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- -वन अमला पकड़ने निकला था तेंदुआ, पकड़ा गया अवैध सागौनमोहला । मोहला- मानपुर जिले में तेंदुए की लगातार आमद से जहां ग्रामीणों के बीच खौफ का आलम है वहीं वन महकमा भी तेंदुए को ट्रैक कर सुरक्षात्मक कसरतों में जुटा हुआ है। करीब एक पखवाड़े से तेंदुआ, वन अमला और ग्रामीणों के बीच जारी आंख मिचौली के बीच ऐसा वाक्या भी सामने आया जहां तेंदुए के पदचिन्ह को देखते देखते तेंदुए तक पहुंचने की कोशिश में जुटे वन अफसरों को तेंदुआ तो नहीं मिला लेकिन तेंदुए के पदचिन्ह सागौन के अवैध जखीरे तक पहुंचा दिया। तेंदुए की खोज में निकले वन महकमे के पकड़ में तेंदुआ तो नहीं आया पर करीब 2 लाख की अनुमानित लागत का अवैध सागौन वन अफसरों ने जरूर पकड़ लिया।24 जुलाई को पानाबरस वन विकास निगम के एसडीओ वीरेंद्र पटेल ने उक्ताशय की पुष्टि करते हुए जानकारी दी कि बीते बुधवार को ग्राम पंचायत पुत्तरगोंदी अंतर्गत ग्राम अमलीडीह में तेंदुए की आमद की सूचना पर वन विकास निगम के अफसर_कर्मी अमलीडीह गांव पहुंचे हुए थे। यहां तेंदुए के पदचिन्ह को ट्रैक करते हुए वन अमला तेंदुए की तलाश में जुटा हुआ था। इसी बीच पदचिन्ह का पीछा करते करते आगे बढ़ रहा वन अमला जब स्थानीय ग्रामीण अगनू राम कोरेटी की बाड़ी में पहुंचा तो यहां तेंदुआ तो नहीं मिला पर ग्रामीण द्वारा अपनी बाड़ी में रखा करीब 70 नग सागौन के लट्ठे वन अमले को मिल गया। जिसे जप्त कर वन अफसर मोहला स्थित वन काष्ठगार के आए।एसडीओ वीरेंद्र पटेल के मुताबिक बाड़ी के मालिक अगनू राम कोरेटी से सागौन लट्ठों के संबंध में पूछताछ की तो उसने दावा किया कि उक्त सागौन के लट्ठे उसके खुद के खेत से काटे गए हैं। हालांकि ग्रामीण अगनू राम के पास सागौन को सागौन लट्ठों के भंडारण व उन्हें काटे जाने को लेकर आवश्यक दस्तावेज नहीं मिला। ऐसे में सागौन लट्ठों का उक्त जखीरा अवैध माना गया। लिहाज़ा तमाम लट्ठों को जप्त कर मोहला स्थित वन विकास निगम के काष्ठगार ला लिया गया।एसडीओ वीरेंद्र पटेल के मुताबिक लगभग 70 नग जप्त सागौन लट्ठों का मेजरमेंट किया जा रहा है। वहीं आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करते हुए मामले की जांच भी की है रही है। एसडीओ श्री पटेल के मुताबिक हालांकि लट्ठों का मेजरमेंट अभी बाकी है लेकिन प्रथम दृष्टया इन सागौन लट्ठों की अनुमानित लागत करीब दो लाख रुपए है। बहरहाल जांच_पड़ताल जारी है। यदि ग्रामीण अगनू राम द्वारा तत्काल सागौन भंडारण व उनकी कटाई के आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया तो उक्त सागौन लट्ठों को विधिवत राजसात किया जाएगा। तथा अवैध सागौन कटाई व भंडारण को लेकर उक्त ग्रामीण के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्यवाही भी की जाएगी।
- -53 से बढ़कर 56 प्रतिशत हो गया जल भरावधमतरी। धमतरी जिले में हो रही बारिश से बांधों के जलस्तर में धीरे-धीरे बढ़ोत्तरी हो रही है। 20 जुलाई तक गंगरेल बांध का जल 53.46 प्रतिशत रहा। 24 जुलाई को जलस्तर बढ़कर 56.26 प्रतिशत हो गया। इसी तरह अन्य बांधों की स्थिति में भी सुधार आया है।गंगरेल बांध के केचमेंट एरिया में बारिश हो रही है। यहां 24 जुलाई को 61 मिमी वर्षा रिकार्ड दर्ज किया गया। गंगरेल बांध का वाटर लेवल 344.70 मीटर है। बांध में 1935 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है। जबकि जावक नील है। बांध का लाईव स्टोरेज केपिसिटी 27.079 टीएमसी है। अब तक बांध में 56.26 प्रतिशत पानी भर चुका है। बांध को लबालब भरने में अभी अधिक बारिश को जरूरत है। माड्मसिल्ली बांध का जल स्तर 369.22 मीटर है। लाईव केपिसिटी 1.46 टीएमसी है। अब तक यहां 25.59 प्रतिशत भर गया है। चार दिनों पहले इस बांध में 21.91 प्रतिशत पानी भरा था। सोंहूर बांध में गुरूवार को 17 मिमी वर्षा हुई। बांध का जल स्तर 464.17 मीटर है। ग्रास केपिसिटी 2.427 टीएमसी, लाईव केपिसिटी 1.774 टीएमसी है। बांध में 27.94 प्रतिशत पानी भर गया है। ज्ञात हो कि 20 जुलाई तक 23.20 प्रतिशत पानी भरा था। चार दिनों में लगभग 4 प्रतिशत पानी बढ़ा है। दुधावा बांध में 9 मिमी वर्षा हुई है। बांध का जल स्तर 417.29 मीटर है। लाईव केपिसिटी 2.283 टीएमसी है। यहां 22.75 प्रतिशत पानी भर गया है। केचमेंट एरिया में 265 क्यूसेक पानी की आवक है। 20 जुलाई तक यहां 21.86 प्रतिशत पानी भर पाया था। दुधावा में भी पानी की आवक कमजोर है। रूद्री बरांज का वाटर लेबल 322.66 मीटर है। यहां 69.75 प्रतिशत पानी भरा हुआ है।
- -उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन होंगे शामिलरायपुर।, राज्य स्तरीय उद्यमी सम्मेलन का आयोजन 26 जुलाई को रायपुर में किया जा रहा है। लघु उद्योग भारती छत्तीसगढ़ और उद्योग विभाग के संयुक्त तत्वाधान में यह सम्मेलन एवं वार्षिक बैठक स्थानीय जेल रोड स्थित होटल सेलिब्रेशन में दोपहर 2.30 बजे से प्रारंभ होगा। कार्यक्रम में राज्यभर के उद्यमी शामिल होंगे। राज्य स्तरीय उद्यमी सम्मेलन एवं वार्षिक बैठक में उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम के सीएसआईडीसी के चेयरमैन श्री राजीव अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि होंगे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं विशेष अतिथि के रूप में लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री प्रकाश चंद शामिल होंगे।यह सम्मेलन न केवल उद्यमियों के बीच नेटवर्किंग का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि उद्योग क्षेत्र में आ रही चुनौतियों, संभावनाओं और योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश सिंघानिया, महासचिव श्रीमती सी. पी. दुबे एवं कोषाध्यक्ष श्री दीपक उपाध्याय प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे।
- -सीजीएमएससी की दवाइयों को राज्य भर के अस्पतालों में पहुंचाने वाले लगभग 70 वातानुकूलित वाहन अब अत्याधुनिक जीपीएस से हैं लैस-स्वास्थ्य मंत्री ने सीजीएमएससी अध्यक्ष और स्वास्थ्य विभाग के सचिव के साथ वाहनों का किया अवलोकनरायपुर । स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने राज्य में दवाइयों की गुणवत्तापूर्ण सप्लाई के लिए विधानसभा में ये घोषणा की थी कि सभी वाहनों को जीपीएस से लैस किया जाएगा ताकि उनकी सही लोकेशन और सही समय का हमेशा पता चलता रहे । स्वास्थ्य मंत्री की इस घोषणा पर अमल करते हुए सीजीएमएससी ने लगभग 70 वाहनों में अत्याधुनिक जीपीएस लगाया है। इसकी खासियत है कि जहां नेटवर्क नहीं रहता वहां लोकेशन और रूट को रिकॉर्ड कर ये बाद में दिखाता है। इससे गड़बड़ी या देरी की कोई गुंजाइश नहीं रहती।स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल इन वाहनों की काम की कार्यशैली को जानने और देखने के लिए सीजीएमएससी के अध्यक्ष श्री दीपक म्हस्के और स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया के साथ नया रायपुर के सेक्टर 27 स्थित सीजीएमएससी कार्यालय पहुंचे और अवलोकन किया। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने वाहनों की गुणवत्ता, दवाइयों के स्टोरेज, वातानुकूलित व्यवस्था और मांगपत्र लेकर रवाना हो रहे ड्राइवरों की कार्य शैली को देखा। साथ ही वेबसाइट पर इस वाहनों की रियल टाइम लोकेशन भी देखी।लिमिटेड दवाइयों की गुणवत्ता को बरकरार रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए वातानुकूलित सप्लाई चैन वाहनों के जरिए दवाइयों, कंज्यूमेबल समान और रीजेंट्स को पूरे राज्य में पहुंचाया जाता है। हर साल लगभग 1 हज़ार प्रकार की दवाएं और 6 सौ प्रकार के कंज्यूमेबल सामान तथा रीजेंट्स को पूरे राज्य में भेजा जाता है।इन वाहनों की खास बात है कि ये प्रोडक्ट क्वालिटी और दवाइयों की क्षमता को बरकरार रखते हैं। इसमें टेंपरेचर सेंसिटिव दवाइयों को अच्छे तरीके से रखा जाता है ताकि दवाइयों का टेंपरेचर नियंत्रण में रहे और वो खराब न हों। इनमें सुरक्षा के अनुसार दवाइयों का स्टोरेज होता है। इसकी वजह से प्राप्तकर्ता के पास सुरक्षित तरीके से दवाइयां पहुंचती हैं।इन वाहनों के माध्यम से दवाइयों की सप्लाई करने से दवाइयों का जीवन बरकरार रहता है। इस दौरान गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं होता है और बेहतर काम की वजह से सप्लायर और कस्टमर के रिश्ते को मजबूती मिलती है। सीजीएमएससी के इन वाहनों द्वारा वैक्सीनेशन और आपातकालीन कार्यक्रमों के संचालन में अहम भूमिका निभायी जाती है साथ ही राष्ट्रीय टीकाकरण और महामारी के दौरान त्वरित कार्य संपन्न करने में भी ये अहम भूमिका निभाते हैं।सीजीएमएससी ने पारदर्शिता के लिए इसे अपने वेबपोर्टल से लिंक किया है ताकि कोई भी गाड़ियों की लोकेशन को देख सके। इस दौरान सीजीएमएससी की प्रबंध संचालक श्रीमती पद्मिनी भोई ने स्वास्थ्य मंत्री के सामने राज्य में 16 वेयर हाउस की संख्या में इजाफा करते हुए इसे सभी जिलों में खोलने की मांग रखी जिस पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सहानुभूति पूर्वक विचार करने की बात कही है।
- -भगवान भोले की कृपा बनी रहे और हमारा देश व छत्तीसगढ़ सतत् रूप से विकास, शांति और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ता रहे : मुख्यमंत्रीरायपुर / सावन मास के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय के साथ आज बगिया स्थित श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर पहुंचकर पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की मंगलकामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सुप्रसिद्ध कथा वाचिका किशोरी राजकुमारी तिवारी द्वारा किए जा रहे शिव महापुराण कथा का श्रवण भी किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान भोलेनाथ की कृपा सभी पर बनी रहे और हमारा देश और छत्तीसगढ़ सतत् रूप से विकास, शांति और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ता रहे। उन्होंने कहा कि भगवान श्री भोलेनाथ के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है। हमारी सरकार की नई उद्योग नीति से आकर्षित होकर बीते छह से आठ महीनों में लगभग साढ़े छह लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार ने युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के अवसर सृजित किए हैं।इस अवसर पर फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर परिसर में आयोजित 01 लाख 108 पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं विशेष पूजन अनुष्ठान श्रद्धा, आस्था और शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन 22 जुलाई से प्रारंभ हुआ था और इसका समापन आज 24 जुलाई को विधिपूर्वक किया गया। पूरे आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। भक्तगण पूर्ण श्रद्धा, निष्ठा और भक्ति भाव से पार्थिव शिवलिंग निर्माण में सहभागी रहे। पूजन एवं अनुष्ठान का आयोजन प्रतिष्ठित विद्वान पंडितों द्वारा शास्त्र सम्मत विधियों के अनुसार किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो उठा। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, कमिश्नर श्री नरेंद्र दुग्गा, आईजी श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, जनप्रतिनिधिगण और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
- -हरेली पर्व किसान, खेत-खलिहान और गोधन की पूजा का अवसर है – विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह--हरेली पर्व हमारी धरती, परिश्रम और परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक – उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव-हरेली पर्व हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और कृषि संस्कृति को संरक्षित रखने की प्रेरणा देता है – राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा-मुख्यमंत्री श्री साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मंत्रीगण और जनप्रतिनिधियों ने की पूजा-अर्चनारायपुर।, छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और कृषि परंपरा से जुड़े पर्व हरेली के पावन अवसर पर राजस्व मंत्री के निवास कार्यालय में पारंपरिक उल्लास और श्रद्धा के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में सम्मिलित होकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया, साथ ही गौरी-गणेश, नवग्रहों और कृषि यंत्रों की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री द्वय श्री अरुण साव और श्री विजय शर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हरेली पर्व छत्तीसगढ़ की जीवनशैली, मेहनतकश किसानों की आस्था और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। हमारी सरकार किसानों के कल्याण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उत्थान और पारंपरिक मूल्यों को संरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत है। बच्चों में गेड़ी जैसी पारंपरिक विधाओं के प्रति आकर्षण बनाए रखना हमारी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा है। हमें चाहिए कि हम ऐसे पर्वों के माध्यम से अपनी नई पीढ़ी को भी छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जोड़ें।विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हरेली पर्व किसान, खेत-खलिहान और गोधन की पूजा का पर्व है। मान्यता है कि आज के दिन शिव-पार्वती स्वयं भू-लोक में आकर किसानों की खेती-किसानी को देखने आते हैं। हरेली से ही छत्तीसगढ़ में त्योहारों की श्रृंखला की शुरुआत होती है।उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है। यह हमारी धरती, परिश्रम और परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह पर्व हमारे किसानों की आस्था और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध को दर्शाता है।राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में निरंतर कार्य कर रही है। हरेली जैसे पर्व हमें हमारी जड़ों से जोड़ते हैं और कृषि संस्कृति को जीवंत रखने की प्रेरणा देते हैं। इस पर्व में गेड़ी चलाने की प्रतियोगिता बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। साथ ही गोधन को पौष्टिक आहार देकर ग्रामीणजन पशुधन के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।इस अवसर पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन, छत्तीसगढ़ी लोक गीतों की प्रस्तुति, गेड़ी चढ़ने की प्रतियोगिता और लोकनृत्यों ने पूरे माहौल को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम स्थल छत्तीसगढ़ी संस्कृति और लोकपरंपरा की झलक से सराबोर हो गया। कार्यक्रम में पारंपरिक कृषि औजारों की पूजा कर प्रकृति और कृषि परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संकल्प दोहराया।
- - खरीफ के लक्ष्य से 94 प्रतिशत खाद का भंडारण, 70 प्रतिशत का वितरण भी-डीएपी की कमी से निपटने तीन लाख बोतल से ज्यादा नैनो डीएपी उपलब्धरायपुर, /चालू खरीफ मौसम में राज्य ने खेती किसानी के लिए रासायनिक खादें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। राज्य सरकार ने चालू खरीफ मौसम में रासायनिक खादों के निर्धारित लक्ष्य से अभी तक 94 प्रतिशत खादों को भंडारण करा लिया है। इसके साथ ही भंडारित खाद में से 70 प्रतिशत खादों का वितरण भी किसानों को कर दिया गया है। राज्य में युरिया, एनपीके, पोटाश, सुपर फास्फेट जैसी रासायनिक खादें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और किसानों को उनकी मांग अनुसार सरकारी समितियों से लगातार मिल रही है। इस खरीफ मौसम के लिए राज्य में 14 लाख 62 हजार मिट्रिक टन खाद भंडारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य के विरूद्ध अभी तक 13 लाख 78 हजार मिट्रिक टन रासायनिक खादों का भंडारण सरकारी और निजी क्षेत्रों में काराकर किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य में अबतक भंडारित उर्वरकों मंे से किसानों ने 10 लाख 20 हजार मिट्रिक टन का उठाव कर लिया है। ठोस डीएपी की वैश्विक कमी से निपटने के लिए राज्य सरकार ने विकल्प के तौर पर नैनो डीएपी की 3 लाख 5 हजार से अधिक बोतलों को भंडारण भी कराया है। डीएपी की कमी से निपटने के लिए किसानों को कृषि अमले द्वारा मिश्रित खादों के उपयोग की लगातार समझाईश दी जा रही है। इसके साथ ही खाद की काला बाजारी या जामाखोरी कर उचे दामों पर बेचने वालों के खिलाफ भी तेजी से कार्यवाही जारी है।कृषि अधिकारियांे से जानकारी के अनुसार प्रदेश में चालू खरीफ मौसम के लिए 6 लाख 22 हजार मिट्रिक टन युरिया का भंडारण किया गया है। जिसमें से 4 लाख 87 हाजर मिट्रिक टन युरिया का वितरण अबतक किसानों को किया जा चुका है, जो कि कुल भंडारण का 68 प्रतिशत है। इसी तरह 2 लाख 22 हजार मिट्रिक टन एनपीके के भंडारण के बाद अबतक 1 लाख 70 हजार मिट्रिक टन का वितरण हो चुका है। जो कि भंडारण का 95 प्रतिशत है। राज्य में 77 हजार मिट्रिक टन से अधिक पोटाश और 2 लाख 76 हजार मिट्रिक टन से अधिक सुपर फास्फेट चालू खरीफ में वितरण के लिए भंडारित किये गए है। इनमें से अबतक 90 प्रतिशत लगभग 53 हजार मिट्रिक टन पोटाश और 83 प्रतिशत लगभग 1 लाख 66 हजार मिट्रिक टन सुपर फास्फेट का उठाव किसानों ने कर लिया है। राज्य में इस वर्ष खरीफ मौसम के लिए 1 लाख 79 हजार मिट्रिक टन से अधिक डीएपी खाद का भंडारण किया गया है। जिसमें से 46 प्रतिशत लगभग 1 लाख 41 हजार मिट्रिक टन का उठाव किसानों ने कर लिया है।राज्य सरकार के निर्देश पर प्रदेश में इफको कंपनी द्वारा 3 लाख 5 हजार बोतल से अधिक नैनो डीएपी का भंडारण कराया गया है। इसमें से डबल लॉक केंद्रों में 82 हजार 470 बोतल, प्राथमिक सहकारी कृषि साख समितियों में अब तक 1 लाख 41 हजार 389 बोतल और निजी क्षेत्र में 48 हजार बोतल तरल नैनो डीएपी भंडारित है। इफको कंपनी के पास अभी भी 33 हजार बोतल से अधिक नैनो डीएपी शेष बचा है। नैनो डीएपी की आधा लीटर की बोतल सहकारी समितियों में 600 रूपए की दर पर किसानों के लिए उपलब्ध है। file photo
- -जनप्रतिनिधियों सहित मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी-गायता और बड़ी संख्या में जनसमुदाय हुआ शामिलरायपुुर।, हरियाली अमावस्या के मौके पर बस्तर की आराध्य देवी मां दन्तेश्वरी मन्दिर के सामने गुरुवार को पाट जात्रा पूजा विधान के साथ ही विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व शुरू हो गया। बस्तर दशहरा पर्व के इस प्रथम पूजा विधान में बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष श्री महेश कश्यप, विधायक जगदलपुर श्री किरण देव, महापौर श्री संजय पाण्डे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और बस्तर दशहरा पर्व समिति के पारंपरिक सदस्य मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी-गायता, पटेल, नाईक-पाईक, सेवादारों के साथ ही बड़ी संख्या में जनसमुदाय शामिल हुआ।बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित इस ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के पहले पूजा विधान पाट जात्रा में रथ निर्माण के लिए बनाए जाने वाले औजार ठुरलू खोटला तथा अन्य औजारों का परम्परागत तरीके से पूजा-अर्चना कर रस्म पूरी की गयी। इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व शुरू हो गया, जो इस वर्ष करीब 75 दिवस की अवधि तक पूरे आस्था, श्रद्धा और पूरे हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाएगा।बस्तर दशहरा पर्व के प्रमुख पूजा विधानों को निर्धारित तिथि अनुसार सम्पन्न की जाती है। जिसके तहत आगामी शुक्रवार 05 सितम्बर को डेरी गड़ाई पूजा विधान, रविवार 21 सितम्बर को काछनगादी पूजा विधान, सोमवार 22 सितम्बर को कलश स्थापना पूजा विधान, मंगलवार 23 सितम्बर को जोगी बिठाई पूजा विधान सहित बुधवार 24 सितम्बर से सोमवार 29 सितम्बर 2025 तक प्रतिदिन नवरात्रि पूजा एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, सोमवार 29 सितम्बर को सुबह 11 बजे बेल पूजा, मंगलवार 30 सितम्बर को महाअष्टमी पूजा विधान एवं निशा जात्रा पूजा विधान, बुधवार 01 अक्टूबर को कुंवारी पूजा विधान, जोगी उठाई पूजा विधान एवं मावली परघाव, गुरुवार 02 अक्टूबर को भीतर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, शुक्रवार 03 अक्टूबर को बाहर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, शनिवार 04 अक्टूबर को काछन जात्रा पूजा विधान एवं मुरिया दरबार होगा। वहीं रविवार 05 अक्टूबर को कुटुम्ब जात्रा पूजा विधान में ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई होगी और मंगलवार 07 अक्टूबर को मावली माता की डोली की विदाई पूजा विधान के साथ ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व सम्पन्न होगी।
- -धूमधाम से मनाया गया छत्तीसगढ़ का पहला लोक पर्व-छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोक जीवन और खानपान की दिखी झलक-श्री साव ने हल और कृषि औजारों की पूजा कर गौमाता को आटे की लोंदी खिलाई, गेड़ी का भी लिया आनंद-प्रदेशवासियों को दी हरेली की बधाई और शुभकामनाएंबिलासपुर । उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के नवा रायपुर स्थित शासकीय निवास पर आज सुबह से हरेली की धूम रही। उन्होंने सपरिवार हल और कृषि औजारों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर गौमाता को आटे की लोंदी और गुड़ खिलाया। उन्होंने गेड़ी का भी आनंद लिया। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक श्री रोहित साहू और श्री मोतीलाल साहू भी हरेली पर्व में शामिल हुए।हरेली पर उप मुख्यमंत्री श्री साव के निवास पर चहुंओर छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोक जीवन और खानपान की झलक दिखी। उन्होंने हरेली पर्व में शामिल होने अपने निवास पहुंचे सभी लोगों का परंपरागत छत्तीसगढ़ी व्यंजनों चौसेला, गुलगुल भजिया, बरा, टमाटर की चटनी और भजिया खिलाकर स्वागत व आवभगत किया। उन्होंने हरेली पर अपने निवास में शीशम का पौधा लगाया।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने प्रदेशवासियों को हरेली की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेली तीज-तिहारों से संपन्न छत्तीसगढ़ का साल का पहला लोक पर्व है। मुख्यतः कृषि और किसानों को समर्पित यह पर्व आज पूरे प्रदेश में उत्साह व उमंग के साथ मनाया जा रहा है। हरेली में गेड़ी का परंपरागत साथ बच्चों के लिए भी इस त्योहार को उत्साहपूर्ण बनाता है। हरेली से मेरे बचपन की कई अच्छी और सुखद यादें जुड़ी हुई हैं। रायपुर नगर निगम के सभापति श्री सूर्यकांत राठौर, खनिज विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष श्री छगन मूंदड़ा, बाल संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री यशवंत जैन, श्री पवन साय और श्री अनुराग अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि भी हरेली पर्व में शामिल हुए।
- -किसानों की खुशहाली और समृद्धि हमारा प्रमुख ध्येय: मुख्यमंत्री श्री साय-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ कर रहा है ऐतिहासिक प्रगतिः डॉ. रमन सिंह-किसानों की खुशहाली और हरियाली का उत्सव बना मुख्यमंत्री निवास का हरेली तिहार आयोजनरायपुर ।सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में आज हरेली पर्व का गरिमामय आयोजन हुआ। त्यौहार मनाने के लिए पूरे परिसर को ग्रामीण परिवेश में सजाया गया था। इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की खुशहाली और समृद्धि हमारी सरकार का मुख्य ध्येय है। हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की परंपरा, प्रकृति और खेती-किसानी से जुड़ा ऐसा पर्व है, जो हमें अपने मूल से जोड़ता है। आज पूरा छत्तीसगढ़ हरेली की खुशी में डूबा है। मुख्यमंत्री निवास में भी यह पर्व पूरे उल्लास और पारंपरिक तरीके से मनाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक हरेली को मनाने का अपना-अपना अंदाज है। लेकिन सभी जगह इसका रंग एक ही है, आस्था और उत्साह एक ही है। जिस तरह प्रकृति हमारा ख्याल रखती है, उसी तरह हमें भी प्रकृति का ख्याल रखना चाहिए। हरेली केवल खेती-किसानी का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह अपनी धरती की हरियाली और प्रकृति पूजा का भी त्यौहार है। छत्तीसगढ़ महतारी की कृपा हम सब पर बरसाती रहे और सभी किसान भाई खुशहाल रहें। यही मंगल कामना है।उन्होंने कहा कि श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने और 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा तय कर ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। हम सभी ने 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का सपना देखा है और इसके लिए हमने अपना विजन डॉक्यूमेंट भी बनाया है। हमारी सरकार राज्य से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए पूरी तरह से प्रयास कर रही है।हरेली त्योहार पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और किसान जीवन का उत्सव है। इस पावन अवसर पर मैं प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ। यह त्योहार प्रकृति, कृषि और पशुधन से जुड़े हमारे जीवन मूल्यों की गूंज है। उन्होंने कहा कि ऐसा विश्वास है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती स्वयं धरती पर आकर किसानों के बीच उपस्थित होते हैं और उनके खेतों का निरीक्षण करते हैं। यही कारण है कि इस दिन किसान अपने कृषि यंत्रों, हल-बैल और खेत-खलिहानों की पूजा करते हैं।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आज छत्तीसगढ़ कृषि के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति कर रहा है। किसानों को समर्थन मूल्य पर धान खरीद और विभिन्न योजनाओं में 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। यह हिंदुस्तान में किसी भी राज्य द्वारा किसानों के लिए किया गया सबसे बड़ा कार्य है। यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ में एक ऐसा मुख्यमंत्री है, जो केवल घोषणाएं नहीं करता, बल्कि धरातल पर किसानों के पसीने की कीमत चुका रहा है।इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, श्री विजय शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम, राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा , महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायकगण, निगम मंडल आयोग के अध्यक्ष सहित जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।
- -छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्वादों से सजी रही पारंपरिक थाली-ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला में जीवंत की छत्तीसगढ़ी पाक शैलीरायपुर / छत्तीसगढ़ की धरती पर जब भी कोई त्योहार आता है, तो वह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं होता, बल्कि वह जीवनशैली, परंपरा, स्वाद और सामाजिक सौहार्द का पर्व बन जाता है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास में पारंपरिक स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। प्रदेश की अतुलनीय पाक परंपरा को जीवंत करते हुए यहां आगंतुकों के स्वागत के लिए विशेष रूप से ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला जैसे दर्जनों पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी।बांस की सूप, पिटारी और दोना-पत्तल में परोसे गए इन व्यंजनों ने न केवल स्वाद, बल्कि प्रस्तुतीकरण में भी लोकजीवन की आत्मा को उजागर किया। अतिथियों ने गर्मागर्म पकवानों का स्वाद लेते हुए राज्य की पारंपरिक पाककला की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं भी इन व्यंजनों का स्वाद चखा और कहा की हरेली तिहार केवल खेती-किसानी का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी लोकसंस्कृति, हमारी परंपरा और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इन पारंपरिक व्यंजनों में हमारी माताओं-बहनों की मेहनत, सादगी और स्वाद की समृद्ध परंपरा छिपी है, जो हमारी असली पहचान है। यह आयोजन न केवल हरेली पर्व की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह प्रमाणित करता है कि छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी मिट्टी, उसके स्वाद और उसकी परंपराओं में रची-बसी है।इस अवसर पर परिसर का हर कोना छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सौंधी खुशबू से सराबोर था। कहीं ढोल-मंजीरों की थाप पर लोक नृत्य होते दिखे तो कहीं व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींचती रही। परंपरागत वेशभूषा में सजे ग्रामीण कलाकारों और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत और आत्मीय बना दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजनों ने इस आयोजन को एक स्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बताया।
- -सरगुजिहा कला पर केंद्रित सजावट में बस्तर और मैदानी छत्तीसगढ़ की भी सुंदर झलक-सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम-रंग-बिरंगी छोटी गेड़ियों, नीम और आम पत्तियों की झालर से आकर्षक बना कार्यक्रम मंडपरायपुर / छत्तीसगढ़ की परंपरा में “हरेली” मानव और प्रकृति के जुड़ाव को नमन करने का उत्सव है। हरेली आती है तो छत्तीसगढ़ के खेत-खलिहान, गाँव-शहर, हल और बैल, बच्चे-युवा-महिलाएँ सभी इस पर्व के हर्षोल्लास से भर जाते हैं। जिस हरेली पर्व से छत्तीसगढ़ में त्योहारों की शुरुआत होती है, उसके स्वागत में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री निवास के द्वार भी सज गए हैं। पूरा मुख्यमंत्री निवास श्रावण अमावस्या को मनाये जाने वाले हरेली पर्व की सुग्घर परंपरा के रंग में रंग गया है।हरेली पर मुख्यमंत्री निवास की सजावट के तीन प्रमुख हिस्से हैं। प्रवेश द्वार, मध्य तोरण द्वार और मुख्य मंडप। प्रवेश द्वार में बस्तर के मेटल आर्ट की झलक है। इस द्वार पर लोगों के स्वागत में छत्तीसगढ़ का पारम्परिक वाद्य तुरही के मध्य में भगवान गणेश की प्रतिकृति है और मेटल आर्ट का घोड़ा भी उकेरा गया है।प्रवेश द्वार के बाद मध्य में तोरण द्वार है जिसे पारम्परिक टोकनी से सजाया गया है। साथ ही रंग-बिरंगी छोटी झंडियाँ तोरण के रूप में शोभा बढ़ा रही हैं। इस हिस्से में नीम और आम पत्तों की झालर को हरेली की परम्परा के प्रतीक के रूप में लगाया गया है। पूरी सजावट का मुख्य आकर्षण वे छोटी-छोटी रंग-बिरंगी गेड़ियां हैं, जिनका सुंदर स्वरूप यहां से मुख्य मंडप तक हर जगह दिखता है।मुख्य मंडप द्वार को सरगुजा की कला के रंगों से आकर्षक बनाया गया है। इस द्वार की छत को पैरा से छाया गया है और सरगुजिहा भित्ति कला का के मनमोहक चित्र बनाये गए हैं। कई रंगों से सजा बैलगाड़ी का चक्का भी इस द्वार की रौनक बढ़ा रहा है।मुख्य कार्यक्रम मंडप के बाएँ हिस्से में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिवेश का पारम्परिक घर बना है। इस घर के आहते को मैदानी छत्तीसगढ़ की चित्रकला से सजाया गया है। घर के आँगन में तुलसी चौरा और गौशाला है, जहाँ हल, कुदाल, रापा, गैती, टंगिया, सब्बल जैसे पारम्परिक कृषि यंत्र के साथ ही गोबर के उपले रखे हैं। इस ग्रामीण घर की दीवारों को सरगुजा की रजवार पेंटिंग के सुंदर चित्रों से सजाया गया है।कार्यक्रम मंडप में कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण है। खास बात यह है कि इस प्रदर्शनी में पारम्परिक और आधुनिक कृषि यंत्रों को एक साथ प्रदर्शित किया गया है। पैडी सीडर, जुड़ा, बियासी हल, तेंदुआ हल और ट्रैक्टर जैसे यंत्र प्रदर्शित हैं।मंडप में एक ओर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के जलपान का हिस्सा है तो वहीं सावन का झूला भी सावन के फुहारों भरे मौसम के आंनद को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ का पारम्परिक रहचुली झूला भी आकर्षण का केंद्र है।संस्कृति की छटा बिखेरते पारम्परिक नृत्य :हरेली के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में गेड़ी नृत्य और राउत नाचा जैसे पारम्परिक लोक नृत्य की छटा भी मनमोहक धुनों के साथ बिखर रही है। गेड़ी नृत्य के लिए बिलासपुर से दल आमंत्रित किया गया है। गेड़ी नृत्य के दल ने वेशभूषा में परसन वस्त्र के साथ सिर पर सीकबंद मयूर पंख का मुकुट, कौड़ी व चिनीमिट्टी से बनी माला और कौड़ी जड़ित जैकेट पहन रखा है। यह दल माँदर, झाँझ, झुमका, खँजरी, हारमोनियम और बाँसुरी की मधुर धुन में अपनी प्रस्तुति दे रही है। ग़ौरतलब है कि गेड़ी नृत्य की शुरुआत हरेली के दिन से होती है।हरेली के मौके पर मुख्यमंत्री निवास में गड़बेड़ा (पिथौरा) से राउत नाचा के लिए 50 लोगों का दल पहुँचा है। इस दल में पुरुषों ने जहाँ धोती-कुर्ता के साथ सिर पर कलगी लगी पगड़ी, कौड़ी जड़ित बाजूबंद और पेटी के साथ पैरों में घुँघरू पहना है तो महिलाएँ भी पारम्परिक श्रृंगारी करके पहुँची हैं। इन दोनों ही दलों के सदस्यों ने बताया कि उन्हें इस मौक़े पर मुख्यमंत्री निवास पहुँचने का बेसब्री से इंतज़ार रहता है।
- -पारंपरिक-आधुनिक कृषि यंत्रों, लोक वेशभूषाओं की आकर्षक प्रदर्शनी-मुख्यमंत्री ने सराहा, बोले-हरेली प्रकृति के प्रति सम्मान का तिहाररायपुर / छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता और कृषि परंपराओं का प्रतीक हरेली तिहार इस वर्ष मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास परिसर में अत्यंत हर्षाेल्लास और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राज्य की समृद्ध विरासत, पारंपरिक कृषि यंत्रों, लोक परिधानों, खानपान और आधुनिक कृषि तकनीकों का समन्वय एक अद्भुत नजारे के रूप में सामने आया। कार्यक्रम स्थल को पारंपरिक छत्तीसगढ़ी रंग-रूप में सजाया गया था, जहां ग्रामीण परिधान पहने अतिथि, कलाकार और आमजन लोक संस्कृति में रमे हुए नजर आए।हरेली उत्सव के दौरान मुख्यमंत्री निवास में परम्परागत और आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदर्शनी स्थल का भ्रमण कर विभिन्न पारंपरिक यंत्रों और वस्तुओं का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में काठा, खुमरी, झांपी, कांसी की डोरी और तुतारी जैसे ऐतिहासिक कृषि उपकरणों को प्रदर्शित किया गया। कृषि विभाग द्वारा आयोजित आधुनिक कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी, जिसमें नांगर, कुदाली, फावड़ा, रोटावेटर, बीज ड्रिल, पावर टिलर और स्प्रेयर जैसे यंत्रों का प्रदर्शन किया गया। ‘काठा’ वह परंपरागत मापक है जिससे पुराने समय में धान तौला जाता था; ‘खुमरी’ बांस और कौड़ियों से बनी छांव प्रदान करने वाली टोपी है; ‘झांपी’ शादी-ब्याह में उपयोग होने वाली वस्तुएं रखने की बांस से बनी पेटी; ‘कांसी की डोरी’ खाट बुनने में काम आती है और ‘तुतारी’ पशुओं को संभालने में उपयोग होती है।मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी कहा कि हरेली तिहार केवल पर्व नहीं, बल्कि यह हमारे कृषि जीवन, पशुधन और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी किसानों, युवाओं और आमजनों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रही। मुख्यमंत्री ने इन उपकरणों की जानकारी लेकर कृषि तकनीकी प्रगति की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ की खेती परंपरा और तकनीक के समन्वय से और भी अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनेगी। किसानों को नई तकनीकों की जानकारी देकर हम राज्य की कृषि उत्पादकता को ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आम नागरिक, किसान, छात्र और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और कृषि नवाचार के अद्वितीय संगम को सजीव रूप में प्रस्तुत किया, जो राज्य की समृद्ध परंपरा और विकासशील सोच का प्रतीक है।
- रायपुर। मुख्यमंत्री निवास में हरेली तिहार के अवसर पर पारंपरिक लोक यंत्रों की गूंज और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छटा के साथ सुंदर नाचा का आयोजन किया जा रहा है। पूरा परिसर उत्सवमय वातावरण से सराबोर है। ग्रामीण परिवेश की जीवंत छवि इस सुंदर माहौल में साकार हो गई है। कहीं सुंदर वस्त्रों में सजे राउत नाचा कर रहे कलाकारों की रंगत बिखरी है, तो कहीं आदिवासी कलाकार पारंपरिक लोक नृत्य की मोहक प्रस्तुतियाँ दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ का अद्भुत ग्रामीण लैंडस्केप अपनी संपूर्ण सांस्कृतिक सुंदरता के साथ यहां सजीव रूप में अवतरित हो गया है। विभिन्न प्रकार की लोक धुनों में छत्तीसगढ़ी संगीत का माधुर्य अपने चरम पर है।राउत नाचा, छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति का एक प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनृत्य है, जो विशेष रूप से दीपावली के अवसर पर गोधन पूजा के दौरान किया जाता है। यह नृत्य विशेषकर यादव समुदाय (ग्वाला/गोपालक वर्ग) द्वारा प्रस्तुत किया जाता है और भगवान श्रीकृष्ण तथा गोधन की आराधना का प्रतीक माना जाता है।राउत नाचा की परंपरा छत्तीसगढ़ में सदियों पुरानी है। इसे गोवर्धन पूजा से जोड़ा जाता है, जब ग्वाल-बाल भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की स्मृति में यह नृत्य करते हैं। नर्तक रंग-बिरंगे परिधानों में सजते हैं, सिर पर पगड़ी धारण करते हैं और हाथों में लाठी थामे रहते हैं। उनके वस्त्रों को कौड़ियों, घुंघरुओं और अन्य सजावटी वस्तुओं से अलंकृत किया जाता है।राउत नाचा की प्रस्तुति के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों — जैसे ढोल, मांदर और नगाड़ा — का प्रयोग होता है। इनकी थाप पर नर्तक सामूहिक रूप से तालबद्ध होकर नृत्य करते हैं।यह नृत्य केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, श्रम की महत्ता, पशुपालन के योगदान और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी देता है। नाचा के साथ गाए जाने वाले गीतों को ‘राउत गीत’ कहा जाता है, जिनमें धर्म, वीरता, प्रेम और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन होता है।
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रायपुर /छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की खुशबू लिए हरेली तिहार का पारंपरिक उत्सव आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निवास में विधिवत रूप से आरंभ हुआ। छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ प्रत्येक अवसर और कार्य के लिए विशेष प्रकार के पारंपरिक उपकरणों एवं वस्तुओं का उपयोग होता आया है। हरेली पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में ऐसे ही पारंपरिक कृषि यंत्रों एवं परिधानों की झलक देखने को मिली, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं।
काठा
सबसे बाईं ओर दो गोलनुमा लकड़ी की संरचनाएँ रखी गई थीं, जिन्हें ‘काठा’ कहा जाता है। पुराने समय में जब गाँवों में धान तौलने के लिए काँटा-बाँट प्रचलन में नहीं था, तब काठा से ही धान मापा जाता था। सामान्यतः एक काठा में लगभग चार किलो धान आता है। काठा से ही धान नाप कर मजदूरी के रूप में भुगतान किया जाता था।
खुमरीसिर को धूप और वर्षा से बचाने हेतु बांस की पतली खपच्चियों से बनी, गुलाबी रंग में रंगी और कौड़ियों से सजी एक घेरेदार संरचना ‘खुमरी’ कहलाती है। यह प्रायः गाय चराने वाले चरवाहों द्वारा सिर पर धारण की जाती है। पूर्वकाल में चरवाहे अपन साथ ‘कमरा’ (रेनकोट) और खुमरी लेकर पशु चराने निकलते थे। ‘कमरा’ जूट के रेशे से बना एक मोटा ब्लैंकेट जैसा वस्त्र होता था, जो वर्षा से बचाव के लिए प्रयुक्त होता था।कांसी की डोरीयह डोरी ‘कांसी’ नामक पौधे के तने से बनाई जाती है। पहले इसे चारपाई या खटिया बुनने के लिए ‘निवार’ के रूप में प्रयोग किया जाता था। डोरी बनाने की प्रक्रिया को ‘डोरी आंटना’ कहा जाता है। वर्षा ऋतु के प्रारंभ में खेतों की मेड़ों पर कांसी पौधे उग आते हैं, जिनके तनों को काटकर डोरी बनाई जाती है। यह डोरी वर्षों तक चलने वाली मजबूत बुनाई के लिए उपयोगी होती है।झांपीढक्कन युक्त, लकड़ी की गोलनुमा बड़ी संरचना ‘झांपी’ कहलाती है। यह प्राचीन समय में छत्तीसगढ़ में बैग या पेटी के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होती थी। विशेष रूप से विवाह समारोहों में बारात के दौरान दूल्हे के वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, पकवान आदि रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता था। यह बांस की लकड़ी से निर्मित एक मजबूत संरचना होती है, जो कई वर्षों तक सुरक्षित बनी रहती है।कलारीबांस के डंडे के छोर पर लोहे का नुकीला हुक लगाकर ‘कलारी’ तैयार की जाती है। इसका उपयोग धान मिंजाई के समय धान को उलटने-पलटने के लिए किया जाता है। -
दुर्ग,। जिले में 1 जून 2025 से 23 जुलाई 2025 तक 390.3 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। कार्यालय कलेक्टर भू अभिलेख शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 जून से अब तक सर्वाधिक वर्षा 514.9 मिमी पाटन तहसील में तथा न्यूनतम 317.2 मिमी. तहसील भिलाई-3 में दर्ज की गई है। इसके अलावा तहसील बोरी में 333.0 मिमी, तहसील अहिवारा में 474.0 मिमी, तहसील धमधा में 325.6 मिमी और तहसील दुर्ग में 376.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। 23 जुलाई 2025 को तहसील दुर्ग में 2.0 मिमी, तहसील धमधा में 18.2 मिमी, तहसील पाटन में 52.4 मिमी, तहसील बोरी में 22.0 मिमी, तहसील भिलाई 3 में 7.0 मिमी और तहसील अहिवारा में 0.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।
- -पार्षद व एमआईसी सदस्य ने सुगम निकास हेतु शीघ्र पुलिया बनाने निगम द्वारा आवश्यक कार्यवाही करने के प्रति आश्वस्त कियारायपुर। बुधवार को राजधानी शहर रायपुर में हुई तेज बारिश के दौरान नगर निगम रायपुर के जोन क्रमांक 4 के अतर्गत पंडित भगवतीचरण शुक्ल वार्ड क्रमांक 57 के क्षेत्र में रतन पैलेस के पीछे राजेन्द्र नगर का नाला ओव्हर फ्लो होने एवं उसमें भारी मात्रा में कचरा होने से बस्ती में जलभराव की समस्या अचानक आ गई इसकी जानकारी होते ही वार्ड 57 पार्षद एव निगम एमआईसी सदस्य श्री अमर गिदवानी ने जोन 4 जोन कमिश्नर श्री अरूण ध्रुव, कार्यपालन अभियता श्री शेखर सिंह, सहायक अभियता श्री दीपक देवांगन, जोन स्वास्थ्य अधिकारी श्री विरेन्द्र चंद्राकर सहित स्थल निरीक्षण किया एवं राजेन्द्र नगर नाले की सघन सफाई जेसीबी मशीन से करवाकर गंदे पानी का निकास सुनिश्चित किया। नागरिको की मांग पर पार्षद व एमआईसी सदस्य श्री अमर गिदवानी ने भविष्य में राजेन्द्र नगर नाले से गंदे पानी का निकास सुगम बनाये रखने एवं जलभराव की समस्या का निराकरण करने पुलिया निर्माण के आवश्यक कार्य हेतु निगम मुख्यालय के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किये जाने एवं कार्यवाही प्रक्रियास्त होने की जानकारी देते हुए नगर निगम से शीघ्र नई पुलिया का निर्माण जलभराव की समस्या का निराकरण करने एवं सुगम निकास कायम करने करवाये जाने के प्रति नागरिकों को आश्वस्त किया।
- -खाद बीज और लोन वितरण कार्य की समीक्षा की-नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग के बारे में किसानों को दें समझाइश-योजनाओं का लाभ किसानों तक आसानी से पहुंचे : श्री चंद्रवंशीबिलासपुर। छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी ने उप संचालक कृषि कार्यालय में अधिकारियों की बैठक लेकर कृषि एवं इससे जुड़े विभागों के काम काज की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि किसानों और कृषि गतिविधियों का विकास राज्य सरकार की प्राथमिकता सूची में सर्वोपरि है। यह तभी संभव है जब शासन द्वारा किसानों के लिए बनाई गई योजनाएं और सुविधाओं का लाभ उन्हें सुगमता से मिल सके। उन्होंने बैठक में सस्ते विकल्प के रूप में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए किसानों के बीच इनका व्यापक प्रचार प्रसार करने के निर्देश दिए।बैठक में श्री सुरेश चंद्रवंशी ने कृषि विभाग के साथ साथ पशुपालन, उद्यानिकी, मछलीपालन तथा मार्कफेड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं तथा जिले में खाद एवं बीज की आपूर्ति के संबंध में विस्तृत समीक्षा की गई। उप संचालक कृषि बिलासपुर ने बताया कि जिले में चालू खरीफ में अब तक 479.63 एमएम वर्षा हुई है। जिसके परिणाम स्वरूप मुख्य फसल धान की बुवाई एवं रोपाई का कार्य 1.17 लाख हेक्टर में पूर्ण हो चुका है तथा शेष बुवाई रोपाई का कार्य कृषक कर रहे हैं। अच्छी बारिश होने से किसानों में खुशी है।कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त अध्यक्ष चंद्रवंशी द्वारा जिले में बीज की भंडारण के संबंध में समीक्षा की गई। जिस पर उप संचालक कृषि द्वारा यह बताया गया कि कुल 21986 क्विंटल मांग थी। जिसके विरुद्ध 98 फीसदी बीच का वितरण किया जा चुका है। उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ती जिले में करने तथा डीएपी उर्वरक के विकल्प के रूप में यूरिया, एसएसपी, एनपीके तथा नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा देने किसानों के बीच प्रचार प्रसार करने के निर्देश दिए। उप संचालक कृषि ने बताया कि जिले में 77% उर्वरक का भंडारण तथा 70% वितरण हो चुका है एवं डीएपी के विकल्प रूप में उपयोग किए जाने वाले खाद के मिश्रण के बारे में प्रचार प्रसार किया जा रहा है।किसानों को नकली उर्वरकों का वितरण को प्रतिबंध लगाने हेतु लगातार उर्वरक निरीक्षक द्वारा निरीक्षण कर रोक लगाने तथा आगामी समय में सभी उर्वरकों का अलग-अलग कलर कोड कर वितरण किए जाने का सुझाव दिए।उप संचालक कृषि द्वारा अवगत कराया गया कि विभाग द्वारा उर्वरक विक्रेताओं के गोदाम तथा विक्रय केंद्र पर लगातार छापे मार करवाई किया जा रहा है। श्री चंद्रवंशी ने पशुधन विकास, मछलीपालन और उद्यान विभाग की योजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी जब इनका लाभ लेकर किसानों की आमदनी बढ़े और उनका जीवन स्तर और क्रय शक्ति ऊपर उठे। कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त श्री चंद्रवंशी के पहली बार उपसंचालक कृषि कार्यालय आने पर उप संचालक पीडी हथेश्वर, उप संचालक उद्यान कमलेश दीवान, उप संचालक मछलीपालन श्री महीश्वर सहित अन्य विभागीय अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
- भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई जोन क्रमांक 04 शिवाजी नगर अंतर्गत सड़क किनारे लगे बैनर-पोस्टर निकालने की कार्यवाही जारी है। बरसात के दिनों में आंधी तूफान से बैनर-पोस्टर निकलकर सड़को पर गिरने से बड़ी दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है। जिसे देखते हुए डबरा पारा चौंक से छावनी चौक तक लगे बैनर-पोस्टर निकाला जा रहा है। नेशनल हाईवे होने के कारण सैकड़ो वाहन चालकों का लगातार आना-जाना लगा रहता है। जिससे उनको किसी प्रकार की समस्या न हो इसके लिए जोन स्वास्थ्य अधिकारी हेमंत मांझी के नेतृत्व में निगम का अमला निरंतर कार्य कर रहा है। शहर के अन्य मार्गो के किनारे लगे बैनर-पोस्टर निकालने की कार्यवाही जोन स्वास्थ्य अधिकारियो द्वारा की जाएगी।नगर निगम भिलाई महापौर एवं निगम आयुक्त सभी विज्ञापन एजेंसियों से अपील किए हैं कि शहर के किसी भी स्थलों पर विज्ञापन, बैनर, पोस्टर लगाने से पहले निगम से अनुमति लेकर ही लगाए। अनावश्यक किसी भी जगह विज्ञापन न लगाए। साथ ही विज्ञापन, बैनर, पोस्टर लगाते समय यह विशेष ध्यान रखा जाए कि फिटिंग ठीक ढंग से हो, जिससे आंधी तूफान से सड़को पर गिरने एवं दुर्घटना से बचा जा सके। बिना अनुमति के होर्डिंग एवं विज्ञापन लगाने वालों के ऊपर नगर निगम अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी ।
- - लखपति दीदी श्रीमती तामेश्वरी साहू ने अपने हौसले एवं आत्मविश्वास से अपनी राह बनाई- सोचा नहीं था कि स्कूटी और ऑटो ले पाऊंगी : लखपति दीदी तामेश्वरी साहूराजनांदगांव । ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं में सामाजिक परिवर्तन की बयार दिखाई दे रही है। यह बयार है शासन की राष्ट्रीय आजीविका मिशन बिहान अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियां, जिससे जुड़कर महिला स्वसहायता समूह की महिलाएं आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल है, राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम परेवाडीह की लखपति दीदी श्रीमती तामेश्वरी साहू, जिन्होंने चुनौतियों एवं संघर्ष के बावजूद अपने हौसले एवं आत्मविश्वास से अपनी राह बनाई। उन्होंने बताया कि वे प्रज्ञा स्वसहायता समूह से जुड़ी है और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से उन्हें भरपूर मदद मिली। उन्होंने बताया कि बिहान से जुडऩे से पहले वे घरेलू कार्य के साथ खेती-किसानी का कार्य करती थी तथा घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उन्होंने बताया कि बैंक लिंकेज के माध्यम से ऋण लेकर अपना किराना दुकान खोला, लेकिन दुकान में आग लगने से बहुत क्षति हुई। फिर उन्होंने हिम्मत करते हुए बिहान से योगदान मिलने पर फिर से अपना किराना दुकान प्रारंभ किया। इसी दौरान ग्राम पदुमतरा में सीएलएफ में खाना बनाने का कार्य मिला। जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत बनी।लखपति दीदी श्रीमती तामेश्वरी साहू ने बताया कि उन्होंने अब तक वे बिहान योजना के माध्यम से 5 से 8 लाख रूपए तक का ऋण ले चुकी है। अभी वे किराना दुकान के साथ ही बैंक सखी एवं वित्तीय साक्षरता के प्रति जागरूकता के लिए कार्य कर रही है और उनकी वार्षिक आय लगभग 1 लाख 50 हजार रूपए है। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मैंने कभी सोचा नहीं था कि अपने लिए स्कूटी और ऑटो ले पाऊंगी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुडऩे के बाद यह सपना साकार हो गया है। उन्होंने बताया कि बैंक सखी के रूप में कार्य करने से आत्मविश्वास बढ़ा, वहीं आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ। उन्होंने बताया कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता के लिए कार्य कर रही हैं तथा जनसामान्य को शासन की योजनाओं की जानकारी दे रही है। लखपति दीदी श्रीमती तामेश्वरी साहू ने बिहान योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया।
- राजनांदगांव । प्रयास आवासीय विद्यालयों के कक्षा 9वीं में प्रवेश हेतु द्वितीय प्रतीक्षा सूची के विद्यार्थियों की काऊंसिलिंग 28 जुलाई 2025 को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक प्रयास कन्या आवासीय विद्यालय गुढिय़ारी रायपुर में आयोजित की गई है। द्वितीय प्रतीक्षा सूची का अवलोकन वेबसाईट https://eklavya.cg.nic.in पर किया जा सकता है। विद्यार्थियों को निर्धारित तिथि, समय एवं स्थान पर अनिवार्य दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने कहा गया है।
- राजनांदगांव । एग्रीस्टेक पोर्टल फॉर्मर रजिस्ट्री के तहत किसान अपना पंजीयन स्वयं कर सकते है। पंजीयन करने के लिए स्मार्ट फोन या कम्प्यूटर सेट, आधार नंबर लिंक मोबाईल, आधार कार्ड, भूमि का खसरा बी-1 की आवश्यकता होगी। कम्प्यूटर से पंजीयन करने के लिए वेबसाईट www.cgfr.agristack.gov.in पर जाना होगा। मोबाईल से पंजीयन करने के लिए गूगल प्ले स्टोर से Farmer Registry Cg एप डाऊनलोड करना होगा। साईट या एप पर जाकर पेज में नीचे क्रिएट न्यू यूजर अकाउंट पर जाये, अपना आधार नंबर बाक्स में भरें, आधार ओटीपी से आधार नंबर वेरीफाई करें, आपकी डिटेल अपने आप आ जायेगी, पेज में सबसे नीचे जाएं, मोबाईल नंबर भरें, ओटीपी से मोबाईल नंबर वेरीफाई करें, अपना स्वयं का पासवर्ड बनाये। अब वापस लॉगिन पेज पर जाकर अपने मोबाईल व पासवर्ड से लॉगिन करें, लॉगिन करने पर आपकी डिटेल पेज पर दिखाई देगी व रजिस्टर पर क्लिक करें, पोर्टल आपसे पूछेगा की आप मोबाईल नंबर बदलना चाहते है? नहीं कर आगे बढ़े। किसान को अपनी डिटेल हिन्दी में भरना होगा (या गुगल ट्रांसलेट से कर सकते है)। आपके विवरण को अंग्रेजी से मिलाकर प्रतिशत में कितना मिल रहा है, बताएगा ध्यान में रखे जानकारी 80 प्रतिशत से ज्यादा मिले। इसी प्रकार आपका पता, जिला, अनुभाग, आदि भरें, अब रजिस्ट्रेशन जमीन की जानकारी में आगे जाये। जमीन में मालिक या किरायेदार पूछेगा आपको कृषि और लैंड ओवनिंग का दो विकल्प दिखाई देगा दोनों को सेलेक्ट करें। फैच लैंड डिटेल पर क्लिक करें। सर्वे नंबर पर मूल खसरा नंबर एवं सर्वे नंबर पर भरें जो संख्या हो उसे भरें, जैसे-110/5 है तो पहले खाने में 110 एवं दूसरे खाने में 5 भरें। अपना नाम किसान की सूची में सलेक्ट करें, पहचानकर्ता के नाम को मिलान कर सबमिट करें। किसान के नाम जितनी भूमि है, सब दिखाई देगी फिर भी बी-1 से मिलाकर उन खसरा का चयन करें जो आपकी है। अब वेरीफाई ऑल लैण्ड पर जो की लिस्ट में ऊपर है उसे क्लिक करें। बाक्स में सहमति के लिए चेकबाक्स में क्लिक करें, ई साईन का विकल्प खुलने पर ई साईन ओटीपी के माध्यम से पूर्ण करें। ई साईन होने के लिए आधार की साईट पर जो अपने आप खुलेगी आधार नंबर डालकर ओटीपी के माध्यम से ई साईन करें। ई-साईन करने पर आपका रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूर्ण होकर नामांकन नंबर मिलेगा। यदि आपके द्वारा 80 प्रतिशत से अधिक मिलान हो रहा है तो यह स्वचलित प्रक्रिया के तहत 48 घंटे में आपकी फार्मर रजिस्ट्री पूर्ण हो जायेगी और यदि 80 प्रतिशत से कम मिलान है तो पटवारी और तहसीलदार द्वारा वेरीफिकेशन पूर्ण होने पर आईडी जारी होगी।
- - कृषक पंजीयन की अंतिम तिथि 30 अगस्त- घर-घर जाकर पंजीयन के लिए छूटे हुए कृषकों को किया जा रहा जागरूकराजनांदगांव । जिले में एग्रीस्टेक पोर्टल फॉर्मर रजिस्ट्री के तहत किसानों का पंजीयन कराया जा रहा है। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे ने किसानों का एग्रीस्टेक पोर्टल फॉर्मर रजिस्ट्री अंतर्गत किसानों को अधिक से अधिक पंजीयन कराने के निर्देश दिए है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिले में किसानों के पंजीयन के लिए कृषक जोड़ो अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कृषि विभाग को सक्रियता के साथ कृषक पंजीयन कराने के लिए निर्देश दिए। एग्रीस्टेक पोर्टल फॉर्मर रजिस्ट्री के तहत कृषक पंजीयन की अंतिम तिथि 30 अगस्त 2025 है। कृषि विभाग द्वारा जिले में पंजीकृत 127107 कृषकों में से 104684 कृषकों का एग्रीस्टेक पोर्टल फार्मर रजिस्ट्री कराया जा चुका है। शेष 22423 कृषकों का 14 अगस्त 2024 तक शिविरों के माध्यम से पंजीयन कराया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा घर-घर जाकर पंजीयन के लिए छूटे हुए कृषकों का चिन्हांकन किया जा रहा है। ग्राम पंचायत एवं सहकारी समिति में शिविर का आयोजन कर चिन्हांकित कृषकों का पंजीयन कराया जा रहा है। ग्राम पंचायत के माध्यम से कृषकों को पंजीयन के लिए प्रेरित किया जा रहा है।उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि जिले में एग्रीस्टेक पोर्टल फॉर्मर रजिस्ट्री के तहत कृषक पंजीयन के लिए कृषक जोड़ो अभियान के तहत लगातार कृषकों का पंजीयन कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि छूटे हुए किसानों का पंजीयन कराने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण किया जा रहा है और पाम्प्लेट, पोस्टर के माध्यम से भी जानकारी दी जा रही है। कृषि विभाग की टीम ग्राम लालूटोला, नवागांव, रीवागहन, टाकुरटोला, भेजराटोला, किरगी ब सहित विभिन्न ग्रामों में लगातार दौरा कर रही है और कृषकों की समस्या का समाधान कर रही है। किसानों के पंजीयन के संबंध में आने वाली तकनीकी एवं अन्य समस्याओं से अवगत करा रहे है।उल्लेखनीय है कि एग्रीस्टेक पोर्टल फॉर्मर रजिस्ट्री के तहत वेबसाईट www.cgfr.agristack.gov.in एवं मोबाईल एप्लीकेशन Farmer Registry Cg के माध्यम से किसान अपना पंजीयन स्वयं कर सकते है। पंजीयन करने के लिए स्मार्ट फोन या कम्प्यूटर सेट, आधार नंबर लिंक मोबाईल, आधार कार्ड, भूमि का खसरा बी-1 की आवश्यकता होगी।
- बिलासपुर। उद्यानिकी फसल उत्पादन कर रहे किसानों के लिए टमाटर, बैगन, अमरूद, केला, पपीता, मिर्च एवं अदरक के लिये खरीफ वर्ष 2023 अंतर्गत पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से भारतीय कृषि बीमा कंपनी के द्वारा संचालित की जा रही है। उप संचालक उद्यानिकी से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के इच्छुक ऋणी एवं अऋणी कृषक 31 जुलाई 2025 तक निकटतम लोक सेवा केन्द्र, बैंक शाखा, सहकारी समिति या भारतीय कृषि बीमा कंपनी के प्रतिनिधि से संपर्क कर अपने उद्यानिकी फसलों का बीमा करा सकते है। योजना के संबंध में अधिक जानकारी के लिए उद्यानिकी विभाग में कार्यरत अधिकारियों एवं बीमा कंपनी के प्रतिनिधि से संपर्क किया जा सकता है। इस हेतु बीमा कंपनी के प्रतिनिधि श्री थानेश्वर साहू मो0न0 99071-22727, बिल्हा में उद्यानिकी विभाग के वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी श्री अशोक कुमार परस्ते 94796-19829, तखतपुर में उद्यान विकास अधिकारी श्री जेनेन्द्र कुमार पैंकरा 62659-81957, कोटा में वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी श्री साधूराम नाग 91654-90297 एवं मस्तूरी में प्रभारी उद्यान अधीक्षक श्री आरके जगत 80852-80923 से संपर्क कर अधिक जानकारी ली जा सकती है।चयनित उद्यानिकी फसलों खरीफ के लिए किसानों द्वारा द्वेय प्रीमियम दर बीमित राशि का 5 प्रतिशत है। बिलासपुर जिले में खरीफ मौसम के फसलों हेतु 100 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित है। टमाटर फसल के लिए प्रति एकड़ बीमित राशि 1 लाख 20 हजार रुपए एवं कृषक अंश राशि 6 हजार, बैगन के लिए बीमित राशि 77 हजार रुपए एवं कृषक अंश राशि 3 हजार 850 रुपए, अमरुद के लिए बीमित राशि 45 हजार रुपए एवं कृषक अंश राशि 2 हजार 250, केला के लिए बीमित राशि 1 लाख 65 हजार रुपए एवं कृषक अंश राशि 8 हजार 250 रुपए, पपीता के लिए बीमित राशि 1 लाख 25 हजार रुपए एवं कृषक अंश राशि 6 हजार 250, मिर्च के लिए बीमित राशि 90 हजार रुपए एवं कृषक अंश राशि 4 हजार 500 रुपए और अदरक के लिए बीमित राशि 1 लाख 50 हजार रुपए एवं कृषक अंश राशि 7 हजार 500 रुपए निर्धारित है।किसानों के हानि का मूल्यांकन अधिसूचित क्षेत्र में स्थापित स्वचलित मौसम केंद्र से प्राप्त 4 आवरित जोखिमों जैसे कम या अधिक तापमान, कम या अधिक या बेमौसम वर्षा, वायु गति, कीट एवं व्याधि प्रकोप के अनुकूल मौसम के प्रमाणित आंकड़ों एवं अधिसूचित टर्मशीट के अनुसार दावा गणना की जाएगी। दावा राशि का भुगतान सीधे किसानों के खाते में किया जाएगा। खरीफ मौसम के टमाटर, बैगन, अमरुद, केला, पपीता, मिर्च, एवं अदरक फसल हेतु ओलावृष्टि हवाएं की स्थिति में कृषक इसकी सूचना सीधे बीमा कम्पनी के टोल फ्री नं. 18004190344 पर तथा टोटल शिकायत निवारण पोर्टल (Farmer Grievance Redressal) या लिखित रुप में 72 घंटे के भीतर संबंधित बैंक, स्थानीय राजस्व एवं संबंधित क्षेत्र के उद्यान अधिकारी को बीमित फसल के ब्यौरे, क्षति की मात्रा तथा क्षति का कारण सहित सूचित करना होगा। संबंधित संस्था/विभाग 48 घंटा के भीतर कृषकों से प्राप्त जानकारी (बीमित फसल के ब्यौरे, क्षति की मात्रा तथा क्षति के कारण सहित) बीमा कंपनी को प्रदान करेंगे।जरूरी दस्तावेज - नवीनतम आधारकार्ड की कॉपी, नवीनतम भूमि प्रमाण पत्र, बी 1, पी 2 की कॉपी, बैंक पासबुक के पहले पन्ने की कॉपी जिस पर एकाउंट नंबर, आईएफसी कोड, बैंक का पता साफ दिखाई दे रहा हो। फसल बुआई प्रमाण पत्र, किसान का वैद्य मोबाईल नंबर, बटाईदार, कास्तकार, साझेदार किसानों के लिए फसल साझा अथवा कास्तकार का घोषणा पत्र।
- रायपुर । बुधवार को नगर पालिक निगम रायपुर के जोन क्रमांक 8 के कार्यालय में जोन 8 जोन अध्यक्ष श्री प्रीतम सिंह ठाकुर और स्वास्थ्य विभाग अध्यक्ष श्रीमती गायत्री सुनील चन्द्राकर ने नगर निगम जोन क्रमांक 8 क्षेत्र के वार्ड पार्षद श्री सन्दीप साहू, श्री भगतराम हरवंश, श्री अमन सिंह ठाकुर, श्री अर्जुन यादव की उपस्थिति में जोन नम्बर 8 के सभी 7 वार्डो के विभिन्न कार्यों की समीक्षा की और सड़क बत्ती, पेयजल एवं सफाई से सम्बंधित कार्यों को लेकर जोन के सभी वार्ड प्रभारियों को आवश्यक निर्देश दिये. जोन 8 जोन अध्यक्ष और स्वास्थ्य विभाग अध्यक्ष ने वार्ड पार्षदों सहित जोन राजस्व विभाग के सम्बंधित अधिकारियों को रायपुर नगर पालिक निगम के हित में अधिकाधिक राजस्व वसूली करने के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता से करने के निर्देश दिये।


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