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कीव । रूस के सैनिकों ने शनिवार तड़के यूक्रेन की राजधानी कीव पर धावा बोल दिया और शहर में कई जगह विस्फोटों की आवाज सुनाई दीं। इस बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने देश छोड़ने से इनकार कर दिया है और अपने देशवासियों से मजबूती के साथ डटे रहने की अपील की है। जेलेंस्की ने कहा कि लड़ाई अभी जारी है और यह यूक्रेन का भविष्य निर्धारित करेगी।जेलेंस्की को अमेरिकी सरकार ने राजधानी कीव से निकलने को कहा था, लेकिन जेलेंस्की ने इससे इनकार कर दिया।
इस लड़ाई में अब तक सैकड़ों लोगों की मौत होने की सूचना मिली है। रूसी सेना की ओर से राजधानी कीव में किए गए हमलों में अपार्टमेंट की इमारत और पुलों और स्कूलों को भारी क्षति हुई है।इस बात के भी संकेत मिल रहे हैं कि रूस यूक्रेन की मौजूदा सरकार को उखाड़ फेंकने (अपदस्थ करना) की कोशिश कर सकता है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यूक्रेन की मौजूदा सरकार को हटाना ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का उद्देश्य है।
दुनिया के नक्शे में बदलाव करने और रूस के शीतयुद्ध कालीन प्रभाव को बहाल करने के लिए यह पुतिन का अभी तक का सबसे बड़ा कदम है। हालांकि इस युद्ध में अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यूक्रेन का कितना हिस्सा अब भी उसके कब्जे में है और कितने हिस्से पर रूस का नियंत्रण हो गया है।यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने संघर्ष विराम की अपील की और एक अस्पष्ट बयान में चेतावनी दी कि कई शहरों पर हमला हो रहा है।यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा, “आज रात हमें मजबूती के साथ डटे रहना होगा। आज ही यूक्रेन का भविष्य निर्धारित होगा।”जेलेंस्की को अमेरिकी सरकार ने राजधानी कीव से निकलने को कहा था, लेकिन जेलेंस्की ने इससे इनकार कर दिया।अमेरिका के खुफिया विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा,‘‘ यहां युद्ध चल रहा है। मुझे गोला बारूद चाहिए, यात्रा नहीं। - नयी दिल्ली । एअर इंडिया का एक विमान रूस के आक्रमण के चलते यूक्रेन में फंसे भारतीयों को स्वदेश लाने के वास्ते शनिवार सुबह रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट पहुंचा।वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने बताया कि उड़ान संख्या एआई1943 ने तड़के करीब तीन बजकर 40 मिनट पर मुंबई हवाईअड्डे से उड़ान भरी और वह भारतीय समयानुसार सुबह करीब 10 बजकर 45 मिनट पर बुखारेस्ट हवाईअड्डे पर पहुंचा।उन्होंने बताया कि जो भी भारतीय नागरिक सड़क मार्ग से यूक्रेन-रोमानिया सीमा पर पहुंचे थे, उन्हें भारत सरकार के अधिकारी बुखारेस्ट ले गए ताकि उन्हें एअर इंडिया की उड़ान के जरिए स्वदेश लाया जा सके।उन्होंने बताया कि बोइंग787 विमान में एक बार में 256 यात्री आ सकते हैं।एअर इंडिया यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों को स्वदेश लाने के लिए बुखारेस्ट और हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट के लिए शनिवार को और उड़ानें संचालित करेगी।गुरुवार को यूक्रेन के अधिकारियों ने यात्री विमानों के परिचालन के लिए अपने देश का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था, इसलिए भारतीयों को स्वदेश लाने के लिए ये उड़ानें बुखारेस्ट और बुडापेस्ट से परिचालित की जा रही हैं।अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन में फिलहाल करीब 20,000 भारतीय फंसे हुए हैं जिनमें ज्यादातर विद्यार्थी हैं।यूक्रेन का हवाई क्षेत्र बंद होने से पहले एअर इंडिया ने 22 फरवरी को यूक्रेन की राजधानी कीव के लिए एक विमान भेजा था जिसमें 240 लोगों को भारत वापस लाया गया था। उसने 24 और 26 फरवरी को दो और उड़ानों के संचालन की योजना बनायी थी लेकिन रूस के 24 फरवरी को आक्रमण शुरू करने और इसके बाद यूक्रेन का हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण ऐसा नहीं किया जा सका।एअर इंडिया ने शुक्रवार रात को ट्वीट करके बताया कि वह दिल्ली और मुंबई से शनिवार को बी787 विमान बुखारेस्ट और बुडापेस्ट के लिए परिचालित करेगा।यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को कहा कि वह रोमानिया तथा हंगरी से आने वाले मार्गों को निर्धारित करने का काम कर रहा है।दूतावास ने कहा, ‘‘वर्तमान में, अधिकारियों की टीम उझोरोद के पास चोप-जाहोनी हंगरी सीमा, चेर्नीवत्सी के पास पोरब्ने-सीरेत रोमानियाई सीमा चौकियों पर पहुंच रही है।’’ दूतावास ने कहा कि इन सीमा जांच चौकियों के करीब रह रहे भारतीय नागरिकों, विशेष कर छात्रों को विदेश मंत्रालय के दलों के साथ समन्वय कर व्यवस्थित तरीके से रवाना होने की सलाह दी जाती है।उसने कहा कि एक बार जब ये मार्ग चालू हो जाएंगे तो भारतीय नागरिकों को खुद से यात्रा करने के लिए सीमा जांच चौकियों की ओर बढ़ने की सलाह दी जाएगी।दूतावास ने भारतीयों को अपना पासपोर्ट, नकदी (प्राथमिक रूप से डॉलर में), अन्य आवश्यक वस्तुएं और कोविड टीकाकरण प्रमाणपत्र सीमा जांच चौकियों पर अपने पास रखने की सलाह दी है।दूतावास ने कहा है, ‘‘भारतीय ध्वज का (कागज पर) प्रिंट निकाल लें और यात्रा के दौरान वाहनों तथा बसों पर उन्हें चिपका दें। यूक्रेन की राजधानी कीव और रोमानिया की सीमा के बीच करीब 600 किलोमीटर का फासला है और सड़क मार्ग से यह दूरी तय करने में साढ़े आठ से 11 घंटे लगते हैं।रोमानियाई सीमा जांच चौकी से बुखारेस्ट करीब 500 किलोमीटर की दूरी पर है तथा सड़क मार्ग से उसे तय करने में करीब सात से नौ घंटे लगते हैं।वहीं, कीव और हंगरी की सीमा के बीच करीब 820 किमी की दूरी है और इसे सड़क मार्ग से तय करने में 12-13 घंटे लगते हैं।
- मास्को। रूस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनाशेनकोफ ने शुक्रवार को बताया कि रूस के सैनिकों ने यूक्रेन में निष्क्रिय हो चुके चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र और उसके आसपास के इलाकों पर कब्ज़ा कर लिया है।यूक्रेन की परमाणु नियामकों ने बताया कि एक निगरानी प्रणाली ने संयंत्र के चारों ओर के क्षेत्र में महत्वपूर्ण संख्या में कुछ बिंदुओं पर असामान्य विकिरण स्तर दिखाया है। इसका कारण निर्धारित नहीं किया जा सका है क्योंकि रूस की सेना ने इस पर अपना कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन, चेरनोबिल परमाणु संयंत्र की संयुक्त रूप से सुरक्षा सुनिश्चित करने पर सहमत है। समाचार एजेंसियों ने विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि क्षेत्र में भारी सैन्य उपकरणों की आवाजाही के कारण विकिरण के स्तर में बदलाव हुआ है और हवा में रेडियोधर्मी कण फैले हैं। file photo
- मास्को। रूस के नागरिक उड्डयन विभाग ने कहा है कि ब्रिटिश एयरलाइंस के विमानों के, रूस के हवाई अड्डों पर उतरने और उसके हवाई क्षेत्र को पार करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।रूस के अनुसार यह कदम ब्रिटेन के उड्डयन अधिकारियों की प्रतिकूल निर्णयों को देखते हुए उठाया गया है। इससे पहले ब्रिटेन ने रूस की राष्ट्रीय एयरलाइन्स एअरोफ़्लोत के ब्रिटेन में उतरने पर प्रतिबंध लगा दिया था। ब्रिटेन ने ऐसा यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद लगाए गए प्रतिबंधों के अंतर्गत किया है।रूस के नागरिक उड्डयन विभागीय रोसावियात्सिया ने कहा कि रूस और ब्रिटेन के बीच अंतर-सरकारी हवाई सेवा समझौते के प्रावधानों के अनुसार ब्रिटेन के विमानन अधिकारियों के स्वामित्व वाले या पट्टे पर लिए गए विमानों की नियमित उड़ानों पर प्रतिबंध के प्रतिकूल निर्णयों के जवाब के रूप में लिया गया था। रूस की सेना द्वारा यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई के बाद बृहस्पतिवार को यूक्रेन का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया था।
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संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र ने रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद, युद्ध प्रभावित देश में विश्व निकाय के मानवीय अभियानों को तेज करने के लिए दो करोड़ डॉलर की मदद तत्काल देने की घोषणा की।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने इस संबंध में घोषणा करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र और उसके मानवतावादी सहयोगी ‘‘जरूरत के वक्त में यूक्रेन में लोगों के सहयोग के लिए मौजूद रहने को प्रतिबद्ध हैं.... यह बात मायने नहीं रखती कि वे कौन हैं और कहां हैं ।’’ उन्होंने कहा,‘‘ मरने वालों की संख्या बढ़ रही है, हम भय का, यूक्रेन के हर कोने में पीड़ा और आतंक का मंजर देख रहे हैं। जनता, निर्दोष जनता हमेशा भारी कीमत चुकाती है।’’ संयुक्त राष्ट्र के मानवीय अभियानों के प्रमुख मार्टिन ग्रिफिथ्स ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के केंद्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया कोष से दो करोड़ डॉलर पूर्वी दोनेत्स्क और लुहान्स्क और देश के अन्य क्षेत्रों में आपात अभियानों को मदद पहुंचाएंगे और ‘‘संघर्ष से प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य देखभाल, आश्रय, भोजन, पानी आदि मुहैया कराने में भी इससे मदद मिलेगी।’’ - वाशिंगटन। यूक्रेन में रूस की सीमा से लगते सूमी शहर पर रूसी सैनिकों के कब्जे के बाद कम से कम 400 भारतीय छात्रों ने एक तहखाने में शरण ली है और भारत सरकार से उन्हें निकालने की अपील की है।इनमें अधिकतर सूमी स्टेट मेडिकल कॉलेज के छात्र हैं। उन्होंने कहा कि बाहर गोलियों की आवाजें सुनाई देने के कारण उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही है। छात्र ललित कुमार ने कहा, ‘‘ इस वक्त हम अपने छात्रावास के तहखाने में छिपे हुए हैं और हमें नहीं पता कि यहां हम कब तक सुरक्षित रह पाएंगे। हम भारत सरकार से हमें यूक्रेन के पूर्वी इलाके से सुरक्षित निकालने की अपील करते हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘ अपने आप यात्रा करना संभव नहीं है। यहां मार्शल लॉ लागू है, जिसका मतलब है कि कोई बाहर नहीं जा सकता, कार, बस और निजी वाहन नहीं निकल सकते। एटीएम और सुपर मार्केट भी बंद हैं।’’छात्रों ने उस तहखाने का वीडियो भी साझा किया जहां वे छिपे हुए हैं। कुमार ने कहा, ‘‘ हमारे पास यहां ज्यादा सामान नहीं है कि हम लंबे समय तक यहां नहीं टिक पाएंगे। भारत सरकार हमारी आखिरी उम्मीद है....हम अपने देश वापस जाना चाहते हैं और अपने लोगों से मिलना चाहते हैं। हमारी मदद कीजिए।’’
- वाशिंगटन। व्हाइट हाउस के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा रूस पर लगाए गए अभूतपूर्व प्रतिबंध मॉस्को को वैश्विक वित्तीय प्रणाली से अलग-थलग कर देंगे और अत्याधुनिक तकनीक तक उसकी पहुंच भी बाधित हो जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के करीबी सहयोगी, भारतीय-अमेरिकी दलीप सिंह ने कहा कि इन कदमों में रूसी सैन्य बलों पर व्यापक प्रतिबंध लगाना शामिल है और ये रूस के रक्षा, उड्डयन और नौवहन क्षेत्रों पर भी लक्षित होंगे। इससे पहले, बाइडन ने रूस के खिलाफ कई कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी।व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बातचीत में सिंह ने कहा, “आज हम अपने सहयोगियों और भागीदारों के साथ मिलकर रूस पर अभूतपूर्व आर्थिक प्रतिबंध और निर्यात पाबंदियां लगाने की घोषणा करते हैं, जो मॉस्को को वैश्विक वित्तीय प्रणाली से अलग-थलग कर देंगे, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी तक उसकी पहुंच बाधित कर देंगे और रूसी अर्थव्यवस्था को विस्तार देने व आधुनिक बनाने की पुतिन की रणनीतिक महत्वाकांक्षा पर लगाम लगाएंगे।” सिंह अभी अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र से जुड़े मामलों में अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के उप निदेशक हैं। उन्होंने कहा, “हम रूस के दो सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों-साइबरबैंक और वीटीबी पर प्रतिबंध लगाएंगे, जिनके पास 750 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की संपत्ति है, जो रूस की बैंकिंग प्रणाली की कुल संपत्ति का आधे से ज्यादा है।” सिंह ने कहा, “वीटीबी के मामले में हम अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से जुड़ी इसकी सभी संपत्तियों को फ्रीज कर देंगे और अमेरिकी नागरिकों के बैंक के साथ किसी भी तरह का लेन-देन करने पर पाबंदी लगा देंगे।”उन्होंने कहा, “वहीं, साइबरबैंक के मामले में हम अमेरिकी वित्तीय प्रणाली तक इसकी पहुंच समाप्त कर देंगे। हम 70 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की कुल संपत्ति वाले तीन अतिरिक्त रूसी बैंकों की संपत्तियां फ्रीज करते हुए उनके साथ भी किसी भी तरह के लेन-देन पर प्रतिबंध लगाएंगे।” सिंह ने कहा कि हम अमेरिकी निवेशकों को रूस की 13 सबसे महत्वपूर्ण सरकारी कंपनियों को ऋण या इक्विटी वित्त पोषण करने से भी रोकेंगे, जिनकी अनुमानित संपत्ति 1500 अरब अमेरिकी डॉलर के करीब है। व्हाइट हाउस अधिकारी ने कहा, “और अंत में हम इन सरकारी कंपनियों के अधिकारियों के साथ-साथ रूस के कुलीन वर्ग के लोगों और उनके परिवार के सदस्यों पर भी प्रतिबंध लगाएंगे, जो पुतिन के राजतंत्र का अहम हिस्सा हैं।” सिंह के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन की ओर से यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, जापान, कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और ताइवान के साथ ‘ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ समन्वय’ के साथ तैयार कई अभूतपूर्व निर्यात प्रतिबंध भी लागू करने जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन नए प्रतिबंधों में रूस के सैन्य बलों पर व्यापक पाबंदियां लगाना और रक्षा, उड्डयन व समुद्री क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक तक मॉस्को की पहुंच बाधित करना शामिल है, जिससे पुतिन की सैन्य ताकत में कमी आएगी। सिंह के अनुसार, अमेरिका और उसके सहयोगी रूस को होने वाले अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के कुल निर्यात में 50 फीसदी से भी ज्यादा की कटौती करेंगे, जिसमें सेमीकंडक्टर से लेकर बुनियादी तकनीक तक शामिल है।इस बीच, खबर है कि अमेरिका और यूरोपीय अधिकारियों ने रूस के खिलाफ एक प्रमुख वित्तीय प्रतिबंध बचाए रखने का फैसला किया है, जिसके तहत मॉस्को को स्विफ्ट से नहीं हटाने का निर्णय लिया गया है, जो वैश्विक वित्तीय लेन-देन के लिए प्रमुख प्रणाली है। अधिकारियों के मुताबिक, बाइडन ने रूस को स्विफ्ट से प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव को फिलहाल खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि यह हमेशा एक विकल्प रहेगा, लेकिन अभी यूरोप के बाकी हिस्से यह फैसला लेने को तैयार नहीं हैं। बाइडन ने स्पष्ट किया है कि रूस पर बेहद कड़े और प्रभावी प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।
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बर्लिन। जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज ने यूक्रेन पर रूस के हमले की गुरुवार को कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘यूक्रेन के लिए एक भयावह दिन और यूरोप के लिए ‘काला दिन’ करार दिया। स्कोल्ज ने कहा कि यूक्रेन पर ‘‘रूसी आक्रमण अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। इसे किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता।’’उन्होंने कहा, ‘‘ जर्मनी, (रूसी) राष्ट्रपति के इस कृत्य की यथासंभव कड़ी निंदा करता है।’’जर्मन चांसलर ने एक बयान में कहा, ‘‘ हम यूक्रेन एवं उसकी जनता के साथ एकजुट हैं। रूस को तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि जर्मनी इस संबंध में जी7, उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) और यूरोपीय संघ के ढांचे के तहत करीबी समन्वय करेगा।
- कीव। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि रूसी हमले के बाद उनके देश ने रूस के साथ राजनयिक संबंध तोड़ लिए हैं। जेलेंस्की ने गुरुवार को रूस के साथ संबंध तोड़ने के फैसले की घोषणा की, जब उसने अपने पड़ोसी पर बड़े पैमाने पर हवाई और मिसाइल हमला किया।रूसी सेना को यूक्रेन में दाखिल होते हुए देखा गया है। यूक्रेन के अधिकारियों का कहना है कि देश की सेना जवाबी कार्रवाई कर रही है और पश्चिमी देशों से रक्षा सहायता का भी अनुरोध किया है।
- ब्रसेल्स। यूक्रेन पर रूसी सेना के हमले के मद्देनजर यूरोपीय संघ (ईयू) गुरुवार को आपात कदम उठाते हुए अब तक के 'कठोरतम और बेहद नुकसानदायक' प्रतिबंधों को लगाने की योजना बना रहा है। यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयेन ने कहा कि उनका लक्ष्य यूरोप समेत पूरी दुनिया की शांति व्यवस्था को स्थिरता प्रदान करना है। उर्सुला ने कहा हम मिलकर इसके लिए व्लादिमीर पुतिन को जिम्मेदार ठहरायेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘हम यूरोपीय नेताओं के समक्ष अनुमति के लिए बड़े और लक्षित प्रतिबंधों का पैकेज पेश करेंगे।’’ यूरोपीय संघ के विदेश नीति मामलों कें प्रमुख जोसेप बोरेल ने इन्हें अब तक के ‘कठोरतम और बेहद नुकसानदायक’ प्रतिबंध करार दिया।
- मॉस्को | रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने यूक्रेन में ‘‘विशेष सैन्य अभियान’’ शुरू करने का निर्णय उसका असैन्यीकरण करने और नाजियों से मुक्त कराने के मकसद से लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस कदम का लक्ष्य रूसी नागरिकों सहित शांतिप्रिय लोगों के खिलाफ अनगिनत अपराध करने वालों को न्याय के दायरे में भी लाना है।रूसी राष्ट्रपति ने टेलीविजन पर अपने विशेष संबोधन में कहा,‘‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ डोनबास ने मदद की गुहार लगाते हुए रूस से संपर्क किया, मैंने विशेष सैन्य अभियान चलाने का निर्णय किया है।’’उन्होंने कहा कि सैन्य अभियान का लक्ष्य ‘‘ उन लोगों की रक्षा करना है जो प्रताड़ित हैं, आठ वर्ष से कीव के शासन में जनसंहार का सामना कर रहे हैं। हम यूक्रेन का असैन्यीकरण करने और उसे नाजियों से मुक्त करने का प्रयास करेंगे। साथ ही, रूसी नागरिकों सहित शांतिप्रिय लोगों के खिलाफ अनगिनत अपराध करने वालों को न्याय के दायरे में भी लाएंगे।’’सरकारी समाचार एंजेसी ‘टीएएसएस’ ने अपनी खबर में पुतिन के हवाले से कहा कि न्याय और सत्य रूस के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा,‘‘बलों की हमेशा जरूरत होती है,लेकिन ये अलग अलग प्रकार के हो सकते हैं और हम जानते हैं कि सही ताकत न्याय और सत्य में हैं और ये हमारे साथ हैं।’’
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दुबई। दुबई में आयोजित एक भव्य समारोह में ‘म्यूजियम ऑफ द फ्यूचर’ का उद्घाटन किया गया जिसे “दुनिया की सबसे सुंदर इमारत” कहा जा रहा है। इस भवन को बनाने में नौ साल का वक्त लगा है। यह सात मंजिला इमारत 77 मीटर ऊंची है और 30 हजार वर्ग मीटर में इसका निर्माण हुआ है। यह विश्व की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा से कुछ ही दूरी पर स्थित है। दुबई में निर्मित वास्तुकला के नमूनों में ‘म्यूजियम ऑफ द फ्यूचर’ ताजा पेशकश है।एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि संग्रहालय मानवता के भविष्य की रुपरेखा को प्रदर्शित करता है और मानव के विकास में आने वाली चुनौतियों और अवसरों के नवाचार युक्त समाधान की प्रेरणा देता है। यूएई के कैबिनेट मामलों के मंत्री तथा दुबई फ्यूचर फाउंडेशन के अध्यक्ष मोहम्मद अल गर्गावी ने मंगलवार को आयोजित उद्घाटन समारोह में कहा कि ‘म्यूजियम ऑफ द फ्यूचर’ एक जीवंत संग्रहालय है। इस इमारत का डिजाइन, किल्ला डिजाइन के वास्तुकार शॉन किल्ला ने किया है और यह इंजीनियरिंग तथा कम्प्यूटर की मदद से किए गए डिजाइन का एक उत्कृष्ट नमूना है। यह स्टेनलेस स्टील से बना है और यहां रोबोट के इस्तेमाल से निर्मित 1,024 कलाकृतियां रखी गई हैं।
- संयुक्त राष्ट्र। रूस-यूक्रेन सीमा पर बढ़ते तनाव को लेकर ‘‘गहरी चिंता’’ व्यक्त करते हुए भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा कि तनाव को कम करना तात्कालिक प्राथमिकता है और वह आश्वस्त है कि इस मुद्दे को कूटनीतिक संवाद के जरिए ही हल किया जा सकता है।रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के ‘‘दोनेत्स्क और लुहांस्क गणराज्य’’ के क्षेत्रों की ‘‘स्वतंत्रता’’ को मान्यता देने के आदेश पर सोमवार को हस्ताक्षर कर दिए, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया और मॉस्को के यूक्रेन पर आक्रमण करने की आशंका बढ़ गयी है। उन्होंने पूर्वी यूक्रेन में सेना भेजने का भी आदेश दिया, जिसे क्रेमलिन ने मॉस्को समर्थित क्षेत्रों में ‘‘शांतिरक्षा’’ मिशन बताया है।संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि एवं राजदूत टी.एस. तिरुमूर्ति ने सोमवार की रात को सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में कहा, ‘‘ हम यूक्रेन की पूर्वी सीमा पर हो रही गतिविधियों और रूसी संघ द्वारा इस संबंध में की गई घोषणा सहित पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘ रूसी संघ के साथ लगी यूक्रेन की सीमा पर बढ़ता तनाव गंभीर चिंता का विषय है। इन चीज़ों से क्षेत्र की शांति एवं सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।’’भारत ने इसके साथ ही सभी पक्षों से संयम बरतने का आह्वान भी किया और कहा कि सभी देशों के वैध सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए और क्षेत्र में दीर्घकालीन शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ‘‘तनाव कम करना’’ तात्कालिक प्राथमिकता है ।पुतिन के फैसले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने यूक्रेन पर एक आपात बैठक की। सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता इस महीने रूस के पास है।भारत ने ‘‘सभी पक्षों के लिए’’ संयम बरतते हुए अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया और साथ ही कहा कि जल्द से जल्द आपसी सहमति से समाधान निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने चाहिए।तिरुमूर्ति ने कहा, ‘‘हम आश्वस्त हैं कि इस मुद्दे को कूटनीतिक संवाद के जरिए ही हल किया जा सकता है। हमें तनाव कम करने की कोशिश में लगे पक्षों द्वारा हाल में उठाए गए कदमों को वक्त देने की जरूरत है।’’उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में नयी दिल्ली त्रिपक्षीय संपर्कसमूह और नॉरमैंडी प्रारूप समेत अन्य प्रयासों का स्वागत करती है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें पक्षों को अलग-अलग हितों को साधने के लिए वृहद प्रयास करने का वक्त देने की आवश्यकता है। हम सैन्य तनाव का जोखिम नहीं उठा सकते।’’वहीं, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने यूक्रेन के दोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों की ‘‘स्वतंत्रता’’ को मान्यता देने के रूस के फैसले पर सोमवार को गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि मॉस्को का फैसला यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता एवं संप्रभुत्ता का ‘‘उल्लंघन’’ है तथा संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के सिद्धांतों के विरुद्ध है।भारत ने तनाव को कम करने के लिए सार्थक कूटनीति की आवश्यकता पर जोर दिया। तिरुमूर्ति ने कहा, ‘‘नागरिकों की सुरक्षा आवश्यक है। 20 हजार से अधिक भारतीय छात्र और नागरिक यूक्रेन के विभिन्न हिस्सों में रहते और पढ़ते हैं। भारतीय नागरिकों की कुशलक्षेम हमारी प्राथमिकता है।’’संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने कहा कि पुतिन ‘‘हमारी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की परीक्षा ले रहे हैं, वह हमारे संकल्प की परीक्षा ले रहे हैं और देखते हैं वे हमें कहां तक लेकर जाते हैं। वह यह दिखाना चाहते हैं कि बल के जरिए वह संयुक्त राष्ट्र का तमाशा बना सकते हैं। हमें इस संकट से निपटने के लिए एक साथ मिलकर काम करना चाहिए।’’उन्होंने कहा कि पुतिन ने ऐलान किया है कि वह इन क्षेत्रों में रूसी बलों को तैनात करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘वह उन्हें शांतिरक्षक बता रहे हैं। यह बेहूदा है। हम जानते हैं कि असल में वे क्या हैं। हम इस वक्त एक साथ आना चाहिए और इससे नजर नहीं फेरनी चाहिए।’’इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत वैसिली नेबेंजिया ने कहा, ‘‘हम कूटनीतिक समाधान के लिए, कूटनीतिक बातचीत के लिए तैयार हैं। हालांकि, डोनबास में फिर खूनखराबे को मंजूरी देने की हमारी मंशा नहीं है।उन्होंने कहा, ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण रूप से हमें यह कहना पड़ रहा है कि अमेरिका के नेतृत्व में हमारे पश्चिमी सहयोगियों ने अत्यधिक नकारात्मक भूमिका निभायी है। कीव को अपने उत्तरदायित्वों को लागू करने के लिए विवश करने के बजाय वे यूक्रेन को यह अर्थहीन मंत्र दोहराने के लिए उकसा रहे हैं कि रूस ने मिंस्क समझौते के तहत उत्तरदायित्वों को लागू नहीं किया है।’’अमेरिका ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह फैसला मिंस्क समझौतों के तहत रूस की प्रतिबद्धताओं को ‘‘पूरी तरह खारिज’’ करता है और रूस के इस दावे के बिल्कुल उलट है कि वह कूटनीति के लिए प्रतिबद्ध है। अमेरिका ने कहा कि यह यूक्रेन की संप्रभुत्ता और क्षेत्रीय अखंडता पर साफ तौर पर हमला है।अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं जिससे अमेरिकी लोगों द्वारा यूक्रेन के तथाकथित ‘‘दोनेत्स्क और लुहांस्क गणराज्यों’’ वाले क्षेत्रों में सभी नए निवेश, व्यापार और वित्त पोषण पर रोक लग जाएगी।रूस के कदमों को उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का घोर उल्लंघन बताते हुए व्हाइट हाउस ने कहा कि उसकी आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी है। यूरोपीय संघ ने भी कहा है कि वह यूक्रेन के अलगाववादी क्षेत्रों को मान्यता देने के लिए रूस पर प्रतिबंध लगाएगा।रूस ने यह कदम तब उठाया है जब एक दिन पहले राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि अगर रूस यूक्रेन पर हमला नहीं करता है तो वह राष्ट्रपति पुतिन के साथ ‘‘सैद्धांतिक रूप से’’ बैठक करने पर सहमति जताते हैं।बहरहाल, क्रेमलिन ने सोमवार को कहा कि इस वक्त ऐसी किसी भी बैठक के बारे में बात करना जल्दबाजी होगी।
- इस्लामाबाद/मॉस्को। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान 23 फरवरी से रूस की दो दिवसीय यात्रा करेंगे। इस्लामाबाद में राजनयिक सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।पाकिस्तान के किसी प्रधानमंत्री की पिछले 23 साल में रूस की यह पहली यात्रा होगी। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने प्रधानमंत्री इमरान खान के 23-24 फरवरी को मॉस्को की यात्रा करने की पुष्टि की है। अधिकारी ने कहा, ‘‘ रूस ने उन्हें आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है और वहां प्रधानमंत्री खान द्विपक्षीय हित के महत्वपूर्ण मुद्दों पर शीर्ष नेतृत्व के साथ वार्ता करेंगे।’’इससे पहले, रूस की सरकारी समाचार एजेंसी ‘तास’ ने रविवार को एक खबर में बताया था कि रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की यात्रा की तैयारी किए जाने की पुष्टि की है।एजेंसी ने एक राजनयिक सूत्र के हवाले से कहा, ‘‘ वह 23-24 फरवरी को यात्रा करेंगे।’’पाकिस्तान और रूस ने हालांकि आधिकारिक तौर पर खान की यात्रा की कोई घोषणा नहीं की है। इमरान ऐसे समय में रूस की यात्रा कर रहे हैं, जब यूक्रेन और रूस के बीच तनाव है। उनकी यात्रा के दौरान, आर्थिक एवं व्यापार सहयोग बढ़ाने के मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। ‘पाकिस्तान स्ट्रीम गैस पाइपलाइन परियोजना’ पर भी प्रगति की उम्मीद है, जिसके तहत रूसी कम्पनी पाकिस्तान में कराची से कसूर तक भारतीय सीमा के पास एक पाइपलाइन बिछाएगी।परियोजना के संबंध में कर छूट पर बातचीत करने के लिए हाल ही में एक रूसी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंचा था।पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के 1999 में मॉस्को की यात्रा करने के 23 साल बाद, इमरान खान रूस की यात्रा करने वाले पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री होंगे। हालांकि, पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ, आसिफ अली जरदारी और पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने रूस का दौरा किया था, लेकिन उनमें से किसी ने आधिकारिक यात्रा नहीं की थी।रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पिछले साल अप्रैल में पाकिस्तान की यात्रा की थी। यात्रा के दौरान, उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से पाकिस्तानी नेतृत्व को संदेश दिया था कि रूस, इस्लामाबाद की हर संभव मदद करने के लिए तैयार है। file photo
- तेहरान। ईरान के उत्तर-पश्चिमी शहर तबरेज में एक लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद फुटबॉल स्टेडियम में जा गिरा, जिसके कारण तीन लोगों की मौत हो गई। देश की सरकारी समाचार एजेंसी ने सोमवार को बताया कि मृतकों में दो पायलट और एक आम नागरिक शामिल है।आईआरएनए ने कहा कि एफ-5 लड़ाकू विमान दुर्घटना के बाद 16 लाख की आबादी वाले शहर के रिहायशी इलाके में स्थित एक फुटबॉल स्टेडियम में गिरा। सरकार ने बताया कि घटना के कारणों की जांच की जा रही है। तबरेज में हवाई अड्डे के कमांडर जनरल रजा यूसुफी ने कहा कि दुर्घटनाग्रस्त विमान का इस्तेमाल प्रशिक्षण के लिए किया जा रहा था और इसकी अंतिम उड़ान में तकनीकी समस्या आ गई। उन्होंने कहा कि पायलट रनवे तक नहीं पहुंच सके। उन्होंने कहा कि विमान को आवासीय क्षेत्र में गिरने से बचाने के प्रयास में पायलट उसे फुटबाल स्टेडियम की ओर ले गये। सरकारी टीवी के संवाददाता ने बताया कि स्टेडियम के बड़ा नहीं होने के कारण विमान आगे बढ़कर एक स्कूल से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। एक रिपोर्ट में यूसुफी के हवाले से कहा गया कि, ''पायलट ने खुद को बलिदान कर दिया, वे सुरक्षित निकलने के लिए उपलब्ध तंत्र का इस्तेमाल कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।'' यूसुफी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि पायलट लोगों को सुरक्षित रखने के लिए विमान को स्टेडियम में ले गये। ईरानी वायुसेना के पास वर्ष 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले खरीदे गये अमेरिकी विमान और रूस निर्मित मिग और सुखोई विमान हैं। दशकों के पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण ईरान के लिए विमान के पुराने बेड़े को बरकरार रख पाना कठिन होता जा रहा है।
- जुनो (अमेरिका)। ‘ओपल' रत्न की अब तक की सबसे अच्छी गुणवत्ता के रत्न में से एक रविवार को अलास्का में एक नीलामी में 1,25,000 डॉलर में बिका। नीलामी हाउस ‘अलास्का प्रीमियर ऑक्शंस एंड एप्रैसल्स' के अनुसार,‘‘अमेरिकस ऑस्ट्रालिस'' कहे जाने वाले इस ओपल का वजन 11,800 कैरेट से अधिक है। इसका लंबा इतिहास भी है। हाल में इसे एन्कूरेज के उत्तर में बिग लेक स्थित एक घर में लिनन की अलमारी में रखा गया था। यह फ्रेड वोन ब्रांट के पास था, जो अलास्का में सोने के लिए खनन करते हैं और उनके परिवार का रत्नों का कारोबार है। ओपल एक ईंट से भी बड़ा होता है और दो टुकड़ों में टूट जाता है। वोन ब्रांट ने बताया कि रत्न की गुणवत्ता को साबित करने के लिए ऐसा दशकों से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह रत्न उनके परिवार के पास 1950 से था, जब उनके दादा इसे जॉन अल्टमैन नाम के एक ऑस्ट्रेलिया ओपल डीलर से खरीदकर लाए थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने फैसला किया कि इस रत्न को ताले में रखे काफी वक्त बीत चुका है और अब इसे वापस दुनिया के पास भेजने का वक्त आ गया है।-
- इम्फाल। मणिपुर के काकचिंग जिले में एक बम विस्फोट में चुनाव ड्यूटी पर तैनात भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के दो जवान घायल हो गए। पुलिस ने सोमवार को बताया कि विस्फोट राज्य की राजधानी इम्फाल से लगभग 60 किलोमीटर दूर वांगू टेरा इलाके में रविवार रात करीब आठ बजे हुआ। आईटीबीपी कर्मी रात में गश्त पर निकले थे, जब विस्फोट हुआ। राज्य में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उन्हें यहां तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि हादसे में घायल हुए दोनों जवान उत्तराखंड के निवासी हैं। दोनों का इम्फाल के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। मणिपुर विधानसभा चुनाव के लिए 28 फरवरी और पांच मार्च को दो चरणों में मतदान होगा। 10 मार्च को मतगणना की जाएगी।
- एथेंस। यूनान के तटरक्षक बल ने कहा है कि धू-धूकर जल उठी इटली की एक नौका के पिछले हिस्से से एक व्यक्ति को जिंदा बचाया गया है, हालांकि 11 लोग अब भी लापता हैं। तटरक्षक प्रवक्ता ने बताया कि इटली की यूरोफेरी ओलम्पिया के पिछले हिस्से में बायीं तरफ बेलारूस का एक नागरिक ठीकठाक हालत में जीवित पाया गया। इस नौका में 290 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे तथा 153 ट्रक और 32 कार लदे हुए थे।यूनान के उत्तर पश्चिम में स्थित इगौमेनित्सा बंदरगाह से शुक्रवार को रवाना होने के तीन घंटे के भीतर ही इसमें आग लग गयी थी। यह नौका इटली के ब्रिंडिसी जा रही थी। आग लगने के बाद यूनान के तटरक्षकों और अन्य नौकाओं ने 280 यात्रियों को बचाया और उन्हें कोर्फू द्वीप ले जाया गया । शनिवार की देर रात को बचाये गये दो यात्रियों में से एक जहाज में सवार यात्रियों की सूची में शामिल नहीं था और ऐसा माना जाता है कि यह कोई बाहरी व्यक्ति है। अधिकारियों ने बताया कि जहाजों को खींचने वाले तीन जहाज (टगबोट्स) यूरोफेरी ओलम्पिया को धीरे-धीरे खींचकर उत्तरपूर्वी द्वीप कोर्फू ले जा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि बचाये गये यात्रियों में अल्बानिया, तुर्की, बुल्गारिया, रोमानिया, यूनान, इटली और लिथुआनिया के नागरिक शामिल हैं।
- लंदन। ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गई हैं और उनमें ‘‘ठंड लगने जैसे हल्के लक्षण'' है। बकिंघम पैलेस ने रविवार को यह जानकारी दी। एलिजाबेथ द्वितीय (95) अपने विंडसर कैसल निवास पर हैं। बकिंघम पैलेस के एक बयान में कहा गया है, ‘‘उनका इलाज जारी रहेगा और वह सभी उचित दिशानिर्देशों का पालन करेंगी।'' इंग्लैंड में कोरोना वायरस से संक्रमित पाये जाने वाले किसी भी व्यक्ति के वास्ते वर्तमान दिशानिर्देशों के तहत उसे 10 दिनों के लिए पृथकवास में रहना होता है। महारानी के बेटे प्रिंस चार्ल्स और उनकी पत्नी कैमिला भी इस महीने की शुरुआत में कोविड से संक्रमित पाये गये थे।
- म्यूनिख (जर्मनी)। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि चीन द्वारा सीमा समझौतों का उल्लंघन करने के बाद उसके साथ भारत के संबंध ‘‘बहुत कठिन दौर'' से गुजर रहे हैं। जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि ‘‘'सीमा की स्थिति संबंधों की स्थिति का निर्धारण करेगी।'' म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (एमएससी) 2022 में शनिवार को एक परिचर्चा को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ समस्या हो रही है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘1975 से 45 साल तक सीमा पर शांति रही, स्थिर सीमा प्रबंधन रहा, कोई सैनिक हताहत नहीं हुआ। अब यह बदल गया है क्योंकि हमने चीन के साथ सीमा या वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैन्य बलों की तैनाती नहीं करने के लिए समझौते किए थे...लेकिन चीन ने उन समझौतों का उल्लंघन किया है।'' जयशंकर ने कहा, ‘‘स्वाभाविक तौर पर सीमा की स्थिति संबंधों की स्थिति का निर्धारण करेगी। जाहिर तौर पर फिलहाल चीन के साथ संबंध बहुत कठिन दौर से गुजर रहे हैं।'' पैंगोंग झील क्षेत्रों में हिंसक झड़प के बाद भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा गतिरोध शुरू हो गया था और दोनों पक्षों ने धीरे-धीरे अपने सैनिकों और हथियारों की तैनाती बढ़ा दी थी। इसके बाद,15 जून 2020 को गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद तनाव बढ़ गया था। पिछले सप्ताह मेलबर्न की यात्रा पर जयशंकर ने कहा था कि एलएसी पर स्थिति 2020 में चीन द्वारा सीमा पर बड़े पैमाने पर सैनिकों के लिए निर्धारित समझौतों के उल्लंघन के कारण उत्पन्न हुई है और कहा कि बीजिंग की कार्रवाई ‘‘समूचे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय बन गई है।'' मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मारिस पायने के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा था, ‘‘जब एक बड़ा देश लिखित प्रतिबद्धताओं की अवहेलना करता है तो मुझे लगता है कि यह समूचे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण चिंता का मुद्दा है।'' जयशंकर ने एमएससी में हिंद-प्रशांत पर परिचर्चा में भाग लिया, जिसका उद्देश्य यूक्रेन को लेकर नाटो देशों और रूस के बीच बढ़ते तनाव पर व्यापक रूप से विचार-विमर्श करना है। परिचर्चा में ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पायने, जापानी विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी, यूरोप और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग पर अमेरिकी सीनेट की उपसमिति की अध्यक्ष जीन शाहीन तथा यूरोप और विदेश मामलों के मंत्री ज्यां-यवेस ले ड्रियन शामिल थे। कनेक्टिविटी के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा कि यह पारदर्शी और व्यावसायिक रूप से आधारित होना चाहिए। चीन की कर्ज देकर देशों को अपनी ओर करने की नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता के बीच जयशंकर ने कहा कि कर्ज का जाल तैयार नहीं किया जाना चाहिए तथा देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
- मियामी (अमेरिका),। अमेरिका के फ्लोरिडा में मियामी बीच के पास समुद्र में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह हेलीकॉप्टर उस स्थान से कुछ फुट की दूरी पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोग तैराकी कर रहे थे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। हेलीकॉप्टर सवार दो लोगों को अस्पताल ले जाया गया है और दोनों की हालत गंभीर है। मियामी बीच पुलिस विभाग ने ट्वीट किया कि उसे साउथबीच इलाके में हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना शनिवार दोपहर को मिली। पुलिस द्वारा सार्वजनिक किए गए एक वीडियो में हेलीकॉप्टर समुद्र की तरफ नीचे आते और दुर्घटनाग्रस्त होकर पानी में गिरते दिखाई दे रहा है। वीडियो में उक्त स्थान के पास बड़ी संख्या में लोग तैराकी करते दिखाई दे रहे हैं।
- कैम्ब्रिज (ब्रिटेन)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 2031 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) को आधिकारिक तौर पर बंद करने की योजना की घोषणा की है। वर्ष 1998 से दर्जनों प्रक्षेपणों के बाद स्टेशन को और ऊपरी कक्षा में ले जाया गया। ऐसे में इसे नीचे लाना अपने आप में एक उपलब्धि होगी। मगर, इसमें खतरे भी हैं। नासा की योजना खत्म करने की प्रक्रिया के लिए प्रशांत महासागर के बीच में ‘प्वाइंट निमो' नामक एक स्थान पर इसे डुबोना है जिसे ‘‘अंतरिक्ष यान के कब्रिस्तान'' के रूप में भी जाना जाता है। आईएसएस के संचालन को नए वाणिज्यिक अंतरिक्ष स्टेशन में बदलने और शेष संरचना को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लाने के लिए ‘प्वाइंट निमो' एक जटिल और बहु-चरणीय मिशन का अंतिम पड़ाव होगा। मूल रूप से 15 साल के जीवनकाल के लिए तैयार किया गया आईएसएस सभी अपेक्षाओं को पूरा कर रहा है। यह पहले से ही 21 वर्षों से परिचालन में है और नासा ने एक और दशक के लिए कार्यकाल आगे बढ़ दिया है, जिससे कक्षा में इसके कुल नियोजित समय को दोगुना कर दिया गया है।आईएसएस ने पांच अलग-अलग अंतरिक्ष एजेंसियों (अमेरिका, रूस, यूरोप, कनाडा और जापान) को शामिल करते हुए मानव जाति में विज्ञान और सहयोग के लिए एक बड़ी छलांग लगाई है। अंतरिक्ष में काम करने के लिए आईएसएस के मॉड्यूल और इसके हिस्सों को कई अलग-अलग देशों द्वारा क्रमिक तौर पर बनाया गया है। यह संरचना अब एक फुटबॉल मैदान की लंबाई तक फैली हुई है और अंतरिक्ष में मानव निर्मित सबसे बड़ी वस्तु है। यह पृथ्वी से भी दिखाई देता है, जब यह पृथ्वी की सतह से 400 किलोमीटर ऊपर से गुजरते हुए अपनी 16 दैनिक कक्षाओं को पूरा करता है। आईएसएस के तथाकथित माइक्रोग्रैविटी वातावरण में अनुसंधान ने पिछले एक दशक में दवा की खोज, टीके के विकास और चिकित्सा उपचार में सफलता हासिल की है। आईएसएस वास्तविक समय में पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी करने में भी मदद करता है। इसका उपयोग भविष्य की अंतरिक्ष यान प्रौद्योगिकियों का परीक्षण करने और सौर मंडल के भविष्य के मानव अन्वेषण की संभावना के लिए दीर्घकालिक अध्ययन करने के वास्ते भी किया जाता है। आईएसएस पर अनुसंधान को लेकर कामयाबी के बावजूद नासा ने इसके बुनियादी ढांचे और घटकों के धीमा होने के संकेत देखे हैं। पृथ्वी के चारों ओर कक्षा में आईएसएस एक तरफ सौर विकिरण से झुलस जाता है और दूसरी तरफ जम जाता है। अंतरिक्ष में उड़ने वाले कबाड़ के बढ़ने से विनाश का अनियोजित और विनाशकारी जोखिम भी पैदा होता है। नासा ने 2030 तक स्टेशन को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। उसके सहयोगी संगठनों ने अभी तक आधिकारिक रूप से समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जिसका अर्थ है कि कक्षा से बाहर निकलने का अंतिम निर्णय इंजीनियरिंग के साथ राजनीति पर भी निर्भर करेगा। यदि आधिकारिक रूप से इसे बंद करने की प्रक्रिया से पहले गिरावट या अनियोजित क्षति होती है तो अनियंत्रित तौर पर दिशाहीन होकर गिरने वाला आईएसएस गंभीर खतरे पैदा कर सकता है। वास्तव में यह आकाश से गिरने वाला पहला अंतरिक्ष स्टेशन नहीं होगा। वर्ष 1979 में नासा के स्काईलैब स्टेशन को समय पर ईंधन नहीं दिया गया था और यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह नियंत्रण से बाहर हो गया ऑस्ट्रेलिया के इर्द गिर्द स्टेशन का हिस्सा बिखर गया। किसी को नुकसान नहीं पहुंचा लेकिन इसने आगे सुधारों की राह दिखाई। डिजाइन नष्ट होने के लिए तैयार उपग्रहों की इंजीनियरिंग और अन्य परिक्रमा करने वाले अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे के लिए एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। कक्षा से स्वतंत्र रूप से गिरने वाली वस्तुओं को छोटे टुकड़ों में बिखरना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे जमीन पर लोगों के लिए खतरा पैदा नहीं करे। आईएसएस का आकार बहुत बड़ा है। यही कारण है कि हमें कक्षा से बाहर करने के लिए विशेष संचालन की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि यह किसी महानगरीय क्षेत्र में यह अनियंत्रित रूप से दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है तो सबसे बदतर स्थिति ‘‘9/11 जैसी घटना'' हो सकती है। हालांकि, यह बिल्कुल असंभव है। आईएसएस के लिए नियोजित, नियंत्रित, डी-ऑर्बिट ऑपरेशन में नव निर्मित मॉड्यूल पहले मुख्य संरचना से अलग हो जाएंगे और अंततः भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशनों के हिस्सों के रूप में पुनर्संयोजन के लिए कक्षा में रहेंगे। आईएसएस को फिर ऑनबोर्ड थ्रस्टर्स द्वारा धीरे-धीरे घटाया जाएगा, जिससे इसकी कक्षा की ऊंचाई कुछ महीनों के दौरान धीरे-धीरे कम हो जाएगी। एक रूसी अंतरिक्ष स्टेशन को पूर्व में इसी तरह सुरक्षित रूप से नीचे लाया गया था। हालांकि आईएसएस लगभग चार गुना बड़ा है, इसलिए इस पैमाने पर कोई ऑपरेशन नहीं हुआ है। आईएसएस 2031 में कक्षा से पूरी तरह से हटने से पहले महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अनुसंधान को बनाए रखने और अंतरिक्ष में नए उद्योगों का आधार तैयार करने के लिए संक्रमणकालीन चरण से गुजरेगा। जेफ बाजोस के ब्लू ओरिजिन ने हाल में आईएसएस को कंपनी के निजी तौर पर संचालित अंतरिक्ष स्टेशन से बदलने की योजना की घोषणा की। अन्य प्रमुख समूहों में नॉथ्रॉप ग्रुम्मन और एक्सिओम स्पेस (स्पेसएक्स के साथ भागीदारी) शामिल हैं, जिनके पास मौजूदा आईएसएस से 2024 की शुरुआत में मॉड्यूल का निर्माण शुरू करने का अनुबंध है। एक रूसी अंतरिक्ष स्टेशन की भी योजना है जिसमें मौजूदा आईएसएस से अलग किए गए मॉड्यूल शामिल होने की संभावना है। इस बीच, चीन ने पिछले साल अपने तियानगोंग अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल लॉन्च किया और आने वाले महीनों में इसके विस्तार को पूरा करने की योजना है।
- पेट्रोपोलिस । ब्राजील के पर्वतीय शहर पेट्रोपोलिस में बाढ़ और भूस्खलन में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर बृहस्पतिवार को 117 हो गयी और 116 लोग अब भी लापता हैं। रियो डी जिनेरियो राज्य सरकार ने मृतकों की संख्या बढ़ने की पुष्टि की। कई लोगों के मिट्टी में दबे होने की आशंका है। दशकों की सबसे भयंकर बारिश के दौरान बाढ़ आने और मिट्टी धंसने से बृहस्पतिवार को गाड़ियां तथा मकान बह गए। एक वीडियो में दो बसों को उफनती नदी में डूबते देखा गया। शहर में भूस्खलन की और घटनाएं होने की आशंका है।स्थानीय निवासी रोसिलीन वर्जिनिया ने कहा कि उसका भाई बमुश्किल बच पाया और वह इसे चमत्कार मानती हैं लेकिन उनका एक मित्र अभी तक नहीं मिला है। रियो पुलिस ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा कि करीब 200 एजेंट जांच चौकियों, शरणार्थी शिविरों और शहर के मुर्दा घर में जाकर जीवित, मृत और लापता लोगों की सूची बना रहे हैं। उन्होंने तीन लोगों को एक स्थानीय स्कूल में जीवित देखने के बाद उन्हें लापता लोगों की सूची से हटा दिया।
- वाशिंगटन। भारत की लोकप्रिय ई-कॉमर्स वेबसाइट इंडियामार्ट डॉटकॉम और नयी दिल्ली के प्रसिद्ध पालिका बाजार सहित पांच भारतीय बाजारों को अमेरिका ने कुख्यात बताया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) द्वारा जारी दुनिया के कुख्यात बाजारों की ताजा वार्षिक सूची में इन बाजारों को शामिल किया गया है। वर्ष 2021 के लिए जारी इस सूची में दुनिया भर के 42 ऑनलाइन और 35 परंपरागत बाजारों को शामिल किया गया है, जो ट्रेडमार्क जालसाजी या कॉपीराइट चोरी में शामिल हैं। सूची में शामिल तीन अन्य भारतीय बाजार मुंबई में हीरा पन्ना, कोलकाता में किदरपुर और दिल्ली में टैंक रोड हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन ताई ने कहा, "नकली और पायरेटेड सामानों का वैश्विक व्यापार अमेरिकी नवाचार और रचनात्मकता को कमजोर करता है और अमेरिकी श्रमिकों को नुकसान पहुंचाता है।"
- पेट्रोपोलिस (ब्राजील)। ब्राजील के पर्वतीय क्षेत्र में अत्यंत भारी बारिश के बाद भूस्खलन और बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 44 हो गयी है। स्थानीय अधिकारियों द्वारा बुधवार को जारी बयान में उक्त जानकारी दी गई। प्राकृतिक हादसों से सबसे ज्यादा प्रभावित पेट्रोपोलिस में राहत एवं बचाव अभियान अभी जारी है और यहां के मेयर रुबेन्स बोम्टेम्पो का कहना है कि हताहतों (मृतकों) की संख्या बढ़ सकती है। अभी तक 21 लोगों को सुरक्षित बचाने में कामयाबी मिली है। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में 2011 में भारी बारिश के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी।राहत एवं बचाव अभियान के बीच बुधवार को 49 वर्षीय रोसलीन विर्गिलियो के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे, क्योंकि उन्हें मलबे में फंसी महिला का क्रंदन याद आ रहा था जिसे वह बचा नहीं सकीं। उन्होंने बताया, ‘‘कल एक महिला मदद के लिए चिल्ला रही थी। मुझे यहां से बाहर निकालो। लेकिन हम कुछ नहीं कर सके। पानी और मिट्टी का मलबा धसक रहा था।'' उन्होंने कहा, ‘‘दुर्भाग्यवश हमारा शहर बर्बाद हो गया है।'' गवर्नर क्लॉडियो कास्त्रो ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि यह ‘युद्ध जैसी स्थिति है' और वह प्रभावित क्षेत्रों से मलबा साफ करने के लिए आसपास के राज्यों से भारी मशीनरी सहित हर संभव मदद मंगवा रहे हैं। राज्य के दमकल विभाग ने मंगलवार देर रात एक बयान में बताया कि 180 सैनिक बचाव अभियान में जुटे हैं। विभाग ने बताया कि इलाके में दिन में तीन घंटे के भीतर 25.8 सेंटीमीटर बारिश हुई, जो इससे पहले के 30 दिन में हुई बारिश के बराबर है। रूस की यात्रा पर गए ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो ने ट्वीट किया कि उन्होंने अपने मंत्रियों को बारिश के कारण प्रभावित हुए लोगों की तत्काल मदद करने के निर्देश दिए हैं।



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