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नई दिल्ली। केंद्र सरकार मिशन पोषण 2.0 के तहत पूरे देश में 8वां पोषण पखवाड़ा आयोजित करने जा रही है। यह अभियान 9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक चलेगा। इस बार का मुख्य विषय है – “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना”। इसी के साथ सरकार का लक्ष्य है कि बच्चों के शुरुआती बचपन (0-6 वर्ष) में उनके मस्तिष्क का सर्वोत्तम विकास सुनिश्चित किया जाए, ताकि उनकी शारीरिक, मानसिक और संज्ञानात्मक क्षमता की मजबूत नींव तैयार हो सके। यह अभियान ‘कुपोषण मुक्त भारत’ के लक्ष्य को मजबूत करने के साथ-साथ जन-जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देगा।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, इस पखवाड़े का राष्ट्रीय स्तर पर शुभारंभ 9 अप्रैल को दिल्ली के विज्ञान भवन में दोपहर 3 से 4 बजे के बीच होगा। कार्यक्रम का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी करेंगी। इस अवसर पर राज्य मंत्री सवित्री ठाकुर और विभाग के सचिव अनिल मलिक भी उपस्थित रहेंगे।मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित “मिशन पोषण 2.0” के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुरुआती वर्षों में पोषण और देखभाल को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है।पोषण पखवाड़े के दौरान देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों में माताओं, अभिभावकों, परिवारों और स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी से विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें पोषण पंचायतें, जागरूकता अभियान, शुरुआती उत्तेजना गतिविधियां, खेल आधारित शिक्षा और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम शामिल होंगे। साथ ही, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की उत्कृष्ट पहलों को भी प्रदर्शित किया जाएगा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के योगदान को सराहा जाएगा।कार्यक्रम का सीधा प्रसारण एनआईसी वेबकास्ट प्लेटफॉर्म और मंत्रालय के यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, बच्चों के जीवन के पहले छह वर्षों में लगभग 85 प्रतिशत मस्तिष्क विकास हो जाता है। ऐसे में शुरुआती 1,000 दिन पोषण, देखभाल और सीखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस वर्ष के अभियान में मातृ एवं शिशु पोषण, स्तनपान और पूरक आहार पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही 0 से 3 वर्ष के बच्चों के लिए संवेदनशील देखभाल और शुरुआती सीखने की गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा। -
नई दिल्ली। असम विधानसभा चुनाव को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इसी बीच चिरांग जिले में शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से मतदान कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। इसी क्रम में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की इकाई, तेल निगम के बोंगाईगांव केंद्र, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, जिला प्रशासन और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मिलकर तय किए गए कक्ष के स्थान का निरीक्षण किया। इस दौरान वहां तैनाती की व्यवस्था और आवश्यक सुरक्षा ढांचे का गहन समीक्षा की गई, ताकि चुनाव से जुड़े सभी महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह सुरक्षित वातावरण में संपन्न हो सकें।
अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि मजबूत कक्ष के आसपास सुरक्षा के सभी जरूरी प्रबंध समय से पहले पूरे कर लिए जाएं। साथ ही, वहां तैनात होने वाले सुरक्षा बलों के लिए सुविधाएं और समुचित व्यवस्था भी जांची गई। अधिकारियों का कहना है कि चुनाव के दौरान मतपेटियों और संबंधित सामग्री की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। किसी भी तरह की लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।इस निरीक्षण के बाद विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को मजबूत करने के उद्देश्य से एक संयुक्त मार्च का आयोजन भी किया गया। इस दौरान केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, असम पुलिस, जिला प्रशासन के अधिकारियों और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर चपागुरी और बेंगटोल के संवेदनशील इलाकों में मार्च निकाला।इस संयुक्त मार्च का उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना और लोगों के बीच भरोसा कायम करना था। जब सुरक्षा बल एक साथ क्षेत्र में मौजूद रहते हैं, तो आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ती है और किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका कम हो जाती है।अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की गतिविधियों से न केवल सुरक्षा बलों के बीच समन्वय बेहतर होता है, बल्कि चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में भी मदद मिलती है। प्रशासन का कहना है कि पूरे जिले में लगातार निगरानी रखी जा रही है और हर स्तर पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि चुनाव प्रक्रिया बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक पूरी हो सके। - कोलकाता. पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद मतदाता सूची से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। अंतिम मतदाता सूची के सामने आने के साथ ही 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के पहले चरण से पूर्व एसआईआर राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग पर राज्य के ''मतुआ, राजबंशी और अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाते हुए उनके नाम हटाने'' का आरोप लगाया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ''पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है।'' मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य के अंतिम मतदाता आधार की घोषणा अभी बाकी है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष अक्टूबर के अंत में 7.66 करोड़ मतदाताओं के आधार पर राज्य में इस समय कुल हटाए गए मतदाताओं का प्रतिशत 11.85 प्रतिशत से अधिक है। एसआईआर प्रक्रिया की शुरुआत से अब तक कुल हटाए गए नामों की अंतिम संख्या 90.83 लाख से थोड़ा अधिक रही।निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक अधिकारियों द्वारा की गई जांच में इन 60.06 लाख में से 27.16 लाख 'विचाराधीन' मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। आंकड़ों से पता चलता है कि 28 फरवरी को एसआईआर के बाद प्रकाशित मसौदा मतदाता सूचियों के बाद न्यायिक जांच के दायरे में आए लगभग 45.22 प्रतिशत नाम हटा दिए गए। वहीं, इस श्रेणी के 32.68 लाख से अधिक मतदाताओं को बरकरार रखते हुए अंतिम सूची में शामिल किया गया है।आयोग के आंकड़ों से पता चला कि सबसे अधिक नाम मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में हटाए गए, जहां न्यायिक जांच के तहत 11.01 लाख नामों में से 4.55 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इस तरह, जिले में न्यायिक जांच के तहत हटाए गए नामों की संख्या लगभग 41.33 प्रतिशत है। बांग्लादेश की सीमा से लगे उत्तर 24 परगना जिले में भी मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। यहां जांच के दायरे में आए 5.91 लाख मतदाताओं में से 3.25 लाख से अधिक मतदाता पात्र नहीं पाए गए। मालदा में न्यायिक जांच के दायरे में आए 8.28 लाख मतदाताओं में से 2.39 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। आंकड़ों के मुताबिक, सुनवाई के बाद दक्षिण 24 परगना जिले में हटाए गए नामों की संख्या लगभग 2.23 लाख, पूर्वी बर्धमान में 2.09 लाख और नदिया में 2.98 लाख रही। प्रतिशत के हिसाब से, नदिया और उत्तर 24 परगना जिलों में सुनवाई के बाद हटाए गए नामों की संख्या क्रमशः 77.86 प्रतिशत और 55.08 प्रतिशत रही। माना जाता है कि इन दोनों जिलों में हिंदू शरणार्थी मतुआ समुदाय के सदस्यों की अच्छी खासी संख्या है। कूच बिहार जिले में विचाराधीन 2.38 लाख मतदाताओं में से 50 प्रतिशत से अधिक यानी 1.2 लाख से ज्यादा नाम अंतिम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इस जिले को राजबंशी समुदाय का प्रमुख क्षेत्र माना जाता है। कोलकाता दक्षिण में 28,000 से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र मौजूद है। सुनवाई के दौरान हटाए गए नामों का प्रतिशत 36.19 प्रतिशत रहा। कोलकाता उत्तर में जांच के दायरे में आए करीब 39,000 मतदाता मतदान के लिए पात्र नहीं पाए गए, जिससे वहां हटाए गए नामों का प्रतिशत लगभग 64 प्रतिशत रहा। नदिया जिले के चकदाहा में एक रैली को संबोधित करते हुए ममता ने निर्वाचन आयोग और भाजपा पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, तृणमूल कांग्रेस उनके साथ खड़ी रहेगी और उन्हें कानूनी सहायता प्रदान करेगी। ममता ने कहा, ''यह भेदभाव क्यों? आप मतुआ, राजबंशी और अल्पसंख्यकों को बाहर कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि लोग यह नहीं समझते?'' उन्होंने दावा किया कि मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में मतदाताओं के नाम ''जूं की तरह चुन-चुनकर बाहर निकाले गए हैं।'' ममता ने दावा किया कि उनके उच्चतम न्यायालय का रुख करने के बाद, निर्णय के लिए विचाराधीन लगभग 60 लाख मामलों में से लगभग 32 लाख नाम सूचियों में बहाल कर दिए गए हैं। आगामी विधानसभा चुनावों को लोगों की पहचान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बताते हुए, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने मतदाताओं से वोट के जरिये अपना जवाब देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ''यह चुनाव आपके लोकतंत्र, भाषा और सम्मान को बचाने की लड़ाई है, ताकि कोई भी आपको कभी विदेशी न कह सके।'' वहीं, शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ''मतदाता सूची से हटाए गए नामों का एक बड़ा हिस्सा ऐसे मतदाताओं का है, जो अब जीवित नहीं हैं। मुख्यमंत्री चाहती हैं कि मृत मतदाता भी वोट दें, इसलिए वह आपत्ति जता रही हैं।'' उन्होंने कहा कि बंगाल बांग्लादेशी मुसलमानों को शरण नहीं देगा। शुभेंदु ने कहा कि ''रिकॉर्ड को एक बार और हमेशा के लिए त्रुटिरहित किया जाना चाहिए।''उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ''चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और अराजकता फैलाने के लिए ममता बनर्जी की यह पुरानी चाल है। वह एसआईआर को, जो मतदाता सूची की जांच का एक आजमाया हुआ और कारगर तरीका है, एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक पंजी) कहकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं। लोग इसका विरोध करेंगे और उन्हें इस कोशिश में कामयाब नहीं होने देंगे।'' कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया, ''भाजपा सत्ता में बने रहने के लिए वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा देती है। उसने ऐसा सिर्फ बंगाल में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में किया है।'' आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से कुल मतदाताओं में से लगभग 8.3 प्रतिशत यानी 63.66 लाख नाम हटा दिए गए, जिससे मतदाता आधार लगभग 7.66 करोड़ से घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गया। 7.04 करोड़ के मतदाता आधार में 60.06 लाख से अधिक मतदाता ऐसे थे, जिन्हें विचाराधीन श्रेणी में रखा गया था। अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद मतदाताओं के पास उच्चतम न्यायालय के आदेशों के तहत राज्य में विशेष रूप से गठित न्यायाधिकरणों में जाने का विकल्प है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि न्यायाधिकरण के न्यायाधीशों द्वारा पात्र पाए गए मतदाता आगामी चुनावों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर पाएंगे या नहीं।
- नयी दिल्ली. निर्वाचन आयोग ने कहा है कि इस महीने हो रहे पांच विधानसभा चुनावों के लिए नौ अप्रैल की सुबह सात बजे से 29 अप्रैल की शाम 6.30 बजे तक एग्जिट पोल का प्रसारण नहीं किया जा सकता है। उसने यह चेतावनी भी दी है कि इस अवधि में एग्जिट पोल आयोजित करना या प्रसारित करना जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 ए का उल्लंघन है और "दो साल तक की कैद, या जुर्माना या दोनों दंड दिया जा सकता है"। केरल, असम और पुडुचेरी में नौ अप्रैल को विधानसभा चुनाव होंगे, वहीं तमिलनाडु में 23 अप्रैल को चुनावी प्रक्रिया होगी। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होंगे। केरल और पुडुचेरी में मंगलवार शाम छह बजे और असम में पांच बजे से चुनाव प्रचार थम जाएगा।आमतौर पर मतदान सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक होता है, लेकिन इलाके और सुरक्षा स्थिति के कारण समय अलग-अलग हो सकता है।
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नयी दिल्ली. विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह 10 अप्रैल को नेपीता में म्यांमा के नये राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, सिंह बुधवार से म्यांमा का चार- दिवसीय दौरा करेंगे, जिसमें वह इस कार्यक्रम में भाग लेने के साथ-साथ द्विपक्षीय वार्ता में भी शामिल होंगे। पिछले सप्ताह म्यांमा की संसद ने वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग के राष्ट्रपति पद संभालने का मार्ग प्रशस्त किया। उनका चयन प्रमुख विपक्षी दल की गैर-मौजूदगी में हुए आम चुनाव के बाद हुआ। 'आंग सान सू की' सरकार के एक फरवरी 2021 के तख्तापलट के खिलाफ लंबे समय तक चले प्रदर्शन के बाद ये चुनाव दिसंबर और जनवरी में आयोजित किए गए थे। मिन आंग ह्लाइंग पिछले पांच महीनों से म्यांमा में सैन्य शासन का नेतृत्व कर रहे थे।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "म्यांमा सरकार के निमंत्रण पर, विदेश, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह आठ से 11 अप्रैल तक म्यांमा का दौरा करेंगे और 10 अप्रैल को नेपीता में नये राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेंगे।'' बयान में यह भी कहा गया कि अपनी यात्रा के दौरान, सिंह म्यांमा सरकार के संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे, व्यापार, आर्थिक और विकास सहायता पहलों से जुड़े द्विपक्षीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे, और यांगून में प्रवासी भारतीयों से संवाद करेंगे। म्यांमा भारत का एक रणनीतिक पड़ोसी देश है और यह कई उत्तर-पूर्वी राज्यों के साथ 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है, जिनमें उग्रवाद प्रभावित नगालैंड और मणिपुर शामिल हैं। -
नयी दिल्ली. सरकार ने सोमवार को खनन रियायत नियमों में संशोधनों को अधिसूचित कर दिया जिससे लाइसेंस-प्राप्त कंपनियों को निर्दिष्ट क्षेत्रों के पास खनिजों का पता लगाने और खनन की अनुमति मिल गई है। इस कदम से गहरे क्षेत्र में स्थित महत्वपूर्ण खनिजों का पता लगाने और उसके उपयोग में मदद मिलने की उम्मीद है। संशोधन से खनन पट्टों और मिश्रित लाइसेंस वाले क्षेत्रों के आसपास के इलाकों को शामिल करना संभव हो सकेगा। साथ ही प्रमुख और सूक्ष्म खनिजों के पट्टों में संबद्ध खनिजों को भी जोड़ा जा सकेगा। खान मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि निकटवर्ती क्षेत्रों को शामिल करने की अनुमति से गहरे भूमिगत क्षेत्रों में छिपे खनिजों का पता लगाने और अनुकूलतम खनन को बढ़ावा मिलेगा। ऐसे क्षेत्रों के लिए अलग पट्टे या लाइसेंस के तहत खनिजों का निकालना संभवत: आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं होता। संशोधित नियमों के तहत गहराई में स्थित भंडारों में छिपे खनिजों के खनन पट्टे या मिश्रित लाइसेंस धारकों के लिए निकटवर्ती भूमि को एक बार में जोड़ने के लिए आवेदन करने की एक सरल और समयबद्ध प्रक्रिया निर्धारित की गई है। जोड़ा गया क्षेत्र मौजूदा पट्टा क्षेत्र के 10 प्रतिशत या लाइसेंस क्षेत्र के 30 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। नीलाम किए गए पट्टों के लिए, पट्टेदार को अतिरिक्त भूमि से प्राप्त खनिजों पर नीलामी प्रीमियम का 10 प्रतिशत भुगतान करना होगा, जबकि गैर-नीलामी वाले पट्टा धारकों को ऐसे उत्पादन पर रॉयल्टी के बराबर राशि का भुगतान करना होगा। बयान के मुताबिक, संशोधन के जरिये किए गए सुधार खनन क्षेत्र को उद्योगों के लिए खनिजों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन देते हैं। संशोधनों में खनन पट्टे में सूक्ष्म खनिज समेत किसी भी अन्य खनिज को शामिल करने का प्रावधान है और राज्यों को आवेदन के 30 दिनों के भीतर इसकी अनुमति देना अनिवार्य है।
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ऋषिकेश. उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित पशुलोक गंगा बैराज पर सोमवार को एक निजी कंपनी द्वारा सी-प्लेन की सफल ट्रायल लैंडिंग की गई। इस पहल को राज्य में हवाई संपर्क और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ऋषिकेश जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र में सी-प्लेन सेवा शुरू होने से चारधाम यात्रा, साहसिक पर्यटन और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटक कम समय में सीधे ऋषिकेश और आसपास के प्रमुख स्थलों तक पहुंच सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सेवा से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। अधिकारियों के अनुसार भविष्य में इस सेवा का विस्तार टिहरी झील, नैनीताल झील और अन्य जलाशयों तक करने की योजना है, जिससे उत्तराखंड को देश का प्रमुख सी-प्लेन गंतव्य बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि यह ट्रायल (परीक्षण) न केवल तकनीकी रूप से सफल रहा, बल्कि यह भी संकेत देता है कि राज्य में हवाई पर्यटन के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू होने वाला है।
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लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर सोमवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल में जनसंघ और भाजपा के 300 से अधिक वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। भाजपा मुख्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार "गौरव सम्मान समारोह" में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह और कार्यक्रम संयोजक नीरज सिंह ने वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को केसरिया अंगवस्त्र पहनाकर तथा वस्त्र एवं साहित्य भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाओं के समक्ष फोटो भी खिंचवाया। इस कार्यक्रम में पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों—राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र, विनय कटियार, डॉ. रमापति राम त्रिपाठी, केशव प्रसाद मौर्य, स्वतंत्र देव सिंह और भूपेंद्र सिंह चौधरी-के संदेश एलईडी स्क्रीन के माध्यम से प्रसारित किए गए। समारोह को संबोधित करते हुए पंकज चौधरी ने कहा कि वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए राष्ट्र प्रेरणा स्थल से बेहतर स्थान नहीं हो सकता। उन्होंने इसे करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बताते हुए कहा कि यह स्थल डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 'एक देश, एक विधान' के संकल्प, पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय और एकात्म मानववाद के दर्शन तथा अटल बिहारी वाजपेयी के सुशासन की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा की यात्रा आसान नहीं रही और दो लोकसभा सीटों से शुरू हुई पार्टी आज केंद्र में लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार चला रही है, साथ ही कई राज्यों में उसकी या उसके सहयोगियों की सरकारें हैं। चौधरी ने कहा कि वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध कार्यकर्ता ही पार्टी की सबसे बड़ी पूंजी हैं। उन्होंने सभी वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को नमन करते हुए आह्वान किया कि वे उत्तर प्रदेश को विकास के शिखर तक पहुंचाने और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को साकार करने में योगदान दें।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत ने अपने असैन्य परमाणु कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है और तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित स्वदेशी रूप से विकसित प्रायोगिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) 'क्रिटिकल' अवस्था में पहुंच गया है। परमाणु रियेक्टर के संबंध में 'क्रिटिकल' होने से तात्पर्य ऐसी स्थिति में पहुंचना है जिसमें परमाणु विखंडन शृंखला प्रतिक्रिया स्व-संचालित हो जाती है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में यह जानकारी देते हुए इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया है। मोदी ने 'एक्स' पर अपनी पोस्ट में कहा, "आज भारत ने अपने असैन्य परमाणु कार्यक्रम की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया है, जिससे कार्यक्रम के दूसरे चरण को आगे बढ़ाया गया है। कलपक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रायोगिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी प्राप्त कर ली है।" उन्होंने बताया कि यह उन्नत रिएक्टर जितना ईंधन खपत करता है, उससे अधिक ईंधन उत्पन्न करने में सक्षम है, जो भारत की वैज्ञानिक क्षमता और इंजीनियरिंग कौशल को दर्शाता है। मोदी ने कहा कि यह उपलब्धि देश के तीसरे चरण के परमाणु कार्यक्रम में विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई देते हुए इसे भारत के लिए गर्व का क्षण बताया। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र है जो बिजली उत्पादन के दौरान खपत होने वाले परमाणु ईंधन की तुलना में अधिक परमाणु ईंधन उत्पन्न करने के लिए तीव्र न्यूट्रॉन का उपयोग करता है।
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नई दिल्ली। एक सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के प्रभाव से राजस्थान के कई हिस्सों में तेज हवाएं, बारिश और ओलावृष्टि देखने को मिल रही है। जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के कई जिलों, जिनमें राजधानी जयपुर भी शामिल है, में खराब मौसम की चेतावनी देते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
मौसम विज्ञान केंद्र ने जयपुर, जैसलमेर, फलोदी, जोधपुर, दौसा, बीकानेर, नागौर, पाली और श्रीगंगानगर सहित आसपास के इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है। इस दौरान कहीं-कहीं ओलावृष्टि भी हो सकती है।हनुमानगढ़, बाड़मेर, चूरू, टोंक, भीलवाड़ा, झुंझुनूं, अजमेर, अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर, सीकर, बूंदी, कोटा और सवाई माधोपुर के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक, 20-30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि हो सकती है।बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से जैसलमेर जिले में फसलों को भारी नुकसान हुआ है, खासकर मोहनगढ़, लाठी और रामदेवरा क्षेत्रों में। जीरा और इसबगोल जैसी फसलें प्रभावित हुई हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।नागौर जिले के कुछ हिस्सों में सोमवार रात से बारिश जारी है, जबकि सुबह डीडवाना में बूंदाबांदी और डेगाना में ओलावृष्टि दर्ज की गई। खराब मौसम को देखते हुए नागौर और मेड़ता की मंडियां आज के लिए बंद कर दी गई हैं।जयपुर और आसपास के इलाकों में सुबह से हल्की बारिश और ठंडी हवाएं चल रही हैं, जिससे बीकानेर, जैसलमेर और श्रीगंगानगर जैसे जिलों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, कई क्षेत्रों में 20-50 मिमी तक बारिश हो सकती है।मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा के मुताबिक, इस मौसम प्रणाली का असर बुधवार तक बना रह सकता है और 9 अप्रैल से मौसम में सुधार होने की संभावना है।जयपुर में सुबह से रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जिससे तापमान में 1-2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। बीकानेर में तड़के 3 बजे गरज और ठंडी हवाएं शुरू हुईं, 4 बजे बारिश हुई और 7:30 बजे तेज बारिश दर्ज की गई।सीमावर्ती जिलों, जैसे श्रीगंगानगर, में भी सुबह से मौसम में बदलाव देखने को मिला, जहां कई जगहों पर रुक-रुक कर बारिश, तेज हवाएं और बिजली चमकने की घटनाएं सामने आईं, जिससे मौसम में ठंडक बढ़ गई है। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने न्यूज चैनलों के TRP (टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट) को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने Broadcast Audience Research Council (BARC) को निर्देश दिया है कि वह न्यूज चैनलों के TRP डेटा को अगले चार हफ्तों तक और जारी न करे।यह फैसला पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच कुछ चैनलों द्वारा सनसनीखेज और अपुष्ट खबरें दिखाने को रोकने के लिए लिया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, इस तरह की रिपोर्टिंग से आम लोगों में डर और भ्रम फैल सकता है, खासकर उन लोगों में जिनके परिवार या रिश्तेदार प्रभावित क्षेत्रों में रहते हैं।सरकार ने पहले 6 मार्च 2026 को भी चार हफ्तों के लिए TRP जारी करने पर रोक लगाई थी। अब स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है, इसलिए इस रोक को आगे बढ़ाया गया है।TRP न्यूज चैनलों के लिए बहुत अहम होता है, क्योंकि इसी के आधार पर विज्ञापन दरें तय होती हैं और चैनलों की लोकप्रियता मापी जाती है। ऐसे में TRP बंद होने से चैनलों के कारोबार और प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है।यह पहली बार नहीं है जब ऐसा कदम उठाया गया है। इससे पहले 2020 में भी -
नई दिल्ली। भारत सरकार पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति को देखते हुए प्रमुख क्षेत्रों में तैयारी और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से तत्पर है। निम्नलिखित अद्यतन जानकारी ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री संचालन और इस क्षेत्र में भारतीय नागरिकों को सहायता प्रदान करने के लिए इन क्षेत्रों में किए जा रहे उपायों के बारे में बताती है:
होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सहित बदलती स्थिति को ध्यान में रखते हुए, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय देश भर में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की सुचारू और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय करना जारी रखे हुए है। मंत्रालय के अनुसार:सरकार पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे पेट्रोल और डीजल की घबराहट में खरीदारी करने के साथ-साथ एलपीजी की अनावश्यक बुकिंग से बचें।नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अफवाहों से सावधान रहें और सही जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।एलपीजी के लिए, नागरिकों से अनुरोध है कि वे एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग करें और जब तक आवश्यक न हो एलपीजी वितरकों के पास जाने से बचें।नागरिकों को जहां तक संभव हो, पीएनजी, इंडक्शन और इलेक्ट्रिक कुकटॉप जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।वर्तमान स्थिति में, सभी नागरिकों से अनुरोध है कि वे अपने दैनिक उपयोग में ऊर्जा संरक्षण के लिए आवश्यक प्रयास करें। -
नई दिल्ली। गुरु तेग बहादुर साहिब महाराज का पावन प्रकाश पर्व मंगलवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, ओम बिरला सहित मुख्यमंत्रियों ने शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की जीवन गाथा का स्मरण कर मन गर्व से भर जाता है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सिख धर्म के नौवें गुरु, ‘हिंद दी चादर’ गुरु तेग बहादुर के प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। भारतीय संस्कृति और मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले गुरु तेग बहादुर ने धर्म त्यागने के बजाय प्राण त्यागना उचित समझा। उन्होंने क्रूर शासकों के अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध अडिग रहकर करुणा व संवेदना की मिसाल स्थापित की। गुरु साहिब की जीवन गाथा का स्मरण कर मन गर्व से भर जाता है।”लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “नवम पातशाही, गुरु तेग बहादुर के प्रकाश पर्व पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। त्याग, तपस्या और अदम्य साहस के प्रतीक गुरु तेग बहादुर ने धर्म, मानवता और सत्य की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। वे केवल एक महान संत ही नहीं, बल्कि मानवता के रक्षक और अन्याय के विरुद्ध अडिग रहने वाले महान योद्धा भी थे। उनका जीवन हमें सत्य, धर्म और परोपकार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।”उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सिख पंथ के नौवें गुरु, ‘हिन्द दी चादर’ गुरु तेग बहादुर महाराज के प्रकाश पर्व पर कोटि-कोटि नमन एवं समस्त श्रद्धालुओं व प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। उनका तप, त्याग और बलिदान मय जीवन हमें यह सिखाता है कि अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़ा होना और सत्य, धर्म व मानवता की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में अडिग रहना ही सच्ची साधना है।”मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सिख धर्म के नौवें गुरु, हिन्द दी चादर, गुरु तेग बहादुर महाराज के प्रकाश पर्व पर कोटिशः नमन करता हूं। तप, त्याग और करुणा के साथ आपने मानवता के कल्याण का संदेश दिया। आपका शौर्य धर्म की रक्षा के लिए अनंतकाल तक प्रेरणा देता रहेगा।”राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मानवता के रक्षक, साहस के प्रतीक, ‘हिंद की चादर’ नौवें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर महाराज के प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं! गुरु साहिब का जीवन हमें निस्वार्थ सेवा, धैर्य और अन्याय के विरुद्ध अडिग रहने की प्रेरणा देता है। -
नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश की अमरावती को अब आधिकारिक और स्थायी राजधानी का दर्जा मिल गया है। इस संबंध में भारत सरकार ने सोमवार को गजट नोटिफिकेशन जारी किया। यह फैसला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के बाद लिया गया, जिन्होंने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 को अनुमोदित किया था। यह विधेयक पिछले सप्ताह संसद से पारित हुआ था। कानून मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अधिनियम, 2026 को 2 जून 2024 से प्रभावी माना जाएगा।
इस संशोधन से 2014 के आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम में बदलाव किया गया। अधिनियम के अनुसार, ‘अमरावती’ में आंध्र प्रदेश कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी अधिनियम, 2014 के तहत घोषित राजधानी क्षेत्र भी शामिल है। संसद ने 2 अप्रैल को अंतिम मंजूरी दी और अमरावती को आधिकारिक राजधानी घोषित किया। राज्यसभा ने बिल को वॉइस वोट से पास किया, जबकि लोकसभा ने इसे एक दिन पहले मंजूरी दी।इस कानून से सालों की राजनीतिक असमंजस और तीन-राजधानी मॉडल की चर्चाओं को समाप्त किया गया है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण और सेवा भाव की सराहना की। उन्होंने सभी नागरिकों को उत्तम स्वास्थ्य की शुभकामनाएं दीं और लोगों से अपील की कि वे स्वस्थ रहने के लिए हर संभव प्रयास करें।
पीएम मोदी ने पोस्ट में लिखा यह संदेशपीएम नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर हम उन सभी लोगों के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं, जो दूसरों की सेवा में अथक रूप से समर्पित हैं और एक स्वस्थ पृथ्वी के निर्माण की दिशा में कार्य कर रहे हैं। हम एक स्वस्थ समाज के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराते हैं। आइए, हम सभी मिलकर स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने और प्रत्येक व्यक्ति के कल्याण को प्राथमिकता देने के लिए निरंतर कार्य करते रहें।”उन्होंने आगे कहा, “विश्व स्वास्थ्य दिवस पर मैं सभी देशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। मेरा आग्रह है कि खुद को स्वस्थ रखने के लिए हरसंभव प्रयास जरूर करें। लाघवं कर्मसामर्थ्यं दीप्तोऽग्निर्मेदसः क्षयः। विभक्तघनगात्रत्वं व्यायामादुपजायते॥”केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी लिखा पोस्टकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर विश्व स्वास्थ्य दिवस की शुभकामनाएं दी और कहा, “अच्छा स्वास्थ्य एक ऐसा चुनाव है, जिसे हम उचित देखभाल से बनाए रख सकते हैं। इस अवसर पर, आइए हम सभी उचित देखभाल, स्वस्थ खान-पान की आदतों और नियमित व्यायाम के माध्यम से एक स्वस्थ और सुदृढ़ समाज के निर्माण के लिए स्वयं को समर्पित करें।”केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा (जेपी नड्डा) ने विश्व स्वास्थ्य दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “यह दिन हमें याद दिलाता है कि हम अपने स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान रखें और एक संतुलित जीवनशैली अपनाएं। स्वास्थ्य सेवा के प्रति भारत का दृष्टिकोण प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का एक अनूठा संगम है, जो न केवल देश के भीतर, बल्कि पूरे विश्व में लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में सहायक है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, ‘आयुष्मान भारत’ और ‘पीएम भारतीय जनऔषधि परियोजना’ जैसी परिवर्तनकारी पहलों ने हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सुदृढ़ बनाया है, जिससे हर नागरिक के लिए गुणवत्तापूर्ण उपचार अधिक सुलभ, किफायती और समावेशी बन गया है।”उन्होंने आगे कहा, “हम उन सभी डॉक्टरों, नर्सों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं, जिनके समर्पण से हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली मज़बूत बनी हुई है। आइए, हम सब मिलकर एक स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र के निर्माण की दिशा में काम करें।”इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी विश्व स्वास्थ्य दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी और कहा, “मैं हमारे डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन कर्मियों के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं, जिन्होंने करुणा और समर्पण के साथ मानवता की सेवा करते हुए, राष्ट्र को स्वस्थ रखने के लिए अथक परिश्रम किया है। ईश्वर करे, हर किसी को उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त हो।” -
नयी दिल्ली. पश्चिम एशिया में करीब एक महीने पहले संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 1,700 से अधिक भारतीय नागरिक आर्मेनिया और अजरबैजान की जमीनी सीमा चौकियों के रास्ते ईरान छोड़ चुके हैं। यह जानकारी विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोमवार को दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेसवार्ता में कहा, ''तेहरान स्थित हमारे दूतावास ने अब तक 1,777 भारतीय नागरिकों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते ईरान से बाहर निकलने में सहायता प्रदान की है।'' भारतीय नागरिक आर्मेनिया और अजरबैजान से हवाई मार्ग से स्वदेश लौट रहे हैं।
जायसवाल ने बताया कि स्वदेश लौटने वाले भारतीयों में 895 छात्र और 345 मछुआरे शामिल हैं। उन्होंने कहा, ''भारतीय मछुआरे ईरान की विभिन्न कंपनियों में कार्यरत थे और वे चार अप्रैल को आर्मेनिया से स्वदेश रवाना हुए। -
कपूरथला (पंजाब). पंजाब के सुल्तानपुर लोधी के एक बुजुर्ग दंपति ने दावा किया है कि नशे की वजह से उनके चार बेटों की मौत हो चुकी है, जबकि उनका पांचवां और आखिरी जीवित बेटा भी यकृत के गंभीर संक्रमण के कारण बिस्तर पर पड़ा है। पति-पत्नी ने मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री भगवंत मान से उसे बचाने की भावुक अपील की है।
मनजीत कौर ने बिस्तर पर पड़े अपने बेटे को पत्रकारों को दिखाते हुए कहा, ''मैं पांच बेटों की मां हूं। चार की मौत नशे की वजह से हो चुकी है।" उन्होंने हाथ जोड़कर कहा, "अगर यह भी मर गया, तो मैं इसके बच्चों को कहां ले जाऊंगी?"
प्रभावित परिवार के सदस्यों ने कहा कि सोनू (32) दो साल के बेटे और छह महीने की बेटी का पिता है एवं गंभीर यकृत संक्रमण से पीड़ित है। उन्होंने कहा कि वह बोलने या खाने में असमर्थ है। परिवार के एक सदस्य ने कहा, '' उसका यकृत पूरी तरह से खराब हो चुका है। वह कुछ भी नहीं खाता है।''
सोनू के पिता जोगिंदरपाल सिंह ने सरकार ने इस क्षेत्र को मादक पदार्थ की बुराई से निजात दिलाने की अपील की। सुल्तानपुर लोधी के पंडोरी मोहल्ले में कई महिलाएं इकट्ठा हुईं और उन्होंने राज्य सरकार से यहां आसानी से उपलब्ध 'चिट्टा' (एक तरह का नशा) के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने बताया कि इलाके के कई युवा इसके आदी हो चुके हैं। मनजीत कौर ने कहा, "मैं मुख्यमंत्री भगवंत मान से हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि हमारी मदद करें। हमारे पांचवें बेटे को बचाएं।" उन्होंने बताया कि परिवार ने अपने सबसे बड़े बेटे के इलाज पर सात लाख रुपये खर्च किए, लेकिन वह बच नहीं सका। उन्होंने कहा कि नशे की लत के कारण तीन महीने बाद, उनके दूसरे बेटे की भी मृत्यु हो गई और कुछ वर्षों बाद उनके दो अन्य बेटों की भी जान चल गयी। कौर ने आंखों में आंसू लिए कहा, ''हमारे इलाके से 'चिट्टा' (नशीली दवा) खत्म होनी चाहिए। पुलिस को उन जगहों की जांच करनी चाहिए जहां नशीली दवाएं बेची जाती हैं।'' वहां मौजूद एक अन्य महिला ने एक बुजुर्ग महिला की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनका बेटा भी नशे का आदी है। उसने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में कई युवाओं की नशे के कारण मौत हो चुकी है। -
चंदौली (उप्र) पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से खाना पकाने वाली गैस समेत ईंधन की चुनौतियों के बीच चंदौली जिले का एक गांव बायोगैस से आत्मनिर्भर बन गया है। यहां 125 से अधिक घरों के रसोईघर एलपीजी की लगभग आधी कीमत पर चल रहे हैं। वाराणसी के पास चंदौली जिले के अलीनगर क्षेत्र के नियमातबाद ब्लॉक के एकौनी गांव में स्थित इस पहल ने अपनी किफायती लागत और पर्यावरणीय लाभों के कारण ध्यान आकर्षित किया है। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाली पुणे की कंपनी के सहयोग से स्थापित बायोगैस संयंत्र, लगभग 500-600 लोगों की आबादी वाले इस गांव के लगभग 125 परिवारों को गैस की आपूर्ति करता है। वाराणसी जिले के रामनगर से तीन किमी की दूरी पर स्थित इस गांव के निवासी नागेन्द्र प्रताप सिंह पेशे से किसान हैं। उन्होंने बताया कि 1995 से उनकी गौशाला है, जिसमें करीब 200 गायें हैं। उन्होंने बताया कि बीटेक की पढ़ाई कर चुका उनका बेटा चन्द्रप्रकाश सिंह ने इस समस्या से निजात के लिए अनुसंधान किया और उसे पुणे की कंपनी का साथ मिला। इस कंपनी की मदद से उसने 2016 में अपनी गौशाला का उन्नयन किया, उसने इसे प्रौद्योगिकी के साथ जोड़ा। चन्द्रप्रकाश ने बताया कि कंपनी ने ही उनके यहां बायो गैस संयंत्र स्थापित किया, इस पर 85 लाख रुपये का खर्च आया। उन्होंने बताया कि कंपनी ने ही संयंत्र के लिए वित्त पोषण किया और तबसे यह संयंत्र निरंतर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन सुबह व शाम ढाई-ढाई घंटे बायो गैस की आपूर्ति दी जाती है। यह बायो गैस एलपीजी की तुलना में आधे दाम में पड़ रही है। पूरे महीने प्रयोग करने पर अधिकतम 400 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। चन्द्रप्रकाश ने बताया कि वर्तमान में अमेरिका-इजराइल व ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण ईंधन की कमी महसूस की जा रही है और चंदौली भी अछूता नहीं है। उन्होंने कहा कि यहां लगे बायोगैस संयंत्र की तरफ बाहरी गांवों के लोग भी आकर्षित हो रहे हैं। चन्द्रप्रकाश ने बताया कि उनके संयंत्र से हाल में करीब 25 और लोगों ने कनेक्शन लिया है।
पुणे की 'साफ एनर्जी कंपनी से जुड़े 'सस्टेन प्लस फाउंडेशन' के सह संस्थापक हर्षद कुलकर्णी ने बताया कि चन्द्रप्रकाश के पिता की ओर से 2022 में मुहैया कराई गई जमीन पर बायोगैस संयंत्र की स्थापना की गई। उन्होंने बताया कि इसकी एवज में कंपनी ने चन्द्रप्रकाश के परिवार को बायोगैस से दो-तीन कनेक्शन दिये, साथ ही उनके गौशाला के गोबर को रोजाना उठाकर संयंत्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ली। कुलकर्णी के मुताबिक कंपनी ने इस संयंत्र में गांव के दो लोगों को रोजगार भी दिया है। उन्होंने यह बताया कि स्थापना के 10 साल बाद 2032 में यह संयंत्र चंद्रप्रकाश के पिता को पूरी तरह से सौंप दिया जाएगा। -
कोलकाता. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मालदा में एक भीड़ द्वारा न्यायिक अधिकारियों का घंटों तक घेराव किये जाने की घटना को लेकर रविवार को तृणमूल कांग्रेस पर तीखा निशाना साधा और इसे सत्ताधारी पार्टी की सरकार के "महाजंगलराज" का उदाहरण बताया। मोदी ने आरोप लगाया कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस बंगाल में कानून-व्यवस्था का ''जनाजा निकालने'' पर तुली हुई है। मोदी ने पिछले महीने चुनाव की घोषणा के बाद कूचबिहार जिले में अपनी पहली चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि पूरे देश ने देखा है कि मालदा में न्यायिक अधिकारियों को कैसे बंधक बनाया गया था और सवाल किया कि यह किस तरह की सरकार है जो न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और संवैधानिक प्रक्रियाओं को सुनिश्चित नहीं कर सकती! उन्होंने कहा, ''हम ऐसी सरकार से बंगाल की जनता की सुरक्षा की उम्मीद नहीं कर सकते।''
मोदी ने कहा, ''जब न्यायिक अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं तो आप तृणमूल शासन में आम लोगों की सुरक्षा की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? मालदा में जो हुआ वह तृणमूल के महाजंगलराज का एक उदाहरण है।'' ममता बनर्जी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार किसी भी संवैधानिक संस्था को महत्व नहीं देती। प्रधानमंत्री ने कहा, ''क्रूर तृणमूल कांग्रेस प्रशासन के तहत बंगाल की पवित्र भूमि पर लोकतंत्र प्रतिदिन रक्तपात का शिकार हो रहा है।'' मोदी ने कहा कि यहां स्थिति इतनी खराब है कि उच्चतम न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ''कानून-व्यवस्था की हत्या करने'' पर तुली हुई है। ये टिप्पणियां मालदा जिले के कालियाचक-दो ब्लॉक विकास कार्यालय में तीन महिलाओं सहित सात न्यायिक अधिकारियों को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से कथित रूप से नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों द्वारा कई घंटों तक घेराव किए जाने के कुछ दिनों बाद आई हैं। भाजपा ने मालदा की घटना को लेकर पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल पर अपना हमला तेज किया और आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने तुष्टीकरण की राजनीति और घुसपैठ के माध्यम से बंगाल के भविष्य और उसकी अस्मिता को खतरे में डाल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया, ''तृणमूल कांग्रेस शासन के तहत, बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में खतरनाक जनसांख्यिकीय परिवर्तन हुआ है। इन घुसपैठियों को तृणमूल कांग्रेस के सिंडिकेट से सीधा संरक्षण मिलता है, जिससे राज्य के लोगों का जीवन खतरे में पड़ जाता है।'' प्रधानमंत्री ने तृणमूल कांग्रेस पर घुसपैठियों को संरक्षण देने के लिए नागरिकता संशोधन अधिनियम और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का विरोध करने का भी आरोप लगाया। -
पुडुचेरी. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को केंद्र शासित प्रदेश के थिरुनालर में एक रोड शो किया और कहा कि नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए लोगों के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंध (राजग) के लिए भारी समर्थन की लहर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। नवीन ने पुडुचेरी से लगभग 140 किलोमीटर दूर थिरुनालर में करीब एक घंटे का रोड शो आयोजित किया और 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा: "आज के रोड शो के दौरान मिली ऊर्जा और जबरदस्त प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि पुडुचेरी ने विकास का मार्ग दृढ़ता से चुन लिया है। यह अविश्वसनीय समर्थन हमारे संकल्प को और मजबूत करता है। हम प्रगति की इस यात्रा को हर घर तक पहुंचाने और सभी के लिए एक उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" उन्होंने कहा, "थिरुनालर की सड़कों पर राजग के लिए जबरदस्त समर्थन की लहर है।"जीएनएस राजशेखरन, थिरुनालर विधानसभा क्षेत्र से एआईएनआरसी-भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार हैं।
यहां पहुंचने पर पार्टी के नेताओं द्वारा नवीन का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिनमें पुडुचेरी इकाई के भाजपा अध्यक्ष वी.पी. रामलिंगम और केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया शामिल थे। -
हैदराबाद. केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने शनिवार को कहा कि यदि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष जारी रहा, तो इसका असर भारत के अन्य देशों को होने वाले निर्यात पर भी पड़ेगा। 'चिंतन शिविर-फार्मा निर्यात वृद्धि' के अवसर पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में अग्रवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण पिछले महीने आयात और निर्यात दोनों पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ा, क्योंकि ऊर्जा भारतीय आयात बाजार का एक प्रमुख हिस्सा है। अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा, "पश्चिम एशिया भी एक महत्वपूर्ण बाजार है। हमारे निर्यात का लगभग 12-13 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र में जाता है। इसलिए, इस पर सीधा असर पड़ेगा। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो संभवतः दुनिया के अन्य हिस्सों में होने वाले हमारे निर्यात भी प्रभावित होंगे क्योंकि कुछ मूल्य श्रृंखलाएं फिर से सामान्य स्थिति में आ जाएंगी। हम इस बात से अवगत हैं।" एक सवाल का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि इस संकट का वास्तविक प्रभाव आने वाले कुछ हफ्तों में स्पष्ट हो सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार कोशिश कर रही है कि आपूर्ति श्रृंखला पर कम से कम असर पड़े, हालांकि आयात और निर्यात दोनों में कुछ कमी आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही युद्ध समाप्त हो जाए, लेकिन इसका असर कुछ महीनों या वर्षों तक बना रह सकता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-सी आपूर्ति श्रृंखला या ढांचा प्रभावित हुआ है। अग्रवाल के अनुसार, इन चुनौतियों से निपटने के लिए उद्योग को आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने बताया कि दवा क्षेत्र पर भी कुछ असर पड़ा है, खासकर जरूरी कच्चे माल और रसायनों की आपूर्ति पर। उन्होंने कहा कि सरकार एलपीजी की सीमित उपलब्धता को प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में बांटने के लिए काम कर रही है और जरूरत पड़ने पर अन्य स्रोतों से आयात भी किया जा रहा है।
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मॉस्को. भारत ने उज्बेकिस्तान के विश्वविद्यालयों द्वारा संचालित चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने के इच्छुक अपने छात्रों को उक्त संस्थानों की साख की जांच करने की सलाह दी है। साथ ही एफएमजीएल नियमों के संभावित उल्लंघन को लेकर चिंता व्यक्त की है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) द्वारा विदेश में चिकित्सा की पढ़ाई करने वाले छात्रों को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइंसेंशिएट्स (एफएमजीएल) प्रदान किया जाता है। ताशकंद स्थित भारतीय दूतावास ने छात्रों से आग्रह किया कि वे किसी भी व्यक्ति या एजेंट के बहकावे में न आएं और यह भी सुनिश्चित करें कि उज्बेकिस्तान के संस्थान अपनी क्षमता से अधिक छात्रों को प्रवेश नहीं दे रहk हो। उज्बेकिस्तान के चिकित्सा महाविद्यालयों में दाखिले को लेकर कई शिकायतें मिलने के बाद भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को छात्रों के लिए एक परामर्श जारी किया। भारतीय दूतावास के मुताबिक उज्बेकिस्तान में भारतीय समुदाय की अनुमानित संख्या 21,000 है, जिसमें देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत 16,300 छात्र शामिल हैं। दूतावास द्वारा जारी परामर्श में कहा गया है कि भारत और उज्बेकिस्तान के द्विपक्षीय संबंध मजबूत होने के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा के लिए उज्बेकिस्तान को चुनने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और इस वृद्धि के साथ-साथ मध्य एशियाई देश में कई नए विश्वविद्यालय सामने आए हैं। इसमें कहा गया, ''दूतावास आपसे आग्रह करता है कि आप जिस विश्वविद्यालय में प्रवेश लेना चाहते हैं, उसकी साख के बारे में पूरी तरह से संतुष्ट हों, और यह भी सुनिश्चित करें कि विश्वविद्यालय अपनी क्षमता से अधिक छात्रों को प्रवेश न दे रहे हों।'' इसके अलावा, छात्रों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि उनकी डिग्री भारत में बतौर चिकित्सा पेशवर कार्य करने के लिए वैध है, जिसके लिए उनके विश्वविद्यालय (उज़्बेकिस्तान में) को भारत के राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा जारी एफएमजीएल विनियमों का सख्ती से पालन करना होगा। परामर्श में कहा गया, '' इस मुद्दे पर आपको गुमराह करने वाले किसी भी व्यक्ति या एजेंट के झांसे में न आएं। कृपया सतर्क रहें और संदेह होने पर दूतावास से संपर्क करें।'' इस परामर्श में भारत में चिकित्सक का पेशा शुरू करने के वास्ते लाइसेंस प्राप्त करने के लिए छात्र की पात्रता हेतु आठ बिंदुओं की शर्तों की एक सूची जारी की गई है। इसमें कहा गया, ''उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि देश में चिकित्सा की डिग्री प्राप्त करने वाले सभी लोगों को घरेलू कानून के अनुसार देश में इलाज करने की अनुमति है।'' परामर्श में कहा गया है कि दूतावास को छात्रों से उनके शिक्षा सलाहकारों (ईसी) के संबंध में कई शिकायतें मिली हैं और उसने सभी ईसी से स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी प्रदान करने को कहा है। उज्बेकिस्तान में विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालयों से संबंधित कई मुद्दों के बीच, दूतावास ने यह भी उल्लेख किया कि अधिकारी ताशकंद राजकीय आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की एक शाखा का दौरा करेंगे, जहां ''छात्रों ने स्वयं विश्वविद्यालय द्वारा एफएमजीएल नियमों के उल्लंघन की शिकायत की है और गंभीर चिंता व्यक्त की है''।
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भुवनेश्वर. केंद्र सरकार ने पुरी में प्रस्तावित श्री जगन्नाथ अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा परियोजना के लिए वन मंजूरी के पहले चरण को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। यह हवाईअड्डा परियोजना वर्ष 2021 में ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक द्वारा प्रस्तावित की गई थी। इसके तहत निर्माण के लिए लगभग 27 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की सशर्त अनुमति दी गई है। पुरी के जिला कलेक्टर दिव्यज्योति परिदा ने बताया कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा दी गई यह मंजूरी कुछ शर्तों के साथ है। इनमें वृक्षारोपण, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन शामिल है। उन्होंने कहा कि इन शर्तों को पूरा करने के बाद परियोजना को दूसरे चरण की मंजूरी मिल सकेगी, जिससे निर्माण कार्य की पूर्ण अनुमति मिल जाएगी। मंत्रालय ने इस संबंध में राज्य सरकार को पत्र के माध्यम से स्वीकृति दी है। इसके तहत पुरी वन प्रभाग की 27.887 हेक्टेयर वन भूमि को परियोजना के लिए उपयोग करने की अनुमति दी गई है।
- नासिक/नासिक के दिंडोरी तालुका में शुक्रवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें 9 लोगों की जान चली गई। जानकारी के मुताबिक, एक कार अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पानी से भरे कुएं में जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि कार में सवार सभी लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई।बताया जा रहा है कि सभी मृतक इंदोरे गांव के दरगुडे परिवार के सदस्य थे, जिनमें सुनील दरगुडे, उनकी पत्नी और बच्चे भी शामिल हैं। परिवार एक निजी कार्यक्रम (स्नेहसंमेलन) से लौट रहा था, तभी यह हादसा हुआ। कड़ी मशक्कत के बाद कुएं से कार और शवों को बाहर निकाला गया। फिलहाल सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। घटना के बाद मौके पर बचाव अभियान चलाया गया, जिसमें एनडीआरएफ की टीम भी पहुंची।क्यों हुआ ये हादसा?प्राथमिक जांच में सामने आया है कि ड्राइवर का कार से नियंत्रण छूटने के कारण यह दुर्घटना हुई। फिलहाल दिंडोरी पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। कार सड़क से फिसलकर सीधे पास के कुएं में जा गिरी. कुआं पानी से भरा हुआ था, जिसके कारण कार पूरी तरह उसमें डूब गई और अंदर बैठे लोग बाहर नहीं निकल सके।
- नई दिल्ली। भारतीय नौसेना में शुक्रवार को एक नवीनतम स्टील्थ युद्धपोत, ‘तारागिरी’ शामिल किया गया है। इस युद्धपोत को विशाखापत्तनम में 3 अप्रैल की दोपहर नौसेना में कमीशन किया गया। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहे। ‘तारागिरी’ नामक यह युद्धपोत सुपरसोनिक मिसाइलों से लैस है।ये मिसाइल सतह से सतह पर मार कर सकती हैं। इसमें मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और एक विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली भी है। अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली व घातक हथियारों से लैस यह युद्धपोत दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। यहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘तारागिरी’ को एक स्टेट ऑफ द आर्ट वॉरशिप करार दिया। उन्होंने कहा कि तारागिरी की कमीशनिंग, भारत की बढ़ती हुई सामुद्रिक शक्ति का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि हमारी नौसेना भारत के मूल्यों और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। आईएनएस तारागिरी की कमीशनिंग , भारतीय नौसेना की ताकत में, मूल्यों में, तथा प्रतिबद्धता में और वृद्धि करेगी। गौरतलब है कि मानवीय मूल्यों के प्रति सजग भारतीय नौसेना आपदा के दौरान देश ही नहीं विदेशों में भी आपदा राहत के कार्य में शामिल होती है। नौसेना का यह नया युद्धपोत तारागिरी भी मानवीय संकट व आपदा के दौरान राहत पहुँचाने में बड़ी मदद कर सकता है।इसकी अनुकूल मिशन प्रोफाइल इसे उच्च-तीव्रता वाले युद्ध के साथ साथ मानवीय सहायता और आपदा राहत के लिए एक आदर्श समुद्री जहाज बनाती है। राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘तारागिरी’ हमारे राष्ट्रीय गौरव और सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जब यह जहाज समुद्र की लहरों को चीरते हुए आगे बढ़ेगा, तो यह पूरी दुनिया को यह संदेश देगा कि भारत की ताकत भारत के लोगों में है, उनकी मेहनत में है, उनकी क्षमता में है और उनके अटूट संकल्प में है।इस युद्धपोत का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा किया गया है। यह युद्धपोत अपने पूर्ववर्ती युद्धपोतों के डिजाइनों की तुलना में एक पीढ़ीगत विकास का प्रतिनिधित्व करता है। इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इस अवसर पर रक्षामंत्री ने मझगांव डॉक शिपयार्ड लिमिटेड और भारतीय नौसेना समेत सभी देशवासियों को बधाई दी।उन्होंने कहा कि मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड की भूमिका, इसमें बहुत महत्वपूर्ण रही है। दशकों से यह संस्थान, देश के लिए एडवांस नौसैनिक प्लेटफार्म तैयार कर रहा है। कुशल वर्कफोर्स, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता ने, इसे एक विश्वसनीय नाम बना दिया है। गौरतलब है कि भारत में बड़े स्तर पर स्वदेशी रक्षा उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है। इसके चलते देश का रक्षा निर्यात भी बढ़ा है।रक्षा मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 62.66 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी दर्शाता है। हथियार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, गोला-बारूद, जहाज बनाने और अन्य सैन्य उपकरणों पर बड़ा खर्च किया गया। सेना, वायु सेना और नौसेना के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ, जैसे मल्टी रोल फाइटर विमान, लंबे समय तक उड़ान भरने वाले ड्रोन, नौसेना के खास जहाज और मिसाइल सिस्टम।



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