- Home
- छत्तीसगढ़
- -वार्ड 28 पंजरी प्लांट में 33 लाख रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन, वार्ड 9 नवागढ़ी में 8 लाख रुपए के शेड का लोकार्पण-रिंग रोड, नालंदा परिसर, नर्सिंग एवं फिजियोथेरेपी महाविद्यालय सहित शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता-पंजरी प्लांट में ऑक्सीजोन और ओपन जिम की घोषणा, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत किया पौधारोपणरायपुर / प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने के साथ रायगढ़ शहर में नागरिक सुविधाओं और अधोसंरचना के विस्तार के लिए भी लगातार योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओपी चौधरी ने आज रायगढ़ प्रवास के दौरान नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता ऐसे विकास कार्यों को धरातल पर उतारना है, जिनका सीधा लाभ आम नागरिकों को मिले और रायगढ़ आने वाले वर्षों में आधुनिक, सुविधायुक्त एवं व्यवस्थित शहर के रूप में विकसित हो।वित्त मंत्री श्री चौधरी ने वार्ड क्रमांक 28 पंजरी प्लांट में 33 लाख रुपए की लागत से सामुदायिक भवन एवं शासकीय स्कूल में बाउंड्रीवाल निर्माण का भूमिपूजन किया। वहीं वार्ड क्रमांक 9 नवागढ़ी में 8 लाख रुपए की लागत से निर्मित शेड का लोकार्पण किया। इन विकास कार्यों से स्थानीय नागरिकों को सामुदायिक गतिविधियों, शिक्षा एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध होगी।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि रायगढ़ के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। विकास का उद्देश्य केवल बड़े निर्माण कार्य करना नहीं, बल्कि ऐसी सुविधाएं विकसित करना है, जिनसे आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए।मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि आने वाले वर्षों में रायगढ़ शहर में 10 ऑक्सीजोन विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इससे शहर में हरित क्षेत्र का विस्तार होगा और नागरिकों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। ऑक्सीजोन के साथ सार्वजनिक स्थलों पर स्वास्थ्य, व्यायाम एवं मनोरंजन से जुड़ी सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया जाएगा।वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि रायगढ़ की बढ़ती जरूरतों और यातायात के दबाव को देखते हुए शहर की अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए बड़े प्रोजेक्ट पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग 600 करोड़ रुपए की लागत से रिंग रोड के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। रिंग रोड के निर्माण से शहर के यातायात को बेहतर बनाने के साथ ही भविष्य के अधोसंरचना विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।श्री चौधरी ने कहा कि रायगढ़ में नालंदा परिसर का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर वातावरण और सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा जिले में नर्सिंग महाविद्यालय एवं फिजियोथेरेपी महाविद्यालय खोलने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।वित्त मंत्री ने कहा कि रायगढ़ में प्रयास विद्यालय पहले से संचालित है और आने वाले समय में शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में संस्थागत सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि जिलेवासियों को उच्च गुणवत्ता की सुविधाओं के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।पंजरी प्लांट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने क्षेत्रवासियों के लिए पर्यावरण एवं स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण सौगात की घोषणा की। उन्होंने उपभोक्ता फोरम के पास ऑक्सीजोन विकसित करने तथा ओपन जिम स्थापित करने की घोषणा की। इससे क्षेत्र के नागरिकों को हरित वातावरण के साथ व्यायाम एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री चौधरी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान करते हुए कहा कि हरित रायगढ़ के निर्माण में जनभागीदारी महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर महापौर श्री जीवर्धन चौहान, सभापति श्री डिग्रीलाल साहू, श्री सुरेश गोयल, श्री पावन अग्रवाल, श्री आशीष ताम्रकार सहित पार्षदगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
-
रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण( सीजीएसडीएमए) में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) एवं राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के अधिकारियों के साथ संयुक्त समीक्षा बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित की गई।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमति शम्मी आबिदी ने बताया कि राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, मानसून अवधि की तैयारियों तथा आपदा प्रतिक्रिया तंत्र के बारे में बताया। राज्य में बाढ़, अतिवृष्टि, आकाशीय बिजली एवं भूस्खलन जैसी मौसमी आपदाओं की तैयारियों की समीक्षा की। राज्य एवं जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र की कार्यप्रणाली तथा समन्वय व्यवस्था के संबंध में अधिकारियों ने जानकारी दी। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं जिला प्रशासन के मध्य त्वरित प्रतिक्रिया एवं समन्वय को और सुदृढ़ बनाने पर विचार किया गया। इसी तरह से पूर्व चेतावनी प्रणाली सचेत प्लेटफॉर्म एवं सेल ब्रॉडकास्ट आधारित अलर्ट प्रणाली की प्रभावी उपयोग की भी समीक्षा की गई। एनडीएमए के संयुक्त सलाहकार श्री संजीव सही द्वारा राज्य में किये जा रहे आपदा प्रबंधन कार्यों में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग पर प्रकाश डाला।मॉक एक्सरसाइज, क्षमता निर्माण, सामुदायिक जागरूकता तथा संसाधनों की उपलब्धता पर चर्चा हुई। इसी तरह से आगामी मानसून अवधि के दौरान संवेदनशील जिलों में बेहतर समन्वय एवं त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाने, पूर्व तैयारी को मजबूत करने तथा किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके। - -मुख्यमंत्री महोदय के निर्देशानुसार विद्युत कंपनियों में रोजगार के खुलेंगे नए व्दार-राज्य बनने के बाद पहली बार निकली बिजली कंपनी में इतनी अधिक भर्तियां-उपभोक्ताओं तक निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति के लिए बढ़ेगा मेनपावररायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ ने 1235 पदों पर भर्ती विज्ञापन जारी कर दिया है। इसमें सहायक अभियंता से लेकर कनिष्ठ अभियंता और संयंत्र परिचारक से लेकर डाटा एंट्री आपरेटर , चिकित्सक,पैरामेडिकल स्टाफ , फायर ऑफिसर्स व स्टाफ , विधि विभाग , वित्त अधिकारी , सुरक्षा विभाग तक के पद शामिल हैं। ये भर्तियां तीनों कंपनियों यथा जनरेशन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन में की जाएंगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने गुणवत्तापूर्ण विद्युत प्रदाय सुनिश्चित करने हेतु रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती करने हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया। उनके निर्देशानुसार पॉवर कंपनियों में बड़ी संख्या में की जा रही भर्ती से जहां एक तरफ बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं उपभोक्ताओं तक निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति के लिए मेनपावर भी उपलब्ध हो सकेगा। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद यह पहला मौका है, जब इतनी अधिक संख्या में भर्तियां होंगी।छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ के अध्यक्ष श्री सुबोध कुमार सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि माननीय मुख्यमंत्री महोदय की मंशा के अनुरूप भर्ती प्रक्रिया को त्वरित गति से पूरा किया जाए। राज्य स्थापना के बाद प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या एवं बिजली खपत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य बनने के समय 18 लाख 91 हजार उपभोक्ता थे, आज इनकी संख्या बढ़कर 67 लाख हो गई है। राज्य गठन के समय विद्युत की मांग 1334 मेगावाट थी, वह अब बढ़कर 7083 मेगावाट हो गई है। बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य शासन ने कोरबा पश्चिम में 1320 मेगावाट के सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट की स्थापना करने का निर्णय लिया और इस हेतु कार्य भी प्रारम्भ हो गया है ।साथ ही पारेषण और वितरण प्रणाली में भी बड़ी संख्या उपकेंद्र व लाइनें स्थापित की जा रही है। विद्युत संयंत्र, उपकेंद्रों तथा लाइनों के उचित रखरखाव एवं उपभोक्ताओं तक निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा बड़ी संख्या में पॉवर कंपनियों में भर्ती करने का निर्णय किया गया है ।छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी के मुख्य अभियंता (मानव संसाधन) विभाग ने भर्ती विज्ञापन जारी कर दिया है। कुल 1235 पदों पर भर्ती होनी है, जिनमें से व्दितीय श्रेणी के पदों की संख्या 189 हैं। शेष पद तृतीय वर्ग के 711 एवं चतुर्थ वर्ग के 335 कर्मियों की भर्ती होगी। इनमें छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी में 547 पद, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी में 96 पद, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में 415 पद तथा तीनों कंपनी के कॉमन कैडर के लिए 177 पदों पर रिक्तियां निकाली गई हैं।पदों से संबंधित विस्तृत जानकारी विज्ञापन, पात्रता, नियम एवं शर्तें, परीक्षा हेतु आवेदन प्रक्रिया तथा परीक्षा संचालन संबंधी निर्देश पृथक रूप से जारी की जाएंगी, जो छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज की आधिकारिक वेबसाइट www.cspc.co.in (डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डाट सीएसपीसी डाट सीओ डाट आईएन) पर अपलोड किये जाएंगे। आवेदन तिथि एवं परीक्षा तिथि का विस्तृत विवरण अलग से जारी किया जाएगा। इसमें सबसे अधिक डाटा एंट्री आपरेटर के 400 पद, प्लांट अटेंडेंट के 300 पद, सहायक अभिंयता के 146, कनिष्ठ अभियंता के 122 पद हैं।
- - 17 अगस्त तक आयोजित होंगे राज्यस्तरीय देशभक्ति कार्यक्रमरायपुर / देश भर में 'हर घर तिरंगा' अभियान 9 से 17 अगस्त 2026 तक मनाया जा रहा है। इस वर्ष यह राष्ट्रव्यापी उत्सव 'वंदे मातरम्' के 150वें वर्ष के स्मरणोत्सव को समर्पित है, जिससे देशभक्ति का माहौल और अधिक बढ़ गया है । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में इस वर्ष का स्वतंत्रता पर्व जनभागीदारी और राष्ट्रप्रेम का व्यापक जनआंदोलन बनने जा रहा है। संस्कृति विभाग द्वारा केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत 7 से 17 अगस्त तक प्रदेशभर में 'हर घर तिरंगा' अभियान, 'वंदे मातरम्' गायन और विभिन्न सांस्कृतिक व देशभक्ति कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया जाएगा।संस्कृति विभाग के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में 9 से 17 अगस्त 2026 तक 'हर घर तिरंगा' अभियान चलाया जाएगा, जबकि 7 से 15 अगस्त तक 'वंदे मातरम्' गायन और संबंधित सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित होंगी। 15 अगस्त को ध्वजारोहण के बाद पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर सामूहिक राष्ट्रगान और वंदे मातरम् गायन होगा।अभियान के दौरान सभी जिला मुख्यालयों, विकासखंडों, ग्राम पंचायतों और शैक्षणिक संस्थानों में तिरंगा यात्राएं, बाइक व कार रैलियां, मशाल रैलियां तथा तिरंगा मैराथन आयोजित की जाएंगी। इनमें जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों, पुलिस, NCC, NSS, स्काउट-गाइड और आम नागरिकों की सक्रिय सहभागिता रहेगी।तिरंगा सेल्फी नागरिक अपने घरों पर फहराए गए तिरंगे के साथ सेल्फी लेकर 'हर घर तिरंगा' पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। सार्वजनिक स्थलों पर तिरंगा कैनवास, तिरंगा मेले और देशभक्ति कॉन्सर्ट आयोजित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय स्वदेशी उत्पादों व कारीगरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। प्रदेशभर में ऑडियो और वीडियो बूथ स्थापित किए जाएंगे, जहां नागरिक स्वयं वंदे मातरम् गाकर अपनी रिकॉर्डिंग अपलोड कर सकेंगे। 14 अगस्त को भारत विभाजन की विभीषिका और स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों को याद करते हुए विशेष प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। इस अवसर पर राज्य पुलिस बैंड द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर देशभक्ति गीतों की संगीतमय प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
- -छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 के प्रभावी क्रियान्वयन, मॉनिटरिंग और मूल्यांकन को मिलेगी नई गति-15 करोड़ रुपये की पूर्णतः अनुदान आधारित परियोजना, राज्य सरकार पर नहीं पड़ेगा कोई अतिरिक्त वित्तीय भार-लोक वित्त प्रबंधन, पीपीपी, ग्रीन फाइनेंस, एआई आधारित क्षमता विकास और संस्थागत सुधारों पर रहेगा विशेष फोकसरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद् की बैठक में वित्त विभाग के उस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसके तहत एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से 'Anjor LIGHT (Anjor Linked Implementation & Guidance for Holistic Tracking)' तकनीकी सहायता परियोजना के लिए 15 करोड़ रुपये का पूर्णतः अनुदान (Grant) प्राप्त होगा। यह परियोजना छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 के प्राथमिकता एजेंडा के प्रभावी क्रियान्वयन, पर्यवेक्षण (Monitoring) एवं मूल्यांकन (Evaluation) को सुदृढ़ बनाएगी।यह बहु-क्षेत्रीय तकनीकी सहायता परियोजना 1 दिसंबर 2026 से 30 नवंबर 2029 तक तीन वर्षों के लिए संचालित होगी। परियोजना का समन्वय आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के माध्यम से किया जाएगा, जबकि राज्य स्तर पर वित्त विभाग नोडल विभाग होगा। इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संचालनालय संस्थागत वित्त को सौंपी जाएगी तथा प्रभावी मॉनिटरिंग एवं समन्वय के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट (PMU) का गठन किया जाएगा।इस परियोजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 के क्रियान्वयन को संस्थागत रूप से सशक्त बनाते हुए राज्य में समावेशी एवं सतत विकास को बढ़ावा देना है। इसके अंतर्गत लोक वित्त प्रबंधन (Public Financial Management) को मजबूत किया जाएगा, विजन दस्तावेज में चिन्हित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए परियोजना पाइपलाइन तैयार होगी तथा संस्थागत एवं नीतिगत सुधारों का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही आउटकम बजटिंग, रियायती जलवायु वित्त (Concessional Climate Funds), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित संस्थागत क्षमता विकास, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देने तथा पर्यावरण पुनर्स्थापन एवं जलवायु अनुकूल संसाधन प्रबंधन के लिए तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।परियोजना के अंतर्गत विभिन्न विभागों के लिए प्राथमिकता आधारित निर्माण एवं विकास परियोजनाओं की पाइपलाइन तैयार की जाएगी। बजटिंग और प्रोक्योरमेंट सुधारों के माध्यम से सार्वजनिक वित्त प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। राज्य सरकार को नीतिगत निर्णयों के लिए सतत व्यापक आर्थिक एवं राजकोषीय (Macro-Fiscal) विश्लेषण उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (SOEs) की वित्तीय स्थिति, ऋण संधारणीयता तथा लाभप्रदता को मजबूत करने के लिए तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाएगा तथा हाइब्रिड फाइनेंसिंग तक उनकी पहुंच बढ़ाने हेतु आवश्यक नीतिगत सुधार किए जाएंगे। विजन-2047 के प्राथमिकता क्षेत्रों में कॉन्सेप्ट प्लान, व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Studies) तथा तकनीकी सहायता के माध्यम से नई पीपीपी परियोजनाओं का विकास भी किया जाएगा।परियोजना से राज्य को अनेक दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होंगे। छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 के अनुरूप प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण परियोजना पाइपलाइन तैयार होगी। सार्वजनिक वित्त प्रबंधन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी, ग्रीन एवं ब्लेंडेड फाइनेंस को बढ़ावा मिलेगा तथा आउटकम आधारित बजटिंग, ग्रीन बजटिंग और जलवायु अनुकूल विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी। साथ ही सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के लिए आवश्यक नीतियां, दिशानिर्देश, फ्रेमवर्क, क्षमता निर्माण और व्यवहार्यता अध्ययन तैयार होने से राज्य में निवेश का अनुकूल वातावरण विकसित होगा।इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह पूरी तरह एडीबी के अनुदान पर आधारित है। इसके लिए राज्य शासन अथवा भारत सरकार को किसी प्रकार का वित्तीय अंशदान नहीं देना होगा। परिणामस्वरूप राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा, जबकि संस्थागत क्षमता निर्माण, निवेश संवर्धन, हरित एवं सतत विकास तथा छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति को नई गति मिलेगी।
- -एनएच-130डी बना उम्मीदों का नया सवेरारायपुर। छत्तीसगढ़ के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरे अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षा शिविरों के विस्तार, सड़कों के निर्माण और प्रशासनिक पहलों के जरिए लाल आतंक की छाया पीछे छूट रही है और बुनियादी विकास की एक नई रेखा खिंच रही है। वर्षों तक दुर्गम पहाड़ियों, सघन वनों और भौगोलिक बाधाओं के कारण विकास की मुख्यधारा से कटा 'अबूझमाड़' अब अपनी पुरानी पहचान पीछे छोड़ रहा है। कभी जहां सड़कों का नामो-निशां नहीं था, वहां आज विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-130डी का नारायणपुर से कुतुल तक निर्माण इस क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक कायाकल्प की सबसे बड़ी मिसाल बनकर उभरा है। यह सड़क केवल कंक्रीट का मार्ग नहीं, बल्कि अबुझमाड़ के आदिवासियों की जीवनरेखा और स्वर्णिम भविष्य का द्वार बन गई है।एक दौर था जब मानसून की पहली बारिश के साथ ही अबूझमाड़ के दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट जाता था। स्वास्थ्य, शिक्षा और दैनिक जरूरतों के लिए ग्रामीणों को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। गंभीर मरीजों को खाट पर लादकर अस्पताल पहुंचाना मजबूरी थी, जहां घंटों की देरी जानलेवा साबित होती थी। बच्चों का स्कूल जाना और किसानों का अपनी उपज बाजार तक ले जाना एक कठिन संघर्ष था। राष्ट्रीय राजमार्ग-130डी के आकार लेने के साथ ही परिदृश्य तेजी से बदला है। मार्ग पर निर्मित आधुनिक पुलों और पक्की संरचनाओं ने बारहमासी आवागमन को संभव बना दिया है। इसके चलते अब दूरस्थ अंचलों तक प्रशासनिक पहुंच, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के पहुंच रहा है।सड़क बनने से अबूझमाड़ के जन-जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। अब गंभीर मरीजों को समय पर एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। दुर्गम रास्तों के डर से दूर रहने वाले बच्चे अब आसानी से स्कूल और कॉलेज पहुंच रहे हैं। इसी तरह किसानों और स्थानीय कारीगरों को अपनी उपज और हस्तशिल्प को बड़े बाजारों तक ले जाने की सुविधा मिली है, जिससे स्थानीय व्यापार को संबल मिला है।एनएच-130डी सिर्फ नारायणपुर और कुतुल को नहीं जोड़ता, बल्कि यह अबूझमाड़ को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ता है। आने वाले समय में यह मार्ग क्षेत्र में इको-टूरिज्म, नए निवेश, व्यापार और समग्र सामाजिक परिवर्तन की मजबूत आधारशिला साबित होगा। अबूझमाड़, जो कभी अपनी दुर्गमता के लिए जाना जाता था, आज विकास और समृद्धि की एक नई पहचान के साथ देश के मानचित्र पर मजबूती से उभर रहा है।
- -आयुषदीप सामान्य सभा और जीवनदीप समिति की भी बैठक लेंगेरायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा बिलासपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री अरुण साव 8 अगस्त को प्रातः 11 बजे बिलासपुर जिला मुख्यालय में सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेकर योजनाओं के क्रियान्वयन एवं विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। वे बैठक में निर्माण कार्यों की प्रगति, शासन की प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों तथा लंबित प्रकरणों की विभागवार समीक्षा करेंगे। वे आयुषदीप सामान्य सभा और जीवनदीप समिति की भी बैठक लेंगे। कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को बैठक में आवश्यक तैयारी एवं अद्यतन जानकारी के साथ निर्धारित समय पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को बैठक में विभागीय योजनाओं एवं विकास कार्यों से संबंधित सभी आवश्यक अभिलेख और जानकारी साथ लाना सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि समीक्षा के दौरान आवश्यक निर्णय लिए जा सकें।
- -आजीविका डबरी का बहुउद्देशीय उपयोगरायपुर। जल संरक्षण, कृषि संवर्धन और सतत स्वरोजगार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। वर्षा जल संचयन और ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत होती है, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ता है। यह चक्र किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए जैविक खेती, पशुपालन और लघु उद्योगों के जरिए स्थायी रोजगार के नए रास्ते खोलता है।छत्तीसगढ़ शासन की ग्रामीण आजीविका उन्मुख योजनाएं आज प्रदेश के सुदूर अंचलों तक पहुँचकर परिवारों के जीवन में नया उजियारा ला रही हैं। जल संरक्षण, कृषि संवर्धन और सतत स्वरोजगार के समन्वित मॉडल का एक उत्कृष्ट उदाहरण धमतरी जिले के विकासखंड नगरी की ग्राम पंचायत भोथापारा में देखने को मिला है, जहाँ आजीविका डबरी ने आदिवासी परिवारों के जीवन को आर्थिक तंगी से निकालकर आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है। ग्राम पंचायत भोथापारा के अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राही सावित्री-फकीर एवं फकीर-हलालखोर का जीवन कुछ वर्ष पूर्व तक अनिश्चितताओं से घिरा था। सीमित कृषि भूमि, मानसूनी वर्षा पर निर्भरता और सिंचाई साधनों के अभाव के कारण परिवार की आय का मुख्य जरिया मौसमी खेती और दिहाड़ी मजदूरी तक ही सीमित था। वर्षभर नियमित आय न होने के कारण परिवार को अक्सर रोजगार की तलाश में पलायन करना पड़ता था। परिवारों की इस स्थिति में निर्णायक मोड़ तब आया, जब शासन की वीबी-जी राम जी योजना के तहत उनकी निजी भूमि पर आजीविका डबरी का निर्माण किया गया। डबरी के बनने से वर्षाजल का प्रभावी संचयन संभव हुआ, जिससे पूरे वर्ष जल की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई। विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन में हितग्राहियों ने जल संचयन के साथ-साथ वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन की शुरुआत की। गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज के उपयोग, संतुलित पूरक आहार और नियमित देखभाल के बल पर मछलियों की बेहतर वृद्धि हुई। प्रथम चक्र में ही मछलियों के विक्रय से परिवारों को उनकी अपेक्षा से अधिक लाभ प्राप्त हुआ।आजीविका डबरी का लाभ केवल मछली पालन तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके त्रिआयामी लाभ सामने आए। मत्स्य पालन से प्राप्त अतिरिक्त आय का उपयोग बच्चों की बेहतर शिक्षा, कृषि निवेश और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में किया गया। संचित जल का उपयोग खेतों की सिंचाई में होने से फसलों की पैदावार बढ़ी और वर्षभर कृषि गतिविधियां जारी रखना संभव हुआ। सिंचाई की सुगम व्यवस्था से खेती की लागत घटी और आय के नए स्रोत विकसित हुए। सावित्री और फकीर बताते हैं कि यदि आजीविका डबरी का संबल न मिलता, तो आज भी उनका परिवार मजदूरी पर ही आश्रित होता। आज वे न केवल आर्थिक रूप से स्वावलंबी हैं, बल्कि अपने अनुभवों को साझा करते हुए गांव के अन्य किसानों को भी आजीविका डबरी के बहुउद्देशीय उपयोग और मत्स्य पालन के लिए प्रेरित कर रहे हैं।धमतरी जिले में संचालित आजीविका डबरी नवाचार यह सिद्ध करता है कि जल संरक्षण और वैज्ञानिक तकनीकी मार्गदर्शन का संगम ग्रामीण अंचलों में स्थायी आजीविका का ठोस आधार बन सकता है। भोथापारा के इन आदिवासी परिवारों की सफलता गाथा छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक इबारत है।
- -उप मुख्यमंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राशि स्वीकृति का पत्र जारीरायपुर। राज्य शासन ने बेमेतरा जिले के नांदघाट से मुंगेली जिला मुख्यालय तक टू-लेन सड़क के फोरलेन में उन्नयन के लिए 21 करोड़ 81 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। इस राशि से 36.40 किमी फोरलेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से राशि स्वीकृति के संबंध में प्रमुख अभियंता को परिपत्र जारी कर दिया है।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।लोक निर्माण विभाग ने प्रमुख अभियंता को कार्य की निविदा समय-सीमा में करने, निर्माण कार्य प्राक्कलन व कार्य संपादित करने में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने निर्माण एजेंसी से अनुबंधित समय-सीमा में काम पूर्ण किया जाना सुनिश्चित कराने को कहा है। कार्य पूर्ण किये जाने के लिए अनावश्यक समय-सीमा वृद्धि नहीं किए जाने के भी निर्देश विभाग ने दिए हैं। अपरिहार्य एवं नियंत्रण से बाहर मान्य कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा में वृद्धि की जा सकेगी। निर्माण कार्य की समयावधि में वृद्धि (Time Extension) नियमानुसार अर्थदंड सहित अधिरोपित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- ** असामाजिक तत्वों का खेल मैदान में प्रवेश प्रतिबंधितरायपुर । विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय आरंग के अंतर्गत आने वाले ग्राम टेकारी ( कुंडा ) में विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत खेल मैदान में 5 अगस्त को वृक्षारोपण किया गया जिसमें शाला परिवार के साथ क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया । इस अवसर पर खेल मैदान में ग्राम के कतिपय असामाजिक तत्वों सहित उनके बुलावे पर आने वाले बाहरी असामाजिक तत्वों के द्वारा शराब व गांजा पीने - पिलाने की लगातार मिल रही शिकायतों के परिप्रेक्ष्य में मैदान के गेट में ताला लगाने व ऐसे तत्वों के खिलाफ ग्रामीण व्यवस्था के साथ - साथ पुलिसिया कार्यवाही भी कराने का निर्णय लिया गया और साथ ही खिलाडियों को इस मैदान का ग्रामीण व्यवस्था के तहत उपयोग करते रहने की भी छूट देने का निर्णय लिया गया। साथ ही इस मैदान में अनाधिकृत प्रवेश करने व शाम ढलने के बाद पाये जाने वालों को अंतिम चेतावनी भी दी गयी । साथ ही समय - समय पर ग्रामीणों द्वारा औचक छापामारी का निर्णय भी लिया गया ।ज्ञातव्य हो कि ग्राम का प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक शाला सहित खेल मैदान ग्राम के बाहर नारा मार्ग पर स्थित है इसी वजह से असामाजिक तत्व इसका फायदा उठा असामाजिक कृत्यों में लिप्त रहते हैं । ग्रामीण व्यवस्था कसने पर इन गतिविधियों पर कमी तो आयी है पर खासकर शाम ढले ग्राम के गंजेडियों सहित पियक्कड़ों व उनके बुलावे पर आने वाले बाहरी असामाजिक तत्वों का मजमा अब भी यहां लगने की शिकायत है । कुछ समय पहले मैदान के गेट में लगाये गये ताले को भी इन असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़ दिये जाने की शिकायत है । इसी के मद्देनजर रोपित किये गये करीबन 500 पौधों की सुरक्षा व यहां होने वाले असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाने सहित इस मैदान में होने वाले विकासखण्ड स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता व अन्य गतिविधियों के परिप्रेक्ष्य में यह निर्णय लिया गया है ।आज के इस वृक्षारोपण कार्यक्रम में क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि हेमंत कश्यप , क्षेत्रीय जनपद सदस्य राजू मनहरे , सरपंच प्रतिनिधि राजू यादव , पूर्व सरपंच नंदकुमार यादव , ग्रामीण सभा अध्यक्ष भूपेंद्र शर्मा व पूर्व उपाध्यक्ष छेदन वर्मा , शाला परिवार के सदस्यों के साथ प्राचार्य एस के वर्मा व रोजगार सहायक कोमल वर्मा , केशव वर्मा , ईश्वर वर्मा व इस योजना में कार्यरत मजदूर मौजूद थे ।
- -प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने कहा : तथ्य सामने आने के बाद कांग्रेस युवाओं से मांगे माफीरायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) द्वारा सूबेदार / उप निरीक्षक संवर्ग / प्लाटून कमांडर परीक्षा - 2024 के प्रारंभिक लिखित परिणाम को लेकर जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण ने पूरे विवाद को समाप्त कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन नामों को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाया जा रहा था, वे संबंधित अभ्यर्थियों द्वारा स्वयं ऑनलाइन आवेदन में दर्ज किए गए वास्तविक नाम हैं तथा पूरी भर्ती प्रक्रिया उन्हीं नामों के आधार पर संचालित हुई है। आयोग ने सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक दावों का आधिकारिक रूप से खण्डन किया है।भाजपा प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने कहा कि प्रारंभिक तौर पर जब परिणाम में कुछ असामान्य नाम सामने आए, तब सामान्य अभ्यर्थियों की तरह उन्हें भी संदेह हुआ। इसलिए उन्होंने स्वयं सीजीपीएससी को टैग करते हुए आयोग से आग्रह किया कि यदि यह तकनीकी या टंकण सम्बन्धी विषय है तो तत्काल सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी किया जाए, ताकि प्रदेश के युवाओं के मन में किसी प्रकार का भ्रम न रहे। उन्होंने कहा कि भाजपा ने इस विषय पर राजनीतिक लाभ लेने के बजाय संस्थागत स्पष्टता की मांग की थी। आयोग ने अब अधिकृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सभी तथ्यों को सार्वजनिक कर दिया है। इसके बाद इस विषय पर किसी प्रकार के घोटाले अथवा हेरफेर के आरोप स्वतः निराधार सिद्ध हो गए हैं।भाजपा प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि कांग्रेस ने आयोग का आधिकारिक पक्ष सामने आने से पहले ही अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों से इस विषय को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया और युवाओं के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न की। अब जबकि स्वयं संवैधानिक संस्था ने तथ्य स्पष्ट कर दिए हैं, कांग्रेस को अपनी भ्रामक पोस्ट वापस लेकर प्रदेश के युवाओं और अभ्यर्थियों से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना उचित है, लेकिन तथ्य सामने आने के बाद झूठे नैरेटिव पर अड़े रहना केवल राजनीतिक अवसरवाद है। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को बिना आधार के कटघरे में खड़ा करना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।भाजपा प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने कहा कि भाजपा पारदर्शिता और जवाबदेही में विश्वास रखती है। किसी भी भर्ती प्रक्रिया में यदि संदेह उत्पन्न होता है तो उसका समाधान होना चाहिए। उन्होंने प्रदेश के युवाओं से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं के बजाय केवल अधिकृत स्रोतों पर विश्वास करें तथा राजनीतिक लाभ के लिए फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार से सतर्क रहें।
- -यह अभियान भारत की आजादी के गौरव को घर-घर तक पहुंचाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है : अरुण सावरायपुर। भारतीय जनता पार्टी के एकात्म परिसर स्थित कार्यालय में “हर घर तिरंगा अभियान“ एवं “तिरंगा यात्रा“ को लेकर रायपुर शहर व ग्रामीण जिला भाजपा की आवश्यक बैठक गुरुवार को आहूत की गई। बैठक को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक तिरंगे को सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पूरे देश में “हर घर तिरंगा अभियान“ बड़े उत्साह के साथ चलाया जा रहा है। यह अभियान भारत की आजादी के गौरव को घर-घर तक पहुँचाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर घर पर तिरंगा फहराकर हम उन वीर शहीदों को नमन करते हैं जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। भाजपा के सभी कार्यकर्ता गांव-गांव, गली-गली जाकर नागरिकों को तिरंगा वितरित करेंगे और उन्हें अपने घरों पर तिरंगा फहराने के लिए प्रेरित करेंगे।उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि यह भारतवासियों में ध्वज के प्रति सम्मान व देश के प्रति देश भक्ति की भावना जगाने में मदद करेगा। इस अभियान के दौरान कई प्रेरक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य नागरिकों में देशभक्ति को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय ध्वज के साथ हमारे संबंध को गहरा करना है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हर भारतीय के लिए एक महापर्व है। भारत में रहने वाला हर व्यक्ति देशप्रेम की भावना से ओतप्रोत है। हर घर तिरंगा और तिरंगा यात्रा जैसे देशभक्तिपूर्ण कार्यक्रमों के आयोजन से आम जनमानस भी जुड़ना पसंद करता है। तिरंगा यात्रा में युवा मोर्चा एवं महिला मोर्चा की भागीदारी सुनिश्चित की गई है ताकि इस अभियान में युवा और महिलाओं को जागृत किया जा सके।10 अगस्त से 14 अगस्त, 2026 तक भव्य तिरंगा यात्रा : यशवंत जैनभाजपा प्रदेश महामंत्री और हर घर तिरंगा अभियान कार्यक्रम के प्रदेश संयोजक यशवन्त जैन ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर प्रारंभ हुआ हर घर तिरंगा अभियान आज राष्ट्र भक्ति के जन आंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर चुका है। श्री जैन ने बताया कि इस वर्ष भी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के निर्देशानुसार व प्रदेश अध्यक्ष किरण देव के आह्वान पर पार्टी के सभी कार्यकर्ता व्यापक भागीदारी करते हुए हर घर तिरंगा तथा तिरंगा यात्रा अभियान में 11 से 15 अगस्त, 2026 तक भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि इस दौरान प्रत्येक घर, सभी प्रतिष्ठानों एवं कार्यालयों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने हेतु जनजागरण किया जाएगा। युवाओं एवं विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति एवं संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति जागरुकता लाई जाएगी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं राष्ट्र निर्माताओं के योगदान का स्मरण करने के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को राष्ट्र के विकास एवं विकसित भारत-2047 के संकल्प से जोड़ा जाएगा और राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता एवं “एक भारत-श्रेष्ठ भारत“ की भावना को सुदृढ़ किया जाएगा। 10 अगस्त से 14 अगस्त, 2026 तक भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन कर पार्टी के कार्यकर्ता इसमें अधिक-से-अधिक जन भागीदारी सुनिश्चत करेंगे। इसमें भारतीय जनता युवा मोर्चा की भूमिका तिरंगा यात्रा में अग्रणी होगी।भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा शांति और सद्भाव का प्रतीक है : अखिलेश सोनीभाजपा प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी ने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से पूर्ण करने के लिए हम सभी लगातार मेहनत करेंगे। घरों में तिरंगा लगाने के लक्ष्य को सबकी सहभागिता से पूरा करना है। हर घर तिरंगा अभियान में प्रभावी व्यक्तियों को जोड़कर उनका सम्मान भी किया जाएगा। हर घर तिरंगा अभियान की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरुआत की है। गुलामी से समाज में जो कुरीतियांँ और विकृतियाँ व्याप्त हुई हैं, उन्हें दूर करना है और देश को गौरवान्वित करना है। उन्होंने कहा कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा शांति और सद्भाव का प्रतीक है। अपने बलिदानी क्रांतिकारियों और महापुरुषों को याद करते हुए और देश की सेवा में अपनी आहुति देने वाले शहीद जवानों को भी याद करते हुए उन्हें नमन करना है। तिरंगा अभियान के माध्यम से हम लोगों में देशभक्ति और राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करेंगे।बूथ स्तर तक जाकर हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाना है : नवीन मार्कण्डेयभाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. नवीन मार्कण्डेय ने कहा कि यह अभियान पूरे छत्तीसगढ़ और देशभर में चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में बूथ स्तर तक जाकर हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाना है। आजादी के अमृत महोत्सव से ही हर घर तिरंगा अभियान की शुरुआत हो चुकी है यह कार्यक्रम पिछले 05 वर्षों से निरंतर चल रहा है। इसके साथ ही जन जागरण के कार्यक्रम भी रखे जाएंगे जिनमें विभिन्न समाज के लोगों को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही जनप्रतिनिधि भी इस कार्यक्रम में अपनी सहभागिता देकर कार्यक्रम की सफलता में योगदान देंगे।कार्यक्रम की शुरुआत में भाजपा रायपुर ग्रामीण जिलाध्यक्ष श्याम नारंग ने भी हर घर तिरंगा अभियान एवं तिरंगा यात्रा को लेकर विस्तार से बताया। इस दौरान बैठक में विधायक मोतीलाल साहू, अनुज शर्मा, भाजपा प्रदेश मंत्री अमित साहू, रायपुर शहर जिला प्रभारी राजेन्द्र शर्मा, रायपुर ग्रामीण जिला प्रभारी सुरेन्द्र पाटनी, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव, अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
- -पेंशनरों का महंगाई भत्ता 55 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत किया गयारायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि विश्वविद्यालय द्वारा सेवानिवृत्त प्राध्यापकों एवं अन्य कर्मचारियों के पेंशन, ग्रेच्यूटी एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभ दिलवाने के संबंध में सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हुए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सेवानिवृत्त प्रध्यापकों द्वारा उनके लंबित पेंशन एवं ग्रेच्यूटी प्रकरणों तथा महंगाई भत्ते में वृद्धि एवं एरियर्स राशि की मांग को लेकर की जा रही हड़ताल के संबंध में स्पष्ट किया है कि विगत अवधि में सेवानिवृत्त 42 प्राध्यापकों/वैज्ञानिकों में से 15 प्राध्यापकों/वैज्ञानिकों को विश्वविद्यालय द्वारा 90 प्रतिशत पेंशन स्वीकृत कर इसका भुगतान किया जा रहा है। इसी प्रकार 15 अन्य लंबित पेंशन प्रकरणों को स्थानीय निधि संपरीक्षा, संचालनालय को सत्यापन हेतु भेजा गया है जिन पर स्वीकृति प्राप्त होते ही पेंशन का भुगतान शुरू किया जाएगा। 12 अन्य पेंशन प्रकरण स्वीकृति हेतु विचाराधीन हैं जिन पर त्वरीत कार्यवाही की जा रही है।विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन सेवानिवृत्त प्रध्यापकों/वैज्ञानिकों को 90 प्रतिशत पेंशन राशि प्रदान की जा रही है उनके नियुक्ति आदेश में उल्लेखित सेवा शर्तों एवं उनके परिपालन में व्याप्त विसंगतियों को दृष्टिगत रखते हुए विश्वविद्यालय के लेखानियंत्रक एवं स्थानीय निधि संपरीक्षा, संचालनालय द्वारा आपत्ति दर्ज की गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उक्त प्रकरणों को मार्गदर्शन हेतु राज्य शासन को भेजा गया है और मानवीय आधार पर तात्कालिक कार्यवाही करते हुए अंतरिम राहत के रूप में 90 प्रतिशत पेंशन राशि का भुगतान किया जा रहा है। इसी प्रकार अन्य विसंगतिपूर्ण लंबित पेंशन प्रकरणों का भी तेजी से निराकरण किया जा रहा है तथा इनका निराकरण होने पर संबंधित प्रध्यापकों/वैज्ञानिकों को पेंशन का तत्काल भुगतान किया जाएगा।विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि विश्वविद्यालय में कार्यरत वैज्ञानिकों द्वारा उनकी सेवानिवृत्ति आयु प्रध्यापक संवर्ग की तरह ही 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष निर्धारित करने की मांग के संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा प्रबंध मंडल से इसे पारित कराकर राज्य शासन से मार्गदर्शन मांगा गया है जो कि अब तक अपेक्षित है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सेवानिवृत्त प्रध्यापकों/वैज्ञानिकों को देय पेंशन राशि में महंगाई भत्ते की दर 55 प्रतिशत से बढाकर 58 प्रतिशत किये जाने का आदेश प्रसारित कर दिया गया है।
- रायपुर। जिंदगी कई बार ऐसे कठिन इम्तिहान लेती है, जिनके सामने इंसान खुद को असहाय महसूस करने लगता है। जीवन में हर व्यक्ति का एक सपना होता है की खुद का आशियाना हो जिसमे वह सुकून की नींद ले सके. इसी सपने को सरकार साकार कर रही हैं.महासमुंद विकासखंड के ग्राम पंचायत डुमरपाली के आश्रित ग्राम रामपुर की 35 वर्षीय कुमारी बाई कमार का जीवन भी कुछ ऐसा ही था। विवाह के कुछ समय बाद ही पति का असामयिक निधन हो गया, जिससे दो छोटे बच्चों के पालन-पोषण और परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई।आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कुमारी बाई बांस से बने घरेलू सामान तैयार कर अपनी आजीविका चलाती थीं। किसी तरह दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो जाता था, लेकिन रहने के लिए सुरक्षित घर नहीं था। जंगल से लगे क्षेत्र में कच्चे मकान में रहते हुए जंगली जानवरों का भय हर रात बना रहता था। ऐसे में पक्का और सुरक्षित घर उनके लिए केवल एक सपना बनकर रह गया था।इसी दौरान ग्राम पंचायत के माध्यम से उन्हें प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाभियान (पीएम जनमन) आवास योजना की जानकारी मिली। पात्रता के आधार पर उनका नाम योजना में स्वीकृत हुआ और उन्हें पक्का आवास मिला। आज कुमारी बाई अपने दोनों बच्चों के साथ नए पक्के घर में सुरक्षित, सम्मान पूर्वक और निश्चिंत जीवन जी रही हैं। अब उन्हें बारिश, आंधी या जंगली जानवरों का भय नहीं सताता। उनका कहना है कि इस योजना ने उन्हें मकान के साथ उनके परिवार को सुरक्षा, सम्मान और भविष्य की नई उम्मीद भी दी है। कुमारी बाई ने खुशी जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है।
- रायपुर। राज्य शासन ने खेल गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए 6 नए जिलों गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़-चौकी, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती में खेल अधिकारी के नए पदों को मंजूरी दी है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा मंत्रालय से विगत 4 अगस्त को इन पदों की मंजूरी के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
- -प्राकृतिक आपदा से गेहूं की फसल खराब होने पर मिला 24 हजार का बीमा दावारायपुर ।कृषि पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर है और मौसम की अनिश्चितता कई बार किसानों की वर्षों की मेहनत पर पानी फेर देती है। ऐसे कठिन समय में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच बनकर सामने आ रही है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के विकासखंड मनेन्द्रगढ़ अंतर्गत ग्राम पसौरी निवासी किसान अजमेर सिंह की कहानी इस योजना की उपयोगिता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।अजमेर सिंह ने अपनी लगभग 4 एकड़ कृषि भूमि में गेहूं की फसल बोई थी। खेती के साथ-साथ उन्होंने दूरदर्शिता दिखाते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत अपनी फसल का बीमा भी कराया। फसल तैयार होने से पहले प्राकृतिक कारणों से उनकी गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।फसल खराब होने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बीमा दावा प्रस्तुत किया। संबंधित अधिकारियों द्वारा दावे का सत्यापन किए जाने के उपरांत बीमा कंपनी ने उन्हें 24,000 की सहायता राशि स्वीकृत कर प्रदान की। यह राशि उनके लिए आर्थिक संबल साबित हुई और खेती से जुड़े नुकसान की भरपाई में महत्वपूर्ण सहायता मिली।अजमेर सिंह बताते हैं कि यदि उन्होंने फसल का बीमा नहीं कराया होता तो नुकसान की भरपाई करना बेहद कठिन हो जाता। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए कठिन परिस्थितियों में एक मजबूत सुरक्षा कवच का कार्य करती है। योजना के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता किसानों को दोबारा खेती करने का आत्मविश्वास देती है और उन्हें विपरीत परिस्थितियों से उबरने में मदद करती है।उन्होंने जिले के सभी किसानों से अपील की कि वे अपनी फसलों का समय पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमा अवश्य कराएं, ताकि प्राकृतिक आपदा, अतिवृष्टि, सूखा, ओलावृष्टि अथवा अन्य कारणों से फसल को नुकसान होने पर उन्हें भी योजना का लाभ मिल सके और आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।अजमेर सिंह ने किसानों के हित में संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के किसान हितैषी प्रयासों एवं कृषि क्षेत्र के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों के प्रति भी धन्यवाद ज्ञापित किया।प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना आज किसानों के लिए केवल बीमा योजना नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा और आत्मविश्वास का मजबूत आधार बनकर उभर रही है।
- -गड़बड़ी पर नपेंगे अफसर, शत-प्रतिशत व पारदर्शी गिरदावरी के कड़े निर्देश-राजस्व विभाग का फरमान, लापरवाही पर होगी सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाईरायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य में समर्थन मूल्य पर धान, मक्का और प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली व अरहर की खरीदी की तैयारियों के बीच छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने एक बड़ा और कड़ा रुख अपनाया है। विभाग द्वारा प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को खरीफ फसल की शत-प्रतिशत और त्रुटिरहित गिरदावरी (डिजिटल व मैन्युअल) सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। शासन ने साफ कर दिया है कि गिरदावरी कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या हेरफेर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।छत्तीसगढ़ में गिरदावरी प्रक्रिया की शुद्धता, पारदर्शिता और मैदानी फर्जीवाड़े पर प्रभावी लगाम लगाने के लिए शासन ने उच्च अधिकारियों से लेकर मैदानी अमले तक 7-स्तरीय भौतिक सत्यापन की सख्त व्यवस्था लागू की है। इस नई व्यवस्था के तहत पटवारी अपने हल्के के शत-प्रतिशत (100%) रकबे का सत्यापन करेंगे। इसके साथ ही राजस्व निरीक्षक और कृषि विस्तार अधिकारी 25-25 प्रतिशत रकबे की जांच करेंगे, जबकि तहसीलदार व नायब तहसीलदार को 10 प्रतिशत और अनुविभागीय अधिकारी (SDO) को 5 प्रतिशत रकबे के सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।प्रशासनिक कसावट को और मजबूत करते हुए जिला स्तरीय अधिकारी 1प्रतिशत तथा राज्य व संभाग स्तरीय अधिकारी 0.1 प्रतिशत गिरदावरी का औचक (रैंडम) निरीक्षण करेंगे।प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए शासन ने स्पष्ट समय-सीमा तय कर दी है। इसके तहत 20 सितंबर 2026 तक गिरदावरी का कार्य पूर्ण कर खसरा एवं भुईयां सॉफ्टवेयर में प्रविष्टि व त्रुटि सुधार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद 25 सितंबर 2026 को ग्रामवार फसल क्षेत्राच्छादन प्रतिवेदन का प्रारंभिक प्रकाशन होगा, जिसके आधार पर प्राप्त होने वाली दावा-आपत्तियों का निराकरण करते हुए 30 सितंबर 2026 तक खसरा पांचसाला और भुईयां सॉफ्टवेयर में अंतिम संशोधन कर दिया जाएगा।सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाने के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि यदि किसी किसान ने धान की जगह अन्य फसल बोई है या जमीन खाली छोड़ी है, तो पटवारी और राजस्व निरीक्षक को मोबाइल से उस खेत का खसरावार फोटो अपलोड करना होगा। राजस्व रिकॉर्ड और वास्तविक बोए गए रकबे में अंतर पाए जाने पर संबंधित मैदानी अमले और पर्यवेक्षण अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।गिरदावरी की तिथियों से ग्रामीणों को अवगत कराने के लिए गांवों में कोटवारों के जरिए मुनादी कराई जाएगी। गिरदावरी के दौरान स्थानीय जन-प्रतिनिधियों को भी जांच के समय उपस्थित रहने का अवसर दिया जाएगा साथ ही किसान स्वयं उपस्थित होकर अपना फोटो खिंचवा सकते है। इसके अलावा, संभागीय आयुक्त और भू-अभिलेख संचालक हर 15 दिन में गिरदावरी की प्रगति की पाक्षिक समीक्षा करेंगे।
- - गायत्री निर्मलकर सहित ग्रामीणों को गांव में ही मिल रही बैंकिंग, डिजिटल और शासकीय सेवाओं की सुविधारायपुर । कभी बैंक का छोटा-सा काम भी गांव के लोगों के लिए पूरे दिन का सफर बन जाता था। पैसा निकालना हो, जमा करना हो या किसी सरकारी योजना की राशि प्राप्त करनी हो, इसके लिए शहर तक जाना पड़ता था। आने-जाने का खर्च अलग और मजदूरी का नुकसान अलग। लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शुरू किए गए अटल डिजिटल सुविधा केंद्र ग्रामीणों के जीवन में नई सुविधा और नया विश्वास लेकर आए हैं।कबीरधाम जिले के ग्राम राजानवागांव निवासी श्रीमती गायत्री निर्मलकर के जीवन में भी अटल डिजिटल सुविधा केंद्र ने बड़ा बदलाव लाया है। उनके पति श्री नोहर निर्मलकर मजदूरी और कपड़े प्रेस करने का कार्य करते हैं। परिवार की आय सीमित होने के कारण बैंक संबंधी कार्यों के लिए शहर जाना उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता था। कई बार बैंक जाने के कारण पूरे दिन की मजदूरी भी छूट जाती थी। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। गांव में संचालित अटल डिजिटल सुविधा केंद्र के माध्यम से श्रीमती गायत्री महतारी वंदन योजना की राशि आसानी से प्राप्त कर लेती हैं। जरूरत पड़ने पर बैंक खाते में राशि जमा भी कर देती हैं। कुछ ही मिनटों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध होने से समय, पैसे और मेहनत तीनों की बचत हो रही है।श्रीमती गायत्री मुस्कुराते हुए कहती हैं कि पहले बैंक जाने में पूरा दिन निकल जाता था। किराया भी लगता था और मजदूरी भी छूट जाती थी। अब गांव में ही अटल डिजिटल सुविधा केंद्र से महतारी वंदन योजना का पैसा मिल जाता है। वे बताती हैं कि सिर्फ उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के बुजुर्गों, महिलाओं, किसानों और मजदूरों को इसका लाभ मिल रहा है। अब छोटी-छोटी बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं के लिए शहर नहीं जाना पड़ता। शासन की योजनाओं का लाभ भी समय पर मिल जाता है। आज अटल डिजिटल सुविधा केंद्र गांवों में केवल बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने वाला केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण डिजिटल सशक्तिकरण का मजबूत आधार बन चुका है। यहां आधार आधारित बैंकिंग, नकद निकासी एवं जमा, बिजली बिल भुगतान, मोबाइल और डीटीएच रिचार्ज, यात्रा टिकट बुकिंग, पैन कार्ड, आधार संबंधी सेवाओं सहित अनेक डिजिटल सेवाएं उपलब्ध हैं।
- -नाशक का छिड़काव कर 40 हेक्टेयर में बचाया समय और श्रमरायपुर। बलौदा बाज़ार भाटापारा जिले के किसान अब खेती में तकनीक का इस्तेमाल कर आधुनिक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इसी कड़ी में विकासखंड भाटापारा के ग्राम पाटन, धौरभठा और खोलवा के किसानों ने खेती में तकनीक का नया उदाहरण पेश किया है। यहां करीब 40 हेक्टेयर रकबे में किसानों ने ड्रोन के माध्यम से खरपतवार नाशक का छिड़काव करवाया।पारंपरिक तरीके से इस रकबे में छिड़काव करने में 10 से 15 दिन लग जाते थे। ड्रोन की मदद से पूरा काम कुछ ही घंटों में पूरा हो गया। इससे किसानों के समय, श्रम और लागत तीनों की बचत हुई।ग्राम धौरभठा के किसान आलोक जायसवाल एवं खोलवा के कृषक गुड्डू चांडक ने बताया कि़ पहले 2से 3 एकड़ में छिड़काव करने के लिए 2 मजदूर पूरे दिन लगते थे। ड्रोन से 40 हेक्टेयर का काम एक दिन में हो गया। पानी भी कम लगी और पीठ पर टंकी ढोने की परेशानी नहीं रही।कृषि विभाग और स्थानीय कृषि तकनीक सेवा प्रदाता के सहयोग से ड्रोन को खेतों में उतारा गया। ड्रोन ने निर्धारित ऊंचाई से एक समान रूप से खरपतवार नाशक का छिड़काव किया। इससे दवा की बर्बादी भी कम हुई और फसल पर असर बेहतर रहा।मैनुअल छिड़काव की तुलना में 80 प्रतिशत समय कम लगा। इसके साथ ही मजदूरी और दवा दोनों में बचत एवं एक समान छिड़काव से खरपतवार नियंत्रण बेहतर हुई।जिला प्रशासन द्वारा सहकरी समिति के माध्यम से किसानों को ड्रोन उपलब्ध कराया जा रहा है जिसमें 4 नग ईफको कम्पनी के भी है। कृषि विभाग के अधिकारियो ने बताया कि़ इस व्यवस्था से अब छोटे किसानों को भी कम दर पर ड्रोन सेवा मिल रही है। भाटापारा क्षेत्र में धान और दलहन की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए यह तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है।फिलहाल पाटन, धौरभठा और खोलवा के किसान इस प्रयोग से काफी संतुष्ट हैं और आने वाले सीजन में और अधिक रकबे में ड्रोन से छिड़काव करवाने की योजना बना रहे हैं।
- -आधार में गलत नाम के कारण हो रही थी परेशानी, अब ऑनलाइन सुविधा से मिली राहतरायपुर। सेवा सेतु पोर्टल नागरिकों के लिए सरकारी योजनाओं और प्रमाण-पत्रों की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाता है। अब लोग घर बैठे मोबाइल या ऑनलाइन माध्यम से आय, निवास, विवाह पंजीयन व अन्य जरूरी सेवाएं तय समय-सीमा में प्राप्त कर सकते हैं, जिससे कार्यालयों के चक्कर काटने की जरूरत खत्म हो गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा संचालित सेवा सेतु पहल नागरिकों के लिए बड़ी राहत बनकर उभर रही है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को घर के नजदीक सरल, सुगम और पारदर्शी शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराना है। दंतेवाड़ा जिले की निवासी श्रीमती धिन्नो कड़ियामी को भी इस पहल का सीधा लाभ मिला है। आधार कार्ड में नाम गलत दर्ज होने के कारण श्रीमती धिन्नो कड़ियामी को लंबे समय से विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ मिलने में कठिनाई हो रही थी। महतारी वंदन योजना सहित अन्य योजनाओं की राशि भी उनके खाते में नहीं पहुंच पा रही थी। पहले आधार कार्ड में नाम सुधार कराने के लिए राजपत्र (गजट) में नाम प्रकाशित कराना आवश्यक था। इसके लिए दस्तावेज जमा करने राजनांदगांव जाना पड़ता था, जिससे समय, धन और श्रम तीनों की काफी हानि होती थी।सेवा सेतु के माध्यम से अब यह सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध हो गई है। श्रीमती धिन्नो कड़ियामी ने आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन जमा कर राजपत्र में नाम संशोधन की प्रक्रिया शुरू कराई। इससे राजपत्र में नाम प्रकाशित होने की प्रक्रिया सरल हुई और आधार कार्ड में नाम सुधार का रास्ता भी आसान हो गया। उन्होंने बताया कि सेवा सेतु की ऑनलाइन सुविधा से उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिली है। अब पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी हो गई है। श्रीमती धिन्नो कड़ियामी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा सेतु जैसी पहल दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के लिए बेहद उपयोगी है। इससे समय और धन की बचत होने के साथ-साथ शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया भी आसान हुई है। यह सफलता की कहानी बताती है कि सेवा सेतु पहल आम नागरिकों तक शासकीय सेवाएं सरल और प्रभावी ढंग से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है तथा जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।
- -बेनूर समिति को मिले शेष डीएपी वितरण के निर्देशरायपुर। प्रदेश में सुशासन, जवाबदेही और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के जरिए आम नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे शासन के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत हो रहा है ।सुशासन की दिशा में सीएम हेल्पलाइन किसानों के लिए एक भरोसेमंद माध्यम साबित हो रही है। नारायणपुर जिले के बेनूर सेवा सहकारी समिति अंतर्गत आने वाले ग्राम के किसान अस्मलाल साहू की डीएपी उर्वरक से जुड़ी समस्या का विभाग ने प्राथमिकता के आधार पर निराकरण कर दिया है।कृषि कार्य के लिए आवश्यक खाद समय पर न मिलने से परेशान किसान अस्मलाल साहू ने अपनी समस्या को लेकर 16 जुलाई 2026 को सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी। अस्मलाल साहू का कहना था कि एक हेक्टेयर भूमि के लिए पर्याप्त डीएपी खाद की आवश्यकता थी, लेकिन निर्धारित कोटा पूरा न होने के कारण खेती-किसानी प्रभावित हो रही थी। शिकायत मिलते ही कृषि और सहकारिता विभाग हरकत में आया। मार्कफेड द्वारा पहले ही बेनूर समिति को पर्याप्त मात्रा में 326.16 टन यूरिया और 245 टन डीएपी उपलब्ध कराया जा चुका था। समस्या की वस्तुस्थिति जानने के लिए अधिकारियों ने शिकायतकर्ता से मोबाइल नंबर पर सीधा संपर्क साधा। प्रकरण के त्वरित निपटारे के लिए विभाग ने किसान अस्मलाल साहू और बेनूर सोसायटी के प्रभारी उमेश नायक के बीच कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए संवाद कराया। चर्चा के दौरान सोसायटी प्रभारी ने स्पष्ट किया कि किसान को पहले ही आंशिक मात्रा में खाद दी जा चुकी है। विभागीय निर्देशों के बाद समिति प्रभारी ने शेष आवश्यक डीएपी खाद नियमानुसार तत्काल उपलब्ध कराने की सहमति दी।विभागीय तत्परता और समस्या के समयबद्ध समाधान पर किसान अस्मलाल साहू ने पूर्ण संतोष व्यक्त किया।आउटबाउंड सत्यापन कॉल में शिकायतकर्ता की सहमति मिलने के बाद सीएम हेल्पलाइन में दर्ज प्रकरण को सफलतापूर्वक बंद कर दिया गया। इस पहल ने एक बार फिर साबित किया है कि सरकार किसानों की हर समस्या के त्वरित समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
- -शिकायत मिलने पर कृषि विभाग ने की कार्रवाईरायपुर। अधिसूचित प्राधिकारी (उर्वरक) एवं कांकेर जिले में कृषि विभाग के उप संचालक श्री जितेन्द्र कोमरा ने कोयलीबेड़ा विकासखण्ड के पखांजूर में अधिक कीमत पर उर्वरक विक्रय किए जाने की शिकायत के विरूद्ध जांच दल द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित एजेंसी का उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। भानुप्रतापपुर के अनुविभागीय कृषि अधिकारी की अध्यक्षता में गठित जांच दल से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।अधिसूचित प्राधिकारी (उर्वरक) एवं उप संचालक कृषि ने बताया कि पखांजूर के कृषक श्री रवीन मजूमदार निवासी पीव्ही 14 एवं सुदाम गाईन पीव्ही 12 को मेसर्स देवनाथ एजेंसी के प्रोप्राइटर श्री शतदल देवनाथ नया बाजार पखांजूर द्वारा कृषि सामग्री (खाद) को उचित मूल्य से अधिक कीमत पर विक्रय किए जाने के संबंध में लिखित शिकायत प्राप्त हुई थी। इस संबंध में अनुविभागीय कृषि अधिकारी भानुप्रतापपुर की अध्यक्षता में जांच दल गठित की गई तथा संबंधित कृषकों के लिखित बयान एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच दल द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। उक्त शिकायत को सही पाए जाने पर अधिसूचित प्राधिकारी (उर्वरक) एवं उप संचालक कृषि ने उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक य मिश्रण) (नियंत्रण) आदेश, 1985 के खण्ड-31(1) में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए मेसर्स देवनाथ एजेंसी प्रोप्राइटर श्री शतदल देवनाथ नया बाजार पखांजूर विकासखण्ड कोयलीबेड़ा को जारी उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र को अंतरिम उपाय के रूप में निलंबित करने का आदेश जारी किया है।
- -147 टीबी मरीजों की पहचान कर त्वरित उपचार से जोड़ा गयारायपुर। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान देश से क्षय रोग (टीबी) को खत्म करने का एक जन-आंदोलन है। इसके तहत मरीजों को पोषण, चिकित्सीय और व्यावसायिक सहायता दी जाती है। इसमें 'निक्षय मित्र' बनकर लोग या संस्थाएं टीबी रोगियों की मदद करते हैं। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिले में संचालित 100 दिवसीय सघन टीबी जांच अभियान जिला प्रशासन नारायणपुरऔर स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयासों से तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिले को टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस अभियान के तहत जनवरी से जुलाई 2026 तक 2,470 लोगों के बलगम नमूनों की जांच की गई, जिसमें 147 टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत त्वरित उपचार से जोड़ा गया है।नारायणपुर जिले के 87 हाई रिस्क गांवों को चिन्हित कर विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 68 गांवों में आधुनिक एआई (AI) आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन के जरिए शिविर आयोजित कर 5,801 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें से 1,101 संदिग्ध मरीजों के बलगम नमूने सीबीएनएएटी (CBNAAT) जांच के लिए भेजे गए हैं। इस आधुनिक तकनीक से सुदूर व दुर्गम क्षेत्रों में भी संभावित मरीजों की पहचान आसान हुई है। कलेक्टर नारायणपुर की विशेष अपील पर जिले के 93 अधिकारियों, कर्मचारियों और सीएसआर सहयोगियों ने आगे आकर 93 टीबी मरीजों को निक्षय मित्र के रूप में गोद लिया है। ये निक्षय मित्र मरीजों को नियमित रूप से फूड बास्केट और पौष्टिक आहार उपलब्ध करा रहे हैं। कलेक्टर ने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में निक्षय मित्र बनकर इस अभियान में योगदान देने का आह्वान किया है।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नारायणपुर ने अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, बुखार, वजन या भूख में कमी और रात में पसीना आने जैसे लक्षण हों, तो वे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय पर जांच और नियमित दवा से टीबी का पूरी तरह से इलाज संभव है।
- -डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा बदलाव, अब घर बैठे मिलेंगी 441 शासकीय सेवाएंरायपुर। डिजिटल सुशासन की दिशा में राज्य शासन ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए पुराने लोक सेवा केंद्रों को आधुनिक “सेवा सेतु केंद्र” के रूप में विकसित किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू किए गए “सेवा सेतु पोर्टल” के माध्यम से अब प्रदेश के नागरिकों को घर बैठे 441 से अधिक शासकीय सेवाओं का लाभ मिल रहा है। यह पोर्टल शासन और जनता के बीच एक मजबूत डिजिटल सेतु के रूप में कार्य कर रहा है, जिससे सेवाएं पहले की तुलना में अधिक सरल, पारदर्शी और तेज हो गई हैं।सुकमा जिला ई-गवर्नेंस विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहले ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं। नागरिकों की आवश्यकताओं और तकनीकी प्रगति को ध्यान में रखते हुए सेवा सेतु पोर्टल का विस्तार किया गया। अब इस एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, विवाह प्रमाण पत्र, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राजस्व प्रकरण तथा नाम परिवर्तन के लिए राजपत्र प्रकाशन जैसी 441 महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध हैं। इससे आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से बड़ी राहत मिली है और पूरी प्रक्रिया अधिक जवाबदेह एवं व्यवस्थित हो गई है।सेवा सेतु पोर्टल का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को मिल रहा है। अब लोग घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और अपने आवेदन की स्थिति को भी आसानी से ट्रैक कर सकते हैं। प्रत्येक सेवा के लिए निर्धारित समय-सीमा तय होने से कार्यों में तेजी आई है और पारदर्शिता बढ़ी है। इससे भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है।डिजिटल तकनीक पर आधारित यह पहल न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बना रही है, बल्कि आम जनता के जीवन को भी सरल और सुविधाजनक बना रही है। सेवा सेतु पोर्टल छत्तीसगढ़ में डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक सफल और जनहितकारी मॉडल के रूप में उभर रहा है, जिससे शासन की सेवाएं अब हर नागरिक की पहुंच में और अधिक सहजता से उपलब्ध हो रही हैं।
- -कच्चे मकान से पक्के आशियाने तक का प्रेरणादायक सफररायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) जरूरतमंद परिवारों के लिए केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन का आधार बन रही है। मुंगेली जिले के जनपद पंचायत पथरिया अंतर्गत ग्राम पंचायत संकरा की हितग्राही कौशिल्या बाई की सफलता की कहानी इसका सशक्त उदाहरण है।कुछ समय पहले तक कौशिल्या बाई अपने परिवार के साथ कच्चे एवं जर्जर मकान में रहने को मजबूर थीं। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता था और हर मौसम में परिवार को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण स्वयं पक्का मकान बनाना उनके लिए संभव नहीं था।प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आवेदन किया। पात्रता के आधार पर उनका चयन हुआ और योजना के तहत स्वीकृति मिलने के पश्चात किस्तों की राशि प्राप्त होते ही उन्होंने अपने नए पक्के मकान का निर्माण शुरू कराया। स्थानीय प्रशासन एवं पंचायत के मार्गदर्शन में निर्माण कार्य समय पर पूरा हुआ। कौशिल्या बाई का परिवार सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक पक्के मकान में रह रहा है। अब उन्हें बरसात में पानी टपकने या अन्य असुविधाओं की चिंता नहीं रहती। उनका नया घर परिवार के लिए सुरक्षा, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद लेकर आया है।कौशिल्या बाई ने प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके परिवार का जीवन बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अब उनका सपना साकार हो चुका है और उनके बच्चों को भी सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण मिल रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का उद्देश्य प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। कौशिल्या बाई की यह सफलता अन्य जरूरतमंद परिवारों के लिए भी प्रेरणा है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेकर वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।




.jpg)










.jpg)

.jpg)









