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ब्रातिस्लावा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फित्सो के साथ हुई बैठक को भारत-स्लोवाकिया संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने अपने रिश्तों को ‘कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप’ (व्यापक साझेदारी) का दर्जा देकर द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा प्रदान की है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि रॉबर्ट फित्सो के साथ उनकी बैठक बेहद सकारात्मक रही और यह भारत-स्लोवाकिया मित्रता के लिए एक विशेष क्षण है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए उन्हें ‘कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप’ के स्तर तक उन्नत किया गया है।प्रधानमंत्री ने बताया कि बैठक के दौरान ऑटोमोबाइल, रेलवे, उन्नत विनिर्माण (एडवांस मैन्युफैक्चरिंग) और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भी दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को नई गति प्रदान करेगा।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्लोवाकिया की साझेदारी में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से सहयोग के नए अवसर खुलेंगे। दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अंतरिक्ष जैसे उभरते क्षेत्रों में भी मिलकर काम करेंगे।पीएम नरेंद्र मोदी और रॉबर्ट फित्सो ने संयुक्त प्रेस वार्ता में बैठक के प्रमुख परिणामों की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह व्यापक साझेदारी आने वाले वर्षों में नए अवसरों, साझा समृद्धि और दोनों देशों के नागरिकों के उज्ज्वल भविष्य का आधार बनेगी। दौरे के दौरान तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। इनमें भारत और स्लोवाकिया के संबंधों को ‘कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप’ का दर्जा देना, आतंकवाद-रोधी सहयोग के लिए संयुक्त कार्य समूह (ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप) की स्थापना तथा नियमित कांसुलर संवाद शुरू करने का निर्णय शामिल है।दोनों देशों के बीच क्वांटम कम्युनिकेशन और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन के क्षेत्र में सहयोग समझौते हुए। इसके अलावा भारत के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचरोपैथी और स्लोवाक हेल्थ स्पा पीएस्टनी के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में साझेदारी स्थापित की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि भारत के प्राचीन उपनिषदों का स्लोवाक भाषा में अनुवाद दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता का उत्कृष्ट उदाहरण है।पीएम नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया में रह रहे भारतीय मूल के लोगों की सराहना करते हुए कहा कि वे वहां की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नई व्यापक साझेदारी व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा, अंतरिक्ष, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग सहित अनेक क्षेत्रों में संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। -
वाशिंगटन. अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिन तक जारी रहे युद्ध को समाप्त करने व होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बन गई है और दोनों देशों के बीच समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार शाम 'ट्रुथ सोशल' पर यह घोषणा की, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव कम हुआ। अधिकारियों ने बताया कि शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे। ट्रंप ने कहा, ''इस्लामिक गणराज्य ईरान के साथ समझौते को अंतिम रूप दिया जा चुका है। सभी को बधाई।''
उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी समाप्त कर दी जाएगी। ट्रंप ने कहा, ''मैं मुक्त आवाजाही के लिए तत्काल होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की मंजूरी देता हूं। दुनिया के जहाजों, इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह होने दो।'' हालांकि, एक अन्य पोस्ट में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य शुक्रवार को समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने के बाद ही खोला जाएगा। यह समझौता ऐसे दिन हुआ जब ट्रंप अपना 80वां जन्मदिन मना रहे थे।
ट्रंप ने कहा, ''यह समझौता पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाएगा। मुझसे पहले कई राष्ट्रपतियों ने ईरान के साथ शांति स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन सभी विफल रहे।'' उन्होंने कहा, ''क्षेत्र के नेताओं को पहली बार ऐसा राष्ट्रपति मिला है, जो उन्हें वास्तविक शांति दिलाने में मदद कर सकता है। शुक्रवार को समझौते पर हस्ताक्षर होने के साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य खोल दिया जाएगा...।'' समझौते को अंतिम रूप दिए जाने से कुछ घंटे पहले बेरूत में हिजबुल्ला के ठिकानों पर इजराइल के हवाई हमलों के कारण तनाव बढ़ गया और ट्रंप की इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ तीखी बातचीत हुई। ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया को बताया कि उन्होंने नेतन्याहू और ईरानी वार्ताकारों, दोनों से नए हमले नहीं करने को कहा है।
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नीस (फ्रांस) . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को नीस में 'भारत इनोवेट्स 2026' कार्यक्रम का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया, जो भारत की डीप-टेक क्षमताओं को प्रदर्शित करता है। दोनों नेता स्टार्टअप प्रदर्शनी देखने पहुंचे और नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं तथा उद्यमियों से बातचीत की। 'भारत इनोवेट्स 2026' भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप, नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं और निवेशकों को वैश्विक नवाचार फंड और 'वेंचर कैपिटल फर्म' के साथ एक मंच पर लाता है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 'भारत इनोवेट्स 2026' में 13 अहम प्रौद्योगिकी क्षेत्र के 120 बेहतरीन स्टार्टअप और 20 से ज्यादा बेहतरीन संस्थानों के अलावा दुनियाभर से 350 से ज्यादा निवेशक और 'वेंचर कैपिटलिस्ट' हिस्सा ले रहे हैं। 'वेंचर कैपिटल फर्म' से आशय ऐसी निवेश कंपनियों से है, जो उच्च विकास क्षमता वाले स्टार्टअप और शुरुआती चरण के व्यवसायों में पूंजी लगाती हैं। वहीं, 'वेंचर कैपिटलिस्ट' उन निजी निवेशकों को कहते हैं, उच्च विकास क्षमता वाले स्टार्टअप और शुरुआती चरण के व्यवसायों में पूंजी निवेश करते हैं। मोदी और मैक्रों ने स्टार्टअप प्रदर्शनी का दौरा किया और क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, रक्षा, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य देखभाल, चिकित्सा प्रौद्योगिकी, एडवांस्ड मटीरियल और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप और नवोन्मेषकों से बातचीत की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों नेताओं ने भारत के युवा नवोन्मेषकों, स्टार्टअप संस्थापकों और शोधकर्ताओं से बातचीत की। उन्होंने कहा कि इनक्यूबेटर और स्टार्टअप "भविष्य के विकास इंजन" होंगे, जो नौकरियां और समृद्धि पैदा करेंगे तथा ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि 'भारत इनोवेट्स 2026' में हुई बातचीत "काफी समृद्ध और ज्ञानवर्धक" रही। उन्होंने नवाचार, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और उभरते हुए क्षेत्रों में भारत में मौजूद मौकों पर चर्चा करने के लिए निवेशकों और वेंचर कैपिटलिस्ट से मुलाकात की। मोदी ने कहा, "भारत की तरक्की उसकी प्रतिभा, उसके पैमाने, उसकी स्थिरता और उसके सुधारों पर आधारित है, जो उसे निवेश और नवाचार के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाते हैं।" मैक्रों ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "हम अपने लोगों के लिए प्रतिभा, निवेश और ठोस समाधानों का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं।" 'भारत इनोवेट्स 2026' 14 से 16 जून के बीच आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम 'भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष' का हिस्सा है, जिसका मकसद वैश्विक मंच पर भारत की नवाचार क्षमताओं को प्रदर्शित करना है।
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नीस (फ्रांस). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्टार्टअप, व्यापार, बुनियादी ढांचा और स्वास्थ्य समेत कई क्षेत्रों पर बातचीत की। विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने अहम अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। मोदी शनिवार रात फ्रांस के नीस शहर पहुंचे और मैक्रों के साथ 'भारत इनोवेट्स' कार्यक्रम का उद्घाटन किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "भारत-फ्रांस साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की, जिसमें उन्होंने भारत-फ्रांस विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति का जायजा लिया।" जायसवाल ने लिखा, "दोनों नेताओं ने नवाचार, व्यापार एवं निवेश, टिकाऊ समाधानों, सुरक्षा, संस्कृति और दोनों देशों की जनता के स्तर पर संबंधों जैसे विषयों पर चर्चा की।" उन्होंने कहा, "इस बैठक के दौरान नवाचार और एआई, विज्ञान और अंतरिक्ष, स्टार्टअप और फिनटेक, व्यापार और बुनियादी ढांचा, परिवहन और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में कई परिणाम उभरकर सामने आए। दोनों नेताओं ने अहम अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए।" शनिवार को नयी दिल्ली से नीस के लिए रवाना होने से पहले मोदी ने कहा कि भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण में फ्रांस का एक खास स्थान है और यह दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों को और मजबूत करता है। यात्रा के दौरान मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे, जहां उनकी मुलाक़ात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दुनिया के अन्य नेताओं से होगी।
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काठमांडू,. नेपाल ने भारतीय आमों के आयात पर अपना रुख बदलते हुए कहा कि इन पर कोई प्रतिबंध नहीं है और मांग के अनुरूप तथा कुछ नियमों के तहत नेपाल के बाजारों में इन फलों के प्रवेश की अनुमति दी गई है। यह स्पष्टीकरण उन खबरों के कुछ दिन बाद सामने आया है, जिनमें नेपाल के अधिकारियों ने कहा था कि सरकार ने अत्यधिक कीटनाशक वाले भारतीय आमों के आयात को सीमित कर दिया है और सीमावर्ती क्षेत्रों, खासकर मधेश प्रांत में 'क्वारंटीन' सुविधाओं की कमी के कारण यह कदम उठाया गया है। कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि भारत से आमों के आयात पर कोई प्रतिबंध नहीं है। मंत्रालय के अधीन 'प्लांट क्वारंटीन एंड पेस्टिसाइड मैनेजमेंट सेंटर' ने कहा कि विभिन्न मीडिया और सोशल मीडिया मंचों पर भारतीय आमों पर प्रतिबंध संबंधी खबरें आने के बाद इस मामले पर उसका ध्यान गया। इसने कहा कि उसने भारत से आमों के आयात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। कुछ नियमों के तहत मांग के आधार पर नेपाल के बाजारों में इन फलों के प्रवेश की अनुमति दी गई है। कुछ दिन पहले मधेश प्रांत के भिट्टामोड़ 'क्वारंटीन' जांच चौकी पर भारत से आए आमों की एक बड़ी खेप को फलों में हानिकारक कीटों की आशंका के कारण रोक दिया गया था। मधेश प्रांत के भूमि प्रबंधन, कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय के प्रवक्ता मनीष कुमार पाल ने बताया कि हालांकि, भारतीय प्राधिकरणों द्वारा 'प्लांट हेल्थ सर्टिफिकेट' जारी किए जाने के बाद अब उस खेप को छोड़ दिया गया है। समाचार पत्र 'द राइजिंग नेपाल' के अनुसार, मधेश प्रांत के जनकपुरधाम में फल एवं सब्जी व्यापारियों के संघ के महासचिव भुवनेश्वर पुरबे ने पहले कहा था कि भारतीय आयात को रोकने से घरेलू बाजारों में कमी हो सकती है। उन्होंने सरकार को सलाह दी थी कि वह 'क्वारंटीन' प्रणाली को मजबूत करे और पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय उचित गुणवत्ता जांच के बाद भारतीय फलों को नेपाल के बाजारों में प्रवेश की अनुमति दे। - वाशिंगटन। अमेरिकी हाउस फॉरेन अफेयर्स कमिटी के चेयरमैन माइकल मैककॉल ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो चीन दलाई लामा का नकली उत्तराधिकारी नियुक्त करने की कोशिश कर सकता है। रिपब्लिकन सांसद मैककॉल ने इस हफ्ते कमिटी की बैठक में एक महत्वपूर्ण संशोधन पेश किया, जिसमें साफ कहा गया है कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनना पूरी तरह से तिब्बती बौद्ध धर्मगुरुओं और उनके कार्यालय का आध्यात्मिक एवं धार्मिक मामला है, जिसमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) को कोई भूमिका नहीं मिलनी चाहिए।मैककॉल ने कहा, “अगर हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे, तो बीजिंग एक नकली दलाई लामा को सामने लाएगा। एक ऐसा आध्यात्मिक नेता जो तिब्बती लोगों के प्रति नहीं, बल्कि कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादार होगा।”उन्होंने आगे चेतावनी दी कि चीन इस नकली नेता का इस्तेमाल पूरे हिमालयी क्षेत्र — खासकर नेपाल, मंगोलिया और भारत की सीमा के पास अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए करेगा।मैककॉल ने 2024 में भारत के धर्मशाला में दलाई लामा से हुई अपनी मुलाकात को याद करते हुए कहा कि दलाई लामा बेहद गर्मजोशी, बुद्धिमत्ता और हास्य से भरे हुए व्यक्ति हैं। उन्होंने बताया कि दलाई लामा ने उनसे कहा था कि वे 110 साल तक जीने की योजना बना रहे हैं।हालांकि, मैककॉल ने कहा कि दलाई लामा के स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना के बावजूद, उत्तराधिकार के मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दलाई लामा पहले ही साफ कर चुके हैं कि उनका उत्तराधिकारी “आजादी के माहौल” में चुना जाएगा, न कि चीन में। इस संबंध में दलाई लामा की ओर से कहा गया कि वे चीन में नहीं, बल्कि आजादी के माहौल में पुनर्जन्म लेंगे।मैककॉल ने याद दिलाया कि 2007 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने खुद को दलाई लामा के उत्तराधिकारी चुनने का “अधिकार” दे दिया था। उन्होंने कहा, “एक आधिकारिक तौर पर नास्तिक सरकार तिब्बती लोगों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही है।”उन्होंने हाल ही में चीन द्वारा पारित “जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने वाले कानून” का भी जिक्र किया, जिसके जरिए बीजिंग अल्पसंख्यक समुदायों पर अपना नियंत्रण और मजबूत कर रहा है।यह संशोधन 2020 के द्विदलीय ‘तिब्बती नीति और समर्थन अधिनियम’ पर आधारित है। मैककॉल ने कहा कि उनका प्रस्ताव अमेरिकी नीति को स्पष्ट रूप से परिभाषित करेगा कि दलाई लामा का उत्तराधिकार तिब्बती लोगों और उनके धर्मगुरुओं का फैसला है, CCP का नहीं।मैककॉल ने अंत में अपील की कि दलाई लामा की इच्छा का सम्मान किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उनका उत्तराधिकारी उन्हीं के लोगों द्वारा चुना जाए, न कि उस सरकार द्वारा जिसने दशकों से तिब्बती संस्कृति और पहचान को मिटाने की कोशिश की है।
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दुबई. ईरान ने बुधवार को कहा कि उसने जॉर्डन में स्थित उस हवाई अड्डे पर मिसाइल हमला किया है, जहां अमेरिकी सैन्य बल तैनात हैं। हालांकि, जॉर्डन और अमेरिका दोनों ने जॉर्डन को निशाना बनाकर किए गए किसी भी हमले की अभी पुष्टि नहीं की। ईरान के अर्धसैन्य बल रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि उसने मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस पर मिसाइलें दागी हैं। इस एयर बेस पर अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमान और अन्य सैन्य विमान तैनात रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य के समीप अमेरिकी सेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद अमेरिका ने बुधवार को ईरान पर हमले किए, जिसके बाद तेहरान ने इनका जवाब देने की चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दुर्घटना के लिए ईरान को दोषी ठहराया है।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई की कसम खाई, जिससे ईरान युद्ध में स्थायी युद्धविराम की संभावनाओं पर फिर सवाल खड़े हो गए। इस युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग अवरुद्ध हो गया है और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया है। इस बीच बहरीन में मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजने लगे, जहां अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है। तेहरान ने कहा कि उसने जवाबी कार्रवाई के तहत इस ठिकाने को निशाना बनाया है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने कहा कि अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के लड़ाकू विमानों ने ईरान में ''वायु रक्षा प्रणालियों, जमीनी नियंत्रण स्टेशन और निगरानी रडार ठिकानों'' को निशाना बनाकर हमले किए। ईरान ने बंदर अब्बास और केश्म द्वीप के आसपास हमलों की पुष्टि की, लेकिन नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। सेंट्रल कमांड ने कहा, ''यह अभियान अमेरिकी बलों और क्षेत्रीय समुद्री मार्गों से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों पर हालिया हमलों के उसी तरह जवाब के रूप में चलाया गया।'' इसके बाद ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय और कुवैत में अमेरिकी सैनिकों वाले सैन्य अड्डे को ड्रोन से निशाना बनाया। हालांकि, बहरीन और कुवैत दोनों ने ऐसे किसी हमले को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की। ट्रंप ने इससे पहले सोशल मीडिया पर लिखा था कि ईरान ने जलडमरूमध्य के ऊपर गश्त कर रहे अमेरिकी विमान को मार गिराया। राष्ट्रपति ने कहा था कि अमेरिका को ''इस हमले का जवाब देना ही होगा।'' ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान के क्षेत्र के पास मौजूद विदेशी सैन्य बल ''लगातार खतरे मे'' हैं और बाद में उन्होंने अमेरिकी हमलों का जवाब देने की भी चेतावनी दी। अराघची ने 'एक्स' पर लिखा, ''ईरानी बल किसी भी हमले या खतरे को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ेंगे। यदि सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो हमारे क्षेत्र से दूर चले जाएं।'' अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को गिराए जाने और उसके बाद किए गए अमेरिकी हमलों ने दो महीने से लागू युद्धविराम को और कमजोर कर दिया। इससे एक दिन पहले ही युद्धविराम लागू होने के बाद पहली बार ईरान और इजराइल के बीच गोलेबारी हुई थी। - वाशिंगटन.। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास निशाना बनाए गए अमेरिकी सेना के अपाचे हेलीकॉप्टर में सवार चालक दल के दो सदस्यों को बचाने के लिए जिस ड्रोन नाव का इस्तेमाल किया गया, उसका निर्माण टेक्सास की एक कंपनी ने किया था, जिसके संस्थापकों में भारतीय-अमेरिकी इंजीनियर वैभव आल्टेकर भी शामिल हैं। 'सैरोनिक टेक्नोलॉजी' की ओर से विकसित ड्रोन नाव 'कोर्सेयर' से संचालित बचाव अभियान अमेरिकी सशस्त्र बलों की ओर से चलाया गया अपनी तरह का पहला मिशन था। अमेरिकी बल इस तरह के अभियानों के काफी समय से मानवरहित विमानों का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। कैप्टन टिम हॉकिंस ने मंगलवार को कहा कि यह एक स्वचालित समुद्री नाव से संचालित अमेरिका का पहला बचाव अभियान था, जिसे एक मानव संचालक दूर से निर्देशित कर रहा था। हॉकिंस के मुताबिक, 24 फुट लंबी 'कोर्सेयर' डीजल पर चलती है और 35 नॉट तक की अधिकतम रफ्तार अख्तियार कर सकती है। उन्होंने बताया कि यह ड्रोन नाव 1,000 पौंड तक का भार उठाने में सक्षम है और एक बार में 1,000 नॉटिकल मील की दूरी तय कर सकती है। 'सैरोनिक टेक्नोलॉजी' की 'लिंक्डइन प्रोफाइल' के मुताबिक, उसने स्वचालित समुद्री नाव के उत्पादन के लिए अमेरिकी नौसेना के साथ 39.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर का करार कर रखा है। 'नेवी सील' से 11 साल तक जुड़े रहे डीनो मवरुकास ने वैभव आल्टेकर, डग लैंबर्ट और रॉब लीहमन के साथ मिलकर सितंबर 2022 में 'सैरोनिक टेक्नोलॉजी' की स्थापना की थी। कंपनी का मुख्यालय टेक्सास के ऑस्टिन में है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले आल्टेकर 'सैरोनिक टेक्नोलॉजी' के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) हैं। कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार, आल्टेकर 'सैरोनिक टेक्नोलॉजी' की स्वचालित प्रणालियों और सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर के विकास का काम देखते हैं। वह 'फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियरिंग', 'प्रोडक्ट' और 'स्पेशल प्रोग्राम्स' के साथ-साथ 'सॉफ्टवेयर' टीम का नेतृत्व करते हैं, जिसमें उन्हें प्रोडक्ट अवधारणा, नेविगेशन, मशीन लर्निंग, कमांड एंड कंट्रोल और सिस्टम्स इंटीग्रेशन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले कर्मियों के साथ काम करने का मौका मिलता है। आल्टेकर सैन्य प्रौद्योगिकी कंपनी 'एंड्युरिल इंडस्ट्रीज' से भी जुड़े रहे हैं, जिसने रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी के लिए 'घोस्ट शार्क' ड्रोन पनडुब्बी सहित कई अन्य सैन्य उपकरणों का निर्माण किया है।
- दुबई. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए हेलीकॉप्टर के पायलट इसमें घायल नहीं हुए। पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान ईरान द्वारा आवागमन के लिए बंद किए गए इस जलडमरूमध्य के पास हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण मंगलवार सुबह तक स्पष्ट नहीं हुए। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने मंगलवार को बताया कि इजराइल के हमले में उसकी हवाई रक्षा इकाइयों के कम से कम दो सदस्य मारे गए। अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए जाने के बाद से शुरू हुए युद्ध ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है।ट्रंप ने न्यूयॉर्क में बॉस्केटबॉल स्पर्धा एनबीए का फाइनल मैच देखने के बाद जॉन एफ. केनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर के पायलट सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, ''पायलट ठीक हैं। कोई घायल नहीं हुआ। हम कल एक रिपोर्ट जारी करेंगे। लेकिन पायलट सुरक्षित हैं।''न्यूयॉर्क टाइम्स ने सबसे पहले खबर जारी की थी कि अमेरिकी सेना का एक अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास गिर गया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह हेलीकॉप्टर किन हालात में गिरा। अमेरिकी सेना की केंद्रीय कमान और रक्षा विभाग ने 'द एसोसिएटिड प्रेस' के प्रतिक्रिया के अनुरोधों पर तत्काल जवाब नहीं दिया। अपाचे हेलीकॉप्टर अमेरिकी सेना के लिए ऐसे समय में एक प्रमुख परिसंपत्ति रहा है, जब ईरान के कच्चे तेल के टैंकरों पर नाकाबंदी लागू की जा रही है ताकि तेहरान पर समझौते के लिए दबाव बढ़े। संयुक्त अरब अमीरात ने भी ईरान युद्ध के दौरान ईरानी ड्रोनों को मार गिराने के लिए इन हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया है। उधर, ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को लेकर नए सिरे से विश्वास प्रकट किया।उन्होंने कहा, ''दो से तीन दिन में हमें समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है।'' हालांकि उन्होंने इस नई उम्मीद के लिए कोई वजह नहीं बताई। हेलीकॉप्टर दुर्घटना सोमवार को ईरान और इजराइल के एक दूसरे पर हमले किए जाने के बाद हुई, जिससे ईरान युद्ध में कमजोर पड़ते संघर्ष विराम को मजबूती प्रदान करने के मकसद से की जाने वाली बातचीत जोखिम में पड़ गई।
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कहा- देश को बहुत नुकसान हो रहा
वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संघीय अदालत के उस आदेश की आलोचना की, जिसमें एक लाख डॉलर के एच-1बी वीजा शुल्क को रद्द कर दिया गया। ट्रंप ने यह भी कहा कि ऐसे अदालती फैसले देश को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में एनबीए फाइनल देखने के बाद न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, ''ये न्यायाधीश हमें बहुत परेशान कर रहे हैं, यह बिलकुल पागलपन है। वे हमें बहुत अधिक परेशान कर रहे हैं... वे हमारे देश को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं।'' मैसाचुसेट्स के एक संघीय न्यायाधीश ने सोमवार को ट्रंप प्रशासन द्वारा उच्च कुशल श्रमिकों के लिए एच-1बी वीजा पर लगाए गए एक लाख डॉलर के शुल्क को रद्द कर दिया। शुल्क आदेश को कैलिफोर्निया और 19 अन्य प्रांतों ने चुनौती दी थी। न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने फैसला सुनाया कि एच-1बी आवेदनों पर ट्रंप द्वारा लगाया गया एक लाख डॉलर का शुल्क गैरकानूनी था, क्योंकि इसे अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी नहीं मिली थी। ट्रंप ने पिछले साल सितंबर में एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें नये एच-1बी वीजा आवेदनों के लिए एक लाख डॉलर का शुल्क निर्धारित किया गया था। व्हाइट हाउस की एक प्रवक्ता ने संकेत दिया कि इस आदेश को अपीलीय अदालत में चुनौती दी जाएगी।
प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा, ''एच-1बी कार्यक्रम का दशकों से दुरुपयोग होता रहा है और राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरकार इसे ठीक करने के लिए कदम उठाया था।'' रोजर्स ने यह भी कहा, ''वाशिंगटन में एक संघीय न्यायाधीश पहले ही लगभग इसी तरह के एक आदेश को बरकरार रख चुके हैं, और प्रशासन को विश्वास है कि अपील में यह आदेश पलट दिया जाएगा। -
तेल अवीव में भारतीय दूतावास
तेल अवीव. इजराइल और ईरान के मध्य फिर से बढ़ते हमलों के बीच तेल अवीव स्थित भारतीय मिशन ने इजराइल में रह रहे भारतीय नागरिकों को ''अत्यधिक सतर्कता बरतने, स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने और देश की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। भारतीय दूतावास ने सोमवार को जारी एक परामर्श में कहा, "क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए इजराइल में सभी भारतीय नागरिकों को हर समय अत्यधिक सावधानी बरतने और सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।" ईरान ने रविवार शाम से इजराइल पर दर्जनों मिसाइल दागीं, जिसके जवाब में इजराइल ने भी कार्रवाई की, जिससे क्षेत्र में बड़े तनाव और संभावित गंभीर स्थिति की आशंका बढ़ गई है। परामर्श में कहा गया है, "भारतीय नागरिकों को इजराइली प्राधिकारियों और होम फ्रंट कमांड द्वारा जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों और निर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी जाती है (अद्यतन निर्देश वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं)।'' भारतीय नागरिकों को अपने आवास या कार्यस्थल के निकट उपलब्ध सुरक्षित आश्रयों के बारे में जानकारी रखने और उनके पास रहने की सलाह दी गई है। परामर्श में यह भी कहा गया है कि अगले आदेश तक इजराइल के भीतर सभी गैर-जरूरी यात्रा से बचा जाए। इसमें कहा गया है कि नागरिकों को स्थानीय समाचार और आधिकारिक सूचनाओं पर लगातार नजर रखनी चाहिए। इजराइल में रहने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या पिछले ढाई वर्षों में बढ़कर 40,000 से अधिक हो गई है, जो पूरे देश में फैले हुए हैं। भारतीय मिशन ने आपात स्थिति के लिए 24x7 हेल्पलाइन भी जारी की है।
दूतावास ने कहा कि वह संबंधित प्राधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और आवश्यकता अनुसार आगे भी अद्यतन जानकारी जारी करता रहेगा। -
सेंट पीटर्सबर्ग. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के दौरान "प्रतिबंधों की धमकियों" से भारत की संप्रभुता को कमजोर करने की कोई भी कोशिश "तुरंत उल्टी पड़ेगी"। पुतिन ने यह बात शुक्रवार को वार्षिक सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक फोरम में कही। यह टिप्पणी उन्होंने बृहस्पतिवार रात दुनिया की बड़ी समाचार एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बातचीत के दौरान उनकी टिप्पणियों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कही। पुतिन ने कहा, "भारत हमेशा एक संप्रभु देश की तरह काम करता है, और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, प्रतिबंधों की कोई भी संभावित धमकी तुरंत उल्टी पड़ेगी।" रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि वह लंबे समय से प्रधानमंत्री मोदी के साथ करीबी बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने उस समय को भी याद किया जब मोदी के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि प्रधानमंत्री मोदी इसे कभी नहीं भूलेंगे। अब जब वह प्रधानमंत्री हैं, तो सभी प्रतिबंध हटा दिए गए हैं, और जहां तक मैं समझता हूं, अमेरिका और भारत के बीच रिश्ते कामयाबी के साथ बढ़ रहे हैं।" यह पूछे जाने पर कि अगर भारत सुखोई-57 विमान या एस-500 वायु रक्षा मंच जैसी रूसी रक्षा प्रणालियां खरीदता है, तो क्या उसे अमेरिकी प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है, पुतिन ने कहा, "भारत एक संप्रभु देश है, और वह उन उत्पादों को चुनने के लिए स्वतंत्र है जिन्हें वह अपने लिए सबसे आधुनिक और सबसे उपयुक्त मानता है, तथा जो स्पष्ट रूप से सर्वोत्तम मूल्य प्रदान करते हैं। चाहे लोग कुछ भी कहें, भारत हमेशा इसी तरह से कार्य करता आया है।" उन्होंने कहा, "भारत हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर काम करता है।'
पुतिन ने कहा कि भारत के साथ रूस का सहयोग, दूसरे सभी साझेदारों की तरह, राजनीतिक माहौल पर निर्भर नहीं करता। उन्होंने कहा, "हम पर हुक्म नहीं चलाया जा सकता... कोई हमें नहीं चला सकता, और कोई ऐसा करने की कोशिश भी नहीं करेगा। हम हमेशा वही करेंगे जो हमें सही लगेगा, और साझेदारों, खासकर भारत जैसे साझेदार देशों को दी गई प्रतिबद्धता पर हमेशा कायम रहेंगे।" भारत के साथ रूस के पुराने रिश्तों, खासकर रक्षा क्षेत्र में संबंधों की बात करते हुए पुतिन ने कहा, "भारतीय दोस्तों के साथ हमारे रिश्ते खास हैं, जिसके लिए आपसी भरोसा एक वजह है। हम सिर्फ व्यापार पर ही ध्यान नहीं देते। सिर्फ खरीदने और बेचने पर ही नहीं, हम संयुक्त अनुसंधान और विकास पर भी ध्यान दे रहे हैं।" पुतिन ने बताया कि कैसे दोनों देशों के विशेषज्ञ मध्यम श्रेणी की मिसाइल ब्रह्मोस के डिजाइन पर काम कर रहे हैं। पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू सुखोई-57 के बारे में पुतिन ने कहा कि रूस ने पहले भारत के साथ संयुक्त विकास कार्यक्रम का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बाद में योजना फलीभूत नहीं होने पर उसने अकेले इस परियोजना को आगे बढ़ाया। पुतिन ने कहा, "सुखोई-57 एक बहुत अच्छा विमान है, शायद सबसे आधुनिक, अभी तक दुनिया का सबसे अद्यतन विमान है। हमने पेशकश की थी कि हमें यह साथ मिलकर करना चाहिए। खैर, यह बात नहीं बनी, लेकिन हमने इसे अपने दम पर किया, और हम सुखोई-57 बेचने के लिए तैयार हैं।" रूस दशकों से भारत का मुख्य रक्षा आपूर्तिकर्ता रहा है। हालांकि, यूक्रेन में युद्ध की वजह से आपूर्ति शृंखला में लगातार रुकावट और आपूर्ति में देरी ने नयी दिल्ली को अपनी सैन्य खरीद की रणनीति में तेजी से बदलाव करने पर मजबूर कर दिया। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए वर्षों के प्रयास के बाद, भारत ने अपनी महत्वाकांक्षी आधुनिक बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान (एएमसीए) परियोजना शुरू की है, जिसे देश का सबसे बड़ा स्वदेशी एयरोस्पेस कार्यक्रम माना जाता है। -
कोलंबो. श्रीलंका में एक वृद्धाश्रम में आग लगने से कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और सात अन्य बुजुर्ग झुलस गए। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि बुधवार शाम करीब साढ़े पांच बजे कलुतारा जिले के अंगुरुवाटोटा स्थित मावपिया सेवाना वृद्धाश्रम में आग लग गई। यह स्थान कोलंबो से लगभग 65 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है।
पुलिस ने बताया कि परिसर में 10 लोग मृत पाए गए जबकि दो अन्य बुजुर्गों ने होराना बेस अस्पताल में भर्ती होने के बाद दम तोड़ दिया। पुलिस के मुताबिक, घटना की जांच के तहत निजी वृद्धाश्रम के मालिक को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि जब आग लगी तब वृद्धाश्रम में 70 से अधिक बुजुर्ग मौजूद थे। पुलिस के अनुसार, द्वीप पर हाल के समय में आग लगने से हुई मौतों की यह सबसे 'भयानक' घटना थी।
पुलिस ने बताया कि कुल 51 निवासियों को सुरक्षित निकालकर पास के एक स्कूल में अस्थायी आवास प्रदान किया गया है। पुलिस के मुताबिक, सात घायल अब भी अस्पताल में भर्ती हैं और निवासियों व पुलिस की सहायता से आग पर काबू पा लिया गया। होराना की मजिस्ट्रेट लकमिनि विदानागामेज ने घटना की जांच की। पुलिस ने बताया कि उनकी (मजिस्ट्रेट) उपस्थिति में मलबे से झुलसे हुए शव बरामद किए गए। शुरुआती खबरों में सामने आया कि घटना के दौरान एक गैस सिलेंडर फट गया जिससे आग तेजी से फैल गई।
अधिकारियों ने बताया कि आग लगने का सटीक कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है। -
वाशिंगटन/नयी दिल्ली। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लागू न करने के आरोप में भारत सहित 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव उन जांच के बाद सामने आया है, जो अमेरिका ने 60 देशों के खिलाफ इस आधार पर शुरू की थी कि वे बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के अधिकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण को अंतिम रूप देने के लिए नयी दिल्ली में तीन दिन की वार्ता कर रहे हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत मार्च में शुरू की गई जांच के बाद यह प्रस्ताव रखा है। यह जांच बंधुआ मजदूरी से जुड़े मुद्दों को लेकर 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ शुरू की गई थी। हालांकि, यूएसटीआर ने स्पष्ट किया है कि यह अभी केवल एक प्रस्ताव है और इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इच्छुक पक्ष 22 जून तक सुनवाई में शामिल होने का अनुरोध और अपने पक्ष का सार प्रस्तुत कर सकते हैं। सुनवाई सात जुलाई को होगी। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, '' भारत धारा-301 कार्यवाही के मामले में अमेरिका के साथ संपर्क में है। साथ ही भारत दो फरवरी, 2026 को घोषित समझौते के ढांचे और सात फरवरी, 2026 को जारी संयुक्त बयान के अनुरूप अमेरिका के साथ समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भी बातचीत कर रहा है।'' यूएसटीआर ने अधिकांश वस्तुओं पर यह अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया है। हालांकि, वस्त्र और परिधान उत्पादों के लिए एक विशेष व्यवस्था का भी प्रस्ताव है, जिसके तहत कुछ देशों से सीमित मात्रा में आयात को कम शुल्क पर अनुमति दी जा सकती है। जिन 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क प्रस्तावित है, उनमें भारत, चीन, जापान, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, इजराइल, मलेशिया, न्यूजीलैंड, ओमान, कतर, रूस, सऊदी अरब, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, थाइलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और वियतनाम सहित अन्य देश शामिल हैं। यूएसटीआर ने कनाडा, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान और इक्वाडोर पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का भी प्रस्ताव किया है। यूएसटीआर ने कहा कि इन देशों द्वारा बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध नहीं लगाने से अमेरिकी व्यापार प्रभावित हो रहा है और इसलिए यह कार्रवाई धारा 301 के तहत की जा रही है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर ने एक बयान में कहा, ''हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने में विफल रहना अस्वीकार्य है। इससे ऐसी स्थिति पैदा होती है, जिसमें अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।'' भारत ने बंधुआ मजदूरी संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए अमेरिका से इन जांच को समाप्त करने की मांग की है। भारत का कहना है कि ऐसे मुद्दों का समाधान दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के ढांचे के भीतर किया जाना चाहिए। यूएसटीआर का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के लिए नयी दिल्ली में तीन दिवसीय वार्ता हो रही है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उसके मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच कर रहे हैं, जबकि भारतीय पक्ष का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन कर रहे हैं। दोनों देशों ने सात फरवरी को अंतरिम व्यापार समझौते या बीटीए के पहले चरण की रूपरेखा को अंतिम रूप देने संबंधी संयुक्त बयान जारी किया था। आर्थिक शोध संस्थान 'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' (जीटीआरआई) ने कहा कि अमेरिका द्वारा धारा-301 जांच के तहत भारत पर प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत शुल्क प्रावधान के दायरे से बाहर है और भारत को इसे चुनौती देनी चाहिए। जीटीआरआई के अनुसार, 12.5 प्रतिशत का यह शुल्क अमेरिका की विश्व व्यापार संगठन प्रतिबद्धताओं से अधिक है। जीटीआरआई ने कहा, '' वर्तमान जांच धारा-301 के दायरे से बाहर है, जो जांच के दायरे में आ रहे देश के आयात व उनके स्रोत से नहीं बल्कि अमेरिकी कंपनियों के सामने आने वाली बाजार पहुंच बाधाओं से संबंधित है।'' आर्थिक शोध संस्थान के अनुसार, यह जांच इस आरोप पर आधारित नहीं है कि निर्यात किए जाने वाले भारतीय उत्पाद बंधुआ मजदूरी से तैयार किए जाते हैं, बल्कि यूएसटीआर की कार्रवाई इस बात पर केंद्रित है कि क्या देश तीसरे देशों में बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाते हैं। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत को यह तर्क देना चाहिए कि अमेरिका एकतरफा व्यापार उपायों के जरिये अपने पसंदीदा आयात-नियंत्रण ढांचे को अन्य देशों पर थोपने की कोशिश कर रहा है, जो धारा-301 के दायरे से बाहर है।
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नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन इसी बीच अमेरिका ने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है जिससे भारत की चिंता बढ़ सकती है। अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों से आने वाले सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात कही है।
अमेरिका का कहना है कि इन देशों ने ऐसे सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं, जो जबरन मजदूरी से बनाए गए हो। इसी वजह से इन देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने कहा है कि भारत उन 54 देशों में शामिल है जिन्होंने ऐसे उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक नहीं लगाई है। इस सूची में चीन, बांग्लादेश, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, वियतनाम और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई बड़े देश भी शामिल हैं।यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश चल रही है। अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच इन दिनों नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत और मुश्किल हो सकती है। अब सिर्फ आयात शुल्क और बाजार पहुंच ही नहीं, बल्कि श्रम कानूनों और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं।अमेरिका ने कहा है कि जिन देशों में जबरन मजदूरी से बने सामान पर कोई प्रभावी रोक नहीं है, वहां से आने वाले उत्पादों पर 12.5 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। वहीं जिन देशों ने इस दिशा में कुछ नियम बनाए हैं या अमेरिका के साथ कोई समझौता किया है, उनके लिए 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव है।अमेरिका का कहना है कि अगर कुछ देशों में जबरन मजदूरी से बने सामान आसानी से बाजार में पहुंच जाते हैं, तो वहां की कंपनियों की लागत कम हो जाती है। इससे उन कंपनियों को नुकसान होता है जो श्रम नियमों का पालन करती हैं। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीयर ने कहा कि दुनिया के बड़े व्यापारिक साझेदारों का इस मुद्दे पर कार्रवाई नहीं करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। इससे अमेरिकी कंपनियों और कामगारों को नुकसान होता है।क्या है सेक्शन 301?अमेरिका ने यह प्रस्ताव अपने व्यापार कानून की धारा 301 के तहत रखा है। यह कानून अमेरिका को उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देता है, जिनकी नीतियां उसे अमेरिकी व्यापार के लिए नुकसानदायक या अनुचित लगती हैं। इस कानून के तहत अमेरिका अतिरिक्त शुल्क लगा सकता है या दूसरे व्यापारिक प्रतिबंध भी लगा सकता है। फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्ताव है और इस पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। लेकिन अगर इसे लागू किया जाता है तो भारत समेत कई देशों के निर्यातकों पर असर पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में, जब भारत और अमेरिका दोनों व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। -
वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेबनान के खिलाफ हमले को रोकने के लिए राजी कर लिया है, जिसके बाद उन्होंने अपने सैनिकों को वापस बुला लिया। ट्रंप ने सोमवार शाम को 'ट्रुथ सोशल' पर यह घोषणा की। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों नेताओं के बीच ''तीखी'' बातचीत की खबरें सामने आ रही थीं। खबरों के अनुसार ट्रंप ने नेतन्याहू से यह भी कहा कि अगर उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो इजराइल के प्रधानमंत्री आज जेल में होते । उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री को उनके लोकप्रिय उपनाम से संबोधित करते हुए कहा, ''आज (सोमवार) मेरी बीबी नेतन्याहू से बातचीत हुई। मैंने उनसे लेबनान के बेरूत में कोई बड़ा हमला न करने का अनुरोध किया। उन्होंने अपनी सेना को वापस बुला लिया। धन्यवाद बीबी।'' ईरान द्वारा लेबनान पर इजराइल के हमलों को लेकर अमेरिका के साथ जारी बातचीत को खत्म करने की धमकी के बाद ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत हुई। नेतन्याहू ने कहा था कि अगर हिजबुल्ला इजराइल पर हमले बंद नहीं करता है तो इजराइल बेरूत में ''आतंकी ठिकानों'' पर हमला करेगा। ट्रंप ने कहा कि उनकी हिजबुल्ला के नेताओं के प्रतिनिधियों से भी बातचीत हुई, जो ''इजराइल और उसके सैनिकों पर गोलीबारी बंद करने'' पर सहमत हुए। उन्होंने कहा, ''मेरी हिजबुल्ला के नेताओं के प्रतिनिधियों से भी बातचीत हुई और वे इजराइल तथा उसके सैनिकों पर गोलीबारी बंद करने पर सहमत हुए। इसी तरह, इजराइल भी उन पर गोलीबारी बंद करने पर सहमत हो गया। देखते हैं यह कब तक चलता है - उम्मीद है कि यह हमेशा के लिए चलेगा।'' अमेरिकी मीडिया आउटलेट 'एक्सियोस' ने बताया कि ट्रंप और नेतन्याहू की फोन कॉल के दौरान तीखी बहस हुई।
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न्यूयॉर्क. अमेरिका की योग टीम चार से आठ जून तक अहमदाबाद में होने वाली पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप में भाग लेगी। अमेरिकी योग संघ (यूएसवाईए) की विज्ञप्ति के अनुसार अमेरिकी योगासन खेल महासंघ (यूएसआईएसएफ) ने यूएसवाईए और विश्व योगासन के सहयोग से यह टीम तैयार की है। विज्ञप्ति में बताया गया है कि अमेरिकी योग संघ और यूएसवाईएसएफ के संस्थापक एवं अध्यक्ष बलविंदर सिंह 11 सदस्यीय अमेरिकी टीम का नेतृत्व करेंगे। भारत में होने वाली चैंपियनशिप के लिए टीम का चयन अप्रैल में कनेक्टिकट में क्वार्टरफाइनल ट्रायल के आधार पर किया गया था। टीम में शामिल खिलाड़ियों की उम्र 10 से 55 वर्ष के बीच है और वह विभिन्न आयु वर्ग की स्पर्धाओं चुनौती पेश करेंगे। अमेरिकी योगासन टीम के सदस्यों ने भारत के अपने दौरे से पहले पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क में भारतीय वाणिज्य दूतावास का दौरा किया और उप वाणिज्य दूतावास विशाल हर्ष से मुलाकात की। वाणिज्य दूतावास ने खिलाड़ियों को चैंपियनशिप में सफलता की शुभकामनाएं दीं। इस प्रतियोगिता में 60 से अधिक देशों के खिलाड़ियों के भाग लेने की संभावना है।
विज्ञप्ति में कहा गया है, ''यह चैंपियनशिप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकता, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और योगासन को विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।'' इस चैंपियनशिप में प्रतियोगी सात आधिकारिक योगासन श्रेणियों में भाग लेंगे, जिनमें कलात्मक और लयबद्ध योग वर्ग शामिल हैं। इसमें खिलाड़ियों का मूल्यांकन वैश्विक मानकीकृत निर्णायक मानदंडों के तहत शक्ति, लचीलापन, संतुलन, सहनशक्ति और सटीकता के आधार पर किया जाएगा। -
बेरूत. इजराइल सरकार ने सोमवार को बेरूत के दक्षिणी उपनगर पर हमलों का आदेश दिया जबकि दूसरी ओर हिज्बुल्ला ने हाइफा शहर समेत उत्तरी इजराइल के विभिन्न क्षेत्रों पर रॉकेट दागे। इससे पहले रविवार को इजराइली थलसेना 26 साल में पहली बार लेबनान में काफी अंदर तक घुस गयी थी।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने एक संयुक्त बयान में कहा कि हिज्बुल्ला की ओर से लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन किए जाने के और इजराइली शहरों व नागरिकों पर हुए हमलों के मद्देनजर उन्होंने इजराइली सेना को बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहिये में हमले करने का आदेश दिया है। अप्रैल के मध्य में संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान हिज्बुल्ला ने इजराइल पर हमले रोकने पर सहमति जताई थी, लेकिन लेबनान पर इजराइली हमलों के बाद हिज्बुल्ला ने फिर से हमले शुरू कर दिए। इजराइल सरकार की चेतावनी के बाद बड़ी संख्या में लोग दहिये से दूसरी जगह जाते हुए दिखे। इस दौरान जगह-जगह जाम लगा नजर आया। -
संयुक्त राष्ट्र. बांग्लादेश और साइप्रस संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए मंगलवार को आमने-सामने होंगे। इस चुनाव पर दुनिया की करीबी नजर बनी हुई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान और साइप्रस के बहुपक्षीय मामलों के विशेष दूत एंड्रियास काकौरिस 193 सदस्यीय महासभा के 81वें सत्र की अध्यक्षता करने की दौड़ में शामिल हैं। यह सत्र सितंबर से आरंभ होगा। संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख विचार-विमर्श, नीति-निर्माण और प्रतिनिधि संस्था, महासभा दो जून को एक वर्ष के कार्यकाल के लिए अपने अगले अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए मतदान करेगी। बारी बारी से अध्यक्ष पद के चुनाव की स्थापित प्रणाली के अनुसार, 81वें सत्र के अध्यक्ष का चुनाव एशिया-प्रशांत समूह से होगा। यह चुनाव 193 सदस्यीय महासभा द्वारा 2027-28 कार्यकाल के लिए 15 देशों की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पांच नए अस्थायी सदस्यों के चुनाव से एक दिन पहले होगा। सफल उम्मीदवार वर्तमान महासभा अध्यक्ष और जर्मनी की पूर्व विदेश मंत्री एनालेना बेरबॉक का स्थान लेगा। बेरबॉक संयुक्त राष्ट्र के 80 वर्षों के इतिहास में इस पद को संभालने वाली केवल पांचवीं महिला हैं। रहमान ने इसी वर्ष फरवरी में बांग्लादेश के विदेश मंत्री के रूप में शपथ ली। इससे पहले उन्होंने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रोहिंग्या मुद्दे के उच्च प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया था। काकौरिस के पास बहुपक्षीय और द्विपक्षीय कूटनीति में चार दशकों से अधिक का राजनयिक और प्रशासनिक अनुभव है। उन्होंने साइप्रस के राजदूत और अमेरिका में उच्चायुक्त सहित कई वरिष्ठ राजनयिक पदों पर कार्य किया है। वह वर्तमान में विदेश मंत्रालय में बहुपक्षीय मामलों के विशेष दूत हैं और हाल में उन्होंने मंत्रालय के स्थायी सचिव के रूप में कार्य किया है।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान एक ''बहुत अच्छे समझौते'' के करीब हैं लेकिन अगर वाशिंगटन को वह नहीं मिलता जो वह चाहता है तो वह ''मामले को किसी और तरीके से खत्म करेगा। ट्रंप ने ये टिप्पणियां अपनी बहू लारा ट्रंप के साथ एक साक्षात्कार के दौरान कीं जिसका प्रसारण शनिवार रात 'फॉक्स न्यूज' पर किया गया। ट्रंप ने कहा, ''हम एक बहुत अच्छे समझौते के करीब हैं। अगर आप जल्दबाजी करेंगे तो आपको बेहतर समझौता नहीं मिल पाएगा और धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से हमें वह मिल रहा है जो हम चाहते हैं। अगर हमें वह नहीं मिला जो हम चाहते हैं, तो हम इसे किसी और तरीके से खत्म करेंग। ट्रंप ने कहा कि ईरानी ''अच्छे वार्ताकार'' हैं लेकिन ''सारे पत्ते'' अब अमेरिका के हाथ में हैं क्योंकि ईरान ''सैन्य रूप से पराजित हो चुका है''। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ''लेकिन हम एक बहुत अच्छे समझौते के करीब हैं। अगर हम इसे कर लेते हैं, तो अच्छा है। अन्यथा, हम सीधे युद्ध विभाग से संपर्क करेंगे।'' ट्रंप ने बताया कि ईरानियों ने कहा है कि वे परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहे हैं। ट्रंप ने सवाल किया कि अगर ईरान परमाणु हथियार खरीद ले तो क्या होगा? उन्होंने कहा, ''मैंने कहा, अगर आप परमाणु हथियार खरीद लें तो क्या होगा? तो अब ईरान कहता है कि हम न तो कोई सैन्य हथियार विकसित करेंगे और न ही खरीदेंगे। यह एक बड़ा अंतर है।'' अमेरिकी नेता ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान पर अमेरिका का ''काफी दबदबा'' है क्योंकि उनकी नौसेना और वायुसेना ''पूरी तरह से तबाह'' हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान की सेना को पूरी तरह से नष्ट नहीं कर पाया है क्योंकि कुछ नेता अधिक उदारवादी हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के अधिक चरमपंथी तत्वों और प्रमुख नेतृत्व को निशाना बनाया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को अपने शीर्ष कैबिनेट सहयोगियों और सशस्त्र बलों के अधिकारियों के साथ बैठक की लेकिन यह बैठक भविष्य की कार्रवाई पर बिना किसी स्पष्टता के खत्म हो गई। अमेरिकी मीडिया संस्थान 'एक्सियोस' ने बताया कि ट्रंप ने उस समझौते में कई संशोधन करने का अनुरोध किया है जो उनके दूतों द्वारा ईरानी समकक्षों के साथ किया गया है। 'एक्सियोस' ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप चाहते हैं कि समझौता हो और इसे जल्द अंतिम रूप देने की उम्मीद करते हैं लेकिन वह समझौते में कुछ ऐसे बिंदुओं विशेष रूप से ईरान की परमाणु सामग्री से संबंधित बिंदुओं को सुदृढ़ करना चाहते हैं जो उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। ट्रंप के इस अनुरोध से दोनों पक्षों के बीच एक बार फिर से बातचीत का दौर शुरू हो गया है जो कई दिनों तक जारी रहने की संभावना है। -
अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक दिवस
संयुक्त राष्ट्र. भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा के प्रति अपनी ''अटूट प्रतिबद्धता'' पर जोर देते हुए यहां संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एक कार्यक्रम में उन शांतिरक्षकों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र में भारत और ऑस्ट्रिया के स्थायी मिशन ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें शहीद शांति रक्षकों के सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि ''ये शांतिरक्षक दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संकटग्रस्त क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं।'' पर्वतनेनी ने कहा, ''संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों को सलाम, जिनके अथक प्रयासों से सबसे खतरनाक परिस्थितियों में भी दुनिया भर में शांति और स्थिरता बनी रहती है। भारत संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता रखता है और इस महान लक्ष्य की दिशा में अपने प्रयास जारी रखेगा।'' भारतीय मिशन ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि श्रद्धांजलि कार्यक्रम में 4,000 से अधिक उन बहादुर पुरुषों और महिलाओं, शांतिरक्षक वर्दीधारियों और आम नागरिकों को श्रद्धांजलि दी गई जिन्होंने शांति के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया। मिशन ने कहा कि भारत शांति अभियानों में सबसे अधिक सैन्य योगदान देने वाले देशों में से एक है। भारत ने 1948 से अब तक 50 से अधिक संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में लगभग तीन लाख सैनिक तैनात किए हैं। भारतीय मिशन ने बताया कि लगभग 184 भारतीय शांति रक्षकों ने अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया है। अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक दिवस हर वर्ष 29 मई को मनाया जाता है। इस तिथि का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि 1948 में इसी दिन सुरक्षा परिषद ने पश्चिम एशिया में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियान- संयुक्त राष्ट्र युद्धविराम पर्यवेक्षण संगठन की स्थापना की थी। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पांच जून को यह दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर महासचिव एंतोनियो गुतारेस संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा में सेवारत उन पुरुषों और महिलाओं को श्रद्धांजलि देंगे जिन्होंने शांति के लिए अपना जीवन बलिदान किया। इसके बाद वह उन 68 सैन्य, पुलिस और असैन्य शांतिरक्षकों को मरणोपरांत 'डैग हैमरस्कजोल्ड पदक' प्रदान करेंगे जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपनी जान गंवाई। इनमें से 59 की मृत्यु पिछले वर्ष हुई थी। -
वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक आवास एवं कार्यालय'व्हाइट हाउस' में शुक्रवार को अपने सलाहकारों के साथ बैठक की लेकिन ईरान के साथ युद्धविराम की अवधि बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने संबंधी प्रस्तावित समझौते पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं किया है। इस बीच ईरान ने भी कहा है कि यह समझौता अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है।
बैठक से पहले ट्रंप ने कहा था कि वह इस मुद्दे पर ''अंतिम निर्णय'' लेने वाले हैं। हालांकि, बाद में प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ लगभग दो घंटे चली बैठक बिना किसी निर्णय के समाप्त हो गई। अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि ट्रंप केवल उसी समझौते को मंजूरी देंगे जो उनकी ''तय शर्तों'' को पूरा करे और ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अंकुश लगाए। ट्रंप ने यह उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में की जब एक दिन पहले कई मीडिया संस्थानों ने खबर दी थी कि अमेरिकी और ईरानी वार्ताकार एक प्रारंभिक समझौते पर सहमत हो गए हैं जिसके तहत मौजूदा नाजुक युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाया जाएगा और ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर फिर से वार्ताएं शुरू होंगी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''ईरान को यह मानना होगा कि वह कभी परमाणु हथियार या बम नहीं बनाएगा।'' उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए खोला जाना चाहिए और वहां बिछाई गई सभी समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाया जाना चाहिए। वहीं, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर कालिबाफ ने शुक्रवार को कहा कि ईरान को ''गारंटी या शब्दों पर नहीं'', बल्कि केवल ठोस कार्रवाई पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में अमेरिका और इजराइल द्वारा दो बार हमले किए जाने के बाद अविश्वास बना हुआ है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''दूसरा पक्ष कार्रवाई नहीं करेगा तो ईरान भी कोई कदम नहीं उठाएगा। हम बातचीत से नहीं, बल्कि मिसाइलों से रियायतें हासिल करते हैं।'' ट्रंप की बैठक समाप्त होने से पहले ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी प्रसारक से कहा कि समझौता ''अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है।'' अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बृहस्पतिवार को संकेत दिया था कि वार्ताकार ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि विस्तृत शर्तों पर आगे की वार्ताओं में चर्चा होगी। हालांकि, बघाई ने कहा कि ईरानी अधिकारी फिलहाल ''युद्ध समाप्त करने पर ध्यान लगा रहे हैं और इस समय परमाणु योजना के विवरण पर चर्चा नहीं कर रहे हैं।'' ईरान चाहता है कि किसी भी समझौते में इजराइल और लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला के बीच युद्धविराम भी शामिल हो। साथ ही, वह विदेशों में फ्रीज अरबों डॉलर के अपने फंड जारी कराने की मांग भी कर रहा है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''ईरान शर्तें तय करेगा : नकद के बदले नकद, लाभ के बदले लाभ, मुफ्त में कुछ नहीं।'' -
जोहानिसबर्ग. भारत के लोकप्रिय गायक अनूप जलोटा को दक्षिण अफ्रीका में भारतीय प्रवासियों द्वारा भारत की संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए स्थापित उत्तर प्रदेश देवभूमि संगठन (यूपीडेस) की मानद सदस्यता सोमवार को प्रदान की गई। जलोटा ने सप्ताहांत में डर्बन और जोहानिसबर्ग में दो संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उन्होंने वहां के भारतीय मूल के लोगों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पांच पीढ़ियों से अपनी संस्कृति को जीवित रखा है। अमेरिका में संगीत कार्यक्रम की यात्रा पर रवाना होने से पहले 'पीटीआई-भाषा' को दिए साक्षात्कार में जलोटा ने याद किया कि वह और भारत के कई अन्य प्रमुख कलाकार दशकों तक दक्षिण अफ्रीका में अपने प्रशंसकों के लिए कार्यक्रम करना चाहते थे, लेकिन संयुक्त राष्ट्र में 1948 से रंगभेद के खिलाफ वैश्विक मुहिम का नेतृत्व कर रही भारत सरकार के कड़े रुख के कारण उन्हें वहां कार्यक्रम प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा, ''हम दक्षिण अफ्रीका जाकर कार्यक्रम करने के लिए बेहद उत्सुक थे, लेकिन हमें अनुमति नहीं मिली। हम बस दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर पूरी दुनिया की यात्रा करते थे। हमने भारत सरकार से कई बार अनुरोध किया, लेकिन हर बार जवाब यही मिला कि संबंध ठीक नहीं हैं, इसलिए वहां मत जाओ।'' जलोटा ने बिना नाम लिए दावा किया कि कुछ भारतीय कलाकारों ने नियमों की अनदेखी कर दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की थी। नेल्सन मंडेला की 27 साल की राजनीतिक कैद के बाद रिहाई होने पर भारत ने अपना रुख बदला और जलोटा उन पहले भारतीय कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने मंडेला के राष्ट्रपति बनने से ठीक पहले दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की। जलोटा ने कहा कि तब से वह दक्षिण अफ्रीका में कई बार कार्यक्रम कर चुके हैं और हर बार दर्शकों ने उनके भजनों और गजलों को बड़े उत्साह से सराहा है। उन्होंने कहा, ''दक्षिण अफ्रीका हमारा छोटा भारत है। पांच पीढ़ियां बीत जाने के बाद भी यहां के लोगों ने अपनी संस्कृति को जीवित रखा है। वे अब भी रामायण का पाठ करते हैं, हनुमान चालीसा के कार्यक्रम आयोजित करते हैं और हिंदू विष्णु परिषद भी सक्रिय है। यह देखना बेहद प्रभावशाली है कि इन्होंने अपनी संस्कृति और कला को कैसे जीवित रखा है।'' हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भाषा के क्षेत्र में अभी और काम किए जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि हिंदी सिखाने के लिए विद्यालय पहले से खुल रहे हैं। अगर ये लोग हिंदी में बात कर सकें, तो संस्कृति का प्रसार और तेजी से होगा। मुझे उम्मीद है कि ऐसा जरूर होगा।'' जलोटा ने संगठन के संस्थापक एवं अध्यक्ष आशीष शर्मा की भी प्रशंसा की, जिन्होंने उनकी मेजबानी की और उन्हें मानद सदस्यता प्रदान की। उन्होंने कहा, ''मैं स्वयं उत्तर प्रदेश से हूं और इस संगठन का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं।'' शर्मा ने कहा कि 'यूपीडेस' अविभाजित उत्तर प्रदेश के उन क्षेत्रों की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने का काम करता है, जो अब उत्तराखंड के नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने कहा, ''उत्तराखंड की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने के लिए अनूप जी से बेहतर कोई नहीं हो सकता, क्योंकि वह भजन सम्राट हैं। वे हमें हमारी संस्कृति से जोड़े रखते हैं और हमारे उद्देश्यों को पूरा करने में सच्चे सहायक हैं।'' जलोटा ने सोमवार को अपने सम्मान में आयोजित एक स्वागत समारोह में भारतीय मूल के कुछ युवा दक्षिण अफ्रीकी गायकों की भी सराहना की, जिन्होंने उनके चर्चित गीत प्रस्तुत किए। -
कराची. पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रविवार को एक 'शटल' ट्रेन में एक शक्तिशाली विस्फोट में कम से कम 20 लोगों के मारे जाने और कई लोगों के घायल होने की आशंका है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। प्रतिबंधित बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने विस्फोट की जिम्मेदारी ली है।
सरकारी समाचार एजेंसी 'एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान' की खबर के अनुसार, 'शटल' ट्रेन क्वेटा छावनी से शहर के रेलवे स्टेशन की ओर जा रही थी कि तभी चमन फाटक के पास इसे निशाना बनाया गया। बीएलए के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह हमला तब किया गया जब ट्रेन छावनी क्षेत्र से सैन्य कर्मियों को ले जा रही थी। सरकार ने हालांकि अब तक आधिकारिक तौर पर 14 लोगों की मौत की पुष्टि की, जिनमें फ्रंटियर कोर के तीन जवान शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 20 लोगों के मारे जाने की आशंका है जबकि मीडिया में प्रकाशित खबरों में मरने वालों की संख्या इससे अधिक बताई गई है। पाकिस्तान के रेल मंत्री हनीफ अब्बासी ने कहा कि 'शटल' ट्रेन में असैन्य यात्री भी थे और विस्फोट से इंजन व तीन डिब्बे प्रभावित हुए। विस्फोट इतना जोरदार था कि आसपास के वाहनों के शीशे और आस-पास की इमारतों के शीशे चकनाचूर हो गए।
अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन में सवार अधिकांश यात्री आगामी ईद के त्यौहार के लिए अपने घर जाने वाली संपर्क ट्रेनों को पकड़ने की प्रतीक्षा कर रहे थे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा, "आतंकवाद के ऐसे कायरतापूर्ण कृत्य पाकिस्तान की जनता के संकल्प को कमजोर नहीं कर सकते।" उन्होंने कहा, "हम आतंकवाद के हर रूप को खत्म करने के अपने संकल्प पर अडिग हैं।"
जियो न्यूज की एक खबर के अनुसार, रेलवे अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर विस्फोट के बाद पेशावर जाने वाली जाफर एक्सप्रेस को क्वेटा रेलवे स्टेशन पर रोक दिया। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता बाबर यूसुफजई ने कहा कि विस्फोट के बाद सभी संबंधित संस्थानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने जनता से विस्फोट स्थल के पास इकट्ठा न होने का आग्रह किया ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और आपातकालीन टीमों को बिना किसी बाधा के बचाव कार्य करने में मदद मिल सके। -
संयुक्त राष्ट्र. लेबनान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में सेवारत भारतीय शांतिरक्षक, मेजर अभिलाषा बराक को विश्व संस्था द्वारा प्रतिष्ठित ''यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड'' के लिए नामित किया गया है। पश्चिम एशियाई देश में तैनाती के दौरान महिलाओं और लड़कियों के साथ किए गए संपर्क प्रयासों के लिए बराक को 2025 का ''यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड'' प्रदान किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि मेजर अभिलाषा बराक को 2025 का 'यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' प्रदान किया जाएगा। उन्हें महिलाओं और किशोरियों के साथ संपर्क कायम करने और सामुदायिक गतिविधियों तथा शांतिरक्षकों को लैंगिक संवेदनशीलता प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए सम्मानित किया जा रहा है।'' बराक संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (यूएनआईएफआईएल) में महिला सहभागिता दल (एफईटी) की कमांडर के रूप में भारतीय बटालियन में कार्यरत हैं। वह भारतीय सेना की पहली महिला लड़ाकू हेलीकॉप्टर पायलट भी हैं। उन्हें संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 29 मई को सम्मानित किया जाएगा। विश्व संस्था 29 मई को हर वर्ष संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के अंतरराष्ट्रीय दिवस का आयोजन करती है। भारत के लिए यह गर्व का क्षण है, क्योंकि बराक देश की तीसरी महिला हैं जिन्हें लैंगिक समानता के संबंध में उनके कार्यों के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है। बराक से पहले मेजर सुमन गवानी और मेजर राधिका सेन को संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में उनके सराहनीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया था। गवानी ने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (यूएनएमआईएसएस) में अपनी सेवाएं दी थीं और उन्हें वर्ष 2019 का 'यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' प्रदान किया गया था। उन्हें यह सम्मान मध्य अफ्रीकी गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र बहुआयामी एकीकृत स्थिरीकरण मिशन (एमआईएनयूएससीए) में कार्यरत ब्राजील की नौसेना अधिकारी कमांडर कार्ला मोंटेइरो डी कास्त्रो अरौजो के साथ संयुक्त रूप से दिया गया था। कांगो गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र संगठन स्थिरीकरण मिशन (एमओएनयूएससीओ) में सेवा दे चुकीं मेजर राधिका सेन को प्रतिष्ठित 2023 'यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया। शांति अभियान विभाग (डीपीओ) के अंतर्गत सैन्य मामलों के कार्यालय द्वारा 2016 में स्थापित यह पुरस्कार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प 1325 (महिला, शांति एवं सुरक्षा) के सिद्धांतों को बढ़ावा देने में एक सैन्य शांतिरक्षक के समर्पण और प्रयासों को मान्यता देता है। यह पुरस्कार उस सैन्य शांतिरक्षक के योगदान को रेखांकित करता है, जिसने शांति स्थापना गतिविधियों में लैंगिक दृष्टिकोण को सबसे प्रभावी ढंग से शामिल किया हो।















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