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नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चक्रवात 'अर्नब' के प्रभाव को देखते हुए बृहस्पतिवार को आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से बात की और लोगों की मुश्किलें कम करने के लिए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार रात जारी बुलेटिन में कहा था कि तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और बंगाल की खाड़ी के आसपास के क्षेत्र में बना भीषण चक्रवाती तूफान पिछले छह घंटों के दौरान लगभग आठ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धीरे-धीरे आगे बढ़ा और कमजोर होकर चक्रवाती तूफान में बदल गया। आईएमडी ने कहा, ''अगले 48 घंटों के दौरान इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना है। यह 28 अक्टूबर, 2026 की मध्यरात्रि तक कमजोर होकर गहरे दबाव के क्षेत्र में बदल जाएगा।'' शाह ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम सक्रिय हो गई है और युद्धस्तर पर बचाव एवं राहत अभियान जारी है। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, ''चक्रवात 'अर्नब' के मद्देनजर मैंने आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से बात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि इस आपदा का सामना कर रहे लोगों की मुश्किलों को कम करने के लिए हरसंभव मदद दी जाएगी।'' उन्होंने कहा, ''आपदा के असर का आकलन करने और आगे की आवश्यक सहायता को लेकर जानकारी जुटाने के लिए जल्द कई अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (आईएमसीटी) भेजी जाएंगी। भारत सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है।''
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नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन ने बृहस्पतिवार को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिवों के साथ पार्टी मुख्यालय में बैठक की। इस दौरान शिवराज सिंह चौहान, पीयूष गोयल और किरेन रिजीजू समेत कई केंद्रीय मंत्री भी मौजूद रहे। निर्वाचन आयोग के कामकाज और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की दिल्ली में एक नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली से पहले यह बैठक हुई। बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पीयूष गोयल, किरेन रीजीजू और अश्विनी वैष्णव शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अलावा भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी भी बैठक में मौजूद रहीं। बैठक में हुई चर्चा के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि इसमें एसआईआर के खिलाफ विपक्ष के लगातार अभियान और इससे निपटने के लिए पार्टी की जवाबी रणनीति पर चर्चा हुई। इससे पहले दिन में, नवीन ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिवों के साथ बैठक कर संगठन से जुड़े विभिन्न मुद्दों और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा की। बैठक के बाद नवीन ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, आज भाजपा मुख्यालय में राष्ट्रीय महासचिवों के साथ बैठक की और आगामी कार्ययोजना तथा संगठन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा से पीएम-किसान योजना की 24वीं किस्त जारी करेंगे। इसके तहत 9.34 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में सीधे 18,690 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए जाएंगे। एक सरकारी बयान के अनुसार, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के रायसेन से इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) के तहत स्थापित 521 इकाइयां राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इनका उद्देश्य कृषि भंडारण, प्रसंस्करण और संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। वह उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से 12 बागवानी संकुल का उद्घाटन भी करेंगे। फरवरी 2019 में शुरू की गई पीएम-किसान योजना के तहत अब तक 23 किस्तों में पात्र किसानों को 4.47 लाख करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। इस योजना के तहत पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को सालाना 6,000 रुपये तीन किस्तों में दिए जाते हैं।
यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी जाती है। बयान के अनुसार, कृषि अवसंरचना कोष के तहत 2.28 लाख से अधिक परियोजनाओं में करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इस कोष से गोदामों, शीत भंडारण सुविधाओं, प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्रों और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास में मदद मिलती है। सरकार का कहना है कि इससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, बाजार तक किसानों की पहुंच बढ़ाने और उन्हें बेहतर लाभ दिलाने में मदद मिलेगी।
कृषि मंत्रालय ने बागवानी की ओर फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख किया। मंत्रालय के अनुसार, बागवानी संकुल विकसित करने से मूल्य श्रृंखला मजबूत होगी और उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन एवं विपणन को प्रोत्साहन मिलेगा। मंत्रालय ने पिछले 12 वर्षों में कृषि क्षेत्र के लिए शुरू की गई प्रमुख कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और 'प्रति बूंद अधिक फसल' का जिक्र किया। इसके अलावा राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन, दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन का भी उल्लेख किया गया। प्राकृतिक खेती मिशन के तहत टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के लिए संकुल विकसित किए जा रहे हैं। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसानों के शामिल होने की उम्मीद है। -
नयी दिल्ली. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के अध्यक्ष अजय कुमार और आयोग के सदस्यों ने बृहस्पतिवार को यहां राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। यूपीएससी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) सहित अन्य सेवाओं के अधिकारियों के चयन के लिए सिविल सेवा परीक्षा समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है। राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में बताया कि आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार के साथ आयोग के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राज शुक्ला, सुमन शर्मा, विद्युत बिहारी स्वैन, डॉ. दिनेश दासा, शीलवर्धन सिंह, संजय वर्मा, सुजाता चतुर्वेदी और अनुराधा प्रसाद ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। कार्यालय ने बताया कि इस दौरान आयोग की 76वीं वार्षिक रिपोर्ट, स्मारक सिक्के और यूपीएससी के शताब्दी वर्ष के अवसर पर जारी डाक टिकट राष्ट्रपति को भेंट किए गए। राष्ट्रपति कार्यालय ने अलग-अलग पोस्ट में बताया कि कर्नाटक की राज्यपाल सुधा यादव और ओडिशा के राज्यपाल ब्रजमोहन राम ने भी राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात की।
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- वैकल्पिक कौशल विषय से मिलेगी राहत: सीबीएसई
नयी दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 2028 की कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं के प्रारूप को बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया। इसके तहत छात्रों के लिए पांच विषय अनिवार्य होंगे और उनके पास एक अतिरिक्त कौशल विषय की परीक्षा देने का विकल्प होगा, जो गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान में असफल होने पर भी परीक्षा में उत्तीर्ण करने में उनकी मदद कर सकता है। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरविषयक क्षेत्र तथा सीटी और एआई मॉड्यूल को उसकी अध्ययन योजना में शामिल नहीं किया जाएगा। यह स्पष्टीकरण विशेष रूप से उन छात्रों पर लागू होता है, जो 2026-27 में कक्षा नौवीं में पढ़ रहे हैं और 2028 में कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा देंगे। इसका मौजूदा कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सीबीएसई की निदेशक (शैक्षणिक) प्रज्ञा एम. सिंह ने स्कूलों के प्रधानाचार्यों को भेजे एक पत्र में कहा, ''इस पाठ्यक्रम व्यवस्था को लागू करने की समय-सारिणी के अनुरूप, कक्षा नौवीं (2026-27) में 'इंडिविजुअल्स इन सोसाइटी' विषय और 'सीटी तथा एआई मॉड्यूल' और कक्षा 10 (2027-28) में 'पर्यावरण शिक्षा' विषय इन बैच के पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं होंगे।'' उन्होंने कहा, ''कक्षा 10वीं (2028 बैच) के विद्यार्थियों के लिए व्यावसायिक शिक्षा अनिवार्य पाठ्यक्रम क्षेत्र बनी रहेगी। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए विद्यार्थी 'कौशल विकास' विषय या बोर्ड द्वारा अधिसूचित 22 कौशल विषयों में से किसी एक का विकल्प चुन सकते हैं।'' परीक्षा के प्रारूप को स्पष्ट करते हुए सीबीएसई ने व्यावसायिक शिक्षा के लिए दो विकल्प बताए हैं। इनके तहत विद्यार्थी स्कूल स्तर पर होने वाले आकलन या राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कौशल प्रमाणपत्र दिलाने वाली बोर्ड परीक्षा में से किसी एक का विकल्प चुन सकते हैं। बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, इस परिपत्र का उद्देश्य मौजूदा कक्षा नौवीं के छात्रों को स्पष्ट जानकारी देना है, ताकि वे कक्षा 10वीं में पहुंचने पर पाठ्यक्रम और परीक्षा से जुड़े प्रावधानों को लेकर असमंजस में न रहें। - नई दिल्ली/पुणे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आज दिनांक 29.10.2026 को M/s आज का आनंद पेपर्स प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में पुणे स्थित विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।सीबीआई ने यह मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, मुंबई की शिकायत के आधार पर M/s आज का आनंद पेपर्स प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशकों तथा अज्ञात लोक सेवकों के विरुद्ध दर्ज किया है। मामले में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग तथा खातों में हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि इन कृत्यों के परिणामस्वरूप स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को लगभग 81.66 करोड़ रुपये की वित्तीय हानि हुई।शिकायत के अनुसार, अभियुक्तों द्वारा व्यवसाय से प्राप्त राजस्व को दबाने/दुरुपयोग करने, लेखा-पुस्तकों एवं इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों में कूटरचना एवं हेरफेर करने तथा आपराधिक न्यासभंग करने के आरोप हैं। यह भी आरोप है कि उन्होंने बैंकिंग संघ (कंसोर्टियम) के ऋणदाताओं की अनुमति के बिना निर्धारित बैंकिंग चैनलों से बाहर संचालित चालू खातों के माध्यम से धनराशि का विचलन (डायवर्जन) किया, जो स्वीकृत ऋण शर्तों का उल्लंघन है। इन कृत्यों से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को गलत वित्तीय हानि पहुंचाने का आरोप है।आज की गई तलाशी के दौरान कंपनी के निदेशकों से संबंधित कार्यालय परिसरों एवं आवासीय परिसरों को भी कवर किया गया।तलाशी के दौरान जांच से संबंधित आपत्तिजनक दस्तावेज एवं डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। बरामद सामग्री का परीक्षण किया जा रहा है ताकि कथित षड्यंत्र, धन के दुरुपयोग, धनराशि के विचलन तथा मामले में शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाया जा सके।मामले की आगे की जांच जारी है।
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नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को दिवाली से पहले तोहफा दिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) और पेंशनभोगियों की महंगाई राहत (डीआर) में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडसल के इस फैसले से करीब 1.17 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को फायदा होगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी देते हुए इसे 'दिवाली का तोहफा' बताया। आधिकारिक बयान के मुताबिक, महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में बढ़ोतरी का फैसला एक जुलाई, 2026 से लागू होगा। इसका मतलब है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को इसका लाभ जुलाई से मिलेगा। इस बढ़ोतरी के बाद केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता उनके मूल वेतन के 60 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत हो जाएगा। इसी तरह, पेंशनभोगियों की महंगाई राहत भी मूल पेंशन के 60 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत हो जाएगी। बयान के मुताबिक, इस फैसले से करीब 48.54 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 68.71 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा। इस तरह कुल लाभार्थियों की संख्या 1.17 करोड़ से अधिक है। महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में बढ़ोतरी से सरकारी खजाने पर सालाना 10,016.10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। सरकार ने कहा कि यह बढ़ोतरी सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय और स्वीकृत फार्मूले के अनुरूप की गई है। महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों को बढ़ती कीमतों के असर से राहत देने के लिए दिया जाता है। इसी तरह, पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को महंगाई से राहत देने के लिए महंगाई राहत दी जाती है। इन दोनों में बढ़ोतरी का मकसद बढ़ती कीमतों के कारण कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की खर्च करने की क्षमता पर पड़ने वाले असर की भरपाई करना है। -
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को कहा कि नरेन्द्र मोदी 2029 के लोकसभा चुनाव में जीत के बाद स्वतंत्रता दिवस पर बतौर प्रधानमंत्री लालकिला जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस "अपनी अंतिम सांसें गिन रही है।"
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ नवीन ने चांदनी चौक इलाके में भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली का नेतृत्व किया। यह रैली जैन लाल मंदिर से टाउन हॉल चौक तक निकाली गई। नवीन ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, "मतदाता सूची की सफाई करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान से कांग्रेस के नेता परेशान हैं, लेकिन भाजपा यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएं।" कई राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान का विरोध करने को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए नवीन ने कहा, "उनका संविधान से कोई लेना-देना नहीं है और उनकी पार्टी केवल वही सुनती है, जो वह या उनका परिवार निर्देश देता है।" भाजपा अध्यक्ष ने यह दावा भी किया कि नरेन्द्र मोदी कहीं नहीं जाने वाले और 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद लाल किले की प्राचीर पर लौटेंगे। लाल किले से ही प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करते हैं।
नवीन ने कहा, "राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस अपनी अंतिम सांसें गिन रही है। जिस तरह वह आगे बढ़ रहे हैं, उससे जल्द ही पार्टी में केवल वही एक कार्यकर्ता बचेंगे। -
पणजी. भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को कहा कि भारत वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि 'मेक इन इंडिया' पहल और कौशल विकास से देश की औद्योगिक क्षमताओं का विस्तार हो रहा है। उन्होंने मोबाइल फोन विनिर्माण में वृद्धि का भी उल्लेख किया। गोवा में युवाओं से बातचीत करते हुए नवीन ने कहा कि कोविड-19 वैश्विक महामारी ने कई औद्योगिक क्षेत्रों में विनिर्माण की वृद्धि को गति दी थी। उन्होंने इस गति को बनाए रखने के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने के महत्व पर जोर दिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और भाजपा की गोवा इकाई के अध्यक्ष दामोदर नाइक भी मौजूद थे।
नवीन ने कहा कि भारत को लंबे समय तक मुख्य रूप से जनशक्ति और कच्चे माल के स्रोत के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन कौशल विकास पर जोर देने से देश को अपनी विनिर्माण क्षमताएं विकसित करने तथा वैश्विक स्तर पर अधिक पहचान हासिल करने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा, ''पहले भारत को जनशक्ति और कच्चे माल के स्रोत के रूप में देखा जाता था। कुशल श्रमिकों की कमी के कारण हमें वह पहचान, सम्मान और स्थान नहीं मिला जिसके हम हकदार थे।'' नवीन ने 'मेक इन इंडिया' पहल से आए बदलावों के उदाहरण के रूप में मोबाइल फोन विनिर्माण में वृद्धि का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माण करने वाला देश बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि विनिर्माण का विस्तार करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कुशल कार्यबल तैयार करना महत्वपूर्ण है कि भारत की औद्योगिक वृद्धि से उसके लोगों के लिए अधिक अवसर पैदा हों। कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौर को याद करते हुए नवीन ने कहा कि कई औद्योगिक क्षेत्रों में तेजी से वृद्धि हुई थी। उन्होंने महामारी के दौरान बिहार जैसे राज्यों के कुशल श्रमिकों को लेकर मुख्यमंत्री सावंत के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया। नवीन ने केंद्रीय बजट में विनिर्माण को समर्थन देने के लिए करीब 20,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित आवंटन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य वाहन कलपुर्जों और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को मजबूत करना है। विनिर्माण पर सरकार के जोर से भारतीयों में देश में बने उत्पादों के प्रति गर्व की भावना बढ़ रही है और घरेलू उत्पादन को लेकर उत्साह पैदा हो रहा है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि 'मेक इन इंडिया' पहल ने भारत की औद्योगिक क्षमता को लेकर धारणा बदलने में मदद की है और इससे वैश्विक विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखलाओं में देश की स्थिति और मजबूत हो सकती है। सरकार ने अगस्त में बताया था कि देश में इस्तेमाल किए जा रहे 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन भारत में बने हैं। साथ ही स्मार्टफोन 2025 में भारत की सबसे बड़ी निर्यात उत्पाद श्रेणी बनकर उभरे थे और उन्होंने डीजल ईंधन तथा तराशे हुए हीरों जैसे पारंपरिक निर्यात उत्पादों को पीछे छोड़ दिया था। -
पणजी. भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को कहा कि युवाओं को 'जेन जी', 'जेन अल्फा' या अन्य पीढ़ियों के आधार पर बांटने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर बदलाव लाने की इच्छा रखता है, उसे युवा माना जाना चाहिए। नवीन ने पणजी में भाजपा की ओर से आयोजित 'युवा संवाद' कार्यक्रम में युवाओं से बातचीत के दौरान कहा कि युवाओं की परिभाषा केवल उम्र के आधार पर तय नहीं की जानी चाहिए। जब तक किसी व्यक्ति में बदलाव लाने और जीवन में आगे बढ़ने की इच्छा है, तब तक वह युवा है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश के कई हिस्सों में मुख्य रूप से 'जेन जी' के नेतृत्व में युवाओं के प्रदर्शन हुए हैं।
विपक्षी दल कांग्रेस भी विभिन्न शहरों में युवाओं तक पहुंच बनाने के कार्यक्रम आयोजित कर रही है। 'जेन जी' और 'जेन अल्फा' जैसे पीढ़ीगत वर्गीकरण का इस्तेमाल बढ़ने का जिक्र करते हुए नवीन ने कहा कि युवाओं को इस तरह के आधार पर बांटने या उनमें फर्क करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ''आज के युवाओं को अलग-अलग श्रेणियों में नहीं बांटा जाना चाहिए। युवा वह है जो संघर्ष करना चाहता है, आगे बढ़ना चाहता है और मानता है कि कड़ी मेहनत तथा लगन से वह अपने जीवन, राज्य और देश में बदलाव ला सकता है।
नवीन ने कहा कि युवाओं की परिभाषा किसी खास आयु वर्ग तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक लोगों में बदलाव लाने और जीवन में आगे बढ़ने की इच्छा बनी रहती है, वे युवा हैं। उन्होंने कहा, ''जब तक किसी व्यक्ति में बदलाव लाने, संघर्ष करने और आगे बढ़ने की चाहत है, तब तक वह युवा है, चाहे उसकी उम्र 15 साल हो या 40 या 45 साल।'' "जेन जी" 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोगों की पीढ़ी को कहा जाता है। ''जेन अल्फा'' उस पीढ़ी को कहा जाता है जिसका जन्म मुख्य रूप से 2010 से 2024 -2025 के बीच हुआ है। यह जेनरेशन जी के बाद और जेन बीटा से पहले की पीढ़ी है। नवीन ने बताया कि भाजपा अपनी युवा शाखा के जरिए युवाओं के साथ संवाद कर रही है और इस कार्यक्रम का मकसद उनके साथ सीधे बातचीत को बढ़ावा देना था। इस मौके पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और भाजपा की गोवा इकाई के अध्यक्ष दामोदर नाइक भी मौजूद थे -
लखनऊ/बेंगलुरु।चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीट पर हुए चुनावों में भाजपा और राजग के उसके सहयोगियों ने 16 सीट जीतीं, जबकि कांग्रेस को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) ने उत्तर प्रदेश में पांच सीट पर जीत दर्ज की, जिनमें वाराणसी की दो सीट शामिल हैं। महाराष्ट्र में नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की एक सीट को छोड़कर सभी सीट के नतीजे घोषित कर दिए गए। नागपुर सीट पर भाजपा के उम्मीदवार सुधाकर कोहले और कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य अभिजीत वंजारी के बीच कड़ा मुकाबला जारी था। बिहार में दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। राज्य में जन सुराज पार्टी ने भी अपना खाता खोला, जबकि पांच मौजूदा विधान परिषद सदस्य अपनी सीट हार गए। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। पार्टी चारों सीट हार गई। भाजपा ने तीन और जनता दल (सेक्युलर) ने एक सीट जीती। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मतपत्रों से मतदान होने के बावजूद कांग्रेस के खराब प्रदर्शन को लेकर पार्टी पर कटाक्ष किया। विपक्षी दल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के खिलाफ अपने अभियान में मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग करते रहे हैं। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक जैसे चार बड़े राज्यों की 28 सीट पर विधान परिषद के चुनाव हुए। मतदान मतपत्रों से हुआ। अंदाजा लगाइए कि कांग्रेस ने कितनी सीट जीतीं।" भाजपा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने महाराष्ट्र में दो सीट जीतीं, जबकि विपक्षी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को दो सीट पर जीत मिली। बिहार में भाजपा ने तीन सीट जीतीं, जबकि जनता दल (यूनाइटेड) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने एक-एक सीट जीती। उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के छह और स्नातकों के पांच निर्वाचन क्षेत्रों, बिहार में शिक्षकों और स्नातकों के चार-चार, कर्नाटक में शिक्षकों और स्नातकों के दो-दो तथा महाराष्ट्र में स्नातकों के तीन और शिक्षकों के दो निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। मतगणना मंगलवार से शुरू हुई थी।
इन चुनावों में केवल स्नातक और शिक्षक मतदाता ही वोट डालने के पात्र होते हैं। मतदान के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय मतपत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। भाजपा ने कांग्रेस की हार को लेकर उस पर निशाना साधते हुए कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि मुख्य विपक्षी दल चुनाव ईवीएम से हों या मतपत्रों से, जनता का समर्थन हासिल नहीं कर सकता। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर राहुल गांधी पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को समझना चाहिए कि जनता का समर्थन मेहनत से मिलता है, "मनोरंजन के लिए यात्राएं" करने से नहीं। कांग्रेस ने मोदी पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री को इतना भरोसा है कि ईवीएम का चुनाव नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ता, तो उन्हें लोकसभा और आगामी विधानसभा चुनाव मतपत्रों से कराने की प्रतिबद्धता जतानी चाहिए। कर्नाटक में जद(एस) ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस से छीन लिया। भाजपा ने उत्तर-पूर्व शिक्षक, दक्षिण-पूर्व स्नातक और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस उम्मीदवारों को हराया। हालांकि, इन नतीजों से कांग्रेस सरकार की स्थिरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इसे भाजपा और जद(एस) के बीच विपक्षी एकजुटता के परिणाम के रूप में देखा जा रहा है। इसे गठबंधन की नैतिक जीत भी माना जा रहा है। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि बेंगलुरु शिक्षक और उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे मंगलवार को घोषित कर दिए गए थे, जबकि बाकी दो सीट पर मतगणना रातभर जारी रही। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने कहा कि राजग की जीत सत्तारूढ़ कांग्रेस को जनता की ओर से खारिज किए जाने का संकेत है और यह 2028 के विधानसभा चुनावों की दिशा भी दिखाती है। मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस जनता के फैसले को सम्मानपूर्वक स्वीकार करती है। उन्होंने माना कि पार्टी को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी जनता के संदेश का विश्लेषण करेगी और सुधार के लिए जरूरी कदम उठाएगी। उत्तर प्रदेश में सपा के मान सिंह यादव ने इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज की।
भाजपा के मानवेंद्र प्रताप सिंह (गुरुजी) ने आगरा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। पार्टी ने बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट भी बरकरार रखी, जहां भाजपा उम्मीदवार हरि सिंह ढिल्लों ने सपा के दानिश अख्तर को हराया। भाजपा ने लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र भी जीत लिया। वहां उसके उम्मीदवार उमेश द्विवेदी ने सपा के सुशील कुमार को हराया। मेरठ में भाजपा ने शिक्षक और स्नातक, दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की।
गोरखपुर-फैजाबाद मंडल शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने जीत हासिल की।
वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सपा के लाल बिहारी यादव ने जीत दर्ज की।
आगरा-अलीगढ़ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा उम्मीदवार आकाश अग्रवाल ने भाजपा के हरि किशोर तिवारी को हराया। वाराणसी और लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में भी सपा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जीतने वाले पार्टी उम्मीदवारों से अपील की कि वे विजय जुलूस निकालने से बचें और इसके बजाय सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी जीत की जानकारी लोगों तक पहुंचाएं। अखिलेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में विजेताओं को ऐसी किसी भी गतिविधि से बचने की सलाह दी, जिससे अशांति फैल सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा गड़बड़ी पैदा करने और उसका आरोप सपा पर लगाने की कोशिश कर सकती है। इससे पहले, अखिलेश ने 'एक्स' पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें आगरा-अलीगढ़ शिक्षक सीट से जीतने वाले सपा उम्मीदवार आकाश अग्रवाल फटा हुआ कुर्ता पहने दिखाई दे रहे थे। उनके समर्थकों ने आरोप लगाया था कि उन पर हमला किया गया। अखिलेश ने कहा, "आगरा से जीत रहे सपा के विधान परिषद उम्मीदवार डॉ. आकाश अग्रवाल के साथ भाजपा के लोगों ने जो व्यवहार किया, उसे कैसे सही ठहराया जा सकता है, यह भाजपा बताए।" पूर्व मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग, उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रपति से इस मामले का तुरंत संज्ञान लेने की अपील की। उत्तर प्रदेश में अगले साल प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले विधान परिषद के इन चुनावों को सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी सपा के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। महाराष्ट्र में शिवसेना के किरण सरनाइक ने अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज की। पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार कौस्तुभ गवाडे ने जीत हासिल की। पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में राकांपा (शप) की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख-जाधव ने जीत दर्ज की।
छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में राकांपा (शप) के उम्मीदवार प्रतापसिंह पाटिल विजयी रहे। नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के सुधाकर कोहले और कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य अभिजीत वंजारी के बीच कड़ा मुकाबला है। बिहार के दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज पार्टी के सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य मदन मोहन झा को 324 वोटों से हराया। भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र प्रसाद सिंह ने मंगलवार को तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज की थी। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय उम्मीदवार भूषण कुमार झा को बड़े अंतर से हराया था। भाजपा के दो विधान परिषद सदस्य सर्वेश कुमार और एन. के. यादव ने क्रमशः दरभंगा स्नातक और कोसी स्नातक सीट बरकरार रखी। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जदयू के नीरज कुमार ने राजद उम्मीदवार को हराया।
पांचवीं बार विधान परिषद सदस्य बने भाजपा नेता नवल किशोर यादव पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अपनी सीट नहीं बचा सके। राजद के संजीव कुमार ने उन्हें हरा दिया। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मौजूदा विधान परिषद सदस्य अफाक अहमद को निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज ने हराया। एक अन्य निर्दलीय उम्मीदवार बंसी धर ब्रजवासी ने तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अपनी सीट बरकरार रखी। - हैदराबाद। बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ मंगलवार देर रात 3:30 बजे आंध्र प्रदेश के तट से टकराया। यहां 125 से 135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं के साथ भारी बारिश हो रही है। आंध्र प्रदेश में 3 मौतें हुई हैं। राज्य के 31 घरों को नुकसान पहुंचा। 57 हजार लोगों को शिफ्ट किया गया है। तूफान के कारण 50 ट्रेनें और विजयवाड़ा-विशाखापट्टनम एयरपोर्ट पर 21 फ्लाइट्स रद्द की गई। ओडिशा में भारी बारिश के चलते 16 जिलों में स्कूल बंद हैं। यहां 30 हजार लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 4,000 साइक्लोन शेल्टर बनाए गए हैं।विशाखापट्टनम में रात 27 अक्टूबर की सुबह 8:30 बजे से 28 अक्टूबर की सुबह 3 बजे तक, यानी करीब 18 घंटे में 200mm से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। यह जुलाई में होने वाली औसत बारिश के डेढ़ गुना से ज्यादा है। यहां जुलाई में औसतन 133mm बारिश होती है।
- नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) का एकीकृत शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में चार गुना होकर 1,750.47 करोड़ रुपये रहा। मुख्य रूप से अधिक राजस्व के कारण कंपनी का लाभ बढ़ा है। इस्पात मंत्रालय के तहत आने वाली कंपनी ने मंगलवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में शुद्ध लाभ 418.72 करोड़ रुपये था। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनी का परिचालन राजस्व बढ़कर 31,997.55 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 26,704.17 करोड़ रुपये था। दूसरी तिमाही के दौरान कुल खर्च बढ़कर 29,913.65 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले इसी तिमाही में 26,113.64 करोड़ रुपये था।--
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को वाल्मीकि जयंती पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि महर्षि वाल्मीकि के मानवता के लिए दिए गए अनमोल संदेश हमेशा लोगों के लिए पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''महर्षि वाल्मीकि जयंती पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। उनके महान विचार भारतीय संस्कृति और विरासत के मूलभूत तत्व रहे हैं, जो हर युग में राष्ट्र को पुष्पित-पल्लवित करते रहेंगे।'' हिंदू महाकाव्य रामायण की रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी।
प्रधानमंत्री ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में भी महर्षि वाल्मीकि की जयंती का उल्लेख किया था, जिसे वाल्मीकि जयंती के रूप में मनाया जाता है। मोदी ने कहा कि हजारों साल बीत जाने के बावजूद महर्षि वाल्मीकि की रचित रामायण आज भी सभी को नयी सीख और दृष्टि प्रदान करती है। उन्होंने कहा, ''रामायण के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि ने हमें जीवन की गहरी सीख दी है। एक ओर उन्होंने निरंतर प्रयास के महत्व पर जोर दिया, तो दूसरी ओर सेवा, करुणा और सामाजिक सद्भाव की महत्ता को भी रेखांकित किया।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि वाल्मीकि रामायण में भगवान राम का चरित्र इन मूल्यों का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने माता शबरी के प्रेम और भक्ति को अपनाया तथा निषादराज के साथ अपनी मित्रता का मान रखा। मोदी ने कहा, ''सबको साथ लेकर चलने की भावना- ये आदर्श आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं।''
उन्होंने कहा कि यही भावना अयोध्या के राम मंदिर में भी दिखाई देती है, जहां महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी को समर्पित मंदिर भी बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ''मुझे इस बात की खुशी है कि अयोध्या के हवाई अड्डे का नाम भी महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है। ये पहल हमारी महान परंपरा को समृद्ध करती हैं- वह परंपरा, जिसमें सेवा, सामाजिक सद्भाव और करुणा को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है।'' -
शाहजहांपुर . अपनी कोई बहन नहीं होने के दर्द को एक शख्स ने इस तरह समाजसेवा में बदला कि आज वह 184 लड़कियों का 'भाई' बन चुका है। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में कारोबारी विनय अग्रवाल अपने संसाधनों से हर साल निर्धन परिवारों की बेटियों की शादी कराते हैं। उनके इस अनूठे प्रयास में न जाति की दीवार आड़े आती है और न ही मजहब का फर्क। अग्रवाल ने रविवार को खिरनी बाग में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में 101 कन्याओं का विवाह कराया। इनमें 93 हिंदू और आठ मुस्लिम कन्याएं शामिल थीं। हिंदू बेटियों का विवाह हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ, जबकि मुस्लिम कन्याओं का निकाह काजियों ने पढ़वाया। समारोह में एक ओर वैदिक मंत्र गूंजे तो दूसरी ओर इस्लामी आयतों के साथ निकाह की रस्में पूरी हुईं। अग्रवाल ने सोमवार को बताया कि उनकी कोई सगी बहन नहीं है और उन्हें हमेशा बहनों की कमी खलती थी और इसी भाव ने उन्हें जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी में मदद करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में वह 'बिन बुलाए मेहमान' की तरह शादियों में पहुंचकर सहयोग करते थे लेकिन बाद में उनकी मां सरोज अग्रवाल की सलाह पर उन्होंने सामूहिक विवाह का आयोजन शुरू किया। पहले 11, फिर 21 और 51 और अब 101 कन्याओं की शादी कराने तक पहुंचे इस सिलसिले को आगे और बड़ा करने का उनका इरादा है। अग्रवाल के मुताबिक, उनके दिवंगत पिता अशोक अग्रवाल का जन्मदिन रामनवमी के आसपास पड़ता है और इसी दौरान वह हर साल सामूहिक विवाह का आयोजन करते हैं। उन्होंने बताया कि विवाह से करीब दो महीने पहले गांवों में बैठक कर आवेदन मांगे जाते हैं और इस बार लगभग 200 आवेदन आए थे। अग्रवाल ने बताया कि इस बार भी जरूरतमंद परिवारों की पहचान के लिए तीन चरणों में जांच कराई गई और उसके बाद 101 कन्याओं का चयन किया गया। इस समारोह की खासियत सिर्फ विवाह की रस्में नहीं, बल्कि बेटियों के नए घर को बसाने की तैयारी भी थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक सभी कन्याओं को ब्यूटी पार्लर में सजाया गया और वर-वधुओं को 101 कारों में विवाह स्थल तक लाया गया। साथ ही शादी के बाद प्रत्येक जोड़े को टेलीविजन, फ्रिज, वाशिंग मशीन, पलंग, अलमारी और दैनिक जरूरत का सामान उपहार में दिया गया ताकि नई गृहस्थी शुरू करने में उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना न करना पड़े। इस पूरे आयोजन में अग्रवाल की पत्नी श्वेता, भाई कुणाल, भाभी नेहा और मां सरोज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिवार के सदस्य विवाह की रस्मों से लेकर व्यवस्थाओं तक में जुटे रहे। स्थानीय लोगों के मुताबिक ऐसा लग रहा था मानो परिवार अपनी ही बेटियों का विवाह कर रहा हो। समारोह में शामिल मुस्कान (24) की कहानी इस आयोजन के मानवीय पक्ष को सामने लाती है। उसके भाई शाहिद ने बताया कि उनके पिता रिक्शा चलाते हैं और मां एक पान की दुकान चलाती हैं, लिहाजा परिवार के लिए दो वक्त के भोजन का इंतजाम करना भी मुश्किल होता है, ऐसे में बहन की शादी के लिए कर्ज लेना उनकी मजबूरी बन सकता था। शाहिद ने कहा, "हमारी बहन की शादी इस समारोह में बड़ी धूमधाम से हो रही है। यह अल्लाह का करम है।"
जमुका गांव की पूजा के लिए यह दिन एक और मायने में खास था। दोनों पैरों से दिव्यांग पूजा की शादी रामनिवास से तय हुई थी, जो खुद भी दिव्यांग है। पूजा ने बताया कि उसके और रामनिवास के पास न खेती है और न ही कमाई का कोई नियमित साधन। उसने बताया कि सीमित संसाधनों में गुजर-बसर करने वाले इस जोड़े के लिए विवाह और गृहस्थी की शुरुआत बड़ी चुनौती थी लेकिन सामूहिक विवाह समारोह में शादी संपन्न होने के बाद दोनों परिवार खुश हैं। अग्रवाल ने बताया कि इस आयोजन के लिए वह किसी से आर्थिक सहयोग नहीं लेते। उन्होंने बताया कि पहले कुछ लोगों ने मदद की पेशकश की थी लेकिन उन्होंने उनसे यह कहते हुए मना कर दिया कि वे लोग मदद करने के बजाय जरूरतमंद लड़कियों की शादी कराएं। शहर के चिकित्सक और समाजसेवी डॉक्टर सत्य प्रकाश मिश्रा ने कहा कि यह अहम बात है कि 101 बेटियों का विवाह पूरे पारिवारिक माहौल में और जरूरत का सामान देकर कराया गया। उन्होंने कहा कि समाज के अन्य लोगों को भी ऐसे प्रयास करने चाहिए। -
जयपुर. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को कहा कि संस्कार और सेवा का भाव भारतीय संस्कृति की असली पहचान है तथा भारतीय संस्कृति में संस्कारों का बहुत अधिक महत्व है। नवीन ने आबूरोड स्थित ब्रह्माकुमारी संस्थान के 90वें स्थापना दिवस पर आयोजित नवदशकोत्सव एवं 'ग्लोबल समिट' को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, ''अच्छे विचार तभी सार्थक हैं, जब वे संस्कार बनते हैं। मैं मानता हूं कि भारतीय संस्कृति में हमारे संस्कारों का महत्व बहुत अधिक होता है। संस्कार तभी प्रभावी होते हैं, जब वे सेवा के भाव के साथ समाज के बीच पहुंचते हैं।'' भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ''हम मानते हैं कि आने वाले समय में हम इस पद्धति से, अपने सेवा और समर्पण के भाव से इस देश को आगे बढ़ाएंगे।''
नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश को सेवा और समर्पण के भाव से नेतृत्व दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का मानना है कि देश को आगे बढ़ाने के लिए 140 करोड़ देशवासियों को एक साथ, एक स्वप्न और एक भाव के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि मन की शक्ति सबसे बड़ी शक्ति होती है, मन ही मनुष्य के जीवन में बंधन का कारण बनता है और मन ही मुक्ति का माध्यम भी बनता है। उन्होंने कहा, ''आज जब मैं मन की शक्ति की चर्चा कर रहा हूं, तो हम सभी को अपने भीतर के उस अहंकार को खत्म करने का प्रयास करना चाहिए, जो 'मैं' शब्द से आता है।'' उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान की 90 वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा सेवा, साधना, शांति और विश्व बंधुत्व का प्रेरक उदाहरण है। संस्थान की थीम 'जागृति से कर्म तक' का उल्लेख करते हुए नवीन ने कहा कि जागृति तभी सार्थक होती है, जब व्यक्ति अपने विचारों को कर्म में उतारे और अपने आचरण से समाज में सकारात्मक बदलाव लाए। उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और सहयोग भारतीय संस्कृति की पहचान हैं तथा सेवा केवल कार्यक्रम तक सीमित न रहकर स्वभाव बननी चाहिए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि व्यक्ति को 'मैं' की बजाय 'हम' की भावना के साथ समाज और राष्ट्र के हित में काम करना चाहिए। नवीन ने संस्थान में महिला नेतृत्व की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में महिलाओं का ज्ञान, दर्शन और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'महिला विकास' के बजाय 'महिला-नेतृत्व वाले विकास' के दृष्टिकोण के अनुरूप मातृशक्ति का नेतृत्व समाज और राष्ट्र को नयी दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सरकार के नशा मुक्ति अभियान का उल्लेख करते हुए नवीन ने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखकर ही देश के भविष्य को सुरक्षित और मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पहल पर शुरू हुए नशा मुक्ति अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाना होगा। नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री का 2047 तक विकसित भारत का सपना देश के 140 करोड़ नागरिकों का साझा संकल्प होना चाहिए, क्योंकि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने आमजन से मूल्य शिक्षा को प्रत्येक युवा तक पहुंचाने, सेवा की भावना से समाज के बीच काम करने और प्रकृति के प्रति अपने व्यवहार को बेहतर बनाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने के तीन प्रमुख संकल्प अपनाने का आह्वान किया। -
नयी दिल्ली. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने रविवार को कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में और 200 किलोमीटर भीतर तक भारतीय वायुसेना के सटीक हमलों ने यह साबित कर दिया कि कोई भी लक्ष्य उसकी पहुंच से बाहर नहीं है। वायुसेना प्रमुख की इस टिप्पणी को पाकिस्तान के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
वायुसेना प्रमुख ने 'पीटीआई-भाषा' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने वायुसेना के क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण की पुष्टि की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस अभियान ने किसी भी संकट में सबसे पहले कार्रवाई करने वाली शक्ति और दुश्मन को हमला करने से रोकने की प्रभावी सैन्य क्षमता के रूप में वायुसेना की निर्णायक भूमिका की एक बार फिर पुष्टि की है। हालांकि, वायुसेना प्रमुख ने आगाह किया कि वायुसेना के इस दृष्टिकोण की पुष्टि होने का मतलब यह नहीं है कि ''हम यहीं रुक जाएं। हमें अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने तथा उनका विस्तार करने की जरूरत है।'' 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान चार दिन तक इस अभियान की कमान संभालने वाले वायुसेना प्रमुख ने कहा, ''सैन्य अभियान के स्तर पर यह सीख सबसे अहम है कि हमें हमेशा अपने पास कई विकल्प रखने चाहिए और दुश्मन के अपनी रणनीति बदलने पर तेजी से उसके अनुसार खुद को ढालने की क्षमता बनाए रखनी चाहिए।''
उन्होंने कहा, ''क्षमता-केंद्रित बल इस मामले में स्वाभाविक रूप से बेहतर होता है क्योंकि वह किसी एक साधन पर निर्भर रहने के बजाय कई तरह के साधनों का इस्तेमाल कर सकता है। इसी लचीलेपन की वजह से हम जरूरत के अनुसार अपनी जवाबी कार्रवाई तय कर पाए और संघर्ष को बढ़ने से रोकने में सफल रहे।'' पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में शुरू किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पिछले साल मई में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में मौजूद आतंकवादी ढांचे पर सटीक हमले किए। यह 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद से भारत की ओर से सीमा पार की गई सबसे साहसिक सैन्य कार्रवाई थी। उन्होंने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया है कि हमने जो रास्ता चुना है, वह सही है। हम और भी अधिक दृढ़ संकल्प के साथ इस रास्ते पर आगे बढ़ते रहेंगे ताकि अगर देश को फिर हमारी जरूरत पड़े तो भारतीय वायुसेना और भी तेजी से, अधिक सटीक और निर्णायक ढंग से देश की शर्तों पर कार्रवाई कर सके।'' वायुसेना प्रमुख ने यह भी बताया कि स्वदेश में विकसित कुछ हथियार प्रणालियों ने ''शानदार'' प्रदर्शन किया और दुश्मन के इलाके में भीतर तक जाकर उसे भारी नुकसान पहुंचाया। साथ ही पूरे अभियान के दौरान वायुसेना ने ''किसी अन्य व्यक्ति या संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाने'' की अपनी प्रतिबद्धता भी पूरी की।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर मुख्य रूप से वायुसेना के क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण की पुष्टि था। हमने अलग-अलग विमानों और हथियार प्रणालियों के बारे में सोचने के बजाय क्षमता के आधार पर विचार करना शुरू किया है जिसके तहत हर विमान, सेंसर, हथियार और नेटवर्क को एकीकृत किया गया।'' उन्होंने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर ने सैन्य अभियानों के दौरान उसी दृष्टिकोण को साकार किया और यह सफल रहा। इसने देश में किसी भी संकट के समय सबसे पहले कार्रवाई करने वाली शक्ति और दुश्मन को हमला करने से रोकने की प्रभावी सैन्य क्षमता के रूप में वायु शक्ति की निर्णायक भूमिका को फिर से साबित किया। साथ ही, इसने गति, सटीकता, एकीकरण और परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता के निरंतर महत्व की भी पुष्टि की।'' एयर चीफ मार्शल ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान अपनाई गई रणनीति, सामरिक विकल्प, चुनौतियों और मारक क्षमता से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा कि इस अभियान की सफलता किसी एक हथियार या मंच की वजह से नहीं मिली, बल्कि यह सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क आधारित अभियान, दुश्मन की मारक सीमा से बाहर रहकर हमला करने वाले हथियारों, सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, कई स्तरों वाली वायु रक्षा प्रणाली एवं मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) का मुकाबला करने की क्षमताओं का नतीजा था जहां सभी ने एक प्रणाली के रूप में मिलकर काम किया। उन्होंने कहा, ''कार्रवाई के मोर्चे पर पूरे पश्चिमी मोर्चे में 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र और 200 किलोमीटर भीतर तक पूरे इलाके में सटीक निशाना लगाने की क्षमता ने यह साबित कर दिया कि भारतीय वायुसेना की पहुंच से कोई भी लक्ष्य दूर नहीं है।'' उन्होंने कहा, ''हमारे स्वदेशी हथियारों ने शानदार प्रदर्शन किया और दुश्मन के इलाके में भीतर तक जाकर भारी नुकसान पहुंचाया। साथ ही हमने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी नागरिक या असैन्य संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हो।'' वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारत की स्वदेशी नेटवर्क आधारित वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना की ओर से बड़ी संख्या में दागे गए ड्रोन और दुश्मन की मारक सीमा से बाहर रहकर हमला करने वाले हथियारों को विफल कर दिया। इससे देश को आत्मविश्वास के साथ कार्रवाई करने में मदद मिली।'' उन्होंने कहा कि अब वायुसेना को अपनी युद्धक क्षमता, खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही (आईएसआर) क्षमताओं, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन रोधी क्षमता, मजबूत नेटवर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निर्णय सहायता प्रणाली को बेहतर बनाने पर ध्यान देना होगा। साथ ही, हमें मजबूत रसद, रखरखाव, बुनियादी ढांचे और इन सबसे ऊपर उठकर स्वदेशी उत्पादन के जरिए लंबे समय तक उच्च-तीव्रता वाले सैन्य अभियानों को जारी रखने की क्षमता विकसित करनी होगी। इन सभी मोर्चों पर पहले से ही काम जारी है। एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि भारतीय वायुसेना का दृष्टिकोण विकसित भारत 2047 के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है क्योंकि विकसित भारत को सुरक्षित और संकटों का सामना करने में सक्षम देश भी होना चाहिए। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय वायुसेना के लिए इसका अर्थ ऐसी बहु-क्षेत्रीय वायु शक्ति के रूप में विकसित होना है जो हर तरह के संघर्ष में भारत के बढ़ते आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक हितों की रक्षा कर सके। उन्होंने कहा, ''इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए पूरे राष्ट्र के स्तर पर प्रयास करने होंगे और भारतीय वायुसेना इसमें अपनी पूरी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।'' उन्होंने कहा, ''वर्ष 2047 तक हमारा लक्ष्य दुनिया की सबसे सक्षम, नवोन्मेषी और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर वायु सेनाओं में से एक बनना है, ऐसी शक्ति जो विकसित भारत की रक्षक होने के साथ-साथ उसकी प्रगति की प्रेरक भी बने।'' -
भुवनेश्वर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि अब युद्ध केवल पारंपरिक तरीकों से नहीं लड़े जाते, बल्कि अर्थव्यवस्थाओं को निशाना बनाकर भी लड़े जाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की बैंकिंग प्रणाली को ''साइबर आतंकवादियों'' से सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया। यहां भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 169 करोड़ रुपये की लागत से बने डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं से ओडिशा और देश के लोगों को काफी लाभ होगा। प्रधानमंत्री ने कहा, ''हम सभी जानते हैं कि आजकल युद्ध केवल हथियारों से नहीं लड़े जाते। किसी देश को कमजोर करना हो, तो उसकी अर्थव्यवस्था पर हमला किया जा सकता है। भारत जैसे-जैसे आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है, वैसे-वैसे यह भी जरूरी है कि हम अपनी बैंकिंग प्रणाली को साइबर लुटेरों और साइबर आतंकवादियों से सुरक्षित रखें।'' उन्होंने कहा कि साइबर खतरों का स्वरूप भी बदल रहा है और देश पुरानी प्रणालियों, प्रशिक्षण व्यवस्था तथा उपकरणों के सहारे इन नयी चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता। मोदी ने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए देश को आधुनिक बुनियादी ढांचे और कुशल मानव संसाधन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे में आरबीआई के डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान जैसी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इन नयी सुविधाओं को भारत की नयी प्राथमिकताओं का प्रतीक बताते हुए मोदी ने कहा कि पूर्वी भारत 'विकसित भारत' के शक्तिशाली विकास इंजन के रूप में उभर रहा है। मोदी ने विपक्षी कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि उसके शासनकाल में आम लोगों को बैंकिंग सेवाओं से वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि गरीबों के नाम पर 1960 और 1970 के दशक में बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था, लेकिन 2014 में पता चला कि देश की आधी से अधिक आबादी बैंकिंग व्यवस्था से बाहर थी। उन्होंने कहा कि उस समय मध्यम वर्ग के लिए भी बैंक से कर्ज लेना सपना था, जबकि गरीबों, छोटे किसानों और महिलाओं के लिए तो इसकी कल्पना करना भी मुश्किल था।
प्रधानमंत्री ने कहा, ''हालांकि, कांग्रेस के शासनकाल में अमीर और प्रभावशाली लोगों को फोन पर ही हजारों करोड़ रुपये का कर्ज मिल जाता था। इस कुप्रबंधन के कारण भारतीय बैंकिंग प्रणाली गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की समस्या के प्रति संवेदनशील हो गई थी। बैंकिंग प्रणाली ढहने की कगार पर थी।'' उन्होंने कहा कि 2014 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद स्थिति बदल गई। अब भारत का बैंकिंग क्षेत्र दुनिया के सबसे कुशल क्षेत्रों में शामिल है और लोगों को चौबीसों घंटे बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हैं। मोदी ने कहा कि छोटे उद्यमियों, पारंपरिक कारीगरों, रेहड़ी-पटरी वालों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को पहली बार औपचारिक बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिला है। उन्होंने कहा, ''एक पूर्व प्रधानमंत्री ने ओडिशा की धरती से कहा था कि दिल्ली से भेजे गए हर रुपये में से केवल 15 पैसे ही लोगों तक पहुंचते हैं। आज पूरी राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचती है। करीब 60 करोड़ जनधन खाते खोले जा चुके हैं।''
उन्होंने कहा कि पहले डेबिट और क्रेडिट कार्ड आम लोगों के लिए विलासिता की वस्तुएं थे, लेकिन अब ये सभी के लिए उपलब्ध हैं। मोदी ने कहा, ''हमारे लिए विकास का अर्थ भारत का संतुलित विकास और गांवों तथा छोटे शहरों के लिए अवसर उपलब्ध कराना है।'' उन्होंने कहा कि पिछला दशक उन लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए समर्पित था, जो इनसे वंचित थे। आने वाला दशक बैंकिंग सेवाओं को अधिक कुशल और भरोसेमंद बनाने पर केंद्रित होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ओडिशा खनन से लेकर माइक्रोचिप तक के क्षेत्रों में अपना भविष्य गढ़ेगा और युवाओं के लिए अवसरों के कई द्वार खुलेंगे। इस कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा, ओडिशा के राज्यपाल ब्रजमोहन राम, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी मौजूद थे। आरबीआई का डेटा सेंटर 18.55 एकड़ में फैला है। इसकी आधारशिला तत्कालीन आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने 22 मार्च, 2023 को रखी थी। सरकार ने बयान में कहा कि डेटा सेंटर में भुगतान और निपटान से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रणालियों के साथ आरबीआई की अन्य प्रमुख पहल भी संचालित होंगी। -
बिरला ने रूसी ड्यूमा अध्यक्ष के साथ बैठक की
नयी दिल्ली. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के आयोजन की पूर्व संध्या पर रविवार को रूसी संसद के निचले सदन 'ड्यूमा' के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन के नेतृत्व वाले एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां द्विपक्षीय बैठक की। लोकसभा सचिवालय ने एक बयान में बताया कि दोनों पक्षों ने वैश्विक मंचों पर आपसी सहयोग को मजबूत करने और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर प्रयास करने पर जोर दिया। बिरला ने इस मुद्दे पर लगातार समर्थन देने के लिए रूस को धन्यवाद दिया और कहा कि 2027 में दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 80 साल पूरे होने का जश्न मनाएंगे। उन्होंने भारत-रूस अंतर-संसदीय आयोग की नियमित बैठकें आयोजित करने और संसदीय प्रतिनिधिमंडलों, विशेष रूप से युवा और महिला सांसदों के माध्यम से लोकसभा तथा ड्यूमा के बीच निरंतर संस्थागत जुड़ाव का आह्वान किया। बिरला ने परमाणु ऊर्जा और उद्योग के क्षेत्र में सहयोग के बारे में भी बातचीत की।
उन्होंने 2026 में भारत की अध्यक्षता में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए, इस समूह के संसदीय सहयोग में रूस की सक्रिय भूमिका की अपील की, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का आह्वान किया, और स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन करने को लेकर मॉस्को को धन्यवाद दिया। वोलोदिन ने संयुक्त व्यापार उपक्रमों को बढ़ावा देने तथा द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सांस्कृतिक और मानवीय क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने तथा दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क को प्रगाढ़ करने के प्रति रूस की प्रतिबद्धता दोहराई। बिरला ने क्यूबा, मिस्र और बेलारूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात की।
यह मंच लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर भी अलग-अलग सत्र आयोजित करेगा।
बयान के अनुसार, सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे और आगंतुक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे। ब्रिक्स सदस्यों और साझेदार देशों की संसदों की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समितियों के अध्यक्षों की एक विशेष बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें संसदीय कूटनीति, क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम परंपराओं के आदान-प्रदान पर चर्चा होगी। उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन विशिष्ट अतिथियों के सम्मान में रात्रिभोज की मेजबानी करेंगे। दो दिवसीय इस सम्मेलन का समापन 27 अक्टूबर को होगा। -
उत्तरकाशी/चमोली। उत्तराखंड के यमुनोत्री धाम में रविवार को मौसम की पहली बर्फबारी से मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे तीर्थयात्रियों में काफी उत्साह देखने को मिला। वहीं, तापमान में गिरावट के बीच केदारनाथ में भी बर्फबारी हुई। इसके साथ ही चारधाम यात्रा अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। यमुनोत्री में बारिश और बर्फबारी तथा केदारनाथ में हिमपात के मद्देनजर मंदिर समिति के एक सदस्य ने तीर्थयात्रियों को जरूरी दवाइयां साथ रखने और धामों की यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी। श्री केदारनाथ-बदरीनाथ मंदिर समिति के विशेष आमंत्रित सदस्य विनीत पोस्ती ने तीर्थयात्रियों से सभी जरूरी दवाइयां साथ रखने और यात्रा के दौरान सतर्कता बरतने की अपील की। यमुनोत्री में बर्फबारी देखकर तीर्थयात्री रोमांचित हो उठे। मां यमुना के दर्शन एवं पूजा अर्चना के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने आसमान से गिरती बर्फ के बीच प्राकृतिक नजारों का आनंद भी लिया। पंच पंडा समिति के सचिव गिरीश उनियाल ने कहा कि मौसम की पहली बर्फबारी से तीर्थयात्रियों में खासा उत्साह देखा गया। उनियाल ने कहा, "कुछ लोगों के लिए इतने करीब से बर्फबारी देखने का यह पहला मौका था और वे इसे देखकर बेहद खुश थे।" भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को उत्तराखंड के उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में कुछ स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश या बर्फबारी का पूर्वानुमान जताया था। ग्रीष्मकालीन चारधाम यात्रा के अंतिम चरण में तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने से यमुनोत्री धाम में फिर से चहल-पहल बढ़ गई है। इससे स्थानीय कारोबारियों को राहत और उम्मीद मिली है, जिनकी आजीविका तीर्थयात्रा पर निर्भर है। कम से कम 6,000 तीर्थयात्री शनिवार को मां यमुना के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए यमुनोत्री धाम पहुंचे। यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव सुनील उनियाल ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु ग्रीष्मकालीन तीर्थयात्रा के अंतिम चरण में धाम पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा, "श्रद्धालुओं की इस आमद से न केवल धाम में रौनक बढ़ी है, बल्कि चारधाम यात्रा से जुड़े कारोबारियों को भी लाभ हुआ है।" उनियाल ने बताया कि यमुनोत्री धाम के कपाट छह महीने के शीतकालीन प्रवास के लिए 11 नवंबर को भाई दूज के शुभ अवसर पर बंद कर दिए जाएंगे। सर्दियों के दौरान श्रद्धालु खरसाली स्थित यमुना मंदिर में मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वाराणसी में अरविंद लिमिटेड की अत्याधुनिक गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। लगभग 150 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित यह इकाई उत्तर प्रदेश में अरविंद लिमिटेड की पहली विनिर्माण इकाई है। इससे 1,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं की होगी।
5.5 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस संयंत्र का कुल निर्मित क्षेत्र लगभग 65,000 वर्ग फुट है। यहां उन्नत स्वचालित सिलाई तकनीक के माध्यम से निटवियर यानी बुने हुए कपड़ों से बने परिधानों का निर्माण किया जाएगा। संयंत्र की संभावित राजस्व क्षमता 250 करोड़ रुपये बताई गई है। इस परियोजना से वाराणसी में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी सृजित होंगे। उद्घाटन समारोह में अरविंद लिमिटेड के चेयरमैन संजय लालभाई, वाइस चेयरमैन पुनीत लालभाई और वाइस चेयरमैन कुलिन लालभाई ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया।इस दौरान प्रधानमंत्री ने कंपनी के पदाधिकारियों के साथ विनिर्माण इकाई का भ्रमण किया और वहां उपलब्ध आधुनिक उत्पादन सुविधाओं का अवलोकन किया। अरविंद लिमिटेड के चेयरमैन संजय लालभाई ने कहा कि प्रधानमंत्री के हाथों इस इकाई का उद्घाटन होना कंपनी के लिए गौरव का विषय है। लालभाई समूह की यात्रा वर्ष 1897 में शुरू हुई थी और इसका इतिहास भारत की औद्योगिक प्रगति से गहराई से जुड़ा रहा है। कस्तूरभाई लालभाई की संस्थान निर्माण की दूरदर्शी सोच से प्रेरित होकर समूह ने ऐसे उद्यमों में निवेश किया है, जो आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं।उन्होंने कहा कि वाराणसी में किया गया यह निवेश बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगा। कार्यबल में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी होगी, जो देश की विकास यात्रा में नारी शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है। अरविंद लिमिटेड निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन के माध्यम से भारत के विकास में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। अरविंद लिमिटेड के वाइस चेयरमैन पुनीत लालभाई ने कहा कि भारत परिधान विनिर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है। देश की मजबूत वस्त्र उत्पादन शृंखला, कुशल कार्यबल और वैश्विक बाजार में विविध स्रोतों से खरीद की बढ़ती मांग भारत को दुनिया के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में शामिल होने का अवसर प्रदान करती है।उन्होंने कहा कि इस अवसर का लाभ उठाने के लिए उत्पादन क्षमता, उत्पादकता, सतत विकास और कार्यबल के कौशल विकास में निरंतर निवेश आवश्यक है। वाराणसी की यह इकाई स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद को बढ़ावा देगी। इसके साथ ही आपूर्ति शृंखला, परिवहन और अन्य स्थानीय सेवाओं से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने से कामगारों को अपने गृह क्षेत्रों के आसपास काम करने का अवसर मिलेगा। अरविंद लिमिटेड वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विनिर्माण क्षमताओं के विकास और दीर्घकालिक आर्थिक मूल्य सृजन के लिए प्रतिबद्ध है।अरविंद लिमिटेड के वाइस चेयरमैन कुलिन लालभाई ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से देश के प्रमुख विनिर्माण गंतव्यों में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास, औद्योगिक विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी और कौशल विकास पर दिया जा रहा जोर उद्योगों को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल और परिधान उद्योग के विस्तार के साथ उत्तर प्रदेश भारत के विनिर्माण तंत्र को मजबूत करने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और दीर्घकालिक निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में है।वाराणसी में स्थापित यह ग्रीनफील्ड परियोजना अरविंद लिमिटेड के गारमेंटिंग व्यवसाय के विस्तार और वर्टिकल इंटीग्रेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस इकाई के माध्यम से कंपनी अपने यहां निर्मित निटेड फैब्रिक यानी बुने हुए कपड़े से तैयार परिधान बना सकेगी। इससे कंपनी को अपने मौजूदा ग्राहकों को अधिक व्यापक उत्पाद उपलब्ध कराने और उनके साथ व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने में मदद मिलेगी। भारत में वस्त्र उत्पादन की मजबूत क्षमता है, लेकिन तैयार परिधानों के निर्माण की अतिरिक्त क्षमता विकसित करना भी जरूरी है। यह संयंत्र इस दिशा में योगदान देगा।हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के बाद यूरोप और ब्रिटेन के बाजारों में उपलब्ध नए अवसरों का लाभ उठाने में भी इस इकाई की महत्वपूर्ण भूमिका रहने की उम्मीद है। इससे कंपनी के उत्पादों की पहुंच बढ़ाने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने में मदद मिलेगी। इस विनिर्माण इकाई को उत्पादन दक्षता, सतत विकास और श्रमिक कल्याण को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। संयंत्र में स्थापित उन्नत स्वचालित उत्पादन प्रणालियों से उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्ता में एकरूपता बनाए रखने और बड़े पैमाने पर उत्पादन को सुगम बनाने में मदद मिलेगी। कंपनी ने कर्मचारियों की आवासीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समर्पित श्रमिक हॉस्टल भी स्थापित किए हैं।उत्पादन गतिविधियों के विस्तार के साथ आवासीय सुविधाओं को और बढ़ाने की योजना है। इससे कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और संयंत्र के संचालन को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी। अरविंद लिमिटेड की इस परियोजना से वाराणसी और उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है। संयंत्र में 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने के साथ आपूर्ति शृंखला, लॉजिस्टिक्स और स्थानीय सेवाओं से जुड़े कारोबार को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही, परिधान निर्माण से जुड़े सहायक उद्योगों और स्थानीय कारोबारी गतिविधियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।यह निवेश उत्तर प्रदेश को टेक्सटाइल और अपैरल विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अरविंद लिमिटेड वस्त्र और परिधान उद्योग से लेकर रिटेल तक विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करने वाला प्रमुख औद्योगिक समूह है। कंपनी का व्यवसाय टेक्सटाइल, परिधान, उन्नत सामग्री, पर्यावरण समाधान, दूरसंचार और ओम्नीचैनल कॉमर्स सहित कई क्षेत्रों में फैला है। कंपनी फाइबर से फैशन तक एकीकृत समाधान उपलब्ध कराती है और वैश्विक ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करती है। दुनिया के प्रमुख फैब्रिक आपूर्तिकर्ताओं में शामिल अरविंद लिमिटेड नवाचार, सतत विकास और विनिर्माण क्षेत्र में उत्कृष्टता पर विशेष ध्यान देता है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत में रविवार को वाराणसी में जनसैलाब उमड़ पड़ा। पुलिस लाइन से नमो घाट तक करीब सात किलोमीटर लंबे मार्ग पर लोगों ने पुष्प वर्षा, ढोल-नगाड़ों और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष के साथ उनका अभिनंदन किया। प्रधानमंत्री सड़क मार्ग से अपने काफिले के साथ नमो घाट पहुंचे, जहां उन्हें भारतीय वायुसेना के एयर शो में शामिल होना है। इस दौरान लोगों में प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए खासा उत्साह देखने को मिला।
प्रधानमंत्री मोदी का काफिला पुलिस लाइन से सांस्कृतिक संकुल, चौकाघाट, कज्जाकपुरा और राजघाट पुल होते हुए नमो घाट पहुंचा। मार्ग में जगह-जगह स्वागत मंच बनाए गए थे और बड़ी संख्या में लोग बैरिकेडिंग के दोनों ओर खड़े होकर उनके आगमन का इंतजार कर रहे थे। भदऊचुंगी समेत कई स्थानों पर समर्थकों की भारी भीड़ जुटी। लोगों का उत्साह देखकर प्रधानमंत्री ने कुछ स्थानों पर वाहन से बाहर निकलकर हाथ हिलाते हुए उनका अभिवादन किया। इस दौरान उनके काफिले पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाई गईं और देशभक्ति गीतों के साथ स्वागत किया गया।नमो घाट पहुंचने पर वायु सेना के अधिकारियों और भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। गंगा तट पर आयोजित कार्यक्रम स्थल पर ‘नमो-नमो’ के उद्घोष के बीच प्रधानमंत्री ने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। स्वागत के लिए जुटे लोगों में विभिन्न समुदायों के लोग शामिल रहे। घाटों और आसपास के इलाकों में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। प्रधानमंत्री इससे पहले मिर्जामुराद क्षेत्र के खोचवां में अरविंद मिल लिमिटेड की नई टेक्सटाइल इकाई का उद्घाटन कर चुके हैं। कई करोड़ रुपये की लागत से सात एकड़ में स्थापित इस इकाई में विभिन्न प्रकार के परिधानों का उत्पादन किया जाएगा।इसके बाद वह भारतीय वायुसेना के एयर शो में शामिल होने के लिए नमो घाट पहुंचे। भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एयर शो को ‘विंग्स ओवर गंगा’ नाम दिया गया है। इसमें करीब 100 विमानों के हिस्सा लेने की जानकारी दी गई है, जिनमें राफेल और सुखोई जैसे 52 लड़ाकू विमान भी शामिल हैं। एयर शो के दौरान लड़ाकू विमानों के साथ हेलीकॉप्टरों की हवाई प्रस्तुतियां भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।रविवार को कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही नमो घाट और आसपास के घाटों पर लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। सुबह से ही दर्शक घाटों की सीढ़ियों और अन्य निर्धारित स्थानों पर बैठकर आसमान में होने वाले हवाई करतबों का इंतजार करते नजर आए। गंगा के दूसरे किनारे डोमरी, बहादुरपुर और कटेसर समेत आसपास के इलाकों में भी लोगों की भीड़ जुटी। भारतीय वायुसेना की सारंग हेलीकॉप्टर प्रदर्शन टीम ने भी अपने समन्वित हवाई करतबों से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।ध्रुव हेलीकॉप्टरों से बनी टीम ने गंगा के ऊपर एक साथ उड़ान भरते हुए सटीक तालमेल, नियंत्रित मोड़ और समूह में बदलती आकृतियों का प्रदर्शन किया। घाटों पर मौजूद दर्शकों ने हेलीकॉप्टरों की इस प्रस्तुति को उत्सुकता से देखा। प्रधानमंत्री के दौरे और एयर शो को देखते हुए वाराणसी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। पुलिस और प्रशासन की टीमें प्रमुख मार्गों तथा कार्यक्रम स्थल पर मुस्तैद रहीं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई। -
नई दिल्ली। मां गंगा की अविरल धारा, काशी के ऐतिहासिक घाट और आसमान में गूंजते भारतीय लड़ाकू विमानों की गगनभेदी गर्जना। कहीं राफेल की तेज रफ्तार, कहीं सुखोई की आक्रामक उड़ान, कहीं स्वदेशी तेजस के हैरतअंगेज हवाई करतब तो कहीं सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम की आसमान पर उकेरी गई कलात्मक आकृतियां। आध्यात्मिक नगरी काशी रविवार को भारतीय वायुसेना के शौर्य, साहस, तकनीकी सामर्थ्य और पेशेवर दक्षता की साक्षी बनी। मां गंगा के ऊपर आयोजित भव्य एयर शो ‘विंग्स ओवर गंगा’ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर वायु शक्ति का अद्भुत प्रदर्शन देखा।
इस ऐतिहासिक आयोजन में सैन्य विमानन की विरासत, आधुनिक युद्धक क्षमता, स्वदेशी तकनीक और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति वायु योद्धाओं के समर्पण का प्रभावशाली संगम देखने को मिला। काशी के आसमान में जब विमानों की गर्जना गूंजी तो गंगा के दोनों तटों पर मौजूद दर्शकों की निगाहें आसमान पर टिक गईं। हर फॉर्मेशन के साथ रोमांच बढ़ता गया और हर करतब के बाद तालियों की गड़गड़ाहट वायु योद्धाओं के साहस और कौशल का अभिनंदन करती रही। यह केवल विमानों की उड़ान का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि बदलते समय के साथ भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता, युद्धक तैयारी, सटीक प्रहार क्षमता और तकनीकी विकास की यात्रा का जीवंत प्रस्तुतिकरण था।कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम के प्रदर्शन के साथ हुई। हेलीकॉप्टरों के बीच सटीक तालमेल, नियंत्रित गति और समन्वित हवाई करतबों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। इसके बाद वायुसेना प्रमुख एवं भारतीय वायुसेना के समस्त वायु योद्धाओं की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वागत और अभिनंदन किया गया। वायुसेना प्रमुख ने इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री को स्मृति चिह्न भेंट किया। समारोह में भारतीय वायुसेना के 94 गौरवशाली वर्षों की यात्रा को काशी की आध्यात्मिक विरासत से जोड़ते हुए कर्तव्य, त्याग और राष्ट्र सेवा के भाव को रेखांकित किया गया।फ्लाईपास्ट के अगले चरण में तीन एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों की ‘ओंकार’ फॉर्मेशन ने प्रवेश किया। ग्रुप कैप्टन अनुज गुप्ता के नेतृत्व में उड़ रहे हेलीकॉप्टरों पर राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय वायुसेना के ध्वज लहरा रहे थे। भगवान शिव से जुड़े पवित्र ‘ओंकार’ के नाम वाली इस संरचना ने राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक आस्था को एक साथ प्रस्तुत किया। इसके बाद ग्रुप कैप्टन दीपांकर दास के नेतृत्व में तीन चेतक हेलीकॉप्टरों की ‘गंगा’ फॉर्मेशन ने काशी के आकाश में प्रवेश किया। मां गंगा के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने के लिए हेलीकॉप्टरों से पुष्प वर्षा की गई। आकाश से बरसते फूलों और नीचे बहती गंगा के बीच बना यह दृश्य समारोह के सबसे भावपूर्ण क्षणों में शामिल रहा।इसके बाद आसमान में भारतीय वायुसेना के शक्तिशाली सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान की गर्जना सुनाई दी। ‘रुद्र’ कॉल साइन के साथ विंग कमांडर एस. भार्गव के नेतृत्व में विमान ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। इसी क्रम में सुखोई-30 एमकेआई से जुड़े हवाई निगरानी और टोही कौशल का भी प्रदर्शन किया गया। स्क्वाड्रन लीडर निखिल बाबू ने ‘शंकर’ कॉल साइन के साथ इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल प्रणाली का उपयोग करते हुए वायुसेना की इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (आईएसआर) क्षमताओं का परिचय दिया। इसके बाद ‘भागीरथी’ फॉर्मेशन में लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) और अमेरिकी अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों का सटीक समन्वय दिखाई दिया। ग्रुप कैप्टन अनुभव महेंद्र के नेतृत्व वाली इस संरचना ने आधुनिक युद्धक्षेत्र में हेलीकॉप्टरों की भूमिका और उनकी परिचालन उपयोगिता को प्रदर्शित किया। ‘त्रिदेव’ फॉर्मेशन ने तीनों सेनाओं के संयुक्त संकल्प को प्रदर्शित किया।भारतीय नौसेना के कामोव-31 हेलीकॉप्टर और भारतीय वायु सेना तथा थल सेना के एएलएच मार्क-3 हेलीकॉप्टरों का साझा प्रदर्शन सैन्य सेवाओं के बीच समन्वय और संयुक्त अभियान क्षमता का प्रतीक बना। इसका नेतृत्व भारतीय नौसेना के कैप्टन दिव्येंदु शर्मा ने किया। तीनों सेनाओं का संदेश एक ही था- तीन सेवाएं, एक मिशन और एक राष्ट्र। ‘अलकनंदा’ फॉर्मेशन में सुखोई और एएलएच हेलीकॉप्टरों ने अपनी उड़ान के तालमेल से दर्शकों को प्रभावित किया। ग्रुप कैप्टन हर्ष पांडे के नेतृत्व में प्रस्तुत इस संरचना ने संयुक्त परिचालन क्षमता और अनुशासित उड़ान कौशल का प्रदर्शन किया। भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ को विशिष्ट रूप देने के लिए एक हेलीकॉप्टर के पिछले रैंप से आकाश में ‘94’ का अंक प्रदर्शित किया गया। इसके साथ वर्षगांठ का विशेष बैनर भी दिखाया गया। यह दृश्य वायुसेना के 94 वर्षों के साहस, बलिदान, उपलब्धियों और निरंतर राष्ट्र सेवा का प्रतीक बना।इस प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि सैन्य विमानन में केवल शक्ति ही नहीं, बल्कि पायलटों की सटीकता, प्रशिक्षण और सूक्ष्म समन्वय भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके बाद ‘भैरव’ फॉर्मेशन में सी-295 और डोर्नियर-228 विमानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विंग कमांडर अनिमेश लांबा के नेतृत्व में इस प्रदर्शन ने भारतीय वायुसेना की परिवहन क्षमता, बहुउद्देशीय उपयोगिता और सटीक फॉर्मेशन फ्लाइंग को प्रदर्शित किया। काशी के रक्षक बाबा कालभैरव के नाम वाली इस संरचना ने निगरानी, विश्वसनीयता और सुरक्षा के भाव को सैन्य विमानन से जोड़ा। ‘कैलाश’ फॉर्मेशन में सी-130 और एएन-32 विमानों ने अपनी एयरलिफ्ट क्षमता तथा समन्वित उड़ान का प्रदर्शन किया।इसके बाद ‘त्रिलोचन’ फॉर्मेशन में एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल विमान और मिग-29 लड़ाकू विमान नजर आए। यह संयोजन आधुनिक हवाई अभियानों में दूर तक निगरानी रखने, संभावित खतरों का आकलन करने और लड़ाकू विमानों को आवश्यक सामरिक जानकारी उपलब्ध कराने की अहमियत को रेखांकित करता है। ‘नटराज’ फॉर्मेशन में भारतीय नौसेना के पी-8आई समुद्री निगरानी विमान और वायुसेना के मिराज-2000 लड़ाकू विमान का प्रदर्शन हुआ। इसके बाद ‘महादेव’ फॉर्मेशन में आईएल-78 एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर और मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया। हवा में ईंधन भरने की क्षमता आधुनिक वायु अभियानों का एक महत्वपूर्ण आधार है, क्योंकि इससे लड़ाकू विमानों की परिचालन पहुंच और मिशन पूरा करने की क्षमता बढ़ती है।काशी की आध्यात्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए कई फॉर्मेशन के नाम भी विशेष रखे गए थे। ‘विश्वनाथ’ फॉर्मेशन में तीन शक्तिशाली सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान शामिल रहे। विंग कमांडर आयुष कुणाल के नेतृत्व में इन विमानों ने आकाश में अपनी गति, शक्ति और सटीक उड़ान कौशल का प्रदर्शन किया। इसके बाद चार जगुआर लड़ाकू विमानों की ‘पशुपति’ फॉर्मेशन ने डायमंड संरचना में उड़ान भरी। ग्रुप कैप्टन मयंक पवार के नेतृत्व में विमानों के बीच सटीक दूरी, अनुशासन और तालमेल ने दर्शकों को प्रभावित किया। जगुआर विमान की भूमिका मुख्यतः जमीनी लक्ष्यों पर प्रहार करने से जुड़ी रही है, इसलिए यह फॉर्मेशन वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता का प्रतीक बना।तीन राफेल लड़ाकू विमानों की ‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन ने अत्याधुनिक युद्धक विमानन शक्ति का प्रदर्शन किया। विंग कमांडर कौस्तुभ नलावड़े के नेतृत्व में विंग फॉर्मेशन में उड़ते विमानों ने आधुनिक एवियोनिक्स, उच्च परिचालन क्षमता और समन्वित उड़ान का प्रभावशाली परिचय दिया। इसके बाद ‘प्रचंड’ फॉर्मेशन में सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, एलसीए तेजस और मिग-29 जैसे विभिन्न लड़ाकू विमानों का संयुक्त प्रदर्शन देखने को मिला। अलग-अलग पीढ़ियों और भूमिकाओं वाले इन विमानों का एक साथ आना भारतीय वायुसेना की बहुआयामी युद्धक क्षमता और विविध परिस्थितियों में मिशन पूरा करने की तैयारी का परिचायक रहा।एयर शो का सबसे आकर्षक और तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण पड़ाव स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस का एकल प्रदर्शन रहा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और भारतीय निजी उद्योग की भागीदारी से विकसित इस विमान ने आत्मनिर्भर भारत की रक्षा तकनीक का प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत किया। ग्रुप कैप्टन रूप के नेतृत्व में तेजस ने काशी के आकाश में अपनी फुर्ती, नियंत्रण और उड़ान कौशल का प्रदर्शन किया। तेजस ने पहले चार-बिंदु रोल प्रस्तुत किया, जिसमें विमान ने अपनी धुरी पर नियंत्रित घुमाव लेते हुए सटीकता का परिचय दिया। इसके बाद वर्टिकल पिच-बैक, मैक्सिमम रेट टर्न और रेड आई टर्न जैसे करतबों ने दर्शकों को रोमांचित किया। इन करतबों के जरिए विमान की दिशा बदलने, तीव्र मोड़ लेने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में नियंत्रण बनाए रखने की क्षमता को प्रदर्शित किया गया।इसके बाद तेजस ने ‘वर्टिकल चार्ली’ और ‘फॉर्मूला वन टर्न’ जैसे करतब प्रस्तुत किए। धीमी गति पर नियंत्रित उड़ान के ‘स्लो मार्च’ प्रदर्शन ने यह दिखाया कि लड़ाकू विमान की दक्षता केवल अधिकतम रफ्तार तक सीमित नहीं होती, बल्कि विभिन्न गति और परिस्थितियों में सटीक नियंत्रण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। तेजस के प्रदर्शन का समापन ‘स्पाइडरमैन फेयरवेल’ के साथ हुआ। विमान ने उल्टी उड़ान की मुद्रा में दर्शकों का अभिवादन किया। इस दौरान गंगा के दोनों तटों से तालियों की गूंज सुनाई दी। तेजस का प्रदर्शन केवल हवाई करतबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने स्वदेशी एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, तकनीकी आत्मनिर्भरता और देश में विकसित रक्षा प्रणालियों की बढ़ती क्षमता का संदेश भी दिया।तेजस के प्रदर्शन के बाद मिराज-2000, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल विमानों की फॉर्मेशन ने पुनः प्रवेश किया। ‘महादेव’, ‘विश्वनाथ’ और ‘नीलकंठ’ संरचनाओं में विमानों ने एरियल स्प्लिट जैसे करतब प्रस्तुत किए। फॉर्मेशन में उड़ते विमानों का निर्धारित समय और दूरी पर अलग-अलग दिशाओं में बंटना पायलटों के अनुशासन, आपसी समन्वय और उच्च स्तर के प्रशिक्षण का परिचायक रहा। इसके बाद दर्शकों को एक काल्पनिक हवाई युद्ध का दृश्य दिखाया गया। इसमें दो जगुआर विमानों को जमीनी लक्ष्य पर हमला करने की भूमिका में रखा गया, जबकि दो सुखोई विमानों ने उन्हें रोकने और काल्पनिक शत्रु विमानों को निष्क्रिय करने की भूमिका निभाई।रडार आधारित पहचान, पीछा करने और लक्ष्य को रोकने की इस नाटकीय प्रस्तुति ने आधुनिक हवाई युद्ध की जटिलता और वायु रक्षा में त्वरित निर्णय लेने के महत्व को सामने रखा। इस प्रदर्शन ने दर्शकों को यह समझने का अवसर दिया कि हवाई युद्ध में केवल विमान की गति या हथियार ही निर्णायक नहीं होते। पायलट का प्रशिक्षण, लक्ष्य की पहचान, सामरिक स्थिति का आकलन, सेंसर से प्राप्त जानकारी और समय पर लिया गया निर्णय भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। प्रदर्शन के दौरान विभिन्न लड़ाकू विमानों से जुड़ी आधुनिक हथियार प्रणालियों का भी उल्लेख किया गया।सुखोई-30 एमकेआई के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, राफेल के साथ स्कैल्प, जगुआर के साथ सेंसर फ्यूज्ड वेपन, मिराज-2000 के साथ क्रिस्टल मेज तथा तेजस व मिग-29 के साथ दृश्य सीमा से परे मार करने वाली मिसाइलों का संदर्भ दिया गया। इन प्रणालियों का उल्लेख भारतीय वायुसेना की विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों के विरुद्ध कार्रवाई करने की क्षमता को प्रदर्शित करता है। लंबी दूरी पर सटीक प्रहार, जमीनी लक्ष्यों पर हमला, हवाई श्रेष्ठता और आधुनिक सेंसरों के जरिए लक्ष्य की पहचान- ये सभी आधुनिक वायु अभियानों के महत्वपूर्ण आयाम हैं। कार्यक्रम में ऑपरेशन बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया गया। इन अभियानों के संदर्भ में वायुसेना की सटीक प्रहार क्षमता, परिचालन तत्परता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्रवाई करने के संकल्प को प्रदर्शित किया गया।एयर शो के अंतिम चरण में सी-17 ग्लोबमास्टर और सूर्य किरण एरोबैटिक टीम की उपस्थिति ने समारोह को नई ऊंचाई दी। ‘दशाश्वमेध’ कॉल साइन वाली फॉर्मेशन में विशाल सी-17 ग्लोबमास्टर के साथ सूर्य किरण टीम का प्रदर्शन काशी की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक वायु शक्ति के संगम का प्रतीक बना। दशाश्वमेध घाट के नाम से जुड़ी इस संरचना ने समारोह के स्थानीय और राष्ट्रीय महत्व को एक साथ प्रदर्शित किया। इसके बाद सूर्य किरण एरोबैटिक टीम ने आसमान में रोमांचक करतबों की श्रृंखला प्रस्तुत की। ग्रुप कैप्टन अजय दशरथ के नेतृत्व में नौ हॉक विमानों की टीम ने अनुशासित और समन्वित उड़ान से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।विमानों ने एक साथ उड़ते हुए अपनी संरचना बदली, अलग-अलग आकृतियां बनाईं और अत्यंत कम अंतर पर सटीक तालमेल के साथ हवाई करतब दिखाए। टीम ने तेजस को समर्पित फॉर्मेशन, विजय फॉर्मेशन, फ्लावर और बैरल रोल जैसे प्रदर्शन प्रस्तुत किए। एक विमान के फॉर्मेशन से अलग होने और बाद में पुनः प्रदर्शन में शामिल होने के दृश्यों ने रोमांच बढ़ाया। विमानों के एक साथ दिशा बदलने, रोल करने और आकाश में सममित आकृतियां बनाने के दौरान दर्शकों की तालियां लगातार गूंजती रहीं। सूर्य किरण टीम का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण था कि एरोबैटिक्स केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पायलटों के असाधारण आत्मविश्वास, एकाग्रता, उड़ान अनुशासन और आपसी विश्वास की परीक्षा भी है। टीम की सटीकता ने भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण और पेशेवर उत्कृष्टता की झलक प्रस्तुत की। -
नई दिल्ली। ओडिशा के भुवनेश्वर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारतीय रिजर्व बैंक के नवस्थापित डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज भुवनेश्वर नए भारत को एक नया संस्थान दे रहा है। भुवनेश्वर में आरबीआई का डेटा सेंटर और साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का उद्घाटन एक महत्वपूर्ण अवसर है। ये ओडिशा और देश के लोगों के लिए बहुत हितकारी होने वाले हैं।
उन्होंने कहा कि मैं इस परियोजना से जुड़े सभी लोगों को बधाई देता हूं। आज का यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि भारत में गवर्नेंस की अप्रोच कैसे और कितनी तेजी से बदल रही है। हमारा ध्यान है, विकास की प्राथमिकता, विस्तार और आखिरी व्यक्ति तक पहुंच। आजादी के बाद देश में बड़े-बड़े शहरों का विकास हुआ, बड़े संस्थान बने, बड़े अस्पताल और बड़े एयरपोर्ट भी बने, लेकिन देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा बुनियादी सुविधाओं का इंतजार करता आ रहा था। दिल्ली में बड़े अस्पताल थे, लेकिन छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों में बेहतर इलाज के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। बड़े शहरों में हवाई यात्रा की सुविधा थी, लेकिन छोटे शहरों को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने पर उतना फोकस नहीं था। रेलवे स्टेशन आम नागरिक की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था, लेकिन रेलवे स्टेशनों पर आधुनिक सुविधाओं का अभाव था। यानी विकास का लाभ देश के हर क्षेत्र और हर नागरिक तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। हमने इसी को बदलने का प्रयास किया है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे लिए विकास का मतलब है भारत का संतुलित विकास और गांवों को अवसर। हमारा मकसद है गरीब परिवारों को सम्मान के साथ जीवन जीने की सुविधाएं देना। हर नागरिक को निरंतर यह विश्वास देना कि विकास की इस यात्रा में वह पीछे नहीं छूटेगा। आज देश के एक्सप्रेसवे छोटे शहरों को भी जोड़ रहे हैं। एम्स जैसे संस्थानों का निर्माण छोटे शहरों में भी हुआ है। गांवों में करीब पौने दो लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोले गए हैं। आज दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है। यही गवर्नेंस का असल मकसद है, नागरिकों के जीवन को आसान बनाना और उसके सपनों को नए अवसर देना। सामान्य परिवारों को कैसे दशकों तक अभाव में रखा गया, उसका एक बड़ा उदाहरण हमारा बैंकिंग सेक्टर भी रहा है। गरीबों के नाम पर 60-70 के दशकों में बैंकों का नेशनलाइजेशन किया गया, लेकिन 2014 तक देश की आधी आबादी बैंकिंग सिस्टम से ही बाहर थी।उन्होंने कहा कि आज भारत में डिजिटल बैंकिंग ने सबको 24 घंटों बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा है। लेकिन 2014 से पहले अलग ही फोन बैंकिंग का दौर था। दिल्ली में कांग्रेस के कुछ खास लोगों को और कनेक्शन वाले लोगों को फोन बैंकिंग से हजारों करोड़ रुपए का लोन दिया जाता था, लेकिन गरीब आदमी को बैंक में खाता खुलवाने के लिए गारंटर की जरूरत पड़ती थी। कांग्रेस की फोन बैंकिंग स्कीम में अमीरों के लिए हजारों करोड़ रुपए हमेशा उपलब्ध रहते थे, जिसके चलते भारत का बैंकिंग सिस्टम एनपीए की चपेट में आ गया। बैंकिंग सिस्टम बर्बादी के कगार पर पहुंच गया। किसी भी बदलाव के लिए सोच का भी बड़ा होना जरूरी है। नीयत साफ हो, इरादे नेक हों तो असंभव लगने वाले काम भी संभव हो जाता है। जहां नीयत में खोट हो तो संभावनाएं भी सीमित हो जाती हैं।उन्होंने कहा कि आज भारत का बैंकिंग सेक्टर दुनिया के सबसे सशक्त बैंकिंग सेक्टर में से एक है। ओडिशा की धरती से ही देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा था कि दिल्ली से एक रुपया भेजते हैं तो जनता तक केवल 15 पैसे ही पहुंचते हैं। एक वो दौर था और एक आज का दौर है। आज दिल्ली से एक रुपया निकलता है तो पूरा का पूरा रुपया लाभार्थी के खाते में पहुंचता है। मुद्रा योजना से 13 करोड़ लोग पहली बार उद्यमी बने हैं। अटल पेंशन स्कीम से 9 करोड़ लोगों को सोशल सिक्योरिटी कवरेज मिला है। अकेले ओडिशा में ही इससे 38 लाख लोग कवर होते हैं, हमारे लिए ‘नागरिक देवो भव:’ ही सुशासन का मंत्र है।पीएम मोदी ने कहा कि यह वही देश है, जहां डेबिट और क्रेडिट कार्ड अमीरों के लिए होते थे और अब देश के हर नागरिक के लिए सुलभ हैं। विगत दशक बैंकिंग को उन लोगों के पास पहुंचाने का था, जो उससे वंचित थे। आने वाला दशक बैंकिंग को अधिक भरोसेमंद बनाने का है। हम सभी जानते हैं कि आजकल युद्ध केवल हथियारों से नहीं लड़े जाते, किसी देश की अर्थव्यवस्था पर चोट करके भी लड़े जाते हैं, इसलिए भारत आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है, तो हमें अपने बैंकिंग सिस्टम को भी साइबर लुटेरों से सुरक्षित करना होगा।( -
नई दिल्ली। वाराणसी में रविवार को गंगा की लहरों के ऊपर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की गर्जना गूंजी। नमो घाट पर आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ हवाई प्रदर्शन में वायुसेना के राफेल, सुखोई और तेजस जैसे लड़ाकू विमानों के हवाई करतब आकर्षण का केंद्र रहे। भारतीय वायुसेना के विमानों और हेलीकॉप्टरों ने आसमान में अपनी उड़ान क्षमता, सटीक नियंत्रण और पायलटों के असाधारण कौशल का प्रदर्शन किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस आयोजन के पर मौजूद रहे व इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बने। भारतीय वायुसेना के 94 गौरवशाली वर्षों के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में गंगा के ऊपर विमानों की तेज उड़ान और रोमांचक हवाई करतबों ने आयोजन को खास बनाया। आसमान में विमानों की गर्जना और उनकी कलाबाजियों ने भारतीय वायुसेना की ताकत और पेशेवर दक्षता की झलक पेश की। इस प्रदर्शन के जरिए वायुसेना की तकनीकी क्षमता, सटीक उड़ान और हवाई अभियानों में उसके कौशल को सामने लाया गया।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘विंग्स ओवर गंगा’ को भारतीय वायुसेना के शौर्य और शक्ति का उत्सव बताया। उन्होंने वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि काशी भारतीय वायुसेना के पराक्रम को देखने के लिए तैयार है। उन्होंने वाराणसी को सशक्त, आत्मनिर्भर और नए भारत की उभरती ताकत का प्रतीक भी बताया। गंगा के ऊपर आसमान में उड़ान भरते लड़ाकू विमानों की गर्जना ने हवाई प्रदर्शन को खास बना दिया।तेज रफ्तार से उड़ान भरना, हवा में दिशा बदलना और सटीक नियंत्रण के साथ अलग-अलग हवाई करतब दिखाना लड़ाकू विमानों की क्षमताओं को सामने लाता है। राफेल, सुखोई और स्वदेशी तेजस जैसे विमानों की मौजूदगी ने भारतीय वायुसेना की विविध लड़ाकू क्षमताओं की झलक पेश की। इन विमानों को उड़ाने वाले पायलटों के लिए बेहद सटीक नियंत्रण, समय का सही आकलन और परिस्थितियों के अनुसार तुरंत निर्णय लेना जरूरी होता है।गौरतलब है कि हवाई प्रदर्शन केवल रोमांच और मनोरंजन तक सीमित नहीं है। ऐसे आयोजनों के जरिए वायुसेना अपनी उड़ान दक्षता, तकनीकी क्षमता और हवाई अभियानों के लिए जरूरी तालमेल को भी प्रदर्शित करती है। लड़ाकू विमानों की गति, उनके संचालन और हवा में सटीक गतिविधियों के पीछे पायलटों का कठोर प्रशिक्षण और तकनीकी तैयारी होती है। इस तरह के प्रदर्शन आम लोगों को भी यह समझने का अवसर देते हैं कि देश की हवाई सुरक्षा के लिए वायुसेना किस स्तर की तैयारी और कौशल के साथ काम करती है।इस आयोजन में भारतीय वायुसेना के विमानों और हेलीकॉप्टरों ने अपनी उड़ान क्षमताओं का प्रदर्शन किया। गंगा के विस्तृत जलक्षेत्र के ऊपर हवाई करतबों ने कार्यक्रम को अलग पहचान दी। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाली काशी में इस तरह का आयोजन भारतीय वायुसेना की शक्ति को आम लोगों के करीब लाने का अवसर भी बना। कार्यक्रम के लिए वाराणसी में विशेष स्वागत तैयारियां भी की गईं।विभिन्न स्थानों पर स्वागत केंद्र बनाए गए, जहां पारंपरिक ढोल-नगाड़ों, डमरू की गूंज, शंखनाद और पुष्प वर्षा के साथ लोगों का स्वागत किया गया। इस तरह आयोजन में काशी की सांस्कृतिक विरासत और भारतीय वायुसेना के शौर्य का संगम देखने को मिला। भारतीय वायुसेना का ध्येय वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ है, जिसका अर्थ है ‘गर्व के साथ आकाश को छुओ’। वाराणसी में आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ ने इसी भावना को केंद्र में रखते हुए भारतीय वायुसेना की हवाई क्षमताओं और उसके पायलटों के कौशल को प्रदर्शित किया।


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