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नयी दिल्ली. लड़कियों को शादी के नाम पर स्टांप पेपर या अनौपचारिक समझौतों के माध्यम से 'बेचे' जाने वाली 'नाता प्रथा' एक बार फिर जांच के दायरे में है। केंद्रीय सूचना आयोग ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सौंपी गई कार्रवाई रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। सूचना आयुक्त पीआर रमेश ने हाल ही में जारी एक आदेश में कहा कि मंत्रालय को सूचना के अधिकार (आरटीआई) अनुरोध पर पुनर्विचार करना चाहिए और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के साथ साझा की गई कार्रवाई रिपोर्ट को उपलब्ध कराना चाहिए हालांकि छूट प्राप्त हिस्सों को हटा दिया जाए। केंद्रीय सूचना आयोग ने हालांकि अपीलकर्ता द्वारा मांगी गई अन्य जानकारी को अस्वीकार करने के फैसले को बरकरार रखा। अपीलकर्ता द्वारा मांगी गयी जानकारी में शिकायतकर्ताओं और उनके परिवारों के व्यक्तिगत विवरण शामिल हैं जो सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(जे) के तहत छूट प्राप्त हैं। आरटीआई आवेदन में मंत्रालय, राष्ट्रीय सूचना आयोग और राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश व गुजरात राज्यों के बीच हुए पत्राचार की प्रतियां तथा इस मामले पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट जारी करने का अनुरोध किया गया था। केंद्रीय सूचना आयोग ने पाया कि व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता लेकिन मानवाधिकार आयोग को सौंपी गई कार्रवाई रिपोर्ट जनहित का मामला है और इसे संशोधित रूप में साझा किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छह जून, 2024 को जारी एक बयान में इस प्रथा को गंभीर बताते हुए इसे 'सामाजिक बुराई' करार दिया था। आयोग ने कहा था, "आयोग 'नाता प्रथा' को गंभीर मानता है, जिसके तहत कुछ समुदायों में लड़कियों को शादी के नाम पर स्टांप पेपर पर या किसी अन्य तरीके से बेचा जाता है। राजस्थान के कुछ हिस्सों और मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश व गुजरात के आसपास के इलाकों में इस प्रथा की कोई कानूनी मान्यता नहीं है।" आयोग ने इस प्रथा को 'अनैतिक' व 'दुराचारी' बताते हुए इसके उन्मूलन की मांग की थी।
इस प्रथा के महिलाओं और नाबालिग लड़कियों पर गंभीर परिणाम होते हैं।आयोग ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और संबंधित राज्यों को नोटिस जारी कर आठ सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। मंत्रालय ने मानवाधिकार को सूचित किया था कि यह प्रथा महिलाओं के लिए 'अपमानजनक' प्रतीत होती है और इसे समाप्त करने की आवश्यकता है। मानवाधिकार आयोग ने राजस्थान में एक नाबालिग लड़की के पिता द्वारा 'नाता प्रथा' के तहत ग्रामीणों की उपस्थिति में परिवारों के बीच हुए समझौते के माध्यम से 2.5 लाख रुपये में उसकी शादी कराने के मामले का भी हवाला दिया। शुरुआती तौर पर 60,000 रुपये का भुगतान किया गया था लेकिन शेष राशि समय पर नहीं चुकाई गई, जिसके बाद पिता लड़की को वापस ले आया और 32,000 रुपये में उसका 'नाता' (शादी) दूसरे आदमी से तय कर दिया। लड़की ने इस व्यवस्था का विरोध किया और पहले वाले आदमी के साथ रहने के लिए लौट गई।बाद में उसने अपने पिता द्वारा उत्पीड़न व धमकियों का आरोप लगाया और जून 2020 में आत्महत्या कर ली। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने फ्लाइट में कम से कम 60 प्रतिशत सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क के देने के अपने पहले के आदेश को फिलहाल स्थगित कर दिया है, जो 20 अप्रैल से लागू होने वाला था। नागर विमानन मंत्रालय ने नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को भेजे गए एक पत्र में कहा कि इस फैसले की समीक्षा की गई है। यह समीक्षा फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस और अकासा एयर द्वारा उठाई गई चिंताओं के बाद की गई, जिसमें इस नियम के ऑपरेशनल और कमर्शियल असर को लेकर सवाल उठाए गए थे।
एयरलाइंस ने कहा था कि यह नियम किराया ढांचे को प्रभावित कर सकता है और मौजूदा डिरेगुलेटेड टैरिफ सिस्टम के अनुरूप नहीं है। सरकार ने कहा कि इन सभी पहलुओं को देखते हुए और मामले की विस्तृत समीक्षा होने तक 60 प्रतिशत सीटें मुफ्त देने का प्रावधान फिलहाल अगले आदेश तक लागू नहीं किया जाएगा। वर्तमान में, फ्लाइट की 20 प्रतिशत सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बुक की जा सकती हैं, जबकि बाकी सीटों के लिए यात्रियों को शुल्क देना पड़ता है।एयरलाइंस आमतौर पर सीट चयन के लिए 200 रुपए से लेकर 2,100 रुपए तक चार्ज करती हैं, जो सीट की लोकेशन और अतिरिक्त लेगरूम जैसी सुविधाओं पर निर्भर करता है। 18 मार्च को नागर विमानन मंत्रालय द्वारा जारी मूल निर्देश का उद्देश्य यात्रियों की बढ़ती शिकायतों को दूर करना था, खासकर सीट चयन जैसे सेवाओं पर ज्यादा शुल्क को लेकर।मंत्रालय ने डीजीसीए के जरिए नए दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिसमें एक ही पीएनआर पर यात्रा करने वाले यात्रियों को एक साथ बैठाने (अधिमानतः अगल-बगल की सीटों पर बैठाना) जैसे यात्री हित से जुड़े प्रावधान शामिल थे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है और भारतीय हवाई अड्डों पर रोजाना 5 लाख से ज्यादा यात्री यात्रा करते हैं। मंत्रालय ने कहा कि वह यात्रियों की सुविधा, पारदर्शिता और विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। -
नयी दिल्ली. सरकार ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों के लिए उनकी भूमिका या स्तर (लेवल) से संबंधित योग्यता-आधारित पाठ्यक्रम विशेष ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसका उल्लेख उनकी वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट में किया जाएगा। कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक सवाल के लिखित जवाब में उच्च सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने योग्यता-आधारित क्षमता निर्माण दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें भूमिका-आधारित शिक्षा, निरंतर कौशल विकास और प्रशिक्षण को भूमिका की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उन्होंने कहा, ''कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के लिए उनकी भूमिका/स्तर से संबंधित योग्यता-आधारित पाठ्यक्रम और उनके मंत्रालयों/विभागों/संगठनों या कैडर नियंत्रण प्राधिकरणों (सीसीए) द्वारा निर्धारित व्यापक मूल्यांकन को आईजीओटी (एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण) पोर्टल पर प्रतिवर्ष पूरा करना अनिवार्य कर दिया है, जिसका उल्लेख उनकी वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) में भी किया जाएगा।''
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नई दिल्ली। भारतीय मौसम विभाग के ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में एक बार फिर मौसम का मिज़ाज तेजी से बदलने वाला है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पूरे सप्ताह आंधी, बारिश, बिजली गिरने और कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, आज के दिन अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) 80 से 45 प्रतिशत के बीच रही। आज का पूर्वानुमान “थंडरस्टोर्म विथ रेन,” यानी गरज-चमक के साथ बारिश का है, हालांकि फिलहाल किसी तरह की औपचारिक चेतावनी जारी नहीं की गई है।4 अप्रैल को भी मौसम का यही रुख जारी रहेगा। अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम 20 डिग्री रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने विशेष रूप से दोपहर और शाम के समय के लिए अलर्ट जारी किया है। दोपहर में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, साथ ही बिजली चमकने और गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। शाम के समय भी यही स्थिति बनी रहेगी, जिससे लोगों को सावधान रहने की सलाह दी गई है।5 अप्रैल को भी गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। तापमान 31 डिग्री (अधिकतम) और 18 डिग्री (न्यूनतम) रहने की संभावना है, जबकि ह्यूमिडिटी 85 से 45 प्रतिशत के बीच रहेगी। 6 अप्रैल को मौसम में थोड़ी राहत देखने को मिलेगी। इस दिन आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रहेगा। तापमान 31 डिग्री/17 डिग्री रहने की संभावना है। इस दिन कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।7 अप्रैल को फिर से मौसम करवट लेगा और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। तापमान 33 डिग्री/18 डिग्री रहेगा। वहीं 8 अप्रैल को तापमान 31 डिग्री/17 डिग्री रहने की उम्मीद है।मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। इसका असर दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी पड़ेगा। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि तेज आंधी और बिजली के दौरान खुले स्थानों से दूर रहें, पेड़ों के नीचे खड़े न हों और अनावश्यक यात्रा से बचें।× किसानों को भी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी गई है। आने वाला सप्ताह एनसीआर के लिए मौसम के लिहाज से काफी उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है, जहां गर्मी के बीच बारिश और तेज हवाएं लोगों को राहत भी देंगी और सतर्क भी रखेंगी। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में कहा कि बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटर वैकल्पिक व्यवस्था है और इसे अनिवार्य नहीं बनाया गया है। खट्टर ने प्रश्नकार में आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सदस्य हनुमान बेनीवाल के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह बात कही। केंद्रीय मंत्री ने उपभोक्ताओं को प्रीपेड मीटर लगाने के लिए बाध्य किए जाने के कुछ सदस्यों के दावों को खारिज करते हुए कहा, ''प्रीपेड स्मार्ट मीटर वैकल्पिक व्यवस्था है और इसे अनिवार्य नहीं बनाया गया है।'' उन्होंने कहा, ''किसी प्रदेश में जबरन स्मार्ट मीटर लगाने का कोई समाचार नहीं। अगर कहीं से कोई शिकायत आती है तो संज्ञान लेंगे।'' ऊर्जा मंत्री ने यह भी कहा कि कई जगहों पर लोग सालों तक बिजली के बिल नहीं भरते, ऐसे में उन्हें बाध्य करने के लिए प्रीपेड मीटर लगाने पर ही बिजली आपूर्ति की जाती है ताकि उनके बिल लंबित नहीं रहें। उन्होंने कहा कि जहां-जहां प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं, वहां कंपनियों के घाटे खत्म हुए हैं और वे मुनाफे में आ गई हैं। मंत्री ने कहा कि निजी बिजली आपूर्ति कंपनियां व्यावसायिक होती हैं और वे कोई सेवा कार्य नहीं कर रहीं। उन्होंने कहा कि प्रीपेड मीटर लगाने से उपभोक्ताओं, राज्य और निजी कंपनियों, सभी को लाभ होता है। उन्होंने यह भी कहा, ''निजी बिजली कंपनियों के इतिहास में पहली बार पिछले साल सभी निजी कंपनियों ने कुल मिलाकर 2600 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया।'' उन्होंने गरीबों और दैनिक कमाई पर आश्रित रहने वाले लोगों को प्रीपेड मीटर रिचार्ज करने संबंधी कठिनाई होने संबंधी एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि पांच से दस दिन के छोटे रिचार्ज के विकल्प भी उपलब्ध हैं।
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नयी दिल्ली. भारत का वार्षिक रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में सालाना आधार पर 62 प्रतिशत से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया मंच पर जानकारी देते हुए कहा कि रक्षा निर्यात में यह ''बड़ी छलांग'' भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दर्शाती है। देश रक्षा निर्यात में सफलता की शानदार कहानी लिख रहा है। उन्होंने कहा, '' वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह गत वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 62.66 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि है।'' रक्षा मंत्री ने कहा कि 14,802 करोड़ रुपये की इस बड़ी वृद्धि से भारत की स्वदेशी क्षमताओं और उन्नत विनिर्माण क्षमता पर वैश्विक विश्वास झलकता है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) का योगदान 54.84 प्रतिशत और निजी उद्योग का योगदान 45.16 प्रतिशत रहा जो सहयोगात्मक एवं आत्मनिर्भर रक्षा परिवेश की ताकत को दर्शाता है। भारत का रक्षा निर्यात 2024-25 में 23,622 करोड़ रुपये और 2023-24 में 21,083 करोड़ रुपये रहा था।
- नई दिल्ली। नासा का आर्टेमिस II चंद्र मिशन अमेरिका के फ्लोरिडा से प्रक्षेपित हुआ। इसमें चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर 50 से अधिक वर्षों में पहली बार चंद्रमा के चारों ओर मानवयुक्त उड़ान भरी गई। स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट जिसके शीर्ष पर ओरियन अंतरिक्ष यान लगा था, बुधवार को शाम 6:35 बजे (ईस्टर्न टाइम) नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से प्रक्षेपित किया गया।यह आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत नासा का पहला मानवयुक्त मिशन है। चार सदस्यीय दल में नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच शामिल हैं। साथ ही कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन भी दल का हिस्सा हैं।लॉन्च काउंटडाउन को टी-10 मिनट के समय पर थोड़ी देर के लिए रोका गया था, जिसके बाद कुछ मिनटों में इसे फिर से शुरू कर दिया गया। आर्टेमिस II मिशन गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए आवश्यक कई क्षमताओं का प्रदर्शन करेगा। नासा के अनुसार, इसका उद्देश्य ओरियन के जीवन-समर्थन प्रणालियों को सत्यापित करना और अंतरिक्ष यात्रियों को आर्टेमिस III और आगामी चंद्र मिशनों की सफलता के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण संचालन का अभ्यास करने का अवसर देना है।दल चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से से लगभग 7,400 किलोमीटर आगे तक यात्रा करेगा और फिर पृथ्वी पर लौटेगा। यह मिशन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से पहले से कहीं अधिक दूर और चंद्रमा के पहले से कहीं अधिक निकट ले जाएगा, जैसा कि पिछले आधे शताब्दी में कभी नहीं हुआ। पुनः प्रवेश (री-एंट्री) इस मिशन के सबसे चुनौतीपूर्ण चरणों में से एक होगा। ओरियन के पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 25,000 मील प्रति घंटे की गति से प्रवेश करने की उम्मीद है, जहां उसे लगभग 5,000 डिग्री तापमान का सामना करना पड़ेगा, इसके बाद यह प्रशांत महासागर में उतरेगा।मिशन के दौरान, अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष यान के प्रदर्शन का मूल्यांकन करेंगे, आपातकालीन प्रक्रियाओं का अभ्यास करेंगे और चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से की तस्वीरें लेंगे। यह दल कई ऐतिहासिक उपलब्धियों का भी प्रतिनिधित्व करता है। इस मिशन में पहली महिला, पहला अफ्रीकी-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और चंद्रमा की ओर यात्रा करने वाला पहला कनाडाई शामिल है। आर्टेमिस II को नासा की व्यापक योजना के शुरुआती कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति स्थापित करना और अंततः अंतरिक्ष यात्रियों को मंगल ग्रह तक भेजना है। आर्टेमिस कार्यक्रम अपोलो मिशनों के बाद शुरू किया गया है, जिनके तहत 1968 से 1972 के बीच 24 अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजा गया था, जिनमें से 12 ने उसकी सतह पर कदम रखा था। नासा इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए चंद्रमा पर एक दीर्घकालिक आधार (लूनर बेस) स्थापित करना चाहता है और इस दशक
- नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को 7, लोक कल्याण मार्ग पर सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की विशेष बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान विभिन्न मंत्रालयों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में आम आदमी के लिए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों की स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया गया। सरकार ने एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति में विविधता लाने, ईंधन शुल्क में कटौती और बिजली क्षेत्र से जुड़े उपायों की समीक्षा की।सरकार ने स्पष्ट किया कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय बढ़ाया गया है और नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं।बैठक में कृषि क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। यूरिया उत्पादन को बनाए रखने और डीएपी/एनपीकेएस के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि खरीफ और रबी सीजन में किसानों को किसी तरह की कमी का सामना न करना पड़े।ऊर्जा क्षेत्र में भी व्यापक तैयारियों की समीक्षा की गई। सरकार ने बताया कि कोयले का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और गर्मियों में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं। गैस आधारित बिजली संयंत्रों को राहत देने और कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।कृषि, नागर विमानन, शिपिंग, लॉजिस्टिक्स और एमएसएमई सेक्टर्स में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए भी रणनीति बनाई गई। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और अन्य आवश्यक आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने पर जोर दिया गया।होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, ताकि व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गलत जानकारी और अफवाहों को रोकने के लिए समय पर और सटीक सूचना जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया। केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर बेहतर समन्वय और रीयल-टाइम संचार के जरिए जन जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए।प्रधानमंत्री मोदी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे वैश्विक संकट के प्रभाव से नागरिकों को बचाने के लिए हर संभव कदम उठाएं और प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को कम करने के लिए सक्रिय रहें। ????
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हनुमान जी के जन्मोत्सव पर उन्हें नमन किया है। उन्होंने प्रार्थना की कि महाबली की कृपा से उनके सभी भक्तों में साहस और सकारात्मकता का संचार हो। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “भगवान हनुमान जी भक्ति, शक्ति और अटूट समर्पण के अद्वितीय प्रतीक हैं। महाबली की कृपा से उनके सभी भक्तों में साहस और सकारात्मकता का संचार हो।”इस अवसर पर उन्होंने एक ‘संस्कृत सुभाषितम्’ भी शेयर किया। पीएम मोदी ने लिखा, “मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शिरसा नमामि॥” ‘संस्कृत सुभाषितम्’ में कहा गया है, “मैं श्रीराम के दूत हनुमानजी की शरण में शीश झुकाता हूं। वे मन के समान तीव्रगामी और वायु के समान वेगवान हैं। वे जितेंद्रिय, बुद्धिमानों में अग्रगण्य, पवन पुत्र और वानर सेना के नायक हैं।”एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने प्रयागराज के प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान जी के मंदिर में दर्शन करते हुए एक तस्वीर भी शेयर की। उन्होंने लिखा, “सभी देशवासियों को हनुमान जन्मोत्सव की अनंत शुभकामनाएं। यह पावन अवसर हर किसी के जीवन में नई ऊर्जा और स्फूर्ति लेकर आए। मेरी कामना है कि पवन पुत्र हनुमान जी सभी को बल, बुद्धि और विद्या का भरपूर आशीर्वाद दें, जिससे देश का सामर्थ्य और बढ़े। जय बजरंगबली।”केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “श्री हनुमान जन्मोत्सव के पावन पर्व की सभी श्रद्धालुओं और देशवासियों को मंगलमय शुभकामनाएं। प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त, बल, बुद्धि, विद्या के दाता, संकट मोचन श्री हनुमान जी की कृपा सभी पर बनी रहे। सबके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्यता का वास हो, सबका मंगल व कल्याण हो, यही प्रार्थना है।”उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हनुमान जी के जन्मोत्सव पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “बजरंग बली की कृपा आप सभी के जीवन में ज्ञान, भक्ति, अदम्य साहस, एकाग्रता, सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का संचार करें, यही कामना है।
- नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं के बीच केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर 30 जून 2026 तक पूरी कस्टम ड्यूटी छूट देने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह कदम अस्थायी और लक्षित राहत के तौर पर उठाया गया है, ताकि देश में जरूरी पेट्रोकेमिकल कच्चे माल की उपलब्धता बनी रहे, डाउनस्ट्रीम उद्योगों पर लागत का दबाव कम हो और सप्लाई स्थिर रह सके। सरकार के अनुसार, इस फैसले से प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल, केमिकल, ऑटो कंपोनेंट्स और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे अंतिम उत्पादों के उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है।इन उत्पादों पर मिलेगी छूटछूट वाले प्रमुख पेट्रोकेमिकल उत्पादों में एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमीथेन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर, मेथनॉल, आइसोप्रोपिल अल्कोहल, मोनोएथिलीन ग्लाइकोल (एमईजी) और फिनोल शामिल हैं। इसके अलावा एसिटिक एसिड, विनाइल एसीटेट मोनोमर, प्योरिफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (पीटीए), अमोनियम नाइट्रेट, एथिलीन के पॉलिमर, एपॉक्सी रेजिन, फॉर्मेल्डिहाइड, यूरिया फॉर्मेल्डिहाइड, मेलामाइन फॉर्मेल्डिहाइड और फिनोल फॉर्मेल्डिहाइड जैसे उत्पाद भी इस सूची में शामिल किए गए हैं।उद्देश्य बढ़ती माल ढुलाई लागत और युद्ध से जुड़े व्यापारिक जोखिमों का सामना कर रहे भारतीय निर्यातकों को समय पर राहत देना है, खासकर खाड़ी और पश्चिम एशिया के समुद्री मार्गों में आई बाधाओं को देखते हुए।सरकार ने बताया कि भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल, एटीएफ, एलपीजी और एलएनजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे अल्पकालिक चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। साथ ही, देश विभिन्न वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से ऊर्जा आपूर्ति बनाए हुए है।--
- नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आने वाले हफ्तों में ईरान के खिलाफ हमले और तेज करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ये सैन्य कार्रवाई अभी कुछ हफ्तों तक जारी रहेगी और अमेरिका जल्द ही और जोरदार हमले करेगा। देश के नाम संबोधन में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन को बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य में निवेश बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिका और दुनिया को सुरक्षित बनाने के लिए उठाया गया है। ट्रंप ने कहा कि यह सैन्य अभियान एक महीने से ज्यादा समय से चल रहा है और अमेरिका ने पहले ही बड़े खतरे को खत्म कर दिया है। उनके अनुसार, “हम इस ऑपरेशन में 32 दिनों से हैं और अब कोई बड़ा खतरा नहीं बचा है।” अभियान की तेजी को दिखाने के लिए ट्रंप ने प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध, कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और इराक युद्ध का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन युद्धों के मुकाबले ईरान ऑपरेशन बेहद तेज और प्रभावी रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि लड़ाई के इतिहास में किसी दुश्मन को इतने कम समय में इतना बड़ा नुकसान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह सैन्य ताकत और रणनीतिक स्पष्टता का उदाहरण है।डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका उनके बिजली उत्पादन संयंत्रों पर बड़े पैमाने पर हमले कर सकता है। ट्रंप ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह जंग जरूरी है, हालांकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने पहले संकेत दिया था कि तेहरान की ऐसी मंशा नहीं है। अपने संबोधन के अंत में ट्रंप ने कहा कि यह लड़ाई लगभग खत्म हो चुकी है और अमेरिका अपने सभी लक्ष्यों को हासिल करने के करीब है।
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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच सरकार ने आज आश्वासन दिया कि देश में सभी प्रकार की फसलों के बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। पश्चिम एशिया के हाल के घटनाक्रमों पर नई दिल्ली में आयोजित अंतरमंत्रालयी बैठक में कृषि और किसान कल्याण विभाग की अपर सचिव डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी ने बताया कि देश भर में खरीफ फसलों के 185 लाख क्विंटल से अधिक बीज उपलब्ध हैं। अपर सचिव ने कहा कि देश में कृषि रसायनों की भी पर्याप्त उपलब्धता है।
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नई दिल्ली। आज अंतर्राष्ट्रीय पक्षी दिवस के अवसर पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि पक्षी प्रकृति के संदेशवाहक हैं, जो लोगों को पृथ्वी के नाजुक संतुलन की याद दिलाते हैं। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे इन अद्भुत पक्षियों का सम्मान करें जो विश्व भर के पारिस्थितिक तंत्रों को जोड़ते हैं। श्री सिंह ने लोगों से पक्षियों के लिए खुले आसमान की रक्षा करने के लिए पर्यावासों का संरक्षण करने, प्लास्टिक कचरा कम करने और स्थानीय हरियाली लगाने का भी आग्रह किया। अंतर्राष्ट्रीय पक्षी दिवस पहली अप्रैल को मनाया जाता है, जब प्रवासी पक्षी सर्दियों के बाद लौटते हैं और प्रकृति जागृत होकर खिलने लगती है।
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नई दिल्ली। असम विधानसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ समय निकालकर डिब्रूगढ़ स्थित एक चाय बागान पहुंचे। यहां उन्होंने कुछ समय बागान में काम कर रही महिलाओं के साथ बिताया और उनसे कहा, “आपकी मेहनत मेरे गांव तक पहुंची है। क्या आपको मालूम है कि मैं भी चाय वाला हूं और बचपन में मैं भी चाय बेचता था।”
पीएम मोदी को अपने बीच पाकर बागान में कार्यरत महिलाएं काफी खुश दिखाई दीं। इस दौरान कुछ महिलाओं ने पीएम मोदी के साथ सेल्फी भी ली। पीएम मोदी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि आप लोग तो अब अच्छे फोटोग्राफर भी हैं। पीएम के इस अंदाज पर महिलाओं की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पांच मिनट का वीडियो शेयर किया। पीएम ने लिखा कि बुधवार सुबह डिब्रूगढ़ के एक चाय बागान में मुझे चाय बागान परिवारों की संस्कृति की झलक देखने को मिली। असम की प्रगति में उनका योगदान बेमिसाल है। प्रधानमंत्री मोदी ने पोस्ट में आगे लिखा कि डिब्रूगढ़ के चाय बागान में महिलाओं ने एक गीत गाया, जो ‘जगत जननी मां’ को नमन करता है। यह सचमुच अद्भुत है कि वे अपनी संस्कृति और अपनी जड़ों से किस कदर जुड़ी हुई हैं। हमें चाय बागान के हर एक परिवार के प्रयासों पर बहुत गर्व है। उनकी कड़ी मेहनत और लगन ने असम का गौरव बढ़ाया है। यहां डिब्रूगढ़ के एक चाय बागान की कुछ और झलकियां हैं। चाय असम की आत्मा है और यहां की चाय ने पूरी दुनिया में अपनी जगह बनाई है। बुधवार सुबह डिब्रूगढ़ में मैं एक चाय बागान में गया और वहाँ काम करने वाली महिलाओं से बातचीत की। यह एक बहुत ही यादगार अनुभव था।चाय बागान में पीएम मोदी ने इस दौरान कार्यरत महिलाओं से उनके परिवार का हालचाल भी लिया। पीएम मोदी को महिलाओं ने बताया कि बच्चे स्कूल जाते हैं, एक महिला ने बताया कि उनका बच्चा ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर चुका है, दूसरी महिला ने कहा कि उनका बच्चा खेलकूद में अपना भविष्य देख रहा है और गांव के मैदान में फुटबॉल खेलता है, इस पर पीएम मोदी ने कहा कि यह तो बहुत अच्छी बात है।पीएम मोदी ने कहा कि मुझे यहां आकर बहुत अच्छा लगा है, इस पर महिलाओं ने दबी आवाज में कहा कि हमें तो आपसे मिलकर काफी घबराहट हो रही थी। पीएम मोदी ने उनका हौसला बढ़ाते हुए कहा कि घबराने की क्या जरूरत है, घबराहट तो शुरूआती पांच मिनट के लिए ही होता है। इसके बाद कैसी घबराहट।प्रधानमंत्री ने इस दौरान महिलाओं से पूछा कि आप लोग बिहू त्योहार के दौरान क्या पकाते हैं। महिलाओं ने इस दौरान बताया कि रीति-रिवाज के अनुसार चीजें बनाई जाती हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि इस चाय के बागान में एक वक्त में कितनी महिलाएं काम करती हैं। महिलाओं ने जवाब देते हुए कहा कि एक वक्त में कई महिलाएं काम करती हैं, महीने में 24 दिन काम करते हैं और 6 दिन छुट्टी होती है।पीएम मोदी ने जाते हुए सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि क्या आप लोगों को मालूम है कि मैं भी चाय वाला हूं, जब छोटा था तो चाय बेचता था, आपकी मेहनत मेरे गांव तक पहुंच गई है। बहुत-बहुत धन्यवाद, आपके साथ मुझे समय बिताकर अच्छा लगा। -
नई दिल्ली। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने आज भारतीय सेना के उप प्रमुख (वीसीओएएस) का पदभार ग्रहण कर लिया। वे खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र हैं और दिसंबर 1986 में बख्तरबंद कोर में कमीशन प्राप्त किया था। करीब चार दशकों के सैन्य करियर में उन्होंने विभिन्न भू-भागों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सेवा दी है। इसमें आतंकवाद-रोधी अभियानों का भी व्यापक अनुभव शामिल है, खासकर जम्मू-कश्मीर में। उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में बख्तरबंद रेजिमेंट, विकसित क्षेत्र में बख्तरबंद ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी बल की कमान संभाली है। लेफ्टिनेंट जनरल बनने के बाद उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर का नेतृत्व किया और बाद में दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग रहे।
सेना कमांडर के रूप में उन्होंने दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्य किया। पश्चिमी मोर्चे पर दो ऑपरेशनल कमांड की जिम्मेदारी संभालना उनके करियर की विशेष उपलब्धि रही है। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने कई महत्वपूर्ण स्टाफ पदों पर भी काम किया, जिनमें अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ सेवा और सेना मुख्यालय में अहम जिम्मेदारियां शामिल हैं। उन्होंने क्षमता विकास और आधुनिकीकरण से जुड़े कई प्रमुख पदों पर भी योगदान दिया।उन्होंने भारतीय सेना की दीर्घकालिक रणनीतिक योजना और आधुनिकीकरण रोडमैप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मशीनीकृत बलों और क्षमता विकास से जुड़े कई पदों पर उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने अपने प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने जूनियर कमांड कोर्स में प्रथम स्थान प्राप्त किया और डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में सर्वश्रेष्ठ छात्र अधिकारी का सम्मान हासिल किया। इसके अलावा, उन्होंने नेशनल डिफेंस कॉलेज सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त किया। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश में फिल्म उद्योग को मजबूत बनाने के लिए कई पहल कर रही है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए NFDC के जरिए काम कर रही है। सरकार की “डेवलपमेंट, कम्युनिकेशन एंड डिसेमिनेशन ऑफ फिल्मिक कंटेंट (DCDFC)” योजना के तहत फिल्म निर्माण को 100% सरकारी फंडिंग दी जाती है। इस योजना के माध्यम से क्षेत्रीय फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री को भी बढ़ावा मिल रहा है।
नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) के जरिए फिल्म निर्माण में सहायता दी जाती है, जिससे देशभर में कलाकारों, तकनीशियनों और अन्य लोगों को रोजगार मिलता है।सरकार ने मुंबई में “वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट (WAVES 2025)” का आयोजन भी किया। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक कंटेंट निर्माण का केंद्र बनाना है। इस कार्यक्रम में 100 से ज्यादा देशों के निर्माता, निवेशक और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ शामिल हुए।इसके अलावा, सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को भी बढ़ावा दे रही है, जिससे फिल्म निर्माण में निवेश और नई तकनीक को बढ़ावा मिले।सरकार राज्यों के साथ मिलकर फिल्म फेस्टिवल आयोजित करने में भी सहायता देती है। इन फेस्टिवल में फिल्म प्रदर्शन, वर्कशॉप और मास्टरक्लास का आयोजन किया जाता है। NFDC राज्य फिल्म विकास निगमों के साथ मिलकर तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रहा है और स्थानीय फिल्मों को संरक्षित करने का काम कर रहा है। सरकार का कहना है कि इन पहलों से भारत का फिल्म उद्योग मजबूत होगा और वैश्विक स्तर पर इसकी पहचान और बढ़ेगी। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार की पहल पर देश में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए जोनल कॉन्फ्रेंसों की श्रृंखला शुरू होने जा रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य कृषि नीति, विज्ञान और जमीनी अनुभव को एक मंच पर लाना है।
कॉन्फ्रेंसों की शुरुआत 7 अप्रैल 2026 को जयपुर में पश्चिमी जोन के सम्मेलन से होगी। इसमें राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस सम्मेलन में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित कई राज्यों के कृषि मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।केंद्रीय मंत्री के अनुसार, 17 अप्रैल को लखनऊ में उत्तर भारत के राज्यों के लिए सम्मेलन होगा, जबकि 24 अप्रैल को भुवनेश्वर में पूर्वी जोन की बैठक आयोजित की जाएगी। इसके बाद मई में हैदराबाद और गुवाहाटी में भी सम्मेलन होंगे।इन जोनल कॉन्फ्रेंसों का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, कृषि में तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देना और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है। इसमें आत्मनिर्भर दलहन मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन, प्राकृतिक खेती मिशन और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। सम्मेलनों में नीति निर्माताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान, किसान संगठन, एफपीओ, स्टार्टअप और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इससे जमीनी अनुभव और बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीति निर्माण किया जा सकेगा।बैठकों में विभिन्न राज्यों के सफल कृषि मॉडल—जैसे सिंचाई, उर्वरक वितरण, एग्री-स्टैक और मूल्य श्रृंखला प्रबंधन—को साझा किया जाएगा, ताकि अन्य राज्य भी इन्हें अपनाकर कृषि विकास को गति दे सकें।शिवराज सिंह चौहान ने विश्वास जताया कि इन कॉन्फ्रेंसों से कृषि क्षेत्र में नवाचार, निवेश और तकनीक अपनाने की रफ्तार बढ़ेगी, जिससे किसानों की आय, उत्पादकता और ग्रामीण विकास को नई दिशा मिलेगी। -
नयी दिल्ली. करीब सात साल के बाद भारत को ईरान से कच्चा तेल जल्द मिलने की संभावना है। ईरानी तेल से लदा एक जहाज गुजरात के वाडिनार बंदरगाह की तरफ बढ़ रहा है। जहाजों की निगरानी करने वाले आंकड़ों के मुताबिक, 'पिंग शुन' नामक यह जहाज लगभग छह लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत की तरफ बढ़ रहा है। जिंस विश्लेषण फर्म केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि यह मई, 2019 के बाद भारत को ईरानी तेल की पहली आपूर्ति हो सकती है। उन्होंने बताया कि हाल में 'समुद्र में मौजूद' ईरानी तेल की खरीद के लिए अमेरिकी सरकार द्वारा 30 दिन की छूट दिए जाने के बाद ही यह आपूर्ति संभव हुई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस जहाज में मौजूद कच्चे तेल का खरीदार कौन है। लेकिन इस जहाज का गंतव्य वाडिनार में स्थित नायरा एनर्जी की रिफाइनरी हो सकती है। वाडिनार बंदरगाह भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की बीना रिफाइनरी सहित अन्य इकाइयों के लिए भी आपूर्ति का केंद्र है। पेट्रोलियम मंत्रालय अब तक यह कहता रहा है कि ईरान से तेल खरीद दोबारा शुरू करने का फैसला तकनीकी एवं व्यावसायिक व्यवहार्यता के आधार पर किया जाएगा। भारत ऐतिहासिक तौर पर ईरानी तेल का बड़ा खरीदार रहा है। एक समय भारत के कुल आयात में ईरान की हिस्सेदारी करीब 11.5 प्रतिशत थी। वर्ष 2018 में भारत ने प्रतिदिन करीब 5.18 लाख बैरल ईरानी तेल का आयात किया था, जो मई, 2019 तक घटकर 2.68 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। फिर ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरानी तेल का आयात पूरी तरह बंद हो गया था। रितोलिया ने कहा, ''मार्च महीने की शुरुआत में 'पिंग शुन' जहाज ने ईरान के खार्ग द्वीप से तेल भरा था। इसके चार अप्रैल को वाडिनार बंदरगाह पर आने पर अनुमान है।'' अमेरिका ने हाल में ईरानी तेल की समुद्र में मौजूद खेप की खरीद पर लगे प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट दी थी जो 19 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी। यह कदम अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण बढ़ी कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयास के तहत उठाया गया। अनुमान है कि समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की कुल मात्रा करीब 9.5 करोड़ बैरल है, जिसमें से लगभग 5.1 करोड़ बैरल भारत को बेचा जा सकता है, जबकि बाकी तेल चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के खरीदारों के लिए अधिक उपयुक्त माना जा रहा है। हालांकि, इस तेल खरीद के भुगतान की व्यवस्था अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। दरअसल, ईरान वैश्विक बैंकिंग नेटवर्क 'स्विफ्ट' से बाहर है। पहले भारत ने तुर्किये के एक बैंक के जरिये यूरो में भुगतान किया था, लेकिन अब वह विकल्प भी उपलब्ध नहीं है।
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नयी दिल्ली. साहित्योत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को भारतीय भाषाओं के कुल 24 लेखकों और कवियों को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कमानी सभागार में आयोजित समारोह में पुरस्कार पाने वालों में अंग्रेजी लेखक और पूर्व राजदूत नवतेज सरना शामिल थे, जिन्हें उनके उपन्यास 'क्रिमसन स्प्रिंग' के लिए पुरस्कार मिला और हिंदी लेखिका ममता कालिया को उनके संस्मरण 'जीते जी इलाहाबाद' के लिए पुरस्कार दिया गया। पुरस्कार विजेताओं को एक पट्टिका, शॉल और एक लाख रुपये की राशि प्रदान की गई।
कवि और साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि योग्य व्यक्तियों को सम्मानित करना समाज का कर्तव्य है, अन्यथा समाज मूल्यों से विरक्त हो जाएगा। तिवारी ने अपने संबोधन में कहा, ''योग्य व्यक्तियों को पुरस्कार देना और सम्मानित करना समाज का दायित्व है। जो समाज योग्य व्यक्तियों का सम्मान नहीं करता, वह धीरे-धीरे मूल्यों से विरक्त हो जाता है और अंततः ढह जाता है। चूंकि समाज स्वयं एक अमूर्त अवधारणा है, इसलिए इसके प्रतिनिधियों पर यह दायित्व आता है।'' उन्होंने कहा कि साहित्य की रचना करने वाले सम्मान के पात्र हैं क्योंकि वे केवल अपनी अभिव्यक्ति के माध्यम से समाज की सेवा करते हैं। अन्य पुरस्कार विजेताओं में प्रसून बंद्योपाध्याय शामिल हैं, जिन्हें बांग्ला में 'श्रेष्ठ कविता' के लिए सम्मानित किया गया। योगेश वैद्य को गुजराती में 'भट्ठखाडकी', अमरेश नुगडोनी को कन्नड़ में 'दादा सीरिसु तंदे' और एन. प्रभाकरण को मलयालम में 'मायामनुष्यर' के लिए पुरस्कार मिला। इसके अलावा, राजू बाविस्कर को मराठी में 'कल्याणील्या रेशा', जिंदर को पंजाबी में 'सेफ्टी किट', जितेंद्र कुमार सोनी को राजस्थानी में 'भरखमा' और सा. तमिलसेलवन को तमिल में 'तमिज सिरुकथैयिन थडंगल' के लिए सम्मानित किया गया। -
नयी दिल्ली. कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को संक्रमण से ठीक होने के बाद मंगलवार सुबह सर गंगा राम अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। चिकित्सकों ने यह जानकारी दी। सोनिया गांधी को बुखार की शिकायत के बाद 24 मार्च की रात करीब 10:20 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, अस्पताल में सात दिन उनका उपचार किया गया। अस्पताल के चेयरमैन डॉ. अजय स्वरूप के अनुसार सोनिया गांधी (79) का, एक गंभीर संक्रमण के लिए इलाज किया गया और एंटीबायोटिक दवाओं से उन्हें काफी फायदा हुआ। जब रोगाणु रक्तप्रवाह में प्रवेश करते हैं और एक ही स्थान पर रहने के बजाय पूरे शरीर में फैल जाते हैं, तो इसे 'सिस्टमिक इंफेक्शन' कहते हैं। चिकित्सकों ने बताया कि वह अब ठीक हो गई हैं और घर पर ही उनका आगे का इलाज होगा।
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नयी दिल्ली. नए आयकर कानून और अन्य बजटीय प्रावधान एक अप्रैल से लागू होंगे। इन बजटीय प्रावधान में वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) व्यापार पर उच्च प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) और चिकित्सा तथा शिक्षा उद्देश्यों के लिए विदेशी पर्यटन पैकेज एवं एलआरएस प्रेषणों पर कम टीसीएस शामिल हैं। इसके अलावा, भारत में डेटा सेंटर सेवाएं लेने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक 20 वर्ष की कर छूट और सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए 'सेफ हार्बर' प्रावधानों की सीमा बढ़ाने से संबंधित बजट घोषणाएं भी वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ बुधवार से प्रभावी हो जाएंगी। आयकर अधिनियम, 2025 एक अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम, 1961 का स्थान लेगा। नए कानून का उद्देश्य उसी कर नीति को अधिक तार्किक, सुलभ एवं पाठक-अनुकूल प्रारूप में प्रस्तुत करना है। आयकर विभाग ने कहा कि बदलाव अवधि के दौरान उसका ई-फाइलिंग मंच पुराने और नए दोनों आयकर कानूनों के तहत अनुपालन की सुविधा देगा। साथ ही, पिछले वर्षों से संबंधित सभी आकलन, अपील एवं अन्य कार्यवाही अंतिम निपटान तक पुराने कानून के तहत ही जारी रहेंगी। आकलन वर्ष 2026-27 (जो पुराने कानून की अवधि से संबंधित है) के लिए जुलाई 2026 में रिटर्न दाखिल करने वाले करदाता पुराने कानून के तहत निर्धारित प्रपत्रों का ही उपयोग करेंगे। कर वर्ष 2026-27 के लिए अग्रिम कर भुगतान जो जून 2026 से शुरू होगा..उसे नए कानून के अनुसार किया जाएगा। आयकर अधिनियम, 2025 में आकलन वर्ष और पूर्व वर्ष के अंतर को समाप्त कर एकल 'कर वर्ष' व्यवस्था लागू की गई है। साथ ही, समय सीमा के बाद आयकर रिटर्न दाखिल होने पर भी टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) की वापसी बिना किसी दंड शुल्क के लेने की अनुमति दी गई है। एक अप्रैल से लागू होने वाला एक अन्य बड़ा बदलाव वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) सौदों पर एसटीटी में वृद्धि है। वायदा अनुबंधों पर एसटीटी 0.02 प्रतिशत से बढ़कर 0.05 प्रतिशत हो जाएगा। विकल्प प्रीमियम एवं विकल्प के प्रयोग पर एसटीटी क्रमशः 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़कर 0.15 प्रतिशत हो जाएगा। एसटीटी में यह बढ़ोतरी इक्विटी बाजार के एफएंडओ खंड में सट्टेबाजी को सीमित करने और छोटे निवेशकों को भारी नुकसान से बचाने के उद्देश्य से की गई है। इक्विटी डेरिवेटिव (एफएंडओ) खंड में कारोबार करने वाले व्यक्तिगत निवेशकों की संख्या 2024-25 में 1.06 करोड़ थी जो 2025-26 में (30 दिसंबर 2025 तक) घटकर लगभग 75.43 लाख रह गई। सेबी के अध्ययन 'इक्विटी डेरिवेटिव खंड में वृद्धि बनाम नकद बाजार' के अनुसार, 2024-25 में व्यक्तिगत निवेशकों को 1.05 लाख करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध नुकसान हुआ। विदेशी यात्रा पैकेज और उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत चिकित्सा व शिक्षा के लिए भेजी जाने वाली राशि पर टीसीएस (स्रोत पर एकत्रित कर) में कमी का उद्देश्य मध्यम वर्ग को राहत देना है। विदेशी यात्रा पैकेज पर टीसीएस 20 प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत कर दिया गया है। चिकित्सा और शिक्षा के लिए प्रेषण पर टीसीएस पांच प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत होगा। इसके अलावा, बजट में घोषित 20 वर्ष की कर छूट से घरेलू डेटा सेंटर कंपनियों को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि इससे वे वैश्विक ग्राहकों को सेवाएं देते समय उनकी विदेशी आय पर भारत में कर लगने के जोखिम से बच सकेंगी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में यह प्रावधान किया गया है कि भारत में डेटा सेंटर सेवाएं लेने वाली किसी भी विदेशी कंपनी को 2047 तक 20 वर्ष की कर छूट मिलेगी, जिससे उनकी वैश्विक आय पर भारतीय कर अधिकारियों द्वारा कर लगाए जाने की आशंकाएं दूर होंगी। चाहे कोई वैश्विक कंपनी भारत में अपना डेटा सेंटर स्थापित करे या किसी भारतीय डेटा सेंटर से सेवाएं ले, दोनों स्थितियों में कर व्यवस्था समान रहेगी जिससे प्रतिस्पर्धा के लिए समान अवसर सुनिश्चित होगा। भारत में प्रभावी कॉरपोरेट कर दर 25.17 प्रतिशत है। इसके साथ ही आईटी सेवाओं के लिए 'सेफ हार्बर' सीमा को 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे आईटी/आईटीईएस क्षेत्र को अधिक निश्चितता मिलेगी एवं मुकदमेबाजी में कमी आने की उम्मीद है। आईटी सेवाओं के लिए 'सेफ हार्बर' एक कर व्यवस्था है जो ''ट्रांसफर प्राइसिंग'' विवादों को कम करने के लिए बनाई गई है। कोई भारतीय आईटी कंपनी जिस कीमत पर अपनी किसी विदेशी शाखा को सेवाएं बेचती है उसे ''ट्रांसफर प्राइसिंग'' कहते हैं।
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नयी दिल्ली. डॉ. प्रतिभा राय (उड़िया), लख्मी खिलाणी (सिंधी) तथा अब्दुस समद (उर्दू) को साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता प्रदान की जाएगी। साहित्य अकादमी की सामान्य परिषद की 30 मार्च 2026 को हुई बैठक में महत्तर सदस्यता प्रदान करने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया। साहित्य अकादमी द्वारा मंगलवार को यहां जारी एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गयी।
साहित्य अकादमी महत्तर सदस्यता, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्यरत साहित्य अकादमी द्वारा प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है। यह एक दुर्लभ सम्मान है, जो सामान्यतः भारतीय साहित्य की अमर विभूतियों के लिए आरक्षित है।
विज्ञप्ति में बताया गया कि पद्म भूषण से अलंकृत डॉ. प्रतिभा राय एक विख्यात उड़िया लेखिका, विदुषी हैं। उनके सृजन का भंडार पचास से अधिक कृतियों का विशाल संग्रह है। उनके दीर्घ एवं गौरवपूर्ण साहित्यिक जीवन में उन्हें पद्म भूषण, ज्ञानपीठ पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा सारला पुरस्कार सहित अनेक सम्मान, पुरस्कार एवं अभिनंदन प्राप्त हुए हैं। इसी प्रकार, लख्मी खिलाणी (लख्मीचंद भीर्योमल खिलाणी) एक प्रतिष्ठित सिंधी कथाकार, नाटककार, अनुवादक, संपादक एवं विद्वान हैं। उनकी प्रकाशित रचनाओं में दो दर्जन से अधिक कृतियाँ तथा असंख्य लेख सम्मिलित हैं। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार सहित अन्य अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। बयान में बताया गया कि अब्दुस समद एक प्रख्यात उर्दू लेखक एवं कवि हैं। उनके सृजन का कोश दो दर्जन से अधिक कृतियों का समृद्ध भंडार है। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, ग़ालिब पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद पुरस्कार तथा उर्दू अकादमी के 'लाइफ़ टाइम अचीवमेंट' पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। साहित्य अकादमी द्वारा इन विभूतियों को यह महत्तर सदस्यता एक विशेष समारोह में बाद में प्रदान की जाएगी। -
नयी दिल्ली. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय टेनिस के दिग्गज खिलाड़ी लिएंडर पेस मंगलवार को यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। पार्टी पदाधिकारियों ने यह जानकारी दी। पेस ने केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। टेनिस स्टार ने हाल ही में कोलकाता में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की थी, जिससे उनके पार्टी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं। पेस वर्ष 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे और उन्होंने 2022 के गोवा विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी के लिए प्रचार किया था। हालांकि, उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा था।
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नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को बिहार के नालंदा के शीतला माता मंदिर में भगदड़ पर शोक व्यक्त किया। राष्ट्रपति मुर्मु के आधिकारिक कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”बिहार के नालंदा में एक मंदिर में हुई भगदड़ में अनेक श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है। मैं सभी शोकाकुल परिवारजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं। घायल हुए सभी लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की मैं कामना करती हूं।”
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के कार्यालय ने नालंदा हादसे पर दुख जताते हुए एक्स पर पोस्ट किया, ” बिहार के नालंदा में भगदड़ के कारण हुई जानमाल की दुखद हानि से मैं अत्यंत आहत हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की मैं प्रार्थना करता हूं।”इससे पहले पीएम मोदी ने नालंदा के शीतला माता मंदिर हादसे पर दुख जताया। उन्होंने भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा भी की। वही, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मृतकों के परिजनों के लिए छह लाख रुपए मुआवजे की घोषणा की।नालंदा जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र में मां शीतला मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान अत्यधिक भीड़ होने के कारण अचानक स्थिति अनियंत्रित हो गई, जिससे भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि आठ से दस लोग घायल हो गए।इस बीच इस घटना के बाद कर्तव्यहीनता के आरोप में दीपनगर थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया है। इस घटना की सूचना मिलने के बाद नालंदा जिला पुलिस प्रशासन घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य में जुट गया। घायलों को तत्काल बेहतर इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मंगलवार को बिहार के नालंदा के शीतला माता मंदिर हादसे पर दुख जताया है। उन्होंने इसमें जान गंवाने वाले पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने इस भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा भी की।
प्रधानमंत्री कार्यालय (सेवा तीर्थ) ने पीएम मोदी के हवाले से लिखा, ”बिहार के नालंदा जिले में हुई दुर्घटना अत्यंत दुखद है। मैं उन लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं जिन्होंने इस हादसे में अपने प्रियजनों को खो दिया। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी और घायलों को 50,000 रुपए दिए जाएंगे।”रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हादसे पर दुख जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ” नालंदा (बिहार) के माता शीतला मंदिर में हुई भगदड़ की घटना अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। इस हादसे में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मैं अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। साथ ही मैं सभी घायल व्यक्तियों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पोस्ट में लिखा, ”बिहार के नालंदा के शीतला माता मंदिर में हुई भगदड़ की दुखद घटना में श्रद्धालुओं के निधन और घायल होने का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। मैं दिवंगत श्रद्धालुओं के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से प्रार्थना करता हूं।”लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी हादसे पर दुख जताते हुए लिखा, ” नालंदा (बिहार) के माता शीतला मंदिर में हुई भगदड़ की घटना अत्यंत दुःखद और पीड़ादायक है। इस हादसे में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मैं अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। साथ ही मैं सभी घायल व्यक्तियों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”नालंदा के मघड़ा मेले में मंगलवार को एक बड़ा हादसा हो गया। जहां प्रसिद्ध माता शीतला के मंदिर में अचानक भगदड़ मचने की घटना में सात लोगों की मौत हो गई। मृतकों में महिलाओं की संख्या अधिक बताई जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए मृतक के परिजनों के लिए छह लाख रुपए मुआवजे की घोषणा की है।



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