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 पारंपरिक विरासत और आधुनिक बुनियादी ढांचे का अनोखा मिश्रण है श्रीनगर : जितेंद्र सिंह

 श्रीनगर। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि श्रीनगर में जी20 समूह की बैठक आयोजित करने का महत्व यह है कि यह शहर पारंपरिक विरासत और अत्याधुनिक तकनीक के साथ आधुनिक बुनियादी ढांचे का एक अनोखा मिश्रण है। सिंह ने यहां एसकेआईसीसी में जी20 देशों के पर्यटन से जुड़े कार्यकारी समूह की तीसरी बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि जहां तक अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और समाज के प्रति दायित्व का संबंध है, भारत वैश्विक जिम्मेदारी साझा करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ‘‘आज जब हम श्रीनगर के दर्शनीय स्थल पर मिलते हैं, तो हमें अपने भीतर यह गहरा एहसास होता है कि हम सभी वैश्विक दुनिया का हिस्सा हैं और नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री काल में भारत इसे लेकर बहुत सतर्क है। '' सिंह ने कहा कि भारत की चुनौतियां, चिंताएं और मानक वैश्विक हैं और इसका विकास भी वैश्विक होना चाहिए।
 उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मोदी जलवायु चुनौतियों को लेकर चिंतित हैं। हम 2070 तक शुद्ध शून्य कॉर्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने को लेकर भी प्रतिबद्ध हैं।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि श्रीनगर में जी20 कार्यक्रम आयोजित करने का महत्व यह है कि यह शहर हमारी पारंपरिक विरासत और अत्याधुनिक तकनीक के साथ सबसे आधुनिक बुनियादी ढांचे का एक अनोखा मिश्रण है। सिंह ने कहा, ‘‘कश्मीर का श्रीनगर शहर फारसी और संस्कृत दोनों ही भाषाओं को सीखने की शुरुआती जगहों में से एक रहा है। यह कालीन, कढ़ाई और शॉल से लेकर कारीगरी और शिल्प कौशल के लिए भी बेहद लोकप्रिय है। दूसरी ओर, हमारे पास सबसे उन्नत अवसंरचनात्मक परियोजनाएं हैं। हमारे पास दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल है, जो एफिल टॉवर से 35 मीटर ऊंचा है। यह चिनाब नदी पर स्थित है, जो भारत की सबसे बड़ी नदियों में से एक है। '' सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में एशिया की ऐसी सबसे लंबी सड़क वाली सुरंग भी है, जिसमें दोनों ओर वाहनों के आवागमन की सुविधा है। इसे श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग के रूप में जाना जाता है। केंद्रीय मंत्री ने जी20 समूह की भारत की अध्यक्षता का जिक्र करते हुए कहा कि जहां तक अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और समाज के प्रति दायित्व का संबंध है, भारत वैश्विक जिम्मेदारी साझा करने के लिए तैयार है। भाषा रवि कांत पारुल

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