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- -ढैंचा की खेती से बढ़ रही मिट्टी की उर्वरता, घट रही रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता-कृषि विभाग किसानों को टिकाऊ एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए कर रहा प्रोत्साहितरायपुर / छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार कृषि विभाग द्वारा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए किसानों को हरी खाद के उपयोग हेतु लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी पहल का सकारात्मक परिणाम सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम केशगंवा में देखने को मिला है, जहां प्रगतिशील किसान श्री नरेंद्र सिंह ने लगभग चार एकड़ भूमि में ढैंचा की फसल उगाकर उसे खेत में पलट दिया है। अब वे इसी खेत में धान की खेती करेंगे।किसान श्री नरेंद्र सिंह ने बताया कि कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ाने के उद्देश्य से ढैंचा की खेती अपनाई। उन्होंने बताया कि फूल आने से पहले ढैंचा को खेत में पलट देने पर यह कुछ ही दिनों में सड़कर प्राकृतिक जैविक खाद में परिवर्तित हो जाती है। इससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है और फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्व स्वाभाविक रूप से उपलब्ध हो जाते हैं।कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार ढैंचा जैसी दलहनी हरी खाद वाली फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मिट्टी को प्राकृतिक रूप से समृद्ध बनाती हैं। इसके साथ ही फास्फोरस, जिंक एवं आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता भी बढ़ती है, जिससे आगामी फसल का विकास बेहतर होता है।हरी खाद के उपयोग से मिट्टी की संरचना में उल्लेखनीय सुधार होता है। ढैंचा के अपघटन से बनने वाला ह्यूमस मिट्टी को भुरभुरा बनाता है, जिससे उसमें हवा और पानी का बेहतर संचार होता है। इससे जड़ों का विकास मजबूत होता है और फसल अधिक स्वस्थ एवं उत्पादक बनती है। साथ ही मिट्टी की जल धारण क्षमता भी बढ़ती है, जिससे नमी लंबे समय तक बनी रहती है और सिंचाई की आवश्यकता कम होती है। ढैंचा की सघन बढ़वार खरपतवारों की वृद्धि को भी प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में सहायक होती है।कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई से पहले ढैंचा, सनई अथवा अन्य हरी खाद वाली फसलों का उपयोग करें। इससे रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च कम होगा, मिट्टी की दीर्घकालीन उर्वरता बनी रहेगी और टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल तथा लाभकारी कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
- रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में प्रख्यात शिक्षाविद् और राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मां भारती के सच्चे सपूत थे, जिन्होंने राष्ट्र की अखंडता के लिए सर्वोच्च बलिदान देते हुए संपूर्ण जीवन देश सेवा के लिए समर्पित किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के दिखाए पथ पर अग्रसर होते हुए हम विकसित और सशक्त भारत का निर्माण करेंगे। इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
- -सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स का पंजीयन सुनिश्चित कराने के निर्देशरायपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी निकायों में बल्क वेस्ट जनरेटर्स का पंजीयन केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने संचालनालय से इस संबंध में सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को परिपत्र जारी किया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने परिपत्र जारी कर निकायों को जानकारी दी है कि केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड द्वारा वेस्ट जनरेटर के पंजीयन के लिए केन्द्रीकृत पोर्टल तैयार किया गया है। बल्क वेस्ट जनरेटर के पंजीयन के लिए केन्द्रीकृत पोर्टल https://swm.cpcb.gov.in 1 जून 2026 से प्रभावशील है। भारत सरकार द्वारा जारी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अनुसार चिन्हांकित सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स का पंजीयन केन्द्रीकृत पोर्टल पर किया जाना है। विभाग ने सभी निकायों को परिपत्र जारी कर केन्द्रीकृत पोर्टल पर चिन्हांकित सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स का पंजीयन कराना सुनिश्चित करने को कहा है।
- -103 करोड़ रुपये से अधिक के स्वास्थ्य अधोसंरचना कार्यों का भूमिपूजन-200 सीटर छात्रावास, कैंसर भवन विस्तार और आवासीय परिसर का होगा निर्माणरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज अटल बिहारी वाजपेयी सभागृह, चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर में 103 करोड़ रुपये से अधिक लागत के स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों का भूमिपूजन किया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ ही विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करेगा। प्रदेश में लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। यह परियोजनाएं प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई प्रदान करेंगी तथा मरीजों, विद्यार्थियों और चिकित्सकों सभी को इसका लाभ मिलेगा।इस अवसर पर छात्र-छात्राओं के लिए आधुनिक छात्रावास, कैंसर भवन के विस्तार तथा चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के आवासीय परिसर सहित विभिन्न निर्माण कार्यों की आधारशिला रखी गई।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पिछली बार मेडिकल कॉलेज आने पर विद्यार्थियों ने छात्रावास निर्माण की मांग रखी थी, जिसे सरकार ने गंभीरता से लेते हुए आज उसके निर्माण की शुरुआत कर दी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में जनता से किए गए अधिकांश वादों को पूरा किया है और "मोदी की गारंटी" को धरातल पर उतारा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और विकसित भारत के संकल्प की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए स्वस्थ छत्तीसगढ़ आवश्यक है। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के नेतृत्व में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग लगातार उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने विभाग के अधिकारियों एवं पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार का छत्तीसगढ़ को निरंतर सहयोग मिल रहा है। उन्होंने बताया कि डीएम कार्डियक कोर्स की स्वीकृति से लेकर अन्य स्वास्थ्य परियोजनाओं तक केंद्र सरकार ने हर मांग पर सकारात्मक सहयोग दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में छत्तीसगढ़ को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद) की भी सौगात मिलेगी, जिससे राज्य की समृद्ध औषधीय वनस्पतियों एवं आयुर्वेद को नई पहचान मिलेगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब नक्सलवाद से मुक्त होकर तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने दूरस्थ क्षेत्रों में घर-घर पहुंचकर लाखों लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया है। उन्होंने मेडिकल विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सरगुजा से लेकर बस्तर तक प्रदेश के हर क्षेत्र में सेवाएं देने का संकल्प लें और केवल शहरों तक सीमित रहने की मानसिकता न रखें।उन्होंने कहा कि सरकार चिकित्सा शिक्षा के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा विद्यार्थियों को बेहतर अधोसंरचना, छात्रावास एवं आधुनिक शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि लगभग 104 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले छात्रावास, कैंसर संस्थान विस्तार एवं अन्य अधोसंरचना परियोजनाएं चिकित्सा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग एवं निर्माण एजेंसियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा से पहले एवं उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं।स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हो रहा है। राज्य में पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति, नर्सिंग कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि, फिजियोथेरेपी कॉलेजों का विस्तार तथा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 10 एकड़ क्षेत्र में 100 बिस्तरों वाले योग एवं नेचुरोपैथी अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर का निर्माण भी प्रगति पर है।स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार ने पूर्व में लंबित कोरबा, कांकेर एवं महासमुंद मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्य प्रारंभ कराए हैं। बिलासपुर स्थित सिम्स का भी व्यापक उन्नयन किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि डीएम कार्डियक कोर्स प्रारंभ हो चुका है तथा जगदलपुर में जल्द ही छत्तीसगढ़ का दूसरा सबसे बड़ा हार्ट सेंटर स्थापित किया जाएगा।कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रथम परियोजना के तहत 200 सीटर आधुनिक छात्र-छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। इसमें विद्यार्थियों के लिए आधुनिक आवासीय सुविधाओं के साथ चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के लिए भी आवास उपलब्ध कराए जाएंगे।दूसरी परियोजना के तहत कैंसर भवन का द्वितीय से छठे तल तक विस्तार किया जाएगा। लगभग 11 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में बनने वाले इस भवन में आधुनिक लैब, 64-64 बिस्तरों वाले वार्ड, सिंगल रूम, आईसीयू तथा अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर विकसित किए जाएंगे, जिससे कैंसर रोगियों को उच्च स्तरीय उपचार सुविधाएं उपलब्ध होंगी।तीसरी परियोजना के अंतर्गत छात्राओं के लिए आधुनिक छात्रावास का विस्तार किया जाएगा, जिसमें अतिरिक्त कमरे, डॉरमेट्री, लाइब्रेरी, रिक्रिएशन हॉल तथा सभी आवश्यक आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि छात्राओं को सुरक्षित एवं बेहतर आवासीय वातावरण उपलब्ध हो सके।इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, सीजीएमएससी के चेयरमैन श्री दीपक म्हस्के, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री रितेश अग्रवाल, पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी, अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर सहित जनप्रतिनिधि, चिकित्सक, मेडिकल विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।
- -कलेक्टर की पहल से किसानों को मिलेगा अतिरिक्त सिंचाई का संबल- दलहन-तिलहन और मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी सशक्तमुंगेली। जिले में 270 आजीविका डबरी निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण, बदलेगी खेती की तस्वीरजल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देते हुए जिला प्रशासन मुंगेली ने ग्रामीण विकास और कृषि समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वीबीजी रामजी आयुक्त श्री तारण प्रकाश सिन्हा के सतत मार्गदर्शन एवं कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार के निर्देशन में जिले में 270 आजीविका डबरी निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए गए हैं। यह पहल किसानों को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। आजीविका डबरियों में वर्षा जल का वैज्ञानिक तरीके से संचयन किया जाएगा, जिससे खेतों में लंबे समय तक पानी उपलब्ध रहेगा। इससे सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी, फसल उत्पादन बढ़ेगा तथा किसानों को वर्षभर कृषि एवं अन्य आजीविका गतिविधियों के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा।कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल संरचनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि किसानों को दीर्घकालिक आजीविका का मजबूत आधार उपलब्ध कराना है। जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार, मत्स्य पालन और फसल विविधीकरण जैसे प्रयास किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये डबरियां वर्षा जल को संरक्षित कर उसे खेतों के समीप सुरक्षित रखेंगी। पहले जो पानी बहकर नालों और नदियों में चला जाता था, अब वही जल सिंचाई, भू-जल पुनर्भरण तथा कृषि उपयोग के लिए उपलब्ध रहेगा। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा तथा जल संकट से राहत मिलेगी। आजीविका डबरियों के माध्यम से किसान आवश्यकता पड़ने पर अपनी फसलों की सिंचाई कर सकेंगे। इससे सूखे की स्थिति में भी फसल सुरक्षित रहेगी, सब्जी एवं बागवानी का विस्तार होगा, कृषि लागत में कमी आएगी तथा उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होगी। सिंचाई सुविधा मिलने से किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ नकदी एवं उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती भी कर सकेंगे।डबरियों में उपलब्ध जल से दलहन एवं तिलहन फसलों को समय पर सिंचाई मिल सकेगी। इससे चना, मसूर, अरहर, मूंग, उड़द, सरसों, तिल सहित अन्य फसलों का उत्पादन बढ़ेगा। साथ ही फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और प्राकृतिक जोखिम भी कम होगा। जिन डबरियों में वर्षभर पर्याप्त जल उपलब्ध रहेगा, वहां वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन भी किया जा सकेगा। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा, ग्रामीणों को पोषणयुक्त खाद्य उपलब्ध होगा तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रभाकर पाण्डेय ने कहा कि आने वाले समय में इन आजीविका डबरियों का समुचित रखरखाव एवं अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे जिले की कृषि व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी तथा जल संरक्षण का यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा। डबरियों में संग्रहित वर्षा जल धीरे-धीरे भूमि में समाहित होकर भू-जल स्तर को बढ़ाने में सहायक होगा। इसका लाभ आसपास के कुओं, हैंडपंपों और बोरवेलों में भी जल उपलब्धता बढ़ने के रूप में मिलेगा। आजीविका डबरी जल संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर कृषि, टिकाऊ आजीविका और समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बनेगी।
- रायपुर / वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज प्रखर राष्ट्रवादी विचारक, शिक्षाविद एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर राजधानी के शारदा चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर विनम्र श्रद्धांजलि दी।इस अवसर पर श्री कश्यप ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्र निर्माण, राष्ट्रीय एकता और जनसेवा के प्रति उनके योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन देशभक्ति, समर्पण और राष्ट्रहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रेरणास्रोत है। उनके विचार आज भी समाज और युवा पीढ़ी को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते हैं।कार्यक्रम में रायपुर उत्तर विधानसभा के विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, श्री रमेश सिंह ठाकुर, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
- गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के जिला आगमन पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने उन्हें जिले की विशिष्ट पहचान एवं स्थानीय आजीविका का प्रतीक विष्णुभोग चावल का पैकेट भेंट कर सम्मानित किया।इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. देवांगन ने मंत्री श्री साहेब को बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा विष्णुभोग चावल का उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन किया जा रहा है। अपनी विशिष्ट सुगंध, उत्कृष्ट गुणवत्ता और पारंपरिक पहचान के कारण विष्णुभोग चावल जिले की एक विशेष पहचान बन चुका है तथा इससे ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को भी मजबूती मिल रही है।विष्णुभोग चावल के संबंध में जानकारी प्राप्त कर मंत्री श्री खुशवंत साहेब ने इसकी सराहना करते हुए कहा कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का विष्णुभोग चावल जिले की समृद्ध कृषि परंपरा और महिला स्व-सहायता समूहों की मेहनत का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने और बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों को निरंतर बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिससे किसानों और महिला समूहों की आय में वृद्धि हो तथा जिले की विशिष्ट पहचान प्रदेश और देशभर में स्थापित हो सके।कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने हरिभूमि एवं आईएनएच के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी को भी विष्णुभोग चावल का पैकेट भेंट कर सम्मानित किया तथा जिले की इस विशिष्ट कृषि उपज और आजीविका गतिविधियों की जानकारी साझा की। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री मनोज खलारी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
- -हितग्राहियों को घर बैठे मिल रही बैंकिंग सुविधाएं, योजनाओं की राशि प्राप्त करना हुआ आसानजगदलपुर । ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को सशक्त बनाने में बैंक सखियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनकी सक्रिय सेवाओं से अब ग्रामीणों को बैंकिंग कार्यों के लिए दूरस्थ बैंक शाखाओं तक जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो गई है। गांव में ही विभिन्न बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध होने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है तथा ग्रामीणों को त्वरित और सहज सेवाएं मिल रही हैं।बैंक सखियां माइक्रो एटीएम एवं आधार आधारित बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से नकद निकासी, जमा, बैलेंस जांच, धन अंतरण सहित अन्य बैंकिंग सेवाएं ग्रामीणों तक पहुंचा रही हैं। इसके साथ ही वे ग्रामीणों को डिजिटल लेन-देन, सुरक्षित बैंकिंग और वित्तीय साक्षरता के प्रति भी जागरूक कर रही हैं।बैंक सखियों के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा पेंशन, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांग पेंशन, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की मजदूरी, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं की राशि हितग्राहियों तक समय पर पहुंच रही है। इससे ग्रामीणों को लंबी दूरी तय कर बैंक जाने की परेशानी से राहत मिली है।विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगजनों एवं दूरस्थ अंचलों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए बैंक सखियां एक भरोसेमंद सहायक के रूप में कार्य कर रही हैं। घर के समीप ही बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध होने से लाभार्थियों को सम्मानपूर्वक और सुविधाजनक तरीके से अपनी राशि प्राप्त हो रही है।इसके साथ ही बैंक सखियां स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण परिवारों को नियमित बचत, बैंक खाते के उपयोग तथा डिजिटल भुगतान के लिए प्रेरित कर रही हैं। इससे गांवों में वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ हो रही है।बस्तर जिले में 141 बैंक सखी कार्य कर रही हैं जिन्होंने जून माह में पेंशन से संबंधित 3166 हितग्राहियों को ट्रांजेक्शन में 28 लाख 67 हजार 565 रुपए की राशि, एमविवाय के तहत 4097 हितग्राहियों को ट्रांजेक्शन में 38 लाख 82 हजार 470 रुपए की राशि, स्व सहायता समूहों के 22367 हितग्राहियों को 2 करोड़ 31 लाख 87 हजार से अधिक राशि, विबी जी राम जी (मनरेगा) में 2103 हितग्राहियों को 15 लाख 46 हजार 179 रुपए और अन्य 12026 वित्तीय हस्तांतरण में 01 करोड़ 44 लाख 78 हजार से अधिक राशि का वित्तीय गतिविधि की गई है ।बैंक सखियों की सक्रिय भागीदारी से शासन की वित्तीय समावेशन की अवधारणा को नई गति मिली है। वे गांव और बैंक के बीच एक मजबूत सेतु बनकर न केवल बैंकिंग सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा रही हैं, बल्कि ग्रामीणों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
- -100 से 125 दिन रोजगार, 261 से 300 रुपये मजदूरी, राजेश्वरी यादव ने जताई खुशीकांकेर। विकसित भारत ‘जी राम जी’ योजना ग्रामीण गरीबों, श्रमिकों और मेहनतकश मजदूर वर्ग के जीवन में भरोसे का सहारा बनी है। यह योजना मनरेगा का उन्नत और आधुनिक रूप है, जो ग्रामीण श्रमिकों के लिए 125 दिन के रोजगार की गारंटी देता है।कांकेर विकासखंड के ग्राम बेवरती निवासी श्रीमती राजेश्वरी यादव ने विकसित भारत जी राम-जी योजना के प्रति खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि पहले उन्हें मनरेगा के तहत 261 रूपए प्रतिदिन मजदूरी मिलती थी, जबकि अब योजना के तहत मजदूरी बढ़ाकर 300 रूपए प्रतिदिन कर दी गई है। इसके साथ ही अब ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार मिलने से उनकी आजीविका को और मजबूती मिलेगी।श्रीमती यादव ने कहा कि बढ़ी हुई मजदूरी और अतिरिक्त रोजगार के दिनों से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा तथा घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की यह योजना ग्रामीण श्रमिकों के लिए बेहद लाभकारी है और इससे गांव के अनेक परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने विकसित भारत जी राम-जी योजना के माध्यम से ग्रामीणों को अधिक रोजगार और बेहतर मजदूरी उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
- एमसीबी/ कहते हैं कि खेती में समय सबसे बड़ा धन होता है। यदि किसान को सही समय पर खाद, बीज और उर्वरक उपलब्ध हो जाएं तो उसकी आधी चिंता स्वतः ही समाप्त हो जाती है। मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के ग्राम चैनपुर निवासी सीमांत किसान नरेन्द्र सिंह, पिता सुदन सिंह, के लिए भी इस खरीफ सीजन में यही अनुभव नई उम्मीद लेकर आया है।नरेन्द्र सिंह के पास कुल 1.780 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसमें संपूर्ण 1.780 हेक्टेयर असिंचित भूमि शामिल है। सीमित संसाधनों के कारण समय पर कृषि आदान की व्यवस्था करना उनके लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। लेकिन इस वर्ष आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, चैनपुर शाखा मनेन्द्रगढ़ ने उनकी इस चिंता को दूर कर दिया। समिति से उन्हें खरीफ फसल के लिए आवश्यक कृषि सामग्री ऋण के माध्यम से उपलब्ध कराई गई, जिससे वे बिना किसी आर्थिक दबाव के समय पर अपनी खेती की तैयारी कर सके।समिति द्वारा उन्हें 50 किलोग्राम की एक बोरी आई.पी.एल. पोटाश (एमओपी), 500 मिलीलीटर की एक बोतल इफको नैनो डीएपी, 45 किलोग्राम की चार बोरी एन.एफ.एल. नीम लेपित यूरिया तथा छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम का लोहारी कोरिया धान (एमटीयू-1156) की 30-30 किलोग्राम की दो बोरियां उपलब्ध कराई गईं। इन कृषि आदानों ने उनकी खरीफ खेती को समय पर शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बेहतर उत्पादन की उम्मीद को मजबूत किया।नरेन्द्र सिंह का कहना है कि यदि खाद और बीज समय पर उपलब्ध नहीं होते तो बुवाई में देरी होने से उत्पादन प्रभावित हो सकता था। सहकारी समिति के माध्यम से आसानी से कृषि सामग्री मिलने से उन्हें न केवल राहत मिली, बल्कि गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक मिलने से अच्छी फसल की उम्मीद भी बढ़ी है। उनका विश्वास है कि आधुनिक कृषि तकनीकों और संतुलित उर्वरक उपयोग से इस वर्ष उत्पादन बेहतर होगा और परिवार की आय में भी वृद्धि होगी।यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद, बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहकारी समितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। शासन की किसान हितैषी व्यवस्था का लाभ सीधे खेत तक पहुंच रहा है, जिससे सीमांत और छोटे किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है तथा वे अधिक उत्साह के साथ खेती कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
- -लॉर्ड्स सिटी सोसाइटी में लगा रूफटॉप सोलर, एक साझा प्लांट से 27 घरों को मिलेगा लाभरायपुर । छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड सीएसपीडीसीएल के सिटी साउथ डिवीजन ने स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए रायपुर के लॉर्ड्स सिटी में वर्चुअल नेट मीटरिंग परियोजना का सफल क्रियान्वयन किया है। इस व्यवस्था के माध्यम से एक साझा रूफटॉप सोलर संयंत्र से अनेक परिवारों को सौर ऊर्जा का लाभ मिल रहा है।परियोजना के अंतर्गत 49.2 किलोवाट एवं 58.2 किलोवाट क्षमता के दो रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए गए हैं। इनसे कुल 27 उपभोक्ताओं को वर्चुअल नेट मीटरिंग सुविधा दी जा रही है। इस परियोजना का कार्य इलेक्ट्रोमैक डिवाइसेस के श्री मारूफ द्वारा पूरा किया गया।भारत सरकार की प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत रूफटॉप सोलर संयंत्रों पर आकर्षक सब्सिडी उपलब्ध है। वर्चुअल नेट मीटरिंग व्यवस्था हाउसिंग सोसायटी एवं अपार्टमेंट्स के लिए उपयोगी है क्योंकि इसमें प्रत्येक मकान पर अलग सोलर प्लांट लगाने की जरूरत नहीं होती। एक साझा सोलर संयंत्र से उत्पन्न बिजली का लाभ सभी पंजीकृत उपभोक्ताओं को मिलता है, जिससे बिजली बिल में बचत होती है और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है।सीएसपीडीसीएल के अधिकारीयों ने बताया कि लॉर्ड्स सिटी में वर्चुअल नेट मीटरिंग का सफल क्रियान्वयन रायपुर की आवासीय सोसायटियों के लिए एक उदाहरण है। जिन सोसायटियों में प्रत्येक घर पर अलग सोलर संयंत्र लगाना संभव नहीं है, उनके लिए यह व्यवस्था लाभकारी है। केंद्र सरकार की सब्सिडी से यह परियोजना और किफायती बन गई है। उन्होंने सभी आवासीय सोसायटियों से अपील की कि वे इस योजना का लाभ उठाकर बिजली बिल में बचत करें तथा हरित ऊर्जा अभियान में सहभागी बनें।लॉर्ड्स सिटी के निवासी श्री हसमुख भाई पटेल एवं श्री नारायण भाई पटेल ने कहा कि वर्चुअल नेट मीटरिंग व्यवस्था लाभदायक साबित हो रही है। साझा सोलर प्लांट से स्वच्छ ऊर्जा का लाभ मिल रहा है जिससे बिजली बिल में बचत हो रही है। सरकारी सब्सिडी के कारण यह परियोजना आर्थिक रूप से भी फायदेमंद रही। इस योजना के लिए हम मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी का आभार व्यक्त करते हैं।
- -NQAS मूल्यांकन में उत्कृष्ट प्रदर्शन, मरीजों को मिलेंगी और बेहतर सुविधाएंरायपुर । बीजापुर जिले का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) चेरपाल अब गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहचान बन गया है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत हुए बाह्य मूल्यांकन में स्वास्थ्य केंद्र ने सफलतापूर्वक सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कर जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता स्वास्थ्य विभाग की बेहतर कार्यप्रणाली, टीमवर्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने की प्रतिबद्धता का परिणाम है।03 और 04 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (NHSRC), नई दिल्ली की विशेषज्ञ टीम ने PHC चेरपाल का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान सामान्य प्रशासन, ओपीडी, आईपीडी, प्रयोगशाला, लेबर रूम, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन, संक्रमण नियंत्रण, दवा प्रबंधन, स्वच्छता, मरीजों को उपलब्ध सुविधाओं तथा अभिलेखों का गहन परीक्षण किया गया।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मार्गदर्शन तथा खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) के नेतृत्व में पूरी स्वास्थ्य टीम ने मूल्यांकन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारियों, चिकित्सा अधिकारियों, स्टाफ नर्सों, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO), ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारियों, मितानिनों तथा अन्य कर्मचारियों ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए मूल्यांकन दल को सभी आवश्यक जानकारी और अभिलेख उपलब्ध कराए।स्वास्थ्य विभाग ने मूल्यांकन दल द्वारा दिए गए सुझावों को भी गंभीरता से लिया है। इन सुझावों के अनुरूप आवश्यक सुधार किए जाएंगे, ताकि स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को और अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।PHC चेरपाल की यह उपलब्धि केवल एक मूल्यांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ क्षेत्र के हजारों लोगों को मिलेगा। बेहतर व्यवस्थाओं, प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के कारण मरीजों का उपचार अधिक प्रभावी और सुविधाजनक होगा। इससे लोगों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास भी और मजबूत होगा।PHC चेरपाल की सफलता यह साबित करती है कि समर्पित टीमवर्क, बेहतर प्रबंधन और निरंतर प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। यह उपलब्धि बीजापुर जिले में गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और भविष्य में अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।
- -नारायणपुर की अनिता वड्डे ने 'बिहान' और उन्नत मुर्गीपालन से बदली अपने परिवार की तकदीर, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं मिसालरायपुर। मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो और सही मार्गदर्शन यदि मिल जाए, तो परिस्थितियां बदलते देर नहीं लगती। इसे सच कर दिखाया है नारायणपुर जिले के विकासखंड नारायणपुर अंतर्गत ग्राम भाटपाल की रहने वाली अनिता वड्डे ने। कभी आर्थिक तंगहाली और अनिश्चित भविष्य से जूझने वाली अनिता आज समाज में 'लखपति दीदी' के रूप में अपनी एक नई और सम्मानजनक पहचान बना चुकी हैं।कुछ समय पहले तक अनिता वड्डे के परिवार की आजीविका का मुख्य साधन बेहद सीमित खेती और अस्थायी मजदूरी थी। आमदनी इतनी कम थी कि घर की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती थी। भविष्य को लेकर हमेशा एक चिंता बनी रहती थी, लेकिन अनिता ने अपनी इस नियति को स्वीकार करने के बजाय आत्मनिर्भर बनने की ठानी।अनिता के जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया, जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत 'जीवन स्व-सहायता समूह' से जुड़ीं। समूह में होने वाली नियमित बैठकों, बचत की आदतों और वित्तीय प्रबंधन के तौर-तरीकों ने उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास फूंका। इसी दौरान उन्हें बिहान के तहत संचालित एकीकृत कृषि क्लस्टर (आईएफसी) परियोजना के बारे में पता चला। पारंपरिक ढर्रे से हटकर कुछ नया करने की चाह में उन्होंने आधुनिक और वैज्ञानिक आजीविका पद्धतियों को अपनाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि बिहान योजना और एकीकृत कृषि क्लस्टर ने मुझे केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर ही नहीं बनाया, बल्कि समाज में सम्मान के साथ जीने का गौरव भी दिया है।आईएफसी क्लस्टर के माध्यम से मिले तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग ने अनिता के प्रयासों को पंख लगा दिए। उन्होंने 1500 चूजों की ब्रूडिंग (Brooding) की कमान संभाली और स्थानीय किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले चूजों की आपूर्ति शुरू की। इससे न केवल उनकी बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हुई। संतुलित आहार, नियमित टीकाकरण और बेहतर प्रबंधन जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उन्होंने मुर्गीपालन व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। वैज्ञानिक प्रबंधन का ही नतीजा था कि शुरुआती चरण में ही उन्हें 16 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई।इस शुरुआती सफलता ने अनिता के हौसलों को एक नई उड़ान दी है। आज वे अपने इस व्यवसाय का लगातार विस्तार कर रही हैं। अब उनका अगला लक्ष्य इस आजीविका के माध्यम से हर महीने 30 हजार रुपये तक की नियमित और स्थिर आय अर्जित करना है।आज उनका परिवार एक सुरक्षित और समृद्ध जीवन जी रहा है। अनिता अब सिर्फ अपने परिवार का सहारा नहीं हैं, बल्कि वे अपने पूरे गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणापुंज बन चुकी हैं। वे चाहती हैं कि गांव की हर महिला आर्थिक रूप से सक्षम होकर अपने पैरों पर खड़ी हो। अनिता वड्डे की यह कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सही अवसर और दृढ़ संकल्प के बल पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक सशक्तिकरण की नई इबारत लिख सकती हैं।
- -आईएफसी नर्सरी बनी किसानों की उम्मीद, गुणवत्तापूर्ण पौधों से बढ़ रही आय और आत्मनिर्भरताधमतरी । छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” के अंतर्गत जनपद पंचायत धमतरी द्वारा संचालित आईएफसी (IFC) परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है। सद्भावना महिला संकुल स्तरीय संगठन, दोनर के सहयोग से संचालित आजीविका सेवा केंद्र (नर्सरी इकाई) आज किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए गुणवत्तापूर्ण पौधों का विश्वसनीय स्रोत बन चुकी है। इस पहल ने न केवल किसानों को समय पर स्वस्थ पौधे उपलब्ध कराए हैं, बल्कि वैज्ञानिक खेती, जैविक उत्पादन और महिला सशक्तिकरण को भी नई दिशा दी है।पहले किसानों को सब्जी एवं फलदार पौधों के लिए दूर-दराज के बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता था। कई बार समय पर पौधे उपलब्ध नहीं होने या निम्न गुणवत्ता के कारण उत्पादन प्रभावित होता था। आईएफसी नर्सरी की स्थापना के बाद यह स्थिति बदली है। अब स्थानीय स्तर पर ही प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार कर किसानों तक समय पर पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे खेती की लागत कम हुई है और उत्पादन की संभावनाएं बढ़ी हैं।नर्सरी इकाई में टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, करेला, मूनगा (सहजन), पपीता, कटहल, नारियल सहित विभिन्न सब्जी एवं फलदार पौधों की उन्नत पौध तैयार की जा रही है। इन पौधों का वितरण उत्पादक समूहों एवं क्लस्टरों के माध्यम से विभिन्न ग्रामों के किसानों तक किया जाता है। इससे क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन को बढ़ावा मिला है और किसानों ने वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाना शुरू किया है।इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि नर्सरी का संचालन महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है। इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार, नियमित आय और उद्यमिता का अवसर प्राप्त हुआ है। समूह की महिलाएं पौध उत्पादन, देखरेख, विपणन और प्रबंधन जैसे कार्यों का सफलतापूर्वक संचालन कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।वर्तमान चरण में नर्सरी इकाई द्वारा 38,100 गुणवत्तापूर्ण पौधों का उत्पादन एवं वितरण किया गया है, जिससे ₹1,15,150 की आय अर्जित हुई। यह उपलब्धि महिला स्व-सहायता समूहों, ग्राम संगठन (VO), उत्पादक समूहों, आईएफसी एंकर तथा क्लस्टर टीम के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।इस पहल से किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होने के साथ-साथ जैविक खेती, पोषण वाटिका, फसल विविधीकरण तथा वैज्ञानिक खेती की अनुशंसित तकनीकों (POP) को भी बढ़ावा मिल रहा है। बेहतर गुणवत्ता के पौधों के कारण फसलों की वृद्धि, उत्पादन एवं आय में सकारात्मक सुधार देखने को मिल रहा है।यह उल्लेखनीय पहल कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री गजेंद्र सिंह ठाकुर, जिला परियोजना प्रबंधक (आजीविका) श्री अनुराग मिश्रा, जनपद पंचायत धमतरी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री वर्षा रानी चिकन्जूरी तथा ब्लॉक परियोजना प्रबंधक श्री प्रेमचंद सिन्हा के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है।आईएफसी नर्सरी इकाई यह सिद्ध कर रही है कि यदि महिलाओं की सहभागिता, आधुनिक कृषि तकनीक और संस्थागत सहयोग का प्रभावी समन्वय हो, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है। धमतरी की यह पहल आज अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है और ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण तथा किसानों की आय वृद्धि की दिशा में एक सफल शासकीय मॉडल के रूप में स्थापित हो रही है।
- -शिक्षा मंत्री ने दी पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलिरायपुर /स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने आज विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्मविभूषण से सम्मानित एवं छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अप्रतिम धरोहर डॉ. तीजन बाई के गृहग्राम गनियारी स्थित निवास पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत वे उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए तथा दाह संस्कार कार्यक्रम तक उपस्थित रहकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने घोषणा किया कि उनके गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नामकरण "डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी" के नाम से किया जाएगा।शिक्षा मंत्री श्री यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना, ओजस्वी वाणी और आजीवन समर्पण के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के एक स्वर्णिम अध्याय का अवसान है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने तथा शोकाकुल परिजनों एवं असंख्य प्रशंसकों को इस दुःख की घड़ी में संबल देने की प्रार्थना की।मंत्री श्री यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन लोकपरंपराओं, संस्कृति और कला के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित रहा। उनकी कला साधना, संघर्ष और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर स्थापित करने में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने डॉ. तीजन बाई के सम्मान में उनके गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नामकरण "डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी" के नाम से किया जाएगा। राज्य सरकार का यह निर्णय महान लोककलाकार के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगा तथा इससे भावी पीढ़ियों को उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व, जीवन-संघर्ष और सांस्कृतिक योगदान से निरंतर प्रेरणा प्राप्त होती रहेगी।
- रायपुर।. मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 6 जुलाई को रायपुर जिले के समोदा में 112 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे। इनमें 21 करोड़ 67 लाख रुपए के 67 कार्यों का लोकार्पण और 90 करोड़ 34 लाख रुपए लागत के 29 निर्माण कार्यों के भूमिपूजन शामिल हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन व लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। वन एवं पर्यावरण तथा रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब और सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आरंग क्षेत्र के ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में लोक निर्माण विभाग के 9 करोड़ 43 लाख रुपए के तीन कार्यों, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के 79 लाख रुपए के पांच कार्यों, नगर पंचायत समोदा के 6 करोड़ 67 लाख रुपए के 20 कार्यों तथा आरंग नगर पालिका में 4 करोड़ 78 लाख रुपए के 39 कार्यों का लोकार्पण करेंगे।श्री साय लोक निर्माण विभाग द्वारा किए जाने वाले 61 करोड़ 11 लाख रुपए लागत के 8 कार्यों, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के दो करोड़ 54 लाख रुपए के 11 कार्यों एवं समोदा नगर पंचायत के 8 करोड़ 70 लाख रुपए के 9 कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। वे स्वास्थ्य विभाग द्वारा नवा रायपुर के सेक्टर-17, कोटरा भाठा में 18 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे 100 बिस्तर अस्पताल का भी भूमिपूजन करेंगे।
- -राजकीय सम्मान के साथ हुई अंत्येष्टि- पुलिस के जवानों ने दिया गॉड ऑफ ऑनरदुर्ग / देश की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का पार्थिव शरीर आज पंचतत्व में विलीन हो गया। निवास ग्राम गनियारी के मुक्तिधाम में उनके पुत्र श्री दिलहरण पारधी ने मुखाग्नि दी। इससे पूर्व पुलिस के जवानों ने सम्मान में गॉड ऑफ ऑनर दिया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, सांसद श्री विजय बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, श्री ललित चंद्राकर, श्री रिकेश सेन एवं श्री अनूप शर्मा तथा संभाग आयुक्त श्री एस.एन. राठौर, आईजी श्री अभिषेक शांडिल्य, कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह, एसएसपी श्री विजय अग्रवाल ने पार्थिव देह पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दिये। अंत्येष्ठी में विशाल जनसमूह और लोक कलाकार बड़ी संख्या में उपस्थित थे।ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ की लोक कला को विश्व पटल पर गौरवपूर्ण स्थान दिलाने वाली महान पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का आज रविवार तड़के निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं और राजधानी रायपुर स्थित एम्स में उनका इलाज चल रहा था। डॉ. तीजन बाई ने आज सुबह करीब 3.15 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का नाम जब भी दुनिया में सम्मान के साथ लिया जाता है, तो सबसे पहले जिन हस्तियों का नाम सामने आता है उनमें पद्म विभूषण डॉ. तीजनबाई प्रमुख हैं। अपनी ओजस्वी आवाज, अद्भुत अभिनय और रंग-बिरंगे तानपुरे के साथ महाभारत की कथाओं को जीवंत करने वाली तीजनबाई ने पंडवानी जैसी लोककला को वैश्विक मंच तक पहुंचाया। बिना औपचारिक शिक्षा प्राप्त किए उन्होंने अपनी प्रतिभा और अथक संघर्ष के दम पर देश-विदेश में छत्तीसगढ़ की संस्कृति का परचम लहराया।डॉ. तीजनबाई का जन्म वर्ष 1956 में दुर्ग जिले (वर्तमान छत्तीसगढ़) के गनियारी गांव में पारधी समुदाय के एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम चुनुकलाल (या हुनुकलाल) पारधी और माता का नाम सुखवती देवी था। बचपन में उन्होंने अपने नाना ब्रजलाल से महाभारत की कथाएं सुनीं और वहीं से पंडवानी के प्रति उनका लगाव शुरू हुआ। उस दौर में महिलाओं के लिए पंडवानी की कापालिक शैली में प्रस्तुति देना सामाजिक रूप से स्वीकार्य नहीं था। जब तीजनबाई ने परंपरा को तोड़ते हुए मंच पर खड़े होकर अभिनय के साथ पंडवानी गाना शुरू किया, तो समाज ने उनका बहिष्कार तक कर दिया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कला को ही जीवन का उद्देश्य बना लिया।पंडवानी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकगायन शैली है, जिसमें महाभारत की कथाओं का गायन और अभिनय किया जाता है। पहले महिलाएं केवल बैठकर श्वेदमती शैलीश् में पंडवानी प्रस्तुत करती थीं, जबकि कापालिक शैली में मंच पर अभिनय के साथ प्रस्तुति पुरुष कलाकार देते थे।तीजनबाई इस परंपरा को बदलने वाली पहली महिला बनीं। उन्होंने कापालिक शैली में मंच पर अभिनय, संवाद, भाव-भंगिमा और स्वर के अद्भुत समन्वय से पंडवानी को नई पहचान दी। उनका तानपुरा कभी भीम की गदा, कभी अर्जुन का धनुष तो कभी दुर्याेधन की तलवार बन जाता है, जिससे दर्शक पूरी तरह महाभारत के दृश्य में खो जाते हैं।तीजनबाई ने अपनी कला का प्रदर्शन भारत ही नहीं बल्कि ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, तुर्की सहित अनेक देशों में किया। उनकी प्रस्तुतियों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय लोककला की नई पहचान बनाई। उन्होंने साबित किया कि लोककला किसी भाषा या सीमा की मोहताज नहीं होती। डॉ. तीजनबाई को कला जगत में उनके असाधारण योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है। पद्म भूषण से अलंकृत पद्मश्री (1988), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995), पद्म भूषण (2003) और पद्म विभूषण (2019) शामिल है। इसके अलावा देश-विदेश की अनेक संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया है और कई विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद उपाधियों से भी अलंकृत किया है।तीजनबाई केवल एक लोकगायिका नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक विरासत की सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिभा और मेहनत के सामने सामाजिक बंधन और कठिन परिस्थितियां टिक नहीं सकतीं। आज भी वे युवा कलाकारों को पंडवानी की शिक्षा देकर इस लोककला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। उनकी जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो एक छोटे से गांव की बेटी भी पूरी दुनिया में अपनी संस्कृति का परचम लहरा सकती है। डॉ. तीजनबाई छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान ही नहीं, बल्कि भारतीय लोककला की ऐसी अमूल्य धरोहर हैं, जिनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
- दुर्ग / राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा जारी "Community Mediation Towards a Litigation-Free Rural India" स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा ग्राम कुथरेल में सामुदायिक मध्यस्थता विषयक जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में न्यायालयीन वादों की संख्या में कमी लाते हुए स्थानीय स्तर पर आपसी संवाद एवं सहमति के माध्यम से विवादों का शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना है।कार्यक्रम में स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं), दुर्ग की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर तथा वरिष्ठ न्यायालय प्रबंधक ने ग्राम पंचायत भवन में आयोजित बैठक में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, महिला समूहों, पैरालीगल वालंटियर्स (PLVs), युवाओं एवं गणमान्य नागरिकों से संवाद किया।अपने संबोधन में स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं), दुर्ग की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा ने कहा कि सामुदायिक मध्यस्थता न्यायालयीन प्रक्रिया का विकल्प नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने वाला एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि अधिकांश स्थानीय विवाद संवाद, समझदारी एवं निष्पक्ष मध्यस्थता के माध्यम से प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त किए जा सकते हैं, जिससे समय, धन एवं श्रम की बचत होने के साथ-साथ पारिवारिक एवं सामाजिक संबंध भी सुरक्षित रहते हैं।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने ग्रामीणों को निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, विधिक साक्षरता कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम स्तर पर संवाद आधारित विवाद समाधान की संस्कृति विकसित करना तथा प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय तक सरल एवं त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना है।बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम के लिए जिले के चयनित ग्रामों में चरणबद्ध रूप से जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, मध्यस्थता उन्मुख कार्यशालाएं एवं जनसंवाद आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण स्वयं अपने छोटे-छोटे विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान करने के लिए प्रेरित हों। कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों ने सामुदायिक मध्यस्थता की अवधारणा का स्वागत करते हुए इसे ग्राम स्तर पर शांति, सद्भाव एवं सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने वाली प्रभावी पहल बताया। ग्रामीणों ने भविष्य में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता का आश्वासन भी दिया। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी, पैरालीगल वालंटियर्स, आंगनबाड़ी एवं मितानिन कार्यकर्ता, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं, युवा तथा बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आगामी दिनों में चयनित अन्य ग्रामों में भी इस प्रकार के संवाद एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि "वाद-मुक्त ग्रामीण भारत" की परिकल्पना को व्यवहारिक रूप से साकार करते हुए न्याय तक सरल पहुंच, सामाजिक समरसता एवं विवादों के वैकल्पिक समाधान की संस्कृति को व्यापक स्तर पर विकसित किया जा सके।
- दुर्ग / छत्तीसगढ शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृषकों का प्रोत्साहित करने एवं सम्मानित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष डॉ. खूबचंद बघेल, कृषक रत्न पुरस्कार प्रदान किया जाता है। इस वर्ष 2026 का पुरस्कार वितरण राज्य स्थापना दिवस, 01 नवम्बर 2026 को आयोजित होने वाले मुख्य समारोह में किया जाएगा। इस संबंध में कृषकों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, जिसकी अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।संयुक्त संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी अनुसार इच्छुक कृषक जो खेती में नवाचार, जैविक कृषि, उत्पादन में वृद्धि, कृषि यात्रिकीकरण या जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं, वे इस पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकते हैं। समस्त पात्र कृषक वे निर्धारित तिथि तक आवश्यक दस्तावेजों सहित आवेदन जिला कार्यालय में प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया, आवश्यक अर्हताएँ एवं अन्य जानकारी संबंधित विकासखंड / जिला कृषि कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।कृषकों से प्राप्त आवेदनों का सत्यापन संयुक्त संचालक कृषि द्वारा गठित विकासखंड स्तरीय छानबीन समिति द्वारा किया जाएगा। विकासखंड स्तरीय समिति कृषकों के प्रक्षेत्रों में जाकर आवेदन में उल्लेखित अधोसंरचना, कृषि आदान, सिंचाई संसाधन व अन्य जानकारी का प्रत्यक्ष निरीक्षण व अवलोकन सत्यापन उपरांत प्रतिवेदन जिला स्तरीय समिति को प्रस्तुत करेगी। जिला स्तरीय समिति द्वारा सूक्ष्म जांच उपरांत जिला से अधिकतम 03 उत्कृष्ट कृषकों का चयन कर जिला कलेक्टर के माध्यम से नामांकन संचालनालय कृषि को उपलब्ध कराया जाएगा।कृषक रत्न पुरस्कार छत्तीसगढ़ राज्य के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं प्रखर कृषक नेता डॉ. खूबचंद बघेल के नाम पर दिया जाता है, जिनके योगदान को याद करते हुए यह सम्मान उन कृषकों को दिया जाता है जिन्होंने कृषि के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का कार्य किया है।
- दुर्ग / छत्तीसगढ़ सरकार की डिजिटल सुशासन पहल ‘सेवा सेतु’ प्रदेश के नागरिकों तक सीधे सरकारी सुविधाएँ पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण जरिया बन चुकी है, जिससे आमजन को अब छोटे-छोटे कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसी तारतम्य में, डिजिटल सशक्तिकरण की एक प्रभावी झलक दुर्ग जिले के ग्राम बोरई में देखने को मिली, जहाँ विगत 3 जुलाई 2026 को आवेदित दो हितग्राहियों, जय ठाकुर और यमुना ठाकुर का सामाजिक प्रास्थिति (अनुसूचित जनजाति-गोड़) प्रमाण-पत्र अनुविभागीय अधिकारी श्री हरवंश सिंह मिरी द्वारा त्वरित रूप से स्वीकृत कर ऑनलाइन जारी किया गया। बिना किसी दफ्तर जाए, घर बैठे आईटी नियमों के तहत प्राप्त हुए ये डिजिटल दस्तावेज़ यह पुख्ता प्रमाण हैं कि ’सेवा सेतु’ व्यवस्था दूर-दराज के इलाकों में भी बेहद पारदर्शी, त्वरित और जन-अनुकूल तरीके से काम कर रही है। उल्लेखनीय है कि ‘सेवा सेतु’ छत्तीसगढ़ के नागरिकों तक डिजिटल सेवाएँ लाने की एक ऐसी खास पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से दूर-दराज विशेषकर ग्रामीण इलाकों में रहने वालों तक सरकार की योजनाएँ और सुविधाएँ पहुँचाना है। राज्य सरकार की इस डिजिटल पहल के तहत लगभग 36 विभागों की 528 सेवाएँ एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस नई डिजिटल व्यवस्था के शुरू होने से अब हितग्राहियों का समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है, साथ ही उन्हें अपनी पढ़ाई और नौकरी से जुड़े जरूरी प्रमाण-पत्र पाने के लिए दलालों और बिचौलियों से भी पूरी तरह मुक्ति मिल गई है।
- रायपुर । मंदिर हसौद तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम संकरी ( जावा ) के पंचायत ने ग्राम के कतिपय शासकीय भूमियों के खसरा नंबर व आबादी की भूमि पर कच्चे व पक्के चारदीवारी बना किये गये अवैध कब्जों को हटाने संकल्पित हो सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर मंदिर हसौद तहसील में पदस्थ संबंधित नायब तहसीलदार नीलम ठाकुर व थाना प्रशासन को ज्ञापन सौंप अवैध कब्जों को हटवाने की मांग की है ।सरपंच लीना विक्की वर्मा व उपसरपंच सरिता शिवा साहू के साथ पंचगण सुनीता साहू , गोपी साहू , चंद्रकला यादव , डा खेमन साहू , कुबेर दास मानिकपुरी , कमलेश राव , राजकुमारी जांगड़े ने यह ज्ञापन सौंपा । उनके साथ सरपंच प्रतिनिधि विक्की वर्मा व पूर्व उपसरपंच शिवा साहू भी थे । पंच भूपेंद्र कुर्रे व मंगतीन वर्मा व्यक्तिगत कारणों के चलते शामिल नहीं हो पाये ।
- रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना-2026 की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाने के आदेश जारी कर दिए हैं। मुख्य अभियंता (मानव संसाधन) कार्यालय द्वारा जारी संशोधित आदेश के अनुसार योजना की अवधि, जो पूर्व में 30 जून 2026 तक निर्धारित थी, अब 30 सितंबर 2026 तक प्रभावशील रहेगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना को उपभोक्ताओं से मिल रहे अच्छे प्रतिसाद को देखते हुए इसकी अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाने की घोषणा की थीउल्लेखनीय है कि कोरोना काल के दौरान आर्थिक कठिनाइयों के कारण बड़ी संख्या में घरेलू, बीपीएल एवं कृषि उपभोक्ता समय पर बिजली बिल जमा नहीं कर सके थे। ऐसे उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य शासन ने मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना प्रारंभ की। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 28 लाख 42 हजार पात्र उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल में लगभग 757 करोड़ रुपये की राहत प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत निम्नदाब घरेलू, बीपीएल एवं कृषि श्रेणी के अशासकीय उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल की मूल राशि एवं अधिभार में नियमानुसार छूट का लाभ प्रदान किया जा रहा है। योजना की अवधि बढ़ने से ऐसे पात्र उपभोक्ताओं को तीन माह का अतिरिक्त अवसर मिलेगा, जो अब तक किसी कारणवश इसका लाभ नहीं ले सके हैं।पावर कंपनी ने सभी पात्र उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे 30 सितंबर 2026 तक अपने निकटतम विद्युत कार्यालय से संपर्क कर योजना का लाभ उठाएं तथा बकाया बिजली बिलों का निराकरण कर छूट का लाभ प्राप्त करें। योजना की अन्य सभी शर्तें पूर्ववत लागू रहेंगी।
- -साय सरकार के जनकल्याणकारी योजनाओं का धरातल पर असर; पीएम जनमन आवास और महतारी वंदन योजना से आदिवासी परिवार को मिला सुरक्षित घर, आर्थिक संबल और सम्मानपूर्ण जीवनरायपुर । शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जब अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है, तब वह केवल एक योजना नहीं बल्कि किसी परिवार के जीवन में परिवर्तन की नई कहानी बन जाती है। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी की श्रीमती सरिता बैगा का जीवन इसका प्रेरक उदाहरण है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना और महतारी वंदन योजना के समन्वित लाभ से उनका परिवार आज सुरक्षित आवास, आर्थिक संबल और सम्मानजनक जीवन की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।पहले सरिता बैगा का परिवार एक कच्चे मकान में रहता था। बरसात शुरू होते ही पूरे परिवार की चिंता बढ़ जाती थी। खपरैल की छत से पानी टपकता था, दीवारों में नमी भर जाती थी और हर वर्ष छत की मरम्मत तथा खपरैल बदलने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता था। छोटे बच्चों के साथ बारिश के दिनों में सुरक्षित रहना भी एक बड़ी चुनौती थी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप सरिता बैगा के परिवार को पीएम जनमन आवास योजना के तहत पक्का आवास स्वीकृत हुआ। ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत तथा ग्रामीण विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से योजना का लाभ समय पर मिला और आज उनका परिवार एक मजबूत, सुरक्षित एवं सुविधायुक्त पक्के घर में रह रहा है।नए आवास ने केवल उनके रहने की व्यवस्था नहीं बदली, बल्कि पूरे परिवार के जीवन में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना भी बढ़ाई है। अब बारिश का मौसम उनके लिए चिंता नहीं, बल्कि राहत और सुकून लेकर आता है। बच्चे सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई कर रहे हैं और परिवार सम्मानपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर रहा है।सरिता बैगा को राज्य शासन की महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता भी नियमित रूप से प्राप्त हो रही है। इस राशि से परिवार के दैनिक खर्चों, बच्चों की आवश्यकताओं और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी सकारात्मक बदलाव आया है।सरिता बैगा बताती हैं कि पहले उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका परिवार भी पक्के घर में रहेगा। आज शासन की योजनाओं ने उनके सपनों को साकार कर दिया है। वे मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि सरकार की जनहितैषी योजनाओं ने उनके परिवार को सुरक्षित आवास, आर्थिक सहयोग और बेहतर भविष्य का विश्वास दिया है।ग्राम पंडरीपानी में पीएम जनमन आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में ग्रामीण विकास विभाग, जनपद पंचायत गौरेला, ग्राम पंचायत तथा संबंधित मैदानी अमले की सक्रिय भूमिका रही। योजनाओं के पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन से पात्र हितग्राहियों को लाभ मिल रहा है, जिससे विशेष पिछड़ी जनजातियों सहित ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। सरिता बैगा की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन केवल आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराता, बल्कि गरीब और वंचित परिवारों के जीवन में स्थायी परिवर्तन लाकर उन्हें सम्मान, सुरक्षा और विकास की नई दिशा भी प्रदान करता है।
- -3 किलोवाट रूफटॉप सोलर संयंत्र से बिजली बिल हुआ शून्य, डबल सब्सिडी से मिली बड़ी राहतरायपुर । प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ आम नागरिकों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रही है। केंद्र एवं राज्य सरकार की संयुक्त पहल से संचालित इस योजना का लाभ लेकर सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत कंठी की निवासी श्रीमती अनीता चौधरी अब केवल बिजली की उपभोक्ता नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा का उत्पादन कर ऊर्जादाता बन गई हैं।श्रीमती अनीता चौधरी ने बताया कि पहले हर माह बढ़ते बिजली बिल का भुगतान उनके परिवार के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता था। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत उन्होंने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कराया। इसके बाद उनके घर की बिजली आवश्यकता सौर ऊर्जा से पूरी होने लगी और उनका बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो गया।उन्होंने बताया कि घरेलू उपयोग के बाद बची अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा रही है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। इस योजना से उनके परिवार का मासिक खर्च कम हुआ है और बिजली बिल की चिंता पूरी तरह समाप्त हो गई है।श्रीमती चौधरी ने बताया कि सोलर संयंत्र स्थापना के लिए उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार से संयुक्त रूप से लगभग 1 लाख 8 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस डबल सब्सिडी के कारण सोलर संयंत्र लगाना आसान और किफायती हो गया है। उन्होंने कहा कि अब सामान्य परिवार भी बिना अधिक आर्थिक बोझ के स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा को अपना सकते हैं।उन्होंने जिले के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक लोग प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेकर अपने घरों की छत पर सोलर संयंत्र स्थापित करें। इससे न केवल बिजली बिल में स्थायी बचत होगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। श्रीमती अनीता चौधरी ने योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल आम नागरिकों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे परिवारों को आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ हरित एवं सतत भविष्य की मजबूत नींव भी तैयार हो रही है।
- रायपुर। वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर गाथाकार, पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्मविभूषण से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय पंडवानी डॉ. गायिका तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।श्री चौधरी ने कहा कि तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और भारतीय कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी अद्वितीय प्रस्तुति शैली से पंडवानी को देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। लोककला के संरक्षण और संवर्धन में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा तथा आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि इस दुःखद घड़ी में उनकी गहरी संवेदनाएँ शोकाकुल परिजनों एवं उनके असंख्य प्रशंसकों के साथ हैं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों और प्रशंसकों को इस कठिन समय में दुःख सहने की शक्ति एवं संबल प्रदान करें।



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