आधुनिक तकनीक और नवाचार से अधोसंरचना विकास को मिलेगी नई दिशा : मंत्री ओ.पी. चौधरी
-मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को आर्थिक रूप से सुदृढ़, आत्मनिर्भर और बहुआयामी संस्था बनाने की दिशा में हो रहे प्रयास
-मंडल का कार्यक्षेत्र अब आवास निर्माण तक सीमित नहीं, सड़क, पुल-पुलिया, खेल परिसर, सार्वजनिक भवन और शहरी पुनर्विकास जैसी परियोजनाओं में भी बढ़ेगी भागीदारी : मंत्री श्री चौधरी
-अधिनियम संशोधन से मंडल के कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों का हुआ विस्तार, ओटीएस योजना से अविक्रित संपत्तियों के विक्रय को मिली गति : अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव
-आईआईएम रायपुर, आईआईआईटी नवा रायपुर और एनआईटी रायपुर के विशेषज्ञों ने सुशासन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक स्ट्रक्चरल डिजाइन पर दिया प्रशिक्षण
-नवा रायपुर में मंडल की राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न, अधिकारियों-कर्मचारियों को वित्तीय प्रबंधन, संपदा प्रबंधन, टाउन प्लानिंग और पीपीपी मॉडल की दी गई जानकारी
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को आधुनिक तकनीक, नवाचार और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से आर्थिक रूप से सुदृढ़, आत्मनिर्भर तथा बहुआयामी अधोसंरचना विकास संस्था के रूप में विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से मंडल द्वारा नवा रायपुर अटल नगर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में प्रदेशभर से आए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक निर्माण तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), वित्तीय प्रबंधन, संपदा प्रबंधन, टाउन प्लानिंग स्कीम तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि बदलते समय और विकास की बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप मंडल को अपनी कार्यप्रणाली, तकनीकी दक्षता और कार्यक्षेत्र का विस्तार करना होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार मंडल को आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर संस्था के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, नवाचार, बेहतर वित्तीय प्रबंधन और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति अपनाकर मंडल प्रदेश में अधोसंरचना विकास को नई दिशा दे सकता है।
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के पास अनुभवी अभियंताओं, तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों का बड़ा मानव संसाधन उपलब्ध है। इस विशेषज्ञता और अनुभव का उपयोग केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। मंडल को सड़क, पुल-पुलिया, खेल परिसर, स्टेडियम, सार्वजनिक भवन, टाउन प्लानिंग तथा शहरी पुनर्विकास जैसी परियोजनाओं के निर्माण में भी विशेषज्ञ संस्था के रूप में अपनी पहचान स्थापित करनी होगी।उन्होंने कहा कि मंडल को अपनी तकनीकी और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का विस्तार करते हुए अन्य राज्यों की निविदाओं में भी भागीदारी के अवसर तलाशने चाहिए। इसके लिए अधिकारियों-कर्मचारियों को आधुनिक निर्माण तकनीकों, बेहतर परियोजना प्रबंधन, वित्तीय अनुशासन और गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में निरंतर अपनी दक्षता बढ़ानी होगी।
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि मंडल की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राज्य सरकार के सहयोग से मंडल की लगभग 700 करोड़ रुपये की ऋण देनदारी समाप्त की गई है। इसके साथ ही वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस-2) योजना तथा प्रभावी विपणन प्रयासों के माध्यम से लंबे समय से रिक्त पड़ी आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों के विक्रय को गति मिली है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की आवासीय परियोजनाओं में वास्तविक मांग का आकलन, निर्माण की गुणवत्ता, वित्तीय व्यवहार्यता और नागरिक सुविधाओं को विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), टाउन प्लानिंग स्कीम तथा पुनर्विकास जैसे नवाचारी मॉडल अपनाकर मंडल अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में अपनी भूमिका का विस्तार कर सकता है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से नवाचार, आधुनिक तकनीक और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति को अपनाने का आह्वान किया।
मंडल अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के रूप में विस्तार संस्था के लिए एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है। दिनांक 24 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित अधिनियम संशोधन के माध्यम से मंडल के नाम एवं कार्यक्षेत्र का विस्तार किया गया है। यह परिवर्तन केवल संस्था के नाम या अधिनियम में संशोधन तक सीमित नहीं है, बल्कि मंडल की कार्यशैली, सोच, जिम्मेदारियों और भविष्य की संभावनाओं में व्यापक बदलाव का अवसर है।उन्होंने कहा कि मंडल को अब आवास निर्माण के साथ नगर विकास और विभिन्न अधोसंरचना परियोजनाओं के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका बढ़ानी है। इस परिवर्तन को सफल बनाने के लिए प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को नई तकनीक, नवाचार, बेहतर प्रबंधन तथा परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाना होगा।
श्री सिंह देव ने कहा कि पिछले लगभग 18 महीनों में संपत्ति विक्रय, राजस्व अर्जन और नई परियोजनाओं के क्षेत्र में मंडल ने उल्लेखनीय प्रगति की है। ओटीएस योजना और प्रभावी विपणन प्रयासों से लंबे समय से अविक्रित संपत्तियों के विक्रय में तेजी आई है। मंडल द्वारा बकायादारों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से विलंबित अवधि की ब्याज राशि में 50 प्रतिशत तथा जलकर पर भारित सरचार्ज राशि में भी 50 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बकाया राशि की वसूली के लिए फील्ड स्तर पर प्रभावी प्रयास किए जाएं तथा शून्य बकाया राशि के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में गंभीरता से कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि मंडल की आर्थिक सुदृढ़ता के लिए संपत्तियों का प्रभावी प्रबंधन, राजस्व अर्जन और बकाया वसूली अत्यंत आवश्यक है।
मंडल अध्यक्ष श्री सिंह देव ने कहा कि तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था में अधोसंरचना निर्माण की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए केवल सरकारी बजट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), टाउन प्लानिंग स्कीम (टीपीएस), पुनर्विकास तथा अन्य नवाचारी वित्तीय मॉडल अपनाने की आवश्यकता है। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से मंडल नई परियोजनाओं को गति देने के साथ अपनी वित्तीय क्षमता का भी विस्तार कर सकता है।उन्होंने कहा कि मंडल का उद्देश्य प्रदेश के सभी 33 जिलों में नागरिकों को बेहतर सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक आवासीय परिसर उपलब्ध कराना है। नई आवासीय योजनाओं में केवल भवन निर्माण ही नहीं, बल्कि उद्यान, बाजार, सामुदायिक सुविधाएं, पर्यावरण संरक्षण और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन जैसी आधुनिक सुविधाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
मंडल आयुक्त श्री अवनीश कुमार शरण ने कहा कि आधुनिक तकनीक और अधोसंरचना विकास की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अधिकारियों एवं कर्मचारियों का निरंतर क्षमता विकास आवश्यक है। इस प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाएं अधिकारियों को नवीन तकनीकों, प्रबंधन पद्धतियों और कार्यप्रणालियों से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।उन्होंने कहा कि कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान का उपयोग अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र में करना चाहिए, ताकि मंडल की परियोजनाओं में निर्माण गुणवत्ता, समयबद्धता, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित आधुनिक तकनीकों का उचित उपयोग प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने में सहायक होगा।
श्री शरण ने अधिकारियों-कर्मचारियों से जिम्मेदारी, नवाचार और टीमवर्क की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को मंडल की कार्यक्षमता बढ़ाने तथा नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्रिय योगदान देना चाहिए।
कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित तकनीकी एवं प्रबंधन संस्थानों के विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर अधिकारियों-कर्मचारियों का मार्गदर्शन किया।आईआईएम रायपुर के निदेशक डॉ. संजीव पाराशर ने गुड गवर्नेंस अर्थात सुशासन और प्रभावी प्रशासनिक प्रबंधन पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने महाभारत के विभिन्न पात्रों का उल्लेख करते हुए राजधर्म और व्यक्ति के कर्तव्यों की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में कर्तव्यनिष्ठा, नेतृत्व क्षमता और बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया।
आईआईआईटी नवा रायपुर के प्रोफेसर डॉ. श्रीनिवास के.जी. ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और उसके व्यावहारिक उपयोग के संबंध में जानकारी दी। वहीं एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर डॉ. जी.डी. रामटेकर ने स्ट्रक्चरल डिजाइन, आरसीसी संरचनाओं की मजबूती तथा आधुनिक निर्माण तकनीकों से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया।कार्यशाला में आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद तथा मंडल आयुक्त श्री अवनीश कुमार शरण ने मंडल की वर्तमान गतिविधियों, कार्यों के विस्तार और भविष्य की संभावनाओं से संबंधित विषयों पर अपने विचार साझा किए।
इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों तथा मंडल के विशेषज्ञों द्वारा नेतृत्व क्षमता, सुशासन, वित्तीय जोखिम प्रबंधन, संपदा प्रबंधन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आरसीसी संरचनाओं की मजबूती और आधुनिक परियोजना विपणन सहित विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।कार्यशाला का उद्देश्य मंडल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन और अधोसंरचना विकास के नए अवसरों से परिचित कराते हुए उनकी तकनीकी दक्षता, निर्णय क्षमता और कार्यकुशलता को सुदृढ़ बनाना था।
इस अवसर पर आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, मंडल अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव, आयुक्त श्री अवनीश कुमार शरण, अपर आयुक्त श्री हर्ष कुमार जोशी, श्री अजीत सिंह पटेल, श्री एम.डी. पनारिया, श्री एस.के. भगत, सीईओ श्री बी.बी. सिंह, सीएओ श्रीमती पूजा शुक्ला मिश्रा, स्टाफ ऑफिसर श्री अरुण कुमार वंजारी सहित मंडल के वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता, तकनीकी विशेषज्ञ तथा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।




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