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- नयी दिल्ली. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के नोटिस पर एक मई से विशेष क्यूआर कोड होगा, जिससे लोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से संचालित चैटबॉट 'अभय' के माध्यम से उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि कर सकेंगे। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। साइबर अपराधियों के जाल में लोगों को फंसने से बचाने के लिए किसी भी एजेंसी द्वारा यह अपनी तरह की पहली पहल है। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने सोमवार को यहां 22वें डी पी कोहली स्मृति व्याख्यान में चैटबॉट की शुरुआत करते हुए इसे एक ''महत्वपूर्ण पहल'' बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल उन ठगों के खिलाफ एक 'प्रभावी सुरक्षा कवच' की तरह काम करेगी, जो खुद को सीबीआई के अधिकारी बताकर लोगों को धोखा देते हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ऐसा तंत्र उन ठगों के खिलाफ एक प्रभावी सुरक्षा उपाय बन सकता है, जो खुद को सीबीआई के अधिकारी बताकर लोगों को धोखा देते हैं और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए फर्जी नोटिस भेजते हैं। ये ठग अक्सर तथाकथित 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर अनजान लोगों को धमकाते हैं। सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि क्यूआर कोड में नोटिस की समाप्ति तिथि भी शामिल होगी।किसी व्यक्ति को कथित नोटिस प्राप्त होने पर वह सीबीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध 'अभय' ऐप पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर सकता है। इससे एजेंसी के डेटाबेस में तुरंत जांच हो जाएगी कि दस्तावेज़ असली है या जाली। साइबर अपराधी इस तरह के नोटिस का इस्तेमाल सीबीआई अधिकारियों के रूप में लोगों को 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी में फंसाने और उनसे पैसे वसूलने के लिए करते हैं।
- नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को अयोध्या की राजकुमारी सुरीरत्ना और कोरियाई राजा किम सूरो की कथा का हवाला देते हुए भारत और दक्षिण कोरिया के बीच प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों पर जोर दिया। हैदराबाद हाउस में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ व्यापक वार्ता के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि आज भारत में के-पॉप, के-ड्रामा बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं। उसी तरह, कोरिया में भी भारतीय सिनेमा और संस्कृति की पहचान बढ़ रही है। उन्होने कहा, "2000 साल पहले, अयोध्या की राजकुमारी सूरीरत्ना और कोरिया के राजा किम सुरो की कहानी हमारी साझा विरासत है।" 'अतुल्य भारत' की आधिकारिक वेबसाइट पर इस प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों पर एक विस्तृत लेख उपलब्ध है।कोरिया में उन्हें रानी हेओ ह्वांग-ओक के नाम से जाना जाता था। उत्तर प्रदेश सरकार और दक्षिण कोरिया के गिम्हे शहर के संयुक्त प्रयास से 2001 में निर्मित उनका स्मारक, रानी हेओ ह्वांग-ओक की महान यात्रा द्वारा निर्मित स्थायी संबंधों का एक जीवंत प्रमाण है। अतुल्य भारत वेबसाइट के लेख के मुताबिक, "जैसा प्रतिष्ठित कोरियाई ग्रंथ सामगुक युसा में दर्ज है, अयोध्या की यह पुत्री - जिसे वहां रानी हेओ ह्वांग-ओक के नाम से जाना जाता है - ने दैवीय आदेश पर एक खतरनाक समुद्री यात्रा की थी।" इसके अनुसार, "ऐसा कहा जाता है कि स्वयं देवताओं ने ही कराक वंश के राजा किम सूरो के साथ उनके विवाह की व्यवस्था की थी...।" सोमवार को, भारत और दक्षिण कोरिया ने दोनों नेताओं की उपस्थिति में सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों में सहयोग सहित कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "संस्कृति और रचनात्मक उद्योग में, आपसी सहयोग के माध्यम से, हम फिल्म, एनिमेशन और गेमिंग के क्षेत्रों में भी नए संपर्क स्थापित करेंगे।" उन्होंने कहा, "हमे बहुत खुशी है कि राष्ट्रपति ली खुद भारतीय सिनेमा के प्रशंसक हैं। इस सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए, हम 2028 में भारत-कोरिया मैत्री उत्सव आयोजित करेंगे।" उन्होंने कहा कि जन-जन संबंधों को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा, अनुसंधान सहयोग और पर्यटन को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा, "हम आने वाले दशक की सफलता की कहानियों की नींव रख रहे हैं।"
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नयी दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार और 'क्वांटम कंप्यूटिंग' में भी इसके उपयोग की वकालत करते हुए सोमवार को कहा कि भारत अब विश्वगुरु नहीं है और इस शब्द का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। जोशी ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से बात करते हुए संस्कृत को भारत की राजभाषा बनाने की भी जोरदार वकालत की और कहा कि भीम राव आंबेडकर सहित कई लोगों ने अतीत में इसके लिए प्रयास किए थे, लेकिन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली।
वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर संवाददाताओं से बात कर रहे थे। भारत के विश्वगुरु के रूप में उभरने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बनाने के दौरान संस्कृत के संवर्धन में देश की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''यह धारणा कि हम विश्वगुरु हैं... मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि वर्तमान में हमें इस शब्द का प्रयोग करने से परहेज करना चाहिए। हम वर्तमान में विश्वगुरु नहीं हैं। हमें विश्वगुरु बनने की आकांक्षा रखनी चाहिए।'' भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, ''सचमुच, एक समय हम विश्वगुरु थे। लेकिन आज वास्तविकता यह है कि हम वर्तमान में (विश्वगुरु) नहीं हैं।'' जोशी ने कहा कि इस दृष्टिकोण से, संस्कृत आज बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने संस्कृत भाषा को और अधिक बढ़ावा देने और 'क्वांटम कंप्यूटिंग' सहित आधुनिक वैज्ञानिक कार्यों में इसके उपयोग की वकालत करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, ''संस्कृत केवल भारत की ही नहीं, बल्कि विश्व की विरासत है। यह सबसे प्राचीन भाषा है। यह ज्ञान और विज्ञान की भाषा है। यह आध्यात्मिकता की भाषा है। यह प्रौद्योगिकी की भाषा भी है। संस्कृत भारत का प्राण है।'' भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, ''यहां तक कि नासा के विशेषज्ञों ने भी बार-बार इस बात की पुष्टि की है कि वास्तव में संस्कृत ही कंप्यूटिंग के लिए सबसे महत्वपूर्ण भाषा है। जिसे वर्तमान में क्वांटम कंप्यूटिंग कहा जाता है, उसमें संस्कृत का विशेष महत्व होगा।'' उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि यदि हम संस्कृत को जल्द से जल्द कंप्यूटिंग की भाषा बना दें तो यह भारत की ओर से एक अभूतपूर्व योगदान होगा।'' संस्कृत को भारत की राजभाषा बनाने का समर्थन करते हुए जोशी ने कहा कि जब अधिकांश कार्य इस प्राचीन भाषा में किया जाएगा, तो यह देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने कहा, ''संविधान के निर्माण के समय, डॉ. आंबेडकर ने भी संस्कृत को भारत की राजभाषा बनाने का प्रयास किया था। कई व्यक्तियों ने इस संबंध में प्रस्ताव रखे थे। हालांकि, ये प्रस्ताव पारित नहीं हो सके।'' उन्होंने कहा, ''मेरा यह कहना है कि उस समय भी बहुत से लोग चाहते थे कि कि संस्कृत भारत की राजभाषा हो। -
नयी दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने देश में संस्कृत के अधिक प्रचार-प्रसार की सोमवार को पुरजोर वकालत की और कहा कि इसके प्रसार में वृद्धि न केवल अन्य सभी भारतीय भाषाओं को समृद्ध करेगी और उनके बीच एक सेतु का काम करेगी, बल्कि लोगों को भारत के प्राचीन विचारों और संस्कृति से भी जोड़ेगी। भागवत ने 'संस्कृत भारती' के नवनिर्मित केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन के लिए यहां आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 'भारत' नाम केवल भौगोलिक नहीं है। उन्होंने कहा, '' भारत एक परंपरा है, एक आधार है जिस पर जीवन का प्रवाह निरंतर बना रहता है। यह एक ऐसी परंपरा है जो संपूर्ण ब्रह्मांड में जीवन को बनाए रखती है, जिसमें इसके सभी सजीव और निर्जीव घटक शामिल हैं। विश्व को इस परंपरा की निरंतर आवश्यकता है और इस आवश्यकता को पूरा करना उन लोगों का कर्तव्य है जो स्वयं को भारतीय मानते हैं।'' भागवत ने कहा कि इसके लिए 'भारत को जानना और समझना' आवश्यक है, साथ ही इसके 'ज्ञान की संपूर्ण संपदा' को भी समझना होगा, ताकि इसे जीवंत रखा जा सके और आगे बढ़ाया जा सके।'' उन्होंने कहा, ''यदि ये सब करना है, तो भारत को समझने के लिए संस्कृत को समझना अनिवार्य है। भारत में अनेक भाषाएं हैं। भारत की प्रत्येक भाषा अपने आप में एक राष्ट्र भाषा है। लेकिन इन विविध राष्ट्र भाषाओं को जोड़ने वाली कड़ी क्या है? वह है संस्कृत।'' भागवत ने संस्कृत भारती से देश में संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए प्रयास करने का आह्वान किया और कहा कि इस दिशा में कार्य इतना आगे बढ़ना चाहिए कि भारत का हर व्यक्ति संस्कृत में बातचीत करने में सक्षम हो सके। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''संस्कृत मात्र एक भाषा नहीं है। भारत में संस्कृत राष्ट्र के 'प्राण' हैं। विचार, जीवन और संस्कृति की जो सबसे प्राचीन परंपरा आज भी विद्यमान है-वह भारत ही है।'' उन्होंने कहा कि संस्कृत के प्रसार से भारत की अन्य सभी भाषाएं समृद्ध होंगी, क्योंकि उनका मूल 'भाव एक ही है'। भागवत ने कहा कि संस्कृत किसी अन्य भाषा को प्रतिस्थापित करके स्वयं को स्थापित नहीं करती।
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भुवनेश्वर। गोवा की साध्वी सतीश सैल ने फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड 2026 का खिताब अपने नाम किया। सैल अब 75वें मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। एक बयान में यह जानकारी दी गयी। सैल ने भुवनेश्वर में हुए एक भव्य समारोह में देश भर की 30 प्रतिभागियों में से यह खिताब जीता। महाराष्ट्र की राजनांदिनी पवार फेमिना मिस इंडिया 2026 की प्रथम उपविजेता बनीं जबकि जम्मू-कश्मीर की श्री अद्वैता जी. तीसरे स्थान पर रहीं। सैल ने इस जीत को 'अविश्वसनीय' बताया और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलने पर आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में उपस्थित अभिनेत्री जीनत अमान ने कहा, "मिस फेमिना के बारे में मैं क्या कहूं? मैं कई साल पहले इसका हिस्सा थी और भारत का प्रतिनिधित्व भी किया था। यह एक ऐसा मंच है जो लड़कियों को अवसर और प्रशिक्षण प्रदान करता है। आप देख सकते हैं कि हमारी लड़कियां विश्व स्तर पर कितनी सफल हुई हैं। उन्होंने कितनी उपलब्धियां हासिल की हैं।" ओडिशा में पहली बार मिस फेमिना का आयोजन किया गया था।
- जम्मू ।जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सोमवार को एक बस के खाई में गिरने से सात लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे राम नगर क्षेत्र में पहाड़ी सड़क पर एक खतरनाक मोड़ पर बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। उन्होंने बताया कि बचाव अभियान जारी है। कई लोगों को घटनास्थल से अस्पताल ले जाया गया है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना उस समय हुई जब बस दूर-दराज के एक गांव से उधमपुर जा रही थी।
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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक अलग ही अंदाज चर्चा का विषय बन गया है। झारग्राम दौरे के दौरान उन्होंने स्थानीय लोकप्रिय स्ट्रीट फूड झालमुड़ी का स्वाद लिया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन कर रहा है। प्रधानमंत्री का यह सहज और स्थानीय संस्कृति से जुड़ा पल लोगों को इतना पसंद आया कि इंस्टाग्राम पर इस वीडियो ने महज 24 घंटों के भीतर 100 मिलियन व्यूज का आंकड़ा पार कर लिया। वहीं फेसबुक पर भी यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ और 90 मिलियन व्यूज को पार करते हुए लगातार आगे बढ़ रहा है।
सोशल मीडिया पर यूजर्स इस वीडियो को बड़े पैमाने पर शेयर कर रहे हैं और प्रधानमंत्री के इस “ग्राउंड कनेक्ट” की चर्चा कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस वीडियो के वायरल होने के बाद झालमुड़ी को लेकर लोगों की दिलचस्पी भी अचानक बढ़ गई है।गूगल सर्च ट्रेंड्स के मुताबिक, ‘झालमुड़ी’ शब्द के लिए सर्च ट्रैफिक पिछले 22 वर्षों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है, जो इस बात का संकेत है कि एक छोटे से लोकल फूड आइटम ने वैश्विक स्तर पर लोगों का ध्यान खींच लिया है।इस बीच, जिस दुकानदार विक्रम शॉ ने प्रधानमंत्री मोदी को झालमुड़ी दी, वह इस मुलाकात से भावुक और हैरान दोनों नजर आए। उन्होंने बताया कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि देश के प्रधानमंत्री उनकी छोटी सी दुकान पर आएंगे। शॉ के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने दुकान पर पहुंचते ही सबसे पहले उनका नाम और हालचाल पूछा, फिर उनसे झालमुड़ी बनाने को कहा। जब उन्होंने पैसे लेने से मना किया, तो प्रधानमंत्री के जोर देने पर ही उन्होंने भुगतान स्वीकार किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए यह भी कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस रह गया कि वह प्रधानमंत्री का ऑटोग्राफ नहीं ले पाए। प्रधानमंत्री इस दौरान स्थानीय लोगों से बातचीत करते, बच्चों और महिलाओं के साथ झालमुड़ी साझा करते और मुस्कुराते हुए नजर आए, जिससे यह पल और भी खास बन गया। -
नई दिल्ली। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत के युवाओं में एनर्जी ड्रिंक्स का अत्यधिक सेवन अब लिवर डैमेज (जिगर की बीमारी) का बड़ा कारण बनता जा रहा है। Liver Transplantation Society of India से जुड़े डॉक्टरों के अनुसार, युवाओं में लिवर से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं और कई मामलों में शुरुआती उम्र में ही लिवर रोग के संकेत दिखने लगे हैं।
डॉक्टर अभिदीप चौधरी ने बताया कि एनर्जी ड्रिंक्स, शराब और ज्यादा शुगर वाले पेय—ये तीन प्रमुख कारण हैं जो लिवर को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन ड्रिंक्स में कैफीन की मात्रा बहुत अधिक होती है, साथ ही टॉरिन और अन्य स्टिमुलेंट्स होते हैं, जिन्हें प्रोसेस करने में लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी कि एनर्जी ड्रिंक्स को शराब के साथ मिलाकर पीना और ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि कैफीन शराब के असर को छुपा देता है, जिससे व्यक्ति जरूरत से ज्यादा शराब पी लेता है।नीरव गोयल के अनुसार, अब 20–30 साल के युवाओं में भी लिवर की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि पहले ये समस्याएं अधिक उम्र में देखने को मिलती थीं।रिसर्च के मुताबिक, इन ड्रिंक्स में मौजूद हाई शुगर, कैफीन और केमिकल्स लिवर में फैट जमा होने, सूजन (inflammation) और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को बढ़ाते हैं, जिससे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) का खतरा बढ़ जाता है।अनुमान है कि शहरी आबादी के करीब 25–30% लोग इस बीमारी से प्रभावित हो सकते हैं, जिसमें युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है।विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो गंभीर स्थिति में लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र इलाज बचता है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन सीमित करें, संतुलित आहार लें और नियमित जांच कराते रहें। -
इरोड (तमिलनाडु). केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के खिलाफ मतदान करने को लेकर कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पर रविवार को तीखा हमला किया और उन पर संसद एवं विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण से वंचित कर उनसे ''विश्वासघात'' करने का आरोप लगाया। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार इस ''साजिश'' को सफल नहीं होने देगी और देश की महिलाओं के लिए न्याय सुनिश्चित करेगी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ने 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मोडक्कुरिची से अपनी पार्टी की उम्मीदवार कृतिका शिवकुमार के समर्थन में यहां आयोजित रोड शो में भरोसा जताया कि इस चुनाव के बाद राज्य में 'ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम' (अन्नाद्रमुक) प्रमुख ई. के. पलानीस्वामी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार बनाएगा। शाह ने कहा, ''कांग्रेस और द्रमुक ने पूरे देश और तमिलनाडु की माताओं-बहनों को संसद और विधानसभाओं में (आरक्षण से) निश्चित रूप से वंचित किया है। तमिलनाडु के लिए (लोकसभा सीटों में) 50 प्रतिशत वृद्धि का मौका था लेकिन 2026 की जनगणना के आधार पर सीटें बढ़ाने पर जोर देकर उन्होंने तमिलनाडु की सीटें घटाने की साजिश रची है।'' उन्होंने कहा, ''लेकिन मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से तमिलनाडु के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम कांग्रेस और द्रमुक की इस साजिश को सफल नहीं होने देंगे। हम तमिलनाडु के लोगों और तमिलनाडु की महिलाओं को निश्चित रूप से न्याय दिलाएंगे।'' शाह ने ''परिवारवादी राजनीति'' को लेकर सत्तारूढ़ द्रमुक पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा, ''(मुख्यमंत्री) स्टालिन का पूरा ध्यान अपने बेटे (उदयनिधि) को मुख्यमंत्री बनाने पर है। पहले करुणानिधि, फिर स्टालिन और अब उनका बेटा। ऐसे वंशवादी दल तमिलनाडु के लोकतंत्र का कोई भला नहीं कर सकते।'' शाह ने कथित भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को लेकर भी द्रमुक की आलोचना की।
उन्होंने कहा, ''राज्य में अन्नाद्रमुक एवं भाजपा की सरकार बनने पर द्रमुक का भ्रष्ट शासन खत्म होगा। हम तमिलनाडु में भी अन्य राज्यों की तरह कानून-व्यवस्था बेहतर बनाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम तमिलनाडु की खोई हुई गरिमा वापस लाने का प्रयास करेंगे।'' शाह ने भाजपा को मिलने वाले ''उत्साहपूर्ण समर्थन'' की भी सराहना की।
प्रचार वाहन पर सवार भाजपा के वरिष्ठ नेता शाह ने मोडक्कुरिची मांगे और लोगों से उन्हें भा विधानसभा क्षेत्र से पार्टी की उम्मीदवार कृतिका के लिए वोटरी अंतर से विजयी बनाने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ''तमिलनाडु में भाजपा के लिए उत्साहपूर्ण समर्थन। इरोड दक्षिण में रोड शो से सीधा प्रसारण। -
नयी दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण पर तीन दिन की वार्ता के लिए भारत के लगभग एक दर्जन अधिकारी 20 अप्रैल को वाशिंगटन पहुंचेंगे। एक अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि चूंकि अमेरिका में शुल्क ढांचा बदल गया है, इसलिए दोनों पक्ष उस समझौते पर फिर से विचार कर सकते हैं, जिसका मसौदा सात फरवरी को जारी किया गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कई देशों पर लगाए गए व्यापक शुल्क के खिलाफ अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिन के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है। अधिकारी ने कहा, ''बैठक 20-22 अप्रैल तक वाशिंगटन डीसी में होगी। भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। सीमा शुल्क और विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी भारतीय दल का हिस्सा हैं।'' इसके अलावा, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) द्वारा शुरू की गई जांच पर भी इन तीन दिवसीय विचार-विमर्श में चर्चा हो सकती है। भारत ने व्यापार कानून की धारा 301 के तहत इन जांच में लगाए गए आरोपों को कड़ाई से खारिज कर दिया है और जांच को समाप्त करने का अनुरोध किया है। पुराने ढांचे के अनुसार अमेरिका भारत पर शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ था। उसने रूसी तेल खरीदने के लिए भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क को हटा दिया था और बाकी 25 प्रतिशत को समझौते के तहत घटाकर 18 प्रतिशत करना था। हालांकि, इसके बाद 20 फरवरी को अमेरिकी शीर्ष अदालत ने ट्रंप के जवाबी शुल्क के खिलाफ फैसला सुनाया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने 24 फरवरी से सभी देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क की घोषणा कर दी। इन बदलावों के कारण फरवरी में होने वाली मुख्य वार्ताकारों की बैठक स्थगित कर दी गई थी। अब वे 20 अप्रैल, 2026 को वाशिंगटन में मिल रहे हैं।
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देहरादून. छह माह बंद रहने के बाद अक्षय तृतीया के पर्व पर रविवार को गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ फिर से खोल दिए गए तथा इसके साथ ही उत्तराखंड में इस वर्ष की चारधाम यात्रा की शुरुआत हो गयी। इस वर्ष पहली बार गंगोत्री सहित तीन धामों में गैर सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध और विशेष शर्तें लागू की गई हैं। उत्तरकाशी जिले में स्थित दोनों धामों में पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से की गयी जबकि गंगोत्री मंदिर के कपाट खुलने के मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी पहुंचे और चारधाम यात्रा के सफल आयोजन तथा देश-प्रदेश की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। धार्मिक विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगोत्री मंदिर के कपाट अपराह्न करीब 12:15 बजे तथा यमुनोत्री मंदिर के कपाट 12:35 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस दौरान दोनों धामों में मौजूद सैकड़ों श्रद्धालु 'हर-हर गंगे' और 'जय मां यमुना' के जयकारे लगा रहे थे। मुख्यमंत्री धामी ने गंगोत्री धाम में प्रधानमंत्री मोदी के नाम से पहली पूजा कर देश और प्रदेश की समृद्धि की प्रार्थना की। धामी ने कहा कि उत्तराखंड के चारधाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था के प्रमुख केंद्र हैं और राज्य सरकार ने यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम बनाने के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का यह प्रयास है कि यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को दिव्य धामों का आशीर्वाद मिलने के साथ ही उनकी यात्रा का अनुभव सुरक्षित, सुखद और यादगार हो। साथ ही धामी ने श्रद्धालुओं से 'ग्रीन और क्लीन' चारधाम यात्रा के लिए सहयोग की अपील भी की। उत्तराखंड के चारधामों में शामिल अन्य दो धाम-रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को तथा चमोली जिले के बदरीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। इस वर्ष तीन धामों में गैर सनातनियों के प्रवेश को लेकर अलग-अलग शर्तें तय की गई हैं। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने दोनों मंदिर परिसरों में प्रवेश के लिए सनातन धर्म के प्रति आस्था का हलफनामा अनिवार्य किया है, जबकि गंगोत्री मंदिर समिति ने पंचगव्य (गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी) ग्रहण करने के बाद ही प्रवेश की अनुमति देने की घोषणा की है। हालांकि, यमुनोत्री मंदिर समिति ने अलग रुख अपनाते हुए बिना जाति-धर्म पूछे श्रद्धाभाव से आने वाले सभी श्रद्धालुओं के स्वागत का निर्णय लिया है। इसके अलावा, इस बार चारों धामों के मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। पिछले वर्ष चारधाम यात्रा में 51 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे, जबकि इस वर्ष अब तक करीब 19 लाख श्रद्धालु ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण करा चुके हैं। उच्च गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र में स्थित ये चारों धाम सर्दियों में भारी बर्फबारी और भीषण ठंड के कारण हर साल अक्टूबर-नवंबर में बंद कर दिए जाते हैं और अप्रैल-मई में पुनः श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं।
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पुरुलिया (बंगाल). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह घुसपैठ के जरिए राज्य की भाषा और संस्कृति बदल रही है, आदिवासी क्षेत्रों की अनदेखी कर रही है और ''महाजंगलराज'' चला रही है। आदिवासी आबादी वाले पुरुलिया में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले जंगलमहल क्षेत्र में भाजपा की राजनीतिक धार तेज करने की कोशिश की और चुनावी मुकाबले को ''विकास बनाम तुष्टीकरण'' की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा, ''घुसपैठ के कारण बंगाल की भाषा और संस्कृति बदल रही है।'' उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल की राजनीति ने राज्य के सामाजिक चरित्र को बदल दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर हमला तेज करते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण आदिवासी पहचान और भाषा की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा, ''संथाली भाषा का अपमान हो रहा है, जबकि मदरसा शिक्षा के लिए रिकॉर्ड बजट दिया जा रहा है। यह और कुछ नहीं, सिर्फ तुष्टीकरण है।'' प्रधानमंत्री ने तृणमूल कांग्रेस शासन को बार-बार ''महाजंगलराज'' करार देते हुए आरोप लगाया कि पुरुलिया, बांकुड़ा और झाड़ग्राम जैसे आदिवासी बहुल जिलों को सड़क, पेयजल, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है। उन्होंने कहा, ''तृणमूल के महाजंगलराज में आदिवासी बहुल जिले विकास और बुनियादी सुविधाओं में पिछड़ गए हैं।'' आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा को स्वाभाविक राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश करते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल ने स्थानीय गिरोहों के जरिए आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया, ''तृणमूल गिरोह ने आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर लिया है। सत्तारूढ़ दल को 'कट मनी' (रिश्वत) दिए बिना कोई काम नहीं होता।'' मोदी ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल ने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का विरोध इसलिए किया, क्योंकि उसे ज्यादा महिला जनप्रतिनिधियों से ''डर'' था। उन्होंने कहा, ''तृणमूल को डर था कि अगर ज्यादा महिला विधायक चुनकर आएंगी तो वे महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाएंगी। इसलिए उसने महिला आरक्षण का विरोध किया। मतदान के समय इस अपराध की सजा भी तृणमूल को देनी चाहिए।'' प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और उगाही ने राज्य में शासन व्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों को पंगु बना दिया है। उन्होंने कहा, ''तृणमूल के जंगलराज में रिश्वत दिए बिना कोई काम नहीं होता। जब रिश्वतखोरी थोप दी जाए तो उद्योग कैसे फलेंगे-फूलेंगे? इसलिए यहां उद्योग भी बदहाल हैं।'' भ्रष्टाचार को बेरोजगारी से जोड़ते हुए मोदी ने दावा किया कि तृणमूल के 15 वर्षों के शासन में पश्चिम बंगाल में खतरनाक स्तर की बेरोजगारी रही है। स्कूल भर्ती घोटाले का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल नेताओं ने हजारों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया। उन्होंने कहा, ''तृणमूल मंत्रियों ने शिक्षकों की भर्ती में लूट की और हजारों युवाओं के साथ धोखा किया।'' उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल के हजारों स्कूल बिना शिक्षकों के चल रहे हैं, क्योंकि नौकरियां ''लूट'' ली गईं। पश्चिम बंगाल के इस पश्चिमी हिस्से में सत्ता विरोधी लहर का दावा करते हुए मोदी ने कहा कि पुरुलिया के लोग अब बदलाव की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ''पूरा पुरुलिया बदलाव चाहता है और कह रहा है 'पलटानो दरकार' (बदलाव जरूरी है)।''
मोदी ने कहा कि जहां-जहां भ्रष्टाचार और अत्याचार चरम पर पहुंचे, वहां लोगों ने आखिरकार भाजपा को विकल्प के रूप में चुना। उन्होंने कहा, ''तृणमूल के भ्रष्टाचार और अत्याचार ने बंगाल की जनता को आतंकित कर दिया है। लेकिन अब लोग भाजपा को एकमात्र विश्वसनीय विकल्प मानते हैं।'' लोगों से वोट की अपील करते हुए मोदी ने कहा कि बंगाल को अब केंद्र में ही नहीं, राज्य में भी भाजपा सरकार चाहिए। उन्होंने कहा, ''आपने मुझे प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी दी है, अब बंगाल को भी भाजपा का मुख्यमंत्री चाहिए।'' भाजपा के ''डबल इंजन'' नारे को आगे बढ़ाते हुए मोदी ने दावा किया कि अगर केंद्र और राज्य दोनों जगह उनकी पार्टी की सरकार होगी तो पुरुलिया का विकास दोगुनी रफ्तार से होगा। उन्होंने कहा, ''जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों भाजपा के होंगे, तो पुरुलिया का विकास मौजूदा रफ्तार से दोगुना होगा।'' उन्होंने भरोसा जताया कि विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा का मुख्यमंत्री शपथ लेगा। भाजपा शासित पड़ोसी राज्यों से तुलना करते हुए मोदी ने कहा कि आदिवासी समुदायों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व केवल भाजपा ने दिया है। उन्होंने कहा, ''ओडिशा और छत्तीसगढ़ में हमने आदिवासियों को मुख्यमंत्री बनाया है।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र ने आदिवासी मामलों के लिए अलग मंत्रालय बनाया और आदिवासी कल्याण के लिए विशेष धनराशि दी, जबकि तृणमूल सरकार ने इस क्षेत्र की अनदेखी की। भाषा और पहचान के मुद्दे पर भाजपा की स्थिति मजबूत करने की कोशिश करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी पार्टी हर भाषा और बोली का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं को ज्यादा महत्व दिया गया है, ताकि गरीब, ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के बच्चे अपनी मातृभाषा में पढ़ सकें। मोदी ने कहा कि बंगाल में भाजपा सरकार बांग्ला, संथाली, कुर्माली और राजबंशी भाषाओं को मजबूत करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्ला भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा भाजपा सरकार ने दिलाया। - मोतिहारी. बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने 2025 में 25 विदेशी नागरिकों को अवैध रूप से देश में रहने के आरोप में हिरासत में लिया। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि इन 25 विदेशियों में बांग्लादेशी, श्रीलंकाई और संयुक्त अरब अमीरात के नागरिक शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इन देशों में अपने समकक्षों को विदेशी नागरिकों की हिरासत के बारे में सूचित कर दिया है। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में शनिवार को पूर्वी चंपारण के रक्सौल में हुई समीक्षा बैठक के दौरान यह जानकारी सामने आई। इस बैठक में बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार, जिलाधिकारी , पुलिस अधीक्षक, अनुमंडल अधिकारी, जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। जिला प्रशासन द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, ''मुख्य सचिव की अध्यक्षता में भारत-नेपाल सीमा संबंधी मुद्दों पर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। 2022 से 2026 के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में शराब की तस्करी के 22,500 मामले दर्ज किए गए, हथियारों की तस्करी के 779 मामलों में 1,179 गिरफ्तारियां हुईं। जाली मुद्रा के दस मामलों में 54.64 लाख रुपये की जब्ती की गई।'' बयान के मुताबिक ''विदेशी घुसपैठ के 41 अवैध मामलों में एक उल्लेखनीय तथ्य यह है कि अकेले 2025 में 25 विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए व्यक्तियों में बांग्लादेश, श्रीलंका और अबू धाबी के नागरिक शामिल हैं।
- नयी दिल्ली. भारत के महापंजीयक ने शनिवार को कहा कि अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले में स्थित पासीघाट को चीनी शहर 'मेडोग' के रूप में दर्शाने वाले स्व-गणना मानचित्र से संबंधित 'समस्या' का समाधान कर लिया गया है। इस मुद्दे को मोहोंटो पांगिंग पाओ नामक एक 'एक्स' उपयोगकर्ता ने उठाया। उसने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक पोस्ट किया। सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर स्व-गणना करने का प्रयास करने के दौरान सामने आने वाले मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट को कथित तौर पर 'मेडोग' के रूप में दर्शाया गया था। पाओ ने पोस्ट में कहा, ''मेडोग चीन का एक कस्बा है! गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई भारतीय हैं! यहां तक कि सरकारी पोर्टल भी वस्तुतः हमारे क्षेत्र को सौंप रहे हैं! तत्काल कार्रवाई की जरूरत है!'' महापंजीयक ने शाम को स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा, ''आज अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में सरकारी पोर्टल के जरिये स्व-गणना के दौरान मानचित्र स्थान को लेकर एक समस्या सामने आई।'' जनगणना आयुक्त ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''मानचित्र सेवा प्रदाता के साथ यह मुद्दा उठाया गया था और इसका समाधान कर लिया गया है।
- नयी दिल्ली. भाजपा ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देश की महिलाओं को सशक्त बनाने के संकल्प को पूरा करने का वादा किया, और पार्टी प्रमुख नितिन नवीन ने कहा कि मोदी के रहते यह संभव है। शुक्रवार को लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाया, जिसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और 2029 से विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव था।राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी ने महिलाओं से माफी मांगी और कहा कि सरकार भले ही विधेयक को पारित नहीं करा पाई हो, लेकिन वह महिलाओं को सशक्त बनाने के अपने प्रयासों को कभी नहीं छोड़ेगी। प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद नवीन ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आज हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अधिनियम को पूरा करने का संकल्प लिया है, और हम भी प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में इसे पूरा करेंगे।'' उन्होंने कहा, ''ऐसा इसलिए है क्योंकि 'मोदी है तो मुमकिन है'।''भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस और इसके सहयोगियों-तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि शुक्रवार को लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ मतदान करने पर उनका ''महिला-विरोधी'' चेहरा बेनकाब हो गया।
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नई दिल्ली। अक्षय तृतीया के दिन खुलेंगे गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट, ‘हर-हर गंगे’ के जयकारों के बीच निकली मां गंगा की उत्सव डोली
सनातन धर्म की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक चार धाम यात्रा का शुभारंभ हो चुका है और अक्षय तृतीया के दिन, कल रविवार (19 अप्रैल) को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोले जाएंगे।गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के मंदिरों में सजावट का काम भी शुरू हो चुका है, लेकिन इसी के साथ मां गंगा की उत्सव डोली आज शनिवार को उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव से गंगोत्री धाम के लिए विधिवत पूजा-अर्चना के साथ रवाना हो गई।मां गंगा की उत्सव डोली को शनिवार को विधिवत पूजा के साथ रवाना किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में आस्था, श्रद्धा, और उल्लास का संगम देखने को मिला। मां गंगा की उत्सव डोली के रवाना होने के साथ भक्तों के बीच उत्साह देखा गया। रविवार को निर्धारित शुभ मुहूर्त में गंगोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलते ही देश-विदेश से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के दर्शन शुरू हो जाएंगे।मुखवा गांव में डोली प्रस्थान से पहले मां की उत्सव डोली की विशेष पूजा-अर्चना की गई और पूरे गांव को भव्य तरीके से सजाया गया। स्थानीय लोगों ने भी मां गंगा की डोली को ढोल-दमाऊ, रणसिंघा और पारंपरिक वाद्य यंत्रों से मां के साथ विदा किया। पूरे मंदिर परिसर में श्रद्धालु की “जय मां गंगे” के जयकारों की गूंज सुनने को मिली। डोली यात्रा में भक्तों और अधिकारियों की भारी भीड़ देखने को मिली। यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और साधु-संत, तीर्थ पुरोहित, स्थानीय जनप्रतिनिधि, और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। सभी मिलकर मां गंगा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े।वहीं दूसरी तरफ अक्षय तृतीया के मौके पर मां गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोले जाएंगे, जिसको लेकर मंदिर समिति और प्रशासन की तरफ से पुख्ता इंतजाम कर लिए गए हैं। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। यातायात प्रबंधन, पार्किंग, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, सफाई व्यवस्था तथा आपदा प्रबंधन की विशेष तैयारियां की गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। शीतकाल में अधिक बर्फबारी की वजह से गंगोत्री धाम के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और मां गंगा की विग्रह डोली को मुखवा गांव में बने मंदिर में स्थापित किया जाता है, और वहां पूरे विधान के साथ मां गंगा की पूजा की जाती है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित कराने के प्रयासों को 'विफल' करने के लिए कांग्रेस को 'महिला-विरोधी' करार दिया। रीजीजू ने कहा कि महिलाओं को निर्णय-निर्माण में उनका उचित स्थान दिलाने के लिए सरकार के प्रयास जारी रहेंगे। बजट सत्र के समापन पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि यद्यपि सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन को इस बात का दुख है कि महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा में पारित नहीं हो सका, लेकिन वे इसे विफलता नहीं मानते। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिलाओं के अधिकारों को 'छीनने' के बाद 'जश्न मना रही है', जिसके लिए देश की महिलाएं उन्हें करारा सबक सिखाएंगी। रीजीजू ने कहा, ''यह साबित हो चुका है कि कांग्रेस महिला विरोधी है। उसे देश की महिलाओं के प्रकोप का सामना करना पड़ेगा। विपक्ष महिलाओं के अधिकारों को छीनने के बाद इसे जीत मान रहा है। लेकिन देश की महिलाएं उन्हें करारा सबक सिखाएंगी।'' मंत्री ने कहा कि कांग्रेस की 'महिला विरोधी मानसिकता' उजागर हो गई है, जो पार्टी के लिए एक 'काला धब्बा' है। उन्होंने कहा, ''हमें दुख है, लेकिन हम इसे पार्टी और सरकार की विफलता नहीं मानते। उन्होंने देश की महिलाओं को ठेस पहुंचाई है। हम महिलाओं को सम्मान देना चाहते थे, उन्हें सशक्त बनाना चाहते थे…, हम ऐसा करना जारी रखेंगे।'' रीजीजू ने कहा कि सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन ने विधेयक पारित कराने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। उन्होंने कहा, ''हम विपक्ष को शारीरिक रूप से किसी विधेयक के पक्ष में मतदान करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। मतदान लोकतांत्रिक तरीके से हुआ।'' विपक्षी दलों द्वारा विरोध में मतदान करने के बाद शुक्रवार रात लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित नहीं हो पाया। इस विधेयक के तहत, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद, 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए लोकसभा सीटों को वर्तमान संख्या 543 से बढ़ाकर 816 तक किया जाना था। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाई जानी थी। इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक था, लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाला सत्तारूढ़ गठबंधन आवश्यक संख्या जुटाने में विफल रहा। मतदान के दौरान, 298 सदस्यों ने विधेयक के समर्थन में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से, संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत यानी 352 मतों की आवश्यकता थी। रीजीजू ने कहा कि बजट सत्र के दौरान, लोकसभा में 12 विधेयक और राज्यसभा में एक विधेयक पेश किया गया।
उन्होंने बताया कि लोकसभा ने नौ विधेयक पारित किए, राज्यसभा ने नौ विधेयक पारित/वापस कर दिए और एक विधेयक लोकसभा से वापस ले लिया गया। मंत्री ने कहा, ''लोकसभा की उत्पादकता लगभग 93 प्रतिशत और राज्यसभा की लगभग 110 प्रतिशत रही।''
बजट सत्र के पहले भाग में लोकसभा और राज्यसभा, दोनों की 13-13 बैठकें हुईं। दूसरे भाग में दोनों सदनों की 15-15 बैठकें हुईं। बजट सत्र के तीसरे भाग (16 से 18 अप्रैल तक) में लोकसभा और राज्यसभा की तीन-तीन बैठकें हुईं, जिससे सत्र के दौरान 81 दिनों में कुल बैठकों की संख्या 31 हो गई। -
नयी दिल्ली. उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने शनिवार को संसद का बजट सत्र समाप्त होने के बाद अपने कार्यालय में कई सांसदों से मुलाकात की। इस मौके पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, सदन के नेता जेपी नड्डा, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा अध्यक्ष और सांसद नितिन नवीन भी मौजूद थे। इस अनौपचारिक बैठक में उपस्थित अन्य संसद सदस्यों में दिग्विजय सिंह, राजीव शुक्ला, जॉन ब्रिटास, प्रमोद तिवारी, रंजीत रंजन, जेबी माथेर, शक्तिसिंह गोहिल, नासिर हुसैन और नीरज डांगी शामिल थे। सभापति ने दोनों सदनों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद सांसदों से मुलाकात की।
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हैदराबाद. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने शनिवार को कहा कि जलवायु और वायु प्रदूषण का अध्ययन करने तथा मौसम की निगरानी करने के लिए डिजाइन किए गए जी20 उपग्रह को 2027 में प्रक्षेपित किए जाने की उम्मीद है। 'इंजीनियरिंग स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया' में डीआरडीओ, इसरो और एयरोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए डॉ. नारायणन ने यह भी कहा कि भारत पहला देश है जिसने एक ही रॉकेट का उपयोग करके 100 से अधिक उपग्रहों को सफलतापूर्वक स्थापित किया है। उन्होंने कहा, ''फिलहाल हम जी20 देशों के लिए एक जी20 उपग्रह पर भी काम कर रहे हैं, जिसमें भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है, और हम 2027 तक इसका प्रक्षेपण करने जा रहे हैं।'' नारायणन ने कहा कि इसरो ने 34 देशों के 433 उपग्रहों सहित कई वाणिज्यिक मिशन पूरे किए गए।
उन्होंने कहा कि इसरो 2040 तक चंद्रमा पर मानव मिशन की दिशा में काम कर रहा है।
इसरो प्रमुख ने कहा, ''अगर हम 2040 तक इसे हासिल कर लेते हैं, तो हम प्रक्षेपण तकनीक, उपग्रह तकनीक, अनुप्रयोग क्षेत्र और मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के मामले में किसी भी अन्य अंतरिक्ष यात्री राष्ट्र के बराबर होंगे। हम 'विकसित भारत' की दिशा में काम कर रहे हैं।'' -
नयी दिल्ली. संसद का शनिवार को संपन्न हुआ बजट सत्र कई बातों को लेकर संसदीय इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया तथा इसी दौरान महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को सरकार शुक्रवार को लोकसभा की मंजूरी दिलवाने में विफल रही। सत्र के दौरान एक दुर्लभ बात उस समय भी देखने को मिली जब राष्ट्रपति अभिभाषण का धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जवाब के बिना ही पारित हो गया। हालांकि राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने इस प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दिया। इसी सत्र के दौरान लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध लाये अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई और निचले सदन ने बाद में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इस प्रस्ताव पर चर्चा और इसे खारिज किए जाने तक बिरला ने अध्यक्ष के तौर पर सदन की कार्यवाही का संचालन नहीं किया। राज्यसभा में इस सत्र के दौरान एक नया इतिहास तब दर्ज किया गया जब कोई मनोनीत सदस्य उप सभापति पद पर निर्वाचित हुआ। मनोनीत सदस्य हरिवंश को शुक्रवार को निर्विरोध उपसभापति निर्वाचित किया गया। इससे पहले भी हरिवंश लगातार दो बार उच्च सदन के उप सभापति पद पर निर्वाचित हो चुके हैं। किंतु उस दौरान वह जनता दल (यू) सदस्य के तौर पर निर्वाचित हुए थे। इसी सत्र में एक नया इतिहास यह भी बना कि सत्र का समापन होने से ठीक पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम की केवल धुन बजाये जाने के स्थान पर इसके पूरे छह अंतरों का पहले से रिकार्ड किया गया गान बजाया गया। लोकसभा में बृहस्पतिवार और शुक्रवार को महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' पर एकसाथ चर्चा की गयी। हालांकि संविधान संशोधन विधेयक पर हुए मतदान में यह पारित नहीं हो पाया। इस कारण से अन्य दो विधेयक को पारित करवाने के लिए सरकार ने रखा ही नहीं। संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हुआ था और इसका पहला चरण 13 फरवरी तक चला था। इसका दूसरा चरण नौ मार्च से शुरू हुआ और सरकार ने पहले घोषणा की थी कि यह दो अप्रैल तक चलेगा। किंतु दो अप्रैल को संसद के दोनों सदनों में घोषणा की गयी कि अगली बैठक 16 अप्रैल को होगी। सत्र को आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी गई है। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से लागू होगी, जिससे कर्मचारियों की सैलरी में इजाफा होगा।
कैबिनेट ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त महंगाई भत्ता (डीए) और पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत (डीआर) जारी करने की भी मंजूरी दी है। यह बढ़ोतरी मौजूदा 58 प्रतिशत की दर से 2 प्रतिशत ज्यादा है, जो महंगाई के असर को कम करने के लिए दी जा रही है।सरकार के अनुसार, डीए और डीआर बढ़ाने से सरकारी खजाने पर सालाना करीब 6,791.24 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इस फैसले से लगभग 50.46 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 68.27 लाख पेंशनर्स को फायदा मिलेगा। यह बढ़ोतरी 7वां केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय किए गए फॉर्मूले के अनुसार की गई है। इस फैसले से कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी होगी, वहीं दूसरी ओर प्रस्तावित 8वें वेतन आयोग को लेकर भी वेतन संरचना में बड़े बदलाव की मांग तेज हो रही है।इसी बीच, नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (एनसी-जेसीएम) ने सरकार को दिए गए ज्ञापन में फिटमेंट फैक्टर को 3.83 तक बढ़ाने की मांग की है। अगर यह प्रस्ताव मान लिया जाता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपए से बढ़कर करीब 69,000 रुपए तक पहुंच सकती है।फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा गुणक होता है, जिसके जरिए महंगाई और जीवन-यापन की लागत को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों की सैलरी तय की जाती है। एनसी-जेसीएम ने इसके अलावा हर साल 6 प्रतिशत वेतन वृद्धि, प्रमोशन पर दो इंक्रीमेंट और कम से कम 10,000 रुपए का लाभ देने जैसे सुझाव भी दिए हैं। यदि ये बदलाव लागू होते हैं, तो देश के 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारी और करीब 65 लाख पेंशनर्स सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि आज भारत का हर नागरिक देख रहा है कि कैसे भारत की नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया। उनके सपनों को बेरहमी से कुचल दिया गया। हमारे भरसक प्रयास के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए। नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया। पीएम मोदी ने कहा कि नारी सब भूल जाती है अपना अपमान कभी नहीं भूलती। देश की नारी जब भी अपने क्षेत्र में इन नेताओं को देखेगी तब वो याद करेगी कि इन्हीं लोगों ने संसद में महिला आरक्षण को रोकने का जश्न मनाया था।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि महिला आरक्षण का विरोध करके जो पाप विपक्ष ने किया है उसकी सजा उन्हें जरूर मिलेगी। इन दलों ने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का भी अपमान किया है। जनता द्वारा इसकी सजा से भी वो बच नहीं पाएंगे।प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा, “कांग्रेस और उसके सहयोगी दल परिसीमन पर लगातार झूठ बोल रहे हैं। ये लोग विभाजन की आग को सुलगाना चाहते हैं क्योंकि बांटो और राज करो ये राजनीति कांग्रेस अंग्रेजों से विरासत में सीखकर आई है और कांग्रेस आज भी उसी के सहारे चल रही है। “उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन संशोधन समय की मांग है। नारी शक्ति वंदन संशोधन सभी राज्यों की शक्ति में समान वृद्धि का प्रयास था। ये संसद में सभी राज्यों की आवाज को अधिक शक्ति देने का प्रयास था। सब राज्यों की समान अनुपात में शक्ति बढ़ाने की कोशिश थी। लेकिन इस प्रयास की कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने सदन में पूरे देश के सामने भ्रूण हत्या कर दी है। कांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी, DMK जैसे दल इस भ्रूण हत्या के जिम्मेदार हैं।पीएम मोदी ने कहा, “महिलाओं के आरक्षण का विरोध करके कांग्रेस ने फिर एक बात सिद्ध कर दी है कि कांग्रेस एंटी रिफॉर्म पार्टी है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन संशोधन किसी से कुछ छीनने का नहीं था, नारी शक्ति वंदन संशोधन हर किसी को कुछ न कुछ देने का था। ये 40 साल से लटके हुए नारी के हक को 2029 के लोकसभा चुनाव से उसका हक देने का संशोधन था।प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे लिए देशहित सर्वोपरि है। लेकिन जब कुछ लोगों के लिए दलहित सबकुछ हो जाता है। दलहित देशहित से बड़ा हो जाता है तो नारी शक्ति को देशहित को इसका खामियाजा उठाना पड़ता है। इस बार भी यहीं हुआ। कांग्रेस, DMK, TMC और समाजवादी जैसी पार्टियों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश की नारी शक्ति को उठाना पड़ा है। -
नई दिल्ली। पुणे एयरपोर्ट से विमान सेवाओं का परिचालन फिर से शुरू हो गया है। भारतीय वायु सेना के एक विमान से जुड़ी घटना के बाद पुणे हवाई अड्डे का रनवे कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था। भारतीय वायु सेना ने बताया कि पुणे हवाई अड्डे पर शुक्रवार रात करीब 22:25 बजे लैंडिंग के दौरान एक लड़ाकू विमान के अंडरकैरिज में खराबी आ गई और वह रनवे पर ही फंस गया। इस तकनीकी खराबी के कारण रनवे पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया और हवाई अड्डे पर विमानों का परिचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।
भारतीय वायु सेना एटीसी के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया था कि रनवे से रुकावट हटाने और सामान्य विमान परिचालन फिर से शुरू करने में लगभग 4 से 5 घंटे का समय लगेगा। इस घटना के बाद, रनवे कुछ समय के लिए पूरी तरह से बंद रहा। इस बीच, मरम्मत का काम प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया गया और पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की गई। इसके बाद शनिवार सुबह 07:30 बजे से विमानों की रवानगी फिर से शुरू हो गई। जबकि विमानों का आगमन सुबह 08:00 बजे से शुरू हुआ।गौरतलब है कि पुणे हवाई अड्डा, जो नागरिक और सैन्य दोनों तरह के विमानों के संचालन का केंद्र है। महाराष्ट्र के प्रमुख विमानन केंद्रों में से एक है। रनवे की उपलब्धता में किसी भी तरह की रुकावट से आमतौर पर व्यस्त समय (पीक आवर्स) के दौरान कई विमानों के आगमन और प्रस्थान पर असर पड़ता है।गुरुवार को हुई एक अलग घटना में दिल्ली हवाई अड्डे पर स्पाइसजेट का एक विमान अकासा एयर के एक खड़े विमान से टकरा गया। इस टक्कर से दोनों विमानों को मामूली नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है। यह घटना दोपहर लगभग 2:15 बजे हुई। उस समय लेह से आया स्पाइसजेट का विमान अपने निर्धारित ‘बे’ (पार्किंग स्थल) की ओर बढ़ रहा था, तभी वह अकासा एयर के विमान के संपर्क में आ गया। अकासा एयर का वह विमान उस समय हैदराबाद के लिए उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था।शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, स्पाइसजेट विमान का दाहिना ‘विंगलेट’ क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि टक्कर के कारण अकासा एयर विमान के बाएं ‘हॉरिजॉन्टल स्टेबलाइजर’ (विमान को संतुलित रखने वाला हिस्सा) को क्षति पहुंची। अकासा एयर के एक प्रवक्ता ने बताया कि दिल्ली से हैदराबाद जाने वाली उसकी उड़ान (फ्लाइट क्यूपी 1406) घटना के बाद वापस अपने ‘बे’ पर लौट आया। प्रवक्ता ने कहा, “शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि अकासा का विमान उस समय स्थिर (खड़ा) था, जब किसी अन्य एयरलाइन का विमान उससे टकरा गया।” -
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उसने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से जुड़े एक संविधान संशोधन विधेयक को पारित होने से रोक दिया और लोकसभा में इसे रोके जाने का ‘जश्न’ मनाया।
कल शुक्रवार को सदन में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि वे “बेहद परेशान करने वाली और शर्मनाक” थीं, और आरोप लगाया कि विपक्ष ने न सिर्फ बिल का विरोध किया, बल्कि उसे रोककर नारे भी लगाए।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, गोयल ने कहा कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी और ‘इंडिया’ गठबंधन के दूसरे सहयोगी बहस करने के लिए नहीं, बल्कि बिल को आगे बढ़ने से रोकने के लिए एक साथ आए थे। उन्होंने लिखा, “आज, लोकसभा में एक बेहद परेशान करने वाला और शर्मनाक नज़ारा देखने को मिला। कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, समाजवादी पार्टी और ‘इंडी’ गठबंधन बहस करने के लिए नहीं, बल्कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के लिए एक अहम संविधान संशोधन बिल को पास होने से रोकने के लिए एक साथ आए। एक ऐसा बिल जो महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की गारंटी देना चाहता था, उसे न सिर्फ खारिज किया गया, बल्कि हैरानी की बात यह है कि जीत के नारों के साथ उसका जश्न भी मनाया गया।”उन्होंने पोस्ट में कहा, “यह विरोध की राजनीति नहीं है, बल्कि भारत की महिलाओं के साथ सोच-समझकर किया गया विश्वासघात है।” विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाते हुए, गोयल ने कहा कि यह साफ नहीं था कि आखिर किस बात का जश्न मनाया जा रहा था; उन्होंने आगे कहा कि ऐसे काम पितृसत्ता का समर्थन करने और महिलाओं के अधिकारों को दबाने के बराबर हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि बिल को रोककर, विपक्ष ने महिलाओं को विधायी निकायों में उनका सही प्रतिनिधित्व देने से मना कर दिया है। गोयल ने पोस्ट में कहा कि ये घटनाएँ एक बड़े पैटर्न को दिखाती हैं, और उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर महिलाओं के सशक्तिकरण का विरोध करने और राष्ट्रीय प्रगति से ऊपर राजनीतिक हितों को रखने का आरोप लगाया।केंद्रीय मंत्री ने कहा, “यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। यह एक पैटर्न है।” उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष का रवैया न तो महिलाओं के हितों के अनुरूप था और न ही देश की आकांक्षाओं के।गोयल ने आगे कहा कि इस मुद्दे के राजनीतिक नतीजे होंगे, और जोर देकर कहा कि महिला वोटर इन घटनाओं को याद रखेंगी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “उनकी सोच सबके सामने आ गई है, जो न तो महिलाओं के हितों के साथ है और न ही एक उभरते भारत की आकांक्षाओं के साथ। हमारी नारी शक्ति का यह अपमान न तो भुलाया जाएगा और न ही माफ़ किया जाएगा। यह बात दूर-दूर तक फैलेगी, हर निर्वाचन क्षेत्र, हर राज्य और हर चुनाव में इसकी गूंज सुनाई देगी। भारत की महिलाएं याद रखेंगी कि कौन उनके साथ खड़ा था और कौन उनके खिलाफ।”केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष के इन कामों की ‘राजनीतिक कीमत’ न केवल 2029 के लोकसभा चुनावों में, बल्कि अन्य चुनावी मुकाबलों में भी देखने को मिलेगी।उन्होंने कहा, “इस धोखे की राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी, न केवल 2029 के लोकसभा चुनावों में, बल्कि पूरे भारत में हर चुनाव में।” -
नई दिल्ली। मनोनीत सदस्य हरिवंश लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुन लिए गए हैं। उन्हें निर्विरोध चुना गया। राज्यसभा में सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने श्री हरिवंश के नाम का प्रस्ताव रखा। श्री हरिवंश का कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त होने के बाद उपसभापति का पद रिक्त हो गया था। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के राज्यसभा से सेवानिवृत्ति के बाद रिक्त हुए राज्यसभा के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें मनोनीत किया था।
तीसरी बार उपसभापति चुने जाने के बाद श्री हरिवंश कहा कि मतभेद और स्वस्थ बहस लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय कामकाज में व्यवधान के लिए कोई जगह नहीं है।इससे पहले, राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्री हरिवंश को तीसरी बार उपसभापति चुने जाने पर बधाई दी। श्री मोदी ने कहा कि उनकी बुद्धिमत्ता ने सदन के वातावरण को अधिक परिपक्व और रचनात्मक बनाने में योगदान दिया है।राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी श्री हरिवंश को बधाई दी। हालांकि श्री खरगे ने चिंता व्यक्त की कि लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद वर्ष 2019 से रिक्त है।राज्यसभा में सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि श्री हरिवंश का राज्यसभा के उपसभापति के रूप में एक बार फिर निर्विरोध निर्वाचित होना संतोष की बात है। श्री नड्डा ने कहा कि उनके नेतृत्व में सदन की कार्यप्रणाली में सुधार हुआ है। सदन की कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

















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