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नयी दिल्ली. 'योजना', 'कुरुक्षेत्र', 'आजकल', 'बाल भारती' और 'रोजगार समाचार' जैसी केंद्र सरकार की प्रमुख पत्रिकाएं प्रसार भारती के वेव्स ओटीटी मंच पर मुफ्त उपलब्ध कराई गई हैं। सूचना और प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने एक बयान में यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य देशभर के पाठकों के लिए विश्वसनीय, सूचनात्मक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध सामग्री तक पहुंच सुनिश्चित करना है। 'योजना', 'कुरुक्षेत्र', 'आजकल' और 'बाल भारती' जैसी मासिक पत्रिकाओं को सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, ग्रामीण विकास, साहित्य और बच्चों की शिक्षा से जुड़े विषयों के गहन विश्लेषण के लिए जाना जाता है, जबकि साप्ताहिक 'रोजगार समाचार' नौकरी के इच्छुक लोगों के लिए रोजगार के अवसरों, भर्ती सूचनाओं, करियर मार्गदर्शन और कौशल विकास पर विश्वसनीय जानकारी प्रदान करता है। बयान के मुताबिक, "डिजिटल ज्ञान सामग्री तक पहुंच को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रकाशन विभाग ने अपनी प्रमुख पत्रिकाओं 'योजना', 'कुरुक्षेत्र', 'आजकल' और 'बाल भारती' के साथ-साथ साप्ताहिक 'रोजगार समाचार' को प्रसार भारती के वेव्स ओटीटी मंच पर मुफ्त में उपलब्ध कराया है, जिससे देशभर के पाठकों को इसके समृद्ध भंडार तक सीधी पहुंच हासिल हो गई है।" बयान के अनुसार, इन पत्रिकाओं के अलावा विभिन्न विधाओं की ई-पुस्तकों का एक व्यापक संग्रह भी वेव्स मंच पर मुफ्त में उपलब्ध कराया गया है, जिसमें प्रतिष्ठित 'भारत ईयर बुक' भी शामिल है, जो भारत के शासन, अर्थव्यवस्था और विकास पहल का आधिकारिक एवं विस्तृत विवरण प्रदान करने वाला एक प्रमुख प्रकाशन है। बयान में कहा गया है कि वेव्स मंच पर फिलहाल कुल 227 ई-पुस्तकें पाठकों के लिए मुफ्त में उपलब्ध हैं।
इसमें कहा गया है, "अपनी डिजिटल सेवाओं का और विस्तार करते हुए प्रकाशन विभाग अप्रैल के अंत तक वेव्स मंच पर लगभग 300 अतिरिक्त ई-पुस्तकें उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है। ज्ञान के प्रसार के विभाग के मिशन को जारी रखते हुए ये ई-पुस्तकें बेहद किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएंगी।" बयान के मुताबिक, पाठकों की सुविधा और पहुंच को बेहतर बनाने के लिए प्रकाशन विभाग ने अपनी पुस्तकों को वेव्स मंच के जरिये खरीदने की सुविधा भी प्रदान कर दी है। इसमें कहा गया है कि यह सुविधा ओएनडीसी (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स) ढांचे के तहत सीएससी ग्रामीण ई-स्टोर के माध्यम से प्रदान की जा रही है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों सहित देश भर के पाठकों को भौतिक प्रतियों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। बयान के अनुसार, मौजूदा समय में कुल 524 पुस्तकें खरीदारी के लिए उपलब्ध हैं।इसमें कहा गया है, "यह पहल अपने प्रकाशनों की पहुंच को व्यापक बनाने और पाठकों की बदलती प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए डिजिटल मंचों का लाभ उठाने की प्रकाशन विभाग की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।" बयान में कहा गया है कि मुफ्त डिजिटल सामग्री के साथ किफायती दरों पर किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित करके प्रकाशन विभाग एक व्यापक और समावेशी पठन पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का लक्ष्य रखता है। -
जम्मू, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने जम्मू-कश्मीर में झीलों के तेजी से हो रहे क्षरण पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि केंद्र शासित प्रदेश की 697 प्राकृतिक झीलों में से 518 (74 प्रतिशत से अधिक) वर्ष 1967 के बाद या तो पूरी तरह समाप्त हो गई हैं या उनके आकार में कमी आई है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक झीलों के तेजी से हो रहे इस क्षरण से पारिस्थितिक असंतुलन और जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों ने बताया कि 31 मार्च 2024 को समाप्त वर्ष के लिए केंद्र शासित प्रदेश में झीलों के संरक्षण पर कैग की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 28,990 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली 697 झीलों में से 315 झीलें (1,537.07 हेक्टेयर क्षेत्र) पूरी तरह समाप्त हो गई हैं, जबकि 203 झीलों का क्षेत्रफल 1,314.19 हेक्टेयर तक घट गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, ''518 झीलों में कुल मिलाकर 2,851.26 हेक्टेयर क्षेत्र में कमी या समाप्ति दर्ज की गई है।'' कैग ने झीलों के प्रभावी संरक्षण और प्रबंधन के लिए ठोस, समयबद्ध और संरचित रणनीति अपनाने की जोरदार सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि झीलों के बड़े पैमाने पर सिकुड़ने से वनस्पति और जीव-जंतुओं की हानि, पारिस्थितिक तंत्र में व्यवधान और जल, खाद्य व जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसमें यह भी कहा गया है कि झीलों के क्षेत्र में कमी से जलवायु को लेकर असुरक्षा की भावना बढ़ी है और यह सितंबर 2014 में जम्मू-कश्मीर में आई विनाशकारी बाढ़ के कारणों में से एक रही, क्योंकि झीलें प्राकृतिक रूप से बाढ़ को नियंत्रित करने का काम करती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों में फैली 697 प्राकृतिक झीलों का पारिस्थितिक और सामाजिक-आर्थिक महत्व अत्यधिक है। इनमें पांच हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाली 185 प्रमुख झीलें शामिल हैं, जैसे कि वुलर झील, जो मीठे पानी की भारत की सबसे बड़ी झील है। इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण जलाशय भी हैं। कैग की रिपोर्ट में बताया गया कि 150 झीलों के क्षेत्रफल में 538.22 हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि 29 झीलों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। हालांकि, संबंधित विभाग इन झीलों के क्षेत्रफल बढ़ने के कारणों का विश्लेषण या निगरानी नहीं कर पाए। कैग ने झीलों के सूखने और क्षरण के लिए मुख्य रूप से झीलों तथा उनके जलग्रहण क्षेत्रों में भूमि उपयोग में बदलाव, वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन एवं अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया है।
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नयी दिल्ली. सदियों पुराने मकबरों, दुर्लभ पौधों और पक्षियों की प्रजातियों का घर लोधी गार्डन बृहस्पतिवार को 90 वर्ष का हो गया। राष्ट्रीय राजधानी के मध्य स्थित इस उद्यान को नौ अप्रैल 1936 को 'लेडी विलिंगडन पार्क' के नाम से शुरू किया गया था, जिसका नाम उस समय के वायसराय की पत्नी के नाम पर रखा गया था। करीब 90 एकड़ में फैला यह हरित क्षेत्र लोधी एस्टेट और खान मार्केट के बीच स्थित है तथा शहर के "फेफड़े" की तरह काम करता है और सुबह-शाम की सैर, जॉगिंग तथा शांत वातावरण में समय बिताने के लिए लोगों की पसंदीदा जगहों में एक है। लोधी गार्डन को उस समय के खैरपुर गांव को हटाकर विकसित किया गया था।
वर्ष 1911 के दिल्ली दरबार में ब्रिटिश शासन ने भारत की राजधानी को कलकत्ता (अब कोलकाता) से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की थी। इसके बाद नयी राजधानी 'नयी दिल्ली' का निर्माण किया गया, जिसका औपचारिक उद्घाटन 13 फरवरी 1931 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने किया था। समृद्ध वनस्पति और जीव-जंतुओं के कारण लोधी गार्डन देशी और विदेशी पर्यटकों के साथ-साथ पिकनिक मनाने वालों के बीच भी बेहद लोकप्रिय है। यहां ऐतिहासिक स्मारकों के अलावा नीम, जामुन, रॉयल बॉटल पाम, बांस और सफेदा जैसे कई प्रकार के पेड़-पौधे पाए जाते हैं। साथ ही तोते, मैना, किंगफिशर और हॉर्नबिल सहित अनेक पक्षियों की प्रजातियां भी यहां देखी जा सकती हैं। लोधी गार्डन में स्थापत्य शैलियों की विविधता देखने को मिलती है, जिसमें सैय्यद, लोदी से लेकर मुगल काल तक की वास्तुकला शामिल है। इंटैक के अनुसार, वर्तमान परिदृश्य का विकास 1968 में अमेरिकी वास्तुकार जोसेफ एलन स्टीन ने किया था, जिसे बाद में जापानी वास्तुकारों के एक समूह ने संशोधित किया। दिल्ली स्थित गैर-लाभकारी संस्था इंटैक, इस उद्यान के पास ही स्थित है। यह संस्था देश में असुरक्षित धरोहरों के संरक्षण के लिए काम करती है इंटैक मुख्यालय के विरासत शिक्षा एवं संचार सेवा (एचईसीएस) विभाग की प्रमुख पूर्णिमा दत्त ने कहा कि यह उद्यान "हमारा पड़ोसी" होने के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए "जीवंत कक्षा" की तरह है, क्योंकि यहां पौधे, पेड़ों, पक्षियों, तितलियों और अन्य जीव-जंतुओं की अनेक प्रजातियां हैं। उन्होंने कहा, "इंटैक और लोधी गार्डन के बीच बहुत ही घनिष्ठ संबंध है। हम रोज यहां से गुजरते हैं और इससे जुड़ी कई यादें हैं।'' दत्त ने बताया कि इंटैक ने अतीत में इस उद्यान में कुछ संरक्षण कार्य भी किए हैं और कई वर्ष पहले इस पर एक पुस्तिका भी प्रकाशित की गई थी। -
नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार-निरोधी निकाय सीवीसी (केंद्रीय सतर्कता आयोग) में केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के पद पर नियुक्ति के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी एक आदेश के मुताबिक, "मौजूदा पदाधिकारी का कार्यकाल पूरा होने पर तीन अगस्त 2026 से केंद्रीय सतर्कता आयोग में होने वाली रिक्ति को भरने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति का प्रस्ताव है।" भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1988 बैच के असम-मेघालय कैडर के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रवीण कुमार श्रीवास्तव वर्तमान में केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। मंत्रालय ने पात्रता मानदंडों का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति उन व्यक्तियों में से की जाएगी, जो अखिल भारतीय सेवा में रहे हों या वर्तमान में सेवारत हों या संघ की किसी भी सिविल सेवा में हों या संघ के अधीन किसी सिविल पद पर कार्यरत हों और जिन्हें सतर्कता, नीति निर्माण, प्रशासन और पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों का ज्ञान और अनुभव हो। मंत्रालय ने कहा कि जो लोग किसी केंद्रीय अधिनियम के जरिये या उसके तहत स्थापित निगम या केंद्र सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाली सरकारी कंपनी में पद धारण कर चुके हैं या वर्तमान में सेवारत हैं, तथा जिन लोगों के पास वित्त (बीमा, बैंकिंग सहित), कानून, सतर्कता और जांच में विशेषज्ञता एवं अनुभव है, वे भी इस पद के लिए पात्र हैं। आठ अप्रैल को जारी आदेश में मंत्रालय ने कहा, "सभी आवेदकों में उत्कृष्ट योग्यता और सत्यनिष्ठा होनी चाहिए तथा उन्हें संबंधित क्षेत्र का ज्ञान और कम से कम 25 वर्षों का अनुभव होना चाहिए।" आदेश के अनुसार, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त का कार्यकाल उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से या 65 साल की आयु प्राप्त करने की तिथि से (जो भी पहले हो) चार वर्ष के लिए होगा। इसमें कहा गया है कि नियुक्ति के लिए निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले व्यक्ति अपने आवेदन 18 मई 2026 तक कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, कर्तव्य भवन-3, नयी दिल्ली को भेज सकते हैं। आदेश में कहा गया है, "निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।"
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अमरावती. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू 14 अप्रैल को भारत के ''पहले स्वदेशी रूप से निर्मित'' ओपन-एक्सेस कंप्यूटर, अमरावती 1एस और 1क्यू को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। प्रदर्शन और तकनीकी सत्र समेत कार्यक्रम से पहले की गतिविधियां 10 अप्रैल से शुरू होंगी और विश्व क्वांटम दिवस पर औपचारिक उद्घाटन तक जारी रहेंगी। मुख्यमंत्री के सचिव पी एस प्रद्युम्न ने पत्रकारों को बताया, ''नायडू भारत के पहले स्वदेशी रूप से निर्मित, ओपन-एक्सेस क्वांटम कंप्यूटर अमरावती 1एस और 1क्यू को 14 अप्रैल को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह एक संप्रभु क्वांटम हार्डवेयर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।'' प्रद्युम्न ने कहा कि अमरावती क्वांटम वैली के तहत संचालित यह पहल आंध्र प्रदेश को क्वांटम हार्डवेयर के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। इसके साथ ही रक्षा, स्वास्थ्य सेवा, क्रायोजेनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे क्षेत्रों में इसके उपयोग को भी सक्षम बनाएगी। उन्होंने कहा कि अमरावती क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटीज (एक्यूआरएफ) के तहत विकसित इन प्रणालियों में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटक हैं और ये सत्यापन, प्रमाणीकरण और अनुसंधान के लिए भारत के पहले ''क्वांटम हार्डवेयर टेस्टबेड'' के रूप में काम करेंगी, क्योंकि ''देश में पहले ऐसी कोई पूरी तरह से निर्मित सुविधा मौजूद नहीं थी।'' उन्होंने कहा, ''यह भारत की क्वांटम यात्रा में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है, जो वैश्विक प्रणालियों पर निर्भरता से हटकर स्वदेशी क्षमता और ओपन-एक्सेस अवसंरचना के निर्माण की दिशा में बदलाव को दर्शाता है।''
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विधानसभा चुनाव
तिरुवनंतपुरम/गुवाहाटी/ असम में बृहस्पतिवार को हुए विधानसभा चुनाव में 85 प्रतिशत से अधिक रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया, जबकि केरल में 78 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। निर्वाचन आयोग के नवीनतम आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। दोनों राज्यों में सत्तारूढ़ दल लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के लिए प्रयासरत हैं।असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि विधानसभा चुनाव में जबरदस्त मतदान ''सामान्य बात नहीं है बल्कि ऐतिहासिक'' है। शर्मा ने कहा कि इस चुनाव का परिणाम ''हमारे लोगों के चेहरों पर उम्मीद, गर्व और खुशी के रूप में पहले से ही दिखाई दे रहा है।'' इस बीच कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने राज्य में बदलाव के लिए बड़ी संख्या में मतदान करने के लिए लोगों को धन्यवाद दिया। गोगोई ने एक बयान में कहा कि लोगों ने ''नए बोर-असम'' (नए और ग्रेटर असम) और नए नेतृत्व की उम्मीद में मतदान किया। उन्होंने कहा, ''अब निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है कि वह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की सुरक्षा सुनिश्चित करे और चार मई को मतों की सटीक गिनती कराए।'' शर्मा और गोगोई दोनों उन 722 उम्मीदवारों में शामिल हैं जो इन चुनावों में 126 निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे हैं। कुल मतदाताओं की संख्या 2.5 करोड़ है। वर्ष 2021 में असम विधानसभा चुनावों में 82.04 प्रतिशत मतदान हुआ था। केरल में, जहां पारंपरिक रूप से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण उच्च मतदान होता रहा है। केरल में 140 विधानसभा क्षेत्रों से 883 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता सी एन मोहनन ने कहा कि मतदान प्रतिशत में वृद्धि से एलडीएफ को फायदा होगा क्योंकि उसके कार्यकर्ताओं ने अधिकतम मतदाता भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए काम किया है। भाजपा नेता के.एस. शैजू ने इस वृद्धि को जमीनी स्तर पर मतदाताओं के व्यवहार से जोड़ा। उन्होंने कहा, ''हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि इस बार अधिक महिला मतदाता मतदान करने आई हैं।'' कांग्रेस नेता दीप्ति मैरी वर्गीज ने कहा कि इस प्रवृत्ति का गहन अध्ययन करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, "आमतौर पर यह प्रवृत्ति देखी जाती है कि जब मतदान प्रतिशत बढ़ता है, तो यह यूडीएफ के लिए अनुकूल हो जाता है।'' इस बीच, केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान मतदान रुझान से संकेत मिलता है कि 90 प्रतिशत मतदान होगा। केरल में 2021 के विधानसभा चुनावों में 74.06 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था।
केरल और असम के साथ-साथ बृहस्पतिवार को पुडुचेरी विधानसभा की 30 सदस्यीय सीट के लिए भी मतदान हुआ।
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए बृहस्पतिवार को हुआ मतदान छिटपुट घटनाओं को छोड़कर शांतिपूर्ण रहा और 86 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पुडुचेरी में अखिल भारतीय एन.आर. कांग्रेस (एआईएनआरसी) नीत मोर्चा सत्ता बरकरार रखने के लिए और, विपक्षी कांग्रेस नीत गठबंधन केंद्र शासित प्रदेश में बदलाव के लिए जोर लगा रहा है। बृहस्पतिवार को दो राज्यों केरल और असम तथा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के लिए मतदान हुआ। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि महिला आरक्षण अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत में करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। मोदी ने सभी सांसदों से इस कदम का समर्थन करने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में यह भी कहा कि यह कदम उस सिद्धांत की पुष्टि है जिसने लंबे समय से भारत की सभ्यतागत विचारधारा का मार्गदर्शन किया है कि समाज तभी प्रगति करता है जब महिलाएं प्रगति करती हैं। उन्होंने कहा कि अब जरूरत है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और आने वाले समय में राज्यों के विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के प्रावधानों के साथ कराए जाएं। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश एक ऐतिहासिक अवसर की दहलीज पर खड़ा है और यह देश के लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने और समानता एवं समावेशन के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का एक अवसर है। उन्होंने कहा कि इन्हीं प्रेरणादायी अवसरों के बीच, 16 अप्रैल को संसद की ऐतिहासिक बैठक होगी। महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के बाद उसे पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। उन्होंने कहा, ''इसे सिर्फ एक विधायी प्रक्रिया कहना इसके महत्व को कम करके आंकना होगा। यह भारतवर्ष की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।'' संसद के बजट सत्र की अवधि को बढ़ा दिया गया है और सदन का एक विशेष तीन दिवसीय सत्र 16 से 18 अप्रैल तक बुलाया गया है, जिसमें 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में 2029 के आम चुनाव से इसके कार्यान्वयन के लिए संशोधन किया जाएगा। इस विधेयक को आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है। इससे लोकसभा सीट की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी, जिनमें से 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान 2023 में संविधान संशोधन के माध्यम से लाया गया था लेकिन यह 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी होगा इसलिए अगर वर्तमान कानून यथावत रहता है तो इसके 2034 में ही लागू होने की संभावना है। उपलब्ध व्यापक रूपरेखा के अनुसार लोकसभा सीट की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 कर दी जाएगी जिसमें महिलाओं के लिए 273 सीट आरक्षित होंगी। निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण प्रस्तावित 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा। राज्य विधानसभाओं के लिए भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी जहां सीट का आरक्षण आनुपातिक आधार पर किया जाएगा। लेख में मोदी ने कहा, ''हमारी नारी शक्ति देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है। आज देश के हर क्षेत्र में नारी शक्ति मिसाल बन रही है।'' उन्होंने कहा, ''विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी से लेकर उद्यमशीलता तक, खेल के मैदान से लेकर सशस्त्र बलों तक और संगीत से लेकर कला के क्षेत्र में महिलाएं अपनी सशक्त पहचान बना रही हैं। हमारी माताएं-बहनें और बेटियां देश की प्रगति में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कई वर्षों से महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा तक बढ़ती पहुंच, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, वित्तीय समावेशन में बढ़ोतरी और बुनियादी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच ने आर्थिक और सामाजिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी को मजबूती दी है। उन्होंने कहा, ''लेकिन यह भी सच्चाई है कि इन सारे प्रयासों के बावजूद भी राजनीति और विधायी संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व समाज में उनकी भूमिका के अनुरूप नहीं रहा है।'' मोदी ने कहा कि यह विशेष रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं प्रशासन चलाने और प्रशासनिक निर्णयों में हिस्सा लेती हैं, तो उनका अनुभव और दूरदृष्टि बहुत काम आती है। इससे चर्चा तो समृद्ध होती ही है, गुणवत्तापूर्ण शासन में सुधार भी होता है। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों में लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं को उनका उचित स्थान दिलाने के लिए बार-बार प्रयास हुए हैं। समितियां गठित की गईं, विधेयकों के मसौदे प्रस्तुत किए गए लेकिन वे कभी पारित नहीं हो सके। उन्होंने कहा, ''फिर भी, इस बात पर व्यापक सहमति रही है कि विधायी निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि सितंबर 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। उन्होंने कहा, ''यह मेरे जीवन के सबसे विशेष अवसरों में से एक रहा है। महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने का यह अवसर हमारे संविधान की मूल भावना के साथ गहराई से जुड़ा है। हमारे संविधान निर्माताओं ने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां समानता न केवल संविधान में निहित हो, बल्कि उसे व्यवहार में भी लाया जाए।'' मोदी ने कहा कि विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करना, उस परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने कहा, ''यह एक ऐसे समाज के निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें राष्ट्र का भविष्य तय करने में प्रत्येक नागरिक की समान भूमिका हो।'' उन्होंने कहा, ''अब इस निर्णय को और टाला नहीं जा सकता। दशकों से इसकी आवश्यकता को स्वीकार किया गया है। इस पर चर्चा हुई है, इसे बार-बार दोहराया गया है। महिलाओं के प्रतिनिधित्व को आगे बढ़ाने में किसी भी प्रकार की देरी हमारे लोकतंत्र की गुणवत्ता और समावेशिता को मजबूत करने में देरी है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद का यह ऐतिहासिक सत्र करीब आ चुका है, ''मैं सभी दलों के सांसदों से हमारी नारीशक्ति के लिए इस महत्वपूर्ण कदम का समर्थन करने का आग्रह करता हूं।'' उन्होंने कहा, ''हम जिम्मेदारी और दृढ़ संकल्प के साथ इस दायित्व को पूरा करें। आइए, हम अपने लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।'' मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा यह दिखाया है कि जब राष्ट्रीय महत्व के मामलों की बात आती है तो वह मतभेदों से ऊपर उठकर एकता के साथ कार्य कर सकता है। उन्होंने कहा, ''यह ऐसा ही एक क्षण है। आइए, हम सब मिलकर आगे बढ़ें और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करें तथा राष्ट्रीय प्रगति के लिए नारी शक्ति को सशक्त बनाएं।'' -
बेंगलुरु. एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत को बहु-क्षेत्रीय संचालन (एमडीओ) अपनाने की ओर बढ़ने की जरूरत है, क्योंकि देश को बाहरी खतरों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तैयारी शुरू से ही बहु-क्षेत्रीय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बहु-क्षेत्रीय संचालन भविष्य का विकल्प नहीं, बल्कि वर्तमान की आवश्यकता है। वह ''रण संवाद 2026'' के दूसरे संस्करण में मुख्य भाषण दे रहे थे, जिसका विषय था ''बहु-क्षेत्रीय संचालन: पारंपरिक और अनियमित खतरों से निपटना।'' दीक्षित ने कहा कि भारत का वातावरण इस परिवर्तन को अत्यावश्यक बनाता है। उन्होंने कहा कि देश की उत्तरी सीमाओं पर टोही ड्रोन, उपग्रह निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरणों की तैनाती है। उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र में, समुद्री संचार मार्ग अंतरिक्ष-आधारित निगरानी, पनडुब्बी प्रतिस्पर्धा और विमानवाहक पोत-आधारित शक्ति प्रदर्शन से जुड़े हुए हैं। उनके अनुसार, पश्चिमी सीमाओं पर दिन-प्रतिदिन नये-नये खतरे उभर रहे हैं। दुष्प्रचार अभियान, विद्युत ग्रिड को निशाना बनाकर साइबर घुसपैठ, संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमले जैसे मिश्रित खतरे जानबूझकर शांति और संघर्ष के बीच के भेद को मिटा रहे हैं। दीक्षित ने कहा कि इन खतरों का निपटारा क्रमबद्ध तरीके से नहीं किया जा सकता, बल्कि एक साथ, विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित तरीके से ऐसा किया जाना चाहिए। पश्चिम एशिया संघर्ष पर उन्होंने कहा कि यह इस बात की स्पष्ट याद दिलाता है कि समुद्री मार्गों में व्यवधान, ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट और क्षेत्रीय अस्थिरता भारत के हितों को प्रभावित कर सकती है, भले ही कोई एक शत्रु हमें सीधे तौर पर निशाना न बना रहा हो। उन्होंने कहा, ''तैयारी शुरू से ही बहु-क्षेत्रीय होनी चाहिए। इसीलिए बहु क्षेत्रीय अभियान भविष्य का विकल्प नहीं है, बल्कि यह वर्तमान की आवश्यकता है।'' रूस-यूक्रेन युद्ध का हवाला देते हुए, एयर मार्शल ने कहा कि संघर्ष के शुरुआती चरणों ने प्रदर्शित किया कि कैसे एक छोटी सेना - वाणिज्यिक उपग्रह तस्वीरों, अंतरिक्ष-आधारित संचार, सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क और सटीक गोलाबारी का उपयोग करते हुए - एक बड़ी सेना को कड़ी चुनौती दे सकती है।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि 'विश्व गुरु' और 'सुपर इकॉनमी' बनने का लक्ष्य हासिल करने के लिए भविष्य-उन्मुख विकास की उपयुक्त दृष्टि होना समय की जरूरत है। गडकरी ने यहां 'एआईएमए' की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि ऐसे प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करना जरूरी है, जहां भविष्य में विकास की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि शोध पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है, क्योंकि यही प्रमाणित प्रौद्योगिकी, आर्थिक व्यवहार्यता, कच्चे माल की उपलब्धता और तैयार उत्पादों की बाजार क्षमता का आधार बनता है। गडकरी ने कहा, "हमें यह समझने की जरूरत है कि भविष्य में किन निर्यात क्षेत्रों की मांग बढ़ेगी और किन आयात विकल्पों में हम बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।" उन्होंने जल-आधारित अर्थव्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल मत्स्य क्षेत्र ही सात लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बन सकता है, जिसमें से लगभग आधे हिस्से का निर्यात किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उत्पादन लागत घटाने के साथ गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
गडकरी ने कहा, ''ईमानदारी, विश्वसनीयता और सद्भावना 21वीं सदी की सबसे बड़ी पूंजी है और भारत जल्द ही 'विश्व गुरु' बनने के साथ एक मजबूत आर्थिक महाशक्ति बनेगा।'' -
नयी दिल्ली. कांग्रेस शुक्रवार को अपनी कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक करेगी, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने के सरकार के कदम, प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया और पश्चिम एशिया संघर्ष पर विचार-विमर्श किए जाने की संभावना है। कांग्रेस की यह प्रमुख बैठक संसद के वर्तमान बजट सत्र के तहत अगले सप्ताह होने वाली दोनों सदनों की तीन दिवसीय बैठक से कुछ दिन पहले हो रही है। संसद की तीन दिवसीय बैठक 16,17 और 18 अप्रैल को होगी। सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या 543से बढ़ाकर 816 करने के लिए विधेयक लाने वाली है, जिसमें करीब 270 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को उन मसौदा विधेयकों को मंजूरी दी, जिनका उद्देश्य 2029 के संसदीय चुनाव से पहले महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना है।
सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक शुक्रवार को अपराह्न तीन बजे पार्टी के स्थानीय मुख्यालय 'इंदिरा भवन' में होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेता महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने के सरकार के कदम, प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया और पश्चिम एशिया संघर्ष के मुद्दे सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाया है कि वह महिलाओं के लिए आरक्षण कानून में संशोधन और उसके शीघ्र कार्यान्वयन के प्रस्ताव का इस्तेमाल एक चुनावी मुद्दे के तौर पर कर रहे हैं। कांग्रेस ने पिछले सप्ताह यह आरोप भी लगाया था कि सरकार ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने तथा चुनावी लाभ हासिल करने के लिए इस महीने संसद का ''विशेष सत्र'' बुलाया है, जो चुनाव आचार संहिता का घोर उल्लंघन है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इस बात पर जोर दिया था कि परिसीमन की प्रक्रिया में जल्दबाजी के ''खतरनाक'' नतीजे होंगे तथा ''हम राज्य स्तर पर लोकसभा सीटों की संख्या के तुलनात्मक अंतर में बदलाव नहीं चाहते।'' -
आसनसोल (पश्चिम बंगाल). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को जोर दिया कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन अपरिहार्य है क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के ''पाप का घड़ा'' भर गया है। उन्होंने राज्य के ''आर्थिक पतन'' का उल्लेख करते हुए कहा, ''राष्ट्रीय जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में बंगाल का योगदान पहले के 12 प्रतिशत से घटकर मात्र पांच प्रतिशत रह गया है।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''बंगाल में सत्ता परिवर्तन अब अपरिहार्य है और बंगाल की जनता यही चाहती है। तृणमूल के पाप का घड़ा भर चुका है। आसनसोल पर सिंडिकेट राज, कोयला और रेत माफिया का राज है।'' उन्होंने दावा किया कि सत्ता परिवर्तन के बाद पश्चिम बंगाल नयी ऊंचाइयों को छुएगा। मोदी ने कहा, ''कभी समृद्ध औद्योगिक क्षेत्र रहे आसनसोल से निवेश खत्म हो चुका है। केवल भाजपा की 'डबल इंजन' सरकार ही इसे सुधार सकती है।" मोदी ने कहा कि केंद्र ने आसनसोल में उद्योगों के पुनरुद्धार के लिए 45,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया, ''तृणमूल ने बंगाल पर क्रूरता की है, जबकि भाजपा ने सत्ताधारी दल द्वारा खड़ी की गई बाधाओं के बावजूद आसनसोल का विकास किया।'' मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि आसनसोल और दुर्गापुर दोनों में 'मेगासिटी' बनने की क्षमता है, और आश्वासन दिया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार उस विकास को साकार करेगी। उन्होंने दावा किया कि ''एसिड अटैक के मामलों में बंगाल सबसे आगे है।'' मोदी ने कहा, तृणमूल महिलाओं को प्रताड़ित करने वालों के साथ खड़ी है। केवल भाजपा ही महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।
- नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि नवकार महामंत्र जैन धर्म के साथ-साथ संपूर्ण मानव समाज के लिए शांति और आध्यात्मिकता अपनाने का एक शक्तिशाली माध्यम है। विश्व नवकार महामंत्र दिवस के अवसर पर आज नई दिल्ली में संतों और भक्तों को संबोधित करते हुए श्री शाह ने कहा कि भारत अनेक समुदायों और धर्मों का घर है। उन्होंने कहा कि यह मंत्र जीवन शक्ति प्रदान करता है और चेतना को जागृत करता है। श्री शाह ने जैन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठन को दिल्ली से विश्व कल्याण के लिए शांतिपूर्ण नवकार मंत्र का जाप करने के लिए बधाई दी।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण समय की मांग है। एक विशेष आलेख में प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण से लोकतंत्र और अधिक जीवंत तथा सहभागी बनेगा। उन्होंंने कहा कि इस आरक्षण को लागू करने में किसी भी प्रकार की देरी अत्यंहत दुर्भाग्यरपूर्ण होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण से जुडे महत्विपूर्ण विधेयक पर चर्चा और उसे पारित कराने के लिए 16 अप्रैल को संसद का सत्र बुलाया गया है।प्रधानमंत्री ने कहा कि यह जरूरी है कि 2029 के लोकसभा चुनाव तथा आने वाले समय में विभिन्नी राज्यों् में विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के लागू होने के साथ आयोजित हों। उन्होंंने कहा कि पिछले कई दशकों से पिछली सरकारों द्वारा लोकतात्रिक संस्थांओं में महिलाओं को उचित स्थाकन देने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। उन्होंनने कहा कि इस सिलसिले में समितियां बनी, विधेयक के मसौदे पेश किए गए लेकिन सार्थक रूप से कुछ नहीं हो पाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सितंबर 2023 में संसद ने आम सहमति की समान भावना के साथ नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था।प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में लगभग आधी जनसंख्याप महिलाओं की है और देश के लिए उनका योगदान अमूल्यी है। अपने लेख में प्रधानमंत्री ने कहा कि विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण, देशभर की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है और इस सिद्धांत की पुष्टि करता है कि समाज तभी आगे बढ़ता है, जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं। महिलाओं के योगदान का उल्लेगख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर उद्यमिता तक, खेल से लेकर सशस्त्र् बलों तक और संगीत से लेकर कला तक महिलाएं देश की प्रगति के हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
- नई दिल्ली। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में लगातार हो रही भारी बर्फबारी के बावजूद केदारनाथ धाम यात्रा की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। प्रशासन ने मौसम की चुनौतियों के सामने घुटने नहीं टेके हैं और धाम व पैदल मार्ग पर सभी जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरा करने के लिए लगातार काम कर रहा है। वर्तमान में केदारनाथ धाम तक खाद्य सामग्री, निर्माण सामग्री और अन्य आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति घोड़े-खच्चरों के माध्यम से लगातार की जा रही है। मोटी बर्फ की परत जमने और कठिन मौसम के बावजूद श्रमिकों और पशु चालकों की मेहनत से सामान धाम तक पहुंचाया जा रहा है।जिलाधिकारी विशाल मिश्रा स्वयं तैयारियों की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वे विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें कर रहे हैं और मौके की स्थिति के अनुसार जरूरी दिशा-निर्देश दे रहे हैं। प्रशासन का पूरा फोकस यात्रा मार्ग को सुरक्षित बनाने, आवास व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने पर है। प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि भले ही मौसम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, लेकिन केदारनाथ यात्रा को सुचारु, सफल और सुरक्षित बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। बर्फबारी के बीच भी जिस रफ्तार से काम चल रहा है, उससे साफ है कि यात्रा शुरू होने तक सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार कर ली जाएंगी।केदारनाथ यात्रा मार्ग पर बर्फ हटाने, पथरीले रास्तों को सुधारने और टेंट-होटल व्यवस्था की तैयारी भी तेजी से चल रही है। स्वास्थ्य विभाग ने धाम और रास्ते में मेडिकल पोस्ट और इमरजेंसी सेवाएं शुरू करने की योजना बना ली है। पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी हुई हैं।जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा, “मौसम कितना भी प्रतिकूल हो, हमारी कोशिश है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा मिले। बर्फबारी के बावजूद हमारी टीम दिन-रात काम कर रही है।
- मुंबई. महाराष्ट्र के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के लिए मक्का खरीद की समय सीमा बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दी है, जिससे राज्य के किसानों को बड़ी राहत मिली है। भुजबल ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा कि समय सीमा में यह विस्तार पहले से पंजीकृत किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मक्का की खरीद के लिए लागू होगा। इससे पहले ज्वार, बाजरा, मक्का और रागी सहित मोटे अनाजों की खरीद की समय सीमा 28 फरवरी थी, जिसे बाद में मक्का के लिए बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया था। मंत्री ने बताया कि चूंकि महाराष्ट्र के कई पंजीकृत किसान अभी तक अपनी उपज नहीं बेच पाए थे, इसलिए राज्य सरकार ने केंद्र से इसे और बढ़ाने का अनुरोध किया था, जिसके बाद नई समय सीमा को मंजूरी दी गई। भुजबल ने कहा कि यह विस्तार कुछ शर्तों के साथ दिया गया है, जैसे कि खरीदा गया मक्का गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना चाहिए और उसके मानव उपभोग के लिए उपयुक्त होने का प्रमाणन आवश्यक है।
- नासिक. महाराष्ट्र के नासिक जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान नदी और झील में डूबने की अलग-अलग घटनाओं में चार बच्चों सहित पांच लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि डिण्डौरी तालुका के परमोरी गांव में समीर गंगोडे (14) और यश पगारे (12) नहाने के लिए कड़वा नदी में उतरे तथा तैरना नहीं जानने के कारण नदी में डूबने से उनकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, इसी तरह की घटना निफाड तालुका के खेरवाड़ी में हुई जहां रुद्र जाधव (13) और ओंकार फातंगडे (13) एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे और नदी में नहाने के दौरान ड्रबने से उनकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि एक अन्य घटना निफाड के पास रेडगांव बुद्रुक गांव में हुई, जहां एक खेत पर झील में तैरते समय सोमनाथ दंबले (32) की डूबकर मौत हो गई। पुलिस ने दुर्घटनावश मौत के मामले दर्ज किए हैं।
- नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि आरएसएस यह नहीं चाहता कि इतिहास में उसका नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाए, बल्कि वह पिछले 100 वर्षों में किए गए अपने कार्यों का पूरा श्रेय समाज को देना चाहता है। भागवत ने कहा कि आरएसएस का पूरा काम स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत पर आधारित है, न कि किसी की कृपा पर। उन्होंने कहा कि इस हिंदुत्व संगठन के काम में किसी की अनदेखी का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। भागवत नागपुर के रेशिमबाग में डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में आरएसएस के 'घोष पाठक' के इतिहास पर आधारित पुस्तक 'राष्ट्र स्वराधना' के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। संघ प्रमुख ने कहा कि सभी स्वयंसेवकों ने आरएसएस की विचारधारा के अनुरूप राष्ट्र निर्माण के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है। उन्होंने कहा कि संघ ने पूरे समाज के योगदान के आधार पर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने का विकल्प चुना है।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि देश में एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों के तेजी से विस्तार के चलते लॉजिस्टिक लागत घटकर अब इकाई अंक में आ गई है। गडकरी ने 'बीएमई कॉन्क्लेव 2026' में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) चेन्नई, आईआईटी कानपुर और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बेंगलुरु की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में एक्सप्रेसवे के निर्माण से लॉजिस्टिक लागत 16 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत पर आ गई है। उन्होंने लागत के और भी कम होकर नौ प्रतिशत पर आ जाने का विश्वास जताते हुए कहा कि इससे वैश्विक बाजार में भारत का निर्यात और अधिक प्रतिस्पर्धी होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप में यह लागत 12 प्रतिशत है जबकि चीन में आठ से 10 प्रतिशत के बीच है।गडकरी ने भारतीय वाहन उद्योग के संदर्भ में कहा कि उनका लक्ष्य भारत को इस क्षेत्र में दुनिया का नंबर एक देश बनाना है। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में इस उद्योग का आकार 14 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अब 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र चार लाख युवाओं को रोजगार देता है और केंद्र एवं राज्यों को सबसे अधिक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रदान करता है।
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नयी दिल्ली. कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का बुधवार को 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। परिवारिक सूत्रों ने बताया कि उन्होंने बुधवार तड़के करीब चार बजे नोएडा के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। उन्हें आज शाम दिल्ली के निजामुद्दीन में स्थित कब्रस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। किदवई पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व वाली सरकार में स्वास्थ्य, परिवहन और शहरी विकास मंत्री रहीं। वह कई बार सांसद, कांग्रेस कार्य समिति की सदस्य और पार्टी संगठन में कई अन्य पदों पर रहीं।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि पीएम मुद्रा योजना ने रुकावटों को दूर करके और लोगों की आकांक्षाओं पर विश्वास करके पूरे भारत में उद्यमशीलता की भावना को मज़बूत किया है। पीएम मुद्रा योजना के 11 साल पूरे होने पर, मोदी ने कहा कि इस योजना ने लाखों लोगों को सपने देखने का आत्मविश्वास और उन्हें पूरा करने के साधन प्रदान करके ऋण तक पहुंच को फिर से परिभाषित किया है। प्रधानमंत्री ने 'एक्स' पर कहा, ''बाधाओं को दूर करके और जनता की आकांक्षाओं पर भरोसा जताकर, इस पहल ने पूरे भारत में उद्यमशीलता की भावना को मजबूत किया है।'' मोदी ने कहा कि पीएम मुद्रा योजना एक ऐसी आर्थिक विचारधारा को दर्शाती है जहां अवसर सुलभ हैं और पहलों को प्रोत्साहन दिया जाता है तथा हर सपने को साकार होने के लिए समर्थन मिल रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''मुद्रा योजना की परिवर्तनकारी क्षमता की एक झलक और इसने हमारी युवा शक्ति और नारी शक्ति पर किस प्रकार सकारात्मक प्रभाव डाला है।'' उन्होंने पीएम मुद्रा योजना पर 'माई जीओवी इंडिया' मंच के एक पोस्ट को भी साझा किया।
'माई जीओवी इंडिया' ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''असली आर्थिक बदलाव हमेशा बोर्डरूम से शुरू नहीं होता। कभी-कभी, यह एक छोटे कर्ज, एक स्थानीय विचार और शुरुआत करने की हिम्मत से आता है। मुद्रा योजना चुपचाप भारत की अर्थव्यवस्था की नींव को नया आकार दे रही है। बिना गारंटी के कर्ज देकर, इसने अनौपचारिक साहूकारों पर निर्भरता कम की है, वित्तीय समावेश को बढ़ाया है, और जमीनी स्तर पर ऋण अनुशासन को मजबूत किया है।'' सरकारी मंच ने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने 11 वर्षों से 'अंजलि मुद्रा' के रूप में काम किया है जो देश की उद्यमी ऊर्जा के लिए एक समर्पित पेशकश है। इसने कहा, ''आकांक्षाओं और ऋण के बीच अंतराल को पाटते हुए इसने नौकरी की चाह रखने वाले 52 करोड़ से अधिक लोगों को उद्यमी बनाया है।'' प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत 2015 में हुई थी जिसका मकसद छोटे व्यापारियों को 10 लाख रुपये तक का ऋण देना और माइक्रो-फाइनेंस संस्थानों के लिए विनियामक के तौर पर काम करना है। -
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौते के बावजूद, भारत ने बुधवार को ईरान में मौजूद अपने नागरिकों को सलाह दी कि वे जल्द से जल्द देश छोड़ दें। भारत ने अपने नागरिकों को ईरान में स्थित दूतावास के बताए रास्तों का इस्तेमाल करने का भी सुझाव दिया है।
तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को एक एडवाइजरी में कहा, “7 अप्रैल की एडवाइजरी के क्रम में और हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे दूतावास के साथ तालमेल बिठाकर और दूतावास की ओर से सुझाए गए रास्तों का इस्तेमाल करके जल्द से जल्द ईरान छोड़ दें।”भारतीय दूतावास ने आगे कहा, “यह फिर से दोहराया जाता है कि दूतावास से पहले से सलाह और तालमेल किए बिना किसी भी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा तक पहुंचने की कोई कोशिश नहीं की जानी चाहिए।”एडवाइजरी में दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए आपातकालीन नंबर भी शेयर किए हैं।हालांकि, एक ताजा पोस्ट में भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम का स्वागत किया। इसके साथ ही, उम्मीद जताई कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी।पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रम पर विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “हम युद्धविराम का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। जैसा कि हमने पहले भी लगातार जोर दिया है, मौजूदा संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए तनाव कम करना, बातचीत और कूटनीति बेहद जरूरी हैं। इस संघर्ष ने लोगों को पहले ही भारी कष्ट पहुंचाया है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व व्यापार नेटवर्क को बाधित किया है। हमें उम्मीद है कि होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आवागमन की अबाध स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार का प्रवाह जारी रहेगा।”यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौता होने के महज कुछ घंटों बाद सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष-विराम समझौते के तहत ईरान के खिलाफ हमलों को दो हफ्ते के लिए सशर्त रोकने की घोषणा की। उन्होंने इस कदम को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलने के प्रयासों से जोड़ा।ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्थायी रूप से स्वीकार करने का संकेत दिया। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि अगर ईरान पर हमले बंद हो जाते हैं, तो तेहरान भी अपनी सैन्य कार्रवाई रोक देगा। -
नई दिल्ली। 1857 की क्रांति के अमर नायक मंगल पांडे के बलिदान दिवस पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओं ने उनके साहस, बलिदान और 1857 की क्रांति में योगदान को याद करते हुए उन्हें राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा बताया।
ओम बिरला ने बताया अदम्य साहस का प्रतीकलोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “1857 की क्रांति के अमर नायक वीर मंगल पांडे के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उनके अदम्य साहस और अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष ने स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखी और पूरे देश में स्वाधीनता की लौ प्रज्वलित की। उनका जीवन देशभक्ति, पराक्रम और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का अनुपम उदाहरण है।”अमित शाह ने बताया प्रेरणादायक बलिदानकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “1857 की क्रांति को अपने अदम्य शौर्य से नई ऊर्जा देने वाले मंगल पांडे ने युवाओं को मां भारती की स्वाधीनता के लिए प्रेरित किया। बैरकपुर छावनी उनके नेतृत्व में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष की प्रतीक बनी। उनका साहस और बलिदान आज भी राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करता है।”जेपी नड्डा ने क्रांति की पहली हुंकार बतायाकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, “अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल फूंककर क्रांति की ज्वाला प्रज्वलित करने वाले अमर बलिदानी मंगल पांडे को उनके बलिदान दिवस पर कोटिशः नमन। उन्होंने आज ही के दिन अपने प्राणों की आहुति देकर अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी और स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी पूरे देश में फैला दी।”योगी आदित्यनाथ ने बताया प्रेरणा स्रोतउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “बैरकपुर छावनी से अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध उन्होंने जो विद्रोह की ज्वाला प्रज्वलित की, वही आगे चलकर स्वाधीनता के एक विशाल महायज्ञ में परिवर्तित हुई। मातृभूमि के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान सभी राष्ट्रभक्तों के लिए प्रेरणा है। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार मिशन पोषण 2.0 के तहत पूरे देश में 8वां पोषण पखवाड़ा आयोजित करने जा रही है। यह अभियान 9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक चलेगा। इस बार का मुख्य विषय है – “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना”। इसी के साथ सरकार का लक्ष्य है कि बच्चों के शुरुआती बचपन (0-6 वर्ष) में उनके मस्तिष्क का सर्वोत्तम विकास सुनिश्चित किया जाए, ताकि उनकी शारीरिक, मानसिक और संज्ञानात्मक क्षमता की मजबूत नींव तैयार हो सके। यह अभियान ‘कुपोषण मुक्त भारत’ के लक्ष्य को मजबूत करने के साथ-साथ जन-जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देगा।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, इस पखवाड़े का राष्ट्रीय स्तर पर शुभारंभ 9 अप्रैल को दिल्ली के विज्ञान भवन में दोपहर 3 से 4 बजे के बीच होगा। कार्यक्रम का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी करेंगी। इस अवसर पर राज्य मंत्री सवित्री ठाकुर और विभाग के सचिव अनिल मलिक भी उपस्थित रहेंगे।मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित “मिशन पोषण 2.0” के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुरुआती वर्षों में पोषण और देखभाल को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है।पोषण पखवाड़े के दौरान देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों में माताओं, अभिभावकों, परिवारों और स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी से विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें पोषण पंचायतें, जागरूकता अभियान, शुरुआती उत्तेजना गतिविधियां, खेल आधारित शिक्षा और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम शामिल होंगे। साथ ही, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की उत्कृष्ट पहलों को भी प्रदर्शित किया जाएगा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के योगदान को सराहा जाएगा।कार्यक्रम का सीधा प्रसारण एनआईसी वेबकास्ट प्लेटफॉर्म और मंत्रालय के यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, बच्चों के जीवन के पहले छह वर्षों में लगभग 85 प्रतिशत मस्तिष्क विकास हो जाता है। ऐसे में शुरुआती 1,000 दिन पोषण, देखभाल और सीखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस वर्ष के अभियान में मातृ एवं शिशु पोषण, स्तनपान और पूरक आहार पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही 0 से 3 वर्ष के बच्चों के लिए संवेदनशील देखभाल और शुरुआती सीखने की गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा। -
नई दिल्ली। असम विधानसभा चुनाव को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इसी बीच चिरांग जिले में शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से मतदान कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। इसी क्रम में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की इकाई, तेल निगम के बोंगाईगांव केंद्र, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, जिला प्रशासन और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मिलकर तय किए गए कक्ष के स्थान का निरीक्षण किया। इस दौरान वहां तैनाती की व्यवस्था और आवश्यक सुरक्षा ढांचे का गहन समीक्षा की गई, ताकि चुनाव से जुड़े सभी महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह सुरक्षित वातावरण में संपन्न हो सकें।
अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि मजबूत कक्ष के आसपास सुरक्षा के सभी जरूरी प्रबंध समय से पहले पूरे कर लिए जाएं। साथ ही, वहां तैनात होने वाले सुरक्षा बलों के लिए सुविधाएं और समुचित व्यवस्था भी जांची गई। अधिकारियों का कहना है कि चुनाव के दौरान मतपेटियों और संबंधित सामग्री की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। किसी भी तरह की लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।इस निरीक्षण के बाद विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को मजबूत करने के उद्देश्य से एक संयुक्त मार्च का आयोजन भी किया गया। इस दौरान केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, असम पुलिस, जिला प्रशासन के अधिकारियों और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर चपागुरी और बेंगटोल के संवेदनशील इलाकों में मार्च निकाला।इस संयुक्त मार्च का उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना और लोगों के बीच भरोसा कायम करना था। जब सुरक्षा बल एक साथ क्षेत्र में मौजूद रहते हैं, तो आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ती है और किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका कम हो जाती है।अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की गतिविधियों से न केवल सुरक्षा बलों के बीच समन्वय बेहतर होता है, बल्कि चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में भी मदद मिलती है। प्रशासन का कहना है कि पूरे जिले में लगातार निगरानी रखी जा रही है और हर स्तर पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि चुनाव प्रक्रिया बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक पूरी हो सके। - कोलकाता. पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद मतदाता सूची से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। अंतिम मतदाता सूची के सामने आने के साथ ही 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के पहले चरण से पूर्व एसआईआर राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग पर राज्य के ''मतुआ, राजबंशी और अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाते हुए उनके नाम हटाने'' का आरोप लगाया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ''पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है।'' मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य के अंतिम मतदाता आधार की घोषणा अभी बाकी है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष अक्टूबर के अंत में 7.66 करोड़ मतदाताओं के आधार पर राज्य में इस समय कुल हटाए गए मतदाताओं का प्रतिशत 11.85 प्रतिशत से अधिक है। एसआईआर प्रक्रिया की शुरुआत से अब तक कुल हटाए गए नामों की अंतिम संख्या 90.83 लाख से थोड़ा अधिक रही।निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक अधिकारियों द्वारा की गई जांच में इन 60.06 लाख में से 27.16 लाख 'विचाराधीन' मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। आंकड़ों से पता चलता है कि 28 फरवरी को एसआईआर के बाद प्रकाशित मसौदा मतदाता सूचियों के बाद न्यायिक जांच के दायरे में आए लगभग 45.22 प्रतिशत नाम हटा दिए गए। वहीं, इस श्रेणी के 32.68 लाख से अधिक मतदाताओं को बरकरार रखते हुए अंतिम सूची में शामिल किया गया है।आयोग के आंकड़ों से पता चला कि सबसे अधिक नाम मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में हटाए गए, जहां न्यायिक जांच के तहत 11.01 लाख नामों में से 4.55 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इस तरह, जिले में न्यायिक जांच के तहत हटाए गए नामों की संख्या लगभग 41.33 प्रतिशत है। बांग्लादेश की सीमा से लगे उत्तर 24 परगना जिले में भी मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। यहां जांच के दायरे में आए 5.91 लाख मतदाताओं में से 3.25 लाख से अधिक मतदाता पात्र नहीं पाए गए। मालदा में न्यायिक जांच के दायरे में आए 8.28 लाख मतदाताओं में से 2.39 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। आंकड़ों के मुताबिक, सुनवाई के बाद दक्षिण 24 परगना जिले में हटाए गए नामों की संख्या लगभग 2.23 लाख, पूर्वी बर्धमान में 2.09 लाख और नदिया में 2.98 लाख रही। प्रतिशत के हिसाब से, नदिया और उत्तर 24 परगना जिलों में सुनवाई के बाद हटाए गए नामों की संख्या क्रमशः 77.86 प्रतिशत और 55.08 प्रतिशत रही। माना जाता है कि इन दोनों जिलों में हिंदू शरणार्थी मतुआ समुदाय के सदस्यों की अच्छी खासी संख्या है। कूच बिहार जिले में विचाराधीन 2.38 लाख मतदाताओं में से 50 प्रतिशत से अधिक यानी 1.2 लाख से ज्यादा नाम अंतिम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इस जिले को राजबंशी समुदाय का प्रमुख क्षेत्र माना जाता है। कोलकाता दक्षिण में 28,000 से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र मौजूद है। सुनवाई के दौरान हटाए गए नामों का प्रतिशत 36.19 प्रतिशत रहा। कोलकाता उत्तर में जांच के दायरे में आए करीब 39,000 मतदाता मतदान के लिए पात्र नहीं पाए गए, जिससे वहां हटाए गए नामों का प्रतिशत लगभग 64 प्रतिशत रहा। नदिया जिले के चकदाहा में एक रैली को संबोधित करते हुए ममता ने निर्वाचन आयोग और भाजपा पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, तृणमूल कांग्रेस उनके साथ खड़ी रहेगी और उन्हें कानूनी सहायता प्रदान करेगी। ममता ने कहा, ''यह भेदभाव क्यों? आप मतुआ, राजबंशी और अल्पसंख्यकों को बाहर कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि लोग यह नहीं समझते?'' उन्होंने दावा किया कि मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में मतदाताओं के नाम ''जूं की तरह चुन-चुनकर बाहर निकाले गए हैं।'' ममता ने दावा किया कि उनके उच्चतम न्यायालय का रुख करने के बाद, निर्णय के लिए विचाराधीन लगभग 60 लाख मामलों में से लगभग 32 लाख नाम सूचियों में बहाल कर दिए गए हैं। आगामी विधानसभा चुनावों को लोगों की पहचान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बताते हुए, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने मतदाताओं से वोट के जरिये अपना जवाब देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ''यह चुनाव आपके लोकतंत्र, भाषा और सम्मान को बचाने की लड़ाई है, ताकि कोई भी आपको कभी विदेशी न कह सके।'' वहीं, शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ''मतदाता सूची से हटाए गए नामों का एक बड़ा हिस्सा ऐसे मतदाताओं का है, जो अब जीवित नहीं हैं। मुख्यमंत्री चाहती हैं कि मृत मतदाता भी वोट दें, इसलिए वह आपत्ति जता रही हैं।'' उन्होंने कहा कि बंगाल बांग्लादेशी मुसलमानों को शरण नहीं देगा। शुभेंदु ने कहा कि ''रिकॉर्ड को एक बार और हमेशा के लिए त्रुटिरहित किया जाना चाहिए।''उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ''चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और अराजकता फैलाने के लिए ममता बनर्जी की यह पुरानी चाल है। वह एसआईआर को, जो मतदाता सूची की जांच का एक आजमाया हुआ और कारगर तरीका है, एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक पंजी) कहकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं। लोग इसका विरोध करेंगे और उन्हें इस कोशिश में कामयाब नहीं होने देंगे।'' कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया, ''भाजपा सत्ता में बने रहने के लिए वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा देती है। उसने ऐसा सिर्फ बंगाल में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में किया है।'' आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से कुल मतदाताओं में से लगभग 8.3 प्रतिशत यानी 63.66 लाख नाम हटा दिए गए, जिससे मतदाता आधार लगभग 7.66 करोड़ से घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गया। 7.04 करोड़ के मतदाता आधार में 60.06 लाख से अधिक मतदाता ऐसे थे, जिन्हें विचाराधीन श्रेणी में रखा गया था। अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद मतदाताओं के पास उच्चतम न्यायालय के आदेशों के तहत राज्य में विशेष रूप से गठित न्यायाधिकरणों में जाने का विकल्प है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि न्यायाधिकरण के न्यायाधीशों द्वारा पात्र पाए गए मतदाता आगामी चुनावों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर पाएंगे या नहीं।




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