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नयी दिल्ली. उद्योग जगत ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के समाधान के लिए सरकार द्वारा महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात पर 30 जून तक तीन महीने के लिए सीमा शुल्क से छूट देना सही समय पर उठाया गया कदम है। इससे कपड़ा, पैकेजिंग और औषधि जैसे क्षेत्रों को राहत मिलेगी। उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ''पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उत्पन्न आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के समाधान के लिए भारत सरकार द्वारा 40 महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों पर 30 जून, 2026 तक पूर्ण सीमा शुल्क छूट देने का निर्णय समय पर उठाया गया व्यावहारिक कदम है।'' उन्होंने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स, पेंट, कपड़ा और खिलौने जैसे क्षेत्र बढ़ते कच्चे माल की लागत और सीमित मूल्य निर्धारण शक्ति का सामना कर रहे हैं। इनमें से कई श्रम गहन एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) हैं। बनर्जी ने कहा, ''शुल्क छूट से कपड़ा, पैकेजिंग और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों को तत्काल राहत मिलेगी, जो पीटीए, मेथनॉल और एसिटिक एसिड जैसे प्रमुख मध्यवर्ती वस्तुओं पर अत्यधिक निर्भर हैं। इससे लागत दबाव को कम करने, आपूर्ति स्थिरता को बनाए रखने और महंगाई की प्रवृत्ति को कम करने में भी मदद मिलेगी।'' उन्होंने राज्य और केंद्रीय करों और शुल्कों पर छूट (आरओएससीटीएल) योजना को बढ़ाने के सरकार के फैसले का भी स्वागत किया और कहा कि इससे परिधान और तैयार माल क्षेत्र के निर्यातकों को समय पर सहायता मिलेगी। उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने कहा कि सीमा शुल्क छूट से प्रसंस्करण उद्योगों के लिए कच्चे माल की लागत कम होगी। इससे आयातित कच्चे माल और मध्यवर्ती वस्तुओं की कीमतें कम होंगी। इस लागत में कमी से विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए जिनमें कच्चे माल की खपत अधिक होती है, मार्जिन को बनाये रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा, ''उदाहरण के लिए, प्लास्टिक, वस्त्र और पैकेजिंग में, पेट्रोरसायन का उपयोग कच्चे माल के रूप में किया जाता है और यह कुल उत्पादन लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कच्चे माल की कीमतों में कमी से परिचालन मार्जिन में सुधार होगा...।'' इसके अतिरिक्त, छूट से खरीद लागत कम करके कार्यशील पूंजी दक्षता में सुधार हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि इससे क्षमता उपयोग में भी वृद्धि हो सकती है, क्योंकि कच्चे माल की कम लागत उच्च उत्पादन स्तर को प्रोत्साहित करती है।
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नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी इस्पात कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने बृहस्पतिवार को कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में उसकी बिक्री 11.5 प्रतिशत बढ़कर 2.01 करोड़ टन रही। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का कच्चे इस्पात का उत्पादन 1.94 करोड़ टन और बिक्री योग्य इस्पात का उत्पादन 1.91 करोड़ टन रहा। सेल ने बयान में कहा, ''अपनी ब्रांड उपस्थिति और ग्राहकों तक पहुंच को मजबूत करते हुए, कंपनी ने 2.01 करोड़ टन की अब तक की सबसे अधिक बिक्री दर्ज की है, जो पिछले वर्ष के 1.8 करोड़ टन की तुलना में 11.5 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि है।'' कंपनी ने आगे बताया कि यह वृद्धि व्यापक रही और सभी उत्पाद श्रेणियों में बिक्री बढ़ी है। कंपनी ने कहा कि उसकी परिचालन उत्कृष्टता बेहतर दक्षता मानकों पर साबित हुई है। बयान के अनुसार, ''भारतीय रेलवे को 12.5 लाख टन की रिकॉर्ड आपूर्ति के साथ ही यूनिवर्सल रेल मिल ने अब तक का सबसे अधिक 'लॉन्ग रेल' उत्पादन दर्ज किया। इससे भारत के रेल विस्तार में कंपनी के रणनीतिक योगदान का पता चलता है।'' निर्यात के मोर्चे पर 162 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 2.9 लाख टन तक पहुंच गया। सेल ने भूटान सहित नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सफलतापूर्वक विस्तार किया है।
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नयी दिल्ली. सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 5.3 करोड़ टन लौह अयस्क का उत्पादन किया और 5.02 करोड़ टन लौह अयस्क की बिक्री की। इस्पात बनाने के लिए मुख्य कच्चे माल के रूप में लौह अयस्क का इस्तेमाल किया जाता है।
समीक्षाधीन अवधि में कंपनी का उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 के 4.40 करोड़ टन की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक रहा, जबकि बिक्री 4.44 करोड़ टन से 13 प्रतिशत बढ़ी। एनएमडीसी ने मार्च महीने में 53.5 लाख टन लौह अयस्क का उत्पादन किया और 59 लाख टन की बिक्री की।कंपनी ने एक बयान में कहा, ''एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 5.3 करोड़ टन लौह अयस्क के उत्पादन के साथ एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। हम भारत के खनन इतिहास में पांच करोड़ टन के वार्षिक उत्पादन के आंकड़े को पार करने वाली पहली कंपनी हैं।'' इस रिकॉर्ड उत्पादन में छत्तीसगढ़ स्थित एनएमडीसी की प्रमुख लौह अयस्क खदानों- किरंदुल एवं बचेली और कर्नाटक में दोनीमलाई का उल्लेखनीय योगदान रहा। एनएमडीसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अमिताभ मुखर्जी ने कहा, ''पांच करोड़ टन से अधिक उत्पादन का आंकड़ा केवल एनएमडीसी के लिए एक मील का पत्थर न होकर देश के खनन क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण है।'' -
नयी दिल्ली. भारती एयरटेल 65 करोड़ ग्राहकों के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बन गई है। कंपनी ने जीएसएमए के आंकड़ों का हवाला देते हुए बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस (जीएसएमए) दुनिया भर के मोबाइल संचालकों और संबंधित कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक प्रमुख संगठन है। कंपनी बयान के अनुसार, 'जीएसएमए इंटेलिजेंस' के मुताबिक मोबाइल ग्राहक आधार के लिहाज से भारती एयरटेल वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है। कंपनी भारत तथा अफ्रीका में सेवाएं देती है। भारती एयरटेल के कार्यकारी वाइस चेयरमैन गोपाल विट्टल ने कहा, '' हम नवाचार, विश्वसनीयता एवं सेवाओं के अनुभव के स्तर को और ऊंचा करने का प्रयास करेंगे, ताकि हर ग्राहक के साथ संपर्क भरोसा जीतने तथा मूल्य प्रदान करने का अवसर बने।'' कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि यह संख्या 31 मार्च तक उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। एयरटेल ने कहा कि भारत में उसके 36.8 करोड़ से अधिक मोबाइल ग्राहक हैं, जबकि अफ्रीका के 14 देशों में 17.9 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं। कंपनी के अनुसार, अपने क्षेत्रीय बाजारों से आगे बढ़ते हुए एयरटेल 'यूटेलसैट वनवेब' और 'स्पेसएक्स' के साथ रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से डिजिटल खाई को पाटने का प्रयास कर रही है।
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नई दिल्ली। वित्तीय वर्ष के पहले ही दिन महंगाई ने बड़ा झटका दिया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में भारी बढ़ोतरी की गई है। सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने 1 अप्रैल से 19 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 195.50 रुपए की बढ़ोतरी कर दी है।
नई दरों के मुताबिक, दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1883 रुपए से बढ़कर 2078.50 रुपए हो गई है। इससे पहले 1 मार्च को इसकी कीमत 1768.50 रुपए थी, जो 7 मार्च को बढ़कर 1883 रुपए हो गई थी। मार्च महीने में ही सिलेंडर के दामों में लगातार इजाफा हुआ है। 1 मार्च से अब तक कुल 310 रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।देश के अन्य महानगरों में भी कीमतों में वृद्धि देखने को मिली है। कोलकाता में 19 किलो का सिलेंडर 2208.00 रुपए, मुंबई में 2031.00 रुपए और चेन्नई में 2246.50 रुपए हो गया है।हालांकि, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। 7 मार्च को इसमें 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद से कीमत स्थिर है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपए बनी हुई है।कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने का सीधा असर होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पर पड़ेगा। संचालक बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डाल सकते हैं, जिससे बाहर खाना महंगा हो सकता है।मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच टकराव के चलते वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया है। होर्मुज स्ट्रेट में बाधाओं के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इस वैश्विक संकट का असर भारत पर भी साफ दिख रहा है। देश में एलपीजी सिलेंडर के दाम युद्ध जैसे हालात के बीच अब तक दो बार बढ़ाए जा चुके हैं, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ गया है। -
नई दिल्ली। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि देश में केवल कमर्शियल एलपीजी की कीमतें बढ़ाई गई हैं, जबकि घरेलू एलपीजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
मंत्रालय ने एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि उद्योगों और होटलों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतें अनियंत्रित होती हैं, बाजार द्वारा तय की जाती हैं और आमतौर पर हर महीने संशोधित की जाती हैं। देश में कुल खपत होने वाली एलपीजी में इनकी खपत 10 प्रतिशत से भी कम है।बयान में बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता के अनुरूप, घरेलू उपभोक्ताओं को पूरी तरह से सुरक्षा मिलती रहेगी, क्योंकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपए पर ही बनी हुई है, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसी तरह पीएमयूवाई योजना के तहत गरीबों के लिए एलपीजी सिलेंडरों की सब्सिडी वाली कीमत भी 613 रुपए पर ही बनी हुई है, उसमें भी कोई बदलाव नहीं किया गया है।”इसमें आगे कहा गया कि मौजूदा कीमतों पर पब्लिक सेक्टर की तेल मार्केटिंग कंपनियों को हर सिलेंडर पर 380 रुपए का नुकसान हो रहा है। मई के आखिर तक, कुल नुकसान लगभग 40,484 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। बयान में कहा गया कि पिछले साल भी, 60,000 करोड़ रुपए के कुल नुकसान में से 30,000 करोड़ रुपए तेल पीएसयू ने और 30,000 करोड़ रुपए भारत सरकार ने उठाए थे, ताकि भारतीय नागरिकों को एलपीजी की ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों से बचाया जा सके। मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत में घरेलू एलपीजी की कीमत दुनिया में सबसे कम कीमतों में से एक है; इसकी तुलना में पाकिस्तान में कीमत 1,046 रुपए प्रति सिलेंडर है, श्रीलंका में 1,242 रुपए, और नेपाल में यह 1,208 रुपए है। बयान में यह भी साफ किया गया कि रेगुलर पेट्रोल और डीजल की कीमतें पहले जैसी ही हैं—क्रमशः 94.77 रुपए प्रति लीटर और 87.67 रुपए प्रति लीटर (दिल्ली की कीमतें)। -
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाज़ारों ने बुधवार के सत्र का समापन मज़बूती के साथ किया, हालाँकि दिन में बाद में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदें फीकी पड़ने से उन्होंने अपनी शुरुआती बढ़त का एक बड़ा हिस्सा गँवा दिया।बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे उनकी दो दिन से चली आ रही गिरावट का सिलसिला टूट गया।
निफ्टी 348 अंक या 1.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,679.40 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 1,186.77 अंक या 1.65 प्रतिशत बढ़कर 73,134.34 पर समाप्त हुआ।निफ्टी के तकनीकी दृष्टिकोण पर टिप्पणी करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि गिरावट की स्थिति में, 22,500 के स्तर से ऊपर टिके रहने में विफलता से बिकवाली का दबाव फिर से बढ़ सकता है, जिससे इंडेक्स 22,300 की ओर खिंच सकता है, जिसके बाद 21,700 के आसपास एक मज़बूत मांग क्षेत्र (demand zone) मौजूद है।अमेरिका-ईरान संघर्ष में संभावित कमी की उम्मीदों के बीच बाज़ारों की शुरुआत मज़बूती के साथ हुई थी। हालाँकि, जैसे-जैसे सत्र आगे बढ़ा, शुरुआती उत्साह ठंडा पड़ गया, जिससे दिन के उच्चतम स्तरों से आंशिक गिरावट देखने को मिली।निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त हासिल करने वालों में Trent Limited, InterGlobe Aviation और Adani Ports and Special Economic Zone शामिल थे, जिन्होंने इंडेक्स में तेज़ी को सहारा दिया।व्यापक बाज़ारों का प्रदर्शन बेंचमार्क इंडेक्स से भी बेहतर रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 2.24 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि निफ्टी स्मॉल-कैप इंडेक्स 3.24 प्रतिशत उछला।क्षेत्रीय मोर्चे पर, निफ्टी PSU Bank इंडेक्स सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले इंडेक्स के रूप में उभरा, जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग शेयरों में मज़बूत बढ़त को दर्शाता है।निफ्टी केमिकल और निफ्टी मीडिया इंडेक्स में भी सत्र के दौरान खरीदारी में उल्लेखनीय दिलचस्पी देखने को मिली।हालाँकि, सभी क्षेत्रों में बढ़त देखने को नहीं मिली। निफ्टी हेल्थकेयरऔर निफ्टी फार्मा इंडेक्स ने बाज़ार के आम रुझान के विपरीत प्रदर्शन किया और गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे बाज़ार की कुल बढ़त कुछ हद तक सीमित हो गई। विश्लेषकों ने कहा कि सत्र के आखिर में उतार-चढ़ाव के बावजूद, बाज़ार बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहा; इसे सभी सेक्टरों में, खासकर मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में हुई व्यापक खरीदारी का समर्थन मिला।एक विश्लेषक ने कहा, “अब बाज़ारों का ध्यान अमेरिका के अहम आंकड़ों पर है, जिनमें नॉन-फ़ार्म पेरोल्स, ADP रोज़गार और बेरोज़गारी दर शामिल हैं; इन आंकड़ों की वजह से बाज़ार में तेज़ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।” -
नयी दिल्ली. बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (बीएलडब्ल्यू) ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 572 रेल इंजन का उत्पादन किया, जिससे भारतीय रेलवे के औद्योगिक इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। रेल मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा, "यह उपलब्धि बीएलडब्ल्यू की तकनीकी उत्कृष्टता, कुशल प्रबंधन और इसके अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अथक प्रयासों का ठोस प्रमाण है।" बीएलडब्ल्यू ने वित्त वर्ष 2024-25 में 477 रेल इंजन का उत्पादन किया था। 2025-26 में कंपनी ने रेल इंजन के उत्पादन में 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है। रेल मंत्रालय ने कहा, "यह उपलब्धि न केवल बीएलडब्ल्यू, बल्कि पूरे भारतीय रेलवे परिवार के लिए गर्व का विषय है।" मंत्रालय के मुताबिक, बीएलडब्ल्यू ने 2025-26 में जिन 572 रेल इंजन का उत्पादन किया, उनमें डब्ल्यूएजी-9 श्रेणी के 401 और डब्ल्यूएपी-7 श्रेणी के 143 इंजन सहित 558 आधुनिक इलेक्ट्रिक इंजन शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा कंपनी ने अमृत भारत ट्रेन के 14 इंजन, मोजाम्बिक को निर्यात के लिए 10 डीजल इंजन और गैर-रेलवे ग्राहकों के लिए चार डीजल इंजन का उत्पादन किया। उसने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 553 इलेक्ट्रिक इंजन के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, जिसके मुकाबले बीएलडब्ल्यू ने लगभग एक फीसदी अधिक यानी 558 इंजन का उत्पादन किया और यह संख्या पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। मंत्रालय ने बताया कि बीएलडब्ल्यू अपनी स्थापना से लेकर अब तक कुल 11,259 रेल इंजन का निर्माण कर चुकी है, जिनमें 2,925 इलेक्ट्रिक इंजन शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, रेल मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 में बीएलडब्ल्यू के लिए 642 इलेक्ट्रिक इंजन के उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
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नयी दिल्ली. आयकर विभाग ने भारतीय करदाताओं के साथ वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 219 अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों (एपीए) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का मकसद कर संबंधी निश्चितता प्रदान कर कारोबार सुगमता को बढ़ावा देना है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने मंगलवार को बयान में कहा कि इसमें एकपक्षीय एपीए (यूएपीए) और द्विपक्षीय एपीए (बीएपीए) शामिल हैं। इसके साथ ही, एपीए कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक कुल अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों की संख्या 1,034 हो गई है, जिसमें 750 यूएपीए और 284 बीएपीए शामिल हैं। बयान के अनुसार, ''सीबीडीटी ने एपीए कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से 2025-26 में कुल 219 एपीए पर हस्ताक्षर किए। यह किसी एक वित्त वर्ष अबतक का सर्वाधिक आंकड़ा है। इस वर्ष, सीबीडीटी ने 84 बीएपीए पर भी हस्ताक्षर किए, जो वित्त वर्ष 2024-25 में हस्ताक्षर किए गए 65 बीएपीए के पिछले रिकॉर्ड को पार कर गया।'' इसमें कहा गया है कि भारत के 13 संधि भागीदारों.... अमेरिका, फिनलैंड, ब्रिटेन, सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, स्वीडन, फ्रांस, इंडोनेशिया, आयरलैंड और न्यूजीलैंड के साथ पारस्परिक समझौतों के तहत द्विपक्षीय एपीए पर हस्ताक्षर किए गए। इस वर्ष फ्रांस, आयरलैंड, इंडोनेशिया और स्वीडन के साथ भारत के पहले द्विपक्षीय एपीए पर हस्ताक्षर करने की उपलब्धि भी है। सीबीडीटी लगातार बड़ी संख्या में एपीए पर हस्ताक्षर कर रहा है, पिछले वित्त वर्ष में 174 एपीए और उससे पिछले वर्ष में 125 एपीए पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसमें कहा गया है कि सेफ हार्बर नियम, अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते रूपरेखा के पूरक हैं और हस्तांतरण मूल्य निर्धारण में निश्चितता प्राप्त करने के लिए एक तेज और कम लागत वाला विकल्प प्रदान करते हैं। बयान के अनुसार, 2013 में शुरू की गई सेफ हार्बर रूपरेखा में अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की विशिष्ट श्रेणियों के लिए निश्चित मार्जिन निर्धारित किए गए हैं। इसमें वर्तमान में 12 लेनदेन श्रेणियां शामिल हैं। इनमें आईटी और सॉफ्टवेयर सेवाएं, आईटी-सक्षम सेवाएं, केपीओ (नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग), अनुबंध अनुसंधान एवं विकास, अंतर-समूह वित्तपोषण, गारंटी, कम मूल्य वर्धित सेवाएं और हीरा उद्योग में कुछ लेनदेन शामिल हैं। वित्त अधिनियम 2026 ने सेफ हार्बर नियमों में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं।
सेफ हार्बर नियम कर नियमन हैं जो अधिकारियों को निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर करदाता द्वारा घोषित हस्तांतरण मूल्य या आय को बिना किसी विवाद के स्वीकार करने की अनुमति देते हैं। बयान के अनुसार, ''विभिन्न प्रौद्योगिकी सेवा खंडों को एक समान 15.5 प्रतिशत मार्जिन के साथ 'सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं' श्रेणी में एकीकृत किया गया है। पात्रता सीमा 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दी गई है। संशोधन के तहत प्रणाली-संचालित और स्वचालित रूपरेखा भी पेश की गई है, जिससे विस्तृत जांच और प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता कम हो जाती है।'' सीबीडीटी ने कहा, ''एपीए कार्यक्रम, सेफ हार्बर नियमों के साथ मिलकर, कर निश्चितता प्रदान करता है, विवादों को कम करता है और एक पारदर्शी कर व्यवस्था को मजबूत करता है।'' द्विपक्षीय एपीए संभावित या वास्तविक दोहरे कराधान से सुरक्षा का अतिरिक्त लाभ प्रदान करते हैं। सीबीडीटी करदाताओं की सहयोगात्मक भावना को मान्यता देता है और एपीए कार्यक्रम के सफल कार्यान्वयन में संबंधित पक्षों के रूप में उनकी भूमिका को महत्व देता है। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को कीमती धातुओं की कीमतों में लगभग तीन प्रतिशत का उछाल आया। शादी-विवाह के सीजन से पहले जौहरियों की ताजा लिवाली के कारण चांदी 7,000 रुपये चढ़कर 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, और सोना बढ़कर 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी की कीमत 7,000 रुपये, या 3.04 प्रतिशत बढ़कर 2,37,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई, जो शुक्रवार को बाजार बंद होने के समय 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम थी। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 3,700 रुपये या 2.5 प्रतिशत बढ़कर 1,51,500 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया। पिछले बाजार सत्र में सोने की कीमत 1,47,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी। कारोबारियों ने कीमतों में इस सुधार का श्रेय शादियों के सीजन से पहले की गई हाजिर लिवाली और वैश्विक बाजार के अनुकूल रुझानों को दिया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक-जिंस सौमिल गांधी ने कहा कि सोमवार को सोने की कीमतों में सुधार देखने को मिला, जिसे कीमतों में गिरावट के समय की गई लिवाली से समर्थन मिला। वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के घटते प्रतिफल ने कीमती धातुओं के बाजार में समग्र धारणा को बेहतर बनाने में मदद की। उन्होंने कहा कि रुपये की विनिमय दर में आए तेज बदलाव ने भी घरेलू कीमती धातुओं की कीमतों को और अधिक मजबूती प्रदान की। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में सोमवार को रुपये ने दिन में कारोबार के दौरान पहली बार 95 प्रति डॉलर के स्तर को पार किया। हालांकि, बाद में यह कुछ सुधार के साथ बंद हुआ। गांधी ने कहा कि रुपये के कमजोर होने से घरेलू सोने की कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिला।
सोमवार को कीमतों में सुधार के बावजूद, इस महीने सोने-चांदी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। दो मार्च से अब तक सोने की कीमत में 21,300 रुपये, या 12.3 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि चांदी 63,000 रुपये या 21 प्रतिशत तक नीचे आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना 38.68 डॉलर, या लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 4,531.67 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 1.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 70.72 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। मिराए एसेट शेयरखान में जिंस-प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा कि हाजिर सोना बढ़कर लगभग 4,530 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है, क्योंकि यह अभी भी उतार-चढ़ाव भरे और अस्थिर तरीके से कारोबार कर रहा है; व्यापारी डॉलर और तेल की कीमतों पर नज़र रखे हुए हैं। लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध विश्लेषक, गौरव गर्ग ने कहा कि वैश्विक बाजारों में, मौजूदा बढ़त के बावजूद, कुल मिलाकर माहौल सतर्क बना हुआ है, क्योंकि इस महीने सोने में लगभग 16 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई है, जो दशकों में इसकी सबसे बड़ी गिरावट में से एक है। - नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के आवंटन का कोटा बढ़ाकर कुल मांग का 70 प्रतिशत कर दिया है, जो कि पहले 50 प्रतिशत था। इससे उन उद्योगों को राहत मिलेगी, जो कि बड़े स्तर पर अपने संचालन के लिए एलपीजी पर निर्भर है।70 प्रतिशत कोटे में इस्पात, ऑटोमोबाइल, वस्त्र, रंगाई, रसायन और प्लास्टिक जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी क्योंकि ये अन्य आवश्यक उद्योगों को भी सहयोग प्रदान करते हैं।इन क्षेत्रों में, प्रक्रिया उद्योगों या उन उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी जिन्हें हिटिंग के लिए एलपीजी की आवश्यकता होती है और जिनका विकल्प प्राकृतिक गैस नहीं हो सकता।सरकारी आदेश में कहा गया है कि वर्तमान में किए जा रहे 50 प्रतिशत आवंटन के अतिरिक्त, 20 प्रतिशत का और आवंटन प्रस्तावित है, जिससे कुल वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन संकट-पूर्व स्तर के पैक किए गए गैर-घरेलू एलपीजी के 70 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त 20 प्रतिशत आवंटन का लाभ उठाने के लिए, सभी वाणिज्यिक और औद्योगिक एलपीजी उपभोक्ताओं को तेल विपणन कंपनियों के साथ पंजीकरण कराना होगा और अपने-अपने शहरों में शहरी गैस वितरण इकाई के पास पीएनजी के लिए आवेदन करना होगा।इससे पहले 21 मार्च को जारी किए गए अतिरिक्त 20 प्रतिशत आवंटन में रेस्तरां, ढाबे, होटल, औद्योगिक कैंटीन, खाद्य प्रसंस्करण/डेयरी, राज्य सरकार या स्थानीय निकायों द्वारा संचालित रियायती कैंटीन/आउटलेट, सामुदायिक रसोई और प्रवासी श्रमिकों के लिए 5 किलो (मुक्त व्यापार एलपीजी) एफटीएल जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई थी।पेट्रोलियम मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 25 मार्च तक प्रवासी श्रमिकों को 37,000 से अधिक 5 किलो एफटीएल सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।एलपीजी सिलेंडरों का वितरण राज्य सरकारों और जिला अधिकारियों द्वारा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों या उपभोक्ताओं के अपने निर्णय के आधार पर किया जाएगा। इस बीच, ईरान ने संकेत दिया है कि वह एलपीजी ले जाने वाले अधिक भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देगा। यह घटनाक्रम भारत सरकार द्वारा इस मुद्दे पर ईरानी अधिकारियों के साथ हुई बातचीत के बाद सामने आया है।
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नई दिल्ली। सरकार ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के बावजूद, भारत को आज दुनिया भर के अपने 41 से अधिक आपूर्तिकर्ता देशों से पहले की तुलना में अधिक कच्चा तेल प्राप्त हो रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों, विशेष रूप से पश्चिमी देशों से उपलब्ध उच्च मात्रा ने किसी भी व्यवधान की भरपाई कर दी है। भारत की सभी रिफाइनरियां 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर चल रही हैं। इंडियन ऑयल कंपनियों ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली है। आपूर्ति में कोई कमी नहीं है।
आपको बता दें, भारत ऊर्जा सुरक्षा का अगुआ है। भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा पेट्रोलियम शोधक और पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है, जो 150 से अधिक देशों को परिष्कृत ईंधन की आपूर्ति करता है। विश्व का शुद्ध निर्यातक होने के कारण भारत में घरेलू पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता संरचनात्मक रूप से सुनिश्चित है। देश भर में एक लाख से अधिक खुदरा ईंधन दुकानें खुली हैं और बिना किसी रुकावट के ईंधन की आपूर्ति कर रही हैं। किसी भी दुकान को आपूर्ति सीमित करने के लिए नहीं कहा गया है।दुनिया भर में कई देश मूल्य वृद्धि, सीमित आपूर्ति, विषम-सम वाहन प्रतिबंध और जबरन स्टेशन बंद करने जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कुछ ही देशों ने “राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल” घोषित किया है। भारत में ऐसे किसी भी उपाय की आवश्यकता नहीं है। जहां अन्य देश सीमित आपूर्ति कर रहे हैं, वहीं भारत में आपूर्ति की कोई कमी नहीं है।कुछ चुनिंदा पंपों पर छिटपुट रूप से घबराहट में खरीदारी की गई है, वे सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो द्वारा फैलाई गई जानबूझकर गलत सूचना के कारण हुईं। ऐसे पंपों पर मांग में वृद्धि के बावजूद, सभी उपभोक्ताओं को ईंधन की आपूर्ति की गई और तेल कंपनियों के डिपो आपूर्ति बढ़ाने के लिए रात भर चालू रहे। पेट्रोल पंप मालिकों की कार्यशील पूंजी संबंधी समस्याओं के कारण किसी भी पंप पर पेट्रोल और डीजल की कमी न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोल पंपों को दी जाने वाली क्रेडिट अवधि को पहले की एक दिन की अनुमति से बढ़ाकर 3 दिन से अधिक करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं।दरअसल, कुछ लेखों और सोशल मीडिया वीडियो के माध्यम से गलत सूचना फैलाई जा रही है, जिसमें यह बताया जा रहा है कि देश में केवल 6 दिनों का ही भंडार है। भारत की कुल भंडार क्षमता 74 दिनों की है और पश्चिम एशिया संकट के 27वें दिन भी वास्तविक भंडार लगभग 60 दिनों का है (जिसमें कच्चे तेल का भंडार, उत्पाद भंडार और भूमिगत गुफाओं में समर्पित रणनीतिक भंडारण शामिल है)। वैश्विक स्तर पर चाहे जो भी हो, प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए लगभग दो महीने की स्थिर आपूर्ति उपलब्ध है। सरकार का कहना है कि अगले दो महीनों के कच्चे तेल की खरीद भी सुनिश्चित कर ली गई है। भारत अगले कई महीनों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है और ऐसी आपूर्ति स्थिति में रणनीतिक भूमिगत गुफाओं में भंडार की मात्रा गौण हो जाती है। इसलिए, भारत के भंडार के समाप्त या अपर्याप्त होने के किसी भी दावे को पूरी तरह से खारिज किया जाता है। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी कम करने का ऐलान किया है। इसके बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी कम होकर 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर शून्य हो गई है। इसका उद्देश्य अमेरिका, इजरायल-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में आए उछाल के प्रभाव को सीमित करना है।सरकार ने ईंधन के निर्यात और विदेशी विमानों को आपूर्ति किए जाने वाले ईंधन पर भी एक्साइज शुल्क में छूट प्रदान की है।
इसके अलावा, केंद्र ने 2022 की एक पूर्व अधिसूचना को रद्द कर दिया है और आयातित विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर एक्साइज ड्यूटी में राहत प्रदान की है।उम्मीद की जा रही है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) बढ़ते नुकसान की भरपाई के लिए इस कटौती को स्वयं समायोजित करेंगी। अनुमान है कि ओएमसी को वर्तमान में ईंधन की बिक्री पर लगभग 48.8 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है, जिसका मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि है।मध्यू पूर्व में तनाव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। बीते एक महीने में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम करीब 40 प्रतिशत बढ़ चुका है। फिलहाल यह 101 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है।सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट रूप से कहा कि भारत में पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। सरकार ने नागरिकों से अपील की कि वे “जानबूझकर चलाए जा रहे दुर्भावनापूर्ण और सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान” से गुमराह न हों, जिसका उद्देश्य अनावश्यक दहशत फैलाना है।पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि भारत के पास कुल 74 दिनों का भंडार है और वर्तमान में लगभग 60 दिनों का वास्तविक स्टॉक है (जिसमें कच्चे तेल का भंडार, उत्पाद भंडार और गुफाओं में बनाए गए विशेष रणनीतिक भंडारण शामिल हैं)। मंत्रालय ने यह भी कहा कि “मध्य पूर्व संकट का आज 27वां दिन है”, और सभी रिटेल फ्यूल आउटलेट्स पर पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है। रुपए -
नोएडा. ऊर्जा और बुनियादी ढांचा समूह जैकसन ग्रुप ने भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को अपना पहला ब्रांड दूत बनाया है । गांगुली इस करार के तहत जैकसन समूह के प्रमुख ब्रांड अभियानों और रणनीतिक पहल में कंपनी का प्रतिनिधित्व करेंगे । गांगुली ने इस मौके पर कहा ,'' वितरित ऊर्जा, सौर ऊर्जा, हरित अणु और बुनियादी ढांचे जैसे ऊर्जा, मेट्रो, सिविल और पानी को लेकर जैकसन का विजन सामयिक और प्रभावी है । मैं एक ऐसे ब्रांड के साथ जुड़कर उत्साहित हूं जो भारत के ऊर्जा बदलाव और एक हरित भविष्य में सार्थक योगदान दे रहा है ।
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नयी दिल्ली. एयरटेल अफ्रीका ने बुधवार को घोषणा की कि सुनील भारती मित्तल जुलाई, 2026 में कंपनी की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के समापन के साथ निदेशक मंडल के चेयरमैन पद से सेवानिवृत्त हो जाएंगे। गोपाल विट्टल को उसी तिथि से गैर-कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त किया गया है, जबकि श्राविन भारती मित्तल डिप्टी चेयरमैन का पदभार संभालेंगे। श्राविन मित्तल के डिप्टी चेयरमैन का पदभार संभालने से एयरटेल अफ्रीका के संस्थापक परिवार और महत्वपूर्ण शेयरधारक के साथ निरंतरता सुनिश्चित होगी। एयरटेल अफ्रीका 14 देशों में दूरसंचार और मोबाइल मनी सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी ने बयान में कहा, ''सुनील भारती संस्थापक परिवार और महत्वपूर्ण शेयरधारक के साथ निरंतरता सुनिश्चित करेंगे और एयरटेल मनी बोर्ड, जिसके वह मित्तल ने बोर्ड को सूचित किया है कि वह इस वर्ष की सालाना आम बैठक समाप्त होने के साथ जुलाई, 2026 में निदेशक मंडल (बोर्ड) के चेयरमैन पद से सेवानिवृत्त होना चाहते हैं।'' एयरटेल अफ्रीका ने कहा कि मित्तल 2019 से चेयरमैन के रूप में कार्यरत हैं और बोर्ड इस अवधि के दौरान उनके नेतृत्व और योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद देता है। कंपनी ने कहा कि विट्टल की नियुक्ति कंपनी में नियंत्रक शेयरधारकों के नामांकन द्वारा की गई है। यह कंपनी, भारती एयरटेल, एयरटेल अफ्रीका मॉरीशस लिमिटेड (बहुसंख्यक शेयरधारक और भारती एयरटेल की एक अप्रत्यक्ष अनुषंगी कंपनी) और भारती टेलीकॉम के बीच 17 जून, 2019 को हुए संबंध समझौते की शर्तों के अनुरूप है। विट्टल को अक्टूबर, 2024 में एयरटेल अफ्रीका का गैर-कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया था। बयान में कहा गया है कि श्राविन भारती मित्तल उसी तिथि से डिप्टी चेयरमैन का पदभार ग्रहण करेंगे।
बयान के अनुसार, ''डिप्टी चेयरमैन के रूप में मित्तल सदस्य हैं और दुबई स्थित एयरटेल अफ्रीका के मुख्यालय, जहां वह रहते हैं, के साथ बोर्ड के संपर्क सूत्र के रूप में कार्य करेंगे।'' कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशकों के संबंध में चल रही उत्तराधिकार योजना के तहत, सात वर्षों से अधिक समय तक सेवा देने के बाद, जुलाई में होने वाली वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के समापन पर अन्निका पोटियानेन भी सेवानिवृत्त हो जाएंगी। सुनील मित्तल ने एयरटेल अफ्रीका के बोर्ड को उनके सभी समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि कंपनी के पास एक ठोस रणनीति और एक उत्कृष्ट नेतृत्व टीम है, जिसकी मजबूती हाल के परिणामों में स्पष्ट है। दूरसंचार उद्योग के दिग्गज मित्तल ने कहा, ''इसलिए मुझे विश्वास है कि अब मेरे लिए चेयरमैन पद से हटने का समय आ गया है। इस क्षमता में एयरटेल अफ्रीका का नेतृत्व करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है और मुझे पता है कि कंपनी 14 अफ्रीकी देशों में लाखों ग्राहकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करते हुए आगे बढ़ती रहेगी।'' मित्तल ने यह भी कहा कि कंपनी के अनुरोध पर वह सहयोग देने के लिए उपलब्ध रहेंगे। -
नयी दिल्ली. सरकारी तेल कंपनियों ने बुधवार को कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है। साथ ही उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर विश्वास न करने तथा घबराहट में ईंधन खरीदने से बचने की अपील की। देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी 'इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन' (आईओसी) ने कहा, ''पेट्रोल या डीजल की कोई कमी नहीं है। '' कंपनी ने बताया कि उसके पेट्रोल पंप पर्याप्त ईंधन से भरे हैं और पूरी तरह संचालित हैं।
आईओसी ने आगाह किया कि अफवाहें अनावश्यक चिंता पैदा कर सकती हैं और सामान्य आपूर्ति व्यवस्था को बाधित कर सकती हैं। कंपनी ने लोगों से घबराहट में खरीदारी से बचने और केवल सत्यापित जानकारी पर भरोसा करने को कहा है। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी की खबरों को ''पूरी तरह निराधार'' बताया और कहा कि पूरे देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। कंपनी ने कहा कि भारत पेट्रोल एवं डीजल का शुद्ध निर्यातक है और उसके पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल तथा विमानन ईंधन (एटीएफ) का पर्याप्त भंडार है। आपूर्ति श्रृंखला बिना किसी व्यवधान के सुचारु रूप से जारी है। बीपीसीएल ने कहा कि कंपनी पूरी तरह संचालित है और निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने भी कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति स्थिर है तथा भंडार पर्याप्त है। कंपनी ने ग्राहकों को अफवाहों से गुमराह न होने एवं घबराहट में खरीदारी न करने की सलाह देते हुए कहा कि वे सामान्य खपत 'पैटर्न' बनाए रखें। एचपीसीएल ने अपने नेटवर्क में निर्बाध और सुचारु ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हुई हैं। हालांकि विविध स्रोतों से आयात के कारण भारत पश्चिम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अमेरिका से पर्याप्त कच्चा तेल हासिल करने में सफल रहा है। कतर में भारत के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता की गैस सुविधाएं युद्ध से प्रभावित होने के कारण द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति में बाधा आई है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं और सीएनजी (संपीड़ित प्राकृतिक गैस) को प्राथमिकता दी गई जबकि उर्वरक संयंत्र जैसे औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति कुछ हद तक सीमित की गई है। युद्ध का सबसे अधिक असर एलपीजी पर पड़ा है, क्योंकि देश अपनी कुल मांग का लगभग 60 प्रतिशत आयात से पूरा करता है। इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जहां से आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस स्थिति में सरकार ने घरेलू रसोई गैस आपूर्ति को प्राथमिकता दी और होटल-रेस्तरां जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए एलपीजी उपयोग को कम से कम आधा कर दिया गया है। - नयी दिल्ली। मजबूत वैश्विक रुख के बीच राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बुधवार को बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में पांच प्रतिशत तक की तेजी आई। इस तेजी के कारण चांदी 11,250 रुपये चढ़कर 2.41 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, जबकि सोना 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी की कीमत 11,250 रुपये या 4.89 प्रतिशत बढ़कर 2,41,250 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई, जो मंगलवार के बंद भाव 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक है। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत भी 4,900 रुपये या 3.38 प्रतिशत बढ़कर 1,49,700 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गई। सर्राफा बाजार में सोने का पिछला बंद भाव 1,44,800 रुपये प्रति 10 ग्राम था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक-जिंस सौमिल गांधी ने कहा कि बुधवार को घरेलू बाजारों में सोने की कीमतों में तेजी आई, जो हाल के सत्रों में एक मजबूत सुधार का संकेत है। इसे बेहतर भू-राजनीतिक माहौल से बल मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर सोना 82.17 डॉलर या लगभग दो प्रतिशत बढ़कर 4,556.55 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी दो प्रतिशत की तेजी के साथ 72.67 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक प्रवीण सिंह ने कहा कि हाजिर सोने में लगातार दूसरे दिन तेजी जारी रही और यह लगभग 4,550 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि निवेशकों को अमेरिका के साथ ईरान के संभावित संघर्षविराम की उम्मीद जगी है, जिसके कारण कच्चे तेल और डॉलर की कीमतों में गिरावट आई है।
- नयी दिल्ली. सामान की फटाफट आपूर्ति करने वाले मंच जेप्टो ने मंगलवार को अपने ऐप पर 'पे लेटर' (बाद में भुगतान) और ताजा सब्जियों की असली तस्वीरें देखने जैसी कई नई सुविधाएं शुरू की हैं। कंपनी अब अपना ध्यान केवल '10 मिनट में डिलिवरी' से हटाकर ग्राहकों की जरूरतों और सुविधा पर केंद्रित कर रही है। कंपनी का कहना है कि अब मुकाबला केवल तेजी से सामान पहुंचाने का नहीं, बल्कि ग्राहकों की रोजमर्रा की खरीदारी को आसान और स्मार्ट बनाने का है। इस नई सुविधा के तहत ग्राहकों को 15 दिन का 'ब्याज-मुक्त' समय मिलेगा। यानी ग्राहक सामान आज मंगा सकते हैं और उसका भुगतान 15 दिन बाद कर सकते हैं। यह सुविधा विशेष रूप से छोटे और बार-बार होने वाले ऑर्डर के लिए बनाई गई है। इसमें भुगतान के लिए किसी ओटीपी की जरूरत नहीं होगी। कंपनी के अनुसार, इसके जरिये 10,000 रुपये तक की तत्काल क्रेडिट सीमा (उधार) दी जा रही है।जेप्टो के ऐप पर पर अब ग्राहक सब्जियों और फलों की केवल पुरानी कैटलॉग तस्वीरें नहीं, बल्कि अपने नजदीकी स्टोर में मौजूद ताजा सामान की असली और ताजी तस्वीरें देख सकेंगे। इससे ऑनलाइन खरीदारी में भरोसे की कमी दूर होगी। अक्सर ऑर्डर देने के बाद याद आता है कि कुछ छूट गया है। अब जेप्टो ग्राहकों को ऑर्डर देने के कुछ समय बाद तक उसमें नए सामान जोड़ने की सुविधा भी देगी।
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मीशो ने पेश किया 'वाणी' डिजिटल सहायक
बेंगलुरु. ई-कॉमर्स मंच मीशो ने मंगलवार को 'वाणी' नाम से कृत्रिम मेधा (एआई) पर आधारित एक ऐसी सुविधा शुरू करने की घोषणा की है, जो बोलकर खरीदारी करने में ग्राहकों की मदद करेगी। इस डिजिटल सहायक के जरिये कंपनी का लक्ष्य उन 50 करोड़ संभावित ग्राहकों तक पहुंचना है, जो फिलहाल इंटरनेट के जरिये सामान मंगाने में हिचकिचाते हैं। "वाणी - आपकी मीशो दोस्त" नाम का यह सहायक उन लोगों के लिए बनाया गया है जिन्हें ऐप पर टाइप करना, फिल्टर लगाना या कीवर्ड के जरिये सामान खोजना मुश्किल लगता है। कंपनी के मुताबिक, यह अनूठी सेवा ग्राहकों को अपनी आम बोलचाल की भाषा में बात करके सामान खोजने, सवाल पूछने और खरीदारी पूरी करने की आजादी देती है। यह बिल्कुल वैसा ही अनुभव होगा जैसे किसी दुकान पर जाकर मुंह जुबानी सामान खरीदा जाता है। फरवरी, 2026 में इसके पहले चरण के परीक्षण के दौरान लगभग 15 लाख ग्राहकों ने इसका उपयोग किया।
मीशो का कहना है कि इसके इस्तेमाल से बिक्री में 22 प्रतिशत का उछाल देखा गया और सामान वापस करने या ऑर्डर कैंसिल करने के मामलों में भी कमी आई है। सॉफ्टबैंक के निवेश वाली यह कंपनी फिलहाल 'वाणी' को हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध करा रही है। आने वाले समय में इसे देश की अन्य प्रादेशिक भाषाओं में भी धीरे-धीरे पेश किया जाएगा। -
मुंबई. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अमेरिका द्वारा नई व्यापार जांच के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई ) के बुलेटिन में सोमवार को यह बात कही गई। बुलेटिन में प्रकाशित अर्थव्यवस्था की स्थिति पर लेख में कहा गया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी झटकों से निपटने के लिए पर्याप्त है। बुलेटिन के अनुसार, वित्त 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पद (जीडीपी) के दूसरे अग्रिम अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति को दर्शाते हैं। इसमें कहा गया, ''अर्थव्यवस्था की स्थिति का संकेतक देने वाले आंकड़े फरवरी में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने का संकेत दे रहे हैं।'' बुलेटिन में कहा गया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई फरवरी में खाद्य और पेय पदार्थों की कीमतों के कारण बढ़ी। इसमें कहा गया है कि प्रणाली में नकदी की स्थिति संतोषजनक बनी रही और वाणिज्यिक क्षेत्र को मिलने वाले कुल वित्तीय संसाधनों में वृद्धि हुई, जिसमें बैंक और गैर-बैंक दोनों स्रोतों से वित्तपोषण बढ़ा। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने कहा कि लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखकों के हैं और भारतीय रिजर्व बैंक के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जनवरी में हाजिर मुद्रा बाजार से शुद्ध रूप से 2.53 अरब डॉलर की खरीदारी की। आरबीआई ने सोमवार को जारी अपने मासिक बुलेटिन में यह कहा। केंद्रीय बैंक ने अमेरिकी डॉलर की यह खरीद लगातार सात महीनों की शुद्ध डॉलर बिक्री के बाद की है। आरबीआई ने पिछली बार, मई, 2025 में हाजिर मुद्रा बाजार से 1.76 अरब अमेरिकी डॉलर की खरीद की थी।
मासिक बुलेटिन के आंकड़ों के अनुसार, आरबीआई ने दिसंबर में 10.02 अरब अमेरिकी डॉलर, नवंबर में 9.71 अरब अमेरिकी डॉलर, अक्टूबर में 11.88 अरब अमेरिकी डॉलर, सितंबर में 7.91 अरब अमेरिकी डॉलर, अगस्त में 7.69 अरब अमेरिकी डॉलर, जुलाई में 2.54 अरब अमेरिकी डॉलर और जून में 3.66 अरब अमेरिकी डॉलर की शुद्ध बिक्री की। सकल आधार पर केंद्रीय बैंक ने जनवरी में 27.99 अरब अमेरिकी डॉलर की खरीद और 25.473 अरब अमेरिकी डॉलर की बिक्री की। विदेशी निवेश और भारत-अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा से फरवरी के पहले सप्ताह में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ और उसके बाद लगभग स्थिर बना रहा। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार में बढ़ती अस्थिरता के कारण मार्च में अब तक (20 मार्च तक) रुपये की विनिमय दर पर दबाव पड़ा और उसमें गिरावट आई है। -
नयी दिल्ली. सरकार ने गैस वितरण को सुव्यवस्थित करने और आपूर्ति दबाव को कम करने के लिए कदम तेज कर दिए हैं। इसके तहत शहरों में पाइपलाइन गैस परियोजनाओं (सीएनजी/पीएनजी) के आवेदन तेजी से निपटाने और प्रमुख क्षेत्रों को वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाने का निर्देश दिया गया है, ताकि चुनौतीपूर्ण वैश्विक भू-राजनीतिक हालात के बीच घरेलू और व्यावसायिक जरूरतों को पूरा किया जा सके। एक आधिकारिक बयान के अनुसार पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) ने अपने कार्यालयों को निर्देश दिया है कि वे शहर गैस वितरण (सीजीडी) के सभी आवेदन केवल 10 दिनों में निपटाएं। इसका उद्देश्य पाइपलाइन के माध्यम से प्राकृतिक गैस की व्यवस्था को तेजी से शुरू करना है। बड़े शहरों और शहरी क्षेत्रों में व्यावसायिक एलपीजी उपभोक्ताओं को भी एलपीजी पर निर्भरता कम करने की व्यापक रणनीति के तहत पाइप के जरिये आपूर्ति की जाने वाली रसोई गैस (पीएनजी) की ओर स्थानांतरित होने की सलाह दी गई है। बयान के अनुसार, घरेलू एलपीजी की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है, वितरकों के पास गैस की कमी की कोई सूचना नहीं है और देशभर में वितरण सामान्य रूप से हो रहा है। साथ ही, अधिकांश आपूर्ति वितरण प्रमाणीकरण कोड (डीएसी) के माध्यम से की जा रही है और पहले जैसी अचानक खरीदारी की स्थिति अब कम हो गई है।
- नयी दिल्ली. अमेजन भारत को एक दीर्घकालिक निवेश बाजार के रूप में देखती है, जहां ई-कॉमर्स अभी भी अपने शुरुआती चरण में है। कंपनी के एक वरिष्ठ कार्यकारी ने कहा कि मजबूत व्यापक आर्थिक आधार और सकारात्मक उपभोक्ता धारणा के दम पर यहां वृद्धि की पर्याप्त गुंजाइश है। अमेजन के भारत और ऑस्ट्रेलिया के परिचालन उपाध्यक्ष अभिनव सिंह ने कहा कि कंपनी ने हाल में 12.5 करोड़ उत्पादों पर 'शून्य रेफरल शुल्क' का विस्तार किया है, जिस पर विक्रेताओं से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है।उन्होंने कहा, ''विक्रेता न केवल शुल्क कटौती से उत्साहित हैं, बल्कि वे इन लाभ को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए भी उत्सुक हैं। इससे बाजार में बेहतर कीमतें मिल सकेंगी। साथ ही, वे अपना मार्जिन भी सुधार पा रहे हैं।'' सिंह ने बताया कि भारत के लिए कंपनी का नजरिया बेहद मजबूत है। उन्होंने कहा, ''हमारा मानना है कि भारत में ई-कॉमर्स अभी बस शुरू ही हुआ है। यह कुल खुदरा बाजार का महज एक छोटा हिस्सा है, और हमारे लिए बढ़ने की जबर्दस्त गुंजाइश है।'' बीजीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ई-कॉमर्स बाजार इस समय 120-140 अरब डॉलर का है और यह 2030 तक 280-300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि अमेजन भारत की युवा आबादी और तेजी से बढ़ते सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को लेकर बहुत आशान्वित है। अमेजन ने हाल ही में 2030 तक भारत में अपने व्यवसायों में 35 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की घोषणा की है, जो इस बाजार में पहले से निवेश किए गए करीब 40 अरब डॉलर के अतिरिक्त होगा। दिसंबरख् 2025 की घोषणा के अनुसार, यह निवेश एआई-संचालित डिजिटलीकरण, निर्यात वृद्धि और रोजगार सृजन जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगा।
- नयी दिल्ली, एक्सिस बैंक अपनी एनबीएफसी इकाई एक्सिस फाइनेंस लिमिटेड (एएफएल) में कारोबार वृद्धि के लिए अगले एक वर्ष में राइट्स इश्यू के माध्यम से 1,500 करोड़ रुपये निवेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बैंक ने बुधवार शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि उसके निदेशक मंडल की अधिग्रहण, विनिवेश एवं विलय समिति ने 18 मार्च 2026 को हुई बैठक में 31 मार्च 2027 से पहले एक या अधिक किश्तों में एएफएल में 1,500 करोड़ रुपये निवेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। कंपनी ने कहा कि यह निवेश एएफएल के राइट्स इश्यू के जरिये किया जाएगा।एएफएल, बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी है। बैंक ने कहा कि 31 मार्च 2027 तक एक या अधिक किश्तों में 1,500 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 10 मार्च 2026 को पत्र के माध्यम से मंजूरी दी थी। एएफएल का कारोबार वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में 2,504 करोड़ रुपये रहा जबकि समूचे वित्त वर्ष 2024-25 में यह 4,296 करोड़ रुपये रहा था।
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नई दिल्ली। एयर इंडिया ग्रुप ने पश्चिम एशिया क्षेत्र से भारत आने-जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट जारी किया है। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस मिलकर 18 मार्च 2026 को कुल 50 उड़ानें (शेड्यूल और नॉन-शेड्यूल) संचालित करेंगे। यह फैसला क्षेत्र में बढ़ती यात्री मांग और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
18 मार्च को जेद्दा और मस्कट से एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस अपनी नियमित शेड्यूल सेवाएं जारी रखेंगी। जेद्दा-भारत रूट पर कुल 14 उड़ानें संचालित होंगी। इसमें एयर इंडिया दिल्ली और मुंबई से एक-एक राउंड ट्रिप सेवा देगी। वहीं एयर इंडिया एक्सप्रेस बेंगलुरु, हैदराबाद और मंगलौर से एक-एक उड़ान संचालित करेगी, जबकि कोझिकोड से दो उड़ानें चलाई जाएंगी। मस्कट से एयर इंडिया एक्सप्रेस 12 शेड्यूल उड़ानें संचालित करेगी, जिनमें कन्नूर, कोच्चि, लखनऊ और तिरुवनंतपुरम जैसे शहर शामिल हैं।शेड्यूल सेवाओं के अलावा, एयर इंडिया ग्रुप संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब से कुल 24 नॉन-शेड्यूल (एड-हॉक) उड़ानें भी संचालित करेगा। ये उड़ानें स्लॉट उपलब्धता, हवाई यातायात नियंत्रण और अन्य ऑपरेशनल परिस्थितियों पर निर्भर करेंगी। सभी उड़ानों के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और संबंधित देशों के नियामक प्राधिकरणों से आवश्यक अनुमतियां ली गई हैं।एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि उत्तरी अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उसकी सभी उड़ानें सामान्य शेड्यूल के अनुसार संचालित हो रही हैं। हालांकि, जिन यात्रियों की उड़ानें अस्थायी रूप से प्रभावित हुई हैं, उन्हें विशेष राहत दी जा रही है। ऐसे यात्री बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपनी उड़ान रीबुक कर सकते हैं या पूरा रिफंड ले सकते हैं।एयर इंडिया ने यात्रियों से अपील की है कि वे रीबुकिंग या कैंसिलेशन के लिए एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अनुरोध दर्ज करें। अधिक जानकारी के लिए 24×7 हेल्पलाइन नंबर +91-11-69329333 और +91-11-69329999 पर संपर्क किया जा सकता है।एयर इंडिया एक्सप्रेस के यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा दी गई है। यूएई के किसी भी स्टेशन से भारत के किसी भी गंतव्य के लिए अतिरिक्त कमर्शियल उड़ानों पर बिना अतिरिक्त शुल्क के रीबुकिंग की जा सकती है। एयरलाइन प्रभावित यात्रियों से सक्रिय रूप से संपर्क कर रही है और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों पर रीबुकिंग विकल्प भेज रही है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपना मोबाइल नंबर अपडेट रखें, ताकि समय पर जरूरी जानकारी मिल सके।

















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