राजनीतिक रैलियों से व्यापारिक गतिविधियां बार-बार बाधित, कैट ने राहुल गांधी को लिखा पत्र
नयी दिल्ली. खुदरा व्यापारियों के संगठन कैट ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों और रैलियों के कारण व्यापारिक गतिविधियां बार-बार बाधित होने पर चिंता जताई। इनमें एक नवंबर को विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की रैली भी शामिल है। 'कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स' (कैट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया ने बृहस्पतिवार को लिखे पत्र में कहा कि पिछले एक महीने के दौरान, विशेषकर त्योहारों में, सड़कें बंद किए जाने और प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के व्यापारियों को काफी नुकसान हुआ है। संगठन ने कहा कि हजारों व्यापारियों, दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, परिवहन कारोबारियों, दिहाड़ी मजदूरों और उनके परिवारों पर इसका असर पड़ा है। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले ग्राहकों और कारोबारियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ा है। पत्र में कहा गया, ''हम दिल्ली ही नहीं, बल्कि देशभर के व्यापारिक समुदाय की गहरी नाराजगी और असंतोष जताने के लिए आपको यह पत्र लिख रहे हैं। राजनीतिक रैलियों, विरोध प्रदर्शनों और धरनों के कारण व्यापारिक गतिविधियां बार-बार बाधित हो रही हैं। इनमें एक नवंबर, 2026 को दिल्ली में आपकी रैली और पिछले एक महीने से विभिन्न संगठनों द्वारा आयोजित प्रदर्शनों को कांग्रेस पार्टी तथा अन्य सहयोगी दलों की ओर से लगातार दिए जा रहे समर्थन भी शामिल हैं।'' संगठन ने कहा कि वह प्रत्येक नागरिक के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार का सम्मान करता है, लेकिन विरोध प्रदर्शन का अधिकार व्यापारिक गतिविधियों को बाधित करने, सार्वजनिक आवागमन रोकने या नागरिकों को आजीविका कमाने के अधिकार से वंचित करने का असीमित लाइसेंस नहीं बन सकता। पत्र में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) का भी उल्लेख किया गया है, जो नागरिकों को कोई भी पेशा अपनाने और व्यापार या कारोबार करने का अधिकार देता है। कैट ने राहुल गांधी से पांच सवाल पूछते हुए कहा कि क्या विरोध प्रदर्शन का अधिकार व्यापार करने और आजीविका कमाने के अधिकार से अधिक महत्वपूर्ण है? बार-बार होने वाले प्रदर्शनों से व्यापारियों और छोटे कारोबारियों को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा? संगठन ने कांग्रेस नेता के उस आह्वान पर भी सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने रैली में शामिल लोगों से स्थानीय बाजारों से खरीदारी करने की अपील की थी, जबकि व्यापारी संगठन के अनुसार, प्रदर्शनों के समर्थन से ग्राहकों का उन्हीं बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो गया। कैट ने कांग्रेस और उसके राजनीतिक सहयोगियों से प्रदर्शनों के कारण व्यापारियों को हुई आर्थिक परेशानियों की जिम्मेदारी लेने की मांग भी की। उसने सवाल किया कि यदि इसी तरह के प्रदर्शनों से राजनीतिक दलों के अपने कारोबार और आजीविका प्रभावित हों, तो क्या वे तब भी ऐसे प्रदर्शनों का समर्थन करेंगे? व्यापारी संगठन ने राहुल गांधी और अन्य राजनीतिक नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि विरोध प्रदर्शन निर्धारित स्थानों पर हों और उनसे व्यावसायिक क्षेत्रों, सार्वजनिक आवागमन तथा आम नागरिकों की आजीविका प्रभावित न हो। कैट ने कहा कि राजनीतिक दलों को सरकार का विरोध करने और रैलियां आयोजित करने का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्हें आम नागरिकों के प्रति जवाबदेही और संवेदनशीलता भी दिखानी चाहिए।






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