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कीव/ यूक्रेन की राजधानी कीव और उसके आसपास के क्षेत्रों में रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई तथा 42 अन्य लोग घायल हो गए। यूक्रेन की सरकारी आपातकालीन सेवा ने बुधवार को यह जानकारी दी। रूस ने मंगलवार रात से बुधवार तड़के तक ये हमले किए। रूस यूक्रेन के खिलाफ बड़े पैमाने पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले कर रहा है। इस साल गर्मियों से ऐसे हमले लगभग नियमित हो गए हैं। यूक्रेन के पास अमेरिका निर्मित 'पैट्रियट' प्रणालियों की मिसाइलों का सीमित भंडार है। उसके पास मौजूद हवाई रक्षा प्रणालियों में केवल 'पैट्रियट' ही बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। इस बीच, यूक्रेन ने भी रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले तेज कर दिए हैं। यूक्रेन की आपातकालीन सेवा ने बताया कि राजधानी के आसपास के क्षेत्र में 14 लोगों की मौत हो गई और 27 अन्य घायल हो गए। ब्रोवरी, बुचा और फास्तिव जिलों में कई स्थानों पर आग लग गई। कीव नगर सैन्य प्रशासन ने बताया कि राजधानी में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 15 अन्य घायल हो गए।
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वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों के आग्रह पर उन्होंने ईरान के खिलाफ हमले करने का फैसला फिलहाल टाल दिया। ट्रंप ने बताया कि रविवार को अमेरिकी सेना की ''द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला'' करने की योजना तैयार थी लेकिन सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान सहित प्रमुख खाड़ी नेताओं से बातचीत और कुछ अज्ञात ईरानी अधिकारियों के अनुरोध के बाद उन्होंने इस योजना को रद्द कर दिया और कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए थोड़ा और समय देने का निर्णय लिया। ट्रंप ने न्यू जर्सी के बेडमिन्स्टर स्थित अपने गोल्फ क्लब से वाशिंगटन लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा, ''मैंने क्राउन प्रिंस से पूछा कि आप क्या चाहते हैं? क्या आप चाहेंगे कि हम हमला करें या नहीं? उन्होंने कहा कि हम हमले के बजाय समझौता करना ज्यादा पसंद करेंगे, क्योंकि आपको नहीं पता कि ऐसे हमले कहां जाकर रुकेंगे।'' ट्रंप और सऊदी अरब के शहजादे के बीच शनिवार को बातचीत हुई थी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि पश्चिम एशिया के सहयोगी देशों ने पांच महीने पुराने युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौते की रूपरेखा पर सहमति बना ली है। यह ट्रंप के रुख में एक और बड़ा बदलाव था। एक दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि उन्हें ईरान के साथ बातचीत पर भरोसा कम होता जा रहा है और चेतावनी दी थी कि अमेरिकी सेना ''ईरान पर बहुत जोरदार हमला करेगी।'' ट्रंप ने रविवार को दोहराया कि प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना शामिल होगा।
हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने रविवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति अब किसी भी कीमत पर 28 फरवरी, यानी युद्ध शुरू होने से पहले जैसी नहीं होगी। उन्होंने ईरान के सरकारी टेलीविजन से बातचीत में कहा कि ईरान होर्मुज के दूसरी ओर स्थित ओमान के साथ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर चर्चा कर रहा है, लेकिन फिलहाल इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलने पर कोई बातचीत नहीं हो रही है। ट्रंप इससे पहले भी कई बार ईरान पर हमले रोकने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन बाद में हालात बिगड़ने पर संघर्ष फिर शुरू हो गया। -
बोगोटा. यूरोपीय पर्यटकों को प्रसिद्ध नाज्का लाइन्स ले जा रहा एक विमान पेरू के नाज्का शहर के बाहर खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे उसमें सवार 13 लोगों की मौत हो गई। स्थानीय अधिकारियों ने यह जानकारी दी। नाज्का नगर प्रशासन ने बताया कि विमान ने शनिवार को पास के इका शहर से उड़ान भरी थी और इसका संचालन पेरू की विमानन कंपनी एरोडियाना कर रही थी। कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर बताया है कि वह पिछले 14 वर्षों से सेसना ग्रैंड कैरावान विमानों के माध्यम से ऐसी उड़ानों का संचालन कर रही है जिसमें पर्यटकों को हवाई मार्ग से प्रसिद्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल नाज्का लाइन्स दिखाया जाता है। नाज्का लाइन्स रेगिस्तान की सतह को खुरचकर बनाई गई विशाल भू-आकृतियों का समूह है, जिन्हें सैकड़ों वर्ष पहले पेरू के आदिवासी समुदायों ने बनाया था। ये आकृतियां विभिन्न जानवरों की हैं और इन्हें पूरी तरह केवल विमान या विशेष टावरों से ही देखा जा सकता है। पेरू के परिवहन मंत्रालय के अनुसार, मृतकों में 18 से 54 वर्ष के सात इतालवी नागरिक, 52 वर्ष के दो स्पेनिश नागरिक और 77 तथा 78 वर्ष के दो जर्मन नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा विमान के पायलट अमेरिको सालाजार और सह-पायलट इरेन्का गुआनिलो डेल कार्पियो की भी इस दुर्घटना में मौत हो गई। राष्ट्रपति केइको फुजीमोरी ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि हवाई अड्डे को ''अस्थायी रूप से बंद करने'' पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अंतिम निर्णय संबंधित मंत्रालयों से रिपोर्ट मिलने के बाद ही लिया जाएगा। पेरू के अधिकारियों ने बताया कि विमान दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। वहीं, एरोडियाना कंपनी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
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कीव/ रूस ने शुक्रवार देर रात से शनिवार तड़के तक यूक्रेन की राजधानी कीव पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से भीषण हमला किया, जिसमें कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई और 22 अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। यूक्रेन की सरकारी आपातकालीन सेवा के अनुसार, कीव के सोलोमियांस्की जिले में मलबा गिरने से पांच मंजिला रिहायशी इमारत क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें आग लग गई। बचावकर्मियों ने इमारत की ऊपरी मंजिलों से 35 लोगों को सुरक्षित निकाला। इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई और दो बच्चों सहित आठ लोग घायल हुए हैं। आपातकालीन सेवा ने बताया कि दारनित्स्की जिले में हमले के कारण मकानों, वाहनों, एक प्रशासनिक भवन और अन्य गैर-आवासीय इमारतों में आग लग गई तथा भारी नुकसान हुआ। इस इलाके में सात लोगों की मौत हो गई और 14 अन्य घायल हो गए। राजधानी के शेवचेंकिव्स्की जिले में भी आपातकालीन कर्मियों ने एक गैर-आवासीय इमारत में लगी आग पर काबू पाया। हालांकि, जिले के महापौर द्वारा पहले दी गई इस सूचना पर कि एक अन्य रिहायशी इमारत में कुछ लोग फंसे हो सकते हैं, कोई नई जानकारी नहीं मिली है। शहर के दो अन्य जिलों में भी व्यावसायिक और रिहायशी इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबर है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की लगातार अमेरिका और अन्य पश्चिमी सहयोगी देशों से रूस के मिसाइल हमलों का मुकाबला करने के लिए पैट्रियट हवाई रक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं। जेलेंस्की ने शुक्रवार देर रात बताया कि उनकी अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से बातचीत हुई। इस दौरान उन्होंने इस सप्ताह वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बैठक पर भी चर्चा की, जिसे उन्होंने 'सकारात्मक और सार्थक' बताया। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया मंच 'टेलीग्राम' पर लिखा, ''हमारे देश पर रूस के हवाई हमले लगातार जारी हैं। बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए पैट्रियट प्रणाली के इंटरसेप्टर और हवाई रक्षा क्षमता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।'' जुलाई में अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका यूक्रेन को पैट्रियट प्रणाली के निर्माण का लाइसेंस देगा। हालांकि, शुक्रवार को मैरीलैंड स्थित कैम्प डेविड में मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। कीव पर यह हमला ऐसे समय हुआ है जब महज दो दिन पहले रूस ने पूरे यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया था। उस हमले में 10 नागरिकों की मौत हो गई थी और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। साथ ही, एक रूसी मिसाइल पोलैंड के हवाई क्षेत्र में भी प्रवेश कर गई थी। दूसरे हवाई हमले की चेतावनी के दौरान तहखाने में बने शरणस्थल में छिपीं 64 वर्षीय ल्यूडमिला नाकोनेचना ने बताया कि रात करीब डेढ़ बजे तेज धमाकों की आवाज से उनकी नींद खुल गई। उन्होंने कहा, ''मैं भागकर गलियारे में पहुंची ही थी कि बाथरूम का दरवाजा जोरदार धमाके से उखड़कर मेरे पैर से टकरा गया। चारों ओर शीशे टूटने की आवाज आ रही थी। मेरी बालकनी पूरी तरह कांच से भर गई और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। मेरे शयनकक्ष की खिड़कियां भी टूट गईं।'' कैंसर का उपचार करा चुकीं नाकोनेचना ने बताया कि रूस के 24 फरवरी 2022 को पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू करने के बाद से उन्होंने कभी शरणस्थल का सहारा नहीं लिया था, लेकिन अब लगातार हमलों के कारण मानसिक तनाव इतना बढ़ गया कि उन्हें वहां जाना पड़ा। उन्होंने कहा, ''स्थिति हर दिन खराब होती जा रही है। पहले दो सप्ताह में एक बार या सप्ताह में एक बार हमला होता था, लेकिन अब लगभग हर दिन हमले हो रहे हैं। मानसिक रूप से इसे सहना बेहद कठिन होता जा रहा है।'' -
अमेरिका और सऊदी अरब ने ईरान समर्थित लड़ाकों पर किए हमले
काहिरा. जॉर्डन की सेना ने कहा कि देश की हवाई रक्षा प्रणाली ने बुधवार तड़के ईरान से दागी गईं पांच मिसाइलों को बीच रास्ते में ही मार गिराया। यह घटना अमेरिकी सेना द्वारा पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर दागी गईं ईरानी मिसाइलों को निष्क्रिय करने और इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के ठिकानों पर सऊदी अरब के साथ संयुक्त हवाई हमले किए जाने के कुछ ही घंटों बाद हुई। जॉर्डन की सेना ने कहा कि 'सभी पांच मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोककर नष्ट कर दिया गया।'
इस बीच, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'आईआरएनए' ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के हवाले से कहा कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन स्थित मुवाफ्फाक सल्ती एयर बेस और अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के मुख्यालय पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इससे कुछ घंटे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा था कि उसकी सेनाएं 'पूरी तरह सतर्क और उच्च स्तर की तैयारी' में हैं। सेंटकॉम ने यह भी बताया कि अमेरिकी और सऊदी बलों ने इराक में उन ठिकानों पर हमले किए, जिनका इस्तेमाल ईरान समर्थित सशस्त्र समूह हाल के दिनों में हमले करने के लिए कर रहे थे। अमेरिका ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी सैनिकों या सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर आगे भी हमले हुए, तो और कड़ी सैन्य कार्रवाई की जाएगी। इराक के प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी ने इन हमलों पर चर्चा के लिए बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ दिनों से अपेक्षाकृत शांति का दौर था। लगभग तीन दिनों तक दोनों देशों की ओर से किसी नए हमले की घोषणा नहीं हुई थी। इससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कई सप्ताह तक तनाव बना हुआ था। यह वही रणनीतिक समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार होता है। यह संघर्ष ऐसे समय फिर भड़क उठा है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रहे हैं। हाल के सप्ताहों में संघर्ष में चार अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि पेंटागन ने युद्ध की बढ़ती लागत के लिए कांग्रेस से अतिरिक्त धन की मांग की है। सेंटकॉम ने कहा, "पिछले 72 घंटों में आईआरजीसी के निर्देश पर किए गए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में अमेरिकी और सऊदी लड़ाकू विमानों ने पूर्वी इराक में आतंकवादी संगठनों के कई रसद और हथियार भंडारण ठिकानों पर हमला किया।" सेंटकॉम ने चेतावनी दी कि "आईआरजीसी और उससे जुड़े आतंकवादी समूहों को ये हमले बंद करने होंगे, अन्यथा अमेरिका आगे भी सैन्य कार्रवाई करेगा।" सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने भी सोशल मीडिया पर हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि "सऊदी अरब तनाव बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब देगा।" 'पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज' (पीएमएफ), जो मुख्य रूप से शिया और ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों का गठबंधन है तथा औपचारिक रूप से इराकी सेना के अधीन है, ने दावा किया कि रातभर चले हवाई हमलों में उसके 20 लड़ाके मारे गए और 32 घायल हुए। सऊदी अरब ने मंगलवार को कहा था कि उसने लगातार दूसरे दिन इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा दागे गए ड्रोन मार गिराए। वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उसने नाकाबंदी करके एक सऊदी तेल टैंकर को रास्ता बदलने पर मजबूर कर दिया। इराक के प्रधानमंत्री अल-ज़ैदी ने सोमवार के कथित ड्रोन हमले के बाद जांच के आदेश दिए। इराकी सेना ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि इराक की भूमि का उपयोग किसी भी मित्र या पड़ोसी देश पर हमला करने के लिए न किया जाए। हालांकि, इराकी मिलिशिया समूहों ने ड्रोन हमलों में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है। -
संयुक्त राष्ट्र. भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा और तनाव को ''गंभीर रूप से चिंताजनक'' करार दिया तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में कई समुद्री जहाजों पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा करते हुए क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में निर्बाध नौवहन और व्यापार जल्द बहाल करने की मांग की । संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पश्चिम एशिया को भारत के लिए "अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र" बताया और कहा कि, ''क्षेत्र में थोड़े समय हमले रुकने के बाद फिर हमले शुरू हो गए हैं जो चिंताजनक है। यह बेहद गंभीर स्थिति है और भारत तत्काल तनाव कम करने का आग्रह करता है।'' संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मंगलवार को पश्चिम एशिया की स्थिति पर आयोजित एक चर्चा में हरीश ने इस महीने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे जीएफएस गैलेक्सी, एमटी अल बहियाह और एमटी मोम्बासा सहित कई जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, ''इन हमलों में कई भारतीय नागरिक घायल हुए, जिनमें कुछ गंभीर रूप से घायल हैं। एक भारतीय नागरिक को अपनी जान गंवानी पड़ी जबकि एक अन्य अब भी लापता है। भारत, नाविकों को निशाना बनाने और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित एवं स्वतंत्र नौवहन बाधित करने वाली सभी हिंसक घटनाओं की लगातार निंदा करता रहा है।'' भारत ने क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के हित में संवाद और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की पुरजोर वकालत की। हरीश ने कहा, ''क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और असैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप क्षेत्र के समुद्री मार्गों पर निर्बाध नौवहन और व्यापार को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए।'' अमेरिका और इजराइल के ईरान के खिलाफ जारी युद्ध के बीच छह जुलाई से वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के बाद ईरान ने 11 जुलाई को एक बार फिर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद घोषित कर दिया। संयुक्त राष्ट्र के एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए आर्थिक एवं सामाजिक आयोग के अनुसार, संघर्ष से पहले प्रतिदिन 100 से अधिक जहाज इस मार्ग से गुजरते थे। सात जुलाई तक यह संख्या 49 तक पहुंच गई थी, लेकिन जुलाई के मध्य तक घटकर केवल आठ से 15 जहाज प्रतिदिन रह गई। हरीश ने कहा कि इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता से भारत के महत्वपूर्ण हित जुड़े हैं क्योंकि भारत का व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति तंत्र पश्चिम एशिया से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत और पश्चिम एशिया के बीच लगभग 180 अरब डॉलर का वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार, 31 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश तथा केवल खाड़ी सहयोग परिषद के देशों से 52 अरब डॉलर से अधिक का वार्षिक प्रेषण (रेमिटेंस) होता है। इनका भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रभाव है। उन्होंने कहा कि लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी क्षेत्र में रहकर काम करते हैं और उनकी सुरक्षा एवं कल्याण भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत ने सुरक्षा परिषद में यह भी कहा कि दुनिया का ध्यान केवल होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर केंद्रित है और ऐसे में गाजा पट्टी में जारी गंभीर मानवीय संकट की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। हरीश ने कहा कि नागरिकों की मौत और असैन्य बुनियादी ढांचे का विनाश चिंता का बेहद गंभीर विषय है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
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यामे (जापान) .जापान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में आए 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद 13 लोगों के शव मिले हैं और लापता लोगों की तलाश के लिए बुधवार सुबह भी बचाव अभियान जारी रहा। देश की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने यह जानकारी दी। दक्षिणी मुख्य द्वीप क्यूशू के कुमामोतो क्षेत्र में मंगलवार को 7.1 तीव्रता का भूकंप आया।
ताकाइची ने कहा, ''कुछ लोग उन्हें बचाए जाने का इंतजार अब भी कर रहे हैं और समय तेजी से निकल रहा है। हम अधिक से अधिक लोगों का पता लगाने और उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।'' ताकाइची ने मृतकों के परिजन के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने भूकंप से प्रभावित लोगों से गर्म मौसम में अपना ध्यान रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जापान का 'सेल्ड डिफेंस फोर्स' भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त एक शॉपिंग मॉल में तलाश एवं बचाव अभियान में बचावकर्मियों के साथ जुटा है तथा सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में पानी, भोजन और अन्य जरूरी वस्तुएं पहुंचाई जा रही हैं। कुमामोतो में अग्निशमन विभाग ने बताया कि काशिमा कस्बे में 'एयॉन मॉल' की दूसरी मंजिल ढह गई जिससे कई लोग फंस गए। कुमामोतो के आपातकालीन दल ने बताया कि 'निप्पॉन पेपर इंडस्ट्रीज कंपनी' के यत्सुशिरो कारखाने की एक चिमनी ढह गई और लोग मलबे के नीचे दब गए। प्रभावित क्षेत्र तोक्यो से लगभग 900 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है।
अग्निशमन एवं आपदा प्रबंधन एजेंसी ने बताया कि प्रमुख सार्वजनिक सुविधाओं या बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। परमाणु विनियमन प्राधिकरण ने कहा कि आसपास के तीन परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में किसी प्रकार की गड़बड़ी का पता नहीं चला है। 'क्योदो न्यूज' ने बताया कि यत्सुशिरो शहर के एक अस्पताल में लगभग 40 घायलों को भर्ती कराया गया जबकि करीब 50 अन्य लोगों को कुमामोतो शहर के एक अस्पताल ले जाया गया। क्यूशू में कई प्रमुख विनिर्माण कंपनियों ने मंगलवार को अपना कामकाज रोक दिया था लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं होने पर उन्होंने बुधवार को परिचालन फिर शुरू करने की योजना बनाई। आसो कुमामोतो हवाई अड्डे का रनवे बंद कर दिया गया है और इस बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं दी गई कि इसे दोबारा कब खोला जाएगा। क्योदो ने बताया कि यत्सुशिरो स्टेशन पर एक ट्रेन पटरी से उतरकर एक ओर पलट गई। प्रमुख पर्यटन स्थल कुमामोतो किले की पत्थर की दीवारों को भी नुकसान पहुंचा है। यह किला 2016 के भूकंप में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और इसकी मरम्मत अब भी जारी है। मिफुने नगर कार्यालय के अधिकारी हिरोकी शिमोदा ने कहा, ''भूकंप के झटकों ने मुझे कुमामोतो में (10 साल पहले) आए भूकंप की याद दिला दी और मैं डर गया।'' उन्होंने आसपास के मकानों की छतों से खपरैल गिरते हुए देखीं।
कुमामोतो में 2016 में आए विनाशकारी भूकंप में कम से कम 50 लोगों की मौत हुई थी। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने भूकंप बाद के संभावित झटकों के मद्देनजर निवासियों से अगले दो से तीन दिनों तक सतर्क रहने का आग्रह किया। -
नई दिल्ली। रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (एफएसबी) ने बुधवार को मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम के संस्थापक पावेल डुरोव पर आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। एजेंसी का कहना है कि टेलीग्राम ने ऐसे कंटेंट को हटाने में विफलता दिखाई, जिसका इस्तेमाल रूस के भीतर तोड़फोड़, आतंकवादी गतिविधियों और साइबर धोखाधड़ी के संचालन के लिए किया जा रहा था।एफएसबी ने यह भी जानकारी दी कि पावेल डुरोव के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया है। हालांकि, इस मामले में अब तक न तो डुरोव और न ही टेलीग्राम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
एफएसबी के अनुसार, आरोप इस बात से जुड़े हैं कि टेलीग्राम ने ऐसे कंटेंट को नहीं हटाया, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर यूक्रेन की विशेष एजेंसियों तथा आतंकवादी और उग्रवादी संगठनों द्वारा रूस के भीतर तोड़फोड़, आतंकवादी हमलों, सामूहिक हत्याओं और साइबर फ्रॉड जैसी गतिविधियों की योजना बनाने और उनके समन्वय के लिए किया गया।साल 2013 में पावेल डुरोव द्वारा लॉन्च किया गया टेलीग्राम आज दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म में शामिल है, जिसके दुनिया भर में 1 अरब से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान सूचना साझा करने में इस प्लेटफॉर्म की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और इसका उपयोग दोनों देशों के लोग व्यापक रूप से करते रहे हैं।रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई मॉस्को द्वारा टेलीग्राम पर नियंत्रण बढ़ाने की दिशा में उठाया गया ताजा कदम है। रूसी प्रशासन लंबे समय से टेलीग्राम के प्रभाव को सीमित करने की कोशिश करता रहा है और इसके साथ-साथ सरकार समर्थित मैक्स मैसेजिंग सेवा को घरेलू विकल्प के रूप में बढ़ावा दे रहा है।रूस में जन्मे पावेल डुरोव बाद में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और फ्रांस की नागरिकता हासिल कर चुके हैं। टेलीग्राम शुरू करने से पहले उन्होंने रूस की लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट वीकॉन्टाक्टे की स्थापना की थी। हालांकि, रूसी अधिकारियों के बढ़ते दबाव के बाद उन्होंने वर्ष 2014 में कंपनी में अपनी बची हुई हिस्सेदारी बेच दी थी।रूस में दर्ज यह मामला डुरोव की कानूनी चुनौतियों को और बढ़ाता है। फ्रांस में भी उनके खिलाफ अलग से जांच चल रही है। फ्रांसीसी अधिकारियों का आरोप है कि टेलीग्राम ने अपने प्लेटफॉर्म पर आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ अपेक्षित सहयोग भी नहीं किया। हालांकि, पावेल डुरोव इन सभी आरोपों से इनकार करते रहे हैं। -
काहिरा. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मंगलवार को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। उनके कार्यालय ने यह जानकारी दी। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन रविवार को ईरान पर अपने हमले रोक दिए, वहीं तेहरान ने भी कहा कि उसने भी जवाबी कार्रवाई फिलहाल रोक दी है। नेतन्याहू ने रविवार को 'फॉक्स न्यूज' से कहा कि वह ट्रंप के उन प्रयासों का ''पूरी तरह समर्थन'' करते हैं जिनका उद्देश्य ईरान को कमजोर करना और उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए दबाव बनाना है। उन्होंने कहा, ''यदि वह बिना दोबारा बड़े सैन्य संघर्ष के यह लक्ष्य हासिल कर सकते हैं, तो इसमें बुराई क्या है?'' इजराइली प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि वह ट्रंप के सामने कोई नयी जानकारी नहीं रखेंगे, बल्कि ''अपने अच्छे मित्र'' ट्रंप की योजनाओं को सुनेंगे। उन्होंने कहा, ''कई मायनों में अंतिम फैसला उन्हीं का होगा।''
हालांकि नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने भविष्य में सीधे या अपने सहयोगी संगठनों के जरिए इजराइल पर दोबारा हमला किया, तो ''यह उसकी बहुत बड़ी गलती साबित होगी।'' इस घटनाक्रम के बीच दोनों देशों को अंतरिम युद्धविराम समझौते पर बातचीत की मेज पर वापस लाने के प्रयास जारी हैं। हालांकि हाल के दिनों में हुए हमलों और जवाबी हमलों ने इस समझौते को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने 'फॉक्स न्यूज' से कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत के लिए कुछ समय देना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ''राष्ट्रपति ट्रंप वार्ता को थोड़ा और वक्त देना चाहते हैं। पिछले कुछ सप्ताहों से, विशेषकर पिछले कुछ दिनों में ओमान, ईरान और हमारे अन्य वार्ताकार वरिष्ठ स्तर से लेकर तकनीकी स्तर तक लगातार संपर्क में हैं।'' वाल्ट्ज ने इस आशंका को खारिज किया कि ईरानी हमलों से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली अमेरिकी इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार कम पड़ रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान दोनों के लिए लंबे समय तक इस तरह के सैन्य अभियान जारी रखना आसान नहीं होगा। नेतन्याहू और ट्रंप की पिछली मुलाकात फरवरी में हुई थी, जिसके कुछ ही सप्ताह बाद ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू हुआ था। इस युद्ध में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ नेताओं की मौत हो गई थी। युद्ध शुरू होने के दो दिन बाद ईरान समर्थित हिजबुल्ला ने इजराइल पर हमला किया था, जिसके जवाब में इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हवाई हमले और जमीनी कार्रवाई की। इसके बाद अमेरिका ने लेबनान और इजराइल के बीच प्रत्यक्ष वार्ता को समर्थन दिया ताकि सीमा पर तनाव कम किया जा सके और हिजबुल्ला को निरस्त्र करने का रास्ता निकाला जा सके। - बीजिंग। चीन ने अंतरिक्ष मलबे का पता लगाने और चौबीसों घंटे उसकी निगरानी के लिए अपने पहले व्यावसायिक उपग्रह नेटवर्क की तैनाती शुरू कर दी है। 120 उपग्रहों वाले 'गांदे कॉन्स्टेलेशन' का पहला उपग्रह शुक्रवार को उत्तर-पश्चिम चीन से लिजियान-1 वाणिज्यिक रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया गया। इस उपग्रह में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ऑनबोर्ड कंप्यूटर लगाया गया है, जिससे यह धरती से न्यूनतम निर्देश के साथ निगरानी और खोजबीन कर सकेगा।अंतरिक्ष मलबे से अभिप्राय पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहे उन उपग्रहों से है, जिनका अब कोई उपयोग नहीं रह गया है। रॉकेट प्रक्षेपण, ग्रहों के मिशन और उपग्रहों की बढ़ती संख्या के साथ अंतरिक्ष मलबे की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। यह प्रक्षेपण ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका की 'स्पेसएक्स' कंपनी अपनी 'स्टारलिंक' प्रणाली और अन्य अमेरिकी अंतरिक्ष निगरानी कार्यक्रमों का विस्तार कर रही है। दूसरी ओर, चीन 2035 तक वैश्विक अंतरिक्ष महाशक्ति बनने के लक्ष्य के साथ अपनी क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपग्रह नेटवर्क उपग्रहों की अंतरिक्ष मलबे से टक्कर को रोकने, चीन के बढ़ते वाणिज्यिक उपग्रह बेड़े की सुरक्षा, अंतरिक्ष संबंधी स्वतंत्र निगरानी क्षमता को मजबूत करने और व्यावसायिक सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करेगा। साथ ही, अंतरिक्ष वातावरण में चीन की नागरिक और सैन्य क्षमताओं को भी मजबूती मिलेगी। 'गांदे कॉन्स्टेलेशन' के मुख्य अभियंता फान वेई ने कहा कि यह मिशन चीन की व्यावसायिक अंतरिक्ष मलबा निगरानी क्षमता की कमी को दूर करेगा और अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा और 2030 से पहले सभी 120 उपग्रह तैनात करने का लक्ष्य रखा गया है।पहले चरण, एलएक्स630 के तहत 14 उपग्रह स्थापित किए जाएंगे, जो पृथ्वी की निचली कक्षा (लो-अर्थ ऑर्बिट) में मौजूद वस्तुओं की व्यापक निगरानी और सूची तैयार करेंगे। इस प्रणाली को विकसित करने वालों के अनुसार, एआई आधारित ऑनबोर्ड कंप्यूटर उपग्रहों को नियमित निगरानी, आपातकालीन प्रतिक्रिया और तेजी से खोज-बीन जैसे कार्य न्यूनतम निर्देश के साथ करने में सक्षम बनाएगा। इनमें कक्षा बदलने की क्षमता भी होगी, जिससे वे नजदीक जाकर निरीक्षण और अन्य उन्नत अंतरिक्ष अभियानों को पूरा कर सकेंगे। विश्लेषकों का कहना है कि यह परियोजना केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन की अंतरिक्ष रणनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। पिछले साल, चीन के शेनझोउ-20 अंतरिक्ष यान को तियानगोंग अंतरिक्ष स्टेशन पर लंबे समय तक रुकना पड़ा था, क्योंकि मिशन के दौरान इसकी वापसी 'कैप्सूल' की खिड़की से अंतरिक्ष का मलबा टकरा गया था। शिन्हुआ के मुताबिक, एक सेंटीमीटर से बड़े अंतरिक्ष मलबे की संख्या 10 लाख से अधिक हो चुकी है। ये टुकड़े लगभग 7.9 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार वाले हैं और टकराने पर अत्यधिक गतिज ऊर्जा पैदा करते हैं, जिससे अंतरिक्ष यान को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। वैज्ञानिक एक ओर अंतरिक्ष यान की सुरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने पर काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अंतरिक्ष मलबे की निगरानी को भी तेज कर रहे हैं। यह कॉन्स्टेलेशन इसी दिशा में चीन की नवीनतम पहल माना जा रहा है।
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वाशिंगटन. भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक और डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अमीश शाह ने एरिजोना की 'फर्स्ट डिस्ट्रिक्ट' से प्रतिनिधि सभा के लिए पार्टी के प्राइमरी चुनाव में जीत दर्ज की। आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ शाह घर-घर जाकर प्रचार करने की अपनी शैली के लिए जाने जाते हैं। वह अपने अभियान के दौरान लगभग 28,000 घरों तक पहुंचे। अब नवंबर में अमेरिकी संसद के चुनाव में उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व एनएफएल (नेशनल फुटबॉल लीग) खिलाड़ी जे फीली से होगा, जिन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन प्राप्त है। एरिजोना प्रतिनिधि सभा के तीन बार के सदस्य शाह ने प्राइमरी चुनाव में पूर्व पत्रकार मार्लीन गैलन-वुड्स को हराया। गैलन-वुड्स को 'डेमोक्रेटिक कांग्रेसनल कैंपेन कमेटी' (डीसीसीसी) का समर्थन प्राप्त था। अब राजनीतिक रूप से आमने-सामने खड़े शाह और फीली का अतीत एक-दूसरे से जुड़ा रहा है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार शाह जब न्यूयॉर्क जेट्स फुटबॉल टीम के चिकित्सक थे और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं देते थे, तब फीली उसी टीम के लिए खेलते थे। शिकागो में 1960 के दशक में अमेरिका आए गुजराती प्रवासियों के घर जन्मे शाह ने नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी मेडिकल स्कूल से चिकित्सा की डिग्री हासिल की। शाह के पिता जैन और मां हिंदू हैं।
डेमोक्रेटिक उम्मीदवार घोषित होने के बाद शाह ने कहा, ''प्राइमरी में हमारी जीत जमीनी स्तर के अभियान की जीत है, जिसमें एरिजोना के मतदाताओं ने अपनी आवाज बुलंद की। अब मेरी जिम्मेदारी है कि मैं इस 'डिस्ट्रिक्ट' के हर मतदाता का समर्थन हासिल करूं, चाहे वे डेमोक्रेट हों जिन्होंने किसी अन्य उम्मीदवार को वोट दिया हो, हमारी राजनीतिक व्यवस्था से निराश निर्दलीय मतदाता हों या फिर देश की मौजूदा स्थिति से निराश रिपब्लिकन मतदाता।'' यह लगातार दूसरा अवसर है जब शाह ने इस 'डिस्ट्रिक्ट' से डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से प्राइमरी चुनाव जीता है। उन्होंने 2024 में भी पार्टी की प्राइमरी जीती थी, लेकिन आम चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार डेविड श्वाइकर्ट से चार प्रतिशत अंक के अंतर से हार गए थे। -
दुबई. अमेरिकी सेना ने बुधवार को घोषणा की कि वह ईरान पर लगातार 12वीं रात भी हवाई हमले कर रही है। दोनों देश महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों पर नियंत्रण को लेकर आमने-सामने हैं। इस बीच, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने बृहस्पतिवार तड़के दावा किया कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया है। लाल सागर में हूतियों के इस हमले से उस युद्ध का दायरा और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है, जिसने पहले ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है तथा ईंधन और अन्य वस्तुओं की कीमतों में दुनिया भर में तेज वृद्धि हुई है। खाड़ी क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच टकराव गहराने के साथ ही संघर्ष समाप्त कराने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों में भी किसी प्रगति के संकेत नहीं मिले हैं। 'यूएस सेंट्रल कमांड' (सेंटकॉम) ने कहा कि इन हमलों का उद्देश्य ''क्षेत्रीय समुद्री मार्गों से गुजरने वाले असैन्य नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को और कमजोर करना है।'' अमेरिका, होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर से नियंत्रण स्थापित करने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सामान्य करने का प्रयास कर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को चेतावनी दी थी कि यदि ईरान जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर हमला करेगा तो अमेरिका उसके जवाब में एक पुल या बिजली संयंत्र को नष्ट कर देगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ''अब से, इस्लामी गणराज्य ईरान जब भी होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से निशाना साधेगा, अमेरिका उसके एक पुल या बिजली संयंत्र पर बमबारी करेगा और उसे नष्ट कर देगा।'' वहीं, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश ''जैसे को तैसा'' की रक्षा नीति अपनाएगा। उन्होंने बुधवार को 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''ईरान या उसके बुनियादी ढांचे के खिलाफ किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई का शक्तिशाली और निर्णायक जवाब दिया जाएगा।'' अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सामान्यतः ऐसे बुनियादी ढांचे पर हमला प्रतिबंधित है, जब तक कि उनका उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए न किया जा रहा हो। हूतियों ने अपनी समाचार एजेंसी सबा के माध्यम से जारी एक बयान में दावा किया कि उन्होंने लाल सागर में 'एंसेलिया' और 'लायला' नामक दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया जिससे दोनों जहाजों में आग लग गई। यदि इस दावे की पुष्टि होती है, तो यह इस सप्ताह की शुरुआत में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से सऊदी अरब से जुड़े जहाजों की आवाजाही पर नाकेबंदी की घोषणा के बाद किसी पोत पर हूतियों का पहला हमला होगा। हूतियों ने यह नाकेबंदी यमन पर सऊदी अरब की नाकेबंदी और विद्रोहियों के कब्जे वाली राजधानी सना के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हाल में हुए हमले के विरोध में घोषित की थी। अरब प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे पर स्थित बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला वैश्विक समुद्री व्यापार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। दुनिया के कुल व्यापार का लगभग 12 प्रतिशत इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर मिस्र की स्वेज नहर के रास्ते यूरोप और एशिया के बीच संचालित होता है। हूतियों के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि सऊदी अरब से जुड़े जहाजों की नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक हूतियों के खिलाफ कई वर्षों से लागू सऊदी नाकेबंदी नहीं हटा ली जाती। अधिकारी ने हमले के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी। सऊदी अरब के सरकारी मीडिया ने सामान्य परिवहन प्राधिकरण के एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से बताया कि लाल सागर में रात के समय यात्रा के दौरान एंसेलिया पर हुए हमले के बाद उसमें आग लग गई। 'सऊदी प्रेस एजेंसी' ने बताया कि हमले से जहाज के अगले हिस्से में आग लगी, हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। एजेंसी ने लायला का कोई उल्लेख नहीं किया। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर (यूकेएमटीओ) ने कहा कि उसे सूचना मिली है कि लाल सागर में सऊदी अरब के अल-शुकैक से लगभग 130 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में एक टैंकर ''अज्ञात प्रक्षेपास्त्र'' की चपेट में आया। यूकेएमटीओ के अनुसार, इस घटना में भी किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
- वॉशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि अमेरिका आयातित जेनेरिक दवाओं पर अगस्त 2028 से भारी शुल्क लगाएगा। ट्रंप ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के उत्पादन को अमेरिका में प्रोत्साहित करना है। इस फैसले का असर भारत पर पड़ सकता है, जो अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है। ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि एक अगस्त से अमेरिका में आयातित सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो वर्ष तक शून्य प्रतिशत शुल्क लागू रहेगा। इसके बाद एक वर्ष के लिए शुल्क बढ़ाकर 100 प्रतिशत और उसके बाद 200 प्रतिशत कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, '' एक अगस्त, 2026 से अमेरिका में लाई जाने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो वर्ष तक शुल्क शून्य प्रतिशत रहेगा। इसके बाद एक वर्ष के लिए इसे 100 प्रतिशत और उसके बाद 200 प्रतिशत कर दिया जाएगा।'' ट्रंप ने कहा, '' यह कदम अमेरिका में जेनेरिक दवाओं के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। निर्धारित अवधि के भीतर जो कंपनियां अमेरिका में संयंत्र और उपकरण स्थापित नहीं करेंगी, उन पर यह शुल्क एक तरह का दंड होगा।'' राष्ट्रपति ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य अमेरिका के लोगों के हितों की रक्षा करना है।उन्होंने कहा कि 'पेटेंट' वाली, 'ब्रांडेड' या 'इनोवेटिव' दवाओं से संबंधित मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। भारत को अक्सर 'दुनिया का दवाखाना' कहा जाता है, क्योंकि वह दुनिया के अनेक देशों को जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है। आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर मूल्य की दवाओं का निर्यात किया। यह उसके कुल वैश्विक औषधि निर्यात 25.8 अरब डॉलर का 38 प्रतिशत था। भारत में बनी जेनेरिक दवाओं का उपयोग अमेरिका में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर, संक्रामक रोगों और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों के उपचार में व्यापक रूप से किया जाता है। ट्रंप की यह घोषणा ऐसे समय आई है, जब कुछ दिन पहले अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने 'न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि अमेरिका इस वर्ष की शुरुआत में उच्चतम न्यायालय द्वारा निरस्त किए गए शुल्कों की भरपाई के लिए नए शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। ट्रंप प्रशासन कथित बंधुआ श्रम प्रथाओं और अनुचित व्यापार नीतियों से संबंधित जांच का हवाला देते हुए भारत सहित लगभग 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक नए शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। अमेरिकी व्यापार प्रमुख ने कहा था कि यह शुल्क नीति पूरी तरह आर्थिक दृष्टिकोण से प्रेरित है, न कि विदेश नीति के नजरिये से।
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कीव. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने मंगलवार को देश के सेना प्रमुख जनरल ओलेक्सांद्र सिरिस्की को पद से हटा दिया। सिरिस्की को पद से हटाने की मांग को लेकर राजधानी कीव समेत देश के कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन के बाद ये घटनाक्रम सामने आया है। यह जेलेंस्की द्वारा जनता के दबाव में किया गया दूसरा बड़ा बदलाव है। इससे पहले पिछली गर्मियों में हुए विरोध-प्रदर्शनों के कारण जेलेंस्की को एक ऐसा कानून वापस लेना पड़ा था जो यूक्रेन की भ्रष्टाचार-रोधी संस्थाओं को कथित तौर पर कमजोर करने वाला था। सोशल मीडिया पर जारी एक बयान के मुताबिक, जेलेंस्की ने मिखाइलो द्रापाती को नया सेना प्रमुख नियुक्त किया है। जेलेंस्की ने कहा, ''हमारी एक ही साझा इच्छा है - दुश्मन पर जीत हासिल करना और मोर्चे पर ऐसे हालात बनाना और रूस पर ऐसा दबाव डालना जिससे रूस शांति के लिए मजबूर हो जाए।'' यूक्रेनी नेता ने कहा कि उन्होंने यह फैसला सैन्य कमांडरों के साथ कई बैठकों के बाद लिया है।
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नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मनीला में आयोजित मंत्री स्तरीय सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। अपने संबोधन में उन्होंने आसियान और भारत से भविष्य की चुनौतियों का मिलकर सामना करने के साथ ही साझेदारी को और मजबूत बनाने का आह्वान किया। जयशंकर ने आसियान मंत्री स्तरीय सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करते हुए कहा, “मौजूदा अस्थिर और तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में कोई भी एक देश या समूह अकेले चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता।” उन्होंने भारत और आसियान देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया।
विदेश मंत्री ने फिलीपींस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह भारत-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए देश समन्वयक (को-ऑर्डिनेटर) की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि आसियान की अध्यक्षता का विषय “मिलकर भविष्य की राह तय करना” (नैविगेटिंग आर फ्यूचर टुगैदर) आज की वैश्विक भावना को दर्शाता है।वर्तमान वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए कहा, “दुनिया लगातार अधिक अस्थिर होती जा रही है और यह स्पष्ट है कि कोई भी देश या संगठन अकेले इन चुनौतियों से नहीं निपट सकता। ऐसे में यह विचार करना जरूरी है कि आपसी सहयोग किस तरह सभी देशों के हितों को आगे बढ़ा सकता है।”जयशंकर ने कहा, “मौजूदा अनिश्चितता और व्यवधान के दौर में आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर दबाव बढ़ रहा है। समुद्री व्यापार पर निर्भरता को देखते हुए समुद्री क्षेत्र भी चिंता का विषय बन सकता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन बेहद महत्वपूर्ण है।”उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 को ‘आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है, जो अधिक स्थिर और सुरक्षित भविष्य के लिए दोनों पक्षों द्वारा किए जा सकने वाले प्रयासों की याद दिलाता है। ट्रेड से लेकर डिजिटल और एआई क्षेत्र में सहयोग की वकालत करते हुए विदेश मंत्री ने कहा, “चुनौतियों के बावजूद भारत और आसियान दोनों अपने भविष्य को लेकर आशावादी हैं। अवसरों पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यापार एवं निवेश, आवागमन और प्रतिभा, प्रौद्योगिकी, डिजिटल क्षेत्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), हरित विकास एवं स्थिरता तथा कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना होगा।”जयशंकर ने कहा कि व्यापक सहयोग ही जोखिमों को कम करने, आपूर्ति और आर्थिक गतिविधियों में विविधता लाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, “भारत और आसियान ने परंपरागत रूप से व्यापक क्षेत्र के कल्याण के लिए मिलकर काम किया है। भारत के लिए आसियान की केंद्रीय भूमिका एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।” उन्होंने आसियान के हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण और भारत की इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव के बीच समानता का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों पक्ष कई क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं, जो उनकी नीतियों और पहलों में दिखाई देता है। जयशंकर ने कहा, “यह दुनिया बदलाव के दौर से गुजर रही है और भारत तथा आसियान, जिनकी संयुक्त आबादी लगभग दो अरब है, को इसे सुरक्षित और स्थिर बनाए रखने के लिए मिलकर आगे बढ़ना होगा।” -
दुबई. ईरान ने मंगलवार तड़के होर्मुज जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर पर हमला किया, जिससे चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा। वहीं, अमेरिका लगातार ईरान पर हवाई हमले कर रहा है। अमेरिका के लगातार 10 रातों तक हुए हवाई हमलों के बावजूद तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है। शांतिकाल के दौरान वैश्विक स्तर पर कारोबार होने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता था। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से पूर्ण युद्ध का खतरा बढ़ने के बीच ईरान के गृह मंत्री बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचे। पाकिस्तान इस विवाद में अहम मध्यस्थ माना जाता है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि युद्ध खत्म करने के लिए कोई नया समझौता हो सकेगा या नहीं। दोनों देशों के बीच पिछले महीने हुआ अस्थायी समझौता अब टूट चुका है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही भी लगभग रुक गई है।
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काबुल. अफगानिस्तान के शीर्ष व्यापारिक संगठन अफगानिस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इन्वेस्टमेंट (एसीसीआई) ने भारत के साथ व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत बनाने पर जोर दिया है। संगठन ने व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने तथा व्यापारिक वीजा जारी करने की प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने का सुझाव दिया है। इन मुद्दों पर काबुल में एसीसीआई के चेयरमैन सैयद करीम हाशिमी और अफगानिस्तान में भारत के राजदूत यतिन पटेल के बीच बैठक हुई। एसीसीआई के अनुसार, दोनों पक्षों ने रणनीतिक एवं कूटनीतिक संवाद के तहत व्यापार, निवेश और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पाकिस्तान के माध्यम से अफगानिस्तान का पारगमन व्यापार तेजी से घटा है। वित्त वर्ष 2020-21 में जहां यह लगभग पांच अरब अमेरिकी डॉलर था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह घटकर 36.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर रह गया है। इसके चलते अफगानिस्तान ने ईरान सहित वैकल्पिक व्यापारिक मार्गों पर अधिक ध्यान देना शुरू किया है। भारत भी ईरान के चाबहार बंदरगाह के माध्यम से अफगानिस्तान के साथ संपर्क और व्यापार को मजबूत कर रहा है। यह मार्ग पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए भारत को अफगानिस्तान तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराता है। भारत और अफगानिस्तान के बीच वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 90.78 करोड़ डॉलर रहा था। बैठक में सैयद करीम हाशिमी ने कृषि उत्पादों, हस्तशिल्प, खनन और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में आर्थिक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अफगानिस्तान के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नए बाजारों तक पहुंच, लॉजिस्टिक ढांचे में सुधार और व्यापारिक वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने जैसे सुझाव भी दिए। भारतीय राजदूत यतिन पटेल ने इन प्रस्तावों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत इन क्षेत्रों में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच संयुक्त व्यापार प्रदर्शनी, विशेष व्यापारिक मंचों और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान की योजना पर कार्य किया जा रहा है। बैठक के अंत में दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश और बुनियादी ढांचा विकास के क्षेत्रों में स्थायी सहयोग को आगे बढ़ाने तथा पारदर्शिता, दक्षता और पारस्परिक लाभ के आधार पर दीर्घकालिक आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
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दुबई. अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को भी बुनियादी ढांचे और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमले जारी रहे। दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच संघर्ष लगातार तीव्र होता जा रहा है। पिछले कई दिनों से दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं। अंतरिम युद्धविराम टूटने के बाद, इस युद्ध के जल्द समाप्त होने के कोई संकेत नहीं हैं। 'अमेरिकी सेंट्रल कमांड' ने बताया कि उसने लगातार सातवीं रात ईरान के खिलाफ अभियान में उसकी सैन्य क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से हमले किए। शनिवार तड़के जारी बयान में कहा गया कि इन हमलों में निगरानी केंद्रों, सैन्य रसद ढांचे, भूमिगत हथियार भंडार और समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया। वहीं कुवैत ने दावा किया कि उसने ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन को बीच में ही रोककर मार गिराया। बहरीन में भी हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाए गए। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हाल के अमेरिकी हमलों में दर्जनों लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने भी अपने कई और सैनिकों के घायल होने की पुष्टि की है। ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावी रूप से बाधित कर दी, जिससे वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ। शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जबकि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या तीन सप्ताह के न्यूनतम स्तर पर आ गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए कहा,'' ईरान में भी हम बड़ी सफलता की ओर बढ़ रहे हैं और इसके नतीजे बहुत जल्द दुनिया के सामने होंगे।'' युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही थी। अब ट्रंप पर युद्ध समाप्त करने और लंबे समय तक चलने वाले पश्चिम एशिया संघर्ष से बचने का घरेलू राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। ईरान में पुलों और बिजली ढांचे पर हमले हुए है।
ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, अमेरिकी हवाई हमलों में दक्षिणी होर्मोज़गान प्रांत के कई पुलों को निशाना बनाया गया। माना जा रहा है कि इन हमलों का उद्देश्य बंदर अब्बास बंदरगाह को देश के मध्य भाग और राजधानी तेहरान से जोड़ने वाले सड़क एवं रेल संपर्क को बाधित करना है। ईरान ने पहली बार स्वीकार किया कि अमेरिकी हमलों में उसके बिजली ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। ऊर्जा मंत्रालय ने दक्षिणी प्रांतों के लोगों से बिजली की बचत करने की अपील की, हालांकि यह नहीं बताया कि कौन-से प्रतिष्ठान प्रभावित हुए। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि हाल के अमेरिकी हमलों में 46 लोगों की मौत हुई है और 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं। शुक्रवार को एक पुल पर हुए हमले में आठ लोगों की जान गई। उधर, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि सोमवार से अब तक 13 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें थलसेना के 10 और नौसेना के तीन जवान शामिल हैं। युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 14 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है और 427 सैनिक घायल हो चुके हैं। अमेरिकी हमलों में ओमान की खाड़ी स्थित ईरान के चाबहार बंदरगाह का एक प्रमुख निगरानी टॉवर भी ढह गया। इसकी पुष्टि ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए और बाद में अमेरिकी सेना ने भी की। भारत के सहयोग से विकसित चाबहार बंदरगाह हाल के दिनों में अमेरिकी हमलों का निशाना रहा है।
ईरान का कहना है कि यह टॉवर बंदरगाह पर आने-जाने वाले व्यावसायिक जहाजों की निगरानी के लिए इस्तेमाल होता था, जबकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा है कि यह रिवोल्यूशनरी गार्ड के समुद्री निगरानी नेटवर्क का हिस्सा था, जिसका उपयोग होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जाता था।
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दुबई. अमेरिका ने बृहस्पतिवार तड़के ईरान पर अपने हमले और तेज कर दिए। अमेरिकी सेना ने इस बार ईरान के और अधिक उत्तरी इलाकों को निशाना बनाया और साथ ही एक ऐसे जहाज पर भी गोलीबारी की, जिस पर नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने तड़के बहरीन और कुवैत पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए।
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच कई दिनों से जारी जवाबी हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव ने ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए हुए अंतरिम समझौते को लगभग निष्प्रभावी कर दिया है। इससे पूरे क्षेत्र में फिर से पूर्ण युद्ध छिड़ने की आशंका बढ़ गई है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी हमलों में अब तक 35 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 300 से अधिक घायल हुए हैं। इस ताजा हिंसा के दौरान पहली बार ईरान की राजधानी तेहरान के आसपास के इलाकों को भी निशाना बनाया गया। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बृहस्पतिवार तड़के अमेरिकी हमलों में तेहरान के आसपास के कई इलाकों को निशाना बनाया गया। समाचार एजेंसी ने बताया कि अमेरिकी सेना ने सेमनान प्रांत पर भी हमला किया, जहां से ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन और अंतरिक्ष कार्यक्रम संचालित होता है। अमेरिका ने बुधवार को भी ईरान पर हमले किए थे, जिससे सैन्य अभियान की तीव्रता और बढ़ती दिखाई दी। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्रेटर तुंब द्वीप पर किए गए हमले में ईरानी रक्षा प्रतिष्ठानों और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसी बीच अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने कुराकाओ के झंडे वाले तेल टैंकर 'बेल्मा' पर गोलीबारी की। यह जहाज फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप की ओर जा रहा था। अमेरिकी सेना के अनुसार, जहाज ने कई बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद दिशा नहीं बदली, जिसके बाद एक अमेरिकी विमान ने जहाज की चिमनी पर मिसाइल दागकर उसे निष्क्रिय कर दिया। जब अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था, तब तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को समुद्री यातायात के लिए प्रभावी रूप से बंद कर दिया था। इस कदम से तेल, उर्वरक और कई अन्य वस्तुओं की कीमतें न केवल क्षेत्र में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी तेजी से बढ़ गई थीं और इससे वार्ता में ईरान की स्थिति मजबूत हो गई। बढ़ती तेल कीमतें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए भी चुनौती बन गई हैं, क्योंकि नवंबर में होने वाले चुनावों में पार्टी कांग्रेस पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहती है। हालांकि, अमेरिका अब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने में सफल नहीं हो पाया है। इसी वजह से ट्रंप ने बुधवार को ईरान पर फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी। ईरानी संसद के अध्यक्ष और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि यदि अमेरिका अंतरिम समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता है तो ईरान व्यापक सैन्य टकराव के लिए तैयार है। वहीं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी कि यदि नाकेबंदी जारी रही तो वह पूरे पश्चिम एशिया से तेल और गैस के निर्यात को रोक सकता है। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा, ''या तो इस क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात सभी के लिए होगा, या फिर किसी के लिए भी नहीं होगा।'' वहीं, ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि ईरान शांति समझौता करना चाहता है, हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। उन्होंने पेनसिल्वेनिया स्थित 'यूएस आर्मी वॉर कॉलेज' में कहा, ''उन्हें हमारी कार्रवाई पसंद नहीं है और वे समझौता करना चाहते हैं। अब देखना यह है कि उनके साथ समझौता होता है या फिर हम इस मामले का पूरी तरह अंत कर देते हैं।'' -
दुबई . ओमान के निकट होर्मुज जलडमरूमध्य में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो तेल टैंकरों पर ईरान के हमले में मंगलवार को चालक दल के एक भारतीय सदस्य की मौत हो गई, जबकि छह भारतीयों समेत आठ अन्य लोग घायल हो गए। यह घटना पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बड़े विस्तार के रूप में सामने आई है।
यूएई के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उसके राष्ट्रीय टैंकर 'मोम्बासा' और 'अल बहियाह' ओमान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी नौवहन मार्ग से गुजर रहे थे, तभी उन पर ईरान की ओर से दो क्रूज मिसाइलें दागी गईं। मंत्रालय ने बताया कि 'मोम्बासा' टैंकर पर सवार चालक दल के एक भारतीय सदस्य की हमले में मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोग घायल हुए हैं। घायलों में से चार की हालत गंभीर बताई गई है। उसने बताया कि घायलों में छह भारतीय और यूक्रेन के दो नागरिक शामिल हैं।
बयान के अनुसार, हमले के कारण दोनों टैंकरों में आग लग गई, जिससे उन्हें नुकसान पहुंचा। हालांकि बाद में आग पर काबू पा लिया गया। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने इस ''खुले हमले'' की निंदा करते हुए इसे ''गंभीर उल्लंघन'' और ''अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट हनन'' बताया। मंत्रालय ने कहा, ''यूएई इस तनावपूर्ण स्थिति पर जवाब देने तथा अपने क्षेत्र, नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का पूरा अधिकार सुरक्षित रखता है।'' उसने कहा कि किसी भी खतरे से निपटने के लिए मंत्रालय उच्चतम स्तर की तैयारी और सतर्कता बनाए हुए है।
इस बीच, अमेरिका ने मंगलवार तड़के ईरान पर हमले किए। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की नाकेबंदी ''फिर से लागू'' कर रहा है। उन्होंने सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने के बदले अन्य जहाजों से शुल्क लेने का भी संकेत दिया। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और यूएई से जुड़े इन दोनों टैंकरों को निशाना बनाकर हमले किए।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अब तक 11 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। इस संघर्ष के दौरान जहाजों और टैंकरों पर हुए हमलों के बीच कई नाविकों को भी बचाया गया है। पिछले महीने पलाऊ के ध्वज वाले टैंकर 'एमटी सेट्टेबेलो' पर अमेरिका के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। -
वेलिंगटन. 'जुरासिक पार्क' में डायनॉसोर से बचने की कोशिश करते नजर आए और 'द पियानो' में हॉली हंटर के पति की भूमिका निभाने वाले बहुमुखी अभिनेता सैम नील का 78 वर्ष की उम्र निधन हो गया है। अभिनेता के सोशल मीडिया पेज पर जारी बयान के अनुसार, नील का निधन सोमवार को सिडनी में हुआ।
नील ने 2023 में बताया था कि उन्हें एंजियोइम्यूनोब्लास्टिक टी-सेल लिम्फोमा की समस्या हो गई है। यह गैर-हॉजकिन लिम्फोमा का ही एक दुर्लभ प्रकार है। बयान में कहा गया कि उनकी मृत्यु ''अचानक और अप्रत्याशित'' थी और निधन के समय वह ''कैंसर मुक्त'' हो चुके थे। हालांकि, मृत्यु के कारण का खुलासा नहीं किया गया। उनके परिवार ने कहा, ''सैम ने अपने परिवार के बीच उसी गरिमा के साथ विदा ली, जो उनके पूरे जीवन की पहचान रही।'' नील उन कई ऑस्ट्रेलियाई कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने 1970 के दशक के अंत में ऑस्ट्रेलियाई सिनेमा के उभार के बाद अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की। इस सूची में पॉल होगन, मेल गिब्सन, ज्योफ्री रश, रसेल क्रो, जेन कैंपियन, पीटर वीयर और जिलियन आर्मस्ट्रॉन्ग जैसे नाम शामिल हैं। नील की अभिनय क्षमता का दायरा काफी व्यापक था। उन्होंने एलन एकबॉर्न की कॉमेडी 'स्वीट रिवेंज' में हेलेना बोनहम कार्टर के साथ काम किया, 'द पियानो' में हॉली हंटर की उंगली काटने वाले किरदार को निभाया और विज्ञान-कथा हॉरर फिल्म 'इवेंट हॉराइजन' में अपनी आंखें निकालने वाले दृश्य के लिए भी जाने गए। अंतरराष्ट्रीय दर्शकों का ध्यान उन्होंने 1979 में जिलियन आर्मस्ट्रॉन्ग की फिल्म 'माई ब्रिलियंट करियर' से खींचा, जिसमें जूडी डेविस भी थीं। इसके बाद उन्होंने फिलिप नॉयस की समुद्री पृष्ठभूमि वाली थ्रिलर 'डेड काल्म' में काम किया, जिसमें निकोल किडमैन भी थीं। सैम नील की सबसे प्रसिद्ध फिल्मों में 'जुरासिक पार्क' शामिल है, जिसमें उन्होंने जीवाश्म विज्ञानी डॉ. एलन ग्रांट की भूमिका निभाई थी। फिल्म में उनका किरदार एक समझदार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाला व्यक्ति था, जो उस थीम पार्क के निर्माता को चेतावनी देता है जहां क्लोन किए गए डायनासोर रखे गए हैं। उन्होंने लौरा डर्न, जेफ गोल्डब्लम और रिचर्ड एटनबरो के साथ इस फिल्म में अभिनय किया था। एलन ग्रांट का किरदार पहली फिल्म की घटनाओं से बच जाता है, लेकिन 1997 में आई 'द लॉस्ट वर्ल्ड : जुरासिक पार्क दो' में नजर नहीं आया। वह 2001 की तीसरी कड़ी और 2022 की 'जुरासिक वर्ल्ड : डोमिनियन' में फिर लौटे। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने उन्हें ''महान कलाकारों में से एक'' बताया।
उन्होंने कहा, ''उन्होंने ऐसे समय में शुरुआत की थी जब न्यूजीलैंड में फिल्म उद्योग लगभग नहीं के बराबर था। पांच दशक से अधिक समय तक उन्होंने न्यूजीलैंड की कहानियों को दुनिया तक पहुंचाया और उनकी प्रतिभा ने हमारे फिल्म उद्योग को आज का स्वरूप देने में मदद की।'' उनका संस्मरण 'डिड आई एवर टेल यू दिस?' मार्च 2023 में प्रकाशित हुआ था। फिल्मों में उनके ''उत्कृष्ट योगदान'' के लिए उन्हें नाइटहुड से सम्मानित किया गया था, जिसे दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने मंजूरी दी थी। -
63 घायल, 22 की हालत गंभीर
बैंकॉक. थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में एक पब में रविवार देर रात भीषण आग लगने से कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और 63 अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। शहर प्रशासन के अनुसार, उत्तरी बैंकॉक स्थित 'ना लाडप्राओ' बीयर हॉल में रविवार को मध्यरात्रि से पहले आग लग गई। दमकलकर्मियों ने लगभग आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में पब से आग की ऊंची लपटें और घना काला धुआं निकलता दिखाई दे रहा है। लोग जान बचाने के लिए बाहर भागते नजर आए। बैंकॉक के गवर्नर चाडचार्ट सिट्टिपुंत ने कहा कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। जांचकर्ता छत में इस्तेमाल सामग्री के साथ साथ यह भी जांचेंगे कि कहीं आपातकालीन निकास मार्ग अवरुद्ध तो नहीं थे, जिससे लोगों को बाहर निकलने में कठिनाई हुई हो। सोमवार सुबह घटनास्थल को घेर लिया गया और फोरेंसिक विशेषज्ञ आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए जले हुए मलबे की जांच में जुट गए। प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल ने घटनास्थल पर संवाददाताओं से कहा कि हादसे में 27 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि पब में प्रस्तुति दे रहे एक संगीतकार ने उन्हें बताया कि मंच के पास लगे एक सर्किट ब्रेकर से धुआं निकलता दिखाई दिया। इसके बाद बिजली चली गई, विस्फोट जैसी आवाज सुनाई दी और देखते ही देखते पूरा परिसर घने धुएं से भर गया। अनुतिन ने बताया कि मृतकों में से कई लोगों के शव पब के पिछले हिस्से में मिले।
गवर्नर ने बताया कि 63 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें 22 की हालत गंभीर है। उन्होंने कहा कि मृतकों और घायलों की पहचान की जा रही है और कई लोगों के पास पहचान पत्र नहीं हैं या वह बेहोश हैं। आग से पब के सामने की ओर लगी खिड़कियों के शीशे टूट गए और सड़क पर जले हुए टेलीविजन, स्पीकर तथा इलेक्ट्रिक गिटार सहित अन्य सामान बिखरा मिला। अंदर मेज-कुर्सियां बुरी तरह जल गईं। सोमवार सुबह कुछ बौद्ध भिक्षु मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने घटनास्थल पर पहुंचे। स्वास्थ्यकर्मियों ने आसपास मौजूद लोगों को धुएं और जहरीले अवशेषों से बचाव के लिए मास्क वितरित किए। प्रशासन ने लापता लोगों के बारे में जानकारी जुटाने और परिजनों की सहायता के लिए घटनास्थल पर एक पंजीकरण केंद्र भी स्थापित किया है। गायिका सुकन्या वोंगवोंगवाई ने बताया कि वह पास में प्रस्तुति दे रही थीं। आग लगने की सूचना मिलने पर वह घटनास्थल पर पहुंचीं क्योंकि उनके बैंड के कई सदस्य उस पब में प्रस्तुति दे रहे थे। उन्होंने बताया कि उनके एक साथी की मौत हो गई, तीन अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि एक अन्य का अब तक पता नहीं चल सका है। उन्होंने कहा, ''अंदर मौजूद लोगों ने बताया कि आग लगते ही पूरा परिसर अंधेरे में डूब गया। बिजली चली गई थी और चारों ओर धुआं फैल गया था, जिससे लोग एक-दूसरे का पता नहीं लगा सके।'' थाईलैंड में इससे पहले वर्ष 2022 में देश के पूर्वी हिस्से में एक म्यूजिक बार में लगी आग में 14 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, एक जनवरी 2009 को बैंकॉक के सैंटिका नाइटक्लब में नए साल के जश्न के दौरान लगी आग में 66 लोगों की मौत और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। उस हादसे का कारण परिसर के भीतर की गई आतिशबाजी को माना गया था। -
दुबई/ अमेरिका के हवाई हमलों पर ईरान की जवाबी कार्रवाई के बीच सोमवार सुबह कुवैत ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय होकर देश की ओर आने वाले हवाई खतरों को निष्क्रिय करने में जुटी है। कुवैत की सेना ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। हालांकि, उसने तत्काल यह नहीं बताया कि इस कार्रवाई में देश में किसी तरह का नुकसान हुआ है या कोई हताहत हुआ है। कुवैत इससे पहले भी कई बार ईरान के हमलों का निशाना बन चुका है। वहीं, ईरानी हमलों के मद्देनजर सोमवार को बहरीन में दूसरी बार मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजे।
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दुबई. अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज पर हमले के जवाब में रविवार तड़के ईरान पर हमला किया। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को निशाना बनाकर हमले किए। फारस की खाड़ी में दोनों पक्षों के बीच हमलों का यह नया दौर ऐसे समय में शुरू हुआ है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान युद्ध को लेकर हुआ अंतरिम समझौता और युद्धविराम अब ''समाप्त'' हो चुका है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, ''ईरान ने गलत विकल्प चुना। अब उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।'' संयुक्त अरब अमीरात ने नजदीक में स्थित कतर में विस्फोटों की आवाज सुने जाने के बीच रविवार को लोगों को मिसाइल और ड्रोन हमले की आशंका को लेकर चेतावनी जारी की। धमाकों के कुछ ही देर बाद कतर में मिसाइल हमले की चेतावनी के सायरन बजने लगे। इस बीच, फारस की खाड़ी में स्थित बहरीन में भी मिसाइल हमले की चेतावनी के सायरन बजे। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय स्थित है। यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका कि संयुक्त अरब अमीरात में किन स्थानों को निशाना बनाया गया। ईरान के हालिया हमलों के दौर में अब तक उसे निशाना नहीं बनाया गया था। होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए हमले के संबंध में 'यूएस सेंट्रल कमांड' (सेंटकॉम) ने कहा कि साइप्रस के ध्वज वाले एक कंटेनर जहाज को ईरान ने निशाना बनाया, जिससे उसके ''इंजन कक्ष को काफी नुकसान'' पहुंचा और चालक दल का एक असैन्य सदस्य लापता है। ईरान के अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि कई जहाजों ने ''अपना मार्ग बदलने और स्वीकृत रास्ते से आगे बढ़ने संबंधी हमारी चेतावनियों तथा निर्देशों की अनदेखी की।'' रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि इनमें से एक जहाज ''चेतावनी के तौर पर चलाई गई गोली की चपेट में आ गया और उसे रोक दिया गया।'' ईरान ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ''अगली सूचना तक'' बंद रहेगा। उसने यह भी कहा कि यदि उस पर और हमले किए गए तो वह ''क्षेत्र में दुश्मन के अन्य सैन्य ठिकानों'' को निशाना बनाने पर विचार करेगा।
- सैन जुआन. बहामास में एक विमान हादसे में मारे गए 10 लोगों में संगीतकार और एक डीजे भी शामिल हैं। 'बहामास म्यूजिशियंस एंड एंटरटेनर्स यूनियन' ने शनिवार को यह जानकारी दी। हादसे के बाद सरकार ने विमानन कंपनी 'फ्लेमिंगो एअर' की उड़ानों पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी। यह हादसा बहामास की राजधानी नासाउ के ठीक पश्चिम में स्थित नॉर्थ एंड्रोस में हुआ।यूनियन ने 'एक्स' पर एक बयान में कहा, ''दिवंगत हुए लोगों में हमारे कुछ प्रतिभाशाली और ऊर्जावान सदस्य भी शामिल हैं, जिनमें 'द पॉन्ड बैंड' के सदस्य और एक डीजे शामिल हैं।'' बहामास के प्रधानमंत्री फिलिप ब्रेव डेविस ने शुरुआत में कहा था कि हादसे में एक व्यक्ति जीवित बच गया है लेकिन बाद में उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में पुष्टि की कि उस व्यक्ति की भी गंभीर रूप से घायल होने के कारण मौत हो गई। उन्होंने कहा कि लोग बहामास की स्वतंत्रता की 53वीं वर्षगांठ मना रहे थे लेकिन ''यह दिन शोक के दिन में बदल गया।''उन्होंने कहा, ''हम उन सभी परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं जिन्हें यह दुखद समाचार मिला है कि उनका कोई प्रियजन अब घर नहीं लौटेगा।'' देश के विमान दुर्घटना जांच प्राधिकरण ने एक बयान में कहा कि बहामास में पंजीकृत 'सेसना 402' विमान ने नासाउ के लिंडन पिंडलिंग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी और वह सैन एंड्रोस जा रहा था, तभी वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। ऊर्जा, सार्वजनिक सेवाएं और विमानन मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दुर्घटना के कारणों की जांच के मद्देनजर 'फ्लेमिंगो एअर' के विमान परिचालन प्रमाणपत्र को निलंबित करना सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया केवल एहतियाती कदम है। मंत्रालय ने कहा कि शुक्रवार को सुरक्षा संबंधी दो घटनाएं होने के बाद यह कदम उठाया गया।ऊर्जा, सार्वजनिक सेवाएं और विमानन मंत्री जोबेथ कोल्बी-डेविस ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पहली घटना शुक्रवार को 'फ्लेमिंगो एअर' के एक विमान के साथ हुई थी। उन्होंने बताया कि विमान मायागुआना जा रहा था, तभी पायलट ने एक समस्या की सूचना दी और विमान को वापस नासाउ ले आया। विमान के उतरने और यात्रियों के बाहर निकलने के बाद उसमें आग लग गई। इस घटना की भी जांच की जा रही है।










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