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- -दोना-पत्तल से कारोबार शुरू कर चार व्यवसायों का कर रही हैं सफल संचालन-गांव की महिलाओं के लिए पेश की मिसालरायपुर / स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर श्लखपति दीदीश् बन रही हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। ऐसी कई महिलाओं ने प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं और छोटी पूंजी की मदद से स्वरोजगार अपनाकर अपनी तकदीर बदली है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत चल रहा लखपति दीदी अभियान छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहा है। इसका सबसे सटीक और जीवंत उदाहरण बनी हैं बैकुण्ठपुर विकासखंड के ग्राम तलवापारा की रहने वाली श्रीमती कांति साहू। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच कांति ने न सिर्फ अपनी किस्मत बदली, बल्कि आज वे गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। एक सामान्य कृषक परिवार से ताल्लुक रखने वाली कांति साहू हमेशा से खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहती थीं, लेकिन पूंजी के अभाव में उनका यह सपना दबा हुआ था। करीब तीन साल पहले वह गांव की महिलाओं के साथ मिलकर शारदा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह में आने के बाद उन्हें बचत और व्यावसायिक बारीकियों की समझ मिली। इसके बाद बिहान योजना के तहत बैंक लिंकेज, एसवीईपी योजना और मुद्रा ऋण के माध्यम से उन्हें करीब 4 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इस पूंजी ने उनके सपनों को पंख दे दिए।कांति दीदी ने जोखिम उठाते हुए किसी एक व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय विविधता को चुना। उन्होंने एक साथ कई आजीविका गतिविधियों की शुरुआत की। दोना-पत्तल निर्माण इकाई, धान कृषि बीज केंद्र, मैचिंग सेंटर (कपड़ा व्यवसाय), सिलाई केंद्र, पति का मिला मजबूत साथ कांति साहू बताती हैं कि इस पूरे सफर में उनके पति महेन्द्र साहू हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे। शुरुआती चुनौतियों को मात देने में पति-पत्नी की साझा मेहनत और समर्पण का बड़ा योगदान रहा। आज कांति साहू के सभी व्यवसाय सफलतापूर्वक चल रहे हैं। वर्तमान में इन व्यवसायों से हर महीने 1 से 1.5 लाख रुपये तक का टर्नओवर (कारोबार) हो रहा है, जिसमें से वे 30 से 35 हजार रुपये का शुद्ध मासिक लाभ कमा रही हैं। इस तरह उनकी वार्षिक शुद्ध आय 3 लाख रुपये से अधिक हो गई है, जिससे उन्होंने आधिकारिक तौर पर श्लखपति दीदीश् की श्रेणी में अपनी जगह बना ली है।आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ ही कांति का सामाजिक आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज वे न केवल अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर रही हैं, बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखा रही हैं। कांति साहू की यह सफलता साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और अवसर मिले, तो वे समाज में महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल कायम कर सकती हैं।
- -जल संरक्षण, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और जनसुविधाओं को लेकर दिए आवश्यक निर्देशमहासमुंद / कलेक्टर श्री विनय लंगेह के मार्गदर्शन में जिले में संचालित विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति की समीक्षा के लिए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हेमंत नंदनवार ने शुक्रवार को विकासखंड सरायपाली एवं बसना क्षेत्र का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान सीईओ जिला पंचायत श्री हेमंत नंदनवार ने ग्राम पंचायत बालसी में निर्मित सामुदायिक शौचालय का अवलोकन किया। उन्होंने शौचालय की उपयोगिता, साफ-सफाई व्यवस्था एवं रख-रखाव की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों को निर्देशित किया कि सामुदायिक परिसंपत्तियों का नियमित रख-रखाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि ग्रामीणों को इसका बेहतर लाभ मिल सके।इसके पश्चात ग्राम पंचायत केंदुढार में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवन का निरीक्षण किया गया। उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति, गुणवत्ता एवं निर्धारित समय-सीमा की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि भवन निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण किया जाए। आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों के सर्वांगीण विकास, पोषण एवं प्रारंभिक शिक्षा के लिए बेहतर सुविधा केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया गया।ग्राम पंचायत बिरकोल में हाट बाजार एवं तालाब का निरीक्षण करते हुए श्री नंदनवार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े हाट बाजारों को सुव्यवस्थित करने तथा आमजन को सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। तालाब निरीक्षण के दौरान उन्होंने जल संरक्षण एवं जल संवर्धन कार्यों को प्राथमिकता के साथ कराने कहा। उन्होंने कहा कि वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण कर भू-जल स्तर में सुधार लाने के लिए ग्राम स्तर पर प्रभावी प्रयास किए जाएं। तालाबों के गहरीकरण, साफ-सफाई एवं आसपास के क्षेत्र के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।निरीक्षण के दौरान सीईओ जिला पंचायत ने समुदायिक केंद्र बसना एवं सरायपाली का भी औचक निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं, व्यवस्थाओं एवं संचालित गतिविधियों की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सुधारात्मक निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए मैदानी स्तर पर सतत निगरानी रखें। विकास कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इस दौरान संबंधित जनपद पंचायत एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं स्थानीय अमला उपस्थित रहे।
- -मुरुम उत्खनन और अवैध रेत परिवहन में संलिप्त 9 वाहन जब्त, खनिज माफियाओं में हड़कंपरायपुर। राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा खनिज संपदा के अवैध दोहन को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध मुरुम उत्खनन और रेत परिवहन में संलिप्त कुल 9 वाहनों को जब्त किया है।कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन के निर्देश पर जिला खनिज उड़नदस्ता दल द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर यह कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान सिवनी और मरवाही क्षेत्र में अवैध रूप से मुरुम उत्खनन किए जाने की सूचना पर खनिज विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। जांच में अवैध उत्खनन की पुष्टि होने पर 2 जेसीबी मशीन एवं 3 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया गया। सभी जब्त वाहनों को संबंधित पुलिस थानों में सुरक्षित रखा गया है। इसी प्रकार मरवाही, कोलबीरा एवं कोटमी क्षेत्र में अवैध रूप से रेत का परिवहन करते पाए जाने पर 4 ट्रैक्टर वाहनों को भी जब्त किया गया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि सभी मामलों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की गई है। वाहन मालिकों को नियमानुसार अर्थदंड जमा करने के बाद ही वाहनों की रिहाई की अनुमति दी जाएगी।राज्य सरकार द्वारा खनिज संपदा को सार्वजनिक संपत्ति मानते हुए उसके संरक्षण और वैध उपयोग को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। अवैध उत्खनन और परिवहन न केवल शासन को राजस्व हानि पहुंचाते हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए भी गंभीर चुनौती उत्पन्न करते हैं। इसी कारण प्रदेश सरकार ने अवैध खनन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का स्पष्ट संदेश देते हुए लगातार निगरानी और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने अधिकारियों को जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने तथा दोषियों के विरुद्ध निरंतर और कठोर कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों का संरक्षण शासन की प्राथमिकता है और इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।खनिज विभाग की लगातार कार्रवाई से जिले में अवैध खनन एवं परिवहन में संलिप्त लोगों के बीच हड़कंप की स्थिति है। जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी की जा रही है तथा शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। इससे अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिल रही है। खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के विरुद्ध अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा राजस्व हितों की रक्षा के लिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि अवैध खनन संबंधी किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल प्रशासन को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके।राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और जिला प्रशासन की सक्रियता के चलते खनिज माफियाओं पर लगातार शिकंजा कस रहा है। कार्रवाई में सहायक खनि अधिकारी आदित्य मानकर, खनि निरीक्षक सुजीत कंवर, खनिज सिपाही शिवकुमार लहरे, नगर सैनिक सतीश साहू एवं साहिब गनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
- -सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सराहा था स्थानीय उत्पाद, बाजार में बढ़ी सुगंधित पारंपरिक चावल की मांगरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के पारंपरिक विष्णु भोग चावल की तारीफ किए जाने के बाद इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। हालत यह है कि अब जिले के बाहर से भी लोग इस विशेष सुगंधित चावल को खरीदने के लिए उत्पादकों तक सीधे पहुंच रहे हैं।गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत निमधा में आयोजित जनचौपाल के दौरान स्थानीय किसानों और महिला समूहों द्वारा उपजाए गए विष्णु भोग चावल की विशेष सराहना की थी। मुख्यमंत्री के इस संबोधन का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। इसी वीडियो को देखकर रायपुर निवासी अजय कुमार इस पारंपरिक चावल की विशेषताओं और गुणवत्ता से इतने प्रभावित हुए कि वे अपने साथियों के साथ सीधे गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले पहुंच गए। जिले में पहुंचे इन ग्राहकों ने कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन की विशेष उपस्थिति में तिपान महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से सीधे 50 किलोग्राम विष्णु भोग चावल की खरीदी की। इस खरीदी की कुल कीमत 7 हजार रुपये रही। रायपुर से आए ग्राहकों ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा उत्पाद की तारीफ किए जाने के बाद ही उनकी रुचि इस चावल के प्रति जगी थी और वे खुद इसकी सुगंध और स्वाद का अनुभव करना चाहते थे। उन्होंने भविष्य में भी इस चावल की खरीदी जारी रखने की बात कही।इस मौके पर तिपान महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की नीति रंग ला रही है। इससे किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और उत्पादक संगठनों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है और उनके लिए बाजार के नए रास्ते खुल रहे हैं।अपनी विशिष्ट सुगंध, बेहतरीन स्वाद और उच्च गुणवत्ता के लिए पहचाना जाने वाला विष्णु भोग चावल अब सिर्फ एक स्थानीय फसल नहीं, बल्कि जिले की कृषि समृद्धि और महिला उद्यमिता का एक सफल ब्रांड बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री की इस अनूठी पहल से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीदें काफी मजबूत हो गई हैं।
- -श्री साव ने 6 जून को किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन पर बन रहे ओवरब्रिज की देखी थी प्रगति, लेट-लतीफी पर ठेकेदार और अधिकारियों को लगाई थी फटकाररायपुर । उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण की धीमी प्रगति पर ठेकेदार को नोटिस जारी किया है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान 6 जून को राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशलूर-जगदलपुर मार्ग में किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन के ऊपर बन रहे फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज का निरीक्षण किया था। उन्होंने निरीक्षण के दौरान काम के पिछड़ने एवं लेट-लतीफी पर ठेकेदार और अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उन्होंने अनुबंध के अनुसार कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर गहरी नाराजगी जताते हुए ठेकेदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। बस्तर जिले में केशलूर के पास 69 करोड़ 36 लाख रुपए की लागत से इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है।लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता ने निर्माण एजेंसी मेसर्स अशोक कुमार मित्तल को जारी नोटिस में कहा है कि साइट उपलब्ध होने के बावजूद मैन-पॉवर, मटेरियल और मशीनरी की खराब व्यवस्था के कारण अलग-अलग चरणों में निर्माण के समयबद्ध लक्ष्यों को हासिल नहीं किया जा सका है। कार्यस्थल पर काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे है और तय किए गए माइलस्टोन्स (महत्वपूर्ण पड़ावों) के अनुरूप नहीं है। विभाग द्वारा प्रगति की लगातार समीक्षा कर कार्यों में तेजी लाने के लिए बार-बार निर्देशित और नोटिस जारी करने के बावजूद काम की गति असंतोषजनक है।विभाग ने ठेकेदार को जारी नोटिस में कहा है कि उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री द्वारा विगत 6 जून को साइट के निरीक्षण के दौरान काम की बेहद धीमी प्रगति पर गंभीर चिंता जताई गई थी। उन्होंने अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार ठेकेदार के विरूद्ध तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उप मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य अभियंता ने ठेकेदार को नोटिस जारी कर तुरंत पर्याप्त मैन-पॉवर, मशीनरी, सामग्री और अन्य जरूरी संसाधन जुटाकर काम में तेजी लाने तथा प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए तय लक्ष्यों को हासिल करने सभी जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए हैं। काम की प्रगति में उल्लेखनीय सुधार नहीं पाए जाने पर विभाग द्वारा अनुबंध के प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- -बलौदाबाजार को 3.5 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात: राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने किया भूमिपूजन और लोकार्पणरायपुर ।छत्तीसगढ़ के राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने शुक्रवार को बलौदाबाजार नगर पालिका क्षेत्र को करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी। मंत्री श्री वर्मा ने कुल 3 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत वाले विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया, साथ ही दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए 12.32 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित रैन बसेरा का लोकार्पण भी किया।भूमिपूजन एवं लोकार्पण के इन विकास कार्यों पर नजर डालें तो नगर पालिका क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं। इसके तहत वार्ड क्रमांक 16 में 56.86 लाख रुपए की लागत से 12 नग राहत शिविरों का निर्माण किया जाएगा, वहीं वार्ड क्रमांक 12 में भी 60.25 लाख रुपए की राशि से 10 नग राहत शिविरों की आधारशिला रखी गई है। स्थानीय नागरिकों की संवेदनशीलता और जरूरत को देखते हुए वार्ड क्रमांक 17 में 61.44 लाख रुपए खर्च कर मुक्तिधाम का उन्नयन एवं जीर्णोद्धार कार्य कराया जाएगा।इसी तरह शहर के सुव्यवस्थित विकास के लिए अधिसंरचना एवं पर्यावरण निधि के अंतर्गत 1.17 करोड़ रुपए की एक बड़ी राशि स्वीकृत की गई है, जिससे विभिन्न वार्डों में 10 अलग-अलग विकास कार्य पूरे किए जाएंगे। इसके साथ ही, आम जनता को स्वच्छ और सुचारू पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अलग-अलग क्षेत्रों में 40.72 लाख रुपए की लागत से पाइपलाइन विस्तार का कार्य शुरू किया गया है। इन सभी भूमिपूजन कार्यों के साथ-साथ, सामाजिक सरोकार को प्राथमिकता देते हुए बस स्टैंड के पास विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए 12.32 लाख रुपए की लागत से एक आधुनिक रैन बसेरे का निर्माण पूरा कर उसका लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार विकास कार्यों को पूरी गति के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि गाँव हो या शहर, विकास की राह में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी। हमारी डबल इंजन की सरकार तेज गति से विकास के पथ पर दौड़ रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश का चहुंमुखी विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। युवा, महिला, किसान और बुजुर्ग—हर वर्ग के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू हैं और जनता इनका सीधा लाभ उठाकर खुशहाल है।भूमिपूजन कार्यक्रम के पश्चात मंत्री श्री वर्मा ने पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने का संदेश दिया। उन्होंने पास में स्थित डबरी (तलाब) की मेढ़ पर आंवले का पौधा लगाया। इसके साथ ही उन्होंने जनपद पंचायत कार्यालय परिसर में नीम का पौधा भी रोपा। इस दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अशोक जैन, जनपद अध्यक्ष श्रीमती सुलोचना यादव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और अधिकारी उपस्थित थे।
- -पांच राज्यों के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव, विकलांगता रोकथाम और सामाजिक भेदभाव समाप्त करने पर विशेष जोररायपुर। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP) के अंतर्गत कुष्ठ रोग के संक्रमण को पूर्णतः समाप्त करने तथा “जीरो ट्रांसमिशन” के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति के लिए नया रायपुर में 02 दिवसीय क्षेत्रीय समीक्षा एवं रणनीतिक कार्ययोजना हेतु कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव एवं मिशन संचालक (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) सुश्री आराधना पटनायक, सचिव स्वास्थ्य, छत्तीसगढ़ श्री अमित कटारिया, आयुक्त सह संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं सह मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ श्री संजीव कुमार झा, संयुक्त सचिव भारत सरकार निखिल गजराज, कुष्ठ रोग प्रकोष्ठ के उप महानिदेशक डॉ. सुनील वी. गिट्टे सहित महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड और मध्यप्रदेश के मिशन संचालक, राज्य कुष्ठ अधिकारी व क्षेत्रीय निदेशक उपस्थित रहे।इस अवसर पर सचिव स्वास्थ्य श्री अमित कटारिया ने राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति, चुनौतियों और आगामी रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की । विशेषज्ञों ने कुष्ठ रोग के संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने, समय पर पहचान सुनिश्चित करने तथा रोग से होने वाली विकलांगता को समाप्त करने के लिए केंद्रित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।अपने संबोधन में स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि इस क्षेत्रीय कार्यशाला में पांच राज्यों के स्वास्थ्य विशेषज्ञ, कार्यक्रम प्रबंधक और तकनीकी विशेषज्ञ एक मंच पर एकत्र हुए हैं। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग केवल स्वास्थ्य संबंधी चुनौती नहीं है, बल्कि इससे जुड़ा सामाजिक कलंक (स्टिग्मा) भी रोगियों के जीवन को प्रभावित करता है। इसलिए उपचार के साथ-साथ समाज के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ इस चुनौती को गंभीरता से स्वीकार करते हुए “कुष्ठ मुक्त छत्तीसगढ़” के लक्ष्य की दिशा में योजनाबद्ध और प्रतिबद्ध प्रयास कर रहा है।केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव एवं मिशन संचालक (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) सुश्री आराधना पटनायक ने अपने मुख्य वक्तव्य में कहा कि कुष्ठ रोग के शून्य संक्रमण लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्यों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान, बेहतर समन्वय और साक्ष्य आधारित योजना निर्माण आवश्यक है। उन्होंने प्रभावित समुदायों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने तथा रोगियों के प्रति भेदभाव और पूर्वाग्रह समाप्त करने की दिशा में व्यापक जनजागरूकता पर बल दिया।कार्यशाला में महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ द्वारा राज्य स्तरीय प्रस्तुतियां दी गईं। प्रस्तुतियों में नए मामलों की पहचान, उपचार सेवाओं की उपलब्धता, संपर्क अनुवर्ती जांच, विकलांगता रोकथाम, पुनर्वास और जागरूकता गतिविधियों की समीक्षा की गई। राज्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में अपनाई जा रही नवाचार आधारित पहलों और सफल मॉडलों को भी साझा किया।कार्यशाला में कुष्ठ रोग प्रकोष्ठ के उप महानिदेशक डॉ. सुनील वी. गिट्टे ने राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति पर प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 में देशभर में 91,783 नए कुष्ठ रोगियों की पहचान की गई है तथा प्रचलन दर 0.56 प्रति 10 हजार आबादी दर्ज की गई। नए मामलों में 2.12 प्रतिशत रोगियों में ग्रेड-2 विकलांगता तथा 4.18 प्रतिशत मामले बच्चों में पाए गए। उन्होंने बताया कि रोगियों के पुनर्वास और विकलांगता रोकथाम के लिए 1,591 पुनर्निर्माण शल्यक्रियाएं, 1.03 लाख से अधिक एमसीआर फुटवियर तथा 1.25 लाख से अधिक सेल्फ-केयर किट वितरित की गई हैं। उन्होंने कहा कि सक्रिय रोगी खोज, समय पर उपचार, विकलांगता की रोकथाम और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से कुष्ठ रोग के शून्य संक्रमण लक्ष्य की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।इसके पश्चात आयोजित संवाद सत्र में भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, राज्यों के प्रतिनिधियों तथा तकनीकी विशेषज्ञों ने जिलावार चुनौतियों और संभावित समाधानों पर चर्चा की। प्रतिभागियों ने रोग की शीघ्र पहचान, उपचार अनुपालन, सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक व्यवहार परिवर्तन को कार्यक्रम की सफलता के लिए महत्वपूर्ण बताया।सत्र के दौरान स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि कुष्ठ रोग के शून्य संक्रमण और विकलांगता मुक्त समाज का लक्ष्य तभी संभव है जब स्वास्थ्य तंत्र, समुदाय और विभिन्न साझेदार संस्थाएं मिलकर कार्य करें। प्रतिभागियों ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्यों, भारत सरकार और तकनीकी सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से देश को कुष्ठ रोग मुक्त बनाने तथा प्रभावित व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति सुनिश्चित की जा सकेगी।
- -सेवा सेतु केंद्र बना आमजनों के लिए सहारा, तत्काल विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र मिलने से रामेश्वरी ने जताया आभाररायपुर। राज्य सरकार द्वारा आम नागरिकों को शासकीय सेवाएं सरल, सुगम और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित सेवा सेतु केंद्र लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से विभिन्न प्रमाण पत्रों और नागरिक सेवाओं का लाभ अब लोगों को एक ही स्थान पर आसानी से मिल रहा है। सेवा सेतु केंद्रों में सेवाओं के विस्तार से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिली है। ऐसी ही बस्तर जिले की एक हितग्राही रामेश्वरी ने मई माह में विवाह पंजीयन आवेदन किया था, सेवा सेतु केंद्र के माध्यम से विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र निर्धारित समय सीमा में प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि विकासखंड बस्तर के ग्राम चोकर निवासी तिरपती से फ़रवरी माह में विवाह हुआ था। विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र की आवश्यकता होने पर वे सेवा सेतु केंद्र पहुंचीं, जहां निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें कुछ ही दिनों में ही प्रमाण पत्र उपलब्ध करा दिया गया। पहले इस प्रकार के कार्यों के लिए कई कार्यालयों में जाना पड़ता था और समय भी अधिक लगता था, लेकिन अब सेवा सेतु केंद्र के माध्यम से यह प्रक्रिया बेहद आसान हो गई है।रामेश्वरी ने कहा कि सेवा सेतु केंद्र में उन्हें कर्मचारियों द्वारा आवश्यक मार्गदर्शन भी मिला और बिना किसी परेशानी के उनका कार्य पूरा हो गया। उन्होंने राज्य सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे आम नागरिकों को काफी सुविधा मिल रही है। उन्होंने विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र समय पर उपलब्ध कराने के लिए शासन और प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल के तहत अब आय, जाति, निवास प्रमाण-पत्र, विवाह प्रमाण-पत्र, नाम परिवर्तन संबंधी राजपत्र अधिसूचना तथा भू-नकल सहित 441 से अधिक शासकीय सेवाएं एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सेवा सेतु पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। सेवा सेतु ने नागरिकों को वन स्टॉप सॉल्यूशन उपलब्ध कराया है। अब लोग ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह पहल केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत भी मानी जा रही है। इससे आम लोगों का शासन व्यवस्था पर विश्वास मजबूत हुआ है।पूर्व में ई-डिस्ट्रिक्ट प्लेटफॉर्म पर केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं। आवश्यकता को देखते हुए इसका उन्नत संस्करण "सेवा सेतु" विकसित किया गया, जिसमें अब 441 से अधिक सेवाएं शामिल की गई हैं। इनमें 54 नई सेवाएं जोड़ी गई हैं, जबकि विभिन्न विभागों की 329 री-डायरेक्ट सेवाओं का एकीकरण भी किया गया है। तीस से अधिक विभाग इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं, जिससे नागरिकों को अलग-अलग पोर्टल पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनी है। पूर्व में कॉमन सर्विस सेंटर के नाम से संचालित केंद्रों में शासन के कुछ ही सेवाएं उपलब्ध थी अब राज्य सरकार ने सेवा सेतु केंद्रों के माध्यम से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन सहित विभिन्न नागरिक सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे शासन की जनहितकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के प्रयासों को मजबूती मिल रही है।
- रायपुर । फिल्में और डॉक्युमेंट्री केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सकारात्मक संदेश देने का एक प्रभावी साधन हैं। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने शुक्रवार को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के सम्मान समारोह में उक्त बातें कही। यह कार्यक्रम रायपुर के एक निजी होटल में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।राज्यपाल ने कहा कि आदिम युग से ही मनुष्य विभिन्न माध्यमों से अपने विचार और संदेश व्यक्त करता रहा है। समय के साथ नाटक, रेडियो, टेलीविजन और अब डिजिटल माध्यमों ने इस भूमिका को और व्यापक बनाया है। उन्होंने कहा कि पहले सिनेमा का मूल उद्देश्य केवल धन अर्जित करना नहीं था, बल्कि समाज को संदेश देना और जागरूक करना था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी भारतीय सिनेमा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राज्यपाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध उल्लेखनीय सफलता मिली है। फिल्म निर्माताओं को चाहिए कि अब वे बस्तर की समृद्ध संस्कृति से देश और दुनिया को परिचित कराएं। इससे क्षेत्र की सकारात्मक छवि को मजबूती मिलेगी।राज्यपाल ने सद्गति, चरणदास चोर और देवदास जैसी फिल्मों और नाटकों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और जागरूकता लाने वाली फिल्मों की आज भी उतनी ही आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और पर्व-त्योहारों जैसे हमारे धरोहर को स्थायी रूप से संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम डॉक्यूमेंट्री फिल्में हैं। उन्होंने कलाकारों से लोककला, लोकगीत, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।राज्यपाल ने कहा कि मोबाइल की बढ़ती लत आज गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। बच्चे खेल के मैदानों से दूर हो रहे हैं और उनकी रचनात्मकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कलाकारों से आग्रह किया कि वे नई पीढ़ी को कला, संगीत, नाटक और नृत्य जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए आगे आएं। इस अवसर पर राज्यपाल ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त डॉक्युमेंट्री फिल्मों छत्तीसगढ़ के भीम दाऊ चिंताराम, हैप्पी बर्थडे और स्क्रीन के निर्माता-निर्देशकों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संस्कृति विभाग के संचालक श्री संजय कन्नौजे ने दिया। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक मनोज वर्मा ने किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, विभिन्न डॉक्युमेंट्री फिल्मों के निर्माता-निर्देशक कलाकार एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
- -इन्वेस्टर कनेक्ट में हैदराबाद के निवेशकों को मुख्यमंत्री साय का न्योता-आईटी, टेक्सटाइल, डेटा सेंटर, फार्मा के क्षेत्र में खुली 7,800 रोजगार की राहरायपुर । छत्तीसगढ़ ने निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हैदराबाद में आयोजित ‘छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट’ कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की सात प्रमुख कंपनियों ने 9,580 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए हैं, जिनसे 7,800 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने देश के प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा विकसित भारत के ग्रोथ इंजन के रूप में छत्तीसगढ़ तेजी से उभर रहा है और राज्य में निवेशकों के लिए ‘रेड कारपेट’ बिछा हुआ है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन सहित दक्षिण भारत के कई बड़े उद्योगपति, निवेशक और कारोबारी प्रतिनिधि मौजूद रहे।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु के साथ-साथ जापान और दक्षिण कोरिया में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्य कर रही है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज निवेश के लिए देश के सबसे बेहतर राज्यों में से एक बनकर उभर रहा है। राज्य में उद्योगों के लिए आसान प्रक्रियाएं, सिंगल विंडो व्यवस्था, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और उद्योग अनुकूल नीतियां उपलब्ध हैं। उन्होंने निवेशकों को छत्तीसगढ़ में उद्योग स्थापित करने का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हैदराबाद ने आईटी, फार्मा, बायोटेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ भी इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और दोनों राज्यों के उद्योगपति एवं उद्यमी मिलकर नए अवसरों का लाभ उठा सकते हैं।उन्होंने कहा कि मध्य भारत में स्थित छत्तीसगढ़ देश का सबसे उपयुक्त लॉजिस्टिक हब बनने की क्षमता रखता है। छत्तीसगढ़ सात राज्यों से घिरा हुआ है और 60 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। रेलवे नेटवर्क, भारतमाला परियोजना, एयर कार्गाे सुविधाओं तथा खनिज संसाधनों की उपलब्धता उद्योगों के लिए इसे अत्यंत अनुकूल बनाती है।मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में ग्रीन स्टील को बढ़ावा देने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे प्रदेश देश के प्रमुख पावर हब के रूप में उभर रहा है।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सात प्रमुख कंपनियों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए ‘इन्विटेशन टू इन्वेस्ट’ (ऑफर लेटर) प्रदान किए। इनमें डेटा सेंटर, सीमेंट, सेमीकंडक्टर एवं जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल और डेयरी प्रसंस्करण क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियां शामिल हैं।सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव हाइपरनेक्स्ट डाटा सेंटर लिमिटेड की ओर से प्राप्त हुआ, जिसने छत्तीसगढ़ में भारत का पहला समर्पित डिजास्टर रिकवरी डेटा सेंटर कैंपस स्थापित करने के लिए 4,200 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया। इस परियोजना से राज्य में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और छत्तीसगढ़ डेटा सेंटर क्षेत्र का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकेगा। इस परियोजना से लगभग 250 रोजगार सृजित होंगे।फीग्रेड एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने सीमेंट क्षेत्र में 2,912 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 4,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं निवाई लैब्स प्राइवेट लिमिटेड ने 1,000 करोड़ रुपये के निवेश से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर असेंबली से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव दिया। इससे राज्य में आधुनिक तकनीकी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा एवं लगभग 200 रोजगार सृजित होंगे।सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण क्षेत्र की एसजी मार्ट लिमिटेड ने 700 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 450 लोगों को रोजगार मिल सकता है। श्री सरवणा मिल्स प्राइवेट लिमिटेड ने 528 करोड़ रूपए के निवेश से अत्याधुनिक टेक्सटाइल और परिधान निर्माण इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इस परियोजना से लगभग 2,500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की काबरा ड्रग्स ने 200 करोड़ रुपये तथा डेयरी क्षेत्र की दिनशॉज़ डेयरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने 40 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है। इन दोनों परियोजनाओं से क्रमशः लगभग 250 और 150 रोजगार सृजित होंगे। हैदराबाद दौरे के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और राज्य के प्रतिनिधिमंडल ने देश की कई अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। इनमें पेज इंडस्ट्रीज और डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स, एक्सिस एनर्जी, सेल्कॉन ग्रुप, मैग्नमविंग्स जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल रहीं। बैठकों में छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और राज्य सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा स्वामी नारायण गुरुकुल संगठन के प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रायपुर के टाटीबंध में 650 बिस्तरों वाले चौरिटेबल अस्पताल की स्थापना के प्रस्ताव पर चर्चा की।इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में आईटी, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, एयरोस्पेस एवं रक्षा, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और उन्नत विनिर्माण जैसे भविष्य के उद्योगों में निवेश के अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। निवेशकों ने इन क्षेत्रों में विशेष रुचि दिखाई।कार्यक्रम में सीएसआईडीसी के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, इन्वेस्टमेंट कमिश्नर सुश्री रितु सैन, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक श्री विश्वेश कुमार, उद्योग विभाग के संचालक श्री प्रभात मलिक एवं अन्य अधिकारी भी शामिल रहे।
- -छत्तीसगढ़ में 1.12 लाख से अधिक वेंडर्स को मिला आर्थिक संबलरायपुर। कभी सड़क किनारे ठेला लगाकर सब्जियां बेचने वाले, चाय-नाश्ते की छोटी दुकान चलाने वाले या फिर फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडर (रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों) के लिए पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। बैंक ऋण तक पहुंच नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय सीमित था। लेकिन प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने इन छोटे उद्यमियों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिखी है।छत्तीसगढ़ में इस योजना के माध्यम से अब तक 1 लाख 12 हजार 36 से अधिक स्ट्रीट वेंडर (पथ विक्रेताओं) को 256 करोड़ 94 लाख रुपये से अधिक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। योजना ने न केवल उनके कारोबार को मजबूती दी है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका का नया अवसर भी प्रदान किया है।कोविड-19 महामारी के दौरान आजीविका पर पड़े गंभीर प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले स्ट्रीट वेंडर को बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने व्यवसाय को फिर से शुरू कर सकें और उसका विस्तार कर सकें। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की गारंटी की आवश्यकता नहीं होती। समय पर ऋण चुकाने वाले हितग्राहियों को अगले चरण में अधिक राशि का ऋण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।योजना के तहत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। प्रथम चरण में 10,000 रूपए तक का ऋण, द्वितीय चरण में 20,000 रूपए तक का ऋण तथा तृतीय चरण में 50,000 रूपए तक का ऋण दिया जाता है। अर्थात इस योजना के अंतर्गत न्यूनतम 10 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 50 हजार रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण सहायता प्राप्त की जा सकती है। समय पर पुनर्भुगतान करने वाले हितग्राही ही अगले चरण के लिए पात्र बनते हैं। पीएम स्वनिधि योजना का लाभ उन छोटे कारोबारियों को मिलता है जो सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इनमें सब्जी एवं फल विक्रेता, चाय, नाश्ता एवं फास्ट फूड विक्रेता, पान दुकान संचालक, कपड़ा एवं रेडीमेड वस्त्र विक्रेता, जूता-चप्पल विक्रेता, किताब एवं स्टेशनरी विक्रेता, फूल एवं पूजा सामग्री विक्रेता, मोबाइल एक्सेसरीज विक्रेता, नाई, मोची, लॉन्ड्री जैसी सेवाएं देने वाले स्वरोजगारी, जैसे अनेक छोटे व्यवसाय शामिल हैं।छत्तीसगढ़ में योजना का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और धमतरी जैसे जिलों में हजारों पथ विक्रेताओं को ऋण सहायता प्रदान की गई है। राज्य स्तर पर 267.22 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि के विरुद्ध 256.94 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया जा चुका है, जिससे 1.12 लाख से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कहना है कि पीएम स्वनिधि योजना केवल ऋण वितरण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह छोटे उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। इससे स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, उनकी आय में वृद्धि हो रही है और वे अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर पा रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों में हजारों पथ विक्रेता इस योजना के सहारे अपने कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना वास्तव में उन मेहनतकश हाथों को आर्थिक संबल देने का माध्यम बनी है, जो अपने परिश्रम से शहरों की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं।
- -कला, संस्कृति और सिनेमा के संरक्षण-संवर्धन के लिए सरकार प्रतिबद्ध - मुख्यमंत्री श्री साय-गिधनी पाठ (छुरा) में विकास कार्यों के लिए 20 लाख रुपये तथा धमतरी में सेन समाज भवन हेतु 10 लाख रुपये की घोषणारायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय शुक्रवार को राजधानी रायपुर में संस्कृति विभाग एवं छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माताओं, कलाकारों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभाशाली व्यक्तित्वों के सम्मान समारोह में शामिल हुए।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि फिल्में केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज की सोच, संस्कृति और संवेदनाओं को दिशा देने वाली सशक्त विधा हैं। एक अच्छी फिल्म समाज में जागरूकता पैदा करती है और सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करती है। भारतीय सिनेमा ने समय-समय पर सामाजिक बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि मदर इंडिया जैसी फिल्मों ने भारतीय समाज में नैतिक मूल्यों, त्याग और आत्मसम्मान की भावना को सुदृढ़ किया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा का गौरवशाली इतिहास रहा है। पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म कही देबे संदेश ने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध सार्थक संदेश दिया था। आज छालीवुड की फिल्में मनोरंजन के साथ-साथ व्यावसायिक सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल और ओटीटी प्लेटफॉर्म के विस्तार से फिल्मों की पहुंच समाज के हर वर्ग तक हुई है, ऐसे में जिम्मेदार, सकारात्मक और मूल्याधारित सिनेमा को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग को नई पहचान दिलाने और स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम को पुनः सक्रिय किया गया है। उन्होंने बताया कि इसी वर्ष जनवरी में 150 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एवं कल्चरल कन्वेंशन सेंटर का भूमिपूजन किया गया है। इस परियोजना से राज्य में फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, हजारों कलाकारों, तकनीशियनों एवं श्रमिकों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे तथा फिल्म पर्यटन को नई गति मिलेगी।मुख्यमंत्री ने आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम एवं संस्कृति विभाग को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश की कला, संस्कृति और सिनेमा को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह सराहनीय पहल है। ऐसे सम्मान समारोह कलाकारों और रचनाकारों का मनोबल बढ़ाने के साथ नई पीढ़ी को भी प्रेरित करते हैं।कार्यक्रम में 11 देशों में सम्मानित छत्तीसगढ़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्म "छत्तीसगढ़ का भीम - चिंताराम" का विशेष प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन को जन्मदिवस की शुभकामनाएं भी दीं।इस अवसर पर उन्होंने गरियाबंद जिले के छुरा क्षेत्र स्थित गिधनी पाठ में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 20 लाख रुपये तथा धमतरी में सेन समाज भवन निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की घोषणा की। इस अवसर पर सर्व सेन समाज के प्रदेश अध्यक्ष श्री पुनीत सेन, वरिष्ठ फिल्म निर्माता श्री मोहन सुंदरानी, छत्तीसगढ़ फिल्म उद्योग से जुड़े निर्माता, निर्देशक, कलाकार एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
- 14 जून को ऑनलाइन योग सत्र एवं 21 जून को होंगे सामूहिक आयोजनबिलासपुर/ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के सफल आयोजन हेतु जिला प्रशासन बिलासपुर द्वारा व्यापक तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा इस वर्ष की थीम "स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग" निर्धारित की गई है। इसी क्रम में जिले के सभी शासकीय विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, स्थानीय निकायों एवं सामाजिक संगठनों से अधिकाधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। इस वर्ष की थीम स्वस्थ एवं सक्रिय जीवनशैली में योग की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने जिले वासियों से अपील करते हुए कहा है कि योग केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन का आधार है। उन्होंने सभी विभागों, संस्थाओं, विद्यार्थियों, कर्मचारियों एवं आम नागरिकों से योग दिवस के आयोजनों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।आयुष मंत्रालय के निर्देशानुसार 14 जून 2026 को प्रातः 6:15 बजे से 7:35 बजे तक ऑनलाइन योग सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से बड़े स्तर पर जनभागीदारी के साथ विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने का प्रयास भी किया जाएगा।वोयोग सत्र में भाग लेने के इच्छुक नागरिक टोल-फ्री नंबर 1800-315-7008 पर मिस्ड कॉल देकर अपना पंजीयन करा सकते हैं। जिला प्रशासन ने सभी विभागों एवं संस्थाओं से इस संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा अधिकाधिक लोगों को जोड़ने के निर्देश दिए हैं।इसके अलावा 21 जून 2026 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जिलेभर में सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिले का मुख्य कार्यक्रम बहतराई स्थित खेल स्टेडियम में होगा। आयुष मंत्रालय द्वारा विकसित योग संगम पोर्टल पर शासकीय, अशासकीय, शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थाएं अपने आयोजनों का पंजीयन कर सकते हैं तथा कार्यक्रम उपरांत विवरण एवं फोटोग्राफ भी अपलोड कर सकते हैं। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए सभी संस्थाएं और नागरिक मिलकर कार्य करें, ताकि बिलासपुर जिले की सहभागिता राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर एक उदाहरण बन सके। 14 जून के ऑनलाइन योग सत्र से लेकर 21 जून के मुख्य कार्यक्रम तक योग के प्रति जागरूकता और सहभागिता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
- अवैध पार्किंग, अनधिकृत ढाबों और दुर्घटना के कारणों पर सख्ती के निर्देशसड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कलेक्टर एवं एसएसपी ने की विस्तृत समीक्षाबिलासपुर/ जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण तथा नागरिकों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह ने आज जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक लेकर सड़क सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य मार्गों एवं ग्रामीण सड़कों पर दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के पालन तथा विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक में कलेक्टर श्री अग्रवाल ने कहा कि सड़क सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से अवगत कराते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध रूप से खड़े ट्रक एवं भारी वाहन दुर्घटनाओं का बड़ा कारण हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसे नागरिकों के जीवन के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय माना है। उन्होंने निर्देश दिए कि वाहन केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों एवं ले-बाय में ही खड़े किए जाएं। प्रारंभिक स्तर पर वाहन मालिकों एवं चालकों को चेतावनी देकर मोहलत दी जाए, इसके बाद नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।कलेक्टर ने कहा कि सड़क किनारे संचालित कई ढाबों एवं होटलों के कारण अवैध पार्किंग की समस्या उत्पन्न होती है। ऐसे प्रतिष्ठानों को स्वयं पार्किंग की समुचित व्यवस्था करनी होगी। आवश्यकता होने पर निजी भूमि मालिकों की सहमति से पार्किंग विकसित की जा सकती है। उन्होंने सड़क किनारे उपलब्ध शासकीय भूमि का भी सर्वे कर पार्किंग के लिए चिन्हांकन करने के निर्देश दिए। साथ ही पार्किंग स्थलों पर मार्गदर्शन हेतु कर्मियों की व्यवस्था करने को कहा।बरसात के मौसम को देखते हुए कलेक्टर ने सड़कों पर घूमने अथवा बैठने वाले मवेशियों के प्रभावी प्रबंधन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु में मवेशियों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। इसके लिए गोधन आश्रय स्थलों, गौठानों एवं गोधामों को अभी से तैयार रखा जाए। वहां साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था एवं चारे-पानी की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पेट्रोलिंग दलों एवं फ्लाइंग स्क्वॉड को नियमित निगरानी करने तथा अवैध रूप से संचालित ढाबों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश भी दिए।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह ने कहा कि सड़क सुरक्षा के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के सभी निर्देशों का जिले में कड़ाई से पालन कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में कमी दर्ज की गई है, फिर भी सुधार की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। पिछले छह माह के दौरान जिले में सड़क दुर्घटनाओं से 151 लोगों की मृत्यु हुई है। रतनपुर, तखतपुर एवं मस्तूरी थाना क्षेत्रों में सर्वाधिक दुर्घटनाएं और मौतें दर्ज की गई हैं। उन्होंने थाना-वार दुर्घटनाओं की समीक्षा करते हुए उनके प्रमुख कारणों का विश्लेषण किया तथा संबंधित विभागों को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।एसएसपी श्री सिंह ने बताया कि नशे की हालत में वाहन चलाना दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बनकर उभरा है। ऐसे मामलों में केवल चालानी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि आवश्यकतानुसार प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं। उन्होंने सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी विभागों को समन्वित टीम भावना के साथ कार्य करने पर बल दिया।बैठक में यह भी बताया गया कि टोल टैक्स से बचने के उद्देश्य से कुछ भारी वाहन ग्रामीण सड़कों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे सड़कें क्षतिग्रस्त होने के साथ दुर्घटनाओं की संभावना भी बढ़ रही है। एसएसपी ने ऐसे वाहनों की पहचान कर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में नगर निगम आयुक्त श्री प्रकाश सर्वे, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संदीप अग्रवाल, जिले के सभी एसडीएम, एसडीओपी, थाना प्रभारी, एनएचएआई, राष्ट्रीय राजमार्ग, परिवहन, पशु चिकित्सा एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। अधिकारियों ने सड़क सुरक्षा को जन आंदोलन का स्वरूप देने तथा दुर्घटनामुक्त बिलासपुर के लक्ष्य की दिशा में समन्वित प्रयास करने का संकल्प लिया।
- दुर्ग मॉडल: पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण उद्यमिता की मिसाल-381 गांवों का कचरा अब बनेगा संसाधन; जिला प्रशासन की वेस्ट टू वेल्थ पहल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दी नई उड़ानदुर्ग/ छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के कार्यान्वयन में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कलेक्टर श्री अभिजित सिंह के विशेष मार्गदर्शन और दूरदर्शी सोच के परिणामस्वरूप, जनपद पंचायत दुर्ग द्वारा ग्राम पंचायत कोलिहापुरी में स्थापित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई को अब जिले के प्रथम आधिकारिक मटेरियल रिकवरी सेंटर (एमआरसी) के रूप में विकसित किया गया है। यह केंद्र न केवल कचरा निपटान का एक केंद्र है, बल्कि यह आत्मनिर्भर ग्राम स्वराज की दिशा में एक सशक्त कदम है।कलेक्टर श्री अभिजित सिंह का वक्तव्य-इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कलेक्टर श्री अभिजित सिंह ने कहा: "कोलिहापुरी एमआरसी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक निष्पादन के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में वेस्ट टू वेल्थ (कचरे से कमाई) के मॉडल को मूर्त रूप देना है। यह केंद्र इस बात का प्रमाण है कि यदि सही तकनीकी मार्गदर्शन और सामुदायिक भागीदारी हो, तो ग्रामीण कचरा प्रबंधन को एक लाभदायक उद्यम में बदला जा सकता है। हम इस मॉडल को पूरे जिले के लिए एक मानक (बेंचमार्क) के रूप में देख रहे हैं।तकनीकी सुदृढ़ीकरण और एकीकरणजिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग दुबे ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि कोलिहापुरी एमआरसी को जिले के स्वच्छता अभियान का नोडल सेंटर बनाया गया है। इसके कार्यक्षेत्र का विस्तार करते हुए दुर्ग जनपद के सभी 81 ग्रामों, धमधा के ग्राम लिटिया और पाटन के ग्राम पतोरा की इकाइयों को इस केंद्र से लिंकेज प्रदान की गई है। इस एकीकृत तंत्र के माध्यम से जिले के कुल 381 गांवों में उत्पन्न होने वाले प्लास्टिक कचरे को एकत्र कर उसे वैज्ञानिक पद्धति से रिसाइकिल किया जा रहा है।स्मार्ट मॉनिटरिंग और पारदर्शी प्रबंधनकचरा प्रबंधन की सबसे बड़ी चुनौती—यानी घर-घर से कचरा संग्रहण—को हल करने के लिए जिला प्रशासन ने स्मार्ट तकनीक का उपयोग किया है। कचरा प्रबंधन में तकनीक का समावेश करते हुए, जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के माध्यम से 04 अत्याधुनिक ई-रिक्शा उपलब्ध कराए गए हैं। इन रिक्शाओं की विशेषता यह है कि इनमें जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली स्थापित की गई है, जो सीधे कंट्रोल रूम से जुड़ी है। इसके माध्यम से गांवों के सेग्रीगेशन शेड से प्लास्टिक वेस्ट के संग्रहण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। यह संपूर्ण प्रक्रिया केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पोर्टल पर पंजीकृत है, जो इसके वैज्ञानिक और कानूनी मानकों के अनुरूप होने की पुष्टि करती है।आर्थिक स्वावलंबन और वेस्ट टू वेल्थ का मॉडलयह केंद्र आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता की एक सफल गाथा लिख रहा है-प्रसंस्करण: प्रतिदिन 150 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे को आधुनिक मशीनों के जरिए प्रोसेस किया जा रहा है।मूल्यवर्धन: प्लास्टिक को पिघलाकर उससे लम्स (लम्प्स) तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी बाजार में भारी मांग है। इन लम्स को 20 से 25 रुपये प्रति किलो की दर से बड़ी निर्माण कंपनियों को बेचा जा रहा है।पिछले छह महीनों के सफल संचालन के उपरांत, सभी परिचालन खर्चों, बिजली शुल्क, मशीनों के रखरखाव और श्रमिकों के मानदेय का भुगतान करने के पश्चात इकाई प्रतिमाह लगभग 15,000 रुपये का शुद्ध लाभांश अर्जित कर रही है।रोजगार और सामाजिक सुरक्षाइस परियोजना ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खोले हैं। एएस पॉलिमर के साथ हुए एमओयू के तहत स्थानीय निवासियों को प्रत्यक्ष रोजगार दिया गया है। श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें मनरेगा दरों के समान साप्ताहिक मजदूरी और बीमा कवरेज प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त, इस मॉडल का सामाजिक पहलू अत्यंत सराहनीय है: 5 प्रतिशत लाभ ग्राम पंचायत को सामाजिक कल्याण गतिविधियों के लिए, 5 प्रतिशत लाभ स्थानीय शिव शक्ति स्व-सहायता समूह को सशक्तिकरण हेतु दिया गया है।परियोजना का निवेश ढांचा (कन्वर्जेंस ऑफ स्कीम्स)यह परियोजना स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और मनरेगा के अभिसरण (कन्वर्जेंस) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। विगत वर्ष 2024 में स्वच्छ भारत मिशन से 6 लाख और मनरेगा से 12 लाख, कुल 18 लाख की लागत से भवन तैयार किया गया। मशीनरी बेलिंग, फटका और श्रेडर मशीनें स्थापित करने हेतु लगभग 8 लाख स्वच्छ भारत मिशन से उपलब्ध कराई गई है। निजी भागीदारी एएस पॉलिमर द्वारा परियोजना में 9 लाख का निवेश किया गया है और बिजली कनेक्शन हेतु 1 लाख रुपये का योगदान दिया गया है। ग्राम पंचायत द्वारा इकाई के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराई गई है। जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताते हुए कहा कि यह मॉडल न केवल गांवों को कचरा मुक्त रखेगा, बल्कि ग्रामीण विकास के लिए एक सतत आय का स्रोत भी बना रहेगा। 11 महीने की अवधि वाला यह समझौता ज्ञापन (एमओयू) दुर्ग जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में सक्षम है।
- - सुरक्षित स्वच्छता हेतु प्रशासन का विशेष जन-जागरूकता संदेशदुर्ग/ स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत कलेक्टर श्री अभिजित सिंह के कुशल मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और स्वास्थ्य मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। जिले में निर्मित 05 फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) के माध्यम से अब ग्रामीणों को वैज्ञानिक पद्धति से सेप्टिक टैंक की सफाई की सुविधा मिल रही है।कलेक्टर श्री अभिजित सिंह ने जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा "ग्रामीणों का स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता है। सेप्टिक टैंकों का असुरक्षित निष्पादन न केवल गंदगी फैलाता है, बल्कि बीमारियों का भी कारण बनता है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक संयंत्र के माध्यम से प्रतिदिन न्यूनतम 02 ट्रिप डी-स्लजिंग (सफाई) का कार्य सुनिश्चित किया जाए। ग्रामवासियों से मेरी अपील है कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने घर के सेप्टिक टैंक प्रति 03 से 04 वर्षों में अनिवार्यतः खाली करवाएं। निजी वाहनों की मनमानी और अवैध डंपिंग को रोकने हेतु प्रशासन कठोर कार्रवाई कर रहा है, आप केवल अधिकृत शासकीय सेवाओं का ही लाभ लें।जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग दुबे ने जानकारी देते हुए कहा "जिले के सभी 381 ग्रामों को इन संयंत्रों से जोड़कर एक व्यवस्थित तंत्र विकसित किया गया है। पंचायत स्तर पर नाममात्र के यूजर चार्ज पर यह सुविधा उपलब्ध है। हमारा उद्देश्य है कि कोई भी गांव गंदगी मुक्त न रहे। हमने प्रत्येक विकासखंड में नोडल अधिकारी और हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं ताकि ग्रामीणों को तत्काल सेवा मिल सके।"जन-सुविधा और शुल्क विवरणजिले में ग्रामीण स्वच्छता के प्रति जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए, ग्रामीणों को सहायता हेतु सुगम संपर्क व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। जिला स्तर पर किसी भी प्रकार की जानकारी या शिकायत हेतु 2214040 पर संपर्क किया जा सकता है। विकासखंड स्तर पर सेवाओं के सुचारू संचालन हेतु ग्राम पंचायतवार उत्तरदायी अधिकारियों के नाम और संपर्क नंबर जारी किए गए हैं। जनपद पंचायत दुर्ग के अंतर्गत कोलिहापुरी ग्राम पंचायत के लिए श्री भूपेंद्र कुमार (9770547944) और सचिव श्री निमेश भोईर (9977030456) से संपर्क किया जा सकता है। इसी प्रकार, जनपद पंचायत धमधा के अंतर्गत पथरिया और लिटिया ग्राम पंचायतों के लिए श्री नीरज/सूरज (7869847187) और सचिव श्री मिथलेश यदु (9098878427) अधिकृत किए गए हैं। जनपद पंचायत पाटन के अंतर्गत पतोरा और रानीतरई ग्राम पंचायतों के लिए श्री भुनेश्वर साहू (9691398116), श्री नरेश महतो (8085520725) और सचिव श्री कन्हैया पांडे (9981368908) को संपर्क सूत्र बनाया गया है। प्रशासन ने ग्रामीणों से आग्रह किया है कि वे इन अधिकृत नंबरों पर संपर्क कर न्यूनतम निर्धारित शुल्क पर सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से अपने सेप्टिक टैंक खाली करवाएं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता बनी रहे और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। ग्राम पंचायत से 5 किलोमीटर की परिधि में 1500/- रुपये का निर्धारित शुल्क लिया जाता है।अवैध गतिविधियों पर कड़ा रुखजिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निजी वाहनों द्वारा अपशिष्ट को खुले में फेंकना एक दंडनीय अपराध है। धौराभाटा और मुरमुंदा में हुई शिकायतों के बाद पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज की गई है। कलेक्टर दुर्ग ने समस्त सरपंचों और सचिवों को निर्देशित किया है कि वे अपने क्षेत्र में अवैध वाहनों की निगरानी करें और किसी भी उल्लंघन की सूचना तत्काल जनपद कार्यालय को दें।डी-स्लज वाहन की क्रियाशीलता का विवरणदुर्ग जिले में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत फिकल स्लज मैनेजमेंट और डी-स्लज वाहनों के संचालन का प्रदर्शन अत्यंत उत्साहजनक रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान जिले की पांच प्रमुख ग्राम पंचायतों—कोलिहापुरी (दुर्ग), पथरिया एवं लिटिया (धमधा), तथा पतोरा एवं रानीतरई (पाटन)—में 381 गांवों को कवर करते हुए कुल 254 डी-स्लज ट्रिप सफलता पूर्वक संचालित किए गए। इस दौरान प्राप्त कुल यूजर चार्ज 5,89,300 रुपये रहा, जिसके सापेक्ष ड्राइवर/सैलरी, डीजल और अन्य मदों में कुल 3,73,237 रुपये का व्यय हुआ, जिससे इस प्रबंधन से कुल 2,16,063 रुपये की शुद्ध बचत प्राप्त हुई। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान भी यह अभियान निरंतर सक्रिय है। वर्ष 2026 के अप्रैल माह में 50 और मई माह में 44 ट्रिप पूरे किए गए हैं, जिनसे अब तक 2,11,000 रुपये का यूजर चार्ज अर्जित किया गया है। विशेष रूप से पथरिया (धमधा) और पतोरा (पाटन) की इकाइयां इस पूरे अभियान में सर्वाधिक सक्रिय रही हैं, जहाँ बड़ी संख्या में डी-स्लजिंग कार्य किया गया है। जिला प्रशासन अब इस अभियान को और अधिक गति देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि ग्रामीण अंचल को पूरी तरह से स्वच्छ और संक्रमण मुक्त बनाया जा सके।
- बाल श्रम नहीं, शिक्षा का अधिकारदुर्ग/ विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा किशोर न्याय बोर्ड दुर्ग में विशेष विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लीगल एंड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के दो काउंसलर विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने बच्चों को उनके अधिकारों एवं बाल संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी जानकारियाँ प्रदान की।शिविर के दौरान बच्चों को बाल श्रम की परिभाषा, उसके विभिन्न स्वरूपों तथा बाल श्रम उन्मूलन के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि बाल श्रम बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं शैक्षणिक विकास में बाधा उत्पन्न करता है तथा उनके उज्ज्वल भविष्य को प्रभावित करता है। वक्ताओं ने बच्चों को बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986, किशोर न्याय से संबंधित प्रावधानों तथा बाल संरक्षण के लिए बनाए गए विभिन्न भारतीय कानूनों की जानकारी भी दी गई।कार्यक्रम में बच्चों को शासकीय पुनर्वास योजनाओं, शिक्षा के अधिकार तथा बाल संरक्षण तंत्र के बारे में भी अवगत कराया गया। साथ ही चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098, गुड टच एवं बैड टच की जानकारी देकर उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। बच्चों ने कार्यक्रम के दौरान उत्साहपूर्वक अनेक प्रश्न पूछे, जिनका काउंसलरों द्वारा सरल एवं सहज भाषा में उत्तर देकर समाधान किया गया।विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के उपलक्ष्य में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया गया। इस अभियान में दुर्ग, भिलाई एवं धमधा क्षेत्र के पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने सक्रिय सहभागिता निभाई। च्स्ट टीमों ने गाँवों, शहरों एवं मोहल्लों में पहुँचकर बच्चों, युवाओं, अभिभावकों एवं आमजन को बाल श्रम के दुष्परिणामों तथा इसके विरुद्ध बने कानूनों के बारे में जानकारी प्रदान की।अभियान के दौरान लोगों को बताया गया कि बाल श्रम केवल कानून का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों का हनन भी है। बाल श्रम करवाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कानून में कठोर दंड एवं जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही आमजन को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता, निःशुल्क अधिवक्ता की सुविधा तथा विभिन्न कानूनी सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा एवं सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है। बाल श्रम मुक्त समाज का निर्माण तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक नागरिक इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभाए और बच्चों को श्रम नहीं, बल्कि शिक्षा एवं अवसर प्रदान करे।
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दुर्ग/ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा योगा फॉर हेल्दि ऐजिंग थीम के अंतर्गत 14 जून 2026 को प्रातः 06.15 से 07.35 बजे तक एक विशेष ऑनलाईन योग सत्र का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन के माध्यम से एक साथ सर्वाधिक लोगों की ऑनलाईन योग सहभागिता का गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड सत्यापित करने का प्रयास किया जायेगा।
छत्तीसगढ शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा प्राप्त निर्देशों के अनुसार इस ऐतिहासिक पहल में अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, समाजिक संगठनों, योग साधकों तथा आम नागरिकों से बढ़-चढ़ कर भाग लेने की अपील की गई है।कार्यकम में सहभागिता हेतु इच्छुक व्यक्तियों को टोल फ्री नं. 1800-315-7008 पर मिस्ड कॉल देकर पंजीयन कराना होगा। पंजीयन उपरांत प्रतिभागियों को व्हाट्सऐप के माध्यम से कार्यक्रम का लिंक प्राप्त होगा। गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड के लिए प्रत्येक प्रतिभागी का अपने व्यक्तिगत मोबाईल, लेपटॉप अथवा डिजिटल उपकरण से अलग-अलग लॉगिन करना आवश्यक होगा।आयुष मंत्रालय द्वारा योग संगम पोर्टल 2026 भी प्रारंभ किया गया है, जिसके माध्यम से विभिन्न संस्थाएं एवं संगठन 21 जून 2026 को आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों के लिए पंजीयन कर सकते है तथा आयोजन उपरांत कार्यक्रम का विवरण एवं फोटोग्राफ अपलोड कर सकते है। यह आयोजन योग के माध्यम से स्वस्थ्य जीवनशैली को बढ़ावा देने, जनजागरूकता विकसित करने तथा भारत की योग परम्परा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।अंतराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के तारतम्य में आयुष विभाग जिला दुर्ग के द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन प्रारंभ हो चुका है जिसके तहत समस्त शासकीय, गैर शासकीय संस्था एवं विभिन्न समुदायों में योग प्रशिक्षकों द्वारा योग के बाह्य सत्र का आयोजन प्रारंभ कर योग प्रोटोकॉल का अभ्यास करवाया जा रहा है। साथ ही सभी संस्थाएं जहां योग का आयोजन हो रहा है उन्हे योग संगम पोर्टल में पंजीयन करवाया जा रहा है। विभाग के द्वारा कुल 78 बाह्य सत्र का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही 17 जून से 21 जून तक 05 दिवसीय योग शिविर का आयोजन किया जायेगा। उपरोक्त बाह्य सत्र में अधिक से अधिक जनभागीदारी का भी लक्ष्य रखा गया है। -
दुर्ग/ खरीफ सीजन 2026 को ध्यान में रखते हुए किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा विभिन्न रासायनिक उर्वरकों की कृषक विक्रय दर निर्धारित की गई है। निर्धारित दरों के अनुसार जिले में यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी, एसएसपी, जिंकटेड सहित नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी उर्वरकों का विक्रय किया जा रहा है।
उपसंचालक कृषि संदीप भोई ने बताया कि यूरिया उर्वरक का कृषक विक्रय दर 266.50 रुपये प्रति बोरी निर्धारित की गई है। वहीं डीएपी उर्वरक की दर कंपनी के अनुसार 1350 रुपए प्रति बोरी तक निर्धारित है। एनपीके उर्वरकों में 12ः32ः16 का मूल्य 1990 रुपए, 20ः20ः0ः13 का मूल्य 1850 रुपए एवं 12ः26ः26 की दर 1990 रुपए निर्धारित की गई हैं। इसी प्रकार एमओपी (पोटाश) की दर 1975 रुपए प्रति बोरी रहेगी। एसएसपी पावडर, 551 एसएसपी दानेदार 591 रुपए, जिंकटेड एसएसपी पावडर 576 रुपए एवं टीएसपी 1300 रुपए दर तय की गई हैं, जिससे किसानों को बाजार में निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध हो सके। इसके अतिरिक्त आधुनिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए इफको नैनो यूरिया (500 मिलीलीटर बोतल) 225 रुपये तथा इफको नैनो डीएपी (500 मिलीलीटर बोतल) 600 रुपये की दर से उपलब्ध कराया जाएगा।जिले में उर्वरकों के मुनाफाखोरी, जमाखोरी, कालाबाजारी, व्यपवर्तन एवं अन्य अनियमितताओं के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही किये जाने हेतु कार्यालयीन आदेश क्र 8178, दिनांक 30.03.26 द्वारा जिलास्तरीय उड़नदस्ता दल का गठन किया गया है। साथ ही कलेक्टर महोदय, जिला-दुर्ग की अध्यक्षता में दिनांक 03.06.2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में खरीफ वर्ष 2026 हेतु भण्डारित उर्वरकों के अधिक मूल्य पर विक्रय, जमाखोरी एवं अन्य अनियमितताओं के विरूद्ध सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर सक्त कार्यवाही किये जाने के निर्देश के परिपालन में कार्यालयीन आदेश क्र 985, दिनांक 09.06.26 द्वारा उर्वरक विक्रय केन्द्र (सहकारी, निजी-थोक एवं फुटकर विक्रेता) का सतत् निरीक्षण किये जाने के लिए मैदानी अधिकारियों की उनके कार्यक्षेत्र में स्थित उर्वरक विक्रय केन्द्र (सहकारी, निजी-थोक एवं फुटकर विक्रेता) में ड्यूटी लगाई गई है। वे उनके कार्य क्षेत्र में स्थित उर्वरक विक्रय परिसर का सतत् निरीक्षण एवं उचित मूल्य पर उर्वरकों की बिक्री अपने समक्ष करायेंगे। तथा उर्वरक भण्डारण-वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता की स्थिति में उर्वरक निरीक्षक उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानानुसार कार्यवाही करेंगे।अब तक जिले के 131 निजी एवं सहकारी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जा चुका है। जांच के दौरान स्टॉक संधारण में गड़बड़ी, उर्वरक नियंत्रण संबंधी नियमों के उल्लंघन करने जैसी अनियमितताएं पाए जाने पर 03 विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। एवं 03 विक्रय केंद्रों पर उर्वरक अनुज्ञप्ति में अतिरिक्त स्त्रोत समावेश किये बिना विक्रय करते पाये जाने पर उर्वरक जब्ती कर प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में भेजा गया है। वहीं 05 विक्रय केंद्रों में अमानक उर्वरक का विक्रय किये जाने के कारण विक्रय प्रतिबंद कर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।कृषि विभाग ने सभी उर्वरक विक्रेताओं एवं समितियों को निर्देशित किया है कि किसानों को निर्धारित दर पर ही उर्वरक उपलब्ध कराएं तथा अधिक मूल्य वसूली की स्थिति में संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग द्वारा खरीफ सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की सतत निगरानी की जा रही है। निर्धारित दर से अधिक दाम पर विक्रय किए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसान भाई इसकी शिकायत नजदीकी कृषि विभाग के कार्यालय में कर सकते हैं। -
66 हजार 663 से अधिक श्रमिकों को मिल रहा रोजगार*
*- 3923 निर्माण कार्यों से गांवों में बढ़ा रोजगार, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास को मिली नई गति**- वर्षा ऋतु से पहले मिट्टी मूलक कार्य पूर्ण करने के निर्देश*दुर्ग/ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत दुर्ग जिले की सभी 300 ग्राम पंचायतों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यों के माध्यम से जिले के 66 हजार 663 से अधिक ग्रामीण श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में जिले में 3923 निर्माण कार्य प्रगति पर हैं, जिनसे एक ओर ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुदृढ़ हो रही है, वहीं दूसरी ओर जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन तथा ग्रामीण अधोसंरचना विकास को भी नई दिशा मिल रही है।कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग श्री बजरंग कुमार दुबे के निर्देशन में जिले में 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारी पूर्ण कर ली गई है। साथ ही आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए सभी मिट्टी मूलक निर्माण कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।सभी ग्राम पंचायतों में जॉब कार्डधारी श्रमिकों को निरंतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, कार्यक्रम अधिकारियों एवं मैदानी अमले को श्रमिकों की मांग के अनुरूप तत्काल कार्य उपलब्ध कराने तथा नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।मनरेगा के तहत जिले में अब तक 21 लाख 45 हजार 386 मानव दिवस सृजित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही 2093 परिवारों को 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया गया है तथा 600 दिव्यांग परिवारों को भी रोजगार से जोड़ा गया है। यह उपलब्धि ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा एवं सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जनपद पंचायतवार स्थिति पर नजर डालें तो जनपद पंचायत दुर्ग अंतर्गत 1048 कार्यों में 16 हजार 806 श्रमिक कार्यरत हैं। इसी प्रकार जनपद पंचायत धमधा अंतर्गत 1687 कार्यों में 22 हजार 963 श्रमिक तथा जनपद पंचायत पाटन अंतर्गत 1188 कार्यों में 26 हजार 865 श्रमिक रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान में अमृत सरोवर निर्माण, नवीन तालाब निर्माण, तालाब गहरीकरण, आजीविका डबरी निर्माण, वाटर हार्वेस्टिंग टैंक (डब्ल्यूएचटी), कच्ची सिंचाई नाली निर्माण सहित अन्य श्रममूलक कार्य प्राथमिकता के साथ संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यों से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ कृषि उत्पादन क्षमता में वृद्धि तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी हो रहा है।जिले में मनरेगा के तहत कुल 36 करोड़ 29 लाख 70 हजार रुपये की मजदूरी राशि का भुगतान किया जा चुका है। इसमें जनपद पंचायत दुर्ग के श्रमिकों को 11 करोड़ 43 लाख 73 हजार रुपये, जनपद पंचायत धमधा के श्रमिकों को 12 करोड़ 14 लाख 07 हजार रुपये तथा जनपद पंचायत पाटन के श्रमिकों को 9 करोड़ 47 लाख 88 हजार रुपये की राशि उनके बैंक खातों में जमा कराई गई है। इसके अतिरिक्त अन्य क्रियान्वयन एजेंसियों के माध्यम से 2 करोड़ 56 लाख 43 हजार रुपये की मजदूरी राशि का भी भुगतान किया गया है।गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य सुनिश्चित करने के लिए सभी तकनीकी सहायकों को कार्यस्थलों का नियमित निरीक्षण, सूचना बोर्ड स्थापना तथा निर्माण कार्यों की सतत मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिल रही है।मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग श्री बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि वर्ष 2026-27 में जिले में बड़े पैमाने पर श्रममूलक निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। जनपद पंचायत दुर्ग में 183 निर्माण कार्यों के लिए 1480.18 लाख रुपये, जनपद पंचायत धमधा में 149 निर्माण कार्यों के लिए 1212.84 लाख रुपये तथा जनपद पंचायत पाटन में 249 निर्माण कार्यों के लिए 1984.63 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस प्रकार जिले में कुल 581 निर्माण कार्यों के लिए 4677.65 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। जिले में संचालित निर्माण कार्यों से आने वाले वर्षों में किसानों, श्रमिकों और ग्रामीण समुदायों को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा तथा आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास को नई मजबूती मिलेगी। - 0- कमजोर परीक्षा परिणाम, फर्जी पंजीयन और अनियमितताओं पर होगी सख्त कार्रवाई : कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह0- शिक्षा का मंदिर है स्कूल, विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगारायपुर. जिले में बोर्ड परीक्षा परिणामों को और बेहतर बनाने तथा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने आज रेडक्रॉस भवन रायपुर में जिले के सभी अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने की। बैठक में कक्षा 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षा सत्र 2025-26 के परिणामों की विस्तृत समीक्षा की गई।बैठक समीक्षा के दौरान डीएमसी श्री अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित बोर्ड परीक्षाओं में जिले का औसत परीक्षा परिणाम कक्षा 10वीं में 71.05 प्रतिशत तथा कक्षा 12वीं में 84.79 प्रतिशत रहा है। यह परिणाम पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर रहा है और जिले ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। हालांकि समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई अशासकीय विद्यालयों का परीक्षा परिणाम शासकीय विद्यालयों की तुलना में अपेक्षाकृत कम रहा है तथा कुछ विद्यालयों के परिणामों में पिछले सत्र की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है।कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह अधिकारी ने बिना पूर्व सूचना बैठक में अनुपस्थित रहने वाले अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय में लापरवाही स्वीकार्य नहीं है और आवश्यकतानुसार ऐसे विद्यालयों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई भी प्रस्तावित की जाए।कलेक्टर डॉ सिंह ने निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों का शैक्षणिक प्रदर्शन लगातार निम्न स्तर का है, उनकी विस्तृत समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना प्रत्येक विद्यालय की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।बैठक में विद्यालयों की गुणवत्ता, शैक्षणिक स्तर एवं कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी के लिए जिला स्तर पर विशेष निरीक्षण दल गठित करने के निर्देश दिए गए। यह दल समय-समय पर विद्यालयों का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी संकलित करेगा तथा शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन करेगा।कलेक्टर ने फर्जी पंजीयन, नियमित कक्षाओं के अभाव तथा आरटीआई के दुरुपयोग करने वाले ऐसे विद्यालयों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यालय में गंभीर अनियमितताएं पाई जाती हैं तो उसके विरुद्ध कार्रवाई भी की जाएगी।उन्होंने निरीक्षण दल को विद्यालयों के शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से संबंधित जानकारी संकलित करने के निर्देश दिए। साथ ही अभिभावकों से कॉल सेंटर के माध्यम से संपर्क कर विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता एवं व्यवस्थाओं के संबंध में उनकी संतुष्टि का फीडबैक प्राप्त करने को कहा। यदि किसी विद्यालय के संबंध में गंभीर शिकायतें अथवा असंतोषजनक स्थिति सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी को भी उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि "विद्यालय शिक्षा का मंदिर है, इसे व्यवसाय का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। शिक्षा के नाम पर अनियमितता और विद्यार्थियों के भविष्य से समझौता करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।"बैठक में कलेक्टर ने सभी प्राचार्यों से प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सोलर ऊर्जा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बिजली व्यय कम करने का प्रभावी माध्यम है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा इस योजना के तहत अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने प्राचार्यों से स्वयं योजना का लाभ लेने और समाज के अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की।बैठक में नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री कुमार बिश्वरंजन, जिला शिक्षा अधिकारी श्री हिमांशु भारती, विकासखंड शिक्षा अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
- 0- केन्द्र में हुई श्री रघतनराम के ट्रायसिकल की निःशुल्क मरम्मत0- दैनिक आवागमन की परेशानी हुई दूररायपुर. मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित प्रोजेक्ट दिव्यांग गैरेजे के अंतर्गत संबल केन्द्र आज दिव्यांगों की आवाजाही की ज़रूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। श्री रघतनराम ध्रुव जो अपने आवागमन के लिए पूर्णतः बैटरी चालित ट्रायसिकल पर निर्भर हैं, ट्रायसिकल के खराब होने पर संबल केन्द्र में निःशुल्क मरम्मत होने से अत्यंत खुश हैं। आवागमन में होने वाली समस्याओं से उन्हें राहत मिली तथा वे अपने दैनिक कार्य आसानी से कर पा रहे हैं।श्री ध्रुव बीरगांव के निवासी हैं एवं अपनी दैनिक आवागमन एवं आवश्यकताओं के लिए बैटरी चालित ट्रायसिकल का उपयोग करते हैं। ट्रायसिकल के खराब होने पर उन्हें आने-जाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था, जिससे उनका दैनिक कार्य भी प्रभावित हो रहा था।इस दौरान उन्हें समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित संबल केन्द्र की जानकारी प्राप्त हुई जहां दिव्यांगजनों के सहायक उपकरण की निःशुल्क मरम्मत की जाती है। केन्द्र में उनके ट्रायसिकल की जांच की गई, जिसमें चार्जर सॉकेट एवं वायरिंग में खराबी पाई गई। तकनीकी कर्मचारियों द्वारा सभी खराबियों की मरम्मत की गई जिससे ट्रायसिकल सुचारू रूप से चलने लगी।उल्लेखनीय है कि 1 अक्टूबर 2025 को वृद्धजन दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने घोषणा की थी कि रायपुर जिले में प्रदेश के दिव्यांगजनों को सुविधाएं प्रदान करने हेतु संबल केन्द्र की स्थापना की जाएगी। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में कार्य प्रारंभ हुआ एवं 3 दिसंबर 2025 को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर रायपुर दक्षिण विधायक श्री सुनील सोनी द्वारा संबल केन्द्र का शुभारंभ किया गया। संबल केन्द्र में बैटरी एवं हस्तचालित ट्रायसिकल की निःशुल्क मरम्मत हेतु दिव्यांग गैरेज संचालित है।
- रायपुर। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग, जिला रायपुर ने जिले के समस्त एफएसएआई लाइसेंसधारी खाद्य कारोबारकर्ताओं को सूचित किया है कि FoSCoS पोर्टल पर वित्तीय वर्ष 2025-26 का वार्षिक रिटर्न जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण FSSAI के नियमानुसार एफएसएआई लाइसेंस धारक खाद्य विनिर्माताओं, रिपैकरों और रिलेबलरों के लिए वार्षिक रिटर्न फॉर्म डीआई दाखिल करना अनिवार्य है।पूर्व में वार्षिक रिटर्न ऑनलाइन जमा करने की अंतिम तिथि 31 मई 2026 निर्धारित थी। खाद्य कारोबारकर्ताओं की सुविधा और तकनीकी कारणों को ध्यान में रखते हुए FSSAI ने इस तिथि को बढ़ाकर अब 15 जून 2026 कर दिया है। उक्त तिथि के पश्चात वार्षिक रिटर्न भरने पर प्रतिदिन 100 रुपये विलंब शुल्क देय होगा।संबंधित खाद्य कारोबारी अपना वार्षिक रिटर्न सीधे FSSAI के आधिकारिक FoSCoS पोर्टल https://foscos.fssai.gov.in पर लॉग-इन कर ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। इसके लिए कार्यालय में भौतिक प्रति जमा करने की आवश्यकता नहीं है।खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने रायपुर जिले के समस्त एफएसएआई लाइसेंसधारी खाद्य विनिर्माताओं, रिपैकरों और रिलेबलरों से अपील की है कि अंतिम समय में पोर्टल पर सर्वर डाउन जैसी समस्याओं से बचने के लिए निर्धारित अंतिम तिथि की प्रतीक्षा किए बिना जल्द से जल्द अपना वार्षिक रिटर्न दाखिल करें।अधिक जानकारी के लिए खाद्य कारोबारी FoSCoS पोर्टल या जिला खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
- रायपुर. जिले में शासकीय कर्मचारियों के जन्मदिन अब केवल व्यक्तिगत आयोजन नहीं रह गए हैं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम बनते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुसार प्रधानमंत्री पोषण शक्ति योजना और न्योता भोज के अंतर्गत संचालित “प्रोजेक्ट आओ बाँटें खुशियाँ” का उद्देश्य ही है - खुशियों को बाँटना, और इस पहल को शासकीय कर्मचारी पूरे उत्साह के साथ अपना रहे हैं।इसी क्रम में सहायक ग्रेड 3 सुश्री अनीता साहू ने आंगनबाड़ी केंद्र ग्राम धनेली एवं गाइनोकोलॉजिस्ट सुश्री किरण कांबले ने एमसीएच कालीबाड़ी में विद्यार्थियों के साथ जन्मदिवस के अवसर पर बच्चों के साथ केक काटकर, फल और पौष्टिक आहार वितरित कर इस दिन को विशेष बनाया।
- 0- 1500 से अधिक वृद्धजनों ने कराया सियान जतन दिवस में स्वास्थ्य जांचरायपुर। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिले की सभी आयुर्वेद, होम्योपैथी एवं यूनानी चिकित्सा संस्थाओं में प्रत्येक गुरुवार को सियान जतन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष पहल के माध्यम से 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाएं एवं परामर्श प्रदान किए जा रहे हैं। इस पहल में वृद्धजनों को निःशुल्क पंचकर्म सुविधा, रक्तचाप, ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन, मूत्र जांच, मलेरिया की जांच, वृद्धावस्था से संबंधित बीमारियों का उपचार, योग परामर्श एवं नियमित योगाभ्यास, रोग प्रतिरोधक काढ़ा वितरण तथा स्वास्थ्य संरक्षण हेतु दिनचर्या एवं ऋतुचर्या संबंधी परामर्श प्रदान किया जा रहा है।जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से विशेष स्वास्थ्य जागरूकता सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं।जिसमें वृद्धजनों द्वारा उत्साहपूर्वक भाग लेकर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा रहा हैं। आयुष विभाग की यह पहल वरिष्ठ नागरिकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है, जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सामान्य दिनों की तुलना में गुरुवार को वृद्ध मरीजों की उपस्थिति सर्वाधिक रहती है।इस गुरुवार आयोजित सियान जतन दिवस में जिलेभर से कुल 1550 वृद्धजनों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया। कार्यक्रम में सर्वाधिक संख्या वात रोग एवं दीर्घकालिक बीमारियों से ग्रसित मरीजों की रही, जिन्हें आयुष चिकित्सकों द्वारा उपचार एवं परामर्श प्रदान किया गया।


















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