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- -जगदलपुर में एथलेटिक्स में ओडिशा ने चार और झारखंड ने दो स्वर्ण जीते-छत्तीसगढ़ के गजेंद्र ठाकुर ने 800 मीटर में रजत, पुरुष हॉकी टीम को कांस्य, मेजबान पुरुष फुटबॉल टीम फाइनल मेंरायपुर । छत्तीसगढ़ में आयोजित खेलों इंडिया ट्राइबल गेम्स के आठवें दिन आज जगदलपुर में एथलेटिक्स में ओडिशा ने चार और झारखंड ने दो स्वर्ण जीते, तो वहीं छत्तीसगढ़ के गजेंद्र ठाकुर ने 800 मीटर में रजत, पुरुष हॉकी टीम ने कांस्य जीता। मेजबान छत्तीसगढ़ की पुरुष फुटबॉल टीम फाइनल में पहुंच गई है।रेस वॉकर दशरथ तलवार और मिडिल-डिस्टेंस धाविका नागिनी के स्वर्ण पदकों की बदौलत कर्नाटक ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के आठवें दिन अपनी बढ़त और मजबूत कर ली। वहीं छत्तीसगढ़ के गजेंद्र ठाकुर ने पुरुष 800 मीटर में रजत पदक जीता और पुरुष हॉकी टीम ने कांस्य पदक हासिल किया।जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर एथलेटिक्स ट्रैक पर दशरथ तलवार ने 45:13.85 के समय के साथ पुरुष 10 किमी रेस वॉक में कर्नाटक को 1-2 की बढ़त दिलाई। उनके साथी दर्शन बगाड़ी (46:25.90) दूसरे स्थान पर रहे, जबकि गुजरात के सागरभाई कटारा (48:16.09) तीसरे स्थान पर रहे।जगदलपुर में एथलेटिक्स में ओडिशा ने चार और झारखंड ने दो स्वर्ण जीतेइसके बाद नागिनी ने महिलाओं की 800 मीटर दौड़ में 2:13.80 का समय निकालते हुए स्वर्ण पदक जीता, जिससे कर्नाटक के स्वर्ण पदकों की संख्या 21 हो गई। कर्नाटक ने अब तक आठ रजत और सात कांस्य सहित कुल 36 पदक जीत लिए हैं।छत्तीसगढ़ के गजेंद्र ठाकुर ने पुरुष 800 मीटर में 1:53.82 के समय के साथ रजत पदक हासिल किया। इस स्पर्धा में ओडिशा के दावनिधि मुंडा ने 1:53.33 के समय के साथ स्वर्ण जीता।अपने प्रदर्शन से खुश ठाकुर ने बताया कि उन्होंने एथलेटिक्स में प्रशिक्षण केवल एक साल पहले शुरू किया था। उन्होंने साई मीडिया से कहा, "मैं बिलासपुर के SAI ट्रेनिंग सेंटर में कबड्डी ट्रायल देने आया था, लेकिन मेरी फिटनेस देखकर कोचों ने मुझे ट्रैक इवेंट्स में जाने की सलाह दी। अपने घर में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में पहला राष्ट्रीय स्तर का पदक जीतकर मैं बेहद खुश हूं।"इससे पहले, छत्तीसगढ़ की पुरुष हॉकी टीम ने पड़ोसी मध्य प्रदेश को 14-6 से हराकर कांस्य पदक जीता। इन दो पदकों के साथ छत्तीसगढ़ की कुल पदक संख्या दो स्वर्ण, आठ रजत और पांच कांस्य हो गई है और टीम समग्र तालिका में 10वें स्थान पर है।एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं के सिर्फ एक दिन शेष रहने के बीच, दूसरे स्थान पर काबिज ओडिशा ने बुधवार को चार स्वर्ण पदक जीतकर अपनी चुनौती बरकरार रखी। ओडिशा के लिए दावनिधि मुंडा (पुरुष 800 मीटर), रोशन खड़िया (पुरुष 400 मीटर हर्डल्स), दीपा किसान (महिला हाई जंप) और धनमती जेस (महिला भाला फेंक) ने स्वर्ण पदक जीते।वहीं झारखंड ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स और 10 किमी रेस वॉक में दो स्वर्ण पदक हासिल कर पदक तालिका में अपना तीसरा स्थान मजबूत किया। झारखंड के अब कुल 19 पदक हो गए हैं, जिनमें नौ स्वर्ण, तीन रजत और सात कांस्य शामिल हैं।उधर, रायपुर के विवेकानंद कोटा स्टेडियम में खेले गए फुटबॉल सेमीफाइनल मुकाबलों में पश्चिम बंगाल ने गोवा को 5-2 से हराकर फाइनल में जगह बनाई, जबकि छत्तीसगढ़ ने रोमांचक मुकाबले में अरुणाचल प्रदेश को 3-2 से पराजित कर खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया।ओडिशा के लिए दावनिधि मुंडा (पुरुष 800 मीटर), रोशन खड़िया (पुरुष 400 मीटर हर्डल्स), दीपा किसान (महिला हाई जंप) और धनमती जेस (महिला भाला फेंक) ने स्वर्ण पदक जीते। वहीं झारखंड ने भी महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स और 10 किमी रेस वॉक में दो स्वर्ण जीतकर पदक तालिका में अपना तीसरा स्थान मजबूत किया।झारखंड के अब कुल 19 पदक हो गए हैं, जिनमें नौ स्वर्ण, तीन रजत और सात कांस्य शामिल हैं।परिणामएथलेटिक्समहिला वर्ग400 मीटर हर्डल्स: शिवानी कुमार (झारखंड) 1:02.06 सेकंड; रजत – आदित्य केएम (केरल) 1:04.60 सेकंड; कांस्य – बसंती माझी (ओडिशा) 1:05.89 सेकंड800 मीटर: स्वर्ण – नागिनी (कर्नाटक) 2:13.80 सेकंड; रजत – पूर्णिमा सांडिल (ओडिशा) 2:15.88 सेकंड; कांस्य – शांति बाई (मध्य प्रदेश) 2:19.11 सेकंड10 किमी रेस वॉक: स्वर्ण – नेहा जालक्सो (झारखंड) 1:04:02.46; रजत – अलिश एक्का (ओडिशा) 1:04:59.12; कांस्य – बेथलीन माकरी (मेघालय) 1:05:18.62हाई जंप: स्वर्ण – दीपा किसान (ओडिशा) 1.45 मीटर; रजत – काहिमा बसुमतारी (असम) 1.45 मीटर; कांस्य – कविता तडिंगी (ओडिशा) 1.43 मीटरभाला फेंक: स्वर्ण – धनमती जेस (ओडिशा) 44.79 मीटर; रजत – सबिता मुर्मू (झारखंड) 43.12 मीटर; कांस्य – अपिक्षा गामित (गुजरात) 41.77 मीटरपुरुष वर्ग400 मीटर हर्डल्स: स्वर्ण – रोशन खड़िया (ओडिशा) 53.41 सेकंड; रजत – ज्ञानेश्वर वली (महाराष्ट्र) 54.02 सेकंड; कांस्य – मनीष बेदिया (झारखंड) 54.62 सेकंड800 मीटर: स्वर्ण – दावनिधि मुंडा (ओडिशा) 1:53.33; रजत – गजेंद्र ठाकुर (छत्तीसगढ़) 1:53.82; कांस्य – राहुल उरांव (झारखंड) 1:54.3210 किमी रेस वॉक: स्वर्ण – दशरथ तलवार (कर्नाटक) 45:13.85; रजत – दर्शन बगाड़ी (कर्नाटक) 46:25.90; कांस्य – सागरभाई कटारा (गुजरात) 48:16.09फुटबॉलसेमीफाइनल पुरुष : पश्चिम बंगाल ने गोवा को 5-2 से हराया, छतीसगढ़ ने अरुणाचल प्रदेश को 3-2 से हराया।
- -केंद्रीय खेल राज्य मंत्री ने खिलाड़ियों का किया उत्साहवर्धनरायपुर । राजधानी रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत स्वामी विवेकानंद एथलेटिक्स स्टेडियम, कोटा में खेले गए पुरुष फुटबॉल के सेमीफाइनल मुकाबलों में छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल ने शानदार जीत दर्ज करते हुए फाइनल में प्रवेश किया।खेले गए एक रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में छत्तीसगढ़ ने अरुणाचल प्रदेश को 3-2 से हराया। मैच की शुरुआत से ही छत्तीसगढ़ टीम ने आक्रामक खेल दिखाया और पहले हाफ की समाप्ति तक 2-0 की बढ़त बना ली। दूसरे हाफ में अरुणाचल प्रदेश ने वापसी की कोशिश की, लेकिन छत्तीसगढ़ ने बढ़त कायम रखते हुए मैच 3-2 से अपने नाम किया। इसी प्रकार पहले खेले गए सेमीफाइनल मैच में पश्चिम बंगाल ने गोवा को 5-2 से हराकर फाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित की।इस अवसर पर केन्द्रीय युवा कार्य एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे ने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर भारतीय खेल प्राधिकरण के उप महानिदेशक श्री मयंक श्रीवास्तव एवं खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, खेल विभाग के अधिकारी, आयोजन समिति के सदस्य, बड़ी संख्या में खिलाड़ी तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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रायपुर/ कलेक्टर डॉ गौरव सिंह ने आज जिला कोषालय के स्ट्रॉन्ग रूम का वार्षिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सरकारी वित्तीय अभिलेखों की सुरक्षा, दस्तावेजों की सुव्यवस्थित रख-रखाव और सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से अवलोकन किया।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखे जनरल स्टाम्प, नोटरी, रेवेन्यू से संबंधित अभिलेखों एवं अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का भौतिक सत्यापन किया। उन्होंने अधिकारियों को सुरक्षा मानकों के सख्त पालन और रिकॉर्ड की सुव्यवस्थित संधारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।इस अवसर पर जिला कोषालय अधिकारी श्री गजानन पटेल सहित कोषालय का स्टाफ उपस्थित रहा। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर द्वारा वर्ष में दो बार कोषालय का नियमित निरीक्षण किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे। - -दूरस्थ क्षेत्रों में अब सही समय में मिलेगी त्वरित चिकित्सा सहायता-आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं के सुदृढ़ीकरण से अब हर जरूरतमंद को मिलेगी “108 एम्बुलेंस” की सेवाएंरायपुर। राज्य सरकार प्रदेश में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की गई। इसी कड़ी में बलरामपुर जिला अस्पताल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने जिले को 9 नई एम्बुलेंस को वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनमें 08 बेसिक लाइफ सपोर्ट और 01 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस शामिल हैं। इस सौगात के साथ ही जिले में 108 एम्बुलेंस की समस्त सेवाएं अब जिले के सभी विकासखंडों और दूरस्थ ग्रामीण वनांचलों तक त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएगी।मंत्री श्री रामविचार नेताम ने आयोेजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य शासन प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण एवं शीघ्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ये एम्बुलेंस केवल वाहन नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में जीवन बचाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। मंत्री श्री नेताम ने बताया कि शासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली माताओं, बहनों और बच्चों को आपातकालीन स्थिति में समय पर उपचार मिल सके। मरीजों को ‘‘गोल्डन ऑवर’’ में चिकित्सा सहायता मिलना जीवन रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है और यह पहल इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।बलरामपुर जिले के कलेक्टर श्री राजेंद्र कटारा ने बताया कि आपातकालीन सेवाओं को दुरुस्त रखने के लिए एम्बुलेंस संचालन एजेंसी के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। इससे सेवाओं की गुणवत्ता और प्रतिक्रिया समय में निरंतर सुधार होगा, जिससे जरूरतमंदों को त्वरित सहायता मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों को समय पर एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सतत प्रयास किए जाएंगे।जिले को मिली 9 नई एम्बुलेंस को विभिन्न विकासखंडों और स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यकतानुसार तैनात किया गया है, ताकि पूरे जिले को कवर किया जा सके। नई व्यवस्था के तहत जिला चिकित्सालय बलरामपुर को 2 और वाड्रफनगर को 2 एम्बुलेंस आवंटित की गई हैं। राजपुर, शंकरगढ़, कुसमी, रामानुजगंज और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सनावल में एक-एक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई है। इस नई व्यवस्था से अब जिले के सुदूर ग्रामीण अंचलों में किसी भी स्वास्थ्य आपातकाल के समय मरीजों को त्वरित सहायता मिल सकेगी।इस कार्यक्रम अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री वैभव बेंकर, रेडक्रॉस सोसायटी अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश जायसवाल, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुश्री सुमित्रा चेरवा, उपाध्यक्ष श्रीमती बबली देवी सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष श्री लोधी राम एक्का, उपाध्यक्ष श्री दिलीप सोनी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह, जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. शशांक गुप्ता सहित स्वास्थ्य विभाग के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
- -धनिया की खेती से प्रति एकड़ 50 हजार रुपए कमा रहे निरंजनरायपुर। राज्य सरकार के किसान हितैषी नीतियों एवं किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार उद्यानिकी फसलों के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए सब्सिडी के साथ-साथ प्रशिक्षण एवं तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। इसी क्रम में महासमुंद जिले के विकासखंड पिथौरा अंतर्गत ग्राम कसहीबाहरा के प्रगतिशील किसान श्री निरंजन पटेल ने अपनी मेहनत और नवाचार से खेती में अच्छी सफलता प्राप्त की है। श्री निरंजन पटेल बताते हैं कि वे पहले पारंपरिक रूप से धान की खेती करते थे, जिसमें उन्हें अधिक लागत और अपेक्षाकृत कम उत्पादन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था।वर्ष 2025-26 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय बागवानी मिशन अंतर्गत मसाला क्षेत्र विस्तार योजना के तहत धनिया की खेती अपनाई। उन्होंने अपनी 0.40 हेक्टेयर पूरी सिंचित भूमि में उन्नत किस्मों कस्तूरी धनिया एवं अंकुर धनिया का उत्पादन प्रारंभ किया। आधुनिक तकनीक के रूप में उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग किया, जिससे जल की बचत के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी वृद्धि हुई।उद्यानिकी विभाग द्वारा उन्हें 0.40 हेक्टेयर के लिए 8000 का अनुदान डीबीटी के माध्यम से प्रदान किया गया, जिससे उन्हें प्रारंभिक लागत में राहत मिली। पूर्व में जहां वे धान की खेती से प्रति एकड़ लगभग 21 क्विंटल उत्पादन प्राप्त करते थे और लगभग 30,000 की सीमित आय होती थी, वहीं धनिया की खेती अपनाने के बाद उन्होंने लगभग 35 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त किया। धनिया की खेती से उनकी कुल आय बढ़कर लगभग 50,000 प्रति एकड़ हो गई। श्री पटेल अपनी उपज का विक्रय पिथौरा एवं बागबाहरा मंडियों में करते हैं। वर्तमान में वे अपने कार्य से अत्यंत संतुष्ट हैं। उनकी इस सफलता को देखकर आसपास के अन्य किसान भी उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और धनिया जैसी नगदी फसलों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
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-खेल उस क्षेत्र में नई उम्मीद लेकर आया, जिसकी पहचान कभी संघर्ष से होती थी': युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे
-श्रीमती खडसे ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के दौरान जगदलपुर का दौरा किया और 2500 से अधिक आदिवासी एथलीटों को 'भविष्य का ओलंपियन' बताया-खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में अस्मिता लीग के पूर्व छात्रों ने हॉकी, वेटलिफ्टिंग, फुटबॉल और तैराकी में पदकों पर अपना दबदबा बनायारायपुर। युवा मामले और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे ने 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026' के दौरान बुधवार को रायपुर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने यहां के माहौल को ऊर्जा, आशा और बदलाव से भरपूर बताया। उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) टीम के प्रयासों की सराहना की और कहा कि एथलीटों, स्थानीय समुदाय और इस क्षेत्र के लोगों की ओर से मिली प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही है।खेल उस क्षेत्र में नई उम्मीद लेकर आया, जिसकी पहचान कभी संघर्ष से होती थी': युवा मामले और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसेदेशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 2,500 से ज्यादा एथलीट अलग-अलग खेलों में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में हिस्सा ले रहे हैं। श्रीमती खडसे ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026, केंद्र सरकार की उस प्रतिबद्धता को दिखाता है जिसके तहत आदिवासी युवाओं को अपना भविष्य बनाने के लिए एक मंच दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लोगों के लिए यह खेल एक नई उम्मीद हैं और यह संकेत कि उनकी काबिलियत को पहचाना जा रहा है और उस पर सबसे ऊंचे स्तर पर निवेश किया जा रहा है।युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री ने कहा, '' एक समय था जब छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद के लिए जाना जाता था, और यहां के लोगों को एक पिछड़ा समुदाय माना जाता था। आज, मुझे लगता है कि इस क्षेत्र के लिए एक नई दिशा खुल रही है। नक्सलवाद का खात्मा हो चुका है और खेल के माध्यम से, इस धरती के युवा अब अपनी ऊर्जा और क्षमता को सामने ला सकते हैं और देश के लिए खेल सकते हैं।''खेल राज्य मंत्री ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 को एक ऐतिहासिक पहल बनाने का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन, गृह मंत्री श्री अमित शाह (जिन्होंने पूरे देश से नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा की है), कैबिनेट मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया और पूरी साई टीम को दिया। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि इन खेलों में हिस्सा लेने वाले कई एथलीट आगे चलकर ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और पदक जीतेंगे।युवा मामले और खेल राज्य मंत्री, श्रीमती रक्षा खडसे ने 'अस्मिता लीग' के परिवर्तनकारी प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। इस लीग को 2021 में प्रधानमंत्री मोदी के उस विज़न के तहत शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत की महिलाओं को प्रतिस्पर्धी खेलों में लाना और उन्हें एक पहचान व अवसर प्रदान करना है।युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री, श्रीमती रक्षा खडसे ने कहा, '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में, नतीजे ज़बरदस्त रहे हैं। हॉकी, वेटलिफ्टिंग और फुटबॉल में हिस्सा लेने वाली लगभग 60 से 70 प्रतिशत लड़कियां ‘अस्मिता लीग’ खेल चुकी हैं और पदक जीत चुकी हैं। इनमें अंजली मुंडा जैसी बेहतरीन खिलाड़ी भी शामिल हैं। तैराकी में जीते गए सभी पांचों स्वर्ण पदक भी ‘अस्मिता लीग’ की खिलाड़ियों ने ही हासिल किए हैं। उन्होंने कहा, '' हमारा प्रयास जारी है कि हम ‘अस्मिता लीग’ को और भी निचले स्तर तक यानी के गांवों तक ले जाएं ताकि खेलों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ती रहे।'' - रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग के निरीक्षण में 21 जिलों में संचालित शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में कई कमियां सामने आई हैं। इन खामियों को लेकर आयोग ने सख्ती दिखाते हुए संबंधित विभागों को त्वरित सुधार के निर्देश दिए हैं। आयोग के अध्यक्ष श्री संदीप शर्मा की अध्यक्षता में नवा रायपुर स्थित कार्यालय में आयोजित अंर्तविभागीय बैठक में खाद्य, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा और आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा की गई। निरीक्षण में उचित मूल्य दुकानों, आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूलों के मध्यान्ह भोजन और आश्रम-छात्रावासों की व्यवस्था का जायजा लिया गया था।बैठक में बालक छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता और सामग्री आपूर्ति में सुधार की जरूरत बताई गई, जबकि कन्या छात्रावासों की स्थिति बेहतर पाई गई। 21 जिलों से निरीक्षण संबंधी अनुशंसाओं के पालन प्रतिवेदन समय पर नहीं मिलने पर अध्यक्ष ने नाराजगी जताई और शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।आयोग ने निर्देश दिए कि सभी आश्रम-छात्रावासों में दैनिक भोजन मैन्यू और कॉल सेंटर नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं, ताकि शिकायत और सुझाव दर्ज किए जा सकें। आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की उपस्थिति ‘पोषण ट्रैकर’ में सही दर्ज करने और आकस्मिक निरीक्षण से उसका मिलान करने को कहा गया।उचित मूल्य दुकानों में अनियमितता पर भी सख्त रुख अपनाते हुए नियमित रूप से दुकान नहीं खोलने, सूचना प्रदर्शित नहीं करने और स्टॉक में गड़बड़ी पाए जाने पर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मध्यान्ह भोजन योजना के तहत प्रदेश में संचालित दो केंद्रीकृत किचनों की व्यवस्था संतोषजनक पाई गई। आयोग ने इन किचनों से अधिक से अधिक स्कूलों को जोड़ने की अनुशंसा की है। इसके अलावा छात्रावासों और स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए किसी छात्र को ‘मेस प्रभारी’ बनाने का सुझाव दिया गया। साथ ही सभी संस्थानों में चावल, दाल, सब्जी और खाद्य तेल की निर्धारित मात्रा का प्रदर्शन और उसका पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि अधिकांश जिलों में योजनाएं ठीक चल रही हैं, लेकिन जहां कमियां मिली हैं, वहां जल्द सुधार करना जरूरी है। बैठक में आयोग के सदस्य श्री राजेंद्र महिलांग, श्री कुलदीप शर्मा और सदस्य सचिव श्री राजीव कुमार जायसवाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
- -प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना कीरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज रायगढ़ प्रवास के दौरान राजापारा स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति, रायगढ़ द्वारा आयोजित ‘उत्कल दिवस एवं वार्षिकोत्सव स्नेह सम्मेलन’ में शामिल होने के क्रम में मंदिर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने उत्कल समाज द्वारा निर्मित प्रभु जगन्नाथ मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर झारसुगुड़ा विधायक श्री टंकाधर त्रिपाठी, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, महापौर श्री जीवर्धन चौहान सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं उत्कल समाज के प्रमुखजन उपस्थित थे।
- रायपुर। पिछले साल 29 दिसंबर को शिलांग के साई के स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर में बेथलीन ग्रेस माकरी के कोच ने अचानक इस युवा एथलीट में एक रेस-वॉक एथलीट बनने की काबिलियत देखी। मजे की बात यह है कि बेथलीन खुद इस इवेंट के बारे में लगभग कुछ भी नहीं जानती थी और इसकी तकनीकी बारीकियों की तो बात ही छोड़ दें।पिछले साल तक, मेघालय की यह युवा एथलीट एक मिडिल और लॉन्ग-डिस्टेंस रनर के तौर पर मुकाबला कर रही थीं। लेकिन 2026 की शुरुआत में, उसे अपना खेल बदलने के लिए कहा गया जिसने उसकी शारीरिक और मानसिक, दोनों तरह की ताकत की परीक्षा ली।खासी ट्राइब से आने वाली बेथलीन के लिए यह बदलाव बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। उनके लिए शुरुआती कुछ सप्ताह बहुत कठिन थे, जब वह रेस-वॉक की अनजान तकनीक के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रही थीं और शरीर में तेज दर्द से जूझ रही थीं। इसके चलते कई रातें बिना नींद के बीतीं और मन में आत्म-संदेह भी पैदा होने लगा।हालांकि, उनके कोच और परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी और इकलौती बेटी होने के नाते, बेथलीन ने इस चुनौती को स्वीकार किया और खेल की तकनीकी बारीकियों को सीखने में खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया। इसके बाद उन्होंने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के पहले एडिशन में भाग लेने के लिए जगदलपुर का रुख किया।उन्होंने साई मीडिया से कहा, '' पहले दो हफ्ते वाकई बहुत मुश्किल थे, खासकर मेरे शरीर के लिए। रेस-वॉक की तकनीकी बारीकियां मध्यम या लंबी दूरी की दौड़ से बिल्कुल अलग होती हैं, इसलिए मुझे इसे समझने में समय लगा। इसके बाद कई रातों तक नींद नहीं आई, घबराहट के पल आए और आखिरकार मुझे खुद पर शक होने लगा कि क्या मेरा फैसला सही था।'' लेकिन बुधवार को उन संघर्षों का भरपूर फल मिला। बेथलीन ने महिलाओं की रेस-वॉक स्पर्धा में 1:05:18 का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। वह झारखंड की नेहा ज़ालक्सो (1:04:02) और ओडिशा की एलीश एक्का (1:04:59) के बाद तीसरे स्थान पर रहीं।पदक जीतने के कुछ ही पलों बाद इस एथलीट ने इसका श्रेय अपने कोच और परिवार को दिया। उन्होंने कहा, ''मेरे कोच और मेरे परिवार ने मेरा पूरा साथ दिया, और मुझे इसे जारी रखने के लिए लगातार प्रेरित करते रहे। मैंने भी इसे आज़माने का सोचा, और आज मैं यहां हूं। मेरे पास अभी भी सुधार की गुंजाइश है, लेकिन यह ठीक वैसी ही शुरुआत थी जिसकी मुझे ज़रूरत थी।'' उन्होंने आगे कहा, '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में मिला कांस्य पदक मेरी कड़ी मेहनत, मेरे विश्वास और मेरे कोचों व परिवार के समर्थन का प्रमाण है और यह इस खेल में आगे बढ़ने के लिए मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम करता है।“शिलांग कॉलेज में बीए की दूसरे वर्ष की छात्रा बेथलीन को इस बात पर बेहद गर्व है कि वह मेघालय की एकमात्र ऐसी 'रेस वॉकर' हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, '' मेघालय से कोई रेस वॉकर नहीं है और मेरा मानना है कि मेरा 'खेलो इंडिया' पदक युवाओं को इस खेल को पेशेवर तौर पर अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। मुझे भी अब यह खेल पसंद आने लगा है।''
- -संघर्ष और अलगाव वाले क्षेत्र से उभर रहे युवा फुटबॉलर; आश्रम में विभिन्न आयु वर्गों के 2,700 से अधिक बच्चे रहते हैं-आरके मिशन अब ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेता हैरायपुर ।छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के दूरस्थ अबूझमाड़ क्षेत्र में आदिवासी समुदायों के उत्थान के उद्देश्य से 1986 में स्थापित रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम आज चुपचाप फुटबॉल प्रतिभाओं की एक अनोखी नर्सरी बनकर उभरा है। यह आश्रम छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में स्थित है और राज्य की राजधानी रायपुर से लगभग 250 किलोमीटर दूर है। इसका प्रभाव मौजूदा खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) में साफ दिखाई दे रहा है, जहां पुरुष और महिला फुटबॉल टीमों में एक दर्जन से अधिक खिलाड़ी आश्रम में प्रशिक्षण पाकर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। जहां महिला टीम फाइनल में पहुंच चुकी है, वहीं पुरुष टीम ने भी सेमीफाइनल में जगह बना ली है।छत्तीसगढ़ फुटबॉल संघ (CFA) के सहायक महासचिव और एआईएफएफ कार्यकारी समिति के सदस्य मोहन लाल ने कहा, “केआईटीजी 2026 में प्रतिस्पर्धा कर रही पुरुष और महिला फुटबॉल टीमों में प्रत्येक में लगभग 12-13 खिलाड़ी इसी अकादमी से हैं।”कभी अलगाव और संघर्ष के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर क्षेत्र में स्थित आरके मिशन दशकों से बेहद दूरदराज के आदिवासी गांवों के बच्चों तक शिक्षा और अवसर पहुंचाने का काम कर रहा है। इनमें से कई गांव घने जंगलों के भीतर हैं, जहां औपचारिक शिक्षा तक पहुंच बहुत सीमित या लगभग नहीं के बराबर है।आश्रम इन बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करता है, साथ ही संगीत और खेलों में उनकी रुचि को भी विकसित करता है। पढ़ाई के साथ-साथ खेल आश्रम के विकास कार्यक्रम का एक अहम स्तंभ बन चुका है। बच्चों को कम उम्र में ही विभिन्न खेलों से परिचित कराया जाता है और शिक्षा के साथ-साथ उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए खेलों में करियर बना सकें। हर साल संस्थान के लगभग 50 से 60 छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका मिलता है, जो इस आवासीय परिसर से लगातार उभर रही प्रतिभाओं को दर्शाता है।मोहन लाल के अनुसार, आश्रम ने अपने छात्रों को समर्थन देने के लिए मजबूत खेल ढांचा विकसित किया है। परिसर में तीन फुटबॉल मैदान हैं, जिनमें एक एस्ट्रो-टर्फ सुविधा भी शामिल है, साथ ही बैडमिंटन, टेबल टेनिस, खो-खो और मल्लखंभ के लिए इनडोर एरेना भी मौजूद हैं।मोहन लाल का मानना है कि नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले कई बच्चों के जीवन में खेल ने परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। आज यह आश्रम विभिन्न आयु वर्गों के 2,700 से अधिक बच्चों का घर है, जहां उन्हें न केवल शिक्षा मिलती है, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, खिलाड़ी या शिक्षाविद बनने के सपने देखने का अवसर भी मिलता है।मोहनलाल ने कहा, “कई मायनों में यह देश के सर्वश्रेष्ठ आवासीय स्कूलों में से एक है, जो शिक्षा और खेल के माध्यम से जीवन संवारने में आश्रम की अनूठी भूमिका को दर्शाता है।”उन्होंने आगे कहा, “यहां लगभग 2700 छात्र हैं, जो सभी आयु वर्गों और कक्षा 1 से 12 तक के हैं। इस स्कूल से निकले कई छात्र देश की शीर्ष कंपनियों में कार्यरत हैं और कई प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं।” लाल ने बताया कि अकादमी की खेल सुविधाओं को तब और पहचान मिली, जब रामकृष्ण मिशन फुटबॉल अकादमी (RKM FA) राज्य का पहला फुटबॉल क्लब बना जिसने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन द्वारा आयोजित अंडर-17 यूथ कप और आई-लीग 2 में भाग लिया।
- -ऑनलाइन आवेदन 17 अप्रैल तक किया जा सकेगारायपुर। संचालनालय तकनीकी शिक्षा, छत्तीसगढ़ के सम्बन्धित पालीटेक्निक कालेजों में प्रवेश के लिए प्री-पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा (PPT) 2026 हेतु ऑनलाइन आवेदन एवं परीक्षा कार्यक्रम घोषित किया गया है। यह परीक्षा राज्य के विभिन्न पॉलीटेक्निक संस्थानों में प्रवेश हेतु आयोजित की जाएगी, जिसमें इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तिथियों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।संचालनालय तकनीकी शिक्षा, छत्तीसगढ़ से प्राप्त जानकारी के अनुसार पालीटेक्निक कालेजों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 25 मार्च 2026 से प्रारंभ होकर 17 अप्रैल 2026 को सायं 5 बजे तक चलेगी।आवेदन पत्र में त्रुटि सुधार हेतु 18 अप्रैल से 20 अप्रैल 2026 तक का समय निर्धारित किया गया है।अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र 27 अप्रैल 2026 को व्यापम की वेबसाइट पर जारी किए जाने की संभावना है। परीक्षा का आयोजन 07 मई 2026 (गुरुवार) को पूर्वान्ह 10:00 बजे से दोपहर 1:15 बजे तक किया जाएगा।यह परीक्षा राज्य के 33 जिला मुख्यालयों में आयोजित की जाएगी, जिससे अभ्यर्थियों को अपने नजदीकी परीक्षा केन्द्र का चयन करने की सुविधा मिलेगी। आवेदन करने के लिए अभ्यर्थियों को आधिकारिक वेबसाइटvyapamcg.cgstate.gov.inपर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा।आवेदन करते समय परीक्षा शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना अनिवार्य है। छत्तीसगढ़ शासन के नियमानुसार राज्य के स्थानीय निवासी अभ्यर्थी, जो परीक्षा में सम्मिलित होंगे, उनका परीक्षा शुल्क व्यापम द्वारा वापस कर दिया जाएगा। यह राशि उसी बैंक खाते में वापस की जाएगी, जिससे अभ्यर्थी ने शुल्क का भुगतान किया है।व्यापम के अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा से संबंधित विस्तृत जानकारी, पात्रता, पाठ्यक्रम एवं दिशा-निर्देश के लिए व्यापम की आधिकारिक वेबसाइट का नियमित रूप से अवलोकन करते रहें।
- -मैनपाट में ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ का सांस्कृतिक संगम, मेहमानों ने सराहा छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता और आतिथ्यरायपुर। ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा की गई व्यवस्थाएं राष्ट्रीय स्तर पर सराहना बटोर रही हैं। विभिन्न राज्यों से आए खेल अधिकारियों एवं कोचों ने सरगुजा जिले के मैनपाट में स्थित प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर यहां की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और आत्मीय आतिथ्य का अनुभव किया।अतिथियों ने मैनपाट के प्रसिद्ध तिब्बती मोनेस्ट्री, रहस्यमयी उल्टा पानी तथा अद्वितीय प्राकृतिक स्थल जलजली का भ्रमण किया। इन स्थलों की विशिष्टता और प्राकृतिक आकर्षण ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अधिकारियों और कोचों ने कहा कि मैनपाट न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक अनूठा पर्यटन गंतव्य है, जहां प्रकृति और शांति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।भ्रमण के दौरान सभी मेहमानों ने छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के सैला रिसॉर्ट में दोपहर भोजन का आनंद लिया। यहां पर परोसे गए पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों जैसे चीला, फरा, ठेठरी-खुरमी और देशी स्वाद से भरपूर भोजन की मेहमानों ने खुले दिल से सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि “छत्तीसगढ़ का भोजन जितना सरल है, उतना ही स्वादिष्ट और पौष्टिक भी है।”अतिथियों ने विशेष रूप से मैनपाट के स्थानीय निवासियों के सहज, सरल और आत्मीय व्यवहार की भी प्रशंसा की। उनका कहना था कि यहां का आतिथ्य उन्हें अपने घर जैसा अपनापन महसूस कराता है, जो छत्तीसगढ़ की पहचान को और मजबूत बनाता है।छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के सौजन्य से ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ में शामिल खिलाड़ियों, अधिकारियों और कोचों को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और खानपान से परिचित कराया जा रहा है, जिससे राज्य की सकारात्मक छवि राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो रही है। खेल और पर्यटन के इस समन्वित मॉडल से छत्तीसगढ़ ने एक नई दिशा दिखाई है, जहां खेल आयोजन केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित न रहकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम भी बन रहे हैं। इससे न केवल राज्य के पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि देशभर में छत्तीसगढ़ की एक सकारात्मक और समृद्ध पहचान भी बन रही है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास राज्य को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक मजबूत स्थान दिलाने में सफल हो रहा है।
- रायपुर । विश्वविद्यालय द्वारा सत्र 2026–27 हेतु द्विवर्षीय बी.एड. एवं डी.एल.एड. (दूरवर्ती) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्री. बी.एड. एवं प्री. डी.एल.एड. प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस हेतु इच्छुक अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 25 मार्च 2026 से प्रारंभ हो चुकी है और 12 जून 2026 (रात्रि 12 बजे तक) जारी रहेगी।प्री बी.एड. एवं प्री. डी.एल.एड. प्रवेश के अभ्यर्थी 13 जून से 15 जून 2026 के बीच 100 रुपए शुल्क के साथ आवेदन में आवश्यक संशोधन कर सकेंगे। प्रवेश पत्र 23 जून 2026 से डाउनलोड किए जा सकेंगे तथा प्रवेश परीक्षा 28 जून 2026 (संभावित) को आयोजित की जाएगी।परीक्षा के पश्चात 29 जून 2026 को मॉडल उत्तर जारी किए जाएंगे, जिन पर अभ्यर्थी 29 जून से 03 जुलाई 2026 तक आपत्ति दर्ज कर सकेंगे। परीक्षा परिणाम (अनंतिम सूची) 10 जुलाई 2026 (संभावित) को घोषित किया जाएगा, जिस पर 10 से 12 जुलाई 2026 तक आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। सभी प्राप्त आपत्तियों के निराकरण के बाद अंतिम प्रावीण्यता सूची 21 जुलाई 2026 (संभावित) को प्रकाशित की जाएगी।अभ्यर्थियों को निर्देशित किया जाता है कि वे आवेदन करने से पूर्व संबंधित नियमों एवं दिशा-निर्देशों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें तथा ऑनलाइन आवेदन पत्र में सभी जानकारी सही एवं स्पष्ट रूप से भरें। यह आवेदन पत्र काउंसलिंग पंजीयन हेतु भी मान्य होगा, अतः अलग से काउंसलिंग फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होगी। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया (ऑनलाइन/ऑफलाइन) की जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।दावा-आपत्ति केवल निर्धारित तिथि एवं समय के भीतर ईमेल [email protected] के माध्यम से ही स्वीकार की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे नवीनतम जानकारी एवं संभावित तिथियों में किसी भी परिवर्तन के लिए नियमित रूप से विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइटwww.pssou.ac.in एव www.pssou.net/portal का अवलोकन करते रहें।
- -200 पदों पर होगी भर्तीधमतरी । जिले के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए अब 15 अप्रैल को लाईवलीहुड कॉलेज धमतरी में रोजगार मेला का आयोजन किया जाएगा। सहायक परियोजना अधिकारी, जिला परियोजना लाईवलीहुड कॉलेज धमतरी ने बताया कि पूर्व में यह रोजगार मेला 10 अप्रैल को आयोजित होना था, जिसमें संशोधन किया गया है। अब यह रोजगार मेला 15 अप्रैल को आयोजित होगा। रोजगार मेला में शामिल होने के इच्छुक युवा निर्धारित पॉम्पलेट में दिए गए लिंक पर ऑनलाईन पंजीयन करा सकते हैं।रोजगार मेला में निजी संस्था के नियोक्ताओं द्वारा क्लाईंट डिलाईट एक्जीक्यूटिव और डाटा एंट्री ऑपरेटर के 50-50 तथा सपोर्ट एक्जीक्यूटिव के 100 पदों, इस तरह कुल 200 पदों पर भर्ती की जाएगी। कलेक्टर सह अध्यक्ष जिला परियोजना लाईवलीहुड कॉलेज श्री अबिनाश मिश्रा ने जिले के विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि वे अपनी संस्थान से शिक्षा प्राप्त कर चुके या अध्ययनरत युवाओं का समुचित परामर्श कर इच्छुक युवओं को प्रस्तावित रोजगार मेला में सम्मिलित करना सुनिश्चित करें। साथ ही इच्छुक युवाओं की सूची 06 अप्रैल तक लाईवलीहुड कॉलेज धमतरी में उपलब्ध कराना कराएं।
- -गरियाबंद जिले में 1 लाख 65 हजार हितग्राहियों का होगा सत्यापन-जिले के सभी जनपद पंचायतों में होगा प्रशिक्षणगरियाबंद ।महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित महतारी वंदन योजना के अंतर्गत हितग्राहियों की पहचान सत्यापन के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया जिले में 03 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होगी। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री अशोक पाण्डेय ने बताया कि यह कार्य ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राम पंचायत भवनों में तथा शहरी क्षेत्रों के वार्ड कार्यालयों में किया जाएगा। ई-केवाईसी अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसके पूरा होने पर ही लाभार्थियों को आगामी किश्तों का भुगतान नियमित रूप से मिल सकेगा।उन्होंने बताया कि ई-केवाईसी के लिए महतारी वंदन योजना में दर्ज नाम और आधार कार्ड में लिखा नाम पूरी तरह मेल होना चाहिए। कई बार वर्तनी की छोटी-छोटी त्रुटियों के कारण सत्यापन प्रक्रिया बाधित हो जाती है। इसलिए सभी हितग्राहियों को पहले अपने निकटतम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से संपर्क कर योजना में दर्ज नाम का आधार कार्ड से मिलान करने को कहा है। यदि नाम में किसी प्रकार की गलती मिलती है, तो लाभार्थियों को शीघ्र ही महिला एवं बाल विकास विभाग में नाम संशोधन के लिए आवेदन जमा करना होगा, ताकि समय रहते सुधार किया जा सके और ई-केवाईसी में कोई समस्या न आए।ई-केवाईसी 03 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक चलेगा। हितग्राही निर्धारित समय के भीतर सत्यापन अवश्य कराएं, ताकि योजना का लाभ नियमित रूप से प्राप्त हो सके। जिले में लगभग 1 लाख 65 हजार हितग्राहियों का ई-केवाईसी किया जाएगा। जिनमें वीएलई, सीएससी ऑपरेटरों और महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षकों को ई-केवाईसी संबंधी सम्पूर्ण प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण उपरांत ऑपरेटर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ई-केवाईसी कार्य को तेज गति से पूरा कर सकेंगे।गरियाबंद ब्लॉक में प्रशिक्षण 6 अप्रैल को जनपद पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित होगा, जिसमें लगभग 62 प्रतिभागी उपस्थित रहेंगे। इसी प्रकार 7 अप्रैल को जनपद पंचायत छुरा में 72 प्रतिभागियों का प्रशिक्षण होगा। जनपद पंचायत फिंगेश्वर में 8 अप्रैल को जिसमें 71 प्रतिभागी प्रशिक्षण लेंगे। मैनपुर में यह प्रशिक्षण 9 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा, जिसमें लगभग 72 प्रतिभागी शामिल होंगे। इसी तरह देवभोग जनपद में 10 अप्रैल को प्रशिक्षण शिविर रखा गया है, जिसमें 54 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- -28 वर्षीय पहलवान परिवार का गुजारा चलाने के लिए घर-घर दूध पहुंचाते हुए भी कुश्ती का अभ्यास करते रहे-मिट्टी के अखाड़े में अभ्यास के लिए 20 किमी और मैट ट्रेनिंग के लिए जम्मू तक 40 किमी का सफर तय करते हैंअम्बिकापुर । जब जम्मू-कश्मीर के हमाम हुसैन कुश्ती का अभ्यास नहीं कर रहे होते, तो वे अपने बड़े भाई के साथ घर-घर जाकर दूध पहुंचाने का काम करते हैं। जम्मू के जोरावर गांव के रहने वाले 28 वर्षीय हमाम के लिए जिंदगी और खेल हमेशा साथ-साथ चले हैं। पांच साल पहले पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके और उनके बड़े भाई के कंधों पर आ गई। दोनों ने मिलकर दूध बेचकर घर चलाया और इसी के साथ हमाम ने अपने कुश्ती के सपने को जिंदा रखा।यह संघर्ष आखिरकार खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में रंग लाया, जहां हमाम ने पुरुषों के 79 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में हिमाचल प्रदेश के मोहित कुमार को हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह उनके 14 साल के कुश्ती करियर का पहला राष्ट्रीय स्तर का स्वर्ण पदक है।हमाम ने साई मीडिया से कहा, “मेरे बड़े भाई भी पहलवान थे और राज्य स्तर पर खेल चुके हैं। पिता के निधन के बाद सारी जिम्मेदारी हम पर आ गई। मेरे भाई को कुश्ती छोड़नी पड़ी और उन्होंने दूध बेचना शुरू कर दिया। मैं भी उनके साथ दूध देने जाता था क्योंकि परिवार चलाना जरूरी था।लेकिन मेरे भाई ने मुझे हमेशा कुश्ती जारी रखने के लिए प्रेरित किया और मुझे दंगलों में लेकर जाते थे।”हमाम ने बताया कि उनके पिता की छोड़ी हुई भैंसें ही परिवार की आजीविका का साधन बनीं। एक बच्चे के पिता हमाम ने कहा, “मेरे भाई ने दूध बेचकर घर चलाया और मैं उनकी मदद करता था। लेकिन जब मैंने मिट्टी के अखाड़े में कदम रखा, तो इस खेल से मुझे लगाव हो गया।”सीमित संसाधनों के बावजूद हमाम ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। वे अपने गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर मिट्टी के अखाड़े में अभ्यास करते हैं और मैट पर ट्रेनिंग के लिए लगभग 40 किलोमीटर दूर जम्मू तक का सफर तय करते हैं। वह भी अपने काम की जिम्मेदारियों के साथ।उन्होंने कहा, “साई सेंटर जम्मू में है और हम निचले इलाके में रहते हैं, इसलिए वहां नियमित रूप से जाना मुश्किल होता है। हम आमतौर पर प्रतियोगिताओं के दौरान ही वहां जाते हैं, वरना गांव के अखाड़ों में ही अभ्यास करते हैं।”वह आगे कहते हैं, “मेरे पास कोई व्यक्तिगत कोच नहीं है। अखाड़े में सीनियर पहलवान हमें मार्गदर्शन देते हैं। जब हम मैट पर अभ्यास करते हैं, तब वहां कोच होते हैं। गांवों में हमें शहरों जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। अगर बेहतर सुविधाएं मिलें, तो हमारे क्षेत्र के पहलवान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पदक जीत सकते हैं।”हमाम के लिए यह स्वर्ण पदक सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने अंत में कहा, “यहां आकर बहुत अच्छा लगा। यहां की सुविधाएं बहुत अच्छी थीं। हम एक पिछड़े इलाके से आते हैं, जहां कुश्ती के लिए ज्यादा समर्थन नहीं है, इसलिए हमें दूर-दूर तक जाना पड़ता है। यह पहली बार है जब हमारे लिए इस तरह की प्रतियोगिता आयोजित की गई है। अगर ऐसे और आयोजन होते रहें, तो हम और पदक जीत सकते हैं।”
- -9 नवीन ‘108 संजीवनी एक्सप्रेस’ एम्बुलेंस को दिखाई हरी झंडीरायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आज सूरजपुर ज़िले में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए 9 अत्याधुनिक ‘108 संजीवनी एक्सप्रेस’ एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।जिला चिकित्सालय सूरजपुर से शुरू की गई यह सेवा अब दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएगी।इस अवसर पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण एवं शीघ्र स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सूरजपुर की बेटी होने के नाते यह मेरे लिए गौरव का क्षण है कि मैं अपने ज़िलेवासियों को यह जीवनरक्षक सुविधा समर्पित कर रही हूँ।9 नवीन ‘108 संजीवनी एक्सप्रेस’ एम्बुलेंस को दिखाई हरी झंडीउन्होंने कहा कि ये एम्बुलेंस केवल वाहन नहीं, बल्कि जीवन बचाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सरकार का उद्देश्य है कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली माताएँ, बहनें और बच्चों को आपातकालीन स्थिति में समय पर उपचार मिल सके और ‘गोल्डन ऑवर’ में चिकित्सा सहायता सुनिश्चित हो।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने यह भी कहा कि एम्बुलेंस संचालन एजेंसी के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर सेवाओं की गुणवत्ता एवं प्रतिक्रिया समय (Response Time) में निरंतर सुधार किया जाएगा। उन्होंने स्वयं इन सेवाओं की नियमित निगरानी करने की बात कही, ताकि पारदर्शिता और प्रभावशीलता बनी रहे।ज़िले में आवंटित 9 एम्बुलेंसों में से 2 को जिला चिकित्सालय सूरजपुर में स्थायी रूप से तैनात किया गया है, जबकि शेष एम्बुलेंसों को विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित हो सके।
- कोरिया। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा राजस्व संबंधी समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए “राजस्व पखवाड़ा 2026” आयोजित की जा रही है। इस अभियान के तहत कोरिया जिले के ग्रामों में क्लस्टरवाइस शिविर लगाकर लंबित प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण किया जाएगा।आज पोड़ी-बचरा तहसील के ग्राम चिरमी में आयोजित राजस्व पखवाड़ा में अपर कलेक्टर श्री सुरेन्द्र वैद्य ने ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं सुना ही नहीं बल्कि त्वरित निराकरण करने के लिए सम्बंधित तहसीलदार को निर्देश भी दिए।राजस्व पखवाड़ा का आयोजन 1 अप्रैल से 15 अप्रैल, 4 मई से 18 मई तथा 1 जून से 15 जून 2026 तक तीन चरणों में किया जाएगा। इस दौरान अविवादित नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन, व्यपवर्तन और वृक्ष कटाई जैसे लंबित मामलों का शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।अभियान के तहत नक्शा बंटाकन की प्रगति, भूमिस्वामियों के खातों में आधार, मोबाइल नंबर, किसान किताब एवं जेंडर प्रविष्टि को पूर्ण किया जाएगा। शिविरों में प्राप्त आवेदनों जैसे फौती नामांतरण, बंटवारा, अभिलेख त्रुटि सुधार आदि का मौके पर ही ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से निराकरण किया जाएगा।इसके अलावा जनहानि, फसल क्षति एवं पशु हानि से संबंधित मामलों का आरबीसी 6-4 के तहत त्वरित समाधान, भू-अर्जन प्रकरणों का समय-सीमा में निपटारा तथा स्वामित्व योजना अंतर्गत अधिकार अभिलेखों का वितरण भी किया जाएगा।शिविरों में आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र के आवेदन भी लोक सेवा केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज कर निर्धारित समय-सीमा में निपटाए जाएंगे। साथ ही ग्राम पंचायतों में व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए कोटवारों के माध्यम से मुनादी कराई जा रही है। कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी ने सम्बंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राजस्व पखवाड़ा में प्राप्त आवेदनों का तत्काल निराकरण करें।
- कोरिया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में कुछ एैसी योजनाएं हैं जिन्होंने हितग्राहियों तक मदद पहुंचाकर उनके जीवन में बदलाव ला दिया है। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वंचित तबके के लिए लागू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण से ग्राम्य परिवेश में बड़ा सकारात्मक बदलाव आ रहा है। आम नागरिकों के जीवन की सहूलियतें बढ़ रही हैं और कुछ सकारात्मक विचारधारा के हितग्राहियों ने ग्रामीण जनजीवन में अपनी मेहनत से नई उर्जा जगाने का काम किया है।प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत हितग्राही बनने के पहले अपने कच्चे मकान में रहने वाली बिफइया बाई पति धरमसाय का जीवन ठीक उसी तरह संकट और अभाव से ग्रस्त हुआ करता था जैसे आम आदिवासी परिवार हुआ करता है। जिसके पास कहने को मात्र कुछ भूमि और एक कच्चा जर्जर मकान हो जिसे अपने आज से ज्यादा कल की चिंता परेशान करती हो। मात्र दो सदस्यों का यह परिवार पूरी तरह से अकुशल मजदूरी पर आश्रित होकर अपना जीवन यापन कर रहा है ऐसे में पक्के मकान का सपना इनके जीवन में एक सपना ही था। इस परिवार को भी हर मौसम में संकट और परेशानियों से जूझना होता था। जिसमें बारिश और ठंड का मौसम बेहद संकट भरा होता था।कोरिया जिले के जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत गढ़तर में गत वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान एक हितग्राही के तौर पर बिफईया बाई को प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना का लाभ मिला। पति पत्नी ने पूरे उत्साह से जल्द अपने पक्के आवास का निर्माण कार्य पूरा किया। अब उस आवास में चैन की रोटी खाते हुए बिफईया बाई अपने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देकर खुशहाल जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत दो लाख रूपए की मदद से बने इस सुरक्षित और स्वच्छ आवास में रहने से इस परिवार को खुशहाली और सुकून दोनों साथ मिल रहा है। वहीं वंचित वर्ग के इस परिवार में आत्मसंतोष के साथ एक बेहतर वातावरण बनकर तैयार हुआ है। मौसम की मार से दूर होकर इस परिवार में सामाजिक संतोष का उत्साह मिल रहा है। यह आवास केवल ईंट गारे की एक संरचना ना होकर इस परिवार के लिए एक जीवंत सपना है।
- -वित्तीय प्रबंधन होगा और अधिक पारदर्शी व आसानरायपुर / संचालनालय कोष एवं लेखा ने राज्य में वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कई नई डिजिटल सेवाओं की शुरुआत की है। इन पहलों का लक्ष्य आम नागरिकों, शासकीय विभागों एवं अन्य हितधारकों को सरल, सुलभ और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।इसी क्रम में, ई-चालान के तहत OTC प्रणाली को 01 अप्रैल 2026 से लागू किया गया है। अब सभी प्रकार की शासकीय प्राप्तियों का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकेगा। नागरिक और संस्थाएं आसानी से चालान तैयार कर राजस्व जमा कर सकेंगे, जिससे भुगतान प्रक्रिया अधिक सहज, समयबद्ध और पारदर्शी होगी।इसके साथ ही कोषालयों में ऑनलाइन बीटीआर सुविधा भी शुरू कर दी गई है, जिससे लेखांकन कार्यों में गति और सटीकता आएगी। राज्य में एक केंद्रीय कोषालय का भी शुभारंभ किया गया है। इस व्यवस्था के तहत भारत सरकार से प्राप्त राशि के भुगतान SNA SPARSH प्रणाली के माध्यम से अब अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और केंद्रीकृत तरीके से किए जाएंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया में दक्षता सुनिश्चित होगी।संचालनालय कोष एवं लेखा की नई वेबसाइट (dta.cg.gov.in) भी लॉन्च की गई है, जहां उपयोगकर्ताओं को विभाग से संबंधित नवीनतम जानकारी, विभिन्न ऑनलाइन सेवाएं और जरूरी सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध होंगी। यह पहल राज्य में वित्तीय प्रशासन को आधुनिक स्वरूप देने और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- -नवविवाहित जोड़ों को प्रदान किया आशीर्वादरायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज कोरबा जिले के प्रवास पर रहे। इस दौरान वे कटघोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम ढपढप-बांकीमोंगरा में आयोजित दिव्य श्री हनुमंत कथा एवं 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याओं के सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने नवविवाहित जोड़ों से भेंट की और उनके सुखमय जीवन के लिए आशीर्वाद दिया। उन्होंने सभी नवविवाहित जोड़ों को सम्मान स्वरूप पाँच हजार रुपये की राशि प्रदान करने की घोषणा भी की।कोरबा प्रवास के दौरान राज्यपाल श्री डेका से कथावाचक श्री धीरेंद्र शास्त्री ने भी सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर कोरबा कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत सहित अन्य अधिकारी एवं आयोजन समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
- रायपुर। प्रदेश में आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सूरजपुर जिले के भटगांव विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जयनगर-कासापारा में 3.80 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाली सड़क के निर्माण कार्य का विधिवत कार्यप्रारंभ पूजन किया।लोक निर्माण विभाग के माध्यम से स्वीकृत इस परियोजना के तहत 3.60 किलोमीटर लंबी सड़क का उन्नयन एवं नवीनीकरण किया जाएगा। इस कार्य के लिए शासन द्वारा 380.15 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। सड़क निर्माण पूर्ण होने के पश्चात क्षेत्र के ग्रामीणों को बेहतर आवागमन सुविधा और सुगम संपर्क का लाभ मिलेगा।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने अपने संबोधन में कहा कि विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुशासन और विकास को प्राथमिकता देते हुए योजनाओं को तेजी से धरातल पर उतार रही है। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़कें केवल आवागमन को सुगम नहीं बनातीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी सृजित करती हैं। जयनगर से कासापारा तक बनने वाला यह मार्ग क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान करेगा।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों की सक्रिय सहभागिता रही। इस अवसर पर श्री हरीश राजवाड़े, श्री देवधन बिंझिया, श्री अशोक अग्रवाल, श्री रितेश जायसवाल, जनपद सदस्य श्रीमती धनेश्वरी सिरदार, सरपंच श्रीमती राधा सिंह सहित विभागीय अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।
- -मुख्यमंत्री से केंद्रीय राज्य मंत्री सुश्री रक्षा खडसे की सौजन्य मुलाकात, खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच देने पर जोर-बस्तर और सरगुजा ओलंपिक तथा बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों को मिल रही है देश भर में सराहनारायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज उनके निवास कार्यालय में केंद्रीय खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री सुश्री रक्षा निखिल खडसे ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, भारतीय खेल प्राधिकरण के उप महानिदेशक श्री मयंक श्रीवास्तव एवं खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सुश्री खडसे का शॉल, बस्तर आर्ट से निर्मित आकर्षक प्रतिकृति तथा बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक भेंट कर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें उचित अवसर, संसाधन और सशक्त मंच उपलब्ध कराने की है। राज्य सरकार खेल एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि हाल ही में आयोजित बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक ने प्रदेश को नई पहचान दिलाई है। इन आयोजनों के जरिए अनेक छिपी हुई प्रतिभाएं सामने आई हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। सरकार द्वारा उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनके कौशल को और निखारने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी करना प्रदेश के लिए गर्व की बात है और हमारे आदिवासी अंचल के युवाओं में यह नई ऊर्जा का संचार करेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर आज जब मुख्यधारा से जुड़ रहा है और वहां शांति स्थापित हुई है तो निश्चित ही आने वाले समय में खेलों में युवाओं की भागीदारी और बढ़ेगी।मुख्यमंत्री ने ‘बस्तर पंडुम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आयोजन में पारंपरिक खेल, गायन, वादन, वेशभूषा एवं व्यंजन सहित 12 विधाओं में लगभग 54 हजार प्रतिभागियों की भागीदारी प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और खेल विरासत का सशक्त उदाहरण है।उल्लेखनीय है कि केंद्रीय राज्य मंत्री सुश्री खडसे ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ प्रवास पर हैं। जगदलपुर में आयोजित इस आयोजन को उन्होंने आदिवासी सशक्तिकरण, जमीनी स्तर पर प्रतिभा खोज और खेलों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।
- रायपुर। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में आज रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में पुरुषों की हॉकी में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच तीसरे और चौथे स्थान के लिए मैच खेला गया। इसमें छत्तीसगढ़ ने मध्यप्रदेश को 14-6 से हरा कर कांस्य पदक जीता।
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- महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह और बस्तर के पारंपरिक आदिवासी शिल्प समावेशी विकास और संस्कृति के संरक्षण के प्रमुख वाहक हैं
जगदलपुर। केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे ने आज जगदलपुर में 'छत्तीस कला' के तहत प्रगति महिला स्वयं सहायता समूह के विकास केंद्र और स्टालों का दौरा किया। उन्होंने स्थानीय उत्पादों की एक श्रृंखला की समीक्षा की और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला उद्यमियों के साथ बातचीत भी की।श्रीमती खडसे ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामुदायिक नेतृत्व वाले विकास की दिशा में हो रही महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाया गया है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक परिवर्तन के वाहक के रूप में उभर रहे हैं।श्रीमती खडसे ने राज्य की महिला-केंद्रित पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान कर रही हैं, जबकि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों की बिक्री, तैयार खाद्य उत्पाद और लखपति दीदी योजना जैसे पूरक प्रयास स्थायी आजीविका के अवसरों और बाजार तक पहुंच का विस्तार कर रहे हैं।श्रीमती खडसे ने कहा कि ये पहल न केवल आय सृजन में योगदान दे रही हैं, बल्कि पोषण सुरक्षा, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक हैं। उन्होंने चल रहे प्रयासों को नारी शक्ति के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।श्रीमती खडसे ने बस्तर जिले के चिलकुटी गांव की अपनी यात्रा के दौरान, समृद्ध कलात्मक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का भी जायजा लिया। धोकरा कला में उपयोग की जाने वाली पारंपरिक लॉस्ट-वैक्स तकनीक इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण रही। यह तकनीक आदिवासी धातु कला का एक प्रतिष्ठित रूप है और बस्तर के कारीगर समुदायों की अनूठी पहचान और शिल्प कौशल को दर्शाती है।श्रीमती खडसे ने इन परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह शिल्प कला मात्र एक कलात्मक अभ्यास से कहीं अधिक है; यह एक जीवंत सांस्कृति और स्थानीय आदिवासी कारीगरों की स्थायी विरासत का प्रतीक है। इस यात्रा ने सांस्कृतिक संरक्षण और आजीविका सृजन के बीच घनिष्ठ संबंध को भी रेखांकित किया। जो पारंपरिक स्थानीय शिल्प समुदायों को आजीविका के स्थायी आर्थिक अवसर प्रदान करते हैं।श्रीमती खड़से ने कार्यक्रम के दौरान महिला उद्यमियों और कारीगरों से बातचीत की और उन्हें अपनी पहलों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।इस अवसर पर जिला कलेक्टर आईएएस श्री आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक आईपीएस श्री शलभ सिन्हा, जिला पंचायत मुख्य कार्यकारी अधिकारी आईएएस श्री प्रतीक जैन और बस्तर के एसडीएम श्री गगन शर्मा उपस्थित थे।छत्तीसगढ़ में महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों और पारंपरिक आदिवासी शिल्पों के माध्यम से हो रहा परिवर्तन महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और समावेशी आर्थिक विकास के आकर्षक मॉडल के रूप में उभर रहा है।














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