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- बालोद। एकीकृत बाल विकास परियोजना दल्लीराजहरा के परियोजना अधिकारी ने बताया कि कार्यालय परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना दल्लीराजहरा द्वारा दुर्गावती वार्ड नंबर 12 आंगनबाड़ी केंद्र रमरा दफाई केंद्र क्रमांक 17 में आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पद पर भर्ती हेतु 08 सितंबर आॅनलाईन आवेदन आमंत्रित की गई है। उन्होंने बताया कि इच्छुक आवेदक वेबसाईट https://aww.e-bharti.in/ पर 08 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।
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रायपुर। भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती रूप कुमारी चौधरी ने नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में विधिवत पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर महिला मोर्चा सहित भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारी एवं वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
पदभार ग्रहण के पश्चात मीडिया से चर्चा करते हुए नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती रूप कुमारी चौधरी ने कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार किया। श्रीमती चौधरी ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी हमेशा से महिला विरोधी रहे हैं। जिस प्रकार कांग्रेस ने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिला आरक्षण का विरोध किया, उसे पूरे देश ने देखा है। सबने देखा कि असल में महिला-विरोधी कौन है।उन्होंने कहा कि एक ओर जहाँ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण देकर आगे बढ़ाने का ऐतिहासिक कार्य कर रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी महिलाओं का अपमान करने और उनके अधिकारों में बाधा डालने का काम करती है।
श्रीमती चौधरी ने कहा कि भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो नारी शक्ति का वास्तविक सम्मान करती है और उन्हें संगठन व सरकार में उचित प्रतिनिधित्व देती है। उन्होंने महिला मोर्चा के सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लिया।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर महिला मोर्चा की निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती वानथी श्रीनिवासन एवं महिला मोर्चा की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री सरोज पांडेय सहित भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। - -भाजपा सांसद संतोष पांडेय ने राहुल गांधी के बयान पर किया पलटवाररायपुर। भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पांडेय ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के नेता भारत की संस्कृति, सभ्यता और विरासत का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी देश की जनता को लगातार भ्रमित करने का काम करते है। श्री पांडेय ने कहा, राहुल गांधी को, उनके सैम अंकल और क्वात्रोची मामा ने ज्ञान नहीं दिया कि भारत में कितनी महिला मुख्यमंत्री रही हैं।भाजपा मुख्य प्रदेश प्रवक्ता एवं सांसद श्री पांडेय ने बताया कि सुचेता कृपलानी उत्तर प्रदेश, नंदिनी सतपथी ओडिशा, शशिकला काकोदकर गोवा, सैयदा अनवरा तैमूर असम, एन. जानकी रामचंद्रन एवं जयललिता तमिलनाडु, मायावती उत्तर प्रदेश, राजिंदर कौर भट्ठल पंजाब, राबड़ी देवी बिहार, सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित दिल्ली, उमा भारती मध्यप्रदेश, वसुंधरा राजे राजस्थान, ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल, आनंदीबेन पटेल गुजरात, महबूबा मुफ्ती जम्मू कश्मीर, रेखा गुप्ता दिल्ली से मुख्यमंत्री बनी हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी यहाँ की संस्कृति, सभ्यता, विरासत का अपमान करने का काम कर रहे हैं, इसे देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। भारतीय जनता पार्टी महिला शक्ति का सम्मान करती है और कांग्रेस के महिला विरोधी मानसिकता की कड़ी निंदा करती है।भाजपा मुख्य प्रवक्ता एवं सांसद श्री पाण्डेय ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और कांग्रेसी नेताओं की महिला विरोधी मानसिकता लगातार सामने आ रही है। इससे पहले जब संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल लाया गया तब यही काग्रेसी नेताओं ने उस बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी देश की महिलाओं को लोकसभा एवं विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ नेतृत्व करने का अवसर प्रदान कर रहे हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी समेत समूची विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के इसी रवैये की वजह से आज कांग्रेस पार्टी भारत के नक्शे से गायब होती नजर आ रही है।
- रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में नवनियुक्त सोशल मीडिया टीम के पदाधिकारियों की बैठक ली।बैठक के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नवीन ने संगठन के डिजिटल संचार को और अधिक प्रभावी बनाने, जन-जन तक पार्टी के विचारों और कार्यों को पहुँचाने तथा सोशल मीडिया के माध्यम से जनसंवाद को और अधिक सशक्त करने की दिशा में विस्तार से मार्गदर्शन दिया।इस अवसर पर बैठक में सोशल मीडिया के नवनियुक्त राष्ट्रीय संयोजक दीपक म्हस्के, निवर्तमान राष्ट्रीय संयोजक अमित मालवीय, नवनियुक्त राष्ट्रीय सह-संयोजक श्रीमती प्रीति गांधी, शिवानन्द द्विवेदी, आलोक भट्ट व अरुण यादव सहित सोशल मीडिया विभाग के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
- -प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा पदस्थापना आदेश जारी, 15 दिनों में ज्वाइनिंग के निर्देश-उच्चतम न्यायालय में स्थगन के निराकरण के दो दिनों के भीतर विभाग ने जारी किए नियुक्ति आदेश-बड़ी संख्या में युवा इंजीनियरों की नियुक्ति से जल जीवन मिशन एवं अन्य कार्यों में आएगी और गति – उप मुख्यमंत्री अरुण सावरायपुर। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने 111 उप अभियंताओं की नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं। इनमें 101 सिविल अभियंता और 10 विद्युत/यांत्रिक अभियंता शामिल हैं। प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा नियुक्ति के साथ ही सभी चयनित उप अभियंताओं की पदस्थापना के आदेश भी जारी किए गए हैं। चयनितों को नियुक्ति आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर पदस्थापना कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने कहा गया है। निर्धारित तिथि तक उपस्थित नहीं होने की स्थिति में नियुक्ति स्वयंमेव निरस्त मानी जाएगी।लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में उप अभियंता (सिविल) के 118 पदों तथा उप अभियंता (विद्युत/यांत्रिकी) के 10 पदों पर भर्ती के लिए व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) द्वारा अप्रैल-2025 में लिखित परीक्षा ली गई थी। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद जुलाई-2025 में विभाग द्वारा व्यापम की मेरिट सूची के अनुसार अभ्यार्थियों के दस्तावेज परीक्षण और पदस्थापना विकल्प के संबंध में कांउसलिंग के बाद उच्चतम न्यायालय में दायर स्थगन के कारण नियुक्ति प्रक्रिया विलंबित रही। उच्चतम न्यायालय द्वारा 20 अगस्त 2026 को याचिका के निराकरण के बाद उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने तत्काल 22 अगस्त को प्रथम चरण में अनुशंसित चयन सूची के अनुसार सिविल के 101 उप अभियंताओं तथा विद्युत/यांत्रिकी के 10 उप अभियंताओं के पदस्थापना आदेश जारी कर दिए हैं।उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव ने एक साथ इतनी बड़ी संख्या में नियुक्ति पर खुशी जताते हुए कहा कि युवा इंजीनियरों की विभाग में नियुक्ति से विभागीय कार्यों, विशेषकर जल जीवन मिशन के कार्यों में गति आएगी। उच्चतम न्यायालय से प्रकरण के निराकरण के तत्काल बाद हमने नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर पदस्थापना आदेश जारी किए हैं। इन युवा इंजीनियरों की ऊर्जा और तकनीकी दक्षता का लाभ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को मिलेगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने सभी चयनितों को पदस्थापना कार्यालय में उपस्थिति देते समय शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, स्थाई जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, सक्षम मेडिकल बोर्ड का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र एवं अन्य प्रमाण पत्रों की मूल प्रति अनिवार्यतः प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मूल तकनीकी शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र के साथ कक्षा दसवीं की अंकसूची जिसमें जन्मतिथि अंकित हो या मूल जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
- -’विरासत भी, विकास भी’ की सोच से संवारा बाबाघाट, उप मुख्यमंत्री ने सौंदर्यीकरण कार्यों का किया लोकार्पणरायपुर। लोरमी के श्री बाबाघाट धाम में आज पावन श्रावण मास के अंतिम सोमवार को आस्था और विकास का सुंदर संगम देखने को मिला। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने लोरमीवासियों के साथ परम पूज्य श्री श्री 108 शिवानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में भगवान भोलेनाथ का विधिवत रुद्राभिषेक किया। इस दौरान उन्होंने महादेव से सभी के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।रुद्राभिषेक के बाद श्री साव ने मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण एवं उन्नयन कार्यों का लोकार्पण किया। भंडारे में श्रद्धालुओं को प्रसाद भी वितरित किया। उन्होंने कहा कि ‘विरासत भी, विकास भी’ की सोच के साथ लोरमी की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य किया जा रहा है। सौंदर्यीकरण के बाद बाबाघाट का स्वरूप भव्य और आकर्षक हुआ है। श्रद्धालुओं को यहां स्वच्छ, शांत और भक्तिमय वातावरण मिलेगा।श्री साव ने कहा कि श्री बाबाघाट धाम लोरमी का प्राचीन धार्मिक स्थल है। वर्षों से यहां साधु-संत पूजन, हवन एवं विश्राम करते रहे हैं। समय के साथ यह स्थल जीर्ण-शीर्ण हो गया था। अब इसके सौंदर्यीकरण और उन्नयन से नया स्वरूप मिला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने काशी कॉरिडोर और उज्जैन में महाकाल लोक कॉरिडोर का निर्माण किया। अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बनाया गया। छत्तीसगढ़ में भी भोरमदेव कॉरिडोर एवं मां बम्लेश्वरी मंदिर में ‘प्रसाद’ योजना के तहत कार्य होगा। वहीं रतनपुर धाम के विकास की दिशा में कार्य हो रहे हैं। इसी तरह लोरमी का बाबाघाट भी भव्य स्वरूप में विकसित किया गया है। श्री साव ने लोरमीवासियों से अपील की कि वे बाबाघाट के स्वरूप को सुंदर बनाए रखते हुए नियमित धार्मिक आयोजन करें।
- -मां नर्मदा के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की-कांवडि़यों के बीच बैठकर ग्रहण किया प्रसादरायपुर। श्रावण मास के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने मध्यप्रदेश के पवित्र तीर्थस्थल अमरकंटक पहुंचकर मां नर्मदा के दर्शन किए। उन्होंने नर्मदा उद्गम स्थल स्थित नर्मदा कुंड में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। इसके पश्चात उन्होंने जलेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का पूजन किया और प्रदेश एवं प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने नर्मदा कुंड एवं नर्मदा उद्गम स्थल के पवित्र परिसर में पूजा-अर्चना कर मां नर्मदा का आशीर्वाद लिया। श्रावण मास के अंतिम सोमवार को अमरकंटक में श्रद्धा और आस्था का विशेष वातावरण रहा। इस दौरान श्री शर्मा ने धार्मिक अनुष्ठानों के साथ जनकल्याण की भावना को सर्वाेपरि रखते हुए प्रदेश की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।अमरकंटक प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा कांवडि़यों के बीच भी पहुंचे। उन्होंने मृत्युंजय आश्रम में कांवडि़यों को भोजन प्रसादी वितरित की और उनके साथ बैठकर प्रसादी ग्रहण की। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं से आत्मीय बातचीत कर उनकी कांवड़ यात्रा, यात्रा मार्ग और उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। कांवडि़यों के साथ सहजता से संवाद करते हुए उन्होंने उनकी यात्रा के अनुभव भी सुने।उल्लेखनीय है कि अमरकंटक से भोरमदेव मंदिर तक लगभग 150 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा को सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के निर्देश पर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। यात्रा मार्ग पर कांवडि़यों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य, सुरक्षा, भोजन और रात्रि विश्राम सहित आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। कांवडि़यों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्ग में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। वहीं सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस अधिकारियों के साथ पुलिस पेट्रोलिंग दल भी तैनात किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।अमरकंटक स्थित मृत्युंजय आश्रम में कांवडि़यों के लिए निःशुल्क भोजन एवं रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई है। यहां श्रद्धालुओं को दाल-भात, सब्जी के साथ खीर, पूरी और हलवा सहित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे लंबी कांवड़ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को विश्राम के साथ पौष्टिक भोजन की सुविधा मिल रही है। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि कांवडि़यों की सुविधा और सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। सावन माह के इस पवित्र अवसर पर भोरमदेव से अमरकंटक तक श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी कांवड़ यात्रा को सुगम बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि सभी भक्तजन श्रद्धा, उत्साह और सुरक्षित वातावरण में अपनी कांवड़ यात्रा पूरी कर सकें।
- -डौण्डीलोहारा में आयोजित समारोह में 67 लाख 28 हजार 918 बहनों के खाते में 631 करोड़ से अधिक की राशि का करेंगे अंतरणरायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय 25 अगस्त को बालोद जिले के विकासखण्ड मुख्यालय डौण्डीलोहारा के लाल रघुवीर सिंह स्टेडियम में आयोजित बिहान दीदी एवं स्व-सहायता समूह के सम्मान समारोह के अवसर पर महतारी वंदन योजना के 31वीं किस्त 67 लाख 28 हजार 918 हितग्राहियों के खाते में 631 करोड़ 38 लाख 37 हजार 700 रूपये की राशि का अंतरण करेंगे।उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु भैय्या के द्वारा रक्षाबंधन के ठीक पूर्व महतारी वंदन योजना की राशि बहनों के खातें में सीधे अंतरण कर लाभान्वित करेंगे। राज्य सरकार के इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से प्रतिमाह मिलने वाली राशि महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक सशक्तिकरण एवं चिकित्सा, स्वास्थ्य तथा सुपोषण के लिए अत्यंत मददगार साबित हो रहा है। इसके अलावा इस राशि का उपयोग राज्य की महिलाओं के द्वारा बेटियों की सुरक्षित एवं सुखद भविष्य हेतु सुकन्या समृद्धि योजना में जमा करने के साथ-साथ विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के निष्पादन में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। महतारी वंदन योजना से अब तक 30 किस्तों में 19 हजार 444 करोड़ की सहायता राशि बहनों को प्रदान की जा चुकी है। ज्ञातव्य है कि सितंबर 2026 की 31वीं किस्त की सहायता राशि का भुगतान सितंबर माह में किया जाना है, लेकिन मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा बहनों को सौगात के तौर पर सितंबर माह की राशि को राखी त्योहार के पूर्व बहनोें के खातें में अंतरित किया जाएगा।
- -गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण करने के दिए निर्देश-लापरवाही और धीमा प्रगति पर होगी कार्रवाईरायपुर ।उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने मुंगेली जिले के विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेकर विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सभी विकास कार्यों को निर्धारित समयावधि के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने लंबे समय से लंबित कार्यों को प्राथमिकता के साथ जल्दी पूरा करने को कहा। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्ध प्रगति को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों से कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कार्यों में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों एवं संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। श्री साव ने बैठक में शासन की प्राथमिकता के अनुरूप विकास कार्यों को गति देते हुए उनका लाभ नागरिकों तक समय पर पहुंचाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को विकास कार्यों की निरंतर समीक्षा एवं स्थल निरीक्षण करते हुए प्रगति पर कड़ी नजर रखने को कहा। उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और कार्यों की धीमी प्रगति पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की बात कही।
- -निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए कैबिनेट ने दी है मंजूरी-कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेजरमेंट बुक, बिल भुगतान, लेखा प्रबंधन एवं गुणवत्ता की निगरानी अब एक ही प्लेटफॉर्म पर-लोक निर्माण विभाग की सम्पूर्ण कार्यप्रणाली होगी पारदर्शी, अभिलेख-आधारित और जवाबदेह - उप मुख्यमंत्री श्री अरुण सावरायपुर। लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए वर्क एण्ड अकाउंट्स मैनेजमेंट इंटीग्रेशन सिस्टम (WAMIS) लागू किया जाएगा। 'वमिस' (WAMIS) से कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेजरमेंट बुक (e-MB), बिल भुगतान, लेखा प्रबंधन तथा गुणवत्ता की निगरानी जैसी सभी प्रक्रियाएं एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होंगी। इस प्रणाली से निर्माण कार्यों की पारदर्शिता बढ़ेगी, भुगतान की प्रक्रिया में तेजी आएगी तथा कार्यों की रियल-टाइम निगरानी की जा सकेगी। इससे निर्माण परियोजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी और जवाबदेह होगा।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में विगत 5 अगस्त को हुई कैबिनेट की बैठक में लोक निर्माण विभाग में 'वमिस' को लागू करने की मंजूरी दी गई है। सी-डैक (C-DAC), पुणे द्वारा विकसित इस प्रणाली को पहले लोक निर्माण विभाग में लागू किया जाएगा, जिसके बाद अन्य निर्माण एवं अधोसंरचना विभागों में भी इसका विस्तार किया जाएगा। राज्य कैबिनेट का यह निर्णय उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव द्वारा विभाग में पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं समयबद्धता पर लगातार दिए जा रहे जोर की परिणति है। लोक निर्माण विभाग में डिजिटल कार्य-संस्कृति की दिशा में राज्य शासन की यह महत्वपूर्ण पहल है।उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव लोक निर्माण विभाग में प्रत्येक स्तर पर उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने निर्माण कार्यों की स्वीकृति से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया को कागजी औपचारिकताओं से मुक्त कर पूर्णतः ऑनलाइन एवं अभिलेख-आधारित करने लगातार जोर दे रहे थे। राज्य कैबिनेट की मोहर के बाद अब इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बताया कि लोक निर्माण विभाग द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में प्रचलित कार्य एवं लेखा प्रबंधन प्रणालियों के तुलनात्मक अध्ययन तथा सी-डैक (C-DAC), पुणे द्वारा विकसित एवं अनेक राज्यों में सफलतापूर्वक संचालित 'वमिस' (WAMIS) को छत्तीसगढ़ की आवश्यकताओं के अनुरूप सर्वाधिक उपयुक्त पाया गया। इसी आधार पर प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।क्या है 'वमिस'?'वमिस' (Work & Accounts Management Integration System) भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन संस्थान सी-डैक, पुणे द्वारा विकसित एक एकीकृत प्रणाली है, जो किसी भी निर्माण कार्य के सम्पूर्ण जीवन-चक्र... प्रारंभिक प्रस्ताव से लेकर कार्य पूर्णता एवं अंतिम भुगतान तक को डिजिटल रूप में संचालित करती है। इस प्रणाली में कार्यों की प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति, ई-प्राक्कलन (e-Estimate) एवं अनुमानित लागत का ऑनलाइन निर्धारण, ई-प्रोक्योरमेंट (निविदा प्रक्रिया) से एकीकरण, ई-मेजरमेंट बुक (e-MB) मापन पुस्तिका का डिजिटलीकरण, ठेकेदारों के देयकों (बिल) की ऑनलाइन तैयारी एवं भुगतान, मासिक लेखा, कैशबुक एवं बजट आबंटन के विरुद्ध व्यय का प्रबंधन, जियो-टैग्ड छायाचित्रों सहित कार्यों की गुणवत्ता एवं भौतिक प्रगति की निगरानी जैसी सभी प्रक्रियाएँ एक ही प्लेटफॉर्म पर समाहित हैं।लोक निर्माण विभाग के कार्यों में आएंगे ये बदलावराज्य में 'वमिस' के लागू होने के बाद कार्य के सभी स्तरों में पारदर्शिता बढ़ेगी। इसमें प्रत्येक कार्य की स्वीकृति, निविदा, मापन एवं भुगतान का डिजिटल अभिलेख उपलब्ध रहेगा। इससे निर्माण कार्यों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी। वरिष्ठ अधिकारी एवं शासन स्तर पर कार्यों की भौतिक तथा वित्तीय प्रगति की समवर्ती निगरानी संभव होगी।वमिस' से ठेकेदारों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा। देयकों की ऑनलाइन प्रक्रिया से ठेकेदारों को भुगतान में विलंब कम होगा और परियोजनाओं की गति बढ़ेगी। अधिकांश प्रक्रियाओं में मानवीय हस्तक्षेप कम से कम होने तथा मापन एवं बिलिंग प्रक्रिया के डिजिटलीकरण से त्रुटि तथा अनियमितता की संभावना घटेगी।इस प्रणाली से लेखा संधारण में भी सुधार आएगा। महालेखाकार कार्यालय को प्रस्तुत की जाने वाली मासिक लेखा प्रविष्टियाँ इससे स्वतः तैयार हो जाएंगी। विभागीय परिसंपत्तियों एवं व्यय का एकीकृत डेटाबेस हमेशा उपलब्ध रहने से विभागीय फैसलों और नीतियों के निर्धारण में भी सहायता मिलेगी।"शासन का संकल्प है कि जनता के धन से बनने वाला प्रत्येक निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण हो और निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हो। 'वमिस' (WAMIS) के माध्यम से लोक निर्माण विभाग की सम्पूर्ण कार्यप्रणाली पारदर्शी, अभिलेख-आधारित और जवाबदेह बनेगी।" - श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री
- रायपुर / रक्षाबंधन के पावन अवसर पर नवा रायपुर अटल नगर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राखी में भारतीय सेना के जवानों के सम्मान और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए भावनात्मक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। COSA Army के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय सेना के अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों एवं अन्य रैंक सहित कुल 72 सैन्यकर्मियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं ने सैन्यकर्मियों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। छात्राओं ने देश की सीमाओं की रक्षा में दिन-रात समर्पित जवानों के प्रति सम्मान, स्नेह और आभार व्यक्त किया। राखी के इस पवित्र धागे ने सैनिकों और विद्यार्थियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत किया।कार्यक्रम की विशेष पहल के रूप में विद्यार्थियों ने नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर भारतीय सेना के जवानों के लिए अपने हाथों से व्यक्तिगत पत्र एवं संदेश लिखे। इन संदेशों में विद्यार्थियों ने सैनिकों के साहस, त्याग और देशसेवा के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उनके सुरक्षित रहने और देश की रक्षा में सदैव सफल होने की कामना की। बच्चों के इन भावपूर्ण संदेशों ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।इस अवसर पर सैन्यकर्मियों ने विद्यार्थियों से संवाद किया और भारतीय सेना के जीवन, अनुशासन एवं कार्यप्रणाली से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने, जिम्मेदार नागरिक बनने और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया। संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को सेना के जीवन को करीब से समझने और सैनिकों के समर्पण एवं चुनौतियों को जानने का अवसर मिला। कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्टेशन मुख्यालय, रायपुर के प्रशासनिक कमांडेंट कर्नल अभिषेक उनियाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के समन्वय एवं संचालन में सूबेदार राज किशोर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस अवसर पर कर्नल अरिंदम मजूमदार, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों ने अपने संदेशों और भावनाओं के माध्यम से देश के वीर जवानों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और राष्ट्रभक्ति का भाव प्रकट किया। नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर लिखे बच्चों के संदेशों में देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों के प्रति पूरे समाज की श्रद्धा और विश्वास की झलक दिखाई दी।
- -महतारी वंदन की 30वीं किस्त बनी श्रीमती अनिता के लिए खुशियों की सौगातरायपुर/ रक्षाबंधन जैसे पर्व के पहले मिलने वाली छोटी-सी आर्थिक मदद भी परिवार के लिए बड़ी खुशी और संबल लेकर आती है। जांजगीर चांपा जिले अंतर्गत नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पेंड्री निवासी श्रीमती अनिता कश्यप के लिए इस बार रक्षाबंधन से पहले महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त का उनके खाते में पहुंचना ऐसी ही खुशियों की सौगात बनकर आया। खाते में 1,000 रुपये की राशि प्राप्त होने पर उन्होंने इसे परिवार की जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी आर्थिक सहयोग बताया।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह राशि महिलाओं को अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के साथ-साथ परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग दे रही है। इससे महिलाओं में आर्थिक आत्मविश्वास बढ़ रहा है और परिवार के निर्णयों एवं जरूरतों में उनकी भूमिका और मजबूत हो रही है।श्रीमती अनिता कश्यप बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि उनके लिए रोजमर्रा की कई जरूरतों में सहायक साबित होती है। बच्चों की पढ़ाई, घर की आवश्यक सामग्री और अचानक सामने आने वाले छोटे-बड़े खर्चों में यह राशि उपयोगी होती है। हर महीने खाते में राशि आने से उन्हें यह भरोसा रहता है कि जरूरत के समय उनके पास स्वयं की आर्थिक सहायता उपलब्ध है।रक्षाबंधन से ठीक पहले 30वीं किस्त की राशि मिलने पर श्रीमती अनिता कश्यप ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त मिलने से मुझे बहुत खुशी हुई है। रक्षाबंधन से पहले राशि मिलने से त्योहार की खुशी और बढ़ गई है। मैं 30वीं किस्त मिलने पर मुख्यमंत्री विष्णु भैया के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करती हूं।” महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए नियमित आर्थिक सहायता के साथ सम्मान, आत्मविश्वास और आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है। रक्षाबंधन के अवसर पर मिलने वाली यह किस्त प्रदेश की लाखों बहनों के लिए सरकार के भरोसे और सहयोग का संदेश लेकर पहुंची है। बहनों का मान बढ़ाने और उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महतारी वंदन योजना निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
- -विष्णु भैया ने दिया बहनों को आर्थिक संबल-महतारी वंदन योजना की राशि पोस्ट ऑफिस में जमा कर बिटिया की पढ़ाई के लिए सुरक्षित कर रहीं भविष्य की पूंजीरायपुर / प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए आर्थिक निर्णय लेने का अवसर देने वाली महतारी वंदन योजना ग्रामीण अंचल की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता अब महिलाओं के लिए केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने का माध्यम नहीं, बल्कि बचत और भविष्य की बेहतर योजना का आधार भी बन रही है।सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खुटिया की निवासी श्रीमती उमा सिंह ने महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक सहायता को अपनी बिटिया के उज्ज्वल भविष्य से जोड़कर एक प्रेरणादायी पहल की है। उन्हें योजना के तहत हर माह मिलने वाली ₹1,000 की राशि वे अपनी बेटी के नाम पर पोस्ट ऑफिस में जमा कर रही हैं। उनका उद्देश्य भविष्य में इस बचत का उपयोग बेटी की पढ़ाई-लिखाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए करना है।आज की छोटी बचत, कल बेटी के सपनों की बड़ी उड़ानउमा सिंह बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत हर माह मिलने वाली राशि उनके लिए आर्थिक सहारा है। उन्होंने इस राशि को तत्काल खर्च करने के बजाय अपनी बेटी के भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि नियमित रूप से की जा रही यह छोटी-सी बचत आने वाले समय में बेटी की शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोग बनेगी।उमा सिंह की यह पहल बताती है कि शासन की योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता का उपयोग महिलाएं अपनी प्राथमिकताओं के अनुरूप किस तरह परिवार के भविष्य को मजबूत बनाने में कर रही हैं। नियमित राशि ने उनमें बचत की आदत विकसित करने के साथ आर्थिक निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ाया है।महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार बनी योजनामहतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। योजना की राशि से महिलाएं घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, बचत और भविष्य की जरूरतों के लिए भी आर्थिक आधार तैयार कर रही हैं।उमा सिंह ने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विष्णु भैया ने महतारी वंदन योजना के माध्यम से उन्हें अपनी बेटी के भविष्य के लिए बचत करने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि योजना से मिलने वाली राशि उनके लिए अपनी बिटिया के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण शुरुआत है। जब महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल मिलता है, तो वे केवल अपनी वर्तमान जरूरतें ही पूरी नहीं करतीं, बल्कि आने वाले कल की मजबूत नींव भी तैयार करती हैं। महतारी वंदन योजना की राशि से शुरू हुई उनकी यह बचत आज उनकी बेटी के सपनों को सुरक्षित करने की दिशा में एक उम्मीद बन गई है।
- -बबली यादव ने फोटो कॉपी, मशरूम और महुआ व्यवसाय से बढ़ाई आय-बिहान से मिला संबल, विष्णु भैया की योजनाओं ने बढ़ाया आत्मविश्वासरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में लागू हो रहे विष्णु के सुशासन का लाभ गांव-गांव तक पहुंच रहा है। शासन की योजनाओं और ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत चुकतीपानी की श्रीमती बबली यादव ऐसी ही मेहनतकश महिला हैं, जिन्होंने विष्णु भैया की सरकार की योजनाओं से मिले अवसरों को अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से सफलता में बदला है।श्रीमती बबली यादव जागृति महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। उन्होंने समूह के माध्यम से ऋण प्राप्त कर कंप्यूटर खरीदा और अपने घर पर ही फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर संबंधी कार्य शुरू किया। गांव में ही यह सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीणों को आवश्यक कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। वहीं बबली को नियमित आय का साधन भी मिल गया। एक छोटे से प्रयास ने उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान दी और उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया।बबली यादव ने अपनी आय बढ़ाने के लिए खेती-किसानी से जुड़े कार्यों को भी अपनाया। उन्होंने मशरूम उत्पादन शुरू किया, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होने लगी। इसके साथ ही वे पीजी समूह के माध्यम से महुआ खरीदी का कार्य भी कर रही हैं। इस पहल से उन्हें आय का एक और साधन मिला है और स्थानीय स्तर पर ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़े हैं।श्रीमती बबली यादव बताती हैं कि फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी जैसे विभिन्न कार्यों से उनकी मासिक आय लगभग 10 हजार रुपये तक हो जाती है। इससे वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने में सक्षम हुई हैं। उनका कहना है कि पहले जहां आर्थिक जरूरतों के लिए सीमित साधन थे, वहीं अब मेहनत और समूह से मिले सहयोग के कारण उनके पास आय के कई साधन हैं।बबली यादव को प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिला है। शासन की विभिन्न योजनाओं से मिले सहयोग ने उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ उनके भीतर आगे बढ़ने का विश्वास पैदा किया है। वे कहती हैं कि विष्णु भैया की सरकार में गांव की महिलाओं को केवल सहायता ही नहीं, बल्कि आगे बढ़ने और अपने पैरों पर खड़े होने के अवसर भी मिल रहे हैं।श्रीमती बबली अपनी सफलता का श्रेय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान, स्व-सहायता समूह और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं को देती हैं। उनका कहना है कि शासन की योजनाओं का सही उपयोग कर महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं और आत्मनिर्भर बन सकती हैं।बबली यादव की कहानी इस बात का उदाहरण है कि विष्णु के सुशासन में योजनाओं का लाभ जब मेहनत और संकल्प से जुड़ता है, तो गांव की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगता है। आज बबली स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। उनकी सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में हो रहे प्रयासों की एक सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है।
- -तना छेदक और पत्ती मोड़क कीट की समय पर पहचान कर करें नियंत्रण, अधिक उर्वरक और जलभराव से बचने की सलाहरायपुर / धान की फसल में तना छेदक एवं पत्ती मोड़क कीट के प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने और फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। विभाग ने कहा है कि कीटों के शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान कर उचित नियंत्रण उपाय अपनाने से फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। खेतों में आवश्यकता से अधिक उर्वरकों का उपयोग तथा लंबे समय तक अधिक जलभराव रहने से इन कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है, इसलिए किसान संतुलित उर्वरक उपयोग और उचित जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें।तना छेदक धान की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कीटों में शामिल है। प्रारंभिक अवस्था में इसके प्रकोप की पहचान करना आसान है। प्रभावित पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। पौधे के तने के निचले हिस्से में छोटे-छोटे छेद दिखाई देते हैं तथा मुख्य तना अंदर से खोखला हो जाता है।तना छेदक का प्रकोप बढ़ने पर धान की बालियां सफेद होकर पूरी तरह सूख जाती हैं। इससे पौधे में दाने बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और उत्पादन में कमी आ सकती है। इसलिए खेत में यदि कुछ पौधों की पत्तियां अचानक पीली पड़ती दिखाई दें या तने में छेद नजर आएं, तो किसान तुरंत फसल का निरीक्षण कर आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाएं।कृषि विभाग ने तना छेदक की रोकथाम के लिए क्लोरोसाइपर (क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत + साइपरमेथ्रिन 5 प्रतिशत) का 50 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है।धान की फसल में पत्ती मोड़क कीट भी नुकसान पहुंचा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे ‘सांवा कीट’ के नाम से भी जाना जाता है। इस कीट की हरी इल्ली धान की पत्तियों को मोड़कर उनके अंदर छिप जाती है और पत्तियों के हरे भाग को खाती है। पत्ती मोड़क कीट के प्रकोप के बाद पत्तियों पर सफेद एवं पारदर्शी धारियां दिखाई देने लगती हैं। पत्तियों का हरा भाग नष्ट होने से पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता प्रभावित होती है। खेत में ऐसी पत्तियां दिखाई देने पर किसान फसल का सावधानीपूर्वक निरीक्षण करें और शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रण उपाय अपनाएं।कृषि विभाग ने पत्ती मोड़क कीट के नियंत्रण के लिए किसानों को क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी का 6 से 10 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर अथवा एमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी का 8 से 10 ग्राम प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है।कृषि विभाग के अनुसार खेत में आवश्यकता से अधिक उर्वरकों का उपयोग करने तथा लंबे समय तक अधिक पानी भरा रहने से कीटों के प्रकोप की स्थिति बन सकती है। किसान फसल की आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें और खेत में जलभराव की स्थिति न बनने दें। नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करने से कीटों की शुरुआती पहचान और समय पर नियंत्रण संभव होगा।कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि धान की फसल में कीट प्रकोप के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। खेतों में नियमित निगरानी रखें और पत्तियों के पीला पड़ने, तने में छेद होने, बालियां सफेद पड़ने अथवा पत्तियों पर सफेद-पारदर्शी धारियां दिखाई देने पर तत्काल उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं। समय पर की गई कार्रवाई से फसल को होने वाले नुकसान को कम करने के साथ बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
- रायपुर / छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री, वरिष्ठ राजनेता एवं पद्म विभूषण से सम्मानित श्री अरुण जेटली जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि श्री अरुण जेटली जी एक कुशल प्रशासक, प्रखर वक्ता, उत्कृष्ट विधिवेत्ता और दूरदर्शी राजनेता थे। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रहित और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में श्री अरुण जेटली जी ने देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और वित्तीय व्यवस्था में व्यापक सुधारों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वस्तु एवं सेवा कर (GST) जैसे ऐतिहासिक आर्थिक सुधार को लागू करने में उनके नेतृत्व और योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा।श्री ओपी चौधरी ने कहा कि श्री अरुण जेटली जी की नीति-निर्माण क्षमता, आर्थिक विषयों की गहरी समझ और राष्ट्र के प्रति समर्पण उन्हें विशिष्ट बनाता था। उनका सरल एवं प्रभावशाली व्यक्तित्व तथा सार्वजनिक जीवन में उनकी प्रतिबद्धता सदैव प्रेरणादायी रहेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि श्री अरुण जेटली जी के विचार, योगदान और राष्ट्रसेवा की भावना आने वाली पीढ़ियों को देशहित में कार्य करने की प्रेरणा देती रहेगी। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं कोटि-कोटि नमन।
- -देश का पहला राज्य बनने की दिशा में छत्तीसगढ़, 100 कलाविद लेखक तैयार करेंगे 100 पाठरायपुर / छत्तीसगढ़ के स्कूली छात्र कक्षा 6वीं से 12वीं तक स्थानीय कला, संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन से जुड़े विशेष पाठ पढ़ेंगे, जिससे नई पीढ़ी अपनी माटी और संस्कृति से गहरे से जुड़ सकेगी।छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति, इतिहास, धरोहर, स्थापत्य, लोक परंपराओं, गीत-संगीत, संतों, महापुरुषों और रचनाकारों को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।इसी उद्देश्य से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), शंकर नगर रायपुर में 24 से 26 अगस्त तक त्रि-दिवसीय आवासीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति पर केंद्रित आर्ट रिपोजिटरी तैयार करने के लिए प्रदेशभर के साहित्यकार, विषय-विशेषज्ञ, संस्कृतिविद, शोधकर्ता एवं जनसंचार विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं।राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप छत्तीसगढ़ अपने संसाधनों से ऐसी पूरक पाठ्य एवं दृश्य सामग्री विकसित करने वाला देश का पहला राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है, जिसके माध्यम से कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षक, प्रशिक्षक, शैक्षिक प्रबंधक एवं पालक समुदाय स्थानीय कला और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकेंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अपनी स्थानीय धरोहरों के प्रति कलात्मक बोध, संवेदना और गौरव की भावना विकसित करना है। कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य छत्तीसगढ़ की विविध कला एवं सांस्कृतिक विधाओं पर गुणवत्तापूर्ण पाठ्य सामग्री तैयार करना है। इसके साथ ही विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक विषय से संबंधित 5 से 10 मिनट की लघु फिल्मों के लिए पटकथा भी तैयार की जाएगी।कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित साहित्यकारों, विषय-विशेषज्ञों, संस्कृतिविदों, शोधकर्ताओं एवं जनसंचार विशेषज्ञों द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति, सभ्यता और कला से जुड़े लगभग 100 विषयों पर लेखन एवं मार्गदर्शन किया जा रहा है। इन विषयों को प्रमुख विधाओं में विभाजित कर विषयवार समूह गठित किए गए हैं।आर्ट रिपोजिटरी में छत्तीसगढ़ की विभूतियों, संतों एवं महापुरुषों के योगदान को भी स्थान दिया जाएगा। इनमें लोमश ऋषि, वाल्मीकि, वल्लभाचार्य, गुरु घासीदास, नागार्जुन, श्रृंगी ऋषि, गहिरा गुरु, शबरी माता, राजा चक्रधर, पद्मश्री तीजन बाई, विनोद कुमार शुक्ल, तुलसीराम देवांगन, सुरुज बाई खांडे, माधवराव सप्रे, दाऊ कल्याण सिंह, मिनीमाता, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पाण्डेय, झाडूराम देवांगन, पं. सुंदरलाल शर्मा, धनी धर्मदास, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर सहित अनेक विभूतियां शामिल हैं।स्थापत्य कला एवं तीर्थ स्थलों में कौशल्या मंदिर, सिरपुर, भोरमदेव, दंतेश्वरी मंदिर, बम्लेश्वरी मंदिर, चंद्रहासिनी मंदिर, मां महामाया मंदिर रतनपुर और राजीव लोचन मंदिर राजिम जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल किया गया है। पंथ एवं परंपराओं के अंतर्गत सतनाम पंथ, कबीर पंथ, रामनामी पंथ, घोटुल, मामा-भांजा, मितान-बदना, लमसेना और मानस मंडली जैसी विशिष्ट परंपराओं पर सामग्री तैयार की जा रही है।छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्व एवं उत्सवों में हरेली, नवाखाई, बस्तर दशहरा, गोंचा पर्व, गौरी-गौरा, रथयात्रा, छेरछेरा, तीजा-पोला, भोजली और मड़ई सहित पारंपरिक खेल एवं गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। दृश्य कला एवं शिल्प के अंतर्गत डोकरा आर्ट, टेराकोटा, बांस शिल्प, लौह शिल्प, गोदना और रजवार भित्ति चित्रों पर सामग्री तैयार होगी। वहीं लोक संगीत एवं वाद्ययंत्र में कबीर गायन, सुवा, बांस, डंडा, पंथी, भोजली, देवार, ददरिया, फाग, भरथरी, विवाह एवं चंदैनी गीत तथा मांदर, मोहरी, ढोल, बांसुरी, सारंगी, धनकुल और टिमकी जैसे पारंपरिक वाद्यों को स्थान दिया जाएगा।लोक नृत्य एवं रंगमंच में पंथी, राउत नाचा, गेड़ी, ककसाड़, गौर, शैला, सुवा, सरहुल नृत्य, नाचा, पंडवानी एवं लोककथाओं को शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पाक कला को भी विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाएगा। ठेठरी, खुरमी, फरा-मुठिया, अंगाकर रोटी, चौसेला, बफौरी, चापड़ा चटनी, माड़िया पेज और पपची जैसे पारंपरिक व्यंजनों पर भी सामग्री तैयार की जाएगी।कार्यशाला के प्रथम दिवस पाठ्य सामग्री का प्रस्तुतीकरण, विषयवार समीक्षा और समूह गठन किया जा रहा है। द्वितीय दिवस 25 अगस्त को सामग्री का संशोधन एवं परिमार्जन, अंतिम ड्राफ्ट का निर्धारण तथा लघु फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लेखन किया जाएगा। तृतीय दिवस 26 अगस्त को लघु फिल्म की स्क्रिप्ट का प्रस्तुतीकरण, अंतिम संपादन, स्वीकृति और समापन सत्र आयोजित होगा।छत्तीसगढ़ की प्रस्तावित आर्ट रिपोजिटरी केवल पाठ्य सामग्री का संग्रह नहीं होगी, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक स्मृतियों, लोकज्ञान, परंपराओं और कला विधाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। इसके माध्यम से विद्यार्थी अपनी मिट्टी की कला, संस्कृति और विरासत को जानने के साथ-साथ उसके संरक्षण और संवर्धन के प्रति भी जागरूक होंगे। यह पहल छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
- -‘बिहान’ से मिला आर्थिक संबल, मक्का उत्पादन ने माया विश्वास को बनाया ‘लखपति दीदी’-स्व-सहायता समूह से 70 हजार रुपये का ऋण लेकर शुरू की मक्का खेती, घर से ही बिक रही उपज, बढ़ा परिवार की आय का आधाररायपुर / छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को बचत, ऋण, प्रशिक्षण और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इन अवसरों का लाभ उठाकर महिलाएं स्थानीय संसाधनों और अपनी मेहनत को आय के स्थायी साधन में बदल रही हैं। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सकालो की श्रीमती माया विश्वास ऐसी ही प्रेरणादायक महिला हैं, जिन्होंने मक्का उत्पादन को अपनी आजीविका का आधार बनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई है।माया विश्वास ‘काली माई’ स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत और ऋण की व्यवस्था के साथ अपनी आजीविका गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला। उन्होंने समूह से चरणबद्ध तरीके से ऋण लेकर कृषि कार्य में निवेश किया और वर्तमान में 70 हजार रुपये के ऋण का उपयोग मक्का उत्पादन के लिए कर रही हैं।माया बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और आय के सीमित साधनों के कारण घरेलू जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक गतिविधि शुरू करने के लिए आवश्यक सहयोग मिला। छोटे-छोटे ऋणों का सदुपयोग करते हुए उन्होंने अपनी कृषि गतिविधियों का विस्तार किया।मक्का की खेती से माया को परिवार की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है। उनकी उपज की बिक्री के लिए उन्हें हमेशा बाजार तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। कई बार खरीदार सीधे उनके घर पहुंचकर मक्का खरीद लेते हैं। इससे उन्हें परिवहन खर्च और समय की बचत होती है तथा उत्पाद की बिक्री भी आसानी से हो जाती है।माया का कहना है कि मक्का उत्पादन से होने वाली आमदनी परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहयोग दे रही है। कृषि को आय के साधन के रूप में विकसित करने से उनकी आर्थिक स्थिति में पहले की तुलना में उल्लेखनीय सुधार आया है।माया विश्वास बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से मिलने वाला ऋण उनके लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का अवसर साबित हुआ। पहले जहां आर्थिक जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता रहती थी, वहीं आज वे स्वयं आय अर्जित कर परिवार की जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं।समूह की सामूहिक शक्ति और आर्थिक सहयोग से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है। इसी आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत का परिणाम है कि माया आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।माया विश्वास की सफलता यह दर्शाती है कि ग्रामीण महिलाओं को यदि सही मार्गदर्शन, आर्थिक सहयोग और अवसर मिले तो वे अपनी परिस्थितियों को बदलने में सक्षम हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने कृषि गतिविधि को नया विस्तार दिया और अब अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।उन्होंने कहा कि समूह के साथ मिलकर काम करने से एक-दूसरे से सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। वे भविष्य में अपनी आजीविका गतिविधि को और विस्तार देने के लिए प्रयासरत हैं।माया विश्वास ने कहा कि ‘बिहान’ के माध्यम से स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक गतिविधि शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने का अवसर मिला। आज वे अपने परिवार की आय में योगदान दे रही हैं और आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य के लिए निर्णय ले रही हैं। उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। माया विश्वास की कहानी ग्रामीण महिलाओं के बदलते आत्मविश्वास और आर्थिक सशक्तिकरण की तस्वीर प्रस्तुत करती है। ‘बिहान’ के माध्यम से स्वयं सहायता समूह अब केवल बचत और ऋण का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार, आयवर्धन और आत्मनिर्भरता का मजबूत मंच बन रहे हैं। माया जैसी ‘लखपति दीदियां’ विकसित और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की प्रेरक मिसाल बन रही हैं।
- -महतारी वंदन की 30वीं किस्त से बहनों के त्योहार में जुड़ी आत्मनिर्भरता और खुशियों की नई मिठास-राखी, मिठाई और उपहार खरीदने से लेकर बेटी के भविष्य के लिए बचत तक, महिलाओं के काम आ रही योजना की राशि-कृषि उत्पादों से राखियां तैयार कर आत्मनिर्भर बन रहीं समूह की दीदियां, 7,020 राखियों की बिक्री से 60 हजार रुपये की आयरायपुर / रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। इस वर्ष छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए यह पर्व आर्थिक संबल और आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लेकर आया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले महिलाओं के खातों में पहुंची, तो बहनों की त्योहार की खुशियों में एक नया रंग जुड़ गया। किसी बहन ने इस राशि से भाई के लिए राखी और मिठाई खरीदने की तैयारी की, तो किसी ने उपहार लेने की योजना बनाई। वहीं कई महिलाएं नियमित मिलने वाली राशि का उपयोग परिवार की जरूरतों के साथ बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए भी कर रही हैं।बलरामपुर की श्रीमती ज्योति सोनी के लिए महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले मिली विशेष सौगात बन गई। खाते में एक हजार रुपये पहुंचने पर उन्होंने कहा कि “हमारे विष्णु भैया ने रक्षाबंधन से पहले हमारे खाते में एक हजार रुपये भेजकर हमारी खुशियां बढ़ा दी हैं।” वे इस राशि से भाई के लिए राखी, मिठाई और त्योहार की आवश्यक सामग्री खरीदने के साथ अपनी बेटी के भविष्य के लिए भी बचत कर रही हैं। उन्होंने अपनी पुत्री का सुकन्या समृद्धि योजना में खाता खुलवाकर उसमें नियमित रूप से राशि जमा करना शुरू किया है।सूरजपुर की श्रीमती उषा पांडे भी इस बार रक्षाबंधन पर भाई के लिए राखी, मिठाई और उपहार खरीदने की तैयारी कर रही हैं। वे कहती हैं कि रक्षाबंधन से ठीक पहले महतारी वंदन की किस्त मिलने से उनकी खुशियां दोगुनी हो गई हैं। उनके लिए योजना की राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि अपने भाई के प्रति स्नेह और अपनत्व को अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्यक्त करने का अवसर भी है।सूरजपुर की ही श्रीमती कुंती साहू के लिए भी योजना की किस्त रक्षाबंधन की खुशियों को सहज बनाने वाली सौगात बनी है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच राखी, मिठाई और उपहार की व्यवस्था करना आसान नहीं होता, लेकिन योजना से मिली राशि से वे अपने भाई के लिए जरूरी सामान खरीद सकेंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें आत्मीयता से “विष्णु भैया” कहा।महतारी वंदन योजना महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर निर्णय लेने का अवसर दे रही है। घरेलू खर्च, बच्चों की जरूरतों, त्योहारों और परिवार से जुड़े महत्वपूर्ण अवसरों में महिलाओं की भागीदारी अब अपने स्वयं के आर्थिक संबल से और मजबूत हो रही है। योजना की राशि का उपयोग महिलाएं अपनी आवश्यकताओं के साथ शिक्षा, बचत और भविष्य की योजनाओं में भी कर रही हैं।रक्षाबंधन के अवसर पर बलरामपुर जिले की महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियां भी आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी लक्ष्मी समूह की महिलाओं ने धान, गेहूं और मक्का जैसे स्थानीय कृषि उत्पादों का रचनात्मक उपयोग कर आकर्षक राखियां तैयार की हैं।समूह की महिलाओं द्वारा अब तक लगभग 7,020 राखियां तैयार की जा चुकी हैं। इनकी बिक्री से लगभग 60 हजार रुपये की आय हो चुकी है। इन राखियों की मांग रक्षाबंधन के अवसर पर लगातार बनी हुई है। राखियां सी-मार्ट में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं तथा अधिक से अधिक लोगों तक स्थानीय उत्पाद पहुंचाने के लिए संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में भी स्टॉल लगाया जा रहा है।यह पहल बताती है कि स्थानीय संसाधनों को महिलाओं के हुनर और रचनात्मकता से जोड़कर किस तरह रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। राखी के हर धागे में ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, स्थानीय उत्पादों का मूल्य संवर्धन और आत्मनिर्भरता का संदेश जुड़ा हुआ है।एक ओर महतारी वंदन योजना की नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं को अपने परिवार और त्योहार की खुशियों में सक्रिय भागीदारी का अवसर दे रही है, वहीं दूसरी ओर महिला स्व-सहायता समूह स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़कर स्वरोजगार की नई राह बना रहे हैं। इस तरह रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर बंधने वाला प्रेम का धागा नहीं, बल्कि सम्मान, स्वाभिमान, आर्थिक संबल और आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक बन रहा है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश की बहनों में यह विश्वास मजबूत हो रहा है कि सरकार उनके साथ खड़ी है। रक्षाबंधन से पहले मिली महतारी वंदन की किस्त और स्थानीय महिला समूहों द्वारा तैयार राखियां इसी विश्वास की दो अलग-अलग लेकिन जुड़ी हुई तस्वीरें हैं—एक तरफ बहनों की खुशियां, दूसरी तरफ उनके आत्मनिर्भर बनने का संकल्प।
- तुलसी जयंती पर बीरगांव में आयोजित हुआ रामायण संवाद कार्यक्रमरायपुर। गोस्वामी संत तुलसीदास और भगवान श्रीराम का संबंध अनन्य भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। तुलसीदास जी ने श्रीराम के चरित्र को जन-जन तक पहुँचाने के लिए रामचरितमानस जैसे महाकाव्य की रचना की और अपना संपूर्ण जीवन राम-भक्ति को समर्पित कर दिया।उक्त विचार मातृभूमि सेवा मिशन, धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन की रायपुर इकाई द्वारा पीएम श्री आडवाणी ऑरलिकन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बीरगांव में आयोजित रामायण संवाद कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण एवं पुष्पार्चन से हुआ। विद्यालय परिसर पहुंचने पर मुख्य अतिथि डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र का विद्यालय परिवार द्वारा भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।रामायण संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि श्रीरामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसी की काव्य रचना का मूल उद्देश्य लोकमंगल की भावना है। लोकमंगल का विधान तभी हो सकता है जब समाज एवं परिवार में नैतिक मूल्यों की स्थापना हो। तुलसी की दृष्टि रामकथा के माध्यम से आदर्श जीवन मूल्यों की स्थापना पर ही केन्द्रित थी।उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस सांस्कृतिक पुनर्निर्माण और नैतिक जागरण का भी साहित्य है। तुलसीदास ने उस राम को जन-जन तक पहुंचाया, जो केवल मंदिरों और शास्त्रों के नहीं, बल्कि लोकजीवन के भी राम हैं। यही कारण है कि रामचरितमानस घर-घर पहुंचा, लोकगीतों में उतरा, रामलीलाओं का आधार बना और भारतीय जनमानस की सांस्कृतिक स्मृति का अभिन्न भाग हो गया। उनकी भाषिक क्षमता भी असाधारण थी।डॉ. मिश्र ने कहा कि आज देश की युवा पीढ़ी के लिए तुलसीदास का जीवन बहुत प्रासंगिक है। तुलसीदास इसलिए केवल अतीत के महाकवि नहीं हैं, वे भारतीय सांस्कृतिक चेतना के ऐसे शिल्पी हैं, जिन्होंने शब्दों के माध्यम से समाज की स्मृति को बचाया, राम के माध्यम से लोकमंगल का आदर्श दिया और जनभाषा के माध्यम से भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाया। तुलसी के राम भारतीय जनता के नैतिक गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं।कार्यक्रम की अध्यक्षता पीएम श्री आडवाणी ऑरलिकन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री मुकेश सिरमौर ने की। मातृभूमि सेवा मिशन मध्य प्रदेश के संयोजक श्री अशोक शर्मा ने मिशन की देशव्यापी सेवा गतिविधियों के बारे में जानकारी दी।कार्यक्रम के अंत में मातृभूमि सेवा मिशन के रायपुर संयोजक एवं जिला समग्र शिक्षा के कार्यक्रम अधिकारी श्री अरुण शर्मा ने आभार प्रकट किया। रामायण संवाद में उपस्थित सभी अतिथियों को मातृभूमि सेवा मिशन रायपुर इकाई द्वारा अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
- -बिहान योजना से सरिता यादव ने संवारी अपनी आजीविका-समूह से ऋण लेकर शुरू किया आटा चक्की और खाद्य सामग्री का व्यवसाय, हर माह 10 से 15 हजार रुपये की आमदनीरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका का मजबूत आधार बन रही है। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं ऋण एवं अन्य सहयोग का लाभ लेते हुए स्वयं का व्यवसाय शुरू कर रही हैं और अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।जशपुर जिले की रहने वाली श्रीमती सरिता यादव भी बिहान योजना से जुड़कर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। पिछले वर्ष उन्हें स्व-सहायता समूह के माध्यम से ऋण प्राप्त हुआ। इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने आटा चक्की सहित खाद्य सामग्री से संबंधित व्यवसाय शुरू किया। आज उनके व्यवसाय से हर माह लगभग 10 से 15 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।सरिता यादव बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने से पहले अपने छोटे-मोटे खर्चों के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। व्यवसाय शुरू करने के बाद परिस्थितियां बदलीं। अब वे अपने दैनिक एवं व्यक्तिगत खर्च स्वयं वहन कर रही हैं और अपनी आय से भविष्य के लिए बचत भी कर पा रही हैं। वे कहती हैं कि स्व-सहायता समूह से मिला सहयोग उनके लिए नई शुरुआत का आधार बना। समूह के माध्यम से ऋण मिलने से उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला और आज वे अपने पैरों पर खड़ी हैं।बिहान योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को समूहों से जोड़कर उन्हें बचत, ऋण और आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इससे महिलाएं अपने हुनर और मेहनत को व्यवसाय का रूप देकर नियमित आय अर्जित कर रही हैं। सरिता यादव की सफलता भी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है, जहां सरकारी योजना और समूह के सहयोग ने एक महिला को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया।सरिता यादव ने बिहान योजना से मिले सहयोग के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की यह पहल महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दे रही है। उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को अवसर और सहयोग मिलता है, तो वे न केवल अपने परिवार को संभाल सकती हैं, बल्कि समाज और प्रदेश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। सरिता यादव की कहानी यह संदेश देती है कि अवसर, मेहनत और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं भी अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बिहान योजना महिलाओं की आजीविका को मजबूत करने के साथ उन्हें आत्मविश्वास और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है।
- -कम लागत में राखियां बनाकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ रहीं बिहान की महिलाएं-घरेलू और स्थानीय संसाधनों का रचनात्मक उपयोग, सीजनल गतिविधियों से बढ़ा आजीविका का आधाररायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं समूह के माध्यम से विभिन्न आजीविका गतिविधियों को अपनाते हुए आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत किशुन नगर की जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल बनकर उभरी हैं। समूह की महिलाएं मौसम और त्योहारों के अनुरूप सीजनल गतिविधियों का चयन कर अपनी आय के नए अवसर तैयार कर रही हैं। रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए इन दिनों समूह की महिलाएं घर में उपलब्ध सामग्री और स्थानीय संसाधनों से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। चावल, गेहूं, मक्का और कोहड़े के बीज सहित अन्य सामग्री को रंगकर और सजाकर सुंदर राखियां बनाई जा रही हैं। वहीं रेशमी धागे, ऊन और अन्य सजावटी सामग्री आवश्यकतानुसार बाजार से खरीदी जाती है। इससे राखियों की उत्पादन लागत कम रहती है और महिलाओं को बेहतर आय अर्जित करने का अवसर मिलता है।समूह की सदस्य सुश्री सोनाली सिंह ने बताया कि जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह में कुल 12 महिलाएं हैं। सभी सदस्य मिलकर अलग-अलग मौसम और त्योहारों के अनुरूप आजीविका गतिविधियों का संचालन करती हैं। वर्तमान में राखी निर्माण का कार्य किया जा रहा है। तैयार राखियों को विभिन्न स्थानों पर स्टॉल लगाकर तथा घर से भी बेचा जा रहा है।उन्होंने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने से पहले महिलाओं के पास आय के सीमित साधन थे। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण, योजनाओं और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिला। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा और वे आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने लगीं।समूह की सदस्य सुश्री दीप्ति चौधरी बताती हैं कि राखी निर्माण में घरेलू सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। पुराने बीज, चावल, गेहूं और मक्के के दानों को आकर्षक रंग देकर उनसे अलग-अलग डिजाइन तैयार किए जाते हैं। इसके साथ रेशमी धागे, ऊन और अन्य सजावटी सामग्री का उपयोग कर राखियों को आकर्षक रूप दिया जाता है।समूह की महिलाएं अपने खाली समय में एक साथ बैठकर राखियां तैयार करती हैं। त्योहार के दौरान मांग बढ़ने पर उत्पादन भी बढ़ा दिया जाता है। तैयार राखियों की बिक्री बाजार में लगाए गए छोटे-छोटे स्टॉल और घर से की जा रही है। इस तरह महिलाएं पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ अपने हुनर को आय के साधन में बदल रही हैं।समूह की सदस्य सुश्री आशा रवि ने बताया कि समूह की महिलाएं पिछले लगभग तीन वर्षों से कम लागत में घरेलू सामग्री से राखियां तैयार कर रही हैं। समूह की सभी महिलाएं मिलकर इस कार्य में भागीदारी करती हैं। उन्होंने कहा कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें रोजगार और आजीविका की विभिन्न गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिला है।उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने से महिलाओं को नई गतिविधियां सीखने, घर से बाहर निकलकर आर्थिक कार्यों में भागीदारी करने और अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर मिला है। इससे महिलाओं के आत्मविश्वास के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी मदद मिल रही है।जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं वर्षभर मौसम और त्योहारों के अनुरूप अलग-अलग गतिविधियों का चयन करती हैं। इससे उन्हें एक ही व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय आय के अनेक अवसर मिलते हैं। समूह के माध्यम से सामूहिक रूप से कार्य करने से उत्पादन, प्रशिक्षण, बाजार और बिक्री में भी एक-दूसरे का सहयोग मिलता है।राखी निर्माण जैसी गतिविधियों ने महिलाओं को यह अवसर दिया है कि वे घर और आसपास उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर कम लागत में उत्पाद तैयार करें और उन्हें बाजार तक पहुंचाकर आय अर्जित करें। यह पहल स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ महिला उद्यमिता को भी बढ़ावा दे रही है।जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने बिहान योजना के माध्यम से आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने कहा कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त होने, अपने हुनर को पहचान देने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। किशुन नगर की इन महिलाओं की कहानी बताती है कि स्थानीय संसाधनों, सामूहिक प्रयास और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिल जाए तो छोटे स्तर की गतिविधियां भी महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकती हैं। रक्षाबंधन के लिए तैयार की जा रही ये राखियां केवल भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, स्वावलंबन और बदलती आर्थिक भूमिका की भी पहचान बन रही हैं।
- -महतारी वंदन योजना की राशि से त्योहार की तैयारियां हुईं आसान, आर्थिक संबल से बढ़ा उत्साहरायपुर / रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और आत्मीयता का पर्व है। इस वर्ष रायगढ़ शहर के इंदिरा नगर वार्ड क्रमांक 7 की निवासी श्रीमती तारागिरी गोस्वामी के लिए यह पर्व और भी खास बन गया है। महतारी वंदन योजना के तहत प्राप्त इस माह की राशि से उन्होंने अपने भाई के लिए राखी खरीदी और त्योहार की तैयारियां कीं। आर्थिक सहयोग मिलने से उनके परिवार में रक्षाबंधन की खुशियां और बढ़ गई हैं।तारागिरी गोस्वामी बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह मिलने वाली राशि महिलाओं के लिए अपनी जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है। इस बार उन्होंने योजना से प्राप्त राशि का उपयोग राखी खरीदने में किया। अब वे अपने परिवार के साथ रक्षाबंधन का पर्व पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि त्योहार के अवसर पर अपनी जरूरत के अनुसार खर्च करने के लिए राशि उपलब्ध होना उनके लिए खुशी की बात है। इससे उन्हें रक्षाबंधन की तैयारियों के लिए किसी अन्य पर निर्भर नहीं रहना पड़ा।तारागिरी गोस्वामी ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से संबल प्रदान कर रही है। योजना की राशि महिलाएं अपनी आवश्यकताओं, परिवार की जरूरतों और त्योहारों की तैयारियों में अपनी सुविधा के अनुसार उपयोग कर पा रही हैं। इससे उनमें आर्थिक आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे अपने छोटे-बड़े निर्णय स्वयं लेने में सक्षम हो रही हैं।उनके लिए इस बार रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर प्रेम और विश्वास का धागा बांधने का पर्व नहीं, बल्कि आर्थिक संबल से मिली आत्मनिर्भरता और खुशी का अवसर भी है।तारागिरी गोस्वामी ने महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विष्णु भैया द्वारा संचालित इस योजना से मिलने वाली नियमित राशि महिलाओं के लिए उपयोगी सहारा बन रही है।उन्होंने कहा कि योजना की राशि से राखी खरीदने और त्योहार की तैयारी करने से उनके चेहरे पर खुशी है। वे इस रक्षाबंधन को अपने परिवार के साथ पूरे उत्साह और उल्लास से मनाएंगी। महतारी वंदन योजना की नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं को केवल आर्थिक संबल ही नहीं दे रही, बल्कि उन्हें अपनी जरूरतों और खुशियों के लिए स्वयं निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी दे रही है। इस रक्षाबंधन पर तारागिरी के हाथों में राखी और चेहरे पर मुस्कान, महिला सशक्तिकरण की एक सुखद तस्वीर प्रस्तुत कर रही है।
- -रक्षाबंधन से पहले मिली महतारी वंदन की 30वीं किस्त, मिलापा की त्योहार की खुशियां हुईं दोगुनीरायपुर / छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के लिए नियमित आर्थिक संबल का मजबूत आधार बन रही है। योजना के तहत हर माह मिलने वाली सहायता राशि से महिलाएं अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ अपनी जरूरतों के लिए भी आर्थिक रूप से सक्षम हो रही हैं। रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले योजना की 30वीं किस्त की राशि मिलने से प्रदेशभर की महिलाओं के बीच विशेष खुशी का माहौल है।इसी खुशी की झलक मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के विकासखंड अंबागढ़ चौकी अंतर्गत ग्राम जोरातराई निवासी श्रीमती मिलापा नदेश्वर के चेहरे पर भी दिखाई दी। महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त की राशि प्राप्त होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया और स्नेहपूर्वक उन्हें ‘विष्णु भैया’ कहकर संबोधित किया।श्रीमती मिलापा नदेश्वर ने बताया कि रक्षाबंधन से पहले महतारी वंदन योजना की राशि मिलना उनके लिए बेहद खुशी की बात है। इस राशि से वे त्योहार की तैयारियों के साथ घर की जरूरी आवश्यकताओं को भी पूरा कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस बार राखी का पर्व उनके लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि समय पर मिली आर्थिक सहायता ने त्योहार की तैयारियों का अतिरिक्त बोझ कम कर दिया है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि जब वे रक्षाबंधन पर अपने भाइयों की कलाइयों पर स्नेह का धागा बांधेंगी, तो उसमें ‘विष्णु भैया’ के प्रति आभार और स्नेह की भावना भी जुड़ी होगी।मिलापा नदेश्वर बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाली राशि उनके परिवार के लिए उपयोगी साबित हो रही है। बच्चों की जरूरतों, घर-गृहस्थी के खर्च और आवश्यक सामानों की खरीदी में यह राशि आर्थिक सहायता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी परिवार के बजट को ध्यान में रखकर खर्च करना पड़ता था, लेकिन अब नियमित सहायता राशि मिलने से वे अपने स्तर पर कई जरूरी खर्च पूरे कर पा रही हैं। मिलापा नदेश्वर के लिए महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ाने का जरिया भी बनी है। नियमित रूप से मिलने वाली राशि ने उन्हें परिवार की जरूरतों में अपनी भूमिका मजबूत करने और आर्थिक निर्णयों में अधिक आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। रक्षाबंधन के अवसर पर मिली 30वीं किस्त उन्हें ‘विष्णु भैया’ की ओर से बहनों के लिए स्नेह और सहयोग जैसी महसूस हो रही है।
- ममता ने कहा.. विष्णु भैया ने त्योहार बनाया खासबिलासपुर/शहर की रहने वाली ममता यादव महतारी वंदन योजना की लाभार्थी हैं। रक्षाबंधन पर्व से ठीक पहले योजना की 30वीं किस्त की राशि प्राप्त होने से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। त्योहार के पहले आर्थिक सहायता मिलने से ममता यादव के लिए इस बार का रक्षाबंधन और भी खास बन गया है। उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से नियमित रूप से मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं को अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ परिवार की छोटी-बड़ी आवश्यकताओं में सहयोग करने का अवसर देती है।ममता यादव ने बताया कि रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के स्नेह और प्रेम का प्रतीक है। ऐसे में त्योहार से पहले महतारी वंदन योजना की किस्त मिलना उनके लिए किसी खुशी के उपहार से कम नहीं है। राशि मिलने से वह रक्षाबंधन की तैयारियां बेहतर तरीके से कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि त्योहार के पहले आर्थिक मदद मिलने से परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत होती है और त्योहार की खुशियां भी बढ़ जाती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ’’“विष्णु भैया ने हमें रक्षाबंधन के पहले ही उपहार दे दिया।”’’ उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को मिलने वाली सहायता राशि से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है। नियमित किस्त मिलने से महिलाएं अपनी जरूरत के अनुसार राशि का उपयोग कर पा रही हैं और परिवार के लिए भी आर्थिक सहयोग दे रही हैं।

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