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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्कों की स्थापना के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य-रसायन योजना) को मंजूरी दे दी है। वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित इस योजना के तहत रासायनिक और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को आधुनिक बुनियादी ढांचे, निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिहाज से नई मजबूती देने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि भव्य-रसायन योजना को मिली मंजूरी भारत के रासायनिक और पेट्रोकेमिकल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आधुनिक प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचे, साझा सुविधाओं और मजबूत पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ रासायनिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इससे लॉजिस्टिक और उत्पादन लागत घटेगी, निवेश आकर्षित होगा, निर्यात बढ़ेगा, आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।सरकार ने योजना के लिए कुल 3,030 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसमें 3,000 करोड़ रुपए पार्कों की आंतरिक अवसंरचना और मूलभूत उपयोगिताओं के विकास पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 30 करोड़ रुपए प्रशासनिक व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि में लागू रहेगी। योजना के तहत संबंधित राज्य सरकार को प्रत्येक पार्क के लिए न्यूनतम 500 करोड़ रुपए का योगदान करना होगा। इसके बाद केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के विकास के लिए अधिकतम 1,000 करोड़ रुपए तक का अनुदान देगी। पार्कों का चयन प्रतिस्पर्धी और प्रदर्शन आधारित वित्त पोषण तंत्र (चैलेंज रूट) के माध्यम से किया जाएगा। सरकार के अनुसार, इस योजना से कच्चे माल की उपलब्धता, विनिर्माण, आपूर्ति शृंखला और सहायक उद्योगों सहित रसायन क्षेत्र की पूरी मूल्य शृंखला को मजबूती मिलेगी। साझा बुनियादी ढांचे और आधुनिक सुविधाओं से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा तथा परिवहन और प्रबंधन लागत में कमी आएगी, जिससे भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।योजना के माध्यम से भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से बेहतर तरीके से जोड़ने का लक्ष्य है। इससे घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। सरकार का मानना है कि इससे देश में घरेलू और विदेशी निवेश भी आकर्षित होगा। भव्य-रसायन योजना के तहत विकसित होने वाले पार्कों में साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र, उपचार, भंडारण एवं निपटान सुविधाएं तथा खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना जैसी केंद्रीकृत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे पर्यावरणीय मानकों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा और रसायन उद्योग का सतत विकास संभव हो सकेगा।सरकार का कहना है कि रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र का विस्तार कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, निर्माण, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अनेक क्षेत्रों को भी गति देगा। इससे रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बल मिलेगा। यह पहल वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।योजना के तहत विकसित किए जाने वाले प्रत्येक रासायनिक पार्क में कम से कम आठ वर्ग किलोमीटर (करीब 2,000 एकड़) का निर्बाध भूमि क्षेत्र होगा। इन पार्कों में रसायन उद्योग की जरूरतों के अनुरूप साझा अवसंरचना और मूलभूत उपयोगिताएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उद्योगों को एकीकृत और आधुनिक औद्योगिक वातावरण मिल सके। -
नई दिल्ली। भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को 17 जुलाई, 2026 को दिल्ली क्षेत्र के जींद–सोनीपत रेलखंड पर हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। शुरुआत के बाद से यह ट्रेन 1,200 किलोमीटर से अधिक की सफल यात्रा पूरी कर चुकी है, जिससे 3,200 लीटर से अधिक डीज़ल की बचत हुई है। यह ट्रेन शून्य टेलपाइप कार्बन उत्सर्जन के साथ केवल जलवाष्प छोड़ती है और भारतीय रेल के स्वच्छ एवं सतत परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक अभिक्रिया के माध्यम से फ्यूल सेल के भीतर ही बिजली उत्पन्न करती है। इसी विद्युत ऊर्जा से ट्रेन संचालित होती है। इस पूरी प्रक्रिया में उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है। न धुआँ निकलता है और न ही टेलपाइप से कार्बन उत्सर्जन होता है, जिससे यह वर्तमान रेल प्रणोदन तकनीकों में सबसे स्वच्छ विकल्प बनकर उभरी है। भारतीय रेल के नेतृत्व में विकसित यह परियोजना पूरी तरह स्वदेशी पहल है। 10 कोच वाली इस ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार लगाई गई हैं, जो संयुक्त रूप से 2,400 किलोवाट शक्ति प्रदान करती हैं। इसके अलावा ट्रेन में लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियां और हाइड्रोजन सिलेंडर भी लगाए गए हैं, जो इसकी ऊर्जा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं। इस परियोजना के तहत जींद में भारतीय रेल की पहली समर्पित हाइड्रोजन भंडारण सुविधा स्थापित की गई है। यहां 500 Bar तक के दाब पर ग्रीन हाइड्रोजन का भंडारण किया जा सकता है, जबकि 350 Bar के दाब पर ईंधन भरने की व्यवस्था उपलब्ध है। इस सुविधा की कुल भंडारण क्षमता लगभग 3,000 किलोग्राम है। ट्रेन में हाइड्रोजन रिसाव, अधिक तापमान, आग और धुएँ का स्वतः पता लगाने वाली कई स्वतंत्र सुरक्षा प्रणालियां लगाई गई हैं। इसके साथ स्वचालित शट-ऑफ सिस्टम, निरंतर वेंटिलेशन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का अनुपालन तथा सभी आवश्यक परीक्षण और सत्यापन भी सुनिश्चित किए गए हैं। जींद–सोनीपत रेलखंड पर सफल परिचालन के बाद जल्द ही इसका परीक्षण दिल्ली मार्ग पर भी शुरू किया जाएगा।
भारत की हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि स्वदेशी हाइड्रोजन रेल इकोसिस्टम की स्थापना की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। यह परियोजना सतत और शून्य-उत्सर्जन रेल परिवहन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा भविष्य में इसके व्यापक विस्तार और स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की मजबूत आधारशिला रखती है। -
नई दिल्ली।छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को नहीं बख्शेंगे : सीएम योगीपेपर लीक की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है और भविष्य में ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार संसद में सख्त कानून लाएगी। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत दोषियों की संपत्ति जब्त करने जैसे कड़े प्रावधान भी होंगे। फतेहपुर के मदारीपुर कला मैदान में 489 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 125 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों को जेल भेजा जाएगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से जुड़े मामलों में भी आवश्यक कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति युवाओं को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का काम कर रही है और शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी तथा आधुनिक बनाया जा रहा है।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में माफिया और अपराधियों के लिए अब कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के लिए केवल दो ही जगह हैं— जेल या जहन्नुम। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य सरकार ने अपराधियों और भू-माफिया के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाया है तथा सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले युवाओं की नौकरियों पर डकैती डाली जाती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 2012 से 2017 के बीच निकली अधिकांश भर्तियां विवादों में रहीं और योग्य अभ्यर्थियों को न्याय नहीं मिला। इसके विपरीत उनकी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराई हैं।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कभी आकांक्षी जिलों में शामिल रहा फतेहपुर आज विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहले विकास के लिए मिलने वाले संसाधनों का दुरुपयोग होता था, जबकि वर्तमान सरकार ने मेडिकल कॉलेज, सड़क, पुल, अस्पताल, बिजली, कंपोजिट विद्यालय, नर्सिंग कॉलेज और अन्य बुनियादी परियोजनाओं के जरिए विकास को गांव-गांव तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों से फतेहपुर पिछड़ेपन की पहचान से बाहर निकल रहा है और विकसित भारत के संकल्प में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। मुख्यमंत्री ने विकास की इस गति को बनाए रखने के लिए जनता से भाजपा का समर्थन करने की अपील भी की। -
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट विवाद के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेजते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी लंबे संदेश में उन्होंने कहा कि उन्होंने हर स्तर पर अपनी जिम्मेदारी निभाई और देश के युवाओं के हितों को सर्वोपरि रखा। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में कहा कि वह पिछले चार दशक से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उनका मानना है कि सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि वह देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का हमेशा सम्मान करते रहे हैं।
प्रधान ने कहा कि 3 मई को हुई नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताएं सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा की तिथि घोषित की। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष से परीक्षा सीबीटी मोड में कराने का निर्णय भी लिया गया। सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न कराना रही, जिसमें केंद्र, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, छात्रों और अभिभावकों का महत्वपूर्ण सहयोग मिला।धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने पहले दिन से ही पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी ली और कभी इससे मुंह नहीं मोड़ा। उनका संकल्प था कि परीक्षा माफिया के कारण किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे, जिसमें गरीब पृष्ठभूमि के कई छात्रों ने सफलता हासिल की। हालांकि, इस दौरान कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने का प्रयास किया, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा। जंतर-मंतर पर सीजेपी के विरोध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए प्रधान ने कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें बेहद दुखी किया। उन्होंने कहा कि यह उनके व्यक्तिगत सम्मान का विषय नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का सवाल है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र विरोधी ताकतें मौजूदा स्थिति का फायदा न उठा सकें और छात्रों का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न फंसे, इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेजने का निर्णय लिया।धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों तथा अपने साथ काम करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और वह भविष्य में भी ओडिशा की जनता, देश के युवाओं और भारत माता की सेवा के लिए समर्पित रहेंगे। -
नई दिल्ली। असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को बताया कि राज्य में अब तक 10.6 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों तक राहत और पुनर्वास सहायता पहुंचाने के लिए 24 घंटे काम कर रही है तथा भोजन, पीने का पानी, दवाइयों और अन्य जरूरी वस्तुओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि राज्य के कई जिलों में बाढ़ का असर जारी है और इस आपदा में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए 24 घंटे काम कर रही है। जल्द ही इस मुद्दे पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करूंगा और आगे की जानकारी साझा करूंगा।”मुख्यमंत्री द्वारा साझा किए गए ताजा बाढ़ बुलेटिन के अनुसार, 29 अप्रैल से 23 जुलाई के बीच राज्य के 25 जिलों में 10,63,216 लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से 77 राजस्व सर्किल और 2,023 गांव प्रभावित हुए हैं। प्रभावित लोगों के लिए 162 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां 41,264 लोग रह रहे हैं। इसके अलावा, सहायता वितरण के लिए 1,072 राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं।सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से अब तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें चराइदेव में 10, शिवसागर में 21, जोरहाट में 8, धेमाजी में 3, कार्बी आंगलोंग में 2, गोलाघाट में 2 और सोनितपुर में 1 व्यक्ति की जान गई है। वहीं, 8 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 6 शिवसागर, 1 धेमाजी और 1 चराइदेव से हैं। बाढ़ के कारण 401 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 1,856 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 28,912 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि वह जल्द ही एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में बाढ़ की मौजूदा स्थिति के साथ राहत और बचाव कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। -
नई दिल्ली। सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा धोखाधड़ी और अन्य अनियमितताओं से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट ने औरंगाबाद तथा नागपुर में दो विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित किए हैं। ये अदालतें सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज मामलों के अलावा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 और महाराष्ट्र विश्वविद्यालय, बोर्ड एवं अन्य निर्दिष्ट परीक्षाओं में कदाचार निवारण अधिनियम, 1982 के संबंधित प्रावधानों के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करेंगी।
यह निर्णय बॉम्बे हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के 23 जुलाई, 2026 के पत्र के बाद लिया। मंत्रालय ने परीक्षा संबंधी कदाचार के मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए समर्पित फास्ट ट्रैक अदालतें नामित करने का अनुरोध किया था।हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (निरीक्षण-1) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, औरंगाबाद न्यायिक जिले के लिए एस.वी. पवार, 10वें संयुक्त सिविल न्यायाधीश (वरिष्ठ खंड) एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया गया है। वहीं, नागपुर न्यायिक जिले के लिए गुलशन आर. कोल्टे, 7वें संयुक्त सिविल न्यायाधीश (वरिष्ठ स्तर) एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत को इस उद्देश्य के लिए नामित किया गया है। हाईकोर्ट ने औरंगाबाद तथा नागपुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को संबंधित विशेष अदालतों को औपचारिक रूप से अधिसूचित करने का निर्देश दिया है। साथ ही, उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी लंबित मामलों को तत्काल इन अदालतों में स्थानांतरित करने और अनुपालन रिपोर्ट हाईकोर्ट को भेजने के लिए कहा गया है।विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना का उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा धोखाधड़ी और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करना है। इससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करने के साथ ऐसे मामलों में शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। -
जयपुर. राजस्थान में एक लाख रुपये या इससे अधिक राशि की ऑनलाइन ठगी की शिकायत मिलने पर अब स्वतः 'ई-जीरो प्राथमिकी' दर्ज होगी। अधिकारियों ने बताया कि नई व्यवस्था बृहस्पतिवार से लागू हो गई। पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि ऑनलाइन वित्तीय अपराधों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान पुलिस ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा ने निर्णय लिया है कि अब एक लाख रुपये या उससे अधिक की ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत पर ई-जीरो प्राथमिकी स्वतः दर्ज होगी। इसके अनुसार यह नई व्यवस्था आज बृहस्पतिवार से पूरे राज्य में प्रभावी कर दी गई। डीजीपी शर्मा ने इस संबंध में राज्य के समस्त पुलिस अधीक्षकों व पुलिस आयुक्तों को संशोधित व्यवस्था के अनुरूप कार्रवाई करने के लिए परिपत्र जारी कर हुए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह निर्णय भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देशों एवं साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है ताकि पीड़ितों को तत्काल कानूनी संरक्षण मिल सके और ठगी की राशि को शीघ्र 'फ्रीज' कर अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सके। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) वी.के.सिंह ने बताया कि इससे पहले राजस्थान में पांच लाख रुपये या उससे अधिक की ऑनलाइन वित्तीय ठगी के मामलों में 'ई-प्राथमिकी' की व्यवस्था लागू थी। अब इसकी सीमा घटाकर एक लाख रुपये कर दी गई है, जिससे अधिक संख्या में पीड़ितों को तत्काल कानूनी सहायता मिल सकेगी। नई व्यवस्था के तहत 'आई4सी' के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930) और सीसीटीएनएस प्रणाली को एकीकृत किया गया है। अब एक लाख रुपये या उससे अधिक की ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज होते ही संबंधित राज्य स्तरीय साइबर पुलिस थाने में स्वतः 'ई-जीरो प्राथमिकी' दर्ज हो जाएगी। 'ई-जीरो प्राथमिकी' मिलते ही पुलिस बिना शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर की प्रतीक्षा किए बैंक खातों से लेन-देने पर रोक लगाने और सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य डिजिटल साक्ष्य जुटाने जैसी आवश्यक कानूनी कार्रवाई तुरंत शुरू करेगी, ताकि साइबर अपराधियों पर शीघ्र शिकंजा कसा जा सके। उन्होंने इस तरह की साइबर ठगी के शिकार लोगों से तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करने की अपील की है।
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नयी दिल्ली. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बृहस्पतिवार को ओडिशा अपतटीय क्षेत्र स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से सतह से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की 'कुशा' मिसाइल का पहला परीक्षण सफलतापूर्वक किया। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह परीक्षण एक ''इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य'' के खिलाफ किया गया, जो तेज़ रफ़्तार और अधिक ऊंचाई वाले हवाई ख़तरे जैसा था। इसने कहा कि मिसाइल प्रणाली ने लक्ष्य को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। बयान में कहा गया कि कुशा मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमानों, प्रक्षेपास्त्र, मानवरहित विमान (यूएवी) और दुश्मन के बड़े विमानों समेत कई तरह के हवाई खतरों को काफी दूर तक और ऊंचाई पर नष्ट करने में सक्षम है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह देश की हवाई रक्षा क्षमता में एक ''बड़ी छलांग'' है।
मंत्रालय ने कहा कि डीआरडीओ ने 23 जुलाई को ओडिशा अपतटीय क्षेत्र स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से सतह से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की 'कुशा' मिसाइल का पहला परीक्षण सफलतापूर्वक किया। रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि 'कुशा' की सफल परीक्षण-उड़ान भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने कहा कि यह लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली विकसित करने की उस क्षमता को दर्शाता है, जो दुनिया के बहुत कम देशों के पास है। मंत्रालय ने बताया कि रक्षा सचिव एवं डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने प्रक्षेपण के दौरान सभी गतिविधियों पर नजर रखी और सफल परीक्षण में शामिल टीम के सदस्यों को बधाई दी। -
देहरादून. उत्तराखंड खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने देहरादून के ईस्ट होप टाउन क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम से बनाई जा रही भारी मात्रा में नकली दवाएं, पैकिंग सामग्री और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें बरामद कीं हैं। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, विभाग के आयुक्त विनय शंकर पांडेय के निर्देश पर मंगलवार को ईस्ट होप टाउन क्षेत्र में एक मकान में उत्तर प्रदेश औषधि नियंत्रण विभाग और स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त छापेमारी की गई। जांच में बकंपनियों के नाम से तैयार की गई नकली दवाएं बरामद हुईं। इनमें गैबापिन-100, जोरिल एम-2 और सेफोलैक-200 समेत कई दवाएं शामिल हैं । अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में इस रैकेट के तार अन्य राज्यों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं जिसकी जांच की जा रही है । व रिष्ठ औषधि निरीक्षक मनेंद्र सिंह राणा और औषधि निरीक्षक विनोद जगूड़ी मामले की जांच कर रहे हैं तथा संदिग्धों से पूछताछ जारी है। आयुक्त पांडेय ने कहा कि नकली दवाओं का कारोबार जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (CWG) के लिए भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी हैं। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत हो रही है, ऐसे में मैं भारतीय दल को अपनी शुभकामनाएं देता हूं। मुझे पूरा भरोसा है कि हमारे खिलाड़ी जोश, दृढ़ संकल्प और बेहतरीन प्रदर्शन की भावना के साथ इन खेलों में हिस्सा लेंगे। हमारे खिलाड़ियों का हुनर और लगन हमेशा अनगिनत भारतीयों को प्रेरित करते हैं।”
इस बार भारत की ओर से कई दिग्गज एथलीट्स कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा ले रहे हैं। हालांकि इस संस्करण में बैडमिंटन, हॉकी, रेसलिंग जैसे कई बड़े इवेंट शामिल नहीं हैं। ऐसे में भारतीय प्रशंसकों की नजरें मुख्य रूप से नीरज चोपड़ा (भाला फेंक) और मीराबाई चानू (वेटलिफ्टिंग) पर टिकी हुई हैं।गुरुवार को ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की औपचारिक शुरुआत की। इसमें भारत की ध्वजवाहक मीराबाई चानू और मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन रहीं।टूर्नामेंट के पहले दिन भारत को अच्छी शुरुआत मिली। बॉल्स प्रतियोगिता में पिंकी सिंह और रूपा रानी टिर्की की जोड़ी ने माल्टा को हराया। पुरुष वर्ग में पुतुल सोनोवाल ने मौजूदा विश्व चैंपियन को उलटफेर करते हुए हराया। केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया भी ग्लासगो पहुंचे हैं।उन्होंने पहले दिन के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए लिखा, “कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की रोमांचक शुरुआत। आज हमारे एथलीटों ने बॉल्स महिला पेयर्स इवेंट में आखिरी थ्रो पर शानदार जीत हासिल की।”भारत ने पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 61 पदक जीते थे, जिसमें 22 स्वर्ण, 16 रजत और 23 कांस्य पदक शामिल थे। इस बार भी भारतीय खिलाड़ियों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। देशभर में भारतीय एथलीटों के लिए शुभकामनाओं का सिलसिला जारी है। -
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक से जुड़ी याचिकाओं पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए व्यापक सुधार किए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने कहा कि पूरी सुधार प्रक्रिया पर सर्वोच्च स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि सरकार के लिए बच्चों का हित सर्वोपरि है। उन्होंने बताया कि परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर गंभीरता से काम किया जा रहा है और जल्द ही सरकार इस संबंध में विस्तृत जानकारी अदालत के सामने रखेगी।तुषार मेहता ने कहा कि सरकार प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर परीक्षा केंद्रों तक उसके सुरक्षित पहुंचने और छात्रों तक पूरी प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि राधाकृष्णन समिति की सभी सिफारिशों को लागू किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सरकार अपने हलफनामे में कंप्यूटर आधारित परीक्षा, डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी भी देगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि परीक्षा प्रक्रिया को तकनीकी रूप से और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा रहे हैं।तुषार मेहता ने अदालत से कहा, “कुछ दिनों बाद मैं पूरी स्थिति और सभी सुधारों का विस्तृत विवरण कोर्ट के सामने रखूंगा।” सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार अपने हलफनामे में यह स्पष्ट करे कि क्या भविष्य में नीट परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित बनाया जा सकता है।इसके अलावा कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि परीक्षा से जुड़े डेटा की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था होगी, साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी और उसकी निगरानी किस प्रकार की जाएगी। अदालत ने इन सभी पहलुओं पर स्पष्ट और विस्तृत जवाब देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को तय की है। -
नई दिल्ली। जम्मू-श्रीनगर में सभी प्रमुख यात्राएं आज शुक्रवार को छठे दिन भी स्थगित रहीं। लगातार बारिश के कारण कई जगहों पर रुक-रुक कर भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाओं की वजह से जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (एनएच-44) बंद रहा। अधिकारियों ने बताया कि रास्ता साफ करने का काम चल रहा है, लेकिन हाईवे को अभी तक ट्रैफिक के लिए सुरक्षित घोषित नहीं किया गया है।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे और भूस्खलन और पत्थर गिरने की संभावना को देखते हुए यात्रा करने से बचें। अधिकारियों ने लोगों से यह भी अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और ट्रैफिक पुलिस के सोशल मीडिया हैंडल और ट्रैफिक कंट्रोल यूनिट के माध्यम से सड़क की स्थिति की आधिकारिक जानकारी लें।जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद होने के कारण नॉर्दर्न रेलवे ने गुरुवार को श्रीनगर और कटरा के बीच एक स्पेशल ट्रेन चलाई और 600 पर्यटक घाटी से बाहर गए। अधिकारियों ने बताया कि फंसे हुए यात्रियों की सुरक्षित और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर उचित सिंघल के निर्देश पर जम्मू डिवीजन की ओर से यह स्पेशल ट्रेन चलाई गई थी।यह ट्रेन गुरुवार शाम 5.10 बजे श्रीनगर रेलवे स्टेशन से रवाना हुई, रास्ते में बनिहाल में रुकी और रात 8.15 बजे श्री माता वैष्णो देवी कटरा पहुंची। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि यह स्पेशल सर्विस यात्रियों, खासकर कटरा और जम्मू तवी से आगे की ट्रेन कनेक्टिविटी वाले यात्रियों की सुरक्षित और समय पर यात्रा सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई थी।सिंघल ने कहा, “यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सड़क यातायात की धीमी गति को देखते हुए डिवीजन ने स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया ताकि यात्री बिना किसी परेशानी के अपनी मंजिल तक पहुंच सकें।”रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले एनटीईएस ऐप, आईआरसीटीसी वेबसाइट या 139 रेलवे हेल्पलाइन के माध्यम से ट्रेन की ताजा स्थिति की जांच कर लें। अधिकारियों ने बताया कि खराब मौसम के दौरान निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करने के लिए जम्मू डिवीजन जरूरत पड़ने पर स्पेशल ट्रेनें चलाता रहा है।इस बीच, खराब मौसम, भारी बारिश, अचानक बाढ़ और भूस्खलन के खतरे के कारण शुक्रवार को छठे दिन भी जम्मू-कश्मीर में सभी प्रमुख धार्मिक यात्राएं स्थगित रहीं। इनमें श्री अमरनाथ जी यात्रा, माता वैष्णो देवी यात्रा और शिव खोरी यात्रा शामिल हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की चेतावनी के बाद यात्रा रोक दी गईं। अधिकारियों ने मौसम ठीक होने और रास्तों के ठीक होने तक यात्राएं रोक दी गई हैं। फंसे हुए श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग बेस कैंपों में मुफ्त भोजन (लंगर) और रहने की व्यवस्था की गई है। ( -
नई दिल्ली। राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (NRDC) और भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) ने भारतीय चिकित्सा प्रणाली में नवाचार, बौद्धिक संपदा (आईपी) प्रबंधन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और अनुसंधान के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।यह समझौता NRDC के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर (सेवानिवृत्त) अमित रस्तोगी और NCISM की अध्यक्ष डॉ. मनीषा कोठेकर के बीच हुआ। इस अवसर पर आयुर्वेद बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अल्लमप्रभु गुड्डा, यूनानी, सिद्ध एवं सोवा-रिग्पा बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. असीम अली खान, आयुर्वेद बोर्ड के सदस्य डॉ. अतुल बाबू वार्ष्णेय तथा दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।समझौते के तहत NCISM से संबद्ध संस्थानों और भारतीय चिकित्सा पद्धति के पंजीकृत चिकित्सकों द्वारा विकसित नवाचारों और बौद्धिक संपदा की पहचान, संरक्षण, विकास और व्यावसायीकरण के लिए एक व्यापक सहयोग तंत्र तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में अनुसंधान को उद्योग और बाजार से जोड़कर नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देना है।इस साझेदारी के तहत NRDC पेटेंट और ट्रेडमार्क पंजीकरण, बौद्धिक संपदा संरक्षण, प्रौद्योगिकी मूल्यांकन, लाइसेंसिंग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, उद्योगों से साझेदारी और नई तकनीकों के व्यावसायीकरण में अपनी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा। साथ ही नवाचारकर्ताओं को मार्गदर्शन, इनक्यूबेशन सहायता, उद्योग-प्रायोजित अनुसंधान तथा प्रभावी आईपी प्रबंधन और व्यावसायीकरण रणनीति तैयार करने में सहयोग देगा।वहीं NCISM अपने अधीन संस्थानों, रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (RIED) सेल और देशभर के पंजीकृत चिकित्सकों के साथ NRDC के समन्वय को बढ़ावा देगा। संस्थान-विशिष्ट तकनीकी, व्यावसायिक और वित्तीय सहयोग संबंधित संस्थानों तथा नवाचारकर्ताओं के साथ सीधे किया जाएगा।यह सहयोग बौद्धिक संपदा की पहचान और संरक्षण, पेटेंट एवं ट्रेडमार्क आवेदन, नवाचार परामर्श, उद्यमिता विकास, संस्थागत आईपी नीति निर्माण, क्षमता निर्माण कार्यक्रम, नवाचार जागरूकता अभियान, आइडियाथॉन, हैकाथॉन, प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी, उद्योग संवाद और सफल अनुसंधान कार्यों के प्रसार जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करेगा।इसके अलावा शैक्षणिक और नैदानिक अनुसंधान को प्रमाणित उत्पादों, तकनीकों और स्वास्थ्य सेवाओं में बदलने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि स्वास्थ्य क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के साथ भारतीय चिकित्सा प्रणाली में नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा सके।इस अवसर पर कमोडोर (सेवानिवृत्त) अमित रस्तोगी ने कहा कि यह साझेदारी भारतीय चिकित्सा प्रणाली में कार्यरत शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं के लिए मजबूत सहयोग तंत्र तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि NRDC की बौद्धिक संपदा प्रबंधन और प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण संबंधी विशेषज्ञता अनुसंधान को उपयोगी तकनीकों में बदलने में मदद करेगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती देगी। वहीं डॉ. मनीषा कोठेकर ने कहा कि यह समझौता NCISM से संबद्ध संस्थानों में अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देगा। वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार प्रबंधन और व्यावसायीकरण सहायता के समन्वय से शोधकर्ताओं, शिक्षकों और चिकित्सकों को भारत की पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान पर आधारित प्रमाण-आधारित स्वास्थ्य समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
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नई दिल्ली। पीएम-स्वनिधि योजना का दायरा अब चरणबद्ध तरीके से शहरी क्षेत्रों से आगे बढ़ाकर जनगणना वाले कस्बों और शहरी-बाहरी इलाकों तक विस्तारित किया जा रहा है। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार, योजना ने रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को औपचारिक ऋण प्रणाली से जोड़ने के साथ उनकी आय, डिजिटल लेनदेन और जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। यह जानकारी आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी), हैदराबाद द्वारा 2023 और 2025 में किए गए अध्ययन के अनुसार, 2023 के सर्वेक्षण में देश के 100 शहरी स्थानीय निकायों के 5,000 से अधिक लाभार्थियों को शामिल किया गया था। इसमें पाया गया कि 95% लाभार्थियों के लिए पीएम-स्वनिधि का ऋण उनका पहला बैंक ऋण था, जिसका उपयोग उन्होंने अपना कारोबार बढ़ाने में किया। 2025 में 99 शहरी स्थानीय निकायों के 5,000 से अधिक लाभार्थियों पर किए गए अध्ययन में सामने आया कि 2023 से 2025 के बीच योजना के लाभार्थियों के औसत वार्षिक व्यापार लाभ में लगभग 20% की वृद्धि हुई।अध्ययन में पाया गया कि सभी ऋण चक्रों में लगभग 30% लाभार्थियों ने बताया कि पीएम-स्वनिधि ऋण के अलावा उनके पास अन्य औपचारिक ऋण भी हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह दर्शाता है कि योजना रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं का क्रेडिट इतिहास बनाने और उन्हें बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।रिपोर्ट के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच लाभार्थियों में डिजिटल भुगतान अपनाने की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। शहरी स्थानीय निकाय नियमित रूप से डिजिटल साक्षरता शिविर आयोजित कर रहे हैं और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए लाभार्थियों को कैशबैक प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है।अध्ययन के अनुसार, योजना का प्रभाव केवल कारोबार तक सीमित नहीं रहा। ऋण उपलब्ध होने से परिवारों की आय और खर्च में स्थिरता आई है, जिससे बेहतर भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और बच्चों की शिक्षा पर सकारात्मक असर पड़ा है।सरकार ने दूसरी ऋण किश्त चुका चुके लाभार्थियों के लिए यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा शुरू की है। 23 जनवरी, 2026 को शुरू की गई इस पहल के तहत 12 जुलाई, 2026 तक कटनी में 14, पन्ना में 2 और खजुराहो में 1 क्रेडिट कार्ड जारी किया गया।योजना के तहत मौसमी विक्रेता, घूम-घूमकर सामान बेचने वाले, महिला विक्रेता और पर्यटन आधारित विक्रेता सहित सभी पात्र रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को लाभ दिया जाता है। लाभार्थियों की पहचान स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका का संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों द्वारा किए गए सर्वेक्षण के आधार पर की जाती है।मंत्रालय ने योजना के विस्तार के लिए रेडियो, टेलीविजन और समाचार पत्रों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाए हैं। स्थानीय भाषाओं में सूचना सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है और राज्यों, शहरी स्थानीय निकायों तथा बैंकों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं। पुनर्गठित पीएम-स्वनिधि योजना को मंजूरी मिलने के बाद 17 सितंबर से 15 अक्टूबर, 2025 तक लोक कल्याण मेलों का आयोजन किया गया। इसके अलावा 3 नवंबर से 2 दिसंबर, 2025 तक लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष अभियान चलाया गया। 1 जून से 30 जून, 2026 तक देशभर में स्वनिधि महोत्सव और लोक कल्याण मेलों के माध्यम से नए लाभार्थियों को जोड़ने, ऋण स्वीकृति में तेजी लाने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के प्रयास किए गए।मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए पीएम-स्वनिधि के तहत ‘स्ट्रीट फूड हब’ विकसित करने के दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इसका उद्देश्य सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आकर्षक विक्रय स्थल विकसित करना है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां पर्यटकों और आम लोगों की आवाजाही अधिक रहती है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोनम वांगचुक से अपील की कि वे 26 दिनों की भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद डॉक्टरों की सलाह का पालन करें और अपनी सेहत संभालें।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए पीएम मोदी ने लिखा, “मैं सोनम जी से आग्रह करता हूं कि वह अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में डॉक्टरों की सलाह मानें और जल्द से जल्द अपना पुराना वजन वापस पाएं। मैं ईश्वर से उनके अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करता हूं।”यह अपील वांगचुक के एक निजी अस्पताल में अनशन तोड़ने के कुछ घंटों बाद आई। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, जितेंद्र सिंह, लेह-लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेता, डॉक्टर और परिवार के सदस्य मौजूद थे।पेपर लीक पर सख्त कानून की तैयारीप्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान पेपर लीक मामलों पर भी सरकार की सख्ती का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पेपर लीक के मामलों में कड़ी सजा और सख्त प्रावधानों वाला एक व्यापक बिल तैयार कर रही है। इस प्रस्ताव पर शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में चर्चा होगी और इसे अगले हफ्ते संसद में पेश किए जाने की संभावना है।इससे पहले गुरुवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि “देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए, केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा। इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए, सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की शृंखला में ये एक महत्वपूर्ण कदम है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।” -
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मुद्दे पर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को केंद्र सरकार के मंत्रियों से मुलाकात करेगा। केंद्र सरकार द्वारा तटस्थ स्थान पर बातचीत के लिए सहमति दिए जाने के बाद यह बैठक आयोजित की जा रही है।
सीजेपी पिछले कई दिनों से कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ जवाबदेही की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरना दे रही है। पार्टी ने बताया कि सरकार ने सरकारी कार्यालयों के बजाय तटस्थ स्थान पर वार्ता की उसकी मांग स्वीकार कर ली है। बैठक कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित होगी।इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए सीजेपी सदस्य सौरभ दास ने कहा, “चर्चा के लिए बुलाया गया है। हमें बहुत खुशी है कि सरकार ने हमारी इस मांग को मान लिया है कि बातचीत किसी तटस्थ स्थान पर हो। इसके लिए कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया को चुना गया है।”पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है और उनका कहना है कि नीट पेपर लीक विवाद से निपटने के तरीके के लिए शिक्षा मंत्री जिम्मेदार हैं। मंत्री के इस्तीफे के साथ-साथ सीजेपी ने भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए देश की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की भी मांग की है।प्रस्तावित वार्ता ऐसे समय हो रही है जब एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मामलों में अधिक सख्त प्रावधानों और कड़ी सजा का प्रावधान करने वाला व्यापक कानून लाने की तैयारी कर रही है।वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में कहा, “पेपर लीक के खिलाफ और अधिक सख्त कार्रवाई कैबिनेट में आने वाली है!”प्रस्तावित विधेयक पर शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा होने की संभावना है, जिसके बाद इसे अगले सप्ताह संसद के मौजूदा सत्र में पेश किया जा सकता है।छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रश्नपत्र लीक से उत्पन्न होने वाली परेशानी को भली-भांति समझती है। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा सख्त कानूनी ढांचे की घोषणा के बावजूद सीजेपी का कहना है कि केवल कानून में बदलाव पर्याप्त नहीं हैं। पार्टी ने दोहराया कि परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ सरकार का “सबसे सख्त कदम” केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना होगा। पार्टी शुक्रवार को सरकार के प्रतिनिधियों के साथ होने वाली बैठक में इस मांग को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा पेपर लीक मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा के कुछ घंटों बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर दिया। यह अदालत केवल इस कानून और इससे जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी।
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय के निर्देश पर अनु ग्रोवर बलिगा को राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में नवगठित फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्पेशल जज (पीसी एक्ट) (सीबीआई)-25 के रूप में तत्काल प्रभाव से नियुक्त किया गया है।हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यह न्यायिक अधिकारी राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-स्पेशल जज (पीसी एक्ट) (सीबीआई) के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करेंगे। साथ ही, अधिनियम के तहत लंबित सभी मामलों और उनसे जुड़े मामलों को इस नई फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित करने का आदेश भी दिया गया है।इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि युवाओं का भविष्य और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक में शामिल लोगों को शीघ्र और कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी दिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और देश के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।क्या है कानून का प्रावधानसार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने के दोषी पाए जाने पर अधिकतम पांच वर्ष की कैद और 10 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। यह कानून राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अलावा यूपीएससी, एसएससी, आरआरबी, आईबीपीएस तथा केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा आयोजित भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं पर लागू होता है। -
नई दिल्ली। देशभर में जारी मॉनसून और भारी बारिश की स्थिति पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय लगातार नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मंत्रालय प्रभावित राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों को हरसंभव सहायता उपलब्ध करा रहा है। गृह मंत्रालय का कहना है कि समय रहते चेतावनी जारी करने, राहत एवं बचाव कार्यों के समन्वय और नुकसान के आकलन के लिए सभी संबंधित एजेंसियां सक्रिय हैं। गृह मंत्रालय का एकीकृत नियंत्रण कक्ष (आईसीटी) भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केन्द्र (INCOIS) सहित अन्य केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय से संचालित हो रहा है। यह राज्य और जिला आपात संचालन केन्द्रों को समय पर अलर्ट भेजने के साथ ही चौबीसों घंटे राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर रहा है।
जुलाई 2026 के दौरान नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव तथा जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में भारी बारिश और भूस्खलन की स्थिति बनी है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) राज्य आपदा मोचन बल, राज्य पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा है। संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से टीमें तैनात की गई हैं। पिछले एक सप्ताह में एनडीआरएफ ने 52 लोगों को सुरक्षित बचाया, जबकि 2,206 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। गृह मंत्रालय के साथ समन्वय करते हुए रक्षा मंत्रालय ने भी अपने संसाधनों का त्वरित उपयोग कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान, लोगों और राहत सामग्री के परिवहन तथा राहत वितरण में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। गृह मंत्रालय ने बताया कि 10 मई, 2026 को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में लू और मॉनसून पूर्व संभावित बाढ़ की तैयारियों की समीक्षा की गई थी। इसके बाद 3 जून, 2026 को जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश, बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन से निपटने की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। चार धाम यात्रा मार्ग की तैयारियों की भी नियमित निगरानी की जाती रही।गृह मंत्री के निर्देश पर अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमों ने 7 से 10 जुलाई, 2026 के बीच अरुणाचल प्रदेश और असम के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का आकलन किया, ताकि राष्ट्रीय आपदा सहायता कोष से आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके। एक अन्य अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम 25 जुलाई, 2026 से असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का विस्तृत आकलन करेगी।गृह मंत्रालय के अनुसार, हाल की भारी बारिश से कुछ राज्यों में जनजीवन प्रभावित हुआ है, लेकिन देशभर में वर्षा की कमी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पहले जहां लगभग 30% वर्षा की कमी का अनुमान था, वह अब घटकर लगभग 15% रह गई है। ( -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता आधारित मोबिलिटी मॉडल को आगे बढ़ाते हुए महाराष्ट्र में ‘भारत टैक्सी’ सेवा का शुभारंभ किया गया। नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने सेवा की शुरुआत की। इस अवसर पर सहकारी क्षेत्र के प्रतिनिधि, अधिकारी और भारत टैक्सी से जुड़े सारथी भी मौजूद रहे।
भारत टैक्सी टैक्सी चालकों को केवल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि सहकारी संस्था का सदस्य, मालिक और शेयरधारक बनाकर संचालित की जाएगी। इसका उद्देश्य बिचौलिया-केंद्रित व्यवस्था की जगह सारथी-केंद्रित परिवहन प्रणाली विकसित करना है, जिससे चालकों को संस्था के लाभ में भी हिस्सेदारी मिले।केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि महाराष्ट्र में भारत टैक्सी की शुरुआत सहकारिता आंदोलन के नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि इस पहल से राज्य के युवाओं, महिलाओं और स्थानीय भूमिपुत्रों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने अधिक से अधिक युवाओं से “सहकार के सारथी” और “समृद्ध महाराष्ट्र के भागीदार” बनने का आह्वान किया।मुरलीधर मोहोल ने कहा कि 2021 में सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद सहकारी आंदोलन को नई दिशा और गति मिली है। पिछले पांच वर्षों में सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए 152 महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इनमें नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति, दो लाख नई बहुउद्देशीय सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने जैसे कदम शामिल हैं। अब तक करीब 40 हजार नई सहकारी समितियां गठित की जा चुकी हैं।उन्होंने बताया कि लगभग 3,000 करोड़ रुपए की लागत से PACS का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है और उन्हें 25 से अधिक आर्थिक गतिविधियां संचालित करने के योग्य बनाया जा रहा है। देशभर में करीब 39 हजार सहकारी समितियां प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र और लगभग 54 हजार PACS कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में सेवाएं दे रही हैं। इसके अलावा सहकारी संस्थाएं पेट्रोल पंप, जन औषधि केंद्र, भंडारण और अन्य ग्रामीण सेवाओं से भी जुड़ रही हैं। मुरलीधर मोहोल ने कहा कि महाराष्ट्र में एनसीडीसी के माध्यम से सहकारी चीनी मिलों को लगभग 10 हजार करोड़ रुपए की सहायता दी गई है। राज्य में इथेनॉल, कंप्रेस्ड बायोगैस, सहकारी आवास और टिश्यू कल्चर जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, सहकारिता के माध्यम से टिश्यू कल्चर के लिए भूमि उपलब्ध कराने वाला देश का पहला राज्य बना है।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं ने यात्रा को आसान बनाया, लेकिन सर्ज प्राइसिंग, छिपे शुल्क और एग्रीगेटर कमीशन जैसी समस्याएं भी सामने आईं। भारत टैक्सी इन चुनौतियों का सहकारिता आधारित समाधान है। इसमें सर्ज प्राइसिंग और छिपे शुल्क नहीं होंगे तथा निर्धारित सेवा शुल्क के आधार पर संचालन किया जाएगा। इससे यात्रियों को पारदर्शी किराए पर सुरक्षित और विश्वसनीय सेवा मिलेगी, जबकि सारथियों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल मिलेगा।मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वर्गीय दि. बा. पाटील सहकारी वाहतूक संघ के साथ हुए समझौते के तहत नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास रहने वाले लगभग तीन से चार हजार स्थानीय भूमिपुत्रों को ऋण सुविधा के माध्यम से टैक्सी उपलब्ध कराने और उन्हें भारत टैक्सी प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे।कार्यक्रम के दौरान भारत टैक्सी से जुड़े सारथियों को शेयर प्रमाणपत्र और सेवा किट भी वितरित की गईं। सरकार के अनुसार, आने वाले समय में महाराष्ट्र की सहकारी संस्थाओं, परिवहन संगठनों और स्थानीय निकायों के सहयोग से इस सेवा का चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में विस्तार किया जाएगा। -
नयी दिल्ली. राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस, आईटीओ और खान मार्केट समेत दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशन अगले आदेश तक सुरक्षा कारणों से बृहस्पतिवार सुबह बंद कर दिए गए। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने यह जानकारी दी। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के जारी प्रदर्शन में भीड़ बढ़ने के बीच यह कदम उठाया गया है। हालांकि, राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों के लिए लाइन बदलने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। डीएमआरसी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन अगले आदेश तक बंद कर दिए गए हैं।
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नयी दिल्ली. सौंदर्यपूर्ण नक्काशी वाले खिलौनों और आभूषण रखने के बक्सों से लेकर आकर्षक डिजाइन वाले पानदानों तक, कभी दिल्ली के संस्कृति केंद्र की शोभा बढ़ाने वाली करीब 2,500 दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह अब यहां स्थित हुमायूं का मकबरा के संग्रहालय की एक समर्पित दीर्घा का हिस्सा बन गया है। इस नयी दीर्घा का उद्घाटन बुधवार शाम हुमायूं के मकबरा परिसर स्थित संग्रहालय में आयोजित एक समारोह में किया गया। यह परिसर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। दक्षिण दिल्ली के महरौली-गुरुग्राम रोड स्थित आनंदग्राम में स्थापित संस्कृति केंद्र की स्थापना 97 वर्षीय ओ. पी. जैन ने दशकों में एकत्र किए गए अपने निजी संग्रह के आधार पर की थी। इस केंद्र में दैनिक उपयोग की वस्तुओं से लेकर विभिन्न प्रकार के वस्त्रों तक, विविध विषयों पर आधारित संग्रहालय स्थापित किए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि 2023 में इसके न्यास मंडल ने कुछ चुनिंदा वस्तुओं और स्थापनाओं को छोड़कर इस अमूल्य संग्रह को दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के माध्यम से राष्ट्र को ''उपहार'' स्वरूप सौंप दिया। करीब 2,500 दुर्लभ वस्तुओं के इस संग्रह को अब संस्कृति केंद्र से स्थानांतरित कर हुमायूं का मकबरा के संग्रहालय की नयी दीर्घा में प्रदर्शित किया गया है। इस संग्रह में 19वीं सदी का बाघ का मुखौटा और अविभाजित भारत की उत्कृष्ट डिजाइन वाली साड़ियां शामिल हैं। इस विशेष दीर्घा को 'संस्कृति संग्रहालय : दैनिक जीवन की कला और भारतीय वस्त्र' के रूप में विकसित किया गया है। इसे 'आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर' (एकेटीसी) ने आईजीएनसीए के सहयोग से स्थापित किया है। उद्घाटन समारोह में ओ. पी. जैन भी उपस्थित रहे। हालांकि अधिक आयु के कारण उनका संबोधन एकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रतिश नंदा ने पढ़कर सुनाया। संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर 19वीं सदी का बाघ का मुखौटा और वक्ष-कवच स्थापित किया गया है। भीतर प्रदर्शित संग्रह को विभिन्न विषयों में विभाजित किया गया है, जिनमें खिलौने, लोटे, दीपक, महिलाओं के श्रृंगार से जुड़ी वस्तुएं (जैसे बैग, आभूषण रखने के बक्से आदि), पानदान और विभिन्न प्रकार के वस्त्र शामिल हैं। वस्त्रों के संग्रह में 19वीं और 20वीं सदी की साड़ियां, ढाका (तत्कालीन अविभाजित भारत) की जामदानी साड़ी तथा पंजाब की फुलकारी और गुजरात क्षेत्र के पाटन पटोला जैसी दुर्लभ बुनाई शैलियों के उत्कृष्ट नमूने शामिल हैं। अपने लिखित संबोधन में जैन ने कहा, ''लगभग 50 वर्ष पहले जब संस्कृति फाउंडेशन की स्थापना हुई थी, तब इसके पीछे यह विश्वास था कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल प्रशंसा करने की वस्तु नहीं है, बल्कि उसकी देखभाल, अध्ययन और उसे साझा किया जाना चाहिए।'' एकेटीसी ने बताया कि 'संस्कृति' दीर्घा एक अगस्त से आम जनता के लिए सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक खुली रहेगी। प्रवेश टिकट 50 रुपये का होगा और प्रति घंटे केवल 50 आगंतुकों को प्रवेश दिया जाएगा।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश के युवाओं का कल्याण और हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा उनके भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक को लेकर युवाओं के लगातार जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र लीक के मामलों में शामिल लोगों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए सरकार ने त्वरित अदालतें स्थापित करने का फैसला किया है। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है। हमारे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर संबंधित प्राधिकारियों और अधिकारियों को सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ''विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
- नई दिल्ली। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम को नीति आयोग, ऑटोमोबाइल निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम), भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) और अन्य तकनीकी संस्थानों को शामिल करते हुए एक चरणबद्ध, वैज्ञानिक रूप से मान्य और परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से लागू किया गया है। इथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है। इसका उपयोग विश्व-स्तर पर एक सदी से अधिक समय से हो रहा है, और ब्राजील जैसे देश दशकों से उच्च इथेनॉल मिश्रण का उपयोग कर रहे हैं। भारत में, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम वर्ष 2001 में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ, वर्ष 2006 में ई5 को पेश किया गया, और यद्यपि वर्ष 2013-14 में मिश्रण लगभग 1.53 प्रतिशत रहा, आवश्यक उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढांचे और नियामक ढांचे के निर्माण के बाद इसे धीरे-धीरे और सुनियोजित तरीके से बढ़ाया गया है।उच्च इथेनॉल मिश्रणों को लागू करने का कार्य ऑटोमोबाइल निर्माताओं, एसआईएएम, एआरएआई, घटक निर्माताओं, परीक्षण एजेंसियों और तेल विपणन कंपनियों के साथ व्यापक परामर्श के बाद ही किया गया था।ईंधन दक्षता, इंजन प्रदर्शन, रखरखाव लागत और समग्र ड्राइविंग अनुभव के संबंध में ई20 पेट्रोल के उपयोग को लेकर वाहन निर्माताओं, ऑटोमोबाइल संघों या उपभोक्ता संगठनों से सरकार को कोई व्यापक या पुष्ट शिकायत प्राप्त नहीं हुई है । हालांकि, सरकार ने मीडिया और सोशल मीडिया में उठाई गई कुछ समस्याओं पर ध्यान दिया है, जिनकी वैज्ञानिक रूप से जांच की गई है।एआऱएआई, एसआईएएम, आईओसीएल, आईआईपी और ऑटोमोबाइल निर्माताओं द्वारा किए गए व्यापक प्रयोगशाला अध्ययनों और क्षेत्र परीक्षणों में इंजन की मजबूती, चलाने की क्षमता, स्टार्ट करने की क्षमता, जंग प्रतिरोध, सामग्री अनुकूलता, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता जैसे मापदंडों को शामिल किया गया है और यह पुष्टि की गई है कि ई20 निर्धारित मानकों के अंतर्गत उपयोग के लिए सुरक्षित है।इन अध्ययनों से यह भी सिद्ध हुआ कि ई20 ईंधन के कारण पारंपरिक वाहनों के प्रदर्शन में कोई महत्वपूर्ण बदलाव या असामान्य टूट-फूट नहीं होती है। व्यापक प्रयोगशाला अध्ययनों, क्षेत्र सत्यापन और वास्तविक परिचालन अनुभव से ई20 ईंधन के कारण वाहन के प्रदर्शन पर किसी व्यापक प्रतिकूल प्रभाव की पुष्टि नहीं हुई है।सरकार का आकलन न केवल प्रयोगशाला अनुसंधान पर आधारित है, बल्कि राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन के बाद व्यापक अनुभव पर भी आधारित है। देश में प्रतिदिन लगभग 8 करोड़ वाहन खुदरा दुकानों पर आते हैं (जिनमें से लगभग 80 प्रतिशत पेट्रोल वाहन होते हैं)।ई15+ मिश्रित पेट्रोल का व्यापक उपयोग साढ़े तीन साल से अधिक समय से हो रहा है और ई19-ई20 ईंधन का उपयोग ढाई साल से अधिक समय से हो रहा है। 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इन मिश्रित ईंधनों पर चल रही हैं और इथेनॉल मिश्रण के कारण इंजन की व्यापक खराबी या वाहन के टूटने का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है। निर्माता सेवा डेटा इस बात की पुष्टि करता है कि ई20 ईंधन के कारण असामान्य जंग, घिसाव या वाहन के जीवनकाल में कमी नहीं होती है। निर्माता ई20 ईंधन का उपयोग करने वाले वाहनों के लिए वारंटी दायित्वों का पालन करना जारी रखते हैं, जिससे इसकी सुरक्षा और विश्वसनीयता में और अधिक विश्वास बढ़ता है।एक प्रमुख ओईएम ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ वाहन ऐसे थे जिन्हें मूल रूप से ई20-संगत प्रमाणित नहीं किया गया था। कंपनी ने ई20 से संबंधित जंग, असामान्य घिसाव या पुर्जों के जीवनकाल में कमी की कोई रिपोर्ट नहीं दी। एक प्रमुख दोपहिया वाहन कंपनी ने भी इसी तरह का अनुभव बताया है। एक ओईएम ने हाल ही में कहा कि 1.4 करोड़ ई20-चालित वाहनों के लंबे समय तक किए गए सर्वेक्षण के आंकड़ों से इथेनॉल-प्रेरित जंग का कोई सबूत नहीं मिला। एआरएआई ने पुनः पुष्टि की कि वाहन उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले सख्त अंतरराष्ट्रीय मानक सत्यापन से गुजरते हैं।सरकारी एजेंसियों और वाहन निर्माताओं द्वारा माइलेज के संदर्भ में किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि ईंधन दक्षता कई कारकों से प्रभावित होती है, जिनमें ड्राइविंग की स्थितियाँ, ड्राइविंग के तरीके और वाहन का रखरखाव शामिल हैं। कुछ ई10 डिज़ाइन वाले वाहनों में ईंधन दक्षता में कमी आमतौर पर लगभग 3-5 प्रतिशत तक ही सीमित होती है, जबकि ई20 उच्च ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉकिंग गुण, स्वच्छ दहन और सुचारू इंजन प्रदर्शन प्रदान करता है।ई20 के वैज्ञानिक मूल्यांकन और चरणबद्ध कार्यान्वयन के हर चरण में ऑटोमोबाइल निर्माता, घटक आपूर्तिकर्ता, एसआईएएम, एआरएआई, परीक्षण एजेंसियां और तेल विपणन कंपनियां शामिल थीं। ईंधन प्रणालियों, इंजन की मजबूती, संचालन क्षमता, उचित सामग्री अनुकूलता और उत्सर्जन प्रदर्शन के सफल सत्यापन के बाद ही ई20 को लागू किया गया। इन अध्ययनों से यह भी सिद्ध हुआ कि ई20 के कारण पुराने वाहनों के प्रदर्शन में कोई महत्वपूर्ण बदलाव या असामान्य टूट-फूट नहीं होती है।एसआईएएम और एआरएआई के अनुसार, ई20 त्वरण और सवारी की गुणवत्ता में सुधार करता है, साथ ही कार्बन उत्सर्जन को कम करता है। इथेनॉल का उच्च ऑक्टेन मान आधुनिक उच्च-संपीड़न इंजनों के लिए उपयुक्त है और इसकी उच्च वाष्पीकरण ऊष्मा दहन दक्षता को बढ़ाती है।ई20 की ओर बदलाव से राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त हुए हैं। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम से 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रतिस्थापन हुआ है, लगभग 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ हस्तांतरित हुआ है।तेल और गैस कंपनियां खरीद, मिश्रण, भंडारण, परिवहन और खुदरा वितरण से संबंधित सख्त मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन करती हैं। ईंधन की गुणवत्ता की जांच डिस्टिलरी, डिपो और खुदरा आउटलेट पर की जाती है। प्राप्त शिकायतों के आधार पर, तेल और गैस कंपनियों ने मिलावट का पता लगाने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि उपभोक्ताओं तक केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप ईंधन ही पहुंचे, खुदरा आउटलेट्स पर 30 हजार से अधिक गुणवत्ता जांच (पिछले 10-20 दिनों में) की हैं। राज्य सरकारों से भी ईंधन में मिलावट के किसी भी मामले के प्रति सख्त रवैया अपनाने का अनुरोध किया गया है।सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने ई20 ईंधन से संबंधित शिकायतों और सुझावों सहित ग्राहकों की शिकायतों और सुझावों को प्राप्त करने, उनकी जांच करने और उनका समाधान करने के लिए मजबूत उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किए हैं। ग्राहक अपनी शिकायतें कई ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यमों से दर्ज करा सकते हैं, जैसे कि सभी खुदरा दुकानों पर उपलब्ध शिकायत/सुझाव रजिस्टर, टोल-फ्री ग्राहक सेवा नंबर, कंपनी की वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन, ग्राहक संबंध प्रबंधन (सीआरएम) सिस्टम, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ईमेल और केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम)। शिकायतों के तत्काल निवारण के लिए डीलरों और संबंधित फील्ड अधिकारियों के संपर्क विवरण खुदरा दुकानों पर प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाते हैं। इन सभी माध्यमों से प्राप्त शिकायतों की ओएमसी की स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार विधिवत जांच की जाती है और निर्धारित समय सीमा के अंदर उनका समाधान किया जाता है।ई20 ईंधन की तकनीकी अनुकूलता और प्रदर्शन संबंधी किसी भी समस्या के बिना सभी पेट्रोल वाहनों के साथ इसके उपयोग के बारे में उपभोक्ताओं को शिक्षित करने के लिए जन जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं, साथ ही इथेनॉल मिश्रण के पर्यावरणीय और ऊर्जा सुरक्षा लाभों के बारे में भी बताया जाता है। शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से प्राप्त उपभोक्ता प्रतिक्रिया की ओएमसी द्वारा नियमित रूप से निगरानी की जाती है, और जहां भी आवश्यक हो, उचित सुधारात्मक उपाय किए जाते हैं ताकि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए उपभोक्ता विश्वास सुनिश्चित किया जा सके।यह जानकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी ने आज लोकसभा में लिखित जवाब में दी।
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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने दक्षिण पूर्व रेलवे के निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन और मिदनापुर के बीच 14.52 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन बिछाने की 440 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना का उद्देश्य व्यस्त रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाना, यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाना तथा परिचालन दक्षता में सुधार करना है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परियोजना हाई-डेंसिटी रेल मार्गों पर नेटवर्क क्षमता बढ़ाने की भारतीय रेलवे की व्यापक योजना का हिस्सा है। परियोजना पूरी होने के बाद इस मार्ग पर हर वर्ष अतिरिक्त लगभग 3.52 मिलियन टन (एमटीपीए) माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी, जिससे उद्योगों और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन को गति मिलेगी।रेलवे के अनुसार, यह सेक्शन हाई यूटिलाइजेशन नेटवर्क (एचयूएन-2) का हिस्सा है। वर्तमान में निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन से गोकुलपुर तक का हिस्सा सिंगल लाइन है, जबकि डबलिंग का कार्य पहले से जारी है। तीसरी रेल लाइन बनने के बाद इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कॉरिडोर की क्षमता और परिचालन लचीलापन दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।इस रेल मार्ग से यात्री ट्रेनों के अलावा मैंगनीज, लौह अयस्क, कंटेनर, कोयला, क्लिंकर, पेलेट आयरन, लोहा-इस्पात, गेहूं, पत्थर, स्लीपर, स्लैग, नमक, चावल, पेट्रोलियम उत्पाद, चूना पत्थर, जिप्सम, उर्वरक, खाद्य तेल, केमिकल सॉल्ट, चारकोल, सीमेंट, बैलेस्ट और राख जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं का परिवहन किया जाता है। वर्तमान में इस मार्ग पर करीब 23.80 मिलियन टन प्रतिवर्ष माल ढुलाई हो रही है।रेलवे के मुताबिक, मौजूदा सेक्शन की लाइन क्षमता का उपयोग 115.71% तक पहुंच चुका है, जो इस मार्ग पर अत्यधिक भीड़भाड़ को दर्शाता है। तीसरी लाइन बनने से अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी, जिससे बढ़ती यात्री और माल यातायात की मांग को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा।परियोजना पूरी होने के बाद आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई तेज होगी, परिचालन संबंधी बाधाएं कम होंगी और रेलवे नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही इस महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर पर निर्भर उद्योगों और कारोबारों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।भारतीय रेलवे ने कहा कि यह मंजूरी हाई-डेंसिटी रेल मार्गों पर क्षमता विस्तार की उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य माल और यात्री ट्रेनों की तेज, सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करते हुए आधुनिक, दक्ष और भविष्य के लिए तैयार रेल नेटवर्क के माध्यम से देश के आर्थिक विकास को गति देना है। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने और केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा। पीएम मोदी ने इस संबंध में निर्देश दिए हैं कि संबंधित विभाग जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करें। इस पर केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और कहा कि पेपर लीक के कारण युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध पीएम मोदी का यह महत्वपूर्ण कदम मील का पत्थर साबित होगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “भारत के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।” उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामलों में तेजी से सुनवाई के लिए ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ बनाने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फैसला युवाओं को सशक्त बनाने के प्रति उनके मजबूत संकल्प और अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह निर्णायक कदम उन लोगों के खिलाफ तेज और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा जो हमारे युवाओं की उम्मीदों और भविष्य को खतरे में डालते हैं।केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “युवाओं का हित और उनका उज्ज्वल भविष्य मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता भी है और संकल्प भी। प्रधानमंत्री की ओर से फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन से पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ त्वरित सुनवाई और कठोर कार्रवाई का निर्णय इसी का प्रतिबिंब है। पेपर लीक के कारण युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह महत्वपूर्ण कदम मील का पत्थर साबित होगा।”केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार युवाओं के भविष्य और उनके हितों की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। पेपर लीक जैसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की ओर से फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन व दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई का संकल्प हमारी सरकार की संवेदनशीलता और युवाओं के प्रति प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है।”उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष और उसके नेता राहुल गांधी संसद में इस महत्वपूर्ण विषय पर सार्थक चर्चा करने से बचते हुए सड़कों पर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं, जो उनके गैर-जिम्मेदाराना और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत आचरण को दर्शाता है।कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “युवा शक्ति विकसित भारत की सबसे बड़ी पूंजी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं के हित और उनके उज्ज्वल भविष्य की रक्षा केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का निर्णय दोषियों को शीघ्र और कठोर दंड सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मामलों के मंत्री भूपेंद्र यादव ने पोस्ट किया, “युवा शक्ति का विश्वास और उनके सपनों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक जैसे अपराधों पर सख्त प्रहार करते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के माध्यम से मामलों के त्वरित निस्तारण तथा दोषियों को शीघ्र और कड़ी सजा सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह पहल उन तत्वों के लिए स्पष्ट संदेश है जो युवाओं की मेहनत और उनके भविष्य से खिलवाड़ करते हैं। पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की दिशा में यह कदम देश के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “फास्ट-ट्रैक कोर्ट अब यह सुनिश्चित करेंगे कि पेपर लीक में शामिल लोगों को सजा मिले। भारत के युवा ही देश की सबसे बड़ी संपत्ति हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि हमारे युवाओं को एक उज्ज्वल भविष्य मिले और उन्हें अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के अवसर मिलें। हम अपने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठाना जारी रखेंगे और अपने युवाओं व अभिभावकों को भरोसा दिलाते हैं कि हम मजबूती से उनके साथ खड़े हैं। देश के युवाओं के भविष्य के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पोस्ट किया, “विपक्ष में बैठने से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर देश को गुमराह करने का लाइसेंस नहीं मिल जाता। विपक्ष के नेता को क्या यह सत्य नहीं पता है कि कांग्रेस ने ही पेपर लीक की समस्या को पनपाया और इसकी जड़ों को गहरा किया।”उन्होंने कहा, “राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के दौरान लगातार सामने आए पेपर लीक के प्रकरण इस विफलता की खुली गवाही हैं। कांग्रेस शासित राज्यों की सरकारें युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करती रहीं, जबकि मोदी जी की सरकार ने शोर-शराबे के बजाय कार्रवाई का रास्ता चुना है। कड़े कानून बनाए, व्यवस्था को मजबूत किया और अब फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से दोषियों को शीघ्र और कठोर सजा सुनिश्चित करने का भी निर्णय लिया है।”गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने पोस्ट में लिखा, “सवाल पूछने के लिए संसद से बड़ा कोई मंच नहीं है। सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने बहस से भागकर उपद्रव की राजनीति को चुना। ‘भारत के भविष्य’ के साथ राजनीति करने वालों को यह याद रखना चाहिए कि युवाओं को कोरे नारे नहीं, निष्पक्ष परीक्षाएं और न्याय चाहिए।”

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