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नई दिल्ली। नई दिल्ली में शुक्रवार को आयोजित राज्यों के पंचायती राज मंत्रियों की राष्ट्रीय कार्यशाला में सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के प्रभावी कार्यान्वयन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय पंचायती राज तथा मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने राज्यों से स्वयं के राजस्व स्रोतों (ओएसआर) के संकलन पर विशेष ध्यान देने और प्रदर्शन-आधारित अनुदानों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए अपनी तैयारियों को मजबूत करने का आग्रह किया। कार्यशाला में केंद्रीय पंचायती राज तथा मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल भी मौजूद रहे।
पंचायती राज मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यशाला में 18 राज्यों के पंचायती राज मंत्रियों ने भाग लिया, जबकि अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व संबंधित पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज, अपर सचिव सुशील कुमार लोहानी समेत मंत्रालय और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्यशाला का आयोजन सोलहवें वित्त आयोग (2026-31) की उन सिफारिशों के संदर्भ में किया गया, जिनमें वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों को 4,35,236 करोड़ रुपए के वित्तीय हस्तांतरण की अनुशंसा की गई है। साथ ही वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी परिचालन दिशानिर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि कार्यान्वयन की रूपरेखा स्थानीय शासन की विविध आवश्यकताओं के अनुरूप हो, ताकि पंचायती राज संस्थाएं अधिक सशक्त और वित्तीय रूप से सक्षम बन सकें।कार्यशाला के दौरान पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव मुक्ता शेखर ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें पंद्रहवें वित्त आयोग के दौरान हुए प्रदर्शन की समीक्षा, सोलहवें वित्त आयोग की प्रमुख सिफारिशों तथा ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए जारी परिचालन दिशानिर्देशों की जानकारी दी गई। बताया गया कि ये दिशानिर्देश अनुदानों के समयबद्ध निर्गमन, पारदर्शी उपयोग और प्रदर्शन-आधारित वित्तीय प्रबंधन को बढ़ावा देंगे। साथ ही पंचायतों में वित्तीय विकेंद्रीकरण, स्थानीय प्राथमिकताओं पर आधारित योजना निर्माण, स्वयं के राजस्व स्रोतों के संकलन और जवाबदेह शासन को भी मजबूती मिलेगी।सोलहवें वित्त आयोग ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों को 4,35,236 करोड़ रुपए के कुल वित्तीय हस्तांतरण की अनुशंसा की है। यह पंद्रहवें वित्त आयोग के तहत 2,36,805 करोड़ रुपए के आवंटन की तुलना में लगभग 84% अधिक है। इसमें 3,48,188 करोड़ रुपए के आधारभूत अनुदान शामिल हैं, जिन्हें स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट और जल प्रबंधन के लिए आबद्ध तथा अनाबद्ध अनुदानों में समान रूप से विभाजित किया गया है। इसके अलावा 87,048 करोड़ रुपए के प्रदर्शन अनुदान का भी प्रावधान किया गया है।ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए प्रति व्यक्ति आवंटन तेरहवें वित्त आयोग के दौरान 176 रुपए से बढ़कर सोलहवें वित्त आयोग में 953 रुपए हो गया है, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। वहीं, पंद्रहवें वित्त आयोग के दौरान मंत्रालय ने कुल 2,97,555 करोड़ रुपए के आवंटन में से लगभग 95% यानी 2,82,632 करोड़ रुपए जारी किए, जो किसी भी वित्त आयोग के तहत स्थानीय निकायों के लिए अब तक का सबसे अधिक निर्गमन प्रतिशत है।देश में वर्तमान में 2,62,738 पंचायती राज संस्थाएं हैं, जिनमें 2,55,308 ग्राम पंचायतें, 6,756 ब्लॉक पंचायतें और 674 जिला पंचायतें शामिल हैं। पारंपरिक स्थानीय निकायों सहित इनकी कुल संख्या 2,76,901 है। पंचायतों में योजना निर्माण, लेखांकन, लेखापरीक्षा और स्वयं के राजस्व स्रोतों के सृजन को मजबूत करने के लिए ईग्रामस्वराज, ऑडिटऑनलाइन, पीएफएमएस इंटरफेस, समर्थ पोर्टल तथा स्वामित्व संपत्ति आंकड़ों के एकीकृत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है। -
नई दिल्ली। भारत और माली ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पहले भारत-माली निर्यात संवर्धन मंच का आयोजन किया। बमाको में आयोजित इस दो दिवसीय मंच के जरिए दोनों देशों ने व्यापार और निवेश सहयोग को संस्थागत स्वरूप देने तथा भविष्य में आर्थिक साझेदारी को नई गति प्रदान करने पर जोर दिया। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 326.61 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 55% अधिक है।
“व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ बनाना” विषय पर आयोजित इस मंच की अध्यक्षता माली की अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री मेजर जनरल अब्दुलाये माइगा ने की। इसका संयुक्त आयोजन माली के उद्योग एवं व्यापार मंत्रालय, बमाको स्थित भारतीय दूतावास तथा माली निर्यात संवर्धन एजेंसी (एपीईएक्स-माली) ने किया। कार्यक्रम में दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ भारत के करीब 30 व्यापारिक नेताओं ने भाग लिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव (एफटी-अफ्रीका) अमित कुमार ने किया, जबकि माली में भारत के राजदूत डॉ. एन. नंदकुमार ने भारतीय मिशन का प्रतिनिधित्व किया।वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और माली के बीच द्विपक्षीय व्यापार 326.61 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 55% अधिक है। माली से भारत को मुख्य रूप से कच्चा कपास, तैयार चमड़ा, काजू, सीसा, गोंद अरबी और तिल का निर्यात होता है। वहीं भारत से माली को औषधियां, सूती वस्त्र, दोपहिया और तिपहिया वाहन तथा साइकिलों का निर्यात किया जाता है। भारत की शुल्क-मुक्त टैरिफ वरीयता (डीएफटीपी) योजना ने दोनों देशों के व्यापार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। माली के लगभग 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर के वैश्विक निर्यात की तुलना में भारतीय बाजार में उसके अप्रयुक्त निर्यात की संभावित क्षमता लगभग 3.96 बिलियन अमेरिकी डॉलर आंकी गई है।उद्घाटन सत्र के बाद भारतीय और माली प्रदर्शनी स्टॉलों का दौरा किया गया, जहां सोनालिका ट्रैक्टर तथा महिंद्रा और टाटा मोटर्स के वाहनों का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद व्यापार-से-व्यापार (बी2बी), व्यापार-से-सरकार (बी2जी) और सरकार-से-सरकार (जी2जी) स्तर की बैठकों में नवीकरणीय ऊर्जा, औषधि, वस्त्र, ऑटोमोबाइल विनिर्माण और खनन क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। उद्देश्य व्यावसायिक अवसरों को व्यापारिक साझेदारियों और समझौता ज्ञापनों में बदलना था।दूसरे दिन भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने माली के उद्योग एवं व्यापार मंत्री मूसा अलासाने डियालो से मुलाकात की। इस दौरान एपीईएक्स-माली ने तत्काल निवेश के लिए “तैयार व्यापार योजनाएं” प्रस्तुत कीं। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने माली की अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री से भी भेंट की।दोनों देशों ने कपास एवं वस्त्र, खनन एवं ऊर्जा, कृषि-उद्योग एवं शीया प्रसंस्करण, औषधियां तथा स्वास्थ्य और शिक्षा सहित सामाजिक अवसंरचना को सहयोग के प्राथमिक क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया। माली ने अपने उद्गम प्रमाण पत्र प्रणाली के डिजिटलीकरण में भारत के सहयोग और भारतीय औषधियों के शीघ्र पंजीकरण में रुचि दिखाई। वहीं भारतीय पक्ष ने शीया-नट के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध पर पुनर्विचार का आग्रह किया तथा माली में भारतीय नागरिकों और भारतीय निवेशों की सुरक्षा के महत्व को दोहराया।मंच के समापन पर माली ने कारोबारी माहौल को और सुरक्षित बनाने तथा ‘विजन माली 2063’ रोडमैप के तहत स्वयं को पश्चिम अफ्रीका के रणनीतिक निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसी दिशा में माली ने 3-4 दिसंबर 2026 को विशेष निवेश मंच आयोजित करने की घोषणा की, जिसमें अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए नई निवेश-योग्य परियोजनियां प्रस्तुत की जाएंगी। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शनिवार) को राजस्थान और गुजरात का दौरा करेंगे। इस दौरान वे विमानन, शहरी परिवहन, ऊर्जा और सेमीकंडक्टर सहित कई प्रमुख अवसंरचना और विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। राजस्थान में वे लगभग 1.06 लाख करोड़ रुपए की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे, जबकि जयपुर मेट्रो फेज-2 की आधारशिला भी रखेंगे। इसके अलावा गुजरात में भारत के पहले सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग केंद्रों में से एक का उद्घाटन करेंगे।
प्रधानमंत्री सुबह लगभग 10:45 बजे जोधपुर हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे और संशोधित विमानन योजना का शुभारंभ करेंगे। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे वे बालोतरा पहुंचेंगे, जहां लगभग 1.06 लाख करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण, उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इस अवसर पर वे एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री बालोतरा जिले के पचपदरा में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) रिफाइनरी के उद्घाटन समारोह के दौरान जयपुर मेट्रो रेल परियोजना के फेज-2 की आधारशिला रखेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से जयपुर के प्रमुख औद्योगिक, वाणिज्यिक और आवासीय क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी तथा शहरी परिवहन को नई गति मिलेगी।13,037 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना के तहत प्रहलादपुरा से तोड़ी मोड़ तक 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इससे सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र, विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (वीकेआईए), जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, टोंक रोड, सवाई मानसिंह अस्पताल, सवाई मानसिंह स्टेडियम, कलेक्ट्रेट, जयपुर रेलवे स्टेशन, अंबाबारी और विद्याधर नगर सहित कई प्रमुख स्थानों को निर्बाध मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी।फेज-2 कॉरिडोर में कुल 36 मेट्रो स्टेशन होंगे। यह आधुनिक जन परिवहन प्रणाली जयपुर के तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों को प्रमुख आवासीय और व्यावसायिक इलाकों से जोड़ेगी। परियोजना का कार्यान्वयन राजस्थान मेट्रो रेल निगम लिमिटेड (आरएमआरसीएल) करेगा, जो केंद्र और राजस्थान सरकार का 50:50 संयुक्त उद्यम है।राजस्थान के कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री शाम लगभग 4:30 बजे गुजरात के साणंद पहुंचेंगे। यहां वे सीजी सेमी के आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओएसएटी) संयंत्र का उद्घाटन करेंगे। यह ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के तहत विकसित भारत के पहले सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग संयंत्रों में से एक है और इसके साथ वाणिज्यिक उत्पादन की शुरुआत होगी। उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, सीजी सेमी ओएसएटी केंद्र 7,500 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश से विकसित किया गया है। यह मिशन के तहत स्वीकृत पहली चार सेमीकंडक्टर परियोजनाओं में शामिल है। यह केंद्र वेफर सॉर्टिंग, असेंबली, परीक्षण, पैकेज डिजाइन, विफलता विश्लेषण, परीक्षण कार्यक्रम विकास, उत्पाद विशेषताओं के मूल्यांकन और लॉजिस्टिक्स सहायता सहित सेमीकंडक्टर असेंबली एवं परीक्षण सेवाओं की संपूर्ण शृंखला उपलब्ध कराएगा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई, 2026 तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा करेंगे। इस दौरान वह तीनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करेंगे और भारतीय प्रवासी समुदाय को भी संबोधित करेंगे। यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा और क्षेत्रीय सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया की यात्रा करेंगे। यह उनकी इंडोनेशिया की चौथी यात्रा होगी और मई 2018 में भारत-इंडोनेशिया संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने के बाद पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। जकार्ता में प्रधानमंत्री राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और दोनों देशों के बीच साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। वह भारतीय प्रवासी समुदाय की एक विशाल सभा को भी संबोधित करेंगे।भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रंबानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे।इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज़ के निमंत्रण पर मेलबर्न जाएंगे। इस दौरान वह प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज़ के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे तथा ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में भाग लेकर दोनों देशों के शीर्ष उद्योगपतियों और व्यापारिक नेताओं को संबोधित करेंगे। इसके अलावा वह मेलबर्न में भारतीय प्रवासी समुदाय की एक विशाल सभा को भी संबोधित करेंगे।न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 और 11 जुलाई को ऑकलैंड की राजकीय यात्रा करेंगे। यह करीब चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की पहली राजकीय यात्रा होगी। ऑकलैंड में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और व्यापार, वाणिज्य, रक्षा तथा अन्य क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंधों की समीक्षा करेंगे। पिछले दो वर्षों में इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री प्रमुख व्यापारिक और खेल जगत की हस्तियों से भी मुलाकात करेंगे। भारत और न्यूजीलैंड के मजबूत जन-संपर्कों को रेखांकित करते हुए वह भारतीय प्रवासी समुदाय की एक विशाल सभा को भी संबोधित करेंगे। -
मंदसौर (मध्यप्रदेश). मध्यप्रदेश में बृहस्पतिवार को मुंबई-अमृतसर पश्चिम एक्सप्रेस में यात्रा के दौरान एक महिला ने प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद रेलवे कर्मचारियों की मदद से सुरक्षित तरीके से एक बच्ची को जन्म दिया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि सूरत से नयी दिल्ली जा रही महिला अपने एक परिजन के साथ ट्रेन संख्या 12925 मुंबई-अमृतसर पश्चिम एक्सप्रेस में यात्रा कर रही थी। उन्होंने बताया कि रतलाम और खाचरोद स्टेशनों के बीच महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उन्होंने बताया कि इस दौरान एक सहयात्री ने ट्रेन में मौजूद रेलवे कर्मचारियों को इसकी सूचना दी। अधिकारी ने बताया कि सूचना मिलते ही रेलवे कर्मचारी तत्काल कोच में पहुंचे और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई, जिसके बाद महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। उन्होंने बताया कि प्रसव के बाद महिला और नवजात को सूखे कपड़े तथा कंबल उपलब्ध कराए गए। कुमार ने बताया कि ट्रेन के खाचरोद स्टेशन पहुंचने पर महिला अपने ससुर के साथ रेलवे कर्मचारियों की मदद से उतरी। उन्होंने बताया कि इसके बाद मां और नवजात को आवश्यक चिकित्सा उपचार के लिए भेजा गया। उन्होंने कहा कि रतलाम मंडल के कर्मचारियों की त्वरित कार्रवाई, उनकी संवेदनशीलता और सहयात्रियों के सहयोग से बच्चे का सुरक्षित जन्म संभव हो सका।
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श्रीनगर. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कश्मीर घाटी पहुंचने पर वार्षिक अमरनाथ यात्रा के तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे का बृहस्पतिवार को गर्मजोशी से स्वागत किया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 4,800 से अधिक तीर्थयात्रियों के जत्थे को हरी झंडी दिखाकर जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से रवाना किया था। अधिकारियों ने बताया कि जब यह काफिला कश्मीर पहुंचा तब घाटी में जगह-जगह उसका भव्य स्वागत किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, जब श्रद्धालु दक्षिण कश्मीर के कुलगाम ज़िले के काजीगुंड इलाके में नवयुग सुरंग से होते हुए घाटी में दाखिल हुए, तो उनका जोरदार स्वागत किया गया। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिरीक्षक और दक्षिण कश्मीर रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक जाविद इकबाल मट्टू समेत पुलिस तथा नागरिक प्रशासन के अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों का मालाओं एवं फूलों के गुलदस्तों एवं पुष्प की पंखुड़ियों से स्वागत किया। इसके बाद ये काफिले अलग-अलग बालटाल और पहलगाम बेस कैंप की ओर बढ़े, जहां से तीर्थयात्री शुक्रवार सुबह 3,880 मीटर ऊंचे अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए आगे की यात्रा आरंभ करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि पहलगाम मार्ग से यात्रा करने वाले तीर्थयात्री पहलगाम के बेस कैंप नुनवान पहुंचे, जहां अनंतनाग के उपायुक्त (यात्रा अधिकारी) बिलाल मोहिउद्दीन भट, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अमोद अशोक नागपुरे, कैंप निदेशक अतुल कुमार, सिविल और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। श्रीनगर पहुंचने पर, बालटाल मार्ग से यात्रा कर रहे यात्रियों का स्वागत पंथा चौक बाईपास पर श्रीनगर के उपायुक्त अक्षय लाब्रू और एसएसपी संदीप चक्रवर्ती ने किया। अधिकारियों ने यात्रियों के पहुंचने पर उनका स्वागत किया और उनकी यात्रा सुरक्षित एवं आध्यात्मिक रूप से सुखद होने की शुभकामनाएं दीं। इसी तरह, बांदीपोरा और गांदरबल ज़िलों में तीर्थयात्रियों का ज़ोरदार स्वागत किया गया।अधिकारियों ने बताया कि बांदीपोरा के शादीपोरा ट्रांज़िट कैंप में तीर्थयात्रियों का गर्मजोशी से पारंपरिक स्वागत किया गया। उत्तरी कश्मीर रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक विनोद कुमार, उपायुक्त इंदु कंवल चिब और एसएसपी एजाज़ अहमद ज़रगर ने फूलों के साथ यात्रियों का स्वागत किया तथा उनकी यात्रा सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक रहने की शुभकामनाएं दीं। अधिकारियों ने बताया कि गांदरबल के बालटाल बेस कैंप में, गांदरबल के उपायुक्त जतिन किशोर, कश्मीर के उपमहानिरीक्षक (आर्म्ड) मकसूद-उल-ज़मान, गांदरबल के एसएसपी सुधांशु धामा और स्थानीय समुदाय के सदस्यों ने मिलकर तीर्थयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह सब भक्ति और उत्साह के माहौल में हुआ। तीन जुलाई को 57 दिनों की यह तीर्थयात्रा आरंभ होगी और 28 अगस्त को उसका समापन होगा। श्रद्धालु अनंतनाग में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम रास्ते या गांदरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबे छोटे बालटाल मार्ग से यात्रा कर सकते हैं। -
लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन आगामी चार जुलाई को उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर आयेंगे। इस दौरान भाजपा अध्यक्ष आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों की समीक्षा करने के साथ—साथ पार्टी पदाधिकारियों तथा चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ कई बैठकें करेंगे। भाजपा द्वारा बृहस्पतिवार को जारी एक बयान के अनुसार, नवीन चार और पांच जुलाई को विभिन्न स्तरों के पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकों में संगठन की कार्ययोजना और आगामी कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे। बयान के अनुसार वह राज्य के पार्टी पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों, सांसदों और विधायकों से बातचीत करने के साथ—साथ अवध क्षेत्र के 'शक्ति केंद्र' संयोजकों के सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के लिये पार्टी के राज्य महासचिव (संगठन) धर्मपाल सिंह के साथ पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए अलग-अलग बैठकें कीं। चौधरी ने इस दौरे को एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक गतिविधि बताया और कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का मार्गदर्शन पार्टी के कामकाज को मजबूत करने और आगामी कार्यक्रमों तथा चुनावी तैयारियों को नई गति देने में मदद करेगा। धर्मपाल सिंह ने कहा कि सभी बैठकों का कार्यक्रम तय कर लिया गया है और हर कार्यक्रम अनुशासित और समयबद्ध तरीके से आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नवीन संगठनात्मक विस्तार, बूथ को मजबूत करने, शक्ति केंद्रों को सक्रिय करने, सेवा पहलों, जनसंपर्क और समन्वय पर मार्गदर्शन देंगे।
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नयी दिल्ली. पंजाबी कलाकार दिलजीत दोसांझ ने यहां जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के विरोध प्रदर्शन से खुद को अलग कर लिया और कहा कि वह एक कलाकार हैं, कोई राजनेता नहीं। फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' के अभिनेता ने बुधवार शाम 'इंस्टाग्राम' पर अपने प्रशंसकों के कई सवालों के जवाब दिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और नीट प्रश्न पत्र लीक विवाद को लेकर कॉजपा के विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे, तो दिलजीत ने कहा, "मुझे इन सब से दूर रखिए... भाई, मैं एक कलाकार हूं। मैं कोई राजनेता नहीं हूं, मुझे नहीं पता आप मुझे क्या समझते हैं।" उन्होंने इसके बाद गुरु ग्रंथ साहिब की एक लोकप्रिय पंक्ति का उल्लेख किया, "नानक दुखिया सब संसार, सो सुखिया जिस नाम आधार', जिसका अर्थ है कि दुनिया में हर कोई दुखों से जूझ रहा है, केवल वे लोग सुखी हैं जो ईश्वर के सहारे रहते हैं।" दिलजीत ने कहा, "देखिए, हर चीज कभी भी पूरी तरह सही नहीं हो सकती। इस दुनिया में सब कुछ कभी भी सही नहीं हो सकता। इसलिए जो लोग विरोध कर रहे हैं, उन्हें बधाई, और जिनके खिलाफ विरोध हो रहा है, उन्हें भी बधाई, क्योंकि मुझे इसके बारे में कुछ पता नहीं है।" वर्ष 2020 में दिलजीत उस समय सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने केंद्र सरकार के विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया था। इस वर्ष मई में एक नागरिक समाज समूह ने दिलजीत से राजनीति में आने की सार्वजनिक अपील की थी लेकिन उन्होंने राजनीति में प्रवेश करने से इनकार कर दिया था। दिलजीत ने 'एक्स' पर कहा, "मेरा काम लोगों का मनोरंजन करना है। मैं अपने क्षेत्र में बहुत खुश हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद।"
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नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्रीय टीम में फेरबदल की अटकलों के बीच पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, शाह के आवास पर हुई करीब तीन घंटे की बैठक में भाजपा के महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष भी मौजूद थे। हालांकि इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई, लेकिन इसमें कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें भाजपा के नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों की टीम के गठन का विषय भी शामिल था। सूत्रों के मुताबिक, जनवरी में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नवीन के नेतृत्व वाली भाजपा की नयी केंद्रीय टीम में ''वरिष्ठ और युवा नेताओं'' को जगह मिलने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार में पद संभाल रहे कुछ नेताओं को भी पार्टी में शामिल किया जा सकता है और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। सूत्रों ने बताया कि भाजपा की नयी केंद्रीय टीम में शामिल किए जाने वाले नेताओं के नामों की घोषणा जल्द ही की जाएगी।
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नयी दिल्ली. नीति आयोग ने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए सरकार से वैश्विक आयुर्वेद पंजी (जीएआर) बनाने और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की सिफारिश की है। आयोग ने 'आयुर्वेद को वैश्विक बनाने के लिए रणनीतिक रूपरेखा' शीर्षक से जारी रिपोर्ट में विश्व आयुर्वेद एवं योग महासंघ की स्थापना तथा आयुर्वेदिक फार्माकोपिया-निर्यात संस्करण तैयार करने का भी सुझाव दिया है। आयोग ने कहा, ''सरकार को आयुर्वेद व्यापार से संबंधित डैशबोर्ड भी विकसित करना चाहिए।''
नीति आयोग ने आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बढ़ाने की भी सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार, आयुर्वेद भारत में पारंपरिक चिकित्सा की एक मान्यता प्राप्त और विनियमित प्रणाली है। देश में 3,55,000 से अधिक प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सक हैं, लेकिन इनमें से लगभग 95 प्रतिशत भारत में ही कार्यरत हैं और विदेशों में इनकी उपस्थिति सीमित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्यात लगभग 150 देशों को किया जा रहा है। इन उत्पादों का निर्यात वर्ष 2014 के 1.09 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2023 में 2.16 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। -
नयी दिल्ली. राशन की दुकानों के जरिये कम टूटे हुए दाने वाले बेहतर गुणवत्ता के चावल आपूर्ति करने के सरकार के फैसले को सभी राज्यों में चरणों में लागू किया जाएगा ताकि बदलाव आसानी से हो सके और इस कदम से सालाना लागत में 2,161 करोड़ रुपये की कमी आएगी। बुधवार को, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने राशन की दुकानों के जरिये 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को वितरित किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का फैसला किया। इसके लिए कुल आपूर्ति में टूटे हुए चावल का प्रतिशत कम किया जाएगा। केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 'एक्स' पर पोस्ट में जानकारी दी कि मंत्रिमंडल ने राशन की दुकानों के जरिये आपूर्ति किए जाने वाले टूटे हुए चावल की सीमा को कम करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि चावल की बोरियों पर क्यूआर-कोड लगाया जाएगा ताकि उनकी ट्रेसिबिलिटी (ट्रैक करने की सुविधा) सुनिश्चित हो सके। इससे परिवहन, भंडारण और रखरखाव की लागत कम होगी। कच्चे चावल के लिए, सीमा को 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। उसना चावल के लिए, इसे 16 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। बृहस्पतिवार को एक बयान में, खाद्य मंत्रालय ने कहा कि सीसीईए ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (जीएमजीकेएवाई) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत आपूर्ति किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए एक अहम सुधार को मंजूरी दी है। इस सुधार में चावल की बोरियों पर क्यूआर-कोड लगाना शामिल है ताकि पूरी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी हो सके। इससे पीडीएस में पारदर्शिता, जवाबदेही और भंडार प्रबंधन मजबूत होगा और साथ ही रिसाव को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।
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नयी दिल्ली. खेलमंत्री मनसुख मांडविया ने बृहस्पतिवार को कहा कि एशियाई खेल कोई 'एक्सपोजर ट्रिप' नहीं है और पदक उम्मीदों पर ही फोकस रखते हुए इस बार 600 से कम सदस्यीय दल ही भेजा जायेगा । खेलमंत्री ने यहां मीडिया से बातचीत में साफ तौर पर कहा कि जापान में 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक होने वाले एशियाई खेलों में महज भागीदारी के लिये लंबा चौड़ा दल नहीं भेजा जायेगा। मांडविया ने कहा ,'' एशियाई खेल कोई एक्सपोजर ट्रिप नहीं है । यह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के लिये मंच है । इसमें पहले दौर में बाहर होने के लिये किसी को भेजने का कोई फायदा नहीं है। मैं बार बार कहता आया हूं कि अच्छा प्रदर्शन करने वालों के लिये ही भारतीय दल में जगह होगी।' उन्होंने कहा, एक्सपोजर कहीं और से भी हासिल किया जा सकता है, एशियाई खेल उसके लिये नहीं हैं । सिर्फ नौकरी पाने के लिये भागीदारी के मकसद से जाने के इच्छुक लोगों के नाम पर मंजूरी नहीं दी जायेगी।
उन्होंने कहा ,'' इस बार चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बरती गई है । इक्के दुक्के मामलों को छोड़कर कहीं कोई विवाद नहीं है और ये मामले भी सुलझ जायेंगे । चयन के मानदंडों के आधार पर ही दल चुना गया है । नौकरी पाने के लिये किसी को एशियाई या राष्ट्रमंडल खेल दल में शामिल करना या किसी के परिजन को सहयोगी स्टाफ बनाकर भेजना अब नहीं होगा ।'' मांडविया ने चयन प्रक्रिया का ब्यौरा देते हुए कहा कि महासंघों द्वारा चुने गए खिलाड़ियों, कोचों और सहयोगी स्टाफ को आईओए और भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा आकलन के बाद खेल मंत्रालय से मंजूरी मिलने पर ही उसे आधिकारिक भारतीय दल का हिस्सा माना जायेगा । उन्होंने कहा ,' चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिये पर्यवेक्षक की मौजूदगी में आन कैमरा ट्रायल कराये गए हैं जिसके बाद चुने गए खिलाड़ियों की सूची एनएसएफ आईओ को भेजते हैं ।'' इसमें आगे कहा गया ,'' भारतीय ओलंपिक संघ इन सुझावों को खेल मंत्रालय के पास समीक्षा और स्वीकृति प्रक्रिया के लिये भेजता है । खेल मंत्रालय इसे साइ को आकलन के लिये भेजता है जिसके बाद साइ से मिलने वाली सूची को अंतिम मंजूरी दी जाती है ।'' एशियाई खेलों के लिये टीम चयन को लेकर प्रमुख विवादों में घुड़सवार अनुष अगरवाला का मामला है जिन्होंने टीम से बाहर रखे जाने को अदालत में चुनौती दी है । एक सूत्र ने बताया कि खेल मंत्रालय उन्हें टीम में रखे जाने के पक्ष में है । अगरवाला और सुदीप्ति हजेला ने अपनी याचिका में उन्हें टीम से बाहर रखने के भारतीय घुड़सवारी महासंघ की तदर्थ समिति के फैसले को चुनौती दी है । उनकी याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ ने खारिज कर दी हालांकि खंडपीठ उस पर सुनवाई कर रही है । सूत्र के अनुसार मंत्रालय अनुष को टीम में रखने के पक्ष में है । सूत्र ने कहा ,' उन्हें बाहर किये जाने के फैसले की समीक्षा की जा रही है और मंत्रालय का मानना है कि उसे मौका मिलना चाहिये ।'' मंत्रालय ने यह भी कहा कि चयन ट्रायल के बाद किसी एनएसएफ द्वारा जारी की गई सूची सरकार द्वारा स्वीकृत भारतीय दल नहीं है । मंत्रालय ने कहा कि ऐसी कोई भी सूची महासंघ की आंतरिक चयन प्रक्रिया के आधार पर तैयार की गई सुझाव की सूची है जिसके बाद आईओए और साइ आकलन करके मंत्रालय को सुझाव भेजते हैं और मंत्रालय से मंजूरी प्राप्त खिलाड़ी, कोच और सहयोगी स्टाफ ही एशियाई खेलों के लिये भारत के आधिकारिक दल का हिस्सा होंगे ।
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नयी दिल्ली/ हैदराबाद आधारित कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि देश के निजी तौर पर विकसित कक्षीय श्रेणी के पहले रॉकेट 'विक्रम-1' की पहली परीक्षण उड़ान के लिए 12 जुलाई से चार अगस्त के बीच का समय तय किया गया है। प्रक्षेपण की अंतिम तारीख श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में प्रक्षेपण स्थल पर परीक्षण से जुड़े काम पूरे होने और मौसम, सुरक्षा व 'रेंज क्लीयरेंस' पर निर्भर करेगी। स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन कुमार चांदना ने एक बयान में कहा, ''हम यह समझना चाहते हैं कि प्रक्षेपण से लेकर ऊपर जाने के हर चरण में रॉकेट कैसा प्रदर्शन करता है। इस डेटा को जमीन पर होने वाले परीक्षण के जरिए पूरी तरह से दर्शाया नहीं जा सकता।'' 'आगमन' नाम का यह अभियान प्रणोदन, मार्गदर्शन, नेविगेशन, नियंत्रण और पूरे प्रक्षेपण यान के प्रदर्शन से जुड़ा अहम डेटा इकट्ठा करेगा। विक्रम-1 सात मंजिला लंबा, बहु-चरणीय कक्षीय प्रक्षेपण यान है जो पूर्ण-कार्बन मिश्रित संरचना के साथ बनाया गया है और घरेलू स्तर पर विकसित प्रणोदन प्रणालियों द्वारा संचालित है।
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नयी दिल्ली. जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची का बृहस्पतिवार को यहां राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में गर्मजोशी से औपचारिक स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस अवसर पर मौजूद रहे। यह तकाइची की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है।
राष्ट्रपति भवन परिसर के प्रांगण में आयोजित समारोह के दौरान जापान की प्रधानमंत्री सलामी मंच पर खड़ी हुईं और प्रधानमंत्री मोदी उनके पास खड़े थे। तीनों सेनाओं के मार्चिंग दस्ते और उनके पीछे बैंड का दस्ता, भारत आईं मेहमान प्रधानमंत्री के सम्मान में शानदार प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़े। तकाइची प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए एक से तीन जुलाई तक भारत की यात्रा पर हैं। दोनों प्रधानमंत्री व्यापार, निवेश, रक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करने के लिए बृहस्पतिवार को यहां 'हैदराबाद हाउस' में वार्ता करेंगे। औपचारिक स्वागत के बाद प्रधानमंत्री तकाइची ने मोदी के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों से मुलाकात की। कई केंद्रीय मंत्रियों ने हाथ जोड़कर तकाइची का अभिवादन किया और उन्होंने भी हाथ जोड़कर उनका अभिवादन स्वीकार किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने बाद में हाथ मिलाया और तस्वीरें खिंचवाईं। तकाइची तीन दिवसीय यात्रा पर बुधवार को नयी दिल्ली पहुंची थीं।
जापान की प्रधानमंत्री ने दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद बुधवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपने आगमन की तस्वीरें साझा की थीं। मोदी ने उनकी पोस्ट साझा करते हुए लिखा, ''प्रधानमंत्री सनाए तकाइची, भारत में आपका हार्दिक स्वागत है।'' उन्होंने कहा, ''आपकी पहली भारत यात्रा पर आपकी मेजबानी करके हमें बहुत प्रसन्नता हो रही है। मैं कल आपके साथ विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा को लेकर उत्सुक हूं, जिससे भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी और मजबूत होगी। हम अपने संयुक्त प्रयासों के जरिये हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उसके बाहर शांति, स्थिरता एवं समृद्धि को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे।'' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को कहा था कि यह यात्रा भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ''महत्वपूर्ण कदम'' है। विदेश मंत्रालय ने कहा था, ''शिखर सम्मेलन दोनों पक्षों को द्विपक्षीय सहयोग के सभी आयामों की समीक्षा करने और उन्हें मजबूत बनाने के साथ-साथ साझा हित के क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान करेगा।'' - नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं और साधु-संतों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। जम्मू की पुरानी मंडी स्थित श्रीराम मंदिर से बड़ी संख्या में साधु-संतों का जत्था गुरुवार को पवित्र अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुआ। यात्रा पर निकलने से पहले संतों और श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के जयकारे लगाए और सुखद व सुरक्षित यात्रा की कामना की।यात्रा पर रवाना हो रहे एक संत ने समाचार एजेंसी से कहा कि अब तक का सफर बेहद सुखद रहा है। उन्होंने बताया कि साथी संतों और श्रद्धालुओं के साथ यात्रा करने का अनुभव बेहद खास है।उन्होंने कहा, “यह पहली बार है जब मुझे बाबा अमरनाथ के दर्शन का अवसर मिल रहा है। संतों के लिए बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और हर साल इसी समर्पण के साथ सेवा की जाती है।”पहली बार अमरनाथ यात्रा पर निकले एक श्रद्धालु ने भी यात्रा को लेकर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, “यह मेरी पहली अमरनाथ यात्रा है। श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रशासन और सेना के जवानों की ओर से जो सहयोग और सहायता मिल रही है, वह बेहद सराहनीय है।”एक अन्य संत ने बताया कि वह पिछले 32 वर्षों से लगातार अमरनाथ यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बार भी सरकार ने यात्रियों के लिए बहुत अच्छी व्यवस्थाएं की हैं। खास तौर पर बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए की गई सुविधाएं काफी बेहतर हैं, जिससे यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम हो गई है।मध्य प्रदेश के नर्मदा नदी के तट पर स्थित जबलपुर से आए एक संत ने बताया कि यह उनकी तीसरी अमरनाथ यात्रा है।उन्होंने कहा, “मैं बाबा बर्फानी का आशीर्वाद लेने आया हूं। यात्रा के लिए सरकार ने शानदार तैयारियां की हैं और सभी व्यवस्थाएं बेहद अच्छी हैं।”इस मौके पर एक अन्य संत ने अमरनाथ यात्रा को आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ते हुए कहा, “हम सभी बेहद उत्साहित हैं। यह हमारी ‘कैलाश यात्रा’ का पहला चरण है। अंतिम चरण जम्मू के हरमुख कैलाश में पूरा होगा, जब वहां की यात्रा शुरू होगी। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।”उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने हर स्तर पर बेहतर व्यवस्थाएं की हैं, जिससे सभी श्रद्धालु सुरक्षित और सहज तरीके से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आगे बढ़ सकें।अमरनाथ यात्रा को लेकर पूरे जम्मू क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं और साधु-संतों में बाबा बर्फानी के दर्शन को लेकर गहरा उत्साह और आस्था साफ दिखाई दे रही है।
- नई दिल्ली। भारत सरकार द्वारा WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर आपत्ति जताए जाने के बाद Meta ने कहा है कि सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थाओं, सेलिब्रिटी और Meta के सत्यापित (Verified) अकाउंट्स के नाम सुरक्षित (Reserved) रखे गए हैं, ताकि उन्हें केवल वास्तविक और अधिकृत व्यक्ति या संस्था ही इस्तेमाल कर सके।सरकार ने इससे पहले Meta को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर यूजरनेम फीचर पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने को कहा था।साथ ही निर्देश दिया था कि सरकार के साथ परामर्श पूरा होने तक इस फीचर को भारत में लॉन्च न किया जाए।WhatsApp के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी ने लोगों को अपना पसंदीदा यूजरनेम सुरक्षित (Reserve) करने का विकल्प देने की घोषणा की है, लेकिन यह सुविधा अभी लाइव नहीं हुई है और इसे इस वर्ष धीरे-धीरे उपलब्ध कराया जाएगा।प्रवक्ता के अनुसार, प्रतिरूपण (Impersonation) रोकने के लिए सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थाओं, सेलिब्रिटी और Meta के वेरिफाइड अकाउंट्स से जुड़े नाम पहले से सुरक्षित रखे गए हैं। इनके जैसे मिलते-जुलते (Lookalike) नामों को भी आरक्षित किया गया है, ताकि कोई उनका गलत इस्तेमाल न कर सके।फोन नंबर रहेगा जरूरीWhatsApp ने स्पष्ट किया कि यूजरनेम फीचर आने के बाद भी प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने के लिए फोन नंबर अनिवार्य रहेगा।कंपनी का कहना है कि यूजरनेम फीचर में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय जोड़े गए हैं।इन सुरक्षा उपायों का होगा इस्तेमालWhatsApp के मुताबिक:-किसी यूजर को संदेश भेजने के लिए उसका सटीक यूजरनेम पता होना जरूरी होगा।-नए अकाउंट कितने लोगों को संदेश भेज सकते हैं, इसकी सीमा तय होगी।-किसी का यूजरनेम या सुरक्षा कुंजी (Username Key) बार-बार अनुमान लगाने की कोशिशों को रोका जाएगा।-संदिग्ध गतिविधियों और प्रतिरूपण के पैटर्न की पहचान कर ऐसे अकाउंट्स पर कार्रवाई की जाएगी।-पहली बार संदेश मिलने पर मिलेगी अतिरिक्त जानकारी-कंपनी ने बताया कि जब यह सुविधा शुरू होगी और कोई व्यक्ति पहली बार यूजरनेम के जरिए संदेश भेजेगा, तब प्राप्तकर्ता को यह जानकारी दिखाई जाएगी कि:-अकाउंट नया है या पुराना,-वह व्यक्ति आपकी संपर्क सूची में है या नहीं,-क्या आप दोनों किसी साझा ग्रुप में हैं,-और वह किस देश से संदेश भेज रहा है।-इससे उपयोगकर्ता तय कर सकेंगे कि उन्हें जवाब देना है या नहीं।-सरकार को प्रतिरूपण और फर्जीवाड़े की चिंतासूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार का मानना है कि यदि किसी नए फीचर के कारण ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी पहचान या भ्रामक गतिविधियों की आशंका बढ़ती है, तो संबंधित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की भी जवाबदेही तय होगी। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का भी कहना है कि यूजरनेम सुविधा से मोबाइल नंबर साझा किए बिना बातचीत करना आसान होगा, लेकिन यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं हुए तो इसका दुरुपयोग कर फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को ठगा भी जा सकता है।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘धैर्य, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य की प्राप्ति संभव है’ के भाव को व्यक्त करते हुए ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर किया है। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास ही सफलता की असली कुंजी है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “निरंतर प्रयास ही सफलता की असली कुंजी है। जीवन में वही व्यक्ति अपने लक्ष्य तक पहुंचता है, जो धैर्य, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता रहता है।” उन्होंने एक ‘संस्कृत सुभाषितम्’ साझा किया, “नानाश्रान्ताय श्रीरस्तीति रोहित शुश्रुम। पापो नृषद्वरो जन इन्द्र इच्चरतः सखा चरैवेति।” ‘संस्कृत सुभाषितम्’ का अर्थ है कि जो मनुष्य निरंतर प्रयत्नशील रहता है, वह समृद्धि प्राप्त करता है, किंतु जो निष्क्रिय होकर बैठा रहता है, वह प्रगति से वंचित रह जाता है। निरंतर प्रयत्न करने वाले का भाग्य भी साथ देता है, इसलिए निरंतर कर्म करते रहो और आगे बढ़ते रहो।इससे पहले, पीएम मोदी ने ‘डिजिटल इंडिया’ पहल के 11 साल पूरे होने पर ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर किया, “विज्ञानसारथिर्यस्तु मनःप्रग्रहवन्नरः। सोऽध्वनः परमाप्नोति तद्विश्नोः परमं पदम्॥” सुभाषितम् का अर्थ है कि जिस व्यक्ति की विवेकशील बुद्धि एक सतर्क, वैज्ञानिक सारथी के रूप में कार्य करती है और जिसका मन अनुशासित एवं नियंत्रित होता है, वह जीवन के पथ की जटिलताओं से परे जाकर अंतिम लक्ष्य तक पहुंचता है।पीएम मोदी ने कहा कि डिजिटल इंडिया के 11 सालों की सफलता ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दी है। प्रधानमंत्री ने ‘एक्स पोस्ट’ में कहा, “डिजिटल इंडिया के 11 वर्षों की सफलता से भारतवर्ष को एक नई पहचान मिली है। इससे नवाचार और प्रौद्योगिकी को अपनाकर देश को नई ऊंचाई पर ले जाने की देशवासियों की संकल्पशक्ति दिखती है।” बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी हर दिन एक ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर करते हैं, जो हमारी संस्कृति, समाज और देश से जुड़े अलग-अलग विषयों पर आधारित होते हैं।
- नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को जम्मू से श्री अमरनाथ यात्रा के तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया। इसके साथ ही, इस सालाना यात्रा की औपचारिक शुरुआत हुई। अमरनाथ यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों के जत्थे को रवाना करने से पहले उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पूजा अर्चना की। इस अवसर पर सांसद जुगल किशोर शर्मा, जम्मू-कश्मीर के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा और भाजपा विधायक अरविंद गुप्ता मौजूद रहे। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “हर-हर महादेव। बाबा बर्फानी के पवित्र धाम की यात्रा का शुभारंभ हो चुका है। जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से श्री अमरनाथ यात्रा 2026 के श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।” उन्होंने आगे लिखा, “श्री अमरनाथ जी की यात्रा एक आध्यात्मिक जागृति है। इस पवित्र रास्ते पर उठाया गया हर कदम बाबा अमरनाथ के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का प्रमाण है। सभी श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित, मंगलमय और आध्यात्मिक आनंद से परिपूर्ण हो, ऐसी कामना है। भगवान शिव हम सभी पर कृपा बनाए रखें।”भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा ने कहा, “इस बार यात्रा में पहले से अधिक तीर्थयात्रियों की संख्या नजर आती है। यहां व्यवस्थाओं की भी कोई कमी नहीं है। प्रशासन ने सभी व्यवस्थाएं की हैं। खासकर नगर निगम, पर्यटन विभाग, पुलिस और कई अन्य सरकारी एजेंसियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात काम किया है कि श्रद्धालुओं को सभी सुविधाएं।”उन्होंने कहा कि देशभर से श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं। इसके साथ ही, भाजपा सांसद ने कहा, “मैं सभी से अपील करना चाहता हूं कि वे बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आएं और उनका आशीर्वाद लें।”विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि तीर्थयात्रियों में अमरनाथ यात्रा को लेकर जोश और उत्साह है। आज पहला जत्था रवाना हुआ है। 28 अगस्त तक चलने वाली इस यात्रा के लिए हम बाबा बर्फानी से कामना करते हैं कि देश के अनेक प्रांतों से आए हुए श्रद्धालुओं की यात्रा को सुखद और सफल बनाएं। सुनील शर्मा ने कहा कि अमरनाथ यात्रा बहुत ही अनोखी यात्रा है। पूरे विश्व में इस तरह की यात्रा कहीं और नहीं है। इस धरती पर यह एक पवित्र स्थान है, जहां बाबा बर्फानी साक्षात दर्शन देते हैं। भाजपा विधायक अरविंद गुप्ता ने कहा, “यह मेरे लिए गौरव का पल है कि मुझे उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ अमरनाथ यात्रा को हरी झंडी दिखाने का अवसर मिला। इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में एक अलग उत्साह था। इस यात्रा को लेकर पूरा जम्मू शहर भी सजा हुआ है।”
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नई दिल्ली। भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस ‘तरकश’ और आईएनएस ‘इक्षक’ ने 29 जून, 2026 को सेशेल्स के पोर्ट विक्टोरिया की अपनी सफल यात्रा पूरी की। इस दौरान दोनों युद्धपोतों ने सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस और स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर आयोजित विभिन्न पेशेवर, औपचारिक और सामुदायिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। यह यात्रा भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत समुद्री सहयोग और रक्षा साझेदारी का प्रतीक रही। यात्रा के दौरान आईएनएस ‘तरकश’ के मार्चिंग दल और नौसेना बैंड ने 28 जून को आयोजित सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस परेड में हिस्सा लिया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। भारतीय नौसेना की इस सहभागिता ने दोनों देशों के ऐतिहासिक और मजबूत समुद्री संबंधों को और मजबूती प्रदान की।
आईएनएस ‘इक्षक’ पर 300 से अधिक आगंतुकों ने भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें जहाज की अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण क्षमताओं की जानकारी दी गई। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में हाइड्रोग्राफिक सहयोग के लिए भारतीय नौसेना के योगदान को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। आईएनएस ‘इक्षक’ के दल ने सेशेल्स में भारतीय उच्चायोग के सहयोग से इंग्लिश रिवर होम में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया। इस दौरान वहां रहने वाले लोगों को प्राथमिक उपचार किट और अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की गई। इस पहल ने स्थानीय समुदायों के कल्याण के प्रति भारत और सेशेल्स की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।भारतीय नौसेना ने कहा कि आईएनएस ‘तरकश’ और आईएनएस ‘इक्षक’ की यह यात्रा भारत सरकार के ‘महासागर’ (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी एवं समग्र प्रगति) दृष्टिकोण के अनुरूप हिंद महासागर क्षेत्र के मित्र देशों के साथ समुद्री सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस तैनाती से आपसी तालमेल, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा मिलने के साथ भारत और सेशेल्स के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध एवं रक्षा साझेदारी को भी नई मजबूती मिली है। -
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से भारतीय वैज्ञानिकों ने 100 वर्षों पुराने सूर्य के हस्तनिर्मित रिकॉर्ड का विश्लेषण कर सूर्य की चुंबकीय गतिविधियों (Solar Magnetic Activity) को समझने में बड़ी सफलता हासिल की है। इस अध्ययन में 1916 से 2007 तक के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया, जिससे यह पता लगाने में मदद मिली कि सूर्य पर मौजूद चुंबकीय रूप से सक्रिय चमकीले क्षेत्र (Plages) समय के साथ कैसे बदलते रहे।
यह अध्ययन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (ARIES) के शोधकर्ता दिव्य कीर्ति मिश्रा के नेतृत्व में किया गया। इस शोध में भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST), भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) और अमेरिका के साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने भी सहयोग किया।शोधकर्ताओं ने कोडाइकनाल सोलर ऑब्जर्वेटरी (KoSO) में संरक्षित 1904 से 2022 तक के सूर्य के दैनिक हस्तनिर्मित चित्रों (Suncharts) का उपयोग किया। इन चित्रों में सूर्य पर दिखाई देने वाले सनस्पॉट, प्लेज, फिलामेंट और प्रोमिनेंस जैसी गतिविधियों को सावधानीपूर्वक दर्ज किया गया था।हालांकि, हाथ से बने इन रिकॉर्डों में अलग-अलग ड्राइंग शैली, कागज की गुणवत्ता और स्कैनिंग की समस्याओं के कारण उनका विश्लेषण करना आसान नहीं था। इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने U-Net आधारित सुपरवाइज्ड मशीन लर्निंग मॉडल का उपयोग किया।AI मॉडल ने दो चरणों में काम किया:सबसे पहले प्रत्येक चित्र में सूर्य की डिस्क का केंद्र, आकार और झुकाव (Tilt) स्वतः पहचानकर सभी विशेषताओं की सही स्थिति निर्धारित की।इसके बाद 1916 से 2007 तक फैले 9 सौर चक्रों के दौरान सूर्य पर मौजूद प्लेज (Plages) यानी चुंबकीय रूप से सक्रिय चमकीले क्षेत्रों की पहचान और ट्रैकिंग की गई।‘बटरफ्लाई डायग्राम’ से समझे गए सौर चक्रAI की मदद से तैयार किए गए आंकड़ों के आधार पर वैज्ञानिकों ने ‘बटरफ्लाई डायग्राम’ तैयार किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि समय के साथ सूर्य की चुंबकीय गतिविधियां किस प्रकार अलग-अलग अक्षांशों पर स्थानांतरित होती हैं।अध्ययन में यह भी पाया गया कि हस्तनिर्मित चित्रों से प्राप्त प्लेज डेटा, KoSO के Ca II K फुल-डिस्क ऑब्जर्वेशन से प्राप्त आंकड़ों से काफी मेल खाता है। इससे यह साबित हुआ कि पुराने रिकॉर्ड आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।वैज्ञानिकों का कहना है कि सूर्य की दीर्घकालिक चुंबकीय गतिविधियों का सटीक रिकॉर्ड भविष्य में स्पेस वेदर (अंतरिक्ष मौसम) को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।सौर गतिविधियां उपग्रहों, जीपीएस, संचार प्रणाली और बिजली ग्रिड को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में 100 वर्षों के लगातार उपलब्ध आंकड़े भविष्य की अंतरिक्ष मौसम संबंधी भविष्यवाणियों को अधिक सटीक बनाने में सहायक होंगे।शोधकर्ताओं के अनुसार यह अध्ययन दर्शाता है कि मशीन लर्निंग की सहायता से दशकों पुराने और असंगत ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी विश्वसनीय वैज्ञानिक डेटा में बदला जा सकता है। इससे सूर्य के ऊर्जा उत्सर्जन, चुंबकीय प्रभाव और विभिन्न सौर चक्रों की तुलना करने में नई संभावनाएं खुलेंगी। यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल (The Astrophysical Journal) में प्रकाशित हुआ है। - -अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप और वैज्ञानिक नेतृत्व को मान्यता देने के लिए छह पुरस्कारनई दिल्ली। भारत के जीवन विज्ञान इकोसिस्टम में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और जन स्वास्थ्य पर उत्कृष्ट प्रभाव को मान्यता देने के लिए भारत लाइफ साइंसेज अवार्ड (बीएलएसए) 2026 के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। 7 करोड़ रुपये के अनुदान से समर्थित यह पुरस्कार स्वास्थ्य सेवा और जीवन विज्ञान को बढ़ावा देने वाले उत्कृष्ट वैज्ञानिकों, अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और इकोसिस्टम के नेताओं को सम्मानित करने के लिए स्थापित किया गया है। इस पहल का आयोजन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसी) और लिली के सहयोग से किया गया है। इसे जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बाइरैक-बीआईआरएसी) तथा इन्वेस्ट इंडिया का समर्थन प्राप्त है।इस पुरस्कार में पांच श्रेणियों में छह सम्मान शामिल हैं, जिनमें व्यक्तिगत उत्कृष्टता, सहयोगात्मक नवाचार, संस्थागत उत्कृष्टता, स्वास्थ्य सेवा और जीवन विज्ञान स्टार्टअप और वैज्ञानिक इकोसिस्टम विकास शामिल हैं। चार श्रेणियों में अनुदान सहायता उपलब्ध है, जबकि दो श्रेणियां नवाचार और इकोसिस्टम निर्माण में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देती हैं। आवेदनों का मूल्यांकन एक स्वतंत्र निर्णायक मंडल द्वारा पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।आवेदन 1 जुलाई से 10 अगस्त 2026 तक खुले हैं और इसके लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं है। शोधकर्ता, वैज्ञानिक, सार्वजनिक अनुसंधान संस्थान, विश्वविद्यालय और निजी क्षेत्र के नवप्रवर्तक इसमें भाग ले सकते हैं। पात्रता संबंधी विवरण और ऑनलाइन आवेदन के लिए www.bharatlifesciencesawards.com. पर जाएं।
- नई दिल्ली। लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन, एवीएसएम, एसएम ने बुधवार को भारतीय सेना के उप थल सेनाध्यक्ष (वाइस चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ) का पदभार ग्रहण किया। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन जून 1988 में महार रेजिमेंट में शामिल हुए थे। लगभग चार दशक के विशिष्ट सैन्य करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में कमान और स्टाफ से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं।लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने अर्ध-मरुस्थलीय क्षेत्र में एक इन्फैंट्री बटालियन की कमान संभाली। उन्होंने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में भी सेवाएं दीं। इसके अलावा, उन्होंने स्ट्राइक कोर में एक इन्फैंट्री ब्रिगेड, काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स तथा उत्तरी कमान में एक पिवट कोर की कमान भी संभाली। उनके सैन्य करियर में ऑपरेशन पवन में भागीदारी, इथियोपिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन में सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में सेवा तथा नियंत्रण रेखा और पूर्वोत्तर के उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियानों का व्यापक अनुभव शामिल है। उन्होंने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन के एक सेक्टर की कमान भी संभाली।लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने उत्तरी कमान में एक कोर की कमान संभाली। इसके बाद उन्होंने दक्षिणी कमान मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्य किया, जहां क्षमता विकास, बल पुनर्गठन और समग्र परिचालन तैयारियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सेना कमांडर बनने के बाद उन्होंने दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने विभिन्न सैन्य इकाइयों और मुख्यालयों में अनेक महत्वपूर्ण स्टाफ और परिचालन नियुक्तियों पर कार्य किया है। इस दौरान उन्हें पारंपरिक सैन्य अभियानों, आतंकवाद विरोधी अभियानों, उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों, संयुक्त राष्ट्र मिशनों और विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में सैन्य तैयारियों का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने आर्मी वॉर कॉलेज के उच्च कमान पाठ्यक्रम और केन्या के राष्ट्रीय रक्षा पाठ्यक्रम में भी भाग लिया है। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) और सेना पदक (एसएम) से सम्मानित किया जा चुका है।
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नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने दिल्ली सरकार के साथ टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन अलग-अलग प्रयासों से नहीं, बल्कि सभी संबंधित पक्षों के सहयोग से होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ समाज की व्यापक भागीदारी भी आवश्यक है। बैठक के दौरान जे.पी. नड्डा ने टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अभियान की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होने की अपील की और कहा कि समाज के हर वर्ग की सहभागिता से ही टीबी उन्मूलन का लक्ष्य समयबद्ध तरीके से प्राप्त किया जा सकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में आयोजित प्रगति (PRAGATI) बैठक में दिए गए मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए ‘माई भारत’ स्वयंसेवकों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका से जागरूकता अभियान और मरीजों तक पहुंच को और मजबूत किया जा सकेगा।समीक्षा बैठक में बताया गया कि दिल्ली में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत अब तक 28.83 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इसके अलावा 21.67 लाख चेस्ट एक्स-रे और 3.65 लाख मॉलिक्यूलर टेस्ट किए गए हैं। अभियान के दौरान 1.75 लाख टीबी मरीजों को अधिसूचित (नोटिफाई) किया गया है। बैठक में अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए जनभागीदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसके तहत निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए) और वार्ड समितियों से अभियान की जिम्मेदारी अपने स्तर पर लेने और सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। -
नई दिल्ली। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची बुधवार शाम तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचीं। उनके आगमन पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री बनने के बाद साने ताकाइची की यह पहली भारत यात्रा है, जिसे भारत-जापान संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दौरे के दौरान साने ताकाइची की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों नेता 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साने ताकाइची का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी आधिकारिक यात्रा भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में उनका स्वागत किया।भारत रवाना होने से पहले आयोजित प्रेस वार्ता में साने ताकाइची ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत के साथ सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देश साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और रणनीतिक हितों के आधार पर अपनी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं। जापान की प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। निवेश, व्यापार, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा से दोनों देशों के आर्थिक, रणनीतिक और औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलेगी तथा सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की भागीदारी से मजबूत एवं टिकाऊ आर्थिक साझेदारी विकसित होगी। -
नई दिल्ली। अति विशिष्ट सेवा पदक और वायु सेना पदक से सम्मानित एयर मार्शल जसवीर सिंह मान ने 1 जुलाई, 2026 को दक्षिणी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (एओसी-इन-सी) के रूप में पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर दक्षिणी वायु कमान मुख्यालय में उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। 16 दिसंबर 1989 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त करने वाले एयर मार्शल जसवीर सिंह मान ने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, हायर एयर कमांड और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से अध्ययन किया है। वे पायलट अटैक इंस्ट्रक्टर हैं और अपाचे, मिग-21, जगुआर, मिग-29, एसयू-30 तथा राफेल सहित विभिन्न लड़ाकू विमानों पर 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव रखते हैं।
लगभग चार दशकों के सैन्य करियर में एयर मार्शल मान ने एक फाइटर स्क्वाड्रन और एक प्रमुख फाइटर एयरबेस की कमान संभाली है। उन्होंने एयर डिफेंस कमांडर और एक कमांड में प्रशासनिक प्रभारी वरिष्ठ अधिकारी सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वायु मुख्यालय में उन्होंने सहायक वायु स्टाफ प्रमुख (ऑपरेशंस-ऑफेंसिव) और महानिदेशक (वेपन सिस्टम्स) की जिम्मेदारी भी निभाई।अपनी नई नियुक्ति से पहले एयर मार्शल जसवीर सिंह मान पश्चिमी वायु कमान में वरिष्ठ एयर स्टाफ अधिकारी थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त परिचालन क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक और वायु सेना पदक से सम्मानित किया जा चुका है।एयर मार्शल जसवीर सिंह मान ने एयर मार्शल मनीष खन्ना का स्थान लिया है, जो 30 जून, 2026 को लगभग चार दशकों की गौरवशाली सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। एयर मार्शल मनीष खन्ना को उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और वायु सेना पदक से सम्मानित किया जा चुका है।





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