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नयी दिल्ली. अग्रणी बीमा कंपनी एलआईसी के प्रमुख आर दुरईस्वामी ने कहा है कि पश्चिम एशिया संकट के लंबे समय तक बने रहने की स्थिति में देश के बीमा क्षेत्र की वृद्धि दर में कुछ नरमी आ सकती है, क्योंकि इससे लोगों की आय और बचत क्षमता प्रभावित हो सकती है। भारतीय जीवन बीमा निगम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक दुरईस्वामी ने कहा कि यदि पश्चिम एशिया संकट लंबा चलता है तो इसका शृंखलाबद्ध प्रभाव लोगों की आय, खर्च और बचत के रुझान पर पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थिति जल्द सामान्य होगी। हालांकि दुरईस्वामी ने कहा कि यदि अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा इस संकट से प्रभावित होता है तो बीमा उद्योग भी इससे अछूता नहीं रह सकता है। लोगों की आय और बचत क्षमता पर असर पड़ने से बीमा क्षेत्र पर भी स्वाभाविक रूप से प्रभाव पड़ेगा। गौरतलब है कि 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों पर असर पड़ा है। इससे आर्थिक वृद्धि में सुस्ती और महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। एलआईसी में सरकार की हिस्सेदारी घटाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर दुरईस्वामी ने कहा कि कंपनी इस तरह के कदमों के लिए पहले से तैयार है। उन्होंने कहा, "जब हमने अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की तैयारी शुरू की थी, तभी से हम आगे के ऐसे कदमों के लिए तैयार थे। इस पर अंतिम फैसला सरकार को लेना है।" एलआईसी प्रमुख ने कहा कि जैसे ही समय और हिस्सेदारी के स्तर पर निर्णय लिया जाएगा, एलआईसी सरकार के साथ मिलकर इसे सफल बनाने के लिए तैयार है। वर्ष 2022 में एलआईसी का आईपीओ आया था, जो उस समय आकार के लिहाज से देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम था। इसके जरिए सरकार ने 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर करीब 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे। उन्होंने कहा कि सूचीबद्ध कंपनियों के लिए निर्धारित मानकों के तहत न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने के लक्ष्य पर सरकार काम कर रही है, लेकिन मौजूदा बाजार अस्थिरता के कारण अगले सार्वजनिक पेशकश के लिए उचित समय का इंतजार किया जा रहा है। आईपीओ के बाद शेयरधारकों को लाभ देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि एलआईसी ने हाल में एक मौजूदा शेयर पर एक बोनस शेयर जारी किया और इसके बाद 67 प्रतिशत अधिक लाभांश देने की भी घोषणा की। एलआईसी के निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजों को अंतिम रूप देते समय 10 रुपये अंकित मूल्य वाले शेयर पर 10 रुपये के अंतिम लाभांश की सिफारिश की है। इसे शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन रखा गया है। एलआईसी ने हाल ही में जनवरी-मार्च तिमाही में 23 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 23,420 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो देश की किसी भी वित्तीय सेवा कंपनी का अब तक का उच्चतम स्तर है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी में सीएनजी की कीमत में मंगलवार को दो रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई। यह दो सप्ताह से भी कम समय में चौथी बार है जब सीएनजी की कीमत बढ़ाई गई है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के अनुसार, सीएनजी की कीमत अब 83.09 रुपये प्रति किलोग्राम होगी। सीएनजी की कीमत में 15 मई के बाद से चौथी बार बढ़ोतरी की गई है और अब तक कुल चार रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए जा चुके हैं।
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नयी दिल्ली. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और सोने-चांदी पर आयात शुल्क में वृद्धि के चलते खुदरा मुद्रास्फीति जून तक बढ़कर करीब पांच प्रतिशत तक जा सकती है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ब्याज दरों में किसी भी बदलाव से पहले स्थिति का आकलन करने के लिए 'इंतजार और निगरानी' की नीति अपनाएगा। 15 मई से शुरू हुई 11 दिन की अवधि में पेट्रोल की कीमतों में 7.38 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 7.48 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। विश्लेषकों के अनुसार, ईंधन की कीमतों में यह वृद्धि परिवहन, भंडारण और आंशिक रूप से बिजली जैसे क्षेत्रों की लागत बढ़ाकर महंगाई पर सीधा असर डालेगी। इसके अलावा, सरकार ने 13 मई को सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। इस तरह कीमती धातुओं के गैर-जरूरी आयात पर अंकुश लगाने की कोशिश की गई है। ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डी.के. श्रीवास्तव ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में औसतन 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से खुदरा मुद्रास्फीति में करीब 0.75 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। मई, 2026 में खुदरा मुद्रास्फीति 4-4.5 प्रतिशत और जून में 4.5-5 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति में यह वृद्धि लागत पर आधारित होने से रेपो दर में बदलाव का असर सीमित हो सकता है। हालांकि, यदि मुद्रास्फीति पांच प्रतिशत से ऊपर जाती है और उसमें तेजी का रुझान दिखता है, तो केंद्रीय बैंक दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की निदेशक मेघा अरोड़ा ने कहा कि जून में खुदरा मुद्रास्फीति चार प्रतिशत से ऊपर जा सकती है, लेकिन आरबीआई के छह प्रतिशत के ऊपरी संतोषजनक स्तर के भीतर रहने की संभावना है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की पांच जून को होने वाली की बैठक में सभी प्रमुख नीतिगत दरों को यथावत रखते हुए 'तटस्थ रुख' बनाए रखा जा सकता है। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल में 42 महीने के उच्चस्तर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 3.48 प्रतिशत रही। बार्कलेज इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री आस्था गुडवानी ने कहा कि मौजूदा अनिश्चितताओं के बने रहने से परिवहन लागत और कच्चे माल की कीमतों के जरिये महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिससे वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। क्रिसिल की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में औसत मुद्रास्फीति 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इक्रा रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि जून में महंगाई पर ईंधन मूल्य वृद्धि का व्यापक असर दिखेगा और दरों में संभावित बढ़ोतरी वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में हो सकती है।
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नयी दिल्ली. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सोमवार को एक बार फिर वृद्धि की गयी। पेट्रोल की कीमत 2.61 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल के दाम 2.71 रुपये प्रति लीटर बढ़ाये गये हैं। सरकारी तेल कंपनियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर डाले जाने के बीच पिछले दो सप्ताह से भी कम समय में यह चौथी बार है जब कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। ईंधन कीमतों में 15 मई से फिर संशोधन शुरू हुआ था। तब से अब तक पेट्रोल और डीजल के दाम कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर बढ़ चुके हैं। उद्योग सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 2.61 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 102.12 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 99.51 रुपये प्रति लीटर थी। डीजल के दाम 2.71 रुपये बढ़ाकर 95.20 रुपये प्रति लीटर कर दिए गए हैं, जो पहले 92.49 रुपये प्रति लीटर थे। यह वृद्धि वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये में कमजोरी के बीच की गई है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और रुपये के कमजोर होने से तेल विपणन कंपनियों की आयात लागत पर दबाव बढ़ा है।
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नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) मार्च तिमाही में वित्तीय क्षेत्र की सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाली कंपनी बनकर उभरी है। तिमाही के दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ 23,420 करोड़ रुपये से अधिक रहा है। केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) में भी वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में एलआईसी ने लाभ के मामले में पहला स्थान बरकरार रखा। एलआईसी का मार्च, 2026 को समाप्त तिमाही में शुद्ध लाभ 23 प्रतिशत बढ़कर 23,420 करोड़ रुपये रहा है, जो एक साल पहले की समान अवधि में 19,013 करोड़ रुपये था। कंपनी ने पिछले सप्ताह अपने तिमाही नतीजों की घोषणा की थी। शेयर बाजारों के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चौथी तिमाही में देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का लाभ 19,684 करोड़ रुपये और निजी क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक का लाभ 19,221 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान वार्षिक लाभ के मामले में एसबीआई ने एलआईसी को पीछे छोड़ दिया। एसबीआई का सालाना शुद्ध लाभ 80,032 करोड़ रुपये रहा, जबकि एलआईसी का लाभ 57,419 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसी तरह, एचडीएफसी बैंक का वार्षिक लाभ 74,670 करोड़ रुपये और आईसीआईसीआई बैंक का लाभ 50,147 करोड़ रुपये रहा है। अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने चौथी तिमाही में 11,378 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। इसके बाद कोल इंडिया का लाभ 10,839 करोड़ रुपये रहा। वहीं, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) ने 8,598 करोड़ रुपये और एनटीपीसी ने 8,747 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का लाभ 4,546 करोड़ रुपये, आरईसी लिमिटेड का 3,375 करोड़ रुपये और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) का लाभ 1,680 करोड़ रुपये रहा। एलआईसी के शानदार नतीजों के एक दिन बाद 23 मई को बीएसई में उसका शेयर शुरुआती कारोबार में लगभग पांच प्रतिशत चढ़कर 839 रुपये पर पहुंच गया। एलआईसी के प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां (एयूएम) 31 मार्च, 2026 तक बढ़कर 57,29,396 करोड़ रुपये हो गईं, जो एक साल पहले 54,52,297 करोड़ रुपये थीं। यह सालाना आधार पर पांच प्रतिशत की वृद्धि है। वर्ष के दौरान कंपनी की कुल प्रीमियम आय में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, समायोजित नेटवर्थ बढ़कर 1,69,605 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 1,20,258 करोड़ रुपये थी। पूरे कॉरपोरेट क्षेत्र की बात करें तो जनवरी-मार्च तिमाही में वोडाफोन आइडिया 51,970 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड लाभ के साथ सबसे अधिक तिमाही मुनाफा कमाने वाली कंपनी रही। करीब छह वर्षों में यह कंपनी का पहला तिमाही लाभ था, जो मुख्य रूप से वैधानिक देनदारियों में राहत मिलने से संभव हुआ। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज का स्थान रहा, जिसका शुद्ध लाभ 16,971 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 19,407 करोड़ रुपये की तुलना में कम है।
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नयी दिल्ली. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में शनिवार को एक बार फिर वृद्धि की गयी। पेट्रोल की कीमत 87 पैसे लीटर जबकि डीजल के दाम 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ाये गये हैं। पिछले10 दिनों से भी कम समय में यह तीसरा मौका है जब ईंधन के दाम बढ़ाये गये हैं।
उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 87 पैसे बढ़कर 98.64 रुपये से 99.51 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल की कीमत 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपये से बढ़कर 92.49 रुपये हो गई है। पेट्रोल, डीजल के दाम में 15 मई के बाद से यह तीसरी बढ़ोतरी है। सरकारी तेल कंपनियों ने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण बढ़ी ऊर्जा कीमतों का बोझ धीरे-धीरे उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया है। पंद्रह मई को कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई थी। उसके बाद 19 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम 90 पैसे लीटर बढ़ाये गये थे। कुल मिलाकर, ईंधन की कीमतों में लगभग 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। -
नयी दिल्ली. पार्ले प्रोडक्ट्स ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी का पैकेट उपहार में देने का वीडियो वायरल होने के बाद इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन बढ़ा दिया है। कंपनी के उपाध्यक्ष मयंक शाह ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। शाह ने इसे ब्रांड के इतिहास का सबसे बड़ा अभियान बताते हुए ' कहा कि अब कंपनी प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 'स्वदेशी ब्रांड' को मिले समर्थन को आगे बढ़ाते हुए मेलोडी की वैश्विक मौजूदगी मजबूत करने का प्रयास करेगी। फिलहाल यह उत्पाद 100 देशों में उपलब्ध है। उपभोक्ताओं और वितरकों की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "वितरकों से शुरुआती प्रतिक्रिया मिली है कि मांग बढ़ी है। अचानक मांग में उछाल देखने को मिल रहा है।" उन्होंने कहा कि फटाफट सामान की आपूर्ति करने वाले ई-कॉमर्स मंचों पर मेलोडी की खरीदारी में तुरंत बढ़ोतरी देखी गई है। ई-कॉमर्स मंचों से भी भारी मांग आई है और बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। शाह ने कहा कि फटाफट सामान की आपूर्ति करने वाले ई-कॉमर्स मंचों पर 'मेलोडी' शब्द की खोज में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह रुझान बुधवार सुबह से देखा जा रहा है। मेलोडी के उत्पादन में वृद्धि के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "कल से हमने उत्पादन बढ़ा दिया है... विदेशों से भी मांग बढ़ रही है।" प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मेलोनी को मेलोडी उपहार में दिए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शाह ने कहा, "यह पार्ले परिवार के लिए बेहद गर्व का क्षण है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व नेताओं को मेलोडी उपहार में दे रहे हैं।" उन्होंने मोदी के इस कदम को वैश्विक मंच पर स्वदेशी ब्रांडों की क्षमता का मजबूत प्रमाण बताया।
शाह ने कहा, "पार्ले मेलोडी भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाला टॉफी ब्रांड है और आज यह 100 से अधिक देशों में उपलब्ध है... प्रधानमंत्री मोदी ने अपना काम कर दिया है, अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस ब्रांड को वैश्विक स्तर पर और बड़ा बनाएं।" उन्होंने कहा, "भारतीय ब्रांड को यह पहचान और दृश्यता देने के लिए हम प्रधानमंत्री के प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हैं।" शाह ने कहा कि कंपनी इस घटनाक्रम का लाभ उठाते हुए मेलोडी ब्रांड का और अधिक प्रचार करेगी।
उन्होंने कहा, "हमने कल से ही डिजिटल माध्यमों पर प्रचार शुरू कर दिया है और आगे विभिन्न मीडिया मंचों पर भी इसका प्रचार किया जाएगा।" प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बुधवार को मेलोनी को मेलोडी टॉफी का पैकेट भेंट करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पार्ले प्रोडक्ट्स सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गई। -
वडोदरा. भारत के पूर्व क्रिकेटर और आईपीएल बायोलॉजिकल्स के ब्रांड एम्बैसडर युवराज सिंह ने पंजाब में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए किसानों से जैविक उत्पादों को अपनाने की बृहस्पतिवार को अपील की। कंपनी के तीसरे विनिर्माण संयंत्र के उद्घाटन के अवसर पर सिंह ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से राज्य की मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। युवराज ने कहा, "पंजाब में रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक इस्तेमाल हुआ है और इसका असर मिट्टी की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। मैं पंजाब के किसानों से जैविक उत्पादों की ओर रुख करने और कृषि भूमि को बचाने की अपील करता हूं।" पूर्व क्रिकेटर ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल कम करने और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने संबंधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "किसान कड़ी मेहनत कर रहे हैं और इस दिशा में उन्हें प्रोत्साहित करने तथा समर्थन देने की जरूरत है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बृहस्पतिवार को सोने की कीमत 600 रुपये बढ़कर 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं और चांदी भी 2.71 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। भू-राजनीतिक तनाव के बीच कारोबारी कीमती धातुओं को लेकर सतर्क रूप से आशावादी बने रहे। स्थानीय बाजार के जानकारों के अनुसार, लगातार तीसरे सत्र में बढ़त जारी रखते हुए, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव 600 रुपये बढ़कर 1,65,500 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया, जो बुधवार के बंद भाव 1,64,900 रुपये से अधिक है। इस कीमती धातु की कीमतों में पिछले तीन सत्रों में कुल 2,700 रुपये की बढ़त दर्ज की गई है।
कारोबारियों ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक स्तर पर महंगाई को लेकर चिंताओं ने अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में मजबूती के बावजूद, इस धातु की खरीद को समर्थन दिया। बाजार के जानकारों के अनुसार, चांदी की कीमतों में भी सुधार देखने को मिला, और इसकी कीमत 5,000 रुपये उछलकर 2,71,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इसे सस्ते भाव पर खरीदारी और औद्योगिक मांग में सुधार के रुख से मदद मिली। विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी बाधाओं को लेकर चिंताओं ने कीमती धातुओं की मांग को लगातार बनाए रखा और रुपये में कमजोरी ने भी स्थानीय कीमतों को समर्थन दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गिरावट के बावजूद घरेलू सर्राफा कीमतें मजबूत बनी रहीं। हाजिर सोने का भाव मामूली रूप से गिरकर 4,534.54 डॉलर प्रति औंस रह गया, जबकि चांदी लगभग एक प्रतिशत फिसलकर 75.39 डॉलर प्रति औंस रह गई। -
नयी दिल्ली. देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया बढ़ती मुद्रास्फीति और लागत में बढ़ोतरी के कारण जून, 2026 से अपने विभिन्न मॉडल की कीमतों में 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी करेगी। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि उसने अपने पूरे मॉडल पोर्टफोलियो में वाहनों की कीमतों में जून से 30,000 रुपये तक की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। कंपनी ने कहा, ''पिछले कुछ महीनों से लागत में बढ़ोतरी के प्रभाव को कम करने के लिए कंपनी लागत कटौती उपायों के जरिये लगातार प्रयास कर रही है।" कंपनी ने कहा कि मुद्रास्फीति का दबाव अब ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है और प्रतिकूल लागत माहौल बना हुआ है। ऐसे में बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा बाजार पर डालना आवश्यक हो गया है, जबकि ग्राहकों पर इसका प्रभाव न्यूनतम रखने का प्रयास जारी रहेगा। मारुति सुजुकी इंडिया फिलहाल शुरुआती श्रेणी की मारुति सुजुकी एस-प्रेसो से लेकर प्रीमियम यूटिलिटी इनविक्टो बेचती है। इनकी शोरूम कीमत 3.49 लाख रुपये से 28.7 लाख रुपये के बीच है।
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नयी दिल्ली. दूरसंचार कंपनी एयरटेल के पोस्टपेड ग्राहकों को कंपनी की हाल ही में शुरू की गई 'प्रायोरिटी पोस्टपेड' सेवाओं का लाभ स्वतः मिलेगा। यह सेवा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगातार बेहतर स्पीड देने का वादा करती है। एयरटेल इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शाश्वत शर्मा ने ग्राहकों को लिखे पत्र में कहा कि प्रीपेड ग्राहकों को इस सेवा का लाभ लेने के लिए अपनी सेवा को पोस्टपेड में अपग्रेड करना होगा। उन्होंने कहा, '' एयरटेल प्रायोरिटी पोस्टपेड सभी पोस्टपेड सेवा पर उपलब्ध है। यदि आप पहले से पोस्टपेड पर हैं तो आपको इसका स्वतः लाभ मिलेगा। यदि आप वर्तमान में प्रीपेड ग्राहक हैं तो आप एयरटेल ऐप पर जाकर अपनी मौजूदा सेवा को पोस्टपेड में अपग्रेड कर सकते हैं।'' भारती एयरटेल ने 19 मई को 'प्रायोरिटी पोस्टपेड 5जी' सेवा पेश की थी, ताकि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भी अपने ग्राहकों को तेज एवं अधिक विश्वसनीय दूरसंचार सेवाएं दी जा सकें। इसके तहत उपयोगकर्ताओं के लिए नेटवर्क का एक समर्पित हिस्सा आवंटित किया गया है और उन्हें अन्य सेवा श्रेणियों से अलग रखा गया है। कंपनी ने 'प्रायोरिटी पोस्टपेड' सेवा शुरू करने के लिए 'नेटवर्क स्लाइसिंग' प्रौद्योगिकी का उपयोग किया है। यह 'स्लाइसिंग' प्रौद्योगिकी पोस्टपेड ग्राहकों को अन्य सेवाओं से अलग करेगी और एक तरह से उन्हें प्रीपेड ग्राहकों की बड़ी संख्या से अलग एक समर्पित तेज लाइन से सेवा उपलब्ध कराएगी। शर्मा ने कहा, '' आपमें से कई लोगों ने बताया है कि कभी-कभी भीड़भाड़ वाले बाजार, ट्रैफिक जाम या किसी कार्यक्रम में वीडियो कॉल करना, ईमेल डाउनलोड करना या फोटो अपलोड करना मुश्किल हो जाता है। यह एक समस्या है जिसे हम हल करना चाहते थे। इसी वजह से हमने 'एयरटेल प्रायोरिटी पोस्टपेड' शुरू किया है। इसे खास तौर पर भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भी आपको लगातार बेहतर अनुभव देने के लिए तैयार किया गया है।'' गौरतलब है कि वैश्विक दूरसंचार कंपनियों एरिक्सन और नोकिया ने 'प्रायोरिटी पोस्टपेड' के लिए नेटवर्क स्लाइसिंग प्रौद्योगिकी के उपयोग को भारत के मोबाइल सेवा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि बताया है। नोकिया का दावा है कि नेटवर्क स्लाइसिंग प्रौद्योगिकी वही उपलब्ध करा रहा है।
नोकिया के अध्यक्ष एवं सीईओ जस्टिन होटार्ड ने सोशल मीडिया पर लिखा, '' हमें गर्व है कि नोकिया की प्रौद्योगिकी इस क्षमता को संभव बना रही है। हमारी 5जी कोर और स्लाइसिंग क्षमताएं पहले से ही उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया में संचालकों को अलग-अलग संपर्क प्रदान कर रही हैं और अब भारत में भी उपलब्ध है। यह एयरटेल के साथ मोबाइल, फिक्स्ड और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में 20 से अधिक वर्षों की साझेदारी पर आधारित है।'' एरिक्सन के अध्यक्ष एवं सीईओ बोरजे एकहोम ने एक सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत डिजिटल क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है और पिछले एक दशक में ''डिजिटल इंडिया'' का सफल क्रियान्वयन मजबूत मोबाइल बुनियादी ढांचे पर आधारित रहा है। उन्होंने कहा, '' दुनिया के सबसे तेज 5जी विस्तारों में से एक के बाद भारत अब भी सबसे उन्नत डिजिटल देशों में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, जहां भारती एयरटेल ने अपने पोस्टपेड ग्राहकों के लिए अलग तरह की संपर्क (कनेक्टिविटी) सेवाएं शुरू की हैं।'' भारती एयरटेल अब अमेरिका, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड जैसे देशों के अग्रणी सेवा प्रदाताओं की श्रेणी में शामिल हो गया है जो उन्नत 5जी समाधानों के जरिये अलग तरह के ग्राहक अनुभव प्रदान कर रहे हैं। -
नयी दिल्ली. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को 90 पैसे प्रति लीटर की और वृद्धि की गयी। एक सप्ताह से भी कम समय में दूसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाये गये है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस वृद्धि के बाद राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल की कीमत अब 90.67 रुपये प्रति लीटर के मुकाबले 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गयी है। इससे पहले, शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल के दाम तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ाये गये थे।
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब 87 पैसे बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल की कीमत 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गयी है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 91 पैसे बढ़कर 107.59 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 94.08 रुपये प्रति लीटर हो गयी है। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत सबसे अधिक 96 पैसे बढ़कर 109.70 रुपये प्रति लीटर हो गयी। वहीं डीजल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 96.07 रुपये प्रति लीटर हो गयी है। चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 82 पैसे बढ़कर 104.49 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल की कीमत 86 पैसे बढ़कर 96.11 रुपये प्रति लीटर हो गयी है। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें 1,300 रुपये बढ़कर 1.64 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं। यह बढ़ोतरी अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच विदेशी व्यापार में आई तेजी का नतीजा है। स्थानीय बाजार के जानकारों के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,300 रुपये बढ़कर 1,64,900 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गई, जो मंगलवार के बंद भाव 1,63,600 रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक है। सर्राफा कारोबारियों ने बताया कि अमेरिकी बॉन्ड के उच्च प्रतिफल तथा डॉलर मजबूत होने के बावजूद कीमती धातुओं में नई खरीदारी से सोने की घरेलू कीमतों को समर्थन मिला। हालांकि, चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे सत्र में गिरावट रही। चांदी की कीमत 5,000 रुपये टूटकर 2,66,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) रह गई। पिछले सत्र में चांदी की कीमत 2,71,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर रही थी। विश्लेषकों ने कहा कि कमजोर औद्योगिक मांग और हाल में कीमतों में आए भारी उतार-चढ़ाव के बाद लगातार मुनाफावसूली होने के कारण चांदी की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना मामूली बढ़त के साथ 4,483.54 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी दो प्रतिशत से अधिक बढ़कर 75.42 डॉलर प्रति औंस हो गई। ब्रोकरेज फर्म कोटक नियो (पहले कोटक सिक्योरिटीज) ने कहा कि बुधवार को हाजिर सोने में तेजी देखी गई, क्योंकि हाल ही में बॉन्ड बाजार में हुई बिकवाली में नरमी आने के बाद कीमती धातुओं को कुछ समर्थन मिला। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल के ऊंचे स्तर और डॉलर की मजबूती ने कीमतों में उछाल को सीमित रखा। कंपनी ने कहा कि बाजार के प्रतिभागियों का ध्यान अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने में हो रही देरी पर केंद्रित रहा। इन घटनाक्रमों से वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति की चिंताओं और सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों को, लगातार बल मिल रहा है। मिराए एसेट शेयरखान में जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा, "निवेशक अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दर की दिशा और सर्राफा कीमतों पर निकट-अवधि में इसके असर के बारे में नई जानकारी हासिल करने के लिए अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक के ब्योरे का इंतजार कर रहे हैं।
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नयी दिल्ली. भारत ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट से इतर भी रूस से तेल खरीदता रहा है और आगे भी व्यावसायिक व्यवहार्यता तथा ऊर्जा सुरक्षा जरूरतों के आधार पर खरीद जारी रखेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, "रूस पर अमेरिकी छूट के संबंध में मैं यह स्पष्ट करना चाहती हूं कि हम पहले भी रूस से तेल खरीदते रहे हैं... छूट से पहले भी, छूट के दौरान भी और अब भी खरीदते रहेंगे।" उन्होंने कहा कि भारत के कच्चे तेल खरीदने के फैसले मुख्य रूप से व्यावसायिक दृष्टिकोण और पर्याप्त आपूर्ति उपलब्धता पर आधारित होते हैं। शर्मा ने कहा, "हमारे लिए खरीदारी का आधार मूल रूप से व्यावसायिक समझ है।"
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और दीर्घकालिक समझौतों के तहत पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। रूसी समुद्री मार्ग से कच्चे तेल की बिक्री और वितरण की अनुमति देने वाली अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट 16 मई को समाप्त हो गई। यह दूसरी बार है जब अमेरिका ने राहत उपाय की अवधि बढ़ाने पर स्पष्टता दिए बिना उसे समाप्त होने दिया। अमेरिकी वित्त विभाग ने यह सामान्य लाइसेंस पहली बार मार्च के मध्य में जारी किया था और अप्रैल में इसका विस्तार किया गया था। इसका उद्देश्य ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़े दबाव को कम करना था। शर्मा ने कहा, "छूट हो या नहीं, इससे उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।"
वर्ष 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों के व्यापक प्रतिबंधों और पारंपरिक निर्यात बाजारों में व्यवधान के कारण रियायती रूसी कच्चा तेल भारत के आयात का प्रमुख हिस्सा बन गया था। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता भारत, कम कीमतों का लाभ उठाने के लिए रूस से तेल खरीद में तेजी से वृद्धि कर चुका है। इससे घरेलू रिफाइनरियों को वैश्विक ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी से निपटने में मदद मिली। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने फरवरी, 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाए थे। हालांकि, रूसी तेल पर प्रत्यक्ष प्रतिबंध नहीं लगाया गया। -
नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड ने सोमवार को कहा कि उसकी स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 90 गीगावाट से अधिक हो गई है। यह उपलब्धि उसकी इकाई पीवीयूएनएल की 800 मेगावाट क्षमता वाली दूसरी इकाई के सफल परीक्षण संचालन के बाद हासिल हुई है। एनटीपीसी ने बयान में कहा कि इस उपलब्धि के साथ एनटीपीसी समूह की कुल स्थापित क्षमता देशभर में 90 गीगावाट से अधिक हो गई है। कंपनी ने कहा कि यह उपलब्धि भारत के लिए टिकाऊ और ऊर्जा-सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) परियोजना 800 मेगावाट की तीन इकाइयों वाली है। यह एनटीपीसी (74 प्रतिशत हिस्सेदारी) तथा झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (26 प्रतिशत हिस्सेदारी) के बीच एक संयुक्त उद्यम है। एनटीपीसी की वर्तमान में लगभग 32 गीगावाट क्षमता निर्माणाधीन है। कंपनी ने वर्ष 2032 तक अपनी कुल स्थापित क्षमता 149 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें 60 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा से हासिल करने की योजना है। नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के तहत कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में सौर, पवन और पंप भंडारण परियोजनाओं में 5,488 मेगावाट क्षमता जोड़ी है। एनटीपीसी का ऊर्जा पोर्टफोलियो तापीय, जल, सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजनाओं में फैला है। इसके अलावा कंपनी ई-परिवहन, बैटरी भंडारण, पंप्ड हाइड्रो, अपशिष्ट से ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसे नए क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है।
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दिल्ली में 80 रुपये किलोग्राम के पार पहुंचे दाम
नयी दिल्ली. वाहन ईंधन के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली सीएनजी की कीमतों में रविवार को एक रुपये प्रति किलोग्राम की और बढ़ोतरी की गई। एक सप्ताह से भी कम समय में दूसरी बार कंप्रेस्ड नैचुरल गैस (सीएनजी) के दाम बढ़ाए गए हैं। देश की प्रमुख शहर गैस वितरण कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लि. (आईजीएल) ने सीएनजी की कीमतों में एक रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की घोषणा की है। नई दरें लागू होने के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सीएनजी की कीमत बढ़कर 80.09 रुपये प्रति किलो हो गई है। इससे पहले बृहस्पतिवार को कंपनी ने सीएनजी की कीमतों में दो रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की थी। इस तरह केवल कुछ दिन में सीएनजी कुल तीन रुपये महंगी हो गई है। कंपनी ने बयान में कहा कि संशोधित कीमतें 17 मई सुबह छह बजे से लागू कर दी गई हैं। यह बढ़ोतरी कंपनी के सभी भौगोलिक क्षेत्रों में प्रभावी होगी। हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई में इस्तेमाल होने वाली पाइप वाली गैस यानी पीएनजी की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। आईजीएल के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की लागत बढ़ने और अमेरिकी डॉलर की मजबूती का असर सीएनजी की लागत पर पड़ा है। इसी कारण कंपनी को खुदरा कीमतों में संशोधन करना पड़ा। कंपनी का कहना है कि कीमतों में यह बढ़ोतरी केवल बढ़ी हुई लागत के प्रभाव को आंशिक रूप से कम करने के लिए की गई है। हालांकि, कंपनी ने दावा किया है कि कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सीएनजी अभी भी पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ता ईंधन है। मौजूदा दरों पर सीएनजी वाहनों का संचालन खर्च अन्य ईंधन के मुकाबले करीब 45 प्रतिशत तक कम पड़ता है। -
नयी दिल्ली. देश को 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते समय किसी एक देश या आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता से बचना होगा। एनटीपीसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह ने आगाह करते हुए कहा कि भारत को परमाणु प्रौद्योगिकी और संसाधनों पर अपना नियंत्रण मजबूत रखना चाहिए। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) द्वारा आयोजित कार्यशाला के ब्योरे के मुताबिक, सिंह ने कहा कि शुरुआती चरण में यदि स्वदेशी विकल्प 5-10 प्रतिशत महंगे भी हों, तब भी देश को उन्हें प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि वैश्विक स्तर पर दिख रही आपूर्ति शृंखला संबंधी कमजोरियों से बचा जा सके। यह कार्यशाला पिछले महीने "शांति अधिनियम, 2025 : सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से भारत की 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा रूपरेखा को सक्षम बनाना" विषय पर आयोजित की गई थी। देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी के प्रमुख सिंह ने कहा कि केवल विधायी बदलाव पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि नियमों और दिशानिर्देशों को जल्द अंतिम रूप देना भी जरूरी है। उनका कहना था कि स्पष्ट कार्यान्वयन व्यवस्था के बिना नीतियों को वास्तविक निवेश में बदलना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भारत को किसी एक देश या आपूर्तिकर्ता पर तकनीकी निर्भरता से बचना चाहिए और दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए घरेलू क्षमता निर्माण पर जोर देना चाहिए। एनटीपीसी प्रमुख ने बताया कि उनकी कंपनी वर्ष 2047 तक 30 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए कंपनी देश के 14 राज्यों में उपयुक्त स्थल की पहचान कर रही है। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी जैसे बड़े बिजली उत्पादक के लिए बड़ी क्षमता वाले रिएक्टर अधिक उपयुक्त हैं। उनके अनुसार, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) औद्योगिक इकाइयों की सीमित या अपनी जरूरतों के लिए बेहतर हो सकते हैं। एनटीपीसी की वेबसाइट के अनुसार, कंपनी की समूह स्तर पर कुल स्थापित क्षमता 89,805.30 मेगावाट है, जिसमें कोयला, गैस, जलविद्युत और सौर ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं। 31 मार्च, 2026 तक भारत की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में एनटीपीसी की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत रही, जबकि कुल बिजली उत्पादन में उसका योगदान 24 प्रतिशत था।
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नयी दिल्ली. दूरसंचार क्षेत्र के दिग्गज सुनील भारती मित्तल ने कहा है कि वह अगले दशक में भारती एयरटेल लिमिटेड की कमान नई पीढ़ी को सौंपने की योजना बना रहे हैं। साथ ही उनकी इच्छा प्रवर्तक कंपनी भारती टेलीकॉम में फिर से 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी हासिल करने की भी है। मित्तल और सिंगटेल समूह के स्वामित्व वाली भारती टेलीकॉम के पास वर्तमान में एयरटेल में 40.47 प्रतिशत हिस्सेदारी है। प्रवर्तक कंपनियां भारती टेलीकॉम, मित्तल परिवार की होल्डिंग कंपनी इंडियन कॉन्टिनेंट इन्वेस्टमेंट, सिंगटेल ग्रुप की कंपनी पास्टेल और अन्य मिलकर एयरटेल में 48.87 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं। भारती एयरटेल की जनवरी-मार्च तिमाही के नतीजों की घोषणा के दौरान मित्तल ने कहा, '' मुझे पता है कि एकदम सटीक भविष्यवाणी करना मुश्किल है लेकिन मेरी इच्छा है कि अगले दशक में जब मैं शेयरधारकों के रूप में अगली पीढ़ी को बागडोर सौंपने के मुकाम तक जाऊं तब तक भारती टेलीकॉम को 51 प्रतिशत या 50 प्रतिशत से थोड़ा अधिक की नियंत्रक शेयरधारिता हासिल कर लेनी चाहिए।'' उन्होंने कहा कि एयरटेल में भारती टेलीकॉम की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत बढ़ाने के लिए बड़ी पूंजी की आवश्यकता होगी, जो मौजूदा शेयर मूल्य एवं बाजार पूंजीकरण के आधार पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश के बराबर है। मित्तल ने कहा कि मूल विचार यह है कि नियंत्रण एवं प्रवर्तक शेयरधारिता एक ही कंपनी के माध्यम से होनी चाहिए। भारती टेलीकॉम ऐतिहासिक रूप से इस कंपनी की संस्थापक प्रवर्तक रही है और लंबे समय तक इसके पास 51 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी रही है। उन्होंने कहा कि अगले तीन से चार वर्ष में प्रदर्शन के आधार पर एयरटेल में हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है, जो शीर्ष प्रबंधन द्वारा संचालन एवं नकदी प्रवाह सृजन पर निर्भर करेगा। सिंगटेल के पास एयरटेल में करीब सात प्रतिशत प्रत्यक्ष हिस्सेदारी है।
मित्तल ने कहा कि सिंगटेल की हिस्सेदारी घटाने की प्रक्रिया जारी है और नई संरचना के बाद हिस्सेदारी अंतर कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले तीन से चार वर्ष में 3.6 प्रतिशत की शेष हिस्सेदारी हासिल करने की योजना एयरटेल के प्रदर्शन, शेयर की पुनर्खरीद और लाभांश जैसे कारकों पर निर्भर करेगी। मित्तल का वर्तमान कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त होना था लेकिन इसे 30 सितंबर, 2031 तक पांच वर्ष के लिए फिर से बढ़ा गया है। एयरटेल ने जनवरी-मार्च तिमाही में 33.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 7,325 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जबकि वार्षिक राजस्व पहली बार दो लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। -
नयी दिल्ली. भारत ने चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर तक प्रतिबंध लगा दिया है। एक सरकारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गयी है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा 13 मई को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि यह आदेश शुल्क दर कोटा योजना के तहत यूरोपीय संघ और अमेरिका को निर्यात की जाने वाली चीनी पर लागू नहीं होगा। यह आदेश अग्रिम प्राधिकरण योजना, सरकारों के बीच निर्यात और पहले से निर्यात प्रक्रिया में शामिल खेपों पर भी लागू नहीं होगा। डीजीएफटी ने कहा, ''चीनी (कच्ची चीनी, सफेद चीनी और परिष्कृत चीनी) की निर्यात नीति को 'प्रतिबंधित' श्रेणी से बदलकर 'निषिद्ध' श्रेणी में तत्काल प्रभाव से 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, कर दिया गया है।''
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नयी दिल्ली. केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त रमेश कृष्णमूर्ति ने बुधवार को कहा कि ईपीएफओ जल्द ही अंतिम भविष्य निधि निकासी दावों के निपटान की प्रक्रिया को स्वचालित करेगा। इससे आवेदक के बैंक खातों में पैसे के अंतरण में तेजी आएगी। केंद्रीय भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सात करोड़ से अधिक अंशधारक हैं।
वर्तमान में, पांच लाख रुपये तक की आंशिक या अग्रिम निकासी दावों का निपटान स्वचालित रूप से किया जाता है। स्वचालित निपटान के लिए समयसीमा दावा दाखिल करने की तिथि से तीन दिन है। उद्योग मंडल एसोचैम के नए श्रम संहिता पर आयोजित एक कार्यक्रम में कृष्णमूर्ति ने कहा, ''हम फिलहाल जहां तक संभव हो, स्वचालित निपटान शुरू करने जा रहे हैं...। यह अबतक केवल अग्रिम निकासी के लिए उपलब्ध था। अब हम अंतिम निकासी के लिए भी स्वचालित निपटान शुरू कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि यदि कोई सदस्य नियोक्ता बदलता है, तो ईपीएफओ भविष्य निधि खातों के स्वचालित निपटान और स्वचालित अंतरण की सुविधा भी शुरू कर रहा है। कृष्णमूर्ति ने कहा, ''अब आपको कोई फॉर्म भरने की जरूरत नहीं है। हम आपके खातों को आपके नये सदस्य खाते में स्वतः अंतरित करने का प्रयास करेंगे।'' चारों श्रम संहिताओं को पूर्णतः कार्यान्वित करने और उनके अंतर्गत नियम प्रकाशित करने के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि परिभाषाओं और अन्य शब्दों को सरल बनाने, संहिताबद्ध करने और मानकीकृत करने के लिए भरसक प्रयास किए गए हैं। सरकार ने आठ मई को चारों नई श्रम संहिताओं को अधिसूचित कर दिया है।
कृष्णमूर्ति ने कहा कि ईपीएफओ से संबंधित अगली अधिसूचनाएं शीघ्र ही प्रकाशित की जाएंगी।
नए कानूनी ढांचे के तहत, तीन योजनाएं ... ईपीएफ योजना 1952, कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा योजना 1976 और कर्मचारी पेंशन योजना 1995... भी पुनः अधिसूचित की जाएंगी। उन्होंने कहा, ''हमने कोई बड़े बदलाव नहीं किए हैं। हमने अतीत से जो भी सीखा है, उसे शामिल करने का प्रयास किया है। हमने केंद्रीय न्यासी बोर्ड द्वारा हाल ही में अनुमोदित सभी निर्णयों को शामिल किया है, जिनमें निकासी को सरल बनाना और अन्य सुधार शामिल हैं। साथ ही छूट प्राप्त न्यासों से संबंधित प्रावधानों में व्यापक संशोधन भी किया गया है। इन्हें नई योजनाओं में शामिल किया गया है।'' केंद्रीय श्रम सचिव वंदना गुरनानी ने कहा कि श्रम संविधान की समवर्ती सूची में है और राज्य अपने नियम स्वयं बनाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का सिद्धांत अनुपालन में कमी, कारोबार को सुगम बनाना, व्यापार विस्तार में आसानी और यह सुनिश्चित करना रहा है कि श्रमिकों के साथ कोई अन्याय न हो। गुरनानी ने कहा कि अब उद्योग जगत की जिम्मेदारी है कि सुधार को केवल अनुपालन सूची के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे एक खुशहाल, स्वस्थ और उत्पादक कार्यबल के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा जाए। -
नयी दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के इस वर्ष सरकार को अब तक का सबसे अधिक लाभांश दिए जाने की संभावना है। इससे केंद्र को पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए वित्तीय मदद मिल सकेगी। सूत्रों ने यह जानकारी दी। आरबीआई ने 2024-25 के लिए केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड लाभांश दिया था जो इससे पिछले वर्ष 2023-24 के 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक था। सूत्रों ने बताया कि आरबीआई इस महीने होने वाली अपनी निदेशक मंडल की बैठक में लाभांश की राशि पर निर्णय ले सकता है। किसी भी वित्त वर्ष के लिए हस्तांतरण योग्य अधिशेष का निर्धारण आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल द्वारा स्वीकृत संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचे (ईसीएफ) के आधार पर किया जाता है। संशोधित ढांचे के अनुसार, आकस्मिक जोखिम बफर (सीआरबी) के तहत जोखिम प्रावधान आरबीआई के बही-खाते के 4.50 से 7.50 प्रतिशत के बीच बनाए रखना होता है। बजट दस्तावेजों के अनुसार, केंद्र को 2026-27 में आरबीआई, राष्ट्रीयकृत बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लाभांश और अधिशेष के रूप में 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है जो चालू वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 3.75 प्रतिशत अधिक है। सूत्रों ने कहा कि सरकार ने सतर्क अनुमान लगाया है लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 के लिए लाभांश भुगतान बजट अनुमान से अधिक हो सकता है क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने 2025-26 में भी रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया है। बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता, स्वस्थ ऋण विस्तार और अधिक आय ने 2025-26 के दौरान पीएसबी की लाभप्रदता में सुधार किया है। कुल परिचालन लाभ 3.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि कुल शुद्ध लाभ 11.1 प्रतिशत बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। लगातार चौथे वर्ष पीएसबी ने समग्र लाभ अर्जित किया है। बजट दस्तावेजों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य निवेश से लाभांश 75,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो चालू वित्त वर्ष के 71,000 करोड़ रुपये से अधिक है। लाभांश और आरबीआई के अधिशेष हस्तांतरण गैर-कर राजस्व की श्रेणी में आते हैं।
केंद्र को कुल मिलाकर चालू वित्त वर्ष 2026-27 में गैर-कर राजस्व के रूप में 6.66 लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है, जो 2025-26 के 6.67 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा कम है। करों से होने वाली आय 28.66 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है जो 2025-26 के 26.74 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 7.18 प्रतिशत अधिक है।
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देख क्या रहा आज का भाव
नयी दिल्ली. सरकार के बहुमूल्य धातुओं पर आयात शुल्क 15 प्रतिशत किए जाने के बाद बुधवार को स्थानीय बाजार में सोने की कीमत 8,550 रुपये बढ़कर 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर पहुंच गई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी की कीमत 20,500 रुपये बढ़कर 2,97,500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो कल 2,77,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) थी। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 8,550 रुपये या पांच प्रतिशत से अधिक बढ़कर 1,65,350 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया। इसका पिछला बंद भाव 1,56,800 रुपये प्रति 10 ग्राम था। सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है जबकि प्लैटिनम पर इसे 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत किया गया है। इसके परिणामस्वरूप सोने/चांदी के डोरे, सिक्के, अन्य वस्तुएं आदि पर भी कर में बदलाव किए गए हैं। ये नए शुल्क बुधवार से लागू हो गए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद एवं विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसे उपायों के आह्वान के बाद यह घोषणा की गई है। स्थानीय कारोबारियों ने कहा कि बढ़े हुए शुल्क का वास्तविक प्रभाव आने वाले दिनों में तब दिखाई देगा जब यह खरीद लागत में परिलक्षित होने लगेगा। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख (जिंस) हरीश वी. ने कहा, '' भारत में सोने पर आयात शुल्क में हालिया बढ़ोतरी से स्थानीय कीमतें बढ़ने एवं भौतिक मांग पर अस्थायी असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। वैश्विक अनिश्चितता तथा घरेलू मुद्रा दबाव के समय सोना सुरक्षित निवेश के रूप में आकर्षक बना रहता है।'' विश्लेषकों ने कहा कि कमजोर रुपये ने भी बहुमूल्य धातुओं की कीमतों को बढ़ाया है।
विदेशी मुद्रा निकासी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की चिंता के बीच रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.80 के निचले स्तर तक गिर गया। भारत बहुमूल्य धातुओं का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और हाल के महीनों में निवेश सहित मांग में लगातार वृद्धि के कारण कीमतों में तेजी आई है। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद ने हालांकि आगाह किया कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने से आयात कम नहीं होता, बल्कि कीमतें बढ़ती हैं। आभूषण खुदरा विक्रेताओं ने कहा कि आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय सोने-चांदी के आयात पर मात्रात्मक अंकुश लगाना देश के चालू खाते के घाटा (कैड) को नियंत्रित करने का अधिक प्रभावी तरीका होगा। वैश्विक बाजार में बुधवार को ब्रेंट कच्चा तेल 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना हालांकि 0.3 प्रतिशत टूटकर 4,700.86 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी एक प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 87.45 डॉलर प्रति औंस हो गई।
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नयी दिल्ली. अमूल ने बुधवार को बढ़ती लागत के कारण पूरे भारत में दूध की कीमतें दो रुपये प्रति लीटर बढ़ाने की घोषणा की। नई दरें कल यानी 14 मई से लागू होंगी। गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) अमूल ब्रांड के तहत अपने उत्पाद बेचती है। पिछली बार कीमतों में बढ़ोतरी एक मई, 2025 को की गई थी।
जीसीएमएमएफ ने बयान में कहा कि उसने ''पूरे भारत में दूध की कीमतें 14 मई से दो रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी हैं।'' उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी लगभग 2.5-3.5 प्रतिशत प्रति लीटर की है, जो औसत खाद्य महंगाई दर से कम है। जीसीएमएमएफ ने कहा, ''कीमतों में यह बढ़ोतरी दूध के परिचालन और उत्पादन की कुल लागत में वृद्धि के कारण की जा रही है। इस साल पशु आहार, दूध की पैकेजिंग सामग्री और ईंधन की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है।'' इस सहकारी संस्था ने बताया कि उसके सदस्य संघों ने भी किसानों से दूध खरीदने की कीमत में 30 रुपये प्रति किलोग्राम वसा (फैट) की बढ़ोतरी की है, जो मई, 2025 की तुलना में 3.7 प्रतिशत अधिक है। जीसीएमएमएफ भारत में दूध के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। -
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के बीच रुपये को सहारा देने के लिए सरकार ने सोना और चांदी पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है। ये दरें बुधवार से प्रभावी हो गई हैं।
वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में मंगलवार देर रात अधिसूचना जारी की । इसके अनुसार, सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर 10 फीसदी मूल सीमा शुल्क और 5 फीसदी कृषि अवसंरचना और विकास उपकर लगाया है। इससे प्रभावी आयात कर 6 फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी हो गया है। यह दरें आज13 मई से लागू हो गई हैं। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना 16/2026 में सीमा शुल्क के माध्यम से कीमती धातुओं और उनसे बनी चीजों (निष्कर्ष) के लिए सीमा शुल्क दरों को अपडेट किया है।अधिसूचना के मुताबिक, सोना और चांदी से बनी चीजों पर पांच फीसदी शुल्क लगेगा, जबकि प्लैटिनम से बनी चीजों पर यह दर 5.4 फीसदी होगी। इसके अलावा कीमती धातुओं से बने इस्तेमाल हो चुके कैटेलिस्ट पर 4.35 फीसदी शुल्क निर्धारित किया गया है, बशर्ते संबंधित अनुपालन मानदंडों को पूरा किया जाए। -
नयी दिल्ली. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद दो महीने के ईंधन भंडार के साथ भारत को आपूर्ति को लेकर कोई चिंता नहीं है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं और खुदरा कीमतों में बदलाव नहीं किया गया, तो सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों को एक ही तिमाही में एक लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि एक स्तर पर इस बात का आकलन करना होगा कि पेट्रोलियम कंपनियां लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) कब तक बेच सकती हैं। हालांकि, उन्होंने कीमतों में बढ़ोतरी की किसी भी संभावना पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन में मंत्री ने कहा, ''हमारे पास आपूर्ति से जुड़ी कोई समस्या नहीं है।'' उन्होंने बताया कि भारत ने संकट की शुरुआत पर्याप्त भंडार के साथ की थी और तब से घरेलू एलपीजी उत्पादन को 36,000 टन से बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है। साथ ही, मंत्री ने खुदरा कीमतों को स्थिर रखने से बढ़ रहे वित्तीय दबाव को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, ''मेरी पेट्रोलियम कंपनियों रोजाना 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।'' उन्होंने बताया कि लागत और बिक्री मूल्य का कुल अंतर बढ़कर लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गया है और एक तिमाही में एक लाख करोड़ रुपये का घाटा पूरे क्षेत्र के वार्षिक लाभ को खत्म कर सकता है। पिछले 10 सप्ताह से पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बावजूद, सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों - इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) ने बिना किसी रुकावट के आपूर्ति सुनिश्चित की है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में 50 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद, पेट्रोल और डीजल दो साल पुरानी दरों पर ही मिल रहे हैं। इस समय कंपनियों को पेट्रोल पर 14 रुपये, डीजल पर 42 रुपये और रसोई गैस पर 674 रुपये प्रति सिलेंडर का घाटा हो रहा है। पुरी ने ऊर्जा संरक्षण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान को दूरदर्शी बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि कल से कोई लॉकडाउन या राशनिंग (खरीद की सीमा) लागू होने वाली है, बल्कि यह भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का एक संदेश है। उन्होंने उद्योगों और घरों से अपील की कि वे जहां संभव हो एलपीजी से पीएनजी की ओर बढ़ें, क्योंकि भारत गैस पाइपलाइन नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रहा है। मंत्री ने बताया कि भारत के पास इस वक्त लगभग 60 दिन का कच्चे तेल का भंडार, 60 दिन का एलएनजी भंडार और 45 दिन का एलपीजी भंडार है।
























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