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नयी दिल्ली. ईरानी कच्चा तेल लेकर आए दो बड़े टैंकर भारत के पूर्वी एवं पश्चिमी तट के बंदरगाहों पर पहुंच गए हैं जो लगभग सात वर्ष में ऐसी पहली आपूर्ति है। जहाज-ट्रैकिंग विवरण से यह जानकारी मिली। नेशनल ईरानियन टैंकर कंपनी द्वारा संचालित 'फेलिसिटी' नामक एक बेहद बड़ा कच्चा तेल वाहक जहाज ने रविवार देर रात गुजरात तट के सिक्का के पास लंगर डाला। इसमें करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल है जिसे मार्च के मध्य में खार्ग द्वीप से लादा गया था। दूसरा टैंकर 'जया' लगभग उसी समय ओडिशा तट के पारादीप के पास पहुंचा। यह भी करीब करीब समान मात्रा में कच्चा तेल लेकर आया है जिसे फरवरी के अंत में खार्ग द्वीप से लादा गया था। यह तेल अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर सैन्य हमले करने और तेहरान की ओर से जवाबी कार्रवाई किए जाने से पहले लादा गया था। करीब सात वर्ष में भारतीय तटों पर पहुंचने वाली ये ईरानी कच्चे तेल की पहली खेप हैं जो पिछले महीने अमेरिका द्वारा जारी प्रतिबंध छूट के बाद संभव हो सकी हैं। एक महीने की इस छूट के तहत समुद्र में पहले से मौजूद ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति दी गई थी, जिसका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान को कम करना और कीमतों को नियंत्रित करना था। सप्ताहांत में शांति वार्ता विफल होने के बाद हालांकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी की घोषणा की है ताकि तेहरान के तेल निर्यात राजस्व को सीमित किया जा सके। भारतीय तटों पर पहुंची इन खेपों के खरीदारों का औपचारिक खुलासा नहीं किया गया है।
पारादीप बंदरगाह मुख्य रूप से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित है जिसने छूट के तहत कम से कम एक ईरानी खेप खरीदने की पुष्टि की है। वहीं, सिक्का क्षेत्र रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के लिए एक प्रमुख कच्चा तेल 'हैंडलिंग' केंद्र है जिनकी यहां बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं। 'पिंग शुन' नामक टैंकर करीब छह लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल के साथ पिछले महीने के अंत में गुजरात के वाडिनार के लिए रवाना हुआ था लेकिन भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण इसे बीच रास्ते में चीन की ओर मोड़ दिया गया था। यदि यह वाडिनार पहुंच जाता, तो यह सात वर्ष में भारत पहुंचने वाली ईरानी तेल की पहली खेप होती। भारत ऐतिहासिक रूप से ईरानी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार रहा है और रिफाइनरियों की अनुकूलता तथा सहायक व्यावसायिक शर्तों के कारण ईरान के हल्के और भारी दोनों प्रकार के तेल का आयात करता रहा है। वर्ष 2018 में प्रतिबंध सख्त होने के बाद मई 2019 से आयात बंद हो गया और इसकी जगह पश्चिम एशिया, अमेरिका तथा अन्य स्रोतों से आपूर्ति होने लगी। एक समय ईरानी तेल भारत के कुल आयात का 11.5 प्रतिशत हिस्सा था। भारत ने 2018 में ईरान से प्रतिदिन 5.18 लाख बैरल तेल खरीदा था जो जनवरी से मई 2019 के बीच घटकर 2.68 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। इसके बाद से कोई आयात नहीं हुआ। भारतीय रिफाइनरियां मुख्य रूप से 'ईरान लाइट' और 'ईरान हेवी' श्रेणी का तेल खरीदती थीं।अमेरिका ने पिछले महीने समुद्र में ईरानी तेल की खरीद पर 30 दिन के लिए प्रतिबंधों में छूट दी थी, ताकि ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण बढ़ी तेल कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। यह छूट 19 अप्रैल को समाप्त हो रही है। अनुमान है कि समुद्र में लगभग 9.5 करोड़ बैरल ईरानी तेल मौजूद है जिसमें से करीब 5.1 करोड़ बैरल भारत को बेचा जा सकता है जबकि शेष चीन तथा पूर्व एशिया के खरीदारों के लिए अधिक उपयुक्त है। -
-पीएनजी विस्तार तेज किया
नयी दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ईंधन आपूर्ति में आई बाधाओं के बीच भारत ने छोटे पांच किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति बढ़ा दी है और पाइप से मुहैया कराई जाने वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) कनेक्शन का विस्तार तेज कर दिया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 23 मार्च से अब तक पांच किलोग्राम के 13 लाख से अधिक एलपीजी सिलेंडर बेचे गए हैं और इनकी दैनिक बिक्री एक लाख से अधिक हो गई है। यह कदम प्रवासी श्रमिकों और कम आय वर्ग के उपभोक्ताओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
इसी अवधि में 4.24 लाख से अधिक नए पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि 30,000 से अधिक उपभोक्ताओं ने एलपीजी कनेक्शन वापस कर पीएनजी को अपनाया है। छह सप्ताह से जारी पश्चिम एशिया संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग आधा कच्चा तेल, 40 प्रतिशत गैस और 85-90 प्रतिशत एलपीजी इस क्षेत्र से आयात करता है, जिस पर इस संकट का असर पड़ा है। हालांकि कच्चे तेल की कमी को अन्य स्रोतों से पूरा कर लिया गया है, लेकिन एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हुई है। ऐसे में सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता दी है और होटल-रेस्तरां जैसे वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति में कटौती की है। संकट से पहले फरवरी में जहां रोजाना लगभग 77,000 सिलेंडर बिक रहे थे, वहीं पिछले दो-तीन सप्ताह में यह संख्या एक लाख से अधिक हो गई है। बयान के अनुसार, घरेलू एलपीजी आपूर्ति कुल मिलाकर स्थिर बनी हुई है और कहीं भी कमी की सूचना नहीं है। 11 अप्रैल को 52 लाख से अधिक सिलेंडर वितरित किए गए। मांग का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा ऑनलाइन बुकिंग के जरिए पूरा हो रहा है, जबकि वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए 93 प्रतिशत लेनदेन में सत्यापन प्रणाली लागू की गई है। वाणिज्यिक एलपीजी की उपलब्धता भी अब संकट-पूर्व स्तर के करीब 70 प्रतिशत तक बहाल हो गई है। सरकारी तेल विपणन कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड राज्य सरकारों के साथ मिलकर आपूर्ति को सुचारु बना रही हैं। बयान में कहा गया है कि रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। साथ ही, घरेलू एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया गया है। - हैदराबाद। देश की प्रमुख कार विनिर्माता मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड वर्ष 2031 तक चार नए इलेक्ट्रिक वाहन पेश करेगी। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। कंपनी ने इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल करते हुए आयोजित एक कार्यक्रम में एक ही दिन में ई-विटारा की 108 इकाइयां ग्राहकों को सौंपी। मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी ( विपणन एवं बिक्री) पार्थो बनर्जी ने कहा कि यह ग्राहकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है, क्योंकि कंपनी स्वच्छ परिवहन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि 2031 तक कंपनी बैटरी आधारित इलेक्ट्रिक वाहन खंड में भी अग्रणी बनने का लक्ष्य रखती है और बाजार की मांग के अनुसार अपनी रणनीति तय करेगी। पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण कंपनी को वाहनों के दाम बढ़ाने होंगे, हालांकि बढ़ोतरी की सीमा जल्द घोषित की जाएगी। उन्होंने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में कंपनी ने करीब 4.50 लाख वाहनों का निर्यात किया, जबकि पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव का अभी आकलन किया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, अब तक ई-विटारा की 25,000 से अधिक इकाइयों का 44 देशों में निर्यात किया जा चुका है और इसे 100 से अधिक देशों में भेजने की योजना है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बृहस्पतिवार को चांदी की कीमत 7,800 रुपये घटकर 2.43 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गई, जबकि सोना 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। ऐसा पश्चिम एशिया में युद्धविराम के टिकने को लेकर चिंताओं के बीच निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली के कारण हुआ। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी बुधवार के 2,51,000 रुपये प्रति किलोग्राम के बंद स्तर से 7,800 रुपये या 3.10 प्रतिशत घटकर 2,43,200 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स मिलाकर) रह गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी 1,500 रुपये या करीब एक प्रतिशत घटकर 1,54,900 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स मिलाकर) रह गया। पिछले बाजार सत्र में सोने की कीमत 1,56,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी। विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता के कारण कीमती धातुओं में बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे निवेशकों की कारोबारी धारणा प्रभावित हुई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज़ में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ''बृहस्पतिवार को सोने की कीमतों में गिरावट आई, जिससे पिछले सत्र की ज़्यादातर बढ़त लुप्त हो गई, क्योंकि निवेशकों ने पश्चिम एशिया में युद्धविराम का फिर से मूल्यांकन किया।'' उन्होंने कहा कि चल रही छिटपुट लड़ाई, होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने को लेकर अनिश्चितता, और टैंकर की आवाजाही रुकने की खबरों के साथ-साथ कथित युद्धविराम उल्लंघन ने बाजार की कारोबारी धारणा पर असर डाला। मिराए एसेट शेयरखान में जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा कि सोना 4,730 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है और शुक्रवार को जारी होने वाली मार्च के अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़ों का इसपर असर पड़ने की संभावना है। उन्होंने आगे कहा कि विदेशी कारोबार में सोने की कीमतें जल्द ही 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं।
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नयी दिल्ली. विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान मामूली बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही उसने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न चुनौतियां वृद्धि पर असर डाल सकती हैं। हालांकि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कटौती से शुरुआती महीनों में उपभोक्ता मांग को सहारा मिलेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश की आर्थिक वृद्धि के 6.9 प्रतिशत, आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने 6.1 प्रतिशत और मूडीज रेटिंग्स ने छह प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। विश्व बैंक ने बुधवार को जारी अपनी 'दक्षिण एशिया आर्थिक अद्यतन रिपोर्ट' में कहा कि भारत की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2024-25 के 7.1 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण मजबूत घरेलू मांग और निर्यात की मजबूती है। रिपोर्ट के अनुसार, निजी उपभोग में वृद्धि विशेष रूप से मजबूत रही जिसे कम मुद्रास्फीति एवं माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के युक्तिकरण से समर्थन मिला। विश्व बैंक ने कहा, '' वृद्धि दर के 2026-27 में घटकर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न प्रतिकूल परिस्थितियों को दर्शाता है।'' रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी दरों में कटौती से वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में उपभोक्ता मांग को सहारा मिलेगा, लेकिन ऊंची वैश्विक ऊर्जा कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं और परिवारों की उपलब्ध आय पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा रसोई गैस एवं उर्वरक पर अधिक सब्सिडी खर्च के कारण सरकारी खपत वृद्धि में नरमी आने की उम्मीद है। बढ़ती अनिश्चितता तथा कच्चे माल की लागत में वृद्धि के कारण निवेश वृद्धि भी धीमी पड़ सकती है। विश्व बैंक ने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के बाजारों तक भारत की निर्यात पहुंच में सुधार का लाभ मुख्य व्यापारिक साझेदार देशों में धीमी वृद्धि से कुछ हद तक प्रभावित हो सकता है। विश्व बैंक ने जनवरी में जारी 'ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स रिपोर्ट' में भारत की वृद्धि दर 2026-27 में 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। रिपोर्ट में कहा गया कि पश्चिम एशिया संकट का असर अत्यधिक अनिश्चित है और अन्य आकलनकर्ताओं ने 2026-27 के लिए वृद्धि अनुमान 5.9 प्रतिशत से 6.7 प्रतिशत के बीच कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे जिसके बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की। हालांकि आठ अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी जिससे पश्चिम एशिया में फैले संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई उथल-पुथल में कुछ राहत की उम्मीद जगी है।
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-देखिए क्या है दाम
नयी दिल्ली. आयशर मोटर्स समूह की दोपहिया कंपनी रॉयल एनफील्ड ने बृहस्पतिवार को अपना पहला इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन 'फ्लाइंग फ्ली सी6' पेश किया। कंपनी ने शेयर बाजार को दी एक सूचना में कहा कि 'फ्लाइंग फ्ली' उसका नया 'सिटी+ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी' ब्रांड है। इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल की शोरूम कीमत 2.79 लाख रुपये रखी गई है, जबकि बैटरी अलग से लेने के विकल्प के साथ यह 1.99 लाख रुपये में उपलब्ध होगी। रॉयल एनफील्ड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बी गोविंदराजन ने कहा, ''यह कंपनी के 125वें वर्ष में इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल की दिशा में पहला कदम है, जो इसकी विरासत और नए दौर की शुरुआत को दर्शाता है।'' उन्होंने कहा कि कंपनी एक सदी से अधिक समय से बेहतर मोटरसाइकिल अनुभव देने पर केंद्रित रही है और 'फ्लाइंग फ्ली' के साथ वह इसी दर्शन को इलेक्ट्रिक युग में आगे बढ़ा रही है। रॉयल एनफील्ड ने कहा कि इस इलेक्ट्रिक मॉडल की आपूर्ति मई, 2026 के अंत से शुरू होगी।
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मुंबई. रुपया बुधवार को 47 पैसे की बढ़त के साथ 92.59 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ दो सप्ताह के लिए सैन्य हमले स्थगित करने की घोषणा करने और भारतीय रिजर्व बैंक के प्रमुख नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखने के फैसले से घरेलू मुद्रा को बल मिला है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.92 पर खुला। यह शुरुआती कारोबार में 92.56 प्रति डॉलर तक पहुंचा और अंत में 92.59 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा जो पिछले बंद भाव से 47 पैसे की बढ़त है। रुपया मंगलवार को 93.06 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.96 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.90 पर रहा। घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स 2,946.32 अंक चढ़कर 77,562.90 अंक पर जबकि निफ्टी 873.70 अंक बढ़त के साथ 23,997.35 अंक पर बंद हुआ। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 13.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ 94.27 डॉलर प्रति बैरल रहा।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मंगलवार को शुद्ध बिकवाल रहे थे और उन्होंने 8,692.11 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। -
मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को भरोसा जताया कि मुद्रास्फीति की अनुकूल स्थिति को देखते हुए ब्याज दरें मध्यम से लंबी अवधि में नीचे बनी रहेंगी। मल्होत्रा ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद संवाददाताओं से कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अत्यंत मजबूत है और इसमें बाहरी झटकों या प्रतिकूल परिस्थितियों से उबरने की जबरदस्त क्षमता है। उन्होंने कहा कि देश की बुनियादी आर्थिक स्थिति बेहतर है, जिसके कारण वृद्धि को गति मिल रही है और कीमतों पर दबाव भी कम है। गवर्नर ने कहा, "इस बात की पूरी संभावना है कि अल्पावधि से मध्यम अवधि में भी ब्याज दरें कम बनी रहेंगी।" आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। वहीं, चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो रिजर्व बैंक के मुद्रास्फीति के लिए निर्धारित दो से छह प्रतिशत लक्ष्य के भीतर है। इससे पहले, रिजर्व बैंक की छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से 'रेपो दर' को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह फैसला ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर पड़ने वाले प्रभावों को देखते हुए लिया गया है। आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि मौद्रिक नीति की समीक्षा करते समय अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम को भी ध्यान में रखा गया है। ब्याज दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के मुद्दे पर मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई की तरफ से रेपो दर में की गई कुल 1.25 प्रतिशत अंकों की कटौती के मुकाबले बैंकों ने ऋण पर लगभग 0.90 प्रतिशत अंकों की कटौती की है, जो संतोषजनक है। रुपये की स्थिति पर उन्होंने कहा कि मुद्रा बाजार में हाल ही में उठाए गए कदम रुपये की विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए थे और ये स्थायी उपाय नहीं हैं।
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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को भारत की आर्थिक वृद्धि दर को लेकर नया अनुमान जारी किया है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए वास्तविक जीडीपी ग्रोथ को 7.4% से बढ़ाकर 7.6% कर दिया है, हालांकि भू-राजनीतिक तनाव से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता भी जताई है। आरबीआई के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में यह वृद्धि मजबूत सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग में विस्तार और घरेलू मांग के चलते संभव होगी। यह रुझान देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान जताया है। यह संकेत देता है कि बाहरी जोखिम और लागत के दबाव के कारण वृद्धि दर में कुछ नरमी आ सकती है। यह जानकारी आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद दी। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए ग्रोथ अनुमान 6.9% से घटाकर 6.8% कर दिया गया है, जबकि दूसरी तिमाही का अनुमान 7% से घटाकर 6.7% किया गया है। इसके पीछे ईरान से जुड़े वैश्विक तनाव और बढ़ते दबाव को प्रमुख कारण बताया गया है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि ऊर्जा की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से महंगाई का खतरा बढ़ गया है, जिससे वैश्विक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।वित्त वर्ष 2026 की दिसंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही, जो पिछली तिमाही के 8.4% से कम है। आरबीआई को उम्मीद है कि निजी क्षेत्र का निवेश आगे भी बढ़ता रहेगा, क्योंकि उद्योगों में क्षमता उपयोग का स्तर ऊंचा बना हुआ है। गवर्नर ने यह भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी सुनिश्चित की जाएगी ताकि अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा किया जा सके। वित्त वर्ष 2027 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति 4.6% रहने का अनुमान है। तिमाही आधार पर पहली तिमाही में 4%, दूसरी में 4.4%, तीसरी में 5.2% और चौथी तिमाही में 4.7% रहने की संभावना जताई गई है। 3 अप्रैल तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 697.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। आरबीआई गवर्नर के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले नेट एफडीआई में सुधार हुआ है और भारत ग्रीनफील्ड निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है। - नयी दिल्ली. दूरसंचार नियामक ट्राई ने मंगलवार को दूरसंचार परिचालकों के लिए यह अनिवार्य किये जाने का प्रस्ताव किया कि वे केवल कॉल और एसएमएस सेवाओं के लिए कम कीमत पर मोबाइल प्लान जारी करें। इसकी कीमत मौजूदा विशेष शुल्क वाउचर की तुलना में कम हो, जिनमें डेटा (इंटरनेट) सुविधा भी शामिल है। दूरसंचार उपभोक्ता संरक्षण (तेरहवां संशोधन) विनियमन, 2026 के मसौदे में ट्राई ने कहा कि उसने प्रत्येक दूरसंचार परिचालक के लिए कम से कम एक विशेष शुल्क वाउचर जारी करना अनिवार्य किया है, जो केवल कॉल (वॉयस) और एसएमएस के लिए हो। लेकिन कंपनियों ने लंबी वैधता वाले कुछ ही प्लान जारी किए। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने यह भी पाया कि केवल वॉयस और एसएमएस पैक को पेश करते समय, दूरसंचार परिचालकों ने शुरू में अपेक्षाकृत अधिक कीमत तय की और प्लान से डेटा लाभ हटाने के अनुपात में इन कीमतों को कम नहीं किया गया। नियामक ने कहा कि पिछले बदलाव का परिणाम संतोषजनक नहीं रहा है और इसलिए उसने एक नया प्रस्ताव पेश किया है। ट्राई ने कहा, ''प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य इस समस्या का समाधान करना है। इसके तहत, वॉयस, एसएमएस और डेटा वाले विशेष शुल्क वाउचर (चाहे उनमें अतिरिक्त सेवाएं हों या न हों) के लिए दी जाने वाली प्रत्येक वैधता अवधि के लिए, सेवा प्रदाता को केवल वॉयस और एसएमएस के लिए एक अलग विशेष शुल्क वाउचर भी देना अनिवार्य होगा।'' नियामक ने कहा कि इस संशोधन से पारदर्शिता बढ़ेगी, अनावश्यक सेवाओं की जबरन खरीद पर रोक लगेगी और यह सुनिश्चित होगा कि जिन उपभोक्ताओं को डेटा की आवश्यकता नहीं है, उन्हें इसके लिए भुगतान के लिए बाध्य नहीं किया जाए। नियामक ने कहा, ''साथ ही, इससे उपभोक्ताओं को केवल वॉयस और एसएमएस वाले पैक के अधिक विकल्प मिलेंगे, जिससे वे डेटा-युक्त पैक के बराबर हो जाएंगे।'' ट्राई ने इस प्रस्ताव पर संबंधित पक्षों से 28 अप्रैल तक सुझाव देने को कहा है।
- नयी दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे माल की बढ़ती लागत और बेमौसम बारिश से गर्मी की शुरुआत में देरी के चलते, रूम एयर-कंडीशनर (एसी) उद्योग के लिए मौजूदा 'बिक्री अवधि' चुनौतीपूर्ण रह सकती है। प्रमुख एसी निर्माता कंपनी 'ब्लू स्टार' के प्रबंध निदेशक (एमडी) बी त्यागराजन ने मंगलवार को संकेत दिया कि ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण प्लास्टिक और इस्पात की कीमतों में उछाल आया है, जिससे आने वाले महीनों में एसी के दाम और बढ़ सकते हैं। हालांकि, इसका मुख्य असर आगामी त्योहारी सत्र की बिक्री के दौरान दिखेगा। त्यागराजन के अनुसार, यदि लागत बहुत अधिक बढ़ती है, तो ग्राहक महंगे उत्पादों के बजाय कम कीमत वाले विकल्पों की ओर मुड़ सकते हैं। इन चुनौतियों के बावजूद भी उन्होंने पिछले वर्ष की तुलना में दहाई अंक में वृद्धि की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा, ''इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद यदि 20 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो यह संतोषजनक होगा।'' एसी उद्योग वर्तमान में तांबे की बढ़ती कीमतों, पोत परिवहन की ऊंची लागत और भारतीय रुपये के अवमूल्यन का सामना कर रहा है।
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नई दिल्ली। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को नई ऊंचाई देखने को मिली। भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के लिए होरमुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मंगलवार की समय-सीमा के बीच तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.69 प्रतिशत या 1.86 डॉलर बढ़कर 111.63 डॉलर प्रति बैरल के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया (सुबह 9:57 बजे तक)। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 3 प्रतिशत से अधिक यानी 4.15 डॉलर बढ़कर 116.56 डॉलर पर पहुंच गया।संघर्ष शुरू होने के बाद से ब्रेंट क्रूड में 60 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई है, जो 27 फरवरी को 72.48 डॉलर से बढ़कर 9 मार्च को 119.50 डॉलर तक पहुंच गया।तेल की कीमतों में यह तेजी उस समय आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होरमुज़ जलडमरूमध्य को खोलने को लेकर ईरान के प्रति कड़ा रुख दिखाया।उनके पोस्ट में कहा गया कि यदि ईरान मंगलवार रात तक तय समय-सीमा का पालन नहीं करता है, तो तेहरान पर “कहर बरसाया जाएगा”। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ईरान को “एक रात में खत्म किया जा सकता है”।उन्होंने कहा कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ, तो “ईरान के हर पुल को नष्ट कर दिया जाएगा” और “हर पावर प्लांट जलकर, फटकर हमेशा के लिए बंद हो जाएगा”।दूसरी ओर, ईरान ने कथित तौर पर युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया और दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ संघर्ष जारी रखा।होरमुज़ जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है, 28 फरवरी से संघर्ष के चलते बाधित बना हुआ है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में इस साल अब तक लगभग 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और कीमतें औसतन 100 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं।वहीं, वैश्विक शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। भारत में शेयर बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, जहां सेंसेक्स और निफ्टी में 1 प्रतिशत तक की गिरावट आई। अमेरिका में वॉल स्ट्रीट हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार रहा। -
नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि राजकोषीय सूझबूझ ने सरकार को पूंजीगत व्यय बढ़ाने और पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित क्षेत्रों को समर्थन देने के लिए पर्याप्त वित्तीय गुंजाइश दी है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक उभरती स्थिति से निपटने के लिए ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है। सीतारमण ने चुनौतीपूर्ण समय में अच्छी सार्वजनिक वित्त नीति के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि इससे आर्थिक नरमी के दौर में उससे निपटने, विशेष रूप से विपरीत परिस्थितियों में भी टिके रहने की क्षमता में सुधार होता है। उन्होंने यहां राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) के एक कार्यक्रम में कहा कि आज भारी कर्ज और बड़े घाटे वाले कई देशों के पास कोई विकल्प नहीं बचा है और उन्हें मितव्ययिता और अस्थिरता के बीच एक कठिन विकल्प का सामना करना पड़ रहा है। वित्त मंत्री ने कहा, ''इसके उलट, भारत के पास राजकोषीय संसाधन हैं। पूंजीगत व्यय कार्यक्रम को जारी रखने की गुंजाइश है, आरबीआई के पास ब्याज दरें कम करने की गुंजाइश है और प्रभावित क्षेत्रों को लक्षित सहायता प्रदान करने की क्षमता है। यह एक दशक की राजकोषीय सूझबूझ और अनुशासन का परिणाम है।'' उन्होंने कहा कि राजकोषीय गुंजाइश को देखते हुए ही हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क कम किए गए और प्रमुख पेट्रोरसायन उत्पादों पर सीमा शुल्क से छूट दी गयी। एसईजेड (विशेष आर्थिक क्षेत्र) को घरेलू शुल्क क्षेत्र में परिचालन की अनुमति दी गयी। सरकार ने 26 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की ताकि युद्ध के बीच बढ़ती वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के प्रभाव से उपभोक्ताओं को बचाया जा सके। अमेरिका और इजराइल के 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले के बाद से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप ईरान ने व्यापक जवाबी कार्रवाई की। सरकार ने डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन (एटीएफ) पर 29.50 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क भी लगाया। पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल पर यह वर्तमान में शून्य है। भारत ने दो अप्रैल को पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण पोत परिवहन मार्गों में समस्याओं के बीच आपूर्ति स्थिरता सुनिश्चित करने और अंतिम उत्पादों के उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात को सीमा शुल्क से छूट दी। सीतारमण ने कहा कि यह साल पिछले वर्ष की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा, ''पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करने वाला बड़ा झटका बन गया है और नई बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का संकेत दे रहा है।'' सीतारमण ने 2025 को प्रभावित करने वाली विभिन्न वैश्विक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह वर्ष नीति निर्माताओं की शुरुआती सोच से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बन गया है। उन्होंने कहा, ''शुल्क और अन्य बाधाओं के कारण व्यापार के प्रभावित होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में गंभीर अनिश्चितता पैदा कर दी है। इसके चलते वैश्विक वृद्धि अनुमान में भारी गिरावट आई...।'' भारत के ऋण-जीडीपी अनुपात का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सामान्य सरकारी ऋण-जीडीपी अनुपात (राज्यों के कर्ज के साथ) 81 प्रतिशत के साथ भारत, जर्मनी के बाद प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम है। उन्होंने कहा कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत एकमात्र ऐसी प्रमुख अर्थव्यवस्था है जहां अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष का अनुमान है कि यह अनुपात 2030 तक घटकर 75.8 प्रतिशत हो जाएगा। जबकि अमेरिका, चीन, जर्मनी और अन्य जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऋण की स्थिति और खराब होने का अनुमान है। वित्त मंत्री ने कहा, ''सितंबर, 2025 तक हमारा बाह्य ऋण-जीडीपी अनुपात मात्र 19.1 प्रतिशत है, जो उभरते बाजारों में सबसे कम में से एक है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 688 अरब डॉलर (31 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार) से अधिक है, जो लगभग 11 महीनों के आयात को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।'' सीतारमण ने कहा कि वास्तव में यह वर्षों के राजकोषीय प्रबंधन के दौरान लिए गए सुनियोजित, निरंतर और कभी-कभी राजनीतिक रूप से कठिन निर्णयों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह इस सरकार की उपयुक्त नीतियों और स्थिर नेतृत्व के कारण संभव हुआ है, जिसका एकमात्र लक्ष्य भारत की तीव्र प्रगति सुनिश्चित करना है। सीतारमण ने कहा कि सूझबूझ के साथ राजकोषीय नीति का अर्थ केवल 'किफायती' या खर्च में कटौती करना नहीं है, बल्कि संसाधनों का कुशल और पारदर्शी तरीके से उपयोग करना भी है। उन्होंने कहा कि इस विवेकपूर्ण प्रबंधन ने भारत की वृहद आर्थिक स्थिरता को मजबूत किया है, जिसके परिणामस्वरूप 2025 में मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस, एसएंडपी और आर एंड आई जैसी एजेंसियों ने साख में सुधार किया है। वित्त मंत्री ने कहा कि एक दशक पहले भारत को 'कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं' में शामिल किया जाता था लेकिन देश अब विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा, ''हमने एक अस्थिर राजकोषीय घाटे के साथ शुरुआत की थी। हमने इसे जीडीपी के 4.4 प्रतिशत तक कम कर दिया है, जो 2030-31 तक जीडीपी के 50 प्रतिशत ऋण अनुपात की ओर बढ़ रहा है। हमने संदेह पर आधारित कर प्रणाली के साथ शुरुआत की थी। हमने एक ऐसी कर प्रणाली बनाई है जो विश्वास पर आधारित है।'' सीतारमण ने कहा कि विकसित भारत 2047 का मार्ग लंबा है और आगे आने वाली चुनौतियां बहुत बड़ी हैं। इन चुनौतियों में जलवायु वित्त, ऋण प्रबंधन, जनसांख्यिकीय परिवर्तन के राजकोषीय निहितार्थ, सार्वजनिक निवेश पर प्रतिफल की चुनौती, प्रौद्योगिकी-आधारित व्यवधान आदि शामिल हैं।
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नयी दिल्ली. सरकार ने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के दुरुपयोग पर रोक लगाने के उद्देश्य से बृहस्पतिवार को सोना, चांदी और प्लैटिनम से जुड़े सभी प्रकार के उत्पादों के आयात पर अंकुश लगाया दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की एक अधिसूचना के मुताबिक, ये अंकुश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। यह रोक पहले से किए गए सौदों या भुगतान जैसी किसी भी शर्त के बावजूद लागू होगी। इसके साथ ही, संक्रमणकालीन प्रावधान का लाभ भी उपलब्ध नहीं होगा। अधिसूचना में कहा गया है कि अध्याय 71 के तहत आने वाले उत्पादों की आयात नीति में संशोधन किया गया है। इस अध्याय में प्राकृतिक या संवर्धित मोती, कीमती या अर्द्ध-कीमती पत्थर, कीमती धातुएं, कीमती धातुओं से जड़े उत्पाद, आभूषण, नकली गहने और सिक्के शामिल हैं। सरकार एक दिन पहले सोना, चांदी और प्लैटिनम आभूषण के आयात पर भी इसी तरह की पाबंदी लगा चुकी है।
अब नए कदम के साथ इन कीमती धातुओं से जुड़े सभी तरह के उत्पादों के आयात को भी अंकुश की श्रेणी में डाल दिया गया है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, कुछ आयातक भारत-आसियान मुक्त व्यापार समझौता का दुरुपयोग कर शुल्क में मौजूद अंतराल का फायदा उठा रहे थे। इसके अलावा वे थाइलैंड जैसे देशों से बिना रत्न-पत्थर वाले आभूषण के नाम पर कीमती धातुओं का आयात कर रहे थे। एक उद्योग अधिकारी ने कहा कि लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक कारोबारी इस कदम से प्रभावित न हों। भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के समूह आसियान के बीच वस्तुओं के व्यापार पर यह समझौता 2010 से लागू है। इससे पहले सरकार प्लैटिनम और चांदी के आभूषणों के आयात पर भी समय-समय पर इसी तरह के अंकुश लगा चुकी है। -
नयी दिल्ली. उद्योग जगत ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के समाधान के लिए सरकार द्वारा महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात पर 30 जून तक तीन महीने के लिए सीमा शुल्क से छूट देना सही समय पर उठाया गया कदम है। इससे कपड़ा, पैकेजिंग और औषधि जैसे क्षेत्रों को राहत मिलेगी। उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ''पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उत्पन्न आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के समाधान के लिए भारत सरकार द्वारा 40 महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों पर 30 जून, 2026 तक पूर्ण सीमा शुल्क छूट देने का निर्णय समय पर उठाया गया व्यावहारिक कदम है।'' उन्होंने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स, पेंट, कपड़ा और खिलौने जैसे क्षेत्र बढ़ते कच्चे माल की लागत और सीमित मूल्य निर्धारण शक्ति का सामना कर रहे हैं। इनमें से कई श्रम गहन एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) हैं। बनर्जी ने कहा, ''शुल्क छूट से कपड़ा, पैकेजिंग और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों को तत्काल राहत मिलेगी, जो पीटीए, मेथनॉल और एसिटिक एसिड जैसे प्रमुख मध्यवर्ती वस्तुओं पर अत्यधिक निर्भर हैं। इससे लागत दबाव को कम करने, आपूर्ति स्थिरता को बनाए रखने और महंगाई की प्रवृत्ति को कम करने में भी मदद मिलेगी।'' उन्होंने राज्य और केंद्रीय करों और शुल्कों पर छूट (आरओएससीटीएल) योजना को बढ़ाने के सरकार के फैसले का भी स्वागत किया और कहा कि इससे परिधान और तैयार माल क्षेत्र के निर्यातकों को समय पर सहायता मिलेगी। उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने कहा कि सीमा शुल्क छूट से प्रसंस्करण उद्योगों के लिए कच्चे माल की लागत कम होगी। इससे आयातित कच्चे माल और मध्यवर्ती वस्तुओं की कीमतें कम होंगी। इस लागत में कमी से विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए जिनमें कच्चे माल की खपत अधिक होती है, मार्जिन को बनाये रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा, ''उदाहरण के लिए, प्लास्टिक, वस्त्र और पैकेजिंग में, पेट्रोरसायन का उपयोग कच्चे माल के रूप में किया जाता है और यह कुल उत्पादन लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कच्चे माल की कीमतों में कमी से परिचालन मार्जिन में सुधार होगा...।'' इसके अतिरिक्त, छूट से खरीद लागत कम करके कार्यशील पूंजी दक्षता में सुधार हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि इससे क्षमता उपयोग में भी वृद्धि हो सकती है, क्योंकि कच्चे माल की कम लागत उच्च उत्पादन स्तर को प्रोत्साहित करती है।
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नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी इस्पात कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने बृहस्पतिवार को कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में उसकी बिक्री 11.5 प्रतिशत बढ़कर 2.01 करोड़ टन रही। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का कच्चे इस्पात का उत्पादन 1.94 करोड़ टन और बिक्री योग्य इस्पात का उत्पादन 1.91 करोड़ टन रहा। सेल ने बयान में कहा, ''अपनी ब्रांड उपस्थिति और ग्राहकों तक पहुंच को मजबूत करते हुए, कंपनी ने 2.01 करोड़ टन की अब तक की सबसे अधिक बिक्री दर्ज की है, जो पिछले वर्ष के 1.8 करोड़ टन की तुलना में 11.5 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि है।'' कंपनी ने आगे बताया कि यह वृद्धि व्यापक रही और सभी उत्पाद श्रेणियों में बिक्री बढ़ी है। कंपनी ने कहा कि उसकी परिचालन उत्कृष्टता बेहतर दक्षता मानकों पर साबित हुई है। बयान के अनुसार, ''भारतीय रेलवे को 12.5 लाख टन की रिकॉर्ड आपूर्ति के साथ ही यूनिवर्सल रेल मिल ने अब तक का सबसे अधिक 'लॉन्ग रेल' उत्पादन दर्ज किया। इससे भारत के रेल विस्तार में कंपनी के रणनीतिक योगदान का पता चलता है।'' निर्यात के मोर्चे पर 162 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 2.9 लाख टन तक पहुंच गया। सेल ने भूटान सहित नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सफलतापूर्वक विस्तार किया है।
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नयी दिल्ली. सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 5.3 करोड़ टन लौह अयस्क का उत्पादन किया और 5.02 करोड़ टन लौह अयस्क की बिक्री की। इस्पात बनाने के लिए मुख्य कच्चे माल के रूप में लौह अयस्क का इस्तेमाल किया जाता है।
समीक्षाधीन अवधि में कंपनी का उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 के 4.40 करोड़ टन की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक रहा, जबकि बिक्री 4.44 करोड़ टन से 13 प्रतिशत बढ़ी। एनएमडीसी ने मार्च महीने में 53.5 लाख टन लौह अयस्क का उत्पादन किया और 59 लाख टन की बिक्री की।कंपनी ने एक बयान में कहा, ''एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 5.3 करोड़ टन लौह अयस्क के उत्पादन के साथ एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। हम भारत के खनन इतिहास में पांच करोड़ टन के वार्षिक उत्पादन के आंकड़े को पार करने वाली पहली कंपनी हैं।'' इस रिकॉर्ड उत्पादन में छत्तीसगढ़ स्थित एनएमडीसी की प्रमुख लौह अयस्क खदानों- किरंदुल एवं बचेली और कर्नाटक में दोनीमलाई का उल्लेखनीय योगदान रहा। एनएमडीसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अमिताभ मुखर्जी ने कहा, ''पांच करोड़ टन से अधिक उत्पादन का आंकड़ा केवल एनएमडीसी के लिए एक मील का पत्थर न होकर देश के खनन क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण है।'' -
नयी दिल्ली. भारती एयरटेल 65 करोड़ ग्राहकों के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बन गई है। कंपनी ने जीएसएमए के आंकड़ों का हवाला देते हुए बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस (जीएसएमए) दुनिया भर के मोबाइल संचालकों और संबंधित कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक प्रमुख संगठन है। कंपनी बयान के अनुसार, 'जीएसएमए इंटेलिजेंस' के मुताबिक मोबाइल ग्राहक आधार के लिहाज से भारती एयरटेल वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है। कंपनी भारत तथा अफ्रीका में सेवाएं देती है। भारती एयरटेल के कार्यकारी वाइस चेयरमैन गोपाल विट्टल ने कहा, '' हम नवाचार, विश्वसनीयता एवं सेवाओं के अनुभव के स्तर को और ऊंचा करने का प्रयास करेंगे, ताकि हर ग्राहक के साथ संपर्क भरोसा जीतने तथा मूल्य प्रदान करने का अवसर बने।'' कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि यह संख्या 31 मार्च तक उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। एयरटेल ने कहा कि भारत में उसके 36.8 करोड़ से अधिक मोबाइल ग्राहक हैं, जबकि अफ्रीका के 14 देशों में 17.9 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं। कंपनी के अनुसार, अपने क्षेत्रीय बाजारों से आगे बढ़ते हुए एयरटेल 'यूटेलसैट वनवेब' और 'स्पेसएक्स' के साथ रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से डिजिटल खाई को पाटने का प्रयास कर रही है।
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नई दिल्ली। वित्तीय वर्ष के पहले ही दिन महंगाई ने बड़ा झटका दिया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में भारी बढ़ोतरी की गई है। सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने 1 अप्रैल से 19 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 195.50 रुपए की बढ़ोतरी कर दी है।
नई दरों के मुताबिक, दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1883 रुपए से बढ़कर 2078.50 रुपए हो गई है। इससे पहले 1 मार्च को इसकी कीमत 1768.50 रुपए थी, जो 7 मार्च को बढ़कर 1883 रुपए हो गई थी। मार्च महीने में ही सिलेंडर के दामों में लगातार इजाफा हुआ है। 1 मार्च से अब तक कुल 310 रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।देश के अन्य महानगरों में भी कीमतों में वृद्धि देखने को मिली है। कोलकाता में 19 किलो का सिलेंडर 2208.00 रुपए, मुंबई में 2031.00 रुपए और चेन्नई में 2246.50 रुपए हो गया है।हालांकि, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। 7 मार्च को इसमें 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद से कीमत स्थिर है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपए बनी हुई है।कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने का सीधा असर होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पर पड़ेगा। संचालक बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डाल सकते हैं, जिससे बाहर खाना महंगा हो सकता है।मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच टकराव के चलते वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया है। होर्मुज स्ट्रेट में बाधाओं के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इस वैश्विक संकट का असर भारत पर भी साफ दिख रहा है। देश में एलपीजी सिलेंडर के दाम युद्ध जैसे हालात के बीच अब तक दो बार बढ़ाए जा चुके हैं, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ गया है। -
नई दिल्ली। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि देश में केवल कमर्शियल एलपीजी की कीमतें बढ़ाई गई हैं, जबकि घरेलू एलपीजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
मंत्रालय ने एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि उद्योगों और होटलों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतें अनियंत्रित होती हैं, बाजार द्वारा तय की जाती हैं और आमतौर पर हर महीने संशोधित की जाती हैं। देश में कुल खपत होने वाली एलपीजी में इनकी खपत 10 प्रतिशत से भी कम है।बयान में बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता के अनुरूप, घरेलू उपभोक्ताओं को पूरी तरह से सुरक्षा मिलती रहेगी, क्योंकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपए पर ही बनी हुई है, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसी तरह पीएमयूवाई योजना के तहत गरीबों के लिए एलपीजी सिलेंडरों की सब्सिडी वाली कीमत भी 613 रुपए पर ही बनी हुई है, उसमें भी कोई बदलाव नहीं किया गया है।”इसमें आगे कहा गया कि मौजूदा कीमतों पर पब्लिक सेक्टर की तेल मार्केटिंग कंपनियों को हर सिलेंडर पर 380 रुपए का नुकसान हो रहा है। मई के आखिर तक, कुल नुकसान लगभग 40,484 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। बयान में कहा गया कि पिछले साल भी, 60,000 करोड़ रुपए के कुल नुकसान में से 30,000 करोड़ रुपए तेल पीएसयू ने और 30,000 करोड़ रुपए भारत सरकार ने उठाए थे, ताकि भारतीय नागरिकों को एलपीजी की ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों से बचाया जा सके। मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत में घरेलू एलपीजी की कीमत दुनिया में सबसे कम कीमतों में से एक है; इसकी तुलना में पाकिस्तान में कीमत 1,046 रुपए प्रति सिलेंडर है, श्रीलंका में 1,242 रुपए, और नेपाल में यह 1,208 रुपए है। बयान में यह भी साफ किया गया कि रेगुलर पेट्रोल और डीजल की कीमतें पहले जैसी ही हैं—क्रमशः 94.77 रुपए प्रति लीटर और 87.67 रुपए प्रति लीटर (दिल्ली की कीमतें)। -
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाज़ारों ने बुधवार के सत्र का समापन मज़बूती के साथ किया, हालाँकि दिन में बाद में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदें फीकी पड़ने से उन्होंने अपनी शुरुआती बढ़त का एक बड़ा हिस्सा गँवा दिया।बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे उनकी दो दिन से चली आ रही गिरावट का सिलसिला टूट गया।
निफ्टी 348 अंक या 1.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,679.40 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 1,186.77 अंक या 1.65 प्रतिशत बढ़कर 73,134.34 पर समाप्त हुआ।निफ्टी के तकनीकी दृष्टिकोण पर टिप्पणी करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि गिरावट की स्थिति में, 22,500 के स्तर से ऊपर टिके रहने में विफलता से बिकवाली का दबाव फिर से बढ़ सकता है, जिससे इंडेक्स 22,300 की ओर खिंच सकता है, जिसके बाद 21,700 के आसपास एक मज़बूत मांग क्षेत्र (demand zone) मौजूद है।अमेरिका-ईरान संघर्ष में संभावित कमी की उम्मीदों के बीच बाज़ारों की शुरुआत मज़बूती के साथ हुई थी। हालाँकि, जैसे-जैसे सत्र आगे बढ़ा, शुरुआती उत्साह ठंडा पड़ गया, जिससे दिन के उच्चतम स्तरों से आंशिक गिरावट देखने को मिली।निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त हासिल करने वालों में Trent Limited, InterGlobe Aviation और Adani Ports and Special Economic Zone शामिल थे, जिन्होंने इंडेक्स में तेज़ी को सहारा दिया।व्यापक बाज़ारों का प्रदर्शन बेंचमार्क इंडेक्स से भी बेहतर रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 2.24 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि निफ्टी स्मॉल-कैप इंडेक्स 3.24 प्रतिशत उछला।क्षेत्रीय मोर्चे पर, निफ्टी PSU Bank इंडेक्स सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले इंडेक्स के रूप में उभरा, जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग शेयरों में मज़बूत बढ़त को दर्शाता है।निफ्टी केमिकल और निफ्टी मीडिया इंडेक्स में भी सत्र के दौरान खरीदारी में उल्लेखनीय दिलचस्पी देखने को मिली।हालाँकि, सभी क्षेत्रों में बढ़त देखने को नहीं मिली। निफ्टी हेल्थकेयरऔर निफ्टी फार्मा इंडेक्स ने बाज़ार के आम रुझान के विपरीत प्रदर्शन किया और गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे बाज़ार की कुल बढ़त कुछ हद तक सीमित हो गई। विश्लेषकों ने कहा कि सत्र के आखिर में उतार-चढ़ाव के बावजूद, बाज़ार बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहा; इसे सभी सेक्टरों में, खासकर मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में हुई व्यापक खरीदारी का समर्थन मिला।एक विश्लेषक ने कहा, “अब बाज़ारों का ध्यान अमेरिका के अहम आंकड़ों पर है, जिनमें नॉन-फ़ार्म पेरोल्स, ADP रोज़गार और बेरोज़गारी दर शामिल हैं; इन आंकड़ों की वजह से बाज़ार में तेज़ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।” -
नयी दिल्ली. बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (बीएलडब्ल्यू) ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 572 रेल इंजन का उत्पादन किया, जिससे भारतीय रेलवे के औद्योगिक इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। रेल मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा, "यह उपलब्धि बीएलडब्ल्यू की तकनीकी उत्कृष्टता, कुशल प्रबंधन और इसके अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अथक प्रयासों का ठोस प्रमाण है।" बीएलडब्ल्यू ने वित्त वर्ष 2024-25 में 477 रेल इंजन का उत्पादन किया था। 2025-26 में कंपनी ने रेल इंजन के उत्पादन में 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है। रेल मंत्रालय ने कहा, "यह उपलब्धि न केवल बीएलडब्ल्यू, बल्कि पूरे भारतीय रेलवे परिवार के लिए गर्व का विषय है।" मंत्रालय के मुताबिक, बीएलडब्ल्यू ने 2025-26 में जिन 572 रेल इंजन का उत्पादन किया, उनमें डब्ल्यूएजी-9 श्रेणी के 401 और डब्ल्यूएपी-7 श्रेणी के 143 इंजन सहित 558 आधुनिक इलेक्ट्रिक इंजन शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा कंपनी ने अमृत भारत ट्रेन के 14 इंजन, मोजाम्बिक को निर्यात के लिए 10 डीजल इंजन और गैर-रेलवे ग्राहकों के लिए चार डीजल इंजन का उत्पादन किया। उसने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 553 इलेक्ट्रिक इंजन के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, जिसके मुकाबले बीएलडब्ल्यू ने लगभग एक फीसदी अधिक यानी 558 इंजन का उत्पादन किया और यह संख्या पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। मंत्रालय ने बताया कि बीएलडब्ल्यू अपनी स्थापना से लेकर अब तक कुल 11,259 रेल इंजन का निर्माण कर चुकी है, जिनमें 2,925 इलेक्ट्रिक इंजन शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, रेल मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 में बीएलडब्ल्यू के लिए 642 इलेक्ट्रिक इंजन के उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
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नयी दिल्ली. आयकर विभाग ने भारतीय करदाताओं के साथ वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 219 अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों (एपीए) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का मकसद कर संबंधी निश्चितता प्रदान कर कारोबार सुगमता को बढ़ावा देना है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने मंगलवार को बयान में कहा कि इसमें एकपक्षीय एपीए (यूएपीए) और द्विपक्षीय एपीए (बीएपीए) शामिल हैं। इसके साथ ही, एपीए कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक कुल अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों की संख्या 1,034 हो गई है, जिसमें 750 यूएपीए और 284 बीएपीए शामिल हैं। बयान के अनुसार, ''सीबीडीटी ने एपीए कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से 2025-26 में कुल 219 एपीए पर हस्ताक्षर किए। यह किसी एक वित्त वर्ष अबतक का सर्वाधिक आंकड़ा है। इस वर्ष, सीबीडीटी ने 84 बीएपीए पर भी हस्ताक्षर किए, जो वित्त वर्ष 2024-25 में हस्ताक्षर किए गए 65 बीएपीए के पिछले रिकॉर्ड को पार कर गया।'' इसमें कहा गया है कि भारत के 13 संधि भागीदारों.... अमेरिका, फिनलैंड, ब्रिटेन, सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, स्वीडन, फ्रांस, इंडोनेशिया, आयरलैंड और न्यूजीलैंड के साथ पारस्परिक समझौतों के तहत द्विपक्षीय एपीए पर हस्ताक्षर किए गए। इस वर्ष फ्रांस, आयरलैंड, इंडोनेशिया और स्वीडन के साथ भारत के पहले द्विपक्षीय एपीए पर हस्ताक्षर करने की उपलब्धि भी है। सीबीडीटी लगातार बड़ी संख्या में एपीए पर हस्ताक्षर कर रहा है, पिछले वित्त वर्ष में 174 एपीए और उससे पिछले वर्ष में 125 एपीए पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसमें कहा गया है कि सेफ हार्बर नियम, अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते रूपरेखा के पूरक हैं और हस्तांतरण मूल्य निर्धारण में निश्चितता प्राप्त करने के लिए एक तेज और कम लागत वाला विकल्प प्रदान करते हैं। बयान के अनुसार, 2013 में शुरू की गई सेफ हार्बर रूपरेखा में अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की विशिष्ट श्रेणियों के लिए निश्चित मार्जिन निर्धारित किए गए हैं। इसमें वर्तमान में 12 लेनदेन श्रेणियां शामिल हैं। इनमें आईटी और सॉफ्टवेयर सेवाएं, आईटी-सक्षम सेवाएं, केपीओ (नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग), अनुबंध अनुसंधान एवं विकास, अंतर-समूह वित्तपोषण, गारंटी, कम मूल्य वर्धित सेवाएं और हीरा उद्योग में कुछ लेनदेन शामिल हैं। वित्त अधिनियम 2026 ने सेफ हार्बर नियमों में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं।
सेफ हार्बर नियम कर नियमन हैं जो अधिकारियों को निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर करदाता द्वारा घोषित हस्तांतरण मूल्य या आय को बिना किसी विवाद के स्वीकार करने की अनुमति देते हैं। बयान के अनुसार, ''विभिन्न प्रौद्योगिकी सेवा खंडों को एक समान 15.5 प्रतिशत मार्जिन के साथ 'सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं' श्रेणी में एकीकृत किया गया है। पात्रता सीमा 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दी गई है। संशोधन के तहत प्रणाली-संचालित और स्वचालित रूपरेखा भी पेश की गई है, जिससे विस्तृत जांच और प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता कम हो जाती है।'' सीबीडीटी ने कहा, ''एपीए कार्यक्रम, सेफ हार्बर नियमों के साथ मिलकर, कर निश्चितता प्रदान करता है, विवादों को कम करता है और एक पारदर्शी कर व्यवस्था को मजबूत करता है।'' द्विपक्षीय एपीए संभावित या वास्तविक दोहरे कराधान से सुरक्षा का अतिरिक्त लाभ प्रदान करते हैं। सीबीडीटी करदाताओं की सहयोगात्मक भावना को मान्यता देता है और एपीए कार्यक्रम के सफल कार्यान्वयन में संबंधित पक्षों के रूप में उनकी भूमिका को महत्व देता है। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को कीमती धातुओं की कीमतों में लगभग तीन प्रतिशत का उछाल आया। शादी-विवाह के सीजन से पहले जौहरियों की ताजा लिवाली के कारण चांदी 7,000 रुपये चढ़कर 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, और सोना बढ़कर 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी की कीमत 7,000 रुपये, या 3.04 प्रतिशत बढ़कर 2,37,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई, जो शुक्रवार को बाजार बंद होने के समय 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम थी। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 3,700 रुपये या 2.5 प्रतिशत बढ़कर 1,51,500 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया। पिछले बाजार सत्र में सोने की कीमत 1,47,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी। कारोबारियों ने कीमतों में इस सुधार का श्रेय शादियों के सीजन से पहले की गई हाजिर लिवाली और वैश्विक बाजार के अनुकूल रुझानों को दिया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक-जिंस सौमिल गांधी ने कहा कि सोमवार को सोने की कीमतों में सुधार देखने को मिला, जिसे कीमतों में गिरावट के समय की गई लिवाली से समर्थन मिला। वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के घटते प्रतिफल ने कीमती धातुओं के बाजार में समग्र धारणा को बेहतर बनाने में मदद की। उन्होंने कहा कि रुपये की विनिमय दर में आए तेज बदलाव ने भी घरेलू कीमती धातुओं की कीमतों को और अधिक मजबूती प्रदान की। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में सोमवार को रुपये ने दिन में कारोबार के दौरान पहली बार 95 प्रति डॉलर के स्तर को पार किया। हालांकि, बाद में यह कुछ सुधार के साथ बंद हुआ। गांधी ने कहा कि रुपये के कमजोर होने से घरेलू सोने की कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिला।
सोमवार को कीमतों में सुधार के बावजूद, इस महीने सोने-चांदी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। दो मार्च से अब तक सोने की कीमत में 21,300 रुपये, या 12.3 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि चांदी 63,000 रुपये या 21 प्रतिशत तक नीचे आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना 38.68 डॉलर, या लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 4,531.67 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 1.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 70.72 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। मिराए एसेट शेयरखान में जिंस-प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा कि हाजिर सोना बढ़कर लगभग 4,530 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है, क्योंकि यह अभी भी उतार-चढ़ाव भरे और अस्थिर तरीके से कारोबार कर रहा है; व्यापारी डॉलर और तेल की कीमतों पर नज़र रखे हुए हैं। लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध विश्लेषक, गौरव गर्ग ने कहा कि वैश्विक बाजारों में, मौजूदा बढ़त के बावजूद, कुल मिलाकर माहौल सतर्क बना हुआ है, क्योंकि इस महीने सोने में लगभग 16 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई है, जो दशकों में इसकी सबसे बड़ी गिरावट में से एक है। - नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के आवंटन का कोटा बढ़ाकर कुल मांग का 70 प्रतिशत कर दिया है, जो कि पहले 50 प्रतिशत था। इससे उन उद्योगों को राहत मिलेगी, जो कि बड़े स्तर पर अपने संचालन के लिए एलपीजी पर निर्भर है।70 प्रतिशत कोटे में इस्पात, ऑटोमोबाइल, वस्त्र, रंगाई, रसायन और प्लास्टिक जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी क्योंकि ये अन्य आवश्यक उद्योगों को भी सहयोग प्रदान करते हैं।इन क्षेत्रों में, प्रक्रिया उद्योगों या उन उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी जिन्हें हिटिंग के लिए एलपीजी की आवश्यकता होती है और जिनका विकल्प प्राकृतिक गैस नहीं हो सकता।सरकारी आदेश में कहा गया है कि वर्तमान में किए जा रहे 50 प्रतिशत आवंटन के अतिरिक्त, 20 प्रतिशत का और आवंटन प्रस्तावित है, जिससे कुल वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन संकट-पूर्व स्तर के पैक किए गए गैर-घरेलू एलपीजी के 70 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त 20 प्रतिशत आवंटन का लाभ उठाने के लिए, सभी वाणिज्यिक और औद्योगिक एलपीजी उपभोक्ताओं को तेल विपणन कंपनियों के साथ पंजीकरण कराना होगा और अपने-अपने शहरों में शहरी गैस वितरण इकाई के पास पीएनजी के लिए आवेदन करना होगा।इससे पहले 21 मार्च को जारी किए गए अतिरिक्त 20 प्रतिशत आवंटन में रेस्तरां, ढाबे, होटल, औद्योगिक कैंटीन, खाद्य प्रसंस्करण/डेयरी, राज्य सरकार या स्थानीय निकायों द्वारा संचालित रियायती कैंटीन/आउटलेट, सामुदायिक रसोई और प्रवासी श्रमिकों के लिए 5 किलो (मुक्त व्यापार एलपीजी) एफटीएल जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई थी।पेट्रोलियम मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 25 मार्च तक प्रवासी श्रमिकों को 37,000 से अधिक 5 किलो एफटीएल सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।एलपीजी सिलेंडरों का वितरण राज्य सरकारों और जिला अधिकारियों द्वारा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों या उपभोक्ताओं के अपने निर्णय के आधार पर किया जाएगा। इस बीच, ईरान ने संकेत दिया है कि वह एलपीजी ले जाने वाले अधिक भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देगा। यह घटनाक्रम भारत सरकार द्वारा इस मुद्दे पर ईरानी अधिकारियों के साथ हुई बातचीत के बाद सामने आया है।






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