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ग्रेटर नोएडा/ भारत को 1983 विश्व कप दिलाने वाले कप्तान कपिल देव ने वेस्टइंडीज के महान हरफनमौला सर गारफील्ड सोबर्स को क्रिकेट को नया आयाम देने वाला खिलाड़ी करार देते हुए कहा कि उन्होंने खेल के प्रति खिलाड़ियों की सोच और खेलने का तरीका ही बदल दिया। सोबर्स का 89 साल की उम्र में शुक्रवार को बारबाडोस स्थित उनके घर पर निधन हो गया। अपने शानदार करियर में उन्होंने 93 टेस्ट मैचों में 57.78 की औसत से 8,032 रन बनाए, जिसमें 26 शतक शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने 235 विकेट भी अपने नाम किए। कपिल ने यहां केडीएसजी (कपिल देव-संजय गुप्ता) अस्पताल में एक न्यूज़ एजेंसी से कहा, ''जो भी क्रिकेट को जानता है, वह गैरी सोबर्स को जरूर जानता होगा। वह इस खेल के सबसे महान क्रिकेटरों में से एक थे।'' उन्होंने कहा, ''उन्होंने जिस अंदाज में क्रिकेट खेला, उसने हम जैसे खिलाड़ियों को प्रेरित किया। उनका जाना बेहद दुखद है, लेकिन वह हमें अपनी प्रतिभा, खेल और विरासत के रूप में बहुत कुछ देकर गए हैं, जिससे हम जीवनभर सीखते रहेंगे।'' कपिल देव ने कहा कि सोबर्स की असाधारण प्रतिभा और खेल के प्रति उनका जुनून ही उन्हें महान बनाता था।
उन्होंने कहा, ''उनकी प्रतिभा, खेल का आनंद लेने का तरीका और खेलने की शैली उन्हें सबसे अलग बनाती थी। उस दौर में वेस्टइंडीज की टीम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में थी, लेकिन सोबर्स ने रिकॉर्ड बनाने के साथ-साथ लोगों की यह सोच भी बदल दी कि क्रिकेट कैसे खेला जाए और उसका लुत्फ कैसे उठाया जाये।'' इस 67 साल के पूर्व खिलाड़ी ने बताया कि सोबर्स ने पारंपरिक क्रिकेट कोचिंग की सोच भी बदल दी।
उन्होंने कहा, ''मुझे सबसे ज्यादा यही बात याद है कि उन्होंने एमसीसी (मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब) की पारंपरिक कोचिंग पद्धति को बदल दिया। उस समय बल्लेबाजों को 'वी' (सीधे बल्ले से लांग ऑफ से लांग ऑन की दिशा में) में खेलने की सलाह दी जाती थी, लेकिन सोबर्स ने दिखाया कि इसके बाहर भी रन बनाए जा सकते हैं। यह बात बचपन से मेरे मन में बस गई थी।'' खुद शानदार हरफनमौला रहे कपिल ने कहा कि ऑलराउंडर के रूप में सोबर्स का कोई मुकाबला नहीं था।
उन्होंने कहा, ''ऑलराउंडर तो और भी हुए हैं, लेकिन उनके स्तर का कोई नहीं। बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजी, स्पिन गेंदबाजी, कमाल का क्षेत्ररक्षण हर क्षेत्र में उनका कोई सानी नहीं था। सबसे बड़ी बात यह थी कि वह दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करना जानते थे। क्रिकेटर तो बहुत आते हैं, लेकिन असली मनोरंजन करने वाले बहुत कम होते हैं।'' उन्होंने कहा, ''वह शानदार क्रिकेटर थे। उनका जाना क्रिकेट जगत के लिए बड़ी क्षति है, लेकिन उनके खेलने के तरीके से हर खिलाड़ी सीख ले सकता है। उन्हें मेरा सलाम। उन्होंने जिंदगी को हमेशा खुलकर जिया।'' कपिल ने सोबर्स के साथ बिताए पलों को याद करते हुए कहा, ''शाम को वह बैठकर बातें किया करते थे और हम सभी उन्हें बड़े ध्यान से सुनते थे। दिलचस्प बात यह थी कि वह क्रिकेट से ज्यादा जिंदगी के दूसरे पहलुओं पर बातें करते थे।'' -
लंदन. भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ निर्णायक तीसरे एक दिवसीय क्रिकेट मैच के लिये जब रविवार को लॉडर्स पर उतरेगी तो समूचे क्रिकेट जगत की नजरें 'हिटमैन' रोहित शर्मा पर लगी होंगी । तमाम अटकलों के बीच बीसीसीआई ने साफ तौर पर कहा है कि यह रोहित के कैरियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं होगा लेकिन पहले दो मैचों में नाकाम रहे भारत के पूर्व कप्तान खुद को साबित जरूर करना चाहेंगे । फ्रंटफुट पर बेहतरीन पूल शॉट खेलने और स्पिनरों को मैदान के चारों ओर खेलने वाले रोहित इस श्रृंखला में उस लय में नहीं दिखे जिससे इन अटकलों को बल मिला कि 39 वर्ष का यह दिग्गज अगले साल दक्षिण अफ्रीका में होने वाला वनडे विश्व कप नहीं खेल सकेगा । कार्डिफ की कठिन पिच पर रोहित ने नौ डॉट गेंदें खेली जिसके बाद आउट हो गए । 'क्रिकेट का घर' कहे जाने वाले लॉडर्स पर बल्लेबाजों की मददगार पिच पर शायद उन्हें लय हासिल करने में मदद मिले । बतौर कप्तान रोहित ने मोर्चे से अगुवाई करते हुए हमेशा पावरप्ले में जोखिमभरे शॉट्स खेले हैं । उनके प्रशंसक रविवार को उसी रोहित को देखना चाहते हैं । पहले दस ओवर में उन्हें जोफ्रा आर्चर की तूफानी गेंदों का सामना करना होगा । कप्तान शुभमन गिल भी बड़ी पारी खेलना चाहेंगे जो सोफिया गार्डंस पर आसानी से आउट हो गए थे ।
दूसरी ओर विराट कोहली का शानदार फॉर्म बरकरार है । वह बृहस्पतिवार को दूसरे शतक की ओर बढ रहे थे लेकिन आर्चर की गेंद पर आउट हो गए जिसके बाद भारत का मध्यक्रम ढह गया और टीम को पराजय का सामना करना पड़ा । अब भारतीय टीम उससे सबक लेकर उतरेगी । केएल राहुल की जगह उतरे ईशान किशन शॉर्ट गेंद पर विकेट गंवा बैठे । उछलती गेंदों के सामने भारतीय बल्लेबाजों की कमजोरी जाहिर हो गई ।श्रेयस अय्यर ने मध्यक्रम में अच्छा खेला और आदिल रशीद के साथ स्पिनरों का बखूबी सामना किया । गेंदबाजी में कुलदीप यादव को उतारा जा सकता है क्योंकि वॉशिंगटन सुंदर चोटिल हैं । रविंद्र जडेजा की गैर मौजूदगी में अक्षर पटेल ने स्पिन हरफनमौला का काम अच्छे से किया है । भारतीय गेंदबाजों को जो रूट के बल्ले पर अंकुश लगाना होगा जो कोहली की तरह रन बनाये जा रहे हैं । रूट के अलावा इंग्लैंड के बाकी बल्लेबाजों ने कुछ खास नहीं किया है । टीमें :
भारत: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), इशान किशन (विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल, शिवम दुबे, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह, गुरनूर बराड़, प्रिंस यादव। इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), बेन डकेट, जोस बटलर (विकेटकीपर), टॉम बैंटन, जो रूट, जैकब बेथेल, विल जैक्स, रेहान अहमद, लियाम डॉसन, जेम्स कोल्स, सैम कुरेन, गस एटकिंसन, जोफ्रा आर्चर, जोस टंग, साकिब महमूद, आदिल राशिद। मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 3.30 बजे शुरू होगा. -
नई दिल्ली। भारत की स्टार शटलर पीवी सिंधु ने शुक्रवार को जापान ओपन सुपर 750 के सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया है। क्वार्टर फाइनल में सिंधु का मुकाबला नोजोमी ओकुहारा से होना था, लेकिन वह चोट के कारण मैच में हिस्सा नहीं ले सकीं।
यह इस सीजन में सिंधु का तीसरा सेमीफाइनल है। इससे पहले वह मलेशिया सुपर 1000 और ऑस्ट्रेलिया सुपर 500 के सेमीफाइनल में पहुंची थीं। इसके साथ ही, 2023 डेनमार्क ओपन के बाद यह उनका पहला सुपर 750 सेमीफाइनल है। 31 वर्षीय भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु की निगाहें इस सीजन का पहला खिताब जीतने पर होंगी। सेमीफाइनल मुकाबले में उनका सामना टोक्यो ओलंपिक चैंपियन और दुनिया की विश्व की नंबर 4 चीनी खिलाड़ी चेन युफेई से होगा। सिंधु और चेन युफेई के बीच अब तक कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। हालांकि, हेड-टू-हेड रिकॉर्ड में सिंधु उनसे 6-8 से पीछे हैं।सिंधु को युफेई के खिलाफ पिछले पांच मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा है। सेमीफाइनल में जीत न केवल सिंधु के हारने के इस सिलसिले को खत्म करेगी, बल्कि लगभग तीन साल में उनके पहले सुपर 750 फाइनल में पहुंचने का रास्ता भी साफ होगा। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु बीडब्ल्यूएफ सुपर 750 टूर्नामेंट में अब भारत की एकमात्र दावेदार हैं। सिंधु ने प्री-क्वार्टर फाइनल मैच में विश्व की नंबर 5 खिलाड़ी हान युए को सिर्फ 35 मिनट में हराया था। उन्होंने हान को सीधे गेम में 21-16, 21-14 से मात देते हुए क्वार्टर फाइनल का टिकट हासिल किया था। इस साल 28 वर्षीय चेन युफेई ने शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने इंडोनेशिया मास्टर्स का खिताब जीता, जबकि थाईलैंड और मलेशिया में हुए सुपर 500 टूर्नामेंट में फाइनल में भी जगह बनाई थी। इसके अलावा, युफेई ने सिंगापुर और भारत में खेले गए सुपर 750 टूर्नामेंट में भी सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था। वह मलेशिया ओपन और ऑल इंग्लैंड जैसे प्रतिष्ठित सुपर 1000 टूर्नामेंट में भी अंतिम चार में पहुंची थीं। -
नई दिल्ली। फीफा विश्व कप 2026 का फाइनल मुकाबला 20 जुलाई रात 12:30 (भारतीय समय के अनुसार) मौजूदा यूरोपीय चैंपियन स्पेन और मौजूदा विश्व तथा दक्षिण अमेरिकी चैंपियन अर्जेंटीना के बीच खेला जाएगा। दोनों टीमें शानदार प्रदर्शन के दम पर फाइनल में पहुंची हैं।
सेमीफाइनल में स्पेन ने प्रबल दावेदार फ्रांस को एकतरफा अंदाज में हराकर फाइनल का टिकट कटाया। पूरे मुकाबले में स्पेन ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और सटीक आक्रमण के दम पर फ्रांस को कोई मौका नहीं दिया। स्पेन ने ग्रुप चरण में ग्रुप-एच में शीर्ष स्थान हासिल किया। टीम का पहला मुकाबला केप वर्डे के खिलाफ गोलरहित बराबरी पर समाप्त हुआ। इसके बाद स्पेन ने सऊदी अरब को 4-0 और उरुग्वे को 1-0 से हराकर नॉकआउट चरण में जगह बनाई।नॉकआउट दौर में स्पेन ने ऑस्ट्रिया को 3-0 से हराया। इसके बाद पुर्तगाल पर 1-0 और बेल्जियम पर 2-1 की रोमांचक जीत दर्ज की। बेल्जियम के खिलाफ स्पेन ने टूर्नामेंट में अपना पहला गोल खाया।अब स्पेन 2010 के बाद पहली बार विश्व कप फाइनल खेलेगा, जब उसने पहली बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था।अर्जेंटीना लगातार दूसरे विश्व कप फाइनल मेंमौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना ने भी रोमांचक सफर तय करते हुए लगातार दूसरी बार विश्व कप फाइनल में जगह बनाई है।ग्रुप चरण में अर्जेंटीना ने अल्जीरिया को 3-0, ऑस्ट्रिया को 2-0 और जॉर्डन को 3-1 से हराया। कप्तान लियोनेल मेसी अब तक टूर्नामेंट में 8 गोल कर चुके हैं, जबकि विश्व कप इतिहास में उनके कुल गोलों की संख्या 21 हो गई है।नॉकआउट चरण में अर्जेंटीना ने अतिरिक्त समय में केप वर्डे को 3-2 से हराया। इसके बाद मिस्र के खिलाफ 0-2 से पिछड़ने के बावजूद शानदार वापसी करते हुए 3-2 से जीत दर्ज की।क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना ने स्विट्जरलैंड को अतिरिक्त समय में 3-1 से हराया। वहीं सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए 2-1 से जीत हासिल की।विश्व कप में दूसरी बार आमना-सामनाविश्व कप इतिहास में स्पेन और अर्जेंटीना की अब तक केवल एक बार भिड़ंत हुई है। वर्ष 1966 में खेले गए उस मुकाबले में अर्जेंटीना ने स्पेन को 2-1 से हराया था।दोनों देशों के बीच कुल 13 मैत्री मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें स्पेन ने 6, अर्जेंटीना ने 5 मुकाबले जीते हैं, जबकि 2 मैच बराबरी पर समाप्त हुए। दोनों के बीच पिछला मुकाबला 2018 में खेला गया था, जिसमें स्पेन ने अर्जेंटीना को 6-1 से हराया था।विश्व कप फाइनल तक पहुंचे, लेकिन कभी नहीं बने चैंपियनफीफा विश्व कप के इतिहास में कई ऐसी टीमें रही हैं, जिन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया, लेकिन खिताब जीतने का सपना कभी पूरा नहीं कर सकीं। इनमें नीदरलैंड्स सबसे आगे है, जिसने तीन बार फाइनल खेला, लेकिन हर बार उपविजेता बनकर लौटना पड़ा। वहीं चेकोस्लोवाकिया (अब चेकिया) और हंगरी दो-दो बार फाइनल में पहुंचकर भी ट्रॉफी से चूक गए। दूसरी ओर, क्रोएशिया और स्वीडन ने एक-एक बार फाइनल खेला, लेकिन उन्हें भी उपविजेता से संतोष करना पड़ा। इन पांचों टीमों का सफर इस बात का प्रमाण है कि विश्व कप फाइनल तक पहुंचना जितना कठिन है, उससे कहीं अधिक मुश्किल उस प्रतिष्ठित ट्रॉफी को अपने नाम करना है।स्पेन-अर्जेंटीना फाइनल: इन खिलाड़ियों के बीच होगी दिलचस्प भिड़ंतफीफा विश्व कप 2026 के फाइनल में रविवार को स्पेन और अर्जेंटीना आमने-सामने होंगे। दोनों टीमों ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है। ऐसे में खिताबी मुकाबले का परिणाम कुछ अहम व्यक्तिगत मुकाबलों पर भी निर्भर करेगा।आयमेरिक लापोर्टे बनाम लियोनेल मेसी39 वर्षीय लियोनेल मेसी इस विश्व कप में आठ गोल के साथ गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे हैं। उन्होंने चार असिस्ट भी किए हैं और विश्व कप इतिहास के सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं।स्पेन की रक्षा पंक्ति की जिम्मेदारी आयमेरिक लापोर्टे के कंधों पर होगी। उन्होंने युवा डिफेंडर पाउ कुबार्सी के साथ मिलकर मजबूत साझेदारी बनाई है। स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में अब तक केवल एक गोल खाया है। यदि लापोर्टे मेसी को रोकने में सफल रहते हैं, तो स्पेन की खिताबी उम्मीदें काफी मजबूत हो जाएंगी।रोड्री बनाम एंजो फर्नांडेज़मध्य पंक्ति में स्पेन के कप्तान रोड्री और अर्जेंटीना के एंजो फर्नांडेज़ के बीच मुकाबला बेहद अहम रहेगा।रोड्री ने इस विश्व कप में सबसे अधिक 648 सफल पास पूरे किए हैं और उनकी पासिंग सटीकता 93 प्रतिशत रही है। इसके अलावा उन्होंने टूर्नामेंट में सबसे अधिक दूरी भी तय की है।दूसरी ओर, एंजो फर्नांडेज़ ने गेंद छीनने और निर्णायक मौकों पर गोल करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने नॉकआउट चरण में मिस्र और इंग्लैंड के खिलाफ महत्वपूर्ण गोल दागकर अर्जेंटीना को फाइनल तक पहुंचाने में बड़ा योगदान दिया।लामिन यामाल बनाम निकोलस टैग्लियाफिकोस्पेन के युवा स्टार लामिन यामाल टूर्नामेंट के सबसे खतरनाक खिलाड़ियों में शामिल हैं। सेमीफाइनल में फ्रांस के खिलाफ उनकी तेज रफ्तार और आक्रामक खेल ने स्पेन को बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।उन्हें रोकने की जिम्मेदारी अर्जेंटीना के अनुभवी लेफ्ट बैक निकोलस टैग्लियाफिको पर होगी। 33 वर्षीय टैग्लियाफिको 2022 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे हैं और बड़े मुकाबलों का भरपूर अनुभव रखते हैं। उनका अनुभव और मजबूत रक्षण अर्जेंटीना के लिए अहम साबित हो सकता है।अब दोनों टीमें विश्व फुटबॉल की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफी के लिए आमने-सामने होंगी। एक ओर स्पेन 16 वर्षों बाद विश्व चैंपियन बनने का सपना पूरा करना चाहेगा, तो दूसरी ओर अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार खिताब जीतकर इतिहास रचने की कोशिश करेगा। इन तीन अहम मुकाबलों में जिस टीम का पलड़ा भारी रहेगा, उसके विश्व कप 2026 का खिताब जीतने की संभावना भी उतनी ही मजबूत होगी। -
नई दिल्ली। हॉकी इंडिया ने एफआईएच महिला हॉकी विश्व कप 2026 के लिए 20 सदस्यीय भारतीय टीम की घोषणा कर दी है। सलीमा टेटे टीम की कप्तान होंगी। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट 15 से 30 अगस्त तक बेल्जियम और नीदरलैंड की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा।मुख्य कोच स्जोर्ड मारीन ने टीम को अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का संतुलित मिश्रण बताते हुए विश्वास जताया कि भारतीय टीम विश्व की शीर्ष टीमों को कड़ी चुनौती देने के लिए तैयार है।
हाल ही में न्यूजीलैंड में एफआईएच नेशंस कप जीतने वाली भारतीय टीम का अधिकांश हिस्सा विश्व कप के लिए बरकरार रखा गया है। भारत ने उस टूर्नामेंट में अपराजित रहते हुए खिताब अपने नाम किया था।टीम में सविता और बिचू देवी खरीबाम को गोलकीपर के रूप में चुना गया है। रक्षापंक्ति में इशिका चौधरी, सुशीला चानू पुखरामबम, लालथंतलुआंगी, ज्योति और शिल्पी डबास शामिल हैं।मध्य पंक्ति में कप्तान सलीमा टेटे के साथ निक्की प्रधान, साक्षी राणा, सुनेलिता टोप्पो, नेहा और दीपिका सोरेंग खेलेंगी।आक्रमण पंक्ति में लालरेमसियामी, रुतुजा दादासो पिसाल, नवनीत कौर, दीपिका, इशिका, बलजीत कौर और ब्यूटी डुंगडुंग को जगह मिली है।भारतीय टीम को पूल-डी में चीन, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ रखा गया है। भारत अपने सभी लीग मुकाबले नीदरलैंड के एम्सटेलवीन स्थित वैगेनर हॉकी स्टेडियम में खेलेगा। भारत अपने अभियान की शुरुआत 16 अगस्त को चीन के खिलाफ करेगा। इसके बाद 18 अगस्त को दक्षिण अफ्रीका और 20 अगस्त को इंग्लैंड से मुकाबला होगा। -
अटलांटा. विश्व कप सेमीफाइनल में जब समय खत्म हो रहा था तो इंग्लैंड अपनी बढ़त को हर हाल में बचाए रखना चाहता था और कोच थॉमस ट्यूशेल ने गोलमुख के सामने एक मजबूत दीवार बनाने के लिए एकादश और रणनीति में बदलाव किए लेकिन अर्जेंटीना और लियोनल मेसी ने उस दीवार को आसानी से तोड़ दिया। दूसरे हाफ के आखिरी लम्हों में इंग्लैंड 1-0 से आगे था लेकिन मेस्सी की मदद से 85वें मिनट में एंजो फर्नांडीज और इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में लॉटेरो मार्टिनेज ने गोल किए जिससे अर्जेंटीना ने बुधवार को 2-1 से जीत दर्ज करके फाइनल में जगह बनाई। फ़ुटबॉल की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विताओं में से एक इस बड़े मुकाबले में ट्यूशेल की रणनीतिक चालों की शायद वर्षों तक समीक्षा और आलोचना होगी क्योंकि इंग्लैंड 1966 के बाद पहली बार विश्व कप फाइनल में पहुंचने से चूक गया। ट्यूशेल ने कहा, ''वे हर हेडर पर प्रहार कर रहे थे। वे लगातार क्रॉस पर क्रॉस दे रहे थे इसलिए हमने 'बैक फाइव' (रक्षा पंक्ति में पांच खिलाड़ी) वाली रणनीति अपनाई।'' उन्होंने कहा, ''हमारे गोल के ठीक बाद हमने बहुत सारे क्रॉस और बहुत सारे मौके विरोधी टीम को दे दिए। इसलिए हमने मदद करने की कोशिश की। लेकिन जाहिर है कि जिम्मेदारी कोच की होती है। और... अगर चीजें ठीक नहीं होतीं तो यह कहना आसान होता है कि फैसला गलत था।
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अटलांटा. लियोनेल मेस्सी और अर्जेंटीना ने मौजूदा विश्व कप में अंतिम मिनटों में वापसी करने का नया इतिहास रचकर दिखा दिया कि उनकी टीम कभी हार नहीं मानती। अर्जेंटीना की टीम सेमीफाइनल में यहां इंग्लैंड के खिलाफ शुरू में पीछे चल रही थी लेकिन आखिर में वह 2-1 से विजयी रही। इस तरह से मौजूदा चैंपियन ने अंतिम क्षणों में नाटकीय वापसी करने की लंबी सूची में एक और अध्याय जोड़ दिया है। अब अर्जेंटीना रविवार को फाइनल में स्पेन से भिड़ेगा। ग्रुप चरण में मेस्सी के शानदार प्रदर्शन से अर्जेंटीना ने अपने तीनों मैच जीते लेकिन नॉकआउट चरण में उसने प्रत्येक मैच में पिछड़ने के बाद वापसी की। केप वर्दे के खिलाफ अर्जेंटीना एक समय पीछे चल रहा था। उसने अतिरिक्त समय में दो गोल करके जीत हासिल की। लिसैंड्रो मार्टिनेज ने 92वें मिनट में गोल करके अर्जेंटीना को 2-1 की बढ़त दिलाई। इसके बाद मेस्सी ने कॉर्नर किक से एक शानदार पास दिया जो 111वें मिनट में आत्मघाती गोल में तब्दील हो गया। इसी गोल ने अर्जेंटीना को 3-2 से जीत दिलाई। मिस्र के खिलाफ अंतिम 16 के मैच में तो अर्जेंटीना का बाहर होना लगभग तय लग रहा था। मिस्र दूसरे हाफ के स्टॉपेज टाइम से ठीक 11 मिनट पहले तक 2-0 से आगे था। लेकिन फिर टूर्नामेंट में सबसे रोमांचक वापसी देखने को मिली। क्रिस्टियन रोमेरो ने 79वें मिनट में गोल किया, मेस्सी ने चार मिनट बाद दूसरा गोल दागा और एन्ज़ो फर्नांडीज़ ने स्टॉपेज टाइम के दो मिनट बाद निर्णायक गोल दाग दिया। स्विट्जरलैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में भी अर्जेंटीना को जीत हासिल करने के लिए अतिरिक्त समय तक जूझना पड़ा। जूलियन अल्वारेज़ ने 112वें मिनट में निर्णायक गोल दागा। इसके बाद अंतिम क्षणों में लोटारो मार्टिनेज़ ने गोल करके अर्जेंटीना की टीम को 3-1 की जीत के साथ सेमीफाइनल में पहुंचा दिया। और अब इंग्लैंड के खिलाफ फिर से उसने इसी तरह से वापसी की। अर्जेंटीना की अंतिम क्षणों में गोल करने की महारत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने अभी तक जो 19 गोल किए हैं उनमें से 11 गोल मैच के 79वें मिनट या उसके बाद किए हैं।
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ब्यूनस आयर्स (अर्जेंटीना) . मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना की विश्व कप की सेमीफाइनल में इंग्लैंड पर 2-1 की जीत का जश्न मनाने के लिए यहां हजारों फुटबॉल प्रशंसक सड़कों पर उमड़ पड़े। ब्यूनस आयर्स में तब मूसलाधार बारिश हो रही थी लेकिन इससे प्रशंसकों पर कोई असर नहीं पड़ा। इनमें से कई प्रशंसक को अपनी शर्ट उतार कर ही सड़कों पर नाच गा रहे थे। इनमें से कई प्रशंसकों ने अपने शरीर नीले और सफेद राष्ट्रीय रंगों से रंगे थे। युवा लड़के-लड़कियां बिजली के खंभों और ट्रैफिक लाइटों पर चढ़कर अर्जेंटीना के झंडे लहरा रहे थे। कई लोग फूट-फूटकर रो रहे थे। उन पर भावनाएं पूरी तरह से हावी थी। अटलांटा में खेले गए मैच में लोटारो मार्टिनेज के इंजरी टाइम की दूसरे मिनट में किए गए विजयी गोल के बाद जश्न का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। अर्जेंटीना अब रविवार को विश्व कप फाइनल में स्पेन से भिड़ेगा। कैथोलिक नन रोसाना बेटो क्रूज़ ने कहा, ''ये सब अजनबी हैं। वे एक दूसरे को नहीं जानते लेकिन फुटबॉल ने उन्हें एकजुट कर दिया है। वे एक साथ उछल कूद और नाच रहे हैं। विश्व कप, हमारी राष्ट्रीय टीम, इन्हीं की वजह से यह सब संभव हो पाता है।'' कई प्रशंसकों ने कहा कि लोग फाइनल में पहुंचने की खुशी से ज्यादा इस बात से अधिक उत्साहित थे कि उनकी टीम ने अपने चिर प्रतिद्वंद्वी इंग्लैंड को हराया। इंग्लैंड और अर्जेंटीना की प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है। ब्रिटेन ने 1982 में फ़ॉकलैंड द्वीप समूह पर कब्जा कर लिया था इसके बाद दोनों देशों के संबंध बिगड़ गए थे और फुटबॉल का मैदान भी इससे अछूता नहीं रहा था। एक प्रशंसक मारिया बेरटेरो ने कहा, ''यह केवल फुटबॉल से जुड़ा नहीं है। यह उस देश को हराने के बारे में है जिसने हमारा दिल तोड़ दिया था। यह जीत हमारे लिए खास है। यह अद्भुत है। यह जादू जैसा है। इससे मुझे अर्जेंटीनाई होने पर गर्व महसूस होता है।
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नयी दिल्ली. भारतीय टेबल टेनिस ने मंगलवार को बड़ी उपलब्धि हासिल की जब नवीनतम आईटीटीएफ विश्व रैंकिंग में भारत की तीन युगल जोड़ियों ने शीर्ष 10 में जगह बनाई। भारतीय युगल जोड़ियों की अगुआई मानव ठक्कर और मानुष शाह कर रहे हैं जो पुरुष युगल रैंकिंग में दूसरे स्थान पर काबिज हैं जो किसी भी युगल वर्ग में किसी भारतीय जोड़ी की अब तक की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग हैं। महिला युगल में दीया चितले और यशस्विनी घोरपडे दुनिया की 10वें नंबर की जोड़ी के रूप में शीर्ष 10 में जगह बनाने में सफल रहीं। मिश्रित युगल में दीया और मानुष दुनिया की पांचवें नंबर की जोड़ी है। यह पहली बार है जब भारत की तीन जोड़ियों ने विश्व रैंकिंग में एक साथ शीर्ष 10 में जगह बनाई है। यह उपलब्धि युगल खेलने वाले सबसे मजबूत देशों में भारत की बढ़ती अहमियत को दिखाती है क्योंकि भारत की जोड़ियां लगातार चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और चीनी ताइपे जैसे पारंपरिक दिग्गजों को कड़ी टक्कर दे रही हैं। यह उपलब्धि खेल के लिए एक अहम मोड़ पर भी आई है क्योंकि लॉस एंजिलिस 2028 खेलों में युगल वर्ग की ओलंपिक कार्यक्रम में वापसी होने वाली है जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस स्पर्धा का महत्व बढ़ गया है।
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नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक बार फिर विदेशी धरती पर कमाल कर दिया। टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेला गया ऐतिहासिक टेस्ट मैच 270 रन से अपने नाम किया। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इस उपलब्धि पर देश की बेटियों की सराहना की है।
लंदन में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में 285 रन बनाए। इसके जवाब में इंग्लैंड का खेमा 170 रन पर सिमट गया। भारत के पास 115 रन की बढ़त थी। अगली पारी 341/7 के स्कोर पर घोषित करने के साथ मेहमान टीम ने इंग्लैंड को जीत के लिए 457 रन का टारगेट दिया, जिसके जवाब में मेजबान टीम दूसरी पारी में सिर्फ 186 रन पर सिमट गई।केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “लॉर्ड्स में रचा इतिहास। हमारी महिला क्रिकेट टीम को इस मशहूर मैदान पर टेस्ट मैच जीतने वाली पहली महिला टीम बनने पर बधाई। इंग्लैंड पर 270 रनों की शानदार जीत इस उपलब्धि को और भी खास बनाती है। इस मौके पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने कहा कि यह शानदार जीत क्रिकेटरों की पीढ़ियों को प्रेरित करेगी और भारत में महिला क्रिकेट के विकास को और मजबूत करेगी।बीसीसीआई ने एक बयान में कहा, “क्रिकेट के घर (लॉर्ड्स) में टेस्ट मैच जीतना किसी भी क्रिकेटर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। युवा भारतीय टीम के लिए, यह एक अहम पल है जो देश में महिला क्रिकेट की शानदार प्रगति और विश्व स्तर पर टीम के जज्बे, कौशल और चरित्र को दर्शाता है। यह जीत भारतीय क्रिकेट में एक और शानदार अध्याय जोड़ती है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टीम की बढ़ती अहमियत को मजबूत करती है। यह उन अनगिनत युवा लड़कियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है जो उच्चतम स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखती हैं।”बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास ने कहा, “यह भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास के सबसे बेहतरीन पलों में से एक है। लॉर्ड्स में टेस्ट मैच जीतना बेहद खास है और यह उस साहस, अनुशासन और विश्वास को दर्शाता है जो इस टीम ने पूरे मुकाबले के दौरान दिखाया है। उन्होंने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया, जबरदस्त जज्बा दिखाया और पूरे देश को गौरवान्वित किया। मैं आईसीसी चेयरमैन जय शाह के बेहतरीन नेतृत्व की सराहना करना चाहता हूं, जिनकी महिला क्रिकेट के विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने ऐसी उपलब्धियों की नींव रखने में मदद की है। मैं बीसीसीआई की तरफ से हरमनप्रीत कौर, खिलाड़ियों, कोचों और सपोर्ट स्टाफ को इस अविस्मरणीय उपलब्धि के लिए बधाई देता हूं।”बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने कहा, “यह ऐतिहासिक जीत महिला क्रिकेट में बरसों के लगातार निवेश और भरोसे का नतीजा है। बीसीसीआई हमारी महिला क्रिकेटरों की सफलता के लिए सही माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहा है, जिसके लिए मजबूत घरेलू ढांचे, बेहतर मौकों और ज्यादा पेशेवर सहयोग पर ध्यान दिया गया है। मैं हमारे पूर्व सचिव और मौजूदा आईसीसी चेयरमैन जय शाह के दूरदर्शी नेतृत्व की भी सराहना करना चाहूंगा। उनकी अहम पहलों- जैसे कि सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट वाली महिला क्रिकेटरों के लिए समान वेतन, घरेलू महिला क्रिकेटरों के लिए बढ़ी हुई मैच फीस और विमेंस प्रीमियर लीग की शुरुआत ने भारत में महिला क्रिकेट की तस्वीर बदल दी है। लॉर्ड्स में आज मिली कामयाबी उन्हीं कोशिशों और सबसे बढ़कर, हमारे खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के असाधारण समर्पण और कड़ी मेहनत का नतीजा है।” - नयी दिल्ली. भारतीय महिला क्रिकेट की दिग्गज खिलाड़ी मिताली राज ने इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले गए ऐतिहासिक एकमात्र टेस्ट में भारत की 270 रन की शानदार जीत का सबसे बड़ा कारण परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता को बताया। भारत ने सोमवार को लॉर्ड्स में खेले गए पहले महिला टेस्ट को यादगार बनाते हुए मेजबान इंग्लैंड को चारों दिन हर विभाग में पछाड़कर बड़ी जीत दर्ज की। बल्लेबाजी में शतक लगाने वाली यास्तिका भाटिया की अगुवाई में भारतीय बल्लेबाजों ने इंग्लैंड के गेंदबाजों का बेहतर सामना किया, जबकि क्रांति गौड़ की अगुवाई वाली तेज गेंदबाजी इकाई ने मेजबान टीम की तुलना में पिच से ज्यादा मदद हासिल की।यास्तिका और क्रांति दोनों ने लॉर्ड्स 'ऑनर्स बोर्ड' पर अपना नाम दर्ज कराया। मिताली ने कहा, ''यह ऐतिहासिक जीत है और लॉर्ड्स में भारत का पहला टेस्ट था। यह देखकर अच्छा लगा कि टीम इस प्रारूप में इतना अच्छा प्रदर्शन कर रही है, जिसमें दुनिया भर की महिला क्रिकेटर अक्सर खेलने का मौका नहीं पातीं।'' पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा कि हरमनप्रीत कौर की टीम ने हालिया टी20 विश्व कप में नॉकआउट चरण में जगह नहीं बना पाने की निराशा को पीछे छोड़ते हुए शानदार वापसी की। उन्होंने कहा, ''टी20 से खुद को अलग करके लंबे प्रारूप में उतरना किसी भी क्रिकेटर के लिए चुनौती होती है, लेकिन लड़कियों ने शानदार तरीके से खुद को तैयार किया। घरेलू टीम को उसके मैदान पर हराना अलग ही एहसास देता है। मुझे यकीन है कि टीम टी20 विश्व कप की निराशा से काफी हद तक आगे बढ़ चुकी है।'' मिताली ने कहा, ''खेल की यही खूबसूरती है। निराशा के बाद भी आपको अगले दिन के लिए तैयार होना पड़ता है और लड़कियों ने यही किया। उन्हें छोटा ब्रेक मिला, उन्होंने इस मुकाबले की तैयारी की और अब उसका परिणाम सबके सामने है।''मिताली ने क्रांति और यास्तिका के प्रदर्शन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर दो भारतीय महिला खिलाड़ियों के नाम दर्ज होना अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा, ''मैं वास्तव में बहुत खुश हूं कि दो भारतीय महिला क्रिकेटरों के नाम ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज हुए। यह भी एक ऐतिहासिक क्षण है।'' उन्होंने क्रांति की तारीफ करते हुए कहा, "क्रांति अभी भारतीय टीम में नई हैं। पिछले साल उन्होंने टीम में जगह बनाई और 50 ओवर के प्रारूप में भी काफी प्रभावशाली रही हैं। उनकी सबसे अच्छी बात यह है कि वह बड़े मंच से प्रभावित नहीं होतीं।'' मिताली ने यास्तिका भाटिया की वापसी की सराहना करते हुए कहा, ''यास्तिका बेहद मजबूत खिलाड़ी हैं। पिछले घरेलू विश्व कप से पहले वह चोटिल हो गई थीं। किसी खिलाड़ी के लिए घरेलू विश्व कप से बाहर रहना बेहद दुखद होता है। फिर भारत ने विश्व कप जीता, ऐसे में आप समझ सकते हैं कि उस समय वह कैसा महसूस कर रही होंगी।'' लॉर्ड्स में पहला महिला टेस्ट पुरुषों के पहले टेस्ट के 142 साल बाद खेला गया। इससे पहले भारतीय कोच अमोल मजूमदार ने भी इस बात पर हैरानी जताई थी कि इतने प्रतिष्ठित मैदान पर महिला टेस्ट आयोजित होने में इतना समय लग गया। मिताली ने इस पर कहा, ''मुझे भी हैरानी होती है कि हमने इंग्लैंड में टेस्ट खेले हैं, लेकिन लॉर्ड्स में कभी नहीं खेल पाए। इसका जवाब मैं नहीं दे सकती कि इसमें इतना समय क्यों लगा। लेकिन मेरा मानना है कि हर चीज का एक सही समय होता है।''
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लंदन। ऑफ स्पिनर स्नेह राणा के चार विकेट की बदौलत भारत ने सोमवार को यहां प्रतिष्ठित लॉर्ड्स मैदान पर खेले गए पहले महिला क्रिकेट टेस्ट मैच के चौथे और अंतिम दिन इंग्लैंड को 270 रन से हरा दिया। भारत को एकमात्र टेस्ट के अंतिम दिन जीत के लिए चार विकेट की दरकार थी और स्नेह (42 रन पर चार विकेट) की अगुआई में मेहमान टीम ने इंग्लैंड को 62.5 ओवर में 186 रन पर समेटकर मुकाबला अपने नाम किया। सयाली सतघरे (24 रन पर दो विकेट), दीप्ति शर्मा (36 रन पर दो विकेट) और क्रांति गौड़ (54 रन पर दो विकेट) ने भी दो-दो विकेट हासिल किए। विकेटकीपर बल्लेबाज ऐमी जोन्स 80 गेंद में 54 रन बनाकर इंग्लैंड की ओर से शीर्ष स्कोरर रही जबकि अंतिम बल्लेबाज के दौरान पर आउट होने वाली सोफी एकलेस्टोन ने 50 रन की पारी खेली। इंग्लैंड ने अंतिम दिन की शुरुआत छह विकेट पर 130 रन से आगे खेलते हुए की और 90 मिनट से अधिक बल्लेबाजी की लेकिन आखिरकार भारतीय गेंदबाजों के सामने घुटने टेक दिए। भारत ने मेजबान टीम के सामने 457 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था। ऐमी अंतिम दिन आउट होने वाली पहली बल्लेबाज रहीं। उन्हें स्नेह ने मिडविकेट पर शेफाली वर्मा के हाथों कैच कराया। क्रांति की गेंद पर दो जीवनदान पाने वाली एकलेस्टोन ने इजी वोंग (33 गेंद में एक रन) के साथ मिलकर भारत के जीत के इंतजार को बढ़ाया लेकिन टीम को हार से नहीं बचा सकीं। दीप्ति ने वोंग और लॉरेन बेल (00) को बोल्ड करके भारत को जीत की दहलीज पर पहुंचाया।
स्नेह ने इसके बाद एकलेस्टोन को बोल्ड करके भारत की जीत सुनिश्चित की जिसके बाद मैदान पर और भारतीय ड्रेसिंग रूम में जश्न शुरू हो गया। भारत पिछले टी20 विश्व कप में ग्रुप चरण से आगे बढ़ने में नाकाम रहा था जबकि इंग्लैंड को फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा था। लॉर्ड्स में पुरुषों का पहला टेस्ट मैच होने के 142 साल बाद महिला टेस्ट मैच हो रहा था इसलिए इस ऐतिहासिक मैच में दोनों टीम के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा था। भारत की जीत की नींव स्मृति मंधाना और तीसरे दिन यादगार शतक जड़ने वाली यस्तिका भाटिया ने रखी। क्रांति गौड़ ने पहली पारी में पांच विकेट लेकर भारत को महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई और लॉर्ड्स के 'ऑनर बोर्ड' पर अपना नाम दर्ज कराया। भारतीय बल्लेबाजों ने इंग्लैंड की बल्लेबाजों की तुलना में पिच से बेहतर सामंजस्य बैठाया। पिच से तेज गेंदबाजों को मदद मिल रही थी जबकि तीसरे दिन कुछ गेंद नीची भी रह रहीं थीं। तेज गेंदबाजों क्रांति और सतघरे ने विपक्षी गेंदबाजों से बेहतर प्रदर्शन किया और पिच की ढलान का सही इस्तेमाल करते हुए काफी मूवमेंट हासिल किया। ऑफ स्पिनर स्नेह भी तेज गेंदबाजों द्वारा बनाए गए दबाव को बनाए रखने में कामयाब रहीं। इस बड़ी जीत के साथ भारत ने सबसे लंबे प्रारूप में इंग्लैंड के खिलाफ अपना शानदार रिकॉर्ड भी बरकरार रखा। दोनों टीम के बीच खेले गए 16 टेस्ट मैच में से भारत ने चार मैच जीते जबकि इंग्लैंड ने एक जीत हासिल की। अन्य 11 मैच ड्रॉ रहे। इंग्लैंड के हाथों भारत को एकमात्र हार 1995 में मिली थी।
दिन का खेल शुरू होने से पहले भारतीय टीम को महान सचिन तेंदुलकर से प्रेरणादायक बातें सुनने को मिलीं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के चेयरमैन जय शाह भी तेंदुलकर के साथ स्टैंड से मैच देख रहे थे और बाद में उन्होंने खिलाड़ियों से हाथ मिलाया। यह इंग्लैंड की अनुभवी खिलाड़ियों टैमी ब्यूमोंट और पूर्व कप्तान हीथर नाइट का विदाई मैच भी था। -
अटलांटा. मौजूदा विश्व कप में सर्वाधिक गोल करने वाले छह खिलाड़ियों में से पांच खिलाड़ी अब भी मैदान में बने हुए हैं जिससे 'गोल्डन बूट' हासिल करने की दौड़ रोचक बन गई है। अर्जेंटीना के सुपरस्टार लियोनेल मेस्सी और फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एमबाप्पे ने आठ-आठ गोल किए हैं और वह 'गोल्डन बूट' हासिल करने की दौड़ में सबसे आगे हैं। इन दोनों खिलाड़ियों के बीच विश्व कप करियर में सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड बनाने के लिए भी रोचक जंग चल रही है। मेस्सी ने अभी तक सभी विश्व कप में कुल मिलाकर 21 गोल किए हैं जबकि एमबाप्पे के नाम पर 20 गोल दर्ज हैं। मौजूदा टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में इन दोनों के बाद नॉर्वे के एर्लिंग हालैंड का नंबर आता है जिन्होंने सात गोल किए हैं लेकिन उनकी टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई है। इसके अलावा इंग्लैंड के जूड बेलिंगहम और हैरी केन भी दौड़ में हैं। इन दोनों ने छह-छह गोल किए हैं। फ्रांस के औस्मान डेम्बेले पांच गोल करके ज्यादा पीछे नहीं हैं। स्पेन के मिकेल ओयार्ज़ाबल ने चार गोल किए हैं। अगर स्पेन सेमीफाइनल में फ्रांस को हरा देता है तो वह चुनौती पेश कर सकते हैं।
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साउथम्प्टन. भारतीय टी20 टीम के नए कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि उनकी टीम ब्रिटेन की परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाने में नाकाम रही जिसके कारण उसे आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ श्रृंखला में हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इससे उन्हें भविष्य में बेहतर कप्तान बनने में मदद मिलेगी। भारत की टी20 विश्व कप जीत के बाद सूर्यकुमार यादव की जगह कप्तान नियुक्त किए गए अय्यर की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम को आयरलैंड से 0-2 से हार का सामना करना पड़ा और फिर वह पहले मैच के बारिश के कारण रद्द होने के बाद इंग्लैंड से टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला 0-4 से हार गई। अय्यर ने इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें मैच में हार के बाद संवाददाताओं से कहा, ''अपेक्षाओं से निपटना वास्तव में मुश्किल नहीं है। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे कप्तानी करने का मौका मिला है। प्रत्येक व्यक्ति भारतीय टीम की कप्तानी करने और शीर्ष स्तर पर जिम्मेदारी संभालने का सपना देखता है। निश्चित रूप से मुझे दबाव पसंद है।'' उन्होंने कहा, ''इसलिए दबाव में अच्छा प्रदर्शन करना, इन मैच से सीखना निश्चित रूप से मुझे आगे चलकर बेहतर बनाएगा। मेरी अभी की सोच यही है। मैं इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा हूं कि लोग इस श्रृंखला के बारे में क्या सोचेंगे, क्योंकि अच्छा और बुरा इस खेल का अभिन्न अंग है।'' अय्यर ने कहा कि टीम के लिए सकारात्मक मानसिकता बनाए रखना जरूरी है क्योंकि यही आगे सफलता की कुंजी होगी। उन्होंने कहा, ''भविष्य में मुझे इस बात को लेकर बेहद सकारात्मक रहना होगा कि मैं विशेषकर विदेश की परिस्थितियों में अपने खिलाड़ियों के खेल में निखार लाने में कैसे मदद कर सकता हूं।'' उन्होंने कहा, ''हम जानते हैं कि हमें ऑस्ट्रेलिया (अगला टी20 विश्व कप) खेलना है। उससे पहले हमें कई अन्य स्थानों पर खेलना है। हमारा लक्ष्य एक ऐसी टीम तैयार करना है जो इन परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन कर सके। भविष्य के लिए हमारी यही योजना है।'' भारत को शनिवार को पांचवें और अंतिम टी20 मैच में 56 रन से हार का सामना करना पड़ा और अय्यर ने स्वीकार किया कि उनकी टीम इस दौरे के दौरान परिस्थितियों के अनुकूल जल्दी से ढल नहीं पाई। उन्होंने कहा, ''हम एक मैदान से दूसरे मैदान पर जाते रहे और हमें लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हम जितनी जल्दी परिस्थितियों से सामंजस्य बिठा सकते थे, वैसा करने में नाकाम रहे। यह पहली चुनौती थी। दूसरी चुनौती उनका हर विभाग में हमसे बेहतर प्रदर्शन करना रहा। इसलिए मुझे लगता है कि इन सब कारण से हमें हार मिली।'' लगातार छह मैचों में हार के कारण भारत ने टी20 अंतरराष्ट्रीय में अपनी नंबर एक रैंकिंग गंवा दी।
अय्यर ने कहा, ''यह वास्तव में निराशाजनक है। लेकिन मुझे लगता है कि कप्तान के तौर पर यह मेरे लिए और पहली बार यहां खेल रहे खिलाड़ियों के लिए भी बेहतरीन सीख है। आपको इंग्लैंड में जीत दर्ज करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी और एकाग्रता बनाए रखनी होगी।'' शीर्ष रैंकिंग गंवाने पर अय्यर ने कहा, ''यह सबके लिए मायने रखता है। अगर आप नंबर एक हैं, तो मुझे लगता है कि आपने टीम के लिए और व्यक्तिगत रूप से भी कुछ बहुत अच्छा किया है। विश्व कप अभी दो साल दूर है। अभी जो कुछ भी हो रहा है, वह सब विश्व कप की तैयारी है। इसलिए जितनी जल्दी और जितनी तेजी से हम सीखेंगे, उतना ही टीम और खिलाड़ियों के लिए अच्छा होगा।'' भारतीय कप्तान ने इसके साथ ही कहा कि टीम को अपने क्षेत्ररक्षण में काफी सुधार करने की जरूरत है। -
लंदन। चेक गणराज्य की 21 वर्षीय लिंडा नोस्कोवा ने विम्बलडन में अपनी पहली ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी जीतकर देश की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया। चेक गणराज्य के खिलाड़ियों के बीच हुए फाइनल में नोस्कोवा ने दूसरे सेट में पांच मैच प्वाइंट गंवाने के बाद शानदार वापसी करते हुए कैरोलिना मुचोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से हराया। नोस्कोवा विम्बलडन के महिला एकल खिताब पर कब्जा जमाने वाली पिछले चार वर्षों में अपने देश की तीसरी खिलाड़ी बन गई हैं। उनसे पहले मार्केता वोंद्रौशोवा ने 2023 और बारबोरा क्रेजसिकोवा ने 2024 में यह उपलब्धि हासिल की थी। नोस्कोवा ने फाइनल में शुरुआत से दबदबा बनाते हुए पहला सेट आसानी से अपने नाम। दूसरे सेट में वह जीत के करीब पहुंच गई थीं, लेकिन मुचोवा ने हार नहीं मानी और पांच मैच प्वाइंट बचाते हुए मुकाबले को निर्णायक सेट तक पहुंचा दिया। नोस्कोवा ने तीसरे सेट में धैर्य बनाए रखा और शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम कर लिया।
दिलचस्प बात यह है कि मुचोवा और नोस्कोवा ने 2024 पेरिस ओलंपिक में जोड़ी बनाकर महिला युगल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। जहां यह जोड़ी सेमीफाइनल तक पहुंची थी। पुरुष एकल फाइनल में रविवार को विश्व के नंबर एक खिलाड़ी यानिक सिनर अपने खिताब का बचाव करने उतरेंगे। उनका मुकाबला फ्रेंच ओपन चैंपियन अलेक्जेंडर ज्वेरेव से होगा। - मेलबर्न। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान शुक्रवार को मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और क्रिकेट की दुनिया के महानतम कप्तानों में से एक स्टीव वॉ से मुलाकात की और उन्हें एक बेहद पुरानी तस्वीर उपहार स्वरूप भेंट की। प्रधानमंत्री मोदी ने स्टीव वॉ को 20 साल पुरानी तस्वीर भेंट की। ये तस्वीर उस समय की है, जब स्टीव वॉ गुजरात दौरे पर थे और उस समय नरेंद्र मोदी इस राज्य के मुख्यमंत्री थे। पीएम मोदी ने 20 साल पुरानी इस यादगार तस्वीर को फ्रेम कराकर स्टीव वॉ को भेंट की। मेलबर्न क्रिकेट स्टेडियम में हुए इस कार्यक्रम के दौरान ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी उपस्थित थे। पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान स्टीव वॉ के नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा भी की।61 साल के स्टीव वॉ ऑस्ट्रेलिया के सफलतम कप्तानों में से एक हैं। उनके दौर में ऑस्ट्रेलियाई टीम अजेय हुआ करती थी। 1985 से 2004 के बीच ऑस्ट्रेलिया के लिए स्टीव वॉ ने 168 टेस्ट और 325 वनडे मैच खेले। टेस्ट में 32 शतक और 50 अर्धशतक की मदद से उन्होंने 10,927 और वनडे में 3 शतक और 45 अर्धशतक की मदद से 7,569 रन बनाए।स्टीव वॉ ने 1999 से 2004 तक ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम के कप्तान के रूप में काम किया। उन्होंने 1997 से 2002 तक वन डे इंटरनेशनल टीम की भी कप्तानी की।वॉ की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने 57 में 41 टेस्ट जीते और महज 9 टेस्ट गंवाए, जबकि 7 टेस्ट ड्रॉ रहा। वॉ की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने रिकॉर्ड 16 टेस्ट लगातार जीते थे। टेस्ट क्रिकेट में वॉ के बतौर कप्तान जीत का रिकॉर्ड क्रिकेट इतिहास में सर्वश्रेष्ठ है। वहीं, उनकी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने 106 वनडे में 67 मैच जीते थे और 35 मैच गंवाए थे। ऑस्ट्रेलिया ने वॉ की कप्तानी में 1999 वनडे विश्व कप और एशेज सीरीज जीती थी।आपको बता दें, प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया दौरे के अंतिम दिन आज शुक्रवार को प्रसिद्ध मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) पहुंचे थे, जहां उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के युवा खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स कोलेबरेशन रोडमैप का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान युवा खिलाड़ियों में खासा उत्साह देखने को मिला। खिलाड़ियों ने उनसे ऑटोग्राफ लिया और सामूहिक तस्वीर भी खिंचवाई। इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया की पुरुष क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ भी मौजूद रहे और उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की।पीएम मोदी ने इसकी फोटो सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर भी साझा की उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री अल्बानीज़ के साथ मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड जाना बहुत अच्छा रहा। खेल के प्रति जुनून भारत और ऑस्ट्रेलिया के लोगों को लगातार करीब ला रहा है।”
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नई दिल्ली। फ्रांस ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। क्वार्टर फाइनल मुकाबले में फ्रांस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मोरक्को को 2-0 से हराया। इस हार के साथ ही मोरक्को का टूर्नामेंट में सफर समाप्त हो गया। फ्रांस अब लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचा है।
फ्रांस की ओर से कप्तान किलियन एम्बाप्पे और उस्मान डेम्बेल ने एक-एक गोल किया। मैच की शुरुआत से ही फ्रांस ने आक्रामक रुख अपनाया और मोरक्को के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाए रखा। पांचवें मिनट में मोरक्को के गोलकीपर यासीन बुनू ने दायोट उपामेकानो के हेडर को शानदार बचाव के साथ गोल में जाने से रोक दिया।पहले हाफ में नोसैर मजराउई ने बॉक्स के अंदर एम्बाप्पे के खिलाफ फाउल किया, जिसके बाद फ्रांस को पेनल्टी मिली। हालांकि, एम्बाप्पे इस मौके का फायदा नहीं उठा सके और बुनू ने शानदार सेव किया। इसके बाद भी फ्रांस ने कई हमले किए, लेकिन मोरक्को का डिफेंस मजबूती से डटा रहा। पहले 45 मिनट तक दोनों टीमें गोल नहीं कर सकीं।दूसरे हाफ में फ्रांस ने अपने आक्रमण की रफ्तार बढ़ा दी। 60वें मिनट में एम्बाप्पे ने शानदार कर्लिंग शॉट के जरिए टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। यह मौजूदा वर्ल्ड कप में उनका आठवां गोल रहा। इसके छह मिनट बाद एम्बाप्पे के सटीक पास पर उस्मान डेम्बेल ने गोल दागकर फ्रांस की बढ़त 2-0 कर दी।दो गोल की बढ़त मिलने के बाद फ्रांस ने पूरे मैच पर नियंत्रण बनाए रखा और मोरक्को को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इस जीत के साथ फ्रांस लगातार तीसरी बार फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंच गया। टीम 2018 में विश्व चैंपियन बनी थी, जबकि 2022 में फाइनल तक पहुंची थी। अब फ्रांस 15 जुलाई को पहला सेमीफाइनल मुकाबला खेलेगा। -
अक्षर ने यह उपलब्धि साथियों, कोच और परिवार को समर्पित की
ब्रिस्टल. भारतीय हरफनमौला खिलाड़ी अक्षर पटेल ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह भारत के लिए 100 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलेंगे। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपने साथियों, कोचों और परिवार को दिया। अक्षर ने 2015 में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण से लेकर भारत के सबसे भरोसेमंद सीमित ओवरों के खिलाड़ियों में शामिल होने तक के अपने सफर को याद किया और कहा कि पिछले एक दशक में उन्होंने बहुत कुछ सीखा है। इंग्लैंड दौरे के दौरान दूसरे टी20 मुकाबले में 100 टी20 अंतरराष्ट्रीय विकेट पूरे करने वाले अक्षर बृहस्पतिवार को श्रृंखला के चौथे मैच में अपना 100वां टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेलेंगे। अक्षर ने 'बीसीसीआई डॉट टीवी' पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, ''जब मैंने पहली बार टी20 खेला था, तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं 100 मैच खेलूंगा। इंग्लैंड का यह दौरा मेरे लिए बहुत खास होगा क्योंकि दूसरे टी20 में मैंने अपने 100 विकेट पूरे किए और चौथे टी20 में मेरा 100वां मैच है। इसलिए यह मेरे लिए बहुत खास दिन है और मैं इस पल का सच में आनंद ले रहा हूं। '' उन्होंने कहा, ''यह सच में बहुत अच्छा लगता है। असल में, जब एक खिलाड़ी के तौर पर आप कोई उपलब्धि हासिल करते हैं तो मुझे लगता है कि यह सिर्फ मेरे बारे में नहीं है, मैं इसे अकेले हासिल नहीं कर रहा हूं। आप जानते हैं कि मेरे साथ मेरे साथी खिलाड़ी, मेरे कोच, मेरा परिवार भी शामिल हैं। इसलिए मुझे लगता है कि मेरे इस सफर में सभी ने भूमिका निभाई है। '' अक्षर ने कहा, ''जब आप शुरुआत करते हैं, जब आप पदार्पण करते हैं, तो वह अहसास बिल्कुल अलग होता है। तब आपको पता नहीं होता कि आप कितना कुछ हासिल करेंगे, लेकिन अब मैं अपना 100वां मैच खेलने जा रहा हूं और उस अहसास को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। अगर आप भारत के लिए एक भी मैच खेलते हैं, तो वह आपके लिए बहुत बड़ी बात होती है क्योंकि यह एक खिलाड़ी का सपना होता है। '' उन्होंने अपने करियर को उतार-चढ़ाव से भरा लेकिन सीख देने वाला सफर बताया।
अक्षर ने कहा, ''जब आप इतने लंबे समय तक खेलते हैं, तो वह सफर जाहिर है 'रोलर-कोस्टर' जैसा होता है, कभी उतार तो कभी चढ़ाव। शुरुआत के पांच-छह साल में मैंने सिर्फ 15 या 16 मैच खेले और फिर 2021 से अब तक, मुझे लगता है कि मैं लगातार खेल रहा हूं। '' उन्होंने कहा, ''हमारे पास पिछले दो टी20 विश्व कप हैं। हमने पहली बार 2024 में और दूसरी बार 2026 में जीत हासिल की, इसलिए जब आप अपना 100वां मैच खेलते हैं तो यह पूरी यात्रा और उससे जुड़ी सारी यादें एक साथ सामने आ जाती हैं। यही सबसे खास पल हैं। '' अक्षर के लिए व्यक्तिगत उपलब्धियां ज्यादा मायने नहीं रखते, और ये उपलब्धियां बस उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत का नतीजा हैं। उन्होंने कहा, ''उपलब्धियां मेरे लिए उतने मायने नहीं रखतीं, लेकिन हां, कभी-कभी अच्छा लगता है कि आप 100 टी20 विकेट ले रहे हैं। यह एक उपलब्धि है। हमने वर्षों तक जो कड़ी मेहनत की है और उसके बाद जब भी चीजें अच्छी या बुरी हुईं, हमने गलतियों से सीखा और इस बात पर ध्यान दिया कि हम कैसे बेहतर हो सकते हैं। मुझे लगता है कि हमने अपनी प्रक्रिया पर ध्यान दिया और हर दिन बेहतर होते गए। -
नयी दिल्ली. पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को बुधवार को उनके 54वें जन्मदिन पर एक शानदार तोहफा मिला जब एडिनबर्ग में हुई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की सालाना बैठक में लिए गए फैसले के बाद वह आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल होने वाले नवीनतम भारतीय क्रिकेटर बन गए। गांगुली के शामिल होने के साथ ही आईसीसी हॉल ऑफ फेम में भारतीय क्रिकेटरों की संख्या 12 हो गई।
इस सम्मान के लिए आईसीसी का आभार जताते हुए गांगुली ने अंतरराष्ट्रीय संस्था के चेयरमैन जय शाह को धन्यवाद दिया और इस पहचान को 'बहुत बड़ा सम्मान' बताया। बाएं हाथ के बल्लेबाज गांगुली ने दुनिया भर से मिली शुभकामनाओं के बीच अपना जन्मदिन मनाया।
गांगुली ने 'एक्स' पर लिखा, ''मुझे हॉल ऑफ फेम में शामिल करने के लिए आईसीसी और चेयरमैन जय शाह का धन्यवाद... यह बहुत बड़ा सम्मान है... हॉल ऑफ फेम में शामिल होने वाले 10 भारतीयों में से एक बनना... कुछ महान नामों का हिस्सा बनना अद्भुत है।'' गांगुली ने नवंबर 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट खेलने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल अन्य भारतीय बिशन सिंह बेदी, सुनील गावस्कर, कपिल देव, अनिल कुंबले, राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, वीनू मांकड़, डायना इडुलजी, वीरेंद्र सहवाग, नीतू डेविड और महेंद्र सिंह धोनी हैं। भारतीय क्रिकेट में गांगुली का सबसे बड़ा योगदान 2000 से 2005 के बीच कप्तान के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान रहा जब उन्होंने मैच फिक्सिंग संकट के बाद टीम को फिर से खड़ा किया। गांगुली ने 113 टेस्ट मैच खेले और 7,212 रन बनाए। साथ ही उन्होंने 311 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 11,363 रन बनाए। खेल से संन्यास लेने के बाद गांगुली क्रिकेट प्रशासन में आ गए और भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष बने। उन्होंने 23 अक्टूबर 2019 को पद संभाला और 18 अक्टूबर 2022 तक भारतीय क्रिकेट की कमान संभाली। वह अभी बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं। -
पुणे. भारत के शीर्ष वरीय ग्रैंडमास्टर अभिजीत गुप्ता ने बुधवार को यहां पुणे अंतरराष्ट्रीय ग्रैंडमास्टर राउंड रोबिन शतरंज टूर्नामेंट में 7.5 अंक के साथ खिताब जीता। अंतरराष्ट्रीय मास्टर अश्वथ एस सात अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहे और इसी के साथ उन्होंने अपना तीसरा और आखिरी ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल कर भारत का 98वां ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव प्राप्त किया। ग्रैंडमास्टर कुशाग्र मोहन ने 6.5 अंक के साथ तीसरा स्थान हासिल किया जबकि पुणे के फिडे मास्टर अद्विक अग्रवाल ने पांच अंक के साथ अपना दूसरा अंतरराष्ट्रीय मास्टर नॉर्म हासिल किया। नौवें और आखिरी दौर में अभिजीत ने श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय मास्टर एलएमएसटी डिसिल्वा को हराकर खिताब अपने नाम किया।
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अर्लिंग्टन. विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर अपना आखिरी मैच खेलने के बाद पुर्तगाल के सुपरस्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो जब मैदान से बाहर जा रहे थे तो दर्शकों ने तालियां बजाई जिसका उन्होंने हाथ हिला कर आभार भी व्यक्त किया लेकिन उनके चेहरे पर निराशा साफ झलक रही थी। अपना छठा और आखिरी विश्व कप खेल रहे 41 वर्षीय सुपरस्टार रोनाल्डो का विश्व कप जीतने का सपना सोमवार को राउंड ऑफ 16 के मैच में पड़ोसी प्रतिद्वंद्वी स्पेन से 1-0 की हार के साथ टूट गया। उन्हें मैच के पहले हाफ में गोल करने का एकमात्र मौका मिला था लेकिन सर्वाधिक लंबे समय तक गोल नहीं खाने का रिकॉर्ड बनाने वाले गोलकीपर उनाई साइमन ने शानदार छलांग लगाकर उनके प्रयास को नाकाम कर दिया। रोनाल्डो लगातार छह विश्व कप में गोल करने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा गोल (146) और सर्वाधिक मैच खेलने वाले (233) खिलाड़ी रोनाल्डो का फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर करियर यहीं पर समाप्त हो गया। अपने करियर में कई खिताब जीतने वाले रोनाल्डो इस तरह से कभी विश्व कप विजेता नहीं बन पाए। उन्होंने पहले ही घोषणा कर दी थी कि यह उनका अंतिम विश्व कप होगा। रोनाल्डो ने राउंड ऑफ 16 के मैच से एक दिन पहले पत्रकारों से लगभग 25 मिनट तक बात की और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह उनका आखिरी मैच नहीं होगा और वह अपने आखिरी विश्व कप का भरपूर आनंद लेना चाहते हैं। रोनाल्डो के रहते हुए पुर्तगाल का विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2006 में सेमीफाइनल में पहुंचना था जो उनका पहला विश्व कप भी था। फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर रोनाल्डो का आखिरी मैच 33 साल की उम्र में विश्व कप में हैट्रिक लगाने के आठ साल बाद आया। उन्होंने ब्राजील में 2014 में खेले गए इस विश्व कप के ग्रुप चरण में स्पेन के खिलाफ 3-3 से ड्रॉ रहे मैच में हैट्रिक बनाई थी। इस मैच को विश्व कप के सर्वश्रेष्ठ मैचों में से एक माना जाता है, हालांकि तब दोनों ही टीमें नॉकआउट चरण तक नहीं पहुंच पाईं थी। रोनाल्डो ने विश्व कप में 11 गोल किए और वह विश्व कप में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में नौवें स्थान पर हैं।
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न्यूयॉर्क. विश्व कप के प्रसारक फॉक्स ने सोमवार को कहा कि अमेरिका के बोस्निया-हर्जेगोविना के खिलाफ खेले गए मैच को लगभग दो करोड़ 64 लाख लोगों ने देखा जिससे यह देश में सबसे अधिक देखे जाने वाला मैच बन गया है। अमेरिका ने बुधवार की रात को खेले गए राउंड ऑफ 32 के इस मैच में बोस्निया को 2-0 से हराकर राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई थी। फॉक्स न्यूज़ के अनुसार, पूर्वी मानक समय (ईएसटी) के अनुसार रात 9.45 बजे से 10 बजे के बीच इसके दर्शकों की संख्या तीन करोड़ 48 लाख से अधिक थी। मिसौरी के कैनसस सिटी, बोस्टन, सेंट लुइस, सैन फ्रांसिस्को और टेक्सास के ऑस्टिन में इसे सबसे ज्यादा देखा गया।
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ईस्ट रदरफोर्ड. पांच बार के चैम्पियन ब्राजील पर 2 . 1 से मिली जीत में दोनों गोल करने वाले एर्लिंग हालैंड का मन नॉर्वे की गलियों में घूम रहा है जहां हजारों की तादाद में फुटबॉलप्रेमी साथ में 'वाइकिंग रो' जश्न मना रहे हैं। हालैंड ने इस असाधारण जीत के बाद कहा ,'' नॉर्वे की सड़कों को देखो । मैने पहले ऐसा कभी नहीं देखा । काश मैं ओस्लो में होता और उन लोगों के साथ जश्न मना रहा होता ।'' लेकिन नॉर्वे फुटबॉल टीम के लिये अच्छा है कि वह अमेरिका में हैं और फीफा विश्व कप में दनादन गोल करके 55 लाख के करीब आबादी वाले अपने देश को जश्न मनाने के मौके लगातार दे रहे हैं । हालैंड के इस विश्व कप में अब अर्जेंटीना के लियोनेल मेस्सी और फ्रांस के किलियान एमबाप्पे के समान सात गोल हो गए हैं । ओस्लो में टाउन हॉल के बाहर चौक पर करीब 50000 प्रशंसक मौजूद थे जिन्होंने गले में नॉर्वे फुटबॉल का स्कार्फ पहन रखा था । नॉर्वे के युवराज हाकॉन रॉयल पैलेस के बाहर प्रशंसकों से मिले और मैच के बाद 'वाइकिंग रो' में भी हिस्सा लिया । अब दुनिया भर में लोकप्रिय हुए 'वाइकिंग रो' में सभी प्रशंसक जमीन पर एक लाइन में बैठ जाते हैं, मानो वे किसी पुरानी 'वाइकिंग लॉन्गबोट' (समुद्री नाव) में बैठे हों। फिर एक लीडर ड्रम बजाना शुरू करता है। ड्रम की बीट के साथ हजारों फैंस एक साथ अपने हाथों से नाव चलाने का एक्शन करते हैं और पूरी ताकत से 'रो!' चिल्लाते हैं। नॉर्वे टीम के घरेलू मैदान उलेवाल स्टेडियम में आतिशबाजी की गई जहां हजारों की संख्या में दर्शक मैच देखने के लिये मौजूद थे । कोच स्टेल सोलबाकेन ने कहा ,'' पूरा देश साथ में नाव चला रहा है । ओस्लो समेत सभी शहरों में जश्न मनाया जा रहा है । 'रोइंग' इसका सूचक है कि हम सभी साथ साथ हैं ।''
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जकार्ता. चंद्रिका पुजारी और जॉयश्री देवी की दमदार जीत से भारत ने रविवार को अंडर-19 एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में अपने अभियान की शानदार शुरुआत की। शुरूआती दौर में विश्व मुक्केबाजी फ्यूचर्स कप की स्वर्ण पदक विजेता चंद्रिका ने मंगोलिया की लखाम त्सेंडबाटार को लड़कियों के 51 किलोग्राम वर्ग में एकतरफा मुकाबले में 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराया। विश्व मुक्केबाजी फ्यूचर्स कप की रजत पदक विजेता जॉयश्री ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए लड़कियों के 54 किलोग्राम वर्ग में चीनी ताइपे की चेन निंग होंग के खिलाफ दूसरे दौर में रेफरी द्वारा मुकाबला रोकने (आरएससी) से जीत दर्ज की। सोमवार को भारत के अंडर-23 पुरुष वर्ग के चार मुक्केबाज रिंग में उतरेंगे।
एशियाई चैंपियन विश्वनाथ सुरेश (50 किग्रा) अपने अभियान की शुरुआत उज्बेकिस्तान के अमीरबेक इस्माइलोव के खिलाफ करेंगे। इसके बाद गंगा (55 किग्रा) का मुकाबला मंगोलिया के अमगलानबातार बुलगनखू से होगा। सागर जाखड़ (60 किग्रा) जापान के कोइची नाकायामा से भिड़ेंगे जबकि दिन के अंतिम मुकाबले में हितेश (70 किग्रा) का सामना चीनी ताइपे के जुन-झांगलिन से होगा। भारतीय मुक्केबाजी महासंघ ने अंडर-19 और अंडर-23 दोनों वर्गों में मजबूत टीम उतारी है। दोनों आयु वर्गों में भारत के 20-20 मुक्केबाज हिस्सा ले रहे हैं। यह चैंपियनशिप भारत के उभरते हुए मुक्केबाजों के लिए एशिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ अपनी प्रतिभा और क्षमता को परखने का महत्वपूर्ण मंच है। - मियामी गार्डन्स। लियोनेल मेस्सी का गोल करने का सिलसिला जारी है और वह इतनी सहजता से गोल करते हैं कि यह आसान सा लगता है । इसके साथ ही अर्जेंटीना की लगातार दूसरा विश्व कप जीतने की उम्मीदें भी कायम है हालांकि केप वर्दे ने एकबारगी उसके लिये खतरे की घंटी बजा दी थी । विश्व कप में अपने प्रदर्शन से फुटबॉलप्रेमियों का दिल जीतने वाले केप वर्दे को अतिरिक्त समय में 3 . 2 से हराकर अर्जेंटीना ने अंतिम 16 में जगह बनाई। मेस्सी ने केप वर्दे के खिलाफ 29वें मिनट में विश्व कप के अपने कैरियर का 20वां गोल किया । वह विश्व कप के इतिहास में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में 20 गोल के साथ शीर्ष पर बने हुए हैं जबकि फ्रांस के काइलियान एमबाप्पे उनसे दो गोल पीछे हैं। बाद में मीडिया कॉन्फ्रेंस में मेस्सी की तस्वीर देखी गई, जिसमें उनके सिर पर एक बड़ा सा निशान था । केप वर्दे के एक खिलाड़ी से टक्कर के दौरान उन्हें घुटने से चोट लगी थी। उन्होंने स्पेनिश में कहा ,''इसमें दर्द हो रहा है लेकिन मैं ठीक हूं ।''इस साल टूर्नामेंट में मेस्सी ने सातवां गोल दागा और 'गोल्डन बूट' की दौड़ में एमबाप्पे उनसे एक गोल पीछे हैं । पिछले आठ विश्व कप मैचों में मेस्सी 12 गोल कर चुके हैं । मेस्सी का विश्व कप में लगातार गोल करने का सिलसिला 2022 में मिली खिताबी जीत से चला आ रहा है । उन्होंने मैच के बाद कहा ,'' हमने अच्छा प्रदर्शन किया और जहां गलतियां हुई हैं, उन्हें सुधारना होगा ।'' मेस्सी के साथ अर्जेंटीना और इंटर मियामी के लिये खेलने वाले रौद्रिगो डि पॉल ने कहा ,'' मेरे लिये उसकी दोस्ती सबसे अहम चीज है और मैं खुशकिस्मत हूं कि इन पलों में उसके साथ मैदान पर हूं ।' मेस्सी ने मार्तिनेज के पास पर केप वर्दे के स्टार गोलकीपर वोजिन्हा को छकाते हुए यह गोल दागा ।मेस्सी और एमबाप्पे के अलावा नॉर्वे के एर्लिग हालैंड और इंग्लैंड के हैरी केन भी पांच पांच गोल करके विश्व कप में सबसे ज्यादा गोल करने के गोल्डन बूट पुरस्कार की दौड़ में हैं । फ्रांस के उस्मान डेम्बेले, स्पेन के मिकेल ओयारजाबाल , ब्राजील के विनिशियस जूनियर और सेनेगल के इस्माइला सार ने चार चार गोल किये हैं । सार दौड़ से बाहर हैं क्योंकि सेनेगल बाहर हो चुकी है । नॉर्वे, इंग्लैंड और फ्रांस अंतिम 16 में हैं । केप वर्दे को हराकर अर्जेंटीना भी वहां पहुंच चुका है । मेस्सी ने कभी गोल्डन बूट नहीं जीता । विश्व कप 2022 में सात गोल करके वह एमबाप्पे से एक गोल पीछे रह गए थे जबकि 2014 में चार गोल करके संयुक्त तीसरे स्थान पर थे । अगर टूर्नामेंट के बाद शीर्ष पर टाई रहता है तो फीफा पहले टाइब्रेकर के रूप में यह देखेगा कि कितने गोल में मदद की है और दूसरा टाइब्रेकर यह होगा कि मैदान पर किसने कम समय बिताया है । एमबाप्पे गोल में सहायता के मामले में मेस्सी से 2 . 0 से आगे हैं ।



























