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- रायपुर ।छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। जिला बीजापुर में 30 और सुकमा में 21 माओवादी कैडरों ने राज्य सरकार की पुनर्वास आधारित पहल “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” के अंतर्गत आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों पर कुल 1.61 करोड़ का इनाम घोषित था।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि हथियारों का परित्याग कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था व्यक्त करना यह स्पष्ट संकेत देता है कि सुरक्षा, सुशासन और समावेशी प्रगति ही किसी भी क्षेत्र के दीर्घकालिक भविष्य की सुदृढ़ नींव होते हैं। यह घटनाक्रम बस्तर में शांति स्थापना के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों का सकारात्मक और ठोस परिणाम है। बीते दो वर्षों में बस्तर के दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इस विकासात्मक पहल ने भटके युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक जीवन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की सुशासन आधारित नीति का केंद्र बिंदु सुरक्षा के साथ-साथ विश्वास, पुनर्वास और भविष्य की संभावनाओं का निर्माण है। आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विज़न, माननीय अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा राज्य सरकार के सतत प्रयासों से बस्तर आज भय और हिंसा से निकलकर विश्वास, विकास और नए अवसरों की ओर तेज़ी से अग्रसर हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में बस्तर एक विकसित, शांत और समृद्ध क्षेत्र के रूप में देश के सामने नई पहचान स्थापित करेगा।
- रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल और लंबे समय तक संघर्षों के लिए पहचाने जाने वाले अबूझमाड़ ने शनिवार को अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम के शुभारंभ समारोह में अबूझमाड़ मल्लखंब एंड स्पोर्ट्स एकेडमी के नन्हे खिलाड़ियों ने देश की सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के समक्ष मल्लखंब की अद्भुत प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।यह पहला अवसर था जब अबूझमाड़ क्षेत्र के बच्चों ने एक साथ राष्ट्रपति के समक्ष मल्लखंब का जीवंत और साहसिक प्रदर्शन किया। लकड़ी के खंभे पर जब इन नन्हे कलाकारों ने असाधारण संतुलन, फुर्ती और कठिन करतबों का प्रदर्शन किया, तो मैदान में मौजूद दर्शक विस्मय से भर उठे। जोश, अनुशासन और उत्कृष्ट तकनीक से सजी इस प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भावविभोर कर दिया।राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु स्वयं बच्चों की प्रतिभा से अत्यंत प्रभावित हुईं । उन्होंने न केवल उनके साहस, कला और अनुशासन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी प्रदान कीं।इस ऐतिहासिक उपलब्धि की नींव नारायणपुर जिले के उन दुर्गम और बीहड़ इलाकों में पड़ी है, जहां आज भी बुनियादी सुविधाएं सीमित हैं। कुटूर, करपा और परपा जैसे सुदूर वनांचलों से निकलकर इन बच्चों ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा न तो संसाधनों की मोहताज होती है और न ही भौगोलिक सीमाओं की।इस संघर्षपूर्ण यात्रा के प्रेरणास्रोत मनोज प्रसाद हैं, जो एकेडमी के संस्थापक होने के साथ-साथ 16वीं बटालियन में आरक्षक के रूप में अपनी सेवाएं भी दे रहे हैं। उनके कुशल नेतृत्व, अनुशासन और सतत मार्गदर्शन में इन बच्चों ने अभावों को पीछे छोड़ते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।इन नन्हे मल्लखंब खिलाड़ियों ने ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ का खिताब जीतकर और ‘रोमानियाज गॉट टैलेंट’ में उपविजेता बनकर पहले ही वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों में 40 से 50 से अधिक टेलीविजन शो, देशभर में सैकड़ों मंचीय प्रस्तुतियों, तथा अनेक प्रतियोगिताओं में स्वर्ण और रजत पदक जीतकर यह टोली निरंतर सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही है।अब यह दल अपनी मिट्टी की खुशबू, लोक-संस्कृति और अद्वितीय कौशल को और अधिक सशक्त रूप में सात समंदर पार ले जाने के लिए तैयार है। एकेडमी का अगला लक्ष्य भविष्य में ‘अमेरिकाज गॉट टैलेंट’ और ‘ब्रिटेन्स गॉट टैलेंट’ जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंचों पर भारत और अबूझमाड़ की लोक-कला का प्रदर्शन करना है। जगदलपुर में हुआ यह ऐतिहासिक प्रदर्शन न केवल अबूझमाड़ मल्लखंब एंड स्पोर्ट्स एकेडमी, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। यह आयोजन ‘बदलते बस्तर’ की उस सशक्त तस्वीर को प्रस्तुत करता है, जहां संघर्ष की जमीन से प्रतिभा के नए सितारे उभर रहे हैं।
- रायपुर। शनिवार का दिन बस्तर के इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब संभाग स्तरीय ‘बस्तर पण्डुम’ के शुभारंभ अवसर पर देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर की आदिम संस्कृति का सजीव और जीवंत स्वरूप प्रत्यक्ष रूप से देखा। इस गरिमामयी अवसर पर बास्तानार क्षेत्र के आदिवासी युवाओं द्वारा प्रस्तुत विश्व-प्रसिद्ध ‘गौर नृत्य’ ने पूरे परिसर को ढोल की थाप और घुंघरुओं की झनकार से गुंजायमान कर दिया। राष्ट्रपति ने इस मनोहारी प्रस्तुति का तन्मयता से अवलोकन करते हुए बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को निकट से महसूस किया।बास्तानार के युवाओं द्वारा प्रस्तुत यह नृत्य केवल एक सांस्कृतिक प्रदर्शन भर नहीं था, बल्कि ‘दंडामी माड़िया’ (बाइसन हॉर्न माड़िया) जनजाति की परंपराओं, जीवन-दर्शन और सांस्कृतिक चेतना का एक जीवंत दस्तावेज था। जैसे ही नर्तक दल मंच पर उतरा, उनकी विशिष्ट वेशभूषा ने उपस्थित जनसमूह का ध्यान सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर लिया। पुरुष नर्तकों के सिर पर सजे गौर के सींगों वाले मुकुट, जिन्हें कौड़ियों और मोरपंखों से अलंकृत किया गया था, बस्तर की वन्य संस्कृति तथा गौर पशु के प्रति आदिवासी समाज के गहरे सम्मान और श्रद्धा को प्रतीकात्मक रूप से अभिव्यक्त कर रहे थे। वहीं पारंपरिक साड़ियों और आभूषणों से सुसज्जित महिला नर्तकियों ने जब अपने हाथों में थमी ‘तिरूडुडी’ (लोहे की छड़ी) को भूमि पर पटकते हुए ताल दी, तो एक अद्भुत, गूंजती और लयबद्ध ध्वनि ने वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया।नृत्य के दौरान पुरुष नर्तकों ने गले में टंगे भारी ‘मांदरी’ (ढोल) को बजाते हुए जंगली भैंसे की आक्रामक, चंचल और ऊर्जावान मुद्राओं की प्रभावशाली नकल प्रस्तुत की। यह दृश्य दर्शकों को ऐसा अनुभव करा रहा था, मानो वे जंगल के सजीव और प्राकृतिक परिवेश के प्रत्यक्ष साक्षी बन गए हों। उल्लास और आनंद से परिपूर्ण इस नृत्य में माड़िया जनजाति की शिकार-परंपरा, साहस और अदम्य ऊर्जा स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती रही। गोलाकार घेरे में थिरकते युवक और उनके कदम से कदम मिलाती युवतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिकता के इस दौर में भी बस्तर ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पूरी निष्ठा और गर्व के साथ संजोकर रखा है।राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति में बास्तानार के कलाकारों द्वारा दी गई यह सशक्त और भावपूर्ण प्रस्तुति न केवल बस्तर पण्डुम की भव्य सफलता का प्रतीक बनी, बल्कि इसने बस्तर की लोक-कला, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक वैभव को राष्ट्रीय पटल पर पुनः प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया।
- रायपुर । बस्तर पंडुम के शुभारंभ समारोह में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज बस्तर की माटी की सुगंध और आदिम जनजातीय परंपराओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर वहां मौजूद स्थानीय निवासियों और कारीगरों से प्रदर्शित कलाओं एवं उत्पादों की विस्तृत जानकारी ली।राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बस्तर पंडुम को आदिवासी विरासत को संजोने और उसे पूरी दुनिया तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने एक-एक कर ढोकरा हस्तशिल्प कला, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस कला, लौह शिल्प, जनजातीय वेश-भूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, बस्तर की जनजातीय चित्रकला, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसकी सराहना की।बस्तर पंडुम आयोजन स्थल पर जनजातीय हस्तशिल्प आधारित प्रदर्शनी में ढोकरा कला से निर्मित सामग्रियों का विशेष प्रदर्शन किया गया। इस हस्तशिल्प में लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह भारत की प्राचीन जनजातीय धातु कला है, जिसमें प्रकृति, देवी-देवताओं और ग्रामीण जीवन की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। ढोकरा की प्रत्येक कृति पूर्णतः हस्तनिर्मित होती है। इसके निर्माण में समाड़ी मिट्टी, मोम वैक्स, तार, पीतल, गरम भट्टी एवं सफाई मशीन का उपयोग किया जाता है। स्थानीय टेराकोटा कला को दर्शाती मिट्टी से बनी आकृतियों का भी प्रदर्शन किया गया, जो लोक आस्था, ग्रामीण जीवन और पारंपरिक विश्वासों को सजीव रूप में प्रस्तुत करती हैं।प्रदर्शनी में लकड़ी की नक्काशी (Wood Carving) कला के माध्यम से सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति देखने को मिली। लकड़ी की मूर्तियां बनाने के लिए सागौन, बीजा, सिवनर एवं साल लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिसमें कारीगर पारंपरिक औजारों से बारीक आकृतियां उकेरते हैं। इसी तरह सीसल कला से बने जूट के कपड़े एवं अन्य हस्तशिल्पों का भी राष्ट्रपति ने अवलोकन किया। एक अन्य स्टॉल में बांस से बनी पारंपरिक उपयोगी एवं सजावटी वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया। वहीं गढ़ा हुआ लोहे की कला (Wrought Iron Art) से निर्मित कलाकृतियों ने भी राष्ट्रपति को विशेष रूप से आकर्षित किया।जनजातीय आभूषणों को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल ने राष्ट्रपति का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस स्टॉल में चांदी, मोती, शंख एवं विभिन्न धातुओं से हाथ से बनाए गए जनजातीय आभूषण (Tribal Jewellery) प्रदर्शित किए गए। ये आभूषण आदिवासी समुदायों की पहचान, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं।तुम्बा कला (Tumba Art) के अंतर्गत सूखी लौकी जैसी फली से बनाए गए पारंपरिक वाद्य यंत्र एवं सजावटी वस्तुएं भी प्रदर्शनी में रखी गई थीं। जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण स्टॉल में बस्तर क्षेत्र की प्रमुख जनजातियां — दंडामी माढ़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा — की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषण संबंधित जनजातियों के युवक-युवतियों द्वारा प्रदर्शित किए गए।बस्तर पंडुम स्थल पर जनजातीय चित्रकला से जुड़ी जीवंत प्रदर्शनी का भी राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में बस्तर की चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। बस्तर की कला में जंगल, लोक देवता, पर्व-त्योहार और दैनिक जीवन को सहज रंगों और प्रतीकों के माध्यम से उकेरा जाता है। यह चित्रकला पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है।स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जनजातीय दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली खाद्य सामग्री एवं पेय पदार्थों का प्रदर्शन किया गया। इसमें जोंधरी लाई के लड्डू, जोंधरा, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, भेंडा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ पेय पदार्थ लांदा और सल्फी को प्रदर्शित किया गया।लोक जीवन से संबंधित लोकचित्रों की प्रदर्शनी में बस्तर की संस्कृति और इतिहास, प्राकृतिक सौंदर्य, लोकजीवन एवं लोक परंपराओं से जुड़ी तस्वीरों के साथ-साथ बस्तर के जनजातीय समाज और लोक संस्कृति से संबंधित साहित्य भी प्रदर्शित किया गया।
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- रथ आगमन से लेकर समारोह स्थल तक तैयारियों की सभी समाजों को सौंपी गई जिम्मेदारियां
- मार्ग सजावट, रूटमैप तय, तात्यापारा में शिवाजी प्रतिमा के समक्ष होगा जोशीला स्वागत
रायपुर। 16 फरवरी को रायपुर पहुंचने वाली छत्रपति शिवाजी महाराज की राष्ट्रीय गौरव यात्रा का टाटीबंध चौक पर शानदार स्वागत किया जाएगा। उसके बाद यात्रा का रूट मैप, सभा स्थल और महाराष्ट्र से आने वाले लगभग 500 यात्रियों के रुकने- भोजन की व्यवस्था सहित हर तरह की तैयारियों की जवाबदारी सुनिश्चित कर दी गई है। महाराष्ट्र मंडल में शुक्रवार देर शाम तक चली बैठक में सभी समाजों के प्रतिनिधि उपस्थित हुए। उन्हें कार्यक्रम की भव्यता के मद्देनजर जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने बताया कि गौरव यात्रा के टाटीबंध प्रवेश से लेकर कृषि मंडपम, इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय तक का रूपमैट, प्रशासन से अनुमति, मार्ग सजावट, ध्वजा आदि की जिम्मेदारी मराठा समाज, कुर्मी समाज, कुनबी समाज, अग्रवाल दाऊ समाज, महाराष्ट्रियन तेली समाज के प्रमुखों को सौंपी गई है। वहीं तात्यापारा चौक पर शिवाजी महाराज की प्रतिमा की पूजा- अर्चना, माल्यार्पण का जिम्मा सभी समाजों के महिला मंडल का होगा। इस अवसर पर सभी समाजों की महिलाएं एक ड्रेस कोड में नजर आएंगी।
कृषि विवि में आयोजित स्वागत समारोह में आवास और भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी धनंजय शर्मा, अजय शर्मा, धनंजय वर्मा और अजय मधुकर काले ने अपने जिम्मे ली। वहीं कार्यक्रम स्थल पर स्टेज सजावट, लाइट, माइक, स्वागत- सत्कार, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बैठक व्यवस्था की जिम्मेदारी डॉ कुलदीप सोलंकी, सुबोध टोले, सभी समाज की महिला प्रमुख को सौंपी गई।
बताते चलें कि छत्रपति शिवाजी महाराज की माता जिजाऊ बाई के मायके सिंधखेड़ से 12 फरवरी को छत्रपति शिवाजी महाराज के भव्य रथ को लेकर शुरू होने वाली राष्ट्रीय गौरव यात्रा नासिक, जालना, अमरावती, नागपुर, राजनांदगांव, दुर्ग - भिलाई से होते हुए 16 फरवरी शाम चार बजे रायपुर पहुंचेगी। टाटीबंध चौक से मुख्य मार्ग होते हुए यात्रा तात्यापारा चौक पहुंचेगी। जहां शिवाजी महाराज की प्रतिमा के समक्ष पूजा- अर्चना की जाएगी। इसके उपरांत शाम छह बजे इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय में स्वागत समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इधर गौरव यात्रा को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। रथ के रायपुर आगमन से लेकर स्वागत समारोह तक सब कुछ खास और यादगार बनाने की तैयारी में सर्व समाज जुटा हुआ है।
बैठक में डा. कुलदीप सोलंकी, लोकेश पवार, धनंजय सिंह वर्मा, ललित कांकडे, सविता बघेल, डा. मुक्ति बैस, शंकर वर्मा, भरत भूषण चंद्रवंशी, पराग दलाल, अभय भागवतकर, दीपक राव इंगले, सुमीत ढिंगे, गणेशा जाधव पाटिल, मालती मिश्रा, नमिता शेष, अमित डोये, चंद्रिका परगहनिया, पुष्पलता वर्मा, केएस वर्मा, अतुल गद्रे, श्याम सुंदर खंगन, सुकृत गनोदवाले सहित विभिन्न समाजों के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
जाणता राजा का मंचन 19 से
बैठक में अजय काले ने महत्वपूर्ण जानकारी दी कि युवा आयोग और सर्व समाज के सौजन्य से 19 से 22 फरवरी तक छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित एशिया के सबसे बड़े महानाट्य 'जाणता राजा' का मंचन रायपुर के सप्रे शाला मैदान में किया जाएगा। इस चार दिवसीय नाट्यमंचन में रायपुर के रंगकर्मियों को भी अपनी कला प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा। इसके लिए बाकायदा 'जाणता राजा' की टीम से जुड़े विशेषज्ञ 10 फरवरी को रायपुर आएंगे और स्थानीय कलाकारों का नाटक के लिए न केवल चयन करेंगे, बल्कि उनके साथ रिहर्सल भी करेंगे। -
बीजापुर/सुकमा. बस्तर मंडल के दो जिलों में शनिवार को कुल 1.61 करोड़ रुपये के इनामी 51 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। नक्सलवाद को खत्म करने की 31 मार्च, 2026 की समय सीमा नजदीक आने के साथ छत्तीसगढ़ में इस साल अब तक आत्मसमर्पण करने वालों की संख्या लगभग 300 हो गई है। यह आत्मसमर्पण ऐसे समय हुआ जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में 'बस्तर पंडुम 2026' उत्सव का उद्घाटन किया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय दौरे पर रायपुर पहुंचे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 34 महिलाएं शामिल हैं।
बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि बस्तर पुलिस की 'पूना मारगेम पुनर्वास पहल' के तहत बीजापुर जिले में 20 महिलाओं समेत 30 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है जबकि पड़ोसी सुकमा जिले में 14 महिलाओं समेत 21 अन्य नक्सली मुख्यधारा में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर यह कदम उठाया है। सुंदरराज ने बताया कि गिरफ्तार किए गए 30 नक्सलियों में से बोटी पोडियम उर्फ मल्ला (23), सुखराम मदकम (24), और रीना पुणेम (25) शामिल हैं जिनपर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम था। उन्होंने बताया कि पांच अन्य पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम था, 14 नक्सलियों पर दो-दो लाख रुपये का इनाम था, और आठ अन्य पर एक-एक लाख रुपये का इनाम था। इन 30 नक्सलियों पर कुल मिलाकर 85 लाख रुपये का इनाम था। सुकमा में माओवादियों के दरभा मंडल, दक्षिण बस्तर मंडल और कालाहांडी-कंधमाल-बौद्ध-नयागढ़ (केकेबीएन) मंडल (ओडिशा) के 21 नक्सलियों ने वरिष्ठ पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें सोढ़ी महेश (35), पोडियम राजू (30) और करम ममता (30) शामिल हैं जिनपर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पांच अन्य सदस्यों पर पांच-पांच लाख रुपये, 12 अन्य पर दो-दो लाख रुपये और एक अन्य पर तीन लाख रुपये का इनाम था। उन्होंने बताया कि सुकमा में नक्सलियों ने तीन एके-47 राइफल (8 मैगजीन के साथ), दो सेल्फ लोडिंग राइफल (दो मैगजीन के साथ), एक इंसास राइफल, पांच एक नली बंदूक, तीन बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल) (20 राउंड के साथ), दस जिलेटिन की छड़ें और 20 गैर-विद्युत डेटोनेटर भी जमा कराया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में से हर एक को तत्काल 50,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई और सरकार की नीति के अनुसार उनका आगे पुनर्वास किया जाएगा। सुंदरराज ने कहा कि सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षा शिविरों की स्थापना, बेहतर सड़क संपर्क, लगातार सफल नक्सल-विरोधी अभियानों और सरकार की विकास योजनाओं की प्रभावी पहुंच के कारण माओवादियों का आधार तेजी से सिकुड़ रहा है। उन्होंने शेष माओवादी कार्यकर्ताओं से आत्मसमर्पण करने की अपील करते हुए कहा कि हिंसा का मार्ग केवल विनाश, पीड़ा और अंधकार की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि 'पूना मारगेम' अभियान शांति, गरिमापूर्ण जीवन और एक उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है। गौरतलब है कि 15 जनवरी को पड़ोसी बीजापुर जिले में 52 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। छत्तीसगढ़ में 2025 में 1,500 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। सुकमा और बीजापुर में नक्सलियों के आत्मसमर्पण पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह घटनाक्रम बस्तर क्षेत्र में शांति, विश्वास और विकास सुनिश्चित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह पिछले दो वर्षों में दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, संचार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ शांति बहाल करने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों का ठोस परिणाम है। -
न्याय तक पहुंच सशक्त करने की दिशा में अहम पहल
बिलासपुर/छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (CGSLSA) द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी (CSJA) के सहयोग से लीगल एड डिफेंस कौंसिल के लिए एक दिवसीय रिफ्रेशर ट्रेनिंग प्रोग्राम का तीसरा छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, ने कहा कि लीगल एड डिफेंस कौंसिल सिस्टम न्याय तक पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 39A के तहत प्रदत्त संवैधानिक जनादेश को साकार करता है।
मुख्य न्यायाधीश ने चीफ लीगल एड डिफेंस कौंसिल और डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस कौंसिल की जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वंचितों को दी जाने वाली विधिक सहायता की गुणवत्ता न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता को सीधे प्रभावित करती है। उन्होंने प्रतिभागियों से सक्रिय भागीदारी, अनुभव साझा करने और व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा करने का आह्वान किया। उद्घाटन सत्र में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशगण — न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू,श्रीमती न्यायमूर्ति रजनी दुबे, न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत, न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय, न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा, न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु और न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में राज्य भर से चीफ लीगल एड डिफेंस कौंसिल एवं डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस कौंसिल सहित कुल 74 प्रतिभागियों ने भाग लिया। स्वागत भाषण छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक द्वारा दिया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री के अधिकारीगण, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारीगण उपस्थित रहे। -
- बोर्ड परीक्षा की तैयारियों को लेकर संत ज्ञानेश्वर विद्यालय की शिक्षिका आराधना लाल ने दिए अहम टिप्स
रायपुर। 10वीं-12वीं, 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षा की तैयारी में जुटे बच्चों के लिए जितना जरूरी पढ़ाई करना या परीक्षा की तैयारी करना है, उतना ही जरूरी है कि वे अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान भी रखें। पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का संतुलन भी आवश्यक है।
संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में 12वीं के बच्चों की अर्थशास्त्र और सामाजिक विज्ञान पढ़ाने वाली शिक्षिका आराधना लाल ने कहा कि स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बच्चों को पैकेट फूड से दूरी बनानी चाहिए और हल्का व संतुलित भोजन करना चाहिए। वहीं बदलते मौसम के बीच खुद की सेहत को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।
आराधना ने कहा कि बच्चों को नियमित अध्ययन, प्रापर टाइम टेबल और रिवीजन वर्क पर ध्यान देना चाहिए। परीक्षा के दिन पहले अपने दिमाग को शांत रखते हुए समय से पहले परीक्षा केंद्र में पहुंचकर अपने स्थान पर पहुंचना चाहिए। परीक्षा में इस्तेमाल होने वाली पेन से एक दिन पहले ही एक- दो पेज लिखकर निश्चित फ्लो में लेना चाहिए, जिससे न सिर्फ लिखावट बेहतर हो, बल्कि लिखने की गति भी अच्छी बनी रहे।
परीक्षा कक्ष से बाहर निकलने के बाद कौन सा प्रश्न छूट गया, क्या लिख पाए- नहीं लिख पाए... आदि बिल्कुल भी नहीं देखना चाहिए, न ही किसी से चर्चा करनी चाहिए, बल्कि अगले पेपर के लिए पूरी सकारात्मक ऊर्जा के साथ तैयारी में जुट जाना चाहिए। विद्यार्थियों को कभी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि अगर कुछ गलती हुई है तो भावी परीक्षा में हमें उसे सुधारने का मौका मिलेगा। - रायपुर/बस्तर पंडुम के शुभारंभ समारोह में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज बस्तर की माटी की सुगंध और आदिम जनजातीय परंपराओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर वहां मौजूद स्थानीय निवासियों और कारीगरों से प्रदर्शित कलाओं एवं उत्पादों की विस्तृत जानकारी ली।राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बस्तर पंडुम को आदिवासी विरासत को संजोने और उसे पूरी दुनिया तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने एक-एक कर ढोकरा हस्तशिल्प कला, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस कला, लौह शिल्प, जनजातीय वेश-भूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, बस्तर की जनजातीय चित्रकला, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसकी सराहना की।बस्तर पंडुम आयोजन स्थल पर जनजातीय हस्तशिल्प आधारित प्रदर्शनी में ढोकरा कला से निर्मित सामग्रियों का विशेष प्रदर्शन किया गया। इस हस्तशिल्प में लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह भारत की प्राचीन जनजातीय धातु कला है, जिसमें प्रकृति, देवी-देवताओं और ग्रामीण जीवन की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। ढोकरा की प्रत्येक कृति पूर्णतः हस्तनिर्मित होती है। इसके निर्माण में समाड़ी मिट्टी, मोम वैक्स, तार, पीतल, गरम भट्टी एवं सफाई मशीन का उपयोग किया जाता है। स्थानीय टेराकोटा कला को दर्शाती मिट्टी से बनी आकृतियों का भी प्रदर्शन किया गया, जो लोक आस्था, ग्रामीण जीवन और पारंपरिक विश्वासों को सजीव रूप में प्रस्तुत करती हैं।प्रदर्शनी में लकड़ी की नक्काशी (Wood Carving) कला के माध्यम से सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति देखने को मिली। लकड़ी की मूर्तियां बनाने के लिए सागौन, बीजा, सिवनर एवं साल लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिसमें कारीगर पारंपरिक औजारों से बारीक आकृतियां उकेरते हैं। इसी तरह सीसल कला से बने जूट के कपड़े एवं अन्य हस्तशिल्पों का भी राष्ट्रपति ने अवलोकन किया। एक अन्य स्टॉल में बांस से बनी पारंपरिक उपयोगी एवं सजावटी वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया। वहीं गढ़ा हुआ लोहे की कला (Wrought Iron Art) से निर्मित कलाकृतियों ने भी राष्ट्रपति को विशेष रूप से आकर्षित किया।जनजातीय आभूषणों को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल ने राष्ट्रपति का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस स्टॉल में चांदी, मोती, शंख एवं विभिन्न धातुओं से हाथ से बनाए गए जनजातीय आभूषण (Tribal Jewellery) प्रदर्शित किए गए। ये आभूषण आदिवासी समुदायों की पहचान, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं।तुम्बा कला (Tumba Art) के अंतर्गत सूखी लौकी जैसी फली से बनाए गए पारंपरिक वाद्य यंत्र एवं सजावटी वस्तुएं भी प्रदर्शनी में रखी गई थीं। जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण स्टॉल में बस्तर क्षेत्र की प्रमुख जनजातियां — दंडामी माढ़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा — की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषण संबंधित जनजातियों के युवक-युवतियों द्वारा प्रदर्शित किए गए।बस्तर पंडुम स्थल पर जनजातीय चित्रकला से जुड़ी जीवंत प्रदर्शनी का भी राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में बस्तर की चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। बस्तर की कला में जंगल, लोक देवता, पर्व-त्योहार और दैनिक जीवन को सहज रंगों और प्रतीकों के माध्यम से उकेरा जाता है। यह चित्रकला पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है।स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जनजातीय दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली खाद्य सामग्री एवं पेय पदार्थों का प्रदर्शन किया गया। इसमें जोंधरी लाई के लड्डू, जोंधरा, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, भेंडा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ पेय पदार्थ लांदा और सल्फी को प्रदर्शित किया गया।लोक जीवन से संबंधित लोकचित्रों की प्रदर्शनी में बस्तर की संस्कृति और इतिहास, प्राकृतिक सौंदर्य, लोकजीवन एवं लोक परंपराओं से जुड़ी तस्वीरों के साथ-साथ बस्तर के जनजातीय समाज और लोक संस्कृति से संबंधित साहित्य भी प्रदर्शित किया गया।
- रायपुर/ नगर पालिक निगम रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने रायपुर नगर निगम के जोन क्रमांक 7 के अंतर्गत डॉ. ईश्वरी चरण शुक्ल वार्ड क्रमांक 22 क्षेत्र अंतर्गत रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत बंजारी माता मन्दिर के समीप पण्डित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर में लगभग 17 लाख रूपये की स्वीकृत लागत से 6 सीटर 1 नवीन आकांक्षीय शौचालय का शीघ्र निर्माण और विकास करने नगर निगम जोन 7 जोन अध्यक्ष श्रीमती श्वेता विश्वकर्मा, एमआईसी सदस्य श्री भोलाराम साहू, डॉ ईश्वरी चरण शुक्ल वार्ड क्रमांक 22 पार्षद श्रीमती मीरा ठाकुर, स्वामी आत्मानंद वार्ड पार्षद श्री आनंद अग्रवाल, जोन 7 जोन कमिश्नर श्री राकेश शर्मा, कार्यपालन अभियंता श्री सुशील मोडेस्टस, सहायक अभियंता श्री कमलेश मिथलेश,उप अभियंता स्वच्छ भारत मिशन शाखा सुश्री कृष्णा राठी, जोन 7 उप अभियंता श्री सुरेन्द्र श्रीवास सहित गणमान्यजनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, आमजनों की उपस्थिति में श्रीफल फोड़कर और कुदाल चलाकर भूमिपूजन करते हुए कार्यरम्भ किया।महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने नगर निगम जोन क्रमांक 7 और नगर निगम मुख्यालय स्वच्छ भारत मिशन शाखा के संबंधित अधिकारियों को स्वीकृति अनुसार शीघ्र नवीन आकांक्षीय शौचालय का निर्माण और विकास कार्य बंजारी माता मन्दिर के समीप पण्डित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर में नागरिकों को जीवन में स्वस्थ परिवेश देने प्रारम्भ करवाकर सतत मॉनिटरिंग करते हुए तय समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण करवाना प्राथमिकता के साथ जनहित में जनसुविधा की दृष्टि से सुनिश्चित करवाने निर्देशित किया।
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*गुरु खुशवंत साहेब जी के नेतृत्व में आरंग में सर्वांगीण विकास*
*सड़क-पुल के बाद अब आस्था का विकास: गुरु खुशवंत साहेब जी के नेतृत्व में आरंग को मिली सौगात**गुरु खुशवंत साहेब जी का संकल्प: आरंग में विकास के साथ-साथ धर्म और संस्कृति का संरक्षण*आरंग/रायपुर।विधानसभा क्षेत्र आरंग में सड़क, सुगम परिवहन, पुल-पुलिया, भवन एवं रोड निर्माण जैसे बुनियादी विकास कार्य निरंतर गति पकड़ रहे हैं। इसी क्रम में माननीय मंत्री गुरु खुशवंत साहेब जी के नेतृत्व में क्षेत्र के धर्म, संस्कृति, सभ्यता एवं आस्था के केंद्रों को सहेजने और सशक्त करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। छत्तीसगढ़ शासन के धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025–26 के अंतर्गत आरंग विधानसभा क्षेत्र में स्थित विभिन्न मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं धर्मशाला निर्माण हेतु कुल ₹55 लाख की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह स्वीकृति क्षेत्र के प्रति गुरु खुशवंत साहेब जी की संवेदनशील सोच और उनके सतत प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम मानी जा रही है।स्वीकृत राशि के अंतर्गत आरंग क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों में स्थित शिव मंदिर, गणेश मंदिर, शीतला मंदिर, सतनामी पारा, बाबा गुरु घासीदास मेला स्थल सहित अन्य धार्मिक स्थलों में जीर्णोद्धार एवं धर्मशाला निर्माण कार्य किए जाएंगे। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्राप्त होंगी तथा क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण सुनिश्चित होगा। इस अवसर पर माननीय मंत्री गुरु खुशवंत साहेब जी ने कहा कि आरंग में विकास की दिशा केवल सड़क, पुल, भवन और रोड तक सीमित नहीं है। हमारी सरकार का उद्देश्य है कि धर्म, संस्कृति, सभ्यता और आस्था के केंद्रों को भी समान रूप से सशक्त किया जाए, क्योंकि यही हमारी पहचान और सामाजिक एकता की नींव हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी स्वीकृत कार्य समयबद्ध, पारदर्शी एवं उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं।इस निर्णय से आरंग क्षेत्र के नागरिकों एवं श्रद्धालुओं में उत्साह का वातावरण है और क्षेत्र में सर्वांगीण विकास की अवधारणा को नई मजबूती मिली है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल तथा वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए क्षेत्रवासियों को बधाई दी गई। -
बिलासपुर/विद्यार्थियों में आत्मविश्वास जागृत करने, परीक्षा के तनाव को दूर करने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के उद्देश्य से परीक्षा पे चर्चा-2026 के अंतर्गत जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन जल संसाधन विभाग के प्रार्थना सभाकक्ष में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पूरे जिले भर के शासकीय स्कूलों में परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम को बच्चों ने तन्मयता से सुना।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ श्री संदीप अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी श्री विजय टांडे, जिला मिशन समन्वयक श्री ओम पांडेय, समग्र शिक्षा के समस्त सहायक परियोजना समन्वयक (एपीसी), विकासखंड बिल्हा के विकासखंड शिक्षा अधिकारी, शहरी स्रोत समन्वयक सहित जिले के विभिन्न विद्यालयों से आए सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान परीक्षा पे चर्चा का सजीव प्रसारण देखा गया, जिसमें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देशभर के विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उन्हें परीक्षा को जीवन का उत्सव मानने की सीख दी। प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों के मन की बात को सहजता से सुनते हुए परीक्षा की तैयारी, परीक्षा के समय तनाव की स्थिति, बोर्ड एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में संतुलन, सीमित संसाधनों में सफलता प्राप्त करने के उपाय, खेल और शिक्षा के बीच सामंजस्य, साथ ही वर्तमान समय में तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के सकारात्मक उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरल, व्यावहारिक और प्रेरणादायक मार्गदर्शन प्रदान किया। प्रधानमंत्री के संवाद ने विद्यार्थियों के मन से भय और दबाव को दूर करते हुए उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति स्पष्टता का संचार किया। विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को अत्यंत प्रेरक बताते हुए इसे अपने जीवन के लिए मार्गदर्शक बताया।कार्यक्रम के अंत में जिला पंचायत सीईओ श्री अग्रवाल द्वारा विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा गया कि सफलता केवल अंकों से नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास से प्राप्त होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से तनावमुक्त होकर पूरे मनोयोग से अध्ययन करने तथा अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया। -
सॉफ्टबॉल 69वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता :
बिलासपुर/69वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के अंतर्गत बिलासपुर में आयोजित सॉफ्टबॉल (अंडर-17) प्रतियोगिता में मेजबान छत्तीसगढ़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी बादशाहत कायम रखी है। जिला क्रीड़ा अधिकारी कमलेश यादव ने जानकारी दी कि सेमीफाइनल मुकाबलों में प्रभावशाली जीत दर्ज कर छत्तीसगढ़ की बालक और बालिका दोनों टीमों ने फाइनल में प्रवेश कर लिया है।बालिका वर्ग में फाइनल मुकाबला छत्तीसगढ़ बनाम सीबीएसई (CBSE WSO) के बीच खेला जाएगा, जबकि बालक वर्ग में छत्तीसगढ़ का सामना महाराष्ट्र से होगा। इससे पहले बालिका वर्ग के सेमीफाइनल में छत्तीसगढ़ ने एकतरफा मुकाबले में महाराष्ट्र को 14-04 से करारी शिकस्त दी। वहीं दूसरे सेमीफाइनल में सीबीएसई (WSO) ने कड़े संघर्ष में चंडीगढ़ को 01-00 से हराकर फाइनल का टिकट कटाया। तीसरे स्थान के लिए हुए मुकाबले में महाराष्ट्र ने चंडीगढ़ को 04-02 से पराजित कर कांस्य पदक अपने नाम किया। बालक वर्ग के सेमीफाइनल में छत्तीसगढ़ ने पंजाब को 07-00 से हराते हुए शानदार जीत दर्ज की। दूसरे सेमीफाइनल में महाराष्ट्र ने ओडिशा को 03-00 से मात देकर फाइनल में जगह बनाई। तीसरे स्थान के लिए खेले गए मुकाबले में ओडिशा ने पंजाब को 02-00 से हराकर तीसरा स्थान प्राप्त किया।*कल होंगे खिताबी मुकाबले*मैदान क्रमांक-1, छत्तीसगढ़ स्कूल मैदान में कल फाइनल मुकाबले खेले जाएंगे। बालिका वर्ग का फाइनल सुबह 9:30 बजे छत्तीसगढ़ बनाम सीबीएसई के बीच होगा, जबकि बालक वर्ग का फाइनल मुकाबला सुबह 10:30 बजे छत्तीसगढ़ बनाम महाराष्ट्र के बीच खेला जाएगा।गेम्स प्रभारी अख्तर खान ने बताया कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से स्थानीय दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है। अब सभी की निगाहें फाइनल मुकाबलों पर टिकी हैं, जहाँ छत्तीसगढ़ की टीमें दोहरा स्वर्ण पदक (डबल गोल्ड) जीतने के इरादे से मैदान में उतरेंगी। -
*मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा ने प्रदान किए प्रमाणपत्र व प्रशंसा पत्र*
बिलासपुर/छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में गणतंत्र दिवस समारोह-2026 के सफल आयोजन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अधिकारियों, सुरक्षा बलों एवं स्वयंसेवकों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में परेड एवं आयोजन से जुड़े दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने वालों को प्रमाणपत्र एवं लेटर ऑफ एप्रिसिएशन प्रदान किए गए।समारोह की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने की।मुख्य न्यायाधीश द्वारा उच्च न्यायालय सुरक्षा कंपनी (02वीं वाहिनी) के कंपनी कमाण्डर बाबूलाल सोनवानी, 13वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की कंपनी के कंपनी कमाण्डर बबीता कुमार नायक, 07वीं वाहिनी एनसीसी छत्तीसगढ़ (डी.पी. विप्र कॉलेज, बिलासपुर) तथा राष्ट्रीय सेवा योजना, अटल बिहारी वाजपेयी विश्व विद्यालय, बिलासपुर के अमन लहरे को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसी क्रम में गणतंत्र दिवस समारोह के आयोजन एवं समन्वय में उल्लेखनीय भूमिका निभाने हेतु कैप्टन आशीष शर्मा, मनोज सिन्हा, श्रीमती संगीता साहू एवं श्री धर्मेंद्र सिंह बैस को लेटर ऑफ एप्रिसिएशन प्रदान कर उनके योगदान की सराहना की गई। उच्च न्यायालय प्रशासन द्वारा सभी सम्मानित व्यक्तियों की सेवाओं की प्रशंसा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री के अधिकारीगण तथा न्यायिक कर्मचारीगण उपस्थित रहे। -
रायपुर /भारत सरकार के नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा बिलासपुर एयरपोर्ट को 3C-VFR से 3C-All Weather Operations (IFR) श्रेणी में अपग्रेड किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस महत्वपूर्ण निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इसे छत्तीसगढ़ के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम बताया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस स्वीकृति के साथ अब बिलासपुर एयरपोर्ट पर सभी मौसमों में विमान संचालन संभव हो सकेगा। इससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी और यात्रियों को अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक हवाई सेवाएँ उपलब्ध होंगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ऑल वेदर ऑपरेशन की सुविधा मिलने से बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में व्यापार, उद्योग और पर्यटन गतिविधियों को नई गति प्राप्त होगी। यह निर्णय औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर सृजित करने में भी सहायक सिद्ध होगा।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू के प्रति प्रदेश की जनता की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन और सहयोग से छत्तीसगढ़ में आधुनिक बुनियादी ढाँचे का तीव्र गति से विस्तार हो रहा है, जो राज्य को विकास के नए आयामों तक ले जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि यह उपलब्धि बिलासपुर एयरपोर्ट सहित पूरे छत्तीसगढ़ को आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास की नई दिशा प्रदान करेगी तथा प्रदेश को राष्ट्रीय विमानन मानचित्र पर और अधिक सशक्त बनाएगी। -
नगर निगम नागरिकों से की अपील- यह अवैध प्लाटिंग का भाग है, यहां परऔर आसपास नगर पालिक निगम रायपुर द्वारा भवन निर्माण अनुज्ञा स्वीकृत नहीं की जाती है, यहां पर प्लाट की किसी भी प्रकार की खरीदी- बिक्री नहीं करें, अन्यथा की स्थिति में छत्तीसगढ़ नगर पालिका निगम अधिनियम 1956 की धारा 292(ग) के प्रावधान अनुसार नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी
रायपुर/ रायपुर नगर पालिक निगम जोन 9 नगर निवेश विभाग द्वारा जोन 9 क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 8 क्षेत्र अंतर्गत सड्डू क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग स्थल पर जनहित में बोर्ड नगर पालिक निगम रायपुर के आयुक्त श्री विश्वदीप के निर्देश पर नगर निगम जोन 9 जोन कमिश्नर श्री अंशुल शर्मा सीनियर के मार्गनिर्देशन में और कार्यपालन अभियंता श्री शरद ध्रुव, सहायक अभियंता श्री सैयद जोहेब, उप अभियंता श्री आशुतोष पाण्डेय की उपस्थिति में लगाये जाने की कार्यवाही की है.बोर्ड में नगर निगम जोन 9 नगर निवेश विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि यह अवैध प्लाटिंग का भाग है. यहां और आसपास भवन निर्माण अनुज्ञा की स्वीकृति नगर पालिक निगम रायपुर द्वारा नहीं दी जाती है, यहां प्लाट की किसी भी प्रकार की प्लाट की खरीदी - बिक्री नही करें, अन्यथा की स्थिति में रायपुर नगर पालिक निगम द्वारा छत्तीसगढ़ नगर पालिका निगम अधिनियम 1956 के अंतर्गत धारा 292( ग ) के प्रावधान अनुसार नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी. - -घर की छत बनी ’पावर हाउस’, घर का बिजली बिल हुआ शून्यरायपुर,। शासन की महत्वाकांक्षी योजना पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों के जीवन में उजियारा फैला रही है। इस योजना का लाभ उठाकर न केवल लोग बिजली बिल के बोझ से मुक्त हो रहे हैं, बल्कि बिजली बेचकर ’ऊर्जादाता’ की नई पहचान भी बना रहे हैं। सरगुजा जिले अंतर्गत लखनपुर के रहने वाले श्री अखिलेश कुमार राजवाड़े के लिए अब सूरज की किरणें केवल उजाला ही नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि भी लेकर आ रही हैं। ’पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ का लाभ उठाकर अखिलेश ने अपने घर की छत पर 2 किलोवाट का सोलर पैनल लगवाया है, जिससे उनका भारी-भरकम बिजली बिल अब पूरी तरह शून्य हो गया है।अखिलेश बताते हैं कि सोलर पैनल लगवाने से पहले उनका मासिक बिजली बिल 2,000 से 2,500 रुपए के बीच आता था। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने गर्व से कहा कि पहले हम केवल बिजली के उपभोक्ता थे, लेकिन अब हम ’ऊर्जादाता’ बन गए हैं। अपनी जरूरत पूरी करने के बाद जो अतिरिक्त बिजली बचती है, उसे हम छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड को बेच रहे हैं, जिसका भुगतान वित्तीय वर्ष के अंत में किया जाएगा।पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की वित्तीय सुगमता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मिली सब्सिडी ने सोलर पैनल लगवाना बेहद किफायती बना दिया है। अखिलेश को केंद्र सरकार से 60,000 रुपए और राज्य सरकार से 30,000 रुपए की सब्सिडी प्राप्त हुई है। इस योजना में उन्हें कुल 90,000 रुपए की आर्थिक मदद से मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सौर ऊर्जा अपनाना अब एक सुलभ निवेश बन गया है।अखिलेश कुमार ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को पर्यावरण के लिए भी क्रांतिकारी बताया। उनके अनुसार, पारंपरिक बिजली उत्पादन में होने वाले प्रदूषण और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के मुकाबले सौर ऊर्जा पूरी तरह स्वच्छ है। इससे न केवल आर्थिक लाभ हो रहा है, बल्कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रदूषण मुक्त वातावरण भी तैयार कर रहे हैं।पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना पर कमलेश ने अपनी संतुष्टि व्यक्त करते हुए केंद्र और राज्य सरकार का आभार जताया और अन्य नागरिकों से भी इस योजना का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनाती है, बल्कि देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- -सभी कर्मियों के लिए आई-जीओटी प्रशिक्षण अनिवार्य-सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया आदेशरायपुर /छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा राज्य में सुशासन, दक्ष प्रशासन एवं क्षमता आधारित कार्य संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए आई-जीओटी कर्मयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रम का संभाग एवं जिला स्तर पर शुरूआत 9 फरवरी से होने जा रही है।सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेशानुसार राज्य के सभी संभाग आयुक्त, जिला कलेक्टर तथा उनके अधीनस्थ कार्यालयों में आई-जीओटी कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इसका उद्देश्य शासन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक प्रशासनिक दक्षताओं, डिजिटल गवर्नेंस, व्यवहारिक प्रशासनिक कौशल एवं भूमिका आधारित प्रशिक्षण से सशक्त बनाना है, जिससे शासन की कार्यप्रणाली अधिक परिणामोन्मुखी एवं नागरिक हितैषी बन सके।सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत द्वारा प्रदेशव्यापी प्रशिक्षण कार्यक्रम की गंभीरता एवं प्राथमिकता से क्रियान्वयन करने हेतु सभी विभागों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से प्रशिक्षण में सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा है कि मिशन कर्मयोगी के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए क्षमता निर्माण को शासन की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।जारी कार्यक्रमानुसार संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन रायपुर संभाग में 09 फरवरी, बस्तर में 12 फरवरी, बिलासपुर संभाग में 18 फरवरी, दुर्ग संभाग में 24 फरवरी तथा सरगुजा संभाग में 26 फरवरी 2026 को किया जाएगा।उल्लेखनीय है कि मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत आईजीओटी प्लेटफॉर्म प्रशासनिक क्षमता निर्माण, सेवा वितरण में गुणवत्ता सुधार, डिजिटल कार्य संस्कृति के विस्तार तथा परिणामोन्मुखी शासन व्यवस्था को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म है। यह पहल राज्य में पारदर्शी, उत्तरदायी एवं नागरिक केंद्रित प्रशासन को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन एवं समन्वय हेतु अवर सचिव एवं नोडल अधिकारी (आईजीओटी कर्मयोगी) सुश्री अंजू सिंह द्वारा संभाग एवं जिला मुख्यालयों में पहुंचकर प्रशिक्षण, मार्गदर्शन एवं समन्वय किया जाएगा। विस्तृत जानकारी के लिए अवर सचिव एवं नोडल अधिकारी (आईजीओटी कर्मयोगी) सुश्री अंजू सिंह, मोबाइल नंबर 9285303900 अथवा ईमेल [email protected] पर संपर्क किया जा सकता है।
- बिलासपुर। बिलासपुर एयरपोर्ट को 3C–VFR से 3C–All Weather Operations (IFR) श्रेणी में उन्नत किए जाने की स्वीकृति छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक और दूरगामी महत्व की उपलब्धि है। इस निर्णय से अब बिलासपुर एयरपोर्ट पर सभी मौसमों में विमान संचालन संभव हो सकेगा, जिससे क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी और यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुगम एवं विश्वसनीय हवाई सेवाएँ उपलब्ध होंगी।इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री तोखन साहू ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री राममोहन नायडू किंजरापु जी के प्रति छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी की विकासपरक सोच वाली डबल इंजन की सरकार के परिणामस्वरूप आज छत्तीसगढ़ में आधारभूत संरचना के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य संभव हो रहे हैं।केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री तोखन साहू ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि बिलासपुर एयरपोर्ट के उन्नयन हेतु रक्षा मंत्रालय से आवश्यक भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया में केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय एवं निरंतर संवाद एक महत्वपूर्ण कड़ी रही, जिसके कारण यह बहुप्रतीक्षित परियोजना साकार हो सकी।.उन्होंने कहा कि ऑल-वेदर (IFR) संचालन की सुविधा मिलने से अब कोहरे, वर्षा अथवा खराब मौसम की स्थिति में भी विमानों का सुरक्षित संचालन संभव होगा, जिससे उड़ानों के निरस्तीकरण में कमी आएगी और यात्रियों का समय व सुविधा दोनों सुरक्षित रहेंगे।यह उन्नयन न केवल बिलासपुर बल्कि पूरे संभाग और छत्तीसगढ़ राज्य के लिए व्यापार, उद्योग, निवेश और पर्यटन के नए द्वार खोलेगा। बेहतर हवाई कनेक्टिविटी से औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और राज्य की आर्थिक प्रगति को नई गति प्राप्त होगी।केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री तोखन साहू ने विश्वास व्यक्त किया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ आने वाले समय में विकास, कनेक्टिविटी और निवेश का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
- -सोना कैवर्त्य को दिल्ली गणतंत्र दिवस समारोह में मिला सम्मानरायपुर ।प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना छोटे व्यापारियों के लिए आर्थिक संबल बनकर सामने आई है। फुटकर व्यवसायियों को आत्मनिर्भर बनाने वाली इस योजना ने लोरमी के एक साधारण फल विक्रेता श्री सोना कैवर्त्य की किस्मत बदल दी। योजना के माध्यम से व्यवसाय को नई ऊंचाईयां देकर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में ‘विशिष्ट अतिथि’ के रूप में शामिल होकर जिले को गौरवान्वित किया। श्री सोना कैवर्त्य की उद्यमिता और योजना के सफल क्रियान्वयन को देखते हुए उन्हें इस वर्ष नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में विशिष्ट अतिथि दीर्घा में आमंत्रित किया गया। यह सम्मान उनकी मेहनत का परिणाम है।श्री कैवर्त्य ने कहा कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने मुझे उस समय सहारा दिया जब पूंजी की सबसे ज्यादा कमी थी। दिल्ली में परेड देखना मेरे लिए सपने जैसा था। उन्होंने आर्थिक कठिनाइयों के समय प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का लाभ लेने भारतीय स्टेट बैंक की स्थानीय शाखा से 10 हजार रुपये का प्रथम ऋण प्राप्त कर अपने बंद पड़े व्यवसाय को दोबारा शुरू किया। समय पर ऋण चुकाने और बेहतर वित्तीय प्रबंधन से उन्हें आगे भी योजना का लाभ मिलने की संभावना बढ़ी। नगरपालिका अध्यक्ष श्री सुजीत वर्मा ने श्री कैवर्त्य की उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना आज छोटे व्यापारियों के लिए नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता की मजबूत राह बन रही है। उन्होंने अन्य छोटे व्यापारियों से भी स्वनिधि योजना से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की अपील की।क्या है प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना?प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना विशेष रूप से उन छोटे फुटकर व्यापारियों के लिए शुरू की गई है, जिनका व्यवसाय कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुआ था। योजना के अंतर्गत बिना जटिल दस्तावेजी प्रक्रिया के आसान ऋण सुविधा उपलब्ध है। हितग्राहियों को 07 प्रतिशत तक ब्याज सब्सिडी, ऋण की श्रेणियां 15 हजार रूपए, 25 हजार रूपए और 50 हजार रुपये तक ऋण उपलब्ध है। लोरमी नगर पालिका अंतर्गत अब तक 249 हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा चुका है।
- -मितानिनों को दिया समस्याओं के शीघ्र समाधान का भरोसारायपुर। सरगुजा जिले में उदयपुर ब्लॉक के रामगढ़ में मितानिनों द्वारा आयोजित स्वास्थ्य पंचायत सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल शामिल हुए। उन्होंने मितानिनों को सम्मानित करते हुए कहा कि मितानिन बहनें ग्रामीण एवं शहरी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे सशक्त और भरोसेमंद कड़ी हैं। शासन की स्वास्थ्य एवं जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचा रही मितानिन बहनें ग्रामीण स्वास्थ्य की धुरी हैं। सरकार आपके हर प्रयास के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।रामगढ़ में मितानिनों द्वारा आयोजित स्वास्थ्य पंचायत सम्मेलन में शामिल हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवालसम्मेलन में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया। उदयपुर विकासखंड की 59 ग्राम पंचायतों से 389 मितानिन, 20 मितानिन ट्रेनर, दो ब्लॉक को-आर्डिनेटर और पांच विकासखंड समन्वयक शामिल हुए। कार्यक्रम का लक्ष्य पंचायत स्तरीय स्वास्थ्य समस्याओं को उजागर कर संबंधित विभागों तक पहुंचाना था। मितानिनों ने अधिकारियों को क्षेत्रीय चुनौतियों से अवगत कराया, पंचायत प्रतिनिधियों को स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ा तथा ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता व पोषण समिति को सक्रिय बनाने पर बल दिया। जिला समन्वयक अर्चना कुशवाहा ने बताया कि मितानिनें मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण व स्वच्छता के माध्यम से समुदाय सशक्त कर रही हैं। विकासखंड समन्वयक गायत्री श्रीवास्तव व मानकुंवर प्रजापति ने उनकी भूमिका को स्वास्थ्य तंत्र की मजबूत कड़ी बताया।इस वर्ष 85 स्वास्थ्य विभाग, 26 महिला-बाल विकास, 12 पीएचई, 12 खाद्य, 25 जनपद स्तर, 8 पुलिस, 5 विद्युत, 5 शिक्षा, 5 सेंट्रल बैंक व 7 विधायक स्तर के आवेदन प्राप्त हुए। मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सभी पर तत्काल कार्रवाई का भरोसा दिलाया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों की उपस्थिति ने आयोजन को और प्रभावी बनाया।
- -स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी विद्यालय एनसीडीसी के 68 छात्रों को मिली साइकिलरायपुर । स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय एनसीडीसी कोरबा में , छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने सरस्वती साइकिल योजना अंतर्गत छात्राओं को साइकिल वितरित की।सरस्वती साइकिल वितरण कार्यक्रम में सर्वप्रथम मां सरस्वती जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जलवन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस दौरान मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि सरस्वती साइकिल वितरण योजना के तहत आज स्कूल में छात्राओं को साइकिल वितरण किया जा रहा है। सभी छात्राओं को बधाई व शुभकामनाएं। खूब पढ़े-खूब बढ़े, बेटियां हैं तो कल है ,सभी बच्चें लगन से पढ़ाई करें और अपने विद्यालय का नाम रोशन करें, हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी की सोच है कि शिक्षा के क्षेत्र में लगातार विकास करते हुए छात्र-छात्राओं को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करें।इसी उद्देश्य के साथ कोरबा जिले के सभी जर्जर हो चुके शासकीय स्कूलों के नवीन भवन निर्माण को तेजी से कराया जा रहा है, स्कूलों में निशुल्क नाश्ता का प्रदाय किया जा रहा है। मेधावी छात्र-छात्राओं को विशेष कोचिंग की सुविधा रायपुर भेज कर उपलब्ध कराई जा रही है।हमारी छात्राओं को स्कूल आने में परेशानी ना हो जिसके लिये सरस्वती साइकिल योजना के तहत सरकार द्वारा साइकिल वितरण किया जा रहा है, शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों के लिए अच्छा अवसर देना हमारा कर्तव्य है। हमारी सरकार के मंशा के अनुरूप शिक्षा के क्षेत्र में आगे की ओर अग्रसर होते हुए प्रदेश में बेहतर शिक्षा देना हमारा कर्तव्य है।इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष श्री राजेश राठौर ,पार्षद श्रीमती सिमरन कौर, पार्षद श्री मुकुंद कंवर , पार्षद श्री लक्ष्मण श्रीवास, शाला प्रतिनिधि श्री यासीन खान , श्री मिलाप बरेठ , श्रीमती ज्योति वर्मा , श्रीधर द्विवेदी , श्रीमती अर्चना रूनीझा , श्रीमती मंदाकिनी त्रिपाठी जी, प्राचार्य डॉ अलका फिलिप्स सहित अभिभावक गण, छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।
- रायपुर। प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों के संबंध में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा महत्वपूर्ण प्रशासनिक आदेश जारी किया गया है। आयुक्त, उच्च शिक्षा, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों में पदस्थ 8 कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि सक्षम समिति की अनुशंसा के आधार पर समाप्त किया गया है।जारी आदेश में उल्लेख है कि संबंधित कर्मचारियों की सेवाओं की समीक्षा निर्धारित अवधि में की गई, जिसके पश्चात उनके कार्य-व्यवहार एवं विभागीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए परिवीक्षा अवधि को समाप्त कर नियमित किया गया है। यह विस्तार शासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं शर्तों के अनुरूप किया गया है। सहायक ग्रेड 3 के पद पर जिन लोगों की परिवीक्षा अवधि समाप्त की गई उसमें सुश्री मोनिका बघेल, श्री राहुल कुमार कंवर, श्री मोहम्मद आमीर खान, श्रीमती मनीषा अवस्थी चौबे, ऋषि वर्मा, श्री संजय कुमार मिरी, श्रीमती अद्रियाना एक्का और श्रीमती मंजू सुर्यवंशी का नाम शामिल है। उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य शासकीय महाविद्यालयों में प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता एवं दक्षता सुनिश्चित करना है, जिससे शैक्षणिक एवं कार्यालयीन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके। यह आदेश तत्काल प्रभावशील माना जाएगा तथा संबंधित महाविद्यालयों एवं अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाई के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
- रायपुर ।जगदलपुर में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के आगमन तथा बस्तर पंडुम कार्यक्रम की तैयारियों का विस्तृत निरीक्षण संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने किया। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर कार्यक्रम को भव्य बनाने पर जोर दिया। यह आयोजन न केवल आदिवासी जीवन शैली, परंपरा, कला और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है, बल्कि बस्तर की आत्मा, सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक जीवन का जीवंत प्रतिबिंब भी है।श्री राजेश अग्रवाल ने निरीक्षण के दौरान कार्यक्रम स्थल की साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था, सांस्कृतिक प्रदर्शनियों की तैयारी और स्वागत समारोह की रूपरेखा पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि आदिवासी कलाकारों के प्रदर्शन, हस्तशिल्प प्रदर्शनी और पारंपरिक नृत्यों की प्राथमिकता सुनिश्चित की जाए, ताकि बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर पूरे देश के समक्ष चमके। मंत्री महोदय ने कहा, "यह पंडुम आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और प्रचार का प्रमुख मंच बनेगा, तथा महामहिम राष्ट्रपति के आगमन से इसे नई पहचान मिलेगी।"बस्तर पंडुम छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदाय की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करने वाला प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव है। तैयारियों में स्थानीय जनजातीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिसमें गोंड, मुरिया, हल्बा समेत विभिन्न आदिवासी समुदायों के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।यह कार्यक्रम बस्तर क्षेत्र के विकास और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगा। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि महामहिम राष्ट्रपति का यह दौरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को राष्ट्रीय पटल पर लाने का सुनहरा अवसर है। हम सभी छत्तीसगढ़ वासी महामहिम राष्ट्रपति महोदया के स्वागत हेतु उत्साहित हैं। उनका यह आगमन न केवल बस्तर पंडुम को गौरवान्वित करेगा, बल्कि आदिवासी कल्याण और क्षेत्रीय विकास के लिए नई दिशा भी प्रदान करेगा।
- -उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और विधायक किरण सिंह देव ने किया लोकार्पणरायपुर, ।शहर की आपाधापी, धूल और शोर-शराबे से दूर, बस्तरवासियों को प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने के लिए शुक्रवार को एक भव्य और अनमोल ठिकाना मिल गया। बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत, परंपरा और नैसर्गिक सौंदर्य को एक सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से कुम्हड़ाकोट में निर्मित 'जनजातीय गौरव वाटिका' का लोकार्पण छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप और विधायक श्री किरण सिंह देव ने किया। लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई यह वाटिका अब जनता के लिए समर्पित कर दी गई है, जो न केवल पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभरी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक अनूठी मिसाल पेश कर रही है।शुक्रवार शाम आयोजित समारोह में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री किरण देव के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप और छत्तीसगढ़ बेवरेजेस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्री श्रीनिवास मद्दी, सीसीएफ श्री आलोक तिवारी, स्टायलो मंडावी, संचालक कांगेर वैली सहित अन्य प्रमुख स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।लोकार्पण के पश्चात उपमुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने वाटिका का अवलोकन किया। वन मंडलाधिकारी श्री उत्तम कुमार गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान अतिथियों को अवगत कराया कि करीब 25 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट को शुरुआत में एक हेल्थ पार्क के रूप में परिकल्पित किया गया था, जिसे बाद में एक भव्य वाटिका का रूप दिया गया। उपमुख्यमंत्री ने यहाँ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों के लिए बनाए गए 1700 मीटर लंबे वॉकिंग ट्रेल, योगा शेड, योगा ज़ोन और ओपन जिम जैसी आधुनिक सुविधाओं की सराहना की। उन्होंने वॉकिंग ट्रेल के बीच-बीच में बनाए गए 'गपशप ज़ोन' और पारिवारिक आयोजनों के लिए निर्मित पाँच सुंदर पगोड़ा को भी देखा, जो अब पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं।वाटिका भ्रमण के दौरान उपमुख्यमंत्री ने यहाँ की 'इको-फ्रेंडली' नीति और 'प्लास्टिक फ्री ज़ोन' के नियम को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। वाटिका के बीच में निर्मित तालाब और आइलैंड ने सभी का मन मोह लिया।आगंतुकों की सुविधाओं के लिए प्रवेश द्वार पर भव्य पार्किंग और प्रसाधन की व्यवस्था भी सुचारू रूप से शुरू हो गई है। वन विभाग द्वारा भविष्य में यहाँ ट्री-हाउस बनाने और एडवेंचर स्पोर्ट्स शुरू करने की योजना की जानकारी भी दी गई। उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा द्वारा किए गए इस लोकार्पण के साथ ही अब 'जनजातीय गौरव वाटिका' बस्तर के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख स्थल के रूप में अंकित हो गई है।इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा तथा वन मंत्री श्री केदार कश्यप द्वारा विभिन्न स्व-सहायता समूहों और हितग्राहियों को कुल 1 करोड़ 22 लाख रुपये से अधिक की राशि के चेक वितरित किए। इस पहल के माध्यम से शासन ने वनांचल में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और वन आश्रित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने 'वृत्त स्तरीय चक्रीय निधि' के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 1 करोड़ 20 लाख 13 हजार रुपये का ऋण वितरित किया। इसमें सबसे बड़ी राशि बकावण्ड के 'मां धारणी करणी स्व-सहायता समूह' को प्रदान की गई, जिन्हें काजू प्रसंस्करण और विपणन जैसे बड़े कार्यों के लिए 50 लाख रुपये का चेक सौंपा गया। इसी कड़ी में, आसना के 'गोधन स्व-सहायता समूह' को गाय पालन के लिए 34 लाख रुपये की राशि दी गई। इसके अतिरिक्त, श्री शर्मा ने घोटिया और भानपुरी के समूहों को इमली संग्रहण व प्रसंस्करण के लिए क्रमशः 13.13 लाख और 13 लाख रुपये तथा कोलेंग की समिति को दोना-पत्तल निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की राशि वितरित कर स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहित किया।कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार को संबल भी प्रदान किया। उन्होंने 'राजमोहनी देवी तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना' के तहत कुरंदी निवासी कमलोचन नाग को 2 लाख रुपये की बीमा राशि का चेक सौंपा। यह सहायता राशि उनकी पत्नी स्वर्गीय भारती नाग के आकस्मिक निधन के पश्चात स्वीकृत की गई थी। उप मुख्यमंत्री द्वारा किया गया यह वितरण न केवल लाभार्थियों के लिए आर्थिक मदद है, बल्कि बस्तर के सुदूर वनांचलों में रोजगार और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम भी है। इस दौरान उपस्थित महिला समूहों के सदस्यों से इमली, काजू के प्रोसेसिंग की गतिविधियों का संज्ञान लेकर बाजार की उपलब्धता एवं मार्केटिंग की व्यवस्था के संबंध चर्चा किए ।














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