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- - राज्य भर में 355 जन औषधि केंद्र स्वास्थ्य देखभाल के वित्तीय बोझ को कम करने में निभा रहे हैं महत्वपूर्ण भूमिकारायपुर। जिले के कोटा में आज 8वें जन औषधि दिवस 2026 का राज्य स्तरीय कार्यक्रम बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) के परिवर्तनकारी प्रभाव को रेखांकित करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है, जो आम जनता को उच्च गुणवत्ता वाली और सस्ती जेनेरिक दवाएं प्रदान कर सभी के लिए सुलभ स्वास्थ्य देखभाल के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। कार्यक्रम में राज्य भर से विभिन्न जन औषधि केंद्र प्रभारी शामिल हुए।योजना की सफलता पर व्यापक परिप्रेक्ष्य रखते हुए, यह उल्लेख किया गया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश भर में कुल 17,990 जन औषधि केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इस नेटवर्क का और विस्तार करने के सरकारी रणनीतिक लक्ष्य के तहत, मार्च 2027 तक 25,000 केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में, छत्तीसगढ़ राज्य में 355 ऐसे केंद्र हैं, जो हजारों परिवारों के स्वास्थ्य देखभाल के वित्तीय बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, रायपुर के सीएमएचओ डॉ. मिथिलेश चौधरी ने जेनेरिक दवाओं के संबंध में आम जनता की भ्रांतियों को संबोधित किया। उन्होंने "सस्ती दवाओं का मतलब कम गुणवत्ता" होने की धारणा को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जन औषधि केंद्रों (JAKs) में दवाओं की कम लागत का कारण केवल बड़ी फार्मा कंपनियों द्वारा किए जाने वाले भारी-भरकम ब्रांडिंग और मार्केटिंग खर्चों का खत्म होना है। परिणामस्वरूप, लागत बचत का लाभ सीधे उपभोक्ताओं को मिलता है, जिन्हें बड़ी फार्मा कंपनियों द्वारा दी जाने वाली समान दवाओं की तुलना में वही दवाएं बहुत कम कीमत पर प्राप्त होती हैं।डॉ. चौधरी ने इस बात पर जोर दिया कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रत्येक नागरिक इन सस्ती स्वास्थ्य समाधानों का लाभ उठा सके, आक्रामक जन जागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है। जिले में प्रगति को प्रदर्शित करते हुए, उन्होंने क्षेत्र के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य की घोषणा की, जिसमें कहा गया कि रायपुर में संचालित जन औषधि केंद्रों की संख्या इस वर्ष के भीतर 50 के पार पहुंच जाएगी।समारोह का समापन एक सम्मान समारोह के साथ हुआ, जहां विभिन्न जन औषधि केंद्रों के समर्पित प्रभारियों को उनकी सेवा के लिए सम्मानित किया गया। इन केंद्रों के संचालन में उनके प्रयास यह सुनिश्चित करने में सहायक रहे हैं कि जीवन रक्षक दवाएं समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक सुलभ रहें।
- बिलासपुर। एनटीपीसी लिमिटेड की सीपत परियोजना में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर परियोजना में कार्यरत महिला कर्मचारियों तथा सहयोगी एजेंसियों के साथ कार्यरत महिला कर्मियों के कार्यों और संगठन की निरंतर प्रगति में उनके योगदान की सराहना की गई। कार्यक्रम में संविदा महिला श्रमिकों के प्रयासों को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर इस विशेष दिवस की शुभकामनाएँ दी गईं।समारोह में परियोजना प्रमुख स्वपन कुमार मंडल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि फौजिया मिर्ज़ा, वरिष्ठ अधिवक्ता, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विभिन्न विभागों की महिला कर्मचारियों ने अपने कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए सशक्त महिला होने का परिचय दिया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिला कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।समारोह के दौरान कई महिला कर्मचारियों ने कविता, गीत और नृत्य के माध्यम से सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि एनटीपीसी सीपत की महिलाएँ न केवल इंजीनियर, चिकित्सक और विभिन्न विभागों की पेशेवर भूमिकाओं में सक्रिय हैं, बल्कि नवाचार और रचनात्मक गतिविधियों में भी अग्रणी भूमिका निभाते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही हैं।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परियोजना प्रमुख स्वपन कुमार मंडल ने इस वर्ष की थीम ‘गिव टू गेन’ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की महिलाएँ सशक्त समाज के निर्माण के साथ-साथ देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रचालन एवं अनुरक्षण (Operation and Maintenance), सुरक्षा, अभियांत्रिकी तथा सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) जैसे विभागों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी यह सिद्ध करती है कि विकसित राष्ट्र के निर्माण में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।अपने संबोधन में फौजिया मिर्ज़ा ने एनटीपीसी सीपत द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने महिलाओं की आर्थिक एवं सामाजिक स्वतंत्रता, उनके अधिकारों और उनकी क्षमता के प्रभावी उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला तथा अपने जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने एनटीपीसी में महिला कर्मचारियों से संबंधित विभिन्न नीतियों की जानकारी प्राप्त की और उनकी प्रशंसा की। विशेष रूप से गर्भवती महिला कर्मचारियों के लिए संचालित कल्याणी योजना की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी पहल को अन्य संस्थानों में भी व्यापक रूप से अपनाया जाना चाहिए।इस अवसर पर कोमल कृति उरांव को भी सम्मानित किया गया, जिनका चयन छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक सेवा परीक्षा 2024–25 में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर हुआ है। वह एनटीपीसी सीपत में वरिष्ठ प्रबंधक के रूप में कार्यरत एस. आर. उरांव की पुत्री हैं।कार्यक्रम को एनटीपीसी सीपत परिवार की महिला कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने और अधिक जीवंत और यादगार बना दिया। इस अवसर पर महाप्रबंधक (प्रचालन एवं अनुरक्षण) सुरोजित सिन्हा, महाप्रबंधक (प्रचालन एवं फ्यूल मैनेजमेंट) अशोक सरकार, महाप्रबंधक (अभियांत्रिकी) विकास खरे सहित विभिन्न विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
- -अब ‘लखपति दीदी’ के रूप में बना रहीं नई पहचानरायपुर। छत्तीसगढ की लाखों महिलाएं सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल बन रही हैं। स्व-रोजगार के माध्यम से वे न केवल अपने परिवार की मजबूत आधार स्तंभ बन रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की नई राह भी गढ़ रही हैं। आर्थिक रूप से सशक्त होती महिलाएं अब विकसित छत्तीसगढ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महिला सशक्तिकरण का यह अध्याय केवल परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ की मजबूत आधार है।जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा की श्रीमती पूनम देवी, जो गणेश महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं, आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में जानी जाती हैं। कभी सीमित संसाधनों के साथ घर-परिवार की जिम्मेदारियों में लगी रहने वाली पूनम देवी ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन की दिशा बदल दी। पूनम देवी बताती हैं कि पहले वे घर-गृहस्थी के कामकाज तक ही सीमित थीं और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए मजदूरी का सहारा लेना पड़ता था। आर्थिक स्थिति सामान्य थी, जिससे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन हो जाता था। इसी दौरान उन्होंने गणेश महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, ऋण सुविधा और स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों की जानकारी मिली।समूह की अन्य महिलाओं को मछली पालन, बकरी पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आय अर्जित करते देख उन्हें भी प्रेरणा मिली। वर्ष 2025 के मार्च माह में उन्होंने मुद्रा योजना के तहत 1 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने छोटे से किराना दुकान के विस्तार में किया।श्रीमती पूनम देवी ने अपने किराना दुकान को व्यवस्थित और बड़ा करने के बाद उनके व्यवसाय में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने लगी। वर्तमान में उनकी दुकान से हर माह लगभग 30 से 35 हजार रुपये तक की बिक्री हो जाती है। इस आय से वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी अच्छी तरह से कर पा रही हैं। पूनम देवी का कहना है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता दोनों आए हैं। आज वे न केवल अपने परिवार के लिए सहारा बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से जिले में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में प्रदेश की महिलाएं विभिन्न योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा की श्रीमती पूनम देवी भी इसी बदलाव की एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी हैं।
- -रायगढ़ जिले में 3 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित-फरवरी तक 24 किश्तों में 663.96 करोड़ रुपये सीधे खातों में अंतरितरायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना रायगढ़ जिले की लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना के तहत हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि महिलाओं के लिए आर्थिक संबल बन रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा रही है। जिले में इस योजना से 3 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। फरवरी 2026 तक इन महिलाओं के खातों में 24 किश्तों के माध्यम से 663 करोड़ 96 लाख 91 हजार 400 रुपये की राशि सीधे अंतरित की जा चुकी है।महतारी वंदन योजना के माध्यम से मिलने वाली राशि से महिलाएं घर की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ छोटी-छोटी बचत भी कर पा रही हैं। कई महिलाएं इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और अन्य जरूरी खर्चों के लिए कर रही हैं, जिससे परिवार को आर्थिक सहारा मिल रहा है। योजना से लाभान्वित महिलाओं का कहना है कि नियमित रूप से मिलने वाली राशि से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे अपनी जरूरतों के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर नहीं रहतीं। कई महिलाएं इस राशि को बीज पूंजी के रूप में उपयोग कर छोटे-छोटे स्वरोजगार भी शुरू कर रही हैं। सिलाई-कढ़ाई, किराना दुकान, सब्जी बिक्री और हस्तशिल्प जैसे कार्यों से जुड़कर वे अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।राज्य सरकार की इस पहल से महिलाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और वे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। महतारी वंदन योजना महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत आधार बन रही है, जिससे सशक्त महिला, सशक्त परिवार और सशक्त समाज की अवधारणा को बल मिल रहा है। महिला दिवस के अवसर पर जिले की महिलाओं ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई यह योजना उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
- -बस्तर का युवा अब विश्व के पटल पर आगे बढ़ रहा है – उपमुख्यमंत्री विजय शर्मारायपुर । बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के छोटे से ग्राम गुदमा के युवा अंकित सकनी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 816वीं रैंक प्राप्त कर पूरे बस्तर संभाग सहित प्रदेश का मान बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने अंकित सकनी और उनके पिता श्री चंद्रैया सकनी से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत कर उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।इस दौरान उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने अंकित से आत्मीय संवाद करते हुए उनकी मेहनत, लगन और संघर्ष की सराहना की। उन्होंने कहा कि बीजापुर जैसे दूरस्थ और आदिवासी अंचल के छोटे से गांव गुदमा से निकलकर यूपीएससी जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करना अत्यंत प्रेरणादायी उपलब्धि है। यह उपलब्धि न केवल अंकित के परिवार बल्कि पूरे बस्तर और प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने अंकित से बातचीत के दौरान कहा कि आपने पूरे देश की उम्मीद को जगा दिया है, लोग मुझसे पुछते थे जब नक्सलवाद खत्म होगा तो क्या होगा?... आपकी सफलता इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि जब नक्सलवाद खत्म होगा तो बस्तर में शांति और विकास का वातावरण बनेगा तो यहां के युवा अपनी प्रतिभा के बल पर देश ही नहीं बल्कि विश्व के पटल पर आगे बढ़कर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।उन्होंने आगे कहा कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त कर अंकित जैसे युवा देश की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और समाज तथा राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देंगे। अंकित की उपलब्धि बस्तर के युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद भी दृढ़ संकल्प और मेहनत से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।इस अवसर पर अंकित के पिता श्री चंद्रैया सकनी के द्वारा बीजापुर में उनसे हुई आत्मीय भेंट की याद भी साझा की। उनके पिता ने भी अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि बेटे की इस सफलता से परिवार और गांव का नाम रोशन हुआ है। वहीं अंकित सकनी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को देते हुए कहा कि उनका सपना देश की सेवा करना है। उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने इसे बस्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि बताते हुए अंकित को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
- - पीएम आवास निर्माण में प्रगति लाने, जल संरक्षण एवं ग्रामीण स्वरोजगार पर ज्यादा फोकस करने के निर्देशबलौदाबाजार / कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने शनिवार को जिला पंचायत सभागार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्यो की समीक्षा की। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत निर्माणाधीन एवं अप्रारम्भ आवासों को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिये। उन्होंने बैठक में योजनाओं, निर्माण कार्यों सहित रोजगार सृजन पर विस्तृत समीक्षा की।कलेक्टर ने कहा कि द्वितीय किश्त जारी हुए आवासों को अप्रैल तक पूरा कराने 15 -15 दिन की प्रगति रिपोर्ट बनाएं। विकासखंड समन्वयक एवं तकनिकी सहायक आपसी समन्वय एवं फिल्ड विजिट करें।कहीं पर दिक्क़त हो तो सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायक की भी सहयोग लें। हितग्राहियों के पलायन के कारण अप्रारम्भ आवासों को शुरू करने के लिये हितग्राहियों से संपर्क करने कहा। इसीतरह मुख्यमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवासों को भी तेजी से पूर्ण कराने के निर्देश दिये।कलेक्टर ने मनरेगा अंतर्गत पंचायतों में कम से कम 2 काम स्वीकृत कर जल संरक्षण के कार्य कराने कहा।हैंडपम्प, टेप नल के पास सोखता गड्ढा का निर्माण एवं सभी पीएम आवास व सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग संरचना निर्माण के निर्देश दिये।उन्होंने तालाब व डबरी निर्माण के काम जल्द शुरू करने के साथ ही डबरी निर्माण में उपयुक्त स्थल का चयन करने के निर्देश दिये ताकि पानी का ठहराव हो। इसीतरह सामुदायिक तालाब निर्माण से पूर्व ग्राम सभा में प्रस्ताव पर चर्चा कर स्थल चयन करने कहा। उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिये ऋण राशि एवं आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिये।मनरेगा में भी महिलाओं की अधिक भागीदारी पर जोर दिये।कलेक्टर ने स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत ग्राम पंचायतों में समूह की महिलाओं द्वारा कचरा कलेक्शन के कार्य को सक्रिय करने, यूजर चार्ज का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने कहा। गांव को साफ सुथरा रखने टीम फिल्ड विजिट करें और लोगों को जागरूक करें। उन्होंने गिरौदपुरी धाम में पूरे मेला परिसर में स्थायी डास्ट बीन की सुविधा हेतु सीमेंट का कूड़ादान निर्माण के भी निर्देश दिये।बैठक में सीईओ जिला पंचायत सुश्री दिव्या अग्रवाल सहित जनपद सीईओ, मनरेगा पीओ, ब्लॉक कोआर्डिनेटर, तकनीकी सहायक उपस्थित थे।
- बलौदाबाजार / कलेक्टर कुलदीप शर्मा शुक्रवार को कसडोल विकासखंड भ्रमण के दौरान ग्राम अमोदी में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत नव निर्मित आवास में हितग्राही लता यादव के परिवार को गृहप्रवेश कराया और उन्हें आवास की चाबी सौंपी।कलेक्टर श्री शर्मा ने योजना के तहत सुन्दर मकान बनाने एवं गृहप्रवेश के लिये हितग्राही लता यादव पति पदुम यादव एवं उनके बच्चों को शुभकामनायें दीं। उन्होने शासन की योजनाओं का इसी तरह लाभ लेकर जीवन को खुशहाल बनाने की बात कही। लता यादव ने बताया कि पहले कच्चे मकान में रहते आ रहे थे जिसमें कई तरह की समस्याओ का सामना कराना पडता था। वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ और कुल राशि 120000 तीन किश्तों में मिला। प्रधानमंत्री आवास योजना से गरीबों का पक्के मकान का सपना पूरा हो रहा है।कलेक्टर श्री शर्मा ने आंगनबाड़ी केन्द्र अमोदी का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यकर्त्ता मलाती केवट से बच्चों की उपस्थिति, पूरक पोषण आहार, कुपोषण की स्थिति, भोजन की गुणवत्ता आदि की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी में बच्चों के लिये बनाए गए भोजन की गुणवत्ता को चख कर देखा और सुधार के निर्देश दिये। उन्होंने बच्चों को खेल- खेल में सीखने के गुण विकसित करने, रंगों व आकृतियों की पहचान कराने कहा। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत सुश्री दिव्या अग्रवाल, एसडीएम आर.आर.दुबे,सीएमएचओ डॉ राजेश कुमार अवस्थी, डीईओ संजय गुहे सहित अन्य अधिकारीव ग्रामवासी मौजूद थे।
- बलौदाबाजार / कलेक्टर कुलदीप शर्मा शुक्रवार को कसडोल विकासखंड के दौरा पर रहे। इस दौरान ग्राम अमोदी के प्राथमिक कृषि साख समिति परिसर पहुंचे। उन्होंने कार्यालय के पास मोर गांव मोर पानी अभियान 2.0 अंतर्गत सोखता गड्ढा निर्माण हेतु श्रमदान किया और उपस्थित ग्रामीणों को जल संरक्षण में सहभागिता के लिये प्रोत्साहित किया।कलेक्टर ने कहा कि पानी जीवन का आधार है और भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन होने के कारण वाटर लेवल घटते जा रहा है। उन्होंने कहा कि पानी को व्यर्थ बहने न दें, नल के पास सोखता गड्ढा बनाएं। गांव के सभी हैंडडपम्प सड़करी भवनो के पास अनिवार्य रूप से जनसहभागिता से सोखता गड्ढा का निर्माण कराएं। उन्होंने सरपंच व सचिव से ग्राम पंचायत में सोखता गड्ढा निर्माण की जानकारी ली। सरपंच ने बताया कि गांव में 7 हैंडपम्प के पास सोखता गड्ढा बनाया गया है।इसके पश्चात कलेक्टर ने सहकारी समिति का निरीक्षण किया और धान उठाव, सूखत, केसीसी, पैक्स में एंट्री, खाद भण्डारण,माइक्रो एटीएम से राशि निकासी आदि की जानकारी ली।समिति प्रबंधक ने बताया कि धान का शतप्रतिशत उठाव कर लिया गया है एवं पैक्स में सभी जानकारी इंट्री हो गया है। किसानों को मैक्रो एटीएम से राशि निकासी की सुविधा है।सहकारी समिति कार्यालय के बगल में संचालित हो रहे पीडीएस दुकान के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने चावल की गुणवत्ता, खाद्यन्न भण्डारण की जानकारी ली। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणो से नियमित एवं समय पर दुकान खुलने व राशन प्राप्त करने के सम्बन्ध में पूछताछ की। ग्रामीणों ने बताया कि दुकान समय पर नियमित खुलता है और कोई दिक्कत नहीं होती। अभी चावल और शक्कर ही मिलता है। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत सुश्री दिव्या अग्रवाल, एसडीएम आर.आर.दुबे, खाद्य अधिकारी पुनीत वर्मा, उपायुक्त साहकारिता उमेश गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
- -हर जरूरतमंद परिवार को सम्मानजनक आवास दिलाना हमारा संकल्प - उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव-छत्तीसगढ़ के लिए 263 परियोजनाएं स्वीकृत, 36 माह में पूरे होंगे काम-रतनपुर में डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट, आधुनिक और उन्नत तकनीकों से बीएमटीपीसी बनाएगी 40 आवासरायपुर। छत्तीसगढ़ में शहरी गरीबों के लिए बड़े पैमाने पर आवास निर्माण की राह खुल गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत राज्य में 28 हजार 461 नए पक्के घरों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति ने राज्य की 263 परियोजनाओं को मंजूरी दी है।प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत राज्य में 28 हजार 461 नए पक्के आवासों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपए से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। हाल ही में 23 फरवरी को केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (Central Sanction & Monitoring Committee) की बैठक में इसकी मंजूरी दी गई। इससे राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हजारों परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आशियाना मिल सकेगा।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सभी के लिए आवास’ के संकल्प को साकार करने देशभर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 का क्रियान्वयन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के मार्गदर्शन में शहरी गरीबों को किफायती और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने सक्रियता से काम किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव नियमित समीक्षा कर आवासों के आबंटन और इनके निर्माण में तेजी व पारदर्शिता सुनिश्चित करने विभागीय अधिकारियों को लगातार निर्देशित कर रहे हैं।केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में छत्तीसगढ़ द्वारा प्रस्तुत 263 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें 211 लाभार्थी आधारित निर्माण परियोजनाएं (Beneficiary-led Construction) और 52 किफायती आवास साझेदारी परियोजनाएं (Affordable Housing Projects) शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेशभर के नगरीय निकायों में कुल 28 हजार 461 आवासों का निर्माण किया जाएगा।लाभार्थी आधारित निर्माण घटक के तहत 13 हजार 058 आवासों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें पात्र हितग्राही अपनी स्वयं की भूमि पर पक्का घर बना सकेंगे। प्रथम बैच में 52 परियोजनाओं के माध्यम से 3844 आवासों को मंजूरी दी गई है, जिसके लिए 57 करोड़ 66 लाख रुपए की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। वहीं द्वितीय बैच में 159 परियोजनाओं के अंतर्गत 9214 आवासों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिसके लिए 138 करोड़ 21 लाख रुपए की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। इन आवासों की प्रति इकाई परियोजना लागत लगभग 3 लाख 89 हजार रुपए निर्धारित की गई है।किफायती आवास साझेदारी घटक के तहत 15 हजार 363 आवासों का निर्माण किया जाएगा। इसके तहत शासकीय भूमि पर सार्वजनिक एजेंसियों के माध्यम से सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर विकसित किए जाएंगे, जिनमें स्लम पुनर्विकास और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए किफायती आवास उपलब्ध होंगे। इस घटक के प्रथम बैच में 24 परियोजनाओं के जरिए 6996 आवासों को मंजूरी दी गई है, जबकि दूसरे बैच में 28 परियोजनाओं के माध्यम से 8367 आवासों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। इन आवासों की प्रति इकाई लागत 5 लाख 75 हजार रुपए तय की गई है। ये सभी परियोजनाएं 36 महीनों में पूर्ण की जाएंगी।भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ को मार्च 2026 तक 50 हजार आवासों के प्रस्ताव प्रस्तुत करने का लक्ष्य दिया था। छत्तीसगढ़ ने 52 हजार 588 आवासों के प्रस्ताव भेजकर लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में राज्य की इस सक्रियता और तत्परता की सराहना भी की गई। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा सभी परियोजनाओं के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन, भू-अभिलेख, लाभार्थी सूची और यूनिफाइड वेब पोर्टल पर आवश्यक प्रविष्टियां केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी की गई हैं। सभी पात्र हितग्राहियों को केंद्रीय सहायता आधार आधारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाएगी। यूनिफाइड वेब पोर्टल के जरिए पारदर्शी तरीके से यह पूरी प्रक्रिया संचालित की जाएगी।केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में बिलासपुर जिले के रतनपुर में एक अभिनव डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट (Demonstration Housing Project) को भी मंजूरी मिली है। यह परियोजना भारत सरकार की नवाचार आधारित एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे देश के चुनिंदा राज्यों में ही स्वीकृत किया जा रहा है। इसके अंतर्गत आधुनिक और उन्नत तकनीकों का उपयोग कर 40 आवास बनाए जाएंगे। इनका निर्माण भवन निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन परिषद (Building Materials & Technology Promotion Council) द्वारा किया जाएगा। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) इन आवासों को पात्र लोगों को किराये पर उपलब्ध कराएगा। राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थल रतनपुर में आकार लेने वाली यह परियोजना सामाजिक उपयोग के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा देने में सहायक होगी। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव की विशेष कोशिशों से रतनपुर को यह परियोजना मिली है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत छत्तीसगढ़ को बड़ी उपलब्धि मिली है। राज्य में 28,461 नए पक्के घरों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। इससे हजारों जरूरतमंद परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार होगा। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का हृदय से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की 263 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है और अगले 36 महीनों में इन आवासों का निर्माण किया जाएगा। बिलासपुर जिले के रतनपुर में आधुनिक तकनीक से 40 आवासों का एक विशेष प्रोजेक्ट भी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिल सके।उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार शहरी गरीबों को आवासीय सुरक्षा प्रदान करने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। विभागीय स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रगति की लगातार निगरानी की जा रही है। नगरीय निकायों के सहयोग से पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें समयबद्ध तरीके से योजना से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है, ताकि अधिक से अधिक परिवारों को पक्के आवास दिए जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही 435 करोड़ रुपए की सहायता से आवास निर्माण में और तेजी आएगी।
- बलौदाबाजार / वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर के निर्देशानुसार शनिवार को वन परिक्षेत्र देवपुर अंतर्गत वन अग्नि से सुरक्षा एवं सावधानी के संबंध में व्यापक जनजागरूकता के उद्देश्य से बाइक रैली का आयोजन किया गया।बाइक रैली के माध्यम से परिवृत्त देवपुर के अंतर्गत ग्राम देवपुर, तेंदुचुवा, धमलपुरा, कोसमसरा, पकरीद, गिधपुरी, मेटकुला, कुरकुटी एवं नवाडीह में ग्रामीणों एवं स्कूली विद्यार्थियों को वन अग्नि से बचाव के संबंध में जागरूक किया गया। इस दौरान बैनर एवं पोस्टर के माध्यम से लोगों को जंगलों में आग न लगाने, जंगल से लगे खेतों में पराली न जलाने, महुआ संग्रहण के समय आग न लगाकर झाड़ू से साफ कर महुआ बिनने, ज्वलनशील वस्तुएं लेकर जंगल में प्रवेश न करने तथा जंगल में आग की घटना होने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही वन अग्नि से पर्यावरण, वन्यजीवों एवं वन संपदा को होने वाली क्षति के बारे में भी बताया गया।इस जनजागरूकता रैली में परिक्षेत्र अधिकारी देवपुर संतोष कुमार पैकरा,चंद्रहास ठाकुर, रामेश्वर साहू सहित समस्त फायर वाचर, समिति सुरक्षा श्रमिक, वन प्रबंधन समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्य तथा गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से आए छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
- बलौदाबाजार / ज़िला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 8 मार्च रविवार को राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा के मुख्य आतिथ्य में महतारी वंदन सम्मेलन का आयोजन किया गया जा रहा है। यह कार्यक्रम जिला ऑडिटोरियम. बलौदाबाजार में सुबह 11से आयोजित होगा। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नारी शक्ति उपस्थित रहेंगे। file photo
- रायपुर । बृहस्पति धुर्वे बताती है कि यदि स्वयं की मेहनत, सही मार्गदर्शन और शासन की योजनाओं का सहयोग मिल जाए, तो साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी कोई महिला सफलता और आत्मनिर्भरता की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है। कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाली पेन्ड्रा-गौरेला-मरवाही जिला के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सधवानी की श्रीमती बृहस्पति धुर्वे आज पूरे क्षेत्र में “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं।कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के सहयोग से बृहस्पति धुर्वे ने अपने जीवन की दिशा बदल दी और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में संचालित ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर बृहस्पति धुर्वे ने महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से अपने सपनों को साकार करने की शुरुआत की। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला, जिससे उन्होंने ऑयस्टर मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया। शुरुआत में यह काम छोटे स्तर पर था, लेकिन मेहनत और लगन से धीरे-धीरे उनका उत्पादन बढ़ता गया। मशरूम उत्पादन के साथ-साथ उन्होंने सब्जी-भाजी की खेती भी शुरू की, जिससे उनकी वार्षिक आय लगभग डेढ़ से 2 लाख रुपए तक हो जाती है। आज उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि वह आर्थिक रूप से सशक्त बन चुकी हैं और अपने परिवार की जरूरतों को आत्मविश्वास के साथ पूरा कर रही हैं।बृहस्पति धुर्वे बताती हैं कि शासन की अनेक योजनाओं का लाभ भी उन्हें मिला है। उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत रसोई गैस कनेक्शन, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान तथा पीडीएस योजना से 35 किलो निःशुल्क चावल की सुविधा भी प्राप्त हो रही है। इन योजनाओं ने उनके परिवार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की है। आज बृहस्पति धुर्वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। वह अपने अनुभव साझा करते हुए आसपास की महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देती हैं और उन्हें भी स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करती हैं। समूह के माध्यम से ऋण लेकर उन्होंने अपने उत्पादों के विक्रय के लिए एक दुकान भी बनवाई है, जहाँ भविष्य में मशरूम और अन्य उत्पाद बेचकर अपनी आय को और बढ़ाने की योजना है।
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विशेष आलेख : धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
तारा शंकर सिन्हा , सहायक संचालक जनसंपर्करायुपर। श्रीमती सगो तेता स्व-सहायता समूह और बिहान से जुड़कर न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि अपने स्वाभिमान और आत्मविश्वास को भी नई पहचान दी है। आज कांकेर जिला के गांव ग्राम गढ़पिछवाड़ी की अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा लेकर आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं। श्रीमती तेता ने अपनी इस सफलता का श्रेय भारत सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना और छत्तीसगढ़ शासन की पहल बिहान को देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और ‘लखपति दीदी’ बनने का अवसर प्रदान किया है। बिहान योजना ने श्रीमती सगो तेता के जीवन में नवा बिहान ला दिया।कुछ कर गुजरने का जुनून और उस इच्छाशक्ति को शासन की छोटी सी मदद मिल जाए, तो कामयाबी की बुलंदी को फर्श से अर्श तक पहुंचने में देर नहीं लगती। कांकेर जिले की महिलाएं शासन के सहयोग से प्रशिक्षण तथा सहायता प्राप्त कर अपने हुनर को अंजाम दे रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गढ़पिछवाड़ी की आदिवासी महिला श्रीमती सगो तेता आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पृथक् पहचान स्थापित कर चुकी हैं। उनकी कामयाबी यह साबित करती है कि मेहनत, लगन, आत्मविश्वास और उचित अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी खुद के दम पर अपने समूह, परिवार और समाज के लिए मिसाल कायम कर सकती हैं।एक समय था जब आर्थिक तंगी के कारण श्रीमती सगो को छोटी-छोटी जरूरतों को पूरी करने के लिए भी दूसरों का मुंह ताकना पड़ता था। आजीविका के एकमात्र साधन के रूप में खेती-बाड़ी तो थी, लेकिन सीमित संसाधनों और पारंपरिक तरीकों के कारण आय बहुत कम होती थी। वहीं बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों की चिंता उन्हें अक्सर परेशान करती थी। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की जानकारी मिली। इससे प्रेरित होकर सगो बाई ने गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर गायत्री स्व-सहायता समूह बनाया, जिसमें 10 महिलाएं शामिल हैं।समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बिहान के अंतर्गत 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश राशि प्राप्त हुई, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दे दी। श्रीमती सगो तेता बताती हैं कि पहले उनके खेत में मोटरपंप (बोरवेल) नहीं था, जिसके कारण खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी और साल में धान की केवल एक ही फसल ले पाती थीं। फिर उन्होंने स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर अपने खेत में बोर करवाया, जिससे अब उन्हें सिंचाई की सुविधा मिल गई है। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अब वे अपने खेतों में साल में दोनों फसलें (खरीफ और रबी) ले रही हैं, जिससे उनकी आय में काफी वृद्धि हुई है।इसके साथ ही सगो बाई ने कई आजीविकामूलक गतिविधियां भी शुरू कीं। उन्होंने मशरूम पालन, छेना (कंडा) निर्माण, गोबर से जैविक खाद तैयार करना, रुई से तकिये बनाना, सब्जी उत्पादन, ईंट निर्माण और कपड़ों के विक्रय जैसे कार्य प्रारंभ किए। उनकी सतत् मेहनत रंग लाई और आज वे इन अलग-अलग गतिविधियों से प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इसी निरंतर आय और बचत के कारण पूरे क्षेत्र में वह आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जा रही हैं।लखपति दीदी श्रीमती सगो तेता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। इसी आय के सहारे उन्होंने अपने तीनों बच्चों की पढ़ाई करवाई, साथ ही अपने दो बच्चों की शादी भी करवा ली है। इसके बाद अब वे अपनी आजीविका से होने वाली आय से अपनी छोटी बेटी की शादी करने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह महतारी वंदन योजना का भी लाभ ले रही हैं, जिससे मिली रकम को वह बेटी के विवाह में किसी बड़े खर्च के लिए बचत कर रही हैं। - -वनांचल क्षेत्र में आय के नए स्रोत- मखाना खेती से सशक्त होंगे महिला समूह-नगरी क्षेत्र की जलवायु बनी उपयुक्त, मखाना उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय-महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा नया आयाम, मखाना उत्पादन से जुड़ेंगे किसानरायपुर /मखाना एक ऐसा पौधा है जो तालाबों, दलदलों और आर्द्रभूमि जैसे स्थिर जल निकायों में उगाया जाता है। इसका प्रसार बीजों द्वारा होता है और अंकुरण के लिए पूर्णतः परिपक्व बीजों की आवश्यकता होती है। मखाना की खेती में न्यूनतम खर्च आता है क्योंकि पिछले फसल से बचे हुए बीजों से नए पौधे आसानी से अंकुरित हो जाते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर होने और नकदी फसल के रूप में किसानों की आय को दोगुना करने की अपार क्षमता को देखते मिलता है। मखाना खेती से धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी । छोटी छोटी डबरी से समृद्धि तक धमतरी की महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखायी दे रही है । शासकीय प्रयासों का प्रतिफल है कि मखाना खेती से धमतरी में आर्थिक सशक्तिकरण होगा ।उल्लेखनीय है कि केंद्रीय कृषिमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने धमतरी प्रवास के दौरान जिले को मखाना बोर्ड में शामिल करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद जिला प्रशासन द्वारा मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है।धमतरी जिले के नगरी वनांचल क्षेत्र में आजीविका संवर्धन की दिशा में एक नई पहल के तहत मखाना खेती की तैयारी स्व-सहायता समूहों के माध्यम से प्रारंभ की गई है। जिले में कुल 100 एकड़ भूमि मखाना उत्पादन के लिए चिन्हांकित की गई है। प्रारंभिक चरण में संकरा क्षेत्र में 25 एकड़ रकबे में मखाना की खेती की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।विशेषज्ञों के अनुसार नगरी क्षेत्र की जलवायु, पर्याप्त जल उपलब्धता एवं प्राकृतिक वातावरण मखाना उत्पादन के लिए अनुकूल है। इससे स्थानीय किसानों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त होंगे। इस पहल से वनांचल क्षेत्र में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।कलेक्टर धमतरी बीते दिनों संकरा पहुंचकर मखाना खेती की तैयारियों का अवलोकन किया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि “मखाना खेती नगरी वनांचल क्षेत्र के लिए आय वृद्धि का प्रभावी माध्यम बन सकती है। स्व-सहायता समूहों को तकनीकी प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं विपणन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। हमारा प्रयास है कि धमतरी जिला प्रदेश में मखाना उत्पादन का मॉडल विकसित करे।”कलेक्टर ने यह भी निर्देशित किया कि कृषि एवं उद्यानिकी विभाग समन्वय बनाकर किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करें तथा जल प्रबंधन एवं फसल संरक्षण पर विशेष ध्यान दें। आने वाले समय में चरणबद्ध रूप से रकबे का विस्तार कर अधिक से अधिक समूहों को इस पहल से जोड़ा जाएगा। जिला प्रशासन की इस पहल से नगरी वनांचल क्षेत्र में आर्थिक सशक्तिकरण की नई संभावनाएं साकार होती दिखाई दे रही हैं।
- बलौदाबाजार-भाटापारा /बलौदाबाजार -भाटापारा जिले के ग्राम बम्हनमुड़ी निवासी मीनाक्षी जोशी के लिए प्रदेश सरकार की 'महतारी वंदन योजना' संबल बनकर उभरी है। हर माह उनके खाते में आने वाली एक हजार रुपए की सहायता राशि ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारा है, बल्कि परिवार की छोटी-छोटी दैनिक आवश्यकताओं को बिना किसी चिंता के पूरा करने का मार्ग भी प्रशस्त किया है।मीनाक्षी के पति श्री भूपेंद्र जोशी एक ऑटो पार्ट्स की दुकान में कार्य करते हैं, जिनसे होने वाली सीमित आय में दो छोटे बच्चों—तीन वर्षीय पुत्री और एक वर्षीय पुत्र—के साथ परिवार का भरण-पोषण करना एक बड़ी चुनौती थी। घर की आर्थिक स्थिति बेहतर न होने के कारण छोटी-बड़ी घरेलू जरूरतों के लिए अक्सर समझौता करना पड़ता था, लेकिन इस योजना ने उनकी राह आसान कर दी है।मीनाक्षी बताती हैं कि इस योजना के लाभ से मिनाक्षी के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव आया है। उनका मानना है कि महतारी वंदन योजना केवल एक वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और समाज में उन्हें सम्मान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। नियमित रूप से मिलने वाली इस राशि से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अब खुद को पहले से अधिक आर्थिक रूप से सशक्त महसूस कर रही हैं। मीनाक्षी ने महिलाओं के हितों का ध्यान रखने और उन्हें यह मजबूती प्रदान करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह योजना उनके जैसे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिसने घर की खुशहाली में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- -नेट की परीक्षा में 33 वाँ रैंक हासिल कर सूरजपुर की बेटी निधि गुप्ता ने रोशन किया जिले का नामरायपुर। महिलाएं अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा, मेहनत और समर्पण के साथ करते हुए प्रशासनिक और विकासात्मक कार्यों को नई दिशा देने आगे आ रही हैं। यह स्थिति न केवल महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है, बल्कि समाज में उनके प्रति बदलती सोच का भी स्पष्ट संकेत है। निधि गुप्ता ने यह साबित किया है कि शासकीय शिक्षा भी उत्कृष्टता की नींव बन सकती है, बशर्ते इरादा पक्का हो। निधि ने देश की अत्यंत कठिन सीएसआईआर नेट परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 33 वाँ रैंक अर्जित की और सूरजपुर का नाम राष्ट्रीय मानचित्र पर गौरव के साथ अंकित किया।अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जब हम उन महिलाओं की बात करते हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जीवित रखा, तो सूरजपुर जिले की बेटी निधि गुप्ता का नाम स्वाभाविक रूप से सामने आता है। शासकीय विद्यालय की पढ़ाई से लेकर देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में शीर्ष रैंक तक उनका सफर संघर्ष, संकल्प और सफलता की एक अनूठी मिसाल है। निधि की प्रारंभिक शिक्षा सूरजपुर जिले के शासकीय कन्या विद्यालय में हुई। संसाधनों की कमी एक वास्तविकता थी, पढ़ाई के दौरान कई उतार-चढ़ाव भी आए लेकिन निधि ने कभी हौसला नहीं खोया। उनके मज़बूत इरादों के आगे हर बाधा बौनी साबित होती रही।स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए उन्होंने शासकीय रेवती रमण मिश्र महाविद्यालय, सूरजपुर में प्रवेश लिया, जहाँ के प्रोफेसरों ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी। रसायन विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. विकेश कुमार झा का मार्गदर्शन उनके जीवन का अहम मोड़ बना। उनकी प्रेरणा और दिशा-निर्देशन से निधि ने देश की अत्यंत कठिन सीएसआईआर नेट परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 33 वाँ रैंक अर्जित की और सूरजपुर का नाम राष्ट्रीय मानचित्र पर गौरव के साथ अंकित किया। निधि के शब्दों में उनकी पूरी यात्रा का सार समाया है -’’महिला दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन सपनों को जीने का दिन है, जो हमने खुली आँखों से देखे हैं।’’ निधि गुप्ता की यह सफलता जिले की उन तमाम बेटियों के लिए एक प्रकाश-स्तंभ ह,ै जो सीमित संसाधनों के बीच अपने सपनों को पालती हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि शासकीय शिक्षा भी उत्कृष्टता की नींव बन सकती है कि बशर्ते इरादा पक्का हो।
- - मजदूरी छोड़ लखपति दीदी बनीं दशमीरायपुर। असाधारण मेहनत, अटूट आत्मविश्वास और त्याग से बुनी गई एक ऐसी सच्ची यात्रा है, जो दिखाती है कि सीमित संसाधनों और विकट परिस्थितियों के बावजूद सफलता संभव है। यह साधारण शुरुआत से असाधारण ऊंचाइयों तक पहुँचने की कहानी है, मोंगरा फूल महिला स्वयं सहायता समूह से जुडे़ दशमी नाग की, जिसमें संघर्ष, लगन और हार न मानने का जज्बा शामिल होता है। आज दशमी नाग अपनी मेहनत एवं लगन के बूते धान, मक्का, सब्जी उत्पादन सहित मुर्गी पालन और बकरीपालन जैसी विविध गतिविधियों के माध्यम से सालाना लगभग दो लाख रुपए से ज्यादा की आय अर्जित कर रही हैं। यह उनके पुराने जीवन की तुलना में एक बड़ी उपलब्धि है। आर्थिक लाभ के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व में भी एक अदभुत परिवर्तन आया है।बस्तर के सुदूर अंचलों में महिला सशक्तिकरण की एक नई इबारत लिखी जा रही है, जिसका जीता-जागता उदाहरण बस्तर जिला के ग्राम पंचायत मामड़पाल मुनगा की रहने वाली दशमी नाग हैं। कभी मजदूरी के भरोसे अपना जीवन बसर करने वाली दशमी आज लखपति दीदी के रूप में अपनी एक नई पहचान बना चुकी हैं। मोंगरा फूल महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद दशमी के जीवन में जो बदलाव आया, वह आज पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरक बन गया है। समूह से जुड़ने से पूर्व दशमी नाग की आर्थिक स्थिति अत्यंत सामान्य थी। वे खेती और पशुपालन तो करती थीं, लेकिन तकनीकी मार्गदर्शन और पूंजी के अभाव में उनकी आय कम ही हो पाती थी। धान, मक्का और सब्जी बाड़ी से होने वाली सीमित कमाई के साथ-साथ उन्हें अपनी आजीविका चलाने के लिए मजदूरी का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन महिला संगठन मुनगा और तीरथधारा महिला संगठन संकुल छिंदावाड़ा के साथ जुड़ने के बाद उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल गई।ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद समूह के माध्यम से मिली कुल 41 हजार 500 रुपए की वित्तीय सहायता जिसमें डेढ़ हजार रूपए रिवॉल्विंग फंड, 15 हजार रूपए सीआईएफ और 25 हजार रूपए का बैंक लिंकेज शामिल था। यह सहायता दशमी के लिए एक मजबूत आधार साबित हुई। इस राशि का सही नियोजन करते हुए उन्होंने खेती और पशुपालन को वैज्ञानिक तरीके से विस्तार दिया। परिणाम यह हुआ कि जिस धान की खेती से वे पहले 50 हजार रुपए कमाती थीं, वह बढ़कर 65 हजार रूपए हो गया। इसी तरह बकरी पालन में उन्होंने लंबी छलांग लगाते हुए अपनी आय को 25 हजार रुपए से बढ़ाकर सीधे 55 हजार रूपए तक पहुँचाया।जो दशमी पहले मजदूरी के लिए संघर्ष करती थीं, आज वे न केवल आत्मनिर्भर हैं, यही नहीं समाज में लोगों के साथ खुलकर आत्मविश्वास के साथ संवाद करती हैं। उनकी यह सफलता की कहानी साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर और मंच मिले, तो वे अपनी तकदीर खुद बदल सकती हैं। वह कहती है कि मेहनत के बल पर सफलता के शिखर हासिल किया जा सकता है।
- - वर्ष 2025 में 820 विदेशी पर्यटकों ने की छत्तीसगढ़ की यात्रा-छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा विकसित की जा रही आधुनिक पर्यटन सुविधाएँ वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर दिला रही नई पहचानरायपुर। प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, घने वन, झरनों की कलकल ध्वनि और ऐतिहासिक धरोहरों से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ अब धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना रहा है। वर्ष 2025 के दौरान कुल 820 विदेशी पर्यटकों ने छत्तीसगढ़ की यात्रा की, जो यह संकेत देता है कि राज्य की अनछुई प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विविधता विदेशी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा विकसित की जा रही आधुनिक पर्यटन सुविधाएँ तथा बेहतर होती सुरक्षा व्यवस्था आने वाले समय में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावनाओं को और मजबूत कर रही है।छत्तीसगढ़ को “पर्यटकों का स्वर्ग” कहा जाता है, क्योंकि यहाँ प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे भव्य जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की जैव विविधता, सिरपुर और रतनपुर जैसे ऐतिहासिक-धार्मिक स्थल, बस्तर की अद्वितीय जनजातीय परंपराएँ और लोकनृत्य, सरगुजा के पर्वतीय क्षेत्र तथा जशपुर की शांत और हरित वादियाँ विदेशी सैलानियों को एक अलग अनुभव प्रदान करती हैं। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ उन पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है, जो प्रकृति के करीब रहकर स्थानीय संस्कृति को समझना चाहते हैं।राज्य सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रमुख पर्यटन स्थलों तक बेहतर सड़क संपर्क, पर्यटक सूचना केंद्रों की स्थापना, होटल और होम-स्टे सुविधाओं का विस्तार, पर्यटक मार्गदर्शकों का प्रशिक्षण, डिजिटल प्रचार-प्रसार तथा बुनियादी सुविधाओं के विकास जैसे प्रयासों से पर्यटकों को अधिक सुगम और सुरक्षित अनुभव मिल रहा है। इसके साथ ही राज्य में ग्रामीण पर्यटन, ईको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय समुदायों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।बस्तर क्षेत्र विदेशी सैलानियों के लिए अत्यंत संभावनाशील पर्यटन गंतव्य के रूप में उभर रहा है। यहाँ के प्राकृतिक जलप्रपात, घने वन, राष्ट्रीय उद्यान, आदिवासी जीवन शैली और प्रसिद्ध बस्तर दशहरा जैसे सांस्कृतिक आयोजन विश्वभर के पर्यटकों के लिए अनूठा अनुभव प्रस्तुत करते हैं। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की जैव विविधता, चित्रकोट जलप्रपात की भव्यता और तीरथगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता बस्तर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान देते हैं। चित्रकोट फॉल्स के पास तीर्था गांव में प्रीमियम लक्जरी टेंट सिटी प्रस्तावित है। चित्रकोट इंडिजिनस नेचर रिट्रीट नामक एक व्यापक प्रस्ताव पर्यटन मंत्रालय को प्रस्तुत करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य चित्रकोट को एक वैश्विक स्तर की प्रकृति और संस्कृति गंतव्य के रूप में पुनर्विकसित करना है। राज्य सरकार की इन योजनाओं से बस्तर आने वाले वर्षों में विदेशी पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केन्द्र होगा।बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था में आए सकारात्मक बदलाव भी पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। बस्तर अब नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और क्षेत्र में शांति एवं विकास का नया वातावरण निर्मित हो रहा है। बेहतर सुरक्षा, सड़क संपर्क और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार से न केवल देशी बल्कि विदेशी पर्यटकों का विश्वास भी बढ़ रहा है। इससे आने वाले समय में बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की मेंटर एवं हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग की संस्थापक सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन की बस्तर की छह दिवसीय यात्रा ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान दिलाई है। उन्होंने बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय समुदायों की जीवन शैली की सराहना करते हुए इसे विश्व के लिए एक अनूठा पर्यटन अनुभव बताया। इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय यात्राएँ और सकारात्मक अनुभव विदेशों में छत्तीसगढ़ की छवि को और मजबूत करेंगे तथा भविष्य में अधिक विदेशी सैलानियों को आकर्षित करने में सहायक होंगे।सरगुजा और जशपुर क्षेत्र भी विदेशी सैलानियों के लिए अपार संभावनाएँ समेटे हुए हैं। सरगुजा के पर्वतीय वन क्षेत्र, मैनपाट का शांत और मनोहारी वातावरण, जशपुर की हरित घाटियाँ तथा वहाँ की प्राकृतिक जैव विविधता प्रकृति प्रेमी पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है। इन क्षेत्रों में ईको-टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म की संभावनाएँ भी तेजी से विकसित हो रही हैं, जिससे विदेशी पर्यटकों के लिए नए अनुभवों के द्वार खुल रहे हैं। छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार, पर्यटन मेलों में भागीदारी, डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से प्रचार तथा पर्यटन अवसंरचना के विकास जैसे कई कदम उठा रही है। साथ ही, स्थानीय संस्कृति, हस्तशिल्प, लोकनृत्य और पारंपरिक उत्सवों को पर्यटन से जोड़कर छत्तीसगढ़ को एक विशिष्ट सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ विदेशी सैलानियों के लिए एक नया और आकर्षक पर्यटन केंद्र बनेगा। प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विविधता, बेहतर होती सुविधाएँ और सुरक्षित वातावरण मिलकर राज्य को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।
- रायपुर। मेहनत, दृढ़ संकल्प और अटूट लगन से अभावों को अवसरों में बदलकर अपने विकास की कहानी लिखना संभव है। यह यात्रा चुनौतियों का सामना मुस्कुराकर करते हुए, निरंतर प्रयास और अदम्य साहस से आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की है। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बिहान (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास और स्वावलंबन का नया सवेरा लेकर आ रही है। सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत मेंड्राकला की रहने वाली श्रीमती हरमनिया देवी राजवाड़े कभी आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की स्कूल फीस भरने के लिए जद्दोजहद करने वाली आज न केवल एक सफल उद्यमी हैं, बल्कि अपने बच्चों को बड़े शहरों में उच्च शिक्षा भी दिला रही हैं।हरमनिया देवी बताती हैं कि बिहान से जुड़ने से पहले उनकी माली हालत दयनीय थी। घर चलाना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन आकांक्षा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष बनने के बाद उनके जीवन ने नई करवट ली। उन्होंने समूह के माध्यम से पहला ऋण लिया और गाँव में ही एक छोटी सी किराना और श्रृंगार दुकान की शुरुआत की।मेहनत और लगन से जब किराना व्यवसाय सफल हुआ, तो उन्होंने ईमानदारी से ऋण चुकता किया। स्व-रोजगार की दिशा में कदम आगे बढ़ाते हुए उन्होंने दोबारा ऋण लिया और अब वे कपड़े का व्यवसाय भी सफलतापूर्वक संचालित कर रही हैं। हरमनिया बतातीं हैं कि, बिहान ने हमें सिखाया कि कैसे छोटे-छोटे कदमों से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।आर्थिक मजबूती का सबसे बड़ा प्रभाव उनके बच्चों के भविष्य पर पड़ा है। हरमनिया देवी गर्व से बताती हैं कि एक समय था जब मैं बच्चों को सामान्य शिक्षा दिलाने में भी असमर्थ थी, लेकिन आज मेरी आमदनी इतनी अच्छी है कि मेरे बच्चे बिलासपुर जैसे बड़े शहर में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मैं बिना किसी परेशानी के उनकी फीस समय पर भर पा रही हूँ।हरमनिया देवी ने अपनी सफलता का श्रेय प्रदेश और केंद्र सरकार की नीतियों को देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका मानना है कि इस योजना ने ग्रामीण महिलाओं को घर की चारदीवारी से निकालकर लखपति दीदी बनने और समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने का कार्य किया है।शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं से आज हरमानिया जैसी हजारों महिलाएँ बिहान के माध्यम से न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में भी शामिल होकर लखपति दीदी बन रही हैं।
- -ग्राम पंचायत बुड़ार में स्वच्छता की अलख जगाकर बनीं प्रेरणा स्रोतरायपुर । महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प हो, एकता हो और समाज के लिए कुछ करने की भावना हो, तो सकारात्मक परिवर्तन अवश्य लाया जा सकता है। आज कोरिया जिले के अंजनि, हीरा मनी, लीलावती और मित्तल अपने गाँव में स्वच्छता की एक मिसाल बन चुकी हैं और अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं। इनका यह कार्य स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनकी मेहनत यह संदेश देती है कि संकल्प, सहयोग और निरंतर प्रयास से गाँव को स्वच्छ और सुंदर बनाया जा सकता है।कोरिया जिले में जनपद बैकुंठपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बुडार की चार महिलाएँ अपने अथक समर्पण, मेहनत और एकजुटता के कारण पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। ग्राम पंचायत में रहने वाली श्रीमती अंजनि, हीरा मनी, लीलावती और मित्तल ने ग्राम पंचायत में प्रेरणा का एक नया माहौल बनाया है। ये महिलाएँ पिछले लगभग तीन वर्षों से स्वच्छता दीदी के रूप में लगातार कार्य कर रही हैं और गाँव को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।स्वच्छता दीदी बनकर ये महिलाएँ सप्ताह में दो दिन बुधवार और शनिवार को गाँव के घर-घर जाकर कचरा संग्रहण का कार्य करती हैं तथा ग्रामीणों को स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूक करती हैं। वे लोगों को समझाती हैं कि गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखने से गाँव स्वच्छ रहता है और कचरे का सही प्रबंधन संभव होता है।कार्य के प्रारंभिक दिनों में इन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। गाँव के बहुत से लोग कचरा अलग-अलग देने के लिए तैयार नहीं थे और स्वच्छता के प्रति जागरूकता भी कम थी। लेकिन इन महिलाओं ने धैर्य, मेहनत और निरंतर प्रयास से घर-घर जाकर लोगों को समझाया। धीरे-धीरे ग्रामीणों की सोच में सकारात्मक बदलाव आया और अब गाँव के प्रत्येक रहवासी नियमित रूप से कचरा देने लगे हैं। जिससे गांव में स्वच्छता का माहौल बना है। श्रीमती अंजनि, हीरा मनी, लीलावती और मित्तल ने बताया कि प्रशासन के सहयोग से उन्हें कबाड़ी का काम करने वाले व्यवसायी से भी जोड़ा गया, जिससे वे सूखे कचरे जैसे प्लास्टिक, कागज और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर रही हैं। इस कार्य से प्रत्येक महिला को लगभग 2 से 3 हजार रुपए प्रति माह की आय प्राप्त होती है। अब तक ये चारों महिलाएँ मिलकर लगभग 2.5 लाख से अधिक की आय अर्जित कर चुकी हैं, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और उनमें आत्मनिर्भरता की भावना भी बढ़ी है। इन महिलाओं की सबसे बड़ी ताकत उनकी आपसी एकता और संगठन है, जिसके कारण वे मिल-जुलकर अपने कार्य को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रही हैं।इनके लगातार प्रयासों और उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा इन महिलाओं को एक ई-रिक्शा भी प्रदान किया गया है, जिससे उन्हें कचरा संग्रहण के कार्य में काफी सुविधा मिल रही है। इस ई-रिक्शा के माध्यम से अब वे आसानी से घर-घर से कचरा एकत्र कर पाती हैं और अपने कार्य को और अधिक प्रभावी तरीके से कर रही हैं। इन महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के सुशासन से हम महिलाएं सशक्त हुई हैं।
- रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में सफल छत्तीसगढ़ के अभ्यर्थियों से वीडियो कॉल के माध्यम से संवाद कर उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस दौरान खरसिया (रायगढ़) निवासी श्री रौनक अग्रवाल, रायपुर निवासी श्री संजय डहरिया, धमतरी जिले के परसवानी निवासी श्री डायमंड सिंह ध्रुव तथा एमसीबी जिले के जनकपुर निवासी सुश्री दर्शना सिंह से बातचीत की।मुख्यमंत्री श्री साय ने उनके परिवारजनों से भी संवाद करते हुए इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आप सभी युवाओं ने अपनी मेहनत, लगन और धैर्य के बल पर प्रतिष्ठित यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। आपकी यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और यह संदेश देती है कि निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण से किसी भी ऊँचाई को प्राप्त किया जा सकता है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ से युवाओं का सिविल सेवा में चयन होना प्रदेश के लिए गौरव की बात है। इससे यह सिद्ध होता है कि छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और हमारे युवा अपने परिश्रम के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी सफल अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के सपनों को नई ऊर्जा और दिशा देने वाली प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये सभी प्रतिभाशाली युवा प्रशासनिक सेवाओं में रहते हुए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जनसेवा करेंगे तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
- -कड़ी मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं : मुख्यमंत्री विष्णु देव सायरायपुर । संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 35वीं रैंक प्राप्त करने वाली सुश्री वैभवी अग्रवाल ने आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने सुश्री वैभवी को मिठाई खिलाकर उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुश्री वैभवी अग्रवाल ने अपनी प्रतिभा, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वैभवी की यह सफलता प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियाँ यह संदेश देती हैं कि लक्ष्य के प्रति समर्पण,अनुशासन और निरंतर प्रयास से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सुश्री वैभवी अग्रवाल भविष्य में प्रशासनिक सेवा में अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए देश और समाज की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगामी दायित्वों के लिए शुभकामनाएँ दीं।इस अवसर पर सुश्री वैभवी अग्रवाल के पिता श्री शीतल अग्रवाल और भाई श्री विनायक अग्रवाल उपस्थित थे।
- रायपुर/ रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री विश्वदीप के आदेशानुसार और नगर निगम जोन 8 जोन कमिश्नर श्रीमती राजेश्वरी पटेल के निर्देशानुसार रायपुर नगर निगम जोन क्रमांक 8 क्षेत्र अंतर्गत वीर सावरकर नगर वार्ड क्रमांक 1 क्षेत्र अंतर्गत जरवाय क्षेत्र में लगभग 1 एकड़ निजी भूमि पर की जा रही अवैध प्लाटिंग पर अज्ञात अवैध प्लाटिंगकर्त्ताओं द्वारा निर्मित अवैध मुरूम रोड को जेसीबी मशीन की सहायता से काटकर और वहाँ लगभग 12 प्लीन्थ लेवल तक किये गए अवैध निर्माणों को तोड़कर तत्काल कारगर रोक लगाने की कार्यवाही स्थल पर नगर निगम जोन 8 उपअभियंता श्री अबरार खान एवं नगर निगम जोन 8 नगर निवेश विभाग के अन्य सम्बंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में की.
- युवा शक्ति को नई उड़ान देगा ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026’ - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव सायमुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में दिए आवश्यक निर्देशबिलासपुर/ प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने और जनजातीय अंचलों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के उद्देश्य से ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026’ का आयोजन 25 मार्च से 06 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का आयोजन रायपुर, सरगुजा और बस्तर के खेल मैदानों में होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में खेल एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक लेकर इस महत्वपूर्ण आयोजन की तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि युवा ही देश और प्रदेश का भविष्य हैं। राज्य सरकार शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और खेल सहित हर क्षेत्र में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 न केवल वनांचल के खिलाड़ियों की प्रतिभाओं को पहचान देने का मंच बनेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी सिद्ध होगा।बैठक में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना, प्रदेश में खेल अधोसंरचनाओं की स्वीकृति एवं निर्माण, खेलो इंडिया की केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन, खेल अकादमियों की गतिविधियों, खेल अलंकरण, युवा महोत्सव और आगामी कार्ययोजना की भी समीक्षा की। उन्होंने विगत वर्षों में स्वीकृत वृहद एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल अधोसंरचना परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ की मेजबानी छत्तीसगढ़ को प्रदान की गई है। इस आयोजन में कुल 7 प्रतिस्पर्धात्मक और 2 प्रदर्शनात्मक खेल आयोजित किए जाएंगे। रायपुर में तीरंदाजी, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, स्वीमिंग और कबड्डी (डेमो), सरगुजा में कुश्ती एवं मलखम्ब (डेमो) तथा बस्तर में एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इस प्रतियोगिता में देश के लगभग 30 राज्यों से करीब 2500 खिलाड़ी और अधिकारी भाग लेंगे।मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि खेलो इंडिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। साथ ही मलखम्ब खिलाड़ियों को एक लाख रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी तथा अमेरिका गॉट टैलेंट में चयनित मलखम्ब खिलाड़ी अनतई पोटाई के अमेरिका आने-जाने का पूरा व्यय राज्य सरकार वहन करेगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक में एक लाख 65 हजार से अधिक युवाओं की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होकर शांति, विकास और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जनजातीय अंचलों में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं और राज्य सरकार इन प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि आने वाले समय में बस्तर और सरगुजा अंचल में भी ओलंपिक स्तर के खेल आयोजनों के माध्यम से राज्य की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, सचिव श्री राहुल भगत, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार और संचालक श्रीमती तनूजा सलाम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
- सरकारी योजनाओं से मिल रहा संबलबिलासपुर/अपने हौसलों और आत्मविश्वास की बदौलत आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है, अब न केवल शहरी महिलाएं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की नई राह मिली है जिससे वे अपना जीवन संवार रही है और अन्य महिलाओं के लिए मिसाल बन रही है। आज ग्रामीण और आदिवासी अंचलों की महिलाएं आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इन योजनाओं की बदौलत अब महिलाएं न केवल परिवार की जिम्मेदारियों को निभा रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त होकर समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं।जिले के कोटा विकासखंड के विचारपुर पंचायत के आश्रित ग्राम जुरेली की सुशीला बाई की जिंदगी में भी सरकारी योजना ने नई उम्मीद जगाई है। पहले सीमित आय के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना उनके लिए मुश्किल होता था, लेकिन स्व सहायता समूह से जुड़कर उन्हें न केवल आजीविका के साधन मिले हैं साथ ही आत्मविश्वास का भी संचार हुआ है। महतारी वंदन योजना से हर माह मिलने वाली 1000 रुपए की राशि ने भी उन्हें बड़ी राहत दी है। अब वे घर के जरूरी खर्चों के साथ बच्चों की जरूरतों को भी आसानी से पूरा कर पा रही हैं। इसी तरह ग्राम सिलपहरी की उर्वशी भानू भी इस योजना से लाभान्वित होकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं। वे बताती हैं कि यह राशि उनके लिए किसी सहारे से कम नहीं है और इससे बच्चों की पढ़ाई और घर के छोटे-मोटे खर्च पूरे करने में मदद मिलती है, साथ ही वे स्व सहायता समूह से जुड़कर टेंट का व्यवसाय भी कर रही हैं जिससे उनकी अपमदनी बढ़ी है।महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की एक प्रेरक कहानी बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रमतला की विजेता रामसनेही उर्फ अन्नू कोरी की है। उन्होंने रेशम और कोसा बीज उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। रमतला रेशम अनुसंधान एवं विकास केंद्र से प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर उन्होंने मात्र एक माह में 12 हजार कोसा बीज तैयार कर एक मिसाल कायम की। उनकी इस उपलब्धि के लिए केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा सम्मानित भी किया गया। इस कार्य से उन्हें लगभग 40 हजार रुपए की आय हुई, जिससे उन्होंने अपने परिवार को आर्थिक संबल दिया और बच्चों की शिक्षा व बेहतर भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाए। विजेता कोरी को प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्का घर मिला, महतारी वंदन योजना से हर माह आर्थिक सहायता मिल रही है और बच्चों को छात्रवृत्ति योजना का लाभ भी प्राप्त हो रहा है। इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना से जुड़े स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्होंने मछली पालन का कार्य भी शुरू किया है, जिससे उनकी आय के नए स्रोत बने हैं।इसी तरह मस्तूरी विकासखंड के ग्राम कर्रा में महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बिहान योजना के माध्यम से “बर्तन बैंक” की अनूठी पहल शुरू की है। गायत्री महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष गौरी यादव ने बताया कि पहले गांव में शादी-ब्याह और अन्य कार्यक्रमों में प्लास्टिक और थर्माकोल के डिस्पोजल का अधिक उपयोग होता था, जिससे गंदगी और पर्यावरण प्रदूषण काफी होता था , इसे देखते हुए महिलाओं ने सामूहिक रूप से स्टील के बर्तन खरीदकर बर्तन बैंक की शुरुआत की। अब गांव में होने वाले कार्यक्रमों के लिए ये बर्तन किराए पर उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे न केवल गांव में डिस्पोजल का उपयोग लगभग बंद हो गया है, बल्कि गांव का वातावरण भी स्वच्छ बना हुआ है। साथ ही बर्तन किराए से होने वाली आय से स्व सहायता समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।महिलाओं के हौसलों और सरकारी योजनाओं से मिले संबल से अब ग्रामीण महिलाओं का जीवन बदल रहा है और इस बदलाव से न केवल उनका जीवन संवर रह है बल्कि इस बदलाव का सकारात्मक प्रभाव परिवार समाज और देश पर भी पड़ रहा है, अब सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचकर महिलाओं का जीवन बेहतर बना रही हैं। महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, छात्रवृत्ति योजनाएं और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना जैसी पहल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है सरकारी योजनाओं के सहयोग और अपनी मेहनत ,हौसलों के दम पर ग्रामीण महिलाएं सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही हैं। इन योजनाओं से लाभान्वित महिलाएं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि सरकार की इन योजनाओं ने उन्हें सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है।























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