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 यूरिया कितना खतरनाक है?
आजकल कृषि में यूरिया का इस्तेमाल तेजी से हो रहा है। पैदावार बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।  किसान अधिकतर नाइट्रोजन युक्त उर्वरक (ज्यादातर यूरिया) या नाइट्रोजन युक्त और मिश्रित जटिल उर्वरक (ज्यादातर यूरिया या डीएपी) का उपयोग करते हैं तथा पोटाश और अन्य अभाव वाले पोषकों के उपयोग को नजऱ अंदाज कर देते हैं।
 दूसरी तरफ, बहुपोषक तत्व कमियां भी अधिकतर मिट्टियों में पहले ही उभर आई हैं तथा विस्तारित हो चुकी हैं। विभिन्न परियोजनाओं के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में किए गए मिट्टी यानि मृदा विश्लेषण से कम से कम 6 पोषक तत्वों- नाइट्रोजन (एन), फोसफोरस (पी),  पोटाश (के), जिंक (जेडएन) और बोरॉन (बी) की व्यापक कमी प्रदर्शित हुई। उत्तर-पश्चिमी भारत के चावल-गेंहू उगाए जाने वाले क्षेत्रों में किए गए कुछ नैदानिक सर्वे से पता लगा कि किसान उपज स्तर को बनाए रखने के लिए, जिन्हें पहले कम उर्वरक उपयोग के जरिए भी हासिल कर लिया जाता था, अक्सर अनुशंसित दरों से ज्यादा नाइट्रोजन का उपयोग करते हैं।
 नाइट्रोजन उर्वरकों में सबसे आम यूरिया का अंधाधुंध उपयोग किया जाता है चाहे  वैज्ञानिक निर्देश कुछ भी क्यों न हो। यूरिया के अत्यधिक उपयोग का मिट्टी, फसल की गुणवत्ता और कुल पारिस्थितकी प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यूरिया के अत्यधिक/अंधाधुंध उपयोग के कुछ बड़े नुकसान इस प्रकार हैं -
1. यह मिट्टी के पोषक तत्वों, जिनका उपयोग नहीं किया गया है या पर्याप्त रूप से उपयोग नहीं किया गया है, के खनन को बढ़ाता है जिससे मृदा की उर्वरता में गिरावट आती है। ऐसी मिट्टियों को अधिकतम उपज देने के लिए भविष्य में अधिक उर्वरकों की जरूरत होगी।
2. फसल की मांग से अधिक उपयोग में लाया गया नाइट्रोजन वाष्पीकरण और निक्षालन के जरिए खत्म हो जाता है।
3. नाइट्रोजन का अत्यधिक उपयोग जलवायु परिवर्तन और भूजल प्रदूषण को बढ़ावा देता है। भूजल के नाइट्रेट तत्व में वृद्धि हानिकारक साबित हो सकती है क्योंकि अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में इसे पीने के पानी के उपयोग में लाया जाता है।
4. सलाह से अधिक मात्रा में यूरिया का उपयोग फसल के रसीलेपन को बढ़ा देता है जिससे पौधे बीमारियों और कीट संक्रमण के शिकार हो सकते हैं।
5. यूरिया का असंतुलित उपयोग नाइट्रोजन की कुशलता को घटा देता है जिससे उत्पादन की लागत में वृद्धि हो जाती है और शुद्ध मुनाफे में कमी आती है।
6. नाइट्रोजन एवं अन्य पोषक तत्वों की कुशलता, लाभप्रदत्ता और पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ाने के लिए यूरिया के उपयोग को युक्तिसंगत बनाने की जरूरत है। 
नाइट्रोजन उर्वरकों के युक्तिसंगत उपयोग के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।   उर्वरक यूरिया उपयोग का संतुलन न केवल फोसफोरस और पोटास के साथ किया जाना चाहिए बल्कि द्वितीयक और सूक्ष्म पोषक तत्वों के साथ भी किया जाना चाहिए। मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक अनुशंसाओं का पालन किया जाना चाहिए। किसानों को सल्फर सूक्ष्म पोषण परीक्षण के लिए जोर देना चाहिए क्योंकि (सल्फर और सूक्ष्म पोषकों के बगैर) केवल नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश अब संतुलित उर्वरक नुस्खा नहीं है।
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