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- अयोध्या.। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन की जांच जारी रहने के बीच सोमवार को यहां एक बैठक के दौरान अपने महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिये। ट्रस्टी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नामित किया गया है। ट्रस्ट के एक पदाधिकारी ने यह जानकारी दी। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि तीन घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में अंतरिम व्यवस्था के तौर पर सदस्य कृष्ण मोहन को महासचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपने का भी निर्णय लिया गया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों का चयन करने के लिए तीन सदस्यीय समिति की घोषणा की। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने संवाददाताओं से बातचीत में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ''हमने न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) प्रदीप कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे (श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष) की तीन सदस्यीय समिति नियुक्त की। यह समिति उम्मीदवारों का साक्षात्कार लेगी और हमें चुनने के लिए तीन नाम देगी।'' गिरि ने मंदिर की दान पेटियों से कथित चोरी को ट्रस्ट के लिए ''गहरे दर्द और शर्मिंदगी'' का विषय बताते हुए कहा कि इस विवाद ने सदियों के लंबे संघर्ष और अनगिनत बलिदानों के बाद बने मंदिर पर ग्रहण लगा दिया है। गिरि ने कहा कि चंपत राय ने स्वेच्छा से पद छोड़ दिया है क्योंकि उनका मानना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में नहीं लाया जाता तब तक महासचिव पद पर बने रहना उचित नहीं है। कोषाध्यक्ष ने कहा कि ट्रस्ट के पास इस मामले में कोई विवेकाधिकार नहीं है क्योंकि वरिष्ठ ट्रस्टी के. परासरन ने बताया कि ट्रस्ट के संविधान के तहत एक बार इस्तीफा देने के बाद यह प्रभावी हो जाता है, जिससे ट्रस्ट के पास इसे स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। के. परासरन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इस बैठक में शामिल हुए।गिरि ने इन आरोपों को खारिज किया कि नकदी के अलावा अन्य चढ़ावा भी गायब हो गया है।उन्होंने कहा कि ट्रस्ट मंदिर को दान की गई सभी वस्तुओं की जानकारी वाला एक रजिस्टर रखता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी प्रत्येक वस्तु सुरक्षित है। कोषाध्यक्ष ने कहा कि ट्रस्ट सत्यापन चाहने वाले किसी भी व्यक्ति को रिकॉर्ड और दान की गई वस्तुएं दिखाने के लिए तैयार है। गिरि ने कहा कि ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के बावजूद राम मंदिर आंदोलन और निर्माण में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंतरिम महासचिव बनाये गये कृष्ण मोहन अपनी सहायता के लिए एक टीम चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे जो पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रणालियों को मजबूत करने के उद्देश्य से उपायों की निगरानी करेगी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट 22 जुलाई को फिर से बैठक करेगा, तब तक उसे उम्मीद है कि कथित गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगी। उन्होंने कहा कि बैठक में अतिरिक्त ट्रस्टियों की नियुक्ति के साथ रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी।बैठक के बाद जारी एक बयान में ट्रस्ट ने कहा कि वह न केवल विशेष जांच दल (एसआईटी) की सिफारिशों को लागू करेगा, बल्कि मंदिर के प्रबंधन और संचालन प्रणालियों में कमजोरियों को दूर करने के लिए विशेषज्ञों से स्वतंत्र सलाह भी लेगा। इसमें कहा गया है कि इसका उद्देश्य एक अधिक मजबूत, कुशल और पारदर्शी प्रशासनिक ढांचा स्थापित करना था जो मंदिर प्रबंधन के लिए एक मॉडल के रूप में काम कर सके। ट्रस्ट ने कहा कि उसने कथित अनियमितताओं की प्रारंभिक जांच के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश सरकार से उच्च स्तरीय एसआईटी जांच की मांग की थी। इसमें कहा गया है कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में आठ लोगों की पहचान की गई, जिनके खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत पाए गए, जिसके कारण पुलिस मामले दर्ज किए गए और गिरफ्तारियां की गईं। ट्रस्ट ने राय और मिश्रा के इस्तीफे के बाद विशेष रूप से आमंत्रित सदस्यों की सूची से गोपाल नागरकट्टे को हटाने की भी घोषणा की, जबकि यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना अनुचित होगा। ट्रस्ट ने कहा कि भक्तों द्वारा दान की गई चांदी की वस्तुओं को भारत सरकार के टकसाल में पिघलाया गया था, जिसमें रिकॉर्ड, तस्वीरें, वजन विवरण और शुद्धता प्रमाण पत्र संरक्षित किए गए थे। इसने व्यक्तियों, संगठनों और पत्रकारों से अपील की कि जिनके पास मंदिर से जुड़े किसी भी अनियमितता के सबूत हैं, वे इसे एसआईटी या उचित जांच एजेंसी को सौंपें। ट्रस्टियों ने यह भी कहा कि विवाद के बावजूद राम मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और उन्होंने इसे कथित गबन के बारे में गलत सूचना बताया है। नवनियुक्त अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने कहा कि उनकी प्राथमिकता मंदिर की प्रबंधन प्रणाली में खामियों को दूर करना और इसकी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मजबूत करना होगा। उन्होंने मीडिया से केवल सत्यापित तथ्यों को रिपोर्ट करने की अपील करते हुए कहा कि जब जांच चल रही हो तो जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए सटीक जानकारी आवश्यक है। गिरि ने कहा कि ट्रस्ट चाहता है कि बड़े साजिशकर्ताओं समेत कथित चोरी में शामिल सभी लोगों की पहचान की जाए और उन्हें दंडित किया जाए। उन्होंने इस विवाद का इस्तेमाल मंदिर ट्रस्ट को बदनाम करने और भक्तों के बीच विभाजन पैदा करने के प्रयासों के प्रति आगाह किया। उन्होंने भक्तों से "झूठे प्रचार" से गुमराह न होने की अपील करते हुए कहा कि अगर किसी को दान की गई वस्तुओं के बारे में संदेह है तो वह सत्यापन के लिए ट्रस्ट कार्यालय से संपर्क कर सकता है। आज की बैठक शाम में समाप्त हुई, जिसके बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास कार्यक्रम स्थल से चले गए। उन्होंने कहा कि कृष्ण मोहन, जिन्हें अंतरिम महासचिव के रूप में अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, अपनी सहायता के लिए एक टीम चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे और पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रणालियों को मजबूत करने के उद्देश्य से उपायों की निगरानी करेंगे। गिरि ने कहा कि ट्रस्ट 22 जुलाई को फिर से बैठक करेगा, तब तक उसे उम्मीद है कि गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगी। उन्होंने कहा कि बैठक में अतिरिक्त ट्रस्टियों की नियुक्ति के साथ रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी। अंतरिम महासचिव मोहन ने बैठक के बाद कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा उसे उचित सजा मिलेगी।उन्होंने कहा कि सभी ट्रस्टी लोगों के विश्वास को बहाल करने और राम मंदिर ट्रस्ट के उद्देश्यों के अनुसार भक्तों द्वारा किए जाने वाले चढ़ावे का प्रबंधन करने के लिए काम करेंगे। यह बैठक राम जन्मभूमि मंदिर परिसर के अंदर अपराह्न करीब सवा तीन बजे शुरू हुई जिसमें ट्रस्ट के नौ स्थायी सदस्यों में से सात ने भाग लिया। यह बैठक शाम करीब साढ़े छह बजे खत्म हुई। मंदिर के चढ़ावे के गबन के आरोपों के बाद राय और मिश्रा द्वारा दिए गए इस्तीफे पर विचार-विमर्श करने, मामले की एसआईटी जांच की प्रगति की समीक्षा करने और इस्तीफे स्वीकार किए जाने पर ट्रस्ट में प्रमुख पदों पर नियुक्तियों पर चर्चा करने के लिए यह बैठक बुलाई गई थी। बैठक से पहले, ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास ने कहा था कि वह रामलला मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से ''बहुत दुखी'' हैं। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के लिए कड़ी सजा की मांग की है। उन्होंने यह विश्वास भी जताया कि कथित अपराध से जुड़े सभी लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।राम मंदिर परिसर के आसपास व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, संपर्क मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था। मीडियाकर्मियों एवं अन्य लोगों के निजी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया था। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बैठक स्थल को मणिराम दास छावनी से मंदिर परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था। मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक एसआईटी ने पिछले महीने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके बाद एक प्राथमिकी दर्ज की गई और आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांचकर्ताओं ने हटाए गए सीसीटीवी फुटेज भी बरामद किए हैं, जिसमें कुछ आरोपी मंदिर परिसर से बाहर जाते समय कथित तौर पर नोटों को छिपाते हुए नजर आ रहे हैं।
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नयी दिल्ली. विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सोमवार को कहा कि वह श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर ट्रस्ट जो भी निर्णय लेगा, उसका सम्मान करेगी। विहिप ने यह भी कहा कि केवल आरोप लग जाने भर से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध विहिप ने यह भी कहा कि राम मंदिर में चढावे की चोरी की जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने दिया जाना चाहिए। ट्रस्ट सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाला है।
विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि संगठन बैठक के नतीजों के बारे में कोई अनुमान नहीं लगाएगा और उसे ट्रस्ट की समझदारी पर पूरा भरोसा है। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ''सिर्फ ट्रस्ट ही निर्णय करेगा और घोषणा करेगा। वह जो भी निर्णय लेगा, हम उसका सम्मान करेंगे। हमें ट्रस्ट से जुड़े संतों की समझदारी पर पूरा भरोसा है।'' जैन ने राय और मिश्रा का बचाव करते हुए कहा कि मात्र आरोप लगने से कोई व्यक्ति दोषी नहीं हो जाता। उन्होंने कहा, ''जब तक दोष साबित न हो जाए, किसी को अपराधी न मानें। जांच एजेंसी को अपना काम करने दें और जांच के परिणाम की प्रतीक्षा करें।'' उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जांच पूरी होने से पहले ही राय को दोषी ठहराने की कोशिश की है।
राय पर लगाए गए कई आरोप जांच की कसौटी पर खरे नहीं उतरने का दावा करते हुए जैन ने कहा कि विहिप नेता ने जांच से बचने की कोई कोशिश नहीं की है। इसके विपरीत, उन्होंने विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन का समर्थन किया है और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। जैन ने यह भी कहा कि प्रारंभिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट ने तुरंत प्राथमिकी दर्ज कराकर कार्रवाई की और किसी को बचाने का प्रयास नहीं किया। जैन ने कहा कि राय और मिश्रा ने नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दिया है तथा उनके इस्तीफों को ''उच्च नैतिक मानदंड स्थापित करने वाला कदम'' बताया। जैन ने कहा कि विहिप ट्रस्ट की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किए जाने के पक्ष में है तथा उसके कामकाज को अधिक पारदर्शी बनाने वाले सुझावों का स्वागत करती है। मंदिरों पर सरकार के नियंत्रण के विरोध में विहिप के रुख को दोहराते हुए जैन ने कहा कि हिंदू धार्मिक संस्थानों का संचालन सरकार के बजाय समुदाय द्वारा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हम हिंदू मंदिरों पर सरकार का कब्जा नहीं होने देंगे। देश के संतों और समाज को ही इन मंदिरों का प्रबंधन और संचालन करना चाहिए।'' उन्होंने विपक्षी नेताओं पर राम मंदिर में जनता का विश्वास कम करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया और कहा कि उनकी आलोचना भ्रष्टाचार की चिंता से प्रेरित होने के बजाय राजनीतिक कारणों से है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को घोषणा की कि सहकारी संस्थाओं के कारोबार का दायरा बढ़ाने के लिए एक सहकारी जीवन बीमा कंपनी स्थापित की जाएगी। उन्होंने साथ ही कहा कि 'भारत टैक्सी' की सेवाओं का विस्तार अगले दो साल में 500 शहरों तक किया जाएगा
राष्ट्रीय राजधानी में सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने भारत के सहकारी तंत्र की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए पेशेवरों की नियुक्तियों में भ्रष्टाचार समाप्त करने पर जोर दिया। शाह ने कहा कि मंत्रालय की स्थापना से भारत के सहकारी आंदोलन को नई ऊर्जा मिली है, जिसे कांग्रेस शासन के दौरान ''उपेक्षित आंदोलन'' बनाया गया था। भारत में लगभग 8.5 लाख सहकारी संस्थाएं हैं, जिनके 30 करोड़ से अधिक सदस्य हैं।
मंत्री ने मंत्रालय की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख किया, जिनमें सहकारी तंत्र में पारदर्शिता और पेशेवर व्यवस्था लाने के प्रयास शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि सहकारी मॉडल के तहत शुरू की गई कैब सेवा से जुड़े मंच 'भारत टैक्सी' का प्रदर्शन अच्छा रहा है और अगले दो वर्षों में इसका विस्तार 500 शहरों तक किया जाएगा। सहकारिता मंत्री ने कहा, '' 'भारत टैक्सी' की तर्ज पर हम सहकारी क्षेत्र में एक जीवन बीमा कंपनी स्थापित करेंगे। इससे बीमा क्षेत्र में सहकारी संस्थाओं के विकास में मदद मिलेगी।'' उन्होंने कहा कि उर्वरक क्षेत्र की सहकारी संस्था इफको का संयुक्त उद्यम इफको-टोकियो पहले से ही बीमा कारोबार में है। भारत में वर्तमान में 26 जीवन बीमा कंपनियां हैं।
'भारत टैक्सी' सहकारिता मॉडल पर आधारित चालक-केंद्रित परिवहन मंच सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड की एक पहल है। वर्तमान में भारत टैक्सी के साथ 6.37 लाख पंजीकृत चालक और 35.77 लाख पंजीकृत ग्राहक जुड़े हुए हैं। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सेवा फिलहाल दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, लखनऊ, चंडीगढ़, मुंबई, जयपुर और कानपुर में संचालित हो रही है। अगले कुछ महीनों में इसे रांची, पटना, गुवाहाटी, भोपाल, कोलकाता, इंदौर और नागपुर में भी शुरू किया जाएगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि विशेष रूप से बीज उत्पादन के लिए एक राष्ट्रीय सहकारी संस्था का गठन किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह अगले तीन वर्षों में देश की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज उत्पादन संस्था बनकर उभरेगी। मंत्री ने कहा कि सहकारी संस्थाओं ने डेयरी, चीनी, उर्वरक और बैंकिंग जैसे पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़ते हुए कई नए क्षेत्रों में भी प्रवेश किया है। कुल 394 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) ने खुदरा ईंधन बिक्री केंद्र के लिए आवेदन किया है, जिनमें से तीन चालू हो चुके हैं। 54,000 से अधिक पैक्स साझा सेवा केंद्र (सीएससी) के रूप में कार्य कर रहे हैं, जबकि 4,248 पैक्स को जन औषधि केंद्र खोलने की मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र का एक 'डेटाबेस' तैयार किया है, जिससे देश में सहकारी संस्थाओं के विस्तार में मदद मिलेगी। शाह ने कहा कि गुजरात के आणंद में क्षमता निर्माण के लिए त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है, जो मानव संसाधन की समस्या से निपटेगा। मंत्री ने विश्वास जताया कि सहकारी क्षेत्र वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। केंद्रीय मंत्रालय पर राज्यों के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप करने की आशंका जताए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस शासित राज्यों ने भी यह शिकायत नहीं की कि केंद्रीय मंत्रालय ने उनके अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप किया है। शाह ने कहा, '' केंद्रीय मंत्रालय का उद्देश्य राज्यों के विषयों में हस्तक्षेप करना नहीं है। इसका उद्देश्य नीतियां बनाना है।'' उन्होंने विश्वास जताया कि देश को 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने में सहकारी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकारों ने हमेशा गरीबों के हित में सर्वांगीण विकास के लिए काम किया है। कार्यक्रम के दौरान शाह ने कई प्रमुख परियोजनाओं और पहल का शिलान्यास तथा उद्घाटन किया।
इन पहल में 75,000 टन क्षमता वाले 135 गोदामों का हस्तांतरण, 85 गोदामों का उद्घाटन तथा 47 अनाज भंडारण गोदामों का वर्चुअल शिलान्यास शामिल था। इसके अलावा, अमूल और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) द्वारा 'सहकार वन' का भूमिपूजन तथा भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की ऊतक संवर्धन (टिश्यू कल्चर) सुविधाओं का उत्तर प्रदेश के बाराबंकी तथा महाराष्ट्र के जलगांव में भूमिपूजन भी किया गया। कार्यक्रम की एक अन्य प्रमुख उपलब्धि 50,000 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को ई-पैक्स में बदलना रही, जो जमीनी स्तर की सहकारी संस्थाओं के डिजिटल सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम के दौरान भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के बीच बीज प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए गए। शाह ने पिछले पांच वर्षों में सहकारिता मंत्रालय की उपलब्धियों पर आधारित एक पुस्तक का भी विमोचन किया। मंत्रालय ने 'सहकार से समृद्धि' तथा विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के साथ किसानों, महिलाओं, युवाओं, लघु उत्पादकों, डेयरी किसानों, शहरी सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण संस्थानों को जोड़ने वाला सहकारी तंत्र विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। -
नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मामले में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने जो कहा है, वह उससे सहमत हैं। भागवत ने नागपुर में संवाददाताओं से कहा, ''होसबाले द्वारा जारी बयान देखिए... मेरी प्रतिक्रिया भी वही है।'' आरएसएस प्रमुख ने एक कार्यक्रम से इतर राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर यह बात कही। होसबाले ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा था कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की घटना ने राम भक्तों और पूरे समाज की आस्था को ''गहरी ठेस'' पहुंचाई है। उन्होंने कहा था कि जांच में दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
होसबाले ने दावा किया था कि ''हिंदू विरोधी और राष्ट्रविरोधी ताकतें'' इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का फायदा उठाकर हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने पूरे हिंदू समाज से अपील की कि वह ''इस कठिन समय'' में धैर्य और संयम बनाए रखे ताकि इस तरह की सभी ''साजिशों'' को विफल किया जा सके। -
उडुपी/नयी दिल्ली. तेजस के माता-पिता ने जब उसके देर से बोलने, ठीक से आंख न मिला पाने और लोगों के बीच कम घुलने-मिलने सरीखी जैसी बातों पर गौर किया किया और उसे चिकित्सक के पास ले गए तो पता चला कि उनका तीन वर्षीय बच्चा 'ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर' (एएसडी) नामक रोग से पीड़ित है। इसके बाद बेंगलुरु निवासी तेजस के माता-पिता ने उसके लिए 'वाक् एवं कर्मोपचार' (स्पीच और ऑक्यूपेशनल थेरेपी) शुरू की। लेकिन तेजस के माता-पिता ने सोचा कि जारी इलाज के साथ आयुर्वेद चिकित्सा भी उनके बच्चे के लिए लाभकारी साबित हो सकती है और इसी उम्मीद में वे उडुपी के एसडीएम आयुर्वेद महाविद्यालय पहुंचे। इसके बाद अगले ढाई सालों में तेजस धीरे-धीरे अपने तरीके से अपनी बात कहने लगा और संस्थान में 'बालपंचकर्म' चिकित्सा के दौरान श्लोक भी पढ़ने लगा। माता-पिता के लिए तेजस की हर छोटी-मोटी कामयाबी उनके लिए जश्न का वजह बन गई। तेजस के परिवार की तरह ही, पूरे भारत में ऐसे माता-पिता की संख्या बढ़ रही है जो अपने बच्चों की जिंदगी को बेहतर बनाने की उम्मीद में वैज्ञानिक रूप से साबित चिकित्सा पद्धित के साथ-साथ आयुर्वेद का भी सहारा ले रहे हैं। समुद्र के किनारे बसी मंदिर की नगरी उडुपी में स्थित एसडीएम आयुर्वेद महाविद्यालय, ऑटिज्म और तंत्रिका-विकास संबंधी व्याधि से पीड़ित बच्चों के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा का सहारा लेने वाले परिवारों के लिए एक पसंदीदा केंद्र बन गया है। एसडीएम आयुर्वेद महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. ममता के.वी. ने कहा कि मरीजों की बढ़ती संख्या इस बात को दिखाती है कि लोगों में यह जागरूकता बढ़ रही है कि आयुर्वेद पारंपरिक चिकित्सा की जगह लेने के बजाय उसके साथ मिलकर काम कर सकता है। एएसडी एक तंत्रिका-विकास संबंधी विकार है, जिसका बच्चों की बातचीत, सामाजिक मेलजोल और उनके व्यवहार पर असर पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया भर में हर 100 में से लगभग एक बच्चे को ऑटिज्म होने का अनुमान है, हालांकि अलग-अलग देशों में इसकी दर अलग-अलग हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑटिज्म वाले हर बच्चे की अपनी खूबियां और चुनौतियां होती हैं, इसलिए शुरुआती पहचान और हर बच्चे के हिसाब से इलाज करना सबसे प्रमुख चीज है। एसडीएम आयुर्वेद महाविद्यालय के बालरोग विभाग (आयुर्वेद पीडियाट्रिक्स) के प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. पृथ्वीराज पुराणिक ने कहा कि आयुर्वेद में 'ऑटिज्म' को केवल एक बीमारी नहीं माना जाता है। पुराणिक ने बताया, ''इसके बजाय, इलाज की योजना बनाने से पहले डॉक्टर शारीरिक बनावट, पाचन, सोने के तरीके, व्यवहार और विकास के क्रम को ध्यान में रखते हुए हर बच्चे की अलग-अलग जांच करते हैं।'' बालरोग विभाग (आयुर्वेद पीडियाट्रिक्स) की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. चित्रलेखा ने कहा कि बीमारी को पूरी तरह ठीक करने का दावा करने के बजाय बच्चे की समग्र कार्यक्षमता को बेहतर बनाने पर ज़ोर दिया जाता है। उन्होंने कहा, ''हमारा मकसद बच्चे की विकास की क्षमता को बढ़ावा देना है। हर बच्चे की अलग-अलग ज़रूरतों के आधार पर, इलाज में खान-पान में बदलाव, दवाएं, ज़रूरत पड़ने पर पंचकर्म प्रक्रियाएं, जीवनशैली में बदलाव और माता-पिता की काउंसलिंग शामिल हो सकती है।'' उन्होंने कहा, ''हमारा लक्ष्य बच्चे की नींद, पाचन, ध्यान लगाने की क्षमता, भावनाओं पर नियंत्रण और जीवन की समग्र गुणवत्ता को बेहतर बनाना है, जबकि बच्चे का पारंपरिक इलाज भी जारी रहता है।'' आयुर्वेद से जुड़ी जन्म से पहले की पारंपरिक प्रक्रिया 'गर्भ संस्कार' का जिक्र करते हुए डॉ. ममता ने कहा कि गर्भधारण से पहले, अगर दंपति अच्छी तरह से योजना बनाएं और 'गर्भाधान संस्कार' की रस्म निभाएं, तो वे इस तरह की बीमारियों की आशंका को दूर कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ''गर्भ संस्कार के जरिए जन्म लेने वाले बच्चे अधिक सक्रिय होते हैं, उनकी प्रतिरक्षा क्षमता अच्छी होती है और उनका तंत्रिकातंत्र संबंधी विकास भी बेहतर होता है। आयुर्वेद मां और बच्चे, दोनों के समग्र आरोग्य को बढ़ावा देने के मकसद से, गर्भावस्था से पहले और उसके दौरान मां की सेहत, संतुलित पोषण और स्वस्थ जीवनशैली पर भी काफी जोर देता है।''
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नयी दिल्ली. देश के अधिकांश हिस्सों में रविवार को मानसूनी गतिविधियां और तेज हो गईं। मुंबई में भारी बारिश के कारण विमान परिचालन बाधित हुआ जबकि केरल, ओडिशा और झारखंड में मौसम को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी व्यापक बारिश हुई है। इस मानसून में मुंबई पर सबसे तगड़ी मार पड़ी है जहां रातभर हुई भारी बारिश के कारण छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर करीब एक घंटे तक विमानों का परिचालन रोकना पड़ा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को मुंबई के लिए 'रेड अलर्ट' बरकरार रखा है और आगे भी लगातार बारिश तथा कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा होने का अनुमान जताया है। विमान परिचालन बाधित होने से कई उड़ानें प्रभावित हुईं, जिससे यात्रियों को विमानों के प्रस्थान में औसतन 75 मिनट और आगमन में कम से कम 28 मिनट की देरी का सामना करना पड़ा। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने एक बयान में कहा, "सुबह करीब 10.17 बजे खराब मौसम, जिसमें 42 नॉट तक की तेज हवाएं और भारी बारिश के कारण कम दृश्यता शामिल थी, की वजह से रनवे का संचालन प्रभावित हुआ।" हालांकि, मौसम में सुधार के बाद एक घंटे के भीतर हवाई पट्टी पर परिचालन सामान्य कर दिया गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुंबई के कई इलाकों में पिछले 24 घंटों में 200 मिमी से अधिक और कुछ जगहों पर 300 मिमी तक बारिश दर्ज की गई है। ओडिशा में बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र गहरे अवदाब में बदल गया है, जिसके बाद राज्य प्रशासन ने सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, यह प्रणाली अगले एक दिन में चांदबली और दीघा के बीच उत्तरी ओडिशा तट को पार कर सकती है, जिससे ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश होने की संभावना है। केरल के भी अधिकांश हिस्सों में रविवार को व्यापक वर्षा हुई जिसके बाद कई क्षेत्रों में 'ऑरेंज' और 'येलो' अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने छह जुलाई को कन्नूर और कासरगोड तथा सात जुलाई को कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भूस्खलन, मिट्टी धंसने और अचानक आने वाली बाढ़ के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रशासन के निर्देशानुसार सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। दिल्ली के कई हिस्सों में रविवार को हुई मध्यम बारिश ने लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत दी। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दोपहर 2.30 बजे तक छतरपुर में सबसे अधिक 49 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके बाद गुरुग्राम में 35 मिमी, महरौली में 18 मिमी, ग्रेटर नोएडा में 17 मिमी, नजफगढ़ में 8 मिमी और जनकपुरी में 7 मिमी बारिश हुई। मौसम विभाग ने दिन के समय आमतौर पर बादल छाए रहने और मध्यम बारिश होने का अनुमान जताया है जबकि अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। उधर झारखंड में, आईएमडी ने छह से नौ जुलाई तक सभी 24 जिलों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने को लेकर 'येलो अलर्ट' जारी किया है। मौसम केंद्र ने कहा, ''राज्य में बादल छाए रहने और अधिकांश हिस्सों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना है, जबकि कुछ सुदूर स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। इस दौरान अधिकतम तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है।'' सोमवार को गढ़वा, पलामू, चतरा, हजारीबाग, लातेहार, लोहरदगा, गुमला और रांची में भारी बारिश होने का अनुमान है।
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लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को राम मंदिर के मुद्दे को लेकर निशाना साधते हुए विपक्ष पर हिंदू आस्था का अपमान और मंदिर आंदोलन का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसी को भी भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। नवीन ने दावा किया कि कांग्रेस पार्टी अप्रासंगिक हो गई है और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी की ''साइकिल कबाड़खाने में भेज दी जाएगी''। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करने के लिए भाजपा को 2047 तक चुनाव जीतते रहना होगा। विपक्षी दलों के नेताओं को अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में वित्तीय अनियमितता मामले में चुनौती देते हुए नवीन ने कहा कि हिंदू धर्म को इतना कमजोर मत समझिए कि आपके झांसे में आ जाएंगे। नितिन नवीन ने यहां राष्ट्र प्रेरणा स्थल में अवध क्षेत्र के शक्ति केन्द्र संयोजकों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ''राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जी हिंदू धर्म को इतना कमजोर मत समझिए कि आपके झांसे में आएंगे, आपके भरमाने में आयेंगे।''
उन्होंने आरोप लगाया, ''हमने देखा है कि जब हिंदू देवी देवताओं का अपमान होता है तो आप मौन रहते हैं।''भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि देखा गया है कि जब राम चरित मानस का अपमान हुआ तो कांग्रेस के लोग मौन बैठे थे। नवीन ने कहा, ''आज कुछ लोग अयोध्या के श्रीराम मंदिर की चर्चा कर रहे हैं, ये वही लोग हैं जिन्होंने प्रभु श्रीराम के होने के अस्तित्व पर सवाल उठाया था। इन लोगों ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दायर किया कि प्रभु श्रीराम एक काल्पनिक चीज हैं, ये वही लोग हैं जिन्होंने कार सेवकों पर गोलियां चलाई थीं और अयोध्या की पवित्र नगरी पर खून की नदियां बहीं थीं।'' भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आज वे लोग आस्था की बात करते हैं, ये घड़ियाली आंसू बहाने वाले लोग कभी हिंदू धर्म की आस्था की बात उठा ही नहीं सकते। उन्होंने कहा कि भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विहिप का संघर्ष और 500 वर्षों का आस्था का जो संघर्ष है, वह कहीं न कहीं अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर के रूप में सामने दिखता है। नवीन ने कहा, ''मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि हमारा खून भी बह जाएगा तो हम इस बात की चिंता करेंगे कि प्रभु श्रीराम की आस्था से कोई खेल नहीं सकता, चाहे कितनी भी कुर्बानी देनी पड़े।'' नवीन ने कहा कि भाजपा सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, ''आपने तो खून की नदियां बहाई हैं, आपकी विरासत हिंदुओं पर गोली चलाने की रही है और हमारी विरासत देवी देवताओं की आस्था के लिए कुर्बान होने की रही है।'' नवीन ने कहा, ''हमने विरासत को संजोया है, उसको संभालेंगे भी और उस पर गर्व करने के लिए लोगों को प्रेरित करेंगे।'' नितिन नवीन ने कहा कि शक्ति केन्द्र के संयोजकों के बल पर 2027 में फिर से भाजपा का कमल खिलने को तैयार है। उन्होंने कहा, ''उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में भारत की आत्मा बसती है और उस उप्र में जहां पर प्रभु श्रीराम का जन्म का हुआ हो, वहां मर्यादा पुरुषोत्तम हमारे आदर्श ही नहीं हम सबको दिशा देते हैं। इस भूमि ने ऐसे महापुरुषों को जन्म दिया जिसने देश ही नहीं दुनिया को रास्ता दिया है।'' नवीन ने कहा, ''जब मैं यहां राष्ट्र प्रेरणा स्थल का भ्रमण कर रहा था तो गर्व की भावना आई, इस राष्ट्र प्रेरणा स्थल का श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में निर्माण किया गया है। यह आने वाले वर्षों तक युवा पीढ़ी को प्रेरणा देगा कि भाजपा का नेतृत्व किस प्रकार विरासत और विकास को लेकर कार्य करता है।'' भाजपा अध्यक्ष ने पूर्ववर्ती विपक्ष की सरकारों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, ''2017 के पहले के उत्तर प्रदेश की चर्चा करना चाहूंगा कि जिस प्रदेश ने केवल भ्रष्टाचार देखा, तुष्टिकरण की राजनीति देखी, परिवारवाद के जहर को देखा है।'' उन्होंने आरोप लगाया, ''उप्र में क्षत्रपों का राज रहता था, हर क्षेत्र का एक क्षत्रप होता था, वही सत्ता चलाता था, लखनऊ में बैठा मुख्यमंत्री एक अलग सरकार चलाता था और क्षत्रप एक अलग सरकार चलाता था।'' नवीन ने पिछले 12 वर्षों में देश और नौ वर्षों से उप्र में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की 'डबल इंजन' सरकार की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा, ''अब उप्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विजन है 'एक जिला-एक उत्पाद' और उस समय 'एक जिला-एक गुंडा' होता था।'' उन्होंने कहा कि अब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने हर जिले से ही नहीं हर कस्बे से गुंडा और माफिया को समाप्त करने का कार्य किया है। सम्मेलन को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, उप मुख्यमंत्रियों - केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक ने भी संबोधित किया। - कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को कहा कि अदाणी समूह न्यू टाउन में 2,000 बिस्तरों वाला एक अस्पताल बनाएगा, जिसमें से 1,000 बिस्तर गरीबों के मुफ़्त इलाज के लिए आरक्षित होंगे। मुख्यमंत्री ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में नागरिक समाज संगठन के सदस्यों के साथ बातचीत के दौरान यह घोषणा की। इस दौरान उन्होंने राज्य में पिछले दो महीनों में अपनी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा, ''अदाणी समूह ने न्यू टाउन में 2,000 बिस्तरों वाला आधुनिक अस्पताल बनाने का लिखित वादा किया है। इनमें से 1,000 बिस्तर गरीबों के लिए होंगे...।'' हालांकि, प्रस्तावित निवेश, परियोजना की लागत या समय-सीमा के बारे में कोई और जानकारी नहीं दी गई।
- मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा में सरकारी स्तर पर आयोजित होने वाला 'श्रीकृष्ण जन्मोत्सव-2026' कार्यक्रम इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से एक सप्ताह पहले शुरू होगा। इस दौरान मथुरा-वृंदावन के प्रमुख चौराहों और मार्गों को सजाया जाएगा तथा विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह ने शनिवार को बताया कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को दिव्य और भव्य स्वरूप देने के लिए गीता शोध संस्थान परिसर स्थित यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय में मंडलायुक्त नरेंद्र प्रताप की अध्यक्षता में तैयारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में महापर्व को पहले से अधिक भव्य बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उन्होंने बताया कि परंपरा के अनुसार इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, चार सितंबर को मनाया जाएगा। हालांकि, राज्य के पर्यटन विभाग, संस्कृति विभाग, ब्रज तीर्थ विकास परिषद और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'श्रीकृष्ण जन्मोत्सव-2026' का शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से सात दिन पहले ही कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने बताया कि इसके तहत प्रमुख चौराहों और श्रद्धालुओं के आवागमन वाले मार्गों पर मंच बनाकर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। ओपन एयर थिएटर और ऑडिटोरियम में देश, प्रदेश और ब्रज क्षेत्र के स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। प्रमुख स्थलों पर 'सेल्फी प्वाइंट' बनाए जाएंगे तथा एलईडी वैन और बड़ी स्क्रीन के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों के सजीव दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। बैठक में मंडलायुक्त ने श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, सरल, सुगम और सुरक्षित दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा प्रमुख चौराहों, मार्गों और स्थलों को आकर्षक ढंग से सजाने के निर्देश दिए। उन्होंने बिजली के खंभों पर तिरंगा रोशनी करने लगाने और मुख्य प्रवेश मार्गों पर स्वागत द्वार बनाने को भी कहा। उन्होंने यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए रूट डायवर्जन योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने, पर्याप्त पार्किंग स्थलों की पहचान करने, दिशा-सूचक संकेतक लगाने तथा सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और भंडारों के लिए समय पर अनुमति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंडलायुक्त ने अग्निशमन वाहनों, एंबुलेंस और संकरी गलियों में बाइक एंबुलेंस की तैनाती के साथ पर्याप्त चिकित्सकों और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा। उन्होंने सरकारी और निजी अस्पतालों की मैपिंग कराने के निर्देश दिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। बैठक में जिलाधिकारी के अलावा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. पंकज कुमार वर्मा, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी (डिप्टी सीईओ) सतीश चंद्र तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
- नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात के साणंद में 'सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट' इकाई के उद्घाटन का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत के प्रौद्योगिकी महाशक्ति बनने की दिशा में एक और उपलब्धि है। शाह ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि यह नयी इकाई ''प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक नयी छलांग'' का प्रतीक है। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात के साणंद में नयी सीजी सेमी ओसैट इकाई का उद्घाटन, भारत के प्रौद्योगिकी महाशक्ति बनने की यात्रा में एक और उपलब्धि है।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''यह नयी इकाई भारत के विकास इंजन के रूप में गुजरात को और अधिक गति प्रदान करेगी तथा युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करेगी।''
- कोलकाता। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को कहा कि नारेबाजी, व्यवधान और विधायी गतिरोध से कोई नेता नहीं बनता बल्कि तथ्य, तर्क और रचनात्मक विचार ही प्रभावी नेतृत्व की पहचान हैं। बिरला ने यहां लोकसभा सचिवालय के 'पार्लियामेंटरी रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज' (प्राइड) और पश्चिम बंगाल विधानसभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्यों के लिए दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि विधानमंडल चर्चा, विचार-विमर्श और समाधान का मंच है तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की वास्तविक शक्ति सार्थक संवाद, परस्पर सम्मान और जनकल्याण के प्रति साझा प्रतिबद्धता में निहित है। उन्होंने विधायकों से संवाद की गुणवत्ता को समृद्ध करने और सदन की चर्चाओं को जनहित तथा राज्य के विकास से जोड़ने का आह्वान किया। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को समाज के अंतिम कतार में खड़े व्यक्ति की आवाज बनना चाहिए और जनता की आकांक्षाओं, अपेक्षाओं तथा सपनों को पूरा करने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास ही निर्वाचित प्रतिनिधियों की सबसे बड़ी शक्ति है और उनका दायित्व है कि वे लोगों की समस्याओं, चुनौतियों और अपेक्षाओं को प्रभावी ढंग से सदन में उठाएं। बिरला ने कहा कि विधानसभा सदस्य केवल अपने निर्वाचन क्षेत्रों के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि पूरे राज्य के विकास और भविष्य के सहभागी भी हैं। उन्होंने उनसे व्यापक और समावेशी दृष्टिकोण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने और पश्चिम बंगाल को नयी दिशा देने वाली नीतियों तथा विकासोन्मुखी पहल में योगदान देने का आह्वान किया। इस बीच यहां कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से बातचीत में बिरला ने कहा कि दल-बदल विरोधी कानून में संशोधन किया जाए या नहीं, इस पर चर्चा कर निर्णय लेना राजनीतिक दलों का अधिकार है। बिरला ने यह टिप्पणी उस प्रश्न के जवाब में की, जिसमें उनसे दल-बदल विरोधी कानून के तहत विधायकों और सांसदों की अयोग्यता से संबंधित संवैधानिक एवं प्रक्रियात्मक व्यवस्था की समीक्षा के लिए उनके द्वारा गठित पीठासीन अधिकारियों की समिति के बारे में पूछा गया था। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि दल-बदल विरोधी कानून पर चर्चा करना और उसके संबंध में निर्णय लेना राजनीतिक दलों पर निर्भर करता है। उन्होंने यह भी बताया कि अतीत में विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में भी इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है। उनकी यह टिप्पणी तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में हाल के दिनों में हुए दल-बदल के घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि देते हुए बिरला ने कहा कि उनके विचार आज भी युवाओं और नेतृत्व दोनों के लिए प्रेरणास्रोत हैं और यह संदेश देते हैं कि समर्पण, चरित्र और समाज के प्रति प्रतिबद्धता से परिवर्तनकारी बदलाव संभव है। उन्होंने कहा कि बंगाल की समृद्ध आध्यात्मिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत ने सदैव देश का मार्गदर्शन किया है। कार्यक्रम के समापन सत्र में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि ने समापन उद्बोधन दिया।बिरला ने पत्रकारों से यह भी कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा से संबंधित रिपोर्ट मानसून सत्र में लोकसभा में पेश की जायेगी। वर्मा को पद से हटाने के आधार की जांच के लिए तीन-सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। यह मामला पिछले साल वर्मा के राष्ट्रीय राजधानी स्थित आवास से नोटों की अधजली गड्डियां मिलने से संबंधित है। इस घटना के समय वह दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे और बाद में उनका तबादला इलाहाबाद उच्च न्यायालय कर दिया गया था। लोकसभा अध्यक्ष ने पिछले वर्ष 12 अगस्त को वर्मा को पद से हटाने के लिए एक बहुदलीय नोटिस स्वीकार करने के बाद इस समिति का गठन किया था। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा।
- नयी दिल्ली। एयरलाइन कंपनी अकासा एयर ने अपने बेड़े में 40वां विमान शामिल कर लिया है। अकासा एयर अपने नेटवर्क का लगातार विस्तार कर रही है।कंपनी ने शनिवार को जारी एक बयान में बताया कि उसे 40वें विमान के रूप में बोइंग 737 मैक्स 8-200 की डिलीवरी मिल गई है, जिसका पंजीकरण नंबर वीटी-वाईबीक्यू है। बयान के मुताबिक, "इस विमान की डिलीवरी उड़ान का पहला चरण अमेरिका के सिएटल से आइसलैंड के रेकजाविक तक था, जबकि अंतिम चरण मिस्र के काहिरा से बेंगलुरु तक की उड़ान के साथ संपन्न हुआ।" अकासा एयर के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विनय दुबे ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि 40वां विमान कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इसे लेकर काफी उत्साह है। एयरलाइन ने इस वर्ष अब तक बोइंग 737 मैक्स के नौ नए विमान अपने बेड़े में शामिल किए हैं। अगस्त, 2022 में वाणिज्यिक परिचालन शुरू करने वाली अकासा एयर फिलहाल देश के 28 घरेलू और सात अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए उड़ानें संचालित करती है। कंपनी ने बोइंग 737 मैक्स के 226 विमानों का ऑर्डर दिया हुआ है।
- सतना.। मध्यप्रदेश के सतना जिले में एक कुएं में गिरे बैल को बचाने के प्रयास में उसमें उतरे तीन लोगों की दम घुटने से मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति की हालत गंभीर है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। अमरपाटन थाना प्रभारी विजय सिंह परस्ते ने बताया कि यह घटना थाना क्षेत्र के खरमसेड़ा गांव के अहिरान टोला में शुक्रवार रात करीब साढ़े आठ बजे हुई। उन्होंने कहा कि रामनिवास कुशवाहा के लगभग 40 फुट गहरे कुएं में एक बैल गिर गया, जिसे निकालने के लिए रस्सी के सहारे एक-एक कर चार ग्रामीण कुएं में उतरे, लेकिन नीचे पहुंचते ही वे अचेत हो गए। परस्ते ने बताया कि बाहर मौजूद ग्रामीणों ने चारों को बाहर निकाला और उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमरपाटन पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने राहुल यादव (36), वीरेन्द्र यादव (40) और कृष्णदत्त यादव (26) को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि गंभीर स्थिति में रामचंद्र यादव (50) को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल सतना रेफर किया गया है। थाना प्रभारी ने कहा कि प्रारंभिक जांच में कुएं के भीतर ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैस की मौजूदगी के कारण चारों के अचेत होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि कुएं में कम पानी होने के साथ काफी मात्रा में कचरा भी जमा था। परस्ते ने बताया कि तीनों मृतक एक ही परिवार के सदस्य थे। उन्होंने कहा कि शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।
- शिमला। मानसून के दौरान शिमला में रिमझिम बारिश, धुंध, सुहावना मौसम और बादलों से घिरी पहाड़ियों के आर्कषण से पर्यटकों का आगमन जारी है। पर्यटन उद्योग के अनुसार, इस मौसम में होटल में नियमित बुकिंग जारी है और अभी तक इसे रद्द करने संबंधी कोई बड़े मामले सामने नहीं आए हैं। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों ने बताया कि इस पहाड़ी शहर में सप्ताहांत होटलों में कमरों की बुकिंग 40 से 50 प्रतिशत के बीच बनी हुई है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक है। 'शिमला होटल्स एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन' के उपाध्यक्ष प्रिंस कुकरेजा ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि बुकिंग रद्द होने का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि बारिश से जुड़ी कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं होती है, तो उद्योग को इस पर्यटन सत्र के सुचारू रूप से चलने की पूरी उम्मीद है। यात्रा संबंधी उद्योग से जुड़े विजय कुमार ने बताया कि पर्यटक अब मानसून का अनुभव लेने के लिए बड़ी संख्या में हिमाचल प्रदेश आ रहे हैं, जबकि पहले के समय में कई लोग बरसात के मौसम में पहाड़ों की यात्रा करने से बचते थे। कानपुर से अपने परिवार के साथ आए बदरुद्दीन ने बताया कि यहां का मौसम बहुत सुहावना है और नजारा बेहद खूबसूरत है। वहीं, लुधियाना के अरविंद सिंह ने कहा कि मैदानी इलाकों में जारी भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए शिमला सबसे बेहतरीन जगह है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने कहा कि तीजन बाई का जाना कला और संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
पीएम मोदी ने आज रविवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला और संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।”राजनाथ सिंह ने एक्स पोस्ट में लिखारक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर दुख जताया। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “लोक कलाओं के क्षेत्र में अपनी गायकी से अमिट छाप छोड़ने वाली लोकप्रिय पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन से मुझे गहरी वेदना की अनुभूति हुई है। छत्तीसगढ़ की कला को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनका जाना कला और संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।”तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी को नई पहचान दिलाईबता दें कि तीजन बाई कुछ समय से बीमार चल रही थीं। उन्होंने 70 वर्ष की उम्र में रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली। तीजन बाई का जन्म साल 1956 में छत्तीसगढ़ के भिलाई के पास स्थित गनियारी गांव में हुआ था। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी को नई पहचान दिलाई। पंडवानी एक ऐसी लोककला है, जिसमें महाभारत की कहानियों को गायन और अभिनय के जरिए मंच पर प्रस्तुत किया जाता है। देश के लिए उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 1988 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। इसके बाद 2003 में पद्म भूषण और 2019 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया। इसके अलावा, उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई अन्य बड़े सम्मान भी मिले। - नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी नागरिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और कानून के शासन में दोनों देशों का साझा विश्वास एवं उनके लोगों की असीम क्षमता इस मित्रता को दुनिया की भलाई के लिए एक ताकत बनाती है। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध रणनीतिक साझेदारी से भी बढ़कर हैं। प्रधानमंत्री ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''1.4 अरब भारतीयों की ओर से, मैं राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिका के लोगों को आपकी (अमेरिका की) स्वतंत्रता की ऐतिहासिक 250वीं वर्षगांठ पर हार्दिक बधाई देता हूं।'' उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और कानून के शासन में भारत और अमेरिका का साझा विश्वास, तथा ''हमारे लोगों की असीम क्षमता हमारी मित्रता को वैश्विक भलाई के लिए एक ताकत बनाती है'' मोदी ने कहा, ''कामना करता हूं कि आने वाले 250 साल अमेरिका के लिए और भी अधिक समृद्धि, शांति एवं तरक्की लाएं तथा भारत-अमेरिका की साझेदारी को नयी ऊंचाई पर ले जाएं।'' file photo
- लखनऊ। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने शनिवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में फिर से कमल खिलेगा और पार्टी कार्यकर्ता चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। नवीन ने कहा, ''आज पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा दिखाया गया प्यार और स्नेह संकेत देता है कि 2027 में कमल निश्चित रूप से खिलेगा।'' उन्होंने कहा, ''जिस तरह से 'डबल इंजन' सरकार मोदी-योगी की जोड़ी ने उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश में बदल दिया है, कमल निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश में खिलने के लिए तैयार है, जहां काशी विश्वनाथ, अयोध्या और मथुरा हैं। आज हमने लखनऊ और पूरे राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच जो उत्साह देखा, उसके आधार पर हम निश्चित रूप से कह सकते हैं कि भाजपा कार्यकर्ता 2027 (विधानसभा चुनाव) के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।'' इससे पहले, नवीन का शनिवार को दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरे के दौरान उनके 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की योजना को कारगर बनाने के लिए वरिष्ठ नेताओं के साथ कई बैठकें करने की उम्मीद है। नवीन ने विशेष रूप से डिजाइन किए गए मोटर चालित रथ पर यात्रा की, जिस पर पार्टी के शीर्ष नेताओं की तस्वीरें और 'सेवा, सुशासन और जनकल्याण' लिखा हुआ था।
- पचपदरा (बालोतरा)। . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत ने अपनी बेहतर नीतियों, ईंधन आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाकर और मजबूत कूटनीतिक संबंधों के दम पर दुनिया के सबसे बड़े वैश्विक ऊर्जा संकटों में से एक का सफलतापूर्वक सामना किया तथा इसका बोझ देश के नागरिकों पर बहुत कम पड़ा। मोदी ने पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण उपजे ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए कहा कि इस सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की इच्छाशक्ति और प्रयास भारी पड़े। उन्होंने कहा कि देशवासी इस मुश्किल समय में जिस तरह से देश के साथ मजबूती से खड़े रहे, देश उसी विश्वास के भरोसे आगे बढ़ पाया है। राजस्थान दौरे पर आए प्रधानमंत्री मोदी ने बालोतरा के पचपदरा में देश के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर को राष्ट्र को समर्पित किया। साथ ही उन्होंने एक लाख पांच हजार करोड़ रुपये के विभिन्न कार्यों का ऑनलाइन तरीके से शिलान्यास/उद्घाटन और लोकार्पण किया।इस मौके पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि ऊर्जा संकट के दौरान अफवाहें फैलाई गईं, लोगों को डराया गया, भड़काया गया, ओछी राजनीति की गई लेकिन जिनके इरादे गलत थे, वे सफल नहीं हो पाए।मोदी ने कहा कि व्यक्ति और देश का स्वाभिमान तभी ऊंचा रह सकता है, जब वह आत्मनिर्भर हो, दूसरों पर कम से कम निर्भर हो। उन्होंने रिफाइनरी के उद्घाटन का जिक्र करते हुए कहा, ''आज का दिन साक्षी है कि भाजपा सरकारें परियोजनाओं को सिर्फ शिलान्यास करके नहीं छोड़ती बल्कि हम उन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भी दिन-रात एक कर देते हैं।'' रिफाइनरी में दो महीने पहले हुए अग्निकांड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके बाद इतनी तेजी से काम पूरा कर लेना भी परिश्रम की पराकाष्ठा का उदाहरण है। मोदी ने कहा, ''आप सभी ने दिखा दिया है कि चुनौती चाहे कितनी भी बड़ी और अप्रत्याशित क्यों न हो, नया भारत अपने संकल्पों से न तो पीछे हटता है और न ही अपनी रफ्तार कम करता है।'' पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण उपजे ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ''बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं। लेकिन 21वीं सदी के इस सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की इच्छाशक्ति और प्रयास भारी पड़े हैं।'' मोदी ने कहा कि इस संकट के दौरान भारत ने हर स्तर पर सही फैसले लिए... संकट का समय रहते सटीक आकलन किया, प्रभावी रणनीति बनाई और भारत के संसाधनों का संतुलित प्रयोग किया। उन्होंने कहा, ''भारत की 'डिप्लोमेटिक पावर' का सकारात्मक इस्तेमाल किया गया और तब जाकर भारत सकंट से उबर पाया है।''उन्होंने कहा कि युद्ध के इसी समय में भारत की दूसरे देशों के साथ दोस्ती बहुत काम आई। उन्होंने कहा, ''जब यह संकट शुरू हुआ था, उससे पहले भारत 25-26 देशों से ईंधन का आयात करता था लेकिन संकट के समय भारत की कूटनीति का जलवा दिख गया और दूसरे देशों के साथ हमारे अच्छे संबंध इस संकट की घड़ी में बहुत काम आए।''उन्होंने कहा, ''युद्ध के दौरान ही भारत 40 से ज्यादा देशों से ईंधन मंगाने लगा। भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि हमारे लिए राष्ट्रहित और राष्ट्र के नागरिकों का हित सर्वोपरि है। 'नागरिक देवो भवः' हमारा मंत्र है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक कीमतों में वृद्धि के कारण अप्रैल से जून के बीच तेल कंपनियों को 75,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ, लेकिन सरकार ने इसका बोझ खुद उठाया। उन्होंने कहा, ''हमने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की और यह सुनिश्चित किया कि आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।" प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के समय सार्वजनिक तौर पर कुछ ताकतें अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थी। उन्होंने कहा, ''बहुत अफवाएं फैलाई गई, लोगों को डराया गया, भड़काया गया, राजनीति के खेल खेले गए। लेकिन जिनके इरादे गलत थे, वे सफल नहीं हो पाए।''मोदी ने कहा, ''जो लोग भारत को असफल होते देखना चाह रहे हैं, इसके लिए भविष्यवाणी भी करने लग गए थे। वे आज निराशा की गर्त में पड़े होंगे।'' भारत की बढ़ती ऊर्जा क्षमता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रिफाइनिंग क्षमता वाला देश बन चुका है और इस क्षमता का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने वैश्विक संघर्षों के कारण ईंधन और उर्वरक आपूर्ति में आई चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की दीर्घकालिक नीतियों के कारण भारत इन व्यवधानों से सफलतापूर्वक उबर सका। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी व्यक्ति या राष्ट्र का स्वाभिमान तभी ऊंचा रह सकता है, जब वह आत्मनिर्भर हो। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 से 2023 के दौरान राजस्थान में कांग्रेस सरकार के समय पचपदरा रिफाइनरी परियोजना का काम लगभग ठप पड़ा रहा। उन्होंने कहा,''कठिन से कठिन लगने वाले संकल्प भी सिद्ध हो जाते हैं अगर नीयत साफ हो। यही बड़ा अंतर भाजपा और कांग्रेस में है। राजस्थान में पानी से जुड़ी समस्या का समाधान इसका उदाहरण है। कांग्रेस की सरकारों ने कभी राजस्थान के जल संकट को दूर करने के लिए कोई ठोस काम नहीं किया।'' उन्होंने कहा,''भाजपा क्षेत्रवाद और बंटवारे की सियासत नहीं करती। भाजपा राष्ट्र प्रथम की भावना पर चलती है।'' इससे पहले प्रधानमंत्री ने रिफाइनरी की मुख्य नियंत्रण इकाई का अवलोकन कर शोधन प्रक्रिया, तकनीकों और उत्पादों की जानकारी ली और युवा कार्मिकों से संवाद किया। उन्होंने श्रमिकों से बातचीत किया और उनके साथ फोटो भी खिंचवाई। प्रधानमंत्री ने 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत रिफाइनरी परिसर में खेजड़ी का पौधा रोप कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। इस अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और डॉ. प्रेमचंद बैरवा भी मौजूद थे।
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लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने शनिवार को दावा किया कि भाजपा के नेतृत्व में देश और उत्तर प्रदेश पूर्ववर्ती विपक्षी सरकारों के "निराशा, तुष्टीकरण और भ्रष्टाचार के दौर" से बाहर निकल चुके हैं। उत्तर प्रदेश प्रवास के अपने पहले दिन लखनऊ में नवीन ने मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री तथा सांसदों और विधायकों के साथ एक बैठक को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों का संकेत दिया। भाजपा की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, नितिन नवीन ने कहा कि "भाजपा के नेतृत्व में देश और उत्तर प्रदेश दोनों ही पूर्ववर्ती विपक्षी सरकारों की घोर निराशा, तुष्टीकरण और भ्रष्टाचार के काले दौर से बाहर निकल चुके हैं।" उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं से अपील की कि वे विपक्ष के किसी भी "लोकलुभावन या भ्रामक विमर्श" का शिकार हुए बिना पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरें और विरोधियों के मंसूबों को विफल करें। नवीन ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश और 2005 से पहले का बिहार "अराजकता, चरम भ्रष्टाचार और संकीर्ण जातिवाद" के दौर से गुजर रहे थे, जिसके कारण इन राज्यों की छवि देश-दुनिया में खराब हुई थी और लोगों को अन्य राज्यों में "हीन भावना" का सामना करना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सपा और बसपा सरकारों के दौरान उत्तर प्रदेश में विकास ठप था और कई क्षेत्रों में "क्षेत्रीय क्षत्रप" समानांतर सत्ता चलाते थे। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने माफियाओं और अराजक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई कर कानून का राज स्थापित किया है, जिसकी चर्चा आज पूरे देश में एक मॉडल के रूप में हो रही है। उन्होंने 2011 की राष्ट्रीय एकता यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने के प्रयास को रोकने की कोशिश की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में कश्मीर में पाकिस्तान के झंडे लहराए जाते थे, जबकि भारतीय ध्वज को छिपाकर ले जाना पड़ता था। नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अब कश्मीर का लाल चौक तिरंगे से सुसज्जित है और अनुच्छेद 370 हटाने के बाद वहां सकारात्मक परिवर्तन हुआ है। उन्होंने विपक्ष पर समाज को बांटने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के समय जातिगत समीकरणों को उभारा जाता है, जिससे भाजपा कार्यकर्ताओं को "राष्ट्र प्रथम" की विचारधारा से भटकाने की कोशिश की जाती है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से करोड़ों लोगों को लाभ मिला है और लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं, लेकिन पार्टी को इसे वोट में पूरी तरह बदलने के लिए जनता से और अधिक संवाद बढ़ाना होगा। उन्होंने भाजपा सांसदों और विधायकों से अपने कार्यालयों से बाहर निकलकर जनता के बीच सक्रिय रहने और विकास कार्यों में भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। नवीन ने विश्वास जताया कि अगले सात-आठ महीनों के प्रयासों से विपक्ष का सफाया तय है और वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश में भाजपा एक बार फिर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।
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नयी दिल्ली. हाल में हुए विधानसभा चुनावों के बाद राजनीतिक समीकरण में आये नाटकीय बदलावों के बीच, संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने शनिवार को यह जानकारी दी। संसद के इस 25 दिवसीय सत्र में 19 बैठकें होगी। यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब विपक्षी खेमे में दरारें गहराती नजर आ रही हैं। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) को अपने अंदर बगावत का सामना करना पड़ रहा है जबकि कांग्रेस ने तमिलनाडु में सरकार का हिस्सा बनने के लिए द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) का साथ छोड़कर टीवीके से हाथ मिला लिया है। पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत ने केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को मजबूती प्रदान की है। संसद का बजट सत्र राजग के लिए निराशाजनक रहा था क्योंकि 2029 से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने तथा संसद के निचले सदन में सीटों की संख्या बढ़ाने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका था। सरकार अब इस विधेयक का नया मसौदा तैयार कर रही है, जिसके तहत सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या समान रूप से 50 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, आबादी के आधार पर सीटों की संख्या में बढ़ोतरी दक्षिणी राज्यों की (क्षेत्रीय) पार्टियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय रही है। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) में हुई बगावत का असर भी संसद के मानसून सत्र में देखने को मिलेगा। तृणमूल के 20 तथा शिवसेना (उबाठा) के छह सांसदों को अलग गुट के तौर पर मान्यता देने की मांग पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा निर्णय लिया जाना अभी बाकी है। राज्यसभा में नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित सदस्यों के शपथ लेने के बाद, बने राजनीतिक समीकरण ने उच्च सदन में सत्तारूढ़ राजग का संख्या बल बढ़ाया है। तृणमूल के तीन बागी सांसदों ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है और उपचुनावों से भाजपा को उच्च सदन में अपनी ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी। मई में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद द्रमुक और कांग्रेस के बीच लंबे समय से चला आ रहा गठबंधन खत्म हो गया। रीजीजू ने 'एक्स' पर पोस्ट किया कि सरकार की संस्तुति पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मानसून सत्र 2026 के लिए संसद के दोनों सदनों को आहूत करने की मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा, ''राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक चर्चा करने और निर्णय लेने के लिए यह सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा।''
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ओंकारेश्वर. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में शनिवार रात भगवान शिव के ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा कि सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन को लेकर उनका और उनकी पत्नी का वर्ष 2003 में लिया गया संकल्प ओंकारेश्वर के दर्शन के साथ 23 साल बाद पूरा हो गया है। कुमार ने नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद संवाददाताओं से कहा," मेरे और मेरी पत्नी अनुराधा के जीवन का आज एक विशेष दिन है। हमने 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का संकल्प लिया था और महादेव की कृपा से यह संकल्प पूरा हो गया है।" दर्शन के बाद बेहद प्रसन्न नजर आए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि उन्होंने 2003 से लेकर अब तक यानी पिछले 23 साल में सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की सपत्नीक यात्रा पूरी कर ली है। उन्होंने देशवासियों से अपने जीवन में अध्यात्म को महत्व देने, भारतीयता का अनुभव करने और देश की उन्नति के लिए कार्य करने का आह्वान किया। इससे पहले, शनिवार शाम को इंदौर में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के साथ संवाद किया। अधिकारियों के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त दो दिवसीय मध्यप्रदेश दौरे पर हैं। वह रविवार को मशहूर पर्यटक स्थल महेश्वर भी जाएंगे और शाम को इंदौर लौटकर दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
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सरकार स्थिति संभालने के लिए तैयार
भुवनेश्वर. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को ओडिशा के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जताते हुए पांच जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया। इसके बाद, राज्य सरकार ने संबंधित सभी विभागों को संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर निम्न वायु दाब का क्षेत्र बनने के कारण राज्य में पिछले तीन दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है। आईएमडी ने अपने ताजा पूर्वानुमान में कालाहांडी, बौध, अंगुल, संबलपुर और सोनपुर जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है। इसके अलावा 21 जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' तथा शेष चार जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। आईएमडी के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तथा उससे सटे उत्तर ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बना निम्न वायु दाब का क्षेत्र अभी भी उसी इलाके में बना हुआ है। इसके अगले तीन दिनों के दौरान उत्तर ओडिशा और उत्तर छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ने की प्रबल संभावना है। भुवनेश्वर मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती ने कहा, ''रेड अलर्ट वाले जिलों में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।'' उन्होंने बताया कि ओडिशा में सात जुलाई तक भारी वर्षा जारी रहने की संभावना है।
इस बीच, विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) कार्यालय ने सभी जिलाधिकारियों को आईएमडी की चेतावनी के मद्देनजर सतर्क रहने और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, शहरी क्षेत्रों में जलभराव और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की स्थिति पर नजर रखने तथा किसी भी अप्रिय घटना के संबंध में राज्य सरकार को तत्काल सूचना देने को कहा गया है। सरकारी बयान में कहा गया, ''राज्य में व्यापक वर्षा की स्थिति को देखते हुए सरकार मौसम की बदलती परिस्थितियों पर लगातार नजर रखे हुए है। एसआरसी कार्यालय के अधीन राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) सभी जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों (डीईओसी) के समन्वय से चौबीसों घंटे सतर्क है।'' जिला प्रशासन को कच्ची सड़कों, संवेदनशील ढांचों, बागवानी फसलों और खड़ी फसलों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। बयान में कहा गया, ''लोगों से सतर्क रहने, मौसम संबंधी आधिकारिक सूचना पर नजर रखने और आकाशीय बिजली से बचाव के लिए गरज-चमक के दौरान सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की गई है।'' राज्य सरकार ने मौजूदा मौसम की स्थिति को देखते हुए मछुआरों को चार से सात जुलाई तक ओडिशा तट और उससे लगे समुद्री क्षेत्रों में मछली पकड़ने के लिए नहीं जाने की सलाह दी है। सरकारी बयान में कहा गया, ''फिलहाल राज्य में समग्र स्थिति सामान्य है और मौसम संबंधी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है।'' आईएमडी ने कहा कि निम्न वायु दाब क्षेत्र के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून के और सक्रिय होने की संभावना है। इसके कारण अगले सप्ताह राज्य के अधिकतर हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश तथा कई स्थानों पर भारी वर्षा का दौर जारी रह सकता है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने, तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है। आईएमडी के अनुसार, निम्न वायु दाब क्षेत्र के प्रभाव से ओडिशा तट पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने तथा इनके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग ने कहा कि समुद्र में ऊंची लहरें उठने की आशंका के मद्देनजर मछुआरों को सात जुलाई तक ओडिशा तट और उससे लगे समुद्री क्षेत्रों में नहीं जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, पारादीप और धामरा बंदरगाह प्राधिकरणों को स्थानीय चेतावनी संकेत जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। आईएमडी के सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार से अब तक ओडिशा के कम से कम 10 स्थानों पर 105 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। इनमें बरगढ़ जिले के सोहेला में सर्वाधिक 202 मिमी तथा गंजाम में 145 मिमी बारिश हुई। आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, पांच जुलाई से उत्तर ओडिशा में वर्षा की गतिविधियां और तेज होंगी। सुंदरगढ़, क्योंझर और मयूरभंज जिलों में आठ जुलाई तक लगातार तीन दिनों तक भारी बारिश होने की संभावना है। इस बीच, एक रिपोर्ट के अनुसार मयूरभंज जिले के 35 वर्षीय अनिल नामक व्यक्ति के भुवनेश्वर स्थित उत्कल विश्वविद्यालय के पास एक नाले में बह जाने की आशंका है। बताया जा रहा कि वह नाले से प्लास्टिक कचरा एकत्र कर रहा था, तभी उसका पैर फिसल गया और वह पानी में बह गया। भुवनेश्वर की महापौर सुलोचना दास ने कहा, ''अग्निशमन विभाग की टीम ने तलाश अभियान शुरू कर दिया है, लेकिन एक घंटे बाद भी व्यक्ति का पता नहीं चल पाया है।'' -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और राष्ट्रीय चेतना को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका योगदान अतुलनीय है। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था और उनका निधन चार जुलाई 1902 को हुआ था।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपने पोस्ट में कहा, '' स्वामी विवेकानंद जी के निर्वाण दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और राष्ट्रीय चेतना को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका योगदान अतुलनीय है।'' उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद की प्रखर बुद्धिमत्ता और प्रेरणादायक विचार आज भी करोड़ों युवाओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, '' उनके आध्यात्मिक संदेश विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में देश को निरंतर नई ऊर्जा और नई प्रेरणा देते रहेंगे।'' स्वामी विवेकानंद का मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त था और उन्होंने रामकृष्ण मिशन की संस्थापना की थी।
उन्हें वर्ष 1893 में अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में दिए गए ऐतिहासिक संबोधन से अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली थी। इस भाषण में उन्होंने समाजसेवा और मानवता की सेवा को सर्वोच्च आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया था। -
जम्मू। अमरनाथ की वार्षिक यात्रा में शामिल होने के लिए 4,812 श्रद्धालुओं का तीसरा जत्था शनिवार को यहां भगवती नगर आधार शिविर से दो अलग-अलग काफिलों में कश्मीर रवाना हुआ। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इस जत्थे में 966 महिलाएं शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार को अनंतनाग जिले के पहलगाम और गांदरबल जिले के बालटाल मार्ग से शुरू हुई 57 दिन की वार्षिक यात्रा के पहले दिन 12,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा में दर्शन और पूजा-अर्चना की। उन्होंने बताया कि तीसरे जत्थे में 244 साधु और 157 साध्वियां भी शामिल थीं। यह जत्था कड़ी सुरक्षा के बीच तड़के तीन बजे से साढ़े तीन बजे के बीच 126 वाहनों में भगवती नगर आधार शिविर से रवाना हुआ। कुल 2,771 श्रद्धालु पहलगाम आधार शिविर की ओर रवाना हुए। इनमें 542 महिलाएं और छह बच्चे शामिल हैं। शेष श्रद्धालु बालटाल मार्ग से गए, जिनमें 424 महिलाएं और पांच बच्चे शामिल हैं।
इसके साथ ही दो जुलाई से अब तक जम्मू से 13,499 श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हो चुके हैं। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने दो जुलाई को पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। -
नई दिल्ली। , भारत के समुद्री और विनिर्माण क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के दादरी स्थित मर्स्क-कॉनकोर अंतर्देशीय कंटेनर डिपो से वैश्विक शिपिंग कंपनी एपी मोलर-मर्स्क के लिए भारत में निर्मित पहले निर्यात-आयात (एक्जिम) शिपिंग कंटेनर को रवाना किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘समुद्री अमृत काल विजन-2047’ को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत के बढ़ते कंटेनर विनिर्माण पारितंत्र पर भरोसा जताते हुए मर्स्क ने डीसीएम श्रीराम ग्रुप को भारत में निर्मित 1,000 अतिरिक्त शिपिंग कंटेनरों का ऑर्डर भी दिया। इसे दीर्घकालिक व्यावसायिक साझेदारी की शुरुआत माना जा रहा है, जिससे वैश्विक समुद्री आपूर्ति शृंखला में भारत की स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एपी मोलर-मर्स्क के पर्यवेक्षी बोर्ड के अध्यक्ष रॉबर्ट मर्स्क उगला के बीच फरवरी 2025 में हुई बैठक के बाद सामने आई है। बैठक में प्रधानमंत्री ने कंपनी को भारत में विश्वस्तरीय कंटेनर विनिर्माण विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया था। महज 16 महीनों में भारत में बने पहले एक्जिम शिपिंग कंटेनर की अंतरराष्ट्रीय खरीद शुरू होना सरकार की त्वरित क्रियान्वयन क्षमता को दर्शाता है।सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से विश्वसनीय वैश्विक विनिर्माण और समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा, “हम केवल शिपिंग कंटेनर ही नहीं बना रहे हैं, बल्कि विकसित भारत के लिए विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री विनिर्माण पारितंत्र का निर्माण कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि भारत में निर्मित पहला कंटेनर अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों, आईएसओ विनिर्देशों और सुरक्षित कंटेनरों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे यह वैश्विक उपयोग के लिए पूरी तरह उपयुक्त है।सोनोवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट 2026 में 10 हजार करोड़ रुपए की कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य आयातित कंटेनरों पर निर्भरता कम करना, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पादन प्रणाली विकसित करना है। इसके तहत ग्रीनफील्ड एवं ब्राउनफील्ड संयंत्रों को पूंजीगत सहायता, परिचालन सहायता, अनुसंधान, परीक्षण, कौशल विकास और क्षमता निर्माण के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।उन्होंने बताया कि कंटेनर निर्माण संवर्धन योजना के तहत भारत की वार्षिक कंटेनर विनिर्माण क्षमता को 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख टीईयू तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिलेगा और देश की आपूर्ति शृंखला अधिक मजबूत बनेगी। सरकार का उद्देश्य भारत को कंटेनर विनिर्माण में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले कंटेनरों का वैश्विक निर्यात केंद्र स्थापित करना है।सोनोवाल ने कहा कि सरकार व्यापार सुगमता बढ़ाने के लिए व्यावसायिक जहाजरानी अधिनियम-2025, तटीय नौवहन अधिनियम-2025 और भारतीय पत्तन अधिनियम-2025 जैसे महत्वपूर्ण कानून लागू कर चुकी है। इसके अलावा 70 हजार करोड़ रुपए की जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना, ‘वन नेशन-वन पोर्ट प्रोसेस’, मैरीटाइम सिंगल विंडो और ई-समुद्र जैसी डिजिटल पहल भी शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि भारत जहाज पुनर्चक्रण के क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल हो रहा है। साथ ही देश के तीन बंदरगाह कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (सीपीपीआई) 2025 की वैश्विक शीर्ष-30 सूची में जगह बना चुके हैं। वधावन बंदरगाह, अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, टूना टेकरा कंटेनर टर्मिनल और आउटर हार्बर कंटेनर टर्मिनल जैसी प्रमुख परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है। (

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