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नयी दिल्ली. स्वास्थ्य मंत्रालय चार से दस मई तक देशभर की सभी स्वास्थ्य सुविधाओं में 'अग्नि सुरक्षा सप्ताह' का आयोजन करेगा, जिसका उद्देश्य अग्नि जोखिमों की रोकथाम और उनसे निपटने की तैयारी को मजबूत करना तथा जागरूकता बढ़ाना है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में शनिवार को कहा गया कि राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों के सहयोग से आयोजित किए जा रहे सप्ताह भर चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव द्वारा यहां कर्तव्य भवन में किया जाएगा। उद्घाटन समारोह का एक प्रमुख आकर्षण स्वास्थ्य सचिव द्वारा "स्वास्थ्य सुविधाओं में अग्नि सुरक्षा" पर संकल्प दिलाना होगा, जिसमें स्वास्थ्य संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानदंडों और तैयारियों के उपायों का कड़ाई से पालन करने की प्रतिबद्धता दोहराई जाएगी।
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नयी दिल्ली. केंद्र ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के दायरे को बढ़ाते हुए कार्यक्रम के संशोधित दिशानिर्देशों के तहत मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों और मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी गैर-संचारी बीमारियों (एनसीडी) के जोखिम कारकों की जांच को भी शामिल किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में संपन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में अच्छी प्रथाओं और नवाचारों पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान आरबीएसके 2.0 दिशानिर्देश जारी किए, जो प्रमुख बाल स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम में एक बड़ा बदलाव है। एक दशक से अधिक के क्रियान्वयन के आधार पर, अद्यतन ढांचा कार्यक्रम के स्थापित दृष्टिकोण - जन्मजात दोष, रोग, कमियां और विकासात्मक देरी - को व्यापक बनाता है। साथ ही व्यवहार संबंधी विकार, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और जीवनशैली से संबंधित बीमारियों सहित उभरती हुई बाल स्वास्थ्य चिंताओं को भी शामिल करता है। संशोधित दिशा-निर्देशों में जन्म से लेकर 18 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए देखभाल की एक व्यापक निवारक, प्रोत्साहक और उपचारात्मक श्रृंखला शुरू की गई है, जिसमें डिजिटलीकरण और देखभाल की निरंतरता पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, उन्नत जांच ढांचे का उद्देश्य बच्चों और किशोरों को प्रभावित करने वाली स्वास्थ्य स्थितियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए शीघ्र पहचान और समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है। इस कार्यक्रम के तहत जांच सेवाएं सचल स्वास्थ्य दलों के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में जारी रहेंगी, ताकि व्यापक पहुंच और सार्वभौमिक कवरेज सुनिश्चित किया जा सके। मंत्रालय ने कहा कि नये दिशा-निर्देशों का उद्देश्य समुदाय स्तर पर की गई जांच से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच और इलाज तक जाने की प्रक्रिया को और मजबूत बनाना है। इसके लिए एक मजबूत निगरानी प्रणाली बनायी जाएगी, जिससे मरीज बीच में इलाज छोड़कर न जाएं और उन्हें समय-समय पर आगे की देखभाल मिलती रहे। सरकार के डिजिटल स्वास्थ्य अभियान के तहत आरबीएसके 2.0 में डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड, वास्तविक समय का डेटा प्रणाली और एकीकृत मंच शामिल किए गए हैं। मंत्रालय ने कहा कि ये डिजिटल नवाचार कार्यक्रम की कार्यक्षमता, जवाबदेही और तथ्यों/डेटा के आधार पर फैसले लेने में मदद करेंगे।
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नई दिल्ली। भारत से जुड़े एक और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) टैंकर ने सफलतापूर्वक फारस की खाड़ी में मौजूद संकरे समुद्री रास्ते हॉर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। भारत से जुड़े एलपीजी टैंकर ने हॉर्मुज स्ट्रेट ऐसे समय पर पार किया है, जब अमेरिका और ईरान दोनों के बीच लगातार तनाव जारी है, जिससे स्ट्रेट से आवाजाही करीब रुक गई है। इसे काफी अहम समुद्री रास्ता माना जाता है, क्योंकि इससे दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है।
शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाला जहाज, सर्व शक्ति, जो खाना पकाने के ईंधन के रूप में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली लगभग 45,000 टन एलपीजी ले जा रहा था, शनिवार को ईरान के लारक और केशम द्वीपों के पास से गुजरने के बाद ओमान की खाड़ी में प्रवेश करते हुए देखा गया। माना जा रहा है कि यह जहाज भारत की ओर जा रहा है। सर्वशक्ति, एक विशाल गैस वाहक पोत है, जो पहले फारस की खाड़ी और भारतीय बंदरगाहों के बीच मार्गों पर संचालित होता रहा है।ईरान से जुड़े संघर्ष के शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र में चलने वाले पोतों द्वारा व्यापक रूप से अपनाए गए सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत, यह पोत वर्तमान में अपने भारतीय गंतव्य और चालक दल के विवरण का प्रसारण कर रहा है। इस जहाज को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह ईरान से जुड़े जहाजों को निशाना बनाकर अमेरिका के नेतृत्व में शुरू की गई नाकाबंदी के बाद भारत से जुड़े किसी टैंकर की पहली यात्रा है।इन प्रतिबंधों के कारण होर्मुज स्ट्रेट से टैंकरों का आवागमन लगभग शून्य हो गया था, जिससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक बाधित हो गया था। सर्वशक्ति उन सबसे बड़े जहाजों में से एक है जिन्होंने पिछले महीने स्ट्रेट के संक्षिप्त और अव्यवस्थित रूप से फिर से खुलने के बाद से इस मार्ग से यात्रा की है, जिसके तुरंत बाद नए प्रतिबंध लगा दिए गए थे।पिछले महीने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के बाद से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की पहली खेप होर्मुज स्ट्रेट से गुजरी है, जो कि नाकाबंदी में ढील के संकेत देता है। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, एलएनजी टैंकर मुबाराज – जिसने मार्च की शुरुआत में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के दास द्वीप प्लांट से माल लोड किया था – भारत के दक्षिणी छोर से गुजरा था। यह जहाज कई हफ्तों तक फारस की खाड़ी में निष्क्रिय रहा और लगभग 31 मार्च से सिग्नल भेजना बंद कर दिया था, जिसके बाद सोमवार को यह भारत के पश्चिम में फिर से दिखाई दिया। -
नई दिल्ली। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों में हुए मतदान के बाद सोमवार को होने वाली मतगणना की तैयारियों के बीच मतगणना केंद्रों पर लगभग 18,000 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। प्राधिकरणों ने सभी 62 मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा सुनिश्चित की है, जहां इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) सुरक्षित रखी गई हैं और उन्हें सख्त निगरानी में खोला जाएगा। मतगणना प्रक्रिया से यह तय होगा कि राज्य में अगली सरकार कौन बनाएगा, जिसे लेकर राजनीतिक दलों और आम जनता में भारी उत्सुकता है।
इस चुनाव में चार-कोणीय मुकाबला देखने को मिला, जिसमें डीएमके नेतृत्व वाला सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस, एआईएडीएमके नेतृत्व वाला नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए), नाम तमिलर काची (एनटीके) और अभिनेता विजय की तमिलगा वेट्ट्रि कझगम (टीवीके) शामिल रहे।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TVK की एंट्री ने वोटों के बंटवारे के कारण चुनावी समीकरणों को काफी बदल दिया है, जिससे अनुमान लगाना और जटिल हो गया है। नतीजों से पहले प्रमुख सवाल बने हुए हैं: क्या DMK सत्ता में वापसी कर इतिहास रचेगी? क्या AIADMK-BJP गठबंधन वापसी कर पाएगा? क्या विजय किंगमेकर बनेंगे या मजबूत विपक्ष के रूप में उभरेंगे?मतगणना सुबह 8 बजे डाक मतपत्रों से शुरू होगी, जिसके बाद 8:30 बजे EVM के वोट गिने जाएंगे। शांतिपूर्ण प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए पूरे राज्य में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मतगणना केंद्रों पर तैनात कर्मियों के अलावा, 40 से अधिक कंपनियां सशस्त्र अर्धसैनिक बलों की भी तैनात की गई हैं। कुल मिलाकर, लगभग एक लाख पुलिसकर्मी तमिलनाडु भर में ड्यूटी पर रहेंगे। पुलिस महानिदेशक संदीप राय राठौर के आदेश पर यह व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। वरिष्ठ अधिकारियों-आईजी, डीआईजी, कमिश्नर और पुलिस अधीक्षकों-को अपने-अपने क्षेत्रों में कड़ी निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।केवल चेन्नई में ही क्वीन मैरी कॉलेज, अन्ना यूनिवर्सिटी (गिंडी) और लोयोला कॉलेज में तीन मतगणना केंद्र बनाए गए हैं, जहां करीब 3,000 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। इसके अलावा, किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए महानगर क्षेत्र में 20,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। सुरक्षा व्यवस्था संवेदनशील स्थानों, जैसे राजनीतिक दलों के कार्यालयों तक भी बढ़ाई गई है, ताकि परिणामों की घोषणा के दौरा न कानून-व्यवस्था बनी रहे।मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक के अनुसार, मतगणना के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। ईवीएम वोटों के लिए 234 हॉल और डाक मतपत्रों के लिए 240 हॉल बनाए गए हैं। कुल 3,324 मतगणना टेबल का उपयोग किया जाएगा। इस प्रक्रिया में 10,545 अधिकारी शामिल होंगे, जिनकी सहायता के लिए 4,624 माइक्रो-ऑब्जर्वर तैनात किए गए हैं, ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।भारत निर्वाचन आयोग ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए एक-एक मतगणना पर्यवेक्षक नियुक्त किया है, यानी कुल 234 पर्यवेक्षक इस प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। इसके अलावा, डाक मतपत्रों की गिनती के लिए 1,135 सहायक रिटर्निंग अधिकारी तैनात किए गए हैं, जहां हर 500 वोट पर एक मतगणना टेबल निर्धारित की गई है।सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए सभी मतगणना केंद्रों पर तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। पहली बार प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए क्यूआर कोड आधारित फोटो पहचान पत्र लागू किए गए हैं, जिससे केवल अधिकृत लोगों को ही सत्यापन के बाद प्रवेश मिल सके। परिणामों की घोषणा प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के रिटर्निंग अधिकारी द्वारा पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए की जाएगी और यह चुनाव आयोग के आधिकारिक प्लेटफॉर्म-ईसीआई नेट ऐप और वेबसाइट पर भी उपलब्ध होंगे। जैसे ही मतगणना शुरू होगी, पूरा राज्य एक निर्णायक जनादेश का इंतजार करेगा, जो तमिलनाडु के राजनीतिक भविष्य को तय करेगा। -
श्री विजय पुरम. अंडमान निकोबार प्रशासन ने शनिवार को राधानगर बीच पर पानी के भीतर दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज फहराकर नया 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड' बनाया। यह विशाल तिरंगा स्वराज द्वीप (हैवलॉक द्वीप) में समुद्र के भीतर एक जटिल और सटीक समन्वित अभियान के तहत फहराया गया, जिसमें कई एजेंसियों और प्रशिक्षित गोताखोरों ने भाग लिया। इस तिरंगे की लंबाई 60 मीटर है जबकि चौड़ाई 40 मीटर है। कार्यक्रम को देखने के लिए उपराज्यपाल डी के जोशी, मुख्य सचिव चंद्र भूषण कुमार और पुलिस महानिदेशक एचएस धालीवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। अंडमान निकोबार पुलिस, वन विभाग, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के कर्मियों के साथ-साथ विभिन्न गोताखारी केंद्रों के गोताखोरों ने पानी के भीतर ध्वज फहराने के इस जटिल अभियान को सफल बनाने में सहयोग किया। सुबह 10:35 बजे, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के निर्णायक ऋषि नाथ ने औपचारिक रूप से इस उपलब्धि की पुष्टि की और जोशी को प्रमाणपत्र प्रदान किया। सभा को संबोधित करते हुए जोशी ने इस उपलब्धि को द्वीपों की विशिष्ट उपलब्धियों में एक महत्वपूर्ण क्षण बताते हुए इसमें शामिल लोगों के समन्वय और समर्पण की सराहना की। प्रशासन रविवार को स्वराज द्वीप के 'लाइटहाउस डाइव साइट' पर 'सबसे ऊंचा मानव पिरामिड' बनाने का एक और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का प्रयास करेगा, जिसमें उपराज्यपाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद है। यह उपलब्धि अंडमान निकोबार द्वीप समूह को साहसिक पर्यटन, समुद्री गतिविधियों और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त आयोजनों के लिए एक उभरते गंतव्य के रूप में दर्शाती है।
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नयी दिल्ली. सरकार ने रोहित जैन को तीन साल के कार्यकाल के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है। जैन, टी रबी शंकर का स्थान लेंगे, जिनका विस्तारित कार्यकाल शनिवार को समाप्त हो गया। सूत्रों ने सोमवार को बताया कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने तीन मई या उसके बाद पदभार ग्रहण करने की तारीख से तीन साल के लिए उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। रोहित जैन इस समय आरबीआई में कार्यकारी निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
आरबीआई अधिनियम, 1934 के अनुसार केंद्रीय बैंक में चार डिप्टी गवर्नर होने चाहिए। इनमें से दो आंतरिक रैंक से, एक वाणिज्यिक बैंकर और एक अर्थशास्त्री होना चाहिए जो मौद्रिक नीति विभाग का नेतृत्व करे। अन्य तीन डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे, पूनम गुप्ता और एस सी मुर्मू हैं। टी रबी शंकर को पहली बार सितंबर 2021 में तीन साल के लिए डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया गया था। उन्हें 2024 में और उसके बाद 2025 में एक-एक साल का विस्तार दिया गया था। -
नई दिल्ली। मोतियों की नगरी हैदराबाद में आयोजित योग महोत्सव में हजारों लोगों ने भाग लेकर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियों को नई ऊर्जा दी। मुख्य आयोजन से 50 दिन पहले हुए इस कार्यक्रम में 20 से अधिक देशों की भागीदारी देखने को मिली। कान्हा शांति वनम में आयोजित इस कार्यक्रम में 6,000 से अधिक प्रतिभागियों ने एक साथ भुजंगासन का अभ्यास किया। यह उपलब्धि एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज की गई, जो एक साथ योग आसन करने वाले सबसे बड़े समूहों में शामिल है।
इस योग महोत्सव में कजाकिस्तान, बुल्गारिया, क्यूबा, नामीबिया, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया सहित 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यह योग के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और भारत की सॉफ्ट पावर को दर्शाता है। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि योग भारत की प्राचीन विरासत ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक अनमोल उपहार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए स्वस्थ, अनुशासित और संतुलित समाज जरूरी है, जिसमें योग अहम भूमिका निभाता है।उन्होंने यह भी कहा कि हैदराबाद को तकनीक के साथ-साथ योग और समग्र स्वास्थ्य के वैश्विक केंद्र के रूप में भी उभरना चाहिए।आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में योग एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है।उन्होंने ‘योग 365’ अभियान का जिक्र करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य लोगों को रोजाना योग अपनाने के लिए प्रेरित करना है। साथ ही, 21 जून तक चलने वाले 100 दिवसीय निःशुल्क योग प्रशिक्षण कार्यक्रम में एक लाख से अधिक लोगों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।मंत्री ने घोषणा की कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की उलटी गिनती के तहत अगला योग महोत्सव खजुराहो में आयोजित किया जाएगा, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत और स्वास्थ्य परंपराओं का संगम है।आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दास ने कहा कि यह आयोजन देशभर में स्वास्थ्य और एकता को बढ़ावा देने वाला आंदोलन बनेगा। वहीं, हार्टफुलनेस के अध्यक्ष कमलेश डी पटेल (दाजी) ने ध्यान सत्र का संचालन किया।इस मौके पर सांसद डीके अरुणा और आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियों का अहम हिस्सा है, जो योग के जरिए स्वास्थ्य, कल्याण और संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। -
नई दिल्ली।‘ भारत ने शनिवार को स्वदेशी तकनीक के जरिए सेल ब्रॉडकास्ट सेवा की शुरुआत की। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय संचार व पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि यह पहल नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने और आपदा के समय त्वरित सूचना सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है।
सिंधिया ने स्पष्ट किया कि मोबाइल फोन पर आया अलर्ट भारत की नई मोबाइल आधारित आपदा संचार प्रणाली का एक परीक्षण संदेश है। इसे दूरसंचार विभाग ने सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक के जरिए विकसित किया है।सिंधिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अलर्ट की फोटो साझा करते हुए लिखा कि यदि किसी के मोबाइल पर ऐसा संदेश आया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह केवल परीक्षण के उद्देश्य से भेजा गया संदेश है।उन्होंने बताया कि यह प्रणाली दूरसंचार विभाग के प्रमुख अनुसंधान एवं विकास केंद्र सी-डॉट द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सहयोग से विकसित की गई है।सिंधिया ने कहा कि भविष्य में इसी प्रणाली के जरिए आपदा या आपातकाल की स्थिति में स्थानीय भाषा और लोकेशन के आधार पर तुरंत अलर्ट भेजे जा सकेंगे। इससे नागरिकों तक सही समय पर सटीक जानकारी पहुंचाना संभव होगा। इससे पहले जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सुझाव और मार्गदर्शन में इस ‘सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम’ का शुभारंभ किया गया।इस अत्याधुनिक प्रणाली के जरिए आपदा, आपातकालीन स्थिति और जनसुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं सीधे मोबाइल फोन पर तुरंत भेजी जा सकेंगी। देशभर में इसके परीक्षण के दौरान लोगों के मोबाइल पर बीप ध्वनि के साथ इमरजेंसी अलर्ट संदेश भी प्रदर्शित हुआ। -
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने रेलवे पुलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और मेट्रो रेल की विद्युत प्रणालियों को उन्नत बनाने के लिए 895.30 करोड़ रुपए की प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन योजनाओं का उद्देश्य सुरक्षा, क्षमता और संचालन दक्षता को बेहतर बनाना है। कोलकाता मेट्रो के उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर को मजबूत करने के लिए 671.72 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी मिली है। इसके तहत 7 नए ट्रैक्शन सबस्टेशन बनाए जाएंगे और मौजूदा 11 केवी बिजली प्रणाली को 33 केवी में अपग्रेड किया जाएगा।इस उन्नयन से मेट्रो की संचालन क्षमता में बड़ा बदलाव आएगा। पहले जहां ट्रेनें 5 मिनट के अंतराल पर चलती थीं, अब उन्हें 2.5 मिनट के अंतराल पर चलाने की मंजूरी मिल गई है, जिससे बढ़ती यात्री मांग को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
1980 के दशक में विकसित मेट्रो सिस्टम अब अपनी क्षमता की सीमा तक पहुंच चुका है। पुराने सबस्टेशन और उपकरणों में स्पेयर पार्ट्स की कमी के कारण रखरखाव में दिक्कतें आ रही थीं। नए उन्नयन से बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय होगी और सेवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।दक्षिण पूर्वी रेलवे के आद्रा डिवीजन में 223.58 करोड़ रुपए की लागत से पुल अवसंरचना को मजबूत किया जाएगा। मधुकुंडा-दामोदर खंड पर स्थित पुराने पुल (संख्या 520) के आधारभूत ढांचे का पुनर्निर्माण किया जाएगा, जो 1903 और 1965 में बनाए गए थे और अब कमजोर हो चुके हैं।यह खंड आसनसोल और टाटानगर के बीच एक अहम रेलवे लिंक है और कोयला गलियारे का हिस्सा भी है। इस परियोजना से सुरक्षा, विश्वसनीयता और संचालन दक्षता में सुधार होगा। साथ ही दुर्गापुर-आसनसोल क्षेत्र के प्रमुख उद्योगों को बेहतर रेल संपर्क का लाभ मिलेगा।इन परियोजनाओं के जरिए भारतीय रेलवे आधुनिक, सुरक्षित और उच्च क्षमता वाली रेल प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मेट्रो उन्नयन से यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी, जबकि पुल परियोजना से माल ढुलाई और औद्योगिक संपर्क को मजबूती मिलेगी। ( -
नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि 1 साल से कम उम्र के बच्चों में अत्यधिक स्क्रीन टाइम, 3 साल की उम्र तक ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के बढ़े हुए खतरे से जुड़ा हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शुरुआती उम्र में स्क्रीन के अधिक संपर्क से बच्चों के मस्तिष्क विकास और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर एक जटिल न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जिसमें बच्चों के व्यवहार, संचार और सामाजिक संपर्क में अंतर देखा जाता है। कई मामलों में इसके संकेत 12 से 18 महीने की उम्र में ही दिखने लगते हैं, जिससे समय पर पहचान और हस्तक्षेप बेहद जरूरी हो जाता है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के 2025 के अनुमान के अनुसार, लगभग हर 31 में से 1 व्यक्ति में ASD पाया जाता है। यह आंकड़ा मजबूत पब्लिक हेल्थ सिस्टम और जागरूकता की जरूरत को दर्शाता है।एम्स के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शेफाली गुलाटी ने बताया कि कई शोध और मेटा-एनालिसिस में पाया गया है कि जिन बच्चों में स्क्रीन एक्सपोज़र जल्दी शुरू होता है और स्क्रीन टाइम अधिक होता है, उनमें ऑटिज्म के लक्षण ज्यादा देखे जाते हैं।एम्स के अध्ययन में भी यह सामने आया कि ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों में स्क्रीन टाइम की शुरुआत कम उम्र में हुई थी। साथ ही, लड़कों में इसकी दर अधिक देखी गई, हालांकि लड़कियों में भी लक्षण स्पष्ट रूप से मौजूद थे।विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए स्क्रीन टाइम को सीमित रखना बेहद आवश्यक है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की गाइडलाइंस के अनुसार 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए। 18 महीने से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए सीमित और उद्देश्यपूर्ण (एक्टिव) स्क्रीन उपयोग की सलाह दी जाती है, जबकि 7 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम को अधिकतम 2 घंटे तक सीमित रखने की अनुशंसा की गई है।विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को मोबाइल या टीवी के जरिए व्यस्त रखने के बजाय माता-पिता के साथ सीधा संवाद और इंटरैक्शन उनके मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए ज्यादा जरूरी है।ऑटिज्म की पहचान आमतौर पर 2 से 3 साल की उम्र में होती है, हालांकि 18 महीने के बाद इसके संकेत देखे जा सकते हैं। इसका कोई एक निश्चित मेडिकल टेस्ट नहीं है; पहचान बच्चे के व्यवहार, संवाद क्षमता और सामाजिक प्रतिक्रिया के आधार पर की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती वर्षों में संतुलित माहौल, सीमित स्क्रीन टाइम और परिवार के साथ अधिक समय बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए बेहद जरूरी है। जागरूकता और समय पर हस्तक्षेप से ऑटिज्म से जुड़ी चुनौतियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। -
नई दिल्ली। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने प्रख्यात गीतकार, लेखक और संचार विशेषज्ञ श्री प्रसून जोशी को भारत के सार्वजनिक सेवा प्रसारक प्रसार भारती का अध्यक्ष नियुक्त किया है।
श्री जोशी साहित्य, विज्ञापन, सिनेमा और सार्वजनिक संचार के क्षेत्र में व्यापक योगदान देने वाले एक प्रतिष्ठित रचनात्मक व्यक्ति हैं। अपने प्रभावशाली लेखन और गहरी सांस्कृतिक संवेदनशीलता के लिए जाने जाने वाले जोशी ने समकालीन भारतीय मीडिया की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके कार्यों में प्रशंसित फिल्मी गीत, विज्ञापन अभियान और सामाजिक रूप से प्रासंगिक कहानियां शामिल हैं जो देश भर के विभिन्न दर्शकों से जुड़ती हैं।उनकी नियुक्ति पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “प्रसार भारती बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में श्री प्रसून जोशी जी की नियुक्ति पर हार्दिक बधाई। प्रसून जी एक विलक्षण रचनात्मक व्यक्तित्व हैं, जिन्हें विज्ञापन, साहित्य, कला और सिनेमा जगत में विश्व स्तर पर ख्याति प्राप्त है, फिर भी उनका हृदय भारत के लिए धड़कता है। उनके शब्दों में हमारी मिट्टी की सुगंध समाई है और उनकी दृष्टि हमारी संस्कृति के शाश्वत सार को प्रतिबिंबित करती है। उनके नेतृत्व में प्रसार भारती को नई ऊर्जा, गहरा उद्देश्य और एक नई रचनात्मक आवाज मिलेगी। उनके आगामी कार्यकाल के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।”इस नियुक्ति से पहले, श्री जोशी अगस्त 2017 से मुंबई स्थित केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहे हैं, जहां उन्होंने फिल्म उद्योग के हितधारकों के साथ जुड़कर फिल्म प्रमाणन प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने में योगदान दिया। सीबीएफसी में उनका कार्यकाल रचनात्मक अभिव्यक्ति और नियामक उत्तरदायित्व के प्रति संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है। इससे पहले, वे मैक्कैन वर्ल्ड ग्रुप इंडिया के सीईओ और मैक्कैन वर्ल्ड ग्रुप एशिया पैसिफिक (मैक्कैन एरिक्सन की एक सहायक कंपनी) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वह 2016 से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के न्यासियों में से एक हैं।रचनात्मक उद्योगों और सार्वजनिक संचार में अपने व्यापक अनुभव के साथ, श्री जोशी से प्रसार भारती के नेतृत्व में एक अनूठा दृष्टिकोण लाने की उम्मीद है, ऐसे समय में जब सार्वजनिक प्रसारण तीव्र तकनीकी परिवर्तन और विकसित होती श्रोताओं की अपेक्षाओं का सामना कर रहा है।प्रसार भारती के बारे मेंप्रसार भारती (ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) अधिनियम, 1990 के तहत स्थापित और 1997 से कार्यरत, प्रसार भारती भारत का वैधानिक स्वायत्त सार्वजनिक सेवा प्रसारक है। इसके दो प्रमुख विभाग हैं:ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर)- विश्व के सबसे बड़े रेडियो नेटवर्कों में से एक, जो शहरी और ग्रामीण भारत में लाखों श्रोताओं तक कई भाषाओं और बोलियों में पहुंचता है।दूरदर्शन (डीडी)- भारत का राष्ट्रीय टेलीविजन प्रसारक, जो समाचार, शिक्षा, मनोरंजन और सांस्कृतिक सामग्री सहित व्यापक कार्यक्रम प्रस्तुत करता है।प्रसार भारती ने सार्वजनिक प्रसारण की भावना को बढ़ावा देने के लिए फ्री-टू-एयर ओटीटी सेवाओं को मजबूत करने हेतु वेव्स ओटीटी प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है।प्रसार भारती सूचना के प्रसार, राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और देश भर में विश्वसनीय सार्वजनिक प्रसारण सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अपने विशाल स्थलीय और डिजिटल नेटवर्क के साथ, यह डिजिटल प्लेटफॉर्म, डीटीएच सेवाओं और अभिलेखीय पहलों के माध्यम से अपनी पहुंच का विस्तार करना जारी रखता है। - नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने शनिवार को शिक्षाविद जोरम अनिया और विद्वान-लेखक आर. बालासुब्रमण्यम को नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया।इन दो नियुक्तियों के साथ ही आयोग में उपाध्यक्ष सहित सदस्यों की कुल संख्या सात हो गई है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीति आयोग के पदेन अध्यक्ष हैं।कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, “प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) ने डॉ. आर बालासुब्रमण्यम और डॉ. जोरम अनिया को नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से और अगले आदेश तक पूर्णकालिक सदस्यों पर लागू होने वाले समान नियमों एवं शर्तों पर नियुक्त करने की स्वीकृति दी है।”सरकार ने 24 अप्रैल को नीति आयोग का पुनर्गठन करते हुए अशोक कुमार लाहिड़ी को उपाध्यक्ष और अर्थशास्त्री के.वी. राजू, एम्स के निदेशक एम. श्रीनिवास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अभय करंदीकर, वैज्ञानिक गोबर्धन दास और पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गाबा को पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया था।प्रधानमंत्री मोदी ने नए नियुक्त सदस्यों को बधाई देते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त होने पर डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम जी और डॉ. जोरम अनिया जी को हार्दिक बधाई। विभिन्न मुद्दों पर उनका व्यापक अनुभव और गहन समझ नीति निर्माण प्रक्रिया को मजबूत करेगी।”उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि उनका (बालासुब्रमण्यम और अनिया का) योगदान सभी क्षेत्रों में नवाचार और विकास को गति प्रदान करेगा। उनके उज्ज्वल और सफल कार्यकाल की कामना करता हूं।”सूत्रों के अनुसार, अनिया का आयोग में शामिल होना एक ऐतिहासिक क्षण है, जिससे अरुणाचल प्रदेश की एक प्रख्यात बुद्धिजीवी को राष्ट्रीय नीति-निर्माण के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचने का अवसर मिला है।कुशल शिक्षाविद, एसोसिएट प्रोफेसर और अरुणाचल प्रदेश निजी शिक्षा नियामक आयोग की सदस्य अनिया को शिक्षण, अनुसंधान और सार्वजनिक नीति में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है।वह निशि समुदाय की पीएचडी हासिल करने वाली पहली महिला होने के साथ ही राज्य में हिंदी भाषा में पीएचडी करने वाली पहली महिला हैं, जिन्होंने साहित्य, संस्कृति और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।विद्वान-लेखक बालासुब्रमण्यम सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ और विकास कार्यकर्ता हैं।योग्य चिकित्सक होने के साथ-साथ वह स्वामी विवेकानंद युवा आंदोलन और ग्रासरूट रिसर्च एंड एडवोकेसी मूवमेंट (ग्राम) के संस्थापक हैं। बालासुब्रमण्यम ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के हार्वर्ड कैनेडी स्कूल से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है।
- नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुजरात में नेशनल हाईवे-48 के सूरत-भरूच खंड पर स्थित चोरायासी टोल प्लाजा पर देश की पहली मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) बैरियर-रहित टोलिंग प्रणाली का शुभारंभ किया। यह नई तकनीक वाहनों को बिना रुके टोल भुगतान की सुविधा देती है। इस अत्याधुनिक प्रणाली में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) और FASTag तकनीक का उपयोग किया गया है। इससे वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी और टोल संग्रह पूरी तरह स्वचालित तरीके से होगा। एमएलएफएफ प्रणाली को भारत के टोलिंग इकोसिस्टम के डिजिटलीकरण और राष्ट्रीय राजमार्गों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। इससे न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और टोल संचालन अधिक पारदर्शी बनेगा।इस नई व्यवस्था से वाहनों के रुकने की आवश्यकता खत्म होने के कारण ईंधन की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। साथ ही, टोल संचालन में मानवीय हस्तक्षेप कम होने से प्रणाली अधिक कुशल और विश्वसनीय बनेगी। नितिन गडकरी ने कहा कि यह पहल आम नागरिकों के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बेहतर बनाएगी और देश में माल एवं लॉजिस्टिक्स की तेज आवाजाही सुनिश्चित कर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार विश्व स्तरीय, तकनीक आधारित और यात्री-अनुकूल राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया 2 मई 2026 को देशव्यापी मोबाइल-आधारित आपदा संचार प्रणाली का शुभारंभ करेंगे। यह प्रणाली दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सहयोग से विकसित की गई है।
एनडीएमए ने सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स (C-DOT) द्वारा विकसित एकीकृत अलर्ट सिस्टम ‘SACHET’ को लागू किया है। यह प्रणाली कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) पर आधारित है और देश के सभी 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय है। इस प्रणाली के जरिए अब तक 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में 134 अरब से अधिक एसएमएस अलर्ट भेजे जा चुके हैं। इसका उपयोग प्राकृतिक आपदाओं, मौसम चेतावनियों और चक्रवात जैसी स्थितियों में प्रभावी ढंग से किया गया है। नई व्यवस्था के तहत एसएमएस के साथ सेल ब्रॉडकास्ट (CB) तकनीक जोड़ी गई है। इसके जरिए किसी विशेष क्षेत्र के सभी मोबाइल फोनों पर एक साथ अलर्ट भेजा जाएगा, जिससे लगभग वास्तविक समय में सूचना पहुंच सकेगी। शुभारंभ के दौरान देश के सभी राज्यों की राजधानियों, दिल्ली और एनसीआर में मोबाइल पर टेस्ट संदेश भेजा जाएगा। यह संदेश हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में होगा, जिसमें नागरिकों को सूचित किया जाएगा कि यह केवल परीक्षण है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि टेस्ट संदेश मिलने पर घबराएं नहीं और किसी प्रकार की कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है। यह केवल आपदा चेतावनी प्रणाली की प्रभावशीलता जांचने के लिए किया जा रहा है। यह पहल समय-संवेदनशील परिस्थितियों—जैसे भूकंप, सुनामी, बिजली गिरने या रासायनिक दुर्घटनाओं—में त्वरित चेतावनी देने की क्षमता को मजबूत करेगी और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगी। -
जयपुर. अलवर जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर चलती कार में आग लगने से तीन महिलाओं और एक नाबालिग लड़की समेत पांच लोगों की जलकर मौत हो गई। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। यह घटना बुधवार रात को लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र के मौजपुर के पास हुई।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रियंका रघुवंशी ने बताया कि पुलिस को कल देर रात वाहन में आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। उन्होंने कहा, ''लगभग 15 मिनट में आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन तब तक कार पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी।'' पुलिस ने बताया कि सभी मृतक मध्य प्रदेश के शिवपुर जिले के निवासी थे और वैष्णो देवी की तीर्थयात्रा से लौट रहे थे। पुलिस उपाधीक्षक कैलाश जिंदल ने बताया कि चलती गाड़ी में आग लगने का कारण अब तक पता नहीं चल पाया है, हालांकि शॉर्ट सर्किट की आशंका है। सीएनजी की मौजूदगी से भी आग और भड़क उठी, जिससे वाहन में सवार लोगों को निकलने का मौका नहीं मिला। मृतकों में तीन महिलाएं, एक नाबालिग लड़की और एक पुरुष शामिल है। उन्होंने बताया, "वाहन से केवल कंकाल बरामद हुए हैं। उनकी पहचान के लिए डीएनए परीक्षण किए जाएंगे।"
कार चालक विनोद कुमार वाहन से कूदने में कामयाब रहा, लेकिन वह लगभग 80 प्रतिशत झुलस गया। अधिकारियों ने बताया कि उसे पहले पास के एक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए जयपुर रेफर कर दिया गया। मामले में आगे की जांच जारी है। -
क्योंझर. ओडिशा के क्योंझर जिले में अपनी मृत बहन के बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए एक आदिवासी व्यक्ति द्वारा उसका कंकाल बैंक में ले जाकर उसकी मौत का प्रमाण पेश करने से जुड़े मामले की जांच राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को शुरू कर दी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने उत्तरी मंडल के राजस्व संभागीय आयुक्त (आरडीसी) को इस घटना की जांच शुरू करने का निर्देश दिया था। सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हुआ था, जिसमें 50 वर्षीय आदिवासी व्यक्ति कंकाल को ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालीपोसी शाखा में ले जाते हुए दिखा था। वीडियो के प्रसारित हो जाने से हंगामा मच गया, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने मामले की जांच का निर्देश दिया। उत्तरी मंडल के राजस्व संभागीय आयुक्त संग्राम केशरी महापात्रा, क्योंझर जिले के आयुक्त विशाल सिंह और अन्य अधिकारी बृहस्पतिवार को जांच के सिलसिले में ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालीपोसी शाखा पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि महापात्रा ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की और घटना के कारणों का पता लगाने के लिए बैंक अधिकारियों से पूछताछ की। टीम क्योंझर जिले के पटाना ब्लॉक के डियानाली गांव भी पहुंची और जीतू मुंडा से पूछताछ की जो अपनी बहन करला मुंडा (56) का कंकाल लेकर बैंक आया था। इस बीच, कांग्रेस की इकाई के पूर्व अध्यक्ष निरंजन पटनायक के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिन में मुंडा से मुलाकात की। बीजू जनता दल (बीजद)की एक तथ्य-अन्वेषी टीम भी बुधवार को मुंडा के घर पहुंची थी और पार्टी ने इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। अधिकारियों ने बताया कि ओडिशा सरकार ने मुंडा को 30,000 रुपये की सहायता प्रदान की है। मुंडा को अपनी दिवंगत बहन के बैंक खाते से पैसे मिल चुके हैं।
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चंडीगढ़. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने 'विकसित भारत' की दिशा में अपने सफर में सभी क्षेत्रों में, विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में, एक लंबी छलांग लगाई है। वह यहां सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में बेहतर और अनुकरणीय प्रथाओं तथा नवाचारों पर 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। नड्डा ने कहा, ''अगर मुझे इन पहलों के बारे में बात करनी हो, तो मैं निश्चित रूप से विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में हमारी स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने पर जोर दूंगा।'' उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी के गतिशील नेतृत्व में हमने पिछले दशक में एक लंबी छलांग लगाई है और कई नयी पहल शुरू की हैं।'' नड्डा ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण नीति वह है जिसका वह प्राय: उल्लेख करते हैं, वह है 2017 की व्यापक स्वास्थ्य नीति। उन्होंने कहा, ''अगर हम 1997-98 में शुरू की गई स्वास्थ्य नीति की बात करें, तो वह एक उपचारात्मक स्वास्थ्य नीति थी, जो लंबे समय से लागू थी। इसका मुख्य ध्यान उपचारात्मक पहलू पर था।'' नड्डा ने कहा, ''लेकिन 2017 में, जब हमने एक नयी नीति जारी की तो वह एक व्यापक, समग्र और समावेशी नीति थी।'' उन्होंने कहा कि इसमें रोकथाम, प्रोत्साहन, उपचारात्मक, पुनर्वास और वृद्धावस्था संबंधी पहलू शामिल हैं। इस अवसर पर, नड्डा ने स्वस्थ भारत और जननी पोर्टल, सर्वोत्तम प्रथाओं पर सार-संग्रह, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल टीम के लिए एकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके-2.0) की शुरुआत की। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों) के बारे में नड्डा ने कहा कि लगभग 1.85 लाख ऐसे केंद्र स्थापित किए गए हैं जो 1.40 अरब लोगों को जोड़ने वाले पहले संपर्क बिंदु हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ''हमारा प्रयास रोकथाम के पहलू को ध्यान में रखना है। चाहे वह उच्च रक्तचाप हो, मधुमेह हो, मुंह का कैंसर हो, स्तन कैंसर हो या गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर हो, हमने इन सभी बीमारियों के लिए 30 वर्ष की आयु में जांच अनिवार्य कर दी है।''
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बेंगलुरु. बेंगलुरु में बुधवार शाम हुई भारी बारिश ने तबाही मचा दी, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि और तेज हवाओं के कारण पेड़ उखड़ गए, कई प्रमुख इलाकों में जलभराव हो गया और यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। बेंगलुरु के बड़े हिस्सों में लगभग एक घंटे तक अचानक और तेज बारिश हुई, जिससे पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए और निचले इलाकों में पानी भर गया। कई सड़कें जलमग्न होने के कारण आवागमन ठप हो गया, जिससे व्यस्त समय में यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। मूसलाधार बारिश के दौरान बॉरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल की एक दीवार गिरने से सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें छह साल की एक बच्ची भी शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में दो लोग केरल के थे, जो अध्ययन दौरे पर आए थे। वे दीवार के पास शरण लिए हुए थे, तभी दीवार गिर गई। एक अन्य घटना में 35 वर्षीय रघु की बैनरघट्टा रोड स्थित वेगा सिटी मॉल के पास करंट लगने से मौत हो गई।
पुलिस ने बताया कि यारब नगर में एक अन्य घटना में छात्र सैयद सुफियान की बारिश के दौरान मोटरसाइकिल खड़ी करते समय बिजली के तार के संपर्क में आने से मौत हो गई। चामराजपेट में भी एक हादसे में मंजुनाथ नामक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जब तूफान के दौरान घर की छत का एक हिस्सा अचानक ढह गया। अचानक हुई इस बारिश ने पूरे शहर में भारी नुकसान पहुंचाया।
पुलिस ने बताया, ''अब तक बारिश से जुड़े हादसों में 10 लोगों की मौत हो चुकी है।'' इन हादसों में दीवार गिरना, करंट लगना और ढांचागत नुकसान शामिल हैं। नगर निकाय के अनुसार, बेंगलुरु में कम से कम 87 पेड़ उखड़ गए और 131 शाखाएं टूट गईं, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। इनमें से 60 पेड़ और 98 शाखाएं हटा दी गई हैं, जबकि मरम्मत का काम जारी है। सड़क किनारे खड़ी कई कारें और दोपहिया वाहन गिरे हुए पेड़ों के नीचे दब गए।
प्रमुख चौराहों और अंडरपास में जलभराव हो गया, जिसमें केआर सर्किल अंडरपास पूरी तरह डूब गया, जिससे पुलिस को वहां अवरोधक लगाने पड़े। यातायात जाम के कारण यात्री घंटों फंसे रहे। अधिकारियों ने बताया कि कई इलाकों में इमारतों को आंशिक नुकसान पहुंचा है और अचानक इतनी तीव्रता के तूफान के लिए लोग तैयार नहीं थे। प्रशासन ने अगले तीन दिनों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। -
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मतगणना केंद्रों में अनाधिकृत प्रवेश को पूरी तरह रोकने के लिए एक नई और आधुनिक क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र मॉड्यूल शुरू करने की घोषणा की है। यह प्रणाली ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म पर कार्य करेगी और मतगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित तथा दक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह नई व्यवस्था 4 मई 2026 को होने वाली मतगणना से लागू होगी। इसमें असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की विधानसभा चुनावों के साथ ही 5 राज्यों के 7 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव शामिल हैं। बाद में इसे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सभी भविष्य के आम चुनावों और उपचुनावों में विस्तारित किया जाएगा।यह पहल पिछले एक वर्ष में चुनाव आयोग द्वारा की गई 30 से अधिक सुधारात्मक पहलों की कड़ी में शामिल है। इससे पहले ब्लॉक स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) के लिए भी मानकीकृत क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र शुरू किए जा चुके हैं। नई प्रणाली मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के स्तर को और ऊंचा उठाएगी।मतगणना केंद्रों पर पहचान सत्यापन के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा तंत्र बनाया गया है। इनमें पहले और दूसरे स्तर पर रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) द्वारा जारी पारंपरिक फोटो पहचान पत्रों की मैन्युअल जांच की जाएगी। तीसरा और सबसे भीतरी सुरक्षा घेरा (मतगणना कक्ष के निकट) में प्रवेश केवल क्यूआर कोड स्कैनिंग के माध्यम से सफल सत्यापन के बाद ही मिलेगा। इससे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के अंदर जाने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।नए क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र उन सभी अधिकृत व्यक्तियों पर लागू होंगे जिन्हें मतगणना केंद्रों और मतगणना कक्षों में प्रवेश की अनुमति दी गई है। इनमें मुख्य रूप से रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ), सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी स्टाफ, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट, मतगणना एजेंट और अन्य अधिकृत अधिकारी शामिल हैं।अधिकृत मीडिया कर्मियों की सुविधा के लिए हर मतगणना केंद्र पर मतगणना कक्षों के पास एक अलग मीडिया केंद्र स्थापित किया जाएगा। मीडिया कर्मियों का प्रवेश पहले की भांति आयोग द्वारा जारी प्राधिकार पत्रों के आधार पर ही रहेगा।जिला निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को इस प्रणाली के सुचारू कार्यान्वयन के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें जांच चौकियों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती भी शामिल है ताकि पहुंच नियंत्रण निर्बाध और सुरक्षित रहे।सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अधिकारियों और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों को मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता, सुरक्षा और दक्षता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। -
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India, ECI) ने मतगणना केंद्रों में अनाधिकृत प्रवेश को पूरी तरह रोकने के लिए एक नई और आधुनिक क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र मॉड्यूल शुरू करने की घोषणा की है। यह प्रणाली ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म पर कार्य करेगी और मतगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित तथा दक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह नई व्यवस्था 4 मई 2026 को होने वाली मतगणना से लागू होगी। इसमें असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की विधानसभा चुनावों के साथ ही 5 राज्यों के 7 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव शामिल हैं। बाद में इसे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सभी भविष्य के आम चुनावों और उपचुनावों में विस्तारित किया जाएगा।यह पहल पिछले एक वर्ष में चुनाव आयोग द्वारा की गई 30 से अधिक सुधारात्मक पहलों की कड़ी में शामिल है। इससे पहले ब्लॉक स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) के लिए भी मानकीकृत क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र शुरू किए जा चुके हैं। नई प्रणाली मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के स्तर को और ऊंचा उठाएगी।मतगणना केंद्रों पर पहचान सत्यापन के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा तंत्र बनाया गया है। इनमें पहले और दूसरे स्तर पर रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) द्वारा जारी पारंपरिक फोटो पहचान पत्रों की मैन्युअल जांच की जाएगी। तीसरा और सबसे भीतरी सुरक्षा घेरा (मतगणना कक्ष के निकट) में प्रवेश केवल क्यूआर कोड स्कैनिंग के माध्यम से सफल सत्यापन के बाद ही मिलेगा। इससे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के अंदर जाने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।नए क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र उन सभी अधिकृत व्यक्तियों पर लागू होंगे जिन्हें मतगणना केंद्रों और मतगणना कक्षों में प्रवेश की अनुमति दी गई है। इनमें मुख्य रूप से रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ), सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी स्टाफ, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट, मतगणना एजेंट और अन्य अधिकृत अधिकारी शामिल हैं।अधिकृत मीडिया कर्मियों की सुविधा के लिए हर मतगणना केंद्र पर मतगणना कक्षों के पास एक अलग मीडिया केंद्र स्थापित किया जाएगा। मीडिया कर्मियों का प्रवेश पहले की भांति आयोग द्वारा जारी प्राधिकार पत्रों के आधार पर ही रहेगा। जिला निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को इस प्रणाली के सुचारू कार्यान्वयन के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें जांच चौकियों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती भी शामिल है ताकि पहुंच नियंत्रण निर्बाध और सुरक्षित रहे।सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अधिकारियों और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों को मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता, सुरक्षा और दक्षता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान 1 मई को ओडिशा के दौरे पर रहेंगे, जहां वे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV (PMGSY-IV) के शुभारंभ के साथ राज्य को बड़ी विकासात्मक सौगात देंगे। इस दौरान 1,701.84 किलोमीटर लंबाई की 827 सड़क परियोजनाओं को करीब 1,698.04 करोड़ रुपए की लागत से आगे बढ़ाया जाएगा।
यह कार्यक्रम रायगड़ा के आईएसीआर ग्राउंड, बरिजोला में आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री मुख्यमंत्री को PMGSY-IV की स्वीकृति पत्र सौंपेंगे और संयुक्त रूप से परियोजनाओं का शुभारंभ एवं शिलान्यास किया जाएगा।इस पहल से 898 बसावटों को पहली बार बारहमासी सड़क संपर्क मिलेगा। इससे स्कूल, अस्पताल, ग्रामीण मंडियों और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी और ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलेगी।नई सड़क परियोजनाओं से स्थानीय व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी से लोगों के जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है।प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ओडिशा पहले ही महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर चुका है। राज्य में अब तक 17,963 सड़कों (74,725 किमी) और 707 पुलों को स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि 17,760 सड़कों (71,742 किमी) और 658 पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है। इस कार्यक्रम में ग्रामीण विकास, पंचायती राज एवं पेयजल मंत्री रबी नारायण नायक सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल होंगे। यह पहल नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य के साझा विकास संकल्प को भी दर्शाती है। -
नई दिल्ली। प्रसिद्ध गायक और पद्मश्री से सम्मानित कैलाश खेर अपने हालिया आध्यात्मिक एल्बम ‘जोगी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। सिंगर ने ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती के सानिध्य में नया एल्बम लॉन्च किया और अब वे बद्रीनाथ धाम में नारायण की भक्ति में रंगे दिखे। सिंगर ने अपने साथ दर्शन करने आए सभी श्रद्धालुओं को अपने गीत से मंत्रमुग्ध कर दिया।
बीते बुधवार को कैलाश खेर बद्रीनाथ धाम दर्शन करने पहुंचे थे। सिंगर ने मंदिर में पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। अब अभिनेता ने एक बहुत ही प्यारा वीडियो शेयर किया है जिसमें वे भक्तों के सामने श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि का जाप कर रहे हैं। भक्त भी सिंगर के साथ मिलकर नारायण का ध्यान कर रहे हैं। इस मौके पर सिंगर पीले कपड़ों में नजर आए और माथे पर तुलसी की माला धारण कर रखी है। सिंगर इस तरीके से पूरे होश के साथ नारायण नाम का जाप कर रहे हैं, वो सुनकर किसी को भी गूजबंप्स आना तय है।बता दें कि 23 अप्रैल को भव्य पूजा-अर्चना के साथ बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले गए थे। छोटी चार धाम यात्रा में बद्रीनाथ धाम महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भक्त गंगोत्री और यमुनोत्री के बाद बाबा केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन करते हैं। बद्रीनाथ धाम भारी बर्फबारी की वजह से 6 माह तक बंद रहते हैं और अप्रैल के महीने में मंदिर के कपाट खोले जाते हैं।इससे पहले सिंगर को हरिद्वार के गंगा घाट पर सिंगर के गंगा आरती के समय बाबा के भक्ति से भरे गीत गाते हुए देखा गया था। सिंगर फिलहाल धार्मिक यात्रा पर है और अपने पड़ाव की जर्नी को फैंस के साथ शेयर करते रहते हैं। बात अगर उनके नए एलबम सॉन्ग की करें तो भक्ति गीत में आदि शंकराचार्य के संन्यास से लेकर हिंदू शास्त्रार्थ, धर्म पुनर्जागरण और भारत के आध्यात्मिक क्षेत्रों की शक्ति को प्रभावी तरीके से शब्दों में पिरोकर लिखा गया है। भक्ति गीत सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है। - जबलपुर। जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर बरगी बांध में गुरुवार शाम आंधी-तूफान के बीच बड़ा हादसा हो गया। तेज मौसम के चलते यात्रियों से भरा एक क्रूज अचानक डूब गया। पर्यटन विभाग द्वारा संचालित क्रूज में 35-40 लोग सवार थे। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंच गए हैं। बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है और गोताखोर लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। हादसे में अब तक पांच पर्यटकों के मौत हो चुकी है। रेस्क्यू टीम को पांचों के शव मिल चुके है। लगभग 15 लोगों को बचा लिया गया है। 15 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। रेस्क्यू जारी है।घटना गुरुवार की शाम लगभग छह बजे की है। बताया जाता है कि क्रूज पर्यटकों को लेकर लहरों के बीच जा रहा था। तभी अचानक तेज आंधी चली और क्रूज अनियंत्रित होकर बरगी बांध की लहरों में समा गया। क्रूज कैप्टन महेश पटेल भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल उनकी खोज में जुटा है।
- सुलतानपुर. सुलतानपुर जिले में बुधवार को तेज आंधी-तूफान और बारिश से जुड़ी घटनाओं में दो बच्चों सहित सात लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कुड़वार थाना क्षेत्र के पूरे शिववंश दुबे निवासी 20 वर्षीय महेंद्र तिवारी की आंधी तूफान की वजह से गिरे बिजली के खंभे की चपेट में आने से मौत हो गई। उन्होंने बताया कि महेंद्र अपनी बहन की शादी के लिए 10 दिन पहले ही घर लौटा था और बुधवार शाम को उसे परिवार के साथ बहन कौशिक का तिलक लेकर अलीगंज बाजार जाना था। सूत्रों ने बताया कि बल्दीराय थाना क्षेत्र में आंधी तूफान जनित घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई।उन्होंने बताया कि कस्बा माफियात में सुरेश कुमार सोनकर की आठ वर्षीय बेटी महिमा की मौत आंधी तूफान के दौरान छप्पर पर ईंट गिरने से हुई। सूत्रों ने बताया कि बल्दीराय थाना क्षेत्र के ही सिंघनी गांव में 58 वर्षीय रामबरन के घर पर तेज आंधी के कारण पेड़ गिर गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई वहीं गंभीर रूप से घायल उसकी पत्नी श्यामलली को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूत्रों के मुताबिक एक अन्य घटना में हलियापुर थाना क्षेत्र के पूरे निधई तिवारी मजरे डोभियारा में 35 वर्षीय रीता की मौत कच्ची दीवार और छप्पर गिरने से हो गयी। एक अन्य घटना में अखंडनगर थाना क्षेत्र के बरामदपुर गांव में आठ वर्षीय सुरेमन की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में विकास (16) और किशन (11) गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज अम्बेडकरनगर में जारी है। सूत्रों के अनुसार बंधुआकला थाना के अलीगंज दाऊदपुर में घर के पास जामुन का पेड़ गिरने से उसके नीचे दबकर सुषमा गुप्ता (40) की मौत हो गई है। उधर, कूरेभार थाना क्षेत्र में पटना मनीपुर में आंधी पानी के दौरान गिरी कच्ची दीवार के मलबे में दबकर 70 वर्षीय केवला देवी की मौत हो गई है।--
- मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत उपायों पर संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बैंक अब उधारकर्ताओं के अनुरोध का इंतजार किए बिना ही उन्हें राहत दे सकेंगे। नए नियम एक जुलाई, 2026 से लागू हो जाएंगे। केंद्रीय बैंक ने अपने निर्देश में कहा है कि कर्जदाताओं को सभी पात्र उधारकर्ताओं को अपने स्तर पर ही राहत देने की अनुमति होगी। हालांकि ग्राहक चाहें तो प्राकृतिक आपदा घोषित होने के 135 दिनों के भीतर इससे बाहर निकल सकते हैं।नए दिशा-निर्देश वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों, सहकारी बैंकों, एनबीएफसी और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों पर लागू होंगे। आरबीआई के मुताबिक, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बैंक अस्थायी परिसरों से शाखाएं चला सकेंगे और सैटेलाइट ऑफिस, एक्सटेंशन काउंटर या मोबाइल बैंकिंग के जरिए सेवाएं बहाल कर सकेंगे। एटीएम सेवाओं को जल्द चालू करने और नकदी जरूरतों के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने के भी निर्देश दिए गए हैं। बैंक अपने विवेक से एक वर्ष तक शुल्क और अन्य मदों में छूट या कटौती कर सकते हैं। राहत केवल उन खातों को मिलेगी जो 'स्टैंडर्ड' श्रेणी में हैं और आपदा के समय 30 दिन से अधिक बकाया में नहीं थे। आरबीआई ने यह भी कहा, "अगर आपदा के बाद कोई खाता गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) हो जाता है, तो समाधान योजना लागू होने पर उसे फिर से 'स्टैंडर्ड' श्रेणी में अद्यतन किया जा सकेगा।" साथ ही, बैंकों को ऐसे खातों पर बकाया कर्ज का अतिरिक्त पांच प्रतिशत प्रावधान करना होगा, जो मौजूदा प्रावधानों के अतिरिक्त होगा। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यह ढांचा आपदा से प्रभावित एवं किसी तरह के वित्तीय तनाव से मुक्त उधारकर्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है और यह मौजूदा नियमों की तुलना में अधिक लचीला है।--














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