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नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान कर्नाटक और केरल के सांसदों के साथ बैठक कर टीबी-मुक्त भारत अभियान की प्रगति और आगे की रणनीति पर चर्चा की। बैठक में दोनों राज्यों के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने टीबी-मुक्त कर्नाटक, टीबी-मुक्त केरल और टीबी-मुक्त भारत के निर्माण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। नड्डा ने सांसदों से जिला कलेक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों के साथ समन्वय कर जांच, उपचार और मरीजों को सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की लगातार निगरानी करने का आह्वान किया।
‘टीबी-मुक्त भारत के लिए सांसदों की अग्रणी भूमिका’ विषय पर आयोजित बैठक विस्तारित संसद भवन परिसर में हुई। इसमें कर्नाटक और केरल के विभिन्न दलों के सांसदों ने हिस्सा लिया। बैठक का उद्देश्य टीबी उन्मूलन की दिशा में राजनीतिक स्तर पर एकजुट प्रयासों को गति देना और राज्यों में चल रही गतिविधियों की समीक्षा करना था।बैठक में 100-दिवसीय टीबी-मुक्त भारत अभियान के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की गई। अभियान का पहला चरण 7 दिसंबर 2024 को शुरू हुआ था, जिसमें शुरुआत में 347 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों को शामिल किया गया। बाद में इसका विस्तार पूरे देश में किया गया और यह चरण 24 मार्च 2025 को समाप्त हुआ। अभियान का दूसरा चरण 24 मार्च 2026 को शुरू हुआ और जुलाई 2026 में समाप्त हुआ। इसमें देशभर के करीब 1.58 लाख उच्च जोखिम वाले गांवों और शहरी वार्डों को शामिल किया गया। नड्डा ने कहा कि वर्ष 2015 से 2024 के बीच भारत में टीबी के मामलों में 21% की कमी आई है, जो वैश्विक स्तर की प्रगति की तुलना में करीब दोगुनी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत ने 92% उपचार कवरेज दर हासिल की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मिली गति को जमीनी स्तर के प्रभाव में बदलने के लिए कर्नाटक और केरल में टीबी की जांच, उपचार और मरीजों को सहायता की पहुंच बढ़ाना महत्वपूर्ण है।केंद्रीय मंत्री ने हाल में संपन्न 100-दिवसीय टीबी-मुक्त भारत अभियान की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। 24 मार्च से 4 जुलाई 2026 तक चले अभियान में देशभर में 2.02 करोड़ से अधिक संवेदनशील लोगों की जांच की गई और 7 लाख से अधिक नए टीबी मामलों का पता लगाया गया। इनमें 1.97 लाख ऐसे मामले भी शामिल थे, जिनमें लक्षण नहीं थे और जिनका सामान्य परिस्थितियों में पता चलना मुश्किल था।स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त सचिव अराधना पटनायक ने अभियान के तकनीकी आधार की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले एक दशक में आणविक जांच की क्षमता को कुछ सौ मशीनों से बढ़ाकर 11,000 से अधिक मशीनों तक पहुंचाया है। देश में करीब 3,000 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित पोर्टेबल एक्स-रे इकाइयां भी क्षेत्र स्तर पर इस्तेमाल की जा रही हैं।स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने दोनों राज्यों में टीबी के अधिक बोझ से जुड़े संवेदनशील कारकों की जानकारी दी। इनमें शहरी क्षेत्र, प्रवासी आबादी, शहरी झुग्गियां, कुपोषण, शराब और तंबाकू का सेवन, एचआईवी एवं मधुमेह का अधिक बोझ, बुजुर्ग आबादी, निर्माण और औद्योगिक श्रमिक तथा पहाड़ी एवं जनजातीय क्षेत्र शामिल हैं। पत्थर की खदानों, रेशम बुनकरों, कॉफी और चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों को भी संवेदनशील समूहों में शामिल किया गया है।100-दिवसीय अभियान के दौरान कर्नाटक और केरल ने स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विशेष रणनीतियां अपनाईं। इसके तहत आयुष्मान आरोग्य शिविरों को शहरी झुग्गियों, निर्माण स्थलों और प्रवासी श्रमिकों के समूहों तक पहुंचाया गया, ताकि जांच और स्वास्थ्य सेवाएं जरूरतमंद लोगों के करीब उपलब्ध हो सकें। बैठक में सांसदों ने जागरूकता अभियान तेज करने, टीबी से जुड़े कलंक को कम करने और शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान को बढ़ावा देने के लिए निक्षय शिविरों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। वे जिला और प्रखंड स्तर पर टीबी सेवाओं की निगरानी भी मजबूत करेंगे, ताकि अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण जांच, उपचार और मरीज-केंद्रित देखभाल पहुंच सके। नड्डा ने कहा कि टीबी-मुक्त भारत केवल स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामूहिक स्वामित्व से संचालित जन आंदोलन है। उन्होंने सांसदों से अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लगातार जनसंपर्क, प्रशासनिक निगरानी और सामाजिक भागीदारी के जरिए अभियान को मजबूत करने का आह्वान किया।सांसदों ने टीबी से प्रभावित लोगों को पोषण संबंधी सहायता, मनोसामाजिक सहयोग और आजीविका से जुड़ी मदद उपलब्ध कराने के लिए समुदायों को संगठित करने की प्रतिबद्धता जताई। नड्डा ने कहा कि 100-दिवसीय अभियान का समापन जिम्मेदारी का अंत नहीं, बल्कि अधिक गहन और निरंतर प्रयासों की शुरुआत है। उन्होंने विश्वास जताया कि कर्नाटक और केरल टीबी उन्मूलन की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पारदर्शी प्रक्रियाओं, व्यापक भागीदारी और बेहतर अवसरों के जरिए भारत में सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया को बदल रहा है। यह मंच व्यवसायों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी और समावेशी इकोसिस्टम तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में यह बात कही। उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के उस लेख को साझा किया, जिसमें 9 अगस्त 2016 को लॉन्च होने के बाद से सरकारी ई-मार्केटप्लेस की प्रगति और उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पारदर्शी खरीद, व्यापक भागीदारी और बेहतर अवसरों के जरिए जीईएम भारत की सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया में बदलाव ला रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जीईएम के विकास में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल ने सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के साथ देश में कारोबार करने में आसानी को मजबूत करने में भी योगदान दिया है। उनके अनुसार, पिछले 10 वर्षों में जीईएम ने अधिक प्रतिस्पर्धी और समावेशी खरीद प्रणाली तैयार करने में मदद की है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी को केंद्र में रखते हुए जीईएम ने अधिक प्रतिस्पर्धी और समावेशी इकोसिस्टम तैयार किया है। इससे विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने में मदद मिली है। सरकारी खरीद के अवसरों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराकर यह मंच छोटे कारोबारियों और महिला उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है।पीएम नरेंद्र मोदी ने लोगों से पीयूष गोयल के लेख को पढ़ने का आग्रह किया, ताकि वे जीईएम की उपलब्धियों और भारत में सार्वजनिक खरीद के आधुनिकीकरण में इसकी भूमिका को विस्तार से समझ सकें। उन्होंने कहा कि प्लेटफॉर्म ने बीते एक दशक में सार्वजनिक खरीद व्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्धी और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है।सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों की खरीद प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए सरकार की ओर से शुरू किया गया जीईएम एक ऑनलाइन बाजार के रूप में काम करता है। इस प्लेटफॉर्म पर खरीदार और विक्रेता पारदर्शी और कुशल तरीके से लेनदेन कर सकते हैं। इसका उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में दक्षता बढ़ाना और खरीद से जुड़ी बाधाओं को कम करना है।जीईएम को देशभर के कारोबारियों की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने वाली प्रमुख पहल के रूप में स्थापित किया गया है। डिजिटल माध्यम से सरकारी खरीद के अवसरों को अधिक सुलभ बनाकर यह मंच प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और सार्वजनिक खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता मजबूत करने में योगदान दे रहा है। - नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ध्वज संहिता का पालन करने का निर्देश दिया। मंत्रालय ने कहा कि हालांकि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेल आयोजनों के दौरान आम लोग कागज से बने झंडे लहरा सकते हैं, लेकिन कार्यक्रमों के बाद उन्हें फेंका या जमीन पर नहीं डाला जाना चाहिए। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजे गए एक संदेश में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने से जुड़े कानूनों, तौर-तरीकों और नियमों के बारे में लोगों के साथ-साथ सरकारी संगठनों और एजेंसियों में भी अक्सर जानकारी की कमी देखी जाती है। इसमें कहा गया, "मुझे यह कहने का निर्देश दिया गया है कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतीक है, इसलिए इसे सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए।" मंत्रालय ने राज्यों से कहा कि वे इस संबंध में बड़े पैमाने पर जागरूकता कार्यक्रम चलाएं और इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों के जरिए इनका व्यापक प्रचार-प्रसार करें। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकों से तिरंगा यात्राओं, तिरंगा रैलियों और 'वंदे मातरम' के सामूहिक गायन के माध्यम से इस अभियान में भाग लेने और इसे मनाने तथा हर घर तिरंगा की आधिकारिक वेबसाइट पर तिरंगा फहराते हुए अपनी सेल्फी साझा करने की अपील की। सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक संदेश में उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा शुरू किया गया 'हर घर तिरंगा' अभियान हमारे राष्ट्र की सामूहिक ताकत का प्रतिबिंब है, जो हमें एक 'विकसित भारत' के निर्माण के हमारे प्रयास में एकजुट करता है।" उन्होंने कहा, "इस वर्ष 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ का अवसर इस अभियान के साथ मिलकर हर देशभक्त के लिए इस पल को और भी भावुक और खास बना देता है।" गृह मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काता और बुना हुआ या मशीन से बना होना चाहिए, और इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री सूती, पॉलिएस्टर, ऊन, रेशम या खादी की होनी चाहिए। आदेश के साथ संलग्न ध्वज संहिता में कहा गया, "कोई भी आम नागरिक, निजी संस्था या शिक्षण संस्थान राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए, किसी भी दिन या अवसर पर-चाहे वह औपचारिक हो या कोई अन्य-राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकता है या प्रदर्शित कर सकता है। 19 जुलाई, 2022 के आदेश के जरिए 'भारतीय झंडा संहिता, 2002' में संशोधन किया गया था... यदि तिरंगा खुले स्थान पर या किसी आम नागरिक के घर पर प्रदर्शित किया जाता है तो उसे दिन-रात फहराया जा सकता है।" इसमें स्पष्ट किया गया कि जब कभी राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाए तो उसकी स्थिति सम्मानजनक होनी चाहिए, और फटा हुआ एवं मैला-कुचैला झंडा प्रदर्शित न किया जाए। संदेश में कहा गया कि झंडे को किसी अन्य झंडे अथवा झंडों के साथ एक ही ध्वज दंड से नहीं फहराया जाए।इसमें कहा गया, "संहिता के भाग-3 की धारा-9 में उल्लखित गणमान्य व्यक्तियों जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल आदि, के सिवाय झंडे को किसी वाहन पर नहीं लगाया जाएगा। किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचाई पर या उससे ऊपर या उसके बराबर में नहीं लगाना चाहिए।"
- नयी दिल्ली. सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि 15 अगस्त को ऐतिहासिक लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् गाया जाएगा और इस कार्यक्रम की थीम 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवा शक्ति का योगदान होगी। रक्षा सचिव आरके सिंह ने कहा कि लाल किले में होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान युवाओं की उपलब्धियों और योगदान को रेखांकित करने की योजना जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन से पहले ही तय की जा चुकी थी। उन्होंने कहा, ''विकसित भारत की दिशा में हमारी यात्रा में युवा बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, क्योंकि वे इसमें योगदान भी देंगे और उम्मीद है कि इसका लाभ भी उठाएंगे। यही एकमात्र वजह है।'' सिंह ने कहा, ''स्वतंत्रता दिवस समारोह में युवाओं की उपलब्धियों और योगदान को रेखांकित करने की योजना किसी भी अन्य घटना से पहले की है।'' रक्षा सचिव ने कहा, ''मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि यह योजना जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से पहले ही बनाई गई थी।'' भारत 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिल्ली के लाल किले से स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगे। सिंह ने कहा कि 2026 में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पहली बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रगीत का गायन किया जाएगा। रक्षा सचिव के अनुसार, प्रधानमंत्री के लाल किले पहुंचने पर वंदे मातरम् का गायन होगा। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और राष्ट्र के नाम पारंपरिक संबोधन देंगे। सिंह ने कहा कि इस साल के समारोह में युवा शक्ति को भी रेखांकित किया जाएगा और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में देश के युवाओं के योगदान को सम्मान दिया जाएगा। भारतीय वायुसेना का एमआई-17 हेलीकॉप्टर वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक बैनर लेकर लाल किले के ऊपर से उड़ान भरेगा और वहां मौजूद लोगों पर फूल बरसाएगा। एक सवाल पर रक्षा सचिव ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को समारोह में आमंत्रित किया गया है और आमंत्रित लोगों के बैठने की व्यवस्था पदानुक्रम के अनुसार की जाएगी। सिंह ने कहा कि पदानुक्रम के अनुसार राहुल गांधी की सीट केंद्रीय मंत्रियों के बाद होगी। रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया जाएगा। अधिकारी ने कहा, ''2026 के अंतरराष्ट्रीय भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित ओलंपियाड में पदक जीतने वाले 19 विद्यार्थियों की उपलब्धियां विज्ञान के क्षेत्र में युवा शक्ति की सफलता का उदाहरण हैं। उन्हें समारोह में आमंत्रित किया गया है और वे लाल किले की प्राचीर पर बैठेंगे।'' उन्होंने बताया कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह में करीब 5,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। ये वे लोग हैं जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में कामयाबी हासिल की है और देश को विकसित भारत की राह पर आगे ले जाने में मदद कर रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि इस वर्ष मुख्य समारोह के निमंत्रण पत्रों पर 'सेवा तीर्थ' को दर्शाया गया है, ताकि लोगों को हर नागरिक के कल्याण के लिए समर्पण और निष्ठा के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सके।
- नयी दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा सहित उसके 32 सहयोगी संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारी अगले सप्ताह आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले में वार्षिक समन्वय बैठक के लिए जुटेंगे। बैठक में समकालीन मुद्दों के साथ-साथ जेन-जी से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। तीन दिन की यह बैठक 19 अगस्त को विशाखापत्तनम के गुडीलोवा में शुरू होगी। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और महासचिव दत्तात्रेय होसबाले इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक 21 अगस्त को समाप्त होगी। आरएसएस के राष्ट्रीय मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख सुनील आंबेकर ने एक बयान में कहा, "बैठक के दौरान, सभी 32 संगठन अपनी-अपनी गतिविधियों के बारे में जानकारी साझा करेंगे और विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार और सुझाव रखेंगे।" उन्होंने कहा कि बैठक में आपसी तालमेल और सहयोग को बेहतर बनाने के साथ-साथ जन-कल्याण और नीति से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, "इस बैठक में जनसंख्या असंतुलन, 'नशा मुक्ति', युवाओं में जागरूकता पैदा करने, 'पंच परिवर्तन' को लागू करने, विकास की भारतीय अवधारणा और अन्य संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।" सूत्रों के मुताबिक, बैठक में "जेन-जी से जुड़े मुद्दों" पर भी चर्चा होगी। इस बैठक में आरएसएस से जुड़ी सभी 32 संस्थाओं के शीर्ष पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। इनमें संस्थाओं के अध्यक्ष और राष्ट्रीय संगठन सचिव शामिल हैं। आरएसएस ने एक बयान में कहा, "सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और सभी सहसरकार्यवाह और अखिल भारतीय कार्यविभाग प्रमुख बैठक में मौजूद रहेंगे।"
- नयी दिल्ली. देश के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा इस साल आयोजित किये जाने वाले 'ऐट होम' समारोह में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है, जिनमें महाराष्ट्र का लावणी और छत्तीसगढ़ का गेड़ी नृत्य शामिल हैं। लावणी महाराष्ट्र की सबसे मशहूर लोक परंपराओं में से एक है, जिसमें संगीत, कविता, नृत्य और रंगमंच का मेल होता है और इसके जरिए बहादुरी, भक्ति और इंसानी भावनाओं को दिखाया जाता है। छत्तीसगढ़ का गेड़ी नृत्य ऊंचे बांस के डंडों पर किया जाता है, जिसमें जबरदस्त संतुलन, फुर्ती और कौशल का प्रदर्शन होता है। राष्ट्रपति की उप प्रेस सचिव नाविका गुप्ता ने सोमवार को कहा, "भारत की आजादी की 80वीं सालगिरह पर, 15 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन में स्वतंत्रता दिवस का रिसेप्शन आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरण की देखभाल की उसकी स्थायी परंपराओं के जश्न के तौर पर आयोजित किया जा रहा है।" उन्होंने कहा कि इस साल का मुख्य विषय महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और गोवा राज्यों की पर्यावरण के अनुकूल जीवन-शैली और जीवित कला परंपराओं पर केंद्रित है, जो समुदायों, संस्कृति और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है। गुप्ता ने कहा, "रिसेप्शन के दौरान चार राज्यों के लगभग 35 कलाकार कई तरह के लोक-नृत्य और पारंपरिक संगीत प्रस्तुत करेंगे।"
- देहरादून. दुनिया की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक कांवड़ यात्रा में इस वर्ष श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ी है जहां सोमवार शाम तक करीब 4.43 करोड़ कांवड़िए हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने घरों को लौट चुके हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अकेले सोमवार को 63.60 लाख कांवड़ियों ने हरिद्वार पहुंचकर गंगा जल लिया।सावन माह की शुरूआत के साथ 30 जुलाई को इस वर्ष की कांवड़ यात्रा की शुरूआत हुई थी और इसका समापन 11 अगस्त को होगा। हर साल करीब 15 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से शिवभक्त हरिद्वार पहुंचते हैं और गंगाजल लेकर अपने-अपने घरों को लौटते हैं जहां शिवरात्रि के दिन वे शिवालयों में भगवान शिव का गंगा जल से अभिषेक करते हैं। कांवड़िए पैदल यात्रा करते हुए सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करते हैं और पवित्र जल को सजाई गई कांवड़ में लेकर जाते हैं। यात्रा के विशाल स्वरूप को देखते हुए उत्तराखंड प्रशासन और पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए हैं। कांवड़ मार्गों पर सुरक्षा, चिकित्सा, पेयजल, विश्राम स्थलों और यातायात प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की गई है। हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में कांवड़ियों की आवाजाही को सामान्य यातायात से अलग रखने के लिए बड़े पैमाने पर यातायात के मार्ग में परिवर्तन और प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
- कोलकाता. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उन्हें पिछले कुछ महीनों में कई धमकी भरे पत्र मिले हैं, जिनमें से एक पत्र में उन्हें और उनकी पत्नी डोना गांगुली को जान से मारने की चेतावनी दी गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने यह पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है कि ये पत्र किसने भेजे थे।अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (सीएबी) के अध्यक्ष गांगुली की ओर से दक्षिण कोलकाता के ठाकुरपुकुर पुलिस थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। यह कदम सोमवार को गांगुली के कार्यालय में एक नया धमकी भरा पत्र मिलने के बाद उठाया गया। ये पत्र कथित तौर पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष के नाम पर पिछले छह महीनों से आ रहे थे, लेकिन शुरुआत में इन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया था। पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी के मैनेजर द्वारा दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत के अनुसार, सोमवार को उनके कार्यालय में दो पत्र मिले, जिनमें गांगुली और उनकी पत्नी को जान से मारने तथा उनके करीबी लोगों को नुकसान पहुंचाने की सीधी धमकी दी गई थी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ता पत्रों की सामग्री की समीक्षा कर रहे हैं और भेजने वाले की पहचान तथा उसके मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि ये पत्र कथित तौर पर उत्तर 24 परगना जिले के बेलघरिया के एक व्यक्ति द्वारा कूरियर सेवा के जरिए भेजे गए हैं।
- नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 16 मुकदमे लंबित होने और लौटकर नहीं आने की दलीलों को दरकिनार करते हुए सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को आंखों के उपचार के वास्ते तीन हफ्ते के लिए विदेश जाने की अनुमति दे दी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने टिप्पणी की कि हर व्यक्ति को अपने इलाज के लिए चिकित्सक को चुनने का अधिकार है। साथ ही बनर्जी को निर्देश दिया कि वह विदेश में ठहरने के स्थान सहित अपनी यात्रा का पूरा ब्योरा जांच एजेंसी को दें। तृणमूल सांसद ने कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा पांच अगस्त को दिये गए उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष रखने के लिए पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि बनर्जी के खिलाफ 16 मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा, ''हमें आशंका है कि वह शायद वापस न लौटे।'' पीठ ने कहा, ''प्रत्येक व्यक्ति को विदेश जाने का अधिकार है। हर व्यक्ति को अपने इलाज के लिए चिकित्सक को चुनने का अधिकार है।'' बनर्जी का पक्ष रखने के लिए पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने राजू की दलीलों का विरोध किया और कहा कि तृणमूल नेता एक सांसद हैं और उनका परिवार भारत में है। उन्होंने कहा कि बनर्जी के खिलाफ अधिकतर मामले पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के बाद दर्ज किए गए हैं।अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि उन्हें बनर्जी के विदेश में इलाज कराने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन चिकित्सा जांच के बाद यह तय करना होगा कि उन्हें विदेश जाने की जरूरत है या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर बनर्जी चिकित्सा जांच कराने को तैयार नहीं हैं, तो उनके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि किसी बीमारी या स्थिति के लिए इलाज कराना कभी-कभी निजता के अधिकार का हिस्सा होता है।न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बनर्जी की अपील मंजूर कर ली और उन्हें तीन हफ्ते के लिए विदेश जाने की अनुमति दे दी। उच्च न्यायालय ने पांच अगस्त को बनर्जी की विदेश यात्रा की अनुमति संबंधी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने इस तथ्य पर संज्ञान लिया था कि वह अपनी चिकित्सा स्थिति की जांच के लिए अगले दिन सरकारी एसएसकेएम अस्पताल के चिकित्सा बोर्ड के समक्ष जाने को इच्छुक नहीं थे। उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर बनर्जी चिकित्सा बोर्ड के सामने पेश हुए होते, तो चिकित्सकों की राय के आधार पर अदालत यह तय कर सकता थी कि उन्हें इलाज के लिए विदेश जाने की ज़रूरत है या नहीं। उच्चतम न्यायालय ने तीन अगस्त को कलकत्ता उच्च न्यायालय से कहा था कि वह विदेश यात्रा की अनुमति मांगने वाली बनर्जी की याचिका पर एक हफ्ते के भीतर सुनवाई करे।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि सरकार सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या शून्य पर लाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए अधिक दुर्घटनाओं वाले 100 जिलों की पहचान कर वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की संख्या आधी करना है। 'आईसीआईसीआई लोम्बार्ड' के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना और यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा, ''सड़क दुर्घटनाओं में मौतों को शून्य पर लाने के लिए काम किया जा रहा है। अधिक दुर्घटनाओं वाले 100 जिलों की पहचान की गई है और दुर्घटना संभावित स्थलों पर तत्काल सुधार के उपाय किए जा रहे हैं।'' सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में देश में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 5.3 प्रतिशत बढ़कर 5.13 लाख से अधिक हो गई। इन दुर्घटनाओं में 1,83,382 लोगों की मौत हुई, यानी औसतन हर घंटे 21 लोगों की जान गई। इस दौरान देश में हर घंटे औसतन 59 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। गडकरी ने कहा कि वर्ष 2026 की पहली छमाही में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस विभागों ने देशभर में 2,85,770 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक मौतें दोपहिया वाहनों से जुड़े मामलों में हुईं। इसके बाद कार, टैक्सी, वैन और अन्य हल्के मोटर वाहनों तथा ट्रकों का स्थान रहा। गडकरी ने कहा कि यदि दोपहिया वाहन चालक हेलमेट पहनना सुनिश्चित करें तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि सड़क उपयोगकर्ताओं की श्रेणी में कुल मौतों में दोपहिया वाहन चालकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक 46.2 प्रतिशत रही। इसके बाद पैदल यात्रियों की हिस्सेदारी 20.6 प्रतिशत और कार, टैक्सी, वैन तथा अन्य हल्के मोटर वाहनों में यात्रा करने वालों की 12.4 प्रतिशत रही। गडकरी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं से देश को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग तीन प्रतिशत आर्थिक नुकसान होता है। इससे निपटने के लिए सड़क अभियांत्रिकी, सुरक्षित वाहन निर्माण और यातायात नियमों के कड़े अनुपालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने सड़क परिवहन मंत्री का पद संभाला था तब भारतीय वाहन उद्योग का आकार 14 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अमेरिका का वाहन उद्योग 78 लाख करोड़ रुपये, चीन का 47 लाख करोड़ रुपये और भारत का 22 लाख करोड़ रुपये का है। गडकरी ने कहा कि देश में वाहन उद्योग ने अब तक 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार दिया है और यह माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में केंद्र और राज्य सरकारों को सबसे अधिक राजस्व देने वाले क्षेत्रों में शामिल है।
- नयी दिल्ली. इतिहास में दस अगस्त का दिन कई घटनाओं के साथ दर्ज है। इनमें एक दिलचस्प घटना यह है कि बच्चों का चहेता आभासी चरित्र स्पाइडरमैन पहली बार कॉमिक बुक में नजर आया। इसे बच्चों ने इतना पसंद किया कि बाद में यह कार्टून और फिर फिल्मों के पर्दे पर भी नजर आया। गरीबों और मजलूमों का मसीहा स्पाइडरमैन लंबे वक्त तक दुनियाभर में बच्चों का पसंदीदा चरित्र रहा। देश-दुनिया के इतिहास में दस अगस्त की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:- 1809 : इक्वाडोर को स्पेन से आजादी मिली।1822 : सीरिया में विनाशकारी भूकंप से 20 हजार लोगों की मौत।1831: कैरेबियाई द्वीप समूह बारबाडोस में चक्रवाती तूफान से डेढ़ हजार लोगों की मौत।1894 : देश के चौथे राष्ट्रपति वी वी गिरि का जन्म।1966 : अमेरिका ने अंतरिक्ष में रॉकेट उतारने की लिए उपयुक्त स्थान का चित्र लेने पहला अंतरिक्ष यान भेजा। 1962 : आज ही के दिन बच्चों का चहेता स्पाइडरमैन कॉमिक बुक अमेजिंग फैंटेसी में नजर आया।1979 : उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 प्रक्षेपित।2000 : पड़ोसी देश श्रीलंका में सिरिमावो भंडारनायके का प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा, आर. विक्रमनायके नये प्रधानमंत्री नियुक्त। 2000 : आत्मनिर्णय के अधिकार पर जिनेवा में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।2001 : रूस ने अमेरिकी प्रक्षेपास्त्र प्रणाली को सशर्त समर्थन दिया।2004 : संयुक्त राष्ट्र और सूडान के बीच दारफुर कार्ययोजना पर हस्ताक्षर।2006 : तमिल विद्रोहियों पर फ़ौजी कार्रवाई में श्रीलंका में 50 नागरिक मारे गये।2008 : चेन्नई के एक लैब में एंटी एड्स वैक्सीन का सफल परीक्षण किया गया।2022: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा नीत राजग से नाता तोड़कर प्रदेश में 'महागठबंधन' की सरकार के गठन के तहत मुख्यमंत्री के तौर पर रिकॉर्ड आठवीं बार शपथ ली। 2024: गाजा के एक स्कूल में इजराइली हवाई हमले में कम से कम 80 लोगों की मौत।2025: तुर्किये में 6.1 तीव्रता का भूकंप, कई इमारतें ढही गईं।
- नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को लोगों से अपील की कि वे अपने घरों, प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर राष्ट्रध्वज फहराकर बड़ी संख्या में 'हर घर तिरंगा' अभियान में शामिल हों। पार्टी ने कहा कि यह पहल देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करेगी। भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अलग-अलग पोस्ट के माध्यम से लोगों से नौ से 17 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान में भाग लेने और तिरंगे को हर घर व हर दिल का हिस्सा बनाने की अपील की। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि तिरंगा भारत के गौरव, एकता और आजादी के लिए दिए गए बलिदानों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह हर भारतीय को देश की सेवा में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करता है।नवीन ने कहा, "तिरंगा हमारे गौरव, एकता और आजादी के लिए दिए गए बलिदानों का प्रतीक है, जो हर भारतीय को देश की सेवा में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करता है।" उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में 'हर घर तिरंगा' अभियान हर व्यक्ति में देशभक्ति की भावना जगाने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है।" केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने लोगों से अपील की कि वे तिरंगे को हर घर और हर दिल का हिस्सा बनाएं।उन्होंने कहा, "इस स्वतंत्रता दिवस पर आइए, हम तिरंगे को हर घर और हर दिल का हिस्सा बनाएं। 'हर घर तिरंगा' अभियान से जुड़ें, अपने घर पर तिरंगा फहराएं।" केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि तिरंगा भारत के गौरव व वैभव का प्रतीक बनना चाहिए और हर घर की पहचान होना चाहिए। गोयल ने कहा, "हर घर तिरंगा, हर दिल तिरंगा... आइए, राष्ट्रगीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर 'हर घर तिरंगा 2026' अभियान से जुड़ें और देशभक्ति के इस उत्सव का जश्न मनाएं।" भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने लोगों से अपील की कि वे 9 से 17 अगस्त तक चलाए जा रहे 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत अपने घरों, प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराएं। उन्होंने कहा, "इसके साथ सेल्फी लें और हर घर तिरंगा की वेबसाइट पर अपलोड करें।
- नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक राहुल नवीन का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है और यह 13 अगस्त से प्रभावी होगा। एक सरकारी आदेश में यह जानकारी दी गई। भारतीय राजस्व सेवा के आयकर कैडर के 1993 बैच के अधिकारी नवीन(59)धनशोधन रोधी संघीय एजेंसी का 14 अगस्त 2024 से पूर्णकालिक निदेशक के तौर पर कार्य कर रहे हैं। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी)ने शनिवार को जारी आदेश में नवीन के ईडी के निदेशक के तौर पर कार्यकाल को 13 अगस्त 2026 से एक साल यानी 13 अगस्त, 2027 तक बढ़ाने की मंज़ूरी दी। इसमें उनके सेवानिवृत्ति की तारीख (31 जुलाई, 2027) के बाद भी सेवा का विस्तार शामिल है, या फिर अगले आदेश तक इनमें से जो भी पहले हो का विस्तार भी शामिल है। नियमों के अनुसार, किसी अधिकारी को दो साल के कार्यकाल के लिए ईडी का निदेशक नियुक्त किया जा सकता है, जिसके बाद उन्हें एक-एक साल के लिए तीन बार सेवा विस्तार दिया जा सकता है। सितंबर 2023 में, नवीन को एजेंसी का कार्यवाहक निदेशक बनाया गया था।नवीन के कार्यकाल के दौरान, ईडी ने कई चर्चित मामलों की जांच शुरू कीं, जिनमें राजनीतिक परामर्श कंपनी आई-पैक, रिलायंस अनिल अंबानी समूह और कई ऑनलाइन मनी गेमिंग कंपनियों से जुड़ी जांच शामिल हैं। उनके कार्यकाल में ईडी ने घर खरीदारों के साथ रियल एस्टेट की बड़ी कंपनियों द्वारा की गई धोखाधड़ी के कई मामलों पर संज्ञान लिया है। एजेंसी ने धनशोधन रोधी कानून के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करके पीड़ितों को करोड़ों रुपये की संपत्ति वापस दिलाई। नवीन ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-कानपुर से बीटेक और एमटेक और मेलबर्न की स्विनबर्न यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी से एमबीए किया है। उन्होंने प्रत्यक्ष कर से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कराधान और अंतरण प्रक्रिया के कई मुद्दों पर किताबें और पत्रिकाओं में लेख भी लिखे हैं।
- अयोध्या. राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति ने आगामी सावन झूला उत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। इसके तहत दर्शन का समय बढ़ाने, संतों के लिए विशेष व्यवस्था करने और पुजारियों की वेशभूषा में बदलाव समेत कई निर्णय लिए गए हैं। समिति के सदस्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने रविवार को बताया कि शृंगार आरती के बाद रामलला और उनके तीनों भाइयों को झूले पर विराजमान किया जाएगा। श्रद्धालुओं को पूरे दिन दर्शन की अनुमति होगी, हालांकि दोपहर के भोग के समय कुछ देर के लिए दर्शन बंद रहेगा। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त से 28 अगस्त तक प्रतिदिन शाम को दो से तीन घंटे के लिए विशेष झूलनोत्सव और दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद रामलला की छोटी प्रतिमा को पालकी में विराजमान कर पारंपरिक उत्सव के लिए कुबेर टीला ले जाया जाएगा और बाद में वापस मंदिर लाया जाएगा। समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि पुजारी रामानंद परंपरा के अनुसार वेशभूषा और श्रृंगार का पालन करेंगे। शरण ने बताया कि उत्सव के दौरान प्रतिदिन भगवान को पूरी, सब्जी, खीर और मालपुआ का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संतों और साधु-संतों के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए उन्हें एक दिन पहले अपनी जानकारी देनी होगी। उन्होंने बताया कि अयोध्या के निवासियों और संतों के लिए नियमित दर्शन पास भी जारी किए जाएंगे और दर्शन की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। राम मंदिर परिसर में हुई इस बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि, ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के प्रतिनिधि कमल नयन दास, ट्रस्टी जिनेंद्र दास, विश्व प्रसन्न तीर्थ, रामानंद दास, धार्मिक समिति के सदस्य डॉ. मिथिलेश नंदिनी शरण और समिति के अन्य सदस्य शामिल हुए।
- माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से पैदल लौट रहे बागपत के दो भाईबागपत. उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के चिरचिटा गांव के दो भाई हरिद्वार से करीब 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर वापस लौट रहे हैं। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। माता-पिता के प्रति सेवा और सम्मान के इस अनोखे भाव को देखकर लोग और राहगीर दोनों भाइयों की सराहना कर रहे हैं और उन्हें 'कलयुग का श्रवण कुमार' बता रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, चिरचिटा गांव निवासी संजीव कुमार और अनिल कुमार हरिद्वार गए थे। वहां उन्होंने हर की पौड़ी से गंगाजल लिया और कांवड़ की दोनों टोकरियों में अपने पिता वेदराम और मां राजेंद्र को बैठाकर बागपत के लिए पैदल यात्रा शुरू की। दोनों भाई बारी-बारी से अपने कंधों पर कांवड़ उठाकर करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं। रास्ते में श्रद्धालु उनकी कांवड़ को देखकर रुक जाते हैं और दोनों भाइयों की सेवा भावना की प्रशंसा करते हैं। दोनों भाइयों ने कहा, ''हमने भगवान से कोई विशेष वरदान नहीं मांगा है। हमारे लिए माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा कर्तव्य और तीर्थ यात्रा है।'' उन्होंने कहा कि जीवन में सच्चा आशीर्वाद माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा करने से मिलता है।दोनों भाइयों ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा करना बेहद जरूरी है।
- गोरखपुर. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर नगर निगम (जीएमसी) ने आवारा व बेसहारा कुत्तों की 'माइक्रोचिपिंग' के लिए एजेंसी के चयन को लेकर चौथी बार निविदा जारी की है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। पिछले छह महीनों में तीन बार निविदा जारी करने के बावजूद किसी कंपनी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई थी। नगर निकाय को उम्मीद है कि इस परियोजना के लिए 14 अगस्त तक एजेंसी का चयन कर लिया जाएगा।यह परियोजना पशु प्रबंधन और कल्याण से संबंधित उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में शुरू की जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रत्येक आवारा कुत्ते के शरीर में एक माइक्रोचिप लगाई जाएगी, जिसमें एक विशिष्ट पहचान संख्या होगी। निकाय ने बताया कि यह चिप एक डिजिटल डेटाबेस से जुड़ी होगी, जिसमें कुत्ते की नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण, स्वास्थ्य स्थिति और व्यवहार संबंधी इतिहास की जानकारी दर्ज होगी। अधिकारियों ने बताया कि इस डेटाबेस से नगर निगम को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन कुत्तों की नसबंदी या टीकाकरण पहले ही हो चुका है। उन्होंने बताया कि इससे एक ही प्रक्रिया दोबारा किए जाने से बचा जा सकेगा और पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रमों की निगरानी बेहतर होगी। अधिकारियों के मुताबिक, इसमें कुत्तों के आक्रामक व्यवहार से जुड़ी घटनाओं का भी रिकॉर्ड रखा जाएगा और इससे अधिकारियों को उन इलाकों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां कुत्तों के हमले अधिक होते हैं तथा वहां लक्षित उपाय किए जा सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रणाली से नगर निगम को टीकाकरण, उपचार, भोजन उपलब्ध कराने और आश्रय गृहों के प्रबंधन की योजना बनाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि माइक्रोचिप के रिकॉर्ड के जरिए उन पालतू कुत्तों के मालिकों का भी पता लगाया जा सकेगा, जिन्हें सड़क पर छोड़ दिया गया है। नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी रॉबिन चंद्रा ने बताया कि डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली से आवारा कुत्तों के स्वास्थ्य, संख्या और व्यवहार का व्यापक रिकॉर्ड रखा जा सकेगा, जिससे उनका प्रबंधन अधिक व्यवस्थित अधिक प्रभावी हो जाएगा।
- हरदा .मध्यप्रदेश के हरदा रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी के दौरान रविवार को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के एक कॉन्स्टेबल की कथित तौर पर प्लेटफार्म पर फिसलने के बाद ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी यह जानकारी दी। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) चौकी प्रभारी कमलेश सिंह रघुवंशी ने बताया कि आरपीएफ का कॉन्स्टेबल लोकेश कुमार (30) प्लेटफार्म क्रमांक संख्या-दो पर तैनात था तभी यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि कुमार का अचानक से प्लेटफार्म पर पैर फिसल गया और वह वहां से गुजर रही रेलगाड़ी (20103 संत कबीर धाम एक्सप्रेस) की चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। रघुवंशी ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी है और शव को जिला अस्पताल की शवगृह में रखवा दिया गया है। उन्होंने कहा कि मृतक के परिजनों के आने पर शव का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। जीआरपी के मुताबिक मृतक लोकेश कुमार राजस्थान के भरतपुर जिले के रहने वाले थे और वे हरदा में पिछले तीन वर्षों से पदस्थ थे।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को शिक्षा सचिव समेत वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करने, परीक्षा प्रक्रियाओं को सुचारू बनाने और एजेंसी को छात्रों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने के उपायों पर चर्चा की गई। जोशी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी से जुड़े मामलों पर शिक्षा मंत्रालय के सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।'' उन्होंने कहा, ''महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई, जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। साथ ही संस्थागत व्यवस्थाओं को और मजबूत करने, प्रक्रियाओं को सुचारू बनाने और छात्रों के प्रति अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आगे उठाए जाने वाले कदमों पर विचार-विमर्श किया गया।'' मंत्री ने कहा, ''हमारा ध्यान एक मजबूत, पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था तैयार करने पर बना हुआ है, जो हर छात्र की आकांक्षाओं को पूरा कर सके।'' धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफा देने के बाद 26 जुलाई को जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया था। नीट पेपर लीक विवाद पर देशभर में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बाद प्रधान ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था।
- इंदौर/ देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में पिछले दो साल के दौरान एक ही जगह बड़े पैमाने पर पौधे रोपे जाने के बाद उनके संरक्षण के जरिये 13.10 लाख पेड़ तैयार करने का रिकॉर्ड बनाया गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधि डॉ. एके जैन ने रविवार को संवाददाताओं को बताया, "हमने शहर के रेवती रेंज क्षेत्र में पेड़ों की गिनती की है। बीते दो साल में पौधारोपण के बाद इस जगह 13,10,012 पेड़ जीवित पाए गए हैं। हमने इसे एक ही स्थान पर सबसे ज्यादा पौधे रोपे जाने के बाद उन्हें संरक्षित करने के रिकॉर्ड के तौर पर मान्यता दी है।" पहाड़ी और पठारी भू-भाग वाली रेवती रेंज में वर्ष 2024 के दौरान 13 से 14 जुलाई 2024 के बीच 12,41,017 पौधे लगाए गए थे और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इसे एक टीम द्वारा 24 घंटों में सबसे ज्यादा पौधे लगाने के विश्व कीर्तिमान के तौर पर मान्यता दी थी। अधिकारियों के मुताबिक पिछले दो वर्षों से रेवती रेंज में मानसून के मौसम में पौधारोपण जारी है जिससे इसमें तैयार वृक्षों की संख्या बढ़कर 13.10 लाख हो गई है। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधियों ने रेवती रेंज में एक कार्यक्रम में राज्य के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव को कीर्तिमान का प्रमाणपत्र सौंपा। यह प्रमाण पत्र इंदौर नगर निगम के नाम जारी किया गया जिसने रेवती रेंज में बड़े पैमाने पर पौधे रोपे जाने के बाद इनकी सुरक्षा, सिंचाई और निगरानी की जिम्मेदारी ली। अधिकारियों के मुताबिक रेवती रेंज में रविवार को करीब 51,000 नये पौधे लगाए गए। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष पौधारोपण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने कहा,''जन भागीदारी से लगाए गए पौधों के संरक्षण के कारण रेवती रेंज की पथरीली जमीन हरियाली से भर गई है।'' संतोष ने कहा कि इंदौर स्वच्छता के क्षेत्र में देश के सामने उदाहरण पेश कर चुका है और अब हरित शहर बनने की ओर आगे बढ़ रहा है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि शहर में मानसून के जारी मौसम में 21 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि सतत पौधारोपण के जरिये शहर के हरित क्षेत्र को नौ प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने की कोशिश की जा रही है।
- बेंगलुरु. अपने दूसरे स्थापना दिवस के करीब पहुंच चुका भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) का अत्याधुनिक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई)' पूर्व सचिव जय शाह के नेतृत्व में बोर्ड अधिकारियों के युद्धस्तर पर किए गए प्रयासों का नतीजा है। मौजूदा सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के वर्तमान प्रमुख शाह ने इस परियोजना को समय पर पूरा कराने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए और सभी अधिकारियों को एकजुट किया। बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में चुनिंदा मीडिया से बातचीत में सैकिया ने कहा, ''उन्होंने बीसीसीआई की शीर्ष परिषद के सभी सदस्यों को साथ लिया और दृढ़ निर्णय किया कि इस परिसर का निर्माण युद्धस्तर पर किया जाना चाहिए। हमें राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी की पुरानी और अस्थायी व्यवस्था से आगे बढ़ने की जरूरत थी।'' सैकिया ने बताया, ''काम शुरू करने के लिए जरूरी कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए शाह कई बार व्यक्तिगत रूप से यहां आए।'' उन्होंने कहा, ''जब कोई बड़ी परियोजना शुरू करनी होती है तो कई नियमों का पालन करना पड़ता है। इसके अलावा जमीन को नियमित कराना भी जरूरी था। इन सभी कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए जय कई मौकों पर खुद यहां आए।'' सैकिया ने कहा, ''यह सबसे बड़ी चुनौती थी, क्योंकि 40 एकड़ की यह जमीन लंबे समय से खाली पड़ी थी और कई लोग इसे वापस लेना चाहते थे। इसलिए 14 फरवरी 2022 को काम शुरू होने से पहले हर चीज को मंजूरी दिलाना जरूरी था।'' उन्होंने कहा, '' बदलाव का दौर चुनौतीपूर्ण था। उस समय रोजर बिन्नी अध्यक्ष थे और हमने वीवीएस लक्ष्मण की भी मदद ली, जो उस समय इस पूरी योजना का हिस्सा बन चुके थे।'' लक्ष्मण ने भी उस लंबे सफर को याद किया, जिसके लिए वह हैदराबाद से बेंगलुरु आए थे। उन्होंने बताया कि 2021 में जय शाह और तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने उनसे संपर्क किया था। उस समय राहुल द्रविड़ भारतीय टीम के मुख्य कोच बनने जा रहे थे और बोर्ड राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में निरंतरता बनाए रखना चाहता था। लक्ष्मण ने कहा, ''मेरे लिए यह कठिन फैसला था। लेकिन एक क्रिकेटर के तौर पर मेरा हमेशा मानना रहा है कि जिन पूर्व खिलाड़ियों को इस महान खेल से लाभ मिला है, उनकी जिम्मेदारी है कि वे खेल के लिए अपना योगदान वापस दें। इसी सोच के साथ मैं दिसंबर 2021 में बेंगलुरु आ गया।'' पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने पूरी परियोजना के दौरान शाह के मार्गदर्शन को याद करते हुए कहा, ''करीब दो साल के भीतर पूरा बुनियादी ढांचा तैयार होकर काम करने लगा। इसका बड़ा श्रेय जय शाह को जाता है। वह उस समय बीसीसीआई सचिव थे और मैंने खुद देखा कि वह आर्किटेक्ट और एलएंडटी की टीम के साथ होने वाली हमारी विभिन्न बैठकों में कितनी दिलचस्पी लेते थे। उनका प्रयास रहता था कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के हर पहलू का ध्यान रखा जाए।'' लक्ष्मण ने कहा, ''यह देखकर अच्छा लगता है कि जो दृष्टिकोण था, उसे हकीकत में बदला गया। मेरा मानना है कि सभी नेतृत्व करने वालों के पास विजन होता है, लेकिन वह विजन तभी सार्थक होता है जब उसे वास्तविकता में बदला जाए। हमने नवंबर 2024 में उस विजन को वास्तविकता के रूप में देखा।''
- नयी दिल्ली. दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुये निर्देश दिया कि 2021 में उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटना मारे गए एक दंपति के पांच बच्चों को 44 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा दिया जाये। पीठासीन अधिकारी अपर्णा स्वामी ने 'इफ़्को तोक्यो जनरल इंश्योरेंस' कंपनी को निर्देश दिया कि याचिकाएं दायर करने की तारीख से 7.5 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ कुल 44.09 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। न्यायाधिकरण ने 30 जुलाई के अपने आदेश में कहा, ''प्रतिवादी संख्या-एक दुर्घटना के समय लापरवाही और तेज गति से वाहन चला रहा था। दुर्घटनाग्रस्त वाहन की 'मेकेनिकल इंस्पेक्शन रिपोर्ट' भी याचिकाकर्ताओं के बयान की पुष्टि करती है।'' न्यायाधिकरण ने बृजनंदन और उनकी पत्नी राजकुमारी की मृत्यु के लिए क्रमशः 19.86 लाख रुपये और 24.23 लाख रुपये के अलग-अलग मुआवजे का आदेश दिया। दावा याचिकाओं के अनुसार, यह दंपति दो जुलाई 2021 को बुलंदशहर जिले में मोटरसाइकिल से जा रहे थे तभी एक कार ने तेज गति से उनकी मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मार दी जिससे वे सड़क पर गिर गए और कार उन्हें कुचलते हुए निकल गई। अस्पताल में दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। वाहन चालक, मालिक और बीमा कंपनी ने इस दावे का विरोध किया था।बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन का पंजीकरण नंबर शुरुआत में प्राथमिकी और जांच रिकॉर्ड में दर्ज नहीं था। इस तर्क को खारिज करते हुए न्यायाधिकरण ने कहा कि जांच में बाद में वाहन का पता लगा लिया गया था और 'मेकेनिकल इंस्पेक्शन रिपोर्ट', पंजीकरण प्रमाणपत्र व बीमा पॉलिसी के माध्यम से दुर्घटना में उसकी संलिप्तता साबित हुई। अदालत ने एक प्रत्यक्षदर्शी की गवाही पर भरोसेमंद माना जिसने कहा कि उसने कार को अपनी मोटरसाइकिल से आगे निकलते, दंपति की मोटरसाइकिल को पीछे से जोरदार टक्कर मारने के बाद मौके से फरार होते देखा था। न्यायाधिकरण ने माना कि दुर्घटना चालक की लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने के कारण हुई। उसने कहा कि जांच में मामूली खामियां विश्वसनीय मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को खारिज नहीं कर सकतीं।
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पुडुचेरी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को पुडुचेरी पुलिस को 'राष्ट्रपति ध्वज' (प्रेसिडेंट्स कलर) प्रदान किया। उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में बल की प्रतिबद्धता और समर्पण की सराहना की। शाह ने अंग्रेजों के जमाने के रद्द किए गए आपराधिक कानूनों का जिक्र किया, जिनमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) भी शामिल है। उन्होंने कहा कि आईपीसी की जगह लागू की गई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) का उद्देश्य नागरिकों के लिए न्याय सुनिश्चित करना है। पुडुचेरी के पुलिस बल को राष्ट्रपति ध्वज प्रदान करने के बाद अपने संबोधन में शाह ने कहा कि नये आपराधिक कानून तीन स्तंभों 'प्रौद्योगिकी, समयसीमा और विश्वास' पर आधारित हैं। पुडुचेरी के विकास के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धता रेखांकित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दृष्टिकोण इस केंद्र-शासित प्रदेश को मजबूत करना रहा है। उन्होंने कहा कि पुडुचेरी को मजबूत बनाने के लिए कई विकास योजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें पिछले नौ वर्षों में 39,000 करोड़ रुपये का निवेश और हजारों करोड़ रुपये की लागत से सड़कों के विस्तार से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। शाह ने कहा कि 1950 से 2014 के बीच पुडुचेरी को केंद्र की ओर से करीब 3,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जबकि 2014 से 2026 के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने केंद्र-शासित प्रदेश को 13,762 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी, उज्ज्वला और प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और शौचालयों के निर्माण जैसी विभिन्न सरकारी पहलों से पुडुचेरी के सात लाख नागरिकों को लाभ मिला है। शाह ने कहा, ''पुडुचेरी पुलिस को निशान (राष्ट्रपति ध्वज) मिला है। इस स्वर्णिम अवसर पर मैं प्रधानमंत्री मोदी की ओर से आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि सरकार केंद्र-शासित प्रदेश के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।'' उन्होंने पुडुचेरी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल के समर्पण और प्रतिबद्धता की सराहना की। शाह ने कहा कि भौगोलिक रूप से पुडुचेरी दक्षिण भारत के अलग-अलग राज्यों में फैला हुआ है और इसके कुछ हिस्से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश के यानम और केरल के माहे में स्थित हैं। उन्होंने कहा, ''राष्ट्रपति ध्वज मिलना किसी भी पुलिस बल के लिए सबसे सम्मानजनक पल होता है। पुडुचेरी पुलिस की संख्या करीब 5,000 है और वह केंद्र-शासित प्रदेश की सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा बनाए रख रही है। आप यह काम किसी फाइल या आदेश के कारण नहीं, बल्कि अपनी प्रतिबद्धता और समर्पण की भावना से करते हैं।'' गृह मंत्री ने कोविड-19 महामारी के चुनौतीपूर्ण दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय वह राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों की स्थिति की समीक्षा किया करते थे। उन्होंने कहा कि पुडुचेरी पुलिस ने लोगों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सेवा के लिए अतिरिक्त प्रयास किए। शाह ने गोरिमेडु स्थित पुडुचेरी सशस्त्र पुलिस मैदान में आयोजित आधिकारिक समारोह में बल के 'एनसाइन ऑफीसर' को राष्ट्रपति ध्वज प्रदान किया। इस मौके पर पुलिस महानिदेशक शालिनी सिंह भी मौजूद थीं। उपराज्यपाल के कैलाशनाथन, मुख्यमंत्री एन रंगासामी और गृह मंत्री ए नमस्सिवायम समेत कई गणमान्य लोग भी समारोह में उपस्थित थे। पुडुचेरी और वहां के लोगों की प्रशंसा करते हुए शाह ने कहा कि करीब 230 वर्षों तक फ्रांसीसी शासन के अधीन रहने के बावजूद पुडुचेरी ने अपनी ''भारतीयता और आध्यात्मिक ऊर्जा'' को बनाए रखा है। उन्होंने इस आध्यात्मिक ऊर्जा का श्रेय ऑरबिंदों और मदर को दिया तथा कहा कि अब यह ऊर्जा पूरे देश में फैल चुकी है। शाह ने कहा, ''पुडुचेरी दक्षिण भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का प्रतीक है।''
मुख्यमंत्री रंगासामी ने अपने संबोधन में केंद्र-शासित प्रदेश प्रशासन को लगातार सहयोग देने और उसके लिए धनराशि मंजूर करने को लेकर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्रालय का आभार जताया। इस अवसर पर पुलिसकर्मियों का अभिनंदन करते हुए रंगासामी ने कहा कि केंद्र-शासित प्रदेश की पुलिस ने अपराधों की रोकथाम और उनका पता लगाने के साथ-साथ दोषसिद्धि का अच्छा रिकॉर्ड कायम करने में भी उपलब्धियां हासिल की हैं। रंगासामी ने कहा कि पुडुचेरी पुलिस को राष्ट्रपति ध्वज प्रदान किया जाना ''वर्दीधारी जवानों की ईमानदारी, समर्पण और अनुशासन को उचित मान्यता देना'' है। उपराज्यपाल कैलाशनाथन ने कहा कि केंद्र ने इंडिया रिजर्व बटालियन (आईआरबीएन) की एक और इकाई स्थापित करने को मंजूरी दी है। इस दूसरी इकाई में करीब 1,000 युवाओं को भर्ती किया जाएगा। उन्होंने पुलिस से प्रधानमंत्री की अपील के अनुरूप पुडुचेरी को नशामुक्त बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। पुलिस महानिदेशक शालिनी सिंह ने साइबर अपराध और कानून-व्यवस्था समेत पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं के कामकाज और उपलब्धियों का विवरण दिया। उन्होंने कहा, ''हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शांतिपूर्ण माहौल के कारण पुडुचेरी को यहां के लोगों और पर्यटकों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान के रूप में पहचाना जाए। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों से पदक जीतकर लौटे भारतीय खिलाड़ियों से रविवार को मुलाकात की और प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें बधाई दी। मोदी ने 'इंस्टाग्राम' पर खिलाड़ियों से हुई मुलाकात का एक छोटा वीडियो साझा किया। उन्होंने इस मुलाकात को खास बताया और देश का मान बढ़ाने के लिए खिलाड़ियों की प्रशंसा की। बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने खिलाड़ियों के साथ हुई मुलाकात के बारे में ट्वीट भी किया। उन्होंने ने 'एक्स' पर कुछ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, ''मुझे 7, लोक कल्याण मार्ग पर राष्ट्रमंडल खेल 2026 के पदक विजेताओं की मेजबानी करके बहुत प्रसन्नता हुई। उनके खेलों के अनुभवों के बारे में जाना। हर खिलाड़ी ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता कई युवाओं को प्रेरित करेगी। '' इस दौरान खेल मंत्री मनसुख मांडविया भी मौजूद रहे।
प्रधानमंत्री से मिलने वाले खिलाड़ियों में मुक्केबाज साक्षी चौधरी भी शामिल थीं जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं की 51 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। ग्लास्गो में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा और देश ने कुल 39 पदक जीते जिनमें 13 स्वर्ण पदक शामिल थे। साक्षी ने कहा, ''हमारे माननीय प्रधानमंत्री ने राष्ट्रमंडल खेलों के सभी पदक विजेताओं का स्वागत किया और हमें इस बात पर बहुत गर्व महसूस हो रहा है। उनसे मिलकर हमें बहुत अच्छा लगा। वह बहुत विनम्र हैं। खिलाड़ियों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''जो खेलेगा, वो खिलेगा। हमेशा भारत का हौसला बढ़ाइए। '' प्रधानमंत्री ने सभी पदक विजेताओं से बातचीत की और उनके शानदार प्रयासों के लिए उन्हें बधाई दी। भारत की मुक्केबाजी टीम का प्रदर्शन भी बेहद शानदार रहा। भारतीय मुक्केबाजों ने ग्लास्गो खेलों में रिकॉर्ड 10 पदक जीते। साक्षी उन सात भारतीय मुक्केबाजों में शामिल थीं, जिन्होंने स्वर्ण पदक जीता। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2025 के पहलगाम हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में आतंकवादियों के खिलाफ अभियान चला रहे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के लिए सर्दियों के कपड़ों और उपकरणों के लिए एक खास कोष मंजूर किया है। आधिकारिक सूत्रों ने एक न्यूज़ एजेंसी' को बताया कि कुछ सप्ताह पहले अर्द्धसैन्य बल को 4.54 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की गई है। इस धनराशि से करीब 600 जवानों के लिए ठंड से बचाव वाले विशेष कपड़े और उपकरण खरीदे जाएंगे। इनमें पैर को ढकने वाले सुरक्षा आवरण, स्लीपिंग बैग, बर्फीले मौसम के लिए चश्मे, जूते, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित अत्यधिक ठंड वाले मौसम के कपड़े (हिमसुरक्षा ब्रांड), गर्मी रोकने वाली चटाइयां, बैग, दस्ताने, तंबू, थर्मल इनसोल, कंबल और बचाव बैग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से अधिकतर सामान पिछले साल से ही अस्थायी अभियान ठिकानों (टीओबी) पर तैनात जवानों को उपलब्ध कराए जा रहे थे। हालांकि, गृह मंत्रालय ने जुलाई में सीआरपीएफ के उस प्रस्ताव को ''पूर्ण मंजूरी'' दे दी, जिसमें इन वस्तुओं की खरीद का अनुरोध किया गया था। सूत्रों के अनुसार, इन उपकरणों की खरीद का उद्देश्य ऊंचाई वाले इलाकों में लंबे समय तक चलने वाली गश्त, कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने और आतंकवादियों के खिलाफ अभियानों के दौरान जवानों को बेहतर तरीके से तैयार करना है। सूत्रों ने बताया कि इन वस्तुओं की उपयोग अवधि लगभग दो साल होती है और नयी खरीद के लिए जरूरत पड़ने पर धनराशि को बढ़ाया भी जा सकता है। उन्होंने कहा कि 6,000 फुट से अधिक ऊंचाई पर बनाए गए अस्थायी अभियान ठिकानों में सीआरपीएफ के कमांडो तैनात रहते हैं। इन ठिकानों से उन इलाकों में तलाशी और हमले की कार्रवाई शुरू की जाती है, जहां आतंकवादी 'ढोक' (मिट्टी और पत्थर से बनी झोपड़ियों) में छिपे होते हैं। यह पाया गया है कि आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके और दुर्गम पर्वतीय इलाकों का इस्तेमाल मैदानी क्षेत्रों में हिंसा करने से पहले या बाद में छिपने के लिए किया। इसी को देखते हुए अब इन ऊंचाई वाले इलाकों में सीआरपीएफ और सेना के जवानों को तैनात किया गया है। सीआरपीएफ ने जुलाई 2025 में इस तरह का पहला अस्थायी अभियान ठिकाना बनाया था। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, सीआरपीएफ ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के दोनों क्षेत्रों में अब तक 55 टीओबी स्थापित किए हैं। इन टीओबी में करीब 15 से 25 हथियारबंद जवानों की एक टीम तैनात रहती है। यहां जवानों के आराम और पुनः तैयार होने के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सीआरपीएफ के ऐसे ही एक टीओबी का इस्तेमाल सुरक्षा बलों ने जुलाई 2025 में पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार तीन आतंकवादियों को मार गिराने के अभियान के दौरान आधार के रूप में किया था। इस अभियान को 'ऑपरेशन महादेव' नाम दिया गया था। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सेना की तर्ज पर सीआरपीएफ कमांडो के लिए अस्थायी अभियान ठिकाने बनाने का प्रस्ताव वर्ष 2022-23 से ही विचाराधीन था, लेकिन इन्हें अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद सक्रिय रूप से संचालित किया गया।
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नयी दिल्ली. स्वतंत्रता दिवस के 'एट होम' कार्यक्रम के लिए इस वर्ष हस्तनिर्मित निमंत्रण किट तैयार करने वाले 130 शिल्पकारों की टीम में कभी नक्सल प्रभावित रहे छत्तीसगढ़ के करीब 50 कलाकार शामिल हैं। इस कार्यक्रम की मेजबानी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा की जाएगी।
इस निमंत्रण किट में छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की समृद्ध शिल्पकला, परंपराओं व सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया है। राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों और अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) की एक टीम ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप इसकी परिकल्पना की है। यह किट स्थिरता, समावेशिता और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
एनआईडी के निदेशक अशोक मंडल ने बताया, ''निमंत्रण किट करीब 130 लोगों ने तैयार की है, जिनमें छत्तीसगढ़ के कभी वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे बस्तर क्षेत्र के करीब 50 शिल्पकार शामिल हैं। यह समावेशी विकास और आजीविका के अवसरों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।'' उन्होंने बताया कि तीन महीने से अधिक समय तक इन शिल्पकारों ने एनआईडी के शिक्षकों, डिजाइनर और विद्यार्थियों के साथ मिलकर अपनी पारंपरिक व पर्यावरण-अनुकूल शिल्प तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए भारत के राष्ट्रपति की ओर से भेजी जाने वाली इस अनूठी निमंत्रण किट को तैयार किया। मंडल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''पूरी तरह हस्तनिर्मित और पर्यावरण-अनुकूल यह किट भारत की कलात्मक उत्कृष्टता, सतत प्रथाओं और पारंपरिक शिल्पकार समुदायों के सशक्तीकरण का प्रतीक है।'' निमंत्रण किट में छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में पर्यावरण संरक्षण व सतत पर्यावरणीय तौर-तरीकों के प्रेरणादायक उदाहरणों को दर्शाया गया है। ये क्षेत्र पहाड़ियों, घुमावदार नदी प्रवाह और भरपूर हरियाली वाले समृद्ध प्राकृतिक परिदृश्य के लिए जाने जाते हैं। इन राज्यों की जीवंत लोक कला परंपराओं का इस्तेमाल करते हुए तैयार की गई यह निमंत्रण किट समुदायों, रचनात्मकता और संरक्षण के बीच गहरे परस्पर संबंध की झलक प्रस्तुत करती है। मंडल ने बताया कि निमंत्रण किट में छत्तीसगढ़ की ढोकरा ढलाई कला को शामिल किया गया है, जो भारत की सबसे पुरानी धातु शिल्प की परंपराओं में से एक है। उन्होंने बताया कि इसमें समुदाय की पवित्र उपवनों के संरक्षण की परंपरा को भी दर्शाया गया है, इसके अलावा लोहे से तैयार की जाने वाली 'पिटवा' शिल्पकला का इस्तेमाल किट के डिस्प्ले फ्रेम और घंटी बनाने में किया गया है। अधिकारी ने बताया, ''यह निमंत्रण किट उन कुशल शिल्पकारों और कारीगरों को समर्पित है, जो क्षेत्र की सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा व विविध सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए हैं।'



























