रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए नहीं लगाने पड़े चक्कर, गौतम सिंह को मिली बड़ी राहत
-ऑटो म्यूटेशन से बचा समय और खर्च, हितग्राही ने करीब 10 हजार रुपये की बचत का अनुभव किया साझा
-आधार आधारित ई-केवाईसी और व्हाट्सऐप सुविधा से आसान और पारदर्शी हो रही पंजीयन प्रक्रिया
रायपुर । जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए तहसील और पटवारी कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने की परेशानी अब तकनीक आधारित व्यवस्था से कम हो रही है। बलरामपुर निवासी श्री गौतम सिंह ने इस बदलाव को स्वयं महसूस किया। पंजीयन विभाग की ऑटो म्यूटेशन सुविधा से रजिस्ट्री के बाद उनके नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ी। इससे उन्हें अलग से तहसील और पटवारी कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ी। श्री सिंह के अनुसार इस व्यवस्था से उनका समय बचा और आने-जाने सहित अन्य खर्चों को मिलाकर करीब 10 हजार रुपये की बचत भी हुई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने अपना अनुभव साझा किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक आधारित सुधार किए गए हैं। रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया को जोड़ने, आधार आधारित ई-केवाईसी से पहचान सत्यापन और व्हाट्सऐप के माध्यम से पंजीयन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने जैसी सुविधाओं से नागरिकों की अनावश्यक दौड़भाग कम करने का प्रयास किया जा रहा है। श्री गौतम सिंह ने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से तहसील और पटवारी कार्यालय जाना पड़ता था। प्रक्रिया पूरी कराने के लिए बार-बार आने-जाने में समय लगता था और अतिरिक्त खर्च भी होता था। ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था ने उन्हें इस परेशानी से राहत दी है।
श्री सिंह ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “पहले पंजीयन के बाद तहसील और पटवारी के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब सीधे रजिस्ट्री कार्यालय से ऑटो म्यूटेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ जाती है। इससे समय एवं धन दोनों की बचत हुई है।” उनके अनुसार कार्यालयों की दौड़भाग कम होने से उन्हें करीब 10 हजार रुपये की बचत का अनुभव हुआ। इस सुविधा ने रजिस्ट्री के बाद नामांतरण को लेकर उनकी चिंता भी कम की।
पंजीयन व्यवस्था में तकनीक का उपयोग नामांतरण तक सीमित नहीं है। आधार आधारित ई-केवाईसी के माध्यम से पक्षकारों की पहचान का सत्यापन किया जा रहा है। इससे पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और गलत पहचान के आधार पर होने वाली गड़बड़ी की आशंका को कम करने में मदद मिल रही है।
श्री गौतम सिंह ने भी तकनीक आधारित इन सुधारों को सुविधाजनक बताया। उनका कहना है कि पहचान सत्यापन की डिजिटल व्यवस्था से प्रक्रिया के प्रति भरोसा बढ़ा है और पंजीयन का काम अधिक सहज हुआ है।
नागरिकों की सुविधा के लिए पंजीयन के विभिन्न चरणों, अपॉइंटमेंट और पंजीकृत दस्तावेजों से संबंधित जानकारी व्हाट्सऐप के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे सामान्य जानकारी और दस्तावेज के लिए बार-बार कार्यालय जाने की आवश्यकता कम हो रही है।
श्री गौतम सिंह का अनुभव बताता है कि पंजीयन और नामांतरण की प्रक्रियाओं के बीच तकनीकी समन्वय नागरिकों को व्यावहारिक राहत दे रहा है। उनके लिए ऑटो म्यूटेशन का अर्थ केवल एक डिजिटल सुविधा नहीं, बल्कि तहसील और पटवारी कार्यालय की दौड़भाग से राहत, समय की बचत और आने-जाने सहित अन्य खर्चों में कमी है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर इन सुधारों के जमीनी प्रभाव, अनुभव और सुझाव संकलित कर रहा है। गौतम सिंह की कहानी इसी बदलाव की तस्वीर है—जहां तकनीक से प्रक्रिया छोटी हो रही है और नागरिकों के लिए संपत्ति पंजीयन से लेकर नामांतरण तक का सफर अधिक सहज बन रहा है।













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