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नयी दिल्ली. हाल में हुए विधानसभा चुनावों के बाद राजनीतिक समीकरण में आये नाटकीय बदलावों के बीच, संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने शनिवार को यह जानकारी दी। संसद के इस 25 दिवसीय सत्र में 19 बैठकें होगी। यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब विपक्षी खेमे में दरारें गहराती नजर आ रही हैं। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) को अपने अंदर बगावत का सामना करना पड़ रहा है जबकि कांग्रेस ने तमिलनाडु में सरकार का हिस्सा बनने के लिए द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) का साथ छोड़कर टीवीके से हाथ मिला लिया है। पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत ने केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को मजबूती प्रदान की है। संसद का बजट सत्र राजग के लिए निराशाजनक रहा था क्योंकि 2029 से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने तथा संसद के निचले सदन में सीटों की संख्या बढ़ाने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका था। सरकार अब इस विधेयक का नया मसौदा तैयार कर रही है, जिसके तहत सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या समान रूप से 50 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, आबादी के आधार पर सीटों की संख्या में बढ़ोतरी दक्षिणी राज्यों की (क्षेत्रीय) पार्टियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय रही है। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) में हुई बगावत का असर भी संसद के मानसून सत्र में देखने को मिलेगा। तृणमूल के 20 तथा शिवसेना (उबाठा) के छह सांसदों को अलग गुट के तौर पर मान्यता देने की मांग पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा निर्णय लिया जाना अभी बाकी है। राज्यसभा में नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित सदस्यों के शपथ लेने के बाद, बने राजनीतिक समीकरण ने उच्च सदन में सत्तारूढ़ राजग का संख्या बल बढ़ाया है। तृणमूल के तीन बागी सांसदों ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है और उपचुनावों से भाजपा को उच्च सदन में अपनी ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी। मई में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद द्रमुक और कांग्रेस के बीच लंबे समय से चला आ रहा गठबंधन खत्म हो गया। रीजीजू ने 'एक्स' पर पोस्ट किया कि सरकार की संस्तुति पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मानसून सत्र 2026 के लिए संसद के दोनों सदनों को आहूत करने की मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा, ''राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक चर्चा करने और निर्णय लेने के लिए यह सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा।''
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ओंकारेश्वर. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में शनिवार रात भगवान शिव के ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा कि सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन को लेकर उनका और उनकी पत्नी का वर्ष 2003 में लिया गया संकल्प ओंकारेश्वर के दर्शन के साथ 23 साल बाद पूरा हो गया है। कुमार ने नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद संवाददाताओं से कहा," मेरे और मेरी पत्नी अनुराधा के जीवन का आज एक विशेष दिन है। हमने 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का संकल्प लिया था और महादेव की कृपा से यह संकल्प पूरा हो गया है।" दर्शन के बाद बेहद प्रसन्न नजर आए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि उन्होंने 2003 से लेकर अब तक यानी पिछले 23 साल में सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की सपत्नीक यात्रा पूरी कर ली है। उन्होंने देशवासियों से अपने जीवन में अध्यात्म को महत्व देने, भारतीयता का अनुभव करने और देश की उन्नति के लिए कार्य करने का आह्वान किया। इससे पहले, शनिवार शाम को इंदौर में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के साथ संवाद किया। अधिकारियों के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त दो दिवसीय मध्यप्रदेश दौरे पर हैं। वह रविवार को मशहूर पर्यटक स्थल महेश्वर भी जाएंगे और शाम को इंदौर लौटकर दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
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सरकार स्थिति संभालने के लिए तैयार
भुवनेश्वर. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को ओडिशा के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जताते हुए पांच जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया। इसके बाद, राज्य सरकार ने संबंधित सभी विभागों को संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर निम्न वायु दाब का क्षेत्र बनने के कारण राज्य में पिछले तीन दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है। आईएमडी ने अपने ताजा पूर्वानुमान में कालाहांडी, बौध, अंगुल, संबलपुर और सोनपुर जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है। इसके अलावा 21 जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' तथा शेष चार जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। आईएमडी के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तथा उससे सटे उत्तर ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बना निम्न वायु दाब का क्षेत्र अभी भी उसी इलाके में बना हुआ है। इसके अगले तीन दिनों के दौरान उत्तर ओडिशा और उत्तर छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ने की प्रबल संभावना है। भुवनेश्वर मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती ने कहा, ''रेड अलर्ट वाले जिलों में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।'' उन्होंने बताया कि ओडिशा में सात जुलाई तक भारी वर्षा जारी रहने की संभावना है।
इस बीच, विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) कार्यालय ने सभी जिलाधिकारियों को आईएमडी की चेतावनी के मद्देनजर सतर्क रहने और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, शहरी क्षेत्रों में जलभराव और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की स्थिति पर नजर रखने तथा किसी भी अप्रिय घटना के संबंध में राज्य सरकार को तत्काल सूचना देने को कहा गया है। सरकारी बयान में कहा गया, ''राज्य में व्यापक वर्षा की स्थिति को देखते हुए सरकार मौसम की बदलती परिस्थितियों पर लगातार नजर रखे हुए है। एसआरसी कार्यालय के अधीन राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) सभी जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों (डीईओसी) के समन्वय से चौबीसों घंटे सतर्क है।'' जिला प्रशासन को कच्ची सड़कों, संवेदनशील ढांचों, बागवानी फसलों और खड़ी फसलों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। बयान में कहा गया, ''लोगों से सतर्क रहने, मौसम संबंधी आधिकारिक सूचना पर नजर रखने और आकाशीय बिजली से बचाव के लिए गरज-चमक के दौरान सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की गई है।'' राज्य सरकार ने मौजूदा मौसम की स्थिति को देखते हुए मछुआरों को चार से सात जुलाई तक ओडिशा तट और उससे लगे समुद्री क्षेत्रों में मछली पकड़ने के लिए नहीं जाने की सलाह दी है। सरकारी बयान में कहा गया, ''फिलहाल राज्य में समग्र स्थिति सामान्य है और मौसम संबंधी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है।'' आईएमडी ने कहा कि निम्न वायु दाब क्षेत्र के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून के और सक्रिय होने की संभावना है। इसके कारण अगले सप्ताह राज्य के अधिकतर हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश तथा कई स्थानों पर भारी वर्षा का दौर जारी रह सकता है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने, तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है। आईएमडी के अनुसार, निम्न वायु दाब क्षेत्र के प्रभाव से ओडिशा तट पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने तथा इनके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग ने कहा कि समुद्र में ऊंची लहरें उठने की आशंका के मद्देनजर मछुआरों को सात जुलाई तक ओडिशा तट और उससे लगे समुद्री क्षेत्रों में नहीं जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, पारादीप और धामरा बंदरगाह प्राधिकरणों को स्थानीय चेतावनी संकेत जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। आईएमडी के सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार से अब तक ओडिशा के कम से कम 10 स्थानों पर 105 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। इनमें बरगढ़ जिले के सोहेला में सर्वाधिक 202 मिमी तथा गंजाम में 145 मिमी बारिश हुई। आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, पांच जुलाई से उत्तर ओडिशा में वर्षा की गतिविधियां और तेज होंगी। सुंदरगढ़, क्योंझर और मयूरभंज जिलों में आठ जुलाई तक लगातार तीन दिनों तक भारी बारिश होने की संभावना है। इस बीच, एक रिपोर्ट के अनुसार मयूरभंज जिले के 35 वर्षीय अनिल नामक व्यक्ति के भुवनेश्वर स्थित उत्कल विश्वविद्यालय के पास एक नाले में बह जाने की आशंका है। बताया जा रहा कि वह नाले से प्लास्टिक कचरा एकत्र कर रहा था, तभी उसका पैर फिसल गया और वह पानी में बह गया। भुवनेश्वर की महापौर सुलोचना दास ने कहा, ''अग्निशमन विभाग की टीम ने तलाश अभियान शुरू कर दिया है, लेकिन एक घंटे बाद भी व्यक्ति का पता नहीं चल पाया है।'' -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और राष्ट्रीय चेतना को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका योगदान अतुलनीय है। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था और उनका निधन चार जुलाई 1902 को हुआ था।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपने पोस्ट में कहा, '' स्वामी विवेकानंद जी के निर्वाण दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और राष्ट्रीय चेतना को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका योगदान अतुलनीय है।'' उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद की प्रखर बुद्धिमत्ता और प्रेरणादायक विचार आज भी करोड़ों युवाओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, '' उनके आध्यात्मिक संदेश विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में देश को निरंतर नई ऊर्जा और नई प्रेरणा देते रहेंगे।'' स्वामी विवेकानंद का मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त था और उन्होंने रामकृष्ण मिशन की संस्थापना की थी।
उन्हें वर्ष 1893 में अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में दिए गए ऐतिहासिक संबोधन से अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली थी। इस भाषण में उन्होंने समाजसेवा और मानवता की सेवा को सर्वोच्च आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया था। -
जम्मू। अमरनाथ की वार्षिक यात्रा में शामिल होने के लिए 4,812 श्रद्धालुओं का तीसरा जत्था शनिवार को यहां भगवती नगर आधार शिविर से दो अलग-अलग काफिलों में कश्मीर रवाना हुआ। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इस जत्थे में 966 महिलाएं शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार को अनंतनाग जिले के पहलगाम और गांदरबल जिले के बालटाल मार्ग से शुरू हुई 57 दिन की वार्षिक यात्रा के पहले दिन 12,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा में दर्शन और पूजा-अर्चना की। उन्होंने बताया कि तीसरे जत्थे में 244 साधु और 157 साध्वियां भी शामिल थीं। यह जत्था कड़ी सुरक्षा के बीच तड़के तीन बजे से साढ़े तीन बजे के बीच 126 वाहनों में भगवती नगर आधार शिविर से रवाना हुआ। कुल 2,771 श्रद्धालु पहलगाम आधार शिविर की ओर रवाना हुए। इनमें 542 महिलाएं और छह बच्चे शामिल हैं। शेष श्रद्धालु बालटाल मार्ग से गए, जिनमें 424 महिलाएं और पांच बच्चे शामिल हैं।
इसके साथ ही दो जुलाई से अब तक जम्मू से 13,499 श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हो चुके हैं। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने दो जुलाई को पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। -
नई दिल्ली। , भारत के समुद्री और विनिर्माण क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के दादरी स्थित मर्स्क-कॉनकोर अंतर्देशीय कंटेनर डिपो से वैश्विक शिपिंग कंपनी एपी मोलर-मर्स्क के लिए भारत में निर्मित पहले निर्यात-आयात (एक्जिम) शिपिंग कंटेनर को रवाना किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘समुद्री अमृत काल विजन-2047’ को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत के बढ़ते कंटेनर विनिर्माण पारितंत्र पर भरोसा जताते हुए मर्स्क ने डीसीएम श्रीराम ग्रुप को भारत में निर्मित 1,000 अतिरिक्त शिपिंग कंटेनरों का ऑर्डर भी दिया। इसे दीर्घकालिक व्यावसायिक साझेदारी की शुरुआत माना जा रहा है, जिससे वैश्विक समुद्री आपूर्ति शृंखला में भारत की स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एपी मोलर-मर्स्क के पर्यवेक्षी बोर्ड के अध्यक्ष रॉबर्ट मर्स्क उगला के बीच फरवरी 2025 में हुई बैठक के बाद सामने आई है। बैठक में प्रधानमंत्री ने कंपनी को भारत में विश्वस्तरीय कंटेनर विनिर्माण विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया था। महज 16 महीनों में भारत में बने पहले एक्जिम शिपिंग कंटेनर की अंतरराष्ट्रीय खरीद शुरू होना सरकार की त्वरित क्रियान्वयन क्षमता को दर्शाता है।सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से विश्वसनीय वैश्विक विनिर्माण और समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा, “हम केवल शिपिंग कंटेनर ही नहीं बना रहे हैं, बल्कि विकसित भारत के लिए विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री विनिर्माण पारितंत्र का निर्माण कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि भारत में निर्मित पहला कंटेनर अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों, आईएसओ विनिर्देशों और सुरक्षित कंटेनरों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे यह वैश्विक उपयोग के लिए पूरी तरह उपयुक्त है।सोनोवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट 2026 में 10 हजार करोड़ रुपए की कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य आयातित कंटेनरों पर निर्भरता कम करना, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पादन प्रणाली विकसित करना है। इसके तहत ग्रीनफील्ड एवं ब्राउनफील्ड संयंत्रों को पूंजीगत सहायता, परिचालन सहायता, अनुसंधान, परीक्षण, कौशल विकास और क्षमता निर्माण के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।उन्होंने बताया कि कंटेनर निर्माण संवर्धन योजना के तहत भारत की वार्षिक कंटेनर विनिर्माण क्षमता को 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख टीईयू तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिलेगा और देश की आपूर्ति शृंखला अधिक मजबूत बनेगी। सरकार का उद्देश्य भारत को कंटेनर विनिर्माण में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले कंटेनरों का वैश्विक निर्यात केंद्र स्थापित करना है।सोनोवाल ने कहा कि सरकार व्यापार सुगमता बढ़ाने के लिए व्यावसायिक जहाजरानी अधिनियम-2025, तटीय नौवहन अधिनियम-2025 और भारतीय पत्तन अधिनियम-2025 जैसे महत्वपूर्ण कानून लागू कर चुकी है। इसके अलावा 70 हजार करोड़ रुपए की जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना, ‘वन नेशन-वन पोर्ट प्रोसेस’, मैरीटाइम सिंगल विंडो और ई-समुद्र जैसी डिजिटल पहल भी शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि भारत जहाज पुनर्चक्रण के क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल हो रहा है। साथ ही देश के तीन बंदरगाह कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (सीपीपीआई) 2025 की वैश्विक शीर्ष-30 सूची में जगह बना चुके हैं। वधावन बंदरगाह, अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, टूना टेकरा कंटेनर टर्मिनल और आउटर हार्बर कंटेनर टर्मिनल जैसी प्रमुख परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है। ( -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के जोधपुर में एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने संशोधित ‘उड़ान’ योजना भी लॉन्च की, जिसका उद्देश्य देश में विमानन कनेक्टिविटी का विस्तार और विमानन-आधारित विकास को गति देना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद नए टर्मिनल भवन का निरीक्षण किया। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उन्हें टर्मिनल की विभिन्न विशेषताओं की जानकारी दी। इसके बाद प्रधानमंत्री ने नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया।यह परियोजना 480 करोड़ रुपए की लागत से विकसित की गई है। 23,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह नया टर्मिनल भवन हर साल 20 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम है। इसमें आधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे यात्रियों को अधिक सुगम और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।राजस्थान की शाही विरासत से प्रेरित इस टर्मिनल की वास्तुकला में मेहराब और झरोखों जैसे पारंपरिक तत्वों को आधुनिक डिजाइन के साथ समाहित किया गया है। ऊर्जा-कुशल प्रणालियां, जल संरक्षण उपाय और हरित भवन निर्माण पद्धतियां इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं। टर्मिनल को 5-स्टार जीआरआईएचए रेटिंग के अनुरूप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नए टर्मिनल के शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पीएम नरेंद्र मोदी ने संशोधित ‘उड़ान’ योजना भी लॉन्च की। इस योजना के तहत 28,840 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इसका उद्देश्य अगले 10 वर्षों में विमानन-आधारित विकास को गति देना और देशभर में व्यापक तथा टिकाऊ हवाई कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है।योजना के तहत मौजूदा अप्रयुक्त हवाई पट्टियों का उपयोग करते हुए 100 हवाई अड्डों के विकास पर विशेष जोर दिया गया है, जिसके लिए 12,000 करोड़ रुपए से अधिक का बजट निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, क्षेत्रीय हवाई अड्डों के शुरुआती वर्षों में उनके संचालन और रखरखाव (ओएंडएम) के लिए 2,500 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता दी जाएगी। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। (इनपुट: आईएएनएस) -
नई दिल्ली। भारत गणराज्य की सरकार और इजराइल की सरकार के बीच 8 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय निवेश समझौता (बीआईए) शनिवार, 4 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गया। इस समझौते को दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और सुरक्षित तथा पूर्वानुमानित निवेश माहौल सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। द्विपक्षीय निवेश समझौता निवेशकों और उनके निवेशों को मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है। साथ ही, यह दोनों देशों को अपने वैध सार्वजनिक नीति उद्देश्यों के अनुरूप संप्रभु नीतिगत अधिकार बनाए रखने का पर्याप्त लचीलापन भी देता है। यह समझौता अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून के आधुनिक सिद्धांतों और विकसित होते न्यायशास्त्र के अनुरूप तैयार किया गया है। सरकार के अनुसार, इस समझौते से भारत और इजराइल के बीच सीमा पार निवेश में वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और द्विपक्षीय साझेदारी को भी नई मजबूती मिलेगी।
भारत-इजराइल द्विपक्षीय निवेश समझौता (बीआईए) 2026 की पूरी प्रति वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है, जहां इच्छुक व्यक्ति इसके प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। -
- अमित शाह बोले- हर आतंकी मॉड्यूल को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है मोदी सरकार
नई दिल्ली। आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 23 और व्यक्तियों को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत ‘आतंकवादी’ घोषित किया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार भारत और देशवासियों की सुरक्षा के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। घोषित किए गए 23 आतंकवादियों में 17 पाकिस्तानी और 6 भारतीय नागरिक हैं, जो वर्तमान में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) से भारत विरोधी गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं।केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ विजन को आगे बढ़ाते हुए गृह मंत्रालय ने प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े 23 खूंखार आतंकवादियों को यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया है। ये आतंकवादी भारत विरोधी गतिविधियों, आतंकी हमलों, आतंकवाद को बढ़ावा देने, हथियारों की तस्करी, सीमा पार घुसपैठ, आतंकी संगठनों की मदद, फंड जुटाने और आतंकवादियों की भर्ती जैसी गतिविधियों में शामिल हैं। मोदी सरकार भारत और देशवासियों की सुरक्षा के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को खत्म करने के लिए कटिबद्ध है।”गृह मंत्रालय के अनुसार, इन व्यक्तियों को औपचारिक रूप से आतंकवादी घोषित किए जाने से उनके वित्तीय नेटवर्क, आवाजाही, भर्ती क्षमता और आतंकवाद समर्थित गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह कदम राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल तत्वों के लिए कड़ा संदेश भी होगा। इससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा एवं कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वित कानूनी, जांच और निवारक कार्रवाई को भी मजबूती मिलेगी।केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में यूएपीए में संशोधन के बाद पहली बार व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान लागू किया था। गृह मंत्रालय के अनुसार, इस ताजा कार्रवाई के बाद अब तक अधिनियम की धारा 35 के तहत कुल 57 व्यक्तियों को यूएपीए की चौथी अनुसूची में ‘आतंकवादी’ के रूप में सूचीबद्ध किया जा चुका है।गृह मंत्रालय द्वारा घोषित 23 आतंकवादियों में अधिकांश का संबंध जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम), लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जमात-उद-दावा (जेयूडी), हरकत-उल-मुजाहिद्दीन (एचयूएम), पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल), अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठनों से है। इन पर सीमा पार घुसपैठ, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी, ड्रोन के जरिए हथियार पहुंचाने, आतंकी फंडिंग, युवाओं की भर्ती, प्रशिक्षण शिविर संचालित करने और भारत में कई बड़े आतंकी हमलों की साजिश रचने या उन्हें अंजाम देने के आरोप हैं।
23 व्यक्तियों को किया गया आतंकवादी घोषित
गृह मंत्रालय ने जिन 23 व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया है, उनमें मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान, हाफिज अब्दुल शकूर, अब्दुल्ला जिहादी, फिरदौस अहमद भट, गुलाम फरीद, हारून रशीद गनई, बिलाल अहमद मीर, आबिद कयूम लोन, नजीर अहमद गुज्जर, अब्दुल रऊफ, अशफाक अहमद, हाफिज खालिद वालीद, मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की, मौलाना सैफुल्लाह खालिद, मोहम्मद याकूब, मौलाना यूसुफ ताईबी, ओवैस फारूज, कारी याकूब शेख, राणा इफ्तिखार, वसीम नूर जाट और मोहम्मद शहीद फैसल शामिल हैं। -
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अल-नीनो के कारण देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा और उसके संभावित प्रभावों की समीक्षा की। बैठक में केंद्रीय गृह सचिव, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण सचिव सहित विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार मानसून की स्थिति और संभावित सूखे पर लगातार नजर बनाए हुए है।
अमित शाह ने कृषि मंत्रालय और अन्य संबंधित मंत्रालयों को राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाकर किसानों को मौसम के अनुरूप फसल बुवाई की जानकारी देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग पूरी सतर्कता के साथ काम करें ताकि संभावित चुनौतियों का समय रहते समाधान किया जा सके। गृह मंत्री ने जल शक्ति मंत्रालय को देश के सभी बड़े और छोटे जलाशयों तथा भूजल की स्थिति की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने पशुओं के चारे, मिलेट्स और दलहन जैसी कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके अलावा ऊर्जा मंत्रालय को देश में बिजली की सुचारू और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि देश में चावल, गेहूं सहित अन्य आवश्यक खाद्यान्न पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। सरकार खाद्यान्न आपूर्ति और मूल्य स्थिति पर भी लगातार नजर रखे हुए है।अमित शाह ने हाल में भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित असम और अरुणाचल प्रदेश में नुकसान का आकलन करने के लिए गृह मंत्रालय की अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (आईएमसीटी) भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में बुनियादी ढांचे, कृषि और रिहायशी क्षेत्रों को हुए नुकसान का मौके पर जाकर आकलन किया जाएगा, ताकि आवश्यक सहायता और आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, उपभोक्ता विभाग, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), केंद्रीय जल आयोग, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान और नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। -
नई दिल्ली। नई दिल्ली में शुक्रवार को आयोजित राज्यों के पंचायती राज मंत्रियों की राष्ट्रीय कार्यशाला में सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के प्रभावी कार्यान्वयन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय पंचायती राज तथा मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने राज्यों से स्वयं के राजस्व स्रोतों (ओएसआर) के संकलन पर विशेष ध्यान देने और प्रदर्शन-आधारित अनुदानों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए अपनी तैयारियों को मजबूत करने का आग्रह किया। कार्यशाला में केंद्रीय पंचायती राज तथा मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल भी मौजूद रहे।
पंचायती राज मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यशाला में 18 राज्यों के पंचायती राज मंत्रियों ने भाग लिया, जबकि अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व संबंधित पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज, अपर सचिव सुशील कुमार लोहानी समेत मंत्रालय और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्यशाला का आयोजन सोलहवें वित्त आयोग (2026-31) की उन सिफारिशों के संदर्भ में किया गया, जिनमें वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों को 4,35,236 करोड़ रुपए के वित्तीय हस्तांतरण की अनुशंसा की गई है। साथ ही वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी परिचालन दिशानिर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि कार्यान्वयन की रूपरेखा स्थानीय शासन की विविध आवश्यकताओं के अनुरूप हो, ताकि पंचायती राज संस्थाएं अधिक सशक्त और वित्तीय रूप से सक्षम बन सकें।कार्यशाला के दौरान पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव मुक्ता शेखर ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें पंद्रहवें वित्त आयोग के दौरान हुए प्रदर्शन की समीक्षा, सोलहवें वित्त आयोग की प्रमुख सिफारिशों तथा ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए जारी परिचालन दिशानिर्देशों की जानकारी दी गई। बताया गया कि ये दिशानिर्देश अनुदानों के समयबद्ध निर्गमन, पारदर्शी उपयोग और प्रदर्शन-आधारित वित्तीय प्रबंधन को बढ़ावा देंगे। साथ ही पंचायतों में वित्तीय विकेंद्रीकरण, स्थानीय प्राथमिकताओं पर आधारित योजना निर्माण, स्वयं के राजस्व स्रोतों के संकलन और जवाबदेह शासन को भी मजबूती मिलेगी।सोलहवें वित्त आयोग ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों को 4,35,236 करोड़ रुपए के कुल वित्तीय हस्तांतरण की अनुशंसा की है। यह पंद्रहवें वित्त आयोग के तहत 2,36,805 करोड़ रुपए के आवंटन की तुलना में लगभग 84% अधिक है। इसमें 3,48,188 करोड़ रुपए के आधारभूत अनुदान शामिल हैं, जिन्हें स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट और जल प्रबंधन के लिए आबद्ध तथा अनाबद्ध अनुदानों में समान रूप से विभाजित किया गया है। इसके अलावा 87,048 करोड़ रुपए के प्रदर्शन अनुदान का भी प्रावधान किया गया है।ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए प्रति व्यक्ति आवंटन तेरहवें वित्त आयोग के दौरान 176 रुपए से बढ़कर सोलहवें वित्त आयोग में 953 रुपए हो गया है, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। वहीं, पंद्रहवें वित्त आयोग के दौरान मंत्रालय ने कुल 2,97,555 करोड़ रुपए के आवंटन में से लगभग 95% यानी 2,82,632 करोड़ रुपए जारी किए, जो किसी भी वित्त आयोग के तहत स्थानीय निकायों के लिए अब तक का सबसे अधिक निर्गमन प्रतिशत है।देश में वर्तमान में 2,62,738 पंचायती राज संस्थाएं हैं, जिनमें 2,55,308 ग्राम पंचायतें, 6,756 ब्लॉक पंचायतें और 674 जिला पंचायतें शामिल हैं। पारंपरिक स्थानीय निकायों सहित इनकी कुल संख्या 2,76,901 है। पंचायतों में योजना निर्माण, लेखांकन, लेखापरीक्षा और स्वयं के राजस्व स्रोतों के सृजन को मजबूत करने के लिए ईग्रामस्वराज, ऑडिटऑनलाइन, पीएफएमएस इंटरफेस, समर्थ पोर्टल तथा स्वामित्व संपत्ति आंकड़ों के एकीकृत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है। -
नई दिल्ली। भारत और माली ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पहले भारत-माली निर्यात संवर्धन मंच का आयोजन किया। बमाको में आयोजित इस दो दिवसीय मंच के जरिए दोनों देशों ने व्यापार और निवेश सहयोग को संस्थागत स्वरूप देने तथा भविष्य में आर्थिक साझेदारी को नई गति प्रदान करने पर जोर दिया। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 326.61 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 55% अधिक है।
“व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ बनाना” विषय पर आयोजित इस मंच की अध्यक्षता माली की अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री मेजर जनरल अब्दुलाये माइगा ने की। इसका संयुक्त आयोजन माली के उद्योग एवं व्यापार मंत्रालय, बमाको स्थित भारतीय दूतावास तथा माली निर्यात संवर्धन एजेंसी (एपीईएक्स-माली) ने किया। कार्यक्रम में दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ भारत के करीब 30 व्यापारिक नेताओं ने भाग लिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव (एफटी-अफ्रीका) अमित कुमार ने किया, जबकि माली में भारत के राजदूत डॉ. एन. नंदकुमार ने भारतीय मिशन का प्रतिनिधित्व किया।वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और माली के बीच द्विपक्षीय व्यापार 326.61 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 55% अधिक है। माली से भारत को मुख्य रूप से कच्चा कपास, तैयार चमड़ा, काजू, सीसा, गोंद अरबी और तिल का निर्यात होता है। वहीं भारत से माली को औषधियां, सूती वस्त्र, दोपहिया और तिपहिया वाहन तथा साइकिलों का निर्यात किया जाता है। भारत की शुल्क-मुक्त टैरिफ वरीयता (डीएफटीपी) योजना ने दोनों देशों के व्यापार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। माली के लगभग 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर के वैश्विक निर्यात की तुलना में भारतीय बाजार में उसके अप्रयुक्त निर्यात की संभावित क्षमता लगभग 3.96 बिलियन अमेरिकी डॉलर आंकी गई है।उद्घाटन सत्र के बाद भारतीय और माली प्रदर्शनी स्टॉलों का दौरा किया गया, जहां सोनालिका ट्रैक्टर तथा महिंद्रा और टाटा मोटर्स के वाहनों का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद व्यापार-से-व्यापार (बी2बी), व्यापार-से-सरकार (बी2जी) और सरकार-से-सरकार (जी2जी) स्तर की बैठकों में नवीकरणीय ऊर्जा, औषधि, वस्त्र, ऑटोमोबाइल विनिर्माण और खनन क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। उद्देश्य व्यावसायिक अवसरों को व्यापारिक साझेदारियों और समझौता ज्ञापनों में बदलना था।दूसरे दिन भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने माली के उद्योग एवं व्यापार मंत्री मूसा अलासाने डियालो से मुलाकात की। इस दौरान एपीईएक्स-माली ने तत्काल निवेश के लिए “तैयार व्यापार योजनाएं” प्रस्तुत कीं। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने माली की अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री से भी भेंट की।दोनों देशों ने कपास एवं वस्त्र, खनन एवं ऊर्जा, कृषि-उद्योग एवं शीया प्रसंस्करण, औषधियां तथा स्वास्थ्य और शिक्षा सहित सामाजिक अवसंरचना को सहयोग के प्राथमिक क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया। माली ने अपने उद्गम प्रमाण पत्र प्रणाली के डिजिटलीकरण में भारत के सहयोग और भारतीय औषधियों के शीघ्र पंजीकरण में रुचि दिखाई। वहीं भारतीय पक्ष ने शीया-नट के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध पर पुनर्विचार का आग्रह किया तथा माली में भारतीय नागरिकों और भारतीय निवेशों की सुरक्षा के महत्व को दोहराया।मंच के समापन पर माली ने कारोबारी माहौल को और सुरक्षित बनाने तथा ‘विजन माली 2063’ रोडमैप के तहत स्वयं को पश्चिम अफ्रीका के रणनीतिक निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसी दिशा में माली ने 3-4 दिसंबर 2026 को विशेष निवेश मंच आयोजित करने की घोषणा की, जिसमें अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए नई निवेश-योग्य परियोजनियां प्रस्तुत की जाएंगी। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शनिवार) को राजस्थान और गुजरात का दौरा करेंगे। इस दौरान वे विमानन, शहरी परिवहन, ऊर्जा और सेमीकंडक्टर सहित कई प्रमुख अवसंरचना और विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। राजस्थान में वे लगभग 1.06 लाख करोड़ रुपए की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे, जबकि जयपुर मेट्रो फेज-2 की आधारशिला भी रखेंगे। इसके अलावा गुजरात में भारत के पहले सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग केंद्रों में से एक का उद्घाटन करेंगे।
प्रधानमंत्री सुबह लगभग 10:45 बजे जोधपुर हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे और संशोधित विमानन योजना का शुभारंभ करेंगे। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे वे बालोतरा पहुंचेंगे, जहां लगभग 1.06 लाख करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण, उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इस अवसर पर वे एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री बालोतरा जिले के पचपदरा में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) रिफाइनरी के उद्घाटन समारोह के दौरान जयपुर मेट्रो रेल परियोजना के फेज-2 की आधारशिला रखेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से जयपुर के प्रमुख औद्योगिक, वाणिज्यिक और आवासीय क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी तथा शहरी परिवहन को नई गति मिलेगी।13,037 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना के तहत प्रहलादपुरा से तोड़ी मोड़ तक 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इससे सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र, विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (वीकेआईए), जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, टोंक रोड, सवाई मानसिंह अस्पताल, सवाई मानसिंह स्टेडियम, कलेक्ट्रेट, जयपुर रेलवे स्टेशन, अंबाबारी और विद्याधर नगर सहित कई प्रमुख स्थानों को निर्बाध मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी।फेज-2 कॉरिडोर में कुल 36 मेट्रो स्टेशन होंगे। यह आधुनिक जन परिवहन प्रणाली जयपुर के तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों को प्रमुख आवासीय और व्यावसायिक इलाकों से जोड़ेगी। परियोजना का कार्यान्वयन राजस्थान मेट्रो रेल निगम लिमिटेड (आरएमआरसीएल) करेगा, जो केंद्र और राजस्थान सरकार का 50:50 संयुक्त उद्यम है।राजस्थान के कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री शाम लगभग 4:30 बजे गुजरात के साणंद पहुंचेंगे। यहां वे सीजी सेमी के आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओएसएटी) संयंत्र का उद्घाटन करेंगे। यह ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के तहत विकसित भारत के पहले सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग संयंत्रों में से एक है और इसके साथ वाणिज्यिक उत्पादन की शुरुआत होगी। उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, सीजी सेमी ओएसएटी केंद्र 7,500 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश से विकसित किया गया है। यह मिशन के तहत स्वीकृत पहली चार सेमीकंडक्टर परियोजनाओं में शामिल है। यह केंद्र वेफर सॉर्टिंग, असेंबली, परीक्षण, पैकेज डिजाइन, विफलता विश्लेषण, परीक्षण कार्यक्रम विकास, उत्पाद विशेषताओं के मूल्यांकन और लॉजिस्टिक्स सहायता सहित सेमीकंडक्टर असेंबली एवं परीक्षण सेवाओं की संपूर्ण शृंखला उपलब्ध कराएगा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई, 2026 तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा करेंगे। इस दौरान वह तीनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करेंगे और भारतीय प्रवासी समुदाय को भी संबोधित करेंगे। यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा और क्षेत्रीय सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया की यात्रा करेंगे। यह उनकी इंडोनेशिया की चौथी यात्रा होगी और मई 2018 में भारत-इंडोनेशिया संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने के बाद पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। जकार्ता में प्रधानमंत्री राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और दोनों देशों के बीच साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। वह भारतीय प्रवासी समुदाय की एक विशाल सभा को भी संबोधित करेंगे।भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रंबानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे।इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज़ के निमंत्रण पर मेलबर्न जाएंगे। इस दौरान वह प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज़ के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे तथा ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में भाग लेकर दोनों देशों के शीर्ष उद्योगपतियों और व्यापारिक नेताओं को संबोधित करेंगे। इसके अलावा वह मेलबर्न में भारतीय प्रवासी समुदाय की एक विशाल सभा को भी संबोधित करेंगे।न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 और 11 जुलाई को ऑकलैंड की राजकीय यात्रा करेंगे। यह करीब चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की पहली राजकीय यात्रा होगी। ऑकलैंड में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और व्यापार, वाणिज्य, रक्षा तथा अन्य क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंधों की समीक्षा करेंगे। पिछले दो वर्षों में इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री प्रमुख व्यापारिक और खेल जगत की हस्तियों से भी मुलाकात करेंगे। भारत और न्यूजीलैंड के मजबूत जन-संपर्कों को रेखांकित करते हुए वह भारतीय प्रवासी समुदाय की एक विशाल सभा को भी संबोधित करेंगे। -
मंदसौर (मध्यप्रदेश). मध्यप्रदेश में बृहस्पतिवार को मुंबई-अमृतसर पश्चिम एक्सप्रेस में यात्रा के दौरान एक महिला ने प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद रेलवे कर्मचारियों की मदद से सुरक्षित तरीके से एक बच्ची को जन्म दिया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि सूरत से नयी दिल्ली जा रही महिला अपने एक परिजन के साथ ट्रेन संख्या 12925 मुंबई-अमृतसर पश्चिम एक्सप्रेस में यात्रा कर रही थी। उन्होंने बताया कि रतलाम और खाचरोद स्टेशनों के बीच महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उन्होंने बताया कि इस दौरान एक सहयात्री ने ट्रेन में मौजूद रेलवे कर्मचारियों को इसकी सूचना दी। अधिकारी ने बताया कि सूचना मिलते ही रेलवे कर्मचारी तत्काल कोच में पहुंचे और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई, जिसके बाद महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। उन्होंने बताया कि प्रसव के बाद महिला और नवजात को सूखे कपड़े तथा कंबल उपलब्ध कराए गए। कुमार ने बताया कि ट्रेन के खाचरोद स्टेशन पहुंचने पर महिला अपने ससुर के साथ रेलवे कर्मचारियों की मदद से उतरी। उन्होंने बताया कि इसके बाद मां और नवजात को आवश्यक चिकित्सा उपचार के लिए भेजा गया। उन्होंने कहा कि रतलाम मंडल के कर्मचारियों की त्वरित कार्रवाई, उनकी संवेदनशीलता और सहयात्रियों के सहयोग से बच्चे का सुरक्षित जन्म संभव हो सका।
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श्रीनगर. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कश्मीर घाटी पहुंचने पर वार्षिक अमरनाथ यात्रा के तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे का बृहस्पतिवार को गर्मजोशी से स्वागत किया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 4,800 से अधिक तीर्थयात्रियों के जत्थे को हरी झंडी दिखाकर जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से रवाना किया था। अधिकारियों ने बताया कि जब यह काफिला कश्मीर पहुंचा तब घाटी में जगह-जगह उसका भव्य स्वागत किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, जब श्रद्धालु दक्षिण कश्मीर के कुलगाम ज़िले के काजीगुंड इलाके में नवयुग सुरंग से होते हुए घाटी में दाखिल हुए, तो उनका जोरदार स्वागत किया गया। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिरीक्षक और दक्षिण कश्मीर रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक जाविद इकबाल मट्टू समेत पुलिस तथा नागरिक प्रशासन के अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों का मालाओं एवं फूलों के गुलदस्तों एवं पुष्प की पंखुड़ियों से स्वागत किया। इसके बाद ये काफिले अलग-अलग बालटाल और पहलगाम बेस कैंप की ओर बढ़े, जहां से तीर्थयात्री शुक्रवार सुबह 3,880 मीटर ऊंचे अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए आगे की यात्रा आरंभ करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि पहलगाम मार्ग से यात्रा करने वाले तीर्थयात्री पहलगाम के बेस कैंप नुनवान पहुंचे, जहां अनंतनाग के उपायुक्त (यात्रा अधिकारी) बिलाल मोहिउद्दीन भट, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अमोद अशोक नागपुरे, कैंप निदेशक अतुल कुमार, सिविल और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। श्रीनगर पहुंचने पर, बालटाल मार्ग से यात्रा कर रहे यात्रियों का स्वागत पंथा चौक बाईपास पर श्रीनगर के उपायुक्त अक्षय लाब्रू और एसएसपी संदीप चक्रवर्ती ने किया। अधिकारियों ने यात्रियों के पहुंचने पर उनका स्वागत किया और उनकी यात्रा सुरक्षित एवं आध्यात्मिक रूप से सुखद होने की शुभकामनाएं दीं। इसी तरह, बांदीपोरा और गांदरबल ज़िलों में तीर्थयात्रियों का ज़ोरदार स्वागत किया गया।अधिकारियों ने बताया कि बांदीपोरा के शादीपोरा ट्रांज़िट कैंप में तीर्थयात्रियों का गर्मजोशी से पारंपरिक स्वागत किया गया। उत्तरी कश्मीर रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक विनोद कुमार, उपायुक्त इंदु कंवल चिब और एसएसपी एजाज़ अहमद ज़रगर ने फूलों के साथ यात्रियों का स्वागत किया तथा उनकी यात्रा सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक रहने की शुभकामनाएं दीं। अधिकारियों ने बताया कि गांदरबल के बालटाल बेस कैंप में, गांदरबल के उपायुक्त जतिन किशोर, कश्मीर के उपमहानिरीक्षक (आर्म्ड) मकसूद-उल-ज़मान, गांदरबल के एसएसपी सुधांशु धामा और स्थानीय समुदाय के सदस्यों ने मिलकर तीर्थयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह सब भक्ति और उत्साह के माहौल में हुआ। तीन जुलाई को 57 दिनों की यह तीर्थयात्रा आरंभ होगी और 28 अगस्त को उसका समापन होगा। श्रद्धालु अनंतनाग में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम रास्ते या गांदरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबे छोटे बालटाल मार्ग से यात्रा कर सकते हैं। -
लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन आगामी चार जुलाई को उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर आयेंगे। इस दौरान भाजपा अध्यक्ष आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों की समीक्षा करने के साथ—साथ पार्टी पदाधिकारियों तथा चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ कई बैठकें करेंगे। भाजपा द्वारा बृहस्पतिवार को जारी एक बयान के अनुसार, नवीन चार और पांच जुलाई को विभिन्न स्तरों के पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकों में संगठन की कार्ययोजना और आगामी कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे। बयान के अनुसार वह राज्य के पार्टी पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों, सांसदों और विधायकों से बातचीत करने के साथ—साथ अवध क्षेत्र के 'शक्ति केंद्र' संयोजकों के सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के लिये पार्टी के राज्य महासचिव (संगठन) धर्मपाल सिंह के साथ पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए अलग-अलग बैठकें कीं। चौधरी ने इस दौरे को एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक गतिविधि बताया और कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का मार्गदर्शन पार्टी के कामकाज को मजबूत करने और आगामी कार्यक्रमों तथा चुनावी तैयारियों को नई गति देने में मदद करेगा। धर्मपाल सिंह ने कहा कि सभी बैठकों का कार्यक्रम तय कर लिया गया है और हर कार्यक्रम अनुशासित और समयबद्ध तरीके से आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नवीन संगठनात्मक विस्तार, बूथ को मजबूत करने, शक्ति केंद्रों को सक्रिय करने, सेवा पहलों, जनसंपर्क और समन्वय पर मार्गदर्शन देंगे।
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नयी दिल्ली. पंजाबी कलाकार दिलजीत दोसांझ ने यहां जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के विरोध प्रदर्शन से खुद को अलग कर लिया और कहा कि वह एक कलाकार हैं, कोई राजनेता नहीं। फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' के अभिनेता ने बुधवार शाम 'इंस्टाग्राम' पर अपने प्रशंसकों के कई सवालों के जवाब दिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और नीट प्रश्न पत्र लीक विवाद को लेकर कॉजपा के विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे, तो दिलजीत ने कहा, "मुझे इन सब से दूर रखिए... भाई, मैं एक कलाकार हूं। मैं कोई राजनेता नहीं हूं, मुझे नहीं पता आप मुझे क्या समझते हैं।" उन्होंने इसके बाद गुरु ग्रंथ साहिब की एक लोकप्रिय पंक्ति का उल्लेख किया, "नानक दुखिया सब संसार, सो सुखिया जिस नाम आधार', जिसका अर्थ है कि दुनिया में हर कोई दुखों से जूझ रहा है, केवल वे लोग सुखी हैं जो ईश्वर के सहारे रहते हैं।" दिलजीत ने कहा, "देखिए, हर चीज कभी भी पूरी तरह सही नहीं हो सकती। इस दुनिया में सब कुछ कभी भी सही नहीं हो सकता। इसलिए जो लोग विरोध कर रहे हैं, उन्हें बधाई, और जिनके खिलाफ विरोध हो रहा है, उन्हें भी बधाई, क्योंकि मुझे इसके बारे में कुछ पता नहीं है।" वर्ष 2020 में दिलजीत उस समय सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने केंद्र सरकार के विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया था। इस वर्ष मई में एक नागरिक समाज समूह ने दिलजीत से राजनीति में आने की सार्वजनिक अपील की थी लेकिन उन्होंने राजनीति में प्रवेश करने से इनकार कर दिया था। दिलजीत ने 'एक्स' पर कहा, "मेरा काम लोगों का मनोरंजन करना है। मैं अपने क्षेत्र में बहुत खुश हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद।"
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नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्रीय टीम में फेरबदल की अटकलों के बीच पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, शाह के आवास पर हुई करीब तीन घंटे की बैठक में भाजपा के महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष भी मौजूद थे। हालांकि इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई, लेकिन इसमें कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें भाजपा के नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों की टीम के गठन का विषय भी शामिल था। सूत्रों के मुताबिक, जनवरी में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नवीन के नेतृत्व वाली भाजपा की नयी केंद्रीय टीम में ''वरिष्ठ और युवा नेताओं'' को जगह मिलने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार में पद संभाल रहे कुछ नेताओं को भी पार्टी में शामिल किया जा सकता है और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। सूत्रों ने बताया कि भाजपा की नयी केंद्रीय टीम में शामिल किए जाने वाले नेताओं के नामों की घोषणा जल्द ही की जाएगी।
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नयी दिल्ली. नीति आयोग ने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए सरकार से वैश्विक आयुर्वेद पंजी (जीएआर) बनाने और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की सिफारिश की है। आयोग ने 'आयुर्वेद को वैश्विक बनाने के लिए रणनीतिक रूपरेखा' शीर्षक से जारी रिपोर्ट में विश्व आयुर्वेद एवं योग महासंघ की स्थापना तथा आयुर्वेदिक फार्माकोपिया-निर्यात संस्करण तैयार करने का भी सुझाव दिया है। आयोग ने कहा, ''सरकार को आयुर्वेद व्यापार से संबंधित डैशबोर्ड भी विकसित करना चाहिए।''
नीति आयोग ने आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बढ़ाने की भी सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार, आयुर्वेद भारत में पारंपरिक चिकित्सा की एक मान्यता प्राप्त और विनियमित प्रणाली है। देश में 3,55,000 से अधिक प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सक हैं, लेकिन इनमें से लगभग 95 प्रतिशत भारत में ही कार्यरत हैं और विदेशों में इनकी उपस्थिति सीमित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्यात लगभग 150 देशों को किया जा रहा है। इन उत्पादों का निर्यात वर्ष 2014 के 1.09 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2023 में 2.16 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। -
नयी दिल्ली. राशन की दुकानों के जरिये कम टूटे हुए दाने वाले बेहतर गुणवत्ता के चावल आपूर्ति करने के सरकार के फैसले को सभी राज्यों में चरणों में लागू किया जाएगा ताकि बदलाव आसानी से हो सके और इस कदम से सालाना लागत में 2,161 करोड़ रुपये की कमी आएगी। बुधवार को, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने राशन की दुकानों के जरिये 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को वितरित किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का फैसला किया। इसके लिए कुल आपूर्ति में टूटे हुए चावल का प्रतिशत कम किया जाएगा। केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 'एक्स' पर पोस्ट में जानकारी दी कि मंत्रिमंडल ने राशन की दुकानों के जरिये आपूर्ति किए जाने वाले टूटे हुए चावल की सीमा को कम करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि चावल की बोरियों पर क्यूआर-कोड लगाया जाएगा ताकि उनकी ट्रेसिबिलिटी (ट्रैक करने की सुविधा) सुनिश्चित हो सके। इससे परिवहन, भंडारण और रखरखाव की लागत कम होगी। कच्चे चावल के लिए, सीमा को 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। उसना चावल के लिए, इसे 16 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। बृहस्पतिवार को एक बयान में, खाद्य मंत्रालय ने कहा कि सीसीईए ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (जीएमजीकेएवाई) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत आपूर्ति किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए एक अहम सुधार को मंजूरी दी है। इस सुधार में चावल की बोरियों पर क्यूआर-कोड लगाना शामिल है ताकि पूरी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी हो सके। इससे पीडीएस में पारदर्शिता, जवाबदेही और भंडार प्रबंधन मजबूत होगा और साथ ही रिसाव को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।
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नयी दिल्ली. खेलमंत्री मनसुख मांडविया ने बृहस्पतिवार को कहा कि एशियाई खेल कोई 'एक्सपोजर ट्रिप' नहीं है और पदक उम्मीदों पर ही फोकस रखते हुए इस बार 600 से कम सदस्यीय दल ही भेजा जायेगा । खेलमंत्री ने यहां मीडिया से बातचीत में साफ तौर पर कहा कि जापान में 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक होने वाले एशियाई खेलों में महज भागीदारी के लिये लंबा चौड़ा दल नहीं भेजा जायेगा। मांडविया ने कहा ,'' एशियाई खेल कोई एक्सपोजर ट्रिप नहीं है । यह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के लिये मंच है । इसमें पहले दौर में बाहर होने के लिये किसी को भेजने का कोई फायदा नहीं है। मैं बार बार कहता आया हूं कि अच्छा प्रदर्शन करने वालों के लिये ही भारतीय दल में जगह होगी।' उन्होंने कहा, एक्सपोजर कहीं और से भी हासिल किया जा सकता है, एशियाई खेल उसके लिये नहीं हैं । सिर्फ नौकरी पाने के लिये भागीदारी के मकसद से जाने के इच्छुक लोगों के नाम पर मंजूरी नहीं दी जायेगी।
उन्होंने कहा ,'' इस बार चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बरती गई है । इक्के दुक्के मामलों को छोड़कर कहीं कोई विवाद नहीं है और ये मामले भी सुलझ जायेंगे । चयन के मानदंडों के आधार पर ही दल चुना गया है । नौकरी पाने के लिये किसी को एशियाई या राष्ट्रमंडल खेल दल में शामिल करना या किसी के परिजन को सहयोगी स्टाफ बनाकर भेजना अब नहीं होगा ।'' मांडविया ने चयन प्रक्रिया का ब्यौरा देते हुए कहा कि महासंघों द्वारा चुने गए खिलाड़ियों, कोचों और सहयोगी स्टाफ को आईओए और भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा आकलन के बाद खेल मंत्रालय से मंजूरी मिलने पर ही उसे आधिकारिक भारतीय दल का हिस्सा माना जायेगा । उन्होंने कहा ,' चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिये पर्यवेक्षक की मौजूदगी में आन कैमरा ट्रायल कराये गए हैं जिसके बाद चुने गए खिलाड़ियों की सूची एनएसएफ आईओ को भेजते हैं ।'' इसमें आगे कहा गया ,'' भारतीय ओलंपिक संघ इन सुझावों को खेल मंत्रालय के पास समीक्षा और स्वीकृति प्रक्रिया के लिये भेजता है । खेल मंत्रालय इसे साइ को आकलन के लिये भेजता है जिसके बाद साइ से मिलने वाली सूची को अंतिम मंजूरी दी जाती है ।'' एशियाई खेलों के लिये टीम चयन को लेकर प्रमुख विवादों में घुड़सवार अनुष अगरवाला का मामला है जिन्होंने टीम से बाहर रखे जाने को अदालत में चुनौती दी है । एक सूत्र ने बताया कि खेल मंत्रालय उन्हें टीम में रखे जाने के पक्ष में है । अगरवाला और सुदीप्ति हजेला ने अपनी याचिका में उन्हें टीम से बाहर रखने के भारतीय घुड़सवारी महासंघ की तदर्थ समिति के फैसले को चुनौती दी है । उनकी याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ ने खारिज कर दी हालांकि खंडपीठ उस पर सुनवाई कर रही है । सूत्र के अनुसार मंत्रालय अनुष को टीम में रखने के पक्ष में है । सूत्र ने कहा ,' उन्हें बाहर किये जाने के फैसले की समीक्षा की जा रही है और मंत्रालय का मानना है कि उसे मौका मिलना चाहिये ।'' मंत्रालय ने यह भी कहा कि चयन ट्रायल के बाद किसी एनएसएफ द्वारा जारी की गई सूची सरकार द्वारा स्वीकृत भारतीय दल नहीं है । मंत्रालय ने कहा कि ऐसी कोई भी सूची महासंघ की आंतरिक चयन प्रक्रिया के आधार पर तैयार की गई सुझाव की सूची है जिसके बाद आईओए और साइ आकलन करके मंत्रालय को सुझाव भेजते हैं और मंत्रालय से मंजूरी प्राप्त खिलाड़ी, कोच और सहयोगी स्टाफ ही एशियाई खेलों के लिये भारत के आधिकारिक दल का हिस्सा होंगे ।
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नयी दिल्ली/ हैदराबाद आधारित कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि देश के निजी तौर पर विकसित कक्षीय श्रेणी के पहले रॉकेट 'विक्रम-1' की पहली परीक्षण उड़ान के लिए 12 जुलाई से चार अगस्त के बीच का समय तय किया गया है। प्रक्षेपण की अंतिम तारीख श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में प्रक्षेपण स्थल पर परीक्षण से जुड़े काम पूरे होने और मौसम, सुरक्षा व 'रेंज क्लीयरेंस' पर निर्भर करेगी। स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन कुमार चांदना ने एक बयान में कहा, ''हम यह समझना चाहते हैं कि प्रक्षेपण से लेकर ऊपर जाने के हर चरण में रॉकेट कैसा प्रदर्शन करता है। इस डेटा को जमीन पर होने वाले परीक्षण के जरिए पूरी तरह से दर्शाया नहीं जा सकता।'' 'आगमन' नाम का यह अभियान प्रणोदन, मार्गदर्शन, नेविगेशन, नियंत्रण और पूरे प्रक्षेपण यान के प्रदर्शन से जुड़ा अहम डेटा इकट्ठा करेगा। विक्रम-1 सात मंजिला लंबा, बहु-चरणीय कक्षीय प्रक्षेपण यान है जो पूर्ण-कार्बन मिश्रित संरचना के साथ बनाया गया है और घरेलू स्तर पर विकसित प्रणोदन प्रणालियों द्वारा संचालित है।
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नयी दिल्ली. जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची का बृहस्पतिवार को यहां राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में गर्मजोशी से औपचारिक स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस अवसर पर मौजूद रहे। यह तकाइची की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है।
राष्ट्रपति भवन परिसर के प्रांगण में आयोजित समारोह के दौरान जापान की प्रधानमंत्री सलामी मंच पर खड़ी हुईं और प्रधानमंत्री मोदी उनके पास खड़े थे। तीनों सेनाओं के मार्चिंग दस्ते और उनके पीछे बैंड का दस्ता, भारत आईं मेहमान प्रधानमंत्री के सम्मान में शानदार प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़े। तकाइची प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए एक से तीन जुलाई तक भारत की यात्रा पर हैं। दोनों प्रधानमंत्री व्यापार, निवेश, रक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करने के लिए बृहस्पतिवार को यहां 'हैदराबाद हाउस' में वार्ता करेंगे। औपचारिक स्वागत के बाद प्रधानमंत्री तकाइची ने मोदी के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों से मुलाकात की। कई केंद्रीय मंत्रियों ने हाथ जोड़कर तकाइची का अभिवादन किया और उन्होंने भी हाथ जोड़कर उनका अभिवादन स्वीकार किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने बाद में हाथ मिलाया और तस्वीरें खिंचवाईं। तकाइची तीन दिवसीय यात्रा पर बुधवार को नयी दिल्ली पहुंची थीं।
जापान की प्रधानमंत्री ने दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद बुधवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपने आगमन की तस्वीरें साझा की थीं। मोदी ने उनकी पोस्ट साझा करते हुए लिखा, ''प्रधानमंत्री सनाए तकाइची, भारत में आपका हार्दिक स्वागत है।'' उन्होंने कहा, ''आपकी पहली भारत यात्रा पर आपकी मेजबानी करके हमें बहुत प्रसन्नता हो रही है। मैं कल आपके साथ विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा को लेकर उत्सुक हूं, जिससे भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी और मजबूत होगी। हम अपने संयुक्त प्रयासों के जरिये हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उसके बाहर शांति, स्थिरता एवं समृद्धि को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे।'' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को कहा था कि यह यात्रा भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ''महत्वपूर्ण कदम'' है। विदेश मंत्रालय ने कहा था, ''शिखर सम्मेलन दोनों पक्षों को द्विपक्षीय सहयोग के सभी आयामों की समीक्षा करने और उन्हें मजबूत बनाने के साथ-साथ साझा हित के क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान करेगा।'' - नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं और साधु-संतों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। जम्मू की पुरानी मंडी स्थित श्रीराम मंदिर से बड़ी संख्या में साधु-संतों का जत्था गुरुवार को पवित्र अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुआ। यात्रा पर निकलने से पहले संतों और श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के जयकारे लगाए और सुखद व सुरक्षित यात्रा की कामना की।यात्रा पर रवाना हो रहे एक संत ने समाचार एजेंसी से कहा कि अब तक का सफर बेहद सुखद रहा है। उन्होंने बताया कि साथी संतों और श्रद्धालुओं के साथ यात्रा करने का अनुभव बेहद खास है।उन्होंने कहा, “यह पहली बार है जब मुझे बाबा अमरनाथ के दर्शन का अवसर मिल रहा है। संतों के लिए बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और हर साल इसी समर्पण के साथ सेवा की जाती है।”पहली बार अमरनाथ यात्रा पर निकले एक श्रद्धालु ने भी यात्रा को लेकर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, “यह मेरी पहली अमरनाथ यात्रा है। श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रशासन और सेना के जवानों की ओर से जो सहयोग और सहायता मिल रही है, वह बेहद सराहनीय है।”एक अन्य संत ने बताया कि वह पिछले 32 वर्षों से लगातार अमरनाथ यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बार भी सरकार ने यात्रियों के लिए बहुत अच्छी व्यवस्थाएं की हैं। खास तौर पर बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए की गई सुविधाएं काफी बेहतर हैं, जिससे यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम हो गई है।मध्य प्रदेश के नर्मदा नदी के तट पर स्थित जबलपुर से आए एक संत ने बताया कि यह उनकी तीसरी अमरनाथ यात्रा है।उन्होंने कहा, “मैं बाबा बर्फानी का आशीर्वाद लेने आया हूं। यात्रा के लिए सरकार ने शानदार तैयारियां की हैं और सभी व्यवस्थाएं बेहद अच्छी हैं।”इस मौके पर एक अन्य संत ने अमरनाथ यात्रा को आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ते हुए कहा, “हम सभी बेहद उत्साहित हैं। यह हमारी ‘कैलाश यात्रा’ का पहला चरण है। अंतिम चरण जम्मू के हरमुख कैलाश में पूरा होगा, जब वहां की यात्रा शुरू होगी। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।”उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने हर स्तर पर बेहतर व्यवस्थाएं की हैं, जिससे सभी श्रद्धालु सुरक्षित और सहज तरीके से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आगे बढ़ सकें।अमरनाथ यात्रा को लेकर पूरे जम्मू क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं और साधु-संतों में बाबा बर्फानी के दर्शन को लेकर गहरा उत्साह और आस्था साफ दिखाई दे रही है।















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