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 किसानों की आय बढ़ाने बाजार आधारित खेती और फसल विविधीकरण को दें सर्वाेच्च प्राथमिकता-कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी

-धान के बदले दलहन, तिलहन और मिलेट्स की खेती अपनाने किसानों को करें प्रोत्साहित, प्रति एकड़ 15 हजार रुपए अनुदान का प्रावधान
-धान खरीदी की सभी तैयारियां समय पर पूर्ण करने के निर्देश, अमानक बीज एवं कीटनाशक विक्रेताओं पर होगी सख्त कार्रवाई
-कृषि यंत्रीकरण, खाद-बीज वितरण, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्यपालन योजनाओं की मैराथन समीक्षा
-हर जिले में विकसित होंगे दो से तीन विशिष्ट कृषि मॉडल, किसानों को बाजार से जोड़कर बढ़ाई जाएगी आमदनी
 रायपुर / कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा है कि प्रदेश के किसानों की आय में वृद्धि, आधुनिक कृषि तकनीकों का विस्तार और कृषि आधारित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ बाजार की मांग के अनुरूप लाभकारी फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। विशेष रूप से धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मिलेट्स तथा अन्य अधिक आय देने वाली फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।
 कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी बुधवार को  रायपुर संभाग के अधिकारियों की मैराथन समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्यपालन, सहकारिता, बीज निगम, मंडी बोर्ड तथा अन्य संबंधित विभागों द्वारा संचालित केंद्र एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
  कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने आगामी 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर प्रारंभ होने वाले धान खरीदी अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि किसानों को धान विक्रय में किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। इसके लिए कृषि, सहकारिता, मार्कफेड सहित संबंधित विभाग आपसी समन्वय से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित करें। उन्होंने खाद-बीज की उपलब्धता, भंडारण एवं वितरण व्यवस्था की भी समीक्षा की तथा इन कार्यों में पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी के लिए साथी पोर्टल का उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
  श्री परदेशी ने फसल विविधीकरण की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को धान के स्थान पर दलहन, तिलहन और कोदो-कुटकी, रागी जैसी मिलेट्स फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने बताया कि धान के बदले अन्य निर्धारित फसलों की खेती करने पर किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपए अनुदान देने का प्रावधान है। इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिकाधिक किसानों को लाभान्वित किया जाए। उन्होंने उद्यानिकी फसलों के विस्तार पर जोर देते हुए फूलों, फलों, मखाना और ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी परिणाममूलक प्रयास किए जाएं।
  कृषि उत्पादन आयुक्त ने बंगाल की खाड़ी में आए चक्रवात श्अर्नबश् के संभावित प्रभावों को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चक्रवात के कारण प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति में तत्काल सर्वे कराया जाए। उन्होंने प्रभावित किसानों के प्रकरण तैयार कर शासन के प्रचलित नियमों एवं योजनाओं के अंतर्गत पात्रतानुसार राहत और सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
  कृषि यंत्रीकरण सबमिशन की समीक्षा करते हुए श्री परदेशी ने कहा कि शासन द्वारा आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों को विभिन्न कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद फसल की बुआई और कटाई के समय हरियाणा, पंजाब सहित अन्य राज्यों से आने वाली कृषि मशीनों का उपयोग अधिक दिखाई देता है। यह स्थिति गंभीरता से विचार करने योग्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की योजनाओं के अंतर्गत कृषि यंत्र प्राप्त करने वाले किसानों को मशीनों के संचालन, रखरखाव और उपयोग का समुचित व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाए। इससे किसान उपलब्ध कृषि यंत्रों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और खेती की लागत में कमी आएगी।
 कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने निजी कृषि आदान विक्रय केंद्रों में अनियमितताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि कुछ निजी विक्रेता प्रतिष्ठित कंपनियों के बीज अथवा कीटनाशक खरीदने वाले किसानों को जबरन अन्य अमानक उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करते हैं। इस प्रकार की फोर्स टैगिंग की प्रवृत्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए। उन्होंने बिना लाइसेंस कीटनाशकों का विक्रय करने तथा अमानक उत्पाद बेचने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध विशेष जांच अभियान चलाने और दोषियों पर नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से नियमित निरीक्षण एवं सतत निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
 बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने किसानों को बाजार आधारित और अधिक लाभकारी खेती से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने सुगंधित चावल एवं अन्य विशिष्ट कृषि उत्पादों की व्यावसायिक संभावनाओं का लाभ उठाने के निर्देश दिए। इस दौरान बलौदाबाजार जिले के कलेक्टर ने जानकारी दी कि जिले के कसडोल विकासखंड में लगभग 700 एकड़ क्षेत्र में ब्लैक राइस का उत्पादन कराया जा रहा है। इसके विपणन के लिए जापान की एक कंपनी से समन्वय स्थापित किया गया है तथा 25 हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से विक्रय की जानकारी दी गई।
  कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के बाजार आधारित कृषि मॉडल किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने अन्य जिलों के अधिकारियों को भी स्थानीय परिस्थितियों, उत्पादन क्षमता और बाजार की मांग के अनुरूप ऐसे नवाचार अपनाने के निर्देश दिए।
 श्री परदेशी ने रायपुर संभाग के सभी जिलों के अधिकारियों को कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के साथ समन्वय स्थापित कर जिले की जलवायु, मिट्टी, उपलब्ध संसाधनों और बाजार की मांग के अनुरूप दो से तीन विशिष्ट कृषि गतिविधियों का चयन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि संबंधित जिले की कृषि क्षेत्र में अलग पहचान स्थापित हो सके। इससे किसानों को नई तकनीकों, बेहतर उत्पादन और विपणन के अवसर उपलब्ध होंगे।
 कृषि उत्पादन आयुक्त ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) की समीक्षा करते हुए निर्धारित फसलों की खरीदी तथा किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए चलाए जा रहे अभियान से पारंपरिक ठोस उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को गति मिली है। अधिकारियों ने बीज उत्पादन एवं भंडारण की स्थिति संतोषजनक होने की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को बिचौलियों के बजाय सीधे बीज निगम के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। बैठक में उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्यपालन विभाग के अधिकारियों ने भी विभागीय योजनाओं की प्रगति और किसानों तथा पशुपालकों को लाभान्वित करने के लिए संचालित गतिविधियों की जानकारी दी।
  उल्लेखनीय है कि कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी द्वारा प्रदेश के विभिन्न संभागों के अधिकारियों की क्रमवार समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इन बैठकों का उद्देश्य कृषि एवं संबद्ध विभागों की योजनाओं की जमीनी प्रगति का आकलन करना, क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं का निराकरण करना तथा किसानों को शासन की योजनाओं का समय पर लाभ सुनिश्चित कराना है। इसी क्रम में आज रायपुर संभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
 बैठक में कृषि विभाग के संचालक श्री राहुल देव, मार्कफेड के प्रबंध संचालक श्री जितेंद्र शुक्ला, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री अजय अग्रवाल, पशुधन विकास विभाग के संचालक श्री चंद्रकांत वर्मा, मत्स्यपालन विभाग के संचालक श्री एन.एस. नाग, मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री महेंद्र सावन्नी, एपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक सहित रायपुर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा कृषि, सहकारिता एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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