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नयी दिल्ली. मनीष राज गुप्ता ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया। आरआईएनएल ने एक बयान में कहा कि गुप्ता ‘स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (सेल) में निदेशक (तकनीकी, परियोजना और कच्चामाल) के पद पर हैं। प्रबंधन में स्नात्कोत्तर, गुप्ता वर्ष 1991 में कंपनी के दुर्गापुर स्टील प्लांट में प्रशिक्षु (टेक्निकल) के तौर पर सेल में शामिल हुए थे और तब से उन्होंने सेल की अलग-अलग इकाइयों में काम किया है। उन्होंने बृहस्पतिवार को आरआईएनएल के अतिरिक्त चेयरमैन' और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) का प्रभार संभाला।
इस्पात मंत्रालय के तहत, आरआईएनएल भारत में इस्पात बनाने वाली एक प्रमुख कंपनी है। - रायपुर। इंडियन स्टील एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन जिन्दल ने कहा है कि फ्लैट स्टील उत्पादों पर ‘सेफगार्ड ड्यूटी’ लगाना सरकार का एक सोच-समझकर लिया गया संतुलित कदम है। इसका उद्देश्य घरेलू स्टील बाज़ार को स्थिर रखना है, ताकि उपभोक्ताओं और देश की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को स्टील की लगातार और भरोसेमंद आपूर्ति मिलती रहे।श्री जिन्दल ने कहा कि आज जब दुनिया का स्टील उद्योग कमजोर मांग और अतिरिक्त उत्पादन की समस्या से जूझ रहा है, तब भारत का स्टील सेक्टर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यह प्रगति बढ़ती घरेलू मांग और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहे निरंतर निवेश का परिणाम है। लेकिन इसी बढ़ती मांग को देखते हुए चीन, जापान, कोरिया और वियतनाम जैसे देशों से सस्ते स्टील को भारत में खपाने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर हमारी घरेलू क्षमता, नए निवेश और रोजग़ार पर पड़ता है। सेफगार्ड ड्यूटी ऐसे दबाव को रोकने में मदद करती है। यह अनुचित प्रतिस्पर्धा से घरेलू उद्योग की रक्षा करती है, बाज़ार में संतुलन बनाए रखती है और स्टील वैल्यू चेन को मजबूत करती है।श्री जिन्दल ने कहा कि इसी संतुलन से उद्योग आत्मनिर्भर बनता है और देश के हित सुरक्षित रहते हैं। इसलिए मौजूदा वैश्विक आपूर्ति असंतुलन को देखते हुए, घरेलू स्टील क्षेत्र के दीर्घकालीन विकास के लिए सरकार से आगे भी ऐसे आवश्यक व्यापारिक उपायों पर विचार किए जाने की हमें उम्मीद है।
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नयी दिल्ली. दिसंबर महीने में सकल जीएसटी संग्रह 6.1 प्रतिशत बढ़कर 1.74 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। करों में कटौती के बाद घरेलू बिक्री राजस्व में वृद्धि सुस्त रहने से जीएसटी संग्रह की रफ्तार नरम पड़ी है। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। दिसंबर 2024 में सकल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा था।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में घरेलू लेनदेन से सकल राजस्व 1.2 प्रतिशत बढ़कर 1.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया जबकि आयातित वस्तुओं से राजस्व 19.7 प्रतिशत बढ़कर 51,977 करोड़ रुपये रहा। दिसंबर में कर ‘रिफंड' 31 प्रतिशत बढ़कर 28,980 करोड़ रुपये रहा।
शुद्ध जीएसटी राजस्व (कर रिफंड समायोजन के बाद) 1.45 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.2 प्रतिशत अधिक है। पिछले महीने उपकर संग्रह घटकर 4,238 करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 12,003 करोड़ रुपये था। उल्लेखनीय है कि 22 सितंबर, 2025 से लगभग 375 वस्तुओं पर जीएसटी की दरें कम कर दी गईं। इससे सामान सस्ता हुआ है। इसके अलावा पहले की तरह विलासिता, अहितकर वस्तुओं पर क्षतिपूर्ति उपकर अब नहीं लगाया जाता है। अब केवल तंबाकू एवं संबंधित उत्पादों पर ही यह लगाया जाता है। जीएसटी दरों में कमी से राजस्व संग्रह प्रभावित हुआ है। -
नयी दिल्ली. विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) या विमान ईंधन की कीमत में 7.3 प्रतिशत की कटौती की गई जबकि वाणिज्यिक एलपीजी 111 रुपये प्रति सिलेंडर महंगा किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने वैश्विक ईंधन मानकों के अनुरूप अपने मासिक मूल्य संशोधन को लागू किया। सार्वजनिक क्षेत्र के ईंधन खुदरा विक्रेताओं के अनुसार, दिल्ली में एटीएफ की कीमत 7,353.75 रुपये प्रति किलोलीटर या 7.3 प्रतिशत की कटौती के साथ 92,323.02 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई। कीमतों में तीन महीने लगातार बढ़ोतरी करने के बाद यह कटौती गई। कीमतों में एक दिसंबर को प्रति किलोलीटर 5,133.75 रुपये या 5.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। इससे पहले एक नवंबर को करीब एक प्रतिशत तथा एक अक्टूबर को 3.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। बृहस्पतिवार को घोषित कटौती से एक अक्टूबर से हुई मूल्य वृद्धि के दो-तिहाई से अधिक हिस्से की भरपाई हो गई है। इस नवीनतम कटौती से विमानन कंपनियों पर दबाव कम होने की उम्मीद है जिनके परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है। मूल्य परिवर्तन के प्रभाव पर विमानन कंपनियों ने तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है। मुंबई में एटीएफ की कीमत संशोधित होकर 86,352.19 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई जबकि चेन्नई और कोलकाता में कीमतें क्रमशः 95,770 रुपये और 95,378.02 रुपये प्रति किलोलीटर पर पहुंच गई। स्थानीय करों के कारण शहरों में ईंधन की कीमतें अलग-अलग होती हैं। इसके साथ ही दिल्ली में होटल व रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भारी बढ़ोतरी करते हुए 111 रुपये की वृद्धि की गई है जिससे इसकी कीमत बढ़कर 1,691.50 रुपये हो गई है। दो बार मासिक कटौती के बाद अब कीमतों में यह वृद्धि हुई है। 19 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत में आखिरी कटौती एक दिसंबर को 15.50 रुपये प्रति सिलेंडर की गई थी। इससे पहले प्रति सिलेंडर कीमत में पांच रुपये की कटौती की गई थी। व्यावसायिक एलपीजी की कीमतें अब पिछले साल जून के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर हैं। घरेलू रसोई में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाली एलपीजी की कीमतें अप्रैल 2025 में 50 रुपये की बढ़ोतरी के बाद 853 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर पर अपरिवर्तित रहीं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम अंतरराष्ट्रीय मानकों और विनिमय दर के आधार पर हर महीने की पहली तारीख को एटीएफ और एलपीजी की कीमतों में संशोधन करते हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले साल मार्च में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी। तब से कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में फिलहाल पेट्रोल की कीमत 94.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 87.62 रुपये प्रति लीटर है।
- मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कहा कि बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) अनुपात में आगे भी सुधार जारी रहने की संभावना है और मार्च 2027 तक यह घटकर 1.9 प्रतिशत रह सकता है। यह अनुमान सामान्य परिस्थितियों के आधार पर लगाया गया है। रिजर्व बैंक ने अपनी छमाही वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में बताया कि सितंबर 2025 तक सकल एनपीए अनुपात 2.1 प्रतिशत पर आ गया था, जो कई दशकों का निचला स्तर है। रिपोर्ट के अनुसार, 46 बैंकों का संयुक्त सकल एनपीए अनुपात सितंबर 2025 के 2.1 प्रतिशत से घटकर मार्च 2027 में 1.9 प्रतिशत हो सकता है। हालांकि, यदि आर्थिक स्थिति प्रतिकूल रहती है, तो यह अनुपात 3.2 प्रतिशत से 4.2 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। पूंजी की स्थिति पर रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों में पूंजी जोखिम-भारित परिसंपत्तियों का अनुपात (सीआरएआर) के पास नुकसान सहने के लिए पर्याप्त पूंजी मौजूद है। सितंबर 2025 तक सार्वजनिक क्षेत्र बैंकों में यह 16 प्रतिशत और निजी बैंकों में 18.1 प्रतिशत है। इससे बैंक आर्थिक झटकों का सामना कर सकते हैं। रिजर्व बैंक के अनुसार, यदि आर्थिक हालात बहुत खराब हो जाते हैं, तो भी अधिकांश बैंक टिके रह सकते हैं। हालांकि, ऐसे हालात में कुछ बैंकों की पूंजी कम हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सामान्य परिस्थितियों के तहत, 46 प्रमुख अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) का कुल सीआरएआर सितंबर 2025 में 17.1 प्रतिशत से घटकर मार्च 2027 तक 16.8 प्रतिशत हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वृद्धि में नरमी और वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए प्रतिकूल परिदृश्यों के तहत यह घटकर क्रमशः 14.5 प्रतिशत और 14.1 प्रतिशत तक हो सकता है। इसमें यह भी कहा गया है, ‘‘दबाव परीक्षण से पता चला है कि निजी बैंकों और विदेशी बैंकों की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की पूंजी में अपेक्षाकृत अधिक कमी आई है।" रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि गंभीर संकट की स्थिति में, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की कुल संपत्ति में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले छह बैंक सीआरएआर के मामले में न्यूनतम स्तर से नीचे जा सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का कुछ बड़े कर्जदारों पर निर्भर रहना कम हुआ है, जो एक सकारात्मक संकेत है। कुल कर्ज में बड़े कर्जदारों की हिस्सेदारी लगभग 44 प्रतिशत बनी हुई है, लेकिन खराब कर्ज में उनकी हिस्सेदारी घटकर 33.8 प्रतिशत रह गई है। कमाई के मामले में रिपोर्ट बताती है कि बैंकों की ब्याज से होने वाली आय की बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी पड़ी है। सितंबर 2025 में यह वृद्धि घटकर 2.3 प्रतिशत रह गई। इसकी एक वजह ब्याज दरों में कटौती है।
- नयी दिल्ली. महाराष्ट्र में उत्पादन में भारी बढ़ोतरी के कारण, चालू सत्र 2025-26 के पहले तीन महीनों में भारत का चीनी उत्पादन 23.43 प्रतिशत बढ़कर एक करोड़ 18.3 लाख टन हो गया। सहकारिता निकाय एनएफसीएसएफ ने बुधवार को यह कहा। पिछले साल इसी समय, चीनी उत्पादन 95.6 लाख टन था, जबकि पूरे 2024-25 सत्र (अक्टूबर-सितंबर) में कुल उत्पादन दो करोड़ 618 लाख टन रहा। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) ने एक बयान में कहा कि 31 दिसंबर तक, लगभग 499 मिलों ने 13.4 करोड़ टन गन्ने की पेराई की, जिससे 8.83 प्रतिशत की औसत चीनी प्राप्ति दर पर 1.18 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ। देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन 2025-26 सत्र के अक्टूबर-दिसंबर के दौरान बढ़कर 35.6 लाख टन हो गया, जो पिछले साल इसी समय में 32.6 लाख टन था। देश के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य, महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 29.9 लाख टन से 63 प्रतिशत बढ़कर 48.7 लाख टन हो गया, जबकि कर्नाटक में उत्पादन इसी समय में 20.5 लाख टन से बढ़कर 22.1 लाख टन हो गया। इस दौरान गुजरात में चीनी का उत्पादन बढ़कर 2,85,000 टन, बिहार में 1,95,000 टन और उत्तराखंड में 1,30,000 टन हो गया। एनएफसीएसएफ ने 2025-26 सत्र के लिए 3.15 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया है, जिसमें एथनॉल के लिए 35 लाख टन का स्थानांतरण शामिल नहीं है।
- नयी दिल्ली. सरकार ने एक जनवरी से रेफ्रिजरेटर, टीवी, एलपीजी गैस चूल्हा एवं कूलिंग टॉवर जैसे कई उपकरणों पर ऊर्जा दक्षता वाली स्टार रेटिंग को अनिवार्य कर दिया है। बिजली मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) की गजट अधिसूचना के मुताबिक, इस नए नियम का विस्तार डीप फ्रीजर, वितरण ट्रांसफॉर्मर और ग्रिड से जुड़े सोलर इनवर्टर पर भी होगा। उल्लेखनीय है कि बीईई का स्टार रेटिंग ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है। इसके तहत उपकरणों पर एक से पांच स्टार की रेटिंग दी जाती है जो बताता है कि संबंधित उपकरण कितनी बिजली खपत करेगा। पहले फ्रॉस्ट-फ्री एवं डायरेक्ट कूल रेफ्रजरेटर, डीप रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर (कैसेट, फ्लोर स्टैंडिंग टावर, सीलिंग, कॉर्नर एसी), रंगीन टीवी और अल्ट्रा एचडी टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर स्टार रेटिंग को दर्शाना स्वैच्छिक था। एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि स्टार-रेटिंग वाले उपकरणों की सूची समय-समय पर अद्यतन की जाती है। जुलाई 2025 में इन उपकरणों के लिए मसौदा नियम जनता से सुझाव लेने के लिए जारी किए गए थे और नए बदलाव इन्हीं सुझावों पर आधारित हैं। पहले भी रूम एयर कंडीशनर, इलेक्ट्रिक सीलिंग फैन, इलेक्ट्रिक वॉटर हीटर, वाशिंग मशीन, ट्यूबलर फ्लोरसेंट लैंप और सेल्फ-बैलास्टेड एलईडी लैंप पर स्टार-रेटिंग अनिवार्य था। अधिकारी ने बताया कि अब इन उपकरणों के लिए नियम पहले से अधिक ऊर्जा दक्षता सुनिश्चित करने के लिए अद्यतन किए गए हैं।
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नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला ने कहा है कि 2026 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए एक टर्निंग प्वाइंट साबित होगा, जब इसका फोकस केवल चर्चा और प्रयोगों से हटकर वास्तविक जीवन में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की ओर बढ़ेगा।
एक ब्लॉग पोस्ट में नडेला ने कहा कि AI उद्योग अब आकर्षक डेमो और दिखावे से आगे बढ़कर यह समझने की दिशा में है कि यह तकनीक असल में कहां और कैसे लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। उन्होंने माना कि AI की क्षमता तेजी से बढ़ी है, लेकिन उसका व्यावहारिक इस्तेमाल उसी रफ्तार से नहीं बढ़ पाया है।नडेला ने इस स्थिति को “मॉडल ओवरहैंग” बताया, यानी AI मॉडल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी, कारोबार और समाज में जितना लागू हो पा रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा तेज़ी से विकसित हो चुके हैं। उन्होंने लिखा कि हम अभी AI की लंबी यात्रा की शुरुआती अवस्था में हैं और इसके भविष्य को लेकर कई सवाल अभी भी खुले हैं।उन्होंने कहा कि आज AI की कई क्षमताएं अभी तक बड़े स्तर पर उत्पादकता, फैसले लेने की प्रक्रिया और मानव जीवन को बेहतर बनाने में पूरी तरह तब्दील नहीं हो पाई हैं। निजी कंप्यूटर के शुरुआती दौर का जिक्र करते हुए नडेला ने स्टीव जॉब्स के उस विचार को याद किया, जिसमें कंप्यूटर को “दिमाग की साइकिल” कहा गया था। उनका कहना है कि AI के युग में इस सोच को आगे बढ़ाने की जरूरत है।नडेला ने स्पष्ट किया कि AI को इंसानी सोच की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उसे मजबूत करने के लिए तैयार किया जाना चाहिए, ताकि यह लोगों को अपने लक्ष्य ज्यादा बेहतर तरीके से हासिल करने में मदद कर सके। उनके अनुसार, AI की असली ताकत इस बात में नहीं है कि मॉडल कितना शक्तिशाली है, बल्कि इस बात में है कि लोग उसका इस्तेमाल कैसे करते हैं।उन्होंने कहा कि AI से असली बदलाव तभी आएगा जब उद्योग केवल मॉडल बनाने से आगे बढ़कर पूरे सिस्टम विकसित करेगा, जिनमें सही सॉफ्टवेयर, काम करने की प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय शामिल हों। नडेला ने यह भी माना कि AI तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन मौजूदा सिस्टम में अभी भी कई सीमाएं और चुनौतियां हैं, जिन्हें सावधानी से संभालने की जरूरत है। - नयी दिल्ली. सरकार ने हर वित्त वर्ष में 50,000 टन तक जैविक चीनी के निर्यात की अनुमति दी है। एक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। यह निर्यात एपीडा (कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात संवर्धन प्राधिकार) के नियमों पर निर्भर है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा, ‘‘जैविक चीनी के निर्यात... की अनुमति है, जो एपीडा द्वारा अलग से तय किए गए तरीकों के हिसाब से हर वित्त वर्ष में 50,000 टन की कुल मात्रा के तहत है।'' जैविक चीनी बिना कीटनाशक और उर्वरकों के उगाए गए गन्ने से बनती है। यह जैविक खेती और प्रसंस्करण मानकों का भी पालन करती है।
- जोहानिसबर्ग. इस साल दक्षिण अफ्रीका में बिकने वाली आधी कारें किसी-न-किसी रूप में भारत से संबंधित हैं। ये कारें या तो महिंद्रा एवं टाटा जैसी भारतीय कंपनियों द्वारा विनिर्मित हैं या फिर इन कारों के कलपुर्जे भारत में बने हुए हैं। बाजार सूचना फर्म लाइटस्टोन की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, बिक्री आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण अफ्रीका में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने, खासकर अपनी ‘पिकअप' शृंखला के जरिये अग्रणी भूमिका निभाई है। लाइटस्टोन ने कहा कि वर्ष 2024 में दक्षिण अफ्रीका में बिकने वाले जापानी कार कंपनियों के 84 प्रतिशत हल्के वाहन भारत से आयात किए गए थे, जबकि केवल 10 प्रतिशत वाहन ही वास्तविक रूप से जापान में विनिर्मित थे। आमतौर पर चीनी ब्रांडों की बढ़ती मौजूदगी को स्थानीय वाहन निर्माताओं के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता है, लेकिन इन आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण अफ्रीका में आयातित अधिकांश कारों का वास्तविक स्रोत भारत है। रिपोर्ट कहती है कि दक्षिण अफ्रीका में बिकने वाले कुल वाहनों में से 36 प्रतिशत वाहन भारत से सीधे या जापानी और कोरियाई स्थापित ब्रांडों के जरिए परोक्ष रूप से आयात किए गए थे। यह हिस्सेदारी स्थानीय स्तर पर उत्पादित वाहनों के 37 प्रतिशत योगदान से थोड़ी ही कम है। लाइटस्टोन के आंकड़ों का हवाला देते हुए ‘इंडिपेंडेंट ऑनलाइन' वेबसाइट ने कहा है कि यदि पिकअप और हल्के वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री को अलग कर दिया जाए, तो 2025 की पहली छमाही में दक्षिण अफ्रीकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी लगभग आधी हो गई। लाइटस्टोन के मुताबिक, वर्ष 2025 के पहले पांच महीनों में कुल यात्री वाहन बिक्री में से 49 प्रतिशत वाहन भारत से आयात किए गए थे। इनमें से अधिकांश वाहन भारत में मारुति सुजुकी के परिचालन से आते हैं। लाइटस्टोन के वाहन विश्लेषक एंड्रयू हिबर्ट ने कहा, “भारत से आने वाले वाहनों की बिक्री में वृद्धि का श्रेय इस तथ्य को दिया जा सकता है कि बड़ी संख्या में वाहन विनिर्माता अब भारत में उत्पादन कर रहे हैं, जहां श्रम और कुल विनिर्माण लागत अपेक्षाकृत कम है।” विश्लेषकों ने कहा कि इस रुझान से खरीदारों को कीमतों में राहत मिल रही है, लेकिन यह स्थानीय वाहन उद्योग के लिए चिंता का विषय है।
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मुंबई. रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची महंगाई के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने 2025 में छह मौद्रिक नीति समीक्षाओं में चार में अपनी प्रमुख नीतिगत दरों में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसे अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘दुर्लभ रूप से संतुलित आर्थिक दौर' करार दिया। मल्होत्रा ने फरवरी में अपने पहले नीति बयान से ही वृद्धि को समर्थन देने के लिए दरों में कटौती की शुरुआत की थी। इसके बाद जून में भी उन्होंने 0.50 प्रतिशत की बड़ी कटौती की, क्योंकि कम महंगाई से नीति में ढील देने की गुंजाइश बनी। नौकरशाह से केंद्रीय बैंक के गवर्नर बने मल्होत्रा ने पद संभालने के एक वर्ष पूरे होने पर मौजूदा स्थिति को भारत के लिए ‘दुर्लभ रूप से संतुलित आर्थिक दौर' करार दिया, जिसमें अमेरिका के शुल्क और भू-राजनीतिक बदलाव जैसे प्रतिकूल कारकों के बावजूद वृद्धि दर आठ प्रतिशत से ऊपर रही और महंगाई एक प्रतिशत से नीचे रही। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगे चलकर वृद्धि की रफ्तार कुछ नरम पड़ेगी और महंगाई बढ़कर आरबीआई के चार प्रतिशत के लक्ष्य के करीब पहुंचेगी। चालू कीमतों पर जीडीपी वृद्धि कम रहने को लेकर चिंताओं के बीच मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के कदम वास्तविक जीडीपी के आधार पर तय होते हैं, जो महंगाई घटाने के बाद सामने आती है। वास्तविक महंगाई के आंकड़े आरबीआई के अनुमानों से काफी कम रहे, जिससे केंद्रीय बैंक की पूर्वानुमान क्षमता को लेकर कुछ सवाल उठे। इस पर डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि आकलन में किसी तरह का प्रणालीगत पक्षपात नहीं है। दर कटौती और उधारी लागत में गिरावट की स्पष्ट अपेक्षाओं के चलते आरबीआई के कदम से बैंकों को झटका लगा। शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) में कमी और मुख्य आय में गिरावट से बैंक प्रभावित हुए। हालांकि, अर्थव्यवस्था में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करने और खास तौर पर नियामकीय ढील जैसे कदमों ने असर को कुछ हद तक कम किया। पूरे साल नियामकीय ढील के लिए कई उपाए किए गए। अक्टूबर की मौद्रिक नीति घोषणा इसका चरम रही, जिसमें 22 नियामकीय उपाय शामिल थे, जिनमें कुछ उपाए आमतौर पर सतर्क माने जाने वाले आरबीआई जैसे संस्थान के लिए असामान्य थीं। इनमें बैंकों को भारतीय कंपनियों द्वारा वैश्विक अधिग्रहणों के लिए वित्तपोषण की अनुमति देना शामिल है। मल्होत्रा का जोर ग्राहकों के प्रति संवेदनशीलता और शिकायतों का तेजी से समाधान करने पर रहा है, जो उनके कई भाषणों और टिप्पणियों में झलकता है। आरबीआई ने 2025 में अपने 90 वर्ष पूरे किए और इस साल उसके लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रुपया का डॉलर के मुकाबले 90 के स्तर से नीचे फिसलना रहा। केंद्रीय बैंक का कहना है कि उसका बाजार में हस्तक्षेप किसी स्तर को बचाने के लिए नहीं, बल्कि उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए होता है। इसके बावजूद घरेलू मुद्रा के कमजोर होने के बीच आरबीआई ने वर्ष के पहले नौ महीनों में 38 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार बेचा। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये का प्रबंधन आगे भी केंद्रीय बैंक के लिए चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।
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नयी दिल्ली. रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने रिलायंस एआई घोषणा पत्र का मसौदा पेश किया। इसमें समूह को कृत्रिम मेधा आधारित उन्नत प्रौद्योगिकी उद्यम बनाने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई गई है। साथ ही छह लाख से अधिक कर्मचारियों की उत्पादकता में दस गुना सुधार करने तथा भारत की अर्थव्यवस्था पर 10 गुना प्रभाव डालने का लक्ष्य रखा गया है। कृत्रिम मेधा (एआई) को मानव इतिहास का सबसे प्रभावशाली तकनीकी विकास बताते हुए अंबानी ने कहा कि तेल से लेकर खुदरा और दूरसंचार तक फैला यह समूह भारत की एआई क्रांति का नेतृत्व करना चाहता है, ठीक वैसे ही जैसे उसने देश के डिजिटल रूपांतरण का नेतृत्व किया था। समूह का घोषित संकल्प 'हर भारतीय के लिए आसानी से एआई' उपलब्ध कराना है, जिसमें सुरक्षा, भरोसा और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए सभी व्यवसायों में एआई को गहराई से समाहित किया जाएगा। उन्होंने कहा, ''रिलायंस में हमने खुद को कृत्रिम मेधा आधारित उन्नत प्रौद्योगिकी कंपनी में बदलने की राह पर कदम बढ़ाया है। इस संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए हमने रिलायंस एआई घोषण पत्र का मसौदा तैयार किया है। यह मसौदा कार्ययोजना का मार्गदर्शक है।'' घोषणा पत्र का भाग-एक आंतरिक रूपांतरण पर केंद्रित है, जिसमें एआई को किसी तकनीकी परियोजना के बजाय काम करने के नए तरीके के रूप में देखा गया है। रिलायंस परिणामों और 'एंड-टू-एंड' कार्य प्रवाह के इर्द-गिर्द संचालन को पुनर्गठित करने की योजना बना रही है, जिसे साझा डिजिटल मंच और मजबूत प्रशासन का समर्थन मिलेगा। एआई और एजेंटिक ऑटोमेशन का उपयोग दोहराए जाने वाले काम को खत्म करने, निर्णय प्रक्रिया को बेहतर बनाने तथा गुणवत्ता और गति बढ़ाने में किया जाएगा। इसके साथ ही स्पष्ट मानवीय जवाबदेही बनी रहेगी। भाग-दो में इस नजरिये को भारत के व्यापक एआई रूपांतरण तक आगे बढ़ाया गया है। अंबानी ने कहा, ''मेरा मानना है कि जैसे हम एआई के जरिए अपने कार्यप्रवाह की गति, दक्षता, गुणवत्ता और परिणामों में 10 गुना सुधार ला सकते हैं, वैसे ही अपने व्यवसायों और परोपकारी पहलों के माध्यम से भारत पर भी 10 गुना प्रभाव डाल सकते हैं।'' उन्होंने कर्मचारियों से रिलायंस के विभिन्न व्यवसायों - जियो के 50 करोड़ से अधिक उपभोक्ता आधार और देश के सबसे बड़े खुदरा नेटवर्क से लेकर ऊर्जा, सामग्री, जीवन विज्ञान, वित्तीय सेवाएं, मीडिया और परोपकार - में एआई के उपयोग पर सुझाव देने को कहा। उन्होंने स्वदेशी एआई हार्डवेयर, रोबोटिक्स और क्रॉस-डोमेन अनुप्रयोगों में अवसरों की ओर इशारा किया, ताकि दक्षता, स्थिरता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके। दस्तावेज को नारे के बजाय कार्य-मार्गदर्शक बताते हुए अंबानी ने सभी कर्मचारियों से 10 से 26 जनवरी के बीच सुझाव देने को कहा। उन्होंने कहा कि यह घोषणा पत्र 'नया रिलायंस और नया भारत' बनाने की साझा प्रतिबद्धता बनेगा।
- मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को कहा कि वह वित्तीय उत्पादों एवं सेवाओं की गलत बिक्री रोकने के लिए वित्तीय संस्थानों पर लागू होने वाले विज्ञापन, विपणन और बिक्री से संबंधित व्यापक नियम जारी करेगा। केंद्रीय बैंक की तरफ से जारी 'भारत में बैंकिंग के रुझान और प्रगति 2024-25 रिपोर्ट' में यह बात कही गयी है। रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई ने कहा कि गलत वित्तीय उत्पादों की बिक्री के मामले ग्राहकों और पूरे वित्तीय क्षेत्र दोनों के लिए गंभीर परिणाम होते हैं। आरबीआई ने यह भी कहा कि वह ऋण की वसूली करने वाले एजेंटों और वसूली से जुड़े संचालन संबंधी मौजूदा निर्देशों की समीक्षा कर रहा है और उन्हें एकीकृत रूप में जारी करने का प्रस्ताव है। डिजिटल एवं साइबर धोखाधड़ी के मामलों से निपटने के लिए रिजर्व बैंक संबंधित मंत्रालयों और अन्य हितधारकों के साथ काम कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, विनियमित संस्थाओं को मजबूत आंतरिक नियंत्रण, सभी स्तरों पर शिकायत निवारण अधिकारी तैनात होने और डिजिटल वित्तीय साक्षरता बढ़ाने की दिशा में काम करने की जरूरत है। रिजर्व बैंक ने हाल में दो प्रमुख डिजिटल पहल शुरू की हैं। संभावित फर्जी खातों की पहचान और प्रणालीगत सीख के लिए म्यूलहंटर.एआई को 23 बैंकों में लागू किया गया है। इसके अलावा एआई-आधारित मंच 'डिजिटल भुगतान आसूचना मंच (डीपीआईपी)' भी काम कर रहा है जो जोखिमपूर्ण लेनदेन को चिन्हित कर फर्जीवाड़े की रोकथाम में मदद करता है। आरबीआई ने यह भी कहा कि अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहक की सीमित जिम्मेदारी संबंधी 2017 के निर्देशों की समीक्षा की जा रही है। यह कदम नए भुगतान चैनलों, डिजिटल लेनदेन की बढ़ती मात्रा और बदलते धोखाधड़ी प्रतिरूप को ध्यान में रखते हुए ग्राहक सुरक्षा को मजबूत करेगा। रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़े भी साझा किए गए हैं। इसके मुताबिक, रिपोर्ट किए गए धोखाधड़ी मामलों की कुल संख्या घट गई, लेकिन इसमें शामिल राशि बढ़ गई। आरबीआई ने कहा, "इसका मुख्य कारण 122 मामलों की दोबारा जांच होनी थी जिनमें कुल 18,336 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी शामिल थी। उच्चतम न्यायालय के मार्च 2023 के निर्णय का अनुपालन सुनिश्चित किया गया।" विवरण के मुताबिक, कार्ड और इंटरनेट धोखाधड़ी की घटनाएं कुल मामलों का 66.8 प्रतिशत रहीं, जबकि राशि के हिसाब से ऋण से जुड़ी धोखाधड़ी 33.1 प्रतिशत रही। निजी क्षेत्र के बैंकों की कुल मामलों में 59.3 प्रतिशत हिस्सेदारी रही जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने धोखाधड़ी राशि में 70.7 प्रतिशत योगदान दिया। आरबीआई ने कहा कि इसकी नियामकीय एवं पर्यवेक्षण नीतियां आगे भी साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम, ग्राहक सुरक्षा, जलवायु जोखिम जागरूकता और वित्तीय स्थिरता पर केंद्रित रहेंगी।
- नई दिल्ली। काफी समय बाद भारतीय रेलवे से जुड़े शेयरों में एक बार फिर मजबूती देखने को मिली है। पिछले पांच कारोबारी सत्रों के दौरान रेलवे सेक्टर के शेयरों में तेज बढ़त दर्ज की गई, जिससे इस सेक्टर से जुड़ी आगामी केंद्रीय बजट से पहले निवेशक रेलवे सेक्टर में दोबारा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसके साथ ही कंपनियों की कमाई को लेकर संकेत भी बेहतर नजर आ रहे हैं, जिससे शेयरों में खरीदारी बढ़ी है। गौरतलब है कि वर्ष 2025 के दौरान रेलवे शेयर लंबे समय तक दबाव में रहे। जुलाई 2024 में सेक्टर के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद शेयरों में गिरावट आई थी। उस समय ऊंचे वैल्यूएशन और सरकारी समर्थन को लेकर कमजोर उम्मीदों के चलते कई शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी।हालिया तेजी से यह संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौट रहा है। इसके पीछे यात्री किराए में बढ़ोतरी, बजट से जुड़ी सकारात्मक उम्मीदें और कुछ कंपनियों से संबंधित बेहतर खबरें प्रमुख वजह मानी जा रही हैं। इस तेजी में ज्यूपिटर वैगन्स के शेयर सबसे आगे रहे, जिनमें महज पांच कारोबारी सत्रों में करीब 37% की बढ़त दर्ज की गई। रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के शेयरों में लगभग 27% और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (आईआरएफसी) के शेयरों में 20% से अधिक की तेजी देखने को मिली।इसके अलावा इरकॉन इंटरनेशनल, टीटागढ़ रेल सिस्टम्स, रेलटेल कॉर्पोरेशन, टेक्समैको रेल एंड इंजीनियरिंग, राइट्स और बीईएमएल जैसी रेलवे से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, इस उछाल के बावजूद अधिकांश रेलवे स्टॉक अपने पुराने उच्च स्तर से अब भी नीचे बने हुए हैं।रेलवे शेयरों में आई इस तेजी के पीछे एक अहम कारण भारतीय रेलवे द्वारा 26 दिसंबर से यात्री किराए में की गई बढ़ोतरी भी है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान यह दूसरी बार है, जब यात्री किराए में संशोधन किया गया है। लंबी दूरी की यात्रा में सामान्य, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के किराए में प्रति किलोमीटर 1 से 2 पैसे की वृद्धि की गई है, जबकि लोकल और उपनगरीय ट्रेनों के किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया है।इस किराया वृद्धि से भारतीय रेलवे को चालू वित्त वर्ष में करीब 600 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आमदनी होने की उम्मीद है। वर्तमान में यात्री ट्रेन सेवाएं घाटे में चल रही हैं, क्योंकि किराया लागत से करीब 45% कम है। इस घाटे की भरपाई माल ढुलाई से होने वाली आय से की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि किराए में यह बदलाव रेलवे की आय बढ़ाने, घाटे को कम करने और वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में सहायक साबित होगा।
- नई दिल्ली। भारत ने 2025 में (नवंबर तक) अब तक सबसे अधिक 44.51 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ी है, जो कि पिछले साल की समान अवधि में जोड़ी गई 24.72 गीगावाट की क्षमता से काफी अधिक है। यह जानकारी केंद्र सरकार की ओर से सोमवार को दी गई।केंद्र सरकार ने कहा कि देश में स्थापित कुल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता नवंबर 2025 में 253.96 गीगावाट थी, जो कि पिछले साल नवंबर 2024 में स्थापित 205.52 गीगावाट क्षमता के मुकाबले करीब 23 प्रतिशत ज्यादा है। देश ने समीक्षा अवधि में 34.98 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ी है। यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि में 20.85 गीगावाट था।नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि देश में जनवरी 2025 में स्थापित सोलर एनर्जी क्षमता के आंकड़े ने 100 गीगावाट का आंकड़ा पार किया था। नवंबर 2025 तक स्थापित सोलर एनर्जी क्षमता बढ़कर 132.85 गीगावाट हो गई है। इसमें पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। नवंबर 2024 में देश में स्थापित सोलर एनर्जी क्षमता 94.17 गीगावाट थी।विंड एनर्जी क्षमता में भी काफी बढ़ोतरी हुई है, पिछले साल इसी अवधि के 3.2 गीगावाट की तुलना में 5.82 गीगावाट की क्षमता जोड़ी गई है। विंड एनर्जी की स्थापित क्षमता मार्च 2025 में 50 गीगावाट का आंकड़ा पार कर गई थी। नवंबर 2025 में विंड एनर्जी की स्थापित क्षमता 53.99 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो नवंबर 2024 के 47.96 गीगावाट की तुलना में 12.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी है।सीओपी-26 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुसार, सरकार 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता तक पहुंचने के लिए काम कर रही है। भारत में जून 2025 में गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता की हिस्सेदारी कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता में 50 प्रतिशत हो गई थी, जो पेरिस समझौते के तहत अपने नेशनल डिटरमाइंड कंट्रीब्यूशन (एनडीसी) के तहत तय 2030 के लक्ष्य से पांच साल पहले है।
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नयी दिल्ली. खनन और विनिर्माण क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन से नवंबर महीने में देश के औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि दर दो साल के उच्च स्तर 6.7 प्रतिशत पर पहुंच गयी। यह जानकारी सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में दी गई। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के मुताबिक, औद्योगिक उत्पादन को मापने वाला औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) नवंबर, 2024 में पांच प्रतिशत बढ़ा था। इससे पहले औद्योगिक उत्पादन का उच्च स्तर नवंबर, 2023 में 11.9 प्रतिशत दर्ज किया गया था।
त्योहारों से पहले देश में मांग और खपत को बढ़ावा देने के लिए कई उपभोक्ता वस्तुओं पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में 22 सितंबर 2025 से कटौती की गई थी। इससे जीएसटी दरों में कमी का लाभ उठाने के लिए विनिर्माण ऑर्डरों में तेजी आई। इसके साथ एनएसओ ने अक्टूबर 2025 के लिए औद्योगिक उत्पादन वृद्धि के आंकड़े को भी संशोधित किया है। अक्टूबर के लिए आईआईपी वृद्धि को बढ़ाकर 0.5 प्रतिशत कर दिया गया है जबकि पिछले महीने जारी अस्थायी अनुमान 0.4 प्रतिशत का था। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2025 में विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन आठ प्रतिशत बढ़ा, जो एक साल पहले इसी महीने में 5.5 प्रतिशत था। खनन क्षेत्र का उत्पादन भी नवंबर में 5.4 प्रतिशत बढ़ा जबकि नवंबर 2024 में यह वृद्धि 1.9 प्रतिशत रही थी। हालांकि, बिजली उत्पादन का प्रदर्शन पिछले महीने कमजोर रहा। नवंबर में बिजली उत्पादन में 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में इसमें 4.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। नवंबर महीने के आईआईपी आंकड़ों में सुधार से संकेत मिलता है कि औद्योगिक गतिविधियों में खासकर विनिर्माण और खनन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में रफ्तार की वापसी हो रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल-नवंबर के दौरान देश का औद्योगिक उत्पादन 3.3 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा 4.1 प्रतिशत था। विनिर्माण क्षेत्र के तहत 23 में 20 उद्योग समूहों ने नवंबर 2025 में सालाना आधार पर सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ''अमेरिकी शुल्क और जुर्माने का असर कुछ विनिर्माण खंडों में दिखाई दे सकता है, जिससे जीएसटी दरों में बदलाव के सकारात्मक प्रभाव का असर कम हो सकता है।'' उन्होंने कहा कि दो महीने के बाद दिसंबर 2025 में बिजली की मांग बढ़ी है, जिससे उस महीने बिजली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और यह आईआईपी वृद्धि के लिए सकारात्मक संकेत है। नायर ने आगे कहा, ''हमें उम्मीद है कि दिसंबर 2025 में आईआईपी वृद्धि घटकर 3.5 से 5.0 प्रतिशत के दायरे में आ सकती है, क्योंकि तुलनात्मक आधार प्रभाव सामान्य होगा। -
नयी दिल्ली/ जिंदल स्टील ने रायगढ़ स्थित अपने संयंत्र में संरचनात्मक इस्पात की वार्षिक उत्पादन क्षमता को दोगुना करके 24 लाख टन तक पहुंचाने की विस्तार योजना की सोमवार को घोषणा की। नवीन जिंदल समूह की कंपनी ने बयान में रायगढ़ स्थित अपने संयंत्र में संरचनात्मक इस्पात निर्माण क्षमताओं के महत्वपूर्ण विस्तार की घोषणा की। इसके तहत कंपनी 2028 के मध्य तक अपनी मौजूदा संरचनात्मक इस्पात उत्पादन क्षमता को 12 लाख टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) से बढ़ाकर 24 लाख टन प्रति वर्ष कर देगी।'' कंपनी ने कहा कि इस विस्तार से भारत में भारी एवं बेहद-भारी संरचनात्मक इस्पात खंडों की उपलब्धता में काफी वृद्धि होगी और इस क्षेत्र में जिंदल स्टील के नेतृत्व को मजबूती मिलेगी। बयान में हालांकि कंपनी ने विस्तार योजना के मूल्य का खुलासा नहीं किया।
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नयी दिल्ली। बीते सप्ताह देश के तेल-तिलहन बाजारों में ऊंचे भाव पर लिवाली प्रभावित रहने से सरसों तेल-तिलहन के दाम में गिरावट देखी गई जबकि साधारण मांग के कारण सोयाबीन तेल-तिलहन, सटोरियों द्वारा ऊंचा दाम बोले जाने से कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल में सुधार आया। नमकीन बनाने वाली कंपनियों की फुल्की फुल्की मांग के कारण बिनौला तेल के दाम में भी मामूली सुधार रहा। सुस्त कामकाज के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम अपरिवर्तित रहे। बाजार सूत्रों ने कहा कि सरकार की ओर से सरसों की बिकवाली की जा रही है जो एक उचित कदम है। क्योंकि सरसों का स्टॉक किसानों, सरकारी संस्थाओं और स्टॉकिस्टों के पास बचा है। आगामी फसल भी आने की तैयारी में है और इसकी खरीद करने के लिए पुराने स्टॉक को बाजार में निकालना जरूरी है। सरसों का हाजिर दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 7-8 प्रतिशत अधिक है। सरसों की नयी फसल कुछ समय में बाजार में आना शुरु हो जाएगी है। मात्रा भले ही कम हो पर इसका असर बाजार पर आता है। इन परिस्थितियों के बीच सरसों तेल-तिलहन के दाम समीक्षाधीन सप्ताह में गिरावट दर्शाते बंद हुए। सूत्रों ने कहा कि दूसरी ओर, सर्दियों के मौसम में स्थानीय स्तर पर सोयाबीन डी-आयल्ड केक (डीओसी) की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा सूरजमुखी (145 रुपये किलो) के मुकाबले सोयाबीन तेल (लगभग 124 रुपये किलो) सस्ता होने से सोयाबीन तेल की मांग भी है। ऐसे में बीते सप्ताह सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम में अपने विगत सप्ताहांत के मुकाबले सुधार आया। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताहांत के मुकाबले स्थानीय मांग होने से सोयाबीन तेल-तिलहन में सुधार है मगर हकीकत में एमएसपी से मुकाबले सोयाबीन का दाम कमजोर बना हुआ है। अपने एमएसपी वाले दाम पर सोयाबीन का बाजार ही नहीं है।
सूत्रों ने कहा कि यही हाल मूंगफली का है क्योंकि इसके एमएसपी के हिसाब से बाजार नहीं है और एमएसपी वाले दाम पर मूंगफली कभी खपेगा नहीं। इस परिस्थिति के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम पूर्व सप्ताहांत के स्तर पर ही स्थिर बने रहे। उन्होंने कहा कि आयातक एक ओर बैंकों में अपना ऋण साखपत्र (लेटर आफ क्रेडिट या एलसी) घुमाने के लिए लागत से कम दाम पर सोयाबीन डीगम तेल काफी समय से बेचना जारी रखे हैं वहीं दूसरी ओर वे अपना आयकर भी दाखिल कर फायदा दिखाते हैं। इस घाटे का सीधा असर यह होगा कि आगे जाकर आयात और घटेगा और इस गिरावट के असर से बाकी तेल-तिलहन भी दवाब में बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह अजीब विरोधाभास है कि जिस देश में खाद्यतेलों की लगभग 60 प्रतिशत की कमी हो, वहां आयातकों को लागत से नीचे दाम पर खाद्यतेल बेचना पड़े। सूत्रों ने कहा कि मलेशिया में सट्टेबाज विगत कुछ कारोबारी सत्रों में पाम-पामोलीन तेल के दाम ऊंचा लगा रहे हैं। वहां स्टॉक रखने की जगह नहीं है।भारत जैसे विशाल उपभोक्ता देश में जाड़े में पाम-पामोलीन की मांग भी घट जाती है लेकिन मलेशिया के कारोबारी फिर भी दाम ऊंचा लगाने में कसर नहीं छोड़ते। इस सट्टेबाजी के कारण पाम-पामोलीन के दाम में सुधार है। उन्होंने कहा कि नमकीन बनाने वाली कंपनियों की हल्की फुल्की मांग के कारण बीते सप्ताह बिनौलातेल के दाम में भी मामूली सुधार है। बीते सप्ताह सरसों दाना 75 रुपये की गिरावट के साथ 6,900-6,950 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। दादरी मंडी में बिकने वाला सरसों तेल 225 रुपये की गिरावट के साथ 14,250 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल का भाव क्रमश: 40-40 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 2,390-2,490 रुपये और 2,390-2,535 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ। समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और सोयाबीन लूज के थोक भाव क्रमश: 100-100 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 4,800-4,850 रुपये और 4,500-4,550 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए। इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 125 रुपये के सुधार के साथ 13,550 रुपये प्रति क्विंटल, इंदौर में सोयाबीन तेल 125 रुपये के सुधार के साथ 13,150 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल का दाम 135 रुपये के सुधार के साथ 10,325 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सुस्त कामकाज तथा एमएसपी से काफी नीचा हाजिर दाम रहने के बीच समीक्षाधीन सप्ताह में मूंगफली तेल-तिलहन की कीमतों में स्थिरता देखने को मिली। मूंगफली तिलहन 6,450-6,825 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 15,500 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,485-2,785 रुपये प्रति टिन के पूर्व सप्ताहांत के भाव पर स्थिर बने रहे। दूसरी ओर, समीक्षाधीन सप्ताह में सीपीओ तेल का दाम 175 रुपये के सुधार के साथ 11,375 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 100 रुपये के सुधार के साथ 13,100 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव 100 रुपये के सुधार के साथ 12,100 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। तेजी के आम रुख के बीच, समीक्षाधीन सप्ताह में बिनौला तेल के दाम भी 75 रुपये सुधार के साथ 12,275 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बंद हुए। - नयी दिल्ली। कॉरपोरेट प्रशासन और जवाबदेही में सुधार के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कोयला मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की सभी अनुषंगी कंपनियों को 2030 तक शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराए। सूत्रों ने यह जानकारी दी। इस कदम का मकसद सीआईएल में प्रशासन को सुव्यवस्थित करना, पारदर्शिता बढ़ाना और परिसंपत्ति मौद्रिकरण के जरिए मूल्य सृजन करना है। कोल इंडिया लिमिटेड देश के कुल घरेलू कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक का योगदान देती है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार कोल इंडिया की सभी अनुषंगी कंपनियों को 2030 तक सूचीबद्ध करने की योजना है। उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि कंपनी के कामकाज को मजबूत बनाने के लिए यह निर्देश सीधे पीएमओ की ओर से दिया गया है। कोल इंडिया अपनी आठ अनुषंगी कंपनियों के माध्यम से परिचालन करती है, जिनमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड को मार्च 2026 तक शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया जाना है, जिसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बीसीसीएल के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रोडशो भी पूरे हो चुके हैं। सूत्रों ने बताया कि भारत कोकिंग कोल लिमिटेड को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया पूरी गति से चल रही है और इसमें किसी प्रकार की रोक या देरी नहीं है।
- नयी दिल्ली । कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के साथ निवेशकों के सोना, चांदी में निवेश के लिए आकर्षित होने के बीच विशेषज्ञों का कहना है कि उपलब्ध विभिन्न निवेश विकल्पों में गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) एक बेहतर विकल्प है। इसका कारण कम राशि के साथ सोना, चांदी में निवेश, उसके रखरखाव को लेकर कोई झंझट नहीं और कम लेन-देन शुल्क के साथ उच्च तरलता यानी भुनाने की सुविधा है। उनका यह भी कहना है कि यदि आप भौतिक रूप से मूल्यवान धातु को महत्व देते हैं, निवेश के लिए सोने/चांदी के सिक्के/बिस्कुट बेहतर है। चूंकि आभूषण खरीदने में उसे बनाने के शुल्क का भुगतान करना होता है, वह बेहतर विकल्प नहीं है।उल्लेखनीय है कि इस साल अबतक सोने में 82 प्रतिशत जबकि चांदी में 175 प्रतिशत की तेजी आई है। मल्टीकमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में सोना एक जनवरी को 76,772 रुपये प्रति 10 ग्राम था जो 26 दिसंबर को 1,39,890 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। वहीं चांदी एक जनवरी को 87,300 रुपये प्रति किलो थी, जो 26 दिसंबर को बढ़कर 2,40,300 रुपये प्रति किलो पहुंच गयी है। निवेश के विकल्पों के बारे में मेहता इक्विटीज लि. के उपाध्यक्ष (जिंस) राहुल कलंत्री ने कहा, ‘‘मूल्यवान धातु में निवेश के लिए उपलब्ध विभिन्न विकल्पों में गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ बेहतर विकल्प है। इसका कारण यह सोना या चांदी को रखने की समस्या के बिना निवेश करने का एक आसान तरीका है। साथ ही यह अत्यधिक तरलता प्रदान करता है।'' हालांकि उन्होंने यह भी कहा, ‘‘जब सोना या चांदी में निवेश की बात करते हैं, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप इसे किस रूप में रखते हैं। यह मूल रूप से आपके ज्ञान और खरीद के सबसे सुविधाजनक साधनों पर निर्भर करता है। अंततः, प्रत्येक व्यक्ति की पसंद उसके व्यक्तिगत लक्ष्यों, उपयोग की आवश्यकताओं और निवेश में बने रहने की अवधि के आधार पर अलग-अलग होगी।''आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स लि. के निदेशक (जिंस और मुद्रा) नवीन माथुर ने कहा, ‘‘उपलब्ध विभिन्न निवेश विकल्पों में से, गोल्ड/सिल्वर ईटीएफ अब तक का सबसे अच्छा निवेश विकल्प है। इसका कारण निवेश के लिए उपलब्ध कम मूल्यवर्ग की इकाइयों, रखरखाव की कोई लागत न होने, अंतर्निहित ईटीएफ के माध्यम से शुद्धता की गारंटी, उच्च तरलता और कम लेनदेन लागत जैसे लाभ हैं।'' गोल्ड/ सिल्वर ईटीएफ निवेश फंड हैं जिनका शेयर बाजारों में शेयरों की तरह कारोबार होता है। इसमें भौतिक रूप से सोना या चांदी खरीदे बिना कीमती धातुओं में निवेश किया जा सकता है। वे भौतिक रूप से सर्राफा (सोना/चांदी) या संबंधित परिसंपत्तियों को रखते हैं और उनकी कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर नजर रखते हैं। इसमें म्यूचुअल फंड के जरिये भी निवेश किया जा सकता है। सोने में निवेश भौतिक रूप से मूल्यवान धातु खरीदकर, ईटीएफ, वायदा एवं विकल्प या फिर म्यूचुअल फंड के जरिये किया जा सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, प्रत्येक विकल्प के अपने फायदे और नुकसान हैं, इसलिए निवेशकों के लिए यह आकलन करना महत्वपूर्ण है कि कौन सा विकल्प उनके लक्ष्यों के अनुकूल है। भौतिक रूप से मूल्यवान धातु खरीदने के फायदे-नुकसान के बारे में पूछे जाने पर कलंत्री ने कहा, ‘‘यदि आप भौतिक रूप से मूल्यवान धातु को महत्व देते हैं, सोने और चांदी के सिक्के/बिस्कुट बेहतर हैं। ये प्रत्यक्ष स्वामित्व प्रदान करते हैं और मूल्य के एक मजबूत भंडार के रूप में कार्य करते हैं, लेकिन इसमें रखरखाव, बीमा लागत और कम तरलता यानी भुनाने की समस्या शामिल होती है।''उन्होंने कहा कि चूंकि आभूषण खरीदने में उसे बनाने के शुल्क का भुगतान करना होता है, वह बेहतर विकल्प नहीं है। वायदा एवं विकल्प कारोबार के जरिये निवेश के बारे में कलंत्री ने कहा, ‘‘ये उन अनुभवी निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं जो अल्पकालिक अवसरों की तलाश में हैं या जोखिम को कम करने के लिए ‘हेजिंग' करना चाहते हैं, लेकिन ये अधिक जोखिम भरे होते हैं।'' एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘डिजिटल सोना मुख्य रूप से सुविधाजनक होने, कम निवेश राशि, खरीदने और बेचने में आसानी और ऐप-आधारित निर्बाध पहुंच के कारण लोकप्रिय हो रहा है। यह आकर्षण विशेष रूप से युवा निवेशकों के बीच है, जो तकनीक को पसंद करते हैं और पारंपरिक भौतिक सोने की तुलना में डिजिटल संपत्तियों के साथ अधिक सहज हैं। इसमें निवेशक बहुत कम राशि से शुरुआत कर सकते हैं और उसके रखरखाव या शुद्धता को लेकर कोई परेशानी नहीं होती है।'' उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, डिजिटल सोना सेबी द्वारा विनियमित उत्पाद नहीं है। यह आमतौर पर निजी मंचों द्वारा पेश किया जाता है जहां सोना तृतीय-पक्ष ‘वॉल्ट' (तिजोरी) प्रबंधकों के पास रखा होता है, जिसमें जोखिम जुड़े होते हैं।'' कलंत्री ने कहा, ‘‘नियामकीय जोखिमों को देखते हुए, हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे केवल सेबी (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) द्वारा विनियमित उत्पादों के जरिये से ही सोना या चांदी में निवेश करें।'' विश्लेषकों का कहना है कि कुल मिलाकर, इन विकल्पों में विविधतापूर्ण दृष्टिकोण अपनाने से निवेशकों को सुरक्षा, तरलता और वृद्धि क्षमता के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।
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नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब बन गया है। साथ ही, देश के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में छह गुना की बढ़ोतरी हुई है। वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) जैसी स्कीमों के कारण देश का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात बीते 11 वर्षों में आठ गुना बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि बड़े स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग के लिए लाई गई पीएलआई स्कीम ने 13,475 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया है और इससे इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में 9.8 लाख करोड़ रुपए का उत्पादन हुआ है और मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ नौकरियों और निर्यात में बढ़त हुई है। वैष्णव ने बताया कि बीते पांच वर्षों में 1.3 लाख से ज्यादा नौकरियां इस सेक्टर में पैदा हुई हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात कैटेगरी है। उन्होंने कहा कि देश शुरू में तैयार प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रहा था, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम ने “मॉड्यूल, कंपोनेंट, सब-मॉड्यूल, कच्चे माल और उन्हें बनाने वाली मशीनों के लिए क्षमता बनाने” की तरफ बदलाव को सपोर्ट किया। पोस्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम में 249 आवेदन आए हैं, जो 1.15 लाख करोड़ रुपए के निवेश, 10.34 लाख करोड़ रुपए के उत्पादन और 1.42 लाख नौकरियां पैदा करने का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ी निवेश प्रतिबद्धता है, जो इंडस्ट्री के भरोसे को दिखाता है। वैष्णव ने सेमीकंडक्टर सेक्टर में हुई प्रगति के बारे में भी बताया, और कहा कि दस यूनिट्स को मंजूरी मिल गई है, जिनमें से तीन पहले से ही पायलट या शुरुआती प्रोडक्शन में हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत से फैब्स और एटीएमपी जल्द ही फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनियों को चिप्स सप्लाई करेंगे।केंद्रीय मंत्री ने कहा, “पिछले दशक में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से 25 लाख नौकरियां पैदा हुईं। यह जमीनी स्तर पर असली आर्थिक विकास है।” उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे हम सेमीकंडक्टर और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाएंगे, रोजगार के अवसर और तेजी से बढ़ेंगे। तैयार प्रोडक्ट्स से लेकर कंपोनेंट्स तक, प्रोडक्शन बढ़ रहा है। एक्सपोर्ट बढ़ रहा है। ग्लोबल कंपनियां भरोसेमंद हैं और भारतीय कंपनियां प्रतिस्पर्धी हैं। नौकरियां पैदा हो रही हैं। यह ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता की कहानी है।” - नई दिल्ली। भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 26 में 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसकी वजह इलेक्ट्रिसिटी की मांग बढ़ना और खनन एवं निर्माण गतिविधियों में इजाफा होना है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई। आईसीआरए की रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 26 की दूसरी छमाही में वृद्धि दर 7 प्रतिशत से कम रहने की उम्मीद है। इसकी वजह प्रतिकूल आधार प्रभाव और निर्यात में कमी होना है। वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में विकास दर 8 प्रतिशत से अधिक थी।रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि आरबीआई फरवरी 2026 की पॉलिसी रिव्यू में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और भविष्य के फैसले वित्त वर्ष 27 के यूनियन बजट और बदलती महंगाई और वृद्धि दर की गतिशीलता के आधार पर लिए जाएंगे।हालांकि, वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में अर्थिक गतिविधियां मजबूत रही हैं। इन्हें त्योहारी सीजन के दौरान ब्याज दरों में कटौती और कुछ सेक्टर्स में सीजनल तेजी का फायदा मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरी तिमाही में त्योहारी मांग और जीएसटी में कटौती का वस्तुओं और सेवाओं की खपत के साथ मैन्युफैक्चरिंग की वॉल्यूम पर सकारात्मक प्रभाव होगा। हालांकि, वित्त वर्ष 26 की दूसरी छमाही में निर्यात में गिरावट देखने को मिल सकती है, जब तक भारत-अमेरिका ट्रेड डील न हो।खुदरा महंगाई दर वित्त वर्ष 26 में कम होकर 2 प्रतिशत के करीब रहने का अनुमान है, जो कि वित्त वर्ष 25 में 4.6 प्रतिशत थी। खुदरा महंगाई दर नवंबर 2025 में बढ़कर 0.7 प्रतिशत हो गई है, जो कि अक्टूबर में 0.3 प्रतिशत थी। इसकी वजह फूड और बेवरेज में अपस्फीति कम होना है।रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 26 में सीमेंट उत्पादन में 6.5-7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद हैइसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि बारिश से होने वाली रुकावटों के कारण आई कमी के बाद, आने वाले महीनों में खनन एवं निर्माण गतिविधियों के साथ-साथ बिजली की मांग में भी मौसमी तेजी देखने को मिलेगी। रिपोर्ट में कहा गया है, “वित्त वर्ष 26 में सीमेंट उत्पादन में 6.5-7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। पिछले कुछ सालों में मजबूत वृद्धि के बाद स्टील की मांग में बढ़ोतरी कम होकर 7-8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वित्त वर्ष 26 के लिए बिजली की मांग में बढ़ोतरी 1.5-2 प्रतिशत पर धीमी रहेगी।
- नई दिल्ली। छोटे बिजनेस को क्रेडिट एक्सपोजर सालाना आधार पर 16.2 प्रतिशत बढ़कर 46 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में दी गई। सीआरआईएफ हाई मार्क और सिडबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि नीतिगत उपायों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए सरकारी लोन योजनाओं के समर्थन से सक्रिय लोन खातों में 11.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह संख्या 7.3 करोड़ तक पहुंच गई है।रिपोर्ट में पाया गया कि 5 करोड़ रुपए तक के लोन वाले व्यवसायों में औपचारीकरण तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें सितंबर 2025 तक लोन लेने वाले 23.3 प्रतिशत उधारकर्ता नए थे, जबकि उद्यमों के लिए यह आंकड़ा 12 प्रतिशत पर था।रिपोर्ट में बताया गया कि छोटे व्यवसायों के लिए लोन व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और इसमें सुधार हो रहा है। लोन पोर्टफोलियो का विस्तार जारी है और औपचारीकरण धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, जिसमें अधिक लेंडर्स सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, जबकि परिसंपत्ति की गुणवत्ता भी अच्छी बनी हुई है।एकल स्वामित्व वाले व्यवसाय इस व्यवस्था में अपना दबदबा बनाए हुए हैं, जो लगभग 80 प्रतिशत लोन और लगभग 90 प्रतिशत उधारकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। सबसे तेजी से बढ़ने वाला वर्ग एकल स्वामित्व वाले व्यवसाय ने 20 प्रतिशत की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की, जो मुख्य रूप से संपत्ति को गिरवी रखकर लिए गए लोन से प्रेरित है।रिपोर्ट में कहा गया है, “निजी बैंक उद्यम को लोन देने में अग्रणी बने हुए हैं, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का स्थान उनके बाद आता है। नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां (एनबीएफसी) अपनी उपस्थिति लगातार बढ़ा रही हैं। अब एमएसएमई को दिए गए लोन में उनकी हिस्सेदारी 41 प्रतिशत से अधिक है।” कार्यशील पूंजी लोन कुल बकाया लोन का लगभग 57 प्रतिशत है, जबकि टर्म लोन पूंजीगत व्यय को समर्थन देना जारी रखे हुए हैं।सीआरआईएफ हाई मार्क के अध्यक्ष और सीआरआईएफ इंडिया और दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय प्रबंध निदेशक सचिन सेठ ने कहा, “सितंबर 2025 तक उधारकर्ताओं के कुल आधार का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा एकल स्वामित्व वाले व्यवसायों का है, जो भारत के लघु व्यवसाय ऋण तंत्र का आधार बने हुए हैं। लघु व्यवसायों के विस्तार के साथ-साथ ऋण का विस्तार और क्रमिक औपचारीकरण भी समानांतर रूप से आगे बढ़ रहा है।”रिपोर्ट में बताया गया कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और गुजरात समग्र पोर्टफोलियो आकार में अग्रणी हैं। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में मजबूत वृद्धि देखी जा रही है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पूर्ण लोन जोखिम में सबसे आगे है, जबकि सेवा क्षेत्र में वार्षिक आधार पर 19.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
- नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 367.25 अंक या 0.43% की गिरावट के साथ 85,041.45 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 99.80 अंक या 0.38% फिसलकर 26,042.30 के स्तर पर आ गया।बाजार पर दबाव बनाने में आईटी शेयरों की प्रमुख भूमिका रही। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1% की गिरावट के साथ बंद हुआ। इसके अलावा ऑटो, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा, रियल्टी, एनर्जी, प्राइवेट बैंक, इन्फ्रा और कंजप्शन सेक्टर भी लाल निशान में रहे। दूसरी ओर एफएमसीजी, मेटल और कमोडिटीज सेक्टर हरे निशान में बंद हुए।लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 136.90 अंक या 0.23% की गिरावट के साथ 60,314.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 13.50 अंक फिसलकर 17,695.10 पर बंद हुआ।सेंसेक्स पैक में टाइटन, एनटीपीसी, एचयूएल, एक्सिस बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट गेनर्स रहे। वहीं बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, एचसीएल टेक, टीसीएस, इटरनल, टेक महिंद्रा, पावर ग्रिड, सन फार्मा, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, बीईएल, एमएंडएम और एचडीएफसी बैंक लूजर्स में शामिल रहे।वृहद बाजार में भी कमजोरी का माहौल रहा, जहां गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से अधिक रही।बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू इक्विटी बाजार में गिरावट की वजह साल के अंत में कम ट्रेडिंग वॉल्यूम और हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली रही। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली से भी बाजार पर दबाव बना रहा। अमेरिका-भारत के बीच संभावित ट्रेड डील को लेकर बढ़ता इंतजार भी निवेशकों में अनिश्चितता पैदा कर रहा है।शुक्रवार को बाजार की शुरुआत भी कमजोरी के साथ हुई थी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते नजर आए थे।
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नई दिल्ली। बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों और अगले साल अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के चलते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतें अपने नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोने का वायदा भाव 0.72 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 1,39,286 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, तो वहीं एमसीएक्स सिल्वर मार्च वायदा 4 प्रतिशत से ज्यादा के बढ़त के साथ रिकॉर्ड 2,33,183 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। यह दोनों कीमती धातुओं में अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है।
खबर लिखे जाने तक सोना 1,39,220 रुपये पर 0.81% और चांदी 2,33,000 रुपये पर 4.12% बढ़ी की तेजी दर्ज हुई। खबर लिखे जाने तक सोना जहां 1,123 रुपए यानी 0.81 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,39,220 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहे थे, वहीं चांदी 9,210 रुपए यानी 4.12 प्रतिशत की उछाल के साथ 2,33,000 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहे थे।सोने की कीमतों में यह उछाल मुख्य रूप से अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनावों के कारण आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने की कीमतें बढ़ी हैं और स्पॉट गोल्ड 0.5 प्रतिशत बढ़कर 4,501.44 डॉलर प्रति औंस हो गई। इससे पहले सोना 4,530.60 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच चुका था।व्यापारी उम्मीद कर रहे हैं कि 2026 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दर में दो बार 0.25 प्रतिशत की कटौती करेगा, क्योंकि महंगाई में कमी आ रही है और श्रम बाजार की स्थिति नरम हो रही है। इसके साथ ही बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के कारण सुरक्षित निवेश की मांग में भी बढ़ोतरी हुई है।अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और नाइजीरिया में आईएसआईएस के खिलाफ अमेरिकी सेना की कार्रवाई से भू-राजनीतिक तनाव बढ़े हैं। इस महीने अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने वेनेजुएला के कच्चे तेल से भरे एक सुपर टैंकर को कब्जे में लिया और वेनेजुएला से संबंधित दो अन्य जहाजों को इंटरसेप्ट करने की कोशिश की, जिससे तनाव और बढ़ गया।मेहता इक्विटी लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कालंत्री ने कहा कि केंद्रीय बैंकों द्वारा खरीदी और लगातार ईटीएफ में पूंजी प्रवाह सोने की कीमतों को समर्थन दे रहे हैं। सोने में 1,36,550 से 1,35,710 रुपए के बीच सपोर्ट है, जबकि 1,38,850 से 1,39,670 रुपए के बीच रेजिस्टेंस है। वहीं सिल्वर में 2,22,150 से 2,20,780 रुपए के बीच सपोर्ट तो 2,25,810 से 2,26,970 रुपए के बीच रेजिस्टेंस है।एक्सपर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी, अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, अमेरिकी टैरिफ के प्रभावों को लेकर चिंता, भू-राजनीतिक तनाव और गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में मजबूत निवेश ने इस वर्ष सोने और चांदी की कीमतों को बढ़ावा दिया है।

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