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- नयी दिल्ली. वित्त मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि डीआरआई अधिकारियों ने पाकिस्तान से लाया गया 362 मीट्रिक टन से अधिक सूखा खजूर जब्त किया और पड़ोसी देश से आयात पर भारत की रोक से बचने की कोशिशों को नाकाम कर दिया। मंत्रालय ने बताया कि राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) के अधिकारियों ने नासिक के अंबाद स्थित 'कंटेनर फ्रेट स्टेशन' (सीएफएस) पर मुंबई की एक कंपनी द्वारा आयात किए गए सूखे खजूर के 13 कंटेनरों की पड़ताल की। इसने कहा कि यह खेप संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के जेबेल अली क्षेत्र से आई थी और इसके आयात दस्तावेजों में यूएई को ही इसका मूल देश बताया गया था। वित्त मंत्रालय के अनुसार, शुरुआती जांच में पता चला कि सामान के पाकिस्तान में बने होने की बात छिपाने की कोशिश की गई। सूखे खजूर को शुरू में पाकिस्तान के कराची बंदरगाह से यूएई के जेबेल अली बंदरगाह तक एक जहाज़ के जरिए कंटेनरों में भेजा गया था। इसने कहा कि जेबेल अली बंदरगाह पर सामान को दूसरे कंटेनरों में रखा गया और पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा संचालित कंपनियों के जरिए भारत भेजने के उद्देश्य से एक अलग जहाज पर लादा गया। पहलगाम आतंकी हमले के बाद, भारत ने 2 मई, 2025 से पाकिस्तान निर्मित या वहां से निर्यात होने वाले सभी सामान के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है। डीआरआई 'ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट' के तहत, पाकिस्तानी मूल के सामान की तीसरे देश के रास्ते भारत में आयात करने की कोशिशों को विफल करने के लिए लगातार काम कर रहा है।
- नयी दिल्ली. खाद्य उत्पादों, ईंधन और विनिर्मित वस्तुओं के दाम बढ़ने के कारण थोक मुद्रास्फीति अगस्त में बढ़कर 9.92 प्रतिशत पर पहुंच गई। जुलाई में यह 9.78 प्रतिशत के स्तर पर थी। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। अगस्त की मुद्रास्फीति दर 2022-23 को आधार वर्ष मानकर तैयार नई थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) श्रृंखला में दूसरी सबसे अधिक है। अर्थशास्त्रियों ने कहा कि पश्चिम एशिया में फिर बढ़े तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा कीमतों में हाल की तेजी डब्ल्यूपीआई और उत्पादक मूल्य सूचकांक (ओपीपीआई) पर दबाव बनाए रखेगी। उत्पादक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में बढ़कर 9.81 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 9.6 प्रतिशत थी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को डब्ल्यूपीआई के आंकड़े जारी करते हुए कहा, '' खनिज तेल (पेट्रोलियम उत्पादों सहित), खाद्य वस्तुएं, खाद्य उत्पादों का विनिर्माण, मूल धातुओं का विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुएं तथा रसायन और रासायनिक उत्पादों का विनिर्माण अगस्त, 2026 में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति बढ़ने के प्रमुख कारण रहे।'' अगस्त में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 7.05 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 6.65 प्रतिशत थी। विनिर्मित वस्तुओं की मुद्रास्फीति बढ़कर 8.37 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई,जो जुलाई में 8.29 प्रतिशत थी। ईंधन और बिजली में थोक मुद्रास्फीति अगस्त में बढ़कर 22.93 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 20.05 प्रतिशत थी। वित्त परामर्श कंपनी बार्कलेज ने एक शोध टिप्पणी में कहा कि ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति में तेजी खनिज तेल व प्राकृतिक गैस तथा पेट्रोलियम की थोक कीमतों में वृद्धि के कारण आई जो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से हुई। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा कि लंबे समय से जारी पश्चिम एशिया संकट ने ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति में दो महीने से जारी गिरावट का रुख पलट दिया है और संकट का समाधान होने तक इसके ऊंचे स्तर पर बने रहने के आसार हैं। पंत ने कहा, ''पश्चिम एशिया संकट का समाधान नहीं होने से (रूस-यूक्रेन संकट की तरह) निकट अवधि में वैश्विक अनिश्चितता बनी रहने के आसार हैं। इसके साथ ही कम बारिश और कमजोर मुद्रा निकट अवधि में मुद्रास्फीति को और बढ़ाएंगे।'' रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुख्य अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि प्रतिकूल आधार प्रभाव के साथ-साथ चीनी जैसी कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में सामान्य से अधिक क्रमिक वृद्धि के कारण सितंबर-अक्टूबर, 2026 में खाद्य मुद्रास्फीति के और बढ़ने की आशंका है। इससे त्योहारी मौसम के दौरान धारणा प्रभावित हो सकती है।
- नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राजस्थान में स्थानीय शहरी निकाय चुनावों में पार्टी की "ऐतिहासिक जीत" के लिए राज्य के लोगों का सोमवार को "आभार जताया।" नवीन ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "राजस्थान के लोगों ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि सम्मानीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उनका अटूट विश्वास है।" उन्होंने लिखा, "भ्रम फैलाने वालों और 'नाराज फूफा' जैसे लोगों को दरकिनार करते हुए राजस्थान ने जनकल्याण, विकास और सुशासन की नीतियों पर मुहर लगाई है।" नवीन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौर और "दिन-रात मेहनत करने वाले समर्पित भाजपा कार्यकर्ताओं" को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह जीत पंचायत से संसद तक सेवा और संकल्प की यात्रा को और बल देगी। शहरी निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा ने सोमवार को कांग्रेस पर बढ़त बनाते हुए 4,179 वार्ड में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस ने 3,613 वार्ड जीते। भाजपा ने राज्य के 10 नगर निगम में से चार में स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
- नयी दिल्ली. मोबाइल फोन उद्योग के संगठन इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने घरेलू मांग में गिरावट के बीच सरकार से मोबाइल फोन पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर मौजूदा के 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों के कारण भी घरेलू मांग प्रभावित हो रही है।आईसीईए ने दो सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र में कहा कि भारत मात्रा के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता बन गया है और वित्त वर्ष 2025-26 में मोबाइल फोन देश का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद रहा। मोबाइल फोन विनिर्माताओं के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ने कहा कि घरेलू मांग हालांकि विनिर्माण और निर्यात की गति के अनुरूप नहीं बढ़ी है। 'हैंडसेट' की खपत घटी है, फोन बदलने की अवधि बढ़ी है और किफायती 'स्मार्टफोन' खंड दबाव में है। आईसीईए के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने पत्र में कहा, "यह असंतुलन विनिर्माण वृद्धि के अगले चरण को प्रभावित करेगा, जब तक भारत अपने घरेलू बाजार में फिर से गति नहीं लाता। इसलिए आईसीईए सरकार से मोबाइल फोन पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने और मोबाइल फोन के कलपुर्जों पर भी दरों में इसी तरह युक्तिसंगत बदलाव करने का आग्रह करता है।" उन्होंने कहा कि कम कर दर से अनौपचारिक और बिना कर वाले विक्रेताओं को मिलने वाला मूल्य लाभ कम होगा।आईसीईए ने कहा कि भारत में आईफोन का निर्माण होने के बावजूद देश में इनकी कीमत मुख्य रूप से ऊंचे कर और रुपये के मूल्य में गिरावट के कारण काफी अधिक है। संगठन के अनुसार, हाल में पेश आईफोन 18 श्रृंखला और आईफोन डुओ अमेरिका की तुलना में भारत में करीब 40,000 रुपये से 1.15 लाख रुपये तक महंगे हैं। संगठन ने कहा कि अप्रैल, 2020 में मोबाइल फोन पर जीएसटी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत किए जाने से डिजिटल पहुंच के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रमुख उपकरण की कीमत बढ़ गई। महेंद्रू ने कहा, "इसके परिणामस्वरूप अधिक खरीद अधिकृत और कर-अनुपालक माध्यमों से होगी, जिससे औपचारिक कर आधार का विस्तार होगा और लेनदेन की निगरानी बेहतर होगी।" आईसीईए ने कहा कि पिछले एक साल में भारत में विभिन्न ब्रांड के शुरुआती स्तर के स्मार्टफोन की कीमतें करीब 35 से 45 प्रतिशत बढ़ी हैं, जबकि 10,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की उपलब्धता तेजी से घटकर पांच प्रतिशत से भी कम रह गई है।
- नयी दिल्ली. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिंदी पत्रिका 'प्रवर्तन संदेश' को सोमवार को हिंदी दिवस के मौके पर 'राजभाषा कीर्ति पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। बयान के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार और नित्यानंद राय ने मुंबई में आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के दौरान 'प्रवर्तन संदेश' को यह पुरस्कार प्रदान किया। बयान में ईडी ने कहा, "प्रवर्तन निदेशालय की ओर से प्रकाशित 'प्रवर्तन संदेश' को हिंदी दिवस के मौके पर 'राजभाषा कीर्ति पुरस्कार 2025-26' से सम्मानित किया गया।" 'राजभाषा कीर्ति पुरस्कार' केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत राजभाषा विभाग की ओर से दिया जाता है।'प्रवर्तन संदेश' केंद्रीय एजेंसी की आंतरिक हिंदी पत्रिका है। इसमें निदेशालय के कार्यक्षेत्र से जुड़े जटिल कानूनी, वित्तीय और जांच संबंधी विषयों के साथ-साथ राजभाषा हिंदी से संबंधित गतिविधियों को सरल, सहज, प्रभावी एवं सुगम भाषा में पेश किया जाता है।
- चंडीगढ़. पंजाब पुलिस ने नशा विरोधी अभियान 'युद्ध नशे विरुद्ध' की शुरुआत के बाद से 79,000 से अधिक मादक पदार्थ तस्करों को गिरफ्तार किया है और 3,800 किलोग्राम से अधिक हेरोइन बरामद की है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पुलिस महानिदेशक डीजीपी गौरव यादव ने यहां संवाददाताओं को बताया कि पिछले साल एक मार्च को 'युद्ध नशे विरुद्ध' अभियान शुरू होने के बाद से पुलिस ने 60,582 प्राथमिकी दर्ज की है और 79,784 मादक पदार्थ तस्करों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 708 बड़े तस्कर शामिल हैं, जो 354 ऐसे मामलों में संलिप्त थे, जिनमें प्रत्येक मामले में दो किलोग्राम से अधिक हेरोइन बरामद हुई थी। उन्होंने विवरण साझा करते हुए कहा कि 10 सितंबर 2026 तक पुलिस ने रिकॉर्ड 3,803 किलोग्राम हेरोइन, 976 किलोग्राम अफीम, 1,325 किलोग्राम गांजा और अन्य मादक पदार्थ जब्त किए हैं।
- नयी दिल्ली. कर्नाटक और तेलंगाना समेत कई राज्यों में खेती का रकबा कम होने की वजह से चालू 2026 के खरीफ सत्र में 11 सितंबर तक धान की बुवाई का चार प्रतिशत घटकर 426.81 लाख हेक्टेयर रह गई है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। पिछले साल इसी अवधि में धान खेती का रकबा 443.78 लाख हेक्टेयर था।धान की खेती के रकबे में कर्नाटक में 4.54 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 4.46 लाख हेक्टेयर, आंध्र प्रदेश में 1.90 लाख हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 1.84 लाख हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 1.75 लाख हेक्टेयर, तमिलनाडु में 1.40 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 1.15 लाख हेक्टेयर और झारखंड में 97 हजार हेक्टेयर की कमी आई है। धान, जो खरीफ (गर्मी में बोई जाने वाली फसल) सत्र की एक प्रमुख फसल है, की कटाई अक्टूबर से शुरू होगी। आंकड़ों के अनुसार, दलहनों के तहत खेती का रकबा 116.79 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 118.46 लाख हेक्टेयर हो गया है। श्री अन्न और मोटे अनाजों का रकबा 182.48 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 183.17 लाख हेक्टेयर हो गया है।हालांकि, तिलहन का रकबा 194.07 लाख हेक्टेयर से घटकर 193.90 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि कपास के तहत आने वाला रकबा 110.31 लाख हेक्टेयर से घटकर 109.34 लाख हेक्टेयर रह गया। गन्ने की बुवाई का रकबा भी मामूली रूप से 58.87 लाख हेक्टेयर से घटकर 58.47 लाख हेक्टेयर रह गया है।कुल मिलाकर, देश के कुछ हिस्सों में कम बारिश के कारण, 11 सितंबर 2026 तक सभी खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा पिछले साल की इसी अवधि के 1,112.54 लाख हेक्टेयर से घटकर 1,096.49 लाख हेक्टेयर रह गया है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम को टी20 एशिया कप चैंपियनशिप जीतने पर बधाई देते हुए सोमवार को कहा कि टीम ने देश को गौरवान्वित किया है। मुर्मू ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''वे हमारे युवाओं, खासकर हमारी बेटियों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत हैं। मुझे विश्वास है कि वे सफलता और उत्कृष्टता के ऐसे कई और प्रेरणादायक अध्याय लिखेंगी।'' हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली भारतीय टीम ने दुबई में श्रीलंका को 72 रन से हराकर रिकॉर्ड आठवीं बार एशिया कप का खिताब जीता। राष्ट्रपति ने कहा, ''महिला टी20 एशिया कप चैंपियनशिप 2026 जीतने पर टीम इंडिया की सभी सदस्यों को मेरी हार्दिक बधाई। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और अपने सभी मैच जीते। उन्होंने देश को गौरवान्वित किया है।''
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करीब 6500 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला गया
रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड) . चीड़वासा हेलीपैड के समीप भूस्खलन व केदारनाथ पैदल मार्ग के बाधित होने से फंसे 6500 से अधिक तीर्थयात्रियों को सोमवार को बचाव एवं राहत दलों की देखरेख में सुरक्षित निकाला गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) से मिली जानकारी के अनुसार, गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर भूस्खलन से उसके आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिलने के बाद एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन के समन्वय से यात्रियों को सुरक्षित रूप से रास्ता पार कराया। एसडीआरएफ के मुताबिक, अब तक 6500 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। साथ ही करीब 600-700 घोड़े-खच्चरों को भी सुरक्षित निकाला जा चुका है। गौरीकुंड से लगभग ढाई किलोमीटर ऊपर चीड़वासा हेलीपेड के समीप रविवार को पहाड़ी से चट्टान और पत्थर गिरने के कारण मार्ग अवरूद्ध हो गया था।
भूस्खलन के दौरान चट्टानों की चपेट में आने से एक स्थानीय निवासी की मौत हो गयी थी। पुलिस के मुताबिक भूस्खलन के बाद पैदल मार्ग पर आवाजाही रोक दी गयी थी। उसने बताया कि पहाड़ी से निरंतर पत्थर गिरने के कारण मार्ग पर से मलबा हटाने में भी दिक्कतें आ रही थीं जिस कारण तीर्थयात्रियों को भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के दोनों तरफ सुरक्षा के मद्देनजर विभिन्न पड़ावों पर रोक दिया गया था। सोमवार सुबह मौसम अनुकूल होने और चट्टानों व पत्थरों के गिरने का सिलसिला थमने के बाद केदारनाथ से लौटने वाले श्रद्धालुओं को बाधित क्षेत्र से बचाव दलों की देखरेख में चरणबद्ध ढंग से सुरक्षित निकाला गया। पुलिस ने बताया कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने के बाद लोक निर्माण विभाग ने बाधित रास्ते पर से मलबा हटाने का कार्य शुरू किया। -
नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने के मकसद से तीन साल पहले गठित 'इंडिया' गठबंन को आगे बढ़ाने के लिए बनाई गई समन्वय समिति अब निष्क्रिय हो चुकी है, हालांकि यह गठबंधन कुछ बिखराव एवं टकराव के बावजूद अपना वजूद बनाए हुए है। गठबंधन की 14 सदस्यीय समन्वय समिति की पहली बैठक 13 सितंबर, 2023 को हुई थी। उस समय इसे गठबंधन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था के रूप में देखा गया था। हालांकि, वह समिति की आखिरी बैठक भी साबित हुई।
तीन साल बाद समन्वय समिति अस्तित्व में नहीं है और इसके मूल सदस्यों में से दो अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खेमे में हैं। इस साल राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय बहाल करने का प्रयास जरूर किया गया। बीते आठ जून को इस गठबंधन के घटक दलों के नेताओं ने दो साल से अधिक समय में पहली बड़ी औपचारिक बैठक की थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने घोषणा की थी कि अब गठबंधन के दल हर दो महीने में बैठक करेंगे। इस साल, अगस्त में हैदराबाद में बैठक का सुझाव दिया गया था, लेकिन वह बैठक नहीं हो सकी। विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने एक न्यूज़ एजेंसी' से कहा, ''हम कांग्रेस द्वारा बैठक की तारीख तय करने का इंतजार कर रहे हैं। हैदराबाद में प्रस्तावित बैठक क्यों नहीं हो सकी, इस बारे में उनकी ओर से कोई जानकारी नहीं है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने पूछे जाने पर कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
इस बीच, गठबंधन बनाने वाले दलों के आपसी संबंधों में बदलाव आया है, जिससे अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गोवा और मणिपुर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। इन राज्यों में कहीं दल सहयोगी हैं, कहीं प्रतिद्वंद्वी और कहीं संभावित साझेदार। पिछले साल गठबंधन से अलग हुई आम आदमी पार्टी (आप) की पंजाब में कांग्रेस के साथ लड़ाई लगातार तीखी होती जा रही है। बीते रविवार को आप ने गोवा में गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेस विकल्प पेश करने के लिए गोवा फॉरवर्ड पार्टी के साथ गठबंधन किया। पार्टी गुजरात में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है। जहां राज्यवार रणनीति ने चुनावी तौर पर काम किया है, वहां भी मतभेद उभर आए हैं।
झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)-कांग्रेस-राष्ट्रीय जनता दल (राजद) गठबंधन ने 2024 में आसानी से सत्ता बरकरार रखी, जबकि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। झारखंड में कांग्रेस के नेता सरकार में प्रतिनिधित्व और झामुमो के साथ समन्वय को लेकर अक्सर शिकायत करते रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ कांग्रेस के रिश्ते खराब हुए हैं। इस महीने दोनों दलों के मतभेद उस समय फिर खुलकर सामने आए जब कांग्रेस ने सरकार समर्थित एक कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' के सभी छह अंतरे गाए जाने पर आपत्ति जताई। इसके जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने सहयोगी दल पर पलटवार किया। तमिलनाडु में कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) का गठबंधन 'इंडिया' गठबंधन के सबसे टिकाऊ राज्य स्तरीय गठबंधनों में से एक था और 2024 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन के प्रदर्शन में उसका महत्वपूर्ण योगदान रहा था। हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस द्रमुक के नेतृत्व वाले मोर्चे से अलग हो गई और सत्तारूढ़ टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो गई।
सितंबर 2023 में मुंबई में हुई बैठक में गठबंधन के 13 सदस्यों को 14 सदस्यीय समन्वय समिति में शामिल किया गया था। एक सीट माकपा के लिए रखी गई थी, लेकिन उसने अपना प्रतिनिधि नामित नहीं किया। समिति में कांग्रेस की ओर से के. सी. वेणुगोपाल, तत्कालीन अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से शरद पवार, द्रमुक से टी. आर. बालू, झामुमो से हेमंत सोरेन, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से संजय राउत, राजद से तेजस्वी यादव, तृणमूल कांग्रेस से अभिषेक बनर्जी, आप से राघव चड्ढा, जो बाद में भाजपा में शामिल हो गए, समाजवादी पार्टी से जावेद अली खान, जनता दल (यूनाइटेड) से ललन सिंह, जो 2024 में भाजपा नीत राजग में लौट गए, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से डी. राजा, नेशनल कॉन्फ्रेंस से उमर अब्दुल्ला और पीडीपी से महबूबा मुफ्ती शामिल थे। अब जद(यू), द्रमुक और आम आदमी पार्टी इस गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। -
नयी दिल्ली. विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का सोमवार को स्वागत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2029 तक सभी भाजपा-राजग शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दी जाएगी। संगठन ने कहा कि यह देश में लैंगिक असमानता और भेदभाव को खत्म करने की दिशा में एक ''मील का पत्थर'' साबित होगा। शाह ने रविवार को कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की 21 राज्यों में सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू करेंगी। शाह ने मुंबई में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार की उपलब्धियों और भाजपा के 25 साल के सफर का जिक्र किया। शाह ने कहा, ''तीन तलाक को समाप्त कर दिया गया है, जिससे मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार मिले हैं। हमने कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की है और मुझे विश्वास है कि 2029 से पहले हम भाजपा-राजग शासित सभी 21 राज्यों में इसे लागू कर देंगे।'' अगले लोकसभा चुनाव 2029 में होने हैं।
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि समान नागरिक संहिता बड़ी संख्या में उन महिलाओं को अपने अधिकार हासिल करने में सक्षम बनाएगी, जो पिछले 75 वर्षों से इनसे वंचित रही हैं। बंसल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''यह महिलाओं और बच्चों को कट्टरपंथियों तथा अलगाववादियों के चंगुल से मुक्त कराने में भी मदद करेगा।'' उन्होंने शाह के बयान को स्वागत योग्य बताते हुए दावा किया कि यूसीसी पहले ही पांच राज्यों में लागू की जा चुकी है और तीन अन्य राज्यों में इसे लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। बंसल ने 'एक्स' पर लिखा, ''2029 तक भारत के 80 प्रतिशत हिस्से में यूसीसी लागू होगी। मोदी सरकार को बधाई... यह फैसला भारत में बची हुई लैंगिक असमानता और भेदभाव को खत्म करने तथा महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।'' बंसल ने 'पीटीआई वीडियो' से बातचीत में कहा, ''यह एक बेहद स्वागत योग्य और महत्वपूर्ण कदम है, जिसका हर जगह समर्थन किया जाना चाहिए। यूसीसी पहले ही भाजपा शासित चार-पांच राज्यों में लागू की जा चुकी है। गोवा में यह शुरुआत से ही लागू है।'' उन्होंने कहा, ''राजस्थान, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल समेत कई अन्य राज्यों में इसे लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। मेरा मानना है कि इस साल के अंत तक इसे ज्यादातर राज्यों में लागू कर दिया जाएगा।'' उन्होंने गैर-भाजपा शासित राज्यों से भी इस मुद्दे पर पहल करने का आग्रह किया। बंसल ने कहा, ''गैर भाजपा शासित राज्यों को भी यूसीसी लागू करने पर विचार करना चाहिए। आखिरकार, नागरिकों को समान अधिकार देना, महिलाओं को अधिकार देना और बच्चों के छीने गए अधिकारों को बहाल करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। यह सिर्फ नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व भी है। -
नयी दिल्ली. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। नवीन ने पूजा-अर्चना के बाद संवाददाताओं से कहा, ''मैं प्रार्थना करता हूं कि हमारे प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश लगातार प्रगति करे और प्रसिद्धि हासिल करे तथा हर व्यक्ति के जीवन में खुशी, उत्साह और उत्सव बना रहे।'' राजस्थान नगर निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए नवीन ने कहा कि पार्टी को राज्य से अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। इस अवसर पर राज्यसभा सदस्य तरुण चुग सहित भाजपा के कई अन्य नेता भी उपस्थित थे। अधिकारियों के अनुसार राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बढ़त बनाए हुए है और कांग्रेस भी कड़ी टक्कर दे रही है। पूर्वाह्न 11 बजकर 45 मिनट तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 10,245 वार्डों के घोषित परिणामों में भाजपा ने 1,937, कांग्रेस ने 1,646 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 1,040 वार्डों में जीत दर्ज की है।
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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को मुंबई में हिंदी दिवस 2026 एवं छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजभाषा विभाग ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ में 50 हजार से अधिक स्थानीय भाषाओं के शब्द जोड़े जाने से हिंदी और अधिक लचीली बनी है और यह शब्दकोश अब 8 लाख शब्दों तक पहुंच चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2029 तक यह विश्व का सबसे बड़ा शब्दकोश बन जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि भाषाएं अनेक रहें, इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन भावना भारतीय रहनी चाहिए और बोलियां अनेक रहें, पर भारत की आवाज एक रहनी चाहिए।
अमित शाह ने हिंदी दिवस और गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह मणिकंचन योग है कि आज हिंदी दिवस और गणेश चतुर्थी दोनों हैं। विघ्नहर्ता भगवान गणेश भारतीय भाषाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगे और मार्ग की बाधाओं का हरण करेंगे। उन्होंने महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेश उत्सव की शुरुआत के लिए लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को याद किया और कहा कि तिलक ने देश में जागरूकता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को संस्कृति और इतिहास के माध्यम से मजबूत करने की आवश्यकता को समझा था। उन्होंने गणेश उत्सव और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के माध्यम से देशभक्ति का बड़ा ज्वार पैदा किया। अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र परंपराओं और विशाल सोच की भूमि है। भक्ति आंदोलन के दौरान महाराष्ट्र के अनेक संतों ने ऐसी रचनाएं कीं, जिनसे देशभर में भक्ति आंदोलन को बल मिला। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि है, जिन्होंने स्वराज, स्वधर्म और स्वभाषा को स्वराज का मूल अंग बनाया। शासन में मराठी को महत्व देकर उन्होंने भाषा का कोष निर्मित किया और इसी माध्यम से हिंदवी स्वराज के काल तक शासन चलता रहा।अमित शाह ने कहा कि कार्यक्रम में हिंदी शब्द संसाधन, हिंदी टंकण और आशुलिपि प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर उन्होंने राजभाषा कीर्ति और राजभाषा गौरव पुरस्कार भी प्रदान किए और पुरस्कार प्राप्त करने वालों को बधाई दी। गृह मंत्री ने ‘शिव अनादि हैं, अनंत हैं’, ‘भारतीय ज्ञानतंत्र : स्रोत और स्वरूप’, ‘अँधेरों से उजालों तक’, राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ पर केंद्रित राजभाषा विभाग की पत्रिका ‘राजभाषा भारती’ की विशेष स्मारिका तथा ‘वंदे मातरम के 150 अध्याय’ जैसे प्रकाशनों का विमोचन भी किया।अमित शाह ने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ कोई साधारण गीत नहीं है, बल्कि घनघोर गुलामी के कालखंड में भारतीय चेतना को जागृत करने का बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का महान प्रयास था। ‘आनंदमठ’ में लिखा गया यह गीत देखते-देखते पूरे भारत में स्वतंत्रता की उद्घोषणा बन गया। उन्होंने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ ने स्वतंत्रता प्राप्ति की उत्कंठा और तीव्र भावना को जागृत करने के साथ भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नींव रखने का काम किया। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से बाद में ‘वन्दे मातरम्’ के टुकड़े कर दिए गए और स्वतंत्रता के बाद भी इसे पूर्ण स्वरूप में स्वीकार करने में संसद को लगभग 80 वर्ष लग गए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वन्दे मातरम्’ को उसके पूर्ण स्वरूप और गौरव के साथ सरकारी समारोहों में गाए जाने की पहल की है।गृह मंत्री ने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष और छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि पर आयोजित हिंदी दिवस कार्यक्रम राजभाषा और भारतीय भाषाओं की यात्रा को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने महाराष्ट्र की बहुभाषी संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां मराठी का सम्मान है और होना भी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही सबसे पहले मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया। महाराष्ट्र में कोंकणी, गुजराती, सिंधी, हिंदी, कन्नड़ और वारली सहित अनेक भाषाओं का विकास हुआ है और उन्हें सम्मान एवं स्वीकृति मिली है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा बहुभाषी प्रदेश है।अमित शाह ने आचार्य विनोबा भावे को उद्धृत करते हुए कहा कि हिंदी के माध्यम से उन्होंने कश्मीर, असम और केरल के गांव-गांव तक भूदान-ग्रामदान का संदेश पहुंचाया। गृह मंत्री ने कहा कि राजभाषा का जुड़ाव देशभर की सभी भाषाओं से है, क्योंकि ये भाषाएं सदियों से देश की बोलचाल और आपसी व्यवहार का हिस्सा रही हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद गुजरात से आते हैं और उनकी मातृभाषा गुजराती है, लेकिन जब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर काम करने का दायित्व मिला, तो देशभर में काम करने में कोई कठिनाई नहीं हुई, क्योंकि वह हिंदी समझते और बोलते हैं। उन्होंने कहा कि राजभाषा ने उन्हें देशभर में कार्य करने का बड़ा अवसर दिया।अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र वीर सावरकर की भूमि है और सावरकर अपने समय के सबसे विद्वान भाषा-शास्त्रियों में से एक थे। उन्होंने ऐसे अनेक शब्दों की रचना की, जो भारतीय भाषाओं में उपलब्ध नहीं थे और बाद में उन्हें मराठी, राजभाषा और देश की अन्य भाषाओं में सहज स्वीकृति मिली। उन्होंने कहा कि राजभाषा विभाग ने वीर सावरकर द्वारा संशोधित और रचे गए शब्दों को ऑनलाइन शब्दकोश ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ में शामिल कर उनका सम्मान किया है।अमित शाह ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने सोच-समझकर 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में राजभाषा विभाग ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा को महत्व दिया गया है। कोई भी बच्चा अपनी मातृभाषा सीखे बिना पूरी तरह विकसित नहीं हो सकता, क्योंकि मां के दुलार और भाई-बहन के प्यार को मातृभाषा के बिना समझना कठिन है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपनी मातृभाषा में सोचता, विश्लेषण करता और निर्णय लेता है, तो सोच, विश्लेषण और निर्णय बेहतर होते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि मातृभाषा के साथ एक और भारतीय भाषा सीखने पर भी जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि दूसरी भारतीय भाषा सीखने का अर्थ ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ से जुड़ना है। अपनी मातृभाषा के साथ एक अन्य भारतीय भाषा सीखने से व्यक्ति भारतीयता से और गहराई से जुड़ता है और संकीर्ण विचारों से मुक्त होता है। उन्होंने कहा कि सरकार देश की हर भाषा को समृद्ध करना चाहती है।अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2019 में तय किया गया था कि अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2019 से अब तक राजभाषा समिति के चार खंड राष्ट्रपति को सौंपे जा चुके हैं और पांचवां खंड तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जब भी किसी बड़े वैश्विक मंच या दूसरे देश में गए, उन्होंने राजभाषा और भारतीय भाषाओं में भाषण दिया। बड़े वैश्विक मंचों पर देश के प्रधानमंत्री को अपनी भाषा में बोलते सुनकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा होता है।गृह मंत्री ने कहा कि कई देशों के विश्वविद्यालयों में राजभाषा पढ़ाने की व्यवस्था की गई है। भारत सरकार के पांच लाख से अधिक कर्मचारियों का प्रशिक्षण हो चुका है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ‘कंठस्थ 2.0’ को पांच करोड़ से अधिक वाक्यों के साथ विदेशियों के लिए भी खोला गया है। उन्होंने कहा कि लीला राजभाषा और लीला प्रवाह (LILA – Learn Indian Languages through Artificial Intelligence) के भी अच्छे परिणाम मिले हैं। अमित शाह ने कहा कि 51 हजार शब्दों से शुरू हुआ ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ अब 8 लाख शब्दों तक पहुंच चुका है। इसमें 50 हजार से अधिक स्थानीय भाषाओं के शब्द जोड़े गए हैं, जिससे हिंदी और अधिक लचीली बनी है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2029 तक यह विश्व की सभी भाषाओं में सबसे बड़ा शब्दकोश बन जाएगा। उन्होंने कहा कि जहां हिंदी में किसी चीज के लिए शब्द उपलब्ध नहीं था, वहां तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, बंगाली, ओड़िया समेत अन्य भारतीय भाषाओं के शब्दों को स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा कि राजभाषा विभाग ने ‘भारती – बहुभाषी अनुवाद सारथी’ का निर्माण किया है और ‘भारतीय भाषा अनुभाग’ की शुरुआत भी की गई है।अमित शाह ने कहा कि सरकार भारतीय भाषाओं को शासन और विज्ञान की भाषा बनाना चाहती है, साहित्य को समृद्ध करना चाहती है और भारतीय भाषाओं को एक-दूसरे से जोड़कर उनका बड़ा संपुट तैयार करना चाहती है। उन्होंने कहा कि जेईई, नीट और स्नातक प्रवेश परीक्षाओं को 13 भाषाओं में आयोजित करने का काम भी किया गया है। गृह मंत्री ने भाषाओं के बीच विवाद खड़ा करने वालों को संदेश देते हुए कहा कि बच्चा अपनी मातृभाषा में ही भारत को सही ढंग से समझ सकता है। यदि वह किसी विदेशी भाषा में भारत को समझने का प्रयास करेगा, तो उससे गलतियां हो सकती हैं। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश के सामने रखे ‘पंचप्रण’ में गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का भी प्रण रखा है।अमित शाह ने कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और साहित्य एक विकसित शतदल कमल की तरह है, जिसकी प्रत्येक पंखुड़ी एक प्रादेशिक भाषा है। उन्होंने कहा कि किसी एक पंखुड़ी के नष्ट होने से कमल का सौंदर्य नष्ट हो जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि भारत की भाषाएं अलग-अलग स्वर जरूर हैं, लेकिन गीत एक है। राष्ट्रभक्ति और संस्कृति का गीत एक है। भाषाएं अनेक रहें, इसमें कोई आपत्ति नहीं, लेकिन भावना भारतीय रहनी चाहिए। बोलियां अनेक रहें, लेकिन भारत की आवाज एक रहनी चाहिए। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर को नई दिल्ली में वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार और लेखक डॉ. हरीश चंद्र बर्नवाल की नई पुस्तक ‘मोदी कथा’ का लोकार्पण किया जाएगा। प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का विमोचन केंद्रीय कानून एवं न्याय (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल करेंगे।
यह कार्यक्रम 17 सितंबर, गुरुवार को शाम 5 बजे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए), जनपथ स्थित समवेत सभागार में आयोजित होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईजीएनसीए के अध्यक्ष राम बहादुर राय करेंगे। इस अवसर पर आईजीएनसीए के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद जोशी, आज तक के वरिष्ठ एंकर सईद अंसारी और एबीपी न्यूज की वरिष्ठ एंकर चित्रा त्रिपाठी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगी।डॉ. हरीश चंद्र बर्नवाल की यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लिखी पांचवीं पुस्तक है। लेखक के अनुसार, ‘मोदी कथा’ राजनीतिक समीक्षा नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के मानवीय पक्ष को सामने लाने वाली दस वास्तविक घटनाओं का संकलन है। इन कहानियों में पिछले 25 वर्षों के अनुभवों और व्यक्तिगत संस्मरणों के जरिए उनकी संवेदनशीलता, करुणा और आत्मीयता को प्रस्तुत किया गया है।पुस्तक में शामिल घटनाओं में 1990 की एक रेल यात्रा का प्रसंग है, जिसमें युवा नरेंद्र मोदी के व्यवहार ने दो महिला यात्रियों की नेताओं के प्रति धारणा बदल दी। एक अन्य कहानी नेपाल के जीत बहादुर की है, जिन्हें मोदी ने एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में अपनाया और प्रधानमंत्री बनने के बाद भी नहीं भूले।पुस्तक में शिक्षिका गीताबेन और दृष्टिबाधित छात्र पिंकल की कहानी भी शामिल है, जिसमें उनकी संवेदनशील मुलाकात के बाद दृष्टिबाधित छात्रों के लिए केंद्रीय बजट में विशेष प्रावधान किए जाने का उल्लेख है। इसके अलावा आगरा की मासूम तैयबा की मदद और हुबली के मजदूर चंद्रकांत जैसे सामान्य लोगों के जीवन से जुड़े प्रसंग भी पुस्तक का हिस्सा हैं। लेखक का कहना है कि पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्रामाणिकता है। प्रत्येक कहानी के अंत में उसके स्रोतों का उल्लेख किया गया है, ताकि पाठक घटनाओं की सत्यता स्वयं परख सकें।डॉ. हरीश चंद्र बर्नवाल समाचार जगत का चर्चित नाम हैं और वे न्यूज18 इंडिया, एबीपी न्यूज, एनडीटीवी, जी न्यूज तथा डीडी न्यूज जैसे संस्थानों में काम कर चुके हैं। वर्तमान में वह राजनीतिक विश्लेषण पर आधारित अपना यूट्यूब चैनल संचालित कर रहे हैं। अब तक उनकी 11 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें ‘मोदी सूत्र’, ‘मोदी नीति’, ‘सच कहता हूं’, ‘टेलीविजन की भाषा’ और ‘संघ की अनसुनी कहानियां’ प्रमुख हैं। -
गुवाहाटी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने ब्रिक्स देशों के नयी दिल्ली घोषणापत्र की सराहना करते हुए कहा कि यह बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारतीय विदेश नीति के ''व्यावहारिक, समावेशी और दूरदर्शी नेतृत्व'' को दर्शाता है। नयी दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान स्वीकार किए गए घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों की मादक पदार्थ रोधी एजेंसियों के प्रमुखों द्वारा हाल में जारी गुवाहाटी घोषणापत्र का भी स्वागत किया गया है। इसमें कहा गया है कि इससे ''ब्रिक्स देशों की मादक पदार्थ रोधी एजेंसियों के बीच अभियानगत और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।'' शर्मा ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''यह दस्तावेज (नयी दिल्ली घोषणापत्र) बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारतीय विदेश नीति के व्यावहारिक, समावेशी और दूरदर्शी नेतृत्व का उदाहरण है।
उन्होंने इस ऐतिहासिक दस्तावेज को सफलतापूर्वक स्वीकार किए जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना की। शर्मा ने कहा, ''यह घोषणापत्र भारत की अध्यक्षता की सफलता का सशक्त प्रमाण है। यह विषयवस्तु की दृष्टि से ठोस और दृष्टिकोण के लिहाज से दूरगामी है।'' उन्होंने कहा, ''बहुपक्षीय सुधार और आतंकवाद से मुकाबले से लेकर नयी प्रौद्योगिकी, कृषि एवं पशु संरक्षण के क्षेत्र में करीबी सहयोग तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर वैश्विक शक्तियों के बीच सहमति बनी है। इसमें 'ग्लोबल साउथ' की आवाज को भी शामिल किया गया है।'' 'ग्लोबल साउथ' से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें विकासशील, अल्प विकसित या अविकसित के रूप में जाना जाता है। ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं। मुख्यमंत्री ने 45 पृष्ठ के नयी दिल्ली घोषणापत्र में गुवाहाटी का उल्लेख किए जाने को लेकर कहा, ''ब्रिक्स घोषणापत्र ने ब्रिक्स देशों की मादक पदार्थ रोधी एजेंसियों के प्रमुखों द्वारा स्वीकार किए गए गुवाहाटी घोषणापत्र को मादक पदार्थों के खिलाफ अभियानगत और तकनीकी सहयोग मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में औपचारिक मान्यता दी है।
शर्मा ने कहा कि नयी दिल्ली घोषणापत्र में गुवाहाटी घोषणापत्र का उल्लेख ''अत्यंत प्रतीकात्मक और महत्वपूर्ण कदम'' है क्योंकि असम मादक पदार्थों की तस्करी के एक महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है। जुलाई में स्वीकार किए गए गुवाहाटी घोषणापत्र में राष्ट्रीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप सदस्य देशों के बीच सूचनाओं, खुफिया जानकारी और सर्वोत्तम तौर-तरीकों को समय पर साझा करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। घोषणापत्र में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कानून प्रवर्तन और नियामकीय प्रयासों को मजबूत करने के लिए नवीन प्रौद्योगिकियों, डिजिटल माध्यमों और आंकड़ों पर आधारित तरीकों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया था। वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का मुख्य विषय 'लचीलेपन, नवोन्मेष, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' है। भारत की अध्यक्षता में छह-सात जुलाई को गुवाहाटी में ब्रिक्स देशों की मादक पदार्थ रोधी एजेंसियों के प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक हुई थी, जिसमें ब्राजील, चीन, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस और संयुक्त अरब अमीरात ने भाग लिया था। -
नयी दिल्ली. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने रविवार को कहा कि ब्रिक्स को अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाना चाहिए और एक समावेशी वैश्विक आर्थिक ढांचे की दिशा में काम करना चाहिए, क्योंकि मौजूदा वित्तीय और व्यापारिक प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं को राजनीतिक झटकों के प्रति असुरक्षित बना दिया है। ईरान के राष्ट्रपति ने दो-दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान पश्चिमी ताकतों पर निशाना साधते हुए 'एकतरफ़ा प्रतिबंधों' की आलोचना की और कहा कि इनका सीधा असर वैश्विक खाद्य सुरक्षा और लोगों के कल्याण पर पड़ रहा है। पेजेश्कियान का यह बयान अमेरिका द्वारा ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने के कुछ हफ़्ते बाद आया है। इन प्रतिबंधों से दोनों पक्षों के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बीच तेहरान की अर्थव्यवस्था में दबाव और बढ़ गया है। ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि ब्रिक्स अब केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का एक ढांचा नहीं रह गया है, बल्कि यह एक अधिक संतुलित और समावेशी दुनिया की बढ़ती मांग का प्रतीक बन गया है, जिसमें ''किसी भी सत्ता-केंद्र को दूसरों की किस्मत तय करने का अधिकार नहीं है''। ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि ब्रिक्स को एक अधिक संतुलित, समावेशी और न्यायपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि गतिशीलता, सहयोग और स्थिरता को व्यावहारिक कार्यों में बदला जाना चाहिए। उन्होंने ईरान पर अमेरिका एवं इजराइल द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई का संदर्भ देते हुए कहा कि सुरक्षा के बिना आर्थिक गतिशीलता बनाए नहीं रखी जा सकती। पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान के आर्थिक, ऊर्जा और विकास से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमलों के नतीजे राष्ट्रीय सीमाओं से परे भी हो सकते हैं, जिसका खामियाजा क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ईरानी लोगों ने भारी कीमत चुकाई है, आम नागरिक मारे गए हैं और दशकों में तैयार किया गया बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया है। ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों की सुरक्षा करे और ''नागरिक ठिकानों पर हमलों को सामान्य होने से रोके''। पेजेश्कियान ने सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए भारत, यहां के लोगों और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इसकी थीम -'गतिशीलता, सहयोग और स्थिरता'- उस समय की बुनियादी वैश्विक जरूरतों को दर्शाती है जब देशों का भविष्य तेज़ी से एक-दूसरे से जुड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने चुनौती केवल मौजूदा संकटों से निपटने की नहीं, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था बनाने की है, जो देशों को भविष्य के संकटों से निपटने के लिए मज़बूत बनाए और एक अधिक निष्पक्ष दुनिया का निर्माण करे। आर्थिक चुनौतियों के संदर्भ में पेजेश्कियान ने कहा कि सीमित वित्तीय और व्यापारिक प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता ने अर्थव्यवस्थाओं को राजनीतिक झटकों के प्रति असुरक्षित बना दिया है। ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि एकतरफा प्रतिबंधों का सीधा असर खाद्य सुरक्षा और लोगों के कल्याण पर पड़ा है। उन्होंने ब्रिक्स सदस्यों की आर्थिक गतिशीलता बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और 'न्यू डेवलपमेंट बैंक' को मजबूत करने की वकालत की। पेजेश्कियान ने गाजा और लेबनान के हालात पर कहा कि इस इलाके के लोग ''अपराधों और नरसंहार'' का परिणाम भुगत रहे हैं। उन्होंने ब्रिक्स से अपील की कि वह राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने तथा बल प्रयोग पर रोक लगाने में अधिक प्रभावी भूमिका निभाए। ईरान के राष्ट्रपति ने दुनिया भर की चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि कोई भी देश अकेले इनका सामना नहीं कर सकता और उन्होंने 'ग्लोबल साउथ' की क्षमताओं को साझा क्षमताओं में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने ईरान की भू राजनीतिक स्थिति और ऊर्जा एवं 'ट्रांजिट' क्षमताओं पर ज़ोर देते हुए कहा कि ये ब्रिक्स सदस्यों के बीच व्यापार और ऊर्जा कॉरिडोर के विकास में योगदान दे सकते हैं। पेजेश्कियान ने वहनीयता के मामले में चेतावनी दी कि ऐसा विकास जो असमानता बढ़ाता है या आज की लागत आने वाली पीढ़ियों पर डालता है, वह वहनीय नहीं हो सकता। ईरान के राष्ट्रपति ने युद्ध के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऊर्जा और औद्योगिक बुनियादी ढांचे को होने वाला नुकसान आर्थिक नुकसान के अलावा प्राकृतिक संसाधनों पर भी असर डाल सकता है। पेजेश्कियान ने ज्ञान और नवोन्मेष को ब्रिक्स एजेंडे का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नयी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल देशों को मजबूत बनाने के लिए किया जाना चाहिए, न कि उनपर हावी होने के जरिये के तौर पर। पेजेश्कियान ने दोहराया किया कि ब्रिक्स सहयोग को प्रगाढ़ करने में ईरान अपनी पूर्वी क्षमता से काम करेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि ब्रिक्स देशों की मजबूती के लिए लगातार सहयोग की जरूरत होती है, सहयोग के लिए न्याय ज़रूरी है, और शांति एवं सुरक्षा के बिना स्थिरता मुमकिन नहीं है। ईरान के राष्ट्रपति ने कहा, ''आइए हम ब्रिक्स को इन सिद्धांतों को व्यावहारिक कार्यों में बदलने का एक मंच बनाएं।'' उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसा भविष्य जिसमें सभी के लिए विकास, सुरक्षा और तरक्की संभव हो हमारी साझा जिम्मेदारी है।
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- मुंबई। महाराष्ट्र की संस्कृति के प्रतीक गणेश महोत्सव के दौरान मुंबई का मशहूर 'लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल' आस्था और टिकाऊपन का अनोखा मेल प्रस्तुत करेगा क्योंकि उसके द्वारा संचालित प्रसाद काउंटरों से निकलने वाले गीले कचरे से शहर भर के सरकारी अस्पतालों को बिजली मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की 'प्रसाद से ऊर्जा' पहल के तहत, लगभग 80 मीट्रिक टन खाने का कचरा चार नगर निकाय अस्पतालों में बने बायोमेथेनेशन संयंत्र में भेजा जाएगा ताकि 7,700 यूनिट से अधिक स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन किया जा सके। नगर निकाय ने यह पहल 'लालबागचा राजा मंडल' के साथ मिलकर शुरू की है। यह शहर के सबसे लोकप्रिय गणपति पंडालों में से एक है, जहां 11 दिन के त्योहार के दौरान मशहूर हस्तियों समेत बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बीएमसी का अनुमान है कि 14 सितंबर से शुरू होने वाले 11 दिन के गणेश उत्सव के दौरान मंडल में रोज़ाना लगभग आठ से 10 मीट्रिक टन जैविक कचरा निकलेगा। अलग-अलग किए गए कचरे को उसके स्रोत से इकट्ठा किया जाएगा और विशेष वाहनों से नायर, कस्तूरबा, जीटीबी तथा सायन अस्पतालों में बने बायोमेथेनेशन संयंत्र तक ले जाया जाएगा। इन संयंत्रों में हर दिन लगभग दो मीट्रिक टन कचरा निपटाने की क्षमता है। हालांकि, वास्तविक बिजली उत्पादन इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग किया गया कितना और कैसा कचरा मिलता है तथा संयंत्र किस हालत में काम कर रहे हैं।
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कोलकाता. प्रवासी साहित्य की भारतीय मूल की लेखिका केतकी कुशारी डायसन का इंग्लैंड स्थित उनके घर पर निधन हो गया है। परिवार के एक करीबी दोस्त ने यह जानकारी दी। डायसन ने अंग्रेजी अनुवाद और शोध के जरिए रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाओं को बड़े पैमाने पर पाठकों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। वह 86 वर्ष की थीं। परिवार की करीबी दोस्त और यहां रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में शोधकर्ता सुमना दास सुर ने बताया कि लंबे समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहीं केतकी ने 11 सितंबर को ऑक्सफोर्ड के बाहरी इलाके में स्थित अपने घर पर आखिरी सांस ली। उनके परिवार में उनके पति रॉबर्ट डायसन और बेटे वर्जिल पुजारी डायसन और इगोर नीलाद्री डायसन हैं।
अविभाजित बंगाल के कुश्तिया (जो अब आधुनिक बांग्लादेश का हिस्सा है) में 26 जून 1940 को जन्मीं केतकी कुशारी डायसन ने 1958 में प्रेसिडेंसी कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में रिकॉर्ड अंकों के साथ ग्रेजुएशन किया। उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की और 1975 में पीएचडी की डिग्री हासिल की। उनके गहन अध्ययन में नोबेल पुरस्कार विजेता टैगोर, और खासकर उनके चित्रों पर व्यापक शोध शामिल है। उन्होंने टैगोर की रचनाओं का अंग्रेजी में अनुवाद करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात अपने भावी पति रॉबर्ट डायसन से हुई, जो यॉर्कशायर के रहने वाले भौतिकी के छात्र थे। बाद में वह ब्रिटिश नागरिक बन गईं, लेकिन जीवन भर बंगाली भाषा और साहित्य से उनका गहरा जुड़ाव बना रहा। उनकी रचनाओं में कई कविताएं, नाटक और उपन्यास शामिल हैं, जिनमें "बालकाल", "नारी, नगरी" और "जल फुनरे आगुन" प्रमुख हैं। उनकी सबसे महत्वपूर्ण विद्वतापूर्ण कृतियों में "रवींद्रनाथ ओ विक्टोरिया ओकांपो-र संधाने" शामिल थी, जिसमें टैगोर के अर्जेंटीना की लेखिका विक्टोरिया ओकांपो के साथ संबंधों का अध्ययन किया गया था। उन्हें 1986 में प्रतिष्ठित आनंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, अपने जीवनकाल में उन्हें कई अन्य पुरस्कार भी मिले। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को ब्रिक्स नेताओं का स्वागत किया। इस दौरान पृष्ठभूमि में तमिलनाडु का मशहूर रामनाथस्वामी मंदिर दिख रहा था, जो चार धाम तीर्थस्थलों में से एक है। माना जाता है कि रावण पर जीत के बाद भगवान राम ने यहीं पूजा की थी। भारत मंडपम में यहां 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स देशों के नेताओं का स्वागत किया, जिनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान शामिल थे। नेताओं ने हाथ मिलाया और तमिलनाडु के रामेश्वरम में मशहूर रामनाथस्वामी मंदिर की पृष्ठभूमि में तस्वीरें खिंचवाईं। चीन के राष्ट्रपति चिनफिंग का स्वागत करते हुए मोदी ने उन्हें मंदिर का महत्व भी बताया।
भारत 12 से 13 सितंबर तक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इसमें 11 सदस्य देशों और 10 सहयोगी देशों के नेताओं के अलावा कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। चार धाम तीर्थस्थलों में से रामनाथस्वामी मंदिर ही एकमात्र ऐसा मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है, जबकि बाकी तीन उत्तर में स्थित हैं (द्वारका, पुरी और बद्रीनाथ)। भारत में मौजूद 12 ज्योतिर्लिंगों में से 11 उत्तर में हैं और सिर्फ रामनाथस्वामी दक्षिण में है। रामेश्वरम न सिर्फ शैव भक्तों के लिए, बल्कि वैष्णव भक्तों के लिए भी एक बहुत बड़ा तीर्थ स्थल है।
हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक दायित्वों में से एक मानी जाने वाली काशी-रामेश्वरम यात्रा काशी से शुरू होती है और रामेश्वरम में भगवान रामनाथस्वामी की पूजा के साथ समाप्त होती है। तमिलनाडु सरकार की एक वेबसाइट के अनुसार, यह ऐतिहासिक तीर्थस्थल 10वीं शताब्दी ईस्वी तक एक साधु की देखरेख में था। सीलोन के राजा पराक्रमबाहु ने 12वीं सदी ईस्वी में मंदिर के गर्भगृह का निर्माण कराया।
रामनाथपुरम के राजा उदयन् सेतुपति और नागूर के एक वैश्य ने 15वीं सदी ईस्वी में पश्चिमी स्तंभ और परिसर की दीवारों का निर्माण कराया। इसके बाद, मदुरै के एक अमीर व्यक्ति ने अम्मन सन्निधि गलियारा बनवाया और मरम्मत के अन्य काम करवाए। इसके बाद, 1897 और 1904 के बीच, नट्टुकोट्टई के नागरथार परिवार के देवकोट्टई जमींदार के परिवार ने 126 फुट ऊंचे और नौ मंजिलों वाले पूर्वी राजगोपुरम का निर्माण पूरा किया। पुराणों के अनुसार, भगवान राम सीता और लक्ष्मण के साथ यहां आए थे और उन्होंने रावण (जो एक ब्राह्मण था) के वध के पाप से मुक्ति पाने के लिए शिवलिंग की स्थापना और पूजा की थी। जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, रामेश्वरम भगवान रामेश्वर का पवित्र स्थान है, यानी भगवान राम द्वारा प्रतिष्ठित ईश्वर। -
नयी दिल्ली/ ब्रिक्स नेताओं ने उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक में अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में व्यापक सुधार का आह्वान किया है। समूह ने एकतरफा शुल्क, व्यापार प्रतिबंधों और आर्थिक प्रतिबंधों की भी कड़ी आलोचना की।
नयी दिल्ली घोषणापत्र में ब्रिक्स ने कहा कि बढ़ता संरक्षणवाद और एकतरफा व्यापार उपाय वैश्विक व्यापार तथा आपूर्ति शृंखलाओं के लिए खतरा हैं। समूह ने कहा, ''हम एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों में वृद्धि को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं, जो व्यापार को विकृत करते हैं और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।'' ब्रिक्स समूह ने चेतावनी दी कि व्यापार प्रतिबंधात्मक उपायों से वैश्विक व्यापार में और कमी आ सकती है, आपूर्ति शृंखलाएं बाधित हो सकती हैं तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक एवं व्यापार गतिविधियों में अनिश्चितता बढ़ सकती है। समूह ने डब्ल्यूटीओ पर केंद्रित नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति समर्थन दोहराते हुए उसके विवाद निपटान तंत्र को तत्काल बहाल करने की मांग की। घोषणा में कहा गया, ''हम सभी डब्ल्यूटीओ सदस्यों के लिए भरोसे और पूर्वानुमेयता के आधार के रूप में सुलभ, प्रभावी और पूरी तरह काम करने वाले दो-स्तरीय बाध्यकारी विवाद निपटान तंत्र की तत्काल बहाली की पुरजोर वकालत करते हैं।'' ब्रिक्स ने डब्ल्यूटीओ की अपीलीय संस्था के नए सदस्यों की नियुक्ति भी बिना और देरी के करने का आह्वान किया।
समूह ने डब्ल्यूटीओ में शामिल होने के लिए इथियोपिया और ईरान की कोशिशों का समर्थन किया तथा चीन द्वारा 53 अफ्रीकी देशों के लिए शून्य-शुल्क व्यवस्था के विस्तार का उल्लेख किया। समूह ने एकतरफा आर्थिक और द्वितीयक प्रतिबंधों की भी आलोचना की। घोषणा में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत एकतरफा जबरन उपायों को लागू किए जाने की निंदा की जाती है। समूह के अनुसार, ऐसे उपाय लक्षित देशों की आम आबादी के मानवाधिकारों, विकास, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर दूरगामी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। ब्रिक्स ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अधिकृत नहीं किए गए प्रतिबंधों सहित ऐसे एकतरफा जबरन उपायों को समाप्त किया जाना चाहिए, क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय कानून तथा 'संयुक्त राष्ट्र चार्टर' के सिद्धांतों और उद्देश्यों को कमजोर करते हैं। घोषणा में 'ब्रेटन वुड्स संस्थानों (बीडब्ल्यूआई)', मुख्य रूप से आईएमएफ और विश्व बैंक, की शासन व्यवस्था में भी सुधार की मांग की गई। ब्रिक्स ने कहा कि इन संस्थानों की शासन व्यवस्था में वैश्विक अर्थव्यवस्था में आए बदलावों को प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए और उभरते बाजारों तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवाज और प्रतिनिधित्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में उनकी स्थिति के अनुरूप होना चाहिए। ब्रिक्स ने आईएमएफ और विश्व बैंक के नेतृत्व के चयन की प्रक्रिया में भी बदलाव का आह्वान किया।
समूह ने योग्यता आधारित, समावेशी और पारदर्शी चयन प्रक्रिया की मांग की, जिससे इन संस्थानों के नेतृत्व में क्षेत्रीय विविधता तथा उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ सके। समूह ने आईएमएफ को वैश्विक वित्तीय सुरक्षा तंत्र के केंद्र में मजबूत और पर्याप्त रूप से वित्तपोषित संस्था बनाए रखने के लिए 'ब्रिक्स रियो डी जेनेरियो विजन फॉर आईएमएफ कोटा एंड गवर्नेंस रिफॉर्म' के प्रति समर्थन दोहराया। ब्रिक्स ने आईएमएफ के कोटा की 16वीं सामान्य समीक्षा के तहत तय बढ़ोतरी को बिना और देरी के लागू करने तथा 17वीं सामान्य समीक्षा के तहत कोटा में सार्थक बदलाव के उपाय जल्द विकसित करने का आह्वान किया। घोषणा में कहा गया कि कोटा में बदलाव से उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की कोटा तथा मतदान हिस्सेदारी बढ़नी चाहिए, लेकिन इसका बोझ गरीब विकासशील देशों पर नहीं पड़ना चाहिए। समूह ने यह भी कहा कि आईएमएफ में स्वैच्छिक वित्तीय योगदान से किसी देश के कोटा, शासन व्यवस्था में प्रतिनिधित्व और मतदान अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए। विश्व बैंक के संबंध में ब्रिक्स ने कहा कि 2025 की शेयरधारिता समीक्षा से संस्था को मजबूत करने और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के कम प्रतिनिधित्व को दूर करने में मदद मिलनी चाहिए। -
नयी दिल्ली. भारत ने शनिवार को तब एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की, जब ब्रिक्स द्वारा अंगीकार किये गए 'नयी दिल्ली घोषणापत्र' में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले की निंदा की गई और देश-समर्थित सीमा-पार आतंकवाद के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं की नीति अपनाने का आह्वान किया। 'लचीलेपन, नवोन्मेष, सहयोग और स्थिरता का निर्माण' शीर्षक वाले इस व्यापक घोषणा-पत्र में वैश्विक आतंकवाद, अवैध वित्तीय लेन-देन, साइबर धोखाधड़ी और उभरते हुए सीमा-पार धोखाधड़ी नेटवर्क के खिलाफ इस समूह का एकजुट रुख सामने आया। घोषणापत्र में सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बात करते हुए, सदस्य देशों ने पहलगाम में 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकी हमले की निंदा की, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी और कई लोग घायल हो गए थे।
घोषणापत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आतंकवाद की सभी गतिविधियां आपराधिक और अनुचित हैं, चाहे उनका उद्देश्य कुछ भी हो, और उन्हें कभी भी, कहीं भी या किसी के भी द्वारा अंजाम दिया गया हो। ब्रिक्स नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों से निपटने के अपने संकल्प को दोहराते हुए, आतंकवादियों की सीमा-पार आवाजाही रोकने, आतंकी वित्तपोषण तंत्र को ध्वस्त करने और उनके सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। सदस्य देशों ने दोहराया कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, और साथ ही यह भी कहा कि आतंकी गतिविधियों में संलिप्त लोगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। -
नयी दिल्ली. भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी के तौर पर, ब्रिक्स समूह ने शनिवार को आम सहमति से एक साझा घोषणापत्र को अपनाया। यह सहमति पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर यूएई और ईरान के बीच गहरे मतभेदों को दूर करने के बाद बनी। घोषणापत्र में ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिका का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया गया। ब्रिक्स नेताओं ने संघर्ष को ''संवाद और कूटनीति'' के जरिए समाप्त करने के भारत के रुख का समर्थन किया और ''लागू'' अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा के सुचारू प्रवाह को बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के पहले दिन अंगीकार किए गए ब्रिक्स घोषणापत्र को भारतीय कूटनीति की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। घोषणापत्र के मसौदे को लेकर बातचीत आखिरी समय तक जारी रही, क्योंकि शुरुआत में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) दोनों ने अपना रुख कड़ा कर लिया था। ब्रिक्स आम सहमति के आधार पर काम करने वाला समूह है, जिसका मतलब है कि कोई भी एक सदस्य अंतिम संयुक्त घोषणापत्र को रोक सकता है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और समूह के अन्य शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में पहले दिन की बैठक समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणापत्र को अपनाए जाने की घोषणा की। घोषणापत्र में कहा गया, ''हम पश्चिम एशिया में तनाव के लगातार बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं और अपने-अपने राष्ट्रीय रुख को ध्यान में रखते हुए अधिकतम संयम बरतने तथा ऐसी कार्रवाइयों से बचने का आह्वान करते हैं, जो हालात को और खराब कर सकती हैं।'' इसमें कहा गया, ''इसके अलावा, हम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के पूरी तरह पालन करने के साथ देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने एवं आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं।'' घोषणापत्र में कहा गया, ''हम संवाद और कूटनीति के माध्यम से ऐसे दीर्घकालिक समझौते की दिशा में प्रयास बढ़ाने को प्रोत्साहित करते हैं, जो क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता में योगदान देगा।'' ब्रिक्स ने लागू अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा के सुचारू प्रवाह को बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। समूह ने पिछले साल अक्टूबर में हुए युद्ध विराम समझौते के बावजूद गाजा में जारी हिंसा पर भी ''गहरी चिंता'' व्यक्त की। घोषणापत्र में कहा गया, ''हम गाजापट्टी से फलस्तीनियों के जबरन विस्थापन की किसी भी नीति को रोकने का आह्वान करते हैं और ऐसी व्यवस्थाओं पर चिंता व्यक्त करते हैं, जो फलस्तीनी लोगों के बुनियादी अधिकारों को प्रभावित कर सकती हैं तथा कब्जे को वैध ठहरा सकती हैं या उसे लंबे समय तक जारी रख सकती हैं।'' घोषणापत्र में कहा गया, ''हम दोहराते हैं कि इजराइल-फलस्तीन संघर्ष का न्यायसंगत और स्थायी समाधान केवल शांतिपूर्ण तरीकों से ही हासिल किया जा सकता है और यह फलस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों की पूर्ति पर निर्भर करता है, जिसमें आत्मनिर्णय और वापसी का अधिकार भी शामिल है।'' ब्रिक्स ने आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने और इस खतरे से निपटने में दोहरे मापदंड नहीं अपनाने की भारत की अपील का पूरा समर्थन किया। समूह के शीर्ष नेताओं ने इस चुनौती से निपटने के लिए मिलकर एक साझा दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति जताई। ब्रिक्स ने पिछले साल जम्मू-कश्मीर में हुए पहलगाम आतंकी हमले की ''कड़े से कड़े शब्दों'' में निंदा की, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। घोषणापत्र में कहा गया, ''हम सभी तरह के आतंकवाद से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं, जिसमें आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और पनाहगाहों का मुकाबला करना भी शामिल है।'' घोषणापत्र में कहा गया, ''हम दोहराते हैं कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। आतंकवादी गतिविधियों में शामिल सभी लोगों और उन्हें समर्थन देने वालों को संबंधित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए।'' इसमें कहा गया, ''हम आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने और आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंड को खारिज करने का आग्रह करते हैं।'' ब्रिक्स ने जोर दिया कि आतंकवाद से मुकाबला करने की प्राथमिक जिम्मेदारी देशों की है और आतंकवादी खतरों को रोकने तथा उनसे निपटने के लिए वैश्विक प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का पूरी तरह पालन करना चाहिए। घोषणापत्र में कहा गया, ''हम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।'' समूह ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के अनुरूप नहीं होने वाली ''व्यापार प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों'' के बढ़ते चलन की भी आलोचना की। इसमें शुल्कों और गैर-शुल्क उपायों में मनमानी बढ़ोतरी तथा पर्यावरणीय उद्देश्यों की आड़ में संरक्षणवादी नीतियां शामिल हैं। घोषणापत्र में कहा गया, ''हम एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों के बढ़ते चलन पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं, जो व्यापार को प्रभावित करते हैं और डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।''
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नयी दिल्ली. चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए शनिवार को नयी दिल्ली की दो दिवसीय यात्रा शुरू की। यह पिछले सात वर्ष में उनकी पहली भारत यात्रा है और इसे व्यापार एवं निवेश संबंधों के विस्तार के जरिये द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार शाम शी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
ऐसा बताया जा रहा है कि दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करेंगे और आपसी संपर्क बढ़ाने के लिए नए कदम उठाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। शी की इस यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच हाल में कई उच्चस्तरीय वार्ताएं हुई हैं। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में हुई विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता भी शामिल है। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में चीन के आक्रामक सैन्य रुख को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने दिल्ली हवाई अड्डे पर शी की अगवानी की। इस दौरान सांस्कृतिक कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर चीन के राष्ट्रपति का स्वागत किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शी का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया पर कहा, ''सहयोग को आगे बढ़ाने और अधिक संतुलित, प्रतिनिधित्वपूर्ण एवं बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में योगदान देने की दिशा में ब्रिक्स लगातार आगे बढ़ रहा है तथा ऐसे में हमें रचनात्मक चर्चा होने की उम्मीद है'' शी के प्रतिनिधिमंडल में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य काई ची और सीपीसी केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य एवं विदेश मंत्री वांग यी भी शामिल हैं। शी की यात्रा संबंधी जानकारियां रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि यह यात्रा पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के कारण तनावपूर्ण हुए भारत-चीन संबंधों को और सामान्य बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में साढ़े चार साल से अधिक समय तक रहे सैन्य गतिरोध के कारण बिगड़े संबंधों को सुधारने के लिए पिछले कुछ महीनों में विश्वास बहाली के कई कदम उठाए हैं। अधिकारियों ने बताया कि मोदी और शी के बीच वार्ता में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर समग्र स्थिति की समीक्षा किए जाने तथा व्यापार एवं निवेश संबंधों के विस्तार समेत द्विपक्षीय संबंधों को और सामान्य बनाने के उपाय तलाशे जाने की उम्मीद है। दोनों नेताओं के बीच बैठक शाम छह बजे निर्धारित है।
मोदी और शी ने पिछले साल 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से इतर व्यापक मुद्दों पर वार्ता की थी। डोभाल ने पिछले महीने के अंत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधि (एसआर) स्तर की वार्ता की थी। इसमें सीमा निर्धारण, सीमा पार सहयोग से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने और एलएसी पर शांति बनाए रखने पर मुख्य रूप से चर्चा हुई थी। डोभाल और वांग दोनों सीमा वार्ता तंत्र के लिए नामित विशेष प्रतिनिधि हैं। भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े विवाद का व्यापक समाधान तलाशने के लिए यह तंत्र 2003 में स्थापित किया गया था। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने शुक्रवार को कहा, ''चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन के अनुरूप भारत के साथ मिलकर काम करेगा, द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक एवं दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखेगा, संवाद बढ़ाएगा, सहयोग मजबूत करेगा, मतभेदों का उचित ढंग से समाधान करेगा तथा अच्छे पड़ोसियों की तरह मित्र और एक-दूसरे की सफलता में सहयोग करने वाला साझेदार बनेगा।'' -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मलेशिया, वियतनाम, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इथियोपिया के नेताओं के साथ शनिवार को द्विपक्षीय बैठकें कीं जिनमें महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्रों समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। ये बैठकें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुईं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ वार्ता में पश्चिम एशिया की समग्र स्थिति और भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के कदमों पर चर्चा की। मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''रक्षा, कृत्रिम मेधा (एआई), अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और संपर्क के क्षेत्रों में हमारी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।'' उन्होंने कहा, ''पश्चिम एशिया में अनिश्चितता के इस दौर में मजबूत भारत-यूएई संबंध स्थिरता, समृद्धि और शांति का प्रतीक है।'' मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर बिन इब्राहिम ने अपनी बैठक में व्यापार एवं निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, बुनियादी ढांचा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) समेत विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की। इब्राहिम ने मोदी को मलेशिया के सबाह प्रांत के कोटा किनाबालू में भारत का महावाणिज्य दूतावास स्थापित करने पर अपने देश की सहमति से अवगत कराया। विदेश मंत्रालय ने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान)-भारत संबंधों को मजबूत करने में मलेशिया के निरंतर सहयोग की सराहना की। दोनों नेताओं ने साझा हित से जुड़े प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।'' मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। मोदी और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के बीच बैठक में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों पर मुख्य रूप से चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय ने कहा, ''इस बैठक से दोनों नेताओं को उन द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करने का अवसर मिला जिन्हें 'उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा दिया गया है।'' मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने साझा महत्व के विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया तथा अपनी साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। विदेश मंत्रालय ने कहा, ''भारत और वियतनाम के बीच साझा सभ्यतागत विरासत, आपसी विश्वास और समझ पर आधारित पुरानी मित्रता है। वियतनाम भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति का एक प्रमुख स्तंभ और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के व्यापक जुड़ाव में महत्वपूर्ण साझेदार है।'' इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ मोदी की वार्ता भी रक्षा और व्यापार समेत विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और विस्तार देने संबंधी कदमों पर केंद्रित रही। विदेश मंत्रालय ने कहा, ''दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से चर्चा की। उन्होंने आर्थिक सहयोग, रक्षा साझेदारी और क्षमता निर्माण समेत प्रमुख क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की।'' यह बैठक पिछले वर्ष दिसंबर में मोदी की अदीस अबाबा यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति को आगे बढ़ाने की दिशा में हुई। मंत्रालय ने कहा, ''दोनों नेताओं ने साझा हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने बहुपक्षीय मंचों पर निकट सहयोग की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।'' -
नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे। हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि गुटेरेस की यात्रा बहुपक्षवाद, संवाद और वैश्विक सहयोग के प्रति ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर गुटेरेस के भारत पहुंचने की जानकारी साझा की। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक के अनुसार, यात्रा के दौरान गुटेरेस की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होने की उम्मीद है। यह 2026 में गुटेरेस की भारत की दूसरी यात्रा है। इससे पहले वह फरवरी में नई दिल्ली में आयोजित इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल हुए थे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में यह भारत का उनका पांचवां दौरा है।
गुटेरेस का मौजूदा कार्यकाल अब अंतिम चार महीनों में है। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन उनके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ महासचिव के रूप में मुलाकात के अंतिम अवसरों में से एक हो सकता है। पुतिन और शी इस महीने के अंत में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक उच्चस्तरीय बैठक में शामिल नहीं होंगे, जबकि दोनों ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं।18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा भी शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट पर केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच लंबे समय से मजबूत और दोस्ताना संबंध हैं, जो रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं। दोनों देश ग्लोबल साउथ के हितों और विकास के लिए मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध हैं। उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन भी नई दिल्ली पहुंचे। वह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ‘कम्युनिटी ऑफ लैटिन अमेरिकन एंड कैरिबियन स्टेट्स’ (सेलाक) का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और सेलाक व्यापार बढ़ाने, तकनीकी ज्ञान एवं नवाचार साझा करने और ग्लोबल साउथ के देशों के बीच साझेदारी मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो का भी नई दिल्ली में स्वागत किया गया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और युगांडा के बीच साझा इतिहास और द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय स्तरों पर बढ़ती साझेदारी के आधार पर गर्मजोशी भरे और दोस्ताना संबंध हैं।भारत की अध्यक्षता में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ साझेदार और आउटरीच आमंत्रित देशों के नेता भी हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान वैश्विक चुनौतियों, बहुपक्षीय सहयोग और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।


















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