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- -किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेंद्र शर्मा ने सरसों उत्पादक किसानों के हित में 30 मई तक खरीदी हेतु पुनः पोर्टल खुलवाने का आग्रह कियारायपुर । रबी सीजन 2026-27 की नयी दलहनी - तिलहनी फसल को बीते 01 मार्च से आसन्न 31 मई तक समर्थन मूल्य पर खरीदने घोषणा के 15 दिन पहले ही तिलहनी फसल सरसों की खरीदी शासन ने बंद कर दी है । बीते 16 मई से संबंधित पोर्टल बंद कर दिये जाने के कारण किसान भटक रहे हैं । बीते दिनों आरंग विकास खंड के ग्राम सिवनी में आयोजित सुशासन तिहार में ग्राम कुंडा के 6 किसानों ने इसकी शिकायत भी दर्ज करायी है पर पोर्टल अभी तक खोला नहीं गया है ।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय , कृषि मंत्री रामविचार नेताम , मुख्य सचिव विकासशील व सी एम सचिवालय के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को मेल से प्रेषित ज्ञापन में यह जानकारी देते हुये किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेंद्र शर्मा ने सरसों उत्पादक किसानों के हित में आसन्न 30 मई तक खरीदी हेतु पुनः पोर्टल खुलवाने का आग्रह किया है । ज्ञापन में जानकारी दी गयी है कि भारत सरकार की समर्थन मूल्य योजना के अंतर्गत रबी सीजन 2026-27 की नई फसल चना , मसूर व सरसों को घोषित समर्थन मूल्य पर खरीदने की घोषणा करते हुये खरीदी केन्द्रों का निर्धारण किया गया था । इसके प्रचार - प्रसार के लिये जारी विभागीय पोस्टर में इसकी खरीदी के लिये 01 मार्च से 30 मई निर्धारित होने की भी जानकारी पोस्टर में दी गयी थी । इसके आधार पर जब किसान 16 मई को तिलहनी फसल सरसों ले खरीदी केन्द्रों में पहुंचे तो जानकारी दी गयी कि इसके खरीदी का पोर्टल 16 मई से बंद कर दिया गया है व इसके खरीदी की निर्धारित तिथि 15 मई थी जबकि दलहनी फसल चना व मसूर की खरीदी तिथि आसन्न 30 मई है । विभागीय भ्रामक प्रचार - प्रसार के चलते 15 मई तक समर्थन मूल्य पर सरसों न बेच पाने वाले प्रदेश के किसानों के सरसों आसन्न 30 मई तक खरीदने पोर्टल पुनः खुलवाने का आग्रह करते हुये ज्ञापन में लिखा गया है कि विभागीय त्रुटि की सजा किसानों को न दी जावे ।
- बालोद जिले में खनिज रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन, भण्डारण पर की जा रही है निरंतर कार्रवाईबालोद ।कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार जिले में खनिज विभाग द्वारा गुण्डरदेही विकासखण्ड में 24 मई 2026 को औचक निरीक्षण किया गया। जिला खनि अधिकारी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान खनिज रेत के अवैध परिवहन करते पाये जाने के कारण कुल 04 वाहनों को जप्त किया गया। जिसमे रेत से भरी हाईवा वाहन (सीजी 17 केएन 2793, सीजी 07 बीएन 7715, सीजी 08 एके 4335) तथा 01 ट्रेक्टर मय ट्रॉली रेत जिसे थाना, आरक्षी केन्द्र गुण्डरदेही के अभिरक्षा में रखा गया है। उन्होंने बताया कि उक्त प्रकरण मे नियमानुसार खान व खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 के तहत् कार्रवाई की जाएगी एवं भविष्य में भी खनिज के अवैध उत्खनन, परिवहन, भण्डारण करते पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- -बस्तर की आंगनबाड़ियों में खेल-खेल में विज्ञान, कला और आत्मविश्वास की नई उड़ानरायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की आंगनबाड़ी केन्द्रों में इन दिनों नन्हे हाथ सिर्फ खेल नहीं रहे, बल्कि अपने सपनों, कल्पनाओं और सीखने की नई दुनिया को आकार दे रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वंयसेवी संस्था ‘तितली’ के सहयोग से चल रही रचनात्मक गतिविधियों ने बच्चों के लिए आंगनबाड़ी को आनंद, जिज्ञासा और नवाचार का केंद्र बना दिया है।माटी की सोंधी खुशबू के बीच जब छोटे-छोटे बच्चों ने अपने हाथों से दीये बनाए, तो वह सिर्फ एक कलाकृति नहीं थी, बल्कि आत्मविश्वास और रचनात्मकता की पहली चमक थी। गीली मिट्टी को आकार देते हुए बच्चों ने स्पर्श, संतुलन और कल्पनाशीलता को महसूस किया। पारंपरिक दीये बनाते हुए वे अपनी सांस्कृतिक विरासत से भी सहज रूप से जुड़ते चले गए।वहीं दूसरी ओर साधारण पेपर कप और धागे से तैयार किया गया ‘पेपर कप फोन’ बच्चों के लिए किसी जादू से कम नहीं था। जब एक छोर से बोली गई आवाज दूसरे छोर तक पहुंची, तो बच्चों की आंखों में आश्चर्य और खुशी एक साथ झलक उठी। इस छोटे से प्रयोग ने नन्हे मनों को विज्ञान के उस अद्भुत संसार से परिचित कराया, जहां सीखना किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि अनुभवों से जुड़ा होता है।इन गतिविधियों ने बच्चों को केवल मनोरंजन नहीं दिया, बल्कि संवाद, ध्यान से सुनना, मिलकर काम करना और नई चीजें बनाने का आत्मविश्वास भी सिखाया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि बच्चों में अब सवाल पूछने और खुद से प्रयोग करने की उत्सुकता बढ़ रही है।विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रारंभिक अवस्था में इस तरह की खेल-आधारित शिक्षा बच्चों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास में बेहद प्रभावी होती है। बस्तर की आंगनबाड़ियों में हो रहे ये प्रयास इस बात का प्रेरक उदाहरण हैं कि यदि बच्चों को सीखने का सहज और आनंददायक वातावरण मिले, तो वे बहुत कम उम्र में ही रचनात्मक सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर सकते हैं।बस्तर की ये तस्वीर आज पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन रही है, जहां आंगनबाड़ी केन्द्र केवल पोषण तक सीमित नहीं रहे, बल्कि नौनिहालों के सपनों, जिज्ञासाओं और उज्ज्वल भविष्य को गढ़ने वाले सशक्त सीख केंद्र बनते जा रहे हैं।
- -जेसीबी से खेतों की मेड़ तोड़कर किया जा रहा नदी के समानांतर समतलीकरण, तांदुला नदी का लौटाया जाएगा पुराना वैभव-राजस्व और पुलिस प्रशासन की टीम सुबह 05:30 बजे से कर रही है कार्यवाही, अतिक्रमणकारियों को दिया गया था 24 घंटे का अल्टीमेटमबालोद, । बालोद जिले की जीवनदायिनी तांदुला नदी को उसके वास्तविक और मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक बड़ी और निर्णायक कार्यवाही शुरू कर दी गई है। जिला मुख्यालय के समीप ग्राम सिवनी और देउरतराई क्षेत्र में तांदुला नदी के तट पर किए गए अवैध कब्जे को हटाने के लिए आज सुबह से ही प्रशासनिक अमला मैदान पर उतर चुका है।तहसीलदार द्वारा सभी 14 अतिक्रमणकारियों को 24 घंटे के भीतर कब्जा हटाने का नोटिस जारी किया गया था। समय सीमा समाप्त होते ही आज सुबह 05:30 बजे से राजस्व और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कब्जा हटाने की कार्यवाही शुरू कर दी है। नदी क्षेत्र की लगभग साढ़े सात एकड़ भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए खेतों की मेड़ों को मशीनों के माध्यम से तोड़ा जा रहा है। इन अवैध खेतों को नदी के समानांतर समतल करने का कार्य तेजी से जारी है। समतलीकरण के बाद इस पूरे क्षेत्र में जलभराव किया जाएगा, जिससे तांदुला नदी को उसका पुराना वैभव और जल संचय क्षमता वापस मिल सकेगा।उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले भी इस क्षेत्र में अवैध कब्जा हटाने की मुहिम शुरू की गई थी, लेकिन तब खेतों में ग्रीष्मकालीन धान की फसल लगी होने के कारण मानवीय दृष्टिकोण से इसे रोक दिया गया था। अब चूंकि धान की फसल कट चुकी है, प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए पुनः इस कब्जा हटाने की कार्रवाई को अंजाम दिया है। राजस्व विभाग की जांच और ड्रोन सर्वे में पता चला था कि जो तांदुला नदी 220 मीटर चौड़ी थी, वह अवैध कब्जों के कारण कई जगहों पर सिकुड़कर मात्र 80 से 90 मीटर ही रह गई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि अधिकांश अतिक्रमणकारियों के पास अन्य जगहों पर अपनी जमीनें हैं और वे किराना दुकान, सैलून आदि जैसे मुख्य व्यवसाय चलाते हैं। कुछ लोगों द्वारा नदी की जमीन पर अवैध कब्जा कर इसे दूसरों को रेगहा पर देने की बात भी प्रमाणित हुई है। अवैध कब्जा हटाने का यह कड़ा कदम तांदुला नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए बेहद जरूरी हो गया था। जिला प्रशासन का मुख्य संकल्प नदी को उसके पुराने और वास्तविक स्वरूप में वापस लाना है, जो आज सुबह से जारी इस त्वरित और बड़ी कार्यवाही से साकार होता दिख रहा है। इस कार्यवाही के दौरान एसडीएम श्री नूतन कंवर, एसडीओपी श्री बोनिफस एक्का, तहसीलदार श्री आशुतोष शर्मा, नायब तहसीलदार श्री मुकेश गजेंद्र, थाना प्रभारी श्री शिशुपाल सिंह, ट्रैफिक टीआई श्री रविशंकर पाण्डेय, गुण्डरदेही थाना प्रभारी श्री नवीन बोरकर, रक्षित निरीक्षक श्रीमती रेवती वर्मा, जल संसाधन विभाग के उप अभियंता श्री विशाल राठौर सहित राजस्व, पुलिस और जल संसाधन विभाग के कर्मचारी मौजूद थे।
- -विशेष अभियान में 23 वाहन जब्त, 2 जेसीबी, 8 हाइवा और 13 ट्रैक्टर-ट्रॉली पर कार्रवाईबिलासपुर / कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश एवं उप संचालक खनिज किशोर गोलघाटे के मार्गदर्शन में जिले में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में खनिज विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर विभिन्न क्षेत्रों में जांच एवं कार्रवाई की गई।अभियान के दौरान तेंदुआ, कोटा, चौरसढ़ी, कछार, लोफंदी, सेंदरी, निरतु, लखराम, गढ़वत, खैरखुंडी, लोखंडी, तुर्काडीह एवं सकरी क्षेत्र में जांच की गई। जांच में अवैध रूप से खनिज रेत, मिट्टी, मुरूम तथा गिट्टी डस्ट के उत्खनन एवं परिवहन में संलिप्त कुल 23 वाहनों को जब्त किया गया। कार्रवाई के तहत तेंदुआ एवं कोटा क्षेत्र में खनिज रेत का परिवहन करते हुए 4 हाइवा एवं 3 ट्रैक्टर पकड़े गए। वहीं कोटा क्षेत्र में खनिज मिट्टी का अवैध उत्खनन करते हुए 1 जेसीबी मशीन एवं 1 ट्रैक्टर जब्त किया गया। चौरसढ़ी क्षेत्र में मुरूम उत्खनन करते 1 जेसीबी एवं 1 हाइवा वाहन पर कार्रवाई की गई। इसी प्रकार लोखंडी क्षेत्र में रेत परिवहन करते 1 हाइवा तथा उत्खनन करते 1 ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की गई।सकरी क्षेत्र में गिट्टी डस्ट परिवहन करते 2 हाइवा एवं खनिज मिट्टी-ईंट परिवहन करते 2 ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी गईं। कछार एवं सेंदरी क्षेत्र में रेत उत्खनन करते 4 ट्रैक्टर-ट्रॉली तथा सेलर एवं गढ़वत क्षेत्र में रेत उत्खनन एवं परिवहन करते 2 ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की गईं। उप संचालक खनिज श्री गोलघाटे ने बताया कि जब्त सभी वाहनों के विरुद्ध खान एवं खनिज अधिनियम 1957 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। जब्त वाहनों को कोनी, कोटा, रतनपुर एवं सकरी थाना परिसर में सुरक्षित रखा गया है। खनिज, राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम द्वारा जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।
- -पहले चरण में 32 नगरीय निकायों का चयन, शहरी अधोसंरचना और जन सुविधाओं को मिलेगी नई गति-मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में छोटे शहरों और कस्बों को भी मिलेगा आधुनिक विकास का नया मॉडल-200 करोड़ रुपए के प्रावधान के साथ कार्यों के चयन के लिए संभाग स्तरीय समितियों का गठन, 15 दिनों में मांगी गई कार्ययोजना-आदर्श शहर समृद्धि योजना से छोटे और मध्यम शहरों को मिलेगा व्यवस्थित विकास का नया आधार : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय-प्रदेश के छोटे शहरों को भी मिलेगा आधुनिक शहरी विकास का नया मॉडल : उप मुख्यमंत्री श्री अरुण सावबिलासपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के समग्र एवं संतुलित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। बड़े शहरों के साथ-साथ उभरते नगरों और कस्बों को भी आधुनिक शहरी सुविधाओं से सुसज्जित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा ‘आदर्श शहर समृद्धि योजना’ प्रारंभ की जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप यह योजना पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में नगर निगमों के लिए प्रारंभ हुई मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना की तर्ज पर नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अधोसंरचना को मजबूत करने, जन सुविधाओं का विस्तार करने तथा विकास कार्यों को गति देने का माध्यम बनेगी। योजना के जरिए छोटे और मध्यम शहरों में भी सुव्यवस्थित शहरी विकास की नई आधारशिला रखी जाएगी।राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने आज योजना के प्रथम चरण के लिए प्रदेशभर के 32 नगरीय निकायों का चयन कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। योजना के तहत कार्यों के चयन, स्थल निरीक्षण और प्राथमिकता निर्धारण के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के क्षेत्रीय (संभागीय) कार्यालयों के संयुक्त संचालकों की अध्यक्षता में संभाग स्तरीय समितियों का गठन भी किया गया है। समितियों को आगामी 15 दिनों के भीतर कार्यों का चिन्हांकन, स्थल निरीक्षण कर प्राथमिकता के क्रम में सूची तैयार करते हुए अनुमानित राशि की जानकारी शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देशानुसार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और समन्वय के लिए पांचों राजस्व संभागों में कार्यों के चयन एवं मॉनिटरिंग हेतु संचालनालय के यांत्रिकी प्रकोष्ठ के मुख्य अभियंता को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, ताकि कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सके।पहले चरण में प्रदेश के 32 नगरीय निकायों को मिला अवसरआदर्श शहर समृद्धि योजना के पहले चरण में प्रदेश के 32 नगरीय निकायों को शामिल किया गया है। इनमें बस्तर, सरगुजा और रायपुर संभाग के छह-छह, बिलासपुर संभाग के नौ तथा दुर्ग संभाग के पांच निकाय शामिल हैं।बस्तर संभाग के अंतर्गत सुकमा नगर पालिका के साथ भोपालपटनम, गीदम, केशकाल, पखांजूर और नरहरपुर नगर पंचायत को शामिल किया गया है। दुर्ग संभाग में पंडरिया और खैरागढ़ नगर पालिका के साथ गुरूर, घुमका और छुईखदान नगर पंचायतों का चयन किया गया है।रायपुर संभाग के अंतर्गत कुरूद, महासमुंद, आरंग और बलौदाबाजार नगर पालिका तथा पिथौरा एवं चंदखुरी नगर पंचायत को योजना में शामिल किया गया है। वहीं सरगुजा संभाग में सूरजपुर, पत्थलगांव और मनेंद्रगढ़ नगर पालिका के साथ लखनपुर, कोतबा और कुनकुरी नगर पंचायतों को शामिल किया गया है।बिलासपुर संभाग के अंतर्गत तखतपुर, मुंगेली, लोरमी, जांजगीर-नैला और सक्ती नगर पालिका के साथ बिल्हा, घरघोड़ा, पुसौर और सरिया नगर पंचायत को योजना के प्रथम चरण में शामिल किया गया है।सड़क, जलापूर्ति, ड्रेनेज से स्मार्ट सुविधाओं तक होगा समग्र विकासमुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सोच के अनुरूप आदर्श शहर समृद्धि योजना केवल आधारभूत निर्माण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि नागरिक जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में समग्र विकास मॉडल के रूप में कार्य करेगी। योजना के अंतर्गत सड़क, ड्रेनेज, जलापूर्ति, परिवहन, पार्क, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामुदायिक सेवाएं, रोजगार, व्यापार, उद्यमिता प्रोत्साहन, ई-गवर्नेंस, स्मार्ट ट्रैफिक, सुरक्षा प्रणाली, हरित क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, सुझाव, शिकायत निवारण तथा रिपोर्टिंग प्रणाली जैसे कार्य प्रमुखता से किए जाएंगे।स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समन्वय से होंगे कार्यों का चयनयोजना के तहत शहरों की स्थानीय आवश्यकताओं और जन अपेक्षाओं के अनुरूप विकास कार्यों का चयन किया जाएगा। इसके लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के क्षेत्रीय संयुक्त संचालक की अध्यक्षता में संभाग स्तरीय समितियां गठित की गई हैं। नगर पालिका अथवा नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को समिति का सदस्य-सह-सचिव बनाया गया है।रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर तथा सरगुजा संभाग के लिए गठित पांच सदस्यीय समितियों में दो-दो कार्यपालन अभियंता और एक सहायक अभियंता सदस्य होंगे, जबकि बस्तर संभाग की चार सदस्यीय समिति में एक कार्यपालन अभियंता तथा एक सहायक अभियंता सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। निकाय अध्यक्षों, पार्षदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समन्वय से शहरों की आवश्यकता के अनुसार प्राथमिकता तय कर कार्यों का चयन किया जाएगा।"हमारी सुशासन सरकार बड़े शहरों के साथ-साथ उभरते नगरों और कस्बों के संतुलित एवं समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। आदर्श शहर समृद्धि योजना के माध्यम से नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अधोसंरचना, जन सुविधाओं और रोजगार के नए अवसरों को सुनियोजित ढंग से विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार छोटे शहरों को भी बड़े शहरों की तरह सर्वसुविधायुक्त और आधुनिक बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है तथा यह योजना प्रदेश के शहरी विकास को नई गति और नई दिशा देने का काम करेगी - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय"आदर्श शहर समृद्धि योजना राज्य के छोटे और मध्यम शहरों के व्यवस्थित विकास की महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के माध्यम से सड़क, जलापूर्ति, ड्रेनेज, स्मार्ट सुविधाओं, हरित क्षेत्र और नागरिक सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। कार्यों के चयन के लिए संभाग स्तरीय समितियों का गठन कर प्रक्रिया को पारदर्शी और परिणाममुखी बनाया गया है तथा सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के हर नगर में नागरिकों को बेहतर अधोसंरचना और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराना है - उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव
- -कटेकल्याण शिविर में 70 से अधिक ग्रामीणों को मिला बी-1 दस्तावेजदंतेवाड़ा। प्रदेश के मुख्यमंत्री की मंशानुसार आमजन को त्वरित एवं पारदर्शी प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में सुशासन तिहार के अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड कटेकल्याण में आयोजित शिविर में ग्रामीण किसानों को बड़ी राहत मिली, जहां लगभग 70 से अधिक किसानों को बी-1 दस्तावेज की प्रतियां तत्काल उपलब्ध कराई गईं।राजस्व विभाग द्वारा शिविर स्थल पर ही किसानों के भूमि अभिलेखों का परीक्षण कर बी-1 दस्तावेज प्रदान किए गए। पहले ग्रामीणों को ऐसे दस्तावेजों के लिए तहसील कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय एवं आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब सुशासन तिहार के माध्यम से गांव स्तर पर ही समाधान मिलने से किसानों में खुशी देखी जा रही है। बी-1 दस्तावेज प्राप्त होने से किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड, बैंक ऋण, फसल बीमा, सीमांकन तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी। शिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं राज्य शासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अब प्रशासन गांव तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहा है। जिला प्रशासन द्वारा सुशासन तिहार के माध्यम से आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करते हुए शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का सतत प्रयास किया जा रहा है।
- -शांतिनगर बस्ती में जलभराव की समस्या से मिलेगी मुक्ति, 05 करोड़ रूपए से बनेगा नाला-बालको जोन के विभिन्न वार्डों को मिली 6 करोड़ 80 लाख रूपये के विकास कार्याे की सौगातरायपुर। प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग, सार्वजनिक उपक्रम, आबकारी व श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने आज 5 करोड़ रूपए की लागत बनने वाले निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। नगर पालिक निगम कोरबा के बालको जोन की शांतिनगर बस्ती अब बरसात के समय जलभराव की समस्या से मुक्त होगी। इसके साथ ही बालको जोन के विभिन्न वार्डाे के 6 करोड़ 80 लाख रूपए के विकास कार्याे की सौगात प्रदान करते हुये इन विकास कार्यों का भूमिपूजन व लोकार्पण किया। इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत उपस्थित थी।नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा बालको कुलिंग टावर से विभिन्न वार्डाे से होते हुये ढेगुरनाला तक बालको सी.एस.आर. मद व डी.एम.एफ. मद से 05 करोड़ रूपये की लागत से नाला का निर्माण कार्य कराया जायेगा। इसी प्रकार वार्ड क्र. 39 बालको में रामलीला मैदान के पास सतनाम भवन का आंतरिक एवं बाह्य विस्तार कार्य अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण मद से 15 लाख रूपये की लागत से सम्पन्न होगा, वहीं वार्ड क्र. 47 अंतर्गत शासकीय माध्यमिक शाला रूमगरा में जिला खनिज न्यास मद से 17 लाख रूपये की लागत से नवीन भवन का निर्माण होगा। इसी प्रकार वार्ड क्र. 42 अंतर्गत स्थित शासकीय प्राथमिक शाला दैहानपारा में जिला खनिज न्यास मद से 15 लाख रूपये की लागत से 02 नग अतिरिक्त कक्ष का निर्माण, बालको जोन अंतर्गत 11 शासकीय स्कूलों में जिला खनिज न्यास मद से 43 लाख रूपये की लागत से किचन शेड का निर्माण कार्य तथा बालको जोन अंतर्गत 14 शासकीय स्कूलों में जिला खनिज न्यास मद से 70 लाख रूपये की लागत से बालक-बालिका शौचालय का निर्माण कार्य कराया जायेगा, जिसका भूमिपूजन आज उद्योग मंत्री श्री देवांगन व महापौर श्रीमती राजपूत के हाथों किया गया।नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा विधायक मद से वार्ड क्र. 38 में 13 लाख रूपये की लागत से सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया है, इसी प्रकार वार्ड क्र. 39 राम मंदिर के पास अधोसंरचना मद से 07 लाख रूपये की लागत से सामुदायिक भवन का निर्माण भी पूरा किया गया है, आज उक्त दोनों नवनिर्मित सामुदायिक भवनों का लोकार्पण उद्योग मंत्री श्री देवांगन एवं महापौर श्रीमती राजपूत के हाथों किया गया।इस अवसर पर उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने अपने उद्बोधन में कहा कि बरसात के समय शांतिनगर बस्ती में जलभराव हो जाता था, पिछले वर्ष भी जलभराव हुआ तब मैं रायपुर में था, महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने मुझे इस समस्या से मोेबाईल पर अवगत कराया, मैं तभी तय कर लिया था कि शीघ्र ही इस समस्या से यहॉं के नागरिकों को मुक्ति दिलाई जायेगी और आज मुझे खुशी हो रही है कि 05 करोड़ रूपये के लागत से नाला का निर्माण कार्य प्रारंभ होने जा रहा है, उन्होने बताया कि इस नाले के निर्माण में 02 करोड़ 50 लाख रूपये बालको अपने सीएसआर मद से देगा, वहीं 02 करोड़ 50 लाख रूपये जिला खनिज न्यास मद से दिया जायेगा। मंत्री श्री देवांगन ने आगे बताया कि उन्होने बालको से कहा है कि बजरंग चौक से रिसदी चौक तक सड़क का निर्माण भी बालको करेगा, जिससे यह पूरा मार्ग एक व्यवस्थित मार्ग हो जायेगा। उद्योग मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि कोरबा निगम क्षेत्र में विभिन्न मदों के अंतर्गत विगत दो वर्ष के दौरान 1000 करोड़ रूपये के विकास कार्य स्वीकृत कराये जा चुके हैं।इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि पिछले साल जब बारिश के दौरान बस्ती में जलभराव हुआ, घरों में पानी घूस गया, यहॉं के निवासी कष्ट व पीड़ा में थे, तब मैं स्वयं यहॉं बरसते में पानी में आयी थी तथा मोबाईल के माध्यम से मंत्री जी को अवगत कराया तथा उनके प्रयास से बालको सीएसआर मद व जिला खनिज न्यास मद से 05 करोड़ रूपये की लागत से अब नाला निर्माण होने जा रहा है, उन्होने कहा कि जो दर्द मैंने अपनी आंखों से खुद देखा था, उस दर्द का मूलकारण अब समाप्त हो जायेगा, उन्होने कहा कि जनताजनार्दन के दुख-सुख में साथ खड़े रहना, हमारा प्रथम दायित्व है, मुझे खुशी है कि शांतिनगर के निवासियों की एक बहुत बड़ी समस्या अब दूर होने जा रही है। इस अवसर पर सभापति श्री नूतन सिंह ठाकुर एवं मेयर इन काउंसिल सदस्य हितानंद अग्रवाल ने भी अपने उद्बोधन में इस बड़ी समस्या का समाधान होने पर प्रसन्नता व्यक्त की तथा उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन एवं महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं पार्षद तरूण राठौर एवं मण्डल अध्यक्ष डिलेन्द्र यादव ने भी अपने उद्बोधन में इस जटिल समस्या के स्थाई निराकरण के लिये उद्योग मंत्री श्री देवांगन व महापौर श्रीमती राजपूत को धन्यवाद ज्ञापित किया।भूमिपूजन लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान सभापति श्री नूतन सिंह ठाकुर के साथ ही वरिष्ठ पार्षद नरेन्द्र देवांगन, एमआईसी सदस्य हितानंद अग्रवाल, पार्षद चेतन सिंह मैत्री, तरूण राठौर, मंगलराम बंदे, रजत खुंटे, मुकुंद सिंह कंवर, डिलेन्द्र यादव, प्रफुल्ल तिवारी, शिवबालक सिंह तोमर, सम्मत यादव, राजा शर्मा, रविन्द्र जायसवाल, हेमलता निर्मलकर, शैलेन्द्र सिंह, मंदाकिनी त्रिपाठी, संजीत कौर, अर्चना रूझिया, जोन कमिश्नर एन.के.नाथ, सहायक अभियंता एम.एल.बरेठ, अभय मिंज, अंजूलता तिग्गा, अश्वनी चन्द्रा, दीपा विश्वास, मीरा मिस्त्री, अल्का त्रिपाठी, संजू शर्मा, जे.पी.सोनी, माया दुबे, राजेश सोनी, के.पी.सोनी, दिनेश त्रिपाठी, मनोज भारिया, मंजू कश्यप आदि के साथ काफी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।
- रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से उनके निवास पर सौजन्य भेंट की।मुलाक़ात के दौरान दोनों नेताओं के बीच जनहित, सुशासन, शहरी विकास, सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ में चल रहे विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी साझा की। दोनों मुख्यमंत्रियों ने देश के विकास में राज्यों की सक्रिय भूमिका और आपसी सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर विभिन्न समसामयिक विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
- रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद् (कैबिनेट) की बैठक मंगलवार , 26 मई को शाम 6.00 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में होगी।
- -800 मीटर लंबी नाली से 250 एकड़ भूमि तक पहुंचा सिंचाई का पानी, किसानों की आय में बढ़ोतरीरायपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के प्रयास अब किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। बलरामपुर जिले के विकासखण्ड शंकरगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत खैराडीह में निर्मित पक्की सिंचाई नाली किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है।वित्तीय वर्ष 2025-26 में मनरेगा के अंतर्गत लगभग 800 मीटर लंबी पक्की सिंचाई नाली का निर्माण कराया गया। इस पहल से गांव के किसानों को अब खेतों तक समय पर और नियमित रूप से पानी उपलब्ध हो रहा है। पहले किसान बारिश पर निर्भर होकर खेती करते थे तथा नहर का पानी खेतों तक पहुंचाने के लिए अस्थायी कच्ची नालियां बनानी पड़ती थीं। हर वर्ष बारिश और टूट-फूट के कारण इन नालियों को नुकसान पहुंचता था, जिससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों बढ़ जाती थी।ग्रामीणों की मांग पर निर्मित पक्की नाली ने अब इस समस्या का स्थायी समाधान कर दिया है। वर्तमान में इस नाली के माध्यम से लगभग 200 से 250 एकड़ कृषि भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो रही है, जिससे गांव के 11 किसान सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। खेतों तक सुचारु रूप से पानी पहुंचने से फसल उत्पादन में वृद्धि हुई है और किसान अब खरीफ के साथ-साथ रबी सीजन में भी खेती कर पा रहे हैं।किसानों का कहना है कि सिंचाई सुविधा बेहतर होने से खेती की लागत घटी है और उत्पादन बढ़ा है। इससे उनकी आय में वृद्धि होने के साथ आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। ग्रामीणों ने मनरेगा के तहत कराए गए इस कार्य को गांव के विकास और किसानों की समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। जिले में मनरेगा के माध्यम से जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार और ग्रामीण आधारभूत संरचना विकास के ऐसे कार्य लगातार किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और किसानों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है।
- -समूह से मिला सहारा, आज प्राकृतिक खेती की प्रशिक्षक एवं सफल उद्यमी के रूप में बना रहीं पहचानरायपुर / बिहान योजना से जुड़कर महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है जय मां संतोषी स्व सहायता समूह की सदस्य श्रीमती हुलेसिया वर्मा की, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है।वर्ष 2016 में 12 गरीब परिवारों की महिलाओं ने मिलकर “जय मां संतोषी स्व सहायता समूह” का गठन किया। समूह में दो विधवा एवं एक परित्यक्ता महिला सदस्य भी शामिल हैं। इन्हीं में से एक सदस्य श्रीमती वर्मा के पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई। चार बच्चों के पालन-पोषण एवं शिक्षा की चिंता के बीच जीवन अत्यंत कठिन दौर से गुजर रहा था। ऐसे समय में बिहान योजना एवं समूह की महिलाओं ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की।बिहान योजना से जुड़ने के बाद श्रीमती वर्मा ने उद्योग सखी के रूप में कार्य प्रारंभ किया, जिससे उन्हें प्रतिमाह 2540 रुपये का मानदेय मिलने लगा। उनकी कार्यकुशलता एवं सक्रियता को देखते हुए नेशनल सपोर्ट संस्था “प्रदान” द्वारा उन्हें एन.एस.ओ.सी.आर.पी. के रूप में चयनित किया गया। जो महिला पहले लोगों से बात करने में झिझकती थीं, आज वही गाँव, विकासखंड एवं जिला स्तर पर महिलाओं को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दे रही हैं।श्रीमती वर्मा ने “लखपति दीदी” द्वारा स्थानीय स्तर पर फलों का मूल्य संवर्धन करते हुए पपीते की बड़ी, आम एवं नींबू का अचार, साबुदाना पापड़ तथा चिप्स निर्माण का कार्य शुरू किया। इसके साथ ही वे सिलाई कार्य भी कर रही हैं। साथ ही उनकी बड़ी बेटी बी.एससी. के बाद पी.जी.डी.सी.ए. की पढ़ाई कर रही है, दूसरी बेटी एल.एल.बी. में अध्ययनरत है, एक बेटा सातवीं एवं तीसरी बेटी दसवीं कक्षा में अध्ययनरत है।गाँव में आवागमन की सुविधा नहीं होने के बावजूद श्रीमती वर्मा ने स्वयं के लिए स्कूटी खरीदकर आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है।कृषि कार्य (धान एवं सब्जी की खेती),मूल्यवर्धन गतिविधि (साबूदाना पापड़, बड़ी, अचार, चिप्स) एवं केडर मानदेय (प्रदान, एन.एस.ओ.) से उन्हें लगभग 1 लाख 45 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई है।
- रायपुर। छत्तीसगढ़ के अंदरूनी और दूरदराज के क्षेत्रों में विकास की नई किरण पहुँचाने वाली 'नियद नेल्लानार योजना' अब ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। जिला प्रशासन के लगातार प्रयासों से नारायणपुर जिले में ओरछा विकासखण्ड के ग्राम कच्चापाल में आजीविका के नए रास्ते खुले हैं। यहाँ की महिलाओं ने न सिर्फ आत्मनिर्भर बनने की ठानी है, बल्कि वे क्षेत्र के पर्यटन विकास में भी अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं।प्रशासन के कुशल निर्देशन में पशुधन विकास विभाग द्वारा ग्राम कच्चापाल के 'इन्द्रावती महिला स्व-सहायता समूह' को एक नई ताकत मिली है। समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना के तहत लाभान्वित किया गया है।विभाग द्वारा समूह के सदस्यों को आजीविका शुरू करने के लिए 10 इकाई उन्नत नस्ल के चूजे औरगुणवत्तापूर्ण कुक्कुट आहार (दाना) दिया गया है।इन्द्रावती महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती पुनई ने जिला प्रशासन के इस सहयोग पर खुशी जताते हुए एक बेहतरीन बिजनेस मॉडल की उम्मीद जताई है। कच्चापाल जलप्रपात (Waterfall) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र में कच्चापाल जलप्रपात होने के कारण पर्यटन की असीम संभावनाएँ हैं। यहाँ आने वाले पर्यटकों के कारण स्थानीय स्तर पर अंडा और मांस की मांग हमेशा बनी रहती है। पहले जहाँ ग्रामीण महिलाओं के पास आय के सीमित साधन थे, वहीं अब इस कुक्कुट इकाई (Poultry Unit) के मिलने से वे मुर्गी पालन और अंडा उत्पादन का काम बड़े पैमाने पर करेंगी। जलप्रपात क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय दुकानों में सीधे सप्लाई होने से महिलाओं को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी। इस व्यवसाय से होने वाली आमदनी से समूह की महिलाएँ आर्थिक रूप से सशक्त होंगी और उनके परिवारों का जीवन स्तर सुधरेगा। कच्चापाल की इन्द्रावती महिला स्व-सहायता समूह की यह कहानी इस बात का प्रतीक है कि अगर सही समय पर सही संसाधन और मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण अंचलों की महिलाएँ भी मुख्यधारा में शामिल होकर विकास की गति को तेज कर सकती हैं।
- -झारा शिल्प और बेलमेटल उत्पाद रहे आकर्षण का केंद्ररायपुर ।जनजातीय संस्कृति और शिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'जनजातीय गरिमा उत्सव' के अंतर्गत सारंगढ़ के साहू धर्मशाला में एक भव्य हस्तनिर्मित (हैंडीक्राफ्ट) वस्तु प्रदर्शनी सह विक्रय मेले का आयोजन किया गया। ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ट्राइफेड) द्वारा आयोजित इस मेले में जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के, विशेषकर ग्राम बैगीनडीह के जनजातीय कारीगरों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और अपने हुनर का प्रदर्शन किया।इस मेले में ग्राम बैगीनडीह के शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए झारा शिल्प और बेलमेटल (घंटी धातु) उत्पाद ग्राहकों और आगंतुकों के लिए मुख्य आकर्षण रहे। प्रदर्शनी में शामिल अधिकांश महिला शिल्पकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के राष्ट्रीय आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत गठित 'कात्यायनी' और 'भारत माता' जैसे स्व-सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के माध्यम से वे अपने पारंपरिक हुनर को आजीविका का मजबूत जरिया बना रही हैं।सारंगढ़-बिलाईगढ़ के बैगीनडीह जैसे कई शिल्प ग्रामों के कारीगर ट्राइफेड से जुड़कर अपने जीवन स्तर को बेहतर बना सकते हैं। ज्ञात हो कि ट्राइफेड अर्थात 'ट्राइबल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड' भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष संस्था है। यह संस्था जंगलों से लघु वनोपज (MFP) इकट्ठा करने वाले और हस्तशिल्प बनाने वाले आदिवासी समुदायों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाता है। इसके साथ ही यह संस्था आदिवासी उत्पादों (जैसे प्राकृतिक शहद, हस्तशिल्प, कपड़े, जैविक उत्पाद) की ब्रांडिंग करती है और इनके लिए राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाजार तलाशती है।ट्राइफेड ने 50-100 राज्य स्तरीय निर्माता कंपनियों के माध्यम से वनधन माइक्रो उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। इन वनधन निर्माता कंपनियों का मुख्य उद्देश्य हैउत्पादकता में वृद्धि और लागत में कमी लाना,कुशल एकत्रीकरण और मूल्य संवर्धन (Value Addition) के लिए बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण (Processing) करना और उत्पादों का बेहतर उपयोग और कुशल विपणन (Marketing) सुनिश्चित करना है। ट्राइफेड केवल कारीगरों के लिए ही नहीं, बल्कि एक बड़ा नेटवर्क बनाने के लिए वैश्विक स्तर पर अवसर प्रदान करता है। इससे कॉर्पोरेट जगत, आदिवासी समाज, वैज्ञानिक, विभिन्न संस्थान, प्रशिक्षक, संसाधन व्यक्ति, विषय विशेषज्ञ, सलाहकार, कार्यान्वयन एजेंसियां, उपकरण निर्माता, खरीदार (Buyers) और डिजाइनर्स सभी जुड़कर एक साथ काम कर सकते हैं।
- -पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव की तैयारियां तेजरायपुर ।हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रायपुर प्रेस क्लब द्वारा 30 मई को आयोजित किए जा रहे “पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव” की तैयारियों को लेकर आज प्रेस क्लब परिसर में महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं।रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी ने सबसे पहले प्रेस क्लब कार्यकारिणी की विस्तारित बैठक ली। बैठक में कार्यकारिणी के नव नियुक्त सात सदस्यों के साथ विभिन्न मोर्चा एवं प्रकोष्ठों के विशेष आमंत्रित संयोजक तथा सलाहकार सदस्य के रूप में प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व महासचिव भी उपस्थित रहे।कार्यकारिणी की बैठक के पश्चात “पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव” के सफल आयोजन हेतु गठित विभिन्न समितियों की अलग-अलग बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में संरक्षक एवं सलाहकार मंडल के सदस्यों ने विभिन्न समितियों के संयोजकों के साथ आयोजन की रूपरेखा, कार्यक्रम के स्वरूप तथा आयोजन की सफलता को लेकर विस्तार से चर्चा की।बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित यह विशेष उत्सव दिनभर चार सत्रों में संपन्न होगा।कार्यक्रम का प्रथम सत्र शुभारंभ सत्र होगा, जिसमें मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल के सदस्य एवं जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। द्वितीय सत्र हिंदी प्रिंट मीडिया की 200 वर्षों की गौरवशाली यात्रा एवं उसकी भूमिका पर केंद्रित रहेगा। तृतीय सत्र इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं न्यू मीडिया की संभावनाओं और चुनौतियों पर आधारित होगा, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार, मीडिया विशेषज्ञ एवं विभिन्न संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधि अपने विचार रखेंगे।इसके अतिरिक्त रायपुर प्रेस क्लब द्वारा इस अवसर पर एक विशेष सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें पत्रकार साथियों की प्रस्तुतियों के साथ संगीत एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।बैठक में प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े सहित कार्यकारिणी एवं विभिन्न समितियों के सदस्य उपस्थित रहे,। रायपुर प्रेस क्लब ने सभी पत्रकार साथियों, मीडिया संस्थानों एवं नागरिकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में सहभागिता निभाने की अपील की है।
- - छत्तीसगढ सिविल सोसायटी के साथ महाराष्ट्र मंडल, बृहन्महाराष्ट्र मंडल ने भी मुख्यमंत्री साय से मुलाकात कर की मांगरायपुर। छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी, महाराष्ट्र मंडल रायपुर और बृहन्महाराष्ट्र मंडल छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्म दिवस 19 फरवरी को प्रदेश में "स्वराज दिवस" घोषित करने की मांग की। साथ ही इस मांग से संबंधित पांच हजार से अधिक लोगों के हस्ताक्षरयुक्त मांग पत्र भी सीएम को सौंपा।राजधानी स्थित मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से शनिवार शाम को छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी के अध्यक्ष डा. कुलदीप सोलंकी, शिक्षाविद संजय जोशी, महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले, बृहन्महाराष्ट्र मंडल के छत्तीसगढ़ राज्य प्रभारी सुबोध टोले ने मुलाकात की। डॉ. सोलंकी ने मुलाकात के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि सीएम साय को बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज भारत के महान योद्धा और स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। उन्होंने मुगल साम्राज्य के खिलाफ लड़कर हिंदवी स्वराज की स्थापना की। भारत की एकता और अखंडता के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा ही नहीं थे, बल्कि एक महान प्रशासक और विजनरी भी थे। उन्होंने एक मजबूत और स्वतंत्र भारत का सपना देखा था। यही वजह है कि जनमानस की प्रबल इच्छा है कि 19 फरवरी को राज्य में ‘स्वराज दिवस’ घोषित किया जाए।महाराष्ट्र मंडल अध्यक्ष अजय काले और शिक्षाविद संजय जोशी ने मुख्यमंत्री से कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज, राजमाता अहिल्याबाई होल्कर और वीर सावरकर के प्रसंगों को पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए। ये महान व्यक्तित्व युवाओं को भावी सशक्त भारत के निर्माण में मार्गदर्शक के रूप में सार्थक होंगे। काले ने राज्य के युवाओं को अंडमान निकोबार स्थित सेल्युलर जेल की शैक्षणिक यात्रा कराने से भविष्य के युवाओं को राष्ट्र प्रेम, समर्पण, धैर्य सीखने का अवसर मिलेगा, जो वर्तमान परिस्थितियों में राष्ट्र के लिए भी अपरिहार्य है।मुख्यमंत्री साय ने मुलाकात में शामिल प्रतिनिधियों से स्वराज दिवस, सावरकर यात्रा और छत्रपति शिवाजी महाराज, राजमाता अहिल्याबाई होल्कर, वीर विनायक दामोदर सावरकर के जीवन प्रसंगों को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की मांग पर सहमति जताई और इन मांगों पर क्रियान्वयन का आश्वासन भी दिया।
- - महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति के अभियान में शामिल है राम रक्षा स्त्रोत पाठ भीरायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर से हर शनिवार को होने वाला राम रक्षा स्त्रोत और हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ इस शनिवार भी उत्साह के साथ जारी रहा। अधिक मास होने के कारण चौबे काॅलोनी केंद्र की महिलाओं ने स्वामी आत्मानंद सरोवर स्थित श्री हनुमान मंदिर पहुंचकर घी की दीये जलाए और हनुमान चालीसा व राम रक्षा स्तोत्र का एक साथ मिलकर पाठ किया। इस दौरान संयोजिका अक्षता पंडित, स्वाती डबली, गौरी क्षीरसागर और सुमन काले उपस्थित रहीं।आध्यात्मिक समिति की आकांक्षा गद्रे ने चौबे कालोनी केंद्र के साथ रोहिणीपुरम, अमलीडीह सहित अनेक महिला केंद्रों के अलावा सियान गुड़ी और मंडल कार्यालय में हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। रोहिणीपुरम महिला केंद्र के सदस्यों ने इंद्रप्रथ कॉलोनी में रीना बाबर के रास डांस स्टूडियो में एकत्रित होकर पाठ किया। इस दौरान अलका कुलकर्णी, अपर्णा जोशी, अपर्णा वरारपांडे, संध्या खंगन, अचला मोहरीकर, मीरा कुपटकर, मंगला पुराणकर, विशाखा पोगडे़, जयश्री गायकवाड़, शीतल कंबलकर, प्राची जोशी, सोनाली कुलकर्णी, मीना विभूते, स्मिता बल्कि, वीणा वंडलकर, ऋतु बहिरट, अक्षदा बहिरट, प्राची गनौदवाले, साधना बहिरट, राजश्री वैद्य, अनुभा साडे़गावकर, रचना ठेंगड़ी सहित अनेक महिला सभासद उपस्थित रहीं। इसी तरह अमलीडीह केंद्र की अक्षरा भागड़े, शोभा जोशी, अर्चना भाखरे और शशि भट्ट ने एक स्थान पर एकत्रित होकर पाठ किया।आध्यात्मिक समिति की सृष्टि दंडवते ने बताया कि महाराष्ट्र मंडल कार्यालय में भी पाठ किया गया। इस दौरान महाराष्ट्र मंडल की लेखा व्यवस्थापिका बी. नंदिनी नायडू, सखी निवास मैनेजर कम्लेश्वरी साहू, वार्डन मंजिरी भगाड़े, श्रद्धा जोशी, हुल्लास देवांगन, मेस की मुख्य रसोइया जामबाई यदु, सुनीता तांडी, वैशाली टांगले, गायत्री साहू, हेमिन साहू, सविता निषाद, नीता खड़तकर उपस्थित रहीं। इसके साथ सियान गुड़ी में डॉ. ओपी सोनी, लखन लाल साहू, विष्णु कुमार मिश्रा, केके पाठक, डॉ. ओसी बिसेन, डॉ. कमल वर्मा ने हनुमान चालीसा का पाठ किया।
- -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को समन्वय कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के दिए निर्देशरायपुर । जांजगीर-चांपा जिले की होनहार पर्वतारोही अमिता श्रीवास ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) को 22 मई 2026 को सफलतापूर्वक फतह कर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि अमिता ने अपने साहस, दृढ़ संकल्प और अथक मेहनत से प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का नया अध्याय रचा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि छत्तीसगढ़ की बेटी ने विश्व की सर्वोच्च चोटी पर तिरंगा और हमारे प्रदेश का गौरव बढ़ाया।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि समिट के बाद बेस कैंप लौटने के दौरान अत्यधिक ऊंचाई, शून्य से लगभग 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान और ऑक्सीजन की कमी के कारण अमिता श्रीवास की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली है। उन्हें हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू कर काठमांडू स्थित नॉर्विक इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें गंभीर फ्रॉस्टबाइट एवं हाई एल्टीट्यूड संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं हुई हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी मिलते ही राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक समन्वय स्थापित कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अमिता श्रीवास और उनके परिवार के साथ खड़ी है तथा उनके बेहतर उपचार के लिए निरंतर संपर्क और सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने अमिता के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि अमिता बिटिया शीघ्र पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर अपने घर लौटें, यही हमारी कामना है। उनका साहस, धैर्य और हौसला हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। छत्तीसगढ़ को उन पर गर्व है।
- -हाइवे में रुक कर पीड़ित बन दर्ज कराई शिकायत, 112 वाहन आने पर सभी उपकरणों का किया परीक्षणरायपुर / रायपुर से कवर्धा जाते समय उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बेमेतरा के पास हाईवे में रुककर डायल-112 नेक्स्ट जेन सेवा की कार्यप्रणाली का औचक परीक्षण किया। सेवा की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और रिस्पॉन्स टाइम को परखने के लिए उन्होंने स्वयं डायल-112 पर कॉल कर मारपीट और सड़क दुर्घटना का पीड़ित बनकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज कराने के बाद वे नजदीक स्थित ढाबा के पास रुककर पुलिस वाहन के पहुंचने का इंतजार करते रहे। निर्धारित समय में डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची, जिसके बाद उप मुख्यमंत्री ने वाहन एवं उससे जुड़ी सभी व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान उन्होंने वाहन में उपलब्ध तकनीकी सुविधाओं, संचार व्यवस्था, रिस्पांस सिस्टम तथा आपातकालीन परिस्थितियों में पुलिस की कार्यप्रणाली की जानकारी अधिकारियों से ली। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को आम नागरिकों को त्वरित एवं प्रभावी सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने वाहन में लगे लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की कार्यप्रणाली सहित हेल्पलाइन की सहायता प्रक्रिया और उनके द्वारा दिए जाने वाली जानकारियों का भी निरीक्षण किया।उल्लेखनीय है कि विगत 18 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में सुरक्षा एवं आपातकालीन सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए 400 नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। नई तकनीक से लैस ये वाहन प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं की पहुंच और रिस्पांस टाइम को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस नए और उन्नत चरण के तहत संपूर्ण व्यवस्था को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और त्वरित बनाते हुए सुरक्षा मानकों और सहायता क्षमता को मजबूत करने के लिए डायल 112 सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्थान पहचान तकनीक को जोड़ा गया है। महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस व्यवस्था में पैनिक बटन और विशेष निगरानी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे पुलिस सहायता, एम्बुलेंस, अग्निशमन सेवा तथा महिला सहायता हेल्पलाइन को एकीकृत मंच पर उपलब्ध कराया जा सकेगा।
- -पतरापारा और बराहनगर के ग्रामीणों को मिला बड़ा लाभ-जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों को मिली बड़ी राहत-एक ही छत के नीचे जुटे सभी विभाग, दर्जनों प्रमाण पत्र जारी, सैकड़ों ग्रामीणों का हुआ निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षणरायपुर । सबसे दूर सबसे पहलेष् एक प्रमुख प्रशासनिक और सामाजिक अभियान है, जिसका मुख्य उद्देश्य सबसे दुर्गम, सुदूर और पिछड़े क्षेत्रों (विशेष रूप से जनजातीय और आदिवासी बहुल गांवों) तक सरकारी सुविधाओं और विकास योजनाओं को सबसे पहले पहुँचाना है। दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव शिविरों के माध्यम से जनजातीय समुदायों को स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, राजस्व और किसान हितैषी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड राजपुर के ग्राम पतरापारा और विकासखंड रामचंद्रपुर के ग्राम बराहनगर में विशेष शिविरों का सफल आयोजन किया गया, जहां अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण की पहल की।जनपद पंचायत सीईओ श्री संजय दुबे के नेतृत्व में ग्राम पंचायत पतरापारा में आयोजित शिविर में पतरापारा सहित डिगनगर, अमदरी, चंद्रगढ़ एवं करजी से बड़ी संख्या में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवार पहुंचे। शिविर की मुख्य उपलब्धियां रहीं स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम द्वारा 71 ग्रामीणों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाइयां दी गईं। गंभीर बीमारियों के निःशुल्क इलाज के लिए मौके पर ही 21 पात्र नागरिकों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए। कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में 11 स्थानीय किसानों का एग्री स्टैक पोर्टल पर डिजिटल पंजीयन किया गया।रामचंद्रपुर विकासखंड के ग्राम बराहनगर में जनपद सीईओ श्री रणवीर साय के नेतृत्व में आयोजित शिविर में ग्रामीणों को विभिन्न विभागीय सेवाओं से सीधा लाभान्वित किया गया। राजस्व एवं नागरिक सेवाएं के तहत राजस्व विभाग द्वारा मौके पर ही 6 जाति, 6 आय और 6 निवास प्रमाण पत्रों सहित कुल 27 जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए। खाद्य एवं श्रम विभाग के द्वारा खाद्य विभाग द्वारा 37 पात्र परिवारों को नए राशन कार्ड वितरित किए गए तथा श्रम विभाग के अंतर्गत 10 श्रमिकों के श्रम कार्ड बनाए गए।पशुधन एवं कृषि कल्याण विभाग द्वारा पशुधन विकास विभाग द्वारा 68 पशुपालकों को निःशुल्क पशु दवाओं का वितरण किया गया। कृषि विभाग ने पीएम किसान सम्मान निधि के 6 लंबित प्रकरणों का सुधार किया, 2 किसानों का एग्री स्टैक पंजीयन किया तथा 1 मृदा परीक्षण सैंपल लिया। शिविर में 157 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर 2 नए आयुष्मान कार्ड जारी किए गए। साथ ही सामाजिक सुरक्षा के तहत 2 हितग्राहियों को पेंशन तथा 1 हितग्राही को परिवार सहायता योजना की राशि स्वीकृत की गई।गौरतलब है कि भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार, कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ के नेतृत्व में इन शिविरों का संपादन किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य फोकस पहाड़ी कोरवा जैसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों को मुख्यधारा से जोड़ना है। जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पहल से जिले के अत्यंत दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक सुशासन की पहुंच सुनिश्चित हो सकी है।
- -जेसीबी से खेतों की मेड़ें तोड़कर नदी के समानांतर समतलीकरण शुरू, लौटाया जाएगा पुराना वैभव-राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने सुबह 5.30 बजे संभाला मोर्चा, 7.5 एकड़ शासकीय भूमि होगी अतिक्रमण मुक्तरायपुर। बालोद जिले की जीवनदायिनी तांदुला नदी को उसके वास्तविक और मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम सिवनी और देउरतराई क्षेत्र में तांदुला नदी के तट पर किए गए व्यापक अवैध कब्जे को हटाने के लिए आज अलसुबह से ही भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमला मैदान में उतर चुका है।तहसीलदार द्वारा सभी 14 चिन्हित अतिक्रमणकारियों को 24 घंटे के भीतर स्वेच्छा से कब्जा हटाने का कड़ा नोटिस (अल्टीमेटम) जारी किया गया था। समय-सीमा समाप्त होते ही आज सुबह 05.30 बजे से राजस्व, पुलिस और जल संसाधन विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर मलबे और अवैध निर्माण को ढहाने की कार्रवाई शुरू कर दी।राजस्व विभाग की सघन जांच और हाईटेक ड्रोन सर्वे में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि जो तांदुला नदी मूल रूप से 220 मीटर चौड़ी थी, वह अवैध कब्जों और खेती के कारण कई स्थानों पर सिकुड़कर मात्र 80 से 90 मीटर ही रह गई थी। जांच में यह भी प्रमाणित हुआ है कि अधिकांश अतिक्रमणकारी आर्थिक रूप से सक्षम हैं। उनके पास अन्य स्थानों पर स्वयं की भूमियां हैं और वे किराना दुकान, सैलून जैसे मुख्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलाते हैं। कुछ रसूखदारों द्वारा नदी की इस शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर इसे दूसरों को श्रेगहाश् (बटाई/किराए) पर देने का मामला भी उजागर हुआ है।प्रशासन द्वारा नदी क्षेत्र की लगभग साढ़े सात एकड़ भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए खेतों की मेड़ों को पोकलेन और जेसीबी मशीनों के माध्यम से तोड़ा जा रहा है। इन खेतों को नदी के समानांतर समतल करने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। समतलीकरण पूर्ण होने के बाद इस पूरे डूब क्षेत्र में जलभराव किया जाएगा, जिससे तांदुला नदी को उसकी पुरानी जल संचय क्षमता और प्राकृतिक सौंदर्य वापस मिल सकेगा।उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले भी प्रशासन द्वारा इस क्षेत्र में अतिक्रमण विरोधी मुहिम शुरू की गई थी। उस समय खेतों में ग्रीष्मकालीन धान की खड़ी फसल होने के कारण मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्रवाई को अस्थाई रूप से रोक दिया गया था। अब चूंकि धान की फसल कट चुकी है, प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए पुनः इस सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है।तांदुला नदी के अस्तित्व और पर्यावरण को बचाने के लिए यह कड़ा कदम उठाना बेहद अपरिहार्य हो गया था। कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीएम, एसडीओपी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, थाना प्रभारी, ट्रैफिक टीआई पुलिस विभाग के अधिकारी तथा जल संसाधन विभाग के अधिकारी सहित तीनों विभागों के सैकड़ों कर्मचारी और तकनीकी स्टाफ मौके पर मुस्तैद रहे।
- -शिविर में मिला स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच, आयुष्मान कार्ड मिलने से दूर हुई इलाज की चिंता-जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान से वनांचल के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रही सुशासन की रोशनीरायपुर ।शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जब दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल कागजी सुविधा नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में बदलाव की एक नई सुबह लेकर आती हैं, जिनमें पात्र व्यक्तियों को आधार पंजीयन, बैंकिंग सेवाएं, राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य शासकीय योजनाओं से जोड़ने के लिये पात्रता परीक्षण, आवेदन एवं मौके पर निराकरण की कार्रवाई की जा रही है। शिविर के माध्यम से स्थानीय समस्याओं का अवलोकन, ग्रामीणों के साथ बैठक एवं योजनाओं का प्रचार-प्रसार, पात्र हितग्राहियों की पहचान, स्वास्थ्य परीक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम, जन सुनवाई तथा शिकायतों के निराकरण के लिये विभागीय कार्रवाई की जा रही है। इसका एक प्रत्यक्ष और जीवंत उदाहरण बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की श्रीमती रोन्ही पहाड़ी कोरवा हैं, जिनके जीवन में प्रशासन की एक संवेदनशील पहल से बेहद सकारात्मक परिवर्तन आया है।विकासखंड राजपुर के सुदूर ग्राम पंचायत पतरापारा की निवासी श्रीमती रोन्ही अपने परिवार के साथ बेहद सीमित संसाधनों में जीवनयापन करती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की समुचित जानकारी और संसाधनों के अभाव में, कई बार मजबूरीवश उन्हें उपचार के लिए स्थानीय बैगा-गुनिया के सहारे रहना पड़ता था।बीमारी बढ़ने की स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना और शहर जाकर इलाज कराना उनके लिए मानसिक और आर्थिक रूप से अत्यंत कष्टकारी साबित होता था। अस्पताल आने-जाने और महंगी दवाइयों में उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता था, जिससे परिवार की रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी दूभर हो जाता था।श्रीमती रोन्ही के जीवन के इस ढर्रे को बदलने का माध्यम बना जिला प्रशासन द्वारा संचालित ?जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान। इसके तहत पतरापारा में आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रोन्ही की समस्या को समझा और मौके पर ही उनका श्आयुष्मान भारत कार्डश् बनाकर उन्हें सौंप दिया। आयुष्मान कार्ड मिलने के बाद अब रोन्ही और उनके पूरे परिवार को इलाज पर होने वाले भारी-भरकम खर्च की चिंता से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई है। अब वे किसी भी आपातकालीन स्थिति या बीमारी में अनुबंधित अस्पतालों में जाकर निःशुल्क एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगी।अपनी खुशी साझा करते हुए श्रीमती रोन्ही बताती हैं, पहले हमारे लिए बीमारी का मतलब सिर्फ मानसिक चिंता और कर्ज का बोझ होता था। लेकिन अब यह आयुष्मान कार्ड हमारे पास है, जिससे हमें एक बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा का एहसास हुआ है। अब मैं अपने परिवार के स्वास्थ्य और उनके भविष्य को लेकर पूरी तरह निश्चिंत हूँ। उन्होंने जनजातीय गरिमा उत्सव शिविर को दूरस्थ अंचल के ग्रामीणों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और जीवनदायिनी पहल बताते हुए राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है।
- -गरीबी और संघर्षों को हराकर चमकाया जिले का नाम, समाज कल्याण विभाग ने बढ़ाया मदद का हाथ-रोजगार के लिए तत्काल 10 हजार रूपए मासिक मानदेय की व्यवस्था, पीएचडी के लिए उच्च स्तर पर पत्राचार शुरूरायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशील नीतियां और त्वरित प्रशासनिक पहल अब जरूरतमंदों के जीवन में नई उम्मीद बनकर सामने आ रही हैं। इसका एक अनुपम और प्रेरणादायी उदाहरण जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही की 75 प्रतिशत श्रवण बाधित दिव्यांग युवती कुमारी पूजा साहू ने पेश किया है। पूजा ने अत्यंत कठिन आर्थिक परिस्थितियों और व्यक्तिगत संघर्षों को बौना साबित करते हुए समाजशास्त्र विषय में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है।पेण्ड्रारोड के वार्ड क्रमांक 1 (सिंचाई कॉलोनी, सारबहर) स्थित स्मृति वाटिका के पास एक छोटी सी झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाली पूजा साहू ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास अडिग हो, तो शारीरिक और आर्थिक अक्षमताएं भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा के प्रति अपनी ललक को कम नहीं होने दिया और विपरीत हालातों में भी निरंतर अध्ययन जारी रखा।कुमारी पूजा साहू अपने आगे पीएच.डी. शोध कार्य हेतु आर्थिक सहायता की गुहार लेकर जिला समाज कल्याण विभाग के कार्यालय पहुंची थीं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को बताया कि उन्होंने समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर करने के बाद राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली है। उनकी असाधारण योग्यता को देखते हुए विभाग ने बिना किसी विलंब के तत्काल कार्यवाही शुरू की।समाज कल्याण विभाग के प्रभारी सहायक संचालक श्री सुरेश भारती ने वस्तुस्थिति का आकलन करने के लिए स्वयं पूजा साहू के निवास का जमीनी निरीक्षण किया। निरीक्षण में पता चला कि लगभग 9 वर्ष पूर्व पूजा के पिता का साया उनके सिर से उठ चुका है। उनकी वृद्ध माता जी स्थानीय स्तर पर मजदूरी करके किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं।पूजा के इस कड़े संघर्ष और असाधारण प्रतिभा को देखते हुए विभाग ने एक बेहद सकारात्मक पहल की। उन्हें तत्काल एक अशासकीय समाजसेवी संस्था ष्प्रगति सेवा संस्था में सामाजिक कार्यकर्ता के पद पर नियुक्ति दिलाई गई है। इस कार्य के लिए उन्हें 10 हाजर रूपए प्रति माह का मानदेय प्राप्त होगा, जिससे उनके परिवार को तुरंत आर्थिक संबल मिलेगा। इसके साथ ही, उनके पीएच.डी. शोध कार्य के लिए विशेष सहायता राशि स्वीकृत कराने के संबंध में उच्च कार्यालय को आवश्यक प्रस्ताव और पत्राचार की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।राज्य सरकार द्वारा दिव्यांगजनों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और मेधावी युवाओं के लिए संचालित की जा रही नीतियां आज धरातल पर रंग ला रही हैं। पूजा साहू की यह ऐतिहासिक सफलता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि शासन का सहयोग सही समय पर सही हकदार तक पहुंचे, तो तकदीर बदलते देर नहीं लगती। आज पूजा की यह कहानी अंचल के हजारों युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा और सकारात्मक आत्मविश्वास का संचार कर रही है।
- -10.15 सेकंड में 100 मीटर दौड़ पूरी कर बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड-जशपुर की गलियों से निकलकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 तक पहुँचा छत्तीसगढ़ का गौरव-फेडरेशन कप में अनिमेष कुजुर ने बिखेरी चमक, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने दी बधाईरायपुर। छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभा ने एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर अपनी अद्वितीय चमक बिखेरते हुए पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। जशपुर जिले के होनहार धावक अनिमेष कुजुर ने फेडरेशन कप-2026 में अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए 100 मीटर की दौड़ मात्र 10.15 सेकंड में पूरी कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया है। इस ऐतिहासिक और गौरवमयी उपलब्धि के साथ ही अनिमेष ने आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 के लिए भी सफलतापूर्वक क्वालीफाई कर लिया है। अनिमेष कुजुर की यह स्वर्णिम सफलता केवल एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के युवाओं के अदम्य साहस, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प का जीवंत प्रतीक है। अत्यंत सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक व आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद, जशपुर की माटी से निकलकर अंतर्राष्ट्रीय मंच तक का सफर तय करना उनकी अथक साधना, कड़े अनुशासन और निरंतर संघर्ष की एक बेहद प्रेरक गाथा है। इस ऐतिहासिक कामयाबी पर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अनिमेष कुजुर को अपनी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा छत्तीसगढ़ के युवा आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। अनिमेष ने अपनी लगन और असाधारण मेहनत से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन किया है। उन्होंने कहा कि अनिमेष की यह सफलता प्रदेश के लाखों उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का एक महान स्रोत बनेगी। राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सफलता के कई नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे। मंत्री श्री अग्रवाल ने अनिमेष के उज्ज्वल भविष्य और आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए देश की ओर से शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि वे आगे भी देश को गौरवान्वित करते रहेंगे। अनिमेष की इस शानदार राष्ट्रीय विजय से पूरे छत्तीसगढ़ में जश्न और गर्व का माहौल है। खेल प्रेमियों, युवा संगठनों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने अनिमेष की इस जादुई दौड़ की सराहना करते हुए इसे राज्य के खेल इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय बताया है। इस बड़ी उपलब्धि ने प्रदेश के ग्रामीण व शहरी अंचलों के युवाओं में खेलों के प्रति एक नई ऊर्जा, उमंग और आत्मविश्वास का संचार कर दिया है।
- महासमुंद / मेहनत, नवाचार और आधुनिक तकनीक के समन्वय से किसान अपनी तकदीर बदल सकते हैं। इसका जीवंत उदाहरण हैं जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम बोहारपार के प्रगतिशील किसान श्री नवीन साव। पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में ग्राफ्टेड बैगन की उन्नत खेती अपनाई और आज वे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।श्री नवीन साव बताते हैं कि वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड बैगन की खेती प्रारंभ की। उन्होंने अपनी 1.31 हेक्टेयर भूमि में आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रिप सिंचाई एवं मल्चिंग का उपयोग कर वैज्ञानिक पद्धति से खेती की। परिणामस्वरूप उन्हें बेहतर उत्पादन एवं अधिक लाभ प्राप्त हुआ। पूर्व में वे पारंपरिक धान की खेती करते थे, जिससे सीमित आय ही प्राप्त होती थी। धान फसल से प्रति एकड़ लगभग 21 क्विंटल उत्पादन एवं करीब 45 हजार 600 रुपए का लाभ मिलता था। वहीं ग्राफ्टेड बैगन की खेती अपनाने के बाद प्रति एकड़ लगभग 155 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। उत्पाद को सरायपाली एवं उड़ीसा मंडी में लगभग 30 रुपए प्रति किलो की दर से विक्रय कर उन्होंने करीब 2 लाख 45 हजार रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया।श्री साव बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के सतत मार्गदर्शन, योजनाओं के लाभ और नई तकनीकों को अपनाने की जिज्ञासा ने उन्हें सफलता दिलाई। वे नियमित रूप से कृषि एवं उद्यानिकी से संबंधित नई जानकारियां प्राप्त करते रहते हैं तथा खेती में नवाचार को प्राथमिकता देते हैं। आसपास के किसान लगातार उनके खेत का भ्रमण कर आधुनिक खेती की तकनीकों की जानकारी ले रहे हैं। कई किसान पारंपरिक खेती छोड़कर उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।



























