आर्थिक सुदृढ़ता राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे का अभिन्न अंग है : राष्ट्रपति मुर्मू
नयी दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि आर्थिक सुदृढ़ता राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे का अभिन्न अंग है और भारतीय अर्थव्यवस्था ने बाहरी कारकों से उत्पन्न व्यवधानों को झेलने की अपनी क्षमता बार-बार साबित की है। उन्होंने यहां राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (एनडीसी) के 66वें पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि आज राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य क्षमताओं तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नवाचार को व्यावहारिक समाधान में बदलने के वास्ते वैज्ञानिक संस्थानों और सशस्त्र बलों के बीच करीबी सहयोग जरूरी है। राष्ट्रपति ने कहा कि हाल के संघर्षों ने ऐसी किफायती प्रौद्योगिकियों के महत्व को रेखांकित किया है, जो उन्नत रक्षा प्रणालियों की पूरक हों और उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में नवाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संबंध मजबूत करने में सरकारी पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने स्वदेशी अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की अनुसंधान, विकास एवं नवाचार योजना का उल्लेख किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि यह योजना न केवल अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी (डीप-टेक) से जुड़े स्टार्टअप को समर्थन देती है, बल्कि रणनीतिक जरूरतों, आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के विकास में भी मदद करती है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, ''आर्थिक सुदृढ़ता राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे का अभिन्न अंग है। भारतीय अर्थव्यवस्था ने बाहरी कारकों से उत्पन्न व्यवधानों को झेलने की अपनी क्षमता बार-बार साबित की है। भारत ने ऐसा अपनी रणनीतिक निर्णय लेने की स्वतंत्रता से समझौता किए बिना किया है।'' राष्ट्रपति ने कहा कि प्राचीन भारत के कई ग्रंथों में सुरक्षा संबंधी प्रतिक्रिया तंत्र और उन कर्तव्यों का विस्तार से वर्णन किया गया है, जिनसे एक शासक को अवगत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि रामायण और महाभारत में राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शासक द्वारा उठाए जाने वाले विभिन्न कदमों का विस्तार से वर्णन किया गया है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इसी तरह, महाभारत के शांति पर्व में युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से पूछा है कि एक शासक को शासन कैसे करना चाहिए। इसके विस्तृत उत्तर में भीष्म ने राज्य संचालन के विभिन्न पहलुओं तथा योग्य शासक के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा, ''भीष्म राज्य की रक्षा और शत्रुओं को परास्त करने की रणनीतियों के बारे में बताते हैं, जिनमें गुप्तचरों के नेटवर्क का प्रबंधन भी शामिल है। भीष्म की सीख सुरक्षा से आगे जाती है। वह सामाजिक एकजुटता के साथ सुरक्षा पर जोर देते हैं।
धर्मसम्मत शासन की अपनी अवधारणा में भीष्म आर्थिक संसाधनों, कूटनीति, रक्षा और आंतरिक शांति को इसके अभिन्न अंग बताते हैं।'' मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के संकाय सदस्यों और पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सहित कई देशों ने माना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के भविष्य का परिदृश्य क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बीच तालमेल पर आधारित होगा। उन्होंने कहा, ''अंतरिक्ष आधारित क्षमताएं भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो गई हैं। विज्ञान, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। यह प्रौद्योगिकी रणनीतिक निर्णय लेने में लगातार अधिक मददगार साबित होने वाली है।'' भारतीय सशस्त्र बलों, नागरिक सेवाओं और मित्र देशों के वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, जिससे नयी और जटिल चुनौतियां सामने आ रही हैं।






.jpg)



Leave A Comment