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रायपुर। बस्तर क्षेत्र में माओवादी प्रभाव से मुक्त हुए 41 गांवों में गणतंत्र दिवस के अवसर पर पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा। यह कदम 'लाल आतंक' के अंत की लड़ाई में मिली सफलता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है और शांति एवं विकास का संकेत देता है।
पुलिस महानिरीक्षक (बस्तर रेंज) सुंदरराज पी ने बताया कि इनमें से 13 गांव बीजापुर जिले में, 18 नारायणपुर में और 10 सुकमा में हैं। उन्होंने कहा, ''बस्तर मंडल के 41 गांवों में पहली बार 77वां गणतंत्र दिवस पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। ये गांव दशकों से ऐसे राष्ट्रीय समारोहों से दूर रहे थे, लेकिन अब देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक भावना में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में इन स्थानों पर सुरक्षा शिविरों की स्थापना ने स्थानीय आबादी के बीच विश्वास, सुशासन और अपनेपन की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पुलिस महानिरीक्षक ने कहा, ''सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से यह सकारात्मक परिवर्तन संभव हो पाया है।
पिछले वर्ष 13 गांवों में 15 अगस्त को पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। अब, इन 13 गांवों सहित कुल 54 गांव पहली बार गणतंत्र दिवस मनाएंगे।" सुंदरराज ने कहा कि अबूझमाड़, राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र आदि में बसवराजु, के रामचंद्र रेड्डी, सुधाकर, कट्टा सत्यनारायण रेड्डी और अन्य माओवादी कैडर को निष्क्रिय करने से क्षेत्र में चरमपंथी प्रभाव काफी कमजोर हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप भय और धमकी की जगह धीरे-धीरे शांति, विकास और प्रशासनिक संपर्क स्थापित हो रहे हैं। इस बीच, एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि राज्य भर में गणतंत्र दिवस समारोह की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि राज्यपाल रमन डेका सोमवार सुबह रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और विभिन्न सुरक्षा इकाइयों से 'गार्ड ऑफ ऑनर' (सलामी गारद) लेंगे, जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साई बिलासपुर जिले में तिरंगा फहराएंगे।
- -साहित्य सृजन कर रहे पूर्व अधिकारियों ने 'शासन और साहित्य' के अंतर्संबंधों पर रखी अपनी रायरायपुर।रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे दिन आज वर्तमान में साहित्य सृजन में लगे भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारियों ने 'शासन और साहित्य' के अंतर्संबंधों पर गहरा विमर्श किया। लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित यह सत्र मूर्धन्य छत्तीसगढ़ी साहित्यकार और पूर्व सांसद स्वर्गीय श्री केयूर भूषण को समर्पित रहा। रायपुर के कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह इस सत्र में सूत्रधार की भूमिका में थे।परिचर्चा में यह बात प्रमुखता से उभरी कि शासन और साहित्य एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। जहाँ शासन नीतियों के जरिए समाज को व्यवस्थित करता है, वहीं साहित्य मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखकर शासन को आइना दिखाने का काम करता है।परिचर्चा की शुरुआत करते हुए सूत्रधार रायपुर के कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह ने कहा कि शासन की प्राथमिकताओं में साहित्य सदैव शामिल रहता है और रायपुर साहित्य उत्सव का यह आयोजन इस बात का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य शासन के लिए दर्पण की तरह है जो व्यवस्था को सही रास्ता दिखाने और समाज में संवेदना जगाने का काम करता है।वरिष्ठ साहित्यकार और सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. सुशील त्रिवेदी ने शासन की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि शासन का मूल काम स्वतंत्रता, समता और न्याय की स्थापना करना है, जबकि साहित्य आम आदमी के संघर्ष और भावनाओं की अभिव्यक्ति है। उन्होंने बेहद सारगर्भित बात कही कि जब 'स्वांत: सुखाय' के भाव से लिखा गया शब्द 'बहुजन सुखाय और बहुजन हिताय' बन जाता है, तब वह साहित्य बन जाता है। उन्होंने साहित्य को मनुष्य का 'स्थायी लोकतंत्र' करार दिया।चर्चा को आगे बढ़ाते हुए साहित्यकार एवं सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. संजय अलंग ने वैश्विक क्रांतियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि रूस और फ्रांस जैसी बड़ी क्रांतियां साहित्य की कोख से ही जन्मी हैं। शासन लगातार साहित्य से सीखता है और सत्ता में आने के बाद भी उसे साहित्य से ही दृष्टि मिलती है। डॉ. अलंग ने कहा कि चाहे शासन हो या साहित्य, यदि आप जनता के पक्ष में खड़े नहीं हैं, तो आप विपक्ष में खड़े हैं।साहित्यकार एवं सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. इंदिरा मिश्रा ने परिचर्चा में शासन की व्यावहारिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शासन सार्वभौमिक और सशक्त होता है, जिसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कभी-कभी कड़े निर्णय लेने पड़ते हैं। कई बार ऐसी रचनाओं पर प्रतिबंध लगाना पड़ता है जो व्यवस्था के लिए चुनौती बनती हैं।साहित्यकार एवं सेवानिवृत्त आईएएस श्री बी.के.एस. रे ने एक अच्छे प्रशासक की परिभाषा गढ़ते हुए कहा कि वही व्यक्ति सफल शासक है जो मनुष्यता को समझता है। उन्होंने साहित्यकारों को आह्वान किया कि यदि शासन कभी रास्ता भटक जाए, तो यह साहित्य का ही दायित्व है कि वह उसे सही मार्ग पर लाए।
- -एक मॉडल सामुदायिक पर्यटन स्थल के रूप में ग्राम केरे को किया जाएगा विकसित-होमस्टेज़ ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़ शासन और जशपुर जिला प्रशासन के बीच एमओयूरायपुर / जशपुर जिले को एक प्रमुख इको-पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय बगिया में आयोजित कार्यक्रम में भारत के अग्रणी होमस्टे प्लेटफॉर्म होमस्टेज़ ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़ शासन और जशपुर जिला प्रशासन के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। इसके अंतर्गत ग्राम केरे को एक मॉडल सामुदायिक पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने ग्राम केरे में तैयार किए गए होमस्टे का शुभारंभ किया गया।एमओयू के अंतर्गत जशपुर का पहला संगठित होमस्टे ग्राम बनाने की दिशा में कार्य होगा। एक सुव्यवस्थित एवं विस्तार योग्य होमस्टे-आधारित ग्रामीण पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना होगी। इस पहल के माध्यम से स्थानीय परिवारों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, सतत आजीविका को सुदृढ़ किया जाएगा तथा क्षमता निर्माण और कौशल विकास के जरिए युवाओं एवं महिलाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस परियोजना का मूल उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, परंपराओं एवं प्राकृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन करना है, ताकि पर्यटन विकास समावेशी, समुदाय-स्वामित्व वाला और पर्यावरण की दृष्टि से सतत बना रहे तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे।मुख्यमंत्री श्री साय की उपस्थिति में हुए इस समझौता का ज्ञापन पर कलेक्टर जशपुर श्री रोहित व्यास तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनोद वर्मा और होमस्टेज़ ऑफ इंडिया प्रा. लि. के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल राज्य सरकार की इको-पर्यटन, समावेशी विकास एवं समुदाय-नेतृत्व वाले आर्थिक विकास की परिकल्पना के अनुरूप है। स्थानीय संस्कृति और प्रकृति पर आधारित प्रामाणिक पर्यटन अनुभवों के माध्यम से यह परियोजना जशपुर की पहचान को सशक्त करेगी और उसे राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य पर्यटन मानचित्र में स्थापित करने में सहायक होगी।
- -महिलाओं द्वारा बांस, छिंद, मिट्टी एवं लकड़ी से बनाए उत्पाद मिलेंगे देश के विभिन्न एयरपोर्ट पर-मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के समक्ष रेयर प्लेनेट संस्था से हुआ ऐतिहासिक एमओयू-महिला स्वावलंबन को मिला नया बाजाररायपुर /वन विभाग की पहल पर जशपुर जिले में महिला सशक्तिकरण और वन आधारित आजीविका को नई दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में विगत दिवस बगिया में रेयर प्लेनेट संस्था तथा जशपुर जिले की स्व-सहायता समूह—जागरण, स्माईल आरती, राखी एवं मुस्कान समूह—के मध्य जशक्राफ्ट ब्रांड के उत्पादों के विपणन हेतु अनुबंध समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।इस महत्वपूर्ण समझौते के अंतर्गत अब जशपुर की जनजातीय महिलाओं द्वारा बांस, छिंद, मिट्टी एवं लकड़ी से निर्मित हस्तशिल्प, आभूषण एवं सजावटी उत्पाद देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर संचालित रेयर प्लेनेट के बिक्री केंद्रों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय स्व-सहायता समूहों को स्थायी बाजार, उचित मूल्य तथा नियमित आय के अवसर प्राप्त होंगे।इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने एमओयू को जशपुर की महिलाओं के लिए एक निर्णायक उपलब्धि बताते हुए कहा कि जशक्राफ्ट जैसे ब्रांड के माध्यम से हमारी आदिवासी बहनों की कला अब देशभर के लोगों तक पहुँचेगी। यह पहल केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और स्वावलंबन की मजबूत नींव रखती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि वन एवं परंपरागत ज्ञान आधारित आजीविका को बाजार से जोड़ा जाए, ताकि महिलाएं अपने गांव में रहकर सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह एमओयू ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को साकार करता है तथा जशपुर की जनजातीय महिलाओं को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक ठोस और दूरगामी पहल है।इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, पत्थलगांव क्षेत्र की विधायक श्रीमती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वनमंडलाधिकारी श्री शशि कुमार सहित स्व-सहायता समूह की महिलाएं एवं रेयर प्लेनेट संस्था के प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।पुस्तक विमोचन और जशक्राफ्ट उत्पादों की सराहनाकार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा “जशक्राफ्ट” पर आधारित विशेष पुस्तक का विमोचन किया गया। उन्होंने जशक्राफ्ट के अंतर्गत तैयार किए गए आभूषणों एवं हस्तनिर्मित उत्पादों का अवलोकन करते हुए उनकी गुणवत्ता, कलात्मकता और नवाचार की सराहना की।स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी एवं विधायक श्रीमती गोमती साय का जशक्राफ्ट ब्रांड के पारंपरिक आभूषण पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया, जो महिला सशक्तिकरण और स्थानीय संस्कृति के सम्मान का सशक्त प्रतीक बना।इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री द्वारा जशक्राफ्ट ब्रांड के प्रचार-प्रसार हेतु तैयार वीडियो का भी विमोचन किया गया, जिससे जशक्राफ्ट को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।जशक्राफ्ट: जशपुर की सांस्कृतिक विरासत से जन्मा सशक्त ब्रांडउल्लेखनीय है कि जशक्राफ्ट जशपुर जिले की समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की सजीव अभिव्यक्ति है। जिले की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या जनजातीय समुदायों से आती है, जहाँ पीढ़ियों से बाँस, कांसा घास, छिंद पत्ते, लकड़ी एवं मिट्टी से हस्तनिर्मित कलाकृतियाँ तैयार की जाती रही हैं। पूर्व में संगठित व्यवस्था और बाजार की कमी के कारण कारीगरों की प्रतिभा सीमित रह जाती थी।जिला प्रशासन की पहल से जशक्राफ्ट के रूप में ऐसा सशक्त मंच विकसित हुआ है, जो जशपुर जिले के आठों विकासखंडों के कारीगरों को एकजुट कर उनकी कला को पहचान, संरक्षण और बाजार उपलब्ध करा रहा है।इस पहल के केंद्र में आदिवासी महिला कारीगर हैं, जिनके हाथों से बिना मशीनों के बने उत्पाद परंपरा, प्रकृति और आत्मनिर्भरता का संदेश देते हैं। जशक्राफ्ट आज स्वदेशी ज्ञान से आकार लेते हुए एक टिकाऊ और सम्मानजनक आजीविका मॉडल के रूप में उभर रहा है।वन विभाग द्वारा संचालित यह पहल महिला स्वावलंबन, वन आधारित आजीविका और स्थानीय उत्पादों के राष्ट्रीय बाजारीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध हो रही है, जो आने वाले समय में जशपुर को हस्तशिल्प के राष्ट्रीय मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाएगी।
- -मुख्यमंत्री श्री साय ने कांसाबेल में किया स्मार्ट क्लास रूम का शुभारंभ-शासकीय विद्यालयों में 206 इंटरएक्टिव पैनल लगाए जाएंगेरायपुर /जशपुर जिले के स्कूली बच्चे अब स्मार्ट क्लास रूम के जरिए पढ़ाई करेंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज कांसाबेल के सरस्वती शिशु मंदिर में स्मार्ट क्लास रूम का शुभारंभ किया। इस परियोजना के लिए एसईसीएल द्वारा सीएसआर मद से 5 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसके अंतर्गत जिले के शासकीय विद्यालयों में 206 इंटरएक्टिव पैनल लगाए जाएंगे।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा को रोचक एवं प्रभावी बनाना समय की आवश्यकता है, ताकि ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों के बच्चों को भी शहरों के समान बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों में नवाचार, जिज्ञासा एवं तकनीकी दक्षता का विकास होगा, जो उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनेगा। इस अवसर पर कार्यक्रम में विधायक श्रीमती गोमती साय सहित अनेक जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।अधिकारियों ने बताया कि एमओयू के तहत जशपुर जिले के चयनित शासकीय विद्यालयों में चरणबद्ध रूप से इंटरएक्टिव पैनल स्थापित किए जाएंगे। इन उपकरणों के माध्यम से शिक्षक डिजिटल कंटेंट, वीडियो, प्रेजेंटेशन एवं ई-लर्निंग संसाधनों का उपयोग कर कक्षाओं को अधिक रोचक, सरल एवं प्रभावी बना सकेंगे। इस पहल से जिले के सैकड़ों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा की बेहतर सुविधा प्राप्त होगी।उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की पहल पर जशपुर जिले के शासकीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने की दृष्टिकोण से विगत माह जिला प्रशासन एसईसीएल एवं ईडूसीआईएल के मध्य त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे।
- -शासन और साहित्य विषय पर पूर्व आईएएएस अधिकारियों के साथ सूत्रधार कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने की चर्चा-प्रेमचंद, शरद जोशी, सार्त्र और वाक्लाव हैवेल जैसे साहित्यकारों विचारकों के उद्दरणों के साथ सार्थक चर्चा का हुआ आयोजन-लाला जगदलपुरी मंडप में हुआ आयोजन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय केयूर भूषण को किया गया नमनरायपुर, । शासन और साहित्य विषय पर आज लाला जगदलपुरी मंडप में दिलचस्प चर्चा हुई। सूत्रधार थे कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह और अतिथि वक्ता थे पूर्व आईएएस अधिकारी श्री बीकेएस रे, श्रीमती इंदिरा मिश्रा, डॉ. सुशील त्रिवेदी और डॉ. संजय अलंग। साहित्य में गहरी दिलचस्पी रखने वाले और अपनी प्रशासनिक क्षमता से प्रदेश में पहचान छोड़ने वाले अधिकारियों ने सूत्र बताए कि किस तरह साहित्य शासन-प्रशासन को जनकल्याण के लिए लगातार सकारात्मक दिशा में लेकर जाता है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि साहित्य समाज को जगाता है। डॉ. सिंह ने कहा कि अगर साहित्य केवल प्रशंसा करता है तो वो कमजोर हो जाता है और शासन यदि केवल नियंत्रण करता है तो वो कठोर हो जाता है इसलिए लोकतंत्र की असली ताकत यही है कि आलोचना को सुना जाए और संवेदना को नीति में बदला जाए। उन्होंने हिंदी साहित्य के इतिहास के प्रसंग बताते हुए कहा कि किस प्रकार वीरगाथा काल में कवियों ने राष्ट्रबोध जगाया और भक्तिकाल में उन्होंने वो मानक बताये जिससे शासन को चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि साहित्य हमेशा केंद्र में रहा है और साहित्यकारों ने अपने प्रखर विचारों को हमेशा रखा। इस मौके पर डॉ. सुशील त्रिवेदी ने कहा कि साहित्य की शक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वतंत्रता संग्राम में हमारे अनेक नेता साहित्यकार रहे। उस दौर में अंग्रेजों की आलोचना करने वाले साहित्यकारों की किताबों पर बैन लगाया गया। यह साहित्य की शक्ति है। उन्होंने दिनकर को उद्धृत करते हुए कहा कि जब राजनीति फिसलती है तो साहित्य उसे संभालता है। यह साहित्य की बड़ी शक्ति है। डॉ. संजय अलंग ने कहा कि साहित्यकार जो देखते हैं उसे लिख देते हैं यह आलोचना भी होती है और प्रशंसा भी होती है। नमक का दरोगा कहानी पढ़े तो ये ईमानदार अधिकारी की कहानी है और इस कहानी ने न जाने कितने लोगों के भीतर ईमानदारी के भाव भरे लेकिन सिस्टम में विसंगतियों को भी अनेक कहानियां अथवा निबंध सामने लाते हैं। उन्होंने शरद जोशी के लिखे व्यंग्य लेख जीप पर सवार इल्लियां का जिक्र किया। श्रीमती इंदिरा मिश्रा ने लेखिका तसलीमा नसरीन का जिक्र किया कि उन्होंने सच्चाई को सामने लाने की हिम्मत दिखाई और उन्हें निर्वासन सहना पड़ा। साहित्य सच को सामने लाता है और समाज को आइना दिखाता है। साहित्य संवेदनशीलता लाता है और जनकल्याणकारी शासन की नींव तैयार करता है। इस मौके पर बीकेएस रे ने कहा कि साहित्य हमारे मनोविज्ञान को बदलता है और एक संवेदनशील मनुष्य बेहतर प्रशासक बनता है। श्री रे ने फ्रांस के स्टूडेंट मूवमेंट का उदाहरण बताते हुए कहा कि नोबल पुरस्कार प्राप्त जीन पाल सार्त्र के नेतृत्व में हो रहे मूवमेंट को रोकने कैबिनेट के बैठक में चर्चा चली। जब किसी ने सार्त्र को गिरफ्तार करने की बात कही तो चार्ल्स डी गाव ने कहा कि हम इस सदी के वाल्तेयर को गिरफ्तार करने का जोखिम नहीं उठा सकते। यह साहित्य की शक्ति है। श्री रे ने वाक्लाव हैवल जैसे विचारकों के प्रमुख उद्दरणों को रखा और इसके माध्यम से अपनी बात कही। सूत्रधार डॉ. गौरव सिंह ने अंत में चर्चा के निष्कर्ष के रूप में कहा कि साहित्य संवेदनशीलता प्रदान करता है समझ प्रदान करता है इसलिए हर युग में वो केंद्र में रहा है। उन्होंने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव जैसे आयोजनों से साहित्य के प्रति लोगों की जागरकूता बढ़ाने में मदद मिलती है।इस अवसर पर उप संचालक श्री सौरभ शर्मा ने शासकीय गमछा पहनाकर स्वागत किया एवं संयुक्त संचालक श्री हीरा देवांगन ने प्रतीक चिन्ह प्रदान किया। साथ ही कुछ नवोदित साहित्यकारों के पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
- रायपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री तेजस्वी सूर्या जी के निर्देशानुसार राष्ट्रीय मतदाता दिवस कार्यक्रम के होटल वेंकटेश इंटरनेशनल, फूल चौक, रायपुर में नव मतदाता जागरूकता कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरुप्रकाश पासवान ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मतदाताओं का सम्मान करने, युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को बढ़ावा देने के लिए पूरे भारत में 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2026 की थीम "मेरा भारत, मेरा वोट" है और इसकी टैगलाइन भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में नागरिक है। यह लोकतंत्र का वह उत्सव है जो प्रत्येक नागरिक को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए सशक्त बनाता है। यह दिन भारत निर्वाचन आयोग के स्थापना दिवस का प्रतीक है, जिसकी स्थापना 25 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत की गई थी।भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकरिहा ने कहा कि नव मतदाता जागरुकता कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे मतदाता जो पहली मतदान उन्हें मतदान के महत्व को बताना है। यह कार्यक्रम नागरिकों को उनके संवैधानिक मतदान अधिकार, मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया, नैतिक मतदान और लोकतंत्र को मजबूत करने में जागरूक मतदाताओं की भूमिका के बारे में शिक्षित करने पर केंद्रित है। संवादात्मक सत्रों, पोस्टरों, नारों और चर्चाओं के माध्यम से चुनावों में सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं और स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी मतदान को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य मतदान के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना, नए मतदाताओं के पंजीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए, विशेषकर युवाओं के बीच पहुंच कर उन्हें मतदान के महत्व को बताना। नागरिकों को चुनावी अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में शिक्षित करना। नैतिक और जानकारी पूर्ण मतदान को बढ़ावा देना। समाज में लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना है।इस दौरान कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष रायपुर शहर रमेश सिंह ठाकुर, जिला महामंत्री अमित मैशेरी, जितेंद्र देवांगन, विशाल पांडेय, वासु शर्मा, शुभम जायसवाल, अंकित द्विवेदी मौजूद थे।
- -47 गांवों में पहली बार मनाया जाएगा गणतंत्र दिवसरायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में दशकों तक चले नक्सल हिंसा के अंधकार के बाद अब शांति, विश्वास और लोकतंत्र का उजास दिखाई देने लगा है। लंबे समय तक माओवादी उग्रवाद से प्रभावित रहे बस्तर संभाग के बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिले के 47 ऐसे गांव, जहां अब तक राष्ट्रीय पर्व मनाना संभव नहीं था, वहां इस वर्ष 26 जनवरी को पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। यह अवसर बस्तर के इतिहास में लोकतांत्रिक पुनर्स्थापना का साक्षी होगा।बीते दो वर्षों में केंद्र एवं राज्य सरकार की समन्वित रणनीति, सुरक्षाबलों की सतत कार्रवाई और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से बस्तर संभाग में हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 59 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिससे उन गांवों में सुरक्षा और प्रशासन की प्रभावी उपस्थिति सुनिश्चित हुई है। इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप बस्तर के 53 गांवों में बीते वर्ष 76वां गणतंत्र दिवस समारोह धूम-धाम से मनाया गया था, अब इस कड़ी में 47 और नये ऐसे गांव जुड़ गए हैं जहां इस साल पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा।बीजापुर जिले के जिन गांवों में पहली बार गणतंत्र पर्व मनाया जाएगा, उनमें पुजारीकांकेर, गुंजेपर्ती, भीमाराम, कस्तुरीपाड, ताड़पाला हिल्स, उलूर, चिल्लामरका, काड़पर्ती, पिल्लूर, डोडीमरका, संगमेटा, तोडका, कुप्पागुड़ा, गौतपल्ली, पल्लेवाया एवं बेलनार गांव शामिल है। इसी तरह नारायणपुर जिले के गांव एडजूम, इदवाया, आदेर, कुडमेल, कोंगे, सितराम, तोके, जटलूर, धोबे, डोडीमार्का, पदमेटा, लंका, परीयादी, काकुर, बालेबेडा, कोडेनार, कोडनार, अदिंगपार, मांदोडा, जटवार तथा वाडापेंदा गांव तथा सुकमा जिले के गांव गोगुंडा, नागाराम, बंजलवाही, वीरागंगरेल, तुमालभट्टी, माहेता, पेददाबोडकेल, उरसांगल, गुंडराजगुंडेम तथा पालीगुड़ा में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा।यह परिवर्तन उन दूरस्थ अंचलों में ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है, जहां कभी नक्सली हिंसा के कारण सामान्य जनजीवन और लोकतांत्रिक गतिविधियां बाधित थीं। बस्तर क्षेत्र में 100 से अधिक सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं। इन कैंपों ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया है, बल्कि विकास कार्यों का मार्ग भी प्रशस्त किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार और बैंकिंग जैसी मूलभूत सुविधाएं अब धीरे-धीरे ग्रामीणों तक पहुंच रही हैं।सुरक्षा बलों और प्रशासन की निरंतर मौजूदगी से स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा की भावना सुदृढ़ हुई है। जिन क्षेत्रों में पहले राष्ट्रीय पर्व मनाने पर प्रतिबंध था, वहां आज ग्रामीण स्वयं उत्साह के साथ तिरंगा फहराने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आगे आ रहे हैं। यह बदलाव बस्तर को माओवाद के भय से बाहर निकालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।सुरक्षा के साथ-साथ राज्य सरकार का ध्यान अब क्षेत्र में स्थायी विकास सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। स्कूलों और आंगनबाड़ियों का संचालन, बैंकों की स्थापना, मोबाइल टावरों की स्थापना, सड़कों का निर्माण तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाया जा रहा है। हाल ही में नक्सल प्रभावित क्षेत्र जगरगुंडा में बैंकिंग सुविधा फिर से शुरू हुई है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कहना है कि जहां कभी नक्सली हिंसा के कारण विकास अवरुद्ध था, वहीं आज सुशासन की सरकार बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर को माओवाद के भय से मुक्त कर विकास और विश्वास के नए युग की ओर ले जा रही है। गणतंत्र दिवस 2026 पर बस्तर के उक्त 47 गांवों में पहली बार फहरने वाला तिरंगा न केवल राष्ट्रीय पर्व का उत्सव होगा, बल्कि यह शांति, लोकतंत्र और विकास के विजय का सशक्त संदेश भी देगा।
- -बस्तर की ‘बड़ी दीदी’ बुधरी ताती एवं दंतेवाड़ा के सेवा समर्पित चिकित्सक दंपत्ति डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले-सुनीता गोडबोले को पद्मश्री-मुख्यमंत्री-विष्णु देव साय ने तीनों विभूतियों को दी बधाईरायपुर /केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। छत्तीसगढ़ के लिए यह अत्यंत गौरवपूर्ण का क्षण है कि राज्य की तीन विशिष्ट हस्तियों का चयन पद्मश्री सम्मान हेतु किया गया है। समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दंतेवाड़ा की समाजसेविका बुधरी ताती तथा चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में दशकों से निस्वार्थ कार्य कर रहे डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले एवं सुनीता गोडबोले को पद्मश्री पुरस्कार से अलंकृत किया जाएगा। डॉ. गोडबोले दंपत्ति को यह सम्मान संयुक्त रूप से प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उक्त तीनों विभिूतियों को पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयनित होने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। तीनों विभूतियों ने अपने सेवा भावना, मानवीय संवेदना और सामाजिक प्रतिबद्धता से छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है।गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म पुरस्कारों की सूची में छत्तीसगढ़ की इन तीनों विभूतियों का नाम शामिल होना राज्य के लिए सम्मान और गौरव का विषय है। विशेष रूप से यह उल्लेखनीय है कि सम्मानित सभी हस्तियां बस्तर अंचल के दूरस्थ एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से सेवा कार्य कर रही हैं।बस्तर की ‘बड़ी दीदी’ बुधरी ताती को पद्मश्रीदंतेवाड़ा जिले के हीरानार ग्राम की निवासी बुधरी ताती को महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान एवं समाजसेवा के लिए पद्मश्री सम्मान प्रदान किया जाएगा। वर्ष 1984 से वे निरंतर वनांचल क्षेत्रों में नशामुक्ति, साक्षरता अभियान, सामाजिक जागरूकता तथा महिलाओं एवं बालिका शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। बुधरी ताती अभी तक 500 से ज्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। बुधरी ताती को छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन आदिवासी बच्चियों की शिक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा वृद्धजनों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। उनके समर्पण और स्नेहभाव के कारण स्थानीय लोग उन्हें सम्मानपूर्वक ‘बड़ी दीदी’ कहकर संबोधित करते हैं।दुर्गम अंचलों में निःशुल्क चिकित्सा सेवा देने वाले गोडबोले दंपत्ति सम्मानितचिकित्सा सेवा के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान के लिए डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले एवं उनकी धर्मपत्नी सुनीता गोडबोले को संयुक्त रूप से पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. गोडबोले और उनकी पत्नी पिछले 37 वर्षों से अधिक समय से बस्तर एवं अबूझमाड़ जैसे अत्यंत दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में निःशुल्क चिकित्सा सेवा प्रदान कर रहे हैं।स्वास्थ्य जागरूकता, कुपोषण उन्मूलन और प्राथमिक उपचार को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से दोनों ने ‘ट्रस्ट फॉर हेल्थ’ के माध्यम से ऐसे गांवों तक इलाज पहुंचाया है, जहां सड़क, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। वे स्वयं पैदल अथवा सीमित साधनों के सहारे इन क्षेत्रों में पहुंचकर नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित करते हैं और मरीजों का उपचार करते हैं।पद्मश्री सम्मान के लिए छत्तीसगढ़ की इन विभूतियों का चयन राज्य की सेवा भावना, मानवीय संवेदना और सामाजिक प्रतिबद्धता को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। यह सम्मान न केवल संबंधित व्यक्तियों के लिए, बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ विशेषकर बस्तर अंचल के लिए गर्व का विषय है और समाजसेवा के क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए प्रेरणास्रोत भी है।
- बिलासपुर /जिला कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में 16वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया गया। अपर कलेक्टर श्री एस.एस.दुबे ने उपस्थित अधिकारी-कर्मचारियों को मतदाता शपथ दिलाई। इस वर्ष राष्ट्रीय मतदाता दिवस की थीम मेरा भारत, मेरा वोट रहा, जिसकी टैगलाइन ‘‘इंडियन सिटीजन एट द हार्ट ऑफ इंडियन डेमोक्रेसी थी। सभी ने देश की लोकतांत्रिक परम्पराओं की मर्यादा बनाए रखने तथा स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण निर्वाचन की गरिमा को अक्षुण्ण रखते हुए, निर्भीक होकर, धर्म, वर्ग, जाति, समुदाय, भाषा अथवा अन्य किसी भी प्रलोभन से प्रभावित हुए बिना सभी निर्वाचनों में अपने मताधिकार का प्रयोग करने की शपथ ली। इस अवसर पर जिला के अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
- -प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिला पंचायत सीईओ एवं अन्य अधिकारी हुए शामिल-प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सभी प्रकार के निर्वाचनों में अनिवार्य रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करने की दिलाई शपथबालोद । स्वामी आत्मनांद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय बालोद में आज 25 जनवरी को 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आज 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बालोद जिले के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री श्याम लाल नवरत्न उपस्थित थे। इस अवसर पर परिवार न्यायालय के न्यायाधीश श्री योगेश पारिक, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री संजय कुमार सोनी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील कुमार चंद्रवंशी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्री चन्द्रकांत कौशिक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव भारती कुलदीप, एसडीएम श्री नूतन कंवर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती मोनिका ठाकुर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। इस अवसर पर अतिथियों के द्वारा देश के प्रत्येक नागरिकों एवं मतदाताओं के लिए मतदान को अधिकार ही नही अपितु कर्तव्य बताते हुए सभी प्रकार के निर्वाचनों में अनिवार्य रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील की गई।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री श्याम लाल नवरत्न ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में मताधिकार के महत्व के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसके अंतर्गत देश के प्रत्येक नागरिकांे को शासन व्यवस्था के संचालन में भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु मताधिकार के रूप में महत्वपूर्ण अस्त्र प्रदान किया गया है। श्री नवरत्न ने कहा कि प्रत्येक मतदाताओं को सभी प्रकार के निर्वाचनों में अनिवार्य रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग कर लोकतंत्र को सशक्त एवं सुदृढ़ बनाने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी चाहिए। श्री नवरत्न ने 18 वर्ष की आयु पूरी करने के उपरांत मतदान के लिए अधिकार प्राप्त करने वाले नए मतदाताओं को भी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भी दी। इस अवसर पर उन्होंने देश के प्रत्येक नागरिकों को 18 वर्ष की आयु पूरा करने के उपरांत मिलने वाले मताधिकार के अलावा अन्य अधिकारों के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी ने कहा कि 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले देश के प्रत्येक नागरिकों को मतदान का अधिकार मिलने के साथ-साथ कर्तव्य भी जुड़ा हुआ है। इसलिए हम सभी मतदाताओं को सभी प्रकार के निर्वाचनों में अनिवार्य रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए।कार्यक्रम का प्रतिवेदन वाचन करते हुए उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्री चंद्रकांत कौशिक ने राष्ट्रीय मतदाता दिवस के आयोजन के संबंध में प्रकाश डाला। श्री कौशिक ने जिले वासियों को राष्ट्रीय मतदाता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। उन्होंने जिले के सभी मतदाताओं को आगामी सभी प्रकार के निर्वाचन के दौरान अनिवार्य रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग कर लोकतंत्र को सशक्त बनाने में महती भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। श्री कौशिक ने निर्वाचन के कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में शासन-प्रशासन के लोगों के अलावा आम जनता की भागीदारी पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सभी के समवेत प्रयासों से ही निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो पाता है।इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री श्याम लाल नवरत्न ने जिले के सभी मतदाताओं को लोकतंत्र में अपनी पूर्ण आस्था रखते हुए तथा देश की लोकतांत्रिक परंपराओं की मर्यादा को बनाए रखने हेतु सभी प्रकार के निर्वाचनों में अनिवार्य रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करने की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण निर्वाचन की गरिमा को अक्ष्क्षूण बनाए रखते हुए निर्भिक होकर धर्म, वर्ग, जाति, समुदाय, भाषा अथवा अन्य किसी प्रलोभन से प्रभावित हुए बिना सभी प्रकार के निर्वाचनों में अपने मताधिकार का प्रयोग करने की शपथ ली।इस अवसर पर अतिथियों के द्वारा 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नये मतदाताओं को बैच लगाकर तथा मतदाता जागरूकता के कार्य एवं निर्वाचन के दौरान उल्लेखनीय कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों, बीएलओ आदि को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस दौरान 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नये मतदाताओं ने भी अपना विचार रखते हुए उन्हें मत देने का अधिकार प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। समारोह में तहसीलदार श्री आशुतोष शर्मा सहित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय बालोद के शिक्षक-शिक्षिकाओं के अलावा अन्य अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
- -“मेरा भारत, मेरा वोट” थीम पर आयोजित हुआ जिला स्तरीय कार्यक्रम-मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने उत्कृष्ट निर्वाचन कार्य के लिए अधिकारी, कर्मचारियों को किया सम्मानितरायपुर / जिले में आज 16वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस उत्साह और लोकतांत्रिक गरिमा के साथ मनाया गया। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम की थीम “मेरा भारत, मेरा वोट” तथा टैगलाइन “भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में नागरिक” रही।जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन सेमिनार हॉल, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, जोरा, रायपुर में किया गया, जिसमें मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ श्री यशवंत कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।इस अवसर पर श्री कुमार ने मताधिकार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हर एक वोट अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने एक प्रेरक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार मतदान में भाग न लेने का प्रभाव भविष्य के निर्णयों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यदि नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करते हैं, तो उन्हें ऐसे निर्णय स्वीकार करने पड़ते हैं जिनमें उनकी कोई भागीदारी नहीं होती। उन्होंने सभी नागरिकों से संवेदनशीलता, निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ मतदान करने का आह्वान किया।मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने नवपंजीकृत युवा मतदाताओं को बधाई देते हुए कहा कि वे अब लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने जिले द्वारा निर्वाचन कार्यों में किए गए उत्कृष्ट प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कार्यों की सराहना हुई है, जिसके लिए पूरी टीम बधाई की पात्र है।कार्यक्रम में श्री कुमार द्वारा युवा मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र वितरित किए गए। साथ ही जिले की सातों विधानसभाओं से 21 बी.एल.ओ., निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के कार्यालय में कार्यरत 54 कर्मियों तथा जिला निर्वाचन कार्यालय के 30 अधिकारी-कर्मचारियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।इस दौरान कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। लोकतंत्र में हर एक वोट कीमती होता है और यही वोट देश की दिशा व दशा तय करता है। उन्होंने सभी मतदाताओं से आग्रह किया कि वे अपने मताधिकार का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें तथा निष्पक्ष, स्वतंत्र और सशक्त लोकतंत्र के निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। मतदान न केवल अधिकार है, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य भी है।इस अवसर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री कुमार ने सभी अधिकारी, कर्मचारियों को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण निर्वाचन तथा किसी भी प्रकार के प्रलोभन से प्रभावित हुए बिना मतदान करने की शपथ भी दिलाई गई।कार्यक्रम में निगम आयुक्त श्री विश्वदीप, सीईओ जिला पंचायत श्री कुमार बिश्वरंजन, उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्री नवीन कुमार ठाकुर, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक अधिकारी सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
- -कवियों ने छत्तीसगढ़ी भाषा की गरिमा और पारिवारिक मूल्यों को काव्य के माध्यम से किया उजागररायपुर /रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में रविवार को तृतीय सत्र के दौरान “छत्तीसगढ़ी काव्य पाठ” का आयोजन किया गया। यह सत्र प्रख्यात साहित्यकार पवन दीवान जी को समर्पित रहा। कार्यक्रम के सूत्रधार श्री भरत द्विवेदी रहे।काव्य पाठ में श्री रामेश्वर वैष्णव, श्री रामेश्वर शर्मा, श्री मीर अली मीर, श्रीमती शशि सुरेंद्र दुबे तथा श्रीमती श्रद्धा संतोषी महंत ने सहभागिता की।कार्यक्रम की शुरुआत श्रीमती श्रद्धा संतोषी महंत के काव्य पाठ से हुई। कवि मीर अली मीर ने“महानदी संगम में राजिम”,“नई पटियावय दाई कोई…”,“नंदा जाहि का रे…”जैसी रचनाओं का पाठ कर छत्तीसगढ़ी लोकभावना को स्वर दिया।हास्य कवयित्री श्रीमती शशि सुरेंद्र दुबे ने छत्तीसगढ़ी भाषा की महिमा पर आधारित कविता का पाठ किया, जिसे श्रोताओं ने सराहना के साथ ग्रहण किया।कवि रामेश्वर शर्मा ने श्यामलाल चतुर्वेदी और पवन दीवान जी को समर्पित रचनाओं का पाठ किया। उन्होंने “मोर गंवई गांव है…” कविता के माध्यम से ग्रामीण जीवन और संस्कृति का सजीव चित्रण किया।कवि एवं गीतकार रामेश्वर वैष्णव ने छत्तीसगढ़ की धरती को काव्य की जननी बताते हुए कहा कि आदि कवि वाल्मीकि की लेखनी की प्रेरणा भी इसी भूमि से उपजी मानी जाती है। उन्होंने अपने प्रसिद्ध गीत “झन बुलव मां-बाप ल…” की प्रस्तुति दी तथा विवाह पर आधारित हास्य कविता “ओ तो अच्छा हुआ मैं नई गेव बरात मा…” का भी पाठ किया, जिस पर श्रोताओं ने तालियों से स्वागत किया।कार्यक्रम के सूत्रधार श्री भरत द्विवेदी ने अपने चिरपरिचित अंदाज में “अटकन-बटकन दही-चटाकन” जैसी पंक्तियों से सत्र का संचालन करते हुए वातावरण को रोचक बनाए रखा। काव्य पाठ कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा की सांस्कृतिक गरिमा, पारिवारिक मूल्यों और लोकजीवन की संवेदनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। उपस्थित श्रोताओं ने कवियों की रचनाओं की मुक्त कंठ से सराहना की।
- -बच्चों से लेकर बुजुर्गों ने भारी उत्साह के साथ आयोजन में लिया हिस्सारायपुर ।रायपुर साहित्य उत्सव में पद्मश्री डॉ सुरेंद्र दुबे को समर्पित ओपन माइक मंच तीनों दिन आकर्षक प्रस्तुतियों से गुलजार रहा ।गीत,संगीत,नृत्य,कहानियों,कविताओं से गुलजार रहा।प्रदेश भर से आए युवा कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इस मंच की खास बात यह रही कि 5 साल के नन्हे बच्चों से लेकर 70 वर्ष के बुजुर्गों ने उत्साह से हिस्सा लिया।कुछ प्रस्तुतियां बेहद खास रहीं जिनमें आकर्ष दीवान ने नवाब सादिक जंग बहादुर “हिल्म” द्वारा रचित लोकप्रिय कव्वाली “कन्हैया याद है कुछ भी हमारी” गाकर माहौल में सूफी रंग भर दिया। वहीं जब 5 साल के अविरल ने “चोला माटी के राम”गीत गाया तो दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी और लोग अपने मोबाइल लेकर अविरल का गीत रिकॉर्ड करने लगे।6 साल की तान्या संगोई ने हारमोनियम के साथ मीर अली मीर जी के गीत “नंदा जाही का रे” गीत प्रस्तुत किया और दर्शकों की तालियाँ बटोरी। रायपुर के ओमकार कोसले ने रामधारी सिंह दिनकर जी की कविता “रश्मि रथी” का धारा प्रवाह पाठन कर दर्शकों का दिल जीत लिया।राजनांदगांव से आई शीतल जैन पारख ने अपनी कहानी में सब्ज़ियों के माध्यम से स्त्री के जीवन के विभिन्न पड़ावों को समझाने के लिए माँ और बेटी के संवाद को रेखांकित किया। रायपुर की रोली साहू ने जब दीप जले आना गाकर ख़ूब तालियाँ बटोरी बिलासपुर से आई 13 वर्षीय नन्ही कथक “नृत्यांगना अनिका बाजपेयी ने श्री कृष्ण की माखन चोरी पर आधारित प्रस्तुति दी। वहीं रुचि देवांगन ने कथक में ही श्री कृष्ण की आराधना पर आधारित प्रस्तुति दी। कुशल मोहता ने अपनी बांसुरी से राग देस की सुमधुर प्रस्तुति दी। इसके अलावा प्रदेश भर से आए कवियों ने विभिन्न विषयों पर काव्य पाठ किया।
- -‘संविधान और भारतीय मूल्य’ विषय पर हुआ गहन बौद्धिक विमर्श-बच्चू जांजगीरी को समर्पित संवाद में वरिष्ठ चिंतकों ने रखे सारगर्भित विचाररायपुर / रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतिम दिन साहित्यकार बच्चू जांजगीरी को समर्पित एक अत्यंत विचारोत्तेजक संवाद का आयोजन किया गया। ‘संविधान और भारतीय मूल्य’ विषय पर आयोजित इस परिचर्चा में वरिष्ठ चिंतक शिव प्रकाश, हितेश शंकर तथा वरिष्ठ साहित्यकार गुरुप्रकाश ने भारतीय संविधान की आत्मा, उसकी सांस्कृतिक जड़ों और समकालीन चुनौतियों पर विस्तार से अपने विचार रखे। संवाद के सूत्रधार डॉ. भूपेंद्र करवंदे रहे।भारतीय सहिष्णुता केवल स्वीकार नहीं, समावेश का भाव है – शिव प्रकाशवरिष्ठ चिंतक श्री शिव प्रकाश ने कहा कि यदि सहिष्णुता को केवल एक-दूसरे को स्वीकार करना माना जाए, तो भारतीय मूल्य उससे कहीं आगे जाते हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के धर्म संसद (शिकागो) के ऐतिहासिक वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन परंपरा यह मानती है कि सभी धर्म अपने-अपने मार्ग से उसी एक सत्य तक पहुंचते हैं।उन्होंने रामकृष्ण परमहंस के जीवन से उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय दृष्टि में पूजा-पद्धतियों को लेकर विवाद का स्थान नहीं है। शास्त्रार्थ की परंपरा को उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्राचीन स्वरूप बताया, जो ज्ञान को परिष्कृत करने का माध्यम रही है।कोरोना काल में भारत द्वारा 57 देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ केवल विचार नहीं, बल्कि व्यवहार में उतरा हुआ भारतीय मूल्य है। पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए उन्होंने तुलसी, पीपल और बरगद की पूजा को भारतीय जीवन-दृष्टि का प्रतीक बताया।संविधान का मंदिर संसद है, गर्भगृह उसका भाव – गुरुप्रकाशवरिष्ठ साहित्यकार श्री गुरुप्रकाश ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि संविधान ठीक से कार्य नहीं करता, तो दोष संविधान का नहीं बल्कि उसे लागू करने वालों का होता है। उन्होंने कहा कि संविधान की मूल प्रति में राम, महावीर और गौतम बुद्ध के चित्र यह दर्शाते हैं कि संविधान भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों से प्रेरित है।उन्होंने मौलिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता पर जोर देते हुए कहा कि राष्ट्र के प्रति निष्ठा किसी भी भाषा, क्षेत्र या जाति से ऊपर होनी चाहिए। संविधान को केवल दिखावे का दस्तावेज नहीं, बल्कि जीवन मूल्य के रूप में अपनाने की आवश्यकता है।संविधान का राजनीतिक उपकरण बनना चिंता का विषय – हितेश शंकरवरिष्ठ साहित्यकार श्री हितेश शंकर ने कहा कि आज संविधान का कई बार राजनीतिक औजार के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जबकि उसका मूल उद्देश्य समाज और राष्ट्र को दिशा देना है। उन्होंने डॉ. अंबेडकर के विराट व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए उनके जीवन से जुड़े प्रसंग साझा किए।उन्होंने 42वें संविधान संशोधन, हिन्दू कोड बिल और स्वतंत्रता के बाद के राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीयता का भाव ही संविधान की आत्मा है, जो सभी को साथ लेकर चलने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर दो पुस्तकों का विमोचन किया गया। जिसमें डॉ. लुनेश कुमार वर्मा द्वारा लिखित कविता संग्रह ‘एक लोटा पानी’ एवं चंचल विजय शुक्ला द्वारा लिखी गयी ‘माटी के लाल: शहीदों को श्रद्धांजलि’ शामिल थीं।
- -मेरा भारत, मेरा वोट” थीम के साथ मनाया गया 16वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस-“भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में नागरिक” टैगलाइन के माध्यम से मतदाता की भूमिका को मिलेगा नया आयाम-मतदाता शपथ एवं उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान-रायपुर। 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर स्थित विवेकानंद सभागार में भव्य राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्री इंदर सिंह उबोवेजा, प्रमुख लोकायुक्त, छत्तीसगढ़ लोक आयोग द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर आयोजित मतदाता जागरूकता प्रदर्शनी का उद्घाटन कर उसका अवलोकन भी किया।कार्यक्रम में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री यशवंत कुमार, अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री भास्कर विलास संदीपन, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री पी. एस. ध्रुव, रायपुर कलेक्टर डॉ गौरव कुमार, दुर्ग कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह, सूरजपुर कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन,उपस्थित रहे।मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्री इंदर सिंह उबोवेजा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मतदाता दिवस का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को अपने मताधिकार के प्रयोग हेतु जागरूक एवं प्रेरित करना है।उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रावधान किए गए हैं। इसी उद्देश्य से आज ही के दिन निर्वाचन आयोग की स्थापना की गई थी। न्यायमूर्ति श्री उबोवेजा ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, मतदान एक नागरिक का अधिकार और कर्तव्य दोनों है। मतदान के माध्यम से हम अपने देश के भविष्य को आकार देते हैं और विकास की दिशा को तय करते है। इसलिए सभी नागरिकों को अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए और देश के समग्र विकास में योगदान देना चाहिए। राष्ट्रीय मतदाता दिवस हमें यह याद दिलाता है कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रत्येक मतदाता का मत महत्वपूर्ण है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री यशवंत कुमार ने राष्ट्रीय मतदाता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में मतदाताओं की जितनी अधिक भागीदारी सुनिश्चित होती है, लोकतंत्र उतना ही अधिक सशक्त, समावेशी एवं प्रभावी बनता है।उन्होंने कहा कि इस वर्ष हमारे 16 वे राष्ट्रीय मतदाता दिवस की थीम मेरा भारत, मेरा वोट” निर्धारित की गई है, जबकि इसकी टैगलाइन “भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में नागरिक” रखी गई है।सीईओ श्री कुमार ने कहा कि “मेरा भारत, मेरा वोट” थीम यह संदेश देती है कि लोकतंत्र की मजबूती नागरिकों की सक्रिय सहभागिता पर निर्भर करती है। प्रत्येक मतदाता का वोट देश के विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाता है। वहीं, टैगलाइन “भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में नागरिक” यह दर्शाती है कि निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं पारदर्शी चुनावों की पूरी प्रक्रिया नागरिकों के विश्वास और सहभागिता पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एक महत्वाकांक्षी पहल के अंतर्गत विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता पंजीकरण से वंचित न रहे तथा कोई भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में पंजीकृत न रहे।राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को मतदाता शपथ दिलाई गई।कार्यक्रम में नव मतदाताओं और निर्वाचन कार्यों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को और वर्ष 2025 के लिए सर्वश्रेष्ठ जिला निर्वाचन पुरस्कार अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिलों को सम्मानित किया गया। जिसमें ‘नवाचार आधारित मतदाता जागरूकता पहल’ के लिए दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले को, ‘निर्वाचन प्रबंधन एवं व्यवस्थापन (लॉजिस्टिक्स)’ के लिए सूरजपुर जिले को, ‘प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण’ के लिए दुर्ग जिले को तथा ‘निर्वाचन में प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग’ के लिए जशपुर जिले को सम्मानित किया।इसी प्रकार उत्कृष्ट उप जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में श्रीमती निष्ठा पांडेय तिवारी, जिला मुंगेली को प्रशस्ति पत्र , चेक और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। इसी तरह उत्कृष्ट निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी पुरस्कार हेतु श्रीमती प्रतिमा ठाकरे, जिला बालोद, श्री हरि शंकर पैकरा, जिला महासमुंद, श्री गगन शर्मा जिला बस्तर, श्रीमती चांदनी कंवर जिला सूरजपुर तथा श्री देवेंद्र कुमार चौधरी जिला जांजगीर-चांपा को प्रशस्ति पत्र, चेक और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।इसके अतिरिक्त उत्कृष्ट सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी श्रेणी में श्री ढालसिंह विसेन जिला दुर्ग, सुश्री ख्याति नेताम जिला रायपुर, श्री पंचराम सलामे जिला बीजापुर, श्री दानिश परवेज जिला बलरामपुर एवं श्री शिव कुमार डनसेना जिला रायगढ़ को भी पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।इसके अलावा स्टेट आइकन श्री विजय शर्मा को, निर्वाचन पर्यवेक्षक के लिए श्री हरीश भाटिया राजनांदगांव को, स्पेशल अवार्ड श्रेणी के लिए श्री विनोद कुमार आगलावे और श्री विनोद कुमार सोनकेसरिया रायपुर को सम्मानित किया गया।इसी के साथ नव मतदाताओं को एपिक कार्ड प्रदान किए गए और संभागवार उत्कृष्ट कार्य करने हेतु 10 बीएलओ में श्री रमेश टोप्पो, सहायक शिक्षक, जिला रायगढ़, श्री अंबिका प्रकाश उपाध्याय, जिला जांजगीर–चांपा, श्री लोकनाथ प्रधान, सहायक शिक्षक, जिला सुकमा, श्री राजकुमार कोण्ड्रा, जिला बीजापुर, श्रीमती अनुपम राय, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, जिला सरगुजा, श्रीमती अनिता तिवारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, जिला सरगुजा, श्रीमती उमेश्वरी वर्मा, रोजगार सहायिका, जिला खैरागढ़–छुईखदान–गंडई, श्रीमती अनिता सोनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, जिला दुर्ग, श्रीमती दुर्गा बघेल, बी.एल.ओ., जिला गरियाबंद तथा श्री विरेन्द्र कुमार जायसवाल, सहायक शिक्षक , जिला बलौदाबाजार–भाटापारा के साथ ही 05 सहायक प्रोग्रामर, 05 डाटा एंट्री ऑपरेटर प्रशस्ति पत्र, चेक और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्रीमती तरुणा साहू ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विभिन्न जिलों के अधिकारी-कर्मचारी एवं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
- -रायपुर साहित्य उत्सव में सत्यजीत दुबेरायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव में “नई पीढ़ी की फिल्मी दुनिया” पर हुई बातचीत किसी औपचारिक पैनल जैसी नहीं लगी। मंच पर बैठे अभिनेता सत्यजीत दुबे की बातों में अनुभव था, ठहराव था और सिनेमा को देखने का एक साफ़, ज़मीनी नज़रिया था। श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में जैसे ही उन्होंने बोलना शुरू किया, यह स्पष्ट हो गया कि यह चर्चा फिल्मों से आगे जाकर कहानियों, संवेदना और समाज की बात करने वाली है। सत्यजीत दुबे के लिए सिनेमा चमक-दमक का खेल नहीं है। उनके शब्दों में, फिल्म की उम्र बजट तय नहीं करता, उसकी सच्चाई तय करती है। जो कहानी दिल तक पहुंचती है, वही समय के साथ चलती है।सत्यजीत ने छत्तीसगढ़ की धरती का ज़िक्र करते हुए कहा कि यहां का लोकजीवन, साहित्य और सामाजिक अनुभव भारतीय सिनेमा के लिए वह आधार हैं, जिन पर टिकाऊ और यादगार फिल्में बन सकती हैं। “कहानियां हमारे चारों ओर हैं,” वे कहते हैं, उन्हें बस देखने और ईमानदारी से कहने की ज़रूरत है। डिजिटल दौर पर उनकी बात किसी ट्रेंड का दोहराव नहीं थी, बल्कि एक संभावना का संकेत थी। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को उन्होंने क्षेत्रीय अनुभवों की आवाज़ बताया कि ऐसी आवाज़, जो अब सीमाओं में नहीं बंधी। आज का दर्शक सच्ची, ज़मीन से जुड़ी कहानियां चाहता है। उसे परफेक्ट चेहरे नहीं, असली इंसान देखने हैं, सत्यजीत दुबे ने कहा।बिलासपुर से मुंबई तकछत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जन्मे सत्यजीत दुबे की कहानी किसी त्वरित सफलता की नहीं है। स्कूली पढ़ाई के बाद वे अभिनय के सपने के साथ 2007 में मुंबई पहुंचे। थिएटर उनके लिए पहला स्कूल बना, जहां उन्होंने अभिनय ही नहीं, इंसान को समझना सीखा।संघर्ष के वर्षों में विज्ञापनों ने उन्हें टिके रहने का सहारा दिया। पिज्जा हट, किटकैट, रिलायंस बिग टीवी और एचडीएफसी बैंक जैसे ब्रांड्स के साथ काम किया। और फिर, महज़ 20 साल की उम्र में, रोशन अब्बास निर्देशित और शाहरुख खान निर्मित फिल्म ‘ऑलवेज कभी कभी’ से उन्हें फिल्मों में पहला मौका मिला।इसके बाद ‘झांसी की रानी’ में नाना साहेब का किरदार हो या ‘लक लक की बात’, ‘बांके की क्रेज़ी बारात’ और केरी ऑन कुट्टन हर काम में उन्होंने अपनी जगह धीरे-धीरे पुख्ता की। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ‘मुंबई डायरीज 26/11’ में डॉक्टर अहान मिर्जा की भूमिका ने उन्हें एक ऐसे अभिनेता के रूप में स्थापित किया, जो संवेदनशील भूमिकाओं को भरोसे के साथ निभाता है। ‘बेस्टसेलर’, ‘रणनीति: बालाकोट एंड बियॉन्ड’ और ‘प्यार टेस्टिंग’ जैसी सीरीज में उनकी मौजूदगी इसी निरंतरता की अगली कड़ी है।रायपुर साहित्य उत्सव के मंच से सत्यजीत दुबे ने युवाओं को कोई प्रेरक नारा नहीं दिया। उन्होंने बस इतना कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। थिएटर ने मुझे सिखाया कि अगर आप खुद से ईमानदार नहीं हैं, तो कोई किरदार भी ईमानदार नहीं हो सकता। कार्यक्रम में सुविज्ञा दुबे ने संक्षेप में बच्चों के आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति पर परिवार की भूमिका को रेखांकित किया, जबकि अन्य वक्ताओं ने सिनेमा और साहित्य के बदलते रिश्तों पर अपने विचार साझा किए।
- -सिनेमाजगत के प्रसिद्ध निर्देशक अनुराग बसु और चाणक्य सीरियल के निर्माता चंद्रप्रकाश द्विवेदी हुए शामिल-लोग रिस्क लेकर सामाजिक सरोकार से जुड़ा सिनेमा बनाते हैं : निर्देशक श्री अनुराग बसु-सिनेमा को देखने का मापदंड बदल गया है : निर्माता चंद्रप्रकाश द्विवेदीरायपुर,। रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत समाज और सिनेमा विषय पर केंद्रित परिचर्चा को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रोता अनिरुद्ध नीरव मंडप में पहुंचे, जिसमें हिंदी सिनेमाजगत के प्रसिद्ध लेखक-निर्देशक श्री अनुराग बसु, इतिहासकार-पटकथा लेखक एवं निर्माता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी और सिनेमा लेखक श्री अनंत विजय ने हिस्सा लिया। परिचर्चा के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के जाने-माने लेखक-निर्देशक श्री मनोज वर्मा रहे।हिंदी सिनेमाजगत के निर्देशक श्री अनुराग बसु ने परिचर्चा में भाग लेते हुए सिनेमा को एक ऐसा औजार बताया, जो बिगड़े हुए समाज को शेप दे सकता है। उन्होंने कहा कि लोग रिस्क लेकर ऐसे सिनेमा बनाते हैं। अगर हम सिनेमा से सामाजिक सरोकार की अपेक्षा करते हैं, तो बहुत से लेखक-निर्देशक आज भी इस दायित्व को निभाते आ रहे हैं।श्री बसु ने कहा कि 90 के दशक में जितने सिनेमा बनते थे, आज भी उतने ही बनते हैं, बल्कि फिल्मों की संख्या और अधिक है। आज सिनेमा के पास ज्यादा टेक्नोलॉजी है, लेकिन कहानियां भी वही हैं। अब नई कहानियां सामने आ रही हैं, नए विषयों पर फिल्में बन रही हैं। हम यदि किसी लेखक-निर्देशक की बनाई किसी फ़िल्म को अच्छा या बुरा कहते हैं, तो यह हमारा व्यक्तिगत विचार है, क्योंकि उसने पूरी ईमानदारी से फ़िल्म बनाई है और उसके हिसाब से वह फ़िल्म अच्छी बनी है। श्री बसु ने आगे कहा कि हम जब भी फ़िल्मों की बात करते हैं, तो पसंद-नापसंद की बात अपने आप ही सामने आ जाती है। उन्होंने फ़िल्मों को समाज का जरूरी हिस्सा बताया।परिचर्चा में अपने संबोधन के दौरान डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि आज फ़िल्म के हिट और फ्लॉप होने की बात अधिक होती है। सिनेमा को देखने का मापदंड बदल गया है। सिनेमा का सामाजिक सरोकार नहीं रहा। सिनेमा आपके प्रश्नों को तभी उठाएगा, जब उससे सिनेमा को बड़ा लाभ होगा। सिनेमा का दौर बदल रहा है।श्री द्विवेदी ने कहा कि आज के समय में आप चाणक्य नहीं बना सकते। हिंदी सिनेमा में हिंदी का स्तर कहां तक पहुंचा है, यह एक बड़ी चुनौती है। सभी सिनेमा को सरल करने की बात करते हैं, हिंदी में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग होता है। उन्होंने अपने अनुभव से जोड़ते हुए बताया कि बायोग्राफी भी उन्हीं पर बन रही हैं, जिनसे बड़े फायदे हों। उन्होंने उपनिषद गंगा सीरियल का उल्लेख करते हुए बताया कि उपनिषद गंगा में बहुत गंभीर काम है, जबकि चाणक्य में उस समय की सच्चाई दिखाई देती है।इस सत्र पर सिनेमा लेखक श्री अनंत विजय ने कहा कि सिनेमा कोई एलाइट माध्यम नहीं है। जब तक हम फ़िल्म नहीं देखते, तब तक चर्चा नहीं होती। आजकल लोग फ़िल्म देखते नहीं, सिर्फ चर्चा करते हैं। प्रेम में वैज्ञानिकता नहीं ढूंढी जाती। फ़िल्मों की कहानी और पात्रों से लोग भावनात्मक जुड़ाव रखते हैं। यही जुड़ाव फ़िल्मों की कॉमर्शियल और सोशल वैल्यू तय करता है।
- -वरिष्ठ पत्रकारों और साहित्यकारों ने साझा मूल्यों पर किया विमर्शरायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे एवं समापन दिवस पर ‘पत्रकारिता और साहित्य’ विषय पर एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। यह सत्र लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित दूसरे सत्र के रूप में सम्पन्न हुआ। यह चर्चा दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय श्री बबन प्रसाद मिश्र की स्मृति को समर्पित रही। पैनल में वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार सुश्री स्मिता मिश्र, डॉ. हिमांशु द्विवेदी, श्री अवधेश कुमार और श्री गिरीश पंकज शामिल रहे, जबकि सत्र का संचालन श्री विभाष झा ने किया।चर्चा के दौरान अपने विचार रखते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्री गिरीश पंकज ने कहा कि चाहे पत्रकारिता हो या साहित्य, लेखन का मूल आधार सदैव जनहित और सामाजिक उत्तरदायित्व होना चाहिए।‘हरिभूमि’ के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि तथ्यों को निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करना पत्रकारिता का मूल सिद्धांत है, वहीं तथ्यों और परिस्थितियों पर चिंतन साहित्य को व्यापक और गहन दृष्टि प्रदान करता है। उन्होंने पत्रकार और साहित्यकार के बीच मूलभूत अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि पत्रकार प्रायः संस्थागत मर्यादाओं, मूल्यों और संपादकीय प्राथमिकताओं के दायरे में कार्य करते हैं, जबकि साहित्यकार को विषय के विविध आयामों को स्वतंत्रता के साथ अभिव्यक्त करने का अधिक अवसर मिलता है।वरिष्ठ पत्रकार सुश्री स्मिता मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता और साहित्य के बीच अंतर मुख्यतः शैली, भाषा और दृष्टिकोण का है। पत्रकारिता जहाँ तथ्यप्रधान होती है, वहीं साहित्य भावनाओं और संवेदनाओं की ओर अधिक झुकाव रखता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भाषा में संवेदनशीलता, रिपोर्टिंग में सहानुभूति और व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने की क्षमता दोनों ही क्षेत्रों के लिए अनिवार्य है, क्योंकि दोनों ही जनमानस को प्रभावित करने की सामर्थ्य रखते हैं।पत्रकार और साहित्यकार दोनों रूपों में अपने अनुभव साझा करते हुए श्री अवधेश कुमार ने पत्रकारिता और साहित्य को एक ही सिक्के के दो पहलू बताया। उन्होंने कहा कि उनके पत्रकारिता के अनुभव अक्सर उनके साहित्यिक लेखन की प्रेरणा बनते हैं तथा अनेक मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरें उन्हें उन विषयों के गहरे सामाजिक और मानवीय पक्षों को साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित करती हैं।सत्र के दौरान संचालक श्री विभाष झा ने छत्तीसगढ़ के प्रख्यात पत्रकारों, जिनमें श्री मुक्तिबोध और श्री माधवराव सप्रे प्रमुख हैं, के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने सामाजिक चेतना के विस्तार के लिए साहित्य को माध्यम बनाया। पैनल में समकालीन पत्रकारिता में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उससे उत्पन्न चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।इस अवसर पर सुश्री स्मृति दुबे के कविता संग्रह ‘करुण प्रकाश’ तथा श्री लोकनाथ साहू ललकार के कविता संग्रह ‘यह बांसुरी की नहीं बेला है’ का विमोचन भी अतिथियों के करकमलों से सम्पन्न हुआ।
- -“हमारी सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण, संवर्धन और उत्सव मनाना अत्यंत आवश्यक,” — कैनात काज़ी-“भारतीय यात्रियों के यात्रा-वृत्तांत और संस्मरण युवा पीढ़ी को प्रेरित और शिक्षित करते हैं,” — शिखा वर्शनीरायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे और समापन दिवस पर लाल जगदलपुरी मंडप में प्रथम सत्र के रूप में “ट्रैवल ब्लॉग: पर्यटन के प्रेरक” विषय पर एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। इस सत्र में प्रसिद्ध यात्रा पत्रकार, ब्लॉगर एवं एकल यात्री सुश्री कैनात काज़ी तथा “देसी चश्मे से लंदन डायरी” की लेखिका सुश्री शिखा वर्शनी ने अपने अनुभव साझा किए। सत्र का संचालन श्री राहुल चौधरी ने किया।अपने वक्तव्य में सुश्री कैनात काज़ी ने कहा कि हिंदी साहित्य ने उनकी यात्रा-यात्रा को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साहित्य से प्रेरित होकर उन्होंने यात्रा आरंभ की और भारत के विभिन्न हिस्सों में किए गए अपने भ्रमण अनुभवों ने उन्हें ब्लॉग लेखन और अनुभवों के दस्तावेजीकरण के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वे मूलतः सीखने और खोज की भावना से यात्रा करती हैं, जबकि ब्लॉगिंग, डायरी लेखन और लोकप्रियता इस यात्रा के स्वाभाविक उपफल मात्र हैं।सचेत यात्रा पर बल देते हुए उन्होंने यात्रियों से आग्रह किया कि वे यात्रा को केवल देखने तक सीमित न रखें, बल्कि उसमें पूर्ण रूप से डूबें। उन्होंने कहा कि ट्रैवल ब्लॉगिंग पर्यटन स्थलों, संस्कृतियों और घटनाओं के प्रत्यक्ष अनुभवों को संजोने का एक सशक्त माध्यम है।अपने यात्रा-सफर से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में सुश्री शिखा वर्शनी ने कहा कि जिज्ञासा ही उनकी यात्राओं और लेखन की मूल प्रेरणा रही है। उन्होंने साझा किया कि सरकारी विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने के दौरान उनका परिचय हिंदी साहित्य से हुआ, जिसने उन्हें अपने अनुभवों को अभिव्यक्त करने के लिए आवश्यक शब्द-सम्पदा और संवेदनशीलता प्रदान की। उन्होंने बताया कि यद्यपि वे भारत में केवल 14–15 वर्ष ही रहीं, लेकिन अपने पिता के साथ देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राओं ने उन्हें भारतीय संस्कृति के विविध रंगों से परिचित कराया।उन्होंने कहा, “दुनिया भर की यात्रा के बाद मुझे यह एहसास हुआ कि हम अपने ही देश की पर्यटन संभावनाओं को अक्सर कम आँकते हैं। भारत का ऐतिहासिक वैभव और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत हमारी परंपराओं, रीति-रिवाजों, स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों में प्रतिबिंबित होती है। भारतीय होने के नाते हमें न केवल इस धरोहर पर गर्व करना चाहिए, बल्कि इसे स्वयं अनुभव करने के लिए भी गंभीर प्रयास करने चाहिए।”सत्र का संचालन करते हुए श्री राहुल चौधरी ने अपने यात्रा अनुभव साझा किए और यात्रा लेखन में सूक्ष्म अवलोकन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर क्षेत्र, अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध लोक-संस्कृति और हरित परिदृश्य के कारण प्रत्येक यात्री की ‘मस्ट-विज़िट’ सूची में अवश्य शामिल होना चाहिए।युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए पैनलिस्टों ने कहा कि पठन-पाठन की घटती प्रवृत्ति के कारण युवाओं की शब्द-सम्पदा सीमित होती जा रही है। उन्होंने युवाओं से साहित्य के साथ गहन जुड़ाव की आवश्यकता पर बल दिया, साथ ही लेखकों से भी आग्रह किया कि वे अपनी भाषा और लेखन शैली को अधिक सहज, सरल और युवा-अनुकूल बनाएं।
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- जिला स्तरीय मुख्य समारोह मोहला के मिनी स्टेडियम में होगा आयोजित
मोहला । जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित मुख्य समारोह में लोकसभा सांसद, राजनांदगांव श्री संतोष पांडेय 26 जनवरी को सुबह 9 बजे ध्वजारोहण कर परेड की सलामी लेंगे। मुख्य अतिथि द्वारा परेड का निरीक्षण एवं संदेश वाचन किया जाएगा। समारोह में मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन, हर्ष फायर एवं परेड का मार्च पास्ट, शहीद परिवारों का सम्मान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विभागीय झांकियों का प्रस्तुतिकरण एवं पुरस्कार वितरण किया जाएगा। - - पीएम आवास, मनरेगा और एनआरएलएम में तेजी लाने के निर्देश- स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के निर्देश, टेलीमेडिसिन सेवा के विस्तार के लिए बनाए कार्ययोजना- उर्वरक आपूर्ति में लापरवाही पर सख्त, उर्वरक आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित करने के दिए निर्देश- उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री शर्मा ने ली जिला स्तरीय समीक्षा बैठकमोहला । छत्तीसगढ़ शासन के उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री विजय शर्मा ने शनिवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर विभिन्न विभागीय योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की। बैठक में विकास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन, जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक सुनिश्चित करने तथा प्रशासनिक समन्वय को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।जिला पंचायत विभाग की समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने योजनाओं के पालन प्रतिवेदन की जानकारी ली। इस अवसर पर सीईओ, जिला पंचायत द्वारा मनरेगा अंतर्गत स्वीकृत, प्रगतिरत एवं लंबित कार्यों की जानकारी दी गई। उप मुख्यमंत्री ने जिले में लंबित प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रकरणों पर जनप्रतिनिधियों एवं विभागीय अधिकारियों को हितग्राहियों को प्रेरित कर आवास निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न स्थानों पर उनके उत्पादों की प्रदर्शनी लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिले में उपलब्ध स्थानीय वनोपज की जानकारी लेते हुए उनके खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग पर विशेष ध्यान देने को कहा, जिससे स्थानीय संसाधनों का वैल्यू एडिशन कर रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकें। उन्होंने सीएलएफ मुख्यालय में महतारी सदन की स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजने, बैठकों को अधिक उपयोगी बनाने तथा भावी रोजगारमुखी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए।सीईओ जिला पंचायत ने जानकारी दी कि स्थानीय स्तर पर राजमिस्त्रियों की कमी को दूर करने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही आवास प्रगति सभा के माध्यम से पीएम आवास हितग्राहियों को निर्माण कार्य में प्रगति लाने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्व-सहायता समूहों, मछली पालन समूहों एवं “मोर गांव मोर पानी” अभियान की भी जानकारी दी। उप मुख्यमंत्री ने पंचायतों में पंजी संधारण की स्थिति की समीक्षा करते हुए स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए।गृह विभाग की समीक्षा के दौरान जिले में नक्सल मूवमेंट, नक्सली संगठन, घुसपैठियों एवं जुआ-सट्टा पर की गई कार्रवाई की जानकारी ली गई। इस संबंध में उन्होंने पृथक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि ट्रैफिक एवं कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु स्कूलों में जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री ने जिले में उपलब्ध संसाधनों की जानकारी ली और जिला अस्पताल को शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने टेलीमेडिसिन सेवा के विस्तार हेतु दूरस्थ ग्राम पंचायतों का चयन कर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इस दौरान ब्लड सैंपल संग्रहण, आयुष्मान कार्ड से उपचार, रेडक्रॉस गतिविधियां, सीएचसी ओपीडी, दिव्यांग प्रमाण पत्र, टीबी मुक्त ग्राम पंचायत, डायलिसिस सेवा सहित अन्य स्वास्थ्य योजनाओं की भी समीक्षा की गई।कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान रबी फसलों हेतु उर्वरक की उपलब्धता नहीं होने पर उप मुख्यमंत्री ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र सोसाइटियों में उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मत्स्य विभाग को व्यक्तिगत स्तर पर हेचरी निर्माण के लिए हितग्राहियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए, जिससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार एवं आयमूलक गतिविधियों से जोड़ा जा सके।पीएचई विभाग को जल जीवन मिशन अंतर्गत कार्यों के दौरान क्षतिग्रस्त स्थानों की मरम्मत कर पंचायतों को हैंडओवर करने के निर्देश दिए गए। वहीं सिंचाई विभाग से सिंचाई क्षेत्र विस्तार हेतु स्वीकृत लघु एवं मध्यम बांधों की प्रगति की जानकारी ली गई। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन तथा जनहित में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री भोजेश शाह मांडवी, जिला पंचायत सदस्य श्री नरसिंह भंडारी, कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति, पुलिस अधीक्षक श्री यशपाल सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती भारती चंद्राकर, अपर कलेक्टर श्री जीआर मरकाम, अपर कलेक्टर श्री मिथलेश डोंडे सहित सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित रहें।- परंपराओं का संरक्षण प्रशासन की जिम्मेदारीप्रभारी मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि जिला पांचवीं अनुसूची क्षेत्र अंतर्गत आता है, ऐसे में परंपराओं एवं सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रत्येक गांव के ठाकुर, मांझी, गायता, पटेल एवं कोटवार की सूची तैयार करने, पारंपरिक देव स्थलों का चिन्हांकन एवं दस्तावेजीकरण करने तथा बीट प्रणाली की समीक्षा कर व्यापक प्रचार-प्रसार एवं चस्पा करने के निर्देश दिए।- अविवादित बटवारा एवं नामांतरण प्रकरणों में कमी लाने प्रदान करें प्रशिक्षणवन विभाग की समीक्षा में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि लाख उत्पादन प्रशिक्षण के साथ-साथ मछली पालन गतिविधियों पर कार्य किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने जानकारी दी कि “हमर स्वस्थ लईका” कार्यक्रम अंतर्गत संवर्धित टेक-होम राशन प्रदान किया जा रहा है, जिससे बच्चों के सुपोषण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब मध्यम कुपोषित बच्चों के लिए भी विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है। वही किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राजस्व विभाग ने बताया कि दस्तावेजों की सुलभ उपलब्धता हेतु अभिलेखागार का निर्माण किया गया है। साथ ही स्कूली एवं आंगनबाड़ी बच्चों के जाति प्रमाण पत्र निर्माण हेतु विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री ने अविवादित बटवारा एवं नामांतरण प्रकरणों में कमी लाने के लिए सचिवों को प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए।
- - कलेक्टर श्रीमती प्रजापति ने लिया व्यवस्थाओं का जायजामोहला । जिला मुख्यालय के मिनी स्टेडियम में शनिवार को गणतंत्र दिवस समारोह का फुल ड्रेस रिहर्सल किया गया। अपर कलेक्टर श्री मिथलेश डोंडे ने मुख्य अतिथि की भूमिका का निर्वाह कर ध्वजारोहण किया व परेड की सलामी ली। इसके पश्चात परेड निरीक्षण किया गया। इस दौरान स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का रिहर्सल भी किया। इस मौके पर कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति,पुलिस अधीक्षक श्री यशपाल सिंह, सीईओ श्रीमती भारती चन्द्राकर, अपर कलेक्टर श्री जीआर मरकाम, एसडीएम मोहला डॉ.हेमेन्द्र भुआर्य, डिप्टी कलेक्टर श्री डीआर ध्रुव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री पिताम्बर पटेल, समेत जिलास्तरीय अधिकारी, बल एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहें।गणतंत्र दिवस समारोह में ध्वजारोहण के पश्चात सलामी, राष्ट्रगान व मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के संदेश का वाचन होगा। जिसके बाद मुख्य अतिथि परेड का निरीक्षण करेंगे। समारोह में आईटीबीपी, जिला पुलिस बल, एनसीसी और स्काउट गाइड के छात्र-छात्राओं की टुकड़ियों द्वारा मार्च पास्ट किया जाएगा। समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कृत किया जाएगा। तत्पश्चात स्कूली बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे।फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान कलेक्टर श्रीमती प्रजापति ने तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने मंच व बैठक व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात, बिजली आपूर्ति, पेयजल आदि के बारे में जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को उनको सौंपे गए दायित्वों के अनुसार सारी तैयारियां समय से पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया।
- -रायपुर साहित्य उत्सव में उमड़ा जनसैलाब-बड़ी संख्या में लोगों ने कराया पंजीयनरायपुर, / नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित तीन दिवसीय ‘रायपुर साहित्य उत्सव-2026’ में साहित्यप्रेमियों का उत्साह देखते ही बन रहा है। उत्सव के तीसरे दिन भी परिसर में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही। विभिन्न आयु-वर्ग के नागरिकों, छात्रों, साहित्यकारों और शोधार्थियों ने उत्सव में पहुँचकर सक्रिय रूप से सहभागिता की।साहित्य उत्सव में आयोजित विविध सत्रों, गोष्ठियों और परिचर्चाओं को सुनने के लिए सुबह से ही लोगों का आना शुरू हो गया था। पंजीयन काउंटरों में लोगों की लंबी कतारें दिखाई दीं। अब तक उत्सव में अत्यधिक संख्या में नागरिकों ने पंजीयन कराया है, जो साहित्यिक गतिविधियों के प्रति लोगों की गहरी रुचि को दर्शाता है।गौरतलब है कि पुरखौती मुक्तांगन प्रांगण पर आयोजित साहित्य उत्सव में विभिन्न विषयों पर आधारित सत्रों में साहित्य, संस्कृति, कला, मीडिया, समाज और तकनीक से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रख्यात वक्ताओं, लेखकों और विशिष्ट अतिथियों ने अपनी उपस्थिति से उत्सव को और भी समृद्ध बनाया।रायपुर साहित्य उत्सव राज्य की साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर को नई दिशा देने का प्रयास है। उत्सव में प्रतिदिन बड़ी संख्या में सहभागी पहुंचे, जिससे यह आयोजन प्रदेश में साहित्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और जनता के जुड़ाव का प्रतीक बन गया है।
- -भारतीय दृष्टि से पाठ्यवस्तु और पत्रकारिता के भारतीयकरण की आवश्यकता पर विशेषज्ञों ने दिया जोररायपुर, /रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में रविवार को “नवयुग में भारत बोध” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। यह कार्यक्रम मावली प्रसाद श्रीवास्तव को समर्पित रहा। परिचर्चा के सूत्रधार श्री प्रभात मिश्रा थे। कार्यक्रम में डॉ. संजीव शर्मा एवं डॉ. संजय द्विवेदी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।डॉ. संजीव शर्मा ने शिक्षा में भारत बोध की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय दृष्टि को समुचित स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल आत्मकल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व कल्याण की भावना से जुड़ी हुई है। हमारी दृष्टि सभी को अपने जैसा बनाने की नहीं, बल्कि विविधता में एकता की है।उन्होंने कहा कि शिक्षा की भूमिका सामान्य से कहीं अधिक व्यापक है और उसका उद्देश्य व्यक्ति को जाति-पाति तथा संकीर्ण बंधनों से मुक्त कर मानवीय मूल्यों से जोड़ना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में ईश्वर की अनुभूति मानव, जीव-जंतु और प्रकृति सभी में की जाती है। हमारी सांस्कृतिक शब्दावली को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाना चाहिए।डॉ. शर्मा ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा स्तर पर भारत बोध से जुड़ी पाठ्यवस्तु में परिवर्तन आवश्यक है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि मुगलों के आक्रमण भौतिक थे, जबकि अंग्रेजों ने मानसिक आक्रमण कर भारतीयों में हीनभावना उत्पन्न की, जिससे बाहर निकलना आज की आवश्यकता है।उन्होंने यह भी कहा कि पाठ्यवस्तु और मानसिकता—दोनों में परिवर्तन जरूरी है, किंतु यह परिवर्तन भारतीय परिप्रेक्ष्य में होना चाहिए, न कि पश्चिमी पद्धति के अनुकरण से। उन्होंने उच्च शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थानों को केवल मान्यता और प्रतिष्ठा की संरचना से बाहर निकलकर विश्वस्तरीय शिक्षा के साथ उसका भारतीयकरण भी करना होगा। पंचतंत्र जैसी कथाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर प्रस्तुत करने की आवश्यकता भी उन्होंने रेखांकित की।डॉ. संजय द्विवेदी ने कहा कि भारतीय भाषाओं में ज्ञान और विज्ञान दोनों समाहित हैं। आज का भारतीय युवा देश की विशिष्ट परंपरा और ज्ञान को विश्व स्तर तक पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी अपने विचार दूसरों पर थोपे नहीं, बल्कि अपने श्रेष्ठ विचार विश्व के सामने प्रस्तुत किए, जैसा कि स्वामी विवेकानंद ने किया था।उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति, पर्वत और नदियों तक को देवत्व के रूप में देखा जाता है। रामराज्य का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राजतंत्र होते हुए भी वहां अंतिम व्यक्ति की बात सुनी जाती थी, जो लोकतांत्रिक चेतना का प्रतीक है।डॉ. द्विवेदी ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता को भी भारतीय मूल्यों के अनुरूप ढालने की आवश्यकता है। पश्चिमी मानकों पर आधारित पत्रकारिता भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक आवश्यकताओं के अनुकूल नहीं है। उन्होंने वैचारिक साम्राज्यवाद को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि भारत बोध का विस्तार सोशल मीडिया सहित सभी माध्यमों से होना चाहिए।उन्होंने कहा कि “भारत को जानो, भारत को मानो” ही भारत बोध का मूल सूत्र है। भारतीयता ही सही अर्थों में राष्ट्रभाव की अभिव्यक्ति है। भारत की नीतियां उसकी अपनी भूमि और परंपरा पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने आत्मविश्वास के अभाव को भारत बोध के मार्ग में बाधा बताते हुए कहा कि समाज में इसे स्थायी रूप देने के लिए शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।परिचर्चा में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही भारत बोध का सशक्त प्रसार संभव है और यही प्रक्रिया भारत की सांस्कृतिक चेतना को पुनर्स्थापित करने का आधार बनेगी।









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