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- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री की देश के नागरिकों से विदेश यात्रा न करने की अपील के बाद अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लोगों को प्रदेश के दर्शनीय स्थलों की सैर के लिए लुभाएगी। प्रदेश के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों पर लोगों की आमद बढ़ाने के लिए योगी सरकार विजिट माय स्टेट अभियान चलाएगी। इसके साथ ही प्रदेश सरकार हेरिटेज स्थलों पर डेस्टिनेशन वेडिंग बढ़ाने पर जोर देगी। पर्यटन विभाग ने लोगों को लुभाने के लिए दो महीने तक पर्यटकों को संग्रहालयों में निशुल्क प्रवेश देने का भी फैसला किया है।उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा है कि वाराणसी, आगरा, मथुरा, लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर और अयोध्या जैसे स्थलों के लिए आकर्षक टूर पैकेज बनाए जाएं। प्रदेश में सबसे ज्यादा पर्यटक इन्हीं स्थानों पर आते हैं। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को ‘आपदा में अवसर’ बताते हुए पर्यटन क्षेत्र को नई संभावनाओं से जोड़ने पर बल दिया। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित बैठक में राज्य के हेरिटेज स्थलों, ईको साइट्स, किलों समेत अन्य स्थलों को डेस्टिनेशन वेडिंग के रूप में बढ़ावा देने तथा ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान शुरू करने के निर्देश दिए।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘पर्यटन विभाग ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से काम करेगा। उन्होंने ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान के तहत संग्रहालयों में आगामी दो माह तक निःशुल्क प्रवेश सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। साथ ही, वाराणसी, आगरा, मथुरा, लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर और अयोध्या जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के लिए आकर्षक और अनुभवपरक टूर पैकेज तैयार करने हेतु टूर ऑपरेटर्स के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए।मंत्री जयवीर सिंह ने पर्यटन विभाग द्वारा संचालित राही पर्यटक आवासों में पर्यटकों को 25 प्रतिशत तक की रियायत प्रदान कर घरेलू पर्यटन को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासी विदेश यात्राओं के बजाय उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक धरोहरों का भ्रमण करें। साथ ही, पर्यटकों को गोशालाओं, प्राचीन मंदिरों एवं प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कराने हेतु विशेष पर्यटन व्यवस्थाएं विकसित किए जाने पर भी जोर दिया गया, जिससे आध्यात्मिक पर्यटन के साथ ग्रामीण और सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई गति मिल सके। साथ ही, पर्यटन महानिदेशक को निर्देश दिए कि वे रेस्टोरेंट एसोसिएशन से समन्वय स्थापित कर पर्यटकों को भोजन एवं अन्य सेवाओं पर विशेष छूट उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर कार्य करें।पर्यटन मंत्री ने स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, कि नागरिक, वेडिंग प्लानर एवं आयोजनकर्ता डेस्टिनेशन वेडिंग सहित अन्य पारिवारिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए प्रदेश के भीतर उपलब्ध विरासत स्थलों को प्राथमिकता दें। उन्होंने पर्यटन विभाग को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के हेरिटेज स्थल, प्राचीन किले, ईको टूरिज्म साइट्स और सांस्कृतिक परिसर डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। मंत्री ने मिर्जापुर स्थित ऐतिहासिक चुनार किला एवं राजधानी लखनऊ की छतर मंजिल को शीघ्र तैयार करने के भी निर्देश दिए।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद त्रिपुरा सरकार ने राज्य के 50 प्रतिशत ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू कर दिया है। सरकार का कहना है कि इससे ईंधन की बचत होगी और सरकारी खर्च भी कम होगा। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद आया है, जिसमें उन्होंने लोगों और संस्थानों से ईंधन बचाने और जहां संभव हो, वहां घर से काम करने की सलाह दी थी।
त्रिपुरा सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सभी विभागाध्यक्ष यह सुनिश्चित करेंगे कि हर दिन केवल 50 प्रतिशत ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारी ही दफ्तर आएं। बाकी कर्मचारियों को घर से काम करना होगा। इसके लिए साप्ताहिक रोस्टर तैयार किया जाएगा, ताकि कर्मचारी बारी-बारी से ऑफिस आएं। सरकार ने यह भी कहा है कि पहले हफ्ते में उन कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए जो दफ्तर के पास रहते हैं, ताकि आने-जाने में कम ईंधन खर्च हो।जो कर्मचारी घर से काम करेंगे, उन्हें फोन और ऑनलाइन माध्यमों से हर समय उपलब्ध रहना होगा। जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत दफ्तर भी बुलाया जा सकता है। सरकार ने यह निर्देश भी दिया है कि यही व्यवस्था सरकारी उपक्रमों, स्थानीय निकायों और अन्य स्वायत्त संस्थाओं में भी लागू की जाए।हालांकि यह आदेश जरूरी और आपातकालीन सेवाओं में लगे कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा। यानी अस्पताल, बिजली, पानी और अन्य आवश्यक सेवाएं पहले की तरह चलती रहेंगी। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और अगले निर्देश तक जारी रहेगा।दक्षिण त्रिपुरा जिला प्रशासन में इस व्यवस्था पर काम भी शुरू हो चुका है। माना जा रहा है कि अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो दूसरे राज्य भी इसी तरह के कदम उठा सकते हैं। कोरोना काल के बाद वर्क फ्रॉम होम का तरीका पहले ही काफी लोकप्रिय हो चुका है और अब इसे ईंधन बचत और खर्च कम करने के उपाय के तौर पर भी देखा जा रहा है। -
नई दिल्ली। भारत में इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी वार्षिक बिक्री में वित्त वर्ष 35 तक बढ़कर 35-40 प्रतिशत हो सकती है, जो कि फिलहाल करीब 7 प्रतिशत के आसपास है। इस दौरान पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ईवी बसों की हिस्सेदारी बढ़कर 85 प्रतिशत से अधिक हो सकती है। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
केपीएमजी की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की वार्षिक बिक्री 35,000 से 50,000 यूनिट्स की है और अब यह इलेक्ट्रिफिकेशन के नए दौरान में प्रवेश कर रहा है। सरकारी खरीद और इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश इस सेक्टर के अगले ग्रोथ फैक्टर्स होंगे।रिपोर्ट में आगे कहा गया कि भारत में यात्रियों द्वारा तय की गई कुल दूरी का लगभग 57 प्रतिशत बसों द्वारा तय किया जाता है, ऐसे में इस क्षेत्र का इलेक्ट्रिफिकेशन देश की क्लीन मोबिलिटी और कार्बन उत्सर्जन कम करने की महत्वाकांक्षाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।केपीएमजी इंडिया के ऑटोमोटिव पार्टनर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लीड रोहन राव ने कहा,“भारत में इलेक्ट्रिक बसों की ओर बदलाव अब केवल नीतिगत पहल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक मोबिलिटी इकोसिस्टम के लिए एक संरचनात्मक परिवर्तन का अवसर बन रहा है। सरकारी खरीद कार्यक्रमों, लागत में सुधार और इन्फ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश के समर्थन से सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण ने पहले ही मजबूत गति पकड़ ली है।”उन्होंने बताया कि आगे चलकर, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंसिंग इनोवेशन, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार और परिचालन दक्षता को संयोजित करने वाले एक स्केलेबल इकोसिस्टम के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि सार्वजनिक और निजी परिवहन दोनों क्षेत्रों में सतत दीर्घकालिक विकास को समर्थन मिल सके।रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में लगभग 62,000 ई-बस टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें से लगभग 46,000 बसें विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत आवंटित की गई हैं। मार्च 2026 तक भारतीय सड़कों पर लगभग 16,300 इलेक्ट्रिक बसें चल रही थीं, जो मजबूत गति और तैनाती संबंधी चुनौतियों दोनों को दर्शाती हैं। भारत में वर्तमान ई-बस तैनाती का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सरकार द्वारा संचालित टेंडरों और सार्वजनिक परिवहन उपक्रमों के माध्यम से हुआ है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि केंद्र और राज्य के नेतृत्व वाली पहलों के माध्यम से वित्त वर्ष 2030 तक लगभग 40,000 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों के लिए टेंडर जारी किए जाने की उम्मीद है।( -
नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के बाद, राज्य के सूचना एवं मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश और अन्य मंत्रियों ने भी पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के मद्देनजर ईंधन संरक्षण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद अपने काफिलों को कम करने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री नायडू के पुत्र और मंत्री नारा लोकेश ने गुरुवार को अपने सुरक्षा कर्मचारियों को अपने काफिले में वाहनों की संख्या में 50 प्रतिशत की कमी करने का निर्देश दिया। इस फैसले का मतलब यह होगा कि उनके काफिले में केवल दो वाहन होंगे। बुधवार को पुलिस महानिदेशक हरीश कुमार गुप्ता और अन्य अधिकारियों के साथ हुई बैठक के दौरान मुख्यमंत्री नायडू ने उन्हें जिला दौरों के दौरान अपने काफिले में वाहनों की संख्या आधी करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य वीआईपी को आधिकारिक कार्यक्रमों और दौरों के दौरान वाहनों का उपयोग कम से कम करने का निर्देश भी दिया।मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने भी इसी तरह की घोषणा की। उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मियों को अपने आधिकारिक काफिले में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत कम करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी फैसला किया है कि जिलों के दौरे के दौरान उनके काफिले में वाहनों की संख्या आधी कर दी जाएगी।उपमुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के मद्देनजर प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों को सलाह दी कि वे ऊर्जा संसाधनों का समझदारी से उपयोग करें और वे स्वयं भी इनका पालन कर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने राज्य में भी इसी भावना को कायम रखने का संकल्प लिया है।पवन कल्याण के अलावा, केंद्रीय संचार राज्यमंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने भी ऐसा ही किया है। उन्होंने भी अपनी आधिकारिक यात्राओं के दौरान प्रोटोकॉल अधिकारियों और वाहनों की संख्या कम करने का निर्णय लिया है।बुधवार को एक जनसभा में मुख्यमंत्री नायडू ने फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बड़े काफिलों में यात्रा करना आजकल सभी के लिए एक प्रमुख चलन बन गया है।उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधियों को अपने काफिलों का आकार कम करके एक उदाहरण पेश करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को भी कम किया जाना चाहिए और यह विवेकपूर्ण और उद्देश्यपूर्ण होनी चाहिए।मुख्यमंत्री की अपील का जवाब देते हुए कई राज्य मंत्रियों ने भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर दी है। एक उदाहरण पेश करते हुए, सिंचाई मंत्री निम्मला रामनैदु गुरुवार को बिना किसी सुरक्षा वाहन के मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर आईं। मंत्री अनीता, संध्या रानी, पी. केशव, कोल्लू रविंद्र, सविता और अन्य मंत्री भी कम वाहनों के साथ वहां पहुंचे।इस बीच, प्रधानमंत्री द्वारा की गई अपील के अनुरूप और अधिक मितव्ययिता उपायों पर चर्चा और निर्णय लेने के लिए कैबिनेट की बैठक निर्धारित है। मंत्रिमंडल आंध्र प्रदेश राज्य की संसाधन संरक्षण और आत्मनिर्भरता संबंधी कार्य योजना पर चर्चा करेगा। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा प्रस्तावित इस कार्य योजना में ईंधन संरक्षण, सार्वजनिक परिवहन, ऊर्जा दक्षता, घरेलू पर्यटन, प्राकृतिक कृषि, स्वदेशी प्रोत्साहन, व्यवहार परिवर्तन पहल और संबंधित क्षेत्रीय हस्तक्षेपों से जुड़े उपाय शामिल हैं। -
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आधारित किताब ‘अपनापन’ लिखी है। इस पुस्तक का विमोचन 26 मई को दिल्ली में किया जाएगा। इसकी जानकारी केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साझा की। उन्होंने इस किताब को 35 वर्षों के अनुभवों का दस्तावेज बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से लोग पीएम मोदी के व्यक्तित्व को करीब से जान सकेंगे।
कृषि मंत्री ने एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि तीन दशकों से अधिक के सार्वजनिक जीवन में पीएम मोदी के साथ विभिन्न भूमिकाओं और दायित्वों में काम करते हुए उन्हें उनके व्यक्तित्व, नेतृत्व, सेवा, संगठन, सुशासन और राष्ट्र-समर्पण को करीब से समझने का अवसर मिला। इन्हीं अनुभवों, भावनाओं और जीवन मूल्यों को उन्होंने अपनी पुस्तक ‘अपनापन’ में संजोने का प्रयास किया है।उन्होंने बताया कि पुस्तक का लोकार्पण 26 मई को सुबह 10:30 बजे एनएएससी कॉम्प्लेक्स, पूसा, नई दिल्ली में किया जाएगा। उनका मानना है कि यह पुस्तक खासकर युवाओं को सेवा, संवेदना, राष्ट्रभक्ति और जनकल्याण के विचारों के साथ विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देगी।वीडियो संदेश में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कभी-कभी जिंदगी में इंसान किसी ऐसे व्यक्ति के साथ काम करता है, जिसे दुनिया एक नेता के रूप में देखती है, लेकिन वह उसमें एक साधक, कर्मयोगी और असाधारण इंसान को देखता है। उन्होंने कहा कि यह किताब लिखना सिर्फ एक साहित्यिक कार्य नहीं, बल्कि उन 35 वर्षों को शब्दों में पिरोने का प्रयास है, जिन्हें उन्होंने पीएम मोदी के साथ बेहद करीब से जिया है।उन्होंने कहा कि लोग नरेंद्र मोदी को मंच से भाषण देते हुए देखते हैं, लेकिन उन्होंने उनमें उस व्यक्ति को देखा है, जो दिन-रात काम करने के बाद भी अगली सुबह देश के लिए उसी ऊर्जा के साथ खड़ा होता है।1991 की एकता यात्रा का भी किया जिक्रशिवराज सिंह चौहान ने 1991 की एकता यात्रा को याद करते हुए कहा कि उस समय कई लोग इसे सिर्फ एक राजनीतिक मार्च मान रहे थे, लेकिन नरेंद्र मोदी ने इसे राजनीतिक जागरूकता का अभियान बना दिया। उनकी सोच थी कि तिरंगा केवल लाल चौक तक नहीं, बल्कि देश के हर युवा के दिल तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि तभी उन्हें एहसास हुआ कि नेतृत्व केवल भाषणों से नहीं, बल्कि तपस्या, सुशासन और लोगों के करीब रहने से आता है।युवाओं और कार्यकर्ताओं को प्रेरित करेगी किताबकिताब के उद्देश्य पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये अनुभव केवल यादों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, इसलिए उन्हें पुस्तक का रूप दिया गया। उन्होंने कहा कि इस किताब में कार्यकर्ता और संगठन से जुड़े लोग देख सकेंगे कि कैसे लोगों को साथ लेकर बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।उन्होंने कहा कि युवा समझेंगे कि लोगों की समस्याओं को समझकर और कड़ी मेहनत के जरिए बदलाव लाया जा सकता है। वहीं सामाजिक और राजनीतिक बदलाव की इच्छा रखने वाले लोगों को छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े परिवर्तन लाने की प्रेरणा मिलेगी।अमेजन और फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध होगी पुस्तकशिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अगर इस किताब को पढ़ने के बाद किसी को यह महसूस होता है कि देश बदलने के लिए बड़े पद की नहीं, बल्कि बड़े संकल्प की जरूरत होती है, तो उनका प्रयास सफल माना जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पुस्तक ‘अपनापन’ अमेजन और फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध होगी। -
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की शुरुआत करने की घोषणा की। आयोग ने कहा कि यह एक बड़ा देशव्यापी अभियान होगा, जिसका उद्देश्य मतदाता सूचियों की सटीकता और पारदर्शिता को मजबूत करना है।
आयोग के अनुसार, एसआईआर के तीसरे चरण का कार्यक्रम वर्तमान में जनगणना के तहत चल रहे मकानों की सूचीकरण प्रक्रिया में लगी साझा फील्ड मशीनरी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है। तीसरे चरण की शुरुआत के साथ एसआईआर प्रक्रिया पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगी, हालांकि इसमें हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और लद्दाख शामिल नहीं होंगे।आयोग ने कहा कि इन तीन क्षेत्रों का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। यह निर्णय जनगणना के दूसरे चरण के पूरा होने और ऊंचाई वाले तथा बर्फ से ढके क्षेत्रों में मौसम संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे इस संशोधन अभियान के तहत 3.94 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) गणना चरण में लगभग 36.73 करोड़ मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। इन बीएलओ की मदद विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा नामित लगभग 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) करेंगे।ईसीआई ने एसआईआर को एक ‘सहभागी और पारदर्शी प्रक्रिया’ बताया है, जिसमें कई स्तरों पर मतदाता, राजनीतिक दल और चुनाव अधिकारी शामिल होते हैं। राजनीतिक भागीदारी के महत्व पर जोर देते हुए आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे संशोधन प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता, समावेशिता और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के लिए हर मतदान केंद्र पर बूथ स्तर के एजेंट नियुक्त करें।ज्ञानेश कुमार ने 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर के तीसरे चरण की शुरुआत के अवसर पर कहा, “मैं सभी मतदाताओं से अपील करता हूं कि वे एसआईआर के तीसरे चरण में पूरे उत्साह के साथ भाग लें और अपने गणना फॉर्म भरें। एसआईआर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में केवल पात्र मतदाता ही शामिल हों और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम न रहे।”आयोग ने आगे कहा कि 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए एसआईआर अभ्यास के पहले दो चरणों में संबंधित एसआईआर आदेश जारी होने की तारीख तक लगभग 59 करोड़ मतदाता शामिल थे। इसमें कहा गया है कि इन चरणों के दौरान प्रक्रिया के अलग-अलग स्तरों पर 6.3 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी और 9.2 लाख बूथ लेवल एजेंट को तैनात किया गया था।अधिकारियों ने बताया कि इस गहन संशोधन अभियान का उद्देश्य डुप्लीकेट, स्थानांतरित, मृत या अयोग्य नामों की पहचान करके मतदाता सूची को सही और त्रुटि-मुक्त बनाना है। साथ ही सभी पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाना भी इसका लक्ष्य है। -
नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने क्वांटम भौतिकी में एक ऐसे आश्चर्यजनक व्यवहार का पता लगाया है, जो यह दर्शाता है कि कभी-कभी विपरीत अवस्थाओं में तैयार किए गए दो कण, समान अवस्थाओं वाले कणों की तुलना में अधिक जानकारी दे सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज भविष्य में क्वांटम उपकरणों के परीक्षण और क्वांटम क्रिप्टोग्राफी तकनीकों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है।
क्वांटम भौतिकी में किसी प्रणाली के सभी गुणों को एक साथ पूरी सटीकता से जान पाना संभव नहीं होता। इस सीमा को बोहर का पूरकता सिद्धांत कहा जाता है। यह सिद्धांत बताता है कि कुछ क्वांटम गुणों को एक साथ पूरी परिशुद्धता के साथ मापा नहीं जा सकता।इसके प्रसिद्ध उदाहरणों में डबल-स्लिट प्रयोग में पथ सूचना और व्यतिकरण दृश्यता के बीच संतुलन, या स्थिति और संवेग जैसी गैर-परिवर्तनशील प्रेक्षणीयताओं का संयुक्त मापन शामिल है।एस. एन. बोस राष्ट्रीय बुनियादी विज्ञान केंद्र, बालागढ़ विजॉय कृष्ण महाविद्यालय और भारतीय सांख्यिकी संस्थान के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में यह जांच की कि क्वांटम कणों के युग्म दिए जाने पर उनके स्पिन की विभिन्न विशेषताओं को कितनी सटीकता से मापा जा सकता है।इन युग्मों को दो अलग-अलग तरीकों से तैयार किया गया। पहले प्रकार में दोनों स्पिन एक ही दिशा में रखे गए, जिसे समानांतर अवस्था कहा गया, जबकि दूसरे प्रकार में दोनों स्पिन एक-दूसरे के विपरीत दिशा में थे, जिसे विपरीत समानांतर अवस्था कहा गया है।सामान्य रूप से यह माना जा सकता है कि समान अवस्थाओं की दो प्रतियां अधिक उपयोगी होंगी, क्योंकि वे अधिक जानकारी देंगी। लेकिन क्वांटम यांत्रिकी में परिणाम इसके उलट सामने आए।शोधकर्ताओं ने पाया कि विपरीत समानांतर स्पिन तीन परस्पर असंगत स्पिन घटकों की एक साथ अधिक सटीक भविष्यवाणी करने में सक्षम हैं। वहीं समानांतर स्पिन के साथ ऐसा करना मूलभूत रूप से संभव नहीं है।यह निष्कर्ष क्वांटम सिद्धांत की बुनियादी समझ को चुनौती देता है। शास्त्रीय भौतिकी में कई गुणों का मापन केवल तकनीकी सीमाओं तक सीमित माना जाता है, लेकिन क्वांटम प्रणालियां अपनी आंतरिक सीमाएं तय करती हैं।यह अध्ययन हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत और बोहर के पूरकता सिद्धांत जैसे मूलभूत सिद्धांतों से भी जुड़ा हुआ है। शोध के अनुसार, यदि क्वांटम अवस्थाओं को विशेष तरीके से तैयार किया जाए, तो कुछ सीमाओं को अप्रत्याशित ढंग से पार किया जा सकता है।यह शोध याकिर अहारोनोव और उनके सहयोगियों द्वारा प्रस्तावित प्रसिद्ध क्वांटम पहेली ‘मीन किंग्स प्रॉब्लम’ से भी संबंधित है।शोधकर्ताओं का कहना है कि विपरीत समानांतर कॉन्फ़िगरेशन क्वांटम उपकरणों के अधिक प्रभावी परीक्षण और विश्लेषण में उपयोगी हो सकता है। यह भविष्य में विश्वसनीय क्वांटम तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।इसके अलावा, यह खोज क्वांटम क्रिप्टोग्राफी प्रोटोकॉल के लिए भी उपयोगी हो सकती है, जहां सीमित क्वांटम संसाधनों से अधिकतम जानकारी प्राप्त करना आवश्यक होता है।अध्ययन यह भी दिखाता है कि क्वांटम भौतिकी में अधिक समरूपता हमेशा अधिक शक्ति का संकेत नहीं होती। कई बार विपरीत अवस्थाएं ऐसी क्षमताएं प्रदान करती हैं, जो समान प्रणालियां नहीं दे पातीं। शोधकर्ताओं के अनुसार, क्वांटम दुनिया में विपरीत चीजें केवल आकर्षित ही नहीं करतीं, बल्कि कई बार वे अधिक जानकारी भी उजागर कर सकती हैं। -
नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को संत ज्ञानेश्वर मौली महाराज पालकी मार्ग का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अपने काफिले के बजाय बस से यात्रा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत संबंधी अपील का समर्थन किया।
निरीक्षण यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि वह लंबे समय से वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 से वह इथेनॉल, मेथनॉल, बायोडीजल, एलएनजी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे ईंधनों पर लगातार काम कर रहे हैं।गडकरी ने आगे कहा कि उन्होंने देश का पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर, इलेक्ट्रिक कार, ट्रक और बस लॉन्च की है। अब वह कृषि क्षेत्र के लिए मशीनरी और ट्रैक्टर भी लॉन्च कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इससे करीब 2 लाख करोड़ रुपए की नई अर्थव्यवस्था तैयार होगी और भारत धीरे-धीरे पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।केंद्रीय मंत्री ने कहा, “हमारा लक्ष्य प्रदूषण को खत्म करना और देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। यह सपना धीरे-धीरे साकार हो रहा है। लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक संकट को देखते हुए हमें पेट्रोल और डीजल की बचत करनी चाहिए। इसी वजह से प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की है।”उन्होंने कहा कि उन्होंने भी अपनी व्यवस्थाओं में कटौती की है और इसी कारण वह बस से यात्रा कर रहे हैं। उनका कहना था कि ईंधन बचत केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईंधन आपूर्ति पर पड़ रहे असर को देखते हुए देशवासियों से पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल सोच-समझकर करने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने लोगों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने, खाने के तेल का कम इस्तेमाल करने और अनावश्यक विदेश यात्राएं टालने की भी सलाह दी थी।प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद कई राज्यों में सरकारी स्तर पर ईंधन बचत को लेकर कदम उठाए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में मुख्यमंत्रियों ने अपने काफिलों में वाहनों की संख्या कम करने के निर्देश दिए हैं।वहीं, योगी आदित्यनाथ समेत कई बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है। वहीं केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल ने भी एस्कॉर्ट वाहन न लेने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने काफिले में शामिल गाड़ियों की संख्या लगभग आधी कर दी है। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर दी है।बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि इसके लिए नए वाहन खरीदने के बजाय मौजूदा संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाए।मिडिल ईस्ट संकट के गहराने के बाद केंद्र सरकार के कई मंत्रालयों ने भी ईंधन बचत से जुड़े उपायों पर अमल शुरू कर दिया है। सरकार का फोकस अब वैकल्पिक ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और कम ईंधन खपत वाले परिवहन साधनों को बढ़ावा देने पर है। नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा था कि वह प्रधानमंत्री मोदी की अपील का पालन करते हुए अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाएंगे और अधिक से अधिक बस से सफर करेंगे। -
नई दिल्ली। आखिरकार लंबे समय तक ऊहापोह के बाद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने केरलम के मुख्यमंत्री के चेहरे का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने इस पद के लिए वीडी सतीशन का नाम फाइनल किया है। वो प्रदेश के 13वें मुख्यमंत्री होंगे। पार्टी में लोग इसे नई पीढ़ी के औपचारिक आगमन के रूप में देख रहे हैं। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने यह ऐलान दिल्ली में किया, जिसमें प्रमुख रूप से दीपा दासमुंशी, मुकुल वासनिक और अजय माकन शामिल रहें। यह फैसला, जिसे काफी समय तक टाला गया था, कांग्रेस ने अपने खास नाटकीय अंदाज़ में घोषित किया। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल अंतिम दौर की चर्चाओं के दौरान दिल्ली में मौजूद थे। नेतृत्व का फैसला बताने से पहले उन्हें राहुल गांधी के साथ बैठक के लिए बुलाया गया। इस बीच, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला को राहुल गांधी का निजी फोन आया, जिसमें उन्हें बताया गया कि अब फैसला हो चुका है और सतीशन को मंजूरी मिल गई है।
सतीशन के लिए यह पद उनकी राजनीतिक यात्रा की बड़ी उपलब्धि है। यह फैसला केरल में लंबे समय से चली आ रही गुटबाज़ी और चुनावी हार के बाद कांग्रेस के खुद को नए तरीके से तैयार करने की कोशिश को भी दिखाता है। कोच्चि जिले में जन्मे सतीशन इस महीने के आखिर में 62 साल के हो जाएंगे। उन्होंने अपनी पहचान गुटबाज़ी की राजनीति से नहीं बल्कि विधानसभा में अच्छे प्रदर्शन और संगठन में लगातार काम करके बनाई है।पेशे से वकील सतीशन ने 2001 में परावुर से विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के तेज़ और प्रभावशाली वक्ताओं में अपनी पहचान बनाई। आंकड़ों, तीखे व्यंग्य और दमदार बोलने के अंदाज़ के कारण सतीशन वामपंथी दलों के लिए बड़ी चुनौती बन गए। दिलचस्प बात यह है कि उन्हें सबसे बड़ी सफलता ऐसे समय में मिली जब कांग्रेस अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही थी।2021 के विधानसभा चुनाव में यूडीएफ की बड़ी हार के बाद सतीशन को अचानक विपक्ष का नेता चुना गया। शुरुआत में कई लोगों ने उन्हें अंदरूनी खींचतान के बीच एक समझौता उम्मीदवार माना था। सतीशन ने इस जिम्मेदारी को अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने का बड़ा मौका बना लिया। सोने की तस्करी का मामला हो, एआई कैमरे से जुड़े आरोप हों या कानून-व्यवस्था को लेकर विजयन सरकार पर लगातार हमले सतीशन ने खुद को केरल में वामपंथी सरकार के खिलाफ सबसे प्रमुख और आक्रामक नेता के रूप में स्थापित किया।कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के विपरीत सतीशन को कभी भी पूरी तरह से ‘ए’ या ‘आई’ गुटों में से किसी का हिस्सा नहीं माना गया, जिन्होंने दशकों तक केरल की कांग्रेस राजनीति पर दबदबा बनाए रखा। इस तरह की अपेक्षाकृत स्वतंत्र स्थिति ने उन्हें उन युवा विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं का समर्थन दिलाने में मदद की, जो नेतृत्व में बदलाव चाहते थे।पार्टी के भीतर उनके आलोचक उन पर फैसले लेने की शक्ति अपने पास रखने और कभी-कभी जल्दबाजी में राजनीतिक फैसले लेने का आरोप लगाते हैं। फिर भी, उनके विरोधी भी मानते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व में इस समय सतीशन का जनता से सबसे मजबूत जुड़ाव है। सतीशन गुरुवार सुबह अपने परिवार के साथ राज्य की राजधानी के लिए रवाना हुए और विपक्ष के नेता के रूप में पिछले पांच वर्षों से जिस सरकारी आवास में रह रहे थे, वहां पहुंचे।एआईसीसी की घोषणा होने से कुछ मिनट पहले ही वह वहां पहुंच गए। इसके बाद वे बिना कुछ बोले, अपने सरकारी आवास पर जमा हुई बड़ी भीड़ के बीच से होते हुए आगे बढ़ गए। अब जब वह विपक्ष की बेंचों से हटकर मुख्यमंत्री बनने की तैयारी कर रहे हैं, तो सतीशन के सामने केवल सरकार चलाने से कहीं बड़ी जिम्मेदारियां और उम्मीदें हैं।उनका उदय कांग्रेस पार्टी के उस प्रयास को दिखाता है, जिसमें वह केरल की राजनीति की जिम्मेदारी एक युवा, अधिक सक्रिय और मीडिया को समझने वाली पीढ़ी को सौंपना चाहती है, जो मौजूदा मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की मजबूत राजनीतिक विरासत का मुकाबला करने के लिए तैयार है। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईंधन से चलने वाले वाहनों के उपयोग में कमी लाने और मितव्ययिता उपाय अपनाने की अपील करने के कुछ दिन बाद अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या काफी कम कर दी है। प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इसी तरह का कदम उठाया है और अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या कम कर दी है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री की हालिया घरेलू यात्राओं के दौरान उनके काफिले में शामिल वाहनों की संख्या कम की गई है। हालांकि, विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक सुरक्षा प्रबंधों को बरकरार रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, हैदराबाद में रविवार को मितव्ययिता उपायों के संबंध में दिए गए प्रधानमंत्री के भाषण के तुरंत बाद गुजरात और असम में उनके काफिले में कारों की संख्या को कम कर दिया गया। सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री ने जहां संभव हो, बिना नए वाहन खरीदे अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने और राज्य के मंत्रियों के काफिले में चलने वाले वाहनों की संख्या तत्काल आधी करने का निर्देश दिया है। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया है कि ईंधन की खपत कम करें और वैश्विक हालात को देखते हुए सोने की अनावश्यक खरीद से बचें। उन्होंने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक तथा विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिवों के साथ बैठक में निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले में तत्काल 50 प्रतिशत तक कमी की जाए। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटा दी।
सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री यादव ने मंत्रिपरिषद के सदस्यों से राष्ट्रीय हित में पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील की और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री के काफिले में अब पहले के 13 वाहनों की तुलना में केवल आठ वाहन शामिल होंगे।
अधिकारी ने बताया कि उनके दौरों के दौरान वाहन रैलियां भी आयोजित नहीं की जाएंगी। सभी मंत्री अपनी यात्राओं के दौरान न्यूनतम वाहनों का उपयोग करेंगे। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी मंत्रियों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सरकारी वाहनों की संख्या में कमी लाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा, ''मैं सभी दिल्लीवासियों से आग्रह करती हूं कि वे भी प्रधानमंत्री जी के इस आह्वान का पालन करते हुए ऊर्जा संरक्षण के इस राष्ट्रीय प्रयास में सहभागी बनें।'' राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उनके काफिले में वाहनों की संख्या कम से कम रखने का निर्देश दिया है, जिसके बाद बुधवार को उनके काफिले में सिर्फ पांच वाहन दिखाई दिए। आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार शर्मा ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या न्यूनतम रखने का निर्देश दिया है और अधिकारियों को अनावश्यक वाहनों का उपयोग न करने को कहा गया है। महाराष्ट्र सरकार ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिया है कि आधिकारिक यात्रा के लिए विमान का उपयोग करने से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अनुमति ली जाए। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने घोषणा की कि वह गुजरात में हेलीकॉप्टर और विमानों से यात्रा करने के बजाय ट्रेनों, राज्य परिवहन की बसों और सार्वजनिक परिवहन के संसाधनों से यात्रा करेंगे और ईंधन की बचत के लिए उनके सरकारी वाहनों के काफिले को भी छोटा किया जाएगा। गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने प्रधानमंत्री की अपील के बाद अपनी अमेरिका की प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी है। बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने ऐलान किया कि उन्होंने अपने काफिले के वाहनों की संख्या स्वयं कम करके आधी कर दी है और जरूरी होने पर ही आधिकारिक यात्रा करेंगे। बिहार की दो अन्य मंत्रियों- लेशी सिंह और शीला मंडल ने भी घोषणा की है कि वे व्यक्तिगत रूप से मितव्ययिता के कदम उठाएंगी। पश्चिम एशिया संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तेलंगाना इकाई द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए मितव्ययिता अपनाने पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री ने पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, शहरों में मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कार पूलिंग अपनाने, इलेक्ट्रिक वाहनों के अधिक इस्तेमाल, पार्सल ढुलाई के लिए रेलवे सेवाओं का उपयोग करने और 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम करने) को बढ़ावा देने का सुझाव दिया था।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शीर्ष पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि आरएसएस हिंदू राष्ट्र का निर्माण नहीं कर रहा है क्योंकि भारत हमेशा से ही एक हिंदू राष्ट्र रहा है। उन्होंने कहा कि गैर-हिंदू अलग नहीं हैं, क्योंकि सभी के पूर्वज और डीएनए एक ही है। आरएसएस के सरकार्यवाह (महासचिव) होसबाले ने कहा, ''यहां ब्रिटिश राज था, है ना? ब्रिटिश राज था... तब भी, यह एक हिंदू राष्ट्र था। यह ब्रिटिश राष्ट्र नहीं था।'' उन्होंने कहा कि देश में कई धार्मिक समूह हैं, जिन्हें अक्सर अल्पसंख्यक के रूप में वर्णित किया जाता है और उनमें से कोई भी द्वितीय श्रेणी का नागरिक नहीं है। होसबाले ने कहा, ''आरएसएस के भीतर भी ऐसे कई लोग हैं जो इन धार्मिक समूहों से आते हैं और संघ स्वयंसेवक हैं। वे हमारे लिए दिखावे की वस्तु नहीं हैं।'' उनसे पूछा गया कि जब आरएसएस हिंदुत्व या हिंदू राष्ट्र की बात करता है तो संघ अल्पसंख्यकों को कैसे आश्वस्त करेगा कि वे भारत में सुरक्षित हैं। होसबाले ने कहा कि आरएसएस की स्थापना के 100 साल बाद से ये सवाल अनगिनत बार पूछे जा चुके हैं। उन्होंने कहा, ''जब लोग कहते हैं कि डर है, तो मैं पूछता हूं कि क्या हुआ है? क्या मुसलमानों की संख्या कम हो गई है?'' उन्होंने कहा, ''क्या उन्हें भागना पड़ा? क्या उनके साथ द्वितीय श्रेणी के नागरिकों जैसा व्यवहार किया जाता है?'' होसबाले ने अपनी बात को पुष्ट करने के लिए महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे भाजपा शासित राज्यों का उदाहरण दिया। उन्होंने पूछा कि क्या सरकारी योजनाएं अन्य धर्मों के लोगों तक नहीं पहुंच रही हैं?
मुस्लिम और विपक्षी नेताओं का हालांकि कहना है कि आरएसएस समर्थित भाजपा के 2014 में सत्ता में आने के बाद से अल्पसंख्यक समुदाय खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। वे इसके लिए कथित गो-तस्करी के मामलों में भीड़ द्वारा पीट-पीट कर की गई हत्या के मामलों, धर्मांतरण, 'लव जिहाद' और रोजमर्रा के भेदभाव के आरोपों का हवाला देते हैं। होसबाले ने कहा कि इन सवालों को बार-बार उठाने से अल्पसंख्यक समुदायों में अनावश्यक रूप से भय पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा, ''जब राष्ट्रीयता एक है और हमारे पूर्वज एक हैं, तो हम उन्हें अलग नहीं मानते। जो लोग मानते हैं कि दुनिया एक परिवार है, वे दूसरे धर्म के लोगों से कैसे भेदभाव कर सकते हैं? बिल्कुल नहीं। वह भी सिर्फ इसलिए कि कोई दूसरे धर्म का पालन करता है।'' होसबाले ने कहा कि आरएसएस अल्पसंख्यक समुदायों के नेताओं के साथ निरंतर संवाद करता रहता है। उन्होंने कहा, ''आरएसएस में हम कहते हैं कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यक की यह अवधारणा ही ठोस आधार पर टिकी नहीं है। जब हम कहते हैं कि हम सब एक हैं, एक ही लोग हैं, एक ही वंश के हैं, एक ही डीएनए के हैं, तो अल्पसंख्यक होने का सवाल ही नहीं उठता।'' उन्होंने कहा, ''पूजा का तरीका बदलने मात्र से आपकी राष्ट्रीयता नहीं बदल जाती। हमारा यही मानना है।'' आरएसएस नेता ने कहा कि राष्ट्र-राज्य की अवधारणा पर भारत के शिक्षाविदों और बौद्धिक जगत के बीच व्यापक बहस और समझ होनी चाहिए। - गुवाहाटी । कांग्रेस नेता पवन खेड़ा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा द्वारा दायर मामलों के संबंध में पूछताछ के लिए बुधवार को राज्य पुलिस की अपराध शाखा के समक्ष पेश हुए। यह मामले ऐसे समय में दर्ज किए गए हैं जब खेड़ा ने आरोप लगाया था कि शर्मा के पास कई पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं।खेड़ा ने अपराध शाखा कार्यालय में प्रवेश करने से पहले पत्रकारों से कहा कि वह जांच में सहयोग कर रहे हैं।उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पुलिस ने तलब किया था, जिसके बाद मैं यहां आया हूं। हम कानून और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, इसलिए मैं कानूनी प्रक्रिया के अनुसार यहां उपस्थित हूं।’’खेड़ा ने कहा कि पूछताछ पूरी होने के बाद वह मीडिया से विस्तार से बात करेंगे।शर्मा ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के विभिन्न प्रावधानों के तहत गुवाहाटी अपराध शाखा पुलिस थाने में खेड़ा और अन्य के खिलाफ आपराधिक शिकायतें दर्ज कराई थीं।कांग्रेस नेता के खिलाफ लगाए गए आरोपों में चुनाव के संबंध में झूठे बयान देना, धोखाधड़ी, जालसाजी, शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना और मानहानि शामिल हैं।खेड़ा ने पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसने उन्हें सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी। हालांकि, असम पुलिस ने इस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।उच्चतम न्यायालय ने ट्रांजिट अग्रिम जमानत आदेश पर रोक लगा दी थी और खेड़ा को गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अपील करने का निर्देश दिया।इसके बाद गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद खेड़ा ने फिर से उच्चतम न्यायालय का रुख किया।बाद में उच्चतम न्यायालय ने उन्हें अग्रिम जमानत दी। इस बीच, गुवाहाटी की एक स्थानीय अदालत ने इससे पहले कांग्रेस नेता के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने की असम पुलिस की याचिका को खारिज कर दिया था।
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नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव का बुधवार को यहां निधन हो गया। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक, 38 वर्षीय प्रतीक यादव की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें सुबह तड़के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
प्रमुख राजनीतिक परिवार से होने के बावजूद फिटनेस प्रेमी प्रतीक यादव सक्रिय राजनीति से दूर रहे। हालांकि उनकी पत्नी अपर्णा बिष्ट यादव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो चुकी हैं और वर्तमान में राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं।समाजवादी पार्टी ने X पर एक संक्षिप्त पोस्ट में कहा, “श्री प्रतीक यादव जी का निधन अत्यंत हृदयविदारक है! ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। भावभीनी श्रद्धांजलि!” प्रतीक यादव, मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे। प्रतीक के साले अमन बिष्ट ने फोन पर PTI से कहा, “मैं अभी अस्पताल में हूं। यह समय बात करने का नहीं है।”उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतीक यादव के “अचानक निधन” को “अत्यंत दुखद” बताया और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।योगी आदित्यनाथ ने X पर लिखा, “उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, ‘पद्म विभूषण’ स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव जी के पुत्र एवं उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती अपर्णा यादव जी के पति श्री प्रतीक यादव जी का आकस्मिक निधन अत्यंत दुखद है। भावपूर्ण श्रद्धांजलि।”उन्होंने आगे लिखा, “शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिजनों को यह असीम दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!”प्रतीक यादव के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया। सपा नेता और प्रतीक यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने इस निधन को “अत्यंत दुखद” बताया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।भाजपा नेताओं में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और उन्हें इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। वहीं, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस खबर को “बेहद दुखद” बताया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी शोकग्रस्त परिवार के साथ एकजुटता व्यक्त की। पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने इस घटना को हृदयविदारक और दुखद बताया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने यादव परिवार के सदस्य के ‘अचानक निधन’ पर शोक जताया।उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान, जो अपर्णा यादव से मिलने उनके आवास पहुंचीं, ने इस असमय मृत्यु को ‘बहुत दुखद’ बताया। मौत की परिस्थितियों को लेकर मीडिया के सवालों पर चौहान ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आजकल कम उम्र में हार्ट अटैक से मौत की खबरें लगातार सुनने को मिल रही हैं।”सिविल अस्पताल में मौजूद कुछ युवकों, जो शव के साथ दिखाई दिए, ने बताया कि वे सुबह करीब 5:10 बजे प्रतीक यादव को अस्पताल लेकर पहुंचे थे और करीब 6 बजे उन्हें आधिकारिक रूप से मृत घोषित कर दिया गया।प्रतीक यादव पशु प्रेमी के तौर पर भी जाने जाते थे और कई पशु आश्रयों का समर्थन करते थे। इस साल 19 जनवरी को प्रतीक यादव ने खुलकर अपनी पत्नी अपर्णा बिष्ट यादव पर परिवारिक रिश्ते खराब करने का आरोप लगाया था और कहा था कि वह जल्द से जल्द उनसे तलाक लेंगे।अपने इंस्टाग्राम अकाउंट (iamprateekyadav) पर लंबी पोस्ट में उन्होंने अपर्णा यादव को “परिवार तोड़ने वाली” बताया था और उन पर “स्वार्थी” तथा “प्रसिद्धि और प्रभाव की भूखी” होने का आरोप लगाया था। हालांकि 28 जनवरी को उन्होंने पत्नी के साथ सुलह की घोषणा की।इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में प्रतीक यादव ने कहा, “19 जनवरी को मेरी पत्नी अपर्णा के साथ गंभीर विवाद हुआ था, जिसके बाद मैंने सोशल मीडिया पर दो पोस्ट किए थे। लेकिन अब बातचीत के बाद मामला आपसी सहमति से सुलझ गया है और हमारे बीच अब कोई विवाद नहीं है।” उन्होंने वीडियो के कैप्शन में लिखा था, “Haters, go to hell.” एक अन्य पोस्ट में उन्होंने अपर्णा यादव के साथ अपना वीडियो भी साझा किया था। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डीजल-पेट्रोल की बचत के लिए की गई अपील का बिहार में असर दिखने लगा है। बिहार में मुख्यमंत्री फ्लीट में वाहनों की संख्या कम अथवा न्यूनतम करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंत्रियों, निगम और बोर्ड के अध्यक्षों से भी वाहनों की संख्या कम करने की अपील की है। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद सोशल मीडिया के जरिए दी है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीजल-पेट्रोल की बचत के लिए वाहनों के कम से कम उपयोग करने की अपील की है। इसे लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। मुख्यमंत्री कारकेड में वाहनों की संख्या कम अथवा न्यूनतम करने का निर्णय लिया है।”उन्होंने बताया है कि मंत्री गण, निगम बोर्ड के अध्यक्ष गण व सदस्य गण, सभी पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से बिना अतिरिक्त वाहन के सार्वजनिक कार्यक्रमों में आने की अपील की गई है। राज्य की जनता से मेट्रो, बस, ऑटो अथवा अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट के प्रयोग पर जोर देने का भी आग्रह किया गया है।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य सरकार के सभी विभागों को सभी प्रकार के कॉन्फ्रेंस अथवा सरकारी बैठकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है। इसके अलावा प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में संचालित होने वाले कैंटीन में पाम ऑयल के कम से कम प्रयोग का निर्देश दिया गया है।उन्होंने सरकारी और निजी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति को बढ़ावा देने की सलाह दी है। इसके अलावा सप्ताह में एक दिन सभी लोगों से ‘नो व्हीकल डे’ के आयोजन का आग्रह किया गया है।बता दें कि पीएम मोदी ने हैदराबाद में जनसभा को संबोधित करते हुए देशवासियों से अपील की था कि वे पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल जितना हो सके कम करें और मेट्रो का इस्तेमाल करें। इलेक्ट्रिक बसों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें और कार पूलिंग को बढ़ावा दें। ( -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) द्वारा एमआईएल (मिहान इंडिया लिमिटेड) को पट्टे पर दी गई भूमि की लीज अवधि को 06.08.2039 से आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है, ताकि एमआईएल वाणिज्यिक संचालन तिथि (सीओडी) से 30 वर्षों के लिए नागपुर हवाई अड्डे का लाइसेंस रियायतग्राही, अर्थात् जीएमआर नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (जीएनआईएएल) को दे सके।
यह नागपुर हवाई अड्डे के लिए नागपुर में मल्टी-मोडल इंटरनेशनल कार्गो हब और एयरपोर्ट (मिहान) परियोजना के तहत क्षेत्रीय विमानन केंद्र बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।वर्ष 2009 में एएआई और महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (एमएडीसी) द्वारा 49:51 के इक्विटी अनुपात में एक संयुक्त उद्यम कंपनी (जेवीसी) - एमआईएल का गठन किया गया था। हालांकि एएआई की हवाई अड्डे की संपत्तियां वर्ष 2009 में हवाई अड्डे के संचालन के लिए एमआईएल को हस्तांतरित कर दी गई थीं, लेकिन भूमि सीमांकन संबंधी मुद्दों के कारण लीज डीड में देरी हुई। बाद में, एएआई की भूमि 06.08.2039 तक एमआईएल को लीज पर दी गई है।वर्ष 2016 में एमआईएल ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत हवाई अड्डे के संचालन के लिए एक भागीदार की पहचान हेतु वैश्विक निविदा जारी की। जीएमआर एयरपोर्ट्स लिमिटेड (जीएएल) 5.76 प्रतिशत के राजस्व हिस्से के साथ उच्चतम बोलीदाता के रूप में उभरी। बाद में इसे संशोधित करके सकल राजस्व का 14.49 प्रतिशत कर दिया गया। इसके बाद, एमआईएल ने मार्च 2020 में बोली प्रक्रिया रद्द कर दी। जीएएल ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में इस रद्द करने को चुनौती दी। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी जीएएल के पक्ष में फैसला सुनाया। 27 सितंबर, 2024 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार, एमआईएल ने 8 अक्टूबर, 2024 को अन्य संयुक्त उद्यम, जीएमआर नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (जीएनआईएएल) के साथ रियायत समझौते पर हस्ताक्षर किए।नागपुर हवाई अड्डे के एक नए युग की शुरुआत:एएआई द्वारा एमआईएल को लीज पर दी गई भूमि की अवधि 06.08.2039 के बाद बढ़ाए जाने से, यह जीएनआईएएल की 30 वर्षीय रियायत अवधि के साथ समाप्त हो जाएगी, जिससे हवाई अड्डे को दूसरे संयुक्त उद्यम-जीएनआईएएल को सौंपने का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे नागपुर हवाई अड्डे के विकास और अवसंरचना उन्नति के एक नए युग की शुरुआत होने की उम्मीद है। निजी क्षेत्र की दक्षता और सरकारी निगरानी के साथ, हवाई अड्डे में महत्वपूर्ण निवेश, आधुनिकीकरण और बेहतर यात्री एवं माल ढुलाई सेवाओं की संभावना है - जो सरकार की विमानन क्षेत्र में मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की परिकल्पना का हिस्सा है।जीएनआईएएल नागपुर के डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को विश्व स्तरीय सुविधा में बदलने का कार्य शुरू करेगा। चरणबद्ध विकास के तहत इसकी अंतिम क्षमता 30 मिलियन यात्रियों को प्रतिवर्ष संभालने की होगी, जिससे यह मध्य भारत के प्रमुख हवाई अड्डों में से एक बन जाएगा। यह परिवर्तन न केवल विदर्भ क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा, बल्कि इसके आर्थिक बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करेगा। इससे माल ढुलाई क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। -
नई दिल्ली। बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के डीए में वृद्धि की है। बुधवार को बिहार कैबिनेट की बैठक में इसकी मंजूरी दी गई है। बिहार में अब सप्तम केंद्रीय पुनरीक्षित वेतन संरचना के तहत कर्मियों को 58 प्रतिशत के बजाय 60 प्रतिशत डीए मिलेगा।
वहीं, छठे वेतनमान वालों का भत्ता 257 प्रतिशत से बढ़ाकर 262 प्रतिशत और पांचवे वेतनमान वालों का 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 483 प्रतिशत कर दिया गया है। यह वृद्धि 1 जनवरी 2026 के प्रभाव से लागू होगी। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में कुल 19 प्रस्तावों की मंजूरी दी गई। बैठक के बाद एक अधिकारी ने बताया कि बैठक में अपराध एवं साम्प्रदायिक रूप से अत्यंत संवेदनशील राज्य के पांच जिलों पूर्वी चम्पारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली एवं सिवान जिले में पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण के कुल पाँच पदों के सृजन की भी स्वीकृति दी गई है।बैठक में औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के लिए वैशाली जिले में 1243.45 एकड़ रैयती भूमि का आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार, पटना के माध्यम से अधिग्रहण के लिए प्रक्रियाधीन भूमि में से 100 एकड़ भूमि पर राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान की स्थापना के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार को निःशुल्क हस्तांतरण की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई। भूमि चयन पर अंतिम निर्णय के लिए निदेशक परिषद, आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार, बिहार, पटना को प्राधिकृत किया गया है। सरकार ने मुख्यमंत्री बिहार पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना को भी मंजूरी दे दी है। योजना का मुख्य उद्देश्य वाहनजनित प्रदूषण कम करना और वर्ष 2030 तक नए वाहनों की कुल बिक्री में कम-से-कम 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है।यह वैश्विक “ईवी 30एट30” अभियान को भी सहयोग देगा। सरकार का मानना है कि योजना से लोगों में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति स्वीकार्यता बढ़ेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की सुविधा उपलब्ध होगी और वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक वाहनों के जरिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। राज्य सरकार ने बिहार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए “बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन” के तहत सिंगापुर की संस्था “ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क” का चयन किया गया है।सरकार के अनुसार, इस संस्था की मदद से राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पारिस्थितिकी तंत्र, कौशल विकास और नवाचार को मजबूत किया जाएगा। राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पारिस्थितिकी तंत्र, कौशल विकास एवं नवाचार को सुदृढ़ करने के लिए ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क, सिंगापुर को नामांकन के आधार पर चयन किया गया है तथा आर्यभट्ट दृष्टि परियोजना के क्रियान्वयन के लिए कुल 209 करोड़ की राशि की प्रशासनिक स्वीकृति भी बैठक में दी गई है। -
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने पश्चिम बंगाल में ‘विधानसभा चुनाव- 2021’ के बाद हुई हिंसा से संबंधित मामलों को फिर से खोलने का आदेश जारी किया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बुधवार को बताया कि पशु तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, “चुनाव के बाद हुई हिंसा की जांच को लेकर गंभीर शिकायतें हैं। विधानसभा चुनाव 2021 में हुई राजनीतिक हिंसा के पुराने मामलों की समीक्षा करके उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।” आदेश में आगे कहा गया है, “2021 के चुनाव के बाद हुई हिंसा से संबंधित मामलों में प्रस्तुत अंतिम रिपोर्टों (एफआरटी) की सावधानीपूर्वक समीक्षा की जानी चाहिए और जहां आवश्यक हो, कार्रवाई की जानी चाहिए। जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही होने पर मामलों को फिर से खोलकर गहन जांच की जानी चाहिए।”सरकार ने कहा कि जहां विशिष्ट मामले दर्ज नहीं किए गए हैं, वहां नए मामले दर्ज किए जा सकते हैं। इसके साथ ही उन मामलों में भी जहां प्रारंभिक जांच में संज्ञेय अपराध का पता चलता है। आदेश में कहा गया है, “एसपी, सीपी को इस प्रक्रिया की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करनी होगी। आरोप पत्र दाखिल करने के बाद इन मामलों की जांच और मुकदमे की नियमित रूप से निगरानी की जानी चाहिए।”2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद कई जगहों पर हिंसा हुई थी। तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल में भाजपा को हराकर सत्ता बरकरार रखी थी। भाजपा 2021 के विधानसभा चुनाव में 77 सीटें जीतकर बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी बनी थी। भाजपा ने 2016 में 3 सीटों से पांच वर्षों में 77 सीटों तक का सफर तय किया था।सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं पर भाजपा से जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा करने का आरोप लगा था। हत्या, दुष्कर्म, तोड़फोड़ और भाजपा कार्यकर्ताओं और उनके परिवार के सदस्यों पर हमले की घटनाएं हुईं। मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय तक पहुंचा, जिसने हत्या और दुष्कर्म की गंभीर घटनाओं में सीबीआई जांच के आदेश दिए। हालांकि, कई मामले अभी भी चल रहे हैं और पीड़ित न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में सरकार परिवर्तन के बाद ऐसे मामलों को फिर से खोलने की पहल की गई है। -
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के नए और नौवें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार दोपहर दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा में शपथ ली। भवानीपुर से विधायक के रूप में शपथ लेकर अधिकारी ने स्पष्ट कर दिया कि वे पूर्वी मिदनापुर जिले के नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से विधायक पद छोड़ देंगे। हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भवानीपुर के साथ ही नंदीग्राम से भी वे विधायक चुने गए थे।
भवानीपुर में इस बार सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार और तत्कालीन मुख्यमंत्री को 15,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराया। नंदीग्राम में अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस के पबित्रा कर को 9,000 से अधिक वोटों से हराया। यह दूसरी बार था जब अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया। 2021 में अधिकारी नंदीग्राम से ममता बनर्जी को लगभग 2,000 वोटों के अंतर से हराकर निर्वाचित हुए।इसके बाद 2021 में ममता बनर्जी भवानीपुर से उपचुनाव जीतकर लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं। 2026 में न केवल उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा बल्कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी हार का सामना करना पड़ा। सुवेंदु अधिकारी की तरह आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के संस्थापक हुमायूं कबीर भी इस बार एक साथ दो विधानसभा क्षेत्रों नाओदा और रेजिनगर से निर्वाचित हुए, ये दोनों ही मुर्शिदाबाद जिले के अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे कौन सी सीट बरकरार रखेंगे और कौन सी सीट छोड़ेंगे।बुधवार को सुवेंदु अधिकारी विधानसभा परिसर पहुंचे और फिर सदन की सीढ़ियों को सिर झुकाकर और छूकर सदन में प्रवेश किया। उनका स्वागत कार्यवाहक अध्यक्ष और उत्तरी कोलकाता के मानिकतला विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक तापस रॉय ने किया। इस दौरान नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को विधानसभा परिसर में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा परिसर के भीतर बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और पुष्प अर्पित किए। इसके बाद, वे विधानसभा परिसर के भीतर सदन के नेता और मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें आवंटित कक्ष में गए और वहां देवी-देवताओं की मूर्तियों के समक्ष पूजा-अर्चना की। बाद में वे सदन के भीतर गए और भवानीपुर से विधायक के रूप में शपथ ली। निर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण समारोह बुधवार को शुरू हुआ और गुरुवार को भी जारी रहेगा। -
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा सत्र का आज बुधवार को पहला दिन है। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले सीएम सुवेंदु अधिकारी के वीडियो ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। सुवेंदु अधिकारी जब बंगाल विधानसभा में मुख्यमंत्री के रूप में एंट्री कर रहे थे, तो पहले वह घुटनों के बल बैठे और सीढ़ियों पर दंडवत होकर विधानसभा को प्रणाम किया। इस दौरान वहां कई नेता और अधिकारी भी मौजूद रहे।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अब सीएम सुवेंदु अधिकारी का यह वीडियो वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो पर अलग-अलग प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। इतना ही नहीं कई लोग सीएम सुवेंदु अधिकारी के इस वीडियो को देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस पल का जिक्र कर रहे है कि जब 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार लोकसभा में एंट्री करने से पहले सीढ़ियों पर मत्था टेका था।पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर पहली बार विधानसभा पहुंचने पर सुवेंदु अधिकारी को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ भी दिया गया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को विधानसभा में विधायक के तौर पर शपथ ली। उनके अलावा राज्य मंत्री दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल ने भी विधायक के तौर पर शपथ ली।हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। कोलकाता में आयोजित भव्य समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने सुवेंदु अधिकारी और उनके साथ पांच अन्य मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई थी। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी शामिल हुए थे। 2026 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ी जीत हासिल की। भाजपा ने 293 में से 207 सीट हासिल की, जबकि तृणमूल 80 सीटों तक ही सिमट कर रह गई। बंगाल में बहुमत का जादुई आंकड़ा छूने के लिए 148 सीट चाहिए थीं, लेकिन भाजपा ने 207 सीटों के साथ यह आंकड़ा भी पार कर लिया। ( -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने गुजरात में अहमदाबाद (सरखेज) से धोलेरा तक सेमी हाई-स्पीड डबल रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब 20,667 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह भारतीय रेलवे की पहली सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना होगी, जिसे स्वदेशी तकनीक के आधार पर विकसित किया जाएगा। परियोजना के तहत लगभग 134 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाई जाएगी, जिससे अहमदाबाद, धोलेरा SIR, आगामी धोलेरा एयरपोर्ट और लोथल राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (Lothal National Maritime Heritage Complex) के बीच तेज और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।सरकार के अनुसार अहमदाबाद और धोलेरा के बीच यात्रा समय में काफी कमी आएगी, जिससे लोगों के लिए रोजाना आना-जाना और एक ही दिन में यात्रा पूरी करना आसान होगा। यह परियोजना देश में भविष्य में बनने वाली सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए मॉडल का काम करेगी।रेल मंत्रालय का कहना है कि यह परियोजना PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई है, ताकि मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाया जा सके। इससे लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही अधिक सुगम होगी।इस परियोजना से गुजरात के अहमदाबाद जिले के लगभग 284 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी, जिनकी कुल आबादी करीब 5 लाख है। सरकार का मानना है कि इससे क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और धोलेरा क्षेत्र के औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।पर्यावरणीय दृष्टि से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेलवे के मुताबिक इससे लगभग 0.48 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी और करीब 2 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जो लगभग 10 लाख पेड़ लगाने के बराबर प्रभाव माना गया है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य भारत के कोल गैसीफिकेशन कार्यक्रम को तेज करना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।
यह योजना वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी। साथ ही LNG, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य भी रखा गया है।सरकार ने “प्रोडक्शन ऑफ सिंगैस लीडिंग टू कोल गैसीफिकेशन” श्रेणी के तहत कोल लिंकज की अवधि बढ़ाकर 30 वर्ष कर दी है। इससे निवेशकों को लंबी अवधि की नीति स्थिरता मिलेगी और निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।योजना की मुख्य विशेषताएंकुल 37,500 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेजलगभग 75 मिलियन टन कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण का लक्ष्यप्लांट और मशीनरी लागत का अधिकतम 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहनप्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए परियोजनाओं का चयनप्रोत्साहन राशि चार चरणों में जारी होगीएक परियोजना के लिए अधिकतम 5,000 करोड़ रुपये की सहायताएक कंपनी समूह के लिए कुल सहायता सीमा 12,000 करोड़ रुपयेसरकार के अनुसार इस योजना से 2.5 लाख करोड़ से 3 लाख करोड़ रुपये तक निवेश आने की संभावना है। साथ ही कोयला उत्पादक क्षेत्रों में लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।सरकार का अनुमान है कि 75 मिलियन टन कोयले के उपयोग से हर साल करीब 6,300 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है। इसके अलावा GST और अन्य करों से भी अतिरिक्त आय होगी।भारत के पास लगभग 401 अरब टन कोयले और 47 अरब टन लिग्नाइट का भंडार है। देश की ऊर्जा जरूरतों का 55 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अभी भी कोयले से पूरा होता है।कोल गैसीफिकेशन तकनीक के जरिए कोयले को “सिंथेसिस गैस” यानी सिंगैस में बदला जाता है, जिसका उपयोग ईंधन और रसायनों के निर्माण में किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इससे वैश्विक आपूर्ति संकट और कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कम होगा।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक FY2025 में LNG, यूरिया, अमोनिया, मेथनॉल और कोकिंग कोल जैसे उत्पादों के आयात पर भारत का खर्च लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपये रहा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 की 14 खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का ऐलान किया है। सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 में सबसे अधिक सूरजमुखी के बीज के लिए एमएसपी को 622 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर 8,343 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है, यह 2025-26 में 7,721 रुपए प्रति क्विंटल थी।
कॉटन के लिए एमएसपी को 557 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर 8,267 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है, जो कि पिछले साल 7,710 रुपए थी। केंद्र ने धान के लिए एमएसपी को 2,369 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2,441 रुपए प्रति क्विंटल, बाजरा के लिए 2,775 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2,900 रुपए प्रति क्विंटल, और रागी के लिए एमएसपी को 4,886 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 5,205 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है।सरकार ने अनाजों के साथ दालों के लिए भी एमएसपी में बढ़ोतरी की है। अरहर के लिए एमएसपी को 450 रुपए बढ़ाकर 8,450 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो कि पिछले साल 8,000 रुपए प्रति क्विंटल थी। उड़द के लिए एमएसपी को 400 रुपए बढ़ाकर 8,200 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो कि पिछले साल 7,800 रुपए प्रति क्विंटल थी। वहीं, मूंगफली के लिए एमएसपी को 7263 प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 7517 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है । मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए खरीफ फसलों के एमएसपी में वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 में एमएसपी को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना पर निर्धारित करने की घोषणा के अनुरूप है। इससे किसानों को उत्पादन लागत पर मिलने वाला अपेक्षित लाभ मूंग (61 प्रतिशत) में सबसे अधिक, इसके बाद बाजरा (56 प्रतिशत), मक्का (56 प्रतिशत) और अरहर (54 प्रतिशत) में होगा। शेष फसलों के लिए, किसानों को उत्पादन लागत पर मिलने वाला लाभ 50 प्रतिशत रहने का अनुमान है। -
नई दिल्ली। सीबीएसई 12वीं की बोर्ड परीक्षा में उपस्थित हुए छात्रों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बुधवार को इंटरमीडिएट (12वीं) बोर्ड की परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। ऐसे में जो छात्र-छात्राएं बोर्ड परिणाम जारी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, वे अब बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के अलावा डिजीलॉकर पोर्टल और उमंग ऐप पर भी जाकर अपना रिजल्ट चेक करने के साथ स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
सीबीएसई की ओर से जारी नतीजों के मुताबिक, इस वर्ष परीक्षा में कुल 85.20 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए हैं, जिसमें लड़कियों ने एक बार फिर बाजी मारते हुए लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया है। सीबीएसई 12वीं बोर्ड की परीक्षा में लड़कियों का कुल पास प्रतिशत 88.86 फीसदी और लड़कों का 82.13 फीसदी दर्ज किया गया है। सीबीएसई 12वीं रिजल्ट में 94,028 छात्रों ने 90 प्रतिशत और उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं जबकि 17,113 छात्रों ने 95 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त किए हैं।सीबीएसई 12वीं बोर्ड का परिणाम चेक करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होमपेज पर जाने के बाद ‘सीनियर स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा (कक्षा XII) परिणाम 2026’ लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद एक नया पेज खुलेगा; वहां अपना रोल नंबर, स्कूल नंबर, और एडमिट कार्ड आईडी दर्ज करें। फिर परिणाम आपके स्क्रीन पर खुल जाएगा। रिजल्ट को चेक करने के बाद मार्कशीट डाउनलोड कर लें। भविष्य के लिए मार्कशीट का प्रिंट आउट सुरक्षित निकाल कर रख लें। बता दें कि इस वर्ष सीबीएसई की ओर से 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं 17 फरवरी से 9 अप्रैल के बीच आयोजित की गई थीं। वहीं, कंपार्टमेंट वाले छात्रों के लिए सप्लीमेंट्री परीक्षा 15 जुलाई को केवल एक दिन आयोजित की जाएगी। इसके लिए एलओसी (उम्मीदवारों की सूची) जमा करने की प्रक्रिया 2 जून से ऑनलाइन माध्यम से शुरू हो जाएगी। -
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देशों के आधार पर महाराष्ट्र के मंत्रियों और अधिकारियों के पहले से मंजूर विदेश दौरों को स्थगित कर दिया गया है। अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े काम वर्चुअल प्लेटफॉर्म के जरिए किए जाएंगे, ताकि सरकारी खर्च कम हो सके और देश के ईंधन बचाने के अभियान को भी बढ़ावा मिले।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को राज्य के मंत्रियों और उच्च-रैंकिंग वाले सरकारी अधिकारियों के लिए पहले से तय विदेश दौरों को तुरंत रद्द करने का आदेश दिया। सरकारी सूत्रों ने बताया कि राज्य प्रशासन ने प्रशासनिक कामों या स्टडी टूर के लिए तय सभी आगामी अंतरराष्ट्रीय दौरों को रोकने के निर्देश जारी किए हैं। इस अचानक और सख्त कदम का मुख्य मकसद राज्य के खजाने पर पड़ने वाले बोझ को कम करना और जनता को वित्तीय अनुशासन व खर्चों में कटौती का एक मजबूत संदेश देना है।यह सुनिश्चित करने के लिए कि शासन-प्रशासन का काम बिना किसी रुकावट के चलता रहे, सरकार ने निर्देश दिया है कि सभी जरूरी अंतरराष्ट्रीय समझौते, बैठकें और विचार-विमर्श वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही किए जाएं। मुख्यमंत्री के आदेश का तुरंत प्रभाव से असर भी हुआ है। पर्यटन, खनन और महिला व बाल विकास मंत्री शंभूराज देसाई ने लंदन और पेरिस के अपने तय दौरे को रद्द कर दिया। बताया जा रहा है कि यह यात्रा तीन महीने पहले से ही एक निजी पारिवारिक छुट्टी के तौर पर तय की गई थी, लेकिन मंत्री देसाई ने इसे रद्द करने का फैसला किया, ताकि वे ईंधन बचाने और विदेशी मुद्रा बचाने की देशव्यापी भावना के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।वहीं, महाराष्ट्र विधानसभा में भी विधायकों के जापान के लिए तय स्टडी टूर को रद्द कर दिया गया। इस बात की पुष्टि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने की।सरकार का यह कदम तब आया है, जब प्रधानमंत्री मोदी ने नेताओं और अधिकारियों से अपील की थी कि वे अनावश्यक विदेश यात्राओं और खर्चों से बचें, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके। यह अपील ऐसे समय में की गई है, जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं और पश्चिम एशिया में चल रहा संकट ईंधन की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता पर असर डाल रहा है। - नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 2026 पेपर लीक मामले की जांच अब आधिकारिक रूप से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है। सीबीआई की एक टीम मंगलवार देर शाम जयपुर में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप मुख्यालय पहुंची। इसके बाद राजस्थान एसओजी ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अब तक गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और अब जांच पूरी तरह उसके हाथ में है।एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी और सबूत नष्ट करने जैसे आरोप शामिल हैं। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स प्रिवेंशन) एक्ट 2024 की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत के अनुसार, नीट परीक्षा 3 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद एनटीए को कई शिकायतें और खुफिया जानकारी मिली कि परीक्षा से पहले ही कुछ गोपनीय दस्तावेज अवैध रूप से प्रसारित किए गए थे।पिछले कुछ दिनों में एसओजी ने जयपुर, जमवारामगढ़, सीकर और अन्य जिलों में लगातार छापेमारी की और करीब 15 लोगों को गिरफ्तार किया। सूत्रों के अनुसार, आरोपियों को पूरे नेटवर्क की जांच के लिए दिल्ली ले जाया जा सकता है, जहां उनसे ‘गेस पेपर’ तैयार करने, उसके वितरण और छात्रों तक पहुंचने के पूरे नेटवर्क के बारे में पूछताछ की जाएगी।जांच में सामने आया है कि सीकर और झुंझुनूं के कई छात्रों को परीक्षा से दो दिन पहले ही ‘गेस पेपर’ मिल गया था। दावा किया जा रहा है कि इसमें से 120 से अधिक प्रश्न असली परीक्षा में आए। एसओजी जांच मई 8 को शुरू हुई थी, जब सीकर और झुंझुनूं से शिकायतें सामने आई थीं।अधिकारियों के अनुसार, पेपर लीक नेटवर्क ने टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर प्रश्न पत्र फैलाया था। जांच में यह भी पता चला कि ‘गेस पेपर’ 1 मई को सीकर के छात्रों में पहली बार वितरित किया गया था। यह भी सामने आया है कि कुल 720 अंकों में से लगभग 600 अंकों के सवाल उस गेस पेपर में शामिल थे और 120–140 प्रश्न सीधे परीक्षा में पूछे गए।जांच में यह भी पता चला कि यह ‘गेस पेपर’ केरल में पढ़ाई कर रहे चुरू जिले के एक एमबीबीएस छात्र ने सीकर के एक दोस्त को भेजा था। वहां से यह पीजी आवास संचालक के जरिए छात्रों तक पहुंचा। जांच एजेंसियों ने बताया कि एक ही पीजी संचालक ने पहले खुद यह प्रश्न बैंक प्राप्त किया और बाद में उसे छात्रों व कोचिंग सलाहकारों को भेज दिया। पुलिस का मानना है कि गिरफ्तारी के डर से उसने बाद में खुद ही शिकायत दर्ज करा दी। कई छात्रों ने भी एनटीए को ईमेल के जरिए पेपर लीक की शिकायत भेजी है। जांच में कई कोचिंग सेंटर भी रडार पर हैं और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।




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