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- रायपुर। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रायगढ़ प्रवास के दौरान ग्राम बनोरा स्थित अघोर गुरु पीठ पहुंचकर अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम जी की प्रतिमा के दर्शन किए। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए पूजा-अर्चना की तथा पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी से आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गुरु भारतीय संस्कृति के ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना के आधार हैं। गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों के सुखद, समृद्ध एवं मंगलमय जीवन की कामना करते हुए सभी को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं।
- रायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि महाविद्यालय, रायपुर की छात्रा एवं 8 सीजी गर्ल्स बटालियन (एनसीसी) की कैडेट सुश्री सानंदा शोविता का चयन वर्ष 2025-26 के लिए मुख्यमंत्री सर्वश्रेष्ठ सीनियर विंग (SW) कैडेट पुरस्कार हेतु किया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान एनसीसी में उत्कृष्ट नेतृत्व, अनुशासन, प्रशिक्षण, सामाजिक सेवा तथा उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए प्रदान किया जाता है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रतिवर्ष उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले एनसीसी कैडेटों एवं एनसीसी अधिकारियों को मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री एवं एनसीसी दिवस नगद पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। 8 सीजी गर्ल्स बटालियन, एनसीसी, रायपुर द्वारा जारी चयन सूची में कृषि महाविद्यालय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर की कैडेट सुश्री सानंदा शोविता का चयन मुख्यमंत्री सर्वश्रेष्ठ एसडी/सडब्ल्यू कैडेट पुरस्कार के लिए किया गया है। इस पुरस्कार के अंतर्गत उन्हें रू. 25,000 की नगद राशि एवं सम्मान प्रदान किया जाएगा। कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल ने सुश्री सानंदा को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
- -वैज्ञानिक खेती अपनाकर महिला कृषक ने घटाई लागत, बढ़ाई उम्मीदें; आधुनिक कृषि तकनीक से बनीं क्षेत्र की प्रेरणादायक मिसालएमसीबी/ कभी बढ़ती उर्वरक लागत और अनिश्चित उत्पादन से चिंतित रहने वाली मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम कछौड़ की महिला कृषक श्रीमती शकुन्तला आज आधुनिक खेती की एक सफल पहचान बन चुकी हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि किसान समय के साथ नई तकनीकों को अपनाएं और वैज्ञानिक सलाह पर भरोसा करें, तो सीमित संसाधनों में भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।खेती उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख आधार रही है, लेकिन हर वर्ष बढ़ती लागत और उत्पादन को लेकर बनी रहने वाली चिंता उन्हें परेशान करती थी। इसी दौरान कृषि विभाग एवं आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कछौड़, शाखा मनेन्द्रगढ़ के माध्यम से उन्हें इफको नैनो डीएपी की जानकारी मिली। कृषि विशेषज्ञों ने उन्हें इसके वैज्ञानिक उपयोग, कम मात्रा में अधिक प्रभाव तथा संतुलित पोषण के बारे में विस्तार से समझाया।नई तकनीक पर विश्वास करते हुए श्रीमती शकुन्तला ने अपनी फसल में नैनो डीएपी का प्रयोग किया। कुछ ही समय बाद खेतों में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट दिखाई देने लगे। पौधों की बढ़वार पहले की तुलना में अधिक तेज हुई, फसल का रंग गहरा हरा और पौधे अधिक मजबूत नजर आने लगे। इससे उन्हें बेहतर उत्पादन की उम्मीद जगी और खेती के प्रति उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा।नैनो डीएपी के उपयोग से पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में लागत में कमी आई। कम खर्च में बेहतर पोषण मिलने से खेती अधिक लाभकारी बनने लगी। यही अनुभव उनके लिए एक नई शुरुआत साबित हुआ। अब वे पूरे विश्वास के साथ कहती हैं कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।श्रीमती शकुन्तला बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें इस तकनीक को लेकर संदेह था, लेकिन परिणाम देखने के बाद उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। अब वे अपने गांव और आसपास की महिला किसानों को भी वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा नैनो डीएपी के उपयोग के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि यदि किसान सही समय पर सही तकनीक अपनाएं तो कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करना संभव है।उनकी सफलता केवल एक किसान की उपलब्धि नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि कृषि विभाग द्वारा किसानों तक पहुंचाई जा रही आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक मार्गदर्शन का प्रभावी उपयोग खेती की दिशा बदल सकता है। आज श्रीमती शकुन्तला अपने क्षेत्र में आत्मनिर्भर, जागरूक और प्रगतिशील महिला कृषक के रूप में नई पहचान बना चुकी हैं। उनकी प्रेरक यात्रा यह विश्वास जगाती है कि आधुनिक तकनीक, सही जानकारी और दृढ़ संकल्प के साथ खेती को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकता है।
- गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। इस बार रक्षाबंधन पर बहनों के स्नेह का प्रतीक राखी सिर्फ रिश्तों को ही नहीं जोड़ेगी, बल्कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की सांस्कृतिक पहचान को भी नई पहचान दिलाएगी। जिले की प्रसिद्ध विष्णु भोग धान और उसके चावल से तैयार की जा रही अनोखी राखियां बाजार में आकर्षण का केंद्र बनने जा रही हैं। बिहान योजना से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं पारंपरिक कला और स्थानीय संसाधनों का अनूठा मेल पेश कर रही हैं।रंग-बिरंगे धागों और विष्णु भोग चावल को कलात्मक रूप देकर तैयार की जा रही ये राखियां स्थानीय विरासत की झलक भी अपने साथ लेकर चलेंगी। इस पहल को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने समूह की महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया, जिसके बाद वे पूरी तरह आत्मनिर्भर होकर राखियों का निर्माण कर रही हैं। तैयार राखियों की बिक्री के लिए रेलवे स्टेशन, कलेक्ट्रेट और विभिन्न ग्राम संगठन परिसरों में स्टॉल लगाए जा रहे हैं, ताकि राखियां सीधे ग्राहकों तक पहुंच सकें और महिलाओं को बेहतर आय मिल सके।महिला समूहों का कहना है कि यह पहल उनके लिए केवल अतिरिक्त आय का जरिया नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और पहचान का माध्यम भी बनी है। स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने की इस कोशिश से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। जिला प्रशासन का मानना है कि यदि स्थानीय उत्पादों को इसी तरह प्रोत्साहन मिलता रहा तो न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि जीपीएम की विशेष पहचान भी प्रदेश और देशभर तक पहुंचेगी। इस रक्षाबंधन पर विष्णु भोग चावल से बनी राखियां भाई-बहन के अटूट प्रेम के साथ-साथ ‘‘वोकल फॉर लोकल‘‘ का भी संदेश देंगी।
- -विशेषज्ञ फिजियोथेरेपी टीम के समर्पित उपचार से मरीज में उल्लेखनीय सुधार, परिवार ने जताया आभाररायपुर । जिला चिकित्सालय मुंगेली में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों का सकारात्मक परिणाम है कि एक गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद लगभग चलने-फिरने की उम्मीद खो चुके 24 वर्षीय ईशान गुप्ता अब जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग के विशेषज्ञ उपचार से आत्मविश्वास के साथ दोबारा खड़े होने और चलने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर रहे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि दाउपारा, मुंगेली निवासी ईशान गुप्ता एक भीषण सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। निजी अस्पताल में सफल ऑपरेशन के बाद भी लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण उनकी मांसपेशियां कमजोर हो गई थीं और शरीर का संतुलन भी प्रभावित हो गया था। ऐसे कठिन समय में जिला चिकित्सालय के फिजियोथेरेपी विभाग में उनका पुनर्वास उपचार प्रारंभ किया गया। फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. उत्कर्ष पाठक ने ईशान की स्थिति का विस्तृत परीक्षण कर चरणबद्ध उपचार योजना तैयार की। नियमित चिकित्सकीय व्यायाम, मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाले विशेष अभ्यास, संतुलन प्रशिक्षण, गेट ट्रेनिंग (चलने का प्रशिक्षण) तथा सतत निगरानी के माध्यम से कुछ ही सप्ताह में उनके स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार दिखाई देने लगा। आज ईशान पहले की तुलना में अधिक आत्मविश्वास के साथ सहारे से खड़े होकर चलने का अभ्यास कर रहे हैं। ईशान गुप्ता और उनके परिजनों ने जिला अस्पताल की पूरी फिजियोथेरेपी टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें दोबारा सामान्य जीवन जीने की नई उम्मीद मिली है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों और फिजियोथेरेपिस्ट की विशेषज्ञता, धैर्य और समर्पण ने उनके जीवन में नई रोशनी भर दी है।सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि गंभीर दुर्घटनाओं के बाद यदि समय पर फिजियोथेरेपी और वैज्ञानिक पुनर्वास उपचार शुरू किया जाए, तो मरीजों की शारीरिक क्षमता तेजी से बेहतर होती है और वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ फिजियोथेरेपी सेवाएं मरीजों के पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
- रायपुर। खैरागढ़ जिले के खैरा नवापारा निवासी 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित श्री योगेश जंघेल की समस्या का जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता के साथ त्वरित समाधान किया। दृष्टिबाधिता के कारण उन्हें आवागमन एवं दैनिक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। इस पर कलेक्टर श्री इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल के निर्देशानुसार तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें स्मार्ट छड़ी उपलब्ध कराई गई।अपर कलेक्टर श्रीमती सुमन राज ने समाज कल्याण विभाग के माध्यम से श्री योगेश जंघेल को स्मार्ट छड़ी प्रदान की। यह उपकरण दृष्टिबाधित व्यक्तियों को सुरक्षित एवं सहज आवागमन में सहायता प्रदान करता है। स्मार्ट छड़ी मिलने से अब योगेश जंघेल को आने-जाने में सुविधा होगी तथा वे अपने दैनिक कार्य अधिक आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ कर सकेंगे। स्मार्ट छड़ी प्राप्त करने पर श्री योगेश जंघेल ने जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहायता से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा और उन्हें स्वतंत्र रूप से आवागमन करने में काफी सहूलियत मिलेगी। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग के सहायक संचालक श्री कमलेश कुमार पटेल भी उपस्थित रहे।
- -सुरदा के किसान धनेंद्र वैष्णव ने जताया शासन के प्रति आभाररायपुर। किसानों को खेती-किसानी के लिए समय पर ऋण और कृषि आदान उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है। समय पर वित्तीय सहायता और कृषि आदानों की उपलब्धता से मुंगेली जिले के किसानों का खेती के प्रति विश्वास और उत्साह बढ़ा है। जिले के ग्राम सुरदा के किसान धनेंद्र वैष्णव ने बताया कि वे 03 एकड़ 31 डिसमिल भूमि में धान की खेती कर रहे हैं। इस वर्ष उन्हें खाद प्राप्त करने में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। समय पर खाद उपलब्ध होने से धान की फसल की बुवाई और अन्य कृषि कार्य सुचारु रूप से संपन्न हुए, जिससे वे संतुष्ट हैं। खेती के लिए उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से 60 हजार रुपये का ऋण समय पर प्राप्त हुआ। इस राशि से उन्होंने कृषि कार्यों की तैयारी सहजता से की और आवश्यक कृषि आदान की व्यवस्था कर सके। किसान धनेंद्र वैष्णव ने कहा, केसीसी के माध्यम से समय पर ऋण मिलने और बिना किसी परेशानी के खाद उपलब्ध होने से खेती करना आसान हुआ है। इसके लिए उन्होंने शासन की व्यवस्था के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
- -महिला एवं बाल विकास विभाग की संवेदनशील पहल से महिला हुई नशा मुक्त, बेटी के साथ सुरक्षित जीवन की ओर लौटीरायपुर । जीवन में अपनों को खोने का दुख किसी भी व्यक्ति को गहरे मानसिक आघात में डाल सकता है। ऐसे समय में यदि भावनात्मक और सामाजिक सहारा मिल जाए, तो जीवन को नई दिशा मिल सकती है। छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर ने ऐसी ही एक महिला को अवसाद और नशे की गिरफ्त से बाहर निकालकर उसे फिर से सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया। दंतेवाडा के आवंराभाटा क्षेत्र की रहने वाली प्रीति सिंह ने कुछ वर्ष पहले अपने पुत्र को बीमारी के कारण खो दिया था। इससे पहले उनके पति का भी निधन हो चुका था। लगातार मिले इन दुखद आघातों के कारण वह गहरे अवसाद में चली गईं और धीरे-धीरे शराब की आदी हो गईं। उन्होंने घर पर रहना छोड़ दिया और कई दिनों तक बिना भोजन के इधर-उधर भटकती रहीं।स्थानीय लोगों ने महिला की स्थिति की जानकारी महिला एवं बाल विकास विभाग को दी। इसके बाद सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम मौके पर पहुंची। महिला की मानसिक और नशे की स्थिति को देखते हुए 112 पुलिस सेवा की सहायता से उनका सुरक्षित रेस्क्यू किया गया और उन्हें सखी सेंटर लाया गया।सेंटर में उनकी नियमित देखभाल की गई। चिकित्सकों की निगरानी में उपचार कराया गया और लगातार काउंसलिंग के माध्यम से उनका मानसिक संबल बढ़ाया गया। काउंसलिंग के दौरान प्रीति सिंह ने बताया कि वह दूसरों के घरों में काम करके अपना जीवन चलाती थीं, लेकिन पति और पुत्र के निधन के बाद अकेलापन और तनाव उन्हें नशे की ओर ले गया।सखी सेंटर के काउंसलरों ने उन्हें स्वास्थ्य सुधार और सुरक्षित वातावरण में रहने की सलाह दी। हालांकि उन्होंने नारी निकेतन में रहने के बजाय अपनी बेटी के साथ रहने की इच्छा व्यक्त की।सखी सेंटर की टीम ने महिला की बेटी का पता लगाया और उसे अपनी मां की देखभाल के लिए प्रेरित किया। जिला कार्यक्रम अधिकारी और जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी के मार्गदर्शन में सखी सेंटर की टीम ने प्रीति सिंह को पूरी तरह स्वस्थ और नशा मुक्त होने के बाद सुरक्षित रूप से रायपुर में उनकी बेटी के पास पहुंचाया।अपनी बेटी के साथ सुरक्षित पहुंचने के बाद प्रीति सिंह ने महिला एवं बाल विकास विभाग और सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।यह कहानी दर्शाती है कि सखी वन स्टॉप सेंटर केवल संकट में फंसी महिलाओं को आश्रय ही नहीं देता, बल्कि उन्हें मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक सहयोग प्रदान कर जीवन की नई शुरुआत करने में भी मदद करता है। छत्तीसगढ़ शासन की यह पहल महिलाओं के संरक्षण, पुनर्वास और सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी और संवेदनशील प्रयास है।
- 5 अगस्त तक जमा किए जा सकते हैं आवेदनरायपुर। . राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए शहीद राजीव पाण्डे पुरस्कार, शहीद कौशल यादव पुरस्कार, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार, शहीद पंकज विक्रम सम्मान, शहीद विनोद चौबे सम्मान, मुख्यमंत्री ट्रॉफी, नगद राशि, प्रेरणा निधि और डाइट मनी के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। पात्र खिलाड़ी, प्रशिक्षक एवं निर्णायक आगामी 5 अगस्त तक निर्धारित प्रारूप में अपने आवेदन जमा कर सकते हैं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की वेबसाइटhttp//sportsyw.cg.gov.inपर आवेदन के प्रारूप उपलब्ध हैं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा प्रतिवर्ष खिलाडियों, प्रशिक्षकों एवं निर्णायकों को खेल पुरस्कार प्रदान कर राज्य खेल अलंकरण से सम्मानित किया जाता है। राज्य के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और निर्णायकों को ये पुरस्कार दिए जाते हैं। राज्य खेल अलंकरण के अंतर्गत सीनियर वर्ग के ऐसे खिलाड़ियों को शहीद राजीव पाण्डे पुरस्कार से अलंकृत किया जाता है, जिन्होंने राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में या राष्ट्रीय खेलों में पदक प्राप्त किया हो या अधिकृत अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व किया हो।इसी प्रकार जूनियर वर्ग के उन खिलाड़ियों को शहीद कौशल यादव पुरस्कार से अलंकृत किया जाता है, जिन्होंने जूनियर वर्ग के राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में पदक प्राप्त किया हो। विगत 5 वर्षों में चार बार सीनियर वर्ग में राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाले महिला व पुरूष खिलाड़ियों को शहीद पंकज विक्रम सम्मान से सम्मानित किया जाता है। प्रशिक्षकों एवं निर्णायकों को वीर हनुमान सिंह पुरस्कार से अलंकृत किया जाता है। खेल से जुड़े 55 वर्ष या अधिक उम्र के ऐसे व्यक्ति जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में भाग लिया हो, या राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक प्राप्त किया हो, या खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवा दी हो, उन्हें शहीद विनोद चौबे सम्मान से अलंकृत किया जाता है। इसी प्रकार सीनियर व जूनियर वर्ग में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक प्राप्त दल को मुख्यमंत्री ट्रॉफी प्रदान की जाती है। इन सभी पुरस्कारों के नियम छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित किए गए हैं। नियमों के अंतर्गत पात्रता रखने वाले आवेदकों का प्रावीण्यता के आधार पर पुरस्कार के लिए चयन किया जाएगा।शहीद राजीव पाण्डे पुरस्कार हेतु 3 लाख रुपए, शहीद कौशल यादव पुरस्कार हेतु 1 लाख 50 हजार रुपए, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार हेतु 1 लाख 50 हजार रुपए, शहीद विनोद चौबे सम्मान एवं पंकज विक्रम सम्मान हेतु 25-25 हजार रुपए के नगद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। सीनियर एवं जूनियर वर्ग के दलीय खेलों के लिए मुख्यमंत्री ट्रॉफी प्रदान की जाएगी। इसके अंतर्गत ऐसे दलीय खेल जिनमें सदस्यों की संख्या 4 है, उन्हें सीनियर वर्ग में 2 लाख रुपए एवं जूनियर वर्ग में 1 लाख रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। ऐसे दलीय खेल जिनमें सदस्यों की संख्या 4 से अधिक है, उनमें सीनियर वर्ग में 5 लाख रुपए तथा जूनियर वर्ग में 3 लाख रुपए का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार राशि के साथ ही मानपत्र, अलंकरण फलक, ब्लेजर एवं टाई भी प्रदान की जाएगी।खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक प्राप्त विजेताओं को प्रोत्साहनस्वरूप नगद राशि पुरस्कार अलंकरण प्रदान किया जाता है। इसके लिए वर्ष 2025-26 में (1 अप्रैल से 31 मार्च तक के 1 वर्ष) जिन खिलाड़ियों ने सब-जूनियर, जूनियर एवं सीनियर वर्ग की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक प्राप्त किया है, वे जिला कार्यालय एवं अपने खेल संघों से आवेदन फॉर्म प्राप्त कर निर्धारित तिथि तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।जिन खिलाड़ियों ने अधिकृत राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पदक प्राप्त किया हो, या राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व किया हो, वे खेलवृत्ति (डाइट मनी) के लिए आवेदन कर सकते हैं। खेलवृत्ति हेतु अधिकतम आयु 19 वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए। खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए खेल संघों द्वारा वर्ष 2025-26 में (1 अप्रैल से 31 मार्च तक के 1 वर्ष) अर्जित की गई उपलब्धि हेतु प्रेरणा निधि के आवेदन जिला कार्यालय या खेल संचालनालय में निर्धारित तिथि तक जमा किए जा सकते हैं। खेल पुरस्कारों, नगद राशि, खेलवृत्ति एवं प्रेरणा निधि हेतु आवेदन फॉर्म संचालनालय, खेल एवं युवा कल्याण या विभाग के सभी जिला कार्यालयों एवं राज्य खेल संघों से प्राप्त किए जा सकते हैं। शहीद पंकज विक्रम सम्मान के आवेदन संघों के माध्यम से नियमानुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत राज्य खेल संघों की अनुसंशा सहित प्राप्त किए जाएंगे। पंकज विक्रम सम्मान के आवेदन संचालनालय एवं जिला कार्यालय में खिलाड़ियों से सीधे स्वीकार नहीं किए जाएंगे।जिला कार्यालयों या संचालनालय में राज्य खेल संघों से अनुशंसा सहित आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 5 अगस्त 2026 तक कार्यालयीन समय तक निर्धारित की गई है। आवेदन पत्रों के प्रारूप मयसूचना विभाग की वेबसाईटhttps://sportsyw.cg.gov.in/cgsports/पर उपलब्ध है। पुरस्कार संबंधी आवेदन केवल ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। विभागीय वेबसाइटhttp//sportsyw.cg.gov.inपर अपलोड किए गए आवेदन ही मान्य होंगे।पुरस्कार नियमों के प्रावधानों के अनुरूप जिन खिलाड़ियों की मान्यता प्राप्त संघ द्वारा पुरस्कार के लिए अनुशंसा नहीं की गई है, पर तुलनात्मक रूप से उनकी उपलब्धि अधिक है, वे तत्संबंधी विवरण प्रस्तुत कर निर्धारित प्रारूप में अपने व्यक्तिगत विवरण की जानकारी 5 अगस्त 2026 तक कार्यालयीन समय में सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम, जी.ई. रोड, रायपुर स्थित खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालनालय या विभाग के जिला कार्यालयों में अपना आवेदन सीधे जमा कर सकते हैं।
- -दूरस्थ आदिवासी अंचल के छात्र ने बिना कोचिंग सेल्फ स्टडी से नीट परीक्षा में पाई सफलतारायपुर । छत्तीसगढ़ के दूरस्थ आदिवासी अंचल से एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी कभी भी बड़े सपनों की उड़ान को नहीं रोक सकती। बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकासखंड के ग्राम उदरसई निवासी किसान पुत्र रमन कुमार ने बिना किसी कोचिंग के केवल सेल्फ स्टडी के दम पर वर्ष 2026 की नीट परीक्षा में सफलता हासिल कर पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।एक साधारण कृषक परिवार से आने वाले रमन ने एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, कुसमी में अध्ययन करते हुए कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। उनकी इस उपलब्धि पर कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कलेक्ट्रेट में उन्हें सम्मानित कर उपहार भेंट किया तथा उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।रमन के माता-पिता खेती-किसानी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से होने के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और कक्षा 6वीं से ही एकलव्य विद्यालय में अध्ययन करते हुए नियमित मेहनत की। उन्होंने किसी भी निजी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया, बल्कि नियमित अध्ययन, अनुशासित दिनचर्या और आत्मविश्वास को अपनी सफलता का आधार बनाया।रमन के पिता श्री राजेश कुमार ने बताया कि उनके गांव से नीट परीक्षा में सफल होने वाले रमन पहले छात्र हैं। बेटे की उपलब्धि से पूरे गांव में उत्साह और गर्व का माहौल है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय रमन की मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग को दिया।सम्मान समारोह के दौरान रमन ने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता के लिए महंगी कोचिंग नहीं, बल्कि स्पष्ट लक्ष्य, सही रणनीति, नियमित अध्ययन और स्वयं पर विश्वास सबसे अधिक जरूरी है। उन्होंने युवाओं से समय का सदुपयोग करने, कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बनाने और पूरी लगन के साथ अपने सपनों को साकार करने का आह्वान किया।रमन कुमार की यह सफलता केवल एक छात्र की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में छिपी प्रतिभाओं की क्षमता का सशक्त प्रमाण है। उनकी कहानी आज प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को यह विश्वास दिला रही है कि सच्ची मेहनत और दृढ़ संकल्प से हर सपना संभव है।
- -उप मुख्यमंत्री ने वन महोत्सव में पर्यावरण संरक्षण की दिलाई शपथ-‘‘एक पेड़ मां के नाम’’ अभियान के तहत हुआ पौधरोपणरायपुर । वृक्ष धरती का श्रृंगार ही नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। जल संरक्षण, स्वच्छ पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पौधरोपण कर उसके संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज गुरु पूर्णिमा एवं अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा बिलासपुर के पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित वन महोत्सव में ये बातें कही। उन्होंने इस अवसर पर ‘‘एक पेड़ मां के नाम’’ अभियान के तहत पौधरोपण किया। श्री साव ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने वन विभाग के ‘‘पौधा तुंहर दुवार’’ वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस राशि का वितरण भी किया।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शिक्षा के मंदिर में वृक्षारोपण होना अत्यंत सुखद एवं प्रेरणादायी है। गुरु त्याग, समर्पण और ज्ञान के प्रतीक होते हैं। आज का दिन गुरुओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर है। आज अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस भी है, जो हमें वन एवं वन्य जीवों के संरक्षण के महत्व की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मानव शरीर अनेक अंगों से मिलकर बना है, उसी प्रकार पृथ्वी पर जीवन के संतुलन के लिए वृक्ष अत्यंत आवश्यक हैं। जल संरक्षण, स्वच्छ पर्यावरण और धरती को जीवनदायी बनाए रखने के लिए अधिक से अधिक वृक्ष लगाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से पौधरोपण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया ‘‘एक पेड़ मां के नाम’’ अभियान प्रकृति और मातृत्व के प्रति सम्मान का प्रतीक है। प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का दायित्व भी निभाना चाहिए।विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने वन महोत्सव में कहा कि वन मानव जीवन और प्रकृति के संतुलन का आधार हैं। वनों की अंधाधुंध कटाई के दुष्परिणाम आज सामने आ रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जन्मदिन एवं अन्य विशेष अवसरों पर एक पौधा अवश्य लगाए तथा उसके संरक्षण का संकल्प भी ले। सीसीएफ श्री मनोज पांडे ने वन महोत्सव का महत्व बताते हुए कहा कि वर्ष 1950 से प्रारंभ हुआ यह अभियान आज भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का प्रभावी माध्यम बना हुआ है।विधायक श्री दिलीप लहरिया, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, बिलासपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, बिल्हा जनपद पंचायत के अध्यक्ष श्री रामकुमार कौशिक, कुलपति डॉ. विरेन्द्र कुमार सारस्वत, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, नगर निगम के आयुक्त श्री प्रकाश कुमार सर्वे, वनमंडलाधिकारी श्री नीरज कुमार, श्री मोहित जायसवाल और श्री राजेश सिंह ठाकुर सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे।
- -वित्तीय साक्षरता कार्यशाला से बढ़ा आत्मविश्वास, 80 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सारायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप प्राप्त रूप से सशक्त बनाने के लिए छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीडि़त राहत एवं पुनर्वास नीति-2025 लागू की है। इस नीति के तहत वित्तीय सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर दिए जाते हैं। अधिक जानकारी के लिए जनसंपर्क छत्तीसगढ़ पर जा सकते हैं।पुनर्वास प्राप्त नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के तत्वावधान में बुधवार को पुनर्वास केंद्र में वित्तीय साक्षरता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में लगभग 80 पुनर्वासित युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को बैंकिंग सेवाओं, वित्तीय अधिकारों और सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनहितकारी योजनाओं की जानकारी देना था, ताकि वे सुरक्षित वित्तीय लेन-देन कर सकें और अपने भविष्य की बेहतर आर्थिक योजना बना सकें। कार्यक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक के सहायक महाप्रबंधक श्री सत्येंद्र राठौर, अग्रणी जिला अधिकारी श्री नवीन तिवारी, अग्रणी जिला प्रबंधक श्री मनीष कुमार कुशरो तथा श्री कार्तिक राम बाँधेकर उपस्थित रहे। श्री नवीन तिवारी ने कहा कि वित्तीय साक्षरता से व्यक्ति अपनी आय और बचत का बेहतर प्रबंधन कर सकता है। उन्होंने बैंकिंग लोकपाल व्यवस्था और उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी देते हुए प्रतिभागियों को वित्तीय मामलों में जागरूक रहने की सलाह दी। कार्यशाला में बैंक खाता खोलने और संचालन, बचत की आदत, केवाईसी प्रक्रिया, बैंक ऋण, जमाकर्ताओं और ऋणग्राहकों के अधिकार, बैंकिंग लोकपाल, चिटफंड कंपनियों से सावधानी, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों तथा साइबर वित्तीय सुरक्षा जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। श्री कार्तिक राम बाँधेकर ने प्रतिभागियों को केवल अधिकृत बैंकिंग संस्थानों के माध्यम से ही वित्तीय लेन-देन करने और किसी भी संस्था में निवेश से पहले उसके पंजीकरण की जानकारी अवश्य जांचने की सलाह दी।कार्यशाला के माध्यम से पुनर्वासित युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्हें बैंकिंग सेवाओं तथा सरकारी योजनाओं की महत्वपूर्ण जानकारी मिली। प्रशासन की यह पहल पुनर्वासित युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में समर्पित संस्था की ऑफिस इंचार्ज सुश्री सरिता गंधामी, काउंसलर श्री विकास सोनी, सुश्री सुनीता सोनी तथा अन्य सहयोगियों का सराहनीय योगदान रहा।
- -थाड़पाथर में 24.70 लाख रुपये की लागत से बने सर्वसुविधायुक्त महतारी सदन का लोकार्पणरायपुर । महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत थाड़पाथर में नवनिर्मित महतारी सदन का लोकार्पण किया। लगभग 24 लाख 70 हजार रुपये की लागत से निर्मित यह भवन ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और कौशल विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।महतारी सदन में विशाल हॉल, स्टोर, किचन, कार्यालय कक्ष तथा दुकान संचालन के लिए अलग स्थान उपलब्ध कराया गया है। भवन के पीछे सामुदायिक शौचालय का निर्माण भी किया गया है, जिससे यह परिसर महिलाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप सर्वसुविधायुक्त बनाया गया है।लोकार्पण समारोह में बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि महतारी सदन योजना छत्तीसगढ़ को महिला केन्द्रित विकास का मॉडल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि यह भवन केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि माताओं और बहनों के सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि "महतारी सदन केवल महिलाओं की तरक्की का आधार नहीं बनेगा, बल्कि पूरे प्रदेश की प्रगति का आधार बनेगा। यह महिलाओं की शक्ति, सम्मान और आत्मविश्वास को नई पहचान देगा तथा शिक्षा, कौशल और उद्यमिता के नए अवसर उपलब्ध कराएगा।"मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बताया कि राज्य सरकार का उद्देश्य महतारी सदनों को महिला स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इन केंद्रों में महिलाओं के लिए सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, हस्तशिल्प, कृषि-आधारित प्रशिक्षण, खाद्य प्रसंस्करण तथा डिजिटल साक्षरता जैसे कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे, ताकि ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार और उद्यमिता से जुड़ सकें।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम, सामाजिक रूप से सशक्त और तकनीकी रूप से जागरूक बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। महतारी सदन जैसी पहलें ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को बैठक, प्रशिक्षण, उत्पादन, विपणन और सामुदायिक नेतृत्व के लिए एक स्थायी मंच प्रदान करेंगी। स्थानीय महिलाओं ने महतारी सदन के निर्माण पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें समूह बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और आयवर्धन गतिविधियों के लिए एक सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध होगा, जिससे गांव में महिलाओं की सहभागिता और आत्मनिर्भरता को नई दिशा मिलेगी।
- रायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि महाविद्यालय, रायपुर की प्राध्यापिका, डॉ. राजश्री गायन तथा द्वितीय वर्ष की छात्रा एवं 8 सीजी गर्ल्स बटालियन (NCC) की कैडेट सुश्री रिद्धिमा अग्रवाल ने 25वीं छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय शूटिंग चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं। इस प्रतियोगिता का आयोजन 11 से 21 जुलाई 2026 तक माना स्थित शूटिंग रेंज, रायपुर में छत्तीसगढ़ प्रदेश राइफल एसोसिएशन के तत्वावधान में किया गया। प्रतियोगिता में प्रदेशभर के निशानेबाजों ने विभिन्न वर्गों में भाग लिया। डॉ. राजश्री गायन ने 10 मीटर एवं 25 मीटर एयर पिस्टल (महिला मास्टर्स वर्ग) में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त कर दो स्वर्ण पदक अर्जित किए। उनके इस उत्कृष्ट प्रदर्शन ने कॉलेज एवं विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया। इसी प्रकार कृषि महाविद्यालय, रायपुर की द्वितीय वर्ष की छात्रा एवं 8 सीजी गर्ल्स बटालियन (NCC) की कैडेट रिद्धिमा अग्रवाल ने 50 मीटर ओपन साइट राइफल महिला वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल ने विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी एवं शिक्षक शिक्षा के साथ-साथ खेल और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर संस्थान की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी महाविद्यालय के खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे।
- -रायपुर, दुर्ग सहित विभिन्न संभागों में बने परीक्षा केंद्ररायपुर / शीघ्रलेखन एवं मुद्रलेखन कम्प्यूटर कौशल परीक्षा परिषद, लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ द्वारा अगस्त 2026 में विभिन्न तिथियों पर मुद्रलेखन एवं कम्प्यूटर मुद्रलेखन कौशल परीक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है। परीक्षा के सफल संचालन के लिए रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा और बस्तर संभागों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।01 अगस्त 2026 को अंग्रेजी मुद्रलेखन (गति 10,000 की-डिप्रेशन प्रति घंटा) की परीक्षा 05 परीक्षा केंद्रों में आयोजित की जाएंगी। इसी प्रकार 02 अगस्त 2026 हिन्दी मुद्रलेखन (गति 10,000 की-डिप्रेशन प्रति घंटा) रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा एवं बस्तर में चयनित 05 परीक्षा केंद्रों में आयोजित की जाएंगी।08 अगस्त 2026 को अंग्रेजी कम्प्यूटर मुद्रलेखन (गति 8,000 की-डिप्रेशन प्रति घंटा) 08 परीक्षा केंद्रों में, 09 अगस्त 2026 को हिन्दी कम्प्यूटर मुद्रलेखन (गति 8,000 की-डिप्रेशन प्रति घंटा) 09 परीक्षा केंद्र एवं 16 अगस्त 2026 को बिलासपुर और सरगुजा संभाग में 01-01 परीक्षा केंद्रों में आयोजित की जाएंगी।परीक्षार्थियों को परिषद द्वारा आबंटित परीक्षा केंद्र पर ही निर्धारित बैच एवं समय पर उपस्थित होना अनिवार्य है। परीक्षा कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी परिषद की आधिकारिक वेबसाइट https://ctsp.cg.nic.in पर उपलब्ध है। प्रवेश पत्र डाउनलोड करने की सूचना परीक्षार्थियों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर SMS के माध्यम से भेज दी गई है। परीक्षा केंद्र में प्रवेश हेतु अभ्यर्थियों को मूल पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य होगा। पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड या मतदाता परिचय पत्र में से कोई भी एक मूल पहचान पत्र प्रस्तुत करना होगा। उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ ने सभी परीक्षार्थियों को प्रवेश पत्र में दिए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
- -मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्नरायपुर / छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने चार नए औद्योगिक पार्क (मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर) विकसित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आयोजित उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अंतर्गत औद्योगिक विकास योजना की राज्य स्तरीय समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी प्रदान की गई।समिति की दूसरी बैठक के दौरान प्रदेश के चार जिलों में औद्योगिक पार्क स्थापित करने के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई और उन्हें स्वीकृति दी गई। राजनांदगांव जिले में स्पेशल मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, पटेवा, धमतरी जिले में मल्टी सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, धूम्रपाली, जांजगीर-चांपा जिले में मल्टी सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, सलखान और बस्तर जिले में मल्टी सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, नियानार में औद्योगिक पार्क स्थापित करने के प्रस्तावों पर स्वीकृति दी गई। भारत औद्योगिक योजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी औद्योगिक विकास नीति के तहत प्रभावी रूप से लागू किया है। राज्य में इस योजना के सुचारू संचालन और विभिन्न परियोजनाओं को समयबद्ध मंजूरी देने के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है।बैठक में राज्य के प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें डॉ. रोहित यादव (सचिव, वित्त विभाग), श्री अंकित आनंद (सचिव, आवास एवं पर्यावरण विभाग), श्री रजत कुमार (सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग), डॉ. सारांश मित्तर (सचिव, ऊर्जा विभाग), सुश्री इफ्फत आरा (विशेष सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग) सहित अन्य संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी शामिल थे।
- रायपुर । मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में गृह विभाग की विशेष केन्द्रीय सहायता योजना के अंतर्गत राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की बैठक सम्पन्न हुई।बैठक में बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर एवं सुकमा जिले में विशेष केन्द्रीय सहायता योजना (एससीए) के तहत आधारभूत संरचनाओं, सड़क, पुल-पुलिया, भवन निर्माण कार्यों की कार्ययोजनाओं के अंतर्गत कार्यों की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा हुई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्वीकृत कार्यों को तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने जिलेवार कार्ययोजना के तहत स्वीकृत सड़क, पुल एवं पुलिया एवं अन्य निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से पूर्ण, अपूर्ण एवं प्रगतिरत कार्यों की विस्तार से जानकारी ली।मुख्य सचिव ने बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर एवं सुकमा के कलेक्टरों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए निर्माण कार्यों की स्थिति की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कलेक्टरों से निर्माण कार्यों को कार्ययोजना के तहत कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कलेक्टरों को निर्माण कार्यों की प्रगति की लगातार समीक्षा करने के निर्देश दिए है। अधिकारियों ने बताया कि बीजापुर जिले में सड़क के निर्माण के 28, नारायणपुर में 7, सुकमा में 9 कार्यों को पूर्ण कर लिया गया है। इसी तरह से पुल निर्माण के कांकेर में 7, सुकमा में 5 कार्यों को पूर्ण कर लिया गया है। अन्य स्वीकृत कार्यों को पूर्ण कराने का कार्य किया जा रहा है। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, पीसीसीएफ श्री अरूण पाण्डेय, गृह विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह सहित अन्य विभागों के अधिकारी एवं वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जिलों के कलेक्टर शामिल हुए।
- -चाँदनी बिहारपुर में जीवन दीप समिति की बैठक, गुणवत्तापूर्ण उपचार और पारदर्शी प्रबंधन पर दिया जोररायपुर । महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि अस्पतालों को केवल उपचार केंद्र नहीं, बल्कि जनविश्वास का मजबूत आधार बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने जीवन दीप समितियों में जनभागीदारी बढ़ाकर स्वास्थ्य संस्थानों को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाने पर विशेष बल दिया।सूरजपुर जिले के चाँदनी बिहारपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में आयोजित जीवन दीप समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने समिति के एजेंडानुसार विभिन्न बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में समिति के पदाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।बैठक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य (चिरायु) कार्यक्रम की समन्वय समिति के अंतर्गत स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों को प्रदान की गई स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। कैटेगरीवार बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, फॉलोअप तथा निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध उपलब्धियों का मूल्यांकन करते हुए आवश्यक सुधारात्मक सुझाव दिए गए।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि जीवन दीप समिति का गठन अस्पताल प्रबंधन में स्थानीय समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने निर्देश दिए कि समिति नियमानुसार वार्षिक बजट एवं आय-व्यय पत्रक तैयार कर सामान्य सभा से अनुमोदन प्राप्त करे, ताकि वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।उन्होंने बीमा क्लेम की शत-प्रतिशत वसूली, अस्पताल भूमि के समुचित प्रबंधन, मेडिकल अपशिष्ट के सुरक्षित निष्पादन तथा एम्बुलेंस एवं अन्य वाहनों के नियमित रखरखाव पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही मरीजों को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण दवाएं, नियमित उपचार तथा ब्लड बैंक जैसी आवश्यक सुविधाएं निर्बाध रूप से उपलब्ध कराने पर जोर दिया।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने समिति के सदस्यों से अस्पताल की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करने और आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण, संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा अस्पताल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने संबंधी विभिन्न सुझावों पर भी चर्चा की गई।अंत में मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सक्रिय सहभागिता से ही जीवन दीप समिति अपने उद्देश्यों में पूर्ण सफलता प्राप्त कर सकेगी और प्रदेश में बेहतर, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
- -28 ग्राम पंचायतों की 39 हजार से अधिक आबादी को मिलेगा सीधा लाभरायपुर। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होना जीवन रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर गर्भवती महिलाओं, दुर्घटना में घायल व्यक्तियों तथा गंभीर बीमारियों से पीडि़त मरीजों के लिए। नई एम्बुलेंस सेवा चांदनी बिहारपुर और आसपास के गांवों के लिए आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित स्वास्थ्य सहायता सुनिश्चित करेगी।प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ एवं सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आज सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से नई एम्बुलेंस को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया।लगभग 18 लाख रुपये की लागत से उपलब्ध कराई गई यह एम्बुलेंस अब क्षेत्र में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाएगी। इस पहल से 28 ग्राम पंचायतों में निवासरत 39 हजार 325 से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।अब तक चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के ग्रामीणों को गंभीर बीमारी, दुर्घटना या प्रसव जैसी आपात परिस्थितियों में इलाज के लिए दूरस्थ शहरों पर निर्भर रहना पड़ता था। कई बार समय पर वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नई एम्बुलेंस सेवा शुरू होने से अब मरीजों को त्वरित रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र या आवश्यकता पड़ने पर उच्च चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाना संभव हो सकेगा।मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन महिलाओं, बच्चों और आमजन के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है तथा प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह एम्बुलेंस ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करने के साथ-साथ लोगों में स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी सुदृढ़ करेगी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने इस सुविधा के लिए राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नई एम्बुलेंस से क्षेत्र के लोगों को समय पर उपचार मिलने में बड़ी सहायता मिलेगी और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति भरोसा और मजबूत होगा।
- -सूरजपुर में जिला स्तरीय युवा जागरूकता कार्यक्रम, 250 से अधिक प्रतिभागियों ने दी सशक्त सामाजिक चेतना की प्रस्तुति-लोकगीत, नुक्कड़ नाटक, चित्रकला और योग परिचर्चा के माध्यम से स्वस्थ एवं नशामुक्त जीवन का दिया गया संदेशरायपुर। विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने तथा युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से दूर रखने के उद्देश्य से ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत विजन’ एवं नशामुक्त भारत अभियान के अंतर्गत सूरजपुर जिले में जिला स्तरीय युवा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पीएमश्री स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, सूरजपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों से लगभग 250 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में सकारात्मक सोच, सामाजिक उत्तरदायित्व, आत्मसंयम तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना था। इस अवसर पर लोकगीत, लोकनृत्य, नुक्कड़ नाटक, कविता पाठ, भाषण, चित्रकला तथा ऑनलाइन नारा लेखन जैसी विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों और इससे दूर रहने के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों की सामाजिक संवेदनशीलता, जागरूकता और रचनात्मक प्रतिभा विशेष रूप से देखने को मिली। कार्यक्रम में श्री शंभु प्रसाद निषाद, श्री रामचन्द्र सोनी तथा श्री राम कुशल तिवारी निर्णायक मंडल के सदस्य रहे। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को कार्यक्रम के अंत में सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया।कार्यक्रम के दौरान आयोजित योग परिचर्चा में विशेषज्ञों ने युवाओं को बताया कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन, तनावमुक्त जीवन और नशे से दूरी बनाए रखने का प्रभावी माध्यम भी है। वक्ताओं ने कहा कि नशामुक्त युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं और जनजागरूकता के माध्यम से यह अभियान एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले सकता है। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती लता बेक, जिला मिशन समन्वयक श्री मनोज साहू, समाज कल्याण विभाग के उप संचालक श्री आलोक भवाल, उप संचालक श्री अजय सिंह, प्राचार्य श्री मनोज झा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों द्वारा नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा स्वयं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का सामूहिक संकल्प लेने के साथ हुआ।
- -स्पॉन संवर्धन योजना से हरिश्चंद्र जांगड़े ने गढ़ी सफलता की नई इबारतरायपुर। मत्स्य पालन विभाग द्वारा संचालित स्पॉन संवर्धन योजना आदिवासी और अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन के लिए निःशुल्क मत्स्य बीज (स्पॉन) और नर्सरी जाल प्रदान करती है। ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने और मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित राज्य शासन की स्पॉन संवर्धन योजना राज्य के मत्स्य पालकों के जीवन में समृद्धि का नया सवेरा ला रही है। धमतरी जिले के ग्राम पंचायत चरमुडिया निवासी श्री हरिश्चंद्र जांगड़े की सफलता की कहानी इस योजना की प्रभावशीलता का एक मिसाल योग्य उदाहरण है।हाल ही में शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र, सांकरा में श्री जांगड़े को 23 लाख स्पॉन जीरा आकार के मछली बीज वितरित किए गए। यह सहायता न केवल उनके व्यवसाय को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का माध्यम बनी है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए आत्मनिर्भरता की ओर भी अग्रसर कर रही है।मत्स्य पालन से लंबे समय से जुड़े हरिश्चंद्र जांगड़े बताते हैं कि पहले उन्हें निजी स्रोतों से महंगे दामों पर बीज खरीदना पड़ता था। इससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ जाती थी और प्रायः बीज की गुणवत्ता को लेकर भी अनिश्चितता बनी रहती थी। श्री हरिश्चंद्र जांगड़े ने कहा कि सही समय पर गुणवत्तायुक्त बीज मिलना ही मत्स्य पालन की सफलता की कुंजी है। स्पॉन संवर्धन योजना के माध्यम से अब हमें प्रमाणित और स्वस्थ मछली बीज सुलभता से मिल रहा है, जिससे लागत घटी है और मुनाफा बढ़ने की पूरी उम्मीद है।प्राप्त 23 लाख स्पॉन को वैज्ञानिक पद्धति से संवर्धित कर 'फिंगरलिंग' एवं गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि आसपास के अन्य मत्स्य पालकों को भी समय पर बीज प्राप्त हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के हितग्राहियों को मौसमी तालाबों में स्पॉन संवर्धन, तालाब सुधार एवं आवश्यक इनपुट्स के लिए 30 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं।मत्स्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य केवल बीज वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य उत्पादन का एक आत्मनिर्भर ढांचा तैयार करना है। इसके लिए हितग्राहियों को तकनीकी मार्गदर्शन और वैज्ञानिक प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। हरिश्चंद्र जांगड़े अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीकों के सहारे अपने व्यवसाय का विस्तार कर रहे हैं। वे क्षेत्र के अन्य युवाओं और किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनकर उभर रहे हैं। स्पॉन संवर्धन योजना यह साबित करती है कि सही समय पर मिली सही सरकारी मदद कैसे ग्रामीण आजीविका को सशक्त आधार प्रदान कर सकती है। धमतरी जिले का यह सफल प्रयास समृद्ध किसान-समृद्ध गाँव की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- -खैरा में गुरु सम्मान समारोह एवं महिला जागृति शिविर आयोजित-10 शिक्षकों, 10 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और महतारी वंदन योजना की 10 जागरूक माताओं का हुआ सम्मानरायपुर। प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि गुरु केवल विषयों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, संस्कार और जीवन मूल्यों का विकास भी करते हैं। गुरु व्यक्तित्व निर्माण के साथ-साथ समाज के उत्थान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह बात सूरजपुर जिले के चांदनी-बिहारपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत खैरा में आयोजित गुरु सम्मान समारोह एवं महिला जागृति शिविर को संबोधित करते हुए कही।गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में श्रीमती राजवाड़े ने सभी नागरिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व हमें अपने गुरुओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का योगदान राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है और उनके मार्गदर्शन से ही विद्यार्थियों का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित होता है।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने महतारी वंदन योजना को महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह देखकर प्रसन्नता होती है कि अनेक माताएं योजना से प्राप्त राशि का उपयोग अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा और भविष्य निर्माण में कर रही हैं। उन्होंने इसे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत बताया।उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि उनके समर्पित प्रयासों से ही शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुंच रहा है। कुपोषण नियंत्रण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बाल विकास से जुड़े कार्यों में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।कार्यक्रम में ओड़गी क्षेत्र के 10 उत्कृष्ट शिक्षकों को विद्यार्थियों को सकारात्मक दिशा देने और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसके साथ ही 10 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा महतारी वंदन योजना की राशि का सदुपयोग अपने बच्चों की शिक्षा में करने वाली 10 माताओं को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री शुभम बंसल ने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान उनके उत्साहवर्धन के लिए किया गया है। उन्होंने बताया कि जिले में कुपोषित बच्चों को बाल संदर्भ सेवाओं से लाभान्वित कराने तथा आंगनबाड़ी केंद्रों के नियमित संचालन में कार्यकर्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
- -60 हजार रुपये के ऋण से शुरू किया बकरी पालन, आज आत्मनिर्भर बनकर कमा रही हैं बेहतर आयअम्बिकापुर । राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर जिले की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। बिहान योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को मिल रहे आर्थिक सहयोग और आजीविका गतिविधियों के विस्तार से महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम अमादरहा, पोस्ट सखोली की निवासी श्रीमती देवंती राजवाड़े की सफलता की कहानी अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।श्रीमती देवंती राजवाड़े "माँ महामाया स्व-सहायता समूह" की अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि बिहान योजना के अंतर्गत उन्हें ₹60,000 का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि का उन्होंने पूरी योजना और समझदारी के साथ बकरी पालन व्यवसाय में निवेश किया। शुरुआत में उन्होंने केवल दो बकरियां खरीदी थीं। मेहनत, नियमित देखभाल और सही प्रबंधन के परिणामस्वरूप आज उनके पास 10 से 12 बकरियों का समूह तैयार हो चुका है।उन्होंने बताया कि समय-समय पर बकरों की बिक्री से उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है। प्रत्येक वर्ष दो से तीन बकरे बेचकर वे अपनी पारिवारिक आय में वृद्धि कर रही हैं। व्यवसाय से हुई आमदनी के बल पर उन्होंने बिहान योजना के तहत लिया गया ₹60,000 का पूरा ऋण समय पर चुका दिया। इसके बाद भी उनका बकरी पालन व्यवसाय लगातार आगे बढ़ रहा है और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है।देवंती राजवाड़े ने कहा कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले जहां वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, वहीं अब वे स्वयं निर्णय ले रही हैं, घर से बाहर निकलकर नई जानकारियां प्राप्त कर रही हैं तथा आजीविका के नए अवसरों से जुड़ रही हैं। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ उनका सामाजिक आत्मविश्वास भी बढ़ा है। बेहतर आय अर्जित करने के कारण वे आज "लखपति दीदी" की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।उन्होंने बताया कि बिहान योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। आज वे अपने पैरों पर खड़ी हैं और अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उनकी सफलता से गांव की अन्य महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित हो रही हैं। श्रीमती देवंती राजवाड़े ने अपनी सफलता का श्रेय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) को देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का सही लाभ मिलने से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और सम्मानजनक आजीविका प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।
- -घर के नजदीक मिली ऑनलाइन विवाह प्रमाण-पत्र की सुविधागौरेला-पेंड्रा-मरवाही। शासन की मंशा के अनुरूप ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक शासकीय सेवाओं को सरल, सुगम एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में सेवा-सेतु पोर्टल प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। इस पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न शासकीय सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें समय, श्रम एवं अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिल रही है। सेवा-सेतु ऑपरेटर श्री खिलावन सिंह पोट्टाम ने मरवाही विकासखंड के ग्राम सिवनी (सिलवारीटोला) के आवेदक सुषमा को सेवा-सेतु केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन विवाह प्रमाण-पत्र की सुविधा उपलब्ध कराई। इसके परिणामस्वरूप हितग्राही को शासकीय कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी और घर के निकट ही सहज एवं पारदर्शी तरीके से सेवा प्राप्त हो गई। हितग्राही ने बताया कि पहले ऐसे कार्यों के लिए कई बार कार्यालय जाना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की अतिरिक्त आवश्यकता होती थी। सेवा-सेतु केंद्र के माध्यम से यह प्रक्रिया सरल और सुविधाजनक बन गई है। उन्होंने शासन की इस पहल तथा सेवा-सेतु केंद्र के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए इसे ग्रामीणों के लिए अत्यंत उपयोगी व्यवस्था बताया।
- बीजापुर ।जिले के उसूर विकासखंड अंतर्गत ग्राम रामपुर (ग्राम पंचायत पुजारी कांकेर) में नए मोबाइल नेटवर्क टॉवर का सफलतापूर्वक संचालन प्रारंभ हो गया है। वर्षों से कमजोर मोबाइल नेटवर्क और सीमित संचार सुविधाओं का सामना कर रहे ग्रामीणों के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। टॉवर के चालू होने से अब रामपुर एवं आसपास के गांवों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं अधिक सुदृढ़ एवं सुचारु रूप से उपलब्ध होंगी।बीजापुर जिला मुख्यालय से लगभग 55 से 60 किलोमीटर दूर स्थित इस दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में अब संचार व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। मोबाइल टॉवर की स्थापना से ग्रामीणों को मोबाइल कॉल, इंटरनेट उपयोग एवं डिजिटल सेवाओं का लाभ आसानी से प्राप्त होगा, जिससे दैनिक जीवन और अधिक सुविधाजनक बनेगा।नई नेटवर्क सुविधा का लाभ विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं, किसानों, व्यापारियों एवं आम नागरिकों को मिलेगा। अब ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, सरकारी पोर्टलों पर आवेदन, ई-गवर्नेंस सेवाओं तथा अन्य इंटरनेट आधारित सुविधाओं का उपयोग पहले की अपेक्षा अधिक सरल और तेज़ होगा।बेहतर नेटवर्क उपलब्ध होने से आपातकालीन परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं से संपर्क स्थापित करना भी आसान होगा। साथ ही ग्रामीण अपने परिजनों एवं अन्य स्थानों पर रहने वाले लोगों से निर्बाध रूप से संवाद कर सकेंगे। मजबूत मोबाइल कनेक्टिविटी से क्षेत्र में डिजिटल समावेशन को बढ़ावा मिलेगा और शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ भी समय पर ग्रामीणों तक पहुंचेगा।स्थानीय ग्रामीणों ने मोबाइल टॉवर के संचालन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे गांव के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना है कि लंबे समय से बेहतर नेटवर्क की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जो अब पूरी हो गई है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और संचार के क्षेत्र में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त होगा। ग्राम रामपुर में स्थापित यह मोबाइल टॉवर केवल संचार सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। डिजिटल इंडिया अभियान के तहत दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों तक आधुनिक संचार सुविधाएं पहुंचाने की यह पहल ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित होगी।















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