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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर बधाई दी है। पीएम मोदी ने कहा कि कई दशकों से अनंत नाग जी के सहज अभिनय, अद्भुत बहुमुखी प्रतिभा और कलात्मक कौशल ने भारतीय सिनेमा, विशेष रूप से कन्नड़ सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सम्मान पूरी तरह से उनके हक का है और भारतीय सिनेमा में श्री अनंत नाग जी के बड़े योगदान को दर्शाता है। उन्होंने इस विशेष अवसर पर इस बेहतरीन कलाकार को शुभकामनाएं दीं।
पीएम मोदी ने X पर पोस्ट किया:“दिग्गज कलाकार अनंत नाग जी को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर बधाई।कई दशकों से उनके सहज अभिनय, अद्भुत बहुमुखी प्रतिभा और बेहतरीन कला ने भारतीय सिनेमा, विशेष रूप से कन्नड़ सिनेमा पर बहुत गहरी छाप छोड़ी है। उन्होंने जो भी भूमिका निभाई, उसमें उन्होंने अनोखी गहराई और सच्चाई दिखाई। सच में यह बेहतरीन कलाकार के लिए पूरी तरह से योग्य सम्मान है।”पांच दशकों में 250 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके 78 वर्षीय अनंत नाग थिएटर की दुनिया में भी एक जाना-माना नाम हैं। उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान, दादा साहब फाल्के पुरस्कार से 22 सितंबर को गुजरात के केवड़िया में नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह में सम्मानित किया जाएगा। -
मुंबई. भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को गणेश उत्सव के बीच मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर और लालबागचा राजा के दर्शन किए तथा भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। नवीन गणेश उत्सव के अवसर पर मुंबई और पुणे के एक दिवसीय दौरे पर हैं। गणेश उत्सव सोमवार से शुरू हुआ है। उनके साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम भी थे।
नवीन ने संवाददाताओं से कहा कि वह गणेश उत्सव के अवसर पर महाराष्ट्र आने पर खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं जो भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद राज्य का उनका पहला दौरा है। उन्होंने कहा, ''मैं अभिभूत हूं और महाराष्ट्र तथा देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना करता हूं। -
मुंबई. मुंबई में 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारों के बीच भगवान गणेश की 61,600 से अधिक मूर्तियों का बुधवार को मुंबई में विभिन्न जलाशयों में विसर्जन किया गया। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के अधिकारियों के अनुसार, बुधवार सुबह छह बजे तक कुल 61,640 मूर्तियों का विसर्जन किया जा चुका था। श्रद्धालुओं ने बारह दिन तक होने वाले गणेश उत्सव के पहले ड़ेढ दिन में इन प्रतिमाओं का विसर्जन किया। नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि इनमें 301 प्रतिमाएं सार्वजनिक गणपति मंडलों की और 61,247 घरेलू प्रतिमाएं शामिल हैं। इस दौरान 92 हरतालिका (देवी पार्वती) प्रतिमाओं का भी विसर्जन किया गया। इसके साथ कुल विसर्जित प्रतिमाओं की संख्या 61,640 हो गई। अधिकारी ने बताया कि विसर्जन के दौरान किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
नगर निकाय ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरे मुंबई में विसर्जन स्थलों की व्यवस्था की है, जिसमें कृत्रिम तालाब भी शामिल हैं। विभिन्न परंपराओं के अनुसार, भगवान गणेश की मूर्तियों का विसर्जन डेढ़ दिन, पांचवें दिन, सातवें दिन और उत्सव के अंतिम दिन किया जाता है। बारह दिवसीय गणेश उत्सव का समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत पाकिस्तान स्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क (एसबीएन) को आतंकवादी संगठन घोषित किया है। शाह ने कहा कि आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने संबंधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए यह कार्रवाई की गई है। गृह मंत्री ने 'एक्स' पर कहा, ''यह समूह सीमापार हथियारों, विस्फोटकों और मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल है। इसके अलावा यह युवाओं और अपराधियों को आतंकवाद के लिए उकसाता है। भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और सांप्रदायिक सौहार्द के ताने-बाने को निशाना बनाते हुए, इस गिरोह ने नफरत फैलाने वाली डिजिटल सामग्री भी प्रकाशित की।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी राजपत्र अधिसूचना में यूएपीए की धारा 35(1)(ए) का हवाला देते हुए ''शहजाद भट्टी नेटवर्क (एसबीएन)'' को अधिनियम की पहली अनुसूची में शामिल किया गया है। इस अनुसूची में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की सूची दर्ज है। यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि केंद्र का मानना है कि एसबीएन '' भारत में आतंकवाद की विभिन्न घटनाओं में शामिल है।'' अधिसूचना में कहा गया है, ''शहजाद भट्टी नेटवर्क एक ऐसा संगठन है, जिसका उद्देश्य भोले-भाले युवाओं और स्थानीय अपराधियों को शामिल कर सीमापार से हथियारों, विस्फोटकों और मादक पदार्थों की तस्करी करना है। यह आतंकवादी गतिविधियों के माध्यम से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, सांप्रदायिक सौहार्द और आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।'' अधिसूचना में कथित एसबीएन सदस्यों के खिलाफ यूएपीए, भारतीय न्याय संहिता, शस्त्र अधिनियम, विस्फोटक अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम जैसे कानूनों के तहत दर्ज आपराधिक मामलों का उल्लेख किया गया है। यूएपीए के तहत किसी संगठन को पहली अनुसूची में शामिल करने से वह औपचारिक रूप से भारतीय कानून के तहत ''आतंकवादी'' घोषित संगठनों की सूची में आ जाता है।
एसबीएन इस सूची में 46वां संगठन है। अधिसूचना के अनुसार एसबीएन प्रलोभन देकर ''भोले-भाले युवाओं को कट्टरपंथी बनाने'', उन्हें राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए उकसाने और अन्य प्रतिबंधित संगठनों तथा इसी तरह नामित संस्थाओं के साथ मिलीभगत कर राष्ट्र-विरोधी कृत्यों के लिए संसाधन जुटाने में शामिल है। इसमें कहा गया है, ''शहजाद भट्टी नेटवर्क हिंसक गतिविधियों के माध्यम से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था बाधित होती है। साथ ही यह विभिन्न डिजिटल संचार माध्यमों का इस्तेमाल कर भड़काऊ संदेश प्रसारित कर रहा है, जिससे देश की अखंडता के लिए गंभीर चुनौती पैदा हो रही है।'' -
नई दिल्ली। 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरजेंसी में सक्रिय भूमिका निभाई थी। नरेंद्र मोदी ने गिरफ्तारी से बचते हुए लोगों को जागरूक किया। इमरजेंसी खत्म होते ही सिर्फ 23 दिन में ही खाना-पीन छोड़कर इमरजेंसी के दौरान गुजरात में संघर्ष पर किताब लिखी थी।
25 जून 1975 की आधी रात को नागरिकों की आजादी छीन ली गई, प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई और सुबह होने से पहले ही विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था। विरोध करने वालों में गुजरात के 24 साल के आरएसएस प्रचारक नरेंद्र मोदी भी शामिल थे। गिरफ्तारी से बचते हुए उन्होंने छिपकर काम किया, संविधान को सार्वजनिक रूप से पढ़ने के कार्यक्रम आयोजित किए और पूरे गुजरात में कम्युनिटी और धार्मिक नेटवर्क के जरिए इमरजेंसी-विरोधी साहित्य फैलाने में मदद की। 21 महीनों तक, जब डर का माहौल बना दिया गया था, युवा नरेंद्र मोदी उस आंदोलन का हिस्सा बने रहे, जिसने लोकतांत्रिक विरोध की भावना को जिंदा रखा।1977 में जब इमरजेंसी खत्म हुई, तब नरेंद्र मोदी ने एक किताब लिखनी शुरू की। सिर्फ 23 दिनों में बिना किसी रेफरेंस बुक के और पूरी तरह अपनी याददाश्त के भरोसे, उन्होंने ‘संघर्ष मा गुजरात’ किताब पूरी की। लिखते समय उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया था और सिर्फ नींबू पानी पीकर काम चलाया। यह किताब उन आम भारतीयों की कहानी थी, जिन्होंने छिपकर इमरजेंसी का विरोध किया था और जिनके त्याग के इतिहास में खो जाने का डर था।गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूभाई जशभाई पटेल ने किताब का पहला संस्करण जारी किया था। पुस्तक के विमोचन के अवसर पर जसभाई पटेल ने पुस्तक के वास्तविक अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा था, “संघर्ष एक ऐसा विषय है जिस पर कोई भी बड़ी-बड़ी बातें लिख सकता है लेकिन छोटी-छोटी बातों को लिखने के लिए शोध की आवश्यकता होती है। इस संघर्ष में गुजरात के आम लोगों का योगदान कभी भी आधिकारिक इतिहास में दर्ज नहीं होगा। उनके लिए, इसे लिखा जाना आवश्यक था।”उन्होंने सभा को आपातकाल के वास्तविक अर्थ की याद दिलाते हुए कहा था, “तीस वर्षों में हम धीरे-धीरे, इंच-इंच करके, तानाशाही की ओर बढ़ते चले गए। शासन करने वाले यह भूल गए कि वे गरीबों के उत्थान की बात करते थे, लेकिन वास्तव में उन्होंने केवल अपना ही उत्थान किया।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर 2026 को सुबह करीब 10 बजे नई दिल्ली के यशोभूमि में SEMICON India 2026 का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर वह कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगे।
तीन दिवसीय SEMICON India 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक ‘Silicon to Systems: Building the Ecosystem’ थीम के साथ किया जाएगा। इसमें सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन से जुड़ी भारतीय और वैश्विक कंपनियां, नीति निर्माता, निवेशक, शोधकर्ता, स्टार्टअप, शिक्षण संस्थान और छात्र हिस्सा लेंगे।सम्मेलन में भारत में सहयोग, निवेश, इनोवेशन और प्रतिभाओं के विकास को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। इसके साथ ही डिस्प्ले इंडस्ट्री में नए विकास, सहयोग और ज्वाइंट वेंचर को बढ़ावा देने के लिए छह Country Roundtables और महिलाओं के नेतृत्व से जुड़े एक फोरम समेत कई सत्र आयोजित किए जाएंगे।SEMICON India 2026 में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन को एक साथ प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें सेमीकंडक्टर मटेरियल, उपकरण और चिप डिजाइन से लेकर फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सिस्टम्स तक की पूरी प्रक्रिया दिखाई जाएगी।कार्यक्रम में नया ‘Sand to Silicon to Systems’ Value Chain Experience भी होगा, जो सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विभिन्न चरणों की पूरी यात्रा को प्रदर्शित करेगा।इस आयोजन में 600 से ज्यादा कंपनियां हिस्सा लेंगी और करीब 50,000 लोगों के आने की उम्मीद है। इसमें 52 देशों के प्रतिनिधि, 400 से ज्यादा एग्जीक्यूटिव और 150 से अधिक स्पीकर शामिल होंगे।प्रदर्शनी में जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन के छह Country Pavilions होंगे। इसके अलावा 12 State booths, Startup Pavilion, Innovation Showcase, Student Hackathon और Workforce Development Pavilion भी आयोजित किए जाएंगे। - मुंबई. इंजीनियरिंग क्षेत्र में उम्मीदवारों की उपलब्धता और भर्ती की मांग के बीच अंतर बढ़ रहा है। प्रवेश स्तर की नौकरियों की तलाश करने वाले उम्मीदवार कुल प्रतिभा का 45 प्रतिशत हैं, जबकि ऐसी नौकरियों की मांग केवल 28 प्रतिशत है। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई। प्रतिभा मंच फाउंडइट (मॉन्स्टर) की रिपोर्ट के अनुसार, इंजीनियरिंग प्रतिभाओं की उपलब्धता और मांग के बीच सबसे अधिक अंतर प्रवेश स्तर पर है। 0-3 वर्ष के अनुभव वाले पेशेवर सक्रिय इंजीनियरिंग उम्मीदवारों के कुल पूल का करीब 45 प्रतिशत हैं, लेकिन उनके लिए उपलब्ध नौकरियों की हिस्सेदारी केवल 28 प्रतिशत है। रिपोर्ट अगस्त में ऑनलाइन मंचों पर जारी की गई इंजीनियरिंग क्षेत्र की नौकरियों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें सक्रिय नौकरी विज्ञापनों को शामिल किया गया है, जबकि उम्मीदवारों की उपलब्धता का आंकड़ा 'फाउंडइट' के प्रतिभा डेटाबेस से लिया गया है। अगस्त, 2026 के अनुमान के अनुसार, कुल 39.59 लाख सक्रिय इंजीनियरिंग उम्मीदवारों के मुकाबले इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाली 6.68 लाख नौकरियां उपलब्ध थीं। यानी हर एक नौकरी के लिए 5.9 उम्मीदवार थे।हालांकि, यह अनुपात इंजीनियरिंग की अलग-अलग धाराओं में काफी अलग है।मोटर वाहन/स्वचालन इंजीनियरिंग में हर नौकरी के लिए 1.1 उम्मीदवार से लेकर 'इलेक्ट्रॉनिक्स' और 'इंस्ट्रूमेंटेशन' में 11.5 उम्मीदवार तक हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इंजीनियरिंग करियर की शुरुआत में उम्मीदवारों की उपलब्धता सबसे अधिक होती है और तीन साल से अधिक अनुभव होने के बाद यह काफी कम हो जाती है। 0-3 वर्ष के अनुभव वाले इंजीनियर उम्मीदवारों का सबसे बड़ा समूह हैं। वहीं, 15 वर्ष से अधिक अनुभव वाले समूह में उम्मीदवारों और नौकरियों का अनुपात 9.5 से घटकर 4.1 रह जाता है, यानी आधे से भी कम हो जाता है। इंजीनियरिंग क्षेत्र में कुल मांग में 4-10 वर्ष के अनुभव वाले लोगों की हिस्सेदारी सबसे अधिक 54 प्रतिशत है। फाउंडइट के मुख्य उत्पाद एवं प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीपीटीओ) तरुण शर्मा ने कहा, ''आज इंजीनियरिंग में करियर अब किसी एक क्षेत्र या पारंपरिक करियर मार्ग तक सीमित नहीं हैं। प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, मोटर वाहन, इलेक्ट्रॉनिक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ने के साथ इंजीनियर के पास अपना करियर बनाने के लिए अधिक व्यापक अवसर हैं। अवसर यह है कि उद्योग जिस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, उसके अनुरूप लगातार खुद को विकसित किया जाए और उभरते क्षेत्रों में इंजीनियरिंग की अपनी बुनियादी विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाए।'' रिपोर्ट में कहा गया कि प्रौद्योगिकी इंजीनियर के लिए सबसे बड़ा एकल क्षेत्र बना हुआ है, लेकिन इंजीनियरिंग से जुड़ी ज्यादातर नौकरियां अब इसके बाहर हैं।
- नयी दिल्ली. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इस महीने के अंत में अमेरिका की यात्रा करेंगे। वह मिलवॉकी में होने वाली जी20 के सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इस दौरान गोयल के अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर के साथ द्विपक्षीय बैठक करने की भी उम्मीद है। दो दिवसीय जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक 30 सितंबर से शुरू होगी। वर्ष 2026 के लिए अमेरिका जी20 की अध्यक्षता कर रहा है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, ''गोयल की यात्रा के दौरान दोनों देशों के मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की उम्मीद है...। बैठक की तारीख और अन्य विवरण तय होने के बाद इसकी जानकारी दी जाएगी।'' उन्होंने कहा, ''द्विपक्षीय बैठक होने पर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा होगी। साथ ही, दोनों देशों के बीच जारी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की बातचीत और इसे आगे बढ़ाने के उपाय भी एजेंडे में शामिल होंगे।''जी20 यानी समूह-20 दुनिया की प्रमुख विकसित एवं उभरती अर्थव्यवस्थाओं का अंतरराष्ट्रीय मंच है, जहां आर्थिक नीतियों पर चर्चा और समन्वय किया जाता है। गोयल की अमेरिका यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं। अग्रवाल ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते के बारे में कहा कि इस पर इस साल के अंत से पहले हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय आयोग ने समझौते को मंजूरी के लिए यूरोपीय परिषद के पास भेज दिया है। इसके बाद समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। अग्रवाल ने कहा, ''हमें इस साल के अंत से पहले इस पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। हस्ताक्षर के बाद इसे मंजूरी के लिए यूरोपीय संसद के पास भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया में कुछ समय लगता है, लेकिन हमें उम्मीद है कि वह भी पूरी हो जाएगी। अब तक हस्ताक्षर और अनुमोदन की प्रक्रिया के लिहाज से यह सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाला समझौता है।''
- नयी दिल्ली. देश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की बेरोजगारी दर अगस्त में मामूली घटकर पांच प्रतिशत रही। जुलाई में यह 5.1 प्रतिशत थी। मंगलवार को जारी आवधिक यानी नियमित अंतराल पर होने वाले श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। आधिकारिक बयान के अनुसार, बीते साल अगस्त में भी बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत थी।ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर मासिक आधार पर अगस्त में घटकर 4.1 प्रतिशत हो गई। जुलाई में यह 4.5 प्रतिशत थी। वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह आलोच्य महीने में मामूली बढ़कर 6.8 प्रतिशत रही जबकि जुलाई में यह 6.7 प्रतिशत थी। अगस्त, 2025 की तुलना में अगस्त, 2026 में कुल और शहरी बेरोजगारी दर लगभग समान रही, जबकि ग्रामीण बेरोजगारी दर 0.2 प्रतिशत घटकर 4.1 प्रतिशत हो गई। अगस्त, 2025 में यह 4.3 प्रतिशत थी। जनवरी, 2026 के बाद ग्रामीण बेरोजगारी दर अगस्त में सबसे निचले स्तर पर रही।पंद्रह वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों में बेरोजगारी दर लगातार तीसरे महीने घटी और अगस्त में 4.9 प्रतिशत रही। मई, 2026 में यह 5.4 प्रतिशत थी। ग्रामीण पुरुषों में बेरोजगारी दर अगस्त में कम होकर 4.3 प्रतिशत रही जबकि जुलाई में यह 4.6 प्रतिशत थी। वहीं शहरी पुरुषों में यह 5.9 प्रतिशत से बढ़कर 6.1 प्रतिशत हो गई। महिलाओं में कुल बेरोजगारी दर लगातार दूसरे महीने घटकर अगस्त में 5.1 प्रतिशत रह गई। जून, 2026 में यह 5.9 प्रतिशत थी। ग्रामीण महिलाओं में बेरोजगारी दर अगस्त में घटकर 3.9 प्रतिशत रही, जो जुलाई में 4.3 प्रतिशत थी। वहीं शहरी महिलाओं में यह पिछले महीने की तुलना में लगभग स्थिर रही। सालाना आधार पर अगस्त, 2026 में पुरुषों और महिलाओं दोनों की कुल बेरोजगारी दर में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। अखिल भारतीय स्तर पर अगस्त के मासिक अनुमान 3,70,160 लोगों से जुटाई गई जानकारी पर आधारित हैं।पीएलएफएस सर्वेक्षण के तौर-तरीकों में जनवरी, 2025 से बदलाव किया गया है। इसका मकसद देश में श्रम बल से जुड़े संकेतकों के मासिक और तिमाही अनुमान उपलब्ध कराना है। अगस्त, 2026 का मासिक बुलेटिन इस श्रृंखला की 17वीं रिपोर्ट है। पंद्रह वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की कुल श्रम बल भागीदारी दर अगस्त में बढ़कर 55.6 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 55.4 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह दर बढ़कर अगस्त में 58.2 प्रतिशत हो गई जो जुलाई में 58 प्रतिशत थी। शहरी क्षेत्रों में यह 50.4 प्रतिशत पर स्थिर रही। अगस्त, 2025 की तुलना में कुल श्रम बल भागीदारी दर 0.6 प्रतिशत अंक बढ़कर 55.6 प्रतिशत हो गई। एक साल पहले यह 55 प्रतिशत थी। इसी अवधि में ग्रामीण श्रम बल भागीदारी दर 57 प्रतिशत से बढ़कर 58.2 प्रतिशत हुई, जबकि शहरी दर मामूली 50.9 प्रतिशत से घटकर 50.4 प्रतिशत रह गई। महिलाओं में कुल श्रम बल भागीदारी दर अगस्त में बढ़कर 34.8 प्रतिशत हो गई जो जुलाई में 34.4 प्रतिशत थी। इसमें ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी का प्रमुख योगदान रहा, जहां यह जुलाई के 38.8 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 39.4 प्रतिशत हो गई।शहरी महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर मामूली बढ़कर अगस्त में 25.4 प्रतिशत रही जो जुलाई में 25.3 प्रतिशत थी। सालाना आधार पर महिलाओं की कुल श्रम बल भागीदारी दर अगस्त, 2026 में 1.1 प्रतिशत अंक बढ़कर 34.8 प्रतिशत हो गई जो बीते साल में 33.7 प्रतिशत थी। ग्रामीण महिलाओं में यह 37.4 प्रतिशत से बढ़कर 39.4 प्रतिशत हुई, जबकि शहरी महिलाओं में 26.1 प्रतिशत से घटकर 25.4 प्रतिशत रह गई। कुल कामगार आबादी अनुपात अगस्त में बढ़कर 52.8 प्रतिशत हो गया जो जुलाई में 52.5 प्रतिशत था। ग्रामीण क्षेत्रों में कामगारों की भागीदारी बढ़ने से कुल कामगार आबादी अनुपात बढ़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात अगस्त में बढ़कर 55.8 प्रतिशत हो गया जो जुलाई में 55.4 प्रतिशत था। जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 47 प्रतिशत पर स्थिर रहा। अगस्त, 2025 की तुलना में कुल कामगार आबादी अनुपात (डब्ल्यूपीआर) 0.6 प्रतिशत अंक बढ़कर 52.8 प्रतिशत हो गया। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 54.5 प्रतिशत से बढ़कर 55.8 प्रतिशत हुआ, जबकि शहरी क्षेत्रों में 47.5 प्रतिशत से घटकर 47 प्रतिशत रह गया। सालाना आधार पर महिलाओं के कामगार आबादी अनुपात में भी वृद्धि हुई। अगस्त, 2026 में यह 33 प्रतिशत रहा, जबकि अगस्त, 2025 में 32 प्रतिशत था।
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अयोध्या. श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने मंगलवार को कहा कि अयोध्या में मंदिर निर्माण में शामिल कंपनियों को 'बैंक गारंटी' देनी होगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आने वाले वर्षों में उनके काम की गुणवत्ता बनी रहे। मिश्रा ने अयोध्या की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के तीसरे और अंतिम दिन संवाददाताओं से कहा कि यह मुद्दा मंदिर निर्माण में शामिल कंपनियों, विशेष रूप से लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) और टाटा को अंतिम भुगतान पर चर्चा के दौरान उठा। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में जैसे जैसे काम आगे बढ़ा कंपनियों को लगातार भुगतान किए जाते रहे हैं। अब प्रक्रिया अंतिम भुगतान और जरूरी समायोजन के चरण में पहुंच गई है। मिश्रा ने प्रक्रिया को समझाते हुए कहा, ''पिछले पांच वर्षों के दौरान काम की प्रगति के आधार पर भुगतान किया जाता था लेकिन अब समायोजन करना होगा।'' उन्होंने कहा कि अंतिम भुगतान प्रक्रिया के तहत हर कंपनी को मंदिर के निर्माण कार्य के संबंध बैंक गारंटी देनी होगी ताकि यह सुनिश्चत हो सके कि आने वाले वर्षों में उनके काम की गुणवत्ता बनी रहेगी। मिश्रा ने कहा कि बैठकों के दौरान बैंक गारंटी से संबंधित कटौती के मुद्दे पर भी चर्चा की गई।
उन्होंने बताया कि अंतिम बिल का प्रस्तावित तृतीय-पक्ष ऑडिट भी एक अन्य प्रमुख मुद्दा था।
मिश्रा ने कहा कि टाटा पहले से ही परियोजना प्रबंधन परामर्श में शामिल था लेकिन ट्रस्ट ने अतिरिक्त ऑडिट के लिए इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को शामिल करने का भी फैसला किया था। उन्होंने कहा, ''इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को अंतिम बिल का कम से कम 60 से 70 प्रतिशत ऑडिट करने के लिए कहा गया है।'' उन्होंने कहा, ''इसका चयन कंपनियों के संबंधित ऑर्डर और लागू प्रतिशत गुणांकों के आधार पर किया जाएगा।'' मिश्रा ने कहा कि मंदिर का निर्माण पूरा होने के साथ अब ध्यान अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय और अन्य संबंधित कार्यों पर है। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर के अंदर एक सभागार और परिसर के बाहर एक अन्य सुविधा निर्माणाधीन है जिसके काम में लगभग तीन से चार महीने की देरी हुई। मिश्रा ने कहा, ''हमें उम्मीद है कि जनवरी-फरवरी तक काम जरूर पूरा हो जाएगा।''
मिश्रा मंदिर परिसर और संबंधित परियोजनाओं की तीन दिवसीय समीक्षा के लिए रविवार को अयोध्या पहुंचे। पहले दिन उन्होंने एक स्मारक स्तंभ का निरीक्षण किया जिसका कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके अलावा उन्होंने निर्माण एवं अन्य संबंधित परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों, ठेकेदारों और प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करने से पहले पुराने अस्थायी मंदिर में सौंदर्यीकरण कार्य की समीक्षा की। उन्होंने सोमवार को मंदिर परिसर के अंदर निर्धारित निर्माण कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों, ठेकेदारों एवं मंदिर प्रबंधन के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं।
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नयी दिल्ली. सरकारी कार्यालयों में चलाए गए विशेष अभियानों के तहत पिछले पांच वर्षों में कबाड़ बेचकर 5,100 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त किया गया है। केंद्र ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इन अभियानों का उद्देश्य सभी सरकारी दफ्तरों में 'स्वच्छता' को संस्थागत रूप देना है।
कार्मिक मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि वर्ष 2021 से इस अभियान के पांच सालाना संस्करणों और सचिवालय में सुधारों की मासिक निगरानी (जुलाई 2026 तक) के जरिए 24.20 लाख से अधिक स्थलों पर अभियान चलाया गया, 180.48 लाख से अधिक फ़ाइलों को हटाया या बंद किया गया है, और कबाड़ बेचकर 5,102.91 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि अकेले 'अभियान-5' में 11.6 लाख स्थलों से कुल 29.52 लाख फाइलों को हटाया गया, 233.75 लाख वर्ग फुट कार्यालय स्थल खाली कराया गया और कबाड़ बेचकर लगभग 833.92 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया। कार्मिक मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह बुधवार को 'अभियान 6' की प्रगति की निगरानी के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत करेंगे। यह अभियान दो अक्टूबर से 31 अक्टूबर के बीच चलाया जाएगा। इससे पहले 16 सितंबर से 30 सितंबर तक तैयारी का चरण होगा।
तैयारी के चरण के दौरान, मंत्रालय और विभाग चुनिंदा श्रेणियों में लंबित मामलों की पहचान करेंगे, जमीनी स्तर के कर्मचारियों को एकत्र करेंगे, अभियान की जगहों को अंतिम रूप देंगे, रिकॉर्ड की समीक्षा करेंगे और जगह के प्रबंधन की योजना बनाने के साथ-साथ चिह्नित कबाड़ का निस्तारण करेंगे। बयान के मुताबिक 19 से 25 दिसंबर तक चलने वाले 'सुशासन सप्ताह'के दौरान बेहतरीन तौर-तरीके पेश किए जाएंगे। कार्मिक मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को होने वाले कार्यक्रम के दौरान, केंद्र के सभी 84 मंत्रालयों और विभागों में 'अभियान 6' के नोडल अधिकारियों, जन शिकायतों से जुड़े नोडल अधिकारियों और अपीलीय अधिकारियों की एक बैठक होगी। बयान के मुताबिक बैठक को प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी), डाक, कोयला, खान और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संबोधित करेंगे।
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भोपाल. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन में उनके 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उज्जैन में 17 सितंबर को आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस आयोजन के मद्देनजर भाजपा ने शिप्रा नदी के घाटों और महाकाल लोक क्षेत्र में करीब 25 लाख दीप जलाए जाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में जल, थल और नभ में भारत का परचम लहरा रहा है, तो वहीं समाज के हर वर्ग के उत्थान में ऐतिहासिक परिवर्तन हुआ है। उन्होंने कहा, "नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन को सारा देश सेवा संकल्प अभियान के रूप में मनाता है। प्रधानमंत्री के जन्मदिन के उपलक्ष्य में बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में विकास का दीप जलाने एवं अभियान का आरम्भ करने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 17 सितंबर को मध्यप्रदेश पधार रहे हैं।" यादव ने कहा, "विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष का मध्यप्रदेश में आत्मीय स्वागत करता हूं।" भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद नवीन पहली बार मध्यप्रदेश आ रहे हैं।
नवीन का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब 19 सितंबर को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में युवाओं से संवाद करने आ रहे हैं। कांग्रेस ने कहा कि जब से राहुल गांधी का इंदौर में कार्यक्रम तय हुआ है तभी से भाजपा उसे बाधित करने का कोई ना कोई प्रयास कर रही है लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, भले नितिन नवीन आएं या कोई और। भाजपा ने एक बयान में कहा कि नितिन नवीन 17 सितंबर को दोपहर इंदौर के देवी अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा पहुंचेंगे और स्थानीय गांधी नगर मैदान में ग्रामीण आबादी को जमीन का मालिकाना हक देने वाली स्वामित्व योजना के तहत निशुल्क रजिस्ट्री वितरण की शुरूआत करेंगे। पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत नवीन उज्जैन के रामघाट पर शिप्रा आरती और 'आशीर्वाद का दीया' नाम से आयोजित दीपोत्सव में भाग लेंगे। पार्टी के मुताबिक, नवीन रामघाट पर आयोजित भजन संध्या में भी शामिल होंगे और अगले दिन और अगले दिन 18 सितंबर को प्रातः श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में शामिल होंगे। भाजपा अध्यक्ष इसके बाद इंदौर हवाई अड्डा पहुंचेंगे और वहां से पंजाब के लिए रवाना हो जाएंगे।
भाजपा ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले सेवा संकल्प अभियान के तहत कार्यक्रमों की घोषणा की है, जिनमें प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर उज्जैन में बड़ा दीपोत्सव कार्यक्रम भी शामिल है। राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम से पहले भाजपा अध्यक्ष के मध्यप्रदेश दौरे पर आने के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रभारी मुकेश नायक ने 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में कहा कि इंदौर ऐसा शहर है जो सभी का स्वागत करता है। उन्होंने कहा, "लेकिन इंदौर में जब दूषित पानी से 35 लोगों की मौत हो गई तब राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित भाजपा का कोई अन्य बडा़ नेता क्यों नहीं आया।" नायक ने कहा कि चाहे कोई भी आए, राहुल गांधी के कार्यक्रम के स्वरूप पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
उन्होंने दावा किया, "राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर युवाओं में अभूतपूर्व उत्साह है और यह अब तक हुए 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रमों में सबसे सफल साबित होगा।" कांग्रेस ने शुरुआत में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के आयोजन के लिए शहर के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम की अनुमति मांगी थी लेकिन मंजूरी नहीं मिलने के बाद कार्यक्रम की तारीख 12 सितंबर से बदलकर 19 सितंबर कर दी गई। - नयी दिल्ली. सरकार के कई उपायों के बाद सोमवार को देशभर में चीनी की औसत खुदरा कीमत लगातार चौथे दिन 60 रुपये प्रति किलोग्राम से कम रही। हालांकि, त्योहारों से जुड़ी मांग के कारण कुछ क्षेत्रों में कीमतों पर बढ़ने का दबाव बना हुआ है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चीनी की औसत खुदरा कीमत सोमवार को 59.57 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जो एक दिन पहले 58.99 रुपये प्रति किलोग्राम थी। शुक्रवार को चीनी की कीमत 60 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे आ गई थी और पिछले तीन दिनों में इसमें और नरमी आई है। औसत खुदरा कीमत अब भी 58.23 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक है। 21 अगस्त को यह कीमत इतनी थी, जब केंद्र ने पहली बार चीनी के आयात की अनुमति दी थी और मिठास देने वाली इस वस्तु की कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए अन्य कदम उठाए थे। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को अधिकतम खुदरा कीमत 85 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही, जबकि न्यूनतम कीमत 40 रुपये प्रति किलोग्राम थी। दक्षिणी राज्यों में आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में खुदरा कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हुई, जबकि तमिलनाडु और केरल में मामूली गिरावट दर्ज की गई। आंध्र प्रदेश में औसत खुदरा कीमत सोमवार को बढ़कर 55.56 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई जो 21 अगस्त को 49.58 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इसी अवधि में केरलम में यह 56.75 रुपये से मामूली बढ़कर 57.8 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। चीनी के प्रमुख उत्पादक राज्यों में कीमतों में नरमी आई। महाराष्ट्र में औसत खुदरा कीमत 59 रुपये से घटकर 58.22 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई, जबकि उत्तर प्रदेश में यह 59.64 रुपये से घटकर 57.88 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। अन्य राज्यों की बात करें तो मध्य प्रदेश में कीमतों में अधिक गिरावट दर्ज की गई। वहां चीनी की कीमत 62.36 रुपये से घटकर 56.57 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। वहीं, पश्चिम बंगाल में कीमत मामूली घटकर 60.43 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जो 21 अगस्त को 60.95 रुपये प्रति किलोग्राम थी। सरकार ने 21 अगस्त को चीनी के आयात की अनुमति देने के साथ थोक उपयोगकर्ताओं और डीलर के लिए भंडारण सीमा संबंधी नियमों को और कड़ा कर दिया था। सरकार ने चीनी मिलों पर कीमतें ''बढ़ाने'' का आरोप लगाया है और कहा है कि देश में मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त भंडार है। हालांकि, उसने 2025-26 के विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया है। देश में सालाना घरेलू मांग 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है।
- नयी दिल्ली. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले उच्चस्तरीय कार्य बल को परीक्षा सुधारों पर सिफारिशों का एक सेट सौंपा है जिसमें अधिक पारदर्शिता, मजबूत सुरक्षा उपायों और प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए दो चरणीय प्रणाली जैसे सुझाव दिए गए हैं। छात्र संगठन ने सोमवार को एक बयान में यह जानकारी दी। संगठन ने कहा कि उसकी सिफारिशें पुणे, नागपुर, भोपाल, दिल्ली, चंडीगढ़ और दक्षिण बिहार में आयोजित गोलमेज सम्मेलनों के दौरान छात्रों और विशेषज्ञों के साथ परामर्श पर आधारित हैं। इसमें कहा गया है कि सिफारिशों में तत्काल, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक सुधारों को शामिल किया गया है जिनका उद्देश्य नीट सहित विभिन्न प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और छात्र-अनुकूल बनाना है। उसने कहा कि एक प्रमुख सुझाव प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं को दो चरणों में आयोजित करना है जिसमें पहला चरण उम्मीदवारों को 'शॉर्टलिस्ट' करने के लिए हो और दूसरा चरण अंतिम चयन के लिए। एबीवीपी ने साल में दो बार नीट परीक्षा आयोजित करने की व्यवहार्यता पर भी विचार करने का सुझाव दिया है, जिसमें अधिकतम प्राप्तांक पर विचार किया जा सकता है।अन्य सिफारिशों में कंप्यूटर-आधारित परीक्षाओं पर अधिक जोर, मजबूत प्रश्न-पत्र सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों के लिए समान राष्ट्रीय मानक और मजबूत उम्मीदवार सत्यापन और डेटा सुरक्षा तंत्र शामिल हैं। एबीवीपी ने दीर्घकालिक सुधारों के लिए पाठ्यक्रम, शिक्षण, मूल्यांकन और प्रवेश परीक्षाओं के बीच बेहतर समन्वय का आह्वान किया है। उसने कोचिंग पर निर्भरता कम करने के लिए संस्थागत शिक्षा को मजबूत करने, कैरियर परामर्श और योग्यता-आधारित मूल्यांकन शुरू करने, प्रमुख सुधारों को प्रायोगिक परियोजनाओं , समीक्षाओं और स्वतंत्र ऑडिट के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से लागू करने की भी सिफारिश की। एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, ''छात्रों को अपने ज्ञान और कड़ी मेहनत के आधार पर प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम होना चाहिए, न कि उन्हें परीक्षा प्रणाली में खामियों का परिणाम भुगतना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि सिफारिशों में पंजीकरण और परीक्षा से लेकर मूल्यांकन और चयन तक की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया गया है।
- नयी दिल्ली. वित्त मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि डीआरआई अधिकारियों ने पाकिस्तान से लाया गया 362 मीट्रिक टन से अधिक सूखा खजूर जब्त किया और पड़ोसी देश से आयात पर भारत की रोक से बचने की कोशिशों को नाकाम कर दिया। मंत्रालय ने बताया कि राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) के अधिकारियों ने नासिक के अंबाद स्थित 'कंटेनर फ्रेट स्टेशन' (सीएफएस) पर मुंबई की एक कंपनी द्वारा आयात किए गए सूखे खजूर के 13 कंटेनरों की पड़ताल की। इसने कहा कि यह खेप संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के जेबेल अली क्षेत्र से आई थी और इसके आयात दस्तावेजों में यूएई को ही इसका मूल देश बताया गया था। वित्त मंत्रालय के अनुसार, शुरुआती जांच में पता चला कि सामान के पाकिस्तान में बने होने की बात छिपाने की कोशिश की गई। सूखे खजूर को शुरू में पाकिस्तान के कराची बंदरगाह से यूएई के जेबेल अली बंदरगाह तक एक जहाज़ के जरिए कंटेनरों में भेजा गया था। इसने कहा कि जेबेल अली बंदरगाह पर सामान को दूसरे कंटेनरों में रखा गया और पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा संचालित कंपनियों के जरिए भारत भेजने के उद्देश्य से एक अलग जहाज पर लादा गया। पहलगाम आतंकी हमले के बाद, भारत ने 2 मई, 2025 से पाकिस्तान निर्मित या वहां से निर्यात होने वाले सभी सामान के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है। डीआरआई 'ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट' के तहत, पाकिस्तानी मूल के सामान की तीसरे देश के रास्ते भारत में आयात करने की कोशिशों को विफल करने के लिए लगातार काम कर रहा है।
- नयी दिल्ली. खाद्य उत्पादों, ईंधन और विनिर्मित वस्तुओं के दाम बढ़ने के कारण थोक मुद्रास्फीति अगस्त में बढ़कर 9.92 प्रतिशत पर पहुंच गई। जुलाई में यह 9.78 प्रतिशत के स्तर पर थी। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। अगस्त की मुद्रास्फीति दर 2022-23 को आधार वर्ष मानकर तैयार नई थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) श्रृंखला में दूसरी सबसे अधिक है। अर्थशास्त्रियों ने कहा कि पश्चिम एशिया में फिर बढ़े तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा कीमतों में हाल की तेजी डब्ल्यूपीआई और उत्पादक मूल्य सूचकांक (ओपीपीआई) पर दबाव बनाए रखेगी। उत्पादक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में बढ़कर 9.81 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 9.6 प्रतिशत थी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को डब्ल्यूपीआई के आंकड़े जारी करते हुए कहा, '' खनिज तेल (पेट्रोलियम उत्पादों सहित), खाद्य वस्तुएं, खाद्य उत्पादों का विनिर्माण, मूल धातुओं का विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुएं तथा रसायन और रासायनिक उत्पादों का विनिर्माण अगस्त, 2026 में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति बढ़ने के प्रमुख कारण रहे।'' अगस्त में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 7.05 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 6.65 प्रतिशत थी। विनिर्मित वस्तुओं की मुद्रास्फीति बढ़कर 8.37 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई,जो जुलाई में 8.29 प्रतिशत थी। ईंधन और बिजली में थोक मुद्रास्फीति अगस्त में बढ़कर 22.93 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 20.05 प्रतिशत थी। वित्त परामर्श कंपनी बार्कलेज ने एक शोध टिप्पणी में कहा कि ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति में तेजी खनिज तेल व प्राकृतिक गैस तथा पेट्रोलियम की थोक कीमतों में वृद्धि के कारण आई जो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से हुई। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा कि लंबे समय से जारी पश्चिम एशिया संकट ने ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति में दो महीने से जारी गिरावट का रुख पलट दिया है और संकट का समाधान होने तक इसके ऊंचे स्तर पर बने रहने के आसार हैं। पंत ने कहा, ''पश्चिम एशिया संकट का समाधान नहीं होने से (रूस-यूक्रेन संकट की तरह) निकट अवधि में वैश्विक अनिश्चितता बनी रहने के आसार हैं। इसके साथ ही कम बारिश और कमजोर मुद्रा निकट अवधि में मुद्रास्फीति को और बढ़ाएंगे।'' रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुख्य अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि प्रतिकूल आधार प्रभाव के साथ-साथ चीनी जैसी कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में सामान्य से अधिक क्रमिक वृद्धि के कारण सितंबर-अक्टूबर, 2026 में खाद्य मुद्रास्फीति के और बढ़ने की आशंका है। इससे त्योहारी मौसम के दौरान धारणा प्रभावित हो सकती है।
- नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राजस्थान में स्थानीय शहरी निकाय चुनावों में पार्टी की "ऐतिहासिक जीत" के लिए राज्य के लोगों का सोमवार को "आभार जताया।" नवीन ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "राजस्थान के लोगों ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि सम्मानीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उनका अटूट विश्वास है।" उन्होंने लिखा, "भ्रम फैलाने वालों और 'नाराज फूफा' जैसे लोगों को दरकिनार करते हुए राजस्थान ने जनकल्याण, विकास और सुशासन की नीतियों पर मुहर लगाई है।" नवीन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौर और "दिन-रात मेहनत करने वाले समर्पित भाजपा कार्यकर्ताओं" को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह जीत पंचायत से संसद तक सेवा और संकल्प की यात्रा को और बल देगी। शहरी निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा ने सोमवार को कांग्रेस पर बढ़त बनाते हुए 4,179 वार्ड में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस ने 3,613 वार्ड जीते। भाजपा ने राज्य के 10 नगर निगम में से चार में स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
- नयी दिल्ली. मोबाइल फोन उद्योग के संगठन इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने घरेलू मांग में गिरावट के बीच सरकार से मोबाइल फोन पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर मौजूदा के 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों के कारण भी घरेलू मांग प्रभावित हो रही है।आईसीईए ने दो सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र में कहा कि भारत मात्रा के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता बन गया है और वित्त वर्ष 2025-26 में मोबाइल फोन देश का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद रहा। मोबाइल फोन विनिर्माताओं के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ने कहा कि घरेलू मांग हालांकि विनिर्माण और निर्यात की गति के अनुरूप नहीं बढ़ी है। 'हैंडसेट' की खपत घटी है, फोन बदलने की अवधि बढ़ी है और किफायती 'स्मार्टफोन' खंड दबाव में है। आईसीईए के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने पत्र में कहा, "यह असंतुलन विनिर्माण वृद्धि के अगले चरण को प्रभावित करेगा, जब तक भारत अपने घरेलू बाजार में फिर से गति नहीं लाता। इसलिए आईसीईए सरकार से मोबाइल फोन पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने और मोबाइल फोन के कलपुर्जों पर भी दरों में इसी तरह युक्तिसंगत बदलाव करने का आग्रह करता है।" उन्होंने कहा कि कम कर दर से अनौपचारिक और बिना कर वाले विक्रेताओं को मिलने वाला मूल्य लाभ कम होगा।आईसीईए ने कहा कि भारत में आईफोन का निर्माण होने के बावजूद देश में इनकी कीमत मुख्य रूप से ऊंचे कर और रुपये के मूल्य में गिरावट के कारण काफी अधिक है। संगठन के अनुसार, हाल में पेश आईफोन 18 श्रृंखला और आईफोन डुओ अमेरिका की तुलना में भारत में करीब 40,000 रुपये से 1.15 लाख रुपये तक महंगे हैं। संगठन ने कहा कि अप्रैल, 2020 में मोबाइल फोन पर जीएसटी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत किए जाने से डिजिटल पहुंच के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रमुख उपकरण की कीमत बढ़ गई। महेंद्रू ने कहा, "इसके परिणामस्वरूप अधिक खरीद अधिकृत और कर-अनुपालक माध्यमों से होगी, जिससे औपचारिक कर आधार का विस्तार होगा और लेनदेन की निगरानी बेहतर होगी।" आईसीईए ने कहा कि पिछले एक साल में भारत में विभिन्न ब्रांड के शुरुआती स्तर के स्मार्टफोन की कीमतें करीब 35 से 45 प्रतिशत बढ़ी हैं, जबकि 10,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की उपलब्धता तेजी से घटकर पांच प्रतिशत से भी कम रह गई है।
- नयी दिल्ली. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिंदी पत्रिका 'प्रवर्तन संदेश' को सोमवार को हिंदी दिवस के मौके पर 'राजभाषा कीर्ति पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। बयान के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार और नित्यानंद राय ने मुंबई में आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के दौरान 'प्रवर्तन संदेश' को यह पुरस्कार प्रदान किया। बयान में ईडी ने कहा, "प्रवर्तन निदेशालय की ओर से प्रकाशित 'प्रवर्तन संदेश' को हिंदी दिवस के मौके पर 'राजभाषा कीर्ति पुरस्कार 2025-26' से सम्मानित किया गया।" 'राजभाषा कीर्ति पुरस्कार' केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत राजभाषा विभाग की ओर से दिया जाता है।'प्रवर्तन संदेश' केंद्रीय एजेंसी की आंतरिक हिंदी पत्रिका है। इसमें निदेशालय के कार्यक्षेत्र से जुड़े जटिल कानूनी, वित्तीय और जांच संबंधी विषयों के साथ-साथ राजभाषा हिंदी से संबंधित गतिविधियों को सरल, सहज, प्रभावी एवं सुगम भाषा में पेश किया जाता है।
- चंडीगढ़. पंजाब पुलिस ने नशा विरोधी अभियान 'युद्ध नशे विरुद्ध' की शुरुआत के बाद से 79,000 से अधिक मादक पदार्थ तस्करों को गिरफ्तार किया है और 3,800 किलोग्राम से अधिक हेरोइन बरामद की है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पुलिस महानिदेशक डीजीपी गौरव यादव ने यहां संवाददाताओं को बताया कि पिछले साल एक मार्च को 'युद्ध नशे विरुद्ध' अभियान शुरू होने के बाद से पुलिस ने 60,582 प्राथमिकी दर्ज की है और 79,784 मादक पदार्थ तस्करों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 708 बड़े तस्कर शामिल हैं, जो 354 ऐसे मामलों में संलिप्त थे, जिनमें प्रत्येक मामले में दो किलोग्राम से अधिक हेरोइन बरामद हुई थी। उन्होंने विवरण साझा करते हुए कहा कि 10 सितंबर 2026 तक पुलिस ने रिकॉर्ड 3,803 किलोग्राम हेरोइन, 976 किलोग्राम अफीम, 1,325 किलोग्राम गांजा और अन्य मादक पदार्थ जब्त किए हैं।
- नयी दिल्ली. कर्नाटक और तेलंगाना समेत कई राज्यों में खेती का रकबा कम होने की वजह से चालू 2026 के खरीफ सत्र में 11 सितंबर तक धान की बुवाई का चार प्रतिशत घटकर 426.81 लाख हेक्टेयर रह गई है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। पिछले साल इसी अवधि में धान खेती का रकबा 443.78 लाख हेक्टेयर था।धान की खेती के रकबे में कर्नाटक में 4.54 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 4.46 लाख हेक्टेयर, आंध्र प्रदेश में 1.90 लाख हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 1.84 लाख हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 1.75 लाख हेक्टेयर, तमिलनाडु में 1.40 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 1.15 लाख हेक्टेयर और झारखंड में 97 हजार हेक्टेयर की कमी आई है। धान, जो खरीफ (गर्मी में बोई जाने वाली फसल) सत्र की एक प्रमुख फसल है, की कटाई अक्टूबर से शुरू होगी। आंकड़ों के अनुसार, दलहनों के तहत खेती का रकबा 116.79 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 118.46 लाख हेक्टेयर हो गया है। श्री अन्न और मोटे अनाजों का रकबा 182.48 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 183.17 लाख हेक्टेयर हो गया है।हालांकि, तिलहन का रकबा 194.07 लाख हेक्टेयर से घटकर 193.90 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि कपास के तहत आने वाला रकबा 110.31 लाख हेक्टेयर से घटकर 109.34 लाख हेक्टेयर रह गया। गन्ने की बुवाई का रकबा भी मामूली रूप से 58.87 लाख हेक्टेयर से घटकर 58.47 लाख हेक्टेयर रह गया है।कुल मिलाकर, देश के कुछ हिस्सों में कम बारिश के कारण, 11 सितंबर 2026 तक सभी खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा पिछले साल की इसी अवधि के 1,112.54 लाख हेक्टेयर से घटकर 1,096.49 लाख हेक्टेयर रह गया है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम को टी20 एशिया कप चैंपियनशिप जीतने पर बधाई देते हुए सोमवार को कहा कि टीम ने देश को गौरवान्वित किया है। मुर्मू ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''वे हमारे युवाओं, खासकर हमारी बेटियों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत हैं। मुझे विश्वास है कि वे सफलता और उत्कृष्टता के ऐसे कई और प्रेरणादायक अध्याय लिखेंगी।'' हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली भारतीय टीम ने दुबई में श्रीलंका को 72 रन से हराकर रिकॉर्ड आठवीं बार एशिया कप का खिताब जीता। राष्ट्रपति ने कहा, ''महिला टी20 एशिया कप चैंपियनशिप 2026 जीतने पर टीम इंडिया की सभी सदस्यों को मेरी हार्दिक बधाई। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और अपने सभी मैच जीते। उन्होंने देश को गौरवान्वित किया है।''
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करीब 6500 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला गया
रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड) . चीड़वासा हेलीपैड के समीप भूस्खलन व केदारनाथ पैदल मार्ग के बाधित होने से फंसे 6500 से अधिक तीर्थयात्रियों को सोमवार को बचाव एवं राहत दलों की देखरेख में सुरक्षित निकाला गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) से मिली जानकारी के अनुसार, गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर भूस्खलन से उसके आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिलने के बाद एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन के समन्वय से यात्रियों को सुरक्षित रूप से रास्ता पार कराया। एसडीआरएफ के मुताबिक, अब तक 6500 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। साथ ही करीब 600-700 घोड़े-खच्चरों को भी सुरक्षित निकाला जा चुका है। गौरीकुंड से लगभग ढाई किलोमीटर ऊपर चीड़वासा हेलीपेड के समीप रविवार को पहाड़ी से चट्टान और पत्थर गिरने के कारण मार्ग अवरूद्ध हो गया था।
भूस्खलन के दौरान चट्टानों की चपेट में आने से एक स्थानीय निवासी की मौत हो गयी थी। पुलिस के मुताबिक भूस्खलन के बाद पैदल मार्ग पर आवाजाही रोक दी गयी थी। उसने बताया कि पहाड़ी से निरंतर पत्थर गिरने के कारण मार्ग पर से मलबा हटाने में भी दिक्कतें आ रही थीं जिस कारण तीर्थयात्रियों को भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के दोनों तरफ सुरक्षा के मद्देनजर विभिन्न पड़ावों पर रोक दिया गया था। सोमवार सुबह मौसम अनुकूल होने और चट्टानों व पत्थरों के गिरने का सिलसिला थमने के बाद केदारनाथ से लौटने वाले श्रद्धालुओं को बाधित क्षेत्र से बचाव दलों की देखरेख में चरणबद्ध ढंग से सुरक्षित निकाला गया। पुलिस ने बताया कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने के बाद लोक निर्माण विभाग ने बाधित रास्ते पर से मलबा हटाने का कार्य शुरू किया। -
नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने के मकसद से तीन साल पहले गठित 'इंडिया' गठबंन को आगे बढ़ाने के लिए बनाई गई समन्वय समिति अब निष्क्रिय हो चुकी है, हालांकि यह गठबंधन कुछ बिखराव एवं टकराव के बावजूद अपना वजूद बनाए हुए है। गठबंधन की 14 सदस्यीय समन्वय समिति की पहली बैठक 13 सितंबर, 2023 को हुई थी। उस समय इसे गठबंधन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था के रूप में देखा गया था। हालांकि, वह समिति की आखिरी बैठक भी साबित हुई।
तीन साल बाद समन्वय समिति अस्तित्व में नहीं है और इसके मूल सदस्यों में से दो अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खेमे में हैं। इस साल राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय बहाल करने का प्रयास जरूर किया गया। बीते आठ जून को इस गठबंधन के घटक दलों के नेताओं ने दो साल से अधिक समय में पहली बड़ी औपचारिक बैठक की थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने घोषणा की थी कि अब गठबंधन के दल हर दो महीने में बैठक करेंगे। इस साल, अगस्त में हैदराबाद में बैठक का सुझाव दिया गया था, लेकिन वह बैठक नहीं हो सकी। विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने एक न्यूज़ एजेंसी' से कहा, ''हम कांग्रेस द्वारा बैठक की तारीख तय करने का इंतजार कर रहे हैं। हैदराबाद में प्रस्तावित बैठक क्यों नहीं हो सकी, इस बारे में उनकी ओर से कोई जानकारी नहीं है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने पूछे जाने पर कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
इस बीच, गठबंधन बनाने वाले दलों के आपसी संबंधों में बदलाव आया है, जिससे अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गोवा और मणिपुर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। इन राज्यों में कहीं दल सहयोगी हैं, कहीं प्रतिद्वंद्वी और कहीं संभावित साझेदार। पिछले साल गठबंधन से अलग हुई आम आदमी पार्टी (आप) की पंजाब में कांग्रेस के साथ लड़ाई लगातार तीखी होती जा रही है। बीते रविवार को आप ने गोवा में गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेस विकल्प पेश करने के लिए गोवा फॉरवर्ड पार्टी के साथ गठबंधन किया। पार्टी गुजरात में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है। जहां राज्यवार रणनीति ने चुनावी तौर पर काम किया है, वहां भी मतभेद उभर आए हैं।
झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)-कांग्रेस-राष्ट्रीय जनता दल (राजद) गठबंधन ने 2024 में आसानी से सत्ता बरकरार रखी, जबकि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। झारखंड में कांग्रेस के नेता सरकार में प्रतिनिधित्व और झामुमो के साथ समन्वय को लेकर अक्सर शिकायत करते रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ कांग्रेस के रिश्ते खराब हुए हैं। इस महीने दोनों दलों के मतभेद उस समय फिर खुलकर सामने आए जब कांग्रेस ने सरकार समर्थित एक कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' के सभी छह अंतरे गाए जाने पर आपत्ति जताई। इसके जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने सहयोगी दल पर पलटवार किया। तमिलनाडु में कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) का गठबंधन 'इंडिया' गठबंधन के सबसे टिकाऊ राज्य स्तरीय गठबंधनों में से एक था और 2024 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन के प्रदर्शन में उसका महत्वपूर्ण योगदान रहा था। हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस द्रमुक के नेतृत्व वाले मोर्चे से अलग हो गई और सत्तारूढ़ टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो गई।
सितंबर 2023 में मुंबई में हुई बैठक में गठबंधन के 13 सदस्यों को 14 सदस्यीय समन्वय समिति में शामिल किया गया था। एक सीट माकपा के लिए रखी गई थी, लेकिन उसने अपना प्रतिनिधि नामित नहीं किया। समिति में कांग्रेस की ओर से के. सी. वेणुगोपाल, तत्कालीन अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से शरद पवार, द्रमुक से टी. आर. बालू, झामुमो से हेमंत सोरेन, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से संजय राउत, राजद से तेजस्वी यादव, तृणमूल कांग्रेस से अभिषेक बनर्जी, आप से राघव चड्ढा, जो बाद में भाजपा में शामिल हो गए, समाजवादी पार्टी से जावेद अली खान, जनता दल (यूनाइटेड) से ललन सिंह, जो 2024 में भाजपा नीत राजग में लौट गए, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से डी. राजा, नेशनल कॉन्फ्रेंस से उमर अब्दुल्ला और पीडीपी से महबूबा मुफ्ती शामिल थे। अब जद(यू), द्रमुक और आम आदमी पार्टी इस गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। -
नयी दिल्ली. विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का सोमवार को स्वागत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2029 तक सभी भाजपा-राजग शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दी जाएगी। संगठन ने कहा कि यह देश में लैंगिक असमानता और भेदभाव को खत्म करने की दिशा में एक ''मील का पत्थर'' साबित होगा। शाह ने रविवार को कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की 21 राज्यों में सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू करेंगी। शाह ने मुंबई में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार की उपलब्धियों और भाजपा के 25 साल के सफर का जिक्र किया। शाह ने कहा, ''तीन तलाक को समाप्त कर दिया गया है, जिससे मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार मिले हैं। हमने कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की है और मुझे विश्वास है कि 2029 से पहले हम भाजपा-राजग शासित सभी 21 राज्यों में इसे लागू कर देंगे।'' अगले लोकसभा चुनाव 2029 में होने हैं।
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि समान नागरिक संहिता बड़ी संख्या में उन महिलाओं को अपने अधिकार हासिल करने में सक्षम बनाएगी, जो पिछले 75 वर्षों से इनसे वंचित रही हैं। बंसल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''यह महिलाओं और बच्चों को कट्टरपंथियों तथा अलगाववादियों के चंगुल से मुक्त कराने में भी मदद करेगा।'' उन्होंने शाह के बयान को स्वागत योग्य बताते हुए दावा किया कि यूसीसी पहले ही पांच राज्यों में लागू की जा चुकी है और तीन अन्य राज्यों में इसे लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। बंसल ने 'एक्स' पर लिखा, ''2029 तक भारत के 80 प्रतिशत हिस्से में यूसीसी लागू होगी। मोदी सरकार को बधाई... यह फैसला भारत में बची हुई लैंगिक असमानता और भेदभाव को खत्म करने तथा महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।'' बंसल ने 'पीटीआई वीडियो' से बातचीत में कहा, ''यह एक बेहद स्वागत योग्य और महत्वपूर्ण कदम है, जिसका हर जगह समर्थन किया जाना चाहिए। यूसीसी पहले ही भाजपा शासित चार-पांच राज्यों में लागू की जा चुकी है। गोवा में यह शुरुआत से ही लागू है।'' उन्होंने कहा, ''राजस्थान, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल समेत कई अन्य राज्यों में इसे लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। मेरा मानना है कि इस साल के अंत तक इसे ज्यादातर राज्यों में लागू कर दिया जाएगा।'' उन्होंने गैर-भाजपा शासित राज्यों से भी इस मुद्दे पर पहल करने का आग्रह किया। बंसल ने कहा, ''गैर भाजपा शासित राज्यों को भी यूसीसी लागू करने पर विचार करना चाहिए। आखिरकार, नागरिकों को समान अधिकार देना, महिलाओं को अधिकार देना और बच्चों के छीने गए अधिकारों को बहाल करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। यह सिर्फ नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व भी है।
























