सेवा संकल्प अभियान- दर्द से राहत और जीवन को नई उम्मीद
0- जिला अस्पताल में पहली बार हुआ घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण का सफल ऑपरेशन
बालोद. स्वास्थ्य सुविधाओं को आम जनता तक पहुँचाने और शासकीय स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में जिला चिकित्सालय बालोद ने एक नया इतिहास रचा है। जिले के इतिहास में पहली बार एक ही दिन में ’घुटना प्रत्यारोपण’ (नी- रिसप्लेसमेंट) और ’कूल्हा प्रत्यारोपण’ (हिप-रिसप्लेसमेंट) का अत्यंत जटिल एवं सफल ऑपरेशन किया गया।
जमुनाबाई को वर्षों पुराने दर्द से मिली मुक्ति
ग्राम परसतराई निवासी 54 वर्षीया श्रीमती जमुनाबाई बीते कई वर्षों से घुटनों के असहनीय दर्द से जूझ रही थीं। चलना-फिरना तो दूर, दैनिक कार्यों के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। जब उन्होंने जिला अस्पताल बालोद में अस्थि रोग विशेषज्ञ को दिखाया, तब एक्स-रे जांच में पता चला कि उनके दोनों घुटनों की हड्डियाँ पूरी तरह घिस चुकी हैं। चिकित्सकों की आत्मीयता और देखरेख ने उनमें ऑपरेशन कराने का हौसला जगाया।
जड़ी-बूटी से नहीं मिला आराम, तो अस्पताल बनी रामप्रसाद की अंतिम उम्मीद
वहीं ग्राम जुंगेरा निवासी 43 वर्षीय श्री रामप्रसाद एक महीने पहले छत से गिर गए थे, जिससे उनके कूल्हे की हड्डी बुरी तरह टूट गई थी। शुरुआत में उन्होंने पारंपरिक जड़ी-बूटियों और देशी इलाज का सहारा लिया, लेकिन स्थिति बिगड़ने और असहनीय दर्द होने पर उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया। चिकित्सकों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित जांच की और कूल्हे के जोड़ के प्रत्यारोपण की सलाह दी।
चिकित्सकों का सेवा भाव और समर्पण
कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.एल. उइके तथा सिविल सर्जन डॉ. आर. के. श्रीमाली के कुशल मार्गदर्शन में कल 23 सितंबर को दोनों मरीजों के सभी आवश्यक परीक्षण पूर्ण किए गए।
अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज कुमार सोरी के नेतृत्व में पूरी चिकित्सकीय टीम ने पूरी लगन, संवेदनशीलता और सेवा भाव के साथ श्रीमती जमुनाबाई के दोनों घुटनों का तथा श्री रामप्रसाद के कूल्हे का सफल प्रत्यारोपण किया।
इस समर्पित टीम में डॉ. पंकज कुमार सोरी के साथ डॉ. अविनाश मण्डावी, डॉ. एन.के. साहू, डॉ. कल्याण, श्रीमती एस. देवदास, श्रीमती पिंकी साहू, श्रीमती एस. नेताम, श्रीमती संगीता सोनी, श्री चैतराम, श्रीमती भगवती अमरिया एवं समस्त नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मरीजों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
महंगे निजी अस्पतालों की तुलना में शासकीय योजनाओं के माध्यम से जिला अस्पताल में ही यह जटिल और खर्चीला इलाज निःशुल्क व सुलभ रूप से उपलब्ध होने पर दोनों मरीजों एवं उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है। इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि सेवा भाव और दृढ संकल्प हो, तो जिला स्तर पर भी बड़े-बड़े निजी अस्पतालों जैसी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं। ऐसे समर्पित सेवा भाव के लिए मरीजों और उनके परिजनों ने मुक्तकंठ से शासन-प्रशासन सहित जिला अस्पताल प्रबंधन को धन्यवाद दिया।











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