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नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि वैश्विक हालात में अनिश्चितता के बावजूद सरकार ने हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक दिशा स्थिर रही है और देश 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।
लगातार नौवां बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य आर्थिक विकास को मजबूत करना और लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना है। यह बजट ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर आधारित है।निर्मला सीतारमण ने कहा, “हमारी सरकार ने हमेशा असमंजस की जगह ठोस कदम उठाए हैं। हमने बड़े आर्थिक सुधार किए हैं, वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है और मुद्रा स्थिरता के साथ-साथ सार्वजनिक निवेश पर विशेष ध्यान दिया है।”वित्त मंत्री ने लोकसभा में कहा कि आज दुनिया में व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर संकट है। संसाधनों और आपूर्ति शृंखला में रुकावटें आ रही हैं। नई तकनीकें उत्पादन के तरीकों को बदल रही हैं और पानी, ऊर्जा व जरूरी खनिजों की मांग बढ़ा रही हैं। ऐसे माहौल में भारत संतुलन और समावेशन के साथ विकसित भारत की ओर कदम बढ़ाता रहेगा। इसके साथ ही वित्त मंत्री ने कई बड़ी घोषणाएं की हैं।यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का 15वां बजट है। इसके साथ ही यह 2024 में एनडीए के लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के बाद दूसरा पूर्ण बजट है। निर्मला सीतारमण देश की पहली महिला वित्त मंत्री हैं, जिन्होंने संसद में लगातार नौ बार बजट पेश किया है।इस बजट में पूंजीगत खर्च पर खास ध्यान दिए जाने की संभावना है, खासकर उन क्षेत्रों में जो मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए रणनीतिक रूप से अहम माने जाते हैं। केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होने के बाद वित्त मंत्री देश के अलग-अलग हिस्सों से आए करीब 30 कॉलेज छात्रों से बातचीत करेंगी। ये छात्र लोकसभा गैलरी से बजट प्रस्तुति को लाइव देख रहे हैं, जिससे उन्हें संसद की अहम कार्यवाही को समझने का मौका मिला है।बजट तैयार करते समय सरकार ने युवाओं समेत देश के नागरिकों से अलग-अलग मंचों के जरिए सुझाव लिए हैं। इन सुझावों की झलक आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में देखने को मिलेगी। इस तरह यह बजट आत्मनिर्भर भारत, युवाओं की ताकत और विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। - नयी दिल्ली,। प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियां केंद्रीय बजट 2026-27 में कृत्रिम मेधा (एआई) पारिस्थितिकी तंत्र के विकास, नवाचार और डिजिटल बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के साथ-साथ बाजार में इसके विस्तार के लिए नकदी उपलब्ध कराने के उपायों की उम्मीद कर रही हैं।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को संसद में बजट पेश करेंगी।संसद में 29 जनवरी को पेश की गई आर्थिक समीक्षा में एआई को महज एक प्रौद्योगिकी की होड़ के बजाय एक आर्थिक रणनीति के रूप में मान्यता दी गई है। इसमें सहयोग और साझा नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘मुक्त’ और ‘परस्पर क्रियाशील’ प्रणालियों पर आधारित विभिन्न क्षेत्र-विशिष्ट दृष्टिकोण अपनाने की पुरजोर वकालत की गई है।एआई कंपनी ‘आयोनोस’ के वाइस-चेयरमैन सी पी गुरनानी ने कहा कि आर्थिक समीक्षा में भारत की प्रौद्योगिकी क्षमता और डेटा संपदा का सही चित्रण किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य इंजीनियरिंग क्षमता का लाभ उठाकर किफायती और मानव-केंद्रित एआई बनाने में है, जो स्थानीय चुनौतियों का समाधान कर सके।लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की सॉफ्टवेयर कंपनी ‘फारआई’ के मुख्य व्यवसाय अधिकारी सूर्यांश जालान ने कहा कि उद्योग को उम्मीद है कि बजट में विश्वसनीयता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार के उपायों पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एआई और उन्नत योजना प्रणालियों के लिए प्रोत्साहन उत्पादकता बढ़ाने के लिए आवश्यक होंगे।जालान ने कहा कि 2027 तक लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में लगभग एक करोड़ नौकरियां जुड़ने का अनुमान है, ऐसे में प्रौद्योगिकी की तैयारी और कौशल विकास पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
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नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन आज एक फरवरी को लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी। लोकसभा में बजट पेश होने के बाद बजट प्रति राज्यसभा में पेश की जाएगी। यह नरेन्द्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा बजट होगा।
बजट तैयार करने से पहले, वित्त मंत्री ने विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श बैठकें कीं। इनमें अर्थशास्त्री, ट्रेड यूनियन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिनिधि, लघु और मध्यम उद्यम, व्यापार और सेवा क्षेत्र, उद्योग जगत, वित्तीय क्षेत्र तथा पूंजी बाजार से जुड़े विशेषज्ञ शामिल थे। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कृषि और ग्रामीण विकास से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर व्यापक पूर्व-बजट परामर्श बैठकें कीं और वित्त मंत्री को सुझावों की संकलित रिपोर्ट सौंपी। -
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 296.59 अंक या 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,269.78 और निफ्टी 98.25 अंक या 0.39 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,320.65 पर बंद हुआ।
बाजार में गिरावट का नेतृत्व मेटल स्टॉक्स ने किया। निफ्टी मेटल इंडेक्स 5.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। निफ्टी कमोडिटीज 2.13 प्रतिशत, निफ्टी आईटी 1.03 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 0.90 प्रतिशत और निफ्टी सर्विसेज 0.64 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।दूसरी तरफ निफ्टी मीडिया 1.85 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.43 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 1.37 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.08 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 0.84 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 0.73 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।लार्ज कैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 109 अंक या 0.19 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 58,432 अंक और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 54.10 अंक या 0.32 प्रतिशत की तेजी के साथ 16,879.10 पर था।सेंसेक्स पैक में एमएंडएम, एसबीआई, आईटीसी, बीईएल, एचयूएल, टाइटन, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक, सन फार्मा और अदाणी पोर्ट्स गेनर्स थे। टाटा स्टील, आईसीआईसीआई बैंक, पावर ग्रिड, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट और टीसीएस लूजर्स थे।बाजार के जानकारों ने कहा कि आम बजट से पहले भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। मेटल शेयरों में तेज बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाने का काम किया। डॉलर में मजबूती के चलते सोने और चांदी में तेज गिरावट देखने को मिली।उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी सरकार के हालिया कामकाज ठप होने को टालने के लिए हुए समझौते ने अस्थायी राहत प्रदान की, लेकिन नए फेड अध्यक्ष की नियुक्ति से पहले बाजार सतर्क बने हुए हैं, क्योंकि अधिक सख्त रुख से तरलता कम हो सकती है और उभरते बाजारों पर दबाव पड़ सकता है।कमजोर ग्लोबल संकेतों से भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ खुला। सुबह 9:19 पर सेंसेक्स 444 अंक या 0.54 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 82,100 और निफ्टी 157 अंक या 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,261 पर था। -
नई दिल्ली। बजट से पहले भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने वाला संकेत सामने आया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 23 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.053 अरब डॉलर बढ़कर ऑल-टाइम हाई 709.413 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है।
इससे पहले भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर 2024 में 704.89 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचा था, जो उस समय का सर्वकालिक उच्च स्तर था। ताजा आंकड़ों के साथ यह पुराना रिकॉर्ड भी टूट गया है।आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) की वैल्यू 2.367 अरब डॉलर बढ़कर 562.885 अरब डॉलर हो गई है।विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल सोने की वैल्यू में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 23 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में गोल्ड रिजर्व 5.635 अरब डॉलर बढ़कर 123.088 अरब डॉलर पर पहुंच गया।आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) की वैल्यू 3.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.737 अरब डॉलर हो गई है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास रिजर्व पोजिशन की वैल्यू 1.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.703 अरब डॉलर हो गई है।पिछले सप्ताह भी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 14.167 अरब डॉलर की बढ़त के साथ 701.360 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था, जिससे लगातार मजबूती का रुझान देखने को मिल रहा है।गौरतलब है कि 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करेंगी। बजट से पहले विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार बेहद अहम होता है। यह न केवल देश की आर्थिक सेहत को दर्शाता है, बल्कि मुद्रा की विनिमय दर को स्थिर रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर किसी समय डॉलर के मुकाबले रुपए पर दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर रुपए को संभाल सकता है।विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि देश में डॉलर की आवक मजबूत बनी हुई है। इससे न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेशी निवेश के लिहाज से भी भारत की स्थिति बेहतर होती है। ( -
मुंबई. वैश्विक स्तर पर सोने की मांग 2025 में 5,000 टन से अधिक होकर एक नए सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गई है। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की बृहस्पतिवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। डब्ल्यूजीसी की '2025 की स्वर्ण मांग के रुझान' रिपोर्ट के अनुसार, कुल सोने की मांग 2025 में 5,002 टन के नए सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गई, जो पिछले वर्ष 4,961.9 टन थी। रिपोर्ट में कहा गया कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से निवेश मांग में तेज उछाल के कारण हुई, जो 2025 में बढ़कर 2,175.3 टन हो गई जबकि यह 2024 में 1,185.4 टन थी। चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में उपभोक्ता मांग दो प्रतिशत बढ़कर 1,345.3 टन हो गई जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 1,318.5 टन थी। डब्ल्यूजीसी की वरिष्ठ बाजार विश्लेषक लुईस स्ट्रीट ने कहा, ''वर्ष 2025 में सोने की मांग में जबर्दस्त उछाल और कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई। ऐसे माहौल में जहां आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिम नई सामान्य स्थिति बन चुके हैं उपभोक्ताओं और निवेशकों दोनों ने सोना खरीदा और उसे अपने पास बनाए रखा।"
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नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) को लगातार तीसरे साल 'ग्रेट प्लेस टू वर्क' (काम करने के लिए बेहतरीन जगह) का प्रमाणन प्राप्त हुआ है। कंपनी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। इस्पात निर्माता ने एक बयान में बताया कि नवीनतम प्रमाणन फरवरी 2026 से फरवरी 2027 की अवधि के लिए दिया गया है। सेल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अमरेंदु प्रकाश ने इस उपलब्धि पर कहा, "यह मान्यता हमारे कर्मचारियों द्वारा संगठन में जताए गए भरोसे और उस कार्य संस्कृति का प्रतिबिंब है, जिसे हम सामूहिक रूप से बना रहे हैं।" इस्पात मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत आने वाली सेल देश की शीर्ष पांच इस्पात उत्पादक कंपनियों में शामिल है। इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 2.1 करोड़ टन है। यह प्रमाणन विभिन्न मानकों के आधार पर कॉर्पोरेट घरानों और अन्य संगठनों को प्रदान किया जाता है। इसमें कर्मचारियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सहित उनके समग्र कल्याण और कार्य संस्कृति का आकलन किया जाता है।
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नई दिल्ली। भारत में औद्योगिक उत्पादन दिसंबर में दो साल से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के मजबूत प्रदर्शन के चलते औद्योगिक गतिविधियों में तेज सुधार देखने को मिला है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) की ग्रोथ 7.8% रही, जो नवंबर में 6.7% थी। इसका मतलब है कि फैक्ट्रियों, खदानों और बिजली उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों में व्यापक तेजी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में औद्योगिक गतिविधियां साल-दर-साल आधार पर 7.8% बढ़ीं, जो पिछले दो साल से अधिक समय में सबसे तेज वृद्धि है। संशोधित आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में आईआईपी ग्रोथ 7.2% रही थी, जिससे यह साफ होता है कि अलग-अलग सेक्टरों में उत्पादन में निरंतर मजबूती आई है।
दिसंबर की इस मजबूती के पीछे मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और बिजली उत्पादन-तीनों सेक्टरों का अहम योगदान रहा। मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन 8.1% बढ़ा, माइनिंग सेक्टर में 6.8% और बिजली उत्पादन में 6.3% की वृद्धि दर्ज की गई। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के भीतर 23 में से 16 उद्योग समूहों में दिसंबर के दौरान सकारात्मक ग्रोथ दर्ज की गई। कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल प्रोडक्ट्स का उत्पादन 34.9% बढ़ा, जबकि मोटर वाहन, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर का उत्पादन 33.5% बढ़ा। अन्य परिवहन उपकरणों में 25.1% की वृद्धि दर्ज की गई।दिसंबर में बेसिक मेटल्स का उत्पादन 12.7% बढ़ा, जिसमें एलॉय स्टील, एमएस स्लैब और स्टील पाइप व ट्यूब्स का योगदान रहा। फार्मास्युटिकल उद्योग में भी 10.2% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसे वैक्सीन, पाचन संबंधी दवाओं और विटामिन उत्पादों की मांग से बल मिला। उपयोग-आधारित वर्गीकरण के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण से जुड़े सामानों का उत्पादन दिसंबर में 12.1% बढ़ा। वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 12.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जो निवेश और उपभोक्ता मांग- दोनों में मजबूती को दर्शाता है।इस दौरान कैपिटल गुड्स का उत्पादन 8.1% और इंटरमीडिएट गुड्स का उत्पादन 7.5% बढ़ा। प्राइमरी गुड्स में 4.4% की वृद्धि दर्ज की गई, जो नवंबर के मुकाबले बेहतर रही।अप्रैल से दिसंबर 2025-26 की अवधि में कुल औद्योगिक उत्पादन 3.9% बढ़ा। हालांकि वित्त वर्ष की शुरुआत में कुछ उतार-चढ़ाव रहे, लेकिन साल के अंत तक ग्रोथ की दिशा स्पष्ट रूप से मजबूत नजर आई।उपभोक्ता पक्ष पर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की ग्रोथ 10.3% से बढ़कर 12.3% हो गई, जबकि कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स का उत्पादन 7.3% से बढ़कर 8.3% रहा। इससे स्पष्ट है कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है।केयरएज रेटिंग की चीफ इकोनॉमिस्ट रजनी सिन्हा के अनुसार, दिसंबर में 7.8% की औद्योगिक वृद्धि दो साल से अधिक समय में सबसे तेज है। उन्होंने कहा कि सरकार के लगातार पूंजीगत खर्च (कैपेक्स), बेहतर जीएसटी कलेक्शन, इनकम टैक्स में राहत, आरबीआई की पिछली ब्याज दर कटौती और महंगाई में नरमी से आगे भी खपत और निवेश को समर्थन मिलेगा।रजनी सिन्हा ने कहा कि आने वाला केंद्रीय बजट आर्थिक रफ्तार के लिए अहम होगा, जबकि अमेरिका के टैरिफ जैसे वैश्विक जोखिमों पर भी सतर्क नजर रखने की जरूरत है। ( -
नई दिल्ली। भारतीय इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी ने बुधवार के सेशन को मामूली बढ़त के साथ खत्म किया, और पूरे दिन भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद हरे निशान में बने रहने में कामयाब रहे।
निवेशकों की भावना दिसंबर-तिमाही की कमाई की घोषणाओं और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिए जाने से प्रभावित हुई।सेंसेक्स 82,345 पर बंद हुआ, जिसमें 487 अंकों या 0.60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। सेशन के दौरान, इंडेक्स 82,504 के उच्च स्तर और 81,815 के निम्न स्तर के बीच रहा, क्योंकि बाजार लाभ और हानि के बीच झूलता रहा।निफ्टी भी सकारात्मक बंद हुआ, दिन के अंत में 25,343 पर बंद हुआ, जो 167 अंक या 0.66 प्रतिशत ऊपर था। इंडेक्स ने इंट्रा-डे में 25,372 का उच्च स्तर छुआ और बंद होने से पहले 25,188 के निम्न स्तर तक फिसल गया।एक विश्लेषक ने बताया, “हालांकि इंडेक्स अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है – जो निकट भविष्य में सावधानी का संकेत देता है – तत्काल प्रतिरोध 25,400-25,450 पर देखा जा रहा है, इसके बाद 25,600-25,650 पर एक मजबूत सप्लाई ज़ोन है, जो 20/50-EMA क्लस्टर के साथ जुड़ा हुआ है।”भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के शेयर 9 प्रतिशत चढ़ गए, जो सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर शीर्ष लाभ कमाने वाले स्टॉक के रूप में उभरे।बाजार को सहारा देने वाले अन्य शेयरों में ONGC, कोल इंडिया, हिंडाल्को, बजाज फाइनेंस, पावर ग्रिड, अदानी एंटरप्राइज़ेज़, ट्रेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा, सिप्ला और श्रीराम फाइनेंस शामिल थे।नुकसान वाले शेयरों में, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स 4.5 प्रतिशत गिर गया। एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, सन फार्मा, मैक्स हेल्थकेयर, डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज़, इंफोसिस और आइशर मोटर्स जैसे शेयर भी 4.2 प्रतिशत तक के नुकसान के साथ निचले स्तर पर बंद हुए।व्यापक बाजार बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन करते रहे। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.66 प्रतिशत बढ़ा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.26 प्रतिशत की मजबूत बढ़त हुई।सेक्टर के हिसाब से, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने रैली का नेतृत्व किया। निफ्टी CPSE इंडेक्स में 5 परसेंट की तेज़ी आई, जबकि निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 3.4 परसेंट की बढ़त हुई।निफ्टी मेटल इंडेक्स में 2.3 परसेंट और निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में 1.7 परसेंट की बढ़ोतरी हुई, जिससे बाज़ार पॉजिटिव नोट पर बंद हुआ।एक एक्सपर्ट ने कहा, “इंडिया-EU FTA के सपोर्ट से घरेलू बाज़ारों में लगातार तेज़ी देखने को मिली।” - नयी दिल्ली. सूचना एवं प्रसारण मंत्री मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कहा कि सरकार का लक्ष्य 2032 तक आधुनिक स्मार्टफोन और कंप्यूटर जैसे उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले 3-नैनोमीटर नोड के उच्च तकनीक वाले छोटे चिप बनाने का है। मंत्री ने कहा कि डिजाइन आधारित प्रोत्साहन (डीएलआई) योजना के दूसरे चरण के तहत सरकार चिप की छह श्रेणियों कंप्यूट, रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ), नेटवर्किंग, ऊर्जा, सेंसर और मेमोरी पर ध्यान केंद्रित करेगी। इससे देश की कंपनियों को 70–75 प्रतिशत प्रौद्योगिकी उत्पादों के विकास पर प्रमुख नियंत्रण मिल सकेगा। डीएलआई योजना के तहत चयनित 24 चिप डिजाइन कंपनियों के साथ बैठक के बाद मंत्री ने कहा, "2032 तक हमारा लक्ष्य 3-नैनोमीटर चिप के डिजाइन और विनिर्माण के स्तर तक पहुंचना है। डिजाइन का काम तो हम आज भी कर रहे हैं, लेकिन विनिर्माण के स्तर पर 3-नैनोमीटर तक पहुंचना होगा।" वैष्णव ने कहा कि सरकार छह प्रमुख प्रणालियों पर ध्यान देना चाहती है, ताकि देश के पूरे सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षेत्र समग्र और व्यापक रूप से विकसित किया जा सके। मंत्री ने कहा, "कंप्यूट, आरएफ, नेटवर्किंग, ऊर्जा, सेंसर और मेमोरी इन छह प्रमुख श्रेणियों में हम शिक्षा जगत और उद्योग को नए विचार, नई सोच और नए समाधान लेकर आने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। जैसे-जैसे हम 2029 की ओर बढ़ेंगे, देश में ऐसे चिप के डिजाइन और विनिर्माण की बड़ी क्षमता विकसित हो जाएगी, जिनकी जरूरत हमारे देश में लगभग 70–75 प्रतिशत अनुप्रयोगों में होती है।" उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र को इन छह प्रकार के चिप के किसी न किसी संयोजन की आवश्यकता होगी।
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नयी दिल्ली। भारत ने यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ अपने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत आयात शुल्क घटाने पर सहमति जताई है, जिससे आयातित यूरोपीय कारों की कीमतें कम हो सकती हैं। यह रियायत सालाना 2.5 लाख वाहनों के लिए दी गई है, जो पिछले साल ब्रिटेन को दी गई रियायत से छह गुना अधिक है। यूरोपीय आयोग के अनुसार इस समझौते के बाद कारों पर लगने वाला शुल्क मौजूदा 110 प्रतिशत से धीरे-धीरे घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगा। यह लाभ प्रति वर्ष 2,50,000 वाहनों के कोटे तक सीमित होगा। आयोग ने कहा कि 2024 में यूरोप ने भारत को 1.6 अरब यूरो मूल्य के मोटर वाहनों का निर्यात किया था। भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को एफटीए के लिए बातचीत पूरी होने की घोषणा की।
ईयू को दिया गया यह कोटा भारत द्वारा पिछले साल ब्रिटेन के साथ किए गए अलग व्यापार सौदे में दी गई 37,000 इकाई की तुलना में छह गुना से भी ज्यादा है। इसे मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी, फॉक्सवैगन, रेनॉल्ट, लेम्बोर्गिनी और पोर्श जैसे यूरोपीय ब्रांडों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। इस समय भारत 40,000 अमेरिकी डॉलर से अधिक कीमत वाली यात्री कारों की पूरी तरह बनी इकाई (सीबीयू) के आयात पर 70 प्रतिशत बुनियादी सीमा शुल्क और 40 प्रतिशत एआईडीसी (कृषि बुनियादी ढांचा और विकास उपकर) लगाता है, जिससे प्रभावी दर 110 प्रतिशत हो जाती है। इसके अलावा 40,000 डॉलर तक की यात्री कारों के आयात पर 70 प्रतिशत शुल्क लगता है। वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पहले साल कुछ खंड में शुल्क कटौती 35 प्रतिशत और कुछ में 30 प्रतिशत होगी। इसके बाद यह धीरे-धीरे घटकर 10 प्रतिशत तक आ जाएगी। -
नयी दिल्ली। भारत यूरोपीय संघ को इस्पात निर्यात के लिए तरजीही सुविधाएं प्राप्त करने को लेकर आशावादी है, क्योंकि 27 देशों वाला यह समूह इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ नए इस्पात व्यापार नियमों पर बातचीत कर रहा है। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत भारत ने यूरोपीय संघ से आयात होने वाले अधिकांश लौह और इस्पात उत्पादों पर शुल्क को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने पर सहमति जताई है। समझौते के अनुसार, कुल उत्पाद श्रेणियों में से 6.1 प्रतिशत को विशेष सुविधा दी जाएगी। इन उत्पादों पर या तो आयात शुल्क कम किया जाएगा या फिर गाड़ियों और इस्पात के लिए सीमा शुल्क कोटा के माध्यम से रियायत दी जाएगी। यूरोपीय संघ वर्तमान में एक नई, अधिक कड़ी इस्पात व्यापार व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जो मौजूदा सुरक्षा उपायों की जगह लेगी। इस बदलाव को नियंत्रित करने वाला मुख्य नियम नई इस्पात अधिशेष क्षमता नियमावली है, जिसे अक्टूबर 2025 में औपचारिक रूप से प्रस्तावित किया गया था और जो एक जुलाई 2026 से लागू होने वाली है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा, "यूरोपीय संघ ने इस्पात को लेकर नए प्रस्ताव पेश किए हैं और हमने ईमानदारी के साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया है ताकि भारत, मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का साझेदार होने के नाते, उन अधिकांश देशों की तुलना में बेहतर शर्तें हासिल कर सके जिनके साथ यूरोपीय संघ का कोई एफटीए नहीं है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि कुछ समय में इसका संतोषजनक समाधान हो जाएगा।
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वाशिंगटन. मजबूत उपभोक्ता खर्च के दम पर अमेरिका की अर्थव्यवस्था जुलाई-सितंबर तिमाही में दो साल में सबसे तेज 4.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने बृहस्पतिवार को जुलाई-सितंबर, 2025 तिमाही के जीडीपी आंकड़े पहले के अनुमान से थोड़ा अधिक रहने की जानकारी दी। सितंबर तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था वार्षिक आधार पर 4.4 प्रतिशत बढ़ी जबकि अप्रैल-जून तिमाही में इसकी वृद्धि दर 3.8 प्रतिशत रही थी। विभाग ने पहले इसके 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में पिछली बार इतनी तेजी जुलाई-सितंबर तिमाही, 2023 में दर्ज की गई थी।
जीडीपी में करीब 70 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला उपभोक्ता खर्च आलोच्य तिमाही में 3.5 प्रतिशत बढ़ा। इसके अलावा, निर्यात में तेजी और आयात में कमी ने भी अर्थव्यवस्था की वृद्धि में योगदान दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शुल्क एवं व्यापार नीतियों में अनिश्चितता के बावजूद दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था काफी हद तक जुझारू बनी हुई है। हालांकि, आम अमेरिकी उच्च जीवन यापन लागत से असंतुष्ट बने हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह 'के-आकार' वाली अर्थव्यवस्था का संकेत है जिसमें संपन्न वर्ग की आय निवेश एवं शेयर बाजार लाभ के कारण बढ़ रही है, जबकि निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के घरों की आय स्थिर और महंगाई बढ़ी हुई है। रोजगार क्षेत्र की स्थिति भी तुलनात्मक रूप से कमजोर दिख रही है। पिछले साल मार्च से यहां प्रतिमाह औसतन केवल 28,000 नौकरियां जुड़ी हैं, जबकि 2021-23 के दौर में यह आंकड़ा चार लाख नौकरी प्रति माह था। इसके बावजूद बेरोज़गारी दर 4.4 प्रतिशत पर है जो कंपनियों की 'न भर्ती, न बर्खास्तगी' नीति को दर्शाती है। -
नयी दिल्ली. होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (एचएमएसआई) ने मंगलवार को कहा कि वह अपनी सीबीआर 650आर मोटरसाइकिल की कुछ इकाइयों को वापस मंगा रही है। दोपहिया वाहन विनिर्माता ने एक बयान में कहा कि वैश्विक बाजार की कार्रवाई के अनुरूप 16 दिसंबर, 2024 से चार मई, 2025 के बीच विनिर्मित कुछ इकाइयां इससे प्रभावित हो सकती हैं। होंडा मोटरसाइकिल ने कहा, ''कंपनी ने पाया है कि कुछ इकाइयों में इंडिकेटर का एक वायरिंग हिस्सा धातु के घटक से रगड़ खा सकता है, और समय के साथ कंपन के कारण इसमें शॉर्ट सर्किट हो सकता है। इससे कुछ लाइट काम करना बंद कर सकती हैं।'' बयान में आगे कहा गया कि एहतियाती कदम के तौर पर ग्राहकों को यह जांचने की सलाह दी जाती है कि क्या उनकी मोटरसाइकिल प्रभावित निर्माण अवधि के भीतर आती है। कंपनी ने कहा कि यदि वाहन प्रभावित श्रेणी में है, तो ग्राहकों से अनुरोध है कि वे वाहन के निरीक्षण के लिए अपने नजदीकी 'बिगविंग' डीलरशिप पर जाएं। अगर जरूरी हुआ तो प्रभावित हिस्सों को मुफ्त में बदला जाएगा, चाहे वाहन की वारंटी की स्थिति कुछ भी हो। हालांकि, एचएमएसआई ने यह नहीं बताया कि कितनी इकाइयों को वापस मंगाया जा रहा है।
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नयी दिल्ली. देश के एक तिहाई से ज्यादा पशुपालक दूध नहीं बेचते और इसके बजाय वे घरेलू पोषण, गोबर और खेती संबंधी अन्य कामकाज में पशुओं के इस्तेमाल पर जोर देते हैं। यह डेयरी उत्पादन से आगे की नीतियों की जरूरत को बताता है। एक अध्ययन रिपोर्ट में मंगलवार यह कहा गया। ‘एनर्जी, एनावायरनमेंट एंड वाटर काउंसिल' (सीईईडब्ल्यू) की अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, ये नतीजे इस मान्यता को चुनौती देते हैं कि भारत का मवेशी क्षेत्र मुख्य रूप से दूध की बिक्री से चलता है। इसमें 15 राज्यों में 7,350 मवेशी पालने वाले परिवारों का सर्वेक्षण किया, जो देश की 91 प्रतिशत दुधारू आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। अध्ययन में पाया गया कि लगभग 38 प्रतिशत पशुपालक या लगभग तीन करोड़ लोग, दूध की बिक्री को मवेशी रखने की प्रेरणा नहीं मानते हैं, झारखंड में यह हिस्सा 71 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश में 50 प्रतिशत से ज्यादा है। अध्ययन में कहा गया है, ‘‘पशुपालकों का एक बड़ा हिस्सा पशुपालन जारी रखने की इच्छा रखता है।''
इसमें कहा गया है कि इसलिए, इस क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार करना एक जरूरी नजरिया है जिस पर नीतियां बनाते समय विचार किया जाना चाहिए। अध्ययन में पाया गया कि लगभग तीन-चौथाई पशुपालकों को इलाके में ज्यादा दूध होने के बावजूद सस्ता चारा और आहार जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सात प्रतिशत पशुपालक, देश भर में लगभग 56 लाख पशुपालक मवेशियों को दूध के अलावा दूसरे कामों के लिए रखते हैं। इसमें गोबर, बैलगाड़ी खींचने या जानवरों को बेचने से होने वाली कमाई जैसे कार्य शामिल हैं। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में, यह लगभग 15 प्रतिशत है। हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश और असम में, 15 प्रतिशत से ज्यादा पशुपालक मवेशी रखने की अपनी मुख्य वजह सामाजिक-सांस्कृतिक या धार्मिक वजह बताते हैं। जब गायों से जुड़े फायदों की रैंकिंग की गई, तो 34 प्रतिशत पशुपालकों ने घर में इस्तेमाल होने वाले दूध को सबसे पहले रखा, जबकि 20 प्रतिशत ने दूध से अलग वजहों को अपनी मुख्य चिंता बताई। बाजार के अलावा दूसरे इस्तेमाल के लिए मवेशी रखने वाले ज्यादातर घरों में आम तौर पर एक या दो देसी जानवर होते हैं, जो खेती के कामकाज में उनकी अहम भूमिका को दिखाता है। पंजाब में 1,389 जानवरों के अस्पताल हैं, लेकिन सिर्फ 22 मोबाइल डिस्पेंसरी हैं। जबकि आंध्र प्रदेश में 337 अस्पताल और 1,558 मोबाइल डिस्पेंसरी हैं। लगभग 75 प्रतिशत मवेशीपालक गोबर को एक मुख्य प्रेरक मानते हैं। इसलिए अध्ययन में गोबर से मूल्यवर्धन के लिए बेहतर मौकों पर जोर दिया गया, जिसमें घरेलू बायोगैस से लेकर वर्मीकम्पोस्टिंग और मूल्यवर्धित खाद तक शामिल हैं। अध्ययन में सूखे इलाकों में पानी बचाने वाले चारे की खेती को प्राथमिकता देने और आम चरागाहों को अतिक्रमण से बचाने की भी सलाह दी गई। -
कोलकाता. कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने मंगलवार को कहा कि उसे महाराष्ट्र में कवलापुर दुर्लभ खनिज (आरईई) ब्लॉक के लिए खनन मंत्रालय से खनिज रियायत लाइसेंस मिला है। कंपनी ने शेयर बाजार को बताया कि खननकर्ता के पास ब्लॉक का लाइसेंस पांच साल के लिए होगा।
इस विकासक्रम को खननकर्ता कंपनी के सामरिक दुर्लभ खनिज खंड में विविधीकरण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। खनिज ब्लॉक के ब्यौरे के अनुसार, आरईई ब्लॉक नागपुर जिले की रामटेक तहसील के कवलापुर गांव में है और लगभग 398.23 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। इस ब्लॉक में दुर्लभ खनिज के भूशास्त्रीय स्रोत लगभग 2 करोड़ 79.5 लाख टन होने का अनुमान है।यह कदम कोल इंडिया की दुर्लभ खनिज स्रोत में विस्तार करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। इसका कारण दुर्लभ खनिज इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रिक परिवहन और रक्षा उपयोग के लिए बहुत जरूरी हैं। यह विकासक्रम, रणनीतिक रूप से जरूरी खनिजों के घरेलू स्रोतों को सुरक्षित करने और आयात पर निर्भरता कम करने के भारत के प्रयास से भी मेल खाता है। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करने की तैयारी में जुटी है। बजट से पहले वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को पिछले बजट में की गई प्रमुख घोषणाओं और उन पर अब तक हुई प्रगति का ब्यौरा साझा किया। मंत्रालय ने टैक्स सुधारों से लेकर निवेश से जुड़े बड़े फैसलों तक की जानकारी दी।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि फाइनेंस एक्ट 2025 के तहत नए टैक्स सिस्टम यानी न्यू टैक्स रिजीम (एनटीआर) में व्यक्तिगत आयकर ढांचे में अहम बदलाव किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य टैक्स देने के बाद आम लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा बचाना है।मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि ये सभी बदलाव वित्त वर्ष 2025-26 से लागू हो चुके हैं। इसका असर आकलन वर्ष 2026-27 से करदाताओं को दिखेगा।वित्त मंत्रालय ने इनकम टैक्स बिल 2025 को भी एक अहम कदम बताया। इस बिल के जरिए भारत के करीब छह दशक पुराने प्रत्यक्ष कर कानून को बदलने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य है कि नया कानून निवेशकों का भरोसा बनाए रखे, टैक्सपेयर्स को राहत दे और टैक्स व्यवस्था को सरल बनाए।टैक्स नीति में किए गए सुधारों में कॉरपोरेट टैक्स भी शामिल है। जो कंपनियां तय छूट और कटौतियों का लाभ नहीं लेती हैं, उनके लिए कॉरपोरेट टैक्स दर 22% रखी गई है। वहीं, नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए सीमित अवधि तक टैक्स दर 15% तय की गई है।व्यक्तिगत आयकर के मोर्चे पर, नए टैक्स सिस्टम में आसान स्लैब और कम टैक्स दरें लागू की गई हैं। इसके तहत 12 लाख रुपए तक की सालाना आय वाले लोगों को टैक्स नहीं देना होगा। सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए यह सीमा 12.75 लाख रुपए तक हो जाती है, क्योंकि उन्हें 75,000 रुपए की स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलता है।फाइनेंस एक्ट 2025 के तहत धारा 10 (23एफई) के लाभ भी बढ़ाए गए हैं। इसके अनुसार, योग्य सॉवरेन वेल्थ फंड (एसडब्ल्यूएफ) और पेंशन फंड अब 31 मार्च 2030 तक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश कर सकेंगे। इन निवेशों पर डिविडेंड, ब्याज और लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) पर टैक्स छूट जारी रहेगी।वित्त मंत्रालय ने बताया कि इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (आईएफएससी) से जुड़े अतिरिक्त कामकाज और समय-सीमा बढ़ाने से संबंधित नियमों को फाइनेंस एक्ट 2025 के तहत पूरी तरह लागू कर दिया गया है। ये बदलाव 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी हो चुके हैं।मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (एआईएफ) के लिए ‘कराधान की निश्चितता’ का अपना वादा पूरा किया है। अब प्रतिभूतियों से होने वाली आय पर टैक्स से जुड़े नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।वित्त मंत्रालय ने कहा कि आईएफएससी से जुड़े अतिरिक्त नियमों और समय-सीमा में बढ़ोतरी को भी फाइनेंस एक्ट 2025 के तहत पूरी तरह लागू कर दिया गया है। इन सभी सुधारों का मकसद निवेश को बढ़ावा देना और टैक्स सिस्टम को पारदर्शी बनाना है। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को सोना मजबूत मांग आने से 5,100 रुपये की छलांग लगाते हुए पहली बार 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया जबकि चांदी ने 20,400 रुपये के उछाल के साथ नया रिकॉर्ड बना दिया। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने कहा कि सोना दिल्ली में 5,100 रुपये की बढ़त के साथ 1,53,200 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर सहित) पर पहुंच गया। इसके साथ ही सोने ने 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का अहम मनोवैज्ञानिक स्तर भी पार कर लिया। सोना सोमवार को 1,48,100 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था।
चांदी की कीमतों ने भी स्थानीय सर्राफा बाजार में मजबूती दिखाते हुए नया उच्चतम स्तर छू लिया। सफेद धातु 20,400 रुपये यानी लगभग सात प्रतिशत बढ़कर 3,23,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) पर पहुंच गई। सोमवार को चांदी की कीमतों में 10,000 रुपये की तेजी देखी गई थी, जिससे यह तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई थी। विदेशी बाजारों में भी सोना और चांदी की मांग में तेजी रही। फॉरेक्स डॉटकॉम के आंकड़ों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना पहली बार 4,700 डॉलर प्रति औंस का स्तर के पार पहुंचा। सोने में 66.38 डॉलर यानी 1.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ कीमत 4,737.40 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हाजिर चांदी ने नया रिकॉर्ड बनाया और 95.88 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, सुरक्षित निवेश की मांग और आभूषणों एवं निवेशकों से आने वाली लगातार मांग के कारण कीमती धातुओं में यह तेजी देखी जा रही है। - नयी दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने सोमवार को भारतीय अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया जो अक्टूबर में जारी अनुमान से 0.7 प्रतिशत अंक अधिक है। वाशिंगटन स्थित बहुपक्षीय वित्तीय संस्था ने अपनी 'विश्व आर्थिक परिदृश्य' रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भी भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पहले 6.2 प्रतिशत था। आईएमएफ ने कहा, “भारत में 2025 (वित्त वर्ष 2025-26) के लिए वृद्धि अनुमान को 0.7 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया गया है। इसका कारण तीसरी तिमाही में अपेक्षा से बेहतर आर्थिक प्रदर्शन और चौथी तिमाही में मजबूत रफ्तार है।” हालांकि, मुद्राकोष ने कहा कि आने वाले समय में भारत की वृद्धि दर में कुछ नरमी आ सकती है। वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 में भारत की वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, क्योंकि चक्रीय एवं अस्थायी कारकों का प्रभाव धीरे-धीरे कम होगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में भारत की जीडीपी वृद्धि दर आठ प्रतिशत रही। जुलाई-सितंबर तिमाही में यह वृद्धि 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई थी। सांख्यिकी मंत्रालय के पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। वित्त वर्ष 2024-25 में वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही थी। मुद्रास्फीति के मोर्चे पर आईएमएफ ने कहा कि 2025 में खाद्य कीमतों में नरमी आने से महंगाई में उल्लेखनीय गिरावट आई है और आगे चलकर इसके निर्धारित लक्ष्य के करीब लौटने की उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर सीमित रखने का लक्ष्य मिला हुआ है। वैश्विक स्तर पर आईएमएफ ने कहा कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि 2026 में 3.3 प्रतिशत और 2027 में 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि दर इन दोनों वर्षों में चार प्रतिशत से थोड़ा अधिक रहने की संभावना है। मुद्राकोष ने चीन के लिए 2025 की वृद्धि दर का अनुमान 0.2 प्रतिशत अंक बढ़ाकर पांच प्रतिशत कर दिया है। वहीं, वैश्विक महंगाई 2025 में अनुमानित 4.1 प्रतिशत से घटकर 2026 में 3.8 प्रतिशत और 2027 में 3.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है।
- नयी दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को चांदी 10,000 रुपये की जोरदार उछाल के साथ तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई जबकि सोना भी 1,900 रुपये उछलकर 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के नए शिखर पर पहुंच गया। सर्राफा कारोबारियों ने कहा कि घरेलू और वैश्विक बाजारों में मजबूत मांग बने रहने से चांदी के दाम में जबर्दस्त तेजी देखी गई। सोमवार को चांदी का कारोबार 3,02,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर हुआ जो तीन लाख रुपये से ऊपर का पहला बंद भाव है। शुक्रवार को चांदी 2,92,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। स्थानीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में भी मजबूती देखी गई और यह नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। सोना 1,48,100 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर पहुंच गया, जो शुक्रवार के 1,46,200 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से 1,900 रुपये अधिक है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, "सोमवार को सोना और चांदी दोनों ही नए रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गए। भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक स्तर पर शुल्क से जुड़ी बढ़ती अनिश्चितताओं के कारण सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ी है।" अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं में मजबूती देखने को मिली। फॉरेक्स डॉट कॉम के मुताबिक, हाजिर चांदी बढ़कर 94.13 डॉलर प्रति औंस के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। सोना ने भी 4,690.80 डॉलर प्रति औंस के अब तक के उच्चतम स्तर को हासिल किया। मिराए एसेट शेयरखान के जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा कि वैश्विक बाजार में सुरक्षित निवेश की मांग के चलते सोने की कीमतों में तेजी आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कुछ यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ी है। ट्रंप ने शनिवार को डेनमार्क, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, फिनलैंड, ब्रिटेन और नॉर्वे से आयात होने वाले सामान पर एक फरवरी से 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी दी। इस शुल्क को एक जून, 2026 से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। गांधी ने कहा, "इस घटनाक्रम से वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ी है, जिसके चलते निवेशक सोने एवं चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।"
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नयी दिल्ली/ टाटा समूह की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी टाटा कैपिटल का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में सालाना आधार पर 39 प्रतिशत बढ़कर 1,285 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में उसे 922 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। टाटा कैपिटल ने कहा कि समीक्षाधीन तिमाही के दौरान कुल ब्याज आय 26 प्रतिशत बढ़कर 2,936 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले लगभग 2,323 करोड़ रुपये थी। प्रबंधन के तहत परिसंपत्ति (एयूएम) 26 प्रतिशत बढ़कर 2,34,114 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1,86,404 करोड़ रुपये थी।
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नयी दिल्ली. एडलवाइस लाइफ इंश्योरेंस को अगले 2-3 वर्षों में दहाई अंकों में वृद्धि की उम्मीद है। कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुमित राय ने यह जानकारी देते हुए कहा कि कंपनी वित्त वर्ष 2026-27 तक घाटे से उबर जाएगी। उन्होंने बताया, ''हम लगभग 14 साल पुराने संगठन हैं। शुरुआती साल, विशेष रूप से 2011 और 2016 के बीच समग्र जीवन बीमा उद्योग के लिए धीमी वृद्धि का दौर था। हम भी उस स्तर पर नए थे और व्यवसाय के प्रति अपने दृष्टिकोण में जानबूझकर रूढ़िवादी रहे। हमारी वृद्धि में वास्तविक उछाल 2017-2018 के बाद आया।'' राय ने कहा कि शुरुआत में बीमाकर्ता मुख्य रूप से एक ही चैनल वाली कंपनी थी। उन्होंने आगे बताया, ''अब हम एक बहु-चैनल बीमाकर्ता के रूप में काम करते हैं, जिसमें मालिकाना और साझेदारी वितरण का योगदान लगभग 50-50 प्रतिशत है।'' राय ने कहा कि यह संतुलन कंपनी के उत्पाद मिश्रण में भी दिखाई देता है। उन्होंने आगे कहा कि कंपनी का निरंतर ध्यान सभी चैनलों और उत्पादों में एक अच्छी तरह से विविध और दीर्घकालिक व्यवसाय बनाने पर रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी लगभग 650 करोड़ रुपये का नया व्यवसाय और कुल लगभग 2,400 करोड़ रुपये की प्रीमियम आय प्राप्त करने का लक्ष्य रख रही है। उन्होंने बताया, ''हम अगले दो से तीन वर्षों में 12-16 प्रतिशत की सीमा में दहाई अंकों में वृद्धि की उम्मीद करते हैं, और हमें वित्त वर्ष 2026-27 तक घाटे से उबरने की उम्मीद है।'' उन्होंने कहा कि कंपनी के पास पर्याप्त पूंजी है। मुख्य कार्यकारी ने बताया, ''हमारी चुकता पूंजी आज लगभग 2,800 करोड़ रुपये है। पिछले कुछ वर्षों में हमने सालाना लगभग 175-200 करोड़ रुपये डाले हैं, और जैसे-जैसे हम विस्तार करेंगे, अगले दो से तीन वर्षों तक पूंजी समर्थन का यह स्तर व्यापक रूप से जारी रहेगा।''
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नई दिल्ली। सरकार की उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के चलते भारत के स्मार्टफोन निर्यात में बड़ी बढ़त देखने को मिली है। साल 2025 में भारत से स्मार्टफोन का निर्यात करीब 30 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 का यह निर्यात पिछले पांच वर्षों में हुए कुल स्मार्टफोन निर्यात का करीब 38 प्रतिशत है। साल 2021 से 2025 के बीच भारत ने कुल मिलाकर लगभग 79.03 अरब डॉलर के स्मार्टफोन विदेश भेजे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा निर्यात 2025 में हुआ।
इन पांच वर्षों में कुल स्मार्टफोन निर्यात का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा एप्पल के आईफोन का रहा, जिसकी कीमत 22 अरब डॉलर से ज्यादा आंकी गई है। साल 2025 में स्मार्टफोन निर्यात में 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पहले के 12 महीनों में यह आंकड़ा करीब 20.45 अरब डॉलर था।केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस हफ्ते एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि साल 2025 में भारत का कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर यानी चिप बनाने के नए कारखाने शुरू होने से आने वाले समय में निर्यात और रोजगार दोनों बढ़ेंगे।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन लगभग 11.3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। साल 2021 में भारत में स्मार्टफोन का उत्पादन शुरू होने के बाद पहली बार 2025 में एप्पल के आईफोन का निर्यात 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया, जो कि 2024 के मुकाबले करीब 85 प्रतिशत अधिक है। देश में एप्पल के कुल पांच आईफोन असेंबली प्लांट हैं, जिनमें से तीन टाटा ग्रुप और दो फॉक्सकॉन द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।गौरतलब हो, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता देश बन चुका है। देश में बिकने वाले 99 प्रतिशत से ज्यादा मोबाइल फोन अब मेड इन इंडिया हैं। स्मार्टफोन के लिए पीएलआई योजना मार्च 2026 में खत्म होनी है, लेकिन सरकार इसे आगे बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। नए नियमों के अनुसार, कंपनियां छह साल की अवधि में किसी भी लगातार पांच वर्षों तक इस योजना का लाभ ले सकती हैं। - नई दिल्ली। साल 2025 में भारत और चीन दोनों में कोयले से बनने वाली बिजली में कमी दर्ज की गई है। यह पहली बार हुआ है जब 1970 के दशक के बाद एक ही साल में दोनों देशों में कोयले से बिजली उत्पादन घटा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि दोनों देशों ने बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जल विद्युत जैसे गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों की ओर रुख किया है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में यह बात कही गई है।रिपोर्ट के आधार पर ब्रिटेन के अखबार इंडिपेंडेंट में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, पिछले साल चीन में कोयले से बिजली उत्पादन 1.6 प्रतिशत और भारत में 3 प्रतिशत कम हुआ। इसे एक ऐतिहासिक बदलाव बताया गया है, क्योंकि ऐसा 1970 के दशक की शुरुआत के बाद पहली बार हुआ है, जब दोनों देशों में एक ही वर्ष में कोयला बिजली उत्पादन में गिरावट आई है।इस बदलाव का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा महत्व है, क्योंकि भारत और चीन मिलकर दुनिया की आधे से ज्यादा कोयले से बनने वाली बिजली का उत्पादन करते हैं। इसलिए इन दोनों देशों की ऊर्जा नीति में बदलाव का असर पूरी दुनिया के प्रदूषण स्तर पर पड़ता है। जलवायु न्यूज वेबसाइट कार्बन ब्रीफ द्वारा जारी की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वच्छ ऊर्जा के रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ने और कोयले से बिजली उत्पादन में गिरावट को भविष्य में होने वाले बड़े बदलावों का संकेत माना जा सकता है।रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने 300 गीगावाट सौर ऊर्जा और 100 गीगावाट पवन ऊर्जा जोड़ी, जो किसी भी देश के लिए अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह क्षमता ब्रिटेन की कुल मौजूदा बिजली उत्पादन क्षमता से पांच गुना से भी ज्यादा है।विश्लेषण के अनुसार, सौर और पवन ऊर्जा से बिजली उत्पादन में 450 टेरावाट घंटे की बढ़ोतरी हुई, जबकि परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन 35 टेरावाट घंटे बढ़ा।वहीं, भारत ने साल के पहले 11 महीनों में 35 गीगावाट सौर ऊर्जा, 6 गीगावाट पवन ऊर्जा और 3.5 गीगावाट जल विद्युत क्षमता जोड़ी। इस दौरान नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में सालाना आधार पर 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ने से कोयला बिजली संयंत्रों को कम चलाना पड़ा। इससे आर्थिक विकास जारी रहने के बावजूद कोयले से बिजली उत्पादन में गिरावट आई। रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार है, जब स्वच्छ ऊर्जा की बढ़त ने भारत में कोयले से बिजली उत्पादन को कम करने में अहम भूमिका निभाई है।रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर चीन में स्वच्छ ऊर्जा का यह विकास जारी रहता है, तो वहां कोयले से बिजली उत्पादन अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के लिए पर्याप्त है। भारत में भी अगर तय किए गए स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य पूरे हो जाते हैं, तो 2030 से पहले ही कोयले से बिजली उत्पादन अपने चरम पर पहुंच सकता है, भले ही बिजली की मांग फिर से तेज हो जाए। हालांकि, अत्यधिक गर्मी एक बड़ी अनिश्चितता बनी हुई है।भीषण गर्मी के दौरान, खासकर शाम के समय जब सौर ऊर्जा कम हो जाती है, तब बिजली की अधिक मांग को पूरा करने के लिए अक्सर कोयला बिजली संयंत्रों का सहारा लिया जाता है। वहीं, ज्यादा तापमान से कोयला संयंत्रों की कार्यक्षमता भी घटती है और पानी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ता है।कोयले से बिजली उत्पादन में गिरावट के बावजूद, दोनों देशों ने नए कोयला बिजली संयंत्र लगाने का काम जारी रखा। चीन में ऊर्जा सुरक्षा और अधिकतम मांग को पूरा करने की चिंता के चलते नए कोयला संयंत्रों को मंजूरी दी जाती रही। भारत में भी औद्योगिक विकास और अत्यधिक गर्मी के समय बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए नए कोयला प्रोजेक्ट्स पर काम जारी रहा।इस कारण कोयला आधारित बिजली क्षमता और वास्तव में बनने वाली बिजली के बीच का अंतर बढ़ गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों में कोयला बिजली संयंत्रों के चलने के घंटे प्रति वर्ष लगातार कम होते जा रहे हैं, जिससे लंबे समय में खर्च बढ़ने और निवेश की बर्बादी को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
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नई दिल्ली। भारत का व्यापारिक निर्यात दिसंबर में बढ़कर 38.51 अरब डॉलर हो गया है, जो कि नवंबर में 38.13 अरब डॉलर था। यह जानकारी वाणिज्य मंत्रालय की ओर से आज गुरुवार को दी गई। देश के व्यापारिक निर्यात में ऐसे समय पर इजाफा हुआ है, जब दुनिया अमेरिकी टैरिफ के कारण अस्थिरता का सामना कर रही है।
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि देश का दिसंबर का सर्विसेज निर्यात 35.50 अरब डॉलर और आयात 17.38 अरब डॉलर रहा है, जिससे सर्विसेज ट्रेड सरप्लस 18.12 अरब डॉलर रहा है। दिसंबर में व्यापारिक आयात बढ़कर 63.55 अरब डॉलर हो गया है जो कि पहले 62.66 अरब डॉलर था। इससे देश का व्यापारिक घाटा बढ़कर 25.04 अरब डॉलर हो गया है।वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में भारत के कुल निर्यात में 4.33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और वित्त वर्ष 2026 में कुल निर्यात 850 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है। इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल-दिसंबर के दौरान भारत का अमेरिका को निर्यात पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 9.8 प्रतिशत बढ़ा है।सरकार ने कहा कि निर्यात में विविधता लाने की रणनीति के तहत, भारत मित्र देशों के साथ नई व्यापारिक साझेदारियां बना रहा है, जबकि अमेरिका के साथ टैरिफ गतिरोध को सुलझाने के लिए बातचीत भी जारी है।वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के साथ व्यापार वार्ता और निर्यात प्रोत्साहन मिशन की शुरुआत को अपने मंत्रालय द्वारा पिछले 10 दिनों में किए गए “प्रमुख कार्यों” में शामिल किया।केंद्रीय मंत्री ने कहा, “ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के व्यापार और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविक के साथ सार्थक वार्ता हुई। हमने प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के प्रमुख क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा की। साथ ही, हमने एक निष्पक्ष, संतुलित और महत्वाकांक्षी समझौते को अंतिम रूप देने के रणनीतिक महत्व पर भी बल दिया, जो उनके साझा मूल्यों, आर्थिक प्राथमिकताओं और नियम-आधारित व्यापार ढांचे के प्रति प्रतिबद्धता के अनुरूप हो।”उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने लिकटेंस्टीन का दौरा किया और भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते के कार्यान्वयन की समीक्षा की।


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