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नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को ‘विद्या वाहिनी’ योजना की शुरुआत करते हुए विभिन्न सरकारी स्कूलों की 9वीं कक्षा की 3,000 से अधिक छात्राओं को मुफ्त साइकिलें वितरित कीं। पूर्वी विनोद नगर स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली करीब 1.40 लाख छात्राओं को चरणबद्ध तरीके से मुफ्त साइकिलें उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान छात्राओं से बातचीत कर उनकी पढ़ाई, भविष्य की योजनाओं और सपनों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम नारी शक्ति का उत्सव है और शिक्षा के माध्यम से प्रत्येक बेटी को सशक्त बनाने के सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने छात्राओं से आत्मविश्वास और लगन के साथ पढ़ाई कर अपने लक्ष्यों को हासिल करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में छात्राओं ने मुख्यमंत्री को अपने हाथों से बनाई पेंटिंग भेंट की। मुख्यमंत्री ने उनकी रचनात्मकता और प्रतिभा की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विकसित भारत’ के विजन में महिला-नेतृत्व वाले विकास को केंद्र में रखा है और शिक्षा को महिलाओं के सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम बताया है। उन्होंने कहा कि ‘विद्या वाहिनी’ योजना इसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से छात्राओं का स्कूल आने-जाने का सफर सुरक्षित और सुविधाजनक होगा। इससे समय की बचत होगी, नियमित उपस्थिति बढ़ेगी, स्कूल छोड़ने की संभावना कम होगी और अभिभावकों की रोजमर्रा की चिंताएं भी घटेंगी।रेखा गुप्ता ने कहा कि साइकिल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि आजादी, आत्मविश्वास, सम्मान, आत्मनिर्भरता और अवसर का प्रतीक है। उन्होंने छात्राओं से साइकिल का जिम्मेदारी से उपयोग करने, यातायात नियमों का पालन करने और सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि ‘विद्या वाहिनी’ योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली की कमान एक महिला मुख्यमंत्री के हाथों में है, जो यह सुनिश्चित कर रही हैं कि लड़कियों की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहे। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री एवं दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, पटपड़गंज के विधायक रविंदर सिंह नेगी, शिक्षा एवं खेल निदेशक नितिन जिंदल, शिक्षक तथा अभिभावक भी उपस्थित रहे। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शहरी प्रशासन को अधिक प्रभावी और सक्षम बनाने के उद्देश्य से आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय का पुनर्गठन करते हुए इसे दो अलग-अलग विभागों में विभाजित किया है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य तथा विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने शुक्रवार को संसदीय परामर्शदात्री समिति की शहरी नियोजन विषयक बैठक में इसकी जानकारी दी।
आधिकारिक बयान के अनुसार, मंत्रालय के पुनर्गठन के तहत पूंजी विकास विभाग (Capital Development Department-CDD) और शहरी विकास विभाग (Department of Urban Development-DUD) का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य संस्थागत क्षमता को मजबूत करना, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और तेजी से बदलती शहरी आवश्यकताओं के अनुरूप शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।मनोहर लाल ने कहा कि मंत्रालय की सभी शहरी नियोजन संबंधी पहल का उद्देश्य रहने योग्य, आपदा-रोधी और नागरिक-केंद्रित शहरों का विकास करना है। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने और संतुलित शहरी विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी शहरी नियोजन, मजबूत शहरी प्रशासन, जल सुरक्षा और निरंतर क्षमता निर्माण आवश्यक है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार शहरी विकास के लिए समग्र दृष्टिकोण अपना रही है, जिसके तहत शहरी नियोजन, बुनियादी ढांचे का विकास, बेहतर प्रशासन और गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक सेवाओं को एकीकृत किया जा रहा है। इन प्रयासों का लक्ष्य नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार करना तथा पर्यावरण के अनुकूल, आर्थिक रूप से सशक्त और आधुनिक तकनीक से लैस शहरों का विकास करना है।मनोहर लाल ने कहा कि भारत के शहरों का भविष्य बेहतर बनाने के लिए सहयोगात्मक नीति निर्माण और रचनात्मक संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों की भागीदारी से शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी।बैठक के दौरान संसदीय परामर्शदात्री समिति के सदस्यों ने शहरी नियोजन और प्रशासन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने सुझाव रखे। केंद्रीय मंत्री ने इन सुझावों का स्वागत करते हुए भरोसा दिलाया कि मंत्रालय की योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।बैठक में पूंजी विकास विभाग की सचिव डी. थारा ने मंत्रालय की शहरी नियोजन संबंधी पहलों और सतत शहरी विकास के रोडमैप पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इस अवसर पर सांसद टोखन साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने के लिए मंत्रालय योजनाबद्ध, टिकाऊ और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शहरी विकास को लगातार बढ़ावा दे रहा है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संशोधित ‘खेलो इंडिया’ योजना और राष्ट्रीय खेल महासंघों (ANSFs) को बढ़ी हुई वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए इन योजनाओं पर 36,441 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार ने इसे आजादी के बाद देश का सबसे महत्वाकांक्षी खेल विकास कार्यक्रम बताया है।सरकार के अनुसार, संशोधित खेलो इंडिया योजना का बजट पिछली योजना की तुलना में करीब आठ गुना बढ़ाया गया है। इसका उद्देश्य देशभर की खेल प्रतिभाओं को स्कूल और गांव स्तर से लेकर ओलंपिक तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत और एकीकृत खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।
यह योजना ‘खेलो भारत नीति-2025’ और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तैयार की गई है। इसके तहत खेलों को शिक्षा, फिटनेस, तकनीक और उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। साथ ही वर्ष 2030 राष्ट्रमंडल खेलों और भारत की ओलंपिक एवं पैरालंपिक मेजबानी की महत्वाकांक्षा को भी समर्थन मिलेगा।पहली बार खिलाड़ियों के लिए प्रतिभा पहचान से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और ओलंपिक तैयारी तक एक समग्र विकास प्रणाली बनाई गई है। इसके तहत नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE), खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (KICoE), SAI ट्रेनिंग सेंटर, खेलो इंडिया मान्यता प्राप्त अकादमियां (KIAA), खेलो इंडिया सेंटर (KIC) और सशस्त्र बलों की यूथ स्पोर्ट्स कंपनियां (YSC) मिलकर खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और खेल विज्ञान सुविधाएं उपलब्ध कराएंगी।स्कूल स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए खेलो इंडिया फीडर स्कूल (KIFS) और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय (KIUV) जैसी नई पहल भी शुरू की जाएगी।योजना के तहत ‘इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट्स (E-KIA)’ श्रेणी शुरू की जाएगी। इससे संगठित खिलाड़ी विकास प्रणाली का दायरा लगभग 10 गुना बढ़ेगा और हजारों नए खिलाड़ियों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, कोचिंग और दीर्घकालिक मार्गदर्शन मिलेगा।योजना के तहत स्कूल, विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय और विभिन्न खेलों की लीग तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं को प्रोत्साहन दिया जाएगा। महिलाओं, पैरा-एथलीटों, स्वदेशी खेलों और सामुदायिक विकास में खेलों की भूमिका पर विशेष जोर रहेगा।सरकार फिट इंडिया अभियान का भी विस्तार करेगी, ताकि युवाओं में फिटनेस, महिला भागीदारी, सीमावर्ती क्षेत्रों में खेल गतिविधियों और नशा मुक्ति जैसे अभियानों को बढ़ावा मिल सके।योजना के तहत नेशनल कोच एक्रेडिटेशन बोर्ड (NCAB) की स्थापना की जाएगी, जिससे कोचों के प्रशिक्षण और गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही खिलाड़ियों, खेल अवसंरचना, प्रतियोगिताओं, फंडिंग और फिट इंडिया कार्यक्रमों को जोड़ने वाला एक एकीकृत डिजिटल स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म भी विकसित किया जाएगा।सरकार ने राष्ट्रीय खेल महासंघों (ANSFs) के लिए भी 2026-31 की अवधि हेतु वित्तीय सहायता बढ़ाने को मंजूरी दी है। इसके तहत खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय कोचिंग, खेल विज्ञान, आधुनिक उपकरण, विदेशी विशेषज्ञों की सेवाएं, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर और वैश्विक प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए सहायता दी जाएगी। साथ ही वैश्विक दक्षिण (Global South) देशों के साथ खेल सहयोग और भारतीय पारंपरिक खेलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जाएगा।सरकार का कहना है कि संशोधित खेलो इंडिया योजना केवल एक खेल कार्यक्रम नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में युवाओं को सशक्त बनाने वाला राष्ट्रीय मिशन है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस अवधि के लिए सरकार ने 3.15 लाख करोड़ रुपए के वित्तीय प्रावधान को स्वीकृति दी है। यह फैसला किसानों की आय बढ़ाने, कृषि निवेश को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एक आधिकारिक बयान में सरकार ने बताया कि इस योजना ने तकनीक-आधारित किसान कल्याण का एक सफल मॉडल स्थापित किया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और सहायता राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है।फरवरी 2019 में शुरू की गई पीएम-किसान योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर वर्ष 6,000 रुपए की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। यह पूरी प्रक्रिया डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी), आधार प्रमाणीकरण और डिजिटल सत्यापन के जरिए पारदर्शी तरीके से संचालित की जाती है।सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पीएम-किसान योजना के तहत अब तक 23 किस्तों के माध्यम से 4.47 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। योजना की 23वीं किस्त के तहत 9.49 करोड़ से अधिक किसानों को 18,984 करोड़ रुपए जारी किए गए। वहीं, कोविड-19 महामारी के दौरान किसानों को राहत देने के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपए से अधिक की सहायता प्रदान की गई।पीएम-किसान योजना का लाभ महिला किसानों तक भी बड़े पैमाने पर पहुंचा है। अब तक 1.06 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि महिला किसानों को दी जा चुकी है। सरकार के अनुसार, योजना के कुल लाभार्थियों में लगभग हर चौथा लाभार्थी महिला किसान है।सरकार का कहना है कि पीएम-किसान के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता से किसानों को समय पर बीज, उर्वरक, सिंचाई, कृषि मशीनरी और अन्य कृषि जरूरतों पर निवेश करने में मदद मिली है। इससे किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ी है, अनौपचारिक कर्ज पर निर्भरता कम हुई है और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।नीति आयोग के डेवलपमेंट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिस (डीएमईओ) द्वारा किए गए स्वतंत्र मूल्यांकन में भी योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।अध्ययन के अनुसार, 92 प्रतिशत से अधिक किसानों ने बताया कि उन्होंने सहायता राशि का उपयोग कृषि कार्यों और कृषि निवेश में किया। वहीं, करीब 85 प्रतिशत लाभार्थियों ने माना कि उनकी कृषि आय में सुधार हुआ और अनौपचारिक स्रोतों से कर्ज लेने की जरूरत कम हुई।सरकार के अनुसार, वर्ष 2020-21 से 2025-26 के दौरान कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई। इस अवधि में खेती का रकबा लगभग 9.65 प्रतिशत, उत्पादकता 10.53 प्रतिशत और कुल खाद्यान्न उत्पादन 21.18 प्रतिशत बढ़ा। सरकार का मानना है कि पीएम-किसान जैसी योजनाओं ने कृषि क्षेत्र को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।पीएम-किसान योजना को सरकार ने डिजिटल इंडिया की एक सफल पहल बताया है। आधार आधारित प्रमाणीकरण, डिजिटल लाभार्थी सत्यापन और डीबीटी प्रणाली के माध्यम से सहायता राशि सीधे किसानों के खातों में पहुंचाई जा रही है। सरकार के अनुसार, यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों में आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और कृषि निवेश की क्षमता भी बढ़ा रही है। सरकार का कहना है कि योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने से किसानों की निवेश क्षमता और उत्पादकता में वृद्धि होगी, कृषि जोखिम कम होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। पीएम-किसान योजना सरकार की किसान-केंद्रित नीतियों का एक प्रमुख स्तंभ है, जिसका उद्देश्य करोड़ों अन्नदाताओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को गति देना है। -
नई दिल्ली। उत्तराखंड के चमोली में लगातार हो रही बारिश के कारण बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग एक बार फिर बंद हो गया है। जिले में पागल नाला के पास पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने से सड़क पूरी तरह बाधित है। इसकी वजह से दर्जनों वाहन बीच रास्ते में फंस गए हैं।
जानकारी के अनुसार रातभर हुई तेज बारिश के बाद पहाड़ी से अचानक मलबा और बोल्डर नीचे आ गए। इससे एनएच-7 पर आवाजाही रोकनी पड़ी। यह 373 किलोमीटर लंबा पहाड़ी मार्ग ऋषिकेश और जोशीमठ को बद्रीनाथ धाम और माणा पास से जोड़ता है। मानसून में यहां अक्सर मलबा आने से रास्ता बंद होता रहता है।रास्ता बंद होने से बद्रीनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई वाहन घंटों तक एक ही जगह खड़े हैं। प्रशासन ने लोगों से अपेक्षा की है कि वे मौसम साफ होने और सड़क सुरक्षित घोषित होने तक यात्रा न करें।सड़क खोलने के लिए बीआरओ और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। जेसीबी और अन्य भारी मशीनों से मलबा हटाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हालात सामान्य होते ही यातायात बहाल कर दिया जाएगा। स्थानीय प्रशासन ने ट्रैवल एडवाइजरी भी जारी की है। इसमें कहा गया है कि पहाड़ों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है, इसलिए जरूरी न हो तो यात्रा टाल दें। ड्राइवरों से सुरक्षित जगह पर वाहन खड़ा करने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। हर साल मानसून में इस हाईवे पर मलबा और भूस्खलन की समस्या होती है। बीआरओ की टीमें लगातार इसे साफ करती हैं। -
नयी दिल्ली. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा को दो सौ से अधिक शिक्षाविदों ने एक खुला पत्र लिखकर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि को निशाना बनाते हुए की गई उनकी 'गौ मूत्र विशेषज्ञ' वाली टिप्पणी पर आपत्ति जताई है। पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 215 शिक्षाविदों के अनुसार किसी मुद्दे पर तर्कपूर्ण संवाद की जगह उपहास को नहीं अपनाया जा सकता। हस्ताक्षर करने वालों में कुलपति और पूर्व कुलपति भी शामिल हैं। पत्र में कहा गया, ''आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को 'गौमूत्र विशेषज्ञ' बताए जाने संबंधी आपकी कथित टिप्पणी पर निराशा व्यक्त करने के लिए हम यह पत्र लिख रहे हैं। चाहे यह व्यंग्य के रूप में की गई हो या राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर, इस तरह का वर्णन चिंताएं पैदा करता है। प्रोफेसर कामकोटि भारत के प्रमुख वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों में से एक के प्रमुख हैं।'' पत्र में कहा गया, ''हर शिक्षाविद की तरह उन्हें भी परिकल्पनाएं पेश करने, पारंपरिक ज्ञान पर चर्चा करने और वैज्ञानिक संवाद में भाग लेने का अधिकार है।'' पत्र में कहा गया, ''किसी विद्वान के विचारों के सार पर चर्चा करने के बजाय केवल एक ठप्पा लगाकर उसे खारिज करना उस वैज्ञानिक दृष्टिकोण को कमजोर करने का खतरा पैदा करता है, जिसे विकसित करना संविधान प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बताता है।'' पत्र में कहा गया, ''वैज्ञानिक दृष्टिकोण का मतलब केवल असामान्य विचारों के प्रति संदेह रखना नहीं है, बल्कि किसी दावे को स्वीकार करने या खारिज करने से पहले उसका निष्पक्ष रूप से परीक्षण करने की इच्छाशक्ति भी है।'' पद्म पुरस्कार से सम्मानित कामकोटि नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार की ओर से गठित छह सदस्यीय परीक्षा सुधार कार्यबल के सदस्य हैं। मंगलवार को लोकसभा में प्रियंका गांधी ने कहा था, ''उन्हें (प्रधानमंत्री को) यह समझने की जरूरत है कि केवल नयी समितियां गठित करने से काम नहीं चलेगा।'' उन्होंने कहा, ''अब तक राधाकृष्णन समिति की एक भी सिफारिश लागू नहीं की गई है। वहीं, नयी समिति में एक पूर्व आईबी प्रमुख, एक आईटी कंपनी के मालिक और एक 'गौमूत्र' विशेषज्ञ को भी शामिल किया गया है।''
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नोएडा (उप्र). नोएडा में सेक्टर-21 के जलवायु विहार में रहने वाले 73 वर्षीय व्यक्ति से शेयर बाजार में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर 2.35 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई है। पुलिस उपायुक्त (साइबर अपराध) शैव्या गोयल ने बताया कि पीड़ित आनंद ने बुधवार रात साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज करायी कि जून में व्हाट्सऐप के माध्यम से उनसे संपर्क कर शेयर बाजार में निवेश का झांसा दिया गया। केवाईसी कराने और एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कराने के बाद आरोपियों ने उन्हें रियायती दर पर आईपीओ में निवेश का लालच दिया। शिकायत में कहा गया है कि 15 जून से 21 जुलाई के बीच उन्होंने विभिन्न बैंक खातों में कुल 2,35,51,136 रुपये हस्तांतरित कर दिए। ऐप पर निवेश की राशि छह करोड़ रुपये से अधिक दिखाई गई। जब उन्होंने 1.85 करोड़ रुपये निकालने का प्रयास किया तो आरोपियों ने कर के नाम पर 62.51 लाख रुपये और जमा करा लिए तथा बाद में 37 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एक अन्य मामले में सेक्टर-50 निवासी विनोद कुमार यादव ने शिकायत दर्ज कराई कि उनकी अनुमति के बिना 'जियोमार्ट' पर उनके क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर 7,10,499 रुपये की खरीदारी कर ली गई। उन्होंने किसी के साथ ओटीपी, कार्ड विवरण या अन्य बैंकिंग जानकारी साझा नहीं की थी। डीसीपी ने बताया कि घटना की रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
गोयल ने बताया कि अन्य मामले में बीती रात को 58 वर्षीय सपना बाग ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके बैंक खाते से बिना अनुमति के 18,55,867 रुपये निकाल लिए गए। उनका कहना है कि उन्होंने किसी के साथ ओटीपी, पिन या बैंकिंग विवरण साझा नहीं किया और आशंका जताई कि उनका मोबाइल फोन हैक कर लेनदेन किया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। -
नयी दिल्ली. भारत के प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ, ईरान के आलमूत महल और संबंधित किला तथा जॉर्डन के अकाबा समुद्री संरक्षित क्षेत्र सहित 25 स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। इन 25 स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का फैसला दक्षिण कोरिया के बुसान में 19 से 29 जुलाई तक आयोजित विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र के दौरान लिया गया। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित सारनाथ को 25 जुलाई को इस सूची में शामिल किया गया। यूनेस्को ने एक बयान में कहा, ''यह सत्र तीन अफ्रीकी देशों कोमोरोस, साओ टोमे एवं प्रिंसिपे और दक्षिण सूडान के लिए भी ऐतिहासिक रहा, क्योंकि पहली बार इन देशों के किसी स्थल को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। इससे अधिक संतुलित और प्रतिनिधित्वपूर्ण सूची बनाने की संगठन की प्रतिबद्धता भी दिखाई देती है।'' बयान में कहा गया कि समिति ने छह स्थलों को संकटग्रस्त विश्व धरोहरों की सूची में भी शामिल किया। इसके अनुसार, इन स्थानों के असाधारण महत्व और इनके संरक्षण की जरूरत को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया है। सूची में शामिल किये गए नए स्थलों में जापान की पुरानी राजधानियां असुका और फुजिवारा, उज्बेकिस्तान का ताशकंद मॉडर्निस्ट आर्किटेक्चर, साओ टोमे और प्रिंसिपे के 'रोकास' (औपनिवेशिक कृषि प्रणाली और जबरन विस्थापन), और यूनान के माउंट ओलंपस का बड़ा हिस्सा है। यूनेस्को ने 28 जुलाई को जारी बयान में कहा कि इन 25 नयी प्रविष्टियों के साथ अब विश्व धरोहर सूची में शामिल स्थलों की संख्या 1,273 हो गई है जो 173 देशों में अवस्थित हैं। सूची में शामिल इन स्थलों को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च मान्यता और संरक्षण का लाभ मिलेगा। समिति ने आपसी संवाद और सहमति के आधार पर विश्व धरोहर सूची में 25 नये स्थलों को शामिल किया। इनमें 19 सांस्कृतिक, पांच प्राकृतिक और एक मिश्रित स्थल है। इसके अलावा पहले से सूचीबद्ध दो स्थलों के दायरे का विस्तार करने को भी मंजूरी दी गई, जिनमें मेजबान देश दक्षिण कोरिया का गेटबोल, कोरियाई ज्वारीय मैदान (चरण 2) भी शामिल है। विश्व धरोहर समिति ने ऑस्ट्रिया के वियना के ऐतिहासिक केंद्र को खतरे में पड़ी विश्व धरोहरों की सूची से हटाने का भी निर्णय लिया। विश्व धरोहर समिति का अगला सत्र वर्ष 2027 में तुर्किये के इस्तांबुल में आयोजित किया जाएगा।
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गुवाहाटी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य में घुसपैठ के खिलाफ जारी अभियान के तहत 18 विदेशी नागरिकों को भारत में प्रवेश करने से रोका गया है। शर्मा ने बुधवार रात सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "असम की सुरक्षा और पहचान को कमजोर करने के लिए घुसपैठ की अनुमति नहीं दी जाएगी। हमारी निरंतर कार्रवाई के तहत इन 18 घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं।" हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह जानकारी साझा नहीं की कि इन लोगों को किस स्थान से पकड़ा गया और वे किस देश के नागरिक हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी कड़ी निगरानी और कार्रवाई चौबीसों घंटे जारी है।"
असम के श्रीभूमि, कछार, धुबरी और दक्षिण सलमारा-मनकाचर जिले बांग्लादेश के साथ 267.5 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। बांग्लादेश में 2024 में राजनीतिक उथल-पुथल के बाद असम पुलिस ने कहा था कि राज्य पुलिस बल पड़ोसी देश से भारत में अवैध प्रवेश रोकने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के साथ मिलकर कानून के तहत सभी आवश्यक कदम उठाएगा। -
नयी दिल्ली. राज्यसभा में बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी के एक सदस्य ने 'वन नेशन वन डिजिटल मेट्रो कार्ड' की मांग करते हुए कहा कि यह समय की मांग है और इससे यात्रियों को कई तरह की सुविधाएं मिल सकेंगी। शून्यकाल में भारतीय जनता पार्टी के सुरेन्द्र सिंह नागर ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क है। उन्होंने कहा '' आज देश में 1090 किलोमीटर मेट्रो नेटवर्क करीब 24 शहरों में तैयार हो चुका है और इतना ही निर्माणाधीन है। 2026-27 के बजट में मेट्रो परियोजना के लिए 28 हजार 740 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा आवंटन किया गया।'' उन्होंने कहा कि इस सफलता के साथ एक नयी चुनौती भी है। मेट्रो यात्रियों के लिए मेट्रो कार्ड जारी किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि हर शहर अपने यहां नया मेट्रो कार्ड जारी करता है, ये कार्ड प्लास्टिक के होते हैं और एक शहर का कार्ड दूसरे शहर में नहीं चलता। मेट्रो यात्रियों के लिए डिजिटल मेट्रो कार्ड जारी करने की मांग करते हुए नागर ने कहा कि इससे पर्यावरण को भी फायदा होगा क्योंकि मेट्रो कार्ड में चिप और एंटीना लगा होने की वजह से इसकी रिसाइकिलिंग नहीं हो पाती तथा इससे कार्बन भी उत्पन्न होता है। ''डिजिटल मेट्रो कार्ड जारी होने पर यह समस्या नहीं होगी।'' उन्होंने कहा कि डिजिटल मेट्रो कार्ड मोबाइल फोन से संबद्ध होगा अत: इसके गुम होने से पूरी बैलेंस राशि का नुकसान नहीं होगा। ''अभी मेट्रो कार्ड गुम होने से उसकी पूरी बैलेंस राशि भी चली जाती है। कार्ड ब्लॉक भी नहीं किया जा सकता क्योंकि इसकी सुविधा नहीं है। डिजिटल कार्ड होने पर यह समस्या नहीं होगी''
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द्रास/नयी दिल्ली. कारगिल की चोटियों पर वर्ष 1999 में मोर्चा बनाकर बैठे दुश्मनों के खिलाफ वायुसेना द्वारा शुरू किये गए 'ऑपरेशन सफेद चादर' में सटीक लेज़र-निर्देशित बम से लैस मिराज 2000 जेट लड़ाकू विमान, साथ ही मिग-21 और मिग-27 ने दुश्मनों को ''निर्णायक और करारी चोट'' पहुंचाई और रणनीतिक ऊंचाइयों से उन्हें तेजी से पीछे हटने के लिए मजबूर किया। वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। 'ऑपरेशन सफेद सागर' के तहत, भारतीय वायु सेना ने पहली बार दुश्मन को निशाना बनाने के लिए सटीक मार करने वाले बमों का इस्तेमाल किया था। देश ने 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ मनाई। इस मौके पर द्रास स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने वाले कई पूर्व सैनिकों ने हिस्सा लिया, इनमें भारतीय वायु सेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल थे। इसके अलावा, एक नयी वेब-सीरीज़ 'ऑपरेशन सफ़ेद सागर: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ द कारगिल वॉर' का प्रीमियर भी सात अगस्त को होना है जो उस समय के 'गोल्डन एरोज़' स्क्वाड्रन की कहानी दिखाती है। भारतीय वायुसेना के प्रवक्ता विंग कमांडर जयदीप सिंह ने 'पीटीआई-भाषा'को बताया, ''ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान, रणनीतिक ऊंचाइयों पर मौजूद घुसपैठियों को हटाने के लिए वायुसेना को हवाई मदद की जिम्मेदारी दी गई। हमला बहुत ज़्यादा ऊंचाई पर मौजूद दुश्मन पर किया गया। यह दुनिया भर में उस समय हवाई ताकत का इस्तेमाल करने वाली सबसे ऊंची जगहों में से एक थी।'' विंग कमांडर सिंह ने कहा कि वायुसेना ने मिग-21, मिग-27 और मिराज-2000 विमानों का इस्तेमाल किया, जो सटीक निशाना लगाने वाले लेज़र निर्देशित बम से लैस थे। उन्होंने कहा कि इन लड़ाकू विमानों ने ''दुश्मन को निर्णायक और करारी शिकस्त दी, जिससे कारगिल की उन ऊंचाइयों से उनके पीछे हटने की प्रक्रिया तेज़ हो गई।'' अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा, वायुसेना के हेलीकॉप्टर ने ज़रूरी मदद दी और घायलों को निकालने में सहायता की, जबकि परिवहन विमानों ने अग्रिम हवाई पट्टियों तक साजो-सामान पहुंचाया। द्रास स्मारक के प्रांगण में वायुसेना का एक पुराना मिग-21 विमान प्रदर्शित किया गया है।
विमान के पास लगी एक पट्टिका पर लिखा है, ''यहां प्रदर्शित मिग-21 विमान बठिंडा के किल्ली भिसियाना एयरबेस पर मौजूद 'गोल्डन एरोज़' (स्क्वाड्रन नंबर 17) का हिस्सा था। इस स्क्वाड्रन की कमान स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा के पास थी, जिन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया और उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया।'' वायुसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी और कारगिल युद्ध में भूमिका निभाने वाले ग्रुप कैप्टन संजय मिश्रा ने 26 जुलाई को द्रास स्मारक में 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत के दौरान उन दिनों को याद किया जब वह 'गोल्डन एरोज़' स्क्वाड्रन का हिस्सा थे। मिश्रा ने 'पीटीआई-भाषा'को बताया, ''वहां (लॉन में) जो विमान आप देख रहे हैं, वही विमान मैंने लगभग 15 साल तक उड़ाया था। उसका टेल नंबर सी 1538 था।'' उन्होंने कहा, ''सेवानिवृत्ति के बाद मुझे अपने ठीक पीछे (द्रास स्मारक के) तोलोलिंग पहाड़ी पर चढ़ने का मौका मिला। वहां से मुझे एहसास हुआ कि तोलोलिंग की लड़ाई कितनी मुश्किल थी, क्योंकि दुश्मन ऐसी ऊंचाई पर बैठा था जिसका उसे सामरिक लाभ मिल रहा था। फिर भी, बहादुर सैनिकों ने लड़ाई लड़ी और हमें जीत दिलाई।'' आने वाली वेब-सीरीज़ 'ऑपरेशन सफ़ेद सागर' में स्क्वाड्रन लीडर आहूजा की भूमिका को भी प्रमुखता से दर्शाया गया है। उस इलाके में दुश्मन की 'सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल' (एसएएम) के खतरे की जानकारी होने के बावजूद, जब आहूजा दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान के एक पायलट का पता लगाने की कोशिश कर रहे थे, तब उनके विमान को दुश्मन की कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइल (एसएएम) ने निशाना बनाया था। कारगिल युद्ध के दौरान बर्फ से ढंकी पहाड़ियों पर लड़ी गई लड़ाइयों में वायुसेना के मिराज 2000 विमानों ने अहम भूमिका निभाई। इन्होंने जून 1999 में मुंथो ढालो में सफलता हासिल करने के अलावा टाइगर हिल पर बंकर बनाकर छिपे दुश्मन के ठिकानों को भी निशाना बनाया। वायुसेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने जून 2019 में ग्वालियर में हुए एक कार्यक्रम में कहा था कि मिराज 2000 लड़ाकू विमानों को तैनात करने और ज़मीनी सेना को हवाई मदद देने से 1999 के युद्ध का पासा भारत के पक्ष में पलट गया था। धनोआ स्वयं युद्ध के समय 17 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर थे। - नयी दिल्ली. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण तभी लागू होगा, जब अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में लाभ मिले। गोयल ने कहा कि जब तक भारत को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर या कम से कम समान शुल्क का लाभ मिलता रहेगा, तब तक भारत, अमेरिका को अपना निर्यात बढ़ाता रहेगा और वहां उपलब्ध विशाल बाजार के अवसरों का लाभ उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत ने धारा 301 के तहत बंधुआ मजदूरी से जुड़े मामलों की अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) की जांच प्रक्रिया में भाग लिया था।इस जांच के तहत अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया है। गोयल ने संवाददाताओं से कहा, ''तीन फरवरी को दोनों देशों के नेताओं द्वारा घोषित व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा चुका है। मैं कई बार स्पष्ट रूप से यह भरोसा जता चुका हूं कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण को तभी लागू किया जाएगा जब अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों, पड़ोसी देशों, आसियान क्षेत्र के देशों तथा अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिले।'' उन्होंने कहा कि यही इस समझौते के पहले चरण का मूल आधार है और जैसे ही यह आधार फिर से स्थापित होगा, भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता लागू करने के लिए तैयार होगा। गोयल ने कहा, ''जब तक भारत को प्रतिस्पर्धी बढ़त या कम से कम प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर शुल्क दरें मिलती रहेंगी, तब तक भारत, अमेरिका को अपना निर्यात बढ़ाता रहेगा और वहां उपलब्ध विशाल बाजार के अवसरों का लाभ उठाता रहेगा।''
- जयपुर. सोशल मीडिया पर मिलने वाले 'लाइक्स', 'व्यूज' और 'कमेंट' अब जेनरेशन-जेड के लिए केवल डिजिटल प्रतिक्रिया नहीं रह गए हैं, बल्कि वे खुशी, लोकप्रियता और आत्म-मूल्यांकन का पैमाना बनते जा रहे हैं। एक समाजशास्त्रीय अध्ययन में सामने आया है कि कई युवा महिलाएं अपनी पोस्ट पर अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर चिंता, अस्वीकृति की भावना और अकेलेपन का अनुभव करती हैं। कोटा के राजकीय कला कन्या महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की प्रोफेसर डॉ. ज्योति सिडाना के नेतृत्व में किए गए 25 दिवसीय अध्ययन में यह तथ्य सामने आए हैं। अध्ययन में विभिन्न महाविद्यालयों की 141 स्नातक और स्नातकोत्तर छात्राओं को शामिल किया गया। इसका उद्देश्य डिजिटल निर्भरता के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रभावों को समझना था।अध्ययन के अनुसार, 82.9 प्रतिशत छात्राओं ने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट पर मिलने वाले लाइक्स और कमेंट की संख्या सीधे तौर पर उनके मूड को प्रभावित करती है। वहीं, 9.8 प्रतिशत ने माना कि यह प्रभाव कुछ हद तक होता है, जबकि केवल 7.3 प्रतिशत छात्राओं ने कहा कि ऑनलाइन प्रतिक्रिया का उनकी भावनात्मक स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ता। डॉ. सिडाना ने कहा, ''आज की पीढ़ी के लिए लाइक्स और व्यूज केवल संख्या नहीं रह गए हैं। वे लोकप्रियता, पहचान और सामाजिक स्वीकार्यता का पैमाना बन चुके हैं।'' उन्होंने कहा, ''जब किसी पोस्ट को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलती तो कई युवा खुद को दूसरों की तुलना में कम स्वीकार्य या कम महत्वपूर्ण महसूस करने लगते हैं। दूसरों की सफल पोस्ट से लगातार तुलना करने की प्रवृत्ति हीन भावना, चिंता और निराशा को बढ़ा सकती है।''अध्ययन में यह भी सामने आया कि 61 प्रतिशत छात्राओं ने कहा कि सोशल मीडिया पर हजारों फॉलोअर्स होने के बावजूद वे वास्तविक जीवन में अकेलापन महसूस करती हैं। छात्राओं का कहना था कि ऑनलाइन संबंधों में अक्सर भावनात्मक गहराई की कमी होती है और वे भरोसे, अपनापन तथा भावनात्मक सहयोग पर आधारित आमने-सामने के रिश्तों का स्थान नहीं ले सकते। डॉ. सिडाना ने कहा कि कई युवा यह महसूस करते हैं कि वास्तविक जीवन में लोगों के साथ बातचीत से मिलने वाली संतुष्टि अधिक स्थायी होती है, जबकि आभासी रिश्ते उतना भावनात्मक सहारा नहीं दे पाते। उन्होंने कहा, ''सोशल मीडिया थोड़े समय के लिए खुशी दे सकता है, लेकिन ऑनलाइन बने रिश्ते मुश्किल समय में साथ नहीं खड़े हो सकते और न ही वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। यही कारण है कि डिजिटल रूप से जुड़े होने के बावजूद कई लोग अकेलापन महसूस करते हैं।'' अध्ययन में पाया गया कि 48.2 प्रतिशत छात्राएं नोटिफिकेशन मिलते ही तुरंत अपना फोन देखती हैं, जबकि 43.9 प्रतिशत ने कहा कि उनके फोन देखने का कोई निश्चित समय नहीं है। इससे दिनभर बार-बार मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की आदत का संकेत मिलता है।करीब 70 प्रतिशत छात्राओं ने माना कि वे मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का उपयोग कम करने या कुछ समय के लिए पूरी तरह बंद करने के लिए डिजिटल डिटॉक्स करना चाहती हैं, लेकिन ऐसा कर पाने में वे असमर्थ हैं। अध्ययन के अनुसार, 43.9 प्रतिशत छात्राओं का मानना है कि सोशल मीडिया ने दिखावे की संस्कृति को बढ़ावा दिया है, जबकि 41.5 प्रतिशत ने कहा कि इसका असर उनकी वास्तविक पहचान पर पड़ा है। वहीं, 14.6 प्रतिशत ने माना कि सोशल मीडिया अनावश्यक खर्च को बढ़ावा देता है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि ऑनलाइन 'परफेक्ट छवि' बनाए रखने का दबाव युवाओं के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। करीब 61 प्रतिशत छात्राओं ने कहा कि सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियों या ट्रोलिंग से वे तनाव या परेशानी महसूस करती हैं, जबकि 39 प्रतिशत ने कहा कि ऐसी टिप्पणियों का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। डॉ. सिडाना ने कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ बड़ी हुई पहली 'डिजिटल नेटिव' पीढ़ी यानी जेनरेशन-जेड को तकनीक ने कई अवसर दिए हैं, लेकिन इसके साथ चिंता, सामाजिक तुलना, अकेलापन और डिजिटल निर्भरता जैसी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। उन्होंने कहा, ''यदि समय रहते डिजिटल संतुलन स्थापित नहीं किया गया तो इसका प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक संबंधों पर और गहरा हो सकता है।'' अध्ययन में नियमित डिजिटल डिटॉक्स, परिवार और मित्रों के साथ अधिक प्रत्यक्ष संवाद, लाइक्स और फॉलोअर्स के आधार पर आत्म-मूल्य तय न करने तथा डिजिटल और वास्तविक जीवन के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखने की सलाह दी गई है। डॉ. सिडाना ने कहा, ''भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए वास्तविक रिश्ते और सामाजिक जुड़ाव सबसे मजबूत आधार हैं। आमने-सामने की बातचीत ही लंबे समय तक भावनात्मक सहयोग प्रदान करती है, आभासी संवाद नहीं।
- नोएडा (उप्र)। नोएडा में कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिसके तहत यहां विभिन्न मार्गों और शिवालयों में ढाई हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे और कांवड़ मार्ग की ड्रोन से निगरानी की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अपर पुलिस उपायुक्त (कानून व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि श्रावण माह शुरू होने वाला है ऐसे में नोएडा और एनसीआर के विभिन्न जगहों से लोग जल लेने के लिए हरिद्वार जाएंगे तथा जल लेकर अपने-अपने गंतव्य तक जाएंगे। उन्होंने बताया कि गौतमबुद्ध नगर जिले में कावड़ यात्रा के आठ प्रमुख मार्ग है, वहां पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और सभी मार्गों का स्थलीय निरीक्षण किया गया है। उन्होंने बताया कि नोएडा पुलिस के एकीकृत नियंत्रण कक्ष से राजपत्रित अधिकारी सीसीटीवी कैमरे से प्राप्त हो रहे फुटेज पर नजर रखेंगे। व्यवस्था को चाक- चौबंद बनाने के लिए एक अंतर विभागीय समिति गठित की गई है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग आदि विभागों के अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने बताया की कावड़ मार्ग पर पुलिस तैनाती की पुख्ता व्यवस्था की गई है। करीब ढाई हजार पुलिसकर्मी कांवड़ मार्ग और विभिन्न शिवालयों में तैनात रहेंगे तथा कांवड़ मार्ग की ड्रोन से निगरानी की जाएगी। उन्होंने बताया कि डीजे संचालकों को भी आदेश दिया गया है कि यात्रा के दौरान संगीत की ध्वनि मानक के अनुरूप ही होनी चाहिए ।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों हरजिंदर कौर और गुलवीर को बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धि की सराहना करते हुए उनके संकल्प, समर्पण और मेहनत को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का लगातार बेहतर प्रदर्शन देश के लिए गर्व का विषय है।
प्रधानमंत्री ने महिला 69 किग्रा भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली हरजिंदर कौर को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हरजिंदर का यह प्रदर्शन उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ रहा है और यह देखकर खुशी होती है कि राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय भारोत्तोलक लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने हरजिंदर कौर के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि देश के युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा देगी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों की महिला 69 किग्रा स्पर्धा में रजत पदक जीतने पर हरजिंदर कौर को बधाई। यह भी उल्लेखनीय है कि उनका कल का प्रदर्शन उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ रहा। यह देखकर प्रसन्नता होती है कि हमारे भारोत्तोलक खेलों में इतना अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हरजिंदर को उनके भावी प्रयासों के लिए मेरी शुभकामनाएं।”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले भारतीय धावक गुलवीर को भी बधाई दी। उन्होंने गुलवीर के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनके संकल्प और समर्पण को उल्लेखनीय बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुलवीर की मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति ने उन्हें इस बड़ी उपलब्धि तक पहुंचाया है। उन्होंने गुलवीर के भविष्य के प्रयासों में सफलता की कामना की।प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “ग्लासगो में गुलवीर का शानदार प्रदर्शन! पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में रजत पदक जीतने पर उन्हें बधाई। उनका संकल्प तथा समर्पण सराहनीय है। उनके भावी प्रयासों के लिए उन्हें ढेरों शुभकामनाएं।” राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार प्रभावशाली बना हुआ है। भारोत्तोलन और एथलेटिक्स जैसे खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर पदक हासिल किए हैं। हरजिंदर कौर और गुलवीर की रजत पदक जीत ने भारत के पदक अभियान को और मजबूत किया है। प्रधानमंत्री की ओर से खिलाड़ियों को मिली शुभकामनाओं से उनका उत्साह भी बढ़ा है। देशभर में खेल प्रेमी दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं और उनसे भविष्य में और बड़ी सफलताओं की उम्मीद कर रहे हैं। -
नयी दिल्ली. एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) ने बुधवार को कहा कि दुबई की मशहूर इमारत बुर्ज खलीफा के लोकप्रिय पर्यटन स्थल 'ऐट द टॉप' की ऑनलाइन बुकिंग के लिए अब यूपीआई से भुगतान शुरू हो गया है। दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा की ऊपरी मंजिलों पर स्थित 'ऐट द टॉप' वह जगह है जहां से पर्यटक पूरे शहर का नजारा ऊपर से देखते हैं। हर साल यहां भारत सहित दुनियाभर से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की अंतरराष्ट्रीय इकाई एनआईपीएल ने बयान में कहा कि यह पहल नियोपे और एमार एंटरटेनमेंट के सहयोग से शुरू की गई है।
एनआईपीएल ने कहा कि इस सुविधा के जरिये भारतीय पर्यटक अब 'बुर्ज खलीफा' में उपलब्ध अनुभवों की बुकिंग उसकी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से कर सकेंगे और भुगतान यूपीआई से कर पाएंगे। यह कदम संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में नियोपे के साथ एनआईपीएल की मौजूदा साझेदारी को और मजबूत करता है। वर्ष 2022 में यूएई में क्यूआर-आधारित यूपीआई व्यापारी भुगतान की शुरुआत के बाद से भारतीय यात्री नियोपे के मर्चेंट नेटवर्क पर यूपीआई-सक्षम ऐप के जरिये भुगतान कर रहे हैं। बयान के मुताबिक, अब पर्यटक अपनी यात्रा से पहले ही वेबसाइट पर जाकर विभिन्न अनुभव चुन सकते हैं और यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं, जिससे यात्रा की योजना बनाना अधिक सरल और सुविधाजनक हो जाएगा। एनपीसीआई इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ऋतेश शुक्ला ने कहा, "ऐट द टॉप, बुर्ज खलीफा के लिए ऑनलाइन बुकिंग में यूपीआई भुगतान सक्षम करने से भारतीय पर्यटकों को अपनी परिचित और भरोसेमंद भुगतान प्रणाली का उपयोग करने में आसानी होगी, वह भी यूएई पहुंचने से पहले ही। -
रांची. नक्सल-विरोधी अभियानों में एक बड़ी कामयाबी के तहत प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को झारखंड के धनबाद ज़िले से गिरफ़्तार किया गया है। उस पर 2.2 करोड़ रुपये से ज़्यादा का इनाम था। झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा ने बुधवार को बताया कि बेसरा पर 2.20 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम था और वह 175 मामलों में वांछित था। डीजीपी ने दावा किया कि देश के सबसे वांछित नक्सली की गिरफ्तारी के साथ राज्य में नक्सलवाद का ''लगभग खात्मा हो गया है।'' उन्होंने बताया कि बेसरा (65) को मंगलवार शाम 'ऑपरेशन दौड़ा पहाड़' के दौरान धनबाद जिले के बरवाअड्डा थानाक्षेत्र के मनियाडीह इलाके से गिरफ्तार किया गया। गिरिडीह जिले के मदनाडीह गांव का निवासी बेसरा ''प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) का एकमात्र सक्रिय शीर्ष स्तरीय पोलित ब्यूरो सदस्य था।'' पुलिस अधिकारी ने बताया, "इस शीर्ष माओवादी पर झारखंड और ओडिशा सरकारों की ओर से कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वह झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में दर्ज 175 मामलों में वांछित था।" डीजीपी ने बताया कि अभियान के दौरान दो अन्य नक्सलियों-15 लाख रुपये का इनामी मेहनत उर्फ मोछू और गौरव को भी गिरफ्तार किया गया। उनके अनुसार, तीनों कुल 320 आपराधिक मामलों में वांछित थे। पुलिस के अनुसार, सागर दा और भास्कर दा के नाम से भी जाना जाने वाला बेसरा वर्ष 1980 में प्रतिबंधित संगठन में शामिल होकर 2003 में उसकी केंद्रीय कमेटी का सदस्य बना था। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बेसरा ने झारखंड और पड़ोसी राज्यों में माओवादी नेटवर्क के विस्तार में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने बताया कि उसने राज्य में सशस्त्र दस्तों के गठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। झारखंड पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) नरेंद्र सिंह ने कहा कि गिरफ्तार किए गए तीनों नक्सली कई बड़े हमलों में शामिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इनमें 2005 में जहानाबाद जेल से भागने का मामला, कई बैंक डकैती, बड़े पैमाने पर हथियार और गोला-बारूद की लूट तथा कई आईईडी विस्फोट शामिल हैं। उन्होंने कहा, "ये सुरक्षा बलों के 100 से अधिक जवानों की मौत के लिए जिम्मेदार थे।"
सिंह ने बताया कि इन तीनों ने वर्ष 2001 में दो महीने के भीतर 25 सुरक्षाकर्मियों की हत्या की थी। उन्होंने बताया कि इनमें उसी वर्ष सितंबर में हजारीबाग जिले के चर्चू थाना क्षेत्र के ओरिया-हरली जंगल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 12 जवानों की हत्या भी शामिल थी। सिंह ने बताया कि इन लोगों ने सुरक्षाकर्मियों से हथियार और गोला-बारूद भी लूट लिया था। उन्होंने बताया कि इसके बाद, अक्टूबर 2001 में इन तीनों ने टोपचांची प्रखंड में एक और हमला किया, जिसमें झारखंड आर्म्ड पुलिस (जेएपी) के 13 जवानों की मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार, तीनों नक्सली पारसनाथ क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहे थे। सिंह ने कहा, "सुरक्षा बल पूरे क्षेत्र की तलाशी लेंगे और झारखंड में सक्रिय माने जा रहे शेष 15-20 नक्सलियों को पकड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाएंगे। इनमें तीन ऐसे नक्सली भी शामिल हैं, जिन पर नकद इनाम घोषित है। इनमें प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के केंद्रीय कमेटी सदस्य असीम मंडल शामिल है, जिस पर एक करोड़ रुपये का इनाम है। इसके अलावा सालुका कायम पर 10 लाख रुपये और मनोहर गंझू पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित है।" अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार तीनों माओवादियों के पास से तीन एके-47 राइफल, आठ मैगजीन और 288 कारतूस बरामद किए हैं। अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा धनबाद जिले से उनके दो सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, राज्य में पिछले तीन महीनों के दौरान कुल 44 नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण किया है, जबकि सात नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी पर उसके भाई देवलाल बेसरा ने कहा कि परिवार को मंगलवार रात करीब 10 से 11 बजे के बीच धनबाद और गिरिडीह की सीमा क्षेत्र से उसकी गिरफ्तारी की जानकारी मिली। उसने कहा, "वह 1986-87 के बाद कभी घर नहीं आया। हमारा एक भतीजा है। हमारी एक भतीजी भी थी, लेकिन उसका निधन हो गया। हमने कई बार उससे मुख्यधारा में लौटने की अपील की थी।" ये गिरफ्तारियां झारखंड पुलिस के समक्ष 16 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के कुछ घंटे बाद हुईं। आत्मसमर्पण करने वालों में छह ऐसे नक्सली शामिल थे, जिन पर कुल 39 लाख रुपये का इनाम था। आत्मसमर्पण करने वालों में संतोष महतो उर्फ वासुदेव दा उर्फ दिलीप भी शामिल था, जिस पर 15 लाख रुपये का इनाम था और वह 128 मामलों में वांछित था। पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में दो उप-क्षेत्रीय कमेटी सदस्य और दो क्षेत्रीय कमेटी के पदाधिकारी शामिल हैं। इस ताजा अभियान को नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकार के अभियान में एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। इस साल की शुरुआत में पश्चिमी सिंहभूम जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में नक्सली अनल उर्फ पतिराम मांझी समेत 16 माओवादी मारे गए थे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उस अभियान को क्षेत्र को नक्सलवाद मुक्त बनाने के अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया था और बचे हुए नक्सलियों से हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की थी।
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-छात्रों की चिंताएं दूर करने के निर्देश दिये
नयी दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) 2026 की काउंसलिंग के लिए की गई तैयारियों का बुधवार को जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अभ्यर्थियों की चिंताओं को दूर करने के लिए सक्रिय कदम उठाएं और पारदर्शी, निष्पक्ष एवं मेधा-आधारित दाखिला प्रक्रिया सुनिश्चित करें। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) के अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) और उसके अंतर्गत आने वाली अन्य सीट पर काउंसलिंग की तैयारियों की समीक्षा करते हुए नड्डा ने अभ्यर्थियों के लिए सुगम प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को मजबूत तकनीकी सहायता व्यवस्था बनाए रखने और शिकायतों का तुरंत समाधान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।नड्डा ने प्रवेश प्रक्रिया के दौरान काउंसलिंग पोर्टल का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि समीक्षा बैठक के दौरान नड्डा ने काउंसलिंग कार्यक्रम, आईटी ढांचे, साइबर सुरक्षा तैयारियों, शिकायत निवारण व्यवस्था, अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए किए गए उपायों और हिस्सा लेने वाले संस्थानों के साथ समन्वय का जायजा लिया। बयान के मुताबिक, अधिकारियों ने नड्डा को बताया कि नीट-यूजी काउंसलिंग में प्रौद्योगिकी आधारित और छात्र-केंद्रित कई बड़े सुधार किए गए हैं, जिनका मकसद दाखिला प्रक्रिया को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और आसान पहुंच सुनिश्चित करना है। बयान में कहा गया है कि एक बार की भौतिक रिपोर्टिंग व्यवस्था की शुरुआत एक प्रमुख सुधार है, जिससे अभ्यर्थियों को बार-बार संस्थानों के चक्कर लगाने की जरूरत काफी कम हो जाएगी। इसमें बताया गया है कि सीट आवंटन के बाद अभ्यर्थी या तो आवंटित सीट को 'फ्रीज' कर सकते हैं या फिर बेहतर सीट पाने के लिए 'फ्लोट' विकल्प चुन सकते हैं। बयान के अनुसार, 'फ्रीज' विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थियों को तय समयसीमा के भीतर अपने आवंटित संस्थान में व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट करना होगा, जहां उन्हें मूल दस्तावेजों के सत्यापन और प्रवेश शुल्क जमा करने सहित दाखिले से जुड़ी अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इसमें कहा गया है कि बेहतर सीट के लिए अगले दौर की काउंसलिंग में शामिल होने की खातिर 'फ्लोट' विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थी तय समयसीमा के भीतर ऑनलाइन माध्यम से दस्तावेज सत्यापन समेत प्रवेश से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कर सकेंगे। बयान में कहा गया है कि इस अवधि के दौरान अभ्यर्थियों को आवंटित संस्थान में व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट करने, मूल दस्तावेज जमा करने या प्रवेश शुल्क भरने की जरूरत नहीं होगी। इसमें कहा गया है कि अगले दौर की काउंसलिंग में शामिल होने के दौरान उनका अस्थायी प्रवेश मान्य रहेगा। बयान के मुताबिक, सीट अपग्रेड करने की सुविधा काउंसलिंग के तीसरे दौर तक उपलब्ध रहेगी। इसमें कहा गया है कि तीसरे दौर के पूरा होने के बाद जिन अभ्यर्थियों को सीट आवंटित हो चुकी होगी, उन्हें मूल दस्तावेजों के सत्यापन, प्रवेश शुल्क जमा करने और संस्थान से जुड़ी अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अपने संबंधित संस्थानों में व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट करना होगा। बयान के अनुसार, संशोधित ढांचे के तहत संस्थान में एक बार रिपोर्टिंग, मूल दस्तावेजों के एक बार सत्यापन और प्रवेश शुल्क एक बार जमा करने की व्यवस्था की गई है, जिससे अनावश्यक यात्रा की जरूरत नहीं पड़ेगी, दाखिले की प्रक्रिया सरल बनेगी और अभ्यर्थियों को आसानी होगी। बयान में कहा गया है कि इस साल नीट-यूजी काउंसलिंग में ऑनलाइन सीट छोड़ने की सुविधा भी प्रदान की गई है। इसमें कहा गया है कि मान्य काउंसलिंग नियमों और तय समयसीमा के तहत जिन अभ्यर्थियों को अपनी आवंटित सीट छोड़नी होगी, वे अब एमसीसी काउंसलिंग पोर्टल के जरिये ऑनलाइन ऐसा कर सकेंगे। बयान के मुताबिक, सीट छोड़ने के लिए अभ्यर्थियों को आवंटित संस्थान में व्यक्तिगत रूप से जाने की जरूरत नहीं होगी, जब तक कि सूचना पुस्तिका में कोई अलग निर्देश न दिया गया हो या एमसीसी की ओर से अलग से कोई सूचना जारी न की गई हो।
बयान में कहा गया है कि अधिकारियों ने पारदर्शिता और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए किए गए उपायों की भी जानकारी दी, जिनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से प्राप्त अभ्यर्थियों के पहले से भरे हुए डेटा का इस्तेमाल, ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की ओर से सीट मैट्रिक्स की पुष्टि और हिस्सा लेने वाले संस्थानों द्वारा सत्यापन जैसे कदम शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। बयान में कहा गया है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में ज्यादा सुलभता, पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए देशभर में निर्धारित मूल्यांकन केंद्रों की संख्या 16 से बढ़ाकर 61 कर दी गई है। इसमें कहा गया है कि एनएमसी की ओर से 27 जुलाई को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित मेडिकल बोर्ड की ओर से जारी किए जाने वाले प्रमाण-पत्र को अब 'पात्रता प्रमाण-पत्र' के नाम से जाना जाएगा। यह कदम अभ्यर्थी की दक्षता के आकलन के आधार पर एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए उसकी पात्रता तय करने के उद्देश्य को दर्शाता है। बयान में कहा गया है कि नये दिशा-निर्देशों में अपीलीय दिव्यांगता मूल्यांकन बोर्ड का भी प्रावधान किया गया है, जिसमें पात्र अभ्यर्थी प्रारंभिक दिव्यांगता मूल्यांकन बोर्ड के आकलन के खिलाफ अपील कर सकेंगे। इसमें कहा गया है कि एक और अहम सुधार अनिवासी भारतीय (एनआरआई) श्रेणी के तहत दाखिला प्रक्रिया का पूरी तरह से डिजिटलीकरण है। बयान के अनुसार, एनआरआई अभ्यर्थियों के लिए पंजीकरण अब तय पात्रता मानदंडों के अनुसार पूरी तरह से ऑनलाइन काउंसलिंग पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। इसमें कहा गया है कि अभ्यर्थी सभी जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड कर सकेंगे, जबकि पहले ये दस्तावेज ईमेल के जरिये जमा किए जाते थे। बयान में कहा गया है कि अपलोड किए गए दस्तावेजों की जांच तय अधिकारी करेंगे, जिससे जांच प्रक्रिया पारदर्शी, कुशल और समयबद्ध बन सकेगी। इसमें कहा गया है कि नड्डा को यह भी बताया गया कि नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की गई है। बयान के अनुसार, पूरे देश में काउंसलिंग प्रक्रिया को एक समान रूप से लागू करने के लिए दिव्यांगता मूल्यांकन बोर्ड, कॉलेज नोडल अधिकारियों और दस्तावेज सत्यापन अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि अभ्यर्थियों की मदद के लिए चौबीसों घंटे चलने वाली टोल-फ्री हेल्पलाइन (1800-102-7637) शुरू की गई है। बयान में कहा गया है कि काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों की मदद के लिए अलग-अलग मंचों के जरिये दो भाषाओं में जानकारी, अक्सर पूछे जाने वाले सवाल के जवाब और मार्गदर्शक वीडियो भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसमें कहा गया है कि अभ्यर्थियों की चिंताओं के तुरंत समाधान के लिए ईमेल-आधारित शिकायत निवारण प्रणाली भी बनाई गई है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 अगस्त को ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ की देशव्यापी शुरुआत करेंगे। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूक करना और उन्हें ‘नशा मुक्त भारत’ तथा ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प से जोड़ना है।
अभियान की खास बातें:– MY Bharat के युवा स्वयंसेवक इस अभियान का नेतृत्व करेंगे।– 2 अगस्त को पूरे देश में 10,000 स्थानों पर एक साथ कार्यक्रम आयोजित होंगे।– एक करोड़ से ज्यादा युवा नशा मुक्ति की शपथ लेंगे।– NSS, युवा क्लब, स्कूल-कॉलेज, NGOs, औद्योगिक संघ और 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठन इसमें शामिल होंगे।यह अभियान केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं बल्कि 100 हफ्तों (लगभग 2 साल) तक चलने वाला जन-आंदोलन होगा। हर रविवार को खेल-कूद, वॉकथॉन, ध्यान सत्र, नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले स्वयंसेवकों और संगठनों को 50वें, 75वें और 100वें सप्ताह पर सम्मानित किया जाएगा।प्रधानमंत्री मोदी के ‘नशा मुक्त भारत’ के विजन को मजबूती देने वाला यह अभियान युवाओं की सकारात्मक ऊर्जा को राष्ट्र-निर्माण में लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। ( -
नई दिल्ली। सहकारिता आधारित डिजिटल मोबिलिटी प्लेटफॉर्म भारत टैक्सी से 19 जुलाई 2026 तक देशभर में 7.97 लाख सारथी (ड्राइवर-सदस्य) जुड़ चुके हैं। सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (एसटीसीएल) के तहत संचालित इस प्लेटफॉर्म का आधिकारिक शुभारंभ दिल्ली-एनसीआर, गुजरात और महाराष्ट्र में किया गया है। यह जानकारी केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। सरकार के अनुसार, भारत टैक्सी प्लेटफॉर्म से जुड़े 7.97 लाख सारथियों में सबसे अधिक 2.55 लाख दिल्ली-एनसीआर में पंजीकृत हैं। इसके अलावा गुजरात में 1.01 लाख और महाराष्ट्र में 71,095 सारथी प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (एसटीसीएल) ने बताया कि भारत टैक्सी की सेवाओं का अन्य शहरों और राज्यों में विस्तार परिचालन तैयारियों तथा आवश्यक सरकारी अनुमोदनों के आधार पर किया जाएगा। इसमें सारथियों की उपलब्धता, वैधानिक आवश्यकताओं की पूर्ति और राज्य सरकारों, सहकारी संस्थाओं तथा अन्य हितधारकों के साथ समन्वय को ध्यान में रखा जाएगा।
भारत टैक्सी शून्य-कमीशन मॉडल पर संचालित होती है। प्लेटफॉर्म के जरिए बुक की गई राइड पर ड्राइवर की कमाई में से कोई कमीशन नहीं काटा जाता। तकनीकी सेवाओं, ऐप के रखरखाव और विस्तार के लिए सारथियों से अलग से मामूली राइड सब्सक्रिप्शन या प्लेटफॉर्म उपयोग शुल्क लिया जाता है। इससे ड्राइवर को मिलने वाले किराए पर कोई असर नहीं पड़ता।सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड के सदस्य बनने वाले सारथियों को बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 और समिति के उप-विधियों के तहत विभिन्न लाभ प्राप्त होते हैं। समिति अपने सदस्यों को कल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता तक पहुंच भी उपलब्ध कराती है। सारथियों को रियायती दरों पर स्वास्थ्य एवं व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, एसबीआई मुद्रा ऋण सहित संस्थागत ऋण तथा बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के माध्यम से वाहन वित्तपोषण की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग, ग्राहक सेवा, सड़क सुरक्षा और यात्री सुरक्षा से संबंधित समय-समय पर प्रशिक्षण एवं अभिविन्यास कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। -
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे में सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में बताया कि पिछले 10 वर्षों में ट्रेन दुर्घटनाओं में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि वर्ष 2014-15 में 135 दुर्घटनाएं हुई थीं, जो 2025-26 में घटकर मात्र 16 रह गईं। चालू वित्तीय वर्ष में जून महीने तक केवल दो दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। मंत्री ने ‘कॉन्सिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स’ (प्रति मिलियन ट्रेन-किलोमीटर पर दुर्घटनाएं) का आंकड़ा देते हुए कहा कि यह 2014-15 में 0.11 से घटकर 2025-26 में 0.01 हो गया है, जो करीब 91 प्रतिशत की कमी दर्शाता है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, सुरक्षा संबंधी कार्यों पर व्यय लगातार बढ़ाया गया है। वर्ष 2013-14 में यह खर्च 39,200 करोड़ रुपये था, जो 2026-27 में बढ़कर 1,20,389 करोड़ रुपये हो गया है।लिए गए प्रमुख सुरक्षा उपाय– 6,671 स्टेशनों पर सेंट्रलाइज्ड इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ पूरी ट्रैक सर्किटिंग लागू।– 10,395 लेवल क्रॉसिंग गेट्स को इंटरलॉक किया गया।सभी लोकोमोटिव में विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस लगाए गए।– कोहरे वाले क्षेत्रों में लोको पायलटों को GPS-आधारित फॉग सेफ्टी डिवाइस उपलब्ध कराए गए।– अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (USFD) टेस्टिंग, लंबी रेल वेल्डिंग और बेहतर वेल्डिंग तकनीक अपनाई गई।– स्टाफ की नियमित ट्रेनिंग और निरीक्षण।रेल मंत्री ने कवच (देशी Automatic Train Protection System) के क्रियान्वयन का भी जिक्र किया, जो ट्रेन की गति नियंत्रित रखते हुए जरूरत पड़ने पर स्वचालित ब्रेकिंग सुनिश्चित करता है। सरकार का दावा है कि इन तकनीकी और संरचनात्मक उपायों के कारण भारतीय रेलवे अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो गई है। -
नई दिल्ली। लोकसभा में आज बुधवार को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ ध्वनिमत से पारित हो गया। साथ ही, विधेयक पर लंबी चर्चा के बाद सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष, विशेषकर लोकसभा में विपक्ष के नेता के रवैये पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर सार्थक सुझाव देने के बजाय विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है।
जितेंद्र सिंह ने कहा, “सबसे पहले विपक्ष का आचरण बेहद निराशाजनक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाने वाले इतने गंभीर और महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय विपक्ष राजनीति कर रहा है। विपक्ष के नेता ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह न केवल असंसदीय थी, बल्कि इतनी अनुचित थी कि मैं उसे दोहराना भी नहीं चाहूंगा। यदि कोई खुद को शिक्षित और संसदीय परंपराओं से परिचित मानता है, तो उसे पता होना चाहिए कि सदन के भीतर ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया जा सकता।”उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष के नेता द्वारा देश के युवाओं को “मूर्ख” कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, “इस देश के युवाओं को, जो देश का भविष्य हैं, ‘मूर्ख’ कहना इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है। मुझे आश्चर्य होता है कि क्या उन्हें संसदीय कार्यवाही के बुनियादी नियमों और मर्यादाओं की भी जानकारी है।”केंद्रीय मंत्री ने 21 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए विपक्ष के नेता पर तंज कसा। उन्होंने कहा, “21 जुलाई को विपक्ष के नेता शायद किसी विशेष सोच के कारण प्रधानमंत्री के आवास 7 एलकेएम के बाहर जाकर बैठ गए। ऐसा लगा मानो उनकी गहरी इच्छा थी कि देश उन्हें चुने और 7 एलकेएम में बैठाए। जब यह इच्छा पूरी नहीं हुई तो वे निराश और हताश होकर वहां के गेट पर जाकर बैठ गए। जब उन्हें विनम्रता से समझाया गया कि ऐसा व्यवहार उनके पद और कद के अनुरूप नहीं है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें बस वहां से हटा दिया जाए।” सदन में उठाए गए एक अन्य मुद्दे पर जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिस घटना का उल्लेख किया जा रहा है, उसमें गोली नहीं चलाई गई थी, बल्कि केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा, “बार-बार स्पष्ट किया गया है कि कोई गोली नहीं चली। जब गोली चली ही नहीं, तो गोली चलाने के आदेश का सवाल ही नहीं उठता। इस तरह का आदेश देने का अधिकार मंत्री के पास नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट के पास होता है।” ( -
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधन रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ के पारित होने पर देशभर के छात्रों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने और युवाओं के सपनों व आकांक्षाओं की रक्षा के लिए सख्त कानूनी प्रावधान सुनिश्चित करता है।
अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि लोकसभा में इस महत्वपूर्ण विधेयक के पारित होने पर भारत के सभी छात्रों को बधाई। उन्होंने कहा कि यह कानून सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों और परीक्षा की पवित्रता भंग करने वालों के खिलाफ सबसे कठोर सजा का प्रावधान करता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह संशोधन विधेयक युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं की रक्षा के लिए लाया गया है। इसके जरिए सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को और मजबूत किया जाएगा।अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि मोदी सरकार छात्रों के भविष्य को खतरे में डालने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कानून की पूरी सख्ती से कार्रवाई की जाएगी और उन्हें कठोर दंड दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। सरकार का मानना है कि नए संशोधन के लागू होने से सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगेगी और ईमानदार अभ्यर्थियों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी। -
नई दिल्ली। काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रावण मास और कांवड़ की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने सावन में काशी विश्वनाथ धाम में लगभग 1 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई है।
विश्वभूषण मिश्रा ने कहा, “श्री काशी विश्वनाथ धाम में सावन के महीने में श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। श्रद्धालुओं के स्वागत और सुरक्षा के साथ-साथ उनके दर्शन को सुगम और सुविधाजनक बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। हमारे स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के अनुसार, श्रद्धालुओं के लिए जिग-जैग कतार व्यवस्था, छायादार जगह, ग्लूकोज-पानी की सुविधा और बारिश से बचाव जैसे इंतजाम किए गए हैं।”विश्वभूषण मिश्रा ने आगे बताया कि सावन के पहले और प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालुओं पर फूल वर्षा की गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए सभी प्रकार के अनुरोध और प्रोटोकॉल दर्शन और काशी द्वार फिलहाल अभी प्रतिबंधित किया गया है। यह कदम भीड़ को देखते हुए उठाया गया है। अगर भीड़ कम होगी तो काशी द्वार का संचालन शुरू किया जाएगा।मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि काशी विश्वनाथ के सभी सोशल मीडिया हैंडल पर श्रद्धालु लाइव दर्शन कर सकेंगे। विगत वर्षों में यहां 1 करोड़ 65-70 लाख श्रद्धालु काशी विश्वनाथ में दर्शन-पूजन करने पहुंचते हैं। इस बार 80 लाख से 1 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, काशी धाम में पॉलीथिन पूरी तरह बैन है, जिसका स्थानीय लोग पूर्णतः पालन कर रहे हैं। इसलिए बाहर से आने वाले श्रद्धालु प्लास्टिक में कांवड़ का जल लेकर न आएं। वहीं, गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर वाराणसी में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंचे और आस्था की डुबकी लगाई। भक्तों ने गंगा स्नान के बाद पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठान किए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घाटों पर जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें तैनात रहीं। - नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को देश के शीर्ष नौकरशाहों से कहा कि वे शासन व्यवस्था में लोगों को केंद्र में रखें और यह सुनिश्चित करें कि हर नीति और निर्णय आम नागरिकों के हितों और आकांक्षाओं के अनुरूप हो। भारत सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आह्वान किया कि सरकार के भीतर सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें ताकि एकीकृत परिणाम हासिल किए जा सकें। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में प्रगति तेज करने के प्रयासों के तहत वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के भविष्य के कार्य एजेंडे की समीक्षा की। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, "आज भारत सरकार के सचिवों के साथ बैठक में वित्त और अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। नागरिक केंद्रित शासन को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वदेशी तकनीक विकसित करने के तरीकों पर जोर दिया। साथ ही प्रमुख क्षेत्रों में युवा उद्यमियों की सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।" प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों और विभागों में टीम भावना के साथ काम करने की जरूरत पर जोर देते हुए अधिकारियों से साझा उद्देश्य के साथ काम करने का आग्रह किया। बयान में कहा गया कि मोदी ने नागरिक केंद्रित शासन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत के लोगों को हमेशा शासन के केंद्र में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हर नीति और निर्णय आम नागरिक के हितों और आकांक्षाओं से प्रेरित होना चाहिए।'' मोदी ने कहा कि भारत बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है, लेकिन इसके साथ स्वदेशी तकनीक विकसित करने को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी आत्मनिर्भरता और घरेलू क्षमताओं के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नागरिकों के कल्याण से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि भारत को नवाचार, विविधीकरण और क्षमता विस्तार में तेजी लाकर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी। सुधारों पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि सुधार केवल एक चलन वाला शब्द नहीं है, बल्कि प्रभावी शासन के लिए लगातार जरूरी प्रक्रिया है। उन्होंने प्रक्रियाओं में सुधार, कार्य संस्कृति को बेहतर बनाने और संस्थागत दक्षता मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डिजिटल प्रणालियों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देना होगा। प्रधानमंत्री ने उभरते साइबर खतरों के प्रति सतर्क रहने और साइबर सुरक्षा क्षेत्र में युवा नवप्रवर्तकों एवं उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। मोदी ने रणनीतिक क्षेत्रों में देश द्वारा की जा रही प्रमुख पहल को लेकर सक्रिय संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि भ्रामक सूचनाओं और निराधार आशंकाओं का मुकाबला किया जा सके। उन्होंने कहा कि उभरते और भविष्य के उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कार्यबल को तैयार करने के लिए उद्योगों के साथ मिलकर नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार को हमेशा युवा, गतिशील और भविष्य की ओर देखने वाली बनी रहना चाहिए तथा नयी चुनौतियों और अवसरों के अनुसार स्वयं को लगातार बदलते रहना चाहिए। बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों में प्रगति, प्राथमिकताओं और क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। इसमें कैबिनेट सचिव, प्रमुख मंत्रालयों और विभागों के सचिव तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।










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