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- -भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद ने पत्रकार वार्ता में 3 करोड़ लखपति दीदियों और देश की आर्थिक प्रगति का किया उल्लेखरायपुर। भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद रूपकुमारी चौधरी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की महिलाएँ सशक्त और आत्मनिर्भर होकर हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। श्रीमती चौधरी ने महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर अपनी नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव सहित केन्द्रीय व प्रदेश नेतृत्व का आभार मानते हुए कहा कि स्वर्गीय करुणा शुक्ला और डॉ. सरोज पाण्डेय के बाद संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर यह जिम्मेदारी मिलना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती चौधरी ने बुधवार को यहाँ एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में आहूत महती पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने में महिला शक्ति की सबसे बड़ी भूमिका रहने वाली है। आज महिलाएँ सिर्फ 'आधी आबादी' नहीं, बल्कि राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बन चुकी हैं। मनुस्मृति के श्लोक 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता' का उल्लेख करते हुए श्रीमती चौधरी ने कहा कि महिलाएँ अब सिर्फ रसोई तक सीमित न रहकर विमान उड़ाने से लेकर खेलकूद और पर्वतारोहण तक हर क्षेत्र में देश का परचम लहरा रही हैं। केन्द्र और प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं व विकास की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए श्रीमती चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं की बदौलत आज देश में करीब 3 करोड़ बहनें 'लखपति दीदी' बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर चुकी हैं। केवल शहरी ही नहीं, बल्कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। विषम वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत 7.8 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर हासिल कर रहा है, जो प्रधानमंत्री श्री मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत नीतियों का परिणाम है।भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती चौधरी ने बताया कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को अपना खुद का पक्का घर बनाने के लिए केन्द्र व प्रदेश सरकार की तरफ से सीधे आर्थिक मदद मिलती है। आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज और ऑपरेशन की सुविधा सरकारी और चुनिंदा प्राइवेट अस्पतालों में मिलती है। देश के सभी छोटे-बड़े किसानों को खेती के खर्च में मदद के लिए हर साल 6 हजार रुपये सीधे बैंक खाते में जमा किए जाते हैं। ग्रामीण छत्तीसगढ़ के हर घर तक पाइप के जरिए साफ और शुद्ध पीने का पानी पहुँचाया जा रहा है। गरीब परिवारों की महिलाओं को धुएँ वाले चूल्हे से आजादी दिलाने के लिए मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन और सिलेंडर दिया जाता है। पीएम सूर्य घर योजना के तहत घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए सरकार भारी सब्सिडी देती है, जिससे बिजली का बिल जीरो हो जाता है और एक्स्ट्रा बिजली से कमाई भी होती है। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्य योजनाओं की चर्चा करते हुए श्रीमती चौधरी ने कहा कि राज्य की शादीशुदा महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर महीने 1,000 रुपये महतारी वन्दन योजना में सीधे उनके बैंक खाते में भेजे जाते हैं। कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को उनकी फसल का सही दाम दिलाने के लिए सरकार 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से (21 क्विंटल प्रति एकड़) धान की खरीदी करती है और आर्थिक मदद देती है। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के तहत ग्रामीण इलाकों के उन परिवारों को सालाना आर्थिक मदद दी जाती है, जिनके पास खेती के लिए खुद की कोई जमीन नहीं है। नियद नेल्लानार योजना योजना में बस्तर के नक्सल प्रभावित और अंदरूनी गाँवों तक बिजली, पानी, राशन, सड़क और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने की एक बड़ी पहल है। इसी प्रकार रानी दुर्गावती योजना, श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना, सरस्वती साइकिल योजना आदि की भी चर्चा श्रीमती चौधरी ने की।पत्रकार वार्ता में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता द्वय शताब्दी पाण्डे व डॉ. किरण बघेल, और महिला मोर्चा रायपुर शहर जिला अध्यक्ष कृतिका जैन उपस्थित रहीं।
- रायपुर / युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र, रायपुर द्वारा आज रोजगार कार्यालय परिसर, सिविल लाइंस में जिला स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया गया। उपसंचालक श्रीमती पुष्पा चौधरी ने बताया कि रोजगार मेले में निजी क्षेत्र की 6 प्रतिष्ठित कंपनियों ने भाग लिया। कंपनियों द्वारा उपलब्ध 422 रिक्तियों के लिए कुल 313 आवेदकों का साक्षात्कार लिया गया। साक्षात्कार के उपरांत 166 आवेदकों का प्रारंभिक चयन किया गया, वहीं 50 आवेदकों का अंतिम रूप से चयन हुआ। शेष आवेदकों की चयन प्रक्रिया नियोजकों द्वारा जारी है।इस दौरान संचालक तकनीकी शिक्षा, रोजगार एवं प्रशिक्षण श्री हेमंत रमेश नंदनवार ने रोजगार मेले का अवलोकन कर विभिन्न कंपनियों द्वारा की जा रही चयन प्रक्रिया की जानकारी ली। उन्होंने उपस्थित युवाओं से संवाद करते हुए रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। रोजगार मेले ने जिले के युवाओं को एक ही मंच पर निजी क्षेत्र की कंपनियों से जुड़ने और अपनी योग्यता के अनुरूप रोजगार प्राप्त करने का अवसर दिया। 50 युवाओं का अंतिम चयन उनके लिए नए करियर की शुरुआत और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
- बालोद । छत्तीसगढ़ शासन युवाओं को बेहतर तकनीकी शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसी दिशा में तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज, दुधली बालोद में सत्र 2026-27 के लिए संस्था स्तर पर ऑनलाइन काउंसलिंग एवं सीधे प्रवेश की प्रक्रिया फिर से शुरू की जा रही है। इच्छुक विद्यार्थी अब सिविल, इलेक्ट्रिकल तथा माइनिंग एंड माइन सर्वेइंग जैसे रोजगारपरक डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकते हैं। प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया 03 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे से 06 सितंबर 2026 की रात 11.59 बजे तक चलेगी। पंजीकृत अभ्यर्थियों की मेरिट सूची 07 सितंबर को शाम 05 बजे जारी की जाएगी। सीट आवंटन के लिए अभ्यर्थियों को 08 सितंबर को सुबह 10 बजे संस्था में अनिवार्य रूप से उपस्थित होना होगा। आवंटित सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया 08 सितंबर को दोपहर 01 बजे से 09 सितंबर को दोपहर 01 बजे तक चलेगी। इसके बाद रिक्त सीटों के लिए अनुपस्थित एवं अपग्रेडेशन वाले अभ्यर्थियों को 09 सितंबर को दोपहर 1.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक अंतिम अवसर दिया जाएगा।प्रवेश प्रक्रिया को विद्यार्थियों के लिए आसान और सुविधाजनक बनाने के लिए शासकीय अवकाश और रविवार के दिन भी सुविधा केंद्र खुले रहेंगे। काउंसलिंग के प्रत्येक चरण में अभ्यर्थियों को अलग से ऑनलाइन पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। शासकीय पॉलीटेक्निक में संचालित रोजगारपरक पाठ्यक्रम युवाओं को तकनीकी ज्ञान, कौशल और बेहतर रोजगार के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शासन का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराकर उन्हें कौशलयुक्त, आत्मनिर्भर और रोजगार के लिए सक्षम बनाना है। इच्छुक विद्यार्थी प्रवेश प्रक्रिया, पाठ्यक्रम और पंजीयन से संबंधित अधिक जानकारी के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट dte.cg.gov.in एवं अथवा प्रवेश पोर्टल cgdte.admissions.nic.in पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
- बालोद। छत्तीसगढ़ राज्य में संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों के सत्र 2026-27 की कक्षा 9वीं में प्रवेश हेतु परीक्षा परिणाम घोषित होने के पश्चात विभागीय वेबसाइट https://eklavya.cg.nic.in पर तृतीय काउंसलिंग हेतु छात्र-छात्राओं की सूची एवं तिथि प्रदर्शित कर दी गई है। आदिवासी विभाग के सहायक आयुक्त ने बताया कि प्रयास आवासीय विद्यालयों के कक्षा 9वीं में प्रवेश हेतु तृतीय काउंसलिंग 03 सितंबर 2026 से 09 सितंबर 2026 तक संबंधित आबंटित प्रयास आवासीय विद्यालयों में सुबह 11 बजे से शाम 04 बजे तक आयोजित की जाएगी। इसी प्रकार प्रयास बालक, कन्या आवासीय विद्यालय जिला बीजापुर के कक्षा 9वीं में प्रवेश हेतु काउंसलिंग भी 03 सितंबर 2026 से 09 सितंबर 2026 तक प्रयास कन्या आवासीय विद्यालय, गुढ़ियारी (जनता कालोनी, एफ.सी.आई. गोडाउन के पास, रायपुर) में सुबह 11 बजे से शाम 04 बजे तक होगी। इसके अतिरिक्त सीट रिक्त रहने की स्थिति में प्रतीक्षा सूची वाले विद्यार्थियों हेतु काउंसलिंग 10 सितंबर 2026 से 15 सितंबर 2026 तक आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि शासकीय अवकाश दिवस 04 सितंबर से 06 सिंतबर तथा दिनांक 12 से 15 सितंबर तक काउंसलिंग आयोजित नहीं की जाएगी।
- -सतर्कता जागरूकता सप्ताह के तहत एनएचएआई द्वारा कार्यशाला का आयोजनरायपुर । भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर द्वारा सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। “सत्यनिष्ठा से समृद्धि” थीम पर आयोजित कार्यशाला में आचरण नियमों, सतर्कता संबंधी प्रक्रियाओं तथा सीटीई (मुख्य तकनीकी परीक्षक) निरीक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई।कार्यशाला को संबोधित करते हुए एनएचएआई के मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री आशीष नाथ ने कहा कि सतर्कता केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कार्यप्रणाली में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की निरंतर प्रक्रिया है। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसियों से अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ करने पर जोर दिया।मेट्स यूनिवर्सिटी, रायपुर के कुलपति प्रो. डॉ. के.पी. यादव ने अपने व्याख्यान में कार्यस्थल पर नैतिकता, ईमानदारी और जिम्मेदार आचरण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की दीर्घकालिक सफलता के लिए व्यावसायिक दक्षता के साथ नैतिक मूल्यों का पालन भी आवश्यक है।सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के सेवानिवृत्त अतिरिक्त महानिदेशक श्री श्याम सुंदर पोरवाल ने अपने संबोधन में अनुशासन, ईमानदारी और जवाबदेही को प्रभावी कार्यप्रणाली का आधार बताया। उन्होंने कहा कि निर्माण एवं अधोसंरचना से जुड़े कार्यों में पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और निर्धारित मानकों का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण है।क्षेत्रीय अधिकारी, रायपुर, एनएचएआई श्री आलोक कुमार ने कहा कि सड़क एवं राजमार्ग निर्माण जैसे बड़े सार्वजनिक कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि इन कार्यों को बेहतर ढंग से संपादित करने के लिए प्रोजेक्ट डायरेक्टर, कन्सेशनायर, अथॉरिटी इंजीनियर्स एवं कांट्रेक्टर सहित सभी संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय और स्पष्ट जवाबदेही आवश्यक है। प्रत्येक स्तर पर निर्धारित प्रक्रियाओं, तकनीकी मानकों एवं नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सतर्कता संबंधी जागरूकता से सभी संबंधित पक्षों में अपने दायित्वों के प्रति जिम्मेदारी और जवाबदेही की भावना मजबूत होती है तथा पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यप्रणाली को बढ़ावा मिलता है। सतर्कता केवल अनियमितताओं की रोकथाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करने का माध्यम है, जिसमें ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा किया जा सके।कार्यशाला में एनएचएआई मुख्यालय के सतर्कता विभाग ने सतर्कता मामलों से संबंधित प्रक्रियाओं, शिकायतों के प्रभावी निपटारे तथा मुख्य तकनीकी परीक्षक के निरीक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। उन्होंने अधिकारियों एवं इंजीनियरों को सतर्कता संबंधी दिशा-निर्देशों के व्यवहारिक अनुपालन और आवश्यक सावधानियों से अवगत कराया। कार्यशाला में श्री धर्मेंद्र कुमार राघव, जीएम विजिलेंस, एनएचएआई, श्री डॉ. अनिल दीक्षित, ज्वाइंट डायरेक्टर, आईसीएआर, डॉ. अर्जुन कदम, डीएसपी, सीबीआई, श्री संजय गौर, डीआईजी, बीएसएफ समेत क्षेत्रीय कार्यालय एवं समस्त पीआईयू के अधिकारी कर्मचारी, अथॉरिटी इंजीनियर्स, टीम लीडर्स, विशेषज्ञों तथा संबंधित कांट्रेक्टर के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
- -लोकवाद्यों की सुरमयी प्रस्तुतियों ने बिखेरा छत्तीसगढ़ी संस्कृति का रंग, लोक कलाकारों और बच्चों का हुआ उत्साहवर्धनरायपुर । छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक लोकवाद्यों और लोक कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों से तीन दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन ‘रंग-तरंग’ का दूसरा दिन जीवंत हो उठा। लोकवाद्य गुदुम बाजा और मोहरी की पारंपरिक धुनों ने आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ी संस्कृति की विशिष्ट छटा बिखेरी और उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।कार्यक्रम में पूर्व संस्कृति आयुक्त श्री अनिल कुमार साहू विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों और बच्चों से आत्मीय मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने लोक कला एवं संस्कृति को संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए कलाकारों और आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी साहित्य से जुड़े श्री विजय मिश्रा, समाजसेवी श्री उदयभान, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। ‘रंग-तरंग’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, साहित्य, संगीत और कला को एक साझा मंच प्रदान किया जा रहा है। आयोजन में पारंपरिक लोकवाद्यों की मधुर धुनों और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। लोक संस्कृति से जुड़े इस आयोजन को संस्कृति प्रेमियों और दर्शकों की सराहना मिल रही है।
- रायपुर / छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान लंबे समय से खनिज और प्राथमिक प्रसंस्करण पर आधारित रही है। अब राज्य इस पहचान को बदलते हुए कच्चे संसाधनों की बजाय वैल्यू एडेड और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंगका केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार की औद्योगिक रणनीति में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स, रक्षा उपकरण, एआई और ग्रीन स्टील जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता दी जा रही है।राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में इस बदलाव का आधार तैयार किया गया है। इस नीति में स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और उनके मूल्य संवर्धन के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, एआई, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, फार्मा, रक्षा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन दिया गया है। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ को केवल खनिजों का आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि तैयार उत्पादों और उन्नत तकनीक आधारित उद्योगों का केंद्र बनाना है।औद्योगिक नीति लागू होने के बाद से राज्य में निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है। राज्य के निवेश प्रोत्साहन पोर्टल के अनुसार पिछले करीब 18 महीनों में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावप्राप्त हुए हैं। इनसे 1.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। खास बात यह है कि इन प्रस्तावों का बड़ा हिस्सा पारंपरिक खनिज आधारित उद्योगों से आगे बढ़कर एआई, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे विशेष क्षेत्रों से जुड़ा है।नवा रायपुर में एआई और डेटा सेंटर से जुड़े निवेश तथा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव राज्य की बदलती औद्योगिक दिशा को दर्शाते हैं। इसी क्रम में राजनांदगांव मेंइलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0)को मंजूरी मिली है। इससे 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश और करीब 9,000 प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार आने की उम्मीद है।स्टील उत्पादन में मजबूत आधार रखने वाला छत्तीसगढ़ अब इस क्षेत्र में भी अगली पीढ़ी के उत्पादन पर जोर दे रहा है। देश में कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित विनिर्माण को बढ़ावा देने के बीचग्रीन स्टीलराज्य के लिए बड़ा अवसर बनकर उभरा है। पिछले महीने आयोजित छत्तीसगढ़ ग्रीन स्टील डायलॉग के दौरान करीब 13,840 करोड़ रुपये के निवेश प्रतिबद्धताओंने इस क्षेत्र की संभावनाओं को मजबूत किया है।राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष स्टील के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई जैसी योजनाएं चल रही हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ अपने खनिज संसाधन, मौजूदा स्टील उद्योग और ऊर्जा आधार का इस्तेमाल उच्च मूल्य वाले स्टील उत्पादों के निर्माण में कर सकता है।फार्मास्यूटिकल्स भी राज्य की नई औद्योगिक तस्वीर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। पिछले 18 महीनों में फार्मा क्षेत्र में करीब992.53 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावआए हैं, जबकि 216 करोड़ रुपये के चार प्रोजेक्ट कार्यान्वयन के चरण में हैं।इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से विस्तार हो रहा है। केंद्र की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत देशभर में 69 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। छत्तीसगढ़ में EMC 2.0 जैसी पहल इस राष्ट्रीय सप्लाई चेन का हिस्सा बनने का अवसर देती है।बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में भी औद्योगिक विकास की रणनीति केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है। वन उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों के जरिए क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ सकते हैं।निवेश को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने सिंगल विंडो व्यवस्था, SIPB और ऑनलाइन स्वीकृति तंत्र को मजबूत किया है। 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता आधारित सुविधाएं और त्वरित अनुमोदन की व्यवस्था भी की गई है।छत्तीसगढ़ के पास खनिज, ऊर्जा और औद्योगिक आधार की ताकत पहले से मौजूद है। अब लक्ष्य इन संसाधनों से आगे बढ़करउच्च मूल्य वाले उत्पादों का निर्माणकरना है। इलेक्ट्रॉनिक्स से ग्रीन स्टील और फार्मा से एआई तक नए क्षेत्रों में बढ़ता निवेश संकेत दे रहा है कि राज्य अपनी औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी में है।
- -खम्हरिया और उदयपुर में महतारी सदन निर्माण का भूमिपूजन, मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने दी सौगात-महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का बनेगा सशक्त मंच - श्री राजेश अग्रवालरायपुर । नारी सशक्तीकरण के संकल्प के साथ सुशासन की सरकार प्रदेश की माताओं-बहनों के सम्मान, स्वाभिमान, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सशक्त नेतृत्व में प्रदेशभर में महतारी सदनों का निर्माण कराया जा रहा है। इसी क्रम में आज अंबिकापुर के ग्राम खम्हरिया और ग्राम उदयपुर में महतारी सदन निर्माण कार्य का भूमिपूजन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने किया।इस अवसर पर मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि महतारी सदन हमारी माताओं-बहनों के लिए केवल एक भवन नहीं, बल्कि सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता का केंद्र होगा। यह महिलाओं को एक ऐसा सशक्त मंच उपलब्ध कराएगा, जहां वे बैठकें, प्रशिक्षण तथा विभिन्न सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां संचालित कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि महतारी सदन गांव की मातृशक्ति को संगठित करने और उनकी प्रतिभा एवं हुनर को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में अनेक पारंपरिक कौशल और प्रतिभाएं मौजूद हैं। उन्हें उचित मंच और अवसर मिलने पर वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि परिवार और समाज की आर्थिक मजबूती में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।उन्होंने कहा कि महतारी सदन में महिलाओं के लिए बैठक, प्रशिक्षण, कौशल विकास तथा विभिन्न सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों के संचालन की सुविधा मिलेगी। इससे महिलाओं के बीच आपसी सहभागिता और समन्वय बढ़ेगा तथा उन्हें सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक रूप से सशक्त होना परिवार और समाज की मजबूती का आधार है। जब महिलाएं अपने हुनर और क्षमता के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों से जुड़ती हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार के साथ-साथ गांव की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। महतारी सदन महिलाओं के सामाजिक सशक्तीकरण के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम भी बनेगा। इसके जरिए मातृशक्ति को अपनी क्षमताओं को पहचानने, उन्हें निखारने और नए अवसरों से जुड़ने का मंच मिलेगा।श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार नारी सम्मान, स्वाभिमान और सशक्तीकरण को विकास की प्राथमिकता से जोड़कर कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को भी विकास के समान अवसर मिलें और वे आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार, समाज और प्रदेश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महतारी सदनों का निर्माण इसी सोच का हिस्सा है। यह पहल महिलाओं को एकजुट करने, उनके कौशल को प्रोत्साहित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।अंबिकापुर क्षेत्र के ग्राम खम्हरिया और ग्राम उदयपुर में महतारी सदन के निर्माण का भूमिपूजन क्षेत्र की मातृशक्ति के लिए महत्वपूर्ण सौगात है। इन सदनों के निर्माण से स्थानीय महिलाओं को अपनी गतिविधियों के लिए सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा और वे सामूहिक रूप से सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ा सकेंगी। मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने इस अवसर पर दोनों ग्रामों के समस्त क्षेत्रवासियों एवं मातृशक्ति को महतारी सदन की महत्वपूर्ण सौगात के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खम्हरिया और उदयपुर के महतारी सदन आने वाले समय में महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान, सशक्तीकरण, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित होंगे।
- -छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के चेन्नई रोड शो में टूर ऑपरेटर्स से सीधा संवाद, छत्तीसगढ़ भ्रमण के लिए पर्यटकों को जोड़ने पर जोर-130 से अधिक टूर ऑपरेटरों ने दिखाई गहरी रुचि-तमिल भाषा में पहली बार हुआ पर्यटन स्थलों का प्रभावी प्रस्तुतीकरणरायपुर । छत्तीसगढ़ के पर्यटन को दक्षिण भारत के प्रमुख पर्यटन बाजार से जोड़ने और राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने चेन्नई में “छत्तीसगढ़ टूरिज्म रोड शो” का भव्य आयोजन किया। फिक्की के सहयोग से आयोजित इस रोड शो में चेन्नई के 130 से अधिक ट्रैवल एजेंट एवं टूर ऑपरेटरों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान आयोजित बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बैठकों में छत्तीसगढ़ और चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों के बीच सार्थक संवाद हुआ, जिससे भविष्य में पर्यटक समूहों को छत्तीसगढ़ भ्रमण पर भेजने तथा कारोबारी साझेदारी बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुईं।चेन्नई में आयोजित यह रोड शो छत्तीसगढ़ को दक्षिण भारत के प्रमुख पर्यटन बाजारों से जोड़ने की रणनीतिक पहल के रूप में सामने आया। रोड शो में छत्तीसगढ़ के पर्यटन उत्पादों, प्रमुख पर्यटन स्थलों और निवेश की संभावनाओं को चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। B2B बैठकों के माध्यम से दोनों राज्यों के स्टेकहोल्डर्स को सीधे संवाद और संभावित व्यावसायिक सहयोग का अवसर मिला। कार्यक्रम में हुई चर्चा में पर्यटन व्यवसायियों की ओर से उत्साहजनक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। उनके संबोधन ने चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों को छत्तीसगढ़ के पर्यटन से जोड़ने और राज्य की पर्यटन संभावनाओं के प्रति प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।इस अवसर पर पर्यटन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन (IAS) तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे (IAS) भी उपस्थित रहे। श्री चौबे ने छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों, पर्यटन उत्पादों तथा राज्य में उपलब्ध निवेश संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। रोड शो का सबसे खास आकर्षण रहा—छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों और संभावनाओं को पहली बार तमिल भाषा में स्थानीय स्टेकहोल्डर्स के समक्ष प्रस्तुत किया जाना। इस पहल ने चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों और स्थानीय पर्यटकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने अपने संबोधन में तमिल और अंग्रेजी भाषा में छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं विरासत संपदा की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने राज्य की पर्यटन संपदा को देश के प्रमुख पर्यटन बाजारों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।रोड शो में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की सहायक निदेशक सुश्री एस. पद्मावती, फिक्की छत्तीसगढ़ टूरिज्म कमेटी के चेयरपर्सन एवं फिक्की छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री जसप्रीत सिंह भाटिया, फिक्की तमिलनाडु स्टेट काउंसिल के को-कन्वीनर श्री श्रीहरन बालन तथा तमिलनाडु पर्यटन के निदेशक डॉ. वी.पी. जयसीलन (IAS) सहित पर्यटन क्षेत्र के अनेक प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे।रोड शो की एक विशेष उपलब्धि यह भी रही कि छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी श्री के.सी. देवासेनापति एवं श्री एलेक्स पॉल मेनन, जो वर्तमान में चेन्नई में पदस्थ हैं, विशेष रूप से कार्यक्रम में शामिल हुए। दोनों अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ से अपने आत्मीय जुड़ाव और राज्य की पर्यटन संभावनाओं पर सारगर्भित विचार साझा किए। उनकी सहभागिता ने कार्यक्रम को एक अलग भावनात्मक आयाम प्रदान किया।चेन्नई रोड शो में छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु के बीच पर्यटन क्षेत्र में व्यावसायिक साझेदारी के साथ-साथ आत्मीय जुड़ाव और सांस्कृतिक निकटता भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। एक ही मंच पर छत्तीसगढ़ से जुड़े वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, पर्यटन विभाग, छत्तीसगढ़ के पर्यटन कारोबारियों और चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष बनाया।B2B बैठकों ने दोनों राज्यों के पर्यटन स्टेकहोल्डर्स को संभावित व्यापारिक सहयोग, पर्यटक समूहों के आवागमन और पर्यटन उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए प्रत्यक्ष संवाद का मंच दिया। इससे छत्तीसगढ़ के पर्यटन को दक्षिण भारतीय बाजार में नई पहचान और नए कारोबारी अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ी है। इस प्रकार चेन्नई का “छत्तीसगढ़ टूरिज्म रोड शो” केवल पर्यटन प्रचार का आयोजन नहीं रहा, बल्कि दक्षिण भारत के पर्यटन बाजार के साथ छत्तीसगढ़ के मजबूत व्यावसायिक एवं सांस्कृतिक संबंधों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बनकर सामने आया।
- -मितानिन बहनें छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र की मजबूत और महत्वपूर्ण कड़ी: राजेश अग्रवालरायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मितानिन बहनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे स्वास्थ्य तंत्र और ग्रामीण समुदाय के बीच मजबूत कड़ी के रूप में कार्य करते हुए लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। मितानिन बहनें हमारे छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र की मजबूत और महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। यह बात पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कही।विधानसभा अंबिकापुर अंतर्गत विकासखंड उदयपुर के रामगढ़ में आज मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने मितानिन बहनों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने मितानिन बहनों से आत्मीय चर्चा कर उनके कार्यों, अनुभवों, समस्याओं और आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने में उनके योगदान को सराहा।मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने और लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मितानिन बहनें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे गांव-गांव में लोगों के साथ सीधे संपर्क में रहती हैं और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर समुदाय के बीच जागरूकता का कार्य करती हैं।उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत बनाने में जमीनी स्तर पर कार्य करने वाली मितानिन बहनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उनकी सक्रियता और सेवाभाव के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सेवाओं का लाभ अधिक लोगों तक पहुंच रहा है।रामगढ़ में आयोजित संवाद के दौरान मंत्री श्री अग्रवाल ने मितानिन बहनों से सीधे बातचीत की और उनके कार्यों से जुड़े अनुभवों को जाना। उन्होंने उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं को गंभीरता से सुना तथा उनके कार्यों और सेवाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की।मंत्री ने कहा कि जमीनी स्तर पर सेवा देने वाली मितानिन बहनों के अनुभव और सुझाव महत्वपूर्ण हैं। उनके साथ संवाद के माध्यम से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े वास्तविक अनुभवों और आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलता है।श्री राजेश अग्रवाल ने मितानिन बहनों की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि वे कठिन परिस्थितियों में भी ग्रामीण समुदाय के साथ निरंतर जुड़ी रहती हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनका सेवा भाव, समर्पण और जमीनी योगदान सराहनीय है । उन्होंने कहा कि मितानिन बहनों का कार्य केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वे ग्रामीण परिवारों के बीच विश्वास और जागरूकता का माध्यम भी बनती हैं। मंत्री ने उनके सेवा और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि स्वस्थ और जागरूक छत्तीसगढ़ के निर्माण में मितानिन बहनों की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रहेगी।
- -प्रदेशभर में मदिरा दुकानें, बार, होटल-बार और क्लब रहेंगे बंद-अवैध मदिरा के परिवहन और विक्रय पर कड़ी निगरानी, जांच दल करेंगे कार्रवाईरायपुर / राज्य शासन ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को संपूर्ण छत्तीसगढ़ में ‘शुष्क दिवस’ घोषित किया है। वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने कहा गया है।जारी आदेश के अनुसार शुष्क दिवस के दौरान प्रदेश की समस्त देशी एवं विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानें बंद रहेंगी। इसके साथ ही रेस्टोरेंट बार, होटल-बार, क्लब, अहाता तथा मदिरा बेचने अथवा परोसने वाले सभी प्रकार के लाइसेंसी प्रतिष्ठानों को भी बंद रखा जाएगा। भांग एवं भांगघोटा की फुटकर दुकानें भी इस दिन बंद रहेंगी।राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि शुष्क दिवस के दौरान किसी भी होटल, रेस्टोरेंट, क्लब अथवा अन्य प्रतिष्ठान या व्यक्ति को मदिरा बेचने और परोसने की अनुमति नहीं होगी। गैरमालिकाना क्लबों, रेस्टोरेंट और स्टार होटलों पर भी यह प्रतिबंध समान रूप से लागू रहेगा।शुष्क दिवस की अवधि में मदिरा के व्यक्तिगत भंडारण तथा गैर-लाइसेंसी परिसरों में मदिरा के भंडारण पर भी सख्ती से रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर मदिरा जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अवैध मदिरा के परिवहन, संग्रहण और विक्रय की रोकथाम के लिए जिला कार्यालयों के साथ संभागीय एवं राज्य स्तरीय उड़नदस्तों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जांच दल गठित कर अवैध मदिरा के संभावित संग्रहण स्थलों और संदिग्ध वाहनों की जांच की जाएगी तथा दोषियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
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- एम्स रायपुर का तीसरा दीक्षांत समारोह
-छत्तीसगढ़ अतीत के अंधकार से निकलकर विकास और प्रगति के नए युग की ओर अग्रसर - उपराष्ट्रपति-ज्ञान के साथ करूणा और नैतिक मूल्य को अपनाएं युवा चिकित्स- राज्यपाल श्री रमेन डेका-एम्स रायपुर के दीक्षांत समारोह में भी 376 महिलाओं और 313 पुरुषों को डिग्री मिलीरायपुर / उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में शामिल होकर कहा कि यह दीक्षांत समारोह केवल उत्सव का क्षण नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि “आज युवाओं को जो डिग्रियां मिल रही हैं और कल इससे कहीं अधिक मूल्यवान जिम्मेदारी सौंपी जाएगी- भारत की जनता का स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन।” एम्स रायपुर के दीक्षांत समारोह में 376 महिलाओं और 313 पुरुषों को डिग्री प्रदाय की गई। उपराष्ट्रपति ने मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र भी प्रदान किए।उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2012 में स्थापना के बाद से एम्स रायपुर ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि बेहद कम समय में यह संस्थान छत्तीसगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों के लिए एक प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है और ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों तक भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर का विकास छत्तीसगढ़ में हो रहे उल्लेखनीय परिवर्तन को दर्शाता है।छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में दशकों से चली आ रही चुनौतियों का जिक्र करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि कठिन भौगोलिक स्थिति, आवागमन की खराब सुविधा और वामपंथी उग्रवाद ने विकास में गंभीर बाधाएं खड़ी की। कई दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में भय और हिंसा ने सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों के विकास को बाधित कर दिया, जिससे समुदायों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में दूरी और अभाव का सामना करना पड़ता था। उपराष्ट्रपति ने अपने उदबोधन में आगे कहा कि छत्तीसगढ़ आज अपने अतीत के अंधकार से निकलकर समृद्धि, विकास और प्रगति के एक नए युग की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के रणनीतिक संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रतिबद्ध नेतृत्व को दिया। दशकों से चले आ रहे नक्सली खतरे का अंत हो गया है और जिन क्षेत्रों को कभी हिंसा के लिए जाना जाता था, उन्हें अब सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों, रोड़ कनेक्टिविटी, निवेश और अवसरों के लिए जाना जाने लगा है। उन्होंने कहा, यह परिवर्तन इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन में कितना बड़ा बदलाव लाया जा सकता हैं।उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को नए छत्तीसगढ़ के बेहतरीन प्रतीकों में से एक बताया, जो भय और अभाव के युग से शांति, प्रगति और संभावनाओं के युग की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने उन्नत स्वास्थ्य सेवा और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में संस्थान की उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ में किए गए पहले किडनी प्रत्यारोपण, किडनी प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर, कॉर्नियल प्रत्यारोपण और कान प्रत्यारोपण को महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में उल्लेख किया, जो यह दर्शाती हैं कि इस क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा कितनी तेजी से सुलभ हो रही है। उन्होंने कहा कि हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।विकसित भारत के राष्ट्रीय विजन को प्राप्त करने के लिए संतुलित विकास के महत्व पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह दृष्टिकोण तभी साकार हो सकता है, जब प्रत्येक राज्य, जिला और गांव का विकास हो। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा तक पहुंच विकसित भारत की परिकल्पना का मूल आधार है। उन्होंने पिछले बारह वर्षों के दौरान उच्च शिक्षा के विस्तार पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी में हुई उल्लेखनीय वृद्धि का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014-15 में महिला नामांकन जहां 1.57 करोड़ था, 2023-24 में यह बढ़कर अब 2.24 करोड़ हो गया, जो 42.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।स्नातकों को संबोधित करते हुए, उप राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने युवा स्नातकों से हमेशा दृढ़ता से नशीली दवाओं को न कहने और एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया, जहां प्रौद्योगिकी सभी नागरिकों तक पहुंचे और प्रत्येक युवा भारतीय एक बेहतर भविष्य की आकांक्षा कर सके। उन्होंने कहा आपका ज्ञान स्वास्थ्य प्रदान करे, आपका शोध नवाचार लाए और आपकी सेवा प्रेरणा दे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि एम्स रायपुर को नैदानिक उत्कृष्टता, वैज्ञानिक नवाचार, जन स्वास्थ्य और करुणापूर्ण सेवा में निरंतर सफलता की कामना की। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि छत्तीसगढ़ का रूपांतरण 2047 तक विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय बनेगा।राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल ज्ञान और कौशल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धैर्य, करुणा और गहरी जिम्मेदारी की भावना भी आवश्यक है। चिकित्सा का वास्तविक उद्देश्य मानवता की सेवा है और एक चिकित्सक की श्रेष्ठता केवल उसकी पेशेवर दक्षता से नहीं, बल्कि मरीजों के साथ किए जाने वाले व्यवहार, विश्वास और सम्मान से भी निर्धारित होती है। उन्होंने सभी उत्तीर्ण विद्यार्थियों को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल, सफल एवं संतोषप्रद भविष्य की शुभकामनाएं दीं।राज्यपाल ने कहा कि नव-स्नातक चिकित्सकों से स्वास्थ्य सेवाओं के विकास, नवाचार को प्रोत्साहित करने और चिकित्सा अनुसंधान में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों, विशिष्ट चिकित्सकीय सेवाओं और अनुसंधान पहलों के माध्यम से संस्थान क्षेत्र के स्वास्थ्य तंत्र को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एम्स रायपुर की बढ़ती प्रतिष्ठा छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है और यह संस्थान के प्राध्यापकों, चिकित्सा विशेषज्ञों तथा पूरी टीम की उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से चिकित्सा विशेषज्ञता के साथ वैज्ञानिक जिज्ञासा और अनुसंधान आधारित सोच को अपनाने तथा समाज की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप नवीन समाधान विकसित करने का आग्रह किया।केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने भी विद्यार्थियों को बधाई दी और आयुष्मान भारत, PM-JAY ABHA और e-Sanjeevani जैसी राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों का उल्लेख करते हुए युवा डॉक्टरों से चिकित्सा उत्कृष्टता के साथ करुणा, नैतिकता, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, शोध और समाज सेवा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने संस्थान की प्रगति और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए चिकित्सा शिक्षा, शोध, नवाचार और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं में उच्च मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने स्मृातक विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और पेशेवर कौशल का उपयोग समाज और राष्ट्र की सेवा में करने का आह्वान किया।विद्यार्थियों को 689 डिग्री प्रमाण-पत्रों का वितरण, उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले 16 विद्यार्थियों को किया पुरस्कृतदीक्षांत समारोह का प्रमुख आकर्षण विभिन्न चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले विद्यार्थियों को 689 डिग्री प्रमाण-पत्रों का वितरण रहा। उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 16 पुरस्कार भी प्रदान किए गए। यह अवसर विद्यार्थियों, उनके परिवारों, शिक्षकों और पूरे एम्स रायपुर परिवार के लिए गर्व और खुशी का क्षण रहा।समारोह में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल और रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित और एम्स रायपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा और एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल उपस्थित रहे। दीक्षांत समारोह में ‘नसे को ना कहें की शपथ भी दिलाई गई। - रायपुर /छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार, उद्योग एवं कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महानदी भवन, नवा रायपुर में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई।मुख्य सचिव ने राज्य के तकनीकी शिक्षण संस्थानों एवं उद्योग प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर तकनीकी वस्त्र सम्मेलन, कानक्लेव आयोजित करने के निर्देश दिए। सम्मेलन में तकनीकी वस्त्रों के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के अंतर्गत उपलब्ध योजनाओं तथा उद्योगों की आवश्यकताओं पर जानकारी एवं संवाद किया जाएगा। तकनीकी शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच सीधा समन्वय स्थापित कर उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। प्रारंभिक रूप से प्रत्येक तकनीकी संस्थान से 10-10 विद्यार्थियों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को तकनीकी वस्त्रों के वास्तविक औद्योगिक उपयोग का अनुभव मिलेगा तथा उद्योगों को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध होगा।वस्त्र प्रशिक्षण केंद्र हथकरघा एवं वस्त्र गतिविधियों वाले क्षेत्रों में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को चरणबद्ध रूप से वस्त्र प्रशिक्षण केंद्रों के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा। प्रथम चरण में कोरबा, रायगढ़, जांजगीर-चांपा एवं बिलासपुर जिलों के संस्थानों को स्थानीय वस्त्र उद्योगों से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा।राज्य के विश्वविद्यालयों एवं तकनीकी संस्थानों को तकनीकी वस्त्रों से संबंधित अनुप्रयोग आधारित अनुसंधान, उत्पाद विकास, परीक्षण, नवाचार एवं प्रायोगिक परियोजनाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कृषि, अधोसंरचना, जल प्रबंधन, स्वास्थ्य, सुरक्षा, पर्यावरण, पैकेजिंग एवं ग्रामीण आजीविका से जुड़ी राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मिशन की योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन, विभागों एवं संस्थानों के बीच समन्वय तथा परियोजनाओं की नियमित निगरानी के लिए परियोजना प्रबंधन इकाई स्थापित की जाएगी। यह इकाई तकनीकी संस्थानों एवं उद्योगों से परियोजना प्रस्ताव प्राप्त कर उन्हें मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार कराने, भारत सरकार को स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करने तथा स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करेगी। इकाई के गठन तक ग्रामोद्योग विभाग में राज्य स्तरीय समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।बैठक में उद्योग विभाग, तकनीकी शिक्षा संचालनालय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर तथा हथकरघा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
- बालोद ।अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक ने आज संयुक्त जिला कार्यालय स्थित अपने कक्ष में जिले के सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत के अधिकारी की उपस्थिति में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं और विकास कार्यों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में अपर कलेक्टर श्री कौशिक ने विभागवार कार्यों की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की। समीक्षा बैठक में उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, मुक्तिधाम योजना, एमआरएफ (ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कार्य), अमृत मिशन, जल आवर्धन योजना, एसटीपी, नाला परिसर, पेयजल, मुख्यमंत्री की घोषणा की अद्यतन स्थिति, आवारा मवेशियों का प्रबंधन एवं गोठान योजना, सीएम हेल्पलाइन, लोक सेवा गारंटी, कैच दी रैन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रगति), अधोसंरचना मद पोर्टल (टाइ्ड-अनटाइ्ड ग्रांट), राज्य प्रवर्तित योजना, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, बिजली बिल (ऊर्जा बिल ऑडिट), राजस्व वसूली, लंबित वेतन भुगतान तथा वृक्षारोपण एवं शहर सौंदर्यीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। अपर कलेक्टर श्री कौशिक ने जिले के सभी नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को निर्धारित समयावधि के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करना सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
- -लोक निर्माण विभाग के सचिव ने पुल-पुलियों और राष्ट्रीय राजमार्गों के कार्यों की समीक्षा की-नए कार्यों की निविदा प्रक्रिया नवम्बर तक पूरी कर जनवरी तक कार्यारंभ करने कहा-अधिकारियों को बिना अनुमति कार्यालय नहीं छोड़ने के दिए निर्देश, निर्माण स्थलों की समस्याओं को तत्परता से निराकृत करने कहारायपुर । लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने बरसात के समाप्त होते ही निर्माणाधीन पुल-पुलियों और राष्ट्रीय राजमार्गों के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी निर्माणाधीन कार्यों का एक सप्ताह के भीतर ठेकेदारों के साथ स्थल निरीक्षण कर काम आगे बढ़ाने की अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करते हुए बरसात के तुरंत बाद निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू करने को कहा है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में सभी निर्माण स्थलों पर काम होते हुए दिखना चाहिए। श्री बंसल ने आज नवा रायपुर स्थित पीडब्ल्यूडी मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में पुल-पुलियों और राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए वर्ष 2025-26 और 2026-27 के प्राथमिकता वाले कार्यों के प्राक्कलन 20 सितम्बर तक जमा करने के निर्देश दिए। उन्होंने बारिश से क्षतिग्रस्त पुलों की मरम्मत के साथ रेलिंग और दीवारों की पेंटिंग का काम 30 नवम्बर तक पूरा करने को कहा।लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में सेतु परिक्षेत्र के सभी संभागों के कार्यपालन अभियंताओं को अपने-अपने संभागों में भ्रमण कर पुल-पुलियों की वास्तविक जरूरत का आकलन कर लोगों की जरूरतों के अनुरूप नए पुल-पुलियों के निर्माण के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुराने और क्षतिग्रस्त पुलों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखने और जहां आवश्यकता हो, वहां नए पुलों के निर्माण के प्रस्ताव भेजने को कहा।श्री बंसल ने कार्यपालन अभियंताओं और अधीक्षण अभियंताओं को सप्ताह में दो दिन अनिवार्य रूप से निर्माण स्थलों पर जाकर कार्यों के निरीक्षण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण की गुणवत्ता और समय-सीमा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने काम में लापरवाही बरतने या कार्य की गति धीमी रखने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई करने को कहा।उन्होंने कार्यपालन अभियंताओं और अनुविभागीय अधिकारियों को बिना अनुमति कार्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र में मौजूद रहते हुए निर्माण स्थलों की समस्याओं को तत्परता से निराकृत करने को कहा।श्री बंसल ने नए कार्यों की निविदा प्रक्रिया नवम्बर तक पूरी करने और जनवरी तक सभी कार्य हर हाल में शुरू करने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों को समय पर ले-आउट, ड्राइंग-डिजाइन और कार्यस्थल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यस्थलों पर आने वाली समस्याओं का तत्परता से समाधान करने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे कार्यों की गंभीरता से मॉनिटरिंग और निरीक्षण करने के निर्देश दिए।लोक निर्माण विभाग के सचिव ने ठेकेदारों को हर महीने भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि कार्यों की भौतिक और वित्तीय प्रगति प्रभावित न हो। उन्होंने कार्य पूर्ण होने के बाद तीन माह के भीतर सभी दस्तावेजी प्रक्रिया और भुगतान पूरा कर अनुबंध क्लोज करने को कहा।श्री बंसल ने भारत सरकार के गतिशक्ति पोर्टल पर प्रदेश के सभी पुल-पुलियों की जानकारी 10 सितम्बर तक अपलोड करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्धारित समय-सीमा में जानकारी अपलोड नहीं करने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा। उन्होंने सीपीग्राम्स (CPGRAMS) और सीएम-हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों और मांगों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण करने के निर्देश दिए। साथ ही न्यायालयीन मामलों, अनुकंपा नियुक्ति और पेंशन से जुड़े प्रकरणों के निपटारे की हर महीने समीक्षा करने को कहा।लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री बंसल ने राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों की बैठक लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त कार्यों की निविदा, अनुबंध और कार्यादेश की भी जानकारी ली। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के अधिकारियों को एनएचएआई और केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।विभागीय सचिव ने रायपुर में निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग के एमएमआई चौक से शदाणी दरबार खंड , बेमेतरा बायपास, कोंडागांव से नारायणपुर राष्ट्रीय राजमार्ग खंड और रतनपुर से पेंड्रा रोड राष्ट्रीय राजमार्ग के कार्यों को अगले साल मार्च तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी, अपर सचिव श्री एस.एन. श्रीवास्तव, सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री एस.के. कोरी और राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री ज्ञानेश्वर कश्यप सहित दोनों परिक्षेत्रों के सभी अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी और एनएचएआई के अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।
- -चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की दी गई जानकारी, विद्यार्थियों ने स्वयं कॉल कर समझी सहायता की प्रक्रियारायपुर । छत्तीसगढ़ में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन और बच्चों के अधिकारों एवं संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिवनी एवं हाई स्कूल कुलीपोटा में बाल विवाह रोकथाम एवं बाल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों तथा इसके सामाजिक प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री गजेन्द्र जायसवाल ने बताया कि बाल विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत बालिका की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष तथा बालक की न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष निर्धारित है। निर्धारित आयु से पहले विवाह कराना अथवा उसमें सहयोग करना कानूनन दंडनीय अपराध है।चाइल्ड हेल्पलाइन टीम ने विद्यार्थियों को बताया कि यदि कहीं बाल विवाह की सूचना मिले अथवा किसी नाबालिग बच्चे या बच्ची का विवाह कराया जा रहा हो, तो इसकी सूचना तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस अथवा महिला एवं बाल विकास विभाग को दी जानी चाहिए। विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि समय पर सूचना देकर बाल विवाह को रोका जा सकता है और बच्चों के सुरक्षित भविष्य की रक्षा की जा सकती है।कार्यक्रम के दौरान चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। विद्यार्थियों ने स्वयं 1098 पर कॉल कर कॉल टेस्टिंग के माध्यम से हेल्पलाइन की प्रक्रिया को समझा और आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता प्राप्त करने के तरीकों की जानकारी ली।विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई। विद्यार्थियों ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के विरुद्ध जागरूकता फैलाने तथा बाल अधिकारों और संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।
- -औपचारिक नामों के स्थान पर अपनत्व और सकारात्मकता से जुड़े नाम रखने की अनुशंसा, 21 सितंबर तक मांगी गई जिलों से रिपोर्टरायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने प्रदेश में संचालित बाल एवं बालिका संरक्षण गृह तथा बाल संप्रेक्षण गृहों की पहचान को अधिक सकारात्मक और बालहितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने इन संस्थाओं के वर्तमान औपचारिक एवं संस्थागत नामों के स्थान पर ऐसे नाम रखने की अनुशंसा की है, जो बच्चों में अपनत्व, आत्मसम्मान, सुरक्षा और सकारात्मक सोच की भावना विकसित करें।डॉ. वर्णिका शर्मा ने इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि बाल संरक्षण संस्थाओं के नाम केवल प्रशासनिक पहचान तक सीमित न हों, बल्कि उनमें बच्चों के प्रति संवेदनशीलता और गरिमा का भाव भी झलके।आयोग ने जम्मू में बाल संरक्षण संस्थाओं के लिए प्रचलित ‘पलाश’ और ‘परिषा’ जैसे सकारात्मक एवं गरिमापूर्ण नामों का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ में भी इसी प्रकार के नाम अपनाने की अनुशंसा की है। आयोग का मानना है कि किसी संस्था का नाम वहां रहने वाले बच्चों के मनोभाव और सामाजिक पहचान पर प्रभाव डालता है। इसलिए नाम ऐसा होना चाहिए, जो बच्चों में हीनभावना के बजाय आत्मविश्वास और सम्मान की भावना को मजबूत करे।अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने जिलों में नामकरण के दौरान स्थानीय भाषा, संस्कृति, प्रकृति, लोक परंपरा और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े सकारात्मक एवं प्रेरणादायक नामों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया है। इससे संस्थाओं की पहचान स्थानीय परिवेश से जुड़ने के साथ बच्चों के लिए अधिक आत्मीय बन सकेगी।आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि नए नाम तय करते समय संबंधित संस्थाओं में रहने वाले बच्चों, देखरेखकर्ताओं और अन्य हितधारकों से सुझाव लिए जाएं। इससे बच्चों को अपनी संस्था की नई पहचान तय करने की प्रक्रिया से जोड़ने और उसमें अपनत्व की भावना विकसित करने में मदद मिलेगी। आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर जिलों से बाल संरक्षण संस्थाओं के प्रस्तावित नामों की सूची प्राप्त करने तथा इस संबंध में की गई कार्रवाई से आयोग को 21 सितंबर तक लिखित रूप से अवगत कराने का आग्रह किया है।
- रायपुर ।शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचाने में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 विशेष भूमिका निभा रहे है। इसी क्रम में महासमुन्द जिले के सरायपाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम केन्दुढार निवासी 62 वर्षीय श्री उग्रसेन नंदे जिनकी समस्या के निराकरण के बाद अब उन्हें मुख्यमंत्री पेंशन योजना का लाभ मिलने का रास्ता प्रशस्त हो गया है।श्री उग्रसेन नंदे पिछले दो वर्षों से वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त करने के लिए ग्राम पंचायत एवं जनपद पंचायत में आवेदन कर रहे थे। पेंशन राशि प्राप्त नहीं होने के कारण उन्हें अपने दैनिक जीवन-यापन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। लंबे समय तक समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में अपनी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत समाज कल्याण विभाग महासमुन्द के संज्ञान में आने पर उप संचालक श्रीमती संगीता सिंह ने प्रकरण के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। निर्देशानुसार मामले की जांच एवं परीक्षण किया गया, जिसमें श्री उग्रसेन नंदे मुख्यमंत्री पेंशन योजना के लिए पात्र पाए गए। इसके पश्चात उनके पेंशन प्रकरण का संबंधित समिति की बैठक में अनुमोदन कराया गया तथा पेंशन राशि का प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से हितग्राही के बैंक खाते में भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक ऑनलाइन प्रविष्टि की गई। अब आगामी समय में श्री उग्रसेन नंदे को मुख्यमंत्री पेंशन योजना का नियमित लाभ प्राप्त हो सकेगा। श्री उग्रसेन नंदे ने इसके लिए राज्य शासन एवं प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित किया है।
- महासमुन्द / सत्र 2026-27 में तकनीकी शिक्षा संस्थाओं में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए तकनीकी शिक्षा संचालनालय द्वारा ऑनलाइन काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके तहत डिप्लोमा इंजीनियरिंग के नियमित एवं लेटरल एंट्री पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीयन 3 सितंबर 2026 से प्रारंभ होगा।शासकीय पॉलीटेक्निक महासमुन्द, बरोंडा बाजार में संचालित डिप्लोमा इंजीनियरिंग के सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग एवं कंप्यूटर साइंस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थी 3 से 6 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन पंजीयन करा सकते हैं। प्रवेश के लिए मेरिट सूची 7 सितंबर 2026 को जारी की जाएगी। मेरिट सूची में शामिल अभ्यर्थियों को 8 सितंबर 2026 को प्रातः 10 बजे आवश्यक दस्तावेजों के साथ संस्था में उपस्थित होना अनिवार्य होगा। सीटें रिक्त रहने की स्थिति में मेरिट सूची के अनुसार इच्छुक अभ्यर्थी 9 सितंबर 2026 को दोपहर 1.30 बजे संस्था में उपस्थित होकर प्रवेश प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।प्रवेश संबंधी विस्तृत जानकारी, पात्रता, ऑनलाइन आवेदन एवं काउंसलिंग प्रक्रिया तथा रिक्त सीटों की जानकारी के लिए अभ्यर्थी तकनीकी शिक्षा संचालनालय की वेबसाइट www.cgdte.admissions.nic.in एवं www.dte.cg.gov.in का अवलोकन कर सकते हैं।
- महासमुंद / जिले के विकासखंड बागबाहरा के ग्राम खेमड़ा में भारी वर्षा के कारण लगभग 20 वर्ष पुरानी सड़क की पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी। पुलिया के टूटने से ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई गई।मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के निर्देश पर पीएमजीएसवाई विभाग द्वारा तत्काल स्थल का निरीक्षण कराया गया तथा अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त पुलिया का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की।कलेक्टर के निर्देशानुसार कार्यपालन अभियंता पीएमजीएसवाई श्री आशीष कुलदीप एवं संबंधित तकनीकी अमले की निगरानी में पुलिया के संधारण एवं मरम्मत का कार्य कराया गया। आवश्यक रखरखाव कार्य पूर्ण होने के बाद सड़क पर आवागमन पुनः सुचारु हो गया है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज शिकायत पर त्वरित कार्रवाई किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की है।
- -पश्चिम बंगाल के कौस्तुव कुंडू बने विजेता, छत्तीसगढ़ के यशद बम्बेश्वर द्वितीय और महाराष्ट्र के केदार ओंकार तृतीय स्थान पर-12 राज्यों के 164 खिलाडि़यों ने लिया हिस्सा, विभिन्न आयु एवं श्रेणियों में खिलाडि़यों ने दिखाया दमखम-शतरंज संयम, एकाग्रता और अनुशासन की सीख देता है: विधायक श्रीमती रायमुनी भगतरायपुर। जशपुर में पहली बार आयोजित ‘चेकमेट एट जशपुरदृअखिल भारतीय ओपन फिडे रेटेड शतरंज प्रतियोगिता 2026’ का सफलतापूर्वक समापन हुआ। प्रतियोगिता में पश्चिम बंगाल के कौस्तुव कुंडू ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ओवरऑल विजेता का खिताब अपने नाम किया। छत्तीसगढ़ के यशद बम्बेश्वर ने दूसरा तथा महाराष्ट्र के केदार ओंकार ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।पुरानी टोली स्थित कम्युनिटी हॉल में 29 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित इस चार दिवसीय प्रतियोगिता में देश के 12 राज्यों से 164 खिलाडि़यों ने हिस्सा लिया। खिलाडि़यों ने अपनी रणनीतिक क्षमता, एकाग्रता और उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता को रोमांचक बनाया।समापन समारोह में मुख्य अतिथि विधायक श्रीमती रायमुनी भगत सहित अन्य अतिथियों ने विभिन्न आयु वर्ग एवं श्रेणियों के विजेता और उपविजेता खिलाडि़यों को ट्रॉफी एवं पुरस्कार राशि के चेक प्रदान कर सम्मानित किया। प्रतियोगिता का आयोजन जिला प्रशासन, खेल विभाग एवं जशपुर जिला शतरंज संघ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।विधायक श्रीमती रायमुनी भगत ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन, खेल विभाग एवं शतरंज संघ को बधाई दी। उन्होंने सभी खिलाडि़यों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि शतरंज केवल मनोरंजन का खेल नहीं है, बल्कि यह संयम, एकाग्रता, अनुशासन और बुद्धिकौशल विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों का सामना बुद्धिकौशल, अनुशासन और संयम के साथ करते हुए समय की कद्र करने वाला व्यक्ति सफलता की ओर आगे बढ़ता है। शतरंज का खेल भी हमें यही महत्वपूर्ण सीख देता है।प्रतियोगिता के विभिन्न वर्गों में खिलाडि़यों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सीनियर सिटीजन वर्ग में जवाहरलाल गुप्ता विजेता और सेनगुप्ता दीपांकर उपविजेता रहे।सरगुजा डिवीजन महिला वर्ग में सिन्हा कशिश ने प्रथम और श्वेता रानी ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। सरगुजा डिवीजन पुरुष वर्ग में रुद्राक्ष सिंह विजेता और यशवंत सिंह उपविजेता रहे।जशपुर महिला वर्ग में हेमलता प्रजापति ने प्रथम तथा प्रेमलता साहू ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। जशपुर पुरुष वर्ग में एलान लकड़ा प्रथम और श्याम सिंह द्वितीय रहे।30 वर्ष से अधिक महिला वर्ग में आरती पावले प्रथम तथा लक्ष्मी शुक्ला द्वितीय रहीं। अंडर-15 वर्ग में ईशान सैनी प्रथम और गर्व केरकेट्टा द्वितीय रहे। अंडर-13 वर्ग में शिल्प कुमार घोड़ेश्वर ने प्रथम तथा विराट यादव ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।अंडर-11 वर्ग में वी. विराट अय्यर प्रथम और कुशाग्र दीक्षित द्वितीय रहे। अंडर-09 वर्ग में आद्विक भूषण प्रथम तथा हृदान मावलंकर द्वितीय रहे।महिला खिलाडि़यों की विभिन्न श्रेणियों में एफ-15$ वर्ग में प्राची यादव प्रथम और भगत कोमल द्वितीय रहीं। एफ-15 वर्ग में अभिश्री वत्स ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। एफ-13 वर्ग में नैना भगत प्रथम रहीं। एफ-11 वर्ग में सावी गौरी प्रथम तथा अनिका रेड्डी गोलुगुरी द्वितीय रहीं। एफ-09 वर्ग में परीक्षिता दुबे प्रथम तथा श्रीनिका रेड्डी गोलुगुरी द्वितीय रहीं।अखिल भारतीय स्तर की इस प्रतियोगिता के सफल आयोजन से जशपुर में शतरंज खेल को नई पहचान मिली है। प्रतियोगिता ने स्थानीय खिलाडि़यों को देशभर से आए प्रतिभाशाली खिलाडि़यों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का अवसर देने के साथ जिले में खेल संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री गंगाराम भगत, कलेक्टर श्री रोहित व्यास सहित खिलाड़ी, शतरंज प्रेमी एवं बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
- -योजना की सहायता राशि से पोषण संबंधी जरूरतें हुईं पूरी, मां और शिशु दोनों स्वस्थरायपुर / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को मातृत्व के दौरान आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य और पोषण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता राशि से महिलाओं को गर्भावस्था एवं प्रसव के बाद पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत मिल रही है। अम्बिकापुर निवासी श्रीमती अन्नू तिवारी भी योजना से लाभान्वित होकर अपने मातृत्व काल को सुरक्षित और बेहतर तरीके से पूरा कर रही हैं।अन्नू तिवारी ने बताया कि पहली बार गर्भवती होने पर उन्हें आंगनवाड़ी केंद्र के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी मिली। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के मार्गदर्शन में उन्होंने आवश्यक प्रपत्र भरकर योजना का लाभ लिया। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें चरणबद्ध रूप से आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि योजना के तहत सबसे पहले उन्हें एक हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई। इसके बाद दो हजार रुपये की सहायता मिली। प्रसव के बाद शिशु को निर्धारित तीन टीके लगने के पश्चात उन्हें पुनः दो हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई। इस प्रकार योजना के अंतर्गत प्राप्त आर्थिक सहायता का उपयोग उन्होंने गर्भावस्था और प्रसव के बाद अपने खान-पान तथा पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में किया।अन्नू तिवारी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है। योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने खान-पान और स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान रखने में मदद की। प्रसव के बाद भी इस राशि से शिशु के पोषण और देखभाल से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत मिली। उन्होंने कहा कि योजना से प्राप्त सहायता उनके परिवार के लिए उपयोगी साबित हुई। आर्थिक सहयोग मिलने से मातृत्व के दौरान जरूरी पोषण और देखभाल पर ध्यान केंद्रित करना आसान हुआ। वर्तमान में वे और उनका शिशु दोनों स्वस्थ हैं।अन्नू तिवारी ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए उपयोगी पहल है। मातृत्व के महत्वपूर्ण दौर में मिलने वाली आर्थिक सहायता से परिवार को अतिरिक्त संबल मिलता है और महिलाओं को अपने स्वास्थ्य तथा बच्चे के पोषण पर बेहतर ध्यान देने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता राशि ने उनके मातृत्व अनुभव को और सुरक्षित बनाने में सहयोग दिया। अन्नू तिवारी ने अन्य पात्र महिलाओं से भी योजना का लाभ लेने और गर्भावस्था के दौरान अपने स्वास्थ्य एवं पोषण का विशेष ध्यान रखने की अपील की।
- -उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने ली समीक्षा बैठकरायपुर / राज्य में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गति लाने के उद्देश्य से आज उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने विभागीय अधिकारियों की मंत्रालय में समीक्षा बैठक ली। बैठक में 1 जुलाई 2026 को लिए गए निर्णयों पर अब तक हुई कार्यवाही का बिंदुवार क्रियान्वयन की समीक्षा की गया। मंत्री श्री वर्मा ने समयबद्ध कार्यों में देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रशासनिक ढिलाई को तुरंत दूर करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के सख्त निर्देश दिए। इस बैठक में सचिव श्री अविनाश चंपावत, आयुक्त श्रीमती रीता यादव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।बैठक के दौरान राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में सत्र 2026-27 के तहत जारी प्रवेश प्रक्रिया का जायजा लिया गया। मंत्री श्री वर्मा ने सहायक प्राध्यापक के 700 पदों पर जारी भर्ती प्रक्रिया की रुकावटों को तत्काल दूर करने तथा प्राध्यापकों के 595 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। स्नातक प्राचार्य के पदों पर पदोन्नति की पेंडेंसी पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने 15 सितंबर 2026 तक समस्त कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अपात्र होने के बावजूद पदोन्नति पाने वाले प्राध्यापकों की जांच कर उन पर की गई कार्यवाही की भी समीक्षा की गई।वरिष्ठ और प्रवर श्रेणी वेतनमान के प्रकरणों में हो रही देरी के कारण सहायक प्राध्यापकों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, जिस पर मंत्री ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने विभाग में लंबित न्यायालयीन प्रकरणों और याचिकाओं का ब्योरा मांगते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 1 अक्टूबर 2026 तक सभी विचाराधीन प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर आदेश जारी किए जाएं। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों की पीएच.डी. अनुमोदन की प्रगति और मंत्री कार्यालय द्वारा भेजी गई शिकायतों पर की गई कार्यवाही का विस्तृत विवरण तलब किया गया।मंत्री श्री वर्मा ने समीक्षा के दौरान पिछली बैठक में मांगी गई बजट संबंधी अधूरी जानकारी पर असंतोष जताया गया। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रत्येक शासकीय महाविद्यालय को आवंटित बजट की महाविद्यालयवार पूर्ण सूची तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से महाविद्यालयों में पदस्थ अतिथि व्याख्याताओं के शिक्षकीय कार्यों का नियमित आकस्मिक निरीक्षण करने का निर्णय लिया गया। छात्र-छात्राओं के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा मंत्री ने महाविद्यालयों में सीट वृद्धि की प्रक्रिया को सुचारू बनाने हेतु नया कैलेंडर लागू करने का सुझाव दिया। इसके तहत शासकीय व निजी महाविद्यालयों से सीट वृद्धि के प्रस्ताव दिसंबर तक मंगाकर जनवरी तक स्वीकृतियां जारी की जाएंगी, ताकि आदेशों में होने वाली त्रुटियों से महाविद्यालयों को मुक्ति मिल सके। लॉ और बी. एड. जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए 31 दिसंबर तक प्राप्त होने वाले ऑनलाइन आवेदनों का निराकरण समय सीमा के भीतर करने के निर्देश दिए गए।इसके साथ ही, 4-वर्षीय बी.एड. पाठ्यक्रम हेतु एन.सी.टी.ई. (NCTE) दिल्ली की नैक ग्रेडिंग शर्तों पर चर्चा के लिए एक विशेष टीम गठित कर दिल्ली भेजने और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमानुसार प्रति सेक्शन 60 विद्यार्थियों के अनुपात को समायोजित करने के लिए अभी से तैयारियां शुरू करने के निर्देश जारी किए गए।
- -एक लाख रुपये के बॉन्ड से बेटी की शिक्षा और भविष्य को मिला आर्थिक संबलरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बेटियों के सुरक्षित भविष्य और उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित नोनी सुरक्षा योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। योजना के तहत पात्र बालिकाओं के भविष्य के लिए आर्थिक प्रावधान किया जा रहा है, जिससे परिवारों को बेटियों की शिक्षा और आगे की जरूरतों को लेकर भरोसा मिल रहा है। अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंड्राकला निवासी श्रीमती कौशिल्या रजवाड़े भी इस योजना से लाभान्वित होकर अपनी बेटी के भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं।कौशिल्या रजवाड़े ने बताया कि उनके पति श्री राजेश कुमार रजवाड़े कृषि कार्य करते हैं और उनके तीन बच्चे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी बड़ी बेटी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नोनी सुरक्षा योजना का लाभ लेने का निर्णय लिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के सहयोग से आवेदन प्रक्रिया पूरी की गई और आवेदन ऑनलाइन पंजीकृत किया गया।आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उनकी बड़ी बेटी का नोनी सुरक्षा योजना में पंजीयन हुआ और उन्हें एक लाख रुपये का बॉन्ड प्राप्त हुआ। कौशिल्या ने बताया कि यह बॉन्ड एलआईसी बीमा के माध्यम से प्रदान किया गया है। योजना की निर्धारित शर्तों के अनुसार बालिका के 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने तथा 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद निर्धारित राशि प्राप्त होगी। इससे बेटी की आगे की शिक्षा और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए आर्थिक आधार तैयार होगा।कौशिल्या के लिए नोनी सुरक्षा योजना केवल आर्थिक सुरक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि बेटी के उज्ज्वल भविष्य का भरोसा भी है। उन्होंने बताया कि कृषि कार्य से होने वाली आय के बीच बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरतों को पूरा करना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में बेटी के नाम पर उपलब्ध आर्थिक सुरक्षा से भविष्य की चिंता कम हुई है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत मिलने वाली राशि भविष्य में बेटी की उच्च शिक्षा तथा अन्य महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित होगी। 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने और 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मिलने वाली राशि बेटी के आगे के जीवन की मजबूत शुरुआत में सहायक होगी और परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को भी कम करेगी।नोनी सुरक्षा योजना बेटियों के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने के साथ परिवारों में बेटियों की शिक्षा को लेकर सकारात्मक सोच को बढ़ावा दे रही है। योजना के माध्यम से बालिकाओं के भविष्य के लिए पहले से आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होने से अभिभावकों को उनकी शिक्षा और भविष्य से जुड़े निर्णय लेने में संबल मिल रहा है।कौशिल्या ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी होने से उन्हें योजना की जानकारी समझने, आवश्यक दस्तावेज तैयार करने और ऑनलाइन पंजीयन कराने में सुविधा मिली। विभागीय स्तर पर मिले सहयोग से योजना का लाभ प्राप्त करना उनके लिए आसान हुआ।कौशिल्या रजवाड़े ने नोनी सुरक्षा योजना के लिए छत्तीसगढ़ शासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योजना से उन्हें अपनी बेटी के भविष्य को लेकर एक मजबूत भरोसा मिला है। उन्होंने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित होने के बावजूद बेटी के भविष्य के लिए पहले से आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध होना बड़ी राहत है। उन्होंने कहा, “अब बेटी के भविष्य की चिंता पहले जैसी नहीं रही। उसके नाम पर आर्थिक सुरक्षा होने से हमें भरोसा है कि आगे उसकी पढ़ाई और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। शासन की यह पहल हम जैसे परिवारों के लिए बहुत उपयोगी है।” कौशिल्या रजवाड़े ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नोनी सुरक्षा योजना बेटियों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल है। योजना से मिली आर्थिक सुरक्षा ने उनके परिवार को अपनी बेटी को बेहतर अवसर देने का विश्वास दिया है।
- -प्रति एकड़ कमाया 1.07 लाख रुपये का शुद्ध लाभरायुपर / पारंपरिक खेती से इतर आधुनिक तकनीकों और उद्यानिकी फसलों को अपनाने से किसानों की तकदीर बदल रही है। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के विकासखंड बागबाहरा अंतर्गत ग्राम टेंगराही के कृषक श्री नारायण प्रसाद वर्मा ने इसे सच कर दिखाया है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के सहयोग से करेले की व्यावसायिक खेती अपनाकर वे न केवल अपनी आय दोगुनी कर चुके हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।युवा किसान की करेले की खेती से किस्मत चमक गई हैए जिसके तहत उन्हें लागत के हिसाब से अच्छा मुनाफा मिल रहा हैं, जिसके लिए वह कई सालों से करेले की खेती कर लाखों रुपए मुनाफा कमा रहे हैं1.06 हेक्टेयर कृषि भूमि के मालिक श्री वर्मा पहले केवल धान की पारंपरिक खेती करते थे, जिससे सीमित आय प्राप्त होती थी। आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना का लाभ लिया। योजना के तहत शासन से उन्हें सब्जी क्षेत्र विस्तार हेतु 1 हेक्टेयर क्षेत्र में करेले की खेती के लिए 24,000 का अनुदान मिला। सपोर्ट सिस्टम स्थापना हेतु 0.50 हेक्टेयर क्षेत्र में सपोर्ट सिस्टम लगाने के लिए 5,000 की राशि सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से उनके खाते में हस्तांतरित की गई।श्री वर्मा ने खेती में नवाचार करते हुए ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई), प्लास्टिक मल्चिंग और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग किया। इससे पानी की भारी बचत हुई और फसल की गुणवत्ता व उत्पादन में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि करेले की उन्नत और आधुनिक तकनीकों और मचान विधि से खेती करके किसान कम समय में लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। श्री वर्मा ने बताया कि खेत में नमी बनाए रखने और खरपतवार रोकने के लिए मल्चिंग शीट और पानी की बचत के लिए ड्रिप इरिगेशन, टपका सिंचाई का उपयोग किया जाता है।करेले की खेती कर रहे युवा किसान नारायण प्रसाद वर्मा ने बताया कि पहले हम पारंपरिक खेती करते थे, पर इसमें उन्हें अधिक मुनाफा नहीं हो पा रहा था। इसके बाद उन्होंने करेले की खेती की शुरुआत की, जिसमें उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ। उन्होंने तकनीकी प्रबंधन और उचित देखरेख के कारण उन्हें प्रति एकड़ करेले की फसल से लगभग 12 टन उत्पादन हासिल हुआ। बाजार में फसल का सही मूल्य मिलने पर सभी लागत और खर्चों को निकालकर उन्हें एक लाख 7 हजार रूपए का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। इस सफलता से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि कृषि के प्रति उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।




























