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- –25 जनवरी मतदाता दिवस के अवसर पर कला मंदिर सिविक सेंटर में जिला स्तरीय सम्मान समारोह का होगा आयोजनदुर्ग / भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर 2026) के अंतर्गत शत-प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरण, संग्रहण एवं डिजिटाइजेशन कार्य पूर्ण करने वाले बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर कल 25 जनवरी 2026 को कला मंदिर सिविक सेंटर भिलाई में पूर्वान्ह 10.00 बजे जिला स्तरीय सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। समारोह में जिले के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से चयनित तीन-तीन उत्कृष्ट बीएलओ को प्रोत्साहन स्वरूप प्रशस्ति पत्र एवं 5000 रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की अर्हता तिथि 01.01.2026 निर्धारित है, जिसके तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिले के 18 बीएलओ का चयन किया गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार विधानसभा क्षेत्र 62 पाटन से मतदान केंद्र क्रमांक 100 की श्रीमती निर्मला बघेल (आंगनवाड़ी कार्यकर्ता), केंद्र क्रमांक 161 की सुश्री चमेली साहू (रोजगार सहायक) तथा केंद्र क्रमांक 176 के श्री नेपाल यादव (रोजगार सहायक) को सम्मानित किया जाएगा। वहीं विधानसभा क्षेत्र 63 दुर्ग ग्रामीण से मतदान केंद्र क्रमांक 86 की श्रीमती सुनीता चन्द्राकर, क्रमांक 87 की श्रीमती हिमानी देवांगन तथा क्रमांक 256 की श्रीमती जयन्ती (तीनों आंगनवाड़ी कार्यकर्ता) को सम्मान के लिए चयनित किया गया है। इसी क्रम में विधानसभा क्षेत्र 64 दुर्ग शहर से मतदान केंद्र क्रमांक 5 की श्रीमती मधु नामदेव (आंगनवाड़ी कार्यकर्ता), क्रमांक 204 की श्रीमती योगिता कनौजे (सहायक शिक्षक) एवं क्रमांक 1 की श्रीमती सरिता साहू (आंगनवाड़ी कार्यकर्ता) को सम्मानित किया जाएगा। विधानसभा क्षेत्र 65 भिलाई नगर से मतदान केंद्र क्रमांक 82 के श्री खिलेश दास (सहायक ग्रेड-3, नगर पालिक निगम), क्रमांक 85 की श्रीमती सरस्वती साहू (शिक्षक) तथा क्रमांक 47 की यशोदा साहू (व्यायाम शिक्षक) का चयन किया गया है।विधानसभा क्षेत्र 66 वैशाली नगर से मतदान केंद्र क्रमांक 23 के श्री अनुज श्रीवास्तव (सहायक ग्रेड-3), क्रमांक 95 के श्री भागवती निर्मलकर (हेल्पर, नगर पालिक निगम भिलाई) एवं क्रमांक 214 की श्रीमती अंजना शर्मा (आंगनवाड़ी कार्यकर्ता) को सम्मानित किया जाएगा। विधानसभा क्षेत्र 67 अहिवारा से मतदान केंद्र क्रमांक 60 की श्रीमती संतोषी साहू, क्रमांक 109 की श्रीमती सुशीला वर्मा (आंगनवाड़ी कार्यकर्ता) तथा क्रमांक 176 की श्रीमती योगमाया वर्मा (सहायक शिक्षक) को भी जिला स्तरीय समारोह में सम्मान प्रदान किया जाएगा।
- - महाराष्ट्र मंडल के दिव्यांग बालिका विकास गृह में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देशभक्ति गीतों की होगी सुमधुर प्रस्तुतिरायपुर। देश और धर्म के प्रति प्रेम व आस्था का सुमधुर आयोजन और वैचारिक अनुष्ठान ‘राम रसायन’ का आयोजन रविवार, 25 जनवरी को मंडल द्वारा संचालित सियान गुड़ी, दिव्यांग बालिका विकास गृह समता कालोनी में शाम 6 बजे से किया जा रहा है।आचार्य चेतन गोविंद दंडवते ने बताया कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर स्थापना की वर्षगांठ पर यह आयोजन किया जा रहा है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर कला एवं संस्कृति समिति की ओर से देशभक्ति गीतों की संगीत संध्या का आयोजन किया गया है। इसके बाद देश के प्रसिद्ध पत्रकार, आध्यात्मिक चिंतक, प्रखर वक्ता संदीप अखिल के साथ समाज में समरसता लाने का वैचारिक अनुष्ठान ‘राम रसायन’ का आयोजन शाम सात बजे तक होगा। संदीप अखिल की कथा का श्रवण कर जीवन में नवऊर्जा और नवचेतना का संचार होता है।आचार्य चेतन ने बताया कि 'राम रसायन कथा' का हमारे जीवन में आध्यात्मिक और नैतिक महत्व है। यह कथा केवल भगवान श्रीराम के जीवन की घटनाओं का वर्णन नहीं करती, बल्कि उनके आदर्शों, गुणों, और मर्यादाओं को जीवन में अपनाने की प्रेरणा भी देती है।
- - महाराष्ट्र मंडल के हल्दी कुंकू में दिखी जागरूकता, वाण भेंटकर महिला सभासदों को दी बधाई- रंगोली स्पर्धा में वैशाली विजेता, अक्षता उप विजेता, फैंसी ड्रेस में जीजा बाई बनीं सुदेशना सबसे सुंदर, शेफाली द्वितीयरायपुर। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में हुए 17 महिला केंद्रों के हल्दी-कुंकू में जन जागरूकता की झलक नजर आई। बूढ़ापारा केंद्र की सभासदों ने अपने नाट्य अभियान में जहां शहर की सड़कों पर दिखने वाले मवेशियों को लेकर चिंता जताई। वल्लभ नगर केंद्र की महिलाओं ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जीवनगाथा को मंचित देख जोश से भरे दर्शक ‘जय भवानी- जय शिवाजी’ के जयकारे लगाने लगे।उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल ने बताया कि कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मंडल की वरिष्ठ सभासद शिल्पी मटरेजा और विशेष अतिथि ज्योति कान्हे उपस्थित थीं। बूढ़ापारा केंद्र के सरस्वती वंदना व तात्यापारा केंद्र के स्वागत गीत से कार्यक्रम शुरू हुआ। फैंसी ड्रेस और रंगोली स्पर्धाएं आकर्षण का केंद्र रहीं।फैंसी ड्रेस स्पर्धा में जज की जिम्मेदारी आंध्र समाज की महिला पदाधिकारी बी. शैलजा और संध्या राज ने निभाई। वहीं रंगोली स्पर्धा में शेखर क्षीरसागर और प्रभा बिन्नानी निर्णायक रहे। इस अवसर पर तीज महोत्सव को सफलतापूर्वक संपन्न कराने वाले अवंती विहार, शंकर नगर, सड्डू-मोवा और देवेंद्र नगर महिला केंद्र का सम्मान किया गया। इस अवसर पर पार्थ शेष का भी अभिनंदन किया गया।महाराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताया कि रंगोली प्रतियोगिता में वैशाली निमजे विजेता, अक्षता पंडित उप विजेता रहीं। मंजूषा चिलमवार को तीसरे स्थान पर संतोष करना पडा। इस तरह फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में जीजाबाई बनीं सुदेशना मेने प्रथम, शेफाली फडणवीस द्वितीय और अनुपमा बोधनकर तृतीय रहीं। विशाखा तोपखानेवाले ने आगे बताया कि वल्लभ नगर केंद्र की महिलाओं ने ‘झुलवा पाळणा पाळणा, बाळ शिवाजीचा....गाली तिल लावून बाळा काजळ घाला डोळा’ मराठी गीत प्रस्तुत किया।फैंसी ड्रेस स्पर्धा के प्रतिभागीडा. शेफाली फडणवीस शंकर नगर, अलका बापट न्यू राजेंद्र नगर, श्रद्धा मरघड़े डंगनिया, सुदेशना मेने अवंती विहार, भारती देवरणकर देवेंद्र नगर, जयश्री ढेकणे सरोना, प्रियंका टेम्पे सुंदर नगर, उर्वशी उरगांवकर सड्डू-मोवा, चित्रा बल्की रोहिणीपुरम, अनुपमा बोधनकर चौबे कालोनी और कोटा केंद्र से वैशाली पुरोहित शामिल रहीं।रंगोली प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागीरंगोली प्रतियोगिता में सोनाली कुलकर्णी, जयश्री गायकवाड़, डा शोभा सोनाये, प्रिया कडु, प्राजक्ता पुसदकर, मंजुषा चिलमवार, वैशाली निमजे, आरती पोतदार, ज्योति बनकर, अक्षता पंडित, लीना केलकर, शोभा जोशी, लीना लांजेवार, श्वेता खरे, माधुरी इंगोले, दीपिका पंडित, रंजना राजिमवाले, लक्ष्मी जिल्हारे, सुरेखा पाटिल, अंजलि काले, सुरेखा बक्षी और मनीषा बिस्सा शामिल हुईं।
- -कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने नोडल अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ली समीक्षा बैठक-किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, पारदर्शी और पात्रतानुसार हो धान उपार्जन – कलेक्टररायपुर / खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 के अंतर्गत जिले में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन का कार्य 139 धान उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से सुचारू एवं व्यवस्थित रूप से किया जा रहा है। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी उपार्जन केन्द्रों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।धान उपार्जन केन्द्रों में मॉइश्चर मीटर, पर्याप्त बारदाना, सटीक तौल व्यवस्था, पेयजल सहित सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके चलते कृषक उत्साहपूर्वक अपने धान का समर्थन मूल्य पर विक्रय कर रहे हैं।कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देशानुसार जिले के समस्त धान उपार्जन केन्द्रों में जिला स्तरीय नोडल अधिकारी एवं धान उपार्जन केन्द्र नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जिससे धान खरीदी की प्रक्रिया पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित बनी रहे।आज कलेक्टर डॉ. सिंह द्वारा धान उपार्जन केन्द्रों के जिला स्तरीय नोडल अधिकारी एवं केन्द्र नोडल अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि धान विक्रय हेतु केन्द्रों पर आने वाले किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो तथा पात्रतानुसार एवं निर्धारित सीमा के भीतर ही धान उपार्जन किया जाए।कलेक्टर ने अधिकारियों को अवैध धान की खरीदी रोकने, पात्रतानुसार धान उपार्जन का कार्य करने तथा सभी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप किसानों को समय पर समर्थन मूल्य का लाभ मिलना चाहिए और किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरजन, खाद्य नियंत्रक श्री भूपेन्द्र मिश्रा, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की सीईओ श्रीमती अपेक्षा व्यास सहित संबंधित अधिकारी ऑनलाइन जुड़े रहे।
- रायपुर। अपने सामाजिक दायित्वों के निर्वहन की कड़ी में महाराष्ट्र मंडल के नए प्रकल्प सियान गुड़ी में रविवार, 25 जनवरी को वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयुष्मान कार्ड शिविर का आयोजन किया जा रहा है। आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए वरिष्ठ जन को अपने साथ आधार कार्ड और राशन कार्ड लाना अनिवार्य होगा।महाराष्ट्र मंडल के मुख्य समन्वयक व सियान गुड़ी के प्रभारी श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि रविवार, 25 जनवरी को सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक आयुष्मान कार्ड शिविर का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने अधिक से अधिक वरिष्ठजनों से इस शिविर में उपस्थित होकर आयुष्मान कार्ड बनवाकर योजना का निःशुल्क लाभ लेने का आग्रह किया। शिविर समता कॉलोनी स्थित सियान गुड़ी- दिव्यांग बालिका विकास गृह में लगाया जाएगा। शिविर में आने वाले वरिष्ठजनों को आधार कार्ड व राशन कार्ड साथ लाना अनिवार्य होगा।बताते चलें कि भारत सरकार की ओर से वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठजनों के लिए विशेष आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं, जिसके अंतर्गत पांच लाख रुपये तक निःशुल्क उपचार प्राप्त किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन और वरिष्ठजन सेवा समिति के प्रभारी दीपक पात्रीकार से संपर्क किया जा सकता है।
- बालोद। बालोद वनमण्डल अंतर्गत दल्ली परिक्षेत्र के कंजेली परिसर (कक्ष क्र. 55 आर.एफ) में वन विभाग द्वारा पुलिस, प्रशासन एवं संयुक्त वन प्रबंधन समिति के सहयोग से अतिक्रमण के प्रयास को विफल करते हुए आज लगभग 35 एकड़ वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। वन मंडलाधिकारी श्री अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि मंगलवार को अतिक्रमण की सूचना प्राप्त हुई। तत्पश्चात अधिकारियों द्वारा फिल्ड का निरीक्षण किया गया एवं वन प्रबंधन समिति के साथ कार्ययोजना बनायी गई। उन्होंने बताया कि अतिक्रमण करने वालों पर प्रकरण कायम कर भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत कार्यवाही की जा रही है एवं वसूली की कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि स्थानीय वनअमले पर भी जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित बीडगार्ड को निलंबित किया गया एवं सहायक परिक्षेत्र अधिकारी को भी उनके कार्य क्षेत्र से हटाया गया है। उक्त क्षेंत्र में स्थानीय ग्रामणों के लाभ के दृष्टिकोण से वनवर्धनिक एवं चारागाह विकास के कार्य प्रस्तावित की जाएगी।
- बिलासपुर, /बालिका दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के छात्रावास में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम के अंतर्गत छात्रावास में निवासरत सभी बालिकाओं की एनीमिया जांच की गई। साथ ही उन्हें स्वास्थ्य, पोषण एवं मौसमी बीमारियों से बचाव से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं द्वारा बनाई गई आकर्षक रंगोली और पेंटिंग का अवलोकन सीएमएचओ द्वारा किया गया। इस अवसर पर बालिकाओं ने सामूहिक नृत्य, गायन एवं भाषण प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा दिखाई। इस अवसर पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली बालिकाओं में से प्रत्येक श्रेणी में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली प्रतिभागियों को विभाग द्वारा पुरस्कृत किया गया।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शोभा गरेवाल ने बालिकाओं को संबोधित करते हुए शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वयं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंतर्गत सभी बालिकाओं को आयरन की गोलियां का वितरण किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के साथ स्वयंसेवी संस्था सर्च एवं आग्रोख की सक्रिय भागीदारी रही।बालिका दिवस के अवसर पर जिले के सभी विकासखंडों में भी विविध जागरूकता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर बालिकाओं को सशक्त बनाने का संदेश दिया गया।
- दुर्ग। दुर्ग विधानसभा क्षेत्र के जनता से मुलाकात करने कैबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव वार्ड पहुँचे और आमजन से सीधा संवाद किये। इस दौरान वार्ड क्रमांक 15 करहीडीह क्षेत्र का भ्रमण कर नागरिकों की समस्याओं को मौके पर सुने और त्वरित निराकरण के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।मॉर्निंग विजिट के दौरान कैबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव करहीडीह स्थित शासकीय स्कूल एवं आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण कर बच्चों से संवाद किये और बच्चों से उपलब्ध शैक्षणिक, पोषण एवं मूलभूत सुविधाओं की जानकारी लिए। मौके पर उपस्थित संबंधित स्टाफ को बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर पोषण एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश दिए। भाजपा सरकार की प्राथमिकता है कि शिक्षा की नींव मजबूत हो और हर बच्चे को समान अवसर मिले।इसके पश्चात करहीडीह क्षेत्र में वार्ड भ्रमण कर स्थानीय नागरिकों से विकास कार्यों की जानकारी लिए। क्षेत्र के नागरिकों द्वारा वार्ड डोमशेड सीमेंटीकरण सड़क, नाली, शेड निर्माण सहित विभिन्न मूलभूत आवश्यकताओं से मंत्री श्री यादव को अवगत कराये। इस पर मंत्री गजेन्द्र यादव ने नागरिकों के सभी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्राथमिकता के साथ आवश्यक कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। करहीडीह वार्ड में उपस्थित नागरिकों से शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते अधिक से अधिक लाभान्वित होने अपील किए। उन्होंने नागरिकों का भरोसा दिलाया वार्ड को विकसित बनाने और भी विकास कार्य किये जायेंगे।
- रायपुर। ईशान हाइट महोबा बाजार रायपुर निवासी श्री विजय निमोणकर (तात्या) का 93 वर्ष की आयु में शुक्रवार देर रात निधन हो गया। वे प्रसन्न, जयदीप और प्रतिमा (सोनू) के पिता, प्रीति, वंदना, संगीता और चैतन्य मुंजे के ससुर, आकांक्षा, प्रद्युम्न, सुजय, प्रथमेश के दादा व अथर्व, कार्तिक के नाना थे। उनकी अंतिम यात्रा रविवार, 25 जनवरी को सुबह 11 बजे उनके निवास स्थान से कोटा मुक्तिधाम के लिए निकलेगी।
- -जशपुर जिले को 51.73 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगातकोतबा में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय भवन, बागबहार में एसडीएम (लिंक कोर्ट) सहित की कई महत्वपूर्ण घोषणाएंरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ तेजी से समृद्धि की ओर बढ़ रहा है। नक्सलवाद, जो कभी छत्तीसगढ़ के लिए गंभीर चुनौती था, अब तेजी से समाप्ति की ओर अग्रसर है। प्रदेश के हर क्षेत्र में अब तेजी से विकास कार्य किए जा रह है। श्री साय आज जशपुर जिले के कोतबा में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे।मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में लगभग 51.73 करोड़ रुपए लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। उन्होंने कोतबा में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय भवन, तहसील लिंक कोर्ट की स्थापना, रेस्ट हाउस निर्माण, इंडोर स्टेडियम का निर्माण, कोतबा जल आवर्धन योजना हेतु आवश्यक अतिरिक्त राशि, कोकियाखार में सामुदायिक भवन निर्माण तथा बागबहार में सप्ताह में एक दिन एसडीएम (लिंक कोर्ट) लगाने की घोषणा की। उन्होंने आज जिन कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन किया उनमें मुख्य रूप से 4.37 करोड़ रूपए की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण के कार्य का भूमिपूजन और 9.85 करोड़ रूपए से निर्मित जल आवर्धन योजना और प्रेस क्लब भवन का लोकार्पण शामिल हैं।मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अधिकांश गारंटी पूरी कर दी गई है। लोगों को इसका सीधा फायदा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्य के सिंचाई परियोजनाओं के मरम्मत एवं विकास के लिए लगभग 3 हजार करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 750 सड़कों को मंजूरी मिल चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने छत्तीसगढ़ की अग्रणी भूमिका रहेगी। वर्ष 2047 तक छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य की श्रेणी में लाने के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है। नई औद्योगिक नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं, छत्तीसगढ़ को अब तक 7.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। जिन पर तेजी से काम हो रहा है।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 36वीं सब जूनियर राष्ट्रीय सॉफ्टबॉल चैंपियनशिप के पदक विजेताओं को सम्मानित किया। उन्होंने राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ के तहत जिले में 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को चेक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, विधायक श्रीमती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, माटीकला बोर्ड अध्यक्ष श्री शंभूनाथ चक्रवर्ती, अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र कुमार बेसरा, पूर्व विधायक श्री भरत साय, सहित अनेक जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
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रायपुर। रायपुर साहित्य महोत्सव के अंतर्गत आज पुरखौती मुक्तांगन, रायपुर स्थित लाला जगदलपुरी मंडप में “आज की हिंदी कहानियाँ” विषय पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। यह सत्र महोत्सव के दूसरे दिन मंडप में आयोजित दूसरा सत्र था।
इस पैनल चर्चा में प्रख्यात साहित्यकार श्री परदेशी राम वर्मा, वरिष्ठ लेखिका सुश्री जयश्री राय, प्रसिद्ध लेखक श्री सतीश जायसवाल तथा साहित्य विदुषी डॉ. अंशु जोशी ने सहभागिता की।चर्चा के दौरान वक्ताओं ने समकालीन हिंदी कहानी के स्वरूप, विषयगत परिवर्तन, शिल्पगत प्रयोगों तथा समाज के बदलते यथार्थ को अभिव्यक्त करने में साहित्य की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। पैनलिस्टों ने आज की हिंदी कहानी में उभरती सामाजिक चेतना, संवेदनशीलता और नए कथ्य पर विस्तार से प्रकाश डाला।इस अवसर पर उपस्थित साहित्यप्रेमियों, विद्यार्थियों एवं पाठकों के साथ संवाद भी हुआ, जिससे कार्यक्रम और अधिक सार्थक एवं विचारोत्तेजक बन सका।रायपुर साहित्य महोत्सव साहित्य, संस्कृति और विचार-विमर्श को बढ़ावा देने का एक सशक्त मंच प्रदान कर रहा है, जहाँ विभिन्न विधाओं और भाषाओं के रचनाकारों का समागम हो रहा है। साहित्य महोत्सव के अंतर्गत आज पुरखौती मुक्तांगन, रायपुर स्थित लाला जगदलपुरी मंडप में “आज की हिंदी कहानियाँ” विषय पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। यह सत्र महोत्सव के दूसरे दिन मंडप में आयोजित दूसरा सत्र था।
इस पैनल चर्चा में प्रख्यात साहित्यकार श्री परदेशी राम वर्मा, वरिष्ठ लेखिका सुश्री जयश्री राय, प्रसिद्ध लेखक श्री सतीश जायसवाल तथा साहित्य विदुषी डॉ. अंशु जोशी ने सहभागिता की।चर्चा के दौरान वक्ताओं ने समकालीन हिंदी कहानी के स्वरूप, विषयगत परिवर्तन, शिल्पगत प्रयोगों तथा समाज के बदलते यथार्थ को अभिव्यक्त करने में साहित्य की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। पैनलिस्टों ने आज की हिंदी कहानी में उभरती सामाजिक चेतना, संवेदनशीलता और नए कथ्य पर विस्तार से प्रकाश डाला।इस अवसर पर उपस्थित साहित्यप्रेमियों, विद्यार्थियों एवं पाठकों के साथ संवाद भी हुआ, जिससे कार्यक्रम और अधिक सार्थक एवं विचारोत्तेजक बन सका।रायपुर साहित्य महोत्सव साहित्य, संस्कृति और विचार-विमर्श को बढ़ावा देने का एक सशक्त मंच प्रदान कर रहा है, जहाँ विभिन्न विधाओं और भाषाओं के रचनाकारों का समागम हो रहा है। - -राजनीति के बढ़ते कवरेज को वरिष्ठ पत्रकारों ने बताया सकारात्मक संकेत, मीडिया आयोग की उठी मांग-जमीनी पत्रकारिता, प्रशिक्षण और संतुलन पर वक्ताओं ने रखे विचाररायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन आज लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित परिचर्चा ‘राष्ट्रीय मीडिया में बहस के मुद्दे’ ने मीडिया की मौजूदा दिशा, चुनौतियों और संभावनाओं पर गंभीर विमर्श को मंच दिया। सूत्रधार श्री वरुण सखा के सवालों के जवाबों के रूप में वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय मीडिया की भूमिका, उसकी प्राथमिकताओं और भविष्य की जरूरतों पर खुलकर बात रखी। यह सत्र छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय श्री रमेश नैयर को समर्पित था।परिचर्चा में वरिष्ठ पत्रकार श्री अनिल पाण्डेय ने कहा कि राजनीति का मीडिया के केंद्र में आना एक सकारात्मक संकेत है। पिछले एक दशक में खबरों के ट्रेंड में बड़ा बदलाव आया है, जहां कभी बॉलीवुड और सिनेमा की खबरें हावी रहती थीं, वहीं अब राजनीति प्रमुख विषय बन रही है। उन्होंने सरकार से प्रेस आयोग या मीडिया आयोग के गठन की मांग करते हुए कहा कि समय के अनुरूप नीतियां और नियमन बनेंगे तो पत्रकारों के हितों की रक्षा संभव होगी। ट्रेड यूनियनों, पत्रकार संगठनों, मीडिया मालिकों और संपादकों के साथ संवाद से मीडिया का माहौल बेहतर हो सकता है। उन्होंने कहा कि आज टीवी चैनलों के प्राइम टाइम डिबेट के विषय सोशल मीडिया तय कर रहा है। उन्होंने पत्रकारों के संवेदनशील और अध्ययनशील होने के साथ ही मुद्दों को समझने के लिए उनके समुचित प्रशिक्षण पर भी जोर दिया।वरिष्ठ पत्रकार श्री अखिलेश शर्मा ने छत्तीसगढ़ के संदर्भ में राष्ट्रीय मीडिया की भूमिका पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से जुड़ी घटनाओं को तो राष्ट्रीय मीडिया में प्रमुखता मिलती है, लेकिन नक्सल मोर्चे पर हो रहे सकारात्मक बदलावों और विकास कार्यों को अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाता। उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में कमियां हो सकती हैं, लेकिन हर पांच साल में सरकार बदलने की प्रक्रिया इसे मजबूत बनाती है। एक पत्रकार के रूप में लोकतंत्र को पंचायत से लेकर संसद तक मजबूत करना मीडिया की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया को केवल टीवी तक सीमित नहीं मानना चाहिए, अखबार और पत्र-पत्रिकाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।वरिष्ठ पत्रकार श्री उमेश चतुर्वेदी ने मीडिया की व्यावहारिक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि सूचना का सबसे बड़ा प्रदाता सरकार ही है और लगातार छुट्टियां पड़ने पर अखबार निकालना तक मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि मीडिया संस्थानों में जमीनी रिपोर्टिंग कम हो रही है, क्योंकि यह खर्चीली है, जबकि प्रायोजित खबरें और डिबेट कम खर्च में आसान विकल्प बन गए हैं। उन्होंने चिंता जताई कि मीडिया संस्थान असल पत्रकारिता, अभिव्यक्ति और भाषा कौशल से भटक रहे हैं, जिससे अनावश्यक शब्दावली और आरोप-प्रत्यारोप बढ़ रहे हैं।परिचर्चा में यह भी कहा गया कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पत्रकारिता की पढ़ाई तो हो रही है, लेकिन व्यावहारिक प्रशिक्षण की कमी है। पत्रकारिता अब खबर और समाज से जुड़ी जिम्मेदारी के बजाय कंटेंट जेनरेशन तक सिमटती जा रही है, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है।
- - महुआ और मिलेट्स से बने जशप्योर उत्पादों को मिली शानदार प्रतिक्रिया-महिला स्वावलंबन की सशक्त कहानी लिख रहा जशप्योररायपुर। रायपुर में आयोजित भव्य साहित्य उत्सव में छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला और संस्कृति के साथ-साथ जशपुर जिले का गृह ब्रांड ‘जशप्योर’ (Jashpure) आगंतुकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मुख्यमंत्री के आदिवासी एवं महिला उत्थान के विजन से प्रेरित यह ब्रांड पारंपरिक स्वादों को आधुनिक बाजार से जोड़ते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान कर रहा है।उत्सव परिसर में लगाए गए जशप्योर के स्टॉल पर दिनभर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। विशेष रूप से महुआ से बने लड्डू, कुकीज़ और कैंडी आगंतुकों के बीच चर्चा का विषय बने रहे। स्टॉल पर आने वाले लोग न केवल उत्पादों के स्वाद और गुणवत्ता की सराहना कर रहे हैं, बल्कि लगाए गए QR कोड के माध्यम से इनके पोषण मूल्य और निर्माण प्रक्रिया की जानकारी भी प्राप्त कर रहे हैं।रायपुर की स्थानीय निवासी निधि साहू ने स्टॉल का भ्रमण करने के बाद कहा,“यह जानकर आश्चर्य हुआ कि महुआ से इतने स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद भी बनाए जा सकते हैं। पारंपरिक ज्ञान का यह आधुनिक उपयोग वास्तव में सराहनीय है।”जशप्योर से जुड़े युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन ने बताया कि महुआ को लेकर लंबे समय से समाज में यह धारणा रही है कि इसका उपयोग केवल शराब निर्माण तक सीमित है, लेकिन जशप्योर इस सोच को बदलने का कार्य कर रहा है।उन्होंने कहा,“जशपुर की महिलाएं अब फूड-ग्रेड महुए का उपयोग कर इसे एक पारंपरिक सुपरफूड के रूप में स्थापित कर रही हैं। यह पहल आदिवासी महिलाओं के पारंपरिक ज्ञान को आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है।”विविधता और आधुनिकता का संगमजशप्योर ब्रांड के अंतर्गत वर्तमान में 90 से अधिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। महुआ के साथ-साथ ग्लूटेन-फ्री मिलेट्स से बने बिस्किट और लड्डू भी लोगों को खासे पसंद आ रहे हैं। इनमें रागी, कुटकी, कोदो और बकव्हीट जैसे पोषक मिलेट्स से तैयार विविध उत्पाद शामिल हैं।महिला सशक्तिकरण की नई पहचानजशप्योर केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि महिला आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की एक अभिनव पहल है। स्थानीय संसाधनों के कुशल उपयोग से जशपुर की ग्रामीण महिलाएं आज न केवल स्थायी रोजगार प्राप्त कर रही हैं, बल्कि उद्यमिता के क्षेत्र में भी सशक्त रूप से आगे बढ़ रही हैं। रायपुर साहित्य उत्सव में जशप्योर की यह प्रभावशाली उपस्थिति छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, स्वदेशी उत्पादों और महिला सशक्तिकरण की बढ़ती पहचान का सशक्त प्रमाण है।
- -लाला जगदलपुरी मंडप में लोकगीतों का जीवंत विमर्शरायपुर /रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के दूसरे दिन लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित परिचर्चा “छत्तीसगढ़ के लोक गीत” प्रदेश की लोक-संस्कृति, भाषा और जनजीवन के गहन संवाद का सशक्त मंच बनी। परिचर्चा में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि लोकगीत छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक स्मृति और जीवन-दृष्टि की आत्मा हैं।लोकगीत सामूहिक स्मृति का जीवंत दस्तावेज : डॉ. पी.सी. लाल यादवलोक साहित्य के प्रख्यात लेखक डॉ. पी.सी. लाल यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ी लोकगीत समाज के इतिहास, संघर्ष और अनुभवों को पीढ़ी दर पीढ़ी संजोकर रखने वाले जीवंत दस्तावेज हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती लोकगीतों का अमृत कुंड है- खेल, पर्व, नृत्य, वन-जीवन और दैनिक क्रियाओं में लोकगीत सहज रूप से रचे-बसे हैं। हर स्थान और हर अवसर से लोकगीत स्वतः जन्म लेते हैं।लोक संवेदना से समृद्ध होता है आधुनिक लेखन : शकुंतला तरारवरिष्ठ कवयित्री एवं स्वतंत्र पत्रकार श्रीमती शकुंतला तरार ने कहा कि लोकगीतों की भावनात्मक गहराई आधुनिक साहित्यिक विधाओं को निरंतर समृद्ध करती है। उन्होंने हाइकू रचना में लोक चेतना के प्रयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि लोक संवेदना पीढ़ी दर पीढ़ी विकसित होती रहती है। बस्तर पंडुम जैसे उत्सव आदिवासी समाज की विविधता, सौंदर्य और अभिव्यक्ति के सशक्त माध्यम हैं, जिनसे लोकजीवन की सच्ची तस्वीर सामने आती है।भाषा-विज्ञान की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध हैं लोकगीत : डॉ. विनय कुमार पाठकहिंदी एवं भाषा विज्ञान में पीएचडी और डी.लिट. की दोहरी उपाधि प्राप्त डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि छत्तीसगढ़ी लोकगीतों में ध्वनि, लय और अर्थ का अद्भुत संतुलन है, जो इन्हें भाषायी दृष्टि से विशिष्ट बनाता है। उन्होंने कहा कि लोकगीत प्रकृति के अत्यंत निकट होते हैं और इसी निकटता के माध्यम से लोकजीवन अपनी बात सहज रूप में अभिव्यक्त करता है।लोककथा और लोकगीत एक-दूसरे के पूरक : डॉ. बिहारी लाल साहूकहानीकार डॉ. बिहारी लाल साहू ने कहा कि लोकगीत और लोककथाएँ समाज की आत्मा को अभिव्यक्त करने के दो सशक्त माध्यम हैं। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और लोक साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि पाहुना का मान करना छत्तीसगढ़ की संस्कृति है और लोकगीत हमारी ऐसी अमूल्य संपत्ति हैं, जो हर रूप में हमारे साथ बहती रहती हैं-इन्हें कोई मिटा नहीं सकता।संवेदनशील संचालन ने संवाद को दिया प्रवाहपरिचर्चा का कुशल एवं प्रभावी संचालन सूत्रधार श्री आशीष सिंघानिया, युवा लेखक एवं संस्कृतिकर्मी ने किया। उन्होंने अपने संचालन में वर्तमान समय में बढ़ते पाश्चात्य प्रभाव के बीच लोकसंस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता पर भी ध्यान आकृष्ट किया। उनके संचालन ने संवाद को सहज, रोचक और प्रवाहपूर्ण बनाए रखा।छत्तीसगढ़ी लोकगीतों में जीवन और उत्सववक्ताओं ने कहा कि सुआ गीत, करमा गीत, ददरिया, पंथी गीत, बिहाव गीत और जवारा गीत छत्तीसगढ़ की संस्कृति, प्रकृति, श्रम-संस्कृति और उत्सवधर्मिता की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। इन गीतों में जनजीवन की खुशियाँ, संघर्ष और आस्था समाहित है।छत्तीसगढ़ी साहित्य की पुस्तकों का विमोचनइस अवसर पर दो महत्वपूर्ण छत्तीसगढ़ी साहित्यिक कृतियों का विमोचन किया गया“हमर का बने का गिनहा” - छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल संग्रह“दिल म घलो अंधियार हवय” - छत्तीसगढ़ी गीत एवं कविता संग्रहलोक विरासत के संरक्षण का आह्वानकार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने लोकगीतों के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक हस्तांतरण की आवश्यकता पर बल दिया। परिचर्चा ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि लोकगीत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान और भविष्य की सांस्कृतिक दिशा हैं।
- -भाषा के मानकीकरण में एआई की भूमिका बड़ी चुनौती : डॉ. व्यास-प्रश्न जितना गहरा, उत्तर भी उतना ही गहरा होगा : श्री प्रफुल्ल केतकर-डॉ. गोपाल कमल की पुस्तक ‘गुणाढ्य की गुणसूत्र कथा’ का हुआ विमोचनरायपुर / नवा रायपुर में आयोजित साहित्य महोत्सव 2026 के दूसरे दिन कवि-कथाकार अनिरुद्ध नीरव मंडप पर साहित्य : उपनिषद से एआई तक विषय पर केंद्रित परिचर्चा आयोजित हुई। इस परिचर्चा में वक्ता के रूप में ट्रिपल आईटी नवा रायपुर के डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश व्यास, वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रफुल्ल केतकर, वरिष्ठ लेखक डॉ. गोपाल कमल शामिल हुए। परिचर्चा के सूत्रधार साहित्यकार श्री संजीव तिवारी रहे, परिचर्चा का यह सत्र कवि जगन्नाथ प्रसाद भानु को समर्पित रहा। इस अवसर पर डॉ. गोपाल कमल द्वारा लिखित पुस्तक, गुणाढ्य की गुणसूत्र कथा का विमोचन किया गया।ट्रिपल आईटी के डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश व्यास ने कहा कि एआई का जो रूप आज हम देख रहे हैं, इसके पीछे विगत 30–40 वर्षों की मेहनत है। एआई निरंतर निखरता जा रहा है। तकनीक खुद को परिमार्जित करती जाती है, यह प्रक्रिया सतत है। एआई नेट पर उपलब्ध जानकारी, आंकड़ों और सूचनाओं का विश्लेषण कर हमें डिस्क्रिप्टिव टेक्नोलॉजी के रूप में समझाता है। धीरे-धीरे एआई निखरा और प्रिडिक्टिव टेक्नोलॉजी के रूप में काम करने लगा। आज एआई भविष्य की चीजों को भी बताता है। उन्होंने कहा कि नवंबर 2022 में पहली बार चैट जीपीटी आया। सिर्फ तीन साल में एआई का रूप कितना भव्य हुआ है, आप देखिए। हम एआई के भविष्य की अब कल्पना भी नहीं कर सकते। भाषा के मानकीकरण में एआई की क्या भूमिका होगी, यह हम सभी के बीच एक बड़ी चुनौती है।वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रफुल्ल केतकर ने परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि गीता के 18 अध्यायों में सभी तरह के ज्ञान का समावेश है। एआई को लेकर लोग चिंतित हैं कि एआई का फ्यूचर क्या होगा। एआई के आधार पर जापान ने जब रोबोट बनाया तो वह स्वयं को नेगेटिव प्रॉम्प्ट देने लगा। एआई कमांड और प्रॉम्प्ट पर काम करता है। एआई वही बताता है जो नेट पर उपलब्ध है। श्री केतकर ने कहा कि हमारे ऋषि सूचना की नहीं, ज्ञान की बात करते थे। वे एआई से बहुत ज्यादा आगे थे। यदि हम मैकाले की शिक्षा पद्धति की बात करें तो उसने हमें अच्छा उत्तर लिखने वाला बना दिया। प्रश्न जितना गहरा होगा, उत्तर भी उतना ही गहरा होगा। मानव के ज्ञान का उद्देश्य प्रकृति पर विजय पाना नहीं, उसके नियमों को समझकर अपने आपको प्रकृति के अनुरूप ढालना था।वरिष्ठ लेखक डॉ. गोपाल कमल ने सत्र में अपने संबोधन में कहा कि हमारे साथ में सोचने की परंपरा ऋग्वेद से आती है। हम सभी एआई में डीप लर्निंग की बात करते हैं। भाषा कहां से आती है, वह आकार कैसे लेती है, मनुष्य भाषा तक कैसे पहुंचा, इस पर होने वाले कार्य और अध्ययन को साइकोलिंग्विस्टिक के नाम से जाना जाता है। जेनेटिक कोड के जरिए ही हम नई चीजों को सीख पाते हैं। डॉ. गोपाल ने कहा कि सोमदेव ने कथासरितसागर के नाम से संस्कृत में पुस्तक लिखी, इसे हम गुणाढ्य के रूप में देख सकते हैं। संस्कृत के लगभग 3900 सूत्र हैं। महेश्वर सूत्रों से हम सभी शब्दरूप और धातुरूप बना सकते हैं। एआई में हम जीरो से एक का सहारा लेते हैं। गुणसूत्र की भाषा से एआई के संचार नेटवर्क को गढ़ा गया है।परिचर्चा के सूत्रधार, साहित्यकार श्री संजीव तिवारी ने कहा कि मेरे समझ में उपनिषद और एआई एक जैसे हैं। वेद ज्ञान का खजाना है, जिसका भाष्य उपनिषद है। एआई भी प्रश्नोत्तर शैली में उत्तर देता है। हमारा उपनिषद एआई का मूल है। उन्होंने कहा कि ट्रिपल आईटी हैदराबाद जैसे संस्थान एआई को लेकर काम कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए दूसरे संस्थान भी काफी अच्छा काम कर रहे हैं, ताकि एआई में बेहतर से बेहतर रूप में छत्तीसगढ़ी भाषा निखरकर आ सके। इस अवसर पर गणमान्य साहित्यकार एवं श्रोता उपस्थित रहे।
- -रायपुर साहित्य उत्सव में वरिष्ठ पत्रकार रुबिका लियाकत हुईं शामिलरायपुर / रायपुर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन अभिनव नीरव मंडल के प्रथम सत्र में विचारोत्तेजक संवाद और सारगर्भित विमर्श हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में आईं वरिष्ठ पत्रकार रुबिका लियाकत एवं छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा के मध्य रोचक परिचर्चा सम्पन्न हुई।अपने संबोधन में सुश्री लियाकत ने राष्ट्रवाद पर संबोधित कहा कि जब हम मिट्टी में मिल रहे हों, तो यह मिट्टी भी रोए इस धरती की। उन्होंने पत्रकारिता के 18 वर्षों के अनुभव साझा करते हुए युवाओं को आगाह किया कि सोशल मीडिया पर आए 30 सेकंड के वीडियो पर आँख मूँदकर भरोसा न करें, बल्कि तथ्यों की स्वयं पड़ताल करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे किसी व्यक्ति या विचारधारा के लिए नहीं, बल्कि सत्य और अच्छाई के लिए कार्य करती हैं और उनकी प्रतिबद्धता भारत के प्रति है।इतिहास और सामाजिक समरसता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी के दंगों के समय किए गए मानवीय कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा स्वभावतः सेक्युलर है और भारतीयता उसी समझ से विकसित होती है। निजी प्रसंग साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी दादी सनातन परंपराओं का पालन भी करती थीं, पाँच वक्त नमाज़ भी पढ़ती थीं और सबका आदर करती थीं, यह भारत की साझा संस्कृति का उदाहरण है।विराट हिंदू सम्मेलन से जुड़े अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें धर्म पर मन से विचार रखने के लिए आमंत्रित किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं कलमा पढ़ती हैं, उनके तीनों बच्चे कुरान पढ़ते हैं पर वे अपने बच्चों को इस प्रकार तैयार कर रही हैं कि वे वंदे मातरम् और भारत माता की जय कहने में संकोच न करें क्योंकि उनकी पहचान भारतीय होने से है।व प्रश्नोत्तर सत्र में पत्रकार बनने की आकांक्षा रखने वाली पत्रकारिता की छात्रा के प्रश्न पर उन्होंने परिश्रम, सत्यनिष्ठा और निर्भीकता को सफलता की कुंजी बताया। धर्म और राष्ट्रवाद से जुड़े प्रश्नों पर उन्होंने कहा कि किसी भी ग्रंथ या विचार को गुरु से समझना चाहिए, संदर्भ जानना चाहिए, और किसी की बातों में बहकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए क्योंकि एक ही बात के कई अर्थ हो सकते हैं। राष्ट्रवाद के प्रश्न पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि मैं हमेशा भारत और राष्ट्रवाद को चुनूँगी।कार्यक्रम के अंत में उन्होंने दो पुस्तकों का विमोचन किया, जिसमें जनसम्पर्क विभाग द्वारा प्रकाशित छत्तीसगढ़ के साहित्य पुरोधा एवं पूजा अग्रवाल की काव्य संग्रह 'अम्मा की चाय' शामिल थे। सत्र में बड़ी संख्या में युवा, साहित्यप्रेमी और पत्रकारिता से जुड़े लोग शामिल हुए।
- रायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 25 जनवरी को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि पर्यटन न केवल देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम भी है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पर्यटन के माध्यम से लोगों को स्थानीय संस्कृति, भौगोलिक विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक एवं अद्भुत स्थलों से परिचित होने का अवसर मिलता है। साथ ही यह क्षेत्र हजारों परिवारों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित कर आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।श्री साय ने कहा कि राष्ट्रीय पर्यटन दिवस का उद्देश्य पर्यटन उद्योग के महत्व को रेखांकित करना और इसके प्रति जनजागरूकता बढ़ाना है, ताकि पर्यटन के माध्यम से देश और प्रदेश को सतत आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके। भारत अपनी विविधताओं, परंपराओं और सांस्कृतिक वैभव के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। देश के प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट पहचान और गौरवशाली पृष्ठभूमि है, जिसे पर्यटन के माध्यम से देश-विदेश तक पहुँचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन स्थलों के संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय सहभागिता निभाएं तथा पर्यटन को बढ़ावा देकर प्रदेश के विकास में सहभागी बनें।
- रायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 25 जनवरी को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रीय मतदाता दिवस भारत के प्रजातांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक परंपराओं और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारत अपने सशक्त लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली के लिए विश्वभर में जाना जाता है। लोकतंत्र की मजबूती प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि मताधिकार केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में नागरिकों का महत्वपूर्ण दायित्व भी है।मुख्यमंत्री ने 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके सभी युवाओं से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल होने का आह्वान करते हुए कहा कि वे मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराएं और प्रत्येक चुनाव में मतदान कर भारत की लोकतांत्रिक परंपरा को और अधिक सुदृढ़ बनाएं।श्री साय ने कहा कि राष्ट्र के नवनिर्माण में प्रत्येक मत की अपनी विशेष महत्ता होती है। इसलिए सभी नागरिकों को अपने बहुमूल्य मताधिकार का प्रयोग पूरी जिम्मेदारी, जागरूकता और निर्भीकता के साथ करना चाहिए, ताकि एक सशक्त, समावेशी और लोकतांत्रिक भारत के निर्माण में सहभागी बना जा सके।
- रायपुर /रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में आज “नई पीढ़ी की फिल्मी दुनिया” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में अभिनेता श्री सत्यजीत दुबे, अभिनेत्री सुश्री टी. जे. भानु, विधायक एवं प्रसिद्ध कलाकार श्री अनुज शर्मा तथा सुश्री सुविज्ञा दुबे विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।परिचर्चा के दौरान श्री अनुज शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा अत्यंत सरल और सहज है, जिसे संवाद के माध्यम से और अधिक सुलभ बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय महिलाओं की सशक्त भूमिका का है, जहां सिनेमा और समाज दोनों क्षेत्रों में उनका योगदान निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने फिल्म निर्माण प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सिनेमा में निर्देशक की भूमिका प्रमुख होती है, रंगमंच में अभिनेता की प्रधानता होती है, जबकि धारावाहिकों में लेखक की भूमिका निर्णायक होती है। उन्होंने साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी रचनाकार की पहचान उसके पहनावे से नहीं, बल्कि उसकी रचनाओं से होती है।अभिनेता श्री सत्यजीत दुबे ने कहा कि किसी भी फिल्म में भावनात्मक तत्व होना आवश्यक है, तभी वह दशकों तक दर्शकों के मन में जीवित रहती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का साहित्य अत्यंत समृद्ध है और यहां अच्छी कहानियों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता केवल पाठक वर्ग को प्रोत्साहित करने की है कि वे पढ़े। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ की लोकजीवन और संस्कृति में असंख्य कथाएं समाहित हैं, जिन्हें सिनेमा के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है।अभिनेत्री सुश्री टी. जे. भानु ने कहा कि डिजिटल माध्यमों, विशेषकर यूट्यूब, ने नए कलाकारों के लिए अवसरों के द्वार खोले हैं। छोटी कहानियां अब विभिन्न मंचों के माध्यम से व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा का सुख केवल गंतव्य तक पहुंचने में नहीं, बल्कि पूरी यात्रा प्रक्रिया में निहित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब महिलाएं निर्माता की भूमिका निभाती हैं, तो वे सेट पर कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताओं और भावनाओं का ध्यान रखती हैं। उन्होंने सिनेमा में दृश्यात्मक प्रस्तुति को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।सुश्री सुविज्ञा दुबे ने कहा कि बच्चों में आत्मविश्वास का विकास घर से ही प्रारंभ होना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को अभिव्यक्ति के अवसर प्रदान करें, जिससे उनमें सृजनात्मकता और आत्मबल विकसित हो सके।परिचर्चा में वक्ताओं ने नई पीढ़ी के सिनेमा, साहित्य और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव पर विचार साझा करते हुए कहा कि सशक्त कहानी, भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक जिम्मेदारी ही भविष्य के सिनेमा की दिशा तय करेंगे।
- - रायपुर साहित्य उत्सव: दूसरे दिन लोकगीतों पर हुई जीवंत परिचर्चारायपुर / रायपुर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन प्रथम सत्र में लाला जगदलपुरी मंडप में छत्तीसगढ़ के लोकगीतों पर परिचर्चा आयोजित हुई। इसमें डॉ. पीसी लाल यादव, श्रीमती शकुंतला तरार, श्री बिहारीलाल साहू और डॉ. विनय कुमार पाठक विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए तथा अपने विचार रखें।डॉ. पीसी लाल यादव ने कहा कि वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ के लोकगीत मानवता के पक्षधर हैं, जो हमें रास्ता दिखाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकगीतों को गर्व से संजोकर रखने का दायित्व अब युवा पीढ़ी का है।परिचर्चा में दूसरी वक्ता श्रीमती शकुंतला तरार ने बस्तर के लोकगीतों और उनके महत्व को अनूठे अंदाज में प्रस्तुत किया। बस्तर के लोकगीत सुनाकर उन्होंने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने घोटुल के इतिहास, लिंगोपेन देवता की पूजा पद्धति में गाए जाने वाले ककसार गीत (जो महिलाओं द्वारा गाए जाते हैं) आखेट पर जाते पुरुषों के लिए महिलाओं द्वारा गाए मंगल गीत, छेरछेरा परंपरा, जगार धार्मिक पर्व में धनकुल गीत तथा 650 वर्षों से चली आ रही बस्तर दशहरा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बस्तर पंडुम द्वारा सरकार के कार्यों की भी सराहना की।श्री बिहारी लाल साहू ने युवाओं को मार्गदर्शन देते हुए वर्तमान लोकगीतों, कहानियों एवं पहेलियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पुराने समय में छत्तीसगढ़ी भाषा और लोकगीतों के महत्व को उदाहरणों सहित समझाया तथा बताया कि छत्तीसगढ़ी एक समृद्ध और पूर्ण भाषा है।अंत में डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि लोक साहित्य जन–जीवन की गहरी अनुभूतियों से उपजा समृद्ध साहित्य है। उन्होंने लोकगीतों को लेकर प्रचलित भ्रांतियों को दूर करते हुए इसकी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और रचनात्मक महत्ता को रेखांकित किया।सत्र के अंत में डॉ. पीसी लाल यादव का छत्तीसगढ़ी गजल संग्रह ‘हमर का बने का गिनहा‘ तथा कविता संग्रह ‘दिन म घलो अंधियार हावय‘ का विमोचन किया। साथ ही श्रीमती वर्णिका शर्मा द्वारा निर्मित वीडियो ‘महतारी की आरती‘ का विमोचन किया गया।
- -डॉ. अम्बेडकर विचारपुंज की आभा’ विषय पर लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित परिचर्चारायपुर/रायपुर साहित्य उत्सव 2026 “आदि से अनादि तक” के द्वितीय दिवस के पंचम सत्र अंतर्गत पुरखौती मुक्तांगन स्थित लाला जगदलपुरी मंडप में “डॉ. अम्बेडकर विचारपुंज की आभा” विषय पर एक विचारोत्तेजक परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात चिंतक डॉ. राजकुमार फलवारिया उपस्थित रहे।अपने वक्तव्य में डॉ. राजकुमार फलवारिया ने कहा कि भारत के सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षिक क्षेत्र, मीडिया जगत तथा अनेक दलित संगठनों द्वारा डॉ. भीमराव अम्बेडकर को केवल दलितों का नेता मानने की धारणा अधूरी और सीमित है। उन्होंने ऐतिहासिक घटनाओं, तथ्यों तथा बाबासाहेब के विचारों के माध्यम से स्पष्ट किया कि डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण समाज के नेता, चिंतक और मार्गदर्शक थे।डॉ. फलवारिया ने कहा कि बाबासाहेब केवल सामाजिक न्याय के प्रतीक ही नहीं थे, बल्कि वे महान अर्थशास्त्री, लेखक, बैरिस्टर, शिक्षक, पत्रकार, संपादक, स्तंभकार, श्रम मंत्री एवं कानून मंत्री के रूप में एक बहुआयामी व्यक्तित्व थे। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों, श्रमिकों के हितों, आर्थिक नीतियों, कृषि एवं औद्योगिक विकास, नदी जल प्रबंधन तथा भारतीय संविधान के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जाति व्यवस्था से ऊपर उठकर सम्पूर्ण समाज को केंद्र में रखकर कार्य किया।परिचर्चा के दौरान विचार व्यक्त किए कि डॉ. अम्बेडकर का चिंतन आज भी सामाजिक समरसता, लोकतंत्र और समानता के लिए पथप्रदर्शक है। कार्यक्रम में साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय सहभागिता रही।कार्यक्रम का उद्देश्य डॉ. अम्बेडकर के समग्र विचारों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना तथा उन्हें केवल एक वर्ग तक सीमित करने की मानसिकता पर पुनर्विचार करना रहा।
- -फिल्म सिटी और कल्चरल कन्वेंशन सेंटर से युवाओं, कलाकारों और पर्यटन को मिलेगा नया आयाम : मुख्यमंत्री-मुख्यमंत्री श्री साय ने चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर का किया भूमि पूजन-फिल्म निर्माण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश-दुनिया में मिलेगी विशेष पहचान-150 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 100 एकड़ में विकसित होगी फिल्म सिटीरायपुर । छत्तीसगढ़ का बरसों पुराना सपना आज साकार हो गया है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया में एक नई पहचान मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से छत्तीसगढ़ न केवल फिल्म निर्माण और सांस्कृतिक आयोजनों का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर होगा, बल्कि यह परियोजना राज्य की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी। चित्रोत्पला फिल्म सिटी और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा, निवेश के नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त होगी। यह परियोजना आने वाले वर्षों में राज्य के युवाओं, कलाकारों और पर्यटन क्षेत्र के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के ग्राम माना-तूता में चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधिवत पूजा-अर्चना के साथ चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण की आधारशिला रखी। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों, फिल्म कलाकारों, निर्माता-निर्देशकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज का दिन प्रदेश के अभिनय और कला जगत से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी के माध्यम से प्रदेश के हजारों हुनरमंद कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। स्थानीय फिल्म निर्माताओं को फिल्म निर्माण से जुड़ी सभी तकनीकी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। उन्होंने फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के लिए केंद्र सरकार से प्राप्त सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार में प्रदेश की कला और कलाकारों को उचित सम्मान मिल रहा है।मुख्यमंत्री ने भूमिपूजन के साथ ही फिल्म निर्माण और कन्वेंशन सेंटर से संबंधित विभाग को चार प्रस्ताव प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में फिल्म निर्माण गतिविधियों को नई गति मिलेगी और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों को बड़े पर्दे पर स्थान मिलेगा।संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि आज का यह अवसर छत्तीसगढ़ पर्यटन एवं फिल्म विकास उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल एक निर्माण परियोजना की शुरुआत नहीं है, बल्कि राज्य के सांस्कृतिक, आर्थिक और रचनात्मक भविष्य की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता से परिपूर्ण राज्य है और इस पहल से पर्यटन के साथ-साथ फिल्म उद्योग को भी नया आयाम मिलेगा। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ फिल्म निर्माताओं के लिए एक पसंदीदा डेस्टिनेशन के रूप में उभरा है। हमारी स्पष्ट योजना है कि आगामी दो वर्षों के भीतर इन परियोजनाओं को पूर्ण कर राज्य को समर्पित किया जाएगा।इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल तथा पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव उपस्थित थे।चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के भूमिपूजन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने परियोजना के प्रस्तावित मास्टर प्लान का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं तथा परियोजना पर आधारित एक लघु फिल्म भी देखी।चित्रोत्पला फिल्म सिटी के भूमिपूजन के साथ ही पर्यटन विभाग को फिल्म निर्माण एवं कन्वेंशन सेंटर में इकाइयों की स्थापना हेतु चार प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। समारोह के दौरान ये प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपे गए।गदर फिल्म के निर्माता श्री अनिल शर्मा ने अपनी आगामी फिल्म का निर्माण चित्रोत्पला फिल्म सिटी में करने का प्रस्ताव दिया। इंडिया एक्सपोजीशन मार्ट लिमिटेड के चेयरमेन श्री राकेश कुमार ने ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर में इंटरनेशनल एक्जीबिशन सेंटर एवं ट्रेड मार्ट के निर्माण का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स के चेयरमेन श्री नीरज खन्ना ने यहां वर्ल्ड क्लास हैंडीक्राफ्ट्स एंड गिफ्ट फेयर आयोजित करने का प्रस्ताव दिया। वहीं एटी फिल्म्स हॉलीवुड से श्री आशुतोष वाजपेयी ने हॉलीवुड फिल्मों एवं स्ट्रीमिंग वीडियो कंटेंट को चित्रोत्पला फिल्म सिटी में लाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपा।उल्लेखनीय है कि राज्य में फिल्म टूरिज्म की व्यापक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की “कैपिटल इन्वेस्टमेंट हेतु राज्यों को विशेष सहायता – ग्लोबल स्तर के आइकॉनिक पर्यटन केंद्रों का विकास” योजना के अंतर्गत इन दोनों परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस योजना के तहत चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण हेतु 95.79 करोड़ रुपये तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण हेतु 52.03 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं का क्रियान्वयन पीपीपी (पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के अंतर्गत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त निजी क्षेत्र से लगभग 300 करोड़ रुपये के निवेश की भी संभावना है। परियोजनाओं को दो वर्षों की समयावधि में पूर्ण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जाएंगे। फिल्म सिटी के निर्माण से छत्तीसगढ़ में स्थानीय एवं अन्य वाणिज्यिक फिल्मों और वेब सीरीज़ के निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। राज्य के प्राकृतिक दृश्य, पर्यटन स्थल एवं समृद्ध संस्कृति फिल्म शूटिंग के लिए अत्यंत अनुकूल हैं।फिल्म सिटी में गांव, शहर एवं गलियों के सेट, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, जेल एवं पुलिस चौकी, स्कूल-कॉलेज, मंदिर एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों के सेट, स्कल्प्चर गार्डन, शॉपिंग स्ट्रीट, प्रोडक्शन ऑफिस, स्टूडियो, प्रशासनिक भवन एवं पार्किंग विकसित की जाएगी। साथ ही पर्यटकों के लिए टॉय म्यूजियम, स्नो वर्ल्ड, होटल, रेस्टोरेंट, मल्टीप्लेक्स एवं एक्सपीरियंस सेंटर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर में लगभग 1500 लोगों की क्षमता वाला आधुनिक कन्वेंशन हॉल विकसित किया जाएगा, जिसमें मीटिंग, कॉन्फ्रेंस, बैंक्वेट, रेस्टोरेंट, अतिथि कक्ष, जिम, लाइब्रेरी, स्वीमिंग पूल एवं प्रशासनिक ब्लॉक जैसी सुविधाएं होंगी।उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में छत्तीसगढ़ में न्यूटन, जहानाबाद, कौन प्रवीण तांबे, द ग्रेट इंडियन मर्डर, ग्राम चिकित्सालय जैसी फिल्मों एवं वेब सीरीज़ की शूटिंग हो चुकी है, जिससे राज्य में वाणिज्यिक फिल्म निर्माण की व्यापक संभावनाएं स्पष्ट होती हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से स्थानीय कलाकारों एवं तकनीशियनों को नए अवसर प्राप्त होंगे। फिल्म फेस्टिवल, अवॉर्ड शो एवं अन्य मनोरंजन कार्यक्रमों के आयोजन की संभावनाएं भी सुदृढ़ होंगी। इसके साथ ही राज्य के पर्यटन स्थलों का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार होगा तथा फिल्म टूरिज्म के साथ सामान्य पर्यटन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
- -प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 से सम्मानित होना छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण : मुख्यमंत्रीरायपुर /नक्सल प्रभावित क्षेत्र कोंडागांव की होनहार बेटी योगिता मंडावी को जूडो में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए वर्ष 2025 का प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिलने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने हर्ष और गर्व व्यक्त किया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि योगिता मंडावी की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत परिश्रम और अनुशासन का परिणाम है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की लाखों बेटियों के सपनों की जीत भी है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी योगिता ने जिस समर्पण और संकल्प के साथ आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन किया है, वह युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि योगिता मंडावी भविष्य में भी अपनी मेहनत और लगन से छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित करती रहेंगी। उन्होंने योगिता के उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
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रायपुर । कबीरधाम जिले के मुख्यालय कवर्धा में गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन आचार्य पंथ श्री गृंध मुनि नाम साहब शासकीय स्नातकोत्तर कालेज कवर्धा में वाणिज्य उद्योग एवं श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न होगा। गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह 26 जनवरी 2026 को प्रातः 9 बजे से प्रारंभ होगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि द्वारा ध्वजारोहण एवं सलामी, परेड का निरीक्षण, मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन, शहीद परिवार का सम्मान तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी का सम्मान किया जाएगा। साथ ही स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृति कार्यक्रम की प्रस्तुति एवं विभिन्न विभागों द्वारा झांकी प्रदर्शन किया जाएगा।
- –जिले में 54 आजीविका डबरी निर्माण का लक्ष्य निर्धारितदुर्ग/ग्रामीण क्षेत्रों में हितग्राहियों की आय बढ़ाने तथा स्थायी आजीविका के साधनों को सुदृढ़ करने की दिशा में जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत वर्ष 2025-26 के लिए जिले में 54 आजीविका डबरी निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह योजना विभिन्न विभागों के कन्वर्जेन्स के माध्यम से संचालित की जा रही है, जिससे ग्रामीण परिवारों को बहुआयामी लाभ प्राप्त होंगे।यह लक्ष्य जीआईएस बेस्ड प्लानिंग के तहत सेटेलाइट डेटा के आधार पर तय किया गया है, जिससे डबरी निर्माण के उपयुक्त स्थलों का वैज्ञानिक चयन सुनिश्चित किया जा सके। आजीविका डबरी के निर्माण से वर्षा जल संचयन, भू-जल रिचार्ज तथा खेतों की सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ होगी। इससे खरीफ एवं रबी दोनों फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होगी। साथ ही पशुपालन एवं मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के माध्यम से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर भी प्राप्त होंगे। स्व-सहायता समूहों की दीदियों के लिए यह योजना विशेष रूप से लाभकारी है। आजीविका डबरी निर्माण से खेती-किसानी से जुड़े कार्यों में सहभागिता बढ़ेगी तथा आजीविका सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी। अधिनियम के अंतर्गत किए जाने वाले सभी कार्य राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना का हिस्सा होंगे, जिनमें जल सुरक्षा, मूलभूत ढांचा तथा आजीविका आधारित गतिविधियाँ शामिल हैं।जिले में 54 आजीविका डबरी के निर्माण से बड़ी संख्या में ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा, ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी तथा जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण के अंतर्गत स्वीकृत डबरी निर्माण कार्यों का शुभारंभ ग्राम पंचायत स्तर पर किया गया। इस अवसर पर स्व-सहायता समूहों की महिलाएं एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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