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- -दूरस्थ वनांचल छिंदनार के लोगों ने सुनी प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’-ग्रामीणों ने उत्साह से सुना प्रधानमंत्री का संदेश, मंत्री, सांसद और विधायक भी रहे मौजूदरायपुर । नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बदलते बस्तर की नई तस्वीर रोज सामने आ रही है। आज दंतेवाड़ा के सुदूर वनांचल छिंदनार में भी एक नया नजारा देखने को मिला। पूरे देश के साथ वहां के लोगों ने भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का प्रसारण सुना। छिंदनारवासियों के लिए यह पहला मौका था, जब पूरा गांव प्रधानमंत्री को सुनने के लिए जुटा था। प्रधानमंत्री को रेडियो पर सुनने को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह था। उन्होंने बेहद तल्लीनता से प्रधानमंत्री की बातें सुनीं। छिंदनार में आज बिलकुल अलग तरह का माहौल था। प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’ को लेकर लोग खासे उत्साहित थे। गांव के कई लोगों ने आज पहली बार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को सुना। वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री केदार कश्यप, बस्तर के सांसद श्री महेश कश्यप और दंतेवाड़ा के विधायक श्री चैतराम अटामी ने भी ग्रामीणों के साथ ‘मन की बात’ का प्रसारण सुना। बस्तर के दूरस्थ वनांचल में आज एक नई तस्वीर दिख रही थी। कुछ महीनों पहले तक रोज धमाकों की आवाज के बीच दहशत में जीने वाले छिंदनार के लोग आज चैन से रेडियो सुन रहे थे।‘मन की बात’ सुनने के बाद ग्रामीणों ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम देश को एक सूत्र में बांधता है। इसके माध्यम से वे देश के विभिन्न भागों में बदलाव लाने वाले सकारात्मक कार्यों और नवाचारों को पूरे देश के सामने रखते हैं। इससे अन्य लोग भी अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित होते हैं। प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम समाज और देश के विकास के लिए जनभागीदारी की भावना को बढ़ाता है। यह कार्यक्रम नागरिकों की नई सोच, नई पहलों, अनूठी कोशिशों और नवाचारों से पूरे देश को वाकिफ कराता है और उसे पहचान दिलाता है। प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम से लोगों को छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की संस्कृति, विरासत और सकारात्मक कार्यों की जानकारी मिलती है। छिंदनार में ‘मन की बात’ के लिए लोगों का जुटना बस्तर में तेजी से आ रहे बदलावों की झलक मात्र है। पूरे बस्तर के चहुंमुखी विकास के लिए कल्याणकारी योजनाओं को हर नागरिक तक पहुंचाने के साथ ही सड़कों, मोबाइल कनेक्टीविटी, स्कूलों, अस्पतालों एवं अन्य बुनियादी जरूरतों की व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। सरकार बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम गांवों तक पहुंचकर नक्सलवाद के कारण दशकों तक ठप्प पड़े विकास कार्यों, बुनियादी जरूरतों और नागरिक सुविधाओं को दुरूस्त करने के लिए सक्रियता और गंभीरता से काम कर रही है।
- -आर्थिक सुरक्षा से कम हुई चिंता, पढ़ाई और विवाह जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों के लिए संबल बनी योजनारायपुर । गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सारबहरा की श्रीमती आकांक्षा अपनी बेटी के उज्ज्वल भविष्य को लेकर हमेशा चिंतित रहती थीं। उनकी इच्छा थी कि बेटी को अच्छी शिक्षा मिले और आगे चलकर उसका जीवन सुरक्षित, आत्मनिर्भर और खुशहाल हो। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच बेटी के भविष्य के लिए बेहतर प्रबंध करना उनके लिए चुनौती थी।इसी चिंता को कम करने और बेटी के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में आकांक्षा ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से अपनी बेटी का ‘नोनी सुरक्षा योजना’ के तहत पंजीयन कराया। योजना से मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा के भरोसे ने उनके मन में बेटी के भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगाई है।आकांक्षा को उम्मीद है कि योजना के माध्यम से मिलने वाला लाभ उनकी बेटी के भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वह चाहती हैं कि उनकी बेटी बिना किसी आर्थिक बाधा के अपनी पढ़ाई पूरी करे और जीवन में अपने सपनों को साकार करे। उन्हें विश्वास है कि योजना से मिलने वाली सहायता बेटी की शिक्षा और विवाह जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर परिवार के लिए उपयोगी साबित होगी।उनके लिए यह योजना केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं है, बल्कि बेटी के भविष्य को लेकर एक सुरक्षा और भरोसे का आधार भी है। बेटी के नाम से भविष्य के लिए आर्थिक प्रावधान होने की जानकारी ने आकांक्षा को मानसिक रूप से भी राहत दी है।आकांक्षा का कहना है कि बेटियों के भविष्य को सुरक्षित और बेहतर बनाने के उद्देश्य से संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन रही हैं। ऐसी योजनाओं से अभिभावकों में अपनी बेटियों की शिक्षा और भविष्य को लेकर भरोसा बढ़ता है तथा उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलते हैं।उन्होंने कहा कि बेटी का भविष्य सुरक्षित होना पूरे परिवार के लिए खुशी और संतोष की बात है। सरकार की योजनाओं से मिलने वाला सहयोग परिवारों को बेटियों की बेहतर परवरिश और शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करता है।आकांक्षा ने बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए चलाई जा रही इस जनकल्याणकारी पहल के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास परिवारों के लिए उम्मीद और संबल का माध्यम बन रहे हैं। आकांक्षा के लिए नोनी सुरक्षा योजना उनकी बेटी के सुरक्षित, आत्मनिर्भर और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद बन गई है। उन्हें भरोसा है कि सरकार की इस पहल का लाभ उनकी बेटी के जीवन में बेहतर अवसरों का रास्ता खोलेगा और उसके सपनों को नई उड़ान मिलेगी।
- रायपुर ।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर चलाए जा रहे ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत आज रायपुर स्थित अशोका पाम मीडोज सोसाइटी में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने वृक्षारोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अधिक से अधिक लोगों से पौधरोपण कर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।वृक्षारोपण कार्यक्रम में श्री राजेश मूणत, श्री अनुज शर्मा, श्री राजीव अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का संकल्प लिया।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ केवल वृक्षारोपण का अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति और मातृशक्ति के प्रति सम्मान की भावना से जुड़ा जन-अभियान है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस अभियान के माध्यम से देशवासियों को अपनी मां के सम्मान में एक पेड़ लगाने का भावनात्मक और पर्यावरणीय संदेश दिया है।उन्होंने कहा कि आज बढ़ते शहरीकरण और बदलते पर्यावरणीय परिस्थितियों के बीच वृक्षों का महत्व और भी बढ़ गया है। पेड़ हमें केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि जल संरक्षण, मिट्टी के संरक्षण, तापमान को संतुलित रखने और जैव विविधता को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।श्री अग्रवाल ने कहा कि एक पेड़ लगाना प्रकृति को दिया गया हमारा छोटा-सा योगदान है, लेकिन जब यही संकल्प करोड़ों लोगों का बन जाता है तो इसका प्रभाव बहुत व्यापक होता है। हमें अपने घर, मोहल्ले, गांव और शहर में अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि केवल पौधरोपण करना पर्याप्त नहीं है। लगाए गए पौधों को वृक्ष बनने तक उनकी नियमित देखभाल करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और विभिन्न संस्थाओं से अभियान से जुड़ने की अपील की।उन्होंने कहा कि आज लगाया गया एक पौधा आने वाले वर्षों में छांव, स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण का आधार बनेगा। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों को पौधरोपण से जोड़ना चाहिए।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संपदा से समृद्ध राज्य है। यहां के घने वन, नदियां, जलप्रपात, पहाड़ और जैव विविधता पर्यटन की बड़ी ताकत हैं। पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास एक-दूसरे के पूरक हैं।उन्होंने कहा कि प्रकृति को संरक्षित रखते हुए पर्यटन स्थलों का विकास करना राज्य की प्राथमिकताओं में शामिल है। हरित और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने से पर्यटकों को बेहतर प्राकृतिक अनुभव मिलेगा और स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे।कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्यजनों ने भी अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया। मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि आइए, अपनी मां की स्मृति और सम्मान में एक पेड़ लगाएं, उसकी देखभाल करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरा-भरा एवं सुरक्षित पर्यावरण तैयार करें। प्रकृति सुरक्षित होगी, तभी हमारा भविष्य सुरक्षित होगा। उन्होंने सभी नागरिकों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने, अधिक से अधिक पौधे लगाने और उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित करने की अपील की।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय होंगे मुख्य अतिथि, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू और श्री सतीश चंद्र दुबे भी होंगे शामिल-टिन पोर्टल और ई-रेत सांगवारी पोर्टल का होगा शुभारंभ, होंगे कई महत्वपूर्ण समझौते-नीलाम प्रमुख खनिज ब्लॉक्स के ऑपरेशनलाइजेशन की भी होगी समीक्षारायपुर / छत्तीसगढ़ में खनिज क्षेत्र के विकास, निवेश और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के प्रभावी दोहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी की 8वीं किश्त पर रोड शो का आयोजन कल 31 अगस्त को नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।रोड शो में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे, सीएमडीसी के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह, छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव, खान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के अधिकारी, खनन क्षेत्र के विशेषज्ञ तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे।भारत सरकार द्वारा क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की 8वीं किश्त के अंतर्गत 20 खनिज ब्लॉक्स को नीलामी के लिए रखा गया है। इनमें 3 माइनिंग लीज तथा 17 कंपोजिट लाइसेंस ब्लॉक्स शामिल हैं। इन ब्लॉक्स में ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, रेयर मेटल्स, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, मोलिब्डेनम, टंगस्टन सहित अन्य महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। ये खनिज देश की ऊर्जा सुरक्षा, आधुनिक प्रौद्योगिकी, औद्योगिक विकास और रणनीतिक आवश्यकताओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह 10:30 बजे पंजीयन एवं चाय के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी। दोपहर 12 बजे मुख्य अतिथि के आगमन एवं दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात वंदे मातरम् और राष्ट्रगान होगा। इसके बाद छत्तीसगढ़ शासन के खनिज संसाधन विभाग के सचिव स्वागत उद्बोधन देंगे। कार्यक्रम में खान मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव उद्घाटन उद्बोधन देंगे। इसके पश्चात भारत सरकार के खान सचिव, छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव तथा छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष द्वारा संबोधन किया जाएगा। केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू और केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे के उद्बोधन के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में अपना संबोधन देंगे।रोड शो के दौरान छत्तीसगढ़ में खनिज क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की जाएंगी। मुख्यमंत्री के मुख्य आतिथ्य में टिन पोर्टल तथा ई-रेत सांगवारी पोर्टल का शुभारंभ किया जाएगा।इस अवसर पर सीएमडीसी और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू, कोरन्डम कटिंग एवं पॉलिशिंग के प्रशिक्षण के लिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के साथ एमओयू का आदान-प्रदान भी किया जाएगा। साथ ही माइनर मिनरल्स पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन तथा तीन लाइमस्टोन माइनिंग लीज ब्लॉक्स के लिए एनआईटी जारी करने की प्रक्रिया भी प्रस्तावित है।दोपहर 2 बजे से आयोजित तकनीकी सत्र में खनिज ब्लॉक्स की नीलामी, निवेश और अन्वेषण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड द्वारा नीलामी के लिए प्रस्तावित खनिज ब्लॉक्स पर प्रस्तुतीकरण दिया जाएगा। एसबीआई कैप्स द्वारा मिनरल ऑक्शन प्रोसेस एवं टेंडर डॉक्यूमेंट तथा एमएसटीसी द्वारा मिनरल ई-ऑक्शन प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। कंपोजिट लाइसेंस धारकों के लिए अन्वेषण व्यय की आंशिक प्रतिपूर्ति से संबंधित एनएमईडीटी योजना पर भी प्रस्तुतीकरण होगा।तकनीकी सत्र के बाद ओपन हाउस डिस्कशन आयोजित किया जाएगा, जिसमें उद्योग प्रतिनिधियों, निवेशकों और विशेषज्ञों के साथ नीलामी प्रक्रिया, खनिज संसाधनों की संभावनाओं तथा निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श होगा। रोड शो के पश्चात दोपहर में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में नीलाम किए गए प्रमुख खनिज ब्लॉक्स के ऑपरेशनलाइजेशन और उनके संचालन की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। खनन परियोजनाओं को तेजी से शुरू करने तथा विभिन्न स्तरों पर आवश्यक समन्वय को लेकर भी चर्चा होगी। इसके बाद माइन विजिट भी प्रस्तावित है।यह रोड शो छत्तीसगढ़ सहित देश में महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों के अन्वेषण और खनन को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। केंद्र और राज्य सरकार, उद्योग जगत तथा खनन क्षेत्र के अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से खनिज क्षेत्र में निवेश और नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त होगा।
- -मछली पालन से सशक्त हुईं मनोरा और दुलदुला की महिलाएं, लाखों की आय से बदली जीवन की तस्वीररायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं को आजीविका के विभिन्न साधनों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। शासन की योजनाओं और विभागीय सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अब पारंपरिक गतिविधियों के साथ-साथ मछली पालन जैसे लाभकारी व्यवसाय को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रही हैं।जशपुर जिले के मनोरा और दुलदुला विकासखंड की महिला स्व-सहायता समूहों ने शासकीय तालाबों को अपनी आजीविका का आधार बनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल पेश की है। शासकीय तालाबों के दीर्घकालीन पट्टे, विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन और समूह की महिलाओं की मेहनत ने मछली पालन को उनके लिए आय का मजबूत जरिया बना दिया है।जशपुर जिले के विकासखंड मनोरा के ग्राम भभरी में कमल महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं पिछले तीन वर्षों से ग्राम पंचायत के 0.700 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले शासकीय तालाब में 10 वर्षीय पट्टे के माध्यम से मछली पालन कर रही हैं। समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और विभागीय मार्गदर्शन से मछली पालन को सफल आजीविका गतिविधि के रूप में विकसित किया है।समूह द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 3 क्विंटल मछली का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे करीब 6 लाख रुपये का वार्षिक विक्रय प्राप्त हो रहा है। इस आय से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब वे घरेलू जरूरतों के साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक खर्चों को भी बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं।दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा में दीप महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी पिछले तीन वर्षों से 0.800 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले शासकीय तालाब में मछली पालन कर रही हैं। समूह ने संगठित प्रयासों और निरंतर मेहनत से इस गतिविधि को आय के प्रभावी साधन में बदल दिया है।समूह द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 3.30 क्विंटल मछली का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे लगभग 6.93 लाख रुपये का वार्षिक विक्रय प्राप्त हो रहा है। इससे समूह की महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है और वे आर्थिक रूप से पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई हैं।महिला स्व-सहायता समूहों को शासकीय तालाबों का पट्टा उपलब्ध कराने, तकनीकी मार्गदर्शन देने और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है। मछली पालन से प्राप्त आय ने महिलाओं को परिवार की आर्थिक जरूरतों में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर दिया है।समूह की महिलाओं का कहना है कि पहले आय के सीमित साधनों के कारण परिवार का खर्च चलाना चुनौतीपूर्ण था। मछली पालन शुरू करने के बाद नियमित आय का माध्यम मिला और अब वे स्वयं अपनी आजीविका गतिविधियों का संचालन करने के साथ आर्थिक निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।कमल महिला स्व-सहायता समूह और दीप महिला स्व-सहायता समूह की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं का प्रभावी लाभ, सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन मिलकर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। आज इन समूहों की महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ गांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में भी योगदान दे रही हैं।
- -1 से 3 सितंबर तक मुक्ताकाशी मंच पर होगा भव्य आयोजन, पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियों के साथ दिखेगा छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का रंगरायपुर । छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और आधुनिक सुरों के अनूठे संगम को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘रंग तरंग’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह सांस्कृतिक आयोजन 1, 2 एवं 3 सितंबर 2026 को प्रतिदिन शाम 7 बजे से रायपुर के मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस में आयोजित होगा।‘रंग तरंग’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को नए और आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम में पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियों के साथ संगीत की विभिन्न विधाओं का संगम देखने-सुनने को मिलेगा। आयोजन का उद्देश्य प्रदेश की लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें समकालीन संगीत के साथ जोड़कर व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाना है।‘रंग तरंग’ को संस्कृति, रंगों और सुरों का फ्यूजन के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। आयोजन में छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं से जुड़े वाद्ययंत्रों और कलाकारों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। पारंपरिक वाद्यों की धुनों के साथ आधुनिक संगीत का मेल दर्शकों को सांस्कृतिक विरासत का नया अनुभव प्रदान करेगा।तीन दिवसीय इस आयोजन के जरिए प्रदेश की विविध लोक परंपराओं, संगीत शैलियों और वाद्य संस्कृति को एक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी जीवंत लोक कलाओं और संगीत परंपराओं से रही है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलने के साथ ही आम लोगों, विशेषकर युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है।संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘रंग तरंग’ में लोक और आधुनिकता का यह मेल दर्शकों के लिए मनोरंजन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को करीब से जानने का अवसर भी बनेगा।तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन रायपुरवासियों और प्रदेश की कला-संस्कृति में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगा। ‘रंग तरंग’ छत्तीसगढ़ की लोकधुनों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और आधुनिक संगीत को एक ही मंच पर लाकर संस्कृति के विविध रंगों को सुरों की तरंगों में पिरोने की पहल है।
- -पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने शासकीय आवास में सुना ‘मन की बात’ का 137वां संस्करण, कहा—प्रधानमंत्री का संवाद जनभागीदारी और राष्ट्रनिर्माण की भावना को देता है नई ऊर्जारायपुर / पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आज रायपुर स्थित अपने शासकीय आवास में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 137वें संस्करण का सामूहिक श्रवण किया। इस अवसर पर अंबिकापुर की महापौर श्रीमती मंजूषा भगत सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े नागरिक उपस्थित रहे।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देश की विविध उपलब्धियों, सामाजिक सरोकारों, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और जनभागीदारी से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर देशवासियों से संवाद किया। कार्यक्रम में इतिहास को डिजिटल माध्यमों से संरक्षित करने के अभिनव प्रयासों से लेकर युवाओं को नशे से दूर रखने, स्वच्छता, स्थानीय उद्यमिता, कृषि में वैज्ञानिक नवाचार और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने जैसे विषय प्रमुखता से सामने आए।‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने इतिहास और देश की समृद्ध विरासत को आधुनिक डिजिटल माध्यमों के जरिए सहेजने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने ऐसे प्रयासों को आने वाली पीढ़ियों को अपने अतीत, गौरव और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत हमारी पहचान और हमारी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। इतिहास, लोक परंपराओं, कला और सांस्कृतिक धरोहरों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से संरक्षित करना समय की आवश्यकता है। इससे हमारी विरासत आने वाली पीढ़ियों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगी।प्रधानमंत्री ने ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ अभियान के तहत ड्रग फ्री इंडिया के संकल्प को मजबूत करने का आह्वान किया। युवाओं को नशे से दूर रखते हुए उनकी ऊर्जा को रचनात्मक और राष्ट्रहित के कार्यों में लगाने पर विशेष जोर दिया गया।मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि युवा शक्ति भारत के भविष्य की आधारशिला है। स्वस्थ, जागरूक और नशामुक्त युवा ही विकसित भारत के निर्माण में अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान दे सकते हैं। समाज के हर वर्ग को मिलकर युवाओं के लिए सकारात्मक और प्रेरक वातावरण तैयार करना होगा।प्रधानमंत्री ने अगस्त माह में देशभर में आयोजित भव्य तिरंगा यात्राओं का उल्लेख करते हुए इनमें लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी को राष्ट्रभावना की अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है।‘मन की बात’ में छोटे रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली पीएम स्वनिधि योजना का भी उल्लेख किया गया। इस योजना के माध्यम से छोटे उद्यमियों को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहयोग और आत्मनिर्भरता का अवसर मिल रहा है।श्री अग्रवाल ने कहा कि छोटे व्यवसाय हमारे स्थानीय अर्थतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जब एक छोटा दुकानदार, ठेला संचालक या रेहड़ी-पटरी व्यवसायी अपने पैरों पर मजबूती से खड़ा होता है, तो इसका सीधा लाभ उसके परिवार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलता है।प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान की निरंतरता पर भी चर्चा की और स्वच्छता को केवल किसी अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे दैनिक जीवन की आदत और सामाजिक जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि स्वच्छता और पर्यटन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। स्वच्छ पर्यटन स्थल न केवल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी पैदा करते हैं। छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका है।प्रधानमंत्री ने हाल ही में संपन्न हुई श्री अमरनाथ जी की पावन यात्रा का उल्लेख करते हुए देश की आध्यात्मिक एवं धार्मिक यात्रा परंपरा की व्यापकता को रेखांकित किया। भारत में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।श्री अग्रवाल ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक यात्राएं हमारी प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखती हैं। छत्तीसगढ़ भी राम वन गमन पथ, माता कौशल्या की नगरी और अनेक प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के माध्यम से देश की आध्यात्मिक पर्यटन परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।प्रधानमंत्री ने किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक नवाचारों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। कृषि में नई तकनीक, वैज्ञानिक पद्धतियों और नवाचारों का उपयोग किसानों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अधिक सक्षम बनाने में सहायक है।मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि कृषि में विज्ञान और तकनीक का समावेश किसानों के लिए नए अवसर खोल रहा है। आधुनिक नवाचारों के साथ स्थानीय अनुभव और पारंपरिक ज्ञान का समन्वय खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बना सकता है।प्रधानमंत्री ने स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘Vocal for Local’ के मंत्र को भी दोहराया। स्थानीय उत्पादों को अपनाने और उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराने से कारीगरों, शिल्पकारों, छोटे उद्यमियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।श्री अग्रवाल ने कहा कि हमारे स्थानीय शिल्प, हस्तकला, लोककलाएं और पारंपरिक उत्पाद केवल वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति और पहचान के वाहक हैं। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से संस्कृति का संरक्षण होने के साथ-साथ कलाकारों और कारीगरों की आजीविका भी मजबूत होती है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देश के अलग-अलग क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक कार्यों, नवाचारों और जनभागीदारी की प्रेरक कहानियों को सामने लाने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे संवाद समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं और नागरिकों को अपने स्तर पर राष्ट्रहित में योगदान देने के लिए प्रेरित करते हैं।मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायी संबोधन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘मन की बात’ देश के करोड़ों नागरिकों को एक-दूसरे से जोड़ने और देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे रचनात्मक प्रयासों को साझा करने का सशक्त माध्यम है। प्रधानमंत्री जी का मार्गदर्शन हमें अपनी संस्कृति, पर्यावरण, स्थानीय अर्थव्यवस्था, युवा शक्ति और विकास के लिए निरंतर बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देता है।
- -अंबिकापुर की डॉ. मीना गुप्ता की सुरक्षित वापसी के लिए विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं अधिकारीरायपुर / नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद 288 से अधिक भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर पर छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने गहरी चिंता व्यक्त की है। लापता भारतीय नागरिकों में अंबिकापुर के वरिष्ठ नेता श्री कर्ताराम गुप्ता की बेटी डॉ. मीना गुप्ता भी शामिल हैं। डॉ. मीना गुप्ता ब्रिटेन में चिकित्सक के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने डॉ. मीना गुप्ता की सुरक्षित वापसी के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाते हुए कहा कि इस कठिन और चिंताजनक परिस्थिति में उनका परिवार अकेला नहीं है। उन्होंने बताया कि डॉ. मीना गुप्ता की स्थिति और उनकी सुरक्षित वापसी के संबंध में नेपाल स्थित भारतीय दूतावास तथा संबंधित अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।श्री अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने भी इस मामले में तत्काल विदेश मंत्रालय से संपर्क कर आवश्यक जानकारी साझा करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराई गई ई-मेल आईडी श्री कर्ताराम गुप्ता को उपलब्ध कराई गई है, ताकि डॉ. मीना गुप्ता से संबंधित सभी आवश्यक विवरण विदेश मंत्रालय तक पहुंचाए जा सकें और उनकी तलाश एवं सुरक्षित वापसी के प्रयासों को आवश्यक जानकारी मिल सके।मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद 288 से अधिक भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक है। इनमें अंबिकापुर की डॉ. मीना गुप्ता जी भी शामिल हैं। उनकी सुरक्षित वापसी के लिए हम लगातार नेपाल स्थित भारतीय दूतावास और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं। मैंने भी तत्काल विदेश मंत्रालय से संपर्क कर आवश्यक जानकारी साझा करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में प्रत्येक लापता व्यक्ति के परिवार की चिंता और व्याकुलता को समझा जा सकता है। प्रशासनिक एवं राजनयिक स्तर पर उपलब्ध माध्यमों के जरिए आवश्यक जानकारी साझा कर डॉ. मीना गुप्ता सहित सभी लापता भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने नेपाल की प्राकृतिक आपदा से प्रभावित सभी परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बाढ़ की इस त्रासदी में जिन परिवारों के सदस्य लापता हैं, उनके लिए यह अत्यंत कठिन समय है। ऐसे समय में संवेदना, सहयोग और हरसंभव सहायता ही सबसे महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में हमारी संवेदनाएं सभी पीड़ित परिवारों के साथ हैं। ईश्वर से मेरी प्रार्थना है कि डॉ. मीना गुप्ता जी सहित बाढ़ में फंसे सभी लोग सकुशल हों और जल्द से जल्द अपने परिवारों के बीच वापस लौटें। हम सभी उनके सुरक्षित लौटने की कामना कर रहे हैं। मंत्री ने आशा व्यक्त की कि राहत एवं बचाव कार्यों के साथ लापता लोगों की तलाश के प्रयासों में जल्द सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे और डॉ. मीना गुप्ता सहित सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित अपने परिजनों के बीच लौट सकेंगे।
- -राज्य स्तरीय UCC समिति को दिए जाएंगे सुझाव, शहर काजी और वरिष्ठ अधिवक्ता रहेंगे मौजूदरायपुर / राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) कानून लागू करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है और इसके लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है। उक्त समिति को सुझाव देने के लिए रायपुर मुस्लिम समाज की ओर से एक दिवसीय बैठक का आयोजन किया गया है। यह जानकारी छ.ग. राज्य वक्फ बोर्ड (कैबिनेट मंत्री दर्जा) के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने दी है।मुस्लिम समाज की यह बैठक 01 सितंबर 2026, मंगलवार को स्थान- गुरु घासीदास ऑडिटोरियम, कार्यालय छ.ग. राज्य वक्फ बोर्ड के सामने, कलेक्ट्रेट चौक, रायपुर में आयोजित की जाएगी। बैठक में मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों द्वारा दिए गए सुझावों को एकत्रित किया जाएगा। इसके लिए रायपुर की समस्त मस्जिदों में जुमा को ऐलान के माध्यम से सूचना दी गई है।आयोजकों ने अपील की है कि UCC के संबंध में सुझाव लिखित में अध्यक्ष, समान नागरिक संहिता समिति, छत्तीसगढ़ के नाम से संबोधित करते हुए दो प्रतियों में प्रस्तुत करें। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में शहर काजी जनाब कारी डॉ. मोहम्मद इमरान अशरफी साहब और अध्यक्षता के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता जनाब फैसल रिजवी साहब उपस्थित रहेंगे। मुस्लिम समाज द्वारा दिए गए सुझावों को बैठक में एकत्रित कर शाम 04:00 बजे समान नागरिक संहिता (UCC) समिति, छत्तीसगढ़ के माननीय सदस्यों के समक्ष उपस्थित होकर प्रस्तुत किया जाएगा।
- -होटल से टूर ऑपरेटर, होमस्टे, इको-टूरिज्म, एडवेंचर पर्यटन और सोशल मीडिया तक 10 श्रेणियों में होंगे ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’; प्रत्येक विजेता को 11 हजार एवं मेमेंटो-पुरस्कार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026, इच्छुक व्यक्ति एवं संस्थाएं [email protected] पर भेज सकेंगे आवेदनरायपुर । छत्तीसगढ़ में पर्यटन क्षेत्र को नई पहचान देने, पर्यटन से जुड़े उद्यमियों, संस्थाओं एवं व्यक्तियों के उत्कृष्ट कार्यों को प्रोत्साहित करने तथा राज्य के पर्यटन स्थलों के विकास, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’ प्रदान किए जाएंगे। इस पुरस्कार योजना के तहत पर्यटन क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले होटल, पंजीकृत टूर ऑपरेटर, जिले, पर्यटन स्टार्टअप, रिसॉर्ट, पर्यटक सूचना केंद्र, होमस्टे, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, इको-टूरिज्म साइट और एडवेंचर टूरिज्म संचालकों को सम्मानित किया जाएगा।योजना के अंतर्गत कुल 10 श्रेणियों में एक-एक पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक विजेता को ₹11 हजार की पुरस्कार राशि एवं मेमेंटो प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।पर्यटन की पूरी श्रृंखला को प्रोत्साहित करने पर जोर‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’ की खासियत यह है कि इसमें पर्यटन को केवल पर्यटन स्थलों तक सीमित न रखते हुए उससे जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को भी सम्मान के दायरे में शामिल किया गया है। आतिथ्य, पर्यटन संचालन, जिला पर्यटन प्रबंधन, उद्यमिता, रिसॉर्ट सेवाएं, पर्यटक सहायता, होमस्टे, डिजिटल प्रचार, पर्यावरण संरक्षण और साहसिक पर्यटन जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया जाएगा।पुरस्कार की 10 श्रेणियां हैं—1. सर्वश्रेष्ठ होटल2. सर्वश्रेष्ठ पंजीकृत टूर ऑपरेटर3. सर्वश्रेष्ठ जिला टूरिज्म प्रमोशन अवॉर्ड4. सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्टार्टअप/उद्यमिता पुरस्कार5. CTB Star Performer – सर्वश्रेष्ठ रिसॉर्ट6. CTB Star Performer – पर्यटक सूचना केंद्र7. सर्वश्रेष्ठ होमस्टे8. सर्वश्रेष्ठ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर9. सर्वश्रेष्ठ इको टूरिज्म साइट अवॉर्ड10. सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्डबेहतर सेवाओं और नवाचार को मिलेगा सम्मानसर्वश्रेष्ठ होटल श्रेणी में राज्य के आतिथ्य क्षेत्र में प्रभावशाली सेवाएं एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले पर्यटन उद्यम को सम्मानित किया जाएगा। इसमें MICE सुविधाओं, पिछले वित्तीय वर्ष के वित्तीय प्रदर्शन, वार्षिक कारोबार और आयोजित कार्यक्रमों की संख्या जैसे मानकों को आधार बनाया जाएगा। पर्यटन प्रचार, सतत पर्यटन, CSR गतिविधियों और रोजगार सृजन में योगदान को भी मूल्यांकन में महत्व दिया जाएगा।इसी तरह सर्वश्रेष्ठ पंजीकृत टूर ऑपरेटर का चयन आवास, परिवहन, दर्शनीय स्थलों की यात्रा, मनोरंजन और अन्य पर्यटन गतिविधियों के प्रभावी संचालन तथा छत्तीसगढ़ के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों के आधार पर किया जाएगा। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी, इटिनरेरी एवं प्रचार सामग्री के माध्यम से पर्यटन का प्रचार तथा वेबसाइट और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा।पर्यटन विकास में उत्कृष्ट जिले को भी मिलेगा सम्मान‘सर्वश्रेष्ठ जिला टूरिज्म प्रमोशन अवॉर्ड’ के तहत उस जिले का चयन किया जाएगा, जिसने पर्यटन के व्यापक विकास, संवर्धन, गंतव्य प्रबंधन तथा घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की दिशा में बेहतर कार्य किया हो।पर्यटन स्थलों की स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, डस्टबिन की उपलब्धता, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, हरित उपाय, प्रकृति आधारित गतिविधियां, कृषि एवं ग्रामीण जीवनशैली, संस्कृति, मत्स्य पालन, पर्यटकों के लिए विशिष्ट अनुभव और पर्यटन के माध्यम से रोजगार सृजन जैसे पहलुओं को भी मूल्यांकन में शामिल किया गया है।युवा उद्यमियों और पर्यटन स्टार्टअप को मिलेगा मंचपर्यटन क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्टार्टअप/उद्यमिता पुरस्कार रखा गया है। इसके माध्यम से ऐसे स्टार्टअप और व्यक्तिगत उद्यमियों को पहचान एवं प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिन्होंने नवाचार एवं अनुकरणीय गतिविधियों के जरिए छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा देने का कार्य किया है।यह पुरस्कार पर्यटन क्षेत्र में नए विचारों, तकनीक, सेवाओं एवं व्यावसायिक मॉडलों के माध्यम से पर्यटन को अधिक आकर्षक, सुविधाजनक एवं प्रतिस्पर्धी बनाने वाले उद्यमियों के प्रयासों को प्रोत्साहित करेगा।रिसॉर्ट और पर्यटक सूचना केंद्रों की सेवाओं को भी पहचानCTB Star Performer की दो श्रेणियों में पर्यटन बोर्ड की प्रीमियम एवं बजट श्रेणी की इकाइयों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले रिसॉर्ट तथा उल्लेखनीय बुकिंग उपलब्ध कराने वाले पर्यटक सूचना केंद्रों को सम्मानित किया जाएगा।सर्वश्रेष्ठ रिसॉर्ट के चयन में टर्नओवर, लाभप्रदता और अधिभोग प्रतिशत जैसे मानकों को आधार बनाया जाएगा। वहीं पर्यटक सूचना केंद्रों का मूल्यांकन पूरे वर्ष पर्यटकों के लिए बुकिंग उपलब्ध कराने में उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।इन पुरस्कारों के माध्यम से पर्यटन बोर्ड की इकाइयों में बेहतर सेवा, ग्राहक संतुष्टि, प्रभावी संचालन तथा पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रोत्साहित किया जाएगा।होमस्टे से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वालों का सम्मानसर्वश्रेष्ठ होमस्टे श्रेणी में घरेलू पर्यटन से अर्जित राजस्व, वार्षिक वृद्धि दर, बुकिंग की संख्या और घरेलू पर्यटकों की संख्या जैसे मानकों के आधार पर चयन किया जाएगा। पर्यटकों को दी जाने वाली सुविधाएं, ग्राहक समीक्षा, शिकायत निवारण प्रणाली, दिव्यांग पर्यटकों के लिए सुविधाएं तथा होमस्टे की विशिष्ट अवधारणा को भी मूल्यांकन में महत्व दिया जाएगा।होमस्टे के माध्यम से स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़ने, स्थानीय उत्पादों एवं व्यंजनों को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आय के अवसर सृजित करने वाले प्रयासों को भी विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा।डिजिटल दुनिया में छत्तीसगढ़ पर्यटन की ब्रांडिंग करने वालों को पुरस्कारसोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका को देखते हुए सर्वश्रेष्ठ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रेणी भी शामिल की गई है। छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों पर आधारित रील्स, वीडियो और अन्य डिजिटल कंटेंट के माध्यम से राज्य के पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को इस श्रेणी में सम्मानित किया जाएगा।फेसबुक, इंस्टाग्राम और यू-ट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की पहुंच, पिछले तीन वर्षों के प्रदर्शन तथा उपलब्ध होने पर कारोबार संबंधी विवरण को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया गया है।इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय जीवन, ऐतिहासिक स्थलों, वन्यजीव, साहसिक गतिविधियों और अन्य पर्यटन आकर्षणों को डिजिटल माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रचारित करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को प्रोत्साहन मिलेगा।सतत पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को विशेष प्राथमिकतासर्वश्रेष्ठ इको टूरिज्म साइट अवॉर्ड के जरिए पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत पर्यटन को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं को सम्मानित किया जाएगा। परियोजना का छत्तीसगढ़ में स्थित होना और कम से कम दो वर्षों से संचालित होना आवश्यक है।नवीकरणीय ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन, जल संरक्षण, स्थानीय समुदायों—विशेषकर आदिवासी एवं ग्रामीण आबादी—की भागीदारी, स्थानीय वनस्पति एवं जीव-जंतुओं तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान जैसे मानकों को प्राथमिकता दी जाएगी।इको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर सृजित करने तथा पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन स्थापित करने वाली पहलों को भी मूल्यांकन में विशेष महत्व दिया जाएगा।साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने वालों को भी सम्मानछत्तीसगढ़ में कैंपिंग और अन्य साहसिक गतिविधियां संचालित करने वाले श्रेष्ठ संचालक को सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्ड दिया जाएगा। गंतव्य प्रबंधन, घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों की संख्या, साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल तथा गतिविधियों से प्राप्त राजस्व प्रमुख मूल्यांकन मानदंड होंगे।इसके साथ ही पर्यटकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण साहसिक अनुभव उपलब्ध कराने, नए एडवेंचर प्रोडक्ट विकसित करने तथा छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक गंतव्यों को साहसिक पर्यटन के लिए विकसित एवं प्रचारित करने वाले प्रयासों को भी महत्व दिया जाएगा।15 सितंबर तक करें आवेदनपुरस्कार की सभी श्रेणियों के लिए आवेदन प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इच्छुक व्यक्ति, संस्थाएं एवं संबंधित पर्यटन क्षेत्र के पात्र हितधारक अपनी प्रविष्टियां [email protected] पर ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं। आवेदन पत्र छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की वेबसाइट www.tourism.cgstate.gov.in पर उपलब्ध है। आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 है।प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन राज्य पर्यटन विभाग/निर्णायक समिति द्वारा निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाएगा। प्रत्येक श्रेणी में प्राप्त प्रविष्टियों का परीक्षण संबंधित श्रेणी के लिए निर्धारित पात्रता एवं मूल्यांकन मानदंडों के आधार पर किया जाएगा।
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रायपुर. अगर चाय पीने के लिए वे पांच दोस्त कुछ देर के लिए नहीं रुकते तो नेपाल में बुधवार को भोटे कोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में आई अचानक बाढ़ में बह सकते थे। हालांकि, वे सुरक्षित बच गए लेकिन इसके बाद उन्हें दो दिन तक एक ऊंची जगह से उफनती त्रिशूली नदी का भयावह रूप देखते हुए चिंता में बिताने पड़े। रायपुर के माना कैंप क्षेत्र के रहने वाले नारायण सेन, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, यतेंद्र प्रकाश और दिनेश सिंह ठाकुर (सभी की उम्र 50 से 60 वर्ष के बीच) शनिवार को अपने घर लौटे। सैलून चलाने वाले 53 वर्षीय नारायण सेन ने 'पीटीआई-वीडियो' सेवा को बताया, ''हम भाग्यशाली थे कि 26 अगस्त को अचानक बाढ़ आने के समय हम चाय पीने के लिए रुक गए थे। अगर हम 10-15 मिनट पहले निकल गए होते तो शायद फंस गए होते।'' उन्होंने कहा, ''अगर हम वहां नहीं रुकते तो पता नहीं क्या होता।'' पांच दोस्तों का ये समूह 21 अगस्त को रायपुर से रवाना हुआ था और अगले दिन नेपाल पहुंचा था। उन्होंने एक कार किराये पर ली थी और पशुपतिनाथ मंदिर, मनोकामना मंदिर तथा अन्य पर्यटन स्थलों की यात्रा की योजना बनाई थी। 26 अगस्त को पूर्वाह्न करीब 9:30 से 10 बजे के बीच वे धादिंग जिले के मलेखू कस्बे के एक होटल में चाय पीने के लिए रुके। सेन ने बताया, ''वहां हमें पता चला कि आगे एक पुल बाढ़ में बह गया है। होटल एक भारतीय व्यक्ति का था, जिसने हमारी काफी मदद की और हमें भोजन भी उपलब्ध कराया।'' इसके बाद ये दोस्त वहां सामने आ रही भयावह आपदा के प्रत्यक्षदर्शी बन गए। सेन ने कहा, ''हमने देखा कि कारें त्रिशूली नदी में बह रही थीं। पानी के तेज बहाव में शव और कई अन्य चीजें भी बहकर जा रही थीं। हम डर गए थे। हर समय यह आशंका बनी हुई थी कि बाढ़ की स्थिति और खराब हो सकती है।'' समूह ने मलेखू में एक ऊंची जगह पर शरण ली और रात अपनी कार में बिताई।
स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने उनकी मदद की।पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात 55 वर्षीय ठाकुर ने बताया कि जब बाढ़ आई, तब वे पशुपतिनाथ मंदिर से करीब 50 किलोमीटर दूर थे। उन्होंने कहा, ''होटल में चाय पीते समय हमने देखा कि अचानक लोग बेचैन होने लगे। बाद में हमें बाढ़ से हुई तबाही के बारे में पता चला। हमने सुना कि पूरे गांव, इमारतें, कार्यालय और जलविद्युत परियोजनाएं तबाह हो गई हैं।'' बाद में वे त्रिशूली नदी के किनारे स्थिति देखने के लिए गए। ठाकुर ने कहा, ''हमने जो देखा, उसे शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है।'' उन्होंने कहा, ''हम लगातार भगवान शिव का नाम जपते रहे और हमें लगता है कि उनकी कृपा ने हमारी रक्षा की।'' ठाकुर ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की सराहना की। उन्होंने कहा, ''वहां बिजली और पानी नहीं था लेकिन प्रशासन व पुलिस ने हमारी मदद की। उन्होंने हमें बताया कि हम ऊंची जगह पर हैं और हमें चिंता करने की जरूरत नहीं है।'' समूह इंटरनेट के माध्यम से अपने परिवारों के संपर्क में रहा और भारत सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई हेल्पलाइन के जरिए अपनी स्थिति की जानकारी साझा की। ठाकुर ने कहा, ''वहां इंटरनेट सेवा अच्छी तरह काम कर रही थी, इसलिए हम अपने परिवारों के संपर्क में रहे और घबराए नहीं।'' दोस्तों का यह समूह आखिरकार 28 अगस्त को नेपाल से रवाना हुआ।त्रासदी के बीच इन पांच दोस्तों के लिए एक भावुक पल भी आया, जब स्थानीय महिला सुरक्षा कर्मियों ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। ठाकुर ने कहा, ''हम रक्षाबंधन के बाद यात्रा से लौटने वाले थे इसलिए हमारी बहनों ने हमें पहले ही राखी दे दी थी। वहां तैनात महिला सुरक्षा कर्मियों ने हमारी कलाई पर ये राखियां बांधीं। वह हमारे लिए सबसे सुकून भरा पल था।'' सिलाई की दुकान चलाने वाले दिनेश ओझा ने कहा कि बाढ़ के बाद उन्होंने जो दृश्य देखे, उन्हें वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने कहा, ''हम जो कुछ देख चुके हैं, उसे कभी नहीं भुला पाएंगे। कई लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में बुरी तरह परेशान होकर इधर-उधर भटक रहे थे।'' ओझा ने कहा, ''हमने अपनी कार में रात बिताई, लेकिन वास्तव में सो नहीं पाए। हर समय यह डर बना हुआ था कि कहीं फिर से बाढ़ न आ जाए।'' उन्होंने कहा, ''हमें खुशी है कि आखिरकार हम सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं।'' - -प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का छत्तीसगढ़ से गहरा नाता रहा हैरायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि केंद्र सरकार ने राज्य से नक्सल समस्या के उन्मूलन के लिए हर संभव सहयोग दिया है। श्री साय ने जोर देकर कहा कि पिछले वर्षों में नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक नक्सलवाद का प्रभावी सफाया रहा है। श्री साय शनिवार को यहाँ कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक सेवा एवं जन-समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आहूत प्रदेशस्तरीय कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे।मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ के गहरे आत्मीय संबंधों को रेखांकित किया और पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि राज्य निर्माण के समय नरेंद्र मोदी छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी थे। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के प्रत्येक जिले का सघन दौरा कर संगठन को मजबूती दी थी। यही कारण है कि उनका छत्तीसगढ़ से बहुत पुराना और अटूट नाता है। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वे निरंतर राज्य के विकास के लिए विभिन्न योजनाएँ स्वीकृत कर रहे हैं। श्री साय ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब बस्तर सहित पूरे वनांचल क्षेत्र के वनवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। जो लोग नक्सल प्रभाव के कारण विकास की मुख्यधारा से कटे हुए थे, उन्हें अब बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और उन्नत जीवन शैली का अधिकार मिल रहा है। इसी क्रम में श्री साय ने प्रदेश सरकार की उपलब्धियों पर भी चर्चा की। श्री साय ने पार्टी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे ‘सेवा ही संकल्प’ अभियान के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर लाभार्थियों तक पहुँचें। श्री साय ने अपने सम्बोधन में वरिष्ठ भाजपा नेता शिवप्रकाश को लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री का दायित्व मिलने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ भी दीं।भाजपा राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदैव असम्भव को सम्भव कर दिखाया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण भूकम्प की त्रासदी झेल चुके गुजरात का पुनरुत्थान है। उन्होंने गुजरात को देश के सबसे अग्रणी राज्यों में स्थापित कर एक मिसाल पेश की, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। देश की जनता के विश्वास पर खरा उतरते हुए प्रधानमंत्री ने भारत को विकासशील से विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए हैं। ‘मेक इन इंडिया‘ की सफलता और 24 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालना धरातल पर दिख रहे बदलाव का प्रमाण है। आज देश में विश्वस्तरीय रेलवे, अत्याधुनिक हवाई अड्डे और मजबूत राष्ट्रीय राजमार्गों का जाल बिछाया जा रहा है। केन्द्र सरकार की नीतियों के केंद्र में महिला सशक्तीकरण रहा है। जन-धन खातों के जरिए सीधे लाभ, राशन कार्ड में महिला को परिवार का मुखिया बनाना और तीन तलाक जैसी कुप्रथा से मुक्ति दिलाकर महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार दिया गया है। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति का साहसिक कदम हो या भव्य राम मंदिर निर्माण के दशकों पुराने संकल्प की सिद्धि, सरकार ने देश की आस्था और सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। श्री शिवप्रकाश ने कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश के सर्वाेच्च पद पर रहते हुए भी नरेंद्र मोदी ‘संगठन सर्वाेपरि’ की भावना का पालन करते हैं। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठकों में सामान्य कार्यकर्ता की भाँति बैठना और सभी संगठनात्मक प्रोटोकॉल का पालन करना उनके अगाध समर्पण को दर्शाता है। ‘मन की बात‘ और ‘परीक्षा पे चर्चा’ जैसे मंचों के जरिए प्रधानमंत्री समाज के हर वर्ग-बुजुर्गों से लेकर युवाओं और बच्चों तक-से निरंतर जीवन्त सम्पर्क बनाए रखते हैं।भाजपा राष्ट्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सांसद डॉ. कविता पाटीदार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के जनसेवा के ऐतिहासिक कार्यकाल के प्रति आभार व्यक्त करने तथा ‘विकसित भारत 2047’ के सामूहिक संकल्प को जन-जन तक पहुँचाने के लिए आयोजित होने वाले राष्ट्रव्यापी अभियानों का विवरण साझा किया। डॉ. पाटीदार ने कहा कि यह अभियान मात्र एक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण का व्यापक जनांदोलन बनेगा। इसमें हर गाँव, शहर, बूथ और परिवार की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। भाजपा राष्ट्रीय मंत्री एवं सांसद डॉ. पाटीदार ने माहभर चलने वाले इस अभियान के कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि प्रत्येक बूथ पर हर परिवार दीप प्रज्जवलन कर प्रधानमंत्री श्री मोदी के 25 वर्षों के सेवा समर्पण के प्रति आभार प्रकट करेगा और ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प लेगा। 25 करोड़ बच्चों के सपनों के भारत के तहत राष्ट्रव्यापी ड्राइंग एवं भाषण प्रतियोगिता के तहत देशभर के सभी सरकारी व निजी स्कूलों में छात्रों के लिए मोदी सरकार के सेवा कार्यों और विकसित भारत की संकल्पना पर भाषण व ड्राइंग प्रतियोगिताएँ आयोजित होंगी। इसी प्रकार नमो सेवा गाथा, आंगन का उत्सव, कहानी बदलाव की, विकसित भारत संकल्प यात्रा, सेवा ज्योति यात्रा, वडनगर से वाराणसी जल जन और सेवा संकल्प यात्रा, सेवा मेरा योगदान जिसके तहत 25 सेवा गतिविधियां, सेवा सेतु अभियान, रंगोली राष्ट्र, राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज, जनसेवक महाकुंभ (पंचायत से पार्लियामेंट) कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। डॉ. पाटीदार ने सभी कार्यकर्ताओं और नागरिकों से आह्वान किया कि वे 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस ‘सेवा महाभियान’ से जुड़कर 25 वर्षों के सेवा कार्यों में से एक कार्य चुनकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें।भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने कार्यशाला में संगठनात्मक विषय पर कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया और आगामी कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। श्री साय ने राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार विभिन्न 13 कार्यकर्माे पर प्रकाश डालते हुए प्रदेश, जिला एवं मंडलस्तरीय संरचना निर्माण करने का निर्देश दिया। साथ ही श्री साय ने प्रदेश के पश्चात जिला एवं जिले के पश्चात मण्डल की कार्यशाला करने का निर्देश दिया। सभी 13 कार्यक्रमों के लिए प्रभारी नियुक्त किए गए जिसमें आशीर्वाद का दिया से लेकर अन्य सभी कार्यक्रमों के लिए प्रभारी नियुक्त किए गए वहीं मंत्रियों, सांसदों एवं पदाधिकारियों को दायित्व प्रदाय किए गए।भाजपा प्रदेश महामंत्री और कार्यक्रम के प्रदेश संयोजक यशवंत जैन ने आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि पार्टी हर साल ‘सेवा पखवाड़ा’ आयोजित करती रही है, लेकिन इस बार का आयोजन ऐतिहासिक और व्यापक होगा। श्री जैन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा जीवन सेवा और गरीब कल्याण को समर्पित रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए जितनी भी जनकल्याणकारी योजनाएँ लागू कीं, उनका मूल उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाना रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी तक सेवा भाव को पहुंचाना और जन-जन में सेवा की भावना को स्थापित करना है। श्री जैन ने बताया कि राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा 13 प्रमुख कार्यक्रम तय किए गए हैं, जिनका आयोजन बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक किया जाएगा। अभियान के तहत आशीर्वाद का दीया (17 सितंबर), आंगनबाड़ी सम्मान, सपनों का भारत प्रतियोगिता, सेवा ज्योति यात्रा (7 अक्टूबर), जन-जल सेवा यात्रा सहित विभिन्न कार्यक्रम निर्धारित किए गए है।कार्यक्रम का संचालन भाजपा प्रदेश मंत्री श्रीमती हर्षिता पांडेय ने किया एवं आभार प्रदेश उपाध्यक्ष जगन्नाथ पाणिग्रही ने माना। इस दौरान कार्यशाला में क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जम्वाल, केन्द्रीय मंत्री तोखन साहू, प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी, डॉ. नवीन मार्कण्डेय, सहित प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि, जिलाध्यक्ष एवं भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहें।
- रायपुर। भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की नव-नियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी का दायित्व ग्रहण करने के बाद शनिवार को प्रथम छत्तीसगढ़ आगमन पर राजधानी रायपुर में ऐतिहासिक एवं भव्य स्वागत किया गया। रायपुर के स्वामी विवेकानंद विमानतल पर उनके पहुँचते ही कार्यकर्ताओं ने जोरदार आतिशबाजी, ढोल-ताशों और नारों के साथ उनका गर्मजोशी से अभिवादन किया।विमानतल पर स्वागत के पश्चात श्रीमती चौधरी सीधे एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय पहुँचीं। यहाँ प्रदेशभर से जुटीं महिला मोर्चा की पदाधिकारियों एवं बड़ी संख्या में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने पुष्पवर्षा और गगनभेदी जयघोष के बीच उनका आत्मीय स्वागत व अभिनंदन किया। इस दौरान महिला कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।एकात्म परिसर में स्वागत कार्यक्रम के उपरांत श्रीमती चौधरी भाजपा प्रदेश कार्यालय 'कुशाभाऊ ठाकरे परिसर' पहुँचीं। वहाँ उन्होंने स्मृति मन्दिर में पार्टी के पितृ पुरुषों एवं प्रेरणास्रोत महापुरुषों की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर आशीर्वाद लिया और संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।इस अवसर पर महिला मोर्चा राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद श्रीमती चौधरी ने पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा दी गई इस महती जिम्मेदारी के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि एक साधारण कार्यकर्ता को राष्ट्रीय स्तर पर यह अवसर मिलना केवल भाजपा में ही संभव है। श्रीमती चौधरी ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में 'नारी शक्ति वन्दन' का दौर चल रहा है। संगठन में महिलाओं की भूमिका केवल भागीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे नीतियों के क्रियान्वयन और राष्ट्र निर्माण की मुख्य धारा में अग्रणी हैं। श्रीमती चौधरी ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं—जैसे महतारी वन्दन योजना, उज्ज्वला योजना और लखपति दीदी—को समाज के अंतिम छोर तक पहुँचाना महिला मोर्चा का प्रमुख ध्येय है। कार्यक्रम में भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी, महिला मोर्चा महामंत्री शीतल नायक, कमलेश शाश्वत, संगीता शर्मा, पुनीता डहरिया, पुष्पलता चौहान, सविता चंद्राकर, शीलू साहू, अंजू त्रिपाठी, संतोषी दीवान, कुमुद बघेल, भारती बागल, गीतांजलि पटनायक, तिलेश्वरी धुरंधर, प्रतिज्ञा गुप्ता, प्रियंका गिरी, नीतू कोठारी, किरण सिंह, वंदना राठौर, प्रीति परगनिया, सत्यलता मिरी, प्रेमलता नागवंशी, माधुरी साहू सहित प्रदेश भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी, महिला मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी, वरिष्ठ नेत्रीगण और रायपुर सहित विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
- रायपुर - टीम प्रहरी अभियान अंतर्गत रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ संजीव शुक्ला और रायपुर जिला कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह के आदेशानुसार और नगर निगम रायपुर के आयुक्त श्री संबित मिश्रा के निर्देशानुसार रायपुर नगर निगम क्षेत्र में जनहित में जनसुविधा हेतु मार्गो में सड़क यातायात सुगम और सुव्यवस्थित बनाने छत्तीसगढ़ शासन की लोककल्याणकारी मंशा के अनुरूप रायपुर जिला प्रशासन एवं रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के मार्गनिर्देशन में रायपुर नगर पालिक निगम मुख्यालय नगर निवेश उड़नदस्ता द्वारा सम्बंधित जोनों की नगर निवेश विभाग टीमों सहित मिलकर निरन्तर अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है.टीम प्रहरी अभियान अंतर्गत आज रायपुर नगर निगम जोन क्रमांक 8 के अंतर्गत क्षेत्र में एम्स हॉस्पिटल के सामने जनहित में जनसुविधा की दृष्टि से मुख्य सड़क मार्ग जीईरोड टाटीबंध क्षेत्र में सड़क यातायात सुगम एवं सुव्यवस्थित बनाने हेतु रायपुर नगर पालिक निगम मुख्यालय नगर निवेश उड़न दस्ता टीम प्रहरी टीम, नगर निगम जोन क्रमांक 8 नगर निवेश विभाग टीम एवं रायपुर पुलिस कमिश्नरेट, यातायात पुलिस विभाग की टीम द्वारा अभियान चलाया गया और ठेलों को प्रमुख सड़क मार्ग से हटाने की कार्रवाई करते हुए सम्बंधित ठेला संचालकों को दोबारा ठेले सड़क मार्ग पर कदापि नहीं लगाने की कड़ी चेतावनी देते हुए स्थल पर सम्बंधित कब्जाधारी ठेला संचालकों पर लगभग 8000 रूपये का ई जुर्माना करने की कार्रवाई की गयी. टीम प्रहरी अभियान अंतर्गत कार्रवाई से राहगीरों और वाहन चालकों को प्रमुख सड़क मार्ग जीई रोड टाटीबंध क्षेत्र के कब्जामुक्त होने पर यातायात जाम की समस्या से त्वरित राहत प्राप्त हुई.
- -महाराष्ट्र मंडल की वर्कशाप में अध्यक्ष सहित तमाम पदाधिकारियों ने कार्यक्षमता बढ़ाने के दिए अहम टिप्सरायपुर। अपने कार्यों को अपडेट किए बिना न तो आपकी तरक्की हो सकती है, न ही आपकी संस्था की। यदि अपने आपको को अपनी संस्था के लिए महत्वपूर्ण बनाए रखना है और कैरियर के दृष्टिकोण से अपनी संभावनाओं को भी प्रबल रखना है, तो आपको हमेशा अपने तय कार्यों को और भी बेहतर तरीके से करने और नए- नए कार्यों को सीखने के लिए जिज्ञासु होना पड़ेगा। महाराष्ट्र मंडल के सभी प्रकल्पों के सौ से अधिक कर्मचारियों- शिक्षक स्टाफ की कार्यशाला में इस आशय के विचार मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा।काले ने कहा कि जब हम अपने कार्यस्थल को मेरी संस्था, मेरा विद्यालय मानने लगेंगे, तो हमें वहां समस्या के साथ उसका समाधान भी नजर आने लगेगा। इससे हमारा काम प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हमारा कार्यस्थल जब हमें अपना लगने लगेगा तो स्वाभाविक है कि हम ‘ये मेरा काम- वो तेरा काम’ की मानसिकता से भी ऊपर उठ जाएंगे। स्टार्टअप कैरियर काउंसलर प्रसन्न निमोणकर ने एटीट्यूड और बिहेवियर पर मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि एटीट्यूड को घमंड के रूप में लेना गलत है और यह किसी शब्दकोष में लिखा भी नहीं है। अच्छे बिहेवियर से आपके आगे बढ़ने की संभावना भी बढ़ती है। इस मौके पर वरिष्ठ रंगसाधक अनिल कालेले ने कम्यूनिकेशन स्कील पर बेहद सारगर्भित संबोधन किया।मंडल की उपाध्यक्ष गीता दलाल ने वर्किंग कल्चर और अपडेट विषय पर जीवन बीमा निगम में अपनी 37 वर्षों की नौकरी का अनुभव साझा करते हुए कहा कि बार-बार ऐसी स्थितियां- परिस्थितियां बनते रहती हैं, जब आपको अपने निर्धारित कार्यों से अलग, कार्यालय से बाहर फील्ड में काम करना पड़ता है, अपनी संस्था का प्रतिनिधित्व करना पड़ता है। यह कार्य आपको स्वस्फूर्त और पूरे जोश के साथ करना चाहिए। काम के दौरान बहुत सी गलतियां होती हैं और अधिक व्यस्तता के कारण बहुत से काम भी छूट जाते हैं, तो आपको विभागाध्यक्ष के साथ कार्यों का यथोचित बंटवारा कर गलतियों को खत्म करने की दिशा में काम करना चाहिए। संत ज्ञानेश्वर स्कूल के प्रभारी परितोष डोनगांवकर ने वर्कशॉप में ड्यूटी में अनुशासन के महत्व पर बिंदुवार जानकारी दी और बताया कि यह आपके टोटल परफार्मेंस को किस तरह अपग्रेड करता है।सचिव चेतन दंडवते ने कहा कि जब भी आप करें, तो पूरी जवाबदेही से करें। हर सफलता के लिए कोई जिम्मेदार होता है, तो किसी विफलता, गड़बड़ी या सेवा में कमी का भी तो कोई न कोई जिम्मेदार है। यदि हम मन लगाकर काम करें, जवाबदेही से काम करें तो भविष्य में वो गलती नहीं होगी। अगर हम ड्यूटी निपटाकर घर जाने की जल्दबाजी में हैं, तो हमारे काम में क्वालिटी नहीं आ सकती और काम समय पर हो भी नहीं सकता। प्रबल इच्छाशक्ति के साथ टीमवर्क से काम करें, तो हमारे काम स्कूल के बच्चों के अभिभावकों, मेस के ग्राहकों व सभासदों को पसंद आएगा और उसका प्रतिसाद हमें भी मिलेगा।सुबोध टोले ने कहा कि संस्था में अपनी भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए और उसमें आपके कार्यों में निरंतर गुणवत्ता बनी रहनी चाहिए। आपके परिणाममूलक कार्यों की निरंतरता ही संस्था में आपको विश्वसनीय बनाएगी। आपके कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही से ही संस्था में आपका प्रभाव बढ़ेगा। अपने कार्यों की समीक्षा करने पर ही आप अपने कार्य में सुधार करेंगे। महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने मंडल टीम से कहा कि समय के साथ आपके कार्यों में बदलाव जरूरी है। संस्था की उत्तरोत्तर प्रगति के लिए ड्यूटी के अलावा एक- दूसरे के साथ सहयोग करना चाहिए। संस्था में आपका अनुशासन और अच्छा व्यवहार बाहरी लोगों को भी प्रभावित करता है। वर्कशाप की शुरुआत सचेतक रविंद्र ठेंगड़ी ने टारगेट बेस्ड वर्किंग सिस्टम विषय पर मागदर्शन करने के साथ की।अंत में मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन ने आभार व्यक्त किया।
- -एक घंटा खेल के मैदान में’ एवं ‘खेलेगा भारत, जीतेगा भारत’ की थीम पर हुआ आयोजनरायपुर । भारत सरकार के खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा भारतीय खेल प्राधिकरण के निर्देशानुसार अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष्य में मेजर ध्यानचंद की स्मृति में खेल दिवस समारोह का आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रातः 8ः30 बजे से किया गया।’कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय शर्मा ने की।’ कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारीगण, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ हॉकी के महान खिलाड़ी एवं भारतीय खेल जगत के प्रेरणास्रोत मेजर ध्यानचंद जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धा पूर्वक नमन किया गया। इसके पश्चात उपस्थित अतिथियों को पुष्प गुच्छ भेट कर स्वागत किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में छात्र-छात्राओं को खेलकूद, योग एवं नियमित शारीरिक गतिविधियों के महत्व एवं उनसे होने वाले शारीरिक तथा मानसिक लाभों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा दैनिक जीवन में खेल एवं व्यायाम को शामिल करने के लिए प्रेरित किया।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के खेल अधिकारी डॉ. राम कुमार ठाकुर द्वारा लिखित पुस्तक “Physical Education, First Aid, Yoga and Meditation: A Practical Perspective” का विमोचन कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय शर्मा एवं उपस्थित अतिथियों द्वारा किया गया। पुस्तक में शारीरिक शिक्षा, प्राथमिक उपचार, योग एवं ध्यान से संबंधित विषयों को व्यावहारिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों को खेलकूद एवं शारीरिक गतिविधियों में अधिक से अधिक भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने फिट इंडिया मूवमेंट के अंतर्गत आयोजित ‘एक घंटा खेल के मैदान में’ कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से प्रतिदिन कम से कम एक घंटा खेल एवं शारीरिक गतिविधियों के लिए समर्पित करने का आह्वान किया। इस कार्यक्रम में डॉ. प्रवीण वर्मा, डॉ. आशुतोष दुबे, सूबेदार मेजर गोवर्धन शर्मा, डॉ. राम कुमार ठाकुर सहित विश्वविद्यालय के अधिकारीगण, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।कार्यक्रम का आयोजन इस वर्ष ‘एक घंटा खेल के मैदान में’ अभियान के अंतर्गत ‘खेलेगा भारत, जीतेगा भारत’ की थीम पर किया गया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में छात्र-छात्राओं के लिए एक घंटे के जुंबा एवं अन्य शारीरिक गतिविधियों का अभ्यास कराया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
- -बस्तर में राखी ने बदली 'दुश्मनी' की परिभाषा-25 साल नक्सली संगठन में रहीं मीना ने जवानों की कलाई पर बांधी राखी-महिला पुलिसकर्मियों ने भी बढ़ाया भाईचारे का हाथरायपुर / कलाई आगे बढ़ी तो कुछ पल के लिए जैसे समय ठहर गया। सामने सुरक्षा बल का जवान था और हाथ में राखी लिए खड़ी थी वह महिला, जिसकी जिंदगी के करीब 25 साल जंगल, नक्सली संगठन और संघर्ष के बीच बीते थे। कभी जिस वर्दी को देखकर मन में टकराव और अविश्वास पैदा होता था, उसी वर्दी की कलाई पर इस बार उसने राखी बांधी। जवान ने भी बहन का रिश्ता स्वीकार किया, शगुन दिया और मिठाई खिलाई।भानुप्रतापपुर के सुरक्षा बल कैंप में रक्षाबंधन का यह दृश्य बस्तर की बदलती तस्वीर की कहानी कह रहा था। यह सिर्फ राखी बांधने का कार्यक्रम नहीं था। यह उस दूरी को पाटने की कोशिश थी, जो वर्षों के हिंसक संघर्ष ने समाज और सुरक्षा बलों के बीच पैदा कर दी थी।करीब 25 वर्षों तक नक्सली संगठन का हिस्सा रहीं मीना और अन्य पूर्व नक्सली महिलाओं के लिए यह पल सामान्य नहीं था। जंगल की जिंदगी में हथियार और संघर्ष उनका अतीत रहे हैं। लेकिन अब वही हाथ एक नए रिश्ते की शुरुआत कर रहे थे।सुरक्षा बल के कैंप में पहुंचीं पूर्व नक्सली महिलाओं ने जवानों की कलाई पर राखी बांधी। जवानों ने भी उन्हें बहन के रूप में स्वीकार किया। शगुन दिया, मिठाई खिलाई और इस रिश्ते को सम्मान दिया।यह तस्वीर इसलिए भी खास थी क्योंकि बस्तर में कई सालों तक सुरक्षा बल और नक्सली आमने-सामने रहे हैं। गोलियों और बारूदी सुरंगों के बीच बने इस तनाव के बीच एक राखी ने संवाद और विश्वास की एक नई जगह बनाई।इस आयोजन में महिला पुलिसकर्मियों ने भी हिस्सा लिया। कभी नक्सल हिंसा के खिलाफ अभियानों और सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा रहे सुरक्षा बल के जवान और पूर्व नक्सली महिलाएं इस दिन किसी संघर्ष के दो पक्ष नहीं, बल्कि एक-दूसरे के भाई-बहन नजर आए।रक्षाबंधन के इस छोटे से आयोजन में संदेश बड़ा था—अगर हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों को समाज में स्वीकार्यता मिले और सुरक्षा बलों के साथ विश्वास का रिश्ता बने, तो नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थायी शांति की राह और मजबूत हो सकती है।कांकेर एसपी श्री निखिल राखेचा ने इस पहल को नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में एक अनूठा प्रयास बताया।उन्होंने कहा, यह एक अनूठा प्रयास है कि नक्सलवाद की जो समस्या थी, उसके समाधान की दिशा में हम जो कदम बढ़ा रहे हैं, उसका यह प्रतीक स्वरूप रक्षाबंधन है। इस रिश्ते के धागे से रिश्ते सामान्य होंगे।एसपी ने कहा कि ऐसे प्रयास केवल त्योहार मनाने तक सीमित नहीं हैं। इनका उद्देश्य समाज में विश्वास बहाली को मजबूत करना और मुख्यधारा से जुड़ने की प्रक्रिया को गति देना भी है।करीब ढाई दशक तक नक्सली संगठन का हिस्सा रहना किसी भी व्यक्ति की जिंदगी पर गहरी छाप छोड़ता है। जंगल की जिंदगी, संगठन की सोच और संघर्ष के बीच बीते वर्षों के बाद मुख्यधारा में लौटना आसान नहीं होता। ऐसे में राखी का यह धागा मीना और उनके साथ आई महिलाओं के लिए एक नए सामाजिक रिश्ते की शुरुआत जैसा था।जिस समाज और सुरक्षा व्यवस्था से कभी दूरी रही, उसी समाज के प्रतिनिधि जवान की कलाई पर राखी बांधना यह संकेत भी है कि अतीत की कड़वाहट को पीछे छोड़कर नई जिंदगी की ओर बढ़ने की कोशिश जारी है।बस्तर की कहानी लंबे समय तक नक्सली हिंसा, मुठभेड़, शहीद जवानों और भय के इर्द-गिर्द लिखी जाती रही। गांवों में बंदूक की मौजूदगी ने सामान्य जीवन को प्रभावित किया। विकास की राह भी हिंसा के साए में आगे बढ़ती रही। लेकिन अब इसी बस्तर से कहानी के कुछ नए अध्याय सामने आ रहे हैं।हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटते लोग, गांवों में पहुंचती विकास की योजनाएं, बनती सड़कें, खुलते स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ सामाजिक विश्वास बहाली के प्रयास भी बदलाव का हिस्सा बन रहे हैं। भानुप्रतापपुर का यह रक्षाबंधन उसी बदलाव की मानवीय तस्वीर है।राखी का धागा छोटा है, लेकिन इस आयोजन का संदेश बड़ा है। यह संदेश उन लोगों के लिए है जो कभी हिंसा के रास्ते पर चले गए थे कि वापसी का रास्ता खुला है। यह समाज के लिए संदेश है कि मुख्यधारा में लौटने वालों को स्वीकार करना जरूरी है। और यह सुरक्षा बलों के लिए भी एक मानवीय पहल है कि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के साथ विश्वास का रिश्ता भी बनाया जा सकता है।नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रक्षाबंधन का यह आयोजन इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यहां राखी सिर्फ कलाई पर नहीं बंधी—यह भरोसे पर बंधी।छत्तीसगढ़ सरकार के नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शांति, विकास और विश्वास के साथ आगे बढ़ते बस्तर की यह तस्वीर बताती है कि किसी भी संघर्ष का अंत केवल बंदूक से नहीं होता। स्थायी शांति के लिए लोगों के बीच भरोसा लौटना भी उतना ही जरूरी है।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के संकल्प के साथ नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे प्रयासों के बीच यह पहल बस्तर के बदलते सामाजिक माहौल की एक भावुक तस्वीर पेश करती है।कैंप में राखी बंधने के बाद शायद सबसे बड़ा बदलाव यही था कि कुछ देर के लिए वहां किसी ने यह नहीं देखा कि सामने वाला कल कौन था।देखा तो सिर्फ इतना गया कि आज वह सामने खड़ा व्यक्ति कौन है—एक भाई, एक बहन और एक ऐसे समाज का हिस्सा, जो अपने अतीत से आगे बढ़कर शांति की ओर जाना चाहता है।बस्तर में कभी बंदूक रिश्तों के बीच खड़ी थी। इस रक्षाबंधन में उसी जगह एक धागा खड़ा था—रिश्तों का, भरोसे का और नए बस्तर का।
- -राष्ट्रीय खेल दिवस पर केटीयू में आयोजित हुए पारंपरिक व नवाचारी खेल- कुलपति, कुलसचिव संग विद्यार्थियों ने लिया हिस्सारायपुर । खेल केवल शारीरिक और मानसिक तंदुरुस्ती का जरिया नहीं, बल्कि यह विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी अंतिम क्षण तक संघर्ष कर विजय श्री हासिल करने का साहस प्रदान करता है। यह विचार कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (केटीयू), रायपुर के कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल ने राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए।विश्वविद्यालय प्रांगण में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. दयाल ने कहा कि खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों में टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, धैर्य, उत्साह, सकारात्मकता और आपसी समन्वय जैसे जीवन-मूल्यों का बीजारोपण होता है। ये गुण न केवल व्यक्तित्व को संतुलित और बहुआयामी बनाते हैं, बल्कि आज के दौर में तनाव मुक्त जीवन जीने का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं।राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष्य में परिसर में विविध पारंपरिक एवं नवाचारी खेलों की धूम रही। इसमें विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों ने 'ओंकार दौड़', 'केंद्र कबड्डी', 'नेताजी की पहचान', 'मत चूको चौहान', 'शेर-आदमी-बंदूक' और 'सुदर्शन चक्र' जैसी स्पर्धाओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।कार्यक्रम में कुलपति प्रो. दयाल के साथ विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुनील शर्मा, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। सभी ने खेल भावना का परिचय देते हुए विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
- -“राखी के धागे में विश्वास अपार, बहनों के साथ विष्णु भैया की सरकार।”-महतारी वंदन की 31वीं किस्त से मिली आर्थिक मदद, राखी और मिठाई की खरीदारी से आसान हुई त्योहार की तैयारियांरायपुर / भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस बार सरगुजा जिले की महिलाओं के लिए आर्थिक संबल और खुशियों का संदेश लेकर आया है। महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि त्योहार से पहले मिलने से महिलाओं को राखी, मिठाई और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीदारी में सहूलियत मिली है। लखनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत पुहपुटरा निवासी श्रीमती कुसुम शुक्ला के लिए भी समय पर मिली यह राशि रक्षाबंधन की खुशियों को दोगुना करने वाली साबित हुई।कुसुम शुक्ला ने बताया कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है। इस बार रक्षाबंधन से पहले 31वीं किस्त की राशि मिलने से उन्होंने अपने भाइयों के लिए राखी और मिठाई खरीदने की तैयारी कर ली है। समय पर मिली राशि ने त्योहार की खरीदारी को आसान बनाया और परिवार के साथ पर्व मनाने का उत्साह बढ़ाया है।वे कहती हैं कि महतारी वंदन योजना की राशि उनके लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि अपनी इच्छानुसार त्योहार मनाने और भाई-बहन के रिश्ते की खुशियों में आर्थिक रूप से सहभागी बनने का अवसर भी है।कुसुम शुक्ला ने कहा, “महतारी वंदन की राशि रक्षाबंधन से पहले मिलने से मैं बहुत खुश हूं। इस राशि से राखी और मिठाई खरीदकर अपने भाइयों के साथ खुशी से रक्षाबंधन मनाऊंगी। विष्णु भैया को हमारी तरफ से बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।”कुसुम शुक्ला बताती हैं कि नियमित रूप से मिलने वाली राशि से महिलाएं अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो रही हैं। घरेलू आवश्यकताओं के साथ त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों में भी महिलाएं अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार खर्च कर पा रही हैं।उनके अनुसार, महतारी वंदन योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ यह आत्मविश्वास भी दिया है कि वे परिवार की खुशियों और महत्वपूर्ण अवसरों में अपना योगदान दे सकती हैं।कुसुम शुक्ला ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रक्षाबंधन से पहले योजना की राशि मिलना बहनों के लिए खुशी की बात है। उन्होंने कहा, “राखी बांधने से पहले पैसा मिल गया है। इससे राखी और मिठाई लेने में मदद मिलेगी। मैं बहुत खुश हूं। दीदी-बहनों की तरफ से विष्णु भैया को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।”कुसुम के लिए इस बार रक्षाबंधन की खुशी में एक खास भाव जुड़ा है। भाई की कलाई पर राखी बांधने की तैयारी के साथ महतारी वंदन योजना से मिला आर्थिक संबल भी उनके उत्साह को बढ़ा रहा है। समय पर मिली राशि ने उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार त्योहार की खरीदारी करने का अवसर दिया है।महतारी वंदन योजना की नियमित सहायता महिलाओं के लिए आर्थिक सहारे के साथ आत्मविश्वास और सम्मान का आधार भी बन रही है। कुसुम शुक्ला की कहानी इसी बदलाव की तस्वीर है, जहां राखी के धागे में भाई-बहन के प्रेम के साथ विष्णु भैया के प्रति विश्वास और आभार का भाव भी जुड़ गया है।
- रायपुर । वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ की गौरवशाली लोकपरंपरा एवं संस्कृति के प्रतीक लोकपर्व भोजली तिहार के अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों को गाड़ा-गाड़ा बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि भोजली तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति श्रद्धा और आपसी भाईचारे का सुंदर प्रतीक है। यह पर्व हमारी ग्रामीण जीवनशैली और लोक आस्थाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि भोजली केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सामाजिक एकता, सौहार्द और सामूहिक खुशियों की जीवंत अभिव्यक्ति है। इस पर्व की परंपराएं हमारी संस्कृति और लोक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का कार्य करती हैं। उन्होंने कामना की कि भोजली दाई की कृपा से प्रदेश में सुख-समृद्धि, हरियाली और खुशहाली बनी रहे तथा सभी परिवारों के जीवन में आनंद और उल्लास का संचार हो।
- -प्रधानमंत्री आवास योजना ने दूरपति राठिया को दिया सुरक्षित और सम्मानजनक आशियाना-कच्चे मकान में बारिश, नमी और जहरीले जीव-जंतुओं का रहता था डर, अब पक्के घर में सुकून से बीत रहा जीवन-मेहनत-मजदूरी कर जीवन चलाने वाली एकल महिला के लिए पक्का आवास बना सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का आधाररायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार जरूरतमंद परिवारों को पक्का और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह योजना गरीब परिवारों के लिए केवल पक्की छत उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन में सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व लेकर आ रही है।रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत महलोई की निवासी दूरपति राठिया के जीवन में भी प्रधानमंत्री आवास योजना ने ऐसा ही सकारात्मक बदलाव लाया है। विधवा एवं एकल महिला दूरपति मेहनत-मजदूरी कर अपना जीवन-यापन करती हैं। सीमित आमदनी में रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना ही उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में अपने संसाधनों से पक्का मकान बनाना उनके लिए संभव नहीं था।दूरपति लंबे समय तक मिट्टी के कच्चे मकान में रहती थीं। बरसात का मौसम उनके लिए परेशानी और चिंता लेकर आता था। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता, घर के भीतर नमी और गंदगी फैल जाती तथा कच्ची दीवारों के कमजोर होने से मकान गिरने का खतरा बना रहता था। इसके साथ ही जहरीले जीव-जंतुओं के घर में प्रवेश की आशंका भी बनी रहती थी। ऐसे कठिन हालात के बीच सुरक्षित छत का सपना उनके लिए दूर की बात लगती थी।मेहनत-मजदूरी के सहारे जीवन आगे बढ़ाते हुए दूरपति को उम्मीद थी कि एक दिन उन्हें भी पक्का घर मिल सकेगा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) उनके इस सपने को पूरा करने का माध्यम बनी। योजना के अंतर्गत उनका आवास स्वीकृत हुआ और शासन से प्राप्त सहायता राशि से पक्के मकान का निर्माण संभव हो सका। वर्षों से देखा जा रहा उनका सपना आखिरकार साकार हुआ।आज दूरपति अपने पक्के प्रधानमंत्री आवास में सुरक्षित और सम्मान के साथ जीवन-यापन कर रही हैं। जिस बारिश के मौसम में पहले उन्हें छत टपकने और कच्ची दीवारों के कमजोर होने की चिंता रहती थी, अब उसी मौसम में वह अपने सुरक्षित घर में निश्चिंत रहती हैं। जहरीले जीव-जंतुओं और मकान के क्षतिग्रस्त होने का डर भी काफी हद तक दूर हो गया है।पक्का आवास मिलने से दूरपति के जीवन में केवल भौतिक बदलाव ही नहीं आया, बल्कि उनके आत्मविश्वास और मनोबल में भी वृद्धि हुई है। उनके लिए यह घर सुरक्षा के साथ-साथ सम्मान और सुकून का प्रतीक बन गया है। नए घर के सामने खड़ी दूरपति के चेहरे की खुशी इस बदलाव की सबसे सुंदर तस्वीर प्रस्तुत करती है।दूरपति राठिया ने पक्का आवास मिलने पर शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अपने पक्के घर में रहना उनके लिए बेहद खुशी और सुकून का अनुभव है। उन्होंने बताया कि पहले बारिश के दिनों में घर को लेकर चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब उन्हें सुरक्षित छत का सहारा मिल गया है।प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से छत्तीसगढ़ में ऐसे हजारों जरूरतमंद परिवारों को उनके सपनों का पक्का घर मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन की योजनाएं समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े परिवारों तक पहुंचकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। दूरपति राठिया की कहानी इसी विश्वास को मजबूत करती है कि सरकार की संवेदनशील पहल जब जरूरतमंद तक पहुंचती है, तो वर्षों का सपना भी सुरक्षित और सम्मानजनक आशियाने में बदल जाता है।
- -29 अगस्त से 1 सितंबर तक जशपुर में ‘चेकमेट एट जशपुर 2026-शतरंज का खेल हमें धैर्य, एकाग्रता और जीवन जीने की कला सिखाती है - श्री अरुण साव-12 राज्यों के 175 से अधिक खिलाड़ी और कोच हो रहे शामिल* हुए शामिलरायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने आज जशपुर में पहली बार आयोजित ‘चेकमेट एट जशपुर – अखिल भारतीय ओपन फिडे रेटेड शतरंज प्रतियोगिता 2026’ का शुभारंभ किया। खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा जशपुर जिला शतरंज संघ द्वारा 29 अगस्त से 1 सितम्बर तक जशपुर के पुरानी टोली स्थित कम्युनिटी हॉल में किया जा रहा है। इसमें देशभर के 12 राज्यों के 175 खिलाड़ी और कोच भागीदारी कर रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शतरंज परम्परा और संस्कृति से जुड़ा हुआ खेल है। शतरंज हमें जीवन जीने की कला सिखाती है। यह जीवन में धैर्य रखना, कोई कदम आगे बढ़ाने से पहले सोचना और निर्णय लेने की सीख देती है। कठिन समय में धैर्य न खोना, एकाग्रता बनाए रखना, सोच-समझकर आगे चलना और हर चुनौती का सामना करना शतरंज सिखाती है। इसके 64 खानों और 32 मोहरो में जीवन का सीख छिपा है । वनवासी कल्याण आश्रम के श्री योगेश बापट, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ रामप्रताप सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविन्द भगत, जशपुर जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री गंगा राम भगत, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेंद सिंह और मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री योगेश्वर उपाध्याय सहित जनप्रतिनिधि, खिलाड़ी एवं कोच बड़ी संख्या में शुभारंभ कार्यक्रम में उपस्थित थे।
- -“बहनों की खुशहाली एवं आत्मनिर्भरता का उपहार, विष्णु भैया की सरकार।”-काली माँ स्व-सहायता समूह से जुड़कर सुभद्रा ने लिया 1 लाख रुपए का ऋण, एक एकड़ में खीरे की खेती से बढ़ी आमदनी की उम्मीदरायपुर / ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाने में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बिहान से जुड़ने के बाद महिलाओं को समूह के माध्यम से ऋण और आवश्यक सहयोग उपलब्ध हो रहा है, जिसका उपयोग वे कृषि, पशुपालन, मछली पालन, सब्जी उत्पादन सहित विभिन्न आजीविका गतिविधियों में कर रही हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आय के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।इसी बदलाव की प्रेरक कहानी है अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सकालो की रहने वाली श्रीमती सुभद्रा मंडल की। काली माँ स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद सुभद्रा ने समूह के माध्यम से 1 लाख रुपए का ऋण लिया और इस राशि का उपयोग कर एक एकड़ भूमि में खीरे की खेती शुरू की। खेती के इस प्रयास के साथ उन्होंने अपनी आय बढ़ाने और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।सुभद्रा मंडल बताती हैं कि पहले आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण वे खेती-बाड़ी को बड़े स्तर पर नहीं कर पाती थीं। परिवार की आमदनी सीमित थी और रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद खेती में निवेश के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध नहीं हो पाती थी।वे बताती हैं कि खेती को आय के अतिरिक्त और स्थायी साधन के रूप में विकसित करने की इच्छा थी, लेकिन पूंजी के अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसे समय में बिहान से जुड़ना उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया।सुभद्रा ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी आर्थिक गतिविधि को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। समूह के माध्यम से ऋण सुविधा प्राप्त होने पर उन्होंने कृषि को आजीविका का साधन बनाने का निर्णय लिया और एक एकड़ में खीरे की खेती शुरू की।वे कहती हैं कि ऋण ने उन्हें केवल खेती शुरू करने के लिए पूंजी ही उपलब्ध नहीं कराई, बल्कि अपने दम पर कुछ करने का आत्मविश्वास भी दिया। अब वे अपनी मेहनत से उत्पादन बढ़ाकर परिवार की आय में योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।सुभद्रा मंडल का कहना है कि खीरे की खेती से प्राप्त होने वाली आमदनी से परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। साथ ही भविष्य में खेती से होने वाले लाभ को दोबारा आजीविका गतिविधियों में निवेश कर आय के स्थायी साधन को और मजबूत करने की योजना है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य अपनी मेहनत और निरंतर प्रयासों से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना तथा ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ना है। उनके लिए खेती अब केवल पारंपरिक कार्य नहीं, बल्कि परिवार की आय बढ़ाने और बेहतर भविष्य तैयार करने का माध्यम बन गई है।सुभद्रा मंडल ने बिहान योजना से जोड़ने और आजीविका गतिविधि शुरू करने के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध कराने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक गतिविधि शुरू करने और अपनी मेहनत को आय के अवसर में बदलने का रास्ता मिला है। उन्होंने कहा कि समूह के माध्यम से मिला आर्थिक सहयोग उनके लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण आधार बना है। अब वे खेती के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं।छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों के लिए आवश्यक सहयोग और ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। महिलाएं इन संसाधनों का उपयोग स्थानीय परिस्थितियों और अपनी रुचि के अनुरूप आजीविका गतिविधियों में कर रही हैं।सुभद्रा मंडल की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है, जहां स्व-सहायता समूह, संस्थागत ऋण और महिला की मेहनत ने मिलकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार की है। एक एकड़ में शुरू हुई खीरे की खेती अब उनके परिवार के लिए अतिरिक्त आय और बेहतर भविष्य की उम्मीद बन गई है।
- -महिला स्वसहायता समूह से जुड़कर मिला आत्मनिर्भरता का अवसर-आरएफ-सीआईएफ और बैंक ऋण से शुरू किया चिकन स्टोररायपुर / गांव की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता केवल एक सपना नहीं, बल्कि सही अवसर, मार्गदर्शन और मेहनत के साथ हासिल की जा सकने वाली उपलब्धि है। मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत मंझगवा की श्रीमती कमलेश यादव ने इसे अपनी मेहनत और लगन से साबित कर दिखाया है। कभी छोटे व्यवसाय को आगे बढ़ाने का सपना देखने वाली कमलेश आज अपनी मेहनत, हुनर और शासकीय योजनाओं से मिले सहयोग के बल पर ‘लखपति दीदी’ के रूप में नई पहचान बना रही हैं।कमलेश यादव वंदना महिला स्वसहायता समूह से जुड़ीं और समूह की अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालते हुए आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय प्रयास शुरू किए। स्वसहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आरएफ (रिवॉल्विंग फंड), सीआईएफ (कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड) और बैंक ऋण के माध्यम से आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए कमलेश ने अपने गांव में चिकन स्टोर का व्यवसाय शुरू किया। व्यवसाय के संचालन के साथ उन्होंने अपनी आय बढ़ाने के लिए सिलाई कार्य को भी जारी रखा।कमलेश ने एक ही आय के साधन पर निर्भर रहने के बजाय अपने हुनर और उपलब्ध अवसरों का बेहतर उपयोग किया। चिकन स्टोर के व्यवसाय के साथ सिलाई कार्य से होने वाली आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निरंतर मेहनत, व्यवसाय के प्रति लगन और आय के विविध साधनों के कारण उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई।यह उपलब्धि कमलेश के लिए केवल आर्थिक सफलता नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत भी है। आज वे अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान देने के साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।कमलेश यादव बताती हैं कि महिला स्वसहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहयोग और आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का उपयोग अपने व्यवसाय को खड़ा करने में किया और अपने हुनर को आय के साधन में बदलने का प्रयास किया।उनका कहना है कि स्वसहायता समूह ने उन्हें केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं दिया, बल्कि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी दिया। आज अपनी मेहनत से अर्जित आय के कारण वे स्वयं को अधिक आत्मनिर्भर महसूस करती हैं और भविष्य में अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाने के लिए उत्साहित हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वसहायता समूह महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। समूहों के माध्यम से उपलब्ध वित्तीय संसाधनों, बैंक ऋण और आजीविका संबंधी अवसरों का लाभ लेकर महिलाएं छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं और उन्हें आगे बढ़ाकर अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं।कमलेश यादव की कहानी इसी बदलाव की एक प्रेरणादायी मिसाल है। उन्होंने सरकारी सहयोग को अपनी मेहनत और हुनर के साथ जोड़कर एक छोटे व्यवसाय को आय का स्थायी साधन बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी बना सकती हैं।एक समय अपने छोटे व्यवसाय को आगे बढ़ाने का सपना देखने वाली कमलेश यादव आज एक सफल ग्रामीण महिला उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक होना उनके निरंतर प्रयासों का परिणाम है। ‘लखपति दीदी’ बनने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वसहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक गतिविधियां शुरू करने के लिए प्रेरित कर रही हैं।अपनी सफलता के लिए कमलेश यादव ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मिल रहा सहयोग उनके जैसे अनेक परिवारों के लिए नई उम्मीद और बेहतर भविष्य का रास्ता तैयार कर रहा है।कमलेश यादव की सफलता की कहानी यह बताती है कि जब महिला की मेहनत को समूह का साथ, शासन का सहयोग और अपने हुनर को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है, तो वह न केवल अपने परिवार की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन सकती है।
- -4.68 करोड़ के नए विकास कार्यों की घोषणा कीरायपुर ।उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने आज जशपुर कम्युनिटी हॉल में 93 करोड़ 91 लाख 98 हजार रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें अमृत मिशन 2.0 के तहत 86 करोड़ 99 लाख 21 हजार रुपए की पेयजल योजना और स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत 6 करोड़ 92 लाख 77 हजार रुपए लागत के एसटीपी का निर्माण शामिल हैं।उन्होंने कार्यक्रम में जशपुर नगर के विकास के लिए 4 करोड़ 68 लाख रुपए के नए कार्यों की भी घोषणा की। इनमें जशपुर नगर पालिका कार्यालय के सामने शॉपिंग कॉम्पलेक्स के निर्माण के लिए एक करोड़ 40 लाख रुपए, देशपांडे पार्क एवं तालाब सौंदर्यीकरण के लिए डेढ़ करोड़ रुपए, मटन मार्केट के लिए एक करोड़ 48 लाख रुपए और शव वाहन के लिए 30 लाख रुपए की राशि शामिल है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि जशपुर के विकास के लिए राशि की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ रामप्रताप सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविन्द भगत, जशपुर जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री गंगा राम भगत, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेंद सिंह और मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री योगेश्वर उपाध्याय भी भूमिपूजन कार्यक्रम में मौजूद थे।



























