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ग्लासगो. भारत के ऋषिकांत सिंह चानमबम ने रविवार को यहां राष्ट्रमंडल खेलों की पुरुषों की 60 किग्रा भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीता। ऋषिकांत ने स्नैच में 121 किग्रा वजन उठाकर खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया। हालांकि क्लीन एवं जर्क में वह केवल 143 किग्रा वजन ही उठा सके। इस तरह उन्होंने कुल 264 किग्रा भार उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया। मलेशिया के बिन कसदान मोहम्मद अनीक ने कुल 273 किग्रा (121 और 152 किग्रा) वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता और खेलों का नया रिकॉर्ड भी बनाया। कीनिया के जोशुआ अमुंगा एमबोया ने कुल 260 किग्रा वजन उठाकर कांस्य पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 115 जबकि क्लीन एवं जर्क में 145 किग्रा वजन उठाया। स्नैच में ऋषिकांत ने सफलतापूर्वक 116 किग्रा वजन उठाकर शुरुआत की और फिर 119 किग्रा और आखिर में 121 किग्रा वजन उठाया। क्लीन एवं जर्क में ऋषिकांत ने पहले प्रयास में 143 किग्रा वजन सफलतापूर्वक उठाया लेकिन दूसरे प्रसास में 148 और तीसरे प्रयास में 151 किग्रा वजन उठाने में नाकाम रहे और स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए।
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ग्लास्गो. स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा का मुकाबला सोमवार से शुरू होने वाली राष्ट्रमंडल खेलों की एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में मौजूदा ओलंपिक चैंपियन पाकिस्तान के अरशद नदीम और श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे से होगा जबकि भारत की नजरें पिछले सत्र की तुलना में अधिक पदक जीतने पर होंगी। नीरज के अलावा भारत के स्वर्ण पदक के प्रमुख दावेदारों में लंबी कूद के खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर शामिल हैं जिन्होंने 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता था। वहीं ऊंची कूद के खिलाड़ी सर्वेश कुशारे भी स्वर्ण पदक के दावेदार हैं। उन्होंने हाल ही में 2.31 मीटर के प्रयास से राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है। भारतीय टीम प्रबंधन को पुरुषों की भाला फेंक, लंबी कूद, ऊंची कूद और त्रिकूद स्पर्धा में दो-दो पदक की उम्मीद है। इसके अलावा पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़, डेकाथथन और महिलाओं की 10,000 मीटर पैदल चाल में भी पदक मिलने की संभावना जताई जा रही है। पुरुषों की 100 मीटर बाधा दौड़, गोला फेंक और महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में भी भारत को पदक का दावेदार माना जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो भारत कुल पदक के मामले में बर्मिंघम में जीते गए आठ पदक (एक स्वर्ण, चार रजत और तीन कांस्य) से आगे निकल सकता है। हालांकि स्वर्ण की संख्या को लेकर कोई निश्चितता नहीं है क्योंकि अधिकांश एथलेटिक्स स्पर्धाओं में विश्वस्तरीय खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। नीरज सितंबर 2025 से कमर दर्द की समस्या से परेशान हैं। इसी वजह से उन्होंने इस साल सत्र की शुरुआत में विलंब करते हुए अपना पहला मुकाबला 19 जून को दोहा डाइमंड लीग में खेला। वहां उन्होंने 85.69 मीटर भाला फेंककर चौथा स्थान हासिल किया। यह प्रदर्शन उनके स्तर के हिसाब से कमजोर है। इसके बाद उन्होंने स्विट्जरलैंड के बिएन शहर में एक महीने तक रिहैबिलिटेशन (चोट से उबरकर फिटनेस हासिल करने की प्रक्रिया) और अभ्यास किया। अब 28 साल के दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज की कोशिश 2018 गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों जैसा प्रदर्शन दोहराने की होगी जहां उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। वह शुक्रवार को स्विट्जरलैंड से ग्लास्गो पहुंच गए। नीरज ने 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में 86.47 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता था। हालांकि चोट के कारण वह 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में नहीं खेल सके थे। भारतीय एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच राधाकृष्णन नायर का कहना है कि नीरज पूरी तरह फिट हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार 32 सदस्यीय भारतीय टीम पिछले राष्ट्रमंडल खेलों से अधिक पदक जीतेगी। हालांकि नीरज के लिए स्वर्ण पदक जीतना आसान नहीं होगा। पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में दुनिया के कई बड़े खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। क्वालीफाइंग मुकाबले 30 जुलाई को और फाइनल 31 जुलाई को होगा। अमेरिका के कर्टिस थॉम्पसन और जर्मनी के जूलियन वेबर को छोड़कर दुनिया के लगभग सभी बड़े भाला फेंक खिलाड़ी ग्लास्गो में खेलेंगे। नीरज के अलावा नदीम, पथिरागे, त्रिनिदाद एवं टोबैगो के मौजूदा विश्व चैंपियन केशॉर्न वॉलकॉट, ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स और कीनिया के जूलियस येगो भी मैदान में होंगे। भारत के रोहित यादव भी पदक के मजबूत दावेदार हैं। उन्होंने पिछले महीने 87.05 मीटर भाला फेंका था जो इस सत्र में राष्ट्रमंडल देशों के खिलाड़ियों के बीच दूसरा सबसे बेहतर प्रदर्शन है। यशवीर सिंह भी भारत की ओर से इस स्पर्धा में खेलेंगे। श्रीलंका के 23 वर्षीय पथिरागे इस समय सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। उन्होंने इस सत्र में 92.62 मीटर का थ्रो किया है और 90 मीटर से ज्यादा भाला फेंकने वाले दुनिया के इकलौते खिलाड़ी हैं। उन्होंने इस साल दो डाइमंड लीग खिताब भी जीते हैं। वहीं नदीम इस समय अच्छी फॉर्म में नहीं हैं। उन्होंने 16 जुलाई को स्विट्जरलैंड के लूजर्न में सिर्फ 78.47 मीटर का थ्रो किया था। पीटर्स का इस सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 86.38 मीटर है जबकि वॉलकॉट का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 83.45 मीटर रहा है। लंबी कूद के खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर ने पिछले महीने 8.38 मीटर का प्रयास किया था। वह मौजूदा सत्र में राष्ट्रमंडल देशों के खिलाड़ियों के बीच पहले स्थान पर हैं। वेन पिनॉक (8.39 मीटर) ने उनसे बेहतर प्रदर्शन किया है लेकिन जमैका ने उनकी जगह तेजाय गेल (8.37 मीटर) को भेजने का फैसला किया है। श्रीशंकर ने बर्मिंघम 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता था और इस बार राष्ट्रमंडल खेलों में अपना दूसरा पदक जीतने की कोशिश करेंगे। भारत के लोकेश सत्यनाथन ने भी इस सत्र में 8.21 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है और उनसे भी पदक की उम्मीद है। पुरुषों की ऊंची कूद में मौजूदा सत्र के शीर्ष छह खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। भारत के सर्वेश कुशारे ने हाल ही में 2.31 मीटर के प्रयास से राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है। उनके साथ इंग्लैंड के किमानी जैक (2.31 मीटर), न्यूजीलैंड के ओलंपिक चैंपियन हैमिश केर (2.28 मीटर, सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन), जमैका के रोमेन बेकफोर्ड (2.30 मीटर, सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन) और ऑस्ट्रेलिया के युआल रीथ (2.28 मीटर, सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन) भी मुकाबले में होंगे। आदर्श राम (2.27 मीटर, सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन) और तेजस्विन (2.26 मीटर, सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन) भी ऊंची कूद में हिस्सा लेंगे। किशारे ने तेजस्विन का ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था। हालांकि तेजस्विन से सबसे अधिक उम्मीद डेकाथलन में है जिसमें वह राष्ट्रीय रिकॉर्डधारक हैं। मौजूदा सत्र के प्रदर्शन के आधार पर वह राष्ट्रमंडल देशों के खिलाड़ियों में दूसरे स्थान पर हैं। उनसे बेहतर प्रदर्शन सिर्फ 2014 राष्ट्रमंडल खेलों और तोक्यो ओलंपिक के चैंपियन कनाडा के डेमियन वार्नर ने ही किया है। वार्नर भी ग्लास्गो में चुनौती पेश करेंगे। पुरुषों की त्रिकूद में भारत के प्रवीण चित्रावेल और सेल्वा प्रभु भी पदक की दौड़ में हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती जमैका के जॉर्डन स्कॉट की होगी। ट्रैक स्पर्धाओं में भारत की उम्मीदें कम हैं लेकिन 100 मीटर बाधा दौड़ में तेजस शिर्से फाइनल में पहुंच सकते हैं। अगर वह 13.27 सेकेंड के अपने सत्र के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और राष्ट्रीय रिकॉर्ड से बेहतर प्रदर्शन करते हैं तो पदक भी जीत सकते हैं। सोमवार को भारत का पहला एथलेटिक्स पदक कुशारे दिला सकते हैं। शिर्से भी उसी दिन मुकाबले में उतरेंगे। इसके अलावा मुरली श्रीशंकर, लोकेश सत्यनाथन और पूजा सिंह (महिला ऊंची कूद) भी अपने-अपने क्वालीफाइंग दौर खेलेंगे। राष्ट्रीय रिकॉर्डधारक गुरिंदरवीर सिंह भी सोमवार को 100 मीटर दौड़ के पहले दौर में हिस्सा लेंगे।
- ग्लास्गो। ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू ने रविवार को यहां राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय भारोत्तोलन में अपनी बादशाहत एक बार फिर साबित कर दी तो वहीं, चोट से जूझने के बावजूद ऋषिकांत सिंह ने ऐतिहासिक रजत पदक जीतकर भारत के लिए दिन को यादगार बनाया। महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में मीराबाई ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 190 किलोग्राम (स्नैच में 85 किग्रा और क्लीन एवं जर्क में 105 किग्रा) वजन उठाया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों के कई रिकॉर्ड भी तोड़ दिए। यह मौजूदा राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का पहला स्वर्ण पदक और कुल तीसरा पदक है।इससे पहले शुक्रवार को पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुषों के हेवीवेट वर्ग में कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला था। मणिपुर की 31 वर्षीय दिग्गज भारोत्तोलक ने स्नैच और क्लीन एवं जर्क, दोनों में पहला प्रयास असफल रहने के बावजूद शानदार वापसी की और 22 किलोग्राम के बड़े अंतर से स्वर्ण पदक अपने नाम किया। नाइजीरिया की रूथ असुक्वो न्योंग 168 किलोग्राम के साथ रजत पदक जीता। स्वर्ण पदक सुनिश्चित करने और एशियाई खेलों में दो महीने से भी कम समय शेष होने के कारण मीराबाई ने क्लीन एवं जर्क का अपना अंतिम प्रयास नहीं किया। इससे पहले पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में ऋषिकांत सिंह चोट के बावजूद रजत पदक जीतने में सफल रहे। घुटने की चोट के कारण वह स्वर्ण पदक की दौड़ में अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सके। मणिपुर के 28 वर्षीय भारोत्तोलक ने स्नैच में 121 किलोग्राम वजन उठाकर राष्ट्रमंडल खेलों के रिकॉर्ड की बराबरी की और क्लीन एवं जर्क से पहले शीर्ष स्थान पर थे। वह हालांकि क्लीन एंड जर्क में 143 किलोग्राम ही उठा सके। अंतिम दो प्रयास असफल रहने से उनका कुल वजन 264 किलोग्राम रहा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।मलेशिया के मोहम्मद अनीक कसदान ने क्लीन एवं जर्क में 152 किलोग्राम का इन खेलों का नया रिकॉर्ड बनाते हुए कुल 273 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि केन्या के जोशुआ अमुंगा म्बोया 260 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक विजेता रहे। ऋषिकांत ने बताया कि प्रतियोगिता से एक सप्ताह पहले लगी घुटने की चोट क्लीन एवं जर्क के दौरान फिर उभर आई, जिससे भारी वजन उठाने की उनकी क्षमता प्रभावित हुई। उन्होंने कहा, "मैं यहां स्वर्ण पदक जीतने आया था। स्नैच के बाद मैं पहले स्थान पर था, लेकिन घुटने में परेशानी हो गई। मैं वजन को क्लीन तो कर पाया, लेकिन उसे ऊपर नहीं धकेल सका क्योंकि एक जांघ ठीक से काम नहीं कर रही थी। मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की।'' ऋषिकांत ने इसके बावजूद इतिहास रचते हुए राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले मणिपुर के पहले पुरुष भारोत्तोलक बनने का गौरव हासिल किया। वह खेलों की भारोत्तोलन स्पर्धा में हिस्सा लेने वाले राज्य के पहले पुरुष खिलाड़ी भी हैं।भारतीय पुरुष चार गुणा 200 मीटर फ्रीस्टाइल रिले टीम ने तैराकी स्पर्धा में अपनी हीट में तीसरा स्थान हासिल कर फाइनल में प्रवेश कर पदक जीतने की उम्मीद कायम रखी है। धक्षण शशिकुमार, अनीश सुनील कुमार गौड़ा, आर्यन नेहरा और श्रीहरि नटराज की भारतीय चौकड़ी ने सात मिनट 39.48 सेकंड का समय निकाला। टीम अपनी हीट में तैराकी की मजबूत टीमों ऑस्ट्रेलिया (7:08.66) और इंग्लैंड (7:18.13) के बाद तीसरे स्थान पर रही। कनाडा के प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेने के कारण इस हीट में केवल चार टीमें उतरी थीं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, भारत और जर्सी चारों ने आठ टीमों के फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया। दोनों हीट के संयुक्त परिणामों में भारत ने पांचवें सबसे तेज समय के साथ फाइनल में जगह बनाई। ऑस्ट्रेलिया, स्कॉटलैंड, इंग्लैंड और वेल्स ने भारत से बेहतर समय दर्ज किया। भारतीय चौकड़ी के इस प्रदर्शन से फाइनल में पदक की दौड़ में चुनौती पेश करने की उम्मीद जगी है। टीम अगर अपनी हीट के समय में सुधार करने में सफल रहती है तो उसके पास पोडियम पर जगह बनाने का बेहतर मौका होगा। लॉन बॉल्स में भारत की रूपा रानी तिर्की और पिंकी सिंह की लगातार तीन मैचों की जीत का सिलसिला थम गया। महिला युगल वर्ग के सेक्शन मुकाबले में उन्हें नामीबिया से करीबी हार का सामना करना पड़ा। भारतीय जोड़ी पहला सेट 5-7 से हार गई, लेकिन दूसरे सेट में 10-1 से शानदार वापसी की। हालांकि, टाई-ब्रेकर में अमांडा स्टीनकैंप और डायना विलजोन की नामीबियाई जोड़ी ने 3-0 से जीत दर्ज की। अब भारतीय जोड़ी अपने अंतिम सेक्शन मुकाबले में इंग्लैंड का सामना करेगी, जिसमें जीत से सेमीफाइनल का टिकट तय होगा।
- - कैरम में भी खिलाड़ियों ने दिखाया दमरायपुर । छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ की अंतर-क्षेत्रीय खेल प्रतियोगिता के अंतर्गत आयोजित शतरंज प्रतियोगिता के पुरुष टीम वर्ग में रायपुर सेंट्रल चैंपियन तथा दुर्ग रीजन उपविजेता रहा। महिला टीम वर्ग में कोरबा वेस्ट ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि रायपुर सेंट्रल उपविजेता रहा।22 से 24 जुलाई तक जगदलपुर में आयोजित अंतर-क्षेत्रीय कैरम प्रतियोगिता में भी विभिन्न क्षेत्रों के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। महिला एकल वर्ग में रायपुर (सेंट्रल) की कंचन महेश ठाकुर विजेता तथा नमिता जैन उपविजेता रहीं। महिला युगल वर्ग में भी दोनों की जोड़ी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि दुर्ग की शकुंतला कारक एवं अनीता रोही की जोड़ी उपविजेता रही। पुरुष एकल वर्ग में कोरबा (वेस्ट) के विनोद राठौर विजेता तथा जगदलपुर के कमलेश ठाकुर उपविजेता रहे। पुरुष टीम स्पर्धा में जगदलपुर ने खिताब अपने नाम किया, जबकि दुर्ग उपविजेता रहा।प्रतियोगिता के पर्यवेक्षक अधीक्षण अभियंता श्री पंकज चौधरी ने बताया कि प्रतियोगिता के प्रदर्शन के आधार पर महिला वर्ग में कंचन महेश ठाकुर, नमिता जैन, शकुंतला कारक, रीना पुरी गोस्वामी, अनीता रोही एवं कविता ठक्कर तथा पुरुष वर्ग में विनोद राठौर, कमलेश ठाकुर, एस.के. मोदी, पी. नागेश्वर राव, शुभम बंचोरे, कमलेश साहू, सुशांत कटाकवार एवं सलीम खान का चयन किया गया है। चयनित खिलाड़ी 4 से 6 अगस्त 2026 तक आंध्र प्रदेश के तिरुपति में आयोजित 48वीं ऑल इंडिया इलेक्ट्रिसिटी स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड की राष्ट्रीय कैरम एवं शतरंज प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ का प्रतिनिधित्व करेंगे।
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हरारे. इशान किशन (81) और तिलक वर्मा (नाबाद 60) की आक्रामक अर्धशतकीय पारियों के बाद गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने शनिवार को दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में जिम्बाब्वे को 90 रन से हराकर तीन मैचों की श्रृंखला में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। जीत के लिए 220 रन का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम की शुरुआत आक्रामक रही, लेकिन नौ ओवर के भीतर पांच विकेट गंवाने के बाद उसकी हार लगभग तय हो गई। पूरी टीम 17.5 ओवर में 129 रन पर सिमट गई। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पांच विकेट पर 219 रन बनाए थे।
इस जीत के साथ भारतीय टी20 कप्तान श्रेयस अय्यर ने आयरलैंड (0-2) और इंग्लैंड (0-4) में लगातार दो श्रृंखलाओं में मिली हार के बाद पहली बार बतौर कप्तान श्रृंखला जीत दर्ज की। जिम्बाब्वे की ओर से ब्रायन बेनेट ने 19 गेंदों में 32 रन बनाकर तेज शुरुआत दिलाई। उन्होंने पदार्पण कर रहे तेज गेंदबाज यश ठाकुर पर छक्का और चौका जड़ा, लेकिन अगली ही कोशिश में विकेटकीपर किशन ने उनका कैच लपक लिया। इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने मेजबान बल्लेबाजों को संभलने का कोई मौका नहीं दिया। रेयन बर्ल (20) और तादिवानाशे मारुमनी (24) कुछ संघर्ष जरूर किया, लेकिन भारतीय आक्रमण के सामने कोई बड़ी साझेदारी नहीं बन सकी। अभिषेक शर्मा ने 17 रन देकर तीन विकेट लिए, जबकि पदार्पण कर रहे यश ठाकुर (30 रन पर दो विकेट) और प्रिंस यादव (10 रन पर दो विकेट) ने दो-दो विकेट झटके। तिलक और शिवम दुबे को एक-एक सफलता मिली। भारत की इस शानदार जीत के बीच प्रिंस यादव की चोट चिंता का विषय रही। मांसपेशियों में खिंचाव के कारण वह गेंदबाजी के दौरान मैदान छोड़कर बाहर चले गए, जिससे टीम के चोट प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। इस जीत की नींव भारत की दमदार बल्लेबाजी ने रखी। पहले बल्लेबाजी का आमंत्रण मिलने पर भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने 29 रन के स्कोर तक अपने दोनों सलामी बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए। 'प्लेयर ऑफ द मैच' किशन ने इसके बाद कप्तान श्रेयस अय्यर (25) के साथ तीसरे विकेट के लिए 66 रन और फिर तिलक के साथ चौथे विकेट के लिए 94 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को संकट से उबारा। किशन ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए 31 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और इसके बाद अगली 31 रन केवल 13 गेंदों में बनाकर रनगति को तेज कर दिया। उनकी पारी की खासियत लेग साइड पर लगाए गए दमदार शॉट रहे। उन्होंने ऑफ स्पिनर बेनेट की गेंदों पर मिडविकेट क्षेत्र में लगातार दो चौके जड़े, जबकि तेज गेंदबाज ब्रैड इवांस के ओवर में दो चौके और एक शानदार छक्का लगाकर दबाव बनाया। तिलक ने भी दूसरे छोर से अपनी स्ट्राइक रेट को लेकर उठ रहे सवालों का करारा जवाब दिया। उन्होंने महज 23 गेंदों में अर्धशतक पूरा करते हुए आक्रामक बल्लेबाजी की। तिलक ने जिम्बाब्वे के प्रमुख तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजरबानी के एक ओवर में लगातार तीन चौके लगाए। उन्होंने इवांस की गेंद पर मिडविकेट के ऊपर शानदार छक्का भी जड़ा। भारतीय बल्लेबाजों ने अंतिम पांच ओवरों में 61 रन जोड़कर टीम को 219 रन के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।
इससे पहले भारत को शुरुआती झटके अभिषेक शर्मा (आठ) और वैभव सूर्यवंशी (20) के रूप में लगे।
अभिषेक मुजरबानी की गेंद पर आसान कैच थमा बैठे। वहीं वैभव सूर्यवंशी ने रिचर्ड नगरावा के एक ओवर में एक छक्का और तीन चौके लगाकर आक्रमक शुरुआत की लेकिन वह नौ गेंद में 20 रन बनाकर नगरावा की बाउंसर पर आउट हो गये। इन शुरुआती सफलताओं के बाद जिम्बाब्वे के गेंदबाज भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव नहीं बना सकें और किशन तथा तिलक की शानदार बल्लेबाजी ने भारत को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचा दिया। -
नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुषों के हैवीवेट वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत का पदक खाता खोला। उनकी इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने बधाई देते हुए इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “झंडू कुमार का शानदार प्रदर्शन। उन्होंने पुरुषों के हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए पदक का खाता खोला है। झंडू को बधाई। उनकी यह उपलब्धि उनकी जबरदस्त ताकत, अटूट संकल्प और वर्षों की अनुशासित मेहनत का बेहतरीन उदाहरण है। हर चुनौती का सामना करते हुए और अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन करके उन्होंने पूरे देश का मान बढ़ाया है और अनगिनत भारतीयों को प्रेरित किया है।”केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी झंडू कुमार को बधाई दी। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत के लिए ब्रॉन्ज। झंडू कुमार ने पुरुषों के हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग में 190 किलोग्राम का शानदार भार उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए पहला पदक जीता। पूरे देश को उन पर गर्व है।”ब्रॉन्ज मेडल तक पहुंचने का झंडू कुमार का सफर आसान नहीं रहा। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें एक समय ई-रिक्शा चलाकर और सब्जियां बेचकर परिवार का गुजारा करना पड़ा। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और लगातार मेहनत जारी रखी।झंडू कुमार ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “मैंने अपना गुजारा करने के लिए ई-रिक्शा चलाया, सब्जियां बेचीं और बहुत संघर्ष किया। हालांकि, मैंने अपना सपना कभी नहीं छोड़ा। मुझे हमेशा विश्वास था कि एक दिन मैं अपने देश के लिए जरूर मेडल जीतूंगा।” उन्होंने कहा कि यह पदक सिर्फ उनका नहीं, बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने कठिन समय में उन पर भरोसा बनाए रखा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सफलता उन्हें भविष्य में भारत के लिए और बड़े मंचों पर बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देगी।पुरुषों के हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग मुकाबले में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने रजत पदक अपने नाम किया। झंडू कुमार ने कांस्य पदक जीतकर भारत को प्रतियोगिता का पहला पदक दिलाया। -
नई दिल्ली। भारतीय निशानेबाज संयम ने शुक्रवार को आईएसएसएफ विश्व कप राइफल/पिस्टल/शॉटगन में महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा का रजत पदक जीतकर भारत का पदकों का खाता खोला। संयम ने फाइनल में 243.4 अंक हासिल किए। यह उनके करियर का दूसरा आईएसएसएफ विश्व कप पदक है। पूर्व जूनियर विश्व और एशियाई चैंपियन संयम ने क्वालीफिकेशन राउंड में 579 अंक हासिल कर फाइनल में जगह बनाई। उन्होंने पूरे मुकाबले के दौरान शानदार निरंतरता बनाए रखी और फाइनल में दमदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया।
आईएसएसएफ विश्व कप में भारत का 36 सदस्यीय दल राइफल, पिस्टल और शॉटगन की व्यक्तिगत तथा मिश्रित टीम स्पर्धाओं में चुनौती पेश कर रहा है। भारतीय टीम में मनु भाकर, स्वप्निल कुसाले, ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर, ईशा सिंह, सुरुचि, एलावेनिल वलारिवन, सिफ्ट कौर समरा, सोनम उत्तम मस्कर, अनीश भानवाला, रायजा ढिल्लों, गनेमत सेखों और अनंत जीत सिंह नरुका जैसे प्रमुख निशानेबाज शामिल हैं।पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल में पार्थ राकेश माने, हिमांशु ढिल्लों, शाहू तुषार माने और रुद्राक्ष बालासाहेब पाटिल भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वहीं महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल में एलावेनिल वलारिवन, सोनम उत्तम मस्कर और साक्षी सुनील पाडेकर चुनौती पेश करेंगी। पुरुषों की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन स्पर्धा में ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर, नीरज कुमार और रुद्राक्ष बालासाहेब पाटिल शामिल हैं, जबकि महिलाओं में आशी चौकसे, विदरसा के. विनोद और सिफ्ट कौर समरा भारतीय टीम का हिस्सा हैं।महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में सुरुचि, संयम और ईशा सिंह भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, जबकि पुरुषों में केदारलिंग बी. उचागंवे, कमलजीत और आकाश भारद्वाज शामिल हैं। महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल में मनु भाकर, ईशा सिंह और राही सरनोबत भारतीय चुनौती पेश करेंगी, जबकि पुरुषों की 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल में अनीश भानवाला, ओमकार सिंह और भावेश शेखावत टीम का हिस्सा हैं।शॉटगन स्पर्धाओं में पुरुषों की ट्रैप में उदयवीर सिंह जाजी, भौनीश मेंदीरत्ता और विवान कपूर उतरेंगे। महिलाओं की ट्रैप टीम में प्रगति दुबे, कीर्ति गुप्ता और राजेश्वरी कुमारी शामिल हैं। पुरुषों की स्कीट में गुरजोत सिंह खंगुरा, परमपाल सिंह गुरोन और अभय सिंह सेखों, जबकि महिलाओं की स्कीट में गनेमत सेखों, दर्शना राठौर और यशस्वी राठौर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। भारत 10 मीटर एयर राइफल, 10 मीटर एयर पिस्टल और ट्रैप मिश्रित टीम स्पर्धाओं में भी हिस्सा लेगा। -
नई दिल्ली। ग्लासगो में आयोजित 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजी दल की अगुवाई देश की सबसे अनुभवी और सफल महिला मुक्केबाजों में शामिल लवलीना बोर्गोहेन कर रही हैं। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता, विश्व चैंपियन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सबसे भरोसेमंद मुक्केबाजों में शुमार लवलीना इस बार उस कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक को जीतने के इरादे से उतरी हैं, जो अब तक उनके शानदार करियर में शामिल नहीं हो सका है।
महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा कर रहीं लवलीना को भारत की सबसे मजबूत पदक दावेदार माना जा रहा है। असम के गोलाघाट जिले के बारोमुखिया गांव से निकलकर विश्व मुक्केबाजी के शीर्ष स्तर तक पहुंचने वाली लवलीना का सफर संघर्ष, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की मिसाल रहा है। किकबॉक्सिंग से खेल की शुरुआत करने वाली लवलीना की प्रतिभा को वर्ष 2012 में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के टैलेंट सर्च कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध कोच पदुम बोरो ने पहचाना था।टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर लवलीना ओलंपिक मुक्केबाजी में पदक जीतने वाली भारत की तीसरी और महिला वर्ग में मैरी कॉम के बाद दूसरी भारतीय मुक्केबाज बनीं। बाद में उन्होंने ओलंपिक भार वर्गों में बदलाव के बाद 69 किलोग्राम से 75 किलोग्राम वर्ग में सफलतापूर्वक कदम रखा और विश्व चैंपियनशिप सहित कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी निरंतरता साबित की।हालांकि, कॉमनवेल्थ गेम्स ऐसा प्रमुख मंच है जहां स्वर्ण पदक जीतने का उनका सपना अभी अधूरा है। ग्लासगो 2026 में वह इसी कमी को पूरा करना चाहती हैं। खेलों से पहले लवलीना ने कहा था कि कॉमनवेल्थ स्वर्ण जीतना उनके सबसे बड़े लक्ष्यों में शामिल है और इसके लिए उन्होंने पिछले कई महीनों से तकनीक, फिटनेस और मानसिक मजबूती पर विशेष ध्यान दिया है।लवलीना के अभियान की शुरुआत सकारात्मक रही है। महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग में प्रतिभागियों की संख्या कम होने के कारण उन्हें सीधे सेमीफाइनल में प्रवेश मिला है। कॉमनवेल्थ गेम्स के प्रारूप के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाले दोनों हारने वाले मुक्केबाजों को कांस्य पदक मिलता है। ऐसे में लवलीना ने रिंग में उतरे बिना ही भारत के लिए मुक्केबाजी का पहला पदक सुनिश्चित कर दिया है।हालांकि, उनके लिए केवल पदक जीतना पर्याप्त नहीं है। उनका लक्ष्य स्वर्ण पदक हासिल करना है। यदि वह सेमीफाइनल जीतती हैं तो कम से कम रजत पदक पक्का हो जाएगा और फिर फाइनल में जीत के साथ वह अपने करियर की उपलब्धियों में कॉमनवेल्थ स्वर्ण भी जोड़ सकती हैं। यह उपलब्धि उनके ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप पदकों के साथ उनके शानदार करियर को और अधिक पूर्ण बना देगी।लवलीना आज देशभर के युवा खिलाड़ियों, विशेषकर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि प्रतिभा, मेहनत और सही मार्गदर्शन के दम पर कोई भी खिलाड़ी विश्व स्तर पर सफलता हासिल कर सकता है। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के उद्घाटन समारोह में भारत की ध्वजवाहक बनने के साथ उन्होंने भारतीय महिला खिलाड़ियों के बढ़ते आत्मविश्वास और सफलता का भी प्रतिनिधित्व किया।कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का मुक्केबाजी में प्रदर्शन हमेशा मजबूत रहा है और इस बार भी देश को लवलीना से स्वर्ण पदक की उम्मीद है। उनकी तकनीकी दक्षता, रणनीतिक समझ और दबाव में शांत रहने की क्षमता उन्हें प्रतियोगिता की सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल करती है।ग्लासगो में चल रहे इन खेलों में लवलीना बोर्गोहेन एक और ऐतिहासिक उपलब्धि के बेहद करीब हैं। यदि वह स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहती हैं तो यह केवल एक और अंतरराष्ट्रीय खिताब नहीं होगा, बल्कि उनके शानदार करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जाएगा और भारतीय मुक्केबाजी के इतिहास में उनका स्थान और भी मजबूत हो जाएगा। -
नई दिल्ली। ग्लासगो में राष्ट्रमंडल खेल 2026 का आधिकारिक आगाज हो चुका है। खेलों के इस महाकुंभ में राष्ट्रमंडल देशों के शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। भारत भी एक बार फिर बड़े पदक अभियान की उम्मीदों के साथ उतरा है और सभी की निगाहें स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू पर टिकी हैं। ओलंपिक रजत पदक विजेता और राष्ट्रमंडल खेलों की कई बार की चैंपियन मीराबाई से भारत को एक और स्वर्ण पदक की उम्मीद है। मणिपुर के एक छोटे से गांव से विश्व खेल मंच तक का उनका सफर उन्हें देश की सबसे प्रेरणादायक खिलाड़ियों में शामिल करता है।
मणिपुर के नोंगपोक काकचिंग गांव से आने वाली मीराबाई चानू ने कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर विश्व की सर्वश्रेष्ठ भारोत्तोलकों में अपनी जगह बनाई। उनकी उपलब्धियों ने भारत में भारोत्तोलन को नई पहचान दिलाई और इस खेल को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।मीराबाई के करियर का सबसे यादगार क्षण टोक्यो ओलंपिक में आया, जहां उन्होंने महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा। यह भारोत्तोलन में भारत का लंबे समय बाद ओलंपिक पदक था। इस उपलब्धि ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई और वह समर्पण व उत्कृष्टता की प्रतीक बन गईं।राष्ट्रमंडल खेल हमेशा से मीराबाई चानू के लिए सफल मंच रहे हैं। उन्होंने 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। इसके बाद 2018 गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। बर्मिंघम 2022 में उन्होंने अपने खिताब का सफल बचाव करते हुए लगातार दूसरा स्वर्ण पदक जीता और दुनिया की सबसे भरोसेमंद भारोत्तोलकों में अपनी जगह मजबूत की। ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में मीराबाई चानू एक बार फिर भारत की सबसे बड़ी पदक उम्मीदों में शामिल हैं। उनकी बेहतरीन तकनीक, दबाव में शांत रहने की क्षमता और अंतरराष्ट्रीय अनुभव उन्हें मजबूत दावेदार बनाते हैं।पिछले कुछ वर्षों में चोटों ने मीराबाई की राह कठिन बनाई, लेकिन उन्होंने हर बार शानदार वापसी कर अपनी मानसिक मजबूती और समर्पण का परिचय दिया। उनका अनुशासित जीवन, कड़ी ट्रेनिंग और सकारात्मक सोच देशभर के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।मीराबाई चानू ने अपनी उपलब्धियों के जरिए खेलों में महिला सशक्तिकरण का भी मजबूत संदेश दिया है। खासकर पूर्वोत्तर भारत की हजारों लड़कियों को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखने का आत्मविश्वास दिया है। उन्होंने साबित किया कि प्रतिभा, मेहनत और अवसर के बल पर भौगोलिक तथा आर्थिक चुनौतियों को भी पीछे छोड़ा जा सकता है।यदि मीराबाई चानू ग्लासगो में एक और स्वर्ण पदक जीतती हैं तो यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि भारोत्तोलन में भारत की बढ़ती ताकत का भी प्रमाण बनेगी। साथ ही 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारियों के बीच यह सफलता देश के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को नई ऊर्जा देगी। मीराबाई चानू केवल अपने प्रदर्शन के लिए ही नहीं, बल्कि विनम्रता, अनुशासन और देश के प्रति समर्पण के लिए भी जानी जाती हैं। इसी सम्मान के चलते उन्हें राष्ट्रमंडल खेल 2026 के उद्घाटन समारोह में भारत के ध्वजवाहकों में शामिल किया गया है।ग्लासगो में भारतीय दल के साथ उतरी मीराबाई चानू से पूरे देश को एक बार फिर स्वर्णिम प्रदर्शन की उम्मीद है। उन्होंने अपने करियर में बार-बार साबित किया है कि सच्चे चैंपियन केवल पदकों से नहीं, बल्कि अपने चरित्र, संघर्ष और उत्कृष्टता की निरंतर तलाश से पहचाने जाते हैं। यदि वह ग्लासगो में एक और स्वर्ण पदक जीतती हैं तो यह उपलब्धि उनके शानदार करियर को और भी ऐतिहासिक बना देगी। -
कोलंबो. लेग स्पिनर रोहित शर्मा और तेज गेंदबाज सी वेंकट ने मिलकर सात विकेट चटकाए जिससे भारत अंडर-19 टीम ने बृहस्पतिवार को यहां दूसरे युवा टेस्ट के चौथे और अंतिम दिन श्रीलंका अंडर-19 को 211 रन से हरा दिया। पहले मैच ड्रॉ रहने के भारत अंडर-19 टीम ने दो मैच की श्रृंखला 1-0 से जीती। भारतीय टीम ने इससे पहले युवा एकदिवसीय श्रृंखला 1-2 से गंवाई थी।
भारत अंडर-19 के 472 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए मेजबान टीम लंच के ब्रेक के बाद 76.5 ओवर में 260 रन पर सिमट गई। कल 55 रन बनाकर खेल रहे कप्तान विमथ दिनसारा सुबह के सत्र मे आउट होने वाले पहले बल्लेबाज रहे। वह 64 रन बनाने के बाद तेज गेंदबाज प्रणव राघवेंद्र का शिकार बने। वेंकट (27 रन पर तीन विकेट) ने कल रात भारत को जीत की राह पर पहुंचाया था जिसके बाद सुबह के सत्र में रोहित (49 रन पर चार विकेट) ने श्रीलंकाई टीम का स्कोर नौ विकेट पर 242 रन किया। सेथमिका सेनेविरत्ने (42 रन, 49 गेंद, छह चौके, एक छक्का) कुछ देकर संघर्ष किया लेकिन हार को कुछ देर के लिए ही टाल पाए। ऑफ स्पिनर जे हेमुचुदेशन ने सेनेविरत्ने को आउट करके श्रीलंका की पारी का अंत किया। - हरारे. भारत के किशोर बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने स्वीकार किया कि पिछले चार महीनों में उनके करियर में कई उतार-चढ़ाव आए हैं लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ बृहस्पतिवार से शुरू हो रही टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला से पहले उनका आत्मविश्वास पूरी तरह कायम है। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में शानदार प्रदर्शन के दम पर 15 वर्षीय सूर्यवंशी को भारत के आयरलैंड और इंग्लैंड टी20 दौरे में शामिल किया गया। हालांकि बेलफास्ट में आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की श्रृंखला में उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में दूसरे टी20 मैच में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया। इसके साथ ही वह सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ते हुए भारत के सबसे कम उम्र के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बन गए। सूर्यवंशी ने अगले तीन मुकाबले खेले, लेकिन बड़ी पारियां नहीं खेल सके।इसके बाद संजू सैमसन की टीम में वापसी होने पर उन्हें पांचवें और अंतिम टी20 मुकाबले से बाहर कर दिया गया। भारत यह श्रृंखला 0-4 से हार गया। उन्हें अंतिम मैच से बाहर किए जाने के फैसले की कई पूर्व क्रिकेटरों ने आलोचना की और सवाल उठाया कि केवल तीन पारियों के बाद किशोर बल्लेबाज को बाहर करना सही नहीं था। सूर्यवंशी ने 'बीसीसीआई डॉट टीवी' से कहा, ''हां, पिछले चार महीनों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। यह क्रिकेट का हिस्सा है और ऐसा आगे भी होता रहेगा। लेकिन मुझे अपनी प्रक्रिया पर भरोसा रखना है और टीम के लिए अपना शत प्रतिशत देना है। '' सूर्यवंशी के हरारे की परिस्थितियों से परिचित होने के कारण बृहस्पतिवार को पहले टी20 मैच में उनके अंतिम एकादश में शामिल होने की संभावना मजबूत मानी जा रही है। इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें और अंतिम टी20 से बाहर किए जाने के बाद सूर्यवंशी भावुक दिख रहे थे। उन्होंने स्वीकार किया कि कम उम्र में ऐसी निराशाओं से उबरना आसान नहीं होता, लेकिन उन्हें अपने आसपास के लोगों और कोचिंग स्टाफ से पूरा सहयोग मिला जिससे वह दोबारा अपना ध्यान खेल पर केंद्रित कर सके। उन्होंने कहा, ''यह स्वाभाविक है कि मुझे जिस भी तरह की मदद या मार्गदर्शन चाहिए, कोच मुझे उपलब्ध करा रहे हैं। जितना अभ्यास मुझे चाहिए, वह भी मिल रहा है।मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं और आत्मविश्वास से भरा हूं। '' सूर्यवंशी इस साल फरवरी में भारत की अंडर-19 विश्व कप विजेता टीम के अहम सदस्य थे। उन्होंने इसी मैदान पर फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ महज 80 गेंदों में 175 रन की विस्फोटक पारी खेलकर भारत को खिताब दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा, ''यह मैदान मेरे लिए बहुत यादगार है। केवल चार महीने पहले हमने यहां अंडर-19 विश्व कप का फाइनल जीता था इसलिए यह मेरे लिए बेहद खास मैदान है। भारत का प्रतिनिधित्व करना हर खिलाड़ी का सपना होता है और यह मेरे लिए बहुत विशेष पल है। '' उन्होंने कहा, ''जिस मैदान पर हमने चार महीने पहले इतिहास रचा था, उसी मैदान पर फिर से भारत के लिए खेलना एक अलग ही अहसास है। मैं इसका भरपूर आनंद ले रहा हूं। '' किशोर बल्लेबाज ने कहा कि यदि उन्हें खेलने का मौका मिलता है तो वह अंडर-19 विश्व कप के दौरान यहां हासिल किए गए अनुभव का पूरा फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। सूर्यवंशी ने कहा, ''यहां की पिच और परिस्थितियों के बारे में मुझे अच्छी जानकारी है। उस टूर्नामेंट से जो भी सीख मिली, उसे अब इन मैचों में लागू करने की कोशिश करूंगा और अच्छा प्रदर्शन करूंगा। '' उन्होंने कहा, ''अब तक मैंने जो अभ्यास किया है, उसी पर भरोसा रखूंगा और अपने खेल के अनुसार खेलने की कोशिश करूंगा। टीम के लिए जितना भी योगदान दे सकूं, वह देने का पूरा प्रयास करूंगा। मैंने इस मैदान पर दो मैच खेले हैं और दोनों में मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा था। अब उसी लय को आगे भी जारी रखना चाहता हूं। ''
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नयी दिल्ली. ''तोक्यो ओलंपिक से पहले मन में जो चल रहा था, कुछ उसी तरह के भाव हैं और तैयारी भी उतनी ही मजबूत है क्योंकि हमारा एक ही लक्ष्य है कि विश्व कप में पांच दशक से पोडियम पर नहीं रहने का सिलसिला तोड़ना ही है ,'' यह कहना है भारतीय हॉकी कप्तान हरमनप्रीत सिंह का । तोक्यो ओलंपिक 2020 में 41 साल बाद कांस्य पदक जीतने के बाद पेरिस में 2024 में अपनी कप्तानी में उसे दोहराने वाले हरमनप्रीत को बखूबी पता है कि कई खिलाड़ियों के लिये विश्व कप जीतने का शायद यह आखिरी मौका है । उन्होंने कहा ,'' हम भी चाहते हैं कि 50 साल से विश्व कप नहीं जीत पाने के सिलसिले को वैसे ही तोड़ें, जैसे तोक्यो में 41 साल बाद ओलंपिक पदक जीता था । उसी सोच और उसी तैयारी के साथ उतरेंगे । लेकिन कोई दबाव नहीं है, बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी है ।'' विश्व कप 15 से 30 अगस्त तक नीदरलैंड और बेल्जियम में खेला जायेगा । भारत ने सिर्फ एक बार 1975 में कुआलालम्पुर में खिताब जीता है । इसके अलावा 1971 में बार्सीलोना में कांस्य और 1973 में एम्सटेलवीन में रजत पदक जीता था । दो ओलंपिक पदक जीत चुके भारतीय टीम के कई मौजूदा खिलाड़ी अपने कैरियर के आखिरी पड़ाव पर भी हैं और विश्व कप के जरिये भारतीय हॉकी का सुनहरा अध्याय लिखना चाहेंगे । भारत के लिये 264 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके इस अनुभवी ड्रैग फ्लिकर ने कहा ,'' पिछले कुछ मैचों में टीम के प्रदर्शन, आत्मविश्वास और एकजुटता से विश्वास बढा है कि यह सुनहरा मौका है । अनुभवी खिलाड़ियों के लिये यह और भी अहम है क्योंकि कुछ खिलाड़ियों का यह आखिरी विश्व कप हो सकता है और उनसे काफी अपेक्षायें हैं।'' उन्होंने कहा ,'' वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके मिसाल बनना चाहेंगे ताकि आने वाली पीढी को इसी तरह से खेलने की प्रेरणा मिले ।'' हरमनप्रीत ने हालांकि स्वीकार किया कि लक्ष्य तक पहुंचना आसान नहीं होगा और इसके लिये काफी मेहनत करनी होगी । उन्होंने कहा ,'' लक्ष्य तक पहुंचने की राह आसान नहीं है, इसलिये बहुत मेहनत करनी होगी । हम हार नहीं मानने की सोच के साथ खेलते हैं और इसे दिमाग में हमेशा रखेंगे ।'' टीम की वास्तविक संभावनाओं के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा ,'' विश्व कप में किसी टीम को हलके में नहीं ले सकते । सभी अपना सौ प्रतिशत देने और जीत की मानसिकता से आयेंगी । हम मैच दर मैच रणनीति बनायेंगे और जरूरत से ज्यादा आगे की नहीं सोचेंगे ।'' प्रो लीग के यूरोप चरण में भारत ने कुछ अच्छे मैच खेले लेकिन टीम नौ टीमों की तालिका में पाकिस्तान से ऊपर आठवें स्थान पर रही । हरमनप्रीत ने कहा कि प्रो लीग की गलतियों से सबक लेकर उनकी टीम खेलेगी क्योंकि विश्व कप में दूसरा मौका नहीं मिलेगा । उन्होंने कहा ,'' प्रो लीग में हम नीदरलैंड और जर्मनी जैसी टीमों के खिलाफ भी जीते । ऐसे टूर्नामेंटों में आप प्रयोग करते हैं, बहुत कुछ सीखते हैं और विरोधी के बारे में विश्लेषण करते हैं । विश्व कप हालांकि ऐसा टूर्नामेंट है जिसमें दूसरा मौका नहीं मिलेगा लिहाजा छोटी छोटी गलतियों से भी बचना होगा ।'' उन्हें यकीन है कि पेनल्टी कॉर्नर के अलावा भारत अधिक फील्ड गोल भी करेगा क्योंकि फॉरवर्ड पंक्ति का आपसी तालमेल बहुत अच्छा है । उन्होंने कहा ,'' पिछले कुछ मैचों में हमने काफी फील्ड गोल किये हैं । गोल कौन कर रहा है, यह मायने नहीं रखता लेकिन मौकों का इस्तेमाल करना जरूरी है । फॉरवर्ड पंक्ति का तालमेल अच्छा है और मुझे उन पर पूरा भरोसा है ।'' यह पूछने पर कि वीडियो विश्लेषण और तकनीक के दौर में ड्रैग फ्लिक में नवीनता लाना कितना मुश्किल है, उन्होंने कहा ,''बिल्कुल यह मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि सभी वीडियो विश्लेषण करते हैं । लेकिन छोटी छोटी चीजों पर काम कर रहे हैं ।हम भी विरोधी टीमों का पीसी डिफेंस देखकर रणनीति बनाते हैं कि कहां गोल की गुंजाइश हो सकती है ।'' विश्व कप में पदार्पण कर रहे खिलाड़ियों पर भरोसा जताते हुए हरमनप्रीत ने कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय हॉकी का पर्याप्त अनुभव है और बतौर कप्तान सकारात्मक संवाद के साथ टीम से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराना उनकी प्राथमिकता है । उन्होंने कहा ,'' पहली बार खेल रहे युवाओं के साथ हम अपना अनुभव साझा कर रहे हैं। बतौर कप्तान मैं सकारात्मक संवाद में विश्वास करता हूं। एक दूसरे का सहयोग करना , अपनी जिम्मेदारी को निभाना बड़े टूर्नामेंट में अहम है ।'' उन्होंने कहा ,'' युवा खिलाड़ियों पर दबाव नहीं है । प्रो लीग में वे शीर्ष टीमों के खिलाफ खेल चुके हैं । उन्हें बताया गया है कि अपना स्वाभाविक खेल खेलें लेकिन टीम के प्रति जिम्मेदारी को ऊपर रखें और यह तैयारी में दिख भी रहा है ।'' ग्रुप चरण में पाकिस्तान के खिलाफ मैच को लेकर 'हाइप' के बारे में उन्होंने कहा कि भारतीय टीम जज्बात को काबू में रखकर खेलेगी । उन्होंने कहा ,''पाकिस्तान के खिलाफ मैच में हाइप तो हमेशा रहेगी , लेकिन हम आपस में बात करते हैं कि जज्बात हावी नहीं होने देना है और टीम के प्रति जिम्मेदारी को पहले रखना है । हमारा प्रदर्शन उनके खिलाफ अच्छा ही रहा है जिसे कायम रखने की कोशिश रहेगी ।'' विश्व कप के कुछ दिन बाद ही सितंबर अक्टूबर में जापान में होने वाले एशियाई खेलों में भी अच्छा प्रदर्शन करके ओलंपिक 2028 के लिये क्वालीफाई करने का उन्हें यकीन है । उन्होंने कहा ,'' मुझे टीम पर और ट्रेनिंग पर भरोसा हैं । जो चीजें हमारे हाथ में नहीं है , उसके बारे में सोचने की बजाय हम विश्व कप के बाद जल्दी रिकवर होकर एशियाई खेलों में अच्छा प्रदर्शन करना चाहेंगे । एशिया में हमने अच्छा खेला है और उस दबदबे को कायम रखकर ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करेंगे ।'' कल से ग्लास्गो में शुरू हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों में हॉकी इस बार नहीं है । हरमनप्रीत ने भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामना देते हुए कहा ,'' आप भारत के लिये खेल रहे हो । अपेक्षायें काफी है कि बड़े टूर्नामेंटों में खिलाड़ी अच्छा खेलेंगे, ज्यादा से ज्यादा पदक जीतेंगे । आपको शुभकामनायें ।
- नई दिल्ली। भारत के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज के लिए जिम्बाब्वे टीम का ऐलान कर दिया गया है। 15 सदस्यीय टीम में पहली बार विकेटकीपर-बल्लेबाज तफादजवा त्सिगा को शामिल किया गया है। इसके साथ ही ऑलराउंडर वेस्ली मधेवेरे और पेसर न्यूमैन न्यामहुरी की जिम्बाब्वे टी20 टीम में वापसी हुई है। ये तीनों खिलाड़ी क्लाइव मडेंडे, टिनोटेंडा मापोसा और ताशिंगा मुसेकिवा की जगह टीम में आए हैं, जो हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ खेलने वाली टीम का हिस्सा थे। टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 23 जुलाई को खेला जाना है। वहीं, दूसरा मैच 25 जुलाई और अंतिम मैच 26 जुलाई को होगा। सीरीज के सभी मुकाबलों की मेजबानी हरारे का हरारे स्पोर्ट्स क्लब मैदान करेगा।जिम्बाब्वे की ओर से 10 टेस्ट मैच खेल चुके त्सिगा ने अब तक सफेद गेंद की क्रिकेट में अपना डेब्यू नहीं किया है। बांग्लादेश सीरीज के दौरान टेस्ट और वनडे टीम में शामिल रहे मधेवेरे जुलाई 2025 के बाद पहली बार टी20 टीम में लौटे हैं। वह अब तक जिम्बाब्वे की ओर से कुल 79 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल चुके हैं। वहीं, न्यामहुरी इंजरी से उबरने के बाद टीम में वापसी कर रहे हैं। चोट के चलते वह बांग्लादेश के खिलाफ हुई वनडे सीरीज में टीम का हिस्सा नहीं रहे थे। न्यामहुरी की जगह बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज में हिस्सा लेने वाले तनाका चिवांगा टीम में अपनी जगह बनाए रखने में सफल रहे हैं।टीम की कमान सिकंदर रजा के हाथों में सौंपी गई है। बांग्लादेश के खिलाफ रजा की अगुवाई में जिम्बाब्वे का प्रदर्शन शानदार रहा। टीम ने एकमात्र टेस्ट और वनडे सीरीज को दमदार प्रदर्शन करते हुए अपने नाम किया था। हालांकि, टी20 सीरीज में जरूर जिम्बाब्वे को 1-2 से हार का सामना करना पड़ा था। मेजबान टीम के सामने भारत की मुश्किल चुनौती होगी। हालांकि, टीम इंडिया को हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ करारी हार का सामना करना पड़ा है। भारत और जिम्बाब्वे की आखिरी भिड़ंत टी20 विश्व कप 2026 के सुपर 8 स्टेज में हुई थी, जहां भारत ने जिम्बाब्वे को 72 रनों से हराया था।भारत के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए जिम्बाब्वे का स्क्वॉड: सिकंदर रजा (कप्तान), ब्रायन बेनेट, रयान बर्ल, तनाका चिवांगा, बेन करन, ब्रैड इवांस, वेस्ली मधेवेरे, तदीवानाशे मारुमानी (विकेटकीपर), वेलिंगटन मसाकाद्जा, ब्लेसिंग मुजारबानी, डियोन मायर्स, रिचर्ड नगारवा, न्यूमैन न्यामहुरी, मिल्टन शुम्बा, और तफादजवा त्सिगा (विकेटकीपर)।
- नयी दिल्ली. शतरंज की सर्वोच्च संस्था फिडे से मान्यता प्राप्त टोटल शतरंज विश्व चैंपियनशिप टूर का आधिकारिक पायलट संस्करण 10 से 21 नवंबर तक हंगरी के बुडापेस्ट में आयोजित किया जाएगा। यहां प्रतियोगिता शतरंज के तीनों प्रारूप क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज में आयोजित की जाएगी। इन तीनों प्रारूप में सबसे अधिक अंक हासिल करने वाला खिलाड़ी चैंपियन बनेगा। बुडापेस्ट में होने वाली प्रतियोगिता चैंपियनशिप के प्रारूप के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में काम करेगी, जिसे 2027 में विश्व स्तर पर लागू किया जाना है। फिडे ने यह भी घोषणा की है कि टोटल शतरंज विश्व चैंपियनशिप टूर विश्व चैंपियनशिप के लिए चैलेंजर का निर्धारण करने वाले कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाइंग प्रक्रिया का हिस्सा होगा। कैंडिडेट्स टूर्नामेंट क्लासिकल प्रारूप में खेला जाता है। टोटल शतरंज विश्व चैंपियनशिप टूर में शीर्ष पर रहने वाले दो खिलाड़ी कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई करेंगे।
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नयी दिल्ली. भारत का 24 सदस्यीय तलवारबाजी दल बुधवार से हांगकांग में शुरू हो रही सीनियर विश्व चैम्पियनशिप में जोर आजमाइश करेगा । नौ दिवसीय चैम्पियनशिप एशियावर्ल्ड एक्स्पो पर आयोजित की जायेगी । भारतीय टीम में 12 पुरूष और 12 महिला खिलाड़ी हैं जो सभी तीन श्रेणियों एपी, फॉइल और साबरे में व्यक्तिगत और टीम वर्गों में भाग लेंगे । भारतीय तलवारबाजी संघ के महासचिव राजीव मेहता ने एक विज्ञप्ति में कहा ,'' विश्व चैम्पियनशिप भारतीय तलवारबाजी के लिये काफी अहम है क्योंकि हमे विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के सामने खुद को आंकने का मौका मिलेगा ।'' टीम के साथ पांच राष्ट्रीय कोच और दो फिजियो भी जायेंगे ।
भारतीय टीम :
एपी (महिला) तनिष्का खत्री, प्राची लोहान, यशकीरत कौर , मितवा जेसंगभाई चौधरी
एपी (पुरूष ) शेरजिन राजेंद्रन शांतिमोल, जोसेफ बेनेट, सिवा मंगेश एस निर्मला, शौर्य अश्विनी
फॉइल ( महिला ) जॉयस ए स्टालिनराज, मीना देवी नाओरेम, कनुप्रिया चावला, सोनिया देवी
फॉइल (पुरूष ) सचिन, हेमाश सिंह, आदित्य, तेजस मनोज पाटिल
साबरे (महिला ) श्रेया गुप्ता, जेफरलिन जानी रेक्सलिन सिमला, श्रुति जोशी, आखरी
साबरे (पुरूष ) करण सिंह, गिशो निधि कुमारेसन पद्मा, लक्ष्य बडसेर, विशाल थापर । -
नयी दिल्ली. छह बार की विश्व चैम्पियन और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता एम सी मैरी कॉम को राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है हालांकि उन्हें लगता है कि स्वर्ण पदक जीत पाना मुश्किल होगा । मणिपुर की 43 वर्ष की इस मुक्केबाज ने कहा ,'' हम पदक जीतेंगे लेकिन मुझे स्वर्ण की उम्मीद नहीं है । अगर मिल जाता है तो मुझे खुशी होगी । राष्ट्रमंडल खेलों में हम फाइनल तक जरूर पहुंचेंगे । मैं प्रार्थना करूंगी कि हम सारे पदक जीतें ।'' उन्होंने कहा ,'' मुक्केबाजी ने मुझे जीवन में सब कुछ दिया है । खेल से इतना कुछ मिलने के बाद यह कैसे संभव है कि मैं वहां खेल रहे अपने खिलाड़ियों के लिये दुआ नहीं करूं । हम एक परिवार हैं ।'' भारतीय मुक्केबाजों ने पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में सात पदक जीते थे जिसमें तीन स्वर्ण और एक रजत शामिल है । ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजी दल में सात पुरूष और सात महिला मुक्केबाज शामिल हैं । भारतीय महिला टीम में ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किलो), दुनिया की नंबर एक मुक्केबाज जैसमीन लम्बोरिया (57 किलो) , एशियाई खेलों की कांस्य पदक विजेता प्रीति पवार (54 किलो) और विश्व कप स्वर्ण पदक विजेता अरूंधति चौधरी (70 किलो) शामिल हैं । चारों ने इस साल अप्रैल में एशियाई चैम्पियनशिप में पदक जीते थे । लड़कों में सचिन सिवाच (60 किलो) और नरेंदर बेरवाल (प्लस 90 किलो) से उम्मीदें हैं ।मैरी कॉम ने कहा ,'' मैं सभी को शुभकामना देती हूं । भारत का प्रतिनिधित्व करना आसान नहीं है, यह बड़ी जिम्मेदारी है । सभी देश के लिये पदक जीतने के इरादे से ही गए होंगे ।'' भारतीय मुक्केबाजी के प्रशासनिक पहलू के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा ,'' अजीब है ।''
पिछले कुछ महीने से अजय सिंह की अध्यक्षता वाले भारतीय मुक्केबाजी महासंघ की चयन संबंधी विवादों, कोचों की नियुक्ति और राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में रहने की खराब व्यवस्था को लेकर काफी आलोचना हुई है । बीएफआई को एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों की अपारदर्शी और अस्पष्ट चयन नीति को लेकर खेल मंत्रालय ने नोटिस भी जारी किया । मैरी कॉम ने कहा ,'' मुझे समझ में नहीं आता कि कुछ चैम्पियन मुक्केबाजों का चयन क्यो नहीं हुआ । यह भविष्य के लिये अच्छा नहीं है । प्रदर्शन ऊपर नीचे हो सकता है लेकिन चयन सही नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है ।'' -
मियामी गार्डन्स. किलियन एमबाप्पे ने शनिवार को इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे स्थान के मैच में फ्रांस के लिए दो गोल करके फुटबॉल विश्व कप में अपने कुल गोल की संख्या 22 तक पहुंचाई और लियोनल मेस्सी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। फ्रांस के स्टार एमबाप्पे ने मौजूदा विश्व कप में 10 गोल किए हैं और 'गोल्डन बूट' की दौड़ में अर्जेन्टीना के महान खिलाड़ी मेस्सी से दो गोल आगे चल रहे हैं। यह पुरस्कार टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले को दिया जाता है। मेस्सी को एमबाप्पे से आगे निकलने का आखिरी मौका तब मिलेगा जब वह और मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना रविवार को न्यू जर्सी के ईस्ट रदरफोर्ड में फाइनल में स्पेन का सामना करेंगे। एमबाप्पे ने 'फॉक्स स्पोर्ट्स' से फ्रेंच में कहा, ''मैं इतिहास का शीर्ष स्कोरर नहीं बनकर कल का मैच (फाइनल) खेलना अधिक पसंद करता।'' एमबाप्पे ने चार साल पहले कतर में आठ गोल करके गोल्डन बूट जीता था जहां फ्रांस फाइनल में पेनल्टी शूटआउट में मेस्सी की कप्तानी वाली अर्जेन्टीना की टीम से हार गया था। मौजूदा टूर्नामेंट में 10 गोल करके एमबाप्पे ने विश्व कप में तीसरे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की बराबरी की। फ्रांस के लिए 1958 में जस्ट फोनटेन ने रिकॉर्ड 13 गोल किए थे जबकि हंगरी के सैंडोर कोक्सिस ने 1954 में 11 गोल किए थे। पश्चिम जर्मनी के गर्ड म्यूलर ने 1970 में 10 गोल दागे थे। जब मध्यांतर के समय फ्रांस 0-4 से पीछे था तो ऐसा लग रहा था कि एमबाप्पे गोल्डन बूट की दौड़ में पिछड़ जाएंगे। एमबाप्पे ने 48वें मिनट में गोलकीपर डीन हेंडरसन को छकाते हुए गोल करके टीम में नई जान फूंकी। इसके बाद 66वें मिनट में उन्होंने लगभग 14 गज की दूरी से बाएं पैर से शॉट मारकर फिर से हेंडरसन को पछाड़ा और मेस्सी के विश्व कप में सर्वाधिक 21 गोल के करियर रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। एमबाप्पे के दूसरे गोल से फ्रांस ने स्कोर 3-4 किया लेकिन टीम जीत दर्ज करने में नाकाम रही।
एमबाप्पे ने कहा, ''मैच में दो बिल्कुल अलग हाफ थे। पहले हिस्से के दौरान मैं समझ सकता हूं कि कुछ लोग क्यों सोचते हैं कि हमने खुद को बेवकूफ बनाया और जर्सी का सम्मान नहीं किया। मैं तो बस इतना कहूंगा कि हम इंसान हैं और हम ऐसी गलती करने की स्थिति में नहीं थे। हम पूरी तरह से हैरान रह गए थे और उन्होंने सच में हमें झकझोर दिया।'' उन्होंने कहा कि फ्रांसीसी खिलाड़ी डिडियर डेसचैम्प्स के लिए जीतना चाहते थे जो राष्ट्रीय टीम की अंतिम मैच में कोचिंग कर रहे थे। एमबाप्पे ने कहा, ''आखिरकार हम जीत नहीं पाए और यह कोच के लिए दुख की बात है। पहले हाफ से ऐसा लगता है कि हमने उन्हें निराश किया। हम बिल्कुल नहीं चाहते थे कि उन्हें ऐसा महसूस हो। यह मैच डिडियर डेसचैम्प्स की विरासत पर कोई दाग नहीं लगाएगा।'' फ्रांस ने डेसचैम्प्स की कोचिंग में 2018 में विश्व कप जीता था लेकिन 2022 में फाइनल में अर्जेंटीना से पेनल्टी शूटआउट में हारा गया था। इस साल फ्रांस को सेमीफाइनल में स्पेन ने हराया। डेसचैम्प्स के 14 साल के कार्यकाल का यह एक निराशाजनक अंत था जबकि उनकी स्टार खिलाड़ियों से भरी टीम एक और विश्व कप जीतने की प्रबल दावेदार मानी जा रही थी। -
बुडापेस्ट. मौजूदा अंडर-20 विश्व चैंपियन काजल ने बुडापेस्ट रैंकिंग सीरीज कुश्ती टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 76 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। स्वर्ण पदक के लिए हुए रोमांचक मुकाबले में अमेरिका की डाइमंड प्रेशियस गिलफोर्ड का सामना करते हुए युवा भारतीय पहलवान काजल ने दबाव के बावजूद बहुत समझदारी और संयम दिखाया। यह कड़ा मुकाबला 3-3 की बराबरी पर खत्म हुआ लेकिन काजल ने क्राइटेरिया के आधार पर चैंपियनशिप जीती जिससे भारत को टूर्नामेंट का तीसरा स्वर्ण पदक मिला। भारत ने 53 किग्रा और 57 किग्रा वर्ग में दो रजत पदक अपने नाम किए।
अंतिम पंघाल को 53 किग्रा चैंपियनशिप के फाइनल में चोट (वीआईएन) के कारण स्वीडन की एम्मा जोना डेनिस माल्मग्रीन के खिलाफ स्वर्ण पदक का मुकाबला हारने के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा। वहीं 57 किग्रा वर्ग में नेहा शर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई लेकिन फाइनल में चीन की केक्सिन होंग के खिलाफ 0-4 से हार गईं और दूसरे स्थान पर रहीं। भारत ने 53 किग्रा वर्ग में एक और पदक हासिल किया जब निशु ने कड़े मुकाबले के बाद कांस्य पदक जीता।
रोमानिया की एंड्रिया बीट्रिस एना के खिलाफ रणनीतिक रूप से कड़े मुकाबले में निशु ने जबरदस्त डिफेंस दिखाया। मुकाबला 2-2 से बराबरी पर खत्म हुआ लेकिन भारतीय पहलवान को क्राइटेरिया के आधार पर विजेता घोषित किया गया और उन्होंने पोडियम पर जगह पक्की की। भारत ने अब तक टूर्नामेंट में कुल 12 पदक जीत लिए हैं जिनमें तीन स्वर्ण, चार रजत और पांच कांस्य पदक शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ी अब ग्रीको रोमन शैली में हिस्सा लेंगे। -
नयी दिल्ली। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने शनिवार को यह सुनिश्चित किया कि राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेने जा रही 16 वर्षीय पैरा साइकिलिस्ट लीशा दास के साथ ग्लासगो में एक महिला सहयोगी स्टाफ सदस्य मौजूद रहेगी। लीशा ने पहले इस संबंध में चिंता जताई थी। भारत के दल की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी और राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वालीफाई करने वाली एकमात्र पैरा ट्रैक साइकिलिस्ट लीशा ने शिकायत की थी कि उनके साथ न तो उनके निजी कोच को और न ही किसी महिला सहयोगी स्टाफ को भेजा जा रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत बृहस्पतिवार से ग्लास्गो में होगी।
यह मामला सामने आने के बाद भारत के दल प्रमुख रोहित राजपाल ने कहा, ''जैसे ही हमें इस मुद्दे की जानकारी मिली, हमने तुरंत संज्ञान लिया और लीशा की मांग के अनुसार महिला फिजियोथेरेपिस्ट की व्यवस्था कर दी। '' उन्होंने कहा, ''हर खिलाड़ी की सुरक्षा, भलाई और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हम सभी खिलाड़ियों को सुरक्षित और सहयोगपूर्ण माहौल उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। '' असम की रहने वाली लीशा महिला सी5 वर्ग में प्रतिस्पर्धा करती हैं। उनके दाहिने हाथ में शारीरिक विकृति है। उन्होंने अपने निजी कोच, एक महिला फिजियोथेरेपिस्ट और एक तकनीशियन सहित तीन सदस्यीय सहयोगी टीम की मांग की थी। भारतीय साइकिलिंग महासंघ ने पहले उनके निजी कोच आदित्य मेहता और के दत्तात्रेय सहित तीन सहयोगी स्टाफ के नाम भेजे थे। अब आईओए ने लीशा के माता-पिता की सहमति से फिजियोथेरेपिस्ट आशा शेख का मान्यता पत्र (एक्रिडिटेशन) भी सुनिश्चित कर दिया है, ताकि वह ग्लास्गो में उनके साथ रह सकें। आदित्य मेहता को भी मान्यता मिल चुकी है जबकि तकनीशियन के लिए भी मान्यता पत्र दिलाने की कोशिश जारी है। पैरा साइकिलिंग में तकनीशियन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि प्रतियोगिता से पहले साइकिल में विशेष तकनीकी सेटिंग और समायोजन करना आवश्यक होता है। खेल मंत्रालय द्वारा मंजूर भारतीय दल में कुल 191 सदस्य हैं जिनमें 126 खिलाड़ी, 51 अधिकारी और 14 अन्य सहयोगी सदस्य शामिल हैं। महिला खिलाड़ियों वाले लगभग सभी खेलों में महिला कोच, फिजियोथेरेपिस्ट या मेडिकल स्टाफ मौजूद है, लेकिन साइकिलिंग और पैरा साइकिलिंग ऐसे दो खेल थे जिसमें महिला सहयोगी स्टाफ नहीं था। यह स्थिति भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के दिशा-निर्देशों के भी विपरीत थी, जिनके अनुसार महिला खिलाड़ियों वाले किसी भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय दल में कम से कम एक महिला कोच या महिला सहयोगी स्टाफ का होना अनिवार्य है। - नयी दिल्ली। कोयंबटूर के वी एस रतनवेल ने गुवाहाटी स्मार्ट सिटी इंटरनेशनल ओपन 2026 में 2500 ईएलओ रेटिंग का आंकड़ा पार कर देश के 99वें ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल किया जिससे भारत शतरंज में अपने 100वें ग्रैंडमास्टर के ऐतिहासिक मुकाम से अब सिर्फ एक कदम दूर है। पच्चीस वर्षीय रतनवेल ने 2022 में ही ग्रैंडमास्टर बनने के लिए जरूरी तीनों नॉर्म पूरे कर लिए थे, लेकिन आवश्यक 2500 ईएलओ रेटिंग हासिल नहीं कर पाने के कारण उन्हें लगभग पांच साल तक इंतजार करना पड़ा। महज छह साल की उम्र से शतरंज खेलना शुरू करने वाले रतनवेल विश्व युवा अंडर-10 कांस्य पदक विजेता और कई वर्षों तक भारत के शीर्ष अंतरराष्ट्रीय मास्टरों में शामिल रहे हैं। रतनवेल ने ' कहा, ''मैं कई बार बहुत ग्रैडमास्टर नॉर्म हासिल करने के करीब पहुंचा, लेकिन हर बार चूक गया। इससे काफी निराशा होती है क्योंकि शतरंज मानसिक खेल है और ऐसे में आप खुद पर ही संदेह करने लगते हैं। इसका प्रदर्शन पर भी असर पड़ता है। आखिरकार 2500 रेटिंग पार करना बेहद संतोषजनक है।'' उन्होंने कहा कि अब सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि वह बिना रेटिंग की चिंता किए खेल सकेंगे। रतनवेल ने कहा, ''मैं अब बिना किसी तनाव के और अधिक सहज होकर खेल सकूंगा। मुझे लगता है कि इससे मेरा प्रदर्शन और बेहतर होगा।'' अखिल भारतीय शतरंज महासंघ (एआईसीएफ) के अध्यक्ष नितिन नारंग ने रतनवेल को बधाई देते हुए कहा कि भारत अब अपने 100वें ग्रैंडमास्टर से केवल एक कदम दूर है।
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नयी दिल्ली. ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन ग्लासगो में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के उद्घाटन समारोह में भारत की ध्वज और बैटन वाहक होंगी। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने शनिवार को यह घोषणा की। कम खिलाड़ियों वाले इस बहु-खेल आयोजन का उद्घाटन समारोह 23 जुलाई को आयोजित किया जाएगा।
आईओए अध्यक्ष पीटी उषा ने एक बयान में कहा, ''यह गर्व का विषय है कि मीराबाई और लवलीना 'ओवीओ हाइड्रो' में यह जिम्मेदारी निभाएंगी। मैं दोनों खिलाड़ियों और पूरे भारतीय दल को शुभकामनाएं देती हूं।'' उन्होंने कहा, '' भारतीय टीम के उद्घाटन समारोह में दो महिला खिलाड़ियों को यह सम्मान मिलना गर्व की बात है। इससे खेलों के माहौल और दिशा की शुरुआत होगी। दोनों खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार भारत का मान बढ़ाया है। वे इस समय ब्रिटेन में खेलों की तैयारी में पूरी मेहनत कर रही हैं।'' बत्तीस साल की होने जा रहीं मीराबाई चानू पिछले करीब एक दशक से भारत की प्रमुख भारोत्तोलक रही हैं। उन्होंने 2021 तोक्यो ओलंपिक में महिलाओं की 49 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीता था। इसके बाद 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया। पेरिस ओलंपिक (2024) में वह अपने पिछले प्रदर्शन को दोहरा नहीं सकीं, लेकिन ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में वह अब भी भारत के लिए पदक की सबसे बड़ी दावेदारी में शामिल हैं। वह विश्व चैंपियनशिप में भी कई पदक जीत चुकी हैं। मुक्केबाज लवलीना ने तोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद उन्होंने 2023 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया। उन्होंने 2023 एशियाई खेलों में हांगझोउ में रजत पदक भी जीता था। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में लवलीना को भी भारत की प्रमुख पदक दावेदार खिलाड़ियों में माना जा रहा है। -
नयी दिल्ली. भारतीय फुटबॉल के दिग्गज बाइचुंग भूटिया का मानना है कि फीफा अगर पुरुष फुटबॉल विश्व कप में टीमों की संख्या 48 से बढ़ाकर 64 कर देता है तो भारत के लिए विश्व कप में जगह बनाने की संभावना बढ़ जाएगी। उन्होंने हालांकि इस बात पर चिंता जताई कि इससे टूर्नामेंट की गुणवत्ता और रोमांच प्रभावित हो सकता है। दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल महासंघ (कॉनमेबोल) ने अप्रैल 2025 में 2030 विश्व कप में 64 टीमों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा था। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने कहा है कि मौजूदा विश्व कप के बाद इस प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। रविवार को न्यूयॉर्क में अर्जेंटीना और स्पेन के बीच फाइनल खेला जाएगा। अगले विश्व कप (2030) की मेजबानी मुख्य रूप से स्पेन, पुर्तगाल और मोरक्को करेंगे जबकि टूर्नामेंट के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शुरुआती तीन मुकाबले अर्जेंटीना, उरुग्वे और पराग्वे में खेले जाएंगे। पहला विश्व कप 1930 में उरुग्वे में आयोजित हुआ था। भूटिया ने पीटीआई से विशेष बातचीत में कहा, ''भारतीय फुटबॉल प्रशंसक के नजरिए से देखें तो ज्यादा टीमों का शामिल होना स्वागतयोग्य कदम है। मैं यह नहीं कह रहा कि भारत निश्चित रूप से क्वालिफाई करेगा, लेकिन 48 की जगह 64 टीमें होने पर भारत के पास विश्व कप में जगह बनाने का बेहतर मौका होगा।'' उन्होंने कहा , '' टीमों की संख्या बढ़ने के बावजूद भारत को विश्व कप के सपने को पूरा करने के लिए अपनी फुटबॉल व्यवस्था, ढांचा और जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों के विकास पर लगातार काम करना होगा। अधिक से अधिक बच्चों को फुटबॉल से जोड़ना होगा।'' उन्होंने कहा, '' भारत को पहले अंडर-17 और अंडर-20 विश्व कप के लिए नियमित रूप से क्वालिफाई करने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके बाद ही सीनियर टीम विश्व कप में पहुंचने की वास्तविक उम्मीद कर सकती है। उज्बेकिस्तान और मोरक्को जैसे छोटे देश इसी मॉडल पर आगे बढ़े हैं और लगातार आयु वर्ग के विश्व कप में जगह बना रहे हैं।'' उन्होंने हालांकि यह भी कहा, ''वैश्विक फुटबॉल और विश्व कप के रोमांच के लिहाज से 64 टीमों का टूर्नामेंट खेल की गुणवत्ता को निश्चित रूप से प्रभावित करेगा।'' भूटिया का मानना है कि भारतीय महिला फुटबॉल टीम पुरुष टीम की तुलना में विश्व कप के लिए पहले क्वालीफाई कर सकती है। 2031 महिला विश्व कप में टीमों की संख्या 32 से बढ़ाकर 48 की जाएगी। भारत की महिला टीम फिलहाल एशिया में 13वें और दुनिया में 69वें स्थान पर है, जबकि पुरुष टीम एशिया में 26वें और विश्व में 138वें स्थान पर है। भूटिया ने कहा, ''भारतीय महिला टीम के पास पुरुष टीम से बेहतर मौका है, लेकिन इसके लिए महिला फुटबॉल में निवेश और रुचि बढ़ानी होगी। 'इंडियन विमेंस लीग (आईडब्ल्यूएल)' में अधिक टीमें हों, अलग-अलग आयु वर्ग की लीग शुरू हों और जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर फुटबॉल कार्यक्रम चलाए जाएं।'' भूटिया ने इसके साथ ही भारतीय मूल के विदेशी खिलाड़ियों (ओसीआई और पीआईओ) को राष्ट्रीय टीम में शामिल करने के विचार का भी समर्थन किया।
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दुबई. अगले साल होने वाले आईसीसी पुरुष वनडे विश्व कप के प्रारूप में किए गए बदलावों को लेकर एसोसिएट देशों और विश्व खिलाड़ी संघ (डब्ल्यूसीए) ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह फैसला पहले उपलब्ध कराए गए अवसरों की मूल प्रकृति को ही बदल देता है। आईसीसी ने 2027 वनडे विश्व कप में भाग लेने वाली टीमों की संख्या 14 ही बरकरार रखी है। यह फैसला 2021 में लिया गया था जबकि 2019 और 2023 के विश्व कप में केवल 10-10 टीमें शामिल थीं। हालांकि, अब टूर्नामेंट के प्रारूप में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में होने वाले 2027 वनडे विश्व कप में अब 12वीं, 13वीं और 14वीं रैंकिंग वाली टीमों के बीच 'सुपर सीरीज' खेली जाएगी। इसमें शीर्ष पर रहने वाली टीम ही अगले चरण में पहुंचेगी। दूसरे राउंड में कुल 12 टीमें दो ग्रुप (प्रत्येक में छह टीम) में खेलेंगी। इस चरण में 30 मुकाबले होंगे। दोनों ग्रुप से शीर्ष तीन-तीन टीमें और दोनों ग्रुप में चौथे स्थान पर रहने वाली टीम में से बेहतर प्रदर्शन करने वाली एक टीम 'सुपर-7' चरण में पहुंचेगी। सुपर-7 चरण में 21 मैच खेले जाएंगे। इसके बाद शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी, जहां पहले स्थान की टीम चौथे स्थान की टीम से और दूसरे स्थान की टीम तीसरे स्थान की टीम से भिड़ेगी। 700 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व करने वाली डब्ल्यूसीए ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि आईसीसी के इस फैसले से पारदर्शिता, परामर्श प्रक्रिया और क्रिकेट के वैश्विक विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उसने कहा कि इतने बड़े बदलावों से पहले खिलाड़ियों और अन्य संबंधित पक्षों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। संस्था ने कहा, ''खेल की संरचना और उसके सबसे बड़े टूर्नामेंटों में किसी भी बड़े बदलाव के साथ स्पष्ट संवाद, पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और खिलाड़ियों व अन्य हितधारकों के लिए पर्याप्त स्पष्टता होनी चाहिए। '' एसोसिएट देशों के कप्तानों ने भी इस पर नाराजगी जताई। नामीबिया, स्कॉटलैंड और नीदरलैंड के कप्तानों ने भी डब्ल्यूसीए के बयान का समर्थन किया। नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरास्मस ने कहा, ''कई देशों के खिलाड़ियों के लिए वनडे विश्व कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि उनके करियर का सबसे बड़ा लक्ष्य होता है। हम मानते हैं कि विश्व कप में जगह प्रदर्शन के आधार पर मिलनी चाहिए, लेकिन क्वालीफिकेशन ऐसा होना चाहिए जिससे सबसे बड़े मंच पर प्रतिस्पर्धा करने का वास्तविक अवसर मिले। एसोसिएट देशों को लंबे समय से सीमित मौके मिलते रहे हैं। '' नीदरलैंड के कप्तान स्कॉट एडवर्ड्स ने कहा, ''आईसीसी वैश्विक स्तर पर क्रिकेट के विस्तार की बात करता है, लेकिन ऐसे फैसले एसोसिएट देशों के लिए दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम के खिलाफ खेलने के अवसर और कम कर देते हैं। यही मौके टीम को बेहतर बनाते हैं और अगली पीढ़ी को प्रेरित करते हैं। अगर क्रिकेट को सचमुच वैश्विक खेल बनाना है तो अवसर बढ़ाने चाहिए, घटाने नहीं।'' स्कॉटलैंड के कप्तान रिची बेरिंगटन ने कहा कि खिलाड़ियों के करियर को प्रभावित करने वाले फैसलों पर उनसे चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ''खिलाड़ी हर फैसला खुद नहीं लेना चाहते, लेकिन खेल और खिलाड़ियों के करियर पर बड़ा असर डालने वाले निर्णयों में उनकी सार्थक भागीदारी होनी चाहिए। अलग-अलग पक्षों की राय से बेहतर फैसले लिए जा सकते हैं और अब समय आ गया है कि ऐसा वास्तव में किया जाए। '' वहीं न्यूजीलैंड के शीर्ष वनडे बल्लेबाज डेरिल मिचेल ने भी खिलाड़ियों और देशों के लिए समान अवसरों की वकालत करते हुए कहा, ''हम पूरी तरह से इस बात के पक्ष में हैं कि दुनिया भर के खिलाड़ियों और देशों को क्रिकेट के सबसे बड़े मंचों तक पहुंचने और वहां प्रतिस्पर्धा करने के लिए लगातार और निष्पक्ष अवसर मिलें।
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ग्रेटर नोएडा/ भारत को 1983 विश्व कप दिलाने वाले कप्तान कपिल देव ने वेस्टइंडीज के महान हरफनमौला सर गारफील्ड सोबर्स को क्रिकेट को नया आयाम देने वाला खिलाड़ी करार देते हुए कहा कि उन्होंने खेल के प्रति खिलाड़ियों की सोच और खेलने का तरीका ही बदल दिया। सोबर्स का 89 साल की उम्र में शुक्रवार को बारबाडोस स्थित उनके घर पर निधन हो गया। अपने शानदार करियर में उन्होंने 93 टेस्ट मैचों में 57.78 की औसत से 8,032 रन बनाए, जिसमें 26 शतक शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने 235 विकेट भी अपने नाम किए। कपिल ने यहां केडीएसजी (कपिल देव-संजय गुप्ता) अस्पताल में एक न्यूज़ एजेंसी से कहा, ''जो भी क्रिकेट को जानता है, वह गैरी सोबर्स को जरूर जानता होगा। वह इस खेल के सबसे महान क्रिकेटरों में से एक थे।'' उन्होंने कहा, ''उन्होंने जिस अंदाज में क्रिकेट खेला, उसने हम जैसे खिलाड़ियों को प्रेरित किया। उनका जाना बेहद दुखद है, लेकिन वह हमें अपनी प्रतिभा, खेल और विरासत के रूप में बहुत कुछ देकर गए हैं, जिससे हम जीवनभर सीखते रहेंगे।'' कपिल देव ने कहा कि सोबर्स की असाधारण प्रतिभा और खेल के प्रति उनका जुनून ही उन्हें महान बनाता था।
उन्होंने कहा, ''उनकी प्रतिभा, खेल का आनंद लेने का तरीका और खेलने की शैली उन्हें सबसे अलग बनाती थी। उस दौर में वेस्टइंडीज की टीम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में थी, लेकिन सोबर्स ने रिकॉर्ड बनाने के साथ-साथ लोगों की यह सोच भी बदल दी कि क्रिकेट कैसे खेला जाए और उसका लुत्फ कैसे उठाया जाये।'' इस 67 साल के पूर्व खिलाड़ी ने बताया कि सोबर्स ने पारंपरिक क्रिकेट कोचिंग की सोच भी बदल दी।
उन्होंने कहा, ''मुझे सबसे ज्यादा यही बात याद है कि उन्होंने एमसीसी (मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब) की पारंपरिक कोचिंग पद्धति को बदल दिया। उस समय बल्लेबाजों को 'वी' (सीधे बल्ले से लांग ऑफ से लांग ऑन की दिशा में) में खेलने की सलाह दी जाती थी, लेकिन सोबर्स ने दिखाया कि इसके बाहर भी रन बनाए जा सकते हैं। यह बात बचपन से मेरे मन में बस गई थी।'' खुद शानदार हरफनमौला रहे कपिल ने कहा कि ऑलराउंडर के रूप में सोबर्स का कोई मुकाबला नहीं था।
उन्होंने कहा, ''ऑलराउंडर तो और भी हुए हैं, लेकिन उनके स्तर का कोई नहीं। बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजी, स्पिन गेंदबाजी, कमाल का क्षेत्ररक्षण हर क्षेत्र में उनका कोई सानी नहीं था। सबसे बड़ी बात यह थी कि वह दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करना जानते थे। क्रिकेटर तो बहुत आते हैं, लेकिन असली मनोरंजन करने वाले बहुत कम होते हैं।'' उन्होंने कहा, ''वह शानदार क्रिकेटर थे। उनका जाना क्रिकेट जगत के लिए बड़ी क्षति है, लेकिन उनके खेलने के तरीके से हर खिलाड़ी सीख ले सकता है। उन्हें मेरा सलाम। उन्होंने जिंदगी को हमेशा खुलकर जिया।'' कपिल ने सोबर्स के साथ बिताए पलों को याद करते हुए कहा, ''शाम को वह बैठकर बातें किया करते थे और हम सभी उन्हें बड़े ध्यान से सुनते थे। दिलचस्प बात यह थी कि वह क्रिकेट से ज्यादा जिंदगी के दूसरे पहलुओं पर बातें करते थे।'' -
लंदन. भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ निर्णायक तीसरे एक दिवसीय क्रिकेट मैच के लिये जब रविवार को लॉडर्स पर उतरेगी तो समूचे क्रिकेट जगत की नजरें 'हिटमैन' रोहित शर्मा पर लगी होंगी । तमाम अटकलों के बीच बीसीसीआई ने साफ तौर पर कहा है कि यह रोहित के कैरियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं होगा लेकिन पहले दो मैचों में नाकाम रहे भारत के पूर्व कप्तान खुद को साबित जरूर करना चाहेंगे । फ्रंटफुट पर बेहतरीन पूल शॉट खेलने और स्पिनरों को मैदान के चारों ओर खेलने वाले रोहित इस श्रृंखला में उस लय में नहीं दिखे जिससे इन अटकलों को बल मिला कि 39 वर्ष का यह दिग्गज अगले साल दक्षिण अफ्रीका में होने वाला वनडे विश्व कप नहीं खेल सकेगा । कार्डिफ की कठिन पिच पर रोहित ने नौ डॉट गेंदें खेली जिसके बाद आउट हो गए । 'क्रिकेट का घर' कहे जाने वाले लॉडर्स पर बल्लेबाजों की मददगार पिच पर शायद उन्हें लय हासिल करने में मदद मिले । बतौर कप्तान रोहित ने मोर्चे से अगुवाई करते हुए हमेशा पावरप्ले में जोखिमभरे शॉट्स खेले हैं । उनके प्रशंसक रविवार को उसी रोहित को देखना चाहते हैं । पहले दस ओवर में उन्हें जोफ्रा आर्चर की तूफानी गेंदों का सामना करना होगा । कप्तान शुभमन गिल भी बड़ी पारी खेलना चाहेंगे जो सोफिया गार्डंस पर आसानी से आउट हो गए थे ।
दूसरी ओर विराट कोहली का शानदार फॉर्म बरकरार है । वह बृहस्पतिवार को दूसरे शतक की ओर बढ रहे थे लेकिन आर्चर की गेंद पर आउट हो गए जिसके बाद भारत का मध्यक्रम ढह गया और टीम को पराजय का सामना करना पड़ा । अब भारतीय टीम उससे सबक लेकर उतरेगी । केएल राहुल की जगह उतरे ईशान किशन शॉर्ट गेंद पर विकेट गंवा बैठे । उछलती गेंदों के सामने भारतीय बल्लेबाजों की कमजोरी जाहिर हो गई ।श्रेयस अय्यर ने मध्यक्रम में अच्छा खेला और आदिल रशीद के साथ स्पिनरों का बखूबी सामना किया । गेंदबाजी में कुलदीप यादव को उतारा जा सकता है क्योंकि वॉशिंगटन सुंदर चोटिल हैं । रविंद्र जडेजा की गैर मौजूदगी में अक्षर पटेल ने स्पिन हरफनमौला का काम अच्छे से किया है । भारतीय गेंदबाजों को जो रूट के बल्ले पर अंकुश लगाना होगा जो कोहली की तरह रन बनाये जा रहे हैं । रूट के अलावा इंग्लैंड के बाकी बल्लेबाजों ने कुछ खास नहीं किया है । टीमें :
भारत: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), इशान किशन (विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल, शिवम दुबे, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह, गुरनूर बराड़, प्रिंस यादव। इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), बेन डकेट, जोस बटलर (विकेटकीपर), टॉम बैंटन, जो रूट, जैकब बेथेल, विल जैक्स, रेहान अहमद, लियाम डॉसन, जेम्स कोल्स, सैम कुरेन, गस एटकिंसन, जोफ्रा आर्चर, जोस टंग, साकिब महमूद, आदिल राशिद। मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 3.30 बजे शुरू होगा.



























