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काहिरा. भारत के उदयवीर सिद्धू ने रविवार को यहां आईएसएसएफ राइफल/पिस्टल विश्व कप की पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। चौबीस वर्षीय उदयवीर ने फाइनल में 240.6 अंक के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। उदयवीर ने जर्मनी के क्रिस्टियन रिट्ज (240.1) को 0.5 अंक से पछाड़ा जिन्होंने रजत पदक जीता। इटली के पाओलो मोन्ना (219.8) ने कांस्य पदक जीता। उदयवीर ने अंतिम चरण में दबाव के बीच संयम बनाए रखा। आखिरी दो शॉट से पहले वह रिट्ज से 0.3 अंक पीछे थे लेकिन भारतीय निशानेबाज ने 10.2 और 9.8 अंक के शॉट लगाए। वहीं, रिट्ज के दोनों शॉट में 9.6 अंक के रहे जिससे उदयवीर ने आखिरी शॉट पर जीत दर्ज की। उदयवीर ने इससे पहले क्वालीफिकेशन दौर में 585 अंक के साथ चौथे स्थान पर रहते हुए फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था। उन्होंने छह सीरीज में 99, 98, 98, 97, 97, 96 अंक जुटाए। प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे एक अन्य भारतीय निशानेबाज जोनाथन गेविन एंटनी क्वालीफिकेशन में दूसरे स्थान पर रहे लेकिन वह केवल रैंकिंग अंक के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे थे। उन्होंने शीर्ष पर रहे पाओलो के समान अंक जुटाए थे। भारत के अजेंद्र सिंह चौहान (580 अंक) और सरबजोत सिंह (574 अंक) क्वालीफिकेशन में क्रमशः 14वें और 31वें स्थान पर रहे और आठ निशानेबाजों के फाइनल में जगह बनाने में नाकाम रहे। केवल रैंकिंग अंक के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे कुमार योगेश ने 573 अंक जुटाए।
फाइनल में तुर्की के पेरिस 2024 ओलंपिक पदक विजेता यूसुफ डिकेच ने भी हिस्सा लिया जो 138.0 अंक के साथ सातवें स्थान पर रहे। यूनान के जॉर्जियोस गाम्पिएराकिस 198.7 अंक के साथ चौथे जबकि लातविया के एमिल्स वासरमानिस 177.6 अंक लेकर पांचवें स्थान पर रहे। -
इंदौर. भारत और वेस्टइंडीज के बीच अभी तक बल्लेबाजों का दबदबा देखने को मिला है तथा रविवार को यहां होने वाले तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में भी यह बरकरार रहने की पूरी उम्मीद है जिससे कि गेंदबाजों पर काफी दबाव रहेगा। रांची में खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में 501 रन बने। वेस्टइंडीज ने भारत के 250 रन के लक्ष्य को लगभग एक ओवर शेष रहते हुए ही हासिल कर दिया था। इंदौर का होलकर स्टेडियम छोटी बाउंड्री और सपाट पिच के लिए जाना जाता है। इसलिए अगर यहां फिर से रनों का अंबार देखने को मिले तो किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए। निश्चित तौर पर मुकाबला दोनों टीम के बल्लेबाजों के बीच होगा लेकिन सभी विभागों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीम ही जीत हासिल करेगी। विशेषकर क्षेत्ररक्षण में अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीम का पलड़ा भारी रहेगा। दोनों टीम ने अभी तक महत्वपूर्ण अवसरों पर कुछ कैच छोड़े हैं जो महंगे साबित हुए हैं। पिछले मैच में मयंक यादव ने शेरफेन रदरफोर्ड का आसान कैच छोड़ दिया था जो एक तरह से निर्णायक साबित हुआ। रदरफोर्ड ने इसका पूरा फायदा उठाकर कप्तान शाई होप के साथ मिलकर 54 गेंदों में 120 रन की साझेदारी की। जब मयंक ने शॉर्ट फाइन लेग पर रदरफोर्ड का आसान कैच छोड़ा तब यह बल्लेबाज 38 रन पर खेल रहा था। उन्होंने इसके बाद 37 गेंदों में 84 रन बनाए, जिसमें सात छक्के और उतने ही चौके शामिल हैं। भारत को होप की शानदार फॉर्म को लेकर भी सतर्क रहना होगा। वेस्टइंडीज के कप्तान ने इस दौरे पर दो शतक जड़े हैं और वह फिर से बड़ी पारी खेलने के लिए प्रतिबद्ध होंगे। भारत के लिए गेंदबाजी अब भी चिंता का विषय बना हुआ है और वह इस मैच में इसका हल ढूंढने की कोशिश करेगा। इस मैच में ओस की भी अहम भूमिका रहने की उम्मीद है। मयंक ने पिछले मैच में तीन विकेट लेकर भारत को अच्छी शुरुआत दिलाई थी लेकिन बाकी गेंदबाज रनों पर अंकुश नहीं लगा पाए और वेस्टइंडीज ने शुरुआती झटकों के बावजूद जोरदार वापसी करके रिकार्ड लक्ष्य हासिल कर दिया। भारत के लिए इस श्रृंखला का सकारात्मक पहलू कप्तान श्रेयस अय्यर का फॉर्म में लौटना है। उन्होंने पहले मैच में नाबाद 102 रन बनाए और दूसरे मैच में 18 गेंद पर 40 रन की तूफानी पारी खेली। संजू सैमसन ने 41 गेंदों में 82 रन बनाकर अंतिम एकादश में अपनी जगह फिर से पक्की कर दी। इसका मतलब है कि युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को फिर से बाहर बैठना पड़ सकता है। भारतीय कोच गौतम गंभीर ने भी रांची में दूसरे मैच के बाद कहा था कि मध्यक्रम में बदलाव किया जा सकता है लेकिन शीर्ष क्रम में नहीं। मुख्य कोच ने यह भी स्वीकार किया कि शिवम दुबे के अय्यर से पहले चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने के बाद भारत अपने टीम संयोजनों के साथ प्रयोग करना जारी रखेगा। हालांकि दुबे केवल सात रन बनाकर आउट हो गए थे। भारत अपने मुख्य गेंदबाज अर्शदीप सिंह से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करेगा, जिन्होंने दो मैचों में 79 रन देकर एक विकेट लिया है। भारत मयंक से भी अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखने की उम्मीद करेगा। होप के शानदार प्रदर्शन और रदरफोर्ड के फॉर्म में वापस आने से वेस्टइंडीज की टीम खुश होगी। वेस्टइंडीज के गेंदबाजों में रोस्टन चेज़ ने अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने पिछले मैच में 24 रन देकर चार विकेट लिए। वेस्टइंडीज हालांकि शमर स्प्रिंगर को बदलने पर विचार कर सकता है, जिन्होंने अपने चार ओवरों में 64 रन देकर दो विकेट लिए। टीम इस प्रकार हैं:
भारत: श्रेयस अय्यर (कप्तान), ईशान किशन, संजू सैमसन (विकेटकीपर), नमन धीर, वैभव सूर्यवंशी, तिलक वर्मा (उपकप्तान), अभिषेक शर्मा, शिवम दुबे, नितीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, प्रिंस यादव, रवि बिश्नोई, मयंक यादव। वेस्टइंडीज: शाई होप (कप्तान और विकेटकीपर), ज्वेल एंड्रयू (विकेटकीपर), शिमरोन हेटमायर, आमिर जांगू (विकेटकीपर), कामिल पूरन, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, क्वेंटिन सैम्पसन, रोस्टन चेज़, कीमो पॉल, रोमारियो शेफर्ड, शमर स्प्रिंगर, मैथ्यू फोर्ड, अकील होसेन, शमर जोसेफ, गुडाकेश मोती। मैच भारतीय समयानुसार शाम 7:00 बजे शुरू होगा। -
नयी दिल्ली. भारत की एकमात्र विश्व कप विजेता महिला क्रिकेट कप्तान हरमनप्रीत कौर ने मंगलवार को तीनों प्रारूपों की कप्तानी से इस्तीफा देते हुए कहा कि बतौर कप्तान उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभाई है और अब वह "एक बार फिर सिर्फ खेल के प्यार और जुनून के लिए खेलने को तैयार हैं।" सैतीस वर्षीय हरमनप्रीत का यह फैसला गुवाहाटी में हुई बीसीसीआई की समीक्षा बैठक के बाद आया, जिसमें पिछले कुछ महीनों में टीम के प्रदर्शन और उसकी आगे की दिशा का आकलन किया गया। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में हरमनप्रीत के अलावा उपकप्तान स्मृति मंधाना और मुख्य कोच अमोल मजूमदार भी शामिल हुए। हाल के दिनों में भारतीय महिला टीम की कप्तानी करने की अपनी इच्छा खुलकर जाहिर करने वाली स्मृति मंधाना अगली कप्तान बनने की दौड़ में सबसे आगे मानी जा रही हैं। कुछ समय से खराब फॉर्म से जूझ रहीं हरमनप्रीत ने इंस्टाग्राम पर लिखा, '' मैं आज भारतीय महिला क्रिकेट टीम के तीनों प्रारूपों की कप्तानी से हट रही हूं।'' उन्होंने कहा, "यह फैसला आसान नहीं है। इसके साथ वर्षों की यादें, भावनाएं, त्याग और ऐसे अनगिनत पल जुड़े हैं, जो जीवन भर मेरे साथ रहेंगे।" हरमनप्रीत ने यह भावुक संदेश इंस्टाग्राम पर साझा किया। इसके साथ उन्होंने ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान की ओर मुंह करके खड़े अपनी तस्वीर भी पोस्ट की। इससे पहले हरमनप्रीत ने कम से कम 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक तक टीम की कप्तानी करने की इच्छा जताई थी। भारत इन खेलों के लिए पहले ही क्वालीफाई कर चुका है। बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट बोर्ड) के एक सूत्र ने 'पीटीआई' को बताया कि अनुभवी खिलाड़ी हरमनप्रीत कौर वनडे और टेस्ट टीम की कप्तानी जारी रखना चाहती थीं। बोर्ड ने हालांकि उन्हें बताया कि वह तीनों प्रारूपों में नेतृत्व में बदलाव की योजना बना रहा है। ऐसे में स्मृति मंधाना की अगली कप्तान बनने की संभावना है। हरमनप्रीत के योगदान को लेकर जारी अपने आधिकारिक बयान में बीसीसीआई ने उन्हें "भारतीय महिला क्रिकेट के विकास में अहम भूमिका निभाने वाली खिलाड़ी" बताया। हरमनप्रीत ने करीब एक दशक तक भारतीय टी20 टीम की कप्तानी की। उन्होंने 2016 में टी20 टीम की कमान संभाली थी। इसके बाद 2022 में उन्हें वनडे टीम का कप्तान बनाया गया और 2023 में वह तीनों प्रारूपों की कप्तान बन गईं। हरमनप्रीत ने 2016 में भारतीय टी20 टीम की कप्तानी संभाली थी और करीब एक दशक तक इस जिम्मेदारी को निभाया। 2022 में उन्हें वनडे टीम की कप्तानी सौंपी गई और 2023 में वह तीनों प्रारूपों की कप्तान बन गईं। पंजाब के मोगा की इस खिलाड़ी ने कहा, "मुझे लगता है कि मैंने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी है। मैंने इस टीम को अपना सब कुछ दिया। मैंने इस जिम्मेदारी को सम्मान के साथ निभाया और भारतीय महिला क्रिकेट का नेतृत्व करने का अवसर मिलने के लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगी।" हरमनप्रीत हालांकि तीनों प्रारूपों में भारत के लिए खेलना जारी रखेंगी।
उन्होंने कहा, "अब मेरे लिए नया अध्याय शुरू करने का समय है। कप्तानी आज खत्म हो सकती है, लेकिन भारतीय क्रिकेट के लिए मेरा प्यार कभी खत्म नहीं होगा। मैंने अपना खून, पसीना, त्याग और सम्मान सब कुछ इस टीम को दिया है। मैं अब फिर से सिर्फ खेल के प्यार के लिए खेलने को तैयार हूं। कप्तानी का अंत हुआ है, सफर जारी है।" अपने भावुक बयान में अनुभवी बल्लेबाज ने कहा कि कप्तान के रूप में उन्होंने टीम को अपना सब कुछ दिया और कई बार अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पीछे रखकर टीम की जरूरतों को प्राथमिकता दी। उन्होंने लिखा, ''मैंने अपना खून, पसीना, समय और कई बार अपने खेल तथा व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं का एक हिस्सा भी टीम को दिया। ऐसे कई मौके आए जब मुझे अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन, अपने विकास और अपनी इच्छाओं को पीछे रखना पड़ा, क्योंकि मेरा मानना था कि टीम सबसे पहले होनी चाहिए।" हरमनप्रीत को भारत की महानतम क्रिकेटरों में शुमार किया जाता है। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने पिछले साल पहली बार वनडे विश्व कप जीता था। हाल ही में टीम ने एशियाई खेलों के टी20 प्रारूप में लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक भी हासिल किया। इसके अलावा हरमनप्रीत की अगुआई में भारत ने 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता था। उन्होंने पांच टेस्ट, 51 वनडे और 155 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत की कप्तानी की।
उन्होंने कहा, "एक कप्तान के रूप में मुझे कई कठिन फैसले लेने पड़े। ऐसे फैसले जिन्हें हमेशा समझा नहीं गया, जो हमेशा आसान नहीं थे और कभी-कभी जिनकी व्यक्तिगत कीमत भी चुकानी पड़ी।" उन्होंने आगे कहा, "मेरा हर फैसला टीम को बेहतर बनाने के प्रेरित था। इसमें अन्य खिलाड़ियों को आगे बढ़ने, खुद पर विश्वास करने और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना शामिल है।'' इस साल की शुरुआत में भारत के टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाने और बल्ले से खासकर टी20 प्रारूप में हरमनप्रीत के अपेक्षाकृत निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उनकी कप्तानी को लेकर आलोचना बढ़ने लगी थी। पूर्व खिलाड़ी डायना एडुल्जी समेत कुछ लोगों ने स्मृति मंधाना को कप्तानी सौंपे जाने की वकालत भी की थी। हरमनप्रीत ने कहा, "मैंने सब कुछ देखा है। मैंने टीम के सबसे बुरे दौर, निराशा, आलोचना, लोगों के सवाल और ऐसे दिन देखे हैं, जब लगता था कि कुछ भी हमारे पक्ष में नहीं हो रहा। लेकिन मैंने जीत की सबसे बड़ी खुशियां भी महसूस की हैं—जीत, जश्न, देश के लिए खेलने का गर्व और वे पल, जिन्होंने हमारे हर त्याग को सार्थक बना दिया।" उन्होंने कहा कि वह कप्तानी की जिम्मेदारी "भावनाओं से भरे दिल, लेकिन मन में शांति के साथ" छोड़ रही हैं। उन्होंने कहा, " मुझे सच में विश्वास है कि मेरी टीम एक अच्छी स्थिति में है। ऐसी टीम, जिसमें प्रतिभा, चरित्र, आत्मविश्वास और एक उज्ज्वल भविष्य है। मैं उसके आगे के सफर को देखने और उसका हिस्सा बने रहने के लिए बेहद उत्साहित हूं।" -
नयी दिल्ली. एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करके इतिहास रचने वाले भारतीय कंपाउंड और रिकर्व तीरंदाजों ने कहा कि उन पर से बहुत बड़ा दबाव हट गया है और वह राहत महसूस कर रहे हैं। भारतीय तीरंदाजों ने एशियाई खेलों में पांच स्वर्ण पदक जीते और दो ओलंपिक कोटा भी हासिल किए। उसने तीरंदाजी में सबसे ताकतवर टीम दक्षिण कोरिया को भी हराया। भारत के कंपाउंड तीरंदाजी कोच डेव कजिन्स ने कहा कि पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदकों की इस उपलब्धि से आलोचकों का मुंह हमेशा के लिए बंद हो जाना चाहिए। रिकर्व तीरंदाजी टीम ने पांच और कंपाउंड तीरंदाजों ने चार पदक हासिल किए। कजिन्स ने भारतीय टीम के स्वदेश लौटने पर कहा, ''आलोचक शुरू से ही हमसे यह अनुमान लगाने को कह रहे थे कि हम कितने पदक जीत सकते हैं। हम केवल इस पर ध्यान दे रहे थे कि हमारे खिलाड़ी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरें और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।'' उन्होंने कहा, ''जब प्रशिक्षण सही हो, तैयारी सही हो और वातावरण अनुकूल हो, तो ऐसे परिणाम मिलते हैं। इसलिए हम इससे बहुत खुश हैं।
ओलंपिक खेलों के लिए कंपाउंड तीरंदाजी में पहला कोटा हासिल करना हमारे लिए बेहद खुशी की बात है। यह हमारे लिए इस समय बहुत बड़ी उपलब्धि है।'' साहिल जाधव और चिकिता तनिपार्थू ने मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर ओलंपिक कोटा हासिल किया। साहिल ने पुरुषों की कंपाउंड टीम स्पर्धा में भी हिस्सा लिया, जिसमें टीम ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि चिकिता ने अनुभवी ज्योति सुरेखा वेन्नम और प्रथिका प्रदीप के साथ मिलकर महिलाओं की कंपाउंड टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया। जाधव ने कहा, ''बहुत अच्छा लग रहा है और इस भव्य स्वागत को देखकर हमें और भी अधिक खुशी मिली है। हमने विशेष रूप से ऐसी स्थितियों के लिए अभ्यास किया था। हमने अपनी रणनीति पर अच्छी तरह से अमल किया। अब दबाव हट गया है।'' चिकिता ने कहा, ''यह सुखद अहसास है। इससे हमें प्रेरणा मिलेगी कि हमें और अधिक जीत हासिल करनी है और अधिक मेहनत करनी है।''
रिकर्व में कुमकुम मोहद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता और महिला टीम वर्ग में स्वर्ण पदक के साथ-साथ मिश्रित वर्ग में रजत पदक हासिल करने में भारत की मदद की। उनके व्यक्तिगत स्वर्ण पदक ने भारत के लिए ओलंपिक कोटा भी सुनिश्चित किया। कुमकुम ने कहा कि यह परिणाम महीनों की तैयारी और टीम वर्क का नतीजा है। उन्होंने कहा, ''जैसा हमने सोचा था, वही हुआ। यह टीम की कड़ी मेहनत, पूरी टीम के उत्साह और भारतीय तीरंदाजी संघ और भारतीय खेल प्राधिकरण के सहयोग का नतीजा था।'' महिला रिकर्व टीम का हिस्सा रही कीर्ति शर्मा ने फाइनल में 10 बार की ओलंपिक चैंपियन दक्षिण कोरिया पर 5-3 से जीत को भारतीय तीरंदाजी के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। कीर्ति ने कहा, ''इस स्पर्धा में भारत का पहला स्वर्ण पदक। हमने कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीता, इसलिए यह हमारे लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। मुझे बहुत खुशी है कि मैं उस टीम का हिस्सा था जिसने यह इतिहास रचा।''
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नागोया. जापान की संस्कृति और मेहमाननवाजी की शानदार झलक के साथ संगीत और रोशनी से सजे भव्य कार्यक्रम के बीच रविवार को आइची-नागोया एशियाई खेलों का समापन हो गया। दो सप्ताह से अधिक समय तक चली कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद एशिया के 45 देशों के खिलाड़ी मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में खेलों के समापन समारोह में शामिल हुए। इन खेलों के दौरान 350 से अधिक रिकॉर्ड बने जिनमें कम से कम 50 विश्व रिकॉर्ड शामिल हैं। हालांकि खेल आयोजन से पहले लॉजिस्टिक समस्याओं और कुप्रबंधन से प्रभावित रहे। समापन समारोह करीब 90 मिनट तक चला।
भारत 85 पदकों (21 स्वर्ण, 27 रजत, 37 कांस्य) के साथ पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा जो चीन के हांग्झोउ में हुए पिछले चरण से 21 कम है। चीन लगातार 12वें चरण में तालिका में शीर्ष पर रहा उसने 169 स्वर्ण, 89 रजत और 83 कांस्य सहित कुल 341 पदक जीते जो विदेश में आयोजित एशियाई खेलों में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। मेजबान जापान 269 पदकों (83 स्वर्ण, 95 रजत और 91 कांस्य) के साथ दूसरे स्थान पर रहा। उसके बाद दक्षिण कोरिया के 39 स्वर्ण, 43 रजत और 68 कांस्य पदक थे। एशिया ओलंपिक परिषद (ओसीए) के अध्यक्ष शेख जुआन बिन हमद अल थानी ने खेलों के समापन की घोषणा की। बाद में ओसीए ध्वज 2030 एशियाई खेलों के आयोजन समिति के एक प्रतिनिधि को सौंपा गया। ओसीए ध्वज को दोहा को सौंपने से संबंधित खंड में कतर के ओलंपिक और विश्व चैंपियन मुताज बाशिम शामिल थे। ट्रैप निशानेबाज नीरू ढांडा (दो स्वर्ण और एक रजत पदक विजेता) के नेतृत्व में भारतीयों ने भी उत्सवी माहौल में हिस्सा लिया। सफेद और नीले रंग की पोशाक पहने लगभग 30 भारतीय खिलाड़ियों और अधिकारियों ने एथलीट परेड में हिस्सा लिया और तिरंगा लहराया। 'वन एशिया' की समापन समारोह की अवधारणा को व्यक्त करने के लिए स्टेडियम के केंद्र में एक षट्भुजाकार मंच बनाया गया था और यह शो का मुख्य आकर्षण था। भव्य समापन के दौरान इसे लालटेन से सजाया गया था जो जापानी गर्मियों का एक विशिष्ट प्रतीक है। ओसीए अध्यक्ष शेख जुआन बिन हमद अल थानी ने कहा कि आइची-नागोया एशियाई खेलों ने एशियाड के लिए मानक ऊंचा किया है। अल थानी ने कहा, ''मैं आइची-नागोया एशियाई खेलों को आधिकारिक रूप से समाप्त घोषित करता हूं। ''
उन्होंने कहा, ''आज रात हम आइची-नागोया 2026 का ध्वज उतारते हुए हम इन खेलों का समापन करते हैं। लेकिन हम एशियाई खेलों के लिए मानक ऊंचा करते हैं। लौ बुझ सकती है, लेकिन इसने जिन उम्मीदों को प्रज्वलित किया है, वे हमारे महाद्वीप में उज्ज्वल रूप से जलती रहेंगी। '' उन्होंने कहा, ''हमने शानदार वापसी, अंतिम सेकेंड में मिली जीत और नाटकीय रूप से मामूली अंतर से मिली हार देखी है। हमने नए किशोर सुपरस्टारों और अनुभवी चैंपियनों के उभरने का जश्न मनाया है जिन्होंने अपनी प्रभावशाली विरासत में और उपलब्धियां जोड़ी हैं। '' उन्होंने कहा, ''हमने खिलाड़ियों को विपरीत परिस्थितियों और चोटों से जूझते हुए जीत हासिल करते देखा है और प्रतिद्वंद्वियों को अविश्वसनीय खेल भावना और सम्मान का प्रदर्शन करते देखा है। '' उन्होंने कहा, ''पहली प्रतियोगिता से लेकर आखिरी तक, एशिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से हमें मंत्रमुग्ध किया। 350 से अधिक रिकॉर्ड टूटे हैं जिनमें 50 से अधिक विश्व रिकॉर्ड शामिल हैं। यह हमारे एशियाई खेलों के लिए एक रिकॉर्ड है। '' परंपरा के अनुसार ओसीए प्रमुख ने एशिया के युवाओं से इस भावना को आगे बढ़ाने और चार साल बाद 2030 में दोहा में होने वाले 21वें एशियाई खेलों में फिर मिलने का आह्वान किया। 19 सितंबर को उद्घाटन समारोह में विभिन्न एशियाई देशों और क्षेत्रों के विविध खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व इंद्रधनुषी रंगों वाले दिलों की कई परतों द्वारा किया गया था। समापन समारोह के लिए दिल के केंद्र में खाली स्थान को भावनाओं और एकता की भावना से खूबसूरती से भर दिया गया। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को एकजुट करना था ताकि वे एशियाई देशों के लिए कई वर्षों तक शांतिपूर्ण वातावरण में मिलकर काम करते रहने के उत्प्रेरक के रूप में काम कर सकें। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 'बोन-ओडोरी' नृत्य रहा जिसकी शुरुआत जापान में हुई थी और अब यह एशिया के कई अन्य देशों में भी लोकप्रिय है। यह नृत्य पीढ़ियों और देशों की सीमाओं से परे लोगों को जोड़ता है। इस नृत्य को 'मत्सुकेन सांबा-2' गीत के जरिए पेश किया गया जिसमें नागोया की खास संस्कृति और आकर्षण की झलक देखने को मिली। यह गीत जापान के लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। गणमान्य व्यक्तियों के आगमन के बाद एक चमकदार लेजर लाइट शो हुआ जिसमें नागोया के कलाकारों ने 'चेरी ब्लॉसम' से सजी पोशाकें पहनकर प्रस्तुति दी। इसके बाद खिलाड़ियों की परेड हुई। भारत की नीरू ढांडा सहित केवल ध्वजवाहकों ने मार्च किया। 45 देशों के दल फिर रोशनी और संगीत की संगत में मैदान में प्रवेश कर गए। इसके बाद खेलों के दौरान हुए कुछ यादगार प्रदर्शनों और मुकाबलों के दृश्य दिखाए गए।
ओसीए अध्यक्ष ने पहले एशियाई खेलों की मशाल, ओसीए का झंडा और मौजूदा ओसीए का झंडा कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी को सौंप दिया। कतर के सबसे सफल खिलाड़ी बाशिम ने केंद्र मंच संभाला। उन्होंने ओसीए ध्वज लिया और विशाल स्क्रीन पर उन्हें ऊंची कूद स्पर्धा में प्रतिस्पर्धा करते हुए दिखाया गया। उन्हें घोड़े की सवारी करते और कड़ाही जलाते हुए भी दिखाया गया। कतर के घुड़सवार खिलाड़ी जासिम अल कुवारी फिर घोड़े पर सवार होकर स्टेडियम में दाखिल हुए और बाशिम से ओसीए ध्वज ले लिया। बाहर जाने से पहले उन्होंने घोड़े पर सवार होकर मंच के दो चक्कर लगाए। रचनात्मक थीम 'अल मकान मकानुकुम' (यह जगह आपकी है) में मेहमान के आने से पहले उसके लिए जगह तैयार करने की परंपरा को दर्शाया गया। 'हैंडओवर' समारोह में ओसीए का झंडा दोहा 2030 का पहला मेहमान बना जो एशियाई खेलों के आयोजन से चार साल पहले ही वहां पहुंच गया। -
- पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहने की संभावना
नागोया/निशानेबाजी और एथलेटिक्स में मिली निराशा से उबरते हुए भारतीय खिलाड़ियों ने मुक्केबाजी, तीरंदाजी, कुश्ती और हॉकी में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदकों की झड़ी लगा दी जिससे एशियाई खेलों में खराब शुरुआत के बावजूद भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंच गया। हांग्झोउ में हुए पिछले एशियाई खेलों में भी भारत इसी पायदान पर था लेकिन तब पदकों की संख्या इस बार से काफी ज्यादा थी।
एशियाई खेलों का पहला सप्ताह भारत के लिए निराशाजनक रहा। चीन में सात स्वर्ण पदक जीतने वाले निशानेबाज इस बार व्यक्तिगत राइफल और पिस्टल स्पर्धाओं में एक भी स्वर्ण पदक नहीं जीत सके। भारत एशियाई खेलों का अभियान 21 स्वर्ण सहित 85 पदकों के साथ समाप्त करने की स्थिति में है। 2023 में आयोजित एशियाई खेलों में भारत ने 28 स्वर्ण सहित कुल 106 पदक जीते थे। भारत तब भी चौथे स्थान पर ही था। इस बार का प्रदर्शन भारत के लिए सम्मानजनक चौथा स्थान हासिल करने के लिए पर्याप्त हो सकता है। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया उससे काफी आगे हैं। चीन तो पदक तालिका में अलग ही स्तर पर है। एथलेटिक्स में कुछ शानदार प्रदर्शन देखने को मिले जिसमें लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने तीन पदक जीते, लेकिन भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या हांग्झोउ में जीते गए छह स्वर्ण से घटकर इस बार केवल एक रह गई। इसके चलते भारत एक समय पदक तालिका में शीर्ष 10 से बाहर बना हुआ था। शुरुआती 10 दिनों की निराशा के बाद हालांकि भारतीय दल के लिए अप्रत्याशित खुशियों का दौर आया।
भारतीय खेमे में सबसे बड़ी खुशियों में से एक निशानेबाज नीरू ढांडा ने दी। उन्होंने एशियाई खेलों के इतिहास में ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रचा। नीरू की खुशी तब दोगुनी हो गई, जब उन्होंने काइनान चेनाई के साथ मिलकर ट्रैप मिश्रित टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीता। एशियाई खेलों में कंपाउंड तीरंदाजी भारत के लिए हमेशा पदकों की झड़ी लगाती रही है, लेकिन इस बार रिकर्व तीरंदाजों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। महिला रिकर्व टीम ने मजबूत दक्षिण कोरियाई टीम को हराकर पहली बार स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बाद कुमकुम मोहोद ने व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण जीतकर इस ऐतिहासिक प्रदर्शन को और यादगार बना दिया। स्वर्ण पदकों की बात करें तो मुक्केबाजी में भी भारत ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की। लवलीना बोरगोहेन ने महिलाओं के 75 किलोग्राम, परवीन ने महिलाओं के 65 किलोग्राम और अंकुश ने पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। हांगझोउ में कुश्ती में एक भी स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने वाले भारत ने इस बार प्रतियोगिता के अंतिम दौर में अमन सहरावत (पुरुष फ्रीस्टाइल 57 किग्रा) और सुजीत कलकल (पुरुष फ्रीस्टाइल 65 किग्रा) के जरिए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। शनिवार के प्रदर्शन के बाद भारत स्वर्ण पदकों की संख्या के मामले में उज्बेकिस्तान के बराबर पहुंच गया। इसमें सबसे अहम योगदान महिला गोल्फर प्रणवी उर्स का रहा, जिन्होंने एशियाई खेलों में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रचा। उनके शानदार प्रदर्शन ने टीम के लिए रजत पदक पक्का किया। इसके बाद पुरुष क्रिकेट टीम ने दबाव से भरे फाइनल में पाकिस्तान को हराकर एक और स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाल दिया।
पुरुष हॉकी टीम ने उम्मीद के मुताबिक स्वर्ण पदक जीता, लेकिन महिला टीम ने भी स्वर्ण पदक हासिल कर हॉकी दल के लिए इस आयोजन को यादगार बना दिया। यह पहली बार था जब एशियाई खेलों में भारत की पुरुष और महिला दोनों हॉकी टीमों ने स्वर्ण पदक जीते। क्रिकेट और कबड्डी में भी भारत के लिए नतीजे उम्मीद के मुताबिक रहे और इन दोनों खेलों के खिलाड़ियों ने पदक तालिका में चार स्वर्ण पदक जोड़े। उज्बेकिस्तान रविवार को अपने एशियाई खेलों के अभियान का समापन करेगा लेकिन प्रतियोगिता के अंतिम चरण में भारत की तेज वापसी को देखते हुए उसके पदक तालिका में अपना स्थान बरकरार रखने की संभावना है। -
नयी दिल्ली. भारतीय महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच शोर्ड मारिन ने चीन के खिलाफ एशियाई खेल फाइनल से पहले टीम को स्पष्ट संदेश दिया था कि एक शेर के गुणों को आत्मसात करके मैदान पर उतरना है और नतीजा खुद ब खुद मिलेगा । भारतीय महिला टीम ने गत चैम्पियन और ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन को 1 . 0 से हराकर एशियाई खेलों में 44 साल में पहली बार स्वर्ण पदक जीता । मारिन ने एक इंटरव्यू में कहा ,'' मैने भारतीय शेरों का उदाहरण दिया । शेर की आंख, प्रतीक और वह पत्थर जो मैने लड़कियों को दिया था । मैने उनसे कहा कि जैसे शेर शिकार करता है, एकाग्र होकर शिकार को देखता है और कैसे झटके से उबरकर फिर वापसी करता है । भारत में शेर सबसे बड़ा प्रतीक है । मैने मैच से पहले उनसे यही सब कहा ।'' एशियाई खेलों में वह पदक जीतकर ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करने के इरादे से ही आये थे और उन्हें यकीन था कि टीम ऐसा कर सकेगी । उन्होंने कहा ,'' पिछले महीने विश्व कप के दौरान पूरे समय मुझे यह भरोसा था । हमने चीन को पहले मैच में ड्रॉ पर रोका और पहली बार बड़े टूर्नामेंट में हम ऊंची रैंकिंग वाली टीम के खिलाफ खेल रहे थे । वहां टीम का प्रदर्शन देखकर मुझे विश्वास जगा था कि हम एशियाई खेलों में स्वर्ण जीत सकते हैं ।'' मारिन ने कहा ,'' हमने एफआईएच नेशंस कप में अच्छा प्रदर्शन किया था और विश्व कप क्वालीफायर में भी लेकिन वह अलग था । विश्व कप में बेहतर टीमें थी और वही मुझे लगा कि हम एशियाई खेलों में स्वर्ण जीत सकते हैं ।'' उन्होंने कहा ,'' और सबसे अहम बात यह है कि मुझे ही ऐसा नहीं लगा, बल्कि टीम को भी यह महसूस हुआ ।''
इस स्वर्ण पदक से पूरे भारत में जश्न का माहौल है और एक बार फिर महिला हॉकी ने सभी का ध्यान खींचा है । कोच ने कहा ,'' मैं अतीत के बारे में नहीं सोच रहा था और यह भी नहीं कि इस जीत के मेरे लिये क्या मायने हैं । मुझे यह अच्छा लग रहा है कि इस जीत ने भारत के लोगों को कितनी खुशी दी है । वे कितने उत्साहित और भावुक हैं और कितने बच्चों को इससे प्रेरणा मिलेगी ।'' तोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला टीम को ऐतिहासिक चौथे स्थान तक ले जाने वाले कोच ने कहा ,''हम सभी टीम को खुलकर खेलने का मौका देते हैं , दबाव नहीं डालते और साथ में मनोरंजन भी करते हैं । बहुत सारी चीजों को मिलाकर यह उपलब्धि हासिल हुई है । सिर्फ एक चीज नहीं है ।'' हॉकी पिच से इतर भी मारिन का भारत से जुड़ाव ऐसा हो गया है कि वह इस देश को अपना दूसरा घर मानते हैं । बेंगलुरू में बाइक राइड से लेकर फिल्टर कॉफी तक और हिन्दी के कुछ शब्द सीखने तक । उन्होंने कहा ,'मैं भारत से करीब से जुड़ गया हूं । लोग हमारी कितनी हौसलाअफजाई करते हैं । सोशल मीडिया पर अच्छे कमेंट आते हैं और कितना सम्मान मिलता है । मैं इससे अभिभूत हूं ।'' तोक्यो ओलंपिक, विश्व कप और एशियाई खेलों में से अपना पसंदीदा पल चुनना मारिन के लिये मुश्किल है लेकिन उन्होंने कहा ,'' ओलंपिक खास था , कोविड की वजह से । मैं डेढ साल तक घर नहीं जा सका लेकिन इस साल विश्व कप और एशियाई खेल भी मेरे शीर्ष तीन अनुभव में से हैं ।'' -
भुवनेश्वर. ओडिशा सरकार ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम के हर खिलाड़ी के लिये 11 लाख रूपये नकद पुरस्कार का ऐलान किया है । प्रत्येक सहयोगी स्टाफ को साढे पांच लाख रूपये दिये जायेंगे । भारत ने चीन को 1 . 0 से हराकर 44 साल बाद एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीता और लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिये क्वालीफाई भी किया । ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा ,'' मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझा ने भारतीय महिला हॉकी टीम के हर सदस्य को एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने पर 11 लाख रूपये और सहयोगी स्टाफ को साढे पांच लाख रूपये देने का फैसला किया है ।'' ओडिशा सरकार 2018 से भारतीय पुरूष और महिला हॉकी की प्रायोजक है और यह करार 2036 तक है ।
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नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय गोल्फर प्रणवी उर्स ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए महिला व्यक्तिगत स्ट्रोक प्ले में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीत लिया। कासुगाई कंट्री क्लब ईस्ट कोर्स में चार दिन तक चले मुकाबले में प्रणवी ने कुल 15-अंडर 265 के स्कोर के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। उनकी शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय महिला टीम ने भी 14-अंडर 546 के कुल स्कोर के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया। प्रणवी उर्स एशियन गेम्स के महिला व्यक्तिगत स्ट्रोक प्ले में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बन गई हैं। अंतिम दौर में उन्होंने ईवन पार 70 का स्कोर किया और पूरे टूर्नामेंट में लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
अंतिम दौर की शुरुआत में प्रणवी के पास दूसरे स्थान पर चल रही सिंगापुर की शैनन टैन पर तीन स्ट्रोक की बढ़त थी। तीसरे होल पर ट्रिपल बोगी के कारण वह कुछ समय के लिए दूसरे स्थान पर खिसक गईं, लेकिन उन्होंने दबाव में शानदार वापसी की। छठे, 10वें और 13वें होल पर तीन बर्डी लगाकर प्रणवी ने फिर बढ़त हासिल कर ली।प्रणवी ने अंतिम 18वें होल पर ईवन पार स्कोर करते हुए अपनी बढ़त बरकरार रखी और 15-अंडर 265 के कुल स्कोर के साथ गोल्ड मेडल पक्का किया। अंतिम दौर से पहले भी वह मजबूत स्थिति में थीं और हांगकांग की चौथे स्थान पर चल रही सोफी हान से नौ स्ट्रोक आगे थीं। प्रणवी के शानदार प्रदर्शन का असर भारतीय महिला टीम के प्रदर्शन पर भी पड़ा। भारत ने चार दिनों में 14-अंडर 546 के कुल स्कोर के साथ सिल्वर मेडल जीता। महिला टीम स्पर्धा में यह एशियन गेम्स के गोल्फ इतिहास में भारत का पहला मेडल है, जिससे भारतीय गोल्फ के लिए यह प्रतियोगिता ऐतिहासिक बन गई।भारत की अनुभवी गोल्फर अदिति अशोक ने अंतिम दौर में 3-अंडर 67 का स्कोर किया। हालांकि, उनका कुल स्कोर 2-ओवर 282 रहा और वह 14वें स्थान पर रहीं। पिछले एशियन गेम्स में अदिति तीसरे दौर के बाद शीर्ष पर थीं, लेकिन अंतिम दिन बढ़त बरकरार नहीं रख सकीं और उन्हें गोल्ड की जगह सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा था।दीक्षा डागर का अंतिम दौर उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्होंने चौथे दिन 7-ओवर पार का स्कोर किया, जिससे उनका कुल स्कोर 12-ओवर हो गया। वह संयुक्त रूप से 23वें स्थान पर रहीं।चीन की यिन रुओनिंग और सिंगापुर की शैनन टैन ने 14-अंडर पार के समान स्कोर के साथ संयुक्त रूप से सिल्वर मेडल हासिल किया। प्रणवी की अंतिम दौर की चुनौती के बावजूद दोनों खिलाड़ियों ने पूरे मुकाबले में मजबूत प्रदर्शन किया। अंतिम दौर से पहले भारत को प्रणवी और महिला टीम से दो मेडल की उम्मीद थी। प्रणवी ने व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड और भारतीय महिला टीम ने सिल्वर जीतकर इन उम्मीदों को ऐतिहासिक उपलब्धि में बदल दिया। इस प्रदर्शन ने एशियन गेम्स 2026 में भारतीय गोल्फ के लिए एक यादगार अध्याय जोड़ दिया। -
नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 के पुरुष क्रिकेट फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 19 रन से हराकर लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 20 ओवर में 6 विकेट पर 211 रन बनाए। जवाब में पाकिस्तान की टीम 20 ओवर में 6 विकेट पर 192 रन ही बना सकी। भारत की जीत में अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा की तूफानी अर्धशतकीय पारियों के बाद गेंदबाजों ने भी अहम भूमिका निभाई।
भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही और 51 रन तक टीम ने वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन के विकेट गंवा दिए। वैभव ने 9 गेंदों पर 15 और सैमसन ने 4 गेंदों पर 2 रन बनाए। इसके बाद अभिषेक शर्मा ने कप्तान श्रेयस अय्यर के साथ तीसरे विकेट के लिए 42 रन की साझेदारी कर पारी को संभाला। अभिषेक शर्मा ने महज 28 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने 7 छक्के और 3 चौके लगाए। वह 93 के स्कोर पर तीसरे विकेट के रूप में आउट हुए। इसके बाद श्रेयस अय्यर ने 24 गेंदों पर 21 और ईशान किशन ने 18 गेंदों पर 20 रन बनाए।उपकप्तान तिलक वर्मा ने भारतीय पारी के अंतिम हिस्से में आक्रामक बल्लेबाजी की। उन्होंने 21 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और 22 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाए। उनकी पारी में 4 छक्के और 3 चौके शामिल रहे। तिलक ने शिवम दुबे के साथ छठे विकेट के लिए 30 गेंदों में 62 रन की साझेदारी की। शिवम ने 15 गेंदों पर 27 रन बनाए।शिवम दुबे के आउट होने के बाद तिलक ने पारी को तेजी से आगे बढ़ाया। उनके साथ अक्षर पटेल एक रन बनाकर नाबाद रहे। भारत ने 20 ओवर में 6 विकेट पर 211 रन बनाए। पाकिस्तान की ओर से अहमद दानियाल और अराफात मिन्हास ने 2-2 विकेट लिए, जबकि सईम अयूब और अबरार अहमद को एक-एक सफलता मिली।212 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की शुरुआत खराब रही। साहिबजादा फरहान 11 गेंदों पर 10 रन बनाकर आउट हुए, जबकि उस्मान खान सिर्फ 3 रन बना सके। माज सदाकत ने 18 गेंदों पर 23 रन बनाए, लेकिन वह भी बड़ी पारी नहीं खेल सके। पाकिस्तान ने 39 रन तक अपने तीन विकेट गंवा दिए थे।तीन विकेट जल्दी गिरने के बाद हसन नवाज और सईम अयूब ने पाकिस्तान की पारी को संभाला। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 48 गेंदों में 87 रन की साझेदारी की। सईम अयूब 29 रन बनाकर शिवम दुबे का शिकार बने। इसके बाद भी हसन नवाज ने आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखी और तेजी से अपना अर्धशतक पूरा किया।हसन नवाज ने 51 गेंदों में 96 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने 5 चौके और 7 छक्के लगाए, लेकिन उनकी यह पारी पाकिस्तान को लक्ष्य तक नहीं पहुंचा सकी। अंतिम ओवरों में भारतीय गेंदबाजों ने दबाव बनाए रखा और पाकिस्तान 192 रन तक ही पहुंच सका।भारत की ओर से अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर और शिवम दुबे ने दो-दो विकेट लिए। भारतीय गेंदबाजों ने पाकिस्तान को 20 ओवर में 6 विकेट पर 192 रन तक सीमित रखा और 19 रन से मुकाबला जीतकर गोल्ड मेडल पर कब्जा किया। पाकिस्तान को हराने के साथ ही भारत ने एशियन गेम्स में पुरुष क्रिकेट का गोल्ड मेडल लगातार दूसरी बार जीत लिया। फाइनल में हार के बावजूद पाकिस्तान को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। भारतीय टीम के लिए यह जीत अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा की विस्फोटक बल्लेबाजी तथा गेंदबाजों के संतुलित प्रदर्शन का नतीजा रही। -
नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में शनिवार का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा। 17 वर्षीय कुमकुम मोहोद ने दक्षिण कोरिया की येजिन ओह को शूट-ऑफ में हराकर महिला इंडिविजुअल रिकर्व में गोल्ड मेडल जीता और इस स्पर्धा में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। वहीं, कुश्ती में अंतिम पंघाल और अमन सहरावत ने अपने-अपने वर्ग के फाइनल में जगह बनाकर भारत के दो और मेडल पक्के कर दिए, जबकि सागर जगलान और दीपक पूनिया ब्रॉन्ज मेडल के लिए मुकाबला करेंगे।
कुमकुम और येजिन ओह के बीच फाइनल पांच सेट के बाद 5-5 से बराबर था। गोल्ड मेडल का फैसला शूट-ऑफ में एक ही तीर से हुआ। ओह ने 8 का स्कोर किया, जबकि कुमकुम ने दबाव के बीच 10 का निशाना लगाकर 6-5 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। फाइनल में कुमकुम की शुरुआत चुनौतीपूर्ण रही। ओह ने पहला सेट 29-27 से जीतकर 2-0 की बढ़त बनाई। दूसरा सेट 29-29 से बराबर रहने के बाद दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी 3-1 से आगे हो गईं। इसके बाद कुमकुम ने तीसरे सेट में लगातार तीन 10 लगाकर परफेक्ट 30 का स्कोर बनाया और 29 के स्कोर पर रुकी ओह के खिलाफ मुकाबला 3-3 से बराबर कर दिया।ओह ने चौथा सेट 28-27 से जीतकर 5-3 की बढ़त बना ली और गोल्ड से सिर्फ एक सेट दूर थीं। कुमकुम ने पांचवें सेट में शानदार संयम दिखाया। उन्होंने लगातार तीन 10 लगाकर 30 का परफेक्ट स्कोर बनाया, जबकि ओह 28 का स्कोर ही कर सकीं। इसके बाद मुकाबला शूट-ऑफ में गया, जहां कुमकुम ने 10 का निशाना लगाकर इतिहास रच दिया।कुमकुम ने एशियन गेम्स के इंडिविजुअल अभियान की शुरुआत रैंकिंग राउंड में 10वें स्थान पर रहते हुए की थी। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने दक्षिण कोरिया की मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन और ओलंपिक टीम गोल्ड मेडलिस्ट कांग चाएयंग को हराकर बड़ा उलटफेर किया। इसके बाद उन्होंने 2025 वर्ल्ड चैंपियनशिप की सिल्वर मेडलिस्ट चीन की जिंगी झू को 6-2 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।सेमीफाइनल में जगह बनाने के साथ ही कुमकुम एशियन गेम्स के इंडिविजुअल रिकर्व फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। अब गोल्ड जीतकर उन्होंने इस स्पर्धा में भारत के लिए पहली बार स्वर्ण पदक भी सुनिश्चित कर दिया है। ब्रॉन्ज मेडल चीन की युवेई हुआंग ने हमवतन जिंगी झू को 6-4 से हराकर जीता। कुमकुम की इस जीत के साथ भारत को लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक गेम्स के लिए महिला इंडिविजुअल रिकर्व में एक कोटा भी हासिल हुआ। कुमकुम और येजिन ओह ने अपने-अपने देशों के लिए एक-एक ओलंपिक कोटा हासिल किया।कुश्ती में अंतिम पंघाल ने महिलाओं के 53 किग्रा वर्ग के फाइनल में जगह बनाकर गोल्ड मेडल की दावेदारी कायम रखी। उन्होंने नॉकआउट राउंड में कजाकिस्तान की शुगिला ओमीरबेक को 9-0 और क्वार्टर फाइनल में उज्बेकिस्तान की साकिबजमल एस्बोसीनोवा को 8-0 से हराया। सेमीफाइनल में उन्होंने चीन की जिन झांग को 6-1 से शिकस्त दी।सेमीफाइनल में अंतिम शुरुआत में 0-1 से पीछे थीं, लेकिन उन्होंने लगातार छह अंक हासिल कर मुकाबला अपने नाम किया। फाइनल में उनका सामना जापान की मो कियोका से होगा। फाइनल मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम 4:02 बजे शुरू होना है। फाइनल में पहुंचकर अंतिम एशियन गेम्स कुश्ती फाइनल में पहुंचने वाली चुनिंदा भारतीय महिला पहलवानों में शामिल हो गई हैं।पुरुषों के फ्रीस्टाइल 57 किग्रा वर्ग में अमन सहरावत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में प्रवेश किया। उन्होंने जापान के यामातो ओगावा को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर 20-9 से हराया और क्वार्टर फाइनल में कजाकिस्तान के नुरदनात ऐतानोव को 12-1 से शिकस्त दी। ताजिकिस्तान के आइयाल बेलोल्युब्स्की के खिलाफ सेमीफाइनल में अमन पहले हाफ के बाद 2-6 से पीछे थे। हालांकि, दूसरे हाफ में उन्होंने जोरदार वापसी की और 12 अंक हासिल किए, जबकि विरोधी पहलवान सिर्फ दो अंक बना सके। अमन ने मुकाबला 14-8 से जीतकर फाइनल में जगह बनाई। अब गोल्ड के लिए उनकी भिड़ंत उत्तर कोरिया के चोंग सोंग हान से होगी।पुरुषों के 74 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में सागर जगलान को क्वार्टर फाइनल में ईरान के योनेस एमामिचोगाई से 0-10 से हार मिली। इससे पहले उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया के तुल्गा तुमुर-ओचिर को 8-1 से हराया था। इसके बाद ब्रॉन्ज मेडल की दौड़ में सागर ने उज्बेकिस्तान के रजाम्बेक जमालतोव को 7-3 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में जगह बनाई।97 किग्रा फ्रीस्टाइल में दीपक पूनिया ने चीन के झोउ जुनपेंग को 12-2 से हराकर अभियान की शुरुआत की। क्वार्टर फाइनल में हांगकांग चीन के ली वुई फंग विंसेंट के मुकाबले के लिए नहीं पहुंचने के कारण दीपक को वॉकओवर मिला और वह सेमीफाइनल में पहुंचे। हालांकि, सेमीफाइनल में उज्बेकिस्तान के शेरजोड पोयोनोव से उन्हें 8-9 से हार का सामना करना पड़ा। अब दीपक के पास ब्रॉन्ज मेडल जीतने का मौका है। - नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में शुक्रवार को भारतीय महिला हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चीन को फाइनल में 1-0 से हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया। भारत ने 44 साल बाद एशियन गेम्स में महिला हॉकी का खिताब अपने नाम किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ भारतीय टीम ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए सीधे क्वालीफाई भी कर लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्रीय मंत्रियों ने टीम को इस शानदार उपलब्धि पर बधाई दी और खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय महिला हॉकी टीम की जीत को भारतीय हॉकी के लिए खास पल बताया। पीएमओ के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने कहा कि देश महिला हॉकी टीम की सफलता का जश्न मना रहा है। उन्होंने टीम के कौशल, टीमवर्क और जज्बे की सराहना करते हुए खिलाड़ियों को भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि यह सफलता देशभर में हॉकी की लोकप्रियता बढ़ाने में योगदान देगी।भारतीय महिला हॉकी टीम ने आखिरी बार 1982 में एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद टीम ने 1998 में सिल्वर मेडल हासिल किया था, जबकि 2018 में भी भारतीय टीम फाइनल तक पहुंची थी। 2026 में चीन को हराकर टीम ने 44 साल के अंतराल के बाद फिर से एशियन गेम्स का खिताब अपने नाम किया।फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही चीन पर दबाव बनाने की कोशिश की। छठे मिनट में बलजीत कौर को ग्रीन कार्ड मिला, लेकिन इसके कुछ ही देर बाद भारत ने बढ़त हासिल कर ली। अपना 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहीं लालरेम्सियामी ने 10वें मिनट में शानदार गोल कर भारत को 1-0 से आगे कर दिया।भारत को बढ़त के बाद स्कोर दोगुना करने का मौका मिला, लेकिन टीम पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील नहीं कर सकी। इसके बावजूद भारतीय डिफेंस ने मजबूती बनाए रखी और पहले क्वार्टर के अंत तक चीन को बराबरी का मौका नहीं दिया।दूसरे क्वार्टर में चीन ने आक्रामक रुख अपनाया और भारतीय गोल पर दबाव बनाया। चीन को पेनल्टी स्ट्रोक मिला, लेकिन अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया ने शानदार बचाव करते हुए भारत की बढ़त कायम रखी। चीन ने लगातार हमले किए, लेकिन भारतीय डिफेंस को भेदने में कामयाब नहीं हो सका।तीसरे क्वार्टर में भारतीय कप्तान सलीमा टेटे के चोटिल होने के बावजूद टीम ने चीन को हावी होने का मौका नहीं दिया। भारतीय डिफेंस ने लगातार मजबूत खेल दिखाया और चीन के हमलों को नाकाम किया। चौथे क्वार्टर में सलीमा टेटे मैदान पर वापस लौटीं और उनकी अगुवाई में भारतीय टीम ने अपनी बढ़त बरकरार रखी।मैच के अंतिम क्वार्टर में चीन ने बराबरी के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने संयम और मजबूत रक्षात्मक खेल का परिचय दिया। चीन को गोल करने का कोई मौका नहीं मिला और अंतिम सीटी बजते ही भारत ने 1-0 की जीत के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भारतीय महिला हॉकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि 44 साल बाद महिला हॉकी में गोल्ड जीतना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने टीम के हुनर, दृढ़ संकल्प और टीमवर्क की सराहना करते हुए खिलाड़ियों को चैंपियन बताया।केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भारतीय महिला टीम की जीत को भारतीय खेलों के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा चैंपियन चीन को हराकर भारतीय महिला हॉकी टीम ने 1982 के बाद 44 साल के इंतजार को खत्म किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस जीत के साथ टीम ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया है।केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय महिला हॉकी टीम को बधाई देते हुए लालरेम्सियामी के निर्णायक गोल और सविता पूनिया के पेनल्टी स्ट्रोक बचाव की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि इन दोनों मौकों पर टीम के कौशल, संयम और लड़ने के जज्बे की झलक दिखाई दी। राजनाथ सिंह ने कहा कि 44 साल बाद हासिल यह खिताब आने वाली पीढ़ियों को भारतीय हॉकी की विरासत आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा।ओलंपिक 2028 का टिकट भी हुआ पक्काएशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया है। इस उपलब्धि से भारतीय टीम के लिए अगले बड़े अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य की राह भी साफ हो गई है।
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नई दिल्ली। लवलीना बोरगोहेन ने 2024 ओलंपिक के बाद मुक्केबाजी से संन्यास लेने की योजना बनाई थी, लेकिन पेरिस खेलों में पदक से चूकने के कारण उन्होंने अपना इरादा बदल दिया जो उनके लिए फायदेमंद साबित हुआ क्योंकि भारतीय स्टार ने शुक्रवार को यहां एशियाई खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता ने अपने जन्मदिन पर 75 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में चीन की ज़ियी बाओ को 5-0 से हराकर एशियाई खेलों की महिला मुक्केबाजी में भारत के 12 साल से चले आ रहा स्वर्ण पदक का इंतजार खत्म किया। उन्होंने पिछले एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था।
लवलीना ने अपने मुकाबले के बाद कहा, ‘‘मेरे लिए यह वर्ष काफी मुश्किल रहा। पहले मैं मुक्केबाजी छोड़ना चाहती थी। लेकिन मैंने जारी रखा। मैं एशियाई खेलों में अपने पदक का रंग बदलना चाहती थी। यह बहुत महत्वपूर्ण था। उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि मैंने खेलना जारी रखा।’’असम की रहने वाली इस मुक्केबाज ने तोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था लेकिन पेरिस ओलंपिक से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने एक साल के लिए ब्रेक लिया और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी की। वह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने से चूक गई थी। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने से मैं खुश नहीं थी। लेकिन एक खिलाड़ी के जीवन में बहुत सी चीजें होती हैं, जैसे हार, चोट। आपको बहुत सी चीजों का सामना करना पड़ता है। यह स्वर्ण पदक मेरे लिए बहुत महत्व रखता है।’’लवलीना ने कहा, ‘‘मैं अच्छा महसूस कर रही हूं। मुझे नहीं पता कि स्वर्ण पदक का जश्न कैसे मनाऊं। मुझे अपनी इस जीत को स्वीकार करने के लिए कुछ समय चाहिए। मैं बहुत अच्छा महसूस कर रही हूं।’’इस 29 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा, ‘‘मुझे मजबूत रहना होगा और जीतना होगा। मैं हर चीज को लेकर बहुत सकारात्मक थी। जापान मेरे लिए बहुत भाग्यशाली है। मैं हमेशा जीतने के बारे में सोचती हूं।’’ लवलीना से जब पूछा गया कि स्वर्ण पदक जीतने के बाद वह सबसे पहले किसे फोन करेंगी, उन्होंने कहा, ‘‘मैं सबसे पहले अपनी मां को फोन करूंगी। वह मेरे मैच नहीं देखतीं क्योंकि वह बहुत चिंतित रहती हैं।’’ -
दुबई. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने अगले साल अफ्रीकी महाद्वीप में होने वाले पुरुष वनडे विश्व कप का कार्यक्रम बृहस्पतिवार को घोषित कर दिया जिसके अनुसार पिछली बार का उपविजेता भारत अपने अभियान की शुरुआत सात अक्टूबर को केपटाउन के न्यूलैंड्स स्टेडियम में मौजूदा चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करेगा। शुभमन गिल की अगुवाई वाली टीम 10 अक्टूबर को जोहानिसबर्ग के वांडरर्स स्टेडियम में अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से भिड़ेगी। भारत 14 अक्टूबर को सेंचुरियन (प्रिटोरिया, जिसे अब तशवाने के नाम से जाना जाता है) में अफगानिस्तान से भिड़ेगा, जिसके बाद 24 अक्टूबर को नवनिर्मित विक्टोरिया फॉल्स स्टेडियम में पानीसह-मेजबान जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच खेलेगा। भारत का मुक़ाबला 17 अक्टूबर को ब्लूमफ़ोनटेन में एक क्वालिफ़ायर से होगा।
दोनों सेमीफाइनल मैच क्रमशः 17 और 18 नवंबर को केपटाउन और सेंचुरियन में खेले जाएंगे जबकि फाइनल 21 नवंबर को वांडरर्स स्टेडियम में खेला जाएगा। किसी भी टीम को फाइनल तक पहुंचने से पहले 11 मैच खेलने होंगे। फाइनल 12वां मैच होगा।भारत को ग्रुप ए में ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, सह-मेजबान जिम्बाब्वे, अफगानिस्तान और क्वालीफाई करने वाली टीमों में से एक के साथ रखा गया है। ग्रुप बी में इंग्लैंड, सह-मेजबान दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड, बांग्लादेश, श्रीलंका और दूसरा क्वालीफायर शामिल हैं। ग्रुप लीग के चरण समाप्त होने के बाद, सुपर 7 टूर्नामेंट 25 अक्टूबर से शुरू होगा, जिसमें प्रत्येक ग्रुप की शीर्ष तीन टीमें और दोनों ग्रुपों में से बेहतर स्थिति वाली चौथी टीम अगले चरण के लिए क्वालीफाई करेंगी। भारत को ए1 श्रेणी में, ऑस्ट्रेलिया को ए2 श्रेणी में और पाकिस्तान को ए3 श्रेणी में रखा गया है।इंग्लैंड बी4 श्रेणी में है जबकि न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका क्रमशः बी1, बी2 और बी3 श्रेणी में हैं। यदि इनमें से कोई भी टीम क्वालीफाई करने में विफल रहती है, तो क्वालीफाई करने वाली टीम को स्वत: ही वह श्रेणी मिल जाएगी। मौजूदा आईसीसी वनडे रैंकिंग के अनुसार भारत को ए1 और पाकिस्तान को ए3 श्रेणी में रखा गया है, इसलिए यदि दोनों टीमें सुपर 7 के लिए क्वालीफाई करती हैं, तो वे सात नवंबर को केपटाउन में एक बार फिर आमने-सामने होंगी। उससे पहले भारत को 28 अक्टूबर को जिम्बाब्वे के विक्टोरिया फॉल्स में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने का मौका भी मिलेगा। -
निशिन. कठिन पिच पर ईशान किशन के 46 गेंद में नाबाद 80 रन की मदद से भारत ने एशियाई खेलों के पुरूष क्रिकेट सेमीफाइनल में बृहस्पतिवार को श्रीलंका को 124 रन से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बना ली जहां सामना चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से होगा । ईशान के 80 रन और वैभव सूर्यवंशी के 21 गेंद में 38 रन की मदद से भारत ने पहले बल्लेबाजी के लिये भेजे जाने पर सात विकेट पर 169 रन बनाये । जवाब में श्रीलंका ने पावरप्ले के भीतर ही छह विकेट 31 रन पर गंवा दिये थे और पूरी टीम 9 . 5 ओवर में 45 रन पर आउट हो गई । जसप्रीत बुमराह ने पहली दो गेंदों पर ही दो विकेट ले लिये जिसके बाद अक्षर पटेल ने भी दो विकेट लिये । श्रीलंका के दो बल्लेबाज रन आउट भी हुए । श्रीलंका अब कांस्य पदक के लिये बांग्लादेश से खेलेगा जबकि भारत का सामना फाइनल में पाकिस्तान से होगा । दोनों मैच शनिवार को खेले जायेंगे । भारत और पाकिस्तान के मैच से पहले फिर चर्चा है कि दोनों टीमें हाथ मिलायेंगी या नहीं । पिछले साल आपरेशन सिंदूर के बाद से भारतीय सेना के प्रति एकजुटता दिखाने के लिये भारतीय खिलाड़ियों ने एशिया कप और आईसीसी टूर्नामेंटों में पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया है । श्रीलंका के खिलाफ स्पिनरों की मददगार पिच पर भारत ने सूर्यवंशी को अंतिम एकादश में शामिल करने का फैसला किया । अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन भी टीम में थे लेकिन बायें हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह को बाहर रखा गया । तेज गेंदबाजी का जिम्मा सिर्फ जसप्रीत बुमराह पर रहेगा । श्रीलंका ने भी भारतीय बल्लेबाजों के लिये फिरकी का जाल बुना और कुछ हद तक कामयाब भी रहे। सूर्यवंशी और ईशान की पारियों के बिना भारत का स्कोर काफी कम रहता । धूप खिलने के कारण आज दोनों टीमें इन खेलों में पहली बार मैदान पर उतरी । पावरप्ले में गेंद काफी टर्न ले रही थी जिससे साबित हो गया कि स्पिनरों का दबदबा रहेगा । श्रीलंका ने तेज गेंदबाजों से दो ही ओवर डलवाये । अभिषेक (तीन गेंद में सात रन) ने श्रीलंका के कप्तान साहन अराछिगे को छक्का लगाया लेकिन उसके बाद ऊंचा शॉट खेलने के प्रयास में शॉर्ट थर्डमैन पर कैच दे बैठे । सैमसन ने नौ गेंद में सात रन बनाये और स्पिनर थारिंडु रत्नायके की गेंद पर अपना विकेट गंवा बैठे ।
तीन ओवर स्पिनरों से कराने के बाद बायें हाथ के तेज गेंदबाज बिनुरा फर्नांडो को चौथे ओवर में गेंद सौंपी गई । सूर्यवंशी ने उन्हें लगातार चौके जड़कर दबाव में ला दिया । थारिंडु के तीसरे ओवर में सूर्यवंशी ने उन्हें लांग आन पर छक्का लगाया । पावरप्ले के बाद भारत का स्कोर दो विकेट पर 58 रन था । 15 वर्ष के सूर्यवंशी को अराछिगे ने शॉर्ट थर्डमैन पर लपकवाकर पवेलियन भेजा । कप्तान श्रेयस अय्यर और अक्षर पटेल बीच के ओवरों में आउट हो गए जिससे रनगति धीमी पड़ी । ईशान ने हालांकि चार चौकों और चार छक्कों की अपनी पारी के दम पर भारत को अच्छे स्कोर तक पहुंचाया । -
काकामिगाहारा. दूसरे हाफ में तीन गोल गंवाने वाली गत चैम्पियन भारतीय टीम लचर प्रदर्शन के बावजूद आखिरी मिनट में अभिषेक के गोल की मदद से बृहस्पतिवार को एशियाई खेलों की पुरूष हॉकी स्पर्धा के फाइनल में पहुंच गई। भारत ने पहले हाफ में तीन गोल करके 3 . 0 से बढत बना ली थी लेकिन दूसरा हाफ पाकिस्तान के नाम रहा जिसने तीन गोल करके स्कोर 3 . 3 कर दिया । ऐसा लग रहा था कि मैच पेनल्टी शूटआउट तक जायेगा लेकिन आखिरी सीटी बजने से कुछ सेकंड पहले अभिषेक ने गोल करके भारत को फाइनल में पहुंचाया । फाइनल शनिवार को खेला जायेगा जिसमें भारत का सामना मलेशिया या कोरिया से होगा ।
भारत के लिये कप्तान हरमनप्रीत सिंह (पांचवां और 13वां मिनट ) ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल किये जबकि सुखजीत सिंह (23वां) और अभिषेक (60वां) ने फील्ड गोल दागे । पाकिस्तान के लिये कप्तान अबू बकर ने 30वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर पहला गोल किया जबकि शाहिद हन्नान (45वां) और राणा वाहिद (49वां) ने पांच मिनट के भीतर दो गोल दागे । -
गामागोरी सिटी (जापान). भारतीय जोड़ी मनु फ्रांसिस और कुरिसिंकल नोबल ने बृहस्पतिवार को यहां एशियाई खेलों की सेलिंग प्रतियोगिता में पुरुष स्किफ की नौवीं रेस में रजत पदक जीता। फ्रांसिस और नोबल ने नौ रेस के बाद कुल 23 अंक जुटाए और दूसरे स्थान पर रहे। दोनों भारतीय खिलाड़ी जो एर्नाकुलम के रहने वाले और आपस में ममेरे भाई हैं। चीन की जोड़ी ने 16 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता। इस स्पर्धा में सबसे कम कुल अंक हासिल करने वाली टीम विजेता बनती है। चीन की टीम में वेन जैडिंग और लियू तियान शामिल थे।
पुरुष स्किफ सेलिंग में प्रत्येक रेस में हासिल किए गए स्थान के आधार पर अंक दिए जाते हैं। पहला स्थान हासिल करने वाले खिलाड़ी को एक अंक मिलता है और कुल अंक सबसे कम होने पर जीत दर्ज होती है। स्किफ छोटी और हल्की नौकाएं होती हैं। हांगकांग चीन के अकिरा ल्यूक साकाई और रसेल आयल्सवर्थ ने 24 अंक के साथ कांस्य पदक जीता।
भारतीय जोड़ी ने तीसरी रेस जीती जबकि पहली, पांचवीं और नौवीं रेस में दूसरा स्थान हासिल किया। दूसरी ओर चीन ने चार रेस में पहला स्थान हासिल करके शीर्ष स्थान सुनिश्चित किया। केरल में 2018 की विनाशकारी बाढ़ के दौरान जान गंवाने वाले मछुआरे के बेटे नोबल ने कहा कि अपने पहले एशियाई खेलों में पदक जीतना विशेष एहसास है। नोबल ने फाइनल के बाद पीटीआई से कहा, ''यह हमारे पहले एशियाई खेल थे और पदक जीतना बहुत विशेष है। यह कड़ी प्रतियोगिता थी और हमने रजत पदक जीत लिया।'' दोनों मुंबई स्थित आर्मी यॉटिंग नोड में प्रशिक्षण लेते हैं।
फ्रांसिस ने कहा, ''यह बहुत कठिन था। हवा तेज थी। हम तेज हवा वाली परिस्थितियों में ज्यादा सहज नहीं हैं। लेकिन हम टिके रहे और किसी तरह रजत पदक जीत लिया।'' उन्होंने कहा, ''हल्की हवा की परिस्थितियों में हम काफी अच्छे हैं। हम भारत में प्रशिक्षण लेते हैं और भारत में लगभग हर समय हवा हल्की रहती है।'' फ्रांसिस के लिए यह मिश्रित भावनाओं वाला दिन रहा क्योंकि उन्हें लगा कि वे स्वर्ण पदक जीत सकते थे। उन्होंने कहा, ''हम इसे लेकर बहुत ज्यादा कुछ महसूस नहीं कर रहे हैं। खुशी भी है और उतनी खुशी भी नहीं है क्योंकि हम स्वर्ण पदक जीत सकते थे।'' उन्होंने कहा, ''शुरुआत में हमें पता नहीं था कि हम रजत पदक की स्थिति में हैं। हमें लगा कि हम कांस्य के लिए मुकाबला कर रहे हैं इसलिए यह हमारे लिए भाग्यशाली रहा। इस तरह की तेज हवा वाली परिस्थितियों में हमारी तकनीक उतनी अच्छी नहीं है। पानी बहुत उथल-पुथल वाला था। लेकिन अंतिम रेस में नाव बहुत तेजी से चली। इसलिए हम उससे खुश थे।'' अपनी जोड़ी के तालमेल के बारे में फ्रांसिस ने कहा, ''हम आपस में भाई हैं। हमारी माताएं और हम साथ-साथ बड़े हुए हैं। हम एक-दूसरे को समझते हैं और इससे तालमेल बिठाना आसान हो जाता है।'' महिला स्किफ स्पर्धा में भारत की हर्षिता तोमर और शीतल वर्मा की जोड़ी 26 अंक के साथ चौथे और अंतिम स्थान पर रही। जापान ने 11 अंक के साथ इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता जबकि हांगकांग चीन 16 अंक के साथ दूसरे और चीन 23 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भारतीय जोड़ी नौ में से किसी भी रेस में जीत दर्ज नहीं कर सकी। हालांकि उसने तीसरी और चौथी रेस में दूसरा स्थान हासिल किया। -
गुवाहाटी। कप्तान शुभमन गिल (नाबाद 233 रन) के रिकॉर्ड सबसे तेज दोहरे शतक और रोहित शर्मा (101 रन) के शतक से भारत ने बुधवार को यहां दूसरे वनडे में वेस्टइंडीज पर आठ विकेट से जीत दर्ज कर सीरीज में 2-0 से अजेय बढ़त बना ली। दो पीढ़ियों के इन सुपरस्टार बल्लेबाजों के शानदार प्रदर्शन से भारत ने 50 ओवर के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा सफल 'रन चेज' पूरा किया। वेस्टइंडीज ने शायद उम्मीद की होगी कि 405 रन का लक्ष्य भारतीय बल्लेबाजों के लिए बहुत मुश्किल साबित होगा, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। गिल ने अपनी ही टीम के साथी ईशान किशन के 126 गेंद में दोहरे शतक के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए 117 गेंद में 200 रन पूरे किए और वनडे में सबसे तेज दोहरा शतक जड़ दिया। वहीं पूर्व कप्तान रोहित ने वनडे में अपना 35वां शतक पूरा किया। दोनों ने मिलकर सिर्फ 26.2 ओवर में पहले विकेट के लिए 255 रन की साझेदारी कर दी और भारत ने 43.3 ओवर में दो विकेट पर 406 रन बनाकर लक्ष्य हासिल कर लिया। इस रात काफी रिकॉर्ड टूटे जिसमें भारत ने वनडे में अपना सबसे बड़ा लक्ष्य भी हासिल। अब भारत से आगे सिर्फ दक्षिण अफ्रीका है जिसने 2006 में जोहानिसबर्ग में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 435 रन के लक्ष्य का सफल पीछा किया था।
बारसापारा की पिच बल्लेबाजी के अनुकूल रही जिस पर 811 रन बने जो एक मैच में सबसे ज्यादा कुल रन का रिकॉर्ड रहा। वेस्टइंडीज ने जॉन कैंपबेल (101 रन), शाई होप (104 रन) और आमिर जांगू (114 रन) के शतकों की बदौलत 50 ओवर के प्रारूप में 400 रन से अधिक का पहला स्कोर खड़ा किया। लेकिन मेजबान टीम ने 2013 में जयपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक विकेट पर 362 रन के अपने पिछले सर्वश्रेष्ठ लक्ष्य का पीछा करने के रिकॉर्ड को बेहतर कर दिया। हालांकि भारत के सामने शुरुआती चुनौती अपना पहला 400 से अधिक के लक्ष्य का सफल पीछा करना था। रोहित और गिल ने शानदार शॉट्स की झड़ी लगाकर इसे एक पायदान और ऊपर उठा दिया। इस दौरान रोहित ने 12,000 वनडे रन पूरे किए जिससे वह ऐसा करने वाले केवल सातवें क्रिकेटर तथा सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली के बाद तीसरे भारतीय बने। इसके बाद उन्होंने एक और वनडे शतक पूरा किया और अपने अंदाज से हटकर हल्की उछल-कूद के साथ जश्न मनाया। गिल ने इससे पहले केवल 62 गेंदों में अपना 11वां वनडे शतक पूरा किया, यह इस प्रारूप में उनका सबसे तेज शतक था। दोनों ने शुरुआत से ही आक्रमण किया और बेहतरीन टाइमिंग से शॉट लगाए। गिल विशेष रूप से सहज दिखे, उन्होंने अपनी कलाइयों का इस्तेमाल करके गेंदों को गैप में रखा और फिर आगे निकलकर स्पिनरों को ऊपर से ड्राइव करके शॉट लगाए। दूसरी ओर, रोहित ने अपने पुल और पिक-अप शॉट्स के साथ ही ऑफ साइड में शानदार ड्राइव लगाकर बाउंड्री लगाई। भारत ने इस तरह 12 ओवर के अंदर 100 रन पार कर लिए। गिल ने 38 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया जबकि रोहित ने केवल 32 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। इस जोड़ी के आक्रमण ने जल्द ही 406 के कठिन लक्ष्य को एक वास्तविक संभावना में बदल दिया।
भारत 22वें ओवर तक बिना कोई विकेट गंवाए 200 रन तक पहुंच गया था, यह पहली बार था जब किसी वनडे में 350 से अधिक के लक्ष्य का पीछा करते हुए किसी सलामी जोड़ी ने ऐसा किया। पर यह साझेदारी 254 पर समाप्त हुई जब रोहित 75 गेंद पर 101 रन बनाकर आउट हुए। लेकिन तब तक भारत को 24 ओवरों में केवल 151 रन चाहिए थे जो मेजबान बल्लेबाजों की बल्लेबाजी को देखते हुए बहुत छोटा दिखने लगा। इससे पहले बल्लेबाजी का न्योता मिलने के बाद कैंपबेल ने 65 गेंदों में शतक जड़कर लय तय की और वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने भारत के अनुभवहीन तेज गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ाईं। कैंपबेल ने 68 गेंदों पर 101 रन की पारी के दौरान भारतीय आक्रमण की धुनाई की जिसमें नौ चौके और पांच छक्के जड़े थे। इसके बाद होप और जांगू ने बीच के और अंतिम ओवरों में दबदबा बनाते हुए करीब आठ रन प्रति ओवर की दर से स्कोर में इजाफा किया। होप ने सूत्रधारक के साथ आक्रामक बल्लेबाज की भूमिका बखूबी निभाई। उन्होंने विराट कोहली द्वारा 27 रन के निजी स्कोर पर मिले जीवनदान का पूरा फायदा उठाया। शॉर्ट मिडविकेट पर कोहली के हाथों से उनका कैच छूट गया था। कप्तान ने 94 गेंदों पर 104 रन की शानदार पारी खेली जिसमें आठ चौके और तीन छक्के शामिल थे। इससे भारत को वापसी करने का मौका नहीं मिला। जांगू ने भी होप का बखूबी साथ दिया। उन्होंने आक्रामकता के साथ सोच-समझकर शॉट खेलते हुए सिर्फ 69 गेंदों में अपना दूसरा वनडे शतक पूरा किया। वह 13 चौके और तीन छक्के की मदद से 114 रन बनाकर नाबाद रहे। इससे पहली बार वेस्टइंडीज के लिए वनडे में तीन शतक बने। यह स्कोर 2019 में इंग्लैंड के खिलाफ उसके पिछले 389 रन के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से बेहतर रहा। एशियाई खेलों की टीम में शामिल जसप्रीत बुमराह और बाहर चल रहे मोहम्मद सिराज की अनुपस्थिति में भारत 2027 विश्व कप से पहले युवाओं को आजमा रहा है। लेकिन तेज गेंदबाजी आक्रमण के प्रदर्शन ने काफी सवाल खड़े किए क्योंकि इससे तेज गेंदबाजी में उसकी अनुभवहीनता उजागर हो रही है। भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को लगातार नजरअंदाज किए जाने के बीच भारत की विकल्प तलाशने की कोशिश प्रभावशाली नहीं दिखी। जम्मू कश्मीर से भारतीय टीम में प्रतिनिधित्व करने वाले तीसरे क्रिकेटर बने औकीब नबी ने अपने 8.5 ओवर में 84 रन लुटाए, उन्हें सपाट पिच पर वेस्टइंडीज को रोकने में संघर्ष करना पड़ा। गुरनूर बरार ने 96 रन देकर दो जबकि प्रसिद्ध कृष्णा ने पांच ओवर में 45 रन देकर एक विकेट लिया। भारत की चिंता और बढ़ गई जब बल्लेबाजी ऑलराउंडर नमन धीर का टखना मुड़ गया जिससे उन्हें 6.1 ओवर गेंदबाजी करने के बाद 36वें ओवर में मैदान छोड़ना पड़ा। भारत के लिए सकारात्मक पहलू दो स्पिनर रहे जिसमें कुलदीप यादव (65 रन देकर दो विकेट) ने वनडे में 200 विकेट के क्लब में प्रवेश किया जबकि रविंद्र जडेजा ने 75 रन देकर दो विकेट झटके।
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निशियो (जापान). अंकुश पंघाल ने एशियाई खेलों में पुरुष मुक्केबाजी के फाइनल में पहुंचकर भारत का आठ साल का इंतजार खत्म किया, वहीं परवीन हुड्डा ने शानदार जीत के साथ महिलाओं के 65 किलोग्राम वर्ग में खिताबी मुकाबले में जगह बनाई लेकिन नरेंद्र बेरवाल को 90 किलोग्राम से अधिक वर्ग के सेमीफाइनल में बाहर होने के बाद कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। परवीन ने 65 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में चीन के ली शू को 5-0 से हराया। इसके बाद अंकुश ने 80 किलोग्राम वर्ग पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए उज्बेकिस्तान के फजलुद्दीन एरकिनबोएव को 4-1 से हराया। एरकिनबोएव 75 किलोग्राम भार वर्ग में मौजूदा विश्व चैंपियन हैं। अनुभवी मुक्केबाज बेरवाल को सेमीफाइनल में कजाखस्तान के मौजूदा सुपर हैवीवेट विश्व चैंपियन आइबेक ओरलबाय के खिलाफ 0-5 से हार का सामना करना पड़ा। बेरवाल ने इसके साथ ही एशियाई खेलों में एक और कांस्य पदक अपने नाम किया। वह 2023 में चीन में हुए पिछले एशियाई खेलों में भी सेमीफाइनल में हारकर बाहर हो गए थे। अंकुश आठ साल में एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरुष मुक्केबाज बन गए हैं। अमित पंघाल ने 2018 में 49 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीतकर आखिरी बार यह उपलब्धि हासिल की थी। राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता अंकुश ने एरकिनबोएव के खिलाफ जबरदस्त जुझारूपन दिखाया। उन्होंने धीमी शुरुआत से उबरते हुए अंतिम दौर में दबदबा बनाया और यादगार जीत हासिल की। अंकुश ने बाद में 'पीटीआई' से कहा, ''मैं एशियाई जूनियर चैंपियनशिप के दौरान भी इस प्रतिद्वंदी के खिलाफ खेल चुका था और मैं वह मुकाबला हार गया था। हमने उसके मुकाबलों के वीडियो देखे और अपनी रणनीति बनाई। मेरा लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना है।'' अंकुश को अपनी लय पाने में समय लगा क्योंकि एरकिनबोएव ने शुरू से ही आक्रामक रुख अपनाया। भारतीय मुक्केबाज ने कुछ जवाबी हमले किए, लेकिन उज्बेक मुक्केबाज यह राउंड 4-1 से जीत गया। अंकुश ने दूसरे राउंड में अपनी रणनीति बदल दी। उन्होंने अधिक आक्रामक रवैया अपनाया और 3-2 से जीत हासिल की। अंकुश ने अंतिम राउंड में जोरदार शुरुआत की और मुकाबले का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और पूरी तरह से नियंत्रण हासिल करते हुए 4-1 से जीत दर्ज की। परवीन दिग्गज एमसी मैरी कॉम (जिन्होंने 2014 में खिताब जीता था) और लवलीना बोरगोहेन (जिन्होंने पिछले खेलों में रजत पदक जीता था) के बाद एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाली तीसरी भारतीय महिला मुक्केबाज भी बन गई हैं। परवीन का पिछले एशियाई खेलों में जीता गया कांस्य पदक अंतरराष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (आईटीए) द्वारा 22 महीने के निलंबन के बाद छीन लिया गया था। परवीन पर यह कार्रवाई अपने ठिकाने की जानकारी (व्हेयरअबाउट्स) से जुड़ी विफलता के कारण हुई थी। अब उन्होंने हांगझोउ में अपने प्रदर्शन से आगे निकलते हुए एशियाई खेलों में कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया है। परवीन ने कहा, ''मुकाबला अच्छा रहा। मैं थोड़ी घबराई हुई थी, क्योंकि उसने क्वार्टर फाइनल में विश्व चैंपियन को हराया था। मैं उसी खिलाड़ी का सामना करने की तैयारी कर रही थी, इसलिए मुझे अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। मैंने जवाबी मुक्कों के जरिए अच्छा प्रदर्शन किया।'' रोहतक की रहने वाली इस मुक्केबाज ने ली के खिलाफ संयमित शुरुआत की लेकिन जल्द ही मुकाबला रोमांचक हो गया क्योंकि दोनों मुक्केबाज करीब से एक-दूसरे पर हमला करने लगे, और परवीन ने तीखे जवाबी मुक्कों के दम पर पांच में से तीन जजों का फैसला अपने पक्ष में किया। इसके बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा लेकिन उन्होंने धैर्य बनाए रखा। जब ली ने आक्रमण शुरू करने की कोशिश की, तो परवीन ने सही समय पर पलटवार किया और दूसरा राउंड सर्वसम्मति से अपने नाम किया। ली ने तीसरे राउंड में दबदबा बनाने की कोशिश की, वहीं परवीन ने मौकों का फायदा उठाया और यह राउंड 4-1 से जीतकर फाइनल में प्रवेश किया जहां उनका मुकाबला शुक्रवार को चीनी ताइपे की पेरिस ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता चेन निएन चिन से होगा। परवीन ने कहा, ''मुझे स्वर्ण पदक की उम्मीद है और इसे जीतने के लिए मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी।'' भारत के अग्रणी सुपर हेवीवेट मुक्केबाज नरेंद्र को ओरलबाय के खिलाफ शुरू से ही संघर्ष करना पड़ा। भारत के 31 वर्षीय खिलाड़ी ने जवाबी हमलों पर भरोसा किया लेकिन इससे उन्हें खास फायदा नहीं मिला। तीसरे राउंड में नरेंद्र को भी स्टैंडिंग काउंट का सामना भी करना पड़ा। नरेंद्र ने कहा, ''मैं पहली बार उसके खिलाफ खेल रहा था। हमने उसके पिछले मुकाबलों का विश्लेषण किया और कोच ने बताया कि क्या करना है। कोच ने मुझे अपने प्रतिद्वंदी पर अधिक बॉडी पंच मारने के लिए कहा, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया। वह विश्व का नंबर एक खिलाड़ी है। यह मेरा एशियाई खेलों में दूसरा पदक है, इसलिए मैं इसे स्वीकार करूंगा।'' भारतीय मुक्केबाजों ने पिछले एशियाई खेलों की तुलना में अपना बेहतर प्रदर्शन कर लिया है। पिछली बार उसने चार पदक जीते थे लेकिन यहां छह मुक्केबाजों ने पदक राउंड में प्रवेश किया है।
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निशिन. श्रीलंका और नेपाल का क्वार्टर फाइनल खराब मौसम के कारण रद्द होने के बाद भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में श्रीलंका से भिड़ेगी। श्रीलंका को अपनी बेहतर रैंकिंग के आधार पर सेमीफाइनल में जगह मिली। टीम रैंकिंग में श्रीलंका नौवें, जबकि नेपाल 14वें स्थान पर है। नागोया में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिसके कारण भारत के क्वार्टर फाइनल समेत अंतिम आठ के सभी मुकाबले बारिश की भेंट चढ़ गए। दूसरे सेमीफाइनल में पाकिस्तान का सामना बांग्लादेश से होगा।
दोनों सेमीफाइनल मुकाबले बृहस्पतिवार को खेले जाएंगे।
श्रेयस अय्यर की अगुआई वाली भारतीय पुरुष टीम ने अभी तक कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में कोई मुकाबला नहीं खेला है। इसी मैदान पर महिला क्रिकेट प्रतियोगिता भी आयोजित हुई थी, जिसमें हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक जीता था। -
काकामिगाहारा. भारतीय पुरूष हॉकी टीम ने एशियाई खेलों में अपना अजेय फॉर्म बरकरार रखते हुए सोमवार को पूल ए के आखिरी ग्रुप मैच में बांग्लादेश को 10 . 0 से हराया । भारत पूल ए में शीर्ष पर रहा और अब एक अक्टूबर को सेमीफाइनल में सामना चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से होगा । भारत के लिये कप्तान हरमनप्रीत सिंह ( 27वां और 40वां मिनट), शिलानंद लाकड़ा ( 44वां और 45वां) ने दो दो गोल किये जबकि अभिषेक ( तीसरा मिनट), जुगराज सिंह (22वां), सुखजीत सिंह (32वां), संजय (59वां) और मनदीप सिंह (60वां) ने एक एक गोल दागा । भारत ने इससे पहले इंडोनेशिया को 13 . 1, दक्षिण कोरिया को 8 . 2, सिंगापुर को 7 . 0 और जापान को 2 . 0 से हराया था ।
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नागोया. युवा निशानेबाज ईशा सिंह ,लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह और लंबी कूद में मुरली श्रीशंकर ने एशियाई खेलों में सोमवार को भारत की झोली में रजत पदक डाले हालांकि स्वर्णिम सफलता के करीब पहुंचकर चूकने का सिलसिला जारी रहा । भारत के नाम पर अभी भी चार स्वर्ण पदक ही दर्ज हैं। इसके अलावा उसने 19 रजत और 20 कांस्य पदक सहित कुल 43 पदक हासिल कर लिए हैं और वह पदक तालिका में 12वें स्थान पर है। चीन 130 स्वर्ण, 53 रजत और 45 कांस्य सहित कुल 228 पदक जीतकर शीर्ष पर बना हुआ है। पहले ही 10000 मीटर में रजत पदक जीत चुके गुलवीर ने पुरुषों की 1500 मीटर प्रतियोगिता में 3:36.72 सेकंड के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ एक और रजत पदक अपने नाम किया। इससे पहले 21 वर्षीय निशानेबाज ईशा ने पांच शूट-ऑफ में से गुजरने के बाद रजत पदक जीता। श्रीशंकर ने लंबी कूद में हांगझोउ खेलों का अपना रजत पदक बरकरार रखा । उन्होंने दूसरे प्रयास में 8 . 07 मीटर की कूद लगाई लेकिन चौथे प्रयास में टखने में चोट लगने के कारण आखिरी दो प्रयास नहीं कर सके । चीन के युहाओ शि ने 8 . 17 मीटर के साथ स्वर्ण पदक जीता । उजबेकिस्ताकन के अनवर अनवारोव को कांस्य पदक मिला । पारूल चौधरी ने महिलाओं की 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक हासिल किया ।
कुराश खिलाड़ी पिकी बलहारा ने 78 किलोग्राम से कम के वर्ग में कांस्य पदक जीतकर सबको चौंका दिया। एशियाई खेलों में उनका यह दूसरा पदक है। इससे पहले उन्होंने 2018 में रजत पदक जीता था। इस तरह से वह इन खेलों में सबसे सफल भारतीय कुराश खिलाड़ी बन गईं। महिला 400 मीटर बाधा दौड़ में विथ्या रामराज का प्रदर्शन भी शानदार रहा। उन्होंने दिग्गज पीटी उषा के चार दशक से अधिक पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ते हुए कांस्य पदक जीता। रामराज ने 54.75 सेकंड का समय निकालकर उषा के 1984 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक में बनाए गए 55.42 सेकंड के रिकॉर्ड को तोड़ा। मुक्केबाजी में ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा) और कपिल पोखरिया (90 किग्रा) ने सेमीफाइनल में पहुंच कर पदक पक्का किया। भारत के तीन मुक्केबाज पहले ही सेमीफाइनल में जगह बना चुके थे। तीरंदाजी में हालांकि भारत को झटका लगा क्योंकि महिला व्यक्तिगत कंपाउंड चैंपियन ज्योति सुरेखा वेम्मन क्वार्टर फाइनल में बाहर हो गई। अनुभवी ट्रैक एथलीट अविनाश साबले पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में अपना खिताब बरकरार रखने में नाकाम रहे। उन्होंने 8:21.67 सेकंड के सत्र के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के बावजूद पांचवां स्थान हासिल किया। इसके अलावा मनु भाकर 25 मीटर महिला पिस्टल प्रतियोगिता में टीम या व्यक्तिगत वर्ग में अच्छा प्रदर्शन करने में विफल रहने के बाद बिना पदक के ही टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। निशानेबाजी में काफी रोमांचक मुकाबले देखने को मिला जिसमें ईशा ने रजत पदक जीता।
हैदराबाद की 21 वर्षीय ईशा इस वर्ग की मौजूदा विश्व नंबर एक हैं। उन्होंने रजत की दौड़ में बने रहने के लिए उत्तर कोरिया की किम हियोन सुक के खिलाफ तीन शूट-ऑफ जीते। इसके बाद स्वर्ण पदक के मुकाबले में उन्हें चीन की शियाओ जियारुईशुआन के साथ दो और शूट-ऑफ से गुजरना पड़ा। निर्धारित सीरीज के बाद दोनों के 38-38 अंक थे, लेकिन अंतिम निशाने में ईशा चूक गईं और उन्हें दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। कंधे के दर्द और करीबी एलिमिनेशन से उबरते हुए ईशा ने बेहद नाटकीय फाइनल में अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया। मनु 579 अंक के साथ 11वें स्थान पर रहीं, जो फाइनल में पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं था। ईशा ने क्वालीफिकेशन में 580 अंक जुटाए थे। भारतीय महिला टीम भी पदक की दौड़ में थी, लेकिन अहम समय पर राही सरनोबत की एक चूक टीम पर भारी पड़ी। सरनोबत ने चौथी सीरीज (प्रत्येक सीरीज में पांच निशाने लगाने होते हैं) में 39 अंक का निराशाजनक स्कोर किया। इसके बाद भारत की पदक की उम्मीदें समाप्त हो गईं। सरनोबत 568 अंक के साथ 30वें स्थान पर रहीं। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम बारिश के कारण अफगानिस्तान के खिलाफ क्वार्टरफाइनल मैच रद्द होने के बाद सेमीफाइनल में पहुंच गई। श्रेयस अय्यर की टीम विश्व रैंकिंग में पहले स्थान पर होने के कारण आगे बढ़ी, जबकि अफगानिस्तान 10वें स्थान पर है। स्क्वाश में दो व्यक्तिगत रजत पदक और मिश्रित युगल में एक कांस्य पदक जीतने के बाद भारत ने टीम प्रतियोगिता में भी अच्छा प्रदर्शन जारी रखा। भारतीय पुरुष और महिला टीमें क्वार्टर फाइनल में पहुंच गईं, जहां महिला टीम ने जापान पर एक कठिन जीत हासिल की। तीसरी वरीयता प्राप्त भारतीय महिला टीम ने जापान को 2-1 से हराया, हालांकि शीर्ष खिलाड़ी अनाहत सिंह विश्व की छठे नंबर की खिलाड़ी सतोमी वातानाबे से पांच गेम में हार गईं। अनाहत ने व्यक्तिगत सेमीफाइनल में विश्व की छठे नंबर की जापानी खिलाड़ी को हराया था और ऐतिहासिक रजत पदक जीता था। पिछले एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय महिला टीम ने अपने पहले मैच में चीन को 3-0 से हराया था। चीन में स्वर्ण पदक जीतने वाली पुरुष टीम ने दक्षिण कोरिया को 3-0 से हराकर अंतिम आठ में अपनी जगह पक्की की। भारतीय पुरुष वॉलीबॉल टीम ने भी पूल सी के प्रारंभिक दौर के मैच में हांगकांग को हराकर लगातार दूसरी जीत हासिल की। भारत ने इससे पहले वियतनाम पर 3-0 की जीत के साथ शुरुआत की और अब वह मंगलवार को कतर से भिड़ेगा। -
नागोया. भारत के सर्वेश कुशारे और एंसी सोजन ने रविवार को यहां एशियाई खेलों में क्रमश: पुरुष ऊंची कूद और महिला लंबी कूद फाइनल में अधिकांश समय बढ़त बनाए रखी लेकिन अंत में उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा जबकि पारुल चौधरी ने महिला 3000 मीटर स्टीपलचेज में कांस्य पदक जीता। सर्वेश स्पर्धा में काफी समय तक शीर्ष पर रहे लेकिन 2.25 मीटर की ऊंचाई को पहली कोशिश में पार नहीं कर पाने के बाद दूसरे स्थान पर खिसक गए। चीनी ताइपे के चाओ शुआन फू ने यह ऊंचाई अपनी पहली कोशिश में पार कर ली। हालांकि कुशारे ने दूसरी कोशिश में 2.25 मीटर की ऊंचाई पार कर ली।
महिला लंबी कूद फाइनल में एंसी ने 6.53 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया और दूसरे स्थान पर रहीं। चीन की हुआंग यिंगयिंग ने आखिरी प्रयास में 6.55 मीटर की कूद लगाकर भारतीय खिलाड़ी को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया। इससे पहले भारत की हरिता भद्रा ने महिला 200 मीटर में 23.20 सेकेंड के समय के साथ कांस्य पदक जीता। भद्रा तीसरे स्थान पर रहीं। वह जापान की इडो अबिगेइरुफुका से मामूली अंतर से आगे रहीं जिन्होंने 23.21 सेकेंड का समय निकाला। हालांकि एंसी की हमवतन शैली सिंह के लिए महिला लंबी कूद फाइनल में निराशा हाथ लगी। चीन की मेंगयी तान ने 6.46 मीटर की कूद लगाकर भारतीय खिलाड़ी को पीछे छोड़ दिया जिससे शैली कांस्य पदक से चूक गईं। एंसी ने पांचवें प्रयास में 6.53 मीटर की कूद लगाई थी लेकिन यिंगयिंग ने 6.55 मीटर की कूद के साथ अंतिम प्रयास में उन्हें पीछे छोड़ दिया। शैली का दिन का सर्वश्रेष्ठ प्रयास 6.42 मीटर रहा।
महिला 200 मीटर फाइनल में सिंगापुर की शांति परेरा ने सत्र का सर्वश्रेष्ठ 22.78 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता जबकि चीन की चेन युजी ने 22.93 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक हासिल किया। फाइनल में शामिल एक अन्य भारतीय उन्नति अयप्पा बोलैंड 23.48 सेकेंड के समय के साथ छठे स्थान पर रहीं।
पिछले एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली पारुल ने नौ मिनट 8.67 सेकेंड के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ लगातार दूसरी बार कांस्य पदक अपने नाम किया। बहरीन की विनफ्रेड यावी ने नौ मिनट 4.36 सेकेंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि कजाखस्तान की नोराह जेरुतो तनुई ने नौ मिनट 06.82 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक अपने नाम किया। स्पर्धा में हिस्सा लेने वाली एक अन्य भारतीय एथलीट अंकिता नौ मिनट 19.24 सेकेंड के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ चौथे स्थान पर रहीं। -
काकामिगाहारा. सुनेलिता टोप्पो के दो गोल की मदद से भारतीय महिला हॉकी टीम ने रविवार को यहां एशियाई खेलों के अपने अंतिम पूल बी मैच में सिंगापुर को 7-0 से रौंद दिया जिससे अब सेमीफाइनल में उसका सामना कोरिया से होगा। भारत ने पांच मैच में पांच जीत के साथ पूल बी में शीर्ष स्थान हासिल किया। अब सेमीफाइनल 30 सितंबर को होगा। भारत के लिए कप्तान सलीमा टेटे (17वें मिनट), सुनेलिता (22वें, 24वें), लालरेमसियामी (26वें), रुतुजा दादासो पिसाल (29वें), निक्की प्रधान (35वें) और दीपिका (55वें) ने गोल किए। गत चैंपियन और मौजूदा ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन दूसरे सेमीफाइनल में मेजबान जापान से भिड़ेगा।
सिंगापुर ने पहले क्वार्टर में भारत को कड़ी टक्कर दी, लेकिन भारत ने दबदबा बनाए रखा। सिंगापुर ने भारत के शुरुआती आठ पेनल्टी कॉर्नर नाकाम किए। दूसरे क्वार्टर में सलीमा ने मैदानी गोल से भारत का खाता खोला। इसके बाद सुनेलिता ने दो गोल किए जबकि ललरेमसियामी और रुतुजा ने भी गोल कर भारत को 5-0 से आगे कर दिया। तीसरे क्वार्टर में निक्की ने भारत की बढ़त 6-0 कर दी। भारत को लगातार पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन टीम उन्हें गोल में बदलने में नाकाम रही। मैच खत्म होने से पांच मिनट पहले दीपिका ने शानदार फ्लिक से सातवां गोल किया। पहले तीन क्वार्टर में भारत को 24 पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन इनमें से केवल तीन को ही गोल में बदला जा सका। मैच खत्म होने से पांच मिनट पहले भारत को लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर मिले जिसमें दीपिका ने टीम का सातवां गोल किया। - -तिलोत्तमा-विदरसा ने व्यक्तिगत फाइनल में बनाई जगहनई दिल्ली। भारत की तिलोत्तमा सेन, विदरसा विनोद कोचलुमकल और आशी चौकसे ने एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं के 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीता। तीनों ने क्वालिफिकेशन राउंड में कुल 1763 पॉइंट्स बनाए। चीन ने 1773 पॉइंट्स के साथ टीम गोल्ड, जबकि कजाकिस्तान ने 1754 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज जीता।भारतीय तिकड़ी पूरे क्वालिफिकेशन में मेडल की दौड़ में बनी रही। नीलिंग, प्रोन और स्टैंडिंग पोजीशन में उनके स्कोर ने एक मजबूत टीम टोटल बनाया। तिलोत्तमा और आशी शुरुआती स्टेज में लीडिंग शूटर्स में से थीं, जबकि विदरसा ने नीलिंग में मुश्किल शुरुआत के बाद काफी रिकवरी की। तिलोत्तमा खास तौर पर कंसिस्टेंट थीं। नीलिंग और प्रोन स्टेज के बाद वह टॉप तीन में पहुंच गईं। आखिरकार उन्होंने इंडिविजुअल क्वालिफिकेशन में 590 पॉइंट्स के साथ तीसरा स्थान हासिल किया और आठ-शूटर फाइनल में जगह बनाई।विदरसा ने भी आखिर में अहम बढ़त हासिल की। नीलिंग के दौरान स्टैंडिंग में नीचे गिरने के बाद उन्होंने प्रोन और स्टैंडिंग में मजबूती से वापसी की और 588 पॉइंट्स के साथ छठे स्थान पर क्वालिफिकेशन पूरा किया। वह फाइनल में तिलोत्तमा के साथ शामिल हुईं। इस बीच, आशी एक मुश्किल स्टैंडिंग सीरीज़ के बाद इंडिविजुअल फाइनल में जगह नहीं बना पाईं। वह 585 पॉइंट्स के साथ 15वें स्थान पर रहीं, लेकिन टीम स्टैंडिंग में भारत के सिल्वर मेडल जीतने में उनका योगदान अहम रहा।क्वालिफिकेशन फॉर्मेट में शूटर्स को नीलिंग, प्रोन और स्टैंडिंग में 20-20 शॉट पूरे करने थे। तीनों एथलीट्स के कुल स्कोर से टीम मेडल पोजीशन तय हुई, जबकि टॉप आठ इंडिविजुअल परफॉर्मर फाइनल में पहुंचे। हर देश से ज्यादा से ज्यादा दो शूटर ही क्वालिफाई कर सकते थे। चीन की हान जियायू ने इंडिविजुअल क्वालिफिकेशन में 594 पॉइंट्स के साथ टॉप किया, जबकि तिलोत्तमा के 590 पॉइंट्स ने उन्हें तीसरा स्थान दिलाया। विदरसा का 588 स्कोर छठे स्थान के लिए काफी था। टीम सिल्वर पहले ही पक्का हो चुका है। अब ध्यान इंडिविजुअल फाइनल पर है। तिलोत्तमा और विदरसा का ध्यान एक और पदक पर होगा।























