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नई दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से इनकम टैक्स के नियम, 2026 का ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है। इसमें बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद में रहने वाले लोगों के लिए टैक्स छूट में इजाफा किया गया है। दरअसल, नए इनकम टैक्स नियम 2026 के तहत पुरानी कर प्रणाली (ओल्ड टैक्स रिजीम) चुनने वाले वेतनभोगी व्यक्ति के लिए 50 प्रतिशत हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) छूट वाले शहरों की संख्या को बढ़ा दिया गया है।
मौजूदा समय में 50 प्रतिशत एचआरए छूट का फायदा केवल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में काम करने वाले कर्मचारियों को ही मिलता है, जबकि अन्य जगह के लिए यह सीमा 40 प्रतिशत है। ड्राफ्ट में इन शहरों के साथ बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद का नाम जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया है।ऐसे में इन शहरों में भी ओल्ड टैक्स रिजीम चुनने वाले वेतनभोगी व्यक्ति भी 50 प्रतिशत एचआरए छूट का फायदा ले पाएंगे।इसके अलावा, इनकम टैक्स के नियम 2026 के ड्राफ्ट में नियोक्ता द्वारा आंशिक रूप से निजी उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली कारों का काल्पनिक कर योग्य मूल्य बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके तहत अब 1.6 लीटर इंजन क्षमता वाली कार के लिए 8,000 रुपए प्रति माह और इससे ऊपर की कारों के लिए 10,000 रुपए तक प्रति माह काल्पनिक कर योग्य मूल्य निर्धारित किया गया है। मौजूदा यह सीमा 2,700 रुपए प्रति माह और उच्च क्षमता वाली कारों के लिए 3,300 रुपए प्रति माह है।इसके अलावा, ड्राफ्ट में नियोक्ताओं द्वारा प्रदान किए जाने वाले भोजन की कर-मुक्त सीमा चार गुना बढ़ाकर 200 रुपए प्रति भोजन करने का प्रस्ताव है। इसी प्रकार, नियोक्ता उपहारों पर वार्षिक छूट 5,000 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए करने का प्रस्ताव दिया गया है। वहीं, ड्राफ्ट नियमों में कर-मुक्त कर्मचारी ऋण के दायरे को भी बढ़ाया गया है और छूट की सीमा 20,000 रुपए से बढ़ाकर 2 लाख रुपए करने का प्रस्ताव दिया गया है। -
नई दिल्ली। भारत ने 2024 को आधार वर्ष मानकर नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) सीरीज शुरू की है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि यह नई सीरीज लोगों के खर्च करने के तरीके को बेहतर ढंग से दिखाती है और इससे गरीबी का अनुमान ज्यादा सही तरीके से लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि नए आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि लोगों की आय और काम करने की क्षमता (उत्पादकता) में बढ़ोतरी हुई है।
नई सीरीज के अनुसार, अब लोग खाने-पीने की चीजों पर कम और सेवाओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा और इंटरनेट जैसी सुविधाओं पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं। नागेश्वरन ने कहा कि सही आंकड़े मिलने से सरकार और रिजर्व बैंक को बदलती आर्थिक स्थिति के अनुसार सही फैसले लेने में मदद मिलेगी।जनवरी में देश की महंगाई दर 2.75 प्रतिशत रही, जो ग्रामीण क्षेत्रों में 2.73 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 2.77 प्रतिशत रही। पुरानी सीरीज में दिसंबर 2025 तक खाद्य महंगाई नकारात्मक थी, लेकिन नई सीरीज में यह 2.1 प्रतिशत दर्ज की गई है।मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन ने कहा कि अब ब्याज दर जैसे फैसले लेते समय सरकार मांग और आपूर्ति की स्थिति को बेहतर समझ सकेगी। उन्होंने बताया कि नई सीरीज में खाने-पीने की चीजों का हिस्सा कम कर दिया गया है, जिससे महंगाई के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव कम हो सकता है।अगर महंगाई में उतार-चढ़ाव कम होगा, तो महंगाई भत्ता (डीए) और अन्य सरकारी खर्च, जो सीपीआई से जुड़े होते हैं, वे भी ज्यादा स्थिर और अनुमानित रहेंगे। इससे सरकार के बजट की योजना बनाना आसान होगा।सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने गुरुवार को 2024 आधार वर्ष वाली नई सीपीआई सीरीज जारी की। पहले इसमें छह समूह थे, जिन्हें अब बढ़ाकर 12 भागों में बांटा गया है ताकि यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हो सके। इसमें ‘एचसीईएस 2023-24’ सर्वे के आधार पर लोगों की खर्च की टोकरी को अपडेट किया गया है।नई सीरीज में वस्तुओं की संख्या 299 से बढ़ाकर 358 कर दी गई है, जिनमें 308 वस्तुएं और 50 सेवाएं शामिल हैं। इससे यह साफ होता है कि लोगों के खर्च में सेवाओं की भूमिका बढ़ रही है।मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने बताया कि सरकार अब हर पांच साल में सीपीआई का आधार वर्ष बदलने की योजना बना रही है। अगला उपभोक्ता खर्च सर्वे 2027-28 में किया जाएगा। -
नयी दिल्ली. जिंदल स्टेनलेस ने विशेष इस्पात के लिए नई पेश की गई उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) 1.2 योजना के तहत इस्पात मंत्रालय के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। सोमवार को केंद्रीय इस्पात मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने विशेष इस्पात के लिए पीएलआई योजना के तीसरे चरण की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य उन्नत मिश्रधातु इस्पात की 87 लाख टन अतिरिक्त क्षमता जोड़ना है। कंपनी ने बयान में कहा कि जिंदल स्टेनलेस लिमिटेड (जेएसएल) ने इस्पात मंत्रालय के साथ क्षमता विस्तार के साथ-साथ विशेष मिश्र धातुओं और फोर्ज्ड उत्पादों (वाहन और विमान के इंजन के पुर्जे, गियर, शाफ्ट, नट-बोल्ट और वॉल्व आदि) सहित मूल्यवर्धित उत्पादों की नई क्षमताएं स्थापित करने के लिए समझौता किया है। कंपनी के प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल ने कहा कि यह नीति न केवल भारत में विशेष इस्पात की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखती है, बल्कि देश को विशेष ग्रेड में आत्मनिर्भर बनाने का भी उद्देश्य रखती है।
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नयी दिल्ली. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत को अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी धागा और कपास से बने परिधान पर वही रियायती शुल्क का लाभ मिलेगा, जो बांग्लादेश को वर्तमान में मिल रहा है। अमेरिका, बांग्लादेश की वस्तुओं पर जवाबी शुल्क घटाकर 19 प्रतिशत कर देगा, लेकिन वस्त्रों पर शून्य शुल्क तभी लगेगा जब वे अमेरिकी कपास और कृत्रिम रेशों से बने हों। वर्तमान में बांग्लादेशी परिधानों पर 31 प्रतिशत शुल्क लगता है (12 प्रतिशत सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र शुल्क और 19 प्रतिशत जवाबी शुल्क) और यदि उनमें अमेरिकी रेशों का उपयोग किया जाता है, तो शुल्क घटकर 12 प्रतिशत हो जाता है। गोयल ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''बांग्लादेश को जो मिला है, वही भारत को भी अंतिम समझौते में मिलने वाला है।'' उन्होंने बताया कि अगर कोई भारतीय कंपनी अमेरिका से धागा और कपास खरीदकर परिधान बनाती है और उन्हें अमेरिका को निर्यात करती है, तो उन परिधानों को भी बांग्लादेशी कंपनियों की तरह अमेरिका में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। गोयल ने कहा कि यह बात अमेरिका-बांग्लादेश समझौते में लिखी है और ''हमारे समझौते में भी होगी।'' उन्होंने यह भी कहा कि इसका भारतीय कपास किसानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मंत्री ने बताया कि अमेरिका में कपास का उत्पादन सीमित है। उसका निर्यात केवल 50 लाख अमेरिकी डॉलर है, जबकि भारत का लक्ष्य 50 अरब अमेरिकी डॉलर है। भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए एक रूपरेखा तैयार कर ली है। इसे मार्च में लागू किए जाने की संभावना है। ये टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया था कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता 'पूरी तरह से आत्मसमर्पण' है, जिसमें भारत की ऊर्जा सुरक्षा अमेरिका को सौंप दी गई है और किसानों के हितों से समझौता किया गया है। इस बीच, यहां आयोजित एक 'मेडटेक, इनोवेशन और स्टार्टअप' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत के अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों से घरेलू चिकित्सा उपकरण उद्योग को रियायती शुल्कों पर व्यापक बाजार पहुंच प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि कुछ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में भारतीय चिकित्सा उपकरणों को शुल्क में छूट भी मिलेगी। मंत्री ने कहा, ''हम नौ एफटीए के माध्यम से विकसित बाजारों के लिए द्वार खोल रहे हैं, जिनमें 38 ऐसे देश शामिल हैं जहां की आबादी समृद्ध है और प्रति व्यक्ति आय अधिक है।'' गोयल ने कहा कि राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (एनआईसीडीसी) देश में चिकित्सा उपकरण इकाइयों के लिए 50 से 100 एकड़ भूमि आरक्षित करने पर विचार कर सकता है।
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नई दिल्ली। भारत में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई दर जनवरी 2026 में सालाना आधार पर 2.75 प्रतिशत रही है। यह जानकारी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से गुरुवार को दी गई।बेस ईयर में बदलाव के बाद खुदरा महंगाई दर के यह पहले आंकड़े हैं। सरकार की ओर से बेस ईयर को बदलकर 2024 कर दिया गया है, जो कि पहले 2012 था।
दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 1.33 प्रतिशत थी। हालांकि, यह पुराने बेस ईयर 2012 पर आधारित थी।सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 2.73 प्रतिशत रही है और शहरी इलाकों में 2.77 प्रतिशत थी। वहीं, खाद्य महंगाई दर जनवरी में 2.13 प्रतिशत रही है। यह ग्रामीण इलाकों में 1.96 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 2.44 प्रतिशत रही है।आंकड़ों में मुताबिक, जनवरी में सालाना आधार पर लहसुन की कीमत 53.05 प्रतिशत, प्याज की कीमत 29.27 प्रतिशत, आलू की कीमत 28.98 प्रतिशत, अरहर की कीमत 24.90 प्रतिशत और मटर की कीमत 15.56 प्रतिशत कम हुई है।दूसरी तरफ, जनवरी में सालाना आधार पर चांदी की ज्वेलरी 159.67 प्रतिशत, टमाटर 64.80 प्रतिशत, कोपरा 47.18 प्रतिशत, सोने/हीरे/प्लेटिनम की ज्वेलरी 46.77 प्रतिशत और नारियल तेल की कीमतें 40.44 प्रतिशत बढ़ी हैं।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में सालाना आधार पर कपड़ों और जूतों की कीमतें 2.98 प्रतिशत, स्वास्थ्य सेवाओं का दाम 2.19 प्रतिशत, ट्रांसपोर्ट की कीमत 0.09 प्रतिशत, पान/तंबाकू जैसे उत्पादों की कीमतें 2.86 प्रतिशत; आवासीय, पानी, बिजली और अन्य ईंधनों की कीमतें 1.53 प्रतिशत बढ़ी हैं।देश में जिन पांच राज्यों में जनवरी में महंगाई दर सबसे अधिक रही है, उनमें तेलंगाना (4.92 प्रतिशत), केरल (3.67 प्रतिशत), तमिलनाडु (3.36 प्रतिशत), राजस्थान (3.17 प्रतिशत) और कर्नाटक (2.99 प्रतिशत) शामिल थे।सरकार ने बयान में कहा, “सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय बेस 2024=100 के साथ उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) जारी कर रहा है। आइटम बास्केट और संबंधित भार घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 पर आधारित हैं। मुद्रास्फीति माप के कवरेज और प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए यह अभ्यास किया गया है। संशोधन अधिक विस्तृत डेटा पेश करता है जो नीति निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों, व्यवसायों और नागरिकों को सटीक डेटा-संचालित निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।” - नयी दिल्ली. भारत पश्चिम एशिया और विभिन्न एशियाई देशों में इस्पात निर्यात के लिए नए बाजारों की तलाश कर रहा है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में अगले छह महीनों में भारतीय कंपनियों के साथ कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। अधिकारी ने बताया, "...मुख्य रूप से हमारा निर्यात यूरोप पर केंद्रित था, लेकिन हम (सरकार) निर्यात में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया और एशिया के कई देशों के साथ सरकार-से-सरकार (जी-टू-जी) के स्तर पर बातचीत जारी है। विभिन्न स्तरों पर वार्ता जारी है और अगले छह मरह में इसके सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है। अधिकारी ने कहा, ''हम देशों के साथ समझौता ज्ञापनों पर काम कर रहे हैं, ताकि इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा सके। उदाहरण के लिए, पश्चिम एशिया एक नया बाजार क्षेत्र है जहां बुनियादी ढांचे का बड़े पैमाने पर विकास हो रहा है।
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नयी दिल्ली। टोरेंट समूह की कंपनी टोरेंट पावर लिमिटेड का चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ करीब 34 प्रतिशत बढ़कर 654.74 करोड़ रुपये हो गया। मुख्य रूप से राजस्व में वृद्धि के कारण मुनाफे में यह उछाल आया है। कंपनी का गत वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी (अक्टूबर-दिसंबर) तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 489.33 करोड़ रुपये रहा था। टोरेंट पावर ने मंगलवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में उसकी कुल आय बढ़कर 6,847.02 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 6,671.25 करोड़ रुपये थी। कंपनी के निदेशक मंडल ने 10 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक शेयर पर 150 प्रतिशत लाभांश की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 15 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम लाभांश को भी मंजूरी दी है। इस लाभांश का भुगतान 12 मार्च, 2026 या उससे पहले किया जाएगा। कंपनी ने बताया कि उसके निदेशक मंडल (बोर्ड) ने निजी नियोजन के आधार पर एक या अधिक किस्तों में गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) के माध्यम से 7,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की भी मंजूरी दी है।
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नयी दिल्ली/ सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने संयुक्त रूप से वेनेजुएला से 20 लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में वेनेजुएला के तेल की आपूर्ति दोबारा शुरू होने के बाद भारतीय रिफाइनरी कंपनियों द्वारा किया गया यह दूसरा बड़ा सौदा है। सूत्रों ने बताया कि दोनों कंपनियों ने अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में आपूर्ति के लिए 'ट्रैफिगुरा' से 20 लाख बैरल 'मेरे' कच्चा तेल खरीदा है। इसमें से 15 लाख बैरल तेल ओडिशा में आईओसी की पारादीप तेल रिफाइनरी को और शेष 5,00,000 बैरल तेल आंध्र प्रदेश में एचपीसीएल की विशाखापत्तनम इकाई को दिया जाएगा। वेनेजुएला के कच्चे तेल के लिए यह दूसरा सौदा है। इससे पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अप्रैल में आपूर्ति के लिए 'विटोल' से 20 लाख बैरल तेल खरीदा था। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता भारत ने अमेरिकी प्रतिबंध दोबारा लागू होने के बाद वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद रोक दी थी। हालांकि, अब अमेरिका द्वारा विटोल और ट्रैफिगुरा को वेनेजुएला का तेल बेचने का लाइसेंस दिए जाने के बाद आयात फिर से शुरू हो गया है। यह घटनाक्रम वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंदी बनाए जाने और वहां के ऊर्जा उद्योग पर अमेरिका के बढ़ते नियंत्रण के बीच हुआ है।
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नई दिल्ली। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने इस बार भी नीतिगत दर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को यहां रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखने की घोषणा की। आरबीआई के इस फैसले की वजह से लोन की ब्याज दरें भी जस की तस रहेंगी।
आरबीआई गवर्नर ने मौद्रिक नीति समीति (एमपीसी) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि एमपीसी ने तटस्थ रुख को बनाये रखने का निर्णय किया है। संजय मल्होत्रा ने कहा कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने आम सहमति से प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर कायम रखा है।मल्होत्रा ने कहा कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आर्थिक विकास दर के अनुमान को बढ़ाकर 7.4 फीसदी कर दिया है। इससे पहले केंद्रीय बैंक ने विकास दर 7.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। आरबीआई गवर्नर ने कहा घरेलू महंगाई और वृद्धि परिदृश्य सकारात्मक होने से रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।उल्लेखनीय है कि आरबीआई फरवरी, 2025 से लेकर अबतक नीतिगत ब्याज दर रेपो रेट में कुल 125 फीसदी की कटौती कर चुका है, जिससे रेपो रेट 5.25 फीसदी पर है।याद हो, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने अर्थव्यवस्था में विकास को बढ़ावा देने के लिए दिसंबर की समीक्षा में रेपो रेट को 25 आधार अंक घटाकर 5.5 प्रतिशत से 5.25 प्रतिशत कर दिया था। आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने अगस्त और अक्टूबर में हुई समीक्षाओं में मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के लिए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था।उससे पहले, RBI ने फरवरी और जून के बीच तेजी से रेपो रेट को 100 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 6.5 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत कर दिया था, और अर्थव्यवस्था पर इसका असर अभी भी हो रहा था। कम पॉलिसी रेट और बैंकों के पास ज्यादा लिक्विडिटी से बैंक लोन पर इंटरेस्ट रेट कम हो जाते हैं, जिससे कंज्यूमर्स और बिज़नेस दोनों के लिए लोन लेना आसान हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप इकॉनमी में ज़्यादा कंजम्पशन और इन्वेस्टमेंट होता है, जिससे ज़्यादा ग्रोथ होती है।हालांकि, रेट कट का असर इस बात पर निर्भर करता है कि कमर्शियल बैंक कितनी जल्दी और कुशलता से इसका फायदा कर्ज लेने वालों तक पहुंचाते हैं। -
नयी दिल्ली. सरकार ने छतरियों पर न्यूनतम आयात मूल्य बृहस्पतिवार को 100 रुपये प्रति इकाई निर्धारित किया, जिसका उद्देश्य देश में छतरी के विनिर्माण को बढ़ावा देना है। इस मूल्य से कम कीमत वाली छतरियों का आयात अनुमति नहीं होगी।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा कि तैयार छतरियों के आयात की नीति और शर्तें अब मुक्त से अंकुश की श्रेणी में डाल दी गई हैं। हालांकि, यदि प्रति छतरी का सीआईएफ (लागत, बीमा और भाड़ा) मूल्य 100 रुपये या उससे अधिक है, तो आयात पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। हालांकि, ये अंकुश अग्रिम प्राधिकरण, निर्यात-उन्मुख इकाइयों (ईओयू) और विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) वाले आयातकों पर लागू नहीं होंगे। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट में छतरियों के आयात पर शुल्क बढ़ाकर 60 रुपये प्रति छतरी या 20 प्रतिशत कर दिया है, जिसमें जो भी राशि अधिक हो, वही लागू होगी। छतरियों के पुर्जे, सजावट और सहायक सामान के आयात पर शुल्क बढ़ाकर 10 प्रतिशत या 25 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है, जिसमें अधिकतम राशि लागू होगी। -
नयी दिल्ली. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और अमेरिका मार्च के मध्य तक बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इसके बाद अमेरिका, भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क कम कर देगा। समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद भारत भी अमेरिका से आयातित कुछ वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करना शुरू करेगा। मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर एक संयुक्त बयान को चार से पांच दिन में अंतिम रूप देने और उस पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है, जिसके बाद अमेरिका द्वारा लगाया गया शुल्क घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा। दोनों देशों ने इस सप्ताह की शुरुआत में समझौते को अंतिम रूप दिया। इसके तहत अमेरिका में प्रवेश करने वाले भारतीय सामान पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, '' द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का पहला चरण लगभग तैयार है और हमें उम्मीद है कि अगले चार से पांच दिन में हम अमेरिका तथा भारत के बीच एक संयुक्त बयान को अंतिम रूप देकर उस पर हस्ताक्षर कर देंगे। इसके आधार पर इस साझेदारी का पहला चरण शुरू होगा।'' गोयल ने कहा कि औपचारिक समझौते का मसौदा तैयार किया जा रहा है जिसमें एक या डेढ़ महीने का समय लग सकता है। संभवत: औपचारिक समझौते पर मार्च के मध्य तक हस्ताक्षर हो जाएंगे। भारतीय वस्तुओं पर कम किए गए 18 प्रतिशत शुल्क अमेरिका के एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से लागू होंगे, जो संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने के एक या दो दिन बाद जारी किया जाएगा। गोयल ने साथ ही बताया कि इस समझौते में किसी भी प्रकार के निवेश की प्रतिबद्धता नहीं है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि इस कानूनी समझौते से हमें अमेरिकी सामान पर शुल्क कम करने का अधिकार मिलेगा। अग्रवाल ने कहा, '' भारतीय शुल्क में कमी केवल एक कानूनी समझौते के बाद ही होगी।''
उन्होंने कहा कि भारतीय शुल्क, एमएफएन (सबसे तरजीही राष्ट्र) शुल्क हैं जबकि अमेरिकी आयात शुल्क, कार्यकारी शुल्क हैं। गोयल ने कहा, '' हमें उम्मीद है कि हम चीजों को तेजी से आगे बढ़ा पाएंगे क्योंकि कानूनी समझौते के बाद हमें और भी रियायतें मिलेंगी।'' सौदे के 500 अरब अमेरिकी डॉलर के खरीद वाले हिस्से के बारे में मंत्री ने कहा कि भारत जिस तेजी से विकास कर रहा है, उसे देखते हुए देश को बड़ी मात्रा में ऊर्जा, डेटा सेंटर उपकरण और आईसीटी उत्पादों की आवश्यकता होगी। मंत्री ने कहा, '' हमारी इस्पात उत्पादन क्षमता वर्तमान के 14 करोड़ टन से बढ़कर अगले कुछ वर्ष में करीब 30 करोड़ टन हो जाएगी। इसलिए, जब हमने अमेरिका से अपनी आवश्यकताओं का अनुमान लगाया तो हम कम से कम 500 अरब डॉलर के आंकड़े पर पहुंचे। हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि अगले पांच वर्ष में हम अमेरिका से कितनी मात्रा में इस्पात प्राप्त कर सकते हैं।'' उन्होंने कहा कि केवल भारत की विमानों की मांग, बोइंग को दिए गए और अभी दिए जाने वाले लेकिन तैयार ऑर्डर की संख्या करीब 70-80 अरब डॉलर है। गोयल ने कहा कि अगर इसमें इंजन और अन्य कलपुर्जे भी जोड़ दिए जाएं तो लागत शायद 100 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी। मंत्री ने साथ ही कहा कि बजट में डेटा केंद्रों के लिए भारी रियायतों की घोषणा की गई है।
उन्होंने कहा, '' अब कल्पना कीजिए कि अगर हमें डेटा केंद्रों में 100-150 अरब डॉलर का निवेश मिलता है तो जाहिर है कि हमें उन डेटा केंद्रों के लिए उपकरणों की आवश्यकता होगी।'' मंत्री ने कहा कि फरवरी, 2025 में दोनों देशों के बीच निर्धारित 500 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत को निश्चित रूप से अमेरिका से निर्यात और खरीद में काफी वृद्धि करनी होगी। उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ हुए इस समझौते के तहत जिन वस्तुओं को खरीदने का वादा किया है उनकी वर्तमान वैश्विक खरीद 300 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। अमेरिका... तेल, एलपीजी, एलएनजी, विमान, आईसीटी उत्पाद, लैपटॉप, स्मार्टफोन और डेटा सेंटर उपकरण जैसी सभी वस्तुएं उपलब्ध करा सकता है जिन्हें भारत अन्य देशों से खरीद रहा है। अग्रवाल ने कहा, '' अगले पांच वर्षों में ये खरीद 2,000 अरब डॉलर की होने वाली है। अगर हम अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीद कर लेते हैं तो इससे हमारी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता और मजबूती ही बढ़ेगी।'' संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर ऑनलाइन माध्यम से किए जाएंगे। -
नयी दिल्ली. एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एनजीईएल) ने राजस्थान के फलोदी में 125 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता का परिचालन शुरू किया। एनजीईएल ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि यह कंपनी की अनुषंगी इकाई एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड के 500 मेगावाट (एमडब्ल्यू) भाडला सोलर पीवी परियोजना का हिस्सा है। एनजीईएल ने कहा, '' राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड (आरआरईसी) से प्राप्त प्रमाणपत्र के आधार पर भाडला सोलर पीवी परियोजना की दूसरी चरण की 125 मेगावाट क्षमता का वाणिज्यिक परिचालन 31 जनवरी देर रात 12 बजे से शुरू किया गया।'' एनजीईएल, बिजली क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड की एक इकाई है।
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मुंबई. रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने बुधवार को कहा कि भारत के लिए निरंतर दोहरे अंकों की वृद्धि संभव है और किसी भी देश को स्थिर आर्थिक नेतृत्व ही परिभाषित करता है। यहां जियोब्लैकरॉक के कार्यक्रम में अंबानी ने कहा कि अगले दशक में भारत अपनी 80 प्रतिशत ऊर्जा का आयात नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि भारत के हर गांव में 5जी नेटवर्क है जो किसी भी अन्य देश से बेहतर एवं सस्ते हैं।
अंबानी ने कहा कि आर्थिक वृद्धि के लिए 15-20 वर्ष तक निरंतर कानून व्यवस्था एवं सामाजिक सद्भाव आवश्यक है। उन्होंने कहा, '' मैं स्पष्ट तौर पर देश में रिलायंस जैसी 100 नई कंपनियों को उभरते हुए देखता हूं। -
नयी दिल्ली. कीमती धातुओं ने बुधवार को लगातार दूसरे दिन राष्ट्रीय राजधानी में अपनी तेज़ी को बरकरार रखा। इस दौरान चांदी की कीमतें बढ़कर 2.98 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गईं और सोना 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। कारोबारियों ने कहा कि मजबूत वैश्विक रुख, कमजोर डॉलर ने इस उछाल में योगदान दिया। पिछले सप्ताह की भारी बिकवाली के बाद डॉलर के कमजोर होने से निवेशकों में बहुमूल्य धातुओं के प्रति रुचि फिर से जगी थी। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी 14,300 रुपये, या 5.03 प्रतिशत बढ़कर 2,98,300 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई। पिछली सत्र में चांदी 2,84,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी तेजी से बढ़ा और 7,400 रुपये या 4.69 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,65,100 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया, जबकि मंगलवार को यह 1,57,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध विश्लेषक, गौरव गर्ग ने कहा, ''सोने और चांदी ने बुधवार को अपनी तेजी जारी रखी, सोने की कीमतें तीन प्रतिशत से अधिक बढ़ीं और लगभग 1.6 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गईं, जबकि चांदी में भारी अस्थिरता और सुधार की अवधि के बाद दिन के कारोबार के दौरान छह प्रतिशत तक का उछाल आया।'' अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर चांदी 4.28 डॉलर, या 5.03 प्रतिशत बढ़कर 89.35 डॉलर प्रति औंस हो गई, जबकि सोना 100.03 डॉलर, या 2.02 प्रतिशत बढ़कर 5,047.07 डॉलर प्रति औंस हो गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक - जिंस, सौमिल गांधी ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से सुरक्षित निवेश की नई खरीदारी के कारण बुधवार को सोने और चांदी में तेजी आई। गांधी ने कहा, ''यह टकराव इस सप्ताह के आखिर में होने वाली अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता को लेकर उम्मीदों को कमज़ोर करता है और अमेरिका और ईरान के बीच और ज़्यादा टकराव की संभावना के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे सोने पर जोखिम प्रीमियम बढ़ सकता है और सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में बहुमूल्य धातुओं की मांग बढ़ सकती है।
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नयी दिल्ली. चालू वित्त वर्ष में अब तक सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) के माध्यम से सामान और सेवाओं की खरीद चार लाख करोड़ रुपये को पार कर गई है, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा 50 लाख से अधिक खरीद और बिक्री ऑर्डर दिए गए हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। जीईएम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) मिहिर कुमार ने कहा कि सार्वजनिक खरीद ऑर्डर का लगभग 45 प्रतिशत सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को दिया गया है, जो 25 प्रतिशत की अनिवार्य आवश्यकता से अधिक है। सरकारी ई-मार्केट (जीईएम) पोर्टल को नौ अगस्त, 2016 को केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के लिए ऑनलाइन सामान और सेवाओं की खरीद के लिए पेश किया गया था। इसके पेश होने के बाद अब तक 17.33 लाख करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी खरीदारी इसी पोर्टल के माध्यम से हुई है। मिहिर कुमार ने कहा, ''वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक (जीईएम) पोर्टल पर 50 लाख से अधिक खरीद ऑर्डर प्राप्त हुए हैं, जिनका मूल्य चार लाख करोड़ रुपये है। उम्मीद है कि यह खरीदारी पिछले साल के स्तर को पार कर जाएगी।" वित्त वर्ष 2024-25 में पोर्टल पर 72 लाख ऑर्डर दिए गए थे, जिनका मूल्य 5.43 लाख करोड़ रुपये था।
जीईएम पर वर्तमान में 1.5 लाख से अधिक सरकारी खरीदार और 62 लाख से अधिक विक्रेता और सेवा प्रदाता हैं, जो विभिन्न उत्पादों और सेवाओं की पेशकश करते हैं। फिलहाल, सरकारी विभाग, मंत्रालय, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां, राज्य सरकारें और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल इस पोर्टल के माध्यम से लेनदेन कर सकते हैं। -
नयी दिल्ली. आईआईटी-बंबई के 'सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी अल्टरनेटिव्स फॉर रूरल एरियाज़' ने रेशम उत्पादन का एक ऐसा तरीका विकसित किया है जो रेशम के कीड़ों की जान बचाता है, जिसका कोल इंडिया ने अपनी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) पहल के तहत समर्थन किया है। 'जीवोदय' नाम की यह तीन साल की प्रायोगिक परियोजना, शहतूत की पत्तियों पर पलने वाले रेशम के कीड़ों को कोकून बनाने के बजाय सपाट सतहों पर रेशम के धागे बनाने के लिए प्रशिक्षित करती है, जिससे वे पतंगे में बदल सकें और अपना प्राकृतिक जीवन चक्र पूरा कर सकें। पारंपरिक तरीकों के विपरीत, जहां रेशम निकालने के लिए कोकून को उबाला जाता है, जिससे लाखों कीड़े मर जाते हैं, नई 'जीवोदय सिल्क' तकनीक करुणा का प्रतीक है, जो प्राचीन भारतीय लोकाचार 'मा कश्चित दुख भाग भवेत' -- कोई भी दुख का भागी न हो -- से प्रेरित है। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने एक बयान में कहा, ''जीवोदय, आईआईटी-बंबई की एक अनोखी और अभूतपूर्व रेशम उत्पादन प्रायोगिक परियोजना है, जिसे कोल इंडिया ने सीएसआर पहल के तहत समर्थन किया है, और तीन साल के लगातार शोध एवं विकास के बाद इसने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।'' इसमें आगे कहा गया है कि कोल इंडिया ने अवधारणा से लेकर पूरा होने तक शोध को धन मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाई, और अब यह परियोजना रेशम उत्पादन करने वाले किसानों और ग्रामीण आजीविका के लिए स्थायी आय को बढ़ावा देने के लिए व्यापक रूप से अपनाने के लिए तैयार है।
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नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में 2026-2031 की अवधि के लिए केंद्र और राज्यों के बीच कर-राजस्व बंटवारे के लिए 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पेश की। संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत स्थापित वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है जो केंद्र और राज्य सरकारों के बीच कर राजस्व बंटवारे की सिफारिश करता है। आयोग का गठन समय-समय पर किया जाता है और यह केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों पर सुझाव देता है। सुश्री सीतारमण ने बजट पेश करने के बाद लोकसभा में वित्त-विधेयक 2026 पेश किया। उन्होंने राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम 2003 के अन्तर्गत वक्तव्य भी पेश किए। इनमें मध्यम-अवधि राजकोषीय नीति सह राजकोषीय नीति रणनी
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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत ऑरेंज इकोनॉमी को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देगा। उन्होंने यह भी बताया कि आयुष सेक्टर को भी नया आयाम मिलेगा।
ऑरेंज इकोनॉमी पर उन्होंने बताया कि एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) सेक्टर देश का एक तेजी से उभरता हुआ उद्योग है। संसद में बजट पेश करते समय वित्त मंत्री ने कहा कि यह वह क्षेत्र है जिसमें वर्ष 2030 तक लगभग 20 लाख पेशेवरों की आवश्यकता होगी। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। यही कारण है कि पूरे देश में 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों इससे जुड़ी लैब्स स्थापित की जाएंगी।वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा, “ऑरेंज इकोनॉमी से जुड़ी शिक्षा पर जानकारी दी। भारतीय युवा ऑरेंज इकोनॉमी का लाभ ले सकें इसके लिए बकायदा सुव्यवस्थित शिक्षा प्रदान करने की पहल की गई है। देशभर के कई विश्वविद्यालयों व स्कूलों के छात्रों को इस महा-अभियान में शामिल करने की योजना है। इसके लिए विश्वविद्यालय व कॉलेज में ऑरेंज इकोनॉमी से जुड़ी लैब्स स्थापित की जाएंगी।”केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, “मैं मुंबई स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीस को समर्थन देने का प्रस्ताव रखती हूँ, ताकि देशभर के 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित की जा सकें।”उन्होंने कहा कि इस पहल से युवाओं को डिजिटल क्रिएटिव स्किल्स में प्रशिक्षित किया जाएगा। ऑरेंज इकोनॉमी को बढ़ावा देने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारत वैश्विक स्तर पर क्रिएटिव इंडस्ट्री में अपनी पहचान और मजबूत करेगा। शिक्षाविदों के अनुसार ऑरेंज इकोनॉमी के तहत रचनात्मकता, संस्कृति, डिजिटल कंटेंट और इनोवेशन आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी, बल्कि युवाओं की प्रतिभा को वैश्विक मंच भी मिलेगा।वहीं, इसके साथ ही वित्त मंत्री ने आयुष सेक्टर को मजबूत करने के लिए बजट भाषण में महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। उन्होंने बताया कि देश में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित किए जाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर व्यापक स्वीकार्यता और पहचान मिली है। आयुर्वेदिक उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार कई ठोस कदम उठाएगी। फार्मेसी और परीक्षण सुविधाओं का उन्नयन होगा।वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि आयुष फार्मेसी और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को अपग्रेड किया जाएगा। इसके साथ ही जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ का वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र और अधिक सशक्त बनाया जाएगा, ताकि भारत पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा सके। युवाओं, स्वास्थ्य और क्रिएटिव सेक्टर पर जोर देने की बात कही गई है। बजट 2026-27 में सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में युवा शक्ति, क्रिएटिव इंडस्ट्री और पारंपरिक चिकित्सा भारत की विकास यात्रा के प्रमुख स्तंभ होंगे।( -
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश किया। इस दौरान वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले साल किए गए बड़े टैक्स सुधारों के बाद इस बार इनकम टैक्स की दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी लोगों को जिस टैक्स सिस्टम के तहत अभी टैक्स देना पड़ रहा है, वही व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी।
हालांकि इनकम टैक्स की बुनियादी संरचना पहले जैसी ही रहेगी, लेकिन बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान बनाने और टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए कई कदमों का ऐलान किया।वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स रिटर्न में संशोधन करने की अंतिम तारीख को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए केवल मामूली शुल्क देना होगा। गौरतलब हो, रिटर्न फाइल करने की तारीखों को भी अलग-अलग किया गया है। आईटीआर-1 और आईटीआर-2 भरने वाले लोग पहले की तरह 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल करेंगे। वहीं जिन कारोबारों का ऑडिट नहीं होता और ट्रस्ट्स को 31 अगस्त तक का समय मिलेगा।टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए यह भी कहा गया है कि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण से मिलने वाला ब्याज अब इनकम टैक्स से मुक्त होगा। साथ ही इस पर टीडीएस भी नहीं काटा जाएगा।भारत की कंपनियों को पूंजीगत सामान देने वाले एनआरआई को भी पांच साल तक इनकम टैक्स में छूट दी जाएगी।वित्त मंत्री ने स्रोत पर टैक्स वसूली (टीसीएस) की दरों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। विदेश यात्रा पैकेज की बिक्री पर टीसीएस को 5 और 20 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है और अब इसमें न्यूनतम राशि की कोई शर्त नहीं होगी। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत विदेश में पढ़ाई और इलाज पर लगने वाला टीसीएस भी 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है।वहीं, छोटे टैक्स देने वालों के लिए एक नया ऑटोमैटिक सिस्टम लाया जाएगा। इसके तहत कम या शून्य टैक्स कटौती का सर्टिफिकेट लेने के लिए अब टैक्स अधिकारी के पास आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी।जिन टैक्सपेयर्स के पास अलग-अलग कंपनियों के शेयर हैं, वे अब फॉर्म 15जी या 15एच सीधे डिपॉजिटरी में जमा कर सकेंगे। डिपॉजिटरी यह फॉर्म संबंधित कंपनियों तक खुद भेज देगी।शेयर बाजार से जुड़े लेनदेन में वित्त मंत्री ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.01 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है। - नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य की दिशा में एक और कदम उठाते हुए बजट 2026 में भारत को कच्चे काजू और कोको उत्पादन व प्रसंस्करण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने तथा निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और भारतीय काजू और भारतीय कोको को वर्ष 2030 तक प्रीमियम वैश्विक ब्रांड में प्रवर्तित करने के लिए भारतीय काजू और कोको हेतु एक समर्पित कार्यक्रम की भी पेशकश की गई है।भारतीय चंदन इकोसिस्टम के गौरव को बहाल करने हेतु केंद्र सरकार केंद्रित खेती और कटाई के पश्चात प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों के साथ भी भागीदारी करेगी। इसके अलावा, पुराने और कम उपज देने वाले उद्यानों को फिर हरा-भरा बनाने तथा अखरोट, बादाम और खुमानीकी उच्च घनत्व वाली खेती का विस्तार करने के लिए बजट में किसानों की आमदनी बढ़ाने और युवाओं की सहभागिता से मूल्यवर्धन करने के लिए एक समर्पित कार्यक्रम की पेशकश की गई है।वित्त मंत्री ने आज बजट पेश करते हुए कहा कि तीसरा कर्तव्य प्रत्येक परिवार, समुदाय, क्षेत्र और सेक्टर को सार्थक प्रतिभागिता के लिए संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों की पहुंच सुनिश्चित कराने के सरकार के सबका साथ, सबका विकास के विजन के साथ संबद्ध है। उन्होंने तीसरे कर्तव्य को हासिल करने का मोटेतौर पर खाका प्रस्तुत किया।निर्मला सीतारमण ने कहा, “इसे हासिल करने के लिए के लिए छोटे और सीमांत किसानों को विशेष पहुंच उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करते हुए उत्पादकता बढ़ाने और उद्यमिता के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने, आजीविका के अवसरों, प्रशिक्षण और कुछ गुणवत्ता वाले उपकरणों के जरिए दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने, मानसिक स्वास्थ्य और ट्रॉमा देखभाल तक पहुंच कायम कर कमजोरों को अधिकार संपन्न बनाने, विकास और रोजगार के अवसरों में तेजी लाने के लिए पूर्वोदय राज्यों तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने” की दिशा में लक्षित प्रयास करने की आवश्यकता है।किसानों की आमदनी बढ़ाने के व्यापक उद्देश्य के अंतर्गत बजट में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास करने, तटीय क्षेत्रों में मत्स्य मूल्य श्रृंखला को मजबूती प्रदान करने तथा स्टार्ट अप और महिला प्रेरित समूहों को मत्स्य कृषक उत्पादक संगठनों के साथ शामिल करते हुए बाजार से जोड़ना सक्षम बनाने के प्रावधान किए गए हैं।निर्मला सीतारमण ने कहा कि पशुपालन किसानों की आमदनी बढ़ाने के प्रमुख क्षेत्रों में से एक हैं। ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए सरकार उद्यमिता विकास के तहत पशुपालन क्षेत्र को सहायता प्रदान करने के लिए निम्न कदम उठाएगी- (क) ऋण आधारित सब्सिडी कार्यक्रम (ख) पशुधन उद्यमों का संवर्धन और आधुनिकीकरण (ग) पशुधन. डेयरी और मुर्गीपालन के लिए संकेंद्रित मूल्य श्रृंखला का सृजन को संवर्धित करना और (घ) पशुधन कृषक उत्पादक संगठनों की स्थापना को प्रोत्साहन देना।केंद्रीय वित्त मंत्री ने तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों में सहायता प्रदान कर उच्च मूल्य वाली खेतीबाड़ी पर जोर दिया। पूर्वोत्तर में अगर वृक्षों और पर्वतीय क्षेत्रों में बादाम, काजू और खुमानी जैसे गिरीदार फलों को भी सहायता प्रदान करेगा।उन्होंने कहा, “भारत दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक है। लगभग 10 मिलियन किसानों सहित लगभग 30 मिलियन लोग अपनी आजीविका के लिए नारियल पर निर्भर हैं। नारियल उगाने वाले प्रमुख राज्यों में नारियल उत्पादन में प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए पुराने और गैर-उत्पादक पेड़ों को नए सैपलिंग/ पौधों /किस्मों से बदलने सहित विभिन्न कदमों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने और उत्पादकता को संवर्धित करने के जरिए मैं नारियल संवर्धन योजना की पेशकश करती हूं।”इसके अतिरिक्त, सीतारमण ने भारत-विस्तार (कृषि संसाधनों तक पहुंच के लिए आभासी एकीकृत प्रणाली) लॉन्च करने के प्रस्ताव की घोषणा की है। विस्तार की परिकल्पना एक बहुभाषी AI टूल के रूप में की गई है, जिसे एआई प्रणाली सहित कृषि प्रणालियों के लिए आईसीएआर पैकेज सहित एग्रीस्टेक पोर्टल के रूप में एकीकृत किया गया है। इससे कृषि उत्पादककता बढ़ेगी, किसानों के लिए बेहतर नतीजे संभव होंगे और अनुकूल परामर्श सहायता प्रदान करते हुए जोखिम में कमी लाई जाएगी।
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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज रविवार को बजट भाषण के दौरान युवाओं के लिए नए अवसर और योगा व डिजाइन उद्योग के विकास को लेकर कई घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के लिए कुशल करियर के नए रास्ते बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े स्तर पर फोकस किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (एएचपी) के लिए मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में नए एएचपी संस्थान खोले जाएंगे। यह योजना 10 चयनित विषयों को कवर करेगी, जिनमें ऑप्टोमेट्री, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया, ओटी टेक्नोलॉजी, एप्लाइड साइकोलॉजी और बिहेवियरल हेल्थ शामिल हैं। अगले पांच वर्षों में इस पहल के तहत एक लाख नए एएचपी तैयार किए जाएंगे।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “प्राचीन भारतीय योग, जिसे दुनिया के कई हिस्सों में पहले से ही सम्मान मिलता है, उसे तब बड़े पैमाने पर ग्लोबल पहचान मिली जब प्रधानमंत्री इसे यूएन ले गए। बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए, कुछ और कदम उठाए जा रहे हैं। तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित किए जाएंगे। सर्टिफिकेशन इकोसिस्टम के उच्च मानकों के लिए आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को अपग्रेड किया जाएगा और अधिक कुशल कर्मियों को उपलब्ध कराया जाएगा। पारंपरिक चिकित्सा के लिए साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए जामनगर में डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर को अपग्रेड किया जाएगा।”डिजाइन सेक्टर को लेकर भी वित्त मंत्री ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारतीय डिजाइन उद्योग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन देश में कुशल डिजाइनरों की कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए ‘चैलेंज रूट’ के माध्यम से पूर्वी भारत में एक नया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन स्थापित किया जाएगा, जिससे डिजाइन शिक्षा और विकास को बढ़ावा मिलेगा।यह बजट निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट है। इसके साथ ही वह पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के 10 बजट पेश करने के रिकॉर्ड के और करीब पहुंच गई हैं। देसाई ने 1959 से 1964 के बीच छह और 1967 से 1969 के बीच चार बजट पेश किए थे। वहीं, पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और प्रणब मुखर्जी ने अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में क्रमशः नौ और आठ बजट पेश किए हैं। (इनपुट-आईएएनएस) -
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को पेश किए बजट में किसानों की आय बढ़ाने और पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के क्षेत्र में बड़े कदम उठाने की घोषणा की है। इन प्रस्तावों का मकसद देश के विकास को संतुलित और टिकाऊ बनाना बताया गया है।
सरकार ने तटीय इलाकों के किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित करने का ऐलान किया है। इसके तहत नारियल, काजू और कोको जैसी फसलों के साथ-साथ पहाड़ी और अन्य क्षेत्रों में अखरोट और पाइन नट्स जैसी मेवों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और खेती अधिक लाभकारी बनेगी।वहीं, पर्यटन के क्षेत्र में सरकार ने कई अहम घोषणाएं की हैं। नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी को अपग्रेड कर एक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी स्थापित किया जाएगा। यह संस्थान शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के साथ मिलकर हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में प्रशिक्षण और मानकों को बेहतर बनाएगा।इसके अलावा, देश के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10,000 टूर गाइड्स को प्रशिक्षित करने के लिए एक पायलट योजना शुरू की जाएगी। यह 12 हफ्ते का मानकीकृत और उच्च गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण हाइब्रिड मोड में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के सहयोग से दिया जाएगा।सरकार एक राष्ट्रीय डिजिटल डेस्टिनेशन नॉलेज ग्रिड भी बनाएगी, जिसमें देश के सभी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विरासत स्थलों को डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा।पर्यावरण और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में टिकाऊ पर्वतीय ट्रेल्स विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही पूर्वी घाट के अराकू घाटी और पश्चिमी घाट के पुडिगई मलै में भी ऐसे ट्रेल्स बनाए जाएंगे। वन्यजीव पर्यटन के लिए ओडिशा, कर्नाटक और केरल में कछुआ नेस्टिंग साइट्स पर टर्टल ट्रेल्स और पुलिकट झील के आसपास बर्ड-वॉचिंग ट्रेल्स तैयार किए जाएंगे। -
नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 पेश करते हुए आज रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्सपेयर्स के लिए कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि नए इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे और आयकर से जुड़े नियमों को पहले से अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है। छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक नई स्कीम का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिससे टैक्स अनुपालन आसान होगा।
वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि आईटीआर-1 और आईटीआर-2 दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई है। इससे लाखों वेतनभोगी और छोटे करदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार का कहना है कि फॉर्म को सरल बनाने के साथ-साथ टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को भी डिजिटल और यूजर-फ्रेंडली किया गया है। हालांकि इस बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है।वित्त मंत्री ने संसद को बताया कि सरकार ने 2021-22 में किया गया वादा पूरा कर लिया है। बजट अनुमान के अनुसार, 2025-26 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2026-27 में यह घटकर 4.3 प्रतिशत होने की उम्मीद है। सरकार का फोकस वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास को गति देने पर है।बजट में राज्यों के लिए भी बड़ी घोषणा की गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 में राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपए की ग्रांट दी जाएगी। वित्त वर्ष 2027 के लिए डेट-टू-जीडीपी रेश्यो 55.6 प्रतिशत, जबकि नेट बॉरोइंग 11.7 लाख करोड़ रुपए तय किया गया है।बजट 2026 में सरकार ने टीसीएस दरों में बड़ी राहत दी है। उदारीकृत प्रेषण योजना यानी लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत विदेश में पढ़ाई और इलाज के लिए भेजी जाने वाली रकम पर लगने वाला टीसीएस भी 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे उन परिवारों को राहत मिलेगी जो शिक्षा या मेडिकल कारणों से विदेश पैसा भेजते हैं।टैक्स नियमों में भ्रम दूर करने के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि मानव संसाधन सेवाओं की आपूर्ति को ठेकेदारों को किए गए भुगतानों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इसके तहत अब इन सेवाओं पर केवल 1 प्रतिशत या 2 प्रतिशत टीडीएस लगेगा, जिससे कारोबारियों और श्रमिकों दोनों को सहूलियत मिलेगी। -
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्र सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा और अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं। बजट 2026-27 में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। रेलवे, विमानन और जल परिवहन क्षेत्रों के लिए कई बड़ी और दूरगामी घोषणाएं की गई हैं, जिनका उद्देश्य कनेक्टिविटी बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स लागत कम करना और आर्थिक विकास को गति देना है।
केंद्रीय बजट 2026 में रेलवे को लेकर एक अहम फैसला लेते हुए सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण की घोषणा की गई है। इन कॉरिडोरों के जरिए देश के प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक केंद्रों को तेज और आधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर इस प्रकार हैं– मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी।इसके साथ ही वित्त मंत्री ने घोषणा की कि अगले पांच वर्षों में 20 नए जलमार्ग चालू किए जाएंगे। इसकी शुरुआत ओडिशा के नेशनल वॉटरवे-5 से होगी, जो तालचेर और अंगुल जैसे खनिज-समृद्ध क्षेत्रों को कलिंगनगर औद्योगिक केंद्र और पारादीप व धमरा बंदरगाहों से जोड़ेगा। इससे पर्यावरण के अनुकूल और कम लागत वाले कार्गो मूवमेंट को बढ़ावा मिलेगा।अंतर्देशीय जलमार्गों को मजबूत करने के लिए वाराणसी और पटना में शिप रिपेयर और मेंटेनेंस से जुड़ा एक आधुनिक इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही समुद्री विमान के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) योजना शुरू करने की भी घोषणा की गई है।बजट 2026 में छोटे और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) के लिए सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपए का ग्रोथ फंड लाने का ऐलान किया है। इससे उद्यमियों को अपने कारोबार के विस्तार में मदद मिलेगी। इसके अलावा, टेक्सटाइल सेक्टर को भी विशेष प्रोत्साहन देने की बात कही गई है, जिससे रोजगार और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि इंफ्रा रिस्क गारंटी फंड बनाया जाएगा और कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम लॉन्च की जाएगी। साथ ही, जलमार्ग क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि इस सेक्टर में कुशल मानव संसाधन तैयार किया जा सके। -
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज रविवार को बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपए करने का ऐलान किया है। इसके जरिए सरकार की कोशिश बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर फोकस कर देश में विकास दर और रोजगार को बढ़ाना है।
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि बड़ी परियोजनाओं के विकास में तेजी लाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क डेवलपमेंट फंड की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास को गति देने के लिए बजट में राजमार्गों, बंदरगाहों, रेलवे और बिजली परियोजनाओं सहित इन्फ्रास्ट्रक्चर को सशक्त प्रोत्साहन देने, 7 रणनीतिक क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और तेजी से लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सृजित करने का प्रस्ताव है।उन्होंने कहा कि सरकार ने सार्वजनिक निवेश पर मजबूत जोर देते हुए राजकोषीय विवेक और मौद्रिक स्थिरता बनाए रखी है, और आगे कहा कि भारत को वैश्विक बाजारों के साथ गहराई से जुड़ना चाहिए, अधिक निर्यात करना चाहिए और विदेशी निवेश को भी आकर्षित करना चाहिए।इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्री ने अपने भाषण में बजट का आधार को तीन ‘कर्तव्यों’को बताया, जिनसे न सिर्फ अर्थव्यवस्था को तेजी मिलेगी, बल्कि गरीब, वंचित और पिछड़े लोगों को भी ताकत मिलेगी। सीतारमण ने कहा कि सरकार के ‘संकल्प’ को पूरा करने के लिए और यह देखते हुए कि यह कर्तव्य भवन में तैयार किया गया पहला बजट है, हम तीन कर्तव्यों से प्रेरित हैं।केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए उन्होंने कहा कि पहला कर्तव्य प्रोडक्टिविटी और कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाकर और अस्थिर ग्लोबल डायनामिक्स के प्रति लचीलापन बनाकर आर्थिक विकास को तेज करना और बनाए रखना है। हमारा दूसरा कर्तव्य हमारे लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनकी क्षमता का निर्माण करना है, जिससे वे भारत की समृद्धि की राह में मजबूत भागीदार बनें। उन्होंने आगे कहा कि हमारा तीसरा कर्तव्य, जो ‘सबका साथ-सबका विकास’ के हमारे विजन के साथ जुड़ा हुआ है, यह सुनिश्चित करना है कि हर परिवार, समुदाय, क्षेत्र और सेक्टर को संसाधनों तक पहुंच मिले।”उन्होंने आगे कहा कि ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ अपनी राह पर तेजी से आगे बढ़ रही है और अपने कर्तव्यों को पूरा करने में हमारी मदद करने के लिए अपनी गति बनाए रखेगी। (


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