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- - न्यायिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल*दुर्ग/ नागरिकों के निकट न्याय को पहुंचाने तथा न्यायिक सुविधाओं का विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में आज भिलाई-3 में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय तथा परिवार न्यायालय (कैम्प कोर्ट-अतिरिक्त बैठक) का वर्चुअल उद्घाटन किया गया। माननीय श्री न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने माननीय श्री न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी, पोर्टफोलियो न्यायाधीश, जिला दुर्ग की गरिमामयी उपस्थिति में भिलाई-3 स्थित जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय तथा परिवार न्यायालय (कैम्प कोर्ट-अतिरिक्त बैठक), जिला दुर्ग का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह उद्घाटन भिलाई-3 क्षेत्र में न्यायिक सेवाओं की उपलब्धता को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय तथा परिवार न्यायालय कैम्प कोर्ट-अतिरिक्त बैठक के प्रारंभ होने से क्षेत्र के नागरिकों को न्यायिक कार्यवाहियों के लिए अधिक सुविधाजनक एवं निकटस्थ न्यायिक मंच उपलब्ध होगा। उद्घाटन तत्पश्चात् माननीय श्री न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति ने अपने उद्बोधन में न्यायिक सेवाओं के विस्तार से जोड़ते हुए अपने विचार व्यक्त किए। भिलाई-3 में न्यायिक सुविधाओं का यह विस्तार न्याय वितरण प्रणाली में सुगमता, पहुंच एवं नागरिक-केंद्रित न्याय की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक कदम है। विशेष रूप से, परिवार न्यायालय कैम्प कोर्टदृअतिरिक्त बैठक के प्रारंभ होने से पारिवारिक विवादों से संबंधित मामलों में संलग्न पक्षकारों को स्थानीय स्तर पर न्यायिक सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।कार्यक्रम का शुभारंभ निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गणमान्य अतिथियों के आगमन के साथ हुआ। तत्पश्चात श्री के. विनोद कुजूर, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि भिलाई-तीन एक महत्वपूर्ण एवं तीव्र गति से विकसित हो रहा क्षेत्र है, जहां बढ़ती हुई जनसंख्या तथा विविध प्रकार की विधिक आवश्यकताएं हैं। समर्पित न्यायालयों की स्थापना के पीछे की परिकल्पना एवं मार्गदर्शक विचार माननीय मुख्य न्यायाधिपति के दूरदर्शी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन से अत्यधिक प्रेरित रहे हैं। अतः भिलाई-तीन में न्यायालयों की स्थापना, अधिक सुगम, उत्तरदायी एवं नागरिक-केंद्रित न्याय वितरण प्रणाली के संबंध में माननीय मुख्य न्यायाधिपति महोदय की परिकल्पना का प्रतिबिंब है।वर्चुअल उद्घाटन के तत्काल पश्चात् भिलाई-3 में प्रारंभ किए जा रहे जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय तथा परिवार न्यायालय (कैम्प कोर्ट-अतिरिक्त बैठक) से संबंधित एक संक्षिप्त वीडियो प्रदर्शित किया गया। वीडियो के माध्यम से प्रस्तावित न्यायिक सुविधा तथा उसकी प्रकृति की एक झलक उपस्थितजनों के समक्ष प्रस्तुत की गई। यह प्रस्तुति केवल एक नई न्यायिक सुविधा के संबंध में जानकारी मात्र नहीं थी, बल्कि यह न्याय वितरण प्रणाली को लोगों के और अधिक निकट लाने की दिशा में एक नई शुरुआत का दृश्यात्मक परिचय भी बनी।कार्यक्रम के अंत में, श्रीमती सुमन एक्का, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, दुर्ग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने माननीय मुख्य न्यायाधिपति, न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी संबंधित व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि भिलाई-3 में इस नवीन न्यायिक सुविधा का प्रारंभ “न्याय को लोगों के और निकट लाने” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल न्यायिक अधोसंरचना के विस्तार को प्रतिबिंबित करती है, बल्कि बदलते समय के अनुरूप एक सुचारु, सुगम एवं नागरिक-केंद्रित न्याय वितरण प्रणाली के प्रति प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।
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दुर्ग/ कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह द्वारा एग्रीस्टेक एवं बकेट क्लेम पंजीयन को प्राथमिकता देते हुए इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। किसानों के पंजीयन एवं संबंधित प्रक्रियाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप जिले में बकेट क्लेम के निराकरण की प्रक्रिया में लगातार प्रगति हो रही है।
27 अगस्त 2026 तक जिले में कुल 1,21,878 बकेट क्लेम पूर्ण किए जा चुके हैं। जिले में कुल 4,59,909 बकेट क्लेम दर्ज हैं। तहसील स्तर पर बोरी 57.19 प्रतिशत क्लेम पूर्ण कर जिले में प्रथम स्थान पर है। इसके बाद धमधा में 49.93 प्रतिशत, अहिवारा में 39.97 प्रतिशत और पाटन में 38.59 प्रतिशत क्लेम पूर्ण किए जा चुके हैं।
विगत चार दिवस में जिले में 931 बकेट क्लेम की प्रगति दर्ज की गई। इसमें पाटन में 426, धमधा में 141, दुर्ग में 137, बोरी में 96, अहिवारा में 86 तथा भिलाई-3 में 45 क्लेम शामिल हैं। बकेट क्लेम पंजीयन किसानों के लिए महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। कलेक्टर ने बकेट क्लेम से संबंधित लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के आधाार पर निराकरण करते हुए पंजीयन की गति बढ़ाने के निर्देश दिए गए है, ताकि अधिक से अधिक पात्र किसानों को लाभ मिल सके। - दुर्ग/ ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार और बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के उद्देश्य से जिला पंचायत दुर्ग द्वारा एक बड़ा कदम उठाया गया है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के अनुमोदन पश्चात् जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बीके दुबे ने विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (व्हीबी-जीरामजी) योजना के तहत जनपद पंचायत पाटन और जनपद पंचायत दुर्ग के अंतर्गत शासकीय शालाओं में निर्माण कार्यों के लिए कुल 25 लाख 57 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। जारी आदेशों के अनुसार स्वीकृत समस्त निर्माण कार्य संबंधित ग्राम पंचायतों द्वारा संपादित कराए जाएंगे।जिला पंचायत सीईओ श्री बजरंग दुबे ने बताया कि जनपद पंचायत पाटन के अंतर्गत ग्राम पंचायत सेलूद में विद्यालय हेतु बहु-इकाई बालिका शौचालय निर्माण के लिए ₹4.30 लाख तथा अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए ₹7.09 लाख, इस प्रकार कुल ₹11.39 लाख के कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। वहीं दूसरी ओर, जनपद पंचायत दुर्ग के ग्राम पंचायत उमरपोटी में पूर्व माध्यमिक शाला के कक्ष क्रमांक 01 एवं कक्ष क्रमांक 02 में दो अतिरिक्त क्लासरूम के निर्माण हेतु कुल ₹14.18 लाख (प्रत्येक कक्ष हेतु ₹7.09 लाख) की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। जिला प्रशासन द्वारा इन स्वीकृत निर्माण कार्यों को पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण ढंग से समय सीमा के भीतर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। योजना के नियमों के अनुसार निर्माण कार्यों में ठेकेदारी प्रथा एवं मशीनों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा तथा केवल पंजीकृत जॉब कार्डधारी श्रमिकों के माध्यम से ही कार्य संपादित कराया जाएगा। श्रमिकों को ₹300 प्रतिदिन की दर से मजदूरी का भुगतान सीधे उनके बैंक या डाकघर खातों में सप्ताह के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। इन स्वीकृतियों से सेलूद और उमरपोटी के शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और मूलभूत सुविधाएँ प्राप्त होंगी।
- दुर्ग/ कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार जिले में स्वाइन फ्लू के संबंध में डॉ. मनोज दानी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दुर्ग, डॉ. सी.बी.एस. बंजारे, जिला सर्वेलेंस अधिकारी, आईडीएसपी दुर्ग एवं सुश्री भूमिका वर्मा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, एन.एच.एम. दुर्ग के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। दुर्ग जिले में 05 से 29 अगस्त 2026 तक कुल 13 स्वाइन फ्लू धनात्मक प्रकरण मिले। वर्तमान में जिले में कुल 09 एक्टिव मरीज है, जिनका विभिन्न अस्पतालों में चिकित्सकीय उपचार चल रहा है जिनकी स्थिति अभी सामान्य है। जिले में नये धनात्मक प्रकरण मिलने पर कांटेक्ट ट्रेसिंग की जाती है, नियमित मरीज की मोनिटरिंग की जाती है।*स्वाइन फ्लू के संबंध में सामान्य जानकारी*स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र का संक्रमण है, जो इन्फ्लूएंजा ए वायरस के कारण होता है। इन्क्यूबेशन पीरियड सामान्यता 1-2 दिवस। संक्रमण का प्रसार संक्रमित व्यक्ति में लक्षण प्रारंभ होने के 3-5 दिवस तक अन्य व्यक्तियो में हो सकता है। संक्रमण का प्रसार सामान्यता संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से ड्राप्लेट इन्फेक्शन के माध्यम से होता है।*मुख्य लक्षण*सर्दी, खासी, बुखार एवं बदन दर्द*क्या करें-*खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रूमाल/टिश्यू या कोहनी से ढकें। हाथों को बार-बार साबुन पानी से धोएं या सैनिटाइजर का उपयोग करें। आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचें। स्वाइन फ्लू से पीड़ित व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखें। पर्याप्त आराम करें, भरपूर नींद लें, पानी पिएं और पौष्टिक भोजन करें। लक्षण होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र से संपर्क करें। होम आइसोलेशन के दौरान स्वास्थ्य की निगरानी करें तथा स्थिति बिगड़ने पर तुरंत अस्पताल जाएं।*क्या न करें-*अभिवादन के लिए हाथ न मिलाएं और गले न मिलें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाई न लें। बीमारी के लक्षण होने पर स्कूल, कार्यालय या भीड़भाड़ वाले स्थानों पर न जाएं। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढक लेवे।स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपील की गई है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है, सतर्क रहें, स्वच्छता का पालन करें, लक्षण होने पर समय पर स्वास्थ्य संस्था से संपर्क करें तथा संक्रमण के प्रसार को रोकने में सहयोग करें।
- रायपुर/छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के 11 अधिकारी-कर्मचारियों को भावभीनी विदाई दी गई। ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला ने सेवानिवृत्त अधिकारी.कर्मचारी को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेट कर सम्मानित कर उनके सुखमय जीवन की कामना व्यक्त की। इस अवसर पर एमडी श्री शुक्ला ने कर्मियों की सेवाओं और योगदान को पाॅवर कंपनी के लिए बहुत महत्वपूर्ण बताया।पाॅवर कंपनी के मुख्यालय डंगनिया स्थित सेवा भवन में सहायक प्रबंधक (वित्त एवं लेखा) श्री रमेश चन्द्र अग्रवाल, मुख्य अभियंता (मानव संसाधन) विभाग में पदस्थ प्रशासनिक अधिकारी श्री शेष कुमार सोनी एवं श्री कमल कुमार भंवर, मुख्य अभियंता (उपकेंद्र) कार्यालय में पदस्थ प्रशासनिक अधिकारी श्री सी.आर.रामचंद्रन, कार्यपालन अभियंता (उपकेंद्र) में पदस्थ वरिष्ठ पर्यवेक्षक (परीक्षण) श्री सुशील कुमार शील व श्री रमेश कुमार वर्मा सहित भिलाई में कार्यरत वरिष्ठ पर्यवेक्षक (परीक्षण) श्री बसंत कुमार साहू, लाईन सहायक श्रेणी-दो श्री दुलारराम यादव एवं लैब टेक्नीशियन श्रीमती सावित्री राय को तथा जगदलपुर में कार्यरत लाईन सहायक श्रेणी-एक श्री आर.गुरवैया, सिविल परिचारक श्रेणी-एक, श्री कस्तुराम नाग को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया। सेवानिवृत्तजनों ने अपनी दीर्घ एवं उत्कृष्ट सेवाकाल की संक्षिप्त अनुभव साझा करते हुए कंपनी प्रबंधन से मिले सहयोग के लिए साधुवाद किया।इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक श्री एम.एस.चैहान, श्री संजय पटेल, श्री वी. के दीक्षित, मुख्य अभियंता श्रीमती शारदा सोनवानी, श्री अब्राहम वर्गीस, श्री प्रसन्न गोसावी, श्रीमती रश्मि वर्मा एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी श्री एच.एल.पंचारी उपस्थित थे।कार्यक्रम का संचालन उपमहाप्रबंधक (जनसंपर्क) श्री गोविंद पटेल एवं आभार प्रदर्शन अधीक्षण अभियंता श्री पंकज चैधरी ने किया।
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-कला मंदिर भिलाई में पूर्वाह्न 11 बजे से शुरू होगी वार्ड आरक्षण प्रक्रिया
दुर्ग/ जिले के नगरीय निकायों में निष्पक्ष एवं पारदर्शितापूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां जारी है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री अभिजित सिंह ने छत्तीसगढ़ नगर पालिका (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं महिलाओं के लिए वार्डों का आरक्षण) नियम, 1994 के तहत जिले के तीन प्रमुख नगर पालिक निगमों- भिलाई, रिसाली और भिलाई-चरोदा के वार्डों का आरक्षण तय करने हेतु औपचारिक आदेश जारी कर दिया है।
जारी समय-सारणी के अनुसार, तीनों नगर निगमों का वार्डवार आरक्षण कार्यक्रम 09 सितंबर 2026 को सेक्टर-6, भिलाई स्थित कला मंदिर (सिविक सेंटर) में आयोजित किया जाएगा। तय कार्यक्रम के तहत पूर्वाह्न 11.00 बजे से नगर पालिक निगम भिलाई, अपराह्न 03.00 बजे से नगर पालिक निगम रिसाली तथा सायंकाल 05.00 बजे से नगर पालिक निगम भिलाई-चरोदा के वार्डों के आरक्षण की कार्यवाही संपन्न की जाएगी।
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उप मुख्यमंत्री ने शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा का किया अनावरण, आदिवासी महासम्मेलन में भी हुए शामिल
गोंडवाना भवन के जीर्णोद्धार के लिए 10 लाख और विकास कार्यों के लिए 6 करोड़ देने की घोषणा की
रायपुर/उप मुख्यमंत्री तथा बेमेतरा जिले के प्रभारी मंत्री श्री अरुण साव ने बेमेतरा में शहीद वीर नारायण सिंह की भव्य प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। वे प्रतिमा अनावरण के बाद कृषि उपज मंडी प्रांगण में आयोजित जिला स्तरीय आदिवासी महासम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में गोंडवाना भवन के जीर्णोद्धार के लिए 10 लाख रुपए तथा बेमेतरा में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 6 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। विधायक श्री दीपेश साहू भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने आदिवासी महासम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ की माटी के ऐसे महान सपूत थे, जिन्होंने गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ वीरतापूर्वक संघर्ष किया। उनका पूरा जीवन संघर्ष, सेवा और राष्ट्रप्रेम की भावना से भरा रहा। उनके मन में समाज के प्रति सेवा का भाव और मातृभूमि के प्रति गहरा प्रेम था। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में गरीब और शोषित लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। अंग्रेजों के अत्याचार के सामने वे कभी नहीं झुके और देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।
श्री साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती अनेक वीर योद्धाओं और जननायकों की गौरवशाली भूमि रही है। शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे महान योद्धाओं ने अपने साहस से समाज व मातृभूमि के प्रति समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया। इन वीर सपूतों का त्याग और बलिदान हमारी आने वाली पीढ़ियों को सदैव याद रहेगा। उन्होंने कहा कि बेमेतरा में स्थापित शहीद वीर नारायण सिंह की यह प्रतिमा उनके त्याग और बलिदान की स्मृति को चिरस्थायी बनाएगी। यह प्रतिमा युवाओं को राष्ट्रसेवा और समाजसेवा के लिए आगे बढ़ने का संदेश देगी। उन्होंने कहा कि देश और समाज के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले महापुरुषों का सम्मान हमारी जिम्मेदारी है।
केन्द्रीय गोंड़ महासभा धमधागढ़ के अध्यक्ष श्री कमलेश सोरी, सर्व आदिवासी समाज जिला अध्यक्ष श्री मुरीत मंडावी, गोंड समाज जिला अध्यक्ष श्री दरबार सिंह नेताम, बेमेतरा नगर पालिका के अध्यक्ष श्री विजय सिन्हा, उपाध्यक्ष श्री अशोक शर्मा, पूर्व विधायक श्री अवधेश चंदेल और श्री अजय साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गोड़ समाज के पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक भी आदिवासी महासम्मेलन में मौजूद थे। -
हिंसा और नक्सलवाद का महिमामंडन करने वाली मानसिकता भी समाज के लिए घातक : साय
रायपुर/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने एक निजी चैनल के साक्षात्कार के दौरान कहा कि नक्सलवाद के समर्थन में बात करने वाले और कुख्यात नक्सली हिड़मा , जिसने सैकड़ो निर्दोषों की हत्या की, उसे आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली हैं । उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के लंबे और पीड़ादायक दौर से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारे सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, केंद्र और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा बस्तर के लोगों के सहयोग से नक्सलवाद समाप्ति की ओर है। अब आवश्यकता इस बात की भी है कि हिंसा और नक्सलवाद को वैचारिक समर्थन देने तथा उसका महिमामंडन करने वाली मानसिकता को समाज स्पष्ट रूप से अस्वीकार करे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी कुछ लोग ऐसे कुख्यात नक्सलियों को अपना आदर्श मानते हैं, जिनके हाथ निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों के खून से रंगे रहे हैं। हिड़मा जैसे नक्सलियों ने हिंसा और आतंक के माध्यम से बस्तर की अनेक पीढ़ियों को भय, अभाव और पिछड़ेपन में रखने का काम किया। ऐसे लोगों का महिमामंडन करना, उनके समर्थन में नारे लगाना या उन्हें नायक के रूप में प्रस्तुत करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बंदूक उठाकर निर्दोष लोगों की जान लेने वाला व्यक्ति किसी समाज का आदर्श नहीं हो सकता। नक्सली हिंसा में बस्तर ने अपने हजारों निर्दोष नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और बहादुर जवानों को खोया है। अनेक परिवारों ने अपनों को खोने का दर्द सहा, बच्चों से उनके माता-पिता छिने और विकास की संभावनाओं को दशकों तक बाधित किया गया। इस पीड़ा को नजरअंदाज कर हिंसा के जिम्मेदार लोगों का गुणगान करना बस्तर के पीड़ित परिवारों और शहीद जवानों के बलिदान का भी अपमान है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलवाद केवल बंदूक और जंगलों तक सीमित चुनौती नहीं है। हिंसा को उचित ठहराने, लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने और नक्सली हिंसा के जिम्मेदार लोगों को नायक के रूप में स्थापित करने वाली सोच भी उतनी ही चिंताजनक है। लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन हिंसा का समर्थन और निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों का महिमामंडन किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की पहचान बदल रही है। जिस क्षेत्र को कभी नक्सली हिंसा, बारूदी सुरंगों और भय के कारण जाना जाता था, वहां अब स्कूलों की घंटियां सुनाई दे रही हैं, सड़कें बन रही हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं, युवाओं को शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं तथा दूरस्थ गांव शासन की योजनाओं और विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर के युवा अब बंदूक नहीं, किताब, कलम, कौशल और रोजगार चाहते हैं। वे अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं और देश-प्रदेश की प्रगति में भागीदार बनना चाहते हैं। हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर के प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले और प्रत्येक परिवार तक विकास तथा सुशासन का लाभ पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई केवल सुरक्षा की लड़ाई नहीं थी, बल्कि बस्तर के भविष्य को बचाने की लड़ाई थी। हमारे जवानों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना इस लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया है। अब समाज की जिम्मेदारी है कि हिंसा की विचारधारा को किसी भी स्वरूप में महिमामंडित न होने दे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ शांति, लोकतंत्र और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ चुका है। नक्सलवाद और हिंसा के लिए नए छत्तीसगढ़ में कोई स्थान नहीं है। बस्तर की नई पीढ़ी के आदर्श वे लोग होने चाहिए जो शिक्षा, सेवा, परिश्रम, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से समाज को आगे बढ़ा रहे हैं, न कि वे जिन्होंने बंदूक और हिंसा के सहारे निर्दोष लोगों का जीवन छीना।
उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना केवल सरकार या सुरक्षाबलों की उपलब्धि नहीं, बल्कि वहां के नागरिकों के साहस और विश्वास की जीत है। अब इस शांति को स्थायी बनाते हुए बस्तर को विकास, पर्यटन, शिक्षा, रोजगार और समृद्धि की नई पहचान देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। -
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा विकसित छत्तीसगढ़
सुरक्षा के साथ विकास की रणनीति ने बदली बस्तर की तस्वीर, अंतिम छोर तक पहुंच रही शासन की योजनाएं
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि दशकों तक नक्सलवाद की चुनौती का सामना करने वाला छत्तीसगढ़ आज शांति, विश्वास और विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। नक्सलवाद के अंधेरे से बाहर निकलकर प्रदेश अब विकास की नई इबारत लिख रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अधोसंरचना, पर्यटन और आजीविका सहित सर्वांगीण विकास के प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखाई देने लगे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भी विकसित राज्य बनने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। प्रदेश के विजन डॉक्यूमेंट के अंतर्गत 10 प्रमुख मिशन निर्धारित किए गए हैं और उन्हें धरातल पर उतारने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संभावनाओं से भरपूर राज्य है। प्रदेश का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां लोहा, बॉक्साइट, लिथियम, सोना सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र टिन उत्पादक राज्य भी है। प्राकृतिक संसाधनों की इस समृद्धि के साथ प्रदेश की मेहनतकश मानव शक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इन क्षमताओं का समुचित उपयोग कर छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश के विकास में और बड़ी भूमिका निभाएगा।
सुरक्षा और विकास की समन्वित रणनीति से बदली बस्तर की तस्वीर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद प्रदेश, विशेषकर बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा बना रहा। वर्ष 2023 में राज्य में सरकार बनने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार ने समन्वय के साथ नई रणनीति पर काम शुरू किया। पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर तालमेल और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक गति दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता मिली है। नई रणनीति की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि सुरक्षा बलों ने पूरी मजबूती से अभियान चलाते हुए पहले की तुलना में अपने जवानों की क्षति को कम रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की जनता ने लगभग चार दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। नक्सली स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और संचार सुविधाओं जैसे विकास कार्यों का विरोध करते थे, जिसके कारण अनेक दूरस्थ क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से कटे रहे। इसलिए सरकार ने नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी।
‘नियद नेल्लानार’ ने दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार शुरू से स्पष्ट थी कि केवल नक्सल समस्या को समाप्त करना पर्याप्त नहीं होगा। स्थायी शांति के लिए बस्तर के प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार तक विकास का लाभ पहुंचाना आवश्यक है। इसी सोच के साथ ‘नियद नेल्लानार’ योजना शुरू की गई। गोंडी भाषा में इसका अर्थ है - ‘आपका अच्छा गांव’। उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से दूरस्थ और संवेदनशील गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूरसंचार जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। क्षेत्र में 421 से अधिक स्कूल खोले गए हैं और दूरसंचार नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। विकास को और गति देने के लिए सरकार ने ‘नियद नेल्लानार 2.0’ भी प्रारंभ किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर को देश का सबसे सुंदर आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प व्यक्त किया है और राज्य सरकार इसी लक्ष्य के अनुरूप बस्तर के समग्र विकास पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम के माध्यम से शासकीय अमला गांवों में पहुंचकर और वहां ठहरकर लोगों को योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है।
शांति लौटने के साथ बस्तर में आजीविका और पर्यटन की नई संभावनाएं
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में शांति स्थापित होने के साथ अब रोजगार, आजीविका और पर्यटन के नए अवसर भी तेजी से विकसित हो रहे हैं। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ समझौता किया गया है। बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। बस्तर के धुड़मारास गांव को दुनिया के श्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया गया है। यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटक होम-स्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन और संस्कृति को निकट से अनुभव कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में होम-स्टे को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ऋण एवं अनुदान की सुविधा दे रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को भी शामिल किया गया है। नक्सलवाद की समाप्ति के बाद खाली हो रहे लगभग 70 सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए खोले पुनर्वास के द्वार
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की रणनीति केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के लिए बेहतर आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति तैयार की गई। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा छोड़कर लौटने वालों के साथ न्याय होगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने हिंसा की जगह संवाद और पुनर्वास को प्राथमिकता दी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त होने के बाद भी वैचारिक स्तर पर भ्रम फैलाने की कोशिश करने वाले कुछ तत्व मौजूद हैं, लेकिन बस्तर में तेजी से पहुंचता विकास और लोगों के जीवन में आ रहा सकारात्मक परिवर्तन ऐसे भ्रम का सबसे प्रभावी उत्तर है।
युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा और रोजगार पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। प्रत्येक विकासखंड तक उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ी है और आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी जैसे राष्ट्रीय महत्व के प्रतिष्ठित संस्थान प्रदेश में संचालित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। दिल्ली में यूथ हॉस्टल के माध्यम से युवाओं को यूपीएससी की तैयारी में सहयोग दिया जा रहा है। प्रदेश में 34 नालंदा परिसरों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए भी सरकार अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभाशाली बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बनें।
नई औद्योगिक नीति से निवेश और रोजगार को मिल रही नई गति
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के माध्यम से छत्तीसगढ़ में उद्योग, निवेश और रोजगार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और इनका असर धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि उसके माध्यम से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करना है। इसी उद्देश्य से एक हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्यमों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
“किसान परिवार से मिली मेहनत और जिम्मेदारी की सीख”
कार्यक्रम में अपनी जीवनयात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और खेती उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। दस वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार के बड़े बेटे के रूप में कम उम्र में ही उन्हें जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं। बचपन से खेती करते हुए उन्होंने परिश्रम, धैर्य और जिम्मेदारी का महत्व सीखा।
उन्होंने कहा कि राजनीति में आने की उनकी कोई पूर्व योजना नहीं थी। गांव के लोगों के आग्रह पर पहली बार वार्ड पंच का चुनाव लड़ा और जनप्रतिनिधि के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई। पांच वर्ष तक पंच के रूप में किए गए कार्यों के आधार पर गांववासियों ने उन्हें निर्विरोध सरपंच चुना। इसके बाद वर्ष 1990 में तपकरा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने। अविभाजित मध्यप्रदेश में दो बार विधायक और रायगढ़ से चार बार सांसद के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला और आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा का महत्वपूर्ण दायित्व मिला है। सार्वजनिक जीवन में जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के सामने संभावनाओं का नया आकाश है। नक्सलवाद की बाधा दूर होने के साथ बस्तर सहित पूरा प्रदेश विकास की नई गति पकड़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध छत्तीसगढ़ मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और पर्यटन में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो तथा वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में ‘विकसित छत्तीसगढ़’ अपनी सशक्त भूमिका निभाए।
कार्यक्रम में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। -
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया TIN पोर्टल का शुभारंभ
TIN पोर्टल से टिन संग्राहक जनजातीय हितग्राहियों को मिलेगा पारदर्शी और उचित मूल्य
LME आधारित मूल्य निर्धारण से बाजार भाव के अनुरूप भुगतान, DBT से सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी राशि
रायपुर/प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज संसाधनों के सतत एवं समावेशी विकास के साथ जनजातीय समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा इंडियन ओवरसीज बैंक के सहयोग से विकसित TIN (ट्राइबल इंसेंटिव्स ऑन नेचुरल रिसोर्सेज़) पोर्टल का शुभारंभ किया। इस दौरान केंद्रीय कोयला और खान राज्यमंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे, केंद्रीय शहरी आवासन राज्य मंत्री श्री तोखन साहू और सीएमडीसी के चेयरमैन श्री सौरभ सिंह सहित अधिकारीगण मौजूद रहे।
यह पोर्टल बस्तर संभाग के जनजातीय समुदायों द्वारा संग्रहित टिन अयस्क के क्रय से लेकर परिवहन, बिक्री, मूल्य निर्धारण और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और समयबद्ध बनाने की महत्वपूर्ण पहल है। पोर्टल में लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) आधारित मूल्य निर्धारण की व्यवस्था की गई है, जिससे टिन संग्राहकों को बाजार की स्थिति के अनुरूप अधिक पारदर्शी मूल्य मिल सकेगा। वहीं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से विक्रय की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में पहुंचेगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी, भुगतान में देरी की संभावना घटेगी और जनजातीय परिवारों को अपने प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले आर्थिक लाभ का अधिक प्रत्यक्ष एवं समयबद्ध लाभ मिलेगा।
टिन खरीदी की पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल, हर चरण की होगी निगरानी
TIN पोर्टल के माध्यम से टिन अयस्क के संग्रहण से लेकर भुगतान तक प्रत्येक चरण को डिजिटल वर्कफ्लो से जोड़ा गया है। इसमें डिजिटल हितग्राही पंजीयन एवं पहचान, बैंकिंग सेवाओं का एकीकरण, क्यूआर कोड आधारित स्मार्ट सत्यापन, स्मार्ट कार्ड/पहचान सुविधा, ऑनलाइन स्टॉक प्रबंधन, भुगतान राशि की स्वचालित गणना, ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग और संपूर्ण ऑडिट ट्रेल जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सीएमडीसी मुख्यालय से लेकर क्षेत्रीय कार्यालयों और क्रय केंद्रों तक रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी विकसित की गई है। पोर्टल के माध्यम से हितग्राहियों को डिजिटल संचार, एसएमएस अलर्ट और भुगतान एवं लेन-देन की स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। इससे न केवल संग्राहकों को अपने टिन की बिक्री और भुगतान की जानकारी समय पर मिलेगी, बल्कि सीएमडीसी के लिए स्टॉक, राजस्व, भुगतान और क्रय प्रक्रिया की निगरानी भी अधिक प्रभावी होगी।
06 टिन क्रय केंद्रों से खरीदी, 03 नए केंद्र प्रस्तावित
सीएमडीसी द्वारा वर्तमान में बस्तर संभाग में 06 टिन क्रय केंद्रों के माध्यम से जनजातीय हितग्राहियों से टिन अयस्क की खरीदी की जा रही है। इनमें दंतेवाड़ा जिले के बचेली, कटेकल्याण और चिकपाल तथा सुकमा जिले के तोंगपाल, नामा और चिंतलनार में संचालित क्रय केंद्र शामिल हैं। अधिक से अधिक जनजातीय संग्राहकों को स्थानीय स्तर पर टिन विक्रय की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा में 03 नए टिन संग्रहण एवं क्रय केंद्र स्थापित करने की योजना है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के संग्राहकों को अपने उत्पाद को बाजार तक ले जाने में होने वाली कठिनाइयों में कमी आएगी और अधिक हितग्राही औपचारिक एवं पारदर्शी क्रय व्यवस्था से जुड़ सकेंगे।
टिन क्रय व्यवस्था में लागू हुई नई SOP, प्रक्रिया होगी सरल और किफायती
TIN पोर्टल के साथ CMDC द्वारा टिन अयस्क की खरीदी से बिक्री तक की प्रक्रिया के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी तैयार कर लागू की गई है। इसके तहत प्रत्येक क्रय केंद्र के लिए अलग सैंपलिंग की व्यवस्था, सैंपल की संख्या को 12 से घटाकर 6 करना, प्रत्येक सैंपल का मानकीकरण 50 ग्राम करना तथा परीक्षण परिणामों को लेकर असहमति की स्थिति में री-एनालिसिस का प्रावधान किया गया है। इससे प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होने के साथ परीक्षण एवं विश्लेषण से जुड़ी लागत में भी कमी आएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मासिक विश्लेषण शुल्क को 14,400 रुपए से घटाकर 7,200 रुपए किया गया है तथा इन सुधारों से CMDC को लगभग 10 लाख रुपए वार्षिक तक की संभावित बचत का अनुमान है। क्रय, बिक्री और परिवहन दरों के नियमित निर्धारण से पूरी प्रक्रिया में स्पष्टता भी बढ़ेगी।
LME आधारित मूल्य से उचित मूल्य, DBT से सीधे खाते में भुगतान
TIN पोर्टल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में LME आधारित मूल्य निर्धारण और DBT भुगतान व्यवस्था शामिल है। इससे टिन के अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखते हुए अधिक पारदर्शी मूल्य व्यवस्था विकसित होगी। विक्रय राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचने से हितग्राहियों को भुगतान के लिए किसी मध्यस्थ पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। बैंकिंग प्रणाली से एकीकरण के कारण भुगतान अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय होगा। साथ ही डिजिटल भुगतान व्यवस्था जनजातीय समुदायों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ते हुए वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा देगी।
टिन संग्रहण को आजीविका से जोड़ने की दिशा में पहल
बस्तर के दक्षिणी क्षेत्रों में जनजातीय समुदाय लंबे समय से टिन अयस्क का संग्रहण करते रहे हैं। वर्ष 2013 में दंतेवाड़ा क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत पांच टिन अयस्क संग्रहण सहकारी समितियों का गठन किया गया था। अब TIN पोर्टल इसी सामुदायिक व्यवस्था को डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए टिन संग्रहण को अधिक व्यवस्थित एवं स्थायी आजीविका गतिविधि के रूप में विकसित करने का प्रयास है। इससे प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले आर्थिक लाभ को स्थानीय समुदायों तक सीधे पहुंचाने, उनकी आय बढ़ाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत करने में मदद मिलेगी।
टिन खरीदी से जनजातीय हितग्राहियों को लगातार मिला आर्थिक लाभ
CMDC द्वारा जनजातीय हितग्राहियों से टिन अयस्क की खरीदी के माध्यम से लगातार आर्थिक लाभ पहुंचाया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 8,707.2 किलोग्राम टिन अयस्क के लिए लगभग 90.82 लाख रुपए, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20,895.335 किलोग्राम टिन अयस्क के लिए लगभग 3.81 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।
सरकार और CMDC के लिए भी बनेगा मजबूत डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म
TIN पोर्टल केवल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह टिन की पूरी मिनरल वैल्यू चेन के डिजिटल प्रबंधन की व्यवस्था है। इससे सरकार को रियल टाइम राजस्व एवं क्रय संबंधी जानकारी प्राप्त होगी, जबकि CMDC को कागजी कार्यवाही कम करने, स्टॉक ट्रैकिंग, ऑडिट अनुपालन, भुगतान और क्रय केंद्रों की निगरानी में सुविधा मिलेगी। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य की नीतियों और योजनाओं के लिए भी बेहतर निर्णय लिए जा सकेंगे। इस प्रकार TIN पोर्टल छत्तीसगढ़ के खनिज संसाधनों को जनजातीय आजीविका से जोड़ने वाली ‘मिनरल-टू-लाइवलीहुड’ पहल के रूप में सामने आया है। LME आधारित पारदर्शी मूल्य निर्धारण, DBT, डिजिटल पहचान, बैंकिंग एकीकरण, रियल टाइम मॉनिटरिंग और मानकीकृत SOP के माध्यम से इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बस्तर के टिन संग्राहक जनजातीय हितग्राहियों को उनके संसाधनों का अधिकतम, पारदर्शी और समयबद्ध आर्थिक लाभ मिल सके।
सीएमडीसी और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच हुआ महत्वपूर्ण एमओयू, कौशल विकास और वित्तीय सहयोग को मिलेगी गति
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू किया गया। इस समझौते से खनिज क्षेत्र में वित्तीय सहयोग, टिन संकलित करने वाले हितग्राहियों को पारदर्शी भुगतान और मूल्य संवर्धन का लाभ मिलेगा। -
कटिंग-पॉलिशिंग के आधुनिक प्रशिक्षण के लिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय बनेगा नॉलेज पार्टनर, ‘बस्तर ब्रांड’ को मिलेगा बढ़ावा
कोरंडम से बस्तर को मिलेगी नई पहचान, खनन से मूल्य संवर्धन तक विकसित होगी पूरी वैल्यू चेन
रायपुर। नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों के दोहन के साथ-साथ उनके स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (CMDC) द्वारा बीजापुर जिले के कुचनूर क्षेत्र में लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद कोरंडम खदान का पुनः संचालन किया गया है। कोरंडम के खनन से लेकर उसकी कटिंग, पॉलिशिंग, आभूषण निर्माण, ब्रांडिंग और विपणन तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने के उद्देश्य से CMDC और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के बीच मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में नया रायपुर स्थित मेफेयर रिज़ॉर्ट में यह महत्वपूर्ण एमओयू सम्पन्न हुआ। विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर के रूप में चयनित किया गया है, जिसके माध्यम से स्थानीय युवाओं और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
वैज्ञानिक पद्धति से हो रहा उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का उत्खनन
प्रदेश में कोरंडम खनिज के दोहन एवं विपणन के लिए CMDC और संयुक्त उपक्रम साझेदार मेसर्स एन.सी. नाहर के मध्य गठित छत्तीसगढ़ कोरंडम माइन्स लिमिटेड के माध्यम से बीजापुर जिले के भोपालपट्टनम क्षेत्र के ग्राम कुचनूर में कोरंडम खदान संचालित की जा रही है। लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद फरवरी 2025 से खदान का पुनः संचालन करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का वैज्ञानिक पद्धति से उत्खनन किया जा रहा है। वर्तमान में खदान से उत्खनित कोरंडम का लगभग 240 किलोग्राम भंडारण है, जिसमें से 157.643 किलोग्राम का परिवहन किया जा चुका है। परिवहन किए गए कोरंडम में 107.989 किलोग्राम बी-ग्रेड तथा 49.654 किलोग्राम औद्योगिक ग्रेड कोरंडम शामिल है।
खनन के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार
कुचनूर कोरंडम खदान के संचालन से बीजापुर जिले के 14 स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार और CMDC का प्रयास है कि खनिज आधारित गतिविधियों का लाभ केवल खनन तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय समुदायों, युवाओं, शिल्पकारों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों की भागीदारी से आय के नए अवसर सृजित हों।
कटिंग-पॉलिशिंग के प्रशिक्षण से बढ़ेगा मूल्य संवर्धन
कोरंडम से अधिकतम मूल्य प्राप्त करने के लिए स्थानीय स्तर पर जेम्स्टोन हैंडलिंग, कटिंग, पॉलिशिंग और अन्य वैल्यू एडिशन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है। आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रत्नों की पहचान और कौशल गतिविधियों में दक्ष बनाया जाएगा। इससे उन्हें रोजगार के साथ स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के अवसर भी मिलेंगे।
‘बस्तर ब्रांड’ के तहत आभूषण और रत्न उत्पादों को मिलेगा बाजार
कुचनूर से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम को ‘बस्तर ब्रांड’ के तहत स्थानीय डिजाइन, गुणवत्ता और प्रमाणिकता से जोड़ने की योजना है। कोरंडम से आभूषण एवं रत्न उत्पाद तैयार कर उनकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे बस्तर की स्थानीय कला, शिल्प और प्राकृतिक खनिज संपदा को एक साथ बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी। स्थानीय इकाइयों, स्टार्टअप्स, शिल्पकारों और निवेशकों की भागीदारी से कोरंडम आधारित नए उद्यम विकसित किए जा सकेंगे।
नए कोरंडम क्षेत्रों की पहचान और अन्वेषण जारी
बीजापुर जिले में कोरंडम से जुड़े नए संभावित क्षेत्रों की पहचान, अन्वेषण एवं पूर्वेक्षण का कार्य भी जारी है। भोपालपट्टनम क्षेत्र में ग्राम कुचनूर सहित अन्य संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर खनन गतिविधियों के विस्तार की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। धनगोल सहित विभिन्न इलाकों में क्षेत्र आरक्षित कर आवेदन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
पारदर्शी नीलामी से सरकार को राजस्व, बस्तर को मिलेगी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान
उत्खनित कोरंडम की पारदर्शी तरीके से नीलामी से राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि के साथ बस्तर क्षेत्र के कोरंडम को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की संभावनाएं बढ़ेंगी। खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग के साथ स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन होने से खनिज की वास्तविक आर्थिक क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। CMDC की यह पहल ‘खनन से मूल्य संवर्धन, मूल्य संवर्धन से रोजगार और रोजगार से आर्थिक सशक्तिकरण’ की अवधारणा को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य केवल कोरंडम का उत्खनन करना नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं और समुदायों को पूरी वैल्यू चेन का भागीदार बनाकर बस्तर की खनिज संपदा को स्थानीय समृद्धि और आत्मनिर्भरता का आधार बनाना है। -
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों से जिले में खेल अधोसंरचना को मिलेगा नया आयाम
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों से जशपुर जिले में खेल अधोसंरचना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला मुख्यालय जशपुर में आधुनिक फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 5 करोड़ 49 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरूण साव के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा स्टेडियम निर्माण की स्वीकृति दी गई है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इस फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण से जशपुर जिले के खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही, स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी खेल प्रतिभा निखारने और जिला स्तर से आगे बढ़कर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए बेहतर मंच मिलेगा।
जशपुर जिले में फुटबॉल के प्रति खिलाड़ियों और युवाओं में विशेष उत्साह एवं रुचि को देखते हुए यह स्टेडियम खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे जिले में नियमित प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और खेल आयोजनों के लिए बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध होगी।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा जशपुर जिले में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और खेल सुविधाओं के विस्तार पर लगातार जोर दिया जा रहा है। फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण के लिए मिली यह स्वीकृति जिले में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। - -धमधा में पुरखौती विरासत यात्रा का आयोजन-बूढ़ा नरवा से लेकर प्राचीन तालाबों, मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों तक पहुंचे प्रतिभागीधमधा, । धमधा की पहचान से जुड़े “छै आगर छै कोरी तरिया” यानी 126 तालाबों को भरने वाली पारंपरिक जल संरचना बूढ़ा नरवा को समझने के उद्देश्य से धर्मधाम गौरवगाथा समिति, धमधा ने पुरखौती विरासत यात्रा का आयोजन किया। इस यात्रा में प्रतिभागियों ने तालाबों की श्रृंखला, बूढ़ा नरवा और खेतों से तालाबों तक पानी पहुंचाने वाली प्राचीन जल व्यवस्था को मौके पर जाकर देखा और समझा।यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण एक क्षेत्र में मौजूद लगभग 50 लबालब भरे तालाबों का एक साथ दिखाई देना रहा। प्रतिभागियों को बताया गया कि बूढ़ा नरवा खेतों से आने वाले वर्षाजल को एकत्रित कर उसे आगे तालाबों तक पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण जल संरचना है और इसकी व्यवस्था से लगभग 20 तालाबों तक पानी पहुंचता है। इस दौरान तालाबों के आपसी जुड़ाव, जल के प्रवाह और इस पूरी व्यवस्था के पीछे विकसित पारंपरिक जल प्रबंधन की समझ को स्थल पर देखा गया। अतिथियों ने कहा कि आज जब जल संरक्षण को लेकर नए उपाय तलाशे जा रहे हैं, तब धमधा की यह पुरानी व्यवस्था अपने आप में अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय है।गायत्री मंदिर, बस स्टैंड में पंजीयन के बाद पंडितवा तालाब से यात्रा प्रारंभ हुई। यहां से प्रतिभागियों ने बिरझापुर स्थित शनिदेव तालाब के जीर्णोद्धार एवं वृक्षारोपण कार्य का अवलोकन किया। बरहापुर रोड स्थित बूढ़ा नरवा देखते हुए गोपाल तालाब पहुंचे। इसके बाद आत्मानंद विद्यालय के पास दानी तालाब और नइया तालाब का भ्रमण किया गया। भानपुर रोड स्थित टार तालाब के बाद यात्रा महामाया मंदिर और बूढ़ादेव मंदिर पहुंची।यात्रा में धमधा की पुरानी सामाजिक एवं सांस्कृतिक बसाहट को भी शामिल किया गया। तमेरपारा में श्री विष्णु प्रसाद ताम्रकार की अनूठी मूर्तिकला तथा श्री विमल चंद्र ताम्रकार के सौ वर्ष पुराने घर को देखकर प्रतिभागियों ने धमधा की स्थापत्य, कला और पारंपरिक जीवन शैली की झलक देखी। इस दौरान स्थानीय इतिहास से जुड़े शोधार्थियों ने विभिन्न स्थलों के संबंध में उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारियां भी साझा कीं।पुरखौती विरासत यात्रा में पूर्व प्राचार्य, भिलाई महाविद्यालय आचार्य महेशचंद्र शर्मा, साहित्यकार दुर्ग श्रीमती विद्या गुप्ता, पूर्व प्राचार्य एवं सामाजिक संस्था अथक के अध्यक्ष श्री पी.आर. साहू, अभिनव जीवन कल्याण समिति दुर्ग के संयोजक श्री जगमोहन सिन्हा तथा नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती श्वेता प्रशांत अग्रवाल अतिथि के रूप में शामिल हुए।यात्रा में वीरेंद्र देवांगन, ईश्वरी निर्मलकर, मनोज सोनी, संतोष उमरे, सामर्थ्य ताम्रकार, भुवनेश्वर धीवर, सेवानिवृत्त शिक्षक डी.पी. शर्मा, मुखराज किशोर यादव, विश्राम सिंह चोपड़े, विवेकानंद ताम्रकार, सुनील साहू मड़ियापार, पत्रकार मोहम्मद फारूखी, अजय चौधरी भिलाई, रामदेव शर्मा सहित अनेक लोग शामिल हुए। चंदूलाल चंद्राकर शासकीय महाविद्यालय, धमधा के शोधार्थी रोशन साहू, प्रीति साहू, देवकी कश्यप, विकास वैष्णव, गौरी निषाद, पायल रजक और तोषी यादव सहित अन्य प्रतिभागियों ने भी सहभागिता की।धर्मधाम गौरवगाथा समिति के अनुसार, धमधागढ़ हेरिटेज वॉक का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराना नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपे इतिहास, तकनीक, लोकस्मृति और सामाजिक जीवन को समझना है। समिति के शोधार्थियों द्वारा अंग्रेजी अभिलेखों और ऐतिहासिक दस्तावेजों से जुटाई गई जानकारियों को स्थानीय स्थलों से जोड़कर देखने का प्रयास किया जा रहा है। धमधा की 126 तालाबों की श्रृंखला और बूढ़ा नरवा जैसी जल विरासत यह बताती है कि पूर्वजों ने वर्षाजल के संरक्षण और उपयोग के लिए कितनी सुविचारित व्यवस्था विकसित की थी।
- - विधायक मोतीलाल साहू ने कहा- नए उपकेंद्र बनने से उपभोक्ताओं को मिलेगी गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्तिरायपुर । छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के नगर संभाग (उत्तर) व्दारा मुख्यमंत्री विद्युत अधोसंरचना विकास योजना के अंतर्गत भनपुरी स्थित उमिया मार्केट में निर्मित 33/11 केवी नवीन विद्युत उपकेंद्र का लोकार्पण हुआ। पांच एमवीए क्षमता वाले इस उपकेंद्र से क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि रायपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री मोतीलाल साहू थे। इस अवसर पर जोन क्रमांक 1 के अध्यक्ष श्री गज्जू साहू सहित पार्षद श्री नंद किशोर साहू, श्री भगत राम हरवंश, श्री मनमोहन मनहरे, श्रीमती अंबिका साहू तथा एल्डरमैन श्री विक्रम सिंह ठाकुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि उपकेंद्र के निर्माण में 5 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर के साथ 0.6 किलोमीटर 33 केवी लाइन तथा 1.7 किलोमीटर 11 केवी लाइन का निर्माण किया गया है। इस परियोजना पर लगभग 2.31 करोड़ रुपये की लागत आई है। उपकेंद्र के ऊर्जीकृत होने से घरेलू एवं व्यावसायिक निम्नदाब उपभोक्ताओं के साथ औद्योगिक उपभोक्ता लाभान्वित होंगे।पूर्व में गोंदवारा क्षेत्र के उपभोक्ताओं को गाजी नगर उपकेंद्र तथा गोंदवारा उपकेंद्र से निकलने वाले 11 केवी फीडरों के माध्यम से विद्युत आपूर्ति की जा रही थी। गाजी नगर उपकेंद्र से गोंदवारा क्षेत्र की दूरी अधिक होने तथा दोनों फीडरों पर 100 एम्पियर से अधिक भार होने के कारण विद्युत आपूर्ति और व्यवधानों के निराकरण में कठिनाई आती थी। नवीन उमिया मार्केट उपकेंद्र से तीन नए 11 केवी फीडर बनाए गए हैं, जिससे फीडरों की लंबाई कम होने के साथ भार का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।नवीन उपकेंद्र से गोंदवारा, न्यू गोंदवारा इंडस्ट्रियल क्षेत्र, सरदार पटेल मार्केट, भनपुरी सहित आसपास के क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही गोंदवारा उपकेंद्र के विजय लक्ष्मी फीडर तथा गाजी नगर उपकेंद्र के उमिया मार्किट एवं भनपुरी उपकेंद्र से टिम्बर मार्केट फीडर का भार सामान्य होने से संबंधित क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी। इस उपकेंद्र के निर्माण में मुख्य अभियंता(रायपुर शहर) श्री संजीव सिंह, अतिरिक्त मुख्य अभियंता सलिल खरे, अधीक्षण अभियंता श्री महेश ठाकुर, सीएच मरकाम, एम विश्वकर्मा, कार्यपालन अभियंता श्री शिव गुप्ता, पीके सिंह, राजेश मिश्रा का योगदान रहा।
- रायपुर । बारिश का दौर अभी जारी है और मौसम विभाग ने आगामी 3 सितंबर तक बारिश का अलर्ट भी जारी किया है पर इस बीच ही सिंचाई पानी की कथित मांग पर सिंचाई पानी देने गंगरेल के गेट खोल दिए गए हैं । इसे ले किसानों में मिश्रित प्रतिक्रिया है । जानकारी के अनुसार लगभग 25 सौ क्यूसेक पानी छोड़ा गया है ।ज्ञातव्य हो कि अल-नीनो के प्रभाव से देश में सूखे की भविष्यवाणी के चलते चिंतित प्रदेश के किसानों पर इंद्र देव की कृपा से हो रहे व्यापक बरसात ने अभी तक किसानों को कम से कम बांधों से सिंचाई पानी की जरूरत महसूस नहीं होने दी है बल्कि वे मौसम न खुलने व लगातार बदली की वजह से कीट प्रकोप की आंशका से आशंकित हैं और कहीं - कहीं छिटपुट कीट प्रकोप शुरू होने की भी समाचार मिलना शुरू हो चला है । इधर गंगरेल से पानी छोड़े जाने के समाचार मिलने पर किसानों में व्यापक मिश्रित प्रतिक्रिया हो रही है । अधिकतर किसानों का कहना है कि फिलहाल छोड़े गये पानी का अधिकांश हिस्सा व्यर्थ नदी - नालों में जावेगा और वे ही किसान फिलहाल पानी की मांग कर रहे हैं जो अपनी लापरवाही की वजह से बरसाती पानी को अपने खेतों में सहेज रखने में कोताही बरते हैं । इधर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पलारी क्षेत्र की मांग पर गंगरेल से यह पानी छोड़ा गया है । इस संबंध में रायपुर जिला जल उपभोक्ता संस्था संघ के अध्यक्ष रहे भूपेंद्र शर्मा ने कहा है कि इस साल धान बुवाई काफी आगे पीछे हुआ है और इस वजह से भविष्य में बरसात न होने की स्थिति में काफी लंबे समय तक बांध से सिंचाई पानी की जरूरत पड़ेगी । किसानों से चर्चा पश्चात् उन्होंने बताया है कि फिलहाल जिले के अपवादस्वरूप किसानों को छोड़ अधिकांश किसान सिंचाई पानी की सामयिक आवश्यकता महसूस नहीं कर रहे और बांध से छोड़े जा रहे पानी का अधिकतम हिस्सा नदी - नालों में व्यर्थ जावेगा क्योंकि सिंचाई विभाग के पास इसे रोकने मैदानी अमलों की नितांत कमी के साथ - साथ अनेकों वितरक शाखाओं , माइनरों व आउटलेटों में देखरेख व सामयिक मरम्मत के अभाव में पानी रोकने की पुख्ता व्यवस्था नहीं है । file photo
- -31 अगस्त से 02 सितंबर 2026 तक काउंसलिंग होगारायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के बी.एस.सी. कृषि (ऑनर्स) स्नातक पाठ्यक्रम में नवीन शिक्षा नीति 2020 के तहत प्रवेश हेतु संचालित ऑनलाईन काउंसलिंग प्रक्रिया के तहत चयनित अभ्यर्थियों को पीएटी परीक्षा के आधार पर स्पॉट काउंसलिंग, महाविद्यालय का आबंटन एवं स्पॉट पर ही ऑनलाइन फीस जमा किया जावेगा। कल 31 अगस्त से 02 सितंबर तक कृषि महाविद्यालय रायपुर में प्रातः 9 बजे से शाम 5ः30 तक स्पॉट काउंसलिंग होगा।स्पाॅट एवं कन्वर्शन काउंसलिंग हेतु पंजीकृत अभ्यर्थियों की सूची 25 अगस्त, 2026 को विश्वविद्यालय की वेबसाईट पर अपलोड किया गया है। स्पाॅट काउंसलिंग हेतु प्रोविजनल सीट एवं महाविद्यालय का आबंटन 31 अगस्त से 01 सितम्बर, 2026 के मध्य किया जाएगा। तत्काल दस्तावेज परीक्षण एवं ऑनलाईन फीस जमा करने हेतु 31 अगस्त से 01 सितम्बर, 2026 तक अभ्यर्थियों को कृषि महाविद्यालय, रायपुर में उपस्थित होना होगा। कन्वर्शन काउंसलिंग हेतु प्रोविजनल सीट, महाविद्यालय आबंटन, तत्काल दस्तावेज एवं ऑनलाईन फीस जमा करने हेतु अभ्यर्थियों को कृषि महाविद्यालय रायपुर में 02 सितम्बर, 2026 को उपस्थित होना पडे़गा। इच्छुक अभ्यर्थी काउंसिलिंग संबंधित दिशा-निर्देशों की अधिक जानकारी हेतु विश्वविद्यालय की वेबसाईट www.igkv.ac.in का अवलोकन कर सकते हैं।
- -बारिश के बावजूद दिखा अभूतपूर्व उत्साहरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश एवं कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन, नगर निगम रायपुर, कला केंद्र एवं स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “तिरंगा शक्ति फेस्ट 2026 गुरु वंदन उत्सव” के अंतर्गत आयोजित सिंगिंग एवं डांसिंग ऑडिशन के प्रथम दिवस में प्रतिभाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित इस विशेष ऑडिशन में शिक्षकों, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बारिश के बावजूद प्रतिभागियों का उत्साह देखते ही बना। लगातार बारिश के बीच भी बड़ी संख्या में प्रतिभागी अपनी प्रस्तुतियां देने के लिए पहुंचे। ऑडिशन स्थल पर प्रतिभागियों एवं उनके अभिभावकों में खासा उत्साह देखने को मिला।ऑडिशन के प्रथम दिवस में 94 से अधिक प्रस्तुतियां हुईं। गायन एवं नृत्य की इन प्रस्तुतियों में प्रतिभागियों ने बॉलीवुड, देशभक्ति एवं भक्ति थीम पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों के आत्मविश्वास, रचनात्मकता एवं मंचीय प्रस्तुति ने निर्णायक मंडल को भी प्रभावित किया।ऑडिशन में निर्णायक के रूप में पद्मश्री छायाधर भारती, छत्तीसगढ़ के बेहद प्रतिष्ठित एवं सुप्रसिद्ध कबीर गायन एवं सूफी गायक, ने पूरे उत्साह एवं आत्मीयता के साथ प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया। उन्होंने प्रतिभागियों को गायन की बारीकियों, सुर एवं प्रस्तुति के संबंध में उपयोगी सुझाव दिए और कई प्रतिभागियों को मौके पर ही बेहतर प्रस्तुति के लिए सिखाया एवं मार्गदर्शन प्रदान किया।इसी प्रकार श्री राजू शर्मा, छत्तीसगढ़ की लोक नृत्य धरोहर के प्रतिष्ठित कलाकार, ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन करने के साथ-साथ उन्हें नृत्य की बारीकियों, भाव-भंगिमा एवं मंचीय प्रस्तुति के संबंध में मार्गदर्शन दिया।श्री संतोष चंद्राकर जी, छत्तीसगढ़ लोक रत्न एवं बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार, ने भी प्रतिभागियों को उनकी प्रस्तुतियों में सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए तथा अपनी कला एवं अनुभव के माध्यम से उन्हें प्रोत्साहित किया।इस दौरान निर्णायकों का प्रतिभागियों के साथ सीधा संवाद, सीखने-सिखाने का माहौल और उत्साहवर्धन ऑडिशन का विशेष आकर्षण रहा। निर्णायकों ने केवल प्रतिभा का आकलन नहीं किया, बल्कि प्रतिभागियों के लिए यह अवसर एक सीखने और अपनी कला को निखारने का मंच भी बना।प्रतिभागियों के उत्साह एवं बड़ी संख्या में प्राप्त हो रही सहभागिता को देखते हुए ऑडिशन की तिथि एक दिन के लिए और बढ़ा दी गई है। अब इच्छुक शिक्षक, अभिभावक एवं विद्यार्थी 31 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक ऑडिशन टाउन हॉल, रायपुर में भाग ले सकते हैं। आयोजन समिति ने अधिक से अधिक प्रतिभागियों से इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की है। ऑडिशन में चयनित प्रतिभागियों को आगामी 3 सितंबर 2026 को शहीद स्मारक भवन, रायपुर में आयोजित होने वाले भव्य ग्रैंड फिनाले में प्रस्तुति देने का अवसर मिलेगा। आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं दर्शकों के उत्साह और सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए आगामी ऑडिशन में अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता की अपील की है।
- -अब अनिता साहू रोज कमा रहीं 700–800 रुपए, बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाने का सपना हो रहा साकार-अनीता ने मुख्यमंत्री का जताया आभार, बोलीं ‘विष्णु भैया‘ बढ़ा रहे हमारा मानरायपुर / जिंदगी ने जब अनिता साहू से उनके पति का साथ छीन लिया, तब सामने सिर्फ जिम्मेदारियां थीं। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और आने वाले कल की चिंता। मुश्किल दौर में उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। आज वही अनिता अपने संघर्ष को अपनी ताकत बनाकर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं।रायपुर के राम नगर की रहने वाली श्रीमती अनिता साहू को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में श्रम विभाग की दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना का लाभ मिला। आर्थिक अनुदान और अपनी कुछ राशि लगाकर उन्होंने ई-रिक्शा खरीदा। अब वे खुद ई-रिक्शा चलाकर प्रतिदिन करीब 700 से 800 रुपए कमा रही हैं। इससे परिवार को हर महीने करीब 18 से 22 हजार रुपए की आय और बचत का सहारा मिल रहा है।अनिता बताती हैं कि पति के निधन के बाद बच्चों की जिम्मेदारी अकेले संभालना बेहद मुश्किल था। तनाव के बीच सबसे बड़ी चिंता बच्चों की पढ़ाई को लेकर थी। पहले वे घर पर छोटी-सी दुकान चलाती थीं, लेकिन आमदनी इतनी नहीं थी कि परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो सकें।पति के जाने के बाद लगा कि बच्चों को कैसे पढ़ाऊंगी, घर कैसे चलाऊंगी। बहुत तनाव था। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं छोड़ी। योजना का लाभ मिला और ई-रिक्शा मेरे लिए सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत बन गया।”आज अनिता की मेहनत का सबसे खूबसूरत हिस्सा उनके बच्चों का भविष्य है। वे अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ा रही हैं और उनके बेहतर भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं। “मेरे बच्चे खूब पढ़ें और उनका भविष्य अच्छा बने, यही मेरी सबसे बड़ी इच्छा है। वे जितना पढ़ेंगे, मैं उनके लिए उतनी ही मेहनत करूंगी।” ई-रिक्शा ने अनिता को कमाई का जरिया देने के साथ बच्चों के स्कूल आने-जाने के खर्च में भी राहत दी है। अब वे अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी के सामने हाथ फैलाने के बजाय मेहनत के दम पर अपने घर की जिम्मेदारी उठा रही हैं। अनीता कहती है कि “विष्णु भैया ने हम महिलाओं के लिए बड़े भाई की तरह सहारा दिया है। आज मैं अपने बच्चों के लिए खुद कमा रही हूं और उनका भविष्य संवारने का सपना देख पा रही हूं। इसके लिए अपने विष्णु भैया का दिल से आभार।”
- -दूरस्थ वनांचल छिंदनार के लोगों ने सुनी प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’-ग्रामीणों ने उत्साह से सुना प्रधानमंत्री का संदेश, मंत्री, सांसद और विधायक भी रहे मौजूदरायपुर । नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बदलते बस्तर की नई तस्वीर रोज सामने आ रही है। आज दंतेवाड़ा के सुदूर वनांचल छिंदनार में भी एक नया नजारा देखने को मिला। पूरे देश के साथ वहां के लोगों ने भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का प्रसारण सुना। छिंदनारवासियों के लिए यह पहला मौका था, जब पूरा गांव प्रधानमंत्री को सुनने के लिए जुटा था। प्रधानमंत्री को रेडियो पर सुनने को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह था। उन्होंने बेहद तल्लीनता से प्रधानमंत्री की बातें सुनीं। छिंदनार में आज बिलकुल अलग तरह का माहौल था। प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’ को लेकर लोग खासे उत्साहित थे। गांव के कई लोगों ने आज पहली बार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को सुना। वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री केदार कश्यप, बस्तर के सांसद श्री महेश कश्यप और दंतेवाड़ा के विधायक श्री चैतराम अटामी ने भी ग्रामीणों के साथ ‘मन की बात’ का प्रसारण सुना। बस्तर के दूरस्थ वनांचल में आज एक नई तस्वीर दिख रही थी। कुछ महीनों पहले तक रोज धमाकों की आवाज के बीच दहशत में जीने वाले छिंदनार के लोग आज चैन से रेडियो सुन रहे थे।‘मन की बात’ सुनने के बाद ग्रामीणों ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम देश को एक सूत्र में बांधता है। इसके माध्यम से वे देश के विभिन्न भागों में बदलाव लाने वाले सकारात्मक कार्यों और नवाचारों को पूरे देश के सामने रखते हैं। इससे अन्य लोग भी अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित होते हैं। प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम समाज और देश के विकास के लिए जनभागीदारी की भावना को बढ़ाता है। यह कार्यक्रम नागरिकों की नई सोच, नई पहलों, अनूठी कोशिशों और नवाचारों से पूरे देश को वाकिफ कराता है और उसे पहचान दिलाता है। प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम से लोगों को छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की संस्कृति, विरासत और सकारात्मक कार्यों की जानकारी मिलती है। छिंदनार में ‘मन की बात’ के लिए लोगों का जुटना बस्तर में तेजी से आ रहे बदलावों की झलक मात्र है। पूरे बस्तर के चहुंमुखी विकास के लिए कल्याणकारी योजनाओं को हर नागरिक तक पहुंचाने के साथ ही सड़कों, मोबाइल कनेक्टीविटी, स्कूलों, अस्पतालों एवं अन्य बुनियादी जरूरतों की व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। सरकार बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम गांवों तक पहुंचकर नक्सलवाद के कारण दशकों तक ठप्प पड़े विकास कार्यों, बुनियादी जरूरतों और नागरिक सुविधाओं को दुरूस्त करने के लिए सक्रियता और गंभीरता से काम कर रही है।
- -आर्थिक सुरक्षा से कम हुई चिंता, पढ़ाई और विवाह जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों के लिए संबल बनी योजनारायपुर । गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सारबहरा की श्रीमती आकांक्षा अपनी बेटी के उज्ज्वल भविष्य को लेकर हमेशा चिंतित रहती थीं। उनकी इच्छा थी कि बेटी को अच्छी शिक्षा मिले और आगे चलकर उसका जीवन सुरक्षित, आत्मनिर्भर और खुशहाल हो। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच बेटी के भविष्य के लिए बेहतर प्रबंध करना उनके लिए चुनौती थी।इसी चिंता को कम करने और बेटी के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में आकांक्षा ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से अपनी बेटी का ‘नोनी सुरक्षा योजना’ के तहत पंजीयन कराया। योजना से मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा के भरोसे ने उनके मन में बेटी के भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगाई है।आकांक्षा को उम्मीद है कि योजना के माध्यम से मिलने वाला लाभ उनकी बेटी के भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वह चाहती हैं कि उनकी बेटी बिना किसी आर्थिक बाधा के अपनी पढ़ाई पूरी करे और जीवन में अपने सपनों को साकार करे। उन्हें विश्वास है कि योजना से मिलने वाली सहायता बेटी की शिक्षा और विवाह जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर परिवार के लिए उपयोगी साबित होगी।उनके लिए यह योजना केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं है, बल्कि बेटी के भविष्य को लेकर एक सुरक्षा और भरोसे का आधार भी है। बेटी के नाम से भविष्य के लिए आर्थिक प्रावधान होने की जानकारी ने आकांक्षा को मानसिक रूप से भी राहत दी है।आकांक्षा का कहना है कि बेटियों के भविष्य को सुरक्षित और बेहतर बनाने के उद्देश्य से संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन रही हैं। ऐसी योजनाओं से अभिभावकों में अपनी बेटियों की शिक्षा और भविष्य को लेकर भरोसा बढ़ता है तथा उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलते हैं।उन्होंने कहा कि बेटी का भविष्य सुरक्षित होना पूरे परिवार के लिए खुशी और संतोष की बात है। सरकार की योजनाओं से मिलने वाला सहयोग परिवारों को बेटियों की बेहतर परवरिश और शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करता है।आकांक्षा ने बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए चलाई जा रही इस जनकल्याणकारी पहल के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास परिवारों के लिए उम्मीद और संबल का माध्यम बन रहे हैं। आकांक्षा के लिए नोनी सुरक्षा योजना उनकी बेटी के सुरक्षित, आत्मनिर्भर और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद बन गई है। उन्हें भरोसा है कि सरकार की इस पहल का लाभ उनकी बेटी के जीवन में बेहतर अवसरों का रास्ता खोलेगा और उसके सपनों को नई उड़ान मिलेगी।
- रायपुर ।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर चलाए जा रहे ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत आज रायपुर स्थित अशोका पाम मीडोज सोसाइटी में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने वृक्षारोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अधिक से अधिक लोगों से पौधरोपण कर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।वृक्षारोपण कार्यक्रम में श्री राजेश मूणत, श्री अनुज शर्मा, श्री राजीव अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का संकल्प लिया।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ केवल वृक्षारोपण का अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति और मातृशक्ति के प्रति सम्मान की भावना से जुड़ा जन-अभियान है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस अभियान के माध्यम से देशवासियों को अपनी मां के सम्मान में एक पेड़ लगाने का भावनात्मक और पर्यावरणीय संदेश दिया है।उन्होंने कहा कि आज बढ़ते शहरीकरण और बदलते पर्यावरणीय परिस्थितियों के बीच वृक्षों का महत्व और भी बढ़ गया है। पेड़ हमें केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि जल संरक्षण, मिट्टी के संरक्षण, तापमान को संतुलित रखने और जैव विविधता को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।श्री अग्रवाल ने कहा कि एक पेड़ लगाना प्रकृति को दिया गया हमारा छोटा-सा योगदान है, लेकिन जब यही संकल्प करोड़ों लोगों का बन जाता है तो इसका प्रभाव बहुत व्यापक होता है। हमें अपने घर, मोहल्ले, गांव और शहर में अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि केवल पौधरोपण करना पर्याप्त नहीं है। लगाए गए पौधों को वृक्ष बनने तक उनकी नियमित देखभाल करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और विभिन्न संस्थाओं से अभियान से जुड़ने की अपील की।उन्होंने कहा कि आज लगाया गया एक पौधा आने वाले वर्षों में छांव, स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण का आधार बनेगा। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों को पौधरोपण से जोड़ना चाहिए।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संपदा से समृद्ध राज्य है। यहां के घने वन, नदियां, जलप्रपात, पहाड़ और जैव विविधता पर्यटन की बड़ी ताकत हैं। पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास एक-दूसरे के पूरक हैं।उन्होंने कहा कि प्रकृति को संरक्षित रखते हुए पर्यटन स्थलों का विकास करना राज्य की प्राथमिकताओं में शामिल है। हरित और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने से पर्यटकों को बेहतर प्राकृतिक अनुभव मिलेगा और स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे।कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्यजनों ने भी अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया। मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि आइए, अपनी मां की स्मृति और सम्मान में एक पेड़ लगाएं, उसकी देखभाल करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरा-भरा एवं सुरक्षित पर्यावरण तैयार करें। प्रकृति सुरक्षित होगी, तभी हमारा भविष्य सुरक्षित होगा। उन्होंने सभी नागरिकों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने, अधिक से अधिक पौधे लगाने और उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित करने की अपील की।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय होंगे मुख्य अतिथि, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू और श्री सतीश चंद्र दुबे भी होंगे शामिल-टिन पोर्टल और ई-रेत सांगवारी पोर्टल का होगा शुभारंभ, होंगे कई महत्वपूर्ण समझौते-नीलाम प्रमुख खनिज ब्लॉक्स के ऑपरेशनलाइजेशन की भी होगी समीक्षारायपुर / छत्तीसगढ़ में खनिज क्षेत्र के विकास, निवेश और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के प्रभावी दोहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी की 8वीं किश्त पर रोड शो का आयोजन कल 31 अगस्त को नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।रोड शो में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे, सीएमडीसी के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह, छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव, खान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के अधिकारी, खनन क्षेत्र के विशेषज्ञ तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे।भारत सरकार द्वारा क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की 8वीं किश्त के अंतर्गत 20 खनिज ब्लॉक्स को नीलामी के लिए रखा गया है। इनमें 3 माइनिंग लीज तथा 17 कंपोजिट लाइसेंस ब्लॉक्स शामिल हैं। इन ब्लॉक्स में ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, रेयर मेटल्स, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, मोलिब्डेनम, टंगस्टन सहित अन्य महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। ये खनिज देश की ऊर्जा सुरक्षा, आधुनिक प्रौद्योगिकी, औद्योगिक विकास और रणनीतिक आवश्यकताओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह 10:30 बजे पंजीयन एवं चाय के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी। दोपहर 12 बजे मुख्य अतिथि के आगमन एवं दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात वंदे मातरम् और राष्ट्रगान होगा। इसके बाद छत्तीसगढ़ शासन के खनिज संसाधन विभाग के सचिव स्वागत उद्बोधन देंगे। कार्यक्रम में खान मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव उद्घाटन उद्बोधन देंगे। इसके पश्चात भारत सरकार के खान सचिव, छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव तथा छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष द्वारा संबोधन किया जाएगा। केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू और केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे के उद्बोधन के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में अपना संबोधन देंगे।रोड शो के दौरान छत्तीसगढ़ में खनिज क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की जाएंगी। मुख्यमंत्री के मुख्य आतिथ्य में टिन पोर्टल तथा ई-रेत सांगवारी पोर्टल का शुभारंभ किया जाएगा।इस अवसर पर सीएमडीसी और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू, कोरन्डम कटिंग एवं पॉलिशिंग के प्रशिक्षण के लिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के साथ एमओयू का आदान-प्रदान भी किया जाएगा। साथ ही माइनर मिनरल्स पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन तथा तीन लाइमस्टोन माइनिंग लीज ब्लॉक्स के लिए एनआईटी जारी करने की प्रक्रिया भी प्रस्तावित है।दोपहर 2 बजे से आयोजित तकनीकी सत्र में खनिज ब्लॉक्स की नीलामी, निवेश और अन्वेषण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड द्वारा नीलामी के लिए प्रस्तावित खनिज ब्लॉक्स पर प्रस्तुतीकरण दिया जाएगा। एसबीआई कैप्स द्वारा मिनरल ऑक्शन प्रोसेस एवं टेंडर डॉक्यूमेंट तथा एमएसटीसी द्वारा मिनरल ई-ऑक्शन प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। कंपोजिट लाइसेंस धारकों के लिए अन्वेषण व्यय की आंशिक प्रतिपूर्ति से संबंधित एनएमईडीटी योजना पर भी प्रस्तुतीकरण होगा।तकनीकी सत्र के बाद ओपन हाउस डिस्कशन आयोजित किया जाएगा, जिसमें उद्योग प्रतिनिधियों, निवेशकों और विशेषज्ञों के साथ नीलामी प्रक्रिया, खनिज संसाधनों की संभावनाओं तथा निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श होगा। रोड शो के पश्चात दोपहर में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में नीलाम किए गए प्रमुख खनिज ब्लॉक्स के ऑपरेशनलाइजेशन और उनके संचालन की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। खनन परियोजनाओं को तेजी से शुरू करने तथा विभिन्न स्तरों पर आवश्यक समन्वय को लेकर भी चर्चा होगी। इसके बाद माइन विजिट भी प्रस्तावित है।यह रोड शो छत्तीसगढ़ सहित देश में महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों के अन्वेषण और खनन को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। केंद्र और राज्य सरकार, उद्योग जगत तथा खनन क्षेत्र के अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से खनिज क्षेत्र में निवेश और नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त होगा।
- -मछली पालन से सशक्त हुईं मनोरा और दुलदुला की महिलाएं, लाखों की आय से बदली जीवन की तस्वीररायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं को आजीविका के विभिन्न साधनों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। शासन की योजनाओं और विभागीय सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अब पारंपरिक गतिविधियों के साथ-साथ मछली पालन जैसे लाभकारी व्यवसाय को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रही हैं।जशपुर जिले के मनोरा और दुलदुला विकासखंड की महिला स्व-सहायता समूहों ने शासकीय तालाबों को अपनी आजीविका का आधार बनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल पेश की है। शासकीय तालाबों के दीर्घकालीन पट्टे, विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन और समूह की महिलाओं की मेहनत ने मछली पालन को उनके लिए आय का मजबूत जरिया बना दिया है।जशपुर जिले के विकासखंड मनोरा के ग्राम भभरी में कमल महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं पिछले तीन वर्षों से ग्राम पंचायत के 0.700 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले शासकीय तालाब में 10 वर्षीय पट्टे के माध्यम से मछली पालन कर रही हैं। समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और विभागीय मार्गदर्शन से मछली पालन को सफल आजीविका गतिविधि के रूप में विकसित किया है।समूह द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 3 क्विंटल मछली का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे करीब 6 लाख रुपये का वार्षिक विक्रय प्राप्त हो रहा है। इस आय से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब वे घरेलू जरूरतों के साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक खर्चों को भी बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं।दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा में दीप महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी पिछले तीन वर्षों से 0.800 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले शासकीय तालाब में मछली पालन कर रही हैं। समूह ने संगठित प्रयासों और निरंतर मेहनत से इस गतिविधि को आय के प्रभावी साधन में बदल दिया है।समूह द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 3.30 क्विंटल मछली का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे लगभग 6.93 लाख रुपये का वार्षिक विक्रय प्राप्त हो रहा है। इससे समूह की महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है और वे आर्थिक रूप से पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई हैं।महिला स्व-सहायता समूहों को शासकीय तालाबों का पट्टा उपलब्ध कराने, तकनीकी मार्गदर्शन देने और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है। मछली पालन से प्राप्त आय ने महिलाओं को परिवार की आर्थिक जरूरतों में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर दिया है।समूह की महिलाओं का कहना है कि पहले आय के सीमित साधनों के कारण परिवार का खर्च चलाना चुनौतीपूर्ण था। मछली पालन शुरू करने के बाद नियमित आय का माध्यम मिला और अब वे स्वयं अपनी आजीविका गतिविधियों का संचालन करने के साथ आर्थिक निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।कमल महिला स्व-सहायता समूह और दीप महिला स्व-सहायता समूह की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं का प्रभावी लाभ, सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन मिलकर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। आज इन समूहों की महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ गांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में भी योगदान दे रही हैं।
- -1 से 3 सितंबर तक मुक्ताकाशी मंच पर होगा भव्य आयोजन, पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियों के साथ दिखेगा छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का रंगरायपुर । छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और आधुनिक सुरों के अनूठे संगम को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘रंग तरंग’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह सांस्कृतिक आयोजन 1, 2 एवं 3 सितंबर 2026 को प्रतिदिन शाम 7 बजे से रायपुर के मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस में आयोजित होगा।‘रंग तरंग’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को नए और आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम में पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियों के साथ संगीत की विभिन्न विधाओं का संगम देखने-सुनने को मिलेगा। आयोजन का उद्देश्य प्रदेश की लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें समकालीन संगीत के साथ जोड़कर व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाना है।‘रंग तरंग’ को संस्कृति, रंगों और सुरों का फ्यूजन के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। आयोजन में छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं से जुड़े वाद्ययंत्रों और कलाकारों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। पारंपरिक वाद्यों की धुनों के साथ आधुनिक संगीत का मेल दर्शकों को सांस्कृतिक विरासत का नया अनुभव प्रदान करेगा।तीन दिवसीय इस आयोजन के जरिए प्रदेश की विविध लोक परंपराओं, संगीत शैलियों और वाद्य संस्कृति को एक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी जीवंत लोक कलाओं और संगीत परंपराओं से रही है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलने के साथ ही आम लोगों, विशेषकर युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है।संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘रंग तरंग’ में लोक और आधुनिकता का यह मेल दर्शकों के लिए मनोरंजन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को करीब से जानने का अवसर भी बनेगा।तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन रायपुरवासियों और प्रदेश की कला-संस्कृति में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगा। ‘रंग तरंग’ छत्तीसगढ़ की लोकधुनों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और आधुनिक संगीत को एक ही मंच पर लाकर संस्कृति के विविध रंगों को सुरों की तरंगों में पिरोने की पहल है।
- -पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने शासकीय आवास में सुना ‘मन की बात’ का 137वां संस्करण, कहा—प्रधानमंत्री का संवाद जनभागीदारी और राष्ट्रनिर्माण की भावना को देता है नई ऊर्जारायपुर / पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आज रायपुर स्थित अपने शासकीय आवास में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 137वें संस्करण का सामूहिक श्रवण किया। इस अवसर पर अंबिकापुर की महापौर श्रीमती मंजूषा भगत सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े नागरिक उपस्थित रहे।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देश की विविध उपलब्धियों, सामाजिक सरोकारों, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और जनभागीदारी से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर देशवासियों से संवाद किया। कार्यक्रम में इतिहास को डिजिटल माध्यमों से संरक्षित करने के अभिनव प्रयासों से लेकर युवाओं को नशे से दूर रखने, स्वच्छता, स्थानीय उद्यमिता, कृषि में वैज्ञानिक नवाचार और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने जैसे विषय प्रमुखता से सामने आए।‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने इतिहास और देश की समृद्ध विरासत को आधुनिक डिजिटल माध्यमों के जरिए सहेजने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने ऐसे प्रयासों को आने वाली पीढ़ियों को अपने अतीत, गौरव और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत हमारी पहचान और हमारी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। इतिहास, लोक परंपराओं, कला और सांस्कृतिक धरोहरों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से संरक्षित करना समय की आवश्यकता है। इससे हमारी विरासत आने वाली पीढ़ियों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगी।प्रधानमंत्री ने ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ अभियान के तहत ड्रग फ्री इंडिया के संकल्प को मजबूत करने का आह्वान किया। युवाओं को नशे से दूर रखते हुए उनकी ऊर्जा को रचनात्मक और राष्ट्रहित के कार्यों में लगाने पर विशेष जोर दिया गया।मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि युवा शक्ति भारत के भविष्य की आधारशिला है। स्वस्थ, जागरूक और नशामुक्त युवा ही विकसित भारत के निर्माण में अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान दे सकते हैं। समाज के हर वर्ग को मिलकर युवाओं के लिए सकारात्मक और प्रेरक वातावरण तैयार करना होगा।प्रधानमंत्री ने अगस्त माह में देशभर में आयोजित भव्य तिरंगा यात्राओं का उल्लेख करते हुए इनमें लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी को राष्ट्रभावना की अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है।‘मन की बात’ में छोटे रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली पीएम स्वनिधि योजना का भी उल्लेख किया गया। इस योजना के माध्यम से छोटे उद्यमियों को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहयोग और आत्मनिर्भरता का अवसर मिल रहा है।श्री अग्रवाल ने कहा कि छोटे व्यवसाय हमारे स्थानीय अर्थतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जब एक छोटा दुकानदार, ठेला संचालक या रेहड़ी-पटरी व्यवसायी अपने पैरों पर मजबूती से खड़ा होता है, तो इसका सीधा लाभ उसके परिवार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलता है।प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान की निरंतरता पर भी चर्चा की और स्वच्छता को केवल किसी अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे दैनिक जीवन की आदत और सामाजिक जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि स्वच्छता और पर्यटन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। स्वच्छ पर्यटन स्थल न केवल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी पैदा करते हैं। छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका है।प्रधानमंत्री ने हाल ही में संपन्न हुई श्री अमरनाथ जी की पावन यात्रा का उल्लेख करते हुए देश की आध्यात्मिक एवं धार्मिक यात्रा परंपरा की व्यापकता को रेखांकित किया। भारत में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।श्री अग्रवाल ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक यात्राएं हमारी प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखती हैं। छत्तीसगढ़ भी राम वन गमन पथ, माता कौशल्या की नगरी और अनेक प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के माध्यम से देश की आध्यात्मिक पर्यटन परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।प्रधानमंत्री ने किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक नवाचारों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। कृषि में नई तकनीक, वैज्ञानिक पद्धतियों और नवाचारों का उपयोग किसानों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अधिक सक्षम बनाने में सहायक है।मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि कृषि में विज्ञान और तकनीक का समावेश किसानों के लिए नए अवसर खोल रहा है। आधुनिक नवाचारों के साथ स्थानीय अनुभव और पारंपरिक ज्ञान का समन्वय खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बना सकता है।प्रधानमंत्री ने स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘Vocal for Local’ के मंत्र को भी दोहराया। स्थानीय उत्पादों को अपनाने और उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराने से कारीगरों, शिल्पकारों, छोटे उद्यमियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।श्री अग्रवाल ने कहा कि हमारे स्थानीय शिल्प, हस्तकला, लोककलाएं और पारंपरिक उत्पाद केवल वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति और पहचान के वाहक हैं। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से संस्कृति का संरक्षण होने के साथ-साथ कलाकारों और कारीगरों की आजीविका भी मजबूत होती है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देश के अलग-अलग क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक कार्यों, नवाचारों और जनभागीदारी की प्रेरक कहानियों को सामने लाने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे संवाद समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं और नागरिकों को अपने स्तर पर राष्ट्रहित में योगदान देने के लिए प्रेरित करते हैं।मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायी संबोधन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘मन की बात’ देश के करोड़ों नागरिकों को एक-दूसरे से जोड़ने और देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे रचनात्मक प्रयासों को साझा करने का सशक्त माध्यम है। प्रधानमंत्री जी का मार्गदर्शन हमें अपनी संस्कृति, पर्यावरण, स्थानीय अर्थव्यवस्था, युवा शक्ति और विकास के लिए निरंतर बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देता है।















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