भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक विरासत का ऐतिहासिक आदान-प्रदान
नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक सहयोग को नई मजबूती मिली है। ऑस्ट्रेलिया के ‘फर्स्ट नेशंस’ (आदिवासी) समुदाय के पूर्वजों के अवशेष भारत से वापस लौटाए जाएंगे, जबकि ऑस्ट्रेलिया भी भारत की कई महत्वपूर्ण कलात्मक और ऐतिहासिक वस्तुएं स्वेच्छा से भारत को सौंपेगा। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने गुरुवार को इस महत्वपूर्ण सांस्कृतिक समझौते की घोषणा की।
मुख्य बातें:
– चेन्नई के गवर्नमेंट म्यूजियम में संरक्षित ऑस्ट्रेलियाई फर्स्ट नेशंस समुदाय के एक पूर्वज के अवशेष भारत सरकार स्वेच्छा से और बिना किसी शर्त के ऑस्ट्रेलिया को लौटा रही है।
– ऑस्ट्रेलिया की नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया और आर्ट गैलरी ऑफ न्यू साउथ वेल्स में रखी भारत की कई कलात्मक एवं ऐतिहासिक वस्तुएं भारत को वापस लौटाई जाएंगी।ऑस्ट्रेलियाई पीएमओ ने इस विकास को “ऐतिहासिक न्याय और मेल-मिलाप की दिशा में महत्वपूर्ण कदम” बताया।
दोनों देशों की प्रतिक्रियाएं
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस निर्णय की सराहना की और कहा कि दोनों देशों का साझा इतिहास लोगों को जोड़ता है तथा सांस्कृतिक सहयोग इन संबंधों को और गहरा बना रहा है। ऑस्ट्रेलिया के कला मंत्री टोनी बर्क ने कहा कि यह आदान-प्रदान दोनों देशों के साझा मूल्यों और आपसी सम्मान का प्रतीक है। स्वदेशी ऑस्ट्रेलियाई मामलों की मंत्री मलांडिरी मैक्कार्थी ने इसे “अतीत की गलतियों को सुधारने” की दिशा में बड़ा कदम बताया और भारत के सहयोग की प्रशंसा की।
दोनों पक्षों का बयान
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कहा कि फर्स्ट नेशंस पूर्वजों की वापसी उनके समुदायों के लिए अत्यंत सम्मानजनक और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है। साथ ही, भारत की सांस्कृतिक वस्तुओं की वापसी नैतिक संग्रह और संग्रहालय प्रबंधन के उच्चतम मानकों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री अल्बानीज़ की मौजूदगी में हो रहे तीसरे ऑस्ट्रेलिया-भारत वार्षिक लीडर्स समिट के दौरान हुआ है, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक और सांस्कृतिक साझेदारी को नई ऊंचाई दे रहा है।










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