मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में कई ऐसे मराठी गानों की प्रस्तुतियां हुईं, जिस पर दर्शकों की वंस मोर की फरमाइश पर गायकों ने दोबारा गाया भी
रायपुर। स्नेहा जोशी ने बेहद जटिल और काफी हद तक क्लासिकल मराठी गाने ‘प्रियकरा’ की बेहतरीन प्रस्तुति में साईंनाथ रमेश की सहभागिता भी गजब की रही। यह गाना महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में बैठे संगीतप्रेमी दर्शकों को इतना भाया कि उनकी ओर से वंस मोर की मांग उठी। जिसे पूरी विनम्रता से स्नेहा और साईंनाथ ने पूरा किया भी।
बात हो रही है महाराष्ट्र मंडल में शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में छठवें दिन भिलाई के अलंकार ग्रुप के मराठी संगीतमय कार्यक्रम की। वंस मोर की मांग एक गाने पर ही नहीं थमी, बल्कि स्नेहा जोशी के ‘अप्सरा आली’, और पूजा नालमवार के ‘अधीर मन झाले’ पर भी उठी, जिसे गायकों ने मुखड़ा गाकर पूरा किया। एक से बढ़कर एक मराठी भाव गीतों व फिल्मी गानों से सजे इस कार्यक्रम को संगीत के शौकीन दर्शक लंबे समय तक याद रखेंगे। कार्यक्रम में चार चांद लगाने के लिए कुछ हास्य प्रहसन की प्रस्तुतियां भी शामिल की गईं।
कार्यक्रम की शुरुआत अजय लोंढे के प्रस्तुत हृदय स्पर्शी गीत ‘सुर निरागस हो’ से हुई। तत्पश्चात श्रीकांत देव ने ‘गारवा’, स्नेहा जोशी ने ‘रुपेरी वाळूत’ और अजय लोंढे ने ‘मन उधाण वाऱ्याचे’ प्रस्तुत कर वातावरण को सुरमयी बना दिया। पूजा नालमवार के ‘अधीर मन झाले’, आशीष करमरकर के ‘राधा ही बावरी’ और स्नेहा जोशी के ‘अप्सरा आली’ ने दर्शकों की विशेष वाहवाही बटोरीं।
इसके बाद दिलीप पाठक ने ‘गुलाबी साड़ी’ और साईनाथ रमेश अय्यर ने ‘येड़ लागलंय’ प्रस्तुत कर कार्यक्रम में और रंग भर दिया। आशीष करमरकर और रेवती जोशी की ‘गोमू संगतीने’, श्रीकांत देव और स्नेहा जोशी की ‘जीव रंगला दंगला’ और दिलीप पाठक और पूजा नालमवार की ‘मी डोलकर’ प्रस्तुतियों पर भी रसिकों ने खूब एंजॉय किया। अजय लोंढे और रेवती जोशी का ‘बहरला हा मधुमास’, साईनाथ रमेश एवं स्नेहा जोशी का ‘प्रियकरा’ और अंत में स्नेहा जोशी, पूजा नालमवार और रेवती जोशी द्वारा प्रस्तुत ‘दिसला ग बाई दिसला’ ने कार्यक्रम का समापन उत्साह और उमंग से भरपूर वातावरण में किया।
कार्यक्रम में प्रस्तुत दो हास्य नाटिकाओं ने इस 'संगीतमय परिवार' में एक अलग ही रंग भर दिया। रेवती जोशी और स्मिता फडे़ द्वारा प्रस्तुत सास-बहू के रिश्ते पर आधारित हास्य प्रसंग ने दर्शकों को हंसाया। वहीं दूसरी हास्य नाटिका के माध्यम से हास्य के साथ सामाजिक जागरूकता का सुंदर संदेश दिया गया। मनोरंजन के साथ समाजोपयोगी संदेश देने का यह प्रयास विशेष रूप से सराहनीय रहा। सभी कलाकारों ने अपनी- अपनी प्रस्तुतियों में स्वर की मधुरता, अभिनय की सहजता, नृत्य की स्फूर्ति और मंच पर आत्मविश्वास का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के निर्देशक हर्षवर्धन वझे ने प्रत्येक कलाकार को अपनी प्रतिभा निखारने का भरपूर अवसर दिया।




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