- Home
- बिजनेस
- नयी दिल्ली. विश्व बैंक ने मजबूत घरेलू मांग और कर सुधारों के दम पर चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है। यह उसके जून के अनुमान से 0.9 प्रतिशत अधिक है। विश्व बैंक ने अपनी प्रमुख रिपोर्ट 'वैश्विक आर्थिक संभावनाएं' में यह भी कहा कि वर्ष 2026-27 में भारत की वृद्धि दर धीमी होकर 6.5 प्रतिशत रह सकती है। यह अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि अमेरिका का 50 प्रतिशत आयात शुल्क इस दौरान लागू रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया, ''इसके बावजूद उम्मीद है कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज वृद्धि दर बनाए रखेगा।'' विश्व बैंक ने कहा कि अमेरिका को होने वाले कुछ निर्यातों पर उच्च शुल्क के बावजूद वृद्धि के पूर्वानुमान में जून के अनुमानों के मुकाबले कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसकी मुख्य वजह यह है कि उन शुल्कों के प्रतिकूल प्रभावों की भरपाई घरेलू मांग में मजबूत वृद्धि और अधिक निर्यात द्वारा की गई। भारत के कुल वस्तु निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत है। रिपोर्ट में कहा गया, ''वित्त वर्ष 2027-28 में वृद्धि दर बढ़कर 6.6 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जिसे मजबूत सेवा गतिविधियों के साथ ही निर्यात में सुधार और निवेश में तेजी से समर्थन मिलेगा।'' चालू वर्ष की आर्थिक वृद्धि पर रिपोर्ट में कहा गया, ''भारत में वित्त वर्ष 2025-26 में वृद्धि दर बढ़कर 7.2 प्रतिशत होने का अनुमान है, क्योंकि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। यह मजबूत निजी उपभोग को दर्शाता है, जिसे पिछले कर सुधारों और ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की वास्तविक आय में सुधार से समर्थन मिला है।'' इस बहुपक्षीय ऋण एजेंसी ने जून में भारत की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।
- नयी दिल्ली. सरकार की सख्ती के बाद 10 मिनट में सामान पहुंचाने की अपनी सेवाओं से जुड़ी ब्रांडिंग को ब्लिंकिट के बाद त्वरित आपूर्ति कंपनियों जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और फ्लिपकार्ट मिनट्स ने भी हटा दिया है। यह कदम चंद मिनटों में सामान पहुंचाने की जल्दबाजी से आपूर्तिकर्ताओं की सुरक्षा एवं कल्याण को पैदा होने वाले जोखिम से जुड़ी सरकार और श्रमिक अधिकार समूहों की चिंताओं के बाद उठाया गया है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने पिछले सप्ताह हितधारकों के साथ हुई एक बैठक में क्विक कॉमर्स कंपनियों से डिलीवरी साझेदारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए कहा था। मांडविया ने सुझाव दिया था कि सामान को जल्द पहुंचाने की सख्त समय-सीमा, खासकर 10 मिनट में डिलीवरी जैसी प्रतिबद्धताएं हटाई जानी चाहिए। सरकार के इस निर्देश के बाद ब्लिंकिट ने मंगलवार को 10 मिनट में आपूर्ति की सेवा संबंधी वादे को अपने मंच से हटा दिया। बुधवार को जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और फ्लिपकार्ट मिनट्स ने भी अपने-अपने मंच से 10 मिनट में सामान पहुंचाने का वादा करने वाली ब्रांडिंग को हटा दिया। हालांकि टाटा समूह के स्वामित्व वाले बिगबास्केट के ऐप पर 10 मिनट में ग्रॉसरी का सामान पहुंचाने का उल्लेख अब भी मौजूद है। देश के भीतर चंद मिनटों में सामान पहुंचाने का कारोबार हाल के वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ा है। लेकिन इसके दबाव में डिलीवरी साझेदारों की कामकाजी स्थितियों और सुरक्षा को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। दस मिनट में डिलीवरी की सेवा के विरोध में गिग वर्करों (अस्थायी कामगारों) ने नए साल की पूर्व संध्या पर देशव्यापी हड़ताल की थी, जिसने कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और आय की ओर ध्यान आकर्षित किया। गिग वर्कर्स एसोसिएशन ने त्वरित आपूर्ति मंचों के ‘10 मिनट में डिलीवरी' का वादा हटाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम डिलीवरी कर्मियों पर पड़ने वाले खतरनाक और असहनीय दबाव को स्वीकार करने की दिशा में एक अहम पहल है। एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में श्रमिकों को अतिरिक्त मेहनत का उचित भुगतान नहीं किया जा रहा था। इस समय देश में इटर्नल कंपनी का ब्लिंकिट, स्विगी का इंस्टामार्ट, जेप्टो, जियोमार्ट, बिगबास्केट, अमेजन नाउ और फ्लिपकार्ट मिनट्स के रूप में सात त्वरित आपूर्ति मंच सक्रिय हैं।
-
नयी दिल्ली. चांदी की कीमत बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में 15,000 रुपये की जबर्दस्त उछाल के साथ 2,86,000 रुपये प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गयी जबकि सोने की कीमत भी वैश्विक बाजार में मजबूत रुझानों के अनुरूप 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने कहा कि चांदी ने लगातार चौथे दिन जोरदार तेजी जारी रखी। मंगलवार को 2,71,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई चांदी बुधवार को 5.5 प्रतिशत यानी 15,000 रुपये की अभूतपूर्व तेजी के साथ 2,86,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों समेत) पर पहुंच गई। यह चांदी के भाव का अब तक का सर्वोच्च स्तर है। पिछले चार सत्रों में ही यह धातु 17.45 प्रतिशत यानी 42,500 रुपये की जबर्दस्त बढ़त हासिल कर चुकी है। आठ जनवरी को चांदी की कीमत 2,43,500 रुपये थी। सर्राफा कारोबारियों ने कहा कि चांदी ने हाल के समय में सोने की तुलना में बेहतर रिटर्न दिया है। वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक चांदी ने लगभग 47,000 रुपये प्रति किलो यानी 20 प्रतिशत की तेजी दिखाई है। यह 31 दिसंबर, 2025 को 2,39,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर थी। वहीं, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत बुधवार को 1,500 रुपये चढ़कर 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों समेत) तक पहुंच गई। मंगलवार को पीली धातु 1,45,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुई थी। पिछले चार सत्रों में सोने की कीमत 1,40,500 रुपये से 6,000 रुपये यानी 4.3 प्रतिशत बढ़ चुकी है। साल की शुरुआत से अब तक सोने में कुल 8,800 रुपये यानी 6.4 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की तेजी विदेशी बाजारों के तेज रुझानों के अनुरूप है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर चांदी ने पहली बार 91 डॉलर प्रति औंस की सीमा पार करते हुए पांच प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 91.56 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड बना दिया। इस दौरान सोने का हाजिर भाव भी 1.14 प्रतिशत चढ़कर 4,640.13 प्रति औंस के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक स्तर पर लगातार भू-राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति, कमजोर डॉलर सूचकांक और अमेरिका में मुद्रास्फीति के नरम आंकड़े निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्पों की मांग को बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर में कटौती की उम्मीदों ने भी सोना और चांदी को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया है. - नयी दिल्ली/ केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि देश से इलेक्ट्रॉनिक निर्यात 2025 में चार लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इस वर्ष चार सेमीकंडक्टर संयंत्रों के उत्पादन शुरू होने के बाद इसमें और वृद्धि होने की उम्मीद है। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, 2024-25 में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन लगभग 11.3 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और निर्यात करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये का रहा। वैष्णव ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच पर जानकारी दी, ‘‘ इलेक्ट्रॉनिक निर्यात 2025 में चार लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया जिससे रोजगार सृजित हुए और विदेशी मुद्रा हासिल हुई। 2026 में भी यह गति जारी रहेगी क्योंकि चार सेमीकंडक्टर संयंत्र व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर देंगे।'' देश के इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्षेत्र में वर्तमान में मोबाइल फोन उद्योग का वर्चस्व है। उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में 25 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं।मंत्री ने एक रिपोर्ट साझा की जिसमें बताया गया कि भारत से आईफोन का निर्यात 2025 में 2.03 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह वर्ष 2024 में एप्पल द्वारा निर्यात किए गए 1.1 लाख करोड़ रुपये से करीब दोगुना है।मोबाइल विनिर्माताओं के उद्योग निकाय ‘इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन' के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक देश में मोबाइल फोन का उत्पादन 75 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 6.76 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचने की उम्मीद है। इसमें 30 अरब अमेरिकी डॉलर या करीब 2.7 लाख करोड़ रुपये का निर्यात शामिल होगा। देश में 2024-25 में 5.5 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का उत्पादन हुआ और इस क्षेत्र से निर्यात लगभग दो लाख करोड़ रुपये का रहा। बाजार अनुसंधान एवं विश्लेषण कंपनी काउंटरपॉइंट के सह-संस्थापक तथा अनुसंधान उपाध्यक्ष नील शाह ने कहा कि चीन पर अमेरिकी शुल्क के बाद अपने विनिर्माण का विस्तार करके और भारत से निर्यात को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचाकर एप्पल, भारत की सफलता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया है। शाह ने कहा, ‘‘ भारत में मोबाइल फोन का उत्पादन करीब 30 करोड़ इकाई तक पहुंच जाएगा और 2025 में भारत में उत्पादित होने वाले हर चार स्मार्टफोन में से एक का निर्यात किया जाएगा।'' इंटरनेशनल डेटा कॉर्पोरेशन के 2025 की तीसरी तिमाही के ‘वर्ल्डवाइड क्वार्टरली मोबाइल फोन ट्रैकर' के अनुसार, एप्पल ने इस तिमाही में घरेलू बाजार के लिए 50 लाख आईफोन की अब तक की सबसे अधिक आपूर्ति दर्ज की। एप्पल प्रीमियम (53,000-71,000 रुपये प्रति इकाई की कीमत वाले स्मार्टफोन) और सुपर-प्रीमियम (71,000 रुपये प्रति इकाई से अधिक कीमत वाले स्मार्टफोन) दोनों खंड में अग्रणी है जिसने जुलाई-सितंबर तिमाही में देश के स्मार्टफोन बाजार की वृद्धि को गति दी।
- नयी दिल्ली। इटर्नल के स्वामित्व वाली इकाई ब्लिंकिट ने डिलीवरी कर्मियों के कल्याण से जुड़ी बढ़ती चिंताओं के बीच सभी मंच से अपना '10 मिनट में' डिलीवरी का दावा हटा लिया है। कंपनी ने अपनी टैग-लाइन को ''10 मिनट में 10,000 से अधिक उत्पाद पहुंचेंगे'' से बदलकर अब ''30,000 से अधिक उत्पाद आपके दरवाजे पर पहुंचेंगे'' कर दिया है। स्विगी और जेप्टो जैसे अन्य ‘क्विक कॉमर्स' मंच भी इस कदम का अनुसरण कर सकते हैं। यह बदलाव केंद्रीय श्रम मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद देखा जा रहा है, जो इतनी कठिन समय सीमा को पूरा करने की कोशिश करने वाले डिलीवरी कर्मियों के कल्याण को लेकर चिंतित था। श्रम मंत्रालय ने इस संबंध में क्विक कॉमर्स मंचों के साथ चर्चा की, ताकि गिग कर्मियों के लिए बेहतर सुरक्षा और कामकाजी परिस्थितियां सुनिश्चित की जा सकें। दस मिनट में डिलीवरी के वादे के कारण वर्ष 2025 की पूर्व संध्या पर गिग कर्मियों ने देशव्यापी हड़ताल की थी, जिसने कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और आय की ओर ध्यान आकर्षित किया। जेप्टो, इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के लिए 10 मिनट में डिलीवरी की ब्रांडिंग अभी भी गूगल प्ले स्टोर और आईओएस ऐप स्टोर पर दिखाई दे रही है, लेकिन ब्लिंकिट के लिए ऐसी कोई ब्रांडिंग अब वहां मौजूद नहीं है। हाल में सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर इटर्नल ग्रुप के सीईओ दीपिंदर गोयल ने लिखा था कि 10 मिनट में डिलीवरी का वादा सामान पहुंचाने वालों पर दबाव नहीं डालता है और न ही असुरक्षित ड्राइविंग का कारण बनता है, क्योंकि उन्हें ऐप पर 10 में मिनट का टाइमर नहीं दिखाया जाता है। उन्होंने यह भी कहा था कि 10 मिनट में या उससे तेज डिलीवरी मुख्य रूप से स्टोर ग्राहकों के करीब होने के कारण होती है, न कि सड़क पर तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने के कारण।
- इंदौर (मध्यप्रदेश)/ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोया खली की ऊंची कीमतों के चलते मांग में कमी के कारण गत दिसंबर के दौरान देश से इस उत्पाद का निर्यात 37.50 प्रतिशत घटकर 1.73 लाख टन पर रहा। प्रसंस्करणकर्ताओं के एक संगठन ने मंगलवार को यह जानकारी दी। गठन के मुताबिक दिसंबर 2024 में देश से 2.77 लाख टन सोयाखली का निर्यात किया गया था।इंदौर स्थित सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के एक अधिकारी ने बताया कि दिसंबर 2025 के दौरान संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ईरान, नेपाल और बांग्लादेश भारतीय सोया खली के शीर्ष आयातक बनकर उभरे।सोपा के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया,‘‘भारतीय सोया खली के दाम अमेरिका, ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे प्रमुख निर्यातक देशों की तुलना में अब भी अधिक हैं। इस कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोया खली की मांग दबाव में बनी हुई है।'' प्रसंस्करण कारखानों में सोयाबीन का तेल निकाल लेने के बाद बचने वाला उत्पाद सोया खली कहलाता है। यह उत्पाद प्रोटीन का बड़ा स्त्रोत है। इससे सोया आटा और सोया बड़ी जैसे खाद्य पदार्थों के साथ ही पशु आहार तथा मुर्गियों व मछलियों का दाना भी तैयार किया जाता है।
- मुंबई/ इटली की लक्जरी मोटरसाइकिल विनिर्माता डुकाटी ने मंगलवार को कहा कि उसकी इस साल भारतीय बाजार में 10 नए एवं उन्नत मॉडल पेश करने की योजना है। कंपनी ने कहा कि नए मोटरसाइकिल मॉडल में डेस्मो450 एमएक्स, नई मल्टीस्ट्राडा वी4 रैली (2026 संस्करण), पैनिगाले वी4 लैम्बर्गिनी, नई मॉन्स्टर वी2 और नई हाइपरमोटार्ड वी2/वी2 एसपी शामिल होंगे। डुकाटी ने कहा कि इन 10 नए मॉडल में से पैनिगाले वी4आर मॉडल को दो जनवरी को पहले ही बाजार में उतारा जा चुका है। डुकाटी इंडिया के प्रबंध निदेशक बिपुल चंद्रा ने कहा, “वर्ष 2026 डुकाटी के लिए एक और अहम साल होने जा रहा है। नई पेशकश की शृंखला के साथ हम प्रीमियम मोटरसाइकिल खंड में नए मानक स्थापित करेंगे।” उन्होंने कहा कि भारतीय ग्राहकों को अत्याधुनिक और प्रदर्शन पर आधारित मोटरसाइकिल मुहैया कराने की कंपनी की प्रतिबद्धता पहले से कहीं अधिक मजबूत है। कंपनी के मुताबिक, कैलेंडर वर्ष 2026 की पहली तिमाही में नई मल्टीस्ट्राडा वी4 रैली (2026 संस्करण), पैनिगाले वी4 लैम्बर्गिनी और बहुप्रतीक्षित डेस्मो450 एमएक्स मॉडल पेश किए जाएंगे। तीसरी तिमाही में नई मॉन्स्टर वी2, पैनिगाले वी2 स्पेशल एडिशन एमएम93 (मार्क मार्केज़) और पैनिगाले वी2 स्पेशल एडिशन पीबी63 (पेको बान्याया) के अलावा डियावेल वी4 आरएस पेश की जाएंगी। चौथी तिमाही में नई हाइपरमोटार्ड वी2 और वी2 एसपी मॉडल पेश किए जाएंगे और दिसंबर 2026 के अंत में पैनिगाले वी4 मार्क मार्केज़ रेप्लिका के साथ साल का समापन होगा। कंपनी ने कहा कि इन मॉडलों की सांकेतिक कीमतें जल्द ही वेबसाइट पर जारी की जाएंगी। बुकिंग दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोच्चि और कोलकाता के डुकाटी डीलरशिप पर उपलब्ध होंगी।
- नयी दिल्ली/ इलेक्ट्रिक दोपहिया बनाने वाली कंपनी ओला इलेक्ट्रिक ने मंगलवार को अपने 4680 भारत सेल उत्पाद पोर्टफोलियो के लिए ‘ओला मुहूर्त महोत्सव' अभियान दोबारा शुरू करने की घोषणा की। कंपनी ने एक बयान में कहा कि इस अभियान के तहत अब तक की सबसे आकर्षक कीमतों पर सीमित संख्या में इकाइयों की पेशकश की जाएगी। ओला इलेक्ट्रिक ने कहा कि यह अभियान 14 जनवरी से दो दिनों तक चलेगा जिसमें ओला शक्ति, एस1 प्रो+ 5.2 किलोवाट घंटा और रोडस्टर एक्स+ 9.1 किलोवाट घंटा मॉडल शामिल होंगे।मुहूर्त महोत्सव के तहत 4680 भारत सेल से संचालित शक्ति, एस1, रोडस्टर एक्स और एक्स+ मॉडलों की सीमित इकाइयों उपलब्ध कराई जाएंगी। ओला इलेक्ट्रिक के प्रवक्ता ने कहा, “हम अपने 4680 भारत सेल प्लेटफॉर्म का जश्न मनाने के लिए मुहूर्त महोत्सव को वापस ला रहे हैं। यह प्लेटफॉर्म सेल, बैटरी पैक और वाहन प्लेटफॉर्म के स्तर पर कंपनी के एकीकृत दृष्टिकोण को मजबूत करता है।”
- मुंबई/ दिसंबर महीने में देश के भीतर भर्ती गतिविधियां सालाना आधार पर 15 प्रतिशत और मासिक आधार पर पांच प्रतिशत बढ़ीं जो रोजगार बाजार के संतुलित विस्तार का रुख करने का संकेत देता है। मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। ऑनलाइन भर्ती पोर्टल फाउंडइट की तरफ से जारी 'इनसाइट्स ट्रैकर रिपोर्ट' के मुताबिक, वर्ष 2025 के दौरान कृत्रिम मेधा (एआई) भर्ती का सबसे बड़ा पहलू बनकर उभरा है। इस दौरान एआई से जुड़े 2.90 लाख से अधिक पदों के लिए विज्ञापन जारी किए गए। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वर्ष 2026 में एआई से जुड़ी भर्तियों में सालाना आधार पर 32 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है और यह संख्या लगभग 3.8 लाख तक पहुंच सकती है। फाउंडइट के मुख्य उत्पाद एवं प्रौद्योगिकी अधिकारी तरुण शर्मा ने कहा, "वर्ष 2025 भर्ती में विस्तार के साथ अनुशासन का भी साल रहा। एआई अब प्रयोग के स्तर से आगे निकलकर कार्यबल योजना का एक अहम हिस्सा बन चुका है।" अगर क्षेत्रवार आंकड़ों का जिक्र करें तो आईटी-सॉफ्टवेयर एवं आईटी सेवाओं का एआई नौकरियों में 37 प्रतिशत हिस्सा रहा। वहीं बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र का हिस्सा 15.8 प्रतिशत और विनिर्माण का छह प्रतिशत रहा। बीएफएसआई क्षेत्र में भर्तियों में सालाना आधार पर 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा स्वास्थ्य एवं औषधि (38 प्रतिशत), खुदरा (31 प्रतिशत), लॉजिस्टिक (30 प्रतिशत) और दूरसंचार (29 प्रतिशत) क्षेत्रों में भी मजबूत बढ़त देखी गई। भौगोलिक रूप से बेंगलुरु 26 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ एआई नौकरियों का सबसे बड़ा केंद्र बना रहा। हैदराबाद ने 35 प्रतिशत वृद्धि के साथ शीर्ष शहरों में सबसे तेज बढ़त दर्ज की, जबकि जयपुर, इंदौर और मैसूरु दूसरी श्रेणी के शहरों में अग्रणी रहे।
- नयी दिल्ली/ मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने मंगलवार को कहा कि आर्थिक वृद्धि ही वित्तीय समावेश का सबसे मजबूत एवं टिकाऊ स्वरूप है। नागेश्वरन ने यहां आयोजित 'ग्लोबल इन्क्लूसिव फाइनेंस' सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "जब अर्थव्यवस्था रोजगार, आय, बाजार और मांग पैदा करती है तो लोगों को वित्तीय प्रणाली में जबरन लाने की जरूरत नहीं पड़ती है। जब लोगों को भविष्य वर्तमान से बड़ा लगता है, तो वे स्वाभाविक रूप से वित्तीय प्रणाली का हिस्सा बनते हैं। उन्होंने कहा, कोई भी वित्तीय संस्था वह नहीं दे सकती जो आर्थिक वृद्धि दे सकती है। वित्त, वृद्धि का पूरक है, उसका विकल्प नहीं।नागेश्वरन ने कहा कि जहां आजीविका ठहरी हुई होती है, वहां वित्तीय समावेश कमजोर रहता है, जबकि आजीविका के विस्तार की स्थिति में समावेश अपने आप सुदृढ़ होता जाता है। यदि वित्त को वास्तविक आर्थिक गतिविधियों के साथ सही ढंग से जोड़ा जाए, तो वह वृद्धि का शक्तिशाली उत्प्रेरक बन सकता है। नागेश्वरन ने 'प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना' का उदाहरण देते हुए कहा कि महामारी के समय सर्वाधिक प्रभावित हुए रेहड़ी-पटरी दुकानदारों ने कार्यशील पूंजी तक पहुंच का उपयोग केवल जीवित रहने के लिए नहीं, बल्कि कारोबार बढ़ाने, बुनियादी परिसंपत्तियों में निवेश करने और अधिक टिकाऊ व्यवसाय खड़ा करने के लिए किया और यही वित्तीय समावेश का वास्तविक अर्थ है।उन्होंने कहा कि बैंकों को सरकारी ऋण सहायता योजनाओं से आगे बढ़ चुके लाभार्थियों को अपने मुख्य पोर्टफोलियो में शामिल करना चाहिए। साथ ही, समावेशी वित्त संस्थानों में निवेश करने वालों को यह स्वीकार करना होगा कि सामाजिक लाभ के बदले वित्तीय प्रतिफल कम मिलेगा। इसके साथ ही सीईए ने आगाह किया कि बिना सोचे-समझे कर्ज देने से वित्तीय समावेश का उद्देश्य नष्ट हो जाता है और इससे सशक्तीकरण के बजाय कर्ज का बोझ और तनाव बढ़ता है।
-
नई दिल्ली। सोमवार को रिकॉर्ड हाई स्तर छूने के बाद हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन, मंगलवार को शुरू में कीमती धातुओं (सोने और चांदी) की कीमतों में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसकी वजह यह रही कि रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।
इससे पहले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख के खिलाफ कार्रवाई की खबरों के चलते सोने-चांदी के दाम काफी बढ़ गए थे और रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गए थे। हालांकि, बाद में चांदी ने रिकवरी की और एमसीएक्स पर इसकी कीमतों में उछाल देखने को मिली। खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 0.32 प्रतिशत गिरकर 1,41,577 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया। जबकि, मार्च डिलीवरी वाली चांदी 0.50 प्रतिशत यानी 1,352 रुपए की तेजी के साथ 2,70,322 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करते नजर आई।इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम की कीमत घटकर 1,40,482 रुपए हो गई, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 1,40,499 रुपए थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत पहली बार 4,600 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गई थी। इसके बाद निवेशकों ने मुनाफा कमाने के लिए सोना बेचना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों में गिरावट आई।सोने की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह ऐलान रहा, जिसमें उन्होंने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाने की बात कही थी। साथ ही उन्होंने ईरान में बढ़ते प्रदर्शनों के बीच सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री ने कहा कि बाजार की नजर अमेरिकी केंद्रीय बैंक के प्रमुख जेरोम पॉवेल से जुड़ी जांच पर बनी हुई है। पॉवेल ने इसे राजनीतिक दबाव बताया है, जिसका मकसद ब्याज दरों में कटौती करवाना है।निवेशक अब अमेरिका की महंगाई से जुड़े अहम आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि आगे की नीति की दिशा साफ हो सके। माना जा रहा है कि इस महीने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन साल के अंत तक दो बार कटौती हो सकती है।पिछले सप्ताह आई अमेरिका की रोजगार रिपोर्ट में उम्मीद से कम नौकरियां बढ़ने की जानकारी मिली थी। इससे यह भरोसा और मजबूत हुआ है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस साल ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है। ईरान में हो रहे प्रदर्शनों, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए संकेतों ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। इन कारणों से सोने की कीमतों को सहारा मिला है।विश्लेषकों के अनुसार, सोने को 1,39,550 से 1,37,310 रुपए के बीच सपोर्ट, जबकि ऊपर की ओर 1,44,350 से 1,46,670 रुपए के स्तर पर रेजिस्टेंस मिल रहा है। वहीं, चांदी में 2,60,810 से 2,54,170 रुपए के बीच सपोर्ट और 2,71,810 से 2,74,470 रुपए के बीच रेजिस्टेंस है।एक्सपर्ट ने आगे कहा कि चांदी की मांग लंबे समय में मजबूत बनी हुई है। उद्योगों और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बढ़ती जरूरत और कम आपूर्ति के चलते आने वाले समय में चांदी की कीमतें और बढ़ सकती हैं। -
नई दिल्ली। सरकारी कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) का आईपीओ शुक्रवार को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलते ही निवेशकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली। यह आईपीओ महज 30 मिनट के भीतर ही पूरी तरह से सब्सक्राइब हो गया। देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनी बीसीसीएल का यह आईपीओ साल 2026 का पहला मेन बोर्ड आईपीओ है। 1,071 करोड़ रुपए के इस ऑफर को सब्सक्रिप्शन के लिए 13 जनवरी तक खुला रखा गया है। ग्रे मार्केट को ट्रैक करने वाली विभिन्न वेबसाइट्स के मुताबिक, इस आईपीओ का अंतिम जीएमपी (ग्रे मार्केट प्रीमियम) 9.4 रुपए दर्ज किया गया (दोपहर 1:53 बजे तक)। वहीं, इसका उच्चतम जीएमपी 16.25 रुपए तक पहुंच चुका है। जीएमपी के आधार पर अनुमान है कि कंपनी के शेयर करीब 32.4 रुपए के स्तर पर लिस्ट हो सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को प्रति शेयर लगभग 40.87% तक के मुनाफे की संभावना जताई जा रही है। शुक्रवार की शुरुआत में ही यह आईपीओ 34.69 करोड़ शेयरों के मुकाबले 38.9 करोड़ शेयरों की बोलियों के साथ 1.12 गुना सब्सक्राइब हो गया। इसमें गैर-संस्थागत निवेशकों ने 1.99 गुना और खुदरा निवेशकों ने 1.5 गुना सब्सक्रिप्शन किया। यह आईपीओ पूरी तरह से कोल इंडिया द्वारा ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) है। कोल इंडिया के पास बीसीसीएल की 100% हिस्सेदारी है। आईपीओ का प्राइस बैंड 21 से 23 रुपए प्रति शेयर तय किया गया है, जिसके जरिए कंपनी 1,071 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है। आईपीओ से पहले बीसीसीएल ने एंकर निवेशकों से 273 करोड़ रुपए जुटाए थे। इसके तहत 23 रुपए प्रति शेयर के भाव पर 11,87,53,500 शेयर आवंटित किए गए। इस आईपीओ में 50% हिस्सा योग्य संस्थागत निवेशकों (क्यूआईबी), 35% गैर-संस्थागत निवेशकों और 15% खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बीसीसीएल की मजबूत बाजार स्थिति के चलते लिस्टिंग के समय निवेशकों को अच्छा-खासा मुनाफा मिल सकता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत के कुल घरेलू कोकिंग कोल उत्पादन में कंपनी की हिस्सेदारी 58.50% रही है। बीसीसीएल की स्थापना वर्ष 1972 में हुई थी और इसे मिनी रत्न का दर्जा प्राप्त है। भारत में इसकी कोई सीधी तुलना वाली सूचीबद्ध कंपनी नहीं है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर इसकी तुलना अल्फा मेटालर्जिकल रिसोर्सेज और वॉरियर मेट कोल जैसी विदेशी कोयला कंपनियों से की जाती है। -
-साल 2025 में उर्वरक खपत का 73% घरेलू उत्पादन से पूरा
-उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भर हो रहा भारतनई दिल्ली। आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए भारत सरकार ने उर्वरक क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। साल 2025 में देश की कुल उर्वरक खपत का 73 प्रतिशत हिस्सा देश में ही उत्पादन कर पूरा किया गया। यह उपलब्धि भारत सरकार की प्रभावी नीतियों और किसानों के हित में किए गए निरंतर प्रयासों का परिणाम है।भारत सरकार किसानों को सशक्त और स्वावलंबी बनाने के साथ-साथ पूरे देश में उर्वरकों की समय पर और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है। उर्वरक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कच्चे माल की उपलब्धता पर अधिक ध्यान दिया गया है। इसके तहत दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते, विभिन्न स्रोतों के उपयोग और आयात पर निर्भरता कम करने जैसे जरूरी कदम उठाए गए हैं।इन प्रयासों से साल 2025 में उर्वरकों का घरेलू उत्पादन अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। उर्वरकों जैसे कि यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी का कुल घरेलू उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। साल 2021 में यह 433.29 लाख टन था, जो 2022 में बढ़कर 467.87 लाख टन हो गया। इसके बाद 2023 में इसमें बड़ी वृद्धि दर्ज की गई और उत्पादन 507.93 लाख टन तक पहुंच गया। यह बढ़त 2024 में भी जारी रही, जब उत्पादन 509.57 लाख टन रहा। वहीं, 2025 में उर्वरक उत्पादन अब तक के सबसे उच्च स्तर पर पहुंचते हुए 524.62 लाख टन दर्ज किया गया। नए उर्वरक संयंत्रों की स्थापना, बंद पड़ी इकाइयों का पुनरुद्धार और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा मिलने से उर्वरक क्षेत्र को मजबूती मिली है। सरकार की इन पहलों से किसानों को उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित हुई है और कृषि उत्पादन को भी समर्थन मिला है। साथ ही, उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को और मजबूती मिली है। - नयी दिल्ली,। कर्ज में डूबी संकटग्रस्त दूरसंचार कंपनी वोडाफोन-आइडिया को सरकार ने राहत देते हुए अगले छह वर्ष में बकाया राशि को चुकाने के लिए वार्षिक भुगतान की सीमा 124 करोड़ रुपये तय कर दी है, जिससे निकट भविष्य में नकदी प्रवाह में आसानी होगी।वोडाफोन आइडिया ने दूरसंचार विभाग (डीओटी) से प्राप्त एक सूचना का हवाला देते हुए शेयर बाजार को बताया कि मार्च 2032 और मार्च 2035 के बीच वार्षिक भुगतान की राशि को घटाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया जाएगा।इसमें कहा गया कि समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) की शेष राशि का भुगतान मार्च 2036 से शुरू होकर छह वर्षों तक वार्षिक रूप से समान किस्तों में करना होगा।सरकार ने वोडाफोन-आइडिया लिमिटेड (वीआईएल) के 87,695 करोड़ रुपये के समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाया पर रोक लगाने पर 31 दिसंबर को सहमति जतायी थी जिसे संकटग्रस्त कंपनी को वित्त वर्ष से 2031-32 से 2040-41 तक चुकाना होगा।भुगतान अनुसूची के विवरण सामने आने के बाद वोडाफोन-आइडिया के शेयर में सुबह के कारोबार में नौ प्रतिशत की तेजी आई। हालांकि दोपहर तक विश्लेषकों द्वारा 5जी विस्तार योजनाओं के लिए आवश्यक धन की जरूरतों को लेकर सतर्कता बरतने के कारण शेयर ने अपनी अधिकतर बढ़त खो दी। बीएसई पर शेयर दो प्रतिशत की गिरावट के साथ 11.27 रुपये पर बंद हुआ।इन कदमों से दूरसंचार कंपनी में 48.9 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली सरकार के हितों की रक्षा होगी। साथ ही स्पेक्ट्रम नीलामी शुल्क और एजीआर बकाया के रूप में केंद्र को देय राशि का व्यवस्थित भुगतान सुनिश्चित होगा। इसके अलावा, वीआईएल इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा में बनी रहेगी और उसके 20 करोड़ उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होगी।एजीआर बकाया का तात्पर्य समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के आधार पर दूरसंचार कंपनियों द्वारा सरकार को देय भुगतान से है। यह वह राजस्व है जिस पर दूरसंचार संचालकों को लाइसेंस शुल्क एवं स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क का भुगतान करना होता है। इसमें सभी राजस्व शामिल हैं यहां तक कि गैर-दूरसंचार आय (जैसे ब्याज, किराया, परिसंपत्ति बिक्री) भी।कंपनी ने शुक्रवार को बताया कि इन बकाया राशियों के अलावा, वर्ष 2017-18 और 2018-19 के एजीआर बकाया जिन्हें सितंबर 2020 के उच्चतम न्यायालय के आदेश के आधार पर अंतिम रूप दिया गया था..अब बिना किसी बदलाव के 2025-26 से 2030-31 वित्तीय वर्ष में चुकाने होंगे। यह वार्षिक भुगतान 124 करोड़ रुपये बनता है।वोडाफोन-आइडिया लंबे समय से वित्तीय संकट से जूझ रही है जिसका मुख्य कारण कड़ी मूल्य प्रतिस्पर्धा, भारी कर्ज एवं एजीआर की परिभाषा में बदलाव के कारण उत्पन्न भारी एजीआर देनदारियां हैं। कंपनी लगातार घाटे, घटते ग्राहक आधार और नेटवर्क विस्तार में निवेश करने की सीमित क्षमता से जूझ रही है जबकि प्रतिद्वंद्वी कंपनियां 4जी और 5जी नेटवर्क को तेजी से पेश कर रहे हैं।कुछ लोगों को उम्मीद थी कि मंत्रिमंडल एजीआर बकाया का कुछ हिस्सा या शायद पूरा ही माफ कर देगा। हालांकि इसके बजाय, मंत्रिमंडल ने बकाया राशि पर रोक लगाने का फैसला किया जिससे कंपनी को समय मिल सके।वोडाफोन-आइडिया अगले 10 वर्ष में सरकार को 1,144 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी। शेष समायोजित सकल राजस्व बकाया जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 87,695 करोड़ रुपये पर स्थिर कर दिया है का भुगतान मार्च 2036 से शुरू करेगी। कंपनी ने कहा कि हालांकि 31 दिसंबर तक 2006-07 से 2018-19 की अवधि के लिए मूलधन, ब्याज, जुर्माना एवं जुर्माने पर ब्याज सहित संपूर्ण एजीआर बकाया राशि को रोक दिया जाएगा और विभिन्न किस्तों में देय होगी।
-
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 604.72 अंक या 0.72% की कमजोरी के साथ 83,576.24 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 193.55 अंक या 0.75% फिसलकर 25,683.30 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में गिरावट का नेतृत्व रियल्टी और ऑटो सेक्टर के शेयरों ने किया। निफ्टी रियल्टी 2.26%, निफ्टी ऑटो 1.15%, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.14%, निफ्टी एफएमसीजी 1.08% और निफ्टी कंजम्प्शन 1.06% की गिरावट के साथ बंद हुआ। दूसरी ओर कुछ सेक्टर्स में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.40%, निफ्टी आईटी 0.28% और निफ्टी पीएसयू बैंक 0.18% की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, सन फार्मा, इंडिगो, एमएंडएम, बजाज फाइनेंस, टाइटन, एक्सिस बैंक, आईटीसी, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, एचयूएल और पावर ग्रिड प्रमुख लूजर्स रहे।वहीं, एशियन पेंट्स, एचसीएल टेक, बीईएल, इटरनल, टेक महिंद्रा, एसबीआई, टीसीएस और इन्फोसिस के शेयर गेनर्स की सूची में शामिल रहे। मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 474.40 अंक या 0.79% की गिरावट के साथ 59,748.15 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 318.40 अंक या 1.81% टूटकर 17,282.65 पर आ गया।बाजार के जानकारों के मुताबिक, वैश्विक अस्थिरता के चलते निवेशकों ने मुनाफावसूली की। इसके अलावा, अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक द्वारा भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी के संकेत दिए जाने से भी बाजार पर दबाव बढ़ा। विश्लेषकों ने कहा कि अब निवेशकों की निगाहें सोमवार को जारी होने वाले महंगाई के आंकड़ों पर होंगी, जिनका बाजार की दिशा पर सीधा असर पड़ सकता है।शुक्रवार को बाजार की शुरुआत सपाट रही थी। सुबह खबर लिखे जाने तक बीएसई सेंसेक्स 176 अंक या 0.21% की बढ़त के साथ 84,357 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 46 अंक या 0.18% की तेजी के साथ 25,923 पर था। हालांकि, दिन चढ़ने के साथ बाजार में बिकवाली हावी हो गई। -
नई दिल्ली। चांदी और कॉपर जैसी धातुओं में गिरावट का असर गुरुवार को मेटल शेयरों पर देखने को मिला। हिंदुस्तान जिंक, हिंदुस्तान कॉपर, नेशनल एल्युमिनियम कंपनी, एनएमडीसी और हिंडाल्को जैसे शेयरों में 6.35 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। हिंदुस्तान जिंक के शेयर 6.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 590 रुपए पर बंद हुए। यह देश में चांदी का उत्पादन करने वाली प्रमुख कंपनियों में से एक है। हिंदुस्तान कॉपर के शेयर 5.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ 521.50 रुपए, नेशनल एल्युमिनियम कंपनी के शेयर 5.57 प्रतिशत और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज का शेयर 3.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
देश में खनिज उत्पादन करने वाली प्रमुख कंपनियों में से एक एनएमडीसी के शेयर 5.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81.45 रुपए पर बंद हुए। बड़े मेटल स्टॉक्स में कमजोरी से निफ्टी मेटल इंडेक्स 3.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ और यह सत्र में सबसे अधिक गिरने वाला सूचकांक था। मेटल के शेयर में गिरावट की वजह धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट होना है।मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोना में आधा प्रतिशत से अधिक, चांदी में तीन प्रतिशत से अधिक और कॉपर में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। धातुओं की कीमत में गिरावट की वजह वैश्विक कमोडिटी इंडेक्स में रिबैलैंसिंग को माना जा रहा है, जिससे मेटल बाजार में बड़े निवेशक बिकवाली कर रहे हैं।भारतीय शेयर बाजार कारोबारी सत्र में बड़ी बिकवाली के साथ बंद हुआ। बाजार में चौतरफा गिरावट देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 780.18 अंक या 0.92 प्रतिशत की गिरावट के साथ 84, 180.96 और निफ्टी 263.90 अंक या 1.01 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,876.85 पर था। मेटल के अलावा निफ्टी एनर्जी 2.89 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 2.84 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 2.48 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 2.40 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 2.08 प्रतिशत, निफ्टी आईटी 1.99 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 1.71 और निफ्टी फार्मा 1.39 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ। -
नयी दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी में चांदी की कीमत बुधवार को 5,000 रुपये बढ़कर 2 लाख 56 हजार रुपये प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। सुरक्षित निवेश की मांग और औद्योगिकी खरीदारी से चांदी को समर्थन मिला। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने यह जानकारी दी। मंगलवार को चांदी 2 लाख 51 हजार रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
कारोबारियों ने कहा कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव ने सुरक्षित निवेश वाली परिसंपत्तियों की मांग को बढ़ाया है, जबकि आपूर्ति बाधाओं और मजबूत औद्योगिक मांग ने चांदी की कीमतों को और बढ़ा दिया है। इस बीच, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का दाम 100 रुपये की मामूली गिरावट के साथ 1,41,400 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स मिलाकर) रहा, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,41,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘हाल की तेजी के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली से बुधवार को सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई।'' उन्होंने कहा कि डॉलर में सुधार से भी सोने की कीमतों पर असर पड़ा। हालांकि लगातार भू-राजनीतिक जोखिम, सुरक्षित निवेश के रूप में कीमती धातुओं की मांग को समर्थन देते हैं। इससे तेज गिरावट होने से रुक रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर सोना 45.22 डॉलर यानी 1.01 प्रतिशत टूटकर 4,449.87 डॉलर प्रति औंस पर रहा। हाजिर चांदी 2.55 डॉलर यानी 3.15 प्रतिशत टूटकर 78.69 डॉलर प्रति औंस पर रही। - नयी दिल्ली। श्री लोटस डेवलपर्स एंड रियल्टी लिमिटेड ने गुजरात के गिफ्ट सिटी में एक लक्जरी मिश्रित उपयोग वाली परियोजना के निर्माण के लिए अभिनेता अभिषेक बच्चन के साथ एक संयुक्त विकास समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक के पास गिफ्ट सिटी में जमीन है। यह जमीन लगभग 15 साल पहले खरीदी गई थी। रियल एस्टेट कंपनी ने बुधवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि उसने अभिनेता अभिषेक बच्चन के साथ एक विकास समझौते के माध्यम से गांधीनगर के गिफ्ट सिटी क्षेत्र में विस्तार किया है। इस परियोजना का निर्मित क्षेत्रफल 10 लाख वर्ग फुट से अधिक होगा।कंपनी इस स्वामित्व वाली भूमि पर एक लक्जरी मिश्रित उपयोग (आवासीय और व्यावसायिक) वाली परियोजना का निर्माण करेगी। यह गुजरात में कंपनी की पहली परियोजना होगी। यह परियोजना कंपनी की अनुषंगी कंपनी राइज रूट प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से संचालित की जाएगी, जिसने अभिषेक बच्चन के साथ समझौता किया है। इस समझौते में लाभ साझा करने का प्रावधान शामिल है।श्री लोटस डेवलपर्स ने आगामी परियोजना के विकास में किए गए निवेश की राशि का खुलासा नहीं किया है।श्री लोटस डेवलपर्स एंड रियल्टी लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक आनंद के पंडित ने कहा, "प्रगतिशील नीतिगत पहल, मजबूत बुनियादी ढांचा विकास और घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की बढ़ती रुचि के समर्थन से गिफ्ट सिटी तेजी से एक प्रमुख वैश्विक वित्तीय और व्यापारिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।" उन्होंने कहा कि गुजरात के बाजार में विस्तार का उद्देश्य इस क्षेत्र में प्रीमियम और लक्जरी आवासीय और वाणिज्यिक स्थानों की बढ़ती मांग को पूरा करना है।
-
नयी दिल्ली ।टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लि. की सौर विनिर्माण इकाई और पूर्ण अनुषंगी कंपनी टीपी सोलर लि. का वित्त वर्ष 2025-26 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान सेल उत्पादन सालाना आधार पर करीब पांच गुना होकर 940 मेगावाट रहा। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की समान तिमाही में यह 196 मेगावाट था।
टाटा पावर ने बुधवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में 990 मेगावाट के मॉड्यूल का उत्पादन किया, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में उत्पादित 927 मेगावाट से लगभग सात प्रतिशत अधिक है। टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी, टाटा पावर की अनुषंगी है।टीपी सोलर तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में भारत की सबसे बड़ी अत्याधुनिक 4.3 गीगावाट सौर सेल और मॉड्यूल निर्माण सुविधा का संचालन करती है। टाटा पावर की इस इकाई को 4,300 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित किया गया है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान इस संयंत्र ने 2.8 गीगावाट सौर सेल और 2.9 गीगावाट सौर मॉड्यूल का उत्पादन किया। - नयी दिल्ली. अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) के 1,000 करोड़ रुपये के गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र (एनसीडी) के सार्वजनिक निर्गम ने खुलने के 45 मिनट के भीतर ही पूर्ण अभिदान हासिल कर लिया। शेयर बाजार के आंकड़ों से यह जानकारी मिली। इस निर्गम का आधार आकार 500 करोड़ रुपये था जबकि इसमें अतिरिक्त 500 करोड़ रुपये का ‘ग्रीन शू' विकल्प यानी अतिरिक्त बोली आने पर उसे रखने का विकल्प भी शामिल है। इनका आवंटन ‘‘पहले आओ, पहले पाओ'' के आधार पर किया गया। कंपनी के अनुसार, निर्गम मंगलवार को शुरू हुआ जो 19 जनवरी 2026 को बंद होगा। एनसीडी बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध किए गए। इसमें निवेशकों को सालाना 8.90 प्रतिशत तक का प्रभावी प्रतिफल मिलेगा। एईएल द्वारा जुलाई 2025 में जारी किए जाने वाले 1,000 करोड़ रुपये के दूसरे एनसीडी निर्गम को भी पहले ही दिन महज तीन घंटे में पूर्ण अभिदान मिला था। बयान में कहा गया कि निर्गम से मिली कम से कम 75 प्रतिशत राशि का उपयोग मौजूदा कर्ज चुकाने में किया जाएगा। बाकी राशि सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।
- नयी दिल्ली. भारतीय चावल निर्यातक संघ (आईआरईएफ) ने सरकार से आगामी 2026-27 बजट में कर प्रोत्साहन, ब्याज सब्सिडी और माल ढुलाई सहायता प्रदान करने का मंगलवार को आग्रह किया ताकि स्थिरता संबंधी चिंताओं को दूर करते हुए इस क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत किया जा सके। व्यापारिक संगठन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से निर्यात ऋण पर चार प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, सड़क एवं रेल माल ढुलाई के लिए तीन प्रतिशत समर्थन और शुल्क माफी योजनाओं (आरओडीटीईपी - निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट) के समय पर वितरण की मांग की। आईआरईएफ के अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने वित्त मंत्री को भेजे एक ज्ञापन में कहा, ‘‘ ये उपाय निर्यातकों की लागत को सीधे तौर पर कम करेंगे, स्थिरता को प्रोत्साहित करेंगे और मूल्यवर्धित लदान को बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगे।" उन्होंने कहा कि वैश्विक चावल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। उसने वित्त वर्ष 2024-25 में 170 से अधिक देशों को लगभग 2.01 करोड़ टन चावल का निर्यात किया। गर्ग ने कहा, ‘‘ चावल का निर्यात एक रणनीतिक आर्थिक संपत्ति बना हुआ है जो किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार एवं विदेशी बाजार को सहारा देता है।'' उन्होंने कहा कि इस प्रमुख खाद्य पदार्थ में निरंतर नेतृत्व भारत की आर्थिक मजबूती और कूटनीतिक प्रभाव को बढ़ाता है। गर्ग ने साथ ही कहा कि इस क्षेत्र को हालांकि कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जिनमें प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में भूजल का कम होना, खरीद एवं भंडारण की उच्च लागत और बाजार में अस्थिरता शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ केंद्रीय बजट लक्षित राजकोषीय एवं सहायक उपायों के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के साथ-साथ स्थिरता और किसानों के परिणामों में सुधार कर सकता है।'' आईआरईएफ ने प्रमाणित जल-बचत एवं कम उत्सर्जन वाली पद्धतियों जैसे कि वैकल्पिक गीलापन और सुखाने (एडब्ल्यूडी), सीधे बोए गए चावल (डीएसआर), ‘लेजर लेवलिंग' और ऊर्जा-कुशल ‘मिलिंग' से जुड़े कर और निवेश प्रोत्साहनों के माध्यम से टिकाऊ चावल उत्पादन के लिए समर्थन मांगा। संघ ने किसानों को बेहतर प्रतिफल देने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खरीद पर दबाव कम करने के लिए उच्च मूल्य वाली धान एवं चावल की किस्मों प्रीमियम बासमती, जीआई/जैविक/विशेष गैर-बासमती की ओर खेती का रकबा स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहन देने का भी आह्वान किया। कार्यशील पूंजी के संबंध में आईआरईएफ ने लघु एवं मझोले उद्यम चावल निर्यातकों को प्राथमिकता देते हुए निर्यात ऋण पर चार प्रतिशत ब्याज सब्सिडी की मांग की। संघ ने कहा, ‘‘ इससे वित्तपोषण लागत कम होती है, नकदी प्रवाह सुगम होता है और मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होता है।" एक प्रमुख मांग कुछ चावल किस्मों पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाए जाने के बाद उत्पन्न हुए पूर्वव्यापी शुल्क दावों की एकमुश्त छूट है। आईआरईएफ ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रीय अधिकारियों तथा निर्यातकों के बीच शुल्क आधार एवं गणना पद्धति की असंगत व्याख्या के कारण अनजाने में विसंगतियां उत्पन्न हुईं। संघ ने प्रीमियम बाजारों में भारत की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए निर्यात वित्त गारंटी तथा अनुपालन बुनियादी ढांचे (परीक्षण, पता लगाने की क्षमता, गुणवत्ता आश्वासन) को मजबूत करने का भी आह्वान किया है।
- नयी दिल्ली. वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने मंगलवार को कृत्रिम मेधा (एआई) और महत्वपूर्ण खनिजों से संचालित भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं को आकार देने में सस्ती एवं भरोसेमंद बिजली की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि भारत की वृद्धि के अगले चरण का निर्धारण सस्ती बिजली से होगा। अग्रवाल ने ऊर्जा सुरक्षा एवं आर्थिक प्रतिस्पर्धा के बीच बढ़ते संबंध का उल्लेख करते सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर लिखा कि अमेरिका की तुलना में चीन की अर्थव्यवस्था छोटी होने के बावजूद आज उसकी बिजली उत्पादन क्षमता दोगुनी है। बिजली अवसंरचना में यह दीर्घकालिक निवेश एआई के दौर में फायदेमंद साबित होगा, जहां डेटा सेंटर, उन्नत विनिर्माण एवं खनिज प्रसंस्करण जैसे क्षेत्र अत्यधिक ऊर्जा खपत वाले हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका पहले से ही बिजली की कमी का सामना कर रहा है क्योंकि एआई के तेजी से विस्तार के कारण भारी मात्रा में बिजली की खपत हो रही है जिससे अन्य औद्योगिक गतिविधियों के लिए सीमित एवं महंगी बिजली ही बच रही है।'' अग्रवाल ने कहा कि यह असंतुलन समय के साथ औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है।उन्होंने कहा भारत एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। पारंपरिक और नवीकरणीय ऊर्जा के साथ उत्पादन एवं पारेषण में अपनी मजबूत क्षमता के साथ भारत घरों, कारखानों तथा डेटा सेंटर के लिए विश्वसनीय एवं किफायती बिजली सुनिश्चित कर खुद को भविष्य के लिए तैयार अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित कर सकता है।'' अग्रवाल ने इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की मांग करते हुए बिजली परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने और नीतिगत ढांचों को सरल बनाने की वकालत की। उन्होंने बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण को एकीकृत करने वाली एक सरल एवं एकीकृत नीति अपनाने का सुझाव दिया, जिससे कंपनियां परियोजनाओं को शुरू से अंत तक गति और दक्षता के साथ पूरा कर सकें। वेदांता समूह के चेयरमैन ने कहा, ‘‘किफायती एवं सुरक्षित बिजली ही भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं को परिभाषित करेगी।'' इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आज किए गए निर्णायक सुधार भारत को एआई-संचालित भविष्य में अग्रणी बनाने में मदद कर सकते हैं।
- नयी दिल्ली. भारतीय बैंकों को आने वाले समय में रिजर्व बैंक की बेहतर निगरानी और मजबूत पर्यवेक्षण व्यवस्था का फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे न सिर्फ बैंकिंग प्रणाली में जोखिम कम होंगे, बल्कि पूरे क्षेत्र का कामकाजी माहौल भी सुधरेगा। एक रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने एक रिपोर्ट में कहा कि मजबूत आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं और महंगाई के जोखिमों में कमी आने के साथ ये बदलाव बैंकिंग क्षेत्र के लिए सकारात्मक हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में तनावपूर्ण हालात से निपटने, जोखिमों की निगरानी और खराब कर्ज की वसूली से जुड़े नियामकीय ढांचे में काफी सुधार हुआ है। फिच ने कहा, "वित्त वर्ष 2015-16 से 2017-18 के बीच गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में तेज बढ़ोतरी के पीछे जिन कमजोरियों की भूमिका थी, उन्हें अब काफी हद तक दूर कर लिया गया है। फिलहाल बैंकिंग प्रणाली के प्रमुख आंकड़े कई वर्षों की सबसे मजबूत स्थिति में हैं।" बैंकिंग क्षेत्र के कुल कर्जों में एनपीए का अनुपात वित्त वर्ष 2017-18 के 11.2 प्रतिशत से घटकर 2025-26 की पहली छमाही में 2.2 प्रतिशत रह गया है। इसी तरह, बैंकों की पूंजी स्थिति भी बेहतर हुई है। इसके अलावा बैंक की वित्तीय मजबूती और संकट झेलने की क्षमता का पैमाना माना जाने वाला कॉमन इक्विटी टियर-1 अनुपात भी बढ़कर 14.8 प्रतिशत हो गया है, जो वित्त वर्ष 2013-14 में करीब 9.3 प्रतिशत था। बैंकों की लाभप्रदता भी एशिया-प्रशांत क्षेत्र के समकक्ष देशों के अनुरूप है। हाल के वर्षों में परिसंपत्तियों पर प्रतिफल (आरओए) करीब 1.3 प्रतिशत रहा है। फिच का मानना है कि अपेक्षित ऋण क्षति (ईसीएल) ढांचे को लागू करने से मुनाफे में उतार-चढ़ाव कम होगा। आगे चलकर देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि (अगले दो वर्षों में छह प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान) बैंकों को कर्ज विस्तार के पर्याप्त अवसर देगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में बैंकिंग ऋण और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का अनुपात अभी 59 प्रतिशत है, जो अन्य देशों के औसत 101 प्रतिशत से कम है। इससे संकेत मिलता है कि सावधानी बरतते हुए कर्ज वृद्धि की अभी काफी अच्छी गुंजाइश मौजूद है।
-
नयी दिल्ली. साख निर्धारित करने वाली इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) तथा आयकर में कटौती जैसे प्रमुख सुधार और व्यापार समझौते, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के रूप में काम करेंगे। साथ ही अर्थव्यवस्था को वैश्विक उथल-पुथल से बचाएंगे। इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा कि अर्थव्यवस्था में अगले वित्त वर्ष में भी उच्च वृद्धि दर और कम महंगाई दर (औसतन 3.8 प्रतिशत खुदरा मुद्रास्फीति) की स्थिति बनी रहेगी। कम शुल्क वाले भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि के आंकड़ों में और इजाफा होगा। एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष में आधार वर्ष 2011-12 पर आधारित जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत और बाजार मूल्य पर जीडीपी नौ प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। इंडिया रेटिंग्स को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारतीय रुपया औसतन 92.26 प्रति डॉलर रहेगा जो मौजूदा वित्त वर्ष में 88.64 प्रति डॉलर से अधिक है। एजेंसी ने साथ ही कहा कि सरकार के विशेष रूप से न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और ओमान के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) विदेशी निवेश को बढ़ावा देंगे और अधिक विदेशी निवेश को आकर्षित करके चालू खाता घाटा (सीए) को कम रखने में मदद करेंगे। पंत ने कहा कि सीमा शुल्क को युक्तिसंगत बनाना एवं विकसित भारत-राम-जी अधिनियम के तहत आवंटन एक फरवरी को निर्धारित 2026-27 के केंद्रीय बजट में अपेक्षित प्रमुख घोषणाएं होंगी। इसके अलावा, 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट को भी एक फरवरी को सार्वजनिक किया जाएगा। इसमें एक अप्रैल से शुरू होने वाले पांच वर्षों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच कर हस्तांतरण के अनुपात का सुझाव दिया गया है। रेटिंग एजेंसी के अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में कर राजस्व में दो लाख करोड़ रुपये की कमी आएगी जिसकी भरपाई गैर-कर राजस्व संग्रह और पूंजीगत व्यय में मामूली कमी से की जाएगी। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा बजट में अनुमानित 4.4 प्रतिशत और वास्तविक रूप से 15.69 लाख करोड़ रुपये रहेगा। एजेंसी के अनुसारख् संशोधित अनुमानों (आरई) में निरपेक्ष रूप से आंकड़ा बढ़ सकता है, हालांकि प्रतिशत के रूप में 4.4 प्रतिशत ही रहेगा।
- नयी दिल्ली। सरकार ने कम राख वाले 'मेटालर्जिकल' कोक पर आयात प्रतिबंध हटा दिए हैं, जिसमें राख की मात्रा 18 प्रतिशत से कम है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने इससे पहले 31 दिसंबर को एक अधिसूचना में कहा था कि वह कम राख वाले 'मेटालर्जिकल' कोक पर आयात प्रतिबंधों को एक जनवरी से बढ़ाकर 30 जून, 2026 तक कर रहा है। हालांकि, तीन जनवरी की एक ताजा अधिसूचना में विभाग ने कहा, ''कम राख वाले मेटालर्जिकल कोक (जिसमें राख की मात्रा 18 प्रतिशत से कम हो) का आयात अब मुक्त है, जिसमें कोक फाइन्स/कोक ब्रीज और फॉस्फोरस मेटालर्जिकल कोक शामिल हैं।''

.jpg)
.jpg)

.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)

.jpg)






.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)


.jpg)

.jpg)