महिला केंद्रों ने मराठी- हिंदी भजनों की प्रस्तुति से की श्रीगणेश की भक्ति
- शहीद मेजर यशवंत गोरे गणेशोत्सव में मंगला अरुण कुसरे की स्मृति में महिलाओं ने सुमधुर भजनों से की गजानन सहित देवी मां की भक्ति
रायपुर। 'प्रथम तुला वंदितो कृपाळा', 'गजानना गणराया', 'मंगलमूर्ती माझे आई', 'मजला ठाव द्याव पायीं', 'ओम जय शिव ओंकारा', 'आज गोकुळात रंग खेळतो हरी राधिके जरा जपून जा तुझ्या घरी...' जैसे मराठी भजनों के साथ महाराष्ट्र मंडल के महिला केंद्रों की महिलाओं ने गजानन के साथ विट्ठल और शिव के सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी। दूसरी ओर महिलाओं ने देवी की स्तुति कर जोगवा गाया और गणपति के भजन गाए, जिससे महिलाएं झूम उठीं। मौका था महाराष्ट्र मंडल में आय़ोजित शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में आयोजनों की श्रृंखला में हुए महिला केंद्रों के भजन का।
महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताया कि प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी महिला केंद्रों की टीम ने गणेशोत्सव के दौरान दो दिवसीय आयोजन में सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी। यह कार्यक्रम मंगला अरुण कुसरे की स्मृति में आयोजित किया गया था। इसमें चौबे कॉलोनी, रोहिणीपुरम, डंगनिया, कोटा, वल्लभ नगर, बूढ़ापारा, तात्यापारा, शंकर नगर और अवंती विहार की महिलाओं ने भजनों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरुआत श्री अथर्वशीर्ष के पाठ के साथ की गई। इसके बाद केंद्र की महिलाओं ने गणपति वंदना प्रस्तुत की। महिलाओं ने ‘अशी चिक मोत्याची माळ, होती ग तीस तोळ्याची ग…. ’, ‘ वाजे मृदुंग टाळ वीणा.. ये रे नाचत गौरी’ गणा। ‘गणपती बाप्पा मोरया मंगलमूर्ती मोरया’, ‘जय जय हे ओंकारा’ और ‘ओम जय शिव ओंकारा’ सहित हिंदी- मराठी भजनों की सुमधुर प्रस्तुति दी।
केंद्र की महिलाओं ने ‘उधे ग अंबे उधे.... उधे ग अंबे उधे! होऊ दे सर्व दिशी मंगळ’, ‘चढवितो रात्रंदिन संबळ’ के साथ जोगवा प्रस्तुत किया। मराठी जोगवा देवी को भेंट स्वरूप भिक्षा मांगने की एक परंपरा है, जिसमें भक्त देवी के नाम पर सूखा राशन या अनाज मांगते हैं। यह दान 'जोगता' और 'जोगातीन' के बीच बांटा जाता है। यह देवी की पूजा का एक अंग है और विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान या देवी के विशेष मंगलवार और शुक्रवार को किया जाता है।











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