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- दंतेवाड़ा । जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र, दंतेवाड़ा द्वारा युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाइवलीहुड कॉलेज, दंतेवाड़ा में रोजगार मेले का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। रोजगार मेले में जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आए 250 से अधिक शिक्षित एवं रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विभिन्न निजी कंपनियों के समक्ष साक्षात्कार दिया। मेले में विभिन्न निजी संस्थानों ने अलग-अलग पदों पर भर्ती प्रक्रिया संचालित की। एक्सिस बैंक द्वारा फील्ड ऑफिसर एवं रिलेशनशिप मैनेजर, श्रम इन द्वारा इलेक्ट्रीशियन तथा अग्रवाल मार्ट द्वारा सेल्स बॉय, कंप्यूटर ऑपरेटर एवं सोशल मीडिया ऑपरेटर सहित कई पदों के लिए अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया गया। नियोजकों ने उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता, तकनीकी दक्षता एवं कार्यकुशलता के आधार पर उनका मूल्यांकन किया।साक्षात्कार प्रक्रिया के उपरांत विभिन्न कंपनियों द्वारा कुल 36 अभ्यर्थियों का प्रारंभिक चयन किया गया। चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन एवं अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद संबंधित कंपनियों द्वारा अंतिम चयन किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों को जिला स्तरीय कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।रोजगार मेले के दौरान युवाओं को निजी क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार के अवसरों, रोजगार पंजीयन, आवश्यक कौशल विकास तथा प्लेसमेंट संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गई। जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र ने जिले के युवाओं से रोजगार कार्यालय में नियमित रूप से पंजीयन एवं अपनी जानकारी अद्यतन कराने के साथ-साथ रोजगार मेलों, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं प्लेसमेंट गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को उनकी योग्यता एवं कौशल के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।
- -बेहतर परिणाम से उत्साहित किसान बोले- आधुनिक तकनीक से खेती बन रही अधिक लाभकारीरायपुर । छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव किसानों के खेतों में दिखाई देने लगा है। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पोड़ी निवासी प्रगतिशील किसान श्री रामदुलारी साहू भी ऐसे ही किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने नैनो यूरिया का सफल प्रयोग कर बेहतर परिणाम प्राप्त किए हैं। शुरुआती सफलता से उत्साहित होकर अब वे आगामी फसल सीजन में लगभग पांच एकड़ भूमि पर नैनो यूरिया का उपयोग करने की तैयारी कर रहे हैं।श्री साहू ने बताया कि उन्होंने कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में पहले लगभग दो एकड़ भूमि पर नैनो यूरिया का प्रयोग किया था। इसके उपयोग से फसल की बढ़वार बेहतर हुई, पौधे अधिक स्वस्थ दिखाई दिए तथा पोषक तत्वों का प्रभावी उपयोग होने से फसल की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला। सकारात्मक परिणामों ने उनका विश्वास और मजबूत किया, जिसके बाद उन्होंने आगामी सीजन में बड़े रकबे में नैनो यूरिया अपनाने का निर्णय लिया।उन्होंने बताया कि पारंपरिक यूरिया की तुलना में नैनो यूरिया का उपयोग अधिक सुविधाजनक है। इसकी छोटी बोतल को आसानी से खेत तक ले जाया जा सकता है, जिससे परिवहन में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती। साथ ही इसका छिड़काव भी सरल है, जिससे किसानों के समय और श्रम दोनों की बचत होती है। श्री रामदुलारी साहू का कहना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक खेती को अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने क्षेत्र के अन्य किसानों से भी कृषि विभाग के मार्गदर्शन में नैनो यूरिया का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि नई तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और समृद्ध बनाया जा सकता है।
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महासमुंद / छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम, 2025 के नियम-7 के अंतर्गत खनिज शाखा महासमुंद द्वारा एमएसटीसी पोर्टल पर महासमुंद तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत पासीद स्थित महानदी के खसरा क्रमांक-01 का भाग, रकबा 4.80 हेक्टेयर की रेत खदान के लिए ई-नीलामी प्रक्रिया 17 जून 2026 को आयोजित की गई थी। उक्त रेत खदान के लिए प्रस्तावित लॉटरी प्रक्रिया अपरिहार्य कारणों से संपन्न नहीं हो सकी थी।
अब इस रेत खदान के लिए निविदा में भाग लेने वाले सभी संबंधित बोलीदाताओं को सूचित किया गया है कि इलेक्ट्राॅनिक नीलामी के माध्यम से लाॅटरी के द्वारा अधिमानी बोलीदाता की चयन प्रक्रिया 24 जुलाई 2026 को प्रातः 11ः00 बजे संपन्न की जाएगी। खनिज शाखा ने सभी पात्र एवं संबंधित बोलीदाताओं से निर्धारित तिथि एवं समय पर उपस्थित होने कहा है। - -कलेक्टर नदी-नाले पार कर बाइक से पहुंचीं कोहकापार-आजादी के बाद पहली बार गांव में गूंजी बच्चों की किलकारी, पहले ही दिन 21 बच्चों का हुआ दाखिलारायपुर । दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र में विकास और शिक्षा की एक नई इबारत लिखी गई है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘स्कूल केइंता’ (स्कूल चलो) अभियान के तहत नारायणपुर जिले के सुदूर ग्राम कोहकापार में आजादी के बाद पहली बार प्राथमिक शिक्षा की शुरुआत हुई है। शिक्षा की यह अलख जगाने के लिए जिले की कलेक्टर स्वयं संकीर्ण रास्तों, नदी-नालों, पहाड़ों और घने जंगलों को पार करते हुए बाइक से 100 किलोमीटर दूर इस अंतिम गांव तक पहुंचीं और गांव की पहली प्राथमिक शाला का शुभारंभ किया।पारंपरिक मुकुट पहनाकर हुआ नौनिहालों का स्वागतकलेक्टर ने गांव के घोटूल में संचालित होने वाली इस नई कक्षा का फीता काटा और स्वयं बच्चों की क्लास लेकर उन्हें पढ़ाया। शाला के पहले ही दिन गांव के 21 बच्चों का नामांकन (11 छात्राएं और 10 छात्र) हुआ। कलेक्टर ने सभी बच्चों का पारंपरिक रूप से मुकुट पहनाकर स्वागत किया और उन्हें स्कूल बैग व पाठ्यपुस्तकें वितरित कीं। बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा ही बेहतर भविष्य और समग्र विकास का सबसे सशक्त माध्यम है। बच्चे नियमित स्कूल आएं और मन लगाकर अपने सपनों को साकार करें।कलेक्टर ने बताया कि ‘स्कूल केइंता’ अभियान के माध्यम से अबूझमाड़ के उन बच्चों को खोजा जा रहा है, जो या तो कभी स्कूल नहीं गए या फिर बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुके थे। घर-घर किए गए शैक्षणिक सर्वेक्षण के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब तक जिले के 2,000 से अधिक बच्चों को विभिन्न शासकीय विद्यालयों और छात्रावासों में दाखिला दिलाया जा चुका है। कोहकापार में स्कूल खुलना इस अभियान की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। स्कूल के शुभारंभ के बाद कलेक्टर ने ग्रामीणों के साथ “माड़ संवाद” किया। उन्होंने गांव में राशन, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी और पोषण स्तर की समीक्षा की। ग्राम पंचायत के सरपंच मनु ध्रुव ने बताया कि 25 परिवारों और करीब 128 की आबादी वाले इस गांव में नल-जल योजना, बिजली और मोबाइल टावर जैसी बुनियादी सुविधाओं की सख्त जरूरत है। कलेक्टर ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को इन समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। कलेक्टर ने ग्रामीणों को राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए प्रेरित किया, ताकि शासन की योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। उन्होंने दुर्गम क्षेत्र में जाकर सर्वे करने वाले स्कूल समन्वयक खेमा अंगारे के प्रयासों की विशेष सराहना की।
- -सुकमा में बारिश की संभावना, किसानों से ‘मौसम सीजी’ और ‘मेघदूत’ ऐप से जुड़ने की अपीलरायपुर । किसानों की फसलों को बदलते मौसम से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सुकमा जिला प्रशासन ने विशेष कृषि सलाह जारी की है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, जगदलपुर से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के आधार पर किसानों को आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की गई है।मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 19 जुलाई तक जिले में हल्की बारिश, घने बादल और 3 से 6 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवा चलने की संभावना है। इसे देखते हुए किसानों को खरीफ फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय करने की सलाह दी गई है।किसानों को उन्नत किस्म के बीजों का उपयोग करने और बीजोपचार के बाद ही बुआई करने की सलाह दी गई है। धान की सीधी बुआई का कार्य शीघ्र पूरा करने तथा अधिक जलभराव वाले क्षेत्रों में लेही पद्धति अपनाने को कहा गया है। मक्का की फसल को इल्लियों और अन्य कीटों से बचाने के लिए खेतों में ‘टी’ आकार के बांस लगाने की सलाह दी गई है। इन पर पक्षी बैठकर खेतों में मौजूद कीटों को खाते हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से कीट नियंत्रण में मदद मिलती है।अरहर, मूंगफली और अन्य दलहनी-तिलहनी फसलों के बीजों को फफूंदनाशक और जैव उर्वरक से उपचारित कर बुआई करने की सलाह दी गई है। इससे फसलों की बेहतर वृद्धि और उत्पादन में मदद मिलती है।जिला प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि बारिश के दौरान खेतों में किसी भी प्रकार के कीटनाशक या खरपतवारनाशक का छिड़काव न करें। बारिश के कारण दवाओं का प्रभाव कम हो सकता है और फसल को नुकसान भी हो सकता है।मौसम की स्थिति को देखते हुए पशुपालकों को अपने पशुओं को गीले और पानी भरे स्थानों पर चराने से बचने की सलाह दी गई है। पशुओं को सुरक्षित और सूखे बाड़े में रखने, समय-समय पर कृमिनाशक दवा देने और खुरपका-मुंहपका जैसे रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण कराने की अपील की गई है।दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं को संतुलित आहार, हरा चारा और खनिज मिश्रण देने की भी सलाह दी गई है।जिला प्रशासन ने किसानों और आम नागरिकों से ‘मौसम सीजी’ और ‘मेघदूत’ ऐप पर पंजीकरण कराने की अपील की है। इन ऐप के माध्यम से मौसम का पूर्वानुमान और कृषि संबंधी महत्वपूर्ण सलाह सीधे मोबाइल फोन पर प्राप्त की जा सकती है। बदलते मौसम के बीच जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी जानकारी पर लगातार नजर रखें और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही खेती से जुड़े कार्य करें। समय पर सही जानकारी और सावधानी बरतकर फसलों को मौसम से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।
- -जमीन पर बैठकर सुनीं समस्याएं, 3 दिन में बिजली और 45 दिन में वनाधिकार पट्टे का भरोसा-ग्रामीण से खुद 108 पर फोन करवाकर परखी एंबुलेंस सेवा की तत्परतारायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन और जनसेवा के संकल्प को साकार करते हुए सुकमा जिला प्रशासन लगातार दूरस्थ और अंदरूनी क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकुंद ठाकुर ने शुक्रवार को दो नदियां पार कर सुदूर वनांचल के ग्राम गुमोड़ी, कोंडासावली और तारलागुड़ा का दौरा किया।अधिकारियों ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर जमीन पर बैठकर जनचौपाल लगाई और उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों से सीधे संवाद कर शासन की योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी ली गई तथा कई समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश मौके पर ही दिए गए। गुमोड़ी में कलेक्टर ने ग्रामीणों से महतारी वंदन योजना, तेन्दूपत्ता भुगतान, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। ग्रामीणों ने बताया कि उनके जमीन संबंधी दस्तावेज गुम हो गए हैं। इस पर कलेक्टर ने गांव में विशेष राजस्व शिविर लगाकर आवश्यक दस्तावेज तैयार करने के निर्देश दिए।ग्रामीणों की मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी मांगों पर कलेक्टर ने बिजली, सड़क और पुलिया निर्माण के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। प्राथमिक शाला के निरीक्षण के दौरान बच्चों ने कलेक्टर को गिनती और एबीसीडी सुनाई। बच्चों की उत्साहपूर्ण प्रस्तुति से प्रभावित होकर उन्होंने स्कूल परिसर में पेवर ब्लॉक, बाउंड्रीवाल और नए रसोईघर के निर्माण को मंजूरी दी।इसके बाद कलेक्टर और सीईओ कोंडासावली पहुंचे। यहां आम के पेड़ के नीचे ग्रामीणों से चर्चा के दौरान तेज बारिश शुरू हो गई। इसके बावजूद कलेक्टर ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनना जारी रखा। बिजली कनेक्शन से जुड़ी शिकायत पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को 3 दिन के भीतर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं, वनाधिकार पट्टे की मांग पर उन्होंने पात्र हितग्राहियों के लिए शिविर आयोजित कर 45 दिन के भीतर वनाधिकार पट्टे उपलब्ध कराने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए।उप स्वास्थ्य केंद्र कोंडासावली के निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों की मांग पर कलेक्टर ने एंबुलेंस वाहन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य केंद्र को बेहतर बनाने के लिए खिड़की-दरवाजों पर पर्दे, मुख्य मार्ग से स्वास्थ्य केंद्र तक पेवर ब्लॉक रैंप, योग शेड और सोकपिट निर्माण के निर्देश भी दिए गए l इससे दूरस्थ क्षेत्र के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं अधिक आसानी से उपलब्ध होंगी और आपात स्थिति में मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा। तारलागुड़ा में निर्माणाधीन सुशासन परिसर के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने एक ग्रामीण से स्वयं 108 एंबुलेंस सेवा पर फोन करवाकर व्यवस्था की तत्परता परखी। फोन पर आवश्यक जानकारी लेने के बाद एंबुलेंस भेजने की पुष्टि होने पर कलेक्टर ने ग्रामीणों से आपातकाल में 108 सेवा का उपयोग करने की अपील की।इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के दो हितग्राहियों ने खाते में राशि जमा नहीं होने की समस्या बताई। जांच में बैंक खाते में तकनीकी कारणों से होल्ड की जानकारी सामने आई। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल समस्या का निराकरण कर हितग्राहियों को योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए।बारिश के बीच भी कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ ने ग्रामीणों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और उनका समाधान करने के लिए मौके पर ही आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि सुशासन परिसर का निर्माण पूरा होने के बाद वे दोबारा गांव पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे।जिला प्रशासन की यह पहल दर्शाती है कि सुकमा में शासन और प्रशासन अब दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक सीधे पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहा है। इससे ग्रामीणों में शासन के प्रति विश्वास और सुशासन की भावना और मजबूत हो रही है।
- -शासकीय सहयोग से बढ़ा उत्पादन, आय और आत्मविश्वास-संबलपुरी साड़ियों की बुनाई से मिल रही नई पहचानरायपुर। ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ग्रामीण भारत में बुनकरों—विशेषकर महिलाओं—को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त माध्यम है। यह समिति कच्चे माल की खरीद, कौशल प्रशिक्षण और तैयार उत्पादों के विपणन की सुविधा प्रदान करके बुनकरों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाती है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। छत्तीसगढ़ शासन के ग्रामोद्योग विभाग (हाथकरघा प्रभाग) की योजनाओं से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। धमतरी जिले के ग्राम नारी की ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति आज आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक हस्तकला के संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बन गई है। नारी की ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति सरकारी सहयोग और बुनकरों की मेहनत से यह समिति न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार का माध्यम बनी है, बल्कि पड़ोसी राज्य ओडिशा के बाजारों में भी अपनी अलग पहचान बना रही है। ग्राम नारी में पहले बुनाई प्रमुख आजीविका नहीं थी। ओडिशा में संबलपुरी साड़ियों की बढ़ती मांग को देखते हुए समिति ने इस कला को अपनाया। अपनी विशिष्ट इकत डिज़ाइन, आकर्षक रंगों और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण संबलपुरी साड़ियों की बाजार में अच्छी मांग है। गांव की महिलाओं ने इस चुनौतीपूर्ण कला को सीखकर पारंपरिक हुनर को आय का स्थायी स्रोत बना लिया।छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शासकीय वस्त्र उत्पादन कार्यक्रम के तहत समिति को नियमित धागा उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही समितियों के सुचारु संचालन के लिए सेवा प्रभार के रूप में आर्थिक सहायता, नवीन बुनाई प्रशिक्षण और आधुनिक करघों का वितरण भी किया गया है। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ी है और बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण वस्त्र तैयार हो रहे हैं।वर्तमान में ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति प्रतिमाह लगभग 300 से 400 संबलपुरी साड़ियों का उत्पादन कर रही है। इनकी बिक्री मुख्यतः ओडिशा के विभिन्न बाजारों में होती है। समिति का मासिक कारोबार अब 3 से 4 लाख रुपये तक पहुंच गया है।इस पहल का सबसे बड़ा लाभ गांव की महिलाओं को मिला है। पहले महिलाएं शासकीय वस्त्र उत्पादन से प्रतिदिन 300 से 350 रुपये कमाती थीं, अब उनकी दैनिक आय 550 से 600 रुपये तक बढ़ गई है। कौशल उन्नयन के माध्यम से भविष्य में आय को 1,000 से 1,200 रुपये प्रतिदिन तक ले जाने का लक्ष्य है। इससे महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सामूहिक निर्णय लेने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिला है।ग्राम नारी की यह सफलता बताती है कि शासन की योजनाएं, आधुनिक प्रशिक्षण और स्थानीय मेहनत मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती हैं। यदि समिति को ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और नए बाजारों तक पहुंच का अवसर मिले, तो यह छत्तीसगढ़ के हाथकरघा उद्योग को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
- -मासिक सहायता से शुरू किया स्वरोजगार और बनी आत्मनिर्भररायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना जिले की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता अब केवल घरेलू जरूरतें पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार का मजबूत आधार बन रही है। मुंगेली जिले के विकासखंड पथरिया के ग्राम जरेली-जुनवानी निवासी श्रीमती शांति बाई ने महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह मिलने वाली 01 हजार रुपये की राशि का सदुपयोग करते हुए अपने गांव में जनरल स्टोर की शुरुआत की। आज उनकी छोटी-सी दुकान परिवार की नियमित आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।शांति बाई ने बताया कि योजना से मिलने वाली राशि से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और इससे उन्हें स्वरोजगार शुरू करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने धीरे-धीरे दुकान में आवश्यक घरेलू सामान रखना शुरू किया। समय के साथ इस स्वरोजगार से वे आत्मनिर्भरत की ओर आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले परिवार की आय सीमित थी, लेकिन अब दुकान से होने वाली अतिरिक्त आमदनी से घरेलू खर्चों को पूरा करने, बच्चों की आवश्यकताओं और भविष्य के लिए बचत करने में भी सहायता मिल रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि अब उन्हें आर्थिक रूप से किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। शांति बाई ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी दे रही है। उन्होंने अन्य महिलाओं को योजना के तहत से मिलने वाली राशि का उपयोग स्वरोजगार और आय बढ़ाने वाले कार्यों में करने की समझाइश दी है।
- दुर्ग / छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के० विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में 18 जुलाई (शनिवार) को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 (चेक बाउंस प्रकरण) से संबंधित मामलों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण निराकरण हेतु विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष लोक अदालत का उद्देश्य न्यायालयों में लंबित चेक बाउंस प्रकरणों का आपसी सहमति एवं समझौते के आधार पर शीघ्र, सरल एवं प्रभावी निराकरण कर पक्षकारों को दीर्घकालीन न्यायिक प्रक्रिया से राहत प्रदान करना है।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने ऐसे सभी चेक धारकों, चेक जारीकर्ताओं, पक्षकारों तथा संबंधित अधिवक्ताओं से अपील की है कि जिनके धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम से संबंधित प्रकरण न्यायालय में लंबित हैं, वे अपने अधिवक्ता के माध्यम से अथवा संबंधित न्यायालय से संपर्क कर विशेष लोक अदालत का अधिकतम लाभ उठाएं तथा आपसी समझौते के माध्यम से अपने विवाद का स्थायी एवं सौहार्दपूर्ण समाधान प्राप्त करें। उक्त संंबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा सम्पूर्ण दुर्ग जिले में विभिन्न माध्यमों से व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार भी किया गया है। विशेष लोक अदालत को सफल बनाने हेतु मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत तथा आकांक्षा राठौर एवं अंजली सिंह न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की विशेष टीम गठित की गई थी। टीम द्वारा संबंधित अधिवक्ताओं एवं पक्षकारों से निरंतर संपर्क स्थापित कर, आपसी संवाद एवं समझौते के लिए प्रेरित करते हुए अधिकाधिक प्रकरणों के सौहार्दपूर्ण निराकरण के उद्देश्य से अथक एवं सराहनीय प्रयास किए गए हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने विश्वास व्यक्त किया है कि इन प्रयासों से विशेष लोक अदालत में अधिकाधिक प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण संभव होगा। विशेष लोक अदालत में समझौते के आधार पर प्रकरणों का निराकरण होने से पक्षकारों के समय, धन एवं श्रम की बचत होती है, आपसी संबंधों में सुधार होता है तथा विवाद का शीघ्र एवं संतोषजनक समाधान संभव हो पाता है। लोक अदालत में पारित निर्णय दोनों पक्षों पर बाध्यकारी होता है तथा उसका विधिक महत्व न्यायालय के निर्णय के समान होता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस महत्वपूर्ण अवसर का लाभ उठाकर अपने लंबित चेक बाउंस प्रकरणों का आपसी समझौते के माध्यम से सौहार्दपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें तथा न्याय सुलभ, त्वरित एवं सरल बनाने की इस पहल में सहभागी बनें।
- -प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन ने बालोद सहित अन्य स्टेशनों के लोकार्पण पर प्रधानमंत्री मोदी व रेल मंत्री वैष्णव का जताया आभाररायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन ने 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के लगभग 3 प्रमुख रेलवे स्टेशनों के आधुनिक पुनर्विकास और आकर्षक स्वरूप में तैयार होने तथा शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इन पुनर्विकसित स्टेशनों के भव्य लोकार्पण कार्यक्रम को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारतीय रेल का अभूतपूर्व आधुनिकीकरण हो रहा है।भाजपा प्रदेश महामंत्री श्री जैन ने कहा कि छत्तीसगढ़ को बुनियादी ढाँचे और सुगमता के क्षेत्र में लगातार नई सौगातें मिल रही हैं। इसी कड़ी में प्रदेश के 3 रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस कर नया व आकर्षक रूप दिया गया है, जिसमें बालोद रेलवे स्टेशन भी प्रमुखता से शामिल है। बालोद एवं अन्य रेलवे स्टेशनों का यह नया स्वरूप न केवल यात्रियों को आधुनिक सुविधाएँ प्रदान करेगा बल्कि स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार को भी एक नई गति देगा। उन्होंने कहा कि बालोद रेलवे स्टेशन को जिस आकर्षक और भव्य ढंग से पुनर्विकसित किया गया है, वह क्षेत्र की जनता के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। रेलवे स्टेशनों का यह कायाकल्प नए भारत की बदलती तस्वीर और छत्तीसगढ़ के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है। बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने और छत्तीसगढ़ के विकास को नई ऊँचाई देने के लिए प्रदेश महामंत्री श्री जैन ने समस्त प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री श्री मोदी और रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया है।
- -हाई रिस्क प्रेगनेंसी महिलाओं के गृहभेंट, कुपोषण मुक्त आंगनबाड़ी और सेल्फ आधार पर दिया गया विशेष फोकसरायपुर । कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक ली । बैठक में विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति, लक्ष्य एवं क्रियान्वयन की बिंदुवार समीक्षा की गई तथा आवश्यक निर्देश दिए गए। बैठक में हाई रिस्क प्रेगनेंसी HRP महिलाओं के गृहभेंट पर विशेष जोर दिया गया। सीईओ ने निर्देशित किया कि HRP महिलाओं के घरों का भ्रमण आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम एवं मितानिन द्वारा संयुक्त रूप से किया जाए। गृहभेंट के दौरान स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी आवश्यक परामर्श देकर समन्वित कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। पोषण पुनर्वास केंद्र NRC में संदर्भित बच्चों के संबंध में अभिभावकों की समुचित काउंसलिंग करने के निर्देश दिए गए। उन्हें यह स्पष्ट किया जाए कि उपचार एवं पोषण प्रबंधन हेतु बच्चों को लगभग 15 दिनों तक NRC में रहना अनिवार्य है।जिले में कुपोषण मुक्त आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा गया। जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया गया कि आगामी माह तक कुपोषण मुक्त आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की जाए तथा इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए। बैठक में सेल्फ आधार की प्रगति की भी समीक्षा की गई। लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण कर निर्धारित लक्ष्य को समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। वित्तीय वर्ष 2025-26 की प्रथम तिमाही में जन्मे बच्चों की जानकारी लेते हुए सभी परियोजना अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जन्म पंजीयन, टीकाकरण, पोषण सेवाओं एवं अन्य विभागीय योजनाओं से शत-प्रतिशत बच्चों को लाभान्वित किया जाए। बैठक के समापन में जिला पंचायत सीईओ ने श्री बिश्वरंजन ने विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, नियमित मॉनिटरिंग तथा निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति सुनिश्चित करने पर बल दिया। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री कुमार बिश्वरंजन, जिला कार्यक्रम अधिकारी सुश्री शैल ठाकुर, सभी परियोजना अधिकारी एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
- -सभी स्कूलों में शत-प्रतिशत किचन गार्डन बनाने के दिए निर्देश, मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोररायपुर । कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने शिक्षा विभाग की साप्ताहिक समीक्षा बैठक ली। बैठक में विभागीय योजनाओं, छात्र-हित से जुड़े कार्यक्रमों एवं पोषण संबंधी कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की गई। बैठक में अधिकारियों ने किचन गार्डन एवं शाला पोषण वाटिका की प्रगति की जानकारी दी। इस पर कलेक्टर ने जिले के सभी शासकीय स्कूलों में शत-प्रतिशत किचन गार्डन तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों को ताजे फल-सब्जी उपलब्ध होंगे और पोषण स्तर में सुधार होगा।कलेक्टर ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना मध्यान्ह भोजन, न्योता भोजन एवं प्रोजेक्ट आओ बांटे खुशियां की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शहरी क्षेत्र में मध्यान्ह भोजन से जुड़े बच्चों की संख्या में वृद्धि की जाए ताकि सभी बच्चों को निर्धारित मानक के अनुसार पौष्टिक भोजन मिल सके। उन्होंने कहा कि स्कूलों में स्वच्छता, मेन्यू की विविधता और भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही भोजन पकाने एवं परोसने में स्वच्छता मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री कुमार बिश्वरंजन, जिला शिक्षा अधिकारी सहित शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
- -कलेक्टर ने ली जिला स्वास्थ्य समिति की बैठकरायपुर । कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक ली । इसमें स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा की गई।बैठक में सीईओ ने पूर्व बैठक में दिए गए निर्देशों के परिपालन की एक-एक कर समीक्षा की। सभी नोडल अधिकारी एवं खंड चिकित्सा अधिकारियों से प्रगति की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।सभी शासकीय एवं निजी स्वास्थ्य केंद्रों में मातृ स्वास्थ्य की एंट्री जननी पोर्टल में 7 दिवस के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। शत-प्रतिशत हितग्राहियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया। सभी मातृ एवं शिशु मृत्यु प्रकरणों का अनिवार्य रूप से ऑडिट किया जाए। BMO स्वयं जाकर प्रकरणों का अवलोकन करेंगे।आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन एवं ANM द्वारा संयुक्त रूप से HRP महिलाओं के घरों का भ्रमण कर स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी परामर्श देने के निर्देश दिए गए।पूर्ण टीकाकरण का डाटा यू-विन पोर्टल से लिया जाएगा। शेष बचे हुए बच्चों एवं बैकलॉग को शत-प्रतिशत पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। स्कूलों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में HPV Vaccination का शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने को कहा गया।NCD पोर्टल में एंट्री की गति बढ़ाकर लक्ष्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए निजी चिकित्सालयों का सहयोग लेने को कहा गया। NTCP के तहत स्कूलों में तंबाकू निषेध संबंधी जागरूकता गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए।आयुष्मान मेला, स्वास्थ्य शिविर एवं टेलीमेडिसिन सेवाओं की उपलब्धि पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। सभी निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पैकेज दरों की सूची का QR कोड बनाकर प्रदर्शित न करने पर नाराजगी व्यक्त की गई और इसे तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मिथलेश चौधरी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
- -कार्यक्रम में शामिल हुई 365 छात्राएं, दी गयी विभिन्न करियर विकल्पों की जानकारीरायपुर / कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने तथा उनके भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से शासकीय श्यामा प्रसाद मुखर्जी कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रायपुर में नवाचारी पहल विजयी भवः के अंतर्गत करियर काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम में कक्षा 9वीं से 12वीं तक की कुल 365 छात्राएं शामिल हुईं। विशेषज्ञों ने छात्राओं को विभिन्न कैरियर विकल्पों, व्यक्तित्व विकास, उच्च शिक्षा के अवसरों तथा भविष्य की संभावनाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। साथ ही छात्राओं को अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करने तथा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में जिले के गणमान्य नागरिक श्री नागेश बंछोर, डॉ. राधेश्याम बघेल, डॉ. मीरा बघेल एवं श्री शिव कुमार वर्मा उपस्थित रहे।
- रायपुर। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले ग्राम मैनपुर के प्रगतिशील किसान इंद्रभान सिंह कंवर, पिता श्री ललन सिंह कंवर वर्षों से खेती-किसानी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। हर किसान की तरह उनकी भी यही इच्छा थी कि कम लागत में अधिक उत्पादन मिले, मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और खेती पहले से अधिक लाभकारी बन सके। लगातार बढ़ती खेती की लागत और रासायनिक उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता उनके सामने एक बड़ी चुनौती थी। ऐसे समय में कृषि विभाग और सहकारी समिति के मार्गदर्शन में उन्होंने इफको नैनो डीएपी के बारे में जानकारी प्राप्त की और इसे अपनी खेती में अपनाने का निर्णय लिया।शुरुआत में उनके मन में भी कई तरह की शंकाएं थीं। उन्हें लगता था कि पारंपरिक डीएपी की जगह इतनी कम मात्रा में उपयोग होने वाला नैनो डीएपी क्या वास्तव में उतना ही प्रभावी होगा। लेकिन कृषि विशेषज्ञों ने उन्हें इसकी विशेषताओं, उपयोग की विधि और लाभों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नैनो डीएपी पौधों द्वारा आसानी से अवशोषित हो जाता है, जिससे पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग होता है और फसल का विकास अधिक प्रभावी ढंग से होता है। इसी विश्वास के साथ उन्होंने खरीफ सीजन में अपनी धान की फसल में नैनो डीएपी का उपयोग किया।फसल बढ़ने के साथ ही उन्हें सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे। पौधों की बढ़वार पहले की तुलना में अधिक समान और स्वस्थ दिखाई दी। खेत में हरियाली बनी रही तथा पौधों की वृद्धि संतुलित रही। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्हें महसूस हुआ कि नई तकनीक वास्तव में खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।इंद्रभान सिंह कंवर बताते हैं कि नैनो डीएपी के उपयोग से उन्हें उर्वरक के बेहतर उपयोग का लाभ मिला। कम मात्रा में उत्पाद का उपयोग होने से परिवहन और भंडारण भी आसान रहा। खेती की लागत को नियंत्रित करने में सहायता मिली और फसल की गुणवत्ता में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिला। उनका मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार नैनो डीएपी का उपयोग करें तो बेहतर उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। वे बताते हैं कि पहले जहां पारंपरिक उर्वरकों पर अधिक खर्च करना पड़ता था, वहीं अब आधुनिक तकनीक आधारित उर्वरकों के उपयोग से खेती अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक होती जा रही है।
- रायपुर ।छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) बिहान आज ग्रामीण महिलाओं के जीवन में परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन चुका है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर उन्हें स्वरोजगार, आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। बिहान की सहायता से हजारों महिलाएं अपने सपनों को साकार कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के साथ-साथ समाज में अपनी अलग पहचान स्थापित कर रही हैं। इन्हीं प्रेरणादायक महिलाओं में एमसीबी जिले के विकासखंड भरतपुर के ग्राम मलकडोल की रहने वाली श्रीमती मीरा सिंह का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। ग्राम मलकडोल में गठित परी महिला स्व-सहायता समूह में 10 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। बिहान मिशन की विकासखंड मिशन प्रबंधन इकाई द्वारा समूह की महिलाओं को नियमित प्रशिक्षण, क्षमता विकास और स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया गया। मीरा सिंह भी प्रारंभ से ही इस समूह की सक्रिय सदस्य रहीं। एक साधारण गृहिणी के रूप में परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाली मीरा सिंह के मन में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की प्रबल इच्छा थी। उन्होंने समूह की बैठकों में नियमित भाग लिया, समूह के 11 सूत्रों का पालन किया और आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन को नई दिशा देने का निर्णय लिया।समूह को प्राप्त रिवॉल्विंग फंड (आरएफ) से उन्होंने 15 हजार रुपये का ऋण लेकर सबसे पहले अपने परिवार की आवश्यक जरूरतों को पूरा किया। इसके बाद समूह को सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) के रूप में 60 हजार रुपये की सहायता प्राप्त हुई। इस आर्थिक सहयोग ने उनके सपनों को नई गति दी और उन्होंने लगभग एक लाख रुपये का निवेश कर बकरी पालन का व्यवसाय प्रारंभ किया।बकरी पालन बना समृद्धि का नया रास्तामीरा सिंह ने पूरी मेहनत, लगन और समर्पण के साथ बकरी पालन को आजीविका का माध्यम बनाया। शुरुआत में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने व्यवसाय को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया। उनकी मेहनत रंग लाई और आज उनका बकरी पालन व्यवसाय लगातार सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वर्तमान में वे इस व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 10 हजार रुपये की नियमित आय अर्जित कर रही हैं तथा एक वर्ष में लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये का लाभ प्राप्त कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना चुकी हैं।इस आय से उन्होंने अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित की है। आज वे आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और आर्थिक स्वावलंबन की मिसाल बन गई हैं।
- -अनामिका महिला स्व-सहायता समूह की सफलता की मिसाल, फूलकली ने स्वरोजगार से लिखी समृद्धि की नई कहानीएमसीबी/ सेंट्रिंग प्लेट व्यवसाय से चमकी फूलकली की किस्मत, बिहान ने बनाया आत्मनिर्भरता का प्रतीकजिले के विकासखंड भरतपुर के ग्राम डोंगरीटोला की रहने वाली श्रीमती फूलकली की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि आत्मविश्वास, मेहनत और सही मार्गदर्शन का साथ मिल जाए तो सीमित संसाधनों के बीच भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) बिहान से जुड़कर उन्होंने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि गांव की अनेक महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गईं।बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संगठित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। इस मिशन के तहत महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और व्यावसायिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। यही प्रयास आज हजारों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है और उनमें से एक नाम है अनामिका महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती फूलकली का।ग्राम डोंगरीटोला में 4 अक्टूबर 2019 को गठित अनामिका महिला स्व-सहायता समूह में 10 महिलाएं शामिल हैं। बिहान मिशन की विकासखंड मिशन प्रबंधन इकाई के मार्गदर्शन और सतत क्षमता विकास कार्यक्रमों ने समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का नया रास्ता दिखाया। फूलकली भी प्रारंभ से ही इस समूह से जुड़ीं। एक साधारण गृहिणी के रूप में जीवन व्यतीत करने वाली फूलकली के मन में अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना था। उन्होंने समूह की बैठकों में नियमित भाग लिया, समूह के सभी नियमों का पालन किया और आजीविका के नए अवसरों को अपनाने का संकल्प लिया।समूह को प्राप्त रिवॉल्विंग फंड से उन्होंने 15 हजार रुपये का ऋण लेकर सबसे पहले अपने परिवार की आवश्यक जरूरतों को पूरा किया। इसके बाद समूह को प्राप्त सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपये की सहायता मिली। इस राशि ने उनके सपनों को नई दिशा दी। उन्होंने लगभग एक लाख रुपये का निवेश कर सेंट्रिंग प्लेट का व्यवसाय प्रारंभ किया। शुरुआती दौर में उन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन अपने परिश्रम, ईमानदारी और लगन के बल पर धीरे-धीरे व्यवसाय को आगे बढ़ाया।आज फूलकली दीदी का सेंट्रिंग प्लेट व्यवसाय सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। इस कार्य से उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 हजार रुपये की नियमित आय प्राप्त हो रही है और एक वर्ष में लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये का लाभ अर्जित कर रही हैं। इस आय से उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, घरेलू आवश्यकताओं को सहजता से पूरा किया और भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित की है। कभी जो महिला केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, वही आज अपने परिवार की आर्थिक आधारशिला बन चुकी हैं।फूलकली की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन गई है। उनकी मेहनत और उपलब्धियों को देखकर अन्य महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित हो रही हैं। आज वे गांव की महिलाओं को यह संदेश दे रही हैं कि आत्मनिर्भर बनने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और सही दिशा में किए गए प्रयासों की आवश्यकता होती है।अनामिका महिला स्व-सहायता समूह आज ग्रामीण महिलाओं की सामूहिक शक्ति का प्रतीक बन चुका है। बिहान मिशन के सहयोग, वित्तीय सहायता और निरंतर मार्गदर्शन ने समूह की महिलाओं को आत्मविश्वास दिया है, जिससे वे अपने सपनों को साकार कर रही हैं। फूलकली ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि अवसर मिले और उसका सही उपयोग किया जाए तो ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं।फूलकली की यह प्रेरणादायक यात्रा बिहान मिशन के उस उद्देश्य को साकार करती है, जिसमें प्रत्येक ग्रामीण महिला को आत्मनिर्भर, सम्मानजनक और समृद्ध जीवन जीने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। आज वे न केवल अपने परिवार की खुशहाली की आधारशिला हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए उम्मीद, आत्मविश्वास और सशक्तिकरण की सशक्त पहचान बन चुकी हैं। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से हर सपना साकार किया जा सकता है।
- -खाद-बीज की समय पर उपलब्धता से बढ़ा उत्पादन, शासन के प्रति जताया आभारअम्बिकापुर । किसानों को खेती-किसानी के लिए समय पर ऋण उपलब्ध कराने तथा कृषि कार्यों को सुगम बनाने के उद्देश्य से संचालित किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। योजना के माध्यम से किसानों को कृषि आदानों की समय पर उपलब्धता मिल रही है, जिससे वे खेती के कार्य निर्धारित समय पर कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। जिले के ग्राम पंचायत कंचनपुर निवासी किसान एवं किसान मित्र ललन राजवाड़े भी ऐसे ही लाभान्वित किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ लेकर अपनी खेती को नई दिशा दी है।ललन राजवाड़े बताते हैं कि कुछ समय पहले तक खेती-किसानी करना उनके लिए आसान नहीं था। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण कृषि कार्यों के लिए आवश्यक खाद, बीज एवं अन्य कृषि सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती थी। इसका सीधा प्रभाव खेती और उत्पादन पर पड़ता था। इसी दौरान वे किसान मित्र से जुड़े और उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड योजना की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपने नजदीकी सहकारी समिति के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड बनवाया।केसीसी बनने के बाद उन्हें खेती-किसानी के लिए आवश्यक ऋण उपलब्ध हुआ। इस राशि से उन्होंने समय पर खाद-बीज एवं अन्य कृषि सामग्री की व्यवस्था की, जिससे खेती के सभी कार्य समय पर संपादित हो सके। उनका कहना है कि अब खेती पहले की अपेक्षा अधिक व्यवस्थित ढंग से हो रही है और कृषि उत्पादन में भी सुधार देखने को मिला है।उन्होंने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड योजना के कारण खेती के लिए बार-बार आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ता। आवश्यकता के समय ऋण की सुविधा मिलने से कृषि कार्य बिना बाधा के पूरे हो जाते हैं, जिससे खेती करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है। इससे उन्हें आत्मविश्वास के साथ खेती करने की प्रेरणा मिली है और वे बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। किसान ललन राजवाड़े ने किसान हित में संचालित योजनाओं के लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड योजना किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने कहा कि समय पर वित्तीय सहायता मिलने से किसानों को खेती में सुविधा मिलती है, जिससे उनकी आय बढ़ाने और कृषि को सुदृढ़ बनाने में मदद मिल रही है।
- -सीड बॉल के जरिए पहाड़ियों और बंजर भूमि में बढ़ेगी हरियाली, ग्रामीणों और महिलाओं की भागीदारी से बना जन-अभियानरायपुर। सीड बॉल निर्माण महाअभियान पर्यावरण संरक्षण और वनीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक जन-सहभागी पहल है। इसमें स्थानीय बीजों को मिट्टी और जैविक खाद के मिश्रण में लपेटकर छोटी-छोटी गेंदें (सीड बाल) बनाई जाती हैं, जिन्हें बारिश में खाली या बंजर जमीन पर बिखेर दिया जाता है।दंतेवाड़ा जिले को हरा-भरा बनाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने मिलकर एक दिवसीय सीड बॉल निर्माण महाअभियान आयोजित किया। अभियान में ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों, युवाओं, विद्यार्थियों, किसानों और सामाजिक संगठनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान एक ही दिन में 1 लाख से अधिक सीड बॉल तैयार किए गए।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में अभियान की कार्ययोजना तैयार की गई। कृषि विभाग ने सीड बॉल निर्माण के लिए स्थानीय जलवायु के अनुकूल मिट्टी, जैविक खाद और महुआ, इमली, हर्रा, बहेड़ा, जामुन, करंज, नीम, चार और खमार जैसी स्थानीय प्रजातियों के बीजों का चयन किया। ग्रामीणों और महिला स्व-सहायता समूहों को सीड बॉल तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया गया।सीड बॉल मिट्टी, जैविक खाद और बीजों से तैयार किए जाते हैं। इन्हें बारिश के मौसम में पहाड़ी, दुर्गम और बंजर क्षेत्रों में फैलाया जाता है। बारिश के पानी से बीजों को नमी मिलती है और वे प्राकृतिक रूप से अंकुरित होकर पौधों का रूप लेते हैं। इस तकनीक में गड्ढे खोदने, नियमित सिंचाई और ट्री-गार्ड की आवश्यकता नहीं होती। इससे कम लागत में बड़े क्षेत्र में हरियाली विकसित की जा सकती है।जिला प्रशासन द्वारा तैयार किए गए सीड बॉल को वन विभाग और स्थानीय समितियों के सहयोग से वन क्षेत्रों, पहाड़ियों और अनुपजाऊ भूमि में फैलाया जाएगा, इससे जिले में हरित आवरण बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी संरक्षण, भूजल संवर्धन और जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा। भविष्य में इन पेड़ों से मिलने वाले लघु वनोपज से ग्रामीणों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी।अभियान में महिला स्व-सहायता समूहों की विशेष भूमिका रही। विद्यार्थियों, किसानों, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संगठनों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। एक ही दिन में 1 लाख से अधिक सीड बॉल तैयार कर दंतेवाड़ा ने यह संदेश दिया है कि प्रशासनिक संकल्प, वैज्ञानिक तकनीक और जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के बड़े लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। यह पहल आने वाले वर्षों में दंतेवाड़ा की पहाड़ियों और वन क्षेत्रों को और अधिक हरा-भरा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
- रायपुर। कृषि केवल खेतों में बीज बोकर फसल काटने का नाम नहीं है, बल्कि यह माटी के साथ सामंजस्य बिठाकर जीवन को एक नया आकार देने की साधना है। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के वनांचल में आज बदलाव की एक ऐसी ही खूबसूरत बयार बह रही है, जो पारंपरिक ढर्रे को छोड़कर आधुनिक सोच को अपनाने से मुमकिन हुई है। इस बदलाव के सूत्रधार बने हैं चिहरीपारा गांव के प्रगतिशील किसान भूपेन्द्र कुमार पुजारी, जिन्होंने अपनी लगन और सरकारी योजनाओं के सही तालमेल से आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिख दी है।*चुनौतियों का दौर और बदलाव की छटपटाहट*एक समय था जब भूपेन्द्र अपने 2.80 हेक्टेयर के खेत में केवल पारंपरिक तरीके से धान उगाते थे। साल में सिर्फ एक बार फसल लेने के कारण आमदनी इतनी सीमित थी कि परिवार का गुजारा चलाना, बच्चों की पढ़ाई और अन्य सामाजिक जरूरतें पूरी करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था। वे बदलाव की राह तलाश रहे थे, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण राह आसान नहीं थी। तभी जिला प्रशासन और कृषि विभाग की साझा कोशिशों ने उनके जीवन में प्रवेश किया। कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में जब कृषि, उद्यानिकी, पशुधन और मत्स्य पालन विभागों ने मिलकर काम शुरू किया, तो भूपेन्द्र को भी अपनी किस्मत बदलने का एक जरिया दिखाई दिया।*सौर सुजला और जल संरक्षण से मिली नई दिशा*भूपेन्द्र के खेत में सबसे बड़ी समस्या पानी की थी, जिसका स्थायी समाधान क्रेडा विभाग की 'सौर सुजला योजना' से हुआ। खेत में जैसे ही सोलर पंप स्थापित हुआ, सिंचाई की चिंता हमेशा के लिए दूर हो गई। सिंचाई की व्यवस्था होते ही उन्होंने मनरेगा के तहत अपने खेत में एक डबरी (छोटा तालाब) का निर्माण कराया। यह डबरी सिर्फ पानी रोकने का साधन नहीं बनी, बल्कि इसने जल संरक्षण के साथ-साथ उनके लिए मत्स्य पालन का एक बिल्कुल नया और मुनाफेदार रास्ता भी खोल दिया।*एकीकृत कृषि प्रणाली: खुशहाली का नया मंत्र*कृषि वैज्ञानिकों के तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण से सीख लेकर भूपेन्द्र ने समझ लिया कि केवल एक फसल पर निर्भर रहना घाटे का सौदा हो सकता है। उन्होंने 'समन्वित कृषि प्रणाली' (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) को अपना मूलमंत्र बनाया। उन्होंने उन्नत तरीके से धान की पैदावार शुरू करने के साथ साथ उड़द की खेती, साग-सब्जी का उत्पादन, बैकयार्ड मुर्गीपालन और डबरी में मत्स्य पालन को भी अपनी दैनिक आजीविका का हिस्सा बना लिया।इस बहुआयामी दृष्टिकोण का असर उनकी आमदनी पर जादुई ढंग से दिखाई देने लगा। आज उन्हें जहां उन्नत धान की खेती से सालाना लगभग 80 हजार रुपये की कमाई हो रही है, वहीं मत्स्य पालन से लगभग 60 हजार रुपये सीधे उनके खाते में आ रहे हैं। इसके साथ ही साग-सब्जी से 24 हजार, मुर्गीपालन से 21 हजार और उड़द की फसल से मिलने वाली 17 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि ने उनकी आर्थिक स्थिति को बेहद मजबूत कर दिया है।*एक प्रेरणा, जो पूरे अंचल को रोशन कर रही है*भूपेन्द्र कुमार पुजारी का मानना है कि विविधता ही कृषि का असली भविष्य है। जब एक किसान अपने खेत में कई तरह के उपक्रम चलाता है, तो मौसम या बाजार के जोखिम बेहद कम हो जाते हैं और आय का जरिया साल भर बना रहता है। अपनी इस शानदार सफलता और आर्थिक आजादी के लिए वे मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।आज भूपेन्द्र की यह कहानी नारायणपुर जिले के बाकी किसानों के लिए उम्मीद का एक चमकता हुआ दीया बन चुकी है। 'आत्मा' योजना और कृषि विभाग के सहयोग से अब अंचल के अन्य किसान भी उनके खेत का भ्रमण कर रहे हैं और इस मॉडल को सीखकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। भूपेन्द्र की यह यात्रा इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अगर किसान के पास सही दृष्टिकोण, वैज्ञानिक सोच और शासन की कल्याणकारी योजनाओं का संबल हो, तो वनांचल के खेतों में भी समृद्धि की सुनहरी फसल उगाई जा सकती है।
- रायपुर - रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री संबित मिश्रा के निर्देशानुसार नगर निगम जोन 3 जोन कमिश्नर श्रीमती प्रीति सिंह के मार्गदर्शन एवं कार्यपालन अभियंता श्री ईश्वर लाल टावरे, सहायक अभियंता श्री नरेश कुमार साहू, उपअभियंता श्री अक्षय भारद्वाज, सुश्री श्रुति चतुर्वेदी की उपस्थिति में नगर निगम जोन 3 नगर निवेश विभाग की टीम द्वारा जोन 3 क्षेत्र अंतर्गत गुरू घासीदास वार्ड वार्ड क्रमांक 48 अंतर्गत काशीराम नगर गली नम्बर 1 में विगत कई वर्षों पूर्व पुराने नाली परके प्रवाह को रोकने किये गए लगभग 23 अवैध कब्जोँ को गन्दे पानी के सुगम निकास प्रबंधन एवं बारिश में जलभराव की समस्या की आशंका को दूर करने श्रमिकों की सहायता से तोड़ने एवं सफाई की बाधा दूर करने की कार्रवाई की गयी. उक्त स्थल पर नगर निगम द्वारा नाली की सफाई करवाकर सड़क एवं नाली का निर्माण जनहित में जनसुविधा की दृष्टि से शीघ्र किया जाना प्रस्तावित है.
- -परीक्षा की सभी तैयारियां समय पर पूर्ण करें : कलेक्टर डॉ. गौरव सिंहरायपुर । संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), नई दिल्ली द्वारा आयोजित सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स में सहायक कमांडेंट भर्ती परीक्षा-2026 का आयोजन 19 जुलाई 2026 को जिले के 4 परीक्षा केंद्रों में किया जाएगा। परीक्षा प्रथम पाली में प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक तथा द्वितीय पाली में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित होगी। परीक्षा में कुल 1704 अभ्यर्थी शामिल होंगे।कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने परीक्षा की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सभी पर्यवेक्षकों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर पेयजल, विद्युत, बैठक व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं पहले से सुनिश्चित कर ली जाएं। उन्होंने सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि प्रत्येक परीक्षार्थी की प्रवेश से पूर्व फ्रिस्किंग एवं फेस ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से पूरी की जाए।परीक्षा से संबंधित गोपनीय सामग्री का वितरण 19 जुलाई को जिला कोषालय, रायपुर से किया जाएगा। परीक्षा के संचालन हेतु डिप्टी कलेक्टर श्री नवीन ठाकुर को को - ऑर्डिनेटिंग सुपरवाइजर, डिप्टी कलेक्टर श्री उत्तम प्रसाद रजक को सहायक को - ऑर्डिनेटिंग सुपरवाइजर एवं रोजगार अधिकारी विशेष रोजगार कार्यालय श्री केदारनाथ पटेल को कंट्रोल रूम प्रभारी नियुक्त किया गया है। सभी अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे परीक्षा केंद्र पर प्रथम पाली में 9:30 बजे एवं द्वितीय पाली में 1:30 बजे तक पहुंचें, ताकि फ्रिस्किंग, फेस ऑथेंटिकेशन एवं अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं समय पर पूरी की जा सकें और उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
- बालोद। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत आवास प्लस 2.0 सर्वेक्षण का कार्य जिले में सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी ने बताया कि सर्वेक्षण से प्राप्त सिस्टम जनरेटेड प्रतीक्षा सूची का जिले के सभी ग्रामों में आयोजित ग्राम सभाओं में सार्वजनिक वाचन एवं 12 मापदंडों के आधार पर सत्यापन किया गया है। वर्तमान में उक्त सूची को पात्र, अपात्र श्रेणी के साथ ग्राम पंचायत एवं जनपद पंचायत के सूचना पटल पर प्रदर्शित कर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। योजना की मार्गदर्शिका के अनुसार, यदि किसी परिवार को त्रुटिवश सूची से हटाया गया है या वरीयता क्रम में कोई विसंगति है, तो वे निर्धारित तिथि 07 अगस्त 2026 तक दावा-आपत्ति प्रस्तुत कर सकते हैं। इस तिथि के पश्चात प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। प्राप्त आपत्तियों का निराकरण जिला स्तरीय अपीलीय समिति द्वारा किया जाएगा, जिनका निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा। अपीलीय समिति की अनुशंसा के बाद सूची में किसी भी प्रकार का बदलाव संभव नहीं होगा।
- बालोद। राज्य के शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में प्रवेश हेतु रिक्त सीटों के लिए ऑनलाइन आवेदन 24 जुलाई 2026 आमंत्रित किए जा रहे हैं। इच्छुक अभ्यर्थी वेबसाइट cgiti.admissions.nic.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके साथ ही किसी भी प्रकार की सहायता या जानकारी के लिए अभ्यर्थी निकटतम शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था से अथवा वेबसाइट पर प्रदर्शित हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा समय-सीमा के पूर्व आवेदक अपने आवेदन पत्र में किसी भी तरह की त्रुटि एवं संस्था, व्यवसाय प्राथमिकता क्रम में सुधार कर सकते हैं।
- -5 अगस्त तक जमा किए जा सकते हैं आवेदन-विभागीय वेबसाइट http//sportsyw.cg.gov.in पर आवेदन प्रारूप उपलब्धबिलासपुर । राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए शहीद राजीव पाण्डे पुरस्कार, शहीद कौशल यादव पुरस्कार, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार, शहीद पंकज विक्रम सम्मान, शहीद विनोद चौबे सम्मान, मुख्यमंत्री ट्रॉफी, नगद राशि, प्रेरणा निधि और डाइट मनी के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। पात्र खिलाड़ी, प्रशिक्षक एवं निर्णायक आगामी 5 अगस्त तक निर्धारित प्रारूप में अपने आवेदन जमा कर सकते हैं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की वेबसाइट http//sportsyw.cg.gov.in पर आवेदन के प्रारूप उपलब्ध हैं।खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा प्रतिवर्ष खिलाडियों, प्रशिक्षकों एवं निर्णायकों को खेल पुरस्कार प्रदान कर राज्य खेल अलंकरण से सम्मानित किया जाता है। राज्य के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और निर्णायकों को ये पुरस्कार दिए जाते हैं। राज्य खेल अलंकरण के अंतर्गत सीनियर वर्ग के ऐसे खिलाड़ियों को शहीद राजीव पाण्डे पुरस्कार से अलंकृत किया जाता है, जिन्होंने राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में या राष्ट्रीय खेलों में पदक प्राप्त किया हो या अधिकृत अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व किया हो।इसी प्रकार जूनियर वर्ग के उन खिलाड़ियों को शहीद कौशल यादव पुरस्कार से अलंकृत किया जाता है, जिन्होंने जूनियर वर्ग के राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में पदक प्राप्त किया हो। विगत 5 वर्षों में चार बार सीनियर वर्ग में राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाले महिला व पुरूष खिलाड़ियों को शहीद पंकज विक्रम सम्मान से सम्मानित किया जाता है। प्रशिक्षकों एवं निर्णायकों को वीर हनुमान सिंह पुरस्कार से अलंकृत किया जाता है।खेल से जुड़े 55 वर्ष या अधिक उम्र के ऐसे व्यक्ति जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में भाग लिया हो, या राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक प्राप्त किया हो, या खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवा दी हो, उन्हें शहीद विनोद चौबे सम्मान से अलंकृत किया जाता है। इसी प्रकार सीनियर व जूनियर वर्ग में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक प्राप्त दल को मुख्यमंत्री ट्रॉफी प्रदान की जाती है। इन सभी पुरस्कारों के नियम छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित किए गए हैं। नियमों के अंतर्गत पात्रता रखने वाले आवेदकों का प्रावीण्यता के आधार पर पुरस्कार के लिए चयन किया जाएगा।शहीद राजीव पाण्डे पुरस्कार हेतु 3 लाख रुपए, शहीद कौशल यादव पुरस्कार हेतु 1 लाख 50 हजार रुपए, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार हेतु 1 लाख 50 हजार रुपए, शहीद विनोद चौबे सम्मान एवं पंकज विक्रम सम्मान हेतु 25-25 हजार रुपए के नगद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। सीनियर एवं जूनियर वर्ग के दलीय खेलों के लिए मुख्यमंत्री ट्रॉफी प्रदान की जाएगी। इसके अंतर्गत ऐसे दलीय खेल जिनमें सदस्यों की संख्या 4 है, उन्हें सीनियर वर्ग में 2 लाख रुपए एवं जूनियर वर्ग में 1 लाख रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। ऐसे दलीय खेल जिनमें सदस्यों की संख्या 4 से अधिक है, उनमें सीनियर वर्ग में 5 लाख रुपए तथा जूनियर वर्ग में 3 लाख रुपए का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार राशि के साथ ही मानपत्र, अलंकरण फलक, ब्लेजर एवं टाई भी प्रदान की जाएगी।खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक प्राप्त विजेताओं को प्रोत्साहनस्वरूप नगद राशि पुरस्कार अलंकरण प्रदान किया जाता है। इसके लिए वर्ष 2025-26 में (1 अप्रैल से 31 मार्च तक के 1 वर्ष) जिन खिलाड़ियों ने सब-जूनियर, जूनियर एवं सीनियर वर्ग की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक प्राप्त किया है, वे जिला कार्यालय एवं अपने खेल संघों से आवेदन फॉर्म प्राप्त कर निर्धारित तिथि तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।जिन खिलाड़ियों ने अधिकृत राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पदक प्राप्त किया हो, या राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व किया हो, वे खेलवृत्ति (डाइट मनी) के लिए आवेदन कर सकते हैं। खेलवृत्ति हेतु अधिकतम आयु 19 वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए। खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए खेल संघों द्वारा वर्ष 2025-26 में (1 अप्रैल से 31 मार्च तक के 1 वर्ष) अर्जित की गई उपलब्धि हेतु प्रेरणा निधि के आवेदन जिला कार्यालय या खेल संचालनालय में निर्धारित तिथि तक जमा किए जा सकते हैं। खेल पुरस्कारों, नगद राशि, खेलवृत्ति एवं प्रेरणा निधि हेतु आवेदन फॉर्म संचालनालय, खेल एवं युवा कल्याण या विभाग के सभी जिला कार्यालयों एवं राज्य खेल संघों से प्राप्त किए जा सकते हैं। शहीद पंकज विक्रम सम्मान के आवेदन संघों के माध्यम से नियमानुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत राज्य खेल संघों की अनुसंशा सहित प्राप्त किए जाएंगे। पंकज विक्रम सम्मान के आवेदन संचालनालय एवं जिला कार्यालय में खिलाड़ियों से सीधे स्वीकार नहीं किए जाएंगे।जिला कार्यालयों या संचालनालय में राज्य खेल संघों से अनुशंसा सहित आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 5 अगस्त 2026 तक कार्यालयीन समय तक निर्धारित की गई है। आवेदन पत्रों के प्रारूप मयसूचना विभाग की वेबसाईट http//sportsyw.cg.gov.in पर उपलब्ध है। पुरस्कार संबंधी आवेदन केवल ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। विभागीय वेबसाइट http//sportsyw.cg.gov.in पर अपलोड किए गए आवेदन ही मान्य होंगे।पुरस्कार नियमों के प्रावधानों के अनुरूप जिन खिलाड़ियों की मान्यता प्राप्त संघ द्वारा पुरस्कार के लिए अनुशंसा नहीं की गई है, पर तुलनात्मक रूप से उनकी उपलब्धि अधिक है, वे तत्संबंधी विवरण प्रस्तुत कर निर्धारित प्रारूप में अपने व्यक्तिगत विवरण की जानकारी 5 अगस्त 2026 तक कार्यालयीन समय में सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम, जी.ई. रोड, रायपुर स्थित खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालनालय या विभाग के जिला कार्यालयों में अपना आवेदन सीधे जमा कर सकते हैं।



























