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- -आधार कार्ड बनने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का जताया आभाररायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी समाधान का भरोसेमंद माध्यम बन रही है। जशपुर जिले के ग्राम जोकबहला (ग्राम पंचायत नारायणपुर) निवासी 85 वर्षीय जॉन क्रूज़ मिंज की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान इसका प्रेरक उदाहरण है।जॉन क्रूज़ मिंज लंबे समय से आधार कार्ड बनवाने का प्रयास कर रहे थे। कई बार आधार नामांकन केंद्र जाने के बावजूद फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं होने तथा अन्य तकनीकी कारणों से उनका आवेदन निरस्त हो जाता था। आधार कार्ड नहीं होने के कारण उन्हें बैंकिंग सेवाओं, पेंशन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, आयुष्मान भारत सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।आखिरकार उन्होंने 19 जून को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित विभाग ने मामले को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक समन्वय किया और तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए त्वरित कार्रवाई शुरू की।विभाग की सक्रिय पहल का परिणाम यह रहा कि मात्र तीन दिनों के भीतर, 22 जून को जॉन क्रूज़ मिंज का आधार कार्ड सफलतापूर्वक बन गया। वर्षों से चली आ रही उनकी समस्या का समाधान होने पर उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, जिला प्रशासन तथा संबंधित अधिकारियों के प्रति हार्दिक आभार जताया।जॉन क्रूज़ मिंज ने कहा कि आधार कार्ड नहीं होने के कारण उन्हें कई आवश्यक सेवाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी होती थी। अब आधार कार्ड मिलने के बाद वे बैंकिंग सेवाओं, पेंशन, राशन तथा आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।यह सफलता मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनसमस्याओं के त्वरित, संवेदनशील और समयबद्ध निराकरण के प्रति शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से वर्षों पुरानी समस्या का शीघ्र समाधान यह साबित करता है कि शासन और प्रशासन की सक्रिय कार्यप्रणाली से आम नागरिकों की समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सकता है।
- -पंडवानी की विश्वविख्यात साधिका का पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार; हजारों लोगों ने दी अंतिम श्रद्धांजलिरायपुर। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने वाली विश्वविख्यात पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई को रविवार को उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। राज्य शासन के निर्णय के अनुरूप पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, साहित्यकारों तथा हजारों श्रद्धालुओं ने नम आंखों से लोककला की इस महान विभूति को अंतिम प्रणाम किया।डॉ. तीजन बाई के निधन से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के कला एवं सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने अपने अद्वितीय गायन, प्रभावशाली अभिनय और ओजपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी जैसी लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को जीवंत शैली में प्रस्तुत करने की उनकी विलक्षण कला ने देश-विदेश के असंख्य दर्शकों को भारतीय लोकसंस्कृति से जोड़ने का कार्य किया।ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्व मंच तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, साधना और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। अनेक सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर ऐसी पहचान बनाई, जिसने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढि़यों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी।भारतीय लोककला में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और देश के दूसरे सर्वाेच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया गया। वे भारतीय लोक परंपरा की ऐसी प्रतिनिधि थीं, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से देश की सांस्कृतिक अस्मिता को विश्वभर में गौरवान्वित किया।राज्य शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप उनके अंतिम संस्कार के अवसर पर राजकीय सम्मान की सभी औपचारिकताएं पूर्ण की गईं। गनियारी गांव में आयोजित अंतिम संस्कार में उपस्थित जनसमूह ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को सदैव जीवित रखने का संकल्प व्यक्त किया। डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोककला के एक स्वर्णिम युग का अवसान है, किंतु उनकी स्वर-साधना, पंडवानी की समृद्ध परंपरा और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए उनका आजीवन समर्पण सदैव अमर रहेगा। उनकी अनुपम कला, ओजस्वी व्यक्तित्व और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढि़यों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।
- -प्रख्यात पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के निधन पर उप मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त कियारायपुर। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस दुखद खबर से हम सभी को गहरा आघात लगा है। उन्होंने प्रदेश की समृद्ध कला और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि पंडवानी की पहचान डॉ. तीजन बाई से थी।श्री साव ने कहा कि उनका जाना देश के लिए और छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति है, जिसकी कभी भरपाई नहीं हो सकेगी। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। करोड़ों दिलों पर तंबूरे की तान एवं बुलंद आवाज गूंजती रहेगी। श्री साव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई की पंडवानी प्रस्तुति अद्भुत थी। अपनी बुलंद आवाज, अभिनय, लयबद्धता और सहयोगियों के संगीत से वे ऐसी प्रस्तुति देती थी जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने पंडवानी के जरिए छत्तीसगढ़ की संस्कृति को देश और विदेश में प्रसारित किया। गांवों में आज भी उनकी पंडवानी कथा अमर है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि मैं परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें। उनके सभी परिजनों और चाहने वालों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
- -पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली महान लोकगायिका के निधन पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने जताया गहरा शोक, कहा— छत्तीसगढ़ ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर का अनमोल रत्न खो दियारायपुर । छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित प्रख्यात पंडवानी गायिका श्रीमती तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर स्थित एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश और विश्व की लोक कला जगत में शोक की लहर है। उनके निधन पर प्रदेश के संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अपने शोक संदेश में कहा कि तीजन बाई केवल एक लोक कलाकार नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान की जीवंत प्रतीक थीं। उन्होंने अपनी अद्भुत कला, दमदार प्रस्तुति और समर्पण से पंडवानी जैसी लोकविधा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित किया। उनका निधन प्रदेश और देश की सांस्कृतिक दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों और असंख्य प्रशंसकों को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।गरीब परिवार से निकलकर विश्व मंच तक का प्रेरणादायी सफर24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके पिता का नाम हुकुमचंद परधा तथा माता का नाम सुखवती बाई था। बचपन से ही उन्हें महाभारत की कथाओं और पंडवानी गायन में गहरी रुचि थी। उनके नाना ब्रजलाल परधा से उन्हें इस लोककला की प्रारंभिक शिक्षा मिली।महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया। उस समय महिलाओं द्वारा पंडवानी की वेदमती शैली में बैठकर प्रस्तुति देने की परंपरा थी, लेकिन तीजन बाई ने इस परंपरा को चुनौती देते हुए पुरुष कलाकारों की कापालिक शैली में खड़े होकर अभिनय, संवाद, गायन और भाव-भंगिमाओं के साथ प्रस्तुति देना शुरू किया। उनकी यही शैली आगे चलकर उनकी विशिष्ट पहचान बन गई।हबीब तनवीर ने पहचानी प्रतिभा, बदल गई जिंदगीप्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचाना और उन्हें बड़े मंचों तक पहुंचाया। इसके बाद तीजन बाई ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के समक्ष अपनी प्रस्तुतियां दीं।उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मॉरीशस, जापान सहित 17 से अधिक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का विश्वभर में परचम लहराया। उनकी प्रभावशाली आवाज, अभिनय और कथावाचन शैली ने विदेशी दर्शकों को भी भारतीय लोक परंपरा से परिचित कराया।देश-विदेश में मिले अनेक प्रतिष्ठित सम्मानलोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 1988 में पद्मश्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2003 में पद्म भूषण, 2018 में जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार तथा 2019 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त बिलासपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट. (मानद उपाधि) प्रदान कर सम्मानित किया।नई पीढ़ी के लिए बनीं प्रेरणातीजन बाई ने न केवल पंडवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि इस लोकविधा से नई पीढ़ी के अनेक कलाकारों को भी जोड़ा। उनकी प्रेरणा से अनेक महिला कलाकारों ने पंडवानी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिभा, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर लोककला को वैश्विक मंच तक पहुंचाया जा सकता है।देशभर से उमड़ा श्रद्धांजलियों का सैलाबतीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, विभिन्न जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, साहित्यकारों तथा सांस्कृतिक संस्थाओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने उन्हें भारतीय लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके योगदान को सदैव अविस्मरणीय बताया।छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान रहेंगी अमरतीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण की अनुपम मिसाल है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से महाभारत की कथाओं को जन-जन तक पहुंचाया और पंडवानी को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। उनके निधन से भले ही लोककला जगत ने अपनी बुलंद आवाज खो दी हो, लेकिन उनकी कला, उनकी शैली और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनकी अमिट सांस्कृतिक विरासत भारतीय लोककला के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगी।
- -पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम को भेंट किया गया जीपीएम की विशिष्ट पहचान ‘विष्णु भोग’ चावल, महिलाओं के आत्मनिर्भरता मॉडल और स्थानीय उत्पाद की सराहनारायपुर । गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के प्रवास पर पहुंचे पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम का स्वागत स्थानीय पहचान और कृषि समृद्धि के प्रतीक ‘विष्णु भोग’ चावल से किया गया। कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने उन्हें जिले की विशिष्ट पहचान माने जाने वाले ‘विष्णु भोग’ चावल का पैकेट भेंट कर सम्मानित किया। यह चावल जिले में बिहान योजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किया जा रहा है, जो ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन का सफल उदाहरण बनकर उभरा है।इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने पुलिस महानिदेशक को ‘विष्णु भोग’ चावल की विशेषताओं, उसकी गुणवत्ता तथा इसके उत्पादन और विपणन में महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पहल न केवल स्थानीय कृषि उत्पादों को नई पहचान दिला रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी आय में भी वृद्धि कर रही है।पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम ने महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे इस सराहनीय प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि ‘विष्णु भोग’ चावल केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से जिले की विशिष्ट पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होती है तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलती है।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महिला समूहों द्वारा गुणवत्ता और परंपरा के साथ तैयार किए जा रहे ऐसे उत्पाद भविष्य में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी अलग पहचान बनाएंगे। स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने से किसानों और महिला समूहों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा, जिससे ग्रामीण विकास को भी गति मिलेगी।इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री मनोज कुमार खिलारी तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
- -विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में सहकारिता की भूमिका पर हुई पैनल चर्चारायपुर / अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर राजधानी स्थित कृषि मंडपम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, लाभांडी में सहकारिता क्षेत्र की चुनौतियों, उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सहकारिता की भूमिका पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता, मार्कफेड के प्राधिकृत अधिकारी श्री शशिकांत द्विवेदी तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अंबिकापुर के अध्यक्ष श्री रामकिशुन सिंह ने किया।उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के गठन के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रदेशभर में 29 जून से 6 जुलाई तक सहकारी सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी श्रृंखला में विगत 4 जून को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर यह विशेष आयोजन किया गया।पैनल चर्चा में विकसित भारत-2047 के लिए सहकारिता क्षेत्र से अपेक्षाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज सहकारी समितियों की भूमिका, दुग्ध सहकारिता के विस्तार, महिला सशक्तिकरण में दुग्ध सहकारी संस्थाओं के योगदान, ग्रामीण रोजगार सृजन में मत्स्य सहकारी समितियों की भूमिका तथा नाबार्ड, अपेक्स बैंक और जिला सहकारी बैंकों की जिम्मेदारियों पर अपने विचार रखे।कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने का प्रभावी माध्यम है। सहकारिता के माध्यम से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को गति देने के लिए सभी संस्थाओं के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।कार्यक्रम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के उपाध्यक्ष श्री अभिनेष कश्यप, राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री सौरभ शर्मा, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक एवं अपर आयुक्त श्री के.एन. कांडे, मत्स्य विभाग के संचालक श्री नाग, अपर आयुक्त श्रीमती सावित्री भगत, उपायुक्त श्रीमती किरण गुप्ता, संयुक्त आयुक्त श्री बसंत कुमार, श्री मुकेश ध्रुव, श्री तिग्गा, श्री बुनकर, श्री गौरीशंकर शर्मा, उपायुक्त श्री युगल किशोर तथा अपेक्स बैंक के डीजीएम श्री भूपेश चंद्रवंशी सहित सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।इसके अलावा अपेक्स बैंक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों, लघु वनोपज संघ, दुग्ध महासंघ, सहकारी शक्कर कारखानों, एनसीडीसी तथा विभिन्न सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के प्रतिनिधि और किसान उपस्थित रहे।
- -दासन और एमडी श्री विवेक आचार्य ने एयरपोर्ट पर किया स्वागत*-मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में सतत पर्यटन, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय रोजगार पर साझा दृष्टि; छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास को लेकर हुई विस्तृत चर्चारायपुर । भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक पर्यटन श्री सुमन बिल्ला के रायपुर आगमन पर छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने रायपुर विमानतल पर उनका आत्मीय स्वागत किया। श्री बिल्ला भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा आईआईएम रायपुर द्वारा आयोजित दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में पर्यटन विषय के प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल हुए।इस अवसर पर श्री सुमन बिल्ला, डॉ. एस. भारती दासन एवं श्री विवेक आचार्य के बीच छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रभावी ढंग से स्थापित करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि छत्तीसगढ़ में पारिस्थितिकी पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, पुरातात्विक पर्यटन, वन्यजीव पर्यटन, जनजातीय पर्यटन तथा ग्रामीण पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं का योजनाबद्ध विकास कर राज्य में रोजगार सृजन, स्थानीय उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान की जा सकती है। स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए पर्यटन विकास का ऐसा मॉडल विकसित करने पर भी सहमति बनी, जिससे आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।बैठक में पर्यटन अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार, डिजिटल प्रचार-प्रसार, गृह-आवास (होम-स्टे) व्यवस्था को बढ़ावा देने, स्थानीय हस्तशिल्प एवं पारंपरिक व्यंजनों को पर्यटन से जोड़ने तथा जनजातीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए प्रभावी प्रचार-प्रसार और राज्य की सशक्त पहचान स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।पर्यटन मंत्रालय और छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का अधिकतम लाभ राज्य को दिलाने, पर्यटन स्थलों के समग्र विकास तथा निवेश को प्रोत्साहित करने के उपायों पर भी सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ।उल्लेखनीय है कि दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में श्री सुमन बिल्ला ने "सतत समृद्धि के आधार के रूप में पर्यटन : छत्तीसगढ़ में आजीविका सृजन, संस्कृति का संरक्षण और प्रकृति की सुरक्षा" विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। इसके पश्चात उन्होंने "आगे की राह – विचार मंथन" विषय पर आयोजित संवादात्मक सत्र का संचालन भी किया। इन सत्रों में पर्यटन को सुशासन, सतत विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय आजीविका से जोड़ने के व्यावहारिक मॉडल पर विस्तार से चर्चा की गई। श्री सुमन बिल्ला के सुझावों तथा केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ का पर्यटन क्षेत्र नई दिशा प्राप्त करेगा। इससे राज्य की जैव विविधता, ऐतिहासिक धरोहर, जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य को वैश्विक पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
- रायपुर । अबूझमाड़ के दुर्गम अंचलों में जब मानसून दस्तक देता था, तो वह अपने साथ प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि ओरछा क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के लिए दुश्वारियों का दौर भी लेकर आता था। हर साल बारिश के चार महीने यहाँ के लोगों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होते थे। लेकिन इस साल तस्वीर जुदा है। नारायणपुर के ओरछा क्षेत्र में पिनगुंडा नाला पर बनी नई बॉक्स पुलिया ने विकास की एक नई इबारत लिख दी है। यह पुलिया सिर्फ कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए खुशहाली और कनेक्टिविटी का एक नया 'लाइफलाइन' बन चुकी है।पल्ली-छोटेडोंगर-ओरछा मार्ग पर स्थित पिनगुंडा नाला सालों से नारायणपुर और ओरछा के बीच एक अभेद्य दीवार बना हुआ था। मानसून के आते ही नाला उफान पर आ जाता, जिससे तहसील मुख्यालय ओरछा सहित दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट जाता था। उफनते नाले के कारण एम्बुलेंस नहीं आ पाती थी और गंभीर मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पाते थे। नदी-नाले पार करने के जोखिम के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई हफ्तों बाधित रहती थी। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ठप हो जाती थी और स्थानीय ग्रामीणों की कृषि उपज मंडियों तक नहीं पहुँच पाती थी।ग्रामीणों की इस दशकों पुरानी और बुनियादी समस्या को संवेदनशीलता से लेते हुए शासन द्वारा यहाँ एक सुदृढ़ पुलिया निर्माण की कार्ययोजना तैयार की गई। इस आधुनिक बॉक्स ब्रिज के बन जाने से बारिश के दिनों में भी नारायणपुर से ओरछा तक का मार्ग पूरी तरह निर्बाध और सुरक्षित हो गया है। घंटों का इंतजार और मीलों लंबा वैकल्पिक सफर अब गुजरे जमाने की बात हो गई है।इस एकल परियोजना ने ओरछा क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। सुरक्षित और सुगम मार्ग मिलने से ग्रामीणों के ईंधन और कीमती समय, दोनों की बचत हो रही है। आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ अब बिना किसी रुकावट के सीधे गांवों तक पहुँच रही हैं। साथ ही शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन भी आसान हुआ है। इसके साथ ही कृषि उपजों और दैनिक उपभोग की वस्तुओं का परिवहन आसान होने से स्थानीय व्यापार को एक नई गति मिली है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल नहीं, हमारा बेहतर भविष्य है। यह निर्माण उनके जीवन की सबसे बड़ी सौगातों में से एक है। सालों से हम इस नाले के सामने बेबस थे। बीमारों को खाट पर लादकर ले जाना पड़ता था। अब इस पुलिया के बनने से हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा डर दूर हो गया है। यह पुल सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के बेहतर भविष्य का रास्ता है।
- रायपुर ।राज्यपाल श्री रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर स्वर-कोकिला, पद्म विभूषण से सम्मानित एवं विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।अपने शोक संदेश में राज्यपाल ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का निधन केवल लोककला जगत ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पूरे राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी अद्वितीय गायन शैली, असाधारण प्रतिभा और लोक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशिष्ट पहचान दिलाई। लोककला के क्षेत्र में उनका अतुलनीय योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।राज्यपाल ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपना संपूर्ण जीवन लोककला की साधना, संरक्षण और संवर्धन को समर्पित किया। उन्होंने पंडवानी जैसी समृद्ध लोक परंपरा को विश्व मंच तक पहुंचाकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। उनका व्यक्तित्व, कला-साधना और सांस्कृतिक योगदान आने वाली पीढि़यों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।राज्यपाल ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों, उनके असंख्य प्रशंसकों और समस्त लोककला जगत को इस गहन दुःख को सहन करने की शक्ति एवं संबल प्रदान करें।
- -कांग्रेस हो चुकी है पीडीएफ याने पर्दा डालो फोर्स-कांग्रेस को गरीबों की नहीं, अपने करीबियों की चिंता है - डॉ. नवीन मार्कण्डेयरायपुर। भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. नवीन मार्कण्डेय ने भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि नकटी ग्राम में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को लेकर कांग्रेस अब निम्न स्तरीय राजनीति कर रही है। कांग्रेस नकटी ग्राम के भोले-भाले लोगों को गुमराह करके बरगला रही है, और उन्हें गलत दिशा में ले जाकर आंदोलन कर रही है। डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि यह सारा कृत्य कांग्रेस का किया-धरा है, लेकिन अब कांग्रेस अपनी उस करतूत को भूल नया पाखण्ड रचने में लगी है।भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. मार्कण्डेय ने आरोप लगाया कि आज नकटी का जो प्रकरण चल रहा है, उसकी स्क्रिप्ट बहुत पहले सन् 2020 में पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के शासनकाल में लिखी गई थी। उस समय हाउसिंग बोर्ड के जरिए वहां आवासीय कॉलोनी तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई। हाउसिंग बोर्ड द्वारा जमीन मांगे जाने पर। पटवारी, आरआई व तहसीलदार ने चिह्नांकित कर सारी विधिसम्मत प्रक्रिया पूरी कर शासन को सौंपी गई। इसी दरम्यान 2022 में वहां आवासीय कॉलोनी बनने की जानकारी मिलते ही 2022-23 में वहाँ कब्जाधारियों की बाढ़ आ गई। पहले वहां लगभग 3 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा था, जिस पर कच्चे मकान चिन्हांकित हुए। डॉ. मार्कण्डेय ने बताया कि नियमानुसार ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को आवास के लिए ढाई डिस्मिल जमीन दी जाती है। लेकिन यहां के कई लोगों ने 10 से 17-20 हजार वर्गफीट जमीन पर कब्जा कर लिया है और उन लोगों ने 50 लाख रुपए मूल्य तक के मकान, बाड़ी बना ली है।भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि नया राजधानी क्षेत्र के तहत नकटी ग्राम तीसरे लेयर का गांव है और इस लिहाज से उसका चरणबद्ध विकास होना है। पूर्ववर्ती भूपेश सरकार ने आवासीय विकास के लिए जगह का चिन्हाकित कर प्रक्रिया पूरी की, उस नजरिए से वहां अतिक्रमण बढ़ा और लोगों ने आवश्यकता से अधिक जमीन पर कब्जा किया। डॉ. मार्कण्डेय ने कहा वि अब इस मामले को लेकर कांग्रेस राजनीति कर रही है। गलत दिशा में ले जाकर लोगों को उकसाया जा रहा है। कांग्रेसी नेताओं को इस बात का जवाब देना चाहिए कि क्या अवैध कब्जों को वे प्रश्रय देते हैं या देना चाहते हैं? क्या अवैध कब्जा कांग्रेस के लोग पूरे प्रदेश में कराना चाहते हैं? जब कांग्रेस की सरकार थी तो सभी शासकीय भूमि को बेचने के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया था, और उस समय कांग्रेस ने बड़े-बड़े नेता तक ने एकड़ों में रियायती दर खरीदें। गरीबों के शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास एवं अन्य प्रयोजन के लिए जो शासकीय जमीन होती है, उसे भी कब्जा करके कांग्रेस शासनकाल में बेचा गया है। बाद में हाईकोर्ट ने इस आदेश को निरस्त किया।भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी एक करतूत को छिपाने के लिए दूसरों पर आरोप मढ़ रहे हैं। कांग्रेस ने पिछले समय 122 परिवारों को सेरीखेड़ी में बेघर किया। कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र इतना पतित हो गया है कि उस समय गरीबों को सेरीखेड़ी में हटाया गया, उन गरीबों को न एक इंच जगह तक दी गई और न ही एक कोई मकान दिया। डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि आज घड़ियाली आंसू बहाकर कांग्रेसी प्रदेश की भाजपा सरकार पर आरोप लगा रही है कि भाजपा गरीबों के खिलाफ हैं। गरीबों के खिलाफ तो कांग्रेस शुरू से रही है। गरीबी हटाने का नारा देते हुए कांग्रेसी गरीबी नहीं, गरीबों को ही मिटाने का काम करते रहे हैं। लेकिन भाजपा सरकार ने इस समय पिछले एक साल मे लगातार नकटी ग्राम के बाहर शासकीय जमीन पर अवैध कब्जाधारियों को नोटिस देते हुए उनके व्यवस्थापन की भी प्रक्रिया की। डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि 29 जून को 61 परिवारों को आवास आबंटित किया और पंजी पर हस्ताक्षर करके ये सब आवास की चाबी लेकर नया रायपुर के सेक्टर-30 में शिफ्ट हुए। इसीलिए शासन-प्रशासन ने कब्जा हटाने की प्रक्रिया की तो उन परिवारों की जरूरत की चीजों तक को नुकसान भी नहीं पहुंचाया।भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि इतनी सब कुछ व्यवस्थित प्रक्रिया कांग्रेस को रास नहीं आई। कांग्रेस प्रदेश में ढाई साल से बैकफुट पर है, किसी प्रकार का मुद्दा नहीं है, जनहित की कोई बात नहीं कर रही है। इसलिए अब झूठे नैरेटिव सेट करके कांग्रेस लोगों को उकसाने के लिए आंदोलन कर रही है। डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की भाजपा सरकार संवेदनशील होकर जन हित में कार्य कर रही है।भाजपा प्रदेश प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने कहा कि कांग्रेस द्वारा यह झूठा नैरेटिव सेट किया जा रहा है कि नकटी गांव को तोड़ दिया गया है। श्री श्रीवास ने कहा कि हमारी सरकार ने नकटी गांव को नहीं तोड़ा है। नकटी गांव में कुल 17 वार्ड हैं। उसमें से एक वार्ड, जहां पर कब्जा हुआ था, उनको विस्थापित किया गया है। बार-बार जो यह कहा जा रहा है कि विधायकों के लिए आवास बन रहा है, वह भी सच नहीं है। इन आवासों में अधिकारी-कर्मचारी भी रहेंगे। यह सामूहिक आवास योजना की प्रकिया है।इस दौरान पत्रकार वार्ता में रायपुर शहर जिला अध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर, रायपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष श्याम नारंग, जिला पंचायत उपाध्यक्ष संदीप यदु उपस्थित रहे।
- दुर्ग। शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अप्रतिम धरोहर, पद्मविभूषण से सम्मानित एवं विश्वविख्यात पंडवानी की अप्रतिम साधिका डॉ. तीजन बाई के निवास पहुँचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा अश्रुपूरित नेत्रों से उन्हें अंतिम विदाई दी।उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपने अद्वितीय कला-साधना, ओजस्वी वाणी और आजीवन समर्पण से छत्तीसगढ़ की लोकधारा को वैश्विक मंच पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका अवसान केवल एक महान लोककलाकार का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के एक स्वर्णिम अध्याय का विराम है। ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों और असंख्य प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति दें। मंत्री श्री यादव दिवंगत तीजन बाई के अंत्येष्टि कार्यक्रम में शामिल हुए।उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन हमारी लोकपरंपराओं, संस्कृति और कला के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित रहा। उनकी साधना आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्वभर में स्थापित करने में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। राज्य की कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके द्वारा स्थापित आदर्श और विरासत को सदैव सम्मानपूर्वक स्मरण किया जाएगा।
- रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने चिंतन शिविर 3.0 के दूसरे दिन की शुरुआत योगाभ्यास के साथ की। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) नवा रायपुर के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित विशेष योग सत्र में उन्होंने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास किया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि नियमित योग न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि व्यक्ति को प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा भी देता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन और प्रभावी निर्णय क्षमता के लिए शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से चिंतन शिविर के दौरान दिन की शुरुआत योग से की गई, ताकि सकारात्मक ऊर्जा और एकाग्रता के साथ राज्य के विकास से जुड़े विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श किया जा सके। उन्होंने कहा कि योगाभ्यास के इस सामूहिक आयोजन से चिंतन शिविर 3.0 में सकारात्मक ऊर्जा के साथ अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली के संदेश को नई दिशा मिलेगी ।योग सत्र में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव तथा आईआईएम रायपुर के अधिकारी भी उपस्थित थे।
- रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने श्भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), नवा रायपुर में आयोजित चिंतन शिविर 3.0 के दूसरे दिन एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत पौधरोपण किया। इस अवसर पर मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने भी पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं जनभागीदारी का संदेश दिया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि एक पेड़ माँ के नाम अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक संवेदनाओं को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान से जुड़कर पौधारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हरित एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए जनभागीदारी आधारित पर्यावरण संरक्षण अभियानों को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है।
- -डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव सायरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर पहुंचकर पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा से उन्होंने पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई तथा छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है।इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
- रायपुर। पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई का लंबी बीमारी के बाद रविवार तड़के रायपुर के AIIMS में निधन हो गया। वे 70 वर्ष की थीं। छत्तीसगढ़ की इस महान लोक कलाकार ने अपनी सशक्त आवाज और प्रभावशाली अभिनय से पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी। भारतीय लोक कला में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से पंडवानी को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक में नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को सुनाने की प्रेरणा उन्हें नाना से मिली थी।तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल 1956 को भिलाई के गनियारी गांव में हुआ था। वे पारधी समुदाय से थीं। देश-विदेश में पंडवानी लोक गायिकी को पहचान दिलाने वाली तीजन की जिंदगी का सफर आसान नहीं रहा। इसी गायिकी की वजह से उन्हें समाज ने बेदखल कर दिया था। समाज से निकाले जाने के बाद भी उन्होंने गाना नहीं छोड़ा। उनके पिता का नाम चुनुकलाल और माता का नाम सुखवती था। तीजन अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियां गाते-सुनाते देखतीं थी। धीरे-धीरे उन्हें ये कहानियां याद हो गई। उनकी लगन और प्रतिभा को देखकर गायक उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें प्रशिक्षण दिया।13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया। उस समय में महिला पंडवानी गायिकाएं केवल बैठकर गा सकती थीं, जिसे वेदमती शैली कहा जाता है। पुरुष खड़े होकर कापालिक शैली में गाते थे। तीजनबाई वे पहली महिला थीं, जिन्होंने कापालिक शैली में पंडवानी की।बचपन में स्कूल का मुंह न देख पाने वाली पंडवानी गायिका तीजन बाई साक्षरता अभियान में किसी तरह पांचवीं की सीढ़ी ही चढ़ पाईं। लेकिन उनकी पंडवानी की ऐसी धूम रही कि उन्हें भारत के 3 नागरिक सम्मानों से नवाजा गया। तीजन बाई को 4 बार डॉक्टर ऑफ लिटरेचर यानी डी.लिट. की उपाधि मिली।तीजन बाई के निधन पर शोक और प्रतिक्रियाएं
-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से दुख व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई का जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है और उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला को विश्व मंच पर स्थापित किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने रायपुर एम्स पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया और परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
- -विधायक अनुज शर्मा एवं कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने पद्म विभूषण तीजन बाई से अस्पताल में की मुलाकातरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण एवं विश्वविख्यात पंडवानी गायिका श्रीमती तीजन बाई के परिजनों से दूरभाष के माध्यम उनका हालचाल जाना तथा मुख्यमंत्री ने उनके स्वास्थ्य के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की तथा हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।श्रीमती तीजन बाई से विधायक श्री अनुज शर्मा एवं कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने आज एम्स पहुंचकर मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जाना। इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. सिंह ने श्रीमती तीजन बाई के परिजनों से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की दूरभाष पर बातचीत भी कराई।विधायक श्री शर्मा ने कहा कि "पद्म विभूषण श्रीमती तीजन बाई हमारी लोककला की अमूल्य धरोहर हैं। मैं उनके शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने की ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ।" कलेक्टर डॉ. सिंह ने श्रीमती तीजन बाई के परिजनों से भी मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और शासन की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
- रायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज महाराष्ट्र मंडल, रायपुर द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में समाज के युवा डॉक्टरों एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने लोक भवन की ओर से महाराष्ट्र मंडल को प्रदत्त एंबुलेंस का लोकार्पण भी किया।अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि डॉक्टर और चार्टर्ड अकाउंटेंट दोनों ही समाज के विकास और प्रगति के महत्वपूर्ण आधार हैं। डॉक्टर मानव जीवन की रक्षा और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े होते हैं, जबकि चार्टर्ड अकाउंटेंट उद्योग, व्यापार और व्यवसाय को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।उन्होंने कहा कि चिकित्सा एक नोबल व्यवसाय है, जो केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वाेच्च दायित्व है। मरीज डॉक्टर को भगवान का स्वरूप मानता है, इसलिए चिकित्सकों की जिम्मेदारी अत्यंत गंभीर है। कठिन परिश्रम और अपने अभिभावकों के सहयोग से डॉक्टर बनने वाले युवाओं को सेवा भावना के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टर की जिम्मेदारी केवल अस्पताल तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह 24 घंटे समाज की सेवा के लिए तत्पर रहता है।राज्यपाल ने चिकित्सकों से कहा कि आधुनिक जांच रिपोर्टों के आधार पर उपचार आवश्यक है, लेकिन मरीज का प्रत्यक्ष परीक्षण और उससे आत्मीय संवाद भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इससे मरीज को मानसिक संतोष मिलता है और चिकित्सक के प्रति उसका विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों के प्रति संवेदनशील, सहानुभूतिपूर्ण और मानवीय व्यवहार अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान में आज जो अभूतपूर्व प्रगति हुई है, उसका श्रेय मानव की बुद्धिमत्ता, अनुसंधान और निरंतर नवाचार को जाता है।चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका पर राज्यपाल ने कहा कि आज उनके कार्य का दायरा काफी व्यापक हो गया है। वे केवल लेखा-जोखा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यवसायियों के मार्गदर्शक और मेंटर की भूमिका भी निभाते हैं। व्यवसाय का विस्तार कैसे किया जाए, स्टार्टअप कैसे स्थापित किया जाए तथा शासन की विभिन्न योजनाओं का अधिकतम लाभ कैसे प्राप्त किया जाए, इसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करते हैं।उन्होंने कहा कि आज अनेक युवा पारिवारिक व्यवसाय को अपेक्षित महत्व नहीं देते और उसमें संभावनाएं कम देखते हैं, जबकि सही सोच, नवाचार और उचित मार्गदर्शन से पारिवारिक व्यवसाय को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने डॉक्टरों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से अपने-अपने दायित्वों का ईमानदारी, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निर्वहन करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष श्री अजय मधुकर काले ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर महाराष्ट्र मंडल के पदाधिकारी, वरिष्ठजन, महिलाएं, युवा तथा बड़ी संख्या में समाज के सदस्य उपस्थित थे।
- -परिजनों से फोन पर चर्चा कर जाना स्वास्थ्य : बेहतर उपचार और सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के दिए निर्देशरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई के अस्वस्थ होने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उनके शीघ्र एवं पूर्ण स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। श्रीमती तीजन बाई वर्तमान में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के मेडिकल आईसीयू में उपचाराधीन हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीमती तीजन बाई के परिजनों से स्वयं दूरभाष पर चर्चा कर उनके स्वास्थ्य की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि तीजन बाई के उपचार, निरंतर चिकित्सकीय निगरानी तथा सभी आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें सर्वोत्तम चिकित्सा उपलब्ध हो सके।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रीमती तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय पंडवानी शैली और विलक्षण कला-साधना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है। उनका योगदान राज्य की सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर है।मुख्यमंत्री ने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि तीजन बाई शीघ्र पूर्णतः स्वस्थ होकर पुनः अपनी अनुपम कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाती रहें।
- -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय उर्वरक मंत्री श्री जे.पी. नड्डा का जताया आभाररायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा छत्तीसगढ़ को 46,500 मीट्रिक टन अतिरिक्त डीएपी आवंटित किए जाने पर उनका हार्दिक आभार व्यक्त किया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा के विशेष सहयोग से लिया गया यह निर्णय प्रदेश के किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे खरीफ सीजन के दौरान किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में बड़ी सहायता मिलेगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि कुछ समय पूर्व नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा से हुई भेंट के दौरान उन्होंने खरीफ सीजन की आवश्यकताओं को देखते हुए छत्तीसगढ़ के लिए अतिरिक्त डीएपी उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। केंद्रीय मंत्री ने किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सकारात्मक सहयोग का आश्वासन दिया था, जिसके परिणामस्वरूप राज्य को अतिरिक्त डीएपी का आवंटन प्राप्त हुआ है।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में यूरिया की उपलब्धता पहले से ही पर्याप्त थी और अब अतिरिक्त डीएपी मिलने से खरीफ सीजन के लिए खाद की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है। इससे किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा तथा कृषि कार्य सुचारु रूप से संचालित होंगे।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित कर रही है कि उन्हें समय पर डीएपी, यूरिया सहित सभी आवश्यक कृषि आदान उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार अन्नदाता के कल्याण और कृषि क्षेत्र की मजबूती के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
- -गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आयोजित समारोह में होंगे शामिल, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी करेंगे अध्यक्षतारायपुर । छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा विकसित रायपुर के डूमरतराई थोक बाजार फेस-2 के नामकरण एवं लोकार्पण समारोह का आयोजन 5 जुलाई 2026 (रविवार) को शाम 5:00 बजे किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। समारोह की अध्यक्षता आवास एवं पर्यावरण, वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी करेंगे।कार्यक्रम में मंत्री श्री केदार कश्यप, मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब तथा रायपुर लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा विधायक श्री राजेश मूणत, श्री मोतीलाल साहू, श्री पुरंदर मिश्रा, श्री सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक समारोह में शामिल होंगे।
- -125 दिनों का रोजगार, 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी और मेट की जिम्मेदारी से बढ़ा आत्मविश्वासरायपुर / शासन की विकसित भारत-जीरामजी (ग्रामीण रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन) योजना दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इस योजना से उन्हें अधिक रोजगार, बेहतर मजदूरी और जिम्मेदारीपूर्ण कार्य मिल रहा है। पहले जहां मनरेगा के तहत 100 दिनों का रोजगार मिलता था, वहीं अब वीबी-जीरामजी योजना के अंतर्गत 125 दिनों का रोजगार और 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मिल रही है। इससे दिव्यांग हितग्राहियों की आय बढ़ी है और उनका आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है।राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम सुंदरा निवासी दिव्यांग श्री चंद्रप्रकाश साहू को वीबी-जीरामजी योजना के तहत 100 मजदूरों के लिए मेट की जिम्मेदारी दी गई है। वे बताते हैं कि पहले उन्हें मनरेगा के अंतर्गत 100 दिनों का रोजगार मिलता था, लेकिन अब 125 दिनों तक काम और 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मिलने से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।उन्होंने कहा कि मेट की जिम्मेदारी मिलना उनके लिए गर्व की बात है। इससे उन्हें समाज में सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिला है।श्री चंद्रप्रकाश साहू को राजनांदगांव प्रवास के दौरान जिले के प्रभारी मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने शॉल, श्रीफल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। वे बताते हैं कि यह सम्मान उनके जीवन का अविस्मरणीय पल है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और आगे बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिली है।विकासखंड डोंगरगांव के ग्राम कोहका की दिव्यांग सुश्री रंभा मंडावी को भी वीबी-जीरामजी योजना के तहत मेट का कार्य मिला है। पहले उन्हें मनरेगा में 261 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी के साथ 100 दिनों का रोजगार मिलता था। अब उन्हें 125 दिनों का रोजगार और 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मिल रही है, जिससे उनकी आय बढ़ी है और परिवार को आर्थिक संबल मिला है।सुश्री रंभा मंडावी ने बताया कि वे मेट के रूप में कार्य करने के साथ-साथ गांव के लोगों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी देती हैं, ताकि पात्र हितग्राही समय पर योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।उन्हें भी जिले के प्रभारी मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने शॉल, श्रीफल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इस सम्मान से उनका उत्साह और आत्मविश्वास दोनों बढ़े हैं।दिव्यांगजनों के लिए नई उम्मीद बनी योजनादोनों हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वीबी-जीरामजी योजना दिव्यांगजनों के लिए सम्मानजनक आजीविका का प्रभावी माध्यम बन रही है। योजना के तहत बढ़े कार्य दिवस, बेहतर मजदूरी और जिम्मेदारीपूर्ण दायित्व ने उनके जीवन में नई उम्मीद, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सुरक्षा का संचार किया है।
- -रोजगार अवधि बढ़ने एवं मजदूरी में वृद्धि से ग्रामीण परिवारों को मिलेगा आर्थिक सशक्तिकरण, गोमती साहू ने जताई खुशीरायपुर / ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार, बेहतर आय और आत्मनिर्भर जीवन का आधार देने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन ने गांवों में नई उम्मीद जगाई है। रोजगार की अवधि बढ़ाकर 125 दिन किए जाने और मजदूरी दर में वृद्धि से ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। मुंगेली जिले के ग्राम लिम्हा की निवासी श्रीमती गोमती साहू ने इस योजना को ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बतया। उन्होंने कहा कि पहले ग्रामीण परिवारों को वर्ष में केवल 100 दिनों का रोजगार मिलता था, जिससे कई बार आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन हो जाता था। अब योजना के तहत 125 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की गारंटी मिलने से परिवार की आय बढ़ेगी और घरेलू खर्चों का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।गोमती साहू ने कहा कि बढ़ी हुई मजदूरी से बच्चों की शिक्षा, परिवार की दैनिक जरूरतों और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करने में काफी सुविधा होगी। सबसे बड़ी राहत यह है कि गांव में ही अधिक दिनों तक रोजगार उपलब्ध होने से अब रोजगार की तलाश में बाहर पलायन करने की आवश्यकता भी कम होगी। यह मिशन केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों के समग्र विकास की मजबूत नींव भी रखेगा। योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण और आजीविका से जुड़ी परिसंपत्तियों के विकास को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिलेगी। गोमती साहू ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय ग्रामीण परिवारों के भविष्य को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। योजना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, आय में वृद्धि होगी और गांवों के विकास को नई गति मिलेगी।
- -केंद्र एवं राज्य शासन की सब्सिडी से घर की छत पर लगा सोलर रूफटॉपरायपुर / प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ आम नागरिकों के बिजली खर्च को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। राजनांदगांव जिले के ग्राम मोखला निवासी श्री विद्यासागर साहू ने इस योजना का लाभ लेकर अपने घर की छत पर सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित किया है। इससे वे स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं तथा भविष्य में बिजली खर्च में बचत का लाभ प्राप्त करेंगे। श्री विद्यासागर साहू ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत आवेदन कर अपने घर में सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित कराया। योजना का बैंकिंग प्रक्रिया छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक भर्रेगांव शाखा से पूरी हुई। योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रूपए तथा राज्य शासन से 30 हजार रूपए की सब्सिडी स्वीकृत हुई है। सब्सिडी दावा की प्रक्रिया भी पूर्ण हो चुकी है तथा शीघ्र ही राशि उनके बैंक खाते में प्राप्त हो जाएगी।श्री विद्यासागर साहू ने बताया कि सोलर रूफटॉप सिस्टम का स्थापना कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है और वर्तमान में संयंत्र सुचारू रूप से कार्य कर रहा है। मोर बिजली मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रतिदिन सोलर पैनल द्वारा उत्पादित बिजली एवं बिजली की खपत की जानकारी आसानी से देख रहे हैं। इससे ऊर्जा उत्पादन की निगरानी सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक हो गई है। श्री विद्यासागर ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह योजना न केवल बिजली खर्च कम करने में सहायक है, बल्कि स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।श्री विद्यासागर साहू ने कहा कि सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी से सोलर रूफटॉप लगवाना पहले की अपेक्षा अधिक सुलभ हो गया है। उन्होंने जिले के सभी नागरिकों से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की दिशा में आगे आना चाहिए। इससे बिजली पर होने वाले खर्च में कमी आएगी, ऊर्जा की बचत होगी तथा पर्यावरण संरक्षण में भी सभी की सहभागिता सुनिश्चित होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के लिए केन्द्र एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह योजना आत्मनिर्भर भारत, ऊर्जा संरक्षण और स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण की दिशा में एक दूरदर्शी एवं जनहितकारी पहल है। इससे नागरिकों को आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ हरित ऊर्जा को भी बढ़ावा मिल रहा है।
- -बेमेतरा में अवैध उर्वरक भंडारण पर बड़ी कार्रवाई, 275 बोरी यूरिया जब्त; किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य सरकार सजगरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को समय पर, उचित मूल्य पर और गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। खरीफ सीजन 2026 के दौरान किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार के निर्देश पर पूरे प्रदेश में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध भंडारण के विरुद्ध सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में बेमेतरा जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से भंडारित 275 बोरी यूरिया जब्त कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि किसानों के अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं के निर्देश तथा कृषि विभाग के उप संचालक श्री मोरध्वज डडसेना के मार्गदर्शन में गठित जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल द्वारा जिलेभर में लगातार औचक निरीक्षण और छापामार कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध हो तथा कृत्रिम अभाव उत्पन्न कर अनुचित लाभ कमाने के प्रयासों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।इसी अभियान के तहत प्राप्त गोपनीय सूचना के आधार पर उड़नदस्ता दल ने ग्राम जानो, तहसील देवकर में अँजोर वर्मा के परिसर में औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए 275 बोरी यूरिया का अवैध भंडारण पाया गया। मौके पर संपूर्ण उर्वरक को विधिवत जब्त कर लिया गया तथा संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। प्राप्त जवाब के परीक्षण के बाद नियमानुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।कृषि विभाग ने जब्त किए गए उर्वरकों के नमूने गुणवत्ता परीक्षण के लिए अधिकृत प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को केवल मानक गुणवत्ता वाले उर्वरक ही उपलब्ध कराए जाएं और किसी भी प्रकार की मिलावट अथवा निम्न गुणवत्ता की सामग्री बाजार में न पहुंचे।जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी, अवैध भंडारण तथा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री करने वालों के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। यदि कोई निजी कृषि केंद्र, उर्वरक विक्रेता अथवा सहकारी संस्था इस प्रकार की अनियमितता करते हुए पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आवश्यक होने पर पुलिस में एफआईआर दर्ज कर प्रकरण न्यायालय में भी प्रस्तुत किया जाएगा।कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं ने कहा है कि किसानों के हितों की रक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी परिस्थिति में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन पूरे जिले में लगातार निगरानी कर रहा है और शिकायत प्राप्त होते ही बिना पूर्व सूचना के तत्काल जांच एवं छापामार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा, कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता तथा कृषि आदानों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। प्रदेश में चल रही इस तरह की सतत कार्रवाई न केवल कालाबाजारी और जमाखोरी पर अंकुश लगाने में सहायक होगी, बल्कि किसानों का विश्वास भी मजबूत करेगी कि सरकार उनकी मेहनत, उनकी फसल और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।जिला प्रशासन ने किसानों एवं आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं उर्वरकों की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, अधिक मूल्य पर बिक्री अथवा अन्य किसी प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिले तो तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन को सूचित करें। प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी तथा प्रत्येक शिकायत पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।
- रायपुर / राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ’’बिहान’’ से जुड़कर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। इसी का प्रेरक उदाहरण सरगुजा जिले के विकासखंड अंबिकापुर की तैलासो राजवाड़े हैं, जो महादेव स्वयं सहायता समूह, रोशनी ग्राम संगठन (वीओ) एवं समृद्ध सरगुजा संकुल से जुड़ी हुई हैं। वे पिछले दो वर्षों से पशु सखी के रूप में कार्य करते हुए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं और अपने परिवार की जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं।तैलासो राजवाड़े बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका का सशक्त माध्यम मिला। वर्तमान में वे पशुपालकों को बकरियों की देखभाल, टीकाकरण के प्रति जागरूकता, समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण एवं आवश्यक दवाइयों की जानकारी उपलब्ध कराती हैं। इस कार्य से उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 से 15 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण एवं बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से चल रही है।उन्होंने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं, जिनमें बड़ा बेटा कक्षा 12वीं, दूसरा कक्षा 10वीं तथा सबसे छोटा कक्षा 8वीं में अध्ययनरत है। पहले आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन आज स्वयं की आय से वे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा कर पा रही हैं।तैलासो ने बताया कि उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जहां पशुपालन एवं बकरियों के स्वास्थ्य प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। उन्होंने कहा कि यदि पशु सखियों को नियमित रूप से उन्नत प्रशिक्षण एवं टीकाकरण संबंधी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो वे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को और बेहतर सेवाएं प्रदान कर सकेंगी।उन्होंने यह भी बताया कि बिहान योजना के माध्यम से उन्हें आजीविका संवर्धन के लिए विभिन्न अवसर प्राप्त हुए हैं। योजना से मिली सहायता के आधार पर उन्होंने अपने खेत में बोर खुदवाया है तथा धान की खेती शुरू की है। भविष्य में वे सब्जी उत्पादन कर अपनी आय में और वृद्धि करने की योजना बना रही हैं। तैलासो राजवाड़े ने कहा कि बिहान योजना से जुड़कर उन्हें आत्मविश्वास, सम्मान और आर्थिक स्वावलंबन मिला है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी भूमिका निभा रही है और इससे अनेक महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।



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