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किन्शासा. मध्य अफ्रीकी देश कांगो में लकड़ी की एक नौका के डूब जाने से कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मध्य कांगों में परीक्षाओं में शामिल होने के बाद छात्र इस नौका से अपने घर लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह नौका कसई प्रांत में संकुरु और कसाई नदियों के संगम क्षेत्र में प्रवेश करते समय डूब गई। कसई प्रांत के इलेबो क्षेत्र के प्रशासक फ्रांस्वा कबुला ने बताया कि यह हादसा शुक्रवार को हुआ।
उन्होंने कहा, "इस दुर्घटना में 80 लोगों को बचा लिया गया, जबकि 20 शव बरामद किए गए हैं।"हालांकि, दुर्घटना के प्रत्यक्षदर्शी शिकुडी जीन ने 'एसोसिएटेड प्रेस' को बताया कि नौका पर 200 से अधिक लोग सवार थे। -
न्यूयॉर्क. पेप्सिको की भारतीय मूल की पूर्व चेयरमैन एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) इंद्रा नूयी ने कहा है कि अमेरिका की 'योग्यता-आधारित व्यवस्था' ने ही उन्हें इतनी बड़ी वैश्विक कंपनी का मुखिया बनने का मौका दिया, जो भारत समेत किसी भी दूसरे देश में संभव नहीं हो पाता। नूयी ने पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडलीजा राइस के साथ बातचीत में कहा कि अमेरिका में प्रतिभा को पहचानने और आगे बढ़ाने की ऐसी व्यवस्था है, जहां लिंग, जातीयता या पृष्ठभूमि से ज्यादा योग्यता मायने रखती है। उन्होंने इस परिचर्चा में कहा, ''एक प्रवासी भी यहां बिना संसाधनों के आकर शीर्ष पद तक पहुंच सकता है। यह दुनिया के किसी अन्य देश में संभव नहीं हो पाता। मैं किसी भी अन्य देश, यहां तक कि भारत में भी, सीईओ नहीं बन पाती।'' येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की पूर्व छात्रा नूयी 12 वर्षों तक पेप्सिको के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) की कमान संभालने के बाद 2018 में पद से हटी थीं। उन्हें आज भी दुनिया के सर्वाधिक प्रभावशाली कारोबार दिग्गजों में गिना जाता है। इसके साथ ही नूयी ने अमेरिका और भारत को 'स्वाभाविक साझेदार' बताते हुए कहा कि चीन के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि एशिया में संतुलन बनाए रखने के लिए भारत एक बेहद महत्वपूर्ण देश है, क्योंकि उस क्षेत्र में चीन का वर्चस्व नहीं होना चाहिए। नूयी ने कहा कि भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के साथ युवा और अंग्रेजी बोलने वाली आबादी के कारण भविष्य में वैश्विक स्तर पर बड़ी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर और एआई पेशेवर तथा प्रवासी समुदाय दुनिया के विकास में अहम योगदान देंगे। उन्होंने भारत और चीन की तुलना करते हुए कहा कि चीन में प्रतिस्पर्धा काफी आक्रामक है और वहां की अधिक केंद्रीकृत व्यवस्था ने उसे तेजी से वैश्विक शक्ति बनने में मदद की। इसके उलट नूयी ने भारत को 'अराजकता से भरपूर एक खूबसूरत' देश बताते हुए कहा, ''भारत अब भी एक वैश्विक शक्ति बनने के लिए संघर्ष कर रहा है, क्योंकि यहां लोकतंत्र है। जब हर व्यक्ति को मत देने और अपनी बात रखने का अधिकार होता है तो प्रगति की गति धीमी हो जाती है, लेकिन मुझे खुशी है कि व्यवस्था ऐसी ही है।''
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काठमांडू, जून में हवाई मार्ग से नेपाल आने वाले विदेशी पर्यटकों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक रही। इस दौरान पिछले साल इसी महीने की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक (41,809) भारतीय पर्यटक नेपाल पहुंचे। यह जानकारी बृहस्पतिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार है। नेपाल पर्यटन बोर्ड (एनटीबी) ने बताया कि इस महीने हवाई मार्ग से कुल 91,363 विदेशी पर्यटक नेपाल आए।
इसमें कहा गया है कि भारतीय पर्यटकों की संख्या पिछले साल जून में 32,662 से बढ़कर इस साल 41,809 हो गई। एनटीबी ने बताया कि 2026 के शुरुआती छह महीनों में हवाई मार्ग से नेपाल आने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या 177,159 रही, जो पिछले साल इसी अवधि में आए 148,540 पर्यटकों की तुलना में 19.27 प्रतिशत अधिक है। इसमें बताया गया है कि जून में सबसे अधिक आने वाले पर्यटकों के मामले में अमेरिका दूसरे नंबर पर रहा और वहां से 11,836 लोग आए; इसके बाद चीन (9,995), बांग्लादेश (4,322) और ब्रिटेन (2,500) का नंबर था। कुल मिलाकर, इस साल जनवरी से जून के बीच नेपाल में 6,20,426 विदेशी पर्यटक आए, जो 2025 की इसी अवधि की तुलना में सात प्रतिशत की वृद्धि है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के वरिष्ठ निदेशक मणि आर. लामिछाने ने कहा कि हाल के महीनों में भारतीय पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी की वजह भारतीय शहरों में अधिक गर्मी, शिक्षण संस्थानों में लंबी छुट्टियां और विदेशी मुद्रा के बाहर जाने को कम करने के लिए घरेलू और क्षेत्रीय यात्रा को बढ़ावा देने की भारत सरकार की कोशिशें हो सकती हैं। -
न्यूयॉर्क. अमेरिकी पॉप गायिका टेलर स्विफ्ट और फुटबॉल खिलाड़ी ट्रैविस केल्सी जल्द ही विवाह करेंगे और शुक्रवार रात न्यूयॉर्क के 'मैडिसन स्क्वायर गार्डन' में शादी का जश्न मनाया जाएगा। एक कानून प्रवर्तन अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने अपना नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर 'एसोसिएटेड प्रेस' को आयोजन से जुड़ी सुरक्षा की जानकारी देते हुए बताया कि विवाह समारोह की शुरुआत बृहस्पतिवार रात विवाह-पूर्व भोज से होगी। पिछले कुछ सप्ताह से ऐसी अपुष्ट खबरें आ रही थीं कि स्विफ्ट और केल्सी का विवाह इस सप्ताहांत न्यूयॉर्क के किसी ऐतिहासिक स्थल पर होगा। इस सप्ताह 'मैडिसन स्क्वायर गार्डन' के बाहर कर्मचारी ट्रकों से सामान उतारते देखे गए थे। एक प्रवेश द्वार के बाहर कुछ देर के लिए एक बड़ा कालीन बिछाया गया जिसे तुरंत हटा लिया गया। स्विफ्ट एवं केल्सी ने अपने विवाह की तारीख को लेकर अभी तक सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की है।
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कीव. रूस ने बृहस्पतिवार रात यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइलों और ड्रोन से भीषण हमला किया जिसमें कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई और 90 से अधिक अन्य घायल हो गए। हमलों के दौरान कई घंटों तक राजधानी में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई देती रहीं। रूस ने इस हमले को यूक्रेन की ओर से मॉस्को के तेल प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों का ''प्रतिशोध'' बताया है। यूक्रेन के इन हमलों से रूस में ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बढ़ा है। बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों तथा ड्रोन से किए गए इस हमले में राजधानी के कई हिस्सों में आवासीय इमारतों और नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अन्य अधिकारियों की ओर से हमले को लेकर पहली बार सतर्क किए जाने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने सबवे स्टेशनों में शरण ली। रूस के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह हमला यूक्रेन की ओर से रूस के नागरिक बुनियादी ढांचे पर किए गए हमलों के जवाब में किया गया। हाल के सप्ताहों में रूस ने कीव पर अपने हमले और तेज कर दिए हैं। वहीं, यूक्रेन भी रूस के सैन्य ठिकानों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर लगातार ड्रोन हमले कर रहा है, जिससे रूस के भीतर ईंधन की कमी पैदा हुई है और उसकी आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है। कीव के मेयर विताली क्लित्सको ने बताया कि हमले में 17 लोगों की मौत हुई है जबकि 90 से अधिक अन्य घायल हुए हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने इस हमले को ''खौफनाक'' करार देते हुए सहयोगी देशों से यूक्रेन की वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वायु रक्षा प्रणालियों और मिसाइलों की आपूर्ति से जुड़े फैसलों में अब और देरी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने यूक्रेन के ड्रोन हमलों के जवाब में रूस की कार्रवाई को उचित ठहराने की किसी भी कोशिश को खारिज करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत यूक्रेन आत्मरक्षा के अपने अधिकार का प्रयोग कर रहा है जबकि रूस ही आक्रामक रुख अपनाए हुए है। कीव शहर के सैन्य प्रशासन के प्रमुख तिमूर तकाचेंको ने बताया कि हमले में आवासीय इमारतों और नागरिक बुनियादी ढांचे समेत शहर के 30 स्थानों को नुकसान पहुंचा है। यूक्रेन के गृह मंत्री इहोर क्लीमेंको ने बताया कि करीब 20 आवासीय इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं।
क्लित्स्को ने बताया कि देस्न्यांस्की जिले में एक क्षतिग्रस्त नौ मंजिला आवासीय इमारत में कुछ लोग फंस गए थे, जिन्हें निकालने के लिए बचाव दल को मौके पर भेजा गया। यूक्रेन की आपातकालीन सेवा के अनुसार, होलोसिएव्स्की जिले में 16 मंजिला एक इमारत की छत पर आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए करीब 500 कर्मियों और 100 विशेष वाहनों को तैनात किया गया। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि इस हमले में ''लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों'' और ड्रोन का इस्तेमाल कर कीव तथा कीव क्षेत्र में सैन्य उद्योग से जुड़े प्रतिष्ठानों, ईंधन एवं ऊर्जा परिसरों और यूक्रेन के चार अन्य क्षेत्रों में स्थित सैन्य हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। मंत्रालय ने उन स्थानों की सूची भी जारी की, जिन्हें निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। इनमें अधिकांश यूक्रेन के ड्रोन, मिसाइल और उनके कलपुर्जों के निर्माण एवं संयोजन संयंत्र बताए गए हैं। यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, रूस ने इस हमले में 74 मिसाइलें दागीं, जिनमें 24 बैलिस्टिक मिसाइलें थीं। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के 496 ड्रोन भी छोड़े गए। इस बीच, यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने दावा किया कि उसकी सेना ने रातभर चले अभियान में मॉस्को के पूर्व में स्थित निजनी नोवगोरोद क्षेत्र की रूस की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक पर हमला किया, जिससे वहां आग लग गई। जनरल स्टाफ ने यह भी दावा किया कि यूक्रेनी सेना ने रूस के कब्जे वाले लुहान्स्क क्षेत्र में सिवेर्स्की दोनेत्स नदी पर बने एक रेलवे पुल को भी निशाना बनाया। उसके अनुसार, रूसी सेना इस पुल का इस्तेमाल सैनिकों, हथियारों और सैन्य सामग्री की आवाजाही के लिए कर रही थी। -
संयुक्त राष्ट्र. भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद को उचित ठहराने के लिए किसी भी शिकायत को आधार बनाए बिना इस ''हत्यारी विचारधारा'' को जड़ से मिटाने के मकसद से मिलकर काम करने का आह्वान करते हुए कहा है कि आतंकवादी, आतंकवादी ही होता है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा, ''भारत सीमा पार आतंकवाद का दशकों से शिकार रहा है। हमारे लोगों ने आतंकवाद की भारी कीमत चुकाई है- जानें गईं, परिवार बर्बाद हुए और समाज बिखर गए। इसी अनुभव ने भारत के इस रुख को आकार दिया है कि आतंकवाद को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता।'' उन्होंने कहा, ''चाहे कोई भी शिकायत, राजनीतिक उद्देश्य या रणनीतिक गुणाभाग हो, आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों की बिना किसी हिचकिचाहट के निंदा की जानी चाहिए।'' पर्वतनेनी ने संयुक्त राष्ट्र वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति (जीसीटीएस) की नौवीं समीक्षा को स्वीकार किए जाने के अवसर पर बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद से निपटने को लेकर दोहरे मानदंडों को खारिज करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वालों, उनकी साजिश रचने वालों, उन्हें वित्तीय मदद देने वालों और उनके प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराना तथा न्याय के कठघरे में लाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को इस संबंध में पूरा सहयोग करना चाहिए।
पर्वतनेनी ने कहा, ''आतंकवादी, आतंकवादी ही होता है। हमें आतंकवाद को उचित ठहराने के लिए किसी भी शिकायत को आधार बनाए बिना इस हत्यारी विचारधारा को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से मिलकर काम करना चाहिए।'' भारत ने कहा कि आतंकवाद-रोधी प्रयासों को गलत तुलना या राजनीतिक रंग वाले विमर्श के कारण कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। पर्वतनेनी ने कहा, ''हमें आतंकवाद को फैलाने में मददगार परिस्थितियों से निपटना चाहिए लेकिन हमें कभी भी परिस्थितियों को आतंकवाद के औचित्य के रूप में नहीं देखना चाहिए। हमें मानवाधिकारों और कानून के शासन को कायम रखना चाहिए लेकिन यह भी स्वीकार करना चाहिए कि पहला मानवाधिकार जीवन का अधिकार है और आतंकवाद इस मानवाधिकार पर सबसे प्रत्यक्ष हमला है।'' भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामूहिक प्रयासों का केंद्र बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा, ''अंतरराष्ट्रीय समुदाय को वित्तीय खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्था बेहतर करनी चाहिए, वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के मानकों के क्रियान्वयन को मजबूत करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी क्षेत्र आतंकवाद के वित्तपोषण का सुरक्षित माध्यम न बने।'' भारत ने कहा कि आतंकवादियों द्वारा नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों का दुरुपयोग किए जाने की बात पर तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। उसने कहा कि यह ''निराशाजनक'' है कि जीसीटीएस की इस समीक्षा के दौरान बातचीत में इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी कि आतंकवादियों को उनके नापाक कृत्यों को पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकी संबंधी साधनों से वंचित रखा जाए। भारत ने कहा कि इस समीक्षा को ऐसे महत्वपूर्ण समय पर स्वीकार किया गया है, जब 20 वर्ष पहले सदस्य देशों ने जीसीटीएस को अपनाने के लिए एकजुटता दिखाई थी। पर्वतनेनी ने कहा, ''ऐसा करके अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस बात की पुष्टि की कि आतंकवाद मानवता के लिए खतरा है और इसे केवल अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ही हराया जा सकता है।'' भारत ने 2006 में जीसीटीएस को पहली बार स्वीकार किए जाने से एक दशक पहले ही अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि (सीसीआईटी) को अपनाने का आह्वान किया था। पर्वतनेनी ने कहा कि सर्वमान्य कानूनी ढांचे का अभाव आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई में अब भी बाधा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि नियम संबंधी खामियों को दूर करने, अभियोजन एवं प्रत्यर्पण को मजबूत करने और आतंकवादियों एवं उनके प्रायोजकों को सुरक्षित ठिकानों, धन तथा हथियारों तक पहुंच से वंचित करने के लिए यह कानूनी व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने कहा, ''लगभग तीन दशक की देरी ने आतंकवाद से निपटने के हमारे सामूहिक प्रयासों में बाधा डाली है। अब सीसीआईटी को अंतिम रूप देने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने का समय आ गया है।'' भारत ने कहा कि उसने आतंकवाद-रोधी वैश्विक प्रयासों में लगातार योगदान दिया है और आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नयी एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल से निपटने संबंधी दिल्ली घोषणा तथा 'नो मनी फॉर टेरर' (आतंकवाद के लिए कोई वित्तीय मदद नहीं) सम्मेलनों सहित कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं की मेजबानी की है। भारत ने 2023 में जीसीटीएस में ऐतिहासिक दिल्ली घोषणा का उल्लेख नहीं किए जाने की आलोचना करते हुए कहा कि यह ''इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति को दर्शाता है कि यह महासभा किस तरह तुच्छ हिसाब-किताब की बंधक बनी हुई है। यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस तरह के व्यवहार को लगातार सहन कर रहा है।'' भारत ने यह रुख भी दोहराया कि वह किसी धर्म या जातीयता, राष्ट्रीयता, भौगोलिक पहचान अथवा नस्ल जैसी हर विशेषता के प्रति पूर्वाग्रह से प्रेरित सभी कुकृत्यों की निंदा करता है। - काराकास। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने 24 जून को देश में आए शक्तिशाली भूकंप के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए सात दिनों के लिए राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। उन्होंने एक्स पर कहा कि खतरनाक भूकंपों से हुए इंसानी नुकसान से वेनेजुएला की आत्मा टूट गई है। रोड्रिगेज ने सोशल मीडिया पर लिखा, “पीड़ितों की याद में मैंने बुधवार (स्थानीय समय) की शाम 6:00 बजे से सात दिनों के लिए राष्ट्रीय शोक घोषित करने का फैसला किया है। भारी दुख की इस घड़ी में हम इस त्रासदी से पीड़ित लोगों को गले लगाते हैं और उनके साथ रहने और उनकी रक्षा करने का अपना वादा दोहराते हैं।” न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, मंगलवार तक भूकंप से कम से कम 1,943 लोगों की मौत हो चुकी थी और 10,500 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इससे पहले, पुर्तगाली सरकार ने भी वेनेजुएला में भूकंप के पीड़ितों, खासकर पुर्तगाली नागरिकों और पुर्तगाली मूल के लोगों के लिए रविवार (5 जुलाई) को राष्ट्रीय शोक दिवस मनाने की घोषणा की थी।पुर्तगाल के विदेश मंत्रालय के नए अपडेट के मुताबिक, पुर्तगाली नागरिकों और पुर्तगाली मूल के लोगों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 71 हो गई है, जिसमें 11 बच्चे शामिल हैं, जबकि 71 और लोग लापता हैं।आधिकारिक लुसा न्यूज एजेंसी के अनुसार, वेनेजुएला में रहने वाला पुर्तगाली समुदाय दुनिया भर में बसे पुर्तगाली प्रवासी समुदायों में सबसे बड़े समुदायों में से एक है। लैटिन अमेरिका में इसका स्थान ब्राजील के बाद दूसरा है। सामुदायिक अनुमानों के मुताबिक, पुर्तगाली मूल के लोगों सहित इस समुदाय की आबादी लगभग 12 लाख (1.2 मिलियन) है।पिछले हफ्ते, वेनेजुएला नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज ने घोषणा की कि ला गुएरा राज्य को बचाव के कामों में मदद करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलिट्री कंट्रोल में ले लिया गया है। ला गुएरा लगातार आए दो भूकंपों से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। रोड्रिगेज ने एक टेलीविजन ब्रीफिंग के दौरान कहा, “हम सभी को बताना चाहते हैं कि ला गुएरा राज्य अब पूरी तरह से मिलिट्री के कंट्रोल में है और पूरी तरह से बोलिवेरियन नेशनल आर्म्ड फोर्सेज के नियंत्रण में है।” रोड्रिगेज ने कहा कि कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, अंदरूनी व्यवस्था बनाए रखने और वेनेजुएला के इमरजेंसी रेस्पॉन्डर्स और अंतरराष्ट्रीय बचाव दलों के रेस्क्यू ऑपरेशन को आसान बनाने के लिए यह कदम उठाने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा कि ज्यादातर रेस्क्यू करने वाले लोग काराबालेडा, मैकुटो, लॉस कोरालेस और कैटिया ला मार में काम कर रहे थे। ये ऐसे इलाके हैं जो भूकंप से बुरी तरह प्रभावित हुए थे।
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विक्टोरिया (सेशेल्स) . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को सेशेल्स में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की। सेशेल्स के पीस पार्क में महात्मा गांधी की एक प्रतिमा स्थापित है, जो वहां उनकी विरासत के प्रति गहरे सम्मान को दिखाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने पार्क का दौरा करके वहां महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और कुछ बच्चों से बातचीत की। उन्होंने इस दौरान एक कलाकार द्वारा प्रस्तुत गायन कार्यक्रम को भी देखा। पार्क में भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों ने अपने हाथों से छोटे-छोटे भारतीय ध्वज लहराकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया। श्री नवशक्ति विनायगर मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद प्रधानमंत्री पीस पार्क पहुंचे।
प्रधानमंत्री शनिवार को सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा के लिए रवाना हुए थे। उन्होंने रविवार को सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ विभिन्न मुद्दों पर व्यापक बातचीत की। उन्होंने सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। भारत और सेशेल्स इस समय अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं।
एक विशेष समारोह में राष्ट्रपति हर्मिनी ने प्रधानमंत्री मोदी को 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' सम्मान से सम्मानित किया। -
विक्टोरिया (सेशेल्स). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। वह तीन दिवसीय यात्रा पर सेशेल्स में हैं और उनकी यह यात्रा शनिवार को शुरू हुई थी। सेशेल्स में इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस समारोह ऐसे वक्त मनाया जा रहा है जब भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे हुए हैं। इस विशेष अवसर पर रविवार रात आयोजित राष्ट्रीय परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की टुकड़ियों ने भी हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''भारत को सेशेल्स के विकास के सफर में एक भरोसेमंद दोस्त और साझेदार के तौर पर उसके साथ खड़े होने पर गर्व है। हमारी साझेदारी साझा मूल्यों और लोगों के बीच आपसी संबंधों के साथ और मज़बूत हो रही है। मुझे यकीन है कि आने वाले समय में हमारी दोस्ती और भी बढ़ेगी।'' एक विशेष सम्मान के रूप में प्रधानमंत्री मोदी भारतीय सैन्य दल के मार्च पास्ट के दौरान खड़े हुए और कृतज्ञता व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''असम रेजिमेंट और भारतीय नौसेना की टुकड़ियों ने कल सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लिया। यह भारत और सेशेल्स के बीच स्थायी और मजबूत मित्रता का एक और प्रतीक है।'' भारतीय दल में असम राइफल्स के जवान, भारतीय नौसेना के जवान और भारतीय नौसेना का मार्चिंग बैंड शामिल था। इसके अलावा भारतीय नौसेना के युद्धपोत तरकश और इक्षक भी पोर्ट विक्टोरिया पहुंचे।
इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ विभिन्न द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक वार्ता की। एक विशेष समारोह में राष्ट्रपति हर्मिनी ने प्रधानमंत्री मोदी को 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' सम्मान से भी नवाजा। यह सम्मान उन्हें पर्यावरण संरक्षण में नेतृत्व, विकासशील देशों के हितों को आगे बढ़ाने के प्रयासों तथा समुद्री अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के प्रति उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के लिए प्रदान किया गया। -
विक्टोरिया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के बीच हुई वार्ता के बाद भारत और सेशेल्स ने रविवार को 19 महत्वपूर्ण समझौतों की घोषणा की, जिससे रक्षा और समुद्री सुरक्षा से लेकर डिजिटल भुगतान, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य देखभाल, कृषि और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार किया जाएगा। ये समझौते हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीपीय देश सेशेल्स के साथ सुरक्षा, संपर्क, क्षमता निर्माण और विकास साझेदारी के क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भागीदारी को दर्शाते हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन परिणामों में प्रत्यर्पण संधि, बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग संबंधी समझौता, सेशेल्स में यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने का समझौता, एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ इंडिया (एक्ज़िम बैंक) के साथ एक व्यापक ऋण सुविधा समझौता तथा नए सेशेल्स राष्ट्रीय अस्पताल की प्रारंभिक तैयारियों से संबंधित समझौता शामिल हैं। दोनों देशों ने सेशेल्स को एक तेज गश्ती पोत उपहार में देने, सेशेल्स रक्षा बल को 10 यूटिलिटी वाहन और पांच लेजर रेडियल श्रेणी की नौकाएं सौंपने, सेशेल्स कोस्ट गार्ड के पोत 'पीएस जोरोस्टर' के पुनर्निर्माण कार्य के पूरा होने तथा डोर्नियर विमान को आधुनिक ग्लास कॉकपिट प्रणाली से उन्नत करने की भी घोषणा की। विदेश मंत्रालय ने 'एक्स' पर सिलसिलेवार पोस्ट में बताया कि अन्य विकासात्मक पहलों के तहत छह एम्बुलेंस, 500 मीट्रिक टन चावल और 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट सेशेल्स को सौंपा गया। साथ ही भारत-सेशेल्स राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक स्मारक लोगो जारी किया गया तथा व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा केंद्र की आधारशिला का डिजिटल माध्यम से समारोह आयोजित किया गया। दोनों देशों ने नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड और सेशेल्स के केंद्रीय बैंक के बीच एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य सेशेल्स में यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देना और आर्थिक व तकनीकी सहयोग को और मजबूत करना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और सेशेल्स के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच जन औषधि योजना के तहत हुए समझौते का उद्देश्य सेशेल्स के लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती भारतीय दवाएं उपलब्ध कराना है। वहीं, एक अन्य समझौता ज्ञापन नए सेशेल्स राष्ट्रीय अस्पताल की प्रारंभिक तैयारियों से संबंधित है। मंत्रालय ने कहा कि इसके अलावा, दोनों देशों ने सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान और सेशेल्स के विदेश एवं प्रवासी मामलों के मंत्रालय के बीच राजनयिक प्रशिक्षण, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा, सेशेल्स के ध्वज वाले जहाजों पर कार्यरत नाविकों के प्रशिक्षण और प्रमाणन की पारस्परिक मान्यता, तथा बाह्य अंतरिक्ष की खोज और उसके शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए। इन सभी समझौतों की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति हर्मिनी के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद की गई। प्रधानमंत्री मोदी की यह तीन-दिवसीय राजकीय यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर सेशेल्स पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी यहां राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भी शामिल होंगे।
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दुबई. ईरान के अर्धसैनिक बल 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' ने अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में बहरीन और कुवैत को निशाना बनाकर रविवार को ड्रोन एवं मिसाइल हमले किए और धमकी दी कि यदि अमेरिका ने हमले जारी रखे तो युद्ध समाप्त करने के लिए जारी वार्ता ''पूरी तरह रोकी'' जा सकती है। ईरान की सीधी निगरानी के बिना होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की कोशिशों के कारण गोलाबारी हुई जिसने अब पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है और इससे लंबे समय तक चलने वाले युद्धविराम के लिए हो रही बातचीत भी खतरे में पड़ गई है। बहरीन और कुवैत पर ये हमले ऐसे समय हुए, जब अमेरिकी नौसेना की निगरानी में काम करने वाली एक बहुराष्ट्रीय समुद्री संस्था ने शनिवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ओमान के पास स्थित एक मार्ग का विस्तार किया जाएगा ताकि उससे खाड़ी में प्रवेश करने और बाहर जाने वाले पोतों की आवाजाही हो सके। इस कदम से ईरान के साथ टकराव का एक नया कारण पैदा हो सकता है। ईरान और ओमान के समुद्री इलाके में होने के बावजूद, दुनियाभर के देश लंबे समय से इस जलडमरूमध्य को एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता मानते रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए अंतरिम समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य से पोतों की आवाजाही फिर शुरू करने की बात कही गई है। हालांकि, ईरान ने संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी के समर्थन से बनाए गए ओमान मार्ग से गुजर रहे पोतों पर दो बार हमले किए हैं। अमेरिका और खाड़ी के अरब देशों के विरोध के बावजूद तेहरान का कहना है कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से पोतों की आवाजाही पर उसका नियंत्रण होना चाहिए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को इराक की राजकीय यात्रा के दौरान इस दावे को दोहराया। एक समय दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस का पांचवां हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता था। अराघची ने बगदाद में कहा, "इस मामले में कोई भी दखल, या ईरान द्वारा अभी किए जा रहे इंतजामों से अलग कोई नयी व्यवस्था करने की कोशिश, सिर्फ और मुश्किलें पैदा करेगी। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में देरी होगी और तनाव बढ़ेगा, ठीक वैसे ही जैसे पिछले दो रातों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हुई घटनाओं से तनाव और टकराव बढ़ा था।" कुवैत की सेना ने बताया कि रविवार सुबह, अमेरिका के हमले के ठीक बाद, वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से आ रहे ड्रोन और मिसाइलों को रोक दिया। कुवैत, जहां अमेरिकी सेना का एक बड़ा अड्डा है, ने कहा कि उसने दो बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाकर उन्हें रोक दिया; किसी के घायल होने या किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है। बहरीन के गृह मंत्रालय ने बताया कि ईरान के हमलों से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा, लेकिन इसमें किसी की मौत नहीं हुई। मंत्रालय ने 8 मंजिला इमारत की तस्वीरें जारी कीं, जिसमें सबसे ऊपर की मंज़िल पूरी तरह तबाह हो गई थी, वहां मलबा भरा था और खिड़कियों के कांच टूटकर बिखर गए थे। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है, जिसके अड्डे पर युद्ध के दौरान बार-बार हमले हुए थे। रविवार को जिस इमारत को नुकसान पहुंचा, वह शहर के बीचों-बीच मनामा में मौजूद बेड़े के मुख्यालय के पास नहीं थी। बहरीन के विदेश मंत्री ने हमले की निंदा की है। ईरान के अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने हमलों की जिम्मेदारी ली है।
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमान ने रविवार तड़के कहा कि समुद्र में एक पोत पर शनिवार तड़के हमले के बाद उसने ''ईरान के सैन्य निगरानी ढांचे, संचार प्रणालियों, हवाई रक्षा ठिकानों, ड्रोन भंडारण केंद्रों और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया।'' ईरानी हमले का शिकार हुआ पनामा के ध्वज वाला तेल टैंकर 'किकू' कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी के लिए कच्चा तेल लेकर गया था। कतर, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में प्रमुख मध्यस्थ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका ने ''युद्धविराम समझौते का फिर से उल्लंघन किए जाने के जवाब में ईरान के मिसाइल एवं ड्रोन भंडारण केंद्रों और तटीय रडार स्थलों पर हमले किए।'' उन्होंने चेतावनी दी कि एक समय ऐसा आ सकता है, जब अमेरिका के लिए संयम बरतना संभव नहीं होगा और वह ''सैन्य कार्रवाई के जरिये काम पूरा करने के लिए मजबूर हो जाएगा।'' ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, ''अगर ऐसा हुआ तो इस्लामी गणराज्य ईरान का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।'' ईरान के एक ड्रोन ने बृहस्पतिवार को ओमान के तट के पास एक मालवाहक पोत को निशाना बनाया था, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने हमले किए थे। हिज्बुल्ला को लेकर गतिरोध कायम है। पिछले हफ़्ते, इजराइल और लेबनान की सरकार ने टकराव खत्म करने के लिए एक कार्यढांचा समझौते पर हस्ताक्षर किए। लेकिन इस समझौते में हिज़्बुल्ला या ईरान शामिल नहीं थे। हिज़्बुल्ला ने इस समझौते की आलोचना की है और हथियार छोड़ने की मांगों को ठुकरा दिया है। रविवार को इराक के दौरे के दौरान अराघची ने फिर कहा कि अमेरिका को इजराइल पर हमले रोकने और पीछे हटने के लिए दबाव डालना चाहिए। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के लगभग 600 वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्ज़ा कर रखा है; उसका कहना है कि हिज़्बुल्ला के हमलों को रोकने के लिए उसे सुरक्षित बफर क्षेत्र के तौर पर इस इलाके की जरूरत है। -
विक्टोरिया (सेशेल्स). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को सेशेल्स की संसद को संबोधित करते हुए न्यायसंगत जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित किया और कहा कि 'ग्लोबल साउथ', विशेष रूप से द्वीप राष्ट्र, जलवायु परिवर्तन का खामियाजा भुगत रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु कार्रवाई को ''निष्पक्षता, जिम्मेदारी और समता'' पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने समुद्री अर्थव्यवस्था और डिजिटल नवाचार के क्षेत्रों में भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत सहयोग का भी आह्वान किया। मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पहले से ही समुद्र तट, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, मौसम के पैटर्न और समुदायों पर दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि जिन देशों ने जलवायु परिवर्तन में सबसे कम योगदान दिया है, उनपर इसके परिणामों का सबसे बड़ा बोझ नहीं पड़ना चाहिए। 'ग्लोबल साउथ' शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है। मोदी ने कहा कि भारत सेशेल्स के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विकासशील छोटे द्वीपीय देशों की चिंताओं पर उचित ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि भारत और सेशेल्स एक ऐसी दुनिया का दृष्टिकोण साझा करते हैं, जहां विकास अधिक समावेशी हो। उन्होंने 'ग्लोबल साउथ' के हितों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। मोदी ने कहा, ''यही वह भावना है जो 'ग्लोबल साउथ' को एकजुट करती है, और यही दृष्टिकोण है जो भारत और सेशेल्स मिलकर आगे बढ़ाते रहेंगे।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''हिंद महासागर में भारत के लिए सेशेल्स एक विशेष स्थान रखता है। हिंद महासागर भारत और सेशेल्स को अलग नहीं करता, बल्कि यह हमें जोड़ता है।'' उन्होंने कहा कि नयी दिल्ली इस द्वीप राष्ट्र को द्वीपों के एक समूह से कहीं अधिक समझता है। मोदी ने इसे लगभग 14 लाख वर्ग किलोमीटर तक फैले समुद्री क्षेत्र के साथ ''एक छोटा द्वीप देश नहीं, बल्कि एक बड़ा समुद्री देश'' बताया। मोदी ने मत्स्य पालन, समुद्री विज्ञान, तटीय प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार करने का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा, ''साथ मिलकर, हम मत्स्य पालन, समुद्री विज्ञान, तटीय प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन में साझेदारी बना सकते हैं।'' सहयोग के एक और अहम क्षेत्र के तौर पर डिजिटल नवाचार का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने यह दिखाया है कि प्रौद्योगिकी किस तरह मौके बढ़ा सकती है, शासन को बेहतर कर सकती है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे सकती है तथा करोड़ों लोगों तक सेवाएं पहुंचा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जब सेशेल्स अपने डिजिटल बदलाव की दिशा में आगे बढ़ेगा, तो भारत को अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा करके खुशी होगी। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के रिश्तों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा कि भारत सेशेल्स का भरोसेमंद साथी बना रहेगा, उसकी उम्मीदों का समर्थन करेगा और एक दोस्त के तौर पर उसके साथ खड़ा रहेगा।
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विक्टोरिया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता और लघु द्वीपीय विकासशील देशों की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में उनके योगदान के लिए रविवार को सेशेल्स ने 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' की मानद उपाधि से सम्मानित किया। यह किसी विदेशी राष्ट्र से उन्हें मिला 34वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है।
राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने यहां मोदी को यह सम्मान प्रदान किया। सेशेल्स की ओर से दिया जाने वाला यह अपनी तरह का पहला सम्मान है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मान के लिए सेशेल्स का धन्यवाद किया और इसे उन देशों को समर्पित किया जो जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से लड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मान प्राप्त करने के बाद सोशल मीडिया पर लिखा, ''मुझे 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' सम्मान से सम्मानित करने के लिए सेशेल्स की जनता, सरकार और राष्ट्रपति हर्मिनी का हृदय से आभारी हूं।'' उन्होंने कहा, ''मैं विनम्रतापूर्वक इस सम्मान को स्वीकार करता हूं और इसे उन सभी देशों को समर्पित करता हूं, जो जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना कर रहे हैं तथा पर्यावरण संरक्षण को आने वाली पीढ़ियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी मानते हैं। यह एक गंभीर चुनौती है, जिसका हमें मिलकर सामना करना होगा।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ''पृथ्वी को अधिक हरित'' बनाने के लिए हरसंभव योगदान देने को तैयार है।
उन्होंने कहा, ''यह हमारी विभिन्न घरेलू नीतियों, 'मिशन लाइफ' पर दिए जा रहे विशेष जोर तथा अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन जैसी वैश्विक पहलों में हमारी सक्रिय भूमिका से स्पष्ट होता है।'' विदेश मंत्रालय ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''यह राष्ट्रपति सम्मान प्रधानमंत्री के नेतृत्व तथा पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास, जलवायु लचीलापन, ब्लू इकोनॉमी और लघु द्वीपीय विकासशील देशों की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को मान्यता देता है।'' विदेश मंत्रालय ने कहा कि 'मिशन लाइफ', 'एक पेड़ मां के नाम', अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन और 'इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस' प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इसी दिशा में शुरू की गई प्रमुख पहल हैं। इस मौके पर राष्ट्रपति हर्मिनी ने कहा, ''यह सम्मान उन नेताओं और साझेदारों के प्रति हमारे राष्ट्र के गहरे सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है, जिनके नेतृत्व और सहयोग ने हमारे 'ब्लू होराइजन' के संरक्षक की भावना को साकार किया है।'' विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यह सम्मान जलवायु कार्रवाई और टिकाऊ विकास को आगे बढ़ाने में प्रधानमंत्री मोदी की 'नेतृत्वकारी भूमिका' को दर्शाता है, साथ ही यह साझेदारी की बढ़ती मज़बूती को भी रेखांकित करता है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ''यह सम्मान प्रधानमंत्री को सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए मिले सम्मानों की कड़ी में सबसे नवीनतम है। उन्हें इसके पहले एफएओ के एग्रीकोला मेडल, सियोल पीस प्राइज और संयुक्त राष्ट्र के 'चैंपियन ऑफ द अर्थ' अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।'' विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह सम्मान इस बात को रेखांकित करता है कि सेशेल्स, क्षमता निर्माण, पर्यावरण संबंधी कार्यों, सतत विकास की पहलों और हिंद महासागर क्षेत्र में साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में एक भरोसेमंद साझेदार के तौर पर भारत की बढ़ती भूमिका को कितना महत्व देता है। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को तीन-दिवसीय यात्रा पर द्वीपीय राष्ट्र सेशेल्स पहुंचे। इस दौरान वह सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसी महीने प्रधानमंत्री मोदी को स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'द ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास)' से भी सम्मानित किया गया था। -
विक्टोरिया (सेशेल्स). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत और सेशेल्स के लोगों के बीच गहरे संबंधों को रेखांकित करते हुए रविवार को कहा कि चटनी और समोसे का स्वाद उन खास चीज़ों में शामिल है जो दोनों देशों की साझा विरासत को दर्शाती हैं। मोदी ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए यह बात कही। वह द्वीपीय देश की तीन दिन की यात्रा पर हैं। यह उल्लेख करते हुए कि सेशेल्स की ''सबसे बड़ी ताकत'' इसके लोग हैं, मोदी ने कहा कि पीढ़ियों से दुनिया भर के लोग इस देश में आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने साथ अलग-अलग भाषाएँ, रीति-रिवाज़, मान्यताएँ और परंपराएँ लेकर आए।
मोदी ने कहा, ''और साथ मिलकर उन्होंने एक ऐसी साझा पहचान बनाई, जिस पर सेशेल्स के लोगों को गर्व है।''
नेशनल असेंबली के आदर्श वाक्य 'विविधता में एकता' का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि जब देश अपनी 'समृद्ध विरासत' का जश्न मना रहा है, तो भारत और सेशेल्स की संस्कृतियों के बीच के संबंध रोज़मर्रा की ज़िंदगी में साफ़ दिखाई देते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ''इन्हें करी कोको, समोसा और चटनी के स्वाद में महसूस किया जा सकता है। इन्हें दीपावली, थाई पोंगल और नवरात्र के दौरान गरबा नृत्य के जश्न में देखा जा सकता है। यही वह भावना है जो हमें हमारी मित्रता के भविष्य के प्रति बहुत भरोसा दिलाती है।'' इस बात का उल्लेख करते हुए कि इस साल दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ है, मोदी ने कहा, ''आज, इस ऐतिहासिक स्वर्ण जयंती वर्ष में जब मैं आपके सामने खड़ा हूँ, तो हमारे लोग उस मित्रता का जश्न मना रहे हैं जो ढाई सदी से भी अधिक पुरानी है।'' मोदी ने कहा ''बहुत कम साझेदारियाँ इतनी मज़बूत नींव पर बनी हैं। और बहुत कम साझेदारियाँ इतनी आत्मीयता, भरोसे एवं सद्भावना के साथ आगे बढ़ी हैं। भविष्य की ओर देखते हुए, आइए- हम इस नींव को और मज़बूत करते रहें।'' उन्होंने कहा कि भारत सेशेल्स का ''भरोसेमंद साथी'' बना रहेगा और इसकी उपलब्धियों का जश्न मनाएगा।
मोदी ने कहा, हम आपकी आकांक्षाओं का समर्थन करेंगे और मित्रों की तरह आपके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा, ''पिछले पचास साल बहुत शानदार रहे हैं। लेकिन मेरा पक्का यकीन है कि सेशेल्स की कहानी के सबसे बेहतरीन अध्याय अभी लिखे जाने बाकी हैं। और हमारी दोस्ती का सबसे अच्छा दौर अभी आना बाकी है।'' विदेश मंत्रालय के अनुसार, सेशेल्स के साथ भारत का एक अहम संबंध है; 1770 में भारतीयों का पहला छोटा समूह (पांच लोग) सेशेल्स पहुंचा था। इसने कहा कि सेशेल्स की कुल आबादी लगभग 1,20,000 है और वहां भारतीय मूल के करीब 5,000 लोग रहते हैं।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के हैदराबाद में एक मार्ग का नाम उनके नाम पर रखे जाने पर आभार जताते हुए कहा कि इस तरह सम्मानित किए गए वह अमेरिका के पहले राष्ट्रपति हैं। तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से सटी एक सड़क का नाम ''डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू'' रखा है जिसके बाद ट्रंप ने शुक्रवार को 'ट्रुथ सोशल' पर एक 'पोस्ट' साझा कर आभार जताया। ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर द्वारा औपचारिक पट्टिका का अनावरण किए जाने की एक तस्वीर साझा करते हुए कहा, ''भारत के हैदराबाद में नया 'डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू'। मैं इस तरीके से सम्मानित किया गया अमेरिका का पहला राष्ट्रपति हूं। धन्यवाद।'' 'डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू' माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अमेजन सहित अमेरिका की प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के कार्यालयों के नजदीक है। तेलंगाना सरकार ने कहा कि सड़क का यह नाम अमेरिका को सम्मान देने और भारत-अमेरिका संबंधों में हैदराबाद की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करने के लिए रखा गया है।
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थिम्पू. भारत ने भूटान के आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम (ईएसपी) के तहत बृहस्पतिवार को 250 करोड़ रुपये की पांचवीं किस्त जारी की। भारतीय दूतावास ने यह जानकारी दी। इसके साथ ही ईएसपी के लिए भारत द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की सहायता राशि में से अब तक कुल 1,250 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। भारत पड़ोसी हिमालयी देश भूटान में विभिन्न विकास परियोजनाओं को नियमित रूप से वित्तीय सहायता प्रदान करता है। भूटान के 2026-27 के बजट में पूंजीगत व्यय का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भारत सरकार के अनुदान से समर्थित होगा। भारतीय दूतावास की विज्ञप्ति के अनुसार, थिम्पू में भारत के राजदूत संदीप आर्य ने भूटान के विदेश मंत्री ल्योंपो डीएन धुंग्येल को 250 करोड़ रुपये का चेक सौंपा। आर्य ने कहा कि भारत भूटान के प्रति अपनी विकास संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रहा है और 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-2029) के तहत परियोजना सहायता, आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम, उच्च प्रभाव वाली सामुदायिक विकास परियोजनाओं तथा कार्यक्रम अनुदानों के लिए धनराशि जारी कर रहा है। धुंग्येल ने कहा कि आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम ने कोविड-19 महामारी के बाद भूटान की अर्थव्यवस्था को फिर खड़ा करने और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का सकारात्मक प्रभाव किसानों, विद्यार्थियों, युवाओं, लघु एवं मझोले उद्यमों, स्टार्टअप, रचनात्मक उद्योग, आतिथ्य तथा पर्यटन क्षेत्रों पर पड़ा है।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को सीनेट में रिपब्लिकन सांसदों को ईरान युद्ध को रोकने संबंधी प्रस्ताव के पक्ष में वोट किए जाने को लेकर खूब खरी-खोटी सुनाई। फ्लोरिडा के सीनेटर रिक स्कॉट के निमंत्रण पर ट्रंप 'कैपिटल हिल' (अमेरिका की संसद का भवन) में रिपब्लिकन सांसदों के दोपहर भोज में शामिल हुए। बैठक से पहले ट्रंप ने संकेत दिया था कि वह बंद कमरे में होने वाली इस बैठक में नागरिकता प्रमाणित करने संबंधी विधेयक के पक्ष में वोट करने के लिए सांसदों पर दबाव बनाएंगे। हालांकि, पूरी बातचीत मंगलवार को पारित हुए युद्ध शक्तियों संबंधी प्रस्ताव (वॉर पावर्स रेजोल्यूशन) पर ही केंद्रित हो गई। ट्रंप ने खासतौर पर उन चार रिपब्लिकन सांसदों को निशाने पर लिया, जिन्होंने इस प्रस्ताव पर डेमोक्रेट सांसदों का साथ दिया था। इनमें अलास्का से लिसा मुर्कोव्स्की, मेन से सुसान कॉलिन्स, केंटकी से रैंड पॉल और लुइसियाना से बिल कैसिडी शामिल हैं। ट्रंप इससे पहले सोशल मीडिया पर इन्हें ''नकारा'' कहा।
अधिकांश रिपब्लिकन सांसद चुप रहे। हालांकि, कैसिडी खड़े हुए और उन्होंने अपने मतदान का बचाव किया। कैसिडी पिछले माह अपनी पार्टी की प्राथमिक चुनावी प्रतिस्पर्धा में हार गए थे, जहां ट्रंप ने उनके प्रतिद्वंद्वी का समर्थन किया था। बैठक के बाद कैसिडी ने संवाददाताओं से कहा, ''मैं खड़ा हुआ और मैंने कहा कि आपने अमेरिकी जनता को यह नहीं बताया है कि वास्तव में क्या हो रहा है। यह अभियान चार सप्ताह चलने वाला था, लेकिन अब चार महीने से जारी है। हमारे मूल उद्देश्य अब तक पूरे नहीं हुए हैं।'' कैसिडी ने कहा कि दोनों के बीच तीखी बहस हुई और उन्होंने भी ट्रंप को उनकी भी भाषा में जवाब दिया। रिपब्लिकन सांसद ने कहा कि बाद में उन्होंने स्थिति को शांत करने की कोशिश की, लेकिन किसी की अकड़ के आगे झुकना नहीं चाहते थे। उन्होंने कहा, ''जब तक मुझे पूरी जानकारी नहीं दी जाती, मैं युद्ध शक्तियों से जुड़े प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करता रहूंगा।'' इस बैठक से परिचित एक अधिकारी के अनुसार, ट्रंप ने बातचीत के दौरान कई बार कैसिडी को बैठ जाने के लिए कहा। एक मौके पर उन्होंने सीनेटर को ''सनकी'' तक कह दिया। हालांकि, सार्वजनिक रूप से ट्रंप ने बाद में कहा कि उनकी ''बेहद अच्छी बैठक'' हुई। उन्होंने मतभेदों के संकेत भी दिए। ट्रंप ने बाहर निकलते समय संवाददाताओं से कहा, ''कुछ लोगों को छोड़कर बैठक में मौजूद सभी लोग अच्छे है, लेकिन कोई बात नहीं।'' यह दोपहर भोज ट्रंप और सीनेट के रिपब्लिकन सांसदों के बीच कई सप्ताह से जारी तनातनी के बीच हुआ।
अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को बाधित करने के लिए युद्ध शक्तियों संबंधी प्रस्ताव को मंगलवार को पहली बार मंजूरी दी। अमेरिकी सांसद युद्ध समाप्त करने के लिए देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर सतर्कता से नजर रख रहे हैं। यह युद्ध शुरू करने का फैसला अमेरिकी प्रशासन ने लिया था लेकिन अब उसे संसद से धन की जरूरत है। सीनेट ने युद्ध रोकने के लिए 10वीं बार प्रयास किया। इस प्रस्ताव के पक्ष में 50 तथा विरोध में 48 मत पड़े जो पिछले प्रयासों की तुलना में एक चौंकाने वाला बदलाव है। -
काराकस. वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश में बुधवार शाम आए लगातार दो शक्तिशाली भूकंपों में कम से कम 164 लोगों की मौत हो गई है और 971 लोग घायल हुए हैं। रोड्रिगेज ने कहा कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है, क्योंकि बचाव दल क्षतिग्रस्त इमारतों में तलाश अभियान चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंपों के बाद आपातकालीन टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। उन्होंने कहा कि ला गुएरा प्रांत इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा, ''कई इमारतें पूरी तरह ढह गई हैं और बचाव अभियान जारी है। ला गुएरा राज्य एक भीषण त्रासदी का सामना कर रहा है और व्यापक स्तर पर तबाही झेल रहा है।'' भूकंप का असर पड़ोसी देशों तक महसूस किया गया, और ब्राजील के अमेजन क्षेत्र में भी कई इमारतों को खाली कराया गया। -
दुबई. ईरान की धमकियों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी द्वारा सुझाए गए नए समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करते हुए कई तेल टैंकर बृहस्पतिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से आगे बढ़े। यह मार्ग ओमान के तट के समानांतर गुजरता है। इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में वैकल्पिक मार्ग खुलने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव कम होगा और अमेरिका के साथ जारी शांति वार्ता में ईरान की उस रणनीतिक बढ़त को भी कमजोर किया जा सकता है, जो उसे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर हासिल है। खाड़ी क्षेत्र के दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि वाशिंगटन इस नए समुद्री मार्ग के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बढ़ी है, लेकिन यह अब भी युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर से काफी कम है। इस बीच, लेबनान में इजराइल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्ला लड़ाकों के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई ने व्यापक युद्धविराम के लिए खतरा पैदा कर दिया है। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, सप्ताहांत में युद्धविराम लागू होने के बाद लेबनान पर इज़राइल के पहले हवाई हमले में बुधवार को दो लोगों की मौत हो गई। 'स्टोइक वॉरियर' नामक जहाज के साथ तेल टैंकरों का एक समूह बृहस्पतिवार तड़के संयुक्त अरब अमीरात और फिर ओमान के तट के पास से आगे बढ़ा। यह वैकल्पिक समुद्री मार्ग ओमान और संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) द्वारा निर्धारित किया गया है। समुद्री आंकड़े और विश्लेषण उपलब्ध कराने वाली 'लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस' के आंकड़ों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले सप्ताह 125 जहाज इस मार्ग से गुजरे, जबकि उससे पहले के सप्ताह में केवल 33 जहाजों ने इसका इस्तेमाल किया था। ईरान ने नए समुद्री मार्ग को अस्वीकार्य बताया है। नए समुद्री मार्ग और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की बढ़ती गतिविधियों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) की नौसैनिक शाखा ने बृहस्पतिवार को चेतावनी जारी की।
- बर्लिन। संचार प्रणाली में खराबी के कारण जर्मनी के रेलवे नेटवर्क को मंगलवार देर रात सभी ट्रेन रोकनी पड़ीं जिससे देशभर में यात्री फंस गए। रेलगाड़ियों को स्टेशनों पर रोक दिया गया और यात्री यह पता लगाने के लिए पूछताछ काउंटरों पर लंबी कतारों में खड़े रहे कि वे अपने गंतव्य तक कैसे पहुंचें। देश की प्रमुख रेलवे परिचालक कंपनी 'डॉयचे बान' ने संचार प्रणाली में खराबी की सूचना देने के करीब ढाई घंटे बाद मंगलवार देर रात करीब एक बजे बताया कि समस्या का समाधान कर लिया गया है और सेवाएं ''चरणबद्ध तरीके से'' बहाल की जा रही हैं। कंपनी ने बताया कि देशभर में 'ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस-रेलवे' (जीएसएम-आर) डिजिटल संचार प्रणाली में समस्या आई थी। इस प्रणाली का इस्तेमाल रेलवे नेटवर्क पर आंतरिक संचार के लिए किया जाता है। कंपनी ने बाद में बताया कि खराबी के कारण का पता लगा लिया गया है लेकिन उसने इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी। 'बिल्ड' समाचार पत्र ने डॉयचे बान की मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवलिन पाला के हवाले से कहा कि वे ''एक आपातकालीन प्रणाली की मदद से स्थिति को स्थिर करने में सफल रहे।'' 'डॉयचे बान' ने बताया कि सेवाएं बाधित रहने के दौरान यात्रियों को टैक्सी और होटल के वाउचर दिए गए। कंपनी ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए माफी मांगी। जर्मनी में हाल के वर्षों में ट्रेन संचालन में देरी और सेवाएं बाधित होने की शिकायतें लगातार बढ़ी हैं
- वाशिंगटन । अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को बाधित करने के लिए युद्ध शक्तियों संबंधी प्रस्ताव को मंगलवार को पहली बार मंजूरी दी। अमेरिकी सांसद युद्ध समाप्त करने के लिए देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर सतर्कता से नजर रख रहे हैं। यह युद्ध शुरू करने का फैसला अमेरिकी प्रशासन ने लिया था लेकिन अब उसे संसद से धन की जरूरत है। सीनेट ने युद्ध रोकने के लिए 10वीं बार प्रयास किया। इस प्रस्ताव के पक्ष में 50 तथा विरोध में 48 मत पड़े जो पिछले प्रयासों की तुलना में एक चौंकाने वाला बदलाव है। यह प्रस्ताव काफी हद तक प्रतीकात्मक है और इसे पूरी तरह कानून का दर्जा हासिल नहीं है लेकिन यह युद्ध और इसे समाप्त करने के लिए ईरान के साथ ट्रंप के समझौते को लेकर प्रतिनिधि सभा एवं सीनेट के कई रिपब्लिकन सांसदों की बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है। प्रतिनिधि सभा ने इस महीने की शुरुआत में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी।ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर इस प्रस्ताव पर मंगलवार रात नाराजगी जताई। उन्होंने मतदान को ''गलत समय पर कराया गया और निरर्थक'' बताते हुए कहा कि इससे ईरान को ''सहायता और समर्थन'' मिला है। सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शूमर ने कहा, ''सीनेट में बड़ी संख्या में रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों ने अमेरिकी जनता के बजाय बार-बार ट्रंप और उनके युद्ध का साथ दिया।'' शूमर ने कहा कि अमेरिकियों को ''ईरान में ट्रंप की ऐतिहासिक भूल'' की कीमत चुकानी पड़ी है। उन्होंने कहा, ''इसे इतिहास में अमेरिका की विदेश नीति के अब तक के सबसे खराब निर्णयों में से एक के रूप में याद किया जाएगा।'' इससे पहले युद्ध शक्तियों संबंधी प्रस्तावों के पक्ष में अधिकतम चार रिपब्लिकन सीनेटर ने मतदान किया था और मंगलवार को भी उन्होंने इसका समर्थन किया। इनमें अलास्का से लिसा मुर्कोव्स्की, मेन से सुसान कॉलिन्स, केंटकी से रैंड पॉल और लुइसियाना से बिल कैसिडी शामिल हैं। पेनसिल्वेनिया से डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया।ट्रंप ने इन चारों रिपब्लिकन नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, ''इन सीनेटर ने मेरा काम और कठिन बना दिया है।'' हाल में किसी अज्ञात कारण से अस्पताल में भर्ती केंटकी से मिच मैककॉनेल समेत दो रिपब्लिकन सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण रिपब्लिकन पार्टी के पास इस प्रयास को रोकने के लिए पूर्ण बहुमत नहीं था। सीनेटर डेव मैककॉर्मिक भी मतदान में शामिल नहीं हुए। यह मतदान ऐसे समय हुआ है, जब पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का मुख्यालय) मुख्य रूप से ईरान युद्ध के बाद गोला-बारूद और हथियारों के भंडार को फिर से भरने के लिए संसद से 80 अरब अमेरिकी डॉलर की मांग कर रहा है।
- वाशिंगटन। अमेरिका की एक संघीय अपीलीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को न केवल सीमा क्षेत्रों में, बल्कि पूरे देश में अवैध प्रवासियों के त्वरित निर्वासन की प्रक्रिया फिर शुरू करने की मंगलवार को अनुमति दे दी। 'डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट' के लिए अपीलीय अदालत की तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने अधीनस्थ अदालत के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसके तहत ट्रंप प्रशासन द्वारा त्वरित निष्कासन के दायरे का विस्तार करने पर अस्थायी रोक लगाई गई थी। संस्था एसीएलयू की आव्रजक अधिकार परियोजना से जुड़े वरिष्ठ स्टाफ अटॉर्नी आनंद बालकृष्णन ने एक बयान में कहा, ''त्वरित निर्वासन पर ट्रंप प्रशासन के जोर देने से लोग एक पक्षपातपूर्ण और त्रुटिपूर्ण व्यवस्था का शिकार होंगे।'' पीठ के सदस्य न्यायाधीश जस्टिन आर. वॉकर ने कहा कि वादी यह साबित नहीं कर सके कि त्वरित निष्कासन के दायरे का विस्तार संवैधानिक न्यायिक प्रक्रिया के अधिकारों का उल्लंघन करता है। उन्होंने अपने फैसले में लिखा कि प्रवासियों को निष्कासन संबंधी कार्रवाई की सूचना दी जाती है और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी प्रदान किया जाता है। न्यायाधीश वॉकर ने कहा कि प्रशासन पर यह जानकारी देने की कोई संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं है कि दो वर्ष से अधिक समय से अमेरिका में रह रहे प्रवासी त्वरित निर्वासन से राहत पाने के पात्र हो सकते हैं। उन्होंने आदेश में कहा, "संविधान के तहत आवश्यक यह है कि सरकार जिस कार्रवाई को अंजाम दे रही है और उसके आधार क्या हैं, इसकी स्पष्ट सूचना दी जाए तथा संबंधित व्यक्ति को जवाब देने का अवसर मिले।" यह फैसला रिपब्लिकन प्रशासन के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है, जो त्वरित निष्कासन की व्यवस्था के विस्तार को अपनी व्यापक निर्वासन नीति लागू करने का एक अहम साधन मानता है। त्वरित निष्कासन ऐसी प्रक्रिया है, जिसके तहत किसी प्रवासी को अदालत में न्यायाधीश के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना ही देश से निर्वासित किया जा सकता है। अब तक यह व्यवस्था मुख्य रूप से समुद्री मार्ग से आने वाले प्रवासियों या सीमा पार करने के तुरंत बाद सीमा पर अथवा उसके निकट पकड़े गए लोगों पर लागू की जाती रही है। जनवरी में ट्रंप प्रशासन ने इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाकर इसे पूरे अमेरिका में अवैध प्रवासियों पर लागू कर दिया था।
- दुबई। भारत ने ईरान में हालात में हाल में सुधार के बावजूद अपने नागरिकों को अगली सूचना तक वहां की गैर-जरूरी यात्राओं से परहेज करने की बुधवार को सलाह दी। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि वह ईरान में मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और हालिया सकारात्मक घटनाक्रम तथा समग्र हालात में आए सुधार को देखते हुए संशोधित यात्रा परामर्श जारी कर रहा है। दूतावास ने अपने परामर्श में कहा, ''हाल में हालात में सुधार के बावजूद भारतीय नागरिकों को अगली सूचना तक ईरान की सभी गैर-आवश्यक यात्राओं से बचने की सलाह दी जाती है।'' दूतावास ने परामर्श की प्रति सोशल मीडिया पर साझा की।इसमें कहा गया है कि वर्तमान में ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों और अपरिहार्य कारणों से वहां यात्रा करने वाले लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए, हर समय सतर्क रहना चाहिए तथा आसपास की परिस्थितियों के प्रति लगातार चौकस रहना चाहिए। दूतावास ने भारतीय नागरिकों से विश्वसनीय सूचना स्रोतों के माध्यम से स्थानीय घटनाक्रम पर कड़ी नजर बनाए रखने और स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने का भी आग्रह किया। परामर्श में ईरान में रह रहे सभी भारतीय नागरिकों तथा वहां पहुंचने वाले भारतीयों को अपनी जानकारी जल्द से जल्द भारतीय दूतावास में पंजीकृत कराने के लिए कहा गया। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत ने ऐसे कई परामर्श जारी किए हैं। यह संघर्ष 28 फरवरी को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया, जिसके बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की।
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लंदन. केअर स्टॉर्मर ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से सोमवार को इस्तीफा देने की घोषणा की। उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के चुनाव की समय-सीमा भी तय करते हुए कहा कि आने वाले हफ्तों में नए नेता का चयन कर लिया जाएगा और वह सितंबर तक पदभार संभाल लेंगे। स्टॉर्मर (63) ने कहा कि लेबर पार्टी के नए नेता के चुने जाने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे। उन्होंने सत्ता का सुचारू हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए नए नेता को अपना ''पूरा समर्थन'' देने का वादा किया। पिछले सप्ताह हुए एक अहम उपचुनाव में स्टॉर्मर के प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले एंडी बर्नहैम की जीत के बाद उनके प्रधानमंत्री पद से हटने की पृष्ठभूमि तैयार हुई। माना जा रहा कि बर्नहैम प्रधानमंत्री बनेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय '10 डाउनिंग स्ट्रीट' से अपने संबोधन में भावुक स्टॉर्मर ने कहा, ''मेरी पार्टी अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए मैं सबसे उपयुक्त व्यक्ति हूं?'' उन्होंने कहा, ''मैंने उस सवाल पर अपनी संसदीय पार्टी का जवाब सुना है और मैं उस जवाब को सम्मान के साथ स्वीकार करता हूं। मैंने जो भी फैसला लिया है, उसमें हमेशा उस देश को प्राथमिकता दी है जिससे मैं प्यार करता हूं। इसीलिए मैं लेबर पार्टी के नेता के पद से इस्तीफा दे रहा हूं।'' स्टॉर्मर ने कहा कि उन्होंने सोमवार सुबह महाराजा चार्ल्स तृतीय से बात करके उन्हें इस फैसले के बारे में जानकारी दी। अब वह लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति से अपने उत्तराधिकारी के चयन की समय-सीमा तय करने का अनुरोध करेंगे। इसके तहत नौ जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश, जो 17 जुलाई से निर्धारित है, से पहले नए नेता के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। स्टॉर्मर ने कहा, ''अगर मुकाबला होता है, तो इससे यह पक्का हो जाएगा कि सितंबर में संसद के फिर से शुरू होने से पहले नया नेता चुन लिया जाए। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, मैं प्रधानमंत्री के पद पर बना रहूंगा और सत्ता का सुचारू रूप से हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश करूंगा।'' उन्होंने कहा, "मैं अपने उत्तराधिकारी को पूर्ण और बिना शर्त समर्थन दूंगा। मुझे विश्वास है कि उन्हें ऐसा ब्रिटेन मिलेगा जो दो साल पहले मुझे मिले ब्रिटेन से कहीं ज्यादा मजबूत और न्यायपूर्ण है, आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार है और लेबर पार्टी को लगातार दूसरी बार सत्ता में वापस लाने में भी अधिक सक्षम है।'' स्टॉर्मर के नेतृत्व में लेबर पार्टी ने जुलाई 2024 के आम चुनाव में भारी जीत हासिल की थी। हाल के महीनों में कुछ विवादित फैसलों की वजह से प्रधानमंत्री के तौर पर उनकी लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है। भावुक दिख रहे स्टॉर्मर ने कहा, ''जब मैं देश की सबसे बड़ी जिम्मेदारी वाला पद छोड़ूंगा, तो मैं अपनी जिंदगी की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर अधिक समय दूंगा। मैं अपनी पत्नी विक का बेहतर पति बनने की कोशिश करूंगा, जिन्होंने अच्छे और बुरे हर दौर में मेरा मजबूती से साथ दिया है। साथ ही, मैं अपने प्यारे बच्चों का सबसे अच्छा पिता बनने का प्रयास करूंगा, जो मेरे गर्व और खुशी का सबसे बड़ा कारण हैं।''
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ओबबुर्गेन (स्विटजरलैंड). अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ शांति वार्ता ने फरवरी के आखिर में शुरू हुई जंग को खत्म करने के लिए "एक सफल अंतिम समझौते की अच्छी नींव" तैयार की है। वेंस ने अंतिम समझौते की तुलना एक मकान से करते हुए पत्रकारों से कहा, "हमने नींव रखी है। हमने घर तो नहीं बनाया है, लेकिन अमेरिकी लोगों के लिए एक अच्छी स्थिति तक पहुंचने के लिए हमने एक मजबूत नींव जरूर रखी है।" वेंस की ये टिप्पणियां तब आईं जब उन्होंने और ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघिर गालिबाफ ने सोमवार को दोनों देशों के बीच युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के मकसद से शुरुआती बातचीत का एक लंबा दौर पूरा किया। वेंस और अमेरिकी अधिकारियों ने कई मोर्चों पर प्रगति का दावा किया। इनमें ऐसे "तरीके" बनाना शामिल है जिनसे यह पक्का किया जा सके कि दुनिया भर में ऊर्जा की आपूर्ति के लिए अहम समुद्री रास्ते, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को खुला रखा जाए और दक्षिणी लेबनान में इजराइल और ईरान-समर्थित हिज़्बुल्ला लड़ाकों के बीच युद्धविराम बना रहे। बड़े पैमाने पर संघर्ष शुरू होने के कुछ ही समय बाद हिज़्बुल्ला और इजराइल के बीच युद्ध छिड़ गया; हिज़्बुल्ला ने उत्तरी इजराइल में आम लोगों की बस्तियों पर रॉकेट और ड्रोन दागे, जबकि इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के बड़े इलाकों पर कब्जा कर लिया। ईरान ने लेबनान में लड़ाई खत्म करने की दिशा में "बड़ी प्रगति" का जिक्र किया और इसे बातचीत की पहली असली परीक्षा बताया। इसके अलावा, युद्ध खत्म करने के अंतरिम समझौते के तहत अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में 60 दिन की छूट देने वाला लाइसेंस जारी किया। खास बात यह है कि इस लाइसेंस से ईरानी तेल का अमेरिका में आयात किया जा सकेगा। अमेरिका ने 1990 के दशक के बाद से ईरानी तेल का बड़े पैमाने पर आयात नहीं किया है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में इस लाइसेंस की घोषणा करते हुए "स्विट्जरलैंड में चल रही सार्थक बातचीत" का ज़िक्र किया; यह लाइसेंस 21 अगस्त तक लागू रहेगा। ट्रंप स्विट्जरलैंड में तो नहीं थे, लेकिन बातचीत पर उनका असर साफ दिख रहा था।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप "लेक ल्यूसर्न समिट" में शामिल नहीं हुए, लेकिन उनकी छाप को साफ तौर पर महसूस किया गया। ट्रंप के बयानों से बातचीत पर बुरा असर पड़ा; उन्होंने हज़ारों मील दूर से ऐसी बातें कहीं जिनसे ईरानियों को बुरा लगा। ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा कि "अमेरिकी राष्ट्रपति के अपमानजनक संदेश के प्रकाशन" के बाद बातचीत रुक गई थी। बाद में बातचीत फिर से शुरू हुई। वेंस ने इस बात का खंडन किया कि ट्रंप की धमकियों से बातचीत मुश्किल हो गई थी।
वेंस ने कहा, "नहीं, उन्होंने सिस्टम में कोई रुकावट नहीं डाली।" उन्होंने आगे कहा, "हां, उन्होंने बाहर जाने की धमकी जरूर दी थी, या कम से कम सोशल मीडिया पर ऐसी धमकियां आई थीं कि वे बाहर चले जाएंगे। लेकिन हम कल रात एक बजे के बाद तक बातचीत कर रहे थे, इसलिए वे बाहर नहीं गए।" उपराष्ट्रपति ने यह भी सुझाव दिया कि अमेरिकी प्रशासन अमेरिकी सोया, मक्का और गेहूं की खरीद के लिए ईरान की जब्त की गई संपत्ति को जारी करने पर सहमत हो सकता है। उन्होंने कहा कि ट्रंप के दामाद और अमेरिका की ओर से बातचीत करने वाले मुख्य लोगों में से एक, जेरेड कुशनर को कतर के अधिकारियों के साथ मिलकर यह विचार आया। वेंस ने कहा कि इस प्रक्रिया पर कतर की मंज़ूरी होगी और प्रतिबंध हटने के बाद जो ईरानी पैसा उपलब्ध होगा, उससे "ईरानी लोगों के फायदे के लिए" अमेरिकी उत्पाद खरीदे जाएंगे। मध्यस्थता करने वाले देशों कतर और पाकिस्तान ने सोमवार को बताया कि स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में घंटों चली बातचीत के बाद अमेरिका व ईरान एक रूपरेखा पर सहमत हो गए हैं। इस रूपरेखा का मकसद 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर पहुंचना है। उन्होंने इस प्रगति को "उत्साहजनक" बताया। मध्यस्थों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि बातचीत "सकारात्मक और रचनात्मक" माहौल में हुई।
वॉशिंगटन लौटने की योजना बना रहे वेंस ने कहा कि तकनीकी बातचीत बहुत जरूरी है।
वेंस ने पत्रकारों से कहा, "हम इसके लिए एक ढांचा तैयार करना चाहते थे ताकि उचित राजनीतिक निगरानी हो सके, लेकिन ज़ाहिर है, भले ही यह जगह बहुत खूबसूरत है, मैं अगले 60 दिनों तक यहां नहीं रह सकता।" अमेरिकी दूत कुशनर और स्टीव विटकॉफ कई तकनीकी मामलों को संभाल रहे हैं।


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