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दुबई. सऊदी अरब ने सोमवार को ईरान को आगाह किया कि अगर वह अरब देशों पर हमले करता रहा तो उसे अब तक का ''सबसे बड़ा नुकसान'' उठाना पड़ेगा। सऊदी अरब का यह बयान उस नए ड्रोन हमले के बाद आया, जिसमें जाहिर तौर पर उसके बड़े शायबा तेल क्षेत्र को निशाना बनाया गया। इसने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन द्वारा शनिवार को दिये गये इस बयान को भी खारिज कर दिया कि ईरान ने खाड़ी अरब देशों पर अपने हमले रोक दिए हैं। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "देश इस बात की पुष्टि करता है कि ईरानी पक्ष ने इस बयान पर अमल नहीं किया, न तो राष्ट्रपति के भाषण के दौरान और न ही उसके बाद। ईरान ने बिना किसी ठोस वजह के अपना आक्रमण जारी रखा है।" बयान में कहा गया कि ईरानी हमले का मतलब है, "तनाव में और वृद्धि, जिसका वर्तमान और भविष्य में संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा।
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दुबई. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का कहना है कि ईरान ने रविवार को ताजा हमलों में 16 बैलिस्टिक मिसाइलें और 117 से अधिक ड्रोन दागे हैं। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने सभी 16 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि 17वीं मिसाइल समुद्र में गिर गई। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने ईरान की ओर से दागे गए अधिकांश ड्रोन को आसमान में ही नष्ट कर दिया, लेकिन चार ड्रोन संयुक्त अरब अमीरात की धरती पर गिरे। मंत्रालय ने कहा कि वह इन हमलों का 'दृढ़तापूर्वक सामना' करने के लिए तैयार है। इससे पहले, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इजराइल और अमेरिका द्वारा जारी हमलों के मद्देनजर रविवार को पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमले बढ़ाने की धमकी दी थी।
- काठमांडू. रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह 'बालेन' नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक बन गए हैं। बालेन ने नेपाल के झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में के.पी. शर्मा ओली को लगभग 50,000 मतों के भारी अंतर से हराया। ओली चार बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। 'बालेन' के नाम से प्रसिद्ध बालेंद्र शाह राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। बालेन ने 2022 में काठमांडू के महापौर पद के लिए हुए चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। पिछले साल सितंबर में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हिंसक प्रदर्शनों के बाद ओली नीत गठबंधन सरकार गिर गयी थी। उसके बाद जेनरेशन जेड के युवाओं ने अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए 35 वर्षीय इंजीनियर बालेन को लोकप्रिय उम्मीदवार माना था। जेनरेशन जेड 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई पीढ़ी है। लेकिन बालेन ने उस समय अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह संसदीय चुनाव लड़कर पूर्ण कार्यकाल के लिए सरकार का नेतृत्व करना पसंद करेंगे। जनवरी में, वह रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली नवगठित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) में शामिल हो गए और जल्द ही उन्हें पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। काठमांडू के महापौर के रूप में, बालेन को व्यापक सुधारों और महानगर के सौंदर्यीकरण का श्रेय दिया जाता है। अपने त्यागपत्र में बालेन ने कहा, ''काठमांडू के महापौर के रूप में, मैंने महानगर और इसके निवासियों के कल्याण के लिए यथासंभव ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाया है।'' काठमांडू में जन्मे बालेन आयुर्वेद चिकित्सक राम नारायण शाह और गृहिणी ध्रुवदेवी शाह के सबसे छोटे पुत्र हैं। उन्हें बचपन से ही संगीत और कविता में रुचि थी और शिक्षा के दौरान उन्होंने रैप संगीत की ओर रुख किया। काठमांडू से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने के बाद, बालेन ने कर्नाटक के विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की।
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यरूशलम. इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को कहा कि इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला इसलिए किया क्योंकि तेहरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू कर दिया था और वह ''कुछ ही महीनों में परमाणु प्रतिरक्षा प्राप्त कर लेता''। नेतन्याहू ने मंगलवार को फॉक्स न्यूज से कहा कि ईरान पर हमला करना बेहद जरूरी था क्योंकि तेहरान अपने मिसाइल एवं परमाणु कार्यक्रमों को हमलों से बचाने के लिए नए भूमिगत ठिकाने बना रहा था। उन्होंने कहा, "ईरान ने नए ठिकाने, नए स्थल, भूमिगत बंकर बनाना शुरू कर दिया, जो उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु बम कार्यक्रम को कुछ ही महीनों में सुरक्षित कर देते। अगर अभी कोई कार्रवाई नहीं की जाती, तो भविष्य में भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाती।" इजराइली प्रधानमंत्री ने टीवी चैनल से कहा, ''हमें अभी कार्रवाई करनी पड़ी, इसका कारण यह है कि पिछले साल जून में हुए 12 दिवसीय युद्ध में उनके परमाणु ठिकानों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर हमला करने के बाद... उन्होंने नए ठिकाने और भूमिगत बंकर बनाने शुरू कर दिए, जो कुछ ही महीनों में उनके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु बम कार्यक्रम को सुरक्षित कर देते।'' उन्होंने कहा, ''अगर अभी कोई कार्रवाई नहीं की जाती, तो भविष्य में भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाती।''
यह नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले साल किए गए दावों के विपरीत है।इजराइली नेता ने कहा था कि इजराइल ने ईरान पर ''ऐतिहासिक विजय'' हासिल की है जो ''पीढ़ियों तक कायम रहेगी''। वहीं, ट्रंप ने दावा किया था कि ईरानी परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से ''नष्ट'' हो गया है। साक्षात्कार में नेतन्याहू ने इस बात से इनकार किया कि अमेरिका और इजराइल ईरान के खिलाफ ''अंतहीन युद्ध'' में लगे हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अभियान जल्द ही समाप्त हो जाएगा। इजराइली प्रधानमंत्री ने कहा, ''मैंने लोगों को यह कहते सुना है कि यहां एक अंतहीन युद्ध होने वाला है - लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि... ईरान में यह आतंकी शासन अपनी स्थापना के बाद से सबसे कमजोर दौर में है।'' उन्होंने कहा, ''यह एक त्वरित और निर्णायक कार्रवाई होने वाली है।''नेतन्याहू ने यह भी कहा कि अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों से ईरान में सत्ता परिवर्तन की परिस्थितियां उत्पन्न होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया की ''95 प्रतिशत'' समस्याएं ईरान के कारण उत्पन्न होती हैं, और शासन के पतन से इजराइल तथा उसके अरब और मुस्लिम पड़ोसियों के बीच शांति समझौतों की बाढ़ आ जाएगी। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि अमेरिका-इजराइल के अभियान से ''शांति के एक ऐसे युग की शुरुआत होगी जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी''। इजराइली नेता ने इन आरोपों का खंडन किया कि इजराइन ने अमेरिका को युद्ध में घसीटा है।उन्होंने कहा, ''यह हास्यास्पद है। डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेता हैं। वह वही करते हैं जो उन्हें अमेरिका के लिए सही लगता है। वह वही करते हैं जो उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सही लगता है।'' नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस्लामी गणराज्य से उत्पन्न खतरों को समझते हैं। -
न्यूयॉर्क/ अमेरिका में एक गैलन पेट्रोल की औसत कीमत रातोंरात 11 सेंट बढ़कर लगभग 3.11 डॉलर हो गई। वाहन संघ 'अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (एएए)' ने यह जानकारी दी। अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने से पहले ही पेट्रोल की कीमतें बढ़ रही थीं, क्योंकि तेल कंपनियां गर्मियों के लिए अलग तरह का ईंधन तैयार कर रही हैं। लेकिन युद्ध के कारण इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है।
मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतें पिछले एक साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। इसकी मुख्य वजह ईरान द्वारा किए गए जवाबी हमले हैं, जिनमें सऊदी अरब स्थित अमेरिकी दूतावास पर किया गया ड्रोन हमला भी शामिल है। अमेरिका के प्रमुख कच्चे तेल की कीमत 8.6 प्रतिशत बढ़कर 77.36 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 6.7 प्रतिशत बढ़कर 81.29 डॉलर प्रति बैरल हो गया। युद्ध के कारण कच्चे तेल का वैश्विक प्रवाह अवरुद्ध होने की चिंता के कारण सप्ताह की शुरुआत में वैश्विक तेल की कीमतों में उछाल आया। -
लंदन. पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण फंसे हवाई यात्रियों को निकालने के लिए सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात से कुछ गिनी-चुनी उड़ानों का संचालन किया गया, हालांकि इस क्षेत्र के ज्यादातर हिस्सों में वाणिज्यिक उड़ानें अब भी बंद हैं। उड़ानों की स्थिति की जानकारी देने वाली 'फ्लाइटरडार24' के अनुसार, सोमवार को तीन घंटे के दौरान अबू धाबी से इस्लामाबाद, पेरिस, एम्स्टर्डम, मुंबई, मॉस्को और लंदन जैसे शहरों के लिए एतिहाद एयरवेज की कम से कम 16 उड़ानें रवाना हुईं। हालांकि, विमानन कंपनी की वेबसाइट पर दिखाया गया कि उसकी सभी नियमित वाणिज्यिक उड़ानें बुधवार दोपहर तक निलंबित रहेंगी। लंबी दूरी की उड़ानें संचालित करने वाली विमानन कंपनियां एतिहाद एयरवेज, एमिरेट्स और फ्लाईदुबई ने सोमवार को कहा कि वे देश से सीमित संख्या में उड़ानें संचालित करेंगी। दुबई और अबू धाबी से सीमित संख्या में उड़ानें ऐसे समय में शुरू हुईं जब अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने "गंभीर सुरक्षा खतरे" के कारण अपने नागरिकों से संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, सऊदी अरब, मिस्र, लेबनान और ओमान समेत 13 देशों से तुरंत वाणिज्यिक उड़ानों से निकलने को कहा। एयरलाइन विश्लेषण कंपनी सिरियम के अनुसार, शनिवार से पश्चिम एशिया से आने-जाने वाली लगभग 32,000 उड़ानों में से करीब 13,000 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।
- वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ चार से पांच सप्ताह तक सैन्य अभियान जारी रह सकता है, लेकिन वह ''इससे ज्यादा समय तक के लिए भी'' तैयार हैं। उन्होंने सोमवार को व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही।ईरान पर इजराइल और अमेरिका के ताजा हमलों के बाद सोमवार को पश्चिम एशिया में युद्ध ने व्यापक रूप ले लिया। इसके बाद, ईरान और उसके सहयोगी देशों ने इजराइल, खाड़ी देशों और तेल-गैस उत्पादन वाले स्थानों पर हमला किया। हमले बढ़ना, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का मारा जाना, और किसी भी स्पष्ट योजना का न होना इस बात का संकेत है कि यह लड़ाई लंबे समय तक जारी रह सकती है तथा इसके व्यापक परिणाम हो सकते हैं।
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काठमांडू. नेपाल में सोमवार को होली का उत्सव शुरू हो गया और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने कहा कि यह त्योहार लोगों को सामाजिक विकृतियों और बुरी प्रथाओं को समाप्त करने के लिए प्रेरित करता है। राष्ट्रपति पौडेल ने देश के पहाड़ी जिलों में मनाए जा रहे रंगों के त्योहार के अवसर पर शुभकामनाएं दीं। हालांकि, तराई क्षेत्र में यह त्योहार मंगलवार को मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह त्योहार लोगों को सामाजिक विकृतियों और बुरी प्रथाओं को समाप्त करने के लिए प्रेरित करने के साथ ही देश में सामाजिक सद्भाव और एकता बनाए रखने में मदद कर सकता है। उत्सव की औपचारिक शुरूआत सात फरवरी को काठमांडू के बसंतपुर दरबार चौक पर 32 फुट से अधिक लंबी बांस की छड़ी 'चिर' की स्थापना के साथ हुयी। रंग-बिरंगे कपड़े छड़ी पर बांधे गए, जो उत्सव के प्रारंभ का प्रतीक था। हालांकि, लोग होली का मुख्य दिन फाल्गुन महीने की पूर्णिमा के दिन मनाते हैं, जो हिंदू पंचांग का एक महत्वपूर्ण महीना है और मुख्य रूप से सर्दियों से वसंत ऋतु में आने का प्रतीक है। सोमवार की आधी रात नेपाल में पांच मार्च को होने वाले प्रतिनिधि सभा चुनावों से पहले चुनाव प्रचार का आखिरी दिन भी है। त्योहार के बावजूद, काठमांडू और अन्य जगहों पर विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार, जिनमें स्वतंत्र उम्मीदवार भी शामिल हैं, अपना चुनाव प्रचार करते नजर आ रहे हैं।
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दुबई। ईरान की संसद के अध्यक्ष ने रविवार को अमेरिका और इजराइल के नेताओं को ''घृणित अपराधी'' करार दिया और कहा कि ईरान पर हमले के जिम्मेदार लोगों को उचित जवाब दिया जाएगा। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कलीबाफ ने एक टेलीविज़न संबोधन में यह टिप्पणी की। शनिवार को शुरू हुए हमलों के बाद से कलीबाफ कैमरे पर आने वाले सबसे उच्च पदस्थ अधिकारी हैं। उन्होंने कहा, ''आप सीमाएं लांघ गए हैं और आपको इसकी कीमत चुकानी होगी। हम आपको ऐसा करारा जवाब देंगे कि आप खुद रहम की भीख मांगने पर मजबूर हो जाएंगे।''
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ब्रसेल्स। यह कब तक चलेगा? क्या यह और बढ़ेगा? ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर और ईरान के साथ जारी टकराव का हम पर और दुनिया की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा? शनिवार को ये सवाल पश्चिम एशिया और दुनियाभर के लोगों की जेहन में छाए रहे। हालांकि, अमेरिका-इजराइल के ईरान पर किए गए हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने संयमित प्रतिक्रिया दी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ घंटे पहले खोमेनेई की मौत की घोषणा करते हुए कहा कि इससे ईरानियों को अपने देश की बागडोर अपने हाथों में ''वापस लेने का सबसे बड़ा मौका'' मिला है। ईरान के सरकारी मीडिया ने रविवार तड़के 86 वर्षीय नेता की मौत की पुष्टि की लेकिन मौत की वजह नहीं बताई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आपात बैठक बुलाई ।
वहीं, एक बयान में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अमेरिका-ईरान से फिर से बातचीत शुरू करने का आह्वान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके देश ईरान पर हुए हमलों में शामिल नहीं हैं, लेकिन वे अमेरिका, इजराइल और क्षेत्र के सहयोगी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। ये तीनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत से समाधान की कोशिशों में आगे रहे हैं।उन्होंने कहा, "हम क्षेत्र के देशों पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। ईरान को बिना सोचे समझे सैन्य हमले करने से बचना चाहिए। आखिर में, ईरानी लोगों को अपना भविष्य खुद तय करने देना चाहिए।" बाद में, आपात सुरक्षा बैठक में मैक्रों ने कहा कि ईरान पर हुए हमलों के बारे में फ्रांस को न पहले से बताया गया था और न ही फ्रांस इसमें शामिल था। उन्होंने कहा कि बातचीत से समाधान निकालने की कोशिशें और तेज करनी चाहिए।मैक्रों ने कहा, "ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उसकी बैलिस्टिक गतिविधियों और क्षेत्र में अस्थिरता जैसे मुद्दे सिर्फ हमलों से ही हल हो जाएंगे, यह सोचना गलत है।" 22 देशों के अरब लीग ने ईरान के हमलों को "शांति का समर्थन करने और स्थिरता लाने की कोशिश करने वाले देशों की संप्रभुता का खुला उल्लंघन" बताया। यह समूह पहले भी इजराइल और ईरान के ऐसे कदमों की निंदा करता रहा है जिनसे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने का खतरा हो सकता है। मोरक्को, जॉर्डन, सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात ने कुवैत, बहरीन, कतर और अमीरात समेत क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डो को निशाना बनाकर किए गए ईरानी हमलों की निंदा की। पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के समय में सीरिया इस क्षेत्र में ईरान का बहुत करीबी सहयोगी था और इजराइल का कड़ा आलोचक भी था। लेकिन सीरिया के विदेश मंत्रालय के बयान में सिर्फ ईरान की निंदा की गई, जो दिखाता है कि नयी सरकार आर्थिक रूप से शक्तिशली देशों और अमेरिका के साथ रिश्ते फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। सऊदी अरब ने कहा कि वह "ईरान की विश्वासघाती आक्रामक कार्रवाई और संप्रभुता के खुले उल्लंघन की कड़े शब्दों में निंदा करता है।" ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान ने बयान में कहा कि अमेरिका की कार्रवाई "अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के सिद्धांत का उल्लंघन है। विवाद शुत्रता और खून-खराबे से नहीं, शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाए जाने चाहिए।" इस पूरे मामले पर देशों के बयान बेहद संयमित शब्दों में आ रहे हैं।न्यूजीलैंड ने खुलकर पूरा समर्थन नहीं किया, लेकिन शनिवार को कहा कि अमेरिका-इजराइल के हमले ईरान सरकार को भविष्य का खतरा बनने से रोक रहे हैं। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्जन और विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने संयुक्त बयान में कहा, "किसी सरकार की वैधता उसके लोगों के समर्थन पर टिकी होती है। ईरानी शासन बहुत पहले ही वह समर्थन खो चुका है।" रूस के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को "पहले से तय और बिना उकसावे का, एक संप्रभु और संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश पर सशस्त्र हमला" बताया। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका और इजराइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम की चिंता की ''आड़'' ले रहे हैं, जबकि उनका असली मकसद सत्ता को बदलना है। इसी तरह चीन की सरकार ने कहा कि वह ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों को लेकर "बहुत चिंतित" है। चीन ने सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने और फिर से बातचीत शुरू करने का आह्वान किया। चीन के विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, "ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और उसके क्षेत्र की अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।" अमेरिका के साथ हाल में तनावपूर्ण रहे संबंधों के बावजूद कनाडा ने भी इस सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, "ईरान का इस्लामी शासन पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और आतंक का सबसे बड़ा स्रोत है।" कई देशों में चिंता साफ दिख रही है।नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ आइडे ने नॉर्वे के प्रसारक एनआरके से बातचीत में कहा कि उन्हें चिंता है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नाकाम होने का मतलब पश्चिम एशिया में "एक नया, बड़ा युद्ध" हो सकता है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता संगठन 'इंटरनेशनल कैंपेन टू अबोलिश न्यूक्लियर वेपन' ने अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। इस संगठन की कार्यकारी निदेशक मेलिसा पार्के ने कहा, "ये हमले पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना हैं। इससे तनाव और बढ़ सकता है, साथ ही परमाणु हथियारों के विस्तार और परमाणु हथियार के इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ सकता है।" यूरोपीय संघ (ईयू) के नेताओं ने शनिवार को संयुक्त बयान जारी करके सभी पक्षों से संयम बरतने और क्षेत्र में कूटनीतिक प्रयास बढ़ाने की अपील की, ताकि "परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित" की जा सके। अरब लीग ने भी सभी अंतरराष्ट्रीय नेताओं से कहा कि वे "जितनी जल्दी हो सके तनाव कम करने" के लिए काम करें, ताकि क्षेत्र को अस्थिरता और हिंसा की मार से बचाया जा सके, और फिर से बातचीत की राह अपनाई जा सके। - इस्लामाबाद/कराची/लाहौर । पाकिस्तान के कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के गेट तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच रविवार को हुई झड़पों में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। अमेरिका-इजराइल के हवाई हमले में शनिवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसक झड़पें और आगजनी की घटनाएं हुई। खामेनेई के मारे जाने की खबर के बाद पाकिस्तान के शिया मुसलमानों का गुस्सा भड़क उठा, जिनकी आबादी 24 करोड़ पाकिस्तानी लोगों में से 20 प्रतिशत है। इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा कि वह कराची और लाहौर में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में जारी प्रदर्शनों की खबरों पर नजर रख रहा है। वहीं, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने नागरिकों से कानून अपने हाथ में न लेने और ''शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने'' का अनुरोध किया है। सिंध प्रांत के तटीय शहर कराची में हिंसक झड़पें हुईं, जहां आक्रोशित लोगों ने माई कोलाची रोड पर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की इमारत पर हमला करने की कोशिश की और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। कराची सिविल अस्पताल (सीएचके) के ट्रॉमा सेंटर के कार्यकारी निदेशक डॉ. मोहम्मद साबिर मेमन ने डॉन को बताया कि वाणिज्य दूतावास के पास हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान 10 लोग मारे गए और 31 अन्य घायल हो गए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक असद रजा ने कहा कि भीड़ द्वारा पुलिस पर हमला शुरू किए जाने के बाद, उन्होंने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले और रबड़ की गोलियों का इस्तेमाल किया। अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हो गए थे, और जब वे अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में घुसने की कोशिश कर रहे थे, तब पुलिस ने उन पर गोली चला दी। सिंध की पुलिस सर्जन डॉ. सुमैया सैयद ने बताया कि सिविल अस्पताल में 10 शव लाए गए, जिनमें से कुछ पर गोली लगने के निशान थे। सैयद ने बताया कि अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में करीब 30 घायलों का इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ''घायलों में चार पुलिसकर्मी शामिल हैं।'' सिंध के सूचना मंत्री के प्रवक्ता हुसैन मंसूर ने झड़प में लोगों की मौत पर ''गहरा दुख'' व्यक्त किया।उन्होंने एक बयान में कहा, ''प्रदर्शनकारी अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के सुरक्षा घेरे को तोड़कर अंदर घुस गए और तोड़फोड़ की।'' लाहौर, इस्लामाबाद के साथ ही पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के गिलगित-बाल्टिस्तान (जीबी) के गिलगित और स्कार्दू शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए, जहां एक बड़ी शिया आबादी है। गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थिति तब गंभीर हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने भारत और पाकिस्तान से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (यूएनएमओजीआईपी) के कार्यालयों में आग लगा दी। उन्होंने एक स्कूल, पुलिस अधीक्षक के कार्यालय और आगा खान ग्रामीण सहायता कार्यक्रम (एकेआरएसपी) के कार्यालय में भी आग लगा दी। डॉन ने कहा कि अधिकारियों ने स्कार्दू जिले में कर्फ्यू लगा दिया है, जबकि जीबी पुलिस ने एक बयान में कहा है कि पाकिस्तान दंड संहिता (पीपीसी) की धारा 245 के तहत पाकिस्तानी सेना को बुलाया गया है। इसने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों ने काराकोरम राजमार्ग (केकेएच) को कई स्थानों पर अवरुद्ध कर दिया।लाहौर में सैकड़ों लोगों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को घेर लिया और उनमें से कुछ ने वाणिज्य दूतावास भवन में जबरन घुसने की कोशिश भी की। हालांकि, उनमें से कुछ लोग कथित तौर पर इमारत में प्रवेश करने में कामयाब हो गए, लेकिन उन्हें दूतावास के सुरक्षाकर्मियों ने पकड़ लिया और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया। पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''खामेनेई की हत्या की पुष्टि होने के बाद, शिया संगठन मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन (एमडब्ल्यूएम) के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता लाहौर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर एकत्र होने लगे। उस समय अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात नहीं थे।'' उन्होंने बताया कि बाद में भारी संख्या में पुलिस बल को घटनास्थल की सुरक्षा के लिए भेजा गया।प्रदर्शनकारियों ने 'अमेरिका मुर्दाबाद' के नारे लगाए और उनमें से कई लोग ईरान के सर्वोच्च नेता की तस्वीर लिए रोते हुए देखे गए। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी और प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति दे दी, हालांकि, दूतावास के आसपास की स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी रही क्योंकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुरोध के बावजूद प्रदर्शनकारी स्थानीय समयानुसार शाम सात बजे तक वहां से नहीं हटे। इस्लामाबाद में प्रदर्शनकारियों को अमेरिकी दूतावास की ओर बढ़ने से रोक दिया गया, जबकि शहर प्रशासन ने राजधानी में धारा 144 लागू करके सभी सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया। प्रशासन ने चेतावनी दी है, ''किसी भी प्रकार के विरोध, प्रदर्शन या सभा के मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।'' अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में कहा कि वह कराची और लाहौर में अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों पर हो रहे प्रदर्शनों की खबरों के साथ-साथ इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास और पेशावर में वाणिज्य दूतावास में अतिरिक्त प्रदर्शनों के आह्वान पर नजर रख रहा है। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ''अयातुल्ला खामेनेई की शहादत'' के बाद पाकिस्तान का हर नागरिक उसी तरह दुखी है जैसे ईरान के लोग शोक मना रहे हैं। उन्होंने कहा, ''हम सभी ईरान के लोगों के साथ हैं। (लेकिन) हम नागरिकों से अनुरोध करते हैं कि वे कानून को अपने हाथ में न लें और शांतिपूर्वक अपना विरोध दर्ज कराएं।'' इसके अलावा, नक़वी ने प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से मुलाकात की और उन्हें कानून-व्यवस्था की स्थिति के बारे में जानकारी दी। इस बीच, सिंध प्रांत में प्रांतीय सरकार ने घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा करने और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगाने के लिए एक उच्चस्तरीय संयुक्त जांच दल (जेआईटी) का गठन किया। सिंध के गृह मंत्री जियाउल हसन लंगर ने कराची के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक से विस्तृत जानकारी मांगते हुए इस बात पर जोर दिया कि ''किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।'' भाषा
- नयी दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, उसको निशाना बनाकर किए गए ईरानी सैन्य हमलों में मामूली रूप से घायल हुए 58 लोगों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि उसे भारतीय नागरिक के घायल होने की जानकारी है और वह अस्पताल अधिकारियों के संपर्क में है। मिशन ने सोशल मीडिया पर कहा, "भारतीय नागरिक खतरे से बाहर है। हम हरसंभव सहायता प्रदान कर रहे हैं।"संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ईरानी हमलों में तीन लोग मारे गए और 58 लोग मामूली रूप से घायल हुए। अमेरिका और इजराइल द्वारा शनिवार को ईरान पर हमला करने के बाद, ईरान ने कई खाड़ी देशों में इजराइली और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमलों को अंजाम दिया है। रविवार तड़के तेहरान द्वारा देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की इजरायल-अमेरिका के हमलों में मौत की घोषणा किए जाने के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई तेज हो गई। संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ईरान द्वारा हमले की शुरुआत से लेकर अब तक उसकी सेना ने 165 बैलिस्टिक मिसाइलों, दो क्रूज मिसाइलों और 541 ड्रोन के हमलों को झेला है। इसमें कहा गया है, "कुल 541 ईरानी ड्रोन हमले हुए, जिनमें से 506 को रोककर नष्ट कर दिया गया, जबकि 35 देश के भीतर गिरे, जिससे भौतिक क्षति हुई।" इसमें कहा गया है, "इन घटनाओं के परिणामस्वरूप पाकिस्तानी, नेपाली और बांग्लादेशी नागरिकों में से तीन की मौत हो गई और अमीराती, मिस्र, इथियोपियाई, फिलिपिनो, पाकिस्तानी, ईरानी, भारतीय, बांग्लादेशी, श्रीलंकाई, अजरबैजानी, यमनी, युगांडा, इरिट्रियाई, लेबनानी और अफगान नागरिकों में 58 लोग मामूली रूप से घायल हो गए।" संयुक्त अरब अमीरात के भीतर वह सटीक स्थान जहां भारतीय नागरिक को चोट लगी, अभी तक स्पष्ट नहीं है।
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नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान को किसी भी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि वह उस देश पर ऐसी ताकत से हमला करेंगे जो पहले कभी नहीं देखी गई।
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर ईरान को लेकर नई चेतावनी जारी की है। ईरान लगातार हमले जारी रखे हुए है। ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हमले में मौत के बाद ईरानी अधिकारी ने मुंहतोड़ जवाब देने और अमेरिका और इजरायल से बदला लेने की बात कही है।रविवार को ट्रूथ सोशल पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पोस्ट में लिखा, “ईरान ने अभी कहा है कि वे आज बहुत जोरदार हमला करेंगे, जितना पहले कभी नहीं हुआ। लेकिन बेहतर होगा कि वे ऐसा न करें, क्योंकि अगर वे ऐसा करते हैं, तो हम उन पर ऐसी ताकत से हमला करेंगे जो पहले कभी नहीं देखी गई!”ईरान के इस्लामिक रिपब्लिक गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने सरकारी टेलीविजन पर सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद, उनके हत्यारों को सजा देने की कसम खाई है और वादा किया कि जवाब अमेरिका और इजरायल के खिलाफ इतिहास का सबसे भयानक हमला होगा।अपने आधिकारिक टेलीग्राम पेज पर पोस्ट किए गए एक बयान में आईआरजीसी ने कहा, “उम्माह के इमाम के हत्यारों को कड़ी, पक्की और अफसोसनाक सजा देने के लिए ईरानी राष्ट्र का बदला लेने का हाथ उन्हें जाने नहीं देगा। आईआरजीसी, आर्म्ड फोर्सेज और बासिज फोर्सेज अपने नेता की विरासत को बचाने, अंदरूनी और बाहरी साजिशों के खिलाफ मजबूती से खड़े रहने और इस्लामिक देश के खिलाफ हमलावरों को सबक सिखाने वाली सजा देने में उनके रास्ते पर मजबूती से चलते रहेंगे।”आईआरजीसी ने घोषणा की कि उसने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 का पांचवां राउंड शुरू किया है, जिसमें हिंद महासागर समेत पूरे इलाके में गोला-बारूद ले जा रहे और ईंधन भरने वाले टैंकरों पर अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है।ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने अमेरिका और इजरायल के नेताओं को गंदे अपराधी करार दिया और कहा कि ईरान पर उनके लगातार हमलों के लिए “बहुत बुरी सजा” मिलेगी। गालिबफ की यह बात एक टेलीविजन संबोधन में आई। शनिवार को हमले शुरू होने के बाद से कैमरे पर दिखने वाले वह सबसे ऊंचे पद के अधिकारी हैं। उन्होंने कहा, “आपने हमारी लाल रेखा पार कर ली है और आपको इसकी कीमत चुकानी होगी। हम इतनी बुरी सजा देंगे कि आप खुद भीख मांगने पर मजबूर हो जाएंगे।” -
नई दिल्ली। ईरान के साथ जारी जंग के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरानी नागरिकों के लिए एक वीडियो संदेश जारी किया है। इजरायली पीएम ने कहा कि हम ईरान के बहादुर लोगों के जुल्म की जंजीरों से आजाद होने के लिए हालात बनाएंगे। ईरान के नागरिकों, इस मौके को हाथ से मत जाने दो।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो जारी कर कहा, “आने वाले दिनों में हम आतंकवादी शासन के हजारों ठिकानों पर हमला करेंगे। हम ईरान के बहादुर लोगों के लिए जुल्म की जंजीरों से आजाद होने के लिए हालात बनाएंगे और इसी वजह से, मैं एक बार फिर आपसे कहता हूं, ईरान के नागरिकों, इस मौके को हाथ से जाने मत देना। यह एक ऐसा मौका है, जो हर पीढ़ी में सिर्फ एक बार आता है। खाली मत बैठिए, क्योंकि आपका पल जल्द ही आएगा।पीएम नेतन्याहू ने आगे कहा, “वह पल जब आपको सड़कों पर उतरना होगा, लाखों की संख्या में सड़कों पर आना होगा ताकि काम पूरा हो सके, उस आतंक के शासन को उखाड़ फेंका जा सके, जिसने आपकी जिंदगी को कड़वा बना दिया है। आपकी तकलीफ और कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी। जिस मदद का आपको इंतजार था, वह अब आ गई है। मदद आ गई है, और अब एक ऐतिहासिक मिशन के लिए एकजुट होने का समय आ गया है। ईरान के नागरिकों, फारसियों, कुर्दों, अजेरियों, अहवाजियों और बलूचियों, अब समय आ गया है कि आप अपनी ताकतों को एकजुट करके शासन को उखाड़ फेंके और अपना भविष्य सुरक्षित करें।”इससे पहले इजरायली पीएम ने कहा था, “आज हमने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम में शामिल कई बड़े नेताओं को मार गिराया है और हम इस सरकार की कई जगहों को टारगेट करते रहेंगे। हमने उस जगह को टारगेट किया है जहां खामेनेई थे।”उन्होंने आगे कहा, “यह तानाशाह अब नहीं रहा। आज सुबह हमने अयातुल्लाह सरकार के बड़े अधिकारियों, रिवोल्यूशनरी गाईस कमांडरों और न्यूक्लियर प्रोग्राम के बड़े लोगों को खत्म कर दिया, और हम ऐसा करते रहेंगे। अगले कुछ दिनों में, हम आतंकी सरकार के हजारों और ठिकानों को निशाना बनाएंगे।”दूसरी तरफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के हमलों का बदला लेना अपना कानूनी हक और जिम्मेदारी मानता है। रविवार को ईरानी सरकारी मीडिया पर जारी एक बयान में, पेजेशकियन ने कहा कि सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को दुनिया के सबसे बुरे दुश्मन के हाथों मारा गया। पेजेशकियन ने कहा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान इस ऐतिहासिक जुर्म के गुनहगारों और कमांडरों के खिलाफ खून-खराबे और बदला लेने को अपनी जिम्मेदारी और कानूनी हक मानता है और इस बड़ी जिम्मेदारी और फर्ज को पूरी ताकत से पूरा करेगा।” -
नई दिल्ली। इजरायल के साथ युद्ध के बीच ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खामेनेई की मौत को लेकर कहा कि ईरान में अब शांति आएगी। हालांकि, शुरुआत में ईरानी मीडिया ने पीएम नेतन्याहू के दावे को खारिज किया था, लेकिन बाद में उन्होंने भी खामेनेई की मौत की पुष्टि कर दी।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, “आज हमने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम में शामिल कई बड़े नेताओं को मार गिराया है और हम इस सरकार की कई जगहों को टारगेट करते रहेंगे। हमने उस जगह को टारगेट किया है जहां खामेनेई थे।” उन्होंने आगे कहा, “यह तानाशाह अब नहीं रहा। आज सुबह हमने अयातुल्लाह सरकार के बड़े अधिकारियों, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडरों और न्यूक्लियर प्रोग्राम के बड़े लोगों को खत्म कर दिया, और हम ऐसा करते रहेंगे। अगले कुछ दिनों में, हम आतंकी सरकार के हजारों और ठिकानों को निशाना बनाएंगे।”इजरायली डिफेंस फोर्स ने जानकारी दी है कि पश्चिमी और मध्य ईरान में आईडीएफ ने 30 से ज्यादा टारगेट पर हमला किया, जिसमें एरियल डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्चर, शासन के टारगेट और मिलिट्री कमांड सेंटर शामिल हैं। आईडीएफ इंटेलिजेंस से गाइडेड, इजरायली एयर फोर्स के दर्जनों फाइटर जेट्स ने पश्चिमी और मध्य ईरान में ईरानी आतंकी शासन के बैलिस्टिक मिसाइल ऐरे और एरियल डिफेंस सिस्टम को कमजोर करने के मकसद से हमला किया।आईडीएफ ईरानी आतंकी शासन के बैलिस्टिक मिसाइल ऐरे और एरियल डिफेंस सिस्टम को कमजोर करना जारी रखेगा। इजरायली एयरफोर्स ने बताया कि ईरान से इजरायल के इलाके की ओर लॉन्च की गई मिसाइलों का पता चलने के बाद देश भर के कई इलाकों में अलर्ट एक्टिवेट कर दिए गए हैं। लोगों से अपील है कि वे होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन करें। इस समय, एयर फोर्स खतरे को दूर करने के लिए जहां भी जरूरी हो, इंटरसेप्ट करने और स्ट्राइक करने के लिए काम कर रही है। डिफेंस पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है और इसलिए होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन करते रहना जरूरी है।इसके अलावा, दुबई के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हवाई हमले से निकले मलबे की वजह से जेबेल अली पोर्ट के एक बर्थ में आग लग गई। दुबई सिविल डिफेंस टीमों ने तुरंत कार्रवाई की और आग को पूरी तरह बुझाने की कोशिश जारी रखी है। किसी के घायल होने की खबर नहीं है। अधिकारियों ने लोगों से 7 जुलाई, 2021 की जेबेल अली पोर्ट आग का पुराना वीडियो शेयर न करने की अपील की है, क्योंकि इससे गलत जानकारी फैल सकती है। जैसे ही और जानकारी मिलेगी, दी जाएगी। बहरीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट को ड्रोन से निशाना बनाया गया, जिससे बिना किसी जान के नुकसान हुआ, और यह घटना ऐसे समय में हुई जब संबंधित अधिकारी उस जगह को सुरक्षित करने के लिए काम शुरू कर रहे थे। -
दुबई. दक्षिणी ईरान में एक बालिका विद्यालय पर इजराइल-अमेरिका के हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 40 हो गई है। सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने शनिवार को यह जानकारी दी। ईरान के होर्मोज़गान प्रांत के मीनाब शहर में हुए हमले में कम से कम 45 अन्य लोग घायल भी हुए हैं। शहर में ईरान के अर्धसैनिक बल 'रिवोल्यूशनरी' गार्ड का एक अड्डा है।
अमेरिका और इजराइल दोनों ने ही अभी तक इस अभियान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। -
तेहरान. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान की घोषणा के बाद भारत ने शनिवार को ईरान और इजराइल में रहने वाले अपने नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने और सतर्क रहने की सलाह दी। ईरान में भारतीय दूतावास ने शनिवार को अपने नागरिकों के लिए एक परामर्श जारी करते हुए उनसे ''अत्यधिक सावधानी बरतने'' और ''जहां तक संभव हो घर के अंदर रहने'' की अपील की है। यह परामर्श क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच जारी किया गया है। दूतावास ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''बदलते घटनाक्रम को देखते हुए ईरान में सभी भारतीय नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने, अनावश्यक आवाजाही से बचने और जहां तक संभव हो घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है।'' दूतावास ने कहा कि सभी भारतीय नागरिक खबरों पर नजर बनाए रखें, आसपास की स्थिति के प्रति जागरूक रहें और भारतीय दूतावास से मिलने वाले आगे के निर्देशों का इंतजार करें। भारत ने इजराइल में रह रहे अपने नागरिकों के लिए भी परामर्श जारी करते हुए उन्हें ''अत्यधिक सावधानी बरतने और हर समय सतर्क रहने'' की सलाह दी है। भारत ने अपने परामर्श में कहा, ''क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए इजराइल में रह रहे सभी भारतीय नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने और हर समय सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।'' सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा गया है, ''भारतीय नागरिक इजराइली अधिकारियों और होम फ्रंट कमांड द्वारा जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों और निर्देशों का सख्ती से पालन करें।'' परामर्श में कहा गया है, ''सभी भारतीय नागरिक निर्धारित आश्रय स्थलों के नजदीक रहें और अपने निवास या कार्यस्थल के आसपास मौजूद सुरक्षित स्थानों के बारे में जानकारी रखें।'' इसमें कहा गया है, ''भारतीय नागरिकों को अगले आदेश तक इजराइल के भीतर गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी जाती है। नागरिकों से स्थानीय समाचार, आधिकारिक घोषणाओं और आपातकालीन अलर्ट पर नियमित रूप से नजर रखने को कहा जाता है।'' भारतीय दूतावास ने कहा कि वह संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी जानकारी जारी करता रहेगा। ईरान पर हमले के कुछ घंटों बाद संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और जॉर्डन समेत खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों में स्थित भारतीय मिशनों ने शनिवार को अपने नागरिकों के लिए परामर्श जारी किया और उनसे ''अत्यधिक सतर्क रहने'' तथा स्थानीय अधिकारियों की सलाह का पालन करने की अपील की। संयुक्त अरब अमीरात में अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने, सावधानी बरतने, सतर्क रहने और अधिकारियों तथा दूतावास द्वारा जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों और परामर्शों का पालन करने को कहा। रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने सऊदी अरब में रह रहे सभी भारतीयों से सतर्क रहने और वहां लागू सुरक्षा दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की। 'एक्स' पर जारी पोस्ट में कहा गया कि रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दा स्थित वाणिज्य दूतावास सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी परामर्श जारी करते रहेंगे। दूतावास ने 24 घंटे के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। जॉर्डन में भारतीय दूतावास ने कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय स्थिति को देखते हुए सभी भारतीय नागरिक और पर्यटक अत्यधिक सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और स्थानीय अधिकारियों की सलाह का पालन करें। साथ ही भारतीय पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन प्रभावित होने से पहले तुरंत देश छोड़ दें। बहरीन में भारतीय दूतावास ने भी नागरिकों से सावधानी बरतने और दूतावास व स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी खबरों और परामर्शों पर नजर रखने को कहा। रामल्ला में फलस्तीन में भारत के प्रतिनिधि कार्यालय ने वहां मौजूद भारतीयों से सतर्क रहने, स्थानीय सुरक्षा और आपातकालीन निर्देशों का पालन करने तथा अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है।
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नई दिल्ली। भारत ने शनिवार को इजरायल में रहने वाले अपने नागरिकों को सलाह दी कि वे ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हवाई हमले के बाद अलर्ट रहें।एक आधिकारिक बयान में, इजरायल में भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की।
दूतावास ने भारतीय प्रवासियों को चौकन्ना और सतर्क रहने की सलाह दी है। इसके अनुसार, “इलाके में मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए, इजरायल में सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे बहुत सावधानी बरतें और हर समय चौकन्ने रहें। भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे इजरायली अधिकारियों और होम फ्रंट कमांड द्वारा जारी सेफ्टी गाइडलाइंस और निर्देशों का सख्ती से पालन करें।”एडवाइजरी में सुरक्षित क्षेत्र के पास रहने की अहमियत पर भी जोर दिया गया। इसमें कहा गया कि सभी भारतीय नागरिक तय शेल्टर के पास रहें और अपने रहने की जगह या काम की जगह के सबसे पास की सुरक्षित जगहों के बारे में पता करके रखें।बयान में कहा गया, “भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि अगली सूचना तक इजरायल के अंदर सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचें। नागरिकों को स्थानीय मीडिया, आधिकारिक ऐलान और इमरजेंसी अलर्ट पर नियमित नजर रखने के लिए कहा जाता है।”दूतावास ने बदलते हालात के दौरान भारतीय नागरिकों को लगातार मदद का भरोसा भी दिया है।इसमें आगे कहा गया, “किसी भी इमरजेंसी में, भारतीय नागरिक 24/7 हेल्पलाइन +972-54-7520711 के जरिए तेल अवीव में भारतीय दूतावास से संपर्क कर सकते हैं। ईमेल आईडी है- सीओएनएस1डॉटतेलअवीवएटएमईएडॉटजीओवीडॉटइन। दूतावास संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार जुड़ा हुआ है और जरूरत पड़ने पर अपडेट जारी करता रहेगा।”यह एडवाइजरी शनिवार को तेहरान में हुए कई जोरदार धमाकों के बाद आई है, जिसे इजरायल ने ईरान से प्रिवेंटिव यानी एहतियात के तौर पर “बचाव के लिए” मिसाइल हमले बताया है।लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटनाक्रम से इलाके में तनाव तेजी से बढ़ा है।ये हमले अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित न्यूक्लियर समझौते को लेकर बढ़ते तनाव के बीच हुए, जिससे मिडिल ईस्ट में बड़े पैमाने पर मिलिट्री टकराव की आशंका बढ़ गई है।रिपोर्ट्स से पता चला है कि कई मिसाइलों ने यूनिवर्सिटी स्ट्रीट और ईरानी राजधानी के जोम्हौरी जिले में कई जगहों पर हमला किया। सेंट्रल तेहरान में पाश्चर स्ट्रीट के पास के इलाकों से धुएं का घना गुबार उठता देखा गया, जहां कई जरूरी सरकारी इमारतें हैं।अधिकारियों ने अभी तक नुकसान के पैमाने या किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं की है। तेजी से बदलते हालात को देखते हुए, इजरायल और ईरान दोनों ने एहतियात के तौर पर अपने एयरस्पेस बंद कर दिए हैं। -
यरुशलम. भारत और इजराइल ने "समय की कसौटी पर खरे" साबित हुए अपने संबंधों को बृहस्पतिवार को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक आगे बढ़ाया और "पारस्परिक रूप से लाभकारी" मुक्त व्यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप देने पर सहमति व्यक्त की। इजराइल का दौरा कर रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गाजा शांति पहल का समर्थन करते हुए कहा कि मानवता को कभी संघर्ष का शिकार नहीं बनना चाहिए। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के बाद अपने मीडिया बयान में मोदी ने कहा कि भारत का सुरक्षा हित पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता से जुड़ा है, और कहा कि नयी दिल्ली गाजा शांति पहल का पूरी तरह से समर्थन करती है। दोनों प्रधानमंत्रियों की बैठक के बाद, भारत और इजराइल ने कुल 17 समझौतों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यापार, निवेश, शिक्षा, विनिर्माण, संस्कृति, समुद्री विरासत, कृषि और अन्य क्षेत्रों में गहन सहयोग प्रदान करेंगे। भारत और इजराइल ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के ढांचे के तहत सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास और उत्पादन की दिशा में काम कर अपनी घनिष्ठ रक्षा साझेदारी का और विस्तार करने का भी संकल्प लिया। विदेश सचिव विक्रम मिसरी के अनुसार, वार्ता में अमेरिका-ईरान गतिरोध और क्षेत्र के अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई और प्रधानमंत्री मोदी ने संवाद के महत्व में भारत के दृढ़ विश्वास का उल्लेख किया तथा शांतिपूर्ण समाधान प्राप्त करने की दिशा में, यदि आवश्यक हो, तो समर्थन देने के लिए नयी दिल्ली की तत्परता को दोहराया। अपने मीडिया बयान में, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-इजराइल संबंधों की बढ़ती प्रगति के बारे में विस्तार से चर्चा की और कहा कि यह संबंध गहरे विश्वास, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय करुणा की मजबूत नींव पर बना है। उन्होंने कहा, "हमारे संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। आज हमने इस सिद्ध साझेदारी को 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह निर्णय दोनों देशों के लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाता है।" दोनों देशों के संबंधों को 2017 में रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया था।
मोदी ने कहा, "हमारा आर्थिक सहयोग विकास, नवाचार और साझा समृद्धि का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। पिछले वर्ष, हमने पारस्परिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक द्विपक्षीय निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए। हम जल्द ही पारस्परिक रूप से लाभकारी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को भी अंतिम रूप देंगे।" प्रधानमंत्री ने आतंकवाद से निपटने में भारत और इजराइल के संयुक्त संकल्प के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, "भारत और इजराइल इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं कि दुनिया में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है। किसी भी रूप में आतंकवाद को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।" उन्होंने कहा, "हम आतंकवाद और उसके समर्थकों का विरोध करने में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं, और हम ऐसा करना जारी रखेंगे।" प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सुरक्षा हित पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, "इसलिए, हमने शुरू से ही संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया है। यह ग्लोबल साउथ और समस्त मानवता की पुकार है।" उन्होंने कहा, "भारत का रुख स्पष्ट है: मानवता को कभी भी संघर्ष का शिकार नहीं बनना चाहिए। गाजा शांति योजना के माध्यम से शांति का मार्ग प्रशस्त हुआ है। भारत ने इन प्रयासों का पूर्ण समर्थन किया है। भविष्य में भी हम सभी देशों के साथ संवाद और सहयोग जारी रखेंगे।" प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में साझेदारी स्थापित करने के लिए दोनों पक्षों द्वारा किए गए संकल्प का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "प्रौद्योगिकी हमारी भावी साझेदारी का केंद्रबिंदु है। आज हमने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए एक साझेदारी स्थापित करने का निर्णय लिया है। इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नयी गति मिलेगी।" उन्होंने कहा, "मुझे खुशी है कि इजराइल में यूपीआई (यूनाइटेड पेमेंट इंटरफेस) के उपयोग के लिए एक समझौता हो गया है। हम डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपने अनुभवों को साझा करके लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।" मोदी ने दोनों पक्षों के बीच रक्षा संबंधों पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा, "रक्षा क्षेत्र में हमारा दशकों पुराना और भरोसेमंद सहयोग है। पिछले वर्ष हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन इसे नए आयाम प्रदान करेगा। हम मिलकर संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की दिशा में आगे बढ़ेंगे।" भारत स्वदेशी वायु रक्षा कवच "सुदर्शन चक्र" विकसित करने पर विचार कर रहा है, और समझा जाता है कि भारतीय पक्ष ने इजराइल की 'आयरन डोम' वायु रक्षा प्रणाली के कुछ तत्वों को अपने प्रस्तावित मिसाइल कवच में शामिल करने की संभावना का भी पता लगाया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष नागरिक परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में भी सहयोग को आगे बढ़ाएंगे। अपने संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि भविष्य उन्हीं का है जो नवाचार करते हैं और इजराइल तथा भारत नवाचार के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उन्होंने कहा, "हम गौरवान्वित प्राचीन सभ्यताएं हैं, हमें अपने अतीत पर बहुत गर्व है, लेकिन हम अपने भविष्य को संवारने के लिए भी पूरी तरह से दृढ़ संकल्पित हैं और हम मिलकर ऐसा कर सकते हैं।" कृषि क्षेत्र में दोनों देशों के बीच मजबूत सहयोग का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि इस सहयोग को भविष्योन्मुखी दिशा देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा, "भारत में इजराइल के सहयोग से स्थापित उत्कृष्टता केंद्र हमारी मित्रता के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इनकी सफलता को देखते हुए, हमने इनकी संख्या बढ़ाकर 100 करने का लक्ष्य रखा है।" मौजूदा उत्कृष्टता केंद्र कृषि उत्पादन के लिए नयी तकनीकें प्रदान करते हैं।
मोदी ने कहा, "इस दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए, हम उत्कृष्ट गांवों के निर्माण पर काम कर रहे हैं। इससे भारत के हर गांव में इजराइली तकनीक पहुंचेगी, जिससे लाखों किसानों की आय और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।" एक मीडिया ब्रीफिंग में, विदेश सचिव मिसरी ने फलस्तीन मुद्दे पर भारत के रुख के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि भारत अमेरिका समर्थित गाजा शांति पहल का समर्थन करता है और उन्होंने बुधवार को इजराइल की संसद (नेसेट) में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में इस बारे में की गई टिप्पणियों का हवाला दिया। मिसरी ने मोदी की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा कि यह उम्मीद खोने का समय नहीं है, बल्कि उम्मीद बनाए रखने का समय है। भारत और इजराइल के बीच भारत-पश्चिम एशिया यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के कार्यान्वयन और आई2यू2 (भारत-इजराइल-यूएई-अमेरिका) के ढांचे के तहत सहयोग पर भी चर्चा हुई। मोदी ने कहा, "हमने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देते हुए, हम भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे और भारत-इजराइल-यूएई-अमेरिका ढांचे पर नयी गति से आगे बढ़ेंगे।" नयी दिल्ली रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ आज हुई चर्चा बेहद फलदायी रही। हमने अपने सदियों पुराने सहयोग को विशेष रणनीतिक सहयोग के स्तर तक बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह निर्णय दोनों देशों के लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाता है।" -
यरुशलम. यरुशलम के हिब्रू विश्वविद्यालय ने इजराइल की संसद (नेसेट) में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ''साहसिक संबोधन'' के लिए बृहस्पतिवार को उन्हें धन्यवाद दिया और इस बात पर जोर दिया कि उनका यह संबोधन ''राजनयिक उपलब्धियों को गहन शैक्षणिक सहयोग में परिवर्तित कर सकता है।'' इजराइली विश्वविद्यालय ने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, आज शाम आपने नेसेट के मंच से जो गर्मजोशी भरे और साहसिक शब्द कहे, उसके लिए आपका धन्यवाद।'' भारत की आतंकवाद को ''बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति'' को दोहराते हुए मोदी ने अपने संबोधन में कहा, ''हम आपकी पीड़ा को समझते हैं। हम आपके दुख में आपके साथ हैं। भारत इस समय और भविष्य में भी पूरी दृढ़ता के साथ इजराइल के साथ खड़ा है।'' उन्होंने इजराइल के सांसदों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कहा, ''नागरिकों की हत्या को कोई भी वजह जायज नहीं ठहरा सकती। आतंकवाद को कोई भी चीज जायज नहीं ठहरा सकती।'' पिछले सप्ताह हिब्रू विश्वविद्यालय ने नालंदा विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। हिब्रू विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपाध्यक्ष प्रोफेसर गाय हरपाज के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भारत के संस्थानों के साथ अकादमिक संबंधों को मजबूत करने के लिए देश का दौरा किया। विश्वविद्यालय ने कहा, ''दोनों देशों के बीच गहरी साझेदारी शैक्षणिक क्षेत्र में भी नजर आती है।''
बताया जाता है कि हरपाज ने एशियाई अध्ययन विभाग और तुलनात्मक धर्म विभाग के प्रोफेसर एवियाटर शुल्मन के साथ मिलकर इस रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा का नेतृत्व किया। विश्वविद्यालय ने कहा, ''हम केवल अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन नहीं करते; हम उन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी वैज्ञानिक उत्कृष्टता की नींव में तब्दील करते हैं।'' विश्वविद्यालय के संस्थापक सदस्यों में अल्बर्ट आइंस्टीन भी शामिल हैं। -
यरुशलम. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने बृहस्पतिवार को ''बेहद सार्थक'' और व्यापक वार्ता की, जिसमें उन्होंने शिक्षा, स्टार्टअप, नवाचार, प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। राष्ट्रपति कार्यालय से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मोदी ने हर्जोग से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की, जहां दोनों नेताओं ने सबसे पहले बगीचे में साथ मिलकर एक 'ओक' का पौधा लगाया, ''जो दोनों देशों के बीच मित्रता, विकास और साझा भविष्य के निर्माण का प्रतीक है।'' मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''हमारी बातचीत बेहद सार्थक और व्यापक रही।''
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''दोनों नेताओं ने शिक्षा, स्टार्टअप, नवाचार, प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।'' बैठक के दौरान, मोदी ने इजराइल पहुंचने पर मिले ''अत्यंत गर्मजोशीपूर्ण और भव्य स्वागत'' के लिए हर्जोग को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, ''यह इजराइल के लोगों का भारत और भारतीयों के प्रति प्रेम दर्शाता है।'' उन्होंने इस बात का भी समर्थन किया कि भारत-इजराइल संबंध, विज्ञान, नवाचार या शैक्षणिक संस्थानों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में, वैश्विक हित के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। मोदी ने कहा, ''हमारे बीच विशेष रूप से जल और कृषि जैसे क्षेत्रों में बहुत सकारात्मक चर्चा हुई। भारत अपने यहां, विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में, इजराइल के कई अच्छे समाधानों को लागू कर रहा है, और इसके फलस्वरूप हमें शानदार परिणाम मिले हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''मुझे दुनिया के अन्य हिस्सों में विभिन्न अवसरों पर आपसे मिलने का मौका मिला है। आपके विचार बहुत स्पष्ट रहे हैं। आप भारत का बहुत सम्मान करते हैं। भारत के प्रति आपकी प्रतिबद्धता और सम्मान के लिए मैं तहे दिल से आपका आभार व्यक्त करता हूं।'' प्रधानमंत्री ने हर्जोग को भारत आने का निमंत्रण भी दिया और कहा कि भारत के 1.4 अरब लोग उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा, ''मैं आपको भारत आने का हार्दिक निमंत्रण देता हूं, और जब आप आएं, तो अपनी यात्रा को केवल दिल्ली तक सीमित न रखें, बल्कि भारत के अन्य हिस्सों की यात्रा के लिए भी समय निकालें।'' हर्जोग ने इजराइल की ऐतिहासिक दूसरी यात्रा के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया और इजराइल के प्रति भारतीय नेतृत्व के दीर्घकालिक और अटूट समर्थन की प्रशंसा की। राष्ट्रपति कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दोनों नेताओं ने नवाचार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, व्यापार और सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में इजराइल और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी के महत्व पर चर्चा की। इसमें यह भी कहा गया है कि उन्होंने दोनों देशों के लोगों के हित में भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा पहल सहित क्षेत्रीय साझेदारी और गठबंधनों के विस्तार के अवसरों पर भी चर्चा की। राष्ट्रपति ने भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि की सराहना करते हुए कहा, ''मेरा मानना है कि भारत पश्चिम एशिया के उज्ज्वल भविष्य का एक अभिन्न अंग है, और यह क्षेत्र भारत के उज्ज्वल भविष्य का एक अभिन्न अंग है। मैंने आपके देश की रिकॉर्ड तोड़ आर्थिक वृद्धि देखी है, जो पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। यह शानदार है।'' ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ाने के तरीकों का सुझाव देते हुए, इजराइली नेता ने कहा कि भारतीय और इजराइली विश्वविद्यालयों के पास भविष्य में मिलकर काम करने का "सुनहरा अवसर" है। राष्ट्रपति ने कहा, ''इजराइल और भारत के बीच यह संपर्क ग्लोबल साउथ के लाभ के लिए और पूर्वी गोलार्ध के माध्यम से दक्षिण पूर्व एशिया से अमेरिका के संपर्क को मजबूत करने के लिए संपूर्ण भू-रणनीतिक स्थिति को बदल सकता है।'' उन्होंने कहा, ''हम जानते हैं कि आप कई क्षेत्रों में विश्व का नेतृत्व कर रहे हैं... और अंत में, मैं यह कहना चाहूंगा कि अब्राहम समझौता, जो क्षेत्र में शांति की दिशा में सुधार लाने का एक मंच हैं, को अब हमें बस लागू करना है।'' हर्जोग ने भारत की यात्रा के निमंत्रण के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, ''मैं इस निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करता हूं। यह मेरा कई वर्षों से सपना रहा है, और भारत के कई हिस्से मुझे आकर्षित करते हैं और आपके अद्भुत इतिहास और संस्कृति में मेरी रुचि जगाते हैं, जिसमें सदियों से भारत के यहूदियों की अविश्वसनीय कहानी भी शामिल है, इसलिए यह एक शानदार अवसर होगा।'' -
यरूशलम. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को इजराइल की अपनी दो दिवसीय यात्रा समाप्त करने से कुछ घंटे पहले भारतीय मूल के यहूदी समुदाय के प्रमुख सदस्यों से मुलाकात करके उनसे बातचीत की। तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, 2023 तक इजराइल में भारतीय मूल के लगभग 85,000 यहूदी रहते थे। मोदी से मिलने वालों में यरूशलम से लगभग 75 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित अश्केलोन की एक परिषद सदस्य डॉ. रिकी शाही भी थीं, जिन्होंने प्रधानमंत्री को 'लोगों के लिए बहुत कुछ करने वाला' बताया और कहा कि यह उनके कार्यों में दिखाई देता है। बड़ौदा निवासी माता-पिता की पुत्री शाही ने कहा, ''वे ज्यादा बोलते नहीं हैं, लेकिन बहुत कुछ करते हैं।'' उन्होंने बताया कि उन्होंने बड़ौदा और अश्केलोन के बीच 'जुड़वां शहर' कार्यक्रम की शुरुआत की है। मणिपुर में जन्मे मानव संसाधन प्रबंधक इसहाक थांगजोन लगभग पांच साल पहले इजराइल आए थे। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा वाकई 'शानदार' है।'' भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (जिन्हें आमतौर पर बनेई मेनाशे कहा जाता है) से शेष सभी 5,800 यहूदियों को अगले पांच वर्षों में इजराइल वापस लाने के इजराइल सरकार के प्रस्ताव में हो रही प्रगति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''परिस्थिति अनुकूल होती जा रही है और हालात बहुत अच्छे दिख रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ''मेरी कामना है कि प्रधानमंत्री मोदी इजराइल-भारत संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएं।'' बुधवार को मोदी ने दिव्यांग कलाकारों के एक समूह द्वारा 'आई लव माई इंडिया...' गीत की प्रस्तुति को 'यादगार' बताया, जिसने भारतीय मूल के यहूदियों और इजराइली नागरिकों को एक साथ लाने का काम किया। इजराइली संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल में भारतीय मूल के जीवंत यहूदी समुदाय को मान्यता दी और शिक्षा, संस्कृति, सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रीय सेवा के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को रेखांकित किया। तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत से इजराइल में आव्रजन की मुख्य लहर पचास और साठ के दशक में देखने को मिली। इनमें से अधिकांश महाराष्ट्र (बेने इजराइली) से हैं और अपेक्षाकृत कम संख्या में केरल (कोचीनी यहूदी) और कोलकाता (बगदादी यहूदी) से हैं। भारतीय दूतावास के अनुसार, हाल के वर्षों में मिजोरम और मणिपुर (बेने मेनाचे) के कुछ भारतीय यहूदी भी प्रवास के लिए इजराइल पहुंच रहे हैं।
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यरूशलम. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बुधवार को इजराइल पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने बेन गुरियन हवाई अड्डे पर मोदी की अगवानी की। प्रधानमंत्री मोदी की नौ वर्षों में इजराइल की यह दूसरी यात्रा है। जुलाई 2017 में इस देश की उनकी पहली यात्रा के दौरान भारत-इजराइल संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाया गया था। नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से गले लगाकर अभिवादन किया। इसके बाद तेल अवीव से 20 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित हवाई अड्डे पर मोदी का औपचारिक स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री मोदी आज इजराइल की संसद को संबोधित करेंगे और नेतन्याहू के साथ वार्ता करेंगे। दोनों नेता बृहस्पतिवार को व्यापक मुद्दों पर बातचीत करेंगे। इजराइल यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा था कि उन्हें विश्वास है कि यह यात्रा भारत और इज़राइल के बीच स्थायी संबंधों को और सुदृढ़ करेगी तथा रणनीतिक साझेदारी के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करेगी। मोदी ने कहा, ''भारत और इज़राइल के बीच एक मज़बूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी है, जिसमें हाल के वर्षों में उल्लेखनीय विस्तार और गतिशीलता देखी गई है।'' उन्होंने कहा, ''मैं प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ होने वाली चर्चाओं को लेकर आशान्वित हूं जिनका उद्देश्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि, जल प्रबंधन, रक्षा एवं सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश के साथ लोगों के बीच आपसी संबंधों समेत विभिन्न क्षेत्रों में हमारे सहयोग को और मजबूत करना है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों नेता पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्री की यह यात्रा पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में भारत-इजराइल संबंध मजबूत हुए हैं, जिनमें रक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्र शामिल हैं। रक्षा सहयोग दोनों पक्षों के बीच साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है, जिसमें इजराइल भारत को कई सैन्य प्लेटफॉर्म और हथियार प्रणालियां मुहैया करा रहा है। पिछले साल नवंबर में, भारत के रक्षा सचिव की इजराइल यात्रा के दौरान, रक्षा सहयोग पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किये गये थे। दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों में भी लगातार प्रगति देखने को मिल रही है। दोनों पक्षों ने सितंबर में आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए एक द्विपक्षीय निवेश समझौते (बीआईए) पर हस्ताक्षर किये थे।
- नई दिल्ली।दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सूक येओल को 2024 में मार्शल लॉ लगाने की नाकाम कोशिश के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। गुरुवार को सोल की एक अदालत ने फैसला सुनाया।योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि इस केस पर पहले फैसले में, सोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने यून को मार्शल लॉ के जरिए बगावत करने का दोषी ठहराया। हालांकि, विशेष अभियोजक ने अपील की थी कि मामले में उन्हें मौत की सजा सुनाई जाए।कोर्ट ने साफ किया कि पूर्व राष्ट्रपति की ओर से दिया गया मार्शल लॉ का आदेश बगावत के बराबर था। यून ने संसदीय क्षेत्र में सेना भेजकर नेशनल असेंबली को कमजोर करने की कोशिश की थी।आदेश में इस बात पर ज्यादा जोर दिया कि यून का नेशनल असेंबली में सेना भेजना ही केस की जड़ है। सुनवाई के दौरान जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति को पेश किया गया। इस सुनवाई का सीधा प्रसारण नेशनल टेलीविजन पर किया गया।पिछले साल जनवरी में यून पर 3 दिसंबर, 2024 को छह घंटे तक चले मार्शल लॉ के जरिए बगावत करने का आरोप लगाया गया था। आरोप के मुताबिक, यून ने पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून और दूसरों के साथ मिलकर संविधान को नुकसान पहुंचाने के मकसद से दंगा करने की साजिश रची और युद्ध या वैसी ही कोई नेशनल इमरजेंसी न होने पर भी गैरकानूनी तरीके से मार्शल लॉ घोषित कर दिया।पिछले महीने ट्रायल की आखिरी सुनवाई के दौरान, स्पेशल वकील चो यून-सुक की टीम ने पूर्व राष्ट्रपति के लिए मौत की सजा की मांग की थी और कहा कि वह न्यायपालिका और विधायिका पर कब्जा करके लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के मकसद से मार्शल लॉ घोषित करने के लिए ज्यादा से ज्यादा सजा के हकदार हैं।टीम ने कहा, “जुर्म की प्रकृति गंभीर है क्योंकि उन्होंने ऐसे फिजिकल रिसोर्स जुटाए जिनका इस्तेमाल सिर्फ देश के हित में होना चाहिए था।” यून ने अपने आखिरी बयान में खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा था कि राष्ट्रपति के संवैधानिक स्टेट इमरजेंसी अधिकार का इस्तेमाल बगावत नहीं हो सकता।
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ढाका. बांग्लादेश में आम चुनावों में अपनी पार्टी बीएनपी को शानदार जीत दिलाने के बाद तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में मंगलवार को पद की शपथ लेंगे। रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 297 में से 209 सीट जीती, जबकि कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी ने 13वें संसदीय चुनाव में 68 सीट हासिल की हैं। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था। लंबे समय से चली आ रही एक परंपरा को तोड़ते हुए बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान (60) का शपथ ग्रहण समारोह बंगभवन के बजाय संसद परिसर के साउथ प्लाजा में आयोजित किया जाएगा। सरकारी समाचार एजेंसी 'बीएसएस' ने सोमवार को बताया कि राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन मंगलवार दोपहर को जातीय संसद (देश का संसद) के साउथ प्लाजा में नये मंत्रिमंडल सदस्यों को शपथ दिलाएंगे। जातीय संसद सचिवालय की सचिव कनीज मौला ने कहा, ''संसद सचिवालय में कल शाम चार बजे नये मंत्रिमंडल सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा।'' इससे पहले, मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन संसद के सभी नव निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाएंगे। जेएस सचिवालय की एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 13वीं जातीय संसद (जेएस) के सभी 297 नव निर्वाचित सांसद ''पहले संसद सदस्य (एमपी) के रूप में और फिर संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।'' रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, विदेश सचिव विक्रम मिसरी और लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह के भी बिरला के साथ उपस्थित रहने की संभावना है।







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