खाली पड़ी जमीन बनी आजीविका का सहारा, डबरी निर्माण से पहाड़ी कोरवा किसान फूना राम ने शुरू किया मछली पालन
-ग्रामीण रोजगार योजना से मिला आजीविका का नया अवसर, वर्षा जल का संचय कर डबरी में डाला मछली बीज
-मछलियों की बिक्री से होगी अतिरिक्त आमदनी, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की जगी उम्मीद
-जल संरक्षण के साथ स्वरोजगार की राह हुई आसान, विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवार को मिला आजीविका का नया साधन
रायपुर / कभी जिस जमीन का कोई उपयोग नहीं हो रहा था, आज वही जमीन सरगुजा जिले के पहाड़ी कोरवा किसान फूना राम के लिए आजीविका की नई उम्मीद बन गई है। ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत खाली पड़ी जमीन पर आजीविका डबरी का निर्माण होने से अब वे मछली पालन से अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बारिश के पानी से डबरी भरने के बाद उन्होंने उसमें मछली बीज डाला है। मछलियां तैयार होने पर उनकी बिक्री से परिवार को अतिरिक्त आय प्राप्त होने की उम्मीद है।अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत घंघरी निवासी फूना राम पहाड़ी कोरवा की यह कहानी जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन का उदाहरण है। ग्रामीण रोजगार योजना के माध्यम से निर्मित डबरी ने उन्हें उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग करने और मछली पालन जैसी आयमूलक गतिविधि से जुड़ने का अवसर दिया है।
फूना राम पहाड़ी कोरवा बताते हैं कि उनकी जमीन का एक हिस्सा लंबे समय से खाली पड़ा था। इस भूमि का उपयोग किसी आयमूलक गतिविधि के लिए नहीं हो पा रहा था। ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत आजीविका डबरी निर्माण की सुविधा मिलने से उन्होंने अपनी खाली जमीन पर डबरी बनवाई।वर्षा ऋतु के दौरान डबरी में पर्याप्त पानी एकत्रित हुआ। पानी की उपलब्धता को देखते हुए फूना राम ने मछली पालन शुरू करने का निर्णय लिया और डबरी में मछली बीज छोड़ा।इस पहल से एक ओर वर्षा जल का संचय संभव हुआ है, वहीं दूसरी ओर खाली पड़ी जमीन आजीविका गतिविधि का आधार बन गई है। अब फूना राम को उम्मीद है कि मछलियां तैयार होने के बाद उनकी बिक्री से परिवार को अतिरिक्त आमदनी होगी।
फूना राम बताते हैं कि डबरी निर्माण से पहले उनकी जमीन का यह हिस्सा खाली पड़ा रहता था। अब उसी स्थान पर पानी का संचय हो रहा है और मछली पालन की गतिविधि शुरू हो गई है।उन्होंने डबरी में मछली बीज डाल दिया है। मछलियों के विकसित होने के बाद उन्हें बेचकर आय अर्जित करने की योजना है। इससे परिवार को आजीविका का एक अतिरिक्त साधन मिलेगा।फूना राम के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उन्हें अपनी उपलब्ध जमीन और वर्षा जल का उपयोग कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार की आजीविका डबरियां जल संरक्षण के साथ मछली पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायक साबित हो सकती हैं।
फूना राम पहाड़ी कोरवा विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय से आते हैं। ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत आजीविका डबरी निर्माण से उन्हें मछली पालन जैसी आयमूलक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला है।पहले जिस जमीन से कोई आमदनी नहीं हो रही थी, अब उसी जमीन पर निर्मित डबरी भविष्य में अतिरिक्त आय का साधन बन सकती है।
फूना राम की पहल यह दर्शाती है कि ग्रामीण परिवारों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के अवसर मिलने पर वे कृषि के साथ अन्य आजीविका गतिविधियों से भी जुड़ सकते हैं।
फूना राम पहाड़ी कोरवा बताते हैं कि उनकी जमीन का एक हिस्सा खाली पड़ा था। ग्रामीण रोजगार योजना से वहां आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया। बारिश के दौरान डबरी में पानी भरने के बाद उन्होंने मछली बीज डाला है।उनका कहना है कि मछलियां तैयार होने पर उनकी बिक्री से अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होगी। इससे परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
फूना राम डबरी निर्माण से मिले इस अवसर को लेकर खुश हैं। उनके लिए खाली पड़ी जमीन का आजीविका के साधन में बदलना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
फूना राम पहाड़ी कोरवा ने ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत आजीविका डबरी निर्माण से मिले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि डबरी निर्माण होने से वर्षा जल का संचय संभव हुआ है और उन्हें मछली पालन शुरू करने का अवसर मिला है। मछलियों की बिक्री से अतिरिक्त आय प्राप्त होने पर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत फूना राम पहाड़ी कोरवा की कहानी बताती है कि ग्रामीण रोजगार योजना के माध्यम से निर्मित आजीविका डबरी ग्रामीण परिवारों को जल संरक्षण के साथ स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध करा सकती है।अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत घंघरी में फूना राम ने अपनी खाली पड़ी जमीन पर डबरी निर्माण कराकर मछली पालन की शुरुआत की है। वर्षा जल के संचय से अब इस भूमि का उपयोग आयमूलक गतिविधि के लिए हो रहा है।
मछलियों की बिक्री से भविष्य में मिलने वाली अतिरिक्त आमदनी उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक होगी। फूना राम की यह पहल जल संरक्षण, उपलब्ध संसाधनों के सदुपयोग और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का प्रेरक उदाहरण है।












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