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फिक्की छत्तीसगढ़ प्रदेश परिषद के संयोजन में सीएसआईडीसी, छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में बायो-इथेनॉल एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश के अवसर पर वेबीनार आयोजित
छत्तीसगढ़ बायो-इथेनॉल और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए निवेश की पसंदीदा जगह है जहां आने वाले समय में 200 फूड पार्क स्थापित होंगे- पी. अरुण प्रसाद- आईएफएस, एमडी-सीएसआईडीसी, छत्तीसगढ़ सरकार
छत्तीसगढ़ सरकार का लघु वन उपज पर बहुत ज़ोर है और इसे आगामी औद्योगिक नीति में सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने की योजना है- संजय शुक्ला-आईएफएस, एमडी- छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उपज सहकारी समिति
रायपुर। फिक्की छत्तीसगढ़ राज्य परिषद और सीएसआईडीसी, छत्तीसगढ़ सरकार ने संयुक्त रूप से जैव-इथेनॉल और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश के अवसर पर बुधवार को एक वेबीनार का आयोजन किया। प्रदीप टंडन, अध्यक्ष फिक्की - छत्तीसगढ़ राज्य परिषद, पी. अरुण प्रसाद, एमडी, सीएसआईडीसी, संजय शुक्ला, एमडी छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ और गुलरेज़ आलम, सदस्य फिक्की -छत्तीसगढ़ राज्य परिषद इस वेबीनार के पैनलिस्ट थे। फिक्की छत्तीसगढ़ राज्य परिषद द्वारा आयोजित इस ऑनलाइन (आभासी) सत्र में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के घरेलू और राष्ट्रीय स्तर के बड़े उद्यमियों के साथ-साथ व्यक्तिगत और संस्था गत निवेशकों की भी अच्छी-खासी भागीदारी रही।
इस अवसर पर सीएसआईडीसी के प्रबंध निदेशक पी. अरुण प्रसाद ने अपने संबोधन में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की प्रदेश में संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्व बैंक के मुताबिक कारोबार की सुगमता के लिहाज से छत्तीसगढ़ सर्वोच्च उपलब्धियां हासिल करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। सरकार की योजना प्रदेश में जिला व प्रखंड स्तर पर 200 फूड पार्क स्थापित करने की है। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर छत्तीसगढ़ देश में तेजी से तरक्की करने वाले मजबूत राज्य के रूप में उभर रहा है। प्रदेश में 80 फीसदी लोग कृषि और कृषि आधारित व्यवसाय पर आश्रित हैं। हमारे यहां 88 प्रजातियों के औषधीय पौधे उगाए जाते हैं और सरकार इथेनॉमेडिसीन इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने में सदैव आगे रही है। इस कार्य में सदियों से अनुसूचित जाति के लोग लगे हैं। छत्तीसगढ़ की सीमाएं 7 राज्यों से मिलती हैं। हमारा प्रदेश रेल, सड़क और हवाई यातायात की दृष्टि से समृध्द है और देश का लॉजिस्टिक्स हब बनने की पूरी क्षमता रखता है।
यहां यह उल्लेख करना आवश्यक होगा कि छत्तीसगढ़ अपनी जरूरत से अधिक (अधिशेष) धान उत्पादन करने वाले राज्यों में शामिल है। ताजा आंकड़ों के हिसाब से राज्य में 80 लाख टन धान की खरीद की गई है जो भविष्य में और बढ़ेगी। हाल ही में, केंद्र सरकार ने अधिशेष चावल को इथेनॉल में बदलने की अनुमति दी है। इस इथेनॉल का उपयोग अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजऱ बनाने और पेट्रोल सम्मिश्रण में किया जाएगा। वाणिज्य और उद्योग विभाग ने छत्तीसगढ़ राज्य में इथेनॉल संयंत्र की स्थापना के लिए प्रस्ताव (ईओआई) मांगे हैं। इस सिलसिले में 21 जुलाई 2020 को हुई प्री-बिड मीटिंग के दौरान प्रतिभागियों ने कोविड19 महामारी की वजह से अंतिम तिथि 10 अगस्त 2020 तक बढ़ाए जाने का अनुरोध किया। पी. अरुण प्रसाद ने इच्छुक बोलीकर्ताओं से अनुरोध किया है कि वे अपने प्रस्ताव निर्धारित आवेदन प्रारूप (ईओआई) के अनुसार ही प्रस्तुत करें।
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उपज सहकारी समिति के एमडी संजय शुक्ला ने कहा कि लघु वन उपज के संग्रह और प्राथमिक प्रसंस्करण को सुगम बनाने के साथ-साथ लघु वन उपज प्रसंस्करण उद्योग की स्थापना से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और इसका वास्तविक लाभ सीधे इस कारोबार से जुड़ी ग्रामीण आबादी को होगा। उन्होंने आह्वान किया कि लघु वन उपज खरीदें, उनका प्रसंस्करण करें और 31 मार्च 2022 तक अत्याधुनिक प्रसंस्करण उद्योग की स्थापना कर यह कारोबार 500 करोड़ रुपये से ऊपर ले जाएं तभी ग्रामीण पृष्ठभूमि के 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य प्राप्त हो सकेगा। इससे पूर्व प्रदीप टंडन, अध्यक्ष, फिक्की छत्तीसगढ़ ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि आज प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की आवश्यकता है क्योंकि यह ग्रामीण क्षेत्रों के शहरीकरण में मदद करेगा, कच्चे कृषि उत्पादों का मूल्यवर्धन कर बेहतर कीमत दिलाएगा, ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार पैदा करेगा और साथ ही अर्थव्यवस्था के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस अवसर पर गुलरेज़ आलम, सदस्य-फिक्की छत्तीसगढ़ राज्य परिषद व निदेशक, एबीआईएस एक्सपोट्र्स आई प्राइवेट लिमिटेड ने अपने धन्यवाद अभिभाषण में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए प्रदेश सरकार की पहल की सराहना करते हुए निवेशकों का आह्वान किया कि वे पूरे इत्मीनान से उद्योग लगाएं और कारोबार करें। सरकार खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास के लिए प्रयत्नशील है। यहां न सिर्फ कृषि उत्पादन पर्याप्त है बल्कि उद्योग लगाने के लिए भूमि व स्थानीय बाजार के साथ-साथ निर्यात की भी भरपूर संभावनाएं हैं। सरकार खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाने के लिए पर्याप्त अनुदान और आर्थिक सहयोग (सब्सिडी) प्रदान कर रही है।
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मुंबई। अर्थव्यवस्था में नकदी के इस्तेमाल को कम करने के लिये सरकार को ग्राहकों के बीच क्यूआर (क्विक रिस्पांस) कोड के जरिये लेनदेन को बढ़ावा देने के लिये प्रोत्साहन देने चाहिये। रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट में बुधवार को यह कहा गया है। क्यूआर कोड के जरिये विभिन्न बिक्री केन्द्रों और दुकानों पर मोबाइल से आसानी से भुगतान किया जा सकता है। क्यूआर कोड पर्याप्त सूचनाओं को अपने में संग्रहित रख सकता हे। यह एक तरह का बारकोड होता है जिसे मशीन के जरिये पढ़ लिया जाता है। एक जापानी कंपनी डेंसो वेव ने1990 में क्यूआर कोड का अविष्कार किया था। भारत में क्यूआर कोड भुगतान प्रणाली व्यापक तौर पर तीन तरह से भारत क्यूआर, यूपीआई क्यूआर और प्राप्रिएटरी क्यूआर-- के जरिये काम करती है। आईआईटी बंबई के प्रोफेसर एमरिटस डी बी पाठक की अध्यक्षता वाली रिजर्व बैंक की इस समिति ने और भी कई सुझाव इस संबंध में दिये हैं। उसने कहा है कि जो व्यापारी अलेक्ट्रानिक तरीके से भुगतान स्वीकार करते हैं उन्हें कर प्रोत्साहन भी दिया जाना चाहिये। क्यूआर कोड के विश्लेषण के लिये गठित इस समिति ने कहा है कि देश में क्यूआर कोड के जरिये लेनदेन को बढ़ावा देने के लिये और इसे लोगों के बीच आकर्षक बनाने के लिये सरकार को प्रोत्साहन योजनाओं को भी शुरू करना चाहिये। क्यूआर कोर्ड के जरिये कोई भी बिजली, पानी, पेट्रोल, डीजल, किराना सामान, यात्रा और अन्य कई तरह के भुगतान कर सकता है। रिजर्व बैंक को सौंपी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कागज आधारित क्यूआर कोड काफी सस्ता और लागत प्रभावी है। इसमें रखरखाव की भी जरूरत नहीं पड़ती है। रिजर्व बैंक ने इस रिपोर्ट पर लोगों तथा अन्य संबंध पक्षों से 10 अगस्त तक अपने सुझाव और टिप्पणियां भेजने को कहा है। -
नई दिल्ली। देश में यूरिया का उत्पदन वर्ष 2019-20 में बढ़कर 244.55 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जबकि इसकी बिक्री पांच प्रतिशत बढ़कर 336.97 लाख टन हो गई। सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। यूरिया के घरेलू उत्पादन और मांग के बीच की अंतर को आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि देश भर में उर्वरकों का उत्पादन और उसकी आवाजाही सहज बनी हुई है। वर्ष 2019-20 के दौरान 244.55 लाख टन का रिकॉर्ड यूरिया उत्पादन हुआ जो वर्ष 2018-19 में 240 लाख टन था। बयान में कहा गया है, जबकि यूरिया की बिक्री या खपत 336.97 लाख टन हो गई, जबकि पिछले वर्ष यानी वर्ष 2018-19 में 320.20 लाख टन थी। केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डी वी सदानंद गौड़ा ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बावजूद देश भर में उर्वरकों का उत्पादन और उसे किसी स्थान पर पहुंचाने में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि इस साल भी उर्वरकों की कोई कमी नहीं होगी।
- नई दिल्ली। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने अडानी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड द्वारा कृष्णापटनम पोर्ट कंपनी लिमिटेड के अधिग्रहण को मंजूरी दी है। प्रस्तावित संयोजन में अदानी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (अदानी पोर्ट्स) द्वारा कृष्णपट्टनम पोर्ट कंपनी लिमिटेड (केपीसीएल) में इक्विटी शेयरहोल्डिंग के साथ प्रबंधन नियंत्रण के अधिग्रहण की परिकल्पना की गई है।अडानी पोर्ट्स एकीकृत पोर्ट अवसंरचना सेवा प्रदाता है जो वर्तमान में छह तटीय राज्यों - गुजरात, गोवा, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा के दस घरेलू बंदरगाहों में मौजूद है। अधिग्रहणकर्ता लॉजिस्टिक्स चेन (यानी जहाजों के प्रबंधन से लेकर जहाजों के ठहरने का स्थान, जहाज संचालन, कर्षण, लंगर डालने की जगह, सामानों के रखरखाव, आतंरिक परिवहन, भण्डारण और संचालन, प्रोसेसिंग व रोड या रेल द्वारा अंतिम निकासी) का प्रबंधन करता है।केपीसीएल आंध्र प्रदेश के कृष्णापट्टनम में गहरे पानी के बंदरगाह को विकसित करने तथा संचालित करने का कार्य कर रहा है। कंपनी का आंध्र प्रदेश सरकार के साथ, वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से 30 साल की अवधि के लिए निर्माण-संचालन-साझा-हस्तांतरण (बिल्ड-ऑपरेट-शेयर-ट्रांसफर) के आधार पर रियायत समझौता हुआ है तथा इस समझौते को और 20 साल की अवधि के लिए विस्तार दिया जा सकता है (दो अवधि - प्रत्येक 10 साल की)।सीसीआई का विस्तृत आदेश जल्द ही जारी किया जायेगा।
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नई दिल्ली। पूंजी बाजार नियामक सेबी के प्रमुख अजय त्यागी ने बुधवार को कहा है कि कार्पोरेट बांड बाजार केवल ऊंची रेटिंग वाले बांड के लिये ही सीमित है। ऐसे में इस बाजार में ऋणपत्रों के जरिये धन जुटाने में सक्षम केवल सीमित संख्या में ही इश्यू आ पाते हैं।
त्यागी ने यहां भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल महासंघ (फिक्की) के पूंजी बाजार पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि इस बाजार में और उद्यमों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता है। इसमें संस्थागत निवेशकों को भी कार्पोरेट बांड बाजार में आने की अनुमति मिलनी चाहिये। फिलहाल इस बाजार में म्यूचुअल फंड ही प्रमुख रूप से सक्रिय खिलाड़ी हैं। कार्पोरेट बांड बाजार की बकाया राशि का बाजार भारत में 2013- 14 में 15,000 अरब रुपये से बढ़कर 2019- 20 में 33,000 अरब रुपये तक पहुंच गया। इस लिहाज से इसमें सालाना 14 प्रतिशत की वृद्धि दर रही। इसके मुकाबले बैंकों का बकाया कर्ज इस अवधि के दौरान सालाना 9 प्रतिशत की दर से बढ़ता हुआ 61,000 अरब रुपये से बढ़कर 104,000 अरब रुपये तक पहुंच गया। कार्पोरट बांड बाजार में हालांकि, पिछले 5 से 6 साल के दौरान बैंक कर्ज के मुकाबले ऊंची वृद्धि दर्ज की गई लेकिन वास्तविक आंकड़ों की यदि बात की जाये तो कार्पोरेट बांड बाजार कुल बैंक रिण का अभी मात्र एक तिहाई तक ही है। सेबी प्रमुख ने कहा कि कार्पोरेट बांड बाजार में बिना किसी देरी के जरुरी सुधार लाया जाना चाहिये। उन्होंने वित्तीय बाजारों के एकीकरण के बारे में कहा। ऐसा बाजार जहां कार्पोरेट बॉंड और सरकारी प्रतिभूति बाजार एकसाथ हों। -
नई दिल्ली। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने बताया है कि उसके सेलम इस्पात संयंत्र ने एसएस 32205 श्रेणी का स्टेनलेस स्टील तैयार किया है, जो अत्यधिक क्षय प्रतिरोधक है। इसके साथ ही सेल इस श्रेणी का इस्पात तैयार करने वाली देश की चुनिंदा कंपनियों में शामिल हो गई है। अभी तक इस श्रेणी के स्टेनलेस स्टील को आमतौर पर आयात किया जाता है। सेल ने एक विज्ञप्ति में बताया कि सुपर डुप्लेक्स स्टेनलेस स्टील बेहद मजबूत और टिकाऊ है। साथ ही अत्यधिक क्षय प्रतिरोधक होने के कारण इसका इस्तेमाल रसायन प्रसंस्करण उपकरणों, तेल और गैस की खोज, लुगदी और कागज उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण उपकरणों और जैव ईंधन संयंत्र में किया जाता है। सेल के चेयरमैन अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि सेल भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान से प्रेरित होकर ऐसे इस्पात के विकास में लगातार काम कर रहा है, जो स्वदेशी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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मुंबई। आवास ऋण देने वाली कंपनी एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (एलआईसीएचएफएल) ने बुधवार को कहा कि उसने आवास ऋण लेने वाले नये ग्राहकों के लिये ब्याज दर को घटाकर 6.90 प्रतिशत कर दिया है। आवास ऋण पर यह अब तक की सबसे निम्न ब्याज दर है। जिन ग्राहकों का सिबिल स्कोर 700 अथवा इससे अधिक होगा उन्हें इस दर पर आवास ऋण उपलब्ध कराया जायेगा। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने एक वक्तव्य में कहा है कि सिविल में 700 अथवा इससे अधिक स्कोर रखने वाले ग्राहकों के लिये 50 लाख रुपये तक के आवास रिण पर ब्याज की दर 6.90 प्रतिशत से शुरू होगी। इसी प्रकार इतने ही स्कोर के साथ 80 लाख रुपए से अधिक आवास ऋण लेने वालों के लिये 7 प्रतिशत की ब्याज दर होगी। एलआईसीएचएफएल के प्रबंध निदेशक और सीईओ सिद्धार्थ मोहंती ने कहा, कंपनी के आवास ऋण पर ब्याज दर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है इसलिये ग्राहकों को कर्ज पर मासिक किस्त का भुगतान भी कम होगा। आकर्षक मूल्य अंकों और सस्ती ईएमआई से मकान खरीदने के लिये मांग बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि इस नये उत्पाद के जरिये कंपनी आवास क्षेत्र में मांग पैदा करना चाहती है। इससे पहले अप्रैल में कंपनी ने सिबिल में 800 अंक अथवा इससे अधिक स्कोर रखने वाले मकान खरीदने वाले नये ग्राहकों के लिये आवास रिण पर ब्याज दर को घटाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया था। मोहंती ने कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में कटौती किये जाने के बाद कोष की लागत में भी नरमी आई है। कंपनी के लिये कोष की लागत वर्तमान में 5.6 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कंपनी के रिण में से 25 प्रतिशत से भी कम कर्ज किस्त भुगतान पर लगी रोक के तहत है। वहीं कंपनी के निर्माण कार्य के लिये दिये गये 13,000 करोड़ रुपये के कर्ज में से 8,500 - 9,000 करोड़ रुपये किस्तों के भुगतान पर रोक के दायरे में है। कंपनी ने पेंशन भोगियों के लिये एक खास आवास रिण उत्पाद, गृह वरिष्ठ, भी जारी किया है। इसके तहत कर्ज की अवधि ग्राहक के 80 साल की आयु पूरी होने तक अथवा अधिकतम 30 साल रखी गई है जो भी इसमें पहले होगा। इस योजना के तहत तैयार मकान खरीदने वाले ग्राहक को छह ईएमआई की छूट और निर्मार्णाधीन मकानों के लिये किस्त भुगतान पर 48 महीने की रोक अवधि जैसी सुविधायें भी उपलब्ध हैं।
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नई दिल्ली। वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लि. (एचजेडएल) ने बुधवार को अंजनी के अग्रवाल और अखिलेश जोशी को निदेशक मंडल में शामिल किये जाने की घोषणा की। कंपनी ने एक बयान में कहा कि जोशी एचजेडएल के पूर्व सीईओ हैं जबकि अग्रवाल ईवाई के पूर्व वरिष्ठ भागीदारी हैं। जोशी ने अपने कैरिअर की शुरूआत 1976 में एचजेडएल से की और 2008 से 2012 के दौरान वे कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी और पूर्णकालिक निदेशक नियुक्त किये गये। वह 2012 से 2015 के दौरान कंपनी के सीईओ और पूर्णकालिक निदेशक रहे। अग्रवाल पिछले साल जून में ईवाई से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने केंद्र सरकार और नीति आयोग में भी विभिन्न नीतिगत मामलों पर काम किया है। हिंदुस्तान जिंक का मुख्यालय उदयपुर है और यह जस्ता, सीसा और चांदी की प्रमुख उत्पादक कंपनी है।
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मुंबई। साधारण बीमा कंपनी एसबीआई जनरल इंश्योरेंस ने मंगलवार को बताया कि उसने प्रकाश चंद्र कांडपाल को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक नियुक्त किया है। कंपनी ने एक विज्ञप्ति में कहा कि उनका कार्यकाल 20 जुलाई से शुरू हो गया है। वह जून 2019 से कंपनी के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे। कांडपाल के पास भारतीय स्टेट बैंक में काम करने का 33 साल का अनुभव है। वह खुदरा, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग के साथ-साथ मानव संसाधन, प्रौद्योगिकी जैसे विभागों की जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वह एसबीआई म्यूचुअल फंड में मुख्य परिचालन अधिकारी भी रहे हैं। कांडपाल, पूषण महापात्रा का स्थान लेंगे। महापात्रा को कंपनी में रणनीतिक निवेश और डिजिटल पहल निदेशक बनाया गया है। वह कंपनी के पूर्णकालिक निदेशक बने रहेंगे।
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रायपुर/नई दिल्ली। देशभर के सर्राफा बाजारों में आज सोने-चांदी की कीमतों ने आसमान छू लिया। धनश्री ज्वेलर्स के योगेश सोनी ने बताया कि बुधवार को राजधानी रायपुर में सोना 51,500 प्रति दस के दर पर पहुंच गया। इसी तरह चांदी 58000 हजार रुपए प्रति किलो रही। श्री सोनी के अनुसार रायपुर में 24 कैरेट सोना एक ही दिन में 500 रुपए प्रति दस ग्राम महंगा हो गया, वहीं चांदी 3000 रुपए प्रति किलो महंगी हो गई।
वायदा बाजार में रहे ये दाम
इधर, अगर भारतीय वायदा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों की बात करें तो आज दोनों धातुएं नई ऊंचाई पर हैं। चांदी का भाव 60,000 रुपए प्रति किलो के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार गया, जबकि सोना भी 50,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर को तोडऩे के करीब है। केडिया कमोडिटीज के डायरेक्टर अजय केडिया कहते हैं कि कोरोना वायरस का संक्रमण कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। इससे शेयर बाजारों में जहां अनिश्चितता का माहौल है वहीं रियल एस्टेट भी पस्त पड़ा है। इस दौर निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित सोना ही नजर आ रहा है। निवेशकों का रुझान गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और बॉन्ड की तरफ बढ़ा है। यही वजह है कि सोने के रेट बढ़ते जा रहे हैं। वहीं कोरोनावायरस संक्रमण के कारण खनन कार्य प्रभावित होने और आपूर्ति बाधित होने से चांदी की कीमतों में ज्यादा तेजी देखी जा रही है। -
रायपुर/नई दिल्ली। पहले लॉकडाउन फिर बारिश और बाढ़ के चलते देशभर में सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। देशभर की सब्जी मार्केट में इस समय सब्जियों की कीमतों में जबर्दस्त उछाल आया है। चिल्हर बाजार में सब्जियां महंगी होने की वजह से लोगों की रसोई का जायका बिगड़ गया है। छत्तीसगढ़ में भी पिछले कुछ दिनों में सब्जियों के दाम में तेजी से इजाफा हुआ है। मंगलवार को टमाटर 50 रुपए किलो बिका। इसी तरह मुनगा 80 रुपए, फूलगोभी 60 रुपए करेला 50 से 60 रुपए, गंवार फल्ली 40 रुपए और भिंडी 30 रुपए किलो बिकी। बुधवार से रायपुर में लॉकडाउन की खबर का असर मंगलवार को दिखा। मंगलवार को आलू के दाम अचानक बढ़कर 40 रुपए प्रति किलो हो गए।
इधर, दिल्ली के आजादपुर मंडी के चेयरमैन आदिल अहमद खान ने कहते हैं कि मानसून के समय हर साल सब्जियों की कीमतों में इजाफा होता है। इस समय पुरानी फसलों की कटाई के बाद नई फसलें तैयार होती हैं। ऐसे में 20-25 दिन थोड़ा संकट वाला होता है। कोलकाता के कोले सब्जी मार्केट के व्यापारी रविंद्र नाथ कोले ने बताया कि इस समय रिटेल में सब्जी की कीमत आसमान छू रही है। बारिश और कई जिलों में बाढ़ जैसी समस्या होने की वजह से हरी सब्जियों के दाम में इजाफा हुआ है। -
नई दिल्ली। कोरोनो महामारी को देखते हुए सरकार ने पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) और सुकन्या समृद्धि स्कीम सहित कई छोटी बचत योजनाओं के लिए जमा और खाता खोलने के नियमों में ढील दी है। ये छूट 31 जुलाई को समाप्त हो रही है। इसके तहत पीपीएफ खाताधारकों को वित्त वर्ष 2019-20 के लिए न्यूनतम और अधिकतम राशि अपने खातों में 31 जुलाई तक जमा करने की अनुमति दी है। वहीं सुकन्या समृद्धि स्कीम के तहत खाता खोलने को लेकर भी राहत दी गई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने आईटी अधिनियम के तहत 2019-20 के लिए कटौती का दावा करने के लिए विभिन्न निवेश की समय सीमा को 31 जुलाई तक बढ़ा दिया है, जिसमें धारा 80सी, 80डी, 80जी आदि शामिल हैं। इसके तहत अब पीपीएफ खाताधारक इसमें टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए 31 जुलाई तक निवेश कर सकेंगे। इसके अलावा अकाउंट में साल में कम से कम 500 रुपए जमा करना होते हैं ऐसा न करने पर पेनल्टी वसूली जाती है। इस मिनिमम अकाउंट को भी 31 जुलाई तक जमा करना होगा। पीपीएफ पर 7.1 फीसदी सालाना की दर से रिटर्न मिल रहा है।
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नई दिल्ली। सरकार ने आईटी और आईटीईएस इंडस्ट्री को इस साल दिसंबर तक वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की छूट दे दी है। सरकार ने देश में कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए इस इंडस्ट्री के कर्मचारियों को जुलाई तक घर से काम करने की अनुमति दी थी। अब दूरसंचार विभाग ने इसे दिसंबर तक बढ़ा दिया है। दूरसंचार विभाग ने ट्वीट कर जानकारी दी, कोविड-19 की लगातार जारी चिंता की वजह से डीओटी ने 31 दिसंबर 2020 तक अदर सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए वर्क फ्राम होम को सुविधाजनक बनाने के लिए नियम-कायदों में ढील को बढ़ा दिया है। मार्च में दूरसंचार विभाग ने अंदर सर्विस प्रोवाइडर्स ओएसपी के लिए नियम-कायदों में 30 अप्रैल तक ढील दी थी, ताकि वर्क फ्राम होम को सुविधाजनक बनाया जा सके जिसे बाद में बढ़ाकर 31 जुलाई कर दिया गया।
- कोरबा। एनटीपीसी लारा की यूनिट 2 ने सफलतापूर्वक अपना ट्रायल ऑपरेशन लक्ष्य पूर्ण कर लिया है। इस घोषणा के साथ ही एनटीपीसी लिमिटेड की कुल स्थापित क्षमता 62910 मेगावाट पहुंच चुकी है एवं लारा के प्रथम चरण की 1600 मेगावाट क्षमता प्राप्ति का लक्ष्य भी पूर्ण हो चुका है।एनटीपीसी लारा की यूनिट 2 का 72 घंटे का फुल लोड (800 मेगावाट पर) ट्रायल ऑपरेशन लक्ष्य 12 जुलाई को रात्रि 01:00 बजे सफलतापूर्वक हासिल हुआ। वहीं 20 जुलाई को समस्त औपचारिकताओं की पूर्ति के पश्चात कंपनी ने क्षमता वृद्धि की घोषणा की ।एनटीपीसी की वर्तमान 62 हजार 910 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता में एनटीपीसी समूह के पास 24 कोयला, 7 संयुक्त चक्रीय गैस / तरल ईंधन, एक पनबिजली, 13 नवीनीकरण और 25 सहायक और संयुक्त उद्यम बिजली स्टेशनों के साथ 70 बिजलीघर हैं।क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक विनोद चौधरी एवं कार्यकारी निदेशक, लारा संजय मदान ने एनटीपीसी लारा के सभी कर्मचारियों को मानदंडों के अनुरूप पूर्ण लोड ट्रायल ऑपरेशन लक्ष्य प्राप्ति में योगदान हेतु बधाई दी।
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मुंबई। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने घरेलू विमानन उद्योग में विभिन्न निवेश प्रस्तावों में तेजी लाने के लिये एकल-खिड़की मंजूरी तंत्र स्थापित किया है। मंत्रालय ने शनिवार को एक ट्वीट में कहा, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शीघ्र सहायता और मंजूरी के लिये निवेश मंजूरी सेल गठित की है। इस सेल की स्थापना की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस वर्ष फरवरी में 2020-2021 के केंद्रीय बजट में की थी। मंत्रालय के 16 जुलाई के आदेश के अनुसार, इस संबंध में एक जुलाई को उद्योग और व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईटी) के एक आदेश के बाद सेल की स्थापना की गयी। मंत्रालय ने अपने ट्वीट में उक्त आदेश का लिंक भी संलग्न किया है। आदेश के अनुसार 10 सदस्यीय सेल का नेतृत्व विमानन मंत्रालय में संयुक्त सचिव अंबर दुबे करेंगे। सेल के बाकी नौ सदस्यों में से पांच विमानन मंत्रालय से हैं। इनमें से एक भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण से और एक इसके कार्गो और लॉजिस्टिक्स व्यवसाय एआईएसीएलएस से तथा एक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से हैं। एक सदस्य को चेयरमैन के द्वारा नियुक्त किया जाना है। - नई दिल्ली। इन्फोसिस और टेक महिंद्रा के बाद सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की एक अन्य प्रमुख कंपनी विप्रो भी विशेष चार्टर्ड उड़ानों से अमेरिका से अपने सैकड़ों कर्मचारियों और उनके परिवार के लोगों को भारत वापस लेकर आई है। कंपनी ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के अपने कर्मचारियों के लिए भी इसी तरह का कदम उठा रही है।विप्रो ने एक बयान में कहा, कंपनी में हमारी शीर्ष प्राथमिकता अपने कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और देखभाल है। इसी सप्ताह के शुरू में कंपनी चार्टर्ड उड़ानों के जरिये अमेरिका से अपने सैकड़ों कर्मचारियों को स्वदेश वापस लेकर आई है। कंपनी ने कहा कि वंदे भारत मिशन उड़ानों के जरिये कंपनी ब्रिटेन से भी अपने कर्मचारियों को वापस लेकर आई है। कंपनी का इरादा इसी महीने ऑस्ट्रेलिया से भी अपने कर्मचारियों को चार्टर्ड उड़ानों से वापस लाने का है। कंपनी ने कहा कि इन कर्मचारियों का वीजा या तो समाप्त हो गया था या समाप्त होने वाला था।-----
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रायपुर। पी एच डी चेम्बर छत्तीसगढ़ चैप्टर तथा सी एस आई डी सी, के संयुक्त तत्वावधान में छत्तीसगढ़ राज्य में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में संभावनाएं विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया।
छत्तीसगढ़ शासन की ओर से पी अरुण प्रसाद, प्रबंध संचालक, सीएसआईडीसी द्वारा राज्य सरकार खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयासों तथा योजनाओं को पॉवर पॉइन्ट प्रेजेंटेशन द्वारा विस्तृत रूप से साझा किया। श्री प्रसाद में अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य है जहां गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने तथा राज्य में पूरी तरह ऑर्गनिक उत्पादन की दिशा में कार्य कर रही है।वहीं गोविंदराम चौधरी, उपाध्यक्ष एग्री बिजनेस एवं फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि किसी भी उद्योग को स्थापित होने जो सहायता चाहिए वह सभी सुविधाएं छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दी जा रही हैं, अत: सभी निवेशकों के लिए जो कि छत्तीसगढ़ में निवेश करना चाहते हैं यह एक सुनहरा अवसर है। श्री चौधरी ने पी एच चेम्बर और छत्तीसगढ़ शासन विशेषकर छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम को इस आयोजन के लिए धन्यवाद दिया।वेबिनार में एस एस बजाज, अतिरिक्त प्रबंध संचालक लघु वनोपज की ओर से बताया गया कि राज्य में लॉक डाउन अवधि में भी 5 हजार स्वसहायता समूहों के माध्यम से रिकॉर्ड खरीदी की गई। उन्होंने राज्य में काजू , तेन्दु, जाम, आम तथा विभिन्न वनोपजों के प्रसंस्करण तथा मूल्य संवर्धन की संभावनाओं तथा अवसरों को विस्तार से बताया। श्री बजाज ने बताया कि राज्य में हर्बल तथा प्रसंस्कृत वनोपजों की बिक्री संजीवनी विक्रय केंद्र के माध्यम से हो रही है तथा महुआ बीज से स्व सहायता समूहों द्वारा हर्बल उत्पाद निर्माण किया जा रहा है।वेबिनार में कोरिया के उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ के प्रतिनिधि सेनचेंग हा ने अपने सम्बोधन में कहा कि बहुत सी कोरियन कम्पनियां हैं जो उचित योजना और मार्केटिंग सपोर्ट मिलने पर छत्तीसगढ़ में निवेश करना चाहेंगे, उन्होंने आयोजन के लिए पी एच डी चैम्बर तथा छत्तीसगढ़ सरकार को धन्यवाद दिया।वहीं मनोज कुमार पिंगुआ, प्रिंसिपल सेक्रेटरी कॉमर्स एंड इंडस्ट्री छत्तीसगढ़ शासन ने अपने उद्बोधन में सबसे पहले कहा कि पी एच डी चैम्बर तथा छत्तीसगढ़ सरकार का बहुत पुराना साथ है, उन्होंने लम्बे समय बाद हुए इस आयोजन के लिए पी एच डी चैम्बर का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला तथा बताया कि राज्य को धान का कटोरा कहा जाता है। उन्होंने राज्य में हार्टिकल्चर के अंतर्गत फलों, सब्जियों तथा मसालों के उत्पादन तथा उनके प्रसंस्करण की अपार संभावनाओं का जिक्र करते हुए सभी निवेशकों से राज्य की संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।कार्यक्रम के अंत में अरुण प्रसाद ने प्रतिभागियों के सवाल का जवाब दिया तथा सभी के प्रश्नों का ईमेल के माध्यम से विस्तारपूर्वक जवाब भेजने हेतु आश्वस्त किया। पी एच डी चैम्बर छत्तीसगढ़ चेप्टर के अध्यक्ष शशांक रस्तोगी ने आज के विशिष्ट अतिथियों, मनोज कुमार पिंगुआ, पी अरुण प्रसाद एवं एस एस बजाज का परिचय सभी प्रतिभागियों के मध्य कराया।वेबिनार के अंत में पी एच डी चैम्बर के रंजीत मेहता तथा योगेश श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन गुंजन गोयला द्वारा किया गया। - नई दिल्ली। ऐप आधारित कैब सेवाएं देने वाली कंपनी उबर ने प्राभजीत सिंह को भारत और दक्षिण एशिया परिचालन का अध्यक्ष नियुक्त किया है।कंपनी ने एक बयान में कहा कि उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभावी है। वह अपनी नयी भूमिका में कंपनी के आवागमन व्यवसाय की वृद्धि के अगले चरण की निगरानी करेंगे। वह भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश में वाहन चालकों व यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेंगे। इससे पहले सिंह परिचालन निदेशक (भारत और दक्षिण एशिया) तथा हेड ऑफ सिटीज के पद पर कार्यरत थे। उबर के क्षेत्रीय महाप्रबंधक (एशिया प्रशांत) प्रदीप परमेश्वरन ने कहा, मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि प्राभ भारत और दक्षिण एशिया के लिये उबर के नये अध्यक्ष के रूप में मेरी जगह ले रहे हैं। भारत और दक्षिण एशिया हमारे सबसे तेजी से बढ़ते व सबसे रणनीतिक बाजारों में से एक है। प्राभ एक उत्साही और नवोन्मेषी कार्यकारी हैं तथा वह उबर को जमीनी स्तर से यहां तक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
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नई दिल्ली। एनटीपीसी ने शनिवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसके सिंगरौली बिजली संयंत्र की यूनिट-1 का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा है। कंपनी ने कहा कि अप्रैल-जून की अवधि के दौरान इस यूनिट ने 101.96 प्रतिशत क्षमता का इस्तेमाल या प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) दर्ज किया है। गौरतलब है कि सिंगरौली की यूनिट-1, एनटीपीसी की सबसे पुरानी इकाई है। इस स्टेशन की पहली यूनिट ने 13 फरवरी, 1982 को बिजली उत्पादन शुरू किया था। एनटीपीसी सिंगरौली की स्थापित क्षमता 2,000 मेगावॉट की है। इनमें पांच यूनिट 200-200 मेगावॉट की और दो 500-500 मेगावॉट की हैं। एनटीपीसी ने बयान में कहा है कि इस संयंत्र की तीन यूनिट (1, 4 और 5) ने तिमाही के दौरान क्रमश: 101.96 प्रतिशत, 101.85 प्रतिशत और 100.35 प्रतिशत का पीएलएफ दर्ज किया। - - स्कूलों के पाठ्यक्रम में परिवार नियोजन को प्राथमिकता से शामिल किया जाए-जन्मदर नियंत्रित रखने के लिए राज्य सरकारों से लेकर पंचायत स्तर तक प्रोत्साहन दिया जाए- पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर घर-घर पहुंचाया जाए छोटा परिवार-सुखी परिवार का संदेश- शिक्षित महिला नेताओं को अग्रणी जिम्मेदारी दी जाए, लोगों को टैक्स छूट जैसे प्रोत्साहन भी दिये जाएंरायपुर। जेएसपीएल के चेयरमैन नवीन जिन्दल ने आह्वान किया है कि भारत को विकसित और देशवासियों को खुशहाल बनाने के लिए जनसंख्या नियंत्रण जागरूकता अभियान को और तेज किया जाए।उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं में अपेक्षाकृत अधिक निवेश और बेटियों की शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर जनसंख्या नियंत्रण जागरूकता अभियान चलाया जाए तो हमारे देश को कोविड-19 व अन्य घातक बीमारियों से मुक्ति मिलेगी, साथ ही भुखमरी व कुपोषण से भी देशवासियों को छुटकारा मिलेगा। इसके लिए उन्होंने सामुदायिक नेतृत्व और टैक्स छूट जैसे प्रोत्साहन पैकेज देने का सुझाव भी दिया है।विश्व जनसंख्या दिवस पर आज अपने ब्लॉग https://medium.com/@
naveen.jindal/how-a- persuasive-indian-democracy- can-stabilise-its-population- 2ee0b1f02b85 के माध्यम से श्री जिन्दल ने सरकार को सुझाव दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर स्कूली पाठ्यक्रमों में परिवार नियोजन संबंधी तथ्यों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों से लेकर पंचायत स्तर तक ऐसा अभियान चलाया जाए जिससे प्रत्येक घर तक दो बच्चे- सबसे अच्छे, का संदेश पहुंच जाए। केंद्र सरकार इस कार्य में अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने की नीति भी बनाए और उन्हें धन आवंटन में पर्याप्त सहयोग दे। उन्होंने याद दिलाया कि जिस तरह पल्स पोलियो नियंत्रण में धर्मगुरुओं और सामुदायिक नेताओं ने भागीदारी कर देश को पोलियोमुक्त कराया, उसी तर्ज पर जनसंख्या नियंत्रण के लिए भी अभियान चलाया जाए ताकि देश के प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग कर देशवासियों को खुशहाल बनाने का मार्ग प्रशस्त हो।ब्लॉग के मुताबिक 2018 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स के मुताबिक भारत 119 देशों में 103 वें स्थान पर था। 137 करोड़ की आबादी वाला हमारा देश 2027 तक दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएगा, जो एक बड़ी चुनौती है क्योंकि बढ़ती आबादी से सामाजिक असमानता बढ़ेगी। अमीर-गरीब की खाई और चौड़ी हो जाएगी इसलिए जनसंख्या नियंत्रण राष्ट्रहित में आवश्यक है जिसके लिए लोगों को समझाना-बुझाना आवश्यक है। इसकी जिम्मेदारी शिक्षित महिलाओं को प्राथमिक रूप से दी जाए और परिवार नियोजन के उपायों को सर्वसुलभ कराया जाए।श्री जिन्दल ने अपने ब्लॉग में जिक्र किया है कि जिन-जिन राज्यों ने बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित किया, वहां-वहां जन्मदर में प्रत्यक्ष रूप से कमी दिखाई पड़ी है। 1991-2001 के दशक में बालिका शिक्षा के विस्तार के कारण जन्मदर 21.5 फीसदी से घटकर 17.7 फीसदी हो गई। केरल, तमिलनाडु, पंजाब, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश में बेहतर बालिका शिक्षा व्यवस्था के कारण जन्मदर घटी है जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पा रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के अनुसार जन्मदर 1.8 फीसदी रहे तो हालात काबू में आ सकते हैं। हालांकि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि 2.1 फीसदी की दर से भी जनसंख्या स्थिरता हासिल की जा सकती है। अभी देश में जन्मदर 2.2 फीसदी होने का अनुमान है।उन्होंने लिखा है कि उनके संसदीय काल में जनसंख्या नियंत्रण उपायों पर अनेक बार चर्चा हुई जिनमें उन्होंने सक्रिय भागीदारी की और सभी कानून निर्माता दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस समस्या के समाधान पर गंभीर थे। 10 राज्यों में कुछ कदम उठाए भी गए और दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को पंचायत चुनाव के लिए अयोग्य करार दे दिया गया। हालांकि श्री जिन्दल देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का हवाला देते हुए लिखते हैं कि टैक्स छूट व अन्य प्रोत्साहन देकर आम जनता को इस मुहिम से जोड़ा जा सकता है। -
-ओपी जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़ में पर्यावरण, स्थायी विकास एवं आपदा प्रबंधन की पढ़ाई की विशेष व्यवस्था
- छात्रों को निखारने के लिए ओ.पी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, सोनीपत के जिंदल स्कूल ऑफ एनवायरमेंट एंड सस्टेनेबिलिटी ने 20 संस्थानों से किया करार
रायपुर। गुणवत्ता युक्त एवं समाज उपयोगी शिक्षा के लिए जेएसपीएल के चेयरमैन नवीन जिंदल की दूरदर्शी सोच के अनुरूप रायगढ़ के ओपी जिंदल विश्वविद्यालय और हरियाणा के सोनीपत स्थित ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के छात्रों को पर्यावरण एवं स्थायी विकास के विशेष गुर सिखाए जा रहे हैं ताकि वे शैक्षिक जीवन से निकल कर राष्ट्र निर्माण में योगदान कर सकें।
ओपीजेजीयू न सिर्फ देश की अव्वल निजी शैक्षिक संस्था है , बल्कि वह पूरी मानवता को पर्यावरण और समाज के स्थायी विकास का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने का माध्यम भी बन गई है। ओ.पी.जे.यू. में अनिवार्य रूप से सभी पाठ्यक्रमों में पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई कराई जा रही है। इसके अलावा बी.टेक. अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए पर्यावरण एवं स्थायी विकास की पढ़ाई की विशेष व्यवस्था की गई है। यहां आपदा प्रबंधन की भी पढ़ाई कराई जाती है जिससे बच्चे संकट के समय अपनी संस्थाओं को सही समाधान प्रस्तुत कर सकें।
ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, सोनीपत ने कोविड-19, बाढ़, भूकंप, समुद्री तूफान समेत अनेक पर्यावरण संकट को देखते हुए विश्व स्तरीय द जिंदल स्कूल ऑफ एन्वायर्नमेंट एंड सस्टेनेबिलिटी के रूप में अपने नौवें स्कूल की स्थापना की है।
जेएसईएस ने उपरोक्त विषयों पर उच्च कोटि की शिक्षा प्रदान करने के लिए पर्यावरण एवं स्थायी विकास के क्षेत्र में काम कर रहे 20 अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संगठनों से करार किया है ताकि छात्रों को सैध्दांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान भी मिल सके और वे पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपना भविष्य निर्माण कर सकें। इस पाठ्यक्रम के लिए छात्रों को एन्वायर्नमेंटल स्टडीज से बीए आनर्स में दाखिला लेना होगा। इन छात्रों को संबंधित 20 संस्थानों में शोध और इंटर्नशिप का व्यापक अवसर मिलेगा ताकि वे जलवायु संकट से निपटने के तरीके सीख सकें और हरे-भरे स्वस्थ वातावरण के निर्माण में योगदान कर सकें। छात्रों को पर्यावरण एवं जीव विज्ञान, जनसांख्यिकी एवं विज्ञान, मानवीय एवं पर्यावरणीय संवाद, जलवायु परिवर्तन, अक्षय ऊर्जा, पर्यावरण कानून, वन एवं वन्यप्राणी विषय का गहन अध्ययन कराया जाएगा ताकि उनमें समाज के लिए संपूर्ण सोच उत्पन्न हो।
ओपीजेजीयू ने जिन 20 संगठनों से करार किया है, उनमें द वल्र्ड वाइल्डलाइफ फंड, पैसिफिक एन्वायर्नमेंट, वल्र्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट, एमसी मेहता फाउंडेशन, एन्वायर्नमेंट सपोर्ट ग्रुप, ग्लोबल पॉलिसी इनसाइट्स, टॉक्सिक लिंक्स, टैगोर सोसाइटी फॉर रूरल डेवलपमेंट, नवदन्या फाउंडेशन, इंडियन काउंसिल फॉर एन्वायरो-लीगल ऐक्शन, देल्ही ग्रींस, एन्वीपोल, ग्रीन मुनिया, दहाईवे-रिसर्च, यूनेको, सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्नमेंट, राजपुताना सोसाइटी ऑफ नेचुरल हिस्ट्री, फ्यूचर ग्रुप-सीएसआर, ह्युंडई इलेक्ट्रिक और पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय शामिल हैं।
गौरतलब है कि उपरोक्त संस्थानों से अनुभव प्राप्त करने के बाद छात्रों को राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक अवसर प्राप्त हो रहे हैं और वे यहां से प्राप्त शिक्षा का इस्तेमाल मानवता के कल्याण में कर सकेंगे। हाल ही में ओपी जिंदल विश्वविद्यालय के रायगढ़ के कंप्यूटर साइंस एन्ड इंजीनियरिंग के छात्र सुजीत सोनी को अमेजन कंपनी द्वारा सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर के पद पर 32 लाख रूपये का पैकेज ऑफर किया गया है।
- नई दिल्ली।. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यस बैंक से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में बैंक के सह-संस्थापक राणा कपूर और डीएचएफएल कंपनी के वधावन बंधुओं की 2,800 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं। इनमें लंदन और न्यूयॉर्क के फ्लैट भी शामिल हैं।प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि उसने मनी लांड्रिंग रोधक कानून (पीएमएलए) के तहत 2,203 करोड़ रुपये की संपत्तियों की कुर्की का अस्थायी आदेश दिया है। इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य 2,800 करोड़ रुपये से अधिक है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि इन संपत्तियों में देश और विदेश में अचल संपत्तियां, बैंक खाते, निवेश और लक्जरी वाहन शामिल हैं। ईडी ने कहा कि ये संपत्तियां राणा कपूर और वधावन बंधुओं कपिल और धीर तथा उनके नियंत्रण वाली इकाइयों की है। कपूर (62) और वधावन बंधुओं को जांच एजेंसी ने इसी साल के शुरू में गिरफ्तार किया था। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं। कपूर की कुर्क की गई संपत्तियों में दिल्ली के पॉश इलाके अमृता शेरगिल मार्ग में स्थित बंगला (40 नंबर) शामिल है। इसका मूल्य 685 करोड़ रुपये है।प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि इसके अलावा कपूर की दक्षिण मुंबई के कंबाला हिल इलाके स्थित आवासीय इमारत खुर्शिदाबाद , मुंबई के नेपियन सी रोड पर तीन डूप्लेक्स फ्लैट, एनसीपीए, नरीमन पॉइंट में एक फ्लैट और वर्ली क्षेत्र में इंडिया बुल्स ब्लू में आठ फ्लैट शामिल हैं। जांच एजेंसी ने कहा कि कपूर से संबंधित इन संपत्तियों का कुल मूल्य 792 करोड़ रुपये है, लेकिन इनका मौजूदा बाजार मूल्य 1,400 करोड़ रुपये है। ईडी ने कहा कि दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन (डीएचएफएल) के मामले में प्रवर्तक भाइयों कपिल और धीरज वधावन की 1,411.9 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गई हैं। इनमें मुंबई के खार (पश्चिम) क्षेत्र में एक दर्जन फ्लैट, न्यूयॉर्क में एक फ्लैट, लंदन में दो फ्लैट, पुणे और मुल्शी के पास दो जमीन के टुकड़े, ऑस्ट्रेलिया में एक व्यावसायिक संपत्ति, पांच लक्जरी वाहन और 344 बैंक खाते शामिल हैं।ईडी ने तीनों के खिलाफ इस साल के शुरू में पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया था। ईडी का आरोप है कि कपूर और उनके परिवार के सदस्यों तथा अन्य लोगों ने बैंक के जरिये बड़े कर्ज देने के लिए घूस ली। इन लोगों ने करीब 4,300 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई का धन इधर-उधर किया। बाद में यह कर्ज गैर निष्पादित आस्ति (एनपीए) बन गया। ईडी द्वारा यस बैंक और डीएचएफएल के बीच कथित संदिग्ध संबंध की भी जांच की जा रही है। ईडी का आरोप है कि अप्रैल-जून, 2018 के दौरान यस बैंक लि. ने डीएचएफल के लघु अवधि के डिबेंचरों में 3,700 करोड़ रुपये का निवेश किया था। बाद में कर्ज के नाम पर राणा कपूर और उनके परिवार के सदस्यों को 600 करोड़ रुपये की घूस दी गई। जांच एजेंसी ने कहा कि इसके अलावा यस बैंक ने वधावान और उनके परिवार से संबंधित कंपनी आरकेडब्ल्यू डेवलपर्स ग्रुप कंपनी को मुंबई में बांद्रा रिक्लैमेशन परियोजना के लिए 750 करोड़ रुपये का ऋण मंजूर किया। जांच एजेंसी का आरोप है कि वधावन भाईयों ने इस राशि को मुखौटा कंपनियों के जरिये इधर-उधर किया। इस राशि का इस्तेमाल घोषित उद्देश्य के लिए नहीं किया गया।-
- नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने राज्यों से अनुरोध किया है कि वे हाल के दिनों में देश के कुछ हिस्सों में बैंककर्मियों पर हमले की घटनाओं के बाद बैंक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।सूत्रों ने कहा कि वित्तीय सेवा विभाग ने राज्यों के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ ही बैंककर्मियों के खिलाफ असामाजिक तत्वों के अनियंत्रित व्यवहार का जवाब दिया जाना चाहिये। पिछले महीने, केनरा बैंक (तत्कालीन सिंडिकेट बैंक) में एक महिला बैंक कर्मचारी पर सूरत के सरोली शाखा में एक पुलिस कांस्टेबल ने हमला किया था। घटना के बाद, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आश्वासन दिया था कि सभी बैंकिकर्मियों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। सूरत हमले के बाद महाराष्ट्र में बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों पर हमले सहित कुछ अन्य घटनाएं हुईं। हालिया खबरों का हवाला देते हुए पत्र में कहा गया है कि इनमें (खबरों में) असामाजिक तत्वों के बैंक परिसरों के भीतर गैरकानूनी तरीके से व्यवहार करने के मामलों को उजागर किया गया है। पत्र में कहा गया है, आप इस बात से सहमत होंगे कि इस तरह की घटनाओं का लगातार जवाब देने की जरूरत है। ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिये, ताकि बैंककर्मियों की सुरक्षा और लोगों के लिये बैंकिंग सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो।---
- नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तीन साधारण बीमा कंपनियों ओरिएंटल इंश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्यरेंस के विलय की प्रक्रिया को रोकने और इनमें नयी पूंजी डालने का का फैसला लिया है। सरकार अब इन कंपनियों की वित्तीय स्थिति बेहतर बनाने के लिये इनमें 12 हजार 450 करोड़ रुपये की पूंजी डालेगी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई बैठक में इस फैसले पर मुहर लगायी गयी। इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने इन कंपनियों की प्राधिकृत शेयर पूंजी को भी बढ़ाने की मंजूरी दी। इसके तहत नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की प्राधिकृत पूंजी बढ़ाकर साढ़े सात हजार करोड़ रुपये और यूनाइटेड इंडिया इश्योरेंस और ओरिएंटल इश्योरेंस कंपनी की प्राधिकृत पूंजी बढ़ाकर पांच-पांच हजार करोड़ रुपये की जायेगी।एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया, मौजूदा स्थिति को देखते हुए विलय की प्रक्रिया को फिलहाल टाल दिया गया है और अब इसके बजाय इन कंपनियों की लाभप्रदा वृद्धि पर ध्यान दिया जायेगा। विज्ञप्ति में कहा गया कि मंत्रिमंडल के द्वारा मंजूर 12 हजार 450 करोड़ रुपये की पूंजी डालने के प्रस्ताव में इन कंपनियों में 2019- 20 में डाली गयी ढाई हजार करोड़ रुपये की राशि भी शामिल है। अब 3 हजार 475 करोड़ रुपये की राशि तुरंत जारी की जायेगी, जबकि शेष 6 हजार 475 करोड़ रुपये बाद में डाले जायेंगे। सरकार ने 2020-21 के बजट में इन तीन कंपनियों में पूंजी डालने के लिये 6 हजार 950 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं से कहा कि पुनर्पूंजीकरण इन सरकारी बीमा कंपनियों को अधिक स्थिर बनायेगा। बयान में कहा गया, प्रदान की जा रही पूंजी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिये सरकार ने केपीआई (प्रमुख प्रदर्शन संकेतक) के रूप में दिशा-निर्देश जारी किये हैं। इसके अलावा, पूंजी डाला जाना तीन सरकारी सामान्य बीमा कंपनियों को अपनी वित्तीय और शोधन क्षमता में सुधार करने, अर्थव्यवस्था की बीमा जरूरतों को पूरा करने, परिवर्तनों को अवशोषित करने, संसाधनों को बढ़ाने और जोखिम प्रबंधन में सुधार करने की क्षमता बढ़ाने में सक्षम करेगा।
- नई दिल्ली। जनजातीय मामले मंत्रालय के तहत ट्रिफेड ने वनों में रहने वाले लगभग 50 लाख जनजातीय परिवारों को उनके कौशल समूहों से जोड़ते हुए, गौण वन ऊपजों और हस्तकरघा तथा हस्तशिल्पों के उनके व्यापार में जनजातीय परिवारों को समुचित मूल्य सुनिश्चित कराने के द्वारा उनके सवश्रेष्ठ हितों में जनजातीय वाणिज्य के संवर्धन के लिए कार्य करता है। एनआईटीआई द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार इस व्यापार का मूल्य लगभग 2 लाख करोड़ रुपये सालाना है।इन गतिविधियों को और आगे बढ़ाने तथा उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए ट्रिफेड ने मानचित्रण करने तथा इसके ग्राम आधारित जनजातीय उत्पादकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोडऩे के लिए अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के मानक अत्याधुनिक प्लेटफार्म की स्थापना करते हुए एक डिजिटाइजेशन मुहिम शुरू की है।इस डिजिटल रूपांतरण कार्यनीति में एक अत्याधुनिक वेबसाइट जनजातीय कारगरों के लिए व्यापार करने तथा सीधे अपनी ऊपजों के विपणन करने के लिए एक ई-मार्केट प्लेस की स्थापना करने, इसकी वन धन योजना, ग्रामीण हाटों तथा वेयरहाउसों जिससे वे लिंक्ड हैं, से जुड़े वनवासियों से संबंधित सभी जानकारियों का डिजिटाइजेशन शामिल है। जनजातीय जीवन एवं वाणिज्य के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, ट्रिफेड ने सरकारी और निजी व्यापार तथा जनजातीयों को संबंधित भुगतानों के जरिये एमएफपी की खरीद का डिजिटाइजेशन भी आरंभ किया है। इसके अगस्त के आखिर से आरंभ हो जाने की उम्मीद है।ट्रिफेड के प्रबंध निदेशक प्रवीर कृष्णा ने कहा, अब यह पूरी तरह स्वीकृत है कि ई-कॉमर्स खुदरा व्यापार का भविष्य है। भारत में बड़ी संख्या में लोगों ने ऑनलाइन शॉपिंग को अपना लिया है। ट्रिफेड को कार्यनीतिक रूप से उभरती स्थिति का प्रत्युत्तर देना है। इसी परिप्रक्ष्य में डिजिटाइजेशन कार्यनीति का निर्माण किया गया है। ट्रिफेड की वेबसाइट संगठन से संबंधित सभी जानकारियां प्रस्तुत करती है, ये जनजातीय कल्याण की योजनाएं हैं। यह साइट मिशन में कनेक्ट करने तथा सहयोग करने का एक प्लेटफार्म है, जिससे कि देश भर के जनजातीय समुदायों को अधिकारसंपन्न बनाने के लिए एक जीआईएस प्लेटफार्म के जरिये दोतरफा संचार एवं सूचना आदान-प्रदान मोड से लिंक किया जाए।ट्रिफेड की व्यावसायिक सहायक कंपनी, ट्राइब्स इंडिया ने एक ई-कॉमर्स पोर्टल लांच किया है, जो जनजातीय उत्पादों के एक बड़े रेंज की ऑनलाइन पेशकश करता है। इन उत्पादों में रचनात्मक उत्कृष्ट कृतियों और डोकरा धातु शिल्प कृतियों से लेकर मिट्टी के सुंदर बर्तनों, विभिन्न प्रकार की पेंटिंग से लेकर रंगीन, आरामदायक अपैरल, विशिष्ट आभूषण तथा जैविक और प्राकृतिक फूड और पेय पदार्थ शामिल हैं।ट्रिफेड ने अपने जनजातीय कारीगरों को बाजार सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील एवं पेटीएम जैसे अन्य ई-कॉमर्स पोर्टलों से भी साझीदारी की है। सरकार द्वारा खरीदों को सुगम बनाने के लिए ट्राइब्स इंडिया उत्पाद जीईएम पर भी उपलब्ध हैं। सरकारी विभाग, मंत्रालय तथा पीएसयू जीएफआर विनियमनों के अनुरूप सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) तथा दुकानों के बरास्ते ट्राइब्स इंडिया को एक्सेस कर सकते हैं।ट्रिफेड का वन धन समेकित इंफार्मेशन नेटवर्क उन्हें ग्रामीण हाटों तथा वेयरहाउसों से जोड़ते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रचालनों तथा इसकी वन धन योजना से जुड़े वन वासियों से संबंधित सभी सूचनाओं के संग्रह को सुगम बनाता है। यह सुगम कार्यान्वयन में मदद करने के लिए देशव्यापी कार्यक्रम की निगरानी करने एवं निर्णय लेने में सहायता करता है। इस स्कीम को 22 राज्यों में कार्यान्वित किया गया है जो लगभग 10 लाख जनजातीय परिवारों के जीवन को छूता है। देश भर में चिन्हित और मानचित्रित जनजातीय क्लस्टर आत्म-निर्भर अभियान के तहत योग्य लाभार्थी हैं। इसका लक्ष्य विभिन्न मंत्रालयों तथा एजेन्सियों के साथ समन्वयन में काम करना तथा इन निर्बल और विपदाग्रस्त समुदायों तक लाभ पहुंचाने में मदद करना है। ट्रिफेड आत्म-निर्भर अभियान के तहत जनजातीय प्रयोजन की पक्षधरता करने एवं सहायता करने के लिए सुसज्जित है।




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