धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़े आशीष, मिश्रित खेती से पहले ही वर्ष कमाए 3.65 लाख रुपये
-एक हेक्टेयर में फलदार पौधों के साथ अंतरवर्तीय खेती, एक ही खेत से तैयार किए आमदनी के कई स्रोत
-हल्दी और मुनगा का पाउडर बनाकर किया मूल्य संवर्धन, 1.10 लाख रुपये की हुई अतिरिक्त आय
-समेकित उद्यानिकी विकास योजना से मिली नई राह, फेंसिंग, बोर, वर्मीटांका और अंतरवर्तीय फसलों के लिए मिला सहयोग
रायपुर । पारंपरिक धान की खेती से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण, अंतरवर्तीय खेती और कृषि उपज के प्रसंस्करण को अपनाकर जांजगीर-चांपा जिले के किसान श्री आशीष राठौर ने अपनी आमदनी बढ़ाने की नई राह बनाई है। नवागढ़ विकासखंड के ग्राम महंत निवासी श्री राठौर ने समेकित उद्यानिकी विकास योजना और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से एक हेक्टेयर भूमि में फलदार पौधों के साथ विभिन्न अंतरवर्तीय फसलों की खेती की। इस नवाचार से उन्होंने पहले ही वर्ष लगभग 3.65 लाख रुपये की शुद्ध आमदनी अर्जित की।
श्री आशीष राठौर, पिता श्री द्वारिका प्रसाद, पहले पारंपरिक रूप से धान की खेती करते थे। उद्यानिकी विभाग से मिले मार्गदर्शन के बाद उन्होंने अपनी एक हेक्टेयर भूमि में मिश्रित फलदार पौधों की खेती शुरू की। खेत में अमरूद, नींबू, आम, मुनगा और पपीता के पौधे लगाए। फलदार पौधों के बीच खाली स्थान का बेहतर उपयोग करते हुए हल्दी, अदरक, टमाटर, आलू, भिंडी और जिमीकंद जैसी अंतरवर्तीय फसलें भी लीं। इससे एक ही खेत में अलग-अलग फसलों के माध्यम से आमदनी के कई स्रोत तैयार हुए।
मिश्रित खेती का लाभ श्री राठौर को पहले ही वर्ष मिलने लगा। अंतरवर्तीय फसलों के उत्पादन से उन्हें लगभग 2 से 2.55 लाख रुपये तक की आमदनी प्राप्त हुई। इसके साथ ही उन्होंने केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रहते हुए कृषि उपज के मूल्य संवर्धन की दिशा में भी कदम बढ़ाया। श्री राठौर ने खेत में उत्पादित हल्दी और मुनगा का पाउडर तैयार कर उसका विक्रय किया। इससे उन्हें करीब 1.10 लाख रुपये की अतिरिक्त आय हुई। फसल विविधीकरण, अंतरवर्तीय खेती और मूल्य संवर्धन को एक साथ अपनाने से उन्हें कुल मिलाकर लगभग 3.65 लाख रुपये की शुद्ध आमदनी प्राप्त हुई।
समेकित उद्यानिकी विकास योजना के अंतर्गत श्री राठौर को फेंसिंग, बोर, वर्मीटांका तथा अंतरवर्तीय फसल के लिए अनुदान के रूप में विभागीय सहयोग मिला। तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता ने उन्हें पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मिश्रित एवं लाभकारी खेती अपनाने में मदद की।
सेवा संकल्प अभियान के दौरान सामने आई आशीष राठौर की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि सीमित कृषि भूमि में भी फसल विविधीकरण, अंतरवर्तीय खेती और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन को अपनाकर आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उनकी पहल दूसरे किसानों के लिए भी खेती में नवाचार और आय के विविध स्रोत विकसित करने का प्रेरक उदाहरण है। श्री राठौर ने मिले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।













Leave A Comment