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- -हमारे युवाओं की आकांक्षा, कौशल और क्षमता ही विकसित भारत की दिशा तय करती हैं: पीएम-आने वाले वर्षों में भारत के युवा वैश्विक विकास, नवाचार और उद्यमिता को आगे बढ़ाने में सबसे आगे रहेंगे: पीएम-भारत अग्रिम पंक्ति में नेतृत्व करने के लिए तैयार है: पीएम-21वीं सदी में अवसर उन देशों को मिलेंगे, जो कुशल प्रतिभा को बढ़ावा देंगे, नवाचार को प्रोत्साहित करेंगे और गुणवत्ता के उच्चतम मानकों को बनाए रखेंगे: पीएम-वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए हमें गुणवत्ता के उच्चतम मानकों को पूरा करना होगा: पीएम
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना से जुड़े लाभार्थियों, उद्योग प्रतिनिधियों और हितधारकों को संबोधित किया और भारत के युवाओं को सशक्त बनाने तथा पूरे देश में रोजगार सृजन को तेज करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। श्री मोदी ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) के तहत लगभग 2,400 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि का वितरण किया, जो पीएम-वीबीआरवाई के कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। पीएम-वीबीआरवाई भारत सरकार की रोजगार से जुड़ी प्रमुख प्रोत्साहन योजना है, जो विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार कर रही है। इस प्रोत्साहन से पूरे देश में रोजगार के 15 लाख अवसरो के सृजन में मदद मिली है।
फ्रांस और स्लोवाकिया की अपनी यात्रा से लौटने के तुरंत बाद सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवाओं को उनकी प्रतिभा, कौशल और क्षमता के लिए वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व पहचान मिल रही है। प्रधानमंत्री जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने और विश्व के राजनेताओं से विचार-विमर्श करने के लिए फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा पर थे। उन्होंने कहा कि दुनिया युवा भारतीयों की क्षमताओं को पहचान रही है और इस बात पर जोर दिया कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि हर युवा को अपनी क्षमता को सफलता में बदलने का अवसर मिले।श्री मोदी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना एक रोजगार योजना से कहीं अधिक है। यह पहली बार नौकरी शुरू करने वाले युवाओं की आकांक्षाओं को मजबूत करने और उद्योग तथा कार्यबल के बीच एक मजबूत सेतु बनाने के लिए तैयार की गई एक पहल है।" उन्होंने कहा कि जहाँ कई योजनाएँ आमतौर पर कर्मचारियों या नियोक्ताओं पर केंद्रित होती हैं, वहीं यह कार्यक्रम एक साथ दोनों का समर्थन करता है। सरकार उन युवाओं के साथ खड़ी है, जो अपने पेशेवर सफर की शुरुआत कर रहे हैं और उन संस्थाओं को प्रोत्साहित करती है, जो नए रोजगार के अवसर पैदा करती हैं।योजना की उपलब्धियों को साझा करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि अब तक लगभग 70 लाख नई नौकरियां सृजित की गई हैं और इतनी ही संख्या में पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि लगभग 20 लाख युवा पहली नौकरी में छह महीने पूरे कर चुके हैं, जबकि इस उपलब्धि को पूरा करने पर लगभग 10 लाख लाभार्थियों को योजना के तहत पहले ही प्रोत्साहन राशि मिल चुकी है। 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की गयी है। इस सहायता को वित्तीय मदद से अधिक बताते हुए, श्री मोदी ने कहा कि यह देश के युवाओं की मेहनत को मान्यता देने और देश का उनके भविष्य में विश्वास का प्रतीक है।प्रधानमंत्री ने योजना के तहत रोजगार के अवसर पैदा करने वाले संस्थानों और उद्यमों की भागीदारी पर भी संतोष व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा, “जब सरकार, उद्योग और युवा मिलकर काम करते हैं, तो रोजगार सृजन में तेजी आती है। यह पहल एक नए भारत की झलक है जहां युवाओं को अवसर मिलते हैं, उद्योगों को प्रोत्साहन मिलता है और रोजगार सृजन एक राष्ट्रीय मिशन बन जाता है।”भारत की जनसांख्यिकीय ताकत को रेखांकित करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और एक विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा स्वाभाविक रूप से देश की युवा शक्ति की आकांक्षाओं, कौशल और क्षमताओं से जुड़ी होती है। उन्होंने दोहराया कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि हर युवा भारतीय अपनी प्रतिभा और महत्वाकांक्षा के अनुसार आगे बढ़ सके। श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि पिछले बारह वर्षों में सरकार ने रोजगार के हर रास्ते को मजबूत करने के लिए काम किया है। उन्होंने कहा, "अवसंरचना और नवाचार से लेकर निर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप्स तक, सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं। मेक इन इंडिया, वोकल फॉर लोकल, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुँचाने के प्रयास और मिशन निर्माण जैसी पहलों ने रोजगार और स्वरोजगार दोनों के लिए अवसरों का विस्तार किया है।"श्री मोदी ने बताया कि सरकार का अवसंरचना में 12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश रोजगार सृजन के लिए मजबूत आधार बना रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 33 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मदद ने लाखों युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने में सक्षम बनाया है। महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करते हुए उन्होंने कहा कि 10 करोड़ से अधिक महिलाएँ स्वयं-सहायता समूहों से जुड़ी हैं, जबकि 3 करोड़ से ज्यादा महिलाएँ लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि पीएम स्वनिधि और पीएम विश्वकर्मा जैसी पहलों ने छोटे उद्यमियों, रेहड़ी विक्रेताओं और पारंपरिक कारीगरों की आजीविका को मजबूत किया है।प्रधानमंत्री ने तेजी से बढ़ते ड्रोन क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे नई तकनीकें रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही हैं। दवाइयों की डिलीवरी और कृषि कार्यों से लेकर स्वामित्व योजना के तहत भूमि मानचित्रण और रक्षा अभियानों तक, ड्रोन तकनीक को अपनाने से युवा भारतीयों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था के परिवर्तनकारी प्रभाव के बारे में श्री मोदी ने गिग अर्थव्यवस्था, प्लेटफॉर्म-आधारित सेवा, कंटेंट निर्माण और तकनीक-आधारित उद्यमों के उदय को रोजगार और आय के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में रेखांकित किया। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, "जो अवसर पहले असंभव लगते थे, वे अब लाखों युवा भारतीयों के लिए जीविकोपार्जन का जरिया बन गए हैं। यही बदलाव भारत के जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी दिखाई दे रहा है, जो लगातार नवाचार को बढ़ावा दे रहा है, रोजगार पैदा कर रहा है और देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान कर रहा है।“प्रधानमंत्री ने पिछले दशक में भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की असाधारण वृद्धि को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पहले देश में केवल लगभग 500 स्टार्टअप थे, जबकि आज 2,00,000 से अधिक पंजीकृतस्टार्टअप कार्यरत हैं, जो देश के लगभग हर जिले में मौजूद हैं। श्री मोदी ने कहा, “वैश्विक समुदाय भारत के भविष्य के प्रति उत्साहित है और उसे इसके युवाओं की क्षमताओं में अत्यधिक विश्वास है।” अपनी हाल की फ्रांस यात्रा का जिक्र करते हुए, उन्होंने “इंडिया इनोवेट्स” कार्यक्रम के सफल आयोजन को याद किया, जिसने भारतीय स्टार्टअप और वैश्विक निवेशकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष तकनीक, हरित ऊर्जा और जैव-प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए एक साझा मंच प्रदान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम भारत के नवाचार इकोसिस्टम में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय रुचि और भविष्य की तकनीकों को आकार देने में इसके बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं।श्री मोदी ने आगे कहा कि भारत सक्रिय रूप से दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ नए व्यापार समझौते कर रहा है। उन्होंने बताया कि ये समझौते भारतीय उद्योगों के लिए नए बाजार खोल रहे हैं और भारतीय पेशेवरों के लिए नये अवसर बना रहे हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “जब पूरी दुनिया भविष्य की अर्थव्यवस्था की तैयारी कर रही है, भारत इसका नेतृत्व करने की तैयारी कर रहा है। जैसे-जैसे देश भविष्य की तकनीकों की ओर बढ़ रहे हैं, भारत अपने युवाओं को तेजी से बदलती दुनिया में सफल होने के लिए आवश्यक कौशल और क्षमताओं से लैस करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।“प्रधानमंत्री ने पिछले बारह वर्षों में भारत के रोजगार इकोसिस्टम में हुए महत्वपूर्ण बदलाव की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसे अक्सर कम महत्व दिया जाता है, लेकिन यह विकसित भारत की यात्रा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। श्री मोदी ने उल्लेख किया, “सरकार का ध्यान हमेशा रोजगार को सुरक्षा, गरिमा और सामाजिक संरक्षण से जोड़ने पर रहा है। कर्मचारियों के भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को आधुनिक बनाने, पेंशन प्रणाली को सरल बनाने और लाखों श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार द्वारा किये गये श्रम सुधारों के पीछे भी यही सोच है।"प्रधानमंत्री ने भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास में महिलाओं के बढ़ते योगदान पर भी ज़ोर दिया। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “रात्रि-पाली रोजगार से जुड़े सुधार, घर-से-काम (वर्क-फ्रॉम-होम) के अवसर बढ़ानाऔर कार्यस्थल सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना, इन सबका उद्देश्य महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी को और बढ़ाना है।“उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने 21वीं सदी में आर्थिक सफलता तय करने में कुशल प्रतिभा, नवाचार और गुणवत्ता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन देशों के पास ये खूबियां होंगी, उन्हें सबसे ज़्यादा मौके मिलेंगे। उन्होंने दावा किया कि भारत के पास इन तीनों क्षेत्रों में अभूतपूर्व क्षमता है। श्री मोदी ने कहा, “दुनिया तेजी से भारत के लिए दरवाजे खोल रही है और लगभग चालीस देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए जा चुके हैं। ये समझौते नए बाजार बना रहे हैं, वैश्विक उपभोक्ताओं तक पहुंच बढ़ा रहे हैं, और मेक इन इंडिया पहल के तहत बने ब्रांड्स के लिए नई संभावनाएँ पैदा कर रहे हैं।”श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि जब कोई देश वैश्विक दृष्टिकोण अपनाता है, तो सफलता की सीमाएँ स्वाभाविक रूप से विस्तृत हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि इक्कीसवीं सदी में प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और इंटर्नशिप अब विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य के कार्यबल के लिए अनिवार्य घटक हैं। श्री मोदी ने रेखांकित किया, “विकसित भारत की ओर यात्रा केवल निवेश से आगे नहीं बढ़ेगी। बल्कि यह प्रतिभा, कौशल और नवाचार की ताकत से संचालित होगी। राष्ट्रीय विकास के हर क्षेत्र में गुणवत्ता ही मुख्य पैमाना होना चाहिए। वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने और सफल होने के लिए, भारत को लगातार सबसे ऊँचे अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करना होगा और उनसे भी आगे निकलना होगा।“श्री मोदी ने कहा कि आज की दुनिया भारत से बड़ी उम्मीदें रखती है। देश के युवाओं में विश्वास व्यक्त करते हुए, उन्होंने कहा कि युवा भारतीय न केवल इन उम्मीदों को पूरा करेंगे बल्कि अपनी लगन, रचनात्मकता और क्षमताओं के माध्यम से उन्हें पार भी कर जाएंगे। उन्होंने इस विश्वास को 'विकसित भारत' की असली ताकत और भारत के युवा शक्ति की विशाल क्षमता का प्रतिबिंब बताया। प्रधानमंत्री ने युवाओं को यह कहकर प्रोत्साहित किया कि वे असफलताओं या बाधाओं से निराश न हों। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “हर असफलता में एक कीमती सबक होता है और यह व्यक्तिगत विकास और भविष्य की सफलता में योगदान देता है। एक युवा मन की सच्ची पहचान इसके चुनौतियों से निरंतर सीखने, सपनों को उपलब्धियों में बदलने, और हर उपलब्धि के बाद नए लक्ष्य बनाने की क्षमता में होती है।“प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के युवाओं और उनमें मौजूद उद्यमिता की ऊर्जा में अटूट विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए अपने संबोधन का समापन किया और दोहराया कि भारत विकसित देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है तथा सरकार देश के युवा नागरिकों की आकांक्षाओं, नवाचार और महत्वाकांक्षाओं का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। - -भारत-कोरिया गणराज्य की साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता, शांति और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है: लोकसभा अध्यक्ष-कोरिया गणराज्य के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष से की मुलाकातनई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने शुक्रवार को कहा कि भारत और कोरिया गणराज्य के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंध हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की बौद्ध विरासत अत्यंत समृद्ध है और दोनों के बीच घनिष्ठ जन-संवाद (people-to-people contacts) रहे हैं। उन्होंने बढ़ते द्विपक्षीय जुड़ाव के माध्यम से इन संबंधों को और गहरा करने के लिए भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराया।उन्होंने ये बातें आज संसद भवन में कोरिया गणराज्य के आंतरिक और सुरक्षा मंत्री तथा 'कोरिया गणराज्य-भारत संसदीय मित्रता समूह' के अध्यक्ष महामहिम श्री युन होजुंग के नेतृत्व में आए एक प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहीं।कोरिया गणराज्य के साथ अपने संबंधों को भारत द्वारा दिए जाने वाले महत्व पर प्रकाश डालते हुए, श्री बिरला ने कहा कि दोनों देश, अग्रणी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और जीवंत लोकतंत्रों के रूप में—लोकतंत्र, कानून के शासन और मानव-केंद्रित विकास के साझा मूल्यों को साझा करते हैं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हरित ऊर्जा और सेमीकंडक्टर जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर दोनों देशों के मिलकर काम करने की विशाल संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कोरियाई गणराज्य के निवेश के लिए भारत के बड़े बाजार और प्रतिभावान युवा कार्यबल को एक आकर्षक अवसर बताया । बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) के अवसरों पर प्रकाश डालते हुए, लोक सभा अध्यक्ष ने भारत की विकास पहलों में भाग लेने के लिए कोरिया गणराज्य की बढ़ती रुचि का स्वागत किया और इस बात पर जोर दिया कि इन क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों के लिए फायदेमंद होगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कोरिया गणराज्य में योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति की बढ़ती लोकप्रियता दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे होते संबंधों को दर्शाती है और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने का एक ठोस आधार प्रदान करती है।संसदीय कूटनीति के महत्व पर जोर देते हुए, लोक सभा अध्यक्ष ने इस बात को रेखांकित किया कि जनप्रतिनिधियोंके बीच नियमित आदान-प्रदान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इस संदर्भ में, उन्होंने कहा कि संसदीय मित्रता समूह संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और सर्वोत्तम संसदीय तौर-तरीकों को साझा करने के लिए प्रभावी मंच के रूप में उभरे हैं।इस अवसर पर बोलते हुए, महामहिम श्री युन होजुंग ने श्री बिरला को उनके गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की संसद के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने आईटी, एआई और ऑटोमोटिव जैसे विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग को रेखांकित किया। भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में आई तेजी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देश भारत में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहयोग कर सकते हैं। प्रभावी आपदा प्रबंधन और सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने के विषय पर, उन्होंने आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI) का हिस्सा बनने की कोरिया गणराज्य की इच्छा व्यक्त की।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को ओडिशा के दौरे पर रहेंगे। पीएम मोदी मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम प्रदेश में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी मौजूद रहेंगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ पीएम मोदी का सुबह लगभग 11:15 बजे मयूरभंज जिले के पहाड़पुर गांव दौरा करने का कार्यक्रम है। पहाड़पुर राष्ट्रपति मुर्मु का पैतृक गांव है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पवित्र उपवन संथाली जाहेरा एवं हो जाहेरा, कौशल केंद्र तथा पहाड़पुर स्कूल में प्रार्थना करेंगे।
यह यात्रा आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षिक अवसरों, कौशल विकास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूत करने के लिए चल रहे प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।दोपहर करीब 1 बजे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ओडिशा सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। कार्यक्रम का विषय “विकास रा धरा, ओडिशा सारा” रखा गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा, औद्योगिक बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और सिंचाई सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 47,600 करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जाएगा।इस अवसर पर प्रधानमंत्री रायरंगपुर में एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इन परियोजनाओं से पूरे ओडिशा में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, कनेक्टिविटी में सुधार, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। जिन प्रमुख परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी, उनमें 600 मेगावाट की ऊपरी इंद्रावती पंप भंडारण परियोजना और आईबी थर्मल पावर स्टेशन की स्टेज-II विस्तार परियोजना शामिल हैं। इस विस्तार परियोजना में 660 मेगावाट की दो नई इकाइयां स्थापित की जाएंगी।अन्य परियोजनाओं में 300 टीपीडी स्रोत-पृथक नगरपालिका ठोस अपशिष्ट आधारित संपीड़ित बायोगैस संयंत्र, कटकजोड़ी नदी पर पुल, बौध जिले में ढालपुर-हरभंगा रोड का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, नुआपाड़ा-घाटीपाड़ा एनएच-353 खंड का चार लेन निर्माण, कुसुमदिही मेगालिफ्ट सिंचाई परियोजना, इग्नू क्षेत्रीय केंद्र तथा रायरंगपुर में इनडोर बैडमिंटन कॉम्प्लेक्स शामिल हैं।इसके अलावा, ओडिशा के विभिन्न जिलों में 24 अटल बस स्टैंड और नौ स्वचालित परीक्षण स्टेशनों का उद्घाटन किया जाएगा। बौध में 300 बिस्तरों वाले जिला मुख्यालय अस्पताल भवन का भी लोकार्पण होगा। इन परियोजनाओं से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जन्मदिन पर उन्हें देशभर से बधाई संदेश मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने राष्ट्रपति मुर्मु को शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु का जीवन साहस, सादगी और जनसेवा के प्रति समर्पण की प्रेरक मिसाल है। उन्होंने यह भी कहा कि वह आज ओडिशा में होने वाले कार्यक्रम में राष्ट्रपति से मिलने के लिए उत्सुक हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। साहस, सादगी, विनम्रता और जनसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से भरी उनकी जीवन-यात्रा देशभर के लोगों को प्रेरित करती रही है।” पीएम मोदी ने राष्ट्रपति मुर्मु के लंबे सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रसेवा की सराहना करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु विशेष रूप से वंचित और हाशिए पर रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए समर्पित रही हैं तथा भारत के विकास के प्रति उनका अटूट समर्पण प्रेरणादायक है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रपति को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्होंने अपना जीवन समाज की सेवा और लोगों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास, सामाजिक न्याय और नागरिकों के कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें जनसेवा की सच्ची भावना का प्रतीक बनाती है।केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राष्ट्रपति मुर्मु को एक आदर्श नेता बताते हुए कहा कि उनकी प्रेरणादायक जीवन-यात्रा साहस, दृढ़ता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने राष्ट्रपति के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रपति मुर्मु को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि साधारण पृष्ठभूमि से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का जीवन विशेष रूप से महिलाओं और वंचित वर्गों को बड़े सपने देखने तथा समाजसेवा के लिए प्रेरित करता है।विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राष्ट्रपति मुर्मु के जीवन-सफर, जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और संविधान के आदर्शों के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। वहीं, अल्पसंख्यक कार्य एवं मत्स्य पालन राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने भी राष्ट्रपति को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य, सुख और सफलता की कामना की। -
नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शुक्रवार को कहा कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा, उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ाने और व्यापार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत परीक्षण और प्रमाणन अवसंरचना अत्यंत आवश्यक है। मुंबई स्थित राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र (एनटीएच) परिसर में परीक्षण सुविधाओं के विस्तार की आधारशिला रखते हुए प्रल्हाद जोशी ने कहा कि एक सशक्त गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली उत्पादों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने और व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रल्हाद जोशी ने कहा कि विश्व स्तरीय परीक्षण अवसंरचना सरकार के आत्मनिर्भर भारत विजन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए देश की गुणवत्ता प्रणाली को और मजबूत करना आवश्यक है।देश की गुणवत्ता आश्वासन और परीक्षण अवसंरचना के विस्तार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के अवसर पर मंत्री ने राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र, मुंबई परिसर का दौरा किया। कार्यक्रम की शुरुआत भूमि पूजन समारोह और परीक्षण सुविधाओं के भावी विस्तार के लिए आधारशिला रखने के साथ हुई।मंत्री ने उपभोक्ता मामलों के विभाग और राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र द्वारा देशभर में उन्नत परीक्षण क्षमताओं के विस्तार तथा उद्योगों और उपभोक्ताओं के लिए गुणवत्तापूर्ण परीक्षण सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मुंबई स्थित प्रयोगशालाओं का भी दौरा किया और चल रही आधुनिकीकरण पहलों तथा परीक्षण क्षमताओं की समीक्षा के लिए वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और अधिकारियों के साथ बातचीत की।कार्यक्रम के दौरान प्रल्हाद जोशी ने मुंबई स्थित राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र में सूक्ष्मजीवविज्ञानी परीक्षण प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इसके अलावा उन्होंने गाजियाबाद स्थित राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र के उत्तरी क्षेत्र केंद्र तथा महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम की ऑरिक सिटी में स्थापित एनटीएच-ऑरिक उपग्रह केंद्र का वर्चुअल उद्घाटन भी किया।नई सुविधाओं के शुरू होने से विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में परीक्षण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन को मजबूती मिलेगी तथा उपभोक्ता सुरक्षा और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिलेगा। -
नई दिल्ली। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने शुक्रवार को सिंगल-यूज प्लास्टिक की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने तथा कूड़ा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उपराज्यपाल ने पूरे लद्दाख में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर कड़ा प्रतिबंध लगाने और प्लास्टिक से जुड़े नियमों के उल्लंघन तथा गंदगी फैलाने के मामलों पर व्यापक कार्रवाई की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि यह कदम लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी और प्राकृतिक सुंदरता की रक्षा के लिए जरूरी है, जो यहां की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। नए नियमों के तहत कूड़ा फैलाने और सिंगल-यूज प्लास्टिक से जुड़े उल्लंघनों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। पहले की व्यवस्था से अलग, अब ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ), तहसीलदार, नगर निकाय अधिकारी, वन अधिकारी और वन रक्षक जैसे फील्ड स्तर के अधिकारियों को नियम उल्लंघन पकड़ने और चालान जारी करने का अधिकार दिया गया है।प्रशासन ने लेह हवाई अड्डे और लद्दाख के विभिन्न सीमा एवं प्रवेश बिंदुओं पर अचानक जांच करने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री की आवाजाही और उपयोग को रोका जा सके। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब लद्दाख के पर्यावरण पर प्लास्टिक कचरे के बढ़ते दुष्प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ रही है। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं, जिससे पर्यावरणीय दबाव भी बढ़ता है।उपराज्यपाल ने कहा कि लद्दाख का प्राकृतिक पर्यावरण उसकी सबसे बड़ी ताकत है और विकास तथा पर्यटन विस्तार के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिबंध का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और क्षेत्र की विशिष्ट पारिस्थितिक पहचान को संरक्षित रखा जाए।गौरतलब है कि क्षेत्र की विशेष पारिस्थितिकी, पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की मांग, लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की प्रमुख मांगों में शामिल रही है। ये दोनों लद्दाख के प्रमुख प्रतिनिधि संगठन हैं। इन संगठनों ने संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने और राज्य का दर्जा दिए जाने की भी मांग की है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग लगभग 10 लाख पेशेवरों की कमी का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए एक बड़ा अवसर है और देश इस क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाला प्रमुख केंद्र बन सकता है।पटना स्थित सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) केंद्र में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग का वर्तमान आकार लगभग 800 अरब डॉलर है और अगले एक वर्ष के भीतर इसके 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक होने की संभावना है। अश्विनी वैष्णव ने कहा, “वर्ष 2032 तक वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में लगभग 10 लाख नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। वहीं उद्योग को करीब 10 लाख कुशल पेशेवरों की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है।”
उन्होंने कहा कि भारत को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए दो प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा – सेमीकंडक्टर डिजाइन और सेमीकंडक्टर निर्माण। मंत्री के अनुसार, सरकार देश में विश्वस्तरीय सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भारतीय छात्र दुनिया के सबसे बेहतर प्रशिक्षित पेशेवरों में शामिल हों। उन्होंने कहा, “जब छात्र सेमीकंडक्टर डिजाइन कौशल के साथ स्नातक होकर निकलें, तो उन्हें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं में गिना जाए और उन्हें तुरंत उद्योग में अवसर मिलें।”अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सेमीकंडक्टर डिजाइन से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और पहलों के माध्यम से अब तक लगभग 75 हजार छात्रों को आकर्षक अवसर मिल चुके हैं। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य इस संख्या को 75 हजार से बढ़ाकर 5 लाख छात्रों तक पहुंचाना है।”मंत्री ने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण गतिविधियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, वैसे-वैसे निर्माण से जुड़े कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी तैयार किए जाएंगे। भारत अपनी सेमीकंडक्टर मिशन योजना के तहत डिजाइन, निर्माण और पैकेजिंग को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है और देश भर में कई परियोजनाएं इस समय क्रियान्वयन के चरण में हैं। एसटीपीआई केंद्र के दौरे के दौरान अश्विनी वैष्णव ने देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को महानगरों से बाहर ले जाने की सरकार की कोशिशों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए टियर-2 और टियर-3 शहरों में एसटीपीआई केंद्रों को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इसके अलावा, मंत्री ने युवा उद्यमियों से बातचीत की, उनके अनुभवों को सुना और स्टार्टअप तथा तकनीक-आधारित उद्यमों के लिए सरकारी सहायता को और बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा की। -
नई दिल्ली।‘ पीएम मोदी ने शुक्रवार को कहा कि पीएम विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) रोजगार के अवसर पैदा करने, देश के युवाओं को सशक्त बनाने और भविष्य के भारत के लिए मजबूत वर्कफोर्स तैयार कर रही है।
पीएम-वीबीआरवाई के तहत इंसेंटिव बांटने के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि इस पहल से हाल के वर्षों में लाखों नौकरियां पैदा करने में मदद मिली है और यह युवा भारतीयों को अवसर प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर उभरी है।पीएम मोदी ने कहा, “पीएम-वीबीआरवाई एक नए भारत की पहचान है। यह ऐसे भारत का प्रतिनिधित्व करता है जहां रोजगार सृजन देश की भावना के केंद्र में है। जब युवा, सरकार और उद्योग एक साथ आते हैं, तो नौकरी पैदा करने की गति कई गुना बढ़ जाती है।” पीएम ने कहा, “भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और एक विकसित भारत की ओर बढ़ने का सफर देश के युवाओं के सपनों, कौशल और क्षमताओं से तय होगा।”उन्होंने कहा कि युवाओं को सार्थक रोजगार के अवसर देकर उन्हें सशक्त बनाना केंद्र सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में से एक है। पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार पहली बार काम-काज की दुनिया में कदम रखने वाले युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है।उन्होंने कहा, “यह योजना न सिर्फ नौकरी चाहने वालों की मदद करती है, बल्कि उद्योगों को भी नए टैलेंट को काम पर रखने और उनमें निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है।” उन्होंने आगे कहा, “जब कोई युवा अपनी पहली नौकरी शुरू करता है, तो सरकार उनके साथ खड़ी होती है। इससे नियोक्ताओं का भी भरोसा बढ़ता है, क्योंकि उन्हें पता होता है कि पूरी सरकारी व्यवस्था इस प्रक्रिया में सहयोग कर रही है।” पीएम ने उन युवाओं को बधाई दी जिन्हें नौकरी के अवसर मिले और उन संस्थानों की भी सराहना की जिन्होंने उनकी क्षमता को पहचाना और उन्हें नौकरियां दीं। उन्होंने कहा कि इन संगठनों ने हाल के महीनों में लाखों रोजगार के अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभाई है। सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अनुभव और आंकड़ों से लगातार यह पता चला है कि जब सरकार, उद्योग और युवा मिलकर काम करते हैं, तो रोजगार सृजन में तेजी आती है। -
नई दिल्ली। ईरान ने शुक्रवार को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत अब जहाजों को पहले से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते में प्रवेश करने से पहले परमिट और बीमा लेना जरूरी होगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान समझौते के बाद हाल ही में यह जलमार्ग फिर से खोला गया है।
ईरान की नई बनाई गई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीजीएसए) ने ये नए नियम जारी किए हैं। यह संस्था वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुए समझौते के तहत बनाई गई है, जिसका मकसद तीन महीने से ज्यादा चले संघर्ष के बाद इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू करना है।अथॉरिटी के मुताबिक, इन नियमों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। यह रास्ता दुनिया के करीब एक-पांचवें हिस्से के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) व्यापार के लिए इस्तेमाल होता है।पीजीएसए ने कहा, “इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और संबंधित अधिकारियों के निर्देश जारी होने के बाद, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को सूचित किया जाता है कि तय समय के दौरान केवल वही जहाज गुजर सकेंगे जो जरूरी नियमों को पूरा करते हुए अपनी यात्रा की अनुमति के लिए आवेदन जमा करेंगे।”नए नियमों के अनुसार, जहाज मालिकों और ऑपरेटरों को होर्मुज स्ट्रेट पहुंचने से कम से कम 48 घंटे पहले यात्रा की अनुमति के लिए आवेदन करना होगा। पीजीएसए ने कहा कि जहाजों को प्रवेश और बाहर निकलने के समय देरी से बचने के लिए अपनी पूरी जानकारी पहले ही देनी होगी।अथॉरिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि जहाजों को यात्रा की अनुमति मिलने से पहले जरूरी परमिट और बीमा भी लेना होगा। इसके अलावा, जहाजों को ईरानी अधिकारियों की ओर से तय किए गए शिपिंग कॉरिडोर का ही इस्तेमाल करना होगा, ताकि उन इलाकों से बचा जा सके जहां संघर्ष के बाद अभी भी बारूदी माइन या अन्य खतरों की संभावना हो सकती है। अथॉरिटी ने चेतावनी दी है कि अगर कोई जहाज इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जहाज मालिकों की होगी। -
नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), नई तकनीकों, रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में मिलकर काम आगे बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों देशों ने भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) का इस्तेमाल करके नए अवसर पैदा करने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने पर भी बात की।
यह चर्चा शुक्रवार को लंदन में भारत के उच्चायुक्त पी. कुमारन और ब्रिटेन के विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसआईटी) के स्थायी सचिव इमरान मियां के बीच हुई बैठक में हुई। भारतीय उच्चायोग ने इसकी जानकारी दी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “उच्चायुक्त पी. कुमारन ने गुरुवार को डीएसआईटी के स्थायी सचिव इमरान मियां के साथ एक अच्छी और सकारात्मक बैठक की। इस दौरान भारत-ब्रिटेन के बीच एआई, नई तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और भारत-ब्रिटेन कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट का इस्तेमाल करने पर भी बात की।”बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि भारत-ब्रिटेन कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) 15 जुलाई 2026 से औपचारिक रूप से लागू होगा। उन्होंने इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक ‘ऐतिहासिक कदम’ बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार और निवेश को काफी बढ़ावा देगा।प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत-ब्रिटेन संबंधों के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। मुझे खुशी है कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को काफी मजबूत करेगा।”उन्होंने आगे कहा कि इससे भारतीय किसानों, कामगारों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स के लिए कई नए अवसर खुलेंगे और यह 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और वह खुद जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान इस बात से खुश हैं कि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिल रही है।चार जून को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर से मुलाकात की थी। इस बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार, तकनीक, सप्लाई चेन, रक्षा, जलवायु, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों जैसे क्षेत्रों में चल रहे सहयोग की समीक्षा की। उन्होंने दुनिया के मौजूदा हालात पर भी चर्चा की।बैठक के बाद एस. जयशंकर ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत-ब्रिटेन साझेदारी अब साझा आर्थिक लक्ष्यों और हाईटेक विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर का भारत में स्वागत करके खुशी हुई। हमने व्यापार, तकनीक, सप्लाई चेन, रक्षा, जलवायु, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों में हो रही प्रगति की समीक्षा की। साथ ही स्वच्छ ऊर्जा, एआई और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में नए अवसरों पर भी चर्चा की।” उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने यूक्रेन, पश्चिम एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र सहित दुनिया के कई मुद्दों पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत-ब्रिटेन की व्यापक रणनीतिक साझेदारी ‘विजन 2035’ के तहत लगातार आगे बढ़ रही है। - नई दिल्ली ।चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने शुक्रवार को कैलाश मानसरोवर यात्रा (केएमवाई) पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक वीडियो संदेश जारी किया। इस संदेश में उन्होंने यात्रियों का स्वागत किया और यात्रा से जुड़ी कुछ जरूरी सलाह दी। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “विदेश मंत्रालय (एमईए) और चीन की सरकार के सहयोग से आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026, 20 जून को भारत से रवाना होगी। दूतावास की टीम आधिकारिक और निजी दोनों माध्यमों से यात्रा करने वाले सभी श्रद्धालुओं का पवित्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा के लिए हार्दिक स्वागत करती है।”राजदूत दोरईस्वामी के नेतृत्व में दूतावास की टीम ने हाल ही में यात्रा मार्गों का दौरा किया। टीम ने भारत के सिक्किम और उत्तराखंड से तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (चीन) तक जाने वाले प्रमुख रास्तों का निरीक्षण किया। इस दौरान नाथू ला और लिपुलेख दर्रों के जरिए यात्रा व्यवस्थाओं और तैयारियों की समीक्षा की गई।दूतावास ने वीडियो साझा करते हुए कहा, “यह हमारे राजदूत का संदेश है। जल्द ही यात्रा से जुड़ी और तस्वीरें तथा जरूरी यात्रा सलाह भी जारी की जाएंगी। सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सफल और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध यात्रा की शुभकामनाएं।” राजदूत ने संदेश में बताया कि नाथू ला दर्रे पर पहुंचने के बाद चीनी कस्टम और इमिग्रेशन अधिकारी श्रद्धालुओं का स्वागत करेंगे। इसके बाद उन्हें बसों के जरिए याडोंग काउंटी ले जाया जाएगा।उन्होंने वीडियो में यात्रा के समय, खाने-पीने की सुविधाओं और करेंसी एक्सचेंज जैसी अन्य जरूरी जानकारियां भी दीं। राजदूत ने यह भी कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के मार्ग से जुड़ी और जानकारी देने वाले कई वीडियो आगे भी जारी किए जाएंगे। पिछले सप्ताह उन्होंने तिब्बत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी ल्हासा का दौरा किया था। वहां उन्होंने स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलकर भारतीय श्रद्धालुओं के लिए की गई तैयारियों और सुविधाओं की समीक्षा की।ल्हासा हवाई अड्डे पर तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के विदेश मामलों के कार्यालय के उप महानिदेशक यांग लाहोंग ने उनका स्वागत किया। दूतावास के अनुसार, बाद में राजदूत ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के उपाध्यक्ष झाओ पेंग से मुलाकात की। झाओ पेंग ने श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं और तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। इससे पहले 13 जून को विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू भवन में कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
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नयी दिल्ली. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और दोनों ने सुरक्षा के क्षेत्र में, विशेषकर आतंकवाद और मादक पदार्थों के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। यह मुलाकात फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स में जी7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बैठक के एक दिन बाद हुई है। शाह ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "आज नयी दिल्ली में भारत में अमेरिकी राजदूत श्री सर्जियो गोर से मुलाकात की। सुरक्षा के क्षेत्र में, विशेष रूप से आतंकवाद और मादक पदार्थों के खिलाफ भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई।" उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत, व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी और दोनों देशों के लोगों को द्विपक्षीय संबंधों से लाभ सुनिश्चित करने के लिए भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। गोर ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "माननीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ एक शानदार बैठक हुई।" उन्होंने कहा, "आतंकवाद से लड़ने, अपने लोगों को मादक पदार्थों और अवैध पदार्थों से बचाने, हमारी सीमाओं को सुरक्षित करने और दोनों देशों में अपराधियों को संयुक्त रूप से न्याय के कटघरे में लाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर हमारी सार्थक चर्चा हुई।" एक अन्य पोस्ट में गोर ने कहा, "फ्रांस में जी 7 की शानदार यात्रा के बाद नयी दिल्ली वापस। अमेरिका और भारत के बीच बहुत सारे सकारात्मक परिणाम मिले!" बुधवार को ट्रंप के साथ अपनी बैठक के दौरान मोदी ने नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया और आग्रह किया कि ईरान के साथ वाशिंगटन के शांति समझौते के कार्यान्वयन के दौरान उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। साथ ही दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के लिए कदम उठाने पर ध्यान केंद्रित किया जिसमें पिछले साल गंभीर तनाव देखा गया था।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने बृहस्पतिवार को नीट-यूजी के अभ्यर्थियों से कहा कि वे परेशान न हों और अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करें। एजेंसी ने साथ ही कहा कि परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। एजेंसी ने 'एक्स' पर एक संदेश में कहा कि पुन: परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रविवार को ही आयोजित की जाएगी। इसने अभ्यर्थियों से अपील की कि वे परीक्षा स्थगित होने की अफवाहों या ''सोशल मीडिया पर मच रहे शोर-शराबे'' से प्रभावित न हों। संदेश में अभ्यर्थियों से कहा गया कि वे सिर्फ़ एनटीए की आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें।
एनटीए ने कहा, ''हम आपको भरोसा दिलाना चाहते हैं कि संबंधित मंत्रालयों, राज्य सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर एक सुरक्षित एवं निष्पक्ष परीक्षा के लिए व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं। इस प्रक्रिया की शुचिता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए मज़बूत, बहु स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है।'' एजेंसी ने कदाचार के खिलाफ भी चेतावनी दी और कहा, ''गलत तरीके अपनाने की किसी भी कोशिश से सख्ती से निपटा जाएगा - क्योंकि ईमानदार और मेहनती छात्रों की सुरक्षा करना ही मुख्य मकसद है।'' तीन मई को हुई मूल परीक्षा को रद्द करने के बारे में एनटीए ने कहा कि यह फ़ैसला अभ्यर्थियों के हित में लिया गया था और इस घटना से मिले सबक का इस्तेमाल परीक्षा प्रक्रिया को मज़बूत बनाने के लिए किया गया है। एनटीए ने कहा, ''तीन मई को लिया गया मुश्किल फ़ैसला सिर्फ़ आपके भले के लिए था। जैसे ही समस्या सामने आई, हमने हर ईमानदार अभ्यर्थी के वास्ते प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कदम उठाए। हमने उन अनुभवों से सीखा है तथा इस बार प्रणाली को और मज़बूत किया है।'' एजेंसी ने परीक्षा से जुड़े तनाव का सामना कर रहे छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता की उपलब्धता पर भी ज़ोर दिया। संदेश में कहा गया, ''अगर आप बहुत ज़्यादा दबाव महसूस कर रहे हैं, तो जान लें कि आप अकेले नहीं हैं। 'मानस' मानसिक-स्वास्थ्य हेल्पलाइन (14416) उपलब्ध है और जिसे भी ज़रूरत हो, उसे मदद मिल सकती है। मदद मांगना हिम्मत की निशानी है।'' एनटीए ने माता-पिता, शिक्षकों और आम लोगों से यह भी अपील की कि वे छात्रों को शांत रखने में मदद करें तथा अपुष्ट जानकारी साझा करने से बचें। इसने कहा, ''कृपया हमारे छात्रों को शांत रखने में हमारी मदद करें। अपुष्ट जानकारी साझा न करें। उन्हें शांत और स्थिर मन के साथ परीक्षा के लिए जाने दें।'' अभ्यर्थियों से सीधे बात करते हुए एजेंसी ने कहा, ''नीट यूजी 2026 परीक्षा में बस तीन दिन बचे हैं। शांत रहें, अच्छी तरह आराम करें और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर ध्यान दें। आपसे बस यही उम्मीद की जाती है।'' चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) इस साल तीन मई को हुई थी लेकिन पेपर लीक के आरोपों के चलते एनटीए ने इसे 12 मई को रद्द कर दिया। केंद्रीय अन्वेषण बयूरो (सीबीआई) द्वारा इस मामले की जांच की जा रही है और पुन: परीक्षा परीक्षा 21 जून को होनी है। -
नयी दिल्ली/ ज्यूरिख। स्विस बैंकों में जमा भारतीय धन वर्ष 2025 में आठ प्रतिशत से अधिक घटकर 3.25 अरब स्विस फ्रैंक (करीब 36,793 करोड़ रुपये) रह गया। यह गिरावट स्थानीय शाखाओं और अन्य बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों के माध्यम से रखी गई राशि में कमी के कारण हुई। स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) की तरफ से बृहस्पतिवार को जारी वार्षिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। इन आंकड़ों के मुताबिक, कुल जमा राशि में गिरावट आने के बावजूद व्यक्तिगत और संस्थागत ग्राहकों के खातों में जमा धन 50 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 52.4 करोड़ स्विस फ्रैंक (करीब 6,000 करोड़ रुपये) हो गया। हालांकि, कुल राशि में इन जमाओं की हिस्सेदारी लगभग 16 प्रतिशत ही रही। कुल धनराशि का बड़ा हिस्सा 'बैंकों को देय राशि' के रूप में रहा, जो अन्य बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के जरिये रखी गई थी। यह राशि पिछले साल करीब 15 प्रतिशत घटकर 2.6 अरब स्विस फ्रैंक रही। इससे पहले वर्ष 2024 में स्विस बैंकों में जमा कुल भारतीय धन तिगुना होकर 3.5 अरब स्विस फ्रैंक हो गया था, जो 2021 के बाद का उच्चतम स्तर था। वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 14 साल के उच्चतम स्तर 3.83 अरब स्विस फ्रैंक पर था। ये बैंकों की तरफ से स्विस नेशनल बैंक को दी गई सूचनाओं पर आधारित आंकड़े हैं। ये स्विट्जरलैंड में भारतीयों के पास मौजूद कथित काले धन की बहुचर्चित मात्रा को नहीं दर्शाते हैं। इन आंकड़ों में वह धन भी शामिल नहीं होता जो भारतीयों, प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) या अन्य लोगों द्वारा स्विस बैंकों में तीसरे देशों की इकाइयों के नाम पर रखा गया हो। एसएनबी के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 के अंत में मौजूद कुल 325.05 करोड़ स्विस फ्रैंक की देनदारियों में से 52.4 करोड़ स्विस फ्रैंक ग्राहक जमा, 2.6 अरब स्विस फ्रैंक अन्य बैंकों के जरिये, 1.86 करोड़ स्विस फ्रैंक विश्वस्त संस्था या ट्रस्ट के जरिये और 10.57 करोड़ स्विस फ्रैंक बॉन्ड एवं प्रतिभूतियों जैसे अन्य वित्तीय साधनों के रूप में थे। एसएनबी के आंकड़ों के अनुसार, स्विस बैंकों में भारतीयों की कुल जमा राशि वर्ष 2006 में करीब 6.5 अरब स्विस फ्रैंक के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बाद इसमें अधिकांश समय गिरावट का रुख रहा। हालांकि 2011, 2013, 2017, 2020, 2021, 2022, 2023 और 2024 जैसे कुछ वर्षों में इसमें वृद्धि दर्ज की गई। एसएनबी ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े बैंकों द्वारा रिपोर्ट की गई कुल देनदारियों को दर्शाते हैं और इन्हें स्विस बैंकों में कथित काले धन का प्रत्यक्ष संकेतक नहीं माना जा सकता। साथ ही, इनमें तीसरे देशों की इकाइयों के नाम पर रखे गए धन को शामिल नहीं किया जाता। अंतरराष्ट्रीय निपटान बैंक (बीआईएस) के 'लोकेशनल बैंकिंग स्टैटिस्टिक्स' के मुताबिक, स्विस बैंकों में भारतीय व्यक्तियों के जमा धन में 2025 के दौरान 20 प्रतिशत बढ़कर 8.97 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 780 करोड़ रुपये) हो गया। स्विट्जरलैंड और भारत के बीच 2018 से कर मामलों में स्वत: सूचना आदान-प्रदान व्यवस्था लागू है, जिसके तहत स्विस वित्तीय संस्थानों में खाताधारकों से जुड़ी विस्तृत जानकारी हर साल भारतीय कर अधिकारियों के साथ साझा की जाती है। वैश्विक स्तर पर स्विस बैंकों में विदेशी ग्राहकों की कुल जमा राशि 2025 में करीब आठ प्रतिशत घटकर 1.05 लाख करोड़ स्विस फ्रैंक रही। देशवार आंकड़ों में स्विस बैंकों में मौजूद विदेशी ग्राहकों के धन के मामले में ब्रिटेन 192 अरब स्विस फ्रैंक के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि अमेरिका (75 अरब स्विस फ्रैंक) और फ्रांस (63 अरब स्विस फ्रैंक) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। हालांकि, भारत वर्ष 2024 के 48वें स्थान से सुधरकर 2025 में 46वें स्थान पर पहुंच गया।
पाकिस्तान की जमा राशि 27.2 करोड़ स्विस फ्रैंक से घटकर 25.7 करोड़ स्विस फ्रैंक रह गई, जबकि बांग्लादेश की जमा राशि 43 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी के साथ 84.2 करोड़ स्विस फ्रैंक पहुंच गई। रैंकिंग में बांग्लादेश 81वें स्थान पर रहा जबकि पाकिस्तान 108वें स्थान पर है। -
नई दिल्ली। सरकार खाद्यान्न भंडारण के लिए स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम लॉन्च करने जा रही है। यह कदम आधुनिक, तकनीक-सक्षम और अधिक कुशल सार्वजनिक भंडारण व्यवस्था के जरिए देश की खाद्य सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया है।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) 18 जून को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम का शुभारंभ करेगा। इस कार्यक्रम में केंद्रीय उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी मौजूद रहेंगे। स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम को एक एकीकृत तकनीक-आधारित समाधान के रूप में विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य गोदाम प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत बनाना और खाद्यान्न भंडारण से जुड़े कार्यों की दक्षता बढ़ाना है।इस पहल से एक आधुनिक भंडारण तंत्र विकसित होने की उम्मीद है, जो खाद्यान्न प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाएगा और लंबे समय तक देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा। मंत्रालय के अनुसार, यह पहल डिजिटल इंडिया, इंडिया एआई मिशन, पीएम गतिशक्ति और आत्मनिर्भर भारत जैसे सरकारी अभियानों की सोच के अनुरूप है।कार्यक्रम के दौरान विभाग केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के उन गोदामों को सम्मानित करेगा, जिन्होंने डिपो दर्पण मूल्यांकन ढांचे के तहत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), स्वचालन और डेटा विश्लेषण जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिनके जरिए गोदाम संचालन को बेहतर बनाया जाएगा और निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।आधिकारिक बयान के अनुसार, इस प्रणाली के जरिए प्रवेश द्वार और वजन पुल (वेटब्रिज) संचालन का स्वचालन, डिजिटल प्रवेश प्रबंधन, गोदामों की स्थिति की स्मार्ट निगरानी, स्टॉक की बेहतर दृश्यता और एकीकृत डैशबोर्ड के माध्यम से रियल टाइम में संचालन की निगरानी संभव हो सकेगी।यह पहल खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के व्यापक सुधार कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य खाद्यान्न आपूर्ति शृंखला में डिजिटल परिवर्तन और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देना है। पिछले कुछ वर्षों में खरीद, भंडारण और वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, कार्यकुशलता सुधारने और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।कार्यक्रम के दौरान उन गोदामों को भी सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने डिपो दर्पण के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। डिपो दर्पण एक संरचित मूल्यांकन और प्रदर्शन निगरानी प्रणाली है, जिसे बुनियादी ढांचे, संचालन, सुरक्षा, स्वच्छता और सेवा गुणवत्ता में लगातार सुधार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। बुधवार को -
नई दिल्ली। भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने बुधवार को घोषणा करते हुए जानकारी दी कि कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) 15 जुलाई से लागू होगा। इसके साथ ही दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नया दौर शुरू होने जा रहा है। इसी दिन सोशल सिक्योरिटी पर एग्रीमेंट, जिसे डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) कहा जाता है, वो भी लागू होगा। इससे यूके में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को अधिक सुविधा मिलेगी और कॉम्पिटिटिवनेस प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, डीसीसी के तहत मिलने वाली छूट की अवधि तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दी गई है। यह यूके में अस्थायी रूप से काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत-यूके संबंधों के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। मुझे खुशी है कि भारत-यूके कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को काफी बढ़ावा देगा।”उन्होंने आगे कहा, “इससे भारतीय किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार करने वालों के लिए कई नए अवसर खुलेंगे। यह विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। मैं और प्रधानमंत्री स्टार्मर हमारे आर्थिक संबंधों को मिली इस नई गति से बेहद खुश हैं।”इस ऐतिहासिक समझौते की नींव मई 2021 में रखी गई थी, जब दोनों देशों ने एन्हांस्ड ट्रेड पार्टनरशिप और इंडिया-यूके रोडमैप 2030 को अपनाया था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचाना और 2030 तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाना था।वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “15 जुलाई 2026 से सीईटीए और डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन के एक साथ लागू होने से भारत के निर्यात के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे। हमारे 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तुरंत शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने से लंबे समय से मौजूद शुल्क संबंधी बाधाएं खत्म हो जाएंगी।” उन्होंने कहा कि इससे भारत के वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को बराबरी का अवसर मिलेगा और वे अपने उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बिना किसी नुकसान के वैश्विक बाजार में बेच सकेंगे।30 अध्यायों वाले सीईटीए को नई पीढ़ी के व्यापार समझौतों का एक नया मॉडल माना जा रहा है। यह सीधे तौर पर भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को समर्थन देता है। यह समझौता केवल आयात-निर्यात शुल्क कम करने तक सीमित नहीं है। इसमें डिजिटल व्यापार, दूरसंचार, वित्तीय सेवाएं, बौद्धिक संपदा अधिकार और पहली बार द्विपक्षीय स्तर पर सरकारी खरीद जैसे आधुनिक क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।मंत्रालय के अनुसार, सीईटीए और डीसीसी के एक साथ लागू होने से भारत की वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बड़ा और संरचनात्मक बदलाव आएगा। साथ ही भारत ने डेयरी उत्पाद, अनाज, मोटे अनाज (मिलेट्स), खाद्य तेल, तिलहन, सेब और कई सब्जियों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की है। -
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को नई दिल्ली को क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने में एक जरूरी पार्टनर बताया। उन्होंने कहा कि भारत एक “भरोसेमंद सहयोगी” है और पश्चिम एशिया के संकट को सुलझाने की कोशिशों में “बड़ी भूमिका” निभा रहा है।ट्रंप ने यह बात यहां G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई हाई-लेवल बातचीत के बाद कही। इस बातचीत में समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और खाड़ी क्षेत्र में बदलते जियोपॉलिटिकल हालात पर चर्चा हुई।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें उम्मीद है कि भारत पश्चिम एशिया में कोई भूमिका निभाएगा, तो ट्रंप ने कहा, “हां, मुझे उम्मीद है। मुझे लगता है कि भारत हर चीज़ में बड़ी भूमिका निभाता है। जब तक वह (पीएम नरेंद्र मोदी) नेता हैं, भारत बड़ी भूमिका निभाता रहेगा।”अमेरिकी नेता ने दोनों लोकतंत्रों के बीच मज़बूत आपसी तालमेल और संस्थागत सहयोग पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि कमर्शियल बातचीत में काफी प्रगति हुई है और इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों देश ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने के “बहुत करीब” हैं। वॉशिंगटन की डिप्लोमैटिक कोशिशों को मानते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में शांति को आगे बढ़ाने के लिए ट्रंप की कोशिशों की तारीफ़ की और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि खाड़ी क्षेत्र में शांति स्थायी होगी।पीएम मोदी ने कहा, “पश्चिम एशिया में शांति की कोशिशों में हुई प्रगति के लिए मैं आपके नेतृत्व की तारीफ़ करता हूं।” उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता के महत्व के बारे में भी बात की और कहा कि ग्लोबल इकॉनमी के लिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुला रखना बहुत ज़रूरी है।खास बात यह है कि प्रधानमंत्री ने अशांत समुद्री इलाकों में काम करने वाले कमर्शियल क्रू सदस्यों की सुरक्षा की वकालत की और खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।यह कहते हुए कि भारतीय नाविकों का कल्याण भारत के लिए प्राथमिकता है, प्रधानमंत्री ने कहा, “मेरा मानना है कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा बहुत ज़रूरी है।” उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि क्षेत्र में बन रही शांति समझ के तहत नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।यह अहम बातचीत बहुत रणनीतिक महत्व रखती है और दोनों नेताओं के बीच सीधी बातचीत में लंबे समय से चले आ रहे अंतराल को खत्म करती है। यह बैठक 16 महीनों से ज़्यादा समय में पीएम मोदी और ट्रंप के बीच पहली आमने-सामने की मुलाकात थी और ऐसे समय में हुई जब पश्चिम एशिया में तनाव, समुद्री सुरक्षा की चिंताएं और ट्रेड बातचीत ग्लोबल डिप्लोमेसी को आकार दे रही हैं। फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स में हुई यह मुलाकात पश्चिमी एशिया में बदलते जियोपॉलिटिकल हालात और भारत व अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की कोशिशों के बीच हुई। इस बातचीत का गर्मजोशी भरा अंदाज, अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारतीय नेतृत्व के बारे में पहले दिए गए सार्वजनिक बयानों के अनुरूप है।ट्रंप ने अक्सर प्रधानमंत्री के साथ अपने अच्छे तालमेल के बारे में बात की है और सार्वजनिक बयानों में पीएम मोदी के नेतृत्व की शैली का ज़िक्र किया है। इस महीने की शुरुआत में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार चुने गए प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी और उन्हें “मज़बूत, स्वस्थ और समझदार व्यक्ति” बताया। -
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अमेरिका में भारतीय कुशल पेशेवरों के लिए अवसरों का समर्थन किया। उन्होंने भारतीयों को ‘बहुत प्रतिभाशाली’ बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से रोजगार के क्षेत्र में अच्छे संबंध रहे हैं। ये बयान ट्रंप ने फ्रांस में हुए जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में दिए।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके राष्ट्रपति कार्यकाल में भारतीय कुशल पेशेवरों को अमेरिका में आगे भी अवसर मिलते रहेंगे, तो ट्रंप ने सकारात्मक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारत के साथ रोजगार के मामले में हमारे हमेशा से बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। उन्होंने भारतीय पेशेवरों की तारीफ करते हुए कहा कि ये बहुत प्रतिभाशाली लोग हैं।ट्रंप के इन बयानों पर भारत में खास ध्यान दिया जाएगा, क्योंकि भारत अमेरिका में बड़ी संख्या में कुशल कर्मचारियों, इंजीनियरों, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और छात्रों को भेजने वाले देशों में शामिल है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और भारत के रिश्ते काफी मजबूत हैं। प्रधानमंत्री मोदी और भारत के साथ हमारी बहुत अच्छी बातचीत हुई। अमेरिका और भारत के बीच बहुत सारी चीजें आगे बढ़ रही हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और बातचीत करने की क्षमता की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि वह बहुत मजबूत बातचीत करने वाले नेता हैं। वास्तव में, वह सबसे अच्छे बातचीत करने वालों में से एक हैं। बाद में ट्रंप ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर काफी सकारात्मक बातें कहीं। उन्होंने कहा कि भारत हमारे साथ जो चाहे कर सकता है। हमारे बीच सबसे अच्छे रिश्ते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि मेरे और प्रधानमंत्री मोदी के बीच या हमारे दोनों देशों के बीच इससे ज्यादा करीबी रिश्ता हो सकता है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले अमेरिका दौरे के बाद से दोनों देशों के बीच सहयोग काफी बढ़ा है। पिछले साल वॉशिंगटन में हमारी बेहद सफल बैठक हुई थी। उसके बाद से हमने अपने रिश्तों में नई गति और नई ऊर्जा दी है। दोनों देश कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के अधिकारी भी तय किए गए लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लगातार मिलकर काम कर रहे हैं। हमारी टीमें भी आपस में लगातार बातचीत और सहयोग कर रही हैं। -
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौता काफी करीब है। उन्होंने G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई बातचीत के बाद यह भरोसा जताया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए लगातार बातचीत चल रही है।जब ट्रंप से पूछा गया कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के कितने करीब हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, “बहुत करीब।”
इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत की क्षमता की तारीफ की और कहा कि बातचीत भले ही कड़ी रही हो, लेकिन काफी सकारात्मक रही। ट्रंप ने कहा, “वह बहुत सख्त बातचीत करने वाले नेता हैं। सच कहूं तो सबसे सख्त नेताओं में से एक हैं।”अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोनों देशों के व्यापक आर्थिक रिश्तों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमारी प्रधानमंत्री मोदी के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई। हम व्यापार समझौतों पर काम कर रहे हैं। हम कई और क्षेत्रों में भी साथ काम कर रहे हैं। अमेरिका और भारत के बीच बहुत कुछ हो रहा है।ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिका में निवेश बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री अमेरिका में बहुत सारे प्रोजेक्ट्स बना रहे हैं। वह अमेरिका में काफी पैसा निवेश कर रहे हैं।राष्ट्रपति ने बार-बार अमेरिका और भारत के मजबूत रिश्तों पर जोर दिया।भारत में हाल की कुछ अमेरिकी नीतियों को लेकर उठी चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि जब तक मैं राष्ट्रपति हूं, भारत का व्हाइट हाउस में एक बहुत अच्छा दोस्त है। ट्रंप ने कहा कि वे भारत से प्यार करते हैं। पीएम मोदी के लिए उनके मन में बहुत सम्मान है। ट्रंप ने दोनों देशों के रिश्तों को बेहद गर्मजोशी भरा बताया। उन्होंने कहा कि हमारे रिश्ते सबसे अच्छे हैं। दोनों देश इससे ज्यादा करीब नहीं हो सकते।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वॉशिंगटन में हुई पिछली मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच सहयोग को नई गति मिली है। पिछले साल वॉशिंगटन में हमारी बेहद सफल और उपयोगी बैठक हुई थी, और उसके बाद हमारे रिश्तों को नई रफ्तार और नई ऊर्जा मिली है। हम कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। दोनों देशों के अधिकारी उन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लगातार मिलकर काम कर रहे हैं, जिन पर दोनों नेताओं ने सहमति बनाई थी। हमारी टीमें भी लगातार आपसी तालमेल और सहयोग के साथ काम कर रही हैं। - नई दिल्ली। एक अहम कूटनीतिक बदलाव का संकेत देते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को फ्रांस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से द्विपक्षीय बातचीत की। इस बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री स्थिरता और पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर चर्चा हुई। इस उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान, पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने की दिशा में ट्रंप के नेतृत्व प्रयासों की सराहना की और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से वैश्विक व्यापार के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।वैश्विक समुद्री मार्गों में भारत के रणनीतिक हितों को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने बेहतर सहयोग की वकालत की। पीएम मोदी ने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। भारत ने हमेशा नेविगेशन की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया है, और हमें इस मुद्दे पर मिलकर काम करना चाहिए। दुनिया भर में, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य भी शामिल है, लाखों नाविक अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।”प्रधानमंत्री की बातों का जवाब देते हुए, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है और उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया। मौजूदा प्रशासन के तहत नई दिल्ली के भू-राजनीतिक प्रभाव पर जोर देते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “जब तक प्रधानमंत्री मोदी नेता हैं, पश्चिम एशिया में भारत की बड़ी भूमिका है।” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान की भी सराहना की और अमेरिका में भारत के निवेश का जिक्र किया।अमेरिकी बाजार में भारतीय व्यावसायिक उपस्थिति के पैमाने की तारीफ करते हुए, ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका में बहुत कुछ बना रहे हैं। वह अमेरिका में बहुत पैसा खर्च कर रहे हैं।” फ्रांस में द्विपक्षीय बैठक के दौरान ट्रंप ने यह बात कही। ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री के साथ अपने व्यक्तिगत अच्छे संबंधों पर भी जोर दिया और कहा, “मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि वह लंबे समय से मेरे दोस्त रहे हैं। आपके साथ होना बहुत अच्छा है। बहुत-बहुत धन्यवाद।” दोनों नेताओं ने मंगलवार को G7 नेताओं की बैठक में मुलाकात की, एक-दूसरे का हाल-चाल जाना और संक्षिप्त बातचीत की। यह 16 महीनों में उनकी पहली आमने-सामने की मुलाकात थी।यह कूटनीतिक मुलाकात पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के बाद हुई है, क्योंकि दोनों पक्ष अब द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। दोनों नेताओं की पिछली आमने-सामने की मुलाकात फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में हुई थी, जो ट्रंप के दूसरे शपथ ग्रहण समारोह के कुछ हफ़्ते बाद थी। इसके बाद, ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ लगाने और बाद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत-पाकिस्तान संघर्ष को खत्म करने के उनके दावे के कारण दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया।
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उदयपुर (राजस्थान). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि भारत का इतिहास गुलामी का नहीं बल्कि आक्रमणकारियों के खिलाफ निरंतर प्रतिरोध का है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश और विदेश में भारत के उत्थान को रोकने के लिए झूठे विमर्श गढ़े जा रहे हैं। भागवत हल्दीघाटी युद्ध की 450वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, ''आज भारत को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिशें हो रही हैं। झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं और लोगों को गुमराह करने के लिए कई तरीके अपनाए जा रहे हैं।'' आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''भारत के उत्थान का विरोध करने वाले लोग जनसंख्या, शक्ति, आर्थिक संसाधन और संगठनात्मक क्षमता रखते हैं, फिर भी हमें अपने मूल्यों के आधार पर दृढ़ रहना होगा।'' भागवत ने राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक गौरव और सामूहिक संकल्प का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, ''वर्तमान चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें अपने आदर्शों और सभ्यतागत मूल्यों पर टिके रहना होगा।'' भागवत ने राजपूत शासक महाराणा प्रताप की विरासत और ऐतिहासिक हल्दीघाटी युद्ध का उल्लेख करते हुए इसे भारत के सभ्यतागत प्रतिरोध का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन धर्म, संस्कृति और आत्मसम्मान की रक्षा का प्रतीक है।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि महाराणा प्रताप ने व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि धर्म, संस्कृति और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा, ''हमारा इतिहास गुलामी का नहीं, बल्कि उन लोगों के खिलाफ संघर्ष का है जिन्होंने हमें गुलाम बनाने की कोशिश की।'' भागवत ने कहा, ''महाराणा प्रताप ने अत्याचारों के खिलाफ, धर्म और संस्कृति के लिए तथा अपनी भूमि की स्वतंत्रता के लिए युद्ध किया।'' आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए उन ऐतिहासिक महापुरुषों से सीख लेने की आवश्यकता है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों और संकल्प पर अडिग रहकर संघर्ष किया। भागवत ने कहा कि भारत की शक्ति केवल उसकी जनसंख्या या भौतिक संसाधनों में नहीं, बल्कि उसके सभ्यतागत मूल्यों में निहित है। उन्होंने लोगों से एकजुट रहने और संकीर्ण पहचान की सीमाओं से ऊपर उठने का आह्वान किया।
भागवत ने कहा, ''हमें उसी प्रकार एकजुट रहना चाहिए, जैसे मेवाड़ की जनता महाराणा प्रताप के साथ खड़ी रही थी। भारत की प्रगति के लिए हमें मिलकर कार्य करना होगा।'' हल्दीघाटी के युद्ध का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि इसे केवल एक सैन्य संघर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हल्दीघाटी का युद्ध केवल एक लड़ाई नहीं था। यह विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध भारतीय समाज के दीर्घकालीन संघर्ष का प्रतीक था।'' भागवत ने कहा कि महाराणा प्रताप इस युद्ध में विजयी होकर उभरे थे।
उन्होंने कहा, ''विभिन्न आक्रमणकारी आए, कुछ ने सत्ता भी प्राप्त की, लेकिन भारत ने सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर कभी भी गुलामी को स्वीकार नहीं किया। इतिहास के कठिन दौर में भी भारत ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखा। हमने अच्छे और बुरे दोनों समय देखे हैं, लेकिन हमारा धर्म और हमारी संस्कृति अक्षुण्ण बनी रही।'' भागवत ने कहा कि भारत का उत्थान केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि विश्व के कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण है और एक सशक्त भारत दुनिया के लिए भी आवश्यक है। हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून, 1576 को मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप और मुगल सम्राट अकबर की ओर से आमेर के राजा मानसिंह के नेतृत्व वाली सेना के बीच लड़ा गया था। कई इतिहासकारसें का मानना है कि इसमें मुगलों को सामरिक जीत मिली। वहीं, कुछ इतिहासकार इसे अनिर्णायक युद्ध मानते हैं, क्योंकि मुगल महाराणा प्रताप को पकड़ने या मेवाड़ को पूरी तरह अपने अधीन करने में असफल रहे। युद्ध के बाद भी महाराणा प्रताप ने गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाकर मुगलों का लगातार प्रतिरोध किया। -
नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बुधवार को यहां मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित अपने आधिकारिक आवास में स्थानांतरित हो गए। नवीन के नये आवास (टाइप-8 बंगला) पर उनके करीबी परिजनों की उपस्थिति में 'गृह प्रवेश' समारोह आयोजित किया गया। यह बंगला (1, मोतीलाल नेहरू मार्ग) पहले झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को आवंटित था।
इस अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्रियों धर्मेंद्र प्रधान, अर्जुन राम मेघवाल, किरेन रीजीजू तथा जी किशन रेड्डी सहित भाजपा के कई नेता नितिन नवीन के आवास पर पहुंचे। इस मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, सांसदों के अलावा भाजपा के कई अन्य नेता भी नवीन के सरकारी आवास पर पहुंचे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दलों के नेता भी इस अवसर पर मौजूद रहे, जिनमें जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष एवं सांसद उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। नवीन 20 जनवरी को निर्विरोध चुने जाने के बाद केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा के स्थान पर भाजपा के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। वे बिहार के पूर्व मंत्री रह चुके हैं और मार्च में राज्य से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। - नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को घोषणा की कि 'दिल्ली स्लम एवं झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति, 2026' को अंतिम रूप दे दिया गया है, जिससे ऐसे स्थानों पर रहने वाले चार लाख परिवारों को लाभ मिलेगा। शाह ने कहा कि दिल्ली सरकार को हर महीने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर आधारित कम से कम पांच पुनर्वास परियोजनाओं के लिए निविदाएं जारी करनी चाहिए। राष्ट्रीय राजधानी में झुग्गी-झोपड़ी वासियों के पुनर्वास को लेकर एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए गृह मंत्री ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) को 45 दिनों के भीतर पांच झुग्गी बस्तियों के लिए निविदाएं जारी करने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों को अतिरिक्त 50 झुग्गी बस्तियों के लिए परियोजना दस्तावेज और निविदा प्रपत्र तैयार करने के भी निर्देश दिए। शाह ने कहा कि झुग्गी बस्तियों के लिए पात्रता की तिथि एक जनवरी, 2025 के अनुसार तय की जाए।बैठक में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल, दिल्ली के उप-राज्यपाल तरणजीत सिंह संधु, दिल्ली की मुख्य मंत्री रेखा गुप्ता तथा अन्य वरिष्ठ मंत्री तथा अधिकारी शामिल हुए।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने पिछले 12 वर्षों में आम नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार पर लगातार ध्यान केंद्रित किया है और अवसरों तक आसान पहुंच, बेहतर बुनियादी ढांचे, उन्नत सार्वजनिक सेवाओं तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आदि को बेहतर बनाने के लिए काम किया है। अपनी सरकार को 'मध्यम वर्ग की सरकार' बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में काम करना उनके लिए सौभाग्य की बात है, क्योंकि इस वर्ग ने अनगिनत तरीकों से राष्ट्र-निर्माण में योगदान दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''पिछले एक दशक में शासन का ध्यान लगातार आम नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने पर केंद्रित रहा है। हमारे प्रयास अवसरों तक आसान पहुंच, बेहतर बुनियादी ढांचे, उन्नत सार्वजनिक सेवाएं, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वच्छ शहरों और दैनिक जीवन में बोझ कम करने आदि का है।'' केंद्र सरकार के नागरिकों से जुड़ने के मुख्य मंच 'माई जीओवी इंडिया' में कहा गया है कि मोदी के नेतृत्व में, पिछले 12 सालों में भारत के मध्यम वर्ग के जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है। इसमें बेहतर आधारभूत ढांचा, बेहतर संपर्क, कर में राहत और सार्वजनिक सेवाओं के विस्तार का अहम योगदान रहा है। इसमें कहा गया है कि बेहतर परिवहन से लेकर मज़बूत डिजिटल पहुंच तक, देश भर के लाखों परिवारों के लिए रोज़मर्रा की ज़िंदगी ज़्यादा आसान और अवसरों से भरी हो गई है। 'माई जीओवी इंडिया' के अनुसार, ग्रामीण और शहरी भारत में इंटरनेट के विस्तार के साथ संपर्क अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है। इसमें कहा गया है कि 103 करोड़ से ज़्यादा कनेक्शन और डेटा की कीमतों में भारी कमी के कारण अब नागरिक बहुत कम खर्च में शिक्षा, रोज़गार के अवसर, डिजिटल पेमेंट और मनोरंजन का आसानी से लाभ उठा पा रहे हैं। 'माई जीओवी इंडिया' ने कहा है कि वंदे भारत सेवाओं के विस्तार से रेल यात्रा तेज़ और ज़्यादा आरामदायक हो गई है। 164 ट्रेन और नौ करोड़ से ज़्यादा यात्रियों को सेवा देने के साथ, मुख्य मार्गों पर यात्रा का समय काफ़ी कम हो गया है। इसमें कहा गया, ''बेहतर राजमार्गों और आसान टोल प्रणाली की वजह से भारत का सड़क आधारभूत ढांचा अच्छा हो गया है, जिससे यात्रा जल्दी पूरी होती है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील से प्रेरित होकर महाराष्ट्र के वर्धा जिले के पुलगांव निवासी सतीश गौरीशंकर चौबे के परिवार ने बेटे के विवाह में सोने की आभूषण नहीं खरीदने का निर्णय किया है। चौबे परिवार मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनूं से दशकों पहले महाराष्ट्र आकर बस गया था। सतीश के सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे यश का विवाह एक जुलाई को होना है। इस संबंध में सतीश ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिवार के फैसले की जानकारी दी। सतीश ने बताया कि होने वाली बहू के लिए नया मंगलसूत्र खरीदने पर चर्चा चल रही थी, लेकिन उनकी पत्नी सीमा ने अपना ही मंगलसूत्र पॉलिश और मरम्मत करवाकर बहू को उपहार स्वरूप देने का फैसला किया। पत्र में सतीश चौबे ने लिखा कि यह केवल धन बचाने का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हित में जिम्मेदार खर्च की भावना को अपनाने का प्रयास है। परिवार ने प्रधानमंत्री को भी विवाह में शामिल होने का न्यौता दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 10 मई को हैदराबाद की एक रैली में विदेशी मुद्रा बचाने के लिए एक वर्ष तक सोने की खरीद और विदेश यात्रा टालने तथा ईंधन के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की अपील की थी।


















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