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नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान को किसी भी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि वह उस देश पर ऐसी ताकत से हमला करेंगे जो पहले कभी नहीं देखी गई।
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर ईरान को लेकर नई चेतावनी जारी की है। ईरान लगातार हमले जारी रखे हुए है। ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हमले में मौत के बाद ईरानी अधिकारी ने मुंहतोड़ जवाब देने और अमेरिका और इजरायल से बदला लेने की बात कही है।रविवार को ट्रूथ सोशल पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पोस्ट में लिखा, “ईरान ने अभी कहा है कि वे आज बहुत जोरदार हमला करेंगे, जितना पहले कभी नहीं हुआ। लेकिन बेहतर होगा कि वे ऐसा न करें, क्योंकि अगर वे ऐसा करते हैं, तो हम उन पर ऐसी ताकत से हमला करेंगे जो पहले कभी नहीं देखी गई!”ईरान के इस्लामिक रिपब्लिक गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने सरकारी टेलीविजन पर सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद, उनके हत्यारों को सजा देने की कसम खाई है और वादा किया कि जवाब अमेरिका और इजरायल के खिलाफ इतिहास का सबसे भयानक हमला होगा।अपने आधिकारिक टेलीग्राम पेज पर पोस्ट किए गए एक बयान में आईआरजीसी ने कहा, “उम्माह के इमाम के हत्यारों को कड़ी, पक्की और अफसोसनाक सजा देने के लिए ईरानी राष्ट्र का बदला लेने का हाथ उन्हें जाने नहीं देगा। आईआरजीसी, आर्म्ड फोर्सेज और बासिज फोर्सेज अपने नेता की विरासत को बचाने, अंदरूनी और बाहरी साजिशों के खिलाफ मजबूती से खड़े रहने और इस्लामिक देश के खिलाफ हमलावरों को सबक सिखाने वाली सजा देने में उनके रास्ते पर मजबूती से चलते रहेंगे।”आईआरजीसी ने घोषणा की कि उसने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 का पांचवां राउंड शुरू किया है, जिसमें हिंद महासागर समेत पूरे इलाके में गोला-बारूद ले जा रहे और ईंधन भरने वाले टैंकरों पर अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है।ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने अमेरिका और इजरायल के नेताओं को गंदे अपराधी करार दिया और कहा कि ईरान पर उनके लगातार हमलों के लिए “बहुत बुरी सजा” मिलेगी। गालिबफ की यह बात एक टेलीविजन संबोधन में आई। शनिवार को हमले शुरू होने के बाद से कैमरे पर दिखने वाले वह सबसे ऊंचे पद के अधिकारी हैं। उन्होंने कहा, “आपने हमारी लाल रेखा पार कर ली है और आपको इसकी कीमत चुकानी होगी। हम इतनी बुरी सजा देंगे कि आप खुद भीख मांगने पर मजबूर हो जाएंगे।” -
नई दिल्ली। ईरान के साथ जारी जंग के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरानी नागरिकों के लिए एक वीडियो संदेश जारी किया है। इजरायली पीएम ने कहा कि हम ईरान के बहादुर लोगों के जुल्म की जंजीरों से आजाद होने के लिए हालात बनाएंगे। ईरान के नागरिकों, इस मौके को हाथ से मत जाने दो।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो जारी कर कहा, “आने वाले दिनों में हम आतंकवादी शासन के हजारों ठिकानों पर हमला करेंगे। हम ईरान के बहादुर लोगों के लिए जुल्म की जंजीरों से आजाद होने के लिए हालात बनाएंगे और इसी वजह से, मैं एक बार फिर आपसे कहता हूं, ईरान के नागरिकों, इस मौके को हाथ से जाने मत देना। यह एक ऐसा मौका है, जो हर पीढ़ी में सिर्फ एक बार आता है। खाली मत बैठिए, क्योंकि आपका पल जल्द ही आएगा।पीएम नेतन्याहू ने आगे कहा, “वह पल जब आपको सड़कों पर उतरना होगा, लाखों की संख्या में सड़कों पर आना होगा ताकि काम पूरा हो सके, उस आतंक के शासन को उखाड़ फेंका जा सके, जिसने आपकी जिंदगी को कड़वा बना दिया है। आपकी तकलीफ और कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी। जिस मदद का आपको इंतजार था, वह अब आ गई है। मदद आ गई है, और अब एक ऐतिहासिक मिशन के लिए एकजुट होने का समय आ गया है। ईरान के नागरिकों, फारसियों, कुर्दों, अजेरियों, अहवाजियों और बलूचियों, अब समय आ गया है कि आप अपनी ताकतों को एकजुट करके शासन को उखाड़ फेंके और अपना भविष्य सुरक्षित करें।”इससे पहले इजरायली पीएम ने कहा था, “आज हमने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम में शामिल कई बड़े नेताओं को मार गिराया है और हम इस सरकार की कई जगहों को टारगेट करते रहेंगे। हमने उस जगह को टारगेट किया है जहां खामेनेई थे।”उन्होंने आगे कहा, “यह तानाशाह अब नहीं रहा। आज सुबह हमने अयातुल्लाह सरकार के बड़े अधिकारियों, रिवोल्यूशनरी गाईस कमांडरों और न्यूक्लियर प्रोग्राम के बड़े लोगों को खत्म कर दिया, और हम ऐसा करते रहेंगे। अगले कुछ दिनों में, हम आतंकी सरकार के हजारों और ठिकानों को निशाना बनाएंगे।”दूसरी तरफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के हमलों का बदला लेना अपना कानूनी हक और जिम्मेदारी मानता है। रविवार को ईरानी सरकारी मीडिया पर जारी एक बयान में, पेजेशकियन ने कहा कि सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को दुनिया के सबसे बुरे दुश्मन के हाथों मारा गया। पेजेशकियन ने कहा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान इस ऐतिहासिक जुर्म के गुनहगारों और कमांडरों के खिलाफ खून-खराबे और बदला लेने को अपनी जिम्मेदारी और कानूनी हक मानता है और इस बड़ी जिम्मेदारी और फर्ज को पूरी ताकत से पूरा करेगा।” -
नई दिल्ली। इजरायल के साथ युद्ध के बीच ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खामेनेई की मौत को लेकर कहा कि ईरान में अब शांति आएगी। हालांकि, शुरुआत में ईरानी मीडिया ने पीएम नेतन्याहू के दावे को खारिज किया था, लेकिन बाद में उन्होंने भी खामेनेई की मौत की पुष्टि कर दी।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, “आज हमने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम में शामिल कई बड़े नेताओं को मार गिराया है और हम इस सरकार की कई जगहों को टारगेट करते रहेंगे। हमने उस जगह को टारगेट किया है जहां खामेनेई थे।” उन्होंने आगे कहा, “यह तानाशाह अब नहीं रहा। आज सुबह हमने अयातुल्लाह सरकार के बड़े अधिकारियों, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडरों और न्यूक्लियर प्रोग्राम के बड़े लोगों को खत्म कर दिया, और हम ऐसा करते रहेंगे। अगले कुछ दिनों में, हम आतंकी सरकार के हजारों और ठिकानों को निशाना बनाएंगे।”इजरायली डिफेंस फोर्स ने जानकारी दी है कि पश्चिमी और मध्य ईरान में आईडीएफ ने 30 से ज्यादा टारगेट पर हमला किया, जिसमें एरियल डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्चर, शासन के टारगेट और मिलिट्री कमांड सेंटर शामिल हैं। आईडीएफ इंटेलिजेंस से गाइडेड, इजरायली एयर फोर्स के दर्जनों फाइटर जेट्स ने पश्चिमी और मध्य ईरान में ईरानी आतंकी शासन के बैलिस्टिक मिसाइल ऐरे और एरियल डिफेंस सिस्टम को कमजोर करने के मकसद से हमला किया।आईडीएफ ईरानी आतंकी शासन के बैलिस्टिक मिसाइल ऐरे और एरियल डिफेंस सिस्टम को कमजोर करना जारी रखेगा। इजरायली एयरफोर्स ने बताया कि ईरान से इजरायल के इलाके की ओर लॉन्च की गई मिसाइलों का पता चलने के बाद देश भर के कई इलाकों में अलर्ट एक्टिवेट कर दिए गए हैं। लोगों से अपील है कि वे होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन करें। इस समय, एयर फोर्स खतरे को दूर करने के लिए जहां भी जरूरी हो, इंटरसेप्ट करने और स्ट्राइक करने के लिए काम कर रही है। डिफेंस पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है और इसलिए होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन करते रहना जरूरी है।इसके अलावा, दुबई के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हवाई हमले से निकले मलबे की वजह से जेबेल अली पोर्ट के एक बर्थ में आग लग गई। दुबई सिविल डिफेंस टीमों ने तुरंत कार्रवाई की और आग को पूरी तरह बुझाने की कोशिश जारी रखी है। किसी के घायल होने की खबर नहीं है। अधिकारियों ने लोगों से 7 जुलाई, 2021 की जेबेल अली पोर्ट आग का पुराना वीडियो शेयर न करने की अपील की है, क्योंकि इससे गलत जानकारी फैल सकती है। जैसे ही और जानकारी मिलेगी, दी जाएगी। बहरीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट को ड्रोन से निशाना बनाया गया, जिससे बिना किसी जान के नुकसान हुआ, और यह घटना ऐसे समय में हुई जब संबंधित अधिकारी उस जगह को सुरक्षित करने के लिए काम शुरू कर रहे थे। -
दुबई. दक्षिणी ईरान में एक बालिका विद्यालय पर इजराइल-अमेरिका के हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 40 हो गई है। सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने शनिवार को यह जानकारी दी। ईरान के होर्मोज़गान प्रांत के मीनाब शहर में हुए हमले में कम से कम 45 अन्य लोग घायल भी हुए हैं। शहर में ईरान के अर्धसैनिक बल 'रिवोल्यूशनरी' गार्ड का एक अड्डा है।
अमेरिका और इजराइल दोनों ने ही अभी तक इस अभियान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। -
तेहरान. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान की घोषणा के बाद भारत ने शनिवार को ईरान और इजराइल में रहने वाले अपने नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने और सतर्क रहने की सलाह दी। ईरान में भारतीय दूतावास ने शनिवार को अपने नागरिकों के लिए एक परामर्श जारी करते हुए उनसे ''अत्यधिक सावधानी बरतने'' और ''जहां तक संभव हो घर के अंदर रहने'' की अपील की है। यह परामर्श क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच जारी किया गया है। दूतावास ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''बदलते घटनाक्रम को देखते हुए ईरान में सभी भारतीय नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने, अनावश्यक आवाजाही से बचने और जहां तक संभव हो घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है।'' दूतावास ने कहा कि सभी भारतीय नागरिक खबरों पर नजर बनाए रखें, आसपास की स्थिति के प्रति जागरूक रहें और भारतीय दूतावास से मिलने वाले आगे के निर्देशों का इंतजार करें। भारत ने इजराइल में रह रहे अपने नागरिकों के लिए भी परामर्श जारी करते हुए उन्हें ''अत्यधिक सावधानी बरतने और हर समय सतर्क रहने'' की सलाह दी है। भारत ने अपने परामर्श में कहा, ''क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए इजराइल में रह रहे सभी भारतीय नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने और हर समय सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।'' सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा गया है, ''भारतीय नागरिक इजराइली अधिकारियों और होम फ्रंट कमांड द्वारा जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों और निर्देशों का सख्ती से पालन करें।'' परामर्श में कहा गया है, ''सभी भारतीय नागरिक निर्धारित आश्रय स्थलों के नजदीक रहें और अपने निवास या कार्यस्थल के आसपास मौजूद सुरक्षित स्थानों के बारे में जानकारी रखें।'' इसमें कहा गया है, ''भारतीय नागरिकों को अगले आदेश तक इजराइल के भीतर गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी जाती है। नागरिकों से स्थानीय समाचार, आधिकारिक घोषणाओं और आपातकालीन अलर्ट पर नियमित रूप से नजर रखने को कहा जाता है।'' भारतीय दूतावास ने कहा कि वह संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी जानकारी जारी करता रहेगा। ईरान पर हमले के कुछ घंटों बाद संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और जॉर्डन समेत खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों में स्थित भारतीय मिशनों ने शनिवार को अपने नागरिकों के लिए परामर्श जारी किया और उनसे ''अत्यधिक सतर्क रहने'' तथा स्थानीय अधिकारियों की सलाह का पालन करने की अपील की। संयुक्त अरब अमीरात में अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने, सावधानी बरतने, सतर्क रहने और अधिकारियों तथा दूतावास द्वारा जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों और परामर्शों का पालन करने को कहा। रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने सऊदी अरब में रह रहे सभी भारतीयों से सतर्क रहने और वहां लागू सुरक्षा दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की। 'एक्स' पर जारी पोस्ट में कहा गया कि रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दा स्थित वाणिज्य दूतावास सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी परामर्श जारी करते रहेंगे। दूतावास ने 24 घंटे के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। जॉर्डन में भारतीय दूतावास ने कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय स्थिति को देखते हुए सभी भारतीय नागरिक और पर्यटक अत्यधिक सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और स्थानीय अधिकारियों की सलाह का पालन करें। साथ ही भारतीय पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन प्रभावित होने से पहले तुरंत देश छोड़ दें। बहरीन में भारतीय दूतावास ने भी नागरिकों से सावधानी बरतने और दूतावास व स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी खबरों और परामर्शों पर नजर रखने को कहा। रामल्ला में फलस्तीन में भारत के प्रतिनिधि कार्यालय ने वहां मौजूद भारतीयों से सतर्क रहने, स्थानीय सुरक्षा और आपातकालीन निर्देशों का पालन करने तथा अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है।
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नई दिल्ली। भारत ने शनिवार को इजरायल में रहने वाले अपने नागरिकों को सलाह दी कि वे ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हवाई हमले के बाद अलर्ट रहें।एक आधिकारिक बयान में, इजरायल में भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की।
दूतावास ने भारतीय प्रवासियों को चौकन्ना और सतर्क रहने की सलाह दी है। इसके अनुसार, “इलाके में मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए, इजरायल में सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे बहुत सावधानी बरतें और हर समय चौकन्ने रहें। भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे इजरायली अधिकारियों और होम फ्रंट कमांड द्वारा जारी सेफ्टी गाइडलाइंस और निर्देशों का सख्ती से पालन करें।”एडवाइजरी में सुरक्षित क्षेत्र के पास रहने की अहमियत पर भी जोर दिया गया। इसमें कहा गया कि सभी भारतीय नागरिक तय शेल्टर के पास रहें और अपने रहने की जगह या काम की जगह के सबसे पास की सुरक्षित जगहों के बारे में पता करके रखें।बयान में कहा गया, “भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि अगली सूचना तक इजरायल के अंदर सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचें। नागरिकों को स्थानीय मीडिया, आधिकारिक ऐलान और इमरजेंसी अलर्ट पर नियमित नजर रखने के लिए कहा जाता है।”दूतावास ने बदलते हालात के दौरान भारतीय नागरिकों को लगातार मदद का भरोसा भी दिया है।इसमें आगे कहा गया, “किसी भी इमरजेंसी में, भारतीय नागरिक 24/7 हेल्पलाइन +972-54-7520711 के जरिए तेल अवीव में भारतीय दूतावास से संपर्क कर सकते हैं। ईमेल आईडी है- सीओएनएस1डॉटतेलअवीवएटएमईएडॉटजीओवीडॉटइन। दूतावास संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार जुड़ा हुआ है और जरूरत पड़ने पर अपडेट जारी करता रहेगा।”यह एडवाइजरी शनिवार को तेहरान में हुए कई जोरदार धमाकों के बाद आई है, जिसे इजरायल ने ईरान से प्रिवेंटिव यानी एहतियात के तौर पर “बचाव के लिए” मिसाइल हमले बताया है।लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटनाक्रम से इलाके में तनाव तेजी से बढ़ा है।ये हमले अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित न्यूक्लियर समझौते को लेकर बढ़ते तनाव के बीच हुए, जिससे मिडिल ईस्ट में बड़े पैमाने पर मिलिट्री टकराव की आशंका बढ़ गई है।रिपोर्ट्स से पता चला है कि कई मिसाइलों ने यूनिवर्सिटी स्ट्रीट और ईरानी राजधानी के जोम्हौरी जिले में कई जगहों पर हमला किया। सेंट्रल तेहरान में पाश्चर स्ट्रीट के पास के इलाकों से धुएं का घना गुबार उठता देखा गया, जहां कई जरूरी सरकारी इमारतें हैं।अधिकारियों ने अभी तक नुकसान के पैमाने या किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं की है। तेजी से बदलते हालात को देखते हुए, इजरायल और ईरान दोनों ने एहतियात के तौर पर अपने एयरस्पेस बंद कर दिए हैं। -
यरुशलम. भारत और इजराइल ने "समय की कसौटी पर खरे" साबित हुए अपने संबंधों को बृहस्पतिवार को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक आगे बढ़ाया और "पारस्परिक रूप से लाभकारी" मुक्त व्यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप देने पर सहमति व्यक्त की। इजराइल का दौरा कर रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गाजा शांति पहल का समर्थन करते हुए कहा कि मानवता को कभी संघर्ष का शिकार नहीं बनना चाहिए। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के बाद अपने मीडिया बयान में मोदी ने कहा कि भारत का सुरक्षा हित पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता से जुड़ा है, और कहा कि नयी दिल्ली गाजा शांति पहल का पूरी तरह से समर्थन करती है। दोनों प्रधानमंत्रियों की बैठक के बाद, भारत और इजराइल ने कुल 17 समझौतों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यापार, निवेश, शिक्षा, विनिर्माण, संस्कृति, समुद्री विरासत, कृषि और अन्य क्षेत्रों में गहन सहयोग प्रदान करेंगे। भारत और इजराइल ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के ढांचे के तहत सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास और उत्पादन की दिशा में काम कर अपनी घनिष्ठ रक्षा साझेदारी का और विस्तार करने का भी संकल्प लिया। विदेश सचिव विक्रम मिसरी के अनुसार, वार्ता में अमेरिका-ईरान गतिरोध और क्षेत्र के अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई और प्रधानमंत्री मोदी ने संवाद के महत्व में भारत के दृढ़ विश्वास का उल्लेख किया तथा शांतिपूर्ण समाधान प्राप्त करने की दिशा में, यदि आवश्यक हो, तो समर्थन देने के लिए नयी दिल्ली की तत्परता को दोहराया। अपने मीडिया बयान में, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-इजराइल संबंधों की बढ़ती प्रगति के बारे में विस्तार से चर्चा की और कहा कि यह संबंध गहरे विश्वास, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय करुणा की मजबूत नींव पर बना है। उन्होंने कहा, "हमारे संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। आज हमने इस सिद्ध साझेदारी को 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह निर्णय दोनों देशों के लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाता है।" दोनों देशों के संबंधों को 2017 में रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया था।
मोदी ने कहा, "हमारा आर्थिक सहयोग विकास, नवाचार और साझा समृद्धि का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। पिछले वर्ष, हमने पारस्परिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक द्विपक्षीय निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए। हम जल्द ही पारस्परिक रूप से लाभकारी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को भी अंतिम रूप देंगे।" प्रधानमंत्री ने आतंकवाद से निपटने में भारत और इजराइल के संयुक्त संकल्प के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, "भारत और इजराइल इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं कि दुनिया में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है। किसी भी रूप में आतंकवाद को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।" उन्होंने कहा, "हम आतंकवाद और उसके समर्थकों का विरोध करने में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं, और हम ऐसा करना जारी रखेंगे।" प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सुरक्षा हित पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, "इसलिए, हमने शुरू से ही संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया है। यह ग्लोबल साउथ और समस्त मानवता की पुकार है।" उन्होंने कहा, "भारत का रुख स्पष्ट है: मानवता को कभी भी संघर्ष का शिकार नहीं बनना चाहिए। गाजा शांति योजना के माध्यम से शांति का मार्ग प्रशस्त हुआ है। भारत ने इन प्रयासों का पूर्ण समर्थन किया है। भविष्य में भी हम सभी देशों के साथ संवाद और सहयोग जारी रखेंगे।" प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में साझेदारी स्थापित करने के लिए दोनों पक्षों द्वारा किए गए संकल्प का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "प्रौद्योगिकी हमारी भावी साझेदारी का केंद्रबिंदु है। आज हमने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए एक साझेदारी स्थापित करने का निर्णय लिया है। इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नयी गति मिलेगी।" उन्होंने कहा, "मुझे खुशी है कि इजराइल में यूपीआई (यूनाइटेड पेमेंट इंटरफेस) के उपयोग के लिए एक समझौता हो गया है। हम डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपने अनुभवों को साझा करके लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।" मोदी ने दोनों पक्षों के बीच रक्षा संबंधों पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा, "रक्षा क्षेत्र में हमारा दशकों पुराना और भरोसेमंद सहयोग है। पिछले वर्ष हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन इसे नए आयाम प्रदान करेगा। हम मिलकर संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की दिशा में आगे बढ़ेंगे।" भारत स्वदेशी वायु रक्षा कवच "सुदर्शन चक्र" विकसित करने पर विचार कर रहा है, और समझा जाता है कि भारतीय पक्ष ने इजराइल की 'आयरन डोम' वायु रक्षा प्रणाली के कुछ तत्वों को अपने प्रस्तावित मिसाइल कवच में शामिल करने की संभावना का भी पता लगाया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष नागरिक परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में भी सहयोग को आगे बढ़ाएंगे। अपने संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि भविष्य उन्हीं का है जो नवाचार करते हैं और इजराइल तथा भारत नवाचार के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उन्होंने कहा, "हम गौरवान्वित प्राचीन सभ्यताएं हैं, हमें अपने अतीत पर बहुत गर्व है, लेकिन हम अपने भविष्य को संवारने के लिए भी पूरी तरह से दृढ़ संकल्पित हैं और हम मिलकर ऐसा कर सकते हैं।" कृषि क्षेत्र में दोनों देशों के बीच मजबूत सहयोग का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि इस सहयोग को भविष्योन्मुखी दिशा देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा, "भारत में इजराइल के सहयोग से स्थापित उत्कृष्टता केंद्र हमारी मित्रता के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इनकी सफलता को देखते हुए, हमने इनकी संख्या बढ़ाकर 100 करने का लक्ष्य रखा है।" मौजूदा उत्कृष्टता केंद्र कृषि उत्पादन के लिए नयी तकनीकें प्रदान करते हैं।
मोदी ने कहा, "इस दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए, हम उत्कृष्ट गांवों के निर्माण पर काम कर रहे हैं। इससे भारत के हर गांव में इजराइली तकनीक पहुंचेगी, जिससे लाखों किसानों की आय और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।" एक मीडिया ब्रीफिंग में, विदेश सचिव मिसरी ने फलस्तीन मुद्दे पर भारत के रुख के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि भारत अमेरिका समर्थित गाजा शांति पहल का समर्थन करता है और उन्होंने बुधवार को इजराइल की संसद (नेसेट) में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में इस बारे में की गई टिप्पणियों का हवाला दिया। मिसरी ने मोदी की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा कि यह उम्मीद खोने का समय नहीं है, बल्कि उम्मीद बनाए रखने का समय है। भारत और इजराइल के बीच भारत-पश्चिम एशिया यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के कार्यान्वयन और आई2यू2 (भारत-इजराइल-यूएई-अमेरिका) के ढांचे के तहत सहयोग पर भी चर्चा हुई। मोदी ने कहा, "हमने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देते हुए, हम भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे और भारत-इजराइल-यूएई-अमेरिका ढांचे पर नयी गति से आगे बढ़ेंगे।" नयी दिल्ली रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ आज हुई चर्चा बेहद फलदायी रही। हमने अपने सदियों पुराने सहयोग को विशेष रणनीतिक सहयोग के स्तर तक बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह निर्णय दोनों देशों के लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाता है।" -
यरुशलम. यरुशलम के हिब्रू विश्वविद्यालय ने इजराइल की संसद (नेसेट) में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ''साहसिक संबोधन'' के लिए बृहस्पतिवार को उन्हें धन्यवाद दिया और इस बात पर जोर दिया कि उनका यह संबोधन ''राजनयिक उपलब्धियों को गहन शैक्षणिक सहयोग में परिवर्तित कर सकता है।'' इजराइली विश्वविद्यालय ने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, आज शाम आपने नेसेट के मंच से जो गर्मजोशी भरे और साहसिक शब्द कहे, उसके लिए आपका धन्यवाद।'' भारत की आतंकवाद को ''बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति'' को दोहराते हुए मोदी ने अपने संबोधन में कहा, ''हम आपकी पीड़ा को समझते हैं। हम आपके दुख में आपके साथ हैं। भारत इस समय और भविष्य में भी पूरी दृढ़ता के साथ इजराइल के साथ खड़ा है।'' उन्होंने इजराइल के सांसदों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कहा, ''नागरिकों की हत्या को कोई भी वजह जायज नहीं ठहरा सकती। आतंकवाद को कोई भी चीज जायज नहीं ठहरा सकती।'' पिछले सप्ताह हिब्रू विश्वविद्यालय ने नालंदा विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। हिब्रू विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपाध्यक्ष प्रोफेसर गाय हरपाज के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भारत के संस्थानों के साथ अकादमिक संबंधों को मजबूत करने के लिए देश का दौरा किया। विश्वविद्यालय ने कहा, ''दोनों देशों के बीच गहरी साझेदारी शैक्षणिक क्षेत्र में भी नजर आती है।''
बताया जाता है कि हरपाज ने एशियाई अध्ययन विभाग और तुलनात्मक धर्म विभाग के प्रोफेसर एवियाटर शुल्मन के साथ मिलकर इस रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा का नेतृत्व किया। विश्वविद्यालय ने कहा, ''हम केवल अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन नहीं करते; हम उन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी वैज्ञानिक उत्कृष्टता की नींव में तब्दील करते हैं।'' विश्वविद्यालय के संस्थापक सदस्यों में अल्बर्ट आइंस्टीन भी शामिल हैं। -
यरुशलम. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने बृहस्पतिवार को ''बेहद सार्थक'' और व्यापक वार्ता की, जिसमें उन्होंने शिक्षा, स्टार्टअप, नवाचार, प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। राष्ट्रपति कार्यालय से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मोदी ने हर्जोग से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की, जहां दोनों नेताओं ने सबसे पहले बगीचे में साथ मिलकर एक 'ओक' का पौधा लगाया, ''जो दोनों देशों के बीच मित्रता, विकास और साझा भविष्य के निर्माण का प्रतीक है।'' मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''हमारी बातचीत बेहद सार्थक और व्यापक रही।''
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''दोनों नेताओं ने शिक्षा, स्टार्टअप, नवाचार, प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।'' बैठक के दौरान, मोदी ने इजराइल पहुंचने पर मिले ''अत्यंत गर्मजोशीपूर्ण और भव्य स्वागत'' के लिए हर्जोग को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, ''यह इजराइल के लोगों का भारत और भारतीयों के प्रति प्रेम दर्शाता है।'' उन्होंने इस बात का भी समर्थन किया कि भारत-इजराइल संबंध, विज्ञान, नवाचार या शैक्षणिक संस्थानों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में, वैश्विक हित के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। मोदी ने कहा, ''हमारे बीच विशेष रूप से जल और कृषि जैसे क्षेत्रों में बहुत सकारात्मक चर्चा हुई। भारत अपने यहां, विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में, इजराइल के कई अच्छे समाधानों को लागू कर रहा है, और इसके फलस्वरूप हमें शानदार परिणाम मिले हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''मुझे दुनिया के अन्य हिस्सों में विभिन्न अवसरों पर आपसे मिलने का मौका मिला है। आपके विचार बहुत स्पष्ट रहे हैं। आप भारत का बहुत सम्मान करते हैं। भारत के प्रति आपकी प्रतिबद्धता और सम्मान के लिए मैं तहे दिल से आपका आभार व्यक्त करता हूं।'' प्रधानमंत्री ने हर्जोग को भारत आने का निमंत्रण भी दिया और कहा कि भारत के 1.4 अरब लोग उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा, ''मैं आपको भारत आने का हार्दिक निमंत्रण देता हूं, और जब आप आएं, तो अपनी यात्रा को केवल दिल्ली तक सीमित न रखें, बल्कि भारत के अन्य हिस्सों की यात्रा के लिए भी समय निकालें।'' हर्जोग ने इजराइल की ऐतिहासिक दूसरी यात्रा के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया और इजराइल के प्रति भारतीय नेतृत्व के दीर्घकालिक और अटूट समर्थन की प्रशंसा की। राष्ट्रपति कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दोनों नेताओं ने नवाचार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, व्यापार और सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में इजराइल और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी के महत्व पर चर्चा की। इसमें यह भी कहा गया है कि उन्होंने दोनों देशों के लोगों के हित में भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा पहल सहित क्षेत्रीय साझेदारी और गठबंधनों के विस्तार के अवसरों पर भी चर्चा की। राष्ट्रपति ने भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि की सराहना करते हुए कहा, ''मेरा मानना है कि भारत पश्चिम एशिया के उज्ज्वल भविष्य का एक अभिन्न अंग है, और यह क्षेत्र भारत के उज्ज्वल भविष्य का एक अभिन्न अंग है। मैंने आपके देश की रिकॉर्ड तोड़ आर्थिक वृद्धि देखी है, जो पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। यह शानदार है।'' ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ाने के तरीकों का सुझाव देते हुए, इजराइली नेता ने कहा कि भारतीय और इजराइली विश्वविद्यालयों के पास भविष्य में मिलकर काम करने का "सुनहरा अवसर" है। राष्ट्रपति ने कहा, ''इजराइल और भारत के बीच यह संपर्क ग्लोबल साउथ के लाभ के लिए और पूर्वी गोलार्ध के माध्यम से दक्षिण पूर्व एशिया से अमेरिका के संपर्क को मजबूत करने के लिए संपूर्ण भू-रणनीतिक स्थिति को बदल सकता है।'' उन्होंने कहा, ''हम जानते हैं कि आप कई क्षेत्रों में विश्व का नेतृत्व कर रहे हैं... और अंत में, मैं यह कहना चाहूंगा कि अब्राहम समझौता, जो क्षेत्र में शांति की दिशा में सुधार लाने का एक मंच हैं, को अब हमें बस लागू करना है।'' हर्जोग ने भारत की यात्रा के निमंत्रण के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, ''मैं इस निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करता हूं। यह मेरा कई वर्षों से सपना रहा है, और भारत के कई हिस्से मुझे आकर्षित करते हैं और आपके अद्भुत इतिहास और संस्कृति में मेरी रुचि जगाते हैं, जिसमें सदियों से भारत के यहूदियों की अविश्वसनीय कहानी भी शामिल है, इसलिए यह एक शानदार अवसर होगा।'' -
यरूशलम. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को इजराइल की अपनी दो दिवसीय यात्रा समाप्त करने से कुछ घंटे पहले भारतीय मूल के यहूदी समुदाय के प्रमुख सदस्यों से मुलाकात करके उनसे बातचीत की। तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, 2023 तक इजराइल में भारतीय मूल के लगभग 85,000 यहूदी रहते थे। मोदी से मिलने वालों में यरूशलम से लगभग 75 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित अश्केलोन की एक परिषद सदस्य डॉ. रिकी शाही भी थीं, जिन्होंने प्रधानमंत्री को 'लोगों के लिए बहुत कुछ करने वाला' बताया और कहा कि यह उनके कार्यों में दिखाई देता है। बड़ौदा निवासी माता-पिता की पुत्री शाही ने कहा, ''वे ज्यादा बोलते नहीं हैं, लेकिन बहुत कुछ करते हैं।'' उन्होंने बताया कि उन्होंने बड़ौदा और अश्केलोन के बीच 'जुड़वां शहर' कार्यक्रम की शुरुआत की है। मणिपुर में जन्मे मानव संसाधन प्रबंधक इसहाक थांगजोन लगभग पांच साल पहले इजराइल आए थे। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा वाकई 'शानदार' है।'' भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (जिन्हें आमतौर पर बनेई मेनाशे कहा जाता है) से शेष सभी 5,800 यहूदियों को अगले पांच वर्षों में इजराइल वापस लाने के इजराइल सरकार के प्रस्ताव में हो रही प्रगति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''परिस्थिति अनुकूल होती जा रही है और हालात बहुत अच्छे दिख रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ''मेरी कामना है कि प्रधानमंत्री मोदी इजराइल-भारत संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएं।'' बुधवार को मोदी ने दिव्यांग कलाकारों के एक समूह द्वारा 'आई लव माई इंडिया...' गीत की प्रस्तुति को 'यादगार' बताया, जिसने भारतीय मूल के यहूदियों और इजराइली नागरिकों को एक साथ लाने का काम किया। इजराइली संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल में भारतीय मूल के जीवंत यहूदी समुदाय को मान्यता दी और शिक्षा, संस्कृति, सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रीय सेवा के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को रेखांकित किया। तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत से इजराइल में आव्रजन की मुख्य लहर पचास और साठ के दशक में देखने को मिली। इनमें से अधिकांश महाराष्ट्र (बेने इजराइली) से हैं और अपेक्षाकृत कम संख्या में केरल (कोचीनी यहूदी) और कोलकाता (बगदादी यहूदी) से हैं। भारतीय दूतावास के अनुसार, हाल के वर्षों में मिजोरम और मणिपुर (बेने मेनाचे) के कुछ भारतीय यहूदी भी प्रवास के लिए इजराइल पहुंच रहे हैं।
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यरूशलम. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बुधवार को इजराइल पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने बेन गुरियन हवाई अड्डे पर मोदी की अगवानी की। प्रधानमंत्री मोदी की नौ वर्षों में इजराइल की यह दूसरी यात्रा है। जुलाई 2017 में इस देश की उनकी पहली यात्रा के दौरान भारत-इजराइल संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाया गया था। नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से गले लगाकर अभिवादन किया। इसके बाद तेल अवीव से 20 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित हवाई अड्डे पर मोदी का औपचारिक स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री मोदी आज इजराइल की संसद को संबोधित करेंगे और नेतन्याहू के साथ वार्ता करेंगे। दोनों नेता बृहस्पतिवार को व्यापक मुद्दों पर बातचीत करेंगे। इजराइल यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा था कि उन्हें विश्वास है कि यह यात्रा भारत और इज़राइल के बीच स्थायी संबंधों को और सुदृढ़ करेगी तथा रणनीतिक साझेदारी के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करेगी। मोदी ने कहा, ''भारत और इज़राइल के बीच एक मज़बूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी है, जिसमें हाल के वर्षों में उल्लेखनीय विस्तार और गतिशीलता देखी गई है।'' उन्होंने कहा, ''मैं प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ होने वाली चर्चाओं को लेकर आशान्वित हूं जिनका उद्देश्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि, जल प्रबंधन, रक्षा एवं सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश के साथ लोगों के बीच आपसी संबंधों समेत विभिन्न क्षेत्रों में हमारे सहयोग को और मजबूत करना है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों नेता पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्री की यह यात्रा पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में भारत-इजराइल संबंध मजबूत हुए हैं, जिनमें रक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्र शामिल हैं। रक्षा सहयोग दोनों पक्षों के बीच साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है, जिसमें इजराइल भारत को कई सैन्य प्लेटफॉर्म और हथियार प्रणालियां मुहैया करा रहा है। पिछले साल नवंबर में, भारत के रक्षा सचिव की इजराइल यात्रा के दौरान, रक्षा सहयोग पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किये गये थे। दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों में भी लगातार प्रगति देखने को मिल रही है। दोनों पक्षों ने सितंबर में आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए एक द्विपक्षीय निवेश समझौते (बीआईए) पर हस्ताक्षर किये थे।
- नई दिल्ली।दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सूक येओल को 2024 में मार्शल लॉ लगाने की नाकाम कोशिश के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। गुरुवार को सोल की एक अदालत ने फैसला सुनाया।योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि इस केस पर पहले फैसले में, सोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने यून को मार्शल लॉ के जरिए बगावत करने का दोषी ठहराया। हालांकि, विशेष अभियोजक ने अपील की थी कि मामले में उन्हें मौत की सजा सुनाई जाए।कोर्ट ने साफ किया कि पूर्व राष्ट्रपति की ओर से दिया गया मार्शल लॉ का आदेश बगावत के बराबर था। यून ने संसदीय क्षेत्र में सेना भेजकर नेशनल असेंबली को कमजोर करने की कोशिश की थी।आदेश में इस बात पर ज्यादा जोर दिया कि यून का नेशनल असेंबली में सेना भेजना ही केस की जड़ है। सुनवाई के दौरान जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति को पेश किया गया। इस सुनवाई का सीधा प्रसारण नेशनल टेलीविजन पर किया गया।पिछले साल जनवरी में यून पर 3 दिसंबर, 2024 को छह घंटे तक चले मार्शल लॉ के जरिए बगावत करने का आरोप लगाया गया था। आरोप के मुताबिक, यून ने पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून और दूसरों के साथ मिलकर संविधान को नुकसान पहुंचाने के मकसद से दंगा करने की साजिश रची और युद्ध या वैसी ही कोई नेशनल इमरजेंसी न होने पर भी गैरकानूनी तरीके से मार्शल लॉ घोषित कर दिया।पिछले महीने ट्रायल की आखिरी सुनवाई के दौरान, स्पेशल वकील चो यून-सुक की टीम ने पूर्व राष्ट्रपति के लिए मौत की सजा की मांग की थी और कहा कि वह न्यायपालिका और विधायिका पर कब्जा करके लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के मकसद से मार्शल लॉ घोषित करने के लिए ज्यादा से ज्यादा सजा के हकदार हैं।टीम ने कहा, “जुर्म की प्रकृति गंभीर है क्योंकि उन्होंने ऐसे फिजिकल रिसोर्स जुटाए जिनका इस्तेमाल सिर्फ देश के हित में होना चाहिए था।” यून ने अपने आखिरी बयान में खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा था कि राष्ट्रपति के संवैधानिक स्टेट इमरजेंसी अधिकार का इस्तेमाल बगावत नहीं हो सकता।
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ढाका. बांग्लादेश में आम चुनावों में अपनी पार्टी बीएनपी को शानदार जीत दिलाने के बाद तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में मंगलवार को पद की शपथ लेंगे। रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 297 में से 209 सीट जीती, जबकि कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी ने 13वें संसदीय चुनाव में 68 सीट हासिल की हैं। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था। लंबे समय से चली आ रही एक परंपरा को तोड़ते हुए बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान (60) का शपथ ग्रहण समारोह बंगभवन के बजाय संसद परिसर के साउथ प्लाजा में आयोजित किया जाएगा। सरकारी समाचार एजेंसी 'बीएसएस' ने सोमवार को बताया कि राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन मंगलवार दोपहर को जातीय संसद (देश का संसद) के साउथ प्लाजा में नये मंत्रिमंडल सदस्यों को शपथ दिलाएंगे। जातीय संसद सचिवालय की सचिव कनीज मौला ने कहा, ''संसद सचिवालय में कल शाम चार बजे नये मंत्रिमंडल सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा।'' इससे पहले, मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन संसद के सभी नव निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाएंगे। जेएस सचिवालय की एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 13वीं जातीय संसद (जेएस) के सभी 297 नव निर्वाचित सांसद ''पहले संसद सदस्य (एमपी) के रूप में और फिर संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।'' रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, विदेश सचिव विक्रम मिसरी और लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह के भी बिरला के साथ उपस्थित रहने की संभावना है। -
केप कैनावेरल. स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण समय से पहले धरती पर वापस लाए गए साथियों की जगह लेने के लिए चार नए अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंच गए हैं। स्पेसएक्स ने शनिवार को अमेरिकी, फ्रांसीसी और रूसी अंतरिक्ष यात्रियों के दल को केप कैनावेरल से रवाना किया और एक दिन बाद ये अंतरिक्ष यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचे। पिछले महीने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से नासा ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण अंतरिक्ष यात्रियों की वहां से निकासी कराई थी जो 65 वर्षों के मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में पहला मामला था। पिछले साल गर्मियों में स्पेसएक्स ने चार अंतरिक्ष यात्रियों को रवाना किया था जिनमें से एक को गंभीर स्वास्थ्य समस्या हुई और इसके कारण उन्हें शीघ्र वापस लौटना पड़ा। इससे अंतरिक्ष अभियान के लिए केवल तीन ही सदस्य बचे - एक अमेरिकी और दो रूसी। इन हालात में नासा को अंतरिक्ष में चहलकदमी और अपना अभियान रोकना पड़ा। नासा की जेसिका मीर और जैक हैथवे, फ्रांस की सोफी एडेनोट और रूस के आंद्रेई फेड्यायेव आठ से नौ महीने अंतरिक्ष में रहेंगे। समुद्री जीवविज्ञानी मीर और पूर्व सैन्य पायलट फेड्यायेव पहले भी अंतरिक्ष में रह चुके हैं। 2019 में अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा के दौरान, मीर ने पहली बार पूरी तरह से महिलाओं द्वारा की गई अंतरिक्ष यात्रा में भाग लिया था। सैन्य हेलीकॉप्टर पायलट एडेनोट अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली दूसरी फ्रांसीसी महिला हैं। हैथवे अमेरिकी नौसेना में कप्तान हैं। अंतरिक्ष कैप्सूल जब 277 मील (446 किलोमीटर) ऊपर स्थित अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ा तो एडेनोट ने कहा 'बोनजो'। कुछ घंटों बाद 'हैच' खुल गए और सातों अंतरिक्ष यात्रियों ने एक-दूसरे को गले लगाया और हाथ मिलाया।
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ढाका. बांग्लादेश ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग के सत्ता से हटने के बाद भारत के साथ संबंधों को नए सिरे से स्थापित करने की इच्छा जताई है। बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा कि दोनों देशों को "पारस्परिक लाभ" के लिए मिलकर काम करना चाहिए। बांग्लादेश में बृहस्पतिवार को हुए ऐतिहासिक संसदीय चुनाव के परिणाम शुक्रवार को घोषित किए गए, जिसमें रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने दो-तिहाई से अधिक बहुमत के साथ शानदार जीत दर्ज की। कबीर ने शनिवार को एक न्यूज़ एजेंसी से बातचीत में जोर देकर कहा कि बांग्लादेश में बीएनपी को मिले प्रचंड जनादेश के बाद बदली हुई राजनीतिक वास्तविकता को स्वीकार करना अब भारत की जिम्मेदारी है। कबीर ने कहा, "बदलाव भारत की सोच में आना चाहिए। शेख हसीना और अवामी लीग आज के बांग्लादेश में मौजूद नहीं हैं। जनता ने स्पष्ट रूप से बीएनपी के पक्ष में फैसला दिया है।" कबीर ने अगस्त 2024 के जनविद्रोह के बाद भारत जा चुकीं हसीना को "आतंकवादी" करार देते हुए उन पर 1,500 से अधिक लोगों की मौत का जिम्मेदार होने का आरोप लगाया। उन्होंने भारत सरकार से आग्रह किया कि वह बांग्लादेश की स्थिरता को प्रभावित करने के लिए हसीना या अवामी लीग के अन्य नेताओं को अपनी जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति न दे। उन्होंने कहा, "भारत बांग्लादेश की संप्रभुता को कमजोर करने वाली किसी भी गतिविधि में सहभागी के रूप में न दिखे। एक बार यह मुद्दा सुलझ जाए, तो सामान्य राजनयिक सहयोग फिर से शुरू हो सकता है। हम पड़ोसी हैं और हमें पारस्परिक लाभ के लिए मिलकर काम करना चाहिए।" भारत ने 26 नवंबर 2025 को कहा था कि वह हसीना के प्रत्यर्पण के बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के अनुरोध पर गौर कर रहा है और बांग्लादेश की जनता के सर्वोत्तम हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, "हम शांति, लोकतंत्र, समावेशन और स्थिरता समेत बांग्लादेश की जनता के सर्वोत्तम हितों के प्रति प्रतिबद्ध हैं और इस संबंध में सभी पक्षों के साथ रचनात्मक रूप से जुड़े रहेंगे।" कबीर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रहमान के बीच फोन पर हुई सौहार्दपूर्ण बातचीत का भी उल्लेख किया, जिसमें मोदी ने रहमान को सुविधाजनक समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया। इस यात्रा के समय को लेकर कबीर ने कहा कि घरेलू प्राथमिकताएं पहले हैं।
उन्होंने कहा, "तारिक रहमान देश को समृद्धि और आर्थिक सुरक्षा के रास्ते पर लाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। यहां स्थिति स्थिर होने के बाद वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं पर विचार करेंगे, जिसमें भारत की यात्रा भी शामिल है।" दक्षिण एशिया में भारत, चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर बांग्लादेश के रुख के बारे में कबीर ने कहा कि नयी सरकार संबंधों में संतुलन की नीति अपनाएगी। उन्होंने कहा, " राष्ट्रीय हित और हमारी क्षेत्रीय भलाई हमारी विदेश नीति के केंद्र में रहेगी।"
उन्होंने कहा, "हम संतुलित संबंध चाहते हैं। हम किसी एक देश के साथ विशेष संबंध नहीं रखेंगे और किसी भी समझौते का अनावश्यक खुलासा नहीं करेंगे।" अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के साथ सांप्रदायिक हिंसा संबंधी चिंताओं को कबीर ने खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा, "अगस्त विद्रोह के बाद पांच दिन तक बिना सरकार की अभूतपूर्व स्थिति के दौरान भी किसी ने अल्पसंख्यकों पर हमला नहीं किया। यह यहां की सांप्रदायिक सद्भावना को दर्शाता है। समस्या वैसी नहीं है, जैसी कभी-कभी प्रस्तुत की जाती है।" भारत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हमलों को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है। दिसंबर में कट्टरपंथी युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद समुदाय पर कई हमले हुए, जिनमें कुछ घातक भी थे। बीएनपी के शनिवार को जारी बयान के अनुसार, बांग्लादेश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अन्य क्षेत्रीय नेताओं को 17 फरवरी को होने वाले देश के अगले प्रधानमंत्री तारिक रहमान के शपथग्रहण समारोह में आमंत्रित किया है।
- कराची. पाकिस्तान के सिंध प्रांत में कराची के बाहर सुपर हाईवे पर कुछ गाड़ियों की टक्कर में शुक्रवार को कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई और नौ अन्य घायल हो गए। राजमार्ग पर गलत दिशा से आ रही एक तेज रफ्तार यात्री बस एम9 अंसारी पुल पर एक तेल टैंकर से टकरा गई। इसी दौरान एक अन्य यात्री बस भी टैंकर से टकरा गई। क्षेत्र के पुलिस अधिकारी खालिद समोजो ने बताया कि घटना में 13 लोगों की मौत हो गई और नौ लोग घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा, ''शुरुआती जांच में घटना में यात्री बस चालक की गलती पाई गई है। एक बस सड़क के किनारे से पुल पर आई और तेल टैंकर से टकरा गई।'' मृतकों और घायलों में पैदल यात्री भी शामिल हैं।
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काठमांडू। पशुपतिनाथ मंदिर में रविवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर करीब आठ लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, जिनमें लगभग 30 प्रतिशत भारतीय होंगे। बागमती नदी के तट पर स्थित मंदिर को देश-विदेश, विशेषकर भारत से आने वाले हिंदू श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए रंग-बिरंगी रोशनी, कागज़ी झंडों, फूलों, मालाओं और बैनरों से सजाया गया है। मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले पशुपति क्षेत्र विकास ट्रस्ट के कार्यकारी निदेशक सुभाष जोशी ने बृहस्पतिवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि आगामी पांच मार्च को होने वाले चुनाव के मद्देनज़र इस बार मंदिर की सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं और लगभग 8,000 सुरक्षाकर्मियों, जिनमें नेपाली सेना के जवान भी शामिल हैं, की तैनाती की गई है। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि के अवसर पर पूजा-अर्चना के लिए सैकड़ों नागा बाबाओं सहित लगभग 4,000 साधुओं के मंदिर परिसर में पहुंचने की उम्मीद है। जोशी ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक नृत्य एवं संगीत कार्यक्रम, भजन-कीर्तन, अलाव और नि:शुल्क भोजन वितरण की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि मंदिर रविवार को तड़के दो बजे खोला जाएगा और श्रद्धालु चारों दिशाओं से शिवलिंग के दर्शन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क पेयजल, आपातकालीन चिकित्सीय सेवा, स्वयंसेवक सेवा तथा चंदन टीका वितरण की व्यवस्था की गई है। जोशी ने बताया कि वृद्ध, बीमार और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है ताकि वे आसानी से मंदिर में प्रवेश कर सकें। उनके अनुसार, मंदिर परिसर में शराब और अन्य मादक पदार्थों के सेवन पर सख्त प्रतिबंध रहेगा। महाशिवरात्रि के अवसर पर कम से कम 2,500 स्वयंसेवकों और 26 संगठनों को तैनात किया गया है। जोशी ने बताया कि नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के भी दिन में करीब साढ़े चार बजे दर्शन के लिए पहुंचने की संभावना है।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की और ईरान के साथ बातचीत जारी रखने पर जोर दिया। अमेरिका ईरान के साथ परमाणु समझौते को आगे बढ़ाना चाहता है। ट्रंप और नेतन्याहू के बीच यह मुलाकात 'व्हाइट हाउस' (अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''यह मुलाकात बहुत अच्छी रही और दोनों देशों के बीच शानदार रिश्ते जारी रहेंगे।'' उन्होंने कहा, ''कुछ भी निश्चित नहीं हुआ है, सिवाय इसके कि मैंने ईरान के साथ बातचीत पर यह देखने के लिए जोर दिया कि यह समझौता हो सकता है या नहीं।''
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कोलंबो. श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) को 15 फरवरी को भारत के खिलाफ यहां होने वाले टी20 विश्व कप मैच का बहिष्कार वापस लेने का निर्देश देने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ का आभार व्यक्त किया है। बांग्लादेश और श्रीलंका के आग्रह के बाद पाकिस्तान सरकार ने बहिष्कार की अपील वापस लेने का फैसला किया जिसका मतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच मैच निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होगा। इससे इस मैच पर बने संकट के बादल भी छंट गए। दिसानायके ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''यह जानकर बेहद खुशी हुई कि मौजूदा टी20 क्रिकेट विश्व कप में भारत और पाकिस्तान के बीच बहुप्रतीक्षित मैच का कोलंबो में आयोजन किया जाएगा।'' श्रीलंका क्रिकेट ने पीसीबी को लिखे पत्र में अपना निर्णय बदलने का अनुरोध किया था जिसके बाद दिसानायके ने सोमवार रात शरीफ को फोन करके उन्हें मैच खेलने के लिए मनाने की कोशिश की थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार दिसानायके की अपील को स्वीकार कर लिया गया है जिससे उनके देश द्वारा मैच का बहिष्कार प्रभावी रूप से समाप्त हो गया। इससे पहले पाकिस्तान ने कहा था कि वह भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलेगा। इसे बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर किए जाने से जुड़ा राजनीतिक विरोध माना जा रहा था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने बांग्लादेश के सुरक्षा कारणों से अपने मैच भारत से श्रीलंका में स्थानांतरित करने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया था।
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कुआलालंपुर. भारत और मलेशिया ने रविवार को व्यापार एवं निवेश, रक्षा, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण तथा सेमीकंडक्टर जैसे उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अपने संबंधों का विस्तार करने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जोर देकर कहा कि दोनों पक्ष हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ व्यापक वार्ता के बाद मोदी ने आतंकवाद से निपटने के मुद्दे पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा: ''आतंकवाद पर हमारा संदेश स्पष्ट है; कोई दोहरा मापदंड नहीं, कोई समझौता नहीं।'' दोनों पक्षों ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में गहन सहभागिता के लिए एक रूपरेखा समझौते सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कुल 11 समझौतों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। मोदी शनिवार को कुआलालंपुर पहुंचे। मोदी और इब्राहिम दोनों ने व्यापार निस्तारण के लिए स्थानीय मुद्राओं - भारतीय रुपया और मलेशियाई रिंगिट के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। मोदी ने भारत-मलेशिया संबंधों को ''विशेष'' बताते हुए कहा, ''हम रणनीतिक विश्वास के माध्यम से आर्थिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेंगे।'' उन्होंने मीडिया में जारी अपने बयान में कहा, ''हम समुद्री पड़ोसी हैं। सदियों से दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे और स्नेहपूर्ण संबंध रहे हैं।'' मोदी ने मलेशिया में भारतीय वाणिज्य दूतावास स्थापित करने के भारत के निर्णय की भी घोषणा की।
अपने संबोधन में इब्राहिम ने भारत की आर्थिक वृद्धि का उल्लेख किया और कहा कि अगर उनका देश भारत के साथ सहयोग के और अधिक तरीके एवं अवसर तलाश सके तो उसे बहुत लाभ होगा। उन्होंने कहा, ''यह (भारत की आर्थिक वृद्धि) अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और व्यापार के क्षेत्र में एक शानदार उन्नति है।'' उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार के लिए स्थानीय मुद्राओं का उपयोग करने के निर्णय को ''उल्लेखनीय'' बताया। वार्ता के दौरान मलेशिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के बाद भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया। सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग के बारे में विस्तार से बताते हुए मोदी ने कहा कि आतंकवाद विरोधी अभियान, खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री सुरक्षा में सहयोग को मजबूत किया जाएगा, साथ ही दोनों पक्ष रक्षा संबंधों को और आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा, ''कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ हम सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाएंगे।'' उन्होंने यह भी कहा कि सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) फोरम में हुई चर्चाओं ने व्यापार और निवेश के नए अवसर खोले हैं। प्रधानमंत्री ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर भारत के रुख और इस क्षेत्र में 10 देशों के समूह वाले आसियान (दक्षिणपूर्व एशियाई देशों का संघ) की केंद्रीय भूमिका पर भारत के दृढ़ विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ''हिंद-प्रशांत क्षेत्र विश्व के विकास के इंजन के रूप में उभर रहा है। भारत आसियान के साथ मिलकर पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विकास, शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।'' उन्होंने कहा, ''मलेशिया जैसे मित्र देशों के सहयोग से भारत आसियान के साथ अपने संबंधों को और अधिक विस्तारित करेगा। हम इस बात से सहमत हैं कि आसियान-भारत व्यापार समझौते (आईटीआईजीए) की समीक्षा शीघ्रता से पूरी की जानी चाहिए।'' मोदी ने कहा कि उन्होंने और इब्राहिम ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी ''सार्थक चर्चा'' की।
उन्होंने कहा, ''वैश्विक अस्थिरता के इस माहौल में भारत और मलेशिया के बीच बढ़ती मित्रता दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।'' उन्होंने कहा, ''हम इस बात से सहमत हैं कि आज की चुनौतियों का सामना करने के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार आवश्यक है। हम शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करना जारी रखेंगे और आतंकवाद पर हमारा संदेश स्पष्ट है: कोई दोहरा मापदंड नहीं; कोई समझौता नहीं।'' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''भारत-मलेशिया संबंधों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता की हम सराहना करते हैं। आइए, हम मिलकर एक समृद्ध मलेशिया के आपके सपने और विकसित भारत के हमारे संकल्प को साकार करें।'' एक संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों की ''स्पष्ट और कड़ी निंदा'' की और आतंकवाद के प्रति ''बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति'' का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने आतंकवाद से व्यापक और सतत तरीके से निपटने के लिए समन्वित वैश्विक प्रयासों का आह्वान किया तथा कट्टरता और हिंसक चरमपंथ का मुकाबला करने की दिशा में काम करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने और आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग को रोकने की दिशा में काम करने का भी संकल्प लिया। बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र और एफएटीएफ (वित्तीय कार्रवाई कार्य बल) सहित आतंकवाद का मुकाबला करने में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। मोदी और इब्राहिम ने संयुक्त राष्ट्र सहित बहुपक्षीय मंचों में सहयोग को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सुधारों का समर्थन करने पर भी सहमति व्यक्त की। संयुक्त बयान में कहा गया है, ''उन्होंने समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करते हुए बहुपक्षवाद को बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया, ताकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) सहित अंतरराष्ट्रीय संगठनों को अधिक प्रतिनिधिक बनाया जा सके।'' बयान में कहा गया है, ''बहुपक्षीय मंचों में आपसी सहयोग की मजबूत भावना को दर्शाते हुए दोनों नेताओं ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सदस्यता प्रस्तावों के लिए आपसी समर्थन पर चर्चा की। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के बाद देश की स्थायी सदस्यता के लिए मलेशिया के समर्थन की अत्यधिक सराहना की। - लंदन. लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (एलएसई) से हाल ही में मैक्रो-इकोनॉमिक्स में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने वाले केरल के एक छात्र ने रोजी-रोटी कमाने और ब्रिटेन में नौकरी की तलाश में जुटे स्नातकों का मनोबल बढ़ाने के लिए 'थॉमस टूर्स' नाम की अनूठी टूर गाइड सेवा शुरू की है। तिरुवल्ला के मल्लापल्ली गांव के रहने वाले जेम थॉमस मैथ्यू (23) ने अपने दादा के नाम पर 'थॉमस टूर' सेवा शुरूe की है, जो उन्हीं की तरह नौकरी की तलाश में जुटे युवाओं को अंशकालिक आधार पर रोजगार हासिल करने का मौका देती है। 'थॉमस टूर' के तहत जेम ने ऐसे यात्रा पैकेज तैयार किए हैं, जो आगंतुकों को कम खर्च में बेहतरीन सुविधाओं के साथ किसी स्थानीय व्यक्ति की तरह लंदन के विभिन्न स्थलों का दौरा करने का अवसर प्रदान करेंगे। जेम के मुताबिक, "हमारी खासियत यह है कि हम आगंतुकों की सहूलियत के अनुसार यात्रा कार्यक्रम तैयार करते हैं, जिसके तहत उन्हें स्थानीय लोगों की तरह ट्यूब (लंदन भूमिगत मेट्रो प्रणाली) और रेड बस सेवा के जरिये पूरे शहर में घुमाया जाता है। हम उन्हें पैदल मार्ग से भी लंदन के दिलकश नजारों का दीदार करवाते हैं।" जेम के अनुसार, "लंदन आने के बाद से ही मैं साइकिल से सफर करता आया हूं, जिसके चलते मुझे शहर के लोकप्रिय स्थलों की ओर ले जाने वाले कई शॉर्टकट रास्तों एवं पैदल मार्गों के बारे में जानकारी हो गई। इसलिए, मैं शहर के अन्य 'टूर ऑपरेटर' के मुकाबले लगभग आधे बजट में यात्रा कार्यक्रम बनाना जानता हूं और मेरा उद्देश्य शहर के स्नातकों को सशक्त बनाना है।"
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काठमांडू. नेपाल की बेनी नगरपालिका को भारत की राजधानी नयी दिल्ली से जोड़ने वाली सीधी बस सेवा शुरू की गई है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, इस बस सेवा के जरिये प्रसिद्ध हिंदू और बौद्ध तीर्थस्थल मुक्तिनाथ की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को काफी सुविधा मिलेगी। बेनी को नेपाल के गंडकी प्रांत के मुस्तांग जिले में स्थित प्राचीन विष्णु मंदिर मुक्तिनाथ का प्रवेश द्वार माना जाता है। मुक्तिनाथ मंदिर, हिंदू और बौद्ध दोनों समुदाय के लोगों के लिए पवित्र है। मुक्तिनाथ को 'मुक्ति के देवता' के रूप में जाना जाता है। हिंदू और बौद्ध धर्म के अनुयायी इसे क्रमशः हिंदू देवता विष्णु और बौद्ध देवता अवलोकितेश्वर से संबंधित पवित्र स्थान मानकर इसकी पूजा करते हैं। मॉडर्न एरा टूर्स एंड ट्रेवल्स और सृष्टि यातायात प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से नेपाल-भारत मैत्री बस सेवा शुरू की गई है। उपमहापौर ज्योति लामिछाने के अनुसार, बेनी नगरपालिका के महापौर सूरत केसी ने इसका उद्घाटन किया।
लामिछाने ने बताया कि बस सेवा बेनी कालीपुल बस पार्क से शुरू होगी और स्यांगजा, वालिंग, भैरहवा, अयोध्या और आगरा से होते हुए नयी दिल्ली पहुंचेगी। मॉडर्न एरा टूर्स एंड ट्रेवल्स के अध्यक्ष केशव प्रसाद अधिकारी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य म्याग्दी और मुस्तांग के धार्मिक स्थलों को भारत से जोड़ना और भारत से नेपाल में पर्यटन को बढ़ावा देना है। अब तक, मुक्तिनाथ मंदिर की यात्रा करने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों को समय लेने वाली और कई चरणों वाली महंगी यात्राएं करनी पड़ती थीं। अधिकारी ने बताया कि बस सेवा के जरिये नयी दिल्ली से बेनी पहुंचने में करीब 27 घंटे लगेंगे।बेनी से प्रतिदिन सुबह 6:45 बजे और नयी दिल्ली से शाम 4:00 बजे बसें चलेंगी। बेनी-नयी दिल्ली मार्ग का किराया 5,400 नेपाली रुपये जबकि नयी दिल्ली से बेनी का किराया 3,200 भारतीय रुपये निर्धारित किया गया है। -
न्यूयॉर्क. अमेरिका के दोनों दलों के शीर्ष सांसदों और नेताओं ने भारत-अमेरिका संबंधों तथा प्रवासी भारतीयों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह साझेदारी विश्व भर में शांति और स्थिरता के लिए ''बहुत महत्वपूर्ण'' है तथा उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को अधिक मजबूत करने का आह्वान किया। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को यहां एक विशेष स्वागत समारोह का आयोजन किया। न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्यदूत बिनय श्रीकांत प्रधान और उप महावाणिज्यदूत विशाल हर्ष ने समारोह में मौजूद गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया। इस समारोह में सरकारी अधिकारी, कारोबारी नेता, शिक्षा और संस्कृति जगत के नेता, भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कई प्रमुख सदस्य, राजनयिक कोर के सदस्य और विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथि शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए डेलवेयर के गवर्नर मैट मेयेर ने इस बात पर जोर दिया कि उनके राज्य में भारतीय समुदाय सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रवासी समुदाय है। उन्होंने डेलवेयर की विदेश सचिव चारुनी पतिबांडा-सांचेज के माता-पिता की प्रवासी यात्रा को याद किया, जो अमेरिका में इस पद को संभालने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी थीं। मेयेर मार्च में भारत की यात्रा करने वाले हैं, जिसमें वह मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद में एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। सफोल्क काउंटी से रिपब्लिकन अमेरिकी प्रतिनिधि निक ला लोटा ने न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड में इतालवी और आयरिश समुदायों के बाद बढ़ते भारतीय समुदाय को 'तीसरा समुदाय' बताया। न्यूयॉर्क के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट के अमेरिकी प्रतिनिधि माइक लॉलर ने 2023 में अमेरिकी कैपिटल में संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण को याद किया और इसे एक ''महत्वपूर्ण'' अवसर बताया, जहां ''हमने उनके (मोदी के) अंदाज को देखा। लोग प्रधानमंत्री को देखकर और उनकी आवाज सुनकर बेहद उत्साहित थे।'' नवंबर 2025 के चुनावों में फिर से चुने गए एडिसन के मेयर सैम जोशी ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत करते हुए कहा, ''मैं खुले तौर पर, बिना किसी हिचकिचाहट के भारतीय हूं...हालांकि मैं कभी भी राष्ट्रीय या संघीय मुद्दों पर बात नहीं करता, लेकिन मैं इस तथ्य से पीछे नहीं हटूंगा कि अमेरिका को भारत के साथ बेहतर संबंध रखने की जरूरत है।'' सांसद लौरा गिलन, न्यूयॉर्क राज्य विधानसभा की सदस्य जेनिफर राजकुमार ने भी अपने संबोधन में भारत के कई महान व्यक्तियों को याद किया।
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ह्यूस्टन (अमेरिका). भारतीय मूल के जलवायु वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को 'रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज' ने भू-विज्ञान में 2026 का क्रैफोर्ड पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की है। ''भू-विज्ञान का नोबेल'' कहे जाने वाले इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के तहत रामनाथन को 'सुपर-प्रदूषकों' और वायुमंडलीय 'ब्राउन क्लाउड्स' पर दशकों तक किए गए उनके शोध के लिए सम्मानित किया गया है, जिसने वैश्विक ताप वृद्धि (ग्लोबल वॉर्मिंग) की समझ को नई दिशा दी। रामनाथन (82) ने 1975 में नासा में काम करते हुए एक ऐतिहासिक खोज की थी। उन्होंने बताया कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी), जो एरोसोल और रेफ्रिजरेशन में व्यापक रूप से इस्तेमाल होते थे, वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 10,000 गुना अधिक प्रभावी तरीके से गर्मी खींचते हैं। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज से बातचीत में रामनाथन ने कहा, ''1975 तक हम मानते थे कि वैश्विक ताप वृद्धि मुख्य रूप से कार्बनडाइऑक्साइड के कारण होती है। मैं यह देखकर स्तब्ध रह गया कि तकनीक और मानव गतिविधियां पर्यावरण को किस हद तक बदल सकती हैं।'' रामनाथन का जन्म मदुरै में हुआ और उनका पालन-पोषण चेन्नई में हुआ। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सिकंदराबाद की एक रेफ्रिजरेटर फैक्टरी में इंजीनियर के रूप में की थी, जहां उन्होंने पहली बार सीएफसी पर काम किया। बाद में उन्होंने अन्नामलाई विश्वविद्यालय और भारतीय विज्ञान संस्थान से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
क्रैफोर्ड पुरस्कार के तहत उन्हें लगभग 9 लाख अमेरिकी डॉलर की राशि और एक स्वर्ण पदक दिया जाएगा। यह पुरस्कार मई 2026 में स्टॉकहोम में आयोजित 'क्रैफोर्ड डेज' के दौरान प्रदान किया जाएगा। रामनाथन का शोध मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौतों की बुनियाद बना, जिसने वातावरण में लाखों टन हानिकारक उत्सर्जन को जाने से रोका है। - वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका वेनेजुएला के ऊपर कमर्शियल एयरस्पेस फिर से खोलने जा रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच संबंधों के एक नए दौर की शुरुआत हो रही है, जिसमें अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में काम के मौके तलाश रही हैं।ट्रंप ने कैबिनेट मीटिंग में कहा कि उन्होंने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति से बात की है और यात्रा बहाल करने के लिए तुरंत कदम उठाने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के ऊपर पूरा व्यावसायिक हवाई क्षेत्र खोला जाएगा और बहुत जल्द अमेरिकी नागरिक वहां जा सकेंगे।उन्होंने कहा कि वहां जाने वाले यात्री सुरक्षित रहेंगे। ट्रंप के अनुसार, स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। ट्रंप ने बताया कि अमेरिका में रहने वाले वेनेजुएलावासी इस फैसले को ध्यान से देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि मियामी के डोरल इलाके में, जिसे ‘लिटिल वेनेजुएला’ कहा जाता है, लोग इस फैसले से बहुत खुश हैं। यह बदलाव एक सफल सुरक्षा अभियान और बेहतर होते रिश्तों का नतीजा है। ट्रंप ने इस काम के लिए जनरल केन और उनकी टीम की तारीफ भी की।उन्होंने इस बदलाव को एक सफल सुरक्षा ऑपरेशन और बेहतर होते संबंधों से जोड़ा। ट्रंप ने कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, वेनेजुएला के संबंध में एक स्थिति बनी थी। मैं जनरल केन और उनके स्टाफ को उनके काम के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। हम उनके साथ बहुत अच्छे से मिल-जुलकर काम कर रहे हैं। रिश्ते बहुत मजबूत, बहुत अच्छे रहे हैं।”ट्रंप ने कहा कि अब दोनों देशों के बीच संबंध काफी मजबूत और अच्छे हो गए हैं। ऊर्जा के क्षेत्र में ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी तेल कंपनियां पहले ही वेनेजुएला जाना शुरू कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी तेल कंपनियां वहां संभावनाएं देख रही हैं और अपने काम की जगह तय कर रही हैं।ट्रंप के मुताबिक, इससे दोनों देशों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि इससे वेनेजुएला और अमेरिका, दोनों के लिए बड़ी संपत्ति पैदा होगी और तेल कंपनियां भी अच्छा मुनाफा कमाएंगी।ट्रंप ने कहा कि इस फैसले के बाद वेनेजुएला में लोग सड़कों पर उतर आए। उन्होंने कहा, “वेनेजुएला के लोग सचमुच सड़कों पर अमेरिकी झंडे लहरा रहे थे, वे बहुत खुश थे।”उन्होंने परिवहन मंत्री सीन डफी और अन्य संबंधित विभागों को तेजी से काम करने का निर्देश दिया। ट्रंप ने कहा कि इस फैसले से दोनों तरफ की यात्रा संभव होगी। वेनेजुएला से आए लोग चाहें तो वापस जा सकेंगे या मिलने के लिए वहां जा सकेंगे। वेनेजुएला के पास दुनिया में सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडारों में से एक है। पहले अमेरिकी कंपनियां वहां के ऊर्जा क्षेत्र में सक्रिय थीं, लेकिन प्रतिबंधों और नियमों की वजह से उनका काम काफी कम हो गया था।






















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