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नदजामेना (चाड)/ चाड के पूर्वी हिस्से में जल संसाधन को लेकर दो परिवारों के बीच हुए विवाद के हिंसक झड़पों में बदलने से कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी देश के उप प्रधानमंत्री लिमाने महामत ने दी। महामत ने वादी फीरा प्रांत के इगोटे गांव के दौरे के दौरान बताया कि शनिवार को हुई इस घटना में 42 लोगों की मौत हुई और 10 अन्य घायल हुए। उन्होंने कहा कि घायलों को प्रांतीय स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि बदले की कार्रवाई का सिलसिला बड़े क्षेत्र में फैल गया था, जिसके बाद सेना को हस्तक्षेप करना पड़ा। उनके अनुसार, सेना की त्वरित कार्रवाई से स्थिति को काबू में कर लिया गया है और अब हालात नियंत्रण में हैं। उप प्रधानमंत्री ने गांव में पारंपरिक मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू करने और आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए न्यायिक कार्रवाई शुरू करने की घोषणा की। मध्य अफ्रीकी देश चाड में संसाधनों को लेकर अंतर-समुदायिक झड़पें आम हैं। पिछले वर्ष दक्षिण-पश्चिमी चाड में किसानों और पशुपालकों के बीच संघर्ष में 42 लोगों की मौत हो गई थी और कई घर जला दिए गए थे। महामत ने कहा कि सरकार सीमा क्षेत्र में अस्थिरता रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी।
चाड के पूर्वी प्रांत पिछले कई महीनों से सूडान में जारी युद्ध से भागकर आए शरणार्थियों को शरण दे रहे हैं, जिससे संसाधनों और सुरक्षा पर दबाव बढ़ गया है। फरवरी में चाड ने सीमा को "अगली सूचना तक" बंद कर दिया था, ताकि सूडान के संघर्ष का असर उसके क्षेत्र में फैलने से रोका जा सके।file photo
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वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि शनिवार रात 'व्हाइट हाउस करेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन' के रात्रिभोज के दौरान होटल के बॉलरूम के बाहर हुई गोलीबारी के बाद जब सुरक्षाकर्मी उन्हें बाहर ले जा रहे थे, तब वह खुद देखना चाहते थे कि आखिर क्या हो रहा है। सीबीएस के '60 मिनट्स' कार्यक्रम में एक साक्षात्कार में ट्रंप ने वाशिंगटन हिल्टन होटल में गोलीबारी के बाद फैली अफरातफरी का पूरा घटनाक्रम बताया। जब उनसे पूछा गया कि क्या गोलियों की आवाज सुनकर वह चिंतित थे, तो ट्रंप ने कहा, ''मैं घबराया नहीं था। मैं जिंदगी को समझता हूं। आजकल की दुनिया में कुछ भी हो सकता है।'' राष्ट्रपति ने कहा कि वह खुद घटनाक्रम को देखना चाहते थे, संभवतः इसी वजह से 'सीक्रेट सर्विस' के कर्मियों को उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने में समय लग गया। उन्होंने कहा, ''मैं देखना चाहता था कि क्या हो रहा है। मैं उनके (सीक्रेट सर्विस के) साथ सहयोग नहीं कर रहा था। मैं जानना चाहता था कि क्या चल रहा है। धीरे-धीरे जब बात समझ में आई, तो लगा कि यह बॉलरूम का शोर नहीं, कुछ और ही मामला है, और गंभीर है।'' ट्रंप ने घटना को याद करते हुए कहा, ''मैं एक सजग टीम के मजबूत घेरे में था, लेकिन सच कहूं तो मैंने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं। मैं कहता रहा, ठहरो, एक मिनट ठहरो।'' उन्होंने कहा कि जब वह मंच से बाहर निकल रहे थे, तब सुरक्षाकर्मी बार-बार उनसे नीचे झुकने की गुजारिश कर रहे थे। ट्रंप ने कहा, ''मैं चलने लगा और उन्होंने कहा, कृपया नीचे झुकिए, कृपया फर्श की ओर झुकिए। तो मैं झुक गया और मेलानिया भी झुक गईं।'' साक्षात्कार के दौरान कुछ तीखे पल भी आए, जब ट्रंप से हमले से पहले संदिग्ध द्वारा अपने परिवार को भेजे गए एक संदेश में उनके बारे में लिखी बातों पर सवाल किया गया। ट्रंप ने कहा, ''मुझे पहले से पता था कि आप यह पढ़ेंगे, क्योंकि आप लोग ऐसे ही हैं।''
उन्होंने कहा, ''हां, उसने यह लिखा, लेकिन मैं बलात्कारी नहीं हूं। मैंने वह संदेश पढ़ा है, वह एक बीमार आदमी है। '60 मिनट्स' जैसे कार्यक्रम में ऐसी बातें पढ़ना शोभा नहीं देता, लेकिन चलिए साक्षात्कार जारी रखते हैं।'' जब साक्षात्कारकर्ता ने पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि हमलावर विशेष रूप से उन्हें निशाना बना रहा था, तो ट्रंप ने कहा, ''मैं कोई बच्चों का शोषण करने वाला व्यक्ति नहीं हूं…आप किसी दिमागी रूप से बीमार इंसान की बकवास पढ़ रहे हैं? मुझे ऐसी चीजों से जोड़ा जा रहा है, जिनका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है। मुझे पूरी तरह बेदाग साबित किया जा चुका है।'' अंत में राष्ट्रपति ने 'व्हाइट हाउस करेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन' से अपील की कि वे अगले 30 दिन के भीतर यह रात्रिभोज दोबारा आयोजित करें। ट्रंप ने कहा, ''मैं नहीं चाहता कि यह रद्द हो। मुझे लगता है कि किसी कम अक्ल इंसान द्वारा इस तरह के आयोजन को रद्द करवा देना बेहद बुरी बात है।'' उन्होंने यह भी कहा, ''ऐसा नहीं है कि मैं वहां जाना चाहता हूं। मैं बहुत व्यस्त हूं। मुझे इसकी जरूरत नहीं।'' -
नई दिल्ली। ईरान की मुख्य सैन्य कमान ‘खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर’ ने कहा है कि अगर अमेरिका पश्चिम एशिया क्षेत्र में अपनी “नाकेबंदी, लूट और समुद्री दखल” जारी रखता है, तो वह इसका जवाब देगा। ईरानी मीडिया में जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नौसैनिक नाकेबंदी कर रखी है। इससे ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। साथ ही, पिछले कुछ दिनों में ईरान जा रहे जहाजों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि उसकी सेना पहले से ज्यादा मजबूत और तैयार है। वह देश की संप्रभुता, हितों और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। बयान में यह भी कहा गया कि हालिया युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ईरान की ताकत और हमले की क्षमता का कुछ हिस्सा देख चुकी है। ईरानी सेना ने कहा कि वह क्षेत्र में दुश्मनों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है। अगर अमेरिका और इजरायल फिर से कोई हमला करते हैं, तो ईरान उन्हें और ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार है।वहीं, सऊदी अरब से जुड़े समाचार चैनल ‘अल अरबिया’ ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि ईरान अमेरिका द्वारा तय की गई शर्तों पर बातचीत करने के लिए तैयार नहीं है। इसी बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार को पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने युद्ध खत्म करने से जुड़े अपने विचार साझा किए।अराघची शुक्रवार रात एक प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे थे। वहां उन्होंने अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध विराम, युद्ध खत्म करने और क्षेत्र में शांति व स्थिरता बढ़ाने के लिए आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की। यह जानकारी अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ ने दी।ईरान ने 28 फरवरी से होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण और सख्त कर दिया था। उसने अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों के गुजरने पर रोक लगा दी थी। यह कदम इन दोनों देशों द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद उठाया गया था।करीब 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध विराम हुआ। इसके बाद 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच लंबी बातचीत भी हुई, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद अमेरिका ने इस जलमार्ग पर अपनी नाकेबंदी लागू कर दी। बताया जा रहा था कि इस हफ्ते पाकिस्तान में एक और शांति वार्ता हो सकती है, लेकिन ईरान ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। ईरान का कहना है कि अमेरिका की लगातार नौसैनिक नाकेबंदी और उसकी “ज्यादा सख्त” शर्तें इसकी मुख्य वजह हैं।( -
लंदन. जयपुर की महारानी गायत्री देवी के संग्रह से प्राप्त 17वीं शताब्दी में पीतल से बने एक दुर्लभ खगोलीय सुपरकंप्यूटर (एस्ट्रोलैब) को अगले सप्ताह लंदन में सोथबी नीलामीघर में नीलाम किया जाएगा। बुधवार को होने वाली नीलामी में यह सुपरकंप्यूटर 'इस्लामिक जगत एवं भारत की कला' का मुख्य आकर्षण है।
इसे इस सप्ताहांत प्रदर्शित किया गया था और इसकी अनुमानित कीमत 15 से 25 लाख पौंड के बीच है।
वर्ष 1612 का यह सुपर कंप्यूटर अपनी तरह का सबसे बड़ा कंप्यूटर माना जाता था और इसे लाहौर के एक मुगल रईस के लिए दो भाइयों ने बनाया था। यह जटिल उपकरण महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय के शाही संग्रह का हिस्सा था और बाद में उनकी पत्नी गायत्री देव के पास रहा और फिर निजी संग्रह में चला गया। गायत्री देवी जयपुर की राजमाता थीं।
नीलामी के विवरण में बताया गया, "इसे आगा अफजल ने बनवाया था, जो मुगल साम्राज्य के एक बेहद शक्तिशाली सरदार थे और उस समय सम्राट जहांगीर के अधीन लाहौर का प्रशासन संभाल रहे थे। यह वस्तु स्पष्ट रूप से उनकी प्रतिष्ठा के अनुरूप ही बनाई गई थी।" विवरण के मुताबिक, "इसकी कारीगरी वाकई अद्भुत है। इसमें 94 शहरों का देशांतर और अक्षांश सहित विवरण अंकित है, फूलों की नक्काशी से जुड़े 38 तारा चिह्न हैं, पांच प्लेटें हैं और डिग्री का विभाजन बेहद बारीक है।" इस 'एस्ट्रोलैब' पर तारों के फारसी नाम और देवनागरी लिपि में संस्कृत नाम अंकित हैं, साथ ही मक्का, बीजापुर, अजमेर, कश्मीर और लाहौर के स्थानों को दर्शाने वाली पट्टियां भी हैं। संदर्भित आधिकारिक साहित्य के अनुसार, 17वीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में लाहौर मुगल साम्राज्य में 'एस्ट्रोलैब' निर्माण का प्रमुख केंद्र था। 'लाहौर स्कूल' के नाम से प्रसिद्ध यह शिल्प एक ही परिवार के भीतर चार पीढ़ियों तक पिता से पुत्र के बीच ही आगे बढ़ता रहा। इस विशेष उपकरण को बनाने वाले दो भाई, कइम मोहम्मद और मोहम्मद मुकिम इस स्कूल के सबसे प्रसिद्ध निर्माताओं में से थे। उन्होंने मिलकर कई 'एस्ट्रोलैब' बनाए जो आज भी मौजूद हैं लेकिन उन्होंने केवल दो पर ही एक साथ काम किया था और लंदन में प्रदर्शित 'एस्ट्रोलैब' उन्हीं में से एक है। उनके द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित एकमात्र अन्य 'एस्ट्रोलैब' अब इराक के राष्ट्रीय संग्रहालय में है और उसका व्यास मात्र 12 सेंटीमीटर है। अगले सप्ताह नीलामी के लिए प्रस्तुत होने वाला 'एस्ट्रोलैब' एक अलग पैमाने का है, जिसका व्यास 29.5 सेंटीमीटर और ऊंचाई लगभग 50 सेंटीमीटर है। नीलामी की अन्य प्रमुख कलाकृतियों में जहांगीर की एक मुगलकालीन पेंटिंग शामिल है, जिसकी अनुमानित कीमत 150,000 से 200,000 पौंड के बीच है और भारत की 19वीं सदी के चित्र लगभग 80,000 पौंड में नीलाम होने की उम्मीद है। - वाशिंगटन. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में कहा कि आरएसएस अमेरिकी श्वेत वर्चस्ववादी समूह 'कु क्लक्स क्लैन' का कोई भारतीय संस्करण नहीं है। साथ ही उन्होंने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में संगठन के कार्यों पर प्रकाश डाला। हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित 'न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस' में संवादात्मक सत्र के दौरान होसबाले ने कहा कि अमेरिका में भारत के बारे में गलतफहमियों की तरह ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बारे में भी गलत धारणाएं हैं। उन्होंने बृहस्पतिवार को लेखक वाल्टर रसेल मीड के साथ चर्चा के दौरान कहा, ''दशकों से जानबूझकर या अनजाने में अन्यथा किसी एजेंडा के तहत इस तरह की धारणा गढ़ी गई है कि आरएसएस एक हिंदू वर्चस्ववादी संगठन है या यह ईसाई विरोधी, अल्पसंख्यक विरोधी, विकास विरोधी और आधुनिकीकरण का विरोधी है।''होसबाले ने कहा, ''इसलिए सकारात्मक कार्यों को कभी उजागर नहीं किया गया। इसके बजाय हमेशा गलत छवि का ही प्रचार किया जाता रहा है... जैसे हम 'कु क्लक्स क्लैन' का कोई भारतीय संस्करण हों, जो कि हम नहीं हैं।'' उन्होंने कहा कि हिंदू दर्शन और संस्कृति पूरे विश्व को एक परिवार की तरह देखती है और यह वर्चस्ववाद का समर्थन नहीं करती। आरएसएस सरकार्यवाह ने कहा, ''हम सजीव और निर्जीव, हर चीज में एकता देखते हैं। जब यही हिंदुओं का मूल दर्शन है, तो श्रेष्ठता का प्रश्न ही नहीं उठता। इतिहास में हिंदुओं ने कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया है।'' होसबाले ने आरएसएस को भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विचारधारा में निहित एक स्वयंसेवी आंदोलन के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा, ''आरएसएस भारत के प्राचीन समाज की सांस्कृतिक नैतिकता और सभ्यतागत मूल्यों से प्रेरित एक जन स्वैच्छिक आंदोलन है जिसे सामान्यतः हिंदू संस्कृति के रूप में जाना जाता है।'' उन्होंने कहा, ''चरित्रवान, आत्मविश्वासी, समाज सेवा का भाव रखने वाले और समाज को संगठित करने में सक्षम स्वयंसेवकों को तैयार करने के लिए आरएसएस एक घंटे की दैनिक और साप्ताहिक शाखाओं का आयोजन करता है। इन एक घंटे की शाखाओं के माध्यम से हम जीवन के मूल्यों को बढ़ावा देते हैं।'' होसबाले ने कहा कि आरएसएस हिंदू पहचान को धार्मिक नहीं बल्कि सभ्यतागत पहचान के रूप में देखता है।उन्होंने कहा, ''अल्पसंख्यक समूहों और पड़ोसी देशों के साथ तनाव राजनीतिक हितों और इतिहास की गलत व्याख्याओं से पैदा होता है।'' उन्होंने यह भी कहा कि गलतफहमियों को दूर करने के लिए अल्पसंख्यक समुदायों के साथ निरंतर संवाद महत्वपूर्ण है। होसबाले ने कहा कि पड़ोसी देशों के बीच तनाव के कई कारण हैं, जिनमें वहां का राजनीतिक नेतृत्व भी शामिल है। उन्होंने कहा, ''समस्या सिर्फ एक पड़ोसी देश से है, जो भारत की कोख से जन्मा है। वह पड़ोसी देश तो बन गया है लेकिन कई लोग उस देश के पीछे हैं और समस्याएं पैदा करने में लगे हुए हैं।'' भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने बृहस्पतिवार शाम वर्जीनिया के एक उपनगर में होसबाले के सम्मान में एक सार्वजनिक स्वागत समारोह का आयोजन किया जिसमें ग्रेटर वाशिंगटन क्षेत्र के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। होसबाले ने कहा कि आरएसएस सेवा भावना और जीवन मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगभग 83,000 शाखाएं आयोजित करता है जिनका उद्देश्य सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा, ''जीवन के हर क्षेत्र और हर आयु वर्ग के लोग हमारे संगठन के स्वयंसेवक बन चुके हैं। आरएसएस प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्य करता है और शिक्षा, स्वास्थ्य, आत्मरक्षा, ग्रामीण विकास और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय है।''आरएसएस नेता ने कहा कि सांस्कृतिक मूल्य और आधुनिकीकरण परस्पर विरोधी नहीं हैं और साथ-साथ चल सकते हैं, हालांकि कुछ तनाव उत्पन्न हो सकते हैं। होसबाले ने कहा, ''आधुनिकीकरण और सांस्कृतिक मूल्यों दोनों को समय के अनुसार ढलने की आवश्यकता होती है। आधुनिकीकरण औद्योगीकरण, प्रौद्योगिकी और व्यक्तिवादी प्रवृत्तियों को तो लाता ही है, साथ ही यह संस्कृति और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ-साथ भी चल सकता है।'' उन्होंने कहा कि हाल के दशकों में कई समाजों में संस्कृति और आधुनिकता का सह-अस्तित्व स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। होसबाले ने कहा, ''चाहे वह हिंदू समाज हो, भारतीय समाज हो, जापान हो या चीन, सभी ने अपने सांस्कृतिक और सभ्यतागत मूल्यों को बरकरार रखते हुए आधुनिकीकरण किया है और उनसे प्रेरणा ली है। इसीलिए मुझे नहीं लगता कि सांस्कृतिक मूल्य और आधुनिकीकरण एक दूसरे को विपरीत दिशा में खींचते हैं।''
- मोगादिशु (सोमालिया). अल्जीरिया और स्पेन के बीच समुद्री क्षेत्र में एक नौका के पलट जाने के बाद कम से कम 17 सोमाली प्रवासी मारे गए। अल्जीरिया में सोमालिया के राजदूत ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। राजदूत यूसुफ अहमद हसन ने सोमालिया की सरकारी मीडिया को बताया कि अपने परिचितों की तलाश कर रहे लोगों ने उनसे संपर्क किया। यूरोप की यात्रा के दौरान नौका के पलटने के बाद डूबने से 12 पुरुष और पांच महिलाओं की मौत हो गई। उन्होंने कहा, ''मुझसे उन अभिभावकों ने संपर्क किया जो अपने बच्चों की तलाश कर रहे थे और उनके बारे में जानना चाहते थे।'' हसन ने बताया कि इसके बाद उन्होंने अल्जीरियाई विदेश मंत्रालय से संपर्क किया, जिसने उन्हें सूचित किया कि राजधानी अल्जीयर्स से लगभग 100 किलोमीटर पश्चिम में एक तटीय प्रांत में अफ्रीकी प्रवासियों के एक समूह में शामिल लोगों की मौत हो गई है। यूरोप जाने की कोशिश कर रहे प्रवासियों के लिए उत्तरी अफ्रीका और स्पेन के बीच का मार्ग आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले मार्गों में से एक है। इन मार्गों पर विशेष रूप से पश्चिमी भूमध्य सागर और अटलांटिक गलियारों में जहाज डूबने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं।--
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लंदन. विक्रम दुरईस्वामी ने ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के रूप में इस सप्ताह अपना कार्यकाल पूरा किया और अब वह बीजिंग रवाना होंगे, जहां वह चीन में भारत के नए राजदूत के रूप में पदभार संभालेंगे। ब्रिटेन के विदेश कार्यालय में हिंद-प्रशांत मामलों की मंत्री सीमा मल्होत्रा ने लंदन में तीन वर्ष से अधिक के दुरईस्वामी के कार्यकाल के दौरान भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय साझेदारी को ''नयी ऊंचाई'' पर ले जाने में उनकी भूमिका की सराहना की। ब्रिटिश-भारतीय मंत्री ने पिछले वर्ष द्विपक्षीय संबंधों की प्रमुख उपलब्धियों में भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के सफल निष्कर्ष तक पहुंचाने में दुरईस्वामी के ''शांत स्वभाव'' और आकर्षक व्यक्तित्व का विशेष उल्लेख किया। हाल ही में लंदन में आयोजित विदाई समारोह में मल्होत्रा ने कहा, ''आपने (दुरईस्वामी ने) हमारे देशों के बीच साझेदारी को नए स्तर पर पहुंचाया। मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में आपने अहम भूमिका निभाई और यह सुनिश्चित किया कि इस समझौते के रास्ते में आने वाली हर चुनौती का समाधान हो।'' उन्होंने कहा, ''आपके कार्य ने ब्रिटेन-भारत इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग ब्रिज के जरिए नए निवेश के रास्ते खोले हैं। ये मजबूत नींव आने वाले वर्षों में भी हमारी कहानी, हमारे रिश्तों और एक-दूसरे के देशों में निवेश को आगे बढ़ाती रहेगी... बीजिंग का लाभ, लंदन की हानि होगी।'' भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के 1992 बैच के अधिकारी दुरईस्वामी मंदारिन भाषा में पारंगत हैं। इससे पहले वह सितंबर 1996 से लगभग चार वर्षों तक बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में तैनात रह चुके हैं। उन्होंने सांसदों, सरकारी अधिकारियों और प्रवासी भारतीय प्रतिनिधियों की सभा को संबोधित करते हुए कहा, ''कुछ भी कभी पूरी तरह समाप्त नहीं होता। यह लगातार प्रगति की प्रक्रिया है और हमेशा ऐसी ही रहेगी।'' उन्होंने कहा, ''मुक्त व्यापार समझौता हमें व्यापार बढ़ाने, निवेश प्रवाह तेज करने और निवेश बढ़ाने का मंच देता है कि भारत की वृद्धि और सफलता में ब्रिटेन की वृद्धि और सफलता निहित है और इसके विपरीत भी। इसलिए यह काम अभी बाकी है और कभी रुकने वाला नहीं है।'' लंदन में 'डिप्लोमैटिक कोर' के मार्शल एलिस्टेयर हैरिसन ने भी इंडिया हाउस पहुंचकर महाराज चार्ल्स तृतीय की ओर से उन्हें विदाई तथा शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह भारत-ब्रिटेन राजनयिक संबंधों की मजबूती, निरंतरता और साझा परंपराओं को दर्शाता है। विदेश मंत्रालय में सचिव और 1992 बैच के ही आईएफएस अधिकारी पेरियासामी कुमारन को ब्रिटेन में भारत का नया उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है और वह जल्द ही लंदन में अपना कार्यभार संभालेंगे।
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न्यूयॉर्क. बिहार दिवस 2026 के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष समारोह में बिहार मूल के प्रवासी समुदाय के चार लोगों को उनकी उपलब्धियों और योगदान के लिए यहां सम्मानित किया गया। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने 'बिहार फाउंडेशन ऑफ यूएसए ईटीजेड' और 'बिहार झारखंड एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका' के सहयोग से इस सप्ताह की शुरुआत में बिहार दिवस मनाया। इस अवसर पर समुदाय के प्रतिष्ठित सदस्यों को बिहार विश्व गौरव सम्मान 2026 प्रदान किया गया। सम्मान पाने वालों में विश्व बैंक समूह के जल विभाग के वैश्विक निदेशक सरोज कुमार झा, फुलक्रम डिजिटल के अध्यक्ष एवं संस्थापक राजेश सिन्हा, एएमडी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं मुख्य सूचना अधिकारी हसमुख रंजन तथा सिल्वामो के मुख्य डिजिटल एवं सूचना अधिकारी संजय चौबे शामिल थे। उन्हें उनकी उपलब्धियों और योगदान के लिए सम्मानित किया गया। बिहार फाउंडेशन ऑफ यूएसए की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत बिनय प्रधान ने राज्य के लोगों के व्यापक प्रभाव और वैश्विक उपस्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ''लगभग हर किसी का एक दोस्त बिहार से है।'' उन्होंने बिहार के ऐतिहासिक अतीत, बदलते वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य पर चर्चा की तथा राज्य और क्षेत्र के प्रवासी संगठनों को सामुदायिक संबंध मजबूत करने के लिए बधाई दी। अपने संदेश में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि बिहार परिवर्तन के लिए तैयार है और उन्होंने वैश्विक प्रवासी समुदाय से राज्य के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में सांता मिश्रा की पुस्तक 'गांव की मिट्टी मिटने नहीं देती' का विमोचन भी किया गया। शाम को बिहार की विरासत को दर्शाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए, जिनमें सम्राट अशोक के युग, नालंदा विश्वविद्यालय की विरासत, महात्मा गांधी के चंपारण आंदोलन से लेकर राज्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विकास जैसी वर्तमान उपलब्धियों तक बिहार की यात्रा को दर्शाने वाली नाट्य प्रस्तुति शामिल थी।
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वाशिंगटन. अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने बुधवार को अचानक घोषणा की कि नौसेना सचिव जॉन फेलन अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में किसी सैन्य सेवा विभाग के प्रमुख के पद छोड़ने का यह पहला मामला है। उनका इस्तीफा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी नौसेना ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रही है और युद्धविराम के बीच तेहरान से जुड़े जहाजों को निशाना बना रही है। फेलन के स्थान पर नौसेना के अवर सचिव हंग काओ को कार्यवाहक नौसेना सचिव बनाया गया है। वह 25 वर्ष के युद्ध अनुभव वाले पूर्व नौसेना अधिकारी हैं और वर्जीनिया से सीनेट व प्रतिनिधि सभा के चुनाव लड़ चुके हैं। फेलन का इस्तीफा पेंटागन में शीर्ष स्तर पर जारी फेरबदल की कड़ी माना जा रहा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पहले ही कई वरिष्ठ जनरलों, एडमिरलों और रक्षा अधिकारियों को हटा चुके हैं। फरवरी 2025 में नौसेना की शीर्ष अधिकारी एडमिरल लिसा फ्रैंचेटी, वायुसेना के उप प्रमुख जनरल जिम स्लाइफ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल चार्ल्स ब्राउन जूनियर को भी हटाया गया था। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि फेलन ''तत्काल प्रभाव से प्रशासन छोड़ रहे हैं।'' फेलन ने सेना में सेवा नहीं की थी और न ही नौसेना प्रशासन में पूर्व में कोई भूमिका निभाई थी। ट्रंप ने उन्हें 2024 के अंत में नौसेना सचिव नामित किया था। वह ट्रंप के बड़े दानदाताओं में से एक रहे हैं। नौसेना इस समय युद्ध के मोर्चे पर तैनात है। उसके तीन विमानवाहक पोत पश्चिम एशिया में तैनात हैं या वहां जा रहे हैं। साथ ही कैरेबियाई क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के अभियान में भी उसकी बड़ी भूमिका है। नए कार्यवाहक सचिव हंग काओ वियतनाम से बचपन में अमेरिका आए थे। उन्होंने कोविड-19 टीकों की अनिवार्यता और सेना में विविधता, समानता एवं समावेशन नीतियों का विरोध किया था। वह अमेरिकी नौसेना अकादमी से पढ़े हैं और इराक, अफगानिस्तान तथा सोमालिया में विशेष बलों के साथ सेवा दे चुके हैं।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्थ देश पाकिस्तान के अनुरोध पर ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है। ट्रंप ने कहा कि यह कदम तेहरान के बिखरे हुए नेतृत्व को सात सप्ताह से जारी युद्ध समाप्त करने के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने का समय देने के उद्देश्य से उठाया गया है। यह घोषणा उस समय हुई, जब आठ अप्रैल को घोषित दो सप्ताह का युद्धविराम कुछ ही घंटों में समाप्त होने वाला था। इसके साथ ही उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की इस्लामाबाद यात्रा भी प्रभावी रूप से टल गई, जहां ईरानी प्रतिनिधियों के साथ शांति वार्ता प्रस्तावित थी। हालांकि, ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका ईरान पर हमला करने से केवल तब तक परहेज करेगा, जब तक उसका नेतृत्व बातचीत के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव पेश नहीं करता। उन्होंने कहा कि ईरान के बंदरगाहों पर आर्थिक नाकेबंदी जारी रहेगी। वेंस और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ तथा जेरेड कुशनर को मंगलवार को इस्लामाबाद रवाना होना था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल की ''पाकिस्तान यात्रा मंगलवार को नहीं होगी।
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वाशिंगटन. अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने यहां आधिकारिक यात्रा पर आए सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की मेजबानी की। सेना प्रमुख की यह यात्रा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी की हालिया अमेरिका यात्राओं के तुरंत बाद हो रही है, जो भारत और अमेरिका के बीच उच्चस्तरीय सैन्य आदान-प्रदान की निरंतरता को दर्शाता है। यहां भारतीय दूतावास ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''इस यात्रा से भारत-अमेरिका रक्षा संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है, जो हमारी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ है तथा स्वतंत्र, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।'' सेना प्रमुख बुधवार को अमेरिका के शीर्ष रक्षा सेवा अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
इससे पहले, जनरल द्विवेदी को अमेरिकी सेना की एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सैन्य मामलों को संभालने वाली 'यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी पैसिफिक' (यूएसएआरपीएसी) कमान की यात्रा के दौरान हवाई स्थित फोर्ट शाफ्टर में सलामी गारद दी गयी। भारतीय सेना ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि जनरल द्विवेदी ने यूएसएआरपीएसी के कमांडिंग जनरल रोनाल्ड पी. क्लार्क और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इन वार्ताओं में भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को मजबूत करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। पोस्ट के अनुसार, जनरल द्विवेदी ने ओआहू द्वीप का हवाई दौरा भी किया, जहां उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था और बहु-क्षेत्रीय संचालन क्षमता की तैयारियों की जानकारी हासिल की। -
लंदन। ब्रिटिश संसद ने उस विधेयक को पारित कर दिया है, जिसमें 31 दिसंबर 2008 के बाद जन्मे लोगों के सिगरेट खरीदने पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। मंगलवार को पारित 'टोबैको एंड वेप्स बिल' के समर्थन में दशकों लंबा अभियान चलाने वाली संस्था 'एक्शन ऑन स्मोकिंग एंड हेल्थ' की मुख्य कार्यकारी हेजल चीजमैन ने कहा कि धूम्रपान और उससे होने वाले विनाशकारी नुकसान का अंत अब तय है। 'टोबैको एंड वेप्स बिल' को महाराजा चार्ल्स तृतीय की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जो महज एक औपचारिकता भर है। इसके कानून की शक्ल अख्तियार कर लेने के बाद सरकार को तंबाकू, ई-सिगरेट और निकोटीन उत्पादों को विनियमित करने की शक्ति मिल जाएगी। ब्रिटेन में अभी 18 साल से कम उम्र के लोगों को सिगरेट, तंबाकू उत्पाद या ई-सिगरेट बेचना गैरकानूनी है। नया कानून दुनिया के सबसे सख्त धूम्रपान-रोधी कानूनों में से एक होगा। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिटेन में धूम्रपान करने वाले लोगों की संख्या में 1970 के दशक से दो-तिहाई कमी दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, देश की 13 फीसदी आबादी यानी लगभग 64 लाख लोग सिगरेट और तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं।
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रियाद। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने सऊदी अरब के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय स्थिति तथा परस्पर हित के अन्य मुद्दों पर चर्चा की। डोभाल रविवार को रियाद पहुंचे। सऊदी अरब में भारत के राजदूत सुहेल खान और सऊदी अरब के राजनीतिक मामलों के उप मंत्री सऊद अल-सती ने उनका स्वागत किया। डोभाल ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान, ऊर्जा मंत्री अब्दुलअजीज बिन सलमान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुसैद अल-ऐबान से मुलाकात की। सऊदी अरब में भारतीय दूतावास ने 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि इन बैठकों के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय स्थिति और परस्पर हित के अन्य मुद्दों पर चर्चा की। डोभाल की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में संभवत: दूसरे दौर की चर्चा होगी। पाकिस्तान में 11 और 12 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच हुई पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी।
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बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को "अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग" बताते हुए इसे जहाजों के सामान्य आवागमन के लिए खोलने का आह्वान किया। ईरान हालांकि इस पर अपना अविभाज्य अधिकार होने का दावा करता है। शी चिनफिंग ने फोन पर बातचीत के दौरान सऊदी के युवराज मोहम्मद बिन सलमान से कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य आवागमन जारी रहना चाहिए, क्योंकि यह क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों की पूर्ति करता है।" ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने और उसके बाद मौजूदा संघर्ष में अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी पर चीनी नेता का यह पहला बयान है। जलडमरूमध्य के बंद होने से दुनिया भर में, विशेष रूप से एशिया में, ऊर्जा की भारी कमी हो गई है, और चीन, जो ईरानी तेल का एक प्रमुख आयातक है, अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध के लंबे समय तक चलने को लेकर तेजी से चिंतित है। शी ने कहा कि चीन क्षेत्रीय देशों का समर्थन करता है कि वे परस्पर अच्छे पड़ोसी होने, विकास, सुरक्षा और सहयोग के आधार पर अपना भविष्य स्वयं अपने हाथ में रखें, तथा क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा को बढ़ावा दें। उनकी यह टिप्पणी महत्वपूर्ण थी क्योंकि चीन ने पश्चिम एशिया में एक "प्रमुख राजनयिक सफलता" हासिल की, जिसके तहत मार्च 2023 में कट्टर प्रतिद्वंद्वी ईरान और सऊदी अरब को एक साथ लाया गया। परिणामस्वरूप, दोनों देशों ने राजनयिक संबंध बहाल कर लिए। अमेरिका-ईरान संघर्ष ने लेकिन सब कुछ बदल दिया है, ईरान ने सऊदी अरब और अन्य क्षेत्रीय देशों पर हमला करने के अलावा, उसके खिलाफ अमेरिकी युद्ध का मुकाबला करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। इसके अलावा, चीनी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी नौसेना द्वारा चीन से ईरान के बंदरगाह की ओर जा रहे उस मालवाहक जहाज पर गोलीबारी करने पर चिंता व्यक्त की है, जिसने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी का उल्लंघन किया था। बाद में अमेरिकी नौसेना ने जहाज को जब्त कर लिया।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने यहां एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "हम अमेरिका द्वारा पोत को जबरन रोके जाने से चिंतित हैं और आशा करते हैं कि संबंधित पक्ष जिम्मेदारी से युद्धविराम समझौते का सम्मान करेंगे, विवादों को बढ़ाने और तनाव को बढ़ने से रोकेंगे और जलडमरूमध्य से सामान्य आवागमन की बहाली के लिए आवश्यक स्थितियां बनाएंगे।" उन्होंने एक ईरानी अधिकारी के इस दावे के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग भी कहा कि ईरान इस पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा, और तेहरान का इस पर "अविभाज्य अधिकार" है। गुओ ने कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय आवागमन का मार्ग है। इस क्षेत्र को सुरक्षित और स्थिर रखना तथा निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हित में है"। -
वाशिंगटन. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी वार्ताकार सोमवार को ईरान के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचेंगे। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह जानकारी दी, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस्लामाबाद में ईरान के साथ होने वाली दूसरे दौर की वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में कौन अधिकारी शामिल होंगे। व्हाइट हाउस और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के कार्यालय, जिन्होंने वार्ता के पहले दौर का नेतृत्व किया था, ने रविवार सुबह इस मामले से जुड़े संदेशों का तुरंत जवाब नहीं दिया। ट्रंप ने अपने पोस्ट में ईरान पर शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में गोलीबारी करके संघर्षविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और धमकी दी कि अगर ईरान अमेरिका द्वारा प्रस्तावित समझौते को स्वीकार नहीं करता है तो वह ईरान में नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट कर देगा। ट्रंप ने कहा, ''अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो अमेरिका ईरान के हर एक बिजली संयंत्र और हर पुल को नष्ट कर देगा।''
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नई दिल्ली। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को किसी दूसरे देश को हस्तांतरित नहीं करेगा और इसे अमेरिका भेजने पर कभी विचार भी नहीं किया गया था।
सरकारी आईआरआईबी टीवी चैनल पर बात करते हुए बघाई ने बताया कि विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के हाल के बयान, 8 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम के दायरे में दिए गए थे। उनका मतलब किसी नई बातचीत या रिश्तों में सुधार का संकेत देना नहीं था। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, इससे पहले शुक्रवार को अराघची ने कहा था कि मौजूदा युद्धविराम के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला रहेगा।=बघाई ने साफ किया कि विदेश मंत्री के बयान का मतलब यह था कि लेबनान में युद्धविराम होने के बाद, तेहरान ने वाशिंगटन के साथ हुए समझौते के तहत जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था लागू की है। उन्होंने कहा, “कोई नया समझौता नहीं हुआ है। वही समझौता लागू है जो 8 अप्रैल को घोषित किया गया था।”बघाई ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने शुरू से ही इस समझौते का पालन नहीं किया, खासकर लेबनान पर भी इसे लागू करने के वादे को पूरा नहीं किया। हालांकि अमेरिका और इजरायल ने इस बात से इनकार किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखी, तो ईरान जवाबी कदम उठाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि युद्धविराम बढ़ाने को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है और पाकिस्तान के नेतृत्व में चल रहे मध्यस्थता के प्रयास संघर्ष को समाप्त करने और ईरान के हितों की रक्षा करने पर केंद्रित हैं।आपको बता दें, ईरान ने 28 फरवरी से इस जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर दी थी। उसने इजराइल और अमेरिका से जुड़े जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता बंद कर दिया था, क्योंकि दोनों देशों ने मिलकर ईरान पर हमले किए थे।वहीं इसके जवाब में अमेरिका ने भी नाकाबंदी कर दी और ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को इस रास्ते से गुजरने से रोक दिया। यह कदम तब उठाया गया जब इस्लामाबाद में शांति वार्ता असफल हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दूसरा दौर इस हफ्ते पाकिस्तान में होने की उम्मीद है, जो संभवतः रविवार को हो सकता है। - वाशिंगटन ।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान एक जरूरी ग्लोबल शिपिंग रूट को फिर से खोलने पर राजी हो गया है। इसके साथ ही चेतावनी दी कि जब तक कोई बड़ा समझौता तय नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी सैन्य दबाव जारी रहेगा। एरिजोना में टर्निंग पॉइंट यूएसए की एक मीटिंग में ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से खुला है और बिजनेस और पूरे रास्ते के लिए तैयार है। इससे दुनिया के सबसे सेंसिटिव एनर्जी कॉरिडोर में से एक में तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं।इसके साथ ही, उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिकी सेना मजबूत मौजूदगी बनाए रखेगी। उन्होंने कहा, “नेवल ब्लॉकेड ईरान के मामले में तब तक पूरी तरह से लागू रहेगा जब तक ईरान के साथ हमारा ट्रांजैक्शन 100 फीसदी पूरा और पूरी तरह से डील पर हस्ताक्षर नहीं हो जाता।”ट्रंप ने अपने भाषण में ‘न्यूक्लियर डस्ट’ को वापस लाने की योजना के बारे में भी बताया। यह डस्ट असल में ईरान में हुए पुराने अमेरिकी हमलों का बचा हुआ मलबा है। इस पर ट्रंप ने कहा, “हम इसे हासिल करेंगे और वापस अमेरिका ले जाएंगे।” इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुदाई वाले जॉइंट ऑपरेशन का सुझाव दिया है।राष्ट्रपति ट्रंप ने इन डेवलपमेंट को बड़ी क्षेत्रीय कूटनीति से जोड़ा। उन्होंने दावा किया, “हाल की अमेरिका की कोशिशों ने ईरान के बाहर तनाव को स्थिर किया है। इजरायल और लेबनान के बीच एक ऐसा सीजफायर हुआ है जो पहले कभी नहीं हुआ। ऐसा डेवलपमेंट 78 सालों में नहीं हुआ था।” उन्होंने सहयोग के लिए कई देशों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “मैं पाकिस्तान को धन्यवाद देना चाहता हूं और उसके महान फील्ड मार्शल को, मैं सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत को भी धन्यवाद देना चाहता हूं। इन सभी ने बहुत मदद की है।”ट्रंप ने यूरोप में अमेरिका के सहयोगियों की कड़ी आलोचना की और कहा कि वाशिंगटन को पारंपरिक साझेदारी पर कम भरोसा करना चाहिए। नाटो का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “जब हमें उनकी जरूरत थी, तब वे बिल्कुल बेकार थे। हमें खुद पर भरोसा करना होगा।” उन्होंने कहा कि अमेरिका ने दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी सेना बनाई है और भविष्य के एंगेजमेंट में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।ट्रंप ने खुद को एक ग्लोबल डीलमेकर के तौर पर भी दिखाया और एक बार फिर से कई संघर्षों को खत्म करने का क्रेडिट लिया। उन्होंने कहा, “मैंने आठ युद्ध खत्म किए। आगे के समझौते से यह संख्या बढ़ सकती है। अगर हम ईरान और लेबनान को जोड़ लें, तो दस युद्ध खत्म हो जाएंगे।”
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नई दिल्ली। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि उनका देश और फ्रांस मिलकर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक रक्षात्मक मिशन चलाएंगे। उन्होंने कहा कि यह मिशन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा और इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि इस होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने पर कोई टैक्स या टोल न लगे और यह पूरी तरह खुला रहे।
स्टार्मर यह बात कल शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह रहे थे, जहां करीब 50 देशों के प्रतिनिधि (कुछ सामने, कुछ ऑनलाइन) इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एकजुट हुए थे कि इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही बिना रुकावट जारी रहे। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। स्टार्मर ने कहा कि अगले हफ्ते लंदन में एक और बैठक होगी, जिसमें आगे की योजना तय की जाएगी।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो पहले ही सहयोगी देशों पर आरोप लगा चुके थे कि वे इस रास्ते को खुला रखने में मदद नहीं कर रहे, उन्होंने ब्रिटेन-फ्रांस की इस पहल को खारिज कर दिया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, “मुझे नाटो से कॉल आया कि क्या हमें मदद चाहिए। मैंने उन्हें कहा कि दूर रहें, जब तक कि वे सिर्फ अपने जहाज तेल से भरना नहीं चाहते। जरूरत के समय वे बेकार थे, सिर्फ कागजी शेर।”ईरान ने यह घोषणा की कि युद्धविराम के दौरान यह होर्मुज स्ट्रेट व्यापारिक जहाजों के लिए खुला रहेगा, जिससे पेरिस में मौजूद नेताओं को हैरानी हुई। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह रास्ता पूरी तरह खुला है। ट्रंप ने भी ‘थैंक यू’ पोस्ट करके इसकी पुष्टि की, लेकिन साथ ही कहा कि ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहेगी।ट्रंप ने एक और पोस्ट में कहा, “ईरान, अमेरिका की मदद से, समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगें हटा रहा है या हटा चुका है।” हालांकि, तेहरान की ओर से इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई। वहीं अराघची ने इस रास्ते के खुलने को लेबनान-इजरायल के बीच हुए युद्धविराम से जोड़ा, जो गुरुवार से लागू हुआ, लेकिन ट्रंप ने कहा कि इसका इससे कोई संबंध नहीं है। -
वाशिंगटन. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने बृहस्पतिवार को कहा कि एशिया वैश्विक वृद्धि का मुख्य चालक बना रहेगा, जिसमें भारत और चीन क्षेत्रीय विस्तार में 70 प्रतिशत का योगदान देंगे। साथ ही संगठन ने यह भी कहा कि खाड़ी संकट के कारण ऊर्जा का झटका इस क्षेत्र को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा। आईएमएफ ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर अपनी रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी शुल्क और व्यापारिक अनिश्चितता के चलते क्षेत्रीय वृद्धि दर के 2026 में घटकर 4.4 प्रतिशत और 2027 में 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा 2025 में पांच प्रतिशत था। आईएमएफ के एशिया प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने यहां पत्रकारों से कहा, ''एशिया ने 2026 में एक मजबूत स्थिति के साथ प्रवेश किया है और अमेरिकी शुल्कों तथा बढ़ती अनिश्चितता का खामियाजा भुगतने के बावजूद क्षेत्र की वृद्धि दर जुझारू बनी हुई है।'' हालांकि, उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की जीवाश्म ईंधन पर उच्च निर्भरता और प्रमुख वस्तुओं के लिए संघर्ष वाले क्षेत्रों पर निर्भरता को देखते हुए, ऊर्जा का नया झटका उन्हें नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि इस संकट के कारण मुद्रास्फीति बढ़ रही है, बाहरी संतुलन कमजोर हो रहा है और वित्तीय मोर्चे पर सख्ती बढ रही है। आईएमएफ के अनुसार, एशिया दुनिया के लगभग 38 प्रतिशत तेल और 24 प्रतिशत प्राकृतिक गैस की खपत करता है।
श्रीनिवासन ने कहा कि 2025 के अंत में अधिकांश एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि दर उम्मीद से अधिक रही। इसका श्रेय निर्यात और खपत को जाता है जो अनुमान से बेहतर रहे। उन्होंने कहा, ''अमेरिका को एशिया का निर्यात घटा है, लेकिन दुनिया के बाकी हिस्सों में यह बढ़ा है।'' -
नई दिल्ली। इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आखिरकार राहत की खबर सामने आई है। शुक्रवार को दोनों देशों के बीच 10 दिनों का युद्धविराम लागू हो गया। इस सीजफायर की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही कर दी थी। इस कदम का उद्देश्य पिछले एक महीने से जारी हिंसक संघर्ष को रोकना है, जिसमें 2,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
जैसे ही युद्धविराम लागू हुआ, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसका स्वागत किया और सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के मुख्य प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि हम उन सभी कदमों का स्वागत करते हैं जो ‘ब्लू लाइन’ के दोनों ओर हिंसा और पीड़ा को समाप्त करने में मदद करें। उन्होंने संबंधित पक्षों से इस युद्धविराम का पूरी तरह पालन करने की अपील भी की।गुटेरेस ने एक्स पोस्ट में लिखा, “मैं इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष-विराम की घोषणा का स्वागत करता हूं और इसे संभव बनाने में अमेरिका की भूमिका की सराहना करता हूं। मुझे उम्मीद है कि इससे इस संघर्ष के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में बातचीत का रास्ता खुलेगा और इस क्षेत्र में स्थायी और व्यापक शांति की दिशा में चल रहे प्रयासों में मदद मिलेगी। मैं सभी से आग्रह करता हूं कि वे संघर्ष-विराम का पूरी तरह सम्मान करें और हर समय अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करें।”वहीं, अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल-गीत ने इस समझौते को लेबनान के लोगों की पीड़ा कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने सभी पक्षों से तुरंत इसका पालन करने और स्थायी शांति के लिए गंभीर बातचीत शुरू करने का आग्रह किया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने भी इस युद्धविराम का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि यह समझौता पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम समझौते का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य युद्ध को रोकना है।मिस्र ने इसे क्षेत्रीय तनाव कम करने और इजरायली हमलों को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। मिस्र के विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे इस युद्धविराम को स्थायी बनाने, मानवीय सहायता पहुंचाने और विस्थापित लोगों की घर वापसी सुनिश्चित करने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।संयुक्त अरब अमीरात और कतर ने भी इस पहल का समर्थन किया और उम्मीद जताई कि यह क्षेत्र में स्थिरता और स्थायी शांति की दिशा में एक मजबूत आधार बनेगा।बता दें कि नवंबर 2024 से लागू पिछला युद्धविराम भी पूरी तरह सफल नहीं रहा था और लगभग रोजाना हमले जारी रहे। यह संघर्ष 2 मार्च को फिर भड़क गया, जब हिजबुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट दागे, जिसके जवाब में लेबनान में भारी हवाई हमले किए गए। -
नई दिल्ली। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हिजबुल्लाह के साथ युद्धविराम लागू होने के बाद भी इजरायल दक्षिणी लेबनान में 10 किलोमीटर का सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखेगा। उनका यह बयान उस समय आया जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की घोषणा की। यह समझौता नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन के बीच हुआ है और इसे अमेरिकी पूर्वी समय के अनुसार शाम 5 बजे से लागू किया जाना है।
नेतन्याहू ने बताया कि उन्होंने हिजबुल्लाह की उस मांग को ठुकरा दिया, जिसमें इजरायली सेना को अंतरराष्ट्रीय सीमा तक पीछे हटने के लिए कहा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायली सेना लेबनान के अंदर बनाए गए इस सुरक्षा क्षेत्र में ही तैनात रहेगी उनका कहना है कि यह सुरक्षा क्षेत्र उत्तरी इजरायल के इलाकों को हमलों और टैंक रोधी हथियारों से बचाने में मदद करेगा।नेतन्याहू ने यह भी कहा कि लेबनान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौता करने का मौका है। उन्होंने बताया कि ट्रंप इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए उन्हें और लेबनान के राष्ट्रपति को बातचीत के लिए आमंत्रित करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री नेतन्याहू के अनुसार, यह मौका इसलिए बना है क्योंकि इजरायल ने लेबनान में ताकत का संतुलन अपने पक्ष में बदल दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक महीने में लेबनान की ओर से सीधे शांति वार्ता के संकेत मिले हैं।उन्होंने बताया कि इन बातचीतों में इजरायल की दो मुख्य शर्तें होंगी- पहली, हिजबुल्लाह को पूरी तरह हथियार छोड़ने होंगे, और दूसरी, एक स्थायी शांति समझौता होना चाहिए।वहीं ईरान के मुद्दे पर नेतन्याहू ने दावा किया कि ट्रंप ने उन्हें भरोसा दिया है कि वे समुद्री नाकेबंदी जारी रखेंगे और ईरान की बची हुई परमाणु क्षमता को खत्म करने के लिए दृढ़ हैं। नेतन्याहू ने इन कदमों को बहुत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इससे आने वाले वर्षों में सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है।इस बीच, ट्रंप ने गुरुवार को इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम की घोषणा की, जिसका उद्देश्य तनाव को कुछ समय के लिए कम करना है। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू और जोसेफ आउन से बातचीत के बाद दोनों पक्ष 10 दिन के युद्धविराम पर सहमत हुए हैं, जो वाशिंगटन समय के अनुसार शाम 5 बजे से शुरू होगा।यह युद्धविराम उस संघर्ष को रोकने की कोशिश है, जो तब बढ़ गया था जब इजरायल ने ईरान से जुड़े हिजबुल्लाह के खिलाफ नया मोर्चा खोल दिया था। हालांकि लेबनान और इजरायल के बीच औपचारिक युद्ध नहीं है, लेकिन हिजबुल्लाह दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है और उसने इज़राइल पर कई हमले किए हैं, जिसके जवाब में इजराइल ने भी कार्रवाई की है। - वाशिंगटन। अमेरिका ने वीजा प्रतिबंध नीति को आगे बढ़ा दिया है। अमेरिकी राज्य डिपार्टमेंट ने घोषणा की है कि वह पश्चिमी क्षेत्र में अपनी वीजा प्रतिबंध नीति को बढ़ा रहा है और 26 लोगों पर रोक लगाई है। राज्य विभाग ने एक बयान में कहा कि यह नीति उन लोगों को टारगेट करती है जो अमेरिका के दुश्मनों की तरफ से अमेरिकी हितों को कमजोर करने के लिए काम कर रहे हैं।राज्य विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी साफ करती है: यह सरकार दुश्मन ताकतों को जरूरी संपत्तियों पर मालिकाना हक या कंट्रोल करने या हमारे इलाके में अमेरिकी सुरक्षा और खुशहाली को खतरा पहुंचाने की काबिलियत से दूर रखेगा। राज्य विभाग देश में अमेरिकी लीडरशिप को आगे बढ़ाने, हमारे देश की रक्षा करने और हमारे पूरे इलाके में जरूरी रास्तों और इलाकों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है।”अमेरिकी राज्य विभाग ने मौजूदा वीजा प्रतिबंध नीति में एक बड़े बदलाव का ऐलान किया। राज्य विभाग ने कहा, “यह बढ़ी हुई नीति हमें अपने इलाके के उन देशों के नागरिकों के लिए अमेरिकी वीजा पर रोक लगाने में मदद करती है, जो पश्चिमी गोलार्ध के देशों में रहते हुए और जानबूझकर दुश्मन देशों, उनके एजेंटों या कंपनियों की तरफ से काम करते हुए, ऐसी गतिविधियों में शामिल होते हैं, मंजूरी देते हैं, उनकी फंडिंग करते हैं, उन्हें बड़ा समर्थन देते हैं, जो अमेरिका के हितों के खिलाफ हैं और उन्हें कमजोर करती हैं। ये लोग और उनके करीबी परिवार के सदस्य आम तौर पर अमेरिका में एंट्री के योग्य नहीं होंगे।”अमेरिकी राज्य विभाग ने बताया कि इन गतिविधियों में जरूरी संपत्ति और रणनीतिक संसाधन हासिल करने या कंट्रोल करने में दुश्मन ताकतों की मदद करना; क्षेत्रीय सुरक्षा की कोशिशों को अस्थिर करना; अमेरिकी आर्थिक हितों को कमजोर करना और हमारे इलाके के देशों की संप्रभुता और स्थिरता को कमजोर करने के लिए डिजाइन किए गए प्रभावी ऑपरेशन चलाना शामिल हैं।अमेरिकी राज्य विभाग ने 26 लोगों के वीजा पर प्रतिबंध लगाए हैं और कहा, “हमने देश में 26 ऐसे लोगों पर वीजा बैन लगाए हैं जो इन गतिविधियों में शामिल रहे हैं। ट्रंप सरकार देश की सेफ्टी और खुशहाली को बढ़ावा देने के लिए हर मौजूद टूल का इस्तेमाल करेगा।”
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वाशिंगटन. अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बृहस्पतिवार को ईरान से समझौता करने की अपील की। हेगसेथ ने पेंटागन में संवाददाताओं से कहा, ''आखिरकार, उन्हें (ईरान को) मेज पर आना ही होगा और समझौता करना ही होगा।'' उन्होंने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान के पास भविष्य में भी कभी परमाणु हथियार न हो।
हेगसेथ ने कहा, ''हम इसे अपने महान उपराष्ट्रपति और बातचीत करने वाली टीम के नेतृत्व में एक समझौते के माध्यम से अच्छे तरीके से करना पसंद करेंगे, अन्यथा हम इसे दूसरे तरीके से कर सकते हैं।'' ईरान ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा है और उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। बाद में प्रेसवार्ता में, हेगसेथ ने ईरान की सरकार से कहा, ''मैं प्रार्थना करता हूं कि आप एक ऐसा समझौता चुनें, जो आपके लोगों की भलाई और दुनिया की भलाई के लिए आपकी समझ में हो। - लंदन. ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) ने बुधवार को कहा कि वह अगले दो वर्षों में अपने वार्षिक बजट का करीब 10 प्रतिशत, यानी लगभग 50 करोड़ पाउंड (करीब 67.7 करोड़ डॉलर) बचाने के लिए लगभग 2,000 नौकरियां खत्म करने की योजना बना रही है। कर्मचारियों के साथ हुई एक बैठक में घोषित योजना बीते एक दशक से अधिक समय में संस्था की सबसे बड़ी कटौती मानी जा रही है। कार्यवाहक महानिदेशक रोडरी टालफन डेविस ने कर्मचारियों को भेजे ईमेल में कहा, "मुझे पता है कि इससे अनिश्चितता पैदा होगी, लेकिन हम इस चुनौती को लेकर पारदर्शी रहना चाहते हैं।" डेविस ने कहा कि यह कटौती महंगाई, लाइसेंस शुल्क और वाणिज्यिक आय पर बढ़ते दबाव, तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता के कारण की जा रही है। बीबीसी ने इस साल की शुरुआत में ही संकेत दिया था कि वह "काफी वित्तीय दबाव" का सामना कर रहा है और 2029 तक अपने बजट में लगभग 10 प्रतिशत की कटौती करना चाहता है।
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संयुक्त राष्ट्र. भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कोई भी सुधार, यदि वीटो शक्ति वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी में विस्तार के साथ नहीं किया जाता है, तो संयुक्त राष्ट्र की इस इकाई में मौजूदा असंतुलन और असमानताएं बनी रहेंगी। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद सुधारों पर अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि वीटो के साथ या उसके बिना एक नयी श्रेणी पर विचार करने से व्यापक विचारों वाली पहले से जारी चर्चा "जटिल" हो जाएगी। उन्होंने कहा, ''दो मूलभूत कारण हैं, जिनकी वजह से संरचना असंतुलित बनती है और परिषद की वैधता व प्रतिनिधित्व पर सवाल उठते हैं-ये हैं सदस्यता और वीटो अधिकार।'' हरीश ने कहा, ''संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर व्यापक सहमति है। 80 साल से अधिक पहले बनी इसकी संरचना आज की बदलती वैश्विक-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है।'' भारतीय राजदूत ने याद किया कि 1960 के दशक में परिषद में किये गए उस एकमात्र सुधार से वीटो का अधिकार रखने वाले देशों की ताकत और बढ़ गई जिसके तहत केवल अस्थायी श्रेणी में विस्तार किया गया था। तुलनात्मक रूप से देखें तो पहले वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों और अस्थायी सदस्यों का अनुपात 5:6 था, जिसे बाद में बदलकर 5:10 कर दिया गया। इससे वीटो का अधिकार रखने वाले देशों को अपेक्षाकृत अधिक फायदा मिला। उन्होंने कहा, "कोई भी सुधार जिसके साथ वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार नहीं किया जाता, वह इस अनुपात को और बिगाड़ देगा और इस प्रकार मौजूदा असंतुलन और असमानताओं को कायम रखेगा। इसलिए, वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार सुरक्षा परिषद के वास्तविक सुधार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।" हरीश ने यह भी कहा कि वीटो अधिकार के साथ या उसके बिना, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार के ढांचे के तहत एक नई श्रेणी पर विचार करने से व्यापक विचारों वाली पहले से चल रही चर्चा "जटिल" हो जाएगी। उन्होंने कहा, "सुधारों के मार्ग को सुव्यवस्थित और त्वरित करने के लिए सुधारों के दायरे को मौजूदा ढांचे तक सीमित रखना महत्वपूर्ण है।" भारत दशकों से सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग कर रहा है, जिसमें इसके स्थायी और अस्थायी दोनों वर्गों का विस्तार शामिल है। भारत का कहना है कि 1945 में स्थापित 15 देशों की यह परिषद 21वीं सदी के लिए उपयुक्त नहीं है और समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है। भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि वह परिषद में स्थायी सीट का हकदार है। उन्होंने कहा, "अतीत में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां निर्वाचित सदस्यों ने केवल अपने संकीर्ण स्वार्थों को पूरा करने के लिए अपने प्रभावी वीटो का प्रयोग करके बाधाएं उत्पन्न की हैं।"


























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